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Incest Sagar (Completed)

Update 22 continue.

जीजू ने श्वेता दी को आवाज लगाई तो वो कमरे से बाहर निकल गई । मैंने अनामिका जी को देखा , वो मुझे ही देख रही थी ।

" श्वेता बोल रही थी कि तुम लड़कियों को मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दे रहे हो। तो थोड़ा बहुत हमें भी सीखा दो "- वो बोली ।

" आप क्या करोगी मार्शल आर्ट्स सीख कर ?"

" क्यों भाई... बाकी लड़कियों की तरह हमें भी सेल्फ डिफेंस के बारे में जानना चाहिेए । है न ।"

" अरे भाभी आप तो खुद दो बड़े बड़े बम लिए घुमती रहती है...किस बेचारे की शामत आई है जो आप को छेड़ेगा ।"

" बम ? कौन सा बम ?"- वो कन्फ्यूज हो कर बोली ‌।

" जरा ध्यान से देखें समझ में आ जायेगा " - मैंने उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयों को घुरते हुए कहा ।

उन्होंने मेरी नज़रों को अपने छाती के उपर घुरता पाया तो वो समझ गई । उनसे पहले भी हल्की फुल्की मजाक होती रहती थी लेकिन एक लिमिट में ही रहती थी ।

" देवर जी इन बमों को देखकर लफंगे भागते नहीं बल्कि और पीछे पड़ जाते हैं " - वो मुस्करा कर बोली ।

" पीछे पड़ कर भी क्या झां...साॅरी बाल उखाड़ लेंगे , जहां बमों का साक्षात दर्शन हुआ कि नहीं कि वे पालतू कुत्ते की तरह आप के आगे पीछे दूम हिलाते हुए नजर आने लगेंगे ।"

" कहीं तुम्हारी हालत भी तो पालतू कुत्ते की तरह नहीं हो गई है " - वो शरारती अंदाज में बोली ।

" अभी मैंने बमों का दर्शन ही कहां किया है... हां अगर आप...."

तभी श्वेता दी आ गई और बोली कि लेबर आ गए हैं । सामान वगैरह नीचे रखवाना है । गाड़ी अभी आई नहीं थी ।

जीजू , मनीष जी के साथ नीचे चले गए जहां सामान वगैरह ला कर लेबर को रखना था । रमाकांत जी अपने फ्लैट के अन्दर चले गए । श्वेता दी , अनामिका जी और मैं लेबर के साथ मिलकर घर के अन्दर काम संभालने लगे । मैं इसी बीच पुरे फ्लैट का जिसमें दो रूम , एक बड़ा डाइनिंग हॉल , एक छोटा स्टोर रूम , बालकनी , किचन , बाथरूम सभी का बड़ी बारीकी से मुआयना किया । खासकर बाथरूम का । लेकिन मुझे कुछ भी संदिग्ध जैसी न लगी ।
पौने घंटे के अंदर सारा सामान नीचे चला गया । तब तक गाड़ी भी आ गई । मुझे बहुत जोर से प्यास लगी थी । तो मैंने श्वेता दी को कहा । श्वेता दी बोली प्यास तो मुझे भी लगी है । अनुपमा जी हमें अपने फ्लैट में ले गयी । उन्होंने फ्रीज से ठंडा पानी का बोतल निकाला और श्वेता दी को दे दी । श्वेता दी ने पानी पी फिर मुझे अपने फ्लैट के मेन दरवाजे का चाबी दिया और कहा कि पानी पीने के बाद फ्लैट को लाॅक करके नीचे आ जाना ।

उनके जाने के बाद अनुपमा जी के फ्लैट में सिर्फ हम दोनों ही थे । मैंने उनसे पानी का बोतल लिया और उनके फ्लैट में चहलकदमी करते हुए बोतल खोल कर पानी पीने लगा । उनका फ्लैट भी सेम पैटर्न का था । लेकिन एक अंतर था वो कि उनके मास्टर रूम में उनका पलंग खिड़की के करीब था । और खिड़की से इमारत का इंट्रान्स और पार्किंग स्थल नजर आता था ।

मैंने खिड़की से नीचे देखा । जीजू और मनीष जी खड़े थे । इमारत का दरबान भी वहीं खड़ा खैनी मसल रहा था । लेबर जमीन पर रखे हुए सामानों को गाड़ी जो कि 407 भेन थी में सम्भाल कर रख रहे थे ।

पानी पीने के बाद मैंने खाली बोतल अनुपमा जी को पकड़ाई तो उनकी उंगली से मेरी उंगली टच हो गई ।

" माई गॉड आपकी उंगली में तो 440 भोल्ट का करेंट है... ऐसे किसी को टच करा देगी तो वो झुलस ही जायेगा ।"

" कोई नहीं झुलसने वाला है । झुलसाने वाली उमर निकल गई है ।"

" आप को गलतफहमी है भाभी । झुलसाने की बात छोड़िए , आप तो भस्म कर सकती हैं ।"

वो मुस्कुराई फिर बोली ।

" बातें लड़कियों को खुश करने वाली बोलते हो । लड़कियां तो कुर्बान हो जाती होगी ।"

" सिर्फ खुश ही होती है । कुर्बान कोई नहीं होती है । अब आप अपने आप को देखिए... कुर्बान हुई ? "

" तुम न सच में एक नम्बर के फ्लर्टबाज हो । तुमने तो लगता है कि लड़कियों को लाईन मारने में पी. एच.डी. हासिल कर रखी है ।"

" क्या फायदा ऐसे पी.एच.डी. का भाभी जब बेरोजगारी ही छाईं हुई हो " - मैंने आह भरते हुए कहा ।

वो होंठ दबा कर हंसी । हंसी मतलब छोकरी फंसी ।

" मेरे हसबैंड को जानते हो न...बीसों धाराएं लगा कर हवालात में पहुंचा देंगे " - वो आंख नचाते हुए बोली ।

" एक बात कहूं ?"

" क्या ?"

" छोड़िए । रहने दिजिए ।"

" अरे नहीं नहीं । बोलो ।"

" आप बुरा मान जाओगी ।"

" नहीं मानूंगी ।"

" नहीं । आप शर्तिया बुरा मान जाओगी ।"

" क्या लड़कियों जैसी बहाने बनाते हो । बोल भी दो "- वो चिढ़ते हुए बोली ।

" ओके। आप अपनी कान इधर लाओ ?"

" क्यों ?"

" अरे लाओ ना , कान में बोलूंगा ।"

वो इधर उधर देखी । कमरा क्या पुरे फ्लेट में कोई भी नहीं था । वो मेरी ओर बढ़ी ।

मैं भी उनके बिल्कुल करीब गया । वो मेरी आंखों में देख रही थी । मैंने भी उनकी आंखों में देखा । फिर नजरें नीचे की और उनके बड़े-बड़े खरबुजो पर टीका दी। दसेक सेकेंड के बाद फिर उसकी आंखों में झांका । वो मेरी हरकतों को वो बिना हिले डुले देख रही थी । मैं स्पष्ट देख रहा था कि उनके सांसों की गति बढ़ गई है । मैं उनके पीछे गया और उनके पिछवाड़े से सटते हुए अपने लबों को उनके कान के पास ले गया ।

" बोल दूं " - मैंने उनके कान में धीरे से मुंह से फूंक मारते हुए कहा ।

" हम्म " - वो मंत्र मुग्ध सा बोली ।

" उससे पहले उसकी बीवी न चोद दुंगा ?" - मैं उनके कान में बहुत धीमें से फुसफुसाया ।

वो सिहर सी गई । उसके बदन ने एक जोर का झटका खाया । उसने ऐसा आशा नहीं किया होगा । वो चुपचाप स्टैच्यू की मुद्रा में खड़ी रही ।

कुछ देर तक मैं भी वैसे ही उनके पीछे उसके कान के पास अपने लबों को रखे रखा कि शायद वो कुछ बोले ।

दो मिनट तक वो कुछ नहीं बोली ।

तभी वो फुसफुसाई -" किसकी बीवी को ?"

" मनीष जैन की बीवी को " - मैंने भी फुसफुसाते हुए जबाव दिया ।

हम जहां खड़े थे वो जगह खिड़की के करीब थी । वो खिड़की की ओर चेहरा किए खड़ी थी और मैं उनके पीछे उनकी बदन से चिपक कर खड़ा था । हम दोनों खिड़की से नीचे जमीन पर पोर्च में गाड़ी के पास जीजू और उसके पति को बातचीत करते हुए देख रहे थे ।

वो अपने पति को देखते हुए फुसफुसाई -" ऐसा क्या है मनीष की बीवी में ?"

" ये पुछो न कि क्या नहीं है " - मैंने उनकी कान के लौ को होंठों से पकड़ते हुए कहा ।

" क्या है ?"

" कह दूं ?"

" हम्म !"

मैं उनसे पीछे से पुरी तरह चिपक गया और अपने दोनों हाथों को आगे ले जाकर उनके साड़ी के अंदर ब्लाउज के ऊपर से गोलाईयों के उपर रख दिया । ओर उन्हें हथेलियों से दबोचते हुए कहा -" मनीष के बीवी की बड़ी बड़ी दो दो किलो की चूंचियां हैं । पुरे ठोस और कड़े कड़े जो मुझे हर रात सपनों में आते हैं ।"

वो उत्तेजित हो कर पीछे घसक कर मुझसे पुरी तरह चिपक गई । अपने चुचियों को मसलवाते हुए धीरे से बुदबुदाई -" और ?"

मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा को खोल कर उसकी चूचियों को मसलने लगा । फिर मैंने अपने लिंग को उसके चूतड पर दबाते हुए कहा -" उसके बीवी की बड़ी बड़ी भारी भरकम गांड़ ।"

" ओह कितना गन्दा बोलते हो ।"

" आप को मेरी गन्दी बातें अच्छी नहीं लग रही है "- मैंने उसके गालों पर अपनी जीभ रगड़ते हुए कहा ।

" हम्म ।"

" क्या हम्म ?"

" अच्छी लग रही है ।"

" तो क्या कहती है आप ?"

" किस बारे में ?

" मनीष जी की बीवी को चोद दूं ?"

" हां " - वो झट से पलट कर मेरे सीने में समाते हुए मेरे कान में फुसफुसाई -" चोद दो मनीष की बीवी को ।"

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा और अपने चेहरे के सामने किया । उसकी आंखों में लाल लाल डोरे तैर रहे थे । चेहरा पुरी तरह तमतमाया हुआ था । होंठ फड़क रहे थे ।

उसने मुझे अपनी नशीली आंखों से देखा फिर अपने होंठों पर अपनी जीभ फिराई । और बड़ी तीव्र गति से हमारे होंठ मिल गए । फिर...

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चुस रहे थे । चुम रहे थे । चाट रहे थे । हमारी जीभें एक दूसरे के मुंह में बिना किसी रोक-टोक के भ्रमण कर रही थी । हम दोनों के थुक मिल कर एक हो गए थे । मैं उसकी भारी भरकम चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से मसल रहा था ।

जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उसकी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके कमर के ऊपर कर दिया और उन्हें साड़ी को पकड़ने का इशारा किया । उसने अपनी साड़ी को अपने हाथों से पकड़ लिया । मैंने खड़े खड़े ही उसकी नंगी चूतड़ को उसके पैन्टी के अन्दर हाथ डाल कर दबोचने और मसलने लगा जबकि हमारे होंठ पहले की तरह एक दूसरे के मुखरस को चूसने चुसाने में व्यस्त थे ।
उसने अपने एक हाथ से मेरी पैंट खोलना शुरू किया जिसमें वो कामयाब नही हो पा रही थी । मैंने अपना हाथ उनकी चूतड़ों से हटा कर सामने लाया और अपने पैंट को उपर से खोल दिया । पैंट के ढीला होते ही उसने अपनी दायीं हाथ को मेरे जांघिया के अन्दर कर दिया और मेरे बगावत पर उतारू सिपाही मेरे लन्ड को अपने हथेलियों से पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगी । मैंने भी उसकी आंखों में देखते हुए अपना एक हाथ सामने लाया और उसकी पैंटी के अन्दर प्रवेश करा दिया । हल्के हल्के झांटों से भरी उसकी रस छोड़ती फुली हुई चुत को अपने हथेलियों में भर लिया और चुत के दरारों में ऊंगली डाल कर रगड़ने लगा । उनकी चुत रस से सराबोर हो गई थी । मेरी उंगली उनके चुत के गाढ़े पानी से लस लस कर रही थी । वो मेरे उपर पसर सी गई थी ।

हमारी आंखें एक दूसरे पर टिकी हुई थी । हमारे होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे । वो मेरे लन्ड को अपने हथेलियों में भर कर मुठ मार रही थी । मैं उसके चुत में ऊंगली डाल कर अन्दर बाहर कर रहा था । हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए थे ।

" कैसा है ?" - मैंने अपने होंठ को अलग करते हुए कहा ।

" क्या ?" - वो कामुक नज़रों से मुझे देखते हुए बोली ।

" मनीष की बीवी के चुत को चोदने वाला लन्ड ।"

" मस्त । काफी मोटा और लम्बा " - वो मेरे लन्ड को मुठियाते हुए फुसफुसाई ।

" तो क्या ख्याल है मनीष की बीवी अपने चुत में मेरा लन्ड लेगी ?"

" तुम खुद ही पुछ लो न ?"

" किससे ?"

" मनीष के बीवी की चुत से " - बोलकर वो मुझे अपने पैरों की तरफ ढकेलने लगी ।

मैं नीचे फर्श पर बैठ गया और उसे अपने साड़ी और पेटीकोट कमर से ऊपर रखने का इशारा किया । उसने ऐसा ही किया । मैंने उसकी पेंटी को नीचे कर दिया तो उसने अपने पांव इधर उधर करके पैन्टी को पुरी तरह से बाहर निकाल दिया । उसके लम्बे लम्बे गोरे चिकने पांव और मोटी मोटी जांघें देखकर मैं दिवाना सा हो गया । दोनों जांघों के मध्य कचोड़ी की तरह चुत जो उसकी काम रस से भीगी हुई थी , मुझे सम्मोहित सा कर दिया था । मैंने अपनी होंठ को उसके चुत से सटा दिया और फिर गहरी खाइयों से मधु निकालने की कोशिश में लग गया । वो खिड़की को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी एक पांव सामने पलंग पर रख दी जिससे उसकी चुत की दरारें फैल गई । मैंने अपनी जीभ उसके चुत में घुसेड़ दी और....

दो मिनट में ही मैंने मधुपान कर लिया । मैं खड़ा हुआ तो उसने मुझे अपनी बांहों में लेकर कस लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी । उसकी नजर खिड़की से बाहर नीचे की ओर गई ।

" हटो " - वो मुझे धकेल कर अपनी पैंटी पहनते हुए बोली -" नीचे गाड़ी में सामान रखा गया है । मनीष उपर आ रहा है ।"

मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट को व्यवस्थित करते हुए कहा -" लेकिन असल काम तो हुआ नहीं ।"

" तुम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दो । मैं बाद में फोन करूंगी लेकिन भुल के भी तुम मुझे फोन मत करना " - वो अपनी हुलिया दुरूस्त करते हुए बोली ।

हम दोनों ने अपना अपना मोबाइल नंबर एक्सचेंज किया । और मैं उसके होंठों पर एक किस कर के श्वेता दी के फ्लेट में चला गया । फ्लेट तो पहले ही पुरा खाली हो गया था । एक बार फिर से पुरे फ्लेट का निरीक्षण किया और फिर बाहर निकल गया । मैंने मेन दरवाजे को लाॅक करके चाबी अपने पैंट में डाल दिया और उस इमारत से बाहर निकल आया ।

407 भेन पुरी तरह से सामानों से लद चुका था । जीजू के कार में बहुत चीजें पीछे वाली सीट पर भरी हुई थी । जीजू और श्वेता दी ने वहां जो लोग अभी भी थे उनको हाथ जोड़कर नमस्ते किया और फिर अपने कार में बैठ गये । मैं भी अपने कार में बैठ गया ।

दोपहर को तीन बजे हम आन्टी ( अमर की मम्मी ) के घर पहुंचे । वहां जाने के बाद मैंने मजदूरों को बुलाया और फिर सारे सामान को उनके घर में पहुंचाने का इंतजाम करवाने लगा । सब कुछ करते करते शाम के छः बज गए । आन्टी भी हर वक्त हम सभी के साथ ही रही जो मुझे बहुत अच्छा लगा ।

वहां से निपट कर मैं अपने घर चला गया । शरीर थका हुआ महसूस हो रहा था इसलिए जल्दी ही खाना खा कर मैं अपने कमरे में चला गया । कपड़े चेंज किए और बिस्तर पर लेट गया ।

आज बहुत सारी घटनाएं हुई थी । इंस्पेक्टर कोठारी से एक सार्थक मुलाकात... श्वेता दी और जीजू का यहां शिफ्ट होना... अनुपमा भाभी के साथ जबर्दस्त एनकाऊंटर..... और...और भी कुछ था ।
 
Update 23.

मैं निद्रा के आगोश में समाये हसीं सपनों में खोया हुआ था । उसे हसीं सपना कहना शायद गलत होगा । वो एक कामुक और उत्तेजक सपना कहना उचित होगा । एक औरत , मेनका को भी मात कर देने वाली... नंगी औरत... मेरे नंगे बदन मेरे जांघों पर चढ़ कर अपने कुल्हों को उपर नीचे किए जा रही थी । उसके कुल्हों के साथ साथ मेरी कमर भी दुगुनी रफ्तार से संगीत की धुन छेड़े जा रही थी । उसके पपीते की तरह बड़ी बड़ी गोलाईया पेंडुलम की तरह हिल रही थी । उसके हाथ मेरे सीने पर और नजरें मेरी आंखों में थी । मैं उन निगाहों से नजरें मिलाये वासना से लिप्त चरम सुख प्राप्त करने के कगार पर ही था कि मेरी नींद टुट गई ।

नजरें खुली तो माॅम को अपने बिस्तर पर बगल में लेटे हुए पाया । उन्हें देखकर मैं चौंक गया । मेरे चौंकने का कारण माॅम को मेरे बिस्तर पर मेरे बगल में लेटना नहीं था । बचपन में ही नहीं बल्कि हाल फिलहाल तक वो मेरे बिस्तर पर कई बार मेरे साथ लेट चुकी थी । चौंकने का मेन कारण था कि जो सपना मैं देख रहा था , उसकी मेनका मेरी माॅम ही थी । और वो अभी मेरे आंखों के सामने थी ।

वो मेरी ओर मुख किए करवट के बल लेटी हुई थी । इस वक्त वो नाइटी में थी । वो अपने एक हाथ से मेरे सर के बालों को सहलाये जा रही थी और दूसरी हाथ उनकी गोद में थी । लेकिन उनकी नजरें मेरे सर से ऊपर कहीं और थी , शायद वो किसी सोच में डुबी हुई थी । मैंने दिवाल पर टंगी घड़ी की तरफ देखा । सुबह के छः बजे थे । ठंडी ठंडी हवा आ रही थी । हवा में नमी थी ।

मैंने सिर्फ एक ढीला पायजामा पहना हुआ था । उपर से नंगा बदन ही था । मैंने करवट ली और उनके बाहों के उपर अपनी बांह रख दी जिससे उनकी तन्द्रा भंग हुई ।

वो मेरे सर के बालों को सहलाते हुए बोली -" नींद खुल गई ?"

" हां " - मैं बिस्तर पर पड़े पड़े अपने हाथों को उनकी मांशल बाहों से आगे बढ़ा कर उनकी पीठ सहलाते हुए बोला - " क्या बात है आज वर्षा सुबह सुबह कैसे आ गई ।"

" बदमाश । अपनी मम्मी का नाम लेता है ?" - वो मुस्कराते हुए मेरे सिर पर एक चपात लगाते हुए बोली ।

मैं उन्हें कस कर जकड़ते हुए कहा -" एक बार दरवाजे से बाहर नजर डालो ?"

" क्या है ?" - बोलकर वो वो दरवाजे के बाहर की तरफ नजरें दौड़ाई ।

हल्की हल्की बूंदा-बांदी शुरू हो गई थी ।

" ओह । बारिश शुरू हो गई । मैं समझी तु मेरा नाम ले रहा है ।"

" हा हा... " - मैंने हंसते हुए कहा -"कुछ दिन वेट करो । नाती पोते सब तुम्हें नाम से ही पुकारेगे ।

" तो फिर मैं क्या करूं । मेरे मां बाप ने नाम ही ऐसा रख दिया है " - वो मुस्कुराते हुए बोली ।

" डैड उठ गये है ?"

" नहीं ।'

" उठने के बाद तुम्हें ना पाकर कहीं परेशान न हों जायं ।"

" होने दो । वैसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है ।"

" सच माॅम ।‌ क्या किस्मत पाई है दोनों भाइयों ने । दोनों की बीवियां इतनी खूबसूरत और वो दोनों बिल्कुल अन रोमांटिक , एक दम निरस । एक के नाक पर हमेशा मक्खी बैठी हुई रहती है तो दुसरे को देश दुनिया तो छोड़ो अपने बीवी-बच्चों से भी कोई मतलब नहीं है । न उधो का लेना न माधो को देना ।"

" अब वे है ही ऐसे । लोगों का स्वभाव थोड़ी ना बदलता है ।"

तभी वो मेरे सीने के बालों को सहलाते हुए बोली -" वो सब छोड़ । कल पुलिस वालों ने क्या कहा ?" कल तु थका हुआ था इसलिए मैने पूछा नहीं ।"

मेरी तरफ करवट होने से उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयां मेरे भुजाओं से सट गई थी । इस सुखद स्पर्श के कारण मेरा कामरेड फिर से इन्कलाब जिंदाबाद करने लगा ।

" तुम्हें ये सब सुझा लेकिन उन दोनों को देखो । उन दोनो मैन ऑफ द हाऊस को याद भी नहीं है " - मैं भी उन्हें अपने बाहों में लेते हुए कहा ।

इसके बाद मैंने सारी बातें बताई जो थाने में हुई थी ।

" उन्होंने प्रोटेक्शन के लिए पुलिस देने को कहा था ?"- वो उत्साहित होकर बोली ।

" हां ।"

" तो फिर लिया क्यों नहीं ।"

" क्या फायदा ? दो चार दिन हमारे साथ साथ रहेंगे फिर वापस चले जायेंगे " - मैंने माॅम की पीठ को नाइटी के ऊपर से सहलाते हुए कहा -" वैसे एक कारण और भी था पुलिसियों को नहीं रखने के लिए ।"

" क्या ?"

