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Incest माँ हुई बेटे के लंड की दीवानी complete

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Guest
माँ हुई बेटे के लंड की दीवानी

कैसे हो दोस्तो! जैसा कि आप सब जानते ही हैं मैं चुत का बहुत रसिया इंसान हूँ। मेरी बहुत सी कहानियाँ भी आप सबने पढ़ी हैं और पसंद भी की है।

मेरी कहानियाँ पढ़ कर मेरी एक महिला मित्र बनी जिसका नाम है रमिता खन्ना, दिल्ली की रहने वाली है। वो दिल्ली में अपने पति और सास के साथ रहती है। वैसे तो उसके पति हिमाचल के रहने वाले हैं पर नौकरी दिल्ली में होने की वजह से वो अब दिल्ली के दिलशाद गार्डन एरिया में कहीं रहते हैं।

अब आते है असली कहानी पर! यह कहानी मेरी नहीं है बल्कि रमिता के बताये गये किस्से पर आधारित है। वो बहुत दिनों से कह रही थी कि उसकी भी एक कहानी है और मैं उसे हिंदी में लिख कर आप सब को भेजूँ। पर समय ही मिल रहा था। आज तीन दिन की छुट्टी मिली तो सोचा कि आज यह शुभ काम कर ही दिया जाए। बस लैपटॉप उठाया और बैठ गया रमिता की कहानी लिखने।

रमिता 22-23 साल की जवान और खूबसूरत बदन की मलिका, कद पाँच फीट तीन इंच, बदन का एक एक अंग साँचे में ढला हुआ। अभी 8 महीने पहले ही उसकी शादी अशोक खन्ना से हुई जो दिल्ली की एक कंपनी में काम करता है।

अशोक भी 24 साल का हट्टा कट्टा नौजवान है। दिखने में सुन्दर और लम्बे मोटे लंड का मालिक। रमिता बहुत खुश थी अशोक से शादी करके। अशोक भी उसकी हर रात को रंगीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता था, खूब मस्त चुदाई करता था वो रमिता की।

परिवार का एक और अहम् सदस्य था अशोक की माँ साधना… उम्र 45 के आसपास पर बदन इतना मस्त कि अच्छी अच्छी कुँवारी लड़कियाँ भी पानी भरती नजर आयें। कद पाँच फीट, चुचे ऐसे जैसे हिमाचल की पहाड़ियाँ। पतला सपाट पेट मस्त उभरे हुए कूल्हे।

आप सोच रहे होंगे कि रमिता की कहानी में मैं उसकी सास की तारीफ क्यों लिख रहा हूँ? तो बता दूँ कि इस कहानी की मुख्य पात्र अशोक की माँ और रमिता की सास ही है।

कहानी की शुरुआत तब हुई जब एक दिन दोपहर में रमिता ने अपनी सास के कमरे से सिसकारियों की आवाज सुनी। उसने दरवाजे में से झाँक कर देखा तो दंग रह गई। उसकी सास साधना सिर्फ पेटीकोट में पलंग पर लेटी थी और एक हाथ की दो उँगलियों से अपनी चुत को रगड़ रही थी वहीं दूसरे हाथ से अपनी कड़क चुचियों को मसल रही थी। शायद वो झड़ने वाली थी तभी उसके मुँह से सिसकारियाँ फूट रही थी।

रमिता का ध्यान साधना की चुत पर गया तो देखा की साधना की चुत एकदम क्लीन शेव थी जैसे आज ही झांटें साफ़ की हो। पानी के कारण लाइट में चमक रही थी साधना की चुत। रमिता को आशा नहीं थी कि उसकी सास इतनी कामुक होगी।

बहू रमिता दरवाजे पर ही खड़ी रही और जब सास साधना झड़ कर शांत हो गई तो वो एकदम से दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो गई। रमिता को देख अस्तव्यस्त कपड़ों में पड़ी साधना एकदम से हड़बड़ा गई और उसने जल्दी से पास पड़ी साड़ी से अपने बदन को ढक लिया।

“अब क्या फायदा मम्मी जी… सब कुछ तो देख चुकी हूँ मैं!” रमिता ने हँसते हुए माहौल को हल्का करने के मकसद से कहा।

साधना तो जैसे शर्म से मरी जा रही थी।

रमिता जाकर साधना के पास पलंग पर बैठ गई- मम्मी जी, क्यों परेशान हो रहे हो… होता रहता है ये सब तो… ये सब तो प्राकृतिक है!

साधना अभी भी चुपचाप बैठी थी जैसे चोरी करते पकड़ी गई हो।

रमिता ने साधना को सामान्य करने के इरादे से हाथ बढ़ा कर साधना की चूची को अपने हाथ में लेते हुए कहा- क्या बात है मम्मी जी… आपकी चूची तो बहुत कड़क और मस्त हैं, देखो मेरी तो तुमसे छोटी भी है और इतनी मुलायम भी नहीं हैं.

कहते हुए रमिता ने साधना का हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया।

“क्यों शर्मिंदा कर रही हो बहू…” साधना के मुँह से पहली बार कोई शब्द निकले।

“अरे नहीं मम्मी जी… ये सब प्राकृतिक क्रिया है… होता है कभी कभी ऐसा कि सेक्स हावी हो जाता है… जब अशोक कभी टूर पर जाते हैं तो मेरे साथ भी ऐसा होता है। तब मैं भी उंगली करके ही शान्त होती हूँ।”

जब बहुत कुछ कहने करने पर भी साधना का मन नहीं बदला तो रमिता ने ये कहते हुए बात खत्म की कि आज से हम दोनों सहेली हैं। जब भी आपको ऐसी कोई जरूरत महसूस हो तो मुझे बताना मैं आपकी मदद कर दूँगी आपको शांत करने में और जब अशोक टूर पर होंगे तो आप मेरी सहायता कर देना।

कुछ दिन ऐसे ही बीते। रमिता पूरी तरह से सास को खुश करने में लगी रहती पर साधना रमिता के सामने शर्मा जाती और ज्यादातर चुप ही रहती।

फिर एक दिन अशोक को तीन दिन के लिए टूर पर जाना था, पीछे से सास बहू घर पर अकेली थी। रमिता ने सोच लिया था कि साधना को इन तीन दिनों में खोल देना है ताकि वो शर्मिंदा महसूस ना करें।

पहली ही रात को रमिता ने साधना को अपने कमरे में सोने को कह दिया। साधना ने मना भी किया पर रमिता नहीं मानी तो साधना को उसकी बात माननी ही पड़ी। रात को रमिता एक पतली सी नाईटी पहन कर सोने के लिए बेड पर आ गई पर साधना साड़ी पहने हुए थी तो रमिता ने उसकी साड़ी को खींच कर अलग लिया और एकदम आराम से सोने को कहा।

कुछ देर इधर उधर की बातें की और फिर रमिता ने अचानक अपनी नाईटी उतार कर एक तरफ उछाल दी। रमिता की इस हरकत से साधना स्तब्ध थी। इससे पहले कि वो कुछ बोलती, रमिता ने आगे बढ़ कर साधना के पेटीकोट कर नाड़ा खींच दिया और फिर बिना देर किये साधना के ब्लाउज के हुक खोलने लगी।

साधना ने रोकने की कोशिश की पर रमिता उसको पूर्ण रूप से नंगी करने के बाद ही रुकी। अब बेड पर दोनों सास बहू जन्मजात नंगी बैठी थी।

“अरे मम्मी जी… आप तो नई नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही है… आगे बढ़ो और मजा करो।”
 
“रमिता, तू बहुत बेशर्म है री… देख तो बेशर्म ने अपने साथ साथ मुझे भी नंगी कर दिया!”

