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Guest
एक साल और 4 दिन बाद...
हमने उदयपुर छोड़ दिया था...और दूर किसी जगह एक छोटा सा आइलॅंड खरीद लिया था..
सवेरे सवेरे....
में अपनी आराम कुर्सी पर बैठा बैठा अपने लॅपटॉप मे कुछ देख रहा था...तभी नीरा मेरे पास आजाती है....
वो धीरे से मेरे कंधे पर अपना एक हाथ रख कर अपने साथ लाया एक खाली ग्लास मेरे सामने टॅबेल पर रख देती है....
नीरा--जान दूध पीने का समय हो गया है....
में उसे अपनी बाहों मे भर के उसके होंठ चूसने लगा और फिर उस से कहा....
में--खाली ग्लास को भरो गी तो दूध पियुंगा ना....
उसके बाद नीरा अपना टॉप निकाल कर केवल ब्रा मे आ जाती है और अपना लेफ्ट साइड का बोबा बाहर निकाल कर उस ग्लास मे अपना बोबा दबा के दूध भरने लग जाती है.....
ग्लास मे दूध अभी अभी ग्लास के तल तक ही था....
में--बस आज इतना ही दूध मिलेगा क्या....
नीरा--अभी और दूध आ रहा है....आपको भला भूका कैसे रहने देंगे हम....
तभी नेहा भी दीक्षा के साथ वहाँ पहुँच जाती है....
नेहा--क्या हुआ....मुँह क्यो लटका रखा है....
दीक्षा--बच्चे को दूध नही मिला है आज....इसीलिए मुँह लटका कर बैठे है....
नेहा--ये तो बड़ी बुरी बात है.....नीरा ला वो ग्लास मुझे दे....
उसके बाद नेहा भी अपना एक बोबा निकाल कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....लेकिन ग्लास अभी तक आधा भी नही भरा था.....नेहा के हाथ से ग्लास लेकर अब दीक्षा भी उसमे अपना दूध भर देती है....
में--आज क्या मुझे आधे ग्लास से ही काम चलाना होगा....
नीरा--नही जान और दूध आ रहा है थोड़ा तो सबर करो....
उसके बाद वहाँ शमा कोमल और रूही भी आ जाते है....उन तीनो ने बस एक छोटा सा शॉर्ट्स ही पहन रखा था उनके दूध से भरे बूब्स चलते समय जबरदस्त तरीके से उछल रहे थे....
रूही--मेरे राजा को अभी तक भूका रख रखा है.....तुम सब किसी काम के नही हो....
उसके बाद रूही शमा और कोमल तीनो अपने बूब्स निचोड़ कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....ग्लास पूरा भर चुका था....
#143
रूही--मेरे राजा को अभी तक भूका रख रखा है.....तुम सब किसी काम के नही हो....
उसके बाद रूही शमा और कोमल तीनो अपने बूब्स निचोड़ कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....ग्लास पूरा भर चुका था....
में--बच्चो को पिलाया या नही....
शमा--इस दूध पर पहला हक आपका है....उसके बाद बच्चो का नंबर आएगा....
कोमल--रूही ये संध्या कहाँ रह गयी....
नीरा--आ जाएगी वो अभी उन सारे शैतानो से घिरी हुई है....सच नाक मे दम कर दिया है सब ने....
दीक्षा--हाँ नीरा सारी लड़किया बस तेरे लड़के के पीछे ही पड़ी रहती है....उसे कहीं ले जाओ तो सब एक साथ रोने लगती है....
तभी संध्या भी वहाँ आ गयी....तुम लोगो ने इसे क्यो घेर रखा है.....दूध नही पिलाया क्या जय को...
शमा--संध्या रानी हमने तो हमारे हिस्से का दूध पिला दिया अब आपकी बारी है..,.
संध्या--नेहा इतने बड़े बड़े बोबे लेकर घूमती है लेकिन जय की भूख शांत नही होती तुझ से.....
नेहा--क्या करूँ....इसके अलावा मुझे और भी बच्चो को दूध पिलाना होता है.....आप शमा को क्यो कुछ नही कहती हो....
में--अगर आप लोगो की बाते ख़तम हो गयी हो तो क्या मुझे और दूध मिलेगा....
मैं अपने हाथ मे खाली हो चुका ग्लास सब को दिखा देता हूँ....
संध्या--ऊओ मेरा छोटा बाबू अभी भी भूका है....हटा इस ग्लास को मैं तुझे वैसे ही अपना दूध पिला देती हूँ....
उसके बाद संध्या ने अपना ब्लाउस उपर किया और एक बोबा निकाल कर मेरे मुँह मे ठूंस दिया....में लगातार उनका दूध पिए जा रहा था और वहाँ सभी लोग मेरे जिस्म पर हाथ घुमाए जा रहे थे....
