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Incest माँ को पाने की हसरत

मैं ये दृश्य देखके संडास की मुद्रा में बैठते हुए पास ही की नाली के पास मूतने लगा...माँ और मैं साथ मुते जा रहे थे....जब माँ की आख़िरी बूँद पेशाब की निकलते हुए थम गयी...तो वो उठके हिचखिचाने लगी कि किससे धोए तो मैने पास आते हुए उठके...पास टंगा हॅंड टॅप हाथ में उठाया और उसे जैसे ही प्रेस किया उसमें से पानी की धार छूटने लगी उसे मैने माँ की टाँगों के बीच पेशाब की बूँदो से लगी गीली चूत पे बरसाने लगा चूत पूरी सॉफ हो गयी थी पानी की धार से...जिससे माँ ने खुद ही अपने हाथ ले जाते हुए मेरे सामने चूत को मलते हुए सॉफ किया...फिर मैने नल को दीवार पे लगे काग्गर में बने होल्डर में टाँग दिया...."चल जा वॉशबेसिन में हाथ धो ले"...मैने माँ से कहा...तो वो अपनी गान्ड मटकाते हुए मेरे सामने ही अपना पिछवाड़ा किए वॉशबेसिन के नल को खोले पास रखके हॅंडवॉश से अपने हाथ को सॉफ करने लगी फिर उसने पास रखे हॅंड टवल से पोंछ लिया..

मैं इस बीच शरारत से माँ के नितंबो के बीच की फांको में अपना मुँह घुसा देता हूँ जिससे मुझे उसकी नितंबो के बीच के पसीने और गान्ड के छेद की मिली जुली महेक अपने नाक में लगती है....उफ्फ उस अहसास से ही मेरा दम घूँट गया और मैं माँ की गान्ड के छेद में अपनी नाक लगाए सूंघने लगा...फिर हल्के से नाक से ही छेद को कुरेदते हुए लंबा साँस भरने लगा...माँ मेरी इस हरकत से हड़बड़ा उठी लेकिन मैं माँ को उल्टा खड़ा किए उसके नितंबो के बीच अपना चेहरा रगड़ते ही रहा..जिससे माँ को मज़ा मिल रहा था...वो अब लगभग मेरे चेहरे पे ही अपने दोनो नितंबो को रगड़ रही थी...और उस वक़्त मेरा चहेरा उसकी गान्ड की दरार के बीचो बीच था इससे उसके नितंबो के भीतर मुँह घुसाने और उसके अपनी गान्ड को दाए बाए हिलाने से उसके दोनो नितंबो के बीच मेरा चेहरा रगड़ खा रहा था और मेरा दम घूँट रहा था..फिर मैने ही उसके नितंबो को दोनो हाथो से मज़बूती से पकड़ा और अपना चेहरा उसके गान्ड की फांको से बाहर निकाला...माँ मुझे हांफता हुआ देख हंस पड़ी...

मैने हल्के से उसकी नितंब पे एक थप्पड़ मारा जिससे नितंब हिल गये...फिर दोनो को दबोचते हुए मैं छेद पे अपनी ज़ुबान लगाके कुरेदने लगा तो माँ का छेद मुझे बंद होता और सिकुड़ता दिखा..मैं उस पर तब भी जीब चलाता ही रहा इससे माँ अपनी गान्ड को ढीला छोड़ने लगी...और कुछ ही देर में मैने दोनो नितंबो को हाथो से मसल दिया..जिससे माँ चिहुक उठी उसने थोड़ा ज़ोर लगाया और पाद मारी..प्र्रर्र्ररर की आवाज़ के साथ एक महेक मेरे नथुनो में जैसे समा गयी क्यूंकी मेरा चेहरा उसके नितंबो के ठीक करीब ही था...

हम फिर अलग अलग हुए ये मेरे लिए एक नया अहसास था..."अब बस भी कर और क्या क्या हरकत करवाना बाकी है?

....मैं हंस पड़ा माँ की बात को सुन उसने मेरे गाल खीचे फिर खुद ही मेरे चेहरे को हाथो से धोने लगी...फिर हम अंदर आए...इंटरकम पे बोलते ही रूम बॉय कुछ ही देर में आ गया...और उसने दरवाजा खटखटाया हम माँ-बेटे नॉर्मल हो गये उसके सामने फिर उसके जाते ही हमने लंच किया....उसका आनंद लेते हुए हम बातचीत कर रहे थे....

अंजुम : बेटा मैं अक्सर सुनती हूँ कि ऐसे होटेल्स में कॅमरा वग़ैरा भी लगे होते है आए दिन ऐसे किस्से भरे देखने को मिलते है कि म्मस बन जाता है फिर उन्हें ब्लॅकमेलिंग वग़ैरा

आदम : हाहाहा अर्रे माँ ये सूयीट है काफ़ी नामी और साथ ही साथ प्रसिद्ध भी भला ऐसे वाहियात काम करके होटेल बंद होगा क्या? तू फिकर ना कर राजीव दा तो मुझसे भी रोमॅंटिक है भला वो अपनी बीवी को कहाँ कहाँ नही चोदे होंगे? वो यहाँ आए थे उन्होने ही मुझे बताया था इस जगह के बारे में थोड़ा सस्ता भी पड़ता है बजेट में पड़ा मेरे इसलिए आ गया और वैसे भी दो-तीन दिन ही तो ठहरेंगे फिर सुर्य मंदिर कोनर्क को देखके वापिस घर

अंजुम : अच्छा बाबा बस मैं ऐसे ही सोच रही थी

आदम : मानता हूँ सतर्कता अच्छी बात है पर ठोक बजा कर ही किसी चीज़ को इख्तियार करना चाहिए वहीं मैने की काफ़ी सर्चिंग की है भाई और उपर से राजीव दा वो भला ग़लत जगह का पता थोड़ी ना देंगे वो यहाँ आ चुके है पोलीस वाले है वो

अंजुम : ह्म चल ठीक है फिर आज कहीं घूमने चले क्या?

आदम : मेरे हिसाब से तो आज सामने की बीच पे चलते है आस पास का दौरा भी करेंगे की कैसी जगह है?

अंजुम : अच्छा चल लेकिन एक बात तो बता तू ज़्यादा ज़्यादा आगे नही बोल रहा है तूने मेरा नाम लिया है रूम बॉय के सामने

आदम : अर्रे मेरी माँ थोड़ा समझने दे उन्हें उन्हें भी तो लगे कि हम मॅरीड कपल है तभी तो यहाँ होटेल रूम बुक हुआ वरना सिंगल बेड और अलग अलग रूम्स ही देते और साथ ही में ये बाल्कनी वाला रूम शायद हमे नही नसीब होता

अंजुम : तू भी ना बहुत बड़ा हो गया है कैसे टाँग खीचता है मेरी?

आदम : अच्छा छोड़ तू फटाफट नहा धो ले फिर मैं भी तय्यार हो जाता हूँ फिर चलते है

अंजुम ने हामी भरी...और फिर अपनी पहनने के लिए बेटे कहे अनुसार एक नीली साड़ी और काला ब्लाउस फिते वाला बेड पे ही छोड़के बाथरूम में घुस गयी...शवर की आवाज़ सुनके आदम ने सोचा कि माँ को निकलने में अभी वक़्त लगेगा तो थोड़ा बाहर हो ले....आदम अपनी कसी जीन्स और शर्ट वैसे ही पहने हुए था वो नीचे उतरा...फिर मॅनेजर से मिला वो उससे पूछताछ करने लगा कि सब ठीक तो है कोई दिक्कत की तो बात नही....आदम ने निश्चिंत होते हुए ना में सर हिलाके मुस्कुरा के शुक्रिया अदा किया...फिर दोनो कुछ देर बातें करने लगे...बातों ही बातों में मालूम चला कि वो आने वाले कपल्स को उड़ीसा घूमने के लिए गाइड भी देता है....तो आदम ने ज़िक्र किया कि वो और उसकी वाइफ सन टेंपल घूमने आए थे....

मॅनेजर : अर्रे इसमें पूछने की क्या बात सर? यहाँ अक्सर फॉरिन टूरिस्ट्स भी वहीं जाते है वेल इस होटेल में अक्सर कपल्स आते है जो हाइली यही डिमॅंड करते है एक यही तो पुरी का सबसे मशहूर हिस्टॉरिकल जगह है जहाँ लोग जाने के लिए उड़ीसा अक्सर यहाँ आते है...

आदम : ह्म

मॅनेजर : मेरा गाइड आपको ले जाएगा फिलहाल तो आज आप लोग रेस्ट कर लीजिए क्यूंकी शाम होने को है फिर कल आप सुबह सुबह चले जाइएएगा

आदम : ह्म ठीक है फिर कल का फिक्स कर दीजिए (आदम ने गाइड की चार्जस पक्की करते हुए मॅनेजर से सुनिश्चित करते हुए वापिस रूम में आया)

अंदर पलंग पे बैठा ही था कि माँ अपने बाल सुखाते हुए तौलिया लपेटे ही नंगी गीले बदन बाहर निकल आई थी...."वाहह क्या आइटम है बॉस? .....आदम हंस पड़ा...तो माँ शरम से लजा गई...

"चल बेशरम मुझे साड़ी पहनने दे"......

"अच्छा पहन लो बाबा मैने कब रोका है"........

"जा तू भी नहा धो ले जब से आया है सिर्फ़ पेशाब किया है तूने जा".....

मैं मुस्कुराते हुए मैं नहाने चला गया...

 
जब बाहर आया तो माँ साड़ी पहन चुकी थी वो काफ़ी हॉट लग रही थी...मैने उसके फितेदार ब्लाउस पे हाथ फेरते हुए उसकी पीठ से होते हुए उसकी कमर पे हाथ लपेटते हुए उसे अपनी तरफ कस कर खीचा..

"अर्रे क्या कर रहा है हट"......माँ मेरे चेहरे को अपने चेहरे से दूर करते हुए शरमाई उसने नज़रें झुका ली मुस्कुराते हुए

आदम : दिल कर रहा है कि यहीं तुझसे शादी कर लूँ

अंजुम : हट पागल कुछ भी चल छोड़ मुझे चलना नही है

आदम : मन नही मान रहा

अंजुम : वो वक़्त सब मिलेंगे फिलहाल हम यहाँ छुट्टिया मनाने आए है बिस्तर गरम करने नही

आदम : हाहाहा अच्छा चल (मैं माँ को वैसे ही अपने से लिपटाये तय्यार हुया बाहर निकला हमने गेट लॉक किया और होटेल से बाहर आए)

मैने सॉफ देखा था कि मॅनेजर मेरी माँ और मेरी जोड़ी देखते हुए मुस्कुरा रहा था...हो सकता है मेरी बला की खूबसूरत माँ पे उसका दिल आ गया होगा...वैसे हमारी तरह यहाँ काफ़ी कपल्स थे इसलिए मुझे इतना सोचने की ज़रूरत नही थी....

हम बीच पे आए वाअहह पुरी का बीच कितना शानदार था? और ढलता सूरज सॉफ दिख रहा था....क्या नज़ारा था दिल देखके ही खुश हो गया लहरों का शोर्र और ल़हेरो का पानी हमारे टाँगों को गीला करते हुए वापिस समुन्द्र में वापिस चले जा रहा था....आस पास बुड्ढे बच्चे सब खेल रहे थे कयि कपल्स एकदुसरे के साथ पानी में खेल रहे थे तो कोई कॅमरा मेन से अपनी तस्वीर खिचवा रहा था....हम थोड़ा एकात में गये और वहीं रेत और किनारो के बीच चलते हुए एकदुसरे का हाथ थामें मज़ा ले रहे थे...

अंजुम : उफ्फ कितना शांत और ठंडा सा महसूस हो रहा है अफ मान शांत हो गया वाक़ई समुन्द्रि इलाक़ा मुझे बड़ा पसंद है

आदम : ह्म

माँ मुझे एकटक बड़ी नज़ाकत से घूर्र रही थी...मेरा हाथ प्कड़े वो मुझसे बार बार लिपट रही थी....मैने भी मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा

आदम : क्यूँ रे आज मुझे बड़ा गौर से देख रही है मेरी जान?

