मेरा मन उखड़ा उखड़ा था तो मैं भी लेट कर सो गया.
सपने में मैंने देखा की मैं पूरा नंगा बिस्तर पर लेटा हूँ
और दीदी भी नंगी होकर मेरे खड़े लंड पर बैठ जाती है
और उछल उछल कर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगती है.
ये सपना और पूरी दिन दीदी की चुदाई देखने की
वजह से मैं नींद में ही झड गया, अचानक गीला गीला
लगने से मेरी नीद टूट गयी तो मैंने देखा शाम
के ७ बज गए थे. रिशू अभी भी सो रहा था.
मैंने उसे जगाया और उससे कहा, सुन भाई,
अब तूने तो दीदी को चोद ही लिया है तो
अब मेरे लिए भी कुछ जुगाड़ कर दे.
रिशू बोला अबे मैंने रश्मि को रंडी क्या बोला
तूने तो सीरियसली ले लिया. जैसे मैं बोलूँगा
और वो टांग उठा कर तुझे चूत दे देगी.
अबे वो तेरी बहन है समझा मेरे कहने भर
से तुझे नहीं दे देगी. रिशू मेरा मजाक उडाता बोला.
मैंने मन में सोचा साले जब मैं तेरी माँ और बहन
दोनों को चोदुंगा तब देखूँगा तेरी हीरोगिरी.
रिशू उठ कर नीचे चला गया और
मैं भी पीछे पीछे नीचे आ गया.
दीदी टीवी देख रही थी.
रिशू तुम्हारे घर मैंने फ़ोन कर दिया था.
बहुत देर सो लिए तुम लोग. दीदी हमे देख कर बोली.
रिशू बोला हाँ रश्मि बड़ी थकान हो गयी थी.
मुझे बड़ा अजीब लगा की वो दीदी को नाम से बुला रहा है
और दीदी एक दम नार्मल बर्ताव कर रही है.
खैर धीरे धीरे समय काटने लगा और
हम लोग बिना ज्यादा बात किये टीवी देखते रहे.
रात को १० बजे हमने खाना खाया.
फिर दीदी बोली तुम लोग तो दोपहर को
सो चुके हो तो तुम लोग तो जागोगे. मैं चली सोने.
फिर दीदी ने बेडरूम में जाकर डोर अन्दर से बंद कर लिया.
मुझे थोड़ी ख़ुशी हुई की दीदी ने दरवाजा बंद कर लिया है.
मुझे नहीं लगता की अब वो रिशू के लिए डोर खोलेगी.
१०-१५ मिनट बाद रिशू बोला, जा बे सो जा जाकर.
पर क्यों? मुझे नींद नहीं आ रही है. मैंने बोला.
अबे जाता है या मारू तेरी गांड. रिशू ने गुस्सा दिखाते हुए कहा.
मैं चुपचाप उठ कर ऊपर आ गया
और नीचे देखने लगा. १० मिनट तक रिशू टीवी
देखता रहा फिर उसने बेडरूम का डोर नाक किया.
दीदी जाग रही थी. उन्होंने अन्दर से पुछा कौन है.
मैं हूँ रिशू ने जवाब दिया.
मोनू कहा है दीदी ने अन्दर से पुछा.
वो सो गया है. रिशू ने कहा.
दीदी ने फ़ौरन दरवाजा खोल दिया और
रिशू ने खीच के दीदी को बाँहों में ले लिया
. रिशू दीदी के नरम होठो का रस पीने लगा
फिर दीदी ने कहा अन्दर चलो ना.
रिशू ने दीदी को गोद में उठा लिया और
दोनों कमरे में चले गए फिर उन्होंने दरवाजा अन्दर से बंद हो गया.
मैं वापस बिस्तर पर आ कर लेट गया और
सोचने लगा की मैंने बड़ी गलती की.
दीदी तो पूरी चुदासी है अगर मैंने कोशिश की होती
तो इस समय रिशू के बदले मैं ही उनकी
जवानी का रस पी रहा होता.
पर जो भी किया अब मुझे रिशू से बहुत ज़लन हो रही थी
की उसने मेरी कुवारी बड़ी बहन को चोद डाला था.
मुझे लगा की अगर दीदी को किसी से चुदना ही था
तो मुझसे क्यों नहीं. अगर मैंने हिम्मत की होती तो
जैसे वो आज रिशू का साथ दे रही है
वैसे ही मेरा भी तो दे सकती थी.
यही सब सोचते हुए मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला.
अचानक मेरी नींद खुली और
मैंने घडी की तरफ देखा रात के ३ बजे थे.
मेरे बगल का बेड खाली पड़ा था मतलब रिशू को
दीदी के साथ कमरे में घुसे ५ घंटे से ज्यादा हो गए थे
पर वो बाहर नहीं आया था.
मुझे लगा की वो नीचे हो सो गया था.
मैं घीरे से नीचे गया.
कमरे का दरवाजा अन्दर से बंद था और
खिड़की पर पर्दा पड़ा हुआ था.
मैं अन्दर देखने का रास्ता ढूनने लगा पर
तभी मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई दी.
रश्मि: आह दर्द होता है...छोड़ो भी अब...
तुम्हारा मन नहीं भरता क्या....आह इस स स
रिशू: रश्मि मेरी जान अगर मेरा बस चले
तो तुम्हे मैं दिन रात नंगा करके सिर्फ चोदता रहूँ
और कोई काम न करू.
