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Incest मा का दीवाना बेटा। (Completed)

आज शहनाज़ बहुत खुश थी क्योंकि उसके बेटे ने आज जो रेशमा के साथ किया था उससे उसे पुरा यकीन हो गया था कि उसका बेटा अब पूरी तरह से सिर्फ उसका हैं। उससे ज्यादा खुशी उसे एक बात की थी कि कितनी सफाई से उसने अपने दादा दादी को रेशमा के यहां छोड़ दिया ताकि वो आराम से मेरे सपने पूरे कर सके। शहनाज ये सब सोच सोच कर खुश हो रही थी और उसे आज सच में अपने पर प्यार अा रहा था। वो अब उसे सिर्फ एक बेटे नहीं बल्कि मर्द की नजर से देख रही थी जो अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए नए नए बहाने खोजता है।

घर जाकर शादाब पूरे दिन का पसीने से भीगा हुआ था इसलिए नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया और जल्दी ही नहाकर बाहर अा गया और तैयार होकर उपर छत पर जाने लगा क्योंकि चांदनी रात में ठंडी ठंडी हवाएं चल रही थी। शादाब अभी तक रेशमा की चूची के बारे में सोच रहा था क्योंकि उसने पहली बार असल ने किसी की चूची देखी थी। उफ्फ बुआ की चूची गोरी तो थी लेकिन अम्मी तो बुआ से बहुत ज्यादा सुंदर हैं तो अम्मी की चूचियां तो बुआ से कहीं ज्यादा मस्त होनी चाहिए। शादाब के उपर वासना हावी होने लगी तो उसे कल देखी हुई फिल्म याद अा गई और उसने तुरंत मोबाइल में वो मूवी देखनी शुरू कर दी। मूवी देखते हुए शादाब की हालत खराब होने लगी क्योंकि आज पहली बार उसे औरत के जिस्म देखने को मिल रहा था। जैसे ही मूवी में लडके ने सविता की पेंटी नीचे खीची तो शादाब के मुंह से आह निकल पड़ी और उसने पहली बार चूत के दर्शन किए। शादाब को हल्की ठंड में भी पसीना आने लगा और उसका लंड पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया। शादाब मूवी देखता रहा और लड़के ने देखते ही देखते अपनी एक उंगली को सविता की चूत में घुसा दिया तो सविता के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। फिर उसने उंगली को मुंह में भर कर चूस लिया और मस्ती में आकर उसने आंटी की चूत पर अपने होठ टिका दिए तो आंटी के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी। शादाब उसे गौर से देख रहा था और औरत के जिस्म के नए नए रहस्यों से आज उसका परिचय हो रहा था।

दूसरी तरफ शहनाज़ नहा चुकी थी और उसने टाइम देखा तो अभी 12 बजने में दस मिनट कम थे। वो रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराई और आज उसने पहली बार अपने बेटे की लाई हुई काले रंग की शॉर्ट ड्रेस पहन ली जिसमें उसके दूध से गोरे चिट्टे कंधे एकदम नंगे थे। शहनाज़ ने अपनी मेक अप किट उठाई और अपने आपको सजाने लगी। दर असल आज शादाब शादाब का जन्म दिन था जिसे वो भूल गया था जबकि शहनाज़ को पूरी तरह से याद था इसलिए वो अपने बेटे को सरप्राइज देना चाहती थी।

शहनाज ने अच्छी तरह से मेक अप करने के बाद अपने बालो को चेहरे के दोनो तरफ कर लिया । उसका खूबसरत चेहरा ऐसा लग रहा था मानो काले स्याह आसमान में से चांद अपने पूरे नूर पर चमक रहा हो। शहनाज ने एक दम गहरे लाल रंग की सुर्ख लिपस्टिक लगाई तो उसके होंठ सजकर बिल्कुल रसीले हो गए। शहनाज ने एक बार खुद को शीशे में देखा और खुद ही अपने आपको देखकर शर्मा गई।
शहनाज़ ने अपने आपको तैयार तो कर लिया लेकिन शर्म की वजह से उसके पैर नहीं उठ पा रहे थे। उफ्फ मेरा बेटा मुझे इस हालत में देखकर क्या सोचेगा, मैं उसकी नजरो का सामना कैसे कर पाऊंगी। फिर शहनाज़ का दिल बोल उठा कि तेरा बेटा तो खुद तुझे इस ड्रेस में देखने के लिए तड़प रहा है तभी तो उसने तुझे अपनी पसंद से ये ड्रेस दिलवाई है और अगर तू इसी शर्म लिहाज के चक्कर में पड़ी रही तो शादाब के पीछे ना जाने कितनी लड़कियां , औरतें पड़ी हुई है कहीं ऐसा ना हो वो हाथ से निकल जाए। ये सोचते ही शहनाज़ ने अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा फैसला किया और वो आत्म विश्वास से भर उठी। उसके पैर अपने आप उपर की तरफ तेजी से बढ़ गए। जहां थोड़ी देर पहले शहनाज़ छत की तरफ जाते हुए डर और संकोच कर रही थी वहीं अब नारी सुलभ ईर्ष्या के कारण उसके कदम तूफान की गति से पड़ रहे थे। वो अपने बेटे के पास जाने के लिए बुरी तरह से तड़प रही थी और ये कुछ कदम का फासला उसे बुरी तरह से तड़पा रहा था।

शादाब को जैसे ही अपनी मा के क़दमों की आहट सुनाई दी तो उसने मूवी को बन्द करते हुए फोन को जेब में डाल लिया और बिना अपनी अम्मी की तरफ देखे बाहर की तरफ देखने लगा क्योंकि मूवी देखने के कारण उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होकर मूसल बन चुका था। शादाब बिल्कुल नहीं चाह रहा था कि उसकी अम्मी की नजर लंड पर जाए। शहनाज आगे बढ़ने लगी, उसके पैर कांप रहे थे लेकिन आज वो पीछे हटने वाली नहीं थी।

शहनाज़ ने शादाब को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया और अपना सिर उसके कंधे पर टिकाते हुए बोली:"

" इतनी रात को अकेले छत पर मेरा राजा क्या कर रहा है?

शादाब को शहनाज़ के जिस्म से आती हुई परफ्यूम की मादक गंध महसूस हुई और वो आगे की तरफ देखते हुए ही बोला:"

" अम्मी बस चांद को देखने अा गया था, देखो ना कितना खूबसूरत लग रहा हैं अम्मी ?

शहनाज़ को चांद से भी जलन महसूस हुई और अपने बेटे की बातो पर हंसी अाई और बोली:"

" राजा जरा एक बार नजर पलट कर देख क्या पता दूसरा चांद भी नजर आ जाय!!

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनते ही घूम गया और उसकी नजरे शहनाज़ के चेहरे पर टिक गई और वो बिना पलके झपकाए उसे दीवाने की तरह देखता रहा। शहनाज समझ गई कि उसके रूप का जादू उसके बेटे पर चल गया है इसलिए उसके थोड़ा और करीब आते हुए बोली:"

" ध्यान से देख ले मेरे राजा, फिर आराम से आराम फैसला करना कि कौन सा चांद ज्यादा खूबसूरत हैं?

शादाब अपनी अम्मी के बिल्कुल करीब अा गया बस बीच में शादाब के खड़े हुए लंड का ही फासला था। वो गौर से शहनाज़ को देखता रहा, उफ्फ ये परियों का सुंदर चेहरा बिल्कुल चांद की तरह उसके काले बालों की घटा से झांकता हुआ, एकदम सेब की रंगत लिए हुए गाल, लिपस्टिक से रंगे लाल सुर्ख होंठ जिनसे रस टपकता हुआ और दूध से गोरे नंगे कंधे, सचमुच शहनाज़ एक क़यामत ही लग रही थी।



ये सब देख कर शादाब मचल उठा और उसके होंठो पर मुस्कान अा गई और अपनी अम्मी की आंखो में देखते हुए उसका हाथ पकड़ कर कहा:"

" आपसे खूबसूरत कोई हो ही नहीं सकता, फिर उस चांद की तो औकात ही क्या है !!

शहनाज़ अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर शर्म के मारे लजा गई और उसका चेहरा लाल होकर शर्म से झुक गया और उसके होंठो पर स्माइल फैल गई और वो अपना मुंह नीचे किए हुए बोली :"

"शुर्किया बेटा, तू सच में मेरा प्यारा राजा हैं।

शादाब अपनी अम्मी की ये हालत देखकर मुस्करा उठा और उसने शहनाज़ का एक हाथ पकड़ लिया। शादाब का स्पर्श होते ही शहनाज़ फिर से कांप उठी और उसने अपने बेटे के हाथ को दबा दिया। तभी घड़ी में बारह बज चुके थे इसलिए शहनाज़ ने आगे होते हुए अपने बेटे के चेहरे को अपने हाथो में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:*

" जन्म दिन मुबारक हो मेरे राजा !!

इतना कहकर शहनाज ने अपने जलते हुए होंठ शादाब के गाल पर टिका दिए और उसके गाल को चूम लिया। शादाब को जैसे याद अा गया कि आज तो उसका जन्म दिन हैं, वो खुशी से भर उठा और अम्मी को जोर से अपनी बांहों में भर कर कस लिया। शहनाज़ जैसे ही शादाब के गले से लगी तो उसे अपनी जांघो के बीच शादाब के खड़े हुए लंड का एहसास हुआ और पूरे जिस्म में उत्तेजना की एक लहर दौड़ गई।
शादाब ने अपनी अम्मी के चेहरे पर चुंबनो की बरसात कर दी और बोला:"
" ओह अम्मी आपको याद था , मैं तो बिल्कुल भूल ही गया था।

शहनाज़ ने अपनी नजरे उठाई और उसकी आंखों में देखते हुए बोली:"

" मेरी जान हैं तू राजा, अगर मैं याद नहीं रखूंगी तो कौन याद रखेगा !!

इतना कहकर उसने फिर से शादाब का गाल चूम लिया। शादाब ने जोश में आकर उसे पूरी ताकत से कस लिया और उसकी कमर को सहलाने लगा। पतली सी ड्रेस के उपर से शादाब के हाथ शहनाज़ के जिस्म में आग लगाने लगे। शहनाज़ ने भी अपने बेटे को पहली बार पूरी ताकत से अपनी बांहों में समेट लिया। शादाब उसके कान में बोला:"

" अम्मी आप इस ड्रेस में बिल्कुल परी लग रही हो, एक हसीन शहजादी अम्मी !!

शहनाज़ अपनी गर्म सांसे अपने बेटे की गर्दन पर छोड़ती हुई बोली :"

" क्या तुझे सच में तेरी अम्मी तुझे खूबसूरत शहजादी लगती हैं मेरे राजा बेटा ?

शादाब अपने हाथ पहली शहनाज़ के नंगे कंधो पर रखते हुए बोला:"

" हान अम्मी , आप तो मेरे लिए शहजादी ही हो एक दम सपनों की शहजादी।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर पूरी तरह से अपने सपने में खो गई जहां उसने कल्पना की थी उसका शहाजदा उसे अपनी शहजादी कहकर बुलाएगा। तभी शादाब ने अपनी अम्मी के गोरे चिट्टे कंधो को सहला दिया तो शहनाज़ उसके स्पर्श से पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसकी आंखो में देखने लगी। दोनो मा बेटे एक दूसरे को बिना पलके झपकाए निहार रहे थे। शादाब के हाथो का दबाव उसके कंधे पर बढ़ रहा था और लंड उसके पेट पर अड़ा हुआ था। शादाब उसके होंठो की तरफ देखते हुए बोला,:"..

" मेरा बर्थ डे गिफ्ट कहां है मेरी शहजादी?

इतना कहकर शादाब ने अपने होंठो पर जीभ फेरी तो शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा और होंठ कांपने लगे। शहनाज़ बुरी तरह से शर्मा गई और मुंह नीचे करके अपने दांतो से निचला होंठ चबाने लगी। शादाब ने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसका चेहरा उपर उठाया तो शहनाज़ के होंठ पूरी तरह से उभर कर सामने आ गए और शर्म से उसकी आंखे पूरी तरह से बंद हो गई। शादाब ने अपने होंठो को बिल्कुल शहनाज़ के होंठो के सामने कर दिया जिससे दोनो की सांसे एक दूसरे से टकराने लगी।शादाब पूरी तरह से मदहोश होकर बोला:"..

" अम्मी प्लीज़ एक बार मेरी आंखो में देखो ना !!

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और अपने बेटे के होंठो को अपने होंठो के सामने देख कर उसका चेहरा लाल हो गया और फिर से पलके झुक गई। शादाब ने अपने होंठ थोड़ा आगे बढ़ाए तो दोनो के होंठ आपस में मिल गए। जैसे ही होंठ जुड़े तो शहनाज़ अपने बेटे से पूरी तरह से कसकर लिपट गई और उसके हाथ अपने आप शादाब के सिर पर पहुंच गए। शादाब ने अपना मुंह खोलते हुए उसके होंठो को मुंह में भर लिया और चूसने लगा। शहनाज़ से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने भी अपने बेटे के होंठो को चूसना शुरू कर दिया।





दोनो मा बेटे पूरी तरह से किस में डूब गए और दोनो एक दूसरे का रस चूसते रहे। तभी शादाब ने अपनी जीभ बाहर निकाल कर शहनाज़ के मुंह पर दस्तक दी तो शहनाज़ के होंठ खुल गए और शादाब की जीभ उसके मुंह में घुस गई। शहनाज़ के मुंह में पहली बार जीभ घुसी थी इसलिए वो अपने होश गंवाते हुए अपने बेटे की जीभ को चूसने लगी। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी। लंबाई कम होने के कारण वो अपने बेटे के पैरो पर चढ़ गई जिससे शादाब का लंड अब उसकी चूत से टकरा गया। दोनो मा बेटे एक साथ सिसक उठे, शादाब के हाथ अब शहनाज़ के कंधे को बहुत अच्छे से रगड़ रहे थे और उसका लंड अब शहनाज की चूत को चूम रहा था।जब दोनो की सांसे उखड़ने लगी तो दोनो सांस लेने के लिए अलग हुए और दोनो की आंखे खुल गई। दोनो ने एक दूसरे की आंखो में झांका और एक साथ मुस्करा दिए और फिर से उनके होंठ जुड़ गए। दोनो मा बेटे एक दूसरे का रस पीते रहे और जी भर कर शहनाज़ का रस चूसने के बाद शादाब के होंठ अलग हो गए।

शहनाज़ का दिल किसी बुलेट ट्रेन की तरह दौड़ रहा था तो शादाब की हालत भी कुछ जुदा नहीं थीं। आज पहली बार उसे एहसास हुआ कि असली किस तो होंठो पर किया जाता हैं। वो अपने अम्मी के कान में बोला:

" अम्मी आपके होंठ बहुत मीठे हैं, उफ्फ शहद जैसा रस निकल रहा था।

शहनाज़ शादाब की बात सुनकर खुश हो गई और उसके होंठो पर उंगली रखते हुए बोली:"

" बस कर मेरे राजा, तुझे अपनी अम्मी के होंठ इतने अच्छे लगे क्या ?

शादाब ने फिर से आगे झुककर उसके होंठो को चूम लिया और बोला:"

" हाय अम्मी, आज पता चला कि अगली किस का असली मजा तो होंठो में आता हैं।

शहनाज़ उसकी बाते सुनकर शर्मा गई और अपना मुंह छुपाते हुए बोली :"
" हाय अल्लाह, कितना बेशर्म हो गया हैं तू, कुछ तो शर्म कर !!

शादाब ने अपनी अम्मी को अपनी तरफ खींच लिया और गले से लगाते हुए बोला:"

" शर्म बहुत कर ली अम्मी, अब तो प्यार करने का समय अा गया हैं। देखना आपका बेटा आपको बहुत प्यार देगा।

शहनाज़:" लगता है अब तेरे लिए कोई लड़की देखनी पड़ेगी, तू तो पूरा जवान हो गया है।

शहनाज़ ने ये बात अपनी जांघो को अपने बेटे के लंड पर रगड़ते हुए कही। शादाब ने अपनी अम्मी की कमर को थाम लिया और उसकी जांघो में लंड घुसाते हुए बोला:"

" कहां अम्मी, अभी तो ठीक से बड़ा भी नहीं हुआ हूं, कहां से जवान हो गया !!

शहनाज का दिल धाड धाड़ करने और वो अपने बेटे के पैरो पर खड़ी हो गई तो लंड सीधा चूत पर रगड़ खाने लगा और वो अपनी चूत लंड पर दबाते हुए बोली:"

" इतना बड़ा तो हो गया है तू, लड़कियां तो डर ही जाएगी तुझसे, तेरी शादी कैसे करूंगी !!

शादाब ने अपनी अम्मी की ड्रेस के अंदर एक हाथ डाल दिया और उसकी नंगी कमर सहलाते हुए बोला:"

" अम्मी मुझे नहीं करनी शादी किसी लड़की से, मैं तो आपका दीवाना हूं बस !

शहनाज़ की धड़कने तेज हो गई और मुंह शर्म से लाल होकर नीचे हो गया। शहनाज उससे अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली:"

" कुछ भी बोल देता हैं, आया कहीं से दीवाना, चल नीचे चलते हैं रात बहुत हो गई है।

शहनाज़ अपने बेटे से अलग हो गई और उसका हाथ पकड़ कर नीचे की तरफ चल पड़ी। शादाब भी अपनी अम्मी के पीछे पीछे अा गया और दोनों अपने कमरे में पहुंच गए। शादाब कमरे में आकर हैरान हो गया क्योंकि शहनाज़ ने पूरे बेड पर ग्रीटिंग्स फैला रखे थे जो वो अपने बेटे के जन्म दिन पर हर बार खुद अपने हाथ से बनाती थी लेकिन उसे हॉस्टल ना भेजकर अपने पास रख लेती थी।

शादाब ये सब देख कर खुशी से उछल पड़ा। उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कमी उसकी अम्मी उससे इतना प्यार करती हैं जबकि शहनाज़ अपने बेटे को खुश देख कर स्माइल कर रही थी। शादाब ने आगे बढ़कर अपनी अम्मी को एक बार फिर से गले लगा लिया और बोला:"

" ओह अम्मी, आप तो मुझसे इतना प्यार करती हैं आज पता चला मुझे। सच में आप बहुत अच्छी हैं ।

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ का गाल चूम लिया तो शहनाज़ उसकी आंखो में देखते हुए बोली:

" बेटा मैं दुनिया में सबसे ज्यादा बस तुझे ही तो प्यार करती हूं। अच्छा चल अब सो जाते हैं रात बहुत हो गई है।

शादाब:" ठीक है अम्मी, क्या एक गुड नाईट किस मिलेगी ?

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात सुनकर उसका गाल चूम लिया और बोली:" बस खुश ?

शादाब: क्या अम्मी आप भी, गाल पर किस तो बच्चो को दी जाती है, मैं तो अब बड़ा हो गया हूं ना अम्मी।

शहनाज़ तिरछी नजर से उसकी पैंट के उभार को देखते हुए:"

हान मुझे पता चल गया है कि तू सच में ना सिर्फ बड़ा बल्कि बहुत ज्यादा बड़ा हो गया है।

शादाब शहनाज़ के नंगे कंधे पर हाथ फेरते हुए:"

"अम्मी आपको अभी सही से अंदाजा नहीं हैं कि मैं सचमुच कितना ज्यादा बड़ा हो गया हूं।

शहनाज़ सोचने लगी कि कमीना कहीं का, अब इसे कैसे बतायू कि इसकी मा इसका पूरा मूसल देख चुकी है, हाथो में थाम चुकी है।

शादाब शहनाज़ के रसीले होंठों को घूरते हुए कहा:"

अम्मी दे दो ना प्लीज़ गुड नाईट किस मुझे?.

शहनाज़ :" बेटा तुझे कैसे समझाऊं कि बेटे को वहां किस नहीं दी जाती!!

शादाब:" अम्मी अभी छत पर तो दी थी आपने मुझे ! अब क्या हो गया इतनी जल्दी ?

शहनाज़ शर्मा गई और बोली:"

" बेटा मैं वो बहक गई थी, जब तूने गिफ्ट मांगा तो मेरे पास देने के लिए उस समय कुछ नहीं था।

शादाब ने अपनी अम्मी को खींच कर खुद से चिपका लिया और उसकी आंखो में देखते हुए कहा:

" अम्मी एक बार फिर से बहक जाओ ना, वैसे मै आपका दोस्त भी हूं, दोस्त समझ कर ही कर दो

शहनाज़ ने अपने बेटे की गर्दन में हाथ डाल कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और दोनो के होंठ बिल्कुल करीब अा गए। शहनाज़ उसके कान में बुदबुदाई:"

" ले चूस ले अपनी अम्मी के होंठ मेरे राजा, फिर बाद में मत बोलना

इतना कहकर शहनाज़ ने अपनी होंठो पर जीभ फेरकर उन्हें पूरी तरह से चिकना और रसीला बना दिया। शादाब से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने आगे बढ़ कर शहनाज़ के होंठो पर अपने होंठ चिपका दिए। एक बार फिर से शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा और उसके होंठ अपने आप खुल गए। शादाब कभी उपर वाले होंठ को चूस रहा था तो कभी नीचे वाले को। शहनाज़ ने भी शादाब के होंठो पर हमला कर दिया और दोनो पूरी तरह से मस्त होकर एक दूसरे का रस चूसने लगे। दोनो की जब सांसे उखड़ने लगी तो उनके होंठ अलग हो गए।

शहनाज़:' बस अब खुश राजा ?

शादाब अपनी जीभ से अपने होंठ चाट कर बोला:"

" जाने ये कैसा रस हैं आपके होंठो में कि जितना चूसो और ज्यादा चूसने का मन करता है, एक बार फिर से हो जाए!!

शहनाज़:" चल जा अपना काम कर अब, जा ड्रेस बदल कर अा जा,फिर सोना हैं।

अपनी अम्मी की बात सुनकर शादाब अपने रूम में चला गया और कपडे बदलने लगा। जबकि शहनाज़ ने भी वो ब्लैक ड्रेस उतार कर अपनी नाइटी पहन ली और बिस्तर में घुस गई। शादाब आया और नाईट बल्ब जला कर अपनी अम्मी के बेड पर चढ़ गया और उसे अपनी बांहों में कस कर पकड़ लिया। दोनो मा बेटे एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

रात को पेशाब के दबाव के कारण शादाब की आंख खुल गई तो उसने अपने आपको कल की तरह अपनी अम्मी की बांहों में ही लिपटे हुए पाया। शादाब का लंड पूरी तरह से अकड़ा हुआ था और शहनाज़ की नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर लगा हुआ था। शादाब की आंखे लाल हो उठी। उसने एक बार अपनी अम्मी की तरफ देखा देखा तो वो गहरी नींद में सोई हुई थी। शादाब ने उसका माथा चूम लिया और जैसे ही उठने लगा तो उसकी नजर शहनाज़ की टांगो के बीच चली गई। उसकी दिल धड़कने लगा और सांसे भारी हो गई, नाइटी बिल्कुल बारीक कपडे की बनी हुई थी और नीचे पेंटी ना होने के कारण चूत का उभार साफ़ नजर आ रहा था। शादाब थोड़ा आगे बढ़ा और उसकी टांगो के बीच में अा गया और अपलक उसकी चूत निहारने लगा। चूत पूरी तरह से तो साफ नहीं दिख रही थी लेकिन उसका आकार साफ नजर आ रहा था। शादाब का लंड झटके पर झटके मार रहा था और उसने जोश में आकर अपनी अम्मी की नाइटी को पकड़ लिया और बस उठाने ही वाला था कि उसके दिल में विचार आया कि ये गलत हैं। एक तो मेरी सगी अम्मी, उपर से बिना उनकी मर्जी के ये सब गलत हैं। अगर उन्हें पता चल गया तो उन्हें बहुत बुरा लगेगा और मेरे बारे में क्या सोचेगी।

सब बाते मन में आते ही शादाब ने नाइटी को ढीला छोड़ दिया और बाथरूम की तरफ चला गया। वापिस आकर वो फिर से अपनी अम्मी को बांहों में भर कर सो गया। शहनाज़ ने नींद में ही उसे अपने गले से चिपका लिया और उसका मुंह चूम लिया। ।

सुबह दोनो मा बेटे एक साथ ही उठ गए। शादाब रोज की तरह कसरत लगने लगा तो शहनाज़ के पास आज कोई काम नहीं था इसलिए उसके पास ही बैठ गई। शहनाज़ ने अभी तक नाइटी नहीं उतारी थी, अभी बाहर हल्का हल्का अंधेरा था इसलिए उसे इसका एहसास नहीं था। शादाब को पसीना अा गया था लेकिन फिर भी लगा हुआ था। उसके जिस्म का एक एक कटाव साफ नजर आ रहा था, पसीने से भीग चुकी चौड़ी छाती बेहद उत्तेजक लग रही थी और शहनाज़ की नजरे वहीं पर जमी हुई और।

शहनाज़:" बेटा कितनी मेहनत करते हो! क्या शानदार और ठोस जिस्म बना लिया है।

शादाब अपनी अम्मी के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया और बोला:"

" अम्मी मजबूत जिस्म का होना आजकल बहुत जरूरी है, अम्मी क्या आप नहीं चाहती कि आपका बेटा ताकतवर बने !

शहनाज़; " मुझे तो बहुत खुशी होती हैं तुझे देखकर राजा, सच में पूरा घोड़ा बन गया है तू।

शादाब:" अम्मी क्या आपको अपने बेटे का जिस्म अच्छा लगता है ?

शादाब ने शहनाज़ की दुखती रग पर हाथ रख दिया तो शहनाज़ उदास होकर बोली:"

" हान बेटा बहुत अच्छा लगता हैं मुझे ऐसा ठोस और मजबूत जिस्म,

शादाब अपनी अम्मी की उदासी समझ गया और बोला:"

" अम्मी इतना ज्यादा ठोस भी नहीं हैं जितना आप समझ रही है, यकीन ना हो तो दबा कर देखो

शादाब ने अपनी अम्मी को खुला अवसर दे दिया जो शहनाज़ ने खुशी खुशी कुबूल कर लिया और उसने आगे बढ़ कर अपने दोनो हाथ शादाब की छाती पर रख दिए और उसकी चौड़ी छाती सहलाने लगी। हल्का हल्का दबा दबा कर देखने लगी और जब नहीं दबी तो थोड़े टाइट हाथ से दबाने लगी। शादाब पूरी तरह से मस्त हो गया था क्योंकि आज पहली बार किसी ने उसकी छाती को सहलाया था।

शहनाज़:" झूठा कहीं का, तू तो पूरा लोहे का बन गया है मेरे राजा, मुझे भी थोड़ा कसरत सीखा दे ना!

शादाब:" अम्मी आपका फूलो से नाजुक बदन ये सब नहीं झेल पाएगा, आप रहने दो।

शहनाज़ के स्वाभिमान को ठेस लगी और वो बोली:"..

" अब तो मुझे जरूर सीखनी है मेरे राजा, ताकि मैं तुझे दिखा सकू कि मेरा बदन इतना भी नाजुक नहीं है जितना तू समझ रहा हैं।

शादाब:" ठीक हैं अम्मी फिर तैयार हो जाओ।

शादाब ने शहनाज़ को अपने बराबर में खड़ा कर लिया और दोनों पैरो से अपने पैरो को झुक कर छूने लगा तो शहनाज भी अपने पैरो को झुक कर छूने लगीं जिससे उसकी गांड़ पूरी तरह से उभर कर सामने अा गई। शादाब ने अपनी अम्मी को ऐसे ही खड़े रहने के लिए कहा और खुद उसके पीछे पहुंच गया। पतली सी ड्रेस में शहनाज़ की गांड़ पूरी तरह से कसी हुई साफ नजर आ रही थी और शहनाज़ की चूत भी बिना पेंटी के साफ दिख रही थी।



चूत पर नजर पड़ते ही शादाब की आंखे फिर से चमक उठी और वो अपनी अम्मी के थोड़ा और करीब आते हुए उसकी टांगो के बीच में झांकने लगा। शहनाज़ को अपने पैरो के बीच से जैसे ही अपनी हालात का एहसास हुआ तो शर्म के मारे वो उसकी टांगे अपने आप बंद हो गई और वो आगे को लुढ़क गई। शादाब ने उसे अपनी जल्दी से अपनी गोद में उठा लिया। शादाब :".

" क्या हुआ अम्मी, सब ठीक तो हैं ना एकदम ?

शहनाज़ की सांसे उखड़ गई, वो सोचने लगी उफ्फ ये क्या हो गया मुझसे और उसने शर्म से अपना मुंह ढक लिया। शादाब उसे अपनी गोद में उठाए हुए ही अंदर कमरे में चला गया और शहनाज़ उसके सीने से लिपटी रही।।

थोड़ी देर बाद शहनाज़ उठी और घर का काम करने लगी जबकि शादाब नहाने के लिए चला गया। शहनाज़ भी नहाकर नाश्ता बनाने में जुट गई। थोड़ी देर बाद ही दोनो मा बेटे नाश्ता कर रहे थे।

शादाब:" अम्मी बताओ फिर आज कहां घूमने चलना हैं आपको ?

शहनाज़:" जहां तू ले चले मेरे राजा ।

शादाब:" मैं सोच रहा था कि खेत पर चलते हैं, मैं भी अपने खेत देख लूंगा। क्या आपको रास्ता पता हैं?

शहनाज़:" हान बेटा तुम्हे खेत देखन चाहिए। एक बार गई थी मैं जब नए खेत लिए थे तेरे दादा जी ने मेरे नाम से।

शादाब:' चलो ठीक हैं फिर, मैं गाड़ी निकाल लेता हूं। फिर चलते हैं।

थोड़ी देर बाद शहनाज़ ने सूट सलवार पहन कर बुर्का पहन लिया और दोनो मा बेटे खेत की तरफ चल पड़े। शहनाज़ आज कल से भी ज्यादा खुश नजर आ रही थी। जल्दी ही रास्ता खत्म हो गया तो पगडंडी शुरू हो गई इसलिए उन्हें कार को वहीं छोड़ देना पड़ा और पैदल ही आगे बढ़ गए। थोड़ी दूर जाकर दोनो एक पेड़ के नीचे चादर डालकर बैठ गए। शहनाज पैदल चलने की वजह से पसीने से पूरी तरह भीग चुकी थी। शादाब ने अपनी अम्मी का मुंह रुमाल से साफ करना शुरु कर दिया तो शहनाज़ शर्मा गई क्योंकि उसे डर था कि अगर किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा।

शहनाज़:" बस कर बेटा, अच्छा बैग निकाल मेरा तो गला सूख गया है प्यास से।

शादाब ने अपने बैग से पानी की बोतल निकाल कर उसकी तरफ बढ़ा दी और शहनाज़ पानी गटागट पीती चली गई। शादाब को भूख लगी थी इसलिए बैग से सामान निकालने लगा तो स्ट्राबेरी का पैकेट भी निकाल लिया।

शादाब ने जैसे ही पैकेट से बेरी निकाली तो उसका आकार देख कर दंग रह गया। दो बेरी एक साथ जुड़ गई थी और बीच में से हल्की सी खुल गई बिल्कुल चूत की तरह।



शहनाज़ की नजर जैसे ही उस पर पड़ी तो उसे शर्म महसूस हुई और उसे एहसास हो गया कि ये तो उसकी चूत जैसी लग रही है। शहनाज़ ने अपनी चूत को देखा नहीं था लेकिन हाथ से पकड़ कर सहलाया जरूर था इसलिए वो समझ गई।

शादाब शहनाज़ को छेड़ते हुए:"

" अम्मी देखो ना ये बेरी कितनी प्यारी और सुन्दर लग रही है,

शादाब ने अपनी अम्मी की टांगो के बीच देखते हुए कहा लेकिन वहां उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था।

शहनाज़ बुरी तरह से कांप उठी क्योंकि उसे लग रहा था शादाब उसकी चूत की बात कर रहा है।
उसकी सांसे तेज होने लगी और चूचियां उपर नीचे होना शुरू हो गई। शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए ही बोली:"

" बेटा ये तो एक बेरी हैं जैसे दूसरी होती हैं, इसमें अलग क्या हैं ?

शादाब अपनी अम्मी के चेहरे को हाथ से पकड़ कर ऊपर उठाया और बोला:"

" अम्मी प्लीज़ एक बार पहले देखो तो ध्यान से इसे !

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और अपने बेटे के हाथ में बेरी को देखा तो फिर से शर्म से उसका मुंह लाल हो गया और आपके झुक गई। शादाब आगे बढ़ा और बेरी को उसके होंठो पर फिराने लगा तो शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से कहा:"

" बेशर्म कहीं का, मत कर राजा ये सब, उफ्फ मान जा ना मेरे राजा।

शादाब: अम्मी आपको तो बेरी बहुत पसंद हैं ना इसलिए आपका बेटा आपको खिला रहा हैं।

इतना कहकर शादाब ने अपने हाथ से अपनी अम्मी का मुंह खोला और जैसे ही बेरी उसके होंठो से टच हुई तो शहनाज़ कांप उठी और वो पीछे को गिर पड़ी। शादाब भी अपनी अम्मी के लंबे चौड़े जिस्म पर ही गिर पड़ा और उसका एक हाथ शहनाज़ की जांघ पर टिक गया। शादाब बोला :"

" अम्मी प्लीज़ मुंह खोलो ना अपना, जिद मत करो!

शहनाज़:" तुझे मेरी कसम बेटा, मान जा, मुझसे नहीं खाई जाएगी ये मेरे राजा। फेंक दे इसे

और इतना कहकर उसने अपनी आंखें बंद कर ली। शहनाज़ का पूरा जिस्म मस्ती से भर चुका था और शादाब ने अब अपनी अम्मी की जांघ को सहलाना शुरू कर दिया दिया शहनाज़ के जिस्म में तरंगे उठने लगी थी।

शादाब:" नहीं अम्मी फेकुंगा नहीं, आप मत खाइए लेकिन आपको मेरी आंखो में आंखे डाल कर अपने हाथ से ये मुझे खिलानी पड़ेगी, बोलो मंजूर ?

शहनाज़ की तो जैसे बोलती बंद हो गई। उफ्फ ये कमीना चाह रहा है कि मैं खुद अपनी चूत जैसी बेरी इसे खिलाऊ , मुझसे ना हो पाएगा, उफ्फ लेकिन ये मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा ऐसे तो।

शादाब के हाथ अब थोड़ी अंदर तक शहनाज़ की जांघ सहला रहे थे जिससे शहनाज़ मस्ती से मचल रही थी। उसने कहा:"

" बेटा अपने हाथ से खिला दूंगी लेकिन आंखे नीचे रखूंगी अपनी।

शादाब आखिरकार मान गया क्योंकि वो जानता था कि उसकी अम्मी बहुत ज्यादा शर्मीली हैं, इसलिए उसे धीरे धीरे खोलना होगा। शादाब ने बेरी को शहनाज़ के हाथ में पकडा दिया और खुद उसके हाथ से सामने अपना मुंह कर दिया। शहनाज़ ने आंखे बंद किए हुए ही बेरी को आगे बढ़ाया और जैसे ही वो शादाब के होंठो से टच हुई तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी जिससे बेरी उसके हाथ से छूट कर उसके पेट से होती हुई जांघो के बीच में गिर पड़ी।

शहनाज़ के होंठ कांप रहे थे और मस्ती से खुल बंद हो रहे थे। शादाब एक हाथ की उंगली को उसके होंठो पर फिराने लगा और बोला:"
" क्या अम्मी, एक बेरी नहीं संभाल पाई आप,

शहनाज़ अपने बेटे की उंगलियों की रगड़ से मस्ती से भरी हुई थी इसलिए बोली:"
" बेटा इस बार नहीं गिरेगी, बस इस बार खिला दूंगी

शादाब अपनी अम्मी के होंठो पर अपनी गर्म सांस छोड़ते हुए बोला:"

" खिला तो आप देंगी ही, लेकिन जो गलती हुई है उसकी सजा भी तो मिलनी चाहिए !

शहनाज़मस्ती में डूबी हुई बंद आंखो के साथ ही बोली:"

"उफ्फ अब क्या सजा देगा तू अपनी अम्मी को मेरे राजा? सोच लेना कि कितनी नाजुक हैं तेरी अम्मी!

शादाब उसके गाल को चूम कर बोला:"

" ओह अम्मी मैं जानता हूं इसलिए मजेदार सजा होगी जब तक बेरी नहीं मिल जाएगी मैं आपके होंठ चूसता रहूंगा,

शहनाज़ ने कोई जवाब नहीं दिया और उसके होंठ थोड़ा सा ऊपर की तरफ उभर गए तो शादाब ने अपनी अम्मी का इशारा समझते हुए उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया। शहनाज़ भी पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसकी गर्दन में हाथ डाल कर किस करने लगी। शहनाज़ और शादाब दोनो का एक एक हाथ नीचे की तरफ आ गया ताकि बेरी ढूंढ़ सके। बेरी ठीक शहनाज़ की चूत के सामने पड़ी हुई थी, जैसे ही शादाब का हाथ नीचे की तरफ आया तो उसने शहनाज़ की चूत को बेरी समझ कर पकड़ लिया जिससे शहनाज़ के मुंह से एक आह निकल पड़ी और उसका मुंह खुलते ही शादाब की जीभ अंदर घुस गई। शहनाज़ का जिस्म मस्ती से पूरी तरह से हिलने लगा और अपनी टांगे इधर उधर करने लगी। शादाब ने जैसे ही चूत को हल्का सा दबाया तो शहनाज़ ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उससे अपने होंठ आजाद किए और तड़पते हुए बोली:"

" उफ्फ बेटा छोड़ दे उसे वो बेरी नहीं है, मर जाऊंगी नहीं तो आज मैं!! उफ्फ मत कर मेरे राजा

शादाब ने उसकी चूत को पूरी तरह से मुट्ठी में भर लिया और बोला;" आह ऐसे कैसे छोड़ तू अम्मी , इतना ढूंढने के बाद तो मिली है मुझे। ये तो बेरी ही हैं।

शहनाज़ ने उसके हाथ को पकड़ लिया और बोली:" उफ्फ बेटा ये बेरी नहीं है मेरे राजा!! मान जा उफ्फ मत कर

शादाब ने उसकी चूत को अच्छे से उंगली फेर कर महसूस किया और बोला:"
" उफ्फ अम्मी, ये तो बिल्कुल वहीं बेरी हैं, बस चिकनी हो गई है पहले से ज्यादा, शायद दबने से रस निकल रहा है इसका।

शहनाज़ पूरी तरह से तड़प रही थी और समझ गई कि उसका बेटा पूरी तरह से जोश में हैं इसलिए उसने खुद ही बेरी ढूंढने का प्लान किया। तभी शादाब की उंगली शहनाज़ के चूत के छेद से टकरा गई तो उसकी पूरी उंगली रस से भीग गई।

शादाब:" उफ्फ अम्मी, देखो ना कितना रस भरा हुआ है इस बेरी के अंदर, उफ्फ उसका तो मुंह में सारा रस चूस जाऊंगा जीभ से।

शहनाज़ का जिस्म झटके पर झटके खा रहा था और उसकी चूत पूरी तरह से गीली होकर अपना रस बहा रही थी। तभी शादाब ने चूत के छेद को हल्का सा सहला दिया तो शहनाज़ सिसक उठी और बोली;"

" आह नहीं मेरे राजा, उफ्फ मान जा शैतान वो बेरी नहीं है मेरे लाल, छोड़ दे उसे।

शादाब चूत के छेद पर अपनी एक मोटी उंगली को उपर से नीचे तक रगड़ते हुए बोला:"

" आह मेरी नाज़, देख ना इसमें तो छेद भी है, उफ्फ बिल्कुल वहीं बेरी हैं, छेद तो बहुत टाइट हैं एक दम कसा हुआ मानो बंद हो!!

शादाब ने ऐसा कहकर चूत के छेद पर उंगली का दबाव बढ़ा दिया तो शहनाज़ की चूत की दीवारें खुलने लगी और शहनाज़ को दर्द का एहसास होने लगा। तभी शहनाज़ के हाथ में बेरी लग गई लेकिन तब तक शादाब का सब्र जवाब दे गया और उसने एक तेज झटके के साथ एक इंच उंगली शहनाज़ की चूत में घुसा दी और शहनाज़ का जिस्म दर्द से भर उठा और उसकी सिसकी निकल पड़ी और उसने कराहते हुए अपनी जांघो को भींच लिया।

" आह नहीं, उफ्फ मा री, आह्हह मार डाला मेरे राजा, अहह ओएचएच उफ्फ एसआईआई

और इसके साथ ही शहनाज़ की चूत ने अपना रस बहा दिया और वो झटके पर झटके खाने लगी। शादाब भी चूत के इस पहले एहसास से तड़प उठा ऐसा लग रहा था मानो चूत ने उसकी उंगली को कस लिया हैं और उसके लंड ने वीर्य की पिचकारी मारनी शुरू कर दी। शहनाज का हाथ अपने आप बेरी लिए उपर उठ गया और जैसे ही वीर्य की पिचकारी बंद हुई तो उसकी आंखे खुल गई और उसे अपनी अपनी आंखो के आगे बेरी नजर आईं तो उसकी आंखे हैरानी से फैल गई । डर और शर्म के मारे चूत में घुसी उसकी उंगली अपने आप बाहर निकल गई और वो शहनाज़ की आंखो में देखते हुए एकदम भोली सूरत बनाकर बोला:"

" उफ्फ अगर ये बेरी हैं तो वो क्या हैं अम्मी जहां उंगली घुस गई थी!!

शहनाज़ अपने बेटे की इस अदा पर निहाल हो गई और उसके होंठ चूमते हुए बोली;"

" चुप कर बेशर्म कहीं का, जो मन में आए बोलता रहता हैं। सुधर जा अब तू।

शादाब अपनी रस से भीगी हुई उंगली को अपने मुंह के पास लाया और शहनाज़ को दिखाते हुए बोला

" उफ्फ अम्मी देखो ना कितनी रसभरी बेरी थी पूरी उंगली भीग गई है , आपको तो बेरी बहुत अच्छी लगती है एक बात टेस्ट करके देखो ना !!.

शहनाज का मन किया कि वो उठ कर भाग जाए लेकिन शादाब के नीचे दबी हुई थी । उसने एक बुरा सा मुंह बनाया मानो उसे कड़वी दवा खाने के लिए मजबूर किया जा रहा हो। उसके पास बोलने के लिए शब्द तो थे लेकिन डर और शर्म के मारे उसकी जुबान नहीं उठ पाई तो उसने शादाब की तरफ आंखे निकालते हुए उनके कान पकड़ कर खींच दिए। शादाब हल्के दर्द से कराह उठा और बोला:"

" आह अम्मी नहीं, उफ्फ दुखता हैं छोड़ दो मेरा कान, आपको नहीं चूसना तो मत चुसिए, मैं खुद ही चूस लेता हूं।

इतना कहकर शादाब ने अपने मुंह खोलते हुए जैसे ही उंगली अंदर डाली तो शहनाज़ ने मारे शर्म के अपना एक हाथ अपनी आंखो पर रख लिया और दूसरे को उसकी कमर पर मारते हुए बोली:"

" छी उफ्फ गंदा कहीं का, कितना बिगड़ गया हैं तू, क्या करू तेरा मैं!!

शादाब मस्ती से उंगली को चूसने लगा और सारा रस चूस कर उंगली को पूरी तरह से साफ कर दिया और बोला:"

" उफ्फ कितनी टेस्टी बेरी थी, मजा आ गया अम्मी , ऐसा टेस्ट मैंने आज तक महसूस नहीं किया।

शहनाज़:" बदतमीज कहीं का ,

इतना कहकर शहनाज़ ने उसकी गर्दन में अपनी बांहे लपेट कर उसे अपने सीने से चिपका लिया तो शादाब भी डर और शर्म के मारे शादाब शहनाज़ के जिस्म पर गिर पड़ा।
 
शादाब ऐसे ही अपनी अम्मी शहनाज़ के उपर पड़ा रहा तभी उन्हें किसी के आने की आहट सुनाई दी तो जैसे दोनो नींद से जागे और शादाब एक दम सही होकर बैठ गया। एक आदमी उसी रास्ते पर अा रहा था जो शायद किसी दूसरे गांव का था और रास्ता भटक गया था।

आदमी:" बेटा मुझे तिनकपुर गांव जाना था क्या ये रास्ता उधर ही जाता हैं ? थोड़ा पानी मिलेगा क्या पीने के लिए?

शादाब:" हान बाबा आप आगे जाकर दाईं तरफ मुड़ जाना तो आप पहुंच जाओगे।

आदमी:' ठीक है बेटा , अल्लाह तुम्हे सलामत रखें।

शादाब ने पानी की बोतल उसे दी तो वो गटागट सारा पानी पी गया और फिर वो आदमी चला गया तो शादाब बोला:" अम्मी अभी कितने दूर हैं हमारे खेत ?

