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Incest भाई-बहन वाली कहानियाँ

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बुर की सील

यह बात 2016 की है, मैं उस समय 19 साल का था और 12 वीं क्लास में था. उस समय मेरे लंड का साइज़ 6 इंच हो गया था. मेरी बहन छवि, जो उस समय 21 वर्ष की थी और थर्ड इयर में पढ़ती थी. उसका रंग बेहद गोरा है, हाईट कोई 5 फिट और 30-28-32 का मादक फ़िगर है. उसके बोबे बहुत सख्त और तने हुए थे.

मैंने मेरी बहन को कभी गंदी नज़र से नहीं देखा था, पर एक बार मेरी बहन बाज़ार जाने के लिए कपड़े बदल रही थी. उस जल्दी की वजह से वो गलती से दरवाजा बंद करना भूल गयी और उसी समय मैं अपनी बुक लेने उस कमरे में चला गया. मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला, मेरी आंखें फ़टी की फ़टी रह गईं और मेरा लंड खड़ा हो गया. मेरी बहन इस वक्त रेड कलर की ब्रा और पैंटी में थी. पहले तो मैं डर गया और सॉरी कह कर दरवाजा बंद करके वापस चला गया. पर मेरी निगाहें अब भी उसी लाल ब्रा पेंटी में बंद उसकी चूचियां और फूली हुई चूत पर ही मंथन कर रही थीं. मेरा लंड एकदम से खड़ा हो चुका था. मैं बाथरूम में जा कर दीदी के नाम की मुठ मारने लगा.

उस दिन से ही मैं अपनी दीदी को गंदी नजर से देख़ने लगा और मुठ मार कर अपनी हवस शांत करने लगा.

एक बार घर पर मेरे और दीदी के अलावा कोई नहीं था. मैंने मौका देखा और कुछ तय कर लिया. जब दीदी नहाने बाथरूम में गईं, तो बाथरूम के छेद में से देखने लगा.

दीदी ने सबसे पहले अपनी टी-शर्ट और कैपरी उतारी. ऊपरी कपड़े उतरने के बाद वो सिर्फ काले कलर की ब्रा पैंटी में रह गई थी. उसके दूध से सफ़ेद शरीर पर काले रंग के अंडरगारमेंट्स देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.

फिर उसने शीशे देखते हुए अपनी ब्रा को उतार दिया और वो अपने तने हुए मम्मों को खुद ही प्यार से देखने लगी. उसके बूब्स एकदम मक्खन से चिकने और एकदम गोरे थे.. उन पर लाइट पिंक कलर के निप्पल जड़े हुए थे. वो अपने निप्ल्लों से खेलने लगी. एक मिनट में ही उसके निप्पल एकदम तन गए. फिर उसने अपनी पेंटी उतारी. उसकी चूत पर थोड़े बाल थे, लेकिन पिंक कलर की चूत बड़ी मस्त लग रही थी. चूंकि बाथरूम में शीशे की पोजीशन दरवाजे वाली दीवार पर थी, इसलिए मैं अपनी दीदी के चूचे और चूत को पूरे साफ़ तौर पर देख पा रहा था. मैं यह सब देखने में मस्त हो गया. दीदी अपनी चूत पर अपनी हथेली से थपथपाने लगी. शायद वो अपनी चूत की आग को मिरर में देख कर थपथपा कर ठंडी करना चाह रही थी.

मैं उसकी हरकत को देख कर अपना लंड हिलाने लगा था. तभी घर की डोर बेल बजी, मैं तुरंत वहां से हट गया और मेन दरवाजे पर जाकर देखा, तो मेरा कजिन भाई आया था.

दीदी ने भी अन्दर से आवाज देकर पूछा- कौन आया है?

मैंने बताया और कुछ देर बाद वो भी नहा कर बाहर आ गयी.

उस दिन के बाद मैं अपनी दीदी को चोदने के मौके का इंतज़ार करने लगा. मैं कई बार उसकी बाथरूम की चूत और चूचियों के साथ खेलने की हरकत से भी अंदाज लगा लिया था कि दीदी को भी लंड की जरूरत है.

एक दिन वो पलंग पे बैठी थी. मैं वहां गया और उससे पढ़ने लगा. मैं बार बार अपना हाथ उसकी जांघ पे रख कर सहला रहा था. वो भी स्माइल दे रही थी और कुछ भी नहीं कह रही थी.

मैंने उसकी तरफ देखा और पूछा- स्माइल क्यों कर रही हो?

दीदी बोली- जब तू हाथ फेरता है तो गुदगुदी लगती है.

मैंने पूछा- और क्या लगता है?

वो आंख मारते हुए हंसने लगी.

तो मैंने उसको अपनी बांहों में उठा कर बेड पे लिटा दिया और उसके दोनों हाथों को पकड़ कर उसके होंठों पर किस करने लग गया. वो भी मुझसे लिपट गयी. हम दोनों एक दूसरे में समाने की कोशिश करने लगे. जब वो पूरी तरह गर्म हो गयी, तो मैं अपना एक हाथ उसके चूचे पे रख कर सहलाने लगा.

पर उतने में पापा मम्मी घर आ गए और हम जल्दी से अलग होकर पढ़ाई करने लगे. लेकिन अब मामला सैट हो चुका था, बस एकांत की जरूरत थी.

दूसरे ही दिन जब पापा ऑफिस चले गए, तब मम्मी को किसी काम से मामा के घर जाना पड़ा. मम्मी के जाते ही मैंने छवि दीदी को बांहों में उठाकर मेरे बेड पे लिटा दिया और हम दोनों वासना के खेल में शुरू हो गए. मैंने पहले दीदी को किस किया, फिर एक एक करके उसके सारे कपड़े उतार दिए. आज दीदी ने पिंक कलर की ब्रा पैंटी पहनी थी. दीदी उसमें बड़ी हॉट एंड सेक्सी लग रही थी.

मैंने दीदी को नंगी कर दिया और उसकी चूत के सामने पहली बार इतने नजदीक से दीदार किए. दीदी की चुत पे छोटे छोटे सुनहले से बाल थे, ऐसा लग रहा था कि कभी किसी ने इसको छुआ भी न हो. दीदी की चूत बिल्कुल सील बंद थी. मैं उसकी बंद चूत को देख कर पागल हो गया और उसके सख्त चूचे को पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा.

हम दोनों के होंठ एक हो चुके थे. मैंने अपना एक हाथ धीरे से उसकी चुत तक ले गया और उसे बड़े ही प्यार से सहलाने लगा. उसने भी अपनी चूत खोल दी और मेरी उंगली को चूत सहलाने के लिए चुदास जाहिर कर दी.

मैंने उंगली में थोड़ा सा थूक लगा कर अपनी एक उंगली दीदी की चूत के अन्दर डाल दी. उंगली घुसी, तो उसकी आह सी निकली. जब मुझे उसकी चुत गीली महसूस हुई, तो मैंने कुछ देर फिंगर करने के बाद चूत को चाटना शुरू कर दिया. दीदी अपनी टांगें पूरी खोल कर मेरी जीभ से चूत चटाई का मजा ले रही थी. मैं जोर जोर से अपनी जीभ से उसे चोदने लगा.

वो जोर जोर से सिसकारियां भर रही थी और आंखें बंद किए हुए बोल रही थी- आह … यश आराम से.

कुछ ही देर में मैंने उसकी चुत गीली महसूस की, तो मैंने अपना लंड चुत पे रख दिया. लंड का अहसास करते ही उसने आंखें खोल दीं और थोड़ा हिलने की कोशिश की. पर मेरे एक बार कहते ही वो चुदाई के लिए मान गयी. बस फिर मैंने अपने हाथ उसके मम्मों पे रखकर थोड़ा सा धक्का मारा, तो मेरे लंड का टोपा उसकी चुत में घुस गया था. उम्म्ह… अहह… हय… याह… वो दर्द के मारे रोने लग गयी, उसकी आंखों में आंसू और मुँह से झलकती पीड़ा से साफ पता लग रहा था कि बहुत डर रही है.

मैंने कुछ देर बाद एक और धक्का मारा, तो उसकी चीख निकल गयी. पर मेरा आधा लौड़ा उसकी चुत में जा चुका था. वो दर्द से चिल्ला रही थी और बोल रही थी- बस यश, निकाल लो, बहुत तेज दर्द हो रहा है.

मगर मैंने कोई परवाह न की बस लंड पेले हुए रुका रहा. कोई 2-3 मिनट बाद मैंने तीसरे झटके में अपना लंड पूरा अन्दर डाल दिया था. इस बार उसकी सील टूट गयी थी और खून निकलने लगा था. हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे, जब तक उसका दर्द कम नहीं हो गया. फिर कुछ देर में मैं अपने लंड को हिलाने लगा और ट्रेन की तरह अपनी स्पीड को बढ़ाने लगा. अब तो उसको भी मजे आ रहे थे और वो कामुक सिसकारियां ले रही थी.

इस वक्त मुझमें और राजधानी ट्रेन में कोई ज्यादा फर्क नहीं था. मैंने बहुत तेज स्पीड से अपनी दीदी की चूत को चोदने में लगा था.. पूरा बेड हिल रहा था.

कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था, तो मैंने लंड बाहर निकाल कर पूरा माल उसके फेस और मम्मों पे डाल दिया. वो भी मस्ती से मेरे कम को अपने जिस्म पर महसूस करने लगी अपनी मम्मों पर वीर्य को फैला कर मलने लगी.

हम दोनों आराम से बेड पर लेट गए और एक दूसरे को देख कर बस हंस रहे थे. कुछ टाइम बाद हम दोनों की आग फिर से भड़क उठी और फिर से चुदाई शुरू की. इस बार मैंने उसको घोड़ी बनने को बोला, तो झट से वो बन गयी. हम दोनों ने फिर से ब्लू फिल्म स्टाइल में चुदम चुदाई शुरू कर दी.

दीदी की चूत चोद कर मैंने अपना काम पूरा किया. बाद में उसी ने मुझे बताया कि वो खुद भी मुझसे अपनी सील तुड़वाना चाहती थी.

मेरी रियल सेक्स स्टोरी आपको मस्त लगी?
 
मौसी की लड़की भावना के साथ

मैं अपनी ज़िंदगी में घटी एक सच्ची घटना से आपको अवगत करवाने जा रहा हूँ। मैं जिस लड़की के बारे में बात करने जा रहा हूँ ये मेरी बहुत दूर की मौसी की लड़की है जिसका नाम भावना (बदला हुआ नाम) है। उसकी उम्र लगभग 20 वर्ष होगी। लंबाई 5 फुट 4 इंच के करीब होगी और बिल्कुल भरे हुए शरीर की है. वह एक गुदगुदा माल है। मेरे कहने का मतलब थोड़ी मोटी सी है। उसकी गांड बाहर निकली हुई है। भावना का फिगर तो ऐसा है जैसे 3-4 महीने के बच्चे की माँ का हो. दूध से भरा हुआ बिल्कुल जिसको देखते ही मुंह में पानी आ जाये।

मेरी मौसी का घर मेरे घर से 4-5 किलोमीटर दूर है। बाकी सारे रिश्तेदार गांव में रहते हैं तो मेरे घर मेरी मौसी का आना-जाना कुछ ज्यादा ही रहता है।

मेरे घर में मेरी मम्मी का बुटीक का काम है तो इसलिए मेरे घर में लेडीज का आना जाना लगा ही रहता है।

एक बार मेरी मौसी की लड़की भावना मेरे घर बुटीक का काम सीखने आई तो मेरी मम्मी ने बोला- एक दिन में तो मैं तुझे यह काम सिखा नहीं सकूंगी और तू सीख भी नहीं पाएगी.

