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Incest माँ को पाने की हसरत

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यहाँ मैं आप लोगो को बता दूं...कि आदम अपने गंदे कपड़े माँ के कपड़े धोने के टाइम ही उन्हें दे दिया करता था...जिस वजह से वो दूसरा कपड़े ना पहन्के सिर्फ़ टाँगों के बीच एक तौलिया बाँध लेता था...माँ को बेटे के नंगे रहने से क्या शरम हो सकती थी पर आज आदम के दिमाग़ कोई और खुरापाती आइडिया चल रहा था...

वो तौलिए के अंदर ही अपना ब्लॅकबेरी मोबाइल अंदर बाथरूम में चुपके से ले आया था...माँ आँगन की सफाई करने चली गयी थी...इसलिए आदम ने लेटरिंग के बहाने बाथरूम का अच्छे से मुआयना किया...और फिर उसे साबुन रखने के तख्ते के ठीक सबसे उपर वाली जगह में अड़ा के रख दिया...उसने मोबाइल का कॅमरा ऑन कर लिया था मेमोरी कार्ड खाली था इसलिए उसमें काफ़ी देर तक का वीडियो रेकॉर्ड हो सकता था...पर प्राब्लम थी कि कहीं बीच में मोबाइल पे माँ की नज़र ना पड़ जाए

आदम बाहर को आया उसने झूठमूठ के हाथ धोए....और वापिस अपने कंप्यूटर पे आके बैठ गया...मोबाइल ऑन था रेकॉर्डिंग चल रही थी...आदम ने देखा माँ ने सिर्फ़ जंपर पहन रखी थी नीचे से उनके झुकते वक़्त उसे उनकी ब्राउन पैंटी दिख गयी अफ उनके जांघों के पास थोड़े बाल उगे थे...लेकिन टाँगें एकदम गोरी थी...वो जानता था जांघों से भी ज़्यादा बाल उसकी टाँगों के बीच होंगे जो इस वक़्त गीली पैंटी से ढके हुए है

माँ झाड़ू एक जगह रख वापिस उठी...तो इस बार मेरी उनके गीले जंपर के सामने निगाह उठी...उनके पेट की नाभि और छातिया सॉफ गीले जंपर से उभर कर दिख रही थी....अगर अंदर ब्रा ना होती तो कसम से उनके निपल्स सॉफ दिख जाते

खैर माँ बाथरूम में अपने गीले पहने कपड़ों के साथ घुस गयी....फिर अंदर नल चलने की आवाज़ आई....करीब कुछ देर तक माँ का नहाना चल रहा था...और इधर बेटा पीसी पे लगी एक सेक्सी माँ बेटे की ब्लूफिल्म देख रहा था जिसमें माँ बेटे का मोटा लंड अपने झान्टेदार चूत में ले लेके चुद रही थी...आदम मूठ मारता रहा

अचानक बाथरूम की कुण्डी खुलने की आवाज़ हुई...आदम ने फ़ौरन अपने मोटे लंबे लंड को तौलिए के भीतर दबाया और टाँगें खोली मुद्रा में कुछ देर वैसे बैठा रहा....उसने पीसी झट से ऑफ कर दिया था....माँ तब तक तौलिया लपेटी अपने गीले बदन पे बाहर निकली....उफ्फ वो किसी 25 साल की सेक्सी लौंडिया जैसी लग रही थी कारण उनका फिगर कुछ कुँवारी लड़कियो जैसा वेल-मेंटेंड था

आदम ने देखा उसकी माँ बिना उससे परदा किए सिर्फ़ एक गीली तौलिया लपेटे बाहर निकलके आ गयी थी...उसने सॉफ पाया माँ ने कांख के बाल सॉफ नही किए थे क्यूंकी वो बहुत ज़्यादा उगे हुए थे...तौलिया छातियो के उपर से लेके माँ ने घुटनो के उपर तक बाँध रखी थी इसलिए चुचियो के कटाव सॉफ उभरे हुए दिख रहे थे...उफ्फ माँ की दाई छाती के उपर एक काला तिल था जो बहुत सेक्सी लग रहा था..

"जा अब ऐसे क्यूँ बैठा हुआ है? जल्दी नहा ले फिर साथ खाना खाएँगे?"....इतना कहते हुए माँ अलमारी खोल अपने पहनने वाले कपड़े निकालने लगी....उस वक़्त उनके हाथ में जो आ रहा था वो उसे बिस्तर पे रखते जा रही थी जिनमें उनके पहले अंडरगार्मेंट्स थे

उन्होने काली ब्रा और नीले रंग की पैंटी निकालके पहले रखी उफ्फ मेरा तो देखके ही खड़ा हो रहा था...मैं तब तक बाथरूम में जाने लगा...एक पल को सोचा माँ को चेंज करते हुए भी देख लून पर शायद माँ को आभास हो जाता फिर भी एक बार पीछे मूड कर कमरे में झाँका तो पाया माँ ने अपनी छातियो पे बँधे टवल की गाँठ खोल दी थी और उसे दोनो हाथो में लेके अपने बदन से अलग करके लगभग हाथो में लिए फैला दिया था उफ्फ अगर सामने से देख सकता तो उनका पूरा नंगा बदन मेरे सामने होता

खैर मैने तौलिया लिए अपने खड़े लंड को हाथो में सहलाया बाथरूम में आया...कुण्डी लगाई और तख्ते से मोबाइल उठाया गनीमत थी कि रेकॉर्डिंग अब तक 38 मिनट तक की रेकॉर्ड हो चुकी थी..मैने वीडियो रेकॉर्डिंग स्टॉप की..फिर उसे दुबारा प्ले किया....करीब 10 मिनट बर्बाद हुए वीडियो की स्टार्टिंग में फिर उसके बाद माँ बाथरूम में आ गयी कुण्डी लगाई और अपने गीले कपड़े खोलने लगी

उफ्फ उन्होने अपने हाथ उपर उठाए जंपर को अपने बदन से अलग किया तो कांख के बाल पहले दिखाई दिए उफ्फ उन्होने बाथरूम की लाइट जला दी थी इसलिए उनका वीडियो पूरा सॉफ था...वो नल चलाते हुए अपनी ब्रा और पैंटी को उतारने लगी अब मेरे सामने उनके लटकती चुचियाँ दिखाई पड़ी फिर उन्होने पैंटी को दोनो उंगली डाले पाँव तक उतारते हुए जैसे टाँगों से निकाल फैका तो पाया कि उनकी टाँगों के बीच झान्टो का भंडार था उफ्फ इतनी लंबी लंबी काली झान्टे थी माँ ने अपने उपर पानी डालना शुरू किया फिर अपने कांख के बालों पे साबुन घिसते हुए फिर अपने पूरे शरीर पे साबुन मलने लगी इस बीच माँ केमरे की तरफ पीठ कर लेती है जिस वजह से मुझे उनके गोल गोल चूतड़ सॉफ दिखाई देते है

क्या सावले उभरे हुए नितंब थे जिनकी गोलाइया भी हॅंडबॉल साइज़ की थी....अफ काश एक दबाने को मिल जाए?....यही देखते देखते मैं अपने लंड को भी मुठिया रहा था...माँ ने अब अपनी झान्टे दार चूत में टाँगों को फैलाए साबुन मलना शुरू कर दिया....हम साबुन एक ही उसे करते थे अब तक शायद मुझे मालूम नही चला पर शायद माँ की चूत की महेक उसमें समा गयी होगी मैं साबुन भी एक हाथ में लेके सुघने लगा...और अपने लंड पे उसे घिसने भी लगा...उफ्फ माँ का पूरा बदन साबुन के झाग से सरोबार था....माँ ने साबुन को ले जाते हुए अपने गीले नितंबो के बीच भी रगड़ना शुरू कर दिया...और उसी बीच मुझे माँ की उभरी नितंबो की गोलाईयों की फांके दिखने लगी

माँ का छेद काला होने से दिख नही रहा था...पर उसमें लगी साबुन का झाग बराबर दिख रहा था...माँ अपनी गान्ड और पीठ को हाथो से रब करके उसका शायद मेल छुड़ा रही थी माँ ने अपने पूरे बदन को अच्छे से साबुन से रगड़ते हुए शवर ऑन कर दिया उफ्फ माँ की गोल गहरी नाभि और निकला तोंद काफ़ी सेक्सी लग रहा था वो अपनी झान्टेदार चूत के भीतर शायद हाथ घुसा घुसा कर उसे भी सॉफ कर रही थी उसने अपने दोनो छेदों को बराबर सॉफ किया और फिर नहाने से फारिग होते ही अपने गीले नंगे बदन पे तौलिया लपेटने लगी....उफ्फ इस बीच मैने गौर किया तो माँ के निपल्स मुझे एकदम सख़्त महसूस हुए जो मोटे ब्राउन से थे...माँ वैसे ही बदन को पोंछते हुए बाहर निकल गयी कुण्डी खोल कर

 
ये सब देखके कब मैने माँ के नाम की मूठ मारके अपना लावा निकाल दिया था मुझे मालूम नही बस गाढ़ा गाढ़ा चिपचिपा वीर्य मेरी माँ के शरीर को देखके निकले जा रहा था...मैने मोबाइल तख्ते पे रख दिया नाहया और बाहर मोबाइल के साथ निकल गया....हम माँ-बेटे ने मिलके लंच किया उसके बाद माँ थोड़ा सुस्ताये लहज़े में बोली कि उसे नींद आ रही है वो सोएगी...वो सोने बेडरूम चली गयी मैं वापिस पीसी पे माँ के बनाए वीडियो को मेमोरी कार्ड से निकाल कर उसमें देखने लगा...

फिर मेमोरी कार्ड निकाल कर वापिस से मोबाइल का मेमोरी कार्ड मोबाइल में फिट कर दिया..ताकि माँ जो बार बार मेरा मोबाइल चेक करती है उसे मिल ना जाए...खैर ये वाक़या सिर्फ़ उस दिन का था..लेकिन धीरे धीरे मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी माँ से खुले शब्दो में जैसे गाली गलोच डबल मीनिंग के रूप में बात करना कोई गंदा जोक सुनाके हंस देना...मतलब मैं माँ को पूरा खोलने के मूड मे था...पर वो माँ थी बेटे और उसके बीच एक परदा था जिसकी वो अब भी रेस्पेक्ट करती थी लेकिन वो परदा मैं शायद अब ज़्यादा दिन तक रखना नही चाहता था

माँ ने भी बेटे की हरकतों को नोटीस करना शुरू कर दिया था...उसने देखा कि आजकल बेटा बार बार उसे बगलो में उगे बालों के लिए टोकता है उसका मज़ाक उड़ाता है तो कभी उसके पेट की स्ट्रेच मार्क्स की बात कह डालता है तो कभी बॉडी शेविंग ब्लेड माँ से लाने को कहता है वो धीरे धीरे माँ से खुल रहा था दो दिन बीत गये बाबूजी आ गये पर बेटे की हिम्मत ज़रा सी भी कम ना हुई थी...हालाँकि पिताजी आदम को देखके काफ़ी खुश हुए थे कि उनका बेटा लौट आया है पर आदम कतरा रहा था कि कहीं उन्हें उसकी होमटाउन की नौकरी छोड़ देने वाली बात ना मालूम चल जाए...

