रुचि आज सुबह से बेचैन नजर आ रही थी,,, वह अंदर ही अंदर वह परेशान हुए जा रही थी एक तो अपनी सास की रंगरेलियां अपनी आंखों से देख चुकी थी और दूसरी यह कि आज उसकी रिपोर्ट आने वाली थी पता नहीं रिपोर्ट में क्या आने वाला है यह सोचकर वह घबरा रही थी वैसे तो उसे अपने आप पर पूरा विश्वास था कि कोई भी कमी उस में बिल्कुल भी नहीं है सारी कमी उसके बेटे में ही है लेकिन फिर भी रिपोर्ट देखने के बाद ही वह अपने मन को शांत कर सकते थी,,,,,, वह आज जल्दी खाना बना कर तैयार हो गई थी और अपने कमरे में अपने आप को देखकर मंद मंद मुस्कुरा भी रही थी और अपने आप को कोश भी रही थी कि कैसी किस्मत लेकर पैदा हुई है इतनी खूबसूरत होने के बावजूद भी शारीरिक सुख से वंचित रह गई,,, एक तरफ उसकी सासू मां थी जो कि उम्र के इस पड़ाव पर भी एक जवान लड़के से चुदवाने का भरपूर आनंद लूट रही थी और एक वह थी कि मर्यादा संस्कार इन सब के बंधनों में बैठकर अपनी शारीरिक जरूरतों को अनदेखा करते हुए अपनी जिंदगी और अपने सपनों का गला घोट रही थी,,,, आईने में साड़ी के ऊपर से भी उभरी हुई अपनी संतरे जैसे चुचियों के उभार को देखकर अपने आप से ही बातें कर रही थी कि सब कुछ तो है उसमे जो एक औरत में होना चाहिए,,, फिर वह क्यों शरीर सुख से वंचित होती जा रही है क्यों उसे अपने पति से शारीरिक संतुष्टि नहीं मिल पाती,,, अपने आपको आईने में देखते हुए उसे वह पल याद आ रहा था जब वह छत पर गई थी वह चोरी छुपे अपनी सास को पड़ोस के ही जवान लड़के सुमन से जबरजस्त चुदवाते हुए देखी थी हालांकि वह भी शुभम से शारीरिक सुख भोग चुकी थी और तब जाकर उसे पता चला था कि असली चुदाई क्या होती है और इसीलिए वह अपनी सास से ईर्ष्या कर रही थी कि इस उम्र में भी वह बिना किसी झिझक के रोक-टोक के बिना डरे छत पर खुले तौर पर उस से चुदवाने का आनंद लूट रही है और वह जवान औरत होते हुए भी ना तो पति से संतुष्टि प्राप्त कर पा रही है और ना ही कहीं बाहर से एक उसका भी वही शुभम ही सहारा था जो उसे शारीरिक सुख देकर उसे संतुष्ट कर सकता था ,,,, लेकिन अपनी सास के होते हुए वह घर में किस तरह से एक जवान लड़के को अपने कमरे में ले जाकर उससे चुदवा सकती थी यह उसकी मर्यादा और संस्कार के खिलाफ था और तो और इसमें बदनामी का भी डर था,,,, ऐसा कोई भी कदम उठाने में डरती थी जिससे उसमे उसकी बदनामी हो,,, वह अपने आपको आईने में देखकर यह सोचने लगी कि उससे कहीं ज्यादा हिम्मत वाली तो उसकी सांस है जो कि खुले तौर पर संध्या के वक्त छत पर जाकर एक जवान लड़के से चुदवाने का आनंद लूट रही थी,,,,, रुचि को शुभम से भी जलन होने लगी थी,, वह अपने मन में ही सोच रही थी कि शुभम कैसा लड़का है जो एक जवान औरत को चोदने के बाद भी एक उम्र दराज औरत को छत पर चोद रहा था वह चाहता तो किसी न किसी बहाने घर में आकर मौका देख कर उसकी भी चुदाई कर सकता था,,,,, वह अपने मन में यह सोचने लगी कि इतना तो तय है कि मर्दो को केवल उनकी बुर से ही मतलब रहता है उनकी उम्र से नहीं,,,,, तभी तो वह कितने मजे लेकर इतनी जोर जोर से धक्के लगा रहा था कि जैसे उम्र दराज औरत को नहीं बल्कि एक जवान औरत को चोद रहा हो,,, यह बात अपने मन में सोचते हुए रुचि को वह पल याद आ गया जब तूफानी बारिश में वह अनजान जगह पर झोपड़ी के अंदर उसकी जबरदस्त चुदाई किया था और वह भी बिना डरे उसे पूरी तरह से नंगी करके वाकई में शुभम में मर्दाना ताकत के साथ साथ मर्दाना जोश से भरा हुआ जिगर भी है,, जो कि यही एक औरत को पसंद भी आती है,,,,, ऊस तूफानी बारिश में सुभम द्वारा लगाए गए जबरदस्त धक्कों को याद करके रूचि का मन बहकने लगा उसे फिर से मोटे तगड़े और वो भी सुभम के लंड की जरूरत पड़ने लगी लेकिन ऐसा मुमकिन बिल्कुल भी नहीं था वही सोच रही थी कि ऐसा क्या जुगाड़ लगाया जाए कि वह जब चाहे तब शुभम के लंड को अपनी बुर में ले सके और अपनी प्यास बुझा सके उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था,,, तभी एकाएक उसके मन में ख्याल आया कि क्यों ना उसकी सांस की रंगरेलियां का ही फायदा उठाकर वह अपने शरीर की जरूरत को शुभम से पूरी कर सके,,,, ओर वह बीना डरे बिना रोक-टोक के ऐसा हो गया तो उसकी किस्मत खुल जाएगी,,,, यह ख्याल मन में आते ही रुचि के चेहरे पर चमक आ गई अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी सास को यह बात बिल्कुल भी पता नहीं है कि वह उसकी शुभम के साथ रंगरेलियां मनाते हुए देख चुकी है अगर यह बात उसकी सास को वह खुद बताए तो उसके चेहरे की हवाइयां उड़ने लगेगी,, और इस उम्र में आकर वह एक जवान लड़के से चुदाई करवा रही है,, यह बात कही में बताना था इसलिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाएगी और यही एक रास्ता है शुभम से हमेशा शरीर सुख भोगने का,, और उसे पक्का विश्वास था कि वह अपने इस युक्ति से शुभम को पूरी तरह से पा लेगी ,,, रुचि यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी सास उम्रदराज होने के साथ-साथ समाज में संस्कारी औरत वाली छवि शुरू से बनाए हुए हैं और समाज के लोग उसकी इज्जत भी करते हैं अगर यह बात बाहर आ गई कि वह कोई संस्कारी औरत नहीं बल्कि अपनी वासना मिटाने के लिए अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ चुदाई करवाती है तो उसकी कितनी बदनामी होगी,,, और यह राज को राज रखने के एवज में उसकी सास ना चाहते हुए भी उसे किसी भी मर्द के साथ खास करके शुभम के साथ संभोग करने की इजाजत दे देगी,, और यही तो रुचि चाहती थी,, रुचि को पक्का यकीन हो गया कि वह उसकी नियुक्ति जरूर काम करेगी और यही सोचकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव आ गए वह जल्दी से तैयार होकर अपनी सास के कमरे की तरफ गई उसे बुलाने के लिए क्योंकि दवा खाने जाने का समय हो रहा था,,
दूसरी तरफ सरला भी तैयार हो रही थी जब से सुभम से मुलाकात हुई थी तब से वह भी सजना सवरना थोड़ा बहुत करने लगी थी,, क्योंकि जब 110 जैसा जवान लड़का उसकी मदमस्त जवानी कि आग मैं अपना हाथ सेकने के लिए तैयार था और से सेंक भी रहा था तो उसे यकीन था कि उसकी मद मस्त जवानी की आग अभी भी बची हुई है जिससे वह किसी भी जवान लड़के को पिघलाने में समर्थ है,,,, जिस तरह के ख्याल रुचि के मन में आ रहे थे वही ख्याल सरला के भी मन में आ रहा था उसे अब एक रास्ता सोच लिया था अपनी तड़पती हुई प्यास को बुझाने के लिए जिस तरह से वह छत पर सूखने के लिए रस्सी पर टंगी हुई साड़ी की ओट का सहारा लेकर शुभम से खुले तौर पर चुदाई करवाई थी उसे लगने लगा था कि अब वह इसी तरह से रोज सुभम से चुदवाएगी और अपने तन की प्यास बुझा पाएगी और यही सोचकर वह मन ही मन गीत गुनगुनाते हुए तैयार हो रही थी,,,,, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और रुचि उसे चलने के लिए बोली तो वह आने के लिए बोल कर जल्दी जल्दी तैयार होकर कमरे से बाहर आ गई,,,,, रुचि उसे देखी तो देखती ही रह गई क्योंकि पहली बार वह इतना ज्यादा सज धज कर दवा खाने जाने के लिए निकल रही थी,,,,,
