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Incest मैं और मेरे बेटा बेटी complete

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अब मैं जान गयी थी कि वो हम दोनों में से किसी को छोड़ने वाला नहीं था. कुछ देर के बाद फिर नेहा मेरे लिए खाना लेकर आई.

वो बोली- मां, ये खाना खा लो. आप काफी थक गयी होंगी.

नेहा की ओर देखा तो मुझे अच्छा लगा. मगर मैं ये नहीं सोच पा रही थी कि ये मेरी बेटी का हक अदा कर रही है या मेरी बहू का!

मैंने नेहा से कहा- मुझे भूख नहीं है. तुम ही खा लो.

वो मेरे पास बैठ गयी और मुझे अपने गले से लगा कर बोली- आप अभी भी नाराज हो क्या?

मैंने कहा- नहीं. मुझे भूख नहीं है.

वो बोली- ये क्या बात हुई, थोड़ा सा खा लो.

नेहा मुझे जबरदस्ती खिलाने लगी लेकिन मेरा मन नहीं था. मैंने थोड़ा सा खाया और फिर मना कर दिया.

फिर वो बोली- इसमें ज्यादा सोचने वाली बात नहीं है. ऐसा तो बहुत से लोग करते हैं. कोई अपनी मां के साथ करता है, कोई बहन के साथ करता है, कोई मौसी के साथ करता है और कोई चाची के साथ करता है.

उसने फिर अपने मोबाइल में मुझे हिन्दी सेक्स कहानी साइट खोल कर दिखाई. उसमें उसने मां बेटे की चुदाई सर्च किया और उसमें बहुत सारी कहानियां निकल कर आईं.

नेहा ने अपना मोबाइल मुझे थमा दिया और बोली- इसमें आप पढ़ कर देख लो मम्मी. अब पहले जैसा कुछ भी नहीं रहा है. अब बहुत कुछ बदल गया है. ये सब कहानियां नहीं हैं, ऐसा अब रियल जिन्दगी में भी होने लगा है.

जो नेहा मुझे दिखाना चाह रही थी वह सब मैं पहले ही देख चुकी थी इसलिए मैंने उसके मोबाइल में कुछ नहीं किया और मैं फिर ऊपर चली गयी.

तभी नेहा ने आवाज दी- मां, भैया ने आपके लिए फोन किया है, आपसे बात करना चाहते हैं. वो कह रहे हैं कि ये मोबाइल मां को दे दो, अब ये उनके पास ही रहेगा.

मैंने उसकी कॉल को रिसीव नहीं किया. मगर नेहा ने फोन को हैंड फ्री कर दिया और मेरे मुंह के सामने कर दिया.

उधर से करण बोला- मां, मैं तुम्हारे लिये ब्रा और पैंटी खरीद रहा हूं. यह बताओ कितने नम्बर की होती है. मुझे आपका साइज नहीं मालूम है.

करण के सवाल का मैंने कोई जवाब नहीं दिया.

फिर नेहा बोली- बता दो मां, अब कैसा शर्माना?

मगर मैंने कुछ नहीं कहा.

तब नेहा बोल पड़ी- भैया, 36 का ले आना. मुझे पता है मां की ब्रा-पैंटी का साइज.

शाम को करण घर पर आया. उसने सीधा आकर नेहा को किस किया और मेरे पास आकर मेरी चूचियों को दबाने लगा. वो ब्रा और पैंटी के 4 सेट लेकर आया था और 2 नाइटी भी लाया था.

खाना खाने के बाद उसने अपने हाथ से मुझे भी जबरदस्ती खिला दिया. उसके बाद उसने मुंह हाथ धो लिया और मुझे अपनी गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया. मैं उसका विरोध करने के लिए खड़ी होती इससे पहले ही करण ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिये.

उसने मुझ नंगी कर लिया. फिर उसने ब्रा और पैंटी निकाली और मुझे पहना दिया. मुझे भी वो अच्छी लगी लेकिन बच्चों के सामने मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी.

फिर करण ने नेहा को दिखाते हुए कहा- देख नेहा, कितनी सुन्दर लग रही है मां के ऊपर.

नेहा बोली- अरे भैया, आखिर मां किसकी है!

उन दोनों की इस बात पर मैं मुस्करा दी. उसने मेरी चूचियों को ब्रा के ऊपर से दबा दिया और फिर नेहा से मोबाइल देने को कहा.

फिर करण ने नेहा के हाथ से मोबाइल ले लिया.

वो बोला- मां, आज से ये फोन तुम्हारे पास ही रहेगा.

मैं समझ नहीं पाई कि करण मुझे फोन क्यों दे रहा था.

मैं सभी दोस्तो से कहना चाहती हूं कि शुरू में मुझे अपने बेटे और बेटी का सेक्स पसंद नहीं आया था लेकिन जब उसने मेरी चूत को चोदा तो मुझे इतना बुरा भी नहीं लगा. मेरे अंदर की औरत की जो भावनाएं नीचे कहीं दब गयी थीं करण ने उनको फिर से जगा दिया था.

उस दिन करण मेरे लिए ब्रा-पैंटी के 4 सेट और 2 नाइटी लेकर आया था. उसने मुझे अपनी बहन यानि कि मेरी बेटी के सामने ही नंगी कर दिया. उसने मुझे पैंटी पहना कर और ब्रा भी पहना दी.
 
उसके बाद उसने मेरे हाथ में फोन थमाते हुए कहा- आज से यह फोन आपके पास ही रहेगा.

फोन का तो मेरे पास कोई काम ही नहीं था. उम्र के इस मोड़ पर मुझे फोन की जरूरत नहीं महसूस होती थी. मेरे पास फोन में करने के लिए ऐसा कुछ था ही नहीं जो मेरे काम आ सके. न कोई बात करने वाला था.

फिर रात को खाना होने के बाद सब लोग सोने लगे. करण ने उस रात मुझे नंगी कर दिया. उसने कहा था कि आज वो मेरी चूत के बाल साफ करेगा.

मुझे नंगी करने के बाद वो मेरी चूत पर बाल साफ करने की क्रीम लगाने लगा. मैं थोड़ा बहुत विरोध कर रही थी लेकिन नेहा ने मेरे पैरों को पकड़ रखा था और फैला रखा था.

आप सोच कर देखिये कि एक मां अपने बच्चों के सामने नंगी बैठी हुई है जिसके पैरों को उसकी बेटी ने फैला रखा है और उसका बेटा अपनी मां की चूत पर बाल साफ करने वाली क्रीम लगा रहा है!

फिर करण ने मेरी चूत के बालों को साफ कर दिया. मेरी चूत को क्लीन शेव करने के बाद करण ने नेहा से कहा- बहन तुम अब मां की चूत के रस का सेवन करो और मैं मां के दूध का सेवन करूंगा.

करण ने मेरी चूचियों को अपने हाथों में कस कर पकड़ लिया और उनको बॉल की तरह दबा कर देखने लगा.

फिर वो बोला- मम्मी, अब आप अपनी टांगों को चौड़ी करके सही पोजीशन में बैठ जाओ.

मैं कुछ नहीं बोली.

फिर से करण ने कहा- अब मान भी जाओ मम्मी, अब क्या बचा है?

मैं अभी भी चुप ही रही.