पर धीरे धीरे माँ ने अपनी ममता के लिए बाबूजी से बात की और उन्हें समझाया...पिता ने बेटे को अगले दिन समझाया कि कोई बात नही जो हुआ सो हुआ वो अब यही ज़िंदगी गुज़ारे हो सके तो 2 साल और पढ़ ले...पर बेटे का कहाँ मन लगने वाला था? वो तो पहले से ही कामवासना की विद्या पढ़ चुका था उसकी हसरत अब सिर्फ़ चुदाई थी और उसका शौक भी अब घर के भीतर ही अपने माँ को पटाने में था...फिर भी उसे खुशी थी बाबूजी सपोरटिव हो गये थे

लेकिन फिर वोई हालत कि घर में कलेश फिर शुरू हो गयी....और अंजुम और उसके पति में काफ़ी झगड़ा होने लगा...बेटा माँ को झगड़े के बाद समझाने की पूरी कोशिश करता था जिस बीच माँ बेटे से क्लोज़ हो जाती उसे लगता इस दुनिया में उसे समझने वाला सिर्फ़ उसका बेटा आदम ही था...और उसने सॉफ कह दिया था अपने पति को कि उसे अब किसी गैर मर्द की ज़रूरत नही उसको सहारा देने वाला उसका बेटा काफ़ी है...पर आदम इस बात को लेके कुछ ज़्यादा ही मज़ा महसूस करता था उसने अपनी माँ का विश्वास लगभग जीत लिया था...

उस दिन अंजुम बेटे की गैर मज़ूद्गी में हेमा से बात कर रही थी....उसने हेमा को बेटे में हुए बदलाव की खबर सुनाई और साथ साथ उसे आदम के बारे में कुछ अज़ाब सा बताने लगी जिसे सुनके हेमा को काफ़ी मज़ा आ रहा था

हेमा : क्या सच में तेरा बेटा कही तेरा आशिक़ तो नही हो गया? वो जिस तरीके की हरकत कर रहा है जैसा तू बता रही है? मुझे लगता है कहीं मेरी बात सच तो नही हो गयी

अंजुम : मुझे तो लगता है यह मेरा भ्रम है हेमा मेरा बेटा मुझे उस निगाह से क्यूँ देखेगा? मैं उसकी माँ हूँ...लेकिन अज़ीब तो लगता है आजकल उसमे सामने तौलिया पहने निकलते हुए शरम आती है वो मेरी जाँघो को मेरे छाती और गले को तो कभी मेरे पिछवाड़े को भी चोर निगाहो से घूर्रता है (कहते हुए अंजुम ने शरम से आँखे नीचे कर ली)

हेमा : हाहाहा लगता है तेरा बेटा तेरा ही दीवाना हो गया क्या पराए मर्द तेरे पीछे खीचें चले आएँगे ये तो घर का सयाना लौंडा ही अपनी माँ का आशिक़ बन गया है

अंजुम : लेकिन हेमा ये सब आदतें मुझे ठीक नही लगती तू एक काम तू तो उसकी माँ जैसी है वो तो तुझसे और भी ज़्यादा खुला हुआ है और तो और उसकी गंदी गंदी बातें मुझे ऐसा लगता है कि अपने होमटाउन से आने के बाद वो बिल्कुल बदल गया है

हेमा : अर्रे अंजुम मैं हर मर्दो को पहचान लेती हूँ और उसकी नुन्नि को तो मैने ही इन्ही हाथो से एक दिन धोया है एक बार तो उसकी गान्ड भी धोयि थी तू फिकर ना कर हो सकता है वो तेरी इतनी परवाह करता है जैसा तूने कहा कि वो तुझे मार्केट ले जाता है सब्ज़िया भी खुद धोके लाता है और तुझे एक बॅग भी उठाने नही देता तो हो सकता है उसका ये ख्याल करना ये अपनापन तेरे लिए खुशख़बरी हो

अंजुम : खुशख़बरी कैसी खुशख़बरी?

हेमा : देख तू चाहती थी ना तेरा बेटा तुझसे दूर ना रहे तो बस वो तेरे पास आ गया बस उसे जी तोड़ प्यार कर उसे किसी चीज़ की कमी होने मत दे और मेरी मान तो तुम दोनो दोस्त जैसे हो तो उसके अंतर मन को जानने की कोशिशें कर

अंजुम : मुझे लगता है कि वो टाउन में किसी लड़की से मुहब्बत कर बैठा है इसलिए शायद अपनी माँ को पटा रहा है ताकि उससे शादी कर सके मुझसे डरता है ना

हेमा अपने सर पे हाथ रखके उसकी मूर्खता पे सर हिला रही थी कैसी औरत थी अंजुम जो अपने बेटे की फीलिंग्स को समझ नही पा रही थी..हेमा लेकिन कुछ कुछ समझ रही थी इसलिए उसने भोली अंजुम को शान्त्वना दी कि आदम उसे और उसकी बहनों से मिल भी लेगा तो उसे आने को कह मेरे घर....अंजुम मान गयी....हेमा अब आदम से डाइरेक्ट खुद इस मामले में उससे बात करना चाहती थी...अंजुम को लगा कि उसकी सहेली हेमा उसके बेटे को शायद समझा देगी कि उसके दिल में क्या है? लेकिन अंजुम क्या जाने हेमा तो आदम और उसके बीच के रिश्ते को टटोलने की कोशिश रही थी

 
समीर आदम का मोबाइल हाथ में लिए मूठ रहा था आदम भी उसके साथ पॅंट नीचे किए दोनो साथ साथ अंजुम की बाथरूम वाली वीडियो को बड़े चाव से देख रहे थे...आदम को समीर का यूँ मस्त होते देखना देख मज़ा दिला रहा था....समीर पूरी वीडियो को देखते हुए खासकरके उसकी माँ की योनि और चुचियो को देखते हुए सिसक रहा था...उसने मोबाइल आदम के हाथ में दे दिया दोनो बेस्ट फ्रेंड थे इसलिए दोनो के बीच कुछ छुपा नही था

समीर : उफ़फ्फ़ कसम से यार आंटी बहुत सेक्सी है साले (समीर का चेहरा लाल था उत्तेजना में वो मदहोश स्वर में बोल उठा)

आदम : हां रे देख मेरा तो पूरी औकात में खड़ा है 3 महीने तक इस लंड की मालिश करवाई थी और देख कल से ही माँ की याद में कैसे झड रहा है?

समीर : कंट्रोल बेटा कंट्रोल यार कसम से आंटी तो मेरी माँ से भी सेक्सी है

आदम : पर तेरी माँ का देखके तो अच्छे अछो का पानी निकल जाए एक तू है जो उन्हें बाँध रखा है कसम से उनकी अंतर्वासना खुलते ही वो तो किसी हवस की भूकि शेरनी की तरह तुझपे टूट पड़ती होगी बिस्तर पे

समीर : मत पूछ साले इसी लिए कह रहा हूँ मत पूछ हमारी माओ की बात ही जुदा है खैर तूने यहाँ तक तो रास्ता नाप लिया...आगे का रास्ता तय करना कोई बड़ी बात नही देख लेना तू एकदिन अंजुम आंटी को अपने बिस्तर पे नंगा देखेगा बहुत जल्द ही

आदम : तेरे मुँह में घी शक्कर

समीर : पर उनसे मुहब्बत करना टूटके मेरे जैसा क्यूंकी औरत के साथ करने के बाद उन्हें दगा देना धोका देने से भी ज़्यादा गुनाहगारी कहलाता है

आदम : हां यार चल अब मैं घर चलता हूँ सोचा तुझे आज यह वीडियो दिखा दूं अब इसे डेलीट कर देता हूँ (आदम ने समीर के सामने ही वीडियो डेलीट कर दी)

समीर : ह्म चल ठीक है फिर ओके भाईजान मेरी शुभकामनाए

आदम : ह्म चल बाइ

आदम समीर के ऑफीस से निकल जाता है पीछे समीर अपने उभरे हुए पॅंट को ठीक करते हुया...ऑनलाइन शॉपिंग में अपनी माँ के लिए एक सेक्सी ब्लॅक निघ्त्य खदीद लेता है

उधर आदम जब घर पहुचता है तो उसकी माँ उसे खुश लगती है....पूछने पे बताती है कि वो आज ऐसे ही बेटे के अब यहाँ रहने से काफ़ी खुश है...आदम अभी मुस्कुराता ही है कि उसे माँ बताती है की उसकी सहेली हेमा उससे मिलना चाहती है आदम हेमा आंटी से मिलने को राज़ी हो जाता है....

"बेटा सवा 12 हो चुका है दोपहर सर चढ़ रहा है बेटा उठ भी जा अब कब तक ऐसे सोया पड़ा रहेगा".......जब आदम का सपना टूटा तो उसने पाया कि वो करीब 9 घंटे तक सोया पड़ा था अपने बिस्तर पे...

आदम आँख मसल्ते हुए उठा तो उसकी माँ उसे जगाके किचन में नाश्ता बनाने चली गयी...आदम ने वक़्त देखा सच में 12 बज चुके थे...एक वक़्त था कि वो सुबह सुबह जल्दी उठके नौकरी के लिए निकल जाता था पर आज एक वक़्त है कि माँ के हाथो का खाना और आलस्पन ने उसे काफ़ी स्लो कर दिया था...इतने में उसने ख्याल किया उसने समीर को वीडियो दिखाई थी उसने अपनी माँ के कमरे में दाखिल होते ही उसे पूछा

आदम : अर्रे माँ कल मैं समीर के यहाँ गया था क्या? आइ मीन कल घर से बाहर गया था

अंजुम : और लो ? एक तो साहेबज़ादे दोपहर के इस वक़्त उठ रहे है और पूछ रहे है मैं घर से निकला था कल? अर्रे उल्लू तू जबसे आया है गया ही कब है? वो तो समीर का आज सुबह ही तेरे फोन पे कॉल आया तो मैने ही उसे बताया कि तू जबसे आया है या तो पीसी पे बैठा रहता है या सोया पड़ा रहता है

आदम : मतलब कल मैं कहीं गया नही था? और आपसे हेमा आंटी ने मुझे बुलावा भेजा

अंजुम : बेटा तूने सपना देखा होगा हेमा का फोन आया ही कब है मुझे तेरे आने के बाद से और मैने कब बात किया उनसे तू सच में सपना ही देख रहा होगा अच्छा जल्दी उठ पड़ता खा और नाश्ता से फारिग होके कपड़े दे जल्दी से धो दूं

