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Incest भाई-बहन वाली कहानियाँ

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मम्मी-पापा ऑफिस के लिए निकल गए थे.. तो कांता मेरे पास आई।

कांता- क्या कर रहे हो?

मैं- बस आराम..

कांता- क्या कल तुम्हें भी मजा आ गया आया?

मैं- हाँ यार बहुत..

कांता- मुझे तो एकदम सुहागरात वाली फीलिंग आ रही थी।

मैं- चलो अच्छा है.. शादी से पहले अच्छे से सुहागरात मना ली।

कांता- हाँ वो तो है.. लेकिन तुम तो बहुतों के साथ चुदाई कर चुके हो।

मैं- हा हा हा..

कांता- अच्छा एक बात पूछूँ?

मैं- हाँ बोलो.. क्या बात है?

कांता- तुमने कभी दो लड़कियों के साथ एक साथ किया है?

मैं- हाँ..

कांता - किसके साथ?

मैं - सोनी और मोनिका..

कांता- बहुत मजा आया होगा ना?

मैं - हाँ लेकिन तुम ये सब पूछ क्यों रही हो?

कांता- वैसे ही मन हुआ तो पूछ लिया।

मैं - करना है क्या?

कांता - सोच तो रही हूँ.. एक बार दीदी और मुझे एक साथ चोदो ना..

मैं - वो तो कोलकाता में है।

दीप्ति - तो एक और ऑप्शन है।

मैं - क्या?

कांता - तुम और जय दोनों मेरे साथ एक साथ चुदाई करो।

मैं - क्या? नहीं सम्भाल पाओगी.. अभी नहीं.. कुछ दिन बाद करना।

कांता - नहीं.. सम्भाल लूँगी..

मैं- तो ठीक है.. मैं बुला लेता हूँ जय को।

कांता- थैंक्स जान..

मैं- हैलो.. जय क्या कर रहा है?

जय- कुछ ख़ास नहीं..

मैं- और मेरी डार्लिंग कैसी है?

जय - यार कितना बेरहमी से चोदे हो.. बुर सूजी हुई है.. मैं बर्फ से सिकाई कर रहा हूँ.. अब ठीक है।

मैं - ओके.. उसको बोलो बुर में बर्फ डालती रहे.. और तुम मेरे घर आ जाओ।

जय - क्या बात है.. आज कुछ प्लान है क्या?

मैं - हाँ आज ग्रुप में करने का मन है।

जय - मतलब कांता को हम दोनों मिल कर चोदेंगे।

मैं- हाँ बे कमीने..

जय - ओके.. तब तो मैं भागते हुए आऊँगा।

मैं- ठीक है.. जल्दी आ जा.. पापा के आने से पहले तुमको वापस भी जाना होगा।

जय - ठीक है बस निकल ही गया हूँ।

मैं- ठीक है।

कुछ ही देर में जय मेरे घर आ गया उसको देखते ही कांता बहुत खुश हुई और जा कर उससे गले लग गई।

तो मैं भी कांता के पीछे उसके गले लग गया.. मतलब कांता मेरे और जय के बीच में थी.. तो मैंने उसके बालों को हटा कर उसकी पीठ पर किस किया।

उसकी गान्ड दबाते हुए बोला- चलो रानी.. शुरू करते हैं तेरी चुदाई..

हम तीनों कमरे में आ गए.. और हम दोनों मर्दों ने मिल कर कांता को जहाँ-तहाँ किस करना शुरू कर दिया।

मैं बोला- यार कपड़ों में मजा नहीं आ रहा है..

इतना सुनते ही हम तीनों अपने-अपने कपड़े उतारने लगे और कुछ देर में तीनों पूरे नंगे हो चुके थे।

कांता अपने एक-एक हाथ से हम दोनों के लंड को पकड़ कर मसलने लगी.. तो हम दोनों भी उसकी एक-एक चूची को पकड़ कर शुरू हो गए..

दबाना.. पीना.. मसलना.. कुछ देर ये सब चला.. तो मैं अपना लंड लेकर कांता के मुँह के पास चला गया।

कांता झट से मुँह में मेरा हथियार ले कर चूसने लगी और जय कांता की बुर को चाटने लगा।

कुछ देर ये सब चला.. फिर मैं बुर चाटने लगा और कांता जय का लंड पीने लगी।

एक-एक बार हम लोग झड़े.. तो कांता ने हम दोनों को कन्डोम पहनाया.. मैं तेल की शीशी लाया.. और कांता की गान्ड के छेद पर तेल लगाने लगा।

थोड़ी देर तेल लगा कर उंगली ऊपर से घुमाता रहा.. फिर जब गान्ड का छेद मुलायम हो गया तो मैंने अपना लंड घुसा दिया।

 
कुछ देर लौड़े को अन्दर-बाहर करने के बाद जब लगा कि अब गान्ड में ज्यादा दर्द नहीं होगा.. तो जय बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया।

मैंने कांता को बोला- जा कर उसके लंड पर बैठ..

तो वो जैसे ही बैठी.. जय नीचे से झटका मारने लगा.. तो कांता के बुरड़ों कि टकराने के बाद जो हिल रहा था सो देख कर मजा आ रहा था।

अब मैं भी पास गया और कांता को थोड़ा झुका दिया.. तो उसकी गान्ड का छेद ऊपर को आ गया।

मैंने भी अपना लंड उसकी गान्ड के छेद पर रख कर एक जोरदार झटका मारा और पूरा लंड गान्ड में सटाक से अन्दर चला गया।

कांता की गान्ड फट गई.. वो इतनी तेज चीखी कि उसकी आवाजें पूरा गूँजने लगीं… शायद आस-पड़ोस वालों को भी आवाज़ का पता चल गया होगा और जिस-जिसने चुदाई के समय ऐसी आवाजें निकलवाई होंगी.. वे सब ज़रूर इन आवाजों को पहचान गए होंगे।

खैर.. मैं रुक गया.. जब कांता थोड़ी शांत हुई.. तो हम दोनों फिर झटके मारने लगे और इस बार हमने कांता के मुँह को हाथ से बंद कर रखा था।

कुछ देर बाद मैं और जय ने अपनी-अपनी अवस्था बदल ली.. मैं कांता की बुर और जय उसकी गान्ड मारने लगा।

उसके बाद एक-दो और आसनों में चुदाई की फिर हम सभी लोग डिसचार्ज हो गए।

कांता पसीने से पूरी तरह लथपथ थी। मैंने उससे पूछा- एक और राउंड?

