."ओह्ह हाए कमीने और कितना हाँसिल करेगा मुझे मैं तो स्वयं तेरी ही हूँ सस्स हाए अल्लह बहुत गढ़ रहा है आहह धीरी सस्स".........माँ-बेटे दोनो आहें भरते हुए जैसे चरम सीमा पे थे...
आदम लगातार धक्के मारे जा रहा था और माँ गान्ड से बेटे के लंड को अंदर बाहर होते महसूस कर रही थी....उसकी घिसाई इतनी तेज़ थी कि जैसे उसकी गान्ड पूरी तरीके से छिली जा रही थी...उसने कस कर चादर को दोनो हाथो से पकड़ा और जैसे चीख उठी..."आआआआअहह"............साथ ही साथ आदम से भी और दर्द ना बर्दाश्त हुआ और उसने झट से लंड को बाहर खीचा
और माँ को सीधा लेटाए उसके चेहरे पे अपने वीर्य की पिचकारिया छोड़ने लगा...."आहह ऑश हमम्म आहह सस्स मामा"..........आदम काँपते हुए अपने लंड को आगे पीछे मसल रहा था और उसका लंड वीर्य की धार बार बार छोड़े जा रहा था...माँ को अपने चेहरे छाती पे बेटे के गरम वीर्य के लगने का अहसास हुआ...जब बेटा पूरी तरह से संतुष्ट हो गया तो वो हान्फते हुए एक ओर जैसे ढेर हुए गिर पड़ा..माँ ने तुरंत उठके
वॉशबेसिन पे जाके कुल्ला किया और आयने की तरफ देखते हुए चेहरे से बेटे का लगा चिपचिपा वीर्य जैसे हाथो से सॉफ करते हुए धोया....
जब वो वापिस आई तो बेटे का लंड अब भी आकड़ा हुआ था....उसने चादर अपने और बेटे के उपर रखी और उससे कस कर लिपट गयी...
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रात कोई 1 बजे आदम पेशाब किए गुसलखाने से बाहर आया....एक बार उसने समीर के कमरे में झाँका तो पाया सोफीया आंटी खर्राटे भर रही थी उसके बदन पे सिर्फ़ एक पतली सी चादर ही धकि हुई थी जिस वजह से उसकी करवट लेने से उसके चुचियाँ ठीक आदम के सामने
आ प्रस्तुत हुई उन्हें देखते हुए आदम ने जैसे नज़र फेर लिया....
जब खामोशी की उस रात आदम अपने कमरे में आकर खिड़की से बाहर देख रहा था..तो इतने में उसे किसी की आहट हुई उसने पीछे
मूड कर देखा समीर मुस्कुराए खड़ा था उसने भी महेज़ एक ढीला पाजामा पहना हुआ था उसका लिंग भी उभरा हुआ दिख रहा था
समीर : और मना ली सुहागरात (आदम मुस्कुराया समीर ने उसके कंधे पे हाथ रखा)
आदम : हां यार वो तो रोज़ ही मनाता हूँ
समीर : पर आज ख़ास रात हुई क्यूंकी आज माँ नही बल्कि आज से तेरी बीवी भी बन गयी है
आदम : हाँ समीर अच्छा स्विट्ज़र्लॅंड की ट्रिप कैसी रही मैने तो पूछा ही नही अब शादी की वजह से इतनी गफलत में थे हम
समीर : हाहहा पूछ मत हमने बहुत एंजाय किया तस्वीरें देख ये ले ?(आदम तस्वीर स्मार्ट्फोन पे देखता हुआ वाक़ई समीर की तारीफ करने लगा)
समीर : अच्छा आदम एक बात बता अभी तो तेरे पिता जी को मालूम नही अब तुम लोग कैसे रहोगे
आदम : देख समीर ये शादी गुप्त शादी है और इसका ढिंढोरा पीटना आसान नही क्यूंकी मेरे उपर के मामले पे हमारे पड़ोसी राजीव दा और
\ उनकी वाइफ ज्योति भाभी रहते है उन्हें तक मालूम नही हमे तो ये बात सारी ज़िंदगी के लिए छुपाए रखना ही होगा
समीर : कोई बात नही आदम बस ये याद रखना कि किसी को पता ना चले?
