S
StoryPublisher
Guest
अब मैं जान गयी थी कि वो हम दोनों में से किसी को छोड़ने वाला नहीं था. कुछ देर के बाद फिर नेहा मेरे लिए खाना लेकर आई.
वो बोली- मां, ये खाना खा लो. आप काफी थक गयी होंगी.
नेहा की ओर देखा तो मुझे अच्छा लगा. मगर मैं ये नहीं सोच पा रही थी कि ये मेरी बेटी का हक अदा कर रही है या मेरी बहू का!
मैंने नेहा से कहा- मुझे भूख नहीं है. तुम ही खा लो.
वो मेरे पास बैठ गयी और मुझे अपने गले से लगा कर बोली- आप अभी भी नाराज हो क्या?
मैंने कहा- नहीं. मुझे भूख नहीं है.
वो बोली- ये क्या बात हुई, थोड़ा सा खा लो.
नेहा मुझे जबरदस्ती खिलाने लगी लेकिन मेरा मन नहीं था. मैंने थोड़ा सा खाया और फिर मना कर दिया.
फिर वो बोली- इसमें ज्यादा सोचने वाली बात नहीं है. ऐसा तो बहुत से लोग करते हैं. कोई अपनी मां के साथ करता है, कोई बहन के साथ करता है, कोई मौसी के साथ करता है और कोई चाची के साथ करता है.
उसने फिर अपने मोबाइल में मुझे हिन्दी सेक्स कहानी साइट खोल कर दिखाई. उसमें उसने मां बेटे की चुदाई सर्च किया और उसमें बहुत सारी कहानियां निकल कर आईं.
नेहा ने अपना मोबाइल मुझे थमा दिया और बोली- इसमें आप पढ़ कर देख लो मम्मी. अब पहले जैसा कुछ भी नहीं रहा है. अब बहुत कुछ बदल गया है. ये सब कहानियां नहीं हैं, ऐसा अब रियल जिन्दगी में भी होने लगा है.
जो नेहा मुझे दिखाना चाह रही थी वह सब मैं पहले ही देख चुकी थी इसलिए मैंने उसके मोबाइल में कुछ नहीं किया और मैं फिर ऊपर चली गयी.
तभी नेहा ने आवाज दी- मां, भैया ने आपके लिए फोन किया है, आपसे बात करना चाहते हैं. वो कह रहे हैं कि ये मोबाइल मां को दे दो, अब ये उनके पास ही रहेगा.
मैंने उसकी कॉल को रिसीव नहीं किया. मगर नेहा ने फोन को हैंड फ्री कर दिया और मेरे मुंह के सामने कर दिया.
उधर से करण बोला- मां, मैं तुम्हारे लिये ब्रा और पैंटी खरीद रहा हूं. यह बताओ कितने नम्बर की होती है. मुझे आपका साइज नहीं मालूम है.
करण के सवाल का मैंने कोई जवाब नहीं दिया.
फिर नेहा बोली- बता दो मां, अब कैसा शर्माना?
मगर मैंने कुछ नहीं कहा.
तब नेहा बोल पड़ी- भैया, 36 का ले आना. मुझे पता है मां की ब्रा-पैंटी का साइज.
शाम को करण घर पर आया. उसने सीधा आकर नेहा को किस किया और मेरे पास आकर मेरी चूचियों को दबाने लगा. वो ब्रा और पैंटी के 4 सेट लेकर आया था और 2 नाइटी भी लाया था.
खाना खाने के बाद उसने अपने हाथ से मुझे भी जबरदस्ती खिला दिया. उसके बाद उसने मुंह हाथ धो लिया और मुझे अपनी गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया. मैं उसका विरोध करने के लिए खड़ी होती इससे पहले ही करण ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिये.
उसने मुझ नंगी कर लिया. फिर उसने ब्रा और पैंटी निकाली और मुझे पहना दिया. मुझे भी वो अच्छी लगी लेकिन बच्चों के सामने मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी.
फिर करण ने नेहा को दिखाते हुए कहा- देख नेहा, कितनी सुन्दर लग रही है मां के ऊपर.
नेहा बोली- अरे भैया, आखिर मां किसकी है!
उन दोनों की इस बात पर मैं मुस्करा दी. उसने मेरी चूचियों को ब्रा के ऊपर से दबा दिया और फिर नेहा से मोबाइल देने को कहा.
फिर करण ने नेहा के हाथ से मोबाइल ले लिया.
वो बोला- मां, आज से ये फोन तुम्हारे पास ही रहेगा.
मैं समझ नहीं पाई कि करण मुझे फोन क्यों दे रहा था.
मैं सभी दोस्तो से कहना चाहती हूं कि शुरू में मुझे अपने बेटे और बेटी का सेक्स पसंद नहीं आया था लेकिन जब उसने मेरी चूत को चोदा तो मुझे इतना बुरा भी नहीं लगा. मेरे अंदर की औरत की जो भावनाएं नीचे कहीं दब गयी थीं करण ने उनको फिर से जगा दिया था.
उस दिन करण मेरे लिए ब्रा-पैंटी के 4 सेट और 2 नाइटी लेकर आया था. उसने मुझे अपनी बहन यानि कि मेरी बेटी के सामने ही नंगी कर दिया. उसने मुझे पैंटी पहना कर और ब्रा भी पहना दी.