" मेरी सेफ्टी करने के चक्कर में वो दिन रात मेरे इर्द-गिर्द ही रहते । जहां जहां मैं जाता वहां वहां वो भी साथ होते । और इन सब के चक्कर में मेरा सेफ्टी हो या नहीं हो मेरी गर्लफ्रेंड का राज खुल जाता और वो बेवजह बदनाम हो जाती ।"

" किसकी बात कह रहा है , वो ज्योत्सना ।"

मैंने उस दिन माॅम के मोबाइल में उनकी खास सहेली ज्योत्सना का नाम ह्वाट्सएप किया था । और ये सच भी था कि हमारे बीच सेक्सुअल सम्बन्ध थे ।

" हां । वो भी " - मैंने कहा ।

" वो भी का क्या मतलब । कोई और भी है ?" - वो चौंकते हुए बोली ।

" हां । ज्यादा नहीं । चार पांच तो होगी ही ।"

" बदमाश । तु बहुत बिगड़ गया है " - वो मेरे सिर पर जोरदार चपत लगाते हुए बोली - " वो ज्योत्सना मुझ से भी दो साल बड़ी है । उसमें तुने ऐसा क्या देख लिया ?"

" अरे माॅम वो तो हमारी उमर के छोरीयो से भी ज्यादा अच्छी है । काफी एक्सपिरियंस और... और क्या कहूं ?

" साली कमीनी । मेरे बेटे को ही फंसा लिया । उसे डर नहीं लगा ? पति है , बच्चे हैं । अगर उन्हें मालूम पड़ गया तो ?" - वो गुस्से से बोली ।

" कभी नहीं पता चलता । ये सब कोई घर वालों को जना कर करता है क्या ? ये चुपके चुपके होता है । उन्होंने तुम्हें कहा क्या ? जब कि आप उनकी बेस्ट फ्रेंड हो । वो तो मैंने तुम्हें बता दिया नहीं तो .."

" फिर भी ?"

" क्या फिर भी । बहुत कुछ होता है , आप को पता भी नहीं । सबकी नीड होती है। बहुतों की जरूरते होती है जो उन्हें अपने हसबैंड से नहीं मिलती है । और वैसे भी उनकी उमर ही क्या हुई है ।"

" वो तुझसे उम्र में बहुत ही बड़ी है । तुझे कोई अपनी उमर की लड़की नहीं मिलती जो अपने से लगभग दुगनी औरतों के पीछे पड़ा है ।"

" ये तो हर किसी के पसन्द नापसंद पर निर्भर करता है । ये दिल दा मामला है । इसमें दिल का , मेरे दिल का , मेरे दिल का क्या कसूर " - मैंने मजाक करते हुए कहा ।

" अपनी काली करतूतों को तर्क देकर सही साबित करता है और मसखरी करते रहता है । वो गन्दी गन्दी नाइटी भी उसी के लिए लाया था न " - वो चिढ़ते हुए बोली ।

" आपको वो गन्दी लगती है ?"

" और नहीं तो क्या । कितनी छोटी छोटी है । पहनना और ना पहनना बराबर है ।"

" अब मैं क्या बोलूं । आज कल औरतें यही सब पसंद करती है ।"

" छी । उनमें से एक तो इतनी छोटी है कि क्या बोलूं । क्या ये ज्योत्सना ने लाने को कहा था ?"

" नहीं । मैंने अपनी मर्जी से लिया था ।"

" तेरी इन्हीं हरकतों से...जरूर.. जरूर तेरी इन्हीं हरकतों से किसी औरत का पति तेरे जान के पीछे पड़ा होगा ।"

" तब तो डैड और चाचू भी पीछे पड़े होंगे ?"

" क्या मतलब ?"

" उनकी बीवियों के भी पीछे पड़ा हुआ हूं न ।"

पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया फिर जब समझी तो मुझे मारने के लिए झपटी तब तक मैं बिस्तर से कुद कर बाथरूम में भाग गया ।

" तु बाथरूम से बाहर निकल फिर तुझे बताती हूं " - वो जोर से चिल्लाते हुए बोली ।

फिर करीब दो घंटे तक बाथरूम और एक्सरसाइज में लगाया । मौसम ने भी अचानक से करवट ले ली थी । हल्की हल्की बूंदाबांदी हो रही थी । आज आन्टी तीर्थ यात्रा पर जाने वाली थी । उनकी ट्रेन दोपहर में थी । उनकी रिजर्वेशन ए.सी. थ्री टायर में हुई थी और उन्हें ट्रेन में बैठाने मुझे ही जाना था । जीजू को भी आज ही मुम्बई रवाना होना था । उनकी ट्रेन रात को बारह बजे थी ।

मैं तैयार हो कर नीचे हाल में आया । डैड सोफे पर बैठे हुए थे और नाश्ते का इंतजार कर रहे थे । रीतु अभी अपने कमरे में ही थी । मैं जाकर डैड के बगल में सोफे पर बैठ गया । थोड़ी ही देर में माॅम ने नाश्ता लगाया । हमने चुपचाप नाश्ता किया । माॅम नोर्मल ही थी । जैसे कि उन्होंने कहा था कि बाथरूम से निकल तुझे बताती हूं... वैसा कुछ भी नहीं हुआ । उनके चेहरे से पता नहीं चला कि वो मुझसे नाराज़ हैं या नहीं । नाश्ते के बाद डैड अपने आफिस चले गए और मैं रीतु के कमरे में ।

वो पढ़ रही थी । मैं बिना आवाज किए बाहर आ गया ।

मैं जब तक उसे देख नहीं लेता हूं मुझे चैन नहीं आती है । वो मेरी दिल की धड़कन है । उसकी बातें , उसका चुलबुला पन , उसकी शरारतें....जब सोचता हूं कि वो पराये घर चली जायेगी तो तो... मेरी आंखों से आंसू निकलते लगता है । मैं उसके बिना अपनी जिंदगी मुक्कमल नहीं पाता ।

ग्यारह बजे मैं आन्टी के घर पहुंचा । बूंदाबांदी अभी भी हो रही थी ।आन्टी अपने कमरे में सफर पर निकलने के लिए तैयारी कर रही थी । श्वेता दी उनकी पैकिंग में हेल्प कर रही थी । जीजू उपर अपने रूम में थे ।

कुछ देर बाद मैं अपनी बाइक वही छोड़ कर एक कैब बुक किया और आन्टी को लेकर स्टेशन पहुंचा । उन्हें ट्रेन में बिठाया । ट्रेन खुलने के पहले उन्होंने अपने कमरे की चाबी मुझे सौंपी और सम्भाल कर रखने को कहा ।

स्टेशन से बस पकड़ कर वापस आन्टी के घर पहुंचा । वहां से अपनी बाइक ली और वापस घर आने लगा । श्वेता दी ने मुझे रोकना चाहा लेकिन मैं रूका नहीं ।

बुंदाबांदी तेज बारिश में बदल गई थी । मैं जल्दी से घर पहुंचना चाहता था कि बाइक ने धोखा दे दिया । बाइक अचानक से बंद हो गई । मैं बाइक को हाथों से ठेलते हुए घर की ओर जाने लगा । बारिश जोरों से होने लगी थी । मैं पूरी तरह पानी से लथपथ हो गया था । मैं ज्योंहि चाचा के घर से गुजरा कि चाची दरवाजे पे खड़ी दिख गई ।

उन्होंने मुझे जोर से आवाज देते हुए कहा -" अरे सागर पानी में क्यों भींग रहे हो जल्दी से भीतर आओ ।"

बारिश मुसलाधार शुरू हो गई थी । मैंने भी उनकी बात मानते हुए बाइक उनके घर के बाहर खड़ी करके अन्दर चला गया ।

" तुम दरवाजे पर क्या कर रही थी चाची " - मैं उनके ड्राइंगरुम की तरफ बढ़ते हुए कहा ।

" बारिश देखकर दरवाजा बंद करने गई थी । लेकिन तुम्हारे बाइक का क्या हुआ ?" - वो दरवाजा बंद करके मेरे पीछे आते हुए बोली ।

" बाइक लगता है खराब हो गई है ।"

" जब तुम देख रहे थे कि बारिश आने वाली है तो बाइक ले जाने की क्या जरूरत थी ।"

"अमर की मम्मी को स्टेशन छोड़ने जाना था । इसलिए घर से बाहर निकलना पड़ा ।"

फिर मैंने उन्हें सारी बातें बताई ।

" तुम तो पुरा भीग चुके हो । कपड़े उतार दो नहीं तो तबियत खराब हो जायेगी ।"

वो ठीक बोल रही थी ।

मैंने अपनी पैंट शर्ट और बनियान उतार दी । अब मैं सिर्फ जांघिया पहने हुए था । चाची ने एक नजर मेरे गठिले शरीर को देखा । फिर वो एक गमछा लाई और मुझे दे कर बोली - " इसे भी उतार दे और इसको पहन ले । मैं इसे पंखे के नीचे रख देती हूं जल्दी सुख जायेगा ।"

मैंने गमछा लपेट कर अपनी जांघिया भी निकाल दी । जब मैंने उन्हें अपनी जांघिया दी तो उन्हें मेरी नंगे सीने को घुरते हुए पाया । वो जांघिया लेकर मेरे सारी कपड़े उठाई और कमरे में पंखे के नीचे रख दिया ।

मैं गमछा पहने सोफे पर बैठ गया । जब वो अपने रूम से बाहर ड्राइंगरुम में आई तो मैंने देखा उनकी साड़ी भी उपर से भीगी हुई थी । शायद दरवाजा बंद करते समय भीग गई थी ।

" चाची , आप की साड़ी भी तो भीग गई है , आप भी चेंज कर लो ।"

वो अपनी साड़ी देखते हुए बोली -" ओह । दरवाजा बंद करते समय भीग गई है ।"

बोलकर वो मेरे सामने ही अपनी साड़ी उतार दी । मैं चौंक पड़ा । क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था ।

वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी । ब्लाउज देखकर स्पष्ट समझ में आ रहा था कि वो ब्रा नहीं पहनी हुई है । उनकी मदमस्त बड़ी बड़ी चूचियां ब्लाउज में कहर ढा रही थी । ब्लाउज के ऊपर के एक बटन खुली हुई थी जिससे दोनों गोलाईयों के बीच बड़ी सी क्लीवेज किसी का भी ईमान भंग कर सकता था । मेरा लन्ड ठनठना गया । मेरी नज़र उनके पेट पर गयी । काफी गोरी रंगत की थोड़ी चर्बीयूक्त और थोड़ी फुली हुई सी थी । पेटिकोट नाभि से नीचे बंधी हुई थी । उनकी नाभि एक रूपए के सिक्के की तरह बड़ी और काफी गहरी थी । पेटिकोट में उनका पिछवाड़ा भी बड़ा नजर आ रहा था । इस रूप में गजब की सेक्सी लग रही थी ।

वो साड़ी उतार कर बाथरूम चली गई और उसे वहीं छोड़ कर वापस आई ।

" चाय बनाऊं ? पियेगा ?"

" हूं "- मैंने उनकी ब्लाउज में कैद बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर कहा ।

वो किचन में चली गई । उन्होंने साड़ी पहनने की कोई जहमत नहीं उठाई । मैं उनके इस रूप को देखकर गरम होने लगा । थोड़ी देर बाद वो दो छोटे छोटे ग्लास में चाय लेकर आई और एक मुझे देकर बगल में सोफे पर बैठ गई ।

" चाचा ड्युटी गए हैं ना ?"

" हां " - वो चाय की चुस्की लेते हुए बोली ।

" और राहुल ?"

" वो पढ़ने गया है ।"

" कब तक लौटेगा ?"

" दो अढ़ाई घंटे बाद । और उनके बारे में तो जानता ही है छः बजे तक आयेंगे ।"

कहीं चाची इशारा तो नहीं कर रही है कि अभी कोई भी नहीं है , मजा लुट लो । वैसे भी कुछ दिनों से मेरा के. एल. पी. डी. ही हो रहा था । मुझे सेक्स की बहुत तलब हो रही थी ।

चाची पहले कभी मेरे सामने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में नहीं आई थी। मैं सोच ही रहा था कि मुझे छींक आ गई ।

" तुझे तो लगता है जुकाम आ गई है " - वो चाय पी कर खाली गिलास को सामने पड़ी टेबल पर रखते हुए कही ।

" पता नहीं , शायद ।"

" रूक , मैं वीक्स लाती हूं । थोड़ा माथे पर रगड़ ले , आराम मिलेगा " - बोलकर वो वीक्स लाने चली गई ।

थोड़ी देर में वो आई और सोफे के किनारे बैठ गई फिर बोली ।

" तु अपना सिर मेरे पांवों पर रख के लेट जा , मैं लगा देती हूं ।"

मैंने अपनी चाय खत्म की और बिना हिल हुज्जत के उनके जांघों के ऊपर सिर रखकर पीठ के बल लेट गया ।

वो वीक्स मेरे ललाट पर लगा कर धीरे धीरे रगड़ने लगी । मैं तो उनके मांशल जांघों का स्पर्श पाकर ही एक नई दुनिया में पहुंच गया । मैंने अपने पांवों को फोल्ड करके रखा हुआ था । लेकिन फिर भी उस पतले गमछे में मेरा लिंग सर उठा कर अपने अस्तित्व का स्पष्ट प्रमाण देने लगा। जहां मेरा लिंग था , उस जगह पर गमछा अपनी औसतन ऊंचाई से काफी ऊपर उठ गया था । मैंने अपनी नजरें उनके चेहरे पर डाली तो उन्हें मेरे लिंग की तरफ देखते हुए पाया ।

मैं औरतों के मामले में बेहाया तो पहले से ही था । इसलिए मैंने भी अपनी पांवों को हिला डुला कर अपने मोटे तगड़े लिंग को गमछे के अन्दर से हल्का सा बाहर निकाल दिया ।

उनकी ललाट पर वीक्स लगाने की गति एकाएक धीमी हो गई । मैंने उनकी तरफ चुपके से देखा । वो मेरा लन्ड देख रही थी । और उनकी सांसों की गति बढ़ गई थी जिससे उनकी छाती उपर नीचे हो रही थी ।

मैंने अचानक से करवट ली और उनके पेट की तरफ मुंह करके लेट गया । लेकिन इसके बावजूद भी मेरा लन्ड गमछे से बाहर ही उनको अपनी दर्शन कराता रहा ।

मैंने अपनी होंठों को उनके नंगे पेट पर रख दिया और हल्के हल्के रगड़ने लगा । मेरे करवट बदलने से उनकी हथेली मेरे ललाट पर से हट कर मेरी छाती पर आ गई । वो जैसे सुध बुध खोई मेरी नंगी छाती पर अपनी उंगलियों को फिराने लगी । थोड़ी देर बाद मैने आर पार लड़ाई करने की सोची और अपने जीभ उनके गदराए हुए पेट से लगा दिया । उनके शरीर ने झटका खाया और उनकी उंगली फिसल कर मेरे सीने के मध्य बालों पर आ गई जिसे वो अपनी कोमल कोमल उंगलियों से हल्के हल्के सहलाने लगी ।

मैं उनकी गोरी पेट को चाटने लगा । चाटते चाटते नीचे की ओर बढ़ा । उनकी सेक्सी नाभि मेरे आंखों के सामने थी । मैंने अपनी जीभ उनके नाभि में ढुका दिया । वो उत्तेजित हो कर उछल सी पड़ी । मैं उनकी नाभि में बदस्तूर जीभ पेलता रहा । और साथ में अपने एक हाथ से उनकी मोटी मोटी जांघों को पेटिकोट के उपर से सहलाने लगा । काफी गुदाज जांघें थी ।

वो मेरे सीने के बालों को सहलाते हुए मेरी निप्पल को कुरेदने लगी । मैंने बहुत देर तक उनकी नाभि के साथ छेड़छाड़ किया । वो जरा भी प्रतिवाद नहीं की । मैं काम वासना से भर गया । मेरा लन्ड पुरे शबाब के साथ गमछे से बाहर सर उठाए खड़ा था । उनकी उंगली मेरे सीने से होते हुए नीचे मेरी नाभि के नीचे आ पहुंची । उनकी उंगलियां मेरी झांटों के उपरी सतह तक आ पहुंची ।

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था । मैंने अपनी उंगली उनके पेटीकोट के नाड़े पर रखी और एक झटके में खोल दिया । पेटिकोट ढीला हो गया था । मैंने हाथों से पकड़ कर पेटीकोट को नीचे घिसका दिया जिससे उनकी नाभि के नीचे पेडू के अगल बगल बड़ी बड़ी झांट साफ दिखाई देने लगी । मैं उनकी नरम , कोमल झांटों को अपने एक हाथ की उंगलियों से सहलाने लगा । और दूसरी हाथ को कमर और जांघों के बीच ढुका कर उनके नरम नरम मांशल कमर और जांघों को दबोचने लगा ।

वो चुपचाप निशब्द पड़ी रही ।

मैंने उनकी झांटों को सहलाते हुए धीरे से कहा - " चाची , एक देवर भाभी वाला चुटकुला सुनोगी ?"

वो कुछ नहीं बोली । चुपचाप मेरे नाभि और झांटों के बीच वाले भाग को सहलाते रही ।

मैंने उन्हें कुछ भी नहीं जबाव देते हुए भी चुटकुला सुनाया ।

" तीन छोटे-छोटे बच्चे सड़क पर खेल रहे थे । उनके क़रीब दो नयी नकोर कारें खड़ी थी । एक मारूति सुजुकी और एक लैंडओवर थी । एक बच्चा बोला , मैं चाहता हूं , मैं बड़ा होऊं तो मेरे जिस्म पर चांदी के बाल उगे , तोड़ कर बेचूं तो ये मारूति सुजुकी मेरी हो । दूसरा बच्चा बोला , मैं चाहता हूं मैं बड़ा होऊं तो मेरे जिस्म पर सोने के बाल उगे , तोड़ कर बेचूं तो वो लैंडओवर मेरी हो । तीसरा बच्चा चुप रहा । दोनों ने इसरार करके पूछा , क्यों बे तु चांदी के बाल चाहता है या सोने के । तीसरा बच्चा बोला , मैं बालों जैसा बाल चाहता हूं , लेकिन सारे जिस्म पर नहीं , बस एक खास जगह पर चाहता हूं । ऐसे बाल मेरी बड़ी बहन के है और ये दोनों गाडियां उसकी है ।"

सुनकर भी कुछ नहीं बोली बल्कि मेरी झांटों को अपने उंगलियों से जोर जोर से सहलाने लगी ।

मैंने भी उनकी झांटों को अपने होंठों से दबाया और खिंचने लगा । वो उत्तेजित हो कर थोड़ा नीचे सरक गई जिससे उनकी पेटिकोट और भी नीचे की ओर सरक गई । मैंने पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर उनके जांघों तक सरका दिया । उनकी झांटों से भरी चुत मेरी आंखों के सामने नंगी हो गई । काफी फुली हुई चुत थी । चुत की दरारें बड़ी थी और वो उनके काम रस से लबालब भरी हुई थी ।

मैं थोड़ा नीचे की ओर सरका और अपनी खुरदरी जीभ से रस से भरी हुई लम्बी दरार को उपर से नीचे तक चाट लिया ।

वो उत्तेजित हो कर मेरे आठ इंच के मोटे तगड़े लन्ड को अपने हाथों से दबोच ली ।

मैंने उनकी चुत पर अपना चेहरा रगड़ने लगा । और जीभ को चुत के अंदर धकेलने लगा । उनकी चुत खुब जोशो खरोश के साथ पानी बहाये जा रही थी । मेरा पूरा मुंह उनके चुत के पानी से सराबोर हो गया था ।

वो मेरे लन्ड को पकड़ कर मूठियाने लगी । मुझे लगा कहीं मैं बिना कुछ किए झड़ ना जाऊं ।

मैं जल्दी से बिस्तर से उठ खड़ा हो गया लेकिन मेरा लन्ड गमछे से बाहर उन्हें अपनी दर्शन कराता रहा । वो सोफे पर अधलेटी सी अवस्था में थी । उनकी पेटिकोट जांघों पर सिमट गई थी जिससे उनकी झांटों भरी रसदार चुत नंगी दिख रही थी ।

मैंने उनकी आंखों में देखा । वो मुझे प्रश्न भरी निगाहों से देख रही थी ।

" मैं बाथरूम से आता हूं " - मैंने अपनी चढ़ती सांसों को काबू करते हुए बोला ।

वो कुछ नहीं बोली ।

मैं बाथरूम करने के बाद बाहर निकला तो ड्राइंगरुम खाली था ।

मैं उनके कमरे में गया ।

कमरा पुरी तरह से अन्धकार में डुबा हुआ था । खिड़कियां बंद थी । उन पर पर्दे लगे हुए थे । कोई भी लाईट जल नहीं रही थी । थोड़ी बहुत जो प्रकाश आ भी रही थी वो दरवाजे के थ्रू आ रही थी । मैं उनके पलंग के पास गया ।

अंधेरा होने के बावजूद भी स्पष्ट दिखाई दे रहा था । वो सर से पांव तक एकदम नंगी बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी । वो अपने दोनों पांव फोल्ड किये हुए थी । और अपने दाहिने हाथ को अपने ललाट पर रखी हुई थी । उनकी बड़ी बड़ी चूचियां जो एक हाथ में समा नहीं पाए , उनकी सांसों की गति के साथ उपर नीचे हो रही थी । जांघें काफी मोटी मोटी और सेक्सी थी । गले में मंगलसूत्र के अलावा कुछ भी नहीं था । हाथों में चुड़ियां और पांवों में पाजेब । मैं मंत्रमुग्ध उनकी सेक्सी काया निवस्त्र निहारता रहा ।

मैंने अपना पहना हुआ एकमात्र गमछा निकाल दिया । और पूर्ण नग्न हो कर उनके बगल में लेट गया । वो मेरी तरफ करवट ली और मुझसे चिपक गई । उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे लन्ड पर कब्जा किया और दूसरी हाथ को मेरे बड़े बड़े चूतड़ों पर रखा ।

मैंने भी अपनी एक हाथ से उनकी चूचियों को पकड़ा और दूसरी हाथ के उंगलियों को उनके चुत में डाल दिया ।

और हमारे होंठ और जीभ एक दूसरे के अन्दर प्रवेश करने के लिए युद्ध करने पर उतारू हो गए ।

उसके बाद........ दो घंटों के दौरान सब कुछ हुआ । एक दुसरे के गुप्तांगों को चूसना , चाटना , और वो सब करना जिसके करने से बच्चे पैदा होते हैं । चार बार उन्होंने अपनी पानी निकाली तो दो बार मैंने । वो सन्तुष्ट हो कर गहरी नींद में सो गई । मैं भी उनके बगल में अपनी आंखें बंद करके लेट गया ।
 
Update 23 Continue.