आदम : ह्म्म्म्म
समीर : चल भाई अब आराम से रहियो अब तो तेरी ज़िम्मेदारी दुगनी हो गयी....
आदम : ह्म मेरी छोड़ तू बता तू कहाँ जा रहा है इतनी जल्दी...
समीर : भाई मुंबई में बिज़्नेस का बहुत काम पेंडिंग पड़ा है नही गया तो सिगमेंट कॅन्सल हो जाएगा और लाखो का नुकसान भी वैसे भी स्विट्ज़र्लॅंड के वक़्त बहुत बिज़्नेस पे प्रभाव पड़ा
आदम : हाहाहा ज़िम्मेदारी पे भी ध्यान दिया कर माँ कहाँ भागी जा रही है सारी ज़िंदगी पड़ी है उससे प्यार करने को
समीर सिर्फ़ मुस्कुराया दोनो दोस्त कुछ देर तक इधर उधर की बातें करते रहे...फिर उसके बाद दोनो अपने अपने कमरे में चले गये सोने के लिए....
2 दिन तक समीर और सोफीया आदम के घर पर रहे.....इस बीच आदम और अंजुम ने जमके उनके साथ गपशप लगाए घमे फिरे २ दिन बाद समीर अपनी माँ को लेके चला गया....
समीर और उसकी माँ के जाने के बाद....दिन पानी की तरह गुज़रने लगे....और इस बीच माँ और बेटे का यह संबंध अब एक नये हाल से था...जिसमें माँ बेटे की संपूर्ण पत्नी बनके उसके साथ वक़्त काट रही थी...आदम भी उसका पति बनके जैसे खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा था....
अंजुम निखर गयी थी बेटे के हन्ब से...उसका फिगर भी काफ़ी सुडोल हो गया अक्सर बेटा उसके नितंबो को पाजामे के बाहर से ही नोटीस करता था....आजकल माँ घर में काफ़ी साज़ सिंगार से रहती थी....और आजकल बालों में गजरा भी मनपसंदीदा मोगरे या संतरी रंग का लगाया करती थी...जिसमें वो काफ़ी हॉट लगती थी...
घर में चूकि अब दो ही मिया बीवी ही रहते थे इसलिए दोनो को किसी से भी परदा शरम या हया करने की कोई ज़रूरत या कोई दिक्कतें नही होती थी...वो जब चाहते एकदुसरे के करीब आ जाते ....10 दिन बाद गाओं से लाजो वापिस घर को लौटी तो उसने घर को एक नया हाल में ही पाया..
आदम दफ़्तर में होगा ज़ाहिर है दोपहर का वक़्त था 12 बज रहा था...उसने दरवाजे को खोला और अंदर आई.....जैसे ही उसकी नज़र
रसोईघर में चूल्हा चढ़ाए खाना बनाती अंजुम पे पड़ी तो जैसे उसे ऐसा लगा जैसे कोई नयी नवेली दुल्हन घर में आ गयी हो....
लाजो : अरे वाह काकी आप तो कितनी सुंदर हो गई देखने में ये हाथो में लाल लाल चूड़ियाँ उफ्फ कितनी सुंदर साड़ी है आपकी और ये बालों में गजरा उफ्फ क्या बात है काकी ? क्या है ये सब (जैसे जीब पे दाँत रखते हुए लाजो को ख्याल आया आदम ने मना किया था कि उसकी माँ को मालूम नही की वो उन दोनो का राज़ जानती है)
अंजुम ने उसे गौर से देखा और कहा क्या तेरा मतलब?.....
लाजो मुस्कुराइ फिर उसने पहलू बदलते हुए कहा हाहाहा मुझे लगा काकु के लिए आपने ये सब!
अंजुम ने जैसे मुस्कुराइ..."हाहाहा तेरे काकु में कुछ नही है उनके लिए मैने कभी कुछ नही किया एक तो उमर में मुझसे 20 साल बड़े थे और उन्हें मेरा साज़ सिंगार करना पसंद नही था"........
."ऐसा क्यूँ?"........