क्या बात है मम्मी आजकल आप बहुत ज्यादा सज धज रही,,हो,,,
नहीं रे ऐसी कोई बात नहीं है बस ऐसे ही,,( अपने पल्लू को ठीक करते हुए सरला बोली,,,)
नहीं ऐसी कोई बात हो तो जरूर बता देना वैसे मुझसे नहीं कहोगी तो किस से कहोगी,,( रुचि अपनी दोनों आंखों को नचाते हुए सरला पर व्यंग कसते हुए बोली,,, रुचिका उसे इस तरह से बात करना सरला को कुछ ठीक नहीं लगा,,, वह बोली कुछ नहीं और घर से बाहर आ गई,,,)
यहां से रिक्शा कर लेते हैं जाने में आसानी होगी,,,,
नहीं मम्मी जी रहने दीजिए पैदल ही चलते हैं 15 20 मिनट तो लगेगा और वैसे भी पैदल चलने में सेहत भी सही रहती है आप अपने आप को मेंटेन रखेंगी तभी तो खूबसूरत लगेंगी,,,
ठीक है जैसा तू कहे ,,,,(ओर इतना कहकर पैदल चलने लगी सरला को कुछ ठीक नहीं लग रहा था जिस तरह से वह आज उससे बात कर रही थी उसे लगने लगा था कि दाल में जरूर कुछ काला है,, लेकिन उसे यह समझ में नहीं आया कि काला कहां है,,, रुचि को साफ नजर आ रहा था कि शर्मिला आज अपनी साड़ी को कुछ ज्यादा ही कस कर अपनी कमर से बांधी हुई थी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी गांड फैली हुई नहीं बल्कि सुडौल लग रही थी,,, रुचि को समझते देर नहीं लगी कि अपनी गांड दिखा दिखाकर ही वह सुभम जैसे जवान लड़के को अपने बस में की है,,,, इकरा से वह अपनी सास की बड़ी बड़ी गांड देखकर ईर्ष्या कर रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अधिकतर लड़कों को औरतों की बड़ी बड़ी गांड ही पसंद आती है जिसे वह पीछे से अपने हाथों से पकड़कर धक्के पर धक्के लगाते हैं,, यह सोचते हुए हो गए उसका ध्यान अपने आप ही अपने नितंबों पर चले गया जिस पर वह पीछे नजर करके नजर भर कर देख ले रहे थे उसे अपने नितंबों में जरा भी खोट नजर नहीं आई बल्कि जवानी से भरपूर औरत की गांड जिस तरह से होती है उसी तरह की गांड उसकी भी थी ना ज्यादा बड़ी ना ज्यादा छोटी उभरी हुई एकदम सुडोल मदमस्त कर देने वाली,,,, जोकि मर्दों की कमजोरी बनी रहती है उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सुबह जैसा जवान लड़का एक उम्रदराज औरत के पीछे कैसे पड़ गया या तो यह भी हो सकता है कि शुभम को केवल दूर से काम होता है औरत से और ना तो उसकी उम्र से कोई लेना देना नहीं होता लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह जिस तरह से रुचि से बातें करता था उससे बिल्कुल भी नहीं लगता था कि शुभम उम्रदराज औरतों के पीछे पागल होता होगा,, उसे सारा दोष अपनी सांस में ही नजर आ रहा था वहां अपने मन में सोच रही थी कि यही कुछ करी होगी उसे दीवाना बनाई होगी उसे लालच दी होगी तभी वह चाहकर इस तरह से उसकी चुदाई कर रहा था नहीं तो वह तो मौका देख कर उसे भी छोड़ दे सकता था क्योंकि एक बार तो उसकी चुदाई कर ही चुका था,,,, लेकिन अब वह मन में ठानी थी कि अब ऐसा दोबारा नहीं होने देगी वह शुभम को अपना बना कर रहेगी,,,,,
सास बहू दोनों फुटपाथ पर चल रहे थे सड़क पर गाड़ियां तेज रफ्तार से आ जा रही थी जिनके होरन की आवाज से पूरा वातावरण गूंज रहा था,, रुचि की नजरें उन मर्दों की नजरों से बच नहीं पाई जो उन दोनों को आते जाते देख रहे थे खास करके उन मर्दों की नजर उसकी सांस की बड़ी-बड़ी का और उसकी मदमस्त गांड पर टिक कर रह जाती थी ,,,