" क्या टाईम हुआ है ?"

चाची के पहलू में लेटा कुछ देर पहले हुई अभिसार सुखों के कल्पनाओं में खोया हुआ था कि चाची के आवाज ने मुझे चेतना में ला दिया । मैंने लेटे लेटे ही टाईम देखने के लिए अपनी मोबाइल ढुंढने के लिए हाथ अगल बगल दौड़ाया । तभी मुझे याद आया कि मोबाइल तो मेरे पैंट में हैं । मैं हड़बड़ा कर बिस्तर से उठा ।

" क्या हुआ ?" - चाची मुझे इस तरह हड़बड़ा कर उठते हुए देख कर बोली ।

" मेरा मोबाइल तो पैंट में हैं.... कहीं पानी में भीगने से खराब न हो गया हो "- मैं नंगे बदन ही उठा और पैंट से मोबाइल निकालते हुए कहा ।

मैंने वहीं बगल में पड़े हुए एक सुखे कपड़े से मोबाइल पोंछा । शुक्र था कि मोबाइल खराब नहीं हुआ था । मगर उसमें माॅम के पांच , रीतु के दो और रमणीक लाल के दो मिस काॅल थे । इतने मिस काॅल देखकर मैं चौंका । मैं मोबाइल लेकर वापस बिस्तर पर आकर बैठ गया ।

" मोबाइल ठीक है ना ?"- चाची उठ कर मेरे बगल में बैठते हुए बोली ।

हम दोनों के शरीर पर अभी भी कपड़े का नामोनिशान तक नहीं था ।

" हां । मोबाइल तो ठीक है लेकिन माॅम , रीतु के ‌कई मिस काॅल है ।"

" क्या बात है ?"- वो मेरे लिंग को अपने हाथों से पकड़ कर सहलाते हुए बोली ।

" पता नहीं । फोन करता हूं " - मैंने भी उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को दबाते हुए कहा ।

मैंने माॅम को फोन लगाया ।

" अरे कहां पर है ? कब से फोन कर रही हूं , फोन क्यों नहीं उठाता ?" - रिंग होते ही माॅम गुस्से से बोली ।

" कैसे फोन उठाऊं ? देख नहीं रही हो कितनी जोर से बारिश हो रही है ।"

" तो बारिश होने से फोन उठाने या नहीं उठाने का क्या मतलब है ?"

" बारिश से फोन भींग कर खराब नहीं हो जायेगी ?"

" वाह ! क्या सुन्दर जबाव दे रहा है । यदि बारिश हो तो फोन का इस्तेमाल ही नहीं करना चाहिए । कहीं उस कमीनी ज्योत्सना के साथ तो नहीं है ?"

अब उन्हें क्या बताऊं कि मैं ज्योत्सना के साथ नहीं बल्कि चाची के साथ नंग धडंग बैठा उनसे बातें कर रहा हूं ।

" अरे नहीं माॅम मैं ज्योत्सना के साथ नहीं हूं । मैं कहीं और ही जगह पर हूं । एक्चुअल में मेरी बाइक भी तो खराब हो गई है ।"

" क्या ? बाइक खराब हो गई है ?" - अब वो पहले के अपेक्षाकृत नरम स्वर में बोली ।

" हां । पहले ये बताओ ना कि फोन किसलिए किया था ?"

" रीतु के लिए ।"

" रीतु के लिए ?" - मैं घबड़ाते हुए बोला - " क्या हुआ रीतु को ?"

" अरे कुछ नहीं हुआ है । वो कल काजल के साथ उसके शहर जाने के लिए बोल रही है । काजल की कजन सिस्टर की शादी है तो वो रीतु को साथ ले जाने के लिए बोल रही है ।"

" क्या ?" - मैं आश्चर्यचकित हुआ ।

लेकिन काजल ने तो मुझे कहा था कि सिर्फ उसके मां बाप जाने वाले हैं और वो यही रहेगी । और उसके मां बाप के जाने के बाद कल पुरा दिन और पुरी रात मेरे साथ पलंग कबड्डी खेलेंगी ।

मैंने माॅम से कहा -" और रीतु क्या बोल रही है ? क्या वो जाना चाहती है ?"

" हां । उसकी भी इच्छा है जाने के लिए ।"

" वो घर पर ही है ?

" नहीं , काजल के घर गई है ।"

" ठीक है । मैं रीतु से बात करता हूं ।"

" लेकिन तु है कहां अभी ? और कब तक आयेगा ?"

" मैने बताया न मैं कहीं और जगह पर फंसा हुआ हूं । मैं आधे घंटे में आ रहा हूं ।"

" और मुझे लगा तु उस कलमूही के साथ होगा ।"

" यही तो गलती कर दिया जो उसके पास नहीं गया । अभी में घर आता हूं फिर वहां से उस कलमूही के घर जाता हूं ।"

चाची मुझे हैरत से देख रही थी । उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने उनकी सहेली ज्योत्सना को भी पटा रखा है ।

" उससे पहले मैं तेरी पांव तोड़ दुंगी " - माॅम गुस्से से बोली ।

मैंने हंसते हुए फोन काट दिया ।

चाची मेरे लन्ड को दबाते हुए बोली -" ये ज्योत्सना वाला क्या चक्कर है ?"

" जैसा तुम्हारे साथ वाला चक्कर है " - कहते हुए मैंने उनकी चूत में अपनी उंगली पेल दी ।

" तुम सच में बहुत नालायक हो । बड़ी बड़ी उमर की औरतों के पीछे पड़ रहते हो । ये सब तुम्हारी गन्दी गन्दी किताबें पढ़ने का नतीजा है " - वो मेरे लन्ड को पकड़ कर मूठ मारते हुए बोली ।

मैं चौंका ।

इसका मतलब मेरी अलमारी से जो किताबें गायब हो रही थी , वो चाची कर रही थी ।

" मैंने उनकी चूची की बड़ी निप्पल को उंगलियों से मसलते हुए कहा - " आपको कैसे पता कि मैं गन्दी गन्दी किताबें पढ़ता हूं ।"

" अपने आलमारी में जो किताबें छुपा कर रखा है क्या वो तेरे बाप का है ?"

" है तो मेरा ही लेकिन आप को कैसे पता ?"

" बस पता है ।"

" कहीं वो आप ही नहीं तो जो मेरे आलमारी से किताबें गायब करती थी ?"

" तुझे मालूम था कि वहां से कोई कोई किताब गायब हो जाती थी ?"

" क्यों नहीं पता होगा ? आखिर मेरा किताब था तो कोई किताब न होने से मालूम पड़ ही जायेगा । अब आप बताओ वो किताबें आप ही निकालती थी न ?"

" मैं नहीं , तेरी मम्मी निकालती थी ।"

" क्या ?"

मैं आश्चर्य से मूंह फाड़े उनको देखता रहा ।

वो मुझे आश्चर्यचकित होते देखकर मुस्कराई और मुझे अपने ऊपर खींच ली । और मेरे लन्ड को पकड़ कर अपने चूत के छिद्र पर रख कर नीचे से धक्का दी जिससे मेरा लन्ड का सुपाड़ा उनके चूत में घुस गया ।

" चाची , सच सच बताओ ? क्या माॅम वहां से किताबें निकालती थी ?" मैं अभी भी श्योर नहीं था ।

" हां । तेरी माॅम ही तेरे रूम के आलमारी से किताबें गायब करती थी और हम दोनों बारी बारी से उसे पढ़ती थी । क्या करें ! आखिर हम भी तो हाड़ मांस की ही बनी है । हमारी भी इच्छा होती है कि कोई हमें भी रगड़ कर प्यार करे । तेरे डैड ने तेरी मम्मी के साथ और तेरे चाचा ने मेरे साथ करीब आठ दस सालों से सेक्स करना ही छोड़ दिया है । उनका खड़ा ही नहीं होता । हम दोनों बरसों से प्यासी है । एक दिन तेरी माॅम तेरी कमरे की सफाई कर रही थी । सफाई करते हुए तेरी बिस्तर के नीचे से उन्हें आलमारी की चाबी मिली । उन्होंने सोचा क्यों न आलमारी भी साफ करके उसके अंदर की सामान सजा दूं , तभी उन्हें तेरी ये गन्दी गन्दी किताबें दिखाई पड़ी । पहले तो वो बहुत गुस्सा हुई । तुम्हें उसी वक्त डांटना चाहती थी । और संयोग से उस दिन मैं भी वहां पहुंच गई । उन्होंने मुझे दिखाया । मुझे भी खराब लगा । लेकिन संयोगवश उसी दिन तुम अपने दोस्तों के साथ बंगलूरू घुमने चले गए । तुम पुरे छः दिन बाद आए थे तब तक यहां की कहानी कुछ और ही हो गई थी । इन छः दिनों में हमने सारी किताबें पढ़ ली और वो भी एक बार नहीं बल्कि कई बार और फिर अब तुम्हें क्या फटकारें हम दोनों खूद ही उन गन्दी कहानियों के दिवाने बन चुके थे । हमारी दबी हुई लालशा फिर परवान चढ़ने लगी । हमारी सेक्स की भुख पहले से भी ज्यादा बढ़ गई । लेकिन परिवार के मान सम्मान हमारी मजबूरी , संस्कृति हमारी पांव में बेड़ियां डाले पहले ही की तरह जकड़ी रही ।

मेरा तो आश्चर्य के मारे बूरा हाल था । माॅम किताबें मेरे रूम से गायब करती थी और उसे पहले खुद पढ़ती थी फिर चाची को पढ़ाती थी और जब फिर पढ़ने के बाद मेरे आलमारी में रख देती थी ।

वो सारी गन्दी गन्दी किताबें जिसमें मां बेटे , बाप बेटी , भाई बहन , चाची भतीजा , देवर भाभी की चुदाई की कहानियां भरी पड़ी थी । ये सोचकर मेरा लन्ड खुशी के मारे उछलने लगा जिसे चाची अपने चूत में साफ महसूस कर रही थी ।

मैं पुरी तरह से उत्तेजित हो गया और चाची को हुमच हुमच कर चोदने लगा । वो भी मेरा भरपूर साथ देने लगी ।

थोड़ी देर बाद वो अपने कपड़े पहनने लगी । मेरा पैंट शर्ट गंजी जांघिया अभी भी भींगा हुआ ही था । फिर भी मैंने सारे भींगे हुए कपड़े दुबारा पहन लिये ।

कपड़े पहनने के बाद मैने रीतु को फोन किया ।

उसके हैलो कहते ही मैंने कहा - " किसलिए फोन कर रही थी ?"

" भाई , मैं काजल के साथ उसकी कजन की शादी में जाना चाहती हूं । क्या जाऊं ?"- उधर से रीतु बहुत ही मीठे स्वर में बोली ।

" अरे , तु क्या करेगी शादी में जाकर ? उनलोगो का अपना समाज होगा , अपना माहौल होगा । तु वहां जाकर परेशान ही होगी ।"

" कोई परेशानी नहीं होगी । शादी जयपुर में है । वहां उन्होंने होटल बूक किया हुआ है । शादी के बहाने जयपुर भी घुम लुंगी ।"

" कितने दिन का ट्रिप है ?"

" चार दिनों का ।"

" लेकिन मैंने तो सुना था कि सिर्फ काजल के मम्मी पापा ही जा रहे हैं । काजल के जाने का प्लान नहीं था ।"

" पहले काजल के जाने का प्लान नहीं था लेकिन उसकी कजन उसके न आने की खबर सुनकर बहुत नाराज़ हूई ।उस ने जोर देकर उसे आने को कहा । और फिर काजल के मम्मी डैडी ने भी फोर्स किया तो फिर तैयार हो गई ।"

" ओह ?"

" वैसे आपको कैसे पता कि काजल नहीं जाने वाली थी । मैंने तो आपको कभी कहा नहीं " - वो मजाक करते हुए बोली ।

मैं हड़बड़ाया ।

" अरे वो... वो... वो काजल एक दिन रास्ते में मिल गई थी , तभी कहा था उसने ।"

" कहीं कुछ छुपा तो नहीं रहे हो मुझसे ? कोई चक्कर वक्कर तों नहीं है ?" - वो शरारती अंदाज में बोली ।

" अरे बकवास मत कर । ऐसा कुछ नहीं है ।"

" तो फिर बताओ मैं क्या करूं ? शादी में जाऊं या नहीं ?"

" तु श्योर जाना चाहती है ?"

" हम्म ।"

" तो एक काम कर , राहुल को भी अपने साथ ले जा । तेरे साथ एक मर्द रहेगा तो अच्छा होगा ।"

" क्या ?"

" हां । अब तु काजल और उसके मम्मी डैडी से पुछ ले । अगर तुझे जाना है तो राहुल भी तेरे साथ जायेगा ।"

" ओके । राहुल हमारे साथ जायेगा ।"

" अरे , पहले पुछ तो ले ।"

" काजल बगल में ही है । मैंने उससे पुछ लिया है । वो राजी है ।"

" ठीक है फिर । वैसे कल निकलना कैसे हैं ?

" सुबह सात बजे के बस से निकलना है । अंकल जा रहे हैं टिकट बूक करने ।"

" बस से ?"

" अरे भाई , शानदार बस है । उसका भाड़ा ए सी ट्रेन से भी ज्यादा है ।"

" ठीक है फिर । तु शाम को कब तक घर आयेगी ?

" छः बजे आ जाऊंगी । तैयारी भी तो करनी है ।"

" जल्दी आना । यदि कोई सामान वगैरह लाना होगा तो खरिदने के लिए समय चाहिए न ।"

" मैं पक्का छः बजे तक आ जाऊंगी ।"

मैंने फोन काट दिया । चाची को सारी बातें बताया । और राहुल को जयपुर जाने के लिए और उसके कपड़े वगैरह भी तैयार रखने को कहा ।

फिर वहां से अपने घर चला आया ।

जब घर पहुंचा तो दरवाजा खुला हुआ पाया । मैंने सोचा कहीं डैड तो नहीं आ गए हैं । मैं घर में प्रवेश कर के मेन दरवाजा बंद किया और माॅम को आवाज लगाई ।

माॅम चिल्ला कर बोली कि वो किचन में है तो मैं ये कहते हुए अपने कमरे की तरफ चला गया कि मैं नहा कर , फ्रेश होकर नीचे आता हूं ।

मैं अपने कमरे में गया । सारे भींगे हुए कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गया । नहा धो कर जब मैं अपनी गंजी और जांघिया पहनने के लिए ढुढने लगा तो देखा कि वो भी पुरी तरह से भीगी हुई है । सुबह से बरसात होने के कारण वो सुख नहीं पाई थी ।

मैं अपने कमरे में आलमारी से एक तौलिया निकाल कर लपेट लिया । और उपर एक शर्ट पहन लिया । और फिर नीचे हाॅल में आ गया । माॅम शायद अभी भी किचन में ही थी ।

मैं किचन में गया । और माॅम को देखकर बुरी तरह से चौंक गया ।

नेक्स्ट कल रात तक.....
 
Update 23 Continue.

माॅम की पीठ मेरी तरफ थी । वो किचन स्लैब के सामने खड़ी खाना बना रही थी । मैं उनके वस्त्र को देखकर बुरी तरह चौंक गया । उन्होंने वो नाइटी पहन रखी थी जो मैंने श्वेता दी के लिए लाया था । वो नाइटी उनके भरे बदन पर घुटने से थोड़ी ही उपर थी । पीछे से उनकी पीठ का साठ प्रतिशत हिस्सा खुला हुआ था । मैं उनकी गोरी अधनंगी पीठ और घुटने से नीचे नंगी पिंडलियों को देखकर भौंचक्का रह गया । इस रूप में मैंने उन्हें पहले कभी देखा नहीं था । लगता था कि जैसे कोई सेक्स की देवी खड़ी हो कर अपने जलवे बिखेर रही हो ।

वो पलटी और मुझे देखकर मुस्कराई । सामने का सीन देखकर तो मेरा कलेजा हलक तक आ पहुंचा । मेरे मुंह के साथ साथ लिंग में भी पानी आ गया ।

उनके दोनों कन्धों पर एक बारिकी सा स्ट्रिप था जो उनके दोनों बड़े बड़े सीना ताने वक्ष को बड़ी मुश्किल से सम्हाले हुए रखा था । सीने का लगभग पचास प्रतिशत उपरी हिस्सा नंगा था । मेरी आंखें जड़ हो गई । मेरी नजरें उनकी छाती से चुम्बक की तरह चिपक गई । और मेरा लन्ड खड़ा हो गया जबकि में चाची को तीन तीन बार चोद कर आया था । मैंने अपनी जिंदगी में इतनी खूबसूरत और सेक्सी गोलाईयां नहीं देखी थी ।

मैं मंत्र मुग्ध हो कर उनकी सेक्सी काया को निहारते जा रहा था ।

" खाना निकालूं ?"

उनकी आवाज सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई ।

मैं उनकी आंखों में देखते हुए कहा -" वाओ ! क्या लग रही हो माॅम ।'

उन्होंने शरमाते हुए कहा -" खराब लग रही हूं ना ?"

" अरे नहीं माॅम बहुत बहुत अच्छी लग रही हो । एकदम हाॅट । क्या बोलूं , निशब्द ।"

" मजाक मत कर । एक दम गन्दी लग रही हूं , मुझे पता है ।"

" मजाक नहीं कर रहा हूं । सच बोल रहा हूं । अगर इस रूप में आपको मूवी वाले देख लें तो हिरोइन का आफर कर दें । डैड तो पागल हो जायेंगे ।"

" बकवास बंद कर । मैं खाना निकालती हूं । चल , बाहर हाॅल में बैठ । मैं खाना लेकर आ रही हूं ।"

" हाॅल में छोड़ो । यहीं नीचे बैठ कर खा लेता हूं ।"

मैं दरवाजे से अन्दर गया । हमारा किचन काफी बड़ा था । नीचे जमीन पर दो लकड़ी के छोटे छोटे तख्त थे । उनमें से एक लेकर दरवाजे के दाहिने तरफ दिवाल से सट कर बैठ गया ।

माॅम ने खाना निकाल कर मेरे आगे रख दिया और खुद भी मेरे अपोजिट एक तख्त लेकर अपना खाना लेकर नीचे बैठ गई । मेरा चेहरा किचन के अन्दर की तरफ था जबकि माॅम का चेहरा मेरी और किचन के दरवाजे की तरफ था । वो पालथी मारे बैठी थी जबकि मैं अपने दोनों घुटने खोले बैठा था ।

खाना खाते हुए ही हम बातें भी करते जा रहे थे । मैंने रीतु वाली बात बताई और ये भी बताया कि उसके साथ राहुल भी जयपुर जायेगा । वो ये खबर सुनकर खुश और निश्चित हो गई कि राहुल भी साथ में जा रहा है ।

खाना खाते समय मैं उनके खुले अंगों को चुपके चुपके निहार भी रहा था । खाने के उपरांत जब मैं हाथ धोने के लिए खड़ा होने लगा तभी मेरी नजर अपने पहने हुए तौलिए पर पड़ी । दोनों घुटने अलग करके बैठने के कारण तौलिया में एक छोटा सा गैप हो गया था । जिससे तौलिया के अन्दर मेरा लन्ड ओपन हो गया था ।

मैं हड़बड़ा कर उठा और तौलिया को एडजस्ट करते हुए वाश बेसिन भागा और जल्दी से हाथ मूंह धोकर अपने कमरे चला गया ।

मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था । माॅम ने तौलिया के अन्दर से मेरे झांकते हुए लन्ड को जरूर देखा होगा । भले ही मेरा लन्ड पुरी तरह से खड़ा नहीं हुआ हो लेकिन माॅम के सेक्सी अवतार को देखकर थोड़ा कठोर तो हो ही गया था ।

उन्होंने शर्तिया मेरा लन्ड देखा था । भले ही मैंने जानबूझ कर नहीं देखाया हो । लेकिन उन्होंने देख तो लिया ही , फिर भी उन्होंने मुझे टोका क्यों नहीं ? और यदि टोकती भी तो क्या टोकती ? कि मेरा लन्ड तौलिया के गैप से दिख रहा है । ऐसा तो वह कह ही नहीं सकती ।

और उन्होंने आज ये रिविलिंग नाइटी क्यों पहन रखी है ? उन्होंने कहा था कि मुझे ये वाहियात नाइटी पसन्द ही नहीं है । ऐसी नाइटी तो औरतें सिर्फ अपने पति या ब्वायफ़्रेंड के समक्ष पहनती हैं । फिर मेरे सामने क्यों पहनी ?

आज जो बातें चाची ने बताई थी उससे ये बात तो क्लियर हो गई थी कि मेरी गन्दी किताबें माॅम ही गायब करती थी । और गायब ही नहीं बल्कि पढ़ती भी थी । और पढ़ने के बाद उसे चाची को सौंप देती थी । चाची ने ये भी बताई थी कि उन्हीं की तरह माॅम का भी सेक्सुअल रिलेशनशिप दस सालों से नहीं हुआ है । डैड की सेक्सुअल क्षमता खत्म हो चुकी थी । उन्होंने माॅम के साथ दस सालों से सेक्स नहीं किया है ।

और जैसी किताबें वो पढ़ती थी उसमें तो वो कामाग्नि के ज्वाला से जल भुन जाती होंगी । अपनी सेक्सुअल भूख को कैसे शांत करती होंगी ? क्या हस्त मैथुन करती होंगी ? या गाजर , मूली , केले आदि का इस्तेमाल करती होंगी ।

सुन्दर और हसीं तो इतनी है कि उनके एक इशारे पर लाखों मर्द उनको पाने के लिए पागल तक हो जाएं ।

दुसरी कोई औरत होती तो मैं कब का ट्राई कर चुका होता । मगर वो मेरी माॅम है । माॅम को भले ही मैं लाख फैंटेसी करूं लेकिन हकीकत में सेक्सुअल रिलेशन बनाना आसान थोड़ी न था । माॅम के साथ सेक्स करना हवाई किले बनाने जैसा था ।

लेकिन आज जो कुछ भी हुआ था , उसमें मुझे आशा की एक किरण दिखाई देने लगी थी ।

फिर मैंने अपना दिमाग इन सब बातों से हटा कर रमणीक लाल की तरफ लगाया । मैंने उसे फ़ोन किया । उसने मुझे अभी तुरंत मिलने के लिए कहा ।

मैंने कमरे से बाहर देखा । बारिश अभी भी हो रही थी लेकिन उसकी रफ़्तार अब धिमी हो गई थी । मैंने उससे मिलने को सोचा । मगर मेरा जांघिया और गंजी दोनों अभी तक भींगा हुआ था ।

मैंने बिना जांघिया और गंजी के ही पैंट शर्ट पहन लिया और माॅम को बोलकर घर से बाहर निकल गया । बाइक तो खराब पड़ी थी और डैड अभी तक आये नहीं थे । इसलिए मैंने बस पकड़ी और रमणीक लाल से मिलने चला गया ।

रमणीक लाल से मिलने और बातें करने में काफी वक्त लग गया । जब मैं घर पहुंचा तब शाम के पांच बज गए थे । रीतु भी घर आ गई थी । माॅम ने अपनी नाइटी चेंज कर ली थी । अब वो पहली वाली पुरे शरीर को ढकने वाली नाइटी पहन रखी थी ।

बारिश बंद हो गई थी । मैं आज क्लब नहीं जाना चाहता था क्योंकि रीतु और राहुल को शोपिंग करवाना था । मैंने क्लब फोन करके आज नहीं आने की सूचना दे दी ।

छः बजे तक डैड आ गए । डैड के आने के बाद मैं रीतु और राहुल को लेकर कार से मार्केट चला गया ।

मार्केट में भी बहुत समय लग गया । नौ बजे हम लोग घर पहुंचे । फिर सभी ने खाना खाया पिया और रीतु माॅम को लेकर अपनी पैकिंग में लग गई । डैड अपने कमरे में चले गए । मैं भी ऊपर अपने कमरे में चला गया ।

मैंने अपने कपड़े चेंज किए।

एक सिगरेट सुलगाया और काजल को फोन लगाया । चार रिंग होने के बाद उसने फोन उठाया ।

" हैलो !" - काजल की आवाज आई ।

" हैलो । क्या कर रही है ?"