शमा के एक लड़की हुई थी....रूही के भी एक लड़की....कोमल और दीक्षा के भी एक एक लड़की...नेहा के एक....और संध्या के जुड़वा लड़कियाँ हुई थी....नीरा के एक लड़का हुआ था...सब कहते है वो बिल्कुल मेरे जैसा दिखता है...बाकी सारी लड़किया अपनी अपनी माँ पर गयी थी....
चाची के भी दो जुड़वा लड़के हुए थे लेकिन अब उनसे हमारा कोई कॉन्टेक्ट नही है....
दूध पीते पीते मैं एक बार आज से एक साल और चार दिन पीछे चला जाता हूँ....कभी सोचा नही था इतना प्यार मिलेगा कभी सोचा नही था रिश्ते कुछ इस तरह बदल जाएँगे....कभी सोचा नाही सिर्फ़ एक ही दिन म सब कुछ बदल जाएगा.....
में और नेहा एक दूसरे की बाहो मे लेटे लेटे सुकूनू की साँसे ले रहे थे....तभी किसी जंगली जानवर की दिल को चीर देने वाली रोने की आवाज़ ने मुझे बैचैन कर दिया....
मुझे किसी अनहोनी की चिंता ने घेर लिया था....हम दोनो ने तुरंत अपने अपने कपड़े पहने और चल पड़े वॉटरफॉल की तरफ.....
उस तरफ जाते वक़्त मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई शक्ति मुझे अपनी तरफ खींच रही है.....हम दोनो तेज़ कदम बढ़ते हुए झरने तक पहुँच गये.....
वहाँ हर तरफ खामोशी फैली हुई थी....बस उस खामोशी को तोड़ती झरने की गिरने वाली आवाज़.... झरने की अविरल धारा ही मेरा ध्यान मेरे परिवार पर आई किसी मुसीबत का संदेश दे रही थी.....
मुझे वहीं नीरा भी मिल गयी उसके सिर से अभी भी खून बह रहा था.....उसे इस हालत मे देख कर मेरे पैरो की जैसे सारी ताक़त ख़तम हो गयी....मैं वही अपने घुटनो पर बैठ कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगा.....
नेहा ने जल्दी से अपने बेग मे से फर्स्ट एड का बॉक्स निकाला और नीरा का घाव सॉफ करके उसका बहता खून रोक दिया....
कुछ पानी की छींटे माकर नीरा को नेहा होश मे ले आई
हमने उदयपुर छोड़ दिया था...और दूर किसी जगह एक छोटा सा आइलॅंड खरीद लिया था..
सवेरे सवेरे....
में अपनी आराम कुर्सी पर बैठा बैठा अपने लॅपटॉप मे कुछ देख रहा था...तभी नीरा मेरे पास आजाती है....
वो धीरे से मेरे कंधे पर अपना एक हाथ रख कर अपने साथ लाया एक खाली ग्लास मेरे सामने टॅबेल पर रख देती है....
नीरा--जान दूध पीने का समय हो गया है....
में उसे अपनी बाहों मे भर के उसके होंठ चूसने लगा और फिर उस से कहा....
में--खाली ग्लास को भरो गी तो दूध पियुंगा ना....
उसके बाद नीरा अपना टॉप निकाल कर केवल ब्रा मे आ जाती है और अपना लेफ्ट साइड का बोबा बाहर निकाल कर उस ग्लास मे अपना बोबा दबा के दूध भरने लग जाती है.....
ग्लास मे दूध अभी अभी ग्लास के तल तक ही था....
में--बस आज इतना ही दूध मिलेगा क्या....
नीरा--अभी और दूध आ रहा है....आपको भला भूका कैसे रहने देंगे हम....
तभी नेहा भी दीक्षा के साथ वहाँ पहुँच जाती है....
नेहा--क्या हुआ....मुँह क्यो लटका रखा है....
दीक्षा--बच्चे को दूध नही मिला है आज....इसीलिए मुँह लटका कर बैठे है....
नेहा--ये तो बड़ी बुरी बात है.....नीरा ला वो ग्लास मुझे दे....
उसके बाद नेहा भी अपना एक बोबा निकाल कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....लेकिन ग्लास अभी तक आधा भी नही भरा था.....नेहा के हाथ से ग्लास लेकर अब दीक्षा भी उसमे अपना दूध भर देती है....
में--आज क्या मुझे आधे ग्लास से ही काम चलाना होगा....
नीरा--नही जान और दूध आ रहा है थोड़ा तो सबर करो....
उसके बाद वहाँ शमा कोमल और रूही भी आ जाते है....उन तीनो ने बस एक छोटा सा शॉर्ट्स ही पहन रखा था उनके दूध से भरे बूब्स चलते समय जबरदस्त तरीके से उछल रहे थे....