शहनाज़ :" बेटा बस थोड़ी दूर और जाना पड़ेगा फिर हमारी जमीन शुरू हो जाएगी।

इतना कहकर शहनाज़ भी खड़ी हो गई और शादाब उसके पीछे पीछे चल दिया। थोड़ी देर बाद ही दोनो एक बड़े रास्ते पर अा गए और वहीं से उनके खेत शुरू हो गए। शहनाज़ बोली:"

" बस बेटा ये सब खेत अपने ही हैं, सारी जमीन तेरे दादा जी के नाम पर हैं बस कुछ खेत अभी मेरे नाम पर भी कर दिए थे।

शादाब अपनी जमीन देख कर बहुत खुश हुआ और फसल से लहलाते हुए खेत उसने बहुत दिनों के बाद देखे थे इसलिए उसकी खुशी की कोई सीमा नहीं थी। अपनी जमीन की मिट्टी की खुशबू अलग ही होती हैं जो आज उसे समझ अा रही थी। खेतों के बीच में एक ट्यूबवेल लगा हुआ था जहां से सारे खेत में पानी दिया जाता था। खेतों के दूसरी तरफ लकड़ियों का एक ऊंचा मचान बना हुआ था जहां से मजदूर खेत की जानवरो के रक्षा करते थे।।

शादाब ने चाबी से ट्यूबवेल खोली और अंदर कमरे में घुस गया तो गर्मी से हांफती हुई शहनाज़ भी अंदर दाखिल हो गई। दोनो का पसीने से बुरा हाल था इसलिए शादाब वहां लगा हुए पंखा चलाने लगा लेकिन काफी दिन से इस्तेमाल ना होने की वजह से वो खराब हो गया था। दोनो गर्मी से बहुत ज्यादा परेशान थे इसलिए शादाब ने उपर मचान पर चढ़ने। का सोचा ताकि उपर होने की वजह से थोड़ी ज्यादा हवा लग सके।

शादाब:" अम्मी गर्मी से बुरा हाल हैं, उपर मचान पर थोड़ी हवा लगा जाएगी। चलो उपर चलते हैं

शहनाज को अपने बेटे की बात ठीक लगी इसलिए वो उसके साथ चल दी।

शादाब:" अम्मी पहले आप चढ़ जाओ, मैं बाद में आऊंगा।

शहनाज़ चढ़ने लगी लेकिन पहली लड़की थोड़ी ज्यादा उपर थी इसलिए उसके हाथ में नहीं अा रही थी तो उसने उम्मीद से अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब ने अपनी अम्मी को अपनी गोद में उठा लिया और उपर की तरफ कर दिया तो शहनाज़ आराम से उपर चढ़ गई।

शहनाज़:" बेटा तू पानी भी लेते आना, प्यास लग गई हैं फिर से गर्मी बहुत हैं।

शादाब वापिस ट्यूबवेल की तरफ आया और पानी की बोतल देखी जी कि गलती से उल्टी डल गई थी इसलिए खाली हो गई थी।

शादाब:"अम्मी बॉटल खाली हैं, सामने एक नल लगा हुआ हैं मैं भर कर ले आता हूं।

शहनाज़:" तुम रहने दो बेटा, ऐसे ही अा जाओ, वो दूर हैं बहुत तुम्हे घूम कर जाना पड़ेगा।

शादाब:" कोई बात नहीं अम्मी मैं चला जाऊंगा, मेरी मा अपने दोस्त के होते हुए प्यासी रहे ऐसा नहीं हो सकता।

इतना कहकर शादाब बॉटल लेकर नल की तरफ चल पड़ा। जितनी पास नल उसे लग रहा था वो सच में उससे कहीं ज्यादा दूर था, उपर से तेज गर्मी शादाब का पूरा जिस्म पसीने से भीग गया लेकिन वो चलता रहा।

दूसरी तरफ शहनाज़ को अब लग रहा था कि उसने अपने बेटे को गलत बोल दिया पानी के लिए। उपर सचमुच बड़ी अच्छी ठंडी हवा लग रही थी जिससे जल्दी ही शहनाज़ का पूरा पसीना सूख गया और उसे अब ठंडी हवा काफी सुकून दे रही थी। वो सोचने लगी कि उसका बेटा सच में उसका बहुत ध्यान रखता हैं, इतनी भयंकर धूप में भी पानी लेने चला गया। तभी उसके होंठो पर मुस्कान अा गई और सोचने लगी कि बड़ा शैतान भी तो हो गया हैं। कमीने ने बेरी समझ कर मेरी चूत को ही पकड़ लिया था,( चूत शब्द दिमाग में आते ही शाहनाज शर्मा गई) उफ्फ मेरी तो हालत ही खराब हो गई थी, लेकिन बेरी भी तो एक दम चूत जैसी ही थी, नीचे भी तो बिल्कुल ऐसा ही छेद था जैसे चूत में होता हैं। उफ्फ शादाब ने तो अपनी मा की चूत को ही बेरी समझ कर उसमे उंगली डालनी शुरू कर दी थी। शहनाज़ की आंखो के आगे वो दृश्य तैर गया जब शादाब उसकी चूत के छेद पर अपनी उंगली रगड़ रहा था। उसकी मस्ती से आंखे बंद हो गई और उसने सोचा कि मेरे बेटे ने तो हल्की सी उंगली घुसा ही दी थी। उफ्फ कितना दर्द हुआ था मुझे हाय लेकिन उससे बहुत ज्यादा अच्छा लगा था। अगर बेरी सही टाइम पर ना मिलती तो वो तो पूरी उंगली घुसा देता। उफ्फ अगर पूरी घुस जाती तो क्या होता !

ये सोचकर शहनाज़ की चूत एक बार फिर से भीगने लगी। ये कमीनी मेरी चूत भी आजकल कितना गीली होने लगी हैं। पिछले 18 साल से तो एकदम सूखी पड़ी हुई थी लेकिन जब से मेरा बेटा शादाब आया था ये नदियां बहा रही है। क्या ये उसके लिए तड़प रही हैं, उफ्फ उसकी एक इंच की उंगली घुसते ही मेरी हालत खराब ही गई उसका लंड...

नहीं ये सब गलत हैं, मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए वो मेरा सगा बेटा हैं। उफ्फ मेरा बेटा भी तो एक दम मेरे सपनों के राजकुमार जैसा ही है क्या करू कैसे रोकु खुद को, कहीं ऐसा ना हो कि रेशमा उसे बिगाड़ ही दे। और वो कमीनी औरतें भी तो उसका नंबर लेकर गई हैं ! क्या करू ??

आखिरकार शहनाज़ ने बहुत देर तक सोचने के बाद फैसला किया कि उसे अपने बेटे को अगर इन सबसे बचाना हैं तो उसे अपनी ओर आकर्षित करना ही होगा। शहनाज़ अपने ख्यालों में डूबी हुई थी कि उसे शादाब आता हुआ दिखाई दिया। पसीने से पूरी तरह भीगा हुआ, चेहरा पूरी तरह से तपकर लाल हो गया था। उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार अा रहा था जैसे जैसे शादाब पास आता जा रहा था शहनाज़ को अच्छा लग रहा था। तभी शादाब मचान के नीचे अा गया था।

शहनाज़:" उफ्फ बेटा कितना भीग गया हैं तू पसीने से, जल्दी उपर अा जा।

शादाब पानी की बोतल लेकर उपर चढ़ गया। शहनाज़ ने उसे गौर से देखा तो उसका चेहरा एक दम धूप से लाल हो गया था और जिस्म पसीने से इतनी बुरी तरह से भीगा हुआ था मानो नहाकर आया हो।

शहनाज़:" उफ्फ मेरे राजा तेरा क्या हाल हो गया गर्मी में, मुझे पहले पता होता तो तुझे बिल्कुल नहीं भेजती ।

इतना कहकर शहनाज़ अपने सूती दुपट्टे से अपने बेटे का चेहरा साफ करने लगी। उसने सब पसीना साफ कर दिया और अपने बेटे के माथे को चूम लिया।

शादाब:" अम्मी आप प्यासी थी इसलिए मेरा फर्ज़ बनता था कि आपकी प्यास बुझाऊं, पानी क्या मैं तो आपके लिए अपनी जान भी दे सकता हूं।

शहनाज:" बस बेटा बस, मुझे तुझ पर पूरा यकीन हैं मेरे राजा।

धीरे धीरे ठंडी हवा से शादाब का पसीना सूखने लगा तो शहनाज़ ने भी अब राहत की सांस ली। जैसे ही गर्मी कम हुई तो शादाब को शरारत सूझी और बोला:"

" अम्मी एक फिल्म में मैंने देखा था कि हीरोइन ऐसे ही हीरो का पसीना साफ कर रही थी अपने दुपट्टे से।

शहनाज़ उसकी बात पर शर्मा गई और बोली:" बड़ा शैतान हो गया हैं तू बड़ी बड़ी बाते करता है।

शादाब अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर बोला:'

" अम्मी देखो ना मैं तो आपका बिल्कुल छोटा सा राजा बेटा हूं, बस दोस्त समझकर मजाक कर लेता हूं कभी कभी।

शहनाज़ भी अब थोड़ा मस्ती में अा गई और बोली:'

" वैसे बेटा तूने काम तो हीरो वाला ही किया था, इतनी गर्मी में चला गया था मेरे लिए पानी लेने। लेकिन मैं तेरी मा हूं राजा हीरोइन नहीं समझा।

शादाब स्माइल करते हुए:"
" अम्मी सच कहा आपने हीरोइन नहीं हो क्योंकि आप तो एक दम आसमान से उतरी हुई परी हो।
चलो आम्मी आपने कम से कम अपने बेटे को हीरो तो मान लिया!!

शहनाज़ :" बाते बनाना तो कोई तुमसे सीखे,

शादाब:" अम्मी आपको बता हैं फिल्म में हीरोइन ने क्या किया था जब हेरी उसके लिए पानी लेकर आया था ?

शहनाज़:" अब मुझे कैसे पता चलेगा जब तक तू बताएगा नहीं ?

शादाब:" अम्मी हीरोइन ने उसके होंठ चूम लिए थे खुश होकर !!

शहनाज़ अपने बेटे की चालाकी पर मुस्कुराए बिना ना रह सकी और सोचने लगी कमीना किस के लिए कैसे कैसे बहाने बना रहा हैं।
शहनाज़ उससे बोली:"

" तेरा दिमाग आजकल कुछ ज्यादा ही चलने लगा हैं, चल थोड़ा खाना खा लेते है आजा ।

शादाब ने टिफिन खोल दिया और दोनों मा बेटे के दूसरे को खाना खिलाने लगे।थोड़ी देर बाद ही वो खाना खाकर आराम करने लगे।

शहनाज़:" अच्छा बेटा एक बात तो हैं कि यहां पर हवा बड़ी अच्छी चल रही है ठंडी ठंडी।

शादाब:" हान अम्मी, हवा अच्छी चल रही हैं। वैसे एक बात हैं कि अगर ये जगह शहर में हो तो मजा ही कुछ और हैं ।

शहनाज़ थोड़ा हैरान होते हुए:"

" वो क्यों बेटा ? शहर में क्या अलग हो जाएगा ?

शादाब:" देखो ना अम्मी ये मचान इतना उपर हैं कि दूर दूर से कोई देख नहीं सकता कि उपर क्या हो रहा है, इसलिए आराम से कपल रोमांस कर सकते हैं।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर हल्की सी शर्मा गई और बोली;'
" बेटा ये कपल क्या होता है?

शादाब:" लड़का और लड़की अम्मी, जो आपस में दोस्त होते हैं और प्यार भी करते है।

शहनाज़ को लग रहा था जैसे सामने उसका बेटा नहीं बल्कि उसके सपने का शहजादा बैठा हुआ हैं और ठंडी ठंडी हवा का असर भी हो रहा था। इसीलिए मुंह नीचे किए हुए बोली:"

" बेटा दोस्त तो हम दोनों भी है!!

शादाब झट से बोल पड़ा :'

" हां अम्मी हम एक दूसरे से प्यार भी करते है इसका मतलब हम भी कपल हो गए।

शहनाज़ समझ गई कि उसका बेटा जरूरत से ज्यादा ही समझदार हो गया है। हल्की सी उंगली पकड़ाते ही पूरा हाथ खुद पकड़ लिया। शहनाज उसका हाथ हल्का सा दबाते हुए बोली:"
" लेकिन हम तो मा बेटा भी हैं ना मेरे राजा फिर कपल कैसे हो सकते हैं ?

शादाब को अचानक से उस दिन सिनेमा हॉल में हुआ हादसा याद अा गया और बोला:"

शादाब:" अम्मी उस दिन शहर में वो सेल्स गर्ल्स आपको मेरी मा नहीं बल्कि दोस्त समझ रही थी और ब्यूटी पार्लर वाली ने तो आपको मेरी बीवी ही समझा लिया था।

शहनाज़ भी आग में घी डालते हुए बोली:"

" अरे हां याद हैं ना जब हम मूवी देख रहे थे तो सामने मा बेटा दोनो कपल ही तो थे।

इतना कहते वो अपने बेटे के एक दम पास खिसक गई। शादाब ने उसके दोनो हाथ पकड़ लिए और उसकी आंखो में देखने लगा तो शहनाज़ बोली:"

" बेटा तुझे पक्का यकीन हैं ना कि यहां से कोई हमे देख नहीं पाएगा

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी काफी हद तक रोमांस के लिए तैयार हैं लेकिन डर रही हैं। शादाब बोल:"

" अम्मी मुझे पूरा यकीन है कोई नहीं देख पाएगा, आप घबराए नहीं।

इतना कहकर शादाब ने उसे अपनी तरफ खींच लिया तो शहनाज शर्म से अपनी आंखे किए हुए अपने बेटे की बांहों में अा गई। उसका पूरा जिस्म कांप रहा था। शादाब ने उसे मचान पर पड़ी चादर पर लिटा दिया और खुद उसके बराबर में लेट गया। अब दूर दूर से कोई पूरी कोशिश करके भी उन्हें नहीं देख सकता था। शहनाज़ शादाब की तरफ थोड़ा खिसकते हुए उससे सट गई और बोली:"

" बेटा तू सच में बहुत प्यारा है शादाब, काश तू मेरा बेटा ना होता।

शादाब ने उसके चेहरे को अपने दोनो हाथो में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:"
" अगर बेटा ना होता तो क्या अम्मी ? आप भी मुझे बहुत अच्छी लगती है

शहनाज़ उसके गाल पर एक उंगली घुमाते हुए बोली:'

" उफ्फ कुछ नहीं , मुझे शर्म आती है मेरे राजा, तू समझ जा

इतना कहकर शहनाज़ ने अपना मुंह उसके चौड़े सीने में छुपा लिया और जोर जोर से सांस लेने लगी। शादाब उसकी कमर सहलाते हुए बोला:"

" अम्मी बताओ ना प्लीज़, अगर बेटा ना होता तो क्या होता ?

शहनाज़ उसकी कमर में हल्के हल्के घुसे मारते हुए :"

" जा मुझे नहीं पता, शर्म आती हैं मुझे बहुत, तुझे खुद समझना हैं तो समझ जा नहीं तो रहने दे।

शादाब:" उफ्फ अम्मी, आप पता नहीं इतना क्यों शर्माती हो, आप अपने राजा पर यकीन कर सकती हो आराम से ?

शहनाज़:" नहीं बेटा मुझसे ना हो पाएगा, तुम खुद ही समझ लेना अगर सच में तुम समझदार हो तो

शादाब:" उफ्फ अम्मी ये किस मुश्किल में डाल दिया मुझे आपने ? कुछ समझ नहीं अा रहा है मुझे तो अब।

शहनाज़ उसके पेट में गुलगुली करते हुए :"

"बेटा तुम्हे समझना ही पड़ेगा ये तो खुद ही मेरे राजा। वैसे मुझे कुछ समझ में आ रहा हैं

शादाब:" हान अम्मी बोलो ना प्लीज़ आपको क्या समझ में आ रहा हैं ?

अपने बेटे की बात सुनते ही शहनाज़ ने अपना चेहरा उपर उठाया और अपने होंठ शादाब के होंठो पर टिका दिए। उफ्फ ये पहली बार था जब खुद शहनाज़ ने किस की शुरुआत करी थी। उसने अपने बेटे के नीचे के होंठ को अपने होंठो में भर कर चूसना चालू कर दिया। शादाब भी सब कुछ भूलकर अपनी मा के होंठो पर टूट पड़ा और दोनो मा की मजे से आंखे बंद हो गई और किस में डूब गए। काफी देर के बाद दोनो के होंठ अलग हुए तो दोनो एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्करा दिए और शहनाज़ अपने बेटे से चिपक गई। शादाब ने भी उसे अपनी बाहों में कस लिया तो शहनाज़ को बड़ा सुकून मिला और वो बोली:"

" बेटा कितना सुकून मिल रहा हैं तेरी बांहों में मुझे, सो जाऊं क्या ?

शादाब अपनी अम्मी के बालो में उंगली निकालते हुए:"

" हान अम्मी, आप अपने बेटे की बांहों में पूरी तरह से महफूज हो, आप आराम कर लो।

शहनाज़ पूरी तरह से शादाब की बाहों में सिमट गई और आंखे बंद कर ली। ठंडी ठंडी हवा का असर दोनो मा बेटे पर होने लगा और जल्दी है दोनो की आंख लग गई।
शाम तक दोनो ऐसे ही सोते रहे और दोनो के साथ जाग गए तो शहनाज़ बोली:"

" बेटा सच में बड़ा सुकून मिला तेरी बांहों में मुझे, शाम हो गई हैं चलो घर चले ।

शादाब:" ठीक हैं अम्मी, पहले मैं उतर जाता है फिर आपको उतार लूंगा !

इतना कहकर शादाब नीचे उतर गया और फिर शहनाज धीरे धीरे नीचे उतरने लगी लेकिन उसका हाथ स्लिप हो गया और शादाब के उपर गिर पड़ी लेकिन शादाब ने उसे पूरी तरह से संभाल लिया और शहनाज़ डर के मारे उससे चिपक गई।

शहनाज़:" उफ्फ बेटा, तू कितना अच्छा हैं, हर बार मुझे बचा लेता हैं, सच में एक औरत मर्द के बिना कितनी अधूरी होती हैं।

शादाब:" अम्मी जब तक मैं हूं आपको कुछ नहीं होने दूंगा, आप बेकिफ्र रहे।

उसके बाद दोनो घर की तरफ चल पड़े। थोड़ी दूर पैदल चलने के बाद शहनाज़ के पैर दर्द करने लगे तो वो बोली:"

" बेटा मेरे तो पैर दर्द करने लगे, मुझसे अब नहीं चला जाता।

अपनी अम्मी की बात सुनते ही शादाब ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और चलने लगा। शहनाज़ शर्म के मारे नीचे उतरने की कोशिश करने लगीं तो शादाब बोला:"

" अम्मी क्या हुआ क्यों उतर रही हो आप ?

शहनाज़:" बेटा मुझे शर्म आती हैं, किसी ने देख लिया तो क्या कहेगा?

शादाब :" अम्मी मुझे किसी के देखने या नहीं देखने से कोई फर्क नहीं पड़ता, आपका ध्यान रखना मेरे फ़र्ज़ हैं।

शहनाज़ चुप हो गई और अपनी दोनो बांहे उसके गले में लपेट कर उससे चिपक गई। शादाब आगे बढ़ता रहा और शहनाज़ दीवानी की तरह उसका सुंदर मुखड़ा देखती रही। शादाब की छाती से उठती हुई मादक मर्दाना गंध शहनाज़ को महसूस होने लगी और वो पूरी तरह से उसमे खोती चली गई। शहनाज़ की जीभ पता नहीं कैसे अपने आप बाहर निकल गई और उसने शादाब के सीने को चूम लिया तो शादाब के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी जिसे सुनकर शहनाज़ जैसे होश में आई और अपनी गलती पर शर्म से दोहरी हो गई। दोनो गाड़ी तक अा गए थे और शादाब ने गाड़ी घर की तरफ चला दी। आज शहनाज़ पूरी तरह से अपने बेटे पर फिदा हो चली थी जबकि शादाब के मन में बार बार वहीं बात घूम रही थी कि काश तू मेरा बेटा ना होता।

थोड़ी देर बाद वो दोनो घर पहुंच गए और शादाब सब्जी लेने के लिए बाजार चला गया तो वहां उसने एक नया होटल देखा जो गांव में उसने पहली बार देखा था। वहां से उसने अपनी अम्मी की पसंद का खाना पैक कराया और घर की तरफ चल पड़ा।

उसके दिमाग में वहीं दो बाते घूम रही थी कि काश तू मेरा मेरा बेटा ना होता और मर्द के बिना औरत कितनी अधूरी होती हैं। शादाब दूसरी बात तो जल्दी ही समझ गया कि उसकी अम्मी अभी ठीक से जवान होकर पूरी तरह से खिल चुकी हैं इसलिए ज़ाहिर हैं कि उसे मर्द की कमी खलती हैं। लेकिन दादा दादी जी तो कह रहे थे कि शाहनजा ने हमेशा घर की मान मर्यादा का ध्यान रखा और गलत कदम नहीं उठाया फिर अचानक से ये क्यों बोला कि औरत मर्द के बिना अधूरी होती हैं जब मैंने उन्हें अपनी बांहों में थामा था। क्या मेरे उन्हें अपनी थामनें से उन्होंने ऐसा बोला हैं ?

उफ्फ कुछ समय नहीं अा रहा हैं ठीक से लेकिन एक बात तो साफ हैं कि अम्मी प्यार के लिए तड़प रही है। भले ही वो किसी से शर्म के मारे कुछ ना कह पाती हो लेकिन उस रात मैने उन्हें खुद देखा था किस तरह से वो खुद ही अपने आपको मसल रही थी।

शादाब ये सब सोचते हुए घर पहुंच गया और उसने देखा कि उसकी अम्मी बेड पर पड़ी हुई थी और किसी गहरी सोच में थी और खुद से ही बाते कर रही थी। शादाब उसके पास पहुंच गया और उसका गाल चूम लिया। शहनाज़ एक झटके से डरकर खड़ी हो गई लेकिन अपने बेटे को देखते ही उसे मारने लगी।

" शैतान कहीं का, मुझे डरा ही दिया था तूने तो।

शादाब:" अम्मी मैं तो बस मजाक कर रहा था। देखिए मैं आपके लिए क्या लाया हूं ?

शहनाज़ अपनी पसंद का खाना देख कर शादाब से चिपक गई और उसका मुंह चूमते हुए बोली

" बड़ा ध्यान रखता हूं तू अपनी अम्मी का, क्या बात हैं मेरे राजा ?

शादाब भी थोड़ा खुलते हुए:"

" अम्मी अब आप मेरी हीरोइन जो बन गई हैं इसलिए ध्यान भी रखना पड़ेगा और प्यार...

शहनाज़ उसकी तरफ तिरछी नजरों से देखते हुए:'

" बोल बोल ना रुक क्यों गया तू ?

शादाब आगे आकर उसके दोनो हाथ पकड़ते हुए बोला:"

" और प्यार भी करना होगा मुझे अपनी हीरोइन को।

शहनाज़ थोड़ा नाराजगी जाहिर करते हुए अपने हाथ छुड़ाने लगी और बोली:'

" जरा मेरे हाथ छोड़ एक बार फिर तुझे ठीक करती हूं, बड़ा आया मुझे प्यार करने वाला !!

शादाब ने उसके हाथ थोड़ा जोर से पकड़ लिए तो शहनाज़ को दर्द होने लगा और बोली:"

" उफ्फ तोड़ ही देगा क्या मेरे हाथ तो, कितना टाइट पकड़ा हैं बात प्यार करने की करता है और करता ज़ुल्म हैं मुझ पर।

शादाब थोड़ा उसके हाथ ढीला छोड़ते हुए:" उफ्फ करना तो प्यार ही चाहता हूं लेकिन आप तो एकदम जंगली बिल्ली जैसी खतरनाक हो, बचना तो पड़ेगा।

शहनाज़ को हंसी अा गई और फिर अगले ही पल गुस्सा करते हुए बोली:' तू बहुत ज्यादा बिगड़ गया हैं अपनी मा को जंगली बिल्ली बोलता है, तुझे सबक सिखाना पड़ेगा।

शादाब ने जिस जगह से शहनाज़ के गोरे चिट्टे हाथ पकड़े थे वहां से नीले पड़ गए थे इसलिए शहनाज़ उसे देखते हुए उसके कान में बुदबुदाई:"

" वैसे हैं तो एकदम पूरा सांड तू, देख ना कैसे हाथ नीला कर दिया मेरा। पूरा मर्द बन गया हैं।

शादाब:" उफ्फ अम्मी अभी पुरा कहां बना हूं, क्या मैं सचमुच मर्द बन गया हूं अम्मी ?

शहनाज़ अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए:"

" और नहीं तो क्या देख ना कैसे जोर से पकड़ हैं? अब तेरी शादी करनी पड़ेगी कोई तगड़ी सी लड़की देख कर ?

शादाब:" अम्मी मुझे नहीं करनी शादी, वैसे तगड़ी सी क्यों कहां आपने ?

शहनाज़ ने शादाब को बातो में लगाकर अपना एक हाथ छुड़ा लिया और उसके कान खींचते हुए बोली:"

" तगड़ी सी इसलिए क्योंकि दुबली पतली सी लड़की को तो तू पीसकर रख देगा।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश हो गया और बोला:"

" क्या सच में अम्मी ?

शहनाज़ अपनी आंखे नाचते हुए:" और नहीं तो क्या ? देखा तूने अपने आपको पता नहीं क्या खाता हैं ?

शादाब :"अम्मी बुरा ना मानो तो एक बात बोलूं ?

शहनाज़:" बोल दे अब जल्दी से जो बोलना है ?

शादाब;" लेकिन अम्मी आजकल के लड़के तो मोटी तगड़ी नहीं बल्कि एक दम आपके जैसी भरी हुई और पतली सी कमर वाली लड़की पसंद करते हैं ।

शहनाज़ उसके तरफ आंखे निकालते हुए :' चल कमीना कहीं का, शर्म नहीं आती अपनी मा से ऐसी बाते करते हुए तुझे?

शादाब:" अम्मी प्लीज़ बुरा मत मानना, सच तो ये ही हैं !

शहनाज़:" बड़ी बड़ी बाते करने लगा हैं आजकल तू। चल जा जल्दी से हाथ धोकर अा मुझे भूख लगी हैं बहुत।

शादाब हाथ धोने चला गया और शहनाज़ टेबल पर खाना लगते हुए सोचने लगी कि उसका बेटा सचमुच पूरा जवान हो गया हैं और बड़ी बड़ी बाते करने लगा हैं। घुमा फिरा कर बोल रहा था कि आजकल के लड़के मेरी जैसी औरतें पसंद करते हैं, सीधे सीधे नहीं बोल पाया कि अम्मी आप मुझे अच्छी लगती हैं।

ये सब सोचते सोचते शहनाज़ का जिस्म कांप उठा। उफ्फ ये शैतान लड़का भी ना, अपनी ही अम्मी का दीवाना हो गया लगता हैं।

शादाब हाथ धोकर अा गया और दोनो मा बेटे एक साथ खाना खाने लगे। शहनाज़ ने अपने बेटे को खुद अपने हाथ से खाना खिलाया क्योंकि वो जानती थी कि उसका बेटा उसे बहुत प्यार करता हैं। जल्दी ही दोनो ने खाना खा लिया और शहनाज़ बर्तन लेकर किचेन में चली गई। शहनाज़ बर्तन धोते हुए अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थीं। काश ये मुझे पहले मिल गया होता तो अपना सब कुछ इस पर लुटा देती। शहनाज़ सोचने लगी कि मैं तो अभी भी काफी जवान हूं और ये तो बोल रहा था कि इसे मेरी जैसी ही पतली और भरे हुए जिस्म की औरतें पसंद आती हैं। शैतान कहीं का अपनी ही मा पर डोरे डाल रहा था। तभी शहनाज़ को अपनी बाते याद आने लगी कि आज दिन में मेरे मुंह से क्या निकल गया था कि काश तू मेरा बेटा ना होता।

उफ्फ वो क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में ! लेकिन मैंने ऐसी बात बोली क्यों, क्या मैं भी उसकी दीवानी हो गई हू। उफ्फ जब भी मैं उसे देखती हूं कहीं खो सी जाती हूं, और जब वो मुझे छूता हैं तो मेरे अंदर अपने आप सितार बजनें लगता हैं। क्या करू मैं !?

कैसे खुद को संभालू, कुछ समझ नहीं आता । खैर ये ही सोचते हुए वो धुले हुए बरतन सजाने लगी और जल्दी ही जल्दी ही काम खत्म करके अपने रूम में चली गई जहां उसका बेटा उसके इंतजार कर रहा था।

उधर शादाब पूरी तरह से अपनी अम्मी की बातो कि मर्द के बिना औरत कितनी अधूरी होती हैं और काश तू मेरा बेटा ना होता तो...
इन्हीं दोनों बातो में डूबा हुआ था लेकिन कुछ खास समझ नहीं पा रहा था।

शादाब अंदर कमरे में बिछी हुई कालीन पर बैठा हुआ था और शहनाज़ भी जाकर उसके पास बैठ गई।

शहनाज़:" क्या हुआ किस सोच में डूबे हुए हो मेरे राजा ?

शादाब:" कुछ खास नहीं अम्मी, बस ऐसे ही आपके बारे में सोच रहा था कि ना तो आपके साथ रहा ना ही आपके बारे में ज्यादा कुछ जानता हूं।

शहनाज़:" क्या बात हैं मेरे राजा! आज कल तू अपनी मा के बारे में कुछ ज्यादा ही सोच रहा है। तेरे इरादे तो नेक हैं ना ?

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर मुस्कराया और उसका एक हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा:"

" हां अम्मी, बस ये ही सोच रहा था कि भरी जवानी में आपने दूसरी शादी क्यों नहीं करी ? जबकि आपके जैसी हीरोइन के लिए तो लाइन लग जाती लड़की की बहुत लंबी।

शहनाज़ ने अपने बेटे के कंधे पर अपना सिर टिका दिया और बोली:"

" बेटा जो किस्मत को मंजूर था वो हो गया, मुझे तेरी बड़ी फिक्र थी तेरा क्या होगा? बस शायद तेरी वजह से ही शादी नहीं करिं

शादाब पहले से ही सब जानता था फिर भी अपनी अम्मी की बात सुनकर बोला:"

" सच अम्मी आप मुझसे इतना प्यार करती रही थी बचपन से ही?

शहनाज़ उसका हाथ सहलाते हुए बोली:" हान राजा, बस तेरे लिए ही मैंने अपनी सब खुशी त्याग दी ताकि तुझे कोई दिक्कत ना आय।

शादाब ने अपनी अम्मी की बात सुनकर शहनाज़ का गाल चूम लिया और बोला:"

" अम्मी आपने मेरे लिए अपनी सब खुशी त्याग दी अब देखना आपको बेटा आपको हर वो खुशी देगा जिसके लिए आप तड़पी हैं।

शहनाज़ बस हल्का सा मुस्कुराई और उसकी आंखे अपने बेटे के कंधे पर सुकून पाकर बंद हो गई।



शादाब अपनी अम्मी की जुल्फों की खुशबू सूंघता हुआ बोला:"

" अम्मी आपकी पापा से शादी कैसी हुई थी ? मतलब वो एकदम काले थे और आप बिल्कुल दूध सी गोरी ?

शहनाज़ को लगा जैसे किसी ने उसकी दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया है। उसकी आंखो से अपने आप एक आंसू निकल आया तो शादाब ने उसे साफ किया और उसे लगा कि उसने गलत सवाल कर दिया है।

शादाब:" सोरी अम्मी, अगर आपको बुरा लगा हो तो ?

शहनाज़ भरे हुए गले से बोली:"

" नहीं बेटा, ये तो खुशी के आंसू हैं कि किसी ने तो मेरे दिल का हाल पूछा। सुन बेटा मेरी अम्मी की मौत के बाद मैं अपनी सौतेली मा के लिए एक बोझ बन गई थी। मेरे अब्बू पूरी तरह से उसके गुलाम बन चुके थे। मुझे बात बात पर वो मारती, परेशान करती थी। एक दिन तेरे दादा जी ने मुझे देखा और पसंद कर लिया और मेरे लालची बाप ने एक तरह से मुझे बेच दिया। तेरे दादा जी को लगा था कि मैं उनके बेटे को सुधार दूंगी लेकिन वो सब एक वहम साबित हुआ।

शादी के बाद तेरे अब्बा और बिगड़ते चले गए और मुझे बात बात पर मारते थे और एक दिन उनकी ऐक्सिडेंट में मौत हो गई। बस जब तू मेरे पेट में था। मैं तेरे ही सहारे रह गई थी। तेरे दादा जी ने अपनी गलती सुधारने के लिए मेरी दूसरी शादी की बहुत कोशिश करी लेकिन कोई भी मुझे बच्चे के साथ रखने को तैयार नहीं था और मेरा भी मन नहीं था दादा दादी को छोड़ कर जाने का। बस ये कहानी है तेरी अम्मी की बेटा।

शादाब की भी आंखे भर आई और उसने अपनी अम्मी का चेहरा अपने दोनो हाथों में थाम लिया और बोला:"

" अम्मी मैं माफी चाहता हूं कि आपको मेरे अब्बू की वजह से काफी सारी मुश्किल उठानी पड़ी। मेरी रगों में उनका ही खून हैं इसलिए आप मुझे माफ़ करे।

शहनाज़ गुस्से से चिल्ला पड़ी:"

" खबरदार जो आज के बाद बोला कि तेरी रगो में उसका खून हैं, तू सिर्फ मेरा बेटा है, बस मेरा खून हैं।

शादाब ने अपने दोनो हाथ अपनी अम्मी के आगे जोड़ दिए और बोला:"

" हां अम्मी, मैं सिर्फ आपका बेटा हूं, आज के बाद मैं कभी अपने बाप का नाम तक नहीं लूंगा।

शहनाज़ ने उसे अपने गले से लगा लिया और दोनो मा बेटे एक साथ सिसक उठे। शादाब ने अपनी अम्मी का मुंह साफ किया और बोला :"

" अम्मी एक बात पूछं लू क्या आपसे , अगर बुरा ना मानो तो ?

शहनाज़:" बोल बेटा तू भी, जो तेरा मन करे बोल?

शादाब:" अम्मी हर लड़की के सपनो में एक शहजादा होता हैं जिसके वो सपने देखती है। आपके सपनों का शहजादा कैसा है अम्मी ?

शहनाज़ ने एक लम्बी आह भरी और बोली :"

" बेटा शहजादे के सपने मैं पहले देखती थी अब नहीं !!

शादाब:" क्यों अम्मी आप तो अभी भी एक शहजादी ही तो लगती हैं, वैसे भी उम्र बढ़ने के साथ आपका हुस्न पूरी तरह से निखर गया है।

शहनाज़ अपने बेटे से अपनी तारीफ सुनकर मुस्कराई और बोली ;"

" तू बड़ा शैतान हो गया हैं अपनी अम्मी को कितना छेड़ता हैं तू शर्म नहीं आती तुझे ?

शादाब:" देखो ना अम्मी, आपका ख़ून हूं और एकदम बिल्कुल आपकी तरह से ही तो दिखता हूं जैसे हम दोनों जुड़वा पैदा हुए हो। आप थोड़ा मजाक तो बनता है ना दोस्त ?

शहनाज़ उसके कान खींचते हुए:'

" हां बनता हैं मेरे राजा, तो सुन मुझे बिल्कुल मेरे जैसा ही अपना शहजादा पसंद था। बिल्कुल ऐसा ही रंग, ऐसे ही नाक नक्श। समझा कुछ।

इतना कहकर शहनाज़ उठ गई और बोली:"

" जा कपड़े बदल कर आ जा, फिर सोते हैं थक गई हूं आज पूरे
दिन घूम कर।

शादाब उठ गया और अपने रूम में चला गया। वो सोचने लगा कि अम्मी को बिल्कुल अपने जैसा चाहिए था मतबल उनके जैसा तो बिल्कुल मैं हूं। तो क्या अम्मी को बिल्कुल मेरे जैसा अपना हीरो चाहिए था। वो आज दिन में बोल भी रही थी कि काश तू मेरा बेटा ना होता। इसका मतलब अम्मी के सपनों का शहजादा मैं ही हूं। लेकिन जब तक उनके मुंह से ना सुन लू तब तक मुझे चैन नहीं आएगा।

शादाब ने एक टॉवेल लिया और नहाने के लिए चला गया। शहनाज़ ने नहीं अपने कपड़े उतार दिए और गर्मी ज्यादा होने के कारण बस नाइटी पहन ली और नीचे ब्रा पेंटी नहीं पहनी। उसकी आंखो के सामने आज दिन में हुई बाते घूमने लगी कि किस तरह उसके बेटे ने बेरी समझकर उसकी चूत को पकड़ लिया था । शहनाज़ की सांसे तेज गति से चलने लगी और जिस्म में आग सी भर गई। उसके हाथ अपने आप उसकी नाइटी के अंदर घुस गए और चूचियों को पकड़ लिया। चूचियों पर हाथ लगते ही उसके मुंह से एक आह निकल पड़ी और वो आंखे बंद करके अपनी जांघो को आपस में रगड़ने लगी। उसकी चूत फिर से भीग गई और रस टपकना शुरू हो गया। शहनाज़ का एक हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया तो रस से उंगली भीग गई। उफ्फ कितना रस छोड़ती हैं ये मेरी चूत , उफ्फ कितनी प्यासी हो गई है पिछले 18 साल से शांत थी अब मानो बगावत पर उतर आई है। उतरे भी क्यों नहीं , आखिरकार जिसके मैं और ये दोनो सपने देखती थी वो अभी मिला है। शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थीं और गलत सही लाज शर्म सब पीछे छूट चुका था। उसने अपनी चूत के छेद पर उंगली फिराई और तड़प उठी तो दूसरा हाथ अपने हाथ गांड़ पर पहुंच गया। उसने अपनी गांड़ को सहला कर देखा टोवदिं भर की थकान का एहसास हुआ तो उसे याद आया कि दो दिन पहले उसके बेटे ने कैसे मसाला कूटने के बहाने उसकी गांड़ का सब दर्द मिटा दिया था। बस ये सोचते ही शहनाज़ पूरी तरह से बहक गई और नाइटी में ही किचेन में घुस गई और औखली उठा लाई। उसने जान बूझकर उसमे कुछ छोटे छोटे पत्थर भर दिए ताकि उसकी गांड़ की बहुत अच्छे से मालिश हो सके।

उसने कमरे का बल्ब बंद कर दिया और नाईट बल्ब जला दिया और पूरे कमरे में एक हल्के गुलाबी रंग की रोशनी फैल गई जिसमें उसका जिस्म एक शोला बनकर दहक रहा था। शादाब नहाकर सिर्फ एक टॉवेल पहले अपने कमरे में जा ही रहा था कि शहनाज़ ने उसे आवाज लगाई।

" राजा जरा इधर तो आओ मेरे पास !

शहनाज़ की आवाज में वो कशिश थी कि शादाब एक पुतले की तरह उसके साथ खींचा चला गया। शहनाज़ कालीन पर बैठी हुई थी और उसने आज जान बूझकर कालीन को डबल कर दिया था ताकि नीचे फिसल कर जब गिरने का बहाना करे तो एकदम गद्दे पर गिरे। एक फायदा ये भी होगा कि जितनी तेजी से उसका जिस्म झटके पर नीचे जाएगा उससे कहीं ज्यादा तेजी से उछाल के साथ उपर आएगा। शादाब उसके पीछे जाकर बैठ गया।

शहनाज़:" वो बेटा कल खाने के लिए मसाला कूटना था, अपनी हीरोइन की मदद कर देगा क्या मेरे हीरो ?

शादाब बिना कुछ बोले थोड़ा आगे हुआ और उसकी कमर से सट गया। शादाब ने एक हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ के उस हाथ को थाम लिया जिसमें उसने मूसल पकड़ा था।

शादाब ने शहनाज़ के हाथ को उपर की तरफ उठाया और मूसल को जोर से औखली में दे मारा तो पत्थर से टकराने से एक अजीब सी आवाज हुई जिससे शादाब समझ गया कि आज मसाला माही कुछ और ही डाल दिया है अम्मी ने इसके अंदर मतलब मेरा दम चेक करना चाहती हैं।

ये ख्याल मन में आते ही उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया। शादाब बिल्कुल इससे सट गया और अपनी गर्म सांसे उसकी गर्दन पर छोड़ते हुए बोला:"

" अम्मी आज मसाला कुछ ज्यादा ही टाइट लग रहा है,

शहनाज़ अपनी कमर पीछे को करती हुई मानो लंड तलाश कर रही हो बोली:"

* हान बेटा, हाथ दर्द करने लगे थे मेरे तो, लेकिन मेरे राजा इसको पीस कर रख देगा। मुझे अपने खून पर पूरा यकीन है।

शादाब :" अम्मी आप फिक्र ना करे, देखो मैं कैसे इसको पीसता हूं एकदम बारीक ।

इतना कहकर उसने जोर से मूसल मारा तो खड़ा हो चुका लंड शहनाज़ की कमर पर लगा जिससे उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई। इसी एहसास के लिए तो वो तड़प रही थी। फिर तो देखते ही देखते शादाब ने स्पीड बढ़ा दी और सटासट औखली में घुसने लगा। लंड शहनाज़ की कमर को अच्छे से रगड़ रहा था जिससे शहनाज़ पूरी मस्ती का अनुभव कर रही थी। तभी शहनाज़ ने कहा:_

" आह बेटे, थोड़ा जोर से कूट, देख ना अभी तो फूटा भी नहीं हैं, ऐसे कैसे पीसेगा र ?

शादाब ने मूसल जोर से मारा और उससे कहीं ज्यादा जोर से लंड का झटका मारा जिससे शहनाज़ अपने आप आगे को जा गिरी और शादाब ठीक उसके उपर पूरे जिस्म पर फैलता चला गया। एक झटके कर साथ मूसल हाथ से छुट गया और औखली पलट गई जिससे कुछ पत्थर के टुकड़े बाहर गिर गए तो शादाब पूरी तरह से निश्चिंत हो गया कि उसकी अम्मी जान बूझकर ये सब सब कर रही हैं। उफ्फ कितनी प्यासी है अम्मी,

आगे गिरने से शादाब का टॉवेल खुल गया और वो पूरी तरह नंगा हो गया। शहनाज़ ने मूसल उठाया और अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब ने एक सेक्सी स्माइल के साथ उसका हाथ थाम लिया और औखली में मूसल चलने लगा। लंड मूसल से भी ज्यादा टाईट हो चुका था इसलिए इसलिए शहनाज़ की गांड़ पर नंगा लंड नाइटी के ऊपर से ही लगने लगा। हर झटके पर शहनाज़ के मुंह से आह निकल रही थीं। टॉवेल शादाब के पैरो में फसने लगा तो उसने उठाकर एक तरफ़ फेंक दिया जो शहनाज़ ने देख लिया। उफ्फ हाय अल्लाह उसका मतलब ये मेरे उपर बिल्कुल नंगा चढ़ा हुआ है ये सोचते ही उसकी गांड़ अपने आप उपर उछलने लगी जिससे शादाब का हौसला बढ़ गया और उसने शहनाज़ के नंगे कंधे चूमने शुरू कर दिए। शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती से भर उठी और मूसल तो बस नाम के लिए उसके हाथ में था, मसाला कुटाई तो कब की बंद हो चुकी थी और गांड़ कुटाई अपने चरम पर थी। धीरे धीरे हर धक्के पर शहनाज़ की नाइटी खिसकती रही और जल्दी ही उसकी कमर पर चढ़ गई जिससे शहनाज़ पूरी तरह से नीचे से नंगी हो गई। जैसे ही अगला झटका लगा तो लंड सीधे उसकी गांड़ की दरार पर जा लगा और मस्ती से उसका मुंह खुल गया !!

" आह मेरे राजा, ऐसे ही कूट , उफ्फ कितना अच्छा हैं तू मेरे राजा, दिखा दे अपना पूरा दम

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी अब पूरी मस्ती में अा चुकी है इसलिए वो एक तेज झटका मारते हुए कहा:"

," अम्मी आपको अच्छा लगता हैं क्या अपने बेटे के साथ मसाला कूटना उफ्फ !!

धक्का लगते ही शहनाज़ मस्ती से सिहर उठी और बोली:"

" उफ्फ मेरे राजा, तेरे साथ तो मसाला कूटने का पूरा मजा आता है हाय मा,

शादाब उसकी कमर सहलाते हुए कहा:" अम्मी आप कुछ बोल रही थी दिन मैं कि औरत अधूरी होती हैं एक मर्द के बिना , उफ्फ कितना जिद्दी मसाला हैं ये ?

इतना कहकर शादाब ने अपने लंड को पूरी ताकत से उसकी गांड़ में धकेला तो शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद हो गई और बोली:

" हां राजा, अकेली औरत मसाला कैसे कूटेगी र , आह उफ्फ तेरे जैसा हीरो होना चाहिए ना हीरोइन की मदद के लिए राजा।

इतना कहकर शहनाज़ ने मस्ती से अपनी टांगे थोड़ी सी ऊपर उठा ली जिससे उसकी गांड़ और चूत दोनो पूरी तरह से खुल गए। शादाब अपनी अम्मी की गर्दन पर जीभ फिराने लगा और एक तगड़ा धक्का शहनाज़ की गांड़ पर रख दिया और बोला:

"हाय अम्मी, क्या आप मेरी हीरोइन हैं !?