पहले यह सब रुचि को अच्छा नहीं लगता था लेकिन आज ना जाने क्यों उसे यह सब अच्छा लगने लगा था जो भी मर्द उसके खूबसूरत बदन या उसके नितंबों की तरफ देखता तो उसके तन बदन में हलचल सी होने लगती थी,, और जिस तरह से फुटपाथ पर आते जाते मर्दों की नजरें उसकी सांस की भी बड़ी बड़ी गांड पर ठहर कर रह जाती थी उससे उसे साफ पता चलता था कि मर्दों को औरतों की बड़ी बड़ी गांड और बड़े बड़े दूध सबसे ज्यादा प्यारे होते हैं,, अपनी सास से शिवम के बारे में बात करने के आगे वह रिपोर्ट वाली बात को भूल चुकी थी उसे अब इस बात की बिल्कुल भी चिंता नहीं थी कि रिपोर्ट में क्या आने वाला है बस वह अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में थे इसलिए वह दो कदम आगे बढ़कर अपने सास के करीब पहुंच गई और उस से बोली,,,
मम्मी जी एक बात कहूं आप बुरा तो नहीं मानोगी,,,
नहीं ,,,,(सरला गौर से रुचि की तरफ देखते हुए बोली क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि रुचि क्या कहने वाली है,,)
मम्मी इस उमर में भी आपकी गांड बहुत जबरदस्त लगती है मैं आज पीछे से देखने पर आपको कह रही हूं,,
( रुचि वह अपना उल्लू सीधा करना था इसलिए जो मुंह में आया वह बोलने लगी हो आज बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रही थी कि अपनी सास के आगे उसे कैसे बात करना है बल्कि वह किसी भी तरह से अपना काम बनाना चाहती थी)
यह क्या कह रही हो बहु तुम्हें ऐसा कहते शर्म नहीं आ रही है,,
शर्म कैसी मम्मी जी मैं तो सच कह रही हूं जो दिखता है वही कह रही हूं,, ( रुचि फिर से एक बार अपनी दोनों आंखों को नचाते हुए बोली,,,)
मम्मी मैं ऐसे ही थोड़ी कह रही हो आते जाते मैं सबकी नजर को देखकर बोल रही हो कि आते जाते जो भी आपको देख रहा है वह आपकी बड़ी बड़ी गांड को ही देख रहा है जो कि आपकी साड़ी कसी होने की वजह से और जबरदस्त लग रही है,,,,( अपनी बहू की बात सुनकर वह अपनी नजर पीछे की तरफ करके अपनी बड़े-बड़े नितंबों को देखने लगी क्योंकि वाकई में बेहद मादकता से भरे हुए लग रहे थे और उन्हें देखते ही उसे शुभम की याद आ गई जो कि वह भी उसकी बड़ी बड़ी गांड कहीं दीवाना था, अपनी बहू की यह वाली बात पर वह मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)
तू पागल हो गई है बहु भला इस उमर में कौन लड़का देखता है मेरे में अब वह पहले वाली बात थोड़ी है,, ( अपने चारों तरफ आते जाते मर्दों की नजर को भांपते हुए सरला बोली जो कि वाकई में वह लोग उसी को देख रहे थे,,)
नहीं मम्मी आप हमें अभी भी पहले वाली बात है तभी तो मर्दों की नजर तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पर टिकी रहती है और खासकर के जवान होते लड़कों की जैसे कि शुभम,, ( इतना कहकर रुची अपनी सास के चेहरे की तरफ देखने लगी जिस पर शुभम का नाम सुनते ही हवाईया उड़ने लगी थी,,)
दूसरी तरफ सरला भी तैयार हो रही थी जब से सुभम से मुलाकात हुई थी तब से वह भी सजना सवरना थोड़ा बहुत करने लगी थी,, क्योंकि जब 110 जैसा जवान लड़का उसकी मदमस्त जवानी कि आग मैं अपना हाथ सेकने के लिए तैयार था और से सेंक भी रहा था तो उसे यकीन था कि उसकी मद मस्त जवानी की आग अभी भी बची हुई है जिससे वह किसी भी जवान लड़के को पिघलाने में समर्थ है,,,, जिस तरह के ख्याल रुचि के मन में आ रहे थे वही ख्याल सरला के भी मन में आ रहा था उसे अब एक रास्ता सोच लिया था अपनी तड़पती हुई