आदम : माँ तुम इतना काम क्यूँ करोगी मैं ही पोंचा लगा देता हूँ ना और झूठे बर्तन भी धो देता हूँ

अंजुम : वाहह माँ का बड़ा ख्याल है तुझे चल ठीक है लेकिन बाद में तेरे बाबूजी को मुँह ना मिले कि बेटे से माँ काम करवा रही है उन्हें पसंद नही कि मर्द होके तू घर का काम करे एक बार बहुत डांटा था मुझे और उन्हें तो बस मौका ही मिल जाएगा

आदम : अपनी माँ का हाथ बाटने में मुझे कोई प्राब्लम नही बाबूजी गये हुए है ना नौकरी पे तो कौन बताएगा उन्हें मैं या तू? चल तू झाड़ू मार दे मैं पोछा लगा देता हूँ

अंजुम : हां पहले नाश्ता तो कर ले बाबू

अंजुम ने प्यार से बेटे के बाल को सहलाते हुए दस्तार ख़ान बिछा कर बिस्तर पे ही नाश्ता लगाया...दोनो माँ-बेटा नाश्ता करने लगे...आदम को अहसास हुआ कि कल रात को ज़्यादा देर रात सोने के बाद से ही उसने ये सपना देखा होगा कि उसने समीर को वीडियो दिखाई थी अपनी माँ की...उसने अपना मोबाइल चेक किया सच में वीडियो तो अब तक डेलीट नही हुआ था....इसका मतलब सॉफ था कि महेज़ वो एक ख्वाब था

आदम को जैसा अज़ीब सा बुरा सा लगा उसने फ़ौरन वीडियो डेलीट कर दिया....माँ ने नाश्ते के वक़्त कहा कि हेमा तुझसे मिलने की ज़िद्द कर रही थी जब तू नही आया था एक बार अपनी बहनों से भी मिल लेना और हेमा आंटी से भी...आदम ने हामी भर दी कि वो आज शाम को अपनी माँ के साथ उनकी सहेली के यहाँ जाएगा

माँ कपड़े लेके गुसलखाने में घुस गयी...आदम पोछा लगाके फारिग हुया झट से पीसी ऑन करता है...उसकी फेव पोर्न्स्टार जूलीया अन्न की एक सेक्सी क्लिप उसे मिलती है जिसमें वो एक हबशी से चुद रही होती है....गौर करने पे पाता है कि उसका बेटा कमरे के बाहर से दोनो की चुदाई देखते हुए रो रहा था...वो अपने आँसू पोंछता है...बाद में सीन में दिखाया जाता है कि जूलीया अन्न एक ग़रीब विधवा औरत होती है जिसका पति के बाद गुज़ारा मुस्किल होता है उसके बेटे की स्कूल फीस भरने और बाकी घर के खर्चा निकालने के लिए वो अपने बाय्फ्रेंड से चुद रही होती है....बेटा इतना गिल्ट महसूस करता है कि वो अपने दोस्त को ये बात नही बताता है और उसका दोस्त सबकी माओ की चर्चा करता है उसे अहसास होता है कि कल्तक वो दूसरो की माओ की चर्चा करता था आज उसके घर उसकी अपनी माँ चुद रही थी उसे बेहद बुरा लगता है उसे महसूस होता है कि कल उसकी भी माँ उसके दोस्तो के बीच इस वाकिये के जानने के बाद चर्चित होगी उसे शर्मिंदगी होगी है और वो माँ का सामना करके उनसे सच्चाई जान जाता है और बढ़ते गिल्ट में वो घर छोड़ देता है...और माँ को भी अपनी मजबूरियो पे शरम और बेटे की मुहब्बत खोने की तक़लीफ़ होती है

इस क्लिप को देखते हुए मेरे अंदर भी कुछ ऐसे भाव आ गये थे कल तक मैं भी कितनी ही वासना भरी नज़रों से अपनी माँ को देखा करता था लेकिन मेरे ईमान ने मुझे जैसे झीजोडा था....नही मुझे अपनी माँ के लिए ऐसी चर्चा किसी से नही करनी चाहिए यहाँ तक कि अपने सबसे अज़ीज़ बेस्ट फ्रेंड समीर से भी नाहही...आख़िर ये मेरा और मेरी माँ के बीच का बेहद पर्सनल मामला था...हालाँकि समीर किसी को कुछ ना बताता लेकिन आज जैसा सपने में वो मेरी माँ को देखके मूठ मारा और मैं एक भद्वे बेटे की तरह लज़्ज़त महसूस कर रहा था

मैं भूल गया था कि माँ मुझे कितना मानती है? और मैं जो गुनाहगारी का काम कर रहा हूँ वो सब क्या था? रूपाली भी तो मेरी अपनी थी....जब उसे कल मालूम चला था मेरा और मेरी दूधमा मौसी का वाक़या तो कैसे उसने मुझसे रिश्ता तोड़ लिया उसके दिल में मेरी इज़्ज़त कितनी कम रह गयी थी..नही आदम तू ये ठीक नही कर रहा? ना ही हेमा को पता चलने दूँगा ना ही अपने दोस्त को...किसी गैर को हमारे बीच के रिश्ते को जानने का कोई हक़ नही माँ सिर्फ़ मेरी है वो मेरी इज़्ज़त और घर की इज़्ज़त कभी बाहर नही उतारी जाती

आदम ने फ़ैसला किया कि वो अपनी माँ को अब हवस भरी निगाहो से नही देखेगा शायद ये खुदा का चमत्कार था या फिर आदम होमटाउन की हवस भरी ज़िंदगी से अब उठ चुका था.....आदम अपनी कशमकश में मगन था कि इतने में उसकी माँ जैसे तौलिया लपेटी अंदर आने को हुई तो उसने बेटे को पॉर्न फिल्में देखते हुए पाया...उसकी साँसें बंद हो गयी क्यूंकी स्क्रीन पे काफ़ी अश्लील तस्वीरे इधर उधर दिखाई जा रही थी जिसमें करीब उसके उमर की औरत जो कि अँग्रेज़ थी नंगी टाँग खोले अपनी गुप्तांगो को दर्शा रही थी

माँ को थोड़ा गुस्सा आया पर उसने पाया कि बेटा उसका जवान था हो सकता था? शायद उसे ये सब देखने की लत लगी थी...पर उसे बुरा भी लगा कि वो ऐसी फिल्में देखता है...उसने वापिस बाथरूम के पास जाके आवाज़ दी..तो सकपकाए आदम उठ खड़ा हुआ..."हां माँ जा रहा हूँ नहाने".....कहते हुए आदम ने फ़ौरन पीसी ऑफ किया और गुसलखाने में माँ के बगल से गुज़रता हुआ नहाने घुस गया....माँ ने उसे कुछ नही कहा...उसने सोचा इस बारे में उससे वो फारिग होके बात करेगी..वो अंदर कपड़े पहनने चली गयी लेकिन उसका दिल उन अशील नंगी औरतो को जिसे उसका बेटा देख रहा था याद करते ही दिल ज़ोरो से अंजुम का धड़कने लगा था...

अंजुम बेटे की थाली में तरकारी और चावल डालते हुए उसे बार बार देख रही थी....आदम ने नोटीस किया कि माँ उसे गौर कर रही है पर उसे नॉर्मल लगा फिर मन में आया शायद माँ के दिल मे कोई सवाल उमड़ा हो

अंजुम : ह्म अच्छा आदम तू क्या देख रहा था उस वक़्त? (माँ ने एकदम से कड़क के आदम से सवाल किया जो नीवाला आदम मुँह में लेने ही वाला था उसने उसे वापिस थाली पे रख दिया वो एकदम चुपचाप सेहेम सा गया)

आदम : म..मा मैं क्या देख रहा था?

अंजुम : देख बेटा तेरा मुझसे कुछ छुपा नही है तू ब्लू फिल्म देखता है ची ची

आदम : म..आ वो (आदम को जवाब नही मिल रहा था उसकी हकलाहट ही उसके सच्चाई को उभार दे रही थी)

अंजुम : देख आदम मेरा तेरे पिताजी से 10 साल तक कोई संबंध नही रहा है और मैं तुझसे छुपाउंगी नही तू आज कल का बच्चा है और तू सबकुछ जानता है शायद मुझसे भी ज़्यादा जानता होगा ये सब देखके तुझे कैसे अच्छा लगता है इन सबसे माइंड खराब होता है

आदम : माँ दरअसल वो एक फ्रेंड ने!

अंजुम : क्या फ्रेंड कहीं समीर ने तो!

आदम : नही नही माँ दरअसल वो किसी नेट फ्रेंड ने मुझे ये लिंक भेजा था मैं नही जानता था तो मेरी नज़र पड़ गयी माँ मैं आपसे कुछ छुपाउंगा नही मैने पहले भी ब्ल्यूफिल्म देख रखी है

अंजुम की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी लगभग उसने अपने मुँह पे हाथ रखके वापिस नीचे किया...."कौन भेजता है तुझे ये सब?".........माँ ने कर्कश स्वर में कहा....

"माँ है एक?".....आदम ने झूंट कहा था उसके ज़हन से अब तक सपने वाली बात गायब हो चुकी थी...अभी उसके दिल में माँ के सामने पकड़े जाने का ख़ौफ़ था

 
उसने अंजुम को समझाया कि बस है एक मैं उससे बात ज़्यादा नही करता वो सबको भेजता है इसलिए मुझे भी भेजा....माँ इतना इंटरनेट को लेके जानकार नही थी इसलिए उसने सोचा उसका बेटा तो भोला है जो लड़कियो को एक निगाह से नही देखता वो भला क्यूँ? ऐसा क्यूँ देखेगा? वो ये भी जानती थी कि उसका शीघ्रपतन होना भी शायद उसकी कमज़ोरी थी....उसने अपने बेटे की झिझक को तोड़ते हुए कहा कि उसे भी कम उमर में धात की बीमारी थी उसका वाइट डिसचार्ज होता था जिस वजह से उसकी माँ हमेशा उसे ग़लत बातों को सोच लेने से कोस्ती थी...हालाँकि अंजुम ऐसी थी नही...हालाँकि उसने किसी से सच्चा प्यार किया था पर वो उसका फ़ायदा उठाना चाह रहा था....असलियत का आभास होते ही अंजुम ने उससे रिश्ता तोड़ लिया था....

