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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

रुचि आज सुबह से बेचैन नजर आ रही थी,,, वह अंदर ही अंदर वह परेशान हुए जा रही थी एक तो अपनी सास की रंगरेलियां अपनी आंखों से देख चुकी थी और दूसरी यह कि आज उसकी रिपोर्ट आने वाली थी पता नहीं रिपोर्ट में क्या आने वाला है यह सोचकर वह घबरा रही थी वैसे तो उसे अपने आप पर पूरा विश्वास था कि कोई भी कमी उस में बिल्कुल भी नहीं है सारी कमी उसके बेटे में ही है लेकिन फिर भी रिपोर्ट देखने के बाद ही वह अपने मन को शांत कर सकते थी,,,,,, वह आज जल्दी खाना बना कर तैयार हो गई थी और अपने कमरे में अपने आप को देखकर मंद मंद मुस्कुरा भी रही थी और अपने आप को कोश भी रही थी कि कैसी किस्मत लेकर पैदा हुई है इतनी खूबसूरत होने के बावजूद भी शारीरिक सुख से वंचित रह गई,,, एक तरफ उसकी सासू मां थी जो कि उम्र के इस पड़ाव पर भी एक जवान लड़के से चुदवाने का भरपूर आनंद लूट रही थी और एक वह थी कि मर्यादा संस्कार इन सब के बंधनों में बैठकर अपनी शारीरिक जरूरतों को अनदेखा करते हुए अपनी जिंदगी और अपने सपनों का गला घोट रही थी,,,, आईने में साड़ी के ऊपर से भी उभरी हुई अपनी संतरे जैसे चुचियों के उभार को देखकर अपने आप से ही बातें कर रही थी कि सब कुछ तो है उसमे जो एक औरत में होना चाहिए,,, फिर वह क्यों शरीर सुख से वंचित होती जा रही है क्यों उसे अपने पति से शारीरिक संतुष्टि नहीं मिल पाती,,, अपने आपको आईने में देखते हुए उसे वह पल याद आ रहा था जब वह छत पर गई थी वह चोरी छुपे अपनी सास को पड़ोस के ही जवान लड़के सुमन से जबरजस्त चुदवाते हुए देखी थी हालांकि वह भी शुभम से शारीरिक सुख भोग चुकी थी और तब जाकर उसे पता चला था कि असली चुदाई क्या होती है और इसीलिए वह अपनी सास से ईर्ष्या कर रही थी कि इस उम्र में भी वह बिना किसी झिझक के रोक-टोक के बिना डरे छत पर खुले तौर पर उस से चुदवाने का आनंद लूट रही है और वह जवान औरत होते हुए भी ना तो पति से संतुष्टि प्राप्त कर पा रही है और ना ही कहीं बाहर से एक उसका भी वही शुभम ही सहारा था जो उसे शारीरिक सुख देकर उसे संतुष्ट कर सकता था ,,,, लेकिन अपनी सास के होते हुए वह घर में किस तरह से एक जवान लड़के को अपने कमरे में ले जाकर उससे चुदवा सकती थी यह उसकी मर्यादा और संस्कार के खिलाफ था और तो और इसमें बदनामी का भी डर था,,,, ऐसा कोई भी कदम उठाने में डरती थी जिससे उसमे उसकी बदनामी हो,,, वह अपने आपको आईने में देखकर यह सोचने लगी कि उससे कहीं ज्यादा हिम्मत वाली तो उसकी सांस है जो कि खुले तौर पर संध्या के वक्त छत पर जाकर एक जवान लड़के से चुदवाने का आनंद लूट रही थी,,,,, रुचि को शुभम से भी जलन होने लगी थी,, वह अपने मन में ही सोच रही थी कि शुभम कैसा लड़का है जो एक जवान औरत को चोदने के बाद भी एक उम्र दराज औरत को छत पर चोद रहा था वह चाहता तो किसी न किसी बहाने घर में आकर मौका देख कर उसकी भी चुदाई कर सकता था,,,,, वह अपने मन में यह सोचने लगी कि इतना तो तय है कि मर्दो को केवल उनकी बुर से ही मतलब रहता है उनकी उम्र से नहीं,,,,, तभी तो वह कितने मजे लेकर