मेरी माँ ने उसको एक महीने तक वहीं रुकने के लिए कह दिया. मेरी माँ चाहती थी कि वह अच्छे से सिलाई व बुटीक का छोटा-मोटा काम सीख जाए। फिर मेरी मम्मी ने उसकी मम्मी को फ़ोन करके यहां रहने के लिए बोल दिया था और उसकी माँ मान भी गई थी।

भावना के बारे में मुझे एक बात पता थी कि उसका कई लड़कों से चक्कर चल रहा था और अभी भी उसका एक बॉयफ्रेंड है। ये बात पता चलने के बाद मैं भी उसे चोदने की फिराक में लगा हुआ था. वह मुझे शक्ल से ही चुदक्कड़ लगती थी. मगर मैं अभी ज्यादा आश्वस्त नहीं था.

मैं जानता था कि लड़कियों के साथ रिस्क लेना ठीक नहीं होता है. वैसे कुछ लड़कियाँ तो खुद ही चुदवा लेती हैं मगर कुछ लड़कियाँ बाहर भले ही चुदवा लेती हों लेकिन घरवालों और रिश्तेदारों के सामने सती-सावित्री होने का नाटक करती रहती हैं. मगर उसके बारे में मैं बहुत कुछ जानता था. मैं यह भी जानता था कि जब यह इतने सारे लड़कों के साथ गुल खिला चुकी है तो मेरे साथ करने में ज्यादा नखरे नहीं करेगी.

मगर फिर भी मैं अभी पूरी तरह से उस पर भरोसा नहीं कर सकता था.

अपने बॉयफ्रेंड वाली बात भावना ने खुद मुझे मैसेज में बताई थी, तभी मैंने सोचा क्यों न इस बहती गंगा में अपने हाथ भी धो लिए जाएं. उसके बाद मैं भी उसे सेट करने के लिए कोशिश करने लगा।

जब भावना मेरे घर रहने के लिए आई थी तब गर्मी कुछ ज्यादा ही पड़ रही थी तो मैंने ऊपर अपने रूम में कूलर सेट कर दिया था। भावना को भी नाइट में कूलर के आगे सोने की आदत थी तो तय हुआ कि भावना भी अब से मेरे रूम में सोएगी।

रात में खाना खाकर वो मेरे रूम में सोने आई तो मैं अभी तक सोया नहीं था. उसने बिना कुछ पूछे बेड के पास नीचे बिस्तर कर दिया और सो गई. एक घंटे तक मैं सोच रहा था कि इस से बात कैसे करूँ. मैंने उसे देखा तो वो भी जग रही थी.

मुझे जागता हुआ देख उसने बोला- मुझे नीचे बहुत ज्यादा गर्मी लग रही है.

उसकी इस बात पर मैंने उसे मेरे साथ ऊपर सोने के लिए बोला तो उसने मना कर दिया और बोली- अगर किसी ने देख लिया तो कोई गलत सोचने लगेगा।

तभी मैंने उठकर सीढ़ियों का मेन गेट बंद कर दिया और रूम का गेट भी बंद कर दिया और बोला- अब अगर तू मुझसे चिपक कर भी सोएगी तो भी कोई नहीं देखेगा।

मेरे ये बोलते ही भावना का चेहरा लाल हो गया और मुझे गुस्से से देखने लगी.

फिर मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया कि मैंने क्या बोल दिया। मैंने सॉरी कहा और बोला- दूसरी कोई जगह है नहीं और मुझे फर्श पर नींद नहीं आती. तू चाहे तो मेरे पास ऊपर सो सकती है.

इतना बोलकर मैं बेड पर लेट गया.

थोड़ी देर के बाद भावना अपना तकिया लेकर मेरे पास आई. मैं साइड में सरक गया. हम दोनों के बीच में तकिया रखकर भावना वहीं बेड पर मेरे साथ में लेट गई।

उसके पास लेटते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. उसके बदन से आने वाली महक मुझे पागल कर रही थी. मैं तो पहले से ही उसको चोदने के सपने देख रहा था. रिश्ते में भले ही वह मेरी बहन लगती थी लेकिन उसके शरीर को देखकर मैं उसकी चुदाई करना चाह रहा था.

वैसे भी जब रात में कोई चालू लड़की साथ में सो रही हो तो मन में ऐसे ही ख्याल आने शुरू हो जाते हैं. मेरे लंड ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया. मेरा लंड तन गया था. बार-बार मेरी लोअर में उछल-उछल कर कह रहा था कि मुझे भावना की चूत में जाना है.

मैं अपने लंड की हालत समझ रहा था. मगर इस वक्त मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था. मैं इसी सोच में पड़ा था कि शुरूआत करूं तो करूं कैसे. अगर मैंने अपनी तरफ से पहल कर दी तो कहीं यह नाटक न करने लगे. वैसे मैं जानता था कि मेरे सफल होने के चान्स ज्यादा हैं फिर भी मन में एक डर तो बना ही हुआ था.

मैंने धीरे से अपनी लोअर की इलास्टिक में हाथ डाला और अपने अंडरवियर में हाथ डालकर अपने लंड को हाथ से ही सहलाने लगा. अब मेरी वासना बढ़ने लगी. लंड पर हाथ जाते ही मेरी आंखों के सामने भावना के बड़े-बड़े चूचे उछलने लगे. मैंने अपने लंड की चमड़ी को थोड़ा सा पीछे कर दिया और हल्के से उसकी भूख को शांत करने की कोशिश करने लगा. मगर साथ में जवान और चुदक्कड़ लड़की लेटी हुई थी. मैंने सोचा कि ट्राई करना तो बनता ही है. उसके बाद जो होगा देखा जाएगा.

वैसे भी मेरा लंड मेरे हाथ की मालिश से ज्यादा खुश नहीं लग रहा था. उसे तो भावना की चूत में जाकर अपनी प्यास बुझानी थी.

मेरा मन कर रहा था कि अभी पटक कर चोद डालूं साली को, लेकिन जोश में होश खोने से गड़बड़ हो सकती थी. इसलिए मैंने उसके सोने तक का वेट किया. उसके सोने के बाद मैं उसके सामने की तरफ मुंह करके लेट गया।

फिर अपना हाथ धीरे-धीरे भावना के पेट पर रख दिया. पेट पर रखने के बाद भी उसने कोई हलचल नहीं की तो मैंने अपना हाथ धीरे-धीरे उसके फिगर पर ले जाकर हल्के-हल्के से उसके बदन को दबाने लगा.

मैंने धीरे से भावना के चूचों को दबा दिया. जब उसकी तरफ से कोई हरकत नहीं हुई तो मैंने उसके चूचों को और जोर से दबाना शुरू कर दिया. मैं अब अपने कंट्रोल में नहीं था. अब तो ऐसा मन कर रहा था कि चाहे जो हो जाए, आज तो इसकी चूत को चोद ही दूँ.

मैंने उसके चूचों की दरार को छेड़ा. उसके सूट के अंदर से हाथ डालकर उसकी ब्रा को महसूस करने लगा. फिर मैंने उसकी तरफ करवट बदल ली. मेरा लंड नीचे उसकी जांघ से सट गया था और उसकी जांघ पर झटके देने लगा. उसके कोमल मुलायम बदन से टच होने के बाद तो हालात मेरे काबू से बाहर हो गये.

मैंने उसकी ब्रा को जोर से दबा दिया. उसके चूचों को दबाने का मजा लेने लगा. अब मैंने उसके सूट से हाथों को बाहर निकाल लिया और अपने हाथ नीचे की तरफ ले आया. मैंने उसकी लोअर पर उसकी पैंटी को महसूस किया. मैं उसकी पैंटी को धीरे से सहलाने लगा. उसकी चूत की शेप मुझे मेरी उंगलियों पर महसूस होने लगी थी. मेरे लंड झटके दे देकर दर्द करने लगा था. मैं अब और नहीं कंट्रोल कर सकता था. मैंने एक बार जोर से उसकी चूत पर अपने हाथ की हथेली से मसल दिया. फिर भी भावना की तरफ से कोई रेस्पोन्स नहीं आया.

वह अभी भी एकदम शांत थी. अब मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने अपना चेहरा उसके चेहरे के पास ले जाकर हल्की सी किस करके हट गया। फिर भी उसका कोई रिएक्शन नहीं था. मैं आराम से उसके होंठों का रसपान करने लगा. इतने में उसने आँखे खोल दीं. मैं एकदम से दूर हट कर सीधा हो कर अपनी जगह लेट गया था।

वो मेरे पास आई और बोली- मुझे पता था तुम मेरे साथ कुछ ऐसा ही करोगे इसीलिए मैंने तेरे रूम में आने के लिए कूलर का बहाना बनाया था. मैं तुम्हें बहुत पहले से लाइक करती हूं. तुमने जब से फ़ोन पर मुझे किस करने के लिए बोला तब से मैं तेरे साथ सेक्स करना चाहती हूँ।

भावना मुझसे फोन पर तो खुल कर बात कर लेती थी लेकिन आज मुझे उसकी बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था. मैं तो बेवहज ही डर रहा था. मैंने इतना टाइम वैसे ही डर में ही बर्बाद कर दिया. इसकी चूत तो मुझे बहुत पहले चोद देनी चाहिए थी.

वह बोली- मेरा बॉयफ्रेंड आजकल मुझसे दूर-दूर रहता है इसलिए मैं जब से तुम्हारे घर में आई हूं मैं तुम्हारे ही लंड को देखने की कोशिश करती रहती हूँ।

मैंने कहा- तुम मेरे लंड को सिर्फ देखना ही चाहती हो क्या?

वह बोली- तुम क्या करना चाहते हो?

मैंने कहा- मैं तो तुम्हारी चूत में लंड को डाल कर तुम्हें चोदना चाहता हूँ.

वह बोली- तो फिर रोका किसने है?

इतना कहते ही हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू कर दिये. पहले मैंने उसके सूट को उतरवा दिया. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचों को दबाने लगा. वह नीचे हाथ ले जाकर मेरे लंड को सहलाने लगी. अभी वह मेरी लोअर के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने में लगी हुई थी. वह लंड की बहुत प्यासी लग रही थी.

भावना बार-बार मेरे लंड को हाथ में लेने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंडरवियर टाइट होने की वजह मेरा लंड अच्छी तरह से उसके हाथ में नहीं जा पा रहा था.

मैंने फिर उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और उसके चूचों को नंगा करवा दिया. फिर मैंने उसके चूचों को चूसना शुरू कर दिया.

