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Incest Sagar (Completed)

Update 11.

माॅम को हग करके मैं अपने कमरे में चला गया । कपड़े उतारने के बाद फ्रेश होकर एक ढीला पायजामा पहना और उपर हल्का शर्ट डाल कर नीचे आया । हाॅल में कोई नहीं था । मैं किचन में गया । माॅम रात के खाने की तैयारी कर रही थी ।

मैं किचन में में प्रवेश करते हुए बोला -" क्या बना रही हो माॅम ?"

माॅम उस समय फुल नाइटी पहनी हुई थी । मगर उनके गदराये हुए यौवन का आभास फिर भी हो रहा था ।मां मेरी तरफ पलटी और मुस्कुरा कर बोली -" दाल भात और कोहड़ा की सब्जी ।"

" क्या ?" - मैंने बुरा सा मुंह बनाया -" रात में दाल भात । और ये दाल भात के साथ कोहड़ा की सब्जी कौन खाता है ।"

" मैं खाती हूं । तेरे डैड खाते हैं । "

" मैंने तो आज तक देखा नहीं । जरुर मजाक कर रही हो । बोलो ना क्या बना रही हो ।" मैंने कहा ।

" जब खाने बैठेगा तब मालूम पड़ जाएगा । तु बता वहां की पार्टी कैसी रही । "

" शानदार । खाना पीना सब मस्त । बड़े बड़े लोग सुन्दर सुन्दर औरतें । उर्वशी दी के हसबैंड भी बहुत अच्छे हैं । "

" खाना पीना ? क्या दारू भी था ? "

" हां । "

" तुम ने तो नहीं पी ना ?"

" थोड़ी सी पी । उर्वशी दी के हसबैंड ने काफी जोर दी तो ।"

" इन सभी चीजों से दूर ही रहना । लिवर खराब कर देती है । और श्वेता ने तुझे टोका नहीं ।"

" वो क्या टोकेगी उसने तो खुद बीयर पी थी । "

" क्या ?" मां आश्चर्य करते हुए बोली ‌।

" अरे ज्यादा नहीं बस थोड़ी सी मुंह जुठारने के लिए ली थी । अब वहां बड़े बड़े लोग थे तो हम भी ‌ना नहीं कर सके ।"

मां कुछ नहीं बोली ।

" डैड और रीतु कहां है ?"

" तेरे डैड अपने दोस्तों के पास गये है और रीतु अपने कमरे में पढ़ रही है " - मां काम करते हुए बोली -" और पार्टी के बारे में बता ।"

मैंने उन्हें वहां संजय जी के उपर गोली चलाने वाली घटना के बारे में बताया तो वो बोली " कौन उन्हें मारना चाहता है ।"

" ये तो मुझे नहीं पता लेकिन बड़े बड़े लोगों के दुश्मन भी तो कई सारे होते हैं । "

तभी वहां रीतु आ गई और अपनी देखते ही पुछा -" अरे भाई आप कब आए ?"
रीतु सलवार सूट में थी ।

" आधे घंटे पहले । तेरी पढ़ाई हो गई ।"

" हां । हो गई । अब जरा मुझे भी बताओ कि वहां रिसेप्शन कैसा रहा । क्या क्या किया ?"

" मैंने माॅम को बता दिया है तु माॅम से पुछ लेना ।"

" अब इतना भी भाव मत खाओ । बताओ ना ।"

" अरे वही सब हुआ जो बड़े बड़े लोगों के पार्टी में होता है । खाने में स्टार्टर , मेन कोर्स , जुस , चाट , कोल्ड ड्रिंक , स्नैक्स , वाइन । मस्ती के लिए म्यूजिक , आर्केस्ट्रा , लीपा पोती की हुई सुन्दर सुन्दर लड़कियां । और तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे तुम कभी पार्टी में कभी गई ही नहीं हो ।"

" ये लीपा पोती से क्या मतलब ?"

" मेरा मतलब फेशियल और बन संवर के आई हुई लड़कियां । क्या जरूरत होती है इतना लम्बा चौड़ा मेकअप करने की । कितनी तो अपने वजन से भी ज्यादा पाउडर क्रीम पोंत कर आई थी । " मैंने माॅम की तरफ देखते हुए कहा -" मैंने कुछ ग़लत कहा माॅम ।"

" नहीं "- माॅम ने हंसते हुए कहा ।

" लड़कियां मेकअप नहीं करेंगी तो क्या लड़के करेंगे । और तुम्हें इससे एलर्जी क्यों होती है ?"

" मुझे क्यों एलर्जी होने लगी , मुझे उनसे क्या मतलब ।और तु जो दो दो किलो का मेकअप करती है , उसे बंद कर । एक दम सिम्पल माॅम की तरह रहा कर ।"

" म..म.. मैं दो किलो का मेकअप करती हूं । माॅम इसे समझा दो नहीं तो मैं इस का सर फोड़ दुंगी ।"

" मुझे तुम दोनों के बीच में नहीं पड़ना है । ये तुम्हारा एक दिन का नहीं रोज़ रोज़ का काम है ।"- माॅम ने कहा ।

" और तुम जानते क्या हो लड़कियों के मेकअप के बारे में ? ये हम लड़कियों के सोलह श्रृंगार का अंग है । "- रीतु भड़कते हुए बोली ।

" सोलह श्रृंगार लड़कियां नहीं शादी शुदा औरतें करती हैं । "

ये सुनकर मां जोर से हंसी तो रीतु और भड़क उठी ।

मैंने अपनी बात जारी रखी - " और जहां तक मैं समझता हूं हमारी देशी सनमारियां खट्टी लस्सी से बाल धोती है तो शैम्पू हो जाता है । बेसन या मुल्तानी मिट्टी का लेप मुंह पर करती है तो फेशियल हो जाता है । सरसों का दिया जलाकर उसकी लपक के उपर कोई बर्तन उल्टा रखकर यूं धूएं से बनी कालख इकट्ठी कर के आंखों में लगाती है तो नयन सहज कारे कजरारे लगने लगते हैं । दंदासा दांतों पर रगड़ती है तो दंदासे की ही लाली होंठों पर चढ़ जाती हैं और शायर लोग उस ' लबों को लाली ' पर ' लहू जिगर का ' दिया होने पर क्लेम लगाने लगते हैं । यानी हींग लगे ना फिटकरी रंग चोखा । "

रीतु और माॅम मुझे आंखें फाड़े देखने लगी ।

" मैं ठीक कह रहा हूं ना रीतु । "

वो अभी भी आंखें बड़ी बड़ी करके मुझे देखे जा रही थी ।

मैंने उसकी तरफ चुटकी बजाते हुए कहा -" ये हमारे देश में होता है , अब तुम्हें कुछ बड़े बड़े सेलीब्रिटी के फेशियल के बारे में बताता हूं । "

दोनों ध्यान से सुन रही थी ।

" किम करदाशियां का नाम सुना है ना हालीवुड अभिनेत्री ।"

" हमम.."

" वो वैमपायर नाम का फेशियल करती है । इसमें अपने ही शरीर से खून निकाला जाता है और माइक्रो नीडल्स की सहायता से चेहरे पर इंजेक्ट किया जाता है । और इसकी लागत 1500 डालर पड़ती है ।.... जापान में एक सांग बर्ड नाम का पक्षी होता है उसके बीट को पीस कर पाउडर बनाया जाता है और चेहरे पर मला जाता है । इसकी लागत 675 डालर पड़ती है ।.... एक होता है लीच फेशियल । इसे हालीवुड अभिनेत्री डेमी मूर कराती है । इसके लिए पहले तारपीन का तेल मिले पानी से स्नान करना होता है फिर चेहरे और बदन पर जोंक छोड़ दिया जाता है और वो जोंक उसके शरीर से ' पुराना खून ' चूस लेती है । और इसकी कोस्ट 1000 डालर पड़ती है ।..... एक होता है ह्यूमन प्लासेंटा फेशियल । इसे प्रसिद्ध हालीवुड अभिनेत्री जेनिफर लोपेज कराती है । प्लासेंटा गर्भस्थ शिशु की नाल को कहते हैं जिसके जरिए गर्भ में शिशु को मां के पेट से पौष्टिक आहार प्राप्त होता है । बच्चा पैदा होने के बाद ये नाल काट कर फेंक दी जाती है लेकिन मैडम लोपेज की नजर में इसके अन्दर बायोलॉजिकल प्रोटीन होता है । इस नाल को पीसकर उसकी क्रीम बनाई जाती है और उसका लेप चेहरे पर गर्दन पर किया जाता है । ये भी 1000 डालर में होता है ।.... एक है फोर स्किन फेशियल । बच्चों के खतने के बाद जो खाल काटी जाती है उसका सीरम तैयार किया जाता है और इसे एक ऐसी सीरिंज से इंजेक्ट किया जाता है जिसमें एक नहीं । सैकड़ों महीन , सुक्ष्म सुईयां होती है । इसकी लागत के बारे में पता नहीं लेकिन इसे हालीवुड की कई हीरोइनें कराती हैं । "

तभी डैड ने पानी के लिए आवाज लगाई । रीतु जो आंखें फाड़े बूत बनें सुन रही थी , चौंकते हुए ' लाती हूं ' कहकर पानी लेकर किचन से बाहर चली गई । मैं माॅम के बगल गया और धीरे से बोला -" और एक होता है सीमेन फेशियल । इसे एक्ट्रेस वैसेना टैडगरेव कराती है । मर्दों के सीमेन में स्पर्माइन नामक कैमीकल पाया जाता है जो बुढियापे की प्रक्रिया की गति को कन्ट्रोल करता है और चेहरे की चमड़ी को जवान रखने में मदद करता है । "

माॅम मुझे आंखें फाड़े चुपचाप देखती रही । तभी रीतु आई और मैं किचन से बाहर निकल कर डैड के पास चला गया ।

थोड़ी देर तक डैड से बातें हुई फिर हम टेलीविजन देखने लगे। कुछ देर बाद माॅम ने डीनर लगाया और हम सभी साथ में खाने बैठ गये ।
खाने के बाद सभी अपने अपने कमरों में चले गए । मैं भी छत पर चला गया । वहां टहलते हुए अपनी फेवरेट क्लासिक का कश लगाने लगा । अब रात के ग्यारह बज चुके थे । मैं अपने कमरे में गया और फिर से उन ' स्पेशल ' किताबों को चेक किया । आज सारे दस के दस किताब मौजूद थे । आज कोई भी किताब मिसिंग नहीं थी । कुछ सोचकर उन सभी किताबों को उठाया और एक सेक्स करते हुए लड़के लड़कियों का रंगीन पिक्चर वाली किताब को छोड़ कर सभी अपने बैग में रख दिया और उसके उपर ताला लगा दिया ।

उस किताब के अन्दर विभिन्न मुद्राओं में लड़की और लड़के की सेक्स करते हुए पिक्चर थी । उस किताब को मैंने वहीं रख दिया जहां पहले रखा करता था । फिर आकर बिस्तर पर लेट गया और आज के दिन भर की घटनाक्रम के बारे में सोचने लगा । सोचा एक बार श्वेता दी को फोन करूं फिर सोचा वो दो दिन के भागदौड़ से थकी हारी होगी इसलिए ये विचार त्याग दिया । फिर कुछ देर बाद नींद के आगोश में समा गया ।
 
Update 12.

बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज से अचानक मेरी नींद खुल गई । मैंने घड़ी में टाईम देखा सुबह के साढ़े पांच बज रहे थे । मैं बिस्तर से उठ कर खिड़की से बाहर की तरफ आसमान की ओर देखा । मेघों ने भास्कर की उदय होती लालिमा को अपने गोद में छुपा लिया था । मेघ रौद्र रूप में कहर बरपाने के लिए तैयार थे। आंधियों ने उनके लय में लय मिलाया और धरती पर तेज आक्रमण कर दिया ।

बादलों ने तीव्र गति से हमला कर दिया था । शोर के साथ साथ बरसात भी तीव्र गति से होने लगी । मैंने छत पर देखा वहां रस्सियों पर कपड़े सुखाने के लिए पड़े हुए थे । मैं जल्दी से दरवाजा खोला और कपड़ों को समेटने लगा । डैड के , मेरे , रीतु के , माॅम के सभी के कपड़े आनन फानन में उतारा और तभी माॅम के साड़ियों में छुपा उनकी पैंटी जमीन पर गिर पड़ी । बारिश तेज हो गई थी । मैंने पैंटी को उठाया और भागते हुए अपने कमरे में प्रवेश किया । सारे कपड़े वहीं बगल में पड़े कुर्सी पर रखा । खिड़की बंद की और बिस्तर पर लेट गया ।

घनघोर बारिश हो रही थी । बादल भी तेजी से गरज रहे थे । मौसम काफी ठंडा हो गया था । मेरी नींद भी उचट गई थी । अचानक से मुझे कुछ याद आया और मैंने माॅम की पैन्टी कपड़ों के अन्दर से बाहर निकला । मैं उसे देख कर उत्तेजित हो गया । पैंटी को उपर से भीतर से सब तरफ से देखा । उसे हाथ से सहलाया । नाक से सूंघा । और अंत में उसे अपने पैजामा के अन्दर अपने जांघिया के अन्दर अपने लिंग से लपेट कर सो गया ।

माॅम की आवाज से मेरी नींद खुली । माॅम मेरे उपर झुक कर मुझे उठाने की कोशिश कर रही है । माॅम के यूं झुकने से साड़ी का आंचल उनके सीने से ढलक गया था । मेरी नजर ब्लाउज में कैद उनके बड़े बड़े उरोजो पर गयी । एक तो सुबह का इरेक्शन उपर से ब्लाउज के ऊपर से उनके बड़े बड़े संतरों का दर्शन मेरी अवस्था नाजुक होने लगी ।

" सागर जल्दी से उठो ।"

" क्या हुआ ।" मैं उनके वक्ष देखते हुए बोला ।

" नीचे बाथरूम के पास पानी भर गया है । और अभी तक किसी ने भी बाथरूम यूज़ तक नहीं किया है ।"

" अच्छा देखता हूं । आप चलो मैं आता हूं ‌।"

" नाले का पानी भी जाम हो गया है । पानी निकल नहीं रहा है ।"

मैं उठ कर बैठ गया । तुम यहीं नहाओ फ्रेश हो जाओ । मैं देखता हूं ।"

मैंने चुपके से उनकी पैंटी ‌जो अभी भी मेरे लिंग से लिपटी हुई थी निकाल कर बेड के नीचे रख दिया । फिर नीचे हाल में गया। डैड उठ गये थे और वहीं बैठ थे । उन्होंने भी मुझसे वहीं कहा जो माॅम ने कहा था । मैं हाल से आगे बढ़ा और किचन को पार कर के अन्दर के दरवाजे से बाहर निकल कर देखा ।

किचन के पिछे बाहर का काफी एरिया ओपन था और वो बाउंड्री वॉल से घिरा हुआ था । वहां हमने कुछ आम और अमरुद के पेड़ लगाए थे जो कि पक गए थे । थोड़े बहुत फूल भी लगाए थे । दाहिने तरफ दिवाल से लगकर बाथरूम कम टायलेट बना हुआ था जो ६ बाई ७ का बना हुआ था । पहले बाथरूम था फिर उसी से सटकर टायलेट बना हुआ था जिसका फर्श बाथरूम से एक फीट ऊंचा था ।

सुबह की घनघोर बारिश से बाथरूम के अन्दर तक पानी प्रवेश कर गया था । पानी को बाहर की ओर निकालने के लिए एक नाला बना हुआ था जो मिट्टी और पत्तों से जाम हो गया था ।

मैंने अपनी पैंट उतारी और सिर्फ जाघिये में ही पानी के बीच उतर गया । पौन घंटे की मशक्कत के बाद नाला साफ हुआ । अब जमा पानी बिना रुकावट के बाहर की तरफ निकलने लगा ।

साफ सफाई के बाद मैं वहीं बाथरूम में फ्रेश हुआ और एक तौलिया लपेट कर घर में चला गया । अपने कमरे में प्रवेश कर मैं कपड़े पहन तैयार हुआ तो उसी समय मेरी नजर कुर्सी पर पड़ी । वहां पर जो कपड़े मैंने सुबह बरसात से भींगने से बचने के लिए रखे हुए थे वो नहीं थे । मैं समझ गया माॅम जब मुझे जगाने आई थी उसी समय वो कपड़े लेकर चली गई ।

तभी मुझे ध्यान आया कि मैंने माॅम की पैन्टी को अपने बिस्तर के नीचे दबा कर रखा है । मैं चिन्तित हो गया । कहीं वो अपनी पैंटी न पाकर मुझ पर शक वगैरह ना कर बैठे । मैं जल्दी से उनकी पैंटी को बेड के नीचे से निकाल कर उसे पैंट के अन्दर छुपा कर नीचे हाल में पहुंचा ।

डैड टीबी देख रहे थे । रीतु शायद अपने कमरे में थी और माॅम किचन में नाश्ते की तैयारी कर रही थी । मैं माॅम के कमरे में प्रवेश किया । सारे कपड़े उनके कवर्ड में बिना चपेते हुए रखे हुए थे । मैंने उनकी पैंटी उन कपड़ों के अन्दर ठूंस दिया और कमरे से बाहर निकल आया । अब मैं थोड़ा आश्वस्त हुआ ।

नाश्ता करने के बाद डैड बैंक चले गए और रीतु कालेज । माॅम वापस किचन में चली गई । नाश्ते के दौरान माॅम के हाव भाव से मुझे कुछ समझ नहीं आया ।

मैं फिर अपने रूम में चला गया । सुबह के साढ़े नौ बज गए थे । मैंने श्वेता दी को फोन लगाया ।

" हैलो !" उधर से श्वेता दी की आवाज आई ।

" कैसी हो स्वीट हार्ट ?"

" मस्त । तु अपनी बता ।"

" ठीक ही हूं । जीजू कैसे हैं ?"

" पहले से बेहतर है ।"

" तुम कहां से बात कर रही हो ?"

" किचन से । नाश्ता बना रही हूं ।"

" और जीजू ?"