अंजुम : बेटा फिर भी मेरी बात मान तू ये सब देखा वेखा मत कर दिमाग़ खराब हो जाएगा

आदम : हां माँ (आदम ने और कोई जवाब नही दिया माँ ने उसे अपने हाथो से एक नीवाला खिलाया तो आदम को अच्छा लगा वो अपनी माँ के प्यार करने से जैसे काफ़ी खुशी सा महसूस कर रहा था)

आदम ने हाथ मुँह धोया और माँ से वार्तालाप करने लगा....दोनो कुछ देर तक बात करते रहे उसके बाद माँ की आँख लग गयी उनकी हल्की ख़र्राटों की आवाज़ सुन आदम ने माँ की टाँगों को दबाना शुरू कर दिया....इसमें उसकी कोई हवस वाली बात नही थी...वो बस अपनी माँ से प्यार करना चाह रहा था उससे आराम देना चाह था...हवस से भरा वो दिल उसने कब का मार लिया था?...उसने जब पाजामा माँ का थोड़ा उपर घुटनो तक किया तो पाया उसकी माँ की टाँगों पे हल्के हल्के बाल थे उसने माँ की गोरी टाँगों को काफ़ी अच्छे से मालिश की फिर उनकी जांघों की .

माँ ने नींद में ही बेटे की तरफ देखके मुस्कुराया उन्हें बेटे के यूँ मालिश करने से आराम मिल रहा था...."बेटा अब रहने दे सो जा".....माँ ने करवट लेते हुए बेटे को मना किया...फिर भी बेटा माँ की मालिश हल्के हाथो से कर ही रहा था

"कोई बात नही माँ थोड़ा कमर में कर दूं तुम्हें हर्वक़्त दर्द रहता है"........आदम ने थोड़ी मिन्नत भरे लवज़ो से कहा

"अच्छा बाबा कर दे पर देख ज़्यादा ज़ोर तक नही एक तू ही तो था जो उस रात चिकुनगुनिया में कैसे मुझे पट्टी कर रहा था याद है".........माँ ने नींद में ही बड़बड़ाते हुए कहा

"हां माँ कैसे भूल सकता हूँ?"........बेटे ने माँ के कपड़े के उपर से ही कमर पे हाथो की मालिश की...उसने माँ से इजाज़त माँगी तो माँ ने कोई जवाब नही दिया इसका मतलब उन्हें बेटे की मालिश से कोई आपत्ति नही थी चाहे जैसे करे

आदम ने फ़ौरन माँ के जंपर को हल्के से उठाके उपर पीठ के सिरे तक कर दिया जिससे माँ की सफेद ब्रा पीछे की दिखने लगी उसने माँ की पीठ और कमर की फुरती से अपने मज़बूत हाथो से मालिश करनी शुरू की....उसने अपने दोनो हाथो से कमर के दोनो तरफ के निकले माँस को अच्छे से दबाया फिर रीड की हड्डी के उपर भी अच्छे से हाथ चलाए लगभग 10 मिनट की मालिश में माँ गहरी नींद की आगोश में डूब गयी....उसने मालिश ख़तम की और माँ के जंपर को ठीक करते हुए कमर और टाँग दोनो को ढक दिया...

वो बिस्तर से उठा और एक बार माँ की तरफ नज़र दौड़ाई..माँ नींद में कितनी खूबसूरत लग रही थी?....आदम अपने कलेजे को सहलाते हुए बाहर आया आँगन में आके वो कुछ देर वैसे ही खड़ा रहा तो उसका फोन बज उठा उसे गुस्सा आया कि माँ की नींद लगभग टूट जाती....उसने फ़ौरन दाँत पे दाँत रखके नंबर पहचाना और उसे अपने कान में लगा लिया

आदम : हां बोल?

समीर : और भाई क्या हाल है?

आदम : सही है यार

समीर : और बात बनी ? माँ ने कोई ! (समीर ने अभी कहा ही था)

आदम : नही यार मैं ग़लत था

समीर कुछ समझ नही पाया...फिर आदम उसे समझाने लगा कि उसके इंटेन्षन ग़लत थे वो समीर को ऐसे ब्यान कर रहा था कि उसका और उसकी माँ के बीच कोई ऐसी बात हो ही नही सकती वो उसे महेज़ माँ के रूप की तरह ही देख रहा था...उसे अपनी माँ में कोई ऐसी वैसी फीलिंग नही लगी और आदम को अपनी माँ के प्रति ऐसा कुछ महसूस हो रहा था...बस वो खुश था कि वो माँ के इतने करीब है...समीर हैरत से सिर्फ़ चुपचाप सुनता रहा

समीर : ह्म फिर भी लेकिन!

आदम : नही समीर मुझे माँ को ऐसी नज़रों से नही देखना चाहिए वो सोफीया आंटी नही है इस बात को तू समझ ले समझा आंटी के अंदर ऐसी फीलिंग तूने जगाई पर मैं ऐसा नही कर पाउन्गा यार प्लस्स ट्राइ टू अंडरस्टॅंड

समीर : ओके डियर तेरी ज़िंदगी है जैसे चाहे रीलेशन रख बट यार मुझे तो अपनी मोम में ही अट्रॅक्षन लगता है चल ठीक है तू बस माँ को किसी बात से हर्ट मत करना उनका ख्याल रखना

आदम : अच्छा ठीक है तू भी चल ठीक है बाइ ओके बाइ (आदम ने फोन कट कर दिया)

मेरे दिल में आ चुका था कि मैं समीर को अपने कोई भी इंटेन्षन अब बताउन्गा नही....ना ही माँ की ऐसी कोई भी चीज़ शेयर करूँगा....माँ जैसा रहनाचाह रही है रहेगी..लेकिन मेरे अंदर जो माँ के लिए ये नये फीलिंग्स है मुझे बस कोशिश करनी है अगर माँ मेरी मुहब्बत को समझ पाई तो ही शायद हमारे बीच कोई नया रिश्ता जुड़ सकता है वरना जैसा रिश्ता हमारे बीच एक साधारण माँ-बेटे का चल रहा था वोई रहेगा..

शाम तक माँ की नींद खुली तो बिस्तर पे ही उनके लिए कप भर चाइ मैं ला चुका था...माँ को बेहद खुशी हुई उसने बताया कि आजतक वो अकेले चाइ पीते आई थी पर अब उसके बेटे के आने से उसका मन अब घर में ही लग रहा था....आदम और माँ के बीच फिर हेमा आंटी की बात शुरू हुई....माँ ने हेमा के नाजायज़ संबंध जो सरदार से थे उसे आदम के सामने खोल डाला....आदम सब सुनके हेमा की बस थू थू कर रहा था....उसने माँ के सामने ये तक कह दिया कि अगर वो हेमा का बेटा होता तो वो उसके सरदार जी का खून कर देता क्यूंकी वो अपनी माँ किसी और गैर आदमी के साथ नही देख सकता था

इसी बीच अंजुम ने उसे शांत किया और कहा ये उसका घरेलू मामला है हमे उससे कोई लेना देना नही....लेकिन फिर भी आदम नाराज़ था कि हेमा के चलते ही उसकी माँ को ऐसे ऐसे मर्दो से बात तक करनी पड़ी थी....और उपर से जो हेमा कयि साल पहले मर्दो से रिश्ता जोड़ती थी और उस बीच अपनी सहेली अंजुम को ले जाती थी ये सब देखके उसके बेटे आदम का खून खौल उठता था....अंजुम जानती थी उसका बेटा उसे ऐसे हालातों में देखना कभी पसंद नही करेगा वो तो बस अपनी दोस्ती निभा रही थी

अंजुम : बेटा वो तो पुरानी बात हो गयी तुझे अपनी माँ पे यकीन नही क्या मैने किसी गैर आदमी के साथ संबंध बनाए तुझे ऐसा लगता है?

आदम : माँ अगर कोई आग पे भी खड़ा होके तुम्हारे बारे में ऐसा कुछ कहेगा ना तो मैं उसे ही आग में जला दूँगा मुझे तुझ पर अपने से भी ज़्यादा यकीन है

अंजुम : मुझे पता है और नाज़ है कि तुझ जैसा समझने वाला बेटा मेरी कोख से पैदा हुआ जो मेरा इतना ख्याल रखता है तेरा बाप तो इस मामले में तेरे पाँव की मिट्टी भी नही

आदम : बाबूजी की बात छोड़ो ना माँ उसने कब तुझपे ध्यान दिया

अंजुम : ह्म तुझे पता है इसी हेमा के एक फ्रेंड का मुझे बार बार कॉल आने लगा था क्यूंकी हेमा तो मेरा नंबर उस लड़के को दे रखी थी जिससे उसको होटेल में मिलना था...वो तो हेमा मज़बूरी में ऐसे मर्दो से संबंध बनाती थी महेज़ पैसो के लिए पर उस लड़के ने मुझे ही पसंद कर लिया था याद है तू स्कूल में था

आदम को ख्याल आया...हां उसका नाम विजय था...वो काफ़ी ज़ज़्बाती किसम का ज़रूर था पर एक नंबर का शक़्क़ी और साइको किसम का इंसान था उस वक़्त आदम स्कूल में था और एक दिन उसकी माँ के फोन पे उसने कॉल कर दिया था जिस मिसअंडरस्टेंडिंग में आदम ने उसे काफ़ी झाड़ा था...लेकिन उसने माँ से सिर्फ़ दोस्ती तक सीमा रखी थी बाद में मालूम चला कि वो अंजुम को पसंद करने लगा था और उसके साथ शादी तक करने को तय्यार था ये जानते हुए कि अंजुम का एक बेटा भी था...वो उन दोनो को भगा ले जाना चाह रहा था...

उसके इरादे मालूम चलते ही अंजुम ने उससे रिश्ता तोड़ दिया था साथ ही साथ हेमा ने भी उसे काफ़ी झाड़ा था उसके बाद सुनने में आया था कि वो शादी करके बीकानेर में उसकी पोस्टिंग हो गयी थी इसलिए वहीं बस गया था....सब सुनने के बाद आदम तो जैसे बेहद गुस्सा हुआ...

आदम : माँ गढ़े मुर्दे क्यूँ उखाड़ रही हो? जब तुम्हें पता है मुझे तुम्हारे साथ किसी गैर मर्द की चर्चा भी नही सुनना अच्छा लगता क्या तुम अब भी उससे मोहब्बत करती हो?

अंजुम : नही बेटा मैं तो बस इसलिए कह रही थी कि तू ही देख कैसे कैसे लोग हैं दुनिया में कि एक शादी शुदा बच्चेदार औरत तक को भी नही छोड़ते

आदम : जो भी हो माँ लेकिन आप अपनी तुलना वैसी औरतो से ना करो और प्लीज़ अगर आप मुझे चाहती हो तो आजके बाद उस कुत्ते की बात मेरे सामने मत करना

अंजुम : अर्रे बेटा बस उसकी बाते दिमाग़ में आ गयी थी वो तो तुझे अपना बेटा तक बनाना चाह रहा था हाहाहा (इतना कहते हुए माँ बेटे के सामने खूब ज़ोरो से हँसने लगी)

 
Thanks very much friends for supporting me .