.अंजुम थोड़े देर के लिए साग की सब्ज़ी एक ओर किए सोचते हुए बोली....."क्यूंकी उनके साथ मैं सोती नही थी वो मुझे संतुष्ट नही कर पाते थे और अब तो उमर निकल गयी अब क्या फायेदा?".......अंजुम ने सब्ज़ी की टोकरी से साग के पत्तो को तोड़ते हुए कहा
लाजो : जो भी रहे आप दिख बड़ी सुंदर रही है मुझे लगा शायद कोई रिश्तेदार आया हुआ है पीछे से मालूम ही नही चल रहा था
अंजुम : हा हा हा हा ऐसा नही है मैं जैसी थी वैसी हूँ
लाजो से क्या छुपता? वो तो मंद मंद मुस्कुरा रही थी की जैसा उसके बेटे ने वादा किया ठीक वैसा ही उसने किया भी...उसने अंजुम से सीधे निक़ाह कर लिया....शायद ये बाद सकपकाई अंजुम भेद ना खुलने से छुपा रही हो..पर वो तो जानती थी इसलिए तो छुट्टी आदम ने उसकी करवाई थी
लाजो ने आते ही काम संभाल लिया.....अंजुम ने उसे कपड़े धोने का बोल गुसलखाने भेज दिया...लेकिन उसे कमरा सॉफ करने से मना किया क्यूंकी वो पहले ही सॉफ सफाई घर की कर चुकी थी....लेकिन लाजो से रहा ना गया उसने कमरे में दोनो के दाखिल होके एक बार बिस्तर और चारो तरफ के चीज़ो पे निगाह दौड़ाई....
उसने पाया ठीक बिस्तर के उपर मॅन्फार्स कॉंडम का एक डिब्बा रखा हुआ था जिसे देखते ही उसके गाल शरम से लाल हो गये...वो दबे पाँव
वापिस कमरे से बाहर आई और गंदे कपड़े जो बाल्टी में थे उसे उठाए गुसलखाने में ज़मीन पे पाँव मोड बैठके धोने लगी.....
वो मन ही मन मुस्कुरा रही थी कि आदम बाबू ने लगता है अपनी माँ के साथ सुहागरात भी मना ली होगी....काश वो ये सब नज़ारा और शादी
अपनी आखो से देख पाती....वो दोनो की चुदाई के ख्यालो में खोई कपड़ों को निचोड़ते हुए उसे वहीं आँगन के रस्सी पर सुखाने लगी....
अंजुम को एकपल को ख्याल आया कि कमरे में कॉंडम का डिब्बा कल रात का छूटा पड़ा है....कही लाजो की नज़र ना पड़ जाए...वो सकपकाई और दौड़ी कमरे में आई तो पाया कि बिस्तर के उपर कॉंडम का डिब्बा है और लाजो कपड़े आँगन में सूखने के लिए टाँग रही
है...उसने झट से कॉंडम के डिब्बे को उठाया और उसे पलंग के नीचे फ़ैक् दिया..."अफ ये लड़का भी ना और मैं भी कम नही एक बार भी
\ ध्यान ना गया"......अंजुम बार बार मूड कर लाजो की तरफ निगाह किए कमरे से बाहर निकल गयी....
लाजो जब बाहर आई तो वो उसके गाल शरम से बेहद लाल लाल हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे माँ-बेटे के वाक़यो को याद करके उसके तन बदन में कामवासना की आग भड़क उठी थी..उस दिन तो आदम कुछ कर ना पाया था..यही सोचते हुए वो फिर अंजुम के साथ बैठी बात करने लगी...
अंजुम बार बार आदम की बात करने में जैसे लज्जा पा रही थी...मानो जैसे एक पत्नी अपने पति की चर्चा किए शर्मा रही है उसकी शरम और
लज्जा से लाजो मन ही मन खुश हो रही थी
इतने में बाइक की आवाज़ आई फिर आदम सीढ़ियाँ चढ़ता हुआ घर में दाखिल हुआ.....उसने लाजो कोदेखके मुस्कुराया फिर अपनी माँ को उसी के सामने हग किया...ये सब देखके लाजो मुस्कुराइ....अंजुम ने उसे दूर धकेलते हुए कहा ये क्या कर रहा है तू? जा जल्दी हाथ मुँह धो
ले...आदम ने कहा हाहाहा अरे लाजो तू कब आई?....जैसे उसे चिड़ा रहा हो और माँ की तरफ देख आँख मारते हुए....
