हेमा हाँफने लगती है अपने होंठ पोंछते हुए आदम को शैतानी मुस्कुराहट देती है...."अर्रे कुत्ता अब बस भी कर अभी तेरी बहनें आ जाएँगी क्या मुँह दिखाएगा उन्हें कि तू जिसे माँ माँ कहता है उसकी छूट में लंड पेल रहा है".......हेमा की बात सुन आदम के लॉडा ज़ोर से झटका मारने लगा...हेमा ने इस बात को नोटीस कर लिया...तो आदम खुद ही अपनी जीन्स की ज़िप नीचे करते हुए अपना लॉडा हेमा के मुँह के सामने हिलाने लगा....उसके मोटे लंबे लंड को देख हेमा की आँखे फटी की फटी रह जाती है
आदम : चल चलता हूँ तुझसे अब तो मुलाक़ात पार्टी के बाद करूँगा और सुन अगर माँ को कहना हुआ ना कुछ तो कह देना मैं नही डरता
हेमा : साला इतना बड़ा लेके घूम रहा है और अपनी आंटी को डरा रहा है...चल नही बताउन्गी बाय्फ्रेंड (हेमा ने आदम को आँख मारी) फिर भी आदम बेटा माँ को हमारे बीच का हुआ ये वाक़या ना बतला देना वरना तेरी माँ मेरी झान्ट उखाड़ लेगी और सुन पार्टी कल शाम 4 बजे से शुरू है
"ये मास्क देख ले".....हेमा ने आदम को वो दो मास्क देते हुए कहा....."ऐसा ही मास्क तू खरीद लेना और पार्टी में आ जाना पर ध्यान से आना कोई लफडा नही हो".......हेमा ने अहेतियात करते हुए कहा....आदम मुस्कुराए निश्चिंत होके मास्क देखके वहाँ से चला गया
उसने समीर के साथ उसी शाम एक बिग माल में जाके वैसा ही पार्टी मास्क एक दिन में ही खरीद लिया....पार्टी में मास्करेड टाइप का नक़ाब पहनने का रिवाज़ था इसलिए उसने एक गोल्डन अपने लिए और एक सिल्वर समीर के लिए खरीद लिया....आदम अगले दिन का इन्तिजार करने लगा....
और वोई हुआ दोपहर 3 बजे माँ नॉर्मल सा सूट पह्न कर जाने लगी बोलके निकली कि नानी के साथ थोड़ा द्वारका साइड जाएँगे तो आने में टाइम लगेगा...आदम जानता था माँ ने सफेद झूंट बोला था..वो हमेशा की तरह आदम को घर छोड़ वो आज भी हेमा के साथ जा रही थी...उसके जाने के ठीक 1 घंटे बाद आदम ने अपना पार्टी वेर वाला शर्ट और ट्राउज़र निकाला और उसे बॅग में लिए समीर के घर पहुचा....समीर के घर वहाँ दोनो तय्यार होके मास्क लिए गाड़ी में सवार समीर के घर से निकल जाते है..
उधर माँ हेमा के घर में ही अपने कपड़े उतारते हुए वो महेंगी काली रंग की जरी का काम की हुई साड़ी पहन लेती है....अंजुम का फिगर देख हेमा भी उससे जल जाती है...अंजुम ब्लॅक साड़ी और हल्का सा लाइट मेकप करके एकदम अप्सरा लग रही थी कोई कहेगा नही कि वो एक जवान बेटे की माँ है दोनो फ़ौरन घर से बाहर निकलते है और मेन रोड से ऑटो पकड़ लेते है....उन्हें मालूम नही होता पीछे उसका बेटा आदम और उसका दोस्त समीर एक गाड़ी में मज़ूद उन्हें ही फॉलो करने वहाँ पहुचे थे...ऑटो में उन दोनो के सवार होते ही आदम समीर को गाड़ी उनके पीछे चला देने को कहता है....
हम ऑटो के ठीक पीछे थे...इसलिए समीर ने गाड़ी को ज़्यादा फास्ट उनके पीछे नही कर रखा था...बीच बीच में समीर गाड़ी को ऑटो के ठीक बगल तक ले आता....जिससे मुझे मेरी माँ अंजुम और हेमा ऑटो में बैठी बातें करती दिखी जा रही थी....समीर ने भी देखा कि दोनो सहेलिया आपस में बातें कर रही है उन्हें मालूम नही था कि बगल वाली गाड़ी में उसका बेटा और उसका दोस्त सवार उनको ही फॉलो करते हुए आ रहा था....अब तक मैं निश्चिंत था कि हेमा ने शायद माँ को मेरे आने की कोई बात नही बताई थी..
जल्द ही 1 घंटे बाद हमारी गाड़ी आनंद विहार टर्मिनल पहुँची...ऑटो वाला हेमा आंटी के बताए डाइरेक्षन से उसी तरफ मोड़ रहा था....अचानक बीच में रेड लाइट सिग्नल हो गया लेकिन ऑटो तब तक आगे निकल चुकी थी हमे रुकना पड़ गया मुझे बेहद तेज़ गुस्सा आया ट्रॅफिक जाम और रेड लाइट के उपर ....."तू फिकर मत यार मेरा देखा हुआ है क्लब".....साथ ही साथ समीर ने जीपीयेस सिस्टम ऑन कर दिया तो हमे डाइरेक्षन मिलने लगी
जल्द ही ग्रीन सिग्नल होते ही हमारी गाड़ी आगे बढ़ी....हम करीब 15 मिनट रुक गये थे जिस वजह से माँ जिस ऑटो में बैठी थी वो शायद अब की क्लब भी पहुच गयी होगी....मेरा दिल धड़के जा रहा था...समीर ने फुरती से गाड़ी को रेसिडेन्स एरिया से होते हुए सुनसान सड़क के बीच मेन रोड पे ले जाना शुरू किया...
समीर : भाई आनंद विहार टर्मिनल ख़तम हो गया है और उस तरफ कड्कडडुम्मा मेट्रो स्टेशन का रास्ता पड़ता है....यानी कि क्लब ग़ाज़ियाबाद और दिल्ली के कहीं बीच में है
आदम : बहेन की लौंडी रंडी हेमा मेरी माँ को इतना दूर ले लाई
समीर : तभी तो तुझे मना किया ये जगह देख रहा है कितना सुनसान है? रेलवे स्टेशन पास में है ऐसे ही जगहो में कांड होते है बाबू
आदम : ह्म
समीर : फिकर मत कर अपने ज़िम्मे ले गयी है हेमा आंटी तो कोई प्राब्लम नही होगी
आदम : फिर भी यार बेचैनी सी हो रही है
समीर ने मुझे पानी की बोतल दी...मैं उसे पीके थोड़ा रिलॅक्स हुआ...समीर ने डाइरेक्षन देखते हुए गाड़ी जल्द ही क्लब के पास रोकी...."वो देख एंट्री हो रही है चल एक मिनट भी वक़्त बर्बाद मत कर आंटी अंदर जा चुकी होगी क्यूंकी ऑटो नही दिख ह्रहा उनका शायद पहले ही हमारे आने से पहले उतर गयी हो"......इतना कह कर समीर उतर गया गाड़ी से और मैं भी....हम दोनो फटाफट अपना अपना मास्क लिए कुछ देर वहीं थोड़ा ठहरे...शायद माँ का ऑटो अब तक हमारे आने से पहले आया ना हो...पर जब आस ना लगी...तो मैं और समीर आगे बढ़े और एंट्री के पास आए....काफ़ी मॉडर्न लोग थे....सब औरतो ने किसी ने छोटी शॉर्ट ड्रेस पहन रखी थी तो किसी उमर दराज़ औरत ने मॉडर्न सी ट्रॅन्स्परेंट साड़ी...उनके साथ मर्द लोग भी घुस रहे थे जो अलग अलग उमर के थे...सब साले अय्याश लग रहे थे पर उनके चेहरे पे मास्क था..अपने में मस्ती करते हुए हंसते बात करते अंदर जा रहे थे
समीर और मैं जैसे ही एंट्री लाइन में उनके पीछे अंदर घुसे ही थे कि इतने में गार्ड ने हमसे एक आध सवाल पूछा...मैं खिजला गया पर बताना ज़रूरी था इसलिए समीर चुपचाप हो गया उसने मुझे कोहनी मारी...हम दोनो मास्क पहने हुए थे इसलिए गार्ड हमे घूर्र रहा था
गार्ड : ह्म किसके रेफरेन्स में आए हो तुम लोग साथ में कोई लौंडिया नही? यहाँ कपल आने का एंट्री होता है दिख नही रहा
आदम : हाहाहा दिस इस माइ फ्रेंड सम आंड आइ आम आदम हमारे साथ आई महिला पहले अंदर चली गयी दरअसल हम ट्रॅफिक में फँस गये थे
गार्ड : ह्म क्या नाम है औरतो का?
आदम : उम्म्म जी हेमा! (आदम को लगा शायद उसकी माँ और उसकी सहेली का नाम वहाँ देके वो लोग अंदर गये होंगे)
गार्ड : ह्म ठीक है किसके रेफरेन्स पे आया है तुम लोग?
आदम : उन्होने बताया नही क्या? अर्रे अपना राजेश वोई तो बोला कि यहाँ पार्टी दमदार होती है
गार्ड : फर्स्ट टाइम आया?
समीर : फर्स्ट टाइम आया तभी तो तुम्हारी हुज़्ज़त को बर्दाश्त कर रहा है वरना अब तक नाम जानके बिना पूछताछ किए अंदर जाने से रोकता हमे (समीर थोड़ा भड़क गया फिर मैने उसे शांत किया)
गार्ड ने हमसे साइन लिया फिर हमे अंदर जाने को कहा...उसकी वहीं तक ड्यूटी थी...हम अंदर आए...उफ्फ काफ़ी लंबा हॉल था स्टेर्स पे तो लोगो की आवा जाही चल रही थी...अंदर क्लब का माहौल था हल्की लाइट्स जल रही थी बीच बीच में फ्लॅशिंग हो रही थी लाइट्स कि डॅन्स फ्लोर पे औरतें और मर्द थिरक रहे थे...वहाँ के वेटरों ने ही सिर्फ़ वहाँ मास्क नही पहना हुआ था...गाना तेज़ शोर में बज रहा था इसलिए कानो में ही एकदुसरे के बोलना पड़ रहा था....
आदम : अर्रे यार समीर अब क्या करें ? यहाँ तो बहुत भीड़ है यार और उपर से सबने मास्क पहन रखा है लाइट्स भी कम जल रही है
समीर : ह्म वो देख उपर भी सीडिया जा रही है जिसमें एक आध लोग कोई ना कोई लॅडीस के साथ उपर जा रहे है कंधे पे हाथ रखके तो किसी को अपने से लिपटा के बेहेन्चोद कांड उपर ही होता होगा तू भी यार ऐसी गंदी जगह में माँ को ले आया क्यूँ नही रोका बे?
आदम : मुझे लगा सब अंडर कंट्रोल होगा एनीवे तू एक काम कर वहाँ एक लंबी लाइन दिख रही है ना बार के काउंटर की उसमें 2-3 बारटेंडरर्स सर्व कर रहे है शायद माँ वहीं हो सकती है मैं उसे पहचान लूँगा तू एक काम कर हो सके तो सीडियो से उपर जा
समीर : अर्रे यार कोई रोक टोक तो नही होगा ना
आदम : अबे संभाल लेना जल्दी से उतर जाना एक बार उपर चेक कर ले मेरा दिल बैठा जा रहा है
समीर : अच्छा ठीक है तू शांत रह तू वहीं बार काउंटर के पास मिलना
समीर इतना कहते हुए डॅन्स फ्लोर पे नाचते लोगो के बीच से गुज़रता हुआ लगभग ठेलता हुआ लोगो को सीडियो के करीब जाते हुए फुरती से उपर चला गया..म्यूज़िक बहुत तेज बज रहा था..इसलिए मैं कान को सहलाते हुए बार काउंटर के पास आया...वहाँ लोग ड्रिंक्स कर रहे थे...