माँ : देख रही हूँ ज़िंदगी कितनी बदल दी तूने एक टाइम था कंप्यूटर में हमेशा बैठे रहने वाला नादान सा लौंडा आज अपनी माँ को घुमा फिरा रहा है संभाल रहा है उसे ज़िंदगी की सारी ऐशो आराम दे रहा है और अब एक आशियाना भी दे चुका जिसके लिए मैं बरसो से तर्सि थी

आदम : अर्रे माँ क्यूँ ऐसा सोचती है? तुझे तो खुश होना चाहिए कि देख तेरे बेटे ने तेरी खातिर क्या कुछ नही कर दिखाया? वहीं बाप बोलता था ना कि मैं किसी लायक नही देख लिया उसने

माँ : मैं तो उस वक़्त ऐसा नही सोचती थी बस विश्वास था तुझपे कि तू किसी काबिल एक दिन ज़रूर बनेगा पर थोड़ा पढ़ लेता आगे तो और भी अच्छा होता

आदम : माँ मौका ही कहाँ मिला? तू तो जानती है कितने कम मार्क्स आए थे मेरे फिर कैसे आगे की पढ़ाई के लिए अड्मिशन लेता गान्ड घिस्सता रहा लेकिन सरकारी जॉब मिलने से रही खैर जो है अब इसी में मुझे अपना कल सावरना है और खुदा के करम से आज मेरे पास सबकुछ है और सबसे बड़ी दौलत तू है माँ तू है जो मेरे पास है मेरे साथ है

माँ : तुझे भला मुझमें ऐसा क्या दिखा? जो तू मेरा इतना दीवाना हो गया (माँ ने इस बार बड़े गौर से मेरी तरफ देखते हुए अपनी दोनो बाँह मेरे कंधे पे रखी और लगभग चेहरा मेरे नज़दीक किया)

आदम : माँ किसी दीवाने से पूछ कि मुहब्बत क्या होती है? बस वहीं अट्रॅक्षन वहीं कशिश वहीं एक तरफ़ा नशा ही है मुझे तेरा जो पहले नही था शायद उस वक़्त वो आदम अलग था जिसे दौलत शौहरत और वासना ही भाती थी पर अब वो नही रहा मैं माँ मैं अब सिर्फ़ तेरा हो चुका हूँ तुनने मुझे बदल दिया है माँ तूने मुझे बदल दिया

माँ मेरी बातों से थोड़ी इमोशनल हो गयी उसकी आँखो से जैसे आँसू उमड़ने लगे तो उसने अपनी उंगलियो से आँखो के आँसुओ को पोंछते हुए मेरी तरफ मुस्कुराया और मेरे गाल और होंठ पे कस कर पप्पी किया....मैं मुस्कुरा कर माँ को अपने सीने से लगाए ढलती सूरज की ओर इशारा करते हुए दिखाने लगा....हम दोनो ढलते सूरज और ल़हेरो के पानी को अपने घुटनो तक महसूस करते हुए देख रहे थे एकदुसरे से लिपटे एकदुसरे की बाहों में...

"सिररर सिर्र"....इतने में मैं और माँ हड़बड़ाये....कोई आदमी था हल्की दाढ़ी रखी हुई थी उसने और एक शर्ट और जीन्स पहन रखी थी उसने हमे कपल समझा था..मैने माँ से कहा चल दो-तीन तस्वीरे खिचवा लेते है...तो माँ मान गयी पर उसे देखके ना जाने क्यूँ शरमाने लगी? इसलिए दूर दूर खड़ी होने लगी मुझसे..

आदम : अर्रे शरमाओ मत अंजुम थोड़ा पास आओ तो हाहाहा (मेरे इतना कहते हुए माँ मुझसे एकदम चिपक्के हंस पड़ी)

कॅमरामॅन ने मुस्कुराते हुए कुछ तस्वीरें हमारी ली अलग अलग अंदाज़ो में और ज़्यादातर तस्वीरे माँ और मेरी काफ़ी चिपकी और लिपटी हुई सी मुद्रा में थी जहाँ कही उसके गले में हाथ डाले उसे अपने सीने से लगाए कही उसने मुझे कंधे से पकड़ रखा था तो कही मैने पीछे से उससे लिपटा हुआ था...

कॅमरा मॅन : सर हो गया मैं तस्वीरे क्लीन करते हुए लाता हूँ (इतना कह कर वो चला गया)

जब वो वापिस आया तो उसके हाथ में तस्वीरे थी हम उसकी खीची तस्वीरो की तारीफ करने लगे....बंदे ने अपना नाम इमदाद बताया कहा कि वो ओड़िया वासी है और यही पुरी टाउन में ही रहता है...जब उसने मेरा परिचय लिया तो मैने माँ को अपनी बीवी बताया हमने बताया कि हम पास ही के होटेल में रुके है तो उसने इशारो इशारो में हमारे होटेल का नाम बताया क्यूंकी वो बीच के सबसे करीबी होटेलो में से था इस वजह से..और नामी भी क्यूंकी उसमें ज़्यादातर कपल्स ही आते थे...मैने और माँ ने हां में सर हिलाया

उसने मॅनेजर का नाम बताया फिर कहा कि वो यहाँ बहुत साल से है वीक्ली ये काम करता है वरना तो यहाँ आने वाले फॉरिनर्स को और फॅमिली और कपल्स को टूर भी करवाता है पूरे दिन का और वो हमारे होटेल के मॅनेजर के अंडर में ही ऐज आ टूर गाइड का काम करता है....हमने कहा तो ठीक है फिर कल होटेल पहुचो वहीं मॅनेजर से बात हो रखी है हमारी तुम ही हमे ले चलना तो उसने सहमति में सर हिलाया....वो काफ़ी मिसुक था इसलिए मुझे उस पर भरोसा हुआ वरना अभीतक तो मैं सबको गैरो की तरह ही ट्रीट कर रहा था...

आदम : उफ़फ्फ़ माँ तुम्हारा पल्लू थोड़ा नीचे से गीला हो गया

अंजुम : हां रे लगता है समुन्द्र के खारे पानी से गीला हो गया घुटनो तक जो हम आ गये यहाँ

आदम : हाहाहा कोई बात नही मेरे भी पाँव में रेत काट रही है चल

अंजुम और मैं एकदुसरे का हाथ पकड़े वापिस होटेल पहुचे मैं नंगे पाँव था इसलिए मेन रोड पे आते ही जूते पहन लिए फिर होटेल में दाखिल हुए मॅनेजर को उसी टूर गाइड इमदाद के बारे में बताया तो वो बोला हां हमारा सबसे ट्रस्टेड और सबसे पसंद किए जाना वाला गाइड वहीं एक्मात्र है...मैने उसे ही कल हमे पुरी के सूर्य मंदिर ले जाने के लिए फिक्स कर लिया...फिर हम वापिस कमरे में आए..

 
माँ काफ़ी थक चुकी थी बाहर का गोलगप्पा और कुछ सी फुड भी हमने खा लिया था...जिससे माँ को हल्की हल्की गॅस बनने लगी...मुझे डर हुआ कि कहीं तबीयत ना खराब हो जाए उनकी पर उन्होने कहा कि कोई ज़्यादा दिक्कत की बात नही है....उन्होने मुझसे ली आंटॅसिड दवाई खाई और फिर संडास करने चली गयी जब वापिस लौटी तो मुझे रज़ाई ओढ़े पाया मैं टी.वी देख रहा था वो भी मेरे बगल में टी.वी देखने लगी इतने में दरवाजे पे दस्तक हुई तो मैं अपनी लूँगी पहने ही दरवाजा खोला और रूम बॉय से खाने की प्लेट्स ले ली....हम दोनो ने बिस्तर पे ही रात का भोजन किया फिर रूम बॉय को बुलाके झूठे बर्तन भिजवा दिए...उसे इस बीच कमरे में आने तक ना दिया मैने क्यूंकी मैं खुले बदन था और लूँगी पहना था और माँ ने मेरे कहे अनुसार एक सेक्सी सी फिते वाली नाइटी ही पहन रखी थी और अंदर कुछ भी नही पहना था

हम रज़ाई ओढ़े ही फिल्में देखते हुए एकदुसरे से लिपटे नींद की आगोश में डूब गये....जब दूसरे दिन आँख खुली तो माँ को बिस्तर पे ना पाके मैं एकदम से हड़बड़ा कर उठा..तो पाया माँ बरामदे में खड़ी सामने बीच के नज़रें को देख रही थी....मैं उसके पास आया और उसके गर्दन और कंधे को चूमा मेरे हाथ उसकी नाइटी के उपर से ही छातियो के उभारों को मसल रहे थे...वो दबी आवाज़ में बोली "उठ गया बेटा"......मैने सिर्फ़ हां में सर हिलाया...ऐसा लग रहा था जैसे ये छुट्टिया कभी ख़तम ही ना हो और हम यूही खड़े एकदुसरे से ऐसे ही सीसाइड का मज़ा लेते रहे..

माँ ने मुझे धकेला और कहा जाओ फ्रेश हो लो रूम बॉय सुबह सुबह आया था पर जनाब तो घोड़े बेचके सो रहे थे मैने कहा ठीक है तू भी तय्यार हो जा फिर इमदाद आ जाएगा...ठीक वहीं हुआ मॅनेजर ही हमारे दरवाजे पे दस्तक देने आ गया कहा कि काफ़ी देर से इमदाद आप लोगो का वेट कर रहा है वैसे आज किसी और कपल को ले जाना था पर आज वही आपका टूर गाइड बनेगा उसने बताया कि आपने ही उसको पर्सनली फिक्स किया है मैने हां में सर हिलाया...माँ और मैं जब नीचे आए तो पाया कि इमदाद टोपी पहने हुए रिसेप्षन में ही खड़ा हमारा इन्तिजार कर रहा था उसने मुझे और माँ को देखके मुस्कुरा कर हेलो कहा फिर हम वहाँ से होटेल से निकले सामने खड़ी उसकी ब्लॅक कार में पीछे बैठते हुए सवार हुए..

हम दोनो करीब सुबह 10 बजते बजते होटेल से उसकी गाड़ी से रवाना देते है..काफ़ी सुहाना मौसम था आज और ज़्यादा धुंप भी नही थी इसलिए हमे खुशी हो रही थी...इस बीच सूर्य मंदिर कोनर्क की बात चीत शुरू हो गयी और माँ उससे ऐतिहासिक चीज़ो के बारे में सुनने लगी मैं भी बड़े चाव से खासकरके उन प्राचीन मूर्तियो के बारे में सुन रहा था

इमदाद गाड़ी अच्छी ड्राइव कर रहा था...इसलिए मैं और माँ आराम से सीट पे पसरे हुए बाहर के नज़रों को देख रहे थे...जल्द ही रेल की पटरी को क्रॉस करते हुए हमारी गाड़ी भीड़ भाड़ से दूर हाइवे मेन रोड पे गुज़रने लगी आस पास हरियाली छा गयी थी...कुछ ही देर में खेत खलिहान शुरू हो गया और आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों से गुज़रते हुए हमारी गाड़ी एकदम सीधी और तेज़ चल रही थी....इस बीच हम दोनो खामोश थे तो इतने में इमदाद ने चुप्पी तोड़ी...

इमदाद : सर सफ़र थोड़ा लंबा होगा क्यूंकी हम शहर से डिस्ट्रिक्ट में आ चुके है..और यहाँ से कोनर्क सन टेंपल 35 किमी की दूरी पे है

आदम : ह्म यानी दूर है

इमदाद : हां सर आप नही जानते होटेल के ज़्यादातर ठहरने वाले कपल्स को रोज़ ले जाना होता है

अंजुम : हाहाहा तब तो तुम रोज़ भी घंटे हो सही है

इमदाद : हां माँ क्या करें? काम ही कुछ ऐसा है अपना भी अच्छा टाइम पास हो जाता है

अंजुम : ह्म अच्छा इमदाद तुम यहीं पूरी के हो

इमदाद : जी नही दरअसल मेडम मैं भुबनेश्वर का हूँ वहाँ से नौकरी छोड़के अभी यहाँ गाइड का काम पकड़ा है क्यूंकी पूरी के इन हिस्टॉरिकल साइट्स में लाने और ले जाने में काफ़ी पैसा मिल जाता है कॅमरा मॅन वाला काम तो पार्ट टाइम है

अंजुम : अच्छा शादी हो गयी तुम्हारी? (मैं माँ और इमदाद की वार्तालाप को चुपचाप सुन रहा था माँ बातुनी किसम की है इसलिए किसी से भी फ्रेंड्ली होते ही बात करने लगती है..इमदाद माँ के शादी लव्ज़ सुनते ही शरमा गया)

इमदाद : जी हां अभी 1 साल ही हुआ है हमारे निक़ाह को

अंजुम : अच्छा क्या नाम है?

