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Incest माँ को पाने की हसरत

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लाजो : आहह उम्म मसस्स आहह उम्म्म (जैसे नज़ाकत से वो लंड को अपने भीतर महसूस किए तड़प रही हो)

आदम ने कस कर दो तीन धक्को में उसके छेद से बाहर लंड को खीचा और उसकी दरारो को काफ़ी चौड़ा और खुला पाया....कॉंडम पे खून

\ के लत्ते जैसे लगे हुए थे....आदम ने चुटकी से वो कॉंडम उठाया और फ़ैक् दिया...फिर एक कपड़ा से छेद के भीतर तक हल्का हल्का

पूरी चूत को जैसे सॉफ किया.....

फिर उसने अपने लंड पे थूक मला...और कोशिश की उसे बिना कॉंडम के चोदने की...उसने लाजो को सीधा अपने उपर लिटाया...और चूत की दरारो में अपना लंड प्रवेश किया...चूत की दरार जैसे लंड को भीतर लेते हुए कसती जा रही थी...अब लाजो के कूल्हें अंडकोषो पे जैसे दबे हुए थे.....अब आसानी से लंड अंदर बाहर हो पा रहा था...

"अफ अफ आहह आहह आहह आहह सस्सस्स ससस्स"......सिसकती और दर्द में आहें निकालती हुई लाजो आदम के उपर जैसे चढ़ि चुद रही थी...आदम ने उसे कस कर दोनो पेट के आज़ु बाज़ू के हिस्सो से पकड़े हुए था...

वो धक्के नीचे से पेल रहा था....लाजो हर धक्को में जैसे काँप उठती और पश्त पड़ जाती...कुछ ही देर में जब आदम को अहसास हुआ कि उसका निकलने वाला है तो उसने लाजो को फ़ौरन अपनी गेरफ्त से आज़ाद करते हुए उसकी चूत से लंड बाहर निकाला और सीधा उसके मुँह में अपना लंड दे डाला...

पहले लाजो को घिन सी आई पर फिर उसने हल्के हल्के खुद लंड को चुस्सना शुरू किया कुछ ही पल मे लंड को मुठियाते हुए आदम दहाड़ने लगा.....और उसके मुँह के भीतर ही अपना वीर्य उगलने लगा....लाजो ने ख़ास्ते हुए वीर्य को अपने मुँह से वॉशबेसिन में जाके उगल

दिया...फिर उसके नमकीन स्वाद को चख कर मुस्कुराइ...

आदम : मर्द का दूध है लाजो इसे पीने से कुछ नही होता आज तू औरत बन गयी

 
लाजो की टाँगों में बुरी तरीके से दर्द उठ रहा था....आदम ने उसे अपने साथ लेटा दिया फिर पानी उबाल हल्के हल्के मोटे कपड़े से उसकी

चूत की सिकाई की....लाजो को इससे थोड़ी राहत हुई...लेकिन कुछ पल के लिए क्यूंकी उसके बाद उसे आदेश अनुसार घोड़ी बनना पड़ा अपने मालिक के लिए ....

आदम ने पीछे से उसके नितंबो पे ढेर सारा ल्यूब लगाके उसे चिकना किया और फिर निरोधक चढ़ाए लौडे को उसके नितंबो की छेद में धीरे धीरे दाखिल करना शुरू कर दिया....

"ससस्स हहा हहू".....लाजो दर्द के मारे तड़प उठी थी....उसे मालूम नही था कि चूत से भी ज़्यादा भयंकर दर्द गान्ड में डालने से होता है....उस तक़लीफ़ को वो सह नही पा रही थी...

लेकिन आदम बुरी तरीके से उसे अपने आलिंगन में जकड़े हुए था...उसने कस कर एक करारा धक्का मारा और पूरा 8 इंच का लंड उसके मुआने के भीतर तक घुसा दिया...लाजो तड़पने लगी दर्द से भीख माँगने लगी...पर आदम ने उसकी पीठ को चूमते हुए उसे शांत किया....