रश्मि: नहीं आह अब फिर से पीछेह आ
अआह नहीं ओह्ह्ह इश्स. अभी भी दर्द हो रहा है
आआअह्हह्हह रिशूऊऊ नान्ह्ही अआह.
आगे डालो ओ ओ आह ना
रिशू: जान जो मज़ा तुम्हारी गांड में है वो
चूत में नहीं है. चूत भी मारूंगा पर गांड मारने के बाद.
अभी तो बहुत टाइम है अपने पास.
रश्मि दीदी ये सुन कर हँसते हुए बोली.
अरे क्या आह सोने नहीं दोगेगे गे क्या मुझे आह ओऊ.
३ तो बज गए है आःह...सुबह आःह ७-८
बजे तक ऊओह जागना अआह होगा.
मैंने फ़ौरन एक स्टूल लिया और
दरवाजे के पास धीरे ले रखकर उसके ऊपर खड़ा हो गया.
दरवाजे के ऊपर रोशनदान से अब मैं अन्दर देखने लगा.
कमरे में जीरो वाट का बल्ब जल रहा था और
उसकी लाल रौशनी में मैंने देखा की रिशू बेड पर बैठा था
और उसने दीदी को अपने आगोश में ले रखा था
और उनके मम्मे नोंच रहा था. दोनों के शरीर
पर एक सूत का धागा भी नहीं था.
रिशू ने दीदी से कहा, अब जल्दी से अपनी गांड दे
दो मेरी जान वरना तुम्हारा रेप कर दूंगा.
दीदी मुस्कुराते हुए बोली, तो करो न रेप.
कबसे इच्छा थी की कोई मेरा रेप करे.
सच रिशू ने एक ही दिन में दीदी को
अनाडी से खिलाडी बना दिया था.
रिशू बोला अच्छा तो चल आज तेरी
ये इच्छा भी पूरी कर देता हूँ. हरामजादी कुतिया,
जिस गांड को मटका मटका कर तू दुनिया की झांटे जलाती है
आज उसी गांड में लंड पेलकर तेरा घमंड तोडूंगा रंडी.
बहुत अकड दिखाती थी न देखा कैसे तेरी
भुर का मैंने भोसड़ा बना दिया.
अब तेरी गांड से तेरी बची हुई अकड़ निकालूँगा.
रश्मि दीदी को गलियां सुन कर बहुत मज़ा आने लगा.
उन्हें लगा की सच में रिशू उनके रेप करने वाला है.
वो भी रोल प्ले में उसका साथ देने लगी
दीदी: भगवान के लिए मुझे छोड़ दो. मुझे जाने दो.
रिशू: साली हरामजादी रंडी अब तुझे
कोई नहीं बचा सकता जल्दी से कुतिया बन जा.
रिशू ने दीदी गांड पकड़ कर उन्हें पलट दिया और
उनकी गांड पर एक जोर का थप्पड़ जड़ दिया
और बोला चल छिनाल जल्दी से अपनी गांड ऊपर उठा.
दीदी को थप्पड़ पड़ने से बहुत दर्द हुआ और वो बोली
दीदी: अआह, अरे रिशू क्या कर रहे हो.
तुम्ही तो कह रही थी जान तुम्हारा रेप करने को.
रेप कोई प्यार से थोड़ी किया जाता होगा.
रिशू मुस्कुराते हुए बोला
दीदी (मुस्कुराते हुए): तुम्हे बड़ा मजा आ रहा था रेप का क्यों.
रिशू: अब टाइम मत वेस्ट करो मेरी जान.
जल्दी से गांड ऊपर कर दो. वरना रात भर सोने नहीं दूंगा.
रश्मि दीदी अब समझ गयी की रिशू को मना
करने का कोई फायदा नहीं. वो उनकी गांड में
अपना लंड पेले बिना मानेगा नहीं. ये
सोचकर दीदी ने अपनी गांड ऊपर उठा दी
और दोनों हाथो से तकिये को पकड़ कर
उसमे अपना मुह दबा दिया.
अपनी आखे बंद करके वो अपनी गांड पर होने वाले
जुल्म के लिए तैयार हो गयी.
रिशू ने ने दीदी की गांड को थोडा और
ऊपर उठा कर उनकी टांगे थोडा और खोल दी
और उनके चूतरो को मसलने लगा.
फिर उसने अपना लंड छड़ी की तरह दीदी की चूत
और गांड पर मारना शुरू किया.
दीदी ने दर्द की उम्मीद में अपने होठो को
अपने दांतों से काट लिया. थोडी देर पहले
मुझे अफ़सोस हो रहा था की मैं सो क्यों गया
और दीदी की गांड चुदाई नहीं देख पाया.
अब मेरा अफ़सोस गायब हो गया और
उसकी जगह उत्तेजना ने ले ली.
अब मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था की
रिशू अपना हलब्बी लंड दीदी की गांड के छल्ले के पार कर दे.
रिशू ने दीदी के चूतरो को पकड़ कर फैलाया
और अपना लंड दीदी की गांड के छेद पर रख दिया.
मेरा दिल धक् धक् करने लगा और
तो दीदी का क्या हाल होगा. रिशू ने दीदी की
गांड के छेद को फैलाते हुए अपना लंड उनकी गांड में ठूस दिया
. दीदी का मुह तकिया से दबा होने के
बावजूद उनके मुह से एक चीख निकल गयी.
उईई माँ मर्र्रर्र्र्रर्र्र गयीईईईइ.....
रिशू ने अगले धक्के के साथ ही अपने
लंड को जड़ तक दीदी की गांड में पेल दिया.