इमदाद : जी नफीसा नाम है

आदम : अर्रे वाहह क्या लव मॅरेज हुई थी?

इमदाद : ज..जी नही असल में हमारे खानदान में आपस में रिश्तेदारो में ही रिश्ता कर दिया जाता है...वो मेरी खाला की लड़की हैं

मैं हैरत से मुस्कुराया....वाक़ई क्या ज़िंदगी है? या यूँ कहो इत्तेफ़ाक की बार बार व्यभचार रिश्तो के बारे में मालूमत चल रही है अपनी सग़ी मौसेरी बहन के साथ शादी वाक़ई ये भी तो खूनी ही रिश्ता हुआ ना

इमदाद : हमारे यहाँ जायेज़ है बाकी जो काफ़ी एजुकेटेड होते है या मॉडर्न थिंकिंग रखते है उनके यहाँ आपस में शादी गुनाह माना जाता है लेकिन हममे भी एक कायदा है अगर मेरी माँ ने किसी लड़की को दूध पिलाया हो तो उससे मैं शादी नही कर सकता

अंजुम : हां ये सब काय्दे तो मैं बखूबी जानती हूँ वैसे क्या वो यही रहती है?

इमदाद : नही माँ हफ़्तो में जाता हूँ घर ना तो फिर एक आध दिन ठहरके फिर दुबारा पूरी आ जाता हूँ होटेल के काम के लिए

आदम : ह्म मतलब अपनी वाइफ को टाइम नही देते हो ग़लत बात

माँ ये सुनके मुझे आँख दिखाते हुए...मेरी सीट पे रखके हाथ पे च्युंती काटती है...मैं मुस्कुरा देता हूँ...इस बीच इमदाद भी शरमा जाता है...वो शायद माँ की वजह से झिझक रहा था....पर माँ को मैने इतना खोल दिया था कि वो शरमाई ज़रूर पर खामोश नही रही यक़ीनन इमदाद उनके बेटे जैसा ही तो था.

अंजुम : तो क्या ग़लत है इसमें? अपने घर को चलाने के लिए अभी से इतनी मेहनत कर रहा है अच्छी तो बात है

आदम : ह्म्म्म्म

इमदाद : जी माँ लेकिन सर सच ही कहते है भला वाइफ को भी टाइम देना चाहिए मैं तो उसे कही घुमाने तक नही ले जा पता टाइम ही नही

आदम : अर्रे बाबा तो कभी यहाँ भी थोड़ा घूमने ले आओ

इमदाद : हाहाहा सर वो क्या है ना? कि छोटे ज़िले से है और काफ़ी शरमो हया वाली है इसलिए इनकार कर देती है (एका एक इमदाद शरमा सा गया)

 
माँ और मैं एकदुसरे को कातिल मुस्कुराहट देते हुए उसे फिर देखने लगे..."अर्रे इमदाद भाई तुम अभी जवान हो और अभी उमर ही क्या हुई है तुम लोगो की? और अभी नयी नयी शादी की है तुमने थोड़ा घूमाओ फिराओ टाइम स्पेंड करो तभी तो तुम्हारे और तुम्हारी वाइफ के बीच में प्यार बढ़ेगा".....ये सुनते ही इमदाद झिझकने लगा पर उसके चेहरे पे मुस्कुराहट ज़रूर दिख गयी ......

हम काफ़ी घंटो बाद सुर्य मंदिर कोनर्क पहुचे...हम वहाँ की चहेल पहेल और मंदिर के एंट्रेन्स गेट को देख रहे थे काफ़ी बड़ा द्वार था वहाँ पे....

"लीजिए सर हम आ गये चलिए उतरिये"...इतना कहते हुए इमदाद बाहर आया मैं तब तक गेट से बाहर निकला और फिर माँ के गाड़ी से निकलते ही दरवाजा लगाया..

."ह्म वाक़ई काफ़ी प्राचीन मंदिर है यार"......

"चलिए सर"....इतना कहते हुए इमदाद आगे और हम उसके पीछे..

इमदाद : ह्म देखिए सर कितना प्राचीन मंदिर है लेकिन वक़्त के साथ साथ ये जगह भी काफ़ी रूयिंड हो चुकी इसका मैं टवर करीब 229 फुट होया करता था और इनकी दीवारो की कमज़ोर मिट्टी हो जाने की वजह से ये 1837 में ढह गयी

आदम : ओह (माँ और मेरी नज़र सामने बड़े से प्राचीन मंदिर की ओर उठी थी)

आस पास के लोग ज़्यादातर फॉरिनर्स और कुछ उडिया वासी लग रहे थे...जो हमारे आज़ु बाज़ू से होते हुए सन टेंपल को हर नज़ारे से देख रहे थे....इस बीच इमदाद हमे हिस्टरी बता रहा था और माँ और मैं उसके पीछे पीछे मंदिर की दीवारो को देख रहे थे छूते हुए...

इमदाद : वो देख रहे है वो है जगह मोहन जो इस मंदिर का सबसे मैं इमारत कहलाती है इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी भूंमिका रखती है...ऐसे ही नही इस प्राचीन मंदिर को सेवेन वंडर्स ऑफ दा वर्ल्ड कहा जाता है....ये उनेस्को का हेरिटेज साइट है

सच में काफ़ी प्राचीन इमारत थी इस प्राचीन मंदिर की बनावट और इसके लगभग ज़रज़र होने की गवाह खुद इसके प्राचीन काल में स्थापित होने का सबूत देती है ये माना जाता है कि उस दशक मे इसे राजा नरसिंहदेव के द्वारा बनवाया गया था इस मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थर और काले ग्रनाइट पत्थरो से हुआ था....इस बीच इमदाद हमे अंदर ले जाके और भी वहाँ के विचित्र और हिस्टॉरिकल चीज़ें दिखाने लगा जहाँ काफ़ी लोग भी जमा थे उनके बीच हमने देखा कि संपूर्ण मंदिर स्थल को बारह जोड़ी चक्रो वाले सात घोड़ो से खीचे जा रहे सुर्य देव के रात के रूप में बनाया गया था..बिना प्रशंसा किए हम ठहर ना सके...

फिर हम आगे बढ़े और इस सांस्कृतिक जगह का खूब देख देखके आनंद उठा रहे थे इस बीच इमदाद थोड़ा झिझका...तो मैने उसका कारण पूछा उसने मुझसे दो मिनट थोड़ा माँ से दूर हटके बात करने को कहा तो मैं उसका मतलब समझ गया..मैं मुस्कुराते हुए उसके नज़दीक आया हम माँ से दूर हटके खड़े थे माँ चुपचाप वहीं खड़ी हमारा इन्तिजार कर रही थी साथ ही साथ हमे ख़ुसर पुसर बात करते देख रही थी....बेचारा इमदाद तो जानता नही था कि माँ मेरी बीवी नही थी

इमदाद : जी वो दरअसल क्या है ना? उम्म आप तो पढ़े लिखे है जानते होंगे कि यह कोनर्क सूर्य मंदिर सिर्फ़ अपने ऐतिहासिक चीज़ो के लिए मशहूर नही है और भी एक ऐसी चीज़ है जिसके लिए मशहूर है मैं आप लोगो के साथ वहाँ नही जा सकता

आदम : क्यूँ भाई? तुम गाइड हो यार तुम नही जाओगे तो हमे मालूम कैसे चलेगा (मैं दिल ही दिल में इमदाद से मज़े ले रहा था अर्रे मैं तो खुद ही चाहता था कि वो आगे हमारे साथ ना जाए ताकि माँ और मैं जिस चीज़ को देखने आए थे उसका एकात में आनंद ले सके )

इमदाद : उम्म्म जी आप समझ नही रहे है सर अंदर कामसूत्र मुद्रा में काफ़ी नंगी आकृतियाँ मौज़ूद है और यहाँ पे आप देख नही रहे कि आगे जाने वाले ज़्यादातर फॉरिनर कपल्स और मिया बीवी का जोड़ा ही जा रहा है फॅमिली ज़्यादा नही

आदम : अच्छा तो ये बात है (मैं अंजान बनते हुए कहा) ठीक है फिर तुम एक काम करो तुम बाहर हमारा गाड़ी के पास इंटिजार करो फिर हम वहीं मिलते है

इमदाद : ओके सर एंजाय युवर वाकेशन (बोलते बोलते ना जाने क्यूँ वो मुस्कुरा के चला गया?)

मैं दो कदम आगे बढ़ा ही था कि इतने में इमदाद एकदम से दौड़ता हुआ आया...उसे हड़बड़ाता देख मैं ठिठक गया कि इसको क्या हुआ?..मैं तब तक माँ के करीब आ चुका था उसने हान्फते हुए कहा कि सिर अंदर फोटोग्राफी अल्लाओ नही है तो आप अंदर तस्वीर ना खींचे

आदम : त..ठीक है बॉस जाओ तुम फिर (इतना कहते हुए इमदाद चला गया मैने तो सोचा था कि माँ के साथ एक दो सेल्फी ले लूँगा लेकिन साला किस्मत खराब )

माँ : क्या बातें हो रही थी?

आदम : अर्रे कुछ नही माँ बस ऐसे ही वो शरमा रहा था क्यूंकी आगे जाने का आक्सेस अडल्ट्स को है और हम यही तो देखने आए है

 
आदम : अर्रे कुछ नही माँ बस ऐसे ही वो शरमा रहा था क्यूंकी आगे जाने का आक्सेस अडल्ट्स को है और हम यही तो देखने आए है

माँ : उफ्फ उसे पता तो नही चला हमारे बारे में

आदम ; अबे यार हम यहाँ घूमने आए है और तुमको तो अपना भेद खुलने का ही डर सता रहा है वो कोई हमारा जानने वाला है क्या? हुहह छोड़ो चलो आगे चलो (माँ और मैं एकदुसरे का हाथ थामें आगे बढ़े)

कोई भी हमे नोटीस करता तो यही समझता कि हम प्रेमी जोड़ा है या शादी शुदा कपल है..इस बीच हमने देखा कि गार्ड से अँग्रेज़ लोग कॅमरा अंदर ले जाने की हुज़्ज़त कर रहे थे पर उन्हें इंग्लीश में सॉफ बोर्ड दिखाते हुए कहा कि नो पर्मिशन अलोड कॅन'ट आक्सेस विद कॅमरास.....हम आगे बढ़े माँ उन्ही को देख रही थी...जल्द ही हम आगे बढ़े तो हमे नगन अवस्थाओ में दीवारो पे बनी वो शिलप आकृतियों का दीदार हुआ...वाहह काफ़ी रचनाओं में और काफ़ी चित्रो की दृष्टि में दिखाई दे रही थी लाइन से....वाक़ई कहीं दरबार तो कहीं देवता तो कहीं जानवरों का इन सब को एक सुत्र में जैसे आकृतियों में दिखाया गया था...माँ और मैं इस बीच काफ़ी आनंद ले रहे थे क्यूंकी हर एक मुद्रा में आलिंगन में जकड़े कहीं एक तो कहीं अनेक आकृतियाँ एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई थी....उनकी बनावट में महिला और पुरुष सॉफ सॉफ जान पड़ रहे थे माँ ये देखके शरमाने लगी..