“मम्मी जी अभी तो सिर्फ नंगी किया है आगे आगे देखो क्या क्या करती हूँ।”

“तू तो पूरी पागल है…” साधना शर्म से लाल हो गई थी। यह पहला मौका था जब वो अपने पति के अलावा किसी के सामने पूर्ण रूप से नग्न थी।

कपड़े उतारने के बाद रमिता साधना से लिपट गई और साधना के खरबूजे के साइज़ के चुचों को मसलने लगी। साधना कसमसा रही थी पर सच यही था कि उसको भी इस सब से उत्तेजना होने लगी थी। रमिता ने किसी मर्द की तरह ही पहले तो उसके चुचों को कस कस के मसला और फिर अपनी सासू माँ के तन चुके चूचुकों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। जैसे ही रमिता ने साधना के मम्मे चूसने शुरू किये, साधना तो जैसे जन्नत में पहुँच गई। सालों से सेक्स का मजा नहीं ले पाई थी साधना। जब भी ज्यादा बेचैन होती तो बस उंगली से चुत मसल कर पानी निकाल लेती। मूली खीरा बेंगन भी कभी प्रयोग नहीं किया था।

आज जब रमिता ने ये सब किया तो साधना को बहुत मजा आने लगा था। रमिता ऐसे ही सब कर रही थी जैसे अशोक उसके साथ करता था उसको गर्म करने के लिए। चूची चूसते चूसते रमिता ने एक उंगली साधना की चुत में पेल दी। साधना की चुत पूरी गीली हो चुकी थी उत्तेजना के कारण। जब रमिता की उंगली घुसी तो साधना मस्त हो उठी और उसके मुँह से आह्ह्ह निकल गई। साधना ने भी अब रमिता के चुचों को अपनी हथेली में दबोच लिया और मसलने लगी थी।

रमिता अब उसके चुचों को छोड़ नीचे की तरफ बढ़ने लगी थी। और फिर रमिता ने साधना की चुत पर जब अपने होंठ रखे तो साधना का पूरा बदन गनगना उठा। रमिता ने जीभ निकाल कर अपनी सासू माँ को खुश करने के लिए पूरी लगन से साधना की चुत चाटना शुरू कर दिया। साधना के लिए ये सब एक नया अनुभव था। रमिता की थोड़ी सी मेहनत से ही साधना की चुत से पानी का दरिया बहने लगा। रमिता के लिए भी ये अनुभव नया था क्योंकि आज तक उसने सिर्फ अपनी चुत चटवाई थी जबकि आज वो पहली बार किसी की चुत का मजा ले रही थी। इसी सोच के कारण रमिता भी उत्तेजित होने लगी थी।

रमिता अपनी सास की चुत चाटते हुए अपने चुचों को मसल रही थी। अब उसकी चुत में भी गुदगुदी होने लगी थी। जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने पलटी मारी और अपनी सासू माँ के ऊपर आकर 69 की पोजीशन बना अपनी चुत साधना के मुँह के ऊपर कर दी।

साधना भी समझ गई कि उसकी लाड़ली बहू क्या चाहती है और उसने भी रमिता की चुत में अपनी जीभ घुसा दी।

करीब एक घंटा सास बहूएक दूसरे से लिपट कर मजा लेती रही और फिर दोनों पस्त होकर लेट गई।

“रमिता… आज सालों बाद मेरा इतना पानी निकला है… चार बार झड़ी आज मेरी चुत…” साधना ने लम्बी लम्बी साँस लेते हुए रमिता से कहा।

“माँ जी… सच बताना, आखरी बार चुत में लंड कब लिया था आपने?”

“बहुत साल हो गये अब तो याद भी नहीं…”

“फिर भी बताओ ना?”

साधना ने अपनी कहानी रमिता को सुनानी शुरू की।

जब मैं स्कूल में पढ़ती थी तब अशोक के पापा से मेरी शादी हुई, वो तब नए नए फौज में भर्ती हुए थे, 19-20 के ही थे वो भी… दोनों ही नादान, सुहागरात को ना उन्हें कुछ पता था ना मुझे। पहली रात तो बस ऐसे ही बीत गई।

अगले उनके दोस्तों ने उनको बताया कि क्या कैसे करना है तब जाकर दूसरी रात को इन्होंने मेरी सील खोली। मेरी कमसिन सी चुत और उनका लंड सारी रात दोनों अन्दर डाल कर पड़े रहे। सुबह देखा तो पूरा बिस्तर खून से सना पड़ा था।

लगभग 20 दिन रहे हम साथ साथ, रोज तीन से चार बार चुदाई करते। फिर उनकी छुट्टियाँ ख़त्म हो गई और वो अपनी ड्यूटी पर चले गए।

बहुत याद आती थी उनकी!

मेरी ससुराल में भरा पूरा परिवार था। मेरी सास इतनी कड़क के उनकी नजर से ही डर लगता था मुझे। कभी इधर उधर नजर उठाने की हिम्मत भी नहीं हुई। दोनों तड़पते रहे। फिर धीरे धीरे आदत सी हो गई। वो छुट्टियों में आते और हम दोनों पूरा समय बस एक दूसरे में ही खोये रहते, पूरी पूरी रात हम चुदाई का मजा लेते, एक एक पल का आनन्द लेते।

फिर मैं पेट से हो गई, वो अपनी ड्यूटी पर थे जब मुझे अपनी कोख में पल रहे बच्चे का पता चला।

जब अशोक पैदा हुआ तो वो आये।
 
फिर उनकी ड्यूटी दूर बंगाल बोर्डर पर हो गई और वो एक साल तक नहीं आये। मैं भी अशोक के साथ व्यस्त रहने लगी। तीन साल तक वो जब भी आये तो हमारा मिलना सिर्फ रात को ही होता। दिन में तो बात भी नहीं होती।

जब उनकी ड्यूटी पठानकोट हुई तब हम दो साल साथ में फॅमिली क्वाटर में रहे।

जिन्दगी ऐसे ही चल रही थी, फिर तेरह साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई, तब से अब तक अकेले ही जिन्दगी काट रही हूँ।

“माँ जी… बुरा मत मानना… पर क्या इन तेरह साल में कभी आपका मन नहीं हुआ किसी से सेक्स करने का?”

“नही… अशोक की परवरिश ही मेरा मकसद बन गया था तो इधर उधर कभी ध्यान ही नहीं गया.”

“मतलब आप इतने दिनों से उंगली से ही काम चला रही थी?” रमिता ने सवाल किया।

“बताया ना कि कभी मन नहीं हुआ…”

“फिर उस दिन इतनी गर्म कैसे हो गई आप…”

“वो… वो… रहने दे ना बहू… तू भी क्या बात लेकर बैठ गई।”

“बताओ ना प्लीज…”

रमिता के बार बार कहने पर साधना ने बताना शुरू किया:

अब तू मेरी बहू के साथ साथ मेरी सहेली भी बन गई है तो तुझसे कुछ नहीं छुपाऊँगी… असल में उससे एक रात पहले जब मैं पेशाब करने के लिए उठी तो तू और अशोक चुदाई का मजा ले रहे थे। तुम्हारे कमरे से सिसकारियाँ आहें… और तुम्हारी पायल की छमछम की आवाज आ रही थी। मैं समझ गई थी कि मेरा बेटा अशोक मेरी बहू यानि तुम्हारी चुदाई कर रहा है। तुम्हारे कमरे का दरवाजा भी थोड़ा सा खुला हुआ था।

मैंने अपने आप को बहुत रोका पर फिर भी मैं अपने आप को रोक नहीं पाई तुम्हारे कमरे में झाँकने से। अन्दर का नजारा देखा तो मेरा तो सारा बदन सिहर उठा। अशोक अपने मोटे से लंड से तुम्हारी चुत बजा रहा था। मैं देखते ही एकदम से अपने कमरे की तरफ चली गई पर मेरा दिल बेचैन हो गया था। बहुत कोशिश की पर मन नहीं माना और मैं फिर से तुम्हारे कमरे के पास पहुँच गई और पूरे 20 मिनट तक मैंने अपने बेटा बहू की चुदाई का कार्यक्रम देखा।

चुत पानी पानी हो गई थी मेरी।

सारा दिन मेरे दिमाग में तुम दोनों की चुदाई का सीन ही चलता रहा। जब कण्ट्रोल नहीं हुआ तो उंगली से अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी की तभी तुम आ गई और मेरी चोरी पकड़ी गई।

“ओह्ह तो ये बात है…”

“बहू, प्लीज किसी सामने ये बात मत करना!”