फिर नेहा ने कहा- भैया, आप अम्मी को अकेले नहीं चोद सकते हो क्या?

वो बोला- नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. मां अब हम दोनों के साथ में ही चुदा करेगी.

नेहा ने मेरे पैरों को फैला दिया और करण ने मेरी चूत में मुंह दे दिया और मेरी चूत को चूसने लगा. मैं भी गर्म होने लगी. करण ने पूरी जीभ अंदर डाल दी और मैंने करण के सिर को अपनी चूत पर दबाना शुरू कर दिया.

कुछ ही देर में मेरी चूत का पानी निकल गया.

करण ने नेहा को दिखाते हुए कहा- देख नेहा, मां की चूत का पानी निकल रहा है.

नेहा बोली- चाट लो भैया.

करण बोला- तू क्या कर रही है, चल आकर अब मां के बूब्स को दबा.

नेहा बोली- वाह भैया, इससे अच्छी बात क्या हो सकती है कि मां की चूचियों को दबाने का मौका मिला है मुझे.

फिर करण ने मेरी चूत में अपना लंड डालने की कोशिश की लेकिन मैं नहीं हिली.

वो बोला- मान जाओ मम्मी, नहीं तो हम आपको इस तरह से छोड़ने वाले नहीं है, आपके साथ ऐसे ही करते रहेंगे.

उसने मुझे घुमा कर मेरी चूत में लंड दे दिया और मुझे चोदने लगा. मैं एक बार फिर से चुदने के लिए तैयार हो गयी लेकिन अंदर से मेरी इच्छा नहीं हो रही थी. उस रात में भी करण ने मुझे बुरी तरीके से चोदा.

अगली सुबह वो तैयार होकर अपने ऑफिस में चला गया. फिर नेहा नाश्ता लेकर आ गयी. वो मुझे समझाने लगी.

नेहा बोली- मम्मी आप दुनिया में अकेली नहीं हैं जो अपने बेटे से चूत मरवा रही हैं.

इनको भी पढ़ कर देख लो.

उसने मेरे सामने सेक्स स्टोरी साइट खोल कर दे दी.

उसमें देसी इंडियन नंगी लड़की दिखाई दे रही थी. जवान लड़की की नंगी फोटो देख कर मेरा ध्यान उस पर गया लेकिन मैंने स्टोरी पढने से मना कर दिया.

नेहा वहां से चली गयी. उसके जाने के बाद मैं फिर से फोन उठा कर वही साइट पर वो पेज खोला और देखने लगी. पहली दो स्टोरी मैंने पढ़ी जो काफी सेक्सी स्टोरी थी.

शाम के 5 बजे तक मैं स्टोरी पढ़ती रही और सोचती रही कि यह सब करना सही है या गलत. कुछ देर सोचने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अगर ये सब जो लिखा हुआ है वो सही है तो वाकई में बेटे के साथ सेक्स और भाई बहन का सेक्स करने में कोई बुराई नहीं है.

मगर ये भी तो हो सकता है कि ये किसी इन्सान के दिमाग की कल्पना ही हो. मगर एक बात यह भी थी कि करण के लंड से चुदते हुए मजा तो मुझे भी आता था. इसको मैं नकार नहीं सकती हूं.

उन कहानियों में से बहुत सी कहानियां तो मुझे सही भी लगीं. एक कहानी मैंने पढ़ी जिसको 17 भागों में लिखा गया था. उस कहानी को मैंने पूरा पढ़ा. उस कहानी में बहुत कुछ मेरी कहानी से मिलता जुलता था. उसमें लगभग वही घटनाएँ थीं जो मेरे साथ भी हुई थीं.
 
फिर मैंने अपनी जिन्दगी की कहानी की तुलना उससे की और देखा कि मेरी कहानी तो इतनी लम्बी नहीं है.

मैं कहानियां पढ़ती गयी और जैसे जैसे मैं उन कहानियों से गुजर रही थी अब वैसे ही धीरे धीरे मेरे मन के विचार के भी बदलने लगे थे. स्वत: ही मैं अपनी कहानी को अपने बेटे से जोड़ने लगी. अपनी कहानी के रूप में मैं अपने बेटे को देख रही थी.

करण मेरे लिए बिकनी और पैंटी भी लेकर आया था. मगर मैं अभी तक उनको नहीं पहन रही थी. मैं काफी परेशान सी थी उन दिनों में. नेहा रोज मुझे कहानी पढ़ने के लिए देती थी. वो चुपचाप मुझे देखती रहती थी और फिर मुस्करा देती थी. मैं उसको कुछ नहीं बोलती थी.

इसी तरह से तीन महीने बीत गये थे. मुझे भी समझ में आ गया था कि अब इसका कोई समाधान होना नहीं है. जो होना है वो तो होकर ही रहेगा. अगर सेक्स कहानी जगत में लेखक मस्तराम नहीं होता तो मेरी कहानी भी नहीं होती.

उसकी कहानी से ही मुझे अपनी कहानी लिखने की हिम्मत मिली.

उस दिन करवा चौथ का दिन था. मैंने सोच लिया था कि करवा चौथ के दिन मैं संपूर्ण रूप से अपने बेटे की हो जाऊंगी. आज मेरा मन कर रहा था कि मैं अपनी इच्छा से अपने बेटे के साथ चुदाई करूं. मैं उसके जिस्म का आनंद ऐसे लेना चाहती थी जैसे मैं अपने पति के साथ चुदाई का आनंद लिया करती थी.

मैं सुबह उठी और नहा धोकर तैयार हो गयी. इससे पहले कि मैं कुछ बोलती उसी समय नेहा आई और बोली- मम्मी, मैं करण की पत्नी बन चुकी हूं. मैंने उसके लिए करवाचौथ का व्रत रखा है. शाम को हम आपके लिए बाहर से खाना मंगवा देंगे.

उसकी बात सुन कर मैंने पेट खराब होने का बहाना कर दिया और बोली- मुझे भी आज भूख नहीं है. मैं तो सोने जा रही थी.

नेहा बोली- ठीक है आप सो जाओ, वैसे आज करण जी बाहर से खाकर आयेंगे और हमारे लिये सामान लेकर आएंगे.

मैं बिना कुछ बोले ही छत पर चली गयी. शाम को 6.30 बजे करण छुट्टी लेकर आ गया.

नेहा ने लाल साड़ी पहन रखी थी और वो खिड़की के पास खड़ी होकर चांद को देख रही थी. करण ने भी चांद को देखा और उसका व्रत छुड़वाया.

जब नेहा तैयार हो रही थी उसी वक्त मैं नीचे तैयार हो चुकी थी. मैंने करण की दी हुई ब्रा पैंटी पहनी थी और साड़ी भी पहन ली थी. मैं तैयार होकर थाली और पानी लेकर बैठी हुई थी. कुछ देर के बाद करण नीचे आया और जैसे ही उसकी नजर मुझ पर पड़ी वो मुझे देख कर एकदम से दंग सा रह गया. उसको मेरा ये रूप देख कर यकीन ही नहीं हुआ.

वो बोला- मम्मी आप भी?

मैंने कहा- मुझे मम्मी न बोलिये. आज से मैं आपकी पत्नी बन रही हूं. सुबह से मैंने भी आपके लिये करवाचौथ का व्रत रखा हुआ है. यह सिंदूर अभी इसी वक्त मेरी मांग में भर दीजिये और मुझे अपना बना लीजिये.

