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Incest भाई-बहन वाली कहानियाँ

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भैया और सैंया--5

जब सुमित को पता चला कि अनवर ने भी निशु की कमसिन जवानी का मजा लूट लिया है तब उसने भी निशु के साथ सेक्स करने की इच्छा जताई। सुमित और अनवर निशु के लिए नये नहीं थे और जब से उसने वो ताश का खेल हम लोगों के साथ खेला था तब से ही उसको पता था कि उसको मेरे दोनों दोस्त आज न कल चोदेंगे ही। साथ ही मैं भी कहता कि तुम परेशान न हो, वो अगर सेक्स करेंगे भी तो हमेशा नहीं एक दो बार ही करेंगे, क्योंकि उनको पता है कि तुम मेरी बहन कम गर्लफ़्रेन्ड ज्यादा हो। मानसिक रूप से निशु भी अनवर से चुदाने के बाद सुमित से सेक्स करने के लिए तैयार थी। जब सुमित ने मुझे अपनी इच्छा बताई तो मैंने उसको सीधे निशु से बात करने को कहा। अगले रविवार को हम तीनों दोस्त जमा थे और निशु चिकेन पका रही थी कि फ़िर सुमित ने यह बात की। तय हुआ कि आज खाने की मेज पर सुमित निशु से बात कर ले। जैसा तय था, खाने की मेज पर सुमित ने निशु से पूछ लिया कि क्या वो उसके साथ एक बार सेक्स करेगी। निशु भी मुस्कुरा कर बोली कि वो तो बहुत पहले से ही ये सोच रही है कि इतने दिनों तक आखिर सुमित भैया यह बात कह क्यों नहीं रहे हैं और फ़िर उसने तीन चार दिन बाद की बात कही क्योंकि तब उसके पीरियड्स के दिन शुरु हो गये थे। अनवर ने ठहाका लगा कर जोर से कहा- "के एल पी डी" और हम सब हंसने लगे। सुमित का चेहरा देखने लायक था। फ़िर वो निशु से बोल पड़ा- ठीक है पर रोकने का मुझे हर्जाना देना होगा। निशु भी हंसते हुए पूछन लगी- क्या? और सुमित ने कहा-तुम्हें मुझसे अपनी गाण्ड भी मरवानी होगी ! मुझे पता था कि सुमित साला एक नम्बर का हरामी है और चुदाई के मामले में वो लड़की से पूरा मजा लूटता है। अब मुझे निशु के जवाब का इंतजार था, उसका जवाब तुरंत आया- नहीं रे बाप, जब आगे घुसवाने में इतना दर्द होता है तब वहाँ करवाने में तो मैं मर जाउँगी ! पर सुमित भी मिन्न्तें करने लगा। जहाँ निशु कहती कि नहीं और सुमित कहता- सिर्फ़ एक बार ! इसके बाद वो कभी निशु से सेक्स की मांग नहीं करेगा। थोड़ी देर बाद जब निशु का सुर बदलने लगा तो मुझे भी लगने लगा कि अब निशु को सेक्स में पूरा पी०एच०डी० मिल जायेगा। निशु ने तब कहा था- अभी तक सिर्फ़ मैंने सुना है गाण्ड चोदन के बारे में ! तब अनवर ने भी निशु को चढ़ाया कि वो एक बार यह अनुभव भी ले।

निशु ने तब मुझसे पूछा कि क्या मैंने कभी ऐसा किया है, और मैंने सच कह दिया कि नहीं, पर साथ ही कहा कि सुमित ही ऐसा करता रहता है लड़कियों के साथ, वो इस मामले में अनुभवी है। अनवर ने अपनी बात कही कि उसने दो-चार बार गांड मारी है और उसको खूब मजा आया, पर सब लड़कियाँ राजी नहीं होती हैं इसलिए बहुत मौका नहीं मिला। सुमित ने उसको तब आश्वस्त किया कि वह निशु को खूब प्यार से पहले गांड मरवाना सिखाएगा और तब उसकी गाण्ड मारेगा। निशु भी तब बोली- ठीक है, पर अगर मुझे दर्द हुआ तो आप भी रुक जाएँगे ! और मुझे और अनवर को इसकी गारंटी लेने को कहा। मुझे तो कोइ आपत्ति होनी नहीं थी। मैं खुश था कि चलो अब निशु के साथ मुझे और ज्यादा मजा का मौका मिलेगा। आखिर सुमित से गाण्ड मराने के बाद उसको मुझसे तो मरवाना ही था। तय हुआ कि सुमित रोज़ शाम को एक घण्टा निशु के साथ बितायेगा और धीरे धीरे उसके डर को एक सप्ताह में खत्म करेगा। गुरुवार को सुमित का फ़ोन आया कि आज वो शाम आठ बजे आयेगा। उस दिन वो एक डी०वी०डी० लाया जिसमें करीब बीस क्लिप थी, सब में 20-22 साल की लड़कियों को चोदा गया था और गाण्ड भी मारी गई थी। दो क्लिप भारत की भी थी। चाय पीने के बाद सुमित ने उस फ़िल्म को चला दिया और फ़िर निशु को अपने सोफ़े के सामने टीवी की तरफ़ मुँह करके झुकने को कहा। निशु सेन्टर टेबल के सहारे झुक गई और

फ़िल्म देखने लगी। सुमित ने उसका लम्बा स्कर्ट कमर से ऊपर कर दिया और फ़िर पैन्टी खोल दी। निशु अब तक बिल्कुल बेशर्म हो गई थी, बोली- आप तो बोले थे कि मुझे पहले सिखाएँगे कि कैसे किया जाता है, फ़िर अभी क्यों? सुमित हँसा-"हाँ मुझे याद है ! आज तुमको सिखाउँगा ही, कुछ दिन में जब तुमको अपनी गाण्ड की मांसपेशियाँ खुद ढीला करना आ जायेगा तब पेलूंगा भीतर ! और फ़िर उसने निशु की बुर पर हाथ फ़ेरना शुरु किया। फ़िल्म देखते हुए और बुर को ऐसे मसलवाते हुए निशु भी धीरे धीरे कसमसाने लगी। जब उसकी बूर पनीया गई। तब सुमित ने उसकी बुर के पानी को ही उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और फ़िर थूक लगा लगा कर निशु की गाण्ड से खेलने लगा। उसका एक हाथ बूर के साथ खेल रहा था और एक हाथ गाण्ड के साथ। 15 मिनट बाद सुमित ने अपनी उँगली निशु की गाण्ड में ठेली। उसकी उँगली के दबाब को महसूस कर निशु पीछे पलटी, पर फ़िर उसको पता था कि क्या होना है सो वापस अपना ध्यान टीवी पे ले गई। इसी तरह से रोज़ गाण्ड में उँगली करते करते चार दिन बाद रविवार को जब अनवर भी था तब सुमित ने हमें दिखाया कि निशु अब बड़े प्यार से अपना गाण्ड ढीली करके दो ऊँगलियाँ भीतर ले रही थी। इस चार दिनों में जिस तरह से निशु को तैयार किया जा रहा था, उसमें निशु को खुद मजा आने लगा था। उसे लगता था कि वो एक स्पेशल लड़की है। मैंने भी जब उसको चोदा या घर में जब मौका मिला उसकी गाण्ड में उँगली जरूर की। उसको अब समझ में आने लगा था कि इस काम का एक अलग मजा है। मंगल को एक छुट्टी थी, तय हुआ कि उसी दिन दोपहर में निशु की गाण्ड का उदघाटन हो। सुमित ने निशु को पेट साफ़ करने के लिए दवा दी और कहा कि सोमवार की रात वो उसे खा ले और फ़िर मंगल को जब तक उसकी गाण्ड नही मारी जाती वो खाली पेट रहे। मैं और अनवर ऐसे बेचैन हो रहे थे
 
मेरी कुंवारी बहन की चुदाई

मेरी पहली चुदाई का मजा बहन की चुत चुदाई से मिला था. मेरी दीदी दिखने में एकदम राबचिक पटाखा माल है लेकिन मैं दीदी की चूत के बारे में नहीं सोचता था. फिर एक दिन …

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रॉय जैन है. मैं इंदौर का रहने वाला हूँ. आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपने जीवन की पहली चुदाई का आनन्द लिया वो भी खुद अपनी सगी बहन के साथ.

पहले परिचय दे देता हूँ. मेरी बहन का नाम अंकिता है और उसकी उम्र 21 साल की है. मेरी उम्र 19 है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और मैं दिखने में बहुत स्मार्ट हूँ. मैंने अपनी पहली गर्लफ्रेंड स्कूल में ही बना ली थी. इससे आप समझ ही सकते हैं कि मैं किस प्रकार का इंसान हूँ. मगर पहली चुदाई का मजा बहन की चुत चुदाई से शुरू हुआ था.

मेरी दीदी दिखने में एकदम राबचिक माल है और उसके मम्मों का साइज 32 इंच है. गांड मस्त उभरी हुई है और उसका साइज 34 इंच है. उसकी पतली कमर को देखकर तो कामदेव भी उसे चोदने को अपना औज़ार तैयार कर लें … ऐसी पटाखा माल है.

मेरे घर में मां पापा और हम दोनों भाई बहन हैं. पापाजी गुजरात में जॉब करते हैं. वो साल में 1 या 2 बार ही आते हैं. मम्मी हाउसवाइफ हैं. मेरी बहन कॉलेज के फाइनल में है और मैं फर्स्ट ईयर में हूँ.

जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी बहन दिखने में बहुत सुन्दर है, पर आज तक उसने कभी किसी लड़के की तरफ देखा भी नहीं था, मतलब वो बहुत ही सीधी साधी लड़की थी. मैंने भी अपनी दीदी को कभी गलत नज़र से नहीं देखा था … बस पोर्न देख कर मुठ मारता रहता था.

एक बार पापाजी घर आए हुए थे, तो मम्मी ने कहा- चलो शिखर जी घूमने चलते हैं.

पापाजी ने कहा- हां चलो. मगर कल ही चलना होगा. इस बार मुझे ज्यादा दिन का ऑफ़ नहीं मिला है.

उस वक्त मेरे फर्स्ट सेम के एग्जाम्स चल रहे थे और आखिरी पेपर बचा था. मैं तो जा ही नहीं सकता था. दीदी के भी एग्जाम्स चल रहे थे … तो उसने भी जाने से मना कर दिया. इस प्रकार पापा और मम्मी का अकेले जाने का प्लान बन गया.

उन्होंने जाने के लिए पैकिंग करना शुरू कर दी और अगले दिन की मैंने टिकट बुक करवा दी. सुबह सुबह मैं उन्हें कार से स्टेशन छोड़ने गया और फिर आकर सो गया. अगले दिन मेरा पेपर था, तो सारा दिन और रात भर जाग कर पढ़ाई करनी थी. पहले मैंने सुबह सोने का सोचा.

मैं सुबह के लगभग 9 बजे के करीब उठ गया. दीदी तो पहले ही उठ चुकी थी. उसने मुझे चाय बना कर दी.

मेरे घर में 3 कमरे हैं. एक दी के लिए एक मेरे लिए … और एक मां के लिए. सबके बाथरूम भी अलग अलग हैं. अभी तक तो मेरे मन में दीदी के लिए कोई गलत भाव नहीं थे.

पर जब हम लोग नाश्ता करने बैठे तो पता नहीं दीदी को क्या हुआ था. वो बार बार अपने लोअर को ठीक कर रही थी … और चोरी चोरी नजरों से मुझे देख रही थी. तब मैं पहली बार दीदी के बारे में गलत सोचने को मजबूर हो गया. शायद उसकी पैंटी सही तरीके से सैट नहीं थी, तो वो उसे ही सैट कर रही थी. इसीलिए नाश्ता करने के बाद वो सीधा बाथरूम में गयी थी.

अभी तक मैं अपनी दीदी को पेंटी में होने की कल्पना भी कर चुका था. मेरे मन में रह रह कर गलत ख्याल आने लगे थे, पर हुआ कुछ नहीं. मैं अपने कमरे में आकर पढ़ाई करने लगा और दीदी किचन का काम निपटा कर अपने कमरे जाकर पढ़ाई करने लगी.

पढ़ते पढ़ते शाम हो गयी, जब मैं अपने कमरे से बाहर निकला … तो दीदी रात के खाने की तैयारी कर रही थी. मैं भी किचन में जाकर उसकी मदद करने लगा.

उसने पूछा- कैसी चल रही पढ़ाई?

मैंने कहा- बढ़िया … और आपकी?

उसने बोला- हां मेरी भी ठीक ठाक ही चल रही है. एक ही पेपर बचा है.

मैंने कहा- हां मेरा भी आखिरी ही बचा है.

ये कह कर मैं चुप हो गया.

दीदी ने बोला- आज रात को मूवी देखें?

मैंने बोला- कल पेपर है दोनों का.

तो वो बोली- अरे पेपर तो हो ही जाएगा और वैसे भी साल भर से पेपर के लिए ही तो पढ़ रहे हैं.

मैंने कहा- ठीक है … पर कौन सी फिल्म देखेंगे?

वो बोली- एवेंजर एन्ड गेम.

मैंने कहा- वो तो मैं 40 बार देख चुका हूँ.

वो कहने लगी कि तो क्या हुआ. … एक बार और देख ले मेरे लिए.

मैंने कहा- चलो ठीक है.

फिर हम दोनों ने खाना बनाया और खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया और दीदी किचन में बर्तन साफ करने चली गयी.

कुछ मिनट बाद वो आयी. लैपटॉप उसके हाथ में था और वो मेरे पलंग पर आकर बैठ गयी. दीदी ने ब्लू कलर का टॉप पहना हुआ था और ब्लैक कलर का कैफ्री डाली हुई थी. मैं सिर्फ बरमूडा में पढ़ाई कर रहा था … ऊपर मैं हाफ टी-शर्ट पहने हुए था.

दीदी कमरे में आयी और फिर हमने एन्ड गेम लगाकर देखने लगे. मैं थोड़ी ही देर में बोर होने लगा क्योंकि मैं उसे बहुत बार पहले भी देख चुका था.

मैं दीदी को देखने लगा, तो दीदी मुझसे कहने लगी- मूवी क्यों नहीं देख रहा, मुझे क्यों देख रहा है?

मैंने कहा- मैं बहुत बार देख चुका हूं … कुछ और करते हैं.

वो कहने लगी- क्या?

मैंने कहा- चलो ट्रुथ और डेयर खेलते हैं.

वो बोली- चलो ठीक है.

मैं पेप्सी की वो छोटी वाली शीशी होती है ना … वो फ्रिज से ले आया.

आधी मैंने पी ली और आधी दीदी को पीने के लिए दे दी.

फिर मैंने कहा- अब शुरू करें?

दी बोली- हां.

सबसे पहले मैंने बोतल को घुमाया, तो वो आकर मेरे पास ही रुकी.

दीदी ने बोला- बोल क्या लेता है … ट्रुथ या डेयर?

मैंने कहा- ट्रुथ.

उन्होंने एकदम से मुझसे पूछा- तेरी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं?

मेरी तो फट ही गयी. आज तक दीदी और मेरे बीच कभी भी ऐसे प्रकार की बात ही नहीं हुई थी, पर आज पता नहीं दीदी कौन से मूड में थी.

मैंने भी बोल दिया- हां, मेरी गर्लफ्रेंड है.

चूंकि मेरी तो 3-4 जुगाड़ें हैं … पर मैंने दीदी को सिर्फ एक की बात बताई. फिर वो कहने लगी कि उसकी फोटो दिखाओ.

मैंने कहा- एक बार में एक ही सवाल.

वो हंसने लगी.

मैंने फिर से बोतल को घुमाया. इस बार वो बोतल का मुँह दीदी के पास जाकर रुका.

उसने भी ट्रुथ ही लिया.

दीदी की गर्लफ्रेंड वाले सवाल से मुझमें भी जोश आ गया था. मैंने भी उससे पूछ लिया- आपका कोई बॉयफ्रेंड है?

उसने साफ मना कर दिया. मेरी दीदी बहुत सीधी है, मैंने आपको पहले ही बताया था.

इसके बाद फिर से बोतल घुमायी गई. इस बार फिर से उसके पास ही जाकर रुकी. उसने इस बार भी ट्रुथ ही लिया. मेरी हिम्मत थोड़ी थोड़ी बढ़ती जा रही थी.

मैंने इस बार पूछ लिया कि जब सुबह आप नाश्ता रही थीं, तो बार बार लोअर ठीक क्यों कर रही थीं?