तो बोली- अब नहीं हो पाएगा.. बहुत थक गई हूँ।

हम लोग बाथरूम जाकर फ्रेश हो गए और कुछ देर बाद कांता सो गई।

जय- तो अब मैं भी घर जाता हूँ..

मैं- ठीक है जा..

जय- दीप्ति की मुझे कब दिलवाओगे?

मैं - मैं क्या करूँ.. तुम खुद ट्राइ करो..

जय - नहीं.. तुम बोलोगे तो शायद मान जाएगी।

मैं - ठीक है.. आज शाम को आता हूँ.. लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा?

जय - जो तू बोल..

मैं - दीप्ति की बुर दिलाऊँगा.. तो बदले में मुझे तुम पद्मा से मिलवाओगे।

जय - साले.. अब तुम क्या मेरी दोनों बहनों को चोदोगे?

मैं - कोशिश तो यही है.. अब क्या लिख कर दूँ.. कि दीप्ति को चोदना है.. तो सोच लो.. मेरे बिना वो तुमसे चुदने को राज़ी नहीं होगी.. बाकी तू समझ..

जय - ठीक है साले.. पद्मा को भी चोद लियो.. मुझे मंजूर है।

मैं - ठीक है.. तू जा घर.. मैं उसको मना लूँगा।

जय अपने घर चला गया और मैं कांता के कमरे में गया तो देखा वो पूरी नींद में औधी पड़ी थी तो मैं भी अपने कमरे में जाकर सो गया।

जब पापा आए तो मेरी नींद खुली.. फ्रेश हो कर मैंने नाश्ता किया और घूमने के बहाने से जय के घर गया।

मैंने देखा दीप्ति अपनी बुर में अब भी बर्फ का टुकड़ा डाल कर बैठी हुई थी। तो मैंने बर्फ हटा कर तेल से थोड़ी मालिश कर दी.. तो वो जल्द ही सामान्य हो गई..

 


अब मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए बोला- अब दर्द कैसा है मेरी जान?

दीप्ति- ठीक हो गई हूँ..

मैं - तब तो एक राउंड हो जाए?

दीप्ति - हाँ अब हो जाएगा।

मैं - नहीं.. रहने दो तुम रेस्ट करो।

दीप्ति - ठीक है डार्लिंग..

मैं - एक बात बोलूँ.. बुरा तो नहीं मानोगी।

दीप्ति- नहीं.. बोलो?

मैं - वो जय तुमको..

दीप्ति- जय मुझे क्या? साफ़-साफ़ बोलो न?

मैं - जय तुम्हारे साथ एक बार करना चाहता है।

दीप्ति - क्या?

मैं - हाँ..

दीप्ति - लेकिन ये सही नहीं है।

मैं - क्या सही नहीं है.. तुम दोनों एक-दूसरे को नंगे देख ही चुके हो.. एक बार ट्राई कर लो।

दीप्ति - ओके.. तुम बोलते हो तो कर लूँगी।

तभी मैंने जय को फोन किया।

मैं- लो साले.. तेरा काम हो गया.. आज पहली बार गान्ड मार ले साले.. पर अपनी दीदी की बुर को मत छूना.. दीप्ति राज़ी हो गई।

दीप्ति - एक बात बोलूँ?

मैं- हाँ बोलो न..

दीप्ति - मैं अपनी गान्ड की सील भी तुमसे ही खुलवानी चाहती हूँ।

मैं - ऐसा क्यों?

दीप्ति - वैसे ही.. मेरी ये विश पूरी कर दो ना प्लीज़..

मैं - ओके मेरी जान..

मैंने उसके कपड़े उतारे और उसकी गान्ड में तेल लगा कर अपना लौड़ा पेल दिया।

मैं उसकी गान्ड खोल कर अपने घर चला आया और रात को आराम से सो गया।

सुबह जय ने फोन करके बताया कि उसने दीप्ति के साथ चुदाई करके उसकी गान्ड मार ली है।

मैं - गुड.. मजा आया ना?

जय - हाँ बहुत..

मैं- ठीक है.. अपना वादा याद है ना..

जय - पद्मा से मिलने का ही ना..

मैं- हाँ..

जय - जब दिल्ली जाएगा.. तब ना..

मैं - हाँ अब दिल्ली ही जाऊँगा.. कितने दिन यहाँ रहूँगा।

जय - ठीक है जब दिल्ली जाएगा.. तो मैं हेल्प कर दूँगा।

मैं - ठीक है।

मैंने फोन रख दिया.. तभी कांता मेरे कमरे में कॉफी ले कर आई.. जैसे ही टेबल पर उसने कॉफ़ी रखी.. मैंने उसे खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया और उसकी चूचियों को दबा दिया।

कांता - पापा घर पर ही हैं.. ज़रा सबर करो।

मैं - तो क्या हुआ.. अभी इधर थोड़े ही आएंगे।

कांता - अगर आ गए तो.. अभी कंट्रोल करो.. और किससे फोन पर बात हो रही थी?

मैं - तुम्हारे आशिक से..

कांता - जय से क्या बात हो रही थी.. मेरे बारे में पूछ रहा था क्या?