करण मुझे छत पर लेकर गया. नेहा भी मुझे देख कर दंग रह गयी.

वो हैरान होकर बोली- मम्मी!

इससे पहले कि वो कुछ और बोलती करण ने उसको चुप रहने का इशारा कर दिया.

उसके बाद उसने मेरी मांग में सिंदूर भरा. फिर उसने मंगलसूत्र उठाया और मेरे गले में पहना दिया. उसके बाद करण ने मुझे पानी पिला कर मेरे व्रत को तुड़वा दिया.

करण ने उसके बाद मुझे अपनी बांहों में लेकर कहा- मुझे आज बहुत खुशी हो रही है मम्मी.

मैं बोली- मैं तुम्हारी मम्मी नहीं, मैं मीरा हूं और पत्नी हूं आपकी.

नेहा बोली- मैंने इनको आपकी पत्नी बनाने में बहुत मदद की है भैया. अगर मैं रोज इनको भाई-बहन की चुदाई और मां बेटे की चुदाई वाली कहानियां पढ़ने को नहीं देती तो आज ये आपकी पत्नी नहीं बन पाती.

करण बोला- हां, मैं सब जानता हूं.

उसके बाद हम तीनों लोगों ने साथ में खाना खाया. उसके बाद हम छत पर ही आ गये. करण ने धीरे धीरे मेरे सारे के सारे कपड़े उतार दिये. अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही रह गयी.

उसके बाद करण ने नेहा के भी सारे कपड़े उतार दिये. नेहा ने ब्लैक रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी. अब हम दोनों ने करण के कपड़े भी उतार दिये.

करण बहुत खुश नजर आ रहा था. आज करवाचौथ के दिन मैं भी अंदर से बहुत खुश थी. मुझे मेरा पति मिल गया था. अब मैं भी सुहागन हो गयी थी. अब मुझे किसी से कोई गिले शिकवे नहीं रह गये थे. मैंने करण के जिस्म को गौर से देखा और फिर उसके मस्त मोटे लंड को अपने हाथ से छूकर देखने लगी.
 
नेहा के चेहरे पर आज खुशी नहीं थी. उसके चेहरे की मुस्कान कहीं गायब सी हो गयी थी. अब मैं करण के लंड को चूस रही थी. आज मुझे करण के लंड को चूसने में असली मजा आ रहा था. मैंने पूरी तबियत के साथ लगभग दस मिनट तक उसके लंड को लॉलीपोप की तरह चूस डाला.

अब करण ने मेरी चूत में उंगली डाल दी और अपनी उंगली को मेरी चूत में चलाने लगा.

मैंने कहा- जब तुम्हारे पास इतना अच्छा लंड है तो उंगली क्यों? अगर उंगली ही करनी थी तो फिर ये लंड किस काम का? मुझे अपने पति के लंड का रस चाहिए. मैं बहुत सालों से प्यासी हूं.

करण बोला- जान, थोड़ा सब्र तो करो. इसका रस भी मिलेगा. पहले तो मैं आपकी चूत का रसपान करूंगा.

करण ने मुझसे अपनी चूत को उसके मुंह पर लगाने के लिए कहा. मैंने अपनी चूत को करण के होंठों पर रख कर दबा दिया. उसके होंठों पर मेरी चूत की दरार लगी तो बदन में सरसरी दौड़ गयी.

अब वो मेरी चूत को नीचे से चाटने लगा. कुछ देर चाटने के बाद उसने मेरी चूत में नीचे से लंड डाल दिया.

नीचे से मेरी चूत में लंड डालते हुए वो बोला- देख नेहा, आज मम्मी अपनी इच्छा से ही सब कुछ करवा रही है. आज मुझे बहुत खुशी हो रही है मम्मी को इस तरह से खुश होते हुए देख कर.

मैंने करण से कहा- आप मुझे मम्मी न बोलिये, मेरा नाम मीरा है, मुझे मीरा ही कहा कीजिये.

करण ने नेहा को इशारा किया- चूचियों को तुम चूस लो.

नेहा ने बेमन से मेरी चूचियों को चूसना शुरू किया.

मैं भी जोश में आकर बोली- नेहा, अभी तो शुरूआत है बेटी. अभी तो बहुत कुछ देखना बाकी है. तुम दोनों ने मेरे अंदर की बुझी हुई आग में घी डाल दिया है. इतने साल से मैंने किसी तरह खुद को शांत रखा हुआ था.

करण बोला- ये हुई न बात, अब मैं अपनी पत्नी के साथ खूब मजा ले सकता हूं.

मैंने करण को छेड़ते हुए कहा- पत्नी के साथ नहीं, पत्नियों के साथ कहिये.

नेहा बोली- मम्मी को पाकर आप हमें भूल ही गये हैं. नेहा ने शिकायती अंदाज में कहा.

मैं नेहा की चूचियों को दबाते हुए बोली- भूल कैसे जायेंगे जान, तुम्हारे चूतड़ों में इनके लंड को तो मैं ही डालूंगी.

वो बोली- तो फिर आपकी चूत का रस मैं ले सकती हूं?

मैंने कहा- इसके बारे में तो मेरे पतिदेव से पूछा. उनसे पूछे बिना तो तुम कुछ नहीं ले सकती. लेना तो क्या तुम मेरी चूत को टच भी नहीं कर सकती.

करण बोला- मम्मी, आप मुझे खुश कर दें. उसके बाद आप जो कहेंगे वो मैं करने के लिए तैयार हूं. बस आप मेरा साथ दीजिये.

मैं बोली- अब तो आप पति बन गये हैं, आपका पूरा हक है हम पर.

ऐसा बोलते ही करण ने मेरे मुंह में लंड दे दिया. मेरे होंठों को चोदते हुए वो बोला- आह्ह जान.. तुम्हारा ये अंदाज बहुत पसंद आया.

इतने में ही मैंने उसके लंड पर दांतों से काट लिया.

वो दर्द में कराहते हुए बोला- ओह्ह … अगर ऐसे करोगी और लंड को खाने लगोगी तो फिर चूत में क्या लोगी?

मैंने उसके लंड को मुंह से निकाल कर कहा- चूत में आप लंड को डाल कहां रहे हो?

तभी उसने मेरी टांगों को खोल कर मेरी चूत में लंड को डाल दिया और तेजी के साथ पेलने लगा.

उसने पूरी तेज स्पीड से मेरी चूत को चोदना शुरू कर दिया. दस मिनट तक उसने मेरी चूत को फाड़ देने वाली चुदाई की. फिर उसके लंड से वीर्य के फव्वारे मेरी चूत में गिरने लगे.

मेरी चूत में वीर्य को भर कर वो मेरे ऊपर चिपक कर लेट गया और थक कर सो गया. मैं नेहा को अपनी बांहों में लेकर चूचियां दबाने लगी. तभी करण उठ गया.

वो बोला- मम्मी, पहले आप बहन को गर्म करो. उसके बाद मेरा लंड तैयार होगा.

नेहा ने कहा- पहले लंड को तैयार कर लो. जब लंड तैयार हो जायेगा तो मैं तैयार ही हूं.
 