मैं डरते डरते उनके चेहरे को ही देख रहा था. उसने थोड़ी देर तक तो कुछ नहीं बोला, पर फिर वो बोली- वो मेरी पैंटी सही सैट नहीं थी, इसीलिए.

उसके मुँह से पैंटी सुनकर मैं हैरान रह गया.

उसके बाद उसने कहा- अब ख़त्म करो … मुझे नींद आ रही है.

मैंने कहा- ओके.

वो मेरे कमरे में ही सो गयी. मैं पढ़ाई करने लगा. रात के 2 बजे तक मैं पढ़ता रहा … फिर दीदी के बगल में आकर सो गया. दीदी सीधी लेटी हुई थी और उसके 32 इंच के चुचे उसकी सांस के साथ साथ ऊपर और नीचे हो रहे थे. मैं काफी देर तक उसके मम्मों को देखता रहा, पर मेरी हिम्मत उन्हें टच करने की नहीं हुई.

मैंने बाथरूम में जाकर मोबाइल में पोर्न देख कर मुठ मारी और आकर सो गया.

सुबह पेपर था, तो मैं जल्दी उठ गया और दीदी भी नाश्ता करके हम दोनों अपने अपने कॉलेज निकल गए.

दीदी का कॉलेज मेरी कॉलेज के रास्ते में पड़ता है, तो रोज मैं उसे अपनी बाइक से छोड़ता हुआ जाता हूँ. आज बात कुछ अलग थी. कल हम दोनों के बीच में कुछ अलग ही बातचीत हुई थी, जिससे कि मैं दीदी के बारे में काम भाव से देखने लगा था. आज मैं ब्रेक भी बार बार लगा रहा था और दीदी भी अपने गोल गोल बूब्स बार बार मेरी पीठ पर दबा रही थी.

बस ऐसे ही हम लोग कॉलेज पहुंच गए. लौटते टाइम भी मैंने बहुत ब्रेक लगाए और दीदी के मम्मों का आनन्द उठाया. शायद दीदी भी थोड़ा थोड़ा समझ गयी थी.

इसके बाद हम लोग घर आ गए. हम दोनों के ही आज सारे पेपर खत्म हो गए थे, तो दोनों ही फ्री थे. पर मुझे नींद आ रही थी … क्योंकि मैं रात में लेट सोया था. मैं जल्दी सो गया.

जब मैं सो रहा था, तो मुझे किसी के चिल्लाने की आवाज ने जगा दिया. मैंने जब वो आवाज ध्यान से सुनी, तो वो मेरी बहन चिल्ला रही थी. मैंने जाकर देखा, तो मेरे होश उड़ गए. मेरी बहन किचन में स्टूल पर से गिर गयी थी और उसके ऊपर बेसन का डिब्बा भी गिर गया था, जिससे उसके सिर में भी चोट लग गई थी. उससे खड़ा होते भी नहीं बन रहा था. पहले मैं उसको गोद में उठा कर ले गया और उसके पलंग पर लिटा दिया. फिर डॉक्टर को कॉल किया. मैं बेहद घबरा गया था.

डॉक्टर आया और उसने दवाई दी. वो कहने लगा कि दिक्कत की कोई बात नहीं है … बस मालिश की जरूरत पड़ेगी.

ये कह कर उसने मुझे एक तेल की शीशी दी और कहा कि इससे, अपनी बहन के पैर की मालिश कर देना.

डॉक्टर चला गया.

उस दिन मैंने खाना बाहर से मंगवा लिया और दीदी को लेटे लेटे ही खिलाया.

उसके बाद मैं जाने लगा, तो उसने मुझे बुलाया.

फिर बोली- कुछ नहीं.

शायद वो मुझसे कुछ कहना चाहती थी, पर शर्मा रही थी.

मैंने पूछा- बोलो ना!

उसने बात पलट दी और कहने लगी- वो तेल से पैर की मालिश कर दे.

मैंने भी भूलने जैसे रिएक्ट किया और तेल की शीशी ले आया. मैं उसके पंजे की मालिश करने लगा. वैसे भी वो घर में कैप्री पहनती थी, तो मालिश करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी.

अभी भी मैं उसके चेहरे पर कुछ परेशानी देख सकता था. तो मैंने फिर से पूछा- बताओ न दीदी … क्या दिक्कत है?

वो बोली- बेसन मेरी ब्रा के अन्दर भी चला गया है … और ऐसी हालत में मैं खुद से उसे उतार नहीं सकती हूँ.

मैंने बीच में ही टोकते हुए कहा- अरे … मैं आपका भाई ही तो हूँ … मुझसे क्या शर्म?

उसने बोला- ठीक है.

पहले मैंने उसको बैठाया और उसका टॉप उतार दिया. अब मेरी खुद की सगी बहन मेरे सामने सिर्फ ब्रा में थी. मैं तो उसको ही देख रहा था.

उसने गुस्सा होते हुए मुझसे कहा- ऐसे क्या देख रहा है?

मैंने कहा- सॉरी … कुछ नहीं!

फिर मैं टॉवल ले आया और उसकी पेट और पीठ सभी जगह लगे बेसन को साफ करने लगा, पर ब्रा की वजह से ठीक से साफ नहीं कर पा रहा था.

मैंने उससे कहा- ब्रा भी उतार दो.

वो गुस्से से बोली- अपनी बहन को नंगी देखना चाहता है.

मैं बोला- मुझे क्या है … तुझे ही बेसन अच्छा नहीं लग रहा था … तो मैं बोल रहा हूँ … और तू मुझे ही गुस्सा बता रही है.

थोड़ा गुस्सा मैंने भी बताया, तो वो फिर प्यार से बोली- अरे मैं वो नहीं कह रही … पर हम भाई बहन हैं, तो मैं तेरे सामने नंगी कैसे हो सकती हूं.

मैंने कहा- जैसे मैं नंगा हो सकता हूँ, तो तुम भी हो सकती हो.

ये कहते हुए मैंने अपनी टी-शर्ट उतार कर फेंक दी.

फिर वो कहने लगी- अच्छा ठीक है.

मैं ख़ुशी से उछल पड़ा.

उसने फिर कहा- आकर खोलो तो इसे अब.

मैंने स्पीड में जाकर उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और उसके 2 गोरे गोरे गोल गोल बूब्स, जिन पर हल्का हल्का बेसन लगा हुआ था, मेरी आंखों के सामने आ गए.

मेरा लंड आज तक इतने उफान पर नहीं आया, पर खुद की बहन के चुचे देख कर आज साला क़ुतुबमीनार को भी मात दे रहा था.

फिर मैं टॉवल लेकर उसके बाजू में खड़े होकर उसके मम्मों को साफ करने लगा.

इस प्रक्रिया में उसके हाथ में मेरा लंड टकराने लगा. वो कहने लगी- ये क्या है जो मेरे हाथ में बार बार लग रहा है.

मैंने ‘कुछ नहीं..’ कहा, तो वो कहने लगी दिखाओ- क्या है?

मैंने कहा- लंड है मेरा.

वो कहने लगी- दिखाओ मुझे.

मैंने झट से अपने पेंट को नीचे सरका दिया और साथ में मेरी अंडरवियर भी उतर गयी.

मेरे लंड को देखकर दीदी बोली- इतना बड़ा. वो भी खुद की बहन को देखकर ये सलामी मार रहा है … शर्म नहीं आती तुझे.

मैंने कहा- क्या करूं … आप हो ही इतनी सेक्सी.

वो मेरे मुँह से सेक्सी सुनकर हैरान हो गई और कहने लगी- कब से लग रही हूँ मैं तुझे सेक्सी?

मैंने कहा- जब आप अपना लोअर ठीक कर रही थी, तब से.

वो कहने लगी- अच्छा बच्चू.

मैंने कहा- दीदी एक बार बस आपके दूध पी लेने दे.

वो कहने लगी- सिर्फ दूध ही पियेगा या कुछ और भी करेगा.

मैंने कहा- जो जो आप कहोगी.

मैं फटाक से उठा और दीदी के मम्मों को चूसने लगा और दीदी गरम आहें भरने लगीं ‘आह आह आह…’

इससे मुझे और जोश चढ़ने लगा. मैं तो पहले से ही नंगा था, मैंने दीदी की कैप्री को एक झटके में उतार कर अलग कर दिया और फिर उनकी नारंगी रंग की पैंटी को देखने लगा.

वो कहने लगी- ऐसे क्या देख रहा है?

मैंने कहा- इसका रस पीना है मुझे.

दीदी कहने लगी- तुझे रोका किसने है?

मैंने फटाक से दीदी की पैंटी उतार दी. और अपनी जीभ को उसकी बिना वालों वाली बुर में घुसेड़ दी.

दीदी अभी तक वर्जिन थी … तो उसकी चूत चिपकी हुई थी और फूली थी. कुछ मिनट चुत चूसने के बाद मैंने उसे एक लंबा सा फ्रेंच किस किया. अब तक वो भी पूरे जोश में आ चुकी थी और मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी.

मैंने अपने होंठ उसके होंठ से हटा कर उसके मम्मों पर लगा दिए और एक हाथ से उसकी चूत से खेलने लगा.

उसके मुँह से मस्त आवाजें निकल रही थीं.

मैंने दीदी को अपना लंड दिखाते हुए बोला कि इसको मुँह में लो.

उसने लंड चूसने से मना कर दिया. मैंने भी ज्यादा जबर्दस्ती नहीं की.

इसके बाद मैं कोल्ड क्रीम ले आया, वो मैंने अपने लंड पर लगायी और थोड़ा सा दीदी की चूत पर भी लगा दी. फिर उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और अपना लंड डालने का प्रयास करने लगा. मेरी बहन की चुत सील पैक होने के कारण बार बार मेरा लंड फिसल रहा था.

फिर मैंने दीदी की टांगों को अपने कंधों पर रखा और पेलने की तैयारी में आ गया.

दीदी कहने लगी- धीरे से करना.

मगर मैंने पूरी ताकत से अपना लंड उसकी चुत के छेद में लगा कर घुसेड़ दिया. एक ही झटके में मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में समां गया और वो चीख पड़ी. उसकी आंखों से आंसू आ गए.

शायद उसकी.सील टूट चुकी थी. मेरे लंड में भी बहुत दर्द हो रहा था. मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया. फिर दीदी धीरे धीरे अपनी गांड हिलाने लगी, तो मैं समझ गया कि अब वो चुदने को तैयार है. अब अगले झटके दिए जा सकते हैं.

मैंने फिर एक बार पूरी ताकत से झटका मारा और इस बार मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में समा गया.

इस बार उसको थोड़ा कम दर्द हुआ पर वो लगातार चीख रही थी ‘आह आह..’

मैं रुक गया.

थोड़ी देर बाद जब दीदी नार्मल हो गई, तो मैं धक्के लगाने लगा. वो भी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी. हम दोनों पूरे दस मिनट तक ऐसे ही चुदाई करते रहे. फिर थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए. मैं नंगा ही दीदी के ऊपर पड़ा रहा. फिर थोड़ी देर बाद मैं उसके बाजू में सो गया.

तो दोस्तो, कैसे लगी मेरी बहन के साथ सेक्स कहानी …
 
मेरी प्यारी बहना की बुर की चुदाई

अपने दोस्त की बहन की चुदाई का कोई मौक़ा मुझे नहीं मिल रहा था तो मैं चूत का प्यासा हो रहा था. इसी बीच मुझे अपनी कुंवारी छोटी बहन की बुर की चुदाई का मौक़ा कैसे मिला?

नमस्कार दोस्तो, मैं राज आज एक नई कहानी को लेकर हाजिर हूँ।

दोस्तो, पिछले महीने की उन्नीस तारीख को एक दोस्त की शादी में मैं और मनीष दोनों गांव आये हुए थे।

पड़ोस में ही शादी हो रही थी और मनीष घर पर था तो मुझे पीहू को चोदने का कोई मौका नहीं मिल रहा था। इसलिए खाना खाकर मैं छत पर जाकर पीहू से फोन पर बात करने लगा।

मैं उससे बातें कर रहा तभी मेरी बहन ज्योति छत पर आ गयी और उसने मुझे रोमांटिक बातें करते हुए सुन लिया।

वो मेरे पास आकर बोली- किससे बात कर रहे हो?

मैंने कहा- किसी से नहीं!

तो उसने कहा कि मैंने सुना है तुम किसी से बात कर रहे थे।

मैंने अपना बड़ा वाला फोन उसे देते हुए बोला- देखो किसी से बात नहीं कर रहा था।

मेरी बहन ने कहा- ज्यादा चालाकी मत करो भैय्या, तुम किसी से तो बात कर रहे थे।

इतना कहकर वो मुझसे मेरा छोटा वाला फोन झटके से छीन लिया.

उससे मैंने अपना फोन छीनने का प्रयास किया तो फोन को वो दोनों हाथों से कसकर दबाकर घुटनों के बल बैठ गयी उसके हाथ उसकी गोद में उसके घुटनों और सीने के बीच में था।

मैंने उससे कहा- प्लीज फोन दे दो!

तो मेरी बहन ने कहा- पहले बताओ?

मैंने कहा- यार कुछ बातें पर्सनल होती हैं.

और उससे फ़ोन छीनने के लिए उसके पीछे आकर उसके दोनों हाथों को बाहर खींचने का प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाया।

उसके बाद मैंने उसके दोनों हाथों के कंधे के नीचे थोड़ी जगह जो बची थी उसमें से अपने हाथ झटके से अंदर डाल दिया मेरे हाथ अंदर जाते ही वो और कसकर चिपक गयी और मेरे हाथों के पंजे उसकी दोनों चूचियों पर लग गए।

चूंकि वो कसकर चिपक कर बैठी थी तो मेरे हाथों के पंजे उसकी नर्म चूचियों का अहसाह पा रहे थे। उसकी चूचियों का अहसास होते ही मेरे अंदर वासना जागने लगी।

अंधेरा काफी हो चुका था इसलिए मैं भी निश्चिन्त था कि कोई हमें देख नहीं पायेगा और वासना के वशीभूत होकर मैं उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा।

मैं उससे सट कर उसकी चूचियों पर हाथों का दबाब बढ़ाते हुए उससे बोला- ज्योति प्लीज दे दो.

तो वो हँसती हुई बोली- नहीं भैय्या, मैं नहीं दूंगी।

मैंने अपने हाथों का दबाब उसकी चूचियों पर थोड़ा और बढ़ाते हुए, जिससे उसे पता चल जाये कि मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा हूँ, और अपने होंठों को उसके गर्दन से सटाते हुए बोला- ज्योति दे दो।

ज्योति हँसती हुई बोली- भइया, मैं नहीं दूंगी.

अब तक उसकी सांसें तेज़ चलने लगी थी जिन्हें मैं महसूस कर रहा था।

अब तक मैं भी समझ गया था कि जो मैं कर रहा हूँ ज्योति भी उसका मज़ा ले रही है इसलिए डर मेरे मन से निकल गया। मैंने ज्योति की चूचियाँ दबाते हुए उसे खड़ा कर दिया। उसकी दोनों चूचियों को दबाए हुए ही मैं अपने होंठों को उसके कानों के पास ले जा कर उससे कहा रहा था- ज्योति प्लीज दे दो!

और वो कह रही थी- नहीं दूंगी।

ज्योति अपने चूचियों पर से मेरे हाथों को हटाने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी बस उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और हंसकर वो कह रही थी- नहीं दूंगी।

बहन का कोई प्रतिरोध नहीं देख कर मैं समझ गया कि रास्ता क्लियर है और खुलकर बहन की दोनों चूचियाँ दबाने लगा.

तब भी वो कुछ नहीं बोली।

तब मैं बहन की गर्दन पर अपने होंठों से किस करने लगा।

अपने दोनों हाथों को मैंने उसकी टीशर्ट के नीचे डालकर उसकी ब्रा के ऊपर से बहन की चूचियाँ दबाने लगा.

इस पर ज्योति बोली- भइया क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- कुछ नहीं … बस तुमसे प्यार कर रहा हूँ। क्या तुम्हारा मन नहीं करता है कि कोई तुमसे प्यार करे … अपनी बांहों में भरकर तुम्हें जिंदगी का सबसे हसीन सुख दे दे।

ज्योति ने कहा- भइया, आप मेरे भाई हैं. किसी को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी।

मैंने कहा- मैं तो किसी से नहीं बताऊंगा. क्या तुम बताओगी?

तो उसने कहा- नहीं।

तब मैंने कहा- बस तो जिंदगी के मज़े लो! क्या तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा है?

तो बहन ने कहा- भाई, बहुत मज़ा आ रहा है।

तब तक मम्मी ने नीचे से आवाज दी और ज्योति ने मुझसे कहा- भैया मुझे जाना होगा.

