नाश्ता लेट किया था तो दोपहर में खाना नही खाया में सोता ही रहा. क्योंकि रात भी ठीक से नही सोया था और उस से पिछले रात तो तबीयत ही खराब हो गई थी.
इस लिए मा ने भी सोया हुआ छोड़ दिया.
शाम में सो कर उठा तो सर भारी सा लग रहा था.
उठ कर बाहर आँगन में आ गया.
सब आँगन में ही बैठे थे.
लल्लू- मा, मुझे क्यू सोने दिया दिन में. अब मेरा सर भारी सा हो गया है.
सोनम- भाई मेरे साथ आ में सर में तेल डाल करलिश कर देता हूँ.
सोनम दीदी मेरा हाथ पकड़ कर अपने कमरे की और ले जाती बोली.
में दीदी के साथ उसके कमरे में चला गया.
सोनम- भाई यहाँ बैठ.
दीदी मुझे एक सोफा पर बैठा कर खुद रॅक से तेल की बोत्टल लेने चली गई.
बोतल ला कर वो मेरे आगे खड़ी हो गई और मेरे सर में तेल डाल कर मेरे सर की मालिश करने लगी.
में आँख मुंडे मालिश का आनंद ले रहा था.
तभी मैने अपनी आँख खोली तो देखा की दीदी मालिश करते हुए अपने हाथ चला रही थी मेरे सर में तो उसी हिसाब से दीदी के गोल ठोस उभार भी वैसे ही हिल रहा था.
दीदी ने इस समय एक टी शर्ट पहना हुआ था जिस के नीचे उन्होने ब्रा नही पहना था जिस कारण मुझे मेरे आँखो के बिल्कुल नज़दीक दीदी का वो हिलता हुआ उभार और उस में से निकला चूचुक.
उउफफफ्फ़ मेरे बदन में एक लहर दौड़ गई.
पता नही मुझे क्या होने लगा.
में वो देख कर बिल्कुल बेचैन हो गया.
जल्दी से आँखे बंद कर में गहरी गहरी साँस लेने लगा.
सोनम- क्या हुआ भाई. ज़्यादा सर दर्द करने लगा.
तुम यहाँ बेड पर लेट जाओ.
दीदी मेरा हाथ पकड़ मुझे बेड पर ले आई और अपने गोद में सर रखने को कहने लगी.
सोनम- आ बही यहाँ सर रख कर लेट. अभी दर्द ठीक हो जायगा.
लल्लू- मुझे तो अब सर का दर्द ठीक हो गया लेकिन कही और दर्द करने लगा. दीदी को क्या कहता. वो बहुत ज़्यादा ज़ोर देने लगी तो में दीदी की गोद में सर रख कर लेट गया.
अब दीदी आराम आराम से मेरा सर सहलाती और दबाती जा रही थी.
में ऐसे लेटा था की मेरा मूह दीदी के पेट में टच हो रहा था.
दीदी का उभार मेरे गाल पर कभी कभी टच होता जब वो मेरा सर दबाते वक्त थोड़ी झुकती थी.
मुझे दीदी के बदन की खुसबु मदहोश करने लगी और में बिल्कुल शांत हो कर सो गया उस खुसबु को सूँघता हुआ.
पता नही क्या नशा था दीदी के बदन के खुसबु में.
जब आँख खुली तो सर दर्द नही था लेकिन रात हो गई थी.
चारो और अंधेरा फैल गया था.
में कमरे से निकल कर दूसरे कमरे में गया तो सब बहने वहाँ पढ़ रही थी.
सोनम- क्या हुआ भाई. कैसा है अब सर दर्द.
लल्लू- दीदी आप का हाथ दो मुझे. क्या जादू है आप के हाथो में. ( में दीदी का हाथ पकड़ कर उसे चूमते हुए कहा.)
सोनम दीदी शरमा कर नज़रे झुका ली.
रोमा- क्या हुआ भाई.
लल्लू- दीदी ऐसे मेरा सर दबाई की सर दर्द तो भाग ही गया साथ ही में भी सो गया जब की में पूरे दिन सो कर उठा था.
सब बहने मेरी बात सुन कर हँसने लगी.
मीनू- ऊहहो तो इसका मतलब है की दीदी के हाथ में सच में जादू है. भाई तुम ने अभी अपने होंठो से छुआ है दीदी के हाथ को देखना कही मूह ना बंद हो जाये तुम्हारा.
सोनम दीदी शरमाती हुई मीनू दीदी को मारने लगी.
सोनम- अच्छा भाई. क्या कल तुम मेरे साथ कॉलेज चलोगे.
लल्लू- हा क्यू नही दीदी. लेकिन आप कॉलेज क्यू जाना चाहते हो.
सोनम- भाई कल फॉर्म भरने का लास्ट डेट है इस लिए जाना है.
लल्लू- अच्छा. में भूल गया था. ठीक है चलेंगे कल.
फिर लल्लू वहाँ से बाहर आँगन में आ गया.
मा- फिर सो गया था. अब रात में क्या करेगा.
लल्लू- जो कल किया था.(सिर खुजाता हुआ)
काजल शरमा कर वहाँ से भाग जाती है.
रात खाना खाने के बाद लल्लू कमरे में जा कर लेट गया.
नींद तो आ नही रहा था तो लेटा लेटा ऐसे ही करवट बदल रहा था.
काजल- मुझे तो बहुत नींद आ रही है. (जमहाई लेने का नाटक करते हुए) में तो सोने जा रही हूँ.
काजल पलट कर दूसरी ओर मूह कर मूह हाथो से दबा कर हँसने लगी.
