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सुनील- क्या हुआ मेरे बेटे को.
लल्लू- ( सुनील लल्लू को बाट मानता था. लल्लू भी काका में सब से ज़्यादा सुनील के ही करीब था और काकी में ऋतु के)
सुनील- किस ने मारा है मेरे बेटे को. ( सुनील लल्लू को गले लगा लिया और ले कर आँगन में खत पर बैठ गया.)
दादू- मेरा बहादुर बेटा है तु तो. तुम बच्चो की तरह क्यू रो रहे हो. ऐसे नही रोते बहादुर बच्चे. तू तो मर्द का बच्चा है.
लल्लू- …..( रुलाई और तेज हो गई उस से कुछ बोला ही नही गया.)
सुनील- रागिनी…( सुनील गुस्से में ज़ोर से चिल्लाता हुआ.)
रागिनी काकी दौड़ कर रसोई से बाहर आई.
सुनील- बहरी हो गई हो क्या घर में सब के सब. इतने देर से ये रो रहा है तुम सब को सुनाई नही देता क्या कुछ. इतनी औरते हो कर क्या कर रही हो तुम लोग.
ऋतु- क्यू गुस्सा कर रहे हो आप. अभी अभी तो यहाँ से दालान की तरफ जा रहा था. किसी लड़की ने डाँट दिया है थोड़ा सा.
लल्लू- रो..मा दी..दी और को...कोमल.. दी दी.ई. ने मारा है मु..झे. दो दो था..प्पर.
सुनील- मतलब सब को पता था की लल्लू रो रहा है और किसी ने इसे चुप नही कराया. रोने दिया इसे. कल अगर ये नही होता ना तो आप का पापा और भैया के साथ वही कुंभ में चटनी बन जाता. यही था जो बच गये सब. और इसे ही सब ने रोते हुए देख कर भी छोड़ दिया.
बांधो सब अपना बोरिया बिस्तर. कोई औरत मुझे नही चाहिए इस घर में. बहनचोद जब तुम से एक बच्चा नही संभलता तो क्या तुम सब को सिर्फ़ महारानी बन कर शृंगार करने और खाने को रखा है यहाँ. भागो सब अपने बाप के घर.
लल्लू सुनील का ये रूप देख कर डर कर चुप हो गया.
सब औरते रसोई से बाहर आ कर सिर झुकाए खड़ी हो गई.
सब को पता था की सुनील को जब गुस्सा आता है तो कोई नही बोलते थे उसके सामने यहाँ तक कि उसके खुद के पापा भी नही.
दादू- बहूँ आज हम सब जिंदा है तो लल्लू बेटे के कारण नही तो कुंभ में ही हमारा क्रिया कर्म हो गया रहता. तुम सब को लगता की हम कुंभ में है और वहाँ हमारा कही मुर्दा घर में लाश सर रहा होता.
लल्लू ही तो था जिस ने हम लोगो को बचा लिया.
रवि काका- ऐसा क्या हुआ था वहाँ पापा.
कुंभ में क्या हुआ था ये अभी किसी को पता नही था सिवाए सुनील के.
रघुवीर जी अपने बेटे को गाड़ी में सुबह स्टेशन से आते समय ही बता दिए थे.
अनिल- में बताता हूँ क्या हुआ था हमारे साथ.
हुआ ये की कुंभ स्नान करने के बाद कल हम लोग आ रहे थे की अचानक बड़ी तेज किसी कारण से भगदड़ मच गई.
मुझे तो पता भी नही चला. लोगो को जिधर जगह मिलता उधर को भाग रहे थे.
उस भगदड़ को देख कर में ठगा सा खड़ा रह गया था लेकिन लल्लू ने बहादुरी दिखा कर पापा और ऋतु के साथ मुझे हम तीनो को बचा कर उस भगदड़ से एक गली में ले आया और वहाँ दीवार से चिपका कर हमें खड़ा हो गया.
काफ़ी देर बाद जब भगदड़ कम हुआ तब हम लोगो को ले कर ये सुरक्षित धर्मशाला तक आया.
हम तीनो को कल इसी ने अपने सुख बुझ से बचाया था.
लड़किया जो सुनील काका के गुस्से क डर गये कमरे में छुप गई थी वो एक एक कर निकल कर बाहर आ गई और लल्लू के सामने कान पकड़ कर खड़ी हो गई.
रोमा- मुझे माफ़ कर दो भाई. मुझे नही पता था की तुम इतने अच्छे भाई हो मेरे. पता नही अभी मुझे क्या हो गया था की में तुम्हे मार बैठी.
कोमल- मुझे भी माफ़ कर दो भाई. मैने भी तुम्हे मारा.
लल्लू- नही में तुम लोगो से बात नही करूँगा. तुम सब से कट्टी हूँ में.( लल्लू बच्चो की तरह रुठता हुआ बोला)
सुनील- आगे से कभी मैने लल्लू को इस तरह कभी रोता देखा या किसी ने मेरे बेटे को रुलाने की कोशिश की तो वो दिल उसका इस घर में आखरी दिन होगा.