माँ : यही सब तू दिखाने मुझे यहाँ लाया था बेशरम (माँ ने मुस्कुराते हुए कहा)

आदम : माँ इसमें बेशर्मी कैसी? ये सब तो प्रेम और काम को जैसे और एक्सप्लाय्ट कर रहे है देखो किन मुद्राओ में ये प्राचीन शिल्प आकृतियाँ है उफ्फ यक़ीनन किसी बड़े महान कलाकार की रचना है यह वाक़ई

माँ : हां रे उफ्फ (माँ की नज़र एक आकृति पे गयी जिसमें काफ़ी कामुकता थी जिसमें एक लिंग को थामें तो एक महिला पुरुष की गोद में हुए उन्हें चुंबन कर रही थी)

ये सब देखते ही देखते मेरे मन में भी कामवासना सी जाग गयी....मैने भी सोचा कि काश मैं माँ को राजा रानी की वेशभूषा और जेवरतो में नंगी देखता और उसके साथ सेक्स करता उफ्फ कामवसना तो अपने आप मुझमें जाग रही थी...हम एकटक खामोशी से आगे बढ़ते हुए एकदुसरे का हाथ पकड़े उन शिल्प आकृतियों को घूर्र रहे थे...

माँ ने एक जगह पे मुँह पे हाथ रखके शरम से मुस्कुराया फिर मुझे ड्काहने को इशारा किया मैं भी हंस पड़ा सच में ऐसा लग रा था की बार बार इन एरॉटिक स्कूल्पुतुरेस को देखता राहु वाक़ई क्या नागन आकृतीया थी वो..हमने इस बीच पाया की आस पास काफ़ी कपल लोग मज़ूद एकदुसरे के साथ छेड़म छेड़ करते हुए उन आकृतीयो का नज़ारा ले रहे थे...हम फिर वापिस लौटे..फिर और कुछ मंदिरो के बारे में जो सुना उसे देखने गये...डेढ़ घंटे बिताने के बाद हम वपयस बाहर लौटे इस बीच धुंप तेज़ हो गयी थी ऐसा लग रहा था जैसे दोपहर अपने पयमाने पे था..

आदम : अफ मज़ा आया ना

माँ : अफ मुझे तो बड़ा अज़ीब लग रहा था सब हमे भी देख रहे थे

आदम : हाहाहा यहाँ किसी को किसी से क्या मतलब शादी शुदा क्या प्रेमी जोड़ा क्या? सब जाते है देखने खासकरके उन आकृतीयो को देखा कितनी हिस्टॉरिकल और प्राचीन साइट है हमारे देश में

माँ : ह्म वाक़ई चल बहुत भूक लगी है अब कुछ खा ले

आदम : हां चल ना

बाहर निकले तो गाड़ी के पास ही इमदाद मिला उसने हमारी मज़ूद्गी का अहसास पाते ही गाड़ी से उठ खड़ा हुआ फिर हम दोनो को देखके मुस्कुराया उसने सॉफ देखा माँ पसीना पोंछ रही थी और उसकी साँसें एकदम तेज़ चल रही थी..मैने उसकी चुप्पी तोड़ने के लिए कहा कि यार भूक लगी है कोई रेस्टोरेंट है आस पास तो उसने कहा हां बस थोड़ा चलना होगा पास ही में है...तो मैने उसे कुछ पैसे की वो भी कुछ खा ले तो उसने कहा कि वो ख़ाके आ चुका है वो यही इन्तिजार करेगा हमारा तब तक हम आ जाए..

हम रेस्टोरेंट गये और वहाँ दोपहर का भोजन किया..भोजन में हमने फास्ट फुड ही लिया था..खा पीके जब वापिस लौटे तो इमदाद ने हमारे लिए गाड़ी के दरवाजे खोल दिए...हम वहाँ से फिर होटेल के लिए रवाना हुए...इमदाद इस बीच एकदम चुप था फिर उसने पूछा की कैसा लगा सर?...मैने कहा बात ही जुदा है बॉस आजतक तो सिर्फ़ मुगलो का ही मीनार देखा था आज इतने ऐतिहासिक चीज़ें भी दिख गयी मैं तो मंदिर के साथ साथ उन शिल्प आकृतीयो की भी प्रशंसा उसके सामने कर बैठा तो वो मुस्कुरा दिया..इस बीच मैने पाया कि माँ मेरे कंधे पे सर रखके सो गयी थी तो मैने फॅट से अपना एक हाथ उसकी साड़ी के अंदर से ले जाते हुए उसके पेटिकोट की डोरी को हल्का सा खीचते हुए अंदर तक सरका दिया....अफ मुझे सॉफ अहसास हुआ कि वहाँ कुछ चिपचिपा सा लगा था क्या माँ अंदर ही अंदर कामवासना से स्खलित हो गयी थी हो भी क्यूँ नही उस पल मैने माँ के नितंबो को भी साड़ी के बाहर से और पेट के भाग पे भी कितना हाथ फेरा था....और उपर से खाना ख़ाके सुस्ताहट और ज़्यादा चल फिरने से थकान हुई थी इसलिए वो गहरी नींद में थी पर उसे अपनी चूत पे मेरे हाथ का स्पर्श तो महसूस हुआ ही होगा

आदम : अफ यार सच कह रहा हूँ तुम अपनी वाइफ को लेके अंदर एक बार जाना

इमदाद : देखूँगा सर हहहा अगर वो मानी तो

आदम : भाई शादी कर लिए हो धीरे धीरे खुल जाएगी फ्रॅंक्ली कह रहा हूँ (तो इमदाद शरमा गया फिर उसने बातों में मुझे उसकी बीवी की तस्वीर दिखाई काफ़ी सेक्सी थी वो देखने में साला मज़े तो बराबर लेता होगा सोचते ही मेरा लॉडा खड़ा हो गया)

आदम : ह्म सुंदर है भाई

इमदाद : थॅंक यू सर

आदम : अभी बच्चे वाच्चे मत लेना थोड़ा एंजाय करो लाइफ को (कहते हुए मैने उसे आँख मारी तो वो झेंप सा गया और फिर हँसने लगा)

 
जल्द ही हम 35 किमी का रास्ता तय करके होटेल पहुचे...माँ को मैने जगाया फिर मैने अंदर जाने से पहले इमदाद को पैसे दिए उसने कहा कि चाहे तो और भी जगह घूम आए...पर मेरा दिल नही माना मैने कहा देखता हूँ भाई कह दूँगा...इतना कह कर मैने उसे कुछ पैसे दिए टिप समझके तो वो खुश हो गया उसने इस बीच बताया कि पुरी में मार्केट लगती है वहाँ जाके आप लोग शॉपिंग भी कर सकते है अभी तो आप एक दिन और ठहरेंगे ही शायद..मैने कहा हां तो फिर एक काम करो कल का प्लान बनाओ..तो उसने हामी भरी...मेरे मन में क्या आया तो मैने उससे पूछा कि यार शरीर में बड़े दर्द रहता है यहाँ कोई मालिश वाली मिलेगी तो उसे लगा शायद मैं माँ के लिए कह रहा था तो उसने काफ़ी सोचा फिर कहा कि एक ओरिया औरत है लगभग 40 बरस की वो होटेल में अक्सर आके औरतो की मालिश कर देती है आप चाहे तो उसे फिक्स कर ले...मैने कहा चार्जस क्या हैं? तो उसने चार्जस बताए फिर कहा मैं उसे लेके आपके पास आ जाउन्गा आपको कहीं जाने की ज़रूरत नही..

मैं राज़ी हो गया और माँ को बिना बताए उपर ले आया....हम रूम में जैसे ही आए तक के चूर होके गिर पड़े बिस्तर पे....1 घंटे की नींद ली और उसके बाद जागे माँ इस बीच टाय्लेट करने चली गयी थी सुबह से गयी नही थी...तो मैं उसके सामने ही वॉशरूम में शेविंग करने लगा...अब एक दिन और ही तो ठहरना था होटेल में....माँ ने पूछा कि उसने सुना कि मैं कोई मालिश का ज़िक्र कर रहा था..मैने कहा कि तेरे लिए मालिश्वाली को बुलाया है वो मेरे सामने ही तेरी मालिश करेगी

अंजुम : अर्रे पागल इन सब की क्या ज़रूरत थी?

आदम : माँ अब तेरी कोई भी ज़िद्द नही चलेगी हम यहाँ क्यूँ आए है छुट्टी बिताने? तो बस मुझे ऐश कर लेने दे फिर तो वहीं काम और काम

अंजुम : तू कोई ऐसी वैसी हरकत मत कर देना उसके सामने औरत ही होनी चाहिए बेटा मालिश्वाली

आदम : माँ भरोसा रख तेरा मर्द तुझे किसी गैर मर्द के हाथो के स्पर्श से तेरे जिस्म को छूने तक ना दूँगा वादा है मेरा

अंजुम : ठीक है

मैने भी सोचा चल बेटा कल आने तो दे फिर तो जमके मालिश के बाद तेरी चुदाई करूँगा...क्यूंकी मुझे इमदाद ने हिंट दे दिया था कि मालिश नंगी ही करती है मालिश्वाली हम मॅरीड कपल थे इसलिए उसने हमे ये अरेंज्मेंट देने का वादा किया उसे मैने भारी टिप दी थी इसलिए वो मुझपे इतना मेहेरबान हो गया था...माँ इस बीच मूतने के बाद हॅगने लगी तो उसकी गोल गान्ड का छेद चौड़ा हो गया और वो काफ़ी प्रेशर लगाए हगने लगी...

प्र्रर्र्ररर प्र्रररर करते हुए पाद भी रही थी....इतमीनान होने पे उसके मुँह से आहह का स्वर भी फुट पड़ा....मैं इस बीच शरारती ल़हेज़े में अपनी गान्ड उसके मुँह के पास ले आया तो वो हंस पड़ी और मेरी नंगी गान्ड पे एक चपत लगाई....

"अर्रे इसमें भी मज़ा है माँ एक बार उंगली डाल के देख".......माँ शरमाने लगी उससे भला ये कैसे होता? फिर मैने बताया कि मुझे गान्ड में किर्मी हो जाती थी तो तू ही तो क्लिप से निकाल देती थी मेरे छेद से....तो माँ बोली कि तू अब बड़ा हो चुका है च्िी ये सब गंदा लगता है?

मैने कहा अर्रे कर तो सही जान

माँ मेरे चूतड़ सहलाते हुए नज़ाकत से बोली तू अपना पीछे वाला भी सॉफ रखता है...तो मैने कहा हान्ं माँ क्या करें? नापाक हो जाता हूँ ना संडास के वक़्त बहुत झान्ट उग जाते है पीछे इसलिए हमेशा पहले से ही सॉफ रखता आया हूँ

तो उसने मसूकुराते हुए मेरे गान्ड पे तेज़ तेज़ थप्पड़ लगाए फिर मेरे चूतड़ को सहलाते हुए अपना एक उंगली मेरे गुदा द्वार के छेद में अंदर डाली जो हल्के हल्के अंदर सरकाने लगा....मैं जानबूझ के मुँह से उः आहह की आवाज़ निकालने लगा ताकि माँ को भी मज़ा आए...माँ ने कस कर दो उंगली अंदर बाहर करते हुए मेरे छेद को जैसे खोल डाला...मैने पीछे हाथ ले जाके उसकी दो उंगलियों को निकाला और सुघने लगा माँ ये देखके शरम में पड़ गयी मुझसे पूछा कहाँ से सीखा ये सब? मैने बस इतना कहा ब्लू फिल्म से

माँ जब हॅग अवस्था से फारिग हुई तो मैने उसे खड़ा किया फिर उसे घोड़ी की मुद्रा में झुका दिया फिर उसकी नितंबो के बीच नल का पानी चला दिया फिर मैं खुद ही माँ की गान्ड धोने लगा माँ छि छि करने लगी पर मैं नही माना मैने उसके गान्ड को अच्छे से धो दिया फिर उसे खड़ा किया फिर वॉशबेसिन में जाके हाथ धोए फिर उसे सूँघा तो माँ शरमाते हुए मुझे छुट्टी काटने लगी..मैने मुस्कुराए उसे अपनी बाहों में उठा लिया उसके खुले बाल हवा में लहराने लगे...वो मेरे कंधे को पकड़े थी और एक तक मुझे देख रही थी मैं उसे बिस्तर पे लाके नंगी ही अवस्था में पटका फिर बरामदे के पर्दे को बराबर किया फिर ना जाने क्यूँ मन हुआ कि माँ को लाइट्स ऑफ करके ही छोड़ा जाए....मैने ठीक वैसा ही किया तो इस बीच मुझे अहसास हुआ कि माँ की चूत पे हल्के हल्के झान्ट उग रहे थे मैं तुरंत बाथरूम गया लाइट जलाया शेविंग फोम और ब्लेड साथ लाया

माँ मना करने लगी पर मैं नही माना और उसकी टांगे चौड़ी किए उसकी चूत पे शेविंग क्रीम लगाके फिर रेज़र को आहिस्ते आहिस्ते से उसकी झान्ट काटने लगा..कुछ ही देर में उसकी चूत फिर चिकनी हो गयी और गुलाबी होने से चमक भी रही थी...मैने उसे मुट्ठी में लेके दो-तीन बार दबोचा तो माँ काँप उठी फिर मैने उसे उल्टा लिटाते हुए उसके नितंबो को फैलाए उसके आस पास के उगते बालों को भी सॉफ कर दिया जिससे उसकी गान्ड और चूत चिकनी हो गई मैं शेविंग किट बाथरूम में छोड़ वापिस अंदर आया...