लाजो : बस आज ही लौटी हूँ गाओं से बाबू आप कैसे है?
आदम : बस ठीक ही चल रहा हूँ अच्छा लाजो तुझसे कुछ बात करनी थी
लाजो : क्या बाबू ?
इतने में अंजुम बीच में उठके बोली कि उसे दाल चौखने जाना है इतना कहते हुए वो बिना लाजो और आदम पे ध्यान दिए वहाँ से चली
गयी.....अंजुम के जाते ही जैसे लाजो ने हिम्मत से उसके करीब आके मुस्कुराया
लाजो : निक़ाह की ढेरो मुबारकबाद आपको
आदम : हाहाहा थॅंक्स लाजो
लाजो : वैसे सुहागरात तो मना लिए होंगे?
आदम : हाहाहा तो वो तो मैं माँ के साथ शादी से पहले ही मनाते आ रहा हूँ अच्छा ये लो
लाजो : ए का बाबूजी अड्वान्स?
आदम : तूने मेरी वजह से छुट्टी कर ली थी ना बस उसी लिए ये तेरी चुट्टियो को कवर करने के लिए दे रहा हूँ क्यूंकी छुट्टी तूने नही मैने करवाई और काम धंधे में कॉंप्रमाइज़ मैं करना पसंद नही करता वैसे भी तू लगातार मेरे यहाँ घर आए काम करके जाती है और अब तो तू मेरी ख़ास है
लाजो शरमाये लहज़े आदम की तरफ देखने लगी.....आदम ने कहा कि इस वक़्त तो माँ घर में मौज़ूद है पर वक़्त जैसे हाथ लगेगा वैसे ही वो लाजो को बुला लेगा....लाजो समझ रही थी उसके बुलावे का मतलब
लाजो : आप तो अब फिरसे शादी शुदा हो गये और अभी से हमपर निगाहें डाले हुए है बाबू
आदम : हाहाहा तूने खुद मज़बूर किया मुझे अपनी ओर निगाह डालने को कि मैं अब खुद को चाह कर भी रोक नही पा रहा वैसे अगर उस दिन का अधूरा अधूरा ही रह जाए तो मुझे कोई दुख नही लेकिन रज़ामंदी और राज़ी खुशी से किए काम ही मज़ा आता है
लाजो : हाहाहा अरे आदम बाबू भला आपसे हम दूर हो सकते है आप इतने जवान शहरी गोरे चिट्टे पैसेवाले आदमी और हम कहाँ जो नखरे करने की भी गुस्ताख़ी करे वैसे आराम से कीजिएगा जैसे आप अपनी बेगम को करते है (एका एक आदम का खड़ा होने लगा उसने लाजो को देखके अपने होंठ काटते हुए मुस्कुराया)
अंजुम जैसे ही घर में आई फ़ौरन लाजो सकपकाई उसने अंजुम और आदम से विदा लिया और वहाँ से रुखसत हो गयी..."क्या कह रहा था उसको?"......
."कुछ नही माँ बस ऐसे ही की कोई पैसो की दिक्कत तो नही 10 दिन तक नही आई उसे लगा कि मैं पैसे काटुन्गा"......
.."नही नही उसका पगार उसे पूरी पूरी दे दिया कर बेचारी कुछ कहती भी नही औरो की तरह नही है".......
दिन शनिवार का था...और वक़्त सुबह 10 बजके 7 मिनट का...उस वक़्त घर की घंटी बजी....आदम पेट के बल सोया पड़ा हुआ था...अंजुम ने
उठके दरवाजा खोला तो पाया की लाजो आई हुई थी....अंजुम ने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल दिया तो वो अंदर आके काम निपटाने लगी.....
जब आदम के कमरे को झाड़ू मार रही थी तो उस वक़्त उसे ख्याल ना हुआ कि चादर ओढ़े आदम केवल एक कच्च्छा पहना हुआ है....उसने झाड़ू मारते मारते जब बिस्तर की तरफ गौर किया और चादर उठाई तो पाया की आदम नंग धड़ंग अवस्था में सो रहा है...उसने आदम के
कुल्हो पर से थोड़े सरके हुए कच्छे को देखा बालों से भरी गान्ड उसके सामने थी....एक तक लाजो उसके कुल्हो की तरफ देखते हुए शरम से लाल हो गयी...फिर उसने चादर को आदम के बदन पे डालते हुए झारू लगाना शुरू कर दिया....
