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Guest
माँ की सेक्सी सेक्सी बातों को सुन मैं अपना आपा खो बैठा था...मैने भी कहा हां अधिकार तो मेरा संपूर्ण तुझपे है अब तू चाह कर भी मुझसे दूर नही जा सकती माइ सेक्सी डार्लिंग......माँ शरमाई तो मैने उसे खीचके उठाया और उसकी कमर पे अपने हाथ लपेट लिए माँ ने कहा चल अब बस भी कर तू मुझे लगता है कुछ करने ना देगा लेकिन अब तुझे मेरे मुताबिक चलना होगा तू अपना काम धंधा संभाल और मुझे घर का काम काज और हां अब कोई बहाना नही महीने की तनख़्वा मेरे हाथ में लाके देगा....इतना कह कर माँ हंस पड़ी तो मैने भी कमर पे हाथ की पकड़ कस ली और उसे अपने से चिपकते हुए कहा अर्रे तू तो मेरी घरवाली है तेरा पूरा अधिकार भी मुँह पे बनता है तू बस कह कर तो देख नोटो की गॅडी तुझपे बर्साउन्गा तुझे नहला दूँगा जेवर पैसा ऐशो आराम की हर चीज़ का तुझे भो दूँगा जो तेरा पति तुझे दे ना सका वो मैं दूँगा......माँ शरम से लाल हो गयी
अंजुम : तू बस मुझे दो रोटी और तंन ढकने के लिए कपड़ा और सर छुपाने के लिए छत भी देगा तो मेरे लिए बहुत है कोई भी औरत बस यही तो चाहती उसके बेटे की खुशी ही उसकी खुशी है मुझे ये ऐशो आराम की चीज़ नही बस तेरा साथ चाहिए और तेरा सुख
माँ भावुक हो गयी मैने उसके आँखो के आँसू पोछे....और कहा बस इसी लिए तो मैं तुझ इतना प्यार करता हूँ मुझे नही परवाह लड़कियो की बस जैसे मेरी इच्छा अब जाके तृप्त हुई है खैर ये सब छोड़ बहुत रो लिया तूने अब तेरे सुख लेने के दिन हैं...
माँ मुस्कुराइ
आदम : अच्छा अब भी दर्द है (मैने कल रात की चुदाई के बाद उनकी चूत का हाल जाना सुबह तो सिकाई कर ही दी थी तो माँ ने सिर्फ़ सर हां में हिलाया)
अंजुम : ज़्यादा नही है हल्का दर्द है तेरा वो काफ़ी मोटा है इसलिए दर्द हुआ
आदम : हाहाहा वो तो बस मेरे हाथो की मालिश और वैद्य जी की दवाई का कमाल है
अंजुम : वैद्य जी कौन वैद्य जी?
आदम : हाहाहा अभी जाने दे वो बात वो किस्सा तुझे बाद में बताउन्गा फिलहाल ये राशन ले तेरी बताई सारी चीज़ें ले आया हूँ तू चादर छोड़ मैं उसे निचोड़ दूँगा बाकी खाना लगा भूक लगी है
अंजुम मुस्कुराइ राशन का सामान लेते हुए मेरे हाथ से रसोईघर चली गयी मैं जब गुसलखाने में आया तो बाल्टी में भरे पानी मे चादर को पाया उसे पानी से निकालके झाड़ा और देखने लगा कि उस पर माँ की चूत से निकले खून का हल्का दाग लगा हुआ था..मैं मुस्कुराया क्यूंकी कल उस चादर के उपर ही हमने अपनी पहली सुहागरात मनाई थी....माँ ने दाग को रगड़ रगड़ कर निकालके सॉफ करने का खूब प्रयास किया था...
नहा धोके फारिग होके मैने निचोड़ी चादर को बाहर लॉन में सुखाने को फैलाक़े टाँग दिया...अंदर आया तो माँ खाना परोस रही थी...मैने एक ही थाली मे दोनो का खाना डालने को कहा फिर माँ को अपनी जाँघ पे काफ़ी उनकी ना नुकुर के बाद बिठाया उफ्फ मेरा लंड प्यज़ामे के अंदर से ही खड़ा होके उनकी नाइटी के कपड़े में कुल्हो के बीच की दरार के मुंहाने में दब गया...माँ शरमाते हुए मुझे अपने हाथो से खिलाने लगी और मैं भी उसे खिलाने लगा झुँटन से तो हम घिन नही मानते थे आपस में
अंजुम : तू बस मुझे दो रोटी और तंन ढकने के लिए कपड़ा और सर छुपाने के लिए छत भी देगा तो मेरे लिए बहुत है कोई भी औरत बस यही तो चाहती उसके बेटे की खुशी ही उसकी खुशी है मुझे ये ऐशो आराम की चीज़ नही बस तेरा साथ चाहिए और तेरा सुख
माँ भावुक हो गयी मैने उसके आँखो के आँसू पोछे....और कहा बस इसी लिए तो मैं तुझ इतना प्यार करता हूँ मुझे नही परवाह लड़कियो की बस जैसे मेरी इच्छा अब जाके तृप्त हुई है खैर ये सब छोड़ बहुत रो लिया तूने अब तेरे सुख लेने के दिन हैं...
माँ मुस्कुराइ
आदम : अच्छा अब भी दर्द है (मैने कल रात की चुदाई के बाद उनकी चूत का हाल जाना सुबह तो सिकाई कर ही दी थी तो माँ ने सिर्फ़ सर हां में हिलाया)
अंजुम : ज़्यादा नही है हल्का दर्द है तेरा वो काफ़ी मोटा है इसलिए दर्द हुआ
आदम : हाहाहा वो तो बस मेरे हाथो की मालिश और वैद्य जी की दवाई का कमाल है
अंजुम : वैद्य जी कौन वैद्य जी?
आदम : हाहाहा अभी जाने दे वो बात वो किस्सा तुझे बाद में बताउन्गा फिलहाल ये राशन ले तेरी बताई सारी चीज़ें ले आया हूँ तू चादर छोड़ मैं उसे निचोड़ दूँगा बाकी खाना लगा भूक लगी है
अंजुम मुस्कुराइ राशन का सामान लेते हुए मेरे हाथ से रसोईघर चली गयी मैं जब गुसलखाने में आया तो बाल्टी में भरे पानी मे चादर को पाया उसे पानी से निकालके झाड़ा और देखने लगा कि उस पर माँ की चूत से निकले खून का हल्का दाग लगा हुआ था..मैं मुस्कुराया क्यूंकी कल उस चादर के उपर ही हमने अपनी पहली सुहागरात मनाई थी....माँ ने दाग को रगड़ रगड़ कर निकालके सॉफ करने का खूब प्रयास किया था...
नहा धोके फारिग होके मैने निचोड़ी चादर को बाहर लॉन में सुखाने को फैलाक़े टाँग दिया...अंदर आया तो माँ खाना परोस रही थी...मैने एक ही थाली मे दोनो का खाना डालने को कहा फिर माँ को अपनी जाँघ पे काफ़ी उनकी ना नुकुर के बाद बिठाया उफ्फ मेरा लंड प्यज़ामे के अंदर से ही खड़ा होके उनकी नाइटी के कपड़े में कुल्हो के बीच की दरार के मुंहाने में दब गया...माँ शरमाते हुए मुझे अपने हाथो से खिलाने लगी और मैं भी उसे खिलाने लगा झुँटन से तो हम घिन नही मानते थे आपस में