शहनाज़ इस धक्के से कांप उठी थी इसलिए सिसकते हुए बोली:"

" हाय राजा मैं बस सिर्फ तेरी ही हीरोइन हूं, फोड़ दे मसाले को मेरे हीरो !!

इतना कहते ही शहनाज़ ने बहुत देर के बाद मूसल उपर उठाया और मूसल से ज्यादा अपनी गांड़ उपर उठा ली। शादाब ने उसकी हालत समझते हुए एक तगड़ा धक्का लगाया तो शहनाज़ का जिस्म फिर से गद्दे में धस सा गया। उसके आंखो के आगे मस्ती से लाल पीले तारे नाच उठे और पत्थर के कुछ टुकड़े टूट गए।

" आह मेरे हीरो, उफ्फ ऐसे ही बेटे सारा मसाला फाड़ दे नहीं तो हॉल वाले लड़के की तरह थप्पड़ खाएगा तू मेरे राजा!!

शादाब ने हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ की कमर को पकड़ कर मोड़ लिया और लंड को आगे करते हुए जांघो के बीच घुसा दिया। कभी लंड गांड़ के छेद तो कभी चूत की फांकों को चूम रहा था। इतने सालो के बाद शहनाज़ अपनी चूत पर लंड महसूस करते ही मस्ती से भर उठी और उसकी सिसकी निकल पड़ी।

" उफ्फ हाय मा, क्या कर रहा हैं तू, हट मुझे गुलगुली हो रहीं हैं।

शादाब उसकी गरदन चूमते;"

" मसाला चेक कर रहा था कितना टाइट हैं, उफ्फ अम्मी बहुत गरम हैं ये तो ।

शादाब ने लंड को चूत पर उपर से नीचे रगड़ते हुए कहा। शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती में चूर हो गई थी इसलिए उसने भी अपनी चूत को हिलाना शुरू कर दिया। शादाब समझ गया कि अब सही समय अा गया है क्योंकि पूरी तरह से रस से भीग चुकी चूत लंड को भी भिगो चुकी थी।

शादाब:" अम्मी आपके सपनों का शहजादा कौन हैं ?

ये कहते हुए शादाब ने लंड पर हल्का सा दबाव बढ़ा दिया तो शहनाज़ का मुंह चूत से पहले ही खुल गया और बोली:_

" आह, हाय मा री, तू हैं मेरे राजा, मेरा सब कुछ तू ही तो हैं ।

शादाब ने एक हाथ से पहली बार शहनाज़ की गांड़ को हल्का सा खोल दिया तो शहनाज़ ने खुद ही अपनी टांगे पूरी खोल दी और लंड पर हल्का सा पीछे को हो गई जिससे लंड चूत की फांकों को चूमने लगा। शादाब उसकी एक गांड़ को दबाते हुए बोला:"

" हाय अम्मी, कितना टाइट हैं आपका मसाला, पूरा दम लगा कर कूटना पड़ेगा।

शहनाज़ ने एक हाथ से अपनी चूची को पकड़ लिया और दबाने लगी। शादाब ने चूत के ठीक बीच में उसकी फांकों को लंड के सुपाड़े के खोलते हुए लंड का सुपाड़ा टिका दिया और कमर को लंड पर खींचते हुए बोला:_

" आह अम्मी उफ्फ मेरी जान, अगर मैं आपका बेटा ना होता तो आप क्या करती ?

इतना कहकर उसने दोनो हाथो में शहनाज़ की गांड़ को थाम लिया और मसलने लगा। गांड़ पर हाथ लगते ही शहनाज जैसे स्वर्ग में पहुंच गई और उसने पहली बार अपनी गर्दन घुमाकर शादाब की आंखो में देखा और बोली;"

"" अगर तू मेरा बेटा ना होता तो तुझे लेकर भाग जाती मेरे राजा!;

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनते ही पूरे जोश में अा गया और एक धक्का आगे की तरफ मारा तो लंड हल्का सा फिसल गया और चूत की फांकों को रगड़ता हुआ नीचे जा लगा।

शहनाज़ की चूत की फांकों को पहली बार इतनी बुरी तरह से लंड ने रगड़ा था इसलिए उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया तो शहनाज़ ने पीछे को होते हुए अपनी जांघों को पूरा खोल दिया और लंड का सुपाड़ा चूत के मुंह पर आ लगा तो शहनाज़ का मुंह पूरी मस्ती से खुल गया।

" आह मर गई मेरे राजा, मेरे सपनो के शहजादे, मेरे हीरो, बना ले मुझे अपनी, ले जा भगा कर मुझे मेरे राजा।

शादाब ने मस्ती में आकर लंड को चूत में घुसान के लिए धक्का लगाना चाहा लेकिन चूत के रस की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लंड ने भी अपनी मा की चूत पर पिचकारी मारनी शुरू कर दी और सिसकते हुए बोला;_

" उफ्फ नाज़ मेरी जान, भगा ले जाऊंगा तुझे सबसे दूर, उफ्फ मेरी मा तेरा बेटा पूरी तरह से तेरा दीवाना हो गया।

शहनाज़ ये बात सुनते ही जोश में पलट गई और शादाब के उपर चढ़ गई और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और दोनो मा बेटे एक दूसरे के होठों को चूसने लगे। नीचे लंड और चूत एक दूसरे को अपना रस पिला रहे थे और उपर दोनो के होंठ। एक जोरदार किस के बाद दोनो मा बेटे एक दूसरे की बाहों में ऐसे ही सो गए।
 
Bro this was the last update posted yesterday on page 47.

शाहनाज एक शादाब दोनो मा बेटे सुबह देर तक ऐसे ही सोते रहे। कोई आठ बजे के आस पास शहनाज़ की आंखे खुली तो उसने अपने आपको अपने बेटे के सीने पर लेटे हुए पाया तो उसे अपने आप पर यकीन ही नहीं हुआ। फिर उसकी आंखो के आगे एक के बाद एक सीन गुजरने लगा तो उसे यकीन हो गया हैं कि ये सब एक सपना नहीं बल्कि हकीकत है। उसने अपनी मैक्सी की तरफ देखा जो उसकी कमर पर पड़ी हुई थी और नीचे से उसकी चूत गांड़ सब बिल्कुल नंगे पड़े थे। उसे बड़ी शर्म अाई और रात हुई बातें याद करके वो मुस्कुरा उठी, उसका रोम रोम मस्ती से भर उठा और उसने शादाब का गाल चूम लिया। उससे बेटा उससे कितना प्यार करता हैं उसे रात पता चला। शहनाज़ को अपने उपर बड़ी मुश्किल से यकीन हो रहा था कि रात उसने शादाब को अपने दिल की बात बोल दी हैं जिसे उसके बेटे ने खुशी खुशी मान लिया है और खुद ही तो वो पहले से ही अपनी अम्मी का दीवाना बना हुआ है।

शहनाज़ उठने लगी तो उसे अपनी टांगो के बीच में शादाब के लंड का एहसास हुआ तो उसकी सांसे एक बार फिर से बढ़ने लगी। वो धीरे से उठी और खड़ी हो गई तो जैसे ही उसकी नजर हवा में लहराते हुए शादाब के लंड पर पड़ी तो उसे अपना पूरा वजूद हिलता हुआ नजर आया। आज वो दूसरी बार एक महान लंड को देख रही थी और उसे आज पहले से ज्यादा खतरनाक लग रहा था। उफ्फ कितना मोटा लाल सुर्ख सुपाड़ा, लंड ऐसे हवा में झटके मार रहा था मानो बहुत ज्यादा गुस्से में हो। शहनाज़ की टांगो के बीच हलचल बढ़ने लगी और उसने एक भरपूर नजर फिर से लंड पर डाली और जाने के लिए पलटी और बाहर की तरफ कदम बढ़ा दिया। उसके पैरो की छन छन करती पायल की आवाज से शादाब की नींद खुल गई और उसने पहले प्यार के आवेश में भाग कर शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया। शहनाज़ को उसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा इतना जल्दी उठकर उसे इस तरह से बांहों में ले सकता हैं इसलिए डर के मारे उसकी चींख़ निकल गई।

शादाब :' अम्मी डरो मत, मैं हूं शादाब आपका राजा!!

शहनाज़ थोड़ा नॉर्मल होते हुए:

" सुधर जा अब तू, ऐसी हरकतें मत किया कर, मैं तो डर ही गई थी पागल!

शादाब ने उसको पूरी तरह से अपनी बांहों में कस लिया और उसके हाथो पर हाथ रखते हुए कहा:"..

" अम्मी अब भी डर लग रहा है क्या आपको ?

शहनाज़ को हमेशा की तरह इस बार भी वहीं अदभुत सुकून मिला शादाब की बांहों में और एक पल के लिए पलटी और उसे जोर से कस लिया । शहनाज़ बोली:"

" बिल्कुल भी नहीं बेटा, तू जब साथ हैं तू मुझे किसका डर राजा ?

शादाब शहनाज़ के गाल सहलाते हुए :"
" वैसे सुबह सुबह आप आज कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही है क्या बात हैं ?

शहनाज़ शर्मा गई और बोली:"

" झूठा कहीं का, जब देखो अपनी अम्मी पर डोरे डालता रहता हैं तू मेरे राजा ?

शादाब:" नहीं अम्मी, आप सच में बहुत अच्छी लग रही हो।

इतना कहकर शादाब उसकी आंखो में देखने लगता हैं तो शहनाज़ भी अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर उसकी आंखो में झांकती हैं। दोनो मा बेटे जैसे एक दूसरे में खो से गए थे और शादाब के होंठ शहनाज़ के होंठो की तरफ बढ़ने लगे तो शहनाज़ कांप उठी। दिन के उजाले और रात के अंधेरे में बहुत फर्क होता है और शहनाज़ तो वैसे ही शर्म की गुड़िया थी। शादाब ने एक हाथ से शहनाज़ का चेहरे उपर उठाया तो शहनाज़ ने एक बार शादाब की तरफ देखा जो उसके होंठो को हसरत भरी निगाहों से देख रहा था और उसे ना कहने की हिम्मत आज शहनाज़ के अंदर नहीं थी इसलिए शहनाज़ ने शर्म के मारे आंखे बंद कर ली और बेड से एक चादर उठा कर खुद को और शादाब को उसमे लपेट लिया। शादाब ने अपने होंठ शहनाज़ के होंठो पर रख दिए और चूसने लगा। शहनाज़ ने भी अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रख दिए और वो भी अपने बेटे का साथ देने लगी।

दोनो पूरी तरह से किस में डूब गए और बिल्कुल नंगे शादाब का लंड शहनाज़ की जांघो में घुसा जा रहा था जिससे शहनाज़ के जिस्म में आग भरने के। शहनाज़ लंड के एहसास को एक बार फिर से अपनी चूत पर महसूस करने के लिए मरी जा रही थी इसलिए वो किस करती हुई एक बार फिर से अपने बेटे के पैरो पर चढ़ गई और लंड अपने आप उसकी चूत पर जा लगा।

इस मस्त एहसास को शहनाज़ बर्दाश्त नहीं कर पाई और किस टूट गई और उसके होंठो से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शादाब ने अपने होंठो को शहनाज़ की गर्दन पर रख दिया और चूमने लगा तो शहनाज़ पूरी तरह से जोश में अा गई चूत को लंड पर धकेलने लगी। शादाब के हाथ शहनाज की कमर को सहलाते हुए उसकी गांड़ तक पहुंच गए और जैसे ही शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को हाथो में भरा तो शहनाज़ ने अपनी बेटे की गर्दन को चूमना शुरू कर दिया। अपनी गर्दन पर अपनी मा के होंठो की रगड़ से शादाब पूरी तरह से जोश में अा गया और जोर जोर से शहनाज़ की गांड़ को मसलने लगा। शहनाज़ इस गांड़ दबवाने की वजह से ही अपने बेटे की तरफ आकर्षित हुई थी और आज पहली बार उसका बेटा पूरी ताकत से उसकी गांड़ दाब रहा था, मसल रहा था और शहनाज़ को उसकी उम्मीद से ज्यादा अच्छा लग रहा था इसलिए वो अपने बेटे से एक अमर बेल की तरह लिपटी हुई थी।

शहनाज मस्ती से सिसकते हुए:"

" आई लव यू मेरे राजा , कहां था तू अब तक मेरी जान? आह राजा

शादाब शहनाज़ की गांड़ को जोर जोर से दबाते हुए:"

" लव यू टू मेरी नाज, आपके ही पास था अम्मी, बस डरता था, कहीं आप नाराज ना हो जाए।

शहनाज़ उसकी कमर को सहलाते हुए:"

" आह उफ्फ, नहीं रे मेरे राजा, तेरी मा क्यों नाराज होगी तुझसे, तो तू उसका शहजादा हैं मेरी जान!

शादाब अपनी अम्मी की बातो से पूरी तरह से बेकाबू हो गया और एक से शहनाज़ का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर टिका दिया तो शहनाज़ जा जिस्म थरथरा उठा और सिसक उठी।

" हाय अल्लाह, उफ्फ राजा ये क्या है इतना मोटा सा एक दम मूसल जैसा ?

इतना कहकर शहनाज़ का हाथ डर के मारे अपने आप ही लंड पर से हट गया। उसकी सांसे पूरी तरह से उखड़ चुकी थी, चूत एक दम गीली हो रही थी। शादाब ने फिर से शहनाज़ का हाथ अपने हाथ में पकड़ कर लंड पर रख दिया। शहनाज़ का पूरा जिस्म फिर से कांप उठा और पागल सी होकर अपनी चूत को लंड पर रगड़ने लगी। शादाब ने शहनाज के हाथ को लंड पर घुमाना शुरू किया तो शहनाज़ को पसीना आने लगा। शहनाज़ का हाथ लंड पर आगे बढ़ता जा रहा था और जब भी उसको लगता था कि लंड बस इतना ही बड़ा हैं शादाब उसके हाथ को और आगे की तरफ कर देता जिससे शहनाज़ की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। जैसे ही शहनाज़ का हाथ लंड के आखिर में पहुंचा तो उसकी चूत डर के मारे दुबक सी गई। उफ्फ हाय मा इतना मोटा लंबा भी लंड होता हैं ये शहनाज़ को सही से आज पता चला था कि क्योंकि आज उस रात की तरह झिझक नहीं थीं।
शादाब:" हाय मेरी नाज, ये वो मूसल हैं जिसने आपकी कमर को कूट दिया था।

शादाब ने एक दो बार लंड पर शहनाज़ का हाथ घुमाया तो शहनाज़ की उंगलियां अपने आप लंड पर चलने लगी तो शादाब ने अब दोनो हाथो से फिर से शहनाज़ की गांड़ को थाम लिया और पूरी ताकत से दाबने लगा। शहनाज़ के मुंह से हल्की हल्की दर्द भरी मस्त सिसकियां निकलने लगी और उसने अपने बेटे के लंड को सहलाना शुरू कर दिया। शहनाज़ लंड के सुपाड़े पर हाथ फेरते हुए बोली:"

" उफ्फ राजा ये तो बहुत टाइट हैं, उस मूसल से भी ज्यादा।

शादाब उसकी नाइटी को उपर उठा कर उसकी नंगी गांड़ को हाथो में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा और बोला:"

" आह मेरी नाज़, टाइट हैं तभी तो कमर को कूट दिया था।

शहनाज़ अपनी नंगी गांड़ पर शादाब के हाथ लगते ही तड़प उठी और लंड को पूरी लंबाई में रगड़ते हुए बोली:"

" आह राजा, इतना अच्छा मोटा मूसल क्या सिर्फ कमर कूटने के ही काम आता हैं क्या बस !!

शादाब अपनी अम्मी की गांड़ की दरार से चूत तक हल्का सा अंदर की तरफ उंगली से रगड़ते हुए बोला:"

" आह, उफ्फ मेरी जान, इससे तो बहुत कुछ कूटा जाता हैं, उफ्फ क्या कूटना हैं आप बताओ मेरी रानी ?

शहनाज अपनी चूत और गांड़ पर उंगली पड़ते ही समझ गई कि उसका बेटा पूरी तरह से उसे चोदने के लिए मरा जा रहा है। वो तड़पते हुए अपनी गांड़ को अपने बेटे की उंगली पर दबाते हुए बोली:"

" आह राजा, तू पहले इसे ही कूट दे, बड़ा दर्द हैं कल से यहां !!

शादाब अपनी अम्मी की चूत पर उंगली रगड़ते हुए बोला:"

" आह अम्मी उफ्फ ये कूट दू क्या !! उफ्फ अम्मी ये बहुत मुलायम हैं आराम से कूट जाएगी!

शहनाज़ मन ही मन सोचने लगी कमीना मेरी चूत फाड़ना चाहता है, अपनी मा की चूत चोदना चाहता है मेरा राजा। शहनाज़ उसके कान खींचते हुए बोली:"

" आह राजा, अभी से कमजोर पड़ गया क्या जो मुलायम चीज कूटना चाहता है, ऐसे कैसे अपनी अम्मी को लेकर भाग पाएगा तू !

शहनाज़ ने शादाब की मर्दानगी को एक चुनौती सी दी तो शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को पूरी ताकत से हाथ में भर कर मसल दिया तो शहनाज़ दर्द से राहत उठी। शादाब उसकी गांड़ को जोर जोर से मसलते हुए बोला:"

"अम्मी बस एक बार इस टाइट चीज का नाम बता दो कि क्या कुटवाना हैं फिर कमाल देखना।

शहनाज़ शर्म के मारे अपने बेटे के सीने ने घुस गई। उफ्फ मैं गांड़ कैसे कहूं अपने मुंह से। ये सोचकर वो कांपने लगी।

शादाब :" बोलो ना मेरी रानी, अगर इतनी शर्म करोगी तो कैसे भागोगी मेरे साथ ?

शहनाज डरते हुए बोली:" आह राजा, मुझे नहीं पता बस तू कूट दे क्यों तड़पा रहा हैं अपनी अम्मी को ?

शादाब उसकी गांड़ के छेद के पास सहलाते हुए बोला:"

" आह अम्मी, आपको बताना हो पड़ेगा ! बोलो ना मेरी जान !

शहनाज़ उसके लंड को रागड़ती हुई बोली:" आह राजा, उफ्फ देख ना तेरा मूसल कैसे अकड़ रहा है, तू मेरा पिछ्वाड़ा कूट दे।

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से कहा और पलट गई जिससे अब लंड उसकी गांड़ पर जा लगा। शहनाज पिछ्वाड़ा बोलकर बहुत ज्यादा शर्मा गई थी इसलिए पलटी थी लेकिन किस्मत ने साथ दिया और लंड अपने आप गांड़ पर अड गया।
शादाब हल्का हल्का लंड रगड़ते हुए :" आह मेरी मा, उफ्फ उसे पिछ्वाड़ा नहीं गांड़ कहते हैं! एक बार गांड़ बोलो ना प्लीज़

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ की गर्दन को चाटना शुरू कर दिया। शहनाज पूरी तरह से बहक चुकी थी इसलिए अपनी गांड़ लंड पर धकेलते हुए बोली:"

" आह राजा, उफ्फ कूट दे जल्दी से मेरी गांड़, बस अब मत तड़पा मुझे राजा, !

शहनाज़ एक झटके के साथ ही गांड़ बोल गई तो शादाब ने लंड का जोरदार धक्का लगाया तो शहनाज़ की गांड़ के उभार हल्का सा अंदर घुस गए। शहनाज़ तो कब से इसके लिए तड़प रही थी इसलिए उसके मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगीं।

" आह राजा, उफ्फ हाय कितना अच्छा है ये मूसल, कूट ऐसे ही दम लगा कर कूट

शादाब शहनाज़ की गर्दन चाटते हुए शहनाज़ की गांड़ को लंड से पीटने लगा तो हर धक्के पर शहनाज़ मस्ती से सिसक रही थी, आज दोनो मा बेटे जानते थे कि वो क्या कर रहे हैं, आज मसाला नहीं बल्कि सीधे गांड़ कूट रही थी। शादाब ने एक तगड़ा धक्का लगाया तो शहनाज़ आगे को गिर से गई लेकिन उसके दोनो हाथ बचने के लिए बेड पर टिक गए जिससे वो अपने आप ही घोड़ी बन गई और गांड़ पूरी तरह से उभर गई। शादाब ने अपनी अम्मी की कमर को पकड़ लिया और जोर जोर से लंड को नंगी गांड़ पर मारने लगा। शहनाज़ सिसकते हुए बोली:"

" उफ्फ राजा, बहुत मजा आ रहा है, हाय ये मूसल, तेज तेज कूट मेरे लाल नहीं तो थप्पड़ खाएगा तू। उफ्फ बहुत अच्छा लग रहा हैं

शादाब अपनी अम्मी की जोश भरी बाते सुनकर खुश हो गया और उसकी गांड़ को जोर जोर से कूटने लगा। दोनो मा बेटे पूरी तरह से मदहोश हो गए थे। दोनो में से कोई भी नहीं जानता था कि गांड़ में भी लंड घुसाया जाता हैं। लेकिन कहते है कि सेक्स सिखाया नहीं जाता अपने आप हो जाता हैं।

शादाब के हर धक्के पर शहनाज़ को बहुत मजा आता और वो अपनी गांड़ खुद पीछे को धकेल देती। लंड जैसे ही दोनो गांड़ के पटो के बीच में लगता तो शहनाज़ को ज्यादा अच्छा लगता जिससे उसकी गांड़ और मजा लेने के लिए अपने आप खुलने लगी।हर धक्के पर गांड़ थोड़ी थोड़ी खुल रही थी और जल्दी ही पूरी तरह से खुल गई।

शादाब ने जैसे ही अगला धक्का मारा तो लंड सीधे गांड़ के छेद से जा टकराया तो दोनो मा बेटे इस सुखद अहसास से तड़प पड़े।

" आह मेरे राजा, उफ्फ ये क्या था, उफ्फ हाय इतना मजा, सआईआई आह बेटा बस इसी जगह पर कूट दम लगा कर!!

शादाब ने भी पूरी ताकत से शहनाज़ की गांड़ के छेद को कूटना शुरू कर दिया। हर धक्के पर गांड़ का छेद हल्का सा खुलता और फिर से बंद हो जाता। शहनाज़ तो आज जैसे मस्ती के सातवे आसमान पर थी इसलिए उसने खुद ही अपनी नाइटी को उतार दिया और पूरी तरह से नंगी हो गई। गांड़ के खुलते बंद होते छेद पर लंड की रगड़ से उसकी आंखे भी मस्ती से खुलने और बंद होने लगी।

शहनाज़ की पूरी नंगी कमर देखते ही शादाब ने जोश में एक तूफानी धक्का लगाया तो शहनाज़ की गांड़ का छेद थोड़ा सा खुला और शहनाज़ मस्ती से सिसक उठी

" आह मेरे शादाब, कूट दे ऐसे ही अपनी मा की गांड़ अपने मूसल से मेरे राजा ! आह उफ्फ नहीआई

शादाब ने आगे झुक कर शहनाज़ का चेहरा अपनी तरफ घुमा दिया तो आग में जल रही शहनाज़ बिना पलके झपकाए अपने बेटे को देखने लगी और मुस्कुरा उठी।

शादाब:" आह मेरी जान शहनाज़, ये मूसल नहीं लोला हैं, तेरे बेटे का लोला मेरी अम्मी ?!

शहनाज़ शादाब के मुंह से पहली बार शहनाज़ सुनते ही बेकाबू सी हो गई और बोली:_

" हाय मेरे शादाब का लोला, मार अपना लोला अपनी मा की गांड़ पर मेरे राजा !!

शादाब पूरी तरह से मचल उठा और लंड में उबाल आने लगा इसलिए वो पूरी तेजी से शहनाज़ की गांड़ के छेद को ठोकने लगा। लंड से निकले प्री कम से शहनाज़ की गांड़ का छेद हल्का सा गीला हो गया था इसलिए हर धक्के पर पहले से ज्यादा खुल रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती में अा गई और अपने दोनो हाथों से गांड़ को पूरी फैला दिया तो शादाब का अगला धक्का शहनाज़ के हिलने की वजह से चूत पर लगा तो शहनाज़ का मुंह मस्ती से खुल गया

" आह राजा, वहां नहीं, आह जल्दी कर मेरे लाल मुझे कुछ हो रहा हैं, उफ्फ हाय मेरी मा

शादाब को भी पता चला गया कि धक्का चूत पर लग गया है तो उसका लंड फटने को तैयार हो गया तो इसलिए उसने अगला अब तक का सबसे तगड़ा धक्का सीधे गांड़ पर पूरी ताकत से मार दिया। चूत के रस से सुपाड़ा पूरी तरह से भीग गया था और गांड़ का छेद पहले से काफी गीला हो गया था इसलिए लंड का भारी भरकम ठोस सुपाड़ा शाहनाज की गांड़ को फाड़ते हुए अंदर घुस गया और शहनाज़ की दर्द भरी चींखं निकल पड़ी।

" आह नईआईआई, हाय मा मर गई, उफ्फ ये कर दिया राज्ज्जा, मार डाला!!

शहनाज़ दर्द से बुरी तरह से कराह उठी क्योंकि उसकी कुंवारी गांड़ का छेद फट सा गया था। शादाब भी इतनी टाइट गांड़ में लंड घुसने से सिसक उठा और उसके लंड ने शहनाज़ की गांड़ में पिचकारी छोड़ दी।

" आह अम्मी, उफ्फ हाय मै गया, आह मेरी शहनाज़ तेरी गांड़।

शादाब शहनाज़ की कमर पर ही ढेर हो गया और लंड अपने आप सिकुड़ कर बाहर निकल गया। लंड के साथ ही शहनाज़ की गांड़ से खून भी निकल गया। शादाब डरकर शहनाज़ की कमर पर से उतर गया तो दर्द से कराहती हुई शहनाज़ बेड पर गिर पड़ी।
शाहनाज की सारी मस्ती और उत्तेजना दोनो की नादानी की वजह से दर्द में बदल गई थी।

हिंदी में एक कहावत है कि अनाड़ी का चोदना चूत का नाश वो यहां पूरी तरह से सही साबित हुई। शहनाज को लग रहा था कि जैसे किसी ने उसकी गांड़ के छेद को चाकू से चीर दिया है। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। शादाब अपनी अम्मी के पास लेट गया और उनका चेहरा साफ करने लगा तो शहनाज़ इस दर्द में भी प्यार भरी नजरो से उसकी तरफ देखने लगी और उसके कंधे पर अपना सिर टिका दिया तो शादाब अपनी अम्मी की कमर सहलाने लगा। काफी देर तक शादाब ऐसे ही अपनी अम्मी की कमर सहलाते हुए उसके बालो में उंगली फिराता रहा जिससे शहनाज का दर्द धीरे धीरे कम होता चला गया।

शहनाज़ अपने बेटे का अपने प्रति प्यार और देखभाल देख कर खुश हो गई और उसका गाल चूम लिया। शादाब ने मासूमियत से अपने दोनो कान पकड़ लिए और बोला:"

" सोरी अम्मी, मुझे नहीं पता था कि ये सब हो जाएगा, मुझे माफ़ कर दो आप।

शहनाज उसके कान खींचती हुई बोली:" एक तो आज के बाद मुझे अम्मी मत बोलना तेरे मुंह से शहनाज़ ज्यादा अच्छा लगता हैं मुझे, और दूसरी बात सच में बेटा मुझे भी नहीं पता था कि ऐसा हो जाएगा। हम दोनों इसके लिए बराबर जिम्मेदार हैं बस फर्क इतना हैं कि दर्द सिर्फ मुझे हुआ हैं मेरे राजा।

शादाब का दिल तड़प उठा अपनी अम्मी की ये दर्द वाली बात सुनकर इसलिए उसकी आंखे छलक उठी और बोला;"

" अम्मी आपको सिर्फ जिस्मानी दुख हुआ है और आपके दर्द से मुझे जो रूहानी दुख पहुंचा है मैं बता नहीं सकता। अम्मी अंदर तक टूट गया हूं मैं।

शहनाज़ ने अपने बेटे की आंखे साफ करी और उसे अपने सीने से लगा लिया और बोली:"

" मुझे आज एहसास हो गया है कि मेरा बेटा मुझसे सचमुच कितना प्यार करता है। लव यू मेरे राजा।

शादाब ने भी अपने आपको संभालते हुए अपनी अम्मी के माथे को चूम लिया और बोला:"

" लव यू टू मेरी जान शहनाज। "

शहनाज गंभीर होकर सोचते हुए बोली:"

" बेटा हम प्यार तो कर बैठे लेकिन इसका अंजाम क्या होगा कभी सोचा है तुमने ?

शादाब ने पूरे विश्वास के साथ शहनाज की आंखो में देखते हुए कहा:'" अम्मी जब तक मेरे सिर्फ में आखिरी सांस होगी मैं आपका साथ नहीं छोडूंगा।

शहनाज़ उसकी बात सुनकर खुश हो गई और उसका हाथ थाम कर घूरते हुए:"

" कमीने बात प्यार की करता हैं और बोल अम्मी रहा हैं मुझे , कुछ तो शर्म कर।

शादाब उसका गाल चूम कर बोला:" अभी आदत पड़ी हुई है ना अम्मी बोलने की इसलिए धीरे धीरे छूट जाएगी मेरी शहनाज़।

शहनाज़:" चल ठीक हैं, मैं अब नहा लेती हूं। फिर तेरे लिए कुछ खाने को भी बना दूंगी मुझे भी भूख लगी हैं।

इतना कहकर शहनाज़ जाने लगी तो शादाब ने उसे हाथ से पकड़ कर खींच लिया तो शहनाज़ उसकी बांहों में गिर पड़ी तो शादाब बोला:"

" जाने से पहले मेरे होंठो पर मीठी सी प्यारी सी किस कौन करेगा ?

शहनाज़ ने आगे होकर शादाब के होंठो पर एक किस करी और बोली :"

" अब तो खुश हैं ना मेरे राजा, मैं चलती हूं अब नहाने के लिए।

शहनाज़ इतना कहकर आगे चली तो दर्द की वजह से उसे चलने में दिक्कत हो रही थी क्योंकि गांड़ की माशपेशियां कठोर लंड से बुरी तरह से छिल गई थी जिससे आपस में दोनो गांड़ के उभार टकराते ही उसे दर्द हो रहा था। शादाब अपनी अम्मी की हालत देख कर आगे आया और बोला:"

" क्या हुआ अम्मी ?

शहनाज उसकी तरफ शिकायत भरी नजरो से देखते हुए बोली:"

" होना क्या हैं मेरे अनाड़ी सैयां, सब मेरा कचूमर निकाल दिया हैं, दर्द हो रहा हैं मुझे!!

शादाब सब समझ गया और शहनाज को उसने अपनी बांहों ने उठा लिया और बाथरूम की तरफ चल दिया। शहनाज़ भी खुशी खुशी उससे लिपट गई और लंड को पेंट के उपर से सहला कर बोली :"

" बेशर्म तुझे किसने कहा था इसे इतना मोटा टॉइट करने के लिए,लगता हैं जैसे मूसल ही लटका लिया हैं तूने।

शादाब अपने लंड की तारीफ सुनकर खुश हो गया और बोला:"

" अम्मी आपको अच्छा नहीं लगा क्या ये,

शाहनाज: चल कमीना कहीं का, कोई ऐसी बात करता हैं अपनी मा से

शादाब:" उफ्फ अम्मी, कोई मा प्यार करती हैं क्या अपने बेटे से ?

शहनाज:" और तू जो अपनी अम्मी का दीवान बना हुआ है उसका क्या ?

शादाब के अंदर गालिब की आत्मा खुश गई और बोला:"

" आशिक हैं तेरे नाम के इस बात से इन्कार नहीं
झूठ कैसे बोलू की मुझे तुझसे प्यार नहीं,
कुछ कुसूर तो तुम्हारी अदाओं का भी हैं मेरी जान
हम सिर्फ अकेले ही तो गुनहगार नहीं।

शहनाज़ अपने बेटे की शायरी सुनकर मुस्कुरा उठी और तभी बाथरूम भी अा गया था तो अपने बेटे की गोदी से उतर गई और अंदर जाने लगी तो शादाब बेहद ही शरीफ अंदाज में बोला :"

" अगर आपकी इजाज़त हो तो क्या हम भी आपके साथ नहा ले ?

शहनाज़ ने उसकी तरफ गुस्से से देखा और अपनी आंखे मटकाती हुई अदा से बोली :"

" चल भाग, बड़ा आया मेरे साथ नहाने वाला !!

शादाब:" उफ्फ हाय मेरी अम्मी तुम्हारी ये अदाएं ही तो दिल पर असर कर जाती हैं।

शहनाज़ उसकी बात सुनकर बोली :" मजनू कहीं का,

शहनाज़ ने बाथरूम का गेट बंद कर दिया और अपनी मैक्सी उतार कर नहाने लगी। उसकी गांड़ में अभी भी दर्द था इसलिए उसने हल्के गुनगुने पानी के साथ प्यार से साफ किया। शहनाज़ अब काफी अच्छा महसूस कर रही थी और अपने बदन को अच्छे से साबुन से साफ किया और फिर टॉवल से अपना बदन सुखाने लगी।

दूसरी तरफ रेशमा पूरे जी जान से लगी हुई थी अपने मा बाप की सेवा करने में क्योंकि वो जानती थी कि जितने तारीफ उसके पापा शादाब के सामने मेरी करेंगे वो उतने ही जोश के साथ मेरी चुदाई करेगा।

रेशमा अपने अब्बा को खाना खिलाते हुए:" अब्बा देखिए मैने आपके लिए खीर बनाई हैं वो असली मावे के साथ, आप हैं कि खा ही नहीं रहे हा।

अब्बा:"बेटी और कितना खिलाएगी मेरा पेट तो भर गया हैं पहले से ही !! अब बस कर

रेशमा:" ना ये आखिरी चम्मच तो आपको खानी ही पड़ेगी।

और अब्बा के मना करने के बाद भी रेशमा जबरदस्ती खिला रही थी। रेशमा की अम्मी ये देख कर बहुत खुश हो रही थी कि चलो आखिर कार उनकी बेटी सही दिशा में लौट अाई हैं।

रेशमा ने अपनी अम्मी को भी मना करने के बाद दो तीन चम्मच खीर खिला ही दी। दोनो बहुत खुश थे और एक दूसरे से रेशमा की तारीफ कर रहे थे। रेशमा को अच्छा मौका लगा और बोली:"

" अम्मी शादाब अभी छोटा बच्चा ही है, पता नहीं कैसे मन लग रहा होगा उसके गांव में ?

रेशमा का तीर काम कर गया और अब्बा भावुक होकर बोल उठे:"

" अरे बेटी एक बात बात तो करा से उससे, दो दिन हो गए उसे गए हुए, पता नहीं कैसा होगा ?

रेशमा ने खुशी से झूमते हुए शादाब का नंबर मिला दिया तो जैसे ही शादाब ने रेशमा का नंबर देखा तक मुस्कुरा उठा और फोन उठा लिया।

शादाब:"सलाम बुआ कैसी है आप ?

रेशमा:" सलाम बेटा, बस ठीक हूं रे, तेरी बहुत याद आती हैं मुझे, कब आएगा तू मेरे पास ?

शादाब सब समझ गया और बोला:" बस बुआ जल्दी ही अा जाऊंगा मैं।

रेशमा:" अच्छा बेटा अब्बा तुझसे बात करने के लिए बोल रहे थे।

इतना कहकर रेशमा ने फोन अब्बा के हाथ में दे दिया तो अब्बा बोले:" मेरा बच्चा,कैसे हो शादाब मेरे बेटे?

शादाब:" सलाम दादा जी, मैं ठीक हूं आप बताए सर।

अब्बा:" मैं भी ठीक हूं बेटा, रेशमा बहुत ध्यान रख रही है बेटा हमारा, हर चीज बिना मांगे मिल रही है, सच में बेटी हो तो रेशमा जैसी मेरे बच्चे।

रेशमा अपने बाप की बात सुनकर खुशी से झूम उठी और रेशमा से कहीं ज्यादा उसकी चूत खुश हुई।
शादाब बोला:"..

" दादा जी आप आराम से रहे, जब भी आपका घर आने का मन करे तो बता देना, मैं गाड़ी लेकर अा जाऊंगा आपके पास!!

मोबाइल हैंड फ्री था जैसे ही रेशमा ने ये बात सुनी तो उसने अपने अब्बा से फोन ले लिया और बोली :"

" बेटा शादाब अभी इन्हे मेरे पास कुछ दिन और रहने दे ताकि मुझे भी अपने मा बाप की सेवा का पुण्य मिल सके।

इतना बोलते हुए रेशमा फोन लेकर अपने मा बाप से बोलकर कि उसे उपर काम हैं छत पर अा गई और शादाब से बोली:"

" शादाब अम्मी पापा के लिए मैंने दिन रात एक कर दिया हैं, और इससे कहीं ज्यादा इनके लिए करूंगी, बस तू अपना वादा याद रखना !

शादाब के होंठो पर स्माइल अा गई और बोला:'

" बुआ आप फिक्र ना करे, आपकी हर इच्छा पूरी करेगा, आपको वो सुख दूंगा जो आपके सपने में भी नहीं सोचा होगा। बस आप दादा दादी का ख्याल रखे कुछ दिन।

रेशमा शादाब की बात सुनकर जोश में अा गई और चूत कपड़ों के ऊपर से ही सहलाते हुए बोली:

" आह बेटा शादाब, देख ना तुझे याद करके मेरी नीचे वाली कैसे आंसू बहा रही हैं!!

शादाब :" जितना वो रोएगी उससे कहीं ज्यादा उसे सुकून दूंगा मैं।
अच्छा ठीक है बुआ बाद में करता हूं मैं।

शादाब ने जैसे ही फोन काटा तो उसे अपने पीछे खड़ी शहनाज़ नजर आईं जो उसकी सारी बाते सुन चुकी थी जिससे उसका खूबसूरत चेहरा एक लाल अंगारे की तरफ दहक रहा था। शादाब डर गया और बोला:"

" अम्मी रेशमा बुआ का फोन था, दादा जी भी बात कर रहे थे, बोल रहे थे कि रेशमा उनका बहुत ध्यान रख रही है।

दादा दादी वाली बात शहनाज़ ने नहीं सुनी थी क्योंकि तब वो बाथरूम में थी। गुस्से से शाहनाज लंगड़ाती हुई आगे बढ़ी और एक जोरदार थप्पड़ शादाब के मुंह पर रशीद कर दिया और किसी जख्मी नहीं की तरह फुफकारते हुए बोली:"

" धोखेबाज कहीं का, हर सुख देने की बात करता हैं उस रण्डी को और प्यार का ड्रामा मुझसे करता है। जा दफा होजा मेरी आंखो के आगे से,

शहनाज़ ने ये बात रोते हुए कही और अपने कमरे ने घुस गई और कमरा अंदर से बंद कर लिया। शादाब को एक पल के लिए कुछ नहीं समझ नहीं आया कि क्या करे इसलिए सिर पकड़ कर वहीं बैठ गया। उसने तो अपनी अम्मी को घुमाने के लिए ये प्लान बनाया था और शहनाज़ उसे ही गलत समझ रही हैं।

कुछ सोच कर शादाब उठा और शहनाज़ का रूम नॉक करने लगा और बोला:"

" अम्मी प्लीज़ पहले मेरी पूरी बात तो सुन लो आप फिर जो आप कहोगी मुझे मंजूर होगा।

शहनाज़ रोते हुए:" अब भी तुझे लगता है कि कुछ बच गया है सुनने के लिए, कितना बेशर्म हैं तू शादाब, मुझे शर्म आती हैं ये सोचकर कि तू मेरा बेटा हैं।

शादाब का दिल पूरी तरह से बैठ गया और आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया और धड़ाम से एक कटे हुए पेड़ की छांव फर्श पर गिर पड़ा और बेहोश हो गया। शहनाज़ को जैसे ही कुछ गिरने की आवाज़ सुनाई दी तो उसका दिल घबरा गया और उसने एक झटके के साथ दरवाजा खोल दिया तो देखा कि उसके बेटा नीचे फर्श पर पड़ा हुआ हैं तो उसे बहुत दुख हुआ और उसके पास पहुंच गई और उसे हिलाते हुए बोली:"

" शादाब आंखे खोलो मेरे बेटे, क्या हुआ तुम्हे , ठीक तो हो तुम बात करो मुझसे ?

शादाब ऐसे ही मुर्दे की तरह पड़ा रहा तो शहनाज उसे उठा कर बेड पर ले जाने की कोशिश करने लगी लेकिन उसके जवान तंदुरुस्त जिस्म को उठाना तो दूर की बात ठीक से हिला भी नहीं पाई। शहनाज़ कुछ सोचते हुए किचेन में घुस गई और पानी लेकर अाई और इसके मुंह पर थोड़ा सा अपनी डाला तो शादाब के जिस्म में हल्की सी हलचल हुई जिससे शहनाज़ ने कुछ सुकून की सांस ली। उसने अपने बेटे के शरीर की हल्की मालिश करनी शुरू कर दी। धीरे धीरे शादाब को होश आने लगा और जैसे ही उसकी आंखे खुली तो उसने अपने आपको शहनाज़ की गोद में पाया जिसका चेहरा शादाब के उपर झुका हुआ था और आंखो से टपटके आंसू शादाब के चेहरे पर गिर रहे थे।

शादाब अपनी अम्मी से लिपट गया और बोला:"

" अम्मी प्लीज़ मेरा यकीन करो, मैंने सब कुछ आपकी खुशी के लिए किया हैं। आपका बेटा धोखेबाज नहीं हैं।

शहनाज़:" बस कर मेरे बेटे, बस तू ठीक हो गया मेरे लिए इतना बहुत हैं शादाब।

शादाब:" अम्मी प्लीज़ अगर आपको लगता हैं कि मैंने गलत किया हैं तू मुझे माफ़ कर दो नहीं तो कोई सजा दो।

शहनाज़:" शादाब मैंने सारे ज़माने की रश्मो और रिश्तों को ताक पर रखकर तुझे प्यार किया हैं, मुझे तेरी बेवफाई बर्दाश्त नहीं होगी

शादाब: अम्मी मेरे मन में कुछ भी ग़लत नहीं हैं, मैंने आपको सब बता तो दिया है।

शहनाज़ कुछ हद तक उसकी बात से सहमत हो गई लेकिन अभी उसके मन में कहीं ना कहीं एक कसक जरूर रह गई। उसने शादाब को सहारा देकर उठाया और बेड पर लिटा दिया और उसके लिए नाश्ता तैयार करने किचेन में घुस गई।
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शहनाज़ ने दूध गर्म किया और अपने बेटे के लिए ब्रेड आमलेट बनाने लगी। उधर शादाब समझ नहीं पा रहा था कि अपनी अम्मी को कैसे यकीन दिलाया जाए क्योंकि दादा जी या बुआ से तो पूछने का सवाल ही नहीं बनता था कि मैं उनसे बात कर रहा था। पता नहीं क्या सोचेंगे वो मेरे और अम्मी के बारे में इसलिए ऐसा सोचना भी गलत हैं। इन्हीं विचारों में डूबा हुआ शादाब नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया।

शहनाज नाश्ता तैयार करके शादाब के रूम में अाई तो वो उसे नहीं मिला तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज सुनकर उसे एहसास हुआ कि शादाब नहा रहा है। शहनाज़ ने अपने बेटे का मोबाइल उठा लिया कि देखू और क्या क्या कर रहता है ये मोबाइल के अंदर। शहनाज़ ने मोबाइल के फोल्डर चेक करने शुरू कर दिए और उसे कहीं कुछ नहीं मिला तभी उसे लास्ट में एक फाइल नजर अाई तो उसे उसने ओपन कर दिया तो फाइल दर असल एक रिकॉर्डिंग फोल्डर था जिसमें आज शादाब के द्वारा की गई बाते रिकॉर्ड हो गई थी। उसने जान बूझकर नहीं की थी लेकिन स्क्रीन टच मोबाइल होने की वजह से अपने आप गाल से लगकर रिकॉर्ड हो गई थी।

शहनाज़ ने रिकॉर्डिंग चला दी तो उसे पता चल गया कि फोन रेशमा ने किया था शादाब ने नहीं । रेशमा सच में उसके सास ससुर का बहुत ध्यान रही हैं ये एहसास उसे अपने ससुर की बाते सुनकर हो गया। आखिर में फोन काटने के लिए भी शादाब ने ही बोला था जो उसे सबसे ज्यादा अच्छा लगा और वो ये सब पता चलते ही शहनाज़ अपने आप पर अफसोस करने लगी कि उसने अपने बेटे पर गलत इल्ज़ाम लगा दिया है। मेरा बेटा कितना दुखी हुआ है मेरी वजह से ये सोचते ही शहनाज़ को अपने आप पर ही गुस्सा आया। लेकिन अब मैं अपनी गलती को सुधार लूंगी।
ये सोचते हुए शहनाज़ अपने रुम में चली गई और एक शॉर्ट रंगीन ड्रेस पहन ली जिसमें उसके कंधे पूरे नंगे थे और काले लंबे बाल कंधे पर लटक रहे थे। ड्रेस बहुत टाईट थी और गला थोड़ा चौड़ा था लेकिन उसमें शहनाज़ की चूचियां पूरी तरह से कसी हुई नजर आ रही थी। उसने अपने आपको सजाना शुरू कर दिया क्योंकि वो अपने बेटे के उपर पूरी तरह से अपना जादू चलाना चाहती थी ताकि वो उसे रेशमा से बचा सकें। शहनाज़ ने अपने खूबसूरत होंठो को लाल रंग की लिपस्टिक से सजाकर और ज्यादा खूबसूरत बना लिया और शादाब के रूम की तरफ चल पड़ी। शादाब नहा चुका था और अपने जिस्म को टॉवेल से साफ करने के बाद अपने कपडे पहन कर अपने रूम में अा गया।
कमरे में घुसते ही उसकी नजर सामने सोफे पर बैठी शहनाज़ पर पड़ी तो वो हैरान हो गया लेकिन उससे कहीं ज्यादा वो खुश हुआ क्योंकि शहनाज़ एक दम जन्नत से उतरी हुई किसी हूर की तरह खूबसूरत लग रही थी।

शादाब अपनी अम्मी को एक हल्की सी स्माइल देकर आगे बढ़ गया और अपने बाल में तेल लगाकर और कंघा करने लगा तो शहनाज़ उठी और उसके पीछे आकर खड़ी हो गई और उसके हाथ को पकड़ लिए जिसके कंघा था। वो अपने बेटे के बाल सेट करने लगी तो शादाब को लगा कि अम्मी अब उतनी भी ज्यादा नाराज नहीं है जितनी मै सोच रहा था । बाल सेट होने जाने के बाद दोनो ने हाथ धोए और एक दूसरे के सामने नाश्ता करने के लिए बैठ गए। दोनो के बीच अभी तक कोई बात नही हुई थी। शहनाज़ लगातार अपने बेटे के चेहरे को प्यार से देख रही थी तो शादाब भी बीच बीच में नजर उठा कर अपनी अम्मी को निहारने से खुद को नहीं रोक पा रहा था।

शहनाज़ खामोशी तोड़ते हुए बोली:" बेटा आज तेरी अम्मी तुझे खूबसूरत नहीं लग रही है ? आज तारीफ नहीं करेगा क्या मेरी ?