तो मैंने कहा- सबके सोने के बाद छत के ऊपर वाले मेरे रूम में आ जाना.

बहन ने कहा- दरवाजा खुला रखना।

मैं भी उसके जाने के बाद अपने कमरे में आकर आराम करने लगा। मुझे नींद नहीं आ रही थी.

रात में लगभग ग्यारह बजे कमरे का दरवाजा खुला और मेरी बहन ज्योति अंदर आकर दरवाजा बंद करने लगी।

इतने में मैं उठकर उसके पास गया और पीछे से बहन की दोनों चूचियाँ पकड़ कर दबाते हुए बोला- कितना इंतज़ार करवा कर तड़पा रही थी!

तो उसने कहा- भईया, जब सब सो गए तो मैं आयी हूँ।

ज्योति को पलट कर मैं उसके पूरे चेहरे पर किस करने लगा. मेरी बहन ने भी मदहोश होकर मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया।

बहन ने मुझसे कहा- भैया, लाइट बन्द कर दो, शर्म आ रही है.

तो मैंने कहा- मेरी प्यारी बहना … कुछ देर बाद तुम्हें चोदकर तुम्हारी शर्म मिटा दूंगा।

उसने अपना सर मेरे सीने में छिपा लिया।

मैंने उसके हाथों को ऊपर उठाकर बहन की टीशर्ट को उठाकर निकाल दिया। बहन की नंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल कर ब्रा भी निकाल दी।

तब मैंने अपना टीशर्ट और बनियान निकाल दिया।

बहन की बर चुदाई

बहन की बर चुदाई

मैंने कहा- ज्योति, तुम बहुत खूबसूरत हो!

तो उसने आँखें खोल कर मेरी आँखों में देखते हुए कहा- सच में भैया?

मैंने कहा- पागल … तेरे भैया तुमसे क्यों झूठ बोलेंगे?

और उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी।

कुछ देर उसके होंठों को चूसने के बाद मैं झुककर बारी बारी बहन की दोनों चूचियाँ को चूसने लगा. वो आँखें बंद कर मेरा सर सहलाते हुए चूचियाँ चुसवाने का मज़ा ले रही थी।

इसके बाद मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया और उसके पेट को चूमने और अपनी जीभ से उसकी ठोढ़ी के आसपास चाटने लगा।

ज्योति अपनी आँखें बंद कर मेरे सर के बालों को सहला रही थी।

उसके बाद मैंने बहन की लैग्गिंग्स उतार दी. फिर मैंने बहन की पैंटी भी उतार दी। अब मेरी बहन मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी.

मेरी बहन की बुर पर एक भी बाल नहीं था. लग रहा था शाम को ही उसने अपनी चूत के बाल साफ किये हैं।

मैंने ज्योति को दीवार से सटा कर खड़ी कर दिया और उससे कहा कि वो अपना एक पैर मेरे कंधे पर रख दे.

वो अपना एक पैर मेरे कंधे पर रखकर मेरे सर को पकड़ कर दीवाल के सहारे खड़ी हो गई।

मैंने ज्योति की कमर को पकड़ कर बहन की बुर पर एक किस किया.

वो सिहर गयी.

फिर मैंने अपनी बहन की बुर में अपनी जीभ डाल कर चूसना शुरू कर दिया.

वो मुझसे कहने लगी- भईया प्लीज छोड़ दीजिए!

लेकिन मैंने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और बहन की बुर चूसता रहा.

लगभग सात या आठ मिनट बाद ज्योति का शरीर अकड़ने लगा और मेरी बहन की बुर ने पानी छोड़ दिया मैं उसका सारा पानी पी गया।

इसके बाद ज्योति ने मुझसे कहा- भैया, मुझे आपसे बात नहीं करनी है. आप मेरी बात नहीं मानते हैं.

मैंने उसके माथे पर एक किस करते हुए कहा- पागल ये बता कि तुझे मज़ा आया या नहीं?

तो उसने मेरे सीने पर किस करते हुए अपना चेहरा मेरे सीने में छिपा लिया।

मैंने ज्योति को सामने बैठने का इशारा किया तो वो मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गयी।

मेरे इशारे पर ज्योति ने मेरे लोवर और अंडरवियर को उतार दिया।

अब मेरा खड़ा लन्ड उसके सामने था. वो बोली- भइया कितना मोटा और बड़ा है आपका!

तो मैंने कहा- मेरा लंड मेरी बहन के लिए है!

वो शरमा गयी।

मैंने उसे लन्ड को चूसने का इशारा किया तो वो मेरा लन्ड अपने हाथों में लेकर चूसने लगी और मैं उसके सर के बालों में अपनी उंगलियां फिराने लगा।

कुछ देर तक लन्ड चुसवाने के बाद मैंने ज्योति को खड़ी कर दिया और उससे पूछा- कभी किसी से चुदी हो?

तो वो मेरा कसम खा कर कहने लगी- नहीं भईया!

मैंने कहा- पागल, कसम खाने की क्या जरूरत है? मुझे अपनी बहन पर पूरा भरोसा है।

फिर मैंने उससे पूछा- तू इतनी खूबसूरत है, तेरे चक्कर में तो बहुत सारे लड़के पड़े होंगे?

तब उसने कहा- हाँ बहुत लड़कों ने मुझे प्रपोज़ किया है पर मैंने किसी का असेप्ट नहीं किया है।

मैंने कहा- ज्योति कोई पसन्द हो तो बताना. मैं उसके बारे में पता कर बताऊंगा कि वो तुम्हारे लायक है कि नहीं.

इस पर ज्योति बोली- अब से सिर्फ आप और जिसे आप मेरे लिए ढूँढेंगे, वो ही मेरी जिंदगी में होगा।

मैंने ज्योति को गोद में उठा लिया औऱ बिस्तर पर लिटा दिया. बहन की दोनों टाँगों को फैलाकर उनके बीच घुटनों के बल बैठ गया।

मैं अपने लन्ड को बहन की बुर पर सेट करने जा रहा था कि ज्योति ने मुझे रोक दिया और बोली- भैया सच बताइए, अब तक कितनी लड़कियों को चोदा है?

तो मैंने कहा- बस पीहू को!

वो बोली- बस एक लड़की अभी तक?

तो मैंने कहा- नहीं … आज दूसरी चोदूंगा।

ज्योति हँसते हुए बोली- हाँ … और दोनों तुम्हारी बहनें ही हैं।

मेरी बहन ने फिर कहा- कोई बात नहीं भईया, अब आपकी लड़कियों से सेटिंग मैं ही करवाऊँगी।

मैं अपने लन्ड पर थूक लगाते हुए बोला- ज्योति पहली बार में दर्द होगा, उसको सह लेना. शोर मत मचाना.

तो उसने आँखों से इशारा किया- ठीक है।

इसके बाद मैंने अपने लन्ड का सुपारा बहन की बुर के छेद पर रखकर हल्का सा पुश किया तो उसकी बुर के छेद में सुपारा सेट हो गया.

मैंने झुककर ज्योति के दोनों होंठों को अपने मुंह में लेकर एक झटका उसके दोनों कंधों को अपने हाथों से दबाते हुए लगाया. तो आधा लन्ड मेरी बहन की बुर में धंस गया.

पीहू नीचे छटपटाने लगी थी.

तभी मैंने दूसरा धक्का मारकर पूरा लन्ड बहन की बुर में डाल दिया।

मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा लन्ड कुछ चीरते हुए आग की भट्टी में चला गया है।

नीचे मेरी बहन छटपटाकर रह गयी.

कुछ देर बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ दिया तो वो बोली- भईया, आप बहुत बेरहम हो. निकालिये इसे … बहुत दर्द हो रहा है.

तब मैंने उससे कहा- कुछ देर और सह लो, उसके बाद मज़ा आएगा।

कुछ देर बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाकर उसे चोदना शुरू किया।

थोड़ी देर बाद उसने अपने दोनों पैरों को मेरी कमर में लपेट दिया और कसकर मुझे अपनी बांहों में भर लिया.

मैं समझ गया कि मेरी बहन अब अपनी चुदाई का मज़ा ले रही है।

मैंने ज्योति से पूछा- बहना … चुदाई का मज़ा आ रहा है?

तो उसने कहा- हाँ भइया।

लगभग दस मिनट बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया।

उसके बाद मैंने भी जोर जोर धक्के लगाकर ज्योति को चोदना शुरू कर दिया. कमरा फच फच की आवाज से गूँजने लगा।

मैं बहन की बुर में से लन्ड किनारे तक निकाल कर उसके कंधों को अपने दोनों हाथों से दबाकर जोर का झटका लगाकर उसकी बुर चोद रहा था। हर झटके पर पूरा बेड हिल जा रहा था।

ज्योति भी अपनी गांड उठाकर हर धक्के का जवाब दे रही थी।

करीब दस मिनट और चोदने के बाद मेरे लन्ड ने बहन की बुर में पानी छोड़ दिया, मेरा पूरा शरीर कांप गया।

पानी छोड़ने के बाद भी दो मिनट तक बहन की बुर में धक्के लगाता रहा और उसके बाद निढाल होकर ज्योति के ऊपर ही लेट गया।

उस रात मैंने ज्योति को एक बार और चोदा.

वो सही से खड़ा नहीं हो पा रही थी. मैंने उसे दर्द की गोली दी और उसे उसके कमरे में छोड़ कर वापस अपने कमरे में आ गया।

दोस्तो आपको मेरी बहन की बुर चुदाई की गर्म कहानी कैसी लगी?
 
भैया मैं आपकी छोटी बहन हूँ-1

मेरी फॅमिली मे हम 4 मेंबर्ज़ हैं.मेरे पापा जो की एम.पी मे सरकारी जॉब करते

हैं और मोन्थ मे 1 या 2 बार ही घर आते हैं.

मेरी मम्मी, भैया और मैं. मेरा नाम कंचन है और मैं 13 साल की एक सुंदर

गोरी लड़की हू और 8थ क्लास की स्टूडेंट हू ,मेरी हाइट 5फ्ट,3इंच है, मेरा बदन

बहुत ही कोमल है और मेरा फिगर 32-28-34 है. मेरे बड़े भैया का नाम अनुज

है और उनकी एज 21 यियर्ज़ है और वो बी.ए फाइनल एअर की स्टडी कर रहे

हैं.ओके अब मैं आप लोगो को अपने बारे मे बता देती हू मैं एक बहुत ही शरीफ

लड़की हू और अपनी क्लास मे सबसे सुंदर हूँ, मेरी क्लास के लड़के और बाकी

स्कूल के लड़के मुझे अक्सर छेड़ते रहते है, और मेरी सेक्सी बॉडी पर कॉमेंट्स मरते, लेकिन मैं ने कभी मूड कर उनको कोई रेस्पॉन्स नहीं दियाया क्योंकि मेरे मन मे सेक्स के बारे मे कभी कोई ख़याल नही आया.

मेरे भैया मुझे बहुत प्यार करते हैं और मैं भी. लेकिन मुझे क्या पता था

की भैया ये भाई-बहन वाला प्यार भूल कर मुझे ही चाहने लगे थे और मुझ से सेक्स के खाविश्मंद थे. अच्छा तो अब मैं अपनी मैं टॉपिक पर आती हूँ. ये बात आज से 4 महीने पहले की है जब मेरी मम्मी को एक हफ्ते के लिए आउट ऑफ स्टेशन जाना पड़ा क्योकि मेरे मामा की शादी थी. पर उस टाइम मेरे एग्ज़ॅम्स चल रहे थे जिसके कारण मैं नही जा सकती थी और मम्मी मुझे अकेला छोड़ के भी नही जा सकती थी क्योकि उस टाइम पापा भी एम.पी मे थे इसलिए मम्मी भाई को मेरा ख़याल रकने के लिए मेरे पास ही रहने को कहा और

चली गई.भैया मम्मी को स्टेशन ड्रॉप करने गये फिर मैने डोर बंद कर दिया,

और टीवी देखने लगी. शाम के करीब 6 बजे भैया स्टेशन से वापस आए फिर

भैया और मैं बातें करने लगे. हम दोनो ने मिल कर

डिन्नर बनाया और फिर रात को डिन्नर कर के भैया और मैं टी.वी पे मूवी देखने

लगे और मूवी देखते देखते मुझे पता नही कब नींद आ गई रात करीब 1:30

बजे मेरी नींद खुली, कमरे मैं नाइट बल्ब की मधाम रोशनी हो रही थी. मैने देखा भैया ने अपना लंड पैंट से बाहर निकाल रखा था और उसे सहला रहे थे और एक हाथ से

मेरे नन्हे नन्हे मासूम बूब्स को सहला रहे थे. ये देख कर मुझे भैया पे बहुत तेज गुस्सा आया और मैं भैया पर भड़क उठी,भैया ये आप क्या कर रहे हो मैं आपकी छोटी बहन हूँ.भैया एक दम से डर गये उन्हो ने अपनी पॅंट ठीक की और कहने लगे कंचन आइ लव यू. मैने कहा भैया ये किया बदतमीज़ी है मैं आपकी छोटी बहन हूँ.

आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं, अगर आप मेरे साथ ऐसी बदतमीज़ी

करोगे तो मैं आपसे कभी बात नही करूँगी और मैं रोने लगी. फिर भैया

ने कहा सॉरी कंचन मैं बहक गया था मैं अब ऐसा नही करूँगा मुझे माफ़

करदो. मैं कमरे से बाहर निकली डोर बंद किया और मैं अपने रूम मे जाके सो गई.

अगले दिन मैं सुबा जल्दी उठ कर नहाने चली गई, नहाने के बाद मैने येल्लो

कलर का टॉप और वाइट स्कर्ट पहना फिर मैं भैया को जगाने गई, उस हादसे के

बाद मुझे भैया के पास जाना अजीब सा लग रहा था, पर वो थे तो मेरे भैया

मुझे लगा की भैया अब सरमिंदा होंगे. मैने उन्हे जगाया और कहा भैया चलिए

जाकर मूह धो लीजिए मैं चाइ लेके आती हूँ और मैं चाइ बनाने चली गयी.

थोड़ी देर बाद मैं चाइ लेके आई,तो भैया ने मुझ से बोला कंचन, कल रत को जो हुआ तुम उसके कारण मुझसे नाराज़ तो नही हो ना! मैने कोई जवाब नही दिया फिर भैया ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा, देखो कंचन मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हू और जैसे जैसे तुम जवान हो रही हो मैं तुम्हे और भी प्यार करना चाहता हूँ

मैं फिर से रोने लगी और कहा भैया मैं आपकी छोटी बहन हूँ आप जो भी

कर रहे है वो सब ठीक नही है, और आप मेरे बड़े भाई हो आप मेरे साथ ऐसा

नही कर सकते ये सब ग़लत है.

भैया को मेरी बात और आँसुओं का कोई फ़र्क नही पड़ रहा था. और फिर भैया

ने मेरे कदमों पे अपना सिर रखते हुए कहा, कंचन,मैं तुझ से बहुत प्यार

करता हूँ मैं पूरी ज़िंदगी तेरा गुलाम बन कर रहूँगा,तू जो

कहोगी,करूँगा, लेकिन मुझे निराश मत कर,वरना मेरी हालत एक मुर्दे जैसी हो

जाएगी.प्लीज़, कंचन तुम मेरी बेहन हो,मेरे ऊपेर रहम खारो,प्लीज़ मान जाओ एक

भाई अपनी बेहन के कदमों में पड़ा अपने प्यार की भीक माँग रहा है और अगर

मेरा प्यार मुझे नही मिला तो मैं अपनी जान दे दूँगा.

अब मुझे भैया के उपर तरस आ रहा था और अपने लिए अपने भैया का प्यार देख

कर मेरे सारे बदन मे आग लग गई फिर मैने भैया का हाथ पकड़ा और कहा

ठीक है भैया लेकिन यह संबंध समाज के मुताबिक अवैध हैं और अगर किसी

को भी मालूम हो गया तो हमारी बहुत बदनामी होगी ये शब्द कहते ही भैया ने

मुझे अपनी बाहों मे भर लिया और मेरी कमर मे अपना हाथ डालते हुए कहने लगे

कंचन तो चिंता मत कर और मेरे कुंवारे गुलाबी होंटो को चूसने लगे और कहने लगे आइ लव यू कंचन अगर तू मुझे नही मिलती तो मैं मर ही जाता तो मैने कहा नही

भैया मैं भी आप से बहुत प्यार करती हून आज के बाद कभी मरने की बात मत

करना. फिर क्या था मेरे इतना बोलते ही भैया की ख़ुसी का तो कोई ठिकाना नही

रहा. उन्होने मुझे अपनी बाँहों मैं उठाया और अपने रूम मैं लेगये. और मुझे

बेड पर लिटा दिया और मेरे होटो को बुरी तरहा चूमने लगे. भैया इस तरहा मेरे

होटो को चूम रहे थे जैसे से आग बरसों पुरानी हो. वो एक हाथ से मेरी जाँघो

(थाइस)को सहलाने लगे. आफ्टर 5 मिनट मुझे भी सेक्स का भूत सवार होने लगा.