उधर अंजुम बेख़बर थी कि उसका बेटा क्लब में घुस चुका है बार काउंटर के पास खड़ी मास्क पहनी हुई चुपचाप सीट पे बैठी हुई थी...उसके हाथ में अपनी और अपनी सहेली दोनो का पर्स शामिल था....अभी कुछ देर पहले राजेश उनके कॉल करने के बाद वहाँ आया था...और हेमा और अंजुम को ड्रिंक्स दे रहा था पर हेमा ने पी लिया लेकिन अंजुम ने काफ़ी ना नुकुर के बाद एक कोल्ड ड्रिंक की सीप ले ली थी वहीं कोल्ड ड्रिंक का ग्लास वो ख़तम किए पार्स काउंटर में रख देती है.,.उसे पता था बारटेंडर को राजेश ने बोला हुआ है कि उससे कोई पैसे ना ले....राजेश हेमा को लेके डॅन्स फ्लोर पे लेके कुछ देर वहाँ उसके नाचा था
फिर हेमा को उसने बाहों में लिया और उसकी सहेली के सामने ही दोनो सीडियो से उपर लगभग कुछ देर पहले ही चढ़के उपर जा चुके थे...हेमा ने सिर्फ़ इतना कहा था कि बस 1 घंटे में वो वापिस आ जाएगी....अंजुम को ऐसी जगहो में जाने की आदत ना थी वो छोटे शहर से बिलॉंग करती थी क्लब्स में वो कभी नही आई थी इतने में बारटेंडर ने अंजुम से ऑर्डर लेना चाहा "एनितिंग एल्स मॅम"........"जी नही".......अंजुम की बात सुनके बारटेंडर वापिस दूसरो को ड्रिंक्स सर्व करने लगा
अंजुम को बेहद अज़ीब लग रहा था उफ्फ एक तो इतना शोर और उपर से कैसे कैसी औरतें लिपटा चिपटी मर्दो से कर रही थी इतने में दो कपल पास आके एकदुसरे को जप्पी पप्पी करते हुए ड्रिंक्स का ऑर्डर देने लगे तो अंजुम को थोड़ा अज़ीब लगा तो वो थोड़ा किनारे वाली सीट पे जाके उन लोगो से दूर बैठ गयी...अचानक अंजुम को अहसास हुआ कि उसके सर में दर्द उठ रहा है उसे मालूम नही था कि उसकी कोल्ड ड्रिंक में नशा था....उसका सर बार बार हल्के नशे होने से घूमे जा रहा था.....उसे थोडी खाँसी हो गयी उसने बारटेंडर से एक ग्लास पानी माँगा....अंजुम को पानी देते हुए बारटेंडर फिर चला गया....जैसे ही अंजुम ने वो पानी भरा ग्लास एक बार में ही खाली करके रखा तो उसे पानी में भी थोड़ा अज़ीब सा सवाद लगा...अंजुम वैसी ही तिठकि हेमा को कोस रही थी कब वो जल्दी आए और वो यहाँ से निकले?
अब तक अंजुम को नशा होने लगा था..वो चुपचाप एक कोने में वैसी ही खड़ी थी....इतने में दो आदमी उसके ईर्द आगे ऑर्डर देके शराब की चुस्किया लेने लगे...उन्होने अकेली अंजुम को खड़ा पाया उसे दोनो ने बारी बारी से अपनी आँखो से उसके फिगर को घूरा....भरपूर जवान औरत थी पतली कमर थी बीच बीच में उनको उसकी गहरी नाभि दिख रही थी....लेकिन अंजुम ने उन लोगो से कोई जवाब सवाल नही किया वो अपने में चुपचाप खड़ी थी...अंजुम ने नोटीस किया कि वो लोग उसे खा जाने वाली नज़रों से देख रहे है...उसका एक पल मन हुआ कि वो बाहर चली जाए लेकिन जैसे उसने कदम बढ़ाए वो सर पकड़े वापिस काउंटर की सीट पे बैठ गयी....दोनो मर्द समझ चुके थे कि वो अकेली थी...लेकिन कोई भाव नही दे रही थी
उधर समीर भी हर रूम्स को लॉक्ड पाता है तो किसी को सटा हुआ...उसे पता चलता है कि हर रूम में कांड हो रहा था किसी में एक आध औरतो के साथ कुछ मर्द थे तो किसी में 3-4 मर्दो के साथ एक औरत....अंदर से आहों की आवाज़ें आ रही थी और शराब की बदबू...समीर सब दरवाज़ों को बराबर हल्का सा खोलने का प्रयास करके अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था....इसलिए जो लॉक्ड था उस पर दस्तक दे देता जिसमें से चिढ़ते हुए कोई ना कोई मर्द या औरत दरवाजा खोल कर उस पर बरस पड़ती सब नशे में धुत्त थे...समीर जैसे ही उस रूम के दरवाजे पे दस्तक देता है तो एक सड़ी हुई शकल लिए एक आदमी नशे में उसे घूर्रता है
समीर ऐसे ही झाँकता है....और झूंठ कहता है कि उसकी गर्लफ्रेंड किसी रूम में उसका इन्तिजार कर रही है इसलिए उसे मालूम नही चल पा रहा कि कौन से रूम में है?.....राजेश का वो दोस्त होता है वो लगभग झल्लाते हुए उसके सामने ही दरवाजा लगा देता है....समीर ने देख लिया था कि अंदर हेमा है जो पूरी निवस्त्र थी और कमरे में 2 मर्द मज़ूद थे...वो ये देखके वापिस होने लगता है...क्यूंकी हेमा के साथ अंजुम नही दिखी उसे वो शूकर करता है
हेमा अंदर राजेश के कपड़े उतारे उसके लंड को कच्छे के उपर से सहला रही होती है...राजेश का दोस्त उसे एक ड्रिंक और बनाके देता है जिसे वो गटकते हुए गले से खाली करके फैक देता है उसके बाद हेमा की साड़ी उपर टाँगों तक उठाए उसके ब्लाउस को लगभग फाड़ते हुए पर हेमा उसे रोकके खुद ही अपने हाथो से ब्लाउस के बटन खोल देती है तो उसकी चुचियाँ 40 साइज़ की बाहर होती है जिसे राजेश भरपूर दबाता है....हेमा सोफे पे गिर जाती है और राजेश लगभग पॅंट घुटनो के नीचे कच्छे सहित किया उसके उपर चढ़ जाता है.....हेमा टाँगें खोल देती है वो अपनी भोसड़ी में राजेश का लंड सरका लेती है
"उई हाए आहह ओह्ह्ह हाहह".........राजेश नशे में धुत्त हेमा की दबा के चुदाई करते करते 5 मिनट में झड जाता है....उसके झाड़ते ही सेक्स की खुमारी उसके उपर से हवा की भांति गायब हो जाती है...तो हेमा उसे अपने उपर से हटाते हुए फ़ौरन अपनी चूत के बीच से उसके लगे कॉंडम को निकाल फेंकती है जिसमें उसका जमा वीर्य होता है...हेमा देखती है कि उसका दूसरा दोस्त अब तक वहाँ मौज़ूद था
इतने में फिर दरवाजे पे दस्तक होती है तो राजेश का फ्रेंड आगे जाके दरवाजा खोलता है वहाँ 3 लौन्डे और होते है जो लगभग 35 साल के करीब होते है....वो तीनो एक बार हेमा को अपना ब्लाउस ठीक करते देखते है हेमा जल्दी जल्दी अपनी चुचिओ को ब्लाउस के भीतर ठेलते हुए उन्हें गुस्से से देखती है फिर उसके दोस्त को कहती है कि ये लोग यहाँ क्या कर रहे है? राजेश का दोस्त राजेश के कहने पे ही वहाँ रुक कर उन दोनो की चुदाई देख रहा होता है इसलिए अब उसकी भी नियत खराब हो जाती है राजेश खर्राटे भर रहा था इसलिए उसके उठने की अब कोई वजह नही थी
हेमा : आए ये सब क्या है? बात तो राजेश से हुई थी ना? तो ये लोग कौन है?
"हम भी राजेश के दोस्त ही है...दरअसल इस जगह का इंतज़ाम हमने ही करवाया है...साला ठरकी तो 3-4 धक्को में ही पश्त हो गया अब ज़रा हमसे भी अपनी मरवाले"........तीनो ठहाका लगाए हंसते है
हेमा : रंडी समझा है क्या? बात एक मर्द की हुई थी तुम लोगो को मैं नही जानती मैं जा रही हूँ
राजेश का दोस्त जो पहले से कमरे में मौज़ूद था..उसने कस कर उसकी बाह पकड़ ली हेमा उसे मारने लगी पर उस पर कोई असर नही हुआ...."अर्रे ज़्यादा नखरे मत कर डर क्यूँ रही है? 4 ही तो है एक से तो चुद ली अबे रंडी होती तो इतने नखरे काहे करती अब चल चुपचाप मान ले 25 की बात राजेश ने की थी हम 30000 देंगे बस एक एक राइड प्लस्स"...........एक लड़के ने जल्दी जल्दी ऑफीसर'स चाय्स की एक ड्रिंक बनाके हेमा की बाह पकड़े राजेश के दोस्त को दी..
उसने जबरन हेमा को शराब पिला दी....पर हेमा टॅस से मस नही हो रही थी आख़िर में 2 पेग हेमा को जबरन उन लोगो ने पिला दी जिसके बाद हेमा को नशा बहुत ज़्यादा होने लगा और वो राजेश के दोस्त की गिरफ़्त में आ गयी...राजेश के दोस्त ने उसे अपने सीने से अलग करते हुए कस कर उसके दोनो बाँह पकड़ी
हेमा : हरामजादो छोड़ो मुझे अच्छा नही होगा आअहह अपनीी माँ पे चढ़ जाओ (राजेश के दोस्त लोग ठहाका लगाते उसकी हालत को देख हँसने लगे)
राजेश के दोस्तो ने आगे बढ़ते हुए उसके पेटिकोट को उपर तक किया और उसे कस कर पकड़ लिया....हेमा छुड़ा नही पा रही थी नशे में बडबडा रही थी..जब पेटिकोट का नाडा खोलते हुए उसके कपड़ों को उपर उठाए एक दोस्त ने कस कस के उसके नितंबो को मसलना शुरू किया तो एक ने पेटिकोट लगभग खींचते हुए टाँगों तक उतार दिया...राजेश का दोस्त जो पहले वहाँ मज़ूद था जिसने ड्रिंक पिलाई थी उसने उसके ब्लाउस के हुंक को जल्दी जल्दी खोलना शुरू किया..कुछ ही देर में बिस्तर पे हेमा की सारे कपड़े उतारके उन चारो ने उसे नंगा कर दिया...एक उसकी बुर को मसल रहा था तो दूसरा उसकी गान्ड को फैलाए छेदों को घूर्र रहा था.....
"उफ्फ रंडी पहले से लगता है केयी दफ़ा चुदि हुई है ये किसको उठाके लाया है राजेश का लॉडा साला खुद तो ठरक की आग भुजाए लॉडा सो रहा है और हमे ऐसी वाहियात औरत पकड़ा गया".......एक दोस्त ने कहा....दूसरे ने उसके हाथ पाँव को कस कर पकड़े रखा था...तीसरे ने आइडिया दिया कि साली को बाथरूम में ले जाके चोदते है....लेकिन राजेश का मज़ूदा दोस्त उन लोगो को पहले अपने अपने कपड़े उतारने को कह रहा था...चारो ने अपने कपड़े उतार दिए......हेमा मदरजात नंगी उन चारो नंगे मर्दो के बीच दबी हुई थी..चारो ने उसे लगभग जबरन बाथरूम में धकेला और शवर ऑन कर दिया....शवर के एकाएक खुलने से हेमा का बदन भीगने लगा और वो छटपटाते हुए होश मे आने लगी....लेकिन चारो ठहाका लगाते उसे अंदर धकेलते जा रहे थे...पर हेमा उनमें से ना किसी के लंड को सहला रही थी ना वो लोग उसे ज़बरन अपने लंड को उसके मुँह में दे पा रहे थे
"रंडी ज़्यादा नखरे ना कर एक एक लॉडा अंदर ले लेगी तो क्या आसमान टूट जाएगा?".......एक ने पीछे आके उसकी गान्ड के छेद में उंगली घुसा दी...हेमा चीख उठी..वो अब लगभग उनसे हाथा पाई करने लगी थी...उन्हें गंदी से गंदी गाली देके खुद को छुड़ाने का प्रयत्न कर रही थी....