मैं - नहीं दीप्ति को चोद दिया उसने.. यह बताने के लिए फोन किया था।

कांता - क्या.. दीप्ति मान कैसे गई?

मैं - मैंने मनाया था।

कांता - बड़ा कमीना है तू… और कुछ प्रोमिस की बात हो रही थी।

मैं - हाँ पद्मा को पटाने की।

कांता - अब उसको भी?

मैं - हाँ दिल्ली जा रहा हूँ.. पद्मा वहीं है.. उस पर भी ट्राई मारूँगा।

 
कांता- ऊऊ ऊऊहह.. वो तो आसानी से पट जाएगी।

इमैं- ऐसा क्यों?

कांता- जब दीप्ति को पटा लिया तो पद्मा तो पहले से ही फास्ट है।

मैं - तुमको कैसे पता?

कांता - अरे स्कूल में वो मेरी जूनियर थी ना.. तब से ही जानती हूँ उसको.. तब ही दो तीन ब्वॉय-फ्रेण्ड थे.. तो अब तो दिल्ली में रहती है।

मैं - तब तो उसको मेरे बेडरूम मे आने में ज्यादा देर नहीं लगेगी!

कांता- हाँ..

मैं - ठीक है.. मैं दिल्ली जा रहा हूँ 2-3 दिनों में ही..

कांता - और यहाँ कांता को भूल गए?

मैं - नहीं उसको अगली बार.. अभी पद्मा उसके बाद शेफाली।

कांता- ठीक है.. लेकिन मुझे भोपाल कौन छोड़ने जाएगा.. तुम दिल्ली जाओगे तो?

मैं - जय को बोलूँगा.. वो तुमको छोड़ आएगा।

कांता- वाउ.. लेकिन पापा उसके साथ नहीं जाने देंगे ना..

मैं - वो मैं कर लूँगा ना..

कांता- कैसे..?

मैं- पापा को बोलूंगा.. तुमको मैं भोपाल छोड़ कर दिल्ली चला जाऊँगा.. लेकिन स्टेशन से तुम जय के साथ चली जाना।

कांता - वाउ प्लान अच्छा है।

मैंने तीन दिन बाद भोपाल के दो और दिल्ली एक-एक टिकट बनवा लिए और दिल्ली जाने से पहले मैंने और जय ने कांता और दीप्ति को जम कर चोदा।

दिन में जय मेरे घर आ कर कांता को चोदता और मैं उसके घर जाकर दीप्ति को चोदता था।

रात को अपने-अपने घरों में अपनी-अपनी बहनों को चोदते थे।

दिन में मम्मी-पापा के ऑफिस जाने के बाद या तो जय दीप्ति को ले कर मेरे घर आ जाता था.. या तो मैं कांता को ले कर जय के घर पहुँच जाता था और शाम तक सामूहिक चुदाई होती थी, फिर अपने-अपने घर लौट जाते थे।

अब वो दिन आ गया.. जब हमें वापस जाना था.. तो मैं कांता को लेकर स्टेशन पहुँचा.. तो जय पहले से वहाँ पहुँचा हुआ था। मुझे एक सामान का बैग दिया।

जय- लो ये पद्मा को दे देना.. और मैं उसको बोल चुका हूँ.. तुम उसके होस्टल में सामान पहुँचा देना.. मैंने तुमको उसका नंबर दे दिया है.. और तुम भी अपने मोबाइल से अभी उसे फोन कर लो… मैं तुम्हारी बात करा देता हूँ।

जय ने मुझे पद्मा का नंबर दिया तो मैंने फोन किया.. पूरी रिंग हुई लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया।

मैं - हो सकता है कहीं बिजी होगी.. बाद में बात कर लूँगा।

जय - ठीक है.. लो ट्रेन भी आ गई।

मैं- हाँ..

मैंने उन दोनों को ट्रेन में चढ़ा दिया उनके डिब्बे में ज्यादा आदमी नहीं थे पूरी बोगी में केवल 5-6 आदमी ही होंगे। इनके आस-पास की सारी सीटें खाली थीं.. तो मैं बोला- डार्लिंग.. आज तो तू जा रही है.. अब मुझसे कब चुदेगी.. पता नहीं…

मैंने कांता की चूचियों को दबा दिया.. तो उसने भी मेरे लंड को दबाते हुए कहा- जब मन होगा.. आ जाना भोपाल..

तभी ट्रेन चलने लगी तो मैं दोनों को बाइ बोल कर नीचे उतर गया।

तभी एक फोन आया.. अरे यह तो पद्मा का नंबर है।

मैं- हैलो..

तो उधर से एक सेक्सी सी आवाज़ आई, मैं तो मन ही मन उसकी आवाज़ से उसके जिस्म के बारे में सोचने लगा।

पद्मा - हाँ जी.. आपका फोन आया था.. मैं उठा नहीं पाई थी।

मैं - हाँ वो जय ने फोन किया था।

पद्मा - अरे राजा भैया आप… भैया ने बताया था कि आप सामान ले कर आ रहे हैं।

मैं- हाँ..

पद्मा - तो क्या मैं स्टेशन आ जाऊँ.?

मैं - अरे नहीं.. मैं सामान तुम्हारे कमरे तक पहुँचा दूँगा.. तुम टेन्शन मत लो।

पद्मा - ठीक है.. वैसे आप आओगे तो थोड़ा अच्छा भी लगेगा.. मैं यहाँ बोर हो रही हूँ।

मैं - ऐसा क्यों?

पद्मा - यहाँ आए 10-12 दिन तो हुए हैं.. ना कुछ देखा हुआ है.. ना ही ज्यादा दोस्त हैं.. सो कमरे में बोर होते रहती हूँ।

मैं- ऊऊहह.. अब समझा.. ठीक है.. मैं आऊँगा तो तुम्हें दिल्ली घुमा दूँगा।

पद्मा- हाँ ये सही रहेगा!

