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Incest Sagar (Completed)

मैं - हैलो डार्लिंग ! कहां हो ?

मैसेज करते ही काजल का जवाब आ गया ।

काजल - घर पर हूं । और बहन से सीधे डार्लिंग ?

मैं - घर पर ? कालेज नहीं गयी ?

काजल - नहीं । मम्मी की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी इसलिए नहीं गई ।

मैं - क्या हुआ उन्हें ?

काजल - कमर का दर्द ।

मैं - ओह ! तब तो रीतु भी नहीं गई होगी , वो भी तेरे ही साथ होगी ।

काजल - नहीं । मैंने उसे बताया था कि मैं आज नहीं आऊंगी । वो कालेज

मैं -
जैसे कि मैंने पहले सोचा था मैं भी बड़े बड़े राइटरों की तरह ये कर सकता हूं... वो कर सकता हूं... फलां कर सकता हूं...ढिकड़ी कर सकता हूं...... लेकिन सच कहूं तो कुछ भी नहीं कर सकता हूं... यहां एक से बढ़कर एक धुरंधर खिलाड़ी हैं... मुझे तो बहुत पहले ही अपनी औकात समझ में आ गई थी । वो तो मैं उस मनहूस लाॅक डाउन घड़ी को कोसता हूं कि कहां आ के फंस गया... कितना अच्छा साइलेंट रीडर था... लेखनी का भुत सवार हो गया और लिखना शुरू कर दिया । खैर जब लिखना शुरू कर ही दिया है तो इतिश्री भी जरूर ही करूंगा । और आप मेरा खुन बाकी लेखकों की रचनाओं पर मेरे द्वारा किए गए कमेन्टस पर भी कर सकते हैं ?
शुक्रिया दोस्त ?
 
Update 17.

चाची ड्राइंगरुम के पीछे बने बाथरूम में चली गई । उनके बाथरूम में घुसते ही मैंने काजल को ह्वाट्सएप किया ।

मैं - कहां हो डार्लिंग ?

तुरंत काजल का जवाब आया ।

काजल - बहन से सीधे डार्लिंग ?

मैं - क्यों बहन डार्लिंग नहीं होती ।

काजल - क्यों नहीं होती... डार्लिंग भी होती है और...और भी बहुत कुछ होती है ।

मैं - और...और भी कुछ होती है... अच्छा..! पहले ये बता कि अभी है कहां ? कालेज में ना घर पर ।

काजल - घर पर ही हूं । मम्मी की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए नहीं गई ।

मैं - ओह ! क्या हुआ उन्हें ?

काजल - खास कुछ नहीं । थोड़ा कमर में दर्द था।

मैं - अभी मम्मी की कमर दबा रही है ना घर के काम कर रही है ।

काजल - घर का काम कर ली हूं । अभी अपने कमरे में मोबाइल से गाना सुन रही हूं ।

मैं - गाना सुन रही है ? जरा में भी तो जानूं कौन सा गाना सुन रही है ?

काजल - भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना ।

मैं - वाह ! वाह ! तु तो सचमुच पुरानी गाने की फैन निकली। कितना सुन्दर गाना है भाई बहन के उपर । वैसे आज तुझे ये गाना सुनने की इच्छा कैसे जाग गई ।

काजल - आप की याद आ रही थी न इसलिए ।

मैं - ऐसा क्या हो गया कि मेरी याद आते ही ' भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना ' गाना सुनने लग गयी ।

काजल - मुझे रक्षाबंधन के वो दिन याद आ गए थे जब आपको राखी बांधने पर आप मुझे गिफ्ट की जगह झुनझुना थमा देते थे... एक नम्बर के कंजूस थे आप ।

मैं - हा..हा..अच्छा ! सबसे पहले तो मुझे आप आप कहना बंद कर...ऐसा लगता है जैसे मैं कोई बुजुर्ग तेरा चाचा , मामा , फुफा टाइप का आदमी हूं ।

काजल - चाचा , मामा , फुफा नहीं हो तो क्या हुआ बड़े भैया तो हो ।

मैं - हां । भैया तो हूं लेकिन दुसरे तरह वाला भैया हूं ।

काजल - दुसरे तरह वाला भैया कैसा होता है ।

मैं - दुसरे वाला भैया नहीं सुनी है ?...जो दिन में भैया और रात में सैंया होता है ।

काजल - ऐसा भी भैया होता है ?

मैं - हां । तो अब से मुझे आप नहीं कहेगी न ।

काजल - आप को मैं आप नहीं कहुगी तो फिर क्या कहूंगी ।

मैं - तुम बोलना...तु बोलना... जानु बोलना... कुछ भी बोलना... मेरा नाम लेकर पुकारना ।

काजल - धत ! मुझे शरम आएगी ।

मैं - मुझे तु , तुम बोलने में शरम आएगी ।

काजल - हां । कभी बोली नहीं हूं न ।

मैं - उस दिन तो शरम नहीं आई तेरे को ।

काजल - किस दिन ।

मैं - जिस दिन पेशाब करते हुए बाथरूम से बातें कर रही थी ।

काजल - वाह रे ! उस दिन मैंने क्या ऐसी बातें कर दी जो मुझे शरम आती ।

मैं - हां उस दिन तो हमने भागवत कथा पर चर्चा की थी न तो उसमें शरम वाली बातें भला कहां से आएगी ।

काजल - अच्छा बाबा ! अब से मैं आपको तु , तुम करके बात करूंगी लेकिन सिर्फ अकेले में ।

मैं - हां ये हुई न मर्दों वाली बात ।

काजल - मैं...मै आपको...साॅरी तुमको मर्द लगती हूं ।

मैं - अरे नहीं नहीं ! वो तो मैंने एक मिसाल दिया था । तु तो जवानी के दौलत से मालामाल एक भरपूर सेक्सी लड़की है ।

काजल - वो तो हूं लेकिन तुमको बड़ी देर बाद पता चला ।

मैं - पता तो बहुत पहले से था लेकिन तु मुझे राखी बांधती थी न तो मुझे हिम्मत नहीं होती थी ।

काजल - यदि हिम्मत होती तो क्या करते ?

मैं - तो... तो...राखी के दिन तुझे कैडबरी ना देकर गिफ्ट के तौर पर तुझे पटक कर तेरी ले लेता ।

काजल - सच में !

मैं - हां ।

काजल - मेरी क्या ले लेते ?

मैं - वही जिसके आसपास बड़े बड़े जंगल उगा रखी हैं... और जिनके बीच नमकीन पानी से भरा हुआ कूआं है ।

काजल - वो जंगल थोड़ी ना है ?

मैं - तो क्या है ?

काजल - आपकी बहन की....

मैं - क्या बहन की ?

काजल - आपकी बहन की रेशम जैसे मुलायम बड़ी बड़ी झांट है ।

मैं - झांट है ?

काजल - हूं.... और झांटों के बीच वो नमकीन पानी वाला कूआं नहीं बल्कि आपकी बहन की चु...

मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी । मैंने अपनी पैंट ढीली करके लन्ड को पैंट के ऊपर से बाहर निकाल लिया और जोर जोर से अपने लन्ड को मसलते हुए टाइप किया - मेरी बहन की चु.. क्या ?

काजल - आपकी बहन की चुत है ।

मैं - मेरी बहन की चुत है ?.. अच्छा उसी के अन्दर मुझे अपना केला घुसेड़ना है ?

काजल - हाय ! मैं तो कब से अपनी जांघ पसारे तुम्हारे केला लेने के लिए इन्तजार कर रही थी । लेकिन तुम्हीं जो अकल के कोल्हू थे ।

मैं - चल कोई बात नहीं... देर आए दुरूस्त आए । अब तक के सारे राखी की गिफ्ट एक बार में ही दे दुंगा । मैं देता जाऊंगा और तु लेती जाना ।

काजल - तो दो ना.... वैसे भैया ऐसी क्या गिफ्ट देने वाले हो जो मैं लेती जाऊंगी ।

मैं - दुंगा न...अपना आठ इंच का लम्बा मोटा केला...।

काजल - आठ इंच का ?

मैं - हां ।

अचानक से उसका मैसेज आना बंद हो गया । मैंने फिर से मैसेज किया ।

मैं - क्या हुआ ?

थोड़ी देर तक उसका मैसेज नहीं आया तो मैंने फिर से उसे मैसेज किया ।

मैं - क्या हुआ ? कहां चली गई ?

इस बार उसका मैसेज आया ।

काजल - नाप रही थी ।

मैं - क्या ?

काजल - इंची फीता लेकर नाप रही थी कि आठ इंच कितना बड़ा होता है ।

मैं - तो नाप ली ?

काजल - हां । ये तो बहुत बड़ा होता है...कैसे जाएगा ?

मैं - क्या ?

काजल - तुम्हरा लन्ड और क्या । बाप रे ! मेरी तो फट के इंडिया गेट हो जाएगी ।

मैं - इंडिया गेट ? मैं तो बुलन्द दरवाजा के बारे में सोच रहा था ।

काजल - भैया जब मेरी शादी होगी तो क्या हसबैंड को सुहागरात में बुलन्द दरवाजा पेश करूंगी ।

मैं - अरे यार लड़किया तो बहाने बनाने में काफी एक्सपर्ट होती है...ये तुझे थोड़ी ना बताना पड़ेगा । बता देना स्पोर्ट्स या साइकिलिंग से हो गया है..आजकल प्रायः लड़कियां ऐसा ही करती है... बहुत सारे बहाने होते हैं ।

काजल - तुम न सही में बहनचोद हो ।

मैं - जब अपनी देगी तब न बहनचोद बनूंगा ।

काजल - वो तो तुम ले ही लेगो और मेरी लेकर बहनचोद भी हो जाओगे लेकिन फिर भी... वो तुम्हारा साइज़...डर लगता है ।

मैं - तो क्या हुआ ? एक बार ले लेगी तो फिर रोज रोज लेने की जीद करेगी । और मेरा तो इतना भी राक्षस जैसा नहीं है , देखी नहीं है विदेशी हबशियो को वो तो बारह चौदह फुट का लेकर घुमते है ।

काजल - क्या ? बाप रे ! बारह फुट... ये तो सर के ऊपर से बाहर निकल जाएगा ।

मैं - अरे नहीं नहीं । तु न मुझे भी कन्फ्यूजन में डाल देती है ‌। वो गलती से इन्च की जगह फुट लिखा गया ।

काजल - ओह ! मेरा अभी तक दिल धड़क रहा है...जानते हैं आप के इन्च , फुट के चक्कर में मेरी हार्ट फेल होने वाली थी ।

मैं - अरे बोला न गलती से हो गया... छोड़ ना वो सब...ये बता दोनों का संगम कब होगा ?

काजल - किन दोनो का संगम ?

मैं - तेरी चुत और मेरा लन्ड का ।

काजल - मेरी चुत और आपके लन्ड का ?

मैं - हां...तेरी चुत के अंदर मेरा लन्ड घुसेगा तभी ना संगम होगा ।

काजल - हूं... बिल्कुल सही कह रहे हो...सुनो...मम्मी डैड अगले हफ्ते तीन दिन के लिए मामा के घर जाने वाले हैं । मामा के बेटे की शादी में लेकिन मैं नहीं जाऊंगी । मैंने पढ़ाई का बहाना बनाया है । और तब तक यहां मेरे साथ रीतु रहेगी..रीतु भी मान गई है । उसी समय ।

में - क्या ? रीतु वहां रहेगी तो फिर कैसे होगा ?

काजल - अरे बुद्ध , मैंने रीतु को दुसरी रात से रहने को बोला है...उसे मैंने कहा है मम्मी डैडी दो दिन के लिए जा रहे हैं इसका मतलब पहला पुरा दिन और पुरी रात हमारे नाम है । अब तुम्हें उस समय के लिए घर में कोई बहाना बनाना होगा ।

मैं - बहाना बनाऊंगा ? ये तो झुठ बोलने के समान हो गया न ।

काजल - तो सच बोल देना ।

मैं - क्या सच बोलुंगा ?

काजल - बोल देना आज रात काजल की चुत से मेरे लन्ड का संगम होने वाला है इसलिए रात में घर नहीं आऊंगा ।

मैं - तु तो साली मुझसे भी बड़ी कमीनी है । ऐसे कोई घर में बोलता है ? जिस दिन मेरे नीचे आएगी ना तो सच में तेरी चुत को भोसड़ा बना दूंगा ।

काजल - तो मना किसने किया है । मैं तो अभी भी सर से पांव तक एकदम नंगी अपनी जांघ फैलाए तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूं । आ जाओ और मेरी ओखली में अपना मोटा मूसल घुसेड़ घुसेड़ कर भोसड़ा बना दो ।

मैं - आऊंगा । जरूर आऊंगा । आग लग जाए , बाढ़ आ जाए , या भूकंप आ जाए... आऊंगा जरूर । लेकिन उस दिन जिस दिन तु घर पर अकेली रहेगी । और तेरी झांटों से भरी चुत को अपने मोटे लौड़े से चोद चोद कर भोसड़ा भी बनाऊंगा ।

काजल - बना देना भोसड़ा। मेरी चुत तो कब से रो रही है तुम्हारे मोटे लन्ड के लिए । अपने लौड़े को मेरी चुत की गहराई में घुसेड़ घुसेड़ कर चोदना और अपना पानी अन्दर गिराते रहना मेरे बहनचोद भाई ।

मैं - हां । जोर जोर से चोदूंगा बहन । और अपने लन्ड का पानी भी अपनी बहन के चुत के अंदर ही छोड़ूंगा । जैसे पिचकारी से पानी की बौछार होती है न उसी तरह मेरा लन्ड तेरी चुत में पानी की बौछार करेगा ।

काजल - हां... अपने लन्ड के पानी से मेरी चुत की गर्मी को ठंडा करते रहना और मैं भी अपनी चुत की गाढ़ी मलाई से अपने भाई के मोटे लन्ड को तरावट देती रहुंगी ।

मैं - अरे यार अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है... क्या करूं...मेरा लन्ड तेरी चुत को चोदने के लिए जमीन आसमान एक किए जा रहा है ।

काजल - मेरा भी भाई... मेरी भी चुत का वही हाल है....हाय भैया अपनी बहन को अपने लन्ड की फोटो भेजो ना ।

मैं - फोटो देख कर क्या करेगी ?