“मैं समझ सकती हूँ माँ जी… ये भी तो शरीर की जरूरत है… जब मैं दो दिन भी अशोक से चुदे बिना नहीं रह सकती तो आपने तो फिर भी तेरह साल काटे है चुदाई के बिना… पर अब आप चिन्ता मत करो आप के बदन की यह जरूरत मैं पूरी कर दिया करूँगी।” कह कर रमिता साधना से लिपट गई और कुछ देर के लिए फिर से दोनों बदन से बदन रगड़ कर चुत से पानी निकालने लगी।

कहते हैं ना सेक्स की आग में जब मस्ती का तड़का लगता है तो ये बहुत ज्यादा भड़कने लगती है। लगभग एक महीना हो गया था दोनों सास बहू को… जब भी मन करता और समय मिलता दोनों कपड़े उतार कर बेड पर आ जाती मस्ती करने।

फिर एक दिन…

“रमिता मेरी जान… तूने मेरी आदत बिगाड़ के रख दी है… सेक्स की जो आग पिछले तेरह सालों से दबी हुई थी तूने उसको सुलगा दिया है.”

“तो क्या हुआ माँ जी… जब तक जिन्दगी है, मजे लो!”

“पर रमिता अब दिक्कत कुछ बढ़ती जा रही है.”

“मतलब.?”

“मतलब यह कि… कभी कभी जब सेक्स हावी हो जाता है तो फिर कण्ट्रोल नहीं होता.”

“तो क्या हुआ माँ जी… आपकी बहू है ना आपको मजे देने के लिए!”

“बात वो नहीं है रमिता…” साधना कुछ बेचैन सी होकर बोली।

“तो क्या बात है माँ जी… खुल कर बोलो… वैसे भी अब हम सास बहू से ज्यादा सहेलियाँ हैं!”

“अब कैसे बताऊँ…”

“अरे बिंदास बोलो ना माँ जी…”

“रमिता… जब से तूने मुझे ये लत लगाई है… मेरा दिल बेचैन रहने लगा है। अब रात को जब भी आँख खुलती है तो ध्यान तुम्हारे कमरे की तरफ ही जाता है। फिर ये सोच सोच कर चुत सुलगने लगती है कि तू तो अशोक के मोटे लंड से मजे ले रही होगी और मैं अकेली पड़ी अपनी चुत को उंगली से मसल रही होती हूँ.”

“ओह्ह… तो ये बात है… मतलब आप का भी मन करने लगा है अब लंड से मजे लेने का?”

“हट पागल… अब इस उम्र में लंड लेकर मैं क्या करुँगी.”

“मन करता है तो बताओ ना?”

“कुछ नहीं… छोड़ इस बात को!” साधना ये बोल कर अपने कमरे में चली गई।

रमिता को अपनी सास की बातों से यह तो महसूस हो गया था की साधना के मन में लंड लेने की चाहत है। पर दिक्कत यह थी कि वो अपनी सास को खुश रखने के लिए किसका लंड दिलवाए अपनी प्यारी सासू माँ को।

दिन बीतते जा रहे थे और अब साधना कुछ ज्यादा बेचैन रहने लगी थी। यह बात रमिता महसूस कर रही थी। रमिता ने साधना से कई बार इस बारे में बात भी की पर साधना हर बार टाल जाती।

एक दिन साधना ने रमिता से जो बोला वो सुन एक बार के लिए तो रमिता अचम्भित हो गई।

“रमिता वैसे तो मुझे ये बात नहीं कहनी चाहिए पर अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो एक बात बोलूँ?”

“बोलो ना माँ जी… पूछना कैसा?”

“रमिता मुझे कहते हुए शर्म महसूस हो रही है कैसे बोलूँ!”

“आप मेरी सहेली भी हो और सहेली से कोई बात कहने में कैसी शर्म?”

“रमिता… वो…”

“अरे बोलो ना?”

“रमिता… मैं चाहती हूँ कि तुम कोई ऐसा इंतजाम करो कि मैं तेरी और अशोक की चुदाई देख सकूँ!”

“माँ जी… आपने देखी तो है पहले भी?”

“अरे तब तो डर के मारे अच्छे से देख ही नहीं पाई थी… बस अब कुछ ऐसा कर कि शुरू से आखिर तक देखने का मौका मिले.”

“कोई नहीं… मैं करती हूँ कुछ इंतजाम!”

“तू बहुत अच्छी है रमिता… बहुत ख्याल रखती है मेरा!”
 
“एक बात तो बताओ सासू मां… आपके मन में कैसे ख्याल आया हमारी चुदाई देखने का?” रमिता ने पूछा।

“अब क्या बताऊँ… तू दिन में मेरे साथ मजा करने के बाद रात को अशोक के लंड का मजा लेती है तो कभी कभी तुम्हारे कमरे से मस्ती भरी सिसकारियाँ सुन मेरी चुत में भी आग सी लग जाती है… बहुत कोशिश करती हूँ अपने आप को रोकने की पर कण्ट्रोल नहीं होता है और सारी सारी रात करवटें बदल बदल कर कटती है। उंगली से भी शान्त करने की कोशिश करती हूँ पर आग नहीं बुझती। बस मन करता है तुम दोनों को चुदाई का मजा लेते हुए देखूँ और अपनी चुत में उंगली करूँ शायद कुछ शांति मिले!”

“ओह्ह्ह… ऐसी बात है… कोई ना मम्मी जी मैं कुछ इंतजाम करती हूँ… पर एक बात तो है…” रमिता कुछ कहते कहते रुक गई।

“अरे बोल ना क्या बात है?” साधना ने उत्सुकता से पूछा।

“मम्मी जी… एक बात बताओ कि अगर मेरी और अशोक की चुदाई देख कर आपका मन भी चुदने को करने लगा तो फिर क्या करोगी?”

यह सुन साधना चुप हो गई, इस बात का उसके पास कोई जवाब नहीं था।

चुप्पी रमिता ने ही तोड़ी- मम्मी जी… मुझे लगता है कि आपको भी अपनी चुत की आग को ठण्डा करने के लिए लंड की जरूरत है.

“हट पगली… तू फिर शुरू हो गई… अब मेरी उम्र थोड़े ही है लंड लेने की…” साधना ने शर्माते हुए कहा।

“माँ जी… लंड लेने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती… मैंने तो 80-80 साल की बुढ़िया का भी सुना है कि वो लंड लेती हैं। अगर आपको झूठ लग रहा हो तो नेट पर देख लो… जब तक चुत में आग है तब तक लंड लेने की लालसा औरत में रहती ही है. और एक बात लंड लेने से बूढ़ी भी जवान हो जाती है… उम्र रुक सी जाती है.”

“बस कर बहू… अब क्या मुझे चुदवा कर ही मानोगी… पहले ही चुत चाट चाट के मेरी दबी हुई आग को सुलगा चुकी हो तुम!”

“माँ जी आप इशारा तो करो… कोई ना कोई लंड भी खोज ही लेंगे आपके लिए!” रमिता ने हँसते हुए कहा।

“बहू… जब भरी जवानी में अशोक के पापा अकेले छोड़ के ड्यूटी पर जाते थे तब कोई लंड नहीं खोजा तो अब बुढ़ापे में खोज के क्या नरक में जाना है?”

