और दीदी के इतना कहते ही हम तीनो उन पर टूट पड़े मैं दीदी की चून्चिया उनकी चोली के ऊपर से दबा रहा था तो रिशू रश्मि दीदी का लहगा उठा कर उनकी चूत पर हाथ रग़ड रहा था और मनीष दीदी के चूतड़ दबा रहा था. रिशू ने दोनों हाथों से खींच कर दीदी की पैंटी उतार दी. दीदी के गोरे चुतड नंगे चमक रहे थे. लगता था की चुतड पर भी दीदी ने फाउंडेशन लगवाया था. दीदी के कपडे तो हम नहीं उतार सकते थे पर हम तीनो ने जल्दी जल्दी अपने कपडे उतार डाले और पूरे नंगे हो गए.
मैंने दीदी को घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड दीदी की पानी छोडती बुर में पेल दिया. दीदी के मुहे से एक हलकी सी आह निकल गयी. तभी रिशू ने दीदी के मुह में अपना लंड पेल दिया और दीदी उसे लालीपाप की तरह चूसने लगी. मनीष ने दीदी की चोली के बटन खोल दिए और ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचिया दबाने लगा. मैंने सामने शीशे में देखा की कैसे दीदी पूरी तरह से दुल्हन की तरह सजी हुई अपने भाई से चुदवा रही है. टाइम कम था तो मैंने ताबड़तोड़ धक्के मार मार कर दीदी की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया. मेरे झड़ते ही रिशू ने दीदी की चूत में अपना लंड पेल दिया और मनीष ने दीदी के मुह में. मैं कपडे पहन कर फिर से तैयार हो गया तब तक कामिनी आंटी भी तैयार हो कर आ गयी.
कामिनी आंटी अन्दर घुस कर रश्मि दीदी से बोली अरे शादी वाले दिन दुल्हन का व्रत होता है. वो कुछ नहीं खाती और तू यहाँ दो दो लंड आगे पीछे से खा रही है. क्यों हो गया तुम लोगो का...
मोनू: मेरा हो गया. रिशू पेल रहा है फिर मनीष.
कामिनी: अरे इतना टाइम नहीं है ७.४५ हो गए है. घर से कोई पार्लर पूछने जाये इससे पहले हमने वहां पहुच जाना चाहिए.
तब तक रिशू ने भी दीदी की चूत को अपने वीर्य से भर दिया. कामिनी आंटी बोली बस अब टाइम नहीं है पर मनीष बोला बस ५ मिनट आंटी और उसने अपना तन्नाया हुआ लंड दीदी की वीर्य से भरी चूत में पेल दिया. दीदी भी अब तक एक बार झड चुकी थी.
कामिनी: चल जब तक तू इसको चोद मैं इसकी चोली वापस बाँध देती हूँ. रिशू तू भी कपडे पहन कर तैयार हो जा.
फिर आंटी दीदी की चोली बांध कर उनकी लिपस्टिक ठीक करने लगी जो लंड मुह में लेने से थोड़ी फ़ैल गयी थी. मनीष के झड़ते झड़ते ८ बज गया.
आंटी ने दीदी के कपडे ठीक किये पर दीदी की पैंटी नहीं मिल रही थी. आंटी ने दीदी को सीधा खड़ा किया और उन्हा लहगा नीचे कर दिया और बोली चल रश्मि जल्दी चल. बाद में दूसरी पैंटी पहन लेना अभी चल. दीदी चूत साफ़ करना चाहती थी पर आंटी ने कहा अब टाइम नहीं है हम सब जल्दी से कार जाकर बैठे और 2 मिनट में गेस्ट हाउस पहुच गए. सब लोग हमारा वेट कर रहे थे. हम सब जल्दी से अन्दर पहुचे और दीदी को सीधे स्टेज पर ले जाया गया. वहा मयंक दीदी का जयमाल के लिए इंतज़ार कर रहा था.थोड़ी देर तक दीदी और मयंक बैठे रहे फिर जब दीदी जयमाल के लिए खड़ी हुई तो उनके बदन में एक सिहरन सी दौड़ गयी क्योंकि जैसे ही मयंक ने उनके गले में वरमाला डाली उसी वक़्त उनकी चूत से मेरा, रिशू और मनीष का मिला जुला वीर्य बह कर उनकी जांघो को चिपचिपा बनाने लगा.