प्यास को बुझाने के लिए जिस तरह से वह छत पर सूखने के लिए रस्सी पर टंगी हुई साड़ी की ओट का सहारा लेकर शुभम से खुले तौर पर चुदाई करवाई थी उसे लगने लगा था कि अब वह इसी तरह से रोज सुभम से चुदवाएगी और अपने तन की प्यास बुझा पाएगी और यही सोचकर वह मन ही मन गीत गुनगुनाते हुए तैयार हो रही थी,,,,, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और रुचि उसे चलने के लिए बोली तो वह आने के लिए बोल कर जल्दी जल्दी तैयार होकर कमरे से बाहर आ गई,,,,, रुचि उसे देखी तो देखती ही रह गई क्योंकि पहली बार वह इतना ज्यादा सज धज कर दवा खाने जाने के लिए निकल रही थी,,,,,
क्या बात है मम्मी आजकल आप बहुत ज्यादा सज धज रही,,हो,,,
नहीं रे ऐसी कोई बात नहीं है बस ऐसे ही,,( अपने पल्लू को ठीक करते हुए सरला बोली,,,)
नहीं ऐसी कोई बात हो तो जरूर बता देना वैसे मुझसे नहीं कहोगी तो किस से कहोगी,,( रुचि अपनी दोनों आंखों को नचाते हुए सरला पर व्यंग कसते हुए बोली,,, रुचिका उसे इस तरह से बात करना सरला को कुछ ठीक नहीं लगा,,, वह बोली कुछ नहीं और घर से बाहर आ गई,,,)
यहां से रिक्शा कर लेते हैं जाने में आसानी होगी,,,,
नहीं मम्मी जी रहने दीजिए पैदल ही चलते हैं 15 20 मिनट तो लगेगा और वैसे भी पैदल चलने में सेहत भी सही रहती है आप अपने आप को मेंटेन रखेंगी तभी तो खूबसूरत लगेंगी,,,
ठीक है जैसा तू कहे ,,,,(ओर इतना कहकर पैदल चलने लगी सरला को कुछ ठीक नहीं लग रहा था जिस तरह से वह आज उससे बात कर रही थी उसे लगने लगा था कि दाल में जरूर कुछ काला है,, लेकिन उसे यह समझ में नहीं आया कि काला कहां है,,, रुचि को साफ नजर आ रहा था कि शर्मिला आज अपनी साड़ी को कुछ ज्यादा ही कस कर अपनी कमर से बांधी हुई थी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी गांड फैली हुई नहीं बल्कि सुडौल लग रही थी,,, रुचि को समझते देर नहीं लगी कि अपनी गांड दिखा दिखाकर ही वह सुभम जैसे जवान लड़के को अपने बस में की है,,,, इकरा से वह अपनी सास की बड़ी बड़ी गांड देखकर ईर्ष्या कर रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अधिकतर लड़कों को औरतों की बड़ी बड़ी गांड ही पसंद आती है जिसे वह पीछे से अपने हाथों से पकड़कर धक्के पर धक्के लगाते हैं,, यह सोचते हुए हो गए उसका ध्यान अपने आप ही अपने नितंबों पर चले गया जिस पर वह पीछे नजर करके नजर भर कर देख ले रहे थे उसे अपने नितंबों में जरा भी खोट नजर नहीं आई बल्कि जवानी से भरपूर औरत की गांड जिस तरह से होती है उसी तरह की गांड उसकी भी थी ना ज्यादा बड़ी ना ज्यादा छोटी उभरी हुई एकदम सुडोल मदमस्त कर देने वाली,,,, जोकि मर्दों की कमजोरी बनी रहती है उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सुबह जैसा जवान लड़का एक उम्रदराज औरत के पीछे कैसे पड़ गया या तो यह भी हो सकता है कि शुभम को केवल दूर से काम होता है औरत से और ना तो उसकी उम्र से कोई लेना देना नहीं होता लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह जिस तरह से रुचि से बातें करता था उससे बिल्कुल भी नहीं लगता था कि शुभम उम्रदराज औरतों के पीछे पागल होता होगा,, उसे सारा दोष अपनी सांस में ही नजर आ रहा था वहां अपने मन में सोच रही थी कि यही कुछ करी होगी उसे दीवाना बनाई होगी उसे लालच दी होगी तभी वह चाहकर इस तरह से उसकी चुदाई कर रहा था नहीं तो वह तो मौका देख कर उसे भी छोड़ दे सकता था क्योंकि एक बार तो उसकी चुदाई कर ही चुका था,,,, लेकिन अब वह मन में ठानी थी कि अब ऐसा दोबारा नहीं होने देगी वह शुभम को अपना बना कर रहेगी,,,,,