“वो तो ठीक है माँ जी… पर अगर चुत में आग लगी है तो उसको तो ठण्डा करना ही पड़ेगा ना… नहीं तो बहुत ख़राब करती है ये आग!”

“बस कर… जैसे पिछले कुछ दिनों से तुम मेरी आग ठंडी कर रही है बस वैसे ही करती रह… अब लंड लेने की ना तो उम्र है और ना ही कोई चाहत!”

बात करते करते ही दोनों सास बहू बेड पर जल्दी ही नंगी हो गई और फिर शुरू हो गया एक दूसरे की चुत से पानी निकालने का मुकाबला.

शांत होने के बाद रमिता बोली- आप चिन्ता ना करो, आजकल में ही मैं आपको मेरी और अशोक की चुदाई का लाइव टेलीकास्ट दिखाती हूँ और फिर जल्दी ही आपकी चुत के लिए भी एक मोटे लम्बे लंड का इंतजाम करती हूँ.

“मुझे नहीं चाहिए किसी का लंड… इस उम्र में बदनाम करवाएगी क्या कमीनी…”

“चिन्ता ना करो माँ जी… बदनामी नहीं होने दूँगी आपकी… आपके लिए ऐसा लंड देखूँगी जिसमे बदनामी का कोई डर ना हो…” कह कर रमिता उठ कर अपने कमरे में चली गई।

साधना अभी भी बेड पर नंगी पड़ी अपने चुचे मसलते हुए सोच रही थी कि क्या उसकी बहू सच में उसके लिए लंड का इंतजाम करेगी? और अगर करेगी तो किसका? ऐसा कौन है जिससे चुदवाने पर उसकी बदनामी का खतरा कम है?

यही सोचते सोचते उसकी आँख लग गई।

शाम को सात बजे उसकी आँख खुली तो अपने आप को बेड पर नंगी पड़े देख वो शरमा गई और जल्दी से उठ कर उसने अपने कपड़े पहने और बाहर आई।

अशोक ड्यूटी से आ चुका था।

साधना का दिमाग एक बार फिर ये सोच कर धक् रह गया कि अगर अशोक उसके कमरे में आ जाता और अपनी माँ ऐसे नंगी पड़े देख लेता तो वो उसके बारे में क्या सोचता!

पर बाहर सब कुछ सामान्य था।

ऐसे ही दो तीन दिन बीते। फिर एक सुबह रमिता ने साधना को बताया कि आज रात को तैयार रहना मेरी और अशोक की चुदाई देखने के लिए। सुनते ही साधना की दिल की धड़कनों ने शताब्दी एक्सप्रेस की स्पीड पकड़ ली। वो शरमा भी रही थी और मन भी कर रहा था वो चुदाई का नजारा देखने का।

साधना के लिए तो शाम तक का समय काटना पहाड़ जैसा हो गया था। शर्म के मारे कुछ कह नहीं रही थी पर नजर घड़ी पर ही थी कि कब रात होगी और कब वो लाइव चुदाई देखेगी। चुदाई भी किसकी… अपनी बहू और बेटे की।

शाम हुई, अशोक घर आ गया, सबने खाना पीना किया, सोने की तैयारी होने लगी।

साथ ही साथ साधना की बेचैनी और दिल की धड़कनें भी बढ़ने लगी। अशोक अपने कमरे में जाकर टीवी देखने लगा।

तभी रमिता साधना के कमरे में आई और उसको अपने साथ चलने को कहा। साधना बिना कुछ बोले उसके साथ चल दी। रमिता के कमरे के दरवाजे पर जाकर रमिता ने साधना को रुकने को कहा और बोली कि जब मैं बोलूं तब अन्दर आ जाना।

साधना दरवाजे पर खड़ी रमिता के बुलावे का इंतज़ार करने लगी, एक एक पल भारी हो रहा था, अजीब सा डर भी था कि कहीं अशोक को पता लग गया तो क्या होगा। चुदाई देखने की ललक उसकी चुत से पानी के रूप में टपक रही थी जो उसे वही खड़े रहने को मजबूर कर रही थी।

दस मिनट बाद रमिता के कमरे की लाइट बंद हो गई। उसने सोचा कि अब तो लाइट भी बंद हो गई शायद रमिता का प्लान फेल हो गया है, वो मुड़कर वापिस अपने कमरे की तरफ जाने लगी।

तभी रमिता कमरे से बाहर आई और साधना का हाथ पकड़ कर कमरे में ले गई।

कमरे में नाईट बल्ब जग रहा था, अशोक भी बेड पर नहीं था।
 
रमिता ने दबी आवाज में बताया कि अशोक बाथरूम में है। उसने साधना को चुपके से एक परदे के पीछे छुपा दिया। रमिता ने परदे के पीछे एक कुर्सी रख कर साधना के बैठने की व्यवस्था भी कर रखी थी।

साधना अपनी बहू के प्यार और समझदारी पर गदगद हो गई थी। साधना ने रमिता को लाइट जला कर सब करने को कहा।

तभी बाथरूम के दरवाजे पर हलचल हुई तो रमिता पर्दा ठीक करके वापिस बेड पर जाकर बैठ गई।

अशोक बाथरूम में से सिर्फ अंडरवियर में बाहर आया, आते ही वो भी बेड पर रमिता के पास बैठ गया। रमिता जो अपनी सासू माँ को गर्मागर्म लाइव चुदाई दिखाने को लालायित थी वो खुद ही अशोक से लिपट गई और अपने होंठ अशोक के होंठों से जोड़ दिए।

“क्या बात है मेरी जान… आज तो मेरे कुछ करने से पहले ही गर्म हो रही हो?”

“बात मत करो… बस शुरू हो जाओ… आग लगी पड़ी है नीचे चुत में…”

“ओके मेरी जान… तुम्हें तो पता ही है कि मैं तो खुद तेरी चुत का हरदम प्यासा रहता हूँ।”

फिर आगे रमिता ने अशोक को कुछ बोलने नहीं दिया और एक बार फिर अपने होंठ अशोक के होंठों से मिला दिए। उधर साधना की चुत भी कार्यक्रम के शुरू में ही गीली हो गई थी। मात्र चार फीट की दूरी से वो आज अपने बेटे बहू की लाइव चुदाई देखने वाली थी।

उधर अशोक ने रमिता के बदन से उसकी नाईटी उतर कर साइड में फेंक दी। रमिता नाईटी के नीचे बिल्कुल नंगी थी। उत्तेजना उसे भी हो रही थी ये सोच कर कि आज उसकी चुदाई देखने वाला कमरे में मौजूद है।

रमिता को नंगी करते ही अशोक उसकी चुची का मर्दन करने लगा और फिर एक चूची को मुँह में लेकर चूसने भी लगा। रमिता के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगी थी। साधना का हाथ भी अपनी साड़ी में घुस कर चुत को सहलाने लगा था।

रमिता का हाथ अब अशोक के अंडरवियर में घुस कर उसके लंड से खेल रहा था। साधना बड़े ध्यान से अशोक के लंड के अंडरवियर से बाहर आने का इंतज़ार कर रही थी। पहले जब उसने छुप कर रमिता और अशोक की चुदाई देखी थी तब उसे सिर्फ अशोक के लंड की एक झलक मात्र देखने को मिली थी पर आज वो अशोक के लंड को मात्र चार फीट की दूरी से चमकती लाइट में देखने वाली थी। ना जाने क्यों उसका मन कर रहा था कि रमिता अब जल्दी से अशोक का लंड बाहर निकाले और आगे की कार्यवाही शुरू करे।

तभी जैसे रमिता को साधना के मन की आवाज सुनाई दे गई और उसने एक झटके के साथ अशोक का आठ इंच लम्बा और लगभग तीन इंच मोटा लंड बाहर निकाल लिया। अशोक का लंड रमिता के हाथ के स्पर्श से लगभग तन चुका था। अशोक ने अपना अंडरवियर खुद उतार आकर अपनी टांगों से अलग किया और वो भी नंगा हो गया।