"आहह स्सा आहह चोदिये आहहस स आहह चोदिये चोदिये बाबू आहह"........कुछ घंटे बाद जैसे लाजो अपनी गान्ड के भीतर से अंदर बाहर

हो रहे लंड के झटके को सहते हुए लज़्जत पाए दहाड़ उठ रही थी...

उसकी सिसकिया कमरे से बाहर जा रही थी..दोनो को दिन की जैसे परवाह नही थी लाजो के बालों को कस कर जकड़े हुए आदम उसके चुतड़ों के बीच लंड अंदर बाहर किए उसे पागलो की तरह चोद रहा था....उसने आगे बढ़के दोनो लाजो के लटकी चुचियो को दबाते हुए उसे जैसे कस कर एक करारा धक्का मारा

तो लाजो का पूरा बदन काँप उठा वो बिस्तर पे जैसे ढेर हो गयी...आदम कस कस कर धक्के पेलता रहा जब तक उसके लिंग ने जवाब ना दे

दिया...उसने कस कर लाजो के दोनो कंधे को जकड़े हुए एक ज़ोरदार दहाड़ लगाई और अपनी वीर्य की पिचकारिया मुआने के भीतर

निरोधक में ही छोड़ने लगा...जब वो सांखलित हुए काँपते हुए लाजो के पसीने पसीने बदन पे ढेर हुआ...तो दोनो को जैसे राहत मिली....लाजो इस भीषण चुदाई से बहुत ज़्यादा तक कर चूर हो चुकी थी......आदम ने उसकी गान्ड से पच की आवाज़ के साथ लॉडा बाहर खीचा फिर

निरोधक खीचके एक ओर फ़ैक् दिया और बिस्तर पे सीधा लेट गया....लाजो कुछ देर के लिए निद्रा अवस्थां मे चली गयी हो भी क्यूँ ना बुरी

तरह थक गयी थी वो इस भीषण चुदाई से

 
करीब करीब 1 घंटे बाद जब आदम की नींद खुली तो उसने पाया कि बिना दरवाजा लगाए लाजो सामने ही हॅगने की मुद्रा में घुटने मोडे हुए टाय्लेट में बैठी पेशाब कर रही थी...फिर वो उठके कमरे में टाँगें फैलाए हुए आई और सीधे आदम के बदन से जा लिपटी...आदम ने उसके

बालों पे हाथ फेरते हुए उसके गाल को चूमा

आदम : अभी ठीक है

लाजो : हां

आदम : तू तो औरत से भी ज़्यादा सहने वाली बंदी है एक सांड़ को तूने आज झेल लिया मानना पड़ेगा

लाजो : सच में बाबू जी पर सच में गान्ड दर्द से फॅट रहा है

आदम : कुछ दिन करेगा सिकाई मुकम्मल तरीके से करना ठीक हो जाएगा

आदम : बस हमारी माँ ना जान ले

लाजो : अरे बाबू कुछ नही होगा (उसकी चुचियो को भीचते हुए लाजो मुस्कुराइ उसकी इस हरकत पर)

दोनो एकदुसरे के बदन से जैसे लिपट गये....

लाजो और मैं काफ़ी देर तक सुस्ता गहरी नींद की आगोश में बिस्तर पर पड़े हुए थे.....जब हमे होश आया तो लाजो को उठने में थोड़ी तक़लीफ़ हो रही थी कह रही थी कि उसका अंग अंग दर्द से फॅट रहा है....मैने ही खुद उठके वक़्त देखा तो शाम 4:20 हो गया था हमारे पेट

में अन्न का एक दाना भी नही था ऐसा जो काम क्रीड़ा में खोए हुए से थे कि सबकुछ भूल गये थे.....

फिर उबला पानी किया और लाजो के सूज गये कुल्हो के बीच और फूली चूत की मैने आहिस्ते आहिस्ते से सिकाई की...हम दोनो का जोश जैसे ठंडा हो गया था....इसलिए लाजो वैसे ही बिस्तर पे नंगी लेटी टांगे खोले पश्त पड़ी हुई गरम गीले कपड़े की सिकाई से सिसकिया ले रही थी...