दीदी का शरीर कापने लगा. रिशू फिर से रेप
वाले मोड़ में आकर दीदी के बाल पकड़ कर बोला...
बोल साली रंडी...दिखाएगी फिर से मुझे नखरे
...हरामजादी....भोसड़ी वाली...कुतिया...
दीदी को गलिया देने के साथ ही उसके धक्को का
जोर बढता जा रहा था. पर दीदी तो रिशू की
खरीदी हुई रांड की तरह चुप चाप सब सुन रही थी
और अपनी गांड में लंड पिलवा रही थी.
गांड की चुदाई में रिशू को इस बात का मज़ा आता
था की गांड के छेद का कोई अंत नहीं होता.
जहा तक चाहे पेलते जाओ. रिशू ने दीदी को
पेट के बल लिटा दिया और उनकी चून्चियों
को दबा दबा कर उनकी गांड मारने लगा.
शुरू में तो दीदी के मुह से केवल चीखे ही निकल रही
थी पर धीरे धीरे उनको भी मज़ा आने लगा.
अब रिशू ने अपनी तीन उंगलिया गचाक से
दीदी के चूत में पेल दी और उनके गांड में धक्को की स्पीड
और बड़ा दी. दीदी के एक छेद में रिशू की उंगलिया
और दुसरे छेद में लंड अन्दर बाहर हो रहे थे.
एक साथ दोनों छेद में रिशू को पाकर दीदी
पूरी तरह मदमस्त हो गयी और झड़ने लगी.
रिशू भी अब कगार पर था तो उसने अपने धक्को की
रफ़्तार और बड़ा दी और दीदी की गांड में ही झड गया.
दीदी: अहह जान निकाल दी तुमने मेरी आअज
रिशू: अरे यार आदत नहीं हुई तुम्हारी अभी तक.
दीदी: आदत? अरे मैं कोई रंडी हूँ जो
रोज़ १० बार चुदती हूँ और गांड मरवाती हूँ.
पहली बार आज तुम्हारा ही लिया है आगे
और पीछे भी. समझे. अब हटो मुझे बाथरूम जाना है.
रिशू: रुको. मैं भी चलता हूँ. तुम्हे मूतते
देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है.
मैं समझ गया की दोनों बाहर आने वाले है
तो मैं जल्दी से ऊपर आ गया और
अपने कमरे में आ कर लेट गया पर मेरी आँखों
में नींद नहीं थी. करीब आधे घंटे बाद रिशू भी
कमरे में आया और मुझे जगा हुआ देख कर बोला
अब मेरे मुह से निकल गया. ५ बार किया तुमने.
सुबह भी तो ३ बार किया था. कैसे?
रिशू: अबे दवाई खाई थी मैंने.
आखिर मेरे यार की बहन है,
पहली चुदाई धमाकेदार होनी ही चाहिए थी.
अब सो जा और मुझे भी सोने दे. बहुत थक गया हूँ.
अगले दिन भी रिशू ने दीदी को खूब चोदा
और उसके बाद जब भी उसे मौका मिलता वो
दीदी को अपने घर ले जाकर या मेरे घर आकर चोदता था.
जब घर पर कोई नहीं होता तो दीदी खुद उसे फ़ोन
करके बुला लेती थी और घंटो चुद्वाती थी.
रिशू जब भी दीदी को चोदता मुझे पूरी चुदाई डिटेल
में जरूर बताता पर दीदी मेरे सामने शरीफ बनी रहती थी.
मैंने कामिनी आंटी को एक दो बार चोदने का प्लान बनाया
पर कुछ हो पाता उससे पहले की रिशू के पापा
अपनी फॅमिली को भी अपने साथ दिल्ली ले गए.
मेरे अरमान दिल में ही रह गए पर मुझे लगा की
चलो रिशू अब दीदी को नहीं चोद पायेगा.
एक दिन रिशू का फ़ोन आया.
दीदी कहीं बहार गयी थी तो वो मुझसे बात करने लगा.
उसने मुझे बताया की वो दो-तीन दिन के लिए रक्षाबंधन पर आ रहा है.
उसने मुझे बोला की ३ दिन वो अपने घर पर अकेला रहेगा.
उसने दीदी को यही बताने के लिए फ़ोन किया था
और वो बाद में फिर से फ़ोन करके दीदी से बात कर लेगा.
मुझे अब रिशू से चिड होती जा रही थी.
उधर दीदी ने अब मुझसे बात करना काफी कम कर दिया था
शायद इसकी एक वजह ये थी की वो समझ गयी थी
मेरी नज़रो में उनके लिए फर्क आ गया है.
इसलिए मुझे दीदी की तरफ से भी कोई ऐसा मौका नहीं मिला
जिसका मैं फायदा उठाता.
दीदी दिन रात रिशू के ख्याल में ही खोई रहती थी.
मैंने देखा रात को वो मेरे सोने का वेट करती रहती है
तो मैंने एक दो बार सोने का नाटक करके देखा
की मेरे सोने के बाद वो गन्दी किताबे पढ़ती है
और अपनी चूत में ऊँगली करती है.
ये सब और फिर रिशू के मुह से दीदी की चुदाई की
कहानिया सुन कर मेरे अन्दर दीदी को चोदने की
इच्छा दिन पर दिन आग पकडती जा रही थी.
मुझे लग रहा था की रिशू फिर से दीदी को
चोदने आ रहा है और मैं उसे कैसे भी रोकू.