शादाब:" अम्मी आप तो हमेशा की तरह एकदम बिल्कुल हूर जैसी लग रही हैं !

शहनाज़ अपनी सीट से उठी और उसके पास आते हुए बोली:"

" बेटा इतनी दूर से तुझे शायद ठीक से नहीं दिख रहा है तभी आधे अधूरे मन से तारीफ कर रहा हैं मेरी। अब बता मेरे राजा एक दम पास से देखकर।

शहनाज़ इतना बोलते हुए बिल्कुल उसके सामने खड़ी हो गई तो शादाब को उसके बदन से उठती हुई मादक परफ्यूम की खुशबू महसूस हुई। शादाब ने एक बार अपनी अम्मी की तरफ नजरे उठा दी और जी भर कर उसकी सुंदरता को देखने लगा।

शहनाज़:" मुझे लगता है कि तुम अभी भी ठीक से नहीं देख पा रहे हो मेरे राजा !! रुक एक मिनट

इतना कहकर शहनाज़ झट से शादाब की गोद में बैठ गई। अब शहनाज़ की दोनो टांगे शादाब की कमर पर अटकी हुई थी और दोनो के चेहरे बिल्कुल एक दूसरे के सामने थे।

शहनाज़:" अब ठीक से देख ले मेरे राजा अपनी शहनाज़ को ?

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश हो गया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:"

" अम्मी आप इस दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो। मैंने ऐसी खूबसूरती कहीं नहीं देखी।

शहनाज ने अपनी तारीफ से खुश हो कर अपने दोनो हाथ उसकी गर्दन में लपेट दिए और आगे को खिसक गई जिससे दोनो के होंठ बिल्कुल एक दूसरे के करीब अा गए। शहनाज उसकी आंखो में देखते हुए बोली:"

" मेरे राजा अपनी शहनाज़ को माफ कर दे मैंने गलतफहमी की वजह से तुझ पर शक किया।

इतना कहते हुए उसने अपने होंठ बिल्कुल शादाब के होंठो के सामने कर दिए और उसके बालो में उंगलियां फेरने लगीं तो शादाब को भी अपनी अम्मी की गर्म गर्म सांसे अपने चेहरे पर महसूस हो रही थीं। शादाब ने भी अपने हाथ शहनाज की गर्दन में लपेट दिए और बोला:"

" अम्मी मैं सिर्फ आपसे प्यार करता हूं, आपका बेटा पूरी तरह से आपका हैं, रेशमा तो क्या दुनिया की कोई भी लड़की मुझे आपसे नहीं छीन पायेगी।

जैसे ही शादाब की बात पूरी हुई शहनाज़ ने अपने होंठ शादाब के होंठो पर रख दिए और चूसने लगी। दोनो की आंखे एक बार फिर से मस्ती से बंद हो गई और दोनो एक लंबे किस में खोते चले गए और दोनो की जीभ एक दूसरे के मुंह में कबड्डी खेलने लगी।

आखिर में जब सांस उखड़ने लगी तो दोनो अलग हुए और एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए। शादाब ने दूध का ग्लास टेबल से उठाया और शहनाज़ के होंठो से लगा दिया तो शहनाज़ ने एक घूंट भर कर शादाब को दिया तो वो दूध पीने लगा। दोनो मा बेटे के बीच अब सारी गलतफहमी दूर हो गई थी इसलिए दोनो मा बेटे एक दूसरे को खाना खिलाने लगें। जल्दी ही नाश्ता करने के बाद शहनाज़ ने सब बर्तन धो दिए और शादाब के पास अा गई।

शादाब:" अम्मी मैं सोच रहा था कि कहीं घूमने चलते है !!

शहनाज़:" ठीक हैं बेटा मैं कपडे बदल लेती हूं ।

शादाब:" क्या कपडे बदलने अम्मी, इन्हीं के उपर बुर्का पहन लो बस।

शहनाज़ शरमाते हुए:"

" अच्छा जी जनाब और फिर आप गांव से बाहर निकलते ही बुर्का उतार देंगे।

शादाब: बिल्कुल अम्मी आपको अब खुलकर जीना चाहिए, आपका बेटा आप को बहुत खुशी देने के लिए आया हैं।

शहनाज़ अपने गले से झांकती हुई अपनी चूचियों की गोलाईयों को देखते हुए:*

" तुझे अच्छा लगेगा क्या जब मुझे लोग ऐसी हालत में देखेंगे।

शादाब:" अम्मी ये ही मैं आपको एहसास कराना चाहता हूं कि आप कितनी खूबसूरत हैं, लोग पागल हो जाएंगे आपको इस हाल में देख कर !!

शहनाज़ शर्म से लाल होते हुए:"

" नहीं मेरे राजा, ऐसा मत कर मैं लोगो की नजरे कैसे बर्दाश्त कर पाऊंगी अपने जिस्म पर ? मुझसे नहीं हो पाएगा, डर लगता हैं मुझे तो बहुत सोच कर ही।

शादाब:" अम्मी इसमें डरने की कोई बात नहीं है, आजकल तो ये फैशन बन गया हैं। अम्मी प्लीज़ मेरी बात मान लो।

शहनाज़ :" ठीक हैं, अगर मैंने किसी को ऐसी ड्रेस पहने देखा तो बुर्का उतार दूंगी नहीं तो मेरे साथ जबरदस्ती मत करना।

शादाब:" अम्मी आप ये बात सपने में भी मत सोचना कि आपका बेटा आपके साथ कोई जबरदस्ती करेगा।

शहनाज़ उठकर चली गई और थोड़ी देर बाद ही बुर्का पहन कर अा गई। शादाब कार निकाल चुका था इसलिए दोनो मा बेटे शहर की तरफ चल पड़े। अभी गांव से बाहर निकल ही रहे थे कि शादाब के दादा जी का फोन आ गया।

शादाब:" सलाम दादा जी, कैसे है आप सब?

दादा:" ठीक हूं बेटा, बस तुम्हारी फिक्र रहती हैं। अच्छा बेटा वो करीम साहब का फोन आया था, हमारे पास के कस्बे के चेयरमैन हैं बेटा वो। विदेश गए हुए थे इसलिए पार्टी में नहीं अा पाए थे। वो अपने बेटे को डाक्टर बनाना चाहते हैं इसलिए उनकी बीबी रेहाना का फोन आया था उसने तुम्हे घर बुलाया हैं। थोड़ी देर बाद तुम्हे कॉल करेगी, उनके घर चले जाना बेटा, उनके बहुत एहसान हैं हम पर।

शादाब:" जी दादा जी आप फिक्र ना करे, मैं चला जाऊंगा।

इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया और शहनाज़ को सारी बाते बताई तो शहनाज़ समझ गई कि ये जरूर वहीं कमीनी रेहाना है जो मेरे बेटे का मोबाइल नंबर लेकर गई थी और उस दिन सिनेमा हॉल में भी अपने बेटे के साथ कैसी नीच हरकत कर रही थी। जिसने अपने सगे बेटे को नहीं छोड़ा वो कमीनी जरूर मेरे बेटे को फसाने के लिए बुला रही है मुझे रोकना होगा।

शहनाज़:" बेटा लेकिन हम तो शहर जा रहे हैं तो उसके घर नहीं जाएंगे।

शादाब:" अम्मी दादा जी ने बोला हैं कि वहां जाना ज्यादा जरूरी है और उन लोगो के हम पर बहुत एहसान हैं अम्मी।

शहनाज़:' कुछ भी हो बेटा लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा हैं तुझे वहां भेजने के लिए।

शादाब:' अरे अम्मी मैं अकेला थोड़े ही जा रहा हूं। आप भी तो मेरे साथ जा रही है।

शहनाज़ शादाब की बात सुनकर थोड़ा राहत की सांस लेने लगी क्योंकि वो जानती थी कि अगर आज नहीं गए तो कहीं ऐसा ना हो कि बाद में शादाब को अकेले ही जाना पड़े।

शहनाज़:" ठीक हैं, लेकिन ज्यादा देर नहीं रुकेंगे।

शादाब आगे कुछ बोलता उससे पहले ही उसका मोबाइल बज उठा। वो समझ गया कि ये जरूर रेहाना का कॉल होगा।

रेहाना:" हेलो क्या मेरी बात शादाब से हो रही है?

शादाब के कानों में एक बहुत ही मधुर आवाज गूंज उठी।

शादाब:" जी मैं शादाब बोल रहा हूं, आप बताए।

रेहाना:" शादाब मै रेहाना बोल रही हूं, उम्मीद हैं आपके दादा जी ने आपको सब बता दिया होगा इसलिए मैं आपको अपना एड्रेस भेज रही हूं।

शादाब:" जी ठीक है, मैं पहुंच जाऊंगा।

रेहाना ने अपना पता भेज दिया और जल्दी ही शादाब और शहनाज़ रेहाना के घर के सामने खड़े थे। डोर बेल बजाने पर घर की एक नौकरानी ने दरवाजा खोला और दोनो को अंदर ले गई। घर बहुत ही आलीशान बना हुआ था। शादाब जैसे ही अंदर कमरे में पहुंचा तो उसे रेहाना दिखाई दी तो उसने सलाम किया।

रेहाना ने उसका सलाम लिया और साथ में शहनाज़ को देख कर वो हैरान परेशान हो गई। उसने पूछा:"..

" शादाब बेटा आपके साथ ये कौन अाई है ?

शादाब से पहले शहनाज़ खुद ही बोल उठी:"

" सलाम रेहाना जी, मैं शादाब की अम्मी हूं। मेरा नाम शहनाज़ है।

रेहाना को बुरा तो लगा लेकिन मजबूरी में उसने शहनाज़ को एक फीकी सी स्माइल दी और बोली:

" माशा अल्लाह शहनाज़ जी आप बहुत खूबसूरत है और शादाब बिल्कुल आप पर ही गया है।

शहनाज़ को बुरा लगा लेकिन उसने भी ऑपचारिकता पूरी करते हुए स्माइल दी। तीनो आमने सामने कुर्सी पर बैठे हुए थे , गर्मी की वजह से एसी में भी शहनाज़ को पसीना अा रहा था शायद धूप में आने की वजह से इसलिए रेहाना बोली:"

" आपको तो बहुत ज्यादा पसीना अा रहा है और उपर से आपने इतना भारी बुर्का पहन रखा है, इसे उतार दीजिए।

रेहाना के सवाल पर शहनाज़ डर से अपने आप में सिमट सी गई क्योंकि बुर्के के नीचे उसने बहुत छोटी ड्रेस पहन रखी थी। इसलिए बुर्का उतारने का तो कोई सवाल ही नहीं पैदा होता।

शहनाज़ अपने आपको संभालते हुए बोली:"

" माफ करना बहन आप मुझे, लेकिन मैंने कभी घर से बाहर बुर्का नहीं उतारा आज तक, इसलिए मैं ऐसे ही ठीक हूं।

रेहाना हैरान होते हुए:"

" आप भी कमाल की बात करती है शहनाज़, अब तो सब कुछ कितना बदल गया है, आपको जमाने के साथ चलना चाहिए।

शादाब को भी मजाक सूझी और बोला:" हान अम्मी, मैं भी आपको यहीं समझाता हूं कि जमाना बदल गया है, आप बुर्का उतार दीजिए।

शहनाज़ को शादाब पर बहुत गुस्सा अा रहा था इसलिए मन ही मन गालियां देते हुए बोली:"

" बेटा लेकिन मुझे मेरे संस्कार और तहजीब आप भी पसंद हैं और मैं उनसे समझौता नहीं कर सकती।

रेहाना सोचने लगी कि अजीब पागल औरत हैं ये शहनाज़ भी, इतनी खूबसूरत हैं उसके बाद भी अपने आपको कैसे कैद करके रखती है, इतना खूबसूरत लड़का हैं इसका, काश शादाब मेरा बेटा होता तो कब का इसे अपने उपर चढ़ा चुकी होती।

रेहाना:" आप दोनो बैठिए, मैं आपके लिए नाश्ते का इंतजाम करती हूं।

इतना कहकर वो बाहर चली तो उसके जाते ही शहनाज़ ने शादाब को थप्पड़ दिखाया और बोली:"

" कमीने कितना ज्यादा बिगड़ गया है तू, पहले मुझे जबरदस्ती छोटी ड्रेस पहनने को बोलता है और फिर यहां इस कमीनी के सामने उतारने को, घर चलकर तुझे अच्छे से ठीक करूंगी।

शादाब:" अच्छा माफ करो अम्मी मैं तो मजाक कर रहा था।

शहनाज़ ने उसे घूर दिया तो शादाब अपनी अम्मी का गुस्सा देखकर स्माइल कर दिया। तभी रेहाना के आने की आहट सुनाई पड़ी तो दोनो सीधे बैठ गए।
नाश्ता लग चुका था और तीनो ने साथ ने नाश्ता किया।

रेहाना:" अरे कमला जरा मेरे बेटे को देखना किधर हैं ? शादाब आया हुआ हैं तो इससे कुछ पूछ लेगा वो।

कमला की बाहर से आवाज आई कि अभी भेजती हूं बीबी जी। थोड़ी देर बाद ही रेहाना का लाडला अा गया जिसे देखकर शादाब चौंक पड़ा। उसे याद अा गया कि ये लड़का तो उस दिन सिनेमा हॉल में अपनी अम्मी को लंड चूसा रहा था। दरसअल उस दिन शादाब रेहाना का चेहरा ठीक से नहीं देख पाया था लेकिन उनकी बातो से इतना जरूर समझ गया था कि ये दोनों मा बेटे हैं। रेहाना का लड़का शादाब के पास ही बैठ गया और उससे बात करने लगा।

शादाब उसे पढ़ाई के बारे में काफी बाते समझाने लगा। कोई 12 बज गए थे और शादाब लडके को सब कुछ बता चुका था। रेहाना बीच बीच में हसरत भरी निगाहों से शादाब की तरफ देख रही थी जो शहनाज़ की शातिर निगाहों से नहीं छुप रहा था इसलिए शहनाज़ जल्दी से जल्दी वहां से निकलने की दुआ कर रही थी।

शादाब ने लड़के को सब कुछ बताने के बाद कहा:"

" अच्छा भाई मैंने तुझे सब बता दिया हैं और आगे कोई जरूरत हो तो मुझे कॉल कर लेना। मुझे शहर में कुछ काम है इसलिए मुझे जाना होगा।

रेहाना:" अरे बेटा इतनी जल्दी क्यों कर रहे हो, खाना खाकर जाना आराम से आप दोनो।

शादाब ने शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ ने उसे चलने का इशारा किया तो शादाब बोला:"

" नहीं आप खाने के लिए तो माफ करे, शहर में मुझे बैंक में कुछ काम हैं इसलिए जल्दी जाना होगा

इतना कहकर शादाब खड़ा हो गया और फिर वो सब बाहर की तरफ जाने लगे। आगे आगे शादाब और रेहाना चल रही थी जबकि शहनाज़ थोड़ा पीछे थी। रेहाना अपने एक हाथ को अपनी चूची के नीचे लाकर उसे उभारते हुए बोली:"

" बेटा कभी कभी आया करना जब भी तुम्हारा मन करे क्योंकि ये भी तुम्हारा अपना ही घर हैं।

शादाब उसकी चूचियां देखते हुए:"

" ठीक है आंटी जी।

शहनाज़ ने दोनो की बात सुन ली लेकिन चूची का उभार उसे नहीं दिखाई दिया। वो अपने गुस्से को मन में दबाए हुए घर से बाहर निकल गई। शादाब ने गाड़ी स्टार्ट करी और शहनाज़ उसके साथ बैठ गई तो रेहाना ने एक कातिल मुस्कान के साथ शादाब को बाय किया। शादाब ने भी उसे बाय बोलते हुए गाड़ी आगे बढ़ा दी।
शादाब ने गाड़ी शहर की तरफ दौड़ा दी और उसने शहनाज़ की तरफ देखा जो उसकी तरफ गुस्से से देख रही थीं।

शादाब:" क्या हुआ मेरी जान ? गुस्से में तो और भी खूबसूरत लग रही हो अम्मी !!

शहनाज़ ने कुछ नहीं बोला और बस उसकी तरफ लगातार गुस्से से देखती रही। थोड़ी देर के बाद जैसे ही गाड़ी हाईवे पर पहुंच गई तो शहनाज़ बोली:"

" शादाब गाड़ी रोक !!

शादाब ने झटके के साथ ब्रेक मारते हुए गाड़ी रोक दी और शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ ने गुस्से से उसके दोनो कान पकड़ लिए और खींचते हुए बोली :"

" कमीने अब बता तू उस रेहाना के सामने मुझे बुर्का उतारने को बोल रहा था। तुझे शर्म हैं कि नहीं

शादाब:" आह अम्मी इतनी जोर से मत कान खींचो दुखता है, मैं तो आपको छेड़ रहा था बस।

शहनाज़:" दुखेगा तो है ही क्योंकि इसलिए ही तो जोर से खींच रही हूं मेरे राजा !!

शादाब:" अच्छा अम्मी गलती हो गई, प्लीज़ माफ कर दो।

शहनाज़:" बस इतने से दर्द से ही तेरी बस हो गई, सुबह जो तूने मेरे साथ किया उसका क्या ?

शादाब:" आह अम्मी, मुझे सच में नहीं पता था कि गांड़ में घुस जायेगा आपकी,

शहनाज़ का दिल धड़क उठा और शर्म से पानी पानी हो गई और शादाब के कान भी अपने आप ही छूट गए उसके हाथ से।

शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए ही बोली:" तुझे शर्म नहीं आती अपनी अम्मी से ऐसी बाते करते हुए बेशर्म !

शादाब उसकी तरफ सरकते हुए:_ उफ्फ कैसी शर्म तुमसे मेरी जान शहनाज़ ! शर्म करूंगा तो भगा के कैसे ले जाऊंगा?

शहनाज़:" उस कमीनी रेहाना को भगा के ले जा, कैसे तुझ पर लाइन मार रही थी बेटा अपना घर समझना, कभी कभी अा जाना।

शादाब:" अम्मी वो तो मुझे ऐसे ही बुला रही थी, आप गलत मत समझो,

शहनाज़:" मैंने दुनिया देखी हैं शादाब, उस दिन सिनेमा हॉल में ये ही कमीनी थी अपने बेटे के साथ मेरे राजा।

शादाब:' हान अम्मी, लड़के को तो मैं पहचान गया था।

शहनाज़:" इसने अपना लड़का नहीं छोड़ा, तो मेरे बेटे को कैसे छोड़ देगी ?

शादाब:"अच्छा अम्मी बेटा तो आप भी अपना नहीं छोड़ रही हो,क्या पता वो भी अपने बेटे से प्यार करती हो ?

शहनाज़ को शादाब की बात सुनकर थोड़ा अच्छा नहीं लगा और बोली:"

" बेटा मैं तुझसे प्यार करती हूं, और उस कमीनी के तो पति भी जिंदा है। शर्म करनी चाहिए, उस दिन हॉल में कैसी गंदी हरकत कर रही थी अपने बेटे के साथ ?

शादाब:' उफ्फ अम्मी मैं आपका दर्द समझ सकता हूं। और वो गंदी नहीं बहुत प्यारी हरकत कर रही थी अपने बेटे की खुशी के लिए।

शहनाज़:" हाय अल्लाह, कितना बिगड़ गया हैं तू !! कोई इसको भी मुंह में लेकर चूसता है क्या ?

शादाब:" उफ्फ मेरी नादान अम्मी, आपने तो खुद अपनी आंखो से देखा हैं सब।

शहनाज़:" कमीने चुप कर, कुछ तो लिहाज कर अपनी मा का, मैंने तो आज तक ठीक से हाथ नहीं लगाया चूसना तो दूर की बात हैं।

शादाब:" अभी आपने इस का कमाल देखा ही कहां हैं, ये वो रॉकेट हैं जो आपको चांद पर के जाएगा।

शहनाज़ शर्माती हुई:" चल बदतमीज, अब मूसल से रॉकेट कैसे बन गया ।

शादाब:" हाय अम्मी, मूसल ही समझ लो बस एक बार अपनी औखली का मसाला कूटवा लो फिर देखना आप !!

शहनाज़ का पूरा जिस्म कांप उठा, उफ्फ कमीना कैसे मुझे चुदवाने के लिए बोल रहा है।

शहनाज़:" मेरे राजा, ख्वाब देखना छोड़ दे तू।

शादाब:" उफ्फ अम्मी बस एक बार आपकी औखली का मसाला कूट जाए, आपको इस मूसल की दीवानी हो जाओगी। फिर जब अच्छे से प्यार भरी नजरो से देखोगी तो आपका मुंह अपने आप खुल जाएगा उस रेहाना की तरह मेरी जान।

शहनाज़:" शादाब तू कुछ ज्यादा ही बिगड़ गया हैं, कैसी गंदी गंदी बाते करता हैं अपनी अम्मी से ?

शादाब उसे अपने सीने से लगा लिया तो शहनाज़ का दिल बहुत तेजी से धड़कने लगा। शादाब उसकी कमर सहलाते हुए बोला:"

" उफ्फ अगर तुमसे ना करू तो क्या उस रेहाना से गंदी गंदी बाते करू मेरी शहनाज़ ?

शहनाज़ उसकी पीठ में अपने नाखून गड़ाते हुए बोली:"

" मुंह तोड़ दूंगी तेरा अगर उसका नाम लिया तो। अच्छा ठीक है मेरे राजा, लेकिन गंदी गंदी बात सिर्फ रात में करना अपनी शहनाज़ से, बस अब खुश !!

शादाब ने शहनाज़ की गर्दन को चूम लिया और बोला:"

" भाग चलो मेरे साथ मेरी शहनाज़, अब मन नहीं लगता तुम्हारे बिना !

शहनाज़ का समूचा वजूद कांप उठा और बोली:"

" मन क्यों नहीं लगता तुम्हारे पास ही तो रहती हू सारा दिन मेरे राजा मैं फिर भी ?

शादाब :" उफ्फ अम्मी समझो, मैं आपसे निकाह करना चाहता हूं, अपनी बीवी बनाना चाहता हूं।
शादाब उसके बिल्कुल पास अा गया और उसकी आंखो में देखते हुए कहा :"

" अम्मी मैं सिर्फ आपको भगाना ही नहीं चाहता बल्कि आपके साथ निकाह करना चाहता हूं। क्या आपको कुबूल होगा ?

शहनाज़ को अपने बेटे से ये उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि वो निकाह तक की सोच कर बैठा हुआ है इसलिए वो उसके चेहरे को अजूबे की तरह देखने लगी।

शादाब:" ऐसे क्या देख रही हो अम्मी ?

शहनाज़:" बेटा दोस्ती और प्यार तक तो ठीक है लेकिन निकाह नहीं बेटा ये ग़लत होगा।

शादाब:" उफ्फ अम्मी, आपका बेटा आपको वो सभी खुशियां देने के लिए आया है जो आपका सपना रही हैं। आपके सपनों का शहजादा अब आपके सब सपने पूरे करेगा।

जैसे ही शादाब की बात पूरी हुई शहनाज़ की आंखो से आंसू निकल पड़े। शादाब ने दोनो हाथो में अपनी मा का चेहरा भर लिया और बोला:"

" क्या हुआ शहनाज़ इन आंखो में आशु क्यों ? क्या मेरी बात गलत लगी आपको ?

शहनाज़ उसके सीने से चिपक गई और बोली:" नहीं राजा तूने कुछ भी गलत नहीं कहा। बस अपनी किस्मत पर यकीन नहीं रहा मुझे।

शादाब ;" अम्मी आपका बेटा सब कुछ बदल देगा। आप मुझ पर यकीन रखे। बस ये बताए कि क्या आपको मुझसे निकाह कुबूल होगा ?

शहनाज़ ने अपनी बार अपनी बेटे की आंखो में पूरे विश्वास के साथ देखा और उसके होंठ चूम कर बोली :" मेरे साथ तो ये सब एक सपने के सच होने जैसा होगा।

शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ लिया और चूम कर बोला :

" आपके सपने सच होने का समय अा गया है अम्मी। मैं आज आपसे निकाह करूंगा।

शहनाज़ :" लेकिन बेटा सब क्या कहेंगे और काजी कहां से लायेगा तू ? गवाह भी तो होते है मेरे राजा।

शादाब :' आप उसकी फिक्र ना करे। मैं सब इंतजाम कर दूंगा,

शहनाज़ को अपने बेटे पर पूरा यकीन था इसलिए उसके जिस्म में मस्ती भरी लहरे दौड़ने लगी। उफ्फ ये कमीना तू आज रात को मेरे साथ बेड पर ...

ये सब सोचकर शहनाज़ की चूत गीली हो गई मानो खुद को तैयार कर रही हो। शादाब बोला:"..

" क्या हुआ अम्मी ? सुहागरात के सपने में खो गई क्या मेरी जान ?

शहनाज़ ने अपने दोनो हाथों से अपना मुंह ढक लिया और बोली:"..

" चल भाग, बेशर्म कहीं का, अभी तो अम्मी हूं तेरी कुछ तो शर्म कर।

शादाब मुस्कुरा दिया और शहर की तरफ गाड़ी बढ़ा दी।

शहनाज़:" बेटा लेकिन अपनी बुआ और दादा दादी जी क्या कहेगा तू ?

शादाब:" देखो अम्मी, हमे ये बात अभी सबसे छुपानी होगी, हम गांव से सब कुछ बेचकर शहर में शिफ्ट हो जायेगे। दादा दादी को भी अपने साथ ले जाऊंगा लेकिन उन्हें कभी नहीं बताएंगे।

शहनाज़:" लेकिन बेटा गांव का क्या होगा ? तुझे तो डॉक्टर बनना था मेरे राजा।

शादाब:' अम्मी मैं अपनी पढ़ाई जारी रखूंगा और अगले एक महीने के अंदर ही गांव में हॉस्पिटल खोल दूंगा।

शहनाज़ अपने बेटे की समझदारी पर नाज़ करने लगी। जल्दी ही वो सब शहर पहुंच गए।

शादाब :" अम्मी पहले निकाह करना हैं या घूमना हैं ?

शहनाज़ उसके सीने में मारते हुए :" पहले निकाह होता हैं मेरे राजा, उसके बाद ही हनीमून ।

शादाब : मतलब आपने खुद को तैयार कर लिया है अपने बेटे के साथ हनीमून मनाने के लिए।

शहनाज़ शर्मा गई और मुंह नीचे कर लिया। शादाब बोला:_

" चलो अम्मी फिर आपको दुल्हन बनाने की तैयारी शुरू करते हैं।

शादाब ने एक मॉल से शहनाज़ के लिए दुल्हन का जोड़ा, ज्वेलरी, कपडे ,मेक उप किट सब कुछ खरीद लिया।

शादाब '' अम्मी चलो अब ब्यूटी पार्लर चलते हैं।

शहनाज़ सोच रही थी कि मैं तो आज शहर घूमने के लिए अाई थी और अब अपने बेटे की दुल्हन बनकर घर वापिस जाऊंगी। उसकी चूत तड़प उठी और कुछ बूंदे और टपका दी।

जल्दी ही दोनो ब्यूटी पार्लर में पहुंच गए तो लेडी ने उन्हें पहचान लिया और बोली:"

" वाह मैडम इतनी जल्दी फिर से ब्यूटी पार्लर ? शादी की सालगिरह हैं क्या आपकी ?

शादाब: मेरी जान को इस तरह सजाना कि चांद भी शर्मा उठे। आज हमारी सुहागरात हैं।

लेडी मुस्कुराई और बोली:"

" ठीक है सर, वादा रहा हैं कि आप इन्हे खुद ही नहीं पहचान पाएंगे।

शहनाज़ मुंह नीचे किए मंद मंद मुस्कुरा रही थी। शादाब बाहर चला गया और अपने दोस्तो को फोन करने लगा ताकि सारे इंतजाम हो सके। जल्दी ही शहनाज़ का मेक अप हो गया और वो एक प्यासे गुलाब की तरह खिल उठी।

शादाब ने उसे दुल्हन के कपड़ों में देखते ही खुद पर से काबू खो दिया और उसका मुंह चूम लिया।

लेडी:" सर आप कहें तो मैं बाहर चली जाऊ ?

शहनाज़ शर्म से लाल हो गई और उसने लेडी का हाथ पकड़ लिए मानो उसे बाहर जाने से रोक रही हो। लेडी रुक गई और शादाब ने उसका पेमेंट किया और दोनो बाहर निकल गए। शहनाज़ ने बुर्का पहन लिया और अपना मुंह उसके अंदर छुपा लिया। शादाब ये देखकर मुस्कुरा दिया।

शादाब:" उफ्फ अम्मी, अभी से इतनी शर्म, सुहागरात कैसे मानाओगी फिर ?

शहनाज़ ने जोर से एक बार से शादाब का हाथ दबा दिया और दूसरे हाथ की उंगली को उसके होंठो पर रख कर चुप रहने का इशारा किया।

शादाब:' हाय अम्मी, तुम्हारी इन्हीं कातिल अदाओं ने मेरा सब कुछ लूट लिया हैं मेरी जान।

उसके बाद शादाब ने गाड़ी निकाली और अपनी मंजिल की तरफ चल पड़ा। जल्दी ही कार एक आलीशान घर के सामने खड़ी हुई थी। वहां शादाब के बहुत सारे दोस्त भी थे और जो उन्हें देखते ही दौड़ते हुए अा गए।
शहनाज़ ने अपने आपको पूरी तरह से ढक रखा था जिससे उसके जिस्म का कोई भी हिस्सा नहीं दिख रहा था।

शादाब का दोस्त:" चलो शादाब अंदर काजी इंतजार कर रहा हैं निकाह के लिए।

शहनाज़ ने जैसे ही ये काजी वाली बात सुनी तो उसकी आंखे खुली की खुली रह गई। वो तो अब तक हुई बातों को मजाक में ले रही थी, उसे यकीन नहीं था उसका बेटा इतना बड़ा कदम भी उठा सकता हैं।

दूसरा दोस्त :" यार शादाब अचानक से शादी का प्लान कैसे बन गया ?

शादाब:" मुझे शहनाज़ पसंद अा गई और इसके घर वाली इसकी शादी कहीं और कर रहे थे इसलिए मजबूरी में भागना पड़ा

पहला दोस्त::" लेकिन तेरे घर वाले तो होने चाहिए, दादा दादी और अम्मी, वो सब कहां हैं?

शादाब अपनी अम्मी का नाम सुनकर एक पल के लिए तो सकपका सा गया लेकिन अपने आपको संभालते हुए कहा:"

" दर असल मेरे घर वाले भी इस शादी के खिलाफ हैं, मेरे दादा दादी कभी इस बात के लिए राज़ी नहीं होंगे।

दोस्त:" चलो फिर अंदर चल कर निकाह की रस्म अदा कर ली जाए शादाब।

शादाब और उसके दोस्त अंदर की तरफ चल दिए तो शहनाज़ भी उनके साथ चल पड़ी। सच मूच सामने काजी ही बैठा हुआ था और निकाह के लिए सभी रशीद और दूसरे जरूरी सामान रखे हुए थे।

शहनाज़ का बुर्का आंखो से हल्का सा खुला हुआ था जिसमें से सब साफ नजर आ रहा था। ये सब देखकर शहनाज़ का दिल पूरी तेजी से धड़कने लगा। उसका मन वहां से भाग जाने का कर रहा था लेकिन अपने बेटे को उसके दोस्तो के सामने जलील नहीं करना चाहती थी।

शहनाज़ ने अपने हाथ में थमा हुआ शादाब का हाथ दबाया तो शादाब ने उसकी तरफ देखा तो शहनाज़ ने उसे कुछ इशारा किया तो शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी उससे कुछ बात करना चाहती हैं। इसलिए वो सामने बने हुए एक कमरे में शहनाज को लेकर चला गया।

कमरे के अंदर घुसते ही शहनाज़ ने अपना मुंह खोल दिया और शादाब से बोली:".

" ये सब क्या हैं शादाब ? तूने तो सचमुच ही निकाह का इंतजाम कर दिया पागल।

शादाब अपनी अम्मी की बाते सुनकर हैरान हुआ और बोला:"

" क्या हुआ अम्मी आपको ? सब कुछ आपकी मर्जी से तो हो रहा था, फिर आप इतनी हैरान क्यों हो ?

शहनाज़:" शादाब बेटा, क्या तू सच मच अपनी मा से निकाह करना चाहता है ?

शादाब थोड़ा गुस्से से:"

" अम्मी बाहर काजी बैठा है चार गवाह के लिए मेरे दोस्त अा गए हैं। आपको यकीन नहीं ही रहा क्या अब भी ?

शहनाज़:" नहीं बेटा ये गुनाहे अज़ीम होगा, मैं अपने सगे बेटे से निकाह नहीं कर सकती।

शादाब के चेहरे का रंग एक दम उड़ गया और गुस्से से लाल होकर बोला :"

" अम्मी ये क्या हो गया आपको ? आपने खुद ही तो मुझे लेकर भागने की बात कही थी।

शहनाज़ का चेहरा अपने आप शर्म से नीचे झुक गया और शादाब के सामने दोनो हाथ जोड़कर बोली:"

" बेटा मुझसे गलती हो गई, मेरे मुंह से ना जाने कैसे वो सब निकल गया।

शादाब ने गुस्से से शहनाज़ की तरफ देखा और बोला:

" अम्मी मेरी इज्जत और मेरे प्यार का तमाशा मत बनाओ, मेरे सब दोस्त क्या समझेंगे।

शहनाज़ :" बेटा मेरी मजबूरी समझने की कोशिश कर शादाब, उन्हें मना ले बेटा।

शादाब बिना कुछ बाहर की तरफ चल पड़ा तो शहनाज़ ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली:"

" मुझे माफ़ कर देना मेरे राजा, मैं मजबुर हूं।

शादाब:" अम्मी आपने मेरे दिल को तोड़ा हैं, मेरे प्यार को मजाक बनाया हैं, मैं आपकी कसम खाता हूं कि आज के बाद कभी आपको मुंह नहीं दिखाऊंगा

शादाब ने ये बात शहनाज़ के सिर पर हाथ रख कर रोते हुए कही तो शहनाज़ ने उसका हाथ अपने सिर पर से हटा दिया और उसके गले लग गई।

शहनाज़:" नहीं बेटा, ऐसी कसम मत खा मेरे लाल, तेरी मा तो मर ही जाएगी तेरे बिना।

शादाब बिना कुछ बोले फिर से बाहर की तरफ चल पड़ा तो शहनाज़ ने फिर से उसे पकड़ लिया। शहनाज़ बोली:"

" शादाब प्लीज़ बेटा, ऐसे मुझसे मुंह मोड़कर मत जा,

शादाब:" अम्मी छोड़ो मुझे, अब हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं रहा।

शहनाज़ रोते हुए :"

" नहीं बेटा ऐसा मत बोल, मेरा क्या होगा तेरे बिना, मैंने तेरे लिए सब कुछ छोड़ दिया था और आज तू ही मुझे छोड़कर जा रहा है शादाब ।

शादाब:" अम्मी मैं भी आपके लिए, आपके प्यार के लिए सब कुछ ठुकरा रहा था और आपने मुझे ही ठुकरा दिया।

शहनाज़:" बेटा लेकिन जो तू चाह रहा हैं वो गलत हैं, एक मा बेटे के बीच जिस्म का रिश्ता नहीं बन सकता है ।

शादाब ने अब शहनाज़ का हाथ पकड़ लिया और बोला:_

" अम्मी आपने सोच भी कैसे लिया कि आपका बेटा जिस्म का भूखा हैं, रेहाना, रेशमा और भी ना जाने कितनी चोद चुका होता अगर जिस्म की भूख होती।

शहनाज़:" बेटा मेरा वो मतलब नहीं था, मैं तो कह रही थी ....

शादाब ने उसकी बात बीच में ही काट दी और बोला:"

" अम्मी प्लीज़ आप मुझे मेरे दोस्तो के सामने जलील होने से बचा लो, वादा करता हूं आपके जिस्म को गंदी नजर से देखूंगा भी नहीं, छूना तो दूर की बात हैं।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर सोच में पड़ गई। उसे आज एहसास हो रहा था उसका बेटा सचमुच उसका दीवाना बन गया है।

शहनाज़:" लेकिन बेटा !!

शादाब ने शहनाज़ के मुंह पर उंगली रख दी और बोला:"

" बस अम्मी अब कोई सवाल नही, आप हान या ना बोल दो बस, निकाह सिर्फ मेरे दोस्तो को दिखाने के लिए ही कर लो, लेकिन मना मत करना।

शहनाज़ के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था इसलिए उसने हान कर दी और उसकी आंखो से आंसू निकल पड़े और अपने बेटे के गले लग गई।

शादाब:" अम्मी चले फिर काजी इंतजार कर रहा हैं।

शादाब आगे चला तो शहनाज़ भी उसका हाथ पकड़ कर चल पड़ी।

बाहर आकर दोनो बैठ गए। शादाब का दोस्त बोला:"

" शादाब भाई निकाह की रस्म अदा की जाए क्या क्योंकि आज शहर में दूसरी शादी भी हैं और काजी जी को वहां भी जाना हैं।

शादाब ने एक बार शहनाज़ की तरफ देखा तो उसने ना चाहते हुए भी उसने अपना सिर हान में हिला दिया। शहनाज़ की आंखो से आंसू निकल रहे थे जो कि बुर्के की वजह से छिप रहे थे।

काजी शाहब ने सारे कागज पूरे कर लिए और बोले :"

काजी:" दूल्हा पक्ष के दो लोग आए और गवाह बने।

शादाब के दो दोस्त अा गए और उनका नाम काजी ने लड़के के तरफ से लिख लिया। उसके बाद काजी ने लड़की के पक्ष से दो लोगो को आने को कहा तो शादाब के दो दोस्त शहनाज़ की तरफ से अा गए।

सब कागज पूरे करने के बाद काजी ने उसमे मेहर आजकल के नियम के हिसाब से भर दिए और सबसे पहले शादाब से पूछा :"

" शादाब पुत्र इरफान आपका निकाह शहनाज़ पुत्री रहीम से किया जा रहा हैं क्या आपको शहनाज़ अपने निकाह में कुबूल है ??

शादाब ने एक बार शहनाज की तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा:"

" जी काजी जी मुझे शहनाज़ अपने निकाह में कुबूल है।

काजी जी ने तीन बार बात दोहराई और शादाब ने तीनो बार कुबूल कर लिया। अब काजी जी ने शहनाज़ की तरफ देखते हुए कहा :" शहनाज़ पुत्री रहीम आपका निकाह शादाब पुत्र इरफान से किया जा रहा है क्या आपको ये निकाह कुबूल हैं ?

शहनाज़ को ऐसे लग रहा था मानो उसके कानों में काजी जी खौलता हुआ शीशा डाल रहे हैं। उसकी सोचने समझने की सब शक्ति लगभग खतम हो गई थी और जिस्म पूरी तरह से कांप उठा और उसने एक बार शादाब की तरफ देखा तो बहुत ही उम्मीद भारी निगाहों से उसकी तरफ देख रहा था।

शहनाज़ का कोई उत्तर ना पाकर काजी जी ने दोबारा कहा:*

"शहनाज़ पुत्री रहीम आपका निकाह शादाब पुत्र इरफान से किया जा रहा है क्या आपको ये निकाह कुबूल हैं ?

शहनाज़ ने अपने दिल पर पत्थर रख लिया और सिर्फ हल्की सी गर्दन हिला कर अपना इशारा कर दिया कि उसे निकाह कुबूल है।
काजी ने अपनी बात दो बार और दोहराई और शहनाज की गर्दन दोनो बार बड़ी मुश्किल से हिली और आखिरकार दोनो का निकाह मुकम्मल हो गया लेकिन असली खुशी दोनो मा बेटे के चेहरे से गायब थी।

काजी :" शादाब आज से शहनाज़ आपकी शरिके हयात बन गई है। आप उसके हर सुख दुख में इसका साथ देंगे और इस पर आने वाली हर मुश्किल का सामना आपको करना होगा।
चलो दुआ करते हैं।

उसके बाद सभी लोगो ने मिलकर दोनो की कामयाब और प्यार भरी ज़िन्दगी के लिए दुआए मांगी और तो मजबूरी में सबके साथ शहनाज़ को भी दुआ में हाथ उठाने पड़े। काजी जी अपने निकाह के इनाम में मिली रकम लेकर चले गए और उसके बाद शादाब के दोस्तो ने मिठाई का डब्बा निकाला और शादाब को मिठाई खिलाई। शादाब ने ना चाहते हुए भी थोड़ी सी मिठाई खाई और दोस्त शहनाज़ को मिठाई खिलाने के लिए जिद करने लगे तो शहनाज़ ने गर्दन हिला कर साफ कर मना कर दिया।

दोस्त:" भाभी जी आप बहुत खुश नसीब हैं जो शादाब जैसा हीरा आपको मिला। मेरे हाथ से ना सही लेकिन इस खुशी के मुबारक मौके पर आपको शादाब के हाथ से मिठाई जरूर खानी चाहिए।

अपने दोस्त के बहुत जिद करने पर शादाब ने मिठाई का एक छोटा सा टुकड़ा उठाया और बुर्के के नीचे से शहनाज़ के होंठो पर लगा दिया तो शहनाज़ को सबको दिखाने के लिए थोड़ी सी मिठाई खानी पड़ी।

दोस्त:" बस भाभी जी इतनी सी मिठाई खाई आपने ?