अचानक मेरी नज़र एलईडी टीवी के नीचे प्लेयर सिस्टम पे गयी जिसका तार टीवी से लगा हुआ था मैने नीचे झुकके देखा तो इस बीच माँ भी उठ बैठी नंगी उसकी छातिया लटकी हुई थी और निपल्स कठोर थे वो अपने बाल को संवारते हुए मेरी ओर हैरानी भरी निगाहो से देखी मैने उसे मुस्कुरा कर देखा और कुछ सीडीज़ दिखाया कपल सूयीट था इसलिए वहाँ दो-तीन अंग्रेज़ो की चुदाई की उपर कवर पिक्चर बनी सीडी पड़ी थी..माँ ने मुँह पे हाथ रखके शरमाया...मैने एक सीडी प्लेयर में चालू की और टीवी ऑन किया ऑन होते ही उसमें चुदाई के सीन चालू एक अँग्रेजिन को एक हबसी पेल रहा था...उफ्फ क्या मादक सीन था? एक तो वैसे ही दिन से हम बेताब थे और अब ये सेक्सी सी फिल्म

माँ और मेरी निगाह एकदुसरे से मिली और हम भी सबकुछ भूल एकदुसरे के बदन से लिपट गये....

अंधेरा हो चुका था...समुन्द्र की हवाए हमारे कमरे में आ रही थी जिसकी ठंडी हवा महसूस होते ही माँ और मेरा बदन सिहर गया....पर्दे उन हवओ से उड़ रहे थे समुन्द्र की ल़हेरो का शोर्र आसानी से सुनाई दे रहा था...और कमरे का माहौल काफ़ी गरम हो चुका था....

दीवार पे लगी एलसीडी टीवी पे खुल्लम खुल्ल्ल चुदाई भरा दृश्य चल रहा था...हबशी अपने मोटे लंड से अँग्रेजिन की चूत दन दन के पेल रहा था...उसने मुँह को काफ़ी भीच रखता है जैसे चूत की सख्ती का अहसास उसे हो रहा हो...अँग्रेजिन का पूरा चेहरा लाल था वो कुतिया की मुद्रा में चुद रही थी...उसकी छातियाँ लटक रही थी और उसके चेहरे पे दर्द और मज़े दोनो के भीषण अहसास थे...उसकी सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज़ रही थी..."ओह्ह्ह गूदडद फक्क्क मईए फुक्कककक मी यअहह यअहह फिल्ल्ल्ल्ल मयी पूस्सययी विद्ड़ अर सीद्द".......वो लगभग चीखते हुए बोल उठी...और इसी बीच हबसी ने रफ़्तार तेज़ करते हुए उसकी चूत लगभग फाड़ते हुए थम गया....कुछ ही पल में जब उसने अपने मोटे लिंग को चूत के मुंहाने से बाहर निकाला तो चूत ढीली पड़ते हुए वीर्य उगल रही थी उफ़फ्फ़ 1 कप भरके शायद उसकी चूत में उसने वीर्य डाला था देखके ही मैं और माँ रोमांचित हो उठे....

 
माँ अब तक निवस्त्र होके मेरे सीने के निपल्स और बीच के हिस्से को चूमते हुए मेरे गाल,गले को चूमते हुए मेरे चेहरे को अपनी ओर किए मेरे होंठो का रस्पान करने लगी थी...हम दोनो एकदुसरे को स्मूच करते हुए बिस्तर पे लेट गये..मैं उसके पूरे बदन पे अपना हाथ फेर रहा था....मुझे वाहिनी कामसूत्र मुद्राओ में लिपटी वो शिल्पी आकृतियाँ दिखने लगी जो महिलाए वेशभूषा में थी और कैसे पुरुष उनके साथ आलिंगन में जकड़े हुए थे

मैने माँ के होंठो को चूस्ते हुए उसकी पीठ को सहलाना शुरू किया फिर उसके नितंबो के बीच हाथ ले जाते हुए छेद को छेड़ना शुरू किया....ऐसा लगा जैसे माँ की गान्ड का छेद कुलबुला सी गयी....वो मेरे सीने पे हाथ दोनो रखते हुए मुझे धकेलके मेरे उपर सवार हो गयी इस बीच मैं टीवी पे चल रही ब्लूफिल्म को बंद कर दिया...

अब माँ मेरे लिंग को अपने चूत के द्वार में लेने से पहले उसे चूस लेना चाहती थी इसलिए वो नीचे सरसराते हुए मेरे लौडे को अपने मुँह में घप्प से लिए चूसने लगी उसने इस बीच अपना मुँह मेरे अंडकोष के नीचे भी रगड़ा और वहाँ जीब फेरी...जिससे मैं स्खलन भरी हालात में आ गया आँखे मुन्दे उसके बालों को समेटते हुए एक टाँग उसकी पीठ पे रख दी....

मेरी टाँग के भार से ही उसका जिस्म मेरे टाँगों के बीच दब गया....वो एक हाथ से मेरी बालों से भरी जाँघ को सहलाते हुए मेरे लंड को मुँह में लिए अंदर बाहर चूसने लगी....इस बीच जब उसने जड़ तक मेरे लंड को मुँह के भीतर लिए चूसा और फिर उसे उगला तो उसके मुँह की लार मेरे लंड के सुपाडे से जुड़ी हुई थी उफ्फ क्या शानदार नज़ारा था वो किसी भूकि औरत की तरह अपनी हवस को मिटा रही थी कैसे चाव से मेरे लंड को चुस्स रही थी?

आदम : आहह माँ ऐसे ही बड़े प्यार से बड़े प्यार से (मैं कहते हुए माँ के मुँह को पोंछता हुआ उसके मुँह में फिर लंड दिया...वो घपप से लंड में लेके चुसते हुए मेरी तरफ देखने लगी)

उसने चुसते हुए मुझे इस नज़रों से देखा जैसे कि मुझे मज़ा आ रहा था कि नही? मैने उसे बस इशारा किया कि तू बस चुस्ती जा मैं तो सातवें आसमान पे हूँ मेरी जान...तेरे गरम मुँह के अहसास से ही पगला रहा हूँ..माँ कुछ देर तक मेरे लंड को चुस्सती छोड़ती रही...उसने मेरे अंडकोषो को भी बारी बारी से प्यार से चूसा और फिर मेरे अंडकोष के सिरे से होते हुए मेरे लिंग के सुपाडे तक अपनी जीब फिराई....इससे मेरा लंड एकदम सख़्त हो गया...

फिर वो धीरे धीरे उठ खड़ी हुई....अब वो अपनी चूत के द्वार में मेरे लंड को टिकाने लगी जैसे ही उसने मेरे खड़े लंड को हाथो में लिए दबोचा ज्यो ज्यो टट्टी करने की मुद्रा में अपनी दोनो टांगे मेरे इर्द गिर्द फैलाई अपनी चूत को मेरे लंड के उपर उतारने लगी त्यो त्यो उसके चेहरे के भाव बदलने लगे और उसका चेहरा अँग्रेजिन जैसा गुलाबी हो गया उसे सख़्त अपनी दरारो में घुसता मेरा लंड महसूस हुआ...वो धीरे धीरे मेरे लंड को अपनी चूत के भीतर तक सरकाने लगी और कुछ ही पल में मेरा लंड पूरा उसकी चूत के अंदर तक समा गया....उसने मेरे लंड पे बैठते हुए एक आहह भरी साँस ली मेरी तरफ देखके मुस्कुराइ तो मैने उसकी दोनो कमर की तोंद को मसल्ते हुए एक करारा धक्का मारा...जिससे उसने अपनी गान्ड सख़्त कर ली और सर उपर उठाए दर्द से अकड़ गयी...

आदम : ढीली ढीली छोड़ मेरी रानी ढीली करो ना

अंजुम ने बेटे की बात सुनते हुए अपने बदन को ढीला छोड़ना शुरू किया साथ ही साथ आदम को चूत की सख्ती कम होती जान पड़ी...मैने फिर एक करारा धक्का मारा तो माँ काँप उठी...उनके स्वर में फिर आहह फूटा...उसकी आँखो में दर्द के भाव प्रकट हुए और मैं मुस्कुराया...मैं माँ की नाभि और पेट को सहलाते हुए उसकी कमर कस कर हाथो में जकड़े....एक शॉट और करारा मारा इससे माँ काँपी ज़रूर पर इस बार सिसक उठी...

हम इसी मुद्रा में थोड़ी देर ठहरे रहे...फिर धीरे धीरे मैने धक्के मारने शुरू किए....और कुछ ही देर में माँ की चूत फ़चा फ़च मेरे लंड को अंदर गहराई तक लेते हुए उगल रही थी...उसकी चूत एकदम खुल चुकी थी मेरा लंड खाने की उसे जैसे आदत सी हो गयी थी...मैं उसकी गुलाबी चूत पेलता हुआ इस बार उसके छातियो को दबाते हुए उठके उस पर मुँह लगा लिया दोनो निपल्स को चाटते चुसते हुए मैने उसे अपने सीने से लगा लिया

अंजुम : ऑश बेटा आ उम्म्म आहह बेटा

आदम : हान्न्न मामा अहहह उहह उहगग (माँ ने मेरी पीठ और मैने माँ को कस कर पकड़ लिया हम एकदुसरे की पीठ को सहला रहे थे मैने इस बीच माँ के गले पीठ और चेहरे को चूमते हुए उसके चेहरे पे अपना चेहरा रगड़ा)

माँ को मेरी सख़्त दाढ़ी चुभ रही थी पर उसमें भी उसे मज़ा आ रहा था उसके कोमल गाल लाल हो गये और मेरी कामवासना की आग ऐसी भड़की कि मैं उसे अपने आलिंगन में जकड़े तेज़ तेज़ उसकी चुदाई करने लगा...उस पोस्चर में कुछ देर में ही माँ झरने लगी...जब उसने सख्ती से अपनी चूत मेरे लंड पे कस ली और लगभग चिल्लाते हुए झड गयी...मैने उसके शांत होने की प्रतीक्षा की फिर उसे अपनी बाहों में वैसी ही समेटे सीधा बिस्तर पे लिटाया...

 
उसकी टांगे खोली फिर उसकी चिकनी गीली गुलाबी चूत पे मुँह लगाया तो उस नमकीन स्वाद के अहसास के साथ मेरा लॉडा फिर उसकी चूत के दरारो में जाने को विवश हो गया मैने उसकी चूत को जीब लगाते हुए नीचे से उपर तक काफ़ी देर चूसा और चाटा जब देखा कि माँ पूरी तय्यार है और आहें भर रही है तो तुरंत लंड को चूत के मुआने में फिराया एक बार उसके दाने पे घिसते हुए उसके दरारो में अपने लौडे को एक ही साँस में घुसा दिया.....इससे माँ के शरीर में हल्की सी हरकत हुई जैसे अब उसे दर्द झेलने की आदत थी....मैं उसकी टांगे अपनी कमर में लपेटे हुए डन दन उसकी चुदाई करता रहा और बस करता रहा...