मेरी छोटी छोटी सी निपल्स टाइट होने लगे थे.और फिर भैया ने धीरे से अपना हाथ मेरी

टी-शर्ट मे घुसा दिया और मेरे बूब्स पे ले गये और सहलाने लगे मेरे पूरे

शरीर मे कुछ हो रहा था अब मैं भी किस्सिंग में भैया का साथ देने लगी.

मेरा रेस्पॉन्स देख भैया धीरे-धीरे अपना हाथ मेरी चूत की फांको के पास ले गये और चूत को सहलाने लगे. मेरी चूत में अब गुदगुदी होने लगी थी. उउउफफफ्फ़ ओउउच

मैं फर्स्ट टाइम किसी के साथ सेक्स कर रही थी वो भी मेरे भैया के साथ.

मेरा पूरा जिस्म कांप रहा था तभी भैया उठे और मेरी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार

दी अब मैं भैया के सामने सिर्फ़ पॅंटी मे थी शर्म के मारे मेरा चेहरा

लाल हो गया था और मेरा बदन कापने लगा मुझे बहुत शर्म आ रही थी.भैया

की आँखों की चमक और बढ़ चुकी थी. और भैया मेरे नंगे छोटे छोटे मुम्मों

को सहलाने लगे.. मेरे मूह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली आअहहसिईइ आईईईई भैया

यह आप क्या कर रहे है प्ल्स मुझे छोड़ दो

कंचन मेरी प्यारी बहन तुम्हारा भाई तुमसे प्यार कर रहा है आज अपने भैया को

मत रोको और देखते ही देखते उन्होने मेरी ऐक चूची अपने मूँह मैं भर ली,. मेरे सख़्त और नुकीले मुम्मो को देखके भैया से रहा नही गया और वो कहने लगे कितना गदराया हुआ और सख़्त बदन है तेरा कंचन तेरा. और मेरी एक चुचि को मूह मे लेके चूसने लगे मेरे शरीर मे करेंट सा दौड़ने लगा. ये सोच के मेरे सगे भैया

अपनी सग़ी छोटी बेहन के बदन को चूम रहे है.

भैया मेरे मुम्मो को बारी बारी से चूस रहे थे और कभी कभी निपल्स को

काट भी रहे थे और मेरी तो जैसे जान ही निकल रही थी . .. और मैं

सिसकिया लेने लगी .. . अयाया . .भैया ..उफ़फ्फ़. और भैया मेरे निपल्स के साथ

खेलते हुए मेरी मरमरी चिकनी चिकनी जंघे को भी सहला रहे थे फिर भैया

धीरे धीरे मेरे पूरे बदन को चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगे और नाभि

पे किस्सिंग करने लगे और फिर मेरी थाइस चूमने लगे और फिर मेरी गोरी

जाँघो को सहलाते हुए उन्होने मेरी पॅंटी खींच दी और भैया

मेरी छोटी सी बिना बालो की गोरी गुलाबी चूत को देखते ही रह गये.
 
भैया मैं आपकी छोटी बहन हूँ-2

अब मैं अपने सगे भैया के सामने बिल्कुल नंगी थी , 13 साल का कच्चा शरीर काप रहा था और भैया मेरी चूत को देखते हुए बोले हाए कंचन मेरी बहन क्या चीज़ है कितना कोमल बदन है तेरा हं ससस्स हहाअ.. और मेरी जाँघो को फैला दिया. मेरी छूट की काली एकदम

क़ास्सी हुई थी दोनो फांके चिपकी हुई थी भैया ने हौले से मेरी चिपकी हुई

फांको को उंगली से अलग किया .ह्हाआ उई मेरी चूत की दोनो फांको पे होंठ रख दिए और कसी हुई चूत के होठों को अपने होठ से दबा के बुरी तरह चूसने लगे और में तो बस कसमसाती रह गयी, तड़पति मचलती आआहह आअहह भैया हाअ उईईइ आहह मुझे ऐसा लगा की मेरी चूत में आग लग गई है. में बुरी तरहा छटपटाने लगी. मैं भैया के बालों को नोचने लगी और उनके सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी. मेरे मूह से आवाज़े आने लगी आहह आअसशह आआहा आआमम आआशह. मैने कहा भाया मुउउउज्झीए कुचह हू राहाआ हॅयियी आआहहह मेरी साँसे बहुत तेज़ हो गई थी. मैं पागलों की तरहा तड़प रही थी. और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी मैने भैया से कहा

प्लीज़ भाइया कुच्छ कीजीये मेंन मारररर जाआओंगीइ. पर भैया मेरी कहाँ

सुनने वाले थे और भाई मेरी चूत चूस चूस के मेरी कच्ची जवानी का रस पीते गये,

और बड़ी देर तक मेरी 13 बरस की छ्होटी सी चूत से चिपके रहे.मेरी चूत का

पानी छोड़ छोड़ के बुरा हाल हो चुक्का था फिर भैया ने अपने भी कपड़े उतारे

जैसे ही उन्होने अपना अंडरवेर उतारा मैं एक दम सून्न रह गई उनका लंड 7इंच

लंबा और 3 मोटा था और मैं तो अभी नाबालिग़ थी. और फिर भैया अपना

लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे.और थोड़ी देर बाद मेरी चूत पे हल्का सा ज़ोर

डाला तो मुझे बहुत तेज दर्द हुआ और मैं एक दम से पीछे को हो गई मैं डर

गैइ सोचने लगी अब मेरा क्या होगा.

और में भैया से मिन्नत करने लगी की मुझे छोड़ दो, उन्होने मुझसे कहा अच्छा

कंचन मैं अपना लंड तेरी चूत मे नही डालूँगा बस उप्पेर से ही सहलाउन्गा

ठीक है और और मेरी चिकनी जाँघो को सहलाते हुए उन्होने अपना लंड मेरी चूत

की दरार पे फिसला दिया और बोले क्या चीज़ है तेरी चूत कंचन हाए इतनी

कसी चूत एकदम तरोटाज़्ज़ा चूत है मेरी बहना की. ऐसा कहते हुए भैया

धीरे धीरे अपना लंड मेरी चूत पे रगड़ने लगे और मेरे निपल्स चूसने लगे फिर

भैया ने अपना लंड मेरी चूत की सेंटर पर रखा और एक शॉट लगाया लंड मेरी

चूत में नही जा रहा था. में सिहर उठी क्योंकि दर्द के मारे मेरी जान

निकल रही थी.भाई ने मुझे सहलाते हुए कहा कंचन पहले थोडा सा दुखेगा

फिर खूब मज़ा आएगा फिर मैं चुप हो गई और आंझे बंद कर ली.

फिर भैया ने अपना लिंग मेरी चूत के छोटे से छेद पे रख कर एक जोरदार झटका

दिया जिसका उनका सूपड़ा अंदर गया जैसे ही सूपड़ा अंदर गया ही था की मैं

चिल्लाने लगी.उउउइइ माऐईन्न मईए माअरर गाऐयइ नीइकाअलू ईसीए मीईंन

मॅर जाओंगीइइ मम्मी मैं मररर गैइइ भाईईईया प्लेआसीए भैया निकालो इससे.

फिर भैया ने मेरे निपल्स को बुरी तरह चूस्ते हुए तुरंत दूसरा शॉट

लगाया ये शॉट इतना तेज लगाया कि भैया का आधा लंड मेरी छोटी सी मासूम

चूत के पतले होंटो को चीरता हुआ अंदर चला गया.मेरी दर्द के मारे जान

निकलने लगी और मेरे मूह से जूरदार चीख निकल गई.अहहाआहहुउऊउउ उवीए..वी. .मैं

मरगई भैय्ाआ... ..आआअहह भैयाः मैं मर गाइइ.प्ल्स छोड़ दो मुझेई. मेरी

आँखों से आँसू आने लगे मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

मेरी चूत से खून भी निकल रहा था ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने भट्टी से

निकाला लाल लाल गर्म लोहा चूत में घुसा दिया हो. मैं बहुत तड़प रही थी. मैं भागना

चाहती थी लेकिन भैया ने मुझ पर अपनी पकड़ इतनी मजबूत बना रखी थी की

मैं कुछ नही कर सकती थी सिवाए आँसू बहाने के. मेरी सील टूट चुकी थी.

करीब 15 मिनट तक भैया बिल्कुल शांत रहे, भैया मेरे सॉफ्ट होंठो को चूस और बूब्स दबा रहे थे.भैया एक भूके बच्चे की तरह मेरे निपल्स को चूस रहे थे जब भैया को लगा की मैं अब शांत पड़ रही हूँ तो उन्होने तीसरा शॉट मारने में देर

नही की, उन्होने आखरी शॉट इतनी ज़ोर का मारा कि उनका

पूरा लंड मेरी छोटी सी चूत की गहराई में समा गया. मुझे इतनी ज़ोर से दर्द

हुआ जिससे कुछ सेकेंड्स के लिए तो मेरी साँस ही अटक गई थी.

मेरी चूत से दोबारा खून निकलना सुरू हो गया और मेरी चूत मे बहुत तेज जलन

होने लगी और मैं बुरी तरह चिल्लाने लगी आअहह . भैया ..आहह ह .में मर

गयी .. आअहह . ..मैं भैया की पकड़ से छूटना चाहती थी पर पर भैया

ने मुझे बहुत मजबूती से पकड़ रखा था मैं पागलों की तरहा तड़प रही थी.

फिर भी भैया को कोई फ़र्क नही पड़ रहा था.और वो मेरे निपल्स को चूस्ते रहे

थे मेरी आँखों से आँसुओं की बौछार निकलने लगी वो पूरा लंड

घुसाने के बाद 20 मिनट तक रुके रहे. फिर धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा

और मैं धीरे-धीरे शांत पड़ने लगी. फिर भैया ने अपने लंड को आगे पीछे

करना सुरू किया. भैया मेरे निपल्स चूस्ते हुए धीरे धीरे अपना लंड

खींच के फिर से धीरे से घुसा दिया भैया जैसे ही लंड थोड़ा बाहर निकल

कर लंड वापस अंदर करते मुझे बहुत तेज दर्द होता और ऐसा लगता जैसे मेरी

चूत मे किसी ने आग लगा दी पर भैया इसी तारह बड़ी ही धीरे धीरे अपनी छोटी बेहन को चोद्ते रहे उन्न्ह आअहहू हाअए आन्णन्न् भैया आई आई रीई भैया हंणन्न् ऊऊहह ऐसे ही धीरे-धीरे मेरा दर्द भी कम हो गया फिर क्या था भैया ने अपनी स्पीड बढ़ई और चुदाई सुरू की.कुछ ही देर मैं मुझे भी मज़ा आने लगा, अब मैं भी

उनके हर एक शॉट का जवाब अपनी गंद हिलाकर देने लगी भैया

भी मेरी टाइट चूत मे अपने फिट लंड से मुझे चोदने का आनंद लेने लगा. पूरे

कमरे मैं अब हमारी चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थी आजज्ज हफफसास्स्स

पाचक-पाचक- पाचक आवाज़ें आ रहीं थी. उउंम आह आह आह उउउ उईईईई मानणन

आअहह आशह. भैया पूरी स्पीड से चुदाई कर रहे थे. में भाई के साथ मिल के

खूब उच्छल कूद करते हुए चुदवाने लगी भैया ज़ोर ज़ोर से पंपिंग करते हुए

मेरे निपल्स को भी चूस लेते और फिर मुझे लगा की मेरी चूत से कुछ

निकलने वाला है,

और मेरी चूत मे खूब तेज़ खुजली सी हुई और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया

बस बस भैयाआआ ह्ह्ह्ह्हाआ आँहंमह और मैं भैया से चिपक गई और 5

सेकेंड में सुस्त पड़ गई मेरा पानी निकल चुका था. लेकिन भैया मेरी चूत को

चोदने मे लगे रहे भैया की साँसे अब तेज होने लगी थी, शायद वो झड़ने

वाले थे. लेकिन मैं इससे पहले कुछ समझ पाती भैया ने अपना सारा पानी मेरी चूत मैं ही गिरा दिया और मेरे उपर ही गिर गये. उनके पानी से मेरी चूत गर्म हो गई थी

भैया मेरे बगल में लेट गये.भैया के लंड पे मेरा खून लगा हुआ था और

मेरी चूत का खून और भैया के पानी से भरी हुई थी हम दोनो आधे घंटे तक

ऐसे हे लेटे रहे. फिर मैं उठी और बथ्रूम में जाने लगी तो मुझसे उठा

भी नही जा रहा था,

इस चुदाई की वजह मैं ठीक से चल भी नही पा रही थी. मेरी चूत बहुत

दर्द कर रही थी. किसी तरहा मैं बाथरूम पहुँची और नहाने बैठ गई.

नहाने के बाद मेरे सरीर में कुछ ताक़त आई. मैं ऐसे ही नंगे बदन बेडरूम

में गई वाहा देखा तो पूरी बेडशीट खून से लाल हो रखी थी भैया अभी भी

बेड पर लेटे हुए थे. शायद भैया भी थक चुके थे, वो हल्की नींद में थे.

फिर मैने कपड़े पहने.

मेरी चूत सूज गई थी जिससे मुझे बहुत दर्द हो रहा था. मैने पानी पिया

और वही ज़मीन पर बैठ कर रोने लगी. मेरी रोने की आवाज़ सुनकर भैया जाग

गये और मेरे पास आए और बोले क्या हुआ कंचन, मेने मूह नीचे कर रखा था

भैया नंगे थे.उनके लंड पर मेरी चूत का खून लगा हुआ था. मैने उनकी बात का जवाब नही दिया और रोती रही. भैया ने मेरा सर उपर किया और कहा देख कंचन रोने से कुछ नही होता जो होना था हो गया. मैं ओर तेज रोने लगी. भैया मुझे समझाने

लगे हमारी बदनामी नही होगी जब हम किसी को बताएन्गे ही नही तो किसी को

कैसे पता चलेगा, तू मेरी सिस्टर है और मैं तुझे लव करता हूँ. आज से तू

ही मेरी गर्लफ्रेंड है भैया ने मुझसे कहा कंचन डू यू लव मी.