" खास कुछ नहीं । पैकिंग कर रही थी ।"

" हो गई पैकिंग ?"

" हूं ।"

" तुमने तो अच्छा उल्लू बनाया मुझे ?"

" मैं क्या करती भैया , मेरा जाने का एक परसेंट भी मन नहीं था लेकिन मेरी कजिन ने इतना प्रेशर किया कि क्या बोलूं ।"

" कोई बात नहीं । कजन की शादी में तुम्हें जरूर जाना चाहिए था । तुमने अच्छा डिसिजन लिया ।"

" हम्म । लेकिन हमने इतने दिनों से ' वो ' प्लानिंग किया था , वो सब गुण गोबर हो गया न ।"

" अच्छा ! हमने ' वो ' प्लानिंग किया था । वैसे क्या ' वो ' प्लानिंग किया था ?" - मैंने उसे छेड़ते हुए कहा ।

" वही " - वो खिलखिलाती हुई बोली ।

" क्या वही ? बोल न मेरी प्यारी चहेती बहन ?"

" मेरी मुनिया से तुम्हारे मुन्ने की दोस्ती ।"

" क्या बोल रही है ? ऐसे कोड भाषा में मुझे समझ नहीं आएगा ।"

वो फुसफुसा कर कामुक स्वर में बोली -" मेरी मुनिया मतलब तुम्हारी काजल की चूत और तुम्हारा मुन्ना मतलब तुम्हारा लन्ड । समझे मेरे चोदू भाई ।"

" समझ गया मेरी चुदक्कड़ बहन । जयपुर से लौट कर आ फिर तेरी चूत फाड़ता हूं " - मैंने अपना लन्ड सहलाते हुए कहा ।

" जरूर मेरे चोदू भाई । तुम्हारी बहन की चूत चोदू भाई के लन्ड का इंतजार करेगी । "

" मैं भी इन्तजार करूंगा । चल अब फोन रख , कल बस स्टैंड पर मुलाकात होगी ।"

" जानते हो आज रीतु ने एक जोक सुनाई थी ।"

" कैसा जोक ?"

" सुनाऊं ?"

" सुना ।"

" एक लड़का आगरा रेलवे स्टेशन से फरीदाबाद अपने घर आने के लिए दिल्ली तक आने वाली ट्रेन में बैठा । जब वह अपने रिजर्वेशन कोच में आया तो वहां उसने एक बहुत ही सुन्दर लड़की को खिड़की के पास बैठे हुए पाया । उसका सीट उस लड़की के ठीक अपोजिट था । वो लड़की भी उसी की तरह अकेले जर्नी कर रही थी । वहां कुछ और लोग भी बैठे हुए थे । लड़का उस हसीना की खुबसूरती देखकर सोचने लगा कि काश ये लड़की मेरी गर्लफ्रेंड होती । वो उस लड़की से बातें करना चाहता था लेकिन वहां और भी कई लोग थे इसलिए वो हिम्मत नहीं जुटा पाता था । जब ट्रेन में बैठे हुए बहुत समय हो गया तो उसने सोचा क्यों न थोड़ा रिस्क ले ही लूं । वो उस लड़की का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बहुत सारी हरकतें करने लगा लेकिन ऐसे जैसे सिर्फ लड़की ही देख पाए । लड़की भी उस की सारी हरकतें देख रही थी और मन ही मन कुढ़ रही थी । ऐसे करते करते फरीदाबाद स्टेशन आ गया । लेकिन बेचारा वो लड़की से बात नहीं ही कर पाया । उसे अब वहीं उतरना था । लेकिन लड़की को अभी आगे दिल्ली तक जाना था । लड़का मन मसोस कर ट्रेन से उतर गया । वो प्लेटफार्म पर आ गया । उसने देखा वो लड़की उसी की तरफ देख रही है । लड़के ने एक बार और हिम्मत की और उस लड़की के पास जो खिड़की से बाहर देख रही थी , गया । लड़की ने उसे खिड़की से घूर कर देखा । लड़का उसके खिड़की के पास गया और बोला - " मैडम , क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं ?" लड़की ने गुस्से से उस लड़के को देखा और बोली - " मेरा नाम बहन जी है ।" लड़का बेचारा दुखी हो गया । तब तक ट्रेन भी खूल चुकी थी । लड़का ट्रेन के साथ साथ चलते हुए कहा -" मैडम , आपने मेरा नाम तो पुछा ही नहीं ।" लड़की क्रोधित होकर बोली -" क्या नाम है तुम्हारा ? तो लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा - " मेरा नाम बहनचोद है ।" लड़की गुस्से में कुछ कहती इससे पहले ही ट्रेन की गति काफी तेज हो गई ।"

मैं सुनकर भौंचक्का रह गया । रीतु ने ऐसा जोक काजल को सुनाया था । अभी मैं उसे कुछ बोलता तभी ' मम्मी बुला रही है ' कहकर उसने फोन काट दिया ।
 
भाई मेरी सोच आपसे बिलकुल नहीं मिलती इस बारे में......................अगर सभी यहाँ सेक्स ही पढ़ने आते हैं हैं तो आपसे कई गुना ज्यादा सेक्स लिखनेवाले लेखक हैं यहाँ .....और उनके पाठक पढ़कर हिला लेते हैं फिर nice लिखकर चले जाते हैं.................. आपकी स्टोरी कम सेक्स वाली और मर्डर वाली कोई क्यों पढ़ेगा....

यहाँ की प्रसिद्ध कहानिया जिनके लिए xossip से xforum तक लोग इस फोरम को पहचानते हैं...................... बिना सेक्स की हैं.... यानि जिसमें चुदाई को ना के बराबर या बिना विस्तार के ....सिर्फ एक-दो बार जरूरत के हिसाब से दिखाया गया है............
1- खामोशियाँ
2- तूने मेरे जाना, कभी नहीं जाना
3- तेरे इश्क़ में साथिया
4- एक भूल
5- कसम
6- मेंटलिटी
7- प्यार - गम या खुशी
8- काँच की हवेली
और भी बहुत सारी प्रेम कहानियाँ हैं......................

और शायद कुछ थ्रिलर भी हो सकते हैं बिना सेक्स के.... या कम से कम सेक्स के ...............
1- शिवम सिरीज़ की 3 कहानियाँ
2-टाइम मशीन
3- अपडेट 1

और ...................अंकित श्रीवास्तव की .................प्यार की भूख.......... चुदाई के दम पर नहीं.......... सस्पेन्स और थ्रिल की वजह से इतनी लंबी कहानी बनी....
चुदाई की ओवरडोस होने पर पाठक खुद कह देते हैं की कुछ अपडेट बिना चुदाई के सिर्फ थ्रिल सस्पेन्स के पोस्ट करो

भाई जिन्हें सिर्फ सेक्स से मतलब है................उनके लिए बहुत सारे फुद्दू फॉरम हैं...और पॉर्न साइट भी............
ये ............. सेक्स फॉरम नहीं ...........................एडल्ट फोरम है........... इसीलिए में भी यहाँ पर हूँ....
वरना बहुत सारी ऐसी फोरम जानता हूँ..............जिनमें यहाँ से 100 गुना ज्यादा भीषण चुदाई की कहानियाँ भरी पड़ी हैं............ और gif/pic तो छोड़ो रियल एमएमएस और विडियो भी देसी लड़कियों के

कोई तो रोक लो ...............अब तक की सबसे लंबी पारिवारिक कहानी............... पाठकों को उसमें दिये गए चुदाई वाले अपडेट ही पसंद नहीं आए.......... उनको पाठकों ने जबर्दस्ती ठूँसा गया माना.........................

तो ......................
सबको एक तराजू में मत तौलो................... हर तरह के लोग हैं...........यहाँ भी ...जैसे असली दुनिया में होते हैं
 
Update 24.

सुबह रीतु और राहुल को बस स्टैंड पहुंचाने गया तब काजल अपने मां और डैड के साथ वहां पहले से ही मौजूद थी । उन्हें बस में बैठा कर करीब आठ बजे घर आया ।

मेरी बाइक खराब थी इसलिए सोचा कि पहले इसे गैरेज में मिस्त्री को दिखा लाऊं फिर नहाना धोना करूंगा । गैरेज हमारे घर से ज्यादा दुर नहीं था । मैं बाइक लेकर गैरेज चला गया । बाइक में कोई खास खराबी नहीं थी लेकिन फिर भी उसे ठीक करते कराते दस बज गया ।

जब घर पहुंचा तब तक डैड ड्यूटी चले गए थे । माॅम ने मुझे जल्दी से नहा धो कर नाश्ता करने को कहा । मैं अपने कमरे में चला गया और आधे घंटे बाद बाथरूम से बाहर निकला । मैंने पैंट पहनना शुरू ही किया था कि मुझे कल दोपहर में किचन में खाना खाते वक्त की घटना याद आई । किस तरह खाना खाते वक्त बैठते समय मेरे तौलिए में गेप हो गया था और मेरा लिंग माॅम के सामने उजागर हो गया था । ये सोचते ही मेरे लिंग में तनाव आने लगा ।

मैंने पैंट को बिस्तर पर रखा और वही तौलिया लपेट लिया । अन्दर मैंने कुछ भी नहीं पहना था । सिर्फ सैंडो गंजी पहन लिया । और नीचे हाॅल में पहुंचा । माॅम वहां नहीं थी । मैं किचन में गया । वो वही पर थी ।

उन्होंने मुझे तौलिया और गंजी में देखते हुए कहा - " तैयार नहीं हुआ अभी तक ?"

माॅम सिम्पल सी बड़ी वाली नाइटी पहन रखी थी ।

" नाश्ता करने के बाद रेडी होऊंगा " - मैं किचन में प्रवेश करते हुए बोला -" पैंट शर्ट पहन कर नाश्ता करने से पेट पर दबाव पड़ता है ।"

"अच्छा , हाॅल में बैठ... नाश्ता ले आती हूं "- वो नाश्ता निकालते हुए बोली ।

" यहीं बैठ कर नाश्ता कर लेता हूं न "

मैं उसी जगह पर दिवाल से सट कर लकड़ी वाले छोटे तख्त पर बैठ गया ।

माॅम ने दो थालियों में नाश्ता निकाला । एक मुझे देकर मेरे ठीक अपोजिट उसी जगह पर अपनी थाली लेकर नीचे दुसरे तख्त पर बैठ गई । वो सभी को खिलाने के बाद ही खाती थी ।

मैंने इस बार जान बुझ कर अपने तौलिए में इस तरह का गैप कर दिया जिससे मेरा लिंग उन्हें स्पष्ट दिखाई दे । और इस बारे में अनजान बन कर नाश्ता करने लगा ।

मैंने अपना सिर नीचे किए हुए नाश्ता करते करते चुपके से कनखियो से उनकी तरफ देखा । नाश्ता करते हुए उनकी नजर रह रह कर मेरे लिंग की तरफ जा रही थी । लेकिन कुछ बोली नहीं । मेरा लिंग वो चोरी छिपे देख रही है ये सोचकर मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी और मेरा लिंग धीरे धीरे अपनी आकार बढ़ाने लगा ।

थोड़ी देर बाद नाश्ता भी खत्म हुआ लेकिन उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी । मैं उठा और जुठे बर्तन को बगल में बने वाश बेसिन में रखकर हाथ मुंह धोया और माॅम की नाइटी से हाथ पोंछने लगा ।

" ये क्या कर रहा है , अपने तौलिए से पोंछ "- उन्होंने मेरे सर पर मारते हुए कहा ।

" इसे गन्दा करने के लिए पोंछ रहा हूं ताकि आप कल वाली नाइटी पहने ।"

" धत ! " - वो शरमाते हुए बोली -" वो तो कल चेक करने के लिए एक बार पहनी थी ।"

" तो फिर कैसी लगी ?"

" बेकार ।"

" आप को कैसे पता कि बेकार लगी । किसी पर कौन सा कपड़ा जंचता है वो तो दुसरे लोग बताएंगे न । जैसे मुझे तो बहुत अच्छी लगी ।"

" तुझे तो अच्छी लगेगी ही " - वो होंठों ही होंठों में बुदबुदाई ।

" क्या बोली ? "- मैंने उन्हें हग करते हुए बोला ।

" कुछ नहीं " - वो मुझे परे धकेलते हुए बोली -" तेरे कहने से क्या होता है । मुझे नहीं पहननी ।"

" क्यों नहीं पहननी ? कल तो पहनी थी न तो फिर दुबारा पहनने में क्या बुराई है ?

" अभी तो बताया था कि चेक करने के लिए पहनी थी और वैसे ये तेरे डैड को अच्छा नहीं लगेगा ।"

" तो प्रोब्लम क्या है ? , आप डैड के सामने मत पहनना ।"

" तो क्या तेरे सामने पहनूंगी । बदमाश , खाली बेसिर पैर का बात करता है " - वो अपनी आंखें तरेरते हुए बोली ।

" मुझे कोई आपत्ती नही है " - मैंने शरारत से कहा ।

" रूक ! अभी बताती हूं तुझे " - वो मुझे मारने के लिए झपटी तब तक मैं वहां से फरार हो गया । मैं अपने कमरे में गया और कपड़े पहन कर नीचे आया ।

माॅम सोफे के पास खड़े होकर धुले हुए कपड़े चपेत रही थी । मैं उन्हें बहुत देर तक निहारता रहा । मैं उनके पास गया और उनके हाथ से कपड़े लेकर सोफे पर फेंक दिया । मैंने उनकी आंखों में देखा । वो मुझे गुस्से से देख रही थी । लेकिन मैं जानता था कि उनका गुस्सा बनावटी है ।

वही चिर परिचित सी आंखें ।
आंखों में वही सूनापन , वही खोई खोई सी । लेकिन चेहरे पर वही बनावटी मुस्कान ।

मैंने माॅम के हाथों को पकड़ा और उन्हें अपने गले लगाते हुए कहा ।

" क्या हुआ ? नाराज हो ?"

उन्होंने ना में अपनी सिर हिलाई ।

मैं उनके चेहरे को अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाया और धीरे से कहा ।

" आप क्या सोचती हो माॅम , मुझे कुछ नहीं पता , मैं सब कुछ जानता हूं... सब कुछ ...डैड की प्रोब्लम , आप की घूट घूट कर जिती हुई जिन्दगी , घर के हालात की प्रोब्लम....सब कुछ....आपके प्रति डैड का रवैया । क्या ये मैं नहीं जानता हूं कि उनकी नजरें आप के प्रति कैसी है ... वो भी आज से नहीं जब मैं बहुत ही छोटा था तब से...।"

" क्या बोल रहा है बेटा ?" - वो मेरे बाहों से अलग होते हुए बोली ।

मैंने बीच में उन्हें टोकते हुए कहा -" कुछ मत बोलो माॅम । औरतों की जिंदगी में पति का प्यार न भी हो तो वो सह लेती है लेकिन...."

उन्होंने मेरा मुंह अपने हाथों से बंद कर दिया और...

वो मेरे सीने से लिपट गई । उनकी आंखे नम थी । मेरी आंखें भी बोझिल हो गई थी ।

मैंने उन्हें अलग किया और आंखों की नमी छुपाते हुए मुस्कुरा कर कहा -" मैं कालेज जा रहा हूं ।"

वो अपने को सम्हालते हुए बोली -" कब तक आएगा ?"

" लास्ट सेमेस्टर में कुछ ही दिन बाकी है , अब वहां पढ़ाई वगैरह तो होता नहीं । बस जाऊंगा और घुम फिर कर चला आऊंगा ।"

मैं माॅम को बोलकर अपने कमरे में की ओर जाने लगा ।

" अब कहां जा रहा है ?" - माॅम मुझे वापस अपने कमरे की तरफ जाते देख बोली ।

" कुछ बुक्स लेने हैं ।"

कहकर मैं उपर अपने रूम में पहुंचा । आलमारी खोली , फोटो सहित सेक्सी कहानियां वाली किताब निकाली । उनमें से एक पन्ना फाड़ कर अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे दबा कर । और नीचे हाॅल में आ गया ।

मैं घर से निकलते निकलते बोला - " मेरे कमरे में मेरा बिस्तर चेंज कर देना , गन्दी हो गई है ।"

*******

मेरा मुड सेक्स करने के लिए काफी बेचैन था । घर से निकला था कालेज जाने के लिए मगर इच्छा नहीं कर रहा था । मैं चाची के पास जाने के लिए सोचा । उन्हें फोन किया तो पता चला कि चाचा घर पर ही है । कल बरसात में भीगने के कारण उनको ज़ुकाम हो गया था । फिर मैंने सोचा चलो कालेज ही चला जाता हूं ।

तभी श्वेता दी का फोन आ गया । वो अपने घर बुला रही थी । मैं खुश हो गया । जीजू भी घर पर नहीं थे । और चाची भी चाचा के तबियत खराब के चलते उनके घर जायेगी नहीं । और आन्टी तीर्थ यात्रा पर गई थी । आज बहुत बढ़िया मौका था ।

ग्यारह बजे मैं श्वेता दी के घर पहुंचा । बाइक घर के बगल में लगा कर बेल बजाईं ।

बेल बजने के बाद थोड़ी ही देर में श्वेता दी आई । उन्होंने चित्ताकर्षक मुस्कान के साथ मेरा स्वागत किया । जबाव में मैंने भी गोल्डन जुबली मुस्कान देते हुए उनको हग किया ।

मेरे अंदर आते ही उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया ।

आन्टी का मकान दो मंजिला था । दोनों मंजीले सेम पैटर्न के ही बने थे । तीन तीन रूम , हाॅल , स्टोर रूम , किचन , बालकनी , एक काॅमन बाथरूम । लेकिन दो रूमों में अटैच बाथरूम था ।

मैं श्वेता दी के साथ सीढ़ियां चढ़ता हुआ उपर वाले तल्ले में पहुंचा । दरवाजा खोलते ही मेन हाॅल था । हाॅल के एक सिरे में रूम था तो दुसरे सिरे में किचन , स्टोर रूम और सबसे लास्ट में बाथरूम बना हुआ था ।

मैं कमरे में प्रवेश किया ।

कमरे में बड़े से पलंग पर उर्वशी बैठी हुई थी । वो गुलाबी कलर की साड़ी पहने हुए थी । मैं उसे देखते ही चौंक गया ।

" हैलो हैंडसम " - उर्वशी दी ने मुस्कुराते हुए कहा ।

मैं मुस्कराते हुए आगे बढ़ कर उन्हें हग किया ।

" वाह ! हवाट्स ए सरप्राइज , कब आई ?"

" तुमसे आधे घंटे पहले । आते ही तुम्हें याद किया , श्वेता को कहा और तुम हाजिर ।"

" मेरा अहोभाग्य । बन्दा आपकी सेवा में 24 आवर्स हाजिर है । बताइए ये खादिम आप की क्या सेवा कर सकता है ?"

" सेवा तो बहुत कर सकते हो , अब देखना यह है कि तुम्हारी सेवा से हम कितना प्रसन्न हो सकते हैं ।"

मैंने शंकित नजरों से श्वेता दी को देखा । वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी । फिर उर्वशी दी को देखते हुए मुस्कुरा कर कहा -" " क्या बात है भाई , कोई परीक्षा ली जाने वाली है क्या ?"

" बताएंगे । जरूर बताएंगे लेकिन पहले बैठो , अपनी सांसें दुरूस्त कर लो ।"

" शुक्रिया " - मैं पलंग पर बैठते हुए कहा -" वैसे मैं कोई पैदल चलकर नहीं आया हूं । मेरी सांसें बिल्कुल दुरुस्त है ।"

" अच्छी बात है । थके हुए नहीं हो ।"

" थके हुए का क्या मतलब ? मैं बिल्कुल फिट और चौकस हूं ।"

" देखेंगे ! थोड़ी देर बाद कितने फिट और चौकस रहते हो " - उन्होंने अर्थपूर्वक लहजे में कहा ।

" बड़ी बहकी बहकी बातें कर रही हो ? जरा डिटेल में समझाओ न ?"

" समझा देंगे लेकिन पहले एक काम करो ।"

" क्या ?"

" बाजार जाओ और दो बियर का बोतल हमारे लिए और अपने लिए जो तुम्हें पसंद है वो ले आओ ।"

" वाइन ?" - मैं चौंक गया।

" हां । आज पार्टी करते हैं । तुम वाइन ले आओ तब तक हम दोनों खाने की तैयारी करते हैं " - वो मुस्कुराती हुई बोली ।

ये क्या चक्कर है... पार्टी , वाइन , बहकी बहकी बातें ।

मैं कंधे उचकाते हुए कहा -" ओके ! ये तो बता दो कि आपके हुजूर अभी ट्रीप से आए हैं या नहीं ?"