मैं- ठीक है दिल्ली पहुँच कर फोन करता हूँ।

मेरी ट्रेन आ गई थी.. मैंने फोन रखना चाहा.. लेकिन वो बातें करने लगी और मैं बात करते-करते ही ट्रेन पकड़ ली।

वो बात करती रही.. मैं मन ही मन सोच रहा था कि ये तो आसानी से पट जाएगी।

कुछ देर बाद मैं फोन रख कर सो गया और नींद खुली तो दिल्ली पहुँच चुका था।

मैंने देखा तो उसका फोन आया हुआ था.. तो मैंने वापस से उसको फोन किया।

पद्मा- कहाँ पहुँचे?

मैं- दिल्ली स्टेशन पर उतर रहा हूँ।

पद्मा- मैं आ जाऊँ क्या?

मैं- नहीं रहने दो.. मैं कमरे से फ्रेश हो कर शाम तक तुम्हारे पास आता हूँ..

पद्मा- मेरा एड्रेस है ना आपके पास?

मैं- हाँ लक्ष्मी नगर पहुँच कर फोन कर लूँगा।

पद्मा- ठीक है।

कुछ देर बाद मैंने उसको लक्ष्मीनगर पहुँच कर फोन किया और उसके बताए पते पर पहुँच गया।

वो बोली- बस नीचे उतर रही हूँ..

मैंने देखा सामने से एक मस्त लड़की आती हुई दिखी.. सच में बहुत जवान थी.. यार.. तब उसने पौना पैंट और टॉप पहन रखी थी। उसका फिगर लगभग 36बी-28-36 होगा।

मैं तो देखता ही रह गया..

तो वो मेरे पास आई और बोली- ऊपर चलिए।

 
मैं उसके साथ उसके फ्लैट में गया।

उसमें उसके साथ दो लड़कियां रहती थीं.. एक पंजाब की थी और एक बंगाल की थी, वो दोनों भी खूबसूरत थीं।

मैंने उसको सामान दे दिया और तीनों से हल्की-फुल्की बातें की.. और फिर जाने लगा.. तो पद्मा से पूछा - मेरा कमरा देखना है?

पद्मा- हाँ आपके साथ चलूँ क्या?

मैं - हाँ चलो.. वैसे भी बोर हो रही हो तो थोड़ा बहुत घूम लोगी।

पद्मा - हाँ आती हूँ.. रेडी हो कर..

वो जल्दी से रेडी हो कर आ गई.. तब उसने घुटनों तक आने वाला जींस और टाइट टॉप पहन लिया था.. जिसमें उसकी उठी हुई चूचियाँ साफ़ दिख रही थीं।

जब वो बैठी तो मैं हल्का पीछे खिसक कर अपनी पीठ पर उसकी चूचियों को महसूस करने लगा। अब मैं बाइक चलाने लगा.. तो मैंने जानबूझ कर डिस्क ब्रेक मारा.. और वो पूरी मेरे पीठ पर चिपक गई।

शायद वो भी समझ गई कि मैं क्या कर रहा हूँ.. सो वो भी मुझे पकड़ कर बैठ गई और उसकी चूचियों मेरे पीठ को मज़े देने लगीं। थोड़ा बहुत घूमने के बाद मैंने उसको खाना खिला कर उसके घर छोड़ दिया, उसे कमरे पर नहीं ले गया मैं।

फिर इसी तरह 1-2 दिन घुमाने के बाद वो मेरे से एकदम खुल कर बात करने लगी… मतलब फ्रैंक हो गई।

एक दिन मैं उसको एक पब में ले गया मैं जानता था कि वहाँ सिर्फ़ कपल्स को ही अन्दर जाने देते हैं। जब हम दोनों वहाँ पहुँचे.. तो पब वाले ने पूछा- कपल्स हो?

मैं कुछ बोलता.. उससे पहले वो ही बोली- हाँ..

तो वो बोला- तो इतना दूर-दूर क्यों चल रहे हो.. साथ जाओ..

मैंने मौका देख कर पद्मा की कमर में हाथ डाल दिया और अन्दर चला गया।

अन्दर जाकर हम दोनों डान्स करने लगे.. मैं उसके साथ डान्स करते-करते उसके बदन के किसी ना किसी अंग को छू देता था.. लेकिन शायद उसको बुरा नहीं लग रहा था। पब में मस्ती करने के बाद जब हम बाहर निकले तो।

मैं- मजा आया?

पद्मा- हाँ बहुत..

मैं- तो आज चलो.. आज मेरे घर.. यहाँ पास में ही है।

पद्मा- तो चलिए.. दिखाईएगा।

मैं- हाँ चलो..

मैं उसको अपने फ्लैट पर ले आया।

पद्मा- वाउ बहुत खूबसूरत है.. अकेले रहते हैं आप यहाँ?

मैं- हाँ अब तक तो अकेले था.. लेकिन अभी तुम हो ना..

पद्मा - हाहहाहा.. मैंने सोचा कि कोई गर्ल-फ्रेंड के साथ रहते होंगे।

मैं- नहीं है।

पद्मा - क्या.. मुझे भरोसा नहीं हो रहा.. इतना स्मार्ट लड़का और बिना गर्ल-फ्रेंड के.. हो ही नहीं सकता।

मैं- सच्ची.. नहीं है गर्ल-फ्रेंड.. तुम्हारा ब्वॉय-फ्रेंड है क्या?

पद्मा - नहीं..

मैं - क्यों तुम भी तो इतनी खूबसूरत सेक्सी सी लड़की हो.. ब्वॉय-फ्रेंड तो होगा ही..

पद्मा- नहीं है.. पहले था पतबा में। लेकिन उससे ब्रेकअप हो गया।

मैं - कैसा ब्वॉय-फ्रेंड चाहिए तुमको?