मैने शरमाते हुए हां में सर हिला दिया और भैया के गले लग गई. फिर रात

को हमने खाना खाया उसके बाद भैया ने मेरी चुदाई नही की क्योंकि मेरी चूत

सूजी हुई थी. उन्होने मेरी चूत को गरम कपड़े से सेका जिससे मेरी चूत का दर्द

कम हुआ

end
 
गंदे ख्याल मेरे भाई के

हैल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम अभिलाषा है और मैं काठमांडू से हूँ | मेरी उम्र 22 साल है और मैंने हाल ही में अपना ग्रेजुएशन कम्पलीट किया है | मैं आप लोगो को अब अपने रंग रूप के बारे में बता दूं | मेरी हाईट 5 फुट 4 इंच है और रंग एक दम गोरा है और इसी के साथ ही भगवान ने मुझे 28-32-34 का मस्त फिगर दिया है जिसे देख कर मुझे बस चोदने की मनोकामना करते हैं | खैर फ्रेंड्स, मैं तो ऐसे ही अपने हुस्न के जलवे बिखेरते हूँ | अब मैं आप लोगो के समय को ज्यादा बर्बाद न करते हुए अपनी पहली कहानी का आरंभ करती हूँ | ये बात उस समय की है जब मैं अपने मामा के घर उनके बेटे के पहले जन्मदिन पर गई थी | मामा जी उस समय मुंबई शिफ्ट हो चुके थे | अब हम घर वालो का मन तो नहीं हुआ कि हम वहां जाए क्यूंकि वो शहर दूर था | मैं आप लोगो को अपनी फॅमिली के बारे में बता दूं – मेरे घर में मेरे पापा भुवन जो कि आर्मी में नौकरी करते हैं और मम्मी स्मिता जो कि हाउसवाइफ हैं मैं और मेरा छोटा भाई जो अभी स्कूल में है |

स्कूल में खेलकूद के चक्कर में सारे बच्चो को छुट्टी मिल गई थी करीब दस दिन की | मम्मी ने पापा से बात की कि हम लोगो को वहां जाना है तो क्या करे ? जगह दूर भी है तो जाना थोडा मुश्किल है और आप यहाँ है नहीं तो घर भी सूना रहेगा | तो पापा ने कहा कि कोई बात नहीं तुम अकेले चले जाओ और मामा को कॉल कर देना | अभिलाषा और बबलू घर में ही रुक जायेंगे | इस बात से पहले तो मम्मी को ठीक नहीं लगा पर मम्मी अकेले वहां जाने के लिए मान गई | मेरे मामा जी बहुत अच्छे हैं और हम लोगो से काफी लगाव भी है | दूर रहने की वजह से हम लोग नहीं जा पाए वरना हम साथ में चले जाते | मैंने सुबह ही मम्मी के कपड़े और जरुरी सामान रख उनका बैग पैक कर दिया और फिर उसके बाद मैं और मेरा भाई उनको छोड़ने स्टेशन चले गए | अब ट्रेन भी चल चुकी थी और मैं और मेरा भाई हम दोनों घर वापस हो गए | शाम का समय था तो मैंने बबलू से पुछा कि तुझे कहीं जाना तो नहीं है | तो उसने कहा नहीं दीदी मुझे अभी कहीं नहीं जाना है अगर जाना होगा तो मैं आप को बता दूंगा | मैंने कहा चल ठीक है मैं सीमा ( मेरी पड़ोसन दोस्त ) के घर जा रही हूँ अगर तुझे कहीं जाना होगा तो तू मुझे वहां आ कर बता देना | उसने कहा ओके दीदी और मैं सीमा के घर आई |

जब मैं उसके घर गई तो घर एक दम खाली था | जब मैं आवाज़ देते हुए उसके रूम पर पंहुची तो देखा कि वो एक ब्लू फिल्म देख कर अपनी बुर में ऊँगली कर रही थी और एक हाँथ से अपने मम्मे सहला रही थी | ये देख कर मैं उसके पास गई और उसके कान से हैडफ़ोन निकाल दी तो वो एक दम से चौंक कर उठी और कहा अबे तूने तो मुझे डरा ही दिया | मैंने कहा शुक्र मना मैं ही थी और कोई नहीं वरना तू तो गई थी | उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और फिर हम दोनों बात करने लगे | बातो ही बातो मैंने उससे पुछा कि तू किसकी ब्लू फलम देख रही थी तो उसने कहा अरे बहुत गजब की फिल्म थी यार उसमे एक छोटा भाई अपनी बड़ी बहन को चोदता है | मेरे मन में आया कि चलो मैं भी देखती हूँ | मैंने उससे कहा कि चल हम दोनों साथ में देखते है | वो तो जैसे उसी का इन्तेजार कर रही थी | उसने तुरंत ही वो ब्लू फिल्म लगा दी | जैसे ही मूवी में चुदाई हुई तो मैं गरम होने लगी | पता नहीं चला कि मेरा हाँथ कब मेरे चूत पर चला गया और मैं अपनी बुर को सहलाने लगी | थोड़ी देर के बाद मैं झड़ गई और मेरी पेंटी एक दम चूत के रस से गीली हो गई तो मैंने उससे कहा कि यार मैं झड़ गई हूँ घर से हो कर आती हूँ | उसने कहा चल ठीक है | जब मैं घर वापस आई तो घर का दरवाजा खुला था तो मुझे लगा शयद मेरा भाई कहीं नही गया है घर पर ही है | फिर मैं तुरन्त बाथरूम गई और जैसे ही दरवाजा खोला तो देखा कि मेरा भाई एक दम नंगा हो कर अपने लंड पर मेरी पेंटी पहन कर मुट्ठ मार रहा था |

ये देख कर वो अपने लंड को ढंकने लगा और मैं शर्म से लाल हो गई | चुदाई से पहले मैं आपको अपने भाई के बारे में बताती हूँ | मेरे भाई की हाईट 5 फुट 10 इंच है और उसका बदन भी हट्टा कट्टा है | वो मुझे देख कर सोर्री कहने लगा तो मैंने उसे कुछ नहीं कहा और बस वहां से निकल जाने को कहा | वो चुपचाप चला गया | फिर मैंने अपनी पेंटी बदली और अपनी वो वाली पेंटी को हाँथ में लिया तो उसमे से कुछ चिपचिपा सा लगा | जब मैंने देखा तो वाइट सा कुछ लगा था मैं समझ गई कि ये उसका वीर्य है | मैंने अपनी दोनों पेंटी को पहले अच्छे से धोई और सुखाने के लिए छत पर गई तो वो वहां पर बैठा हुआ था | कपड़े डालने के बाद मैं उसके पास गई और उससे पुछा कि ये तू क्या नाटक कर रहा था | तो उसने कहा दीदी सॉरी मुझसे गलती हो गई मुझे माफ़ कर दो | मैंने उससे कहा देख तू ऐसी हरकत किया है ये बात तो मुझे बताना ही पड़ेगा मम्मी पापा को | तो वो रोने लगा और कहने लगा दीदी प्लीज मुझे छोड़ दो मुझे माफ़ कर दो मत बताना किसी को दीदी आप जैसा कहोगे मैं वैसा ही करूँगा | उसके बार बार मिन्नते करने पर मैंने उसे माफ़ कर दिया |

अब रात का खाना खाते वक़्त मैंने उससे पुछा कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या ? उसने कहा नहीं दीदी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है | फिर मैंने पुछा कि ठीक है पर अब कभी ऐसी हरकत मत करना | उसने कहा ठीक है दीदी अब मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा | थोड़ी देर बाद मैंने उससे पुछा कि तुझे मेरे ही कपड़े मिले थे क्या ये सब करने को ? तो उसने अपना सिर नीचे झुका लिया लेकिन कुछ बोला नहीं | मैंने उसके हाँथ में हाँथ रखते हुए कहा चल बता भी दे मैं कुछ नहीं बोलूंगी तुझे | अब उसको थोड़ी हिम्मत आई तो उसने कहा दीदी आप मुझे अच्छे लगते हो और मैंने आपको कई बार नहाते हुए देखा भी है इसलिए मैंने आपकी पेंटी के साथ ऐसा किया | उसकी ये बाते सुन कर मेरे पैरो तले जमीन खिसक गई | मुझे गुस्सा तो आया पर मैंने उसे कुछ नहीं बोला और चुपचाप खाना ख़त्म किये | अब सोने की बारी थी तो वो मेरे पास ही सोता था | उस दिन रात में मैंने उससे कहा कि तू दूसरे कमरे में जा कर सो जा | तो उसने कहा नहीं दीदी मुझे अकेले में डर लगता है यहीं सो जाने दो न क्या दिक्कत है ? तो मैंने कहा चल ठीक है पर मुझसे दूर सोना | वो समझ गया कि मैंने ऐसा क्यूँ कहा | खैर अब सो रहे थे | रात के करीब 1 बजे मेरी नींद खुली तो देखा कि मेरा भाई वहां नहीं था | तो मुझे लगा शायद चला गया होगा दूसरे कमरे में | मुझे बहुत जोर से बाथरूम लगी थी तो मैं बाथरूम की तरफ गई और देखा कि लाइट जल रही है | जब मैं पास गई तो मुझे कुछ आवाज़ आ रही थी |

वो आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि मेरे भाई कि थी और वो कह रहा था आहा मेरी जान अभिलाषा हाय क्या माल है आहा ऊउंह तुझे तो कुतिया बना कर चोदूंगा आहा | उसकी ऐसी बाते सुन कर मुझे बहुत गुस्सा आया पर रात का समय था थोडा मन मेरा भी हुआ | मैंने दरवाजे के छेद से अन्दर देखा तो भाई का 8 इंच का लम्बा लंड मेरी आँखों के सामने था और वो उसे जोर जोर से हिला रहा था | उसके इतने बड़े लंड को देख कर मेरी चूत में हलचल होने लगी | मेरे दिल की धड़कने तेज होने लगी और मेरे शरीर में एक अजीब सी कसक होने लगी और साथ ही उत्तेजना होने लगी |

मैंने अपने भाई के प्रति कभी ऐसी फीलिंग्स नहीं लाइ थी जैसी अब आ रही थी मुझमे | मुझे एक अलग ही आभास हो रहा था और मेरे भाई से चुदवाने की इच्छा अपने आप जाग रही थी | मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था और मैं चुदासी हो रही थी | वही मेरा भाई आहा ऊंह अभिलाषा तुझे चोदना है तुझे मेरे बच्चे की माँ बनाना है तुझे खूब चोदूंगा बस एक बार मुझसे अपनी चूत चुद्वाले | ये सुन सुन कर अब मेरा मन भी चुदाई करने का होने लगा था | मेरी चूत से पानी रिश्ने लगा था और मैं बेकाबू हो रही थी | तभी उसने आहाआ करते हुए अपने वीर्य को झड़ा दिया | उसके वीर्य को देख कर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गई | उसके निकलने से पहले मैं अपने रूम में जा कर जल्दी से सोने का बहाना करने लगी | ऐसे ही लेटे लेटे मेरी नींद ही लग गई | अगली सुबह जब मैं उठी तो वो नहीं दिखा मुझे | मुझे रात को वो सब याद आ रहा था और अब मैं उस पर गुस्सा नहीं बस प्यार दिखाना चाह रही थी | मैं नीचे गई तो देखा कि वो सोफे पर बैठ कर टीवी देख रहा था | मैंने बिना कुछ बोले नीचे आई और किचन में जा कर पानी पीने लगी | पानी पीने के बाद मैंने ब्रश किया और नहा कर पूजा की | ये मेरी रोज की आदत है | फिर मैं पूजा कर के किचन में जा कर नाश्ता बनाने लगी | तब तक भाई भी नहा कर एक फ्रेश हो गया था | मैंने उसे आवाज़ दे कर नाश्ता करने के लिए बुलाया | तो उसने कहा दीदी आप रख दो मैं अभी आता हूँ | मैंने कहा ठीक है |

मैं नाश्ता करने लगी और 5 मिनट के बाद वो भी आ गया नाश्ता करने के लिए | मैंने सोचा कि क्यूँ न इसे पटा कर चुदवाया जाए | क्यूंकि कल का सीन अभी तक मेरे दिमाग से नहीं निकला था और मैं चाहती थी कि अब मैं अपने भाई से चुद्वाऊ उस ब्लू फिल्म में जैसे एक बहन अपने छोटे भाई से चुद्वाती है | मैंने उससे पुछा कि कल रात मेरी नींद खुली थी तू दिखा नहीं दूसरे दूसरे कमरे में सो रहा था क्या ? वो एक दम से घबरा गया | उसने कहा हाँ दीदी आपने कहा था ना इसलिए मैं चला गया था | मैंने मन ही मन कहा साले अपनी बड़ी बहन के नाम की मुट्ठ मारता है और झूट बोल रहा है मुझसे | मैंने बनते हुए कहा अच्छा चल ठीक है | ये कह कर मैंने उसे जाने दिया | दो दिन तो ऐसे ही निकल गए और हमारे पास बस 6 दिन ही बचे हुए थे | अब मैं उसके सामने झुक कर झाड़ू या पोछा करती ताकि उसे मेरे मम्मों के दर्शन हो सके | मैं उसके सामने अपनी चूतड मटका मटका कर चलती और वो अपना लंड मसल कर रह जाता |

मैं उसे ये समझाना चाहती थी कि वो समझ जाये कि अब उसकी बड़ी बहन उससे चुदवाने को तैयार है और चाह रही है कि तू पहल करे | अब वो दिन भी आ ही गया जिसका मुझे इन्तेजार था | एक रात खाना खाने के बाद मैं और मेरा भाई हम दोनों हॉलीवुड मूवी देख रहे थे जिसका नाम बेसिक इन्स्सित था | उसमे कुछ गंदे सीन आते तो मैं बड़े ही मजे ले कर देखती और वो मुझे देखा | अब धीरे धीरे मैं गरम होने लगी तो मैंने उससे कहा कि चल तू मूवी देख मैं सोने जा रही हूँ | उसने कहा ठीक है दीदी | मैं ऊपर जा कर सोने लगी और मुझे मालूम था कि ये जरुर मेरे नाम की मुट्ठ मरेगा और मेरा नाम लेगा | मैं करीब दस मिनट के बाद वापस आ गई और जैसा कि मैंने कहा था कि ये मेरे नाम की मुट्ठ मारेगा वो ठीक यही कर रहा था | मैंने भी देर न करते हुए सीधे जा कर उसके लंड को अपने हाँथ से पकड़ ली और नाटक करते हुए कहने लगी तू फिर से ये सब करने लगा | मैंने तुझे मना किया था न ? तो वो एक दम से झेंप गया और कहने लगा दीदी सॉरी दीदी मुझे माफ़ कर दो | मैंने कहा अब तुझे माफ़ी नहीं मिलेगी और मैं जा रही हूँ पापा को बताने कि ये ऐसी ऐसी हरकत करता है | ये बात सुन कर उसके पसीने छूटने लगे और उसका लंड भी डर के कारण छोटा हो गया | मैं फ़ोन की तरफ जाने लगी तो उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया | उसका लंड मेरी गांड की दरार से टकरा रहा था और वो मेरे दोनों दूध को पीछे से ही पकड़ा रहा |

मुझे अच्छा लग रहा था और मैं झूटमूट का नाटक कर रही थी | उसने मुझे घसीट कर दिवार के सहारे टिका दिया और कहने लगा दीदी प्लीज मत बताओ न प्लीज दीदी | मैंने कहा तू मुझे छोड़ बहुत कास कर दबा रखा है | उसने कहा दीदी पहले आप कहो कि आप नहीं बताओगी तभी मैं आपको छोडूंगा | मैंने कहा ठीक है नहीं बताउंगी | फिर जैसे ही उसने अपनी पकड़ ढीली किया मैं तुरंत उसके चंगुल से आजाद होने की कोशिश की पर उसने फिर से मुझे कास कर पकड़ लिया | अब हम दोनों एक दूसरे के एक दम करीब थे और हम दोनों की साँसे एक दम तेज होने लगी थी | मैं भी शांत खड़े हो कर उसे देख रही थी और वो भी | फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठ में रख दिया और मेरे होंठ को दबा कर चूसने लगा | मुझे भी अच्छा लग रहा था और मैं भी उसका साथ देते हुए उसके होंठ को चूसने लगी | उसने मुझे अब आजाद कर दिया क्यूंकि वो समझ चुका था कि मैं नहीं मना करुँगी | वो मेरे होंठ को चूसते हुए मेरे मम्मों को भी दबा रहा था और मैं भी उसके होंठ को चूसते हुए उसके बदन को सहलाने लगी | हम दोनों ने करीब 15 मिनट तक एक दूसरे के होंठ का स्वाद लिया | उसके बाद उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरे ब्रा के ऊपर से ही मेरे मम्मों को दबाने लगा तो मेरे मुंह से आहा ऊंह आऊं आम आआ की हलकी सिस्कारियां निकलने लगी | उसने जरा भी देर नहीं किया और मेरे ब्रा को भी निकाल कर मेरे दोनों कबूतरों को आजाद कर दिया |

कुछ देर तक वो मेरे मम्मों को अपने हाँथ में ले कर देखने लगा तो मैंने पुछा क्या देख रहा है ? तो उसने कहा दीदी रोज मैं बस इसको छूने के सपने देखा करता था आज मिल रहा है तो बड़ा ही मजा आ रहा है | मैंने कहा कि चल चूस ले | वो मेरे एक मम्मे को अपने मुंह में ले कर चूसने लगा और दूसरे मम्मे को दबाने लगा | उसके ऐसे करने से मेरे मुंह से मादक सिसकियाँ निकलने लगी | उसको मेरी सिसकियों से ज्यादा उत्त्जेना होने लगी तो उसने मेरे दोनों मम्मों को जोर जोर से अपने मुंह में ले कर चूसने लगा और मैं आहा ऊंह ऊम्ह आहाहा उन्ह उमह करते हुए सिसक्र्याँ लेने लगी | मैंने कहा भाई अब मुझसे रहा नहीं जाता जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड घुसेड कर चोद दे | फिर हम दोनों जल्दी नंगे हो गए और उसने मुझे लेटा कर अपने लंड को एक ही धक्के में अन्दर डाल कर चोदने लगा | मैं भी अपनी कमर उठा उठा क्र चुदाई में साथ देने लगी | फिर उसने अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दिया और जोर जोर से मेरी चूत को बेरहमी से चोदने लगा | मैं सिस्कारियां लेते हुए उसके गाली भी दे रही थी | उसने करीब मेरी चूत को आधे घंटे तक चोदा और फिर मेरी चूत में ही झड़ गया |
 