ठीक उसी बीच राजेश का पहला वाला दोस्त बाहर आया और उसने कपड़े पहने..."उफ्फ इस रांड़ से तो कुछ मिलने नही वाला लगता है भोसड़ी बना चुकी है छेद भी गान्ड का खुला हुआ है...ऐसी तो रंडी की भोसड़ी होती है सड़ी हुई मैं नीचे जाता हूँ राजेश से सुना है इसकी एक सहेली भी आई हुई है वो अभी तक नीचे होगी"....राजेश का दोस्त कपड़े पहनते हुए बोला
"अर्रे तो फिर देरी कैसी? ले आता उसको".......
."राजेश ने मना किया था".....
"वो तो पड़ा हुआ है ढेर होके तू जा ले आ उसे कैसी है? कुँवारी?"......
"नही शादी शुदा है".....
"उफ्फ तब तो पट जाएगी ले आ साली को वैसे बस इसकी तरह रंडी ना निकले पकड़ साली को"...........हेमा राजेश के दोस्तो की बात सुन घबरा गयी और नशे में ही उन्हें मना करने लगी
हेमा : अर्रे हराम के उस पर अपनी निगाह मत कर कुत्ते मेरी सहेली है तुम रंडुए उसे मत कुछ करना रुक जा तू एम्म्म (लेकिन कस कर एक ने हेमा के मुँह पे जबरन हाथ रख दिया हेमा वैसी ही पूरी नशे में धुत्त थी तीनो उसे घसीटते हुए लगभग बाथरूम से बाहर ले आए और उसे नंगी ही बिस्तर पे लेटा दिए....उसके चूड़ी पहने हाथों को दो मुश्टंडों ने कस कर थाम लिया....बाकी तीसरा उसकी टाँग खोले उस पर चढ़ने की कोशिश करने लगा)
नीचे अंजुम को अब तक नशा काफ़ी सर चढ़ चुका था..अब म्यूज़िक का शोर जैसे जैसे गूँज़ रहा था उसके कानो में...उसे सब अच्छा अच्छा लग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे वो ज़मीन से उपर नीचे हो रही है...वो एकदम चकराई लगभग बैठे हुए सर पकड़े रही...इतने में वाइन का ग्लास थामे राजेश का दोस्त उसे देखते हुए उसके पास आया वाइन की चुस्किया लेके उसका नशा दुगना हो गया वो ललचाई निगाहो से काली साड़ी पहनी अंजुम के बदन को निहारने लगा
राजेश का दोस्त : अर्रे आप ठीक तो है ना भाभी जी ?
अंजुम : ज.जीि हां पर आप कौन?
राजेश का दोस्त : मैं राजेश का फ्रेंड हूँ लगता है आपकी तबीयत ठीक नही
अंजुम : न..नहिी मैं ठीक हूँ वो हेमा कहाँ है?
राजेश का दोस्त : वो तो हाहाहा उपर है आप ही को याद कर रही थी आपको बुलाई है उपर
अंजुम: मुझे लेकिन उम्म मैं नही आप उसे यही भेज दीजिए
राजेश का दोस्त :देखिए यहाँ ऐसे बैठे रहने से कोई फ़ायदा नही आप उपर चलिए
अंजुम : नही नही मैं यहाँ ठीक हूँ म..मैंन (अंजुम लगभग लरखड़ा सी गयी उसके हालत को देख राजेश मुस्कुराया)
राजेश : अर्रे आइए आइए उपर चलिए आप रेस्ट भी कर लीजिएगा लगता है आपने ड्रिंक कर लिया
अंजुम : म..मैं नही आउन्गि (अंजुम थोड़ी सहम गयी एक तो उसे नशा हो रहा था उपर से राजेश के दोस्त को देखके उसे डर लग रहा था)
लगभग राजेश के दोस्त ने उसके बाज़ू पे हाथ अभी रखा ही था...इतने में नाचते लोगो को ठेलत हुआ आदम अपनी माँ को देख लेता है जिसके बाज़ू पे उस आदमी का हाथ है....वो मास्क पहनी माँ के चेहरे को आराम से पहचान लेता है...आदम मास्क अपना ठीक किए एकदम से दोनो के बीच आता है और लगभग राजेश के दोस्त का हाथ बाज़ू से हटा देता है
आदम : क्या हो रहा है यहाँ? ईज़ देयर एनी प्राब्लम अंजुम ? (आदम की भारी आवाज़ को सुन राजेश का दोस्त और अंजुम दोनो ही चौंक उठते है राजेश का दोस्त एकदम से उसे घूर्र घूर्र के देखने लगता है हैरत से)
राजेश का दोस्त : जी आपकी तारीफ आप कौन है? और ऐसे हमारे बीच क्यूँ आए? (दोस्त के स्वर में एका एक कड़क भाव था)
आदम : यह मेरी गर्लफ्रेंड है बोले तो मेरी घरवाली (राजेश का दोस्त चमक उठता है अभी राजेश का दोस्त कुछ और कह पाता) एनी प्राब्लम आपको कोई दिक्कत?
राजेश का दोस्त : पर राजेश ने तो बताया था हेमा के साथ सिर्फ़ उनकी सहेली!
आदम : मेरी गर्लफ्रेंड अंजुम ने ही मुझे इन्वाइट किया था पार्टी में साथ में मेरे दोस्त भी है यहाँ मिस्टर अजय सिंग राठोड
राजेश का दोस्त कुछ समझ नही पा रहा था उसे लगा उसकी सहेली और हेमा अकेले आए हुए थे उसने एक बार कुछ कहना ही चाहा था कि आदम ने पलभर में माँ की तरफ देखा जो उसे नही पहचान रही थी और उसे आश्चर्य और गुस्से भरे भाव से देख रही थी एकदम से क्यूँ उसने उसे अपनी गर्लफ्रेंड कहा....आदम के मास्क के होंठ में छेद था इसलिए वो अपने होंठ माँ के कान के नज़दीक पलभर में लाया और बोल उठा जिसे सुनते ही माँ हड़बड़ा गयी नशे में होने के बावजूद वो हैरान थी कि उसका बेटा यहाँ क्लब आया हुआ था उसके पीछे
राजेश का दोस्त : भाभी जी क्या ये सच कह रहे है? ये आपके ?
अंजुम : ज.जीई ये मेरा बाय्फ्रेंड है अनिल (अंजुम को सही लगा नाम उसने कह दिया)
राजेश का दोस्त चुपचाप सा हो गया इतने में समीर पीछे से आया जो सिल्वर मास्क पहना हुआ था अंजुम उसे पहचान नही पाई पर आवाज़ से उसे कोई जाना पहचाना लगा...."क्या हुआ बडी एनीप्रोब्लम?"........आदम की जान में जान आई...समीर राजेश के दोस्त को घूर्रने लगा
राजेश का दोस्त : आपकी तारीफ?
समीर : मेरा नाम अजय सिंग राठोड है सीनियर इनस्पेक्टर फ्रॉम दिल्ली क्राइम ब्रांच (एका एक उसकी पुलिसिया पहचान से राजेश का दोस्त घबरा गया)
आदम : अंजुम इसने तुम्हारे बाज़ू पे हाथ क्यूँ रखा ? (आदम ने हिम्मत से कहा तो अंजुम ने भी राजेश के दोस्त को देखते हुए बताया कि यह ज़बरदस्ती ऐसा कर रहे थे राजेश का दोस्त घबरा गया वो ना ना करने लगा)
समीर : अच्छा तो ये मामला है तो तू ज़बरदस्ती कर रहा था वो भी पोलीस वाले के साथ
आदम : एक पोलीस वाले की माल पे निगाह रखने में तुझे डर नही लगा बुला राजेश को बुला ज़रा उसे
राजेश का दोस्त : आई..सा कुछ नही ये झूंठ बोल रही है मुझे लगा कि यह यहाँ अपनी सहेली के साथ!
आदम : तो अकेले देखके मेरी गर्लफ्रेंड का फ़ायदा उठा रहा था
समीर : तू रहने दे दोस्त मैं देखता हूँ इसको एक पोलीस वाले की प्रॉपर्टी पे हाथ डाला है इसने (समीर वैसे ही जान गया था कि उसने मेरी माँ को छेड़ा था इसलिए उसका खून खौल उठा और वो उसे कस कर पकड़े बाथरूम में ले गया...वैसे भी समीर हॅटा कट्टा था)
इतने में माँ ने मेरे मास्क को उतार डाला लगभग मुझे देखके उन्हें अच्छा अहसास हुआ..."उफ्फ तू यहाँ कैसे?"........
"फिलहाल तो तू चल मेरे साथ यहाँ से अभी कुछ पूछना मत"....
."बेटा बहुत दर्द हो रहा है सिर में तेरे से माँफी मांगती हूँ प्लीज़ हाथ जोड़के कि बाप को मत!"...
."पागल है क्या तू? रुक"......
.माँ की हालात खराब हो गयी थी मैने बारटेंडर को घूरा जो अब तक हमारे बीच जो कुछ भी हुआ उसे नोटीस कर रहा था
मैने उसे झाडा..."इधर आ तो नशीली चीज़ें तू कोल्ड ड्रिंक पानी में मिलाता है?".......
वो सुनके डर गया..
"सब-इनस्पेक्टर के सामने ज़्यादा श्याना ना बन बेटीचोद जैल में सडेगा तू".....
"स..इर्र मांफ कर दो मालूम नही था कि ये आपके साथ आई है ये तो यहाँ चलते रहता है"......
मैने उसे खूब झाड़ा जिससे वो डर गया...गनीमत थी कि वहाँ हमारी वजह से कोई हंगामा नही हो रहा था
इतने में समीर आया....उसने बताया कि उसने अच्छे से तीन चार जड़ दिए राजेश के फ्रेंड को वो ढेर हो गया है साले को एक टाय्लेट रूम में बंद करके आया है अब यहाँ से जल्द से जल्द से निकल जाना चाहिए...उसने अंजुम की हालत देखी तो आदम के साथ साथ उसने भी बारटेंडर को धमकाया...और उसे एक ग्लास बियर के साथ सलाद लाने को कहा...आदम कुछ समझ नही सका
"साले तेरी माँ को नशा ज़्यादा हो गया है पहली बार लगता है ड्रिंक की है...तू ये बियर और मसाला वाला खीरा इन्हें खिला ये ठीक हो जाएँगी"......
मैने ठीक वैसे ही माँ को खीरा और बियर पीने को बोला....माँ ने नशे में ही उसे जैसे तैसे खाना शुरू किया और आधा ग्लास तक बियर पिया फिर उनसे पिया नही गया....
"यार हेमा आंटी के चक्कर में लेने के देने पड़ जाते आज यार उपर तो हेमा घुसी पड़ी होगी उसे भी ले चलते है यहाँ से"..........समीर अब तक बहुत गुस्से में था उसने मुझे झाड़ा
समीर : नही अबे छोड़ जाने दे मरने दे रंडी को
पर अंजुम नशे हालत में हेमा को बुलाने के लिए कह रही थी....उसे अकेले छोड़के जा नही सकते थे अगर उसे कुछ हो गया तो उसकी बेटियाँ तो अनाथ ही हो जानी थी कोई उनके आगे पीछे नही था हेमा के सिवाय...समीर ने मुझे मेरी माँ को बाहर गाड़ी में बैठने का बोलके गाड़ी की चाबी दी...मैं माँ को संभाले कंधे से पकड़े बाहर ले आया...गार्ड मुझे एक औरत के साथ पाया तो मुस्कुराया...मैने उसकी तरफ देखा नही उसे गेट से बाहर ले आया....