पद्मा- अगर आपके जैसा हैण्डसम.. स्मार्ट हो.. तो..

मैं हँसा और पूछा- कॉफी पीओगी?

पद्मा - हाँ पी लूँगी.. आपकी गर्ल-फ्रेंड सच में नहीं है?

मैं - नहीं.. एक थी.. लेकिन अब हम अलग हो गए हैं।

पद्मा- कहाँ की थी?

मैं- पंजाब की.. यहीं साथ रहती थी मेरे साथ..

पद्मा- साथ मतलब.. लिव-इन में रहते थे?

मैं- हाँ..

पद्मा- ऊऊऊऊओह तब तो..!

मैं - क्या तब तो..?

पद्मा- कुछ नहीं..

मैं- बोलो न…

पद्मा- वो आप समझ गए होंगे..

मैं- हाँ मैं समझ गया.. और तुम भी समझ गई होगी.. सो इस बात को हटाओ.. चीनी ख़त्म है.. मैं नीचे से ले कर आता हूँ.. तब तक तुम बोर ना हो इसलिए लैपटॉप खोल देता हूँ।

मैंने अपना लैपटॉप खोल कर उसको बोल दिया- डी ड्राइव मत खोलना।

पद्मा- क्यों?

मैं- उसमें मेरी पर्सनल फाइलें हैं।

पद्मा- ठीक है।

डी ड्राइव में मेरा नंगा फोटो पड़ा था.. मेरे खड़े लंड का फोटो था और अब तक जितनों को चोदा है उन सबके नंगे फोटो.. उन सबको चोदते हुए फोटो.. और वीडियो हैं। ख़ास करके मेरी डार्लिंग काजल का तो चुदाई वीडियो और उसको चोदते हुए का फोटो पड़ा था।

मैं जानता था कि मैंने मना किया है तो वो जरूर देखेगी।

 
मैं पद्मा को उसी कमरे में बैठा कर आया था… जिस कमरे में कैमरा लगा हुआ था.. तो मैंने बाहर निकलते ही कैमरा को मोबाइल से कनेक्ट किया और छत पर जाकर बैठ गया और देखने लगा कि वो क्या कर रही है।

मैंने देखा वो अभी डी ड्राइव में ही घूम रही थी कि उसकी नज़र हाइड फाइलों पर पड़ी.. तो उसने उस फोल्डर को क्लिक कर दिया।

उसके बाद मेरी फोटो देखने लगी.. जिसको देख कर तो उसके होश ही उड़ गए थे। मेरी सारी नंगी फोटो थीं.. ख़ास करके मेरे खड़े लंड की फोटो को वो ज़ूम करके देख रही थी।

उसने लंड तो खाए होंगे.. लेकिन शायद इतना दमदार लंड नहीं खाया होगा.. इसी लिए ज़ूम करके देख रही थी।

उसके बाद चोदते हुए भी फोटो खोलने लगी.. तो वो टॉप के ऊपर से ही अपनी चूची को दबाने लगी।

फिर उसने मेरा ही एक चुदाई वाला वीडियो चला दिया.. जिसमें मैं काजल को चोद रहा था।

वो सब देख कर पद्मा बहुत गर्म हो रही थी और अपना हाथ बुर के पास ले जा रही थी.. कि तभी मैं अन्दर आ गया और कॉफी बना कर कमरे में गया।

तो मैंने देखा कि उसका कंठ सूखा हुआ था.. वो इस समय एकदम गरम थी।

सो उसको कॉफी देने के बहाने मैंने उसके शरीर पर कॉफी का कप गिरा दिया और ‘ऊहह सॉरी..’ बोलते हुए उसको पोंछना चाहा.. और इसी बहाने उसकी चूचियों को दबा दिया।

वो कुछ नहीं बोली लेकिन उसकी नज़र मेरे लंड पर ही थी और कहते हैं ना कि अगर चुदी हुई लड़की अगर अच्छा लंड देख ले.. तो उसको बिना चुदे अच्छा ही नहीं लगता। कुछ वैसा ही हाल था पद्मा का… वो कुछ बोल तो नहीं पा रही थी लेकिन उसको देख कर मैं सब समझ रहा था।

सो मैंने उसकी चूचियों को ज़ोर से दबा दिया और वो भी अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पाई और मेरे गले लग गई।

उसने झपट कर पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया तो मैं कौन सा पीछे रहने वाला था.. मैंने अपना लंड निकाल कर उसके सामने कर दिया और उसकी चूचियों को दबाने और चूसने लगा।

अब वो मेरे लंड को सहला रही थी कि तभी वो नीचे बैठ गई और और मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। उसके लंड चूसने के तरीके से मैं समझ गया कि कांता ने इसके बारे में कुछ गलत नहीं बताया था.. ये ज़रूर अच्छे ख़ासे लंड खा चुकी होगी। कभी लंड के नीचे पड़े दो गोलों को चूसती.. तो कभी पूरा लंड अन्दर गटक जाती थी।

मुझे भी अच्छा लग रहा था और तब तक चूसती रही.. जब तक मैं झड़ नहीं गया। वो मेरे लंड का सारा रस पी गई और मेरे लंड को एकदम साफ़ कर दिया। अब मैंने भी उसकी बुर को चाटा.. जब वो भी डिसचार्ज हुई.. तब ही मुझसे अलग हुई और बिस्तर पर लेट गई।

मैं उसकी चूचियों के ऊपर हाथ घुमाने लगा और दबाने लगा और फिर कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने अपना मुँह ही लगा दिया और टॉप के ऊपर से ही उसके रसीले आमों को चूसने लगा।

कुछ देर चूसने के बाद हाथ टॉप में डाल दिया और नंगे पेट को सहलाने लगा। फिर कुछ देर में उसके टॉप को निकाल ही दिया.. अब वो सिर्फ़ ब्रा में थी।

ब्रा भी इतनी सेक्सी लग रही थी कि मैं बता नहीं सकता। काली ब्रा में बंद उसकी चूचियाँ.. मानो मुझे बुला रही थीं कि आओ.. और मुझे चूसो.. आज़ाद करो.. मुझे इस काली ब्रा के बंधन से..

