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Incest माँ का मायका

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(Episode 3)

दोपहर को बड़ी मामी का कॉल आया,उन्होंने घर जल्द से जल्द घर आने को बोला।मैं तो घबरा गया।मैं कैसे वैसे घर पहोंच गया। पर जैसे सोच रखा था उतना भयानक नही था पर थोड़ा अजीब जरूर था।सब लोग नाना जी के कमरे में थे।बेड पे नाना ,बाजू में बड़ी मामी,मा,सिद्धि भाभी,बाजू खड़े रवि भैया और बड़े मामा भी थे।

नाना जी:आ गए वीरू,तुमसे एक जरूरी बातचीत करनी थी हमे।

मैं:जी बोलिये नाना जी।

नानाजी:अभी संजू बड़ी हो गई है।हमारे यह लाड़ प्यार से बड़ी हुई है,उसको दुनिया का कोई ज्ञान नही।तो मैं ये सोच रहा था की उसकी शादी की जाए।

मै:अच्छा विचार है,लड़का कौन है?

नानाजी:वो क्या है की मेरी अइसी इच्छा है की तुम ही उससे शादी करलो।

मैं(नाटक करते हुए):क्या मै!??मगर...!!

बड़ी मामी:देख लल्ला हमने बेटी को बड़े लाड़ प्यार से पाला है,उसकी जुदाई बर्दाश्त नही होगी मुझसे।तू भी हमारे भरोसे का है।तुझसे शादी करेगी तो यही हमारे साथ रहेगी।

मैं:वो सही है पर बड़े मामा...!!??

बड़े मामा:अरे वीरू मैं क्यों भला मना करूँगा।तुम जैसा होनहार दामाद को कौन मना करेगा।और हा कल से शादी तक ऑफिस मै संभाल लूंगा।तुम शादी तक घर पे रहना,कहि जाना नही।

मा:अभी तू ज्यादा मत सोच ,मुझे भी संजू स्वीकार है बहु के रूप में।

मैं:ठीक है अगर आप कहते है तो मैं तैयार हु पर संजू दी का क्या जवाब है इसपर।

सिद्धि:जाओ उसको ही जाके पूछ लो,मनाओ अपनी होने वाली बीवी को।

सब लोग हसने लगे।मुझे भी शर्म आने लगी।मै ऊपर संजू के कमरे में चला गया।उनका दरवाजा खुला था।और वो बाल्कनी में नाखून चबा रही थी।लगता है वो इन इंतजार में थी की नीचे क्या फैसला होगा। बड़े मामी ने अच्छी योजना बनाई थी।और उसमे मेरे अच्छे बर्ताव की और सहायता हुई।बड़े मामा तो वैसे भी तैयार होते क्योकि 10 % जो संजू के है वो उनके पास ही रहने वाले थे औ मेरे 20% भी दामाद की हैसियत से उनके कब्जे में ही रहने वाले थे।

मैं संजू के पास गया।मेरे आहट से संजू घूम गयी।और मेरे तरफ घूर कर देख रही थी।उसके कान फैसला सुनने को बेकरार थे।

मैं उनके सामने गया।जाते जाते मेज पर रखा गुलाब उठा लिया।उसके सामने जाके खड़ा हुआ।संजू मुझे बड़े बेकरारी वाली नजरो से घुरि जा रही थी।

मैं उसके सामने घुटनो पे बैठा।

मै:मिस संजू क्या आप मेरी जीवन साथी बनना पसन्द करेगी?(गुलाब उनके सामने कर दिया।)

संजू की आंखे चौड़ी हो गयी।उसने मुह पे हाथ रखा और उछलते हुए रोने लगी।।मै उठ खड़ा हुआ।

मैं:अरे क्या हुआ रो क्यों रहे हो,नही करनी शादी मुझसे।ठीक है।

मैं पीछे घूमने ही वाला था की उसने मेरे ऊपर छलांग लगाई और मेरे ऊपर चढ़ गले मिल गयी।मेरे चेहरे पर चूमने लगी।थोड़ी गर्माहट हुई तो हमारे ओंठ एकदूसरे को मिल गए।काफी देर तक ओंठ की चुसाई में समय का पता ही नही चला।

सिद्धि भाभी:हु ह्म्म्म!!!!

सिद्धि भाभी के आवाज से हम अलग हो गए।मैंने गलती से दरवाजा खुला छोड़ा था।

सिद्धि:क्यो जनाब शादी के बाद के लिए कुछ रखोगे या नही।

संजू:आपको क्या करना है उससे,होने वाला हो या हो चुका हो आखिर पति ही है मेरा,हम कुछ भी करले।आप अपने हो चुके पति के पास जाओ न।

सिद्धि:अरे मेरे हो चुके पति से कुछ नही होता,मुझे तेरे होने वाले पति से ही ज्यादा मजा आता है।

संजू:मेरा पति है ही दमदार।तुम चिंता मत करो भाभी,जब जरूरत पड़े तब इसके साथ मजे करना।मुझे कोई आपत्ति नही।

सिद्धि थोड़ी इमोशनल हो गयी।उसने संजू को गले लगाया।

सिद्धि:थैंक यु संजू।

तभी संजू को बड़ी मामी बुला लेती है।

संजू:ठीक है मैं अभी चलती हु।

मै:कहा चली...!!

संजू:अरे वो मा बोली थी की अगले हप्ते ही शादी करवाएंगे,बाद में 1 साल तक कोई मुहूर्त नही है।तो चाची और मा के साथ शॉपिंग जा रही हु।तुम आ रहे हो?