उसके बाद मैं उसके पेट पर किस करता हुआ नीचे की तरफ आने लगा और मैंने उसकी लोअर को उतार दिया. उसने नीचे पैंटी पहनी हुई थी जो अब हल्की सी गीली होने लगी थी. मैंने धीरे से उसकी पैंटी को अपने हाथों से पकड़ कर नीचे खींच कर उसकी जांघों में फंसा दिया और उसकी चूत पर अपने नर्म होंठों से एक किस कर दिया.

भावना ने मेरा सिर पकड़ लिया और अपनी चूत पर मेरे होंठ रखवा दिये. मैंने उसकी चूत को चूमना शुरू कर दिया. फिर वह उठने लगी और उसने मेरी टी-शर्ट को निकलवा दिया. वह मेरे निप्पलों को चूसने लगी. मुझे गुदगुदी सी होने लगी लेकिन साथ में मजा भी आ रहा था.

फिर उसने मुझे नीचे लेटा दिया और मेरे बदन को चूमती हुई नीचे की तरफ जाने लगी. उसने मेरी लोअर को नीचे सरका दिया और मेरे अंडरवियर में तने हुए मेरे लंड को चूमने लगी. मैंने उसको वापस अपनी तरफ खींच लिया और उसको फिर से अपने नीचे लेटा लिया. फिर मैंने मौसी की लड़की भावना के होंठों को जोर से चूसना शुरू कर दिया. साथ ही साथ मैं उसकी गर्दन पर भी बीच-बीच में किस कर देता था.

वह भी मेरी गर्दन पर किस करने लगी. उसके हाथ मेरी पीठ पर फिर रहे थे. मैंने उसके निप्पलों को अपने होंठों से काट लिया तो उसकी जोर से सिसकारी निकल गई. आह्ह्ह … आराम से करो … कहकर वह फिर से मेरी गर्दन को चूमने लगी.

और मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे किस करने लगा. साथ ही उसके बड़े-बड़े बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगा. मैं भावना की भूरी कलर की निप्पल को जोर-जोर से चूस रहा था।

उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह…

वह गाली देकर बोली- और जोर से चूस बहनचोद! जोर से काट लो मेरी चूचियों को। आह … पी लो मेरे भाई।

मैं उसके पैरों की उंगलियों से किस करता हुआ ऊपर की तरह बढ़ रहा था. उसकी सांसें तेज होने लगीं. उसके मुंह से बस उम्म्ह … अहह … हय … की आवाज ही निकलने लगी. मैंने उसकी जांघों पर किस करते हुए उसकी क्लीन चूत को जैसे ही हाथ से मसला तो वो और जोर से सिसकारियां लेने लगी।

मैं धीरे से उसकी चूत के दोनों फलकों को अलग करके अपनी जीभ को अंदर डाल कर उसकी चूत को जोर से चूसने लगा। मैं उसकी पूरी गीली हो चुकी चूत के रस को चाट रहा था. साथ ही साथ मैं उसकी चूत की फलकों को भी अपने होंठों से चूम लेता तो कभी दांतों से काट लेता था.

बदले में वह मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत में दबा देती थी. मैं उसकी चूत में अंदर तक जीभ डालने की कोशिश कर रहा था. मैं उसको पूरी तरह से गर्म करने के बाद ही चोदना चाहता था. यहाँ पर मेरे लंड का बहुत ही बुरा हाल हो चुका था. वह भावना की चूत में जाने के लिए तड़प रहा था मगर अभी मैं भावना की चूत को और ज्यादा तड़पाना चाहता था. इसलिए मैं पूरी ताकत के साथ उसकी चूत को चाटने में लगा हुआ था.

उसने मेरे सिर को टांगों से टाइट जकड़ लिया और जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी। उसके मुंह से बस आआ उम्म्ह … अहह … हय … याह … आहह ओह मुंऊ … उम्मईं आआहह … ही निकल रहा था।

फिर मैंने उसे मेरा लंड चूसने को कहा. उसने फट से मेरा लंड मुंह में ले लिया और ऐसे चूस रही थी जैसे कोई पोर्न स्टार प्रोफेशनल तरीके से लंड को चूस रही हो। मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता। मेरा रस निकलने से पहले मैंने उसके मुंह से अपना लंड निकाल दिया।

मैं उसकी चूत पर लंड को सेट करने लगा तो उसने पहले लंड पर कंडोम चढ़ाने को बोल दिया. वह काफी माहिर थी चुदाई करवाने में और साथ में इस बात का भी ध्यान रख रही थी कि कहीं वह प्रेग्नेंट न हो जाए.

मैंने उसे समझाया कि अभी मेरे पास कंडोम नहीं है. मैं सुबह पिल लेकर दे दूंगा। फिर भी वो नहीं मानी और अपनी जिद पर अड़ी रही.

उसने बोला- मैं तुम्हारा लंड चूसकर शांत कर देती हूं।

मैं भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. क्या पता कितनों से चुद कर आई हो। मैंने उसके बालों को पकड़ कर अपना लंड उसके मुंह में ठूंस दिया और उसके मुंह को जोर जोर से चोदने लगा. उसे सांस भी नहीं आ रहा था. वो गु … गुउ … करने लगी.

मैं उसके मुंह में लंड को डालकर जोर जोर से धक्के दे रहा था. मुझे उसकी चूत तो नहीं मिल पाई लेकिन मैं अपने लंड को उसके मुंह में इस तरह डाल रहा था कि जैसे उसका मुंह ही मेरे लिए चूत हो. मेरा लंड उसके गले तक फंसाने के लिए मैं उसके बालों को पकड़ कर पूरा जोर लगा देता था.

वह भी पूरी चुसक्कड़ थी और मेरे लंड को पूरी तरह से अपने गले तक ले जाती थी. मगर मैं हैरान था कि यह साली लंड को चूत में डलवाने से मना क्यों कर रही है. जब इसको चुदने की इतनी प्यास लगी है तो बिना कंडोम के करवाने में क्या दिक्कत है. मगर एक तरह से उसकी बात भी सही थी. इसमें हम दोनों का ही फायदा था. मैं भी उस पर भरोसा नहीं कर सकता था.

वह पहले से ही इतने लड़कों के साथ चूत को चुदवा चुकी है. इसलिए मेरे लिए वह सेफ नहीं था. दूसरी तरफ अगर मैंने बिना कंडोम के किया तो हो सकता था कि वह पेट से हो जाए और फिर एक मुसीबत और आ खड़ी हो. इसलिए अब तो उसके मुंह को ही चूत बनाकर मैं चोदने में लगा हुआ था. बहुत दिनों से मैंने भी किसी के मुंह में लंड को नहीं दिया था और हाथ से काम चला रहा था इसलिए मैं उसके मुंह में पूरा जोर लगा कर लंड को अंदर बाहर कर रहा था.

दस मिनट तक उसके मुंह को चोदने के बाद मैंने अपना सारा माल उसके मुंह में ही निकाल दिया. वो पूरा का पूरा माल पी गई. एक बूंद भी नीचे नहीं गिरने दी।

भावना ने मेरे लंड को चूस कर साफ कर दिया. मेरा लंड शांत हो चुका था. अब मैं थोड़ी सी कमजोरी भी महसूस करने लगा था. कुछ देर तक भावना मेरे लंड के साथ ही मेरी जांघ पर लेटी रही. मुझे भी थोड़ी थकान हो रही थी. अब धीरे-धीरे हम दोनों को नींद आना शुरू हो गई थी.

कुछ देर के बाद मेरी आंखें भारी होने लगीं और मैंने भावना को उठने के लिए कह दिया. हम दोनों ने उठकर अपने-अपने कपड़े पहन लिए. वैसे उसकी चूत को चोदने का सपना उस रात तो अधूरा ही रह गया. फिर हम दोनों ने अपने बिस्तर को ठीक किया और पहले की तरह से ही उसने बीच में तकिया रख लिया. मगर मैंने उसके बाद तकिया को बीच में से हटा दिया.

पहले तो वह अलग होने लगी लेकिन मैंने उसको बांहों में ले लिया और उसको किस करने लगा.

फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर सो गए।

यह थी मेरी मौसी की लड़की भावना के साथ मेरी लंड चुसाई की कहानी.
 


बहन के साथ सुहागरात


ये बात करीब डेढ़ साल साल पहले की है, मेरी छोटी बहन, जिसका नाम मालिनी है, उसने अपनी बारहवीं पास की, उस वक्त उसकी उम्र 18 साल से ऊपर थी. उसका रिजल्ट बहुत अच्छा नहीं आया था, तो उसे किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं मिला. इस बात को लेकर मालिनी ने मुझे फ़ोन किया और मुझसे सुझाव लेने लगी कि उसे क्या करना चाहिए.

मैंने उससे कहा- तुम जे बी टी कर सकती हो, मैं आसानी से भोपाल में तुम्हारा दाखिला करवा दूंगा.

मेरी बात सुनकर मालिनी बहुत खुश हुई और भोपाल आने की तैयारी करने लगी. मैंने भी पिछले 2 साल से अपनी बहन को सिर्फ तस्वीरों में देखा था. मैंने अपने माता-पिता को समझा दिया और उन्हें मना लिया.

दाखिले एक महीने बाद से शुरू होने थे लेकिन मालिनी ने तुरंत आने की जिद की, जिसे मैंने मान लिया. अगले शनिवार को मालिनी को आना था. मैंने अपने मकान मालिक को मालिनी के बारे में कुछ नहीं बताया, मैंने सोचा जब मालिनी आ जाएगी तब बता दूंगा, वर्ना वो मकान किराए को लेकर ड्रामा करेंगे. तय वक्त के मुताबिक़ मालिनी शनिवार की सुबह आने के लिए ट्रेन में शुक्रवार बैठ गयी.

शनिवार की सुबह मैं भी नहाकर स्टेशन पर पहुंच गया और मालिनी का इन्तजार करने लगा. आठ बजे ट्रेन पहुंच गयी, चूँकि मैंने पिछले 2 सालों से मालिनी को सिर्फ तस्वीरों में देखा था, इसलिए मैं भी काफी उत्साहित था. जैसे ही मालिनी ट्रेन से उतरी, मैं उसे देखता ही रह गया. करीब 5 फुट 5 इंच की लम्बाई और 34सी के चूचों के साथ मालिनी 23-24 साल की लड़की लग रही थी. मालिनी ने उस वक्त टी-शर्ट और लोअर डाला हुआ था. उसको देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और मेरे दिमाग में शैतानी आने लगी.

मैंने मालिनी को अपनी कार में बैठाया और अपने घर की तरफ चलने लगा. मैंने मालिनी से कहा कि मेरा मकान मालिक बहुत सख्त है और वो किसी और को मेरे घर में रहने की परमिशन नहीं देगा. इससे बचने के लिए मैंने उसे बोल दिया कि मेरी पत्नी आ रही है.

इस पर मालिनी हैरान हो गयी और बोली- मैं आपकी बहन हूँ.

मैंने मजबूरी का हवाला दिया और कहा कि जल्दी ही मैं नया कमरा देख लूँगा.