मैं कैसे नहीं सुनता चूचियों की उस पुकार को.. सो मैं सीधा उस पर टूट पड़ा और बहुत जल्दी ही उनको आज़ाद कर दिया और ब्रा को खोल दिया। जैसे ही ब्रा खुली.. उसकी चूचियों उछल कर बाहर आ गईं.. जैसे बहुत देर से आज़ादी का इंतजार करने के बाद आज़ादी मिली हो।

अब मैं उन रस भरी चूचियों को चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने अपनी शर्ट भी उतार दी और मैं भी पूरा नंगा हो गया। मेरे शर्ट उतारते ही पद्मा मेरे मर्दाना बदन को भी चूमने लगी।

कुछ देर एक-दूसरे को चूसने के बाद मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसके पैरों के बीच चला गया। अब मैं उसकी बुर के ऊपर अपना लंड घुमाने लगा..

तो वो बोली- जल्दी डालो ना अन्दर..

तो मैंने एक झटके में पूरा लंड डाल दिया और पूरा का पूरा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया…

वो कराह उठी।

लेकिन जल्दी ही नॉर्मल हो गई और मैं झटके मारने लगा और उसके मुँह से आअहह फक मी.. फक मी फास्ट.. निकलने लगा।

मेरे झटकों की आवाज़ और उसके मुँह से निकल रही मादक आवाज़ पूरे कमरे में फैल रही थी। फिर कुछ देर ऐसा ही चलता रहा और कुछ देर बाद हम दोनों फारिग होने वाले थे.. तो लंड को बाहर निकाल कर मैंने उसके मुँह पर सारा रस छोड़ दिया।

कुछ देर बाद हम दोनों ने फिर चुदाई की.. कुछ पोज़ मैं जानता था.. कुछ उसने बताए और हम दोनों 3 बार डिसचार्ज होने के बाद एक साथ बिस्तर पर ही लेट गए।

मैं - कहाँ से सीखा इतना अच्छा लंड चूसना और इतने सारे पोज़.. लगता है अच्छा-ख़ासा अनुभव है लंड चूसने का?

पद्मा- हाँ अब आप से क्या छुपाना.. वैसे आप भी कम नहीं हैं।

मैं - हाँ वो तो हूँ ही.. वैसे कितने लंड खाए हैं अब तक.. तेरी बुर बता रही है कि रेग्युलर लंड खाती हो।

पद्मा - हा हा हा.. ज्यादा नहीं, 5 ही खाए हैं।

मैं - क्या.. अभी 12वीं खत्म ही हुई है.. और 5 लंड खा चुकी हो.. वाउ कमाल की हो..

पद्मा - आप भी कम नहीं हैं.. मैंने भी आपकी करतूत आपके लैपटॉप में देख ली है।

मैं- हा हा हा.. वैसे कौन थे वो 5 लण्ड?

पद्मा - थे… अपने ही लोग थे..

मैं - कौन थे.. बताओ तो सही.. ज़रा मैं भी तो जानूँ.. तुम्हारी बुर का मजा लेने वाले ख़ुसनसीब कौन-कौन हैं?

पद्मा - ओके.. बताती हूँ.. पहली बार चुदाई सर से हुई.. जो टियूशन पढ़ाने आते थे..

मैं- वाउ.. कहाँ चोदता था तुमको..?

पद्मा - पहली बार तो घर में ही चोदा था.. फिर बाहर अपने घर पर पेला था।

मैं - उसके बाद?

पद्मा - पड़ोस में रहता है वो? उसने भी घर में ही चोदा था।

मैं- ओके..

पद्मा- उसके बाद 2 ब्वॉय-फ्रेण्ड और ये होटल और फ्रेंड के घर पर चोदा..

मैं - और एक और कौन?

पद्मा - आप का ही दोस्त मोहित

मैं - क्या मोहित?

पद्मा - हाँ..

मैं - ये कब हुआ.. मतलब कब से?

पद्मा - एक साल से और मुझे सबसे ज्यादा भी इसी ने चोदा है।

 
मैं - अब पता चला.. क्यों साले का घर नज़दीक होने के बाद भी तुम्हारे घर में किराए पर रहता था।

पद्मा- हा हा.. हा हा..

मैं - मैं कौन सा बुरा था यार.. मुझे भी दे देती।

पद्मा - मैं तो आपको लाइन देती ही थी.. आप ही ध्यान नहीं देते थे।

मैं - हो सकता है तुमको बच्ची समझ रहा होऊँ।

पद्मा - और अब?

मैं - अब तो तुम पटाखा.. चुदक्कड़ आइटम हो..

पद्मा- हाहहहह हाहा.. आपने भी तो बहुत को चोदा है।

मैं - वो तो तुम देख ही चुकी हो लैपटॉप में।

पद्मा - तब तो इसमें मेरा भी आ जाएगा..

मैं - हाँ वो देखो सामने कैमरा लगा है।

पद्मा - और इसे तो आपके दोस्त भी देखते होंगे।

मैं - नहीं.. लेकिन कुछ तो देखते ही हैं।

पद्मा - मेरा भाई भी.. उसे मत दिखाना.. नहीं तो क्या सोचेगा मेरे बारे में।

मैं - ओके रूको.. तुमको कुछ और दिखाता हूँ।

मैंने उसको दीप्ति की फ़ोटो दिखा दी।

पद्मा - ये तो दीदी हैं.. मतलब आपने?

मैं - हाँ जो तुम बोलना चाह रही हो… वो सही है.. और उसको दीप्ति का पूरा वीडियो दिखा दिया।

पद्मा - तुम बहुत कमीने हो?