ऐसे में एक दिन मम्मी ने मुझे बुलाया और
कहा तेरी मौसी का फ़ोन आया था,
इस बार तेरे कजिन्स राखी पर नहीं आएंगे.
हर साल तो वही लोग आते है मम्मी क्यों न
इस बार मैं दीदी को लेके वहां चला जाऊ.
मैंने तुरंत मम्मी से कहा. मुझे लगा की जब
हम यहाँ नहीं होंगे तो रिशू लंड हिलाता वापस चला जायेगा.
मम्मी: ठीक है. मैं आज ही तेरी मौसी को फ़ोन कर देती हूँ.
मोनू: नहीं मम्मी, हम उन्हें सरप्राइज देंगे.
मम्मी ने पैसे देकर मुझे बोला जाकर ट्रेन के टिकेट
बुक करवा लाओ और मैं रिजर्वेशन करवाने चला गया.
राखी से एक दिन पहले की टिकेट आराम से मिल गयी
और जब मैं लौट कर आया तब तक
दीदी को भी मम्मी ने बता दिया था.
अब दीदी को तो पता नहीं था की उनका यार
उनको चोदने के लिए उसी समय यहाँ आने वाला था
तो वो आराम से जाने के लिए तैयार हो गयी.
ट्रेन में बैठते ही दीदी मुझसे पहले ही तरह ही
बातें करने लगी और मुझे लगा की हमारे लौटने
तक सब नार्मल हो जायेगा. सफ़र अच्छा रहा
और हम रात होने से पहले मौसी की कोठी पर पहुच गए.
जब हमने बेल बजाई तो मौसी का कुत्ता राकी
हमारे स्वागत के लिए भौकता हुआ बाहर आया.
दीदी को राकी से बहुत डर लगता था.
राकी एक कट्टा कट्टा जर्मन शेफर्ड था.
वैसे दीदी को सभी कुत्तों से डर लगता था
पर राकी से वो कुछ ज्यादा ही डरती थी.
तब तक मनीष भी बाहर आ गया.
मैं आपको बता दूं की मेरी मौसेरी बहन का नाम मोनिका है.
और उसकी भी उम्र १९ साल है और मेरा कजिन
मनीष उससे १ साल बड़ा है पर मेरी उससे अच्छी बनती है.
हम दोस्तों की तरह ही रहते है.
मेरे मौसी और मौसा दोनों डाक्टर है और
शहर का सबसे बड़ा नर्सिंग होम चलाते है.
कुल मिलाकर अच्छे पैसे वाले लोग है.
मनीष हमे देख कर बहुत खुश हुआ और दरवाजा खोलने लगा पर दीदी बोली
पहले राकी को बांध दो फिर मैं अन्दर आऊंगी. मनीष हँसते हुए राकी को पकड़ कर अन्दर ले गया और हम पीछे पीछे अन्दर आ गए. अन्दर आ कर हमने देखा की घर पर और कोई नहीं था तब मनीष ने बताया की मौसी, मौसा और मोनिका हमारे मामा के घर चले गए है और घर पर केवल मनीष ही है.
दीदी ने कहा लो सरप्राइज देने की जगह मिल गया. मोनू तुम्हे आने से पहले फ़ोन कर देना चाहिए था.
मनीष ने कहा कोई बात नही. मैं अभी उन लोगो वो वापस बुला लेता हूँ और उसने मामा के घर फ़ोन करके हमारे आने के बारे में बता दिया. तब मौसी ने फ़ोन पर मुझसे कहा की अच्छा हुआ की तुम लोग आ गए अब तुम लोग आराम करो हम कल दोपहर तक वापस आ जायेंगे.
फिर हम मनीष के साथ डिनर करने चले गए और वापस आते आते १० बज गया और रश्मि मोनिका के रूम में सोने चली गयी और मैं मनीष के रूम में उसके साथ सोने आ गया. मनीष मुझसे बोला की यार आज घर पर कोई था नहीं इसीलिए एक दोस्त से ब्लू फिल्म ले के आया था. देखेगा?
मैंने कहा पर अगर टीवी रूम में रश्मी दीदी आ गयी तो. मनीष बोला यही रूम में कंप्यूटर पर लगा लेते है. और हम ब्लू फिल्म देखने लगे और उसने अलमारी से व्हिस्की की बोतल निकाली और बोला आज ऐश करवाता हूँ तुझे और दो लार्ज पेग बना दिए. मैंने इससे पहले बियर ही पी थी, ये पहली बार मैं व्हिस्की पी रहा था और हम दोनों भाई पीते पीते ब्लू फिल्म का मज़ा ले रहे थे.
पर दोस्तों हर ब्लू फिल्म की हीरोइन में मुझे रश्मि दीदी नज़र आ रही थी और उसको चोदने वाला हर आदमी रिशू... देर रात तक हम पीते रहे, हमे काफी चढ़ भी गयी थी और हम काफी गरम भी हो गए थे.
मोनू: भाई रहा नहीं जा रहा, मैं तो मुठ मारने जा रहा हूँ.
मनीष: यार कभी कोई लड़की चोदी है.
मोनू: नहीं यार, हमारी किस्मत में लौंडिया कहा. हम तो हांथो से गुजारा कर रहे है भाई. तुम्हारी तो गर्ल फ्रेंड है, तुमने तो बहुत पेला होगा.