शादाब:" माफ करना दोस्त लेकिन इन्हें मिठाई ज्यादा पसंद नहीं है ।

शादाब के मुंह से अपने लिए इन्हे शब्द सुनकर शहनाज़ हैरान हो गई क्योंकि उसका बेटा उसे एक दुल्हन की तरह इज्जत दे रहा था। थोड़ी देर के बाद शादाब बोला :"

" अच्छा दोस्तो मै चलता हूं, आप सबका ये एहसान मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।

दोस्त एक साथ :" शादाब तू अपना राजा हैं यार, होस्टल में तुझ पर एक से एक खूबसूरत लड़की मरती थी लेकिन तूने किसी को घास नहीं डाली, हमे तो लगता था कि तुझे प्यार हो ही नहीं सकता। आज तेरा घर बसने से सबसे ज्यादा खुश तो हम सब हैं भाई।

शादाब अपने सब दोस्तो को बाय बोलकर वहां से चल पड़ा। दोनो मा बेटे गाड़ी में आगे वाली सीट पर बैठे हुए थे। शहनाज़ ने अब भी बुर्का औढ़ कर रखा था। धीरे धीरे गाड़ी शहर से बाहर निकल गई और हाईवे पर अा गई तो शादाब को शहनाज के सिसकने की आवाज सुनाई दी तो उसने गाड़ी को साइड लगा दिया।

गाड़ी रोककर वो शहनाज के थोड़ा करीब हो गया और शहनाज़ का हाथ अपने हाथ में पकड़ लिया तो शहनाज़ की रुलाई फूट पड़ी और उसने अपना सिर अपने बेटे शादाब के कंधे पर टिका दिया।

शादाब अपनी अम्मी की कमर को प्यार से सहलाकर उसे तसल्ली देने लगा। शहनाज सिसकते हुए बोली:"

" उम् अा उन्नन, ये ठीक नहीं हुआ शादाब, मैं किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही।

शादाब:" अम्मी आपको पहले सोचना चाहिए था, और मेरी गलती ये रही कि मैं आपका मजाक नहीं समझा पाया।

शहनाज़:" लेकिन बेटा ये सब बहुत गलत हो गया। मुझे खूब पर ही शर्म अा रही है बेटा।

शादाब: " अम्मी आपने आज मेरे दोस्तों के सामने मेरी इज्जत रख ली और आप आजाद हो, आप चाहो तो मैं आपको अब तलाक दे सकता हूं ताकि अगर आपको ये सब गुनाह लग रहा है तो आप उससे बच सके।

शहनाज़ के उपर तो जैसे आसमान सा टूट पड़ा अपने बेटे की ये तलाक वाली बात सुनकर। वो एक दम सकते में अा गई क्योंकि उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि निकाह के लिए इतनी कोशिश करने वाला शादाब उसे एक पल में ही तलाक देने के बारे में सोच सकता हैं। शहनाज़ को यकीन हो गया कि उसका बेटा उसके जिस्म से प्यार नहीं करता।

शहनाज़:" एक गुनाह के बाद अब दूसरा गुनाह मत कर शादाब, लेकिन मुझसे एक वादा कर कि तू मुझ पर कभी भी पति वाला हक नहीं जमाएगा।

शादाब शहनाज़ का हाथ चूमकर बोला:"

" अम्मी मुझे आपकी हर शर्त मंजूर हैं। बस मुझे आपकी खुशी चाहिए और इससे ज्यादा कुछ नहीं।

शहनाज़ ने शादाब को गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए कहा तो शादाब ने गाड़ी दौड़ा दी और थोड़ी देर बाद ही वो घर पहुंच चुके थे।
 
घर जाकर शहनाज़ गाड़ी से उतर गई और अंदर चली गई जबकि शादाब गाड़ी पार्क करने के लिए चला गया।

शहनाज़ ने अपने कमरे में जाकर अपना बुर्का उतार दिया तो अपने आपको फिर से सुबह पहनी हुई छोटी ड्रेस में पाया तो उसने अपने आपको दुल्हन के लाल जोड़े में पाया तो उसकी आंखो के आगे फिर से निकाह वाला सीन अा गया और उसका मुंह अपने आप शर्म से झुक गया। उसे खुद से बड़ी नफरत सी हो रही थी कि मैंने अपने बेटे के उकसावे में आकर ये क्या गुनाह कर दिया।

तभी उसके अंदर विचार आया कि मेरे बेटे ने को किया तो नादानी में किया लेकिन तू तो समझदार थी तुझे उसका विरोध करना चाहिए था लेकिन तूने तो उसे और बढ़ावा दिया और उसके साथ खुद ही बहक गई। जो आज हुआ उसकी जिम्मेदार तू खुद हैं और अपने इस गुनाह के लिए तू जिम्मेदार हैं।

तभी दिल में विचार आया कि मेरी क्या गलती हैं शादाब मेरा बेटा बिल्कुल मेरे सपनों के शहजादे जैसा हैं। उसके हाथ लगते ही मुझे पता नहीं क्या हो जाता था, अपना काबू खी देती थी मैं।

लेकिन तुझे खुद पर काबू रखना चाहिए था शहनाज़, वो तेरा सगा बेटा हैं, तुझे ये बात ध्यान रखनी चाहिए थी और तेरी सबसे बड़ी गलती ये हैं कि उसमे अपना शहजादा ढूंढने की कोशिश करी है और जैसे ही किसी भी लड़की या औरत ने उसकी तरफ हसरत भरी निगाहों से देखा तो तुझे एक मा नहीं बल्कि एक महबूबा की तरह जलन महसूस हुई तो अब तुझे परेशानी तो होगी ही। लेकिन अपने परिवार की मान मर्यादा और अपने चरित्र को तूने जिस तरह से आज तक बचा कर रखा है उम्मीद हैं तू अब आगे भी अपने आपको काबू में रखेगी बस एक महीने की ही तो बात है फिर शादाब वापिस चला जाएगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन ध्यान रखना तुझे अपने बेटे को एक मा का प्यार देना होगा ताकि वो तुझसे नफरत ना कर बैठे। आखिरकार शहनाज़ ने फाइनल निर्णय कर लिया कि अब वो अपने ऊपर कभी भी निकाह वाली बात हावी नहीं होने देगी और अपने बेटे को एक मा का प्यार देगी।

शहनाज़ सुबह से भूखी थी और वो जानती थी कि शादाब भी भूखा हैं इसलिए वो जल्दी से कुछ बनाना चाहती थी और किचेन में घुस गई और देशी घी का हलवा बनाने लगी।

शादाब भी उपर अा गया था और अंधेरा पूरी तरह से गहरा चुका था इसलिए शादाब ने अपने कपड़े बदल लिए और अपने कमरे में ही बैठ गया और सोच में डूब गया। शहनाज़ ने हलवा बनाने के बाद दूध गर्म किया और और खाने की टेबल पर सब सामान रख दिया और शादाब को बुलाने के लिए उसके कमरे में चली गई!

शहनाज़ ने देखा कि उसका बेटा किसी गहरी सोच में डूबा हुआ है तो उसने आवाज लगाई:"

" शादाब बेटा तुझे भूख लगी होगी
मैंने हलवा और दूध बना दिया है अा जा खा लेते हैं।

शादाब:" नहीं अम्मी मुझे भूख नहीं हैं, आप खा लो।

शहनाज़ ने शादाब का हाथ पकड़ लिया और खींचते हुए बोली:"

" चुप चाप खड़ा हो जा और चल मेरे साथ खा ले नहीं मैं भी नहीं खाऊंगी।

शादाब अब ज्यादा विरोध नहीं कर पाया और अपनी अम्मी के साथ खींचा चला आया। दोनो मा बेटे ने हलवा खाना शुरू किया और हलवे से आती देशी घी की खुशबू से शादाब को कुछ दिन पहले बने हलवे की याद आ गई और वो काफी भावुक हो गया। दोनो मा बेटे चुपचाप मुंह नीचे किए खाना खाते रहे। खाना खाकर शादाब अपने कमरे में चला गया और शहनाज़ किचेन में बर्तन साफ करने के लिए घुस गई। थोड़ी देर के बाद काम खत्म करके शहनाज़ अपने रूम में आ गई और उसने अपने आपको शीशे में देखा तो खुद को दुल्हन के लाल जोड़े में पाया तो इस बार उसकी नजरे खुद पर से हटाए नहीं हट रही थी। वो अपने रूप सौंदर्य पर खुद ही मोहित हो रही थी। इतनी सुन्दर तो जब भी नहीं लगी थी जब भरी जवानी में उसकी शादी हुई थी। सचमुच ब्यूटी पार्लर वाली लेडी ने आज उसका रूप निखारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। शहनाज़ ये सब सोचते हुए अपने बेटे के बारे में सोचने लगी कि उसका बेटा सच में उससे बहुत प्यार करता है और उसका बहुत ध्यान रखता हैं। वो बेड पर लेट गई और सोने की कोशिश करने लगी लेकिन नींद उसकी आंखो से पूरी तरह से गायब थी। एक तो अपने बेटे के साथ हुए निकाह की वजह से वो काफी दुखी थी क्योंकि वो जानती थी कि उससे बहुत बड़ी गलती हो चुकी है। दूसरी बात जिस दिन से शादाब आया था उस दिन से शहनाज़ को अपने बेटे की बांहों में सोने की आदत सी हो गई थी।
जब काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी नींद नहीं अाई तो वो समझ गई कि उसे उसके बेटे की बांहों के बिना नींद नहीं आएगी इसलिए वो उठी और शादाब को बुलाने के लिए चल दी।

शादाब अपने कमरे में बेड पर लेता हुआ था आज दिन में हुई घटनाओं के बारे में डूबा हुआ था। कमरे में बिल्कुल हल्की सी रोशनी अा रही थी जिसमे उसका चेहरा नजर आ रहा था। शहनाज़ ने गेट को धक्का दिया तो वो अपने आप खुल गया और शहनाज़ अंदर घुस गई। अपनी अम्मी को रात के 11 बजे अपने कमरे में घुसता देख कर शादाब हैरान हो गया। शहनाज़ उसके पास जाकर बेड पर बैठ गई और बोली:"

" बेटा नींद नहीं अा रही हैं क्या ?

शादाब:" नहीं अम्मी, अा जाएगी नींद तो, बस सोने ही वाला था।

शहनाज़:" अपनी मा के बिना तुझे कैसे नींद अा सकती है, मुझे देख तेरे बिना बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही है।

शादाब:" अम्मी अा जाएगी नींद आपको, आंखे बंद करके लेट जाओ आप अपने कमरे में।

शहनाज़:" बेटा सब कर चुकी हैं, लेकिन रोज तुझे गले लगा कर सोती रही हूं इसलिए आदत सी पड़ गई है। चल तू मेरे कमरे में चल, मुझे अकेले नींद नहीं आएगी।

शादाब ने अपना मुंह नीचे कर लिया और बोला:'

" माफ करे अम्मी, मैं आज आपके कमरे में नहीं जा पाऊंगा। कल से अा जाऊंगा।

शहनाज़:"क्यों आज ऐसा क्या हो गया कि तू अपनी मा के साथ नहीं सो सकता।

शादाब:" अम्मी आप प्लीज़ जाओ, समझने की कोशिश करो मैं आज नहीं सो सकता आपके साथ।

शहनाज़:" कोई बात नहीं, अगर तू मेरे रूम में नहीं अा सकता तो मैं ही तेरे रूम में सो जाती हूं तेरे साथ।

शहनाज़ ने अभी तक वहीं दुल्हन वाले कपडे पहने हुए थे और शादाब को शहनाज़ एक दुल्हन नजर आ रही थी अपनी दुल्हन, बस इसलिए ही वो उसके साथ नहीं सोना चाहता था कि कहीं उससे कोई ग़लत कदम ना उठ जाए और शहनाज़ को बुरा लगे।

शादाब:_ अम्मी प्लीज़, आप समझो मेरे उपर ज़ुल्म मत करो, बस आज रात की माफी दे दो।

शहनाज़:" बेटा तू तो बहुत बड़े बड़े दावे करता था कि मेरा हमेशा ख्याल रखेगा और कोई दिक्कत नही आने देगा मुझे।

शादाब:" अम्मी मैं अपनी बात पर कायम हूं, आप के लिए जान भी दे सकता हूं।

शहनाज़:" वो तो देख ही रही हूं कि किस तरह मुझसे जान बचाना चाहता हैं तू । बड़ा आया जान देने वाला।

शादाब को दुख हुआ और बोला:"

" अम्मी आप समझने की कोशिश करो, मेरी मजबूरी है।

शहनाज़:" यहीं मजबूरी कि आज तेरी सुहागरात हैं और तू मुझे अपनी बांहों में पाकर कहीं कोई गलती ना कर दे।

शादाब को जैसे अपने कानो पर यकीन ही नहीं हुआ। उसकी आमी ने कितनी बहादुरी से ये सब एक झटके में कह दिया, शादाब की तो जैसे बोलती ही बंद हो गई थी और सिर शर्म से झुक गया । शहनाज़ ने अपने हाथ से शहनाज़ का चेहरा उपर उठाया और बोली:"

" बेटा तुझे खुद पर यकीन नहीं हैं क्या कि तू अपने आपको काबू में नहीं रख पाएगा ।

शादाब ने पहली बार अपनी नजरे उपर उठाई और बोला:'

" अम्मी बात वो नहीं है, दर असल हर इंसान के अपने सुहागरात को लेकर कुछ सपने होते हैं। बस इसलिए ही सोच रहा था कि कहीं कमजोर ना पड़ जाउ मैं इसकी वजह से।

शहनाज़ को एक झटका सा लगा क्योंकि उसके भी अपनी सुहागरात को लेकर कुछ सपने और उम्मीद थी जो बुरी तरह से ध्वस्त हुई थी और उसका दिल बुरी तरह से टूट गया था। जैसे ही उसे अपनी पीड़ा का एहसास हुआ तो उसे अपने बेटे पर रहम अा गया और वो बोली:"

" शादाब मेरे लाल देखना तेरी शादी बहुत धूमधाम से करूंगी और तेरे सब सपने में खुद पूरे करूंगी ।

शादाब अपनी अम्मी की बात से बहुत ज्यादा आहट हुआ और रोनी सी सूरत बनाकर बोला:'

" अम्मी मेरी शादी हो चुकी हैं, अब मेरे लिए किसी और से शादी के बारे में सोचना भी पाप होगा। हान ये सच हैं कि मेरे सपने सिर्फ आप ही पूरे कर सकती है और वो भी तब जब मेरे सपने आपके सपने बन जाए।

शहनाज़ अपने बेटे की बाते सुनकर आवाज सी खड़ी रह गई क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। शादाब अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर बोला :"

" चलिए अम्मी अब आप ज्यादा मत सोचिए,। आपके रूम में चलते हैं।

शहनाज़ पूरी तरह से अपने विचारो में डूबी हुई थी और शादाब उसे लेकर उसके रूम में अा गया। शहनाज़ ने हो दुल्हन वाला सूट पहना हुआ था वो उसे निकालना ही भूल गई और दोनो मा बेटे पर शहनाज़ के बेड पर लेटे हुए थे। शादाब सीधा लेटा हुआ था जबकि शहनाज़ ने अपने बेटे की तरफ करवट लेकर अपना सिर उसके कंधे पर टिका रखा था। दोनो मा बेटे खामोश थे लेकिन मन में बहुत सारे विचार चल रहे थे बहुत सारी बाते थी जो वो एक दूसरे से करना चाहते थे लेकिन कभी कभी खामोशी बोलने से ज्यादा जरूरी हुआ करती हैं।

बाहर आसमान में काले काले बादल उमड़ने लगे और बाहर तेज तूफान चलना शुरू हो गया था लेकिन उससे भी तेज तूफान इन दोनो मा बेटे के अन्दर चल रहा था। एक झटके के साथ लाइट बंद हो गई और तभी आसमान में जोरदार बिजली कड़कने की आवाज आई तो शहनाज़ पूरी तरह से कांप उठी और डर के मारे शादाब से पूरी तरह से कस कर चिपक गई।शहनाज़ कांपते हुए बोली:"

" हाय अल्लाह रहम, बेटा मुझे बचपना से ही बहुत डर लगता है बिजली से !!

शहनाज़ ने कांपती हुई शहनाज के पूरे वजूद को अपने आगोश में समेट लिया और बोला:"

" क्यों अम्मी आपको क्यों डर लगता हैं बिजली से ?

शहनाज़:" बेटा जब मै छोटी थी तो मेरी एक सहेली के उपर बिजली गिर गई थी तब से लेकर आज तक मैं बहुत डरती हूं।

शादाब:" अम्मी आप फिक्र मत करो, आपका बेटा आपको कुछ नहीं होने देगा।

शहनाज़:" हान बेटा मुझे तुझ पर पूरा यकीन हैं मेरे लाल।

शादाब:" लेकिन अम्मी जब मैं हॉस्टल में था और बिजली कड़कती थी तब आप क्या करती थी ?

शहनाज शादाब की बात सुनकर शर्मा गई और बोली:"

" मैं बता नहीं पाऊंगी नहीं तो तू बाद में मेरी मजाक उड़ाएगा।

शादाब:" अम्मी आपको अपने बेटे पर यकीन नहीं हैं क्या ?

शहनाज़:" बेटा अब तो सिर्फ तुझ पर ही यकीन हैं, बेटा जब मैं अकेली होती थी और बिजली कड़कती थी तो मैं डर के मारे बेड के नीचे घुस जाती थी।

इतना कहकर शहनाज़ ने अपने बेटे के सीने में शर्म के मारे मुंह छिपा लिया। शहनाज़ की बात सुनकर शादाब की हंसी छूट गई और आज निकाह के बाद पहली बार हंसा था। शहनाज़ अपने बेटे को खुश देख कर सुकून महसूस करने लगी और मजाक में बोली:'.

" अम्मी मेरी बात पर हंस रहा है, तूने तो बोला था कि मेरा मजाक नहीं उड़ाएगा। झूठा कहीं का

शादाब अपनी हंसी रोक कर बोला:" सोरी अम्मी, लेकिन मैं आपका मजाक नहीं उड़ा रहा था, मुझे इसलिए हंसी अा गई कि आप इतनी बड़ी होकर भी बिजली से डरती हैं।

शाहनाज:" बेटा पूरी जवानी अकेले ही काट दी बस इसलिए डर लगता हैं।

शादाब:" हां अम्मी मैं आपका दर्द समझ सकता हूं लेकिन सही मैं अब आप पूरी तरह से जवान हुई हो अम्मी।

शहनाज़ उसकी कमर में मारते हुए:"

" चल कमीना, अच्छा अब मैं सो जाती हूं, गुड नाईट बेटा।

इतना बोलकर शहनाज़ ने अपने बेटे के माथे पर किस किया और पूरी तरह से उससे लिपट गई और सोने की कोशिश करने लगीं। शादाब के मजबूत कंधे शहनाज़ के लिए बहुत आरामदेह साबित हुए और उसे जल्दी ही नींद अा गई। बाहर तूफान और बारिश अभी भी जारी थी और रह रह कर बिजलियां कड़कने की आवाज अा रही थी जिससे शहनाज़ नींद में भी बुरी तरह से डर रही थी और अपने बेटे में पूरी तरह से सिमटी जा रही थी मानो उसके अंदर घुस जाना चाहती हो।

शादाब भी एक जवान लड़का था और शहनाज़ का पूरी तरह से दीवान बन चुका था। आज की रात उस पर जैसे ज़ुल्म पर ज़ुल्म कर रही थी क्योंकि आज उसकी शादी की पहली बार मतलब सुहागरात थी और शहनाज़ अभी तक दुल्हन के कपड़े पहने उसकी बांहों में सिमटी हुई पड़ी थी। बाहर कड़कती हुई बिजली से डरती हुई शहनाज़ पूरी तरह से खुद को बचाने के लिए उसके अंदर घुस जाना चाहती थी जिस कारण शादाब का लंड खड़ा हो गया। उसके सपनों की रानी दुल्हन बनी उससे लिपटी हुई थी और वो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था। धीरे धीरे नींद का असर शादाब पर भी होने लगा और कोई रात के चार बजे के आस पास उसकी आंख लग गई ।

दोनो मा बेटे एक दूसरे की बाहों में सोए हुए थे और शहनाज़ को नींद में सपना अा गया। शहनाज़ ने देखा कि शादाब उससे नाराज होकर दूर जा रहा है तो शहनाज़ ने भागकर उसे अपनी बांहों में भर लिया। शहनाज़ ने अपने बेटे को एक झटका देकर अपने उपर बेड पर गिरा लिया और अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर बांध दिए और उसके होंठ चूसने लगी। शादाब भी अपनी अम्मी के होठ चूस रहा था, दोनो पूरी तरह से मदहोश हो गए और एक लंबे किस के बाद जब दोनो के होंठ अलग हुए तो शहनाज़ बोली:"

" कहां जा रहे थे मुझे फिर से बेवा करके तुम ? अब तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी, एक मा से ज्यादा अब तुम्हे तुम्हारी बीवी का प्यार दूंगी मेरे राजा।

शादाब ने शहनाज़ के मुंह को पागल दीवाने की तरह चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ ने भी उसकी कमर सहलानी शुरू कर दी।शादाब ने दोनो हाथ जैसे ही शहनाज़ की गांड़ पर पहुंचे तो उसकी चूत पूरी तरह से गीली होकर रस बहाने लगी तो शहनाज़ ने पूरी तरह से बेकाबू होते हुए अपनी चूत को शादाब के खड़े हो चुके लंड पर जोर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। शहनाज़ के मुंह से अपने आप मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थी। वो पूरी ताकत से जोर जोर से अपनी चूत अपने बेटे के मोटे मूसल जैसे लंड पर मार रही थी। शादाब पूरी ताकत से उसकी मजबूत गांड़ को कस कस कर मसल रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश होती जा रही थी। वो पूरे जोश में अपने बेटे का मुंह चूम रही थी और उसकी चूत में उठता हुआ तूफान बढ़ता ही जा रहा था और उसने अपने आप अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे घुटनो तक सरका दी और पैंटी को अपनी एक अंगुली से साइड करके अपनी नंगी चूत शादाब के लंड पर उसके पायजमे के उपर से ही रगड़ने लगी। शादाब को जैसे ही अपने लंड पर चूत का एहसास हुआ तो उसकी आंखे एक झटके से खुल गई और वो समझ गया कि शहनाज़ नींद में शायद कोई सपना देख रही है और इसलिए ऐसा कर रही हैं इसलिए वो हालात को समझते थोड़ा सा पीछे हुआ तो शहनाज़ किसी चुम्बक की तरह उसकी तरफ खींची चली आई और फिर से उसे पकड़ लिया। शादाब जितना पीछे होता शहनाज़ उतना ही आगे सरक जाती। शहनाज़ को लग रहा था कि उसका बेटा उसे दूर भगाना चाहता है इसलिए नींद में ही बोली:"

" उफ्फ मेरे राजा, मुझे मत छोड़ कर जा, मर जाऊंगी तेरे बिना मेर जान, प्यार कर मुझे। बहुत प्यार कर अपनी शहनाज़ को ।

शादाब अब बेड के किनारे पर अा गया था और जरा सा सरकने से वो नीचे गिर सकता था इसलिए उसने पीछे हटना बंद किया तो शहनाज़ फिर से अपनी चूत उसके लंड पर रगड़ने लगीं। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी। तभी शहनाज़ को लगा कि उसकी चूत में तूफान सा आने वाला हैं इसलिए उसने पूरी ताकत से जोर से अपनी चूत को लंड में घुसेड़ सा दिया तो लंड का मोटा बारीक कपडे के उपर से चूत की दीवारों पर दबाव डालता महसूस हुआ और इसके साथ ही शहनाज़ की चूत ने एक झटके के साथ अपना सारा रस बाहर उगलना शुरू कर दिया और वो अपने बेटे के ऐसे लिपट गई मानो उसकी हड्डी तक तोड़ देना चाहती हो।

" आह मेरे राजा, उफ्फ मर गई रे तेरी शहनाज़। हाय मा उफ्फ

इसके साथ ही शहनाज़ की आंख खुल गई तो शादाब ने डर के मारे अपनी आंखो को बंद कर दिया मानो सो रहा हूं। शहनाज़ को जैसे ही खुद की हालत का अंदाजा हुआ तो उसके पैरो तले से जमीन खिसक गई। उफ्फ वो सपना देख रही थी लेकिन यहां तो हकीकत में उसने खुद ही अपनी सलवार खोल दी थी। हाय अल्लाह ये क्या गुनाह हो गया मुझसे, और शादाब का मुंह देखते ही वो कांप उठी, उसका पूरा मुंह शहनाज़ की लिपस्टिक से लाल हो चुका था। उफ्फ मेरा बेटा क्या सोचेगा मेरे बारे में, ये बेचारा तो खिसक खिसक कर बेड के किनारे पर अा गया और मैं खुद ही इसके उपर चढ़ रही थी।

शहनाज़ की सारी वासना हवा में उड़ में उड़ चुकी थी। उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार आया कि किस तरह शादाब ने अपनी सुहागरात होने के बाद भी खुद पर काबू रखा नहीं तो आज मेरा सपने के चक्कर में चुद जाना तय था। शहनाज़ नहीं चाहती थी कि शादाब को कुछ नहीं पता चले इसलिए उसने शादाब के चेहरे को अपने दुपट्टे को थूक से गीला करके साफ प्यार से साफ करना शुरु कर दिया। जल्दी ही शादाब के मुंह पर लगी लिपस्टिक साफ हो चुकी थी, हालाकि शादाब जाग रहा था लेकिन चुप चाप पड़ा रहा

शहनाज़ ने अपने आपको ठीक किया और शादाब का माथा चूम कर बाथरूम में घुस गई नहाने के लिए क्योंकि सुबह हो चुकी थी।

शहनाज़ को आज नहाते हुए बहुत शर्म अा रही थी क्योंकि आज उसकी चूत ने इतना रस छोड़ दिया जितना वो शादाब के बाप के साथ पूरी ज़िन्दगी नहीं छोड़ पाई थी। शहनाज़ अपने आपको बहुत अधिक शर्मिंदा महसूस कर रही थी क्योंकि उसने अपने बेटे के साथ बहुत गलत हरकत करी थी। शादाब की तो आज तो आज सुहागरात ही थी और मैंने उसके साथ ये सब ठीक नहीं लिया। लेकिन शादाब बेड के किनारे पर कैसे पहुंच गया ये ख्याल मन में आते ही शहनाज़ की बोलती बंद हो गई, नहीं ये नहीं हो सकता, वो तो सो रहा था। नहीं शहनाज़ वो जाग रहा था और उसे सब कुछ पता हैं तभी तो खिसक कर बेड के किनारे पर पहुंच गया था। तू ही थी पूरी तरह से उसके उपर चढी जा रही थी, वो चाहता तो आराम से तेरे बदन पर हाथ फेर सकता , तेरा सब दबा सकता है लेकिन उसके मन में पाप नहीं जन्मा क्योंकि वो तुझसे प्यार करता है। आज ये सब बाते सोचकर शहनाज़ के दिल में शादाब के लिए इज्जत और भी ज्यादा बढ़ गई। शहनाज़ जल्दी जल्दी नहाने लगीं ताकि अपने बेटे के लिए खाने के लिए कुछ बना सके।

दूसरी तरफ शहनाज़ के जाते ही शादाब ने अपनी आंखे खोल दी और जो कुछ हुआ था उसे याद करके वो मुस्करा उठा। हालाकि उसने ऐसी सुहागरात का सपना कभी नहीं देखा था लेकिन शहनाज़ पूरी रात उसकी बांहों में रही और उसका मुंह चूम चूम कर लाल कर दिया ये सब भी कुछ कम नहीं था शादाब के लिए। शादाब का पायजामा शहनाज़ की चूत से निकले हुए रस से आगे से काफी हद तक गीला हो गया था। शादाब ये देखकर मुस्कुरा दिया और अपने कमरे में चला गया और नहाने के लिए कपडे निकालने लगा। शहनाज़ नहाकर अपने रूम में अा गई थी इसलिए शादाब बाथरूम में घुस गया और नहाने लगा। शहनाज़ कपडे बदल कर किचेन में चली गई और शादाब को आलू के परांठे बहुत पसंद थे इसलिए वो परांठे बनाने की तैयारी करने लगी क्योंकि वो अपने बेटे को बहुत खुश देखन चाहती थी। शादाब भी नहा कर अा चुका था और कपडे बदल कर अपने आपको तैयार कर रहा था। शहनाज़ ने परांठे टेबल पर लगा दिए और बोली "

" शादाब आजा बेटा देख मैंने तेरे लिए आलू के परांठे बनाए हैं बेटा।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खाने के लिए अा गया और दोनो मा बेटे नाश्ता करने लगे। परांठे बहुत स्वादिष्ट बने थे इसलिए शादाब बोला:"

" अम्मी आप के हाथो में जादू हैं, बहुत टेस्टी परांठे बनाए हैं आपने।

शहनाज़ जवाब में बाद हल्का सा मुस्करा दी और नाश्ता करने लगी। जल्दी ही दोनो के नाश्ता कर लिया तो शहनाज़ बोली:"

" बेटा तो पीसा हुए मसाला खत्म हो गया हैं क्या तू मेरी मदद कर देगा बेटा ?

शादाब :" ठीक हैं अम्मी, आप ले जाओ सब मसाला।

शहनाज़ ने रोज की तरह औखली और मसाला सब कालीन पर रख दिया और शादाब को इशारा किया तो शादाब शहनाज़ के पीछे नहीं बल्कि सामने बैठ गया और बोला :"

" अम्मी आज ही आप काफी सारा मसाला दे दो, मैं कूट दूंगा रोज रोज का झंझट खत्म।

शहनाज़ को अपने बेटे की बात पर जैसे यकीन ही नही हुआ, उसे लग रहा था कि शादाब मसाला कूटने के बहाने उसकी कमर में अपना लंड मारेगा जबकि सब कुछ बदल गया। शहनाज़ ने काफी सारा मसाला शादाब को दिया तो शादाब बोला:"

" अम्मी आप दूसरे काम खत्म कर लो, मैं इसको कूट देता हूं।

शहनाज़ हैरानी के साथ वहां से चली गई जबकि शादाब ने मसाला कूटना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में सब मसाला कूट दिया और शहनाज़ को देते हुए बोला:"

" अम्मी कोई और काम हो तो बता दो नहीं तो आज मुझे वकील अंकल के साथ जमीन का हिसाब देखने खेत जाना हैं।

शहनाज़ को शादाब का पता नहीं क्यों अपने से दूर जाना अच्छा नहीं लगा। लेकिन उसके पास कोई बहाना भी नहीं था इसलिए वो चुप रही और शादाब घर से बाइक लेकर निकल गया। शादाब ने वकील को साथ में लिया और खेत जमीन का सब हिसाब देखने लगा। थोड़ी देर बाद जब सब हिसाब हो गया तो वकील घर चला आया और शादाब खेत में बने हुए मचान पर चढ़ गया लेकिन आज उसका मन उदास था। क्योंकि वो कुछ दिन पहले शहनाज़ के साथ मचान पर था और इसी वजह से उसका दिल दुख रहा था।

जब कुछ समझ में नहीं आया तो उसने मन बहलाने के लिए बी ग्रेड मूवी देखना शुरू कर दिया और यहीं से उसे पोर्न मूवी का लिंक मिल गया तो आज शादाब पहली बार पोर्न मूवी देख रहा था। जैसे जैसे मूवी आगे बढ़ती जा रही थी औरत के जिस्म और सेक्स क्रिया से शादाब का रहस्य उठता जा रहा था। आखिर कर मूवी खत्म होते होते शादाब का लंड पूरी तरह से अकड़ा चुका था और उसे सेक्स के बारे में काफी कुछ समझ अा गया था। उसने एक के बाद एक काफी मूवी देखी और नई नई चीज सीखता चला गया।

शहनाज का मन नहीं लग रहा था क्योंकि एक तो घर में कोई नहीं था उपर से जब से शादाब आया था आज पहली बार ऐसा हुआ था कि वो उसकी आंखो से दूर गया था। शहनाज़ को शादाब की बहुत याद आ रही थी इसलिए उसने शादाब का नंबर मिलाया तो शादाब बोला:"

" हान अम्मी, क्या हुआ ?

शहनाज़ बोली:" बेटा कहां है तू , जल्दी घर अा जा मेरा मन नहीं लग रहा है।

शादाब:" ठीक हैं अम्मी मैं अा जाता हूं।

शादाब घर पहुंच गया तो शहनाज गेट खोलते ही उससे लिपट गई और उसका मुंह चूम लिया।

शादाब:" क्या हुआ अम्मी, आज बड़ा लाड अा रहा हैं अपने बेटे पर ?

शहनाज़ ;" मेरा बेटा हैं ही इतना प्यारा, मैं प्यार नहीं करूंगी तो कौन करेगा। अब तू कभी मुझे छोड़ कर नहीं जाना,!!

शादाब:" अरे आप तो ऐसे हुक्म जमा रही है जैसे आप मेरी बीवी हो ?

शहनाज़:" बीवी तो तूने बना ही लिया था मुझे कल!! इसलिए मेरा जैसे मन करेगा हुक्म चलाऊंगी
समझा।

शादाब अपनी अम्मी की बाते सुनकर खुश हो गया और शहनाज़ शर्म से लाल हो गई कि जोश में उसके मुंह से क्या निकल गया।

शादाब:" अम्मी क्या आप सच मुच खुद को मेरी बीवी मानती हो ?

शहनाज़ की बोलती बंद हो गई और अपनी झेंप मिटाने के लिए बोली:"

" कितनी बात करता हूं तू, जा नहा ले फिर खाना खाते हैं।

ऐसे ही कुछ तीन बीतते चले गए और शादाब ने शहनाज़ का दिल पूरी तरह से जीत लिया। वो बिल्कुल एक पति की तरह से शहनाज़ का ध्यान रख रहा था। रोज उसे घुमाने ले जाता, उसकी पसंद का सब कुछ खिलाता, घर के काम में मदद करता जिसका नतीजा ये हुआ कि शहनाज़ भी शादाब की तरफ आकर्षित होती चली गई। शहनाज़ के मन में भी सवाल उठने लगा कि शादाब बिल्कुल एक पति की तरह उसका ध्यान रख रहा है। रात भर उसकी बांहों में सोता है लेकिन गलत नियत से हाथ तक नहीं लगाता। शहनाज़ को भी लगने लगा था कि उसे भी अपने पत्नी धर्म का पालन करना चाहिए।

लेकिन ये सब शहनाज़ के लिए इतना आसान नहीं था।

 
एक दिन दोपहर की बात है कि शादाब और शहनाज़ दोपहर का खाना खाकर आराम कर रहे थे। रोज की तरह दोनो मा बेटे एक ही साथ लेते हुए थे, थोड़ी देर बाद ही शहनाज़ की नींद लग गई। शहनाज़ गहरी नींद में जा चुकी थी तभी नीचे दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई तो शादाब उठ गया और दरवाजा खोलने चला गया तो उसने देखा कि दरवाजे पर रेहाना खड़ी हुई थी।

शादाब:" अरे रेहाना मैडम आप ? मुझे ही बुला लिया होता आपने अगर पढ़ाई के बारे में कोई बात करनी थी।

रेहाना:" इधर से निकल रही थी तो सोचा तुमसे मिलती चलू, इसलिए अा गई, अंदर आने के लिए नहीं कहोगे ?

शादाब झेंपते हुए गेट के सामने से हट गया और जल्दी से बोला:"

" ओह माफ कीजिए, मैं आपको अचानक उस तरह से देखकर हैरान हो गया, आइए अंदर आइए।

शादाब रेहाना को नीचे बने दादा दादी जी के कमरे के साथ बने हुए गेस्ट रूम में ले गया और बोला:"

" आप तशरीफ रखिए, मैं आपके लिए पानी लेकर आता हूं !!

रेहाना:" नहीं रहने दीजिए, मुझे प्यास नहीं हैं, आपकी अम्मी जान नहीं नजर आ रही है ? कहीं बाहर गई हैं क्या ?

इतना कहकर रेहाना ने शादाब को एक बहुत ही कामुक स्माइल दी तो शादाब सब समझ गया था लेकिन बोला :"

" अम्मी तो यहीं हैं, उपर सो रही है, मैं बुला लाता हूं उन्हें !!

रेहाना एक दम तेजी से बोली:"

" अरे नहीं शादाब बेटा सोने दे उन्हें, क्यों उनकी नींद खराब करनी और वैसे भी मैं उनसे नहीं तुमसे मिलने के लिए अाई हूं।

शादाब:" जी मैडम लेकिन जब तक आप कुछ हमारे घर का खाएगी नहीं मुझे अफसोस सा रहेगा !!

शादाब की बात सुनकर रेहाना ने एक सरसरी नजर शादाब के खूबसूरत होंठो पर टिका दी और बोली:"

" आप तकल्लुफ ना करे शादाब जी, आपके घर का मै सिर्फ खाना ही नहीं बल्कि पीना भी चाहती हूं।

शादाब रेहाना का इशारा समझ चुका था और वो एक भरपूर मर्द बन चुका था इसलिए उसके जिस्म में भी हलचल होने लगी और उसकी पैंट में उभार बनने लगा। रेहाना बहुत पुरानी खिलाड़ी थी और जानती थी कि लडको को कैसे फसाकर उनका शिकार किया जाता हैं। रेहाना ने अपने दुपट्टे का पल्लू नीचे गिरा दिया तो उसकी चूचियों के बीच की गहरी खाई साफ नजर आने लगीं तो शादाब की नजरे अपने आप उधर टिक गई।

रेहाना समझ गई कि चिड़िया ने दाना चुगना शुरू कर दिया और बहुत ही जल्दी जाल में फस जायेगी। रेहाना ने अपने हाथ का हल्का सा दबाव अपने सीने पर बढ़ाया तो सूट के गले से उसकी चूचियां बाहर निकलने को बेताब सी नजर आईं। शादाब तो मंत्र मुग्ध सा होकर ये सब देख रहा था। शादाब के अलावा कोई और भी था जो ये सब बहुत ही गुस्से और नफरत के साथ देख रहा था और वो थी शहनाज़।

दर असल जैसे ही शादाब शहनाज़ की बांहों से निकला था तो उसकी नींद खुल गई और जब शादाब नीचे की तरफ गया तो शहनाज़ भी उसके पीछे पीछे ही चल दी थी। जब शादाब गेट खोलकर रेहाना को अंदर गेस्ट रूम में के गया था तभी शहनाज़ चुपके से दादा दादी जी के कमरे में घुस गई थी और दोनो कमरे के बीच लगे हुए दरवाजे से उन पर नजर रख रही थी और पूरी तरह से समझ गई थी कि रेहाना शादाब पर डोरे डाल रही हैं। वो चाहती थी अब तक का उसका मुंह तोड़ चुकी होती लेकिन वो ये देखना चाह रही थी कि शादाब उससे जो प्यार करने का दावा करता हैं वो कितना सच्चा हैं बस इसलिए खामोशी से सब देख रही थीं।

रेहाना:" और बताओ शादाब तुम्हारा मन लग रहा हैं गांव में ?

शादाब:" जी बस ठीक है, घर में रहता हूं अपनी अम्मी के साथ और अब जमीन का हिसाब भी देखना शुरू कर दिया है।

रेहाना:" वो तो ठीक है बेटा, लेकिन कहां वो हॉस्टल की ज़िन्दगी, दोस्तो के साथ मस्तियां, घूमना और कहां गांव की ये नीरस ज़िन्दगी, जहां ना अपनी मर्जी से पहन सकते हैं और ना खा सकते हैं शादाब।

शादाब:" आपकी बात ठीक हैं, लेकिन गांव में एक सुकून हैं अपनी मिटी की खुशबू ही अलग होती हैं।

रेहाना को लगा कि या तो शादाब बिल्कुल मासूम हैं जो उसके बोलना का मतलब नहीं समझ पा रहा हैं या फिर जरूरत से ज्यादा तेज हैं को जान बूझकर उसकी बात को घुमा रहा है। इसलिए रेहाना बोली:"

' शादाब मैं तो शहर में पली बढ़ी हुई हू इसलिए मुझे तो गांव का माहौल पसंद नहीं आता, मुझे तो बस घूमना और मस्ती करना चाहिए ।

शादाब:" वो तो सबकी अपनी अपनी पसंद होती हैं मैडम।

रेहाना शादाब को देखते हुए अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए बोली:" तुम्हे क्या पसंद हैं शादाब ?

शादाब:" बस कुछ खास नहीं, पढ़ाई से अलग कुछ सोचा नहीं, किताबो से और ही नहीं उठाया अभी तक।

रेहाना समझ गई कि उसे एक दम फ्रेश माल मिला है इसलिए खुश होते हुए उसकी तरफ झुकते हुए टेबल पर अपनी दोनो कोहनियां टिका दी जिससे उसकी चूचियां बाहर निकलने को बेताब सी नजर आईं। रेहाना अपनी जीभ अपने होंठो पर घुमाते हुए बोली:'

" दुनिया बहुत खूबसूरत हैं शादाब, एक बार देखो किताबे भूल जाओगे।

शादाब बिना पलके झपकाए रेहाना की गोलाईयों को देखने लगा तो रेहाना समझ गई कि लड़का लाइन पर अा गया है तो उसने धीरे से टेबल के नीचे से अपना पैर शादाब के पैर पर रख दिया तो शादाब ने उसकी तरफ देखा तो रेहाना ने एक स्माइल दी और उसका पैर सहलाना शुरू कर दिया और बोली:"

:" शादाब तुझे रोज मेरे बेटे को पढ़ाने के लिए मेरे घर अा जाया करना, तुम्हे मैं पूरी दुनिया दिखा दूंगी।

इतना कहकर रेहाना ने अपने टेबल के नीचे से ही शादाब का पैर सहलाते हुए उसकी जांघ पर अपना एक हाथ रख दिया तो शादाब एक पल के लिए विचलित हो उठा और बोला:"

" माफ कीजिए मैडम, मै नहीं अा पाऊंगा, घर में मेरी अम्मी अकेली रहती हैं तो मैं उनके साथ रहता हूं।

रेहाना थोड़ा सा जोर से उसकी जांघ सहलाते हुए:" अच्छा अरे हान तुम्हारी अम्मी, वो तो पुराने जमाने की औरत हैं। माफ करना शादाब लेकिन उससे तुम पक जाते होंगे।

शादाब ने एक दम से गुस्से से रेहाना का हाथ हटा दिया और थोड़ा जोर से बोला:"

" थोड़ा तमीज से बात कीजिए, मेरी अम्मी बहुत अच्छी है, आप मुझे मत सिखाए, आप जा सकती हैं।

रेहाना को लगा कि उसने जल्दबाजी कर दी हैं और उसे शहनाज़ के बारे में ऐसे नहीं बोलना चाहिए था। रेहाना थोड़ा नरम पड़ते हुए बोली:"

" बेटा शादाब तुम तो बुरा मान गए, मेरा वो मतलब नहीं था जो तुम सोच रहे हो। मैं तो बस ये कहना चाह रही थी कि तुम्हारी अम्मी को दुनिया के साथ चलना चाहिए, अब कहां ऐसी सोच हैं कि घर के अंदर भी बुर्का नहीं उतर सकते।

शादाब का चेहरा गुस्से से लाल हो गया और बोला:' रेहाना मैडम आप जा सकती हैं। बहुत हो गया, मुझे अपनी अम्मी के बारे में कुछ भी गलत बात बर्दाश्त नहीं।

रेहाना ने भी अपने शाही तेवर दिखाने शुरू कर दिए और बोली:" जुबान संभाल कर बात करो शादाब, मैं तो तुम्हारे घर के नौकर नहीं तो तुम्हारी मर्जी से आऊ या जाऊ ?

शादाब ने गुस्से से एक जोरदार मुक्का टेबल पर दे मारा तो रेहाना के टेबल पर टिके हाथ एक झटके से हट गए और उसका मुंह टेबल पर लगा जिससे उसके मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी।

शादाब:" बस बहुत हो गया जाइए आप, कहीं ऐसा ना हो तुम्हे धक्के देकर बाहर निकालना पड़े।

रेहाना को ज्यादा चोट तो नहीं लगी थी लेकिन बस मुंह लाल सुर्ख हो गया था, थोड़ा सा चोट की वजह से तो बाकी अपमान की वजह से। वो गुस्से से खड़ी हुई और बोली:"

:' शादाब तुम मुझे ठीक से नहीं जानते हो अभी, तुमने अपनी मा जैसी जाहिल औरत के लिए मेरी बेइज्जती की हैं देखना मैं क्या हाल कर दूंगी तुम दोनो मा बेटे का ?

शादाब ने एक झटके के साथ आगे बढकर रेहाना का हाथ पकड़ लिया और उसकी आंखो में गुस्से से देखते हुए बोला:"

" रेहाना अगर मेरी मा का बाल भी बांका हुआ ना तो तेरे पूरे खानदान को तबाह कर दूंगा, वो हाल करूंगा कि मेरी नाम से ही तेरी रूह कांप उठेगी।

रेहाना गुस्से से अपने कदम पटकती हुई बाहर की तरफ चल पड़ी और गाड़ी में बैठ गई और बोली :" शादाब आज से हमारी दुश्मनी शुरू।

शहनाज़ पीछे से चिल्लाती हुई अाई और बोली:'

" रुक कमीनी, अभी तुझे सबक सिखाती हूं ।

लेकिन तब तक वो तेज हवा के जैसे अपनी गाड़ी लहराती हुई निकल गई। शादाब अपनी अम्मी को देखकर हैरान हो गया और बोला :'
" अम्मी आपको क्या हुआ अब, आप इतना गुस्सा मत करो,

शहनाज़:" बेटा तुझे नहीं पता इसकी ताकत का, बेटा इसका पति एक बहुत बड़ा गुंडा आदमी हैं जो सिर्फ शराफत का ढोंग करता हैं। तुझे उससे नहीं उलझना चाहिए था।

शादाब:' अम्मी गुंडा होगा अपने घर का, वो आपके बारे में भला बुरा बोल रही थी...

शहनाज़ बीच में ही उसकी बात काटते हुए बोली:"

" और तू सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन मेरी बुराई नहीं, ये ही बोलना हैं ना तुझे।

शादाब:" हान अम्मी मुझे कोई कुछ कहे तो बर्दाश्त कर लूंगा, आपको कोई कुछ कहे तो हाथ तोड़ दूंगा उसका, अच्छा हुआ ये लड़की थी अगर लड़का होता तो अब मार डाला होता मैंने इससे ।

शहनाज़ को अपने बेटे की बातो में मजबूती और आंखो में विश्वास दिखाई दिया।

शहनाज:" इतना प्यार करता हैं तू मुझसे शादाब ?

शादाब:" अम्मी इससे भी कहीं ज्यादा, कैसे यकीन दिलाऊ आपको मैं ?

शहनाज़;' उसकी जरूरत नहीं, मुझे अपने बेटे पर खुद से ज्यादा यकीन हैं। अच्छा चल उपर चलते हैं खाना बनाना है मुझे।

दोनो मा बेटे उपर की तरफ चल पड़े और शहनाज़ सब्जी काटने लगीं तो शादाब बोला:"

" अम्मी आप तो सो रही थी ना आप कैसे उठ गई थी ?