सिद्धि:नही तुम जाओ मेरे और रवि के साथ शॉपिंग कर लेगा।

संजू वहाँ से चली जाती है।सिद्धि भाभी मुझे हाथ को पकड़ के अपने कमरे में लेके जाती है।रूम में रवि लेपटॉप पर कुछ काम कर रहा था।

रवि:अरे दुल्हेराजा आओ पधारो।

मैं:क्या भैया आप भी।

सिद्धि:अरे दूल्हे ही हो अगले हप्ते तक।अगला हप्ता भी किधर गिन के 5 दिन बचे है।

मैं:फिर भी ।

रवि:फिर भी क्या,बड़े हो गए हो अभी,और मेरे बच्चे के बाप भी।

सिद्धी:रवि.....!!!!!

रवि:अरे अभी तक नही हुई हो,पर हो जाओगी न।शुक्रिया तो कहने दो।

मैं:भैया मैं कुछ समझ नही रहा हु।सिद्धि भाभी ये भैया किस बारे में बता रहे है।

रवि:अरे तुम डरो मत,तुम्हे ताना नही मार रहा हु,सच में दिल से शुक्रिया कह रहा हु,मा के तानों से छुटकारा मिल जाएगा।

सिद्धि:वीरू तुम परेशान मत हो,एक न एक दिन बताना था,आज ही बता दिया,नही तो ये घर कब रहता है।

रवि:अभी क्या वीरू है तेरी गर्मी को शांत करने के लिए।

मैं:भैया क्या बात कर रहे हो।नही...!!!

सिद्धि रवि से:मतलब तुमसे कुछ नही होगा।

रवि:मैंने अइसा तो नही कहा।पर कोई एतराज भी नही है।

सिद्धि:वीरू इधर आ बेड पर।

मैं उन दोनो के साथ बेड पे आया।सिद्धि भाभी अचानक मेरे पास आयी और मेरे ओंठो को चुसने लगी।

.

रवि:अरे इतनी क्या जल्दी है ,आराम से।

मैं तो दंग रह गया।क्या चल क्या रहा है,भैया मेरे से 2 हाथ दूरी पर थे।उनके 2 हाथ दूरी पर उसकी पत्नी एक अजनबी तो उसके बुआ का बेटा है उसके साथ रंगरंगिया मना रही है।पर उसको उसका कुछ फर्क नही था।

भाभी ने अपने कपड़े फटाफट उतार फेंके।मुझे भी उतारने को बोली।मै रवि भैया के पास देखने लगा।तो उन्होंने आंखों से ही इशारा किया की "भाई तुम लगे रहो,मुझे कुछ अयतराज नही है"।वो वह से उठके जाने लगे।

सिद्धि:तुम किधर जा रहे हो।रुको इधर ही बैठो।आज तेरी बीवी को रंडी की तरह चोदते देख।और सिख कुछ,कैज़ चोदते है।

रवि और मैं एक दूसरे की ओर देखने लगे।मैं कुछ करने से ही पहले सिद्धि भाभी ने मुझे बेड पे लिटाया।और मेरा लण्ड चुसने लगी।

सिद्धि:हाये क्या लण्ड है वीरू तेरा।एकदम लोहा,मुह में भी मजा देता है और चुत में भी।आआह उम्मम म।

सिद्धि भाभी एकदम जोश में थी उसने ज्यादा देर न गवाते जैसे ही लण्ड तन के खड़ा हुआ।वो मेरे लण्ड पे बैठ गयी।

नीचे झुक कर मुझे किस करने लगी।मै उसके चुचे दबा रहा था।ओ अभी गांड ऊपर नीचे करके चुदने लगी।

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सिद्धि:आआह आआह आआह आआह,वीरू क्या लण्ड है तेरा जैसे ही चुत में घुस आंनद आ गया आआह आआह।

सिद्धि भाभी थोड़ी थक गयी ।मैं उनको नीचे लिया और उनके ऊपर रह के धक्के देने लगा।

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सिद्धि:आआह जोर से आआह वीरू जोर से

मैंने अपना स्पीड बढ़ाया।

सिद्धि:आआह वीरू आआह आआह भड़वे रवि देख आआह आआह इसे कहते है चोदना आआह आआह वीरू और अंदर घुसा बहोत खुजली है चुत में आआह आह।

मेरे सामने सिद्धि की गाली दी हुई रवि को बर्दाश्त नही हुई।उसने अपना काम छोड़ा और पेंट निकाल के उसके मुह में लण्ड ठूस दिया।

रवि:मै भड़वा क्या तू साली रंडी है ...मसाला भी डाल दु तो भी रंडिया तेरी खुजली नही मिटेगी।ले चूस लण्ड।

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मैंने जोरदार धक्के देना चालू किया।रवि आया बड़े थाट से पर 15 मिनट में ही उसके मुह में झड गया।मैंने भी अपना सारा पानी सिद्धि के चुत में झाडके बाजू हुआ।

सिद्धि:अरे भड़वे तुझे भड़वा इसीलिए बोलती हु भोसडीके उसका देख चुसने के बाद भी आधे घंटे चुदाई करता रहा तेरा 15 मिनिट नही हुआ,झड गया।

शाम को सिद्धि मै रवि भैया और मा अपनी शॉपिंग के लिए निकल गए।
 
(Episode 4)

तीसरे दिन हमारी इंगेजमेंट हुई।सारे घर के ही लोग थे।उसमे मुझे कम्पनी पार्टनर संपतसिंह भी दिखे।बात अजीब नही थी।पर वो काफी घुल मिल गए थे जैसे वो रिश्तेदार हो।