तब जाकर मालिनी खामोश हुई, लेकिन पूरे रास्ते वो मन ही मन हंस रही थी. मैंने भी सोचा चलो पहली परेशानी तो दूर हुई. रास्ते में मैंने कार एक पेट्रोल पंप पर रोकी और अपने मकान मालिक की बीवी, राखी आंटी को फ़ोन करके कहा कि मेरी पत्नी आ रही है.

आंटी ने हैरानी जताई और बोलीं- तुमने कभी बताया नहीं कि तुम्हारी शादी हो चुकी है.

मैंने बस हंस कर कह दिया- आपने कभी पूछा ही नहीं.

वो बोलीं- चलो अच्छा है कि अब वो तुम्हारा घर संभाल लेगी.

कुछ ही देर में हम घर पहुंच गए, जैसे ही हम घर में घुसने लगे, पीछे से आवाज आई तो देखा कि मकान मालकिन हाथ में चावल से भरा लोटा लेकर खड़ी थीं. ये सब देखकर मालिनी हंसने लगी.

मैंने मालिनी से कहा- किसी की भावनाओं का मजाक नहीं उड़ाते.

मालिनी ने अपने सीधे पांव से लोटे को गिराया और अन्दर घुसी.

राखी आंटी ने कहा- बेटी, अब तुम्हारी शादी हो चुकी और तुम्हें अपने पति से आशीर्वाद लेना चाहिए.

मालिनी के पास कोई आप्शन नहीं था, वो मेरे पास आई और एक पत्नी की तरह मेरे पांव छुए.

आंटी ने कहा- बेटी अब तुम आ गयी हो, तो ये रुचित भी संभल जाएगा और सिगरेट और शराब की आदत छोड़ देगा.

यह कहने के बाद आंटी चली गईं.

इतने ड्रामे से मालिनी परेशान नहीं हुई बल्कि हंसने लगी. मैंने भी सोचा चलो दूसरा काम भी हो गया और सब कुछ प्लान के मुताबिक़ चल रहा है और अच्छा ही हुआ कि आंटी ने मेरे सिगरेट और शराब की बात बोल दी.

मैंने गेट बंद किया और अपनी जेब से एक सिगरेट निकाली और कश लेने लगा. मालिनी मेरी तरफ अजीब से भाव से देख रही थी जैसे कह रही हो कि वो भी सिगरेट के कश लेना चाहती है, मगर शायद उसकी हिम्मत नहीं हुई.

दोपहर को आंटी खाना लेकर आ गईं, उस वक्त हम दोनों सो रहे थे. मालिनी ने उठ कर दरवाजा खोला, उस वक्त उसके बाल फैले हुए थे. मालिनी को ऐसे देखकर आंटी हंसने लगीं.

मैंने आंटी से पूछा- क्या हुआ?

तो आंटी जी बोलीं- लगता है आते ही पहला राउंड ले लिया तुमने मालिनी के साथ, कम से कम आज तो आराम करने देते.

ये सुनकर मालिनी शरमा गयी और खाना लेकर रसोई में चली गयी. आंटी वहीं खड़ी रहीं और बोलीं- कल एक व्रत है, जिसे सुहागन औरतें अपने पति के लिए रखती हैं और अब चूँकि मालिनी भी यहीं है, तो उसे भी रखना है.

मैं वहीं से मालिनी को देख रहा था, उसे व्रत के नाम से चिढ़ है.

मैंने आंटी जी को बोल दिया कि मालिनी जरूर रखेगी. आंटी जी के हाथ में एक पोलीथिन थी, उसमें से उन्होंने एक साड़ी निकाली और बोलीं कि ये मालिनी के लिए है. ब्लाउज आदि वो अपने हिसाब से काट-छांट कर लेगी और पहन लेगी.

आंटी के जाने के बाद मालिनी गुस्से में मेरे पास आई और बोली कि ये बहुत दखल दे रही है, ऐसे तो मुझे सच में तुम्हारी पत्नी बनकर रहना होगा.

मैंने उससे कहा कि कुछ दिन संभाल लो, मैं दूसरा कमरा देख लूँगा.

इस पर मालिनी मान गयी क्योंकि वो वापिस दिल्ली नहीं जा सकती थी. वहां उसे इतनी आजादी भी नहीं थी.

अगले दिन आंटी जी सुबह ही आ गईं, उन्होंने दरवाजा बजाया, जिससे मेरी आंख खुल गयी. मैंने देखा कि मालिनी अपने कमरे में नहीं थी, मैंने दरवाजा खोला. इतने में मालिनी रसोई में से निकलकर आई. उसने आंटी की दी हुई साड़ी पहन रखी थी और उसमें वो क़यामत लग रही थी.

मालिनी मेरे पास आकर खड़ी हो गयी, मालिनी को देखकर आंटी बोलीं- लगता है पूरी रात बहुत मजा दिया है, बहू को अपने वश में कर लिया है.

मैंने भी सोचा मौका है, मैंने मालिनी को बांहों में लिया और कहा- मालिनी तो मेरी जान है.

आंटी ने मेरे गालों पर एक हल्का थप्पड़ मारा और मुझे अलग किया.

आंटी बोलीं- तुम दोनों बहुत शैतान हो.

इसके 2 घंटे बाद मालिनी पूजा करके आ गयी और आते ही एक अच्छी पत्नी की तरह उसने मेरे पैर छुए.

मैंने कहा- तुम बहुत सुन्दर लग रही हो, काश सच में तुम मेरी पत्नी होती, तो मैं तुम्हें रानी बना कर रखता.

मालिनी खुल कर बोली- भोपाल में तो मैं तुम्हारी पत्नी ही हूँ, अब जब तक हम भोपाल में हैं. पति-पत्नी की तरह रहेंगे और मैं भी तुम्हें पसंद करती हूँ.

मैंने हैरानी से कहा- क्या … तुम्हें कोई ऐतराज नहीं है?

मालिनी बोली- ऐतराज होता तो मैं पहले ही नहीं आती क्योंकि मैंने तुम्हारी और आंटी की बातें सुन ली थी. जब तुम आंटी से फ़ोन पर बातें कर रहे थे.

मैंने मालिनी को बांहों में भरा और उसके होंठों पर एक जोरदार चुम्बन दिया. मैंने मालिनी को गोद में उठाया और अपने बिस्तर पर कर दिया.

क्योंकि उसने लाल साड़ी पहन रखी थी तो मैंने कहा- आज हमारी सुहागरात है और आज से मेरी हर चीज पर तुम्हारा हक है.

मैंने हल्के से उसकी साड़ी उतारी. अब मालिनी खुद को मेरी पत्नी मान चुकी थी, तो वो मेरा पूरा साथ दे रही थी. मैंने भी अपनी टी-शर्ट और पजामा उतारा और फिर अपना अंडरवियर उतार कर अपना लौड़ा मालिनी के सामने कर दिया.

मेरा 7 इन्च लम्बा और 3.5 इंच लौड़ा देखकर मालिनी सहम गयी. फिर हंसते हुए बोली- अब से इस फौलादी लौड़े पर मेरा हक है.

मैंने कहा- हां जानेमन, अब से ये लौड़ा तुम्हारी चूत की गुलामी के लिए हमेशा तैयार रहेगा.

फिर मैंने मालिनी का ब्लाउज उसके बदन से अलग किया और उसने लाल ही कलर की ब्रा पहन रखी थी, मैं समझ गया कि मालिनी ने पहले से ही सब प्लान कर रखा है. मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध पीने लगा, मालिनी मेरे लौड़े से खेलने लगी. मेरे लौड़े को ऊपर नीचे घुमाने लगी. मैंने इतने में उसका पेटीकोट भी अलग कर दिया और उसको ब्रा-पेंटी में कर दिया. मैंने उसको पकड़ा और उसकी पेंटी भी उतार दी और उसकी चूत को चाटने लगा.

चूत पर मेरी जीभ पाते ही मालिनी सिहर गयी. शायद थोड़ी देर पहले ही उसने मूता था, उसकी पेशाब की गंध अभी तक थी, लेकिन मैंने चाटकर उसकी चूत को गीला किया.

मेरी बहन अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी, उसने लपक कर मेरा लौड़ा पकड़ लिया और उसे चाटने लगी. वो एक अनुभवी औरत की तरह सब कर रही थी. मैं भी अपनी छोटी बहन की चूत चाट रहा था. हम दोनों 6-9 की पोजीशन बनाये हुए थे और एक दूसरे को चाट रहे थे.

करीब 10 मिनट एक-दूसरे को चाटने के बाद मेरी बहन मेरा लौड़ा चूत में लेने को तैयार थी, मैंने मालिनी को लिटाया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया. फिर उसकी चूत के दरवाजे पर अपना लौड़ा सैट किया और एक हल्का झटका दिया.

मालिनी के मुँह से एक हल्की सी आवाज निकली, तब मुझे लगा कि मालिनी लौड़ा सहन कर लेगी, इसलिए मैंने एक तेज झटका मारा और अपना आधे से ज्यादा लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया.

मालिनी के मुँह से एक तेज चीख निकल गयी, वो चिल्लाने लगी और साथ में गालियां बकने लगी- बहनचोद, अपनी बहन पर रहम कर, उम्म्ह… अहह… हय… याह… इतना मोटा लौड़ा मेरी चूत में पेल दिया. पहले दिन तो रहम करता, अब तो अगले 2 साल तक मैं तेरी रंडी हूँ, जब मन करे तब चोद दियो, आज तो छोड़ दे. इतना दर्द तो तब भी नहीं हुआ था, जब बड़े भैया ने मुझे चोदा था.

यह सुनकर मैं समझ गया कि मेरे बड़े भैया मोहित पहले ही मालिनी को चोद चुके हैं. मालिनी शायद दर्द के मारे बोल गयी. इसके बाद मेरे मन में बची-खुची शर्म भी चली गयी. मैंने सोचा जब पहले ही मोहित भैया चोद चुके हैं, तो मैं क्यों पीछे रहूँ.

मैंने अपने झटके चालू रखे और करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों अलग हुए.

इस तरह हम भाई बहन ने सुहागरात मनायी. इस चुदाई के बाद मालिनी और मैं अब पूरी तरह खुल चुके थे.

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ताउजी की चुदासी बिटिया

मेरे ताऊ की लड़की का नाम निहारिका (बदला हुआ) था।

उसकी लंबाई सामान्य लड़कियों से कुछ अधिक थी।

बूब्स का आकार ऐसा था मानो वो तीन बच्चों की माँ हो। कहने का अर्थ है कि उसके चूचे बहुत ही ज्यादा बड़े थे. उसकी गांड का तो कहना ही क्या! इतनी सम्मोहित करने वाली गांड थी कि अगर कोई छक्का भी देख ले तो उसका भी औजार तनकर नब्बे डिग्री के एंगल पर खड़ा हो जाये।

दिखने में भले ही वो कटरीना कैफ न हो परंतु सेक्सी इतनी थी कि उसे देखते ही उसकी गांड में अपना लंड डालने का मन हो उठे। वैसे मेरा और निहारिका के बीच सेक्स बहुत छोटी ही उम्र से चलता आ रहा था। मगर यह शरीर तक नहीं पहुंचा था.