माँ : अहहह आहह आहह आहह आहह उहह उ आहह ससस्स (माँ जैसे रोते हुए सिसक रही थी वो किसी कम्सीन लौंडिया जैसी उस वक़्त मेरी बाहों में लग रही थी)

और कुछ ही पल में मैने उसकी चूत में ताबड़तोड़ एक दो बार और लंड अंदर बाहर किया.....मैने कस कर उसे अपने बदन से जकड लिया और ठीक उसी पल मैं उसकी चूत में ही फारिग हो उठा....उस वक़्त मेरे काँपते जिस्म को ही माँ ने कस कर अपने बदन से लगाया हुआ था उसके निपल्स की सख़्त चुभन का अहसास मुझे अब भी होता है तो सिहर जाता हूँ सोचके

कुछ देर बाद हम दोनो एकदुसरे से अलग हुए फिर मैं माँ को अपने बदन से ही लिपटाये रज़ाई ओढ़ लेता हूँ...माँ को अपनी चूत में बेटे के गरम वीर्य का अहसास होता है तो वो आदम को जगाती है..."बेटा वो टिश्यू पेपर दे तो"......

"ओह्ह अंदर चला गया सॉरी माँ आज कॉंडम नही पहना मैं शायद लाना भूल गया".......

"कोई बात नही तू कल मुझे दवाई लाके दे देना".....

."अच्छा वो 72 घंटे वाला ठीक है ला दूँगा"......मैने खुद ही उठते हुए दो तीन टिश्यू पेपर लिया और माँ की चूत से निकलते वीर्य को पोन्छा और फिर कुछ और टिश्यू पेपर लेके उसकी चूत के अंदर तक घुसाके हल्का सा पूरा चूत को सॉफ करके डस्टपिन में वो गंदे टिश्यू पेपर फैक दिए...माँ इस बीच एक टाँग मेरी टाँगों पे चढ़ाए मुझसे लिपटके सो गयी....मैं भी उसकी ज़ुल्फो पे हाथ फेरता हुआ उसके माथे पे चुम्के सो गया...

सुबह मेरी नींद तब खुली जब पेशाब का अहसास भी हुआ और रूम बॉय ने दस्तक दी...मैं झट से माँ के नंगे बदन पे रज़ाई ओढ़ा कर पहले टाय्लेट गया फिर फारिग होके माँ को पूरा रज़ाई से ढकते हुए लूँगी पहन ली और खुले बदन रूम बॉय को अंदर बुलाया वो जैसे झुकाए नज़र आया था वैसे ही चला गया मुझे नाश्ता देके....फिर मैने माँ को जगाया तो माँ पेशाब करके फ्रेश होके ब्रश व्रुश करके मेरे साथ नाश्ता करने लगी....

मैं इमदाद को एक बार कॉल कर के पूछा तो उसने बताया कि वो मालिश वाली दोपहर तक आ जाएगी अगर आपको जमे तो मैं बुला लूँ..तो मैने कहा ठीक है बुला ले इस बीच हमारे फोन वार्तालाप में माँ ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए कहा कि क्या हुआ? तो मैने कहा कुछ नही इमदाद लेके आ रहा है मालिश वाली को पर अभी नही तू तब तक नहा धो ले फिर थोड़ा बीच साइड घूम फिरके होटेल आ जाएँगे.....

माँ ने कहा पर बेटा आज तो हमारा लास्ट डे है ना

आदम : अर्रे माँ एक दिन और स्टे कर लेंगे दट'स इट

माँ फिर कुछ नाही बोली वो मुझे अपने हाथो से खाने का नीवाला खिलाने लगी...हम दोनो खा पीके फारिग होके एक साथ नहाने लग जाते है...शवर के ठीक नीचे मैं माँ की पीठ गर्दन को चूमता हुआ उसे अपनी ओर किए साबुन मलने लगता हूँ उसके बदन पे फिर उसकी बगलो में फिर उसकी चिकने गुप्तांगो में...माँ इस बीच मेरे गाल को चूमते हुए साबुन मुझसे लेकर फिर मेरे शरीर पे साबुन मल्ति है..हम दोनो का बदन साबुन के झाग से सारॉबार होता है....फिर हम शवर ऑन कर उसके ठंडे पानी से नहाते भीगते एकदुसरे के बदन को सॉफ करने लगते है....इस बीच माँ मेरे लंड और अंडकोष को भी बड़े अच्छे से धो देती है...फिर हम दोनो एकदुसरे को किस करते हुए...पास रखे एक ही टवल से एकदुसरे को पोंछते है...फिर माँ उसे अपने बदन पे लपेट लेती है और मैं नंगा ही बाहर निकल जाता हूँ...हम अपने कपड़े पहनते हुए जब नीचे जाते है तो पाते है मॅनेजर खड़ा है...मैं मॅनेजर से बात करके कल हमारे घूमने का जो इंतेज़ाम उसने किया था उसकी फी पे कर देता हूँ...मॅनेजर कहता है इमदाद और भी जगह ले जाएगा...तो मैने कहा नही आज थोड़ा यहीं स्टे करते है कल बहुत थक गये थे फिर कल चले जाएँगे वैसे भी परसो हमे निकलना है..तो मॅनेजर चुप हो गया फिर माँ जो मेरा हाथ पकड़े थी हम दोनो फिर बीच के लिए निकल जाते है....आज धुंप बहुत कड़ी थी इसलिए कुछ देर केफे में जाके कॉफी की चुस्किया लेते हुए मेन रोड की गाडियो को आते जाते हम देख रहे थे आस पास काफ़ी लोग थे आपस मे सब बातचीत कर रहे थे...

इस बीच माँ ने मेरे हाथ को सहलाया तो मैने कहा क्या हुआ? तो उसने कहा तूने टिकेट करवा ली...मैने कहा हां एक ही कॉल मारूँगा तो एजेंट मुझे टिकेट ऑनलाइन भेज देगा...मैं प्रिंट आउट निकलवा लूँगा और बस हम चल लेंगे....माँ मेरे इंतेज़मात से बड़ी खुश हुई थी...हम कॉफी और कुछ खाने के बाद फिर बीच पे लौटे इस बीच बीच एकदम सुनसान हो गया था हो भी क्यूँ ना समुन्द्र का पानी गरम हो जाता है इस वक़्त और कढ़क धूप में कौन घूमेगा फ़िरेगा ...हमने देखा कि पास एक बोट है टूटी फूटी सी शायद कभी बाढ़ में किनारे पे आके पड़ी रह गयी होगी मैने चारो तरफ देखा दूर दूर होटेल्स और मेन रोड जहाँ से लोग भी ख़ास कोई नोटीस ना कर सके...

हम एकदुसरे का हाथ पकड़े बोट के पास आए फिर मैने माँ से कहा कि चल इधर ही ठहरते है....तो माँ मेरे इरादो से वाक़िफ़ होते हुए बोली हट बदतमीज़ कल तेरा जी नही भरा जो तू यहाँ भी शुरू हो रहा है....मैने कहा ये तो हनीमून है तेरे साथ माँ जो बिन शादी के मैं मना रहा हूँ फिर अगर तू राज़ी हो जाए तो हम शादी करके फिर कहीं और हनिमून मनाने जाए माँ ने कस कर मेरी पीठ पे थप्पड़ लगाया और मुझे धकेलते हुए दौड़ी तो मैं उसके पीछे दौड़ा...हम दौड़ते हुए समुन्द्र की लहरों पे चल रहे थे....मैने उसका हाथ पकड़ा उसे खीचके पानी में फैक दिया जिससे उसके कपड़े भीग जाते है उसने भी उठते हुए मुझे एक धक्का मारा तो मैं औंधे मुँह पानी में गिर पड़ा वो खिलखिलाके हंस पड़ी...हम ऐसे ही समुन्द्र के पानी में खेलते रहे एकदुसरे को गीला करते हुए मैने कॅमरा फोन निकाला और माँ की हर अदाओ में पिक्स निकाली...."माँ हां इस पॉज़ में माँ थोड़ा ऐसे हां ये हुई ना मेरी जान"........मैं हर तस्वीर उसकी निकालता रहा...कहीं वो डॉगी स्टाइल में नज़ाकत से मुझे देखते हुए ल़हेरो को रेत पे हाथ टिकाए अपनी साड़ी को समेटे हुए अपनी नितंबो को साड़ी के उभार से दर्शाए पोज़ देती है... तो कही पानी में लेटते हुए एक हाथ अपने बालों को समेटते हुए तो बड़ी अदा से अपने गीले ब्लाउस और बगल को दर्शाती है...कही पीठ पे हाथ रखके अपनी चिकनी कमर और पेटिकोट गीले हो जाने से नितंबो के उभार को सॉफ दर्शाती है...तो कही मेरे साथ लिपटके मेरे गाल में चूमते हुए मुस्कुरा कर पोज़ देती है हम दोनो हँसी खुशी वापिस उस टूटी बोट के पास आके अपने कपड़े सुखाने लगे

अंजुम : उफ्फ कपड़े तो गीले हो गये बेटा मेरी साड़ी तो पूरी भीग गयी है (अपने नितंबो से खींचते हुए अपने पेटिकोट और साड़ी को झाड़ते हुए माँ कहती है)

आदम : अर्रे मेरी जान धूप देख अपने आप कपड़े सुख जाएँगे

अंजुम : कोई देख तो नही रहा ना

मैने चारो तरफ देखा जगह एकदम सुनसान हो गयी थी...हम बोट के आड़े खड़े थे बोट काफ़ी बड़ी थी इसलिए हम दोनो को जैसे पीछे से छुपाए हुए सी थी...हम छाँव की आड़े ऐसे ही खड़े रहे....फिर मैने माँ को अपने तरफ खीचा तो माँ ने शरम से अपने दोनो चेहरे पे हाथ रख लिए मैने उसके दोनो हाथो को मज़बूती से हटाया और फिर उसके होंठो को चूमना शुरू किया...कुछ ही पल में हमारी गरम सासें एकदुसरे से टकराने लगी और माँ और मैं एकदुसरे को स्मूच करने लगे अपनी ज़बान एकदुसरे के मुँह में डालते हुए चूसने लगे मैं तो जैसे बेख़बर हो गया पर माँ नही हर चुंबन के बीच मुझे रोकते हुए वो इधर उधर नज़र फिरा रही थी फिर मैं ही उसके होंठो को वापिस मुँह में भरता हुआ उसकी ब्लाउस की डोरियो को सहलाते हुए उसे अपने एकदम बदन से लिपटा लिया...हम दोनो करीबन कुछ देर तक यूही सख़्त धूप में खड़े नाव की छाँव में एकदुसरे को स्मूच कर रहे थे कुछ देर में हम दोनो एकदुसरे से अलग हुए और हाफने लगे...माँ ने अपने होंठो को पोन्छा फिर मुझे कहा कि दो बुड्ढे गुज़र रहे है वो देख लेंगे मैने भी उनपे नज़र डाली और हम हाथ पकड़े बोट के पीछे से निकलते हुए वापिस होटेल आ गये इस बीच माँ और मेरे कपड़े काफ़ी हद तक सूख चुके थे...मैं अंदर आते ही रिसेप्षनिस्ट से कहा कि हमारे रूम नंबर .205 में खाना पहुचा दिया जाए...उसने हामी भरी...मैने माँ से कहा कि माँ मैं एक मिनट में आता हूँ इतना कहते हुए मैं बाहर चला गया माँ वापिस होटेल रूम में पर वो थोड़ी चिंतित हुई ऐसे यूँ अकेला छोड़के जा रहा था...

 
उसके बाद मैने एक आदमी से केमिस्ट के बारे में पूछा तो वो थोड़ा दूर बताया मैं मेन रोड क्रॉस किए केमिस्ट शॉप के पास आके उससे बर्त कंट्रोल पिल माँगी उसने मुझे दी फिर मैं उसे काग़ज़ में अच्छे से छुपाए वापिस होटेल रूम पहुचा...मैं जब आया तो पाया रूम बॉय लंच देके निकल रहा था मुझे सलाम करते हुए वो चला गया मैं अंदर आया तो माँ बेड पे बैठी बेंगाली गाने सुन रही थी टीवी पे...