लल्लू उल्लू की तरह मा को देख रहा था.
लल्लू- मा… माआ. सुनो ना.. लेकिन काजल मुस्कुराती चुप चाप दूसरी ओर मूह घुमाए हस रही थी.
लल्लू खिसक कर काजल के पास आ गया और उस के पीछे से चिपक कर उसे अपनी ओर मोड़ने लगा.
काजल नाटक करते हुए खर्राटे मारने लगी.
लल्लू- ओह्ह्ह्ह अभी अभी तो आई है सोने और खर्राटे भी मारने लगी.
लल्लू समझ गया की मा नाटक कर उसे परेशान कर रही है.
लल्लू- मा में जानता हूँ आप नाटक कर रही हो. आप तो मेरी प्यारी मा हो. जग से न्यारी मा हो. मेरी रानी मा हो. आप मेरी एकलौती मा हो. आप तो सात जन्मो से मेरी मा हो. अपने नादान बेटे को सताता हुआ आप को अच्छा लगता है तो ठीक है सता लो.
काजल का हस हस कर पेट दर्द कर रहा था. अब उस से हँसी रोकी नही जा रही थी.
काजल हस पड़ी.
काजल- किस ने बोला था इतना सोने के लिए. अब मुझे भी सोने नही दे रहा. (काजल हँसते हुए बोली.)
लल्लू झपट कर मा को कस कर गले लगा लिया.
लल्लू- तो मुझे तंग किया जा रहा था.
काजल- तू जो मुझे तंग करता है उसका क्या.
लल्लू- में तो आप का प्यारा बेटा हूँ.
काजल- और में तो तेरी प्यारी मा हूँ.
लल्लू- आप मेरा नकल करना बंद करेंगी.
काजल- नही…
लल्लू काजल को गुदगुदी लगाने लगता है.
काजल हँसती हुई उछलने कूदने लगती है.
काजल- बेटा सो जा मुझे नींद आ रहा है.
लल्लू- मा मुझे नही आ रहा में क्या करू.
काजल- तू ना गाना गा.
लल्लू- मा आप के कान में गाऊ..
( इट'स आ जॉक)
सुन कर मा और लल्लू दोनो ठहाका लगा कर हस पड़े.
काजल- बदमाश कही का मा के कान में सू सू करेगा.
लल्लू- में तो गाना गेम का बोल रहा था मा.
काजल- हा हा में सब समझती हूँ. जैसे कल रात मेरे मूह में गाना गाया था और आज कान में गा देना चाहता है.
लल्लू- मा में क्या करू आप हो ही इतनी प्यारी की मुझ से रहा ही नही गया.
काजल- चल झूठा.
लल्लू- सच मा. कसम खिला लो अगर यकीन नही तो.
काजल लल्लू के गाल को चूम कर उसे अपने से चिपका ली.
काजल- मुझे यकीन है बेटा. अब सो जा.
काजल लल्लू के अपने से चिपकाए उसके सर को सहला रही थी.
लल्लू वैसे ही लेटा हुआ काजल के होंठो को चूमता हुआ उसक्के दोनो चुचियो का मर्दन करने लगा.
थोड़ी देर में जब काजल को थोड़ा दर्द कम हुआ तो वो लल्लू के कमर को अपने हाथ से दबाने लगी.
लल्लू समझ गया और आधे लौड़े से ही काजल को चोदने लगा.
पहले थोड़ी देर हल्का हल्का धक्का लगा रहा था फिर धीरे धीरे लल्लू काजल के दूध को निचोड़ता हुआ अपना स्पीड बढ़ा दिया.
अब ऊपर से लल्लू पूरा ज़ोर लगा कर धक्का मारता और नीचे से काजल अपने दोनो पैरो का कैची बनाए लल्लू को अपने सिकंजे में पकड़े नीचे से अपनी बड़ी गान्ड को उठा उठा कर लल्लू के लौड़े को पूरा पूरा निगल रही थी.
काजल मारे उत्तेजना क उसके होंठ थरथरा रहे थे.
इतना मज़ा काजल को कभी नही आया था राम के साथ.
लल्लू पूरा वहशी बना हुआ इस बेलगाम घोड़ी को को ठोके जा रहा था.
दोनो के घमासान से कमरे में जैसे भूचाल आया हुआ था.
बेड छू छू कर रहा था लगातार.
दोनो के जंघा एक दूसरे से टकरा रहा था जिस से ठप ठप ठप ठप की आवाज़ गूँज रहा था वहाँ चारो और.
काजल एक बार झड़ चुकी थी लल्लू के लौड़े की मार से.
दोनो के चुदाई की अलग आवाज़ फूच फूच फूच.
ये तीन तीन तरह के आवाज़ से ये कमरा...क्या कहूं कैसा संगीत बना रहा था.
काजल- आहह लल्लू मेरा बेतताअ. ईीसस ऐसे हिी मेरीलाला..
मॅर कोरे से खा जा आअज्ज.
फ़फ्फारर दीए म्मीररी इस निगग्गूड्दीई कककू.
पता नही क्या क्या बड़बड़ाती जा रही थी काजल
अब दोनो अपने चरम पर थे.
मुझे तो डर था की कही इन दोनो के घमासान में बेड ही ना टूट जाये.
काजल लल्लू को पकड़े पलट गई और उसके ऊपर आ कर लल्लू के लौड़े पर अपनी मोटी भारी गान्ड को उठा उठा उठा उठा कर पटकने लगी.
नीचे लल्लू काजल के चुचे को मसल मसल कर ऐसे कर दिया था जैसे अभी खून छलक पड़ेगा.