काजल - जब तक असल नहीं मिल जाता तब तक उसी को देखकर ऊंगली करती रहूं ।

मैं - तु भी अपनी चुत की फोटो भेज ना ।

काजल - पहले तुम भेजो ।

मैं - अच्छा रूक.. भेजता हूं ।

तभी मुझे याद आया कि मैं अपने कमरे में नहीं बल्कि चाची के यहां बैठा हूं । मैंने पीछे मुड़कर बाथरूम की तरफ देखा । बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था । ओह माई गॉड... मतलब चाची नहा कर बाथरूम से निकल गयी है । कहीं उन्होंने मुझे अपना लन्ड हिलाते हुए तो नहीं देख लिया । मैंने जल्दी से लन्ड को पैंट के अन्दर किया और चैन लगाया । फिर काजल को मैसेज किया ।

मैं - काजल... मैं अभी नहीं भेज सकता... मैं चाचा के घर आया हूं । अभी फोन रखते हैं , रात में मैसेज करेंगे । ओके ।

काजल - ओके...लव यू डार्लिंग...सी यु ।

काजल आफलाइन हो गई । मैंने भी अपना मोबाइल पैंट के अन्दर कर लिया । तभी चाची प्लेट में सुजी का हलवा और एक पानी का बोतल लेकर आई । वो हलवा का प्लेट मेरे हाथों में देकर मेरे बगल में ही बैठ गई । पानी का बोतल अपने हाथ में ही रखे रही ।

नहाने के बाद उन्होंने एक हल्के ब्लू कलर का साड़ी और उस से मैच करता ब्लाउज पहन रखा था । नहाने के बाद वो काफी फ्रेश दिख रही थी । माथे के बाल अभी भी भींगे हुए थे जिसे वो खुला छोड़ रखी थी। होंठों पर हल्की लिपस्टिक थी । सुन्दर तो थी ही लेकिन इस वक्त वो मुझे काफी सेक्सी भी दिख रही थी । थोड़ी देर पहले काजल के साथ हुए गरमागरम चैटिंग से मैं पहले ही काफी उत्तेजित था। और फिर उस पर चाची के बगल में बैठना उत्तेजना को और भड़काने वाला जैसा था ।

" कितनी जल्दी नहा ली चाची " - मैंने हलवा खाते हुए कहा -" मुझे पता ही नहीं चला ।"

" चैटिंग सैटिंग से फुर्सत होगी तो ना पता चलेगा ।"- चाची बोतल की ढक्कन खोल कर सिर उपर उठाकर पानी पीते हुए बोली ।

" आपने देखा चै...?" ( कहीं इन्होंने मुझे लन्ड मुठियाते हुए तो नहीं देख लिया )

" हां देखा ।"

" क्या देखा ?"

" चैटिंग सैटिंग करते हुए ।" - चाची मुस्कराते हुए बोली ।

" ओह ! वो... वो एक फ्रेंड से चैटिंग हो रही थी ।"

" अच्छा ! क्या बोल रही थी ?"

" वो बोल रही थी..." - अचानक से मैं चौंका - " क्या मतलब बोल रही थी.?...बोल नहीं रही थी बल्कि बोल रहा था ।"

" अच्छा ! बोल रहा था...?...वैसे वो क्या बोल रहा था ।"

" यही सब कालेज की कुछ पढ़ाई-लिखाई की बातें फिर एक्जाम के बारे में ।"

" हां देख तो रही थी कि बाहर भी पढ़ाई-लिखाई की बातें मोबाइल पर कर रहा था और फिर यहां भी शुरू हो गया... मोबाइल पर पढ़ाई-लिखाई से लोग जल्दी से सीख जाते हैं...है ना ?"

" क्या चाची ?... बच्चे का मजाक उड़ा रही हो ?"

" बच्चा..?.. कौन बच्चा ?"

" मैं बच्चा... आप को दिख नहीं रहा है ?"

" तु बच्चा है तो सांड किसको बोलेंगे ।"

" क्यों मजाक करती हो चाची.... मैं आपको कहां से सांड लगने लगा ?" ( शर्तिया चाची ने मेरा लन्ड देख लिया है )

वो मेरे शरीर को अपने आंखों से एक्स रे करती हुई बोली -" चौड़ा सीना , चौड़ा कन्धा , लोहे की तरह मजबूत हाथ , मजबूत जबड़ा , लम्बा कद.... सांड नहीं है तो और क्या है ?...तु तो शादी के लायक हो गया है ।"

" क्या चाची ! ...तुम तो मुझे चने की झाड़ पर चढ़ा रही हो ।"- मैंने शरमाते हुए कहा ।

" सच बोल रही हूं...तु तो एकदम कामदेव का अवतार हो गया है ..तेरी मम्मी से बात करूं तेरी शादी के लिए ?"

" क्या बात है आजकल माॅम और तुम दोनों मेरे शादी के पीछे पड़ी हुई हो ।"

" अभी नहीं पड़ेंगे तो कब पड़ेंगे...तु कहेगा तो मै तेरी शादी की बात करूं... एक लड़की है मेरी निगाह में ।"

" कौन है ?" - मैंने चौंकते हुए पूछा ।

" मेरी दुर की एक भाभी है , उनकी बेटी.. दोनों मां बेटी बहुत सुंदर है ।"

" आप की भाभी की बेटी ?"

" हां ।"

" बेटी सुन्दर है ?"

" हां ।"

" और मां भी सुन्दर है ।"

" हां वो भी बहुत अच्छी है ।"

" तो क्यों न अपनी भाभी से ही मेरी शादी करवा दो ।"

" नालायक ! मसखरी करता है... वो मेरी और तेरी मम्मी की उमर की है , पता है ?"

" तो क्या हुआ ? ... आप कौन सी बुढ़ी हो गई हो... और मैंने आपकी वो खुबसूरत सी भाभी को देखा है वो भी आप ही की तरह काफी मस्त है... और वैसे भी मुझे बड़ी उमर की औरतें अधिक पसंद है ।"

" तु बुढ़िया से शादी करेगा ?"

" आप बुढ़िया है ?"

" एक दम नहीं ।... और खबरदार जो मुझे बुढ़िया कहा ।"

" वही तो मैं भी कह रहा हूं कि वो भी आप की तरह मस्त मस्त है ।"

" तुझे बड़ी उमर की औरतें पसंद है ?"

" हां ।"

" तुझे अपनी उमर के समान लड़कियां पसंद नहीं ?

" है ना... वो भी पसंद है ।"

" तो फिर उस लड़की से शादी करने में क्या बुराई है ?"

" जब मैं आपकी भाभी से शादी कर लुंगा तो उसकी बेटी भी एटोमेटिकली मेरी बीवी बन जाएगी.... एक के साथ एक फ्री ।"

" कमीने वो तेरी बेटी बन जाएगी ना बीवी ।"

" वो मेरी बेटी बन जाएगी ?.... ऐसे थोड़ी न होता है... मैं कहां 24 साल का और मेरी बेटी 20. 22 साल की । लोग क्या कहेंगे ?"

" अभी बताती हूं कि लोग क्या कहेंगे।" - बोलकर चाची ने मेरे कान को चुटकियों से जोर से पकड़ा और मसलने लगी ।

" अर.. अरे चाची क्या कर रही हो ?... बहुत जोर से लग रही है ।"- मैंने हंसते हुए अपनी कान छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा ।

चाची ने मेरा कान छोड़ा और पानी का बोतल मेरे सर के ऊपर गिरा दी जिससे मेरा शर्ट पानी से भीग गया ।

" अब ऐसे ही गीले कपड़े में रह....खाली शैतानी करते फिरता है ।"

" देख लो चाची आपने मुझे गीला किया है इसका बदला मैं भी एक न एक दिन जरूर लुंगा....याद रखना ।" - मैं खड़े होकर शर्ट से पानी झाड़ते हुए कहा ।

" अच्छा ! क्या करेगा जरा ये तो बता ?" - चाची बोतल के अन्दर बचे हुए पानी पीते हुए बोली ।

" म... मैं भी आपको गीला कर दुंगा ।"

" तो खड़ा क्यों है ? कर मुझे भी गीला ।"

" अभी नहाकर नहीं आई होती तो कर ही देता ।" - बोलकर मैंने अपना हाथ धोया और चाची के साड़ी के पल्लू से अपना मुंह पोंछने लगा जिससे उनके साड़ी का पल्लू उनके सीने पर से हट गया और ब्लाऊज़ में कैद उनके कसे हुए बड़े बड़े बूब्स मेरी आंखों के समकक्ष आ गए ।

मैं अपना मुंह उनकी साड़ी के पल्लू से साफ करता हुआ बोला -" चाची , आपकी साड़ी बहुत खुबसूरत है ।"

" तुझे अच्छी लगी...तीन हजार रुपए की है ।"

" हूं " - मैं उनके बड़े बड़े बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से देखता हुआ बोला -" और आप की ब्लाउज तो साड़ी से भी ज्यादा अच्छी है ।"

चाची ने मुझे उनके गोलाईयों को घुरते हुए देख लिया । वो मेरे सर पर धीरे से थप्पड़ जड़ती हुई बोली - " चाची से मजाक करते हुए तुझे बड़ा अच्छा लगता है....है ना ?"

मैं वापस सोफे पर बैठता हुआ बोला -" हूं.... काश आप मेरी भाभी होती तो कितना अच्छा होता...खुब जमकर मजाक करता ।"

चाची भी आकर मेरे बगल में बैठ गई और बोली -" मुझसे तु कौन सा कम मजाक करता है... भाभी वाला ही तो मजाक करता है ।"

" कहां भाभी वाला मजाक आपसे करता हूं.... भाभी वाला मजाक अलग तरह का होता है ।"

" कैसा होता है भाभी वाला मजाक...जरा मैं भी तो सुनूं ।"

" आप नहीं सुन पाएंगी ।"

" क्यों नहीं सुन पाऊंगी ?"

" क्योंकि... क्योंकि ।"

" क्योंकि ?" - चाची ने मेरे आंखों में देखते हुए कहा ।

जबकि मैं उनके बड़े बड़े मम्मे को देखते हुए कहा -" क्योंकि वे काफी हाॅट होते हैं ।"

" इधर उधर कहां देख रहा है नालायक " - चाची ने मुझे अपने छातियों पर देखते हुए पाया तो कहा -" मेरा चेहरा इधर है... और वो कैसी-कैसी हाॅट होती है ।"

मैंने हड़बड़ाते हुए अपना सर उठाया और उनकी आंखों में देखते हुए कहा -" नहीं... आप को बुरा लगेगा सुनने में ।"

" कोई बात नहीं... मैं कुछ नहीं कहूंगी... तु बोल ।"

" मुझे शरम आ रहा है... मैं नहीं बोल पाऊंगा ।"

" बोल ना ।... तुझे मेरी कसम ।"

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या बोलूं । कसम देने के बाद तो मैं और भी उहापोह वाली स्थिति में था ।

" ठीक है जब आप इतना जोर दे रही है तो मैं आपको बताऊंगा लेकिन आप के सामने नहीं... क्या पता मेरे बोलते ही आप मेरा सर फोड़ दे इसलिए मैं आपके मोबाइल पर मैसेज भेज दुंगा ।"

अचानक से चाची उदास हो गई और बोली -" कोई फायदा नहीं । मेरी मोबाइल तो एक महीने पहले ही चोरी हो गई है ।"

" अरे तो आपने बताया क्यों नहीं...कब चोरी हुई थी ?"

" शायद जिस दिन श्वेता की सहेली उर्वशी की शादी थी , उस दिन ।"

" ओह ! तो फिर बाद में नया मोबाइल नहीं खरीदी ?"

" तेरे उस खुसट चाचा को तो कई बार बोला है लेकिन उसका कान को तो जैसे दीमक चाट गया है ।" - चाची ने निराश होकर कहा -" लेकिन मैंने आज बोला है कि यदि वो आज मेरे लिए नया मोबाइल लेकर नहीं आए तो कल से सागर को बोलकर मोबाइल खरीदवा लुंगी ।"

" तो आज तक इन्तजार करो चाची... यदि वो फिर भुल गए हों तो कल मुझे बोलना ।"

" वो आज भी भुल जाएगा , तु कल सुबह मेरे से पैसे ले लेना और एक देख समझ के अच्छी सी मोबाइल ले लेना ।"

" ठीक है चाची " - कहकर मैं खड़ा हुआ -" चाची , अब चलता हूं , कुछ काम है ।"

" क्या जरूरी काम है ?"

" अरे नहीं चाची.... ऐसी भी कोई जरूरी काम नहीं है , और अगर हो भी तो मेरी प्यारी चाची से बढ़कर दुसरी जरूरत और क्या होगी ।"

" तु सच में मेरा प्यारा सोना है... एक तु ही तो है जो सब का ध्यान रखता है ।"

चाची थोड़ा इमोशनल होने लगी थी । मैंने उन्हें अपने बाहों में कस के गले लगा लिया । थोड़ी देर बाद मैं अपने घर चला आया । उस वक्त दोपहर के अढ़ाई बजे थे । रीतु कालेज से अभी आई नहीं थी और माॅम इस वक्त हमेशा आराम करती है तो मैं सीधे अपने कमरे में चला गया और पैंट शर्ट खोलकर बिस्तर पर लेट गया ।

आज जिस तरह से काजल से ह्वाट्सएप पर चैटिंग हुई थी याद कर कर के मैं गरम होने लगा । बहुत जल्द काजल मेरी बाहों में होगी और उसके साथ मैं बिस्तर पर क्या क्या करूंगा , सोच सोच कर मैं उत्तेजित होने लगा । तभी सोचा क्यों न आज नेट पर सेक्स कहानियों वाली फोरम पढ़ा जाय ।

मैंने मोबाइल निकाला और ' वो ' प्रसिद्ध कहानियों वाली वेवसाईट खोला । कई कहानियां थी । हर तरह की कहानी थी । कुछ कहानियां पढ़ी । कुछ बहुत अच्छी लगी । कुछ तो एकदम बकवास लगी । लेकिन जो मुझे सबसे ज्यादा खराब लगी वो थी पढ़ने वालों की नेगेटिव कमेन्टस । मुख्य तौर पर औरतों के उपर की जाने वाली अभद्र टिप्पणी । यदि किसी कहानी के उपर कोई औरत कमेन्टस करती है , उसके बाद कहानी के लेखक के कमेन्टस देखकर ऐसा लगता है कि जिस औरत ने कमेन्ट किया है या तो वो औरत एक निम्न श्रेणी की गिरी हुई औरत है । या तो उसके लेखनी से प्रभावित होकर उस पर फिदा है । या वो एक निम्फोमेनियाक औरत है । बहुत बुरा लगा मुझे । बहुत ही बुरा । ऐसा नहीं होना चाहिए । यही सब सोचते सोचते मैं निद्रा के हवाले हो गया ।
 
Update 18.

शाम को चार बजे मैं उठा और अपने कमरे से बाहर निकला ।

बाहर निकलते ही मैंने छत पर एक साइड में रीतु को फोन पर बातें करते हुए पाया ।

उसने निगाह उठा कर मेरी तरफ देखा और फिर जानबूझ कर स्वर ऊंचा करते हुए बोली - " मैं तुझे फिर फोन करती हूं , महेश , अभी मेरे भैय्याया आ गये हैं ।"

उसके भैय्याया कहने से ही मैं समझ गया कि फोन पर कोई महेश नहीं था ।

मैं उसके सामने जा खड़ा हुआ ।

उसने बड़ी अदा से मुझे देखा ।

" महेश ।" - मैं उसे घुरता हुआ बोला ।

" यस भैयया ।" - वो पलक झपकते बोली ।

" कौन है ये महेश ?"

" मेरा ब्वायफ़्रेंड है ।"

" वो तो सुरेश है ना ।"

" वो प्रीलंच ब्वायफ़्रेंड है । ये पोस्टलंच ब्वायफ़्रेंड है ।"

" क्या मतलब ?"

" भुल गए... मेरी कालेज... वो लड़की मधुमिता... लड़कियों का ब्वायफ़्रेंड...घर से निकलते समय...घर आते समय ।

" ऐसे टोटल कितने हैं ?"

" ज्यादा नहीं है । आपकी बहनजियों से कम है ।"

" लिस्ट में मेरा नम्बर कौन सा है ?"

" आप का लिस्ट में क्या काम ?"

" क्यों नहीं काम ?"

" आप ब्वायफ़्रेंड कैसे हो सकते हो ? आप तो भैय्या हैं ।"

" भैय्या ब्वायफ़्रेंड नहीं हो सकता ?"

" नहीं हो सकता । ब्वायफ़्रेंड तो खास होता है , भैय्या तो खडुस , हमेशा अपना हुकुम चलाने वाला , बात बात में नुक्ता चीनी निकालने वाला और वाइफोकल्स लगाता है ।"

" मैं तुझे ऐसा दिखाई देता हूं ?"