फिर झट चाबी से गाड़ी का लॉक खोल उसे गाड़ी में बिठाया...."उफ्फ मम्मी तू ठीक तो है ना".........मेरे झींझोड़ने से माँ बस मुझसे माँफी ही माँगें जा रही थी वो मेरे कंधे पे सर रखके नशे में धुत्त सो गयी....मुझे बेहद बुरा लगा कि माँ ने मेरे साथ ऐसा क्यूँ किया था?
उधर समीर झट से उसी रूम के करीब पहुचा जहाँ उसने हेमा को कमरे में पाया था उसने दरवाजे पे दस्तक दी...तो तीनो में से एक लौंडा नंगा ही राजेश का दोस्त उसकी सहेली को ले आया सोचके दरवाजा खोल देता है....तो एक मास्क पहने लौन्डे को देख हड़बड़ा जाता है...समीर ने फुरती से उसे एक लात मारके गिरा दिया...दोनो उठके उस पर झपटे लेकिन तीनो इस बीच पूरे पिए हुए थे तीनो नंगे थे....समीर ने दूसरे वाले की टाँगों के बीच एक लात जमा दी वो अंडकोष पकड़े वहीं गिर पड़ा....उसने देखा कि हेमा रो रही थी वो छुड़ाने की कोशिस कर रही थी जो लौंडा उस पर कुछ देर पहले चढ़ा हुआ था..वो एकदम नंगी पड़ी हुई थी समीर को देखके घबरा गयी
समीर ने कस कर एक बाई किक उसके उपर चढ़े लौन्डे जो एकदम से समीर के हमले से बच ना सका पलंग के दूसरी ओर गिर पड़ा...समीर ने तुरंत पास रखी साड़ी हेमा के बदन पे डाल दी....हेमा जैसे तैसे साड़ी को पहनने लगी समीरके सामने
"फिकर ना कीजिए आदम ने भेजा है मुझे अब चलो यहाँ से अकेले आई तो आई उसकी माँ को भी साथ ले आई"........
.हेमा शर्मिंदा सी बदहवास उठ खड़ी अपनी साड़ी को पहनने लगी जैसे तैसे....वो बहुत ज़्यादा थर थर काँप रही थी ये तो गनीमत था कि उसकी चुदाई शुरू होने से पहले समीर आ धमका था
हेमा ने कस कर दो तीन लात उन लोगो के उपर बरसा दी जो गिरे पड़े थे और एक लात राजेश की गान्ड पे भी मारी और वैसे ही बौखलाए उल्टे पाँव समीर के साथ वहाँ से निकल गयी समीर ने देखा कि वो लोग वापिस उठ रहे थे इतने में उसने कमरे का दरवाजा कस कर लॉक्ड कर दिया...
इतने में मैने पीछे झाँका तो पाया हेमा साड़ी ठीक करते हुए खुद पे क़ाबू किए नॉर्मल भाव से क्लब से बाहर निकल रही थी पीछे समीर जो अपना अब मास्क उतार लिया था वो उसके पीछे चलते हुए आ रहा था
आदम : उफ्फ तुम दोनो का कब्से इन्तिजार कर रहा हूँ समीर तू ठीक है ना यार
समीर : बेहेन्चोद मर जाती साली तीन चढ़े हुए थे इस्पे वो तो अच्छा हुआ कि मैं वक़्त पे आ गया वो लोग तो तेरी माँ के नाम का ज़िक्र कर रहे थे हेमा आंटी ने बताया कि इसके भद्वे का वो दोस्त था तेरी माँ को उपर ले जाने आ रहा था
मैने कस कर हेमा को झिंजोड़ दिया तो वो रोने लगी मैने उसे खूब झाड़ा कि आपकी वजह से मेरी माँ की इज़्ज़त लूट ली जाती क्या मुँह दिखाती मेरी माँ अपने घरवालो को?..
.हेमा को नही पता था कि हालात इतने बत्तर हो जाएँगे राजेश के दोस्त इस तरह नियत खराब कर लेंगे....समीर ने मुझे शांत किया
समीर : आदम बरस मत शांत हो जा पहले यहाँ से निकल लेते है वरना उनका कोई आदमी बाहर हमे ढूंढता हुआ आ जाएगा (इतना कहते हुए हम चारो वहाँ गाड़ी में सवार होकर निकल गये)
आधे रास्ते आते आते हेमा आंटी का नशा पूरा उतर चुका था...वो शर्मिंदा थी और मुझसे माँफी माँग रही थी उसने समीर और मेरा काफ़ी शुक्रियादा किया कि अगर हम वक़्त पे ना आते तो सच में उसके ज़बरन चुदाई के साथ साथ अंजुम के साथ भी कुछ घट जाता...मेरा बस चलता तो उसका गला दबा देता....पर माँ मेरे कंधे पे सर रखके निढाल सोई पड़ी हुई थी...समीर ने उपर जो हुआ सब ब्यान किया...मैने भी समीर का बहुत बहुत शुक्रियादा किया..
समीर ने हमे हमारे घर तक छोड़ दिया...हेमा आंटी माँ को मेरे कंधे पे संभाले अपने घर जैसे तैसे चली गयी वो सारे रास्ते राजेश को गालियाँ दे रही थी उसे हाथ में एक भी पैसा नही मिला था....वो मुझसे माफी माँगके गयी...
माँ को जब घर लाया तो वो करीब 10 मिनट और सोई पड़ी रही...अच्छा था बाबूजी लेट आने वाले थे हम शाम को 7 बजे तक घर पहुच गये थे...माँ ने 10 मिनट आराम किया फिर धीरे धीरे उन्हें होश आया फिर वो मूतने बाथरूम गयी फ्रेश होके वापिस आने के बाद वो थोड़ा मायूस सी हुई जैसे शर्मिंदा हों जो कुछ भी हुआ उसे जब याद किया उनके मुँह से शराब की महेक आ रही थी...मैं नही चाहता था कि पापा को कुछ पता चले इसलिए फ़ौरन उन्हें नहाने को भेज दिया...कुछ घंटे में माँ बिल्कुल ठीक हो गयी...फिर मैने उसे सबकुछ बताया फिर उन्होने भी कि उन्हें मालूम नही था कि इतना कुछ उनके साथ हो गया....वो मेरे गले लग्के लगभग रो पड़ी...उसे गर्व था कि मैने उसके लिए इतना बड़ा रिस्क लिया था...मैं दिल ही दिल में खुश था कि चलो जो हुआ सो हुआ पर माँ ने मुझे जब अपना बाय्फ्रेंड कहा थोड़ा अज़ीब सा ज़रूर लगा था
माँ ने फोन करके हेमा आंटी से उनकी हालत पूछी और लगभग गुस्से में आके कह डाला कि अब वो उनसे कोई मतलब नही रखना चाहती...हेमा ने काफ़ी रिक्वेस्ट किया कि उसे मांफ कर दे जो हुआ उसे भूल जाए आदम को उसी ने मनाया था क्लब जाने को लेकिन माँ कुछ सुनना नही चाहती थी उन्होने सॉफ कह डाला कि मेरे बेटे ने मेरी इज़्ज़त को लूटने से बचाया अगर उसे कुछ होता तो आदम या उसके बाप को क्या जवाब देती? हेमा चुप हो गयी उसने माँफी फिर माँगा...पर माँ ने इतनी सालो की दोस्ती एक ही झटके में फोन कट करते हुए तोड़ दी ....मैं खुश हुआ कि आख़िरकार माँ को मेरी मुहब्बत का अहसास तो हुआ और अच्छे बुरे का अहसास भी
मैं और माँ कुछ देर वैसे ही बतलाते हुए रज़ाई ओढ़े सोए रहे माँ हैरत में थी कि मैं कैसे वहाँ आ गया था और मुझे मालूम कैसे चला? मैने सारी बात उन्हें बताई वो कस कर मेरे खुले उपरी बदन पे लिपट गयी और आँखो में आँसू उमड़ गये कि मैने अपनी जान पे खेलके उनकी जान बचाई थी.....रात 10 बजे तक हम नॉर्मल होके उठे और साथ में हम माँ-बेटे ने खाना बनाया पिताजी आ चुके थे उन्हें कुछ मालूम नही चल पाया
पिछली शाम जो कुछ भी हुआ था वो अंजुम के दिल-ओ-दिमाग़ से नही निकल पा रहा था...उसे अब भी अहसास हुआ था कि वो कितनी बड़ी मुसीबत से बच निकली थी....सुबह पति के उठाने पे ही उसने आँख खोली थी तो पाया कि वो काफ़ी कल की वजह से थकि हुई थी हालाँकि वो जल्दी सोई भी नही थी...उसने फटाफट उठके नाश्ता पति के लिए बनाया और टिफिन पॅक किया....पति फ़ौरन घर से ऑफीस के लिए निकल पड़ा...अंजुम भी उबासी लेते हुए अपनी अधूरी नींद पूरी करने के लिए दुबारा लेट गयी...
इस बीच उसका बेटा आदम बिस्तर पे करवट लिए आँखे मुदें सोया पड़ा था...अंजुम को जैसे उस पर प्यार आया लेकिन वो उसे छूती वो जाग जाता कल उसने वैसे भी कैसे अपनी जान जोखिम में डालके अपनी माँ की जान बचाई थी? यही सोचते हुए वो सो गयी...अचानक उसकी नींद टूटी तो उसने पाया कि आदम अपने बिस्तर पे नही है....कहीं वो टाय्लेट में तो नही था? उसे हर पल आदम के पास ना होने से अज़ीब सा लगता था..
वो उठके एक बार बाथरूम में झाँकी तो पाया आदम वहाँ नही था....उसका पति सुबह 7 बजे के लगभग निकल चुका था और अभी 7:30 हुए थे वो तो कचरे की जो गाड़ी आती है उसकी आवाज़ ने उसे जगा दिया था....उसने पाया कि दूसरे कमरे में गुम्सुम आदम बैठा हुआ है....वो आदम के करीब आई और उसके कंधे पे हाथ रखके उसके बगल में बैठ गयी
अंजुम : क्या हुआ सब ठीक तो है इतनी सुबह सुबह तो कभी उठता नही और यहाँ ऐसे एकात मे इस कमरे में अकेले तू इतना चुपचाप क्यूँ बैठा हुआ है?
आदम : माँ मैं तुमसे बहुत नाराज़ हूँ
अंजुम : क्या तूने अभी तक अपनी माँ को मांफ नही किया?
आदम : माँ मैं तुमपे नाराज़ इसलिए हूँ कि तुम मुझे बिना बताए झूंट बोलके नानी के घर का बहाना लगाए उस गंदी हेमा के साथ उस पार्टी में चली गयी पता है अगर मैं वहाँ ना पहुचता और अगर समीर ने मदद ना की होती तो वो तो दोस्त है...क्या सोचा होगा? उसने जब आपको नशे की हालत में पाया मुझे कितना बुरा लगा आप जानती है?