I am really grateful to all those who have repped me... thanks once again
 
आदम भी गुस्से में आते हुए भी हंस पड़ा क्यूंकी सच में वो था ही ऐसा आदमी....लेकिन आदम मन ही मन बुद्बुदाया कि अगर वो सामने होता तो वो उसको इतनी बातें नही कहने देता और अपनी माँ के ज़िंदगी से उसे दूर कर देता...एक पल को उसे अहसास हुआ कि उसे अपनी माँ किसी गैर मर्द के साथ दिखने में भी कितना बुरा लग रहा था? वो जानता था उसकी माँ उसके बाप के बाद किसी से भी संबंध नही बनाई थी

आदम ने भी माँ से इस बात को छुपाए रखा कि उसने दो शादी शुदा औरतों को प्रेग्नेंट किया था उसमें एक उसकी बहन थी और एक उसकी भाभी....उसकी माँ को उस पर पूरा यकीन था कि उसका बेटा ऐसा कोई वाहियात भरा काम नही कर सकता था...पर हक़ीक़त को तो आदम माँ से कोसो दूर रखना चाहता था वो अपनी माँ के विश्वास को भी तोड़ देना नही चाहता था...

खैर हेमा आंटी के घर जाते वक़्त रास्ते में आदम को सपने में माँ और हेमा का वार्तालाप याद आ रहा था कि कैसे उसकी माँ ने उसे अपना फिगर घूर्रते हुए देखते पाया था और ये सब बातें वो हेमा को बता रही थी...आदम यही सोच सोचके घबरा रहा था कि उसका यूँ अचानक आने से हेमा को कहीं उस पर शक़ तो नही हो गया था..शक़ करने वाली जैसी औरत थी भी वो....दस घाट का पानी पी रखी थी...और सरदार जी से संबंध बनाने के बाद तो और वो किसी खुली रंडी जैसी हो गई थी...जो कुछ भी बोल देती थी क्या मालूम उसने मेरी माँ को क्या गंदा कुछ कहा हो?....अब मुझे वो औरत खटकने लगी थी नज़र में पर मैं उसकी बेटियो को अपनी बहन जैसा मानता था इसलिए मुझे उन लोगो से मिलने जाना पड़ा...

हम दूसरे माले पर आए और माँ ने दरवाजा खटखटाया...लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था..अंजुम झिझक रही थी उसे लगा कि कहीं अंदर कोई गैर मर्द ना हो या फिर संजय जो हमेशा हेमा से मिलने अक्सर आ जाया करता था....लेकिन हेमा की बेटी ने दरवाजा खोला उसकी बड़ी बेटी मेरे गले लगी और हम अंदर आए....मैं उसकी नयी लगी जॉब और ग्रॅजुयेशन की बात कर रहा था तो माँ हेमा को अंदर ढूँढने लगी....हेमा सोफे पे बैठी टेबल पे एक खाली ग्लास में पानी के साथ शराब मिक्स कर रही थी....बोतल इंपीरीयल ब्लू का था जो हेमा के हाथो में था...वो हमे देखके मुस्कुराइ हम जानते थे हेमा के घर का कुछ ऐसा ही बोल्ड माहौल था कि वो अपने बेटियो के सामने पीने में झिझकति नही थी सरदारजी ने उसकी और उसकी घरवालो की सारी शर्मो हया उतार दी थी...

वो शराब का ग्लास टेबल पे रखके उठ खड़ी हुई....उसने बड़ी बेढंगी किसम की साड़ी पहनी हुई थी...और वो बार बार पल्लू ठीक कर रही थी पहले से ज़्यादा मोटी और काली हो गयी थी...गले पे दस माला उसने पहन रखे थे....जाहिल गावर थी इसलिए उसे ड्रेसिंग का कोई सेन्स नही था....वो उठी और मेरे और माँ के गले लगी

हेमा : और बेटा सब ठीक तो है देख रे अंजुम तेरा बेटा कितना दुबला पतला होके आया और रह वहाँ अकेले माँ को छोड़के जाएगा साला

आदम : हाहाहा अर्रे नही हेमा आंटी मैं नौकरी छोड़के आ गया हूँ

हेमा : नौकरी छोड़के ओह्ह हो देख लिया अंजुम और तू तो कहती थी कि ये तेरे से अलग हो गया अब देख

आदम : हाहाहा बस आंटी आप सुनाए ?

हेमा : ह्म मेरा क्या है बेटा? मैं तो अकेली ही हूँ ना कोई बेटा है और ना ही कोई ख्याल रखने वाला अच्छा आदम बेटा तुम अपनी बहनों के साथ बातें करो अंजुम तू ज़रा उपर चल ना

हेमा माँ को उपर वाले माले पे ले जाना चाह रही थी जो सरदार जी का था....माँ ने मुझे नीचे रहने बोला और उनके साथ उपर चली गयी....मैं कुछ देर तक नीचे ही बैठा हेमा की बेटियो से गप्पे लड़ाता रहा...जब बोरियत महसूस हुई तो मैं उनसे इजाज़त लेके फ़ौरन उपर वाले माले पे सीडियो से चढ़ता आ गया....दरवाजा सटा हुआ था...सरदार जी था नही शायद गया होगा कहीं....मैने हल्के से दरवाजा खोला और अंदर आया..शायद बेटियो के सामने बोलने से हेमा क़तरा रही थी इसलिए दोनो सहेली उपर आके बात कर रही थी

हेमा ने मुझे देखा और प्यार से अंदर बुलाई.....मेरी माँ थोड़ी दुखी सी थी उसने मुझे रिपोर्ट दिया...मैं कुछ समझा नही...माँ ने बताया देख तेरी हेमा आंटी को क्या हो गया है?

मैने रिपोर्ट्स पढ़नी शुरू की....तो उसमें जो मुझे मालूम चला मुझे बेहद अज़ीब सा महसूस हुआ उस वक़्त...हेमा आंटी रोई रोई निगाहों से अपनी हालात को पेश कर रही थी....माँ मुझसे पूछे जा रही थी कि बता तेरी आंटी को क्या हुआ है?

आदम : माँ मैं कैसे कहूँ?

हेमा : अर्रे बेटा आजतक तू और तेरी माँ दोनो मेरे इतने करीब रहे है कह भी दे झिझक क्यूँ रहा है? अच्छा हुआ उपर आ गया वरना तेरी बहने सुन लेती अब तू ही बता

आदम : आंटी आप को तो बच्चेदानी में सूजन हो गया और ये आपके भीतरी योनि से लेके अंदर तक है ये इसलिए होता है कि कोई जब किसी के साथ ब्रूटली तौर से मेरा मतलब है काफ़ी रफ सेक्स करे तब (मैने माँ के सामने ही झिझकते हुए आहिस्ते से कहा माँ को भी थोड़ी शरम आई पर वो उस वक़्त सरदार जी पे काफ़ी खफा थी)

अंजुम : ये सूजन किस वजह से होती है यही बात सरदार जी को समझनी चाहिए ना फिर भी तू उसके चक्कर में पड़ी है ( माँ ने हेमा को डाँटते हुए कहा पर वो साली हंस रही थी)

हेमा : छोड़ ना अंजुम उस जानवर को क्या सम्झाउ? वो तो आता है और बस मुझपे चढ़ जाता है (हेमा ने ज़रा भी परवाह नही की कि मैं और मेरी माँ वहाँ उसके पास बैठी है उसने खुले शब्दो में ये बात कही तो मैं और माँ दोनो अंदर ही अंदर शरमा गये)

इतने में माँ को शायद पेशाब लग गयी वो बीच कॉन्वर्सेशन से ही उठके अंदर बने थोड़े दूरी वाले बाथरूम में घुस गयी....हेमा जो कि उस वक़्त शराब का ग्लास पूरा खाली कर चुकी थी मुझे हँसके अपनी करीबी खींचते हुए बोली

हेमा : और तू बता? तूने एकदम से मन कैसे बना लिया? देख तेरी माँ नही है इसलिए कुछ छुपा मत (हेमा उस वक़्त नशे में होके भी नही थी उसके मुँह से शराब की गंध आ रही थी)

आदम : नही आंटी ऐसा कुछ नही है आपको क्या लगा? दरअसल मेरा वहाँ अकेले मन नही लगा

हेमा : अच्छा जी तेरी माँ तो यहाँ आके तेरा किस्सा रोज़ बताती थी..कि तू कितना उनसे झगड़ा करता है कहता है मैं यहाँ नही आउन्गा यहाँ की औरतो को नही चोदुन्गा बोल बोल

आदम : हां आंटी मैं माँ को बहुत कुछ उल्टा सीधा कह दिया था पर मुझे शर्मिंदगी है क्यूँ आपको क्या लगा?

हेमा : मुझे लगा कि तू? (हेमा ने बीच में बात काट दिया उसे अहसास हुआ शायद मेरा मेरी माँ को लेके कोई ऐसे वैसे विचार नही थे खैर उसने बात को वहीं तक रहने दिया)

आदम : पर आंटी आपको ज़रा सा अंदाज़ा है इससे आपकी सूजन कितनी ज़्यादा दर्द पहुचाएगी आपको आप इस हालत में भी उस मदर्चोद का लॉडा अपने अंदर ले लेती हो (मैं हेमा आंटी से खुले शब्दो में कहा उसे कोई फरक नही पड़ा वो बस मुस्कुराइ)

हेमा : तू भी बहुत श्याना हो गया है हां क्या करूँ बेटा? वो खर्चा चलाता है घर पालता है उसकी हां में हां तो मिलाना ही पड़ता है ना हमारे घर में खिलाने वाला कोई मर्द भी तो नही पति को गुज़रे कितने साल हो गये पता है ना तुझे?