" रूम में बैठ कर टीवी देख रहे हैं । और हां मैंने उन्हें दिल्ली शिफ्ट होने की तुम्हारे सलाह के बारे में बताया था । वो राजी हैं बल्कि बहुत उत्साहित है ।"

" ठीक है मैं आज आन्टी से बात करता हूं ।"

" तुमने नाश्ता कर लिया ?"

" कर तो लिया लेकिन मजा नहीं आया ।"

" क्यों ?"

" तुम्हारा ‌ नाश्ते से कहां घर का नाश्ता अच्छा लगेगा ।"

" तो आ जाते । "

" नाश्ता करा देती ? जीजू के रहते ?"

" हां करा देती और उन्हें क्या फर्क पड़ता ?"

" उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि मैं साया साड़ी उठा कर अपनी मुंह तुम्हारे जांघों के बीच ढुका कर अपना नाश्ता कर लेता ।"

" कुत्ता कहीं का । सुबह सुबह ही शुरू हो गया । और मैं उसकी बात नहीं कर रही थी ।"

" क्या उसका भी कोई टाइम होता है ।"

" होता है ।"

" कब ?"

" रात को । और बकवास बंद करो मुझे नाश्ता बनाना है ।"

" एक बात तो बताती जाओ उर्वशी और तुम्हारे बीच में क्या क्या बातें हुई थी ?"

" बहुत सारी बातें हुई थी तुम क्या सुनना चाहते हो ?"

" होटल वाली । मेरे और तुम्हारे बारे में । हमारे रिश्तों के बारे में ।"

" कमीने ! खुद ही सारी राम कहानी उसे सुना कर मुझसे पुछता है कि क्या बातें हुई ।"

" मैंने कुछ न थोड़ी बताया । फर्श पर गिरे हुए हमारे कछी को देख कर उसने खुद ही अंदाजा लगा लिया । और उपर से ताश के पत्तों पर हमने चित्र कारी भी तो कर दी थी ।"

" उसी के बारे में पुछ रही थी । पहले तो मै ना नुकुर की लेकिन बाद में मानना पड़ा ।"

" फिर ?"

" फिर क्या । फिर सारे राज खुल गये । मैंने अपना बताया तो उसने भी अपना बताया ।"

" उसने क्या बताया ?"

" यही कि तुम दोनों की स्टोरी कैसे चालु हुईं । अच्छा सुनो फोन रखती हूं नाश्ते के लिए देरी हो रही है ।"

" ओके । बाय ।" और मैंने फोन पर उसे कीस किया ।

" बाय ।" उसने भी कीस किया फिर फोन काट दी ।
 
Update 12 A.

नाश्ता करने के पश्चात माॅम को बाय बोला और आन्टी ( अजय की मां ) के घर चला गया । उनका घर पैदल मेरे घर से पन्द्रह मिनट की दूरी पर था । अजय के पापा की ऊंची पोस्ट पर सरकारी नौकरी थी । उन्होंने पैसे काफी कमाये थे । उनके नौकरी के दौरान ही मरने के बाद पी. एफ. और ग्रेच्युटी की काफी अच्छी रकम मिली थी ।L.I.C. से भी insurance की मोटी रकम मिली थी जिसे उन्होंने बैंक में जमा करा दिया था । उनके खर्चे पैंशन के पैसों से बखूबी हो जाता था। उनका मकान दो तल्ला था दोनों तल्ले में दो रूम , एक हाल , किचन , बाथरूम था । दोनों तल्ला सेम पेटर्न में बना हुआ था । आन्टी नीचे ग्राउंड फ्लोर पर रहती थी । पहले एक रूम में आन्टी और दुसरे रूम में अजय रहता था लेकिन अमर के देहांत के बाद पुरे घर में वो अकेली रह गई थी ।

जब मैं उनके घर पहुंचा तब उनका मेन दरवाजा खुला हुआ मिला । मैं घर में प्रवेश किया और उनके रुम के पास गया । वो बिस्तर पर पलंग के सिरहाने पीठ टिकाए गुमसुम बैठी सामने दिवाल पर देख रही थी । मैंने उनकी नजरों का पिछा किया । दिवाल पर उनके पति और अमर की बड़ी फोटो लटकी हुई थी जिस पर फुलों का हार लगा हुआ था । उनकी नजरें अमर के फोटो पर टीकी हुई थी । उनके आंखों से आंसू छलक कर गालों को भिगो रहे थे । वो तील तील कर मर रही थी ।

मेरे गले की घंटी बजी । मन व्याकुल हुआ । ह्रदय विचलित हो उठा । मैं उनके रुम के दरवाजे से सटे दिवाल से टेक लगाये खड़ा हो गया । आंखों से झर झर आंसू बहने लगे । मैं बहुत ज्यादा भावुक हो गया था । मुझसे उनका गम देखा नहीं जा रहा था । मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं । कैसे उनको दिलासा दूं । क्या बोलूं । उनका जवान लड़का हमेशा के लिए उनका साथ छोड़ चुका था । क्या बीत रही होगी उनके दिल पर । क्या सोच रही होगी... अपने बेटे की बचपन की यादें... उसकी शरारतें...उसका नटखटापन...उसका रोना....या उसका हंसना...या उसका रूठना मनाना....या उसका प्यार ।

एक जवान बच्चे की मौत मां बाप के लिए श्राप होती है । उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी होती है । बच्चा तो चला जाता है लेकिन अपने पिछे मां बाप को जीवन भर के लिए आंसू और गम दे जाता है । वो जिंदा लाश की तरह हो जाते हैं । ये आंसू और गम उनके अंतिम पड़ाव तक साथ चलते रहते हैं ।

आंटी ने अपने पति की मौत के सदमे को अपने बेटे के प्यार में भुलने की कोशिश की होगी । मगर अपने बेटे अमर की मौत के बाद और कौन है जिसके लिए वो अमर को भुलाने की कोशिश करेंगी । एक ही तो लड़का था । और दूसरा कोई भी तो नहीं है ।

भगवान यदि मुझसे सिर्फ एक बर मांगने को कहे तो शर्तिया मैं यही मांगूंगा कि हे प्रभु किसी भी मां बाप के जिन्दा रहते उसके औलाद की मौत ना हो । और अगर हो भी तो औलाद के जन्मने के साल भर के अन्दर हो ।

मैंने कहीं पढ़ा था कि भगवान राम जब रावण का बध किये ‌थे और रावण जमीन से गिरा पड़ा था तब उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को रावण से कुछ ज्ञान लेने के लिए उनके पास भेजा था । लक्ष्मण जमीन पर पड़े रावण के के पास गया और उनके सिर के बगल खड़ा हो गया । रावण कुछ नहीं बोला । तब श्री राम ने लक्ष्मण को समझाया कि रावण ब्राह्मण होने के साथ-साथ एक बहुत बड़ा ज्ञानी और विद्वान भी है । और यदि किसी से कुछ ज्ञान प्राप्त करना हो तो उनके चरणों के पास बैठना चाहिए । लक्ष्मण दुबारा रावण के पास गए और उनके पांवों के पास खड़े हो गए । तब रावण ने लक्ष्मण को एक बात बताई थी कि अगर तुमने कुछ करने का संकल्प ले रखा है तो उसे तत्काल कर लेना चाहिए । उसे बाद के लिए टालना नहीं चाहिए । रावण ने कहा.... मेरी तीन इच्छाएं थी जिसे मैं करना चाहता था लेकिन दुर्भाग्यवश नहीं कर पाया । १. स्वर्ग के लिए सीढ़ी बनाना ( सभी लोगों को स्वर्ग भेजना ) । २. समुद्र के खारे पानी को दुध में बदल देना ( कोई भी भुखा प्यासा नहीं रहे । दुध को सम्पूर्ण भोजन माना जाता है ।) और ३. मां बाप से पहले उसके पुत्र का देहांत ना हो ।

मैंने अपने आंसुओं को पोंछा और बड़ी मुश्किल से चेहरे पर मुस्कान लिए आंटी के पास गया । उन्हें अपने गले लगा कर हर तरह से दिलासा देने की कोशिश की । उनके दिमाग को अमर की यादों से निकालने की कोशिश की ।

कुछ देर बाद वो थोड़ी नार्मल हुई । उनके घर की जरूरत की चीजें मार्केट से ले आया । अब वो पहले से बेहतर थी । फिर मैंने उन्हें उपर वाला फ्लोर श्वेता दी और राजीव जीजू को रेंट पर देने की सलाह दी । और उन्हें ये भी बताया कि उनलोगो के आने से आपका अकेलापन भी दुर होगा । वो जरा सा भी आपत्ति नहीं की । सिर्फ यही कहा -" बेटा जो तुम्हें अच्छा लगता है वो करो । और श्वेता जैसी तुम्हारी बहन है उसी तरह मेरी बेटी भी है । उससे मुझे कोई भी किराया नहीं चाहिए ।"

कुछ देर वहीं बैठा रहा । उनसे बातें की । फिर मैं युनिवर्सिटी चला गया । वहां पता चला कि कुछ बड़ी कम्पनियां काउन्सलिंग के लिए आईं हुई है । मतलब आज यहां अधिक समय लगने वाला है । मैंने रीतु को फोन किया और उससे कहा कि वो कालेज की छुट्टी के बाद काजल को साथ में ही अपने घर लेते हुए आना और उसके लिए मैंने आगरा से जो पेठा लाया है वो उसे दे देना ।

काउंसलिंग शेष होते-होते शाम के छः बज गए । अब घर जाने में कोई फायदा नहीं था इसलिए वहीं से पैराडाइज क्लब चला गया । मैं अभी क्लब के अन्दर प्रवेश किया ही था कि स्टाफ ने मुझे कहा ' आपको कुलभूषण खन्ना याद कर रहे हैं ' ।

' क्या बात हो सकती है ' सोचते हुए मैं उनके आफिस की तरफ चला गया ।
 
Update 12 A. Continue.

" वैलकम ! वैलकम ! " - कुलभूषण खन्ना अपनी चेयर पर बैठे हुए बोला ।

मैं उससे हाथ मिलाया और उसके सामने पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया ।

" और सब खैरियत है ।" वो अपने कान की लौ खिंचता हुआ बोला ।

" जी खन्ना साहब । सब खैरियत है ।"

उसने अपने स्टाफ को चाय लाने की आर्डर दी । मैं उसके बोलने की प्रतीक्षा करने लगा ।

" हम सोच रहे थे कि अमेरिका शिफ्ट हो जाएं ।"

" हम ?"

" मैं और अनुष्का ।"

" अमेरिका ?"

" मेरा छोटा भाई वहां रहता है । कयी साल से बुला रहा है ।"

" सैर कर आने को ?"

" वही सैटल हो जाने का ।"

" क्यों ? कोई खास वजह ?"

" वजह तुम जानते हो " - भावावेश में उसकी आवाज कांपने लगी -" तुम्हें यह भी पता है कि उस दिन मैंने यहां तुम्हें क्यों रोक रखा था ।"

" क्यों ?"

" अपनी बीवी से तुम्हारा आमना सामना करवाने के लिए ।"

" जी !"

"" तुम्हारी विजिट से मेरा यह शक विश्वास में बदल गया था कि तुम्हारे जीजा राजीव सोलंकी के फ्लेट में तुम्हारा जिस कटे बालों वाली युवती से आमना-सामना हुआ था , वह मेरी बीवी अनुष्का थी । तुम्हारी शक्ल देखते ही उसके चेहरे का रंग उड़ता मैंने साफ देखा था । और वो समझती है कि बाद में क्लब के बाहर उसने तुमसे जो खुसुर फुसुर की थी , उसकी मुझे खबर नहीं ।"

मैं खामोश रहा । अपनी नर्वसनेस छुपाने के लिए मैंने सिगरेट सुलगा लिया ।

" दो कौड़ी की औकात नहीं थी मेरी बीवी की मेरे साथ शादी से पहले " - वह जोर जोर से अपने कान को मसलता हुआ बोला -" कालेज की मामूली स्टूडेंट , टी. बी. सिरियल में काम पाने के लिए सारा सारा दिन मण्डी हाउस की खाक छाना करती थी । मैंने उससे शादी की , उसे रूतबा दिया , इज्जत दी , सुख-सुविधा और ऐश्वर्य दिया । जमीन से उठा कर आसमान पर बिठाया उसे । बदले में मुझे क्या मिला उस नाशुक्री और बेवफाई औरत से ? धोखा ! फरेब ! बेवफाई !"

वह ठिठका । मुझे यूं लगा जैसे वह रोने लगा हो । लेकिन ऐसा न हुआ । उसने अपने आप पर काबू पाया और अपेक्षा कृत सुसंयत स्वर में बोला -" मैं जिन्दगी का बड़े से बड़ा झटका बर्दाश्त कर सकता हूं लेकिन औरत की बेवफ़ाई नहीं बर्दाश्त कर सकता । मैं अपनी बीवी की कल्पना राजीव सोलंकी , तुम्हारे उस हरामजादे , कुत्ते के पिल्ले के पहलू में नहीं कर सकता । मैं खून कर दुंगा उसका ।"

" फांसी हो जाएगी " - मैं धीरे से बोला ।

" मैं उसे तबाह कर दुंगा " - वह यूं बोला जैसे उसने मेरी बात सुनी न हो -" मैं उसे कौड़ी कौड़ी का मोहताज कर दुंगा । मैं उसे गलियों में भीख मांगने वाला मंगता बना दुंगा ।"

मैं खामोश रहा । तभी स्टाफ चाय लेकर आया । स्टाफ के जाने के बाद फिर बोला -" मेरी बीवी बाद में तुमसे मिली थी ।"

मैंने उत्तर न दिया ।

" झुठ बोलने का कोई फायदा नहीं । मेरे आदमी को अनुष्का ने डाज दे दी थी । लेकिन फिर भी मुझे मालूम है कि वह तुम्हीं से मिली थी ।"

" फिर भी कैसे मालूम है ?"

" वो छोड़ो और बोलो मेरी बीवी तुमसे मिली थी । जबाव यह सोचकर देना कि इनकार भी करोगे तो मुझे विश्वास नहीं होगा ।"

" हां । मिली थी ।"

" क्या चाहती थी ?"

" खास कुछ नहीं ।"

" फिर भी ।"

" मेरा शुक्रगुजार होना चाहती थी कि मैंने उस दिन आपके सामने उसकी पोल नहीं खोली थी और आगे भी वह राज रखने का वादा लेना चाहती थी ।"

" यह वादा हासिल करने के लिए और क्या क्या किया उसने ?"

" क्या मतलब ?"

" तुम पर डोरे डालने की कोशिश नहीं की उसने ?"

" नहीं " - मैं बड़े सब्र से बोला ।

" क्यों झुठ बोल रहे हो । इसलिए इनकार कर रहे हो क्योंकि समझते हो कि मैं बुरा मान जाऊंगा । तुम खुबसूरत हो , नौजवान हो , मार्डन हो , उपर से....."

" खन्ना साहब " - मैं सख्ती से बोला -" ऐसा कहकर , ऐसा सोचकर आप अपने आप को टार्चर कर रहे हैं । ईशया की भावना ‌ने आपकी मति भ्रष्ट कर दी मालूम होती है । यूं तो जो मर्द एक सेकेंड के लिए आपकी बीवी के पास खड़ा होगा , आप उसी पर शक करने लगेंगे । ऐसा कहीं होता है ? इससे तो बेहतर है तो आप तलाक दे दें ऐसी बीवी को ।"

" उसने.... उसने तलाक का कोई जिक्र किया था ?"

" नहीं । कतई नहीं ।"

" हूं । "- वह बोला । उसने कान की लौ को खींचने मसलने की जगह सहलाना आरम्भ कर दिया -" अच्छा , यह बताओ तुम्हारे ख्याल से मेरी बीवी का उस आदमी के कत्ल से कोई रिश्ता हो सकता है जो राजीव के फ्लेट में मरा पाया गया था । क्या नाम था उसका ?"

" अमर । अमर गुप्ता ।"

" हां । अमर गुप्ता । उसके कत्ल से मेरी बीवी का कोई रिश्ता हो सकता है ?"

" मुझे नहीं मालूम ।"

" भई । मैंने तुम्हारा ख्याल पुछा है ।"

" मेरा इमानदराना ख्याल जानना चाहते हैं आप ?"

" हां ।"

" फिर तो हो सकता है । आप की बीबी के पास राजीव जी के फ्लैट की चाबी थी । और मौका-ए-वारदात पर वो पाई गई है । और हालात ऐसे पैदा हो गये हो सकते हैं कि आपकी बीवी को गोली चलानी पड़ गई हो ।"

" हूं । अगर ऐसा हुआ , वह पकड़ी गई और उसे सजा हो गई तो मुझे बहुत अफसोस होगा ।"

" अच्छा !"

" मैं उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता ।"

" जी ।"

मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि ये शख्स किस टाइप का आदमी है । घड़ी में तोला , घड़ी में माशा ।

" मैं सच कह रहा हूं ।'

" अच्छा , मुझे आज्ञा दिजिए ।" मैंने उठने का उपक्रम किया ।

" जरा एक मिनट सुनो ।"- वो बोला -" तुम्हारा जीजा भी तो क़ातिल हो सकता है ?"

" होने को तो क़ातिल आप भी हो सकते हैं । "

" क्या बकवास कर रहे हो ।"

" मैं भी आप ही की तरह सम्भावना व्यक्त कर रहा हूं । आप को अपनी बीवी पर शक था । आपने अपनी बीवी का पिछा किया । वहां आपने अपनी बीवी को अपने दुसरे यार अमर की बाहों में देखा । आपका खून खौलने लगा । और आपने अमर का खून कर दिया । "

" क्या बे-सिर-पैर की बातें कर रहे हो । उसकी दोस्ती तो राजीव से थी । मुझे मारना होता तो मैं राजीव को मारता । और ये अमर नाम का लड़का कहां से फिट हो गया । उसे तो न मैं जानता हूं और न ही अनुष्का । उसे भला मैं क्यों मारूंगा ।"

" आप को अमर के मर्डर केस की सारी कहानी पता है । क्या आप बता सकते हैं कि मर्डर वाले दिन सुबह दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक कहां थे ?"