अंजुम चुपचाप थोड़ी सी उदास हो गयी ऐसा लग रहा था जैसे वो फिर सूबक रही थी..."हां आदम ग़लती मेरी ही है तेरी बात मानके भी मैने वहाँ जाने का फ़ैसला किया अगर तू ना आता तो कसम से वो कमीना तो मेरे नशे का फ़ायदा उठा लेता हेमा से कल जब बात हुई थी तो उस रंडी ने बताया कि उसे चार पैसे भी नही मिले थे वो तो मुझसे भी ज़्यादा घबराई हुई थी बलात्कार जो हो जाता उसके साथ अगर समीर वक़्त पे वहाँ दाखिल नही होता और ना जाने मेरा भी क्या हाल होता?....लेकिन जो भी हो मुझे अब उस औरत से कोई ताल्लुक़ात नही रखना लेकिन तू प्लीज़ मुझे बार बार कल हुई घटना का कुछ भी याद मत दिला"........अंजुम ने बेटे की तरफ देखते हुए कहा
आदम : आइ आम सॉरी माँ मैं शायद आप पे बरस पड़ा...लेकिन कसम से कोई गैर इंसान अगर तुम्हारे बदन पे हाथ भी रखता है ना मुझे ऐसा लगता है कि उसकी जान ले लूँ...तुम नही जानती मैं नही चाहता कि तुम कही भी मुझे बिना बताए अकेले कही जाओ
अंजुम उसके बर्ताव में आए परिवर्तन को देख हैरत से देखते हुए मुस्कुराती है....वो बड़े गौर से अपने बेटे को देखती है....आदम का चेहरा गुस्से में जैसे लाल तमतमा उठता है...एकदम से उसकी माँ बीच में उसे रिलॅक्स करती है
अंजुम : रिलॅक्स बस बस इतना गुस्सा ठीक नही मुझे पता है तू मेरा सबसे ज़्यादा ख़याल रखता है लेकिन एक बात बता तुझे तेरी माँ में ऐसा क्या? मेरा मतलब है क्या महसूस हुआ कि तू एकदम से होमटाउन और नौकरी छोड़के महेज़ मेरे लिए चला आया?
आदम : क्यूंकी माँ मैं आपके बगैर एक पल भी नही रह सकता...खैर जाने दो जो कल हुआ सो हुआ पर एक वादा करो कि आज के बाद हेमा आंटी के पास आप भूल से भी नही जाओगी और ना ही अब किसी से मतलब नही रखोगी
अंजुम : बेटा मैं तुझे अपनी कसम देती हूँ मैं किसी से भी अब मतलब नही रखूँगी अब मैं सारा ध्यान अपने घर में और सिर्फ़ और सिर्फ़ तुझपे दूँगी खुश?(अंजुम के मुस्कुराते ही आदम उससे लिपट गया)
मैने माँ को इतनी ज़ोर से बाहों में भींचा कि माँ एकपल के लिए हैरत से मुझे देखते हुए मेरी पीठ सहला रही थी...उसने मुझे अलग किया और नज़ाकत से देखा
अंजुम : एक बात आदम मेरे दिल में केयी दिनो से ये बात चल रही है?
आदम : हाँ बोलो ना
अंजुम : तू मुझमें कुछ ज़्यादा ध्यान नही देने लगा है ? मेरा मतलब मैने कभी किसी भी बेटे को अपनी माँ के लिए इतना ज़्यादा केर करते नही देखा हालाँकि अगर कोई और लड़का होता और उसकी माँ ठीक वैसे ही मौज़ूद किसी क्लब में होती तो शायद उसे जॅलील करता या परवाह ना करता पर तुझे मैं समझ नही पा रही क्या बात है? हालाँकि कौन माँ नही चाहती कि उसे उसका बेटा इतना ख्याल रखे इतना प्यार करे..
आदम समझ चुका था...कि मा फ्रॅंक्ली उससे ये सवाल कर रही थी....वो कहना चाहता तो था कि माँ तू मुझे बहुत पसंद है....और मैं अब तेरे साथ सारी ज़िंदगी बसर करना चाहता हूँ...तू मुझे इतनी पसंद है कि तुझे अपनी बाहों में हमेशा समेटे रखू सारी अयाशी छोड़ दी सबकुछ छोड़ दिया सिर्फ़ तुझे पाने के लिए....इतने में अंजुम ने उसे झिंजोड़ा तो आदम को होश आया कि वो मन की विचार धारा में उलझा हुआ था
अंजुम : बोल ना?
आदम : माँ सुन (आदम ने दोनो हाथ माँ के चेहरे पे रखे माँ उसे अज़ीब निगाहो से देखने लगी उसकी इस अज़ीब सी हरकत पर आदम का चेहरा उसके चेहरे महेज़ एक उंगली के फ़ासले दूर था) माँ मैं तुझे बहुत चाहता हूँ तुझे बहुत प्यार करता हूँ और मुझे तू भा गयी है
अंजुम : हाहहाहा हाहहाहा (माँ का एकदम से हँसते हुए यूँ उसे देखना आदम को अज़ीब लगा पर वो शरमा गया)
अंजुम : बुद्धू तू ऐसे क्यूँ कह रहा है? वो तो हर माँ अपने बेटे को उससे भी ज़्यादा उसे चाहती है प्यार करती है पर यूँ फ़िल्मो की तरह लड़की के चेहरे को पकड़े हाहाहा अज़ीब लगता है
आदम को थोड़ा गुस्सा आ गया...माँ ने उसकी फीलिंग्स को नज़रअंदाज़ कहीं ना कही कर दिया था...वो शरम से झेंप उठा नही...बल्कि उसने इस बार माँ को कस कर पकड़ा..माँ की हसी एक पल को ठहर गयी और वो बड़ी बड़ी निगाहो से बेटे की ओर देखने लगी...बेटे ने उसकी दोनो कलाई पकड़ कर रखी हुई थी
आदम : मेरी बात तुझे झूठ लगे या सच पर यही सच्चाई है अब मुझे तेरा किसी भी आदमी के साथ देखना अच्छा नही लगता शायद हमारा रिश्ता सबसे पहले जुदा हो और नाज़ुक हो...लेकिन मुझे तेरे से सच्चे दिल से प्यार है इसलिए देख मैने कभी किसी औरत को उस निगाह से नही देखा ना उस नज़रिए से जिन निगाहो से एक मर्द औरत को देखता है...मैं तुझे बेपनाह प्यार करता हूँ (आदम की गंभीर आवाज़ सुन उसकी माँ उसे लज्जा पाते हुए देख रही थी साथ ही साथ आदम को उसकी गरम साँसों का अहसास भी हो रह था)
कुछ पल के लिए आदम ठहरा रहा...बोलता रहा अपनी मन की हसरतों को जो उसकी माँ के लिए थी...पर अंजुम समझ ना पाई कि ये क्या था?....आख़िर में चुप्पि साधी माँ से आदम ने जवाब माँगा...वो घुटनो बैठ गया नीचे और पलंग पे बैठी माँ के हाथ को पकड़े उसने उसे लगभग चूमते हुए अपने हाथो में थामें रहा
आदम : क्या तुम मेरी ज़िंदगी की एक मात्र औरत बनोगी ?
अंजुम : आ..द्दाम बेटा ये कैसी बातें कर रहा है तू? मैं तेरी माँ हूँ और एक माँ और बेटे के बीच सिर्फ़ एक ही रिश्ता होता है वो है ममता का तू मेरी कोख से पैदा हुआ है....लेकिन तू जिस तरीके से कह रहा है ऐसा कैसे हो सकता है? भला एक बूढ़ी औरत के लिए तू सारी ज़िंदगी उसके नाम करना चाह रहा है अर्रे मैं तो रहूंगी तेरे साथ पगले पर बेटा ये सब अज़ीब!
आदम : माँ जानता हूँ कि ये बेहद अज़ीब सी हालत है जो मैं तुझसे कह रहा हूँ पर मैं तुझसे बहुत कुछ चाहता हूँ जो फिलहाल कह नही सकता....पता नही माँ मैं अपनी सारी ज़िंदगी तेरे साथ काटना चाहता हूँ मैं जानता हूँ कि ये सोसाइटी इस रिश्ते को पाप समझेगी आइ डॉन'ट गिव आ शिट टू दिस सोसाइटी
अंजुम : बेटा तू मेरी औलाद है पर तेरा प्यार उन लोगो के बीच होता है जो पति पत्नी होते है हालाकी मेरा तेरे पिता के साथ कभी ऐसा कुछ नही रहा...लेकिन मुझे लग ही रहा था कि तेरे मन में कुछ बात ज़रूर चल रही है
अंजुम को हेमा की वोई बातें याद आ रही थी कि आजकल लड़के अपनी ही माओ के साथ व्यभिचार रिश्ता बनाते है जो कि खूनी रिश्ते होते है पर संबंध जैसा एक मिया बीवी का होता है ठीक वैसा....अंजुम को अहसास होता है अब तक उसने अपने बेटे को एक बच्चे की तरह पाला पोसा और अपने सीने से लगाए रखा लेकिन आज ऐसा लग रहा था कि उसके बेटे के रूप में कोई गैर मर्द उसका हाथ माँग रहा हो उसे प्रपोज कर रहा हो
अंजुम के होंठ काँप रहे थे....वो अपने बेटे से अटूट मुहब्बत करती थी लेकिन आज उसे ऐसा लग रहा था जैसे ये सब ग़लत हो गुनाह हो...उसका बेटा अपनी ही माँ को गंदी नज़र से देख रहा हो....ये सब सोचते सोचते अंजुम रोने लगी....आदम हैरान होते हुए माँ के चेहरे को सहलाने लगा...उसने माँ के आँसू पोंछे
आदम : म...माँ मैं तो बस माँ मुझसे ग़लती हो गयी प्लीज़ माँ रो मत प्लीज़
अंजुम : रोऊ नही तो और क्या कहूँ? मुझे छी यकीन नही होता कि तू मुझे अपनी ही माँ को ऐसी नज़र से देखने लगा है क्या जादू कर दिया तेरे परिवार ने तुझपे क्या तू इसीलिए होमटाउन से यहाँ आया सिर्फ़ अपनी माँ से अपनी नापाक हसरत मिटाने तू जानता भी है तेरे इस प्यार का कोई वजूद नही मुझ जैसी बुढ़िया लेके तू पगला रहा है मुझपे क्या बीतेगी इसका तुझे कोई अंदाज़ा है
आदम : माँ नही ऐसा कुछ नही माँ
अंजुम ने बेटे के हाथ अपने चेहरे से हटा लिए....और नज़रें नीचे करते हुए उसे ऐसे नज़रो से देख रही थी जिसमें घृणा और दुख दोनो घुले हुए थे....आदम को लगा कि उससे कितनी बड़ी भूल हो गयी? लेकिन उसे अहसास हुआ ये उसकी हवस नही बल्कि उसका सच्चा प्यार था...उसने माँ की तरफ हाथ बढ़ाया पर माँ उसके हाथ को झटकते रही...
आदम रोने लगा वो एकदम से माँ की तरफ जुनून भरी निगाहो से देखता है...."ठीक है माँ मैने तुम्हें गंदी नज़रों से देखा ना मुझे तुमने मेरे प्यार को ग़लत ठहराया...ये सोचा कि हमारा रिश्ता नापाक हो जाएगा...ठीक है तो भूल जाओ अब मुझे खो देना आदम का नाम जो तुझे दुगनी खुशी देना चाह रहा था शायद ग़लती मेरी है मुझ जैसे पापी को इस दुनिया में रहने का कोई अधिकार नही ठीक ना"......धीरे धीरे एकदम से आदम बौखला उठा वो लगभग चिल्लाने चीखने लगा....