मेरी छोटी बहन

हेलो दोस्तों, कैसे हैं ? आशा है की ठीक ही होंगे। मेरे घर में मम्मी , पापा और मेरी छोटी बहन जिसका नाम ऋतू है, रहते हैं। मेरी उम्र २३ साल है और ऋतू की 19 साल। अपनी बहन के बारे पिछले १ महीने से पहले मेरे मन में कभी भी कुछ गलत ख्याल नहीं आया था। खैर, जिस दिन आया उस दिन की बात बता रहा हूँ।

हुआ ये की मेरे मम्मी पापा को एक रिश्तेदार की शादी में बंगलौर जाना था। उन्हें वापस आने में लगभग १५ दिन का टाइम लग जाता। वो लोग चले गए। अब घर पर मैं और मेरी बहन ऋतू थे। ऋतू ने खाना बनाया और हम दोनों खाकर अपने अपने कमरे में लेट गए जाकर। मैं अपने मोबाइल में पोर्न देखने लगा क्यूंकि मेरा मुठ मारने का बहुत मन था। लगभग आधे घंटे बाद मुझे महसुसु हुआ की कोई मेरे साथ और देख रहा था। मैंने ध्यान दिया तो वो ऋतू थी। मैं चौक गया। मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और उससे बोलै – अरे तुम कब आयी ? वो बोली – भैया, मुझे डर लग रहा था इसीलिए बस अभी आयी। मुझे पता था की वो देर से खड़ी थी। खैर, मैंने बोलै -ठीक है, साथ में लेट जाओ। वो लेट गयी। मैंने पूछा – तुमने कुछ देखा तो नहीं ? वो बोली- क्या ? मैंने कहा -अरे मैं फ़ोन में कुछ देख रहा था। वो बोली – नहीं, मेरे आने पर तो आपने फ़ोन बंद कर लिया था। खैर, हम दोनों सो गए।

पोर्न देखने की वजह से मेरा लैंड खड़ा था और बिना मुठ मारे वो बैठेगा नहीं ये मुझे पता था। जब मुझे लगा की ऋतू सो गयी है तो मैंने मोबाइल निकाला, ईरफ़ोन लगाए और फिर से पोर्न देखने लगा और पेंट के अंदर लैंड सहलाने लगा। अचानक से ऋतू बोली – भैया, कुछ हिल रहा था। मैं डर गया, मैंने झट से मोबाइल बंद किया और पूछा कहाँ ? वो बोली -आपकी कमर के पास। असल में मैं लैंड हिला रहा था और वो उसी को बोल रही थी। मुझे भी पता है इतनी अनजान वो है नहीं जितनी बन रही है। मैंने बोलै – कुछ नहीं, सो जाओ। वो बोली – अरे भैया दिखाओ न क्या हिल रहा था। मैंने कहा – अरे वो तेरे मतलब की चीज नहीं है। वो बोली – मेरे ही मतलब की चीज है और आपके मतलब की चीज मेरे पास है। मैं चौंक गया। वो फिर बोली – मैंने सब देख लिए है और मैं मम्मी-पापा को बता दूंगी। मैं उससे रिक्वेस्ट करने लगा की नहीं, प्लीज् नहीं बताना। वो बोली – चलो फिर, जल्द से दिखाओ। मैं शर्मा गया और आँखें बंद कर के मैंने चादर हटा दी। ऋतू मेरे खड़े लैंड को देखने लगी। वो बोली – अरे भैया, शर्माओ मत, घर की बात घर में रहेगी और मजे भी पुरे होंगे।

मैं समझ गया की मेरी बहन मुझसे कई कदम आगे है। मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा था की मैं क्या करूँ। मैंने खुद को काबू में किया लेकिन तब तक ऋतू मेरे लंड को सहलाना शुरू कर चुकी थी। अब जब खड़े लैंड पर ऐसे नरम हाथ हों तो किसी का भी मन डोल जाएगा। मैंने अब कहा – अब तू रुक। इतना कह कर मैं उसके ऊपर आ गया और उसको किश करने लगा। वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी।

अब मैंने उसके सलवार को उतार दिया और ब्रा को भी। उसके परकी टाइप के दूध हैं। अब मै उसे हाँथ से दबाते हुए उसके निप्पलस को अपनी ऊँगली से मसलने लगा और वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए सिस्कारियां लेने लगी।

मैंने ऋतू के दूध को अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से मसलते हुए चूसने लगा। वो भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहा आआअ आहा आआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए मेरे लंड को सहलाने लगी ऊपर से ही। | उसके बाद मैंने उसके पूरे कपडे उतार दिए और उसे लेटा दिया।

अब मैं उसकी टाँगे चौड़ी कर के उसकी चूत चाटने लगा। और उसके मुंह इ आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की सिस्कारियां निकलने लगी | अब मैंने भी अपने सारे कपडे उतार दिया और पूरा नंगा हो गया | उसके बाद उसने मेरे लंड को चाटना चालू कर दिया और अच्छे से मेरे लंड को चाटने लगी तो मैं भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए सिस्कारियां लेने लगा | फिर उसने मेरे लंड को अपने मुंह में डाल ली और चूसने लगी | मैं भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करने लगा। मुझे उसके लंड चूसने के तरीके से इतना मजा आ रहा था की मैं बस दस मिनट में झड़ गया। वो मेरे लैंड का सारा माल पि गयी।

जब मेरे लंड का माल निकल गया तो मैं निढाल होकर लेट गया। वो अब भी प्यासी थी। मैंने बोला – चलो अपना जादू को खड़ा करो। वो बोली – जो आज्ञा। अब वो बारी बारी से मेरे लंड और गोटों से खेलने लगी। मेरे लंड में हरकत होने लगी। अब उसने अपने दोनों दूधों के बीच में मेरे लंड को फंसाया और फिर ऊपर निचे करना शुरू कर दिया। अब मैंने आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः करना चालु कर दिया। मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था।

मैंने ऋतू को लिटाया और उसके पेट पे किस करने लगा। उसको मजा आ रहा था। मैंने फ़ोन की टोर्च आन की तो उसका कतीला बदन मुझे उसकी ओर खींच रहा था। मैं उसको चूमते और चांटे ही जा रहा था। करीब आधे घंटे तक मैंने उसके दूध और शरीर को चाटा। मैंने अब उसकी चूत में ऊँगली से अंदर बाहर करना शुरू कर दिए और वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः करने लगी।

अब उससे रहा नहीं जा रहा था। वो बोली – भैया, अब और न तड़पाओ, चोद भी दो मुझे। मैंने बोला -ठीक है , चोद रहा हूँ। मैंने उसकी चुत पर लंड टिकिया तो वो फिसल गया। मुझे पता चला गया इसकी चूत टाइट है क्रीम लगा के चोदना पड़ेगा। मैंने क्रीम लगायी और उसकी चूत में जैसे ही लंड डाला वो चिल्लाने लगी। मैंने धीरे धीरे उसके अन्दर लंड डाला और उसको किस भी करता गया | फिर धीरे धीरे उसकी चूत में मेरे पूरा लंड चला गया और अब चुदाई अच्छे से होने लगी। वो भी मस्ती में आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः करती रही और चुदती रही गांड हिला हिला के |

पोजीशन बदलने के लिए कहा और मैं खुद लेट गया। वो मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लैंड को अपनी चुत में लेकर उछलने लगी। वो जोर जोर से आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः कर रही थी। मुझे जोश आ गया। मैंने उसकी कमर को पकड़ा और जोर छूट को चोदना शुरू कर दिया।

उसके बाद मैंने उससे कहा मेरा लंड चूसो। वो उठी और मेरा लंड चूसने लगी। वो मेरा लंड गले तक ले रही थी और मुझे मज़ा आरा हा था। मैं मस्ती में आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः कर रहा था | फिर मैंने उसको चोदना चालु किया और वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः करते हुए झड़ गयी और मैं भी झड़ गया।
 
दोस्तों, सुबह जब मैं उठा तो ऋतू नंगी ही मेरे साथ में लेती हुई थी। उसका कमसिन बदन देख कर मेरे लंड में फिर से जान आ गयी। मैंने उसे उठाया और किश किया। हम दोनों ने प्लान किया की आज बाथरूम सेक्स करते हैं। फ्रेश होने और ब्रश करने के बाद हम दोनों एक साथ बाथरूम में चले गए और शावर ों कर लिया। ऊपर से बारिश जैसी पानी की बूंदें और साथ में सेक्सी बहन.. क्या नजारा था। हम दोनों एक दूसरे को किस करने मजे जुट गए। किश करते करते मैंने उसको लव बाईट दे दिया। वो मुस्कुरा पड़ी और उसने मुझे भी लव बाईट दे दिया।

फिर मैंने उसके बूब्स को चूसना शुरू कर दिया। बूब्स को चूसते हुए मैंने उसकी चुत को सहलाना भी शुरू कर दिया था। वो मस्त होकर जोर जोर से आ आ हा आ ऊ ऊन्न्ह ऊ ऊ म्म्ह ऊ उ म्म ऊ उन्न्ह अ हहा आ अ हा अ अह ह हा ह ह हाआअ अ ह हहा आ ऊ उ न्न्ह ऊउम् म् ह ऊनंह ऊ उम्म् म् ह अ ह ह हा आ आ अ आहाआआ उ न् ह ऊ उन् न्ह ऊ उ म्म्ह आहा आआ आ हा ऊ उम् म् ह ऊ उन् न्ह आअ हाआ अ करने लगी।

जब उसकी चुत का पानी निकाल गया तो वो बैठ गयी और मेरे लंड को चाटने लगी | मेरे मुंह से आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की सिस्कारिया निकलने लगा। वो बहुत अच्छे से मेरे लंड को चाट रही थी। मैं भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए मजे लेने लगा। मेरे लंड को चाटने के बाद उसने मुंह में भर ली मेरे लंड को और सुपाडे को चाटते हुए चूसने लगी ऊपर नीचे करते हुए। मैं भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए सिस्कारिया लेने लगा।

अब मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया और उसके होंठ में अपने होंठ रखते हुए किस करने लगा। वो भी मेरा साथ देते हुए मेरे गले में हाँथ डाल ली और मेरे होंठ को चूसने लगी। फिर मैं उसके दूध को मसलने लगा। वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ कार्टर हुए सिस्कारिया लेने लगी। उसके मस्त दूध देखकर मुझे जोश आ गया और मैं उसके निप्पल और जोर से चूसने लगा तो वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए मेरे सिर के बालो को सहलाने लगी।

अब मेरा निशाना उसकी चुत पर था। उसकी चूत एक दम चिकनी चूत थी यार। मैंने उससे पूछा कि तुम अपनी चूत चिकनी ही रखती हो क्या ? तो उसने कहा कि हाँ मैं रोज सुबह उठ कर अपनी चूत के बाल साफ करती हूँ। फिर मैंने उसे उठा कर अपने कंधे पर रखकर उसकी टाँगे चौड़ी कर के उसकी चूत में अपनी जीभ लगा कर चाटने लगा। उसके मुंह से आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की सिस्कारिया निकलने लगी। वो भी गरम हो चुकी थी और मैं भी। मैं उसकी चूत को जीभ से चाटते हए उसकी चूत की झिल्ली को अपने होंठ में दबा कर चूसने लगा और वो भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी |

मैंने अब और देर करने सही समझा और उसकी एक टांग उठा कर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पे टिकाया और धीरे धीरे उसकी चूत में डालने लगा। वो अपने होंठ को कास कर दबा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी | फिर जब मेरा लंड उसकी चूत में चला गया तो मैं धीरे धीरे पेलने लगा और उसके मुंह से आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की आवाज निकलने लगी | फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से चोदने लगा उसके मुंह से भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की आवाज जोर जोर से आने लगी | फिर मैंने उसे घोड़ी बना दिया और चोदने लगा और वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए अपने दूध को मसलने लगी | करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं उसकी गांड के ऊपर झड़ गया। अब मैं कभी भी उसकी चूत की खुजली मिटा दिया करता हूँ।

अब मम्मी-पापा के वापस आने की तारीख नजदीक आ रही और इसका मतलब ये भी था की अब हम दोनों ऐसे खुल के चुदाई नहीं कर पाएंगे। मैंने ऋतू से कहा – ऋतू, मेरी एक इच्छा है। वो बोली – बोलो भैया। मैंने कहा -मुझे तुम्हारी सेक्सी गांड मारनी है। वो पहले तो बोली की बहुत दर्द होगा लेकिन फिर मान गयी। उसको भी पता था की मम्मी पापा के आने के बाद छह कर भी वो मेरी ये इच्छा पूरी नहीं कर पाएगी। उसने कहा – चलो, लुब्रीकेंट या क्रीम ले आना और फिर रात में क्र लेना। मैं खुश हो गया। मैं दिन में जाकर लुब्रीकेंट ले आया और रात का इंतजार करने लगा। हम दोनों खाना खाया और फिर गए।

मुझे रहा नहीं जा रहा था अब। मैंने उसको पकड़ा लिया तो उसे भी मेरे होंठ में अपने होंठ रख दिए और मेरे होंठ को चूसने लगी | मैं भी चुदासा था तो मैं क्यू हाँथ आया मौका छोड़ता | मैं भी उसका साथ देते हुए उसके होंठ को चूसने लगा | वो मेरे होंठ को चूसते हुए मेरे लंड को पकड के हिलाने लगी | मैं भी उसके होंठ को चूसते हुए उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।

फिर उसके बाद मैंने उसकी सलवार और सूट को उतार दिया और उसके ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध को मसलने लगा। वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए मेरे हाँथ को सहलाने लगी। फिर मैंने उसके ब्रा के भी खोल दिया और फिर उसके मस्त दूध को अपने मुंह में ले कर चूसने लगा और वो आ आ हाआ ऊ ऊन्न्ह ऊऊ म्म् ह ऊउम् म ऊ उन् न्ह अहहा आ अ हाअ अहहहा ह हहा आअ अह हहाआ ऊ उन् न्ह ऊ उ म् म् ह ऊनंह ऊउ म्म्म् ह अह हहाआ आ अ आहा आआउ न्ह ऊउन्न्ह ऊ उम् म्ह आहा आआआ हा ऊउम् म्ह ऊउ न्न्ह आअहाआअ करते हुए कहा कि पी लो जान मेरे इन भरे हुए दूध को। मैंने भी कहा हां मेरी बहना जान और मसल मसल के उसके दूध पीने लगा। उसके मुंह से लगातार आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की आवाजे निकल रही थी और उसकी चूत भी गीली हो चुकी थी।

उससे भी कण्ट्रोल नहीं हुआ और वो मेरे लंड को पकड़ के चाटने लगी और लंड के सुपाडे पर अपनी जीभ फेरने लगी। मैं भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए सिस्कारिया लेने लगा | मेरे लंड को वो बहुत अच्छे से चाट रही थी ऐसा लग रहा था जैसे स्वाद ले रही हो।

मेरे लंड को चाटने के बाद उसने अपने मुंह में डाल लिया और ऊपर नीचे करते हुए चूसने लगी | मैं भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए उसके दूध के निप्पलस को मसलने लगा। वो मेरे लंड को अपने गले तक ले रही थी | उसकी लार मेरे लंड से टपकते हुए मेरे अन्टोलो को भिगो रही थी। उसके बाद मैंने उसे बेड पर घोड़ी बना दिया और उसकी चूत और गांड दोनों को चाटने लगा। वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए मजे लेते हुए अपने दूध को दबाने लगी | फिर उसने कहा कि भैया अब चोद दो मुझसे नही रहा जा रहा है। तो मैंने कहा ठीक है और सीधा उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और चोदने लगा। वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए बोल रही थी कि और चोदो मेरी चूत को फाड़ दो इस भोसड़ी को। मैं भी उसकी चूत को जोर जोर से चोदने लगा और वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करने लगी।

अब मैं बोलै – चलो बहना, तैयार हो जाओ। वो समझ गयी की अब उसकी गांड की बारी है। मैंने उसकी गनद के छेद पर ढेर सारा लुब्रीकेंट लगाया और अपने लंड पर भी। उसकी गांड पर टिका कर मैंने जोर का झटका दिया। वो रो पड़ी। मैंने लैंड बाहर निकाला और फिर से डाल और गांड में डाल दिया | उसे दर्द नहीं हुआ तो मैं समझ गया कि ये गांड भी चुदवाती है | फिर मैं उसके दोनों दूध को पकड के उसकी गांड मारने लगा और वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए सिस्कारिया लेने लगी | मैं उसकी गांड पे थप्पड़ मारते हुए चोद रहा था और वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए गांड चुदाई का मजा ले रही थी | उसके बाद मैंने उसकी गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया |

हम लोग अब जब भी मौका मिलता है, चुदाई कर लेते हैं।
 
दीदी की तूफानी चुदाई

दोस्तो, मेरा नाम राकेश उर्फ़ रॉकी है. मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और मेरी बड़ी बहन रूबी है. मेरी उम्र 28 वर्ष है. मेरी बहन इस समय 30 वर्ष की है. यह घटना आज से लगभग 10 साल पहले की है.