.................................................
आदम उठके माँ के साथ लिविंग रूम में नाश्ता कर रहा था....अंजुम ने कहा की आज उसे ताहिरा मौसी से मिलने की बड़ा मान कर रहा है कयि दिनो से वो उसे मिली भी नही....आदम उसके जाने की बात को सुन मन ही मन मुस्कुराया तो अंजुम को आदम के खाने की फिकर हुई....
लाजो ने तपाक से कहा अरे काकी मैं हूँ ना मैं आदम बाबू को खाना बना के खिला दूँगी....अंजुम खुश हुई उसने कहा ठीक है फिर तो तुम
आज रोटिया और भिंडी की सब्ज़ी कटी हुई है उसे बनाके आदम को खिला देना और चाहो तो खुद भी खा लेना
आदम ने भी कहा हां ये आइडिया ठीक रहेगा क्यूँ लाजो?...
.लाजो शरम से मुस्कुराइ उसने कुछ ना कहा...
."हां आदम ठीक ही तो कह रहा है लाजो तुम दोपहर का खाना यही खा लेना ठीक है और जब तक मैं ना आउ मत जाना अगर ज़्यादा कोई प्राब्लम है तो बोलो तुम्हारी माँ को कॉल करके बता देती हूँ"........
.लाजो ने कहा कि उसे इतना चिंता नही करना....अंजुम मुस्कुराई अपने पति उर्फ बेटे आदम को घर पर छोड़के ताहिरा मौसी से मिलने चली गयी....अब घर में सिर्फ़ दो ही लोग थे....
लाजो ने आदम की तरफ देखा जो उसे देखके मुस्कुरा रहा था...
."अब तो जगह भी है आपके पास और वक़्त भी"......
.."ह्म सही कहा लाजो तो फिर काए को ये वक़्त ज़ाया होने दे".....
.लाजो ये सुनके खिलखिलाए हंस पड़ी....
उसने तुरंत पास जाके दरवाजे की कुण्डी लगाई और फिर एका एक आदम के करीब आई...
लाजो : खाना अभी बना दूँ बाबू की बाद में खाएँगे
आदम : पहले तो जो अधूरा रस्पान करना रह गया था उसके लिए तो वक़्त दो
लाजो : बाबू हामका लज्जा आवत है (मुझे शरम आती है)
आदम : पगली आज शरमाना नही आज खुलके मुझे मज़ा दो तुम...
."अरे कल ही तो आपकी शादी हुई और आज कैसे मुझपर टूट ना पड़ना चाहते है".......
"मैं तो तुझपे निशा के टाइम से ही टूट पड़ना चाहता था तेरे पसीने की महेक मुझे पागल कर देती है".......
."छी बाबू ये क्या कह रहे है?"........एका एक लाजो के गाल शरम से लाल हो गये....
."छी बाबू ये क्या कह रहे है?"........एका एक लाजो के गाल शरम से लाल हो गये....
आदम : तुम कमरे में जाओ मैं दो बियर भरके ग्लास लाता हूँ पियोगी
लाजो : बाबू आप कहते तो ताड़ी ले आती
आदम : अरे ताड़ी की क्या ज़रूरत? वो किसी और दिन अगर ताड़ी पीली तो होश नही संभाल पाउन्गा और तुम मुझे नही जाओ कमरे में मैं आ रहा हूँ
लाजो एका एक अपनी साड़ी को ठीक किए कमरे में चली गयी.....बियर की दुकान पास में पड़ती थी इसलिए उसने बिना झिझके फॉस्टर की बियर लाई और फिर ग्लास में ढाला...उसके बाद ट्रे में दो ग्लास बियर लिए कमरे में आया तो उसके जैसे आँखे फॅट गयी...
सामने लाजो बिस्तर पे नंगी लेटी हुई थी और उसकी साड़ी ब्लाउस पेटिकोट एक ओर था...आदम ने मुस्कुरा कर ट्रे बिस्तर पे ही रख दिया...एक बार उसके बदन का जायेज़ा लिया अफ लाजो के मोटे काले निपल्स और गोरी गोरी चुचियो को दबाए कैसे उसे तडपा रही थी?