वो लगभग दौड़ पड़ा...माँ उसके गुस्से को जानती थी उसकी आँखे बड़ी बड़ी हो गयी वो बेटे के पीछे भागी उसे मालूम था बेटा जब गुस्सा करता है या उस पर कोई जुनून चढ़ता है तब वो कुछ नही देखता होशो हवास खो बैठता है...लगभग 2न्ड माले पे उसका परिवार रहता था..वो ठीक आँगन में आया...और फ़ौरन अपनी एक टाँग उसने बाल्कनी के ग्रिल के दूसरी साइड रख ली..वो लगभग आँगन के ग्रिल पे चढ़ा हुआ था...उसकी माँ उसे छुड़ाने लगी.."न्नहिी नहिी आदम नहिी बेटा नहिी".....माँ रोते हुए जैसे चीख रही थी
इतनी तेज़ शोर में पड़ोसी लोग बाल्कनी की तरफ देखने लगे कि अचानक क्या हुआ? जो अंजुम का बेटा ऐसे स्यूयिसाइड करने की कोशिश कर रहा था...आदम का पूरा चेहरा लाल था आँखे एकदम गुलाबी गुस्से में चिल्लाते हुए माँ के हाथो को धकेल रहा था इतने में माँ ने उसे अपनी कसम दे डाली..आदम रुक गया उसकी माँ की आँख उसे देख रही थी....उसका गुस्सा लगभग कम होने लगा...उसने कस कर बेटे को उतारने की कोशिशें की
आदम बाल्कनी से तो उतर गया...तो माँ ने कस कर उसके चेहरे पे थप्पड़ मारा....एक नही दो-तीन बार....कि आगे से ऐसा कुछ भी वो ना करे? अगर उसने उसे खो दिया होता तो उसकी ज़िंदगी का क्या वजूद बाकी रह जाता
आदम और अंजुम दोनो ही एकदुसरे को रोते हुए गले लग्के लिपट गये....तब तक मकान मालकिन भी चीख चिल्लाहट की आवाज़ के साथ अपने पति के साथ उपर आके दरवाजा खटखटाई...तो माँ ने ही दरवाजे खोला और झूठ कहा कि उसके और उसके बेटे एक बीच कलेश हो गया था अब सब ठीक है....वो लोग तो डर ही गये सोचने लगे कि कही कोई अनहोनी तो नही घट गयी.....उन लोगो के जाने के बाद
अंजुम ने आँगन का दरवाजा लगाके बंद कर दिया....बेटा चुपचाप पलंग पे लेटा हुआ था...माँ ने उसे गौर से देखा
अंजुम : तू आजके बाद ऐसा कभी नही करेगा वादा कर
आदम : लेकिन मुझे आप भी वादा करो कि आप मेरे प्यार को कभी हवस का नाम नही दोगि
अंजुम : आदम मैं तुझे कैसे सम्झाउ? मैं तेरी माँ हूँ रे तेरे पिता और मेरे बीच 20 साल हुए संबंध नही रहा...तेरी माँ इतनी तक़लीफो से पीड़ित है तुझे कुछ अंदाज़ा है और आज तू ऐसा कुछ मुझसे माँग रहा है
अंजुम बेटे के सर के बालों को सहलाते हुए उसके पास बैठ गयी...दोनो चुपचाप कुछ देर चुप्पी साधे रहे..कोई घर से बाहर भी नही निकाला....आए दिन तो कलेश होता था पर इस तरह माँ-बेटे के बीच कभी कुछ ऐसा नही घटा था....
अंजुम : अच्छा तू मुझसे क्या चाहता है ? क्या तू वादा करता है कि कभी मुझसे नही झगड़ेगा अपनी माँ की हर बात मानेगा? और सबसे बढ़कर कभी तू मुझे छोड़के कही नही जाएगा बोल जवाब दे
आदम : मैं पूरा वादा करता हूँ माँ
अंजुम : और क्या ये भी जानता है? कि जो तू रिश्ता चाह रहा है वो माँ-बेटे के बीच मुमकिन नही
आदम : मैं सबकुछ जानता हूँ माँ अगर मेरे अंदर कुछ ऐसा वाहीयतपना होता तो क्या मैं अब तक कुछ ऐसा नही करता?
अंजुम चुपचाप नज़रें झुकाए रखी...."पर बेटा मुझे तेरी मुहब्बत पे पूरा विश्वास है पर कल को अगर तेरे पिताजी या कोई तेरे मन की हसरतों को जान ले तो जानता है हम दोनो कितने बदनाम हो जाएँगे?"....... अंजुम आदम के करीब हो गयी
आदम : मुझे किसी की परवाह नही और वैसे ही कल पिता के बाद हम दोनो ही अकेले रह जाएँगे कौन रहेगा हमारे साथ? और मुझे शादी वादी करनी नही बस तू वादा कर
अंजुम ने मुस्कुरा कर आदम के हाथो में हाथ रख दिया..उसे थोड़ा अज़ीब लगा ज़रूर था पर अब वो अपने बेटे को अलग नज़रों से देख रही थी वो जानती थी कि अगर वो इस मुहब्बत को क़बूल करती है तो आदम उसकी ज़िंदगी खुशियो से भर देगा पर उसे गुनाह से डर भी था...
अंजुम के होंठो को आदम ने लगभग चूम लिया उसने इतने धीमे से और इतने देरी से होंठो से होंठ को अलग किया...कि माँ को उसके होंठो की मीठी जलन सी लगी वो उसे अज़ीब निगाहो से देखते हुए चुपचाप उठ कर चली गयी....
12 बजे तक उन्होने नाश्ता किया...दोनो माँ-बेटे वापिस अपने घरेलू ज़िंदगी में जैसे लौट चुके थे....दोनो के बीच सबकुछ नॉर्मल रहा...लेकिन अंजुम बेटे को अलग निगाह से देख रही थी उसे हैरत हो रही थी कि कभी भी उसने ऐसा किस्सा सुना हो कि एक बेटा अपनी माँ को चाह बैठेगा....
आदम धीरे धीरे दिन प्रतिदिन उसे खुशिया देने की नाकाम कोशिशे कर रहा था वो मन लगाके आगे की पढ़ाई के लिए सोचने लगा नौकरी के लिए इंटरनेट पे रिज्युम बनाए उसने कई जगह आवेदन किए...माँ की सेवा में वो लग गया वो माँ को हर मुमकिन आराम देने लगा था....धीरे धीरे माँ का उसे देखने का नज़रिया अलग होता चला गया और उसके दिल में जो अज़ीब सी फीलिंग थी वो धीरे धीरे गायब होने लगी..वो भी खुश थी कि आदम उसके इतना करीब आ गया वो ये बात अपनी माँ यानी आदम की नानी तक से छुपाए रखी हुई थी कि उन दोनो के बीच क्या हुआ था
माँ-बेटा अब प्रेमी जोड़े की तरह घर में हंसते वैसी वैसी हरकते करते जैसा एक लड़की को एक लड़का नज़ाकत से करता है दोनो कहीं भी बाज़ार या कुछ भी खरीदने को निकल जाते....फिर पिता जी के घर लौटने के बाद दोनो उनके सामने जैसे एकदम नॉर्मल बिहेव करते...सनडे उसे ऐसा लगता था कि माँ उससे दूर हो गयी क्यूंकी उस दिन पिता घर पे होते...उसे माँ का यूँ पिता के लिए इतना काम करना पसंद नही था....वो खुद शाम को पिता जी के घर लौटने के बाद कॉफी और शाम का नाश्ता खुद बनाके पिता को देता और माँ रात का खाना बनाने का इंतेज़ाम करती.....उसने माँ को इतना सुख दिया कि घर का आधे से ज़्यादा काम वो करता....उसकी माँ ने उसे अपने बचपन की बातें बताई कि उसका हमेशा कत्थक और साउत इंडियन डॅन्स सीखने का शौक था उसकी पायल को उसके बाप यानी आदम के नाना ने दिया था जिसे उसका पति जुआ की लत हो जाने की वजह से हार गया था उसके बाद कभी भी उसे दूसरी पायल उसका पति नही दिला पाया
आदम को तेज़ गुस्सा आया......अगले दिन घर पे एक डिल्वरी बॉय आया था..आदम सो रहा था इसलिए नमाज़ ख़तम कर माँ ने ही उससे पार्सल लिया उसे लगा शायद बेटे ने कुछ ऑर्डर किया होगा जब उसने उसे खोला तो पाया उसमें पायल थी वो जज्बाती हो उठी...आदम को उसने जगाया और सवाल किया तो उसने मुस्कुराते हुए प्यार से माँ के पाँव में दोनो पायल पहनाई..वो धीरे धीरे माँ को अपने करीब खीचता ले आ रहा था...और माँ भी धीरे धीरे आदम से काफ़ी खुश रहने लगी थी....
हमेशा लड़ाई झगड़े के दौरान आदम और माँ दूसरे कमरे में इकट्ठे सोने चले जाते थे...उसका पति कुछ समझ नही पा रहा था...रोज़ रात एक ही बिस्तर पे मज़ूद होने से माँ-बेटे एकदुसरे से लिपटे सोते थे....अब आदम बात बात पे माँ को होंठो पे किस कर देता था....माँ भी बेटे के होंठ को चूम लेती थी...लेकिन उसके बाद जैसे उसे शर्मिंदगी सी होती थी
एक दिन माँ नमाज़ से उठके कालीन को उठाए उसे फोल्ड कर रही थी वो झुकी हुई थी इसलिए बेटे को उसके नितंबो के उभार पाजामे से ही दिख रहे थे दोनो नितंबो की बीच कपड़ा जैसे धँस गया था और दो गोलाइयाँ पाजामा में शेप ली हुई थी...वो इसी अहसास से जैसे गरम सा हो गया...माँ पीछे मूडी तो उसने बेटे की तरफ मुस्कुराया तो उसने पाया कि बेटे का पाजामा फूला हुआ था....वो चुपचाप रही उसने आदम पर गौर किया आदम वहाँ से चला गया माँ एकदम से खिलखिलाए हंस पड़ी
उस रात आदम को नींद नही आ रही थी...वो सोने की नाकाम कोशिशें कर रहा था...इतने में माँ का अहसास उसे अपने ठीक बगल में खड़ी महसूस हुआ...उसने पाया कि उसकी माँ एक निघट्य पहनी हुई थी...उसने धीरे से आदम को जैसे जगाना चाहा था माँ उसे बड़े गौर से देख रही थी...."क्या हुआ?"...
."आदम उठ आ मेरे साथ"...आदम को आभास हुआ कि रात करीब ना जाने कितना टाइम हो रहा था वो उसके साथ अलमारी के शीशे के सामने खड़ा हो गया
माँ स्टूल के उपर दोनो हाथ रखे खड़ी हुई...उसने अपनी पेटिकोट का नाडा खोल डाला और पलभर में आदम के पाजामे के अंदर बंद लौडे को ठीक पाजामा नीचे खिसकाते हुए अपने हाथो में थाम लिया...."आदम इसे यहाँ डाल".....अंजुम ने अपने ही हाथो से अपने बेटे के सामने झुकते हुए स्टूल के सहारे एक हाथ से...दूसरे हाथ से उसके लिंग को अपने नितंबो की बीच घिस्सते हुए दबाया..."ओह माआ"....आदम अपने बिस्तर से उठ बैठा
वो पसीने पसीने हो रहा था..उसे अहसास हुआ कि उसके पाजामे के अंदर ही उसका वीर्य निकल चुका है...माँ बगल में लेटी सो रही थी और वक़्त रात के 2 बजे का था....यानी उसने अब तक महेज़ सपना देखा....वो मुस्कुराते हुए अपने सर पे हाथ रखके माँ कीतरफ देख रहा था....कुछ देर बाद वो उठा पाजामा उतारा थोड़ा सा शवर लिया उसके बाद तौलिए से अपने गीले बदन को कमरे में आते हुए पोछा...माँ तब भी सो रही थी..उसने पाजामा पहना और खुले बदन माँ से लिपटे सो गया
अगले दिन अंजुम ने बाथरूम के फर्श पे आदम का गीला पाजामा पाया उसके हाथ में बेटे का वीर्य लग गया जो चिपचिपा था उससे उसे घिन ना आई वो उन्हें बाकी कपड़ों के साथ धोने ले गयी....जैसे उसके लिए कोई नयी बात नही थी
करीब 2-3 महीने तक माँ-बेटा एकदुसरे के साथ एक छत के नीचे दिन गुज़ार रहे थे....अब माँ के बिना कहे ही आदम उसे कयि भी छू लेता था..हालाँकि उसकी माँ ने कभी कभी उसे मना किया कि ऐसा ना करे...पर अब उसके छूने से उसे आपत्ती नही होती थी...क्यूंकी आदम शरारत से कभी उसके पेट को तो कभी नाभि को तो कभी उसके गर्दन को दबाते हुए उस पर होंठ रगड़ लेता था तो कभी कान काट ले तो कभी गाल या होंठ पे चूम भी लेता था....माँ जैसे उसके काबू में थी वो चुपचाप रहती थी..