मैं उसके बगल में बैठ गया और उसे पिल दी...उसने झट से पिल खाई और पानी पिया..फिर कुछ देर बाद हम लंच करने लगे...शाम तक इमदाद आ गया वो खुद ही मेरे रूम मालिश वाली को लेके आ गया था....उसने मेरा परिचय सुधा से कराया सुधा ओड़िया थी 40 बरस की औरत थी बदन एकदम गातीला छातिया और नितंब बाहर निकले हुए वो ओरिया साड़ी में थी थोड़ी साँवली थी उसने मुझे नमस्ते किया फिर माँ को भी....माँ चुपचाप थी मैं ही उससे उसकी चार्जस की बातचीत करने लगा तो इमदाद उसे मेरे पास छोड़ कर चला गया...

आदम : सुधा जी आपको मेरी बीवी की अच्छे से मालिश करनी है आइए अंदर

अंजुम : आदम अभी करना होगा? :फ़ौरन: (माँ जैसे झिझक रही थी)

सुधा : अर्रे अंजुम जी एक बार करवा लीजिए मेरे हाथो की मालिश आपको काफ़ी आराम देगी (माँ का चेहरा शरम से लाल हो गया)

सुधा को पहले ही शायद इमदाद ने बताया कि मांलीश मेरे सामने करना था अगर राज़ी ना होती तो मुझे सॉफ कह देती फिर उसने मेरी तरफ देखा मैने डोर लॉक्ड कर लिया...सुधा साथ में एक बोतल तेल की शीशी भी लाई थी...मैं बिस्तर के एक कोने पे बैठ गया तो उसने एक चद्दर बिछाई..फिर सुधा ने माँ को साड़ी उतारने को कहा तो माँ मुझे ने शरम से लाल गालो से घूरा ...तो मैने भी उसे कहा कि अर्रे अंजुम क्या फरक पड़ता है काहे की शरम मैं हूँ ना यहाँ और ये तो महिला है सुधा हंस पड़ी...माँ ने धीरे धीरे साड़ी उतारनी शुरू की और फिर अपनी पेटिकोट और ब्लाउस भी उतार दिया....सुधा मेरी माँ के बदन को घुरते हुए जैसे प्रशंसा कर रही थी कि क्या फिगर था उसने मुझे देखके मुस्कुराया

सुधा : आप नही जानते आपसे पहले हमने कयिओ के किए है अँग्रेजिन महिलाओ की भी

सुधा ने सिर्फ़ अपनी साड़ी उतार ली थी और अपनी पेटिकोट को कमर तक जैसे बाँध लिया..उसे मेरी मज़ूद्गी से भी कोई सवाल नही उठा...मैं जैसे चुपचाप बैठा उन दोनो को देख रहा था...सुधा ने माँ को ब्रा पैंटी भी उतारने कहा तो माँ झिझकते हुए हँसने लगी तो मैने खुद खड़ा होके उसकी पैंटी और ब्रा उतार दी...जिससे माँ एकदम शरम से पानी पानी हो गयी....अब सुधा को क्या मालूम कि मेरा और अंजुम का क्या रिश्ता था? वो तो हमे एक शादी शुदा जोड़ा ही समझ रही थी...

फिर माँ लेट गयी उसने माँ के एक बार नंगे बदन को घूरा फिर अपने हाथो में तेल लेते हुए माँ की नाभि पे एक दो बूँद तेल की डाली और उसकी छातियो के उपर...माँ उससे झिझकना कम करने लगी....उसने माँ के बदन की मालिशें शुरू की पहले दोनो कलाईयों से होते हुए बाजुओं की फिर उसके मोटी मोटी जांघों से होते हुए उसके फटे तालपेट की चमड़ी की फिर पूरे बदन पे हाथ हाथ घिसते हुए उसकी चिकनी बगलो पे हाथ ले जाते हुए उसकी छातियो को भी मसल्ने लगी....मैं माँ की ज़बरदस्त मालिश देखके सोचा कि यही कपड़े उतारके मूठ ही मार लूँ...पर सुधा को देखके काबू में था..

सुधा ने मेरी तरफ घूमते हुए कहा कि आपकी मिसेज़ का बदन काफ़ी फिट है ऐसा फिगर के लिए औरतें तरसती है...फिर वो हमारे शादी ब्याह के बारे में पूछने लगी मैं तो झूठ बातें बता रहा था...और माँ वहीं नंगी लेटे जैसे शर्मा रही थी...सुधा माँ की प्रशंसा कर रही थी माँ चुपचाप सुनते हुए मुस्कुरा रही थी

फिर उसने माँ की छातियो को मसलना शुरू किया तो माँ ने आँखें बंद कर ली मुझे ऐसा लगा जैसे वो गरम हो रही थी फिर सुधा ने माँ की टाँगों के बीच हाथ रखते हुए वहाँ पे भी मालिश करनी शुरू की....माँ चुपचाप बड़े मज़े से आनंद ले रही थी इस बीच जब सुधा के हाथ दाने को छेड़ते हुए चूत के मुआने पे कस गये तो माँ चिहुक उठी तो सुधा मुस्कुराइ..बोली मेडम जी मज़ा आ रहा है आपको.....माँ कुछ नही बोली उसका चेहरा लाल हो गया था वो तीन उंगली माँ की गुलाबी पावरोटी जैसी सूजी चूत की फांको के उपर घिस्सते हुए उसके छेद को टटोल रही थी...फिर उसने माँ को पलट जाने को कहा माँ के पलट जाने पे ही वो माँ के चूतड़ और पीठ पे तेल डालते हुए वहाँ भी अच्छे से मांलीश करने लगी उसने दोनो नितंबो की भी काफ़ी अच्छे से मालिश की फिर बीच में उंगली देते हुए माँ के छेद पे हाथ की एडी घिसी...माँ इस बीच पूरे बदन की मालिश से तेल से गीली हो चुकी थी उसका बदन चमक रहा था...

सुधा ने काफ़ी देर तक माँ की मालिश की तो माँ ने उससे कहा कि कमर में दर्द रहता है यहाँ भी कर दो सुधा ने माँ के नितंबो को छोड़ फिर उसकी कमर की मालिश की उसके बाद वो उठ खड़ी हुई मुझे बोली सर हो गया...तो मैने उसका सुक्रियादा करते हुए उसे पैसे दिए....उसने माँ की तरफ पलट के कहा कि गुनगुने पानी से कुछ एक आध देर बाद नहा लीजिएगा इतना कहते हुए वो पैसा गिन्के अपने ब्लाउस में ही डाले वहाँ से चली गयी जाते जाते उसने धीमें से कहा कि आप काफ़ी लकी हो बड़ी सेक्सी बीवी है आपकी तो मैने मुस्कुरा कर उसका शुक्रियादा किया और उसकी मालिश की भी तारीफ कर डाली...

उससे अपनी मालिश तो नही करवा सकता था अगर करवाता तो अपनी कामवासना पे काबू ना कर पाता और भला माँ के सामने उसके साथ कुछ भी करना मतलब माँ के साथ रिश्ते से हाथ धो बैठना था जो मैं कत्तयि नही चाहता था...सुधा के जाते ही माँ वैसी नंगी बिस्तर पे लेटी हुई थी उसने कहा कि उसे काफ़ी आराम मिला कमर के दर्द से भी तो मैने उसके तेल से लिपटे नितंबो पे हाथ से सहलाते हुए कहा कि मैं गुनगुना पानी कर देता हूँ...

मैने गीज़र से हल्का पानी गरम किया फिर अपने कपड़े उतारे और माँ के पास आया माँ सो चुकी थी....तो मैने सोचा थोड़ी देर ठहर जाए जब माँ की नींद टूटी तो मैने उसे गोद में उठाया और उसके गीले तेल से लथपथ बदन को अपनी बाहों में कसे बाथरूम मे आया और उसे लेटा दिया फिर गुनगुने पानी से उसके बदन को नहलाने लगा माँ को हॉट शवर लेने के बाद काफ़ी आराम मिला था वो नहा कर फारिग हुई मेरे साथ बाहर आई इस बीच वो पूरी नंगी थी मैने उसकी शेव्ड चिकिनी चूत और गान्ड को तौलिए से पोछा और फिर उसके बदन को भी फिर उसे बिस्तर पे लिटाते हुए उसके बगल में लेट गया...सोचा माँ के साथ एक राउंड और हो जाए

पर यार पिल खाया था माँ ने इसलिए थोडा एक दिन ठहर जाना मुनासिब समझा हम दोनो ने...माँ वैसे ही सुस्ताते हुए सो गयी और मैं उसके बगल में ही लेता रहा...अचानक मेरा फोन बज उठा तो मैं नंबर पे गौर किया...मेरे खुशी का ठिकाना नही रहा क्यूंकी ये मेरे दोस्त समीर का कॉल था ....

आदम : हेलो?

समीर : अबे ओह क्या हाल बे ? दिल्ली छोड़ते ही दोस्त को भूल गया

आदम : अर्रे नही यार क्या करूँ काम का प्रेशर बहुत ज़्यादा पड़ गया था

समीर : अच्छा जी या फिर कोई नयी लौंडिया को फ़सा लिए

आदम : नही यार अब तक तो किसी से भी संबंध नही बनाए

क्या कहता समीर को? कि माँ के साथ कितने आगे मेरी स्टोरी पहुच चुकी अब ये भी कह देता कि मैं माँ को लेके बिन शादी होनमून पे उड़ीसा आया हूँ तो पक्का मेरी जान खा लेता पूछ पूछके कि क्या कब कैसे? अर्रे महेज़ माँ और मेरे संबंध की अगर बात उसको पता लग जाती तो फिर वो चुप ना रहता और अपनी माँ सोफीया को छोड़ मेरे ही किस्से सुनने लग जाता

समीर : अच्छा तो भाई इस वक़्त है कहाँ तू घर पे?

आदम : नही यार दरअसल काम के पर्पस में उड़ीसा आया हूँ पूरी

समीर : अच्छा वहाँ पे ये तो सोनार्क सूर्य मंदिर के लिए काफ़ी प्रसिद्ध है मैने सुना है वहाँ काम्सुत्र जैसी मुद्राओं में कयि प्रकार के स्टॅच्यूस है जो दीवार पे बने हुए है मंदिर के

आदम : हां हां वहीं अभी फिलहाल होटेल में हूँ यार अच्छा तू सुना? तू कहाँ पे है

समीर : वहीं जहाँ मुक़द्दर में लिखा था

आदम : क्या मुंबई? इतने जल्दी

समीर : हां यार कुछ महीना हुआ है शिफ्ट हुए तेरे जाने के तक़रीबन एक माज़ बाद ऑफीस खाली किया और उसके ठीक बाद मुंबई में कारोबार सेट अप करके फिर माँ को लिए बांग्ला बेचके ठीक यहाँ

आदम : अर्रे यार तूने इतना आलीशान बंगला बेच दिया दिल्ली का

समीर : अर्रे यार मेरे लिए घर कोई बड़ी बात नही रखती मेरे लिए मेरी माँ ही सारी धन दौलत है आज उसी के बिनाह पे मैं इतना कुछ पाया हूँ खैर मैं मुंबई में अपने पुराने फ्लॅट आ गया हूँ बाकी तेरे लिए एक खुशख़बरी भरा सर्प्राइज़ है

आदम : अबे तो खुशख़बरी भरा सर्प्राइज़ बताने में इतनी देर क्यूँ लगाई ?

समीर : हाहाहा सोचा पहले तेरे बारे में हाल समाचार जान लूँ

आदम : अर्रे मेरा तो जान लिया तूने अपना बता (मैने पाया माँ करवट लिए सो रही थी और उसकी नितंबो की फाँक मेरे सामने खुल गयी)

समीर : ह्म तो सुन अगले महीने ठीक 15 तारीख को मैं और माँ निक़ाह करने जा रहे है

आदम : व्हाट ? शादी?