अभी तक वह नजरों से ही मेरे बदन की प्यासी दिखाई पड़ती थी. चूंकि मैं उससे काफी छोटा था और वह मुझसे उम्र में सात साल बड़ी थी, वह बचपन से ही मुझ पर नजर रखे हुए थी. उस वक्त तो मैं छोटा था और इन सब बातों के बारे में ज्यादा कुछ जानता नहीं था.

मगर जब मैं 18 साल को पार कर गया तो मुझे बचपन की वो सारी बातें समझ में आने लगीं कि वह मुझसे क्या चाहती थी. मगर जवानी से पहले उसने कभी मेरे साथ कुछ गलत हरकत करने की कोशिश नहीं की थी. वह भी शायद मेरे जवान होने का इंतजार कर रही थी. जवान हुआ तो उसने अपना हवस भरा खेल मेरे साथ शुरू कर दिया. वो मुझे अपने साथ बैठाकर कभी मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसती तो कभी मेरे मुँह को चूमती।

कभी दीदी अपने बूब्स को चुसवाती तो कभी अपनी चूत को मेरी उंगलियों से सहलाती। बिल्कुल सत्य कहूँ तो मित्रों मुझे बड़ा आनंद मिलता था इस सब क्रियाओं में उसके साथ। एक रात जब घर में कोई न था तब उसने अचानक मुझे अपने आगोश में ले लिया और मुझे उठाकर एक अंधेरी सी जगह पर ले गयी। मैं डरने का झूठा नाटक कर रहा था परंतु अंदर ही अंदर मैं बहुत प्रसन्न था। अंधेरे में ले जाकर उसने अचानक कुछ ऐसा किया जो उसने पहले कभी नहीं किया था।

पहले तो उसने मेरा लंड अपने हाथों से पकड़ा और जोर-जोर से हिलाने लगी फिर दीदी ने मेरा लंड अपने मुँह से छुआ। जिससे मेरे अंदर सरसरी सी दौड़ गयी। ऐसा अहसास मुझे पहले कभी नहीं हुआ था। मेरा लंड तन कर तकरीबन 6 इंच का हो गया। मेरे लंड को तना हुआ देखकर वो बहुत खुश हो गयी। फिर उसने जो किया मैं शायद कभी अपनी ज़िंदगी में न भूल पाऊंगा।

उसने अपनी गांड मेरी ओर की और मुझसे कहा- इसके अंदर अपना लंड डाल!

मैं थोड़ी देर तो सकपकाया सा रह गया। फिर उसने थोड़ा और जोर दिया तो मैंने अपने लंड को उसकी गांड में घुसाने का प्रयत्न करना शुरू कर दिया। पहले तो मुझे थोड़ी मुश्किल हुई पर उसके द्वारा मेरे लंड को चूसे जाने से मेरा लंड काफी चिकना हो गया और सीधा दीदी की गांड में 3 इंच अंदर तक पूरा चला गया। उसकी जोर से चीख निकली पर फिर उसने अपनी आवाज़ दबा ली।

मैं बाकी के लेखकों की तरह झूठ नहीं बोलूंगा. उस उम्र में तजुर्बा ना होने की वजह से मेरा लंड घुसते ही सम्पूर्णतः आनंदमय होकर पुनः छोटा हो गया। आप समझ सकते हैं कि पहली बार नारी के बदन का भेदन करने पर भला कौन होगा जो खुद पर इतना कंट्रोल रख पाए. इसलिए मैं तो 2 मिनट भी नहीं टिक सका. मगर निहारिका का मन अभी नहीं भरा था वो अपनी गांड को बहुत जोर-जोर से पीछे करके मेरे लंड को अंदर लेने लगी।

इतनी जोर से कि मुझे शीघ्र ही दर्द होने लगा।

थोड़ी देर बाद वो रुकी और दीदी ने मेरे लंड को पुनः चूसा और मुझे गाल पर किस देकर मुझे मेरे घर छोड़ आयी। उस दिन मुझे जो अनुभव मिला वो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। मेरे मन में आया कि अब मुझे निहारिका से दूर रहना चाहिए और पढ़ाई पर ध्यान लगाना चाहिए इसलिए मैंने तब से लेकर दो साल बाद तक उससे दूरी बनाये रखी।

किंतु जब मैं कॉलेज में पहुंचा तो मेरे अंदर सेक्स के प्रति अनुराग फिर से जाग गया। मुझे फिर से निहारिका की याद आयी। अब मेरा मन किया कि क्यों न अब मुझे अपनी जवानी में उसे थोड़ा दर्द देने का मौका मिले? मैंने यह निश्चित किया कि अब मैं उससे अधिक से अधिक बात करने का प्रयत्न करूंगा. साथ ही साथ उसे सम्मोहित करने की भी कोशिश करूंगा। मैं कोई न कोई बहाना लेकर उसके पास जाने लगा।

वो भी ऐसा नाटक करने लगी थी जैसे इससे पहले हमारे बीच में कुछ हुआ ही न हो। बड़े ही सामान्य तरीके से मुझसे बातें करने लगी थी वो। पर मुझे उसकी आँखों में दिखता था कि वो अभी भी कुछ नहीं भूली और उसके अंदर संभोग करने की कितनी प्यास थी। मैं भी उसके साथ थोड़े बहुत मज़े लेने लगा। जैसे कभी उसकी गांड को छूकर अचानक से गुजर जाना, कभी उसके बूब्स को अचानक अकस्मात छू लेना इत्यादि। कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.

फिर आया दिसंबर … उस साल सर्दियां थोड़ी कम पड़ रही थीं। एक रात को मैंने उसे उसकी छत पर टहलते- टहलते हमारे चाचा की लड़की के साथ अंताक्षरी खेलते हुए पाया।

मेरे अंदर से आवाज़ आयी कि आज तेरा दिन है कि तू भी कुछ करके दिखा। संयोग से उस दिन बिजली भी पूरे जिले में ही नहीं थी। ऐसा बढ़िया मौका शायद ही दोबारा मिलता। मैं भी उसकी छत पर अंताक्षरी खेलने के बहाने चला आया। मेरी अच्छी छवि के कारण उन्होंने शीघ्र ही मुझे भी उनके साथ खेलने की स्वीकृति दे दी। हम तीनों छत पर टहलते-टहलते खेलने लगे।

वो बीच में थी और मैं और उसकी चचेरी बहन दायीं और बायीं ओर थे।

अंधेरा बहुत अधिक था इसलिये कोई भी एक दूसरे को आसानी से नहीं देख सकता था। मुझे बहुत अच्छा मौका मिल गया। मैं धीरे-धीरे उसके बूब्स और गांड पर हाथ फेरने लगा। शायद उसे भी आनंद आ रहा था इसलिए उसने कुछ नहीं कहा. वरना चाहती तो वो अपनी चचेरी बहन से कहकर बहुत बड़ा हंगामा खड़ा करवा सकती थी।

मुझे भी अब ग्रीन सिग्नल मिल गया था. मैं भी अब जोर-जोर से रगड़ने लगा। फिर कुछ समय बाद अचानक निहारिका के बाकी भाई बहन भी ऊपर छत पर आ गए और मेरा प्लान बर्बाद होता दिखने लगा. परंतु मैं उस दिन हार मानने के मूड में नहीं था। अब हम सभी लोग फिर से अंताक्षरी खेलने लगे। मैं निहारिका और एक दो और लोग, हम सब एक टीम में और बाकी सब दूसरी टीम में अंताक्षरी खेलने लगे। मैं और मेरी टीम के बाकी सदस्य निहारिका के पीछे जाकर खड़े हो गए। मैं उसके बिल्कुल पीछे जाकर खड़ा हो गया।

अंधेरा अभी भी बहुत अधिक था।

कोई भी एक दूसरे को अच्छे से नहीं देख पा रहा था। मेरा लंड अब बिल्कुल खड़ा हो चुका था। मेरे लंड की लंबाई भी तकरीबन सात इंच के लगभग हो गयी थी। तब मुझे एक तरकीब सूझी कि क्यों न लंड को पैंट के अंदर ही रख कर थोड़े मज़े लिए जाएं? मैं पैंट के अंदर से ही उसे अपने लंड से धक्के देने लगा।

पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा परंतु बाद में वो सामान्य होकर धक्के सहन करने लगी। ऐसा ही तकरीबन 15 मिनट तक चला और मैं झड़ गया। मेरी जवानी का वीर्य मेरी पैंट के अंदर ही रह गया और किसी को बिल्कुल भी खबर नहीं हुई। किंतु दो साल पहले हवस का जो भूत निहारिका के दिमाग पर सवार था वही भूत आज मेरे दिमाग में भरा हुआ था.

अभी मैं संतुष्ट नहीं हुआ था. थोड़ी ही देर में मेरा औजार फिर से खड़ा हो गया। अब अंताक्षरी खेलते-खेलते भी बहुत समय हो गया था. सभी लोग जाने लगे। अब सभी लोग छत से जा चुके थे और मैं, निहारिका और उसके दो भाई-बहन छत पर थे। हम लोग वैसे ही कुछ देर तक बात करने लगे. मैं भी निहारिका को उसके बदन पर कभी यहाँ तो कभी वहाँ छू-छूकर गर्म करने की कोशिश करने लगा। वो अब बहुत गर्म हो चुकी थी.

उसकी साँसों से मैं बता सकता था कि वो बहुत ही ज्यादा गर्म हो चुकी है।

थोड़ी ही देर में वो नीचे जाने के लिए उठी। मैं भी उसको उठता देखकर उसके पीछे जाने लगा। अभी भी बिजली नहीं आयी थी और नीचे जाने वाली सीढ़ियों पर बहुत अंधेरा था। वह सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी. मैं भी उससे एक-एक सीढ़ी पीछे उतरने लगा। अंतिम सीढ़ी पर जाकर वो रुकी और मेरी ओर मुड़ गयी। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।

निचली सीढ़ियों पर खड़े हुए मेरा दिल धक-धक कर रहा था.

घबराहट पकड़े जाने की नहीं बल्कि हवस को पूरा करने की थी. हवस जब नई-नई जागना शुरू होती है इस तरह की घबराहट अक्सर महसूस होती है जैसी मुझे उस वक्त हो रही थी.

निहारिका नीचे वाली सीढ़ी पर खड़ी हुई थी और मैं इस इंतजार में था कि अब अगले पल में क्या होने वाला है. दो पल तक उसका इंतजार करने के बाद मैं उसको पीछे से पकड़ने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाने ही वाला था कि निहारिका ने मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.

मेरा काम बन गया था. जो आग मेरे अंदर जल रही थी उसी आग में निहारिका भी तप रही थी. उसने मेरे लंड को खड़ा होने के बाद अपने हाथों में भरने की कोशिश की मगर पैंट बीच में आ रही थी. वह मेरे लंड को पकड़ कर उसकी पूरी फील लेने का मजा ले रही थी. उसके हाथ में जाकर मेरा लंड भी आनंद में गोते लगाने लगा था.