साधना की नजर जैसे ही अशोक के लंड पर पड़ी तो उसकी चुत में पानी उतर आया। बहुत सालों बाद इतनी नजदीक से किसी मर्द का लंड देखा था। क्या मस्त मोटा और कड़क लंड था अशोक का। एक बारगी तो साधना का मन करने लगा कि वो अभी उठ कर जाए और रमिता को साइड में कर अशोक के लंड का अहसास करे।

अशोक ने आगे बढ़ कर लंड का सुपारा रमिता के होंठों से लगा दिया तो रमिता ने भी झट से मुँह खोल कर लंड मुँह में भर लिया और मस्त होकर चूसने लगी। अशोक अपने लंड पर रमिता के होंठ और जीभ के स्पर्श से आनन्दित हो उठा और उसके मुँह से मस्ती भरी आहें निकलने लगी थी। अशोक का एक हाथ रमिता की मस्त चूची का मर्दन कर रहा था तो दूसरा रमिता की जाँघों के बीच चुत के दाने को सहलाने में व्यस्त था।

दूसरी तरफ साधना भी अपने पेटीकोट को पूरा ऊपर उठा कर अपनी चुत के दाने को अपने हाथों से सहला रही थी। चुत पानी पानी हो रही थी साधना की… बिना कुछ करे ही वो मस्त हो गई थी। चुत में कीड़े कुलबुला रहे थे और मस्ती की खुमारी चढ़ती जा रही थी।

सच कहें तो साधना से अब कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।
 
उधर बेड पर अब अशोक और रमिता 69 की पोजीशन में आकर मजे कर रहे थे। अशोक की जीभ रमिता की चुत की गहराई नाप रही थी तो रमिता भी अशोक के लम्बे मोटे लंड को लोलीपॉप बनाये हुए चाट और चूस रही थी।

दोनों मस्त मग्न थे, चपर चपर की आवाज के बीच कभी कभी दोनों में से किसी की आह या सिसकारने की आवाज आती।

दस मिनट की चूसा चुसाई के बाद दोनों का पानी छुट गया। रमिता ने अशोक का लंड मुँह से निकाल कर फेंटना शुरू कर दिया तो अगले कुछ मिनट में ही अशोक का लंड रमिता की चुत की गहराई नापने को तैयार हो गया।

अशोक ने बेड से नीचे खड़े होकर रमिता की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखी और लंड को चुत पर सेट करके एक जोरदार धक्के के साथ लगभग पूरा लंड रमिता की चुत में उतार दिया।

जोरदार प्रहार से रमिता कराह उठी और उसके सिसकारने की आवाजें कमरे में गूँजने लगी।

अशोक ने भी लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ रमिता आह आह आईई ऊईईई कर रही थी।

तभी जैसे रमिता को अपनी सासु माँ की याद आई और उसने साधना को और उत्तेजित करने के उदेश्य से रमिता ने अपनी सिसकारियों की आवाज बढ़ा दी- आह… जोर जोर से चोद मेरे राजा… फाड़ दाल मेरी चुत अपने मोटे लंड से… उम्म्ह… अहह… हय… याह… क्या कड़क लंड है मेरे मर्द का… चुत की नश नश में करंट भर देता है जालिम… चोद… चोद… जोर जोर से चोद मेरी जान!

अशोक एक बारगी तो रमिता के इस रूप को देख कर दंग रह गया क्योंकि आज से पहले कभी रमिता ने ऐसा नहीं किया था उल्टे वो तो अशोक को कम आवाजें करने को बोलती थी कि ‘धीरे बोलो या धीरे करो… साथ वाले कमरे में मम्मी जी सो रही हैं…’ पर आज वो खुद ऐसे आवाजें निकाल रही थी कि साथ वाले कमरे में मम्मी जी तो क्या पड़ोसी भी सुन लें, समझ लें कि रमिता चुद रही है।

जो भी था रमिता की इस हरकत ने अशोक को और ज्यादा उत्तेजित कर दिया था और वो अब पहले से भी ज्यादा जोश के साथ रमिता की चुत में लंड पेल रहा था- ले मेरी रानी… ले पूरा का पूरा लंड ले… आज तो तेरी चुत में अलग ही बात है… आग बरसा रही थी साली… ले चुद मेरे मोटे लंड से…

अशोक भी अब रमिता के रंग में रंगने लगा था। रमिता भी तो ये ही चाहती थी।

दूसरी तरफ साधना का हाल बेहाल हुआ पड़ा था। तीन तीन उंगलियाँ चुत में पेल रही थी, चुत पानी पानी हो रही थी पर चुत में जो आग लगी थी वो जैसे कह रही थी कि ‘अब उंगली से काम नहीं बनेगा, मेरी जान अब तो मेरे लिए लंड का इंतजाम कर ही दे तो शांति मिले।’

अब साधना का ध्यान रमिता अशोक की चुदाई से ज्यादा अपनी चुत को ठण्डी करने पर था।

उधर अशोक ने रमिता को अब घोड़ी बना लिया था और लंड पीछे से रमिता की चुत में उतार दिया था और सुपरफास्ट गति से लंड को अंदर बाहर करते हुए रमिता की चुत बजा रहा था। अशोक के टट्टे रमिता की गांड पर थप थप की मधुर आवाज कर रहे थे। हर धक्के के साथ अशोक की मस्ती भरी आहें और रमिता की दर्द और मस्ती से भरी सिसकारियाँ कमरे के मौसम को और ज्यादा रंगीन बना रही थी।

करीब बीस मिनट की मस्त चुदाई के बाद अशोक ने अपने लंड का लावा रमिता की चुत में उगल दिया। वो और रमिता दोनों हैरान थे क्यूंकि आज चुदाई और दिनों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा लम्बी चली थी। आमतौर पर अशोक रमिता को दस से बारह मिनट तक ही चोदता था पर आज तो लगभग बीस मिनट तक उसने रमिता की चुदाई की थी। रमिता भी पहले दो या तीन बार ही झड़ती थी पर आज तो जैसे उसकी चुत से दरिया बह निकला था। आज वो पाँच बार झड़ी थी और अब निढाल सी बेड पर पड़ी अपनी साँसों को नियंत्रित कर रही थी।

अशोक भी उसके साइड में लेटा हुआ लम्बी लम्बी साँसें ले रहा था।

साधना भी अब झड़ झड़ के थक सी गई थी। बहुत पानी निकला था आज उसकी चुत से!

तभी जैसे रमिता को साधना का ख्याल आया। साधना को कमरे से निकाल कर दूसरे कमरे में भेजने के लिए अशोक को साइड करना जरूरी था।

“अशोक आज तो तुमने कमाल ही कर दिया… मेरा तो मन है की आज एक बार और ऐसी ही मस्त वाली पारी खेली जाए…”

“आज क्या खा के आई है मेरी जान… जो चुत में इतनी गर्मी हो रही है कि बीस मिनट की चुदाई के बाद भी मैडम को दुबारा चुदाई करवानी है?”