किसी तरह दीदी ने कण्ट्रोल किया और जयमाल के बाद मौका मिलते ही एक कमरे में जाकर फेरो से पहले अपने कपडे बदले और अपनी चूत और पैरो को साफ़ किया. दो दिन बाद रश्मि दीदी मयंक के साथ चली गयी पर मेरे दिल में उनकी चुदाई की सुनहरी यादें हमेशा के लिए छोड़ गयी.
समाप्त..
मैंने दीदी को घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड दीदी की पानी छोडती बुर में पेल दिया. दीदी के मुहे से एक हलकी सी आह निकल गयी. तभी रिशू ने दीदी के मुह में अपना लंड पेल दिया और दीदी उसे लालीपाप की तरह चूसने लगी. मनीष ने दीदी की चोली के बटन खोल दिए और ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचिया दबाने लगा. मैंने सामने शीशे में देखा की कैसे दीदी पूरी तरह से दुल्हन की तरह सजी हुई अपने भाई से चुदवा रही है. टाइम कम था तो मैंने ताबड़तोड़ धक्के मार मार कर दीदी की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया. मेरे झड़ते ही रिशू ने दीदी की चूत में अपना लंड पेल दिया और मनीष ने दीदी के मुह में. मैं कपडे पहन कर फिर से तैयार हो गया तब तक कामिनी आंटी भी तैयार हो कर आ गयी.
कामिनी आंटी अन्दर घुस कर रश्मि दीदी से बोली अरे शादी वाले दिन दुल्हन का व्रत होता है. वो कुछ नहीं खाती और तू यहाँ दो दो लंड आगे पीछे से खा रही है. क्यों हो गया तुम लोगो का...
मोनू: मेरा हो गया. रिशू पेल रहा है फिर मनीष.
कामिनी: अरे इतना टाइम नहीं है ७.४५ हो गए है. घर से कोई पार्लर पूछने जाये इससे पहले हमने वहां पहुच जाना चाहिए.
तब तक रिशू ने भी दीदी की चूत को अपने वीर्य से भर दिया. कामिनी आंटी बोली बस अब टाइम नहीं है पर मनीष बोला बस ५ मिनट आंटी और उसने अपना तन्नाया हुआ लंड दीदी की वीर्य से भरी चूत में पेल दिया. दीदी भी अब तक एक बार झड चुकी थी.
कामिनी: चल जब तक तू इसको चोद मैं इसकी चोली वापस बाँध देती हूँ. रिशू तू भी कपडे पहन कर तैयार हो जा.
फिर आंटी दीदी की चोली बांध कर उनकी लिपस्टिक ठीक करने लगी जो लंड मुह में लेने से थोड़ी फ़ैल गयी थी. मनीष के झड़ते झड़ते ८ बज गया.
आंटी ने दीदी के कपडे ठीक किये पर दीदी की पैंटी नहीं मिल रही थी. आंटी ने दीदी को सीधा खड़ा किया और उन्हा लहगा नीचे कर दिया और बोली चल रश्मि जल्दी चल. बाद में दूसरी पैंटी पहन लेना अभी चल. दीदी चूत साफ़ करना चाहती थी पर आंटी ने कहा अब टाइम नहीं है हम सब जल्दी से कार जाकर बैठे और 2 मिनट में गेस्ट हाउस पहुच गए. सब लोग हमारा वेट कर रहे थे. हम सब जल्दी से अन्दर पहुचे और दीदी को सीधे स्टेज पर ले जाया गया. वहा मयंक दीदी का जयमाल के लिए इंतज़ार कर रहा था.थोड़ी देर तक दीदी और मयंक बैठे रहे फिर जब दीदी जयमाल के लिए खड़ी हुई तो उनके बदन में एक सिहरन सी दौड़ गयी क्योंकि जैसे ही मयंक ने उनके गले में वरमाला डाली उसी वक़्त उनकी चूत से मेरा, रिशू और मनीष का मिला जुला वीर्य बह कर उनकी जांघो को चिपचिपा बनाने लगा.
किसी तरह दीदी ने कण्ट्रोल किया और जयमाल के बाद मौका मिलते ही एक कमरे में जाकर फेरो से पहले अपने कपडे बदले और अपनी चूत और पैरो को साफ़ किया. दो दिन बाद रश्मि दीदी मयंक के साथ चली गयी पर मेरे दिल में उनकी चुदाई की सुनहरी यादें हमेशा के लिए छोड़ गयी.
समाप्त..