आदम थका हारा चिल्चिल्लाति धुंप में दोपहर 12 बजे तक घर लौटता है...इन 2-3 महीनो के बीच जिस एडी चोटी के साथ....आदम नौकरी ढूँढने के लिए निकला था उसके हाथ अब तक कुछ नही आया था....जिस भी इंटरव्यू में गया या तो उसकी बहस हो गयी या फिर उसे कोई ख़ासियत नही दी गयी....बेटा जब घर लौटके आया...तो माँ ने दरवाजा खोला....बेटा मायूस था उसने एक बार फीकी मुस्कुराहट दी और अपना फाइल एक साइड रखके जूते उतारने लगा...वो इतना दुखी था कि उसने जूते जो बाहर दरवाजे पे छोड़ आया था उसे अंदर नही किया....बेरहाल माँ ने उसकी हालत देखते हुए खुद ही जूते अंदर किए और दरवाजा लगाया...
अंजुम ने बेटे को एक ग्लास ग्लूकान-डी देते हुए उसे सवाली निगाहो से देखा
अंजुम : क्या हुआ कोई बात बनी?
आदम : नही माँ एक तो इतनी गर्मी उपर से पता है 150 कॅंडिडेट थे इस बार तो हद हो गयी देश की क्या जनसंख्या बढ़ गयी...एक तो बुलाए उपर से एचआर रिक्रूटर लोग 20 मिनट एक इंटरव्यू लेने में इतना टाइम लगाए उसके बाद कहते है हम आपको बुला लेंगे आप अपना अड्रेस और नंबर छोड़ दो माँ के लौन्डो को काम नही देना तो सॉफ मुँह पे कह दे यार (आदम रोई आवाज़ में कहता है उसका दिल खराब हो जाता है?)
अंजुम : उफ्फ बेटा दिल छोटा नही करते आज ये काम नही मिला तो कोई और मिल जाएगा?
आदम : माँ तुम तो जानती हो पिताजी कि ना कोई संपत्ति हमे मिलने वाली है और ना ही पिताजी ने मेरे लिए कुछ कर रखा है जो कुछ करना है मुझे अपने कंधो पे ही करना होगा...कल को ज़िम्मेदारिया बढ़ेगी तो कौन काम देगा आजकल के ज़माने में साला कोई किसी मदद नही करता सब बस पैसो के पीछे भागते है
अंजुम : क्या तुझे लगता है कि रिश्ते पैसो से भी बढ़कर है क्या तुझे अब यही लगता है? कि तू मेरा बोझ नही उठा सकता? मैं कितना खाउन्गी दिन में 2 ही टाइम तो खाती हूँ और तूने खाना पीना भी छोड़ दिया जब से होमटाउन गया था...बोल ज़रा हमे क्या तक़लीफ़ होगी बस ज़िंदगी गुज़रने के लिए उतने ही तो पैसे चाहिए ना
आदम : माँ मैं 2-3 महीनो से ट्राइ पे ट्राइ कर रहा हूँ कोई भी वेकेन्सी हाथ नही आ रही या कोई मुझे रखना नही चाहता
अंजुम : इसी लिए तू खामोखाः डिसट्रिब्युटर की नौकरी छोड़के यहाँ आ गया सिर्फ़ अपनी माँ के लिए
आदम : माँ फिर ऐसा कभी ना कहना? मैं यहाँ सिर्फ़ तेरे लिए आया हूँ और मुझे दुख नही कि अब तक मुझे नौकरी नही मिली बस मैं तुझे खुशिया देना चाहता हूँ
अंजुम ने बेटे के चेहरे पे हाथ फेरा...उसे अपने बेटे की मुहब्बत पे नाज़ हुआ....उसने बेटे के मूड को ठीक करते हुए उसे हौसला दिया कि वो पूरी कोशिश करे एक ना एक दिन खुदा ताला उसे ज़रूर कोई ना कोई नौकरी दिलवाएगा ये अंजुम का विश्वास था वो रोज़ बेटे के लिए यही दुआ करती थी....अपनी माँ अंजुम का सपोर्ट और हौसला पाते हुए आदम खुशी मन से उसके गले लग गया
इन महीनो के बीच आदम के अंदर कोई कामवासना ज़ोर नही डाल रही थी उसपर...ना ही वो फिलहाल माँ को वासना भरी नज़रो से देख रहा था उसका पूरा फोकस सिर्फ़ काम और खुद को बनाने में था.....एक दिन माँ ने कहा कि समीर की हेल्प क्यूँ नही लेता? उससे बात कर....लेकिन समीर ने पहले से ही काफ़ी मदद की थी और अब उससे कुछ और हेल्प लेना ठीक नही लग रहा था आदम को वो किसी पे डिपेंडेंट नही होना चाहता था....वो अपने पिता को साबित करना चाहता था कि देख मैं भी एक ज़िम्मेदार मर्द हूँ...लेकिन पिता के दिल में उसके बेटे को लेके सिर्फ़ यही सोच उमड़ी हुई थी कि वो एक गुस्सेदार नाकाबिल औलाद है....माँ ने बेटे की प्राब्लम पति से वार्तालाप के दौरान कोशिश भी की पर उसके पिता इस बात को गंभीर रूप से नही लेते माँ को लगता कैसा पति है उसका? ना उसकी ज़िंदगी सवार पाया ना उसके बेटे की?....और इन्ही बातों में झगड़ा हो जाता...लेकिन माँ बेटे को इन्वॉल्व नही होने देती थी...चाहे उसका बाप कितना भी उसे जॅलील करता
रात तो जैसे माँ-बेटा एक अलग ही भमिका निभाते थे....लेकिन दिन में वो दोनो ऐसे रहते जैसे मिया बीवी हो...लेकिन मिया बीवी की तरह एकदुसरे से अब तक संबंध नही बना था....क्यूंकी पहल माँ कर नही रही थी और फिलहाल तो आदम का दिमाग़ माँ की मुहब्बत में महेज़ डूबा था उसे बस माँ के पास रहने में ही सुकून था...एक दिन काफ़ी वक़्त हो गया सुबह 6 बजे का निकला आदम बिना माँ को जगाए नौकरी ढूँढने के लिए निकला था...पिता से ढंग से बात नही करता था इसलिए उसका पिता भी कुछ कह ना सका अंजुम को...माँ जब जागी तो उसने आदम को नही पाया पति से पूछा तो उसने दोनो कंधे उचकाते हुए कहा सुबह सुबह पता नही कहा गया काफ़ी तय्यार लग रहा था? माँ आख़िर माँ थी उसे बेटे की फिकर हुई...
दोपहर हो गया लेकिन बेटा घर नही लौटा....अंजुम ने उसकी पसंद के नमकीन चावल और रायता बनाए थे....पर दोपहर शाम में तब्दील होने लगी...एक नीवाला भी अंजुम से ज़्यादा खाया नही गया....बस यही सोच उमड़ रही थी कि क्या पता? काम के लिए गया या कहीं कोई बात तो नही हो गयी?....उसने फोन भी किया तो पाया आदम फोन छोड़के गया था...उसे अब बेटे की बहुत ज़्यादा फिकर होने लगी...जब सूरज ढलने लगा तो एकदम से दरवाजे पे दस्तक हुई...अंजुम ने उठते हुए हड़बड़ी हालत में दरवाजा खोला वो बेटे पे थोड़ी गुस्सा हुई....बेटा पसीने पसीने थकि हालत में घर लौटा अपनी शर्ट के दो बटन खोले पंखे के नीचे हवा खाने लगा
अंजुम : क्या हुआ आज भी नौकरी नही मिली?
आदम ना में सर हिलाया...उसने बताया कि सॅलरी बहुत कम थी और उपर से स्टाफ का बिहेवियर काफ़ी रूड था....माँ ने उसके कंधे पे हाथ रखा और उसे शांत किया....आदम जब बाहर आया नहा कर तो उसे गरमा गरम खाना देख ज़ोरो की भूक लग गयी वो सुबह से ढंग से तो कुछ ख़ाके भी नही गया था....माँ उसे देख रही थी कि उसका बेटा अपने अरमानो को कुचले सिर्फ़ उसके लिए यहाँ आके कैसे काम के लिए दर दर भटक रहा है....सिर्फ़ अपनी माँ को संभालने और खुद को एक ज़िम्मेदार मर्द बनाने के लिए...माँ आज भी उससे मज़ाक मस्ती करने लगी ताकि उसका मूड थोड़ा ठीक हो जाए...
आदम : क्या माँ? क्या कर रही हो ? गुदगुदी होती है
(अंजुम ने बेटे के पाँव पे उंगली करते हुए कहा)
अंजुम : हाहाहा मुझे अच्छा नही लगता कि तू दुखी होता है? काए को इतना स्ट्रेस ले रहा है सब ठीक हो जाएगा तुझे मिल जाएगी नौकरी यहाँ नही तो कहीं और सही जहाँ भी तू चाहेगा
आदम : माँ आप कह रही हो कि मैं बंगाल में ढूँढ लूँ हाहाहा आपको तो बंगाल पसंद नही
अंजुम : हां पसंद नही पर तू ही देख तेरे पिताजी क्या मुझे खुशिया दिए? आज बुड्ढे हो गये है मुझसे 20 साल बड़े है और अब प्राइवेट नौकरी से कब वो हाथ धो ले कोई मालूम नही इतना सब सामान लिए ये किराए का घर क्या होगा हमारा? कहाँ जाएँगे हम? एक स्थान तो होना ज़रूरी है ना बोल
आदम : हां माँ पर मैं नही चाहता कि तू मेरी वजह से बंगाल में जाके रहे
अंजुम : अब तेरे सिवा मेरा है ही कौन? उस दिन मैने तेरी आँखो में खुद के लिए जो प्यार देखा मुहब्बत नही कसम ख़ाके कहती हूँ ऐसा प्यार मुझे तो अपने किसी प्यार करने वाले से भी नही मिला था और मैं इतनी भाग्यशाली हूँ कि मुझे प्यार भी अपने इकलौते बेटे का मिल रहा है बस मैं ये नही चाहती कि मुझ जैसी बुढ़िया के लिए.........
आदम : माँ फिर शुरू हो गयी तुम किस मदर्चोद ने बोला कि तू बुढ़िया है बोल इतनी जवान है आज भी अगर मॉडर्न ड्रेसस पहने ना तो कोई फरक नही बता पाएगा
अंजुम : अच्छा जी यानी अब तुझे अपनी माँ 25 साल की लड़की दिखती है
आदम : मेरी उमर की लगती हो हाहहाहा
अंजुम भी हँसने लगी अचानक उसकी कमर में दर्द शुरू हो गया..."उफ्फ बेटा लगता है गॅस का दर्द है उफ्फ ये भी ना रह रहके हो जाता है"......माँ अपनी कमर पकड़े दर्द से बिलबिला उठी..
."माँ क्या हुआ? ऑश शिट"......बेटे ने तुरंत माँ को लिटाया और दस्तर्खान पे रखी खाने की प्लेट्स सिंक में रखते हुए वापिस कमरे में लौटा
अंजुम : बेटा कुछ दिनो से खुलासा नही हो रहा इसलिए गॅस पेन होता रहता है
आदम : माँ तूने कुछ खाया नही आज?
अंजुम : तू था नही क्या खाती?