शहनाज़ ने क्या बताती कि वो अपने बेटे की जासूसी कर रही थी इसलिए बोली:"

' बेटा जब मैंने जोर जोर से झगड़े की आवाज सुनी तो आंख खुल गई और मैं दौड़कर नीचे अाई। लेकिन ये कमीनी अचानक से कहां से आ गई और झडगा कैसे हुआ ?

शादाब बोला:" ये गंदी औरत मेरे पीछे पड़ी हुई हैं अम्मी, मुझ पर डोरे डालने अाई थी कि मेरे बेटे को पढ़ाने के लिए मेरे घर अा जाना तुझे पूरी दुनिया दिखा दूंगी।अम्मी दुनिया तो मैंने देखी है अब ये कौन सी दुनिया दिखाने की बात कर रही थी ?

शादाब ने इतने भोलेपन से कहा कि शहनाज़ की हंसी छूट गई तो शादाब उदास हो गया और बोला:"

," अम्मी मेरा मजाक मत उड़ाओ, प्लीज़ बताओ ना ?

शहनाज़ इतनी भी बेवकूफ नहीं थी इसलिए वो रेहाना का मतलब समझ गई थी लेकिन शादाब को कैसे बताए इसलिए बोली:"

" मुझे नहीं पता शादाब, उसी रेहाना से पूछ लेना बता देगी।

शादाब गुस्से से:" मुझे नहीं पूछना उससे, उसका तो मैं मुंह तोड़ दूंगा।

सब्जी कट चुकी थी इसलिए शहनाज़ खाना बनाने लगी और शादाब छत पर घूमने चला गया। थोड़ी देर खाना बन गया था और दोनो मा बेटे के खाना खाना शुरू किया तो आज शहनाज़ ने अपने हाथ से खाने का निवाला बनाकर अपने बेटे को खिलाया तो शादाब खुशी से झूम उठा और उसने भी शहनाज़ को अपने हाथ से खाना खिलाया। दोनो मा बेटे जल्दी ही खाना खाकर सोने के लिए बेड पर चले गए। शहनाज़ ने एक ढीली सी नाइटी जबकि शादाब ने भी बहुत बारीक कपडे पहन लिया था। बेड पर जाते ही शहनाज़ ने शादाब को अपनी बांहों में भर लिया और अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया तो सादाब ने भी अपनी अम्मी को खुद में समेट लिया और दोनो मा बेटे एक दूसरे से पूरी तरह से चिपक गए।

शहनाज़ आज दिन में हुए हादसे के बारे में सोच रही थी कि किस तरह से शादाब ने उसकी जरा सी भी बुराई बर्दास्त नहीं करी और बिना सोचे समझे रेहाना से लड़ पड़ा। शहनाज़ अपने बेटे की इस बात पर बहुत खुश हुई और उसने शादाब का गाल चूम लिया तो शादाब ने हैरानी से उसकी तरफ देखा तो शहनाज़ बोली:"

" शादाब बेटा जितना प्यार तू मुझसे करता हैं, उससे कहीं ज्यादा मै तुझसे करती हूं मेरे लाल।

शादाब ने बस शहनाज़ को स्माइल किया और चुप हो गया

शहनाज:" बेटा वो मुझे जाहिल और पुराने जमाने की बोल रही थी, मेरे बेटे को मेरी वजह से सुनना पड़ा मुझे इसका दुख हैं शादाब।

शादाब:" अम्मी जाहिल औरत वो खुद हैं जो अपने पति के जिंदा होते हुए भी अपनी बेटे और मुझे भी फसा रही थी।

शहनाज़:" बेटा अब तेरी मा तेरे हिसाब से चलेगी, बदल दे मुझे नए जमाने के हिसाब से शादाब, मैं एक दिन उसकी आंखो में आंखे डाल कर उसे जवाब दूंगी

शादाब को जैसे उसकी बात पर यकीन ही नहीं हुआ इसलिए वो खुशी छिपाते हुए बोला:"

" क्या अम्मी ? क्या कहा आपने प्लीज़ एक बार और बताओ मैंने ठीक से सुना नहीं ?

शहनाज़ जानती थी कि उसका बेटा जान बूझकर दोबारा पूछ रहा हैं इसलिए वो पूरे आत्म विश्वास के साथ बोली:

" बेटा बदल दे मुझे अपने हिसाब से जैसे तू चाहे, मैं उस कमीनी को दिखा दूंगी कि मैं भी जमाने के साथ चल सकती हूं।

शादाब:" ठीक हैं अम्मी, कल से आपकी ट्रेनिंग शुरु, मैं आपको पूरी तरह से बदल दूंगा।

शहनाज़ ने खुश होकर शादाब का गाल चूम लिया और उससे लिपट गई। दोनो मा बेटे एक दूसरे से लिपट कर सो गए। अलग दिन सुबह 5 बजे शादाब और शहनाज़ दोनो उठ गए और शादाब ने अपनी अम्मी को अपने हाथ बहुत हल्की कसरत कराई तो शहनाज़ आज एक अलग ही खुशी महसूस कर रही थी। उसके बाद नाश्ता करने के बाद शादाब शहनाज़ को लेकर शहर की तरफ निकल गया।

शहनाज ने रोड पर चढ़ते ही खुद ही अपना बुर्का उतार दिया और शादाब को एक स्माइल दी तो शादाब समझ गया कि शहनाज़ सचमुच बदल रही हैं। उसके बाद दोनो मॉल में गए और शादाब ने अपनी अम्मी के लिए एक से बढकर ट्रैक सुइट और जिम में कसरत करने के लिए ड्रेस ली, शहनाज़ के लिए उसने उसने कुछ जीन्स और टी शर्ट भी खरीद ली, शहनाज़ आज कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि खुश होकर अपनी पसंद के अनुसार ड्रेस खरीद रही थी। जब शॉपिंग का सब काम खत्म हो गया तो शादाब अपनी अम्मी को एक लेडीज सैलून में के गया और उसके बालो को स्टेट किया और एक नए डिजाइन का कट करवा दिया। शहनाज़ अपने आपको शीशे में देखना चाहती थी लेकिन शादाब ने मना कर दिया और बोला:"

" अम्मी जब तक मैं नहीं कहूंगा आप खुद को शीशे में नहीं देखेंगे।

शहनाज़ अपने बेटे की जिद के चलते मजबुर हो गई और उसके बाद शादाब ने अपनी अम्मी को खाना खिलाया और फिर आते हुए एक जिम में अपना और शहनाज़ का रजिस्ट्रेशन करा दिया और उसके बाद दोनो घर की तरफ चल पड़े। आज शहनाज़ बहुत खुश थी इसलिए घर आते ही शादाब से कस कर चिपक गई। दोनो मा बेटे एक दूसरे के दिल की धड़कन सब रहे थे और किसी दूसरी दुनिया में ही पहुंच गए थे। शहनाज़ बोली:"

" शादाब तू मेरा इतना ख्याल रख रहा है बेटा, तुझे कभी कभी मुझ पर बहुत गुस्सा आता होगा कि मैंने तुझे तेरा प्यार नहीं दिया।

शादाब:" अम्मी मैं उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहता, आप खुश हो मेरे लिए बहुत हैं।

शहनाज़:" लेकिन मेरा बेटा खुश नहीं हैं, मैं ये जानती हूं शादाब, मैं बहुत बुरी मा हूं ना।

शादाब उसका गाल चूम कर:" अम्मी आप तो दुनिया की सबसे अच्छी अम्मी हो जो अपने बेटे को इतना प्यार करती है।

शहनाज़;" बेटा मुझे थोड़ा टाइम दे, ऐसा नहीं है कि मैं तुझे प्यार नही करती, मैं दुनिया की सबसे अच्छी मा के साथ साथ कुछ और भी बनना चाहती हूं।

शादाब:" कुछ और क्या बनना चाहती हो आप ?

शहनाज़:" बेटा मैं नहीं बोल पाऊंगी, वक़्त आने पर तुझे अपने आप पता चल जाएगा।

शादाब ने मुस्करा कर शहनाज़ को देखा और दोनो मा बेटे घर के काम में लग गए। शहनाज़ खाने की तैयारी करने लगी और शादाब अपने मोबाइल में फिर से मूवी देखने लगा। शादाब की औरत के जिस्म के बारे में जिज्ञासा बढ़ती ही जा रही थी और वो मौका मिलते ही मूवी देखने लगता था।

खाना बन चुका था इसलिए दोनो ने खाना खा लिया और उसके बाद शादाब बोला:"

" अम्मी आज जल्दी सो जाना,कल से आपको जिम करने के लिए जाना हैं।

शहनाज़:" ठीक हैं बेटा, आओ चलते हैं सोने के लिए।

उसके बाद दोनो मा बेटे अपने कपडे बदल कर सोने के लिए चले गए। दोनो रोज की तरह एक दूसरे की बांहों में सो गए। अगले दिन सुबह दोनो जिम के लिए निकल पड़े, शहनाज़ ट्रैक सुट में बहुत खूबसूरत लग रही थीं। दोनो मा बेटे ने एक ही रंग के कपड़े पहने हुए थे तो शादाब बोला:"

" अम्मी एक बात कहूं अगर आपको बुरा ना लगे तो ?

शहनाज़:" हान बोल बेटा मुझे अब तेरी कोई बात बुरी नहीं लगती मेरे बेटा ?

शादाब:" देखो अम्मी, आपको देखने से बिल्कुल भी नहीं लगता कि आप एक जवान बेटे की मा हो, इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं आपको जिम में अम्मी ना बुलाऊ?

शहनाज़:" ठीक हैं बेटा, लेकिन फिर क्या कहकर बोलेगा ?

शादाब:" अम्मी मुझे लगता हैं कि मुझे आपको नाज़ कहकर पुकारना चाहिए।

शहनाज़:" ठीक हैं बेटा, मुझे बहुत पसंद आया ये नाम, शहनाज़ का आधा नाम नाज ही होता है।

शादाब:" लेकिन आप मुझे बेटा कहकर बुलाएगी तो मुझे आपकी नाज़ कहने का कोई फायदा नहीं होगा नाज !!

शहनाज अपनें बेटे के मुंह से नाज सुनकर खुश हो गई और बोली:"

" ठीक हैं मैं तुझे बेटा नहीं बल्कि राजा कहकर बुलाऊंगी। अब खुश हो राजा ?

शादाब मुस्कुरा दिया और दोनो मा बेटे जिम एक अंदर घुस गए। अंदर जाते ही शहनाज़ को देखते ही वहां जिम कर रहे लड़को की आंखो में चमक उभर आई। शादाब और शहनाज दोनो से ये सब छुपा ना रह सका और दोनो के दूसरे को देख कर मुस्करा दिए। उसके बाद दोनो ट्रेनर के हिसाब से जिम करने लगे, शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से भरा हुआ था और घर के काम की वजह से बहुत हद तक फिट भी था लेकिन जिम करने की वजह से अब सही जगह पर कट पड़ जाने तय थे।

शादाब बाथरूम करने के लिए गया तो एक लड़का शहनाज को इंप्रेस करने के लिए अा गया और बोला :" मैडम आपका जिस्म तो पहले से ही फिट हैं बस थोड़ी सी मेहनत कीजिए बिल्कुल फिट ही जाएगी आप।

शहनाज़ ने एक तिरछी नजर उसे देखा और फिर से जिम करने लगी तो लड़का बोला:".

" मैडम क्या आप मुझसे दोस्ती कर सकती है?

शहनाज़ को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ, कमीना अपनी मा की उमर की औरत पर लाइन मार रहा हैं इसलिए शहनाज़ बोली :"

" जाइए आप अपना काम कीजिए, अगर राजा अा गया तो आपको दिक्कत ही जाएगी।

लड़का:" अच्छा जो आपके साथ आया है वो राजा हैं, बहुत खूबसूरत है आपका बॉय फ्रेंड मैडम। आपकी जोड़ी एक दम मस्त हैं।

इतना कहकर वो लड़का वहां से चला गया और थोड़ी देर के बाद शादाब भी अा गया तो दोनो मा बेटे घर की तरफ चल पड़े। ऐसे ही मात्र 10 दिन के अंदर ही शहनाज़ के जिस्म पूरी तरह से बदल गया और सीना और चूतड़ पहले से ज्यादा भारी होते चले गए जबकि कमर एक दम पतली सी हो गईं। शहनाज अपने जिस्म में बदलाव तो साफ महसूस कर रही थी लेकिन शीशा नहीं देख रही थी। एक औरत के लिए शीशा ना देख पाना किसी सजा से कम नहीं होता और शहनाज़ हंस कर इस सजा को कुबूल कर रही थी।
अब तो शहनाज़ ने घर में भी शादाब को बेटा बोलना बंद का दिया था और राजा ही बोलती थी वहीं शादाब को शहनाज़ को मा कहकर पुकारें हुए एक लंबा टाइम बीत गया और बस नाज़ ही बुला रहा था।

एक दिन जिम करते हुए एक लड़की ने शहनाज़ को बोला दिया :"

" नाज़ तुम बहुत किस्मत वाली हो तुम्हारा बॉय फ्रेंड एक दम हीरो के जैसा हैं, इतना खूबसूरत लड़का मैंने आज तक नहीं देखा।

शहनाज़ अंदर ही अंदर मुस्करा उठी और लड़की को स्माइल दी, फिर धीरे धीरे बात यहां तक अा गई कि जिम में ही कुछ लडको ने तो शहनाज़ को नाज़ भाभी कहना शुरू कर दिया जिसका उसने बिल्कुल भी विरोध नहीं किया। शादाब अपनी अम्मी में आए इन बदलाव को देख रहा था और खुश था, अब लोगो की नजर में दोनो कपल बन चुके थे। शहनाज़ को विश्वास हो गया था कि सच में उसका जिस्म एकदम जवान हैं और पूरी तरह से कस गया हैं जिम करने की वजह से।

फिर एक दिन वहीं हुआ जिसका शहनाज़ को डर था, जब वो रास्ते से लौट रहे थे तो रेहाना के भेजे हुए गुंडों ने उन पर हमला कर दिया। शादाब ने उनका डटकर सामना किया लेकिन कुछ गुंडे शहनाज़ को खेत में उठा ले गए और शादाब बाकी गुंडों से लड़ता रहा। शादाब शहनाज़ को ले जाते देखकर गुस्से से बाहर उठा और उसके हाथ में एक मोटा लकड़ी का डंडा अा गया तो उसने एक के बाद भी करके गुंडों को पीटना शुरू कर दिया। जल्दी ही सब गुंडे जमीन पर पड़े हुए थे, शादाब शहनाज़ को ढूंढ रहा था लेकिन वो नहीं मिल रही थी।

गुंडे शहनाज़ को एक गन्ने के खेत में उठा ले गए जिस कारण शादाब को शहनाज़ नहीं मिल पा रही थी। दो गुंडों ने शाहनाज के हाथ पैर पकड़ लिए और उसे बांध दिया और एक काले जानवर से दिखने वाले गुंडे ने उसकी सलवार फाड़ दी। शहनाज़ बुरी तरह से रो रही थी और गुंडों के आगे हाथ जोड़ रही थी लेकिन एक गुंडे ने अपना काला गंदा सा लंड लेकर उसकी जांघो के बीच अा गया और एक गुंडे से बोला:"

" जैसे ही मैं इसकी चूत में लंड घुसा दू तो इस साली के मुंह पर तेजाब फेंक देना।

शहनाज़ ने डर के मारे अपनी जांघों को पूरी तरह से भींच लिया और जोर जोर से शादाब को आवाज देने लगी। शादाब को जैसे ही शहनाज की आवाज सुनाई दी तो वो तेजी से खेत में घुस गया और अपने मा को इस हालत में देखते ही उसकी आंखो में खून सवार हो गया और उसने शहनाज़ की टांगो के बीच में घुसे हुए गुंडे के सिर में जोर से वार किया और वो गिर पड़ा। शहनाज़ तेजी के साथ खड़ी हो गई और अपने कपड़े ठीक करने लगीं उसके बाद शादाब ने एक के बाद एक सभी गुंडों की लाशे बिछा दी और शहनाज़ डर के मारे कांपती हुई शादाब से लिपट गई।

शहनाज:_ बेटा अच्छा हुआ तू अा गया,। नहीं तो मैं तो आज किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहती।

शादाब:" अम्मी जब तक मै जिंदा हू कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

शहनाज़ और शादाब ने मिलकर गुंडों की लाश को गाड़ी में डाल दिया और घर की तरफ चल पड़े। शहनाज़ अभी तक बुरी तरह से डरी हुई थी। बाहर रात गहरा चुकी थी तो शादाब ने सभी गुंडों कि लाशे रेहाना के घर के अंदर फेंक दी और शादाब ने जान बूझकर खून के निशान उसके घर के दरवाजे पर भी बना दिए और दोनो मा बेटे अपने घर की तरफ चल पड़े।

शादाब को भी चोट लगी थी लेकिन बहुत ज्यादा चोट नहीं थी। घर जाकर शादाब ने सबसे पहले अपने खून से रंगे हुए कपडे निकाले और नहाने के लिए घुस गया। शहनाज़ नीचे बने हुए बाथरूम में घुस गई। जल्दी ही दोनो मा बेटे नहाकर कपड़े बदल चुके थे।

दोनो में से किसी को भी भूख नहीं थी इसलिए दोनो शहनाज़ के बेड पर लेट गए। शहनाज़ आज अपने बेटे के बारे में सोच रही थी कि किस तरह से शादाब ने चोट लगने के बाद भी उसे बचाया, नहीं तो आज वो किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहती। शादाब ने सिर्फ उसकी जान ही नहीं बल्कि इज्जत भी बचाई और जब उसकी सलवार फट गई थी तो शादाब ने एक बार भी नजरे उठाकर शहनाज़ की तरफ नहीं देखा था जब तक कि उसने अपने कपड़े ठीक नहीं कर दिए। शहनाज़ ये सब सोचते सोचते आज शहनाज पूरी तरह से अपने बेटे के सामने हार गई। उसने आखिर आज वो फैसला ले ही लिया जो दुनिया और समाज के नियमो के खिलाफ था।

शहनाज ने अपने बेटे के चेहरे को अपने हाथो में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:"

" शादाब तूने तो मुझे एक बेटे की तरह प्यार दिया और शौहर की तरह मेरा ध्यान रखा और जान पर खेलकर बचाया, आज मैं तेरे आगे हार गई शादाब।

शादाब ने अपनी अम्मी की आंखो में देखा तो उसे सच्चाई नजर अाई और वो खुश होते हुए बोला : क्या अम्मी सच में ?

शहनाज़ उसके होंठ चूमकर बोली:" शादाब निकाह तो तुमने पहले ही कर लिया था आज मेरा सब कुछ जीत लिया, ये शहनाज़ आज तुम्हे तन मन धन से अपना शौहर मानती हैं।

इतना कहकर शहनाज़ ने शादाब का गाल चन लिया तो शादाब ने शहनाज को अपनी बांहों में भर लिया और बोला :"

" शहनाज़ मैं कहीं सपना तो नहीं देख रहा हूं ?

शहनाज़:" तुम्हारे हर सपने को अब मैं हक़ीक़त में बदल दूंगी। इतना कहकर शहनाज़ बेड पर सीधी लेट गई और शादाब की तरफ देखते हुए बोली:"

" अा जाओ मेरे राजा, आज अपने सुहागरात मनाए।

शादाब को तो जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये सब उसकी अम्मी बोल रही हैं। शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ कर उसे बैठा दिया और बोला:"

" शहनाज़ मैं तुम्हारे जिस्म का नहीं बल्कि तुम्हारे प्यार का भूखा हू, अा जाओ मेरी बांहों में।

शहनाज और शादाब दोनो एक दूसरे की बाहों में खो गए और दिन भर के थके होने के कारण उन्हें नींद अा गई।

अगले दिन सुबह जब रेहाना और उसके पति ने अपने पालतू कुत्तों की लाशे अपने घर के अंदर देखी तो दोनो की गांड़ फट गई। घर के बाहर फैला हुआ खून देखकर एक पड़ोसी ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस अा गई और रेहाना के घर के अंदर घुस गई तो लाशे देखकर दोनो को पकड़ लिया और थाने के गई। पूरा मोहल्ला रेहाना के खिलाफ था, ना कोई गांव और ना ही किसी रिश्तेदार ने उनका पक्ष लिया। चूंकि उनका पहले से ही अपराधिक रिकॉर्ड था इसलिए अदालत ने मर्डर का जिम्मेदार मानते हुए उन्हें जेल भेज दिया। रेहाना सब सच्चाई जानती थी लेकिन बोल नहीं पाई क्योंकि बोलकर भी उसने और ज्यादा फस जाना था।

जब शहनाज़ को ये खबर पता चली तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, उसे अपने बेटे/ पति के दिमाग पर गर्व महसूस हुआ।
 
जैसे ही शहनाज़ को रेहाना के जेल जाने की खबर मिली तो वो खुशी से झूम उठी और शादाब को अपनी बांहों में भर लिया और बोली:"

" तुमने तो कमाल ही कर दिया राजा, ऐसा बदला लोगे मुझे सपने में भी उम्मीद नहीं थी।

शादाब अपने अम्मी के गाल सहला कर बोला:" आपकी तरफ नजर उठाने वाला का यहीं हाल कर दूंगा मैं नाज।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर उसके गाल को चूमते हुए बोली:" शादाब मैं ऐसे ही पति के सपने देखती थी जो ना सिर्फ मुझे प्यार करे बल्कि मेरी रक्षा भी करे और ये सब खूबी तुम्हारे अंदर हैं मेरे राजा।

शादाब:" अम्मी एक बार आप फिर से सोच लो, कहीं बाद मैं आपको पछतावा ना हो ?

शहनाज़ समझ गई कि शादाब के दिल में अभी उससे पहले हुई गलती की कसक हैं इसलिए शहनाज़ बोली:"

" जान तेरे नाम"

शादाब अपनी अम्मी के इस अंदाज़ पर फिदा हो गया और बोला :" बस शहनाज, अब मैं तुम्हे इतना प्यार दूंगा जिसकी तुमने कल्पना भी नहीं करी होगी।

शहनाज़ उसकी आंख में देखते हुए :" तो करो ना मेरे राजा, मैं तो कब से तड़प रही हूं।

शादाब:" अम्मी मैं आपको पूरी तरह से शारीरिक और मानसिक तौर भी तैयार करना चाहता हूं ताकि आप हमारे इस मधुर मिलन को हमेशा याद रखे।

शहनाज़:" मैं तो सब तरह से तैयार हूं राजा, जब तेरा मन करे मेरे शरीर के ज़र्रे ज़र्रे पर तेरा हक हैं मेरी जान।

इतना कहकर शहनाज़ ने अपने बदन को शादाब की बांहों में ढीला छोड़ दिया तो शादाब ने उसे खुद से चिपका लिया और बोला:"

"ठीक है अम्मी, आप हल्का पानी गर्म करो, मैं बाज़ार जाकर आता हूं, कुछ जरूरी सामान लाना हैं

शहनाज़ ने उसे स्माइल दी और शादाब ने जैसे ही अपने होंठ शहनाज़ की तरफ बढ़ाए तो शहनाज़ के होंठ कांपने लगे क्योंकि ये इज़हार के बाद पहली किस होने जा रही थी। शहनाज़ ने अपनी आंखे बंद कर ली और शादाब ने जान बूझकर शहनाज़ के माथे को चूम लिया तो एक झटके के साथ शहनाज़ की आंखे खुल गई। उसने अपने बेटे को देखा और स्माइल कर दी तो शादाब उसका हाथ थोड़ा जोर से दबा कर बाहर चला गया।

शादाब ने बाजार से मिठाई, कुछ सूती चादर, नए टॉवेल के साथ साथ हल्दी, बेसन, बादाम पाउडर, सब कुछ खरीद लिया और फिर घर की तरफ लौट पड़ा जहां शहनाज़ बेताबी से अपने बेटे का इंतजार कर रही थी।

शाहनाज ने पानी गर्म कर दिया था और शादाब का इंतजार कर रही थी। उसे समझ नहीं अा रहा था कि गर्म पानी का क्या काम होगा लेकिन अपने बेटे की हर इच्छा पूरी करना उसका फ़र्ज़ था क्योंकी वो जानती थी कि शादाब की हर बात के पीछे कोई ना कोई लॉजिक जरूर होता हैं। वो अपने बेटे को खुशी से अपना जिस्म सौंपने के लिए तैयार तो हो हुई थी लेकिन उसके अंदर डर अभी भी पनप रहा था क्योंकि वो जानती थी कि शादाब का लंड झेलना उसके लिए कितना मुश्किल होने जा रहा हैं।

शादाब अंदर अा गया तो शहनाज़ उसे देखते ही खुशी से खिल उठी और बोली:"

" अा गए मेरे राजा, क्या लेकर आए हो बाजार से ?

शादाब ने सब कुछ शहनाज़ को दिखा तो शहनाज़ मन ही मन मुस्कुरा उठी और बोली:"

" शादाब तू नहीं जानता कि जब मेरी शादी हुई थी तब भी मुझे हल्दी नहीं लगी थी क्योंकि एक ही दिन में सब कुछ हो गया था।आज पहली बार मेरे शरीर पर हल्दी लगेगी मेरे राजा।

शादाब:" आपक बेटा खुद अपने हाथो से आपको हल्दी लगाएगा मेरी जान, अपनी दुल्हन में खुद तैयार करूंगा।

शहनाज:" हान राजा, मैं भी तुझे खुद हल्दी लगाऊंगी, अपने दूल्हे को मैं भी खुद ही तैयार करूंगी।

शादाब:" वैसे अम्मी ऐसा दुनिया में पहली बार होगा कि कोई अपनी दुल्हन और दूल्हे को खुद तैयार करेगा।

शहनाज:" कमीने अगर मा से। कोई बेटा सुहागरात भी तो पहली ही बार मनाएगा।

इतना कहकर शादाब आज बहुत दिनों के बाद पहले की तरह शर्मा गई और शादाब के गले लग गई तो शादाब बोला:"

"अम्मी जितना शर्माना हैं पहले ही शर्मा लेना, कहीं सुहागरात को शरमाने में ही दिन ना निकल जाए।

शहनाज़ शादाब का हाथ पकड़ कर दबाते हुए बोली:"

"कोई बात नहीं राजा, तू फिर सुहागदिन मना लेना अपनी शहनाज़ के साथ।

शहनाज़ के मुंह से अपनी शहनाज़ सुनकर शादाब मस्ती से भर उठा और बोला:"

" अम्मी प्लीज़ एक बार और बोलो ना अपनी शहनाज़, बहुत अच्छा लगा आपके मुंह से मेरी जान।

शहनाज़ शर्म से लाल हो गई लेकिन बोली:"

" आह मेरे लाल, मेरे राजा, मैं सिर्फ अपने शादाब की शहनाज़ हूं, शादाब की शहनाज़।

शादाब की खुशी देखने लायक थी, उसने शहनाज़ को अपनी बांहों में उठा लिया और झूमने लगा तो शहनाज़ ने अपनी दोनो बांहे उसके गले में लपेट दी।

शहनाज़:" कितना तगड़ा हैं तू राजा, मुझे किसी फूल की तरह से उठा लेता हैं, सचमुच बहुत ताकत हैं तेरे अंदर।

शादाब अपनी तारीफ सुनकर खुशी से झूम उठा और लंड ने भी अपना सिर उठा दिया और शहनाज़ की कमर पर लग गया तो शहनाज़ को उसकी सांसे रुकती हुई सी महसूस हुई। शादाब शहनाज़ की हालत समझ गया और बोला:"

" अम्मी इसके अंदर भी बता दो कितनी ताकत हैं !

इतना कहते हुए शादाब ने अपने लंड को शहनाज़ की कमर में थोड़ा जोर से गड़ा दिया तो शहनाज का जिस्म मस्ती से भर उठा और बोली:"

" इसमें तो तेरे से भी ज्यादा ताकत हैं राजा, मूसल से भी ज्यादा अच्छा कूटता हैं ये, बस गलत चीज कूट देता है मेरे राजा। इसे फर्क नहीं पड़ता चाहे कितनी ही टाइट क्यों ना हो।

शादाब शहनाज़ की आंखो में देखते हुए बोला:"

" उफ्फ अम्मी जान टाइट जब ये टाइट चीज की धज्जियां बना देता हैं तो सोचो जो पहले से ही इतनी मुलायम हैं उसका क्या हाल कर देगा मेरी शहनाज़ !!

शहनाज़:" हाय अल्लाह, मुलायम चीज तो गई काम से, उफ्फ कहां वो मासूम बच्ची और कहां ये खूंखार जानवर!!

शादाब अपने लंड की तारीफ सुनकर खुश हुआ और फिर शहनाज़ को गोद से उतार दिया और बोला:"

" अम्मी आप उबटन तैयार करो, तब तक मैं ये सूती कपड़े पहन कर आता हूं।

इतना कहकर शादाब अंदर चला गया और अपने कपड़े उतार कर सिर्फ एक सूती चादर को अपनी जांघो पर बांध दिया और चल पड़ा। शहनाज़ ने उबटन तैयार कर लिया था और जैसे ही उसने शादाब को सिर्फ लुंगी में देखा तो उसकी आंखे वासना से लाल हो गई, शहनाज़ भी शादाब के आने से पहले ही अपने कपड़े उतार चुकी थी और सिर्फ के नया लाल रंग का टॉवेल उसने अपने सीने पर बांध रखा था जिसमें से उसकी चूचियों की गोलाई नजर आ रही थी। शादाब बोला:"

" तो अम्मी बताए कि पहले आप अपने दूल्हे हो हल्दी लगाएगी या मैं अपने दुल्हन को लगा दू ?

शहनाज़ शादाब की बात सुनकर अंदर ही अंदर कांप उठी क्योंकि वो जानती थी कि उसका बेटा उसके पूरे जिस्म पर हल्दी लगाएगा तो उसकी हालत क्या हो जाएगी, इसलिए शहनाज़ बोली:"

" बेटा एक काम कर पहले तू ही लगा दे अपनी दुल्हन को हल्दी, ताकि फिर में आराम से तुझे हल्दी लगा दू।

शादाब अपनी अम्मी को बांहों में भर लिया और जैसे ही जोर से पकड़ा तो हाथो के दबाव के कारण शहनाज़ की चूचियां बाहर को छलक सी पड़ी। बस निप्पल को छोड़ कर लगभग पूरी चूची बाहर थी। शहनाज़ अपने बेटे की मजबूत पकड़ से कसमसा उठी और बोली:"

" आह ज़ालिम इतनी जोर से क्यों कसता है मुझे अपनी बांहों में!! लगता हैं जैसे हड्डी तोड़ देगा!

शादाब शहनाज़ की गर्दन चाटते हुए बोला: आह अम्मी , हड्डी नहीं पर और बहुत कुछ तोड़ना हैं मुझे आपका,


इतना कहकर शादाब ने एक हाथ शहनाज़ की गांड़ पर रख दिया तो शहनाज़ तड़प सी उठी और जोर लगाकर उसकी पकड़ से आजाद हो गई और बोली:"

" आह मेरी जान, जो तेरा मन करे तोड़ लेना मेरे राजा, सब कुछ तेरा ही तो हैं, चल अब जल्दी से मुझे हल्दी लगा दे।

शहनाज़ वहीं पड़े हुए एक गद्दे पर लेट गई जो कि शादाब ने अंदर से लाकर बिछा दिया था। शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से कांप रहा था और सांसे तेज होने से चूचियां उछल कूद कर रही थी जिससे शहनाज़ का मुंह शर्म से लाल हो गया और उसने शर्म के मारे हाथो से अपना मुंह छुपा लिया तो शादाब के होंठो पर मुस्कान अा गई और बोला:"

" हाय मेरी शर्मीली अम्मी, तुम्हारी इसी अदा ने तो मुझे तुम्हारा दीवाना बना दिया है।

इतना कहकर उसने शहनाज़ के हाथो पर हल्दी लगानी शुरू कर दी तो अपने बेटे के स्पर्श से शहनाज़ मचल उठी और शादाब ने उसके दोनो हाथो को उसके चेहरे से हटाकर पकड़ लिया तो शहनाज़ की आंखे हया से बंद हो गई और वो मुस्कुरा उठी। शादाब ने शाहनाज के दोनो हाथो पर बहुत अच्छे से हल्दी लगाई और फिर शहनाज़ की गर्दन पर मुंह पर हल्दी लगाने लगा तो शहनाज़ ने अपनी आंखे खोल दी और शादाब की तरफ प्यार भरी नजरो से देखने लगी।

शादाब:" ऐसा क्या देख रही हो शहनाज़ मुझे ?

शहनाज़ को अपने बेटे के मुंह से अपना नाम सुनना बहुत अच्छा लगा और वो बोली:"

" देख रही हूं कि कितने अच्छे से अपनी दुल्हन को हल्दी लगा रहे हो मेरे राजा

शादाब ने हाथ में थोड़ी हल्दी ली और उसके पैरो पर लगाते हुए बोला:"

" अम्मी मैं चाहता हूं कि मेरी दुल्हन दुनिया की सबसे खूबसूरत दुल्हन लगे सुहागरात को, बस इसलिए कर रहा हूं।

शादाब ने शहनाज़ के दोनो पैरो पर अच्छे से हल्दी लगाने के बाद उसकी जांघो में अपना हाथ घुसा दिया तो शहनाज़ का रोम रोम कांप उठा और उसने शर्म के मारे अपने जांघें बंद कर ली तो शादाब उसकी टांगो को खोलने लगा तो शहनाज ने इशारे से मना कर दिया तो शादाब बोला:"

" आह अम्मी, लगाने दो ना प्लीज़ हल्दी मुझे

शहनाज़ अपनी आंखे बंद करते हुए बोली:"

" आह मेरे राजा, ऐसे लगाएगा तो टॉवेल खराब हो जाएगा

शादाब;" हाय अम्मी, उफ्फ रुको में टॉवेल उतार देता हूं, फिर आराम से करता हूं,

शहनाज़ को अपनी गलती का एहसास हुआ कि टॉवेल उतारने से तो पूरी नंगी हो जाएगी, मगर तब तक शादाब टॉवेल की गांठ खोल चुका था। शादाब ने जैसे ही टॉवेल को हटाना चाहा तो शहनाज़ ने उसके हाथ पकड़ लिए और बोली:"

" आह राजा मत कर मेरे लाल, टॉवेल हटाते ही मैं पूरी नंगी....

शहनाज़ ने बीच में ही अपना शर्म के मारे अपनी बात अधूरी छोड़ दी तो शादाब समझ गया कि उसकी मा नंगी हो जाएगी इसलिए वो उसके कान में बोला:"

" हाय अम्मी नंगा तो आपको होना ही हैं, निकाह किया हैं जब मर्जी कर सकता हूं,!!

इतना कहकर शादाब ने टॉवेल जोर से खींचा तो शहनाज़ ने कसकर पकड़ लिया और बोली:"

" आह राजा आज नहीं, सुहागरात को, उफ्फ समझ मेरी जान।

शादाब:" अम्मी लेकिन फिर मैं हल्दी कैसे लगाऊंगा पूरे शरीर पर ?

शहनाज़ कुछ सोचती हैं और फिर बोली :" तू इधर मेरे पास अा जा, मैं बताती हू।

शादाब शहनाज़ के पास बैठ गया तो शहनाज़ ने उसे कहा:"

" अपनी आंखे बंद कर ले मेरे राजा, और जब तक मैं ना कहूं मत खोलना।

शादाब अपनी आंखे बंद करके बैठ गया और शहनाज़ ने अपने दुपट्टे को तीन बार फोल्ड किया और शादाब की आंखो पर बांधने लगी तो शादाब को सब समझ अा गया। जल्दी ही शहनाज ने शादाब की आंखों पर पट्टी बांध दी और बोली:"

" अब कर ले जो तेरा मन करे, लेकिन ध्यान रखना सिर्फ हल्दी लगानी हैं, कहीं से भी मसलना या दबाना नहीं है मेरे राजा।

शादाब:" उफ्फ, अम्मी ये क्या ज़ुल्म हैं मुझ पर, खाना सामने हैं भूख लगी हैं मगर खा नहीं सकता।

शहनाज:" बेटा बस 7 दिन और सब्र कर ले, फिर को तेरा मन करे करना मेरे राजा!!

शादाब ने अब शहनाज़ के जिस्म पर पड़ा टॉवेल हटा दिया तो शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से नंगा होकर खिल उठा। शहनाज़ की 36 के आकार की गोल गोल मोटी मोटी ठोस चूचियां पूरी तरह से छलक उठी। शहनाज़ की चूत का लगभग पूरी तरह से बंद हो चुका छेद अपने गुलाबी रंगत लिए हुए था।

शादाब ने हाथ में हल्दी ली और हाथ शहनाज़ की तरफ बढ़ा दिया तो ये देखकर शहनाज़ की सांसे उखड़ गई और चूचियां उछल कूद करने लगी मानो शादाब को बुलावा दे रही हो। शादाब ने अपना हाथ शहनाज़ के पतले से मुलायम त्वचा वाले पेट पर रख दिया तो शहनाज़ के जिस्म में हलचल मच गई और वो अपनी जांघो को आपस में रगड़ने लगीं। शादाब ने बहुत धीरे धीरे हल्के हाथो से शाहनाज के पेट को अच्छे से हल्दी लगाई और शादाब ने जैसे ही अगली बार हाथ में हल्दी लेकर शहनाज़ की तरफ बढ़ाया तो शहनाज़ जान बूझकर कर पलट गई जिससे शादाब का हाथ उसकी कमर पर जा लगा, शादाब को उम्मीद थी कि इस बार वो अपनी अम्मी की चूचियों को पकड़ कर अच्छे से हल्दी लगाएगा लेकिन जैसे ही कमर पर हाथ लगा तो निराशा के साथ साथ हैरानी शादाब के चेहरे पर साफ नजर अाई जो अपने ही पल मुस्कान में बदल गई और शादाब बोला :"

" उफ्फ अम्मी, मेरी आंखे बंधे होने का फायदा उठा रही हो!

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ की कमर को थोड़ा जोर से दबा दिया तो शहनाज़ के मुंह से आह निकल गई और सिसकते हुए बोली:" " आह मेरे राजा, कोई फायदा नहीं उठा रही, सब कुछ तेरा ही तो हैं शादाब।

शादाब ने जैसे ही शहनाज़ की सिसकी सुनी तो वो जोश में अा गया और शहनाज़ की कमर को थोड़ा ज्यादा ही जोर से रगड़ दिया तो शहनाज़ के होंठो से एक मादक आह निकल पड़ी और वो बोली :" हाय मेरे राजा, हट जा मैं खुद लगा लूंगी, दबाने को मना किया था अभी तुझे ??

शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपने कान पकड़ लिए और बोला:"

" उफ्फ आपकी कमर इतनी चिकनी और नाजुक हैं कि मैं खुद को रोक नहीं पाया शहनाज़ !!

शहनाज़ अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और बोली:"

" माफ किया राजा, बस थोड़ा प्यार से लगा ना, मसल मत अभी मुझे शादाब।

शादाब ने शहनाज़ की कमर पर बहुत प्यार से हल्दी लगाई और फिर हाथ में हल्दी ली और कमर से नीचे की तरफ आने लगा। जैसे जैसे शादाब के हाथ शहनाज़ की गांड़ की तरफ बढ़ रहे थे शहनाज़ की चूत में गीलापन बढ़ता जा रहा था। शादाब ने अपने दोनो हाथ पहली बार शहनाज़ की पूरी नंगी गांड़ पर रख दिए तो शहनाज़ के होंठो से अपने आप एक मस्ती भरी सिसकारियां निकल पड़ी। शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को खूब अच्छे से हाथ में भर लिया और हल्का हल्का हाथ फिराने लगा, उफ्फ क्या मस्त मस्त मोटी गांड़ थी शहनाज़ की, एक दम कोरी, बाहर की तरफ निकली हुई , शादाब का मन तो कर रहा था कि उसकी गांड़ को दबा दबा कर लाल कर दे, एक फूल की तरह मसल कर रख दे लेकिन वो मजबूर था। शहनाज़ को अपनी गांड़ पर पड़ते शादाब के हाथ एक अलग ही मजा दे रहे थे क्योंकि उसकी गांड़ पूरी तरह से उसके बेटे के हाथो में समाई हुई थी। उस मनचले ने बिल्कुल ठीक कहा था ये लड़का ही इसकी गांड़ को अच्छे से मसल सकता हैं, शहनाज़ का भी मन तो कर रहा था कि शादाब कम से कम एक बार ही सही अच्छे से उसकी गांड़ मसल दे लेकिन मजबुर थी इसलिए बोल नहीं सकती थी। शादाब ने हाथ में हल्दी ली और शहनाज़ की गांड़ के दोनो पटो पर रगड़ना शुरू कर दिया, शादाब गांड़ को दबा नहीं रहा था बस थोड़ा टाइट हाथो से हल्दी लगा रहा था जिससे शहनाज़ की गांड़ मचल उठी और अपने आप थोड़ा सा ऊपर की तरफ उभर गई तो शादाब शहनाज़ का इशारा समझ गया और उसने हल्दी लेकर थोड़ा सा तगड़ा हाथ गांड़ पर रगड़ा तो शहनाज़ के होंठो से आह निकल पड़ी और जिस्म अपने आप उपर नीचे होने लगा। शादाब ने जोश में आकर शहनाज़ की गांड़ को थोड़ा जोर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया तो शहनाज़ के मुंह से निकलती हुई हल्की हल्की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगी।

" आह शादाब, उफ्फ क्या मस्त लड़का हैं तू राजा, बाद मसलना या दबाना मत, ऐसे ही रगड़ उफ्फ बेटा बहुत अच्छा लग रहा हैं मुझे ।

शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को दाए बाए फैला दिया और थोड़ा सा अन्दर की तरफ हल्दी लगाने लगा तो शहनाज़ की चूत से रस टपकना शुरू हो गया और शहनाज़ अपनी जांघो को जोर जोर से आपस में रगड़ रही थी।

शादाब ने जैसे ही शहनाज़ के गांड़ के छेद के आस पास हल्दी लगाई तो शहनाज़ ने शर्म से घबराकर अपनी टांगे बंद कर ली और बोली:"

," आह मेरे राजा वहां नहीं, उफ्फ गंदी जगह हैं वो शादाब!!

शादाब:" हाय अम्मी, आपका जिस्म का हर हिस्सा एक दम साफ़ हैं कुछ भी गंदा नहीं है मेरी शहनाज,

शहनाज़:" मत कर बेटा,

शादाब:" करने दो मेरी शहनाज़ अपनी जान को, बस थोड़ी सी लगाऊंगा।

शहनाज़:" अच्छा बाद में लगा देना वहां, बस अब खुश

शादाब शहनाज़ की बात सुनकर मुस्कुरा दिया और हाथो में हल्दी लेकर उसकी कमर से उसकी पैर की उंगलियों तक लगाने लगा। कमर से उंगलियों की तरफ आते शादाब के हाथ जैसे ही गांड़ पर आते तो शहनाज़ की गांड़ खुशी में अपने आप थोड़ा सा उभर जाती और शादाब अच्छे से रगड़ देता। आखिर कार जल्दी ही शहनाज़ के पिछले हिस्से पर जब पूरी तरह से हल्दी लग गई तो शहनाज़ अपने आप पलट गई।
शादाब ने हल्दी ली और जैसे ही अपने हाथ टिकाए तो हाथ में शहनाज़ की चूचियां अा गई, शहनाज़ अपनी नंगी चूचियों पर शादाब का पहला स्पर्श महसूस करते हुए सिसक उठी!!

" आह राजा, उफ्फ बस दबाना मत, प्यार से लगा दे हल्दी मुझे सारे जिस्म पर मेरे राजा बेटा।

शादाब ने शहनाज की चूचियों को हाथो में भर लिया तो शहनाज़ का चेहरा लाल सुर्ख होकर दहकने लगा और आंखे मस्ती से खुलने बंद होने लगी। शादाब ने पहली बार अपनी मा की चूचियों को छू रहा था और उसे महसूस हुआ कि सच में शहनाज़ की चूंचियां कुदरत का नायाब नमूना हैं। बिल्कुल कश्मीरी सेब के आकार की, शादाब ने हल्दी लगाने के बहाने हल्का सा दबाव दिया तो चूचियां अकड़ गई और झुकने से मना कर दिया मानो शहनाज़ को चुनौती दे रही हो। शादाब से बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसका बहुत मन था कि बस एक बार दबा कर देखे इसलिए वो थोड़ा सा आगे को झुका और शहनाज़ के कान में बोला:"

" आह मेरी मा शहनाज़, उफ्फ क्या मस्त चूचियां हैं, एक दम ठोस, प्लीज़ अम्मी एक बार दबा दू क्या ?

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ का निप्पल हल्दी लगाने के बहाने हल्का सा सहला दिया तो शहनाज़ के होंठो से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी!!