इससे पहले भी दीदी ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया था मगर आज की बात ही कुछ निराली थी. एक तो सीढ़ियों पर अंधेरा था. ऐसे में सेक्स का खुमार घरवालों के डर पर हावी हो जाता है. हम दोनों भी बिना किसी की परवाह किये एक दूसरे में खो जाने को बेताब थे.

मैंने निहारिका की चूचियों को पकड़ कर उनको जोर से दबाना शुरू कर दिया. वह नीचे से मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बार-बार दबाकर उसको नाप रही थी. मेरा लंड फटने वाला था. जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने अपना हाथ अपनी चेन की तरफ बढ़ाया मगर निहारिका ने इससे पहले ही मेरे हाथ को रोक लिया.

निहारिका मेरे चूतड़ों को अपने दोनों से पकड़ लिया. वह थोड़ी नीचे की तरफ झुकी और उसने मेरी पैंट में तने हुए मेरे लंड पर अपने होंठों को रगड़ना शुरू कर दिया. आनंद के मारे मेरी आंखें बंद हो गईं. मैंने उसके सिर को पकड़ कर उसके होंठों को अच्छे तरीके से अपने लंड पर रगड़वाना चालू कर दिया.

मम्मी कसम … वह पल जब याद करता हूँ तो आज भी लंड सलामी देने लगता है. निहारिका मेरे लंड को बार-बार पैंट के ऊपर से ही चूम रही थी. वह मुझमें पूरा जोश भर देना चाहती थी. मैंने उसकी चूचियों के अंदर हाथ डाल दिया था और उनको जोर-जोर से भींचना शुरू कर दिया था.

हम दोनों को यह भी ध्यान नहीं रहा कि हम सीढ़ियों में खड़े होकर यह सब कर रहे हैं. सारा होश हवस के नशे रफू चक्कर हो गया था. मेरा मन तो कर रहा था कि अभी लंड बस निहारिका के मुंह में चला जाए. मगर पता नहीं वह मुझे क्यों तड़पाने में लगी हुई थी.

कुछ देर तक मेरे लंड को अपने होंठों से सहलाने के बाद निहारिका ने आगे कदम बढ़ाया.

अचानक से उसने मेरी पैंट को खोला और मेरे अंडरवियर में से मेरा लंड निकाल कर अपने हाथ से हिलाने लगी। फिर अचानक से उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया। उसकी छुअन बहुत ही सुंदर प्रतीत हुई और मुझे अपार आनंद देने लगी। उसने मेरे लंड को मुंह में लेकर वहीं पर चूसना शुरू कर दिया.

मुझे इतना आनंद आ रहा था कि मैंने अपने चूतड़ों को आगे की तरफ धकेलते हुए उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया था, ऐसा लगा कि मैं सीधा झड़ ही जाऊंगा। दीदी मेरे लंड को मुंह में लेकर इतने प्यार से चूस रही थी जैसे उसके होंठ लंड को प्यार देने के लिए बनाए हैं ईश्वर ने. मेरी हालत वहीं पर खराब होना शुरू हो गई थी. स्थिति मेरे नियंत्रण के बाहर होती जा रही थी. मन कर रहा था अभी उसको दीवार के सहारे लगाकर बुरी तरह से चोद दूँ. मगर सीढ़ियों पर चुदाई करने में काफी रिस्क था.

मेरी पैंट सरकते हुए नीचे मेरे टखनों में जाकर बैठ गई थी. मेरा अंडरवियर मेरे घुटनों तक पहुंच चुका था. निहारिका कभी मेरे लंड को चूसने लगती तो कभी उसको हाथ में लेकर मुट्ठ मारने लगती. उफ्फ … मैं तो बेकाबू हो रहा था उसकी हरकतों के कारण. फिर उसके बाद उसने जो किया वह तो आनंद की परम सीमा थी. उसने मेरी गांड को अच्छे तरीके से अपने हाथों में पकड़ लिया. उसके दोनों हाथ मेरे एक-एक चूतड़ पर पीछे की तरफ आकर सेट हो गये थे. उसकी उंगलियां मेरी गांड की दरार तक पहुंच गई थीं.

निहारिका ने मेरी गांड पर अपनी उंगलियों की पकड़ को टाइट किया और मेरे खड़े लंड के टोपे को ऊपर से चूसते मेरे पूरे डंडे पर अपनी जीभ को फिराते हुए नीचे तक अपनी जीभ से मेरे लंड को गीला करने लगी. उसके बाद उसने अगले ही पल मेरे अंडकोषों को अपने होंठों में भर लिया और उसकी नाक मेरे लंड की जड़ में आकर धंस गई. वह अपनी जीभ से मेरे अंडकोषों को मुंह के अंदर ही पपोलने लगी.

उसकी इस हरकत ने मेरे सब्र की सारी सीमाओं को पार कर दिया. बस अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता था. मैंने तुरंत उसके अपने लंड के नीचे से हटा दिया. अगर दो-तीन सेकेण्ड भी वह ऐसा और कर देती तो मेरा वीर्य उसके सिर के बालों को नहला देता.

मैंने उसको अपने हाथों से पीछे हटा दिया और अपने अंडरवियर को ऊपर कर लिया. मैंने लंड को ढक लिया और फिर पैंट को भी ऊपर कर लिया. धीरे से निहारिका के कान के पास अपने होंठों को ले गया और मैंने उससे पलंग पर चलने को कहा.

उसने कहा- वहां घरवालों के आने का डर है।

अचानक से फिर से निहारिका ने मेरी पैंट को खोल दिया और जोर-जोर से मेरा लंड चूसने लगी।

मुझे तो स्वर्ग की अनुभूति सी होने लगी। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ. यह नहीं रुकने वाली आज. फिर वो अचानक रुकी और खड़ी हो गयी।

मैंने थोड़ी देर उसकी कुर्ती में से उसके तने हुए बूब्स को दबाया फिर मैं उसके बूब्स को बाहर निकालकर चूसने लगा। मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। आज भी मुझे उस घटना का एक-एक पल याद है। फिर दीदी ने अपनी पैंटी को उतारा और मुझसे अपना लंड उसकी चूत में घुसाने को कहा।

मैंने अचानक से घुसाया तो उसे बहुत जोर का दर्द हुआ. वो थोड़ा सा चीख पड़ी. फिर मैं धीरे-धीरे उसे किस करते-करते धक्के लगाने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा. वो भी खड़े-खड़े ही अपने आप को आगे की ओर करने लगी। थोड़ी देर बाद मैं उसके अंदर ही झड़ गया।

पहली बार उसकी चूत में मेरा वीर्य जब झड़ा तो उसका आनंद कभी नहीं भूल सकता मैं. मैंने उसको किस करके बाय कहा और मैं अपने घर वापस आ गया।

अब उसकी एक दुबले से व्यक्ति से शादी हो चुकी है. मैंने उसके पति को देखा है. उसकी सेहत देख कर तो लगता है कि वह उसको शायद ही खुश कर पाता होगा. काम वासना की जितनी आग निहारिका के अंदर मैंने देखी है उसके लिए तो उसको एक रति-क्रिया में माहिर मर्द चाहिए जो उसकी योनि की अग्नि में अपने वीर्य की बरसात कर सके.

मैं अभी भी निहारिका की तरफ आकर्षित होता रहता हूँ. मुझे अभी भी लगता है कि वो भी मेरे साथ किये गए सेक्स के बारे में रोज़ सोचती होगी। अभी भी जब वो मायके वापस आती है तो मैं उसे चोदने की कोशिश में लगा रहता हूँ पर अभी तक सही मौका नहीं बन पाया है।

मैं पूरी कोशिश में हूँ कि जैसे ही निहारिका दीदी के साथ चुदाई का सीन बनेगा मैं आप सबको जरूर बताऊंगा. शादी के बाद लड़कियों की सोच और शरीर में काफी परिवर्तन हो जाता है. मैं यह देखने के लिए हमेशा उतावला रहता हूँ कि निहारिका की सोच में कुछ परिवर्तन आया या नहीं. साथ ही साथ मुझे इस बात की भी जिज्ञासा है कि निहारिका के शरीर में क्या-क्या बदलाव आए हैं. यह सब तो तभी पता लग पाएगा जब उसको फिर से चोदने का मौका मिलेगा और मैं आज तक उसी मौके की तलाश में हूँ.

मेरी यह सच्ची कहानी आपको कैसी लगी,
 
बहन का कुँवारापन



मेरी फैमिली में मम्मी-डैडी और मेरी एक बहन है. मेरी मम्मी एक हाउस वाइफ हैं और पापा का अपना रिटेल का बिजनेस है. मेरी बहन मुझसे दो साल छोटी है.. लेकिन हम दोनों एक ही कॉलेज में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं.

मेरे घर में सभी काफी हंसमुख स्वभाव के हैं ख़ास तौर पर मेरे डैडी और मेरी बहन बहुत ही हंसमुख हैं.

जिस तरह से मैं और मेरी बहन दोनों एक ही कॉलेज में हैं.. तो वो ज़्यादा मॉडर्न बनकर पेश नहीं आती है. मेरे डैडी एकदम जॅकी श्रॉफ से दिखते हैं. कॉलेज में भी अक्सर मेरी फ्रेंड्स कहते हैं कि मेरे डैडी की काफ़ी अच्छी पर्सनॅलिटी है.

यह कहानी पूरी तरह से मेरे और मेरी बहन रीमा के साथ जुड़ी है.

वो रोज मेरे साथ मेरी बाइक पर कॉलेज जाती है.. लेकिन आने के टाइम वो अपनी फ्रेंड्स के साथ आ जाती है. वो ये भी समझती है कि मुझे भी कॉलेज में लड़कियों के साथ घूमना पसंद है.

कॉलेज में मेरी इमेज एक प्लेबाय से कम नहीं है.. लेकिन कभी सेक्स का एक्सपीरियेन्स नहीं ले पाया.. क्योंकि दिल्ली में जगह अरेंज करना इतना ईज़ी नहीं है.

मैं अभी फाइनल इयर में था और मेरी बहन अभी फर्स्ट इयर में है.

उसे ट्रेडीशनल कपड़े ही पहनना ही पसंद हैं इसलिए वो सलवार सूट वगैरह पहन कर ही कॉलेज आती है. कभी-कभी मम्मी के कहने पर स्कर्ट भी पहन लेती है. मेरी कुछ खास फ्रेंड्स हैं जो अक्सर कहती हैं कि स्वप्निल अगर रीमा चाहे तो तुझसे हॉट दिख सकती है.

अक्सर मैं जब उसे बाइक पर कॉलेज के गेट पर ड्रॉप करता था.. तो उसके जाने के बाद मेरी फ्रेंड्स अक्सर कहती थीं ‘शुक्र है.. रीमा का भाई यहाँ पर है.. नहीं तो वो कॉलेज में एक हॉट बॉम्ब के नाम से जानी जाती..’

ये सब सुनकर मुझे अजीब लगता था कि मेरी वजह से मेरी बहन खुद को कुछ दबाव में महसूस कर रही है.

मैं उन लड़कियों से अक्सर पूछता कि आख़िर क्यों रीमा तुम्हें हॉट लगती है.. तो वो सब अक्सर कहतीं कि एक भाई की नज़र से मत देख.. और फिर देख.. ‘लुक एट हर बूब्स.. जैसे अन्दर कोई आयरन बॉल लगी हो.’