चल बेटा बहुत ज़ोर की भूख लगी है. आ जा खाना खाते है.
लल्लू अपने प्यारे काका की बात कभी नही काटता था.
लल्लू- काका मेरे कपड़े छोटे हो गये है.
सुनील- हाय्ी. एक दिन में कैसे छोटे हो गये. और ये तेरे पीठ पर क्या है.
लल्लू- वो...वो टॅटू है.
रवि काका- वाहह, तो तुम्हे ये सब भी पता है. टॅटू कहा बनवा लिया तुमने.
लल्लू- वो...वो कुंभ में.
सुनील- अच्छा अच्छा चल पहले खा ले फिर में तुम्हे ले कर बाजार चलूँगा. वहाँ नये कपड़े ले लेना.
फिर सब खाना खाने बैठ गये. खाना खा कर लल्लू वही टीशर्ट पहन लिया.
फिर लल्लू काजल के कमरे में जा कर लेट गया.
मर्द लोग खाना खा कर चले गये तब औरतो ने अपने लिए खाना निकाल कर लड़कियो के साथ बैठ गई.
काजल- क्यू मारा था अपने भाई को तुम लोगो ने.
सोनम- वो...वो..काकी रोमा और कोमल पढ़ रहे थे की भाई आ कर किताब पलट दिया इसी लिए इन दोनो को गुस्सा आ गया तो दोनो ने डाट दिया था.
लल्लू जो वही लेटा था
लल्लू- झूठ बोलती है दीदी. झूठ बोलना बुरी बात है. रोमा और कोमल दीदी पढ़ नही रही थी. में दीदी को पुकारता हुआ जा रहा था कमरे में तो सोनम दीदी कपड़े बदल रही थी.
सोनम दीदी सिर्फ़ छोटी पेंट पहने थी इसी लिए दीदी ने मारा की दरवाजा बजा कर क्यू नही आया.
मा- हूँ. बेटा तुम्हे दीदी क कमरे में ऐसे नही जाना था ना.
लल्लू- लेकिन मा में आवाज़ देता जा तो रहा था और में भी तो नंगा ही था ना ऊपर से. आप ने ही तो मुझे दीदी के पास भेजा था. तो में क्या करू.
ऋतु- कोई बात नही. सब ने सुन लिया है ना. आगे से अगर इसे किसी ने रुलाया तो तुम सब के हिटलर काका सब को घर से बाहर निकाल देंगे.
तो ध्यान रखना इस बात का.
लल्लू- ( सुनील लल्लू को बाट मानता था. लल्लू भी काका में सब से ज़्यादा सुनील के ही करीब था और काकी में ऋतु के)
सुनील- किस ने मारा है मेरे बेटे को. ( सुनील लल्लू को गले लगा लिया और ले कर आँगन में खत पर बैठ गया.)
दादू- मेरा बहादुर बेटा है तु तो. तुम बच्चो की तरह क्यू रो रहे हो. ऐसे नही रोते बहादुर बच्चे. तू तो मर्द का बच्चा है.
लल्लू- …..( रुलाई और तेज हो गई उस से कुछ बोला ही नही गया.)
सुनील- रागिनी…( सुनील गुस्से में ज़ोर से चिल्लाता हुआ.)
रागिनी काकी दौड़ कर रसोई से बाहर आई.
सुनील- बहरी हो गई हो क्या घर में सब के सब. इतने देर से ये रो रहा है तुम सब को सुनाई नही देता क्या कुछ. इतनी औरते हो कर क्या कर रही हो तुम लोग.
ऋतु- क्यू गुस्सा कर रहे हो आप. अभी अभी तो यहाँ से दालान की तरफ जा रहा था. किसी लड़की ने डाँट दिया है थोड़ा सा.
लल्लू- रो..मा दी..दी और को...कोमल.. दी दी.ई. ने मारा है मु..झे. दो दो था..प्पर.
सुनील- मतलब सब को पता था की लल्लू रो रहा है और किसी ने इसे चुप नही कराया. रोने दिया इसे. कल अगर ये नही होता ना तो आप का पापा और भैया के साथ वही कुंभ में चटनी बन जाता. यही था जो बच गये सब. और इसे ही सब ने रोते हुए देख कर भी छोड़ दिया.
बांधो सब अपना बोरिया बिस्तर. कोई औरत मुझे नही चाहिए इस घर में. बहनचोद जब तुम से एक बच्चा नही संभलता तो क्या तुम सब को सिर्फ़ महारानी बन कर शृंगार करने और खाने को रखा है यहाँ. भागो सब अपने बाप के घर.
लल्लू सुनील का ये रूप देख कर डर कर चुप हो गया.
सब औरते रसोई से बाहर आ कर सिर झुकाए खड़ी हो गई.
सब को पता था की सुनील को जब गुस्सा आता है तो कोई नही बोलते थे उसके सामने यहाँ तक कि उसके खुद के पापा भी नही.