" घर में हुंगा और कहां होऊंगा । "

" अच्छी तरह से याद करके बताईए । शायद भविष्य में इससे आप को फायदा ही हो ।"

" मैं ‌घर में ही था ।"

" आप घर में थे , इसका कोई सबूत , या कोई गवाह ।"

" नहीं कोई भी नहीं था । एक मेड आती है रोज लेकिन ‌शायद उस दिन वो आई नहीं थी । और अनुष्का किसी सहेली के पास जाने के लिए कहकर चली गई थी ।"

" तब तो आपके पास भी उस वक्त की कोई पुख्ता एलीवाई नहीं है । अच्छा अब इजाजत दिजिए । क्लास के लिए लेट हो रहा है ।"

" ठीक है । जाते जाते ये तो बता जाओ कि पुलिस को अनुष्का के बारे में कोई खबर है ?"

" जी नहीं ।"

मैं वहां से क्लास चला गया । थोड़ी देर में ही मन उचट गया । और खन्ना साहब से बिदा ले कर घर चला गया । दरवाजा रीतु ने खोला । वो सलवार सूट पहने हुए थी । मैं अभी हाल में पहुंचा ही था कि रीतु पीछे से आकर बोली ।

" भाई । काजल को उसके घर छोड़ दोगे क्या ?"

" क्या " - मैं चौंकते हुए कहा -" वो अभी तक यहीं है ।"

" हां ।"

" ठीक है छोड़ दुंगा । कब तक निकलेगी ?"

" आधे घंटे में ।"

" माॅम कहां है ?

" किचन में ।" बोल कर वो अपने रूम में चली गई ।

मैं किचन में गया । माॅम हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहने खड़ी हो कर किचन स्लैब के उपर सब्जी काट रही थी । गर्मी के कारण पसीने से उनका ब्लाउज भीग गया था । साड़ी पेट से हट गयी थी जिससे उनकी गोरी गोरी थोड़े फुले हुए पेट दिखाई दे रही थी । साड़ी नाभि के थोड़ा नीचे से बंधा हुआ था । पसीने की बूंदें सरक कर नाभि से होते हुए साड़ी पर जमा हो रही थी । ये सब देखकर मैं थोड़ा उत्तेजित हो गया । मैं उनके पास गया और पीछे से उनसे लिपट गया ।

" इतनी गर्मी में इतना हैवी साड़ी क्यों पहनती हो । पुरा पसीना पसीना हो गई हो । तुम्हारी नाइटी कहां गयी ?"

" बड़ा जल्दी आ गया ।" - माॅम पलट कर मेरे बालों को सहलाते हुए बोली ।

" हां । आज मन नहीं लगा इसलिए जल्दी चला आया । तुमने बताया नहीं तुम्हारी नाइटी क्या हुईं ?"

" पुरानी हो गई थी इसलिए फट गई ।"

" तो दुसरी ले लेती ।"

" मैंने रीतु को बोला था लेकिन वो बार बार भुल जाती है ।"

" अरे ! तो मैं हूं ना । मुझसे कहती मैं ले आता ।'

" अच्छा तो तु ही ले आना ।"

मैं माॅम के कन्धों के पसीने को हाथों से पोछता हुआ बोला -" कौन सी ले आऊंगा ?"

" कोई भी ले आना ।"

" कोई भी ?"

" हां । "

" तुम्हे पता है न नाइटी कयी तरह की आती है । एक पुरे एंडी तक आने वाली , एक घुटने से थोड़ी नीचे तक आने वाली और एक घुटने से थोड़ी उपर वाली ।"

वो फिर मेरी तरफ पलटी और मुझे देखते हुए मुस्कुरा कर बोली -" बड़ा ज्ञान है तुझे नाइटी का ।"

" मुझे तो सभी चीजों के बारे में थोड़ा थोड़ा ज्ञान है । तुम जानती ही हो ।"

" हां जानती हूं लेकिन थोड़ा थोड़ा नहीं बल्कि ज्यादा ज्यादा ज्ञान है ।"

" बोलो ना ।"

" क्या ?"

" कौन सी ले आऊं ?"

" घुटनों से ऊपर वाली अपनी बीवी को पहनाना । मुझे एंडी तक आने वाली ही ले आना ।"

" घुटनों तक वाली पहनोगी तो हवा अच्छी तरह से आयेगी और इतना पसीना पसीना नहीं रहोगी ।"

" जरूरत नहीं है । मुझे वही ले आना ।"

" ओके वही ले आऊंगा । अब ये बताओ कि किस टाइप का ले आऊं ?"

" अब ये ' किस टाइप ' क्या है ?"

" मतलब मोटे कपड़े वाली , पतले कपड़े वाली , सेमी ट्रांसपेरेंट या ..."

उसने मेरे पेट पर कस कर मुक्का मारा । " बहुत ज्यादा बदमाश हो गया है । तुम रहने ही दो मैं रीतु से मंगवा लुंगी ।"

मैं माॅम के गाल पर पप्पी लेते हुए बोला -" ऐसे कैसे रहने दो । मैं ही ‌ले आऊंगा और ‌अब से नाइटी ही नहीं बल्कि तुम्हारी हर चीजें मैं ही ले आऊंगा ।"

" बड़ा आया ले ‌आने वाला । पहले कमाना तब बातें करना ।"

" इतना तो कमा ही लेता हूं कि तुम्हारी जरूरत के चीजों को खरीद सकूं और रही बात ज्यादा कमाने की तो कुछ दिनों तक वेट करो । सोने की पलंग बनवा दुंगा ।"

" किसके लिए । अपनी बीवी के लिए ।" - माॅम मुस्कराते हुए बोली ।

" तुम्हारे लिए । "

" मैं क्या करूंगी सोने की पलंग ले कर । मेरे लिए मेरा टुटा फुटा लकड़ी का खटिया ही काफी है ।"

अभी मैं कुछ कहता तभी रीतु और काजल आ गयी । काजल घर जाने के लिए तैयार हो गई थी । मैं वहां से निकला और काजल को अपनी बाइक पर बैठा कर उसके घर की ओर रवाना हो गया ।
 
Update 12 B.

मैं बाइक लिए दरवाजे के बाहर खड़ा था जब रीतु और काजल वहां आई ‌। काजल से रीतु की दोस्ती स्कूल के समय से ही थी । दोनों में काफी गहरी दोस्ती थी । इन दोनों का एक-दूसरे के घर जाना और कभी कभी एक-दूसरे के घर रुक जाना आम बात थी । वैसे मैं भी कभी कभी काजल से मजाक कर लिया करता था । उसके घर में उसके मां बाप के अलावा एक बड़ी बहन थी जिसकी शादी गुड़गांव में ही हुई थी ।

काजल डीप ब्लू कलर की शर्ट और लेगिंग्स पहनी हुई थी जो उसके गोरे गोरे रंग पर काफी फब रहा था । उसके बड़े-बड़े वक्ष शर्ट पर काफी कसे हुए थे । उसकी मोटी मोटी जांघें लेगिंग्स में बहुत ही सेक्सी लग रही थी । होंठों पर लाली , आंखों में हल्का सुरमा , घुंघराले कमर तक आये हुए बाल उसकी खूबसूरती में चार-चांद लगा रहे थे । रीतु सलवार सूट में भी हमेशा की तरह जगमग जगमग कर रही थी ।

काजल रीतु को बाय बोल कर बाईक पर मेरे पिछे अपने दोनों पैर दोनों साइड करके बैठ गई ।

" सुन ! अच्छी तरह से भाई को पकड़ कर बैठ जा ।" - रीतु बोली ।

पिछे थोड़ा हिल डोल कर काजल अपने को एडजस्ट करने लगी ।

' अरे ! क्या कर रही है ? ठीक से भाई को पकड़ कर बैठ । कहीं गिरा , पड़ा तो लेने को देने पड़ जायेंगे ।"

" हां काजल । अच्छी तरह से पकड़ ले नहीं तो गिर पड़ेगी " - मैंने भी काजल को समझाया ।

काजल आगे की ओर घसक गई और मुझसे सटकर बैठ गई ।

" मैं काजल को गिरने के चलते तुम्हें पकड़ कर बैठने के लिए नहीं बोल रही हूं ।"- रीतु बोली ।

" तो किसलिए बोल रही हो ?"

" तुम्हे गिरने से बचाने के लिए । अगर रास्ते में किसी से भिड़ गए तो काजल तुम्हें बचा ले ।"

" मुझे गिरने से बचाने के लिए "- मैं हैरान हुआ ।

" हां । क्योंकी काजल तो बाईक पर से गिर ही नहीं सकती । वो तो चुम्बक की तरह बाईक से चिपक जाती है । उसे कोई गिरा ही नहीं सकता ।"

" क्या बकवास करती है ।" मैं भड़क कर बोला ।

" सच बोल रही हूं । तुम काजल से ही पुछ लो । अभी कुछ दिन पहले जब ये मामा के यहां गयी थी तो ये एक दिन अपने मामा के साथ उनके बाईक पर बैठे मार्केट जा रही थी । रास्ते में एक कुत्ता आ गया और इसका मामा एक्सीडेंट कर बैठा । मामा तो उछल कर दुर कहीं गिरा मगर ये बाईक से चिपकी हुई ही रही ।"

" क्या ?"- मैं आश्चर्यचकित मुंह बाये देखता रहा ।

" हां । " - रीतु काजल को बोली -" चल अब कस के भाई को पकड़ ले ।"

काजल अब पुरा आगे आ गयी और मुझसे सटकर बैठते हुए अपनी दोनों बांहों को आगे कर मेरे बाहों को पकड़ ली ।

" अरे ! क्या कर रही है काजल । मेरी बांह तो छोड़ , मैं बाईक कैसे चलाऊंगा ।"

काजल ने तुरंत अपनी बाहें हटायी और इस बार मेरे पेट के उपर बाहों का हार बना कर पकड़ ली । उसकी दोनों बड़े बड़े मम्मे मेरे पीठ पर धंस गये ।

" हां । अब ठीक है । "- रीतु सन्तुष्ट हो कर बोली ।

" अब मैं जाऊं ?" मैंने कहा ।

" हां जाओ ‌।"

" चलें काजल ?" मैंने काजल से पूछा ।

' हां भैया चलिए ।" काजल बोली ।

मैं बाईक स्टार्ट करने ही वाला था कि रीतु जोर से बोली -" अरे काजल , तेरी बुक्स कहां है ? और तेरा पेठा वाला बैग ?"

" ओह ! भुल गयी यार । लेते आ न ।" काजल ने कहा ।

" तु भी चल ना , दो मिनट में आ जाएंगे ।"

फिर दोनों अन्दर चली गई । और करीब पन्द्रह मिनट बाद आई । मैं बाइक पर बैठे बैठे भुनभुनाता रहा । काजल ने अपनी किताबें और पेठा वाला बैग मुझे दिया । मैंने उसे बाइक की डिकी में रख दिया । फिर मेरे बाइक पर बैठते ही काजल उसी तरह मेरे पेट को अपने हाथों से पकड़ कर चिपक कर बैठ गई ।

ज्योंहि उसके बड़े-बड़े वक्ष मेरी पीठ पर दबे तो मुझे कुछ अलग सा फिल हुआ । मैं उसके मम्मे को स्पष्ट रूप से महसूस कर रहा था । शर्तिया उसने अन्दर जा कर अपनी ब्रा उतार दी थी । मेरी दिल की धड़कन तेज हो गई । ये क्या खेल खेलना चाहती है ।

" चलें काजल "- मैंने प्यार से कहा ।

" हां भैया ।"

काजल ने रीतु को बाय बोला और हम वहां से रवाना हो गए । वो मुझसे इस तरह चिपकी हुई थी कि बीच में से हवा भी पार न होने पाए । उसकी छाती मेरी पीठ से धंसी हुई थी । उसके बड़े-बड़े मुलायम स्पंज की तरह मम्मे की रगड़ मुझे काफी उत्तेजित कर रही थी । जांघिया में कैद मेरे छोटे सिपाही ने जैसे बाहर निकलने के लिए बगावत शुरू कर दी थी ।

काजल का घर पीतमपुरा में था जो हमारे यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर है । इनका मकान दो मंजिला था । मकान के पिछले हिस्से में एक छोटा सा बगीचा था जहां हमलोगो की तरह ही फलों के पेड़ लगे हुए थे और कुछ सब्जियां भी बोई गई थी ।

" काजल कोई परेशानी तो नहीं हो रही है न ।" मैं बाइक चलाते हुए कहा ।

" नहीं भैया ।"

" तुमने पेठा खाया ?"

" हां । बहुत टेस्टी है और थैंक यू भैया ।"

" तुझे अच्छा लगा यही मेरे लिए काफी है ।"

बाइक चलाते हुए सामने एक बमपर आया तो बाइक हल्के से उछल गई और काजल भी थोड़ी उछली और फिर मेरे पीठ पर अपने मम्मे को रगड़ते हुए बैठ गई । मैं ' आह ' करके रह गया ‌। मैं उससे बात करना चाहता था लेकिन क्या कहूं समझ में नहीं आ रहा था । तभी कुछ याद आया ।

" काजल तुझे याद है तुम मुझे अपने आम खिलाने वाली थी ।" मैं बोला ।

" हां भैया याद है । घर चलिए आप को खिलाती हूं ।"

" अभी तो घर पर सभी होंगे । कभी फुर्सत में खा लेंगे ।"

अपने मम्मे को मेरे पीठ पर कसते हुए बोली -" उससे क्या फर्क पड़ेगा । आप पिछे की तरफ से गार्डेन में चलियेगा । अभी इस वक्त वहां कोई नहीं होगा , आप आराम से खा लिजिएगा ।"

" कहीं तेरी मम्मी डैड ने देख लिया तो ।"

" क्या देख लिया तो ?"

" कि मैं तेरे आम खा रहा हूं ।"

वो अपने हाथों को मेरे पेट से हटा कर मेरे जांघों पर लिंग के करीब ले गयी और उंगलियों से जांघ को सहलाते हुए बोली -" डैड अभी दुकान पर होगें और मम्मी अपनी फेवरेट सीरियल देख रही होगी ।"

लिंग के खड़े होने के कारण पैंट पर काफी उभार आ गया था । और उसकी ऊंगली उभारों से करीब करीब सट कर ही थी । उसके उंगलियों द्वारा वहां सहलाने से मेरा लिंग फुल कर कुप्पा हो गया था

" अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात बताई । अब तो मैं पक्का तेरी आम चुसुगा ।"

वो अपने मुंह मेरे कानों से सटा कर बोली -" भैया आपको कैसे आम पसंद है मतलब बड़े बड़े या छोटे ।"

" मुझे सभी पसंद है । वैसे तेरी आम कैसी है ?"

वो कान में अपनी होंठ को सटा कर फुसफुसाई -" भैया मेरे बड़े बड़े हैं ।"

मुझे तो ऐसा लगा कि सच में ही कहीं मैं एक्सीडेंट ना कर बैठूं । मैं अपने आप को संभालते हुए बोला -" वाह । बड़े बड़े । मुझे बड़े बड़े बहुत ज्यादा पसंद है । काजल सच में अपने आम मुझसे चुसवाएगी...मेरा मतलब चुसने देगी न ।"

" हां भैया सच में दुंगी । आप से नहीं चुसवाउगी....माने आप को चूसने नहीं दुंगी तो भला किसे दुंगी ।" - फुसफुसा कर बोली और अपनी मध्यम उंगली को मेरे लिंग के साइड में हल्का हल्का सहलाने लगी ।

उसके उंगलियों के वहां स्पर्श से मुझे लगा कि अब मैं झडने ही वाला हूं । मैं काफी उत्तेजित हो गया था । मैंने हिम्मत करके बाइक के हैंडल पर से अपना एक हाथ हटाया और उसकी उंगलियां जो मेरे जांघों के मध्य से जरा ही दुर था उसे अपने उंगलियों से फसा कर बीच में ठीक लिंग के उपर रख दिया । उसने जरा भी प्रतिवाद नहीं किया ।

" मैं जरूर चुसुगा । दबा दबा कर चुसुगा । "

" हां भैया जरूर चुसीएगा । दबा दबा कर चुसीएगा ।" - वो अपने उंगलियों को हल्के से पैंट के ऊपर से लिंग के उपर दबाई ।

" हां अपने दोनों हथेलियों से पकड़ कर खुब दबा दबा कर चुसुगा , पिऊंगा ।"

" चुस लेना भैया । अपने हाथों से दबोच दबोच कर पी लेना । " कहते हुए वह अपने हथेलियों को मेरे लन्ड को पैंट के ऊपर से दबाई ।

" हाय काजल ... मुझे तो तु अपनी आम चुसाएगी और तुझे क्या पसंद है .... तुझे क्या चाहिए ?"

" हाय भैया मुझे केला पसंद है । आप मुझे खिलाओगे न " - मेरे कानों में धीरे से बोली और उसे अपनी जीभ की नोक से स्पर्श कर दिया ।

" जरूर खिलाऊंगा काजल । मैं तो कब से चाहता था कि तुझे अपना केला खिलाऊं ।"

" तो ये आपकी गलती है न भैया । आप को पहले बोलना चाहिए था ।"

" हां मेरी गलती है । मगर अब गलती नहीं करूंगा । "

वो कुछ कहती उससे पहले ही उसका घर आ गया । उसके घर के सामने ही उसके डैड खड़े मिले । मैं समझ गया अब कुछ नहीं हो सकता है । KLPD हो गया । मैंने काजल की तरफ देखा। उसकी आंखें गुलाबी सी हो गई थी । मुझे अपनी ओर देखता पाकर धीरे से मुस्कुराई । मैंने उसके डैड को प्रणाम किया । उनके साथ उनके घर में प्रवेश किया । उसके मम्मी और डैड से गप शप किया । चाय नाश्ता किया और फिर अपने घर चला आया ।
 
Update 13.