दूसरी ओर उसकी टाँगों के बीच फूली हुई साँवली सी चूत जैसे पनिया रही हो....उसने एक ग्लास लाजो को दिया और खुद एक ग्लास लिए बैठ गया....
लाजो ने पहले पहले मुँह कड़वा किए पिया और उसके बाद धीरे धीरे उसको सुरूर जैसे चढ़ने लगा....आदम जानता था अब चुदाई के धक्को का दर्द वो आसानी से झेल सकती थी ...
आदम ने ग्लास खाली किया और डकार मारते हुए अपने कपड़े भी एक झटके में उतार लिए पाजामा नीचे खिसकाते ही उसका मोटा तना हुआ लंड झुलके जैसे लाजो को सलामी देने लगा....
लाजो : हाए दय्या ये कितना मोटा और लामा पहले से लग रहा है उफ्फ इसके इर्द गिर्द कितने नसें चढ़ि हुई है
आदम : ये तुम्हें देखके काबू से बाहर हो रहा है लाजो
लाजो ने उसे हाथो में लिए आगे और पीछे की ओर मसला और फिर उसे जैसे नापा...उसकी अनुमान से कयि हिसाब वो बड़ा और मोटा था...वो उसे बेहद गौर से देखते हुए अपना मुँह खोले उसे एक ही झटके में मुँह में लेके चूसने लगी.....म्म्म्मम म्म्मस्सलूर्रप्प्प्प....लंड बड़ी मुस्किल से वो अपने मुँह में ले पा रही थी पूरा मुँह में जैसे उसका लंड भर गया था....वो हल्के हल्के से लंड को चुसते हुए उस पर दाँत घिस्स रही थी....
आदम ने लाजो के सर को कस कर पकड़ा और उसके मुँह के अंदर बाहर अपना लंड करने लगा...लाजो भी बड़े प्यार से उसका लंड चुस्सें जा रही थी...."उफ़फ्फ़ सस्स"......आदम ने सिसकी लेते हुए कहा....लाजो की मुँह की गर्मी उसे बर्दाश्त नही हो रही थी...लाजो उपर उसकी तरफ देखते हुए अंडकोषो को भी सहला रही थी...
जब लाजो ने लिंग को अपने मुँह से बाहर निकाला तो वो थूक से गीला था..उसे अपने हाथो में लेके आगे पीछे कस कर मुत्ठियाते हुए लाजो मुस्कुराइ...आदम ने लाजो को लिटाया और उसके कुल्हो को जैसे हवा में किया उसकी टाँगों के बीच ओबीच फूली सूजी हुई चूत पे अपना मुँह
रख दिया....उसे अपनी जीब से चाट्ता हुआ उसमें लगातार उंगली भी करने की कोशिश करने लगा...
लाजो को आदम की गरम जीब का अहसास अपनी चूत की फांको में महसूस हुआ तो वो जैसे सिहर उठी...
लाजो : ससस्स धीरे करिए ना बाबू सस्सस्स खुजली सी हो रही है सस्स आहह उम्म्म (आँखे मूंदते हुए)
आदम : सस्स म्म्म्मम स्लूर्रप्प्प वाहह लाजो सस्स तेरी चूत तो अभी से ही गीली हो रही है ?(चूत पे मुँह रगड़ते हुए उस पर जीब डालते हुए)
लाजो : आहह स्स आपके छूने से ही मेरी वो जगह गीली हो जाती है (अपनी छातियो को दबाते हुए)
आदम : हाहहा ससस्स ढीला छोड़ो अपनी चूत को एम्म्म ससलूर्रप्प्प्प (आदम ने चूत की दरारो को अच्छी तरह ज़ुबान से चाट चाटके गीला कर दिया था)
वो एक झटके में उठा और उसने तीन उंगली अंदर सर्कायि...."सस्स आहह नहिी".....लाजो के चेहरे पे दर्द भरे भाव आए और उसने कस कर आदम के हाथ को जकड़ा...
"ससस्स अरे रानी इसी में तो मज़ा है ससस्स थोड़ा सा से ले फिर मज़ा ही मज़ा मिलेगा"........आदम चूत में उंगली करता हुआ दाने को भी चुस्स रहा था...