मुझे कुछ शक सा हुआ।मैंने नाना जी से पूछ लिया।

नाना:अरे वो शिला के बड़े चाचा है।शादी होने तक यही रुकेंगे।

अच्छा तो ये छोटी मामी का चाचा है।इसका मतलब ये वो मास्टर माइंड हो सकता है।पर मुझे पूरा भरोसा नही था उस बात पे।जैसे ही एंगेजमेन्ट खत्म हुई छोटे मामा को लेकर संपत सिंह किधर तो चले गए।छोटी मामी उनके मा के साथ रूम में गयी।बड़ी मामी मा ,संजू,सिद्धि और बड़ी मामी के घरवाले संजू की अगली तैयारी रस्म में जुड़ गए।शादी ज्यादा शोर शराबा शानो शौकत में नही करनी थी ,क्योकि बड़े मामा को वैसा पसन्द नही था।बड़ी अजीब बात है,एकलौति बेटी की शादी अइसे कोई करता है भला।लगता है वो बेटी होने से ही खुश नही थे।नाना और बड़े मामा नाना के कमरे में बातचीत में लग गए।

मैं अपने कमरे में कपड़े उतारने गया।इतने भारी कपड़े पहनने की आदत नही थी मुझे तो मै अपने रोजाना कपड़े पहन लिया।तभी मुझे छोटे मामी ने अपने कमरे में बुलाया।

मैं अंदर गया।

छोटी मामी:वीरू मैंने तुम्हारी बाते मान ली थी अभी मेरे कागजाद दो।

मैं:कौनसे कागजाद??

मामी:देख अभी धोखाधड़ी मत कर,हममे एक डील हुई थी की तुम मेरे जायदाद के पेपर मुझे लौटा दोगे।

मैं:हा हुई थी।पर आपके पेपर्स की।और आपके नाम पे कोई जायदाद या कागजाद नही है।डील के पेपर पर भी वही लिखा था और अपने हस्ताक्षर भी दिए थे।

मामी गुस्से में मुझे थप्पड़ जड़ दी।मुझे भी गुस्सा आया।

मैं:बहोत घमंड है आपमे अभी देखता हु कैसे जायदाद मिलती हैं आपको।

मैं जाने के लिए घुमा तभी छोटी मा की मा सविता ने मुझे रुकाया।

सविता:रुको बेटा,मै माफी मांगती हु इसकी तरफ से,मेरी बात सुनो।

मैं:आप को उससे क्या?अभी थप्पड़ की सजा इनको मिलेगी जरूर।जायदाद का एक इंच भी नही दूंगा ।ये थप्पड़ बहोत भारी आपकी बेटिपर।

(मै वहाँ से निकलने लगा।उन्होंने मुझे हाथ पकड़ के रोका।)

सविता:सुनो बेटा नाराज क्यो होते हो।मसले का हल निकाल लेते है।तुम कहोगे वो करेंगे पर अभी जो तेरे पास दामादजी के जायदाद के कागज है उनको लौटना हिग।मंजूर!!!

मैं कुछ देर सोचा।मुझे लगा वैसे भी इनकी जायदाद का मुझे कुछ लेना है नही।मामाजी के कम्पनी कर्जे को जमा करदु तो वैसे भी उनके नाम की आधी जायदाद चली जाएगी।

मैं:ठीक है।ऊपर के टेरेस वाले कमरे में जाओ मै आया।

दोनो ने कुछ सोच कर वहाँ निकल गयी।मैं कुछ देर बाद वह पहुचा मेरे हाथ में बोतल थी।वही ट्रुथ और डेयर वाली।

सविता:ये क्या है?

मैं:ट्रुथ और डेयर।पर खेल थोड़ा अलग है।इसमे डेयर ही होगा।जिसके पास मुह गया उसको मैं डेयर दूंगा और उसे ओ करना पड़ेगा।

छोटी मामी मना करने ही वाली थी की सविता ने उसे रोका

सविता:ठीक है,चलो चालू करो।

ये हो क्या रहा था।ये सविता इतनी कॉन्फिडेंस से सब मंजूर कर रही है।कहि कुछ पक तो नही रहा यहा।वीरू बीटा चौकना रहना।अपने कम दुश्मन ज्यादा है यहाँ।दोनो को नीचे बिठाया और बोतल घूमी।

बारी छोटी मामी की।

मैं:एक कस के अपनी मा की गाल में लगाओ।

मामी:ये क्या बेहूदा पन है।मैई अइसा कुछ नही करूंगी।

मैं:करना तो पड़ेगा।रूल इस रूल।

सविता:शिला कोई बात नही।आज का दिन उसका है।

मामी ने कस के अपनी मा के कान के नीचे लगाई।

बोतल घुमा बारी सविता पे आई

मैं:आँटी सेम डेयर आपका।लगाओ कसके बेटी को

सविता ने भी कसके मामी को झांपड लगा दिया।

मैं:पता चला जब कान के नीचे पड़ती है तब कैसा लगता है।

अभी बोतल सविता के ही पास।

मैं:चलो आंटी ब्रा और पेंटी छोड़ के बाकी कपड़े उतारो।

मामी:वीरू अभी हद हो गयी।वो मा है मेरी।

मैं:मेरी मा को रंडी बनाने के वक्त मजा आया था न।वैसे भी तेरी मा भी उसी लेवल की है।क्यो आँटी जी।

सविता ने जैसे का वैसा कर दिया।अगली बारी मामी की।

मैं:चलो आप भी अपनी माताजी को कम्पनी दो।

दोनो औरते ब्रा पेंटी में मेरे सामने बैठी थी।अगली बोतल मामी को ही आयी।

मैं:अपने बचे कूचे कपड़े उतारो और पीठ के बल सो जाओ।

मैं शॉर्ट उतारा और नंगा होकर उनके पूरे शरीर पे मुत दिया।

अगली बारी सविता पे आयी।

मैं:आँटी अभी मामी का सारा बदन चाटके साफ करो।

अगली बार भी सविता आँटी के पास ही आया।

मै:आँटी अभी आप भी नंगी हो जाओ और बेटी के चुत को चुसो परपानी नही निकलन चाहिए।

सविता आँटी घोड़ी बन कर मामी की चुत चाटने लगी।

सविता की गांड बहोत बड़ी थी और गांड का छेद भी खुला हुआ था।ये तो गांड मरवा चुकी थी।मामी को चरम सिमा पे छोड़ वो बाजू हो गयी।मामी का पूरा शरीर हवस से लाल हो गया।