“पता नहीं पर आज तो मन कर रहा है कि जैसे सारी रात चुदवाती रहूँ… तुम बाथरूम से फ्रेश होकर आओ जल्दी से… फिर सोचते हैं दूसरी पारी के बारे में…”
 
अशोक उठ कर बाथरूम में चला गया। अशोक के जाते ही रमिता साधना के पास गई और उसको बाहर जाने का इशारा किया। साधना की हालत ख़राब थी, रमिता ने उसको उठाया और उसको दरवाजे तक छोड़ कर वापिस अपने बेड पर आकर लेट गई।

साधना लगभग लड़खड़ाते हुए क़दमों से अपने कमरे में पहुँची और धम से बेड पर लेट गई। लेटते ही साधना जैसे नींद के आगोश में समा गई। उसमे अब हिलने की भी ताकत नहीं बची थी। उंगली कर कर के चुत का सारा रस तो निचोड़ चुकी थी वो।

अगली सुबह जब साधना उठी तो नौ बज चुके थे। रमिता नाश्ता तैयार कर अशोक को ऑफिस भेज चुकी थी।

रमिता जब साधना के कमरे में आई तो साधना अस्तव्यस्त कपड़ों में अपने बेड पर लेटी हुई थी। रमिता ने जाकर साधना की साड़ी खींच दी। रमिता के ऐसा करने पर साधना एकदम से हड़बड़ा के उठकर बैठ गई।

“क्या हुआ मम्मी जी… आज तो बहुत नींद आ रही है?”

“पूछ मत… रात तो जैसे पूरा बदन ही निचोड़ दिया किसी ने… पानी का दरिया बह रहा था टांगों के बीच!”

“ऐसा क्या हो गया मम्मी जी… जो दरिया चल पड़ा आपकी टांगों के बीच…” रमिता ने अपनी आँखें नचाते हुए पूछा.

“तू सच में बहुत बदमाश लड़की है… कमीनी ने मुझे भी अपने जैसे बदमाश बना दिया है… बिल्कुल शर्म नहीं करती तू!”

“अरे… बताओ ना मम्मी प्लीज… क्या क्या हुआ… रात को?”

“बताया तो शुरू से आखिर तक टाँगों के बीच बस दरिया ही बहता रहा… इतनी उत्तेजना, इतना मजा तो ब्लू फिल्म देखने में भी नहीं आता जितना तेरी और अशोक की लाइव चुदाई देख कर आया। वैसे मेरा बेटा मस्त चोदता है… तुम्हारी तो हालत खराब कर दी थी उसने धक्के मार मार कर!”

“एक बात पूछूँ… कैसा लगा अपने बेटे अशोक का लंड?”

“हट कमीनी… कुछ तो शर्म रखा कर… एक माँ से पूछ रही है कि बेटे का लंड कैसा है.”

“अरे… मैंने ऐसा क्या पूछ लिया… रात को आपने देखा तो है… तभी पूछा कि कैसा है… वैसे अभी खुद ही तो कह रही थी ‘मेरा बेटा मस्त चोदता है…’ रमिता ने झूठमूठ का नाराज होते हुए कहा।

“वो बात नहीं है रमिता… पर अपने ही बेटे की तारीफ़ करने में शर्म तो आएगी ही ना…”

“मम्मी जी, मैंने आपको पहले ही कह दिया था कि अब सास बहू का रिश्ता छोड़ कर हम दोनों सहेलियां बन चुकी हैं… और सहेलियाँ ऐसी बातें कर सकती है… किसी के भी बारे में!”

“ठीक है… बहुत लम्बा, कड़क और मोटा लंड है अशोक का… अब खुश?” साधना इतना सब बोल कर शरमा गई।

“वो तो है… जब अन्दर घुसता है तो हलचल मचा देता है!”

“मौज है तेरी… सेवा किया कर मेरी… जो ऐसा कड़क मर्द पैदा करके तुझे दिया पति बनाने के लिए!” साधना के इतना कहते ही कमरे में दोनों सास बहू के ठहाके गूंज उठे.

साधना उठी और सीधा बाथरूम में घुस कर बिना देर किये नंगी हो गई और शावर चला कर उसके नीचे खड़ी हो गई। ठण्डे ठण्डे पानी की बूंदों ने बदन में एक बार फिर से हलचल मचा दी और रात का नजारा याद आते ही साधना का हाथ एक बार फिर से अपनी चुत पर पहुँच गया था।

दो तीन दिन बीते तो साधना का मन एक बार फिर से लाइव चुदाई के लिए मचलने लगा। उसने रमिता को कुछ नहीं कहा पर रमिता ने उसके मन की बात जान ली थी। रमिता अपनी सास को सेक्स की आग में ऐसे जलते हुए नहीं देख पा रही थी पर उसके पास इस बात का कोई इलाज भी तो नहीं था। साधना की आग एक लंड से ही ठंडी हो सकती थी पर अब रमिता अपनी सास के लिए लंड कहा से ढूंढें।

रमिता ने एक बार और रिस्क लेते हुए साधना को अपनी और अशोक की लाइव चुदाई दिखाई। इससे साधना की आग ठंडी होने बजाए और ज्यादा भड़क उठी थी। रमिता बार बार सोचती कि किसका लंड दिलवाए वो अपनी प्यारी सासू माँ को।

उधर साधना के मन के किसी कोने में अब लंड लेने की चाहत सर उठाने लगी थी पर वो शर्म के मारे कह नहीं सकती थी। बस रमिता अशोक की लाइव चुदाई के पलों को याद कर कर के अपनी चुत से पानी निकालती रहती थी।

अचानक एक दिन रमिता ने RSS पर कुछ कहानियाँ पढ़ी जिनमें माँ बेटे की चुदाई की कहानियाँ भी थी। आज का समाज ऐसा ही है। आज औरत को लंड और मर्द को चुत चाहिए बस… चाहे वो किसी की भी क्यों ना हो। बहन भाई से चुदने को तैयार है तो भाई भी बहन को चोदने के लिए लंड खड़ा किये तैयार है। ऐसे ही सास दामाद, माँ बेटा, बाप बेटी सब एक दूसरे को भोगने के लिए तैयार बैठे हैं।

यह इक्कीसवीं सदी की दुनिया है, लोक-लाज, शर्म-लिहाज पुराने जमाने की बातें हो गई है।

कानून का डर ना हो तो ये सब सरेआम होने लगे।
 
रमिता का भी दिमाग घूम गया था। उसके दिमाग में भी साधना और अशोक की चुदाई के सीन घूमने लगे थे। कहानियाँ पढ़ पढ़ कर वो भी सोचने लगी थी कि क्यों ना साधना की चुत अशोक के लंड से ठण्डी करवा दी जाए।

पर क्या अशोक अपनी माँ को चोदने को तैयार होगा? क्या साधना मान जायेगी अशोक का लंड लेने के लिए?

साधना तो शायद मान भी जाए पर अशोक का मानना मुश्किल लग रहा था।

सारा दिन अब रमिता के दिमाग में बस यही सब घूमता रहता। दिन रात अब वो इसी प्लानिंग में लगी रहती कि कैसे वो साधना की चुत अशोक के लंड से चुदवाये। इसी प्लानिंग के तहत उसने अशोक को भी दो तीन बार माँ बेटे की चुदाई की कहानियाँ पढ़वाई। अब अक्सर वो अशोक के सामने साधना की बातें करने लगी थी। जैसे कि मम्मी जी इस उम्र में भी कितनी मस्त है, कड़क है, सेक्सी है इत्यादि इत्यादि।

एक दिन दोनों चुदाई करने के बाद साथ साथ लेटे हुए थे तो रमिता ने फिर से साधना की बात छेड़ दी- अशोक, एक बात पूछूँ?

“पूछो…”

“मम्मी जी ने इतने साल कैसे निकालें होंगे बिना चुदाई के?”

“मतलब…??”

“मतलब यह कि मम्मी जी खूबसूरत हैं और बदन भी तुमने देखा होगा कितना मस्त है… तो बस यही देख कर मन में ख्याल आया कि मम्मी जी का दिल नहीं करता होगा क्या चुदाई के लिए?”