जब उसको पता लगा कि मैं उसकी पत्नी बन कर रहना चाहती हूं तो वह बहुत खुश हो गया. उस रात उसने मेरी चूत में अपने वीर्य के कई फव्वारे छोड़े और मेरी चूत को भर दिया. मुझे भी बहुत सुकून मिला. मेरी सुहागरात मेरे बेटे का साथ हो गयी और मैंने उसको पति बना लिया.

उस दिन मेरी बेटी नेहा का भी व्रत था.

करण मेरी चूत को चोद कर मेरे ऊपर लेटा हुआ था कि नेहा ने कहा कि मुझे भी लंड चाहिए.

करण बोला- पहले इसको गर्म करो मां, उसके बाद मैं इसको चोद दूंगा.

नेहा बोली- पहले लंड को तैयार करो, अगर लंड तैयार है तो मैं भी तैयार हूं.

मैंने करण के लंड को चूसना शुरू किया. दस मिनट तक मैंने खूब जोर से उसके लंड को चूसा और उसका लंड तैयार हो गया.

अब उसने नेहा को नीचे लिटाया और उसकी चूत में लंड को लगा कर उसके ऊपर लेट गया. मैंने नेहा की चूचियों को थाम लिया और उनको पीने लगी.

करण ने नेहा की चूत में लंड घुसा कर धक्के लगाना शुरू कर दिया. नेहा की मदहोशी भरी सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह भैया, मुझे आपसे प्यार है, आप ही मेरे पति हो.

नेहा मेरे बेटे के मोटे लंड से चुदते हुए मदहोश हो चुकी थी और मैं उसकी चूचियों के निप्पलों पर जीभ से चाट रही थी. पांच मिनट की चुदाई में ही नेहा की चूत ने पानी छोड़ दिया.

उसके बाद पांच मिनट और बाद तक करण ने उसकी चुदाई की और फिर वो भी झड़ गया. अब हम तीनों ही थक कर लेट गये थे. करण ने मेरी चूचियों के बीच में मेरे सीने पर सिर रख लिया. नेहा ने करण की जांघों के बीच में मुंह रख लिया और उसके लंड को सहलाने लगी.

मैं करण के सिर के बालों में हाथ फेर कर उसको प्यार करने लगी. मेरा बेटा अब मेरा पति बन चुका था. उस रात के बाद में खून के सारे रिश्ते खत्म हो गये थे. अब हमारे बीच में रिश्तों के नाम बदल गये थे.

करण मेरे पति के रूप में रहने लगा था. एक 22 का लड़का, एक 41 साल की मां और एक 19 साल की लड़की, इन तीनों का ही बहुत अच्छा कॉम्बिनेशन बन रहा था.

अब करण हर रोज मुझे चोदने लगा. हम लोग साथ में शॉपिंग करने के लिए जाते. कभी मूवी देखने के लिए जाते. मौका पाकर बाहर भी करण मेरी चूचिचों को दबा देता था. इस तरह से जिन्दगी बहुत खुशहाल बीत रही थी. मैं अपने बेटे की रखैल, पत्नी और मां सब कुछ बन चुकी थी.

मगर करण ने अब एक जिद पकड़ ली थी. वो कहने लगा कि उसको मेरी कोख से एक बच्चा चाहिए. मेरी कोख से बच्चे का मतलब था कि करण का एक और भाई. मगर अब वो मेरा पति बन गया था और इसी हक से मुझसे एक बच्चा चाहता था.

मैंने उसको बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो मान नहीं रहा था. उसको मुझसे ही अपना बच्चा चाहिए था.

मैंने कहा- ये नहीं हो सकता. अपनी बहन को क्या जवाब दोगे?

वो बोला- बहन को सब पता है. वो कुछ नहीं बोलेगी. वैसे मुझे इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि नेहा क्या सोचेगी. मुझे उसके साथ सेक्स करने में उतना मजा नहीं आता है जितना तुम्हारे साथ आता है. इसलिए मैं कह रहा हूं कि बस मुझे तुम एक बच्चा दे दो उसके बाद मैं तुम्हें फ्री छोड़ दूंगा. तुम जहां जाना चाहो, जहां रहना चाहो, वहां रह सकती हो.

अब मैं दुविधा में फंस गयी थी कि उसको पति तो बना लिया, अब उसके लिये बच्चा कैसे पैदा करूं. इस उम्र में अगर मैं बच्चा पैदा करने लगी तो लोग क्या कहेंगे. अगर किसी ने पूछ लिया कि किसका बच्चा तो फिर मैं क्या जवाब दूंगी. ये सारे सवाल मुझे परेशान कर रहे थे.

मेरी बेटी भी अब मुझसे झगड़ा करने लगी थी. उसको करण का मेरे साथ रहना चुभने लगा था.

वो बोली- क्यों मां, पहले तो तुमको बहुत बुरा लगता था जब मैं और करण भैया आपस में प्यार करते और एक दूसरे के साथ सेक्स करते थे. अब तुम भी बेटे का लंड लेने की आदी हो गयी हो!

इस बात को लेकर नेहा के साथ मेरा अब आये दिन झगड़ा होने लगा था. उसको अब मुझसे जलन होने लगी थी. वो बात बात पर मुझसे झगड़ा करते हुए कहती रहती थी कि मां तुम अब मेरी सौतन हो गयी हो.

मैंने कहा- ऐसा नहीं है नेहा. मैं तो उसको बहुत समझाती हूं. वो मेरी बात नहीं सुनता और बार बार मेरे पास ही आ जाता है आकर्षित होकर.
 
मगर नेहा मेरी बात समझने को राजी नहीं थी. उस दिन हम लोगों का झगड़ा इतना बढ़ गया कि आखिर में मुझे अपने बेटे को ही कॉल करना पड़ा.

करण घर पर आया और उसने नेहा को बहुत डांटा और मारा भी उसको. मैं उसको मारने से रोकने की कोशिश करती रही लेकिन वो नहीं रुक रहा था. मैंने उसको अलग करने की बहुत कोशिश की मगर वो उसको डांटता पीटता रहा.

जब उसका गुस्सा थोड़ा शांत हुआ तो उसको अपनी गलती का अहसास हुआ. उसने अपनी बहन नेहा को गोद में उठाया और उसको बाथरूम में लेकर गया. वहां ले जाकर उसने उसके कपड़े उतार दिये. उसको नंगी कर लिया.

नंगी करने के बाद उसने शावर चला दिया और वो उसकी चूचियों को मसलने लगा था कि इतने में मैं भी बाथरूम में ही अंदर चली गयी. मैं अंदर गयी तो देखा कि नेहा की चूचियों पर पानी गिर रहा था.

मेरी बेटी की चूचियों से जो पानी गिर रहा था वो उसके पेट से होकर उसकी चूत के अंदर से बहता हुआ करण के मुंह में गिर रहा था. करण अपनी बहन की चूत से गिरते हुए पानी को मुंह लगा कर पी रहा था. साथ में ही वो दोनों हाथों से नेहा की चूचियों को भी दबा रहा था.

मैंने बेटी से कहा- बेटी, जो कुछ भी हुआ अब उसको बदला नहीं जा सकता है. अब तुम मेरी बेटी नहीं रही, मेरी सौतन बन गयी हो.