" वो परसों तक आयेंगे । तुम देर मत करो , फटाफट निकलो और वाइन के अलावा ये थोड़ा सा सामान है , ले आओ ।"

मैंने ओके कहा और बिस्तर से उठ गया । श्वेता दी एक कागज की परची दी जो लाने वाले सामान का लिस्ट था ।

श्वेता दी मुझे पैसे दे रही थी लेकिन मैंने लिया नहीं ।

आधे घंटे बाद वापस घर आया । इस बार उर्वशी ने दरवाजा खोला । हम उपर रूम में गये । मैंने बोतल फ्रिज में रख दिया । वे दोनों भोजन बनाने में बिजी हो गई ।

मैं वहां बैठे हुए बोर हो रहा था इसलिए मैं नीचे आन्टी के कमरे के पास आ गया । आन्टी अपने घर की चाबी मुझे सौंप गई थी । मैंने न जाने क्या सोचकर उनके कमरे को खोला और अंदर चला गया । कमरे के अंदर कवर्ड , बक्से , ड्रेसिंग टेबल सभी कुछ थे । उनके पलंग के गद्दे के नीचे चाबियों का गुच्छा भी पड़ा मिल गया।

मैंने उनके पुरे कमरे की तलाशी लेनी शुरू कर दी । बक्सा , आलमारी सब कुछ छान डाला लेकिन कोई भी संदिग्ध जैसी चीजें नहीं मिली ।

फिर मैं अमर के रूम में गया । वहां भी उसी तरह पुरे शिद्दत के साथ तलाशी ली लेकिन वहां भी सेम वही रिजल्ट । मैं थक हार कर वहां से निकलने लगा कि मेरी नज़र उसके शो केस पर पड़ी । वहां एक ही फोटो फ्रेम में दो फोटो साथ में लगे मिले । एक मे वो मेरे साथ था तो दुसरे में अपनी मां के साथ । फोटो देख कर मेरा दिल लरजने लगा । फोटो फ्रेम के पास एक जापानी एनटिक खंजर था । उस खंजर की मुठ गोलाकार और बड़ी थी । मुझे याद आया ऐसा ही खंजर मैंने श्वेता दी के पास भी देखा था ।

फिर सारे दरवाजे बंद करके मैं उपर श्वेता दी के कमरे में गया । कमरे के अंदर नजर पड़ते ही मैं बुरी तरह से चौंक गया ।

Continue....
 
Update 24. Continue.

कमरे के अंदर नजर पड़ते ही मैं बुरी तरह चौंक गया । मैं दरवाजे के ओट में खड़ा आंखें फाड़े दोनों सहेलियों को देख रहा था । उर्वशी दी एक ऐसी हाॅट नाइटी पहनी थी जो उनके मांशल जांघों तक ही आती थी । उपर आधा वक्ष नंगा था । ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उन्होंने कई ब्रा या पैंटी नहीं पहनी थी । उनका गोरा और अधनंगा बदन उस नाइटी में कहर ढा रहा था । वो इस वक्त ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी होकर अपने बालों पर कंघी कर रही थी ।

श्वेता दी शायद अभी अभी नहाकर आई थी । वो मात्र पेटीकोट पहने हुए थी जिसे उन्होंने अपने बड़े बड़े बूब्स पर आधे से बांध रखा था । पेटिकोट नीचे उनके घुटनों तक ही सीमित थी । और उन्होंने भी कोई ब्रा पैंटी नहीं पहन रखी थी । वो एक तौलिए से अपनी बाल सुखा रही थी । क्या कहूं... शब्द नहीं थे कुछ कहने के लिए ।

इन दोनों औरतें के इस सेक्सी अवतार को देखकर मेरी सांसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे हो गई । मेरी आंखें उनके इन वस्त्रों के अन्दर छुपी हुई जन्नत का दिदार करने के लिए चीर हरण करने लग गई । मेरा लिंग मेरे पैंट और जांघिया से फड़फड़ा कर बाहर आने के लिए उछल कूद मचाने लगा ।

शायद दोनों खाना बनाने के बाद नहाई थी और अब कपड़े पहनने के लिए तैयारी कर रही है ।
मुझे इनकी मंशा संदेहास्पद तो लग रही थी लेकिन कहीं न कहीं मैं आश्वस्त भी था । दिन में अचानक से पार्टी करना , वाइन मंगवाना , घुमा फिरा कर बहकी बहकी बातें करना । मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ये दोनों सहेलियां आज मेरा शिकार करने वाली है । और ऐसा शिकार भला कौन नहीं होना चाहेगा ।

लेकिन उत्तेजना के साथ साथ कहीं ना कहीं मुझे डर भी लग रहा था । क्या मैं इन दो भड़कती शोलों की आग को अकेला बुझा पाऊंगा ? मर्दों का तो एक बार स्खलन हुआ तो फिर दुबारा तैयार होने में बहुत टाइम लगता है लेकिन औरतें एक बार स्खलन होने के बाद दुबारा तुरंत ही तैयार हो जाती है । वो एक बार के ही सेक्स के दौरान कई बार स्खलन का सुख भोग लेती हैं ।

मुझे याद आया जब मैंने पहली बार सेक्स किया था । वो एक पैंतीस साल की खुबसूरत औरत थी । सहवास के दौरान उसने मुझे कुछ बातें कही थी । उसने कहा था हम औरतें सिर्फ संभोग से ही रज स्खलन प्राप्त नहीं कर लेती बल्कि हमारे शरीर में ऐसे कई पार्ट्स है जिसे हमारा सेक्स पार्टनर चुम के , चाट के , रगड़ के , उत्तेजित कर के हमारे योनि से रज स्खलन करवा सकता है । इनमें से कोई एक से भी हम चरम सुख प्राप्त कर सकती हैं । हमारे होंठों को चुसे जाने से..., हमारे जीभ को चुसे जाने से..., हमारी चुचियों को दबाये मसले जाने से..., निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चुसे जाने से..., हमारे कटि प्रदेश को प्यार करने से..., हमारे योनि के अगल बगल हिस्से को अपने होंठों से चुमे , चाटे जाने से... , हमारे चूतड़ों को पकड़ कर दबाये मसले जाने से हमारी योनि स्खलन प्राप्त कर लेती है । कभी कभी तो हम अपने कानों और गले को भी चुमने चाटने से अपनी पानी निकाल देती हैं । मतलब हम औरतों के स्खलन में शरीर के क‌‌ई पार्ट्स काम करते हैं । हम औरतें सिर्फ एक बार के सम्भोग में ही कई बार चरम सुख प्राप्त कर सकती हैं ।

मगर मर्दों के शरीर में सेंसेटिव पार्ट सिर्फ एक ही है । उनका लिंग । जब तक लिंग को मसला नहीं जाय , रगड़ा नहीं जाय , उस पर प्रेशर नहीं दिया जाय तब तक वो स्खलन सुख प्राप्त नहीं कर सकते । भले ही वो अपने हाथों से करें या बिस्तर और तकिए पर रगड़ कर करें । या सेक्स कर के करें । इसीलिए कहा गया है कि औरतों का सेक्स पावर मर्दों से कई गुना ज्यादा होती है ।

औरतों के लिए लिंग का आकार भी कोई खास मायने नहीं रखता । वो किसी भी आकार के लिंग से चरम सुख प्राप्त कर सकती है । औरतें प्यार की भुखी होती है । उनका पार्टनर यदि उनकी मनोदशा को समझे और सिर्फ अपना ही सेक्स सुख की कामना न रख कर अपने पार्टनर के सुख का ख्याल रखें तो वो अपने प्रेमी पर जानों जान से न्योछावर हो जाती है ।

मैं उसकी बातें सोच रहा था कि उर्वशी दी की नजर मुझ पर पड़ी ।

" अरे ! दरवाजे पर खड़े खड़े होकर क्या कर रहे हो ? अन्दर आओ "- उर्वशी दी ने अपने बालों पर कंघी करते हुए कहा ।

मैं कमरे में चला गया और जाकर पलंग पर बैठ गया ।

" कहां चले गए थे ?"- श्वेता दी ने पूछा । वो अभी भी अपने बालों को तौलिए से पोंछे जा रही थी ।

" कहीं नहीं गया था । तुम दोनों खाना बनाने में बिजी थी तो नीचे आन्टी के घर में चला गया । "

वो दोनों ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी थी । मैं दोनों को बारी बारी से देखे जा रहा था । उनकी बड़ी बड़ी छातियों से नजर हटती तो उनके जांघों पर चली जाती । वहां से हटती तो फिर उनकी गोलाईयों पर चली जाती।

" किसकी अच्छी है ?"- उर्वशी दी की आवाज सुनकर मेरा ध्यान टुटा ।

" क्या ?"- मैं उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयों को देखते हुए कहा ।

" बाल । हम दोनों में किसकी बाल अच्छी है ?" - वो धूर्तता पूर्वक मुस्कराते हुए बोली ।

मेरी आंखें उनकी बालों पर पड़ी । कमर तक लम्बी ।‌ जो नहाने के कारण भींगी हुई थी ।

" बाल ! मैं तो कुछ और ही समझा था ।"

" फिलहाल तो बाल के बारे में ही बताओ ?"

" बालों के बारे में तो मुझसे पुछो मत ।"

" क्यों ?"

" इन बालों के चक्कर में एक बार मेरी बड़ी फजीहत हो चुकी है ।"

" क्या हुआ था ?"- श्वेता दी अपने बाल पोछते हुए बोली ।

" छोड़ो , क्या करोगी जानकर । बड़ी दर्द भरी कहानी है ।"

" अच्छा ! ऐसा क्या । तब तो जरूर सुनूंगी "- उर्वशी दी कंघी को ड्रेसिंग टेबल पर रख कर मेरे बगल में बैठते हुए बोली ।

उनके मेरे बगल में बैठने से उनकी जांघें मेरी जांघों से सट गई ।

" जब मैं बी एस सी फर्स्ट इयर का स्टूडेंट था तब ये दुर्घटना मेरे साथ घटी थी ।"

" क्या हुआ था ?"- श्वेता दी भी आकर मेरे दूसरे साईड बैठते हुए बोली ।

अब मैं दोनों ओर से दो खुबसूरत अधनंगी हसीनाओं के बीच था । दोनों की सेक्सी मोटी मोटी जांघें मेरे दोनों जांघों को स्पर्श कर रही थी । एक सेक्सी नाइटी पहनी हुई तो एक सिर्फ पेटीकोट पहने हुई । मैं हवा में उड़ने लगा ।

" अरे ! बोलो भी "- उर्वशी दी मेरे गाल को खिंचती हुईं बोली ।

मैं जमीन पर आते हुए बोला - " एक दिन दोपहर के वक्त मैं अपने दोस्तों के साथ कालेज कैम्पस में बातें कर रहा था । हमसे थोड़ी सी ही दुरी पर कुछ लड़कियां खड़ी थी । वो भी आपस में खुसुर फुसुर कर रही थी । उनमें एक लड़की काफी सुंदर थी । अच्छी कद काठी थी उसकी । मगर उसमें जो खास बात थी वो उसकी बाल थी । काली काली घुंघराले बाल जो उसकी आधी पीठ तक ही आती थी । जैसे माधुरी दीक्षित की साजन मूवी में थी । मेरे दोस्तों ने मुझे डेयर दिया कि मैं उस लड़की से बात करके दिखाऊं । मैं अपने आपको तीसमार खान समझता ही था सो मैं बेफिक्र होकर मस्ती से उन लड़कियों के पास चला गया । वे सभी अचानक से मुझे आया देखकर चौंकी । मैं उस घुंघराले बाल वाली लड़की के सामने गया और उसके बालों की बड़ाई कर दी ।"

" क्या बोला तुमने ?"- श्वेता दी बोली ।

" मैंने कहा मिस , आपकी बाल बहुत ही खूबसूरत है । लम्बे लम्बे
..काले काले... घुंघराले घुंघराले ।"

" फिर क्या बोली लड़की "- इस बार उर्वशी ने पूछा ।

" फिर... फिर उस लड़की ने एक जोरदार का तमाचा मेरे गाल पर जड़ दिया और भुनभुनाती हुई वहां से चली गई ।"

" क्या ! सिर्फ इतनी सी बात पर तुम्हें तमाचा मार दिया । तुमने तो कुछ भी खराब नहीं कहा बल्कि उसकी बड़ाई ही की "- श्वेता दी आश्चर्य करते हुए बोली ।

" वही तो । तब मुझे क्या पता था कि बाल की बड़ाई करने से तमाचे भी खाने पड़ते हैं । लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे मालूम पड़ा कि उसने मुझे तमाचा क्यों मारा ।"

" क्यों मारा ?"- श्वेता दी बोली ।

" दरअसल वो लड़की बंगाली थी । और बंगला भाषा में बाल का मतलब झांट होता है ।"

" क्या ?"- दोनों एक साथ बोली ।

और जोर जोर से हंसने लगी ।

" और बाल को क्या बोलती है ?"- श्वेता दी ने हंसते हुए कहा ।

" चुल या केश । यदि पंकज उधास को मालूम होता तो वो ' बंगाल का जादू बालों में ' वाली गज़ल कभी भी नहीं गाता ।"

वो दोनों हंसे जा रही थी ।

मैं चिढ़ते हुए बोला -" अब तुम दोनों गला फाड़कर हंसना बंद करो । और ये बताओ कि खाने पीने का क्या इंतजाम है ।"

" भुख लगी है ?"- उर्वशी दी ने हंसते हुए कहा ।

" अरे ! पार्टी रखा है तो कुछ फिलहाल के लिए हल्का फुल्का ही खाने पीने का इंतजाम करो ?"

" क्या श्वेता " - उर्वशी दी ने श्वेता दी की तरफ देखते हुए कहा -" कैसी बहन है तु । भाई को भुख लगी है और तु कुछ कर नहीं रही है ।"

" क्यों नहीं करूंगी । मेरा भाई है तो मैं ही न अपने भाई के भुख प्यास का ख्याल करूंगी " - कहते हुए श्वेता दी ने मेरे सिर पर हाथ रखा ओर झुका कर अपने सीने पर मेरा मुंह कर दिया । मेरा मुंह उसकी नंगी चूचियों से जा चिपका ।

उन्होंने न जाने कब अपने पेटीकोट को अपने छाती से नीचे घिसका दिया था । मैं हतप्रभ तरन्नुम में उनकी निप्पल को मुंह में डाला और फिर सब कुछ भुल गया ।

वाह ! वाह ! क्या दिन था आज का । लोग-बाग सपने देखते हैं और मैं हकीकत जी रहा था । वैसे दोनों सहेलियां थोड़ी डोमिनेट जैसे लग रही थी पर मुझे उससे क्या । डोमिनेट हो या सवमिसिव मुझे तो मजा ही आना था ।

मैं श्वेता दी की चुचियों को प्यार से मुंह में लेकर चुसे जा रहा था कि उर्वशी दी की आवाज आई ।

" तेरे भाई को तो पता ही नहीं है श्वेता। इसे तो मेरे हसबैंड से सिखना चाहिए कि बहन की चुचियों को कैसे प्यार किया जाता है ।"

मैं सुनते ही श्वेता दी के चुचियों से अपना मुंह हटाया और हैरत से उर्वशी दी की तरफ देखा ।

" क्या कहा आपने ?"

" बहरे हो ?"

" आप के कहने का मतलब संजय जी और मधुमिता का आपस में सेक्सुअल रिलेशनशिप है ?"

" हां ।"

मैंने आश्चर्य से उनकी तरफ देखा फिर श्वेता दी की ओर देखा । श्वेता दी के चेहरे के हाव-भाव से लगता था कि उन्हें इस के बारे में सब पता है । मैंने फिर उर्वशी दी की तरफ देखा और कहा -" आप को कैसे पता ?"

" बताऊंगी सोना । पहले बाथरूम जाओ और नहा धो कर फ्रेश हो कर आओ । फिर पार्टी करते हैं । और फिर बातें भी करते रहेंगे "- उर्वशी दी ने मुस्कुराते हुए कहा ।

मैंने श्वेता दी की तरफ देखा । वो अपनी पेटीकोट को पहले की ही तरह बांध ली थी । उन्होंने भी मुस्करा कर अपनी सहमति जताई ।

मैं बिना कुछ कहे अटैच बाथरूम में घुस गया और तैयार हो कर बाहर आया । श्वेता दी ने जीजू का शार्ट दिया था । मेरे बदन पर शार्ट के अलावा कुछ नहीं था । जब मैं बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि वे दोनों पहले वाली ही ड्रेस में ही थी । उन्होंने कोई भी वस्त्र चेंज नहीं किया था । दोनों पलंग पर बैठी थी । पलंग से सटकर टेबल लगा हुआ था और उसके उपर बीयर का बोतल , मेरी स्काच की छोटी बोतल , तीन ग्लास , एक प्लेट में ड्राई फ्रूट्स , एक प्लेट में सलाद और एक बड़े से प्लेट में बोनलेस चिकन चीली रखा हुआ था । उन्होंने जाम की तैयारी कर रखी थी ।

मैं पलंग के पास पहुंचा तो उर्वशी दी ने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने और श्वेता दी के बीच बैठा दिया । हम तीनों सटकर बैठे थे । मैं उन दोनों के शरीर से आती हुई गर्मी से पिघले हुए भाप बनें जा रहा था । मेरा लिंग जो नहाने के बाद थोड़ा शांत था फिर से अपनी औकात में आने लगा ।

उर्वशी दी ने दो ग्लास में बीयर ढाला और एक ग्लास में मेरा वाइन ।
फिर चीयर्स बोलकर अपना अपना ग्लास हमने अपने होंठों से लगाया ।

मैंने एक घुंट मारा और चटखारे लेते हुए कहा - " अब बताओ तुम्हारे हसबैंड और तुम्हारे ननद की प्रेम कहानी ।"

" बताती हूं , थोड़ी सी और बीयर पेट में जाय फिर बताती हूं "- उर्वशी दी ने बीयर पीते हुए कहा ।

इस बीच मैं उठकर अपना फेवरेट सिगरेट क्लासिक अपने पैंट में से निकाला और वापस उसी जगह पर बैठ गया ।

जब एक एक ग्लास उन्होंने खतम किया तब उर्वशी ने हल्के तरंग में बोलना शुरू किया -" आगरा के होटल में उस रात एक कमरे में जब तुम दोनों भाई बहन अपनी रास लीला रचा रहे थे उसी समय एक दूसरे रूम में एक दूसरे भाई बहन की कामूक गाथा लिखी जा रही थी ।"

मैं सिगरेट सुलगाया और कश लगाते हुए कहा -" शुरू से बताना ?"

उन्होंने बोलना शुरू किया ।

" संजय को तुम जानते ही हो । दिखने में स्मार्ट , हैंडसम , टाॅल , खुबसूरत और वही उनकी बहन मधुमिता जो बिल्कुल हूबहू आयशा टाकिया की जिरक्स काॅपी । मैं जब शादी करके उस घर में गई तब से ही मुझे इन दोनों भाई बहन में कुछ ज्यादा ही प्रेम भाव दिख रहा था । मगर मैंने कभी भी उन दोनों को कोई ग़लत हरकत करते हुए नहीं देखा था । आगरा में रिसेप्शन पार्टी वाली रात के बारे में तुम्हें पता ही है कि हम सभी ने वाइन पी थी । नशा सभी को थोड़ा बहुत था । रात में खाने पीने के बाद तुम भाई बहन अपने कमरे में चले गए । और मैं अपने कमरे में । संजय को उस रात अपने दोस्तों के साथ ताश खेलने का प्रोग्राम था तो वो अपने दोस्तों के पास चले गए । मैं अपने कमरे में अकेले बोर हो रही थी तो मैंने मधुमिता को फोन किया और कहा कि वो मेरे रूम में चली आए । मधुमिता अपनी सहेलियों के साथ एक रूम में थी । वो मेरी बात सुनते ही मेरे रूम में चली आई । शायद उस वक्त रात के बारह बज रहे होंगे । मैं उसे देखते ही समझ गई कि उस ने भी वाइन पी रखी है । मेरे पुछने पर उसने बताया कि वो अपनी सहेलियों के साथ रूम के अंदर बैठ कर वाइन पी थी । मैंने इस पर ज्यादा तवज्जो नहीं दी । मैंने दरवाजा बंद की और हम दोनो ने नाइट ड्रेस पहनी और बिस्तर पर लेट गई । लाईट हमने पहले ही बंद कर दी थी ।

नशा और थोड़ी थकावट के कारण मैं जल्दी ही सो गई । रात के किसी वक्त रूम में बेल बजने की आवाज से मेरी नींद टुट गई । आलस के चलते उठने का मन नहीं करता था । तभी मैंने देखा मधुमिता बिस्तर से उठी और बोली -" कौन है ?"