रात के खाने के पश्चात थोड़ी देर छत पर टहला , सिगरेट फुंका और काजल के साथ थोड़ी देर पहले हुई बातों को याद कर के गर्म होने लगा । रात के दस बज चुके थे । सोचा काजल से फोन पर बात करते हैं । मैं अपने कमरे में गया और अपना सैमसंग का स्मार्टफोन ले वापस छत पर आ गया । काजल को फोन लगाया । उसका फोन स्विच ऑफ था । मन खिन्न सा हो गया । फिर सोचा क्यों न मधुमिता को फोन करूं । लेकिन उसका भी फोन स्विच ऑफ मिला । क्या बात है लड़कियों की फोन हड़ताल पर चली गई है क्या ? थोड़ी देर बाद कुछ सोचकर श्वेता दी को फोन लगाया । उन्होंने तुरंत फोन उठाया ।

" हैलो ! " श्वेता दी की मधुर आवाज़ सुनाई दी ।

" क्या कर रही हो दी ?"

" सोने की तैयारी हो रही हूं ।"

" इतनी जल्दी !"

" जल्दी कहां है साढ़े दस बजने वाले हैं ।"

" और जीजू ?"

" बगल में लेटे हुए हैं । क्या कोई काम है ?"

मैं समझ गया दोनों अगल बगल ही है ।

" मै ये बताने के लिए फोन किया था कि अजय की मम्मी राजी है । आप लोग यहां शिफ्ट कर सकते हैं ।"

" अच्छा । " - वो खुश हो कर बोली -" ये तो बहुत अच्छी खबर है । मैं फोन तुम्हारे जीजू को दे रही हूं वो तुमसे बात करना चाहते हैं ।"

" हैलो सागर ! क्या तुम्हारे दोस्त की मां मान गई ।" जीजू की आवाज आई ।

" हां जीजू । उन्हें कोई आपत्ती नही है बल्कि उन्होंने कहा कि वो किराया भी नहीं लेंगी । आप लोग जितना दिन रहना चाहें , खुशी से रह सकते हैं ।"

" वाह ! सच में अच्छी ख़बर है । मेरा भी काफी आराम हो जाएगा । यहां से आने जाने में एक तो समय बहुत लगता है और उपर से पेट्रोल का अनाप-शनाप खर्च ।"

" हां जीजू । वैसे कब तक यहां शिफ्ट होने को सोच रहे हैं ?"

" आज अप्रैल का लास्ट दिन है और कल से मई शुरू हो जाएगा तो अगले हफ्ते में ही रविवार का दिन कैसा रहेगा ?"

" ठीक रहेगा । छुट्टी का दिन रहेगा तो सामान भी ढंग से सजा लीजिएगा ।"

" ठीक है लो अपनी दीदी से बात करो ।" कहकर जीजा ने फोन श्वेता दी के हाथ में पकड़ा दिया ।

" सागर , घर में पापा और मम्मी को बता देना और रविवार के दिन घर पर ही रहना ।" श्वेता दी बोली ।

" हां हां मैं घर पर ही रहूंगा । चिन्ता मत करो ।'

" ठीक है तो मैं फोन रखूं ।"

" हां रखो । गुड नाईट ।"

" सेम टू यू ।" बोलकर श्वेता दी ने फोन काट दिया ।

कहां मै सोच रहा था श्वेता दी से थोड़ी हंसी मजाक करूंगा कहां...। खैर मैं अपने कमरे में आया और बिस्तर पर लेट गया । नींद आ नहीं रही थी । आज अठाईस अप्रैल हो गया । अमर को मरे चौबीस दिन हो गए थे । करीब करीब महीना पूरा होने वाला था लेकिन अभी तक क़ातिल का कोई अता-पता नहीं था । और पुलिस भी निकम्मी हाथ पर हाथ धरे बैठी थी ।

सुबह छः बजे नींद खुली । फ्रेश होकर छत पर वर्क आउट किया फिर नीचे हाल में चला गया । कुछ देर बाद सभी ने एक साथ नाश्ता किया । नाश्ते के बाद डैड अपने काम पर निकल गये । माॅम किचन चली गई और मै और रीतु टीबी देखने लगे । थोड़ी देर माॅम चाय लेकर आई और हम तीनों चाय पीते हुए टीबी देखने लगे ।

" तुम्हें आज कहीं जाना नहीं है क्या ?" माॅम चाय पीते हुए बोली ।

" नहीं । आज कहीं जाने की इच्छा नहीं है । आज दिन भर घर में ही रहूंगा । शाम को क्लब जाउंगा ।"

" ठीक है । कभी कभी शरीर को भी आराम देना चाहिए । इसी बहाने मैं भी निश्चिंत घुम आऊंगी ।"

" क्यों ! तुम कहीं जा रही हो ।" मैंने चौंकते हुए कहा ।

" हां । बहुत दिनों से ज्योत्सना अपने घर बुला रही थी । और आज उसकी शादी की बाइसवीं सालगिरह है तो सोची चली ही जाऊं ।"

ज्योत्सना माॅम और चाची की सहेली थी । वो अक्सर हमारे यहां आया करती थी । वो भी दिखने में काफी सुंदर थी ।

" चाची भी जायेगी क्या ?" मैंने पूछा ।

" हां । वो यहां पहुंचने ही वाली होगी ।"

मैंने रीतु को तरफ देखते हुए कहा -" आज तु इतनी शान्त शान्त क्यों है ?"

" कुछ नहीं भाई । सोच रही थी आज मैं भी कालेज न जाऊं । लेकिन ये काजल की बच्ची जबरदस्ती बुलाने पर तुली हुई है । बोलती है उसे कोई अर्जेंट काम है जबकि मेरा शरीर थकावट जैसी लग रहा है ।"

" थकावट ! क्यों रात में नींद नहीं आई ।"

" आई । बराबर आई । फिर भी मन थका हुआ सा लग रहा है ।"

" तेरी एक्चुअल में थकावट किस चीज की है ? शरीर की या मन की ।"

" यही तो समझ नहीं आ रहा है। कभी लगता है शरीर थका हुआ है कभी लगता है मन थका हुआ है ।"

" तेरा शरीर तो थक सकता नहीं क्योंकि तु तो एक रत्ती भर का भी काम करती नहीं ।"- मैं उसे छेड़ते हुए बोला ।

" क्यों नहीं काम करती । बहुत सारे काम करती हूं । सुबह आठ बजे उठती हूं फिर बाथरूम में जाती हूं । पौन घंटे तक वहीं मेहनत हो जाती है । फिर आधे घंटे मेकअप करने में । उसके बाद यहां से बस से कालेज खड़े खड़े जाने में । और वहां की तो पुछो मत.... पांच से छः घंटे पढ़ाई करने में । पढ़ाई में कितनी मेहनत लगती है ये तो कम से कम तुम अच्छे से जानते होगे । फिर वहां से वापस घर बस में खड़े खड़े आने में । उसके बाद खाना खाने में । फिर जरा सी.... मात्र जरा सी आराम करना फिर तुरंत शाम को पढ़ने बैठ जाना । उफ...फिर रात में भोजन करना तब जाकर रात को दस बजे फुर्सत मिलती है । सुबह आठ बजे से लेकर रात के दस बजे तक सिर्फ जरा सा सिर्फ जरा सा आराम मिलता है और तुम बोलते हो मैं मेहनत नहीं करती ।"

मेरे समझ में नहीं आया कि मैं क्या बोलूं । मैंने माॅम की तरफ देखा वो मुस्कराए जा रही थी ।

" सच में इन सब कामों में बहुत मेहनत लगती है ।" मैंने कहा ।

रीतु मुझे और माॅम को संबोधित करते हुए बोली -" माॅम मैं कालेज से सीधे काजल के घर चली जाऊंगी और भाई आप शाम के क्लास के बाद काजल के घर से मुझे पिक अप कर लेना ।"

" जो आज्ञा ।" मैंने और माॅम ने एक साथ कहा । और फिर तीनों ठठा कर हंस पड़े ।

थोड़ी देर बाद रीतु कालेज चली गई । रीतु के जाते ही चाची आ गयी । उन्होंने नीले रंग की साड़ी पहनी थी । और उसी से मैच करता हुआ ब्लाउज । कद पांच फुट तीन इंच का । शरीर भरा-भरा । भारी भारी स्तन शायद ४०..४२ डी. होंगे । बाहर की ओर निकले हुए नितम्ब । पेट पर हल्की चर्बी । तीखे नैन-नक्श । गाल फुले फुले । इनका फिगर बिदया बालन की याद दिला देता है । वैसे ही होंठ ।

चाची आकर मेरे बगल में बैठ गई तो माॅम तैयार होने चली गई ।

" आज कालेज नहीं गया ?" चाची बोली ।

" नहीं चाची आज नहीं गया । आज रेस्ट करने को जी चाहा तो घर पर ही रूक गया ।"

" चलो अच्छा है । तब तु घर की रखवाली कर तब तक हम भी घुम कर आ जायेंगे । "

" आप लोग कब तक आ जाओगे ?"

" शाम को पांच छः बजे तक आ जायेंगे । बेचारी ज्योत्सना हमारे यहां बराबर आती हैं और हमारी बारी आती है तो हम कोई ना कोई बहाना बना कर के मना कर देते हैं । लेकिन इस बार नहीं गये तो पक्का नाराज हो जायेंगी ।"

" नहीं नहीं चाची आप लोग को जरूर जाना चाहिए ।"- मैं चाची से मजाक करते हुए बोला -" वैसे चाची आपकी सहेली ज्योत्सना के यहां मर्द भी तो पार्टी में होंगे ।"

" हां क्यों ?"

मैं उन्हें सर से पांव तक निहारते हुए कहा -" आपको देख कर उन सभी की हालत खस्ता होनी जानी है । सारे मर्दों के मुंह से शर्तिया लार टपकनी ही टपकनी है ।"

चाची मुस्कराते हुए बोली -" बदमाश । छेड़ रहा है मुझे ।"

" चाची आपकी कसम सच बोल रहा हूं । मुझे तो आपकी चिंता होने लगी है जरा सम्भाल कर रहिएगा । मैं नहीं चाहता मेरे हक पर कोई दुसरा डाका मार दे ।"

" नालायक । तेरा हक कहां से हो गया । खाली मसखरी करता है । और वो हक तो बहुत पहले तेरे चाचा को मिल चुका है ।"

" बड़े ही खुशकिस्मत हैं चाचा "- मैं आह भरते हुए बोला -" अच्छा चाची , चाचा तो अभी भी आपको छेड़ते होंगे ।"

" क्यों नहीं छेड़ना चाहिए ।" चाची मुस्कराते हुए बोली ।

" जरूर छेड़नी चाहिए । मगर मुझे लगता नहीं है कि वो अब आपको छेड़ते होंगे ।"

" क्यों ?"

" उनको डर नहीं होगा ? कहां तुम सतर किलो की और कहां चाचा पचास किलो का । चाचा की हड्डी वडडी नहीं टुट जायेंगी । "

" बेशरम कहीं का । लाज वाज नहीं आती है तेरे को ।"

" आती है चाची लेकिन क्या करूं आपको देख कर चली जाती है ।"

" शरम कर शरम ।" चाची इस बार अपनी मुस्कान को छिपाते हुए बोली ।

" आपसे कैसा शरम चाची । चाची आपसे एक बात कहनी थी ।"

" क्या ?"

मैंने उन्हें श्वेता दी के यहीं अमर के घर में शिफ्ट होने की खबर बताई । मुझे लगा ये खबर सुनकर वो कोई खास उत्साहित नहीं थी ।

तभी माॅम आ गई और वो दोनों अपनी सहेली के घर चली गई । मैं घर में अकेला हो गया था । कुछ देर टीवी देख कर समय पास किया । फिर मधुमिता को फोन लगाया । अभी तक उसका फोन बंद था । काजल को फोन कर नहीं सकता था क्योंकि वो अभी कालेज में होगी । फिर श्वेता दी को फोन लगाया । अब उनका भी फोन स्विच ऑफ आने लगा । मन वितृष्णा से भर गया । जब इन्हें फोन बंद ही रखना था तो ये फोन खरीदी क्यों । मैं अपने कमरे में गया और बिस्तर पर सो गया ।

चार बजे नींद खुली । फ्रेश हो कर किचन में गया । माॅम खाना बना कर गयी थी । मैंने खाना खाया । फिर थोड़ा फेसबुक और व्हाट्स एप देखने लगा । पांच बजने वाले थे जब काजल का फोन आया । मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा । मैंने जल्दी से फोन उठाया ।

" हैलो !" मैं मिश्री से भरे स्वर में बोला ।

" हैलो भैया !" काजल की आवाज आई ।

" हैलो काजल कैसी हो ?"

" अच्छी हूं भैया । आप कैसे हो ?"

" मैं कहां ठीक हूं । और तुम्हारा फोन रात में स्वीच ऑफ क्यों आ रहा था ?"

" चार्ज खत्म हो गया था । और आप ने ऐसा क्यों बोला ' कहां ठीक हूं ' । क्या तबियत ठीक नहीं है । रीतु भी बोल रही थी आज आप घर में ही रेस्ट कर रहे हैं ।"

" नहीं नहीं तबीयत बिल्कुल ठीक है बस थोड़ा दिल का धड़का सा लग गया है ।"

" धड़का ओह माई गॉड आपको हार्ट अटैक आया है ।"

" अरे पगली हार्ट अटैक आता तो क्या मैं तुझसे बातें कर रहा होता । वो एक्चुअल में कल तेरा आम चुस नहीं पाया न इसलिए थोड़ा दिल का धड़का लग गया । कल तो पुरा ही KLPD हो गया था न ।"

" ओह । तो मैं क्या करती भैया । मेरा तो पुरा मन था कि आपको अपने आम चुसवाती लेकिन डैड टाइम से पहले ही घर आ गए । और भैया ये KLPD क्या होता है ?"

" KLPD..... अच्छा सुन अभी तु कहां है और रीतु क्या कर रही है ?"

" हम अभी घर के पीछे अपने बगीचे में है । रीतु आम तोड़ रही है और मैं आपसे बात कर रही हूं ।"

" तुम दोनों साथ में ही हो ?"

" नहीं , मैं उससे थोड़ी दुरी पर हूं । वो...वो मैंने उससे कहा मुझे मामी से बात करनी थी ।"

" वाह ! तु तो सच में होशियार है काजल ।"

" वो तो हूं भैया ।"

" तो बता न तेरे बड़े बड़े आम मुझे कब चुसने को मिलेंगे । बड़ी इच्छा कर रही है यार ।"

" तो अभी आ जाओ ना।"

" अभी आ जाऊं ?"

" हां । और....खोलकर... उतार कर चुस लो ।"

" हाय काजल खोल कर , उतार कर ?"

" आम चुसने के लिए खोलोगे नहीं , उतारोगे नहीं ?"

" हां उतारूंगा तभी न दोनों हाथों से दबोच दबोच कर दबाऊंगा और चुसुगा ।"

" हां भैया खुब दबोच कर , मसल मसल कर चुसिएगा । मेरा बहुत मन कर रहा है भैया । "

" मेरा भी बहुत मन कर रहा है कि तेरी बड़ी बड़ी रसीली आम को हाथों से मसल मसल कर चुसु ।"

" हां भैया । खुब चुसिएगा । मैं भी आपका केला चुसुगी । भैया अपनी केला मुझे चुसावोगे न ।"

" हां बहना जरूर चुसाऊगा । मेरी बहन अपने भाई का केला नहीं चुसेगी तो किसका चुसेगी । और क्या खाली केला ही चुसेगी या उसका जुस नहीं पियेगी ?"

" हाय मेरे भैया आपके केले को तब तक चूसुगी जब तक उसका जुस ना पी लूं ।" - काजल की आवाज काफी उत्तेजित हो गई थी -" अच्छा भैया , मेरे बगीचे में घांस काफी उग गया है । मैं सोच रही थी उसे साफ करवा दूं । आपको क्या लगता है भैया उसे साफ करवा दूं या वैसे ही रहने दूं ।"

मेरा लन्ड तो पहले से खड़ा था । मगर अब वो जांघिया के अन्दर बंद रहने से दर्द करने लगा था । घर में कोई था नहीं । मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगा हो गया ।

मैं अपने लन्ड सहलाते हुए बोला -" मुझे तो बगीचे...घांस वाला भी अच्छा लगता है और बिना घांस वाला भी । तुझे क्या पसंद है ?"

" घांस वाली ।" काजल बोली ।

" घास वाली ।"

" हां भैया ।'

" तो घांस रहने ही दो । जानती हो मेरे बगीचे में भी बहुत घांस हो गया है ।"- मैंने अपनी झांटों को सहलाते हुए कहा ।

" लेकिन मेरे से बड़ा नहीं होगा भैया । मेरी बहुत बड़ी बड़ी है ।"

" ऐसा है तो जब मिलेंगे न तो तु मेरी घांस चेक कर लेना और मैं तेरी चेक कर लुंगा । फिर देखेंगे कि तेरी झांट.....साॅरी तेरी घांस बड़ी है ना मेरी ।"

" ठीक है भैया । अच्छा भैया मैं आपको थोड़ी देर बाद फ़ोन करूं ।"

" क्यों क्या हुआ ?"

" मुझे बहुत जोर से पेशाब लगी है ।"

" अरे तो उससे क्या हुआ । तु पेशाब करती रहना और हम बातें भी करते रहेंगे ।"

" अच्छा भैया ।"

फिर मुझे उसकी आवाज सुनाई दी । ' रीतु मैं जरा बाथरूम से आ रही हूं ' । फिर मुझे रीतु को आवाज सुनाई दी ' ठीक है जा लेकिन जल्दी आना '।

दो तीन मिनट तक जब उसकी आवाज नहीं आई तो मैं बोला -" क्या हुआ काजल बाथरूम नहीं पहुंची क्या ?"

" पहुंच गई हूं भैया । सलवार उतार दी हूं अब अपनी पैंटी उतार रही हूं ।"

मैं उसको पैंटी उतारते हुए की कल्पना करने लगा और उत्तेजित होता रहा ।

" हाय काजल अब तक मुझे भी पेशाब लग गई है ।"

" तो आप भी कर लो । दोनों पेशाब करते हुए बातें करेंगे ।"

" लेकिन मैं बाथरूम में पुरा नंगा हो कर पेशाब करता हूं ।"

" आप पुरा नंगा हो कर पेशाब करते हैं ?"