मेरी बहन रूबी दिखने में एकदम मस्त माल दिखती है. उसका गोल गोल भरा हुआ बदन और एकदम गोरा रंग है. मेरी बहन के मम्मों का साइज़ अभी 40 का है. उस समय लगभग 36 का रहा होगा. उसकी गांड को छिपाए हुए उसके मस्त चूतड़ एकदम गोल-गोल थे.

खैर उस समय रूबी घर से दूर एक चंडीगढ़ में हॉस्टल में रह कर कॉलेज में पढ़ती थी और मैंने अपने 12 वीं की परीक्षा दे रखी थी. कुछ दिन बाद बहन के एग्जाम भी पूरे हो चुके थे, तो मम्मी ने कहा- जाओ, अपनी दीदी को घर ले आओ.

मैं अपनी बहन को लेने उसके हॉस्टल चला गया. अगले दिन शाम को हमारी ट्रेन 7 बजे थी. हमारी बर्थ कन्फर्म नहीं थी, परन्तु हम दोनों स्टेशन आ गए और मैंने टीटी को 200 रूपये देकर स्लीपर कोच में एक बर्थ कन्फर्म करवा ली.

हम दोनों जाकर सीट पर बैठ गए और ट्रेन चल पड़ी. करीब 9 बजे हमें नींद आने लगी. हमने बैग से कम्बल निकाला और ओढ़ लिया. टीटीई ने मुझे बताया था कि आगे जाकर सीट कन्फर्म हो जाएगी, शायद किसी स्टेशन पर बहुत सारी सवारियां उतरने वाली थीं.

जिस कम्पार्टमेंट में हम दोनों थे, उसमें एक बूढ़े लोगों का बड़ा समूह यात्रा कर रहा था. उन सभी को आगे आने वाले किसी स्टेशन पर उतरना था, जिस वजह से उन सभी ने शाम से ही अपने बिस्तर जमा लिए थे और वे सब सो गए थे.

कुछ देर बाद रूबी ने भी मुझसे कहा- भाई मुझे नींद आ रही है.

मैंने कहा- ठीक है … तुम सो जाओ.

वो बर्थ पर लेट गयी और वो अपना सिर मेरी गोद में रखकर लेट गयी. मैं खिड़की के सहारे बैठा था और रूबी आराम से मेरी गोद में सिर रखकर सो रही थी.

एक घंटे बाद लगभग सभी लाइटें बंद हो गईं … तो मुझे भी नींद आने लगी. तभी एकदम से मेरी दीदी ने करवट बदली और अपना मुँह मेरी तरफ कर दिया, जिससे उसकी गर्म सांसें मेरी पेंट की ज़िप से होकर मेरे लौड़े को छू रही थीं. अचानक से मेरे दिल में एक कंपकपी सी छूट गयी. उसकी गर्म सांसों की वजह से मेरे लौड़े का साइज़ बढ़ने लगा और कुछ ही देर में मेरा लौड़ा पूरे जोश में आ गया. मैं जितना रोकने की कोशिश करता, यह उतना ही ज्यादा जोश मारता. मेरा लौड़ा अब उसके मुँह और होंठों को टच कर रहा था.

तभी दीदी ने अचानक से अपना हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया. मैं एकदम से घबरा गया. लेकिन थोड़ी देर तक उसने कुछ नहीं किया, तो मुझे लगा कि वह सो रही है.

ट्रेन तेज़ गति से आगे बढ़ रही थी, उससे भी तेज़ मेरी धड़कन चल रही थी. फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके उसकी कमर पर हाथ रख दिया.

‘आह्ह्ह …’ उसकी कमर छूते ही जैसे मुझे करंट लगा. कितनी मस्त थी यार … क्या बताऊं. फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को थोड़ा खिसका कर अन्दर हाथ डाल दिया और उसकी कमर को धीरे-धीरे सहलाने लगा. मेरा लौड़ा और ज्यादा कड़क हो गया था. फिर मैंने अपने लौड़े पर रूबी के मुँह का दबाव महसूस किया. उसकी सांसें भी बहुत तेज़ी से चल रही थीं.

तब मुझे लगा कि शायद वो जाग रही है और उसको भी मजा आ रहा है. इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गयी और मैंने उसकी पूरी कमर पर हाथ फेरना चालू कर दिया.

फिर मैंने उसकी बगल के नीचे से उसके मम्मों को पहली बार छुआ.

इस्स्स्स … आअह्ह … क्या अहसास था वो. उसके मुलायम दूधिया मोटे मोटे चुचे थे.

मैं पूरे जोश में आ गया और उसके मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा. वह एकदम से कसमसा उठी.

पहले तो मैं घबरा गया और मैंने अपना हाथ हटा लिया. फिर मैंने धीरे से महसूस किया कि उसने मेरी ज़िप खोल दी और अंडरवियर को हटा दिया. मेरा लौड़ा एकदम से फनफनाता हुआ बाहर आ गया था. उसने लपककर मेरे लंड पर एक किस जड़ दी. मेरा जोश का ठिकाना न रहा.

अब हम दोनों भूल चुके थे कि हम दोनों सगे भाई-बहन हैं. मैंने तुरंत उसकी टी-शर्ट ऊपर करके उसकी ब्रा को खोल दिया और उसके मोटे मोटे मम्मों को मसलना शुरू कर दिया.

फिर मैंने भी एक हाथ से उसकी जीन्स का हुक खोलकर उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया. उसकी चूत एकदम क्लीन शेव थी. उसकी चिकनी चूत को छूते ही उसने पानी छोड़ दिया.

मैंने इधर उधर देखा, सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे और हम दोनों भाई बहन एक दूसरे को चूसने में मस्त थे. हमने कम्बल को ठीक से ओढ़ लिया और रूबी अब मेरे लौड़े को जोर जोर से चूसने लगी थी. मेरे लंड के सुपारे को आगे पीछे करके जोर जोर से लंड चूस रही थी. मेरी जोर जोर से सिसकारियां निकल रही थीं.

तभी बीच में एक स्टेशन आ गया और ट्रेन से बहुत सारी सवारियां उतर गईं. हमारा कम्पार्टमेंट लगभग खाली हो चुका था. जिधर हम दोनों लेटे थे, उधर तो एक भी सवारी नहीं रह गई थी.

ट्रेन फिर से चल पड़ी और हम दोनों फिर से शुरू हो गए. अब मैदान भी साफ़ था और कोई हमें देखने वाला भी नहीं था. मैंने बेखौफ उसकी जीन्स और पैंटी पूरी उतार दी और उसके ऊपर चढ़ गया. ऊपर से कम्बल ओढ़ा हुआ था. हम दोनों किस करने लगे.

‘आह्ह उह्ह … उम्म …’ क्या मस्त अहसास था वो … शायद हम दोनों का पहला अहसास था.

अब हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे लौड़े द्वारा चुदने वाली पहली चूत मेरी सगी बहन की ही होगी.

रूबी मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर चढ़ा था. अपनी छाती से मैं उसके मोटे मोटे मम्मों को रगड़ रहा था और मेरा 8 इंच का भारी भरकम लौड़ा उसकी चिकनी चूत पर टच हो रहा था. हम दोनों से रहा नहीं जा रहा था.

उसने धीरे से मेरे कान में कहा- भाई, अब लंड अन्दर डाल दो.

मैं उसके मुँह से लंड डालने की बात बहुत ज्यादा जोश में आ गया और अंधेरे में ही तीर चला दिया. परन्तु निशाना चूक गया और मेरा लौड़ा फिसल कर नीचे चला गया. मैंने दुबारा फिर से कोशिश की, परन्तु नाकाम रहा. उसने अपनी टांगें पूरी खोल दीं. मैंने तीसरी बार फिर से प्रयास किया, परन्तु उसकी चूत इतनी टाईट थी कि मेरा लौड़ा अन्दर नहीं जा रहा था.

उसने मेरी तरफ सवाल भरी निगाहों से देखा … तो मैंने कहा जानेमन मैं सोच रहा था कि आराम से काम हो जाए, पर अब लगता है जोर लगाना पड़ेगा.

उसने कहा- तो लगा न चूतिये … रोका किसने है.

मेरी बहन के मुँह से ये शब्द सुनकर मैं चौंक गया और ज्यादा जोश में भी आ गया. हम दोनों उठकर बैठ गए. मैंने उसको इशारा किया और वो तुरंत मेरी गोदी में आकर बैठ गयी उसने अपनी चूत मेरे लौड़े पर टिकाई और जोर लगाया, परन्तु लौड़ा अन्दर नहीं जा रहा था.

मैंने उसको कंधों को पकड़ा और थोड़ा ऊपर उठा कर कहा- पूरा जोर लगाकर गिरना.

उसने वैसा ही किया और हम दोनों के संयुक्त प्रयास से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया.

अआह्ह्ह … वह जोर से चिल्लाने को हुई, मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया. मेरी बहन दर्द से छटपटा उठी. उसकी आंखों से आंसू बह निकले. ये आंसू हमारे प्यार के आंसू थे.

अब मैं उसको किस करने लगा और उसके बूब्स चूसने लगा, जिससे उसका दर्द कुछ कम हुआ. फिर मैंने थोड़ा नीचे सरकते हुए एक जोरदार झटका मारा.

‘ऊउईइ माँ … मर गई …’ उसकी आह निकली और मेरी बहन की चूत से खून रिसने लगा.

आह दोस्तो … क्या बताऊं उस समय की मेरी फीलिंग्स.

फिर मैंने एक और जोरदार धक्का मारकर अपना 8 इंच का लौड़ा उसकी चूत की गहराई में उतार दिया. वो दर्द के मारे छटपटाने और रोने लगी. लेकिन मैंने उसकी चीखों पर कोई ध्यान नहीं दिया, बस उसके दूध मसलता रहा.

अब मैं धीरे धीरे उसको चोदने लगा.

‘अआह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ अआह स्स्स्स.’

कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगा और हम दोनों जोर जोर से चोदन में लग गए. हमारे आस-पास की सभी सीटें खाली थीं, तो हमें कोई डर नहीं था.

अब हमने अपना कम्बल भी उतार दिया. उस टाइम हम दोनों ने पहली बार एक दूसरे के बदन को देखा. उसकी हसीन नंगी जवानी को देख कर मेरी आआह्ह्ह निकल गई. अब मैं अपनी रूबी दीदी को जोर जोर से चोदने लगा था. ट्रेन की स्पीड के साथ-साथ मेरी स्पीड भी बढ़ती जा रही थी.

फिर मैंने उसको बर्थ पर घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में अपना लम्बा मोटा लौड़ा डाल कर चोदने लगा.

आःह आआह ह्हह …

हम दोनों भाई बहन पूरे जोश में लगभग 20 मिनट तक चोदने में लगे रहे और हम दोनों एक साथ ही झड़ गए.

उस रात फिर मैंने अपनी रूबी दीदी को 2 बार और चोदा और उसके बाद घर पर भी जब हमें मौका मिलता, मैं उसको जोरदार तरीके से चोद देता.

अब से 2 साल पहले उसकी शादी हो गयी. शादी से पहली रात भी मैंने उसकी चुदाई की. परन्तु शादी के बाद मेरी दीदी ने चुदाई से मना कर दिया.

दो साल बाद भी उसको कोई बच्चा नहीं हुआ, तो एक दिन वह मेरे पास आकर रोने लगी और मुझे बताया कि वह अपने पति से संतुष्ट नहीं है.

अब मैं इस असमंजस में हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए? क्या शादी के बाद यह सब ठीक है?
 
वो रसीले होंठ

दोस्तो, पसन्द तो मैं दीदी को बचपन से ही करता हूं। जब से लन्ड जवान हुआ है तब से ही मैं उनके हुस्न का दीवाना हूँ। स्कूल में जब दीदी स्कर्ट में गांड मटकाते हुए चलती थी तो मेरा लन्ड मचल उठता था। मैंने कई बार अपनी बहन के बारे में सोच कर मुठ मारी है. मगर खुल कर कभी प्रयास नहीं किया था.

यह बात तब की है जब मैं फर्स्ट ईयर में था। छुट्टियों में घर आया हुआ था. मुझे नहीं पता था कि इन छुट्टियों में मुझे एक खुशबूदार चूत मिलने वाली है.

प्रीति:

मैं छत पर बैठी रो रही थी, मेरे हाथों में शराब की बोतल थी। वैसे मैं शराब पीने की आदी नहीं थी. लेकिन आज कुछ हुआ ही था ऐसा कि मुझे पीने की जरूरत आन पड़ी थी.

“दीदी आप यहाँ है, वहाँ पार्टी में सब आपका इन्तजार कर रहे हैं.”

“तू चल मैं आती हूँ.” मैं रुंधी सी आवाज में बोली.

“दीदी आप रो रही हो?” वो मेरे पास आते हुए बोला.

“नहीं ऐसा कुछ नहीं है.” मैंने आँसू पौंछते हुए कहा.

“आप रो रहे हो … और ये शराब कब से पीने लगे आप?” थोड़ी गम्भीर आवाज में उसने बोला.

“मैं नहीं रो रही. मैंने कहा न कि तू चल, मैं आती हूँ.”

विशाल घुटनों के बल मेरे सामने बैठ गया। मेरा हाथ पकड़ कर बोला- क्या हुआ है दीदी? प्लीज बताओ, मैं प्रोमिस करता हूं मैं आपकी हेल्प करूँगा.

मैं अभी भी चुप थी, मेरा भाई फिर बोल पड़ा- दीदी, आप मुझ पर भरोसा कर सकते हो. ये बात हम दोनों के बीच ही रहेगी प्रोमिस!

उसके इस अंदाज पर मैं पिघल गयी। उसकी बांहों में लिपट कर रोने लगी। उसने भी गले लगा कर मुझे सहारा दिया। लेकिन आप सब जैसा सोच रहे हैं वैसे नहीं। मैंने उसे फोन में व्हाट्सएप खोल कर थमा दिया जिसमें अश्विन और मेरे चैट्स खुले थे।

अश्विन उर्फ आशू मेरा एक्स बॉयफ्रेंड था। तीन महीने पहले हमारा ब्रेकअप हो गया क्योंकि वो बड़ा ही कमीना था। उसने मेरे साथ धोखा किया था। धोखे में मुझे मजबूर कर अपने एक दोस्त से चुदवा दिया और उसका वीडियो बना लिया। अब मुझे ब्लैकमेल कर रहा था। जब मन करता मुझे बुला कर अपनी वासना बुझाता।

मैं मजबूर थी।

आज के दिन भी वो मुझे अपने एक दोस्त के नीचे चुदने के लिए बुला रहा था।

दोस्तो, चुदाई या सेक्स अपनी जगह है लेकिन वो मेरा पहला प्यार था. दिल से चाहती थी उसे. मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि वो मेरा इस कदर फायदा उठाएगा। मैं पूरी तरह टूट चुकी थी।

“बहनचोद …” चैट्स पढ़ कर विशाल गुस्से में चिल्लाया.

मैं तो डर ही गयी. उसका चेहरा गुस्से से लाल था। लेकिन दूसरे ही पल वो मेरे सामने घुटनों पर था.

मेरा हाथ पकड़ कर बोला- दीदी आप टेंशन ना लो, इसे मैं देखता हूँ. आज आपका बर्थडे है. आपको सब पार्टी में खोज रहे हैं. बस जल्दी से तैयार होकर नीचे आओ.

मैंने हाँ में सिर हिलाया और वो चला गया। मैं तैयार होकर नीचे आ गयी. पार्टी में सबके साथ एन्जॉय करने लगी। लेकिन मेरी गांड फटी पड़ी थी क्योंकि मेरा मोबाइल भाई के पास ही था। व्याकुलता में रात कटी. पता नहीं था कि वो क्या करने वाला है।

सुबह मुझे विशाल ने अपने साथ कॉलेज चलने को कहा; मैं चल पड़ी। जैसे-जैसे वो बोलता गया मैं करती गयी।

उसने बाइक पार्किंग में रोकी। कुछ दूरी पर आशू और उसके दोस्त बैठे थे। उसने रास्ते भर से ही मुझे समझा रखा था। मैं आशू और उसके दोस्तों की ओर बढ़ी. आशू के साथ उसके चार दोस्त बैठे थे।

मुझे उनकी तरफ आता देख एक ने बोला- वो देख आ गयी आशू की रंडी!