" अभी नहीं ।"

" यानी देर सबेर तो वैसा बन के रहूंगा ।"

वो हंसी ।

" भीतर आ , तेरे से एक बात करनी है ।"

मैं अपने कमरे में प्रवेश किया और बिस्तर पर बैठ गया ‌।

मेरे पीछे पीछे वो भी वहां पहुंच गई ।

" बैठ ।"

उसकी भवें उठी ।

" अरे बिस्तर पर , कुर्सी पर , कहीं भी बैठ मेरी मां ।"

वो मेरे सामने बिस्तर पर बैठ गई ।

" बोल बेटा ।"

मेरी हंसी छुट गई ।

वो भी हंसने लगी ।

फिर हम दोनों संजीदा हुए ।

" रीतु " - मैं बोला -" अमर..मेरा दोस्त जिसका मर्डर हो गया था , उसको तु जानती ही हैं - मैं चाहता हूं कि तु पुरी बात सुन और फिर मुझे कोई सजेशन दे ।"

" वो तो ठीक है लेकिन पहले ये बताओ कि मेरी पाकेट मनी कहा है ।"

" अरे ! ले लेना । पहले सेनसियर हो के मेरी बात सुन ।

" सुन रही हूं ।"

मैंने एक सिगरेट सुलगा लिया और धीरे धीरे तफसील से तमाम वाकयात वयान किया ।

आखिरकार मै खामोश हुआ और प्रश्नसूचक निगाहों से उसकी तरफ देखा ।

" एक सिगरेट मुझे दीजिए ।" - वो बोली ।

" क्या ?"

" सोचने के लिए ।"

" तु सिगरेट पियेगी ?"

" खाऊंगी । आप दीजिए तो सही ।"

मैंने भुनभुनाते हुए अपना क्लासिक का पैकेट और लाइटर उस के सामने फेंका ।

उसने पैकेट से एक सिगरेट निकाला , लेकिन लाइटर की तरफ हाथ न लगाया । उसने सिगरेट को होंठों के करीब ले जाकर - लेकिन होंठों से लगाकर नहीं - नथुनों से धुआं निकालने का अभियान किया ।

" तो राजीव जीजू का अनुष्का नाम की औरत से अफेयर है । बेचारी श्वेता दी का फिर क्या होगा ? वो तो बेचारी टुट ही जाएंगी ।"

" मैंने अभी तो सारी बातें बताई । राजीव जीजू का अनुष्का के साथ मोहब्बत सिर्फ जिस्मानी है और इसके चलते उन दोनों की शादी पर कोई असर नहीं पड़ेगा । तु दिमाग केन्द्रित कर क़ातिल ढुढने में ।"

" आप की सारी स्टोरी सुनने के बाद क़ातिल होने का शक पांच लोगों पर जाता है ।"

" कौन कौन ?"

" पहला शक अनुष्का पर जाता है । दुसरा उसके पति कुलभूषण खन्ना पर । और तिसरा जीजू पर ।"

" और बाकी दो ?"

" चौथा आप पर ।"

" क्या बक रही है ?"

" हम केस से सम्बंधित यदि हर किसी को शामिल करें तो उसमें आप भी आते हैं । और आप को यदि बाद कर दिया जाय तो सिर्फ चार बचते हैं ।"

" चौथा कौन ?"

" आप शायद उस गुमनाम व्यक्ति को भुल गए हैं जिसने पुलिस को पब्लिक बुथ से वारदात की सूचना दी थी ।"

" ओके । तो हमारे पास चार सस्पेक्ट है । अब तु बारी बारी से उनके बारे में डिस्कसन कर ।"

" सबसे पहले अनुष्का के बारे में बात करते हैं ।"

" बोल ।"

" मर्डर पुलिस के डाक्टर के अनुसार सुबह दस बजे से लेकर साढ़े ग्यारह बजे के बीच में हुआ है । ठीक ।"

" हां ।"

" और अनुष्का मर्डर के वक्त मौका ए वारदात पर मौजूद थी । खुद उसी के बयान के अनुसार वो वहां अधिक देर तक रूकी थी । इसलिए उसके पास मर्डर करने का भरपूर मौका था ।"

" बिल्कुल सही लेकिन खुन करने का मकसद क्या था ?"

" यही चीज तो इसके पक्ष में जा रही है । लेकिन मर्डर विपन तक इसकी पहूंच तो शर्तिया थी । इसके हसबैंड के पास वही रिवाल्वर है जिस तरह की रिवाल्वर से अमर का खून हुआ था ।"

" ३६ कैलिवर का रिवाल्वर । और उनके रिवाल्वर से कारतूस भी कम पाया गया था ।"

" इसका मतलब यह हुआ कि अनुष्का के पास वारदात को अंजाम देने के लिए मौका भी था और मर्डर करने के लिए हथियार भी । लेकिन मर्डर करने का कारण , वजह अभी क्लियर नहीं है ।"

" हूं । अब उसके पति कुलभूषण खन्ना की बारे में बोल ।"

" कुलभूषण खन्ना के पास मर्डर करने के लिए वजह भी है और हथियार भी उपलब्ध है ।"

" क्या वजह है ?"

" वो अपनी बीवी से बहुत प्यार करता है । जब उसे अपनी बीवी की बेवफ़ाई के बारे में पता चला तो वो अपना आपा खो दिया और उसकी जासूसी करते करते जीजू के फ्लेट में पहूंच गया । वहां उसने अपनी बीवी को अमर के बाहों में देखा और गुस्से में अमर पर गोली चला दी ।"

" लेकिन अमर पर क्यों ? अनुष्का की आशनाई तो जीजू के साथ थी । अगर उसे मारना होता तो जीजू को मारता । अमर को क्यों ?"

" क्यों अनुष्का की आशनाई जब जीजू से हो सकती है तो अमर से क्यों नहीं । क्या अमर भगवान राम था , क्या वो लड़कियों के मामले में कोई महात्मा था । ये तो आप मुझसे बेहतर जानते होंगे ।"

" लेकिन ये बात अभी सामने कहां आई है कि अनुष्का का सम्बन्ध अमर से भी था । और मान लिया उन दोनों के बीच आपस में एक गहरा सम्बन्ध था लेकिन आशनाई करने के लिए उन्हें जीजू का ही घर मिला था । वे और भी कहीं मिल सकते थे । जीजू के घर ही क्यों ?"

" ये तो सभी को पता है कि श्वेता दी कई दिनों से यहां अपने मायके में है और जीजू दिन के वक्त अपने आफिस में होते हैं । और आपने ही कहा था कि फ्लेट की एक चाबी अनुष्का के पास भी रहती है । और यहां दिल्ली से गाजियाबाद जाने में ट्रेन से समय ही कितना लगता है ।"

" लेकिन उस दिन अनुष्का की डेट जीजू के साथ थी । और उसी लिए जीजू ने उस दिन आफिस से छुट्टी लेकर घर आ गए थे । अगर अनुष्का की डेट उस दिन पहले से ही फिक्स थी तो भला वो क्यों कर अजय के साथ उसी फ्लेट में जाएगी ।"

" कुछ न कुछ तो है जो अभी दिखाई नहीं दे रहा है लेकिन भले ही अभी कुलभूषण खन्ना के क़ातिल होने की वजह नहीं दिख रही हो पर हथियार तो उसके पास भी है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस समय कतल हुआ था उस वक्त के लिए उसके पास कोई एलीबाई , कोई गवाह नहीं है । वो कहता है कि उस वक्त वो अपने घर पर था लेकिन कौन जानता है कि वो अपने घर पर ही था या वहां से दुर गाजियाबाद में ।

" ओके । अब जीजू के बारे में बता ?"

" जीजू के पास भी कत्ल करने का मौका हासिल था ।"

" कैसे ?"

" जीजू ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि वो उस वक्त दिल्ली से अपने घर बाइ कार लौट रहे थे । उन्हें वहां से अपने घर तक आते-आते अढ़ाई घंटे लग गए । "

" हां ।"

" कौन कहता है ?"

" क्या मतलब ?"

" ये तो जीजू कह रहे हैं न । हो सकता है कि वो बहुत पहले ही आ गये हों ।"

" और ?"

" और उन्होंने अनुष्का को अमर की बाहों में देखा और गुस्से में अमर का खून कर दिया ।"

" लेकिन हथियार... हथियार कहां से आया ?"

" हथियार कौन सी बड़ी बात है । कहीं से जुगाड़ कर लिया होगा ।"

" ओके । अब वो चौथा खबरी ?"

" जिस ने पुलिस को सूचना दी थी क्या वो मर्द था ?"

" हां ।"

" उसे कैसे पता कि इग्जेक्ट जीजू के ही फ्लेट में खून हुआ है ? आप सबसे पहले तो ये बताओ कि उस आदमी ने पुलिस को क्या कहा था ?"

" मतलब ?"

" मतलब ये कि उसने पुलिस को पब्लिक बुथ से क्या कहा था ? कि उसने जीजू के फ्लेट में किसी गोली चलने की आवाज सुनी है या किसी का खून होते हुए देखा है या किसी झगड़े या मारपीट का अंदेशा हुआ है ?"

" ये तो मुझे नहीं पता ।" मैंने निराश होकर कहा ।

" तो ये भी तो हो सकता है कि उस गुमनाम खबरी ने ही अमर का खून किया हो और चूंकि उसने खून किया है तो उसे बखूबी पता होगा कि उसने खून कब किया है और किसी खास समय का इंतजार किया और फिर उसने पुलिस को फोन करके बताया ।"

" किस खास समय का ?"

" उस खास समय का जब फ्लेट के अन्दर अनुष्का मौजूद पाई जाय या उस खास समय का जब आप फ्लेट के अन्दर पाए जाय ।"

मेरी आंखें चौड़ी हो गई ।

" तुम्हारे कहने का मतलब है कि उसने पहले अमर का खून किया फिर अनुष्का या फिर मुझे उस खून के इल्ज़ाम में फंसाने के लिए पुलिस को इन्फोर्मे किया ।

नेक्स्ट रात तक ।
 
Update 18. Continue.

" हां ।" - रीतु ने विश्वास के साथ कहा ।

" लेकिन कौन ? और यदि वो मुझे या अनुष्का को फंसाना चाहता था तो क्यों ? इससे उसको क्या हासिल होता ?"

" ये तो अभी तहकीकात की विषय है । अच्छा ! एक बात बताओ ? जीजू के फ्लेट का पुलिस ने फिंगरप्रिंट तो लिया होगा ?"

" हां । वहां कुल सात लोगों का फिंगर कहो या फुट प्रिंट मिला है । जिनमें जीजू , श्वेता दी , अमर , अनुष्का और मेरा मिल चुका है लेकिन बाकी के दो का मिलान अभी तक नहीं हो पाया है ।"

" जिन दो लोगों का मिलान अभी तक नहीं हो पाया है उनमें एक तो वो खबरी भी हो सकता है ।"

" हो सकता है ।"

" अमर की मोबाइल कहां है ?"

मैं चौंका । मैं तो अमर के मोबाइल के बारे में भुल ही गया था ‌।

" ये तो मेरे दिमाग से ही उतर गया था । मैंने इसके बारे में पुलिस से पूछा ही नहीं ।"- मैंने खेद पूर्वक कहा ।

" कोई बात नहीं । इस बार पुछ लेना और अमर की मम्मी से भी ।"

" अच्छा एक बात बता आगरा में संजय जी के उपर जो हमला हुआ था , क्या उसका भी अमर के कत्ल से कुछ सम्बन्ध हो सकता है ?"

" मुझे वहां की सारी बातें फिर से बताओ ।"

मैंने आगरा में रिसेप्शन में हुई सारी बातें बताई लेकिन श्वेता दी और मेरे बीच हुई सेक्स को छुपा लिया ।

" तुझे क्या लगता है संजय जी के उपर हमला का इस केस से कोई सम्बन्ध है ?"

" आप को लगता है कि वहां किसी ने संजय जी पर गोली चलाई और उन्हें जान से मारने का प्रयत्न किया ।"

" हां ।"

" लेकिन मुझे तो कुछ और ही लग रहा है ।"

" क्या ?"

" मुझे तो लगता है कि वहां संजय जी पर नहीं बल्कि आप पर गोली चलाई गई है । उस गोली का शिकार संजय जी नहीं बल्कि आप होने वाले थे ‌।"

मैं सकपकाया.... फिर हड़बड़ाया ।

" क्या बोल रही है ?"

" जब गोली चलाई गई तब स्टेज पर संजय जी के ठीक आगे आप खड़ थे । मतलब संजय जी आप के ओट में खड़े थे । आप ने संजय जी के चश्मे के प्रतिबिंब से अपनी तरफ तनी हुई रिवाल्वर देखी । आप ने कुद कर ये निष्कर्ष निकाला कि कोई संजय जी को मारना चाहता है लेकिन वो गोली उन्हें कैसे लगती । वो तो आप की कवर में थे । यदि आप संजय जी को लिए जमीन पर नहीं गिरते तो गोली आपने लगनी थी ना कि संजय जी को ।"

मैं भौंचक्का आंखें फाड़े चुपचाप उसे देखता रहा । मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि किसी ने मुझे आगरा में मारने की कोशिश की थी ।

मैं प्रशंसा भरी नजरों से उसे देखा ।

" तब तो इसका मतलब यही लग रहा है कि दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई है " - मैंने कहा ।

" हो सकता है और नहीं भी हो सकता है ।"

मैं कुछ देर तक सोचता रहा ।

" भाई " - रीतु चिन्तित भरे स्वर से बोली -" कहीं आप ने कुछ ऐसी वैसी हरकत तो नहीं न कर दी जिससे कोई आप के जान का प्यासा हो गया हो ।"

" अरे नहीं नहीं । मैंने कोई भी ऐसी वैसी हरकत नहीं की हैं । "

" तो फिर ये सब क्या है ? क्यों कोई आप के जान के पीछे पड़ा है ?"

" यही तो समझ में नहीं आ रहा है । जरूर कोई किसी के मुगालते में मेरे पीछे पड़ गया है । मैं एक काम करता हूं परसो रविवार है , उस दिन श्वेता दी और जीजू यहां शिफ्ट होने वाले हैं , मैं उस दिन वही चला जाता हूं और पुलिस से भी मिल लुंगा और उनसे ये सारी बातें डिसकस कर लुंगा ।"

" हूं , ये सही रहेगा और आप एक काम और करना ।"

" क्या ?"

" एक बार अपने बुद्धि से श्वेता दी के फ्लेट की छानबीन भी कर लेना । वैसे तो पुलिस पहले छानबीन कर चुकी है लेकिन आप एक बार खुद बड़ी बारीकी से जांच लेना । हो सकता है आप को कुछ ऐसा दिख जाए जो पुलिस को न दिखी हो और यदि दिखी भी हो तो उन्हें वो महत्वपूर्ण जैसी ना लगी हो । वो कहते है न कि मुजरिम कितना भी होशियार क्यों न हो मगर अपने जुर्म की निशानी कहीं ना कहीं छोड़ ही जाता है ।"

" एक महिना के आसपास हो गया , क्या इतने दिनों तक कुछ निशानी या क्लू बची भी होंगी । इतने दिनों में तो कितनों बार बाथरूम ही नहीं बल्कि पुरे घर की साफ-सफाई हो गई होगी ।"

" फिर भी आप देखना जरूर ।"

" जरूर देखूंगा "- मैंने कहा -" अमर का कत्ल ३६ कैलिवर के रिवाल्वर से हुआ है । तु कहती है कि काजल के डैड के पास भी रिवाल्वर है । क्या तुने वो रिवाल्वर देखी है ? क्या वो ३६ कैलिवर की रिवाल्वर है ?"