मनीष: कहा यार, कुछ दिनों पहले एक दोस्त का घर कुछ दिनों के लिए खाली था तो उसने एक रात को रंडी बुलाई थी तब हम दोनों ने उसको चोदा था. उसके बाद कभी मौका नहीं मिला. गर्ल फ्रेंड है तो मगर ज्यादा कुछ करने नहीं देती. उस रंडी की उम्र ३५-३८ साल की होगी फिर भी बहुत मज़ा आया था. सोचता हूँ कोई १८-२० साल का कड़क माल हो तो लेने में कितना मज़ा आयेगा.
मोनू: भाई लौंडिया तो अब सपने में मिलेगी तो तुम जल्दी से हिला के सो जाओ.
मनीष: यार अगर बुरा न मानो तो एक बात कहूँ.
मोनू: ऐसी क्या बात है.
मनीष: यार लौंडिया तो यही है और बहुत करारी भी, मेरा तो बहुत दिनों से दिल है उस पर अगर तुम कहो तो मैं उसको चोद लू.
मोनू: अब इस वक़्त लौंडिया. मैं कहूँ तो चोदेगा मतलब. किसकी बात कर रहा है.
मनीष: रश्मि की.
मुझे ये सुन कर बहुत गुस्सा आया की साला पूरी दुनिया को चोदने के लिए मेरी ही बहन नज़र आती है. मैंने तो अभी तक उनको चोदा नहीं और ये साला पहले दीदी को चोद ले पर मैं उसके सामने खुलना नहीं चाहता था इसीलिए बोला
मनीष: यार कहा था की बुरा मत मानना.
तुम तो नाराज़ हो गए. अगर तुम मोनिका को
चोदने को कहोगे तो मैं कहूँगा की
अगर चोद सको तो चोद लो.
यार हम लोग सेक्स को अजीब तरीके से देखते है.
यार एक बात बताओ रश्मी या मोनिका क्या कभी चुदेंगी नहीं.
अब उनकी चूत में एक आदमी का लंड जाये
दो का या तीन का क्या फरक पड़ता है.
अन्दर ही अन्दर मेरे मन में आया की बेटा
मेरी बहन तो चुद भी चुकी और क्या पता तेरी बहन
ने भी कितने लंड लीले होंगे. सबको लगता है
की हमारी बहन तो बहुत भोली है पर
जब से दीदी को रिशू से चुद्वाते देखा तब पता चला
की हर जवान लड़की की जरूरत लंड है
पर ऊपर से मैंने मनीष की बात का विरोध किया
मोनू: चुप रहो यार, अपनी बहनो के बारे में कोई ऐसा नहीं सोचता.
मनीष: मैं तुम्हे सगे भाई बहन की ब्लू फिल्म दिखा सकता हूँ
मेरे पास है. इसमें लड़के और लड़की अपना ड्राइविंग
लाइसेंस दिखाते है जिससे ये पता चला की दोनों के बाप
और एड्रेस एक ही है और दोनों शकल से भी
भाई बहन लगते है और फिर धुआधार चुदाई करते है.
मोनू: मुझे नहीं देखनी यार कोई फिल्म. दीदी नहीं मानेगी.
मनीष को क्या पता था की मैं अपनी सगी
बेहेन की लाइव ब्लू फिल्म देख चूका हूँ और
उससे ज्यादा दीदी को चोदने को मरा जा रहा हूँ.
कुछ व्हिस्की का असर कुछ मनीष की बातों का
मेरा लंड एक दम लोहे के राड की तरह खड़ा हो गया.
इसी नशे में जब मेरे मुह से निकला की दीदी
नहीं मानेगी तो मनीष समझ गया की मैं मान गया हूँ.
मनीष ने इसको महसूस किया और
आग में घी डालते हुए बोला की सोचो ऐसा सुनेहरा
मौका दुबारा नहीं मिलेगा जब रश्मि और
हम दोनों के सिवा घर में कोई नहीं है. अगर
आज मैंने रश्मी को चोद लिया तो तुमसे भी चुदवा दूंगा
फिर जिंदगी भर के लिए तुम्हारे लिए फ्री की
चूत का जुगाड़ हो जायेगा. कसम से कह रहा हूँ
की अगर ऐसा मौका मुझे मोनिका के साथ
मिलता तो पूरी रात नंगी करके चोदता और तुमसे भी चुद्वाता.
मैंने सोचा के ये कह तो सही रहा है और
रिशू ने कैसे बेदर्दी से दीदी को चोदा था पर
फिर भी वो उससे चुदवाने दौड़ी दौड़ी जाती है
पर मैंने मनीष से कहा दीदी ने अगर उसने घर पर बोल दिया तो.
मनीष मुझे तैयार होता देख कर खुश हो गया
और बोला की यार तुम मेरे साथ तो चलो और
मैं जो बोलूं वो करते रहना बस.
मैंने कहा तुम जाओ मैं बाद में आ जाऊँगा.
मनीष बोला यार डरो मत मेरे साथ आओ.
फिर वो मोनिका के रूम की तरफ चला गया
और मैं भी हिम्मत करके उसके पीछे चल दिया.
दीदी ने रूम अन्दर से लॉक कर रखा था
पर मनीष के पास लॉक की दूसरी चाभी थी
और उसने रूम का डोर खोला और
हम दोनों अन्दर आ गए. अन्दर अँधेरा था.
मनीष ने नाईट लैंप ऑन किया.
हलकी पीली रौशनी कमरे में फ़ैल गयी.
रश्मि दीदी बेड पर गहरी नींद में सो रही थी
और उन्होंने मोनिका की नाइटी पहनी थी
और वो बहुत सेक्सी लग रही थी
. मनीष दीदी को हवस की नजरों से देख रहा था.