"आहह हहाए दय्याअ ससस्स उफ़फ्फ़"..........सिसकते हुए लाजो ने गुलाबी निगाहो से अपनी चूत के अंदर बाहर हो रही उंगली को देखा
फिर आदम ने उंगली बाहर की और मुट्ठी में लेके चूत को जैसे कसा....और उसे दो-तीन बार बार कस्स कस के मसला...तो लाजो जैसे झरने
लगी....उसकी चूत से गीला रस दरारो से बाहर बहने लगा....आदम ने उसे अपनी गोद में उठाया और उल्टा करके उसकी गान्ड की दरारो
और चूत पे अपना मुँह रख दिया...दोनो छेदों को जीब से चाटते हुए वो जैसे लाजो को उत्तेजित करना चाह रहा था...
लाजो को उल्टे टाँगे होने से चक्कर आने लगे फिर भी उसने अंडकोषो पे अपने ज़ुबान चलाए रखा और बारी बारी से उल्टे लटके दोनो अंडकोषो को चूस डाला. फिर उसके चेहरे पे लग रहे लिंग को भी हाथो में लेके मुँह में लेके कुछ देर तक चुस्सा....जिससे आदम को भरपूर मज़ा मिलने लगा...
कुछ पल में उसने लाजो को लेटा दिया और फिर अपनी लंड पे दराज़ से निकाली एक्सट्रा डॉटेड कॉंडम चढ़ाई.....लाजो ने अपनी टांगे फैला ली ये देखते हुए...आदम ने उस दिन का अधूरा काम आज पूरा करना था...
उसने एक टाँग लाजो की अपने कमर पे रखी और एक करारा धक्का दे मारा."उईईइ सस्स आहह हाए ई दाययी एम्म"......लाजो जैसे दर्द के
मारे रो पड़ी उसकी साँस जैसे उखड़ गयी....आदम ने उसके गले को दबोचा और नितंबो पे दबा दबा कर धक्के पेले...
चूत को फाडे लंड उसकी दरारो के अंदर बाहर जा रहा था....शायद लाजो पहले से चुदि हुई थी लेकिन उसे ये अहसास नही हुआ कि लॉडा अभी आधा ही गया था....आदम ने कोई रहम नही पेश की उसने लाजो की दोनो कलाईयो को मोड़ा और उसे पेट के बल लेटा दिया...उसने कस कर एक करारा धक्का मारा तो लॉडा जड़ तक चूत की दरारो को फाड़ता हुआ अंदर दाखिल हो गया एक पल को उसने पकड़ मज़बूत कर ली...तो आदम को अपना लंड किसी सख़्त दीवारो में जकड़ा महसूस हुआ...उसे कुछ कुछ गीला गीला भी अपने लंड के निचले पर लगा महसूस हुआ
उसने वैसी ही हालत में लाजो की जमके चुदाई करनी चालू की....लाजो पेट के बल लेटी दबी आवाज़ में चिल्ला रही थी.....उससे दर्द शायद
बर्दाश्त नही हो रहा था....आदम धक्को पे धक्का मारे जा रहा था....शायद आज उसने लाजो का कुँवारापन पूरी तरीके से छीन लिया था
लाजो : अफ हाए दय्या आहह उम्म्म उर्गघ सस्स बाबू बस भी कीजिए बहुत्त्त दर्द हो रहा है
आदम : लाजो बस थोड़ा सा सह ले उफ्फ इस वक़्त मैं चाह कर भी तेरी चूत के भीतर से अपना लॉडा नही निकाल सकता..उफ्फ तेरी चूत किसी गरम भट्टी तरह आग उगल रही है सस्स जलन हो रही है मुझे सस्स लगता है तेरी टाइट चूत मारने के चक्कर में मेरा लंड कही छिल गया आहह ससस्स
पर आदम धक्के मारे ही जा रहा था..लाजो वैसी ही लेटी लेटी चुदि जा रही थी....उसकी दर्द भरी आहें काफ़ी देर तक चली कुछ देर बाद वो
थोड़ा थोड़ा रिलॅक्स होने लगी...उसके बाद उन दर्द भरी आहों में सिसकियो की आवाज़ में परिवार्तन होना शुरू हो गया.....