" काजल के डैड के पास रिवाल्वर तो है लेकिन वो कौन सी रिवाल्वर है , ये मुझे नहीं पता । मुझे रिवाल्वर की किसी भी क्वालिटी के बारे जानकारी नहीं है ।"

मैं कुछ नहीं बोला ।

" क्या आप को काजल के डैड पर शक है ?"

" नहीं । मैं बस जानकारी के लिए पुछ रहा था - मैंने कहा -" लेकिन दिल्ली जैसे शहर में गन का लाइसेंस मिलना बड़ी मुश्किल काम है , जबकि यहां हम देख रहे हैं कि जो तो गन लिए घुम रहा है ।

" गन होना बड़ी बात तो है ही , लेकिन उसे हैंडल करना भी बड़ी बात है । इतना भी आसान नहीं है कि हर कोई गन से टारगेट कर सके । जिस तरह से अमर के सीने में बिल्कुल दिल के करीब गोली मारी गई थी और जैसा कि आगरा में हुआ था उससे तो यही लगता है कि वो आदमी बहुत अच्छी तरह से गन हैंडल करता है । "

" हां । बिल्कुल परफेक्ट निशाना साधा था , वो तो किस्मत अच्छी थी कि मैंने चश्मे में देख लिया ।"

" भाई मुझे बहुत डर लग रहा है । आप प्लीज सावधानी से रहिएगा ।" - वो भावुक होकर बोली ‌।

" अरे क्यों चिंता करती है , कुछ नहीं होगा मुझे । मुझे मरना होता तो मैं उसी दिन मर गया होता । मेरा ग्रहण खतम हो गया है और अब से उस मादरचोद का ग्रहण शुरू होने वाला है । " - मैंने शुष्क लहजे में कहा ।

" आप पुलिस प्रोटेक्शन क्यों नहीं ले लेते ।"

" पुलिस जिस तिस को प्रोटेक्शन थोड़ी न दे देती है । और क्या कहेंगे पुलिस से ? अभी हमने जो भी डिस्कसन किया है वो तो हमारी इमेजिनेशन है । और वैसे भी तुझे इतना भी डरने की जरूरत नहीं है । कोई धोखे से कुछ कर दे तो बात अलग है । वैसे यु नो....आयम मार्शल आर्ट्स एंड ब्लेक बेल्ट होल्डर । पांच सात से तो ऐसे ही निपट लुंगा ।"

वो कुछ बोली नहीं , सिर्फ आगे बढ़कर मेरी गले लग गई । मैंने भी उसे अपने बाहों में कस लिया । थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे फिर वो मुझसे अलग हो गई और बोली - " तो अब आप क्या करोगे ?"

" करूंगा ना । कुछ ना कुछ तो जरूर करूंगा । पहले इंस्पेक्टर कोठारी से मिलता हूं फिर बाद की प्लानिंग करेंगे ।"

" फिर भी क्या सोचे हो ?"

" सभी की जन्म कुंडली निकालूंगा , फिर देखते हैं ।"

वो कुछ नहीं बोली ।

अचानक मुझे कुछ याद आया ।

" चाची की मोबाइल भी चोरी हो गई है ।"

" क्या ? कब ?"- वो चौंकते हुए बोली ।

" जिस दिन उर्वशी की शादी थी । "

" और उसी दिन सुबह अजय का खून हुआ था "- वो अचरज भरे स्वर में बोली ।

" हां । "

" क्या इसका भी ताल्लुक इस केस से है ?" - वो प्रश्न सूचक दृष्टि डालते हुए बोली ।

" कह नहीं सकता । हो सकता है कि ये एक इत्तफाक हो । लेकिन अभी जैसी परिस्थितियां हैं उसमें किसी भी बात को नजरंदाज नहीं किया जा सकता ।"

मैंने कुछ देर तक सोचा फिर बोला -" जिस दिन अमर का कतल और रात में उर्वशी का शादी होना था , उस दिन यहां की कंडीशन कैसी थी । मतलब हमारे घर में । चाची के घर में ।"

" जहां तक मुझे याद है आप सुबह दस बजे डैड की कार लेकर यहां से श्वेता दी के घर जाने के लिए निकल गये थे । और आपसे पहले ही डैड आफिस के लिए निकल गये थे। मैं उस दिन कालेज नहीं गई थी , दिन भर घर पर ही थी । आपके निकलने के आधे घंटे बाद चाची और श्वेता दी आ गई थी । फिर माॅम , चाची , श्वेता दी और मैं गप शप करने लगे । "

" कैसी गप शप ?"

" खास कुछ नहीं , औरतों वाली बात । फिर करीब आधे घंटे बाद ही चाची चली गई । "

" क्यों ?"

" बोली तबीयत थोड़ी ठीक नहीं है ।"

" हूं , फिर ?"

" फिर चाची के जाने के पौन घंटे बाद श्वेता दी भी चली गई । बोली ब्यूटी पार्लर जाना है । क्योंकि उस दिन उनकी सहेली उर्वशी की शादी जो थी ।"

" और चाचा , राहुल ?"

" राहुल तो अपने स्कूल में था और चाचा ड्यूटी पर ।"

" चल ठीक है " - मैंने घड़ी में टाईम देखते हुए कहा -" मेरा क्लब जाने का टाइम हो गया है , निकलता हूं अब ।"

" दो मिनट रुक जाओ मैं चाय बना देती हूं ।"

मैंने हां में सर हिलाया । वो नीचे चली गई । उसके जाने के बाद बाथरूम में जाकर हाथ मुंह धोया फिर नीचे हाल में जाकर सोफे पर बैठ गया । माॅम अभी अपने कमरे से बाहर नहीं निकली थी ।

चाय पीकर अपनी बाइक से क्लब निकल गया ।

शाम को साढ़े सात बजे जब मैं घर आया तब सभी मतलब डैड , माॅम और रीतु को हाल में बैठे गहन मुद्रा में विचार विमर्श करते हुए पाया ।

" क्या बात है ? सभी इतने गम्भीर क्यों बैठे हैं ?"- मैंने डैड की तरफ देखते हुए कहा ।

" तुमने दिन में रीतु से जो बातें की थी , उन्हीं को लेकर चर्चा हो रही है ।" - डैड ने चिन्तित हो कर कहा ।

" भाई " - रीतु बोली - " मैंने सारी बातें माॅम डैड को बता दी है ।"

" तुमने हमें ये सब पहले क्यों नहीं बताया ?" - डैड ने कहा ।

" आप सभी को सारी बातें तो पता ही थी । अमर के मर्डर केस के बारे में आप सब जानते ही हैं । और आगरा में जो हुआ था , वो भी मैंने माॅम को बताया था " - मैंने माॅम की तरफ देखते हुए कहा -" क्यों माॅम बताया था न ?"

" हां बताया था " - माॅम ने कहा -" लेकिन ये थोड़ी न बताया था कि वहां तुझे मारने की कोशिश की गई थी ।"

" अरे माॅम , मुझे भी कहां पता था कि वहां मुझे मारने के लिए कोशिश की गई थी। रीतु से बात करने से पहले मैं भी यही समझता था कि वहां संजय जी को मारने के लिए गोली चलाई गई थी ।"

" भाई सही बोल रहे हैं माॅम " - रीतु ने कहा - " मैंने बताया तो था आप लोगों को सारी बातें जो भाई और मेरे बीच में हुई थी ।"

" है कौन वो जो तुम्हारे पीछे पड़ा है ।" - डैड ने कहा ।

" मैं " - रीतु ने कहा - " चाय बना के ले आती हूं ।"

रीतु किचन चली गई ।

मैं , डैड और माॅम के साथ - जो बातें दिन में रीतु के साथ हुई थी - वही सब बातें होने लगी ।

रीतु के आने के बाद भी वही सब चर्चा होती रही ।

डिनर का समय हो गया था । हमने एक साथ डिनर किया ।

मैंने डिनर के वक्त सबको समझाया कि ये सारी बातें हमारे बीच में ही रहनी चाहिए । कोई भी किसी को इसके बारे में किसी को नहीं बतायेगा । सभी ने मेरी राय से सहमति जताई ।

डिनर के पश्चात सभी अपने अपने कमरे में चले गए । मैं भी अपने रूम में जाकर कपड़े वगैरह चेंज कर के बिस्तर पर लेट गया ।

रीतु के बातों ने मुझे झकझोर के रख दिया था ।

कौन है वो जो मुझे मारना चाहता है ?

कौन है वो जो मुझे अमर के कतल में फंसाना चाहता है ?

आखिर मैंने ऐसा किया क्या है ?

कौन है जो मेरा इतना बड़ा दुश्मन बना बैठा है ?

अमर ने क्या किया था कि उसे जान से हाथ धोना पड़ा ।

अगर हमने कुछ ग़लत भी किया था तो वो सिर्फ और सिर्फ सेक्स ।

लेकिन सेक्स भी किया तो किसी को दबाव देकर नहीं बल्कि उन युवतियों के रजामंदी से । कभी सपने में भी जबरदस्ती का ख्याल नहीं आया ।

क्या अमर का अनुष्का के साथ सच में रिलेशनशिप था ‌।

लेकिन यदि अमर की रिलेशनशिप अनुष्का के साथ थी भी तो फिर मैं टारगेट क्यों ।

सिर्फ एक युवती थी जिसके साथ मैंने और अजय ने एकसाथ सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाया था लेकिन वो भी कई साल पहले । शायद चार साल हो गए होंगे । लेकिन हमने कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी बल्कि उसी की इच्छा थी कि थ्रीसम करने की ।

तो फिर आखिर में अजय और मेरा कौन ऐसा काॅमन शख्स है जो हमें दुश्मन समझता है ।

कौन है वो चौथा आदमी जिसने पुलिस को अमर के खून होने की सूचना दी ।

कौन है वो खबरी ।

मैंने काजल को कहा था कि रात में चैटिंग करेंगे लेकिन इन परिस्थितियों में में खुद ही टेंशन से भरा हुआ था । मैंने काजल को एक मैसेज कर दिया ।

और मैं घंटों सोचते सोचते समय गुजार दिया ।
 
Update 19.

सुबह नौ बजे नाश्ते के बाद मैं अपनी बाइक लिए चाचा के घर गया । चाची ने कल मुझे नया मोबाइल लाने के लिए कहा था । दरवाजा बंद था । मैंने बेल बजाईं ।

चाचा ने दरवाजा खोला । मैं आश्चर्यचकित हुआ । उन्हें तो ड्यूटी पर होना चाहिए था , ये अभी तक घर पर क्या कर रहे हैं ?

मेरे चाचा जिनका नाम रमेश था , अडतालीस वरषिय करीब दुबले-पतले शख्स जो कि एक नम्बर के खड़ूस और निहायत ही हाट टेम्पर माइंडेड आदमी । एक नम्बर के जेलेसी मैन । जहां मेरे डैड एक सोवर और मिलनसार व्यक्ति थे वहीं चाचा रिजर्व और जलनखोर टाइप के आदमी थे । मैंने शायद ही इन्हें कभी हंसते हुए देखा हो ।

चाचा ने मुझे घुरते हुए कहा -" क्या है ?"

" चाची ने बुलाया था ।" मैंने कहा ।

" किस लिए ?"

" डाइवोर्स के लिए ।"

" क्या मतलब "- वो चौंकते हुए बोले ।

तभी चाची आ गई । वो इस वक्त साड़ी पहनी हुई थी । वो मुझे देखते हैं बोली ।

" अरे सागर बेटा , आओ आओ ।"

" ये क्या कह रहा है ? किसका डाइवोर्स है ?"

" डाइवोर्स " चाची ने चौंकते हुए कहा -" किसका डाइवोर्स ?"

चाचा ने मुझे गुस्से से देखा -" किसका डाइवोर्स ?"

" चाचा मेरे एक दोस्त की मम्मी है , वो अपने पति के रोज के किच किच से परेशान होकर डाइवोर्स लेना चाहती है । वो मुझे किसी काबिल वकील के बारे में पुछ रही थी । मैंने चाची को कहा था इसके बारे में तो इन्होंने कहा था कि कल आना बात करेंगे ।"

चाचा ने मुड़कर चाची को देखा ।

" अरे हां , मैं तो भुल ही गयी थी । कल सागर ने बताया था "- चाची ने बात संभालते हुए कहा ।

मेरा तात श्री इतना भी अक्ल का कोल्हू नहीं था जो इस ब्यंग्य को समझ नहीं रहा था ।

मैं निकल रहा हूं " - चाचा ने मुझे अपने आंखों से भस्म करते हुए नजरों से देख कर बोला - " थोड़ा पढ़ाई-लिखाई पर भी ध्यान दो , ऐसी चीजें पर दिमाग लगाओगे तो जिन्दगी भर भीख मांगते फिरोगे ।"

बोलकर चाचा बाहर निकल गया ।

" उफ़ चाची ! क्या खा के पैदा की थी ऐसे हसबैंड को " - मैं लम्बी सांसें लेते हुए सोफे पर ढेर हो गया ।

" नालायक कहीं का.... मैंने पैदा किया था या तेरी दादी ने । और पैदा किया तो किया ले आके मेरे ही पल्लू से बांध दिया "- चाची ने मेन दरवाजा बंद करते हुए कहा ।

" तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हारी जबरदस्ती शादी करवा दी गई हो । हंटर मार के लग्न मंडप पे बैठा दिया गया हो । कोई प्यार मोहब्बत था ही नही । तो फिर ये आपके प्यारे प्यारे टाबरे ( लड़के और लड़कियां ) कहां से आ गए ।"

" जिस दिन तुम्हारी शादी होगी उस दिन तुम खुद जान जाओगे । जब तुम्हारी शादी भी हमारे जैसे , पुराने जमाने की तरह होगी " - चाची मेरे बगल में बैठते हुए बोली ।

" मेरी शादी आप जैसे किसी हसीना से होती तो मैं अपनी बीवी को चौबिसों घंटा इतना मीठा मीठा बोलता न कि.... इतना मीठा मीठा बोलता न..."

" तो क्या होता ?"

" उसे शुगर हो जाता ।"

" नालायक । हर घड़ी मसखरी करता है "- चाची ने हंसते हुए कहा -" चाय लाऊं ?"

" नहीं । अभी तो नाश्ता किया है । आप ये बताओ कि चाचा ने मोबाइल लाया है कि नहीं ?"

" कहां लाया है । बोलते हैं कि समय नहीं मिला , भुल गया , कल पक्का ही ले आऊंगा । रोज रोज वहीं बहाना ।"

" ओह ! अच्छा चाची क्या चाचा शुरू से ही ऐसे थे न बाद में हुए ।"

" अरे वो शुरू से ही ऐसे थे । तु तो देख ही रहा है ।"

" मैंने तो जब से होश संभाला है तब से ही मैं उन्हें ऐसे ही कठोर और किसी से कोई मतलब नहीं रखने वाला देखा है लेकिन जब आपकी शादी हुई थी तब भी क्या वो ऐसे ही थे ।"

" वो शुरू से ही ऐसे थे । ज्यादा किसी से मतलब नहीं । अपने में ही खोया रहना "- चाची अपने शादी के समय को याद करते हुए बोली " कालेज में खेल कुद में बहुत ही माहिर थे और उन्हें खेलकूद के चलते ही नौकरी भी मिली थी । उन्होंने कई प्रतियोगिताएं भी जीती थी । मेरे मां बाप ने सरकारी नौकरी वाला लड़का देखा और फिर Thanks for supporting friend ?
 
Update 19. Continue.