" मैं हूं ।" संजय की आवाज आई ।

मधुमिता बिस्तर से उठी और दरवाजा खोल दी । संजय कमरे में प्रवेश किए और दरवाजे को बंद कर दिया ।

मधुमिता की आवाज आई -" दरवाजा क्यों बंद कर दिया आपने । मैं अपने कमरे में जाती हूं न ।"

" रात के दो बज रहे हैं , कहां जाओगी ? सभी गहरी नींद में सोए होंगे । यही पे सो जाओ ।" संजय ने कहा ।

फिर किसी की आवाज नहीं आई । कमरे में अंधेरा था लेकिन एक नाइट बल्ब जल रहा था जिससे हल्की हल्की रोशनी थी । मैंने सोने के लिए अपनी आंखें बंद कर दी । मैं बिस्तर के किनारे पर सोई थी । मेरे बगल में मधुमिता लेटी थी । संजय भी कपड़े उतार कर सिर्फ एक शार्ट पहन कर बिस्तर के दुसरे किनारे लेट गए । पलंग बड़ा था इसलिए सोने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं थी । मधुमिता हम दोनों के बीच सोई थी ।

संजय के बेल बजाने , कमरे में आने और उनके बिस्तर पर लेटने तक मैं उठी नहीं तो उन्हें लगा कि मैं गहरी नींद में सोई हुई हूं । और उन्हें ये भी पता था कि मैंने वाइन भी पी थी । संजय जानते थे कि मुझे आधे बोतल बीयर में ही नशा हो जाता है । और बीयर पीने के बाद एक बार सोई तो फिर कोई कितना भी चिल्लाए , नींद नहीं टुटती है । लेकिन उस रात न जाने क्यों एक बार जो नींद टुटी फिर दुबारा आ नहीं रही थी । शायद नई जगह और पार्टी में हुई घटनाओं के चलते । मैंने आंख बंद कर ली और नींद आने का इंतजार करने लगी ।

आंख बंद किए काफी देर हो चुकी थी तभी मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ । शायद पलंग पर उन दोनों के हिलने डुलने से लगा था । मैंने आंखें खोली और लेटे हुए ही उन्हें देखा । दोनों जो पहले करवट के बल लेटे हुए थे , अब पीठ के बल हो गए थे । मैंने फिर से अपनी आंखें बंद कर ली ।

थोड़ी देर बाद संजय के धीरे से एक बार खांसने की आवाज आई । उसके चार पांच मिनट बाद मधुमिता की एक बार खांसने की आवाज आई । शायद वो अभी भी जगे हुए थे । मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और सोने का प्रयास करने लगी ।

तभी मुझे फिर से संजय के एक ही बार वाली खांसने की आवाज आई । मुझे गुस्सा आने लगा । इनके खांसने से मुझे नींद नहीं आ रही थी । मैंने कुछ कहा नहीं और सोने की कोशिश करने लगी । थोड़ी देर बाद मधुमिता की खांसने की आवाज आई । मेरा मन वितृष्णा से भर गया । इन दोनों भाई बहन ने तो खांसने का अन्ताक्षरी शुरू कर दिया है । खैर , मैं क्या कर सकती थी । मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगी ।

थोड़ी देर बाद संजय की फिर से खांसने की आवाज आई और उसके तुरंत बाद मधुमिता भी खांसी । अचानक से मेरे दिमाग की बत्ती जली । ये तो कोई और चक्कर लग रहा है । मेरी सांसें तेज हो गई और मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई । मैं सांस रोके पीठ के बल लेटे उनके इस गेम का इंतजार करने लगी । मैं भले ही पीठ के बल लेटी हुई थी मगर मेरा चेहरा उनके तरफ ही था । मैं कनखियों से उन्हें देख रही थी और उनके अगले कदम का इंतजार करने लगी ।

थोड़ी देर बाद मैंने संजय को हाथों की कूहनी के बल अपने शरीर को उठाते देखा । उन्होंने मधुमिता के चेहरे पर निगाह डाला और फिर मेरे चेहरे पर । मैं कनखियों से उनकी हरकतें देख रही थी । तभी वो घसक कर आगे आये और मधुमिता के शरीर से चिपक गए । फिर अपने कूहनियों के बल उठ कर अपना एक हाथ मधुमिता की चुची को नाइटी के ऊपर से धीरे से पकड़ते हुए मेरी तरफ झुके और मेरे चेहरे के पास अपना मुंह लाकर धीरे से बोले " उर्वशी सो गई हो क्या ?"

मैंने अपनी आंखें मजबुती से बंद कर ली और अपनी सांसें रोक ली । थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना चेहरा मेरे चेहरे पर से हटाया और वापस अपने जगह पर लेट गए ।

जिस तरह से उन्होंने मधुमिता की चुची को पकड़ा था वो देखकर मैं न जाने क्यों बहुत उत्तेजित हो गई । एक बड़े भाई का अपनी छोटी बहन की चुची पकड़ना मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था । और सबसे बड़ी बात ये थी कि मधुमिता ने कोई ओब्जेक्सन नहीं किया था । वो जगी हुई है ये तो मैं श्योर जानती थी ।

दसेक मिनट के बाद फिर से संजय की धीमे से आवाज आई -" उर्वशी , उर्वशी ।" मैं चुपचाप सोने का नाटक करती रही ।

थोड़ी देर बाद उन्होंने वैसे ही धीरे से फुसफुसा कर बोला -" मधु , मधु ।"

वो अब अपनी बहन को पुकार रहे थे लेकिन उसने भी कोई जबाव नहीं दिया ।

दो मिनट बाद उन्होंने मधुमिता को फिर से धीरे से पुकारा । इस बार मधुमिता ने धीरे से कहा - हम्म् ।"

संजय मधुमिता की तरफ करवट होते हुए धीरे से बोले -" उर्वशी सो गई है क्या ?"

" पता नहीं "- मधुमिता ने धीरे से कहा ।

" देख ना ! सो गई है क्या ?"

" आप खुद ही देख लो । मुझे निंद आ रही है "- कहकर वो पीठ के बल लेट गई।

मैं कनखियों से सब कुछ देख रही थी । वो फिर से अपने हाथों की कूहनियों के सहारे उठे और अपने दोनों हथेलियों से मधुमिता की दोनों चूचियों को नाइटी के ऊपर से दबोचते हुए मेरी तरफ झुके । फिर मुझे नाम से धीरे से पुकारा । मैं चुपचाप गहरी नींद में सोने का नाटक करती रही । दो चार सेकेंड बाद वो अपना चेहरा मुझ पर से हटा कर मधुमिता के उपर किया ।

फिर वो मधुमिता के शरीर पर झुकते हुए उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए उसके कानों में धीरे से कहा -" उर्वशी गहरी नींद में सोई हुई है , वो सुबह से पहले नहीं उठने वाली ।"

" हम्म्..." मधुमिता की बहुत ही धीरे से आवाज आई ।

मैं ये देखकर बहुत ही उत्तेजित हो गई । मधुमिता ने अपनी चुचियों को पकड़े जाने पर कुछ भी नहीं कहा । मेरी चूत में पानी भर गया । मैंने उनकी नजरें बचाकर अपने हाथ को अपने जांघों के बीच ले गई और अपनी चूत में ऊंगली डाल दी । इनसेस्ट कहानी पढ़ी थी मैंने लेकिन कभी प्रत्यक्ष होते हुए नहीं देखी थी । "

" फिर क्या हुआ ?" - मैंने वाइन का लास्ट घूंट मारते हुए कहा ।

" फिर क्या होना था ? एक मिनट के अंदर दोनों भाई बहन पुरे नंग धड़ंग हो गए और फिर चुमा चाटी , चुसा चुसी , 69 , फोर प्ले और लास्ट में घमासान चुदाई " - उर्वशी दी ने कहा ।

उर्वशी दी की इन बातों और वाइन पीने पिलाने के दौरान हम तीनों भी इस दौरान वस्त्र हिन हो गए थे । और संजय और मधुमिता की सेक्स कहानी सुनकर काफी उत्तेजित हो गए थे ।

फिर हमारा थ्रीसम सेक्स शुरू हुआ जो मेरी जिंदगी का पहला और सबसे बढ़िया एक्सपिरियंस रहा ।
 
Update 24. A

श्वेता दी और उर्वशी दोनों संभ्रांत परिवार की महिलाएं थी । एक मेरी कजिन सिस्टर थी तो दुसरी उनकी खास सहेली जिनहे मैं दीदी कह के पुकारता था। और उन दोनों के साथ मैं सेक्स कर चुका था । लेकिन दोनों के साथ अलग अलग ही किया था । इकठ्ठे कभी नहीं हुआ था । आज जिस तरह से दोनों ने भरी दोपहरिया में ड्रिंक्स पार्टी का आयोजन किया था ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था । वो ड्रिंकर नहीं थी लेकिन आज ड्रिंक्स का इंतजाम किए हुए थी ।

दोनों जानती थी कि मैंने उन दोनों के साथ सेक्स किया हुआ था और वे अपने हाव भाव से इस पर मजाक भी कर दिया करती थी ।
आज जब उर्वशी ने अपने हसबैंड संजय और उनकी बहन मधुमिता के नाजायज संबंधों की दास्तान सुनाई तो रूम का माहौल काफी वासनामई हो गया था । उत्तेजना मेरे सर पर चढ़ कर नाचने लगा था ।

बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं को दबा कर रखा था कि कब अपनी लोवर निकाल कर खुद को पुरी तरह से नंगा कर लूं और उन दोनों के शरीर से एक मात्र कपड़े उतार कर उन्हें भी पुरी तरह से नंगा कर दूं और दोनों के साथ घमासान खाट कबड्डी शुरू कर दूं । और हुआ भी । क्या गजब का हुआ । ये मेरी लाइफ की पहली और सबसे शानदार थ्रीसम सेक्स थी ।

श्वेता दी के घर से मैं करीब चार बजे के आसपास निकला और सीधे अपने घर चला गया । मेन गेट पर ताला लगा हुआ था । मुझे लगा शायद माॅम चाची के पास हो । मैं चाची के घर गया । माॅम वहीं थी । वो दोनों आपस में बातें कर रही थी । मुझे देखते ही माॅम ने चाबी सौंपी और कहा कि तु घर चल मैं थोड़ी देर में आती हूं ।

मैं घर आया और अपने कमरे में बिस्तर पर लेट गया । आज की सुखद घटनाओं के बारे में सोच कर मेरा लन्ड फिर से खड़ा होने लगा । मुझे उर्वशी दी की वो बातें याद आने लगी जब उन्होंने विस्तार से संजय जी और मधुमिता की पहली चुदाई के बारे में बताया था । मैं फ्लैश बैक में चला गया ।

*****

जब मेरे ये पुछने पर कि " फिर क्या हुआ " के जबाव में उर्वशी ने कहा कि " फिर क्या होना था थोड़ी देर में दोनों भाई बहन नंगे , चुमा चाटी और घमासान चुदाई " तो मैंने कहा - नहीं उर्वशी दी , ऐसे नहीं जरा डिटेल में बताओ ?"

" अभी नहीं । पहले ये सब साफ करते हैं "- श्वेता दी ने जुठे बर्तनों की तरफ इशारा करते हुए कहा -" फिर आराम से बताना ।"

दोनों सहेलियां आधे घंटे के अंदर सब कुछ साफ़ कर दी । मैं बिस्तर पर लेटा हुआ बड़ी बेसब्री से उनके आने का इंतजार कर रहा था । थोड़ी देर बाद दोनों आई और बिस्तर पर चढ़कर मेरे अगल बगल लेट गई । मैं दोनों के बीच में सैंडविच बना गया था ।

तभी उर्वशी ने मुझे अपनी ओर घुमाया और अपनी नाइटी को अपने कंधों से नीचे सरका दिया जिससे उनकी दुध से भी गोरी ३६ डी साईज की बड़ी बड़ी चूचियां नंगी हो गई । उन्होंने अपनी चूचियों को अपने हाथों से पकड़ा और निप्पल मेरे मुंह में डाल दी । मैं आश्चर्यचकित उनकी किसमिस की तरह निप्पल को अपने मुंह डाल कर चूसने लगा। तभी एक हाथ मैंने अपनी लोवर के अन्दर जाता महसूस किया । मैंने अपनी नजरें नीचे की । देखा श्वेता दी का हाथ था । वो लोवर के अन्दर मेरे खड़े लन्ड को अपने हाथों से पकड़ कर सहलाने लगी । मैंने उनकी चेहरे पर नजर डाली वो उर्वशी की तरफ देख रही थी ।

मैं तो जैसे इन्द्र के दरबार में था । एक तरफ एक अप्सरा उर्वशी की चुची चुस रहा था तो दुसरी तरफ एक अप्सरा श्वेता मेरा लन्ड अपने कोमल हाथों से हिला रही थी ।

" बोल ना फिर क्या हुआ ?"- श्वेता दी ने उर्वशी को कहा ।

" बताती हूं ना , इतना हड़बड़ क्यों कर रही है । तुझे तो सब बताया ही था "- कहते हुए उर्वशी ने मेरे उपर से अपनी हाथ बढ़ाकर श्वेता दी की पेटिकोट को खिंच कर उसकी चूचियों को नंगा कर दिया और उनकी चूचियों को दबाने लगी ।

" भाई को पता नहीं है ना , इसे बता "- कहते हुए श्वेता दी ने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा जिससे मेरे मुंह से उर्वशी दी की निप्पल ' पक ' की आवाज के साथ निकल गई और वो अपनी चूची को मेरे मुंह में दबाते हुए बोली -" क्यों सागर , भाई बहन की लवस्टोरी सुनना है न ।"

मैं वासना से लथपथ श्वेता दी की बड़ी बड़ी चूचियों के ऊपर अपने मुंह रगड़ते हुए " हम्म् " कहा और निप्पल को अपने मुंह में लेकर बुरी तरह चूसने लगा । दो अलग-अलग चुचियों का स्वाद एक साथ ले रहा था ।

तभी उर्वशी ने श्वेता दी के हाथ को हटा कर मेरा लन्ड अपने हाथों से पकड़ लिया और मुठ मारते हुए बोली -" हां तो मैं कहां थी ?"

" तुने बताया था कि तेरे हसबैंड ने मधुमिता की चुचियों को उसके नाइटी के ऊपर से अपने दोनों हाथों से पकड़ते हुए उसके कानों में धीरे से कहा था कि उर्वशी गहरी नींद में सो गई है वो अब सुबह से पहले नहीं उठने वाली है के जबाव में मधुमिता ने " हम्म् " कहा ।"

" हां । उसके बाद एक दो मिनट तक वे दोनों भाई बहन वैसे ही पड़े रहे । संजय का एक पांव मधुमिता के अधनंगी मांशल जांघों पर था । उसके दोनों हाथ उसकी दोनों चूचियों पर था और उसका मुंह मधुमिता के सर पर कानों के पास था । जब मधुमिता ने कोई प्रतिवाद नहीं किया तो संजय ने उसकी चूचियों को अपने हाथों से धीरे से दबा दिया ।

(दोनों सहेलियों को इतना खुलकर बातें करते हुए देख मैं हैरान होने के साथ-साथ बहुत उत्तेजित भी था ।)

तभी मधुमिता की धीरे से आवाज आई -" हटो ना भाई ? भाभी उठ जायेंगी ।"

" नहीं उठेगी , मैं जानता हूं "- वो उसके शरीर से जोंक की तरह चिपक गये । अपने नंगे जांघ को उसकी मोटी अधनंगी जांघो पर रगड़ने लगे ।

मधुमिता उसके भार से कसमसाते हुए बोली -" ठीक है नहीं उठेगी लेकिन अपना हाथ हटाओ वहां से ?"

" कहां से हटाऊं ? "- संजय उसे छेड़ते हुए बोले ।

" जहां पर है ।"

" कहां पर है ?" - कहते हुए संजय ने उसकी चूचियों को जोर से मसल दिया ।

मधुमिता जोर से सिसकियां भरते हुए बोली -" मेरी छाती पर ।"

" तुम ही हटा दो न "- वो उसकी चूचियों को एक बार फिर से दबाते हुए बोले ।

" मैं क्यों हटाऊं ? जिसने रखा है वो हटाए ।"

( रूम में एसी चालू था इसलिए मैं ब्लैंकेट ओढ़ी हुई थी । लेकिन उनके हरकतों से मुझे गर्मी महसूस होने लगी । उनकी हरकतों को देख कर मेरा विश्वास पक्का हो रहा था कि इन दोनों के बीच में बहुत पहले से कुछ कुछ था । मधुमिता का चेहरा मेरी तरफ था । मैंने साफ देखा वो ये बोलते वक्त धीरे से मुस्कुराई थी । साली को बड़ी मजा आ रहा था अपने बड़े भाई से चुचियां मिसवाने में । और नखरे ऐसे कर रही थी कि पुछो मत । और संजय भी शायद उसकी नखरों को समझ रहे थे ।)

" नहीं हट रहा है यार , लगता है गोंद की तरह चिपक गया है "- उन्होंने उसके कानों की लौ को होंठों से दबा कर चुसते हुए कहा ।

" तुम बहुत बदमाशी कर रहे हो भाई। हटाओ न , दुखता है "- वो नाटक करते हुए बोली ।

" अगर ऐसा है तो खुद ही हटा दो ।"

" नहीं , आपने रखा है तो आप ही हटाओ "

" ठीक है हटाता हूं लेकिन पहले ये बताओ कि किस पर से हाथ हटाऊं ?" वो उसकी गालों को चूमने लगे ।

( मधुमिता के चेहरे की हाव भाव से मुझे समझ में आ रहा था कि वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई है । वो अपने होंठों को बार बार अपने जीभ से गीला कर रही थी । और उसके साथ साथ मैं भी बहुत उत्तेजित हो गई थी । मुझे गुस्सा आना चाहिए था लेकिन मैं इन दोनों के इरोटिक गेम देखकर गरम हो रही थी । मेरी चूत में पानी भर गया था । जब शराब और शबाब का जादू चलता है तो बुद्धि घांस चरने चली जाती है । वो दोनों तो जैसे मेरा रूम में होना ही भुल गए थे ।)

" मैंने कहा तो था मेरी छाती पर से "- मधुमिता अपने चुचियों की तरफ इशारा करते हुए बोली ।

" छाती से क्या मतलब हुआ , ठीक से आम बोलचाल वाली भाषा में बोल ना "- कहते हुए उन्होंने मधुमिता की नाइटी को उसके कंधों पर से नीचे सरका दिया जिससे उसकी ब्रा में कैद चुचियां उनके आंखों के सामने आ गई ।

मधुमिता देख रही थी कि उसका भाई उसकी ब्रा में कैद चुचियों को बड़े कामुक नज़रों से देख रहा है । वो बहुत उत्तेजित हो गई ।

" ब्रेस्ट पर से "- वो धीरे से बोली ।

संजय उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से दोनों हाथों से पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगा । मधुमिता की सिसकारियां निकलने लगी ।

" ब्रेस्ट तो इंग्लिश में बोलते हैं । अपने भाषा में बताओ "- कहकर संजय ने अपनी एक हाथ उसकी ब्रा पर से हटा कर मधुमिता के चेहरे को अपने चेहरे के सामने किया । दोनों एक-दूसरे के आंखों में देख रहे थे । दोनों की आंखें वासना से लाल हो गई थी । दोनों के होंठ एक दूसरे के काफी करीब थे ।

" बोल ना मधु " - संजय ने फुसफुसाते हुए कहा और उसकी आंखों में देखते हुए अपनी चुटकियों से उसकी ब्रा के ऊपर से निप्पल को मसलने लगे ।

मधुमिता की नजरें अपने भाई की उंगलियों पर थी जो उसकी निप्पल को मसलने में लगा हुआ था। जब संजय ने देखा कि वो उसके उंगलियों को देख रही है तो उसने अपनी उंगलियों को वहां से हटा दिया और अपना मुंह नीचे कर के ब्रा के ऊपर से निप्पल को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा ।

मधुमिता हाय हाय कर उठी । वो सिसकी मारते हुए बोली - "ऊंह ! मुझे शरम आती है ।"

" बोल ना यार " - उसके निप्पल को होंठों से निकालते हुए संजय ने कहा और फिर उसके दुसरे निप्पल को ब्रा के ऊपर से ही होंठों से चुसने लगा ।

मधुमिता कुछ देर तक ब्रा के ऊपर से निप्पल चुसाई का मजा भोगी । वो देख रही थी उसका भाई ब्रा के ऊपर से ही एक चुची को मसल रहा है और दूसरी चूची के निप्पल को चूस रहा है । वो काफी उत्तेजित हो गई और अपनी कमर को दायें बायें हिलाने लगी । मगर संजय के पांव उसके जांघों पर होने से वो ठीक से हिला भी नहीं पा रही थी ।

वो अपनी नजरें अपनी छाती से हटा कर संजय के ऊपर डाली तो उसे अपनी ओर ही देखते पाया । वो उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से खेलते हुए उसे ही देख रहा था । उसे अपने भाई का लन्ड भी अपने जांघों पर चुभता हुआ महसूस हुआ । दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे । संजय उसकी आंखों में देखते हुए उसकी निप्पल को ब्रा के ऊपर से चुस रहा था और उसकी दुसरी चुची को हाथों में भर कर दबा रहा था । मधुमिता अब हवश की आग में जलने लगी ।

वो अपने भाई की आंखों में देखते हुए फुसफुसाई -" चुची ।"

संजय अपनी बहन के मुंह से चुची शब्द सुनकर पागल जैसे हो गए । उनसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था । उन्होंने उसकी दोनों बांहों को उपर उठा कर उसके बगलों ( कांख ) को चाटना शुरू कर दिया । मधुमिता के बगलों में काफी हल्के हल्के बाल थे । शायद कुछेक दिन पहले उसने शेविंग किया था । दोनों बगलों को चाटने के बाद फिर से उसकी एक निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगे । थोड़ी देर बाद निप्पल को मुंह से निकाला और मधुमिता को देखते हुए कहा -" तु भी बाल साफ़ नहीं करती है क्या ?"

मधुमिता सुन कर शर्मा गई और बोली -" धत ! आपने कब देख लिया ?"

" अभी ही तो देखा "- वो उसकी चूची को दबाते हुए बोला ।

" झुठ मत बोलो ।"

" तो फिर ये क्या है ?"- कहते हुए संजय ने मधुमिता को कांखों के बाल की तरफ इशारा किया ।

" ओह ! आप उसकी बात कर रहे थे और मैं वहां की समझ..."

" तुम कहां की समझ रही थी ?" - जबकि संजय को सब समझ में आ गया था ।

" कुछ नहीं । छोड़िए मुझे नींद आ रही है ।"

" ऐसे कैसे छोड़ दूं । पहले बताओ कि तुम कहां की समझ रही थी ?"

" धत ! मैं नहीं बताऊंगी "- वो अपनी मुस्कान छुपाते हुए बोली ।

" ठीक है तब मैं भी तुम्हें आज सोने नहीं दुंगा "- बोलकर उसकी चूचियों को दबाने लगे ।

" हटो नहीं तो मैं भी पकड़ लुंगी ।"

" मेरे पास तेरी तरह इतनी बड़ी बड़ी नहीं है ।"

" मैं ये पकड़ लुंगी "- कहकर मधुमिता ने झटके से अपना हाथ संजय के लोवर के अन्दर डाल दिया और उसके लन्ड को पकड़ लिया ।

( मैं ये देखकर चौंक गई । काफी तेज लड़की निकली ।संजय का लन्ड भी काफी मोटा और आठेक इंच लम्बा था । न जाने वो अपने भाई के लन्ड को पकड़ कर सहला रही होगी या मसल रही होगी या डर रही होगी । मुझे पता नहीं चल रहा था ।)

" अपने लन्ड पर मधुमिता के हाथ का स्पर्श पाकर संजय ने कहा -" ये तो गलत है तुमने मेरा पकड़ लिया है और मैंने ब्रा के ऊपर से ही पकड़ा है ।"

" तो इसमें मैं क्या करूं "- वो लोवर के अन्दर अपने हथेलियो से लन्ड को पकड़ कर मसलते हुए फुसफुसाई -" ये आपकी गलती है ।"

( पक्का वो अपने भाई के लन्ड को अपने हाथों में भर के हिला रही थी । और उसके बातों से साफ पता चलता था कि वो अपनी चूचियों को अपने भाई से नंगी करवाना चाहती थी । )

और संजय ने किया भी वही । वो उसकी नाइटी को पुरी तरह से उसके शरीर से बाहर निकाल दिये और उसकी ब्रा को खोल कर साइड में रख दिया । मधुमिता की बड़ी बड़ी चूचियां संजय की आंखों के सामने नंगी थी । वो आंखें गड़ाए अपनी बहन की कुंवारी , ठोस और कड़ी चुचियों को घुरे जा रहे थे ।

संजय ने कुछ देर तक चुचियों की सुन्दरता को निहारा फिर मधुमिता को देखा । वो कामुक नज़रों से संजय को देख रही थी । संजय ने उसकी चूचियों को अपने दोनों हथेलियों में दबोच लिया और जोर जोर से मसलने लगे । मधुमिता कामुक अंदाज में सिसकारियां छोड़ने लगी ।

(और मैं ब्लैंकेट के भीतर अपनी चूत में अपनी दो उंगलियां डाल कर अन्दर बाहर करने लगी ।)

संजय चुचियों को मसलते हुए अपनी बहन की आंखों में देखे जा रहे थे । मधुमिता भी अपने भाई की नजरों से अपनी नजरें मिलाए उसके लन्ड को मुठियाए जा रही थी ।

संजय उसकी चूचियों को दबाते हुए बोले -" बोल ना मधु तुमने कहां की बाल के बारे में सोचा था ?"