बेटी बोली- और मेरा पति तुम्हारी चूत का आशिक हो चुका है. आपके बेटे को आपकी चूत ज्यादा पसंद है. मुझे भी लंड चाहिए होता है, मेरे पास भी एक चूत है, उसकी प्यास को कौन बुझायेगा?

उसकी बात सुन कर मैंने कहा- अगर ऐसी बात है तो फिर ये हम दोनों की चूत को शांत करेगा.

तभी करण बोला- मैं तुम दोनों से ही प्यार करता हूं.

नेहा बोली- हां करते होगे लेकिन दिन-रात तो तुम मां के साथ ही होते हो. हर रात को मां के साथ ही सोते हो. अब तुमको मेरी जरूरत नहीं है. मैं तो तुम्हारे लिये बस एक मोहरा थी ताकि तुम मां को पा सको. अब मां तुम्हें मिल गयी है अब मेरी तुम्हें जरूरत नहीं रही.

वो बोला- नहीं, तुम गलत सोच रही हो, तुम तो मेरी जान हो. मां को पाकर तो मुझे और भी ज्यादा खुशियां मिल गयी हैं. तुम ही तो कहती थी कि अगर मां भी हमारे साथ मिल जाये तो हम तीनों मिल कर अपनी जिन्दगी में एक नये रीति रिवाज को मिल कर एक साथ निभायेंगे. आज वह काम पूरा हो गया है. मां सब बात मान रही है और पत्नी वाला सब सुख दे रही है. मुझे ये सब अपनी बहन की वजह से ही तो मिला है. अगर तुम नहीं होती तो शायद मुझे ये सब कभी न मिल पाता. मैं तुम दोनों को ही प्यार करता हूं.

इतने में ही नेहा की चूत को पीछे खींच कर मैं बोली- मैं अब तुम्हारा पूरा साथ दे रही हूं. अब तुम्हें जलन क्यों हो रही है?

वो बोली- अब ये मुझे प्यार नहीं करते हैं.

मैंने कहा- क्यों नहीं करते हैं? अगर तुमसे नहीं करते तो और किससे करते हैं?

नेहा पलट कर बोली- अगर मुझसे प्यार करते तो रात भर तुम्हारे साथ नहीं सोते.

करण ने नेहा को समझाते हुए कहा- मैं तुमसे भी बहुत प्यार करता हूं. मां तो केवल 10-15 साल तक ही साथ दे सकती है, जब तक उसकी चूत और चूची ढीली नहीं हो जाती, मगर तुम्हारे साथ तो मैं जीवन भर रहूंगा.

नेहा बोली- आपने बोला था कि जब मां राजी हो जायेगी तो हम लोग शादी कर लेंगे, इसीलिये तो आप मां को चोदने का प्लान किये थे. मगर आज जब मां राजी हो गयी है तो आपको बस मां ही मां दिखाई दे रही है. मेरी ओर तो आपका ध्यान ही नहीं है, आप हमेशा ही मां को खुश करने में लग रहते हैं. इनको भी पहले तो शुरू शुरू में ये सब करना बहुत पाप लगता था. मगर अब सारे पाप खत्म हो गये हैं. इनको भी अब अपने बेटे के साथ चुदने में मजा आता है. अब ये भी हमेशा ही बेटे से ही चिपकी रहती है जैसे इनका ही पति हो गया हो, और तो कोई है ही नहीं घर में! अब इनको बेटे के लंड से चुदने में कोई पाप नहीं दिखता है.

नेहा की बात सुनकर मैं बोली- बेटी तुमने मेरी आंखें खोल दी हैं.

कहते हुए मैंने उसकी चूचियों को पीना शुरू कर दिया.

करण ने अपनी बहन की चूत में लंड डाल दिया और उसकी चूत चोदने लगा. करण पीछे उसकी चूत में लंड डाल रहा था.

मैंने नेहा को आगे की ओर अपनी चूत पर झुका लिया और उसके मुंह पर अपनी चूत को लगा कर कहा- ये ले बेटी, मजे ले जिन्दगी के. भगवान ने सबको एक दूसरे के लिए ही बनाया है. मजा ले तू.

मगर नेहा मेरी चूत को नहीं चाट रही थी. मैंने अपनी चूचियों को दबाना शुरु किया. करण पीछे से बहन की चुदाई कर रहा था.

कुछ देर में उसका वीर्य निकल गया और वो खाली होकर बाथरूम से निकल गया. फिर नेहा भी चली गयी. मैं अपनी गर्म चूत के साथ प्यासी ही रह गयी.

मैंने बेटी को समझाया लेकिन वो मुझसे गुस्सा ही रही. रात को जब करण ऊपर मेरे पास सोने के लिए आने लगा तो उसने नेहा को भी बोला कि तुम भी चलो ऊपर लेकिन नेहा ने उसके साथ आने से मना कर दिया.

फिर करण भी नेहा के साथ ही लेट गया. जब तक नेहा को नींद नहीं आई तो वह उसके पास ही लेटा रहा. जब वो सो गयी तो करण धीरे से बिना आवाज किये उठ कर ऊपर मेरे पास आकर लेट गया.
 
मैंने करण से पूछा- तुम करना क्या चाहते हो? तुम तो कह रहे थे कि बेटी की शादी कर दूंगा किसी अच्छे लड़के से, उसके बाद शादी करके तुम्हारे साथ रहूंगा? मैं तो यही कहूंगी कि तुम नेहा की शादी करवा दो कोई अच्छा सा लड़का ढूंढ कर, फिर उसके बाद हम साथ में रह लेंगे. फिर मैं तुम्हारे लिये भी एक अच्छी लड़की देख कर तुम्हारी भी शादी करवा दूंगी.

मेरी इस बात पर करण बहुत गुस्सा हो गया और बोला- इसीलिये मैं तुम पर विश्वास नहीं करता हूं मां, तुम हमेशा मुझे दूर भगाने की कोशिश करती रहती हो जैसे तुम मेरे साथ मजबूरी में रह रही हो.

मैंने कहा- मैं तो तुम्हारे लिये ही सोच रही हूं बेटा.

वो बोला- तुम्हें मेरे लिये सोचने की जरूरत नहीं है. तुम मेरी बात मान लो, उसके बाद नेहा को मैं खुद ही मना लूंगा. मगर उसके पहले तुम मेरा बच्चा अपने पेट में ठहरा लो और मेरी बच्चे की मां बनो. अगर तुम्हारे पेट में मेरा बच्चा ठहर गया तो उसके तीन महीने के अंदर ही मैं नेहा की शादी करवा दूंगा.

करण ने कहा- मेरा एक दोस्त है जिसका नाम शिवकुमार है. उसको मेरी बहन बहुत पसंद करती है.

मैं बोली- तुम्हें कैसे पता कि वो शिवकुमार को पसंद करती है?

बेटा बोला- जब से मैं तुम्हारे साथ ज्यादा वक्त बिताने लगा हूं तब से ही वह शिवकुमार के साथ चैटिंग करती रहती है. एक दिन मैंने उसकी चैटिंग को देख लिया था. मैं जानता हूं कि शिवकुमार के मां-बाप नहीं हैं इसलिए वह बहन से शादी कर लेगा. उसके बाद मैं ये शहर छोड़ कर गुजरात में पोस्टिंग करवा लूंगा. उसके बाद हम दोनों अपने जीवन को आराम से जीयेंगे.