" वो शुरू से ही ऐसे थे । ज्यादा किसी से मतलब नहीं । अपने में ही खोया रहना " - चाची अपने शादी के समय को याद करते हुए बोली -" कालेज में खेलकूद में बहुत माहिर थे और खेलकूद के चलते ही नौकरी भी मिली थी । उन्होंने कई प्रतियोगिताएं भी जीती थी । मेरे मां बाप ने सरकारी नौकरी वाला लड़का देखा और फिर हमारी शादी हो गई । हमारे जमाने में लड़का लड़की देखने का रिवाज नहीं था । मां बाप अपने लड़के और लड़कियों की शादी फिक्स करते थे और शादी हो जाती थी ।"

" और यदि किसी को लड़का या किसी को लड़की पसंद ना आए तो ?"

" तो भी कुछ नहीं हो सकता था । एक बार शादी हो गई तो हो गई । भले ही लड़का या लड़की एक दुसरे को पसंद आए या ना आए , वे जिन्दगी भर के लिए शादी के डोर से बंध जाते थे । तुम्हारे मम्मी और डैडी की शादी भी तो बिना देखे हुए ही हुई थी ।"

" डैड को तो मैंने माॅम के सामने कभी तेज आवाज में बातें करते या लड़ते झगड़ते नहीं देखा है लेकिन तात श्री को कई बार आपसे लड़ते झगड़ते देखा है । उनके खौफ से श्वेता दी भी उनके सामने नहीं जाती थी । मेरे पुछने का मतलब था कि क्या जब आप की शादी हुई थी तब भी क्या वो ऐसे ही थे ?"

" नहीं नहीं , शादी के शुरुआती कई सालों तक बहुत अच्छे थे लेकिन जब से उन्हें हार्ट की बिमारी हुई तब से थोड़े बदल गये और बची खुची बवासीर के रोग ने कर दिया ।"

" बवासीर ! ये कब हुआ ?"

" छः सात साल हो गए " - चाची अपने कमरे की तरफ जाती हुई बोली -" तु बैठ । मैं पैसे लेकर आती हूं ।"

मैं सोफे पर लेट गया।

थोड़ी देर में चाची आई और सोफे पर मेरे सर के बगल बैठने का प्रयास करी। मेरे लेटने के कारण सोफे पर जगह नहीं था इसलिए मैने उठने का प्रयत्न किया तो चाची ने मेरे सर को उठा कर अपने गोद यानी जांघों पर रख दिया और बोली - " लेटा रह । मैं बैठ जाऊंगी ।"

" आपको बैठने में दिक्कत होगी " - मैंने लेटे हुए उनको देखते हुए कहा ।

" कोई दिक्कत नहीं होगी " - कहकर चाची रूपए मेरे हाथ में पकड़ाई और मेरे सर के बालों को अपनी उंगलिया से सहलाने लगी ।

मैंने अपने सर को उनके मोटे और मांशल जांघों पर एडजस्ट करते हुए रूपए गिनने लगा । बीस हजार रुपए थे ।

" ये तो बहुत ज्यादा है । कौन सी मोबाइल लाना है ?" - कहते हुए रूपयों को अपने पैंट के अंदर रख दिया ।

" कोई भी अच्छी सी देख समझ के ले लेना ।"

" ठीक है । लेकिन चाइनीज मोबाइल नहीं लाऊंगा ।"

" जो तुझे समझ में आए वो ले लेना । "

चाची के जांघों पर सर रखकर लेटने से उनके जांघों का गुदाज पन महसूस हो रहा था जिससे मुझे कुछ कुछ हो रहा था । मैंने करवट ली और उनके पेट की तरफ मुंह करके लेट गया । उनकी साड़ी पेट पर से हट गई थी जिससे उनकी थोड़ी चर्बी युक्त और थोड़ी फुली हुई पेट नग्न हो गई थी । करवट ले कर पलटने से मेरा मुंह सीधे उनके नंगे पेट से सट गया । जिससे उनके बदन में हुई सिहरन को मैंने साफ महसूस किया ।

वो अभी भी मेरे सर के बालों को सहलाए जा रही थी । चाची अभी मात्र ४३ या ४४ साल की थी । इस उम्र में भी औरतों की सेक्स लाइफ पिक पीरियड में रहती है । जबकि चाचा की बिमारी देख कर मुझे नहीं लगता था कि वो अपनी सेक्स लाइफ इन्जवाय कर रही होगी। और शायद कई सालों से ऐसी ही जीवन जी रही होगी ।मुझे उन पर ना जाने क्यों बहुत दया आई और मैंने उनकी नंगे पेट को अपने होंठों से चुम लिया ।

" अरे ! क्या करता है , गुदगुदी होती है " - चाची अपने शरीर को झटके देते हुए बोली ।

" आप को अच्छा नहीं लगता है ? " - कहते हुए मैंने फिर से उनके पेट को चुम लिया ।

वो कुछ नहीं बोली । सिर्फ मेरे बालों पर उंगलियां फेरती रही । हम ऐसे ही अवस्था में कितनी देर तक पड़े रहे । तभी किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी ।

मैं उठ कर बैठ गया । चाची अपने साड़ी को व्यवस्थित करते हुए दरवाजा खोलने चली गई ।

चाची के साथ चाचा ने हाॅल में प्रवेश किया ।

" तुम अभी यहीं हो , कालेज गए नहीं ? " - चाचा ने मुझे देख कर अपनी चिर-परिचित लहजे में कहा ।

" आज कालेज नहीं है । कल श्वेता दी और जीजू यहां शिफ्ट हो रहे हैं उसी के बारे में चाची से बातें चल रही थी ।"

" अच्छा ! थोड़ी देर पहले तो किसी के डाइवोर्स के बारे में बोल रहे थे ।"

" हां । उसके अलावा इसके बारे में भी बातें करनी थी ।"

" ठीक है ठीक है...मुझे भी पता है कि वो लोग ..यहां तुम्हारे उस दोस्त... क्या नाम था उसका.... हां , शायद अमर के घर शिफ्ट हो रहे हैं । तो इस के लिए तुम दोनों को क्या बातें करनी थी ?

" चाचा , वो लोग यहां काफी सारे सामान के साथ शिफ्ट कर रहे हैं । क्या आप ने कोई लेबर वगैरह से बात की है ? इतना सारा सामान जिसमें बड़े बड़े पलंग , आलमारी , बक्से , बर्तनों का कार्टून , बैग और न जाने क्या क्या सामान होगा , वो क्या आप खुद ही करोगे ।"

तात श्री ने मुझे घूर कर देखा और चाची से बोले -" मेरी मोबाइल यहां छुट गया है , देखो वो मेरे रूम में कहीं होगा ।"

चाची कमरे में चली गई । कुछ देर बाद वो चाचा का मोबाइल लिए हुए आई और उन्हें सौंप दी । चाचा मोबाइल लेकर बाहर चले गए ।

" तुमने मुझे ये सब बताया नहीं कि मजदूर देखने होंगे " - चाचा के बाहर निकलते ही चाची ने पूछा ।

" आप चिंता मत करो , मैंने लेबर पहले ही ठीक कर दिया है ।"

" ओह । " - चाची ने थोड़ी देर रूक कर कहा -" देखा न कैसा आदमी है... जहां काम दिखाई दिया , फट से ज़बान बन्द हो गई। कैसे लेबर जुगाड़ होगा... कैसे राजीव और श्वेता को यहां शिफ्ट करने में मदद करना है....उन को तो जैसे कोई मतलब नहीं है...सुना और भाग खड़े हुए ।"

" आप तो उनका स्वभाव जानती हो... छोड़ो उनको... मैं सब कर लुंगा " - मैंने चाची को आश्वासन दिया ।

" हां , कई साल हो गए उनको जानते हुए । अगर तु नहीं होता तो मेरे घर का एक रत्ती भर भी काम नहीं होता....मेरा काम , श्वेता का काम , राहुल का काम.... आज तक तुने ही तो किया है ।"

" मैंने तो जो भी किया है अपनी फेमिली के लिए किया है... छोड़ो वो सब । मैं चलता हूं " - कहकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा ।

" कहां जाओगे ?" - चाची भी मेरे साथ चलते हुए बोली ।

" अमर की मम्मी के पास । वहां रूम वगैरह की सफाई भी तो करवानी है ।"

" ठीक है " - चाची ने कहा ।

***********

मैं वहां से निकल कर अमर की मम्मी के घर चला गया ।

वहां मजदूर उपर वाले तल्ले की साफ सफाई कर रहे थे । आंटी ( अमर की मम्मी ) मजदूरों के साथ ही खड़ी थी ।

मैंने आंटी के चरण स्पर्श कर प्रणाम किया और कहा -" आंटी , एक बार नीचे चलो न , कुछ बात करनी थी ।"

" कैसी बातें ?" - आंटी ने मुझे सवालिए दृष्टि से देखते हुए कहा ।

" अमर के बारे में ।"

आंटी कुछ नहीं बोली ।

मैं आंटी के साथ उनके कमरे में आ गया ।

" क्या बात करनी है ? - वो बिस्तर पर बैठते हुए बोली ।

" आंटी , अमर का मोबाइल कहां है ?" - मैं भी उनके बगल में बैठते हुए कहा ।

" अमर का मोबाइल यहां पर नहीं है । पुलिस भी जब यहां आई थी तब उन्होंने भी मोबाइल के बारे में पुछा था । फिर उन्होंने पुरे घर की तलाशी ली थी । उपर नीचे दोनों तल्लों में । हर जगह लेकिन मोबाइल कहीं भी नहीं मिली ।"

" ओह ! " - मैंने निराश होते हुए कहा ।

" वैसे अमर के क़ातिल का कुछ अता पता लगा ?"

" नहीं आंटी , अभी तक तो नहीं । इसीलिए तो मोबाइल के बारे में आप से पुछ रहा था । उसके काॅल डिटेल से पता चलता कि उसने उस दिन या पिछले कुछ दिनों से किस किस के साथ बात की थी । या कुछ मैसेज वगैरह से पता चलता कि हाल फिलहाल किसके साथ ज्यादा टच में था ।"

" एक महिना से भी ऊपर हो गया लेकिन अभी तक मेरे बेटे के हत्यारे को पुलिस पकड़ नहीं पाई । मुझे तो पुलिस पर यकीन ही नही रहा । मेरा बेटा उपर से मुझे देख रहा होगा और बोल रहा होगा कि मां..मेरा हत्यारा अभी तक खुलेआम घूम रहा है ... क्या उसको सजा नहीं मिलेगी... क्या उसके हत्यारे ऐसे ही खुलेआम बेफिक्र होकर घुम रहे होंगे " - वो भावुक होते हुए रूंधे गले से बोली - " क्या मेरी आत्मा ऐसे ही भटकते रहेगी ।"

" सजा मिलेगी आंटी...जरूर मिलेगी । भगवान के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं । आप थोड़ी हिम्मत बनाएं रखें ।"

" मैंने तो हिम्मत ही बनाए रखा है बेटा.... मैं तो बस इसलिए जिन्दा हूं कि एक बार हत्यारे को फांसी पर चढ़ते हुए देख लूं वर्ना मैं तो उसी दिन अमर के साथ ही ऊपर चली गई होती ।"

आंटी फफक कर रो पड़ी । मेरी आंखें भी भर आई । मैंने उन्हें अपने बाहों में भर लिया और उन्हें दिलासा देते रहा ।

थोड़ी देर बाद वो नोर्मल हुई । वो मुझ से अलग हो गई ।

" बेटा , मैं अपनी सारी दौलत लुटा दुंगी अपने बेटे के हत्यारे को फांसी पर चढ़ाने के लिए । तु पुलिस को पैसे खिला । और यदि तुझे लगता है कि पुलिस हत्यारे को पकड़ने में कुछ नहीं कर पायेगी तो कोई डिटेक्टिव ढुंढ । उसे पैसा दे । वो जितना मांगे मैं उतना दुंगी लेकिन उस खूनी को ढुंढे और मेरे हवाले करे । उसे मै सजा दुंगी । अपने हाथों से उसका खून करूंगी ।" - आंटी क्रोधित होकर बोली ।

" आंटी , मैं कल इसी सिलसिले में गाजियाबाद जा रहा हूं पुलिस से मिलने । और प्राइवेट डिटेक्टिव के बारे में मुझे कोई खास जानकारी नहीं है । हां इतना मैंने सुना है कि वो भले ही काम का रिजल्ट दे पाए या ना दे पाए लेकिन अपना चार्ज ले ही लेंगे और उनके चार्ज भी काफी बड़ी रकम में होती है ।"

" कुछ भी कर पर उस हत्यारे को ढुंढ । रूपए पैसे की चिंता मत कर जितना लगेगा मैं दुंगी । मेरी ये सारी जमा पूंजी , सम्पत्ति किस काम की है...जब मेरा बच्चा ही नहीं रहा तो ये मेरे किस काम की ।"

" मैं कर रहा हूं आंटी । मैं पुरे जतन से खूनी का पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं । और अब तो उस खूनी का अगला टारगेट मैं हो गया हूं ।"

" क्या ?" - आंटी ने चौंकते हुए कहा ।

" हां आंटी ।"

मैंने उन्हें मेरे और रीतु के बीच में जो बातें हुई थी , वो कह सुनाई ।

वो सुनकर चिन्तित होते हुए बोली -" मेरा एक बेटा तो चला गया और अब मैं अपने दुसरे बेटे को खोना नहीं चाहती.... एक मिनट तु बैठ , मैं अभी आती हूं ।"

ये बोलकर वो बिस्तर से उठी और अपनी अलमारी से कुछ निकाल कर वापस बिस्तर पर आकर बैठ गई । मैंने देखा वो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का उनके नाम पर चेकबुक था । उन्होंने एक चेक पर अपना साइन किया और चेकबुक से फाड़ कर मुझे दे दिया ।

" बेटा , इसमें तीन लाख रुपए भर के बैंक से उठा ले । एक लाख मुझे दे देना और बाकी तु अपने पास रख लेना । तु इन पैसों को उस हत्यारे को खोजने में लगा ।"

" ये तो काफी बड़ी रकम है आन्टी ।"

" कोई बात नहीं । और भी यदि ज्यादा पैसों की जरूरत पड़े तो मुझे बताना । "

मैंने चेक पाकेट में रख लिया ।

" बेटा , तुझसे एक बात और कहनी थी ।"

" हां आंटी बोलिए ।"

" कल तुम्हारे जीजा और बहन आ रही है तो मैं चाहती हूं कि इस बीच मैं चारों धाम दर्शन करके आ जाऊं ।"

" चारों धाम ! कौन सी चारों धाम ?" - मैं चौंक कर बोला ।

" बद्रीनाथ , केदारनाथ , गंगोत्री और यमुनोत्री ।"

" ओह ! कब जाएंगी ?"

" वो लोग कल यहां आ रहे हैं तो तु परसों की टीकट करवा दे ।"

" ठीक है आंटी.... मैं अब चलता हूं । वैसे आप को कुछ सामान वगैरह मंगवाना है ?"

" हां । कल आना , बता दुंगी ।"

मैं वहां से बाहर निकल गया ।

************

मैं बाहर निकल कर रमणीक लाल को फोन लगाया ।

रमणीक लाल करोलबाग थाने में हवलदार था । शायद ३५ से ४० के बीच उमर होगा । करप्ट पुलिसिया था । रिश्वतखोरी में फंस गया था , जिसकी वजह से काफी अरसे से सस्पेंशन में चल रहा था । एक बार उसकी कुछ लोगों के साथ पंगे के दौरान मैंने उसकी मदद की थी इसलिए वो मेरी इज्जत करता था । और मेरा दोस्त जैसा हो गया था । जबकि हमारे उम्र में काफी अंतर था । चूंकि अभी वो सस्पेंशन में चल रहा था इसलिए उसका हाथ तंग रहता था ।

" सागर बोल रहा हूं " - मैं बोला - " एक काम है , करेगा ?"