वो बोली- मां, ये खाना खा लो. आप काफी थक गयी होंगी.
नेहा की ओर देखा तो मुझे अच्छा लगा. मगर मैं ये नहीं सोच पा रही थी कि ये मेरी बेटी का हक अदा कर रही है या मेरी बहू का!
मैंने नेहा से कहा- मुझे भूख नहीं है. तुम ही खा लो.
वो मेरे पास बैठ गयी और मुझे अपने गले से लगा कर बोली- आप अभी भी नाराज हो क्या?
मैंने कहा- नहीं. मुझे भूख नहीं है.
वो बोली- ये क्या बात हुई, थोड़ा सा खा लो.
नेहा मुझे जबरदस्ती खिलाने लगी लेकिन मेरा मन नहीं था. मैंने थोड़ा सा खाया और फिर मना कर दिया.
फिर वो बोली- इसमें ज्यादा सोचने वाली बात नहीं है. ऐसा तो बहुत से लोग करते हैं. कोई अपनी मां के साथ करता है, कोई बहन के साथ करता है, कोई मौसी के साथ करता है और कोई चाची के साथ करता है.
उसने फिर अपने मोबाइल में मुझे हिन्दी सेक्स कहानी साइट खोल कर दिखाई. उसमें उसने मां बेटे की चुदाई सर्च किया और उसमें बहुत सारी कहानियां निकल कर आईं.
नेहा ने अपना मोबाइल मुझे थमा दिया और बोली- इसमें आप पढ़ कर देख लो मम्मी. अब पहले जैसा कुछ भी नहीं रहा है. अब बहुत कुछ बदल गया है. ये सब कहानियां नहीं हैं, ऐसा अब रियल जिन्दगी में भी होने लगा है.
जो नेहा मुझे दिखाना चाह रही थी वह सब मैं पहले ही देख चुकी थी इसलिए मैंने उसके मोबाइल में कुछ नहीं किया और मैं फिर ऊपर चली गयी.
तभी नेहा ने आवाज दी- मां, भैया ने आपके लिए फोन किया है, आपसे बात करना चाहते हैं. वो कह रहे हैं कि ये मोबाइल मां को दे दो, अब ये उनके पास ही रहेगा.
मैंने उसकी कॉल को रिसीव नहीं किया. मगर नेहा ने फोन को हैंड फ्री कर दिया और मेरे मुंह के सामने कर दिया.
उधर से करण बोला- मां, मैं तुम्हारे लिये ब्रा और पैंटी खरीद रहा हूं. यह बताओ कितने नम्बर की होती है. मुझे आपका साइज नहीं मालूम है.
करण के सवाल का मैंने कोई जवाब नहीं दिया.
फिर नेहा बोली- बता दो मां, अब कैसा शर्माना?
मगर मैंने कुछ नहीं कहा.
तब नेहा बोल पड़ी- भैया, 36 का ले आना. मुझे पता है मां की ब्रा-पैंटी का साइज.
शाम को करण घर पर आया. उसने सीधा आकर नेहा को किस किया और मेरे पास आकर मेरी चूचियों को दबाने लगा. वो ब्रा और पैंटी के 4 सेट लेकर आया था और 2 नाइटी भी लाया था.
खाना खाने के बाद उसने अपने हाथ से मुझे भी जबरदस्ती खिला दिया. उसके बाद उसने मुंह हाथ धो लिया और मुझे अपनी गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया. मैं उसका विरोध करने के लिए खड़ी होती इससे पहले ही करण ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिये.
उसने मुझ नंगी कर लिया. फिर उसने ब्रा और पैंटी निकाली और मुझे पहना दिया. मुझे भी वो अच्छी लगी लेकिन बच्चों के सामने मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी.
फिर करण ने नेहा को दिखाते हुए कहा- देख नेहा, कितनी सुन्दर लग रही है मां के ऊपर.
नेहा बोली- अरे भैया, आखिर मां किसकी है!
उन दोनों की इस बात पर मैं मुस्करा दी. उसने मेरी चूचियों को ब्रा के ऊपर से दबा दिया और फिर नेहा से मोबाइल देने को कहा.
फिर करण ने नेहा के हाथ से मोबाइल ले लिया.
वो बोला- मां, आज से ये फोन तुम्हारे पास ही रहेगा.
मैं समझ नहीं पाई कि करण मुझे फोन क्यों दे रहा था.
मैं सभी दोस्तो से कहना चाहती हूं कि शुरू में मुझे अपने बेटे और बेटी का सेक्स पसंद नहीं आया था लेकिन जब उसने मेरी चूत को चोदा तो मुझे इतना बुरा भी नहीं लगा. मेरे अंदर की औरत की जो भावनाएं नीचे कहीं दब गयी थीं करण ने उनको फिर से जगा दिया था.
उस दिन करण मेरे लिए ब्रा-पैंटी के 4 सेट और 2 नाइटी लेकर आया था. उसने मुझे अपनी बहन यानि कि मेरी बेटी के सामने ही नंगी कर दिया. उसने मुझे पैंटी पहना कर और ब्रा भी पहना दी.