रूही--मेरे राजा को अभी तक भूका रख रखा है.....तुम सब किसी काम के नही हो....
उसके बाद रूही शमा और कोमल तीनो अपने बूब्स निचोड़ कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....ग्लास पूरा भर चुका था....
#143
रूही--मेरे राजा को अभी तक भूका रख रखा है.....तुम सब किसी काम के नही हो....
उसके बाद रूही शमा और कोमल तीनो अपने बूब्स निचोड़ कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....ग्लास पूरा भर चुका था....
में--बच्चो को पिलाया या नही....
शमा--इस दूध पर पहला हक आपका है....उसके बाद बच्चो का नंबर आएगा....
कोमल--रूही ये संध्या कहाँ रह गयी....
नीरा--आ जाएगी वो अभी उन सारे शैतानो से घिरी हुई है....सच नाक मे दम कर दिया है सब ने....
दीक्षा--हाँ नीरा सारी लड़किया बस तेरे लड़के के पीछे ही पड़ी रहती है....उसे कहीं ले जाओ तो सब एक साथ रोने लगती है....
तभी संध्या भी वहाँ आ गयी....तुम लोगो ने इसे क्यो घेर रखा है.....दूध नही पिलाया क्या जय को...
शमा--संध्या रानी हमने तो हमारे हिस्से का दूध पिला दिया अब आपकी बारी है..,.
संध्या--नेहा इतने बड़े बड़े बोबे लेकर घूमती है लेकिन जय की भूख शांत नही होती तुझ से.....
नेहा--क्या करूँ....इसके अलावा मुझे और भी बच्चो को दूध पिलाना होता है.....आप शमा को क्यो कुछ नही कहती हो....
में--अगर आप लोगो की बाते ख़तम हो गयी हो तो क्या मुझे और दूध मिलेगा....
मैं अपने हाथ मे खाली हो चुका ग्लास सब को दिखा देता हूँ....
संध्या--ऊओ मेरा छोटा बाबू अभी भी भूका है....हटा इस ग्लास को मैं तुझे वैसे ही अपना दूध पिला देती हूँ....
उसके बाद संध्या ने अपना ब्लाउस उपर किया और एक बोबा निकाल कर मेरे मुँह मे ठूंस दिया....में लगातार उनका दूध पिए जा रहा था और वहाँ सभी लोग मेरे जिस्म पर हाथ घुमाए जा रहे थे....
शमा के एक लड़की हुई थी....रूही के भी एक लड़की....कोमल और दीक्षा के भी एक एक लड़की...नेहा के एक....और संध्या के जुड़वा लड़कियाँ हुई थी....नीरा के एक लड़का हुआ था...सब कहते है वो बिल्कुल मेरे जैसा दिखता है...बाकी सारी लड़किया अपनी अपनी माँ पर गयी थी....
चाची के भी दो जुड़वा लड़के हुए थे लेकिन अब उनसे हमारा कोई कॉन्टेक्ट नही है....
दूध पीते पीते मैं एक बार आज से एक साल और चार दिन पीछे चला जाता हूँ....कभी सोचा नही था इतना प्यार मिलेगा कभी सोचा नही था रिश्ते कुछ इस तरह बदल जाएँगे....कभी सोचा नाही सिर्फ़ एक ही दिन म सब कुछ बदल जाएगा.....
में और नेहा एक दूसरे की बाहो मे लेटे लेटे सुकूनू की साँसे ले रहे थे....तभी किसी जंगली जानवर की दिल को चीर देने वाली रोने की आवाज़ ने मुझे बैचैन कर दिया....
मुझे किसी अनहोनी की चिंता ने घेर लिया था....हम दोनो ने तुरंत अपने अपने कपड़े पहने और चल पड़े वॉटरफॉल की तरफ.....
उस तरफ जाते वक़्त मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई शक्ति मुझे अपनी तरफ खींच रही है.....हम दोनो तेज़ कदम बढ़ते हुए झरने तक पहुँच गये.....
वहाँ हर तरफ खामोशी फैली हुई थी....बस उस खामोशी को तोड़ती झरने की गिरने वाली आवाज़.... झरने की अविरल धारा ही मेरा ध्यान मेरे परिवार पर आई किसी मुसीबत का संदेश दे रही थी.....
मुझे वहीं नीरा भी मिल गयी उसके सिर से अभी भी खून बह रहा था.....उसे इस हालत मे देख कर मेरे पैरो की जैसे सारी ताक़त ख़तम हो गयी....मैं वही अपने घुटनो पर बैठ कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगा.....
नेहा ने जल्दी से अपने बेग मे से फर्स्ट एड का बॉक्स निकाला और नीरा का घाव सॉफ करके उसका बहता खून रोक दिया....
कुछ पानी की छींटे माकर नीरा को नेहा होश मे ले आई