मैं बोली- तो ठीक है, जो तुम चाहते हो वही करो. मगर एक बात याद रखना कि अगर तुम अपनी मर्जी से करोगे तो फिर मैं भी तुम्हारा बच्चा पैदा नहीं करूंगी.

वो बोला- ठीक है, जिस दिन नेहा की शादी तय हो जायेगी, उस दिन तो मेरा बच्चा कर लोगी ना?

मैं बोली- हां, पहले उसकी शादी पक्की करो, उसके बाद मैं तुम्हारा बच्चा भी कर लूंगी.

आज के दौर में यह बात तो बिल्कुल सही है कि इंटरनेट की दुनिया में कोई ऐसा रिश्ता नहीं है जिसको जानकर या देखकर हैरानी होगी. मैं तो 20 साल पहले की सोच रखने वाली महिला थी. मगर आज जब मैं खुद को देखती हूं तो मैं काफी बदल गयी हूं. इसीलिये सोचती हूं कि जब मैं इतनी बदल सकती हूं तो कोई और भी बदल सकता है.

मुझे अपनी इस घटना को कहानी का रूप देते हुए पहले तो बहुत आश्चर्य हुआ था. मगर जब मुझे मेरी बेटी ने कहानी के माध्यम से मुझे इन सब के बारे में दिखाने और बताने के साथ ही सेक्स वीडियो भी दिखाये, चाहे वह सही हो या गलत जो भी हो, मगर इतना तो तय है कि उसने मेरी जिन्दगी के रास्ते बदल दिये.

आज मैं उस मुकाम पर पहुंच गई हूं जहां पर शायद ही कोई हो और शायद कोई और पहुंचना भी नहीं चाहता हो. मगर जो मेरे साथ हुआ उसको कहानी के माध्यम से बताने का मेरा यही मकसद था कि बदलाव के इस दौर में समाज में नये नये अनसुने रिश्ते भी पनप रहे हैं जिनके बारे में पहले कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.

मैं अपनी जिन्दगी की इन सभी घटनाओं को किसी के साथ शेयर नहीं कर सकती थी. इसलिए मैंने कहानी वाला रास्ता चुना. मेरा यही एकमात्र सहारा था.

उस समय जब मैं शुरू शुरू में इस रास्ते पर चली थी या यूं कहें कि समय और किस्मत को यही मंजूर था, या फिर ईश्वर ने मेरे बेटे को यह पाप करने के लिए मजबूर किया था, उस वक्त इन सभी बातों को लेकर मैं बहुत ही ज्यादा परेशान रहती थी.

इसके विपरीत मेरा बेटा करण ये कहता है कि उसने अपने पिछले किसी जन्म में कुछ ऐसा पुण्य का काम किया होगा कि उसको मेरे साथ में ऐसा जीवन जीने का मौका मिला. उसका कहना है कि उसको अब किसी और चीज की जरूरत नहीं है.

मेरे बेटे की यही जिद थी कि मैं उसके साथ में ही रहूं. आज उसकी जिद ने मुझे बदलने पर मजबूर कर दिया. मगर अब मुझे भी ये लगने लगा है कि कहीं न कहीं मैं भी उससे प्यार करने लगी हूं. आज मैं करण को लेकर बेईमान हो चुकी हूं.

उसको अपने पति के रूप में स्वीकार भी कर चुकी हूं. अब मैं अपने आगे के जीवन को टेंशन फ्री होकर जीना चाहती हूं. आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी का अंत आपको बताने जा रही हूं कि कैसे मेरे जीवन में अब सब कुछ बदल चुका है और मैं पूर्णतया अब दिल और दिमाग दोनों से ही अपने बेटे करण की हो चुकी हूं.

यह महीने भर पहले की बात है. करण मुझसे जिद कर रहा था कि मैं कहीं बाहर घूमने के लिए चलूं उसके साथ. मगर मुझे डर लग रहा था कि मैं बेटे के साथ बाहर घूमने कैसे जा सकती हूं, उसके साथ बांहों में बांहें डाले हुए जीन्स, स्कर्ट और टॉप में कैसे घूम सकती हूं? वो मुझे जीन्स स्कर्ट पहना कर ले जाना चाहता था.

मगर यहां पर सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि वो अपनी बहन को भी साथ में लेकर जाना चाहता था. जबकि नेहा का मेरे साथ पहले से ही इतना झगड़ा चल रहा था.

मुझे ले जाने की बात पर करण कहने लगा कि नेहा को मैं मना लूंगा.

मैंने कहा- ठीक है लेकिन मैं एक शर्त पर ही चलूंगी कि मैं ज्यादा बाहर नहीं निकलूंगी.

वो भी इस बात को मान कर राजी हुआ.

हम लोग गोवा घूमने के लिए जा रहे थे. जिन्दगी में पहली बार हम लोग कहीं बाहर घूमने के लिए जा रहे थे. इससे पहले हम लोग कभी कहीं पर घूमने के लिए नहीं गये थे. नेहा और करण की परवरिश और पढा़ई में सारे पैसे लग जाते थे. 20 साल से मैंने घर के बाहर कहीं कदम भी नहीं रखा था.

गोवा की तो कोई उम्मीद ही नहीं थी. गोवा तो मेरे लिए स्वर्ग के जैसा था. ऊपर से बेटे के प्यार ने मेरी जिन्दगी को खुशियों से भर दिया था. गोवा बहुत ही सुंदर लगा मुझे जैसे मैं किसी और ही दुनिया में आ गयी हूं.

हम तीनों समन्दर के किनारे बैठे हुए थे. वहां पर आये हुए कपल्स सब विदेश लोग थे और उन सबने ही काफी छोटे छोटे कपड़े पहने हुए थे. मेरे बेटे ने भी जिद करना शुरू कर दिया कि मैं भी छोटे कपड़े पहनूं.
 
पब्लिक में इस तरह के कपड़ों में निकलना मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था लेकिन मैं अंदर से खुश थी कि मुझे जीने का सही तरीका मिल रहा है, इस तरह की जीवन शैली से मैं आज तक अन्जान थी. पहले शादी फिर बच्चे, फिर पति की मौत, फिर बच्चों की परवरिश, इन सब में ही सारी जिन्दगी निकल गयी थी.

मैं अपने ही विचारों में मग्न थी कि उधर मेरी बेटी को जलन हो रही थी. मैं सब भूल गयी थी किसको क्या हो रहा है, मैं बस अब जीना चाहती थी. जीवन का यह तरीका मैंने नहीं चुना था. यह तरीका मेरी बेटी ने मुझे दिया था. मैं बहुत बदल गयी थी.

बाहर घूमने के बाद हम लोग एक होटल में गये. वह होटल किसी महल के जैसा लग रहा था. मैंने कभी होटल में खाना नहीं खाया था. उस वक्त वो होटल का खाना इतना अच्छा लग रहा था कि मैं अपने शब्दों में बता नहीं सकती.

मेरे बेटे ने आज मुझे पूर्णता में बदल दिया था. मुझे समाज के रीति रिवाज और रिश्ते सब दिखावे के लगते हैं. मैं मानने लगी हूं कि इन्सान को सिर्फ जीना चाहिए और जीवन के आनंद को प्राप्त करना चाहिए.