आदम : हां आंटी लेकिन कसम से हरम्खोर ने तुम्हारी बहुत ज़बरदस्त चुदाई की है तुम्हारी चूत को छील दिया है साथ साथ इतनी ज़ोर ज़ोर से तुम्हारी चुदाई की है कि तुम्हारी बच्चे दानी पे उसके लंड के बार बार घिसने से भीतरी जगह ज़ख़्म हो गया है और अब सूजन बन गयी है उफ्फ

हेमा : वोई दर्द रहता है बेटा खैर जाने दे मेरी छोड़ तू आया है तो अपनी माँ का ख्याल रखना

आदम ने मुस्कुराया उसने हेमा को अपने किसी भी इंटेन्षन का मालूमत चलने नही दिया वरना वो मज़े लेती...और आदम उसे कुछ भी मालूम चलने देना नही चाहता था कि उसके अंदर अपनी माँ के लिए किस तरह का इनसेसियियस फीलिंग पनप रहे है....हेमा उसके साथ शरारत करने लगी तो आदम ने उसके होंठ पे एक किस कर दिया...हेमा उसे धकेलते हुए मुस्कुराइ

हेमा : बहुत कमीना हो गया है तू ह्म बहुत कुछ देखने लगा है आजकल तभी ये सब सीख रहा है चल जा नीचे

आदम बिना कुछ कहे माँ के वापिस कमरे में आते ही नीचे चला गया....दोनो वहाँ से रात को रुखसत हुए...क्यूंकी पिता के आने के वक़्त हो गया था...रास्ते में अंजुम ने बताया कि हेमा कितनी ज़्यादा गिर चुकी है? उसकी कैसी हालत हो गयी है? आदम चुपचाप सुन रहा था....इतने में अंजुम ने बताया कि वो भी आज बाय्फ्रेंड की बात कर रही थी और बता रही थी कि मर्द के उस चीज़ से औरत नहा दी जाती है

आदम एक पल को ठिठक गया....उसने माँ से कहा ऐसा कैसे?.....जब अंजुम ने इसका जवाब अँग्रेज़ी शब्द में दिया...तो आदम के लंड में थोड़ा तनाव हुआ....माँ ने शायद फ्रॅंक्ली होके ही सही पर कुछ ऐसा कहा कि दोनो माँ-बेटे शर्माके हंस पड़े

अंजुम : क्या तो लिखा था उस वीडियो के उपर उम्म्म जो हेमा ने बताया था हां याद आया एक्सट्रीम कुंशोट फेशियल छि तौबा

आदम ने कोई जवाब नही दिया पर उसके माँ के मुँह से निकले ऐसे शब्दो से उसका लंड तनाव में आ गया....उसका चेहरा लाल हो गया था

 
अंजुम : वोई तो मर्द का जो पानी होता है जो निकलता है उससे औरत को पूरा भीगा दिया जाता है वो भी एक मर्द से या अल्लाह छि क्या देख लिया लाहोल विला कूवत

आदम : हाहाहा माँ वो फेक होता है..इतना ज़्यादा वीर्य तो निकलता भी नही वहाँ से जितना दिखाया जाता है...खैर

अंजुम : हां छोड़ उन बातों को घिन नही आती इस औरत को छि अर्रे वोई कमीनी मुझे दिखाई जो सच में कैसी औरत है? कुछ भी दिखा देती है बक देती है...लेकिन हालत की मज़बूर है ना तरस आता है

आदम : हाँ माँ आप ही देखो उसके नाजायज़ रिश्ते का उसे क्या दर्द मिल रहा है सरदारजी उसके साथ कैसे पेश आ रहे है

अंजुम: ह्म मुझे तो सोचके भी या अल्लाह बड़ा अज़ीब लगता है कैसे छि उस जैसे गंदे इंसान को अपने उपर ! (कहते कहते उसे आदम का आभास हुआ तो वो चुप सी हो गयी आदम भी झेंप सा गया)

माँ घर आते ही खाना बनाने में जुट गयी....आदम निसचिंत था कि चलो हेमा को ऐसा वैसा कुछ महसूस नही हुआ था उन दोनो के बीच के रिश्ते को लेके...लेकिन हेमा की बच्चेदानी में हुई सूजन और उसका माँ को ब्लूफिल्म दिखाना कही ना कही आदम को अटपटा सा लगा.....उसे अहसास हुआ कि उसके अंदर माँ के लिए अज़ीब सी कशिश उमड़ रही थी...उसने माँ को कहा कि अब वो हेमा के घर जाया ना करे बस फोन तक ताल्लुक रखे....अंजुम भी इस बात से सहमत हुई....

धीरे धीरे माँ और मेरे बीच काफ़ी खुले विचारो में बात होने लगी थी....मैं माँ को हर मुमकिन खोलने का प्रयास करता था और उन्हें हर मुमकिन खुशिया देने की भी कोशिश कर रहा था...अब माँ मुझसे पिता जी के सामने भी प्यार करती थी इतना बड़ा होने के बावजूद वो मुझे छोटे बच्चो सा प्यार करती...कभी चेहरा सहला देती तो कभी मेरा बच्चा मेरा बच्चा कह कर मुझे अपनी छातियो से लगा लेती पर मेरा उनके लाड का कोई फ़ायदा उठाने का मोह नही था फिर भो मैं बिना झिझके उन्हें छू लिया करता था

कभी उनकी पीठ सहला देता तो माँ के खुले विचारो के होने से कभी कभी वो मुझे ब्रा का हुंक लगाने को कह देती जिससे मैं उनकी पीठ को लगभग मज़ाक मज़ाक में छू लेता और उनके ब्रा का हुंक लगा देता...माँ को मैं आराम देता चूँकि माँ को कमर का पेन काफ़ी होता था इसलिए माँ ने कामवाली भी रखी थी पर वो साली काम कम और छुट्टिया ज़्यादा करने लगी थी..इसलिए घर की साड सफाइबर्तन ढोने से लेके कपड़े को निचोड़के फैलाने का काम मैं ही करता था माँ अब कपड़े धोते वक़्त आँगन में बैठ जाती थी तो मैं परदा उपर दीवार से लेके कूलर के सहारे रखी एक पतली सी लाठी पे फैला देता ताकि माँ को धुंप ना लगे...माँ का अक्सर पाजामा गीला हो जाता जिस वजह से वो पाजामा उतारके महेज़ जंपर पहने अपना काम करती वो बैठके टाँगें फैला लेती तो उनकी टाँगो के बीच जंपर एक आड हो जाती जिससे कुछ ना दिखता

पर माँ के अक्सर उठने से मुझे उनकी हर रोज़ अलग अलग रंग की पैंटी ज़रूर दिख जाती थी...माँ अगर कपड़े धोके मुझे देती तो मैं उसे निचोड़के बाहर रसियो पे टाँग देता...और जब माँ नहाने बाथरूम चली जाती तो बीच में आवाज़ देकर मुझे बाथरूम के आधे दरवाजे से हाथ निकाले अपनी गीली धोयि ब्रा और पैंटी दे देती तो मैं उसे लेके बाहर रस्सियो पे सूखने के लिए टाँग देता इस बीच पड़ोसियो ने भी अक्सर मुझे माँ के अंडरगार्मेंट्स मेरे हाथ में कयि बार देखे थे जो मैं रस्सियो पे टाँग देता पर पड़ोसी औरतें सिर्फ़ शर्मा जाती थी

खैर मुझे माँ के साथ रहते रहते 1 महीना हो गया..और इस बीच माँ और मैं भी सेक्स रिलेटेड चीज़ो पे बात करने लगे थे...माँ को पसीने भरे बालों वाले मर्दो से घिन आती थी वो हमेशा मुझे मेरे गुप्तँग सॉफ रखने को बोलती थी...एक दिन माँ ने मुझे आवाज़ दी मैं पीसी पे बैठा था जैसे ही बाहर आया पाया माँ आवाज़ दे रही थी

माँ : बेटा ज़रा वो छोटा कैची देना

आदम : माँ तुझे बाथरूम में कैची की क्या ज़रूरत आ पड़ी ?

माँ : अर्रे बाबा वो शॅमपू का पॅकेट काटना था

आदम : अच्छा ठहरो (मैने झट से माँ के हाथ में कैंची पकड़ाई)

माँ ने झट से अंदर हाथ कर लिया और बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया....पर मेरे अंदर की उत्सुकता बढ़ती ही जा रही थी...इसलिए मैने काफ़ी कोशिस की पर बाथरूम की कोई खिड़की नही थी इसलिए मैं टेहल रहा था कि शायद एक बार देखने का कोई चान्स मिल जाए इतने में मैने पाया कि बाथरूम का दरवाजे के ठीक नीचे का कुछ हिस्सा दीमक लगने से खोलर सा बन गया था मैं नीचे हुआ बाथरूम के फर्श का पानी बाहर भी निकल रहा था

मैने बहुत गौर से खोलर से अंदर झाँका तो पाया माँ पूरी मदरजात अंदर नंगी एक कोने दीवार के सहारे बैठी हुई थी और अपनी टाँगें चौड़ी किए झान्टो के लंबे लंबे बालोंको कैची से काट रही थी उफ्फ माँ की झान्टे वीडियो से भी ज़्यादा बड़ी आज लग रही थी ऐसा लग रहा था चुत को पूरा धक दिया है...माँ ने कैची रखते हुए अपनी झान्टो को छोटा और बराबर कर लिया और उस पर एक मग पानी डाल साबुन का ढेर सारा झाग बनाया झान्टे एकदम गीली झाग से सराबोर थी उसके बाद माँ ने रेज़र चलाना शुरू किया माँ की झान्टे इतनी सख़्त थी कि कट नही रही थी करीब 1 घंटे तक माँ लगी रही और उसने अपनी झान्टो के बाल एकदम सॉफ कर लिए चूत से उफ्फ माँ की साँवली चूत मेरे सामने प्रस्तुत थी जो एकदम चिकनी दो सूजी डबल रोटी जैसी माँस से धकि हुई थी मा ने रेज़र तोड़ा अपने गुदा द्वार पे भी छलके उस जगह को सॉफ करलिया था फिर वो उठके नहाने लगी

माँ के चक्कर में मेरी गर्दन में दर्द ज़रूर हो गया था मेरे लंड में भरपूर दर्द उठने लगा था...कारण माँ को अपनी लंबी लंबी योनि की झान्टो को सॉफ करते देख मेरे अंदर की कामवासना फिर से जाग उठी थी...मैने गर्दन सीधी की और वापिस कमरे में आ गया क्यूंकी माँ अब खड़ी होके अपने शरीर पे पानी डाल रही थी....बीच बीच में मुझे माँ का रेज़र को फर्श पे ठोकने की आवाज़ भी आ रही थी...उफ्फ काश मैं माँ की झान्टे खुद सॉफ करता माँ की चूत कितनी सेक्सी थी काश उस नरम गीली चूत पे अपनी ज़बान लगा पाता..लेकिन दूसरे ही पल मेरा दिल मुझे कह रहा था नही पहले माँ की मर्ज़ी फिर उसके बाद ही कुछ वरना मन मसोस के सारी ज़िंदगी गुज़ारना होगा

मैं तय्यार था....खैर माँ बाहर आई उन्होने काफ़ी देर लगाई थी मुझसे माँफी माँगते हुए मुझसे ब्रा और पैंटी माँगी जो मेरे कमरे में थी....मैने ब्रा और पैंटी बेड के पास रखी बड़ी पॉलीथिन में से उनके कहने के मुताबिक एक नीले रंग रंग की पैंटी और एक 36 साइज़ का मखमल सा नरम सफेद रंग की ब्रा उनके गीले हाथो में दी....वो ब्रा पैंटी लिए दूसरे कमरे में चली गयी साथ ही उन्होने दरवाजे की कुण्डी लगाई...मुझे आवाज़ दी कि जाके नहा ले .

 
मैं फ़ौरन तौलिए की गाँठ बांधता हुआ अपने मूसल जैसे खड़े लंड को दबाता बाथरूंम मे आया...फर्श एकदम सॉफ था...माँ ने निकलते वक़्त शायद फर्श को रगड़ रगड़ के सॉफ किया था..खैर मुझे ज़्यादा वक़्त नही लगा क्यूंकी पास ही टाय्लेट के उपर फ्लश करने वाले यन्त्र के उपर एक गीली सी ब्लेड पड़ी थी जिसकी ब्लेड में अनगिनत लंबे लंबे बाल फसे हुए थे...ये मेरी माँ की चूत से निकली झान्टो के बाल थे....उफ्फ मैने उन्हें सूँघा..और अपनी टाँगों के बीच और लंड के उपरी सिरे पे घिस्सने लगा उफ्फ माँ के ब्लेड में फसे बाल मुझे गढ़ रहे थे उफ्फ क्या आनंद था?