अगली डेयर मामी पे आयी।

मैं:मामी की अभी यहाँ कुछ होगा पर आपको पानी नही झड़ाना है।अगर झड गया तो आप खेल से बाहर होकर सजा मिलेगी और जायदाद जाएगी वो अलग।

ये बात सुन के सविता आँटी चौक गयी,ये हमला उनको उनके योजना से परे था।वो कुछ बोलना चाहती थी।पर उससे पहले मैंने उनके मुह में लन्ड ठूस दिया।और चोदने लगा।

कितने भी घमंड से भरी हो फिर भी इंसानी शरीर था।अपना धैर्य छोड़ दिया।मामी झड गयी।मैंने लन्ड बाहर निकाला और कपड़े पहन के जाने लगा।

जाते हुए:देखो आँटी एक मौका दिया था,आप खेल हार गयी।तो अभी जायदाद भूल जाओ।

दूसरे दिन औरतो के कुछ रस्म थे तो मैं घूम रहा था बाहर गार्डन में।तभी मक्खन का कॉल आया।

मैं:बोल मक्खन,क्या हुआ।

मक्खन:साब मुझे एक फाइल मिली है।आप कहो तो।

मैं:नही तुम यहाँ मत आओ,मैं आफिस आ जाता हु।

मैं किसी को बिना बताए निकल गया।आफिस में सब सुनसान था।अरे हा आज शनिवार था।मैं आफिस में गया।जैसे ही दरवाजा खोला तो सब बिखरा पड़ा था।मैं अपनी कुर्सी के पास गया तो मेरे पसीने छूटे। नीचे मक्खन गिरा पड़ा था।

मैं उसको उठाने लगा पर बहोत समय निकल गया था।उसने किसी फाइल का जिक्र किया था।मैं उस फाइल को ढूंढने लगा।पर अइसी कोई फाइल नही थी।केबिन का बिखरा समान देख लग रहा था की फाइल कोई लेके गया है।और उसी फाइल ने इसकी जान ली।

मैं मक्खन के कपड़े तलाशने लगा।और नसीब से एक पेनड्राइव उसके जेब में था।वो हाथ में लेके जैसे ही बाहर गया।किसीने गोली चला दी।बाल बाल बच गया।पार्किंग लॉट केबिन से काफी लम्बा था।पर कोई तरीका भी नही था तो मै भागा ।पार्किंग लॉट आने तक पैर के साइड से गोली छू कर निकल गयी थी।मैं कैसे वैसे गाड़ी में बैठा और वह से बाहर निकला।सीधा पोलिस स्टेशन।पोलिस वालो ने मेरे जख्म पर दवाई की।

इंस्पेक्टर:क्या हुआ था।कहा हुआ ये।

मैंने फोन से लेके अभीतक की सारी सच्चाई उनको बया की।उन्होंने एक टीम हमारे आफिस भेजी और मक्खन की लाश बरामद करके वहा से और सबूत की तलाशी ली।

इंस्पेक्टर:वो पेनड्राइव दो,हम देखते है कुछ मिलता है क्या।

मैंने इंस्पेक्टर को वो पेनड्राइव सौंप दी।इंस्पेक्टर ने उनके सहाय्यक को दी और पता करवाने बोला।

मैं घर आया।अभी भी मौहोल सही था।मै फुल पेंट पहनके था तो जख्म की पट्टी दिखाई नही दे रही थी।वो दिन निकल गया।

दूसरे दिन शाम को हल्दी थी और दूसरे दिन शादी।शादी गेस्ट हाउस पर थी।हल्दी की रस्म पूरी हुई।मै नहा के टेरेस पे था।वहाँ बड़ी मामी आयी।

ब मामी:क्यो बेटा अकेले अकेले,खुश नही हो शादी से तो पहले बतव।

मैं:नही मामी अइसी कोई बात नही।

ब मामी:फिर मामी क्यो बोल रहा है सासु मा बोल न

हम दोनो हस दिए।

बड़ी मामी:चल सुबह जल्दी उठना है।शादी है तेरी।ये अलग बात है की शानो शौकत में नहीं हुई ।खैर मेरे पोते के शादी में अपनी इच्छा पूरी कर लुंगी।

मुझे लेके ओ नीचे जाने लगी।तभी मुझे किसीका काल आया मैंने उनको आगे जाने को बोला।कॉल इंस्पेक्टर का था।

मै:जी सर बोलो,कुछ खबर मिली

इंस्पेक्टर:माफ करना इतनी रात गए कॉल किया।बात ये है की मक्खन को गोली मारने से पहले पीटा गया।उसके शरीर पे कुछ उंगलियो के निशान मिले।वो रिकॉर्ड में चेक किया तो कोई 'बलबीर सिंह' है।

मैं:अच्छा बलबीर!!!!

इंस्पेक्टर:आप जानते हो उसे??