“क्या सारा दिन बस इन्ही बातों में लगी रहती हो…”

“अरे… मैं बिना सिर पैर की बात थोड़े ही कर रही हूँ… मैंने मम्मी जी को एक दो बार देखा है कमरे में अपनी चुत को मसलते हुए… उंगली करते हुए… तभी मुझे लगा कि हो सकता है कि उनका भी मन हो चुदाई का… वैसे भी ज्यादा उम्र थोड़े ही हुई है उनकी…” रमिता ने अपनी बात अशोक के सामने रख दी।

तभी रमिता उठ कर कमरे से बाहर रसोई में पानी लेने गई पर तुरन्त ही वापिस आ गई।

अशोक ने जब पूछा कि पानी नहीं लेकर आई तो रमिता ने अशोक को अपने साथ चलने को कहा।

अशोक पूछता रह गया कि कहाँ ले जा रही हो पर रमिता उसको लगभग खींचते हुए साधना के कमरे के सामने ले गई। साधना के कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था। रमिता ने अशोक को अन्दर देखने को कहा तो पहले तो अशोक मना करने लगा पर रमिता ने जब जिद की तो अशोक ने जैसे ही कमरे में झाँक कर देखा तो हक्काबक्का रह गया।

साधना अपने पलंग पर बिल्कुल नंगी पड़ी अपनी चुत सहला रही थी। कमरे की लाइट भी जली हुई थी जिस कारण साधना का बदन रोशनी में चमक रहा था।

यह रमिता की प्लानिंग का हिस्सा नहीं था। यह तो जब रमिता और अशोक चुदाई कर रहे थे तो साधना उनके कमरे के दरवाजे के छेद से उनकी चुदाई देख रही थी और जब चुदाई का खेल खत्म हुआ तो साधना अपने कमरे में जाकर अपनी चुत सहला कर पानी निकाल रही थी। साधना को कोई अंदाजा भी नहीं था कि रमिता या अशोक में से कोई भी इस समय उसके कमरे में आ सकता है या झाँक सकता है। वो तो पूरी मस्ती में अपनी चुत को उंगली से रगड़ रगड़ कर अपना पानी निकालने की कोशिश कर रही थी।

अशोक अपने कमरे में जाना चाहता था पर रमिता ने उसे रोक के रखा। तभी अन्दर से साधना के बड़बड़ाने की आवाज आई।

जब ध्यान से सुना तो अशोक और रमिता दोनों ही सन्न रह गए।

साधना कह रही थी- रमिता कमीनी अकेले अकेले अशोक के मोटे कड़क लंड का मजा लेती रहती है… कमीनी कभी मेरी चुत का भी तो सोच… मुझे भी अशोक जैसा कड़क लंड चाहिए अपनी चुत की आग को ठण्डा करने के लिए… तेरह साल से प्यासी है… कुछ तो इंतजाम कर कमीनी मेरी चुत के लिए भी!

रमिता समझ सकती थी कि साधना को अब लंड चाहिए पर अशोक के लिए ये सब बिल्कुल नया था। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी माँ इतनी कामुक होगी और लंड लेने के लिए तड़प रही होगी। और लंड भी अपने बेटे अशोक के लंड जैसा।

उसी दिन से अशोक के दिमाग में भी साधना का वो रात वाला सीन घूमने लगा था। जब भी वो अकेला बैठा होता तो उसका ध्यान ना चाहते हुए भी साधना पर पहुँच जाता। रमिता को भी ये सब समझते देर नहीं लगी कि अशोक साधना की तरफ आकर्षित होने लगा है। माँ बेटा दोनों एक दूसरे की तरफ आकर्षित हो रहे थे पर सामाजिक बंदिशों के कारण दोनों ही चुप थे।

दिन बीतते जा रहे थे, आग दोनों ही तरफ बढ़ रही थी। रमिता भी अशोक के मन को हर रोज टटोल रही थी। साधना ऊपरी मन से तो मना कर रही थी पर अब उसका मन करने लगा था चुदाई का। रमिता हर रोज उससे भी चुदाई की बात कर कर के उसकी आग में घी डालती रहती थी।
 
फिर एक दिन…

शाम का समय था, रमिता और साधना साथ साथ बैठी रात के खाने की तैयारी कर रही थी।

रमिता ने फिर से चुदाई की चर्चा शुरू कर दी- मम्मी जी… कब तक इस तरह सेक्स की आग में जलती रहोगी… मैं तो बोलती हूँ चुदवा लो किसी से!

“तुम फिर से शुरू हो गई… कितनी बार बोला कि मैं नहीं चुदवा सकती… बदनाम नहीं होना मुझे इस उम्र में!”

“मम्मी जी… आप हाँ करो तो कोई ऐसा लंड ढूँढ दूँ आपकी चुत के लिए जिससे चुदने पर बदनामी का भी डर ना हो?”

“तू ये बात हर बार बोलती है… चल ठीक है, मैं तैयार हूँ चुदवाने के लिए अब बता किससे चुदवायेगी मुझे जिसमे बदनामी नहीं होगी… बोल… बोल ना?” साधना हल्का गुस्सा दिखाती हुई बोली।

“मम्मी जी… मैं आपकी पक्के वाली सहेली हूँ… मुझे अच्छे से पता है कि आप भी चुदवाना चाहती है… जल रही हैं चुदाई की आग में… इसी लिए मैंने सोचा है कि आपके लिए अब लंड का इंतजाम कर ही देती हूँ.”

“पर… किसका???”

“अशोक का…” रमिता ने जैसे बम्ब फोड़ दिया था साधना के ऊपर।

“क्या… हरामजादी तू होश में तो है… तुझे पता भी है तू क्या बोल रही है?” साधना गुस्से में चिल्लाई।

“मम्मी जी… मुझे पता है कि आपको अशोक का लंड पसंद है… आप यह भी जानती हो कि अशोक का लंड कितना मस्त कड़क लंड है… तो आपकी पसंद का लंड ही तो दिलवाना चाह रही हूँ मैं… उसमें क्या दिक्कत है?”

“दिक्कत… क्यों दिक्कत नहीं है… एक माँ को अपने बेटे से चुदवाने को बोल रही हो और पूछ रही हो कि क्या दिक्कत है… पाप है ये!”

“कोई पाप नहीं है… आज रात को मैं आपको कुछ पढ़ने को दूँगी फिर सुबह बताना कि कहाँ दिक्कत है?”

“कमीनी ये बात अशोक से मत करना… वर्ना पता नहीं क्या सोचेगा वो मेरे बारे में!”

“उनसे क्या बात करनी… वो तो पहले ही अपनी माँ के हुस्न का दीवाना हुआ घूम रहा है.”

“मतलब??” साधना ने चौंकते हुए पूछा.

रमिता ने साधना को उस रात वाली सारी बात बता दी तो साधना अचम्भित होकर रमिता को देखने लगी थी, साधना से कुछ कहते नहीं बन रहा था। वो चुपचाप उठकर बाथरूम में चली गई और टॉयलेट सीट पर बैठे बैठे रमिता की कही बातों को याद कर कर बेचैन हो रही थी। कभी उसको अपने ऊपर गुस्सा आता और वो शर्मिंदा महसूस करने लगती पर अगले ही पल उसे रमिता की कही ये बात याद आती कि अशोक भी उसके हुस्न का दीवाना हुआ घूम रहा है तो वो अशोक के बारे में सोच कर उत्तेजित हो जाती। उसे गर्व सा महसूस होता की क्या वो सच में इतनी खूबसूरत है कि उसका खुद का बेटा भी उसकी और आकर्षित हो रहा है।

लगभग बीस मिनट बाद जब रमिता ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया तो साधना विचारों की दुनिया से बाहर आई। बाहर आते ही साधना अपने कमरे में चली गई और रमिता रसोई में काम निपटाने लगी।

रात हुई और बीत गई। उस रात साधना पूरी रात नहीं सो पाई थी, वो समझ ही नहीं पा रही थी रमिता उसे कहाँ ले जा रही है। क्या उसे सच में लंड की जरूरत है। क्या उसे अब चुदवा लेना चाहिए। पर किससे… क्या अशोक से… नहीं… नहीं… वो बेटा है मेरा, मैं उससे कैसे चुदवा सकती हूँ।

दूसरी तरफ रमिता अशोक से चुदवाते हुए यही बातें कर रही थी कि क्या अशोक भी साधना को चोदने की सोच रहा है।

अशोक उसको कभी गुस्से से तो कभी प्यार से चुप करवाने की नाकाम सी कोशिश कर रहा था- रमिता… प्लीज यार मत करो ऐसी बातें… माँ है वो मेरी!

