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अपडेट 12.
लल्लू ऋतु को पीछे छोड़ कर चल दिया.
सीढ़ियो के पास आ कर गेट को लगा दिया. फिर पलट कर आ गया छत पर.
लल्लू इस बार ऋतु के पास आ कर उसके दोनो चुचे को हाथो में पकड़ कर मसलने लगा.
बड़े बड़े गोल गुब्बारे यू छत पर खुले में दबाता हुआ लल्लू ऋतु के होंठो को अपने होंठो में ले कर चूसने लगा.
ऋतु किसी बेल की तरह लल्लू से लिपटी हुई थी.
लल्लू ऋतु के होंठो को चूस्ता हुआ ऋतु के दूध को भी दबाता जा रहा था.
ऋतु- उहह, थोड़ा आराम से दबाओ दर्द करता है.
लल्लू- दिन में जो तड़पा हूँ उसका बदला लेना तो अभी बाकी है. अभी से दर्द करने लगा मेरी लुगाई को.
ऋतु- क्या करू मेरा सैया ज़रा अनाड़ी है.
लल्लू ऋतु के आँचल को हटा कर उसके ब्लाउस को खोल दिया.
ऋतु- यहाँ खुले में मत करो. नीचे रूम में चलते है ना.
लल्लू- कभी काका के साथ खुले आसमान के नीचे ठंढी ठंढी हवओ के बीच में यू कुछ की हो.
ऋतु- मुआअ, अब तू ही मेरा ख़सम है तो अब से कभी उसकी कोई बात मत करना नही तो फिर कभी च्छुने भी नही दूँगी.
लल्लू- गुस्सा क्यू करती हो. यहाँ खुले में प्यार करने का एक अलग मज़ा है.
लल्लू ऋतु के ब्लाउस को खोल कर अलग कर दिया. नीचे ऋतु ने बलक ब्रा पहनी थी.
लल्लू- क्या बात है आज तो चुचि कसनी भी पहनी है.
लल्लू पीछे हाथ ले जा कर उसका भी हुक खोल कर अलग रख दिया.
अब ऋतु ऊपर से बिल्कुल नंगी थी.
ऋतु के दो फूले हुए गुब्बारे हवा में खुल रहे थे.
लल्लू एक को अपने हाथ में थाम कर दूसरे को मूह खोल कर जितना आ पाया उतना डाल कर चुभलने लगा.
ऋतु मज़े से सस्सीई ससीई करती हुई लल्लू के बालो में उंगली घुमा रही थी.
लल्लू आज सुबह से ही परेशान था.
रात में पहली बार तो वो ये स्वाद चखा था तो अभी अब उस में सबर नही था.
कुछ देर दोनो दूध को गुठने चूसने के बाद लल्लू ऋतु को वहाँ रखी एक टूटी कुर्सी पर बैठा दिया दीवाल के सहारे और अपना लॉडा निकाल कर उसके मूह के पास कर दिया.
ऋतु लल्लू के मन की बात समझ कर लल्लू के लौड़े को ले कर मुठियाने लगी.
लल्लू ऋतु के सर को पकड़ कर अपने लौड़े पर झुकता चला गया.
लल्लू ऋतु के होंठो पर अपना लॉडा रगड़ने लगा.
ऋतु अपना मुँह खोल कर लौड़े को अपने मूह में ले कर चुप्पा लगाने लगी.
लल्लू अपना कमर हिला कर ऋतु के मूह को छोड़ रहा था.
लल्लू तो मज़े से सातवे आसमान में था.
लल्लू को बहुत मज़ा आ रहा था ऋतु के मूह को चोदते हुए.
लल्लू हाथ बढ़ा कर ऋतु के चुचे को हाथो में ले कर मसलने लगा और इधर कमर हिला कर मूह भी चोदे जा रहा था.
धीरे धीरे लल्लू का हिलना तेज होता चला गया.
अब लल्लू ने ऋतु के मूह को दोनो हाथों से पकड़ कर अंदर तक अपने लौड़े को ठोकता जा रहा था.