 
कुछ देर बाद मैने उसे गोदी में उठाया वज़नदार औरत थी इसलिए बड़ी मुस्किल से उसे अपनी बाहों की गेरफ्त में जैसे तैसे गोदी उठाए बाथरूम के पास लाया तो उसने खड़े खड़े ही अँग्रेज़ी टाय्लेट सीट के पीट में अपनी चूत से पेशाब की मोटी धार छोड़ी....फिर उसने मुझसे कहा की उसे कस कर टट्टी भी लगी है तो मैने उसे किसी तरह टाय्लेट सीट पे बिठाया

तब तक मैं बाहर आ गया कह दिया था उसको कि आवाज़ दे देना मैं बाहर आके तुझे फिरसे गोदी में उठाके बाहर ले आउन्गा....मैने बाहर का जायेज़ा लिया और एक बार माँ को कॉल लगाया कि अगर वो आ रही है कि नही? तो उन्होने ताहिरा मौसी ने कहा कि वो खा पीके सो रही है...तो मेरी जान में जैसे जान आई....

संडास घर से मुझे लाजो की प्रर्र प्रर की आवाज़ उसके नितंबो के छेद से निकलती सुनाई दे रही थी....वो पाद छोड़ रही थी जब मैं अंदर आया तो वो मुट्ठी कस कर ज़ोर लगा लगाके मल त्याग रही थी उसके चेहरे पे दर्द के भाव थे....शायद गान्ड की सील टूटने से उसे मल त्यागने में काफ़ी पेन हो रहा था...."आहह बाबूजी जब टट्टी निकल रही है छेद से तो काफ़ी दर्द हो रहा है".......उसने दर्द भरे लहज़े में बैठे बैठे कहा

आदम : अरे लाजो होता है शुरू शुरू में अभी तेरी गान्ड एकदम कुँवारी थी तेरे पति ने सिर्फ़ तेरी चूत को ही छेद रखा था ; उसे भी मैने पूरी तरीके से खोल दिया और तू तो टॅटगढ़ (ताक़तवाली) है जो मुझे झेल ली तेरे जैसी ही औरत इस लंड की दासी बन सकती है (लाजो दर्द में भी जैसे लज्जा पाई )

लाजो ने उसी वक़्त ज़ोर से पाद मारी तो मुझे पूरे संडास घर में उसकी गूँजती आवाज़ के साथ साथ मनमोहक पाद की महेक मिलने लगी....ऐसा लग रहा था जैसे उसे फिर उल्टा करू और अपना 8 इंच का लंड उसकी गान्ड की छेद में दुबारा घुसा के उसे तबीयत से चोदु....लेकिन लाजो उस वक़्त लेने के काबिल नही थी...

जब लाजो फारिग हुई तो उसे समझ नही आया कि अपने गुप्तांगो को कैसे धोए?.....मैने आगे बढ़ते हुए पास रखा टॅप हाथो में लिया और उसका बटन ऑन किया...उससे पानी की मोटी धार ठीक उसके झुका देने से उसके नितंबो के बीच लगने लगी....मैने अपने ही हाथो से उसकी गुदा द्वार को धोया और फिर छेद को भी हल्का सा टटोला...वाक़ई मल त्याग ने के बाद भी जैसे छेद एकदम चौड़ा हो गया था....मैने फिर वॉशबेसिन में अपने हाथ धोए टॅप हॅंडल पे रखा....और फिर उसे नितंबो से सख्ती से थामते हुए अपनी गोद में उठाके पूरी ताक़त से कमरे में ले आया....

 
लाजो : बाबू आपको हमारी वजह से काफ़ी कष्ट हो रहा है ना

आदम : अरे नही नही लाजो बल्कि माँफी मुझे माँगनी चाहिए जो कि मैं खुद पे काबू ना रख सका....(लाजो फिर उठने का धीरे धीरे प्रयास करने लगी)

मैने दराज़ से एक ट्यूब निकाली जो कि माँ अक्सर हमारे बीच किसी भीषण चुदाई के वक़्त उनकी चूत या गुदा छेद छिल जाती थी तो उसका प्रयोग करती थी..मैने ट्यूब से थोड़ा सा क्रीम निकाला और उस मलम को अपने हाथो से लाजो की गान्ड के छेद के आस पास लगाने लगा

फिर चूत के उपरी मुआने पे और थोड़ा भीतर लगाया....जिसकी ठंडक से लाजो शांत पड़ गयी..और वो पेट के बल लेटी ही रही...