समीर : तू इतना चौंक क्यूँ रहा है? जोक सुनाया थोड़ी है तुझे सच में शादी करने वाले है

आदम : पर यार किसी को कुछ

समीर : किसी को क्या न्योता भेजू ? भला कोई ऐसी शादी को शादी मानेगा कहेगा कोई अज़ीबो ग़रीब है लोग होंगे तू बाहर लोगो की छोड़ तूने प्रॉमिस किया था देख तू मुकरेगा नही साले

आदम : न..नही नही यार मैं तेरा राज़दार तेरा हमदर्द तेरा दोस्त भला तू निक़ाह करे और मैं आउ ना ऐसा हो सकता है कभी नही :वेरी हॅपी: अच्छा ये बता निक़ाह कहाँ रखा है

समीर : सोचा है कि घर में ही कर ले वैसे भी आएगा कौन ? तू होगा और बस हम तू पेशी के तौर पे भी निक़ाहनामा में साइन कर देना

आदम : विटनेस की फिकर ना कर मैं आ जाउन्गा और सुना आंटी बिल्कुल राज़ी क़ाज़ी अगर पूछेगा तो

समीर : सब फिक्स है बॉस माँ और मेरा परिचय उनके सामने कत्तयि होगा ही नही तो भला उन्हें क्या मालूम लगेगा?

आदम : यार पर इतना बड़ा इरादा करना ठीक है आइ मीन कि कही कुछ ग़लत तो नही कर रहा ना तू

समीर ये सुनके मुझपे हल्का गुस्सा हुआ फिर शांत होते हुए बोला.."देख यार मेरा ये पहला और आखरी फ़ैसला है मैं शादी करूँगा तो सिर्फ़ और सिर्फ़ सोफीया से और मैं किसी की भी परवाह नही करता"..........मैं समीर के गुस्से को शांत करने लगा

आदम : अच्छा अच्छा भाई आइ आम सॉरी यार काये को गुस्सा होता है बस तेरी और आंटी की चिंता थी तो यूँ ही

समीर : मैं जानता हूँ कि तू मेरी बड़ी फिकर करता है तू बस इतना करना कि 15 तारीख से पहले मेरे यहाँ आ जाना बस रेलवे स्टेशन पहुच जाइयो बाकी मैं आके तुझे पिक कर लूँगा

आदम : अच्छा ठीक है बाबा ठीक मैं 15 तारीख से पहले ही आ धम्कुन्गा ठीक भला दोस्त की शादी में शारिक़ ना होउंगा तो लात जूते नही खाउन्गा

समीर : दट'स व्हाट आइ आम एक्सपेक्टिंग सो ब्रो चल जल्दी आना

आदम : ओके ब्रो चल रखता हूँ

समीर : ठीक है बाइ

आदम : बाइ आंड कोंग्रथस

समीर ने फोन कट कर दिया....पर मेरे मन में एक जिग्यासा जैसे छोड़ गया आख़िर वो दिन आ ही गया जिसका समीर को बेसवरी से इंतेज़ार था संबंध तक तो ठीक था पर शादी हाहाहा इस दीवाने बेटे को तो खुदा ही समझे कि ये कैसा है? एक बार मैने भी सोचा कि दिल्ली से लेके बेंगल तक मेरा भी तो रिश्ता अपनी अंजुम से कुछ समीर जैसा दीवाना सा हो गया था....पर शादी छी उसकी हिचकिचाहट तो अब भी थी मुझे माँ को इतने इकरार के बाद भी उसने हां ना कहा था...क्या पता माँ खुद ही पहेल कर दे? पर ऐसे अज़ीबो ग़रीब इरादे के लिए वो क्या कभी तय्यार होगी यही सोचते सोचते मेरी भी कब आँख लगी मुझे पता नही...

 
जब अहसास हुआ तो माँ ने ही मुझे जगाया कहा कि तेरा फोन बजे जा रहा है और तू सोया पड़ा है....माँ ने सूट पहन रखा था शायद वो मुझसे पहले जाग गयी होगी और उस वक़्त ही चेंज किया होगा...मैं उठके अपने फोन को रिसीव करता हूँ उनके देते ही...फोन इमदाद का था उसने कहा कि कल रेडी रहिएगा सर फिर उसी वक़्त की तरह पूरा पुरी घुमा दूँगा आपको और आपकी मिसेज़ को...तो मैने कहा ठीक है मैं तय्यार रहूँगा इतना कह कर उसने फोन कट कर दिया...

हमने डिन्नर किया और फिर वापिस बिस्तर पे लेट गये....अगले दिन इमदाद की गाड़ी में मैं और माँ पुरी में घूमने का आनंद ले रहे थे....इस बार इमदाद ने मुझे और माँ को जगन्नाथ मंदिर भी दिखाया....दोपहर होते होते इमदाद हमे पूरी के सबसे बड़े मार्केट ले आया.....वहाँ इमदाद ने हमे छोड़ा और हम मार्केट की सैर करने लगे...वाक़ई काफ़ी बड़ा मार्केट था...माँ के लिए मैने एक एक संतरे रंग के फूलों का बना एक गजरा लिया और वहीं उसे पहनाया उसके बालों में गजरा बड़ा सुंदर लग रहा था...हम वैसे ही आगे बढ़े तो पाया कि वहाँ बड़ी साड़ी का सेंटर था...जहाँ से मैने माँ के लिए काफ़ी महेंगी बनारसी साड़ी एक दो खरीद ली मैने चाहा कि माँ उसे पहन्के एक बार देख ले वो तो मुझे होटेल आके ही देखना था कि उस पर कितना जचता ?

खैर फिर हमने वहाँ उड़ीसा की कुछ डिशस का रेस्टोरेंट में मज़ा लिया और फिर खा पीके मार्केट से एक आध माँ के लिए मैने शादी के जोड़े वाली चूड़िया और कुछ मेक अप का सामना जैसे लिपस्टिक फेस क्रीम ये सब खरीदा..फिर हम बाहर मार्केट से लौटे...अंधेरा हो चुका था चारो तरफ लाइट्स की जगमगाहट थी थोड़ी परेशानी हुए इमदाद को ढूँढने में क्यूंकी भीढ़ बहुत ज़्यादा लगी हुई थी और मेन रोड पूरा जाम था....इमदाद हमे खुद ही मिल गया....उसने कहा कि शाम को यहाँ ऐसे ही बहुत भीढ़ लग जाती है चलिए होटेल चला जाए....हम गाड़ी में बैठे और उस भीड़ भाड़ भरे इलाक़े से जल्द ही निकल गये...

होटेल आते आते एकदम शांत भरा वातावरण सा हो गया...जब हम रूम पहुचे तो मैं इमदाद को पैसे देते हुए गले मिला कहा कि उसका शुक्रिया कि उसने हमे ऐसी राइड करवाई काफ़ी घुमाया फिराया बड़ा मज़ा आया पुरी में....उसने कहा कि आप बस ऐसे ही आईएगा तो मैने कहा बिल्कुल..फिर हम होटेल रूम पहुचे..माँ ने घुसते ही ए सी ऑन कर लिया फिर बरामदे के पर्दे को हटते हुए बाहर की समुन्द्रि हवाओं और समुन्द्र की ल़हेरो को देखते हुए महसूस करने लगी...

"ह्म्म आज रात काफ़ी सुहानी है"........माँ ने मेरे बगल में होते ही कहा

"ह्म और आज दिन भी"......मैने माँ की पीठ पे चूमते हुए कहा तो वो शर्मा गई...मैने उसे फिर समीर और उसकी माँ सोफीया की शादी के बारे में बताया तो वो शरमाई बोली पगला है यह लड़का समीर भी मगर उसकी माँ भी तो राज़ी है अब जब दोनो ये इरादा कर ही चुके तो कौन बदल सकता है?

मैने माँ की तरफ सवालात से देखा कि क्या हम भी? ....पर माँ ने कहा भला मैं इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती हूँ? जिसकी उमर ढल रही है और वो अपने बेटे की ज़िंदगी महेज़ अपने लिए ही खराब कर दे ऐसी कन्सर्वेटिव वो नही थी...वो अब तक जो भी कि मेरी खुशियो के लिए उसने किया...तो मैं चुपचाप रहा...उसने मेरे मांयूस चेहरे पे हाथ फेरा...मैने कहा क्या सच में तुम? माँ नेमेरे होंठो पे उंगली रखते हुए कहा आज कुछ मत पूछ आज की इस आखरी रात को भी एंजाय कर ले फिर ये मौके बार बार हासिल नही होंगे

माँ की कॅटिली मुस्कान मुझे विवश कर दी कि मैने उसके पीछे पीछे कमरे में आते हुए दरवाजा लगाया....मैने गजरा चूड़िया शादी के जोड़ो वाला मेक अप का सामान साड़ी सब बिस्तर पे रखते हुए उसे दिखाते हुए कहा चल अब तय्यार भी हो जा...तो माँ ने मुस्कुराया हम दोनो के बीच शादी को लेके फिर कोई बात नही उठी क्यूंकी वो पल ही कुछ ऐसा था...

माँ ने मेरे कहे अनुसार मेरे ही सामने अपना सूट उतारते हुए गजरा बालों में लगाया साड़ी पहनी मेक अप किया लिपस्टिक लगाया काजल लगाया कलाईयों में चूड़िया डाली और फिर मुझे नज़ाकत से देखते हुए अपनी साड़ी ठीक करने लगी..मैं उसके इस रूप को देखके पगला सा गया था...मैने झट से अपने कपड़ों को उतारा और उसके सर पे प्यार से हाथ फेरते हुए उसे नीचे अपने झुका लिया

उसने झुकते के साथ मेरे लंड को अपने होंठो की लाली के बीचो बीच मुँह खोल के घप्प से लिया फिर उसे चूसा और मुझे बड़ी बड़ी काजल भरी आँखो से घूरा...मेरे लंड को चुसते हुए उसके एक हाथ मेरे हाथो में था मैने उसकी साड़ी खीचके उतारी उसके पेटिकोट और साड़ी दोनो को उसकी कमर तक किया उसकी पैंटी को उतारा और उसकी चिकनी गुलाबी चूत पे अपना मुँह लगाया जीब से चाटते हुए उसे पागल सा कर दिया....उसने अपनी दोनो जाघ इस बीच मेरे खुले बदन पे खूब रगड़ी...

मैने उसकी आइडियो को चूमते हुए उसकी पायल पहनी टाँगों से लेके जाँघो तक चूमा...फिर उसकी चूत पे मुँह दबाया तो वो सिसक उठी....फिर उसने अपने ब्लाउस से ही अपनी चुचियो को लगभग निकालते हुए मेरी ओर देखा मैने उसके मोटे ब्राउन निपल्स को एक एक करके चूसा और उसकी दोनो चुचियो को ब्लाउस के बाहर निकालते ही चूसा फिर उसकी चूत का भी हस्थ मैथुन करता रहा...इससे माँ पूरी गरम हो गयी....उसने कस कर भीचते हुए मेरी पीठ पे अपने नाख़ून गढ़ाए और मुझे अपने बदन से चिपका लिया

मैं भी उसके खुले पीठ वाले ब्लाउस में हाथ डाले उसकी पीठ को सहलाता हुआ मचल रहा था...मैने उसके कान के झूमकों पे चूमा और उसे अपने दाँतों से निकालके फ़ैक् दिया....फिर उसके रूज़ लगे दोनो गालो को बारी बारी से चूमा फिर उसके लाल लिपस्टिक लगे होंठो को चूस लिया...

अंजुम : उफ्फ इन्हें चबा जाएगा क्या? (माँ ने मेरे होंठो से खुद के होंठो आज़ाद करते हुए कहा)

आदम : अर्रे यही तो मज़ा है रानी ला दे ज़रा अपने होंठ (मैने माँ के होंठो को फिर चुस्सना शुरू किया)

अंजुम के होंठो चुसते हुए मैने उसकी चुचियों जो ब्लाउस से बाहर निकली हुई थी उन्हें भी दबाना शुरू किया जिससे माँ सिसकते हुए खुद ब खुद मुझसे लिपट गयी उसने खुद ही मेरा लिंग जो कि अकडा हुआ था उसे सहलाके फिर रोड जैसा खड़ा किया और फिर अपनी टांगे खोले बिस्तर पे लेट गयी मैने उसके खुले बालों को छूते हुए...उसके नितंबो को पीछे साड़ी उठाए दबाते हुए उसकी चूत पे मुँह लगाके फिर दाने को चूसा और चूत की गहराई को चाटना शुरू किया...उसकी फांको के बीच से सफेद रस बहे जा रहा था...वो स्खलन कर चुकी थी....और मेरे होंठ उसकी गीली चूत के पवरोटी जैसे दोनो मांसो को दाँत से खीच रहे थे....वो भरपूर कामवासना का आनंद ले रही थी...

 
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