उनके मम्मे जो रिशू ने दबा दबा कर बड़े कर दिए
थे एक दम कच्चे आम की तरह उभरे हुए थे.
मुझे पता था की दीदी बहुत बड़ी चुद्दकड़ बन गयी है
पर फिर भी मुझे डर लग रहा था पर मनीष के
ऊपर तो दीदी की जवानी को पीने का नशा चढ़ा था
तो उसने आगे बढ़कर दीदी नाइटी को ऊपर खिसका दिया.
दीदी की संगमरमर जैसी सफ़ेद जांघे देख कर
मेरे लंड से जैसे पानी ही निकल गया.
दीदी ने गुलाबी रंग की फ्लावर प्रिंट की पैंटी पहिनी थी.
मनीष ने वही स्टडी टेबल पर राखी एक केंची उठाई
और दीदी की पैंटी को दोनों तरफ से धीरे धीरे काट दिया.
दीदी ने कोई हरकत नहीं की.
अब रश्मि दीदी की गुलाबी चूत हमारी आँखों के सामने थी.
दीदी की चूत को इतने पास से देख कर ऐ
सी कमरे में भी मेरा बदन गर्मी से जलने लगा.
रश्मि दीदी की चूत पाव रोटी की तरह फूली हुई थी
और उस पर बहुत हलके से काले बाल थे.
दीदी को शेव किये १-२ दिन ही हुए होंगे.
फिर मनीष ने धीरे से नाइटी को भी बीच से काट दिया.
दीदी ने वाइट कलर की ब्रा पहनी थी और
उनका चिकना पेट, नाभि, चूत अब हमारे सामने नंगा था.
अब मनीष से कण्ट्रोल नहीं हुआ और
उसने ब्रा के ऊपर से ही रश्मि दीदी की चूची को दबा दिया.
दीदी फ़ौरन जाग गयी और
अपनी हालत और हम दोनों को कमरे में देख कर शॉक हो गयी.
उन्होंने मनीष को धक्का दिया और
बेड से खड़ी को कर गुस्से से बोली की ये क्या कर रहे हो
तुम मनीष और मोनू तुम खड़े हो कर देख रहे हो
. मैं तुम्हारी बड़ी बेहेन हूँ.
मुझे समझ में नहीं आया की क्या कहू पर
तभी मनीष बोला रश्मि आज हम एक नया अटूट
रिश्ता बनायेगे जो की दुनिया का सबसे पुराना रिश्ता है.
आदमी और औरत के जिस्म का रिश्ता.
रश्मि: बकवास बंद करो और दोनों रूम से बाहर निकल जाओ.
मनीष: अब हम कहीं नहीं जायेंगे.
आज हमें कोई रोक नहीं सकता.
रश्मि: तुम चाहते क्या हो मनीष.
मनीष: तुम्हे चोदना चाहते है बेहना.
रश्मि: पागल हो गए हो क्या. अगर तुमने कुछ किया
तो कल मौसा जी से कहके तुम्हे घर से निकलवा दूँगी
और मोनू तुम कुछ तो करो क्या पुतले की तरह खड़े हो.
मनीष: कल तुम्हे जो करना है तुम करना
पर आज की रात हमारी है. और सुन मोनू
अब हम पीछे नहीं हट सकते.
जब हम इसको एक बार चुदाई का मज़ा देंगे
तब रोज खुद टांगे खोल कर हमें बुलाएगी.
चल पकड़ इसे जब तक मैं अपने कपडे उतारता हूँ.
मुझे याद आ गया की दीदी पहले रिशू से भी
ऐसे ही कह रही थी पर बाद में मज़े ले लेकर चुदवा रही थी.
दीदी समझ गयी की अब हम नहीं मानेगे तो
वो रूम से बाहर भागने लगी.
तब मैंने उनको पकड़ लिया और बोला देखो
दीदी हमारे साथ कोआपरेट करो
ताकि तीनो को ही मज़ा आये.
पर वो नहीं मानी और छूटने के लिए ताकत लगाने लगी.
तब तक मनीष पूरा नंगा हो चूका था और
उसने रश्मि दीदी की पैंटी दीदी के ही मुह में ठूस दी
अब मेरी प्यारी बेहना पूरी तरह से उसके काबू में आ गयी थी.
फिर मनीष ने दीदी की ब्रा भी फाड़ दी और
उनको मादरजात नंगा कर दिया और पलंग पर पटक दिया.
अब मनीष दीदी के मम्मे चूसने लगा और
मैं महीनो का प्यासा उनकी चूत चाटने लगा.
क्या बताऊ आप लोगो को उनकी चूत का स्वाद.
बस जन्नत का मज़ा आ गया.
करीब १० मिनट तक चाटने के बाद दीदी ने
पानी छोड़ दिया और मैंने उसे पूरा पी लिया.
अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था मेरा
बहुत पुराना ख्वाब अब पूरा होने वाला था.
मैंने अपना लंड दीदी की चूत से रगड़ना शुरू
किया तो मनीष बोला रुक, पहले मैं चोदुंगा.
मैंने कहा की मेरी सगी बहन है
मेरा हक पहला है. यह बोल के मैंने रश्मि दीदी
की एक टांग उठा कर अपने कंधे पर रखी
और अपना सुपाड़ा उनकी चूत पर लगा कर
एक जोर का शॉट लगाया.
रश्मि दीदी मचल उठी और मेरा लंड उसकी
चूत के अन्दर चला गया. दोस्तों मुझे विश्वास नहीं हुआ
की मेरा सबसे बड़ा ख्वाब आज पूरा हो गया.