मैं फिर मूतने गया जाके देखा कि टाय्लेट पिट पे लाजो के त्यागे मल पर खून और कुछ चिपचिपा सफेद सफेद पदार्थ लगा हुआ था...मैने झट

से फ्लश ऑन किया जिससे टाय्लेट पिट एकदम सॉफ हो गया....मैं मुत्के जब बाहर लौटा तो देखा कि लाजो साड़ी पहने खाना बना रही थी...

आदम : अरे लाजो तुम्हारी तक़लीफ़ बढ़ जाएगी आराम कर लो

लाजो : ना बाबू ऐसा अगर करते रहेंगे तो फिर आलसी हो जाएँगे और अगर माँ ने हमारी चाल समझ ली तो फिर तो ग़ज़ब हो जाएगा वैसी भी

कुँवारी दुल्हन क्या पहली चुदाई के बाद काम नही संभालती

आदम : हा हा हा हा (मैं हंस पड़ा)

लाजो : आप जाके नहा धो लीजिए मैं खाना लगाती हूँ वैसे भी शाम हो रहा है अगर अंजुम काकी को मालूम चलेगा तो बहुत गुस्सा होगी मुझपे

की सही वक़्त पे आपको खाना ना दे सकी

आदम : अरे लाजो तू फिकर मत कर किसी को कुछ मालूम ना चलेगा चल ठीक है मैं नहाने जा रहा हूँ

लाजो : अच्छा बाबू (भिंडी की सब्ज़ी कढ़ाई में चलाते हुए)

 
वाक़ई वो दिन भी उन हसीन पलों में से था...जिसका मुझे उम्मीद नही था....रूपाली भाभी से भी दुगना मज़ा गाओं की किसी औरत से ऐसा मिल सकता है तो यक़ीनन मैं लाजो का ही मुरीद बन जाता....उसने जिस तरीके से मुझे खुश किया उसके बाद उसकी इज़्ज़त मेरी निगाहो में सिर्फ़ कामवाली की ना रही....एक तो वो मेरी मौसेरी ही सही सौतेली बहन थी...और दूसरी ही ओर मेरी अंजुम के बाद जगह लेने वाली उससे मुझे बहुत संतुष्टि प्राप्त हुई थी...

उस शाम गुसल करके जब मैं बाहर लौटा तो उसने दस्तर्खान बिछाके खाना लगा दिया वो खुद थाली लेके ज़मीन पे बैठ गई तो मैने उसे खूब डांटा..कि ये मतभेद और जात पात और छोटी सोच वाली ऐसी ज़लील हरकत मेरे सामने ना करना..तुम एक औरत हो और मेरे लिए मेरे परिवार की एक हिस्सा....लाजो शरमाई फिर उसने उठके मेरे साथ पलंग पे ही खाना खाया...उसके बाद 7 बजते बजते मैने उसे उसके घर तक बाइक से ड्रॉप कर दिया...हालाकी बाइक पे वो काफ़ी सटके मुझसे बैठी हुई थी जिससे मेरे बदन में ठरक उठ रही थी उसके साथ फिर करने को...