आदम : उफ्फ ये भी कैसी ज़िद है तेरी? रुक पड़ गये ना लेने के देने जब तुझे पता है कि खाली पेट रहने से तुझे गॅस बनता है फिर भी तू (आदम ने दवाई माँ को देते हुए कहा)
माँ ने दवाई खाई और वहीं बिस्तर पे पेट के बल लेट गयी....कुछ देर बाद आदम को महसूस हुआ कि माँ ठीक हो गयी है...उसने माँ की कमर पे हाथ रखके थोड़ा सा दबाव दिया तो अंजुम को कोई अहसास नही हुआ...."माँ लगता है कमर दर्द ठीक हो गया मैं थोड़ी लगे हाथो मालिश भी कर दूं तू पूरे दिन काम की है सोई भी नही होगी है ना".........अंजुम ने मुस्कुराते हुए ना में इशारा किया
आदम तेल ले आया...फिर उसने माँ को बोला कि जंपर उतार ले लग जाएगा पर माँ ने कहा नही जंपर उपर कर और वैसे कमर पे तेल लगा दे....पर आदम ने ज़िद्द की क्यूंकी जंपर गंदी हो सकती थी....माँ ने उठके अपने जंपर को अपने कंधो से होते हुए बाज़ुओ से निकल उतार फैका...और वापिस पेट के बल लेट गयी...इस बीच माँ की दोनो कांख में उगे बाल देख आदम की आँखो में चमक सी आई
माँ ने सिर्फ़ एक ब्रा पहनी हुई थी उसने आराम से तेल हाथो में लेके कमर के चारो तरफ हल्की बूँदें टपकाई...उसके बाद दोनो हाथो से मालिश शुरू की...माँ को आराम मिलने लगा बेटे के हाथो के स्पर्श से उसे काफ़ी राहत महसूस होने लगी.....
अंजुम : ह्म काफ़ी अच्छा मालिश सीख ली है तूने कहाँ से सीखा?
आदम : हाहाहा बस एक फ्रेंड था नेट फ्रेंड उससे सीखा था (आदम को याद आया कि उसने ठीक ऐसी ही मांलीश ताहिरा मौसी की की थी एक पल को उसे अहसास हुआ चुदाई का उसे मालूम नही था कि उसका लिंग माँ की टाँगों के बीच अकड़ गया है माँ को अहसास हो सा गया था)
आदम फुरती से कमर की अच्छे से मालिश कर उठ खड़ा हुआ..."चल थोड़ा पेट की भी कर देता हूँ और टाँगों की भी".........आदम ने माँ को ज़िद्द करते हुए कहा
अंजुम : नही नही काफ़ी है बेटा बहुत आराम मिला है क्यूँ खामोखा पूरी बॉडी का करेगा अच्छा नही लगेगा
आदम : प्लीज़ आपसे वादा किया था मैं हर मुमकिन खुश रखूँगा प्लीज़ ना मत करो प्लीज़ अपने बेटे के हाथो की मालिश से देखना आप का बॉडी फ्री हो जाएगा
अंजुम : चल ठीक है पर मैं सो गयी तो तेरे बाप का रात के लिए खाना कौन बनाएगा?
आदम : मैं कर दूँगा ना छोड़ो ना उसकी बात उससे वैसे भी हमे क्या मिलने वाला है? इतनी सेवा तो करती ही हो उनकी
आदम के काफ़ी ज़ोर देने पे अंजुम सीधी लेट गयी...उसने अपने दोनो बाज़ू सर के आज़ु बाज़ू सीधे कर लिए....इस बार आदम ने देखा कि उसकी माँ का फटा (स्ट्रेच मार्क्स) पेट कितना सेक्सी लग रहा था...आदम ने तेल की बूँदें कुछ नाभि में डाली और कुछ पेट के आस पास
अंजुम : अपने घर को देख रहा है (माँ ने बेटे को अपनी नाभि और पेट घूरते हुए पाया बेटे का हाथ तेल से सना हुआ हाथ उसके पेट पे था)
आदम : हाहाहा तू भी ना
फिर उसने माँ की तोंद हल्की सी निकली पेट की मालिश शुरू कर दी साथ ही साथ उसकी नाभि में भी उंगलिया चलाई....अंजुम गुदगुदा जाती एक पल को हाथ आगे किए आदम को रोक देती...लेकिन आदम भी मस्ती करता हुआ मुस्कुराए माँ के गुदाज़ पेट पे हल्की हल्की मालिश किए जा रहा था...उसके बाद उसके हाथ पाजामे के नाडे के पास आए और उसने डोरी खोली....अंजुम उसे मना करने लगी
अंजुम : बेटा नही नही खोल मत खोल मत हाहाहा मत खोल ना अर्रे क्या कर रहा है ऐसे उपर से कर दे (अंजुम उठने लगी तो आदम ने उसे लेटा दिया)
आदम : माँ तू लेटी रह ना क्यूँ इतना हड़बड़ा रही है? हट कुछ नही होता
बेटे की ज़िद्द के आगे माँ क्या कर पाती?...खैर वो चुपचाप आँखे मुन्दे लेटी रही....बेटे ने पाजामा पूरा उतार दिया माँ ने ब्राउन रंग की पैंटी पहनी हुई थी...उसने दोनो टाँगों पे लगभग तेल डाला और जांघों की मालिश करते हुए घुटनो को मलने लगा....माँ को भरपूर आराम मिल रहा था और साथ ही साथ उसे महसूस हो रहा था अपनी टाँगों के बीच के अन्द्रुनि हिस्से में एक अज़ीब से अहसास का....टाँगों की भरपूर मालिश करते हुए आदम ने पाँव पे भी तेल गिराया और एडी तक को उठाए अच्छे से मालिश किया एक एक उंगली की....माँ बेटे के सामने तेल से लथपथ सिर्फ़ ब्रा पैंटी में थी....बेटे ने दोनो ने टाँगो को नीचे रख दिया और इस बीच उसके हाथ वापिस से पेट पे आए और नाभि को उंगली करने लगे..
."बेटा हो गया ना छोड़ ना अब".......माँ ने धीमे से कहा
आदम : क्या हुआ माँ तुझे अच्छा नही लग रहा ?
अंजुम : बहुत वक़्त हुए जा रहा है अब बस रहने दे अर्रे बेटा यहाँ क्यूँ हाथ दे रहा है (उसे अहसास हुआ कि बेटे ने अब उसके ब्रा के ठीक उपरी छाती के उभारों के ठीक उपर गले और छाती के हिस्से पे हाथ रख दिया )
अंजुम उसे मना करने लगी...पर आदम ना माना उसने थोड़ा सा तेल माँ की छाती पे डाला और वहाँ मालिश करने लगा बार बार उसका हाथ ब्रा मे क़ैद चुचियो से लग जा रहा था...फिर माँ के दोनो गले के हिस्सो से लेके कंधे को मालिश करते हुए आदम माँ को देखके मुस्कुरा रहा था
अंजुम : बेटा उफ्फ बेटा बस भी आहह सस्स (अंजुम की साँसें जैसे तेज़ हो उठी...उसने कुछ नही कहा फिर)
बेटा मालिश करता रहा....और ठीक इसी बीच जब उसे अहसास हुआ..तो पाया कि उसके दोनो ब्रा के उपर बेटे ने हाथ रख दिया था...."आहहस्स नहिी नहिी वहाँ नही बेटा वहाँ नही".....माँ ने बेटे से अनुरोध दृष्टि से कहा...
आदम को अहसास हुआ कि उसने अपनी माँ से कहा था कि उसका प्यार उसकी वासना नही...एकदम से आदम अपनी साँसों पे काबू पाता हुआ ब्रा में क़ैद दोनो चुचियो के उपर से हाथ हटा देता है माँ एकदम गंभीरता से उसे देख रही थी
वो मँफी माँगता हुआ अपनी साँसों पे काबू पाए कमरे से निकल जाता है...अंजुम को अहसास होता है कि उसकी टाँगों के बीच की पैंटी एकदम गीली थी....वो हैरत में पड़ जाती है कि ये उसकी ज़िंदगी में पहली बार था जब वो इतनी कामुक होके झड गयी थी....ये उसकी ज़िंदगी का पहला ऑर्गॅज़म था..वो भी उसके बेटे के हाथो के स्पर्श के बदौलत उसे काफ़ी अज़ीब सा लगा....बेटे के बाथरूम से निकलते ही वो फ़ौरन वैसी ही ब्रा पैंटी पहने बाथरूम में चली गयी...बेटे ने एक बार अपनी माँ अंजुम के जाने से उसके पीछे से हिलते नितंबो को पैंटी के उपर से ही घूरा...माँ नहा रही थी...
वो अपने पूरे बदन पे हाथ फेर रही थी...डॉक्टर की बात उसके बाद बेटे की मांलीश उसे धीरे धीरे उत्तेजित कर रही थी....मर्द का स्पर्श जो कि उसके बेटे के हाथों का था...कैसे वो खुद पे काबू नही रख सकी...उसने पाया कि उसकी पैंटी बहुत गीली थी उसमें सफेद वीर्य जैसा कुछ लगा हुआ था...उसने पैंटी वहीं फैकि और उसे अच्छे से धो लिया साथ ही साथ उसने अपनी चूत पे हाथ रखा जो एकदम गीली थी....बदहवास उत्तेजना से परिपूर्ण माँ नहा कर बाहर लौटी...वो बेटे से शरमाते हुए नज़र तक नही मिला पा रही थी....आदम ने कोई जवाब नही दिया माँ अंदर कपड़े बदलने गयी तो दरवाजे पे दस्तक हुई...अंजुम थोड़ी चौंक उठी उसने कपड़े लिए और दूसरे कमरे मे लेके चली गयी...
आदम ने दरवाजा खोला तो पाया उसका पिता बाहर खड़ा था....उसके बाद अंजुम खाना बनाने चली गयी....तो आदम कुछ देर चुपचाप रहा...फिर अंजुम ने आवाज़ दी...पिता जी टीवी पे न्यूज़ देख रहे थे दूसरे कमरे में....अंजुम ने नॉर्मली बर्ताव से उसका हाथ बटाने को कहा....आदम ने ठीक वैसा किया..उसे खुशी थी कि माँ को कोई चीज़ बुरी नही लगी थी....
दूसरा दिन नॉर्मल ही गुज़र रहा था....दोनो माँ-बेटे फिर एकदुसरे से बातों में लग गये ऐसा लग रहा था पिछली रात जो कुछ भी हुआ उसमें दोनो में से किसी को कोई बुराई ना लगी....आज आदम गया नही कहीं...उसने माँ के साथ पालक का साग तोड़ते हुए बातें शुरू की
आदम : माँ तुम वॅक्स क्यूँ नही करती? कितने बाल उगे हुए है बालतोड़ हो जाएगा
अंजुम : मैने बहुत पहले छोड़ दिया था असल में गाँठ बन गयी थी वहाँ पे इसलिए अंडरआर्म्स करना छोड़ दिया
आदम : समीर तो अपनी माँ को हर टाइम ब्यूटी पार्लर भेजता रहता है वो भी हमारी तरह रहते है बिल्कुल अलग और अकेले
अंजुम : तेरा समीर भी अज़ीब है तेरी तरह लेकिन सच में वो इतना सोफीया को तय्यार क्यूँ रखता है?
आदम : उससे मुहब्बत जो करता है दोनो माँ बेटे कम और मिया बीवी की तरह ज़्यादा रहते है
अंजुम : छी या अल्लाह एक माँ होके अपने बेटे
आदम : माँ इसमें क्या बुराई है? वो दोनो खुश है तू देखती नही कि दोनो एकदुसरे के बिना रह नही पाते एकदुसरे की खुशियो के लिए क्या कुछ नही कर गुज़रते
अंजुम : तो इसका मतलब क्या वो अपनी माँ के साथ हमबिस्तर होता है? (माँ जैसे सवाली निगाहो से पूछी थी)
आदम : ह्म कुछ ऐसा ही (अंजुम हैरत से सोच में पड़ जाती है फिर नज़रें इधर उधर करते हुए बेटे को हया भरी नज़रो से देखती है)