मैं - वो तो हूँ ही.. आओ एक बार और करते हैं.. तुम्हारी गान्ड किसी ने नहीं मारी है ना.. आज मैं ये कमी भी पूरी कर देता हूँ।

पद्मा - हाँ.. मजा आएगा..

मैं उसके बुरड़ों को मसलने लगा.. फिर गलिसरीन आयल ला कर उसके पूरे बुरड़ों में लगा दिया और थोड़ा तेल उसकी गान्ड के छेद में भी डाल दिया। फिर मैं उंगली अन्दर डालने लगा.. कुछ देर उंगली डालने के बाद उसकी गान्ड के छेद पर अपने लंड को रख दिया और डालना चाहा.. लेकिन जा नहीं पा रहा था।

तो मैंने अपने लंड पर भी तेल लगाया उसके बाद एक झटका मारा और पूरा लंड अन्दर चला गया.. लेकिन वो चिल्लाने लगी- निकाल दो यार.. बहुत दर्द हो रहा है..

वो तड़फने लगी.. तो मैं उसकी बुर में उंगली करने लगा। कुछ देर बाद वो नॉर्मल हुई.. तो मैं फिर से झटके मारने लगा। अब उसको भी मजा आने लगा.. दम भर चोदने के बाद मैं डिसचार्ज हो गया और उसकी गान्ड में रस छोड़ दिया।

फिर हम दोनों ने खुद को साफ़ किया।

पद्मा - आपने तो मेरे टॉप को गंदा कर दिया है.. अब मैं क्या पहन कर जाऊँगी।

मैं - अभी साफ़ कर दो और रात भर यहीं रुक जाओ.. जब सूख जाएगा तब चली जाना।

पद्मा - तब तक पहनूँगी क्या?

मैं- मेरी जान, यहाँ पर कपड़े कोई नहीं पहनता।

पद्मा- ठीक है।

रात भर पद्मा मेरे घर पर ही रही.. सुबह जब कपड़े सूख गए.. तब वापस जाने लगी।

मैं- जा रही हो जान.. फिर आती रहना..

पद्मा- मैं तो अपना सामान लेकर यहीं आ जाती हूँ.. कॉलेज खुलने तक यही रहूंगी।

मैं- वाउ.. तब तो मेरे मजे हैं.. जाओ जल्दी ही आना।

पद्मा- ओके बाय..

उसके जाते ही मैंने जय को फोन किया।

मैं - कैसे हो.. इधर काम हो गया है..

जय - क्या बात कर रहे हो.. सच्ची?

मैं - हाँ अभी तो यहाँ से गई है.. तुम कहाँ हो?

जय - भोपाल में ही।

मैं- क्या?

जय- हाँ कांता के साथ ही एक होटल में रुका हुआ हूँ।

मैं - साले तुम भी कमीने हो गए हो..

जय - तुम से ही सीखा भाई.. तुमने तो..

मैं - लेकिन तुम्हारी बहन कुँवारी नहीं थी.. 5 लंड खा चुकी थी।

जय - क्या?

मैं - हाँ उसकी बुर तो पहले से फटी थी गान्ड मैंने फाड़ दी।

जय - इतने लंड खा चुकी है.. तब तो मेरा लंड भी ले ही लेगी..

मैं - हाँ आ जा दिल्ली.. उसकी बुर भी तुमको भी दिलवाता हूँ..

जय - ठीक है आता हूँ.. कुछ दिन में अभी कांता को चोदने दो.. यहीं मन लग रहा है।

मैं - ठीक है… एंजाय कर..

उस दिन के बाद पद्मा मेरे पास हमेशा आती और चुद कर जाती थी।

एक बार जय के साथ भी उसको चोदा मतलब सिर्फ़ मैं ही नहीं.. जय भी अपनी दोनों बहन को चोद कर बहनचोद बन गया था।

*****

 
मैंने दोनों बहनों को अब तक अलग-अलग चोदा था।

एक बार मैं और कांता घर पर थे.. और रोज की तरह चुदाई कर रहे थे.. तभी पता चला की डॉली भी आने वाली है।

कांता- आज डॉली आने वाली है.. पता है तुमको?

मैं- हाँ पता चला.. मुझे भी!

कांता- तो?

मैं- तो क्या?

कांता- अब हम लोग मस्ती कैसे करेंगे?

मैं- जैसे करते थे..

कांता- डॉली के सामने?

मैं- हाँ कौन सा मैंने उसको नहीं चोदा हुआ है?

कांता- लेकिन मुझे शर्म आ रही है..

मैं- आने तो दो.. जो होगा देखा जाएगा..

कांता- हाँ लेकिन दोनों में से किसको चोदोगे?

मैं- एक साथ दोनों को..

कांता- नहीं.. मैं नहीं करूँगी.. लेकिन तब भी आइडिया बुरा नहीं है..

मैं- बुरा नहीं है.. तो ट्राई कर सकते हैं ना..

कांता- सोचूँगी इसके बारे में..

मैं- सोचना क्या है इसमें.. साथ में ही कर लेंगे..

कांता- ओके..

मैं- डॉली आ रही है.. स्टेशन लेने के लिए मेरे साथ चलना है क्या?

कांता- ओके चलो.. चलती हूँ..

मैं- ठीक है।

हम दोनों स्टेशन पहुँच गए डॉली को लेने… चुदाई के बाद दोनों बहनें पहली बार एक-दूसरे से मिलने वाली थीं..

डॉली की ट्रेन अभी तक नहीं आई थी, हम ट्रेन का इंतज़ार करने लगे।

जैसे ही ट्रेन आई.. हम दोनों की नजरें डॉली को ढूँढने लगीं.. तभी सामने ट्रेन से उतरती हुई दिखी।

कांता- वो देखो..

मैं- मैंने भी देख लिया..