" कैसा काम ?" - रमणीक लाल ने कहा ।

" मामूली काम ।"

" अरे ! पहले काम तो बता ?"

" थोड़ा रूटीन काम है । थोड़ा लेग वर्क है , थोड़ा क्लैरिकल वर्क है । कुछ कमाई का भी जोगाड़ है ।"

" क्या बात है । लगता है कोई लाटरी लग गई है ?"

" वो सब छोड़ , काम करेगा तो हां बोल बरना..."

" अगर इल लैगल काम है तो सुन....मेरा सस्पेंशन का दौर खत्म हो गया है , मेरी नौकरी बहाल हो गई है ।"

" ये तो बहुत अच्छी खबर है । ठीक है मैं किसी और को देखता हूं ।"

" कितना देगा ?"

" रमणीक लाल , काम मेरी मर्जी का और उजरत तेरी मर्जी का ।"

" जरूर कोई मोटा बकरा काटा होगा ।"

मैं हंसा ।

" कुछ लोग की फुल बैक ग्राउंड टटोलनी है । उनके बारे में जितनी ज्यादा जानकारी हासिल हो सके , इकठ्ठा करनी है ।"

" कौन लोग ?"

" इस काम के लिए तुम्हें एक दो आदमी भी एंगेज करने पड़े तो उस की फीस भी मैं भरूंगा ।"

" जरूर , जरूर । कोई मोटा बकरा है ।"

" हां या ना बोल ।"

" हां ।"

" कागज कलम निकाल और जो बोलता हूं , उसे नोट कर ।"

" करा ।"

मैंने उन तमाम लोगों के नाम लिखाये जो इस केस से सम्बंधित थे ।

" सब नोट कर लिया ?" - फिर मैंने पूछा ।

" हां ।"

मैंने सम्बन्ध विच्छेद किया और बाइक पर बैठ कर पहाड़गंज चला गया ।
 
Update 20.

पहाड़गंज जिस काम से मैं गया था वो हुआ नहीं तो मैंने संजय जी के होटल से ही उनको फोन लगाया और उनसे मिलने की इच्छा जताई । उन्होंने बताया कि वो अभी दिल्ली से बाहर है , थर्सडे तक वापस दिल्ली आयेंगे । आज सेटरडे था.... इसका मतलब वो पांचवें दिन वापस दिल्ली लौटेंगे ।

वहां से वापस मैं रोहिणी निकल पड़ा । रोहिणी पहुंचने के बाद उस बैंक में गया जिसमें आंटी का एकाउंट था । पहला सेटरडे होने के कारण बैंक खुला हुआ था । लेकिन न जाने क्यों आज भीड़ ज्यादा थी । पैसे निकालते निकालते तीन बज गए ।

वहां से फिर आंटी के घर गया और उन्हें उन रूपयों में से एक लाख रुपए वापस दे दिए । लेबर अभी भी काम में व्यस्त थे । उनका मजदूरी भी जोड़ जाड़ के काम शेष होने के पहले ही दे दिया । आंटी ने जो सामान मंगवानी थी उसका लिस्ट भी आज ही दे दिया तो वहां से फिर मैं मार्केट चला गया और आंटी के सामानों की खरीदारी कर उन्हें उनके घर देता हुआ अपने घर चला आया ।

जब मैं घर पहुंचा तब चार से कुछ ही मिनट उपर हुए थे । दरवाजा माॅम ने खोला था । माॅम ने खाने के लिए पुछा तो मैंने मना कर दिया । मैं सीधे अपने कमरे में चला गया । और बिना पैन्ट शर्ट चेंज किए बिस्तर पर लेट गया ।

मै हैरान था कि आखिर कल से माॅम ने मेरे मैसेज का कोई रियेक्सन क्यों नहीं दिया । वो मैसेज देख ली है , ये तो साफ कन्फर्म है ... और उस युवती का नाम भी पढ़ ली है जिसके बारे में मैंने बताया था कि नाइटी उस युवती के लिए लाया हूं और उसके साथ मेरा सेक्सुअल रिलेशन है और और वो युवती उनके जान पहचान में ही है । फिर भी उसके बारे में अभी तक मुझसे कुछ पुछा क्यों नहीं... मुझे फटकारा क्यों नहीं...। हो सकता है ये सब पुछने के लिए उन्हें समय ना मिला हो ।

माॅम को ह्वाट्सएप करने के बाद और फिर ताजातरीन घर में हुई चर्चा के बाद माहौल भी तो बदला था । शायद अभी उन सब बातों से ज्यादा उन्हें मेरी सलामती की फ़िक्र सताए जा रही हो । यही कारण हो सकता है कि उनके अभी तक नहीं पुछने का ।

सोचते सोचते मेरी आंख लग गई । पांच बजे माॅम ने जगाया । डैड और रीतु भी घर आ चुके थे । चाय नाश्ते के बाद मैं क्लब चला गया ।

फिर वही सब जो वहां रोज होता है । लड़के और लड़कियों को ट्रेनिंग देना । ट्रेनिंग खत्म होने के बाद आफिस जाना । आज भी मालिक कम मैनेजर कुलभूषण खन्ना नहीं था । वहां से वापस घर आ गया ।

माॅम और रीतु रात के खाने की तैयारी कर रही थी जबकि डैड हमेशा की तरह टीबी के सामने बैठे अपने पसंदीदा चैनल पर डेली ओपेरा सिरियल का लुत्फ उठा रहे थे । मैं सीढ़ियों से होता हुआ अपने कमरे में चला गया और पैंट शर्ट खोलकर पायजामा और हल्का शर्ट पहन लिया ।

अभी सात ही बजे थे । मैंने सोचा श्वेता दी को कल अपने गाजियाबाद आने की सूचना तो दी ही नहीं । मैं कमरे से बाहर निकल कर खुले छत पर आया , एक सिगरेट सुलगाया और उन्हें फोन लगाया ।

दो रिंग बजते ही उन्होंने फोन उठाया ।

" हैलो !" - श्वेता दी की मधुर आवाज़ आई ।

" क्या कर रही हो तुफाने हमदम ?"

" डिनर की तैयारी कर रही हूं....तु बता वहां क्या खबर है ?"

" कोई खास नहीं । और बताओ तुमलोग की पैकिंग शैकिंग हो गई ?"

" वो तो कल ही हो गई । बस कुछ बर्तन , कपड़े और कुछ खुचरा सामान बाकी है , वो सब कल कर लेंगे ।"

" पलंग खोल दिया है क्या ?"

" हां । कल हम जमीन पर ही चादर डाल कर सोये थे ।"

" और गाड़ी वगैरह ?"

" गाड़ी भी बुक हो गई है । हम कल सुबह दस बजे यहां से निकल भी जायेंगे ।"

" सुनो , मैं कल वहां आ रहा हूं । मेरे वहां पहुंचने के बाद ही निकलना है ।"

" क्यों ? क्या हुआ ? ...कोई काम है क्या ?"

" हां । थाने में थोड़ा काम है । वैसे मैं तुम्हारे पास ग्यारह बजे तक पहुंच जाऊंगा ।"

" देर नहीं हो जायेगी ?...वहां पहुंच कर सामान सब रखवाना है , एडजस्ट करवाना है ।"

" कुछ भी देर नहीं होगा । यहां के लिए मजदूर कर दिया है , एकाध घंटे में वो सब रख देंगे । और बाकी रहा एडजस्ट करने का वो धीरे धीरे बाद में करने के लिए तुम्हारे दो आशिक तो है ही ।"

" दो नहीं सिर्फ एक है ।"

" अपने हसबैंड को काम करने से बचाना चाहती हो ?"

" वो यहां रहेंगे तो न काम करेंगे ।"

" क्यों ? अमेरिका , युरोप जा रहे हैं ?"

" नहीं । मुम्बई जा रहे हैं ।"

" अरे ! किस्त किस्त में क्या बोल रही हो । साफ साफ बताओ ना ?"

" आज सुबह इनके आफिस से इनके बाॅस का फोन आया था तो वो सुबह आफिस चले गए थे । वहां बाॅस ने इन्हें मुम्बई में कम्पनी के डेलीगेट मीटिंग में शामिल होने को कहा है । वो मीटिंग बुधवार से शुरू होगी जो तीन चार दिनों तक चलेगी । इसलिए ये दिल्ली से सोमवार को ही निकल जायेंगे ।"

" लेकिन जीजू तो छुट्टी पर थे ना ?"

" ये बहुत ही अर्जेंट काम है इसलिए इन्हें जाना ही पड़ेगा । वैसे भी इनकी तबीयत ठीक हो ही गई है और सोमवार से ज्वाइनिंग भी करनी ही थी ।"

" जीजू अभी घर पे ही है ?

" नहीं । दोस्तों से मिलने गए हैं , अब आते ही होंगे ।"

" मुम्बई जाने का मतलब सात आठ दिन जीजू घर से बाहर...वाह ! और घर पर सिर्फ़ हम तुम ।"

" क्या हम तुम ?"

" हम तुम एक कमरे में बंद हो और चाबी खो जाय " - मैंने बाॅबी मूवी का गाना गाया ।

" बड़ा शौक है ना ! और तुम्हारे साथ मैं क्यों कमरे में बंद हुंगी , आन्टी है ना... उनके साथ रहुंगी ।"

" आंटी भी मंगलवार से चार धाम के यात्रा पर जा रही है । समझी ! एक हफ्ते तक...अब मैं ही तुम्हें बजाऊंगा... मुझे तो सोच सोच के न जाने क्या क्या हो रहा है ।"

" बड़ा आया बजाने वाला । मैं मम्मी को बुला लुंगी ।"

" चाची को बुला लोगी तो चाचा और राहुल का देखभाल कौन करेगा ? तुम करोगी ?...चाचा का मुड तो वैसे ही हर समय दुर्योधन के गुस्से जैसा रहता है... इधर तुमने चाची को अपने घर बुलाया उधर तात श्री रासन पानी लेकर चाची के पीछे पीछे तुम्हारे घर में ।"

" मैं उर्वशी को बुला लुंगी... वैसे भी संजय जी भी कहीं बाहर गए हैं तो वो पक्का आ जायेगी ।"

" वाह वाह ! दो फुल एक माली....मजा आ जायेगा ।"

" हमें फुल समझने की गलती मत करना बेटा...गन्ने की तरह चुस डालेंगे ।"

" मैं तो कब से तैयार बैठा हूं मम्मी कि कोई मुझे गन्ने की तरह चुस डाले । तुम पहले यहां आओ तो जानेमन ।"

" आ रही हूं बेटा... थोड़ा सब्र कर.... बस दो ही दिन की तो बात है ।"

" मैं तो बस सब्र ही किए जा रहा हूं कि कब आवोगी और मैं तुम्हें कब आगे पीछे दोनों साइड से बजाऊं ।"

" खबरदार जो दोनों साइड के बारे में सोचा... पीछे के बारे में भुल कर भी मत सोचना ।"

" पीछे के बारे में क्या बुराई है ?.... आजकल सारी लड़कियां करवाती है ।"

" मुझे औरों के बारे में नहीं सोचना... मैं सिर्फ अपने बारे में कह रही हूं.... मुझे तो सोचकर ही कंपकंपी छूट जाती है ।"

" अरे कुछ नहीं होता... लड़कियो को लड़कों से भी ज्यादा मजा आता है । ब्लू फिल्म में नहीं देखी है ?"

" मुझे बेवकूफ मत बनाओ... मुझे सब पता है । बाप रे ! वो इतना छोटा और तुम्हारा इतना बड़ा.... जायेगा ही नहीं , अगर भुले भटके चला भी गया तो वो मेरी जिंदगी का अन्तिम दिन ही हो जायेगा... असम्भव...नो...नेभर ।"

" बेकार में टेंशन ले रही हो... कुछ नहीं होता... हां , पहली बार थोड़ा सा दर्द होगा और वो तो आगे वाली सील भी टुटने से होता है । इसमें भी सेम वैसा ही होगा । और एक बार ले लिया न तो खुद ही कुद कुद कर कहोगी कि मेरे पीछे ढुकाओ ।"

" मैं ऐसा कभी नहीं कहने वाली हूं । और तुम भी कोई जबरदस्ती नहीं करोगे ।"

" जैसी आप की इच्छा स्वीट हार्ट । वैसे पीछे करवाना स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक होता है ।"

" अच्छा ! भला वो कैसे ?"

" जिन्दगी में कभी पाइल्स की बिमारी नहीं होगी ।"

" फिर कोई उल जलूल तर्क देगा । फिर भी बता कैसे पाइल्स नहीं होगी ?"

" पाइल्स में जानती हो न कि क्या होता है ?"

" हां , जानती हूं ।"

" क्या होता है ?"

" वो लैट्रिन के रास्ते में घाव हो जाता है और वहां से खून निकलने लगता है ।"

" ठीक कहा लेकिन लैट्रिन के रास्ते में घाव क्यों हो जाता है ?"

" मुझे क्या पता । तु ही बता ?"

" हम जब लैट्रिन करते हैं तब ना हमारे मलद्वार से कभी मल पतला निकलता है तो कभी मोटा तो कभी सही तरीके से ... जानती हो न..।"

" छी...छी... मुझे नहीं सुनना तेरी ये गन्दी बातें ।"

" अरे भाई सुन तो पहले... फिर बाद में गन्दी अच्छी करते रहना ।"

" बक ।"

" पतला और मोटा मल निकलना पेट की बिमारी के कारण होता है ।"

" वो सभी को पता है । तु पाइल्स के बारे में बता ?"

" जब लैट्रिन होते वक्त मल मोटे मोटे हार्ड रूप में निकलने लगता है तो उससे गुदा छिद्र छील जाता है । और यही यदि अक्सर होने लगे तो वो जगह छिलते छिलते घाव का रूप अख्तियार कर लेता है । और इसी घाव के कारण वहां से खून का रिसाव होने लगता है । और यही पाइल्स कहलाता है । ये बिमारी यदि ज्यादा बदतर पोजीशन में चला जाय तो कैंसर भी बन जाता है ।"

" तो पीछे वाले हिस्से में करने से इस बिमारी का क्या मतलब ?"

" पीछे करने से गांड़ का छोटा छेद बड़ा हो जाता है और छेद बड़ा होने से मल कितना भी मोटा क्यों न हो फ्रिक्वैटंली बड़े आराम से बाहर निकल जाता है । और जब मल बिना विध्न वाधा के बाहर निकल जाए तो थोड़ी न मल छिद्र में कोई खिंचाव आयेगा या कोई जख्म बनेगा । और जब जख्म नहीं होगा तो पाइल्स भी नहीं होगा ।"

" ये सब डाक्टर ने बताया ?"

" नहीं । ये मेरी थियुरी है ।

" कमीने , कुत्ता , बदमाश......."- वो गरम हो कर बोली ।

" शान्त बालिके... शान्त " - मैंने हंसते हुए कहा ।

" कितना गन्दा थियुरी है ।"

" अच्छा यदि तुम्हें विश्वास नहीं है तो किसी डॉक्टर से पुछ लो... वैसे एक डाक्टर है मेरी नजर में... डॉ. चुतिया । बहुत ही काबिल डाक्टर है । उनके सैकड़ों किताबें भी मार्केट में उपलब्ध है ।"

( साॅरी डॉ साहब ये मैंने आपसे बिना इजाजत लिए लिख दिया )

" जरूरत नहीं है मुझे किसी डॉक्टर वाक्टर से पूछने की । और यदि ऐसा ही है तो तु खुद ही क्यों नहीं मरवा लेता ? तुझे कभी बवासीर नहीं होगा ।"

" तुम यदि लड़का होती तो मरवा भी लेता ।"

" कोई बात नहीं , वहां आने के बाद तेरी ये इच्छा मैं फिर भी पुरी कर दुंगी "

" तुम अपनी इच्छा पूरी करना और मैं अपनी इच्छा पुरी करूंगा ।"

" नो वे ।"

" तेरा पीछा ना छोडूंगा सोनिये , भेज दे चाहे जेल में..."