मैंने मन ही मन मनीष का शुक्रिया अदा किया.
मैंने दीदी के कान के पास मुह ले जाकर कहा,
दीदी जब पहली बार रिशू को तुम्हे चोदते देखा था
तब से तुम्हे चोदने की मेरी तमन्ना थी.
आज पूरी हो गयी. मेरा लंड रिशू जितना न सही
पर मज़े तुम्हे पूरे दूंगा. मेरी बात सुनते ही दीदी समझ गयी की
उनकी शराफत के नाटक का पर्दाफाश हो चूका है
और उन्होंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया.
वो समझ चुकी थी की मैं उनके और
रिशू के बारे में सब जानता हूँ.
मुझे लगा की अब दीदी ने मुझे स्वीकृति दे दी है
की जो करना हो करो तो मैंने उनके मुह से पैंटी बाहर निकाल दी.
दीदी के मुह से एक हलकी सी सीत्कार निकली उफ्फ्फ्फ़ आःह.
पर तब तक मनीष ने रश्मि दीदी के मुह में अपना लंड डाल
दिया और उनका मुह फिर से बंद कर दिया...
मैं तो महीनो से भरा बैठा था. करीब १५ मिनट धक्के
मारने के बाद मैं रश्मि दीदी की चूत में ही झड गया.
अब मैं बेड पर लेट गया और मनीष ने पोजीशन ले ली.
मनीष का लंड करीब ६ इंच का था
पर काफी मोटा था फिर भी दीदी ने आराम से ले लिया.
दीदी धीरे धीरे आह आह की आवाज़ निकाल रही थी.
१५ मिनट बाद धक्के लगाने के बाद मनीष भी झड गया.
अब हम तीनो बेड पर चुपचाप लेट गए.
मैंने न में सर हिला दिया. दीदी को अब जोर से
बोली तुम दोनों बहुत गंदे हो और
तुमने मुझे भी गन्दा कर दिया.
ये कहकर वो उठने की कोशिश करने लगी तो मनीष बोला
आओ मेरी जान. हम तुम्हें बाथरूम तक ले चलते हैं.
वहाँ हम अपने हाथों से तुम्हारी चूत को साफ करेंगे ओके..
फिर मनीष ने उनको गोद में ले लिया और
दीदी उसके साथ बाथरूम में चली गई.
मैं भी उसके पीछे गया.
मनीष ने उनको शावर के नीचे बिठा दिया था
और उन पर पेशाब करने लगा.
रश्मि दीदी बोली क्या कर रहे हो मनीष.
तो उसने कहा तुम्हे नहला रहा हूँ.
मैंने कहा यार क्या कर रहे हो.
जल्दी से दीदी को साफ़ करो.
अभी तो कायदे से चोदना है दीदी को. दिल नहीं भरा.
तब मनीष ने शावर खोला और
दीदी को आराम से नीचे बैठा कर
गर्म पानी से चूत साफ करने लगा.
दीदी: आह.. आराम से.. दुखता है..
तुम लोगो के डंडे छोटे सही पर मोटे तो है.
कितनी बेदर्दी से मेरी छोटी सी चूत में घुसा
दिए तुम दोनों ने. सूखी ले ली मेरी.
मनीष: अरे रश्मि.. तेरी चूत तो ऐसी थी कि
उंगली जाने से भी दर्द करती.
अब लौड़ा गया है.. तो थोड़ा तो दु:खेगा ही..
र तुझे अबकी बार ज़्यादा मज़ा आएगा.. देख लेना..
अब उसको क्या पता की दीदी पता नहीं
कितना चुदवा चुकी है और वो भी रिशू के हलब्बी लंड से
और उसके अलावा किसी और
से भी चुदवाया हो तो मुझे पता नहीं.
रश्मि दीदी ने भी हमारे लौड़े को पानी से साफ किया
और प्यार से उसको सहलाने लग गई.
काफ़ी देर तक हम लोग एक-दूसरे को साफ करते रहे
और नहाते रहे. फिर हमारे लौड़े दुबारा खड़े हो गए थे.
ये देख कर दीदी बोली तुम दोनों का मन भी नहीं भरा
और मेरा भी नहीं पर इस बार कुछ मेरा भी ख्याल रखना.
मनीष: अरे तेरी जवानी तो ऐसी है..
कि लंड अपने आप इसे सलामी देने लगता है.
पहली बार तो सब जल्दबाज़ी में हुआ तो ठीक से
मैं तुम्हारे इन रसीले होंठों का मज़ा नहीं ले पाया.
इन कच्चे आमों का रस नहीं पी पाया..
अब सुकून से इनको चूस कर मज़ा लूँगा.
तेरी महकती चूत को चाट कर उसकी सूजन कम करूँगा.
मनीष की बातों से दीदी भी अब उत्तेज़ित होने लगी थी.
वो बोली तो मैंने भी कहाँ मज़ा लिया.
चलो बेडरूम में चलो और मनीष ने फिर से
दीदी को गोद में उठाया और हम वापस बेडरूम में आ गए
बेडरूम में आते ही मनीष ने दीदी को पलंग पर लिटा दिया
और ६९ की पोजीशन में आकर
उनकी चूत के होठों को कुरेदने लगा.
अब रश्मि दीदी के लिए भी खुद को संभालना मुश्किल हो
चला था और वो भी खुल कर चुदाई के मूड में आ गई
और मेरे लंड को चाटने लगी. उन्हें दिक्कत न हो तो
मैं भी सर दूसरी तरफ करके लेट गया
और मनीष को देखने लगा.