मुझे अब अपने बेटे की वो बात याद आ रही थी जब वो कहता था कि मां तुम किस दुनिया में जी रही हो. वो कहता था कि ईश्वर ने किसी को यह बता कर नहीं भेजा है कि उसको किसके साथ सेक्स करना चाहिए और किसके साथ नहीं, यह सब केवल इन्सान के द्वारा बनाया गया नियम है, इससे ज्यादा कुछ नहीं.

इन्सान अपनी सुविधा के अनुसार नियम व कानून बनाता है. जानवर कभी ये नहीं देखते कि उनकी मां कौन है या कौन उनका भाई है, या ये मेरी बहन है और ये मेरा बाप है. उनका जिससे मन होता है वो उससे सेक्स कर लेते हैं और उनको ऐसा करने से कोई रोकता भी नहीं है. उसकी कही हर बात मुझे याद आ रही थी.

हम लोग होटल में खाना खाने के बाद रूम में चले गये. रूम भी काफी सुन्दर था. मेरे लिये यह सब नया था. फुल इन्जॉय करने के बाद रात में करण मेरी बेटी नेहा के पास सो रहा था. फिर उसने मुझे भी अपने पास ही बुला लिया.

वो पूछने लगा- मम्मी तुमको अच्छा लग रहा है?

मैंने हां में सिर हिलाया.

फिर वो मेरी चूची को सहलाते हुए बोला- मैं तुमको हर खुशी देना चाहता हूं.

मैंने करण की बात का कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि नेहा करण को घूर रही थी और मैं इस वक्त बात को आगे नहीं बढ़ाना चाह रही थी. इसलिए मैंने कुछ नहीं बोला.

मेरे बेटे ने फिर रात भर मेरे साथ मजे किये. सुबह हम लोग दूसरी जगह पर घूमने के लिए चले गये. 2 दिन गोवा घूमने के बाद फिर मेरे बेटे का प्लान दक्षिण भारत घूमने का हो गया. मुझे तो उसने कुछ बताया भी नहीं था इस बात के बारे में. फिर हम लोग वापिस आ गये. अब दक्षिण भारत घूमने का प्लान हो रहा था.

बेटे से मैंने कहा- पहले कुछ बातें हैं उनके बारे में कुछ विचार कर लें उसके बाद तुम जहां कहोगे वहां हम घूमने के लिए चल पड़ेंगे.

घर पर आने के बाद बेटी और मेरे बीच में बहुत लड़ाई हुई. मैं उसको समझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन बेटे के मन में कुछ और चल रहा था. उस दिन घर पर खाना भी नहीं बना.

करण ने नेहा के ऊपर हाथ भी उठा दिया और रात को फिर मेरे पास लेट कर बात करने लगा.

वो बोला- मैं नेहा की शादी करवा दूंगा, मगर पहले तुम राजी हो क्या मेरे साथ रहने के लिए? ये समाज का डर छोड़ने के लिए? मैं तुम्हारे साथ सेक्स करने में सबसे ज्यादा आनंद प्राप्त करता हूं. अगर तुम राजी हो तो फैसला करो. ये रोज के झगड़े से मैं परेशान हो गया हूं. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

मैंने कहा- कोई बात नहीं, जैसा चल रहा है वैसे ही चलने दो. नेहा तुम्हें पाने के लिए ये सब कर रही है. तुम मुझसे ज्यादा उसके पास टाइम बिताओ, वह मान जायेगी. उसके बाद सब सही चलने लगेगा.

मगर मेरे बेटे करण के दिमाग में से नेहा उतर गयी थी. नेहा उसको फ्री नहीं छोड़ती थी. वह चाहती थी कि करण सिर्फ उसके साथ ही सेक्स करे. नेहा को करण से प्यार नहीं था. वह केवल सेक्स की भूखी थी और बेटा जवान लड़की की चूत चोदने की बजाय मेरी चूत चोद कर ज्यादा खुश होता था.

नेहा के जिस्म की भूख पूरी नहीं हो पा रही थी इसलिए नेहा उस पर गुस्सा हो जाती थी.

करण बोला- मैंने एक प्लान के बारे में सोचा है. अगर तुम राजी हो तो मैं उसको मना लूंगा.
 
मैं बोली- तुम सब काम ठीक तरीके से करो तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है. हां मगर कोई बाहरी इस बारे में जान गया तो फिर बहुत दिक्कत हो जायेगी. जिस तरह से तुम लोग लड़ाई कर रहे हो, मैं इस तरह से नेहा को दुखी नहीं देखना चाहती हूं. वह भी मेरी औलाद है और हम लोग कितने दिन तक मुम्बई में रहेंगे. कभी ना कभी तो हमें रिलेशन में भी जाना होगा.

वो गुस्सा होकर बोला- तुम ये रिलेशन वाली बात आज आखरी बार कर रही हो. आज के बाद मुझे ये रिलेशन वाली बात नहीं सुननी है.

मैं बोली- ठीक है, मगर तुम करना क्या चाहते हो, पहले मुझे तो बताओ, उसके बाद ही तो मैं तुम्हें कुछ बता सकती हूं.

करण बोला- मैं नेहा से झगड़ा करूंगा. उससे प्यार नहीं करूंगा. वह फिर मुझसे दूर जाने की कोशिश करेगी. फिर जब वो दूर जायेगी तो तुम उसे समझाओगी कि उसकी शादी किसी दूसरे लड़के के साथ कर दी जायेगी. जितना मैं नेहा के साथ झगड़ा करूंगा उतना ही तुम उसको प्यार करना. इस तरह धीरे धीरे नेहा मान जायेगी. इसमें थोड़ा समय जरूर लगेगा लेकिन सब ठीक हो जायेगा.

बेटा बोला- मैं शिवकुमार को शादी के लिए मना लूंगा. उसके मां-बाप नहीं हैं. उसके पास घर और जमीन जायदाद भी बहुत है. नेहा उसके साथ खुश रहेगी. उसकी शादी होने के बाद सब कुछ ठीक हो जायेगा. उसके बाद मैं गुजरात में ट्रान्सफर करवा लूंगा.

मुझे करण की बात सही लगी. वो चुदाई तो रोज ही करता है मगर नेहा के रहते मुझे समाज का डर भी लगा रहता है. अगर नेहा नहीं रहेगी तो फिर किसी का डर नहीं रहेगा. मुझे अपने रिश्ते को समाज में छुपाने की भी जरूरत नहीं रहेगी.

उसके अगले दिन से ही मैं नेहा के करीब जाने की कोशिश करने लगी. करण उसके साथ झगड़ा करने लगा था. उसने नेहा पर ध्यान देना छोड़ दिया था. फिर नेहा को मैं समझाती थी कि करण किसी की नहीं सुनेगा. उसने तुम्हें पाने के लिए प्यार किया. फिर उसके बाद जब उसको मैं मिली तो वो तुम्हें भूल गया. अब कल को वो किसी और के पास जायेगा और फिर मुझे भी भूल जायेगा.