सास बहू दोनों फुटपाथ पर चल रहे थे सड़क पर गाड़ियां तेज रफ्तार से आ जा रही थी जिनके होरन की आवाज से पूरा वातावरण गूंज रहा था,, रुचि की नजरें उन मर्दों की नजरों से बच नहीं पाई जो उन दोनों को आते जाते देख रहे थे खास करके उन मर्दों की नजर उसकी सांस की बड़ी-बड़ी का और उसकी मदमस्त गांड पर टिक कर रह जाती थी ,,,
पहले यह सब रुचि को अच्छा नहीं लगता था लेकिन आज ना जाने क्यों उसे यह सब अच्छा लगने लगा था जो भी मर्द उसके खूबसूरत बदन या उसके नितंबों की तरफ देखता तो उसके तन बदन में हलचल सी होने लगती थी,, और जिस तरह से फुटपाथ पर आते जाते मर्दों की नजरें उसकी सांस की भी बड़ी बड़ी गांड पर ठहर कर रह जाती थी उससे उसे साफ पता चलता था कि मर्दों को औरतों की बड़ी बड़ी गांड और बड़े बड़े दूध सबसे ज्यादा प्यारे होते हैं,, अपनी सास से शिवम के बारे में बात करने के आगे वह रिपोर्ट वाली बात को भूल चुकी थी उसे अब इस बात की बिल्कुल भी चिंता नहीं थी कि रिपोर्ट में क्या आने वाला है बस वह अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में थे इसलिए वह दो कदम आगे बढ़कर अपने सास के करीब पहुंच गई और उस से बोली,,,
मम्मी जी एक बात कहूं आप बुरा तो नहीं मानोगी,,,
नहीं ,,,,(सरला गौर से रुचि की तरफ देखते हुए बोली क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि रुचि क्या कहने वाली है,,)
मम्मी इस उमर में भी आपकी गांड बहुत जबरदस्त लगती है मैं आज पीछे से देखने पर आपको कह रही हूं,,
( रुचि वह अपना उल्लू सीधा करना था इसलिए जो मुंह में आया वह बोलने लगी हो आज बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रही थी कि अपनी सास के आगे उसे कैसे बात करना है बल्कि वह किसी भी तरह से अपना काम बनाना चाहती थी)
यह क्या कह रही हो बहु तुम्हें ऐसा कहते शर्म नहीं आ रही है,,
शर्म कैसी मम्मी जी मैं तो सच कह रही हूं जो दिखता है वही कह रही हूं,, ( रुचि फिर से एक बार अपनी दोनों आंखों को नचाते हुए बोली,,,)
मम्मी मैं ऐसे ही थोड़ी कह रही हो आते जाते मैं सबकी नजर को देखकर बोल रही हो कि आते जाते जो भी आपको देख रहा है वह आपकी बड़ी बड़ी गांड को ही देख रहा है जो कि आपकी साड़ी कसी होने की वजह से और जबरदस्त लग रही है,,,,( अपनी बहू की बात सुनकर वह अपनी नजर पीछे की तरफ करके अपनी बड़े-बड़े नितंबों को देखने लगी क्योंकि वाकई में बेहद मादकता से भरे हुए लग रहे थे और उन्हें देखते ही उसे शुभम की याद आ गई जो कि वह भी उसकी बड़ी बड़ी गांड कहीं दीवाना था, अपनी बहू की यह वाली बात पर वह मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)
तू पागल हो गई है बहु भला इस उमर में कौन लड़का देखता है मेरे में अब वह पहले वाली बात थोड़ी है,, ( अपने चारों तरफ आते जाते मर्दों की नजर को भांपते हुए सरला बोली जो कि वाकई में वह लोग उसी को देख रहे थे,,)
नहीं मम्मी आप हमें अभी भी पहले वाली बात है तभी तो मर्दों की नजर तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पर टिकी रहती है और खासकर के जवान होते लड़कों की जैसे कि शुभम,, ( इतना कहकर रुची अपनी सास के चेहरे की तरफ देखने लगी जिस पर शुभम का नाम सुनते ही हवाईया उड़ने लगी थी,,)

