उस दिन के बाद से ही लाजो मेरी गुलाम हो गयी जैसे मेरी दासी हो आदेश अनुसार मेरे सामने वो पलक झपटते ही नंगी खड़ी हो जाती .मैने उसकी चूत और गान्ड को फाड़ फाड़ कर उसकी चुदाई कर करके उसके दोनो छेदों को लगभग चौड़ा कर दिया था....लेकिन उतना भी नही की उसका पति उसको तलाक़ ही दे दे

उसकी माँ को भी इस बाद का आभास ना हुआ...उल्टे उसे हमारे घर पे बहुत भरोसा था...इधर अंजुम के साथ ज़िंदगी अच्छी कट रही थी....लेकिन कमर में जब हल्का हल्का पेन होता तो वो खुद ब खुद मुझसे दूर हो जाती थी...जैसे मांयूस सी हो जाती कि चहके भी वो मुझसे हमबिस्तर नही हो पाएगी...मुझे बुरा लगता था लेकिन हम माँ-बेटे या यूँ कह लो पति पत्नी एकदुसरे से कब तक दूर रह पाते...ये तंन की

गर्मी हमे एकदुसरे से अलग ना कर पाती थी...मौका मिलते ही हम एकदुसरे को आलिंगन में अपने जकड लेते थे...

__________________

 
"माँ आज चलोगि?"..........

."कहाँ पे?"........

."आज दीपावली से पहले 10 दिनो का मेला लगा है चलते है ना".........\

."नही बेटा तू जा घूम फिर आ मुझे ज़्यादा चलने को डॉक्टर ने मना किया है ना"..........

."अरे माँ बाइक पे चलेंगे"........

."ना रे ना बहुत ही भीड़ होती है मैं ज़्यादा चल ना पाउन्गि".......

."अच्छा माँ पर मैं जा रहा हूँ क्यूंकी दिल्ली में तो कभी मेला नही देखा अब मेला तो ऐसे छोटे शहरो में ही लगता है"........

."ठीक है तो फिर तू घूम आ"......

.मैं थोड़ा मांयूस सा हो गया क्यूंकी माँ जाना नही चाह रही थी उसे वैसे भी शोर शराबा पसंद नही था...

मैं मेला पहुचा वाक़ई काफ़ी भीड़ लगी हुई थी...बड़े बुड्ढे बच्चे सब जैसे मज़ूद थे वहाँ...पर अकेले अकेले माँ के बगैर अच्छा भी नही लग रहा था....मैने देखा कि मौत का कुआ पे भीड़ लगी हुई है इसलिए मैं वहाँ खड़ा होके मौत का कुआ पे चलती गाड़ी और बाइक्स को गोल गोल

घूमते हुए देखने लगा...वाक़ई काफ़ी मज़ा आ रहा था मुझे....जब ज़्यादा भीढ़ बढ़ गयी तो पैसा देके मैं वहाँ से बाहर उतरा....

उसके बाद देखा कि जाइयंट वील चल रही है...सोचा कि उसका भी एक राइड ले लूँ आज जैसे मुझपे बच्पना सा चढ़ गया था...लेकिन फिर कदम ठिठक गये माँ होती तो मज़ा आता क्यूंकी उसमें दो जनों के बैठने लायक सीट्स थी...मुझे माँ के बगैर अच्छा ना लगा तो मैं दूसरी ओर चल पड़ा...अचानक देखता हूँ कि एक टेंट लगा हुआ है और इसके बाहर लिखा है सिद्दी बाबा मुझे लगा शायद जादू टोने वाला कोई जादूगर

हो....तो बाहर ही खड़ा एक लड़का सबको पर्चिया बाँट रह था...मेरे पास आके बोला "सर आप जाएँगे अंदर "......

.मैं ना नुकुर करने लगा...तो उसने कहा कि पैसे नही लेते वो काफ़ी पहुचे हुए है ऐसे ही लोगो के मश्तिक को देखके सबकुछ बता देते है...