‘लुक एट हर बैक.. पता नहीं कितने जवान दिलों की धड़कन होगी ये..’

ये सब सुनकर मैं भी अपनी बहन को गौर से देखने लगा, यहाँ तक कि घर में भी मैं उसे गौर से देखता.

मेरी गर्ल-फ्रेंड अक्सर कहती- स्वप्निल मेरे साथ कहीं चलो न.. हम लोग सेक्स का मजा लेंगे..

तो मैं उसे अक्सर पूछता- क्या लड़कियों का भी माइंड सेक्स की तरफ घूमता रहता है?

तो वो कहती- हाँ.. लड़कों से ज़्यादा..

फिर वो मुझ पर कमेंट भी मारती- लेकिन मैं क्या करूँ.. मेरा बॉयफ़्रेंड तो कुछ करता ही नहीं है.

मैं हँस देता..

मैंने अपनी गर्ल-फ्रेंड को बताया- देख मेरी बहन को.. वो भी तो कॉलेज आती है लेकिन वो इस बारे में नहीं सोचती.

तो वो बोली- वो तुम्हारी बहन है.. तुम्हें थोड़ी ना बताएगी.. नहीं तो वो भी तरस रही होगी कि उसे कोई आकर मसल के रख दे.

मैं अपनी बहन से इतना फ्रैंक नहीं था लेकिन मैंने इन्हीं सब बातों को सोच कर धीरे-धीरे उसके साथ फ्रैंक होना शुरू कर दिया.

घर पर उसके सामने अपनी गर्ल-फ्रेंड्स से बात करना.. उसके कमरे में कभी-कभी स्मोकिंग कर लेना इत्यादि..

मैं उससे अक्सर पूछता भी रहता था- तुम्हें बुरा तो नहीं लगता.. तो वो अक्सर कहती- अरे ये सब तो आजकल लड़कों में नॉर्मल बातें हैं इनका क्या बुरा मानना.

धीरे-धीरे मैं उसके दिल का हाल जानने की कोशिश करने लगा और उसे मैंने बताया- मेरी गर्ल-फ्रेंड ये कहती है कि हर लड़की हॉट दिखना चाहती है.

तो रीमा ने कहा- हाँ.. ये बात सच है..

फिर मैंने कहा- तुम कॉलेज इतनी सिंपल बन कर क्यों जाती हो?

तो उसने कहा- लड़की हॉट दिखती है तो लड़के 100 बार कमेंट करते हैं और वो सब मेरे भाई को अच्छा नहीं लगेगा.

मैंने कहा- मुझे नहीं लगता कि रीमा तुम इतनी हॉट दिख पाओगी कि लड़के तुम पर कमेंट करेंगे.

वो बोली- चलो फिर आज शॉपिंग करने चलते हैं.. फिर कल कॉलेज में देखते हैं कि क्या होता है.

मैंने बाइक घर से निकाल ली और आज रीमा खुश थी. फिर हम शॉपिंग मॉल में पहुँचे.. जहाँ रीमा ने कहा- अच्छा तुमको लड़की कैसे हॉट लगती है?

मैंने कहा- ये बात मैं तुम्हें कैसे बताऊँ?

उसने कहा- भाई शर्माओ मत.. मुझे सब पता है कि तुम कैसे लड़कियों को आँखें खोल-खोल कर देखते हो.

तो मैंने भी उसे खुल कर बता दिया- लड़की का एक हॉट लुक हो.. जिसे देख कर दिल में ‘हॉट थॉट्स’ आएं.. चाहे वो सेक्स के ही क्यों ना हों.

रीमा बिल्कुल भी शर्मा नहीं रही थी और वो मेरी बातों को हंस कर सुन रही थी. फिर मैंने बताया- बूब्स की क्लीवेज अच्छा होना चाहिए और बूब्स थोड़े से तो उभरे हुए दिखने ही चाहिए. लड़की की चाल में एक बात होनी चाहिए.. हिप्स का चाल के साथ बैलेंस बनना चाहिए.. मतलब हिप्स का मटकना अच्छा होना चाहिए.

फिर उसने शॉपिंग मॉल में बहुत सारे फैशन टॉप्स और बॉटम ट्राई किए.. लेकिन मुझे ट्रायल रूम के बाहर निकल कर नहीं दिखाए. फाइनली उसने कुछ कपड़े खरीदे और हम घर आ गए.

रात में उसने कहा- भैया कल आप कॉलेज अकेले जाएँगे और मैं आपके बाद खुद आ जाऊँगी.

मैंने भी कहा- ठीक है..

अगले दिन मैं कॉलेज पहुँच गया.

कुछ देर बाद मेरी गर्लफ्रेण्ड आई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे कॉलेज के गेट पर ले जाने लगी.

मैंने पूछा- क्या बात है?

लेकिन उसने नहीं बताया.

मैं कॉलेज के गेट पर पहुँचा और देख कर दंग रह गया कि मेरी बहन एक ‘सुपर हॉट बॉम्ब’ की तरह खड़े होकर अपनी फ्रेंड्स से बातें कर रही है और सब उसे ऐसे देख रहे हैं जैसे कोई ‘हॉट सेलेब्रिटी’ आ गई हो.

गहरे गले वाला टॉप और लो-वेस्ट स्लिम फिट जीन्स.. लाइट मेकअप और उसके लाइट पर्फ्यूम की खुश्बू चारों तरफ बिखर रही थी. उसके मम्मों का क्या बताऊँ कैसे लग रहे थे.. इससे पहले मुझे कभी अहसास नहीं हुआ कि उसके मम्मे इतने हार्ड होंगे.

उसने मुझे देखा.. एक स्वीट सी स्माइल दी और फिर अन्दर कॉलेज की तरफ जाने लगी.

सभी लड़कियों उसे इन्फीरियरटी कॉम्प्लेक्स के साथ देख रही थीं.

सच में वो सबसे अलग दिख रही थी. वो अन्दर ऐसे जा रही थी जैसे कोई रैम्प पर चल रहा हो.

उसके इस रूप से तो मैं दंग रह गया, वो आज़ आग का शोला दिख रही थी.

कोई लड़का कुछ बोल रहा.. तो कोई कुछ.. पहली बार मैंने फील किया कि अपनी बहन को देख कर मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था. मैं चकित था कि ये कैसे हो गया.. एक सलवार-सूट में दिखने वाली सिंपल लड़की एक ‘सेक्स बॉम्ब’ कैसे बन गई है.

कॉलेज में वो दिन काफ़ी अजीब रहा.. शाम को रीमा ने कहा- भैया मैं अब आपके साथ ही जाऊँगी.

अगले दिन से वो फिर से मेरे साथ बाइक पर बैठ गई.. पहले अक्सर वो दोनों टाँगें एक साइड करके बैठती थी.. लेकिन उस दिन फिल्मी स्टाइल में वो दोनों तरफ अपनी टाँगें फैला कर बाइक पर बैठी.

उफ़फ्फ़.. उसके बैठने का तरीका.. मैं तो पागल ही हो गया..

मैं पूरे रास्ते भर उसके मम्मों को महसूस करता रहा.. वो भी काफ़ी चिपक कर बैठी हुई थी.

रास्ते में लड़के कमेंट भी कर रहे थे कि ‘क्या माल है..’ कोई कह रहा था कि ‘क्या कपल है!’

एक मेरा लण्ड भी बैठने का नाम नहीं ले रहा था.

किसी तरह से हम घर पहुँचे.. घर पर मम्मी नहीं थीं.. वो सब्जियाँ लेने के लिए गई थीं.

हम दोनों घर के अन्दर गए.. मैं सोफे पर शांत जाकर बैठ गया.

थोड़ी देर बाद मेरी बहन मुझे पानी देने के लिए आई, उसने जीन्स चेंज कर ली थी और एक शॉर्ट पहन कर आई थी.. जिसमें उसकी जाँघों ने मुझे और भड़का दिया.

पानी देते समय उसने एक स्माइल दी और कहा- लो, ठंडा पानी पी लो..

मैं खुद को रिलेक्स करने के लिए स्मोकिंग करने लगा. अपनी बहन का वो रूप बार-बार मुझे पागल कर रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी बहन आई.. सामने वाले सोफे पर बैठ गई और कहने लगी- भैया टेन्शन में क्यों हो?

वो हंस भी रही थी.. मैंने कहा- शायद मुझे कुछ चाहिए..

मेरी बहन तपाक से बोली- यस आई नो यू नीड सेक्स नाओ..

इतना सुनते ही मैं उस पर टूट पड़ा.. उसने कहा- वेट ब्रदर.. अभी मम्मी का आने का ख़तरा है.. हम लोग रात में पूरी मस्ती से सब कुछ करेंगे.

मैं बहुत खुश हुआ और उसके होंठों पर एक हार्ड स्मूच किया.

अब मैं रात होने की प्रतीक्षा करने लगा, भूख भी नहीं लग रही थी.. कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था.. बस अपनी बहन की चूचियाँ दिमाग में घूम रही थीं.

मैं आज तक कुँवारा था.. सो मैं बाथरूम गया और थोड़ा सा तेल लेकर अपने लण्ड की मालिश करने लगा. इसकी मोटाई से ही अहसास हो रहा था कि आज मेरी बहन को इसे झेलना भारी पड़ेगा. मेरे लंड का रूप बहुत खतरनाक लग रहा था.

शाम में मैं अपनी छत पर घूम रहा था, तभी बहन आई और बोली- क्या हुआ? टाइम नहीं कट रहा?

मैंने कहा- दिल कर रहा है कि तुझे यहीं लिटा लूँ और पूरी रात पेलता रहूँ.

मेरी बहन ने कहा- बातों से नहीं किसी और चीज से पेला जाता है.

मुझे लगा कि जैसे वो मुझे चैलेंज कर रही है.

‘ठीक है.. बताता हूँ किस चीज से पेला जाता है.’

वो कंटीली अदा से आँख मार कर भाग गई.

रात हुई और वो मेरे कमरे में आई, करीब 5 मिनट के बाद उसने आँखों से इशारा किया- शुरू करें..

उसने पिंक ट्रांसन्स्पेरेंट नाइटी पहनी हुई थी और वो बला की खूबसूरत लग रही थी.

मैंने उसे होंठों पर किस करना शुरू किया वो भी पूरा सपोर्ट कर रही थी.. किस करते-करते वो मेरी शर्ट के बटन खोल रही थी और अन्दर बालों भारी छाती पर हाथ फिरा रही थी.

उसकी सिसकारियाँ मुझे और पागल कर रही थीं. धीरे-धीरे मैंने अपने हाथ उसके मम्मों पर पहुँचा दिए.

ओह माय गॉड.. उसकी ब्रा के अन्दर उसके मम्मे बाहर आने को छटपटा रहे थे.

मैंने ब्रा का हुक तोड़ दिया.

रीमा ने कहा- ब्रो रिलॅक्स.. आई एम ऑल युअर्ज़.

फिर उसने धीरे से मुझे कान पर किस करते हुए कहा- मेरे बूब्स को नहीं चूमोगे?