मैं:जी वो मेकेनिक प्लम्बर है कम्पनी का।

इंस्पेक्टर:बड़ा बदमाश है,चोरी हाफ मर्डर के केस है।कैसे नोकरी पे रखा क्या मालूम आप लोगो ने।

मै:वो तो नाना जी के टाइम से है।पर वो छोड़ो उस पेनड्राइव का क्या हुआ।

इंस्पेक्टर:उसमे किसी फ़ाइल के पेपर के फोटोज है।आपके नाना के जायदाद के पेपर।आप देखना चाहते हो तो आपके यहाँ भेज देता हु।

मै:ठीक है मैं देखता हु।

इंस्पेक्टर ने मुझे व्हाट्सएप के जरिये वो फ़ोटो भेजे।वो पेपर अलग थे और मेरे हमले के बाद बने थे।मुझे अभी खतरे की घण्टी बजती दिखाई दी।मैंने कुछ सोचा औऱ इंस्पेक्टर को कॉल किया।अभी तो हम दोस्त बन गए थे।मैंने सारा प्लान उनको समझा दिया।कल कुछ जबरदस्त होने वाला था।मेरे शादी को मेरे बर्बादी की योजना बना रहा था कोई।
 
(Episode 5)

सुबह हम जल्दी उठ गए थे।छोटी मामी छोड़ बाकीऔरते सुबह ही गेस्ट हाउस पोहोंच गयी थी नाना के साथ।छोटे मामा मामी तो वैसे भी मेरे किसी खुशी में रुचि नही रखते थे।पर मुझे भी उनको तंग करना अच्छा नही लग रहा था।सुबह मैं मामी के कमरे में गया।

मामी:क्या है अभी,क्या चाहिए तुझे।

मै:ये आपके कागजाद!!!!

मामी को कागजाद सौंप दिए और वहा से निकलने लगा।

मामी ने रोका:रुक वीरू!ये क्या कैसे।अचानक!मुझे कुछ विश्वास ही नही हो रहा।

मैं:मामी मुझे आपसे कोई दुश्मनी नही,बस थोड़ा सावधान था तो बर्ताव में बदलाव किया था।कुछ गलत बोला हो तो माफ कर देना।

मामी:अरे नही गलती तो हमसे हुई,हमे तुम्हे जाने बिना बदसलूकी की।

मैं:चलो अभी तो साफ हो गये गिलाशिकवे तो आप अपने रास्ते मैं अपने रास्ते।

मामी:अरे वीरू रुक तो सही।अभी गिलेशिकवे दूर हो गए तो दोस्ती कर ले।

मैं:मैं अयसेही किसीसे दोस्ती नही करता।आपके लिए सोचूंगा फिर कभी।

मामी:अरे तुम बहोत ही बुरा मान गये।चलो आओ बैठो।मैं कुछ तोफा लाती हु।

मै:नही मामी,देर हो जाएगी।सभी लोग गेस्ट हाउस गए है।

मामी:शादी दोपहर 2 बजे है अभी 9 बजे है।बहोत ज्यादा टाइम है।तुम बैठो तो सही ।

मैं बेड पे बैठ गया।और मामी की राह देखने लगा।कुछ देर बाद मामी बाहर आयी।पूरी नंगी।

मैं:मामी ये क्या है।नही ये सब अभी मत करो,इसके लिए ये सही वक्त नही है।

मामी:वीरू इसका कोई वक्त नही होता।(उन्होने चुत को मसला।)जब आग लगे चुदवा लेना चाहिए।तू चोदता बड़ा मस्त है।अबतक थोड़ा ईगो था इसलिए नही तो तेरे से मजे लेके चुदवाने का मन था।

मैं:पर अभी कैसे,ये वक्त नही है ये।बाद में कभी सोचेंगे।

मैं उठ कर जाने लगा।मामी मेरे पास आयी और मुझे बेड पर धककल कर मेरे ऊपर चढ़ गयी।मेरे चेहरे को चूमने लगी।

मामी:अभी तू समय की बात मत कर,अभी सहन नही होगा मुझसे।

मामी ने मेरे कपड़े झट से निकाल फेंके औऱ बेड पर मेरे ऊपर चढ़ के मेरे पूरे शरीर को चाटने लगी।चाटते हुए नीचे लन्ड तक जाके लण्ड को चाटने लगी ऊपर से नीचे अंडों तक।लण्ड के टोपे पर जीभ घुमाने लगी।पूरा लण्ड मुह में लेके चुसने लगी।

फिरसे मेरे ऊपर आयी अपनी चुत को मेरे मुह पर लगा के गांड को आगे पीछे करने लगी।मैन अपनी जीभ उनके चुत में डाल दी थी।वो अभी जीभ से अपनी चुत को चुदवा रही थी।अपने चुचे मसल रही थी।चुत एकदम गर्म हो गयी थी।कुछ पल में ही उन्होंने अपने चुत को झड़ा दिया।

फिर नीचे लण्ड पे बैठ के पूरा लण्ड चुत में लिया"आहाह आहाह" ।गांड उठा के आहिस्ता आहिस्ता चोदने लगी।

मामी:साला कुछ भी हो तू है बड़ा दमदार लौंडा।तेरा लण्ड चुत में घुसते ही चुत तिलमिल जाती है आआह आआह आआह।

मामी ने चुदने का स्पीड बढ़ाया और फिरसे झड गई।वो आगे बढ़ती उससे पहले मै उनको हटाया और बाजू होकर कपड़े पहन लिया।

मैं:मामी बस हो गया।आपकी हवस कभी मिटेगी नही ,पर आज कुछ खास दिन है,आपकी हवस बाद में मिटा दूंगा।

मामी का ये बर्ताव सच में मेरे लिये बड़ा ही पहेली वाला था।क्या छोटी मामी सच में मेरे जान के पीछे नही थी।छोटे मामा तो मुझसे कबसे दूर भागे जा रहे है।मतलब पहलेसे ही इनको मेरे रास्ते में रखा गया था जिससे मेरा ध्यान सही शख्स से भटका रहे।बड़ा गेम खेल लियो रे ये तो।

दोपहर को 1 बजे

हम गेस्ट हाउस पहोंच गए।मेरा द्वार पे स्वागत हुआ।नाचते हुए गेस्ट हाउस के पिछे की तरफ जाना था।मेरे साथ छोटी मामी मा और रवि भैया और भाभी थी।बेंजो वाले आगे थे।पीछे कान्ता और शिवकरण।