कांता- चलो चलते हैं।

मैं- नहीं यहीं रूको.. आ जाएगी!

कांता- ठीक है।

तभी देखा कि डॉली सामने से आ रही थी।

मैं- वो देखो इधर ही आ रही है।

कांता- हाँ दिख रही है, और भी बहुत कुछ दिख रही है।

मैं- मतलब.. क्या दिख रही है?

कांता- कुछ नहीं.. तुम्हारी मेहनत..

मैं- मेरी मेहनत?

कांता- हाँ तुम्हारी मेहनत डॉली के फिगर पर.. तुमने उसका सब कुछ बढ़ा दिया है।

मैं- ऊओह.. अब समझा.. बढ़ तो तुम्हारा भी गया है..

कांता- हाँ लेकिन उतना नहीं.. जितना डॉली का साइज़ बढ़ा हुआ है.. तुम और जय दोनों ने मिल कर मुझसे अधिक मेहनत डॉली पर हुई है।

मैं- हाँ ये तो है.. डॉली की फिगर पहले भी बड़ी थी.. खुद भी खूब मेहनत करती थी और उसका ब्वॉय-फ्रेण्ड भी खूब उछल-कूद करके मेहनत किया करता था..

 
कांता- वो तो ऊपर से मेहनत करता था ना.. और नीचे से देखो.. पिछवाड़ा कितना फैला हुआ है..

मैं- हाँ वो मेरी मेहनत है.. वैसे भी अभी उसको देख कर मुझसे कंट्रोल नहीं हो पा रहा है।

कांता- तो क्या करने वाले हो?

मैं- देखो क्या करता हूँ..

कांता- ओके.. नज़दीक तो आ ही गई।

तब तक डॉली हमारे पास पहुँच गई तो मैं सीधा उसके गले लग गया और उसकी बुरड़ों को दबा दिया और जल्दी से अलग हो गया। ये सब मैंने इतना जल्दी किया कि किसी को ज्यादा पता ही नहीं चला।

तो डॉली मुस्कुरा दी.. और हम तीनों गाड़ी की तरफ़ बढ़ने लगे और गाडी में आगे मैं और डॉली बैठे और कांता पीछे वाली सीट पर बैठ गई।

अब हम घर जाने लगे.. रास्ते में कुछ हुआ नहीं.. सो ज्यादा सोचने की ज़रूरत नहीं है। कुछ ही देर में हम लोग घर पहुँच गए।

अब मैं दीदी को चोदने का मौका ढूँढ रहा था लेकिन सब घर में थे.. सो चुदाई का मौका ही नहीं मिल पा रहा था। क्योंकि दीदी माँ-पापा के पास बैठी हुई थी.. तो कांता ने मुझे अपने पास बुलाया।

मैं- क्या हुआ?

कांता- कुछ नहीं.. आगे का क्या प्लान है?

मैं- पता नहीं.. दीदी कभी अकेली तो रह नहीं रही है।

कांता- तो मुझसे काम चला लो..

मैं- तुमको तो रोज चोद ही रहा हूँ.. आज दीदी को चोदना है.. उसको बहुत दिन से नहीं चोदा है।

कांता- ठीक है.. माँ-पापा को ऑफिस जाने दो.. फिर चोद लेना।

मैं- हाँ, यह आइडिया बुरा नहीं है।

कांता- लेकिन मैंने आइडिया दिया है.. तो मुझे क्या मिलेगा?

मैं- क्या चाहिए.. जाओ जय के पास से निपट आओ..

कांता- नहीं अब उसके साथ उतना मजा नहीं आता है।

मैं- तो तुम्हारे लिए और क्या कर सकता हूँ।

कांता- कुछ नहीं.. बस तुम डॉली दीदी को चोदना और मैं देखूंगी!

मैं- क्या बात कर रही हो.. क्या तुम साथ में नहीं चुदवाओगी?

कांता- नहीं.. मैं देखना चाहती हूँ कि दीदी कैसे चुदती हैं।

मैं- ओके मेरी जान..

कुछ देर बाद दीदी रसोई में खाना बनाने गई.. तो मैं भी मौका देख कर उसके पीछे से चला गया और उसको पीछे से पकड़ लिया।

डॉली- क्या कर रहे हो.. कोई देख लेगा!

मैं- क्या करूँ.. कंट्रोल नहीं हो पा रहा है।

डॉली- कंट्रोल करो.. कोई देख लेगा तो गड़बड़ हो जाएगा।

मैं उसका हाथ अपने लंड पर रखते हुए बोला- मैं तो कर भी लूँगा.. लेकिन ये तुम्हार हथियार कंट्रोल नहीं कर पा रहा है।

डॉली मेरे लंड को दबाते हुए इसको भी बोलो करने को..

मैं- नहीं मान रहा है.. पूछ रहा है इसकी गुफा कब मिलेगी!

डॉली- रात को मिल जाएगी..

मैं- इतना लंबा इंतज़ार नहीं हो पा रहा है।

डॉली- करना पड़ेगा.. और कोई रास्ता भी तो नहीं है।

मैं- एक रास्ता है।

डॉली- क्या?

मैं- दोनों के ऑफिस जाने के बाद..

डॉली- लेकिन कांता तो रहेगी ना..

मैं- उसको भी बाहर भेज दूँगा.. उसके दोस्त के घर या मार्केट।

डॉली- तब ठीक है.. अब जाओ यहाँ से..

मैं- ओके जाता हूँ.. लेकिन बिना कुछ लिए कैसे चला जाऊँ?

डॉली- क्या चाहिए.. ये लो खाना खाओ..

मैंने उसकी चूचियों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- खाना नहीं.. ये पीना है..

डॉली- ये बाद में.. अभी जाओ..

मैं- प्लीज़.. थोड़ा..

डॉली- कोई देख लेगा तो?

 
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