" हां । और तु ?"

" मैं तो नहीं करती लेकिन सोचती हूं आज कर लूं ।"

" तो कर ना । मैं तो पुरा नंगा हो भी गया हूं ।"

" हाय भैया अभी आप पुरा नंगे हो ?"

" हां । तु हुई या नहीं ।"

उसके कपड़ों के सरसराहट की आवाज सुनाई दी ।

" मैं भी हो गई हूं । " वो बोली ।

" नंगी हो गई ।'

" हां भैया। आपकी बहन सर से पांच तक एकदम नंगी है । "

" तो चल हम दोनों भाई बहन एक साथ पेशाब करते हैं ।"

" हां भैया । मैं अब बैठ गयी हूं और आप ।"

" मैं भी उसको पकड़ कर खड़ा हूं ।"

" किसको पकड़ कर खड़े हो भैया ?"

" उसी को जिससे वो निकलता है ।"

" जिससे पेशाब निकलता है भैया ?"

" हां ।"

" ठीक है आप उसे पकड़ कर खड़े हो कर करो । और मैं बैठ कर करती हूं । ........हाय मेरा पेशाब निकल गया भैया ।"

उसके ये शब्द सुनकर मैं उसकी चुत से पेशाब निकलते हुए की कल्पना करने लगा ।

काजल के पेशाब करने की आवाज मुझे स्पष्ट सुनाई पड़ रही थी । एक दम किसी सीटी की आवाज की तरह । मेरा तो पेशाब निकलने का सवाल ही पैदा नहीं होता था । खड़े लन्ड से कहीं पेशाब होता है ।

" काजल , ये जोर जोर से सीटी की आवाज कहां से आ रही है ?" मैंने अपने लौड़े को मुठियाते हुए कहा ।

" ये मेरे पेशाब करने की आवाज है भैया । बड़ी जोर से मुतवास लगी थी न इसलिए आवाज थोड़ा जोर से आ रही है ।"

" आह ! कितनी मधुर आवाज आ रही है । "

' लेकिन आप के मुतने की आवाज नहीं आ रही है ।"

" हम लोगों की तुम लोगों जैसी आवाज नहीं आती है न ।"

मैं करीब पांच सात मिनट तक उसके पेशाब करने की आवाज सुनता रहा । जब आवाज आनी बंद हो गई तो मैंने कहा -" पेशाब कर ली काजल ।"

" नहीं भैया अभी भी रूक रूक कर निकल रही है ।"

" बाप रे ! कितनी देर तक मुतती है । पांच सात मिनट हो गए ।"

" क्या करूं भैया । आपको बोला था न बहुत जोर से लगी है । आप खुद देखते न तब समझते । अच्छा हो गया अब । अब उसको पानी से धो लूं ।"

" धो ली ।"

" धो ली भैया लेकिन वहां बड़ी खुजला रही है ।"

" खुजला तो मेरा भी रहा है । एक काम कर तु अपनी खुजला और मैं अपनी खुजलाता हूं ।"

मैं जोर जोर से मुठ मारने लगा । मैं जानता था कि वो भी अपनी चुत में ऊंगली कर रही होगी ।

" खुजला रही है काजल ?" मैं मुठ मारते हुए बोला ।

" हां भैया । बड़ी जोर से चुनचुना रही है । और आप भैया ?"

" मैं भी काजल । मैं उसे हथेलियों में कसकर उपर नीचे कर रहा हूं ।"

" हाय भैया आप उपर नीचे से मसल रहे हैं , मैं भी अपनी ऊंगली को अन्दर बाहर कर रही हूं ।"

" तु ऊंगली को अन्दर ढुका रही है निकाल रही है ।"

" हां भैया , ऊंगली मलाई से भीग गई है ।"

" हाय काजल , काश तेरी ऊंगली चाट लेता ।"

" चाट लेना भाई । ऊंगली ही क्यों अपनी जीभ उसके अंदर ढुका कर चाट लेना ।"

" हाय काजल बड़ा मज़ा आ रहा है ।"

" मुझे भी भैया । ऐसी सुन्दर खुजली तो मुझे कभी नहीं हुई थी । "

" ओह काजल , अभी तो अपनी ऊंगली से खुजली मिटा बाद में मैं अपने मोटे लम्बे केले को उसमें डाल कर खुजली मिटाऊंगा । मेरे केले को उसमें डलवाएगी न काजल ।"

" डलवाऊंगी भैया । रोज रोज डलवाऊंगी । "

' कहां डलवाएगी काजल ?"

" अपनी घासों से भरी हुई छेद में ।"

दोनों तरफ से सेक्सी आवाजें निकल रही थी । दोनों घमासान हस्त मैथुन किए जा रहे थे । हमारा ये एक अलग तरह का इरोटिक सेक्स गेम चरम पर था ।

" अपनी घासों से भरी छेद में मेरा लौड़ा... मतलब केला डलवाएगी ।"

" हां भैया अपनी घांस से भरी हुई छेद में आपका लौड़ा..... मतलब केला डलवाऊंगी ।"

मैं जोर जोर से मुठ मारते हुए बोला -" मेरे लौड़े का...... मेरे लन्ड का ... मेरे केले का रस कहां लेगी ? अपने छेद के भीतर लेगी या...."

" हाय मेरे राजा भैया आपके लन्ड....आपके लौड़े का रस मै अपनी छेद ... अपनी बुर.... अपनी चुत में लुंगी । हाय भैया चोदिए मुझे.... अपने लौड़े को मेरी बुर में घुसेड़ कर जोर जोर से चोदिए ।"

" हां चोदुगा मेरी बहन.. मेरी काजल । तेरी बुर में अपना मोटा लौड़ा घुसेड़ कर जोर जोर से चोदुगा । तेरी चुत को भोसड़ा बना दुंगा । अपनी चुत को भोसड़ा बनवाएगी न काजल ।"

" हां भैया । मेरी कुंवारी चुत को चोद चोद कर भोसड़ा बना दीजिएगा । हाय भैया मेरा निकलने वाला है । अभी आप क्या सोच रहे हैं भैया ?"

" मेरा भी निकलने वाला है काजल । मैं सोच रहा हूं कि मेरा लन्ड तेरी चुत में घुस रहा है और निकल रहा है ।"

" हाय भैया मैं भी वही सोच रही हूं । मेरी बुर को आप अपने मोटे लौड़े से चोद रहे हैं । आह.... मैं गई...मेरा निकल रहा है भैया...।"

उसके बोलते ही मेरा पानी भी निकल गया । क्या गजब का इजेकुलेशन हुआ था । हम दोनों बहुत देर तक वैसे ही परिस्थिति में रहे ।
 
RIP Sushant Singh Rajput. ??

Update 14.

माॅम और चाची के आने के बाद अपने र्पाट टाइम जाॅब करने क्लब चला गया । वहां दो घंटे तक पसीना बहाया फिर काजल के घर रीतु को लाने चला गया । वहां रीतु के रहते काजल के साथ कुछ गरम गरम होने की संभावना कम ही थी लेकिन भले फिल्म न सही ट्रेलर की आस तो थी ही । मगर वो भी नहीं हुआ । काजल के हाव भाव पहले की ही तरह सामान्य थी । मैं रीतु को बाइक पर बैठा कर घर की ओर चल दिया ।

" आज कल काजल से बड़ी चैटिंग सैटिंग होती हैं " रीतु ने अचानक कहा ।

" क्या मतलब ?" मैं चौंकते हुए बोला ।

" काजल से बड़ी चैटिंग सैटिंग होती है ।" वो बाइक पर थोड़ा आगे की ओर सरक कर बोली ।

" किसने कहा ? क्या काजल ने कहा ?" मैं घबराए हुए बोला ।

" हां ।"

" क्या कहा ?".... मैंने सोचा कहीं उसने सारी बातें रीतु को कह तो नहीं दी । आखिर वो दोनों सहेलियां हैं । लेकिन नहीं हमने जिस तरह की गन्दी बातें की थी वो सब वो किसी को भी नहीं बोल सकती ‌।

" यही कि मैं सागर से बात कर रही थी ।"

" अरे ! पुरी बात बतायेगी ?"

" हम दोनों उसके बगीचे में थे तभी वो बाथरूम जाने को बोलकर निकल गई । और बाथरूम से पुरे आधे घंटे बाद निकली । तो मैंने पूछा इतनी देर क्या कर रही थी तो वो बोली कि तेरे भैया से बात कर रही थी ।'

" अच्छा ! ऐसा कहा उसने ।"

" हां ।"

" फिर तु क्या बोली ?"

" मैं क्या बोलती ? मैंने बस इतना ही कहा कि जरा संभल कर कहीं पंगा न हो जाए , और कहीं तेरे डैड को पता चल गया तो अपनी रिवॉल्वर लेकर मेरे घर ना पहूंच जाएं । और साथ में तेरी भी खैर खबर ना ले लें ।"

" क्या ? उसके डैड के पास रिवाल्वर है ?" मैं चौंक गया ।

" हां ।"

" कौन सी रिवाल्वर है ? तुने देखी है ?"

" हां । छोटी सी है "

" अच्छा । फिर तेरे बोलने के बाद काजल ने क्या कहा ?"

" प्यार किया तो डरना क्या ।"

" क्या ?"

" बोली प्यार किया तो डरना क्या ।"

" मुझे तो लगता है कि या तो वो तुझे बेवकूफ बना रही है या तु मुझे बेवकूफ बना रही है ।"

" यू नो.. मुझे कोई बेवकूफ नहीं बना सकता ।"

" इसका मतलब तु मुझे बेवकूफ बना रही है ।"

" तुम्हें कौन बेवकूफ बना सकता है ?

" अच्छा !... पहली बार सही बोली ।"

" जी नहीं । जो पहले से ही बेवकूफ हो उसे भला बेवकूफ बनाने की क्या जरूरत है ।"

" मैं बेवकूफ हूं ?"- मैं भड़क कर बोला ।

" हां , काजल तो यही कहती हैं ।"

" काजल नहीं , तु बकती हैं ये सारी बकवास । ये सब तेरी हमेशा वाली फितरत है । वैसे काजल ने तुझे ये नहीं बताया कि वो मुझसे क्या क्या बातें कर रही थी ।"

" नहीं बताई कलमुंही ने । इसीलिए तो मैं तुम से पुछ रही थी ।"

" कोई बात हुई होगी तो न बताएगी । अब चुपचाप बैठ , हम घर पहुंचने वाले हैं ।"

थोड़ी देर बाद हम घर पहुंच गए । रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया । कपड़े चेंज किए फिर छत पर टहलते हुए सिगरेट पीने लगा । मुझे न जाने क्यों शुरू से लग रहा था कि अनुष्का और उसके पति कुलभूषण खन्ना के बारे में पुलिस को न बता कर बड़ी गलती कर दी है । अगर मैंने पहले ही पुलिस को उनके बारे में बता दिया होता तो वो उनके घर जाकर तहकीकात करती और हो सकता है कि मर्डर विपन भी बरामद हो जाता यदि वो क़ातिल हुए तो । पुलिस के पास जानकारी हासिल करने के लिए बहुत सारी चीज़ें होती हैं । वो इन मामलों में एक्सपर्ट होते हैं । उनके पास पावर होता है , टार्चर करके सच्चाई निकलवाने के हजारों तरीके होते हैं । और अगर कहीं दोनों मियां बीवी अमेरिका खसक लिए, और बाद में वो गुनाहगार पाए गए तो सांप निकलने के बाद लकीरें पिटने वाली बात रह जायेगी ।

मैंने डिसाइड कर लिया कि मैं पुलिस को उन के बारे में बताऊंगा । मगर मैं ये भी जानता था कि पुलिस मुझे उनके बारे में इतने दिनों तक जानकारी छुपाने पर मेरी बखिया उधेड़ देंगी । खैर अब पुलिस मेरे साथ जो भी करें मैंने उनके बारे में पुलिस को बताने का निर्णय कर लिया ।

.......

सुबह तैयार होकर नाश्ता किया फिर माॅम डैड को सारी बातें बताई । उन्होंने भी मुझे पुलिस के पास जाने की सलाह दी । मैं अपनी बाइक लेकर गाजियाबाद निकल गया । थाने में इंस्पेक्टर विजय कोठारी अपने कक्ष में मिला । मैंने उसे सारी बातें बताई । सुनते ही वो भड़क उठा । भरे थाने में मेरी बुरी तरह फजीहत कर दी । फिर उसने कहा वो कुलभूषण खन्ना और अनुष्का के घर जा रहा है और वो जब तक वहां से वापस न आ जाए तब तक थाने में ही उसकी प्रतीक्षा करें । मैंने बड़ी मुश्किल से उसे मनाया कि मैं थाने में न रूककर अपने जीजा के घर चला जाता हूं और वो जब वहां से वापस आ जाए तब मैं थाने चला आऊंगा ।

इंस्पेक्टर अपने लाव लश्कर के साथ कुलभूषण खन्ना के घर चला गया और मैं जीजू के घर । अभी दिन के ग्यारह ही बजे थे । जब मैं जीजू के घर पहुंचा तब श्वेता दी किचन में थी और दोपहर के भोजन बनाने की तैयारी कर रही थी और जीजू अपने कमरे में टीवी चालू किए मोबाइल देख रहे थे ।

मुझे देखकर श्वेता दी बहुत खुश हुई । वो साड़ी पहनी हुई थी । मैंने श्वेता दी को हग किया और अपने हाथ को पीछे ले जाकर उनके बड़े बड़े चूतड़ों को दबोच लिया । वो चिहुंक कर मुझे देखी और फुसफुसाई - " क्या करते हो , तुम्हारे जीजू घर में हैं , कहीं देख लिया तो ।"

" नहीं देखेंगे । कमरे से किचन थोड़ी ही दिखेगा । " - कहकर मैंने अपने होंठ उनके होंठों से सटा दिया । और उनके शहद से भी मीठे लबों को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा ।

वो मुझे परे धकेलते हुए बोली -" क्या कर रहे हो मरवाओगे क्या ? चुपचाप रूम में जाकर जीजू के पास बैठो । "

" क्या यार , इतनी दूर से आया था कि अपनी बहन को प्यार करूंगा , उसके गले लगूंगा , लेकिन तुम तो मेरा दिल ही तोड़े देती हो ।" मैंने मायूसी शक्ल बनाते हुए कहा ।

" नाटक मत करो । जाओ , मैं चाय लेकर आती हूं ।" - उन्होंने बर्तन उठाते हुए कहा ।

" लेकिन मुझे चाय नहीं पिनी है ।"

" तो क्या पिनी है , खाना बना दूं ..वैसे चावल और दाल बना दिया है , सब्जी बनानी बाकी है । सलाद काट देती हूं और पापड़ तल देती हूं , क्यों ठीक रहेगा ना ।"

" लेकिन फिलहाल तो मुझे दुध पिनी है और वो भी तुम्हारी चोली के अंदर वाली ।" - कहकर मैंने उनके एक मम्मा दबा दिया ।

" कमीना कहीं का । अभी कुछ नहीं मिलने वाला है । और इस वक्त तो हरगिज नहीं ।"

" चलो ठीक है । जैसी आप की इच्छा ।" - मैं निराश होकर बोला ।

और मैं जीजू के पास जाने लगा तभी उसने मेरी बांह पकड़ी और किचन के कोने में ले गयी । फिर उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए । धीरे धीरे चुम्बन विल्ड होने लगी । दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चुसने लगे । वो अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी । मैं उसके जीभ को चूसने लगा । उसकी लार थूक को मैं गले के अन्दर लेने लगा । वो उत्तेजित होकर पैंट के ऊपर से ही मेरे लन्ड को दबाने लगी । मैं उसकी भारी चूतड़ों को हाथों से पकड़ कर दबोचने लगा । फिर मैंने अपनी हाथ को उसके पेटीकोट के अन्दर प्रवेश कराने लगा तो उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझसे अलग हो गई ।

" आज नहीं " - वो हांफते हुए बोली -" मैं वहां तो आ ही रही हूं चार पांच दिन के अंदर फिर कर लेना ।"

" क्या कर लेना ?" मैंने उसे पकड़ने की कोशिश की ।

" प्लीज़ भाई , जाओ ना " श्वेता दी ने अनुरोध किया ।

" ओके । तुम खाना बनाओ मैं जीजू के पास बैठता हूं ।" - मैंने प्यार से कहा ।

उसने सहमति में सिर हिलाया । मैं जीजू के पास चला गया और पलंग के बगल में दिवाल से लगी हुई बड़े सोफे पर एक किनारे बैठ गया । थोड़ी बहुत औपचारिक बातों के पश्चात उन्होंने मेरे आने का कारण पूछा तो मैंने बहाना बनाया कि मेरे एक दोस्त का यहां के कालेज में कोई काम है इसलिए उसके साथ चला आया । तभी श्वेता दी आई और हमें चाय सर्व किया फिर सोफे के दुसरे कोने में बैठ गई । तीनों चाय पीते पीते बात करने लगे । मैंने जीजू से पूछा कि काम कब से ज्वाइन करने वाले हैं तो उन्होंने कहा अब दिल्ली आकर वहीं से काम ज्वाइन करेंगे । फिर थोड़ी देर बाद वो एक टीबी सीरियल देखने में बिजी हो गये । शायद वो उनकी फेवरेट सीरियल थी जो दुबारा दिन में दिखाई जा रही थी ।

मैं चाय पीते हुए श्वेता दी की तरफ देखा । वो चाय पीते हुए मुझे ही देख रही थी । मैंने अपना मोबाइल बाहर निकाला और श्वेता दी के ह्वाट्सएप पर मैसेज किया । श्वेता दी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने इशारे से उनको अपना मोबाइल देखने को कहा । वो अपनी मोबाइल उठाई जो उनके बगल में सोफे पर पड़ी हुई थी ।

मेरा मैसेज - वहां सन्डे को आ रही हो ना ।

श्वेता दी का मैसेज - हां , क्यों ?