क्योंकि दीदी की चूत मनीष के मुंह के सामने थी
तो उसने पहले उसे चूमा और कुछ देर में ही उसने
उसे अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.
शुरू-2 में तो वो सिर्फ अपनी जीभ की नोक को
दीदी की चूत से छुआ रहा था लेकिन फिर
उसने रश्मि दीदी की चूत से आने वाली खुशबू से
सुध-बुध खोकर दीदी की गुलाबी-इत्र सी महकती
हुई चूत को पूरी तरह से चाटना शुरू कर दिया
रश्मि दीदी को इतना मजा आने लगा कि वो
मस्ती में कराहती हुई और जोरों से मेरा लंड चूसने लगी.
अचानक उन्होंने उत्तेजनावश मेरा लंड छोड़ दिया
और मनीष का लंड चूसने लगी.
मनीष का लंड दीदी के गुलाबी होठो के बीच
किसी मोटे बैगन सा नजर आ रहा था.
जैसे मनीष की जीभ दीदी की चूत में गहरी होने लगी
वैसे ही रश्मि दीदी ने हम दोनों के लंड इकट्ठे
मुह के अन्दर लेने की कोशिश करने लगी
लेकिन दोनो भाइयों के लंड दीदी के छोटे
से मुंह में नहीं समा पा रहे थे.
आखिर थक कर रश्मि दीदी ने शारे से बताया कि
अब उन्हें चूत में लंड डलवाना है और
मनीष बिस्तर से उतर कर लंड पकड़ कर नीचे खड़ा हो गया
और हम दोनों ने मिलकर अपनी बहन को कमर के बल लेटा दिया.
अब मनीष उनकी दिलकश चूत को सहलाने लगा
और मैं शानदार चूचियाँ.
रश्मि दीदी से सहन नहीं हुआ और
वह मनीष का तना हुआ लंड पकड़ कर अपनी चूत से रगड़ने लगी.
मनीष आनन्द के अतिरेक से फटा जा रहा था
और उसने लंड को दीदी की गुलाबी चूत के
मुंह पर रख कर निशाना लगा लिया.
मुझे ये देखते हुए इस समय अलौकिक आनन्द की
अनुभूति हो रही थी. सच अपनी बहन को चुदते देखने का
सुख खुद चोदने से कम नहीं है
जिन्होंने देखा है वो लोग जानते ही है...
इसबार जरा धीरे-2 अन्दर घुसाना..
तेरा लंड बड़ा मोटा है. अपनी बहन का थोडा
ख्याल रखना भैया. दीदी ने मुस्कुरा कर मनीष से कहा.
मनीष ने मुस्कराहट के साथ अपने लंड के सुपारे
को रश्मि दीदी की चूत के मुंह से भिड़ा कर
अन्दर डालना शुरू किया. रश्मि दीदी खुद
भी पागल हुई जा रही थी और मोटे सुपारे को
अपनी भट्टी जैसी चूत के अन्दर पाकर दीदी ने
मनीष को कसकर पकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगी.
मनीष भी दीदी के होठ चूसने लगा.
मैं इस समय अपने मौसेरे भाई से चूत चुदाती हुई
मेरी छिनाल दीदी के मुंह को चोदने में लगा था.
मैं बीच बीच में उनके चूतड़ सहलाता हुआ उनकी चूत के
दाने को सहला रहा था और मेरे हाथ से रगड़ खाता
मनीष का लंड मेरी बहन की चूत का बाजा बजा रहा था.
मनीष अचानक उतावला हो उठा और उसने
झटके के साथ रश्मि दीदी की चूत से अपना
सुपाड़ा बाहर निकाल कर पूरा का पूरा अन्दर घुसेड़ दिया
'आआआ.. मर गई. आई.. तूने मेरी चूत फाड़ दी.
ओए.. आआ.. हाँ ऐसे ठीक है.. थोडा धीरे मारो.
ऊऊऊओ.. हाँ.. ऐसे.' चूत पर हुए अचानक
हमले से मेरी बहन रोआंसी सी हो आई,
लेकिन मनीष ने खुद को सँभालते हुए धीरे ध
क्कों के साथ चुदाई जारी रखते हुए स्थिति को संभाल लिया
अब वो बिना जल्दी किए धीरे-2 मेरी दीदी की नर्म-गुलाबी
चूत को चोदने लगा और मेरी रश्मि दीदी वासना के
सुख सागर में गोते लगाने लगी, उनके मुख से तेज
सिसकारियाँ निकलने लगी और उनकी मुख-मुद्रा
बता रही थी कि उसके सुख की कोई सीमा नहीं थी
'ओ ओ ओ.. आआआ.. आआआ.. आ आ आ आआ..
सीई..आआआ.. स्स्स्सीई..' रश्मि दीदी के मुख से
वास्तविक ख़ुशी भरी सिसकारियाँ निकलने लगी
बैंगन जैसा मोटा और लोहे की राड जैसा सख्त मनीष
का लंड दीदी की अँधेरी सुरंग की गहराइयों को नापने लगा
जो खुद भी अपनी जीभ से उसे गर्मजोशी से जवाब दे रही थी.
वासना से कामांध होकर दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चाटने लगे.
इस दौरान चुदाई की स्पीड हर धक्के के साथ बढ़ती जा रही थी
और दीदी के गले से निकलने वाली आवाज हर
धक्के के साथ तेज होती जा रही थी.