" ये क्या है ?"

" गाना है और क्या है ।"

" सुन , मैं फोन रखती हूं , शायद वो आ गए हैं ।"

" ओके । बाॅय एंड स्वीट ड्रीम्स ।"

" सेम टू यू ।"

उन्होंने फोन काट दिया ।

फिर कुछ खास नहीं हुआ । डिनर के पश्चात सभी अपने अपने कमरे में चले गए । मैं भी अपने कमरे में चला गया । सुबह जल्दी ही निकलना था इसलिए सोने की कोशिश करने लगा ।
 
फ़ायरफ़ॉक्स भाई.... बहुत बहुत आभार । ?
मैं आपको इस फोरम पर कई सालों से जानता हूं कि आप एक बहुत ही उम्दा किस्म के क्रिटिक है और एक बार फिर ये बात साबित हो गई ।
असहमति , मतभेद , वैचारिक भिन्नता , वाद विवाद आदि की हमारे यहां एक मजबूत परम्परा है और ये आवश्यक भी है ।
जैसे कि मैंने पहले कहा था कि ये मेरा प्रथम प्रयास है कहानी लिखने का । यदि इस कहानी को निबंध के तौर पर लिखता तो शायद हर किरदार की हरकतें पाठकों को प्रत्यक्ष रूप से दृष्टिगोचर होती । लेकिन ये कहानी निबंध से अधिक " संवाद " के माध्यम से अधिक चल रही है और वो भी कहानी के मुख्य नायक " सागर " के नजरिए से ।
जहां जहां सागर है कैमरे का फोकस वहीं है ।
अतः आपके कई सवालों का जवाब तो इस मैसेज से ही मिल जाना चाहिए । कौन कहां है ? कौन क्या कर रहा है ? कौन क्या सोच रहा है ? ये सब नायक को थोड़ी न पता है ।
वो एक आम बन्दा है जो मस्ती करता है , इनसेस्ट सोच रखता है , काम के लिए समर्पित है और अभी हालात के मारे अपने दोस्त के क़ातिल का पता लगाने की कोशिश कर रहा है ।
अमर की फेमिली के बारे में मैंने पहले ही बताया था कि उन मां बेटे के अलावा उनका दुनिया में और कोई भी नहीं है ।
अमर की मम्मी सागर को अपने बेटे के समान ही प्यार करती है । अमर के मरने के बाद वो सागर पर अधिक निर्भर है । उसे सागर पर अटूट विश्वास है इसलिए उसके किसी भी बात या फैसले से एतराज नहीं है । राजीव और श्वेता के अपने घर पर पनाह देने से भी उसे आपत्ति नहीं है । वैसे राजीव अभी तक अपराधी साबित नहीं हुआ है ।
कुलभूषण एक उम्रदराज आदमी है जिसने एक हुर , अपने से लगभग आधे उम्र की लड़की से शादी किया है । और अपनी बीवी के बेवफाई जानने के बाद भी अपनी बीवी से न पुछ कर सागर से वाद विवाद किया जिसके फलस्वरूप सागर को उसके मनोस्थिति का आभास हुआ और सागर को यह पता लगा कि वो अपनी बीवी को उसके बेवफाई के बावजूद भी बहुत प्यार करता है । शायद अब इस उम्र में वो अपनी बीवी खोना नहीं चाहता ।
श्वेता भी कौन सी दुध की धुली हुई है । वो तो अपने हसबैंड से भी कहीं उपर उठकर अपने कजन भाई के साथ संसर्ग का सुख भोग प्राप्त करना चाहती है । और जैसे कि मैंने पहले ही कहा है राजीव और श्वेता के बीच क्या क्या बातें हो रही है , उनके बीच अनुष्का को लेकर कोई बखेड़ा हुआ है या नहीं ये अभी नायक को पता नहीं । और अगर नायक को पता नहीं तो फिर पाठकों को कैसे पता होगा । हो सकता है बाद में सागर का श्वेता से बात हो तो कुछ मालूम चले ।

लास्ट में आप ने बवासीर वाला प्वाइंट उठाया । गलती तो किसी से भी हो सकती है... मैंने पाइल्स की जगह पायरिया का इस्तेमाल कर दिया... जिसे मैंने तुरंत दुरूस्त भी कर दिया । ये एक मानवीय भुल है जिसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं ।
ये एक इनसेस्ट कहानी है जिसमें रिश्तेदारों के बीच कई तरह की नोंक झोंक , कई तरह की हरकतें , कई तरह की अश्लील जोक्स , थोड़ी सी कहीं रोमांटिक तो थोड़ी सी कहीं फुहड़ता दर्शाई गई है ।
और लास्ट वाला पैराग्राफ उसी का एक हिस्सा था । ये एक सिम्पल सा मजाक था जिसे शायद पाठकों ने पसंद नहीं किया ।
इस के लिए एक बार फिर से क्षमा प्रार्थी हूं और कोशिश करूंगा कि नेक्स्ट बार ऐसा न हो ।

धन्यवाद भाई.....
 
Update 21.

सुबह की किरणें रोशनदानों से होती हुई मेरे चेहरे पर पड़ी तो मेरी आंखें खुल गईं । मोबाइल पर नजर डाली , पांच बज रहे थे । बिस्तर छोड़ कर नित्य कर्म से निवृत्त हुआ । थोड़ी बहुत एक्सरसाइज की । आज सन्डे था तो डैड की छुट्टी थी । रीतु को भी कालेज नहीं जाना था । मैं नीचे हाल में पहुंचा तब वहां पर अभी कोई भी नहीं था । शायद छुट्टी के कारण अभी किसी ने बिस्तर नहीं छोड़ा था । मैं वापस अपने कमरे में चला गया और बिस्तर पर लेट गया । लेटे लेटे झपकी लग गई ।

माॅम की आवाज सुनकर निंद टुटी ।

" क्या बात है ? इतने देर तक सोये हुए हो... गाजियाबाद नहीं जाना है क्या ?" - माॅम बिस्तर पर बैठते हुए बोली ।

" जाना है माॅम..." - मैंने घड़ी के उपर निगाह उठाई , आठ बज चुके थे ।

" तबीयत तो ठीक है ना ?"

" हां । ठीक है... मैं तो बहुत पहले ही उठ गया था , फ्रेश होकर दुबारा सो गया था ।"

मैंने देखा माॅम ने मेरी लाई हुई नाइटी जो पुरे बदन को ढकने वाली थी , पहनी हुई थी । वो नहा धो कर काफी फ्रेश और ताजगी से भरी हुई लग रही थी ।

" हाॅल में ही चल... नाश्ता लगाती हूं " कहते हुए वह उठ खड़ी हुई ।

" माॅम , वो जो मैंने आपको मैसेज किया था...."

" बाद में बात करेंगे " - माॅम ने मेरी बात पुरी होने से पहले ही टोक दिया ।

फिर हम दोनों नीचे हाल में गये । डैड और रीतु सोफे पर बैठ कर चाय पीते हुए टीबी में न्यूज चैनल देख रहे थे । मैंने डैड से उनकी कार की चाभी मांगी फिर नाश्ता करके उपर अपने कमरे में चला गया । कपड़े वगैरह पहने । फिर इंस्पेक्टर कोठारी को फोन लगाया और आज उनसे मिलने की इच्छा जताई । इंस्पेक्टर ने मुझे दस बजे के बाद आने को कहा ।

घर से साढ़े आठ बजे मैं निकल गया । चाची के घर के सामने कार खड़ी की और कार से उतर कर उनके घर चला गया । बेल बजाने पर राहुल ने दरवाजा खोला । मैंने उससे चाची के बारे में पुछा तो उसने किचन की तरफ इशारा किया और बाथरूम में नहाने के लिए चला गया । चाचा घर पर नहीं थे । मैं किचन में गया । चाची साड़ी पहनी हुई थी । और गर्मी के कारण साड़ी के पल्लू को कमर में लपेट लिया था । उनके बदन पर पसीने की बूंदें दिख रही थी । वो इस वक्त चूल्हे के पास खड़े खड़े सब्जी बना रही थी ।

मैं किचन में दाखिल हुआ और उनको पीछे से अपने बाहों में कसते हुए बोला -" क्या कर रही हो चाची ?"

चाची चिहुंक उठी और मुझे देखते हुए बोली -" नालायक , डरा ही दिया था ।"

" क्यों ? मैंने ऐसा क्या किया कि डर गई " - कहते हुए मैं उनसे और चिपक गया । लेकिन मेरा कमर से निचले वाला हिस्सा उनसे दूर ही था ।

" ऐसे अचनके में पकड़ेगा तो डर लगेगा नहीं ?"- वो कुकर में सब्जियों को तलते हुए बोली ।

" ठीक है , आगे से आपको पुछ कर पकडूंगा "- कहते हुए मैंने एक छोटी सी थैली उनको पकड़ा दी ।

" क्या है ये ?"

" आप की मोबाइल ।"

वो सब्जी बनाना छोड़ कर थैली से मोबाइल निकाली । मैं उनसे पीछे वैसे ही चिपका रहा ।

" बहुत अच्छी मोबाइल है "- वो मोबाइल देखते हुए बोली ।

" आप से अच्छी नहीं "- कहते हुए मैंने अपनी दाहिना हाथ आगे बढ़ा कर उनके नंगे चर्बी युक्त पेट पर रख दिया । नंगे पेट पर हाथ पड़ते ही वो सिहर सी गई ।

" क्या कर रहा है ? छोड़ ना.... मेरी सब्जी जल जाएगी "- कहते हुए मोबाइल को किचन के स्लैब पर रखते हुए बोली ।

" मैंने क्या आपको सब्जी बनाने से रोक रखा है ?" - इस बार मैंने हिम्मत करते हुए उनके गदराए हुए पेट को मुठ्ठी से हल्के से दबा दिया जिससे वो ' उंह ' कर बैठी । पसीने से उनका पेट भींगा हुआ था ।

" तु अभी श्वेता के यहां जा रहा है न " - वो दुबारा सब्जियों पर ध्यान देते हुए बोली ।

" हां । वहां जाकर उनकी भी थोड़ी हेल्प कर दूं ।"

" तुझे वहां जाने की क्या जरूरत है । राजीव तो है ही , वो सब सम्भाल लेगा ।"

" सम्भाल तो लेगा लेकिन मेरा भी वहां कुछ पर्सनल काम है तो सोचा एक पंथ दो काज हो जाय " - कहते हुए मैंने अपनी बीच वाली उंगली से उनके गहरी नाभि के अगल बगल सहलाने लगा ।

वो बुरी तरह कांप गई ।

" छोड़ ना ! राहुल नाश्ते के लिए आता ही होगा " - वो कसमसाते हुए बोली ।

" राहुल अभी अभी बाथरूम में गया है "- कहते हुए अपनी उंगली को धीरे-धीरे उनके नाभी के आसपास सहलाते रहा ।

वो चुपचाप वैसे ही खड़ी रही तो मैंने थोड़ी और हिम्मत की । अपने कमर के निचले हिस्से को भी उनके पिछवाड़े से सटा दिया । और उनसे लगभग पूरी तरह चिपक गया । उनके बड़े बड़े पिछवाड़े का स्पर्श पाकर मेरा लिंग पुरी तरह तन गया । मुझे अंदाजा तो था कि वो मेरे लिंग को जरूर महसूस कर रही होंगी ।

तभी उनके दरवाजे की घंटी बजी । वो हड़बड़ा कर मुझसे अलग हुई । मैंने उनके चेहरे को देखा । उनका चेहरा तमतमाया हुआ था ।

" कौन है ? - मैंने पूछा ।

" शायद तेरे चाचा होंगे " - वो मुझसे नज़रें चुराती हुई बोली ।

मैं किचन से बाहर निकल गया । दरवाजा खोला । तात श्री ही थे ।

" शाम को घर पर ही रहिएगा... कहीं दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने मत निकल जाइएगा... श्वेता दी आ रही है , कोई काम वाम पड़ सकता है " - तात श्री को बोलकर बिना उनका जबाव सुने मैं बाहर निकल गया ।

सवा दस बजे मैं गाजियाबाद के उस पुलिस स्टेशन में पहुंचा जहां इंस्पेक्टर कोठारी की पोस्टिंग थी । वो अपने केबिन में बैठा लेंड लाईन फोन पर किसी से बातें कर रहा था । मुझे देखते ही सामने विजिटिंग चेयर पर बैठने का इशारा किया । मैं चुपचाप बिना कुछ कहे चेयर पर बैठ गया ।

करीब दस मिनट तक फोन पर बिजी रहा फिर फोन को रख कर मेरे तरफ़ प्रश्न सूचक दृष्टि से देखा ।

" हूं " - कोठारी बोला -" अब बताओ , क्या कहना चाहते हो ?"

मैंने आगरा में हुए संजय जी के रिसेप्शन का सारा हाल कह सुनाया ।

" तो तुम कहते हो कि वहां किसी ने तुम्हें जान से मारने की कोशिश की ।"

" सर , मैं अभी भी कन्फ्यूजन में हूं । मैंने आपको बताया कि ये मेरी बहन के साथ हुई बातों से निकल कर हमने निष्कर्ष निकाला । लेकिन क्या आपको अमर केस का सम्बन्ध आगरा से सम्बंधित लगता है ।"

" मैं बात करता हूं वहां के इंचार्ज से । वैसे तुमने कोई गैरकानूनी हरकतें तो नहीं न कर दी है । कोई ग़लत शलत काम ।"

" सर मुझे तो याद नहीं है कि मैंने ऐसा कोई ग़लत काम किया है कि कोई मेरे जान का प्यासा हो जाए ।"

" कुछ तो बात जरूर है... कहीं न कहीं तुम ने या तुम दोनों दोस्तों ने कुछ ऐसा घपला किया है या कुछ ऐसा देख लिया है जो नहीं देखना चाहिए था शायद इसीलिए ये सब हो रहा है । यदि ऐसा कोई भी बात है तो मुझे निसंकोच बताओ ।"

" सर मैं हर बार कहूंगा कि मैंने कुछ भी नहीं किया है । जब किसी की जान पर पड़ जाय तो कौन झुठ बोलेगा ।"

" कालेज में कहीं ड्रग्स वगैरह का कोई चक्कर तो नहीं था ।"

" मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी ड्रग्स देखा ही नहीं है तो इसके बारे में क्या बोलूं ।"

" देखा नहीं है सुना तो जरूर होगा।"

" हां सर सुना है ।"

" क्या सुना है ?"

" ड्रग्स के नाम जैसे गांजा , अफीम , हिरोइन , एल एस डी , हशीश , मार्फिन , मारेजूआना , कोकीन , ब्राउन सुगर , चरस , हेलीपेरीडोल , बारबीटुरेक्स २।"

" हेलीपेरीडोल , बारबीटूरेक्स २ ये क्या है ।"

" सर मैंने कहीं पढ़ा था कि इसके चार डोज हाथी को भी चार घंटे के लिए बेहोश कर देते हैं ।"

" अच्छा ! और क्या जानते हो इसके बारे में ?"