मैं - जीजू काम कब से ज्वाइन करेंगे ?

श्वेता दी - सोमवार से ।

मैं - ड्यूटी पर निकलेंगे किते बजे ।

श्वेता दी - दस बजे । और वापस लौटेंगे सात बजे ।

मैं - तब तो तुम नौ घंटे अकेले रहोगी । कैसे समय काटोगी ।

श्वेता दी - क्यों ? मां को या राहुल को बुला लुंगी ।

मैं - राहुल का स्कूल रहेगा और चाची रोज रोज थोड़ी न आयेगी ।

श्वेता दी - तो उर्वशी को बुला लुंगी । वो नहीं मिली तो रीतु या तुम्हारी मम्मी को बुला लुंगी ।

मैं - सारी दुनिया को बुला लेना लेकिन मेरे बारे में ख्याल तक मत करना ।

श्वेता दी - क्यों नहीं ख्याल करूंगी , जब मेरे कपड़े धोने हो तब खयाल करूंगी , जब घर की साफ-सफाई करनी होगी तब खयाल करूंगी , जब बाजार से राशन सब्जी मंगवानी हो तब खयाल करूंगी ।

मैं - इतना सारा काम करवाओगी ।

श्वेता दी - हां ।

मैं - और बदले में मजदुरी में क्या दोगी ।

श्वेता दी - तुम्हारे जीजू से बोलकर पांच सौ रुपए और दिवाली होली के दिन कपड़े ।

तभी जीजू ने श्वेता दी को टोका -" किससे चैट कर रही हो श्वेता ।"

श्वेता दी ने संभलते हुए कहा - " उर्वशी है ।"

" अच्छा ।" कहकर उन्होंने फिर अपना ध्यान टीवी पर केन्द्रित कर दिया ।

मैं - वैसे तुम पैसे कपड़े ना भी देती तो मैं तुम्हारे सारे काम कर देता ।

श्वेता दी - फ्री में ।

मैं - बिल्कुल फ्री में ।

श्वेता दी - कुछ भी नहीं लेते ।

मैं - लेता न ..बस तीनों टाइम.... ब्रेकफास्ट , लंच और डिनर करा देती ‌।

श्वेता दी - वाह ! ये भी कोई कहने की बात है । मैं पक्का ब्रेकफास्ट , लंच , डिनर करा दुंगी ।

मैं - लेकिन ये तो पुछ लो कि मैं ब्रेकफास्ट लंच और डिनर में क्या लुंगा ।

श्वेता दी - क्या लोगे ।

मैं - ब्रेकफास्ट में तुम्हारे होठों और जीभ का मधु रस , लंच में तुम्हारे थानों का दुध और डिनर में तुम्हारे जांघों के बीच जो गहरी सी छेद है न , वहां से निकलने वाली मलाई ।

श्वेता दी ने कामुक नज़रों से मुझे देखा फिर जीजू की तरफ देखा जो टीबी देखने में व्यस्त थे , फिर अपने मोबाइल पर मैसेज लिखने लगी ।

श्वेता दी - सिर्फ इतने में पेट भर जाएगा ।

मैं - हां... भर तो जाना चाहिए । खास तौर पर तुम्हारी मलाई से तो पक्का ही भर जाएगा । बोलो पिलाओगी न अपने चिकनी छेद से निकलने वाली गाढ़ी मलाई को ।

श्वेता दी ने फिर एक नज़र जीजू को देखा फिर मैसेज टाइप की - जरूर पिलाऊंगी अपने डार्लिंग भाई को.... अपनी गाढ़ी मलाई ।

मैंने उनकी तरफ देखा वो कामुक नज़रों से मुझे देख रही थी फिर उन्होंने अपने जीभ को होंठों पर फिराने लगी ।

मैं - हाय दीदी... मैं तो मरा जा रहा हूं तेरी सुरंग की लसदार गाढ़ी मलाई को पीने के लिए ...चल ना बाथरूम में..अपनी पेटीकोट को पकड़ कर अपने जांघों से ऊपर कर खड़ी हो जाना और मैं नीचे बैठ कर तेरी जांघों के बीच में जो सुरंग है उस पर अपना मुंह रख कर जीभ से सारी मलाई चुस चुस कर पी लुंगा ।

श्वेता दी - मेरी भी बहुत इच्छा कर रही है तुझे पिलाने में । मेरी तो अभी से पैन्टी भीग गई है... अगर तुने अभी चुस लिया न तो मेरी इतनी मलाई निकलेगी कि तेरा पेट क्या गला तक भर जाएगा ।

तभी जीजू ने बोला -" क्या बोल रही है उर्वशी ।"

श्वेता दी ने संभलते हुए कहा - " वही सब लड़कियों वाली बातें.. गर्ल्स टाक । उसे मेरी बनाई हुई मलाई बहुत पसंद है , वही खिलाने को बोल रही है ।"

" ओह ! ठीक है उसे दिल्ली , घर बुलाना वहीं उसे मलाई खिला देना ।" - जीजू ने कहा ।

" हां वही तो उसे बता रही हूं दिल्ली में जितना इच्छा हो खा लेना ।" श्वेता दी ने मुझे घुरते हुए कहा ।

फिर जीजू ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा -" तुम कहां बीजी हो गये हो , कोई गर्लफ्रेंड है क्या ?"

" अरे नहीं जीजू , मेरी ऐसी किस्मत कहां । मेरे एक स्टुडेंट का फोन है । " मैंने मुस्करा कर जबाव दिया ।

वो फिर टीवी देखने में व्यस्त हो गए । मैंने फिर श्वेता दी को मैसेज किया ।

मैं - श्वेता दी , चलो न बाथरूम में ।

तुरंत श्वेता दी का मैसेज आया - किसलिए ।

मैं - तुम्हारी मलाई चाटने ।

श्वेता दी - हाय तुम से ज्यादा इच्छा मेरी हो रही है लेकिन अभी रिस्क ज्यादा है.... दिल्ली में तुम्हें भरपेट मलाई चटाऊगी । जब कहोगे तब । बोलो चाटोगे न अपनी बहन की मलाई ।

मैं - हां दीदी चाटूंगा... वहां तो तुम्हें पुरी नंगी करके तुम्हारे दोनों पैरों को फैला कर तुम्हारे सीने के उपर रख कर अपनी जीभ अंदर बाहर कर कर के चाटूंगा । ( मैंने श्वेता दी को जीजू के नजरों से छुपा कर अपने लन्ड को पैंट के ऊपर से मसलते हुए दिखाया )

श्वेता दी भी पुरी गरम हो गई थी । उन्होंने मैसेज भेज कर मुझे देखा ।

श्वेता दी - हां , मेरे बेडरूम में मेरी बिस्तर पर जहां तुम्हारे जीजू और मैं सोते हैं उसी पर मुझे नंगी कर के मेरी जांघों के बीच के छेद में अपनी जीभ डाल डाल कर चाटना ।

मैं - हां दीदी...तेरा भाई तेरी छेद के अंदर मुंह और जीभ घुसा घुसा कर चाटेगा । तेरी आगे वाली और पिछे वाली दोनों छेदों में जीभ पेलूंगा ।

श्वेता दी - खाली जीभ ही पेलेगा और कुछ नहीं पेलेगा ।

मैं - तु बता न और क्या पेलूंगा ।

श्वेता दी - अपना मोटा लौड़ा नहीं पेलेगा ।

मैं - हाय मेरी दीदी...मेरा मोटा लौड़ा से पेलवाएगी.. मेरे मोटे लन्ड से क्या पेलवाएगी ।

श्वेता दी - अपनी चुत पेलवाऊगी... अपने छोटे भाई से अपनी चुत चोदवाऊगी... अपनी गांड़ चोदवाऊगी ।

जीजू वहीं बैठा टीवी देख रहा था और हम दोनों भाई बहन उसी के साथ बैठे एक दूसरे को गन्दे गन्दे मैसेज कर रहे थे । मेरा लन्ड तो बहुत पहले से ही उफ़ान पर था और अब वो किसी भी समय बरसात करने के लिए तैयार था । और जो मुझे समझ आ रहा था कि श्वेता दी भी या तो चरम पर पहुंच चुकी थी या पहुंचने वाली थी । मैं श्वेता दी को मैसेज भेजता कि जीजू ने उन्हें लंच सर्व करने को बोल दिया । बहुत मुश्किल से हम दोनों अपने को कन्ट्रोल किए ।

खाना पीना होते-होते दो बज गए । फिर हम तीनों उसी बेड पर लेट गए । जीजू बीच में था इसलिए और कुछ होने की संभावना नहीं ही थी । हमें आराम करते हुए एक घंटा बीता था कि इंस्पेक्टर कोठारी का फोन मेरे मोबाइल पर आया ।
 
Update 15.

जब मैं थाने पहुंचा तब मालूम हुआ कि इंस्पेक्टर कोठारी थोड़ी देर पहले किसी दूसरे केस के सिलसिले में बाहर गया हुआ है और मुझे थाने में ही बैठकर उसका इन्तज़ार करने को कहा है । मैं वहीं कुढ़ता , मन मसोसता उसके कक्ष में उसका इन्तज़ार करने लगा । करीब आधे घंटे बाद वो आया । उसके चेहरे पर थकान की भाव थी । उसकी बातों से पता चला कि उसके कुलभूषण खन्ना के घर के विजिट के दौरान दोनों मियां बीवी अपने घर पर ही मिले । पुछताछ के दौरान अनुष्का ने वारदात वाले दिन जीजू के घर मौजूद होने की बात स्वीकार करी । लेकिन उसने अजय के कत्ल में खुद पर लगे इल्जाम का पुरजोर विरोध किया । उसके जीजू के घर मौजूद होने की वजह जीजू के साथ दोस्ती बताई । कुलभूषण खन्ना ने तो इस पुरे केस से अपनी अनभिज्ञता जाहिर की । वो साफ मुकर गया कि वो किसी अजय या किसी राजीव सोलंकी नाम के शख्स को जानता भी है । हालांकि कत्ल के वक्त वो घर में ही था , इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं पेश कर सका । और सबसे सनसनीखेज खबर ये थी कि उनके पास से एक ३६ केलिवर रिवाल्वर का पाया जाना जो लाइसेंसी थी । रिवाल्वर के खाने में से तीन गोलियां कम थी जिसके बारे में उसने बताया कि शुटिंग प्रेक्टिस के दौरान कहीं गायब हो गई ।

इंस्पेक्टर मेरे उपर काफी भड़का था कि समय रहते मैंने उनके बारे में खबर नहीं की । अगर मैंने समय रहते खबर किया होता और यदि उस रिवाल्वर से गोली चली होती तो रिवाल्वर के अंदर पाये गये बारूद के कण और उसके गन्ध से और अजय के शरीर में धंसे हुए गोली से उसका जांच कराया जा सकता था । मैंने शर्मिंदगी से अपनी गलती कबूल की । मेरे को लास्ट में यह वार्निंग देकर जाने दिया कि अगर मुझे इस केस से सम्बंधित कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत उसे ख़बर करे ।

मैं वहां से दिल्ली पैराडाइज क्लब की ओर रवाना हो गया क्योंकि समय भी वहां पहुंचने का हो गया था ।

वहां पहुंचने पर मालूम हुआ कि १ मई होने के कारण आज क्लब बंद है । लेकिन आफिस खुला था । मैं आफिस गया वहां कुलभूषण खन्ना हमेशा की तरह अपने आरामदायक कुर्सी पर बैठा कोई फाइल चेक कर रहा था । मुझे देखते ही उसने अन्दर बुलाया । मैं उसके सामने एक कुर्सी पर बैठ गया ।

" तो आखिर में तुमने पुलिस के सामने अपना मुंह खोल ही दिया ।" - उसने अपने कान की लौ को सहलाते हुए कहा ।

मैं चुपचाप बैठा रहा ।

" क्यों किया ऐसा । मैंने तुम्हें पहले भी कहा था कि मैं अनुष्का से कितना मोहब्बत करता हूं । उसके साथ कुछ बुरा हो ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता । मैंने तुम्हें यहां नौकरी दी , तुम्हें इज्जत दी तो बदले में तुमने इस तरह मेरा शुक्रगुजार अदा किया ।" - वो अपने कान की लौ को जोर जोर से खिंचते हुए कठोर स्वर में बोला ।

मैं चुपचाप बैठा रहा ।

" मुझे तुमसे ऐसी आशा नहीं थी । मैं तुम्हें एक अक्लमंद युवक समझता था लेकिन तुम...।"

" खन्ना साहब , मैंने वही किया जो एक आम नागरिक का अपने देश के साथ.... देश के कानून के साथ फर्ज होता है । मैंने वही किया जो एक दोस्त का एक दोस्त के प्रति वफादारी और विश्वास का होता है । और मैं आपसे वादा करता हूं कि ये तब तक करता रहूंगा जब तक मेरे दोस्त के हत्यारे को कानून के गिरफ्त में..कानून के शिकंजे में न ला दूं । और हत्यारा आप की पत्नी क्या अगर मेरा बाप भी होगा तो भी करता रहूंगा ।" - मैंने भी कठोर और स्पष्ट स्वर में कहा ।

वो अपनी छोटी छोटी आंखों से मुझे एक टक देखता रहा ।

मैंने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा -" क्या आप नहीं चाहते कि क़ातिल को उसके किए की सजा मिले...क्या आपको अपने देश के विधि विधान से मतलब नहीं है....भगवान न करे लेकिन यदि आपकी पत्नी अगर क़ातिल निकले तो आपको उसके पहलू में सोने से डर नहीं लगेगा... आप सारी जिंदगी एक क़ातिल के साथ गुजारना पसंद करेंगे । और यही बात आप पर भी लागू होता है । मैं भी कोई पाक पवित्र आदमी नहीं हूं... मैंने भी समाज के नियमों के खिलाफ व्यवहार किया है लेकिन किसी की जान लेना मेरे उसूल के खिलाफ है । यदि कोई गुनाहगार है तो सजा देना परवरदिगार का काम है या फिर कानून का ।"

वो अपने चेयर पर बैठे बैठे कसमसाने लगा । कुछ देर तक चुप रहा फिर अपेक्षाकृत मध्यम स्वर मेंबोला - " लेकिन पुलिस का शक तो मुझ पर भी है ।"

" आपने खुन किया है ?

" नहीं । मैंने आज तक एक मक्खी भी नहीं मारी ।"

" तब आपको चिंता करने की क्या जरूरत है । "

" लेकिन अनुष्का..?"

" आप उनके हसबैंड है.. उनके बारे में आप अन्य बाकी लोगों से ज्यादा बेहतर जानते होंगे.. क्या आप को लगता है कि उन्होंने खून किया हो सकता है ।"

" मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है । मैं उसके बारे में नहीं कह सकता ।"

" आप निश्चित रहिए... अगर वो निर्दोष है तो उन्हें कुछ नहीं होगा । और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक अमर का न तो आपसे और न ही आपकी पत्नी से कोई रिश्ता साबित हुआ है । "

वो अब पहले से ज्यादा शान्त लग रहा था । उसने अपने स्टाफ को चाय लाने का आर्डर दिया ।

" खन्ना साहब , अभी थोड़ी देर पहले आप ने कहा कि आपने मुझे यहां नौकरी देकर मुझ पर अहसान किया है । मुझे इज्जत बख्श की है । इसके लिए आपको मैं एक बार से शुक्रिया कहता हूं लेकिन आप बुरा न मानें ये नौकरी मैं पार्ट टाइम कर रहा हूं....और वो भी किसी सिफारिश पर नहीं बल्कि मेरी काबिलियत के बल पर मिली है... जितनी आमद यहां होती है उन से मेरी गृहस्थी नहीं चल सकती..हो सकता है कि अगले छः महीने के अंदर मेरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई काम आ जाए और फिर मैं यहां न होऊं... और जहां तक इज्जत की बात है तो इज्जत फोकट में नहीं मिलती है बल्कि कमाइ जाती है... और इसका सबूत मेरे क्लास के यंग लड़के लड़कियां देंगे जिनसे मेरे बारे में आपने काफी छानबीन की है ।

वो हक्का बक्का मुझे देखता रहा । उसने कुर्सी से उठने की कोशिश की तो अपने मोटे विशाल कमर के कारण कुर्सी कमर से फंसाए खड़ा हो गया । उसने हाथों से कुर्सी को झटक कर अपने कमर से निकाला ।

" नहीं नहीं भई..मेरा इरादा तुम्हरा अपमान करने का नहीं था । आज घर में पुलिस आने के कारण मैं थोड़ा असहज महसूस कर रहा था । यदि मेरी बातों से तुम्हें दुःख पहुंचा हो तो मुझे क्षमा करना ।" - वो बनावटी हंसी करते हुए बोला ।

तभी स्टाफ चाय ले आया । उसके जाने के बाद हम चाय पीने लगे । चाय पीने के बाद मैंने अपना फेवरेट क्लासिक निकाल कर उसे दिया तो उसने सहर्श एक सिगरेट निकाल लिया । मैंने भी अपनी सिगरेट सुलगाई ।

" आज पहली मई के कारण यहां छुट्टी है इसलिए कोई भी नहीं आया है लेकिन मुझे कुछ अर्जेंट काम के लिए आना पड़ा । लेकिन तुम आज क्यों आ गये ?" - वो वापस कुर्सी पर बैठ गया ।

" मुझे नहीं मालूम था कि आज छूट्टी है " - मैं कुर्सी से उठता हुआ बोला -"अच्छा खन्ना साहब अब मुझे इजाजत दीजिए ।"

" सुनो , तुम्हारी सेलरी बैंक एकाउंट में भेज दी गई है । चेक कर लेना ।"

" लेकिन अभी तो मेरा महिना पुरा नही हुआ है ।" - मैं आश्चर्य करता हुआ बोला ।

" यहां सभी की सेलरी महिने की पहली तारीख को दे दी जाती है । और तुम्हारी ज्वाइनिंग पहली तारीख से ही शुरू कर दी गई है ।"

" शुक्रिया खन्ना साहब ।"

मैंने उसको नमस्कार किया और वहां से निकल गया । घर जाते समय याद आया कि मैंने माॅम को नाइटी लाने के लिए बोला था तो मैं ए.टी.एम. जा कर पैसा उठाया फिर माॅल चला गया और उनके लिए दो सुती के फुल एड़ियों तक आने वाली नाइटी खरीद लिया । फिर कुछ सोचकर श्वेता दी के लिए भी दो नाइटी खरीद लिया । मगर श्वेता दी वाली नाइटी काफी हाॅट थी । एक तो घुटने तक की थी जो सेमी ट्रांसपेरेंट थी और दूसरी बेबीडॉल नाइटी थी जो जांघ तक ही आती थी और काफी ज्यादा ट्रांसपेरेंट थी । इसकी स्ट्रीप बहुत पतली थी । यदि कोई युवती इसे पहन ले तो उसकी अस्सी प्रतिशत छाती न्यूड हो जानी थी और जांघों से नीचे का हिस्सा न्यूड था ही ।

मैं वहां से घर निकल ही रहा था कि रीतु का फोन आया । उसने बताया संजय जी उर्वशी और अपनी बहन मधुमिता के साथ घर आए हुए हैं । मैं हैरान हुआ न कोई फोन न कोई मैसेज... मैंने एक होटल से कुछ मिठाई , समोसा , भुजिया और कोल्ड ड्रिंक लिया फिर घर की ओर निकल गया ।

शाम के सात बजे थे जब मैं घर पहुंचा । सभी लोग हाॅल में ही बैठे मिले । बड़े वाले सोफे पर डैड , संजय जी और मधुमिता बैठे हुए थे जबकि उर्वशी दी और माॅम सिंगल सोफे पर बैठे हुए थे । रीतु एक अलग कुर्सी पर बैठी थी । मैंने होटल से लाई हुई सारी चीजें माॅम को दे दी । माॅम उसे लेकर किचन चली गई । फिर मैंने संजय जी को प्रणाम किया तो वो सोफे से उठ कर मुझ से गले मिले । फिर मैंने उर्वशी और मधुमिता को हग किया और दो मिनट में आने को बोलकर अपने रूम में चला गया । वहां मैंने खरीदी हुई नाइटी मेरे बिस्तर के बगल में रखी कुर्सी पर रख दी फिर हाथ मुंह धोकर निचे हाॅल चला आया ।
 
Update 15. A.