फिर सब हँसने लगे।

आशू- क्यों री … कल बुलाया तो क्यों नहीं आई?

“देखो मैं ऐसा वैसा कुछ नहीं करने वाली अब, वैसे भी हमारा ब्रेकअप हो चुका है.”

आशू- सुबह-सुबह चढ़ा कर (दारू पीकर) आयी है क्या, तुझे पता है न मैं क्या कर सकता हूँ?

वो मेरा वीडियो कॉलेज ग्रुप में डालने की धमकी देने लगा. बोला कि मुझे पूरे कॉलेज के सामने नंगी कर देगा. मैं डर के मारे चुप हो गयी.

विशाल पीछे से आते हुए- क्या कर लेगा तू?

आशू- तू कौन है बे? प्रीति का नया कस्टमर है क्या?

बस इतना कहना था कि भाई ने एक पंच दे मारा आशू के थोबड़े पर. तभी उसके चारों दोस्त भी मेरे भाई पर टूट पड़े. विशाल 6 फिट लम्बा और शरीर से काफी तगड़ा था. स्कूल के दिनों से ही बॉक्सिंग कर रहा था. दो मिनट में ही उसने सबको धो डाला.

चारों में से कोई नहीं उठ पाया.

आशू- इसका अंजाम बहुत बुरा होगा.

मेरी ओर देखते हुए उसने कहा.

विशाल ने अपनी जेब से एक पेन ड्राइव निकाला और आशू की जेब में डालते हुए फुसफुसाकर बोला- इसको पूरे कॉलेज में बांट देना, तुझे तेरी औकात पता लग जायेगी.

आशू का चेहरा उस समय देखने लायक था. उस दिन के बाद से मेरा भाई कॉलेज की लड़कियों का हीरो बन गया. मैं भी खुश थी कि आशू जैसे लड़के के साथ ऐसा ही होना चाहिए था. उस दिन के बाद से हर लड़की मुझसे मेरे भाई विशाल के बारे में ही पूछती रहती थी.

सब कुछ ठीक चल रहा था. मेरे भाई के प्रति मेरे मन में सेक्स जैसे कोई भाव नहीं थे जब तक कि मेरी दोस्ती आयशा के साथ न हुई थी. आयशा आशू की गर्लफ्रेंड थी. आयशा के होते हुए भी आशू मुझे ही चोदता था.

आशू के साथ लड़ाई होने के बाद आयशा ने उसके साथ ब्रेकअप कर लिया था. अब वो मेरी अच्छी दोस्त बन गयी थी. एक दिन वो ग्रुप स्टडी के लिए मेरे घर आई थी। हम दोनों पढ़ाई कम और इधर उधर की बातें ज्यादा कर रहे थे।

“यार तेरा भाई बड़ा डैशिंग है.” आयशा बोली.

मैं- हा हा हा … कॉलेज की बाकी लड़कियां भी यही सोचती हैं, मेरे से उसका नम्बर मांगती हैं.

वो बोली- हां यार … कसम से, तेरे भाई को देख कर तो चूत मचल उठती है.

मैंने कहा- चुप कर! कुछ भी बोलती रहती है.

आयशा- यार काश मेरा भी तेरे जैसा कोई भाई होता!

मैं- तो क्या करती फिर तू? मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा.

वो बोली- तो फिर बाहर मुँह मारने की जरूरत ही नहीं पड़ती, घर में ही इतना हॉट लौड़ा मिल जाता.

मैं हैरान होते हुए- चुप कर! ऐसे थोड़ी न होता है?

वो बोली- अरे, होता है मेरी जान. मेरी एक कजिन है. वो भी चुदवाती है रोज अपने भाई से!

हैरानी से मैंने कहा- चल झूठी, ऐसा केवल कहानियों में होता है.

आयशा- सच में भी होता है डियर, वैसे तुझे भरोसा नहीं तो मैं मिलवा दूंगी, तू खुद पूछ लेना.

मैंने कहा- सच्ची?

वो बोली- और क्या… मैंने तो अपनी मां को भी कई बार अपने मामा के साथ देखा है. वो दोनों कई बार चुदाई करते हैं. कई बार तो मैंने उनको सेक्सी बातें करते हुए भी सुना है.

“धत्त… सही में?” मैंने आश्चर्य से पूछा.

वो बोली- हां सच्ची यार, जब भी मेरे मामा विदेश से आते हैं तो वो दोनों मुझे किसी न किसी बहाने से घर के बाहर भेज देते हैं. पापा तो बचपन में ही गुजर गये थे. इसलिए मां अपने भाई के साथ ही काम चला लेती है.

कुछ देर की चुप्पी के बाद मैंने पूछा- पर यार, सगे भाई के साथ कैसे हो सकता है ये सब?

मैं इससे आगे कुछ कहती इससे पहले ही वो बोल पड़ी- अरे बहुत फायदे हैं … देख! पहले तो घर मे ही लौड़ा मिल जाएगा. जब मन करे, चुद सकती है. दूसरा फायदा ये कि घर का है तो तू ट्रस्ट कर सकती है. आशू की तरह तुझे धोखा खाने का डर भी नहीं रहेगा. तीसरा फायदा ये कि घर वालों की टेंशन भी वही लेगा. तुझे तो बस चुदाई के मजे लेने हैं.

“हा हा हा … और?” मैंने हंसते हुए आयशा से पूछा.

वो बोली- सेफ सेक्स की गारंटी होती है. जब मन करे चुद लिया कर. अगर मेरा कोई भाई इतना सेक्सी होता तो मैं बॉयफ्रेंड ही नहीं रखती.

आयशा तो चली गयी लेकिन दिन भर ये बात मेरे दिमाग में घूमती रही।

“सेफ सेक्स की गारन्टी” बात तो कुतिया ने सही कही थी। हाँ ये अलग है कि वो मेरे भाई पर लाइन मार रही थी।

आयशा ने उस दिन मुझे मेरी फड़कती चूत का इलाज बता दिया था. मेरे दिमाग में खुराफात का बीज पड़ गया था.

एक दिन सुबह-सुबह मैं विशाल के कमरे में गयी तो केवल बॉक्सर में ही था. उसने शायद कुछ देर पहले ही वर्कआउट किया था. उसका कसरती बदन, मस्त डोले, चौड़ी छाती, सिक्स पैक ऐब्स, उसके मस्त कट्स देख कर मैं उसको देखती ही रह गयी. किसी बॉडी बिल्डर से कम नहीं लग रहा था वो। उसको देख कर किसी भी चूत का चुदने को मन कर जाये.

नाश्ता करने के बाद मैं और भाई मेरी मां के साथ मंदिर में दर्शन के लिए गये. हम लोग बाहर खड़े होकर मां का वेट करने लगे. विशाल से बात करने का अच्छा मौका था.

मैंने पूछा- तूने आशू के कानों में उस दिन ऐसा क्या कहा था जो वो अगले ही दिन मेरे पैरों में गिर गया था?

वो बात पलटने की कोशिश करते हुए बोला- छोड़ो न दीदी. बीत गयी तो बात गयी.

जोर देकर मैं बोली- नहीं बता, मुझे जानना है?

वो बोला- मैंने उसे एक पेन ड्राइव दी थी, उसकी करतूतों का चिट्ठा था उसमें. उसने जितनी भी लड़कियों के साथ सेक्स किया था उसके सारे वीडियो थे उसमें.

हैरानी से मैंने पूछा- लेकिन ये सब तुझे कहां से मिला?

विशाल- “आसान था, मैंने प्रीति बनकर उससे चैट की. उसका लंड खड़ा कर दिया. उसके कुछ वीडियो और फोटो मांग लिये. उसने अपने मोबाइल को कम्प्यूटर से कनेक्ट कर लिया. मैंने अपने एक दोस्त की मदद से उसका कम्प्यूटर हैक कर लिया और सारे वीडियोज और फोटोज गायब कर लिए.

“हे भगवान, तूने वो फोटोज देखे तो नहीं?” मेरी बात पर वो मूक बना खड़ा था।

“बोल, बोलता क्यों नहीं… ” मैंने गुस्से से पूछा.

विशाल बोला- सॉरी दीदी, मैं आपकी मदद कर रहा था.

उसकी बात सुनकर मैं वहीं पर सिर को पकड़ कर बैठ गयी. कुछ देर के बाद मैंने पूछा- तेरे दोस्त ने भी देख लिये?

“नहीं दीदी बिल्कुल नहीं, मम्मी कसम, उसने सिर्फ मेरी मदद की थी. मैंने सारी फ़ाइल डिलीट करवा दी. उसने कुछ नहीं देखा.”

मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गयी थी ये जान कर कि मेरा भाई मेरी नंगी फोटोज देख चुका है. मैं वहीं सीढ़ियों पर बैठ गयी. मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था. कैसे मैं आशू की बातों में आ गयी. आखिर क्यों मैंने उस पर भरोसा किया.

नतीजा यह हुआ कि मैं अपने भाई के सामने नंगी हो गयी थी.

मेरे चेहरे पर चिंता के भाव देख कर विशाल डर गया और वो मुझे मनाने लगा- सॉरी दीदी, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था. मैं तो आपकी हेल्प करना चाह रहा था. मैंने आपके कुछ फोटोज के अलावा कुछ नहीं देखा. मेरी नजर आपकी इज्जत आज भी वैसी ही है.

बात तो उसकी सही थी. उसने मुझे एक बड़ी समस्या से निकाला था। वैसे भी गलती उसकी नहीं मेरी थी। उसने तो मेरी हेल्प की थी। फिर मैं मान गयी। उसने भरोसा दिलाया कि वो सारे फोटो डिलीट कर चुका है.

उस दिन मेरे ज़हन में एक बात आयी। ये जानते हुए भी कि मैं कितनी बड़ी रण्डी हूं उसने मेरा फायदा नहीं उठाया। मेरी हेल्प की और मुझे इस समस्या से निकाला।

ये सोचते हुए आयशा की बात मेरे दिमाग में घूमने लगी ‘सेफ सेक्स की गारंटी!’

उस दिन के बाद से मेरे मन में एक भावना का उदय हो गया था. मेरे भाई का भोला चरित्र मेरे मन को भा गया था. मेरी नजर उसके लिए बदलने लगी थी. अब मैं छिप कर अपने भाई की सेक्सी बॉडी को निहारा करती थी.

घर में विशाल केवल बनियान और शॉर्ट्स में ही घूमा करता था. उसको अपनी बॉडी दिखाने का बहुत शौक था. मेरा भाई मुझे पसंद आने लगा था. वो सच में बहुत सेक्सी था.

मैं एक दिन पार्लर गयी और मैंने सिर को छोड़कर शरीर के सारे बाल हटवा लिए. अपनी चूत भी चिकनी करवा ली. मैं अपने ही घर में सेक्सी ड्रेस पहनने लगी. अपना चिकना बदन अपने भाई को दिखाने लगी. हमारी फैमिली वैसे भी काफी खुले विचारों वाली थी इसलिए कोई दिक्कत नहीं थी. सूट सलवार पहनने वाली लड़की अब एक सेक्सी माल बन चुकी थी.

मेरे इस नये अवतार को देक कर भाई भी हैरान था. उसकी नजर अक्सर मेरे बूब्स पर रहती थी. वो मेरे सेक्सी बदन को निहारा करता था. मैंने भी उसको जैसे खुली छूट दे रखी थी. कभी कभी तो मैं नीचे से ब्रा भी नहीं पहनती थी ताकि उसको मेरे कड़क निप्पल्स दिखाई दे जायें.

कई बार मैं विशाल को खुद ही मेरे बदन को छूने का मौका देती थी ताकि वो मुझे पटक कर चोद दे. मगर अभी तक मुझे बिल्कुल अकेले में ऐसा मौका नहीं मिल पाया था. वैसे तो हमारे कमरे भी अलग थे लेकिन मैं अपनी तरफ से पहल नहीं करना चाह रही थी. यदि मैं ऐसा करती तो उसकी नजरों में गिर जाती.

एक दिन भगवान ने मेरी तड़पती हुई चूत की पुकार सुन ली और मुझे मौका मिल ही गया. उस दिन मेरे छोटे मामा की शादी थी. मां और पापा पहले ही निकल चुके थे. हम दोनों के एग्जाम्स चल रहे थे. हम शादी के दो दिन पहले ही पहुंचने वाले थे.

पापा ने हमें बस से आने के लिए कहा. ट्रेन में कोई बुकिंग नहीं मिल रही थी. मुझे बसों में सफर करने में बिल्कुल भी रूचि नहीं थी इसलिए मैंने भाई को पर्सनल सवारी से जाने की इच्छा जताई. बाय रोड 8 या 10 घंटे का सफर था. हम लोग आसानी से कार से जा सकते थे. भाई भी कार से जाने के लिए मान गया और हम निकल पड़े.

अब विशाल के शब्दों में:

मौसम आज सुबह से ही खराब था। सुबह से ही बारिश हो रही थी। रास्ता लम्बा था। मैं धीरे धीरे कार चला रहा था। ट्रेन और बस के चक्कर में हमने काफी लेट कर दिया था। अन्धेरा होने को आया था.

हम लगभग आधे रास्ते तक ही पहुंचे थे। तभी तेज हवा के साथ बारिश होने लगी.

कुछ दूरी पर जाकर देखा तो हाइवे जाम हो गया था. कुछ लोगों से पूछने पर पता लगा कि तूफान की वजह से आगे रास्ता बंद कर दिया गया है. तूफान के समय में भूस्खलन का डर रहता है. हम भाई-बहन ने किसी होटल में रुकने का प्लान किया. हमें 2 किलोमीटर पैदल चलने के बाद एक होटल मिला.

पैदल चलते हुए हम भीग गये थे. जब होटल में पहुंचे तो होटल मैनेजर ने पहले ही कह दिया कि लाइट बारिश रुकने के बाद ही आयेगी. होटल में बिजली भी नहीं थी. मगर हमें लाइट से क्या करना था. हमें तो रात गुजारने के लिए छत चाहिए थी. चाबी लेकर हम भाई-बहन कमरे में आ गये. मैंने दीदी की ओर देखा तो वो पूरी की पूरी भीग गयी थी.

दीदी की भीगी हुई जुल्फें, गोरा सा चेहरा, सुर्ख लाल होंठ. उसने रेड कलर का सूट पहना हुआ था. उसका सूट भीग कर उसके बदन के साथ चिपक गया था. दीदी के उभार भी साफ नजर आ रहे थे. मगर बाकी दिनों की तुलना में थोड़े छोटे लग रहे थे.

बारिश में भीगी उस लड़की को देख कर लग ही नहीं रहा था कि वो मेरी बहन है. वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. मुझे पहली बार दीदी की खूबसूरती का अंदाजा हुआ था.

अब प्रीति के शब्दों में:

मैं भीगे बदन के कारण ठंड से ठिठुर रही थी।

भाई ने कहा- दीदी, आप भीग चुकी हो. कपड़े बदल लो.

हमने एक्स्ट्रा कपड़े लिए ही नहीं थे। सारे लग्गेज को हमने मां और पापा के साथ ही भेज दिया था.

उसने मुझे ठंड से ठिठुरती देख कर अपनी जैकेट ऑफ़र की। लेकिन मैं पूरी तरह भीगी हुई थी। उसके कपड़े उसके लैदर जैकेट की वजह से काफी हद तक बचे हुए थे।

कुछ देर बाद वो बोला- दीदी अगर आप बुरा न मानो तो आप मेरे कपड़े पहन सकती हो.

“और तू क्या पहनेगा फिर?” मैंने पूछा.

वो बोला- “मेरे पास है न. वैसे भी मैं भीगा नहीं हूं, मुझे जरूरत नहीं है”

चूंकि छोटे कपड़े तो मैं घर में भी पहनती थी। वैसे भी नंगी तो वो मुझे देख ही चुका था। उसे रिझाने का ये मौका मैं कैसे गंवा देती।

मैं कपड़े बदलने गयी तब तक उसने होटल वालों से कह कर अलाव का इंतजाम करवा लिया था। कुछ देर आग के सामने बैठे हुए हम बातें करते रहे। आग की गर्मी से हमें कुछ राहत मिली.
 
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