लल्लू का लॉडा ऋतु के गले में कंठ पर जा कर ठोकर मारता था.
लल्लू मज़े से अपने मूह से अजीब अजीब आवाज़े निकाल ता हुआ ऋतु के मूह को तूफ़ानी गति से चोदे जा रहा था. वो भूल गया था की ये ऋतु का चूत नही बल्कि उसका मूह है.
लल्लू झटके ख़ाता हुआ ऋतु के मूह में ही खाली हो गया.
ऋतु एक झटके से लल्लू को धकेल कर खाँसते हुए उल्टी करने लगी.
लल्लू तो देख कर दर गया की जोश जोश में ये क्या कर गया.
ऋतु जब थोड़ी देर बाद संभाली तो उठ कर एक थप्पड़ लगाई.
ऋतु- मुआअ में क्या मना की हूँ कुछ करने को. कम से कम आराम से तो कर. तू तो जान ही ले लेता मेरा.
लल्लू- सॉरी काकी. वो मुझे होश ही नही रहा. लेकिन आप तो बता सकती थी ना.
ऋतु- मुआअ बताती कहाँ से. मूह में तो लॉडा ठूँस रखा था तू ने और हाथ से मार रही हूँ इतनी देर से तो उसका तो तुम्हे कोई पता ही नही चला.
लल्लू- सो सॉरी काकी. आगे से में ध्यान रखूँगा. प्लीज़ आप नाराज़ ना हो.
ऋतु- ठीक है. चल अब नीचे चल.
लल्लू- क्या…. अभी तो सुरू ही हुआ है. अभी कहा नीचे जाएँगे.
ऋतु- तो आज सोच लिया है यही खुले में चोदेगा मुझे.
लल्लू- हा रानी. आज मेरा मन है की में तुम्हे नंगी कर के खूब हुमच हुमच कर इस छत पर खुले आसमान के नीचे चोदु.
ऋतु- ज़्यादा ज़ोर मत लगाना. नही तो में चिल्लाने लगी तो लोग आ कर हम दोनो को जान से मार देंगे.
लल्लू ऋतु को पकड़ कर खड़ा किया और उसके होंठो को चूसने लगा.
लल्लू को ऋतु के मूह से अपने कम की बदबू आ रही थी लेकिन ऋतु के मदमस्त जवानी को चूसने में उसे अपने कम का भी टेस्ट अच्छा ही लगने लगा.
लल्लू ऋतु को पकड़ कर अलग किया और उसकी साड़ी को खोल कर अलग कर दिया.
ऋतु- लल्लू ये सब मत खोल बेटा. अगर यहाँ कोई आ गया तो हम जल्दी से तैयार भी नही हो पाएँगे.
लल्लू- अब यहाँ कोई नही आ पाएगा मेरी जान. मैने गेट बंद कर रखा है.
लल्लू पेटिकोट का नाडा पकड़ कर खिच दिया.
पेटिकोट सरसरता हुआ ऋतु के पैरो में गिर गया
अब ऋतु मदरजात नंगी थी इस खुले आसमान के नीचे.
ऋतु को बड़ा शरम आ रहा था.
वो शरमा कर पीछे घूम गई जो लल्लू के जान पर बन आई.
ऋतु की भारी मटके जैसे गोल गान्ड अब लल्लू के आँखो के सामने था.
चाँद की रोशनी में ऋतु का संगमरमर जैसा बदन चमक रहा था. उस पर से ये कातिल गान्ड…
हाय्यी क्या कहना.
लल्लू जल्दी से अपना सारा कपड़ा खोल कर नंगा हो गया और पीछे से ही ऋतु से चिपक गया.
ऋतु का गान्ड देख कर लल्लू का लॉडा रोड की तरह खड़ा हो गया था जो चिपकने से बिल्कुल ऋतु के गान्ड के दोनो फाकॉ के बीच टेढ़ा वो कर नीचे निकल गया था.