हाॅल पहुंच कर जिस सिंगल सोफे पर माॅम बैठी हुई थी , उस पर मैं बैठ गया । संजय जी डैड के पहलू में बैठे अपनी बीवी उर्वशी , बहन मधुमिता और रीतु से बातों में मशगूल थे । डैड कोई खबरिया चैनल देखने में व्यस्त थे । मैंने फिर से संजय जी की ओर नजरें फिराई । वो हकीकत में इतना सुन्दर था - वैसा ही सजा धजा था - कि फिल्म स्टार जान पड़ता था ।

मन ही मन मैं सोच रहा था , और कुढ़ भी रहा था , कि कमीना अपने खुबसूरत थोबड़े की वजह से ही कितनी औरतों का मान मर्दन कर चुका होगा । जरूर गिनती करना भी मुहाल होगा । औरतें बलिहार जाती होगी उस पर ।

औरतें उतनी खुश नहीं होती जबकि उन्हें अपनी पसंद का मर्द मिलता है जितनी वो तब खुश होती है जबकि उन्हें हर किसी की पसंद का मर्द मिलता है । और संजय जी के हर किसी की पसंद का भेद होने में क्या कसर थी ।

कभी मर्द का आकर्षण उसकी मर्दानगी में होता था , उसकी मूंछों में होता था , आज उस के जनानापन में होता है , लड़कियों जैसी लम्बे बाल रखने में होता है । पता नहीं आजकल की लड़कियों के पसन्द ऐसे लड़के क्यों होते हैं ?

वजह जरूर वियाग्रा था जो पुराने जमाने में नहीं होती थी और जो किसी को भी मर्द बना देती थी ।

वियाग्रा के अलावा मर्दाना ताकत हासिल करने में जो आधुनिक तरीके मैंने सुने थे , वो थी :

मेंढक की हडि्डयों को सुरमे जैसा बारीक पीस कर फांक जाओ ।

गधी के दूध में चिमदागड़ का खून घोलकर पियो ।

शेर के अंडकोष का ब्रेसलेट बनवा के पहनो ।

इतने तरीके तो मैंने सुनें थे , जो कि शहद में बादाम घोंट के पीने , दुध में केसर उबाल के पीने , घोंघे खाने जैसे पुरानी तरिको पर हावी थे , अभी और भी होंगे जिनकी मुझे खबर नहीं थी ।

उर्वशी गहरी लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें वो हमेशा की तरह हाॅट और सेक्सी दिख रही थी ।

रीतु के बारे में कुछ भी कहना अतिश्योक्ति ही होगी । जगमग जगमग , ताजे खिली हुई कली की तरह , नेचुरल ब्यूटी ।

मधुमिता भी निहायत खुबसूरत थी और मेरी पसंद की हर चीज उसमे थोक में थी । जैसे कि लम्बा कद , छरहरा बदन । तनी हुई सुडौल भरपूर छातियां जो पुरी तरह से ढकी होने पर भी नुमायां जान पड़ती थी । करारी कमर , भारी नितम्ब । लम्बे सुडौल गोरे चिट्टे हाथ पांव , खुबसूरत नयन नक्श , लम्बे रेशमी बाल ।

एण्ड वाट नाट !

वो एक वी शेप खुले गले की स्कीवी और खुली छतरी जैसी स्कर्ट पहने थी । स्कर्ट की बेल्ट बहुत नीचे थी और स्कीवी उसके असाधारण रूप से उन्नत वक्ष की वजह से ऊंची उठी हुई थी । और यूं उसका सुडौल , जाफरान मिले मक्खन की रंगत का पेट कम से कम दस इंच नंगा था । स्कीवी का वी इतना गहरा था कि जरा सी कोशिश से गिरहवान में बहुत दूर तक झांका जा सकता था ।

इन लड़कियों को देखना नयन सुख अभिलाषियों के लिए तो लाटरी निकलने जैसा था , कोई भोग भी लगा पाया हो तो उसकी तकदीर मर्दों के लिए काबिलेरश्क थी ।

" कहां खो गए ।"

" सारी " - मैं हड़बड़ा कर बोला । मैंने देखा संजय जी मेरी ओर चेहरा किए मुस्करा रहे थे ।

" कहीं नहीं । क्या बातें हो रही है ?" - मैंने मुस्करा कर कहा ।

" बातें मैं कहां कर रहा हूं भाई... बातें तो ये औरतें कर रही है , मैं तो सिर्फ इनकी हां में हां और ना में ना मिला रहा हूं ।"- उन्होंने हंसते हुए कहा ।

" हां भाई आप तो सिर्फ पंचायती कर रहे हो... बातें कहां कर रहे हो ।"- मधुमिता ने अपनी आंखें तरेरते हुए कहा ।

तभी माॅम नाश्ता वगैरह ले कर आ गई । माॅम ने नाश्ता लगाते हुए कहा -" आप लोग खाना खा कर ही जाना ।"

" अरे नहीं आन्टी , आपको कष्ट करने की जरूरत नहीं है... इतना हैवी नाश्ता के बाद इतनी जल्दी खाना थोड़ी ही खाया जाएगा.।"- संजय जी ने माॅम को कहा ।

" नहीं नहीं... मैं कुछ नहीं सुनने वाली हूं , आप लोग पहली बार हमारे यहां आए हुए हैं खाना तो खाना ही पड़ेगा ।" माॅम ने जोर देकर कहा ।

" आन्टी अभी टाइम बहुत ज्यादा हो गया है.. मैं प्रोमिस करती हूं अगली बार हम जरूर भोजन करके ही जाएंगेे ।"- उर्वशी ने माॅम को समझाते हुए कहा ।

" अब जैसी तुम्हारी इच्छा बेटा.. लेकिन याद रखना अगली बार बिना खाए नहीं जाने दुंगी ।"

फिर नाश्ता का कार्यक्रम चलने लगा । इसी बीच हमारी हल्की फुल्की बातें भी होती रही । मैं मधुमिता से बातें करना चाहता था लेकिन यहां सम्भव दिख नहीं रहा था ।

थोड़ी देर बाद उर्वशी ने माॅम से कहा -" आन्टी मैं चाहती हूं कि जब यहां आई हुई ही हूं तो क्यों न श्वेता के माॅम डैड से भी मिल लूं.. अगर श्वेता को मालूम हुआ कि हम यहां आकर उसके घर नहीं गये तो उसे बुरा लग सकता है ।"

" हां हां क्यों नहीं... जरूर हो आओ ।"- माॅम ने कहा ।

कुछ समय बाद रीतु उर्वशी और संजय जी और मधुमिता को लेकर चाचा के घर चली गई । माॅम जुठे बर्तन लेकर किचन चली गई । डैड तो अपने ही कार्यक्रम टीबी देखने में व्यस्त थी और मैं उपर छत पर चला गया ।

छत पर क्लासिक का सिगरेट सुलगाया और उन हसीन तरीन औरतों के बारे में सोचने लगा जिनके साथ हमबिस्तर होने का फिर मुझे गाहे-बगाहे हासिल होता रहा था ।

आप सोचते होंगे कि मैं हमेशा औरतों के बारे में ही सोचता रहता हूं । इस इल्जाम के जवाब में आपके खादिम की अर्ज है कि ये एक गलत और बेजा इल्जाम है कि मैं हमेशा औरतों के बारे में सोचता हूं - हमेशा तो मैं सोचता ही नहीं - अलबत्ता इतना तो शर्तिया कबूल करता हूं कि जब सोचता हूं तो औरतों के बारे में सोचता हूं ।

और क्या मैं अकेला सोचता हूं ।

मुझे उर्वशी और श्वेता दी के अलावा सात हसीनाओं का अभिसार सुख प्राप्त हुआ है । जिनमें एक में तो मेरा मरहूम दोस्त अजय भी शामिल था । अजय की और मेरी सोच लगभग लगभग एक समान ही थी । हमने किसी भी औरत के साथ कभी जबरन नहीं किया और ना ही कभी किसी कोठे पर गये । जिन औरतों के साथ भी हमबिस्तर हुआ वो औरतों के राजी खुशी , उनकी इच्छा के अनुसार हुआ । बलात्कार और औरतों के प्रति हिंसा का मैं सख्त विरोधी था । सेक्स के मामले में मेरा यही सोच रहा कि मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी ।

मेरी सोच मधुमिता की आवाज सुनकर भंग हुई ।

" हल्लो ।"

" हल्लो " - मैं मुस्कुराता हुआ बोला -" वैलकम ! प्लीज़ ।"

" थैंक यू "- अपने मोतियों जैसे खुबसूरत दांत चमकाती वो बोली ।

" क्या बात है ! बड़ी जल्दी आ गए ।"

" सभी नहीं सिर्फ मैं आ गई । मुझे वहां बोरियत लग रही थी । यहां आई तो तुम्हारी मम्मी ने कहा छत पर हो , सो चली आई ।"

" बहुत अच्छी की ।"- मैंने चेहरे पर गोल्डन जुबली मुस्कराहट लाते हुए कहा -" मैंने तुम्हें कई बार फोन लगाया था लेकिन हर बार नो रिचेबल बताता रहा... कहीं नम्बर तो नहीं चेंज कर ली ।"

" नहीं तो । सेम नम्बर है... अभी लगा कर देखो ।"

मैंने उसको फोन लगाया फिर से वही सेम नो रिचेबल । वो मेरे करीब आई और अपनी मोबाइल नंबर चेक करने लगी । एक नम्बर गलत था । बीच के नंबरों में एक में सात की जगह आठ टाइप हो गया था । मैंने नम्बर करेक्ट किया ।

उसके इतने करीब आने से उसकी शरीर से आती हुई खुशबू मुझे मदहोश करने लगी । मैंने उसकी तरफ देखा वो मुस्कराते हुए बोली -" तुमने नम्बर ही रोंग लिख लिया था ।"

" हां ।"- मैंने मुस्करा कर कहा -" वैसे बात क्या है ! आज हजार वाट के वाल्व की तरह दमक रही हो ।"

" ठीक पहचाना । आज मैं बहुत खुश हूं ।"

" वो तो दिख रहा है । क्या बात है शादी कर रही हैैं ।"

" नो यार ।"

" तो हनीमून वजह होगा इतनी खुशी का ।"

" हनीमून ! वो तो शादी के बाद होता है । नो ।"

" नो । कभी ऐसा दकियानूसी रिवाज होता था , अब नहीं होता । अब हनीमून शादी का मोहताज नहीं रहा । वो कभी भी हो सकता है । बस हनी को कबूल होना चाहिए ।"

" क्या नानसेंस बोल रहे हो ।"

" इट्स ए मैटर आफ ओपिनियन हनी ।"

" यू आर ए सन ऑफ ए विच ।"

" दि ओरीजनल , हनी । वैरी फर्स्ट आफ दि काइंड । इस जगत प्रसिद्ध विच ने जितने सन पैदा किए , उनमें से अव्वल ।"

" मैंने क्या तुम्हरा तारीफ किया ?"

" नहीं किया तो समझिए बिना किए हो गया । आदमी का बच्चा हो तो अव्वल हो , वरना न हो ।"

वो कुछ क्षण खामोश रही और चेहरे पर उलझन के भाव लिए अपलक मुझे देखती रही । फिर चित्ताकर्षक ढंग से मुस्कुराई । अभी वो कुछ बोलती कि हाॅल से उर्वशी की आवाज आई । हम दोनों नीचे हाल चले आए । वो लोग चाचा के घर से लौट आए थे । जाते जाते संजय जी ने मुझे और मेरी फेमिली को अपने घर आने का निमंत्रण दिया । उन्होंने अपने उस आफिस का भी ठिकाना दिया जहां वो अक्सर पाए जाते हैं ।

उनलोगो के जाने के बाद हमने कुछ समय टीबी देखने में बिताया फिर रात के डीनर के पश्चात अपने अपने कमरे में चले गए । मै अपने कमरे में प्रवेश कर अपने पहने हुए कपड़े चेंज किया और एक ढीला सा पजामा और बनियान पहन कर सिगरेट सुलगाने लगा । तभी मेरी नजर मेरे बिस्तर के बगल में पड़ी हुई कुर्सी पर पड़ी । वहां मैंने जो नाइटी माॅम और श्वेता दी के लिए खरीद कर रखी थी , गायब थी ।
 
Update 16.

मैं हलकान परेशान अपने रूम की सारी जगहें छान मारा लेकिन नाइटी वहां होती तो न मिलती । मुझे डर सिर्फ उन दो नाइटियो का था जो मैंने श्वेता दी के लिए खरीदी थी । और वो भी इसलिए कि वो कुछ हट कर थी । कौन ले गया ? माॅम ने या रीतु ने ? मेरे लिए दोनों में जो भी ले जाए प्रोब्लम ही थी । भले ही मेरी फेंटेसी की वो दोनों प्रथम अहम हिस्सा थी लेकिन रिश्तो के कारण आगे बढ़ने की हिम्मत मेरे में नहीं थी । मेरे मे क्या किसी मे भी नहीं हो सकती । न जाने मेरे बारे में क्या सोचेगी । ख़ैर जो होना था वो तो हो गया । रात के ग्यारह बज गए थे मैं अब उन्हें उठा कर ये तो नहीं पुछ सकता था कि नाइटी किस ने ली है । यही टेंशन पाले मैं बिस्तर पर लेट गया और निंद के हवाले हो गया ।

सुबह जब मैं नौ बजे के आसपास नीचे हाल में पहुंचा तब रीतु को वहीं सोफे पर बैठे हुए पाया । शायद माॅम किचन में थी और डैड अपने कमरे में आफिस के लिए तैयार होते रहे होंगे । मैंने रीतु से पूछा क्या उसने मेरे कमरे में से कोई कपड़े का पैकेट उठाया है तो उसने ना में सर हिलाया । फिर मैंने पूछा क्या माॅम कल मेरे कमरे में गयी थी तो उसने कहा जब हम संजय जी और उनके फेमिली को बाहर बिदा करने निकले थे तब मम्मी उपर छत पर सुखने के लिए रखी हुई कपड़े उतारने गई थी ।

मैं समझ गया नाइटी माॅम के हाथ लग गयी है । मेरा दिल जोर से लरजा । न जाने वो क्या रियेक्ट करेंगी । कहीं सभी के सामने मेरी इज्जत का फलूदा तो नहीं बना देगी । या मेरी उम्र का लिहाज करके चुप रहेंगी । या........