“वो तो मुझे भी पता है कि माँ है वो तुम्हारी पर तुमने खुद देखा और सुना कि वो कैसे तड़प रही है लंड लेने के लिए…”

“तो मैं क्या कर सकता हूँ?”
 
“क्यों नहीं कर सकते… सुना नहीं वो कह रही थी कि उसको चुदवाने के लिए आप जैसा ही कड़क लंड चाहिए… मतलब साफ़ है कि वो आपके लंड को पसंद करती है और चुदवाना चाहती हैं.”

“मैं इसमें उनकी कोई मदद नहीं कर सकता… और अब तुम भी ऐसी बातें करना बंद करो और सो जाओ… पता नहीं क्या क्या सोचती रहती हो सारा दिन!”

“सच बताना… क्या तुम्हें मम्मी जी अच्छी नहीं लगती… क्या तुम उन्हें सिर्फ इसीलिए तड़पते देखते रहोगे क्योंकि तुम उनके बेटे हो… और सोच कर देखो अगर उन्होंने बाहर किसी से चुदवा लिया और कुछ गड़बड़ हो गई तो कितनी बदनामी होगी तुम्हारी और इस घर की?”

“प्लीज… मुझे कोई बात नहीं करनी इस बारे में…” कहकर अशोक मुँह फेर कर सो गया।

लगभग एक सप्ताह और बीत गया, बात आगे नहीं बढ़ रही थी।

तभी रमिता के मायके से फ़ोन आया कि रमिता के पिताजी की तबीयत ठीक नहीं है और उन्होंने उसे मिलने के लिए बुलाया है।

रमिता का मायका चंडीगढ़ में था। अशोक ने जब ये खबर रमिता को बताई तो वो बेचैन हो उठी और अशोक से चंडीगढ़ जाने के बारे में बात की। अशोक खुद रमिता के साथ जाना चाहता था तो उसने अपने ऑफिस में अपने बॉस से छुट्टी के लिए बात की तो बॉस ने अर्जेंट मीटिंग का कहते हुए उसको छुट्टी देने से इन्कार कर दिया।

जब अशोक को छुट्टी नहीं मिली तो अशोक ने रमिता को साधना के साथ चले जाने को कहा। एक बार तो रमिता इसके लिए मान गई पर फिर उसने अकेले जाने को कहा। अशोक ने बहुत कहा कि मम्मी जी को साथ ले जाओ पर वो अकेले जाने पर ही अड़ी रही। उसके मन में दूसरी ही खिचड़ी पक रही थी। वो अशोक और साधना को अकेले छोड़ना चाहती थी। खाने पीने और घर के दूसरे काम का बहाना बना कर उसने साधना को साथ ले जाने से मना कर दिया।

अशोक क्या कर सकता था… उसने रमिता को अगली सुबह चंडीगढ़ जाने वाली बस में बैठा दिया और खुद अपनी ड्यूटी पर निकल गया।

यहीं से कहानी ने दूसरा मोड़ ले लिया।

मीटिंग लम्बी चली और मीटिंग के बाद डिनर भी ऑफिस में ही था तो अशोक को देर हो गई। क्योंकि रमिता भी नहीं थी तो उसने अपने एक दोस्त के साथ दो पेग व्हिस्की के लगा लिए और खाना खा पी कर रात को करीब बारह बजे घर पहुँचा।

उसने इस बारे में अपनी मम्मी साधना को पहले ही फ़ोन करके बता दिया था।

साधना भी खाना खाकर टीवी देखने बैठ गई। टीवी पर रोमांटिक सीन आया तो साधना की चुत भी कुलबुलाई। उसने सोचा कि एक बार चुत से पानी निकाल ही लिया जाए। साधना ने साड़ी उतार कर नाईटी पहन ली थी और नाईटी को ऊपर उठा कर चुत को मसल मसल कर पानी निकाल दिया। पानी निकलने के बाद साधना पर नींद हावी हो गई और वो वहीं सोफे पर ही ढेर हो गई।

रात को अशोक जब आया तो उसने सोचा कि देर हो चुकी है तो क्यों मम्मी को तंग किया, उसने अपनी चाबी से दरवाजा खोला और अंदर आ गया।

अन्दर आते ही सबसे पहले टीवी पर नजर पड़ी फिर जब उसकी नजर सोफे पर सोते हुई अपनी माँ साधना पर पड़ी तो उसकी धड़कनें एकदम से बढ़ गई। सोफे पर साधना लगभग अधनंगी सी लेटी हुई थी… नाईटी घुटनों से ऊपर जाँघों तक उठी हुई थी और साधना दीन-दुनिया से बेखबर सी सो रही थी।

अशोक ने अपनी मम्मी को इस अवस्था में देखा तो उसके दिल में हलचल सी मची। अशोक बिना कुछ बोले अपने कमरे में चला गया और जाकर फ्रेश हुआ और बनियान और लोअर पहन कर वापिस कमरे में आया।

वो साधना को जगा कर अन्दर कमरे में भेजने के इरादे से आया था।

अशोक के मन में आया कि साधना उसके सामने अपने आप को अर्धनग्न अवस्था में देख कर पता नहीं क्या सोचेगी तो क्यों ना साधना की नाईटी को ठीक कर दे। वो सोफे के पास खड़ा ये सोच रहा था पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी साधना को छूने की।

कुछ देर के बाद उसने हिम्मत करके साधना की नाईटी को ठीक करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया और नाईटी को थोड़ा ऊपर उठा कर जैसे ही ठीक करने लगा तो उसकी नजर सीधे अपनी माँ साधना की चुत पर गई।

साधना ने नाईटी के नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी… या यूँ कह सकते है कि उसने चुत में उंगली करते समय वो उतार दी थी। साधना की क्लीन शेव चुत देख अशोक की हालत खराब होने लगी। उसकी नजरों के सामने वही चुत थी जिसमें से वो पैदा हुआ था। अशोक को साधना की चुत रमिता की चुत से भी ज्यादा सुन्दर लग रही थी।

कुछ तो शराब का हल्का हल्का नशा पहले से ही था और कुछ अपनी मम्मी साधना की चुत देख कर अशोक अपने होश में नहीं रहा। कहाँ तो वो अपनी माँ का अर्धनग्न बदन ढकने के लिए आया था पर अब वो खुद अपनी माँ के खूबसूरत बदन को देख कर उत्तेजित हो रहा था। उसने नाईटी को नीचे करने की जगह थोड़ा और ऊपर उठा दिया। साधना की चुत देख अशोक का लंड भी लोअर फाड़ने को बेचैन सा हो गया था।

अशोक ने हाथ आगे बढ़ा कर उंगली से अपनी माँ की चुत को छुआ। चुत का साधना की चुत से निकला नमकीन रस उसकी उंगली पर लग गया। अशोक ने वो रस चख कर देखा तो मदहोश होता चला गया।

तभी साधना ने करवट ली तो अशोक को जैसे होश आया, वो जल्दी से वहाँ से हट गया और अपने कमरे की दरवाजे पर जाकर उसने साधना को आवाज लगाई। अशोक की आवाज सुन कर साधना एकदम से चौंक कर उठी। उसने देखा अशोक अपने कमरे के दरवाजे पर खड़ा था। तभी उसका ध्यान अपने अस्तव्यस्त कपड़ों पर गया तो और ज्यादा चौंक गई।
 
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