मेरी नजर इंस्पेक्टर को ढूंढ रही थी।बेंजो वाले बड़े मजे ले रहे थे मेरे शादी की।

एक बेंजो वाला:साब जी काहे मय्यत वाली शक्ल बनाये हो,खुशियां मनाओ,आज तो शादी है।

इसको क्या मालूम आज मैं दो धार वाली तलवार में चल रहा हु ।आज या तो आर या पार।

आज शादी थी मैरी पर मुझे शोकसभा का अहसास हो रहा था।कल रात जो बाते मुझे मालूम पड़ी वो बहोत भयानक थी।

हम मंडप में गए।थोड़ी रस्मे पार हुई और संजू आ गयी।

आज कमाल लग रही थी।आज उनके प्यार में जान देने का भी मन नही था क्योकि वैसे भी जान के पीछे कोई और था।

संजू मंडप में आयी।सब लोग मंगलाष्टक के लिए खड़े हुए।

हर एक के आंखों में खुशी की लहर थी।ये जानना बहोत कठिन था की वो शादी की है या किसी और बात की।मै सिर्फ इंस्पेक्टर को ढूंढ रहा था।अभी उसके सिवा भरोसेमंद कोई था नही औऱ वही था जो आज मुझे बचा सकता था।

शादी खत्म हुई हम खाना खाने गए।फिर बिदाई तो होनी सी नही रही।पर अभी तक इंस्पेक्टर का कुछ मालूम पता नही था।अरे यार आज तो जान जानी थी।

घर जाने के लिए सब गाड़ी में बैठ गए।मेरे गाड़ी में मैं संजू मा बड़ी मामी और रवि भैया और दूसरे गाड़ी में छोटे मामा मामी भाभी और कान्ता।बाकी लोग तीसरे गाड़ी में।

हमारी गाड़ी बीच में थी और कान्ता वाली हमारे पीछे हमारे आगे बेंजो वाले थे।कुछ आधा कोस दूर रास्ते पर आने के बाद पूरा घना अंधेरा हो गया।और अचानक कहि से एक गाड़ी आयी 5 से 6 लोग उतरे और गोलीबारी चालू हुई।हमलावरों ने शुरवाती निशाना ड्रायविंग सीट मतलब ड्राइवर पर साधा क्योकि उससे गाड़ी या तो रुक जाय यातो पलट जाए।मारना तो सबको ही होगा उनको।इस मनसूबे की वजह से शिवकरण और छोटे मामा पहले शिकार हो गए।

गाड़िया रास्ते के बाजू वाले डगर पर चढ़ के रुक गयी।सारे लोग डर के मारे रो रहे थे चिल्ला रहे थे।इनका निशाना इसबार सिर्फ मैं नही था सारे थे।दो आदमी झट से कहि से आके मेरे गाड़ी का दरवाजा खोला बड़ी मामी को नीचे खींच कर संजू को लेके गया।दो आदमी उन 5 6 लोगो से अलग थे।वो दूसरी गाड़ी से आये थे।

सारा खेल सिर्फ 5 मिनट में घटा।उन लोगो ने फट फट से सारे लोगो को बाहर किया।सारे लोगो के एक किनारे खड़ा किया।हमलावर मास्क पहने थे।

मैं:देखो मुझे मालूम है की आप किसके लिए आये हो।जान मेरी लेनी थी तो उनको क्यो मारा।अभी बस हो गया ।आपको मैं चाहिए तो मै हाजिर हु।इनको छोड़ दो।

बंदे ने अपना मास्क हटाया:अरे चल बे लवड़े,आज सब के गाड़ में गोली मारूंगा।राम नाम सत्य है।

सब लोगो की उसको देख के आंखे घूम गयी।वो बलबीर था।बाकी लोगो ने भी मास्क हटाए।उन लोगो में फैक्टी के ही लोग थे।और वो दोनो सुपरवाइजिंग स्टाफ भी।मतलब मै जहा सेफ महसूस कर रहा था वही मेरे हमलावर थे।पिछला हमला कैसे हुआ इसका पता चल रहा था मुझे।

बलबीर ने मेरे ऊपर गन तानी:बहोत खून में गर्मी है न तेरे।साले आज सब मिट जाएगी।

उसका उंगली ट्रिगर पे दबने वाला था।यहाँ घरवाले पूरा सदमे में और हमलावर सब हस कर मजे ले रहे थे।मैंने आंखे बन्द की।मन ही मन इंस्पेक्टर को गाली देने लगा।फिर एक गोली चली।आंखे खोलने तक 4 5 6 गोलियां बरस गयी।पर फिर भी मैं जिंदा था।किसीने मुझे पीछे धकेला।मैं होश में आया।वो बेंजो वाले थे।

वो शख्स ने मुझे अपना वेश उतारा:क्यो साब जी मजे आये,खुशियां मनाओ,शादी हो गयी है।

मैं:यार पवन जान निकाल दी आपने।मुझे लगा आप फूल चढ़ाने आओगे मय्यत पे।

पवन वही है जो पुलिस में काम करता है और अभी दोस्त भी बना था।जिसकी सुबह से आँखे लगाए राहदेख रहा था।

पवन:अरे देरी करने की बहोत बड़ी वजह है चलो मेरे साथ।बताता हु।

शिवकरण और छोटे मामा तो स्वर्ग सिधार गए।मामी और कान्ता को एकदम से गहरे सदमे में थी।लाशें पोस्टमार्टम को ले जाई गयी।और सारे लोगो को इंस्पेक्टर पवन ने सारी बाते समझा दी।

सब लोग बंगले पर पहुंच गए।औरते बाहर थी।रवि भैया को गोली छू कर गयी थी तो उसे लेकर अस्पताल गए मै और पवन और कुछ हवलदार हमलावर का भेस बनाकर बंगले में गए।बलबीर को गाड़ी में बांध पुलिस ने बंगले को घेर लिया था।