मेरी थोड़ी क्यूरीयासिटी जाग गयी....पैसा नही लेने वाला ज़रूर कोई पहुचा हुआ होगा...सोचा अपने भविश्य के बारे में थोड़ा जान लूँ पर दिल नही मान रहा था फिर भी ना जाने क्यूँ पैर टेंट की तरफ बढ़े? मैं अंदर घुसा तो देखा एक औरत अपने पति के साथ निकल रही थी....पेट

उसका काफ़ी हद तक निकला हुआ था सॉफ था कि वो गर्भवती थी मैं थोड़ा आड़ में हो गया ताकि उसे धक्का ना लग जाए फिर उन दोनो के जाते ही अंदर दाखिल हुआ

एक लंबी लंबी दाढ़ी और बालों वाला ध्यान में जैसे आँखे मुन्दे लाल रंग का कपड़ा पहने हुए बैठा था...एक अज़ीब सी महेक आ रही थी शायद किसी अगरबत्ती की खुश्बू थी....उसके बीच जहाँ वो बैठा हुआ था वहाँ अज़ीबो ग़रीब सामान पड़े हुए थे एक पल को हुआ जादू टोना वाला तो नही....

 
तो उसने एकदम से मुस्कुराते हुए मेरी तरफ आँखे खोले देखा...तो मैं थोड़ा घबरा गया..."आओ बेटा बैठो आओ बैठो आदम बेटा".......उसे मेरा नाम कैसे मालूम था मुझे चौंकता देख वो फिर मुस्कुराया

बाबा : बेटा मुझे तुम्हारी ज़िंदगी अगला पिछला सब मालूम है बैठ जाओ आके डरो नही मैं कोई टोना टोक वाला काला जादूगर नही हूँ

मैं एकदम सखते में पड़ गया....एक पढ़ा लिखा इंसान था मैं लेकिन आज जैसे अंधविश्वास को यकीन में तब्दील होते देख रहा था...मैं उसके करीब बैठ गया...

."मन में तो हज़ार सवाल लिए आए हो क्या क्या पूछ पाओगे मुझसे?"...........

"आ..आपको कैसे मेरा नाम और सबकुछ मालूम है"........

"हाहाहा बस जो सिद्दी मैने प्राप्त की है ये उसी का नतीजा है खैर बेटा संकोच ना करो मैं पैसे नही लेता मैं उन पंखंडी बाबओ में से नही हूँ

फिर भी मन का सवाल अगर खुद ही पुछोगे तो शायद संतुष्ट महसूस करोगे"........

.मेरे से बोल ना बन पाया

मैं चुपचाप थोड़ा वक़्त खामोश रहा उसके बाद मैने अपनी चुप्पी तोड़ी...

आदम : बस भविश्य (जैसे गौर से देख रहे थे मुझे बाबा)

बाबा : ह्म तुम्हारा भविश्य तो तुम्हारी माँ बनी पत्नी के साथ प्युरे ज़िंदगी का वक़्त बीतना लिखा है बेटा

आदम : क्क...क्या? ये आप क्या कह रहे है? आप इतना कुछ (मेरी माँ का नाम लेने से और उसके साथ हुए शादी के बारे में उसे कैसे मालूम था? मैं एकदम शॉक्ड )

 
बाबा : मैने कहा ना मुझे अगला पिछला सब मालूम है इसलिए चिंता ना करो अगर कोई मुसीबत भी होगी तो भी तुम्हें अवगत करा देता वैसे तुम और तुम्हारी माँ का संबंध करीब 2 सालो से चल रहा था इस बीच तुम्हारी शादी हुई थी एक बेवफा औरत से उसने तुमपे बहुत दुख ढाए

आदम : जीि जब आपको मालूम है तो फिर मेरे कहना वाजिब नही फिर तो

बाबा : ह्म बहुत कष्ट में है वो उसका रिश्ता इसलिए टूट गया क्यूंकी वो माँ बन गयी और वो भी तुम्हारी संतान की

आदम : क्या? इसका मतलब

बाबा : तुम्हारे कुल 4 बच्चे है और ये सब तुम्हारे संबंध जोड़ने से हुए है पहला तुम्हारी मौसेरी भाभी के साथ जिसे तुम दिलो जान से प्यार अब भी करते हो जिसका नाम राहिल है और दो जुड़वा औलाद तुम्हारी तबस्सुम दीदी को तुमसे हुए है...और एक अब उस औरत को हुआ है तुम्हारा

आदम जैसे खामोश चुपचाप आँखे बड़ी बड़ी किए थूक घोंट रहा था बाबा जी को इसका मतलब ये भी मालूम था कि उसका व्यभाचारी रिश्ता है