लल्लू ऋतु को पीछे छोड़ कर चल दिया.
सीढ़ियो के पास आ कर गेट को लगा दिया. फिर पलट कर आ गया छत पर.
लल्लू इस बार ऋतु के पास आ कर उसके दोनो चुचे को हाथो में पकड़ कर मसलने लगा.
बड़े बड़े गोल गुब्बारे यू छत पर खुले में दबाता हुआ लल्लू ऋतु के होंठो को अपने होंठो में ले कर चूसने लगा.
ऋतु किसी बेल की तरह लल्लू से लिपटी हुई थी.
लल्लू ऋतु के होंठो को चूस्ता हुआ ऋतु के दूध को भी दबाता जा रहा था.
ऋतु- उहह, थोड़ा आराम से दबाओ दर्द करता है.
लल्लू- दिन में जो तड़पा हूँ उसका बदला लेना तो अभी बाकी है. अभी से दर्द करने लगा मेरी लुगाई को.
ऋतु- क्या करू मेरा सैया ज़रा अनाड़ी है.
लल्लू ऋतु के आँचल को हटा कर उसके ब्लाउस को खोल दिया.
ऋतु- यहाँ खुले में मत करो. नीचे रूम में चलते है ना.
लल्लू- कभी काका के साथ खुले आसमान के नीचे ठंढी ठंढी हवओ के बीच में यू कुछ की हो.
ऋतु- मुआअ, अब तू ही मेरा ख़सम है तो अब से कभी उसकी कोई बात मत करना नही तो फिर कभी च्छुने भी नही दूँगी.
लल्लू- गुस्सा क्यू करती हो. यहाँ खुले में प्यार करने का एक अलग मज़ा है.
लल्लू ऋतु के ब्लाउस को खोल कर अलग कर दिया. नीचे ऋतु ने बलक ब्रा पहनी थी.
लल्लू- क्या बात है आज तो चुचि कसनी भी पहनी है.
लल्लू पीछे हाथ ले जा कर उसका भी हुक खोल कर अलग रख दिया.
अब ऋतु ऊपर से बिल्कुल नंगी थी.
ऋतु के दो फूले हुए गुब्बारे हवा में खुल रहे थे.
लल्लू एक को अपने हाथ में थाम कर दूसरे को मूह खोल कर जितना आ पाया उतना डाल कर चुभलने लगा.
ऋतु मज़े से सस्सीई ससीई करती हुई लल्लू के बालो में उंगली घुमा रही थी.
लल्लू आज सुबह से ही परेशान था.
रात में पहली बार तो वो ये स्वाद चखा था तो अभी अब उस में सबर नही था.
कुछ देर दोनो दूध को गुठने चूसने के बाद लल्लू ऋतु को वहाँ रखी एक टूटी कुर्सी पर बैठा दिया दीवाल के सहारे और अपना लॉडा निकाल कर उसके मूह के पास कर दिया.
ऋतु लल्लू के मन की बात समझ कर लल्लू के लौड़े को ले कर मुठियाने लगी.
लल्लू ऋतु के सर को पकड़ कर अपने लौड़े पर झुकता चला गया.
लल्लू ऋतु के होंठो पर अपना लॉडा रगड़ने लगा.
ऋतु अपना मुँह खोल कर लौड़े को अपने मूह में ले कर चुप्पा लगाने लगी.
लल्लू अपना कमर हिला कर ऋतु के मूह को छोड़ रहा था.
लल्लू तो मज़े से सातवे आसमान में था.
लल्लू को बहुत मज़ा आ रहा था ऋतु के मूह को चोदते हुए.
लल्लू हाथ बढ़ा कर ऋतु के चुचे को हाथो में ले कर मसलने लगा और इधर कमर हिला कर मूह भी चोदे जा रहा था.
धीरे धीरे लल्लू का हिलना तेज होता चला गया.
अब लल्लू ने ऋतु के मूह को दोनो हाथों से पकड़ कर अंदर तक अपने लौड़े को ठोकता जा रहा था.