मैने ब्लेड वैसी ही रख दी और नाली के ढक्कन को खोला तो पानी में झाग के साथ साथ उसमें कटी झान्टे तैरती हुई पाया..उफ्फ खैर होमटाउन छोड़ने के बाद तो अब मैं किसपे खुमारी उतारता इसलिए? बस मुट्ठी मारने लगा....लेकिन लंड से पानी नही निकला और दर्द भी करने लगा...लेकिन उसे कैसे समझाता? कि माँ की चूत के भीतर उसका प्रवेश अभी नामुमकिन ही था खैर दिल की जीत हुई और लंड मसोसता हुआ कुछ देर में ही मुरझा गया...

मैं भी अच्छे से नहाया....दोपहर सवा 3 के लगभग हम माँ-बेटे ने दोपहर का भोजन खाया...और फिर कुछ देर बात चीत के बाद मैं अपने कमरे में आके लेटके अपने स्मार्ट्फोन के इंटरनेट को यूज़ करने लगा...माँ शायद अब तक सो चुकी थी..क्यूंकी दूसरे कमरे की पंखे की आवाज़ आ रही थी...मैं अपनी फेव अधेड़ उमर की पोर्न्स्टार वाली सेक्सी औरतें जो बगल और झान्ट के बाल काटती नही उनकी ब्लूफिल्म देखके एंजाय कर रहा था...

इतने में बीच में ना जाने माँ के कमरे में फोन की आवाज़ आई मैं अपने दिल को कचोट ते हुए उठ बैठा....उफ्फ अब कौन आ मरा?....मैं अभी फोन रिसीव करने जा ही रहा था क्यूंकी बीच में फोन आने से मेरा कलपद हो गया था और मुझे मूवी की क्लिप बीच में बंद करनी पड़ी थी....खैर दो कदम दूसरे कमरे की तरफ बढ़ा ही था कि इतने में माँ की आवाज़ सुनाई दी उसके बाद जो कुछ मैने सुना मैने फ़ौरन आहिस्ते से चल रहे टीवी का वॉल्यूम एका एक मूट किया और कमरे और अपने कमरे की बीच की दीवार के फ़ासले खड़ा होके माँ और उनके फोन कॉन्वर्सेशन को सुनने लगा..वार्तालाप कुछ इस तरह था

अंजुम : हेलो अर्रे हां हेमा बोलो कैसी है तू? (हेमा ज़ोर से बोल रही थी इसलिए आदम को आवाज़ पहचानने में देरी नही लगी...वो गवार औरत थी उसे बात चिल्लाके और बेढंगे तरीके से करने की आदत थी)

हेमा : अर्रे डार्लिंग क्या हाल है? तू तो आना ही छोड़ दी अपनी सहेली को भूल गयी क्या?

अंजुम : ऐसा कैसे हो सकता है? बस वो मन नही हो रहा था (क्यूंकी माँ को आदम ने मना किया था इसलिए वो चुप सी हो गयी)

हेमा : अंजुम मेरी सहेली मेरी दोस्त तुझसे बहुत ज़रूरी काम है तेरी मदद की ज़रूरत है अगर तू चलने को तय्यार हो गयी तो मुझे थोड़ा कॉन्फिडेन्स मिलेगा और तू तो मेरे साथ कहीं भी जाने में ज़रा सा भी नही झिझकी याद है ना तुझे

अंजुम : हेमा तू कहना क्या चाह रही है सॉफ सॉफ कह?

हेमा : अच्छा तो मुद्दे की बात सुन वो अपना राजेश है ना हां हां वोई साउत-एक्स वाला हां वो मुझे एक पार्टी में बुला रहा है

अंजुम : हां तो तूने क्या डिसाइड किया?

हेमा : देख अंजुम तू तो जानती है सरदार ने आना कम कर दिया है कहीं किसी कुँवारी की बुर फाड़ रहा होगा या अपनी बीवी को लेके कही सैर सपाटा करने शहर से बाहर गया होगा 1 माह से आया नही....इसलिए मुझे पैसो की तंगी हो रही है और तू तो जानती है बड़ी बेटी पूरी बाप पे गयी हुई है उसे तो मेरे इस पेशे की कोई मालूमत नही कि मैने बाहर भी चुदवा रखा है

अंजुम : हेमा देख इतना खुलके बोलने की ज़रूरत नही तो फिर तुझे मुझसे क्या है? अगर राजेश बुला रहा है तो अकेली जा मैं कैसे जा सकती हूँ? वो भी पार्टी में तुझे पता है मेरा शौहर मुझे कोई ढंग के कपड़े देता भी है और मुझे ऐसी किसी भी वाहियात पार्टी में नही जाना राजेश अय्याश किसम का इंसान है वहाँ उसके दोस्त यार होंगे नही नही मुझे अज़ीब लगेगा कही वहाँ कुछ बखेड़ा ना हो जाए

हेमा : देख अंजुम तू फिकर काहे करती है याद है आदम उस वक़्त स्कूल गया था जब राजेश तेरे घर आया करता था और हम दोनो बाथरूंम में

अंजुम : हां (आदम को भी याद आया कि उसने बाथरूम में गाढ़ा वीर्य देखा था जब वो स्कूल से जल्दी आ गया था...उसके बाद उसने पानी डालके उसे नाली में बहा दिया बाद में माँ ने झूंट कहा था कि एज़ी पाउच लीक हो गयी थी)

हेमा : तो फिर तू चल वहाँ कुछ नही होगा और वहाँ वैसे भी बहुत औरतें है तू नीचे डॅन्स फ्लोर पे रहना मैं कमरे में राजेश के साथ 1 घंटे में ही निपटके वापिस आ जाउन्गी तू प्लीज़ मना मत कर चल ये आखरी बार इसके बाद कभी नही कहूँगी

अंजुम ने काफ़ी देर सोचा...उसके मन में उठ रहा था कि बेटे ने उसे सख्ती से जाने मना किया है...लेकिन उसका मन उत्थल पुत्थल कर रहा था....उसने हामी भर दी कि ठीक है वो जाएगी पर उसके पास पहनने के लिए कोई ढंग का कपड़ा नही....उसे बेहद शरम सी महसूस हो रही थी वो एक घरेलू घराने से थी कभी ऐसी पार्टी उसने अटेंड नही की थी.....हेमा उसके राज़ी होने से काफ़ी खुश हुई उसने अंजुम से कहा कि कोई साड़ी ही पहन्के आ जाए क्यूंकी वो सूट तो वहाँ पहन्के आ नही सकती...अंजुम को ख्याल आया कि उसके पति ने उसके लिए एक बार बंगाल से काले रंग की साड़ी लाके दी थी...अंजुम ने डिसाइड किया कि वो वोई पहन लेगी पर उसे डर था कि वहाँ कुछ होये ना क्यूंकी पार्टी और डॅन्स फ्लोर का मतलब था कि वहाँ का माहौल शराब और शवाब से जुड़ा होगा

अंजुम ने तफ़सील से जाना कि वो किस तरह की पार्टी थी?.....हेमा ने भी उसे सबकुछ बताया पार्टी के बारे में...कि पार्टी मास्क वाली है और उसे राजेश ने ऑलरेडी दो मास्क दिए है कि अगर उसके साथ कोई आए तो वो उसे दे दे....अंजुम राजेश को जानती थी जो उसे भाभी भाभी करता था इसलिए अंजुम ने राजेश पे विश्वास किया....इधर आदम सब सुनने के बाद आग बबुला हो गया एक पल को लगा हेमा को झाड़ दे और माँ को कह दे लेकिन पार्टी में कल माँ को जाना था इसलिए उसके मन में कोई और विचार उठा

अंजुम फोन कट करते हुए बेटे के कमरे की तरफ आने लगी.....बेटा फटाफट से स्मार्ट्फोन को अपनी बाह के पास रखके ऐसे चारो खाने चित्त आँखे मुन्दे लेता था...कि माँ को लगा कि वो सो रहा है....माँ ने टीवी ऑफ किया और उसके गाल पे एक चुम्मा लेते हुए कमरे से बाहर निकल गयी....आदम ने आँखे खोली और बड़ी गंभीरता से विचार करना शुरू किया

 
खैर उसने पार्टी कहाँ हो रही थी? और कैसी पार्टी थी? सबकुछ जान लिया था...पार्टी एक क्लब में हो रही थी जो कि आनंद विहार के पास था....माँ सब्ज़ी लाने शाम को बाज़ार चली गयी पर आज आदम माँ के साथ नही गया ना उसने माँ की आब्सेंट में ब्लू फिल्म देखी वो बस चुपचाप सोच की कशमकश में कमरे के इधर से उधर टेहल रहा था....इतने में उसके मन में समीर से बात करने का विचार आया...आदम ने समीर को कॉल लगाया लेकिन अलग तरीके से ताकि समीर को उसके मन में छुपे इरादे मालूम ना चल जाए

आदम : हेलो समीर हेलो?

समीर : हां यार बोल सॉरी वो दरअसल थोड़ा (समीर अपने कपड़े ठीक कर रह था बिस्तर पे उसकी माँ रज़ाई ओढ़े लेटी हुई थी कमरे में ठंडी ए सी की हवा चल रही थी)

समीर ने ए सी कम किया और मोबाइल लेके अपने कच्छे को पहनते हुए आँगन की तरफ आया.....

आदम : अर्रे यार समीर तू मेरी मदद कर सकता है?

समीर : अबे सेयेल भाई से मदद की गुहार लगा रहा है मैं तो हमेशा तेरे लिए तय्यार हूँ बोल कैसे काम आउ तेरे ?

आदम : यार वो माँ जो है ना ?

समीर ह..हां बोल

आदम : यार माँ ना अपनी सहेली के साथ तुझे बताया था ना वो हेमा आंटी

समीर : हां वो दो नंबर टाइप की जो सहेली है तेरी माँ की? हां हां क्या हुआ?

आदम : अर्रे यार वो माँ को अपने साथ किसी ब्लॅक नाइट क्लब ले जा रही है जो आनंद विहार एरिया में पड़ता है

समीर सोचने लगा वो क्लब का नाम बडबडा रहा था...उसके माथे की शिकन एकदम से चिंता में फैल गयी..."क्या? अंजुम आंटी ऐसे वाहियात क्लब में क्या करने जा रही है?"........समीर ने सवालात भरे लवज़ो में कहा

आदम : क्यूँ अबे? क्लब बदनाम है क्या? (वो तो जानता था की राजेश कौन सा अच्छा आदमी है? फिर भी माँ को क्या पता था उस क्लब के बारे में)

समीर : साले वो क्लब नशाखोरों के साथ ठरकीयो का जगह है...और आनंद विहार के आस पास तुझे तो पता ही है जंगल झाड़ बहुत है....ऐसे सुनसान एरिया में ही ऐसे वाहियात काम होते है वहाँ ऐसे एक आध क्लब है...असल में ये क्लब काफ़ी बदनाम है यहाँ रहीश लोग ज़्यादा आते है पर ज़्यादातर इन्वाइटेड होते है भाई गैरो को कोई आक्सेस नही मिलता?