बाबा : व्यबचार रिश्ता तुम्हारी ताहिरा मौसी से शुरू हुआ है उसके बाद फिर उसकी बहू यानी तुम्हारी भाई की बीवी उसके बाद तुम्हारी बड़ी बुआ की बेटी यानी तुम्हारी दीदी से और फिर अब एक सौतेली रिश्ते में लगी तुम्हारे घर जो काम करने आती है उससे जिसका नाम लाजो है

क्यूँ सही कह रहा हूँ ना (जैसे मुस्कुराते चले गये मुझे वाक़िफ़ करते हुए मैं सिर्फ़ हां में सर हिला रहा था)

बाबा : तुम वासना में डूबे रहने वाले लड़के थे तुम्हारी माँ की मुहब्बत ने तुम्हें बदला और ये सब चीज़ो से तुम्हें वाक़िफ़ एक वेश्या ने करवाया था जो मज़बूरी में वो काम में उतर गयी थी जिसका नाम चंपा था उसे तुम आख़िर में मिलने भी गये थे उसने गंदी बीमारी के वजह से अपना

दम तोडा था आख़िरत में उसने तुम्हें बहुत याद किया था...कहो सच कह रहा हूँ कि नही?

आदम : जब आप सब जानते है तो फिर कहना कैसा?

 
ऐसा लग रहा था जैसे मैं फिर किसी दुख में डूब सा गया था...बाबा ने मेरे कंधे पे एकदम से हाथ रखा और मुझे शांत होने को कहा फिर वो कुछ ऐसा बताने लगे जिसे मैं बड़ी गौर से सुन रहा था इस बीच खेमे में उसका शागिर्द आया तो बाबा ने उसे बाहर जाने को बोल दिया और कहा की 1 घंटे तक कोई अंदर ना आए...वो सुनके अनुमति लिए बाहर चला गया....

बाबा : तुम्हारी किस्मत में बार बार ऐसे संबंध बनना और व्याबचारी रिश्तो का आना साधारण बात नही थी वासना और काम क्रिया की हद जब बढ़ जाए तो वो संबंधो के हदो को पार कर जाती है और वो इन रिश्तो को नये नज़रिए से देखने लगती है...ये तुम्हारी किस्मत थी...लेकिन इन्ही रिश्तो के चलते तुम्हें अपने काई पुराने रिश्ते नातो को खोना भी पड़ गया....आज तुम भगवान की दया से अच्छा कमाते हो...और तुम्हारे

पास अब पत्नी के रूप में तुम्हारी माँ तुम्हारे साथ है ये आसान बात नही....दो आत्माओ का मिलन जैसे इस जनम में हुआ है....मुझे मालूम था

कि तुम यहाँ आओगे मैं तुम्हारा ही जैसे इन्तिजार कर रहा था ताकि तुम्हें मालूम चल जाए अपने वजूद के बारे में...

आदम : कैसा वजूद? (मैने एकदम से कहा)

बाबा : धीरज रखो मैं दिखाउन्गा तुम्हें तुम्हारी माँ अंजुम का इस जनम में तुम्हारे साथ होना कयि कठिनाइयो से तुम दोनो का गुज़रना (राज़ौल और निशा की आड़े आने की कहानी बताते हुए) इसलिए था कि इस जनम का तुम दोनो ने एकदुसरे से वादा किया था और भगवान ने तुम्हें

फिर एक संग मिलाया लेकिन चंपा आज इस जनम में तुम्हारे सामने वैश्या थी पर उस जनम में उसी के बदौलत तुम्हारी आत्मा तुम्हारी माँ की आत्मा से अलग हुई थी

आदम : क्क...क्या? चंपा पर आप ऐसा कह कैसे सकते है? उसने मुझे मेरी माँ के प्रति जो नज़रिया दिलवाया था उसमें पहले तो वासना थी लेकिन धीरे धीरे मैं माँ के प्रति उससे सच्चा प्यार करने लगा जैसे एक गैर मर्द एक औरत को करता है

 
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