लल्लू का लॉडा ऋतु के गले में कंठ पर जा कर ठोकर मारता था.
लल्लू मज़े से अपने मूह से अजीब अजीब आवाज़े निकाल ता हुआ ऋतु के मूह को तूफ़ानी गति से चोदे जा रहा था. वो भूल गया था की ये ऋतु का चूत नही बल्कि उसका मूह है.
लल्लू झटके ख़ाता हुआ ऋतु के मूह में ही खाली हो गया.
ऋतु एक झटके से लल्लू को धकेल कर खाँसते हुए उल्टी करने लगी.
लल्लू तो देख कर दर गया की जोश जोश में ये क्या कर गया.
ऋतु जब थोड़ी देर बाद संभाली तो उठ कर एक थप्पड़ लगाई.
ऋतु- मुआअ में क्या मना की हूँ कुछ करने को. कम से कम आराम से तो कर. तू तो जान ही ले लेता मेरा.
लल्लू- सॉरी काकी. वो मुझे होश ही नही रहा. लेकिन आप तो बता सकती थी ना.
ऋतु- मुआअ बताती कहाँ से. मूह में तो लॉडा ठूँस रखा था तू ने और हाथ से मार रही हूँ इतनी देर से तो उसका तो तुम्हे कोई पता ही नही चला.
लल्लू- सो सॉरी काकी. आगे से में ध्यान रखूँगा. प्लीज़ आप नाराज़ ना हो.
ऋतु- ठीक है. चल अब नीचे चल.
लल्लू- क्या…. अभी तो सुरू ही हुआ है. अभी कहा नीचे जाएँगे.
ऋतु- तो आज सोच लिया है यही खुले में चोदेगा मुझे.
लल्लू- हा रानी. आज मेरा मन है की में तुम्हे नंगी कर के खूब हुमच हुमच कर इस छत पर खुले आसमान के नीचे चोदु.
ऋतु- ज़्यादा ज़ोर मत लगाना. नही तो में चिल्लाने लगी तो लोग आ कर हम दोनो को जान से मार देंगे.
लल्लू ऋतु को पकड़ कर खड़ा किया और उसके होंठो को चूसने लगा.
लल्लू को ऋतु के मूह से अपने कम की बदबू आ रही थी लेकिन ऋतु के मदमस्त जवानी को चूसने में उसे अपने कम का भी टेस्ट अच्छा ही लगने लगा.
लल्लू ऋतु को पकड़ कर अलग किया और उसकी साड़ी को खोल कर अलग कर दिया.
ऋतु- लल्लू ये सब मत खोल बेटा. अगर यहाँ कोई आ गया तो हम जल्दी से तैयार भी नही हो पाएँगे.
लल्लू- अब यहाँ कोई नही आ पाएगा मेरी जान. मैने गेट बंद कर रखा है.
लल्लू पेटिकोट का नाडा पकड़ कर खिच दिया.
पेटिकोट सरसरता हुआ ऋतु के पैरो में गिर गया
अब ऋतु मदरजात नंगी थी इस खुले आसमान के नीचे.
ऋतु को बड़ा शरम आ रहा था.
वो शरमा कर पीछे घूम गई जो लल्लू के जान पर बन आई.
ऋतु की भारी मटके जैसे गोल गान्ड अब लल्लू के आँखो के सामने था.
चाँद की रोशनी में ऋतु का संगमरमर जैसा बदन चमक रहा था. उस पर से ये कातिल गान्ड…
हाय्यी क्या कहना.
लल्लू जल्दी से अपना सारा कपड़ा खोल कर नंगा हो गया और पीछे से ही ऋतु से चिपक गया.
ऋतु का गान्ड देख कर लल्लू का लॉडा रोड की तरह खड़ा हो गया था जो चिपकने से बिल्कुल ऋतु के गान्ड के दोनो फाकॉ के बीच टेढ़ा वो कर नीचे निकल गया था.