मधुमिता को भी यह सब अच्छा लग रहा था ।

वो भी लन्ड को मुठ मारते हुए बोली -" आपको पता है ।"

संजय ने अपनी लोवर निकाल कर फेंक दिया। वो पूरी तरह से नंगा हो गया । मधुमिता ने उनके लन्ड को देखा और मंत्र मुग्ध होते हुए उसे अपने हथेलियों से पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगी । इधर संजय उसकी नंगी चूचियों को मुंह से चाटने लगा । चाटते चाटते उसकी अंगुर की जैसी निप्पल को मुंह में भरकर चूसने लगा । थोड़ी देर बाद फिर उन्होंने कहा -" मुझे पता है लेकिन मैं तुम्हारे मुख से सुनना चाहता हूं । बता ना ?"

मधुमिता कामान्ध होकर फुसफुसाई -" वहां की बाल ।"

" कहां की बाल ?"

" बहुत बदमाश हो । खाली गन्दी गन्दी बातें मुझसे बोलवाना चाहते हो ।"

" इसमें गन्दी बातें क्या है ? जैसे मेरे लन्ड के अगल बगल हल्का हल्का बाल है । वैसे ही तेरी भी होगी । "

मधुमिता उत्तेजना से थरथराते हुए बोली -" तुम खुद ही देख लो ।"

" वो तो देखूंगा ही लेकिन तु बता ना पहले ? है भी या पुरी तरह साफ है ।"

" हल्की हल्की है "- वो उनके लन्ड को जोर से मसलने लगी ।

संजय मधुमिता के उपर चढ़ गये और अपने लन्ड को उसकी पैंटी के ऊपर ठीक उसकी चुत के बीचों-बीच रख कर अपनी कमर हिलाने लगे । और उसकी चूचियों को मसलने लगे । मधुमिता ने अपनी पांव उठाकर संजय के उपर रख दिया ।

" बोल ना मेरी प्यारी बहन ?"- संजय ने फिर पूछा ।

बहन सुनकर मधुमिता उत्तेजना में संजय के गाल को दांतों से काट ली और फुसफुसा कर बोली -" मेरी चुत की बाल ।"

( मधुमिता के मुंह से यह सब सुनकर मेरी चुत पानी से बहने लगी )

संजय मधुमिता के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ कर अपने चेहरे के सामने किए और उसकी होंठों को चुम कर बोले -" कहां की बाल ?"

" मेरी चुत की "- वो कामान्ध स्वर में बोली ।

संजय उसे पुरी तरह बेशर्म बनाने में अड़े थे ।

" मेरी बहन के चुत की ?"

" हम्म् ।"

" क्या हम्म ?"

" धत ! तुम बड़े हरामी हो । मुझे शरम आती है ।"

" आज तेरी शरमगाह में अपना लन्ड पेलकर तुझे भी अपनी तरह बेशर्म बना दुंगा । बना दूं तुझे बेशर्म ?"- संजय ने अपनी एक हाथ मधुमिता के पैंटी में डालते हुए कहा ।

मधुमिता अपनी चुत पर संजय की उंगलियों का स्पर्श पाते ही वासना से भरी स्वर मे फुसफुसाई -" बना दो बेशर्म ।"

" लेकिन उसके लिए तेरी चुत में अपना लन्ड डालना होगा "- वो उसकी चुत में ऊंगली डालते हुए बोले -" अपने चुत में मेरा मोटा लौड़ा डलवाएगी ?"

" हम्म । डलवाऊंगी "- वो नशे से बोली ।

" चुत में लन्ड जाने का मतलब समझती है ?"

" हम्म ।"

" क्या ?"

मधुमिता संजय की आंखों में देखते हुए फुसफुसाई -" चोदा चोदी ।"

फिर तो मै उनके प्रगाढ़ चुम्बन को लाइव देख रही थी । दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चुम रहे थे । दोनों एक-दूसरे के जीभ को आइसक्रीम की तरह चुस रहे थे , चाट रहे थे । दोनों की थुक एक दूसरे के मुंह में निर्विघ्न जा रही थीं ।

चुमा चाटी के दौरान ही संजय ने मधुमिता के शरीर से आखिरी वस्त्र भी बाहर निकाल दिया। दोनों भाई बहन मादरजात नंगें एक दूसरे के उपर चढ़ , उतर रहे थे । कमरे के अंदर उन दोनों की सिसकारियां गूंज रही थी । और इधर मैं अपनी मुंह भींच कर अपनी सिसकारी दबा रही थी । संजय मधुमिता की भारी गांड़ को दोनों हाथों से दबोचते हुए उसकी होंठों को चुसे जा रहे थे ।

थोड़ी देर बाद मधुमिता को मेरे बगल में लेटा दिया मगर उसकी पांव मेरे सिर की तरफ थी । उन्होंने उसकी दोनों टांगों को अलग अलग करके उपर उठा दिया । उसकी टांगें उसके चुचियों तक पहुंच गई जिससे उसकी चूत उभर कर सामने आ गई । उसकी चुत पर हल्के हल्के बाल थी । चुत की दरारें पांव फैलाने से थोड़ी खुल गई थी जो उसके काम रस से भरी हुई थी । उसकी कामरस से उसकी जांघें भी भींगी हुई थी । उसके चुत के होंठ मोटे मोटे थे । संजय ने देरी न करते हुए जल्दी से अपने होंठ उसके चुत से सटा दिए और अन्दर से सारी मलाई चाट चाट कर साफ करने लगे ।

( मैं मधुमिता को नहीं देख पा रही थी लेकिन मुझे विश्वास था कि वो भी अपने भाई के हबसी लन्ड को चुस चाट रही होगी । मैं बस संजय को मधुमिता की चुत को चाटते हुए और उसके अंदर जीभ ढुकाते हुए देख रही थी । कभी कभी तो वो उसकी गान्ड के छेद को चाटने लग जाते थे । )

आधे घंटे तक दोनों भाई बहन ने 69 की मुद्रा में एक दूसरे को चुसा चाटा । फिर संजय मधुमिता के उपर आए और अपने लन्ड को उसकी चुत के छेद से सटा दिया ।

" धीरे से करना "- मधुमिता बोली -" बहुत बड़ा है ।"

" घबडा़ओ मत । शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा उसके बाद सब ठीक हो जाएगा ।"- संजय ने उसे आश्वासन दिया ।

( मैंने थोड़ी देर में मधुमिता के दर्द से चिखने की आवाज सुनी । वो धीरे धीरे कराह रही थी । उसके पांच सात मिनट बाद दोनों की सिसकारियां कमरे में गुंजने लगी । मधुमिता की पांव मेरी तरफ था । उन दोनों का सिर मेरे पांवों की तरफ था इसलिए मैने अपनी चुत में ऊंगली करनी बंद कर दी । लेकिन मैं उनकी चोदाई देखना चाहती थी इसलिए थोड़ा सा उनके पैरों की तरफ खिसक गई । और जो मुझे दिखाई दिया वो कभी भुलने वाली चीज नहीं थी । मैं संजय के लन्ड को मधुमिता के चुत में अन्दर बाहर होते हुए स्पष्ट देख रही थी । ये देखकर मैं वासना की आग से छटपटाने लगी । बीस मिनट तक मधुमिता को चोदने के बाद उसके चुत में ही उन्होंने अपना वीर्य छोड़ दिया । मैं जल्दी से अपने पहले वाली जगह पर खिसक गई क्योंकि दोनों का काम क्रीड़ा खतम हो चुका था । वो कभी भी उठ सकते थे । )
 
Update 24 A.

Flashback continue....

जैसे ही उर्वशी चुप हुई मैं दौड़कर बाथरूम भागा । संजय और उसकी बहन मधुमिता की चुदाई कहानी सुनकर लन्ड आसमान ज़मीन एक किए हुए था । और वाइन पीने के कारण पेशाब भी लग गया था ।

इतना जोर से पेशाब लगा था कि दो तीन मिनट तक लग गए पेशाब करते करते । फिर हाथ मुंह धोकर रूम में प्रवेश किया । और वहां के माहौल को देखा तो मेरा लन्ड जो पेशाब करने के बाद थोड़ा शांत हो गया था फिर से अशांति पर उतर आया ।

दोनों हस्तनी सहेलियां श्वेता दी और उर्वशी पुरी तरह निर्वस्त्र पलंग पर एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो कर एक दूसरे को चुम चाट रही थी ।

मैंने पोर्न मूवी तो बहुतों देखी थी । और कुछ लेस्बियन सेक्स मूवी भी देखा था लेकिन कभी जीवंत नहीं देखा था । दो गोरी-चिट्टी मांशल बदन वाली शादीशुदा युवतियों को पुरी तरह नंगी एक दूसरे से गुत्थमगुत्था देखना शरीर के रोंगटे खड़े कर देने वाला था । दोनों के लेस्बियन सेक्स को और देखने के लालशा में मैंने उन्हें डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा और बगल में रखे सोफे पर बैठ गया । मैंने भी अपना लोवर निकाल दिया । अब मैं भी उन्हीं की तरह सर से पांव तक निर्वस्त्र था ।

श्वेता दी बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और उनके उपर उर्वशी दी चढ़ी हुई थी । दोनों सहेलियों ने अपने दोनों पांवों को कैंची की तरह फंसा कर रखा था जिससे दोनों की रस से भरी हुई चुत एक दूसरे से रगड़ खा रही थी । साथ में दोनों अपनी मोटी मोटी जांघें फैलाए एक दुसरे से घसे जा रही थी ।

दोनों की बड़ी बड़ी चूचियां एक दूसरे से दबी हुई थी । उर्वशी श्वेता दी की जीभ को बुरी तरह चुस रही थी । दोनों की चुमाचाटी और सिसकारियों की आवाज पुरे कमरे में मधुर संगीत पैदा कर रही थी ।

उपर चढ़े होने के कारण उर्वशी की तरबुज की तरह बड़ी गांड़ आगे पीछे एक लय में हील रही थी । और नीचे से श्वेता दी भी धक्के लगा रही थी । मैं जहां बैठा था वहां से दोनों को एक-दूसरे के चुत को घिसते हुए स्पष्ट देख रहा था । दोनों की चिकनी चुत की रसमलाई रिसते हुए उनके मोटी मोटी जांघों तक आ पहुंची थी ।

उर्वशी दी के उपर होने के कारण उसकी चौड़ी गान्ड की हल्की भुरी छेद भी मैं देख पा रहा था जो कभी खुल रही थी तो कभी बंद हो रही थी । मै बहुत उत्तेजित हो गया था । मैं डर से अपने लन्ड को छु नहीं रहा था कि कहीं मेरे कठोर हाथों के स्पर्श से लन्ड पानी न फेंक दे ।

वो दोनों एक दूसरे में इतना खो गई थी कि उन्हें मेरा ख्याल तक भी नहीं रहा था । कुछ देर तक एक-दूसरे को चुमते चाटते और अपनी चुत रगड़ते कब 69 पोज में आ गई , इसका अंदाजा उन्हें खुद भी नहीं था। फिर तो जो वो दोनों एक-दूसरे के गुप्तांगों को चुमने चाटने लगी कि उनके चपर चपर की आवाज मेरे कानों तक पहुंचने लगी । उर्वशी दी की पांव मेरी तरफ थी जिससे मैं श्वेता दी को उनकी फुली हुई रसभरी दरारों को अपने जीभ से चाटते हुए स्पष्ट देख रहा था ।

तभी श्वेता दी की नजर मुझ पर पड़ी । वो मुस्कराई और मुझे आंखों ही आंखों में वहां आने का इशारा की ।

मैं तो बहुत पहले से इस निमंत्रण का इंतजार कर रहा था । मैं बिना देरी किए वहां झटपट पहुंच गया । श्वेता दी ने उर्वशी की चुत को अपने दोनों हाथों से फैलाया । उनकी चुत उनके कामरस से भीगी हुई थी । बस फिर क्या था... उर्वशी की चुत को हम दोनों भाई बहन एक साथ चुसने लगे । उर्वशी को भी इसका आभास हो गया था कि उसकी चुत में दो दो जीभ ढुके हुए हैं । वो उत्तेजित हो कर बेसब्री से अपनी कमर हिलाने लगी । श्वेता दी उसकी क्लीट को अपने होंठों से दबा कर चूसने लगी और मैं उसके छेद में अन्दर तक जीभ डाल उसकी चुत को जीभ से चोदने लगा ।

ये दो तरफा प्रहार उर्वशी झेल नहीं पाई और बुरी तरह झड़ने लगी । उसकी चुत ने पानी का फव्वारा छोड़ दिया जिसे हम दोनों भाई बहन ने गटक गटक कर पी लिया ।

उर्वशी के सुस्त पड़ते ही मैंने श्वेता दी को पकड़ कर बिस्तर पर पटक दिया और अपने दोनों हाथों से उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुए उनकी गुलाबी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा । मेरा लन्ड उनकी कचोड़ी जैसे फुली हुई चुत पर झटके पर झटका दिए जा रहा था । श्वेता दी भी काफी उत्तेजित हो गई थी । वो बड़े जोश से अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर ठेलने लगी ।

ये देख उर्वशी की काम वासना फिर से भड़कने लगी । वो सरक कर हमारे करीब आई और अपनी जीभ निकाल कर हम दोनों के जीभ से सटा दी ।

फिर तो हम तीनों आपस में अपना मुंह सटाए चुमा चाटी करने लगे । तीनों बदल बदल कर एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे । तीनों ने अपनी अपनी जीभ निकाल कर एक दूसरे के मुंह में ठुसने शुरू कर दिए । तीनों के थुक एक दूसरे के मुंह में जा रहे थे ।

थोड़ी देर बाद उर्वशी वहां से घसक कर मेरे जांघों के पास आई और मेरे फनफनाते लन्ड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और आइसक्रीम की तरह चूसने लगी । ये देख श्वेता दी ने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरे सर के ऊपर से अपने दोनों पांव दो तरफ करके मेरे मुंह के सामने अपनी चिकनी चुत रखकर आगे की ओर झुक गई । अब वो भी उर्वशी के साथ साथ मेरे लन्ड को चूसने लगी ।

मैंने श्वेता दी की खुबसूरत चुत को बड़ी कामूक भरी निगाहों से देखा जो उसके काम रस से भीगी हुई थी । सच में ये जन्नत का द्वार था । डबल पावरोटी के समान फुली हुई और बीच में दरार ली हुई । उनकी चुत को अपने दोनों हाथ के अंगूठे से फैलाया । अंदर रस ही रस था । और उसकी महक मुझे पागल किए जा रही थी । मैंने अपना जीभ निकाला और उनके दरारों में घुसेड़ दिया और उनकी चुत से निकल रही मलाई को चुस चुस कर पीने लगा । मैं जितना उनकी चुत से मलाई चाटता उतना ही वो और अधिक मलाई छोड़ देती । और मैं बड़े प्रेम से उसे भी चाट चाट कर साफ़ कर देता ।

इधर मेरा मोटा तगड़ा हथियार कभी उर्वशी के मुंह के अंदर होता तो कभी श्वेता दी के मुंह में होता । मेरे दोनो अंडकोष को दोनों सहेलियां बदल बदल कर अपने होंठों से तो कभी जीभ से प्यार करती । कभी अपने मुंह में डाल कर चुसती ।

मैं लन्ड चुसाई का सुख भोग ही रहा था कि उर्वशी दी कामोत्तेजना बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरे जांघों पर चढ़ गई और मेरे लन्ड को पकड़ कर अपने चुत के छिद्र से सटाकर उसे अपने अंदर लेने लगी । जैसे ही मेरा लन्ड उनके चुत के गहराइयों में पहुंचा कि वो अपनी कमर ऊपर नीचे करके मुझे चोदने लगी । उनकी चुत अभी भी कसी हुई थी जिससे कारण लन्ड फंस फंस कर अंदर बाहर हो रहा था ।

श्वेता दी मेरे मुंह पर अपनी चुत रखकर चुसवा रही थी वहीं उर्वशी मेरे लन्ड को अपने चुत में डाल कर खुद ही मुझे चोदे जा रही थी । मैं तो जैसे सातवें आसमान पर था ।

कमरे का तापमान काफी गरम हो गया था । श्वेता दी मेरे मुंह पर अपनी चुत रगड़ते हुए अपनी गाल मेरे नाभि के ऊपर रखकर अपने भाई के लन्ड को उर्वशी की चुत में तेजी से अंदर बाहर होते हुए देख रही थी । इस कामूक दृश्य को देख उत्तेजित होकर वो मेरे मुंह पर अपनी चुत तेजी से पटकने लगी ।

उर्वशी की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई थी । वह जोर जोर से मेरे लन्ड पर कूदते हुए और सिसकारियां मारते हुए बुरी तरह झड़ने लगी । उन्होंने अपनी पानी से मेरे लन्ड को नहलवा दिया । मेरा लन्ड उर्वशी की चुत की गर्मी और उनके झड़ते हुए पानी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और वो भलभला कर उनके चुत में झड़ने लगा । श्वेता दी की नजरें हमारे संधि स्थल पर ही थी । हमें झड़ते देखकर वो भी बर्दाश्त नहीं कर पाई और उन्होंने भी अपनी नलकी मेरे मुंह में खोल दी । और मैं बड़े प्रेम से उनकी मलाई पीता गया । उर्वशी झड़ने के बाद श्वेता दी के पीठ पर सुस्त हो कर पसर गई ।

थोड़ी देर बाद तीनों अगल बगल लेट गए । करीब दस पंद्रह मिनट तक हम अपनी सांसें दुरूस्त करते रहे ।

श्वेता दी जब सहज सी महसूस की तो उसने उर्वशी से पुछा -" तेरा और सागर का ये सब चक्कर कैसे चालु हुआ था , ये तो तुने अभी तक बताया नहीं ।"

" इसने नहीं बताया ? " - उर्वशी ने कहा ।

" पुछने का टाइम नहीं मिला "- श्वेता दी बोली ।

मैं चुपचाप बिस्तर पर लेटे थोड़ा आराम करते हुए मोबाइल पर इंग्लैंड और पाकिस्तान क्रिकेट मैच का ड्रीम इलेवन टीम बनाने लगा ।

" ह्वाट्सएप पे बढ़िया बढ़िया मैसेज भेज के पटाया ।"

" ऐसा क्या बढ़िया मैसेज भेजता था कि एक दम से चुद ही गई ?"

" शुरुआत गुड मार्निंग मैसेज से किया था ।"

" गुड मार्निंग मैसेज ?"

" हां... गुड मार्निंग मैसेज.. इतना सुन्दर होता था न कि क्या बताऊं । जो भी पढ़ेगा वो यही समझेगा कि भेजने वाला शख्स कितना अच्छा संस्कारिक और धार्मिक किस्म का आदमी है ।"

" अच्छा तो तु धार्मिक टाइप के मैसेज से पट गई ?"

" अरे नहीं यार । सुन ! ये तेरा मासूम सूरत वाला कमीना भाई रोज सुबह..जो दिन होता था उसी दिन के हिसाब से भगवान का फोटो और साथ में अच्छी अच्छी धार्मिक मैसेज भेजता था । "

" तो इसमें खराबी क्या थी ?"

" खराबी कुछ भी नहीं थी। बल्कि बहुत ही सुन्दर मैसेज होता था । जानती है..इसके भेजे हुए देवी देवताओं के फोटो और मैसेज से मेरा फोन का गैलेरी पुरा भर गया था । मुझे डर लगता था कि भुल से भी कहीं मेरा पांव टच न हो जाए मोबाइल से और मोबाइल के अन्दर के देवी देवता नाराज न हो जाएं.... मैंने तो मोबाइल सोते समय बिस्तर पर रखना तक छोड़ दिया था ।"

" फिर ?" - श्वेता दी ने हंसते हुए कहा ।

" फिर.. फिर दो तीन महीने बाद रात में गुड नाईट मैसेज भेजना शुरू किया ।"

" किस तरह का मैसेज ?"

" शुरू में तो सिम्पल साधारण सा भेजता था लेकिन बीस पच्चीस दिन के बाद थोड़ा रोमांटिक टाइप भेजना शुरू किया ।"

" तो तेरे मन में कैसा रियेक्सन होता था ?"

" पहली बार थोड़ा अजीब सा लगा फिर धीरे धीरे सामान्य सा लगा...और जैसे जैसे दिन गुजरते गया अच्छा लगने लगा ।"

" क्या तु भी मैसेज करती थी ?"

" गुड मार्निंग वाला तो मैं भी करती थी । आखिर इतना सुन्दर मैसेज के जबाव में मुझे भी तो कुछ अच्छे अच्छे मैसेज भेजना बनता था न ।"

" और रात वाली । गुड नाईट के बदले ?"

" कुछेक दिन तो नहीं भेजी फिर एकाध महीने के बाद मैं भी भेजना शुरू कर दी ।"

" यानी कि धीरे धीरे आग लगनी शुरू हो गई "- श्वेता दी मुस्कराते हुए बोली ।

" वो तो लगनी ही थी । आखिर कमीना है भी तो हैंडसम । फिर धीरे धीरे रात वाली मैसेज और ज्यादा रोमांटिक होने लग गई । और एक रात इसने थोड़ी अश्लील टाइप गुड नाईट मैसेज भेजा ।"

" किस तरह का ?"

" गूगल से कोई फोटो डाउनलोड करके भेजा था । जिसमें एक लड़की लिंगरी में पीठ के बल लेटी हुई थी और उसके उपर एक लड़का लड़की के एक बोबे को अपने हाथों में पकड़े हुए उसकी चुम्बन ले रहा था और नीचे गुड नाईट लिखा हुआ था ।"

" फिर ?"