दादू- बहूँ आज हम सब जिंदा है तो लल्लू बेटे के कारण नही तो कुंभ में ही हमारा क्रिया कर्म हो गया रहता. तुम सब को लगता की हम कुंभ में है और वहाँ हमारा कही मुर्दा घर में लाश सर रहा होता.
लल्लू ही तो था जिस ने हम लोगो को बचा लिया.
रवि काका- ऐसा क्या हुआ था वहाँ पापा.
कुंभ में क्या हुआ था ये अभी किसी को पता नही था सिवाए सुनील के.
रघुवीर जी अपने बेटे को गाड़ी में सुबह स्टेशन से आते समय ही बता दिए थे.
अनिल- में बताता हूँ क्या हुआ था हमारे साथ.
हुआ ये की कुंभ स्नान करने के बाद कल हम लोग आ रहे थे की अचानक बड़ी तेज किसी कारण से भगदड़ मच गई.
मुझे तो पता भी नही चला. लोगो को जिधर जगह मिलता उधर को भाग रहे थे.
उस भगदड़ को देख कर में ठगा सा खड़ा रह गया था लेकिन लल्लू ने बहादुरी दिखा कर पापा और ऋतु के साथ मुझे हम तीनो को बचा कर उस भगदड़ से एक गली में ले आया और वहाँ दीवार से चिपका कर हमें खड़ा हो गया.
काफ़ी देर बाद जब भगदड़ कम हुआ तब हम लोगो को ले कर ये सुरक्षित धर्मशाला तक आया.
हम तीनो को कल इसी ने अपने सुख बुझ से बचाया था.
लड़किया जो सुनील काका के गुस्से क डर गये कमरे में छुप गई थी वो एक एक कर निकल कर बाहर आ गई और लल्लू के सामने कान पकड़ कर खड़ी हो गई.
रोमा- मुझे माफ़ कर दो भाई. मुझे नही पता था की तुम इतने अच्छे भाई हो मेरे. पता नही अभी मुझे क्या हो गया था की में तुम्हे मार बैठी.
कोमल- मुझे भी माफ़ कर दो भाई. मैने भी तुम्हे मारा.
लल्लू- नही में तुम लोगो से बात नही करूँगा. तुम सब से कट्टी हूँ में.( लल्लू बच्चो की तरह रुठता हुआ बोला)
सुनील- आगे से कभी मैने लल्लू को इस तरह कभी रोता देखा या किसी ने मेरे बेटे को रुलाने की कोशिश की तो वो दिल उसका इस घर में आखरी दिन होगा.
चल बेटा बहुत ज़ोर की भूख लगी है. आ जा खाना खाते है.
लल्लू अपने प्यारे काका की बात कभी नही काटता था.
लल्लू- काका मेरे कपड़े छोटे हो गये है.
सुनील- हाय्ी. एक दिन में कैसे छोटे हो गये. और ये तेरे पीठ पर क्या है.
लल्लू- वो...वो टॅटू है.
रवि काका- वाहह, तो तुम्हे ये सब भी पता है. टॅटू कहा बनवा लिया तुमने.
लल्लू- वो...वो कुंभ में.
सुनील- अच्छा अच्छा चल पहले खा ले फिर में तुम्हे ले कर बाजार चलूँगा. वहाँ नये कपड़े ले लेना.
फिर सब खाना खाने बैठ गये. खाना खा कर लल्लू वही टीशर्ट पहन लिया.
फिर लल्लू काजल के कमरे में जा कर लेट गया.
मर्द लोग खाना खा कर चले गये तब औरतो ने अपने लिए खाना निकाल कर लड़कियो के साथ बैठ गई.
काजल- क्यू मारा था अपने भाई को तुम लोगो ने.
सोनम- वो...वो..काकी रोमा और कोमल पढ़ रहे थे की भाई आ कर किताब पलट दिया इसी लिए इन दोनो को गुस्सा आ गया तो दोनो ने डाट दिया था.
लल्लू जो वही लेटा था
लल्लू- झूठ बोलती है दीदी. झूठ बोलना बुरी बात है. रोमा और कोमल दीदी पढ़ नही रही थी. में दीदी को पुकारता हुआ जा रहा था कमरे में तो सोनम दीदी कपड़े बदल रही थी.
सोनम दीदी सिर्फ़ छोटी पेंट पहने थी इसी लिए दीदी ने मारा की दरवाजा बजा कर क्यू नही आया.
मा- हूँ. बेटा तुम्हे दीदी क कमरे में ऐसे नही जाना था ना.
लल्लू- लेकिन मा में आवाज़ देता जा तो रहा था और में भी तो नंगा ही था ना ऊपर से. आप ने ही तो मुझे दीदी के पास भेजा था. तो में क्या करू.
ऋतु- कोई बात नही. सब ने सुन लिया है ना. आगे से अगर इसे किसी ने रुलाया तो तुम सब के हिटलर काका सब को घर से बाहर निकाल देंगे.
तो ध्यान रखना इस बात का.