उसके मुँह से ये बात सुनकर मैं एकदम से पागल हो गया और उसके नंगे मम्मों को चाटने लगा.

वो भी ‘अहहहा हाहहाआ.. आहहहहाहा..’ करती जा रही थी.

इसके बाद उसने अपने हाथों से मेरे लण्ड को टटोलना शुरू कर दिया.

लाइट्स ऑफ थीं.

उसके हाथ में मेरा बड़ा लण्ड जैसे ही आया.. तो रीमा ने कहा- प्लीज़ स्विच ऑन करो न.. मुझे तुम्हारा बड़ा लण्ड देखना है..

मैंने लाइट्स ऑन कीं और वो मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई. मेरी जीन्स और अंडरवियर नीचे करने के बाद उसके मुँह से निकला- वोउव.. उसके गोरे हाथों की ऊँगलियों के बीच मेरा मजबूत काला भुजंग लण्ड साफ़ दिख रहा था.

थोड़ी देर बाद उसने अपने होंठों के स्पर्श से मुझे पागल कर दिया.

उसकी फ्लेवर्ड लिपस्टिक से मेरा लण्ड महकने और रंगने लगा था. वो भी ऐसे पेश आ रही थी.. जैसे सकिंग में कितनी एक्सपर्ट है.

मेरे लण्ड से वो बिल्कुल भी डर नहीं रही थी.

फिर मैंने उसे सिसकारते हुए कहा- आह.. अगर तुमने इसे ज़्यादा चूसा तो मैं तुम्हारे मुँह में ही डिसचार्ज हो जाऊँगा.

वो समझ गई और उसने मुँह से लवड़ा निकाल दिया.

इसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर धक्का दे करके लिटा दिया और उसकी पेंटी को उतारने लगा. उसने अपनी चूत को बिल्कुल चिकना किया हुआ था.

मैंने ज़्यादा टाइम ना लगाते हुए अपने होंठ उसकी चूत से लगा दिए.

वो पागल हो चुकी थी और बोले जा रही थी- फक्क मीईईईई.. अहह.. भाई.. लण्ड पेल दो..

थोड़ी देर के बाद मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर लगाया, मैं खुद भी सोच रहा था कि इतना बड़ा लौड़ा इसकी जरा सी फांक में कैसे अन्दर जाएगा.

फिर एक हल्का सा स्ट्रोक लगाया.. बिल्कुल ऐसा अहसास हुआ कि उसका कुँवारापन टूट गया.

उसकी साँसें अटक गई.. आँखें ठहर गईं.. और वो मरी सी आवाज में बोल रही थी- ओह्ह.. स्लोय्यययई.. बहुत मोटा है.. तुम्हारा लण्ड है या गरम रॉड.. दर्द हो रहा है.. धीरे.. आह्ह..

मैं पूरे संयम के साथ लगा रहा.. उसके मम्मों को चूसता रहा.

फिर थोड़ी देर के बाद वो नॉर्मल हुई.. और मैंने तेज धक्के देना शुरू किए.

हम आपस में बहुत गंदी-गंदी बातें कर रहे थे. पूरा कमरा चूत चुदाई की ‘फच फच..’ की आवाजों के साथ गूँज रहा था.

कुछ देर के बाद वो शांत हो गई और मैं भी.. निढाल हो गया.

उसके चेहरे पर तृप्ति के भाव थे.

तब से मेरी छोटी बहन को बस सेक्स की भूख है..

आप तो जानते ही हैं कि जब जलेबी शीरा पी जाती है तो वो कितनी मीठी हो जाती है इसी तरह वो भी बेहद खूबसूरत और मस्त हो चुकी है.

यह मेरा पहला फैमिली सेक्स अनुभव था..
 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 


चुदवाने का चस्का भाई से लगा




मेरा नाम मोनिका ह। म हिमांचल की रहने वाली हु। मेरी उम्र 19 साल ह । ये घटना करीब 2 साल पहले की ह जब मैंने 12 वी के एग्जाम दिए थे ये घटना मेरी और मेरे भाई की ह। मेरे घर में मैं, पापा, ममा, निकिता दीदी (20)और भाई(22) हैं। दीदी पापा की लाड़ली हैं और वो पापा के साथ ही रहती ह। जब पापा घर आते ह तभी निकिता दीदी आती है।

दीदी साडी और खुले गले के ब्लाऊज़ पहनती है जिसमे उनका भूरा पेट गहरी नाभि और आधी चूचियाँ साफ दीखती हैं। उनको पापा और ममा मना नही करते बल्कि खुस होते हैं। मेरे पापा डेल्ही में जॉब करते ह और भाई पंजाब में।

मेरे भाई का नाम रोहन ह। रोहन की हाइट 5फ़ीट 9इंच और बॉडी बिल्डर जैसी बॉडी हैं।

मेरी हाइट 5 फ़ीट 3इंच ह। रंग गोरा ह।

मेरी चूचियाँ का साइज़ 32 कमर 28 और कूल्हे36 ह। मेरे स्कूल में लड़के मेरे कुल्हो क दीवाने ह। म लड़को की तरह छोटे बाल रखती हु। मुझे जीन्स ओर शॉर्ट टॉप पहनना पसन्द है। मेरी हाइट कम होने के कारण मेरे कूल्हे ज्यादा बड़े दीखते ह। मेरी चुचियां गोल और ब्राउन कलर के निपल हैं। चेहरा गोल है।

मेरा भाई कंपनी में जॉब करता ह। उनको खाना बनाने में दिक्कत होती थी तो ममा ने मुझसे कहा के तुम चली जाओ भाई क साथ। वैसे भी म घर पर ही रहती थी पूरा दिन खाली तो म भी चाहती थी के म उनके साथ रहूँ। क्यू के मुझे वहा आजादी मिल जाती और मुझे भी वहा घूमने फिरने का मोका मिल जाता और वैसे भी मेरे भाई के साथ मुझे रहना, उनके साथ सोना, बाते करना मुझे अच्छा लगता है।

घर में भी मेरा और भाई का एक ही कमरा है। म भाई क साथ हर बात शेयर कर लेती हु यहा तक के भाई मुझे गिफ्ट में ब्रा और पेंटी भी दे देते ह। म भाई को ही अपना बॉयफ्रेंड मानती हु लेकिन भाई को ये पता नही ह क उनकी छोटी बहन ही उनकी हमबिस्तर होने को तयार ह तो… मैंने हा क्र दी।

और भाई क साथ जाने को तयार हो गयी। भाई भी खुस हो गए क्यू क उनको भी खाना बनाने वाली जो मिल रही थी।

दिन में ममा बहार चली गयी मैं और भाई घर पर अकेले रह गए। तब भाई ने कहा के मोनिका तुम अपने कपड़े पैक कर लो और मेरे कुल्हो पर हल्का चांटा लगा दिया..

भाई ऐसा करते रहते थे।

फाइनली हम नेक्स्ट डे सुबह घर से चल दिए और शाम को 8 वजे पहुंच गए। हम थक गए थे तो मैंने और भाई ने सावर लिया और खाना खाया जो हमने घर से पैक किया था। और सोने लगे।

भाई के रूम में एक ही बेड था जिसपर हम दोनों लेट गए। म दिवार की तरफ मुह करके सो गयी जिस से मेरे कूल्हे भाई की तरफ हो गए। भाई ने अपना लण्ड मेरे कुल्हो से सटा दिया और मेरे पेट पर हाथ रख क्र मुझसे चिपक कर सो गए। मुझे थोड़ी देर बाद मेरे कुल्हो क बिच में हलचल महसूस हुई।

मैंने सोचा क भाई नींद में ह रहने दो जो हो रहा ह उसे होने दू क्यू क मुझे भी मजा आ रहा था। थोड़ी देर बाद भाई आगे पीछे होने लगे। तो मैंने अपने पैरो को थोडा खोल दिया जिस से भाई का लण्ड मुझे मेरी चूत पर महसूस होने लगा क्यू क मैंने लवर के निचे पेंटी नही पहनी थी।

भाई अब थोडा सा तेज आगे पीछे होने लगे।

5 मिनट बाद भाई ने मुझे आवाज़ दी :- मोनिका।

मै नही बोली

भाई ने दोबारा आवाज दी तब म बोली:- हा भाई

भाई:- जाग रही हो

मैं:- हा भाई

भाई:-मेरी तरफ मुह क्र क सो जाओ।

मुझे मालूम था क भाई चोदना कहते ह मुझे।

मैंने भाई की तरफ मुह कर लिया और अपनी आँखे बन्द कर के सोने लगी।

भाई:-मोनिका यार तेरा कोई बॉयफ्रेंड ह क्या।

मै:-नही भईया।

आपके पास कोई लड़का हो तो बताना और म हस दी।

भाई भी हसने लगे।

मैंने भाई से पूछा क आपकी कोई गर्लफ्रेंड ह क्या।

भाई:- नही। जॉब से फुर्सत ही नही मिलती जो लड़की पटाऊँ।

भाई:- अब मुझे गर्लफ्रेंड की जरूरत भी नही ह।

मै :-क्यू?

भाई:- तुम जो आ गयी हो। आज से तुम हो मेरी गर्लफ्रेंड।

इतना कहते ही भाई ने मेरी दोनों चुचियो क बिच में मुह रख दिया और अपना लण्ड मेरी चूत से सटा दिया।

म भी भाई से यही चाहती थी। क्यू क भाई मेरे बचपन से ही कर्स रहे ह। मैंने अपनी टांगे थोड़ी सी खोल क़र भाई के

ल्हो पर हाथ रख क्र अपनी तरफ खिंच लिया। तभी भाई पीछे हट गए। म घबरा गयी क अब क्या हो गया।

भाई:- मोनिका मुझे फुल मजा करना है।

और अपनी लोवर और टीशर्ट उतार दी भाई ने अंडरवियर नही पहना था। भाई का लण्ड करीब 6 या 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था । मुझे लगा के म इसे नही ले पाऊँगी तभी भाई मेरे भी कपड़े उतरने लगे। मेरी टीशर्ट उतारते ही चुचिया उनके सामने लहराने लगी। मुझे श्रम महसूस हो रही थी। तभी भाई ने मेरी चुचियो को हाथ में ले क्र दबाने लगे।

भाई ने चूची को मुह में भर लिया।

मेरी सिसकिया छुटने लगी आह सीईईईईईईईईई …. मुझे इतना मजा आने लगा था के म बता नही सकती। सच पूछो तो मेरी चूत से पानी निकलने लगा था। तभी भाई ने मेरी लोअर निकाल दी। मेरी क्लीन चूत भाई क सामने थी। भाई ने चूत पर हाथ रखा और 1 ऊँगली अंदर दाल दी।मुझे बहूत मजा आ रहा था। हम दोनों लोग नंगे ही एक दूसरे को गले लगाने लगे. वोअपना लंड मेरे मुँह में डालने लगा. मैं उसको मना कर रही थी कि नहीं मैं ये नहीं करूँगी तोवो बोला कि इसमें मजा आता है.तो मैं भी उसके लंड को चूसने लगी.

 
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