" मैं तो देखकर भौंचक्का हो गई थी । शुरू में गुस्सा आया...फिर बिना कोई जबाव दिए मोबाइल स्विच ऑफ कर दी और सो गई । सुबह उठने के बाद जब फिर से वो मैसेज देखी तो मुझे कुछ कुछ होने लगा । मेरी भी भावनाएं मचलने लगी...फिर तो जैसे एक रूटिन बन गई । ये रोज सुबह-सुबह गुड मार्निंग मैसेज अच्छी अच्छी वाली भेजता था और रात में गुड नाईट वाली मैसेज रोमांटिक और गंदी टाइप वाला भेजने लगा ।"

" तो तु क्या करती थी..इसके मैसेज का जबाव देती थी या नहीं ?"

" कुछ दिन बाद मैं भी देने लगी ।"

"अच्छा ! रोमांटिक और गंदी गुड नाईट वाली की भी ?"

" हां । लेकिन मैं सिर्फ गुड नाईट लिखकर भेज दिया करती थी ।"

" फिर ?"

" फिर तो इसकी हिम्मत बढ़ते गई और रात में न जाने कहां-कहां से खोज खोज कर गंदी गंदी पिक्चर और पोर्न टाइप गिफ्ट भेजने लगा । ये सब देखकर मैं उत्तेजित होने लगी... आखिर मैं भी तो एक जवान लड़की थी.... लड़के लड़कियों की नंगी चूदाई तस्वीर देखकर भला कौन उत्तेजित नहीं होगा ?"

" फिर ?

" फिर एक दिन इसने मुझे फोन किया और डेट के लिए पुछा ।"

" हम्म्.. फिर ?"

मैं तो पहले से ही तैयार थी...थोड़ी आनाकानी की फिर मान गई । फिर हम मूवी देखने गए वहीं थियेटर में ही हमने पहली किस की और फिर कुछ दिन के बाद एक होटल में गए... सुबह ग्यारह बजे के आसपास... वहीं हमारी पहली चुदाई हुई... पहले दिन ही इसने तीन बार मेरी ले ली ।"

" क्या ?"- श्वेता दी मुस्की काटते हुए बोली ।

" ये "- उर्वशी दी भी मुस्कराते हुए अपनी चुत की तरफ इशारा की ।

" रूक... मैं पेशाब करके आती हूं तब बाकी बताना "- श्वेता दी खड़ा होते हुए बोली ।

" चल । मैं भी चलती हूं ।"

फिर दोनों नंगी ही रूम में ही बने अटैच बाथरूम में चली गई । और बिना दरवाजा बंद किए नीचे बैठकर पेशाब करने लगी ।

जैसे ही दोनों अपनी अपनी बड़ी गांड़ फैलाए नीचे बैठ कर पेशाब करना शुरू की.... कि मेरा लन्ड फनफना कर खड़ा हो गया । उनकी पेशाब करने की आवाज मेरे कानों तक पहुंच रही थी ।

जब वे नंग धडंग बाथरूम से आई तो मेरा खड़ा लन्ड देखकर मुस्कुराने लगी । श्वेता दी बिस्तर पर चढ़ते ही झुकी और बिना हाथ लगाए मेरे लन्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी । उर्वशी दी बगल में बिस्तर पर लेटकर हमें देखने लगी ।

थोड़ी देर बाद मैंने श्वेता दी के मुंह से अपना लन्ड निकाला और उठकर उनके पीछे बैठ गया । अपनी छाती उनके मुलायम पीठ से सटाते हुए अपने हाथों को आगे बढ़ाया और उनकी दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगा । वो अपनी बड़ी गांड़ मेरे गोद में रखकर पीछे की ओर झुक गई और अपनी चूचियों को मसलवाने का आनंद लेने लगी । मेरा तनतनाया हुआ लन्ड उनकी चौड़ी गांड़ से दब गया था। वो सिसकारियां भरते हुए अपनी गांड़ मेरे लन्ड पर घसने लगी ।

थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें आगे की ओर झुकाया और अपने लन्ड को पकड़ कर उनके रस छोड़ती चुत के दरारों में घिसने लगा । उनकी चुत के पानी से मेरा लन्ड गीला हो गया था ।

मैंने उन्हें थोड़ा और आगे की ओर झुकाया । वो अपनी चौड़ी गान्ड पीछे से उपर उठाए आगे की ओर हाथ के सहारे झुक गई । वो कुतिया वाली पोजीशन में हो गई थी । मैंने अपने घुटनों के बल पोजीशन लिया और उनकी चुत के छिद्र में अपना लन्ड रखा और जोर का धक्का लगा दिया। उनकी चुत उनके काम रस से इतनी ज्यादा गीली हो गई थी कि दो ही प्रयास में पुरा लन्ड उनकी चुत की गहराई में प्रवेश कर गया ।

मैं उनकी चूचियों को दबाते हुए धीरे धीरे उन्हें चोदने लगा । शुरू शुरू में हल्के-हल्के धक्के से चोद रहा था । उर्वशी दी ने जब मुझे श्वेता दी को कुतिया पोजीशन में चोदते हुए देखा तो वो पीठ के बल लेट गई और सरकते हुए हम दोनों के कमर के नीचे जहां मेरा लन्ड श्वेता दी की चुत में अन्दर बाहर हो रहा था , पहुंच गई । और अपनी आंखों से करीब दस बारह इंच की दूरी पर मेरे लन्ड को श्वेता दी के चुत से अंदर बाहर होते देखने लगी । वो इतने करीब से लन्ड को चुत में घुसते निकलते देख कर काफी उत्तेजित हो गई और जैसे ही मेरा लन्ड श्वेता दी के चुत के अंदर से बाहर की ओर निकला , अपने हाथों से पकड़ कर पुरी तरह बाहर निकाल ली और अपने मुंह में डाल कर चूसने लगी । मेरे लन्ड को चूसने के बाद श्वेता दी की चुत के अंदर अपनी जीभ डाली और चार पांच बार चारों तरफ जीभ फिराई फिर मेरे लन्ड को पकड़ कर श्वेता दी की चुत के छेद पर सटा दी ।

मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और फिर से मेरा लन्ड उनके चुत में घुस गया । अब मैं जोर जोर से श्वेता दी को चोदने लगा । उर्वशी दी अपनी सिर को उपर की ओर उठाई और अपनी जीभ हम दोनों के संधि स्थल पर फिराने लगी । मैं श्वेता दी को बुरी तरह चोदे जा रहा था । श्वेता दी भी उत्तेजना के मारे अपनी चूतड़ तेजी से पीछे की ओर धकेल रही थी । करीब आधे घंटे की चुदाई के दौरान श्वेता दी तीन बार झड़ चुकी थी और मेरा भी वीर्य निकलने वाला ही था । आखिरी समय में मेरा चोदने का स्पीड इतना बढ़ गया था कि पलंग भी हिलने लग गया था । ज्योंहि मेरा झड़ने का समय नजदीक आया मैंने श्वेता दी के चेहरे को अपनी ओर घुमाया और उनके जीभ को चुसते हुए लन्ड को उसकी चुत की गहराइयों में घुसेड़ कर झड़ने लगा । इसके साथ साथ एक बार फिर से वो भी झडने लगी ।

थोड़ी देर बाद तीनों बिस्तर पर लेट कर सुस्ताने लगे ।

आधे घंटे बाद हम सभी ने एक बार फिर से नहाया । फ्रेश होने के बाद लजीज व्यंजन का लुत्फ उठाया । उसके बाद एक एक राउंड चुदाई का दौर और चालू हुआ ।

उसी दौरान श्वेता दी ने बताया कि रात में सोने के लिए वहां चाची आ रही है । ये सुनकर मैं मायूस हो गया । मेरा इच्छा रातभर उनके साथ रहने का था । खैर.... थोड़ी देर बाद मैं उन दोनों को छोड़कर घर आ गया ।

************

" सागर...चाय पियोगे क्या ?"

माॅम की आवाज सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई ।

" हां...बनाओ । मैं थोड़ी देर में आ रहा हूं "- मैंने ऊंची आवाज में कहा ।

क्लब भी जाने का टाइम हो गया था । मैं तैयार हो कर रीतु को फोन किया । वो लोग जयपुर पहुंच कर होटल में शिफ्ट हो गए थे । अभी सभी आराम कर रहे थे । थोड़ी देर बात करने के बाद मैं नीचे हाॅल में गया । डैड भी आज जल्दी ही आ गए थे ।

शाम हो गया था । चाय पीने के बाद मैं क्लब चला गया ।
 
Update 25.

अगले दिन...सुबह नौ बजे पिछले दो दिनों की तरह ही सिर्फ तौलिया लपेटे नीचे आया तो डैड को नाश्ता करते हुए पाया । मैं किचन में गया और उसी जगह पर दिवाल से सट कर लकड़ी के छोटे से तख्ते पर बैठ गया ।

माॅम मुझे देख कर मुस्कराई । वो सिम्पल सी नाइटी पहनी हुई थी । वो नाश्ता निकालने लगी ।

नाश्ता निकाल कर एक थाली मुझे दी और दुसरी थाली लेकर मेरे अपोजिट दरवाजे की ओर मुंह करके बैठ गई ।

हम दोनों नाश्ता करने लगे । मैंने फिर से उसी तरह अपने तौलिए को एडजस्ट कर दिया जिससे मेरा लन्ड उन्हें स्पष्ट दिखाई देता रहे ।

वो चुपचाप नाश्ते के दौरान कनखियों से मेरे तौलिए के फांक से हट्टे कट्टे लन्ड को देखती फिर रह रह कर दरवाजे से डैड को भी देखती जो हाॅल में सोफे पर बैठे नाश्ता कर रहे थे ।

माॅम को मेरे लिंग को कनखियों से देखते पाकर मैं एक्साइटेड हो रहा था । मुझे कल का वाकया भी याद आ रहा था जब मैंने एक गंदी पिक्चर वाली पृष्ठ किताब से फाड़ कर अपने तकिए के नीचे दबा दिया था और माॅम को ये कहते हुए चला गया था कि मेरा बिस्तर चेंज कर देना ।

बिस्तर चेंज तो हुआ ही था और साथ ही वो गंदी पिक्चर वाली पृष्ठ जिसमें एक कम उम्र का लड़का एक बड़ी उम्र की औरत के साथ सेक्स कर रहा था... वो सलीके से मोड़कर मेरे बिस्तर पर गद्दे के नीचे रखा हुआ था ।

इसका जो मतलब निकलता था उसका अंदाजा मुझे हो रहा था । और जिस तरह से माॅम मेरे लन्ड को चुपके चुपके देख रही थी.. वो उस मतलब को और भी पुख्ता कर रहा था ।

" डैड आ रहे हैं ।"

" क्या ?"- मैं सकपकाते हुए कहा ।

" डैड आ रहे हैं "- वो मुझसे बिना नजरें मिलाए दरवाजे की ओर देखते हुए बोली ।

मैं हड़बड़ाया , पीछे देखा डैड किचन की तरफ आ रहे थे । मैंने जल्दी से अपने तौलिए को दुरुस्त किया । मेरा लिंग अब तौलिया के अन्दर था ।

डैड किचन में आए और मुझसे कहा -" तुम्हारा मोबाइल बज रहा है ।"

मैंने जल्दी से नाश्ता खतम किया और भागते हुए अपने कमरे में चला गया । सही टाइम पर माॅम ने चेता दिया था नहीं तो डैड के नजरों में मेरा लिंग आ गया होता । बाल बाल बचा था ।

कालेज से प्रोफेसर का फोन था । कुछ बड़ी कम्पनियां काउन्सिल के लिए आ रही थी इसलिए उन्होंने फोन किया था ।

मैं तैयार हो कर माॅम को यह बोलकर निकल गया कि आज कालेज में लेट होगा इसलिए मैं दोपहर नहीं आ पाऊंगा और हो सकता है मैं अब रात को ही घर आऊं ।

मैं कालेज चला गया । वहां काउन्सलिंग के चलते काफी लेट हो गया ।

‌मै कालेज में ही था तभी रमणीक लाल का फोन आया । उसने मुझे शाम को छः बजे मिलने को कहा । चूंकि मुझे शाम को ड्यूटी बजाने क्लब भी जाना था इसलिए उसे शाम को सात बजे मिलने को कहा ।

****

शाम सात बजे करोलबाग में एक बार एंड रेस्टोरेंट में मेरी रमणीक लाल से मुलाकात हुई ।

" विस्की पियोगे ?"- मैंने बोला ।

" फोकट में मिलेगा तो क्यों नहीं पियूंगा ?"- वो संजीदगी से बोला -" लेकिन बाद में । पहले काम की बात ।"

" ओके ।"

" तुने जो नाम लिखाये थे... उनमें पहला नाम था कुलभूषण खन्ना । ये शख्स जवानी में एक मवाली और हिस्ट्रीशीटर था और एक बाहुबली नेता का खास सिपहसालार हुआ करता था । उसी दौरान उसकी एकलौती लड़की से इसका नैन मटक्का चलने लगा । नेता को जब इसके बारे में पता चला तो वो दोनों से बहुत ही खफा हुआ । खासतौर पर कुलभूषण खन्ना से । उसने उसे खुलेआम धमकी दी कि वो उसे जान से मार डालेगा लेकिन उसके कुछ दिनों बाद वो खुद एक दिन अपने कमरे में मरा पाया गया ।"

" क्या ? कैसे ?"

" कहा जाता है कि हार्ट अटैक से मरा ।"

" ऐसे कैसे एकाएक हार्ट अटैक आ गया ? क्या उसके बाडी का पोस्टमार्टम हुआ था ?"

" नहीं.. उसे मरने के बाद तुरंत आनन-फानन जला दिया गया था । और उसके कुछ दिनों बाद लड़की ने कुलभूषण से शादी कर ली थी । "

" कोई जांच पड़ताल नहीं हुआ ?"

" कहां से होगा भाई जब बेटी को ही किसी तरह का शक नहीं था तो जांच पड़ताल के लिए कौन कहता ? और फेमिली के नाम पर दुसरा कोई था ही नहीं ।"

" हुम्म् ..क्या ये हो सकता है कि बेटी ने अपने आशिक कुलभूषण के साथ मिलकर अपने बाप का खून कर दिया हो ?

" सरासर हो सकता है लेकिन जब इसका जांच पड़ताल ही नहीं हुआ तो इसके बारे में क्या कह सकते हैं ?"

" फिर क्या हुआ ?"

" शादी के महज पांच साल के बाद ही उसकी बीवी कैंसर से मर गई ।"

" उसके कुकर्मों की सजा भगवान ने जल्दी ही दे दिया।"

" हूं..फिर छः साल पहले उसने दुसरी शादी अनुष्का नामक एक लड़की से की ।"

" अनुष्का की तो खासुलखास तफ्शीश की होगी तुमने ?"

" ऐसी कोई बात नहीं ।"

" क्यों भाई ? इतनी सेक्सी लड़की...लार तो जरूर टपकी होगी ?"

" लार का क्या है , वो तो हर नौजवान लड़की को देखकर टपकती है । एक मिनट...दारू आर्डर करो ।"

वेटर को रेड वाइन का आर्डर दिया । पांच मिनट में ही उसने वाइन के साथ सलाद और ड्राई फ्रूट्स सर्व कर दिया ।

" हां..अब अनुष्का के बारे में बताओ ?"

" बहुत ही हसीन है , बहुत जवान है , खसम से कुछ नाखुश ही लगती है ।"

" ये तो मुझे भी मालूम है । कुछ नया बताओ ?"

" मेरठ की रहने वाली है । इसकी एक बहन है वीणा । इन दोनों के मां बाप की मौत सालों पहले ही हो गई थी । इनकी जिंदगी अभाव और तंगी में बीती हे । मां और बाप दोनों मेरठ के ही हैं । दोनों की फेमिली साधारण वर्ग की है । बाप के परिवार में कोई अपना नहीं है लेकिन मां की एक बहन थी जो अनुष्का की ही तरह किसी अमीरजादे से शादी करके चली गई । लेकिन इन दोनों बहनों की परिस्थितियां मां बाप के मरने के बाद बहुत ही खराब हो गई थी । अनुष्का घर छोड़कर दिल्ली आ गई और कुलभूषण खन्ना से शादी करके अपनी अभाव ग्रस्त जिंदगी से छुटकारा पा ली लेकिन उसकी छोटी बहन वीणा अपनी बड़ी बहन अनुष्का के जाने के बाद बहुत ही कष्टदायक जीवन जी रही थी..साल भर पहले वो भी गांव छोड़कर दिल्ली आ गई । नई दिल्ली में एक नाइट क्लब में कैबरे डांसर का काम करती है ।"

" क्या ?"- मैं आश्चर्यचकित हो कर बोला -" उसकी बडी बहन जो यहां करोड़पति की बीवी है..रोज के हजारों रूपए शौकिया खर्च कर देती है उसकी छोटी बहन एक मामूली सी कैबरे डांसर ?"

" यही तो ऊपरवाले का खेल है बेटा ।"

" और इनकी मौसी ने कोई हेल्प नहीं किया ?"

" मौसी के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है ।"

" क्या अनुष्का को मालूम है कि उसकी बहन एक मामूली सी कैबरे डांसर है ?"

" इसके बारे में भी फिलहाल मुझे नहीं पता । "

" वो कहां काम करती है.. ये तो जानते होंगे ?"

" हां ।"

उसने मुझे एडरेश लिखाया । वो डिफेंस कॉलोनी में गोल्डन नाईट क्लब का पता था ।

" उसकी कोई फोटो है तुम्हारे पास ?"

" नहीं ।"

" वीणा के काम का समय तो रात में ही होगा ?

" नाईट क्लब में असल रौनक तो रात को ही होती है ।"

" मतलब रात में ही काम करती होंगी ।"

" हूं... फिर तुम्हारे नामों के लिस्ट में बिजनेस मैन संजय का नाम था । इसके बारे में जो जानकारी निकल कर आई उसके हिसाब से ये एक महत्वाकांक्षी नौजवान है , जहीन है और काबिल बिजनेस मैन है । होटल का बिजनेस है और अच्छे पैसे कमाता है । इसकी अभी हाल में ही शादी हुई है । फेमिली में बीवी के अलावा मां बाप और एक बहन है जो कि अभी कुंवारी है । इसके मां बाप की शादी लव मैरिज हुई थी और इनका होटल का व्यापार खानदानी है ।

" आदमी कैसा है ?"

" रंगीन मिजाज और बिंदास जीवन जीने वाला ।"

" कभी किसी केस में या किसी लफड़े में इस पर पुलिस केस दर्ज हुआ ?"

" नहीं ।"

" ओके । अब जरा वकील साहब मनीष जैन के बारे में बताओ ?"

" कमीना ! आदतन खुन्दकी ! झगड़ालू ! दगाबाज ! हमेशा पीठ पर छुरी मारने को तैयार । अपने इन्हीं गुणों की वजह से उसके दोस्तों की संख्या न के बराबर है । लेकिन पट्ठे ने बीवी काफी खूबसूरत पाई ।"

" वो इतना खराब कैसे हो सकता है ?"

" मिलना । देखना । भुगतना । फिर आ के बताना ।"

" मिला तो हूं एकाध बार लेकिन सिर्फ दुआ सलाम तक ही बातें सीमित रही । मुझे नहीं पता था कि वो ऐसा आदमी होगा ।"

" ये तो मैंने उसके कुछ खुबियों के बारे में बताया ।"

" अच्छा ! अभी और भी है ?"

" इसके अलावा वो एक बेरहम , बदमिजाज , दिमागी तौर पर शातिर और एक नम्बर का रिश्वतखोर वकील है ।"

" तुम इतने विश्वास से कैसे कहते हो ?"

" तु भुल रहा है कि मैं भी पुलिस ही हूं भले ही अभी सस्पेंसन में चल रहा हूं और पुलिस वकील का साथ हर दुसरे तीसरे दिन होता ही रहता है ।"

" जब वो ऐसा आदमी है तो अब तक सरकारी वकील बना कैसे रहा ? जज को या प्रशासन की नजर इसके ऊपर कैसे न पड़ी ?"

" मैंने बताया न कि दिमागी तौर पर शातीर आदमी है ।"

" हूं । "

" गिलाश खाली करो ।"

" क्या ?... नहीं , नहीं । वन इज एनफ फार मी । तुम अपना जारी रखो ।"

" ओनली वन ?"

" प्रेजेंटली ।"

" ओह , प्रेजेंटली ।"

उसने अपने लिए नया जाम तैयार किया ।

" रमाकांत की क्या कहानी है ?"

" उसके बारे में अभी तक जो जानकारी मिली है वो एक रिटायर्ड बुजुर्ग आदमी है जो अपनी पत्नी जानकी के साथ हिमाचल प्रदेश से करीब पच्चीस साल पहले नोएडा में शिफ्ट हुआ था । उसकी पत्नी को कोई सांस की बिमारी थी इसलिए । वो दिल्ली शिफ्ट होना चाहता था लेकिन महंगा शहर होने के कारण वो नोएडा में शिफ्ट हो गया । गाजियाबाद में पिछले पांच सालों से रह रहा है ।"

" उसके इनकम का सोर्स ? करता क्या है ?"

" नहीं मालूम । शायद तुम्हारा जीजा जानता होगा आखिर पड़ोसी है ।"

" ठीक है । बात करूंगा ।"

" खर्च बढ़ते जा रहा है बेटा । कुछ रोकड़ा तो सरकाओ ?"

" तुम अपना एकाउंट नंबर मुझे दे दो , मैं आन लाइन तुम्हारे एकाउंट में ट्रांसफर कर दुंगा ।"

" एक तो सस्पेंड चल रहा हूं उपर से रोकड़ा डायरेक्ट मेरे एकाउंट में ट्रांसफर करके और दुश्वारियां पैदा करना चाहते हो ?"

" ठीक है..कल शाम को सात बजे कनात पैलेस पैराडाइज क्लब के बाहर मिलना ।"

रात के नौ बज गए थे । मैं आज ही वीणा से मिलना चाहता था । क्योंकि जहां वो काम करती थी वहां उससे रात में मिला जा सकता था । यदि उसके घर का पता होता तो दिन में किसी भी वक्त उससे मिल लेता लेकिन घर का पता मालूम नहीं था ।

मैंने रमणीक लाल से नाईट क्लब चलने को कहा तो उसने साफ इंकार कर दिया । वो नहीं चाहता था कि नौकरी बहाल होने तक पुलिस की नजरों में किसी अवांछनीय जगह पर देखा जाय ।

उसके जाने के बाद मैं गोल्डन नाईट क्लब की ओर अपनी बाइक दौड़ा दिया ।

Continue....
 
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