हम घर में घुसे।सामने कुछ लोग खड़े थे।नानाजी,बड़े मामाजी,सुशील(छोटे मामी का बाप)सविता,संपत सिंह और अम्मा।

पवन संपत से:हो गया काम तमाम,अभी क्या हुकुम है।

संपत:और लाशें।

पवन(हमलावरों की भेस में):वो वहां है जहा आप सोच नही सकते।

"वो जिंदा हो गए तो तुम्हारे साथ क्या होगा ये तुम नही सोच सकते।ओ मरने ही चाहिए।"आवाज जानी पहचानी थी पर भरोसा नही हो रहा था की है शख्स इस सब के पीछे हो सकता है।जी जनाब वही मिस्टर शामलदास सिंह ,यानी नानाजी।

बड़े मामा:अभी उनकी जरूरत नही हमे,पुलिस को ओ महज एक एक्सीटेंट लगना चाहिए।

पवन ने अपना भेस हटाया:पर अभी बहोत देर हो गयी है।

अचानक से बलबीर समझ रहे थे वही पवन निकलने से सारे लोग एक दम हड़बड़ा गए।

सुशील:कौन हो तुम,बलबीर कहा है?

पवन:मैं तेरा बाप और तेरा बलबीर को ससुराल भेज दियो हमने।अभी आपकी बारी।

सविता:पु पु पुलिस.........!!!!!

सविता भाभी के पुलिस शब्द से सब चौकना हो गए।संपत ने झट से बंदूक तानी ।सविता उसका पति और नाना जी निकल गए। वह से निकल गए।संपत ने अपने कुछ आदमियो को भी इशारा किया।अभी वह जंग छिड़ गयी थी।गोलीबारी हो रही थी।

पवन ने मुझे कवर करके बोला तुम तुम्हारी बीवी को बचाओ।मैं संभाल लूंगा इनको।मैं ऊपर के कमरे में गुया।संजू के कमरे में।वह सविता नाना जी और सुशील थे।सविता ने चाकू संजू के गर्दन पे रखा था बाकी दोनो गमला लेके खड़े थे।

मैं:सुनो पूरा बंगला पुलिस से घिरा है।तुम लोगो का बचने का चांस नही।अगर संजू को कुछ हो जाएगा तो इंस्पेक्टर दोस्त है मेरा।यही शट आउट साइट करवा दूंगा।

सविता घबराहट से हाथ हटा दी।

नानाजी:अरे पगला गयी है।ये तुम्हे फुसला रहा है।और तुम पुलिस बाहर नही गयी तो संजू को मार देंगे।

मैं चौक कर:नानाजी नातिन है आपकी,ये क्या वाहियात हरकते लगा रखे हो।आप छोड़ो उसे।अपने ही परिवार को मारने को तुले हो।

हम झगड़ रहे थे।तभी रवि भैया के बाल्कनी से कूद के पवन अंदर आया उसने सुशील पर गोली चला दी।गोली पैर के नीचे लगी पर आवाज भारी होने से सविता के हाथ से चाकू गिर गया।नानाजी गमला लेके भाग ही रहे थे ।मैं पवन को मना करने से पहले ही पवन ने गोली चला दी पर बदनसीबी से जो गोली पैर पर लगने वाली तबी वो छाती पे लग गयी क्योकि जब भागते वक्त गोली बचाने नानाजी नीचे झुके उनको मालूम नही था की वो गोली पैर पे चलाएगा उन्होंने छाती का अनुमान लगाया था।एक गोली का झटका और नानाजी स्वर्ग पधार गए।

तभी पीछे से सारे घरवाले। अंदर घुस गए।मा और बड़ी मामी नानजी के पास जाके रोने धोने लग गयी।

मैं पवन से:भाई इंस्पेक्टर जनाब ये माजला क्या है,हम तो पूरे हिल गए है।जो कभी जिंदगी में नही सोचा वो देख रहै है।

पवन:चलो नीचे चलते है।फोरेंसिक को बुलाया है वो अपना काम करेगी यहां बाकी माजला मै समझा दूंगा।

नीचे संपत और उसके साथी मरे पड़े थे और चाचा के पैर पे गोली लगी थी।फोरेंसिक मलम पट्टी कर चुकी थी।उन्हें हतकड़िया से जखड के पुलिस कॉन्स्टेबल खड़ा था।

पवन ने अपनी बात शुरू की।

"ये मसला तुम्हारे पिताजी और चाचा से शुरू होता है।ये लोग एक कंपनी के लिए काम करते थे जो की एक कपड़ा कम्पनी थी।पर असलियत में वो ड्रग्स सप्लीमेंट करते थे।उनको घाटे की वजह से और पुलिस रेड से काफी नुकसान हुआ अभी जरूरत पैसे जगह और राजनीति से पुलिस सप्पोर्ट की थी

उस कम्पनी का मालिक संपत सिंह।अभी ये संपत तुम्हारे पिता जी का सगा भाई।ये जो बंगला है वो वीरमल जी का था।जिसकी विकलांग लड़की से शामलदास ने शादी की पैसे और जायदाद के लिए।तुम्हारा बड़ा मामा इनका सगा बेटा है जो शामलदास के पहले बीवी का बेटा और ये सविता सगी बेटी।विवेक इनके तीसरे पार्टनर का बेटा।पर तुम्हारी छोटी मामी इनकी बेटी नही है।उन्होंने गोद लिया था क्योकि विवेक बाप नही बन सकता था।क्योकि वो गे है।

तुम्हारी मा और छोटे मामा शामलदास के दूसरे पत्नी मतलब वीरमल के बेटी के सगी संताने है।