" ये रंगहीन होता है , टेस्ट हिन होता है , मैंने कहीं पढ़ा था कि अक्सर ट्रैन में यही सब चाय सिगरेट पान आदि में थोड़ा सा लगा कर लुटेरे यात्रियों को लुट लेते हैं । एक हल्का सा इसका अंश आदमियों को सैकड़ों घंटे बेहोश कर सकता है ।"

" तुम तो बहुत कुछ जानते हो ।"

" सर कुछ कुछ जानता तो हर चीज के बारे में हूं लेकिन वो भी पुरा सच है या नहीं ये मुझे नहीं पता ।"

इंस्पेक्टर कोठारी खामोश रहा । वह कुछ क्षण खामोशी से बैठा एक हाथ से कुर्सी का हत्था ठकठकाता रहा और फिर एकाएक बोला -

" अगर तुम्हें लगता है कि पुलिस प्रोटेक्शन चाहिए तो मैं इंतजाम किए देता हूं ।"

" नहीं सर । मुझे फिलहाल पुलिस प्रोटेक्शन नहीं चाहिए लेकिन मैं आपसे कुछ मेरी शंकाएं है जो कि पुछना चाहता हूं ।"

" पुछो ।"

" सर, पहले तो मैं जानना चाहता हूं कि किसी के कत्ल की जांच आप लोग किस तरह से करते हैं ?"

" नियमों के मुताबिक पुलिस कोई भी घटना होने के बाद तुरंत वैज्ञानिक सबूत एकत्रित करने के लिए फाॅरेंनसिक लैव को सूचना देती है । इसके अन्तर्गत वाॅयोलोजिकल एक्सपर्ट , फिजिकल डिविजन , फाॅरेंसिक फोटोग्राफी की टीम जांच करती है । और यदि गोली चलाने जैसी कोई घटना होती है तो उसकी वैलेस्टिक जांच भी की जाती है । पैराफिन टेस्ट भी होता है.... इसके बारे में उस दिन मैंने बताया भी था ।"

" थैंक यू सर ये बताने के लिए । और एक बात और बता दें तो बड़ी मेहरबानी होगी ।"

" क्या ?"

" अमर के कत्ल के बाद आपकी जांच रिपोर्ट क्या कहती है ?"

इंस्पेक्टर ने अपने एक हवलदार को बुलाया और अमर केस की फाइल मंगवाया ।

" मौत करीब दस और साढ़े ग्यारह के बीच में हुई है । और गोली करीब छः फुट की दूरी से चलाई गई है । " वो फाइल पढ़ते हुए बोला -" और फ्लैट के अन्दर ऐसा कोई भी सुराग नहीं मिला है जिससे हमें क़ातिल को ढुंढ ने में मदद मिले । उसके शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं है । ना ही उसके शरीर में कोई जहर पाया गया है ।"

" आप लोग ये अंदाजा कैसे करते हैं कि मौत इन समयों के बीच में ही हुआ है ।"

" डेड बोडी के टेम्परेचर और लास्ट टाइम पर किए गए भोजन के डाइजेस्ट के रिसर्च पर । इसके अलावा भी और कई तरह की जांच होती है ।"

" और सर गोली छः फुट की दूरी से चलाई गई है तो क्या इसका भी कोई जानने का प्रोसिजर है ।"

":हां । इसका भी प्रोसिजर है । डिस्टेंस में थोड़ा बहुत डिफरेन्स आ सकता है ।"

" मैंने सुना है कि कुछ लोग कई गोली खाने के बाद भी मरते नहीं है लेकिन ऐसा क्या हो गया कि वो सिर्फ एक ही गोली से मर गया ।"

" ये डिपेंड करता है कि गोली ‌शरीर के किस हिस्से में लगी है । अमर को गोली ठीक उसके हार्ट पर लगी है तो इसमें उसका बचना असम्भव था । "

" इसका मतलब कि किसी तजुर्बेकार आदमी ने गोली चलाई होगी ?"

" बिल्कुल और जैसा कि तुमने बताया आगरा में वहां भी किसी एक्सपर्ट ने ही गोली चलाई मालूम पड़ती है ।"

" मतलब जिसने भी ये कत्ल किया है वो हथियार चलाने में सक्षम है ।"

" बिल्कुल ।"

" एक बात और... यहां थाने में मुखबिर ने अमर के कत्ल के बारे में एग्जेक्ट क्या कहा था ?"

" सेक्टर न. ७ राजा पैलेस फ्लैट नं १३१ मैं गोली चलने की आवाज आई है ।"

" सर , एक बात बताओ वो छ मंजिला इमारत है जिसमें हर फ्लोर पर तीन तीन फ्लैट है । उसे एग्जैक्ट कैसे पता कि उस छः मंजिला इमारत के उसी फ्लैट में गोली चलने की आवाज आई है । बगल में दो फ्लैट है तो उनमें से किसी ने गोली चलाने की आवाज क्यों नहीं सुनी । आपने तो बगल के फ्लैट में भी पता किया होगा । उन लोगो का क्या कहना था ।"

" बगल ही नहीं बल्कि पुरे बिल्डिंग में किसी ने भी गोली की आवाज नहीं सुनी । हमने सभी से इन्क्वायरी की है ।"

" जब बगल वाले फ्लैट में किसी ने गोली की आवाज नहीं सुनी तो आपका वो मुखबिर भला कैसे गोली की आवाज सुन लिया । मान लीजिए क़ातिल ने साइलेंसर का इस्तेमाल किया होगा शायद इसीलिए फ्लैट में रह रहे लोगों ने गोली की आवाज नहीं सुनी लेकिन यदि साइलेंसर का इस्तेमाल किया गया है तो उस मुखबिर ने कैसे सुन ली ।"

" बरखुदार... हमें हमारी ड्यूटी मत समझाओ... ये हम भी जानते हैं और इसीलिए तुम और तुम्हारे जीजा को हमने अरेस्ट नहीं किया । वो मुखबिर हमारे टारगेट पर है... और पुलिस उसकी तलाश कर रही है ।"

" और सर... वहां मिले फिंगरप्रिंट के बारे में क्या कहना है ?

" वहां से हमें सात लोगों का फिंगरप्रिंट और फुटप्रिंट मिला है जिसमें तुम्हारा , तुम्हारे जीजा , तुम्हारी बहन श्वेता , अनुष्का , और तुम्हारा मरहूम दोस्त अमर का मिलान हो चुका है लेकिन बाकी के दो कौन है , ये अभी तक मालूम नहीं हो पाया है ।

मेरी सिगरेट पीने की इच्छा तलब करने लगी तो मैंने इंस्पेक्टर से इजाजत मांगी ।

" यहां नहीं " - कोठारी ने कहा -" बाहर चलते हैं... मैं भी पियूंगा ।"

हम उसके केबिन से बाहर निकल आए और थाने के कैम्पस में ही एक जगह खड़े हो गए । मैंने सिगरेट का पैकेट निकाला और उसमें से एक सिगरेट निकाल कर कोठारी को दिया और एक अपने लिए निकल लिया । मैंने पहले उसकी सिगरेट सुलगाई फिर अपनी ।

" सर मेरे पास आपके लिए एक प्रपोजल है " - मैंने सिगरेट का एक गहरा कश लेते हुए कहा ।

" क्या ?"- वो चौंकते हुए बोला ।

" मरहूम अमर की मम्मी के तरफ से यदि आप या आपकी पुलिस अमर के क़ातिल को गिरफ्तार करती है तो उनके तरफ से एक छोटा सा नजराना बतौर गिफ्ट पेशकश है ।"

" मैंने ये वर्दी नजराना या ईनाम के लिए नहीं पहनी है " - कोठारी गरम होते हुए बोला -" मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी घूस नहीं लिया है और ना ही कभी लुंगा । मैं अपनी तरफ से भरपूर कोशिश कर रहा हूं कि उस बच्चे के क़ातिल को कानून के शिकंजे में जकड़ कर अदालत के कटघरे में खड़ा करूं ।"

मैंने उसे सम्मान की दृष्टि से देखा । आज के जमाने में ईमानदार पुलिसिया कहां मिलता है । सिगरेट पीने के बाद इंस्पेक्टर कोठारी को नमस्कार करके मैं श्वेता दी के फ्लेट चला गया ।
 
Update 22 Continue.

श्वेता दी के फ्लेट के नीचे बने पार्किंग में कार खड़ी कर के लिफ्ट से थर्ड फ्लोर पर पहुंचा । उस वक्त ग्यारह से कुछ ही मिनट उपर हुए थे । जब मैं उनके फ्लेट में दाखिल हुआ तो उस वक्त पुरे फ्लेट में बेतरतीबी का बोलबाला था । चारों तरफ सामान का भंडार जो पैकिंग किया हुआ था , फैला हुआ था । जीजू अपने पड़ोसियों के साथ डाइनिंग रूम में खड़े होकर बातें कर रहे थे । जिनमें से दो आदमी को तो मैंने फौरन पहचान लिया । वो दोनों आदमी उसी फ्लोर पर बने दो अलग-अलग फ्लेटों के मालिक थे ।

श्वेता दी की शादी के इन दो सालों के दरमियान मैं यहां कई बार आ चुका था। तीन चार बार तो मेरा स्वर्गीय दोस्त अमर भी आ चुका था । अमर के मौत के बाद दुसरी बार यहां आया था । उसकी याद आते ही मेरा दिल लरजने लगा ।

मैंने अपने को सम्हाला और जीजू को देखा जो बड़े मग्न हो कर उन सभी से बातें कर रहे थे । कुल चार लोग थे जिनमें दो तो पड़ोसी थे और बाकी दो लोगों को मैं नहीं जानता था । दो पड़ोसियों में एक थे रमाकांत पाठक जो जीजू के फ्लेट के दांये वाले फ्लेट में रहते थे । वो लगभग ७० साल के लम्बे , ऊंचे , उम्रदराज लेकिन निहायत तंदरुस्त व्यक्ति थे और अपने सफेद बालों , हल्के दाढ़ी और मोटे फ्रेम के पावर वाले चस्मे में काफी प्रभावशाली लगते थे । उनकी अधेड़ पत्नी के अलावा परिवार के नाम पर और कोई नहीं था । मैने जीजू से सुना था कि वो हिमाचल प्रदेश के रहने वाले थे । उनकी पत्नी जानकी को सांस की कोई बिमारी थी इसलिए उन्होंने दिल्ली जैसे गर्म आबोहवा में बसने को सोचा । लेकिन बाद में उन्होंने गाजियाबाद में ही अपना आशियाना बना लिया ।

दुसरा पड़ोसी मनीष जैन जीजू के फ्लेट के ठीक ओपेजिट में रहता था । वो एक चालीस वर्षीय शरीर से काफी मोटा औसतन हाईट का व्यक्ति था जो पेशे से सरकारी वकील था । अपनी वकालत की दुकानदारी दिल्ली में ही चलाता था । एक नम्बर का धुर्त और कमीना इनसान था । उसके परिवार में भी उसकी निहायत खुबसूरत बीवी के अलावा और कोई नहीं था ।

जब मैं वहां पहुंचा तो पता चला कि बाकी के दो व्यक्ति उनके दोस्त रोहन और रजनीश थे जो उसी बिल्डिंग के अन्य फ्लेट के रहने वाले थे । उन दोनों का अपना अपना अलग बिजनेस था । सभी लोग जीजू को सी आफ करने के लिए जुटे थे । मैंने सभी को अभिवादन किया ।

" अभी तक गाड़ी नहीं आई है क्या "- मैंने जीजू से पूछा ।

" ये तो रमाकांत अंकल बताएंगे " - जीजू ने रमाकांत जी को देखते हुए कहा -" गाड़ी और लेबर इन्होंने ही ठीक किया है ।"

" मेरी आधे घंटे पहले बात हुई है वो अब पहुंचते ही होंगे " - रमाकांत जी ने अपनी रौबदार आवाज में कहा ।

" और बाकी सब पैकिंग वगैरह हो गई है ना ?"- मैंने कहा ।

" हां सब कुछ हो गया है , बस गाड़ी का ही इंतजार है " - जीजू ने कहा -"मुझे मालूम हुआ कि तुम घर से जल्दी ही निकल गए थे , तुम्हें भुख लगी होगी । तुम रमाकांत जी अंकल के फ्लेट में चले जाओ , वहीं हम सभी का नाश्ता बना हुआ है... आंटी से बोलना वो नाश्ता दे देगी ।"

" अरे नहीं जीजू , मैंने नाश्ता कर लिया है । इसकी कोई जरूरत नहीं है ।"

" क्या बोला ? " - रमाकांत जी ने आंख तरेरते हुए कहा -" चुपचाप आन्टी के पास जाओ और नाश्ता करो ।"

" ठीक है , थोड़ी देर में जाता हूं "- मैंने धीरे से कहा ।

कहकर मैं शयनकक्ष में चला गया । वहां श्वेता दी मनीष जैन की बीबी अनुपमा के साथ खड़े खड़े गप्पे लड़ाने में व्यस्त थी । अनुपमा भाभी से पहले भी दो बार मिल चुका था । अनुपमा एक पैंतीस , छतीस साल की भरे-पूरे शरीर की गोरी रंगत की युवती थी । कद काठी में वो अपने पति से भी लम्बी थी । बड़े बड़े मम्मे , हैवी नितम्ब , मोटे होंठ , लम्बे बाल बड़ी बड़ी आंखें... कुल मिलाकर वह काफी सेक्सी दिखती थी । इस वक्त श्वेता दी सलवार और अनामिका जी साड़ी पहनी हुई थी ।

मुझे देखते ही श्वेता दी ने कहा -" आओ सागर ? तुम्हारा काम हो गया ?"

" हां मेरा काम तो हो गया लेकिन यहां तो अभी भी लगता है देर ही होने वाली है । जल्दी करो भई ।"

" यहां का भी काम हो गया है बस गाड़ी वाले का वेट कर रहे हैं ।"

" अरे जल्दी करवाओ दी , वहां भी तो अरेंजमेंट करनी है ।

" तुम्हें बड़ी हड़बड़ लग रही है " - अनुपमा ने कहा ।

मैंने देखा अनुपमा जी मुस्कराते हुए मेरी तरफ देख रही है ।

" मेरी कोई हड़बड़ नहीं है भाभी... ये तो मैं श्वेता दी के लिए कह रहा हूं ... और आप जैसी खुबसूरत हसीनाओं की संगत में रहने के लिए भला कौन हड़बड़ी करना चाहेगा " - मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

" क्यों झुठ बोलते हो देवर जी , मैं और हसीना ?"

" क्यों आपको सन्देह है ?

" मैं छतीस की हूं ।"

" छतीस से रिश्ता तो आपका पति से होगा , मेरे लिए आप अभी भी अठरह की ही लगती है ।"

" अच्छा ! ऐसा क्या देख लिया मुझमें ।"

" ऐसा क्या नहीं है आपमें देखने के लिए ।"

मैंने उनकी बड़ी बड़ी संतरों को देखते हुए कहा ।

उन्होंने मेरी नज़रों को देखते हुए कहा

" देख रही है श्वेता " - वो मुस्कुराती हुई श्वेता दी से बोली -" तेरा ये भाई मुझ पर लाईन मार रहा है ।"

" क्या करेगा बेचारा भाभी " - श्वेता दी ने हंसते हुए कहा -" अभी तक किसी लड़की ने घांस तक नहीं डाली है तो हर जगह ट्राई करते फिरता है ।"

अपडेट अधूरा है.... बाकी रात में ।

" Thanks friend for reading n supporting...
 
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