" आह मेरे राजा, पहली बार किसी ने मेरी जवानी की कदर करी हैं, दबा ले शादाब बस एक ही बार दबाना, कहीं ऐसा ना हो कि जोश में आज ही सुहागरात हो जाए।

शादाब ये सुनते ही जोश में अा गया और उसने जोर से शहनाज़ की चूचियों को भींच दिया तो शहनाज़ मस्ती और दर्द से कराह उठी क्योंकि उसके सीने में बहुत मीठा मीठा दर्द हुआ ।

" उफ्फ हाय मेरे बच्चे, थोड़ा प्यार से दबाते हैं राजा, बस अब जल्दी से हल्दी लगा दें

शादाब ने शहनाज़ की दोनो चूचियों को हल्दी से तर कर दिया और उसके हाथ ना चाहते हुए एक बार फिर से मचल उठे और उसने जोर से शहनाज़ की चूचियों को दबा दिया तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी

" आह कमीना कहीं का, उफ्फ मार ही देगा क्या मुझे, मत दबा सुहागरात में सब तेरा ही तो हैं।

शादाब जनता था कि शहनाज़ कैसे मनाना है इसलिए उसने दोनो कान पकड़ लिए तो शहनाज़ मुस्करा उठी। शादाब ने फिर से हल्दी ली और शहनाज़ की चूचियों से पेट और कंधे तक लगाने लगा।

शादाब का भी लंड पूरी तरह से अकड़ चुका था और शहनाज़ की चूत को जैसे पानी पानी हो रही थी। शादाब ने अगली बार हल्दी लेकर शहनाज़ की जांघो पर लगाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की चूत के होंठ अपने आप मस्ती से खुलने बंद होने लगे। शादाब का हाथ जैसे ही जांघ के अंदर की तरफ जाता तो चूत कांप सी जाती। शादाब ने हल्दी ली और दोनो जांघो के जोड़ पर लगाने लगा, शहनाज़ पूरी तरह से तड़प रही थी , उसकी जीभ अपने आप उसके होठों पर घूम रही थी। शादाब का हाथ जैसे ही एक चूत के उपर से गुज़रा तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी।शादाब ने जोश में आकर शहनाज की चूत को मुट्ठी में भर लिया तो शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी गांड़ अपने आप उपर नीचे होने लगी और सिसक उठी।

" आह मेरे राजा, मेरे शादाब, इसे मत दबा देना मेरे लाल, बस जल्दी से हल्दी लगा दे।

शादाब ने एक बार चूत पर अच्छे से अपनी उंगली फिराई तो शहनाज़ अपनी कमर को उठा उठा कर पटकने लगी। चूत के आकार को महसूस करते ही शादाब को बेरी की याद आ गई और बोला:"

" हाय अम्मी, ये तो बिल्कुल बेरी है, उफ्फ कितना रस निकल रहा है इसमें से मेरी शहनाज़।

शहनाज़ सिसकते हुए:_

" आहओह नहीं, उस दिन तूने इसमें ही तो उंगली घुसा दी थी मेरे राजा बेरी समझकर। उफ्फ हाय मा जल्दी लगा से मुझे कुछ हो रहा है शादाब।

शादाब चूत के दाने को सहलाते हुए:"

" आह अम्मी, एक बार घुसाने दो ना उंगली फिर से मुझे, उफ्फ कितनी गर्म हैं ये एकदम तपी हुई है शहनाज़।

शहनाज़ तड़पते हुए:" बस कर कमीने, अब भी उंगली ही घुसाएगा क्या, मूसल डालकर कूट देना अच्छे से सुहागरात को,

शादाब चूत पर उपर से नीचे उंगली फेरते हुए:"

" आह अम्मी, इसको मैं ऐसी कूट दूंगा कि आप ज़िन्दगी भर याद रखोगी, मूसल से सारा रस निकाल दूंगा मार मार कर।

शहनाज़ की चूत में तूफान सा उठ रही थी और वो खुद ही अपनी चूत अपने बेटे के हाथ पर रगड़ रही थी और जोर जोर से सिसक रही थी। बस शहनाज़ ने एक झटके के साथ अपनी जांघो को जोर से भींच दिया तो शादाब ने अपना हाथ बाहर निकाल लिया।
शहनाज़ तड़प उठी क्योंकि उसका रस निकलते निकलते रह गया और बोली:"

" आह शादाब मेरी जान, बस रगड़ दे इसको एक बार, चाहे तो दबा से जोर से मेरे राजा, आह निकाल दे मेरा रस !!

शादाब ने शहनाज़ के जिस्म पर चादर डाल दी और अपनी आंखे खोल दी तो देखा कि शहनाज़ का पूरा जिस्म कांप रहा था, चूचियों पर से चादर उछल रही थी।

शादाब:" शहनाज़ अब तो तुम्हारा ये रस सुहागरात को ही निकलेगा मेरी जान।

शहनाज़:' आह बेटा, उफ्फ तब तक तो मैं इस आग से मर ही जाऊंगी, हाय कुछ कर ना तू

शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ के उसे गद्दे पाए से उठा दिया और खुद लेट गया तो शहनाज़ समझ गई और उसने अपने हाथ में हल्दी ली और शादाब के बदन पर लगाने लगी। शहनाज़ पूरी तरह से गरम हो रही थी और कुछ भी करके झड़ जाना चाहती थी इसलिए एक हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी तो शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ लिया और बोला:"

" बस करो अम्मी, थोड़ा सा सब्र रखो, फिर आपका बेटा आपकी सब प्यास बुझा देगा।

शादाब ने शहनाज़ का हाथ अपने बदन पर रख दिया तो शहनाज़ उसे हल्दी लगाने लगी, हालाकि उसकी चूत मर रह रह कर चिंगारी सी उठ रही थी लेकिन फिर भी वो मजबुर थी।

शादाब ने शहनाज़ की छाती को जैसे ही छुआ तो दोनो मा बेटे के साथ सिसक उठे, शहनाज़ ने शादाब निप्पल पर अच्छे से हल्दी लगाई और फिर नीचे की तरफ आने लगी तो उसकी चादर में लंड का उभार देखकर उसकी आंखे डर के मारे एक बार तो बंद ही हो गई। शादाब के होंठो से हंसी छूट गई तो शहनाज़ उसे हल्का सा मारते हुए बोली:"

" उफ्फ कमीने मेरा मजाक उड़ाता है, शर्म नहीं आती तुझे

शादाब अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए:

:" अम्मी इसे देखते ही डर क्यों जाती हैं,

शाहनाज का मुंह शर्म से झुक गया और बोली:'

" साइज देखा हैं तूने इसका, लगता हैं जैसे इंसान का ना होकर किसी राक्षस का हो

शादाब:" उफ्फ अम्मी सबके ऐसे ही होते है, इसमें अलग क्या हैं?

शहनाज़:" ऐसा ही तो नहीं होता राजा, तेरे पापा का मैंने देखा तो नहीं लेकीन इसका आधा भी नहीं था, और रेहाना के लड़के का तो मरियल सा था, ठीक से खड़ा भी नहीं हो रहा था

शादाब का लंड अपने तारीफ सुनकर खुश हो गया और तेज झटका खाया तो शहनाज कांप सी उठी। शहनाज़ ने शादाब की जांघो पर हल्दी लगानी शुरु कर दी तो शादाब की आंखे मस्ती से बंद हो गई जिससे शहनाज़ की शर्म कुछ दूर हुई और वो खूब अच्छे से हल्दी लगाने लगी।
शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया और बोला:"

" आह शहनाज़ इस पर हल्दी लगा दे अम्मी !!

शहनाज़ का बदन कांप उठा और हाथ में हल्दी लेकर बोली:"

" शादाब अपनी आंखे मत खोलना बेटा नहीं तो मुझे शर्म आएगी।

शादाब ने अपनी गर्दन हा में हिला दी तो शहनाज़ ने शादाब की चादर के अन्दर हाथ घुसा दिया और जांघों की जड़ में मालिश करने लगी। शादाब पूरी तरह से तड़प रहा और उससे कहीं ज्यादा लंड मचल रहा था। शहनाज़ ने एक हाथ जैसे ही लंड के ऊपर से घुमाया तो शादाब सिसक उठा और बोला:"

" आह अम्मी मेरी जान, चादर उतार कर अच्छे से लगाओ

शहनाज़ ने अपनी आंखे बंद कर ली और धीरे धीरे हाथ आगे ले जाते हुए चादर को पकड़ कर खींच दिया तो लंड आज़ाद होकर लहराने लगा। लंड के आजाद होते ही शादाब की आंखे खुल गई तो उसने देखा कि शहनाज़ का पूरा जिस्म कांप रहा था, चेहरा पूरा लाल भभूका हो रहा था और आंखे बंद थी। शादाब ने अपनी आंखे बंद कर ली और बोला:"

" आह अम्मी, बस अब हल्दी लगा दे जल्दी दे, खूब अच्छे से लगा देना! देर ना कर अब।

शहनाज़ ने पहले धीरे धीरे अपने आंखे खोली और लंड को देखा तो उसकी आंखे डर और शर्म से झिझक सी गई लेकिन फिर से देखने लगी। एक दम लंबा मोटा, किसी लहराते हुए सांप जैसा, शहनाज़ आज जी भर कर लंड देख रही थी। किसी पहाड़ी आलू की तरह से मोटा सुपाड़ा, एक दम लाल सुर्ख मानो गुस्से में लाल हो रहा हो। शहनाज़ की उम्मीदों से कहीं ज्यादा खतरनाक लग रहा था आज ये लंड, शहनाज़ की चूत तो जैसे शांत पड़ गई थी और सब चिंगारी सी बुझ गई थी लंड का ये खौफनाक रूप देखकर।

शहनाज़ ने अपने हाथो में हल्दी ली और कांपते हुए हाथो को लंड की तरफ बढ़ा दिया। जैसे ही लंड पर शहनाज़ के हाथ लगे तो शादाब तड़प उठा और बोला:

" आह अम्मी, उफ्फ मेरी शहनाज़ लगा दे हल्दी हल्दी से पकड़ ले इसे, तेरे लिए ही हैं बस।

शहनाज़ ने लंड को अच्छे से पकड़ लिया और हल्दी लगाने लगी तो शादाब के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी।

" आह मेरी नाज़ पूरे लंड पर लगाओ, जड़ तक लगाओ

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर समझ गई कि शादाब लंड को जड़ तक घुसा देगा इसलिए जड़ तक हल्दी लगाने के लिए कह रहा है। शहनाज़ ने लंड को को दोनो हाथो की मुट्ठी बनाकर पकड़ लिया और फिर से कम से कम तीन इंच लंड बाहर रह गया। उफ्फ कितना लंबा हैं ये और मोटा तो उससे भी ज्यादा।शहनाज़ लंड को हल्दी से जल्दी लगाने लगी, लंड सुपाड़े पर से एक दम बिल्कुल ठोस था मानो लोहे का बना हो। शहनाज़ से रहा नहीं गया और उसने जोर से सुपाड़ा दबा दिया तो शादाब सिसक उठा।

" आह अम्मी, आपके नाजुक हाथो से ये कहां दब पाएगा

शहनाज़ को ठेस पहुंची और उसने जोर से लंड का सुपाड़ा दबा दिया तो हल्का सा दब गया और शादाब तड़प उठा।

" आह उखड़ ही दोगी क्या शहनाज़ इसे मेरी जान ?

शहनाज़ के होंठो पर मुस्कान अा गई और जोर जोर लंड पर मालिश करने लगी। शादाब का पूरा जिस्म मस्ती से भर उठा और बोला:"
" हाय ऐसे ही अम्मी, उफ्फ आप कितनी अच्छी हैं, आह मुझे कुछ हो रहा हैं हाय शहनाज़।

शहनाज़ ने अपने बेटे को ऐसे तड़पता देख कर लंड पर से अपना हाथ हटा लिया और पेट पर हल्दी लगाने लगी तो शादाब तड़प उठा और उसका हाथ फिर से लंड पर टिका दिया और बोला:'

" हाय सिकी, उफ्फ करो ना अम्मी, निकल जाएगा मेरा उफ्फ

शहनाज़:' तड़प अब तू ऐसे ही सुहागरात तक मेरे राजा।

इतना कहकर वो खड़ी हो गई और पतली सी चादर से उसकी गांड़ साफ नजर आ रही थी।


मा बेटे वहीं छत पर एक दूसरे के सामने ही बैठ कर नहाने लगे। शहनाज़ चादर के अन्दर से शादाब के सामने ही अपनी चूची और चूत साफ करने लगी तो शादाब ने भी अपने लंड को खून हिला हिला कर साफ किया। शहनाज़ की नजरे लंड पर ही टिकी रही और वो अंदर ही अंदर डर महसूस कर रही थी।

उसके बाद दोनो मा बेटे ने एक साथ खाना खाया और एक दूसरे को बांहों में सो गए। पूरी रात शादाब का लंड शहनाज़ की चूत पर कपड़ों के ऊपर से ही झटके मारता रहा और शहनाज़ की चूत रह रह कर टपकती रही लेकिन दोनो मजबूर थे।
 
अगले दिन सुबह दोनो मा बेटे एक साथ जिम करने गए और उसके बाद सुहागरात के लिए शॉपिंग करने लगे।

शहनाज़:"" बेटा मैं तो सब कुछ तेरी पसंद से लूंगी, जो तेरा मन करे दिला दे मुझे।

शादाब ने शहनाज़ को एक से बढ़कर एक कपडे दिलाए और दोनो ने बाहर ही खाना खाया और उसके बाद घर की तरफ चल पड़े। शाम होने वाली थी इसलिए हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था।

शहनाज़:" बेटा थोड़ा तेज चला, अंधेरे में पता नहीं क्यों डर लगता हैं मुझे ?

शादाब ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी और दोनो घर पहुंच गए। शहनाज़ ने पानी गर्म किया और सिर्फ कल वाली चादर लपेटकर हल्दी लगाने के लिए तैयार हो गई। आज वो कल के मुकाबले अच्छा महसूस कर रही थी। शादाब भी अा गया तो शहनाज़ उससे बोली:"

" बेटा तुम लेट जाओ, पहले मैं हल्दी लगा देती हूं।

शादाब गद्दे पर लेट गया और शहनाज़ ने हाथ में हल्दी लेकर उसके बदन पर लगाना शुरू कर दिया। शहनाज़ की आंखे फिर से लाल होने लगी और धड़कने बढ़ गई। शहनाज़ ने जैसे ही हल्दी लेने के लिए कड़ाही की तरफ देखा तो शादाब ने अपनी चादर उतार दी और पूरा नंगा हो गया। लंड अभी पूरी तरह से खड़ा हो चुका था इसलिए जैसे ही शहनाज़ ने लंड देखा तो उसकी सांसे फिर से रुक सी गई और माथे पर पसीना छलक उठा।

शादाब:" क्या हुआ शहनाज़ ?

शहनाज़:" उफ्फ राजा ये कैसे फन उठा उठा कर लहरा रहा है किसी नाग की तरह !!

शादाब:" अम्मी डरो मत आप, ये आज नहीं काटेगा आपको, आराम से आप हल्दी लगाओ।

शहनाज़ ने शादाब को स्माइल दी और लंड को एक हाथ से पकड़ लिया और दूसरे से उस पर हल्दी लगाने लगी, आज लंड कल से ज्यादा अकड़ रहा था। मा बेटे दोनो एक साथ तड़प उठे और जल्दी ही शहनाज़ ने शादाब के पूरे जिस्म को हल्दी से ढक सा दिया। शहनाज़ की चूत गीली हो गई थी और चुचियों में अपने आप मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था।

शादाब:" अम्मी आज आपने बहुत ज्यादा हल्दी लगा दी मुझे, आप एक काम करो लेट जाओ, मैं आपको लगाता हू।

शहनाज़ लंबी लंबी सांस लेती हुई लेट गई और शादाब ने देखा कि हल्दी बहुत कम बची हुई थी क्योंकि उत्तेजना में शहनाज़ ने उसे बहुत ज्यादा हल्दी लगा दी थी। शादाब ने थोड़ी सी हल्दी ली और शहनाज़ के हाथो पर लगाने लगा तो शहनाज़ का जिस्म कापने लगा। हल्दी खत्म हो गई तो शादाब बोला:"

" उफ्फ अम्मी हल्दी तो खत्म हो गई आज, अब कैसे हल्दी लगेगी मेरी दुल्हन को।

शहनाज़:' मैं तैयार करके ले आती हूं, तू रुक थोड़ी देर।

शादाब शहनाज़ के कान में बोला:"
" अम्मी मेरे जिस्म पर ज्यादा हल्दी लग गई है, कहो तो अपने बदन से आपको हल्दी लगा दू।

शहनाज़ को शादाब का सुझाव पसंद अाया लेकिन वो जानती थी कि वो अपने पूरे जिस्म को उसके बदन से रगडेगा। ये सोचकर शहनाज़ की चूत सुलग उठी और उसने शादाब की तरफ देखते हुए कहा:".
" अा जा फिर लगा दे अपनी दुल्हन को हल्दी, देखती हूं कितनी अच्छी लगायेगा।

शादाब पूरी तरह से नंगा था इसलिए वो शहनाज़ के उपर नंगा ही चढ़ गया। जैसे ही दोनो के बदन टकराए तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

" आह शादाब, कितना भारी हैं तू मेरी जान, तू तो पूरा मर्द बन गया है मेरे राजा।

शादाब अपने बदन को शहनाज़ के बदन से रगड़ने लगा और बोला:"

" आह अम्मी आपका बदन बिल्कुल फूलो की तरह नाजुक हैं,

शहनाज़:" कमीने तो मेरे पूरे को पीस कर रख देगा बहुत बुरी तरह से, उफ्फ डर लगता है सोचकर ही मुझे तो राजा।

शादाब का लंड चादर के उपर से शहनाज़ की चूत पर रगड़ रहा था जिससे शहनाज़ का जिस्म हल्के हल्के झटके खा रहा था। शादाब उसके कन्धे सहलाते हुए बोला:"

" आह मेरी शहनाज़, अब मर्द बोल दिया है तो मर्दानगी तो दिखानी पड़ेगी ना अम्मी।

दोनो के बदन हिलने से शहनाज़ के जिस्म पर से चादर सरकने लगी और शहनाज़ बोली:"

" आह राजा, थोड़ा जोर जोर से रगड़ कर लगा हल्दी मुझे।

शादाब ने जैसे ही अपनी चौड़ी छाती पर शहनाज़ की तनी हुई चूचियों पर रगड़ना शुरू किया तो फटने के डर से चादर मानो अपने आप बीच से सरक गई और पहली बार शादाब का पूरा नंगा जिस्म शहनाज़ के जिस्म पर छा गया जिससे शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद हो गई और मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां अपने आप निकलने लगी।

" आह शादाब, उफ्फ ये क्या हो गया मेरे राजा, कितना अच्छा लग रहा है, हाय मेरी मा,

शादाब अपना लंड उसकी जांघो में घुसाते हुए बोला:"

" आह मेरी शहनाज़, उफ्फ कितना गर्म हैं तेरा बदन,

शहनाज़ ने अपनी जांघें मस्ती से खोल दी शादाब का लंड चूत से जा टकराया तो शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उसकी गांड़ पर रख दिए और चूत पर दबाने लगी और सिसकते हुए बोली:"

" आह मेरा नंगा शादाब,मेरे राजा बेटा, उफ्फ अच्छे से लगा हल्दी मुझे।

शादाब अपनी छाती को शहनाज़ की चुचियों से रगड़ने लगा तो शहनाज़ एक दम पूरी तरह से मस्त हो हुई और उसकी चूत से रस टपकना शुरू हो गया। जैसे ही शादाब को लगा कि शहनाज़ झड़ सकती हैं तो वो हटने लगा तो शहनाज़ उसे अपने ऊपर खींचने लगी और बोली:"

" आह राजा, और लगा ना हल्दी मुझे, देख मेरी जांघो के बीच ठीक से नहीं लगी है।

शादाब ने अपनी जांघ पर से हल्दी लेकर हाथ से उसकी चूत पर अच्छे से लगा तो शहनाज़ की बोलती बंद हो गई। शादाब उसकी पीठ से अपनी पीठ रगड़ने लगा और दोनो के जिस्म पर पूरी तरह से हल्दी लग गई।

उसके बाद दोनो नहाए और साथ में ही खाना खाया। ये सब अगले छह दिन तक चलता रहा और आखिरकार वो दिन अा ही गया जिसके लिए दोनो मा बेटा तड़प रहे थे, शहनाज़ पिछले छह दिन से जिस्म की आग में जल रही थी। उसकी चूत तो हरदम गीली रही लेकिन खुलकर बह नहीं पाई जिससे उसका पूरा जिस्म अकड़ रहा था। शरीर बहुत पूरी तरह से आग से तप रहा था और रह रह कर चिंगारी सी निकल रही थी। उसकी चूचियां अकड़ कर एकदम सख्त हो गई थी मानो अब बुरी तरह से मसलने, दबाने के बाद ही उनका दर्द खत्म होगा। शहनाज़ की चूत पर हल्दी लगने से एक अलग ही रंगत अा हुई थी जिससे वो अब पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। शहनाज़ को खुद यान नहीं था कि वो आखिरी बार कब चुदी थी इसलिए चूत का छेद पूरी तरह से बंद हो गया था। आज शहनाज़ की चूत के होंठो पर एक अलग ही नशा छाया हुआ था और वो पूरी तरह से रस से भीगे हुए और बेकरारी में एक दूसरे को चूम रहे थे।

शहनाज़ की आंख खुली तो उसने अपने बेटे के लंड को अपनी जांघो में घुसे हुए पाया तो उसके होंठो पर मुस्कान उभर गई। फ्रेश होने के बाद शहनाज़ ने अपने नए कपड़े निकाले और टॉवेल लेकर बाथरूम में घुस गई। आज उसकी चाल में एक अजीब सी मस्ती छाई हुई थी क्योंकि आज वो अपना सब कुछ अपने सपनों के शहजादे अपने बेटे शादाब पर लुटा देना चाहती थी।

शहनाज़ ने बाथरूम में घुस गई और चादर को अपने जिस्म से अलग कर दिया तो उसका बदन पूरा नंगा होकर खिल उठा। उसके हाथ अपने आप अपनी चूचियों पर चले गए तो उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई। उफ्फ कितनी टाइट हो गई है मेरी चूचियां, लगातार जिम करने से उसकी चूचियां सच में एक दम गोल गोल और मस्त हो गई थी। शहनाज़ ने अपनी चूची को हल्का सा दबाया तो उसके मुंह से आह निकल पड़ी। शहनाज़ की चूत आज सुबह से ही गीली हो रही थी, शहनाज़ ने अपने जिस्म को अच्छे से पानी से साफ करना शुरू कर दिया तो सारी हल्दी उतर गई और उसका जिस्म गुलाब की तरह खिल उठा। शहनाज़ की चूत पर हल्के हल्के बाल उग आए थे जो उसे अच्छे नहीं लग रहे थे क्योंकि वो अपने बेटे को एक दम साफ चिकनी चूत गिफ्ट करना चाहती थी इसलिए उसने क्रीम लगाकर सब बाल साफ कर दिए और उसकी चूत बिल्कुल चिकनी हो गई। शहनाज़ ने बंद आंखों के साथ ही एक उंगली अपनी चूत पर फिराई तो उसका जिस्म कांप उठा और मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शहनाज़ के घुटने कमजोर पड़ने लगे तो वो फर्श पर ही बैठ गई। उसने शॉवर का पाइप लिया और अपनी चूत पर मारने लगी



शहनाज़ अपनी चूत को खूब अच्छे से रगड़ रगड़ कर साफ़ करने लगी मानो युद्ध की तैयारी से पहले अपने आपको तैयार कर रही हो। शहनाज़ ने अपनी चूत के होंठो को पानी से साफ किया और अंदर तक पानी मारने लगी जिससे उसकी चूत एक इंच अंदर तक पूरी तरह से साफ हो गई।

शहनाज ने अपनी चूत पर हाथ फिराया और जब संतुष्ट हो गई कि उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं हैं और पूरी तरह से चिकनी और साफ स्वच्छ हो गई है तो उसके होंठ मुस्कुरा उठे और उसने अपने कपड़े पहन लिए और बाहर की तरफ चल पड़ी। उसने शादाब को उठाया तो शादाब उसे नए कपड़ों में देख कर बहुत खुश हुआ और उसका गाल चूम लिया। पिछले 10 दिन से ना शादाब ने अपनी अम्मी के होंठ छुए और मा ही शहनाज़ ने पहल करी। शहनाज़ को उपर से नीचे तक निहारने के बाद शादाब बोला:"

" उफ्फ अम्मी बिल्कुल क़यामत लग रही हो, उफ्फ ये हुस्न ये जवानी,

शहनाज़ अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और बोली:'

" शादाब मेरे राजा, अब तो मैं पूरी तरह से तेरी बीवी बन गई हूं, अब तो अम्मी मत बुला मुझे, शहनाज़ ज्यादा अच्छा लगता है मुझे।

शादाब:" ओह अभी आदत पड़ी हुई है ना अम्मी बोलने की मेरी जान, बस इसलिए निकल जाता हैं, धीरे धीरे कम हो जाएगी।

शहनाज़:" अब खड़ा हो जा और नहाकर अा जा, मैं कुछ खाने के लिए बना देती हूं।

शादाब खड़ा हुआ और दोनो हाथो में शहनाज़ की गांड़ को भर लिया तो शहनाज़ एक झटके से अदा के साथ उसकी पकड़ से निकल गई और बोली:"

" उफ्फ इतनी जल्दी ठीक नहीं होती राजा, रात तो होने दे मेरी जान।

शादाब:" उफ्फ अम्मी बर्दाश्त नहीं होता अब, आज देखना मैं आपको कैसे रगड़ रगड़ कर, मसल मसल कर प्यार करूंगा।

शहनाज़:" कमीने वो तो मैं जानती हूं कि आज तू मेरे पूरे जिस्म को अपने मूसल से कूट देगा बुरी तरह से।

शादाब अपने लंड को चादर के उपर से शहनाज़ को दिखा कर सहलाते हुए:"

" आह आम्मि, आज तो आपका ऐसा मसाला कूट दूंगा कि आज मेरे मूसल की दीवानी हो जाओगी मेरी मां।

शहनाज़ उसकी तरफ जीभ निकाल कर किचेन में चली गई और शादाब नहाने के लिएं। शादाब ने चादर उतार दी और नंगा हो गया तो उसका लंड आजाद होकर झटके खाने लगा। शादाब उसे पुचकारते हुए बोला:"

" बस कर मेरे बच्चे, बस आज मिल जाएगी तुझे मेरी मा की चूत, शाम तक सब्र कर।

लंड ने एक तगड़ा झटका खाया मानो अपनी खुश ज़ाहिर कर रहा हो।शादाब नहाने लगा और अपने सारे जिस्म से बाल साफ़ किए और टॉवल बांध कर बाहर निकल गया। शादाब ने अपने कपड़े पहन लिए और शहनाज़ के कमरे में अा गया तो काजू बादाम केसर वाला दूध और देशी घी का हलवा टेबल पर रखा हुआ था। शहनाज़ शादाब की गोद में बैठ गई और दोनो ने एक दूसरे को दूध पिलाया और हलवा खिलाया।

शादाब:" अम्मी थोड़ी देर बाद हम शहर निकल जाएंगे और रात के लिए कुछ जरूरी सामान लाना हैं

रात का नाम सुनते ही शहनाज़ के गाल अपने आप गुलाबी हो उठे और एक बार शादाब की तरफ नजरे उठा कर देखा और फिर शर्मा गई। शादाब ये सब देख कर मुस्कुरा उठा।

थोड़ी देर बाद ही शादाब ने गाड़ी निकाल ली और दोनो मा बेटे शहर की तरफ चल पड़े। शहनाज़ ने आज अपना बुर्का नहीं निकाला और ना ही शादाब ने उसे बुर्का उतारने के लिए कहा।

शादाब:" अम्मी मैं आपको ब्यूटी पार्लर छोड़ दूंगा, वहां मैडम आपको अच्छे से तैयार कर देगी, बस आप शीशा मत देखना अभी।

शहनाज़:" बेटा वो तो मैं पिछले 15 दिन से नहीं देख रही हूं।लेकिन आज दुल्हन बनकर मैं खुद को जरूर देखूंगी।

शादाब:" अम्मी हम दोनों साथ में ही देखेंगे।

दोनो बाते करते हुए शहर पहुंच गए और शादाब ने शहनाज़ को ब्यूटी छोड़ दिया और खुद अपने जिम वाले दोस्तो और कॉलेज वाले दोस्त जो उस दिन निकाह में शामिल थे उन्हें सब को आज 2 बजे के लिए एक पार्टी का बुलावा भेज दिया।

शादाब ने एक हॉल बुक किया और मालिक को सब कुछ समझा उसे जिम्मेदारी दे दी। उसके बाद वो वापिस शहनाज़ को लेने के लिए चल दिया। तीन घंटे हो चुके थे और शहनाज़ का मेक उप भी पूरा हो गया था।

मैडम ने शादाब को आवाज लगाई तो शादाब अंदर चला गया और जैसे ही शहनाज़ को देखा तो उसकी आंखे खुशी से खुली की खुली रह गई। सचमुच वो एक पारी की तरह लग रही थी, उफ्फ माथे पर सजा हुआ टीका, सेब की तरह सुर्ख गाल, लाल सुर्ख होंठ, नाक में एक बाली, गले में शानदार ज्वेलरी, और मेहंदी से रचे हुए लाल हाथ कुल मिलाकर एक सपनो की शहजादी।



शादाब बिना पलके झपकाए एकटक शहनाज़ को देखता रहा तो शहनाज़ की आंखे अपने आप शर्म से झुक गई और उसके होंठो पर स्माइल आ गई।



शादाब चलता हुआ उसके पास आया और उसके पीछे आकर खड़ा हो गया और शहनाज़ के चेहरे को हल्का सा उपर उठाया तो शहनाज़ चेहरा अपने आप उठता चला गया। शादाब बोला:"

" शहनाज़ अपनी आंखे बंद कर लो, तुम्हे आज एक बहुत बड़ा झटका लगने वाला हैं।

शहनाज़ ने अपनी आंखे बंद कर ली और शादाब उसे मैडम के सामने ही बांहों में लिए हुए शीशे के सामने के गया और बोला:"

" आंखे खोलो मेरी जान, दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की दुल्हन आपको देखना चाहती हैं।

शहनाज़ ने जैसे ही अपनी आंखे खोली तो उसे जैसे खुद पर यकीन ही नहीं हुआ। वो दीवानी की तरह खुद को देखने लगी और जब उसे एहसास हो गया है कि ये शीशे में उसकी ही फोटो है तो वो खुशी के मारे शादाब से लिपट गई और बोली:"

" ओह शादाब मेरे राजा तुमने तो मुझे पूरी तरह से बदल दिया। तुम्हारे बिना मैं बिल्कुल अधूरी थी मेरी जान।

शादाब:" शहनाज़ मैं आपको और भी बहुत खुशी दूंगा, आप देखती रहो बस।

शहनाज़ शादाब को कसकर गले लगाती हुई:"

" शुक्रिया मेरी ज़िन्दगी में आने के लिए शादाब, ऐसा लग रहा है जैसे मेरी ज़िन्दगी असल में अब शुरू हुई हैं।

उसके बाद दोनो मा बेटे वहां से सीधे हॉल पहुंच गए जहां सब दोस्त उनका ही इंतजार कर रहे थे। ये शहनाज़ के लिए बिल्कुल सरप्राइज था क्योंकि उसे शादाब से ये उम्मीद नहीं थी। शादाब ने अपना हाथ आगे बढाया तो शहनाज़ गाड़ी से उतर गई और शादाब उसका हाथ पकड़े स्टेज की तरफ बढ़ गया। दोनो सामने रखी हुई बड़ी बड़ी सजी हुई कुर्सियों पर बैठ गए।

शहनाज़ की खूबसूरती का असर सब पर हो रहा था। एक के बाद एक दोस्त मुबारकबाद देने लगे। हर कोई शहनाज़ के लिए कोई ना कोई गिफ्ट लेकर आया था जिससे शहनाज़ की खुशी बढ़ गई थी। जिम वाला लड़का आया और शहनाज़ को एक गिफ्ट पैक देते हुए बोला;'

" मुबारक हो भाभी जी, आखिरकार आपको आपका प्यार मिल ही गया।

उसकी बात सुनकर शहनाज़ ने एक बार शादाब की तरफ देखा और दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए तो शहनाज़ बोली;"

" प्यार अगर सच्चा हो तो मिल ही जाता है।

उसके बाद सभी लोग खाना खाने लगे तो शादाब और शहनाज़ के लिए भी एक टेबल पर खाना लग गया और दोनो ने बहुत हल्का खाना खाया और उसके बाद एक एक एक करके सभी दोस्त जाने लगे और आखिकार शादाब भी शहनाज़ को लेकर घर की तरफ चल दिया।
दोनो चुप बैठे हुए थे और शहनाज़ का चेहरा लाल भभुका हो रहा था। बीच बीच में वो शादाब की तरफ नजरे चुरा चुरा कर देख रही थी और जैसे ही दोनो की नजरे मिलती तो शहनाज़ शर्मा जाती। आगे आने वाले पलो के बारे में सोच सोच कर उसकी चूत गीली होने लगी थी।

कोई शाम के छह बजे तक वो घर पहुंच गए और शहनाज़ ने अपने आपको पूरी तरह से बुर्के में छुपा लिया था ताकि किसी मोहल्ले वाले को किसी तरह का कोई शक ना हो। शहनाज़ कांपते हुए कदमों से गाड़ी से उतरी हुई और शादाब गाड़ी पार्क करने लगा। शादाब वापिस आया तो शहनाज़ ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके गले लग गई तो शादाब ने शहनाज़ को अपनी बांहों में उठा लिया तो शहनाज़ ने अपनी बांहे शादाब के गले में डाल दी और दोनो मा बेटे एक दूसरे की आंखों में देखने लगे। शादाब उसे बाहों में लिए हुए ही उपर आ गया और जैसे ही शहनाज़ के कमरे को धक्का दिया तो वो खुलता चला गया तो शहनाज़ की आंखे एक बार फिर से खुशी से चमक उठी क्योंकि पूरा कमरे एक सुहागरात के कमरे में तब्दील हो चुका था और दो बेड को जोड़कर एक बहुत बड़ा बेड गोल बेड बनाया जा चुका था जिस पर एक साफ सुथरी सफेद रंग की चादर बिछी हुई थी।

 
शादाब धीरे धीरे शाहनाज के हाथ पकड़े बेड तक पहुंच गया। शाहनाज ने अभी तक बुर्का पहना हुआ था और उसके हाथ पैर कांप रहे थे। जिस्म में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी और रह रह कर उसकी सांसे रुक सी रही थी। शहनाज़ ने धीरे से अपने सैंडिल निकाले और बेड पर चढ़ गई और बैठ गई। शादाब ने शहनाज़ का हाथ हल्का सा दबाते हुए कहा:"

" अम्मी आप बैठो मैं अभी आया पांच मिनट में।

शहनाज़ ने बिना मुंह से कुछ बोले अपने गर्दन हिला दी और शादाब कमरे से बाहर अा गया। शादाब किचेन में चला गया और केसर बादाम वाला दूध गर्म करने लगा। सच में शादाब आज बहुत खुश था क्योंकि उसकी अम्मी ने अब हर तरह से उसे अपना लिया था।

दूसरी तरफ शहनाज़ ने शादाब के जाने के बाद अपना बुर्का उतार दिया और एक तरफ रख कर अपने घूंघट को ठीक किया और शादाब का इंतजार करने लगी। शहनाज़ के कदम कदमों कि आहट पर लगे हुए थे और उसकी चूत अपने आप टपक रही थी।

शादाब ने ग्लास में दूध भर लिया और एक डिब्बा लेकर शहनाज़ के रूम की तरफ चल पड़ा। कमरे में घुसने के बाद शादाब ने गेट को लॉक लगाकर बंद कर दिया तो शहनाज़ के रोंगटे खड़े हो गए। शादाब ने दूध को टेबल पर रख दिया और डिब्बे में से एक मस्त तेज महक वाला परफ्यूम पूरे कमरे में छिड़क दिया तो पूरा कमरा महक से भर उठा। शादाब ने अपने जूते उतारे और बेड पर चढ़ गया और शहनाज़ के सामने बैठ गया। घूंघट से शहनाज़ के कांपते हुए लाल सुर्ख होंठ साफ दिख रहे थे।


शादाब ने कहा:" उफ्फ अम्मी आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दिन हैं क्योंकि मेरा सबसे बड़ा सपना पूरा हो रहा हैं। आप मिल गई मुझे सब कुछ मिल गया।

शहनाज़ सिर्फ हल्का सा मुस्कुरा उठी तो शादाब बोला:"

" उफ्फ शहनाज़ मेरी अम्मी, मेरी जान बस अब अपना ये चांद सा चेहरा मुझे दिखा दो। मैं अपनी दुल्हन को जी भर कर देख तो लूं एक बार।

शहनाज़ ने ना मैं सिर हिला दिया और तो शादाब बोला:"

" उफ्फ अम्मी आज तो मना मत करो, आज क्यों ज़ुल्म कर रही हो मुझ पर ?

शहनाज़ समझ गई कि उसका बेटा अभी काफी नादान हैं इसलिए धीरे से बोली:"

" मेरे राजा, आज के दिन मुंह दिखाई गिफ्ट में दी जाती हैं, पहले मेरा गिफ्ट दो, तब जाकर ये घूंघट हटेगा।

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी क्या चाह रही हैं इसलिए वो उठा और डब्बे से एक हीरे की अंगूठी निकाल ली और बेड की तरफ चल पड़ा। अब दोनो मा बेटे एक दूसरे के सामने बैठे हुए थे और शादाब बोला:"

" शहनाज़ मैं मुंह दिखाई देने के लिए तैयार हूं, बस अब देर ना कर मेरी जान।

शहनाज़ के होंठो पर मुस्कान अा गई और वो उठी और बेड के सिरहाने से एक डिब्बे से अंगूठी निकाल ली। शादाब भी खड़ा हो गया और शहनाज़ को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया तो शहनाज़ के मुंह से आज अपने बेटे के पहले स्पर्श से एक सिसकी निकल पड़ी।

" आह राजा, थोड़ा प्यार से मेरी जान, बहुत नाजुक हैं तेरी अम्मी

शादाब का एक हाथ शहनाज़ की छाती तो दूसरा उसके पेट पर टिका हुआ था। शहनाज़ ने अपने हाथ आगे लाते हुए शादाब के हाथो पर रख दिए तो दोनो एक दूसरे को अंगूठी पहनाने लगे।



शादाब का पूरी तरह से खड़ा हुआ लंड शहनाज़ की गांड़ से लगा हुआ था जिससे शहनाज़ का बदन तपता जा रहा था। अंगूठी पहन लेने के बाद शादाब बोला:"

" बस शहनाज़ मेरी अम्मी अब तो दिखा दे अपना चांद सा चेहरा मुझे।

शहनाज़ ने एक स्माइल दी और शादाब को हान में सिर हिला दिया तो शादाब ने अपने हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ का घूंघट उठाने लगा। जैसे जैसे घूंघट उठता जा रहा था शहनाज़ की सांसे तेज होती जा रही थी। जैसे ही घूंघट हट गया तो शहनाज़ का चांद से ज्यादा चमकता हुआ चेहरा शादाब के आगे अा गया और शादाब बिना पलके झपकाए उसे देखता रहा।



शहनाज़ दुनिया की सबसे खूबसूरत दुल्हन बनी हुई थी और शादाब अपलक उसे देखे जा रहा था। शहनाज़ की आंखे बंद शर्म से झुकी जा रही थी इसलिए वो शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमाने लगीं।



शादाब ने शहनाज़ के चेहरे को हाथ से थाम लिया और बोला:"

" उफ्फ मेरी जान, मेरी शहनाज़ देखने दो ना जी भर कर मुझे अपनी दुल्हन को।

शहनाज़ अपने बेटे की बाते सुनकर शर्मा सी गई और बोली:'

" बस कर मेरे राजा और कितना देखेगे मुझे, कहीं नजर लग गई तो?

शादाब :" अम्मी दीवाने की नजर नहीं लगती हैं।

शादाब ने इतना कहकर शहनाज़ का एक हाथ पकड़ लिया तो शहनाज़ ने एक झटके के साथ उससे अपना हाथ छुड़ा लिया तो शादाब ने हैरानी से उसकी तरफ देखा और बोला:"

"इतना गुस्सा किसलिए शहनाज़ ? क्या मुझसे कोई गलती हुई है ?

शहनाज़ ने उसे जलाने के लिए कहा:" हान बहुत बड़ी भूल कर रहा हैं तू राजा, अभी तेरा मेरे सिर्फ पर हक नहीं हैं।

शहनाज़ के मुंह से निकले ये लफ़्ज़ शादाब को एक तीर की तरह से चुभे और बोला:"

" अम्मी ऐसा क्यों बोल रही हो आप ? सब कुछ आपकी मर्जी से तो रहा हैं।

शहनाज़ शादाब का रोना सा मुंह देखकर अंदर ही अंदर मुस्करा उठी और धीरे से अपना मुंह उसके कान के पास लाते हुए बोली:" राजा पहले निकाह में बंधे हुए मेरे मेहर दो मुझे, उसके बाद ही तुम मुझे छू सकते हो।

शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसके होंठो पर मुस्कान तैर गई और बोला:"

" शहनाज़ क्या तुम मेरे मेहर माफ करोगी ? या मैं आपको चुका दू।

( मेहर निकाह के वक़्त लड़की की सुरक्षा के लिए तय की गई एक रकम होती हैं। अगर पति तलाक चाहे तो उसे मेहर की रकम पत्नी को देनी होती हैं।)

शहनाज़: जा माफ कर दिए मेरे राजा।

जैसे ही शहनाज़ ने मेहर माफ किए तो शादाब ने तेजी से आगे बढ़ कर उसे अपने सीने से लगा लिया तो शहनाज़ भी अपने बेटे से चिपक गई।

शादाब:" ओह शहनाज़ आई लव यू मेरी जान।

शहनाज़:: लव यू टू मेरे शादाब।

शादाब:" अम्मी मुझे आज सब कुछ मिल गया। आप जैसी दुल्हन पाकर मेरी किस्मत खुल गई।

शहनाज़:" शादाब सच में तुम एकदम मेरे सपनो के शहजादे हो, तुम्हे पाकर आज मैं भी पूरी हो गई हूं मेरे राजा।

शादाब ने अपना लंड शहनाज़ की जांघो में दबाते हुए कहा:"

" आह अम्मी, अभी आप कहां पूरी हुई हो ?

शहनाज़ उसका हाथ दबाते हुए:"

" उफ्फ शैतान, क्यों तंग करता हैं मुझे डराकर इससे ?

शादाब:" आज तक मेरी रात हैं, मैं जो चाहे करू, आज मुझे पूरा हक है शहनाज़ ।

दोनो मा बेटे ऐसे ही बेड पर लेट गई और शहनाज़ पूरी तरह से शादाब से कस कर लिपट गई और बोली:"

" आह मेरे राजा, आज तुझे पूरा हक मुझ पर, मेरा सब कुछ तेरा हैं अब हमेशा के लिए।

दोनो मा बेटे एक दूसरे की आंखो में देख रहे थे और शादाब की नजरे बार बार शहनाज़ के रस टपकाते हुए लिप्स पर ठहर रही थी। दोनो मुस्कुरा दिए और शहनाज़ ने अपनी जीभ निकाल कर अपने होंठो को रस से पूरी तरह से गीला कर दिया तो शादाब के होंठ अपने आप शहनाज़ के होंठो की तरफ बढ़ गए। शादाब ने शहनाज़ का मुंह से उपर किया तो शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल हो गया और शादाब ने अपने प्यासे होंठ अपनी दुल्हन, अपनी शहनाज़ के होंठो पर टिका दिए। जैसे ही शहनाज़ को अपने बेटे के होंठो का स्पर्श हुआ तो उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई और उसके हाथ शादाब की गर्दन में कस गए तो शादाब ने शहनाज़ के होंठो को चूसना शुरू कर दिया और उसके हाथ शहनाज़ के बालो को सहलाने लगे। शहनाज़ भी पूरी तरह से किस में डूब गई और उसने भी अपने बेटे के होंठो को चूसना शुरू कर दिया तो शादाब ने कसकर बिल्कुल अपने करीब कर लिया जिससे लंड फिर से शहनाज़ की जांघो में घुस गया। लंड लगते ही शहनाज़ पूरी तरह से जोश में आ गई और शादाब के कभी उपर वाले तो कभी नीचे वाले होंठ को पूरी ताकत से चूसने लगी।



शादाब भी शहनाज़ के होंठो को किसी रसभरी की तरह से चूस रहा था और उसके हाथ शहनाज़ की गर्दन को मसल रहे थे जिससे शहनाज़ मदहोश होती जा रही थी। शादाब ने अपनी जीभ बाहर निकाली और शहनाज़ के दांतो पर दबाव दिया तो शहनाज़ का मुंह खुल गया और शादाब की जीभ उसके मुंह में घुसती चली गई। जैसे ही शहनाज़ की जीभ शादाब की जीभ से टकराई तो शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा और अपनी चूत को शादाब के लंड पर रगड़ने लगीं। दोनो मा बेटे की जीभ अब एक दूसरे के मुंह में घुस रही थी।



जब दोनो की सांसे उखड़ने लगी तो दोनो कर होंठ सांस लेने के लिए अलग हुए और फिर से जुड़ गए। शादाब के हाथ इस बार शहनाज़ की कमर को मसल रहे थे जिससे शहनाज़ उसके होंठ पूरे जोश में चूस रही थी। एक लंबे किस के बाद आखिर कार दोनो को अलग होना पड़ा और शादाब ने शहनाज़ की आंखो में देखा जो किस की वजह से लाल सुर्ख होकर दहक रही थी। शादाब ने शहनाज़ के लहंगे पर रख दिया तो शहनाज़ शादाब से मुंह नीचा करके शरमाते हुए बोली:"

" आह पहले लाइट बंद कर दीजिए ना आप।

शादाब समझ गया कि शहनाज़ लाइट की वजह से ज्यादा शर्मा रही है इसलिए उसने उठकर लाइट बन्द कर दी और बोला:"

" शहनाज़ मेरी जान, अगर आपकी इजाज़त हो तो कुछ मोमबत्तियां जला दू ?