.....या मेरी सिक्रेट फेंटेसी हकीकत में बदलने की एक कदम और आगे अग्रसर होंगी ।

डैड के आफिस जाने का समय हो गया था । माॅम किचन से नाश्ता लेकर आई और टेबल पर रख दी । मैं चुपके से उनकी तरफ देख रहा था लेकिन उनका ध्यान मेरी तरफ नहीं था । डैड के आने के बाद सब ने नाश्ता किया । फिर डैड अपने आफिस चले गए । नाश्ते के दौरान कोई बात हुई नहीं इसलिए माॅम का रवैया समझ में नहीं आया । रीतु भी आम दिनों के वनस्पति कुछ शान्त ही थी । मैंने जल्दी से नाश्ता खत्म किया और अपने रूम में चला गया ।

मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं । माॅम से बात तो करनी ही होगी । कोई दूसरा होता तो मुझे बात कर ने मे झिझक महसूस नहीं होती लेकिन यहां तो....। मुझे उन्हे न तो फोन से काॅल करके पुछने की हिम्मत हो रही थी ना ही ह्वाट्सएप के द्वारा मैसेज भेज कर की । मैंने घड़ी में टाईम देखा दस से उपर बज गए थे.. यानी रीतु कालेज चली गई होगी । मैंने कुछ सोचा और फिर माॅम से बात करने का निश्चय लिए हाॅल चला गया । माॅम हाॅल में नहीं थी । मैं उनके कमरे में गया , वो वहां भी नहीं थी । जरूर किचन में होंगी । मैं किचन के दरवाजे पर पहुंचा , माॅम दरवाजे की तरफ पीठ किए किचन की ग्रेनाइट पत्थर की बनी सेल्फ को साफ कर रही थी । वो ग्रे कलर की साड़ी पहनी हुई थी और ब्लाऊज़ भी फुल बांह वाली और साड़ी का मेचिंग था । साड़ी के पल्लू को अपने कमर में फंसा कर रखी थी । जिससे कमर का कुछ हिस्सा खुला हुआ था । वो काम करते हुए भी काफी अच्छी दिख रही थी । भले ही वो 43 साल की हो गई हो लेकिन उनके शरीर के रख रखाव , शरीर का मेनटेनेंस और शारीरिक श्रम उन्हें 34.35 से ज्यादा शो नहीं दिखाता था। परफेक्ट हाईट , माशल गदराया हुआ शरीर , भारी नितम्ब , हल्की मोटी भुजाएं , मोटी जांघें , पेट पर थोड़ी चर्बी ( जो मेच्योर औरतों को और भी नाकाबिले तारीख सेक्सी बनाते हैं ) , बड़े बड़े गिरिवर की चोटियों की तरह वक्ष , तीखे नैन-नक्श , गुलाबी रंगत लिए रसीले होंठ , कमर से भी नीचे आते स्याह काले बाल किसी भी मर्द को हाइपनोटाइजम कर सकते थे । पता नहीं कैसे डैड के किस्मत में वो मिल गयी जबकि डैड उनके मुकाबले कहीं पर भी नहीं थे । पुराने जमाने में शादियां ज्यादातर अरेंज मैरिज और लड़की और लड़के देखे होती थी । डैड सच में बहुत खुशनसीब थे ।

मैं किचन में दाखिल हुआ और पीछे से माॅम के गले में बाहें का हार डाल अपने चेहरे को उनकी कन्धों पर रख दिया ।

" क्या कर रही हो माॅम ।" मैंने चापलूसी भरे स्वर में कहा ।

" दिख नहीं रहा है क्या कर रही हूं ।" माॅम बिना मुड़े स्लैब को साफ करते हुए बोली ।

" सच में आप को बहुत काम करना पड़ता है , उपर से इतनी गर्मी क्यों नहीं एक दाई रख लेती हो ।"

" दाई से तो अच्छा है कि क्यों न बहु ही ले आऊं ।"

" बहु ! मतलब मेरी आजादी छीनना चाहती हो.. मेरे पैरों में बेड़ियां डालना चाहती हो ।"

" बहु आने से तेरी आजादी छीन जाएगी ।"

" और नहीं तो क्या । अभी तो मेरे हंसने खाने , मौज मस्ती के दिन हैं । अभी थोड़ी न किसी बंधन में बंधना है ।"

" तेरे डैड की शादी तुम से भी कम उम्र में हो गई थी ।"

" वो जमाना अलग था माॅम । इस जमाने में जब तक लड़का अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता है तब तक वो इस लफड़े से दूर ही रहता है ।"

" मैं क्या कहूं , आज के जमाने में शादी ब्याह जबरदस्ती भी तो नहीं की जा सकती । वैसे तो मैं भी ये मानती हूं कि जब तक लड़का और लड़की अपने पैरों पर खड़े न हो जाए और अपने खर्चों का बोझ उठाने लायक़ न हो जाए तब तक शादी नहीं करनी चाहिए । भले ही लड़का जिन्दगी भर कुंवारा रहे ।"

" क्या बोल रही हो माॅम ? चार पांच साल की बात अलग है जिन्दगी भर मैं कुंवारा नहीं रहने वाला , भले ही मैं कमाऊं या न कमाऊं । मैं कहे देता हूं ।" - मैंने मजाक करते हुए कहा ।

" इसीलिए तो बोल रही थी कि शादी कर ले ।"- माॅम ने हंसते हुए कहा ।

" कर लेंगे माॅम... सही समय पर वो भी कर लेंगे ।"

मैं माॅम से नाईटी वाली बात कहना चाहता था लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि कैसे कहूं । अभी थोड़ा मुड ठीक है तो पुछ ही लेता हुं । थोड़ा झिझकते हुए मैं माॅम की कन्धों पर अपने चेहरे की हल्के से दबाते हुए कहा -

" माॅम व..वो.. वो नाइटी...."

" अच्छी है ।"- माॅम वैसे ही काम करती हुई बोली ।

मैं चौंका । अच्छी है का मतलब क्या हुआ । उनके कहने का तात्पर्य क्या है कि वो दो अधनंगी और उनमें भी एक लगभग लगभग नंगी दिखने वाली नाइटी भी अच्छी है ।

" आपने देखी ।"- मैंने बड़ी मुश्किल से अपने स्वर को संतुलित रखते हुए कहा ।

" हां ।"

मैं उनसे अलग हो कर उनके बगल में खड़ा हो गया । मैं क्या बोलूं कुछ समझ नहीं आ रहा था ।

" माॅम ।" मैंने धीरे से कहा ।

" हूं !"

" माॅम ! वो नाइटी...म..मेरा मतलब..."

" क्या हुआ बोलो ना ।"

मैंने हिम्मत करके कहा -" माॅम उनमें से दो नाइटी दुसरे की है ।"

" वो तो मैं भी समझ रही हूं.. वो नाइटी तु मेरे लिए तो नहीं लाया हो सकता है... कौन है ?"

" क्या मतलब ?"

" कौन है वो जिसके लिए वो लाया है ।"

मैं क्या बोलूं । श्वेता दी का नाम तो हरगिज नहीं ले सकता था । किसका नाम लूं ।

" माॅम वो मेरा नहीं है । मेरे एक दोस्त का है ।"- मैंने झुठ बोला ।

" दोस्त मतलब गर्लफ्रेंड ।"

" नो माॅम । मेरे कालेज के एक मेल फ्रेंड का है । उसने अपनी गर्लफ्रेंड को गिफ्ट देने के लिए मुझे लाने को कहा था ।"

" झुठ मत बोलो । तुम्हारा अमर के अलावा कोई दूसरा जिगरी मेल दोस्त था ही नहीं , ये मुझे अच्छी तरह से पता है । हां अगर तुम नहीं बताना चाहते तो बात अलग है ।"

मैं कुछ देर असमंजस की स्थिति में खड़ा रहा । सोच रहा था क्या बोलूं क्या न बोलूं । फिर मैंने कुछ डिसाइड किया ।

" साॅरी साॅरी माॅम । वो मैं आपको क्या बोलूं एक्चुअल में वो.. वो मेरी एक ग.. गर्लफ्रेंड का है ।" मैंने हिम्मत करके कहा ।

" कौन है वो । क्या मैं जानती हूं उसे ।"

माॅम ने ना तो नाइटी पर कोई नाराजगी जताई और ना ही गर्लफ्रेंड पर । इसलिए मेरी हिम्मत बढ़ी ।

" हां ।" - मैंने कहा ।

" मैं जानती हूं ?" - माॅम इस बार मेरी तरफ पलटते हुए आश्चर्य से बोली ।

" हां ।"- मैंने थोड़ा शरमाते हुए कहा ।

" कौन है ।"

" नहीं । मैं नहीं बता सकता ।"

" क्यों नहीं बता सकते । "

" क्या बताऊं ? वो.. वो फ्रेंडशिप बस सिर्फ टाइम पास है ।"

" ओह ! मतलब कोई लव शव का चक्कर नहीं है । बस सिर्फ दिलजोई है ।"

" हूं ।"

उन्होंने मुझे कुछ देर तक एक टक देखा फिर कहा -" वो जो तुम्हारी गर्लफ्रेंड है क्या वो भी ये जानती है कि ये सब कोई लव शव का मैटर नहीं बल्कि मौज मस्ती का मामला है ।"

" हूं ।"

माॅम ने इस बार कुछ नहीं बोला । वो किचन में बनी वास वेसिन चली गई और अपनी हाथों को धोने लगी । हाथ धोने के बाद दरवाजे पर टंगी एक तौलिये से अपने हाथ को पोंछने लगी । वो अपने हाथ पोछते हुए बोली -" कौन है वो लड़की ।"

" आप जान कर क्या करोगी ? और अगर मैंने आप को उसके बारे में बता दिया और उसे पता चला कि मैंने आपको उसके बारे में बता दिया है तो आपके साथ साथ वो भी नाराज होगी ।"

" उसे कैसे पता चलेगा ? हां यदि तुम खुद ही उसे बता दोगे तो बात अलग है ।"

" मैं नहीं बताऊंगा । लेकिन आप उस का नाम सुनकर भड़क उठी तो ?"

" मैं तुम्हें जोर तो दे सकती नहीं । आखिर तुम एक जवान और मेच्योर लड़के हो । और हमारे यहां कहा जाता है कि जब लड़के का कद बाप के कन्धे तक और बाप का जुता बेटे को आने लगे तो बेटा अपने बाप का दोस्त और मां का सहारा की तरह का हो जाता है । यदि तुम्हें लगता है कि तुम मुझसे शेयर कर सकते हो तो मुझे कोई आपत्ती नही है ।"

" ओके । मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा । लेकिन सबसे पहले तो आप प्रोमिस करो कि ये बात डैड को नहीं बताएगी । और दूसरी आप नाराज़ नहीं होंगी ।"

" नहीं बताऊंगी तुम्हारे डैड को । अब बताओ ।"

" आप नाराज़ भी नहीं होगी ।"

" ओके । नाराज नहीं हूंगी ।"

" ये मैं आपको रूबरू नहीं बल्कि आपके ह्वाट्सएप नम्बर पर बताऊंगा । आप के ह्वाट्सएप नम्बर पर उस का नाम भेज दुंगा ।"

माॅम कुछ नहीं बोली । वो मुझे अपलक देखती रही ।

" ओके ।"- मैंने माॅम से कहा ।

" ओके ।"- माॅम सहमति में अपनी सर हिलाई ।

मैंने अपने पैंट के पाकेट से पन्द्रह हजार रुपए निकाल कर माॅम को दे दिया फिर बोला -" माॅम कल मुझे पहली सेलरी मिली थी । संजय जी और उनके परिवार के आने से कल मैं दे नहीं पाया था ।"

" तेरा भी तो खर्चा है ना , अपने पास रख अपनी खर्चा पानी निकालना इन पैसों से.. मेरे पास तो तेरे डैड के दिए हुए पैसे रहते ही हैं ।"

" मेरा इतना भी खर्चा नहीं है माॅम । वैसे भी शुरू से खर्चों का पैसा तो आप ही देती हो.. मुझे जब जरूरत होगी तब मांग लुंगा । और वैसे भी बेटे के हर चीज पर मां का अधिकार सबसे अधिक होता है। रूपया पैसा आप से बड़ी चीज थोड़ी न है ।"

" कभी कभी तो बड़ी सयानी सयानी बातें करता है , काफी अच्छी अच्छी और कभी कुछ विचित्र तरह की हरकतें करता है । मुझे तो तु एक पहेली जैसा लगता है जिसे मैं भी समझ ना पाऊं ।"

" मैं तो एक खुली किताब हूं जिसे हर कोई आसानी से पढ़ सकता है । एक दम सिम्पल ।"

" हां हां वो तो नाइटी देख कर ही समझ में आ रहा है ।" माॅम ने मुस्कुराते हुए कहा ।

" देखो अगर छेड़ोगी तो अपून तुम्हें कुछ नहीं बताने वाला ।"- मै झुठ मुठ का गुस्सा करते हुए बोला ‌।

" अच्छा अच्छा अब कुछ नहीं बोलूंगी ।" वो पूर्ववत मुस्कराते हुए बोली ।

" आज कालेज नहीं जाना है क्या ?"

" जाना है न । ओके मैं निकलता हूं माॅम ।" कहकर मैंने माॅम को हग किया । वो भी अपनी बाहों से मुझे थोड़ी कसती हुई लिपट गई ।

फिर वहां से मैं कालेज के लिए निकल गया । कालेज पहुंचने पर मालूम हुआ कि आज कुछ खास पढ़ई नहीं है तो मैं वापस घर लौट पड़ा । मैं घर पहुंचने ही वाला था कि याद आया और मैंने बाइक रोक दी ।

घर में अभी कोई भी नहीं होगा , अगर माॅम ने फिर वही सवाल दुहराया कि वो लड़की कौन थी तो मैं क्या कहूंगा.. मैंने मैसेज भी तो नहीं किया था। मैं सोचने लगा किसका नाम लिखूं जिसे वो भी जानती है । ऐसी भी बात नहीं थी कि उनके जान पहचान युवतियों में से किसी के साथ सेक्स नहीं किया था , उनकी जान पहचान की औरतों में मैं दो के साथ सेक्स कर चुका था । कुछ देर तक माथापच्ची के बाद और कुछ सोचकर एक नाम मैंने माॅम को ह्वाट्सएप कर दिया ।

मैं माॅम को ह्वाट्सएप कर रहा था कि मेरी नज़र चाची पर पड़ी । वो अपने दरवाजे के बाजू में कचरे के डिब्बे में कुड़ा फेक रही थी । उन्होंने मुझे देखा और वहीं से जरा जोर से बोली ।

" तु यहां क्या कर रहा है... कालेज नहीं गया ?"

मैंने माॅम को ह्वाट्सएप कर के अपनी बाइक उनके घर के सामने खड़ा कर दिया और नीचे उतर कर बोला - " गया था चाची लेकिन मुझे लगा कि शायद मेरी रूपसी रूपाली चाची को मेरी जरूरत है इसलिए वापस आ गया ।"

" नौटंकी बाज... मैं सब जानती हूं तेरी तिकड़म फितरत को... जरूर किसी चक्कर में होगा ...ये बता यहां क्या कर रहा है..किसको मैसेज कर रहा है ।"

" ऐसे न बोलो चाची जान... मैं तिकड़म करता हूं ?... और करता भी हुंगा तो वनली एंड वनली अपनी रूप की रानी रूपाली चाची को... अब आप ही बताओ क्या मैं अपने प्यारी सी चाची को भी..न करूं तो भला किसे करूं ।"- मैंने चाची को छेड़ते हुए कहा -" वैसे ये मेरी प्यारी..किसी सियासत की महारानी जैसी चाची इस भरी दोपहरी में ये कौन सा काम लेकर बैठ गई है... अपने इस ग़ुलाम को कहती , में नतमस्तक आपकी सेवा में हाजिर हो गया होता ।"

चाची हंसते हुए बोली - बक-बक बंद कर..चल अन्दर चल ।"

मैंने चाची को मुस्कराते हुए देखा फिर अपनी बाइक उनके घर के सामने खड़ी कर दी। मैं चाची के साथ उनके घर में चला गया । घर में प्रवेश करते ही चाची ने मेन दरवाजा बंद कर दिया । घर में चाची के अलावा कोई नहीं था । चाचा ड्यूटी पर गए थे और राहुल अपने स्कूल ।

चाची के बारे में जैसा कि पहले मैंने कहा था वो बिल्कुल विद्या बालन की यादें ताजा करा देती हैं... हूबहू वैसा शरीर और वैसा ही उनका चेहरा... वैसा ही होंठ... वैसा ही हाईट । मेरा मरहूम दोस्त अजय का कहना था कि यदि मैं कभी शादी करूंगा तो वो बिल्कुल विद्या बालन जैसी होनी चाहिए... और अगर कहीं उन्नीस बीस हो भी तो वो कम से कम चाची की तरह तो बिल्कुल ही होनी चाहिए ।

चाची उस वक्त एक फुल गहरे ब्लू रंग की नाइटी पहन रखी थी । नाइटी के अन्दर उनका सफेद रंग का ब्रा स्पष्ट दिखाई दे रहा था जिससे ये स्पष्ट समझ में आ रहा था कि उनके उरोज कितने बड़े बड़े हैं । नीचे पैन्टी पहनी थी या नहीं , ये नहीं दिख रहा था । नाइटी में भी वो गजब की सेक्सी लग रही थी ।

" क्या खाएगा ?... पास्ता खाएगा या हलवा बनाऊ ?"- ड्राइंगरुम में सोफे पर बैठते हुए चाची ने कहा ।

" सुजी का हलवा ।" - मैं चाची के बगल में बैठते हुए बोला ।

" ठीक है...तु बैठ मैं दो मिनट में नहा कर आ रही हूं ।" - चाची उठते हुए बोली ।

" दो मिनट में... दो मिनट तो आपको कपड़े उतारने में ही लग जाएंगे ।"

" अच्छा पांच मिनट में ।"- चाची ने हंसते हुए कहा ।

" वैसे तो पांच मिनट में भी नहीं होने वाला है... फिर भी जाओ , मैं यहीं बैठे बैठे सेकेंड , मिनट , घंटा मिला रहा हूं ।"

" तुझे क्या लगता है मैं घंटों नहा रही हुंगी ।"

" मुझे तो लगता है कि औरतों को नहाने में काफी समय लगता है ।"

" बड़ एक्सपिरियंस है तुझे लड़कियों के नहाने को लेकर ।"

" थोड़ा बहुत तो है ।"- मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

" जरूर कोई छोकरी पटा रखी होगी...ये तो मुझे शुरू से ही शक था ।"

" चाची नहाने वाली बात को लेकर छोकरी पटाने की जरूरत क्यों पड़ेगी ?.. लड़कियों को नहाने में देर लगती ही है ये तो तुम भी जानती होगी... जानती हो न ?"

" तेरे चक्कर में रहूंगी तो दिन भर बिना नहाए रह जाऊंगी...तु बैठ मैं एक घंटे में आ रही हूं ।"- बोलकर चाची बाथरूम जाने के लिए आगे बड़ी ।

" क्या एक घंटे में ?"- मैंने चिल्लाते हुए कहा ।

" हां । एक घंटे में । तु ही तो बोल रहा था... मैं चली ।" - चाची हंसते हुए बोली और बाथरूम में घुस गई ।

चाची के बाथरूम जाने के बाद मैंने काजल को ह्वाट्सएप किया
 
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