समीर की बात सुनके मेरा हौसला टूट रहा था...लेकिन मुझे माँ की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करनी थी क्यूंकी माँ को रोक तो सकता था...लेकिन अगर मैं माँ को रिस्क लेने देता हूँ तो ऐसी बदनाम पार्टी में उनके साथ कुछ भी उल्टा सीधा हो क्या पता? राजेश के दोस्त लोग कुछ ऐसा वैसा काम करे....क्यूंकी समीर ने मुझे बताया था कि वहाँ की हर एक नॉर्मल ड्रिंक्स यहाँ तक पानी में भी नशा मिला हुआ होता है...और ऐसे में माँ का बदहवास होना और अपने उपर से काबू हट जाना आम हो जाता..मेरे दिल में रह रहके अज़ीब अज़ीब सीन माँ को लेके आ रहे थे..मैने फिर बात शुरू की

आदम : यार ये तो ठीक नही

समीर : तू माँ को मना कर देना

आदम : या माँ ने मुझे नही बताया मैने मना किया है कि हेमा आंटी के पास भी ना जाए पर सहेली है ना एक वक़्त था हमारे घर खाना नही जुट रहा था तो उसी ने हमे फाइनान्षियल हेल्प दी थी

समीर : पर सुन आदम आंटी को ऐसी जगह मत जाने दे कोई कुछ ड्रिंक वृंक पीला दिया और तू तो जानता है आंटी एकदम भर जवान है (समीर के कहने से अच्छा तो नही लगा पर उसकी बात सच थी)

फिर मैने समीर को एक प्लान बताया..ताकि मैं माँ को आधे समय में ही पार्टी से सही सलामत वापिस घर ले आ सकूँ...तो मेरे दिल की चिंता कुछ कम हो जाएगी....अगर मैं माँ के आस पास भी रहा तो मेरी माँ को कोई ख़तरा नही...पर समीर ने कहा कि ऐसी अडल्टरी पार्टी में अगर आदम का गुस्सा बहक गया..तो क्या वो सच बता देगा? कि हेमा के साथ आई सहेली अंजुम का वो बेटा है...आदम ने ना में सर हिलाया और कहा नही...उसने निसचिंत होते हुए कहा कि किसी को कुछ मालूम नही चलेगा....समीर के मुताबिक वहाँ कपल में आती सहेलिया या औरत मर्द का जोड़ा अंदर आके मास्क वैसे ही पहना हुआ होता है और उसी हालत में किसी भी सिंगल पर्सन से जुड़ जाता है...फिर बाद में रज़ामंदी या फिर नशे की हालत में दोनो उपर वाले किसी भी रूम्स को शेयर कर लेते है...ये पार्टी धरल्ले से होती है और अब तक कोई लफडा यहाँ हुआ नही....

आदम के मन में आया कि उसको नही जाना चाहिए...पर ना जाने क्यूँ उसे माँ की चिंता सताए जा रही थी....उसकी माँ को तो लगा बस हेमा जाएगी और आ जाएगी और उपर से राजेश को तो वो जानती थी इसलिए उसे डर नही था...पर वो क्लब राजेश का नही था सिर्फ़ उसने उस पार्टी में शामिल होने के लिए हेमा और उसे इन्वाइट किया हुआ था....ताकि अपने घर से दूर आके हेमा जैसी औरत से अपनी शहवत (चुदाई की कसर) पूरी करे...हेमा और उसके बीच अफेर काफ़ी सालो से था

आदम की तरक़ीब के मुताबिक समीर उसकी मदद को तय्यार हो गया...लेकिन क्लब में घुसने का इंतज़ाम उसने हेमा के पास जाके ही करना था...इसलिए वो दूसरे दिन उसकी बेटियो की गैर मज़ूद्गी में हेमा के पास जाके हो आया....हेमा उस वक़्त सोफे पे सुस्ता रही थी...इतने में आदम के अंदर आने से वो एका एक चौंक उठी

आदम : क्यूँ आंटी माँ को कहाँ ले जाने की बात की हो तुम?

हेमा : अर्रे तुझे कैसे पता? चल जब जान चुका है तो कह दूं एक क्लब में राजेश ने बुलाया है ना तो तेरी माँ को साथ ले जा रही हूँ तू तो जानता है अकेले जाउन्गी आने में दिक्कतें होंगी

आदम : ह्म लेकिन तुम जहाँ जा रही हो वहाँ मेरी माँ की गॅरेंटी कौन देगा? कि वो सेफ रहेगी

हेमा : हाहाहा तू इसलिए यहाँ आया है अच्छा अच्छा तो चल तू भी चल साथ

आदम : नही आंटी माँ फिर तुम्हारे जाएगी नही भला माँ-बेटा ऐसी वाहियात जगह पे संग जा सकते है भला बस तू मेरा इतना सा काम आसान कर दे कि

हेमा : मुझे ऐसा क्यूँ लग रहा है ? क़ि तुझे डर है कि कही कोई ऐरा ग़ैरा आदमी तेरी माँ को छू ना दे

आदम : साली जब तुमको पता है तो फिर पूछ काहे रही हो?

हेमा : हाहाहा बेटा तू तो मुझसे भी बड़ा वाला है....मैं तो सिर्फ़ लॉडा अंदर लेती हूँ तू तो तीनो छेदों में डालता है कुँवारा लड़का झिझकता है शरमाता है पर तू तो एकदम छुट्टे सांड़ की तरह मुझ जैसी औरत से बात करता है

आदम : अब तुम मेरी इतनी प्यारी आंटी हो तो रहेगा ना रही बात जवानी की तो माँ से ना कहना दो को प्रेग्नेंट कर चुका हूँ

हेमा : हाहाहा साला चूतिया बना रहा है चूत फादा होगा चोदा भी होगा पर बच्चा बच्चा दिया होता किसी को तो तू यहाँ क्या कर रहा होता?

आदम को खुशी हुई रंडी पूरी तरीके से उसे पहचान नही पाई थी....फिर हेमा ने आदम को शान्त्वना दिया कि वो अंजुम के लिए निश्चिंत रहे उसे कुछ नही होगा वो किसी मर्द को अंजुम के पास फटकने भी नही देगी अंजुम तो उसके साथ कयि जगह भी गयी अगर वो लिविंग रूम में होती तो मर्द को हेमा खुद बेडरूम ले जाती..इसी लिए हेमा को अंजुम पे विश्वास था वो उसकी एक मात्र सबसे अच्छी सहेली थी...पर उसे जलन भी कि उसका एक घरेलू जीवन था और उसकी रखैल भरी ज़िंदगी फिर भी आदम ने ज़ोर दिया तो हेमा ने आदम के लिए राजेश से एक बार और बात कर ली राजेश तो हेमा की मौजूदगी चाहता था इसलिए उसने कह डाला कि चाहे जिसको भी साथ ला लेकिन आना तुझे बनता है

आदम खुश हुआ उसका रास्ता आसान हो गया था....हेमा ने फोन कट करते हुए आदम को इशारा किया कि वो भी चल सकता है पर वो साथ आएगा कैसे?.....आदम ने बस उसे ना में इशारा करते हुए कहा इसकी फिकर वो लोग ना करे...वो उनके आस पास ही होगा बाकी उसकी माँ अंजुम को कुछ भी पता चलने ना दे....हेमा आंटी मान गयी...इतने में आदम ने हेमा आंटी के पेट की तोंद जो साड़ी से दिख रही थी उस पर एक चुटकी काटी

हेमा खिलखिला के हंस पड़ी...वो समझ गयी उसने आदम को धकेला

हेमा : वाहह बड़ा हुआ भी नही और अभी से अपनी हेमा आंटी के उपर चढ़ने की कोशिस कर रहा है

आदम : मैं तो तुम्हें अपनी माँ जैसा मानता हूँ

हेमा : तो कमीने माँ पे भी चढ़ ना वो तो मुझसे ज़्यादा तीखी और मस्त है...मुझमें क्या है ?

आदम : आंटी तुम्हारे में जो है वो मेरी माँ में नही

हेमा : बेटा शोरुम अलग ज़रूर है मेरा पर गॉडाउन नीचे का तेरी माँ का और मेरा सबका सेम है और तू तो मेरे बेटे जैसा है

आदम : लेकिन मुझे इसी शोरुम से खरीदना पसंद है

हेमा : अर्रे कमीना मत कर (आदम ने हेमा की गुदाज़ पेट पे हाथ चलाते हुए उसकी तोंद को मुट्ठी में लेके मसल दिया...हेमा के सामने एक कम उमर का लौंडा था जो उसके बेटे जैसा था उसका दिल डगमगा रहा था पर वो उसकी सहेली का था इसलिए वो उसके हाथ को नोचते हुए उसे अपने पेट से हाथ हटाने को कह रही थी)

हेमा : तेरी माँ को कह दूँगी

आदम : हां हां कह देना कि हेमा आंटी इतनी सेक्सी है कि उसके बेटे की उमर के लौन्डे का भी खड़ा कर देती है

हेमा : हाए कमीना आज तू कुछ पीके आया है क्या? आज तुझे ज़्यादा ठरक चढ़ रही है

आदम ने इस बार हेमा का पल्लू ज़ोर से खींचते हुए उतारा और उसकी दोनो छातियो को भर हाथो में ब्लाउस के उपर से ही दबाने लगा..हेमा सिसक उठी उसने दाँतों से होंठ भीच लिए

आदम : साली आंटी अगर मेरी माँ को किसी ने भी छुआ ना तो कसम से तेरी भोसड़ी और भी चौड़ी कर दूँगा

हेमा : अर्रे कमीना तू तो ऐसे धमका रहा है कि अंजुम तेरी घरवाली .........

आदम ने कस कर एकदम से हेमा की दोनो टाँगें जो फैली हुई थी उसके बीच के पेटिकोट में हाथ डाल उसकी चूत को मुट्ठी में लेके दबा देता है...उईईइ...हेमा ज़ोर से सिसक उठती है....आदम हेमा के होंठो से होंठ जोड़ देता है....दोनो एकदुसरे को लगभग 1 मिनट स्मूच करते है...आदम हेमा की गँवारो वाले किस का आनंद ले रहा होता है...वो हेमा के दोनो होंठो को लगभग चबा जाता है दाँतों से...फिर एकदम से उसके उपर से उठ खड़ा होता है..

 
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