शहनाज़ अपना मुंह नीचे किए हुए ही बोली:" शादाब मैं आज तक किसी के सामने पूरे कपडे नहीं निकाले है बेटा। इसलिए तू रहने दे।

शादाब:" आह शहनाज़ आज तो आपका बेटा आपको पूरी तरह से नंगी करके प्यार करेगा।

शहनाज़ अपने आप में ही सिमट सी गई और बोली:"

" तेरे लिए तो मेरी जान भी हाज़िर है मेरे राजा।

शादाब:' अगर आपकी इजाज़त हो तो मैं कुछ मोमबत्तियां जला दू मेरी जान ?

शहनाज़ ने सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी तो शादाब ने कमरे में रखी गई मोमबत्तियों को जलाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ भी उसका सहयोग करने लगी।



जल्दी ही पूरा कमरा मोमबत्तियों की हल्की रोशनी से भर गया और उसमे शहनाज़ पहले से ज्यादा सेक्सी और खुबसुरत नजर आने लगी। शहनाज़ बेड पर लेटी हुई थी और शादाब आगे आकर उसके उपर चढ़ गया तो शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर बांध दिए। शादाब ने शहनाज़ के माथे को चूम लिया और फिर धीरे धीरे उसकी आंखो को प्यार करने लगा। शहनाज़ ने अपने जिस्म को पूरी तरह से ढीला छोड़ दिया और शादाब का लंड उसकी जांघो में घुसा जा रहा था।

शादाब ने नीचे आते हुए शहनाज़ के गाल पर अपने होंठ टिका दिए और चूसने लगा। शहनाज़ ने अपने दोनो हाथों से शादाब की कमर को सहलाना शुरू कर दिया तो शादाब ने जोश में आते हुए शहनाज़ के गुलाबी गाल को मुंह में भर कर काट किया तो शहनाज़ के होंठो से आह निकल पड़ी।

" उफ्फ आराम से मेरे राजा, दर्द होता हैं मुझे।

शादाब उसके गाल को सहलाते हुए कहा:" " मेरी जान शहनाज़ आज की रात तो तुम्हे बहुत दर्द होंगे मीठे मीठे इस से भी बढ़कर।

शहनाज़ ने उसकी बात सुनकर उसे जोर से कस लिया और बोली:" आह मेरे राजा, आज तेरी मा हर दर्द सहने के लिए तैयार हैं तेरे लिए।

शादाब ने शहनाज़ के दोनो गालों को बारी बारी से चूमा, चाटा और हल्का हल्का दांतो से काट काट कर लाल कर दिया। शादाब ने अब अपने होंठ फिर से शहनाज़ के होंठो पर टिका दिए और चूसने लगा तो शहनाज़ भी उसका साथ देने लगी। शादाब का एक हाथ नीचे सरक कर उसकी चूचियों पर अा गया और हल्का हल्का दबाने लगा तो शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ शादाब की कमर पर घुमाने शुरू कर दिए।

शादाब ने शहनाज़ की कान की लौ को जीभ से चाटना शुरू किया तो शहनाज़ के जिस्म में बिजली सी दौड़ने लगी और उसकी सिसकी निकल पड़ी। शादाब ने जैसे ही उसकी लौ दांतो से हल्का सा काटा तो शहनाज़ की सिसकियां तेज होने लगी और वो शादाब की गांड़ पर हाथ फेरने लगी। शादाब ने नीचे आते हुए शहनाज़ की गर्दन पर अपने होंठ टिका दिए और उसकी गर्दन को चाटने लगा।


शहनाज़ से ये सब बर्दाश्त नही हुआ और उसकी गर्दन अपने आप ही शादाब की जीभ पर थिरकने लगी। (शहनाज़ को आज पहली बार एहसास हो रहा था कि प्यार क्या होता हैं, उसके पति ने सीधे लंड घुसा दिया था)!

शहनाज़ ने अपना हाथ नीचे लाते हुए शहनाज़ के सूट को पकड़ लिया और उपर की तरफ बढ़ाने लगा तो शहनाज़ की सांसे तेज होने लगी और चूत गीली हो गई। शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उपर उठा दिए और शादाब ने उसका सूट उतार दिया तो शहनाज़ शर्म के मारे शादाब से कसकर लिपट गई तो शादाब के हाथ उसकी नंगी कमर पर जा लगे तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

" आह शादाब मेरे राजा, उफ्फ

शादाब ने शहनाज़ की कमर को अपने हाथो में भर कर सहलाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ किसी अमर बेल की तरह उससे लिपट गई। शादाब उसकी कमर दबाते हुए कहा:'

" आह अम्मी, आपकी कमर कितनी चिकनी और पतली हैं मेरी शहनाज़ !!

इतना कहकर उसने शहनाज़ की कमर को जोर दे दबा दिया तो शहनाज़ मस्ती से सिसक उठी और बोली:"..
" आह मेरे शादाब थोड़ा प्यार से राजा, सब कुछ तेरे लिए ही है मेरी जान।

शादाब के हाथ शहनाज़ की कमर से होते हुए उसकी गांड़ तक पहुंच गए और वो प्यार से शहनाज़ की गांड़ सहलाने लगा। शहनाज़ तो जैसे पागल ही हो गई और अपने दोनो हाथ अपने बेटे के हाथो पर रख दिए और अपनी गांड़ को दबाने लगी। शादाब ने अब शहनाज़ की सलवार के नाड़े को एक झटके में खोल दिया तो शहनाज़ के मुंह से उत्तेजना में फिर से सिसकी निकल पड़ी और शादाब ने उसकी सलवार को नीचे सरका कर उतार दिया तो अब शहनाज़ सिर्फ ब्रा पेंटी में पड़ी हुई थी और शर्म के मारे अपने आप में सिमट रही थी। (कमरे में जल रही मोमबत्तियां मैजिक कैंडल की तर्ज पर बनी हुई जिनका प्रकाश थोड़ी देर के बाद ट्यूब लाइट से भी तेज हो जाता हैं और अब धीरे धीरे कमरे में प्रकाश बढ़ रहा था) शहनाज़ की गांड़ सिर्फ पेंटी में थी।

शहनाज़ शर्म के मारे पेट के बल लेट गई और शादाब ने अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी गांड़ को पकड़ लिया और दोनो हाथो में भर कर जोर जोर से दबाने लगा। शहनाज़ मस्ती से भर उठी और सिसकते हुए बोली:"

" आह शादाब, उफ्फ थोड़ा प्यार से मेरी जान,

शादाब अपनी अम्मी की सिसकियां सुनकर जोश में अा गया और पूरी ताकत से उसकी गांड़ दबाने लगा।



शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती में सिसकते हुए:"

" आह मार ही देगा क्या मुझे, उफ्फ दर्द होता हैं राजा थोड़ा प्यार से मसल।

शादाब उसकी के पटो को खोलकर अंदर की तरफ दबाते हुए:" आह शहनाज़, कितनी मस्त उभरी हुए गांड़ हैं तेरी, दबाने दे जोर जोर से आह टाइट है।

शादाब के मुंह से अपनी गांड़ की तारीफ सुनकर शहनाज़ बहक गई और अपनी गांड़ खुद ही उसके हाथो में मारने लगी और बोली:"

" आह मेरे राजा, मसल पूरी तरह से रगड़ मुझे ऐसे ही, दबा पूरी भर भर दबा मुझे।

शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को पूरी अपने हाथो में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा तो शहनाज़ सिसकते हुए बोली:"

" आह मेरे बच्चे,तेरे हाथ तो मेरी गांड़ के लिए ही बने हैं, उफ्फ कितनी बड़ी हैं फिर भी पूरी समा गई।

शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को पूरी तरह से दबा दबा कर लाल कर दिया और शहनाज़ मस्ती से अपनी गांड़ मसलवाती रही। शादाब ने एक हाथ से शहनाज़ की गांड़ दबाते हुए दूसरे हाथ से खुद को नंगा करना शुरू कर दिया और उसके जिस्म पर अब सिर्फ अंडर वियर बचा हुआ था।

शहनाज़ की गांड़ को जी भर कर दबा कर लाल सुर्ख कर देने के बाद शादाब शहनाज़ की पीठ पर लेट गया तो शहनाज़ को उसके नंगे होने का एहसास हुआ और उसके मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शादाब उसकी गर्दन चाटते हुए अपना खड़ा हुआ लंड उसकी गांड़ में घुसाने लगा। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से गीली हो गई और कच्छी भीग चुकी थी। शादाब ने अब शहनाज़ की कमर को चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की सिसकियां निकलने लगी।

शादाब अपनी जीभ निकाल कर शहनाज़ की कमर को चाटने लगा तो शहनाज़ ने दोनो हाथो से बेड शीट को दबोच लिया और अपनी चूची और चूत बेड शीट पर रगड़ते हुए बोली:"

" आह मेरे राजा, उफ्फ ऐसे ही प्यार कर मुझे, बहुत प्यासी है तेरी अम्मी शादाब।

शादाब की जीभ जैसे ही शहनाज़ की ब्रा से टकराई तो दोनो मा बेटे एक साथ मस्ती से सिसक पड़ें। शादाब ने शहनाज़ की ब्रा के हुक को दांतो से भर लिया और खोलने लगा तो शहनाज़ का पूरा जिस्म मचलने लगा। शादाब ने ब्रा के हुक को खोल दिया तो शहनाज़ की कमर पूरी तरह से नंगी हो गई और शहनाज़ फिर से सिसक उठी। शादाब में अपनी जीभ से उसकी पूरी कमर को चाटना शुरू कर दिया तो शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने ने हल्की सी अपनी कमर उपर उठाई और अपने दोनो हाथ अपनी चुचियों के नीचे टिका दिए। जैसे ही उसकी कमर नीचे अाई तो चूचियां अपने आप दबती चली गई और शहनाज़ का मुंह मस्ती से खुल गया :"

" आह मेरे राजा, उफ्फ मेरा शादाब।

शादाब ने उसकी कमर को हल्का हल्का काटना शुरू किया तो शहनाज़ पागल हो उठी और एक हाथ से अपनी चूची को दबाते हुए दूसरे हाथ से चूत को पकड़ कर जोर से दबा दिया। शादाब ये सब देख कर आपे से बाहर हो गया और शहनाज़ को पलट दिया तो शर्म के मारे शहनाज़ ने दोनो हाथो से अपनी चुचियों को ढक लिया और आंखे बंद कर ली।

शादाब ने अपने हाथ शहनाज़ के हाथो पर टिका दिए और उसकी चूचियों को हल्का हल्का दबाने लगा। शादाब का लंड अब उसकी चूत पर गड़ गया था और शादाब हल्के हल्के धक्के मार रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश हो गई। शादाब ने उसके हाथो को हटाना चाहा तो शहनाज़ ने जोर से अपनी चूचियों को पकड़ लिया क्योंकि आज तक उसने खुद भी अपनी चूची और चूत को नहीं देखा था।

शादाब: " आह अम्मी क्यों तड़पा रही हो, उफ्फ हाथ हटा लो ना ?

शहनाज़ कांपते हुए:" आह राजा,मुझे शर्म आती हैं, आज तक मैंने खुद ही इन्हे नहीं देखा और ना ही कभी अपनी टांगो के बीच झांका हैं।

शादाब अपनी अम्मी की सुनकर मस्ती में अा गया और शहनाज़ का एक हाथ पकड़ कर नीचे की तरफ ले जाने लगा तो शहनाज़ ने दूसरे हाथ की कोहनी से अपनी दोनो चूचियों को छिपा लिया। शादाब ने शहनाज़ का हाथ अपने लंड पर टिका दिया तो शहनाज़ की चूत कुलबुलाने लगी। शादाब ने शहनाज़ के हाथ से धीरे धीरे अपने अंडर वियर को नीचे सरकाना शुरू कर दिया और जैसे ही अंडर वियर उतरा तो लंड अपने आप शहनाज़ के हाथ में अा गया। शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसने लंड को हाथ में थाम लिया और शादाब ने शहनाज़ का दूसरा हाथ उसकी चूचियों पर से हटा दिया। शहनाज़ के मुंह से एक जोरदार सिसकी निकल पड़ी और उसके शर्म और उत्तेजना के मारे अपनी आंखो को बंद कर लिया।

" आह मेरे शादाब, उफ्फ ये कर दिया बेटा, हाय मेरी चूची देख ली
तूने राजा।

शादाब ने अपनी नजरे पहली बार शहनाज की चुचियों पर टिका दी। एक दिन गोल गोल मोटी तनी हुई ठोस चूचियां, बिल्कुल किसी मोटे कश्मीरी सेब के आकार की। बीच में तने हुए निप्पल एक दम सीधे खड़े हुए।



शादाब ने अपने दोनो हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ की चूचियों पर रख दिए और उन्हें हल्के हल्के सहलाने लगा। शहनाज़ की चूचियां पूरी तरह से अकड़ी हुई थी और शादाब को निप्पल चुनौती दे रहे थे। शादाब ने अपनी मा की चूचियों को दोनो हाथो में भर कर जोर से दबा दिया तो शहनाज़ के मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

" आह शादाब, थोड़ा प्यार से मेरे राजा, उफ्फ दबा धीरे धीरे अच्छा लग रहा है।

शादाब तो पिछले छह दिन से तड़प रहा था शहनाज़ की चूचियों को दबाने के लिए इसलिए उसने पूरी जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की चूचियां में हल्का हल्का मीठा मीठा दर्द होने लगा और उसकी आह निकल गई और उसने जोर से अपने बेटे के लंड को दबा दिया तो शादाब मस्ती से भर उठा और जोर जोर से उसकी चूचियां दबाने लगा।



शहनाज के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगीं और वो अपनी चूचियां उपर की तरफ उछालने लगी जिससे शादाब मस्त हो गया और एक निप्पल को अपनी उंगलियों में भर कर मसल दिया तो शहनाज़ दर्द और मस्ती दे कराह उठी।

" आह मेरे शादाब, उखाड़ ही देगा क्या राजा मेरी चूचियां आज ?

शादाब :" आह अम्मी आपकी चूचियां कितनी सख्त हैं, उफ्फ कितना मजा आ रहा है आह मेरी शहनाज़ उफ्फ ।

शहनाज़ की चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी और रस जांघो तक बह रहा था। शहनाज़ ने शादाब के लंड को मसलना शुरू कर दिया तो शादाब ने झुक कर शहनाज़ की एक चूची के उभार को चाटना शुरू किया तो शहनाज़ का जिस्म मस्ती से हवा में उड़ने लगा और उसका एक हाथ अपने शादाब के सिर पर पहुंच हुआ और उसे उसे अपनी चूची पर दबाने लगी। शादाब ने अपना मुंह खोल कर उसकी एक चूची को मुंह में भर लिया तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसकी चूत ने दो बूंद रस और टपका दिया तो शहनाज़ से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने शादाब का हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर टिका दिया।चूत पर हाथ लगते ही दोनो मा बेटे आपे से बाहर हो गए और शादाब ने उसकी चूची को जोर जोर से चूसना शुरू किया तो शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद हो गई और बोली:"

"आह मेरे बेटे, चूस ले मेरी चूचियों को, उफ्फ कहां था तू अब तक ?



शादाब ने शहनाज़ के निप्पल को जोर जोर से चूसा तो शहनाज़ शादाब का लंड मसलने लगी और शादाब ने शहनाज़ की पेंटी को एक तरफ सरका दिया और उसकी टपकती हुई चूत को उंगली से सहलाने लगा। शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो अपनी टांगे पटकते हुए शादाब को अपने उपर खींचने लगी तो शादाब उसके बेट को चूमने लगा। शहनाज़ को गुदगुदी हो रही थी और चूत पूरी तरह से बह रही थी। शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से गरम हो गया था और वो अपने टांगे बुरी तरह से पटक रही थी, कभी मचल रही थी तो कभी जोर जोर से सिसक रही थी।

शादाब ने अब शहनाज़ की जांघो को चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ खुद ही जोर जोर से अपनी चूचियां दबाने लगी। कमरे में पूरी तरह से प्रकाश फैल गया था लेकिन शहनाज़ को अब कोई शर्म या हया नहीं रही थी। शादाब ने जैसे ही उसकी पेंटी को पकड़ कर खींचा तो शहनाज़ ने अपनी गांड़ उपर उठा दी और शादाब ने उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया तो शहनाज़ का बदन पूरी तरह से कांपने लगा और उसने अपनी टांगो को भींच लिया। शादाब ने धीरे से उसकी टांगो को खोल दिया तो शहनाज़ ने शर्म के मारे आंखे बंद कर ली । शादाब ने पहली बार शहनाज़ की चूत को देखा। गुलाबी रंगत लिए हुए दो होंठ एक दूसरे में बिल्कुल घुसे हुए और पूरी तरह से रस से भीगे हुए, एकदम छोटी सी चिकनी मासूम चूत, चूत का दाना पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हुआ। शादाब ने चूत पर उपर से नीचे एक उंगली फिरा दी तो शहनाज़ जोर से सिसक उठी। शादाब ने अब उसकी जांघो को चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ का जिस्म मस्ती से उछलने लगा। शादाब के होंठ जैसे ही उसकी चूत के पास पहुंच गए तो शहनाज़ ने उसका सिर थाम लिया और बोली:"

" आह शादाब, वहां नहीं बेटे, उफ्फ गंदी हैं वो।

शादाब ने अपने दोनो हाथों से शहनाज़ के हाथो को पकड़ लिया और जीभ निकाल कर उसकी चूत पर फेर दी।



चूत पर जीभ लगते ही शहनाज़ मस्ती से उछल पड़ी और सिसकते हुए बोली:'

" उफ्फ शादाब, वहां मत चूम बेटे, मुझे कुछ होता है, आह हाय मा हट जा बेटा।

शादाब ने शहनाज़ की टांगो को पूरी खोल दिया और उसकी चूत को चाटने लगा तो शहनाज के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी

" आह शादाब,उफ्फ कितना अच्छा लग रहा है, चूस ले तू अपनी मा की चूत, मेरी जान हैं तू

शादाब ने शहनाज़ के दोनो हाथ पकड़ लिए और उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ घुसा दी तो शहनाज़ बिस्तर पर पड़ी पड़ी उछलने लगी और मुंह उठा कर शादाब को देखने लगी। जैसे ही शादाब ने उसकी चूत के दाने को मुंह में भर कर चूसा तो शहनाज़ ने उसे अपनी टांगो के बीच में भींच लिया और अपनी गांड़ उठा उठा कर उसके मुंह पर मारने लगी


" आह मेरे शादाब, चूस अपनी अम्मी की चूत, आह कितना अच्छा है तू।

शादाब ने जैसे ही उंगली से उसकी चूत को सहलाया तो शहनाज़ पूरी तरह से तड़प उठी और अपनी पूरी ताकत लगाकर शादाब को अपने उपर खींच लिया। शादाब शहनाज़ के उपर छा गया और दोनो के नंगे जिस्म आपस में चिपक गए। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से रस से लबालब भरी हुई थी और शादाब शहनाज़ के होंठो को चूसने तो शहनाज़ ने अपने हाथ से पकड़ कर लंड को खुद ही अपनी चूत पर टिका दिया और शादाब को जोर से कस लिया। शादाब का मोटा मूसल अपनी चूत पर लगाकर शहनाज़ डर के मारे कांप उठी। शादाब ने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और रस से पूरी तरह से सुपाड़ा भीग गया।



लंड की रगड़ से शहनाज़ तड़प उठी और अपनी चूत खुद ही उठाने लगीं। शादाब ने एक बार शहनाज़ की आंखो में देखा तो शहनाज़ हल्का सा मुस्कुरा उठी और शर्म से अपनी आंखे बंद कर ली तो शादाब ने शहनाज़ के होंठो को मुंह में भर लिया और दोनो हाथो से उसकी चूचियां भरकर लंड का सुपाड़ा का धक्का शहनाज़ की चूत पर लगा दिया लेकिन लंड फिसल गया और उसकी जांघ से जा लगा। शहनाज़ को लगा कि कोई लोहे की रॉड उसकी जांघ से टकरा गई है। शहनाज़ सिसक उठी और उसने खुद लंड को चूत के छेद पर टिका दिया तो शादाब में एक जोर का धक्का मारा और मोटा तगड़ा सुपाड़ा अन्दर घुस गया



शहनाज़ के होंठो से एक दर्द और मस्ती भरी आह निकल पड़ी

" उफ्फ शादाब, आह कितना मोटा है ये, दर्द होता है। हाय शादाब, घुसा दे पूरा अंदर,

शादाब ने शहनाज़ के होंठो को मुंह में भर लिया और उसकी दोनो चूचियों को हाथो में थाम लिया और लंड का एक और जोरदार धक्का लगाया तो आधा लंड शहनाज़ की चूत में घुस गया। शहनाज़ दर्द से कराह उठी और शादाब से कसकर लिपट गई। शहनाज़ की आंखो से आंसू निकल पड़े जिन्हे शादाब ने अपनी जीभ से चाट लिया और शहनाज़ की आंखे खुल गई और अपने बेटे का प्यार देख कर दर्द में भी मुस्कुरा उठी और शादाब को देखने लगी। शादाब ने अब तक का सबसे जोरदार धक्का लगाया और शादाब का लंड शहनाज़ की चूत को फाड़ते हुए जड़ तक घुस गया। शहनाज़ को लगा जैसे उसके अंदर कोई मोटा मूसल घुसेड़ दिया गया हैं और वो दर्द से कराहती हुई शादाब से बुरी तरह से लिपट गई और उसके मुंह से निकली एक जोरदार चीनख़ पूरे घर में गूंज उठी।



" आह नहीं शादाब, मर गई मेरी अम्मी, हाय बहुत दर्द हो रहा है

लंड सीधे बच्चेदानी से जा टकराया और इस अदभुत एहसास को महसूस करते ही शहनाज़ के सब्र का बांध टूट गया और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया।

" आह बेटे, उफ्फ ये क्या हो गया, गई मेरी चूत, हाय अल्लाह,

शहनाज़ ने उपर उठते ही शादाब के होंठ चूम लिए और बोली:"

" आह मेरे राजा, बस घुसा लिया, अब हट जा मुझे बाथरूम जाना हैं शादाब।

शादाब ने शहनाज़ को पूरी तरह से कस लिया और लंड को पूरी ताकत से बाहर निकाला और फिर से एक ही धक्के में पूरा घुसा दिया। शहनाज़ दर्द और मस्ती से सिसक उठी और बोली:_

" ये क्या था मेरे राजा, बहुत अच्छा लगा, उफ्फ दर्द होता है अभी बहुत।

शादाब उसकी चूचियों को दबाते हुए:'

" आह अम्मी इसे चुदाई कहते हैं,कितनी टाइट और गर्म हैं आपकी चूत।

शहनाज़ ने शादाब की आंखो में देखते हुए बोली:"

" उफ्फ बेटे, तेरे पापा तो एक ही बार में घुसा कर मेरे अंदर माल छोड़ देते थे। मुझे क्या पता चुदाई इसे कहते हैं।

शादाब ने धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और शहनाज़ तो जैसे मस्ती से पागल सी हो गईं और शादाब के होंठो को चूसने लगी। सख्त लंड का सुपाड़ा चूत को पूरी तरह से रगड़ रहा था।
शहनाज़ मस्ती से अपने की आंखो में देखते हुए बोली:"

" आह राजा, बहुत मजा आ रहा हैं, ऐसा लग रहा है जैसे मूसल की तरह मसाला कूट रहा है तेरा लंड, कूट शादाब मेरी चूत का मसाला आह सआईआईआईआईआई उफ्फ

कुछ धक्कों के बाद चूत शहनाज़ के लंड से हिसाब से खुल गई तो अब दर्द तो जैसे खतम हो गया और बस मजा ही मजा रह गया। शहनाज़ ने नीचे से अपनी गांड़ उठानी शुरू कर दी और शादाब उसके होंठ चूसते हुए प्यार से धक्के लगाने लगा। दोनो अब एक दूसरे की आंखो में देखते हुए धक्के लगा रहे थे, जैसे ही शादाब लंड बाहर की तरफ खींचता तो शहनाज़ अपनी चूत उठा देती जिससे लंड अंडर घुस जाता और शहनाज़ का मुंह मजे से खुल जाता।

" आह शादाब, चुदाई में इतना मजा आता हैं आज पता चला, करता रह ऐसे ही हाय शादाब तेरा लंड कितना अच्छा है मेरे राजा,

शादाब ने लंड को पूरा बाहर निकाला तो शहनाज़ तड़प उठी और लंड को हाथ में पकड़ कर चूत में घुसाने लगी तो शादाब ने एक जोरदार धक्का लगाया और लंड जड़ तक घुसा दिया और बोला;_

" आह मेरी शहनाज़ ये लंड नहीं लोला हैं मेरी जान, हाय अम्मी तेरी चूत।

शहनाज़ इस धक्के से मस्ती से भर उठी और शादाब की तरफ देखते हुए बोली;_
" आह शादाब का लोला, मेरे बेटे का लोला घुस गया मेरी चूत में, मेरी चुदाई कर रहा है शादाब तू, चोद अपनी मां की चूत बेटा, आह



शादाब ऐसे ही प्यार से धक्क लगाता रहा और शहनाज़ की मस्ती भरी सिसकारियां पूरे घर में गूंज रही थी। शहनाज़ की चूत से अब फच फ़च की मधुर आवाज गूंज रही थी जो कमरे के माहौल को और गर्म कर रही थी। शादाब शहनाज की एक चूची को मुंह में भर कर चूस रहा था तो दूसरी को जोर जोर से भींच रहा था। शहनाज़ की टाइट चूत का असर लंड पर होने लगा तो शादाब ने पूरा लंड बाहर निकाला और एक तेज झटके के साथ शहनाज़ की चूत में घुसा दिया और लंड सीधे बच्चेदानी को जा लगा। शादाब ने कसकर शहनाज़ को भींच दिया मानो उसकी हड्डी ही तोड़ देना चाहता हो।

" आह शहनाज़ तेरी मा की चूत, एसआईआईआईआईए, गया मैं तो मेरी जान।

शादाब के लंड ने वीर्य की पिचकारी मारने शुरू कर दी और इसके साथ ही शहनाज़ ने भी अपनी चूत पूरी ताकत से लंड पर दबा दी और बेटे के चेहरे को बहुत बुरी तरह से चूमने लगी।

" आह शादाब, मर गई मेरी चूत, हाय उफ्फ

शहनाज़ की चूत ने एक बार फिर से अपना रस बहा दिया और वो शादाब से पूरी ताकत से लिपट गई। शादाब शहनाज़ की चुचियों पर गिर पड़ा और शहनाज़ ने उसकी कमर पर अपने दोनो हाथ लपेट दिए और उसे पूरी तरह से कस लिया।
 
शादाब ऐसे ही शहनाज़ के उपर पड़ा रहा और दोनो मा बेटे एक दूसरे की तरफ प्यार से देखते हुए अपने सांसे दुरुस्त कर रहे थे। शहनाज़ ने थोड़ा उपर की तरफ उठते हुए अपने बेटे के गाल को चूम लिया। शादाब के होंठो पर मुस्कान अा गई और बोला:"

" बहुत प्यार अा रहा हैं अपने बेटे पर आज आपको ?

शहनाज़ उसकी तरफ स्माइल करते हुए अपने हाथ उसकी कमर पर थोड़ा और जोर से कस देती है और बोली:"

"मेरा बेटे है ही प्यार करने लायक। लव यू शादाब आज मुझे लगता है कि मैं तेरे बिना कितनी अधूरी थी।

शहनाज़ के बाल उसके चेहरे पर अा गए तो शादाब उन्हें प्यार से हटाते हुए बोला:"

" ऐसा कर कर दिया आपके बेटे ने जो आप अपने आपको पूरा समझने लगी हो ?

शहनाज़ एक दम से शर्मा गई और अपने आपको शादाब की छाती में छुपा लिया। शादाब ने थोड़ा झुकते हुए शहनाज़ के कंधे चूम लिए और बोला:"

" बताओ मा मेरी जान शहनाज़, अब पूरी नंगी मेरी बांहों में लेती हो और फिर भी शर्मा रही हो ?

शहनाज़ को अपनी हालत का एहसास हुआ और वो शादाब की कमर में हल्का हल्का मारने लगी और बोली:"

" उफ्फ कितना तंग करता हैं तुझे मुझे, अब तुझे कैसे बताऊं मेरे राजा?

शादाब :" बस प्यार से बता दो मेरी जान, अब हमारे बीच में कोई पर्दा नहीं रहना चाहिए।

शहनाज़:" लेकिन बेटा मुझे शर्म आती हैं, अच्छा चल पहले मुझे उठने दे !

शहनाज़ उसे अपने ऊपर से हटाने लगती हैं तो शादाब कसकर उसके कंधे थाम लेता हैं और बोला'"
" ऐसे कैसे जाने दू मेरी जान, अभी तो हमारा प्रेम मिलन शुरू हुआ हैं, अभी तो रात बाकी हैं।

शहनाज़ फिर से शर्मा जाती हैं तो शादाब बोला:"

" अम्मी प्लीज़ बताओ ना आप मुझे, आप कैसे पूरी हो गई ?

इतना कहकर शादाब शहनाज़ की कान की लौ को अपनी जीभ से सहलाने लगता हैं तो शहनाज़ फिर से अपने होश खोने लगती है, वो अपने बेटे के नीचे एक बार फिर से मचलना शुरू कर देती हैं तो शादाब जैसे ही उसकी कान की लौ को हल्का सा दांतो से काटता हैं तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल गई

" आह्ह शादाब, उफ्फ मत कर बेटा, मुझे कुछ होता है।

शादाब:" आहह मेरी जान, अभी तो बहुत कुछ होगा देखती जाओ तुम !

शहनाज़ के जिस्म में फिर से उत्तेजना छाने लगी और शहनाज़ की चूचियों के निप्पल फिर से कड़क होने लगे जिनका एहसास शादाब को अपनी छाती पर होने लगा तो उसने अपनी छाती से ही शहनाज़ की चूचियों को रगड़ना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की आंखे खुल गई और लाल सुर्ख होकर दहकने लगे और सांसे भारी होने से चूची उछलने लगी मानो खुद ही अपने आपको मसलवाना चाहती हो।

शादाब शहनाज़ की चूचियों को जोर से रगड़ते हुए बोला:"

" आह अम्मी बताओ ना कैसे पूरी हो गई आप ?

शहनाज़ के उपर अब जिस्म का बुखार फिर से चढ़ गया था इसलिए वो मचलती हुई बोली:"

" आह शादाब आज जो सुख तूने दिया तो मुझे कभी महसूस नहीं हुआ राजा।

शादाब के लंड में भी तनाव आने लगा तो वो शहनाज़ की जांघो में घुस गया जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मस्त हो गई और शादाब की कमर सहलाने लगी तो शादाब बोला:"

" आह अम्मी ऐसा कौन सा सुख दे दिया आपके बेटे ने आपको जो पहले नहीं मिला था?

शहनाज़ की चूत फिर से भीगने लगी और वो अपने पैरो को अपने बेटे के पैरो से रगड़ने लगी और आंखे बंद करके बोली:"

" शादाब मूसल तो मेरी औखली में पहले भी घुसा था, लेकिन मसाला आज पहली बार तूने ही कूटा हैं मेरे राजा!

शहनाज़ ने अपनी जांघो को थोड़ा सा खोल दिया तो लंड चूत पर दबाव बनाने लगा तो शहनाज़ तड़प उठी और अपनी चूत हिलाने लगी तो शादाब ने शहनाज़ के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और दोनो मा बेटे एक दूसरे को होठ चूसने लगे।शहनाज़ किसी दूसरी ही दुनिया में मस्ती कर रही थी और उसने खुद ही अपनी जीभ शादाब के मुंह में घुसा दी और चूसने लगी।


शादाब भी अपनी अम्मी का साथ देने लगा और एक लंबे किस के बाद दोनो के होंठ अलग हुए तो लंड पूरी तरह से अकड़ कर मूसल बन चुका था और चूत फिर से पूरी भीगकर उसका स्वागत करने को तैयार थी।

दोनो मा बेटे के दूसरे की आंखो में देख रहे थे और शादाब लंड को चूत पर रगड़ रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से तड़प रही थी और लंड लेने के लिए चूत उपर उठा रही थी लेकिन शादाब उसे तड़पा रहा था। शहनाज से बर्दास्त नहीं हुआ और बोली:"

" आह शादाब मुझे प्यार कर बेटा, बहुत प्यासी हैं तेरी मा?

शादाब लंड का थोड़ा दबाव बढ़ाते हुए:" अम्मी प्यार कर रहा हूं, तभी तो आप इतने करीब हो मेरे शहनाज़।

इतना कहकर शादाब उसके गाल चूम लेता हैं और लंड को चूत की कलिट पर जोर से रगड़ा देता है तो शहनाज़ उससे पागल सी होकर लिपट गई और सिसकते हुए बोली:

" आह राजा किस वाला नहीं, नीचे वाला, मूसल दे दे मुझे

शादाब शहनाज़ को पूरी तरह से खोलना चाहता था ताकि आराम से दोनो मा बेटे मस्ती कर सके इसलिए उसने एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत पर रख दिया और सहलाते हुए बोला:"

" आह अम्मी, मूसल तो आपके पास ही पास हैं, देखो ना आपकी टांगो में घुसा हुआ हैं।

इतना कहकर उसने शहनाज़ की चूत को लंड के साथ साथ उंगली से सहलाना शुरु कर दिया और एक उंगली थोड़ी सी अंदर घुसा दी तो शहनाज़ ने खुद ही अपना हाथ लंड पर रख दिया और बोली:"

" आह उंगली नहीं राजा, ये मूसल घुसा दे मेरे अंदर ।

शादाब :" आह अम्मी मूसल नहीं इसे लोला कहते है मेरी शहनाज़ ?

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ की गर्दन को चाटना शुरू कर दिया तो शहनाज़ मस्ती से बिफर पड़ी और बोली:"

" आह मेरे शादाब, अपनी अम्मी की चूत में अपना लोला घुसेड़ दे मेरे राजा, चोद ले मुझे!!

इतना कहकर शहनाज़ ने शादाब के लंड को दबा दिया तो शादाब ने लंड का एक धक्का लगाया और सुपाड़ा फिर से शहनाज़ चूत में घुस गया और दर्द के मारे शहनाज़ फिर से तड़पते हुए बोली:

" आह शादाब तेरा लोला, उफ्फ घुसा कर चोद मुझे राजा।

शादाब अपने होंठ शहनाज़ के होंठो पर रख दिए और जोर से धक्का मारा तो आधा लंड अंदर घुस गया और शहनाज़ की चुदाई से लाल हो चुकी चूत में पहले से ज्यादा दर्द हुआ लेकिन मजा भरपूर था इसलिए वो सिसक उठी :"

" आह शादाब, उफ्फ कितना मोटा हैं तेरा लोला, उफ्फ कैसे फैला रहा हैं मेरी चूत, हाय मा उफ्फ दर्द होता हैं

शादाब :" आह अम्मी आपकी चूत बहुत टाइट हैं, बड़ी मुश्किल से घुसता हैं

शहनाज़ उसका मुंह चूमते हुए:"

" चुदाई नहीं हुई मेरी शादाब कभी, आज तुमने ही चोदा हैं मुझे राजा, उफ्फ मार मेरी चूत शादाब,

शादाब ने एक बार लंड को बाहर निकाला और पूरी ताकत से जड़ तक अन्दर घुसा दिया तो शहनाज़ इस हमले से तड़प उठी और सिसकते हुए बोली:"

" आह मा री, मार देगा क्या मुझे ? थोड़ा प्यार से मेरे राजा, उफ्फ तेरी ही चूत ये तो !! पूरा ही घुसा दिया

शादाब का लंड पूरा घुसते ही शहनाज़ दर्द से भर उठी और शादाब ने उपर उठते हुए शहनाज़ की एक चूची को मुंह में भर लिया तो शहनाज़ मस्ती से भर उठी और शादाब का सिर सहलाने लगी तो शादाब ने पूरा मुंह खोलते हुए उसकी चूची को आधे से ज्यादा मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा तो शहनाज़ मजे से पागल हो गई और आनह भरते हुए बोली:"

" आह शादाब, मेरा बेटा, मेरा राजा, आह

शादाब ने अपने लंड को बाहर निकाला तो वो शहनाज़ की चूत की दीवारों को बुरी तरह से रगड़ते हुए बाहर निकल आया तो शहनाज़ की चूत की फांके लंड के साथ ही खींची चली गई तो शहनाज़ इस एहसास से पूरी तरह से चुदासी हो उठी और बोली:"

"आह शादाब देख कैसे फस रहा है तेरा लोला हाय जैसे मूसल फसता था औखली में!

शादाब शहनाज़ की सिसकी सुनकर जोश में आ गया और एक ही धक्के में पूरा लंड घुसा दिया तो दर्द और मस्ती से शहनाज़ की आंखो के आगे लाल पीले तारे नाच उठे और उसका मुंह मस्ती से अपने आप खुल गया:"

" हाय शादाब, ये लोला तो जैसे मेरी चूत के लिए ही बना हैं राजा, देख ना कैसे अंदर तक पूरा घुस रहा है हाय चोद अब मुझे!!

शादाब शहनाज़ की एक चूची को जोर से मसल दिया तो शहनाज़ दर्द से कराह उठी और शादाब की आंखो में देखने लगी तो शादाब ने लंड को बाहर निकाला और फिर से पूरी ताकत से ठोक दिया तो शहनाज़ मस्ती से उछल पड़ी और बोली:"
" आह शादाब, ऐसे ही बस, बहुत अच्छी हैं चुदाई, उफ्फ हाय मा

शादाब शहनाज़ को ऐसे ही प्यार से चोदने लगा। धक्का जोर से मार रहा था लेकिन धक्कों की स्पीड बहुत हल्की थी जिससे लंड हर बार चूत को पूरा रगड़ रहा था और दोनो में बेटे इस अद्भुत एहसास को पूरी तरह से महसूस कर रहे थे। जैसे ही अंदर अंदर घुसता तो शहनाज़ का हर धक्के पर अपने आप मूह खुल जाता और सिसक पड़ती लेकिन जैसे ही लंड बाहर निकलता तो उसके हाथ शादाब की कमर पर जोर से कस जाते और वो उसे जोर से अपनी तरफ खींचती और लंड फिर से घुस जाता। शहनाज़ की पायल और चूड़ियां दोनो धक्कों के साथ बहुत धीरे धीरे खनक रही थी जिनकी मधुर आवाज दोनो को और जोश दिला रही थी। दोनो के होंठ आपस में जुड़े हुए और बहुत प्यार से एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे। शादाब शहनाज़ के कंधे सहला रहा था और मस्ती में शहनाज़ की टांगे अपने आप उछल रही थी।



कमरे में दोनो की मादक सिसकियां गूंज रही थी जिससे दोनो और जोश में एक दूसरे से लिपट रहे थे। शहनाज़ की नजर दूध के ग्लास पर पड़ी तो उसके होंठो पाए स्माइल अा गई और उसने शादाब को इशारा किया तो दोनो मा बेटे मुस्करा उठे। दूध तो ऐसे ही रखा रह गया था इसलिए शहनाज़ ने दूध की तरफ हाथ बढ़ाया तो शादाब ने उसे अपनी बांहों में उठा और बेड पर बैठ गया। लंड अभी भी चूत के अंदर ही घुसा उठा था। शहनाज़ ने दूध को शादाब ने होंठो से लगा दिया तो शादाब ने एक घूंट भर लिया और ग्लास शहनाज़ की तरफ बढ़ा दिया तो शहनाज़ ने ग्लास को बीच में ही रोक दिया और अपने होंठ शादाब के होंठो से चिपका दिए और दोनो मा बेटे दूध पीने लगे। जल्दी ही एक एक घूंट के बाद ग्लास खाली हो गया तो दोनो के हाथ एक दूसरे की कमर पर कस गए। शादाब ने को बाहर की तरफ निकाला और फिर से शहनाज़ की चूत में घुसा दिया तो शहनाज़ की आंखे फिर से मस्ती से बने बंद हो गई। शहनाज़ अपने आप शादाब की गोद में धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी और लंड अपने आप अंदर बाहर होने लगा। दोनो के दूसरे के मुंह को चूम रहे थे चाट रहे थे और दोनो के हाथ एक दूसरे की कमर को दबा रहे थे, मसल रहे थे सहला रहे थे।



शहनाज़ को ज्यादा मजा अा रहा रहा था और दर्द बिलकुल भी नहीं था क्योंकि लंड पुरा बाहर नहीं अा रहा था जिससे शहनाज़ को सिर्फ मजा ही मजा आ रहा था। दोनो को कोई जल्दी नहीं, बिल्कुल आराम से प्यार से धक्के लग रहे थे, बस इस चुदाई में अब मजा ही मजा था कोई दर्द नहीं कोई कराह नहीं बस शहनाज़ के होंठो से मस्ती भरी सिसकारियां गूंज रही थी।

शहनाज़ ने अगले धक्के पर गांड़ थोड़ा ज्यादा उछाल दी तो लंड चूत से बाहर निकल गया लेकिन शादाब ने नीचे से अपने लंड का धक्का लगाया और फिर से पूरा लंड शहनाज़ की चूत में घुसा दिया। लंड के पत्थर से टाइट सुपाड़े ने जैसे ही चूत की फांकों को रगड़ा शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी और वो सिसकते हुए बोली'"

" आह शादाब, बहुत अच्छा लगा रहा है, एसएसआईआईआईआई उफ्फ ये चुदाई, रोज ऐसे ही चोदना अब मुझे।

शादाब अपने लंड को अंदर घुसते हुए:" आह अम्मी, उफ्फ मेरी शहनाज़, हाय तेरी चूत कितनी मस्त एयू गर्म है।

शहनाज़ की चूत पूरी तरह से गीली थी और झड़ने के कगार पर पहुंच गई तो उसने कस कर शादाब को पकड़ लिया और जैसे ही लंड अंदर घुसा तो शहनाज़ की चूत ने अपना रस बहा दिया और सिसक उठी:"

" आह शादाब, उफ्फ मर गई तेरी अम्मी, हाय ये मजा, उफ्फ मेरा राजा बेटा।

शादाब भी शहनाज़ की चूत के रस की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और अगले धक्के पर उसने शहनाज़ के कंधो को जोर से नीचे दबा दिया जिससे लंड शहनाज़ की बच्चेदानी में जा लगा और शहनाज़ पागल सी होकर उससे लिपट गई और अपनी चूत पूरी तरह से लंड पर कस दी और शादाब के होंठो से भी आह निकल पड़ी और उसके लंड ने फिर से शहनाज़ की चूत को भरना शुरू कर दिया ।

लंड की पिचकारी जैसे ही चूत में पड़ी तो शहनाज़ की जलती हुई चूत पर मानो ठंडे बादल से बरसने लगे और उसने शादाब को पूरी तरह से कस लिया। दोनो मा बेटे पूरी ताकत से एक दूसरे से चिपके रहे और लंड शहनाज़ की चूत को भरता रहा। दोनो मा बेटे सब कुछ भूल गए थे और इस अद्भुत एहसास से दोनो की ही आंखे बंद हो गई थी।

धीरे धीरे लंड की पिचकारियां बंद हुई तो दोनो जैसे मस्ती के आसमान से धरातल पर अा गिरे और एक दूसरे की आंखो में देखते हुए मुस्करा उठे।

शादाब:" अम्मी शायद ये दुनिया की पहली सुहागरात होगी जहां चुदाई के बाद दूध पिया गया है।

शहनाज़ शर्मा गई और उससे कसकर लिपट गई और प्यार से बोली:"

"हान मेरे राजा क्योंकि पहली बार ही किसी मा ने अपने बेटे से सुहागरात मनाई हैं।

इतना कहकर शहनाज़ ने मुस्कुराकर शादाब की तरफ देखा तो शादाब ने भावहीन चेहरे के साथ शहनाज़ को देखा तो शहनाज़ ने उसके दोनो कान पकड़ कर खींच दिए और बोली:"
" कमीना कहीं का मुझे परेशान करता हैं।

शहनाज़ की इस अदा पर शादाब पूरी तरह से निसार हो गया और जोर जोर से हंस पड़ा तो शहनाज़ भी हंस पड़ी और दोनो ने एक दूसरे को कस लिया।
 
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