मैंने नेहा को समझाते हुए कहा- बेटी, तुम्हारा पूरा जीवन अभी बाकी है. संभल जाओ तुम. तुम भाई-बहन ने जो भी किया मैं उसको भूल चुकी हूं. मेरे पास तो कोई ऑप्शन नहीं था, मैं तो मजबूर हूं. मगर तुम्हारे पास तो अभी भी रास्ता खुला हुआ है. तुम्हारी शादी हो जायेगी तो तुम सारा जीवन फ्री होकर रहोगी. मेरी बात को समझने की कोशिश करो. मैं तुम्हारी दुश्मन नहीं हूं. तुम्हारी मां हूं. तुम्हारे अच्छे के लिए ही कह रही हूं.

मैं नेहा से बोली- यह सब बात लेकिन तुम करण को मत बताना. तुम देखो और समझो. उसके बाद जो तुम्हें अच्छा लगे वो करो. मैं तुम दोनों के भविष्य के साथ में पहले भी थी और आज भी हूं. मैंने तुम्हारे भविष्य के लिये समाज में सब कुछ छोड़ दिया.

इस तरह से मैं नेहा को रोज समझाती थी. ऐसे ही 25 दिन निकल गये थे. नेहा ने अब कह दिया था- मां आप करण से कह दो कि मैं अब उसके साथ नहीं रहूंगी. लेकिन क्या वो मुझे शादी करने देगा?

मैंने कहा- उसको तैयार करना तो मुश्किल है लेकिन मैं तुम्हारे लिये ये भी कर लूंगी. बस तुम उससे मतलब कम रखा करो.

नेहा बोली- मां, मेरी शादी जल्दी से करा दो. मैं अब देर नहीं करना चाहती हूं.

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो बेटी.

उधर मैंने करण को बता दिया था कि नेहा अब शादी के लिए तैयार हो गयी है. उसकी शादी की तैयारी शुरू कर दो.

करण फिर शिवकुमार को लेकर आया. नेहा ने शिवकुमार को पसंद कर लिया. वैसे नेहा के पास दूसरा कोई ऑप्शन भी नहीं था इसलिए वो मना नहीं कर सकती थी.

कुमार से मैंने कहा- देखो, मेरे पास बहुत ज्यादा पैसे नहीं हैं बेटा, रिसेप्शन तुम लोग देख लो अपने लोगों के लिए.

करण बोला- एक या डेढ़ लाख की व्यवस्था तो मैं भी कर दूंगा.

वो लड़का बोला- मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं है. लेकिन एक बात आपसे पूछनी है कि क्या नेहा आपकी सगी बेटी है?

करण बोला- नेहा इनकी बड़ी बहन की बेटी है. उनके मरने के बाद इसकी देख रेख हमने ही की है. इसलिए नेहा इनको मां बुलाती है.

शिवकुमार बोला- ठीक है, मैंने तो इसलिए पूछ लिया था कि करण ने बताया था आपके बारे में कि किस तरह आप दोनों ने शादी की थी और करण ने किस तरह से आपकी मदद की है. करण बहुत ही अच्छा आदमी है.

मैंने शिवकुमार से कह दिया कि हम लोग आर्य समाज मंदिर में शादी करते हैं और तुम डेट निकलवा लो.

उसके बाद वो चला गया.

उसके जाने के बाद मैंने करण से पूछा- तुमने शिवकुमार से क्या कहा है हम दोनों के बारे में?

करण बोला- मैंने उसको पहले ही बता दिया है कि हम दोनों ने लव मैरिज की है. अगर कल को वो हमारे घर आयेगा और हम मां बेटे को साथ में देखेगा तो क्या सोचेगा, और फिर जो बच्चा पैदा हम करेंगे उसके बारे में पूछेगा कि ये बच्चा किसका है तो फिर हम उसको क्या बतायेंगे? इसलिए मैंने उसको पहले ही हमारी शादी के बारे में बता दिया है और उससे कह दिया है कि तुम मेरे से 4 साल बड़ी हो. ये सब मैंने इसलिए बताया है ताकि कल को कोई दिक्कत न हो.

अब हम लोगों ने शादी की डेट निकलवा ली थी और सब शादी की तैयारी में लगे हुए थे. ज्यादा लोग नहीं थे. दो मित्र और मैं और नेहा. इधर से मैंने अपने सारे आभूषण नेहा को दे दिये.

हमने नेहा के ऊपर बहुत पैसा खर्च किया. काफी कैश भी दिया. मगर एक बात मुझे बहुत बुरी लगी. करण ने नेहा की शादी के एक दिन पहले नेहा के साथ सेक्स करने की बात कही.

नेहा मना करने लगी लेकिन करण रोने लगा और नेहा से बोला- मैं तुमको मजबूर होकर विदा कर रहा हूं.

तो नेहा बोली- लेकिन मुझे पीरियड हुए तीन दिन ही हुए हैं.

करण बोला- तो फिर अच्छा है, तुम्हारे पेट में मेरा बच्चा होगा. किसी को पता भी नहीं चलेगा शादी के बाद कि ये बच्चा किसका है, क्योंकि मां के साथ मैं सेक्स तो करूंगा लेकिन बच्चा पैदा नहीं करूंगा.

करण ने नेहा को अपने इमोशन में फंसा लिया और रात भर उसके साथ सेक्स का मजा लिया.

सुबह मैंने उससे पूछा तो वो बोला- ये लास्ट बार था मां.

मैंने कहा- मैं रात को सब सुन रही थी. तुम बोले थे कि शादी के बाद जो बच्चा होगा वो तुम्हारा ही होगा.

वो बोला- तो तुम ही कहती थी कि मेरी बेटी की शादी करो इसलिए मैंने उसके साथ एक निशानी तो पैदा कर ही दी है.

मैं करण की इस बात का उत्तर न दे पायी.

हमने नेहा की शादी कर दी. कुमार और नेहा अपनी जिन्दगी जीने लगे. एक महीना बीत गया है आज. करण मुझे भी आर्य समाज मन्दिर लेकर गया. वहां पर पूरी रीति रिवाज के साथ हमने शादी की. शादी के समय मैं बहुत दुखी थी. ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं कुछ गलत काम करने जा रही हूं. मगर मैं कुछ नहीं कर पाई.

शादी के बाद हम दोनों ने शिमला का टूर बनाया. करण मुझे वहां ले गया और मेरे साथ खुल कर जीने लगा. अब मैं उसके नाम का सिंदूर लगाने लगी. करण अब मुझे बहुत खुश रखता है.

कभी कभी मैं अपने अतीत में चली जाती हूं. मुझे बहुत ही अलग सा फील होता है वो बीता हुआ कल. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि कैसा होगा करण के साथ आगे का जीवन. करण ने अब मुझे बिल्कुल फ्री छोड़ दिया है. वो कोई बंदिश नहीं रखता है और मैं बहुत खुश हूं.

अब एक बात मुझे सही तरह से समझ में आ गयी थी कि समाज बदल रहा है. समाज के रिश्ते बदल रहे हैं. इसलिए मैं भी इस नये समाज के साथ अपने आप को जोड़ने की कोशिश कर रही थी लेकिन कभी कभी अपने किये फैसले से परेशान हो जाती हूं. इसलिए मैंने ये कहानी लिखी.

ये थी मेरी आपबीती. आप लोग मुझे बतायें कि मैंने इसमें क्या सही किया और क्या गलत किया

samaapt
 
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