जो वसीहत कल पढ़ी वो वीरमल जी की असली वसीहत थी।जिसमे साफ साफ लिखा है की।मेरे पति के बच्चो को ही मेरी संपत्ति का हिस्सा मिलेगा।इस सच्चाई को सिर्फ संपत और शामलदास जानते थे।इसलिए तुम्हारे पिता से तुम्हारे मा की शादी भाग के करवाई और छोटी मामी को गोद लेके इनकी शादी छोटे मामा से।

मा की भागके शादी इसलिए जिससे वो फिरसे मुह दिखाने न आजाये पर तुम्हारे पिता ने कहि से ये बात जान ली।और कुछ प्लान कर तुझे चाचा से गोद लिया।जब प्रोपर्टी मांगने वो शामलदास के पास गए तो शामलदास ने मना किया।तुम्हारे पिता उसको बोले की वसीहत में अइसा जिक्र है की भाग जाने से वसीहत का हिस्सा बच्चा होने के बाद फिरसे मिलेगा वो भी तब जब बच्चा 18 साल का हो जाए ये नियम इसलिए जिससे तुम्हारी मा का संसार टिका रहे कोई पैसों के लिए शादी कर धोका न दे।पर तुम्हारी मा उसे तो बच्चा होगा नही इसलिये तुम्हारे बाप ने गोद लिया तुझे।

जब झगड़ा करके तुम्हारा बाप वहां से निकल गया तब शामलदास ने तुम्हारे चाचा को फुसलाया की ये तो तेरा बेटा है अगर भाई बीच न आएगा तो उसको मिलने वाली जायदाद तेरी।इसलिए उसने तेरे बाप को मरवा दिया।पर जब उसके बाद भी जायदाद नही मिली और जब चाचा को मालूम पड़ा की जायदाद तुझे दे दी गयी है तब वो आगबबुला हो गया उसने नाना को मारने की कोशिश की।पर नाना बच गए।

तुम पर जो हमले हो रहे थे वो संपत करवा रहा था।बलबीर और वो सुपरवाइजिंग स्टाफ के मदत से।मक्खन को बलबीर ने ही मारा।बलबीर सम्पत का खास आदमी।

बड़ी मामी के पिता एक MLA के यहाँ काम करते है।इसके लिए बड़े मामा की शादी उनसे करवाई जिससे थोड़े राजनैतिक सम्बन्ध बन जाए और पुलिस से बचने का जरिया हो जाए।पर बड़े मामा की पहले ही शादी हो गयी है।स्वीटी है उसका नाम।बड़े मांमा की पहली बीवी।

अभी इनका प्लान था की तुममें और छोटे मामा में आग लगा दी जाए और वैसे ही हुआ।तूने सारी जायदाद जो उनके नाम थी अपनी चालाकी से अपने नाम कर दी।और वही जायदाद संजू से शादी करवाके संजू के जरिये फिरसे अपने नाम करवाने वाले थे।फ़ीर मरने का नंबर संजू का था।तुम्हारी बीवी थी और तुम सबको मारने के बाद वही बाख जाती इसलिए सब जायदाद उसकी।हा पर ये एक्सीटेंट बताना था इसलिए खाई नीचे या नदी में डूबना था जहा वो एक्सीटेंट लगे और उधर पुलिस भी न पहुंचे।क्योकि जायदाद के अनुसार अगर खुन होता है तो सारा सरकार को मिल जाता।

पर ये फसे तुम्हारे चाचा की वजह से,तुम्हारी वचन से और शाश्वत से उसे उसने हमे सब गवाही में बता दिया।जिससे वो अभी माफी का साक्षीदार बन गया।हम अयसेही बताएंगे तुम्हारी चाची को जिससे आप में दुश्मनी न रहे।

हम सम्पत पर नजर गढ़ाए थे।पर हमे ये मालूम नही था की बलबीर भी है।पर जब उसने मक्खन को मारा और तुमपर भी हमला किया तब हमे जायदाद और बलबीर की सब इन्फो मिल गयी।झुंड में आकर चोरी करना उसकी आदत और फितरत है वो पूरा पुलिस डिपार्टमेंट जानता है।इसलिए हम भी उसकी ही स्टाइल से उसे पकड़े,भेस बदल के,बलबीर इतना खूंखार नही था लगता है कुछ वैयक्तिक दुश्मनी थी इसलिए उसने अइसा किया होगा।बाकी औऱ कुछ बताने जैसा है नही।बाकी तो बहोत कुछ जानते हो।

ब मामि मामा से रोते चिल्लाते:अरे हरामी हमे छोड़ो खुद की सगी बेटी को भी मारने का कैसे मन किया।

वो मामा को मारने दौड़ी पे लेडी कॉन्स्टेबल ने रोका।मा ने मामी को सम्भलके बाजू किया।मैंने पवन को थैंक्स बोला।बाद में आता हु बाकी की करवाई के लिए बोलके अलविदा किया।

अभी पूरे राज खुल गए थे।नाना छोटे मामा शिवकरण अभी इस दुनिया में नही है।बड़े मामा छोटी मामी के माता पिता को अरेस्ट किया गया।अभी उनके ऊपर मुकदमा चलेगा।चाचा भी माफी का साक्षीदार बन गया तो चाची और मेरे बीच भी कोई गीले शिकवे नही रहे।

अभी बचे मैं संजू मा छोटी और बड़ी मामी रवि भैया सिद्धि भाभी और कान्ता।अभी जिंदगी इन्ही लोगो के साथ जिनी थी।उनकी जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी।सारे कम्पनी का बोझ मेरे ऊपर आया।बाद में संजू और रवि भैया और सिद्धि भाभी ने भी उसमे भागीदारी लेके साथ दिया।अभी फिलहाल जिंदगी बिना रुकावट चल रही है।

end
 
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