इतनी जोर जोर से धक्के लगा रहा था कि जैसे उम्र दराज औरत को नहीं बल्कि एक जवान औरत को चोद रहा हो,,, यह बात अपने मन में सोचते हुए रुचि को वह पल याद आ गया जब तूफानी बारिश में वह अनजान जगह पर झोपड़ी के अंदर उसकी जबरदस्त चुदाई किया था और वह भी बिना डरे उसे पूरी तरह से नंगी करके वाकई में शुभम में मर्दाना ताकत के साथ साथ मर्दाना जोश से भरा हुआ जिगर भी है,, जो कि यही एक औरत को पसंद भी आती है,,,,, ऊस तूफानी बारिश में सुभम द्वारा लगाए गए जबरदस्त धक्कों को याद करके रूचि का मन बहकने लगा उसे फिर से मोटे तगड़े और वो भी सुभम के लंड की जरूरत पड़ने लगी लेकिन ऐसा मुमकिन बिल्कुल भी नहीं था वही सोच रही थी कि ऐसा क्या जुगाड़ लगाया जाए कि वह जब चाहे तब शुभम के लंड को अपनी बुर में ले सके और अपनी प्यास बुझा सके उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था,,, तभी एकाएक उसके मन में ख्याल आया कि क्यों ना उसकी सांस की रंगरेलियां का ही फायदा उठाकर वह अपने शरीर की जरूरत को शुभम से पूरी कर सके,,,, ओर वह बीना डरे बिना रोक-टोक के ऐसा हो गया तो उसकी किस्मत खुल जाएगी,,,, यह ख्याल मन में आते ही रुचि के चेहरे पर चमक आ गई अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी सास को यह बात बिल्कुल भी पता नहीं है कि वह उसकी शुभम के साथ रंगरेलियां मनाते हुए देख चुकी है अगर यह बात उसकी सास को वह खुद बताए तो उसके चेहरे की हवाइयां उड़ने लगेगी,, और इस उम्र में आकर वह एक जवान लड़के से चुदाई करवा रही है,, यह बात कही में बताना था इसलिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाएगी और यही एक रास्ता है शुभम से हमेशा शरीर सुख भोगने का,, और उसे पक्का विश्वास था कि वह अपने इस युक्ति से शुभम को पूरी तरह से पा लेगी ,,, रुचि यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी सास उम्रदराज होने के साथ-साथ समाज में संस्कारी औरत वाली छवि शुरू से बनाए हुए हैं और समाज के लोग उसकी इज्जत भी करते हैं अगर यह बात बाहर आ गई कि वह कोई संस्कारी औरत नहीं बल्कि अपनी वासना मिटाने के लिए अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ चुदाई करवाती है तो उसकी कितनी बदनामी होगी,,, और यह राज को राज रखने के एवज में उसकी सास ना चाहते हुए भी उसे किसी भी मर्द के साथ खास करके शुभम के साथ संभोग करने की इजाजत दे देगी,, और यही तो रुचि चाहती थी,, रुचि को पक्का यकीन हो गया कि वह उसकी नियुक्ति जरूर काम करेगी और यही सोचकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव आ गए वह जल्दी से तैयार होकर अपनी सास के कमरे की तरफ गई उसे बुलाने के लिए क्योंकि दवा खाने जाने का समय हो रहा था,,

दूसरी तरफ सरला भी तैयार हो रही थी जब से सुभम से मुलाकात हुई थी तब से वह भी सजना सवरना थोड़ा बहुत करने लगी थी,, क्योंकि जब 110 जैसा जवान लड़का उसकी मदमस्त जवानी कि आग मैं अपना हाथ सेकने के लिए तैयार था और से सेंक भी रहा था तो उसे यकीन था कि उसकी मद मस्त जवानी की आग अभी भी बची हुई है जिससे वह किसी भी जवान लड़के को पिघलाने में समर्थ है,,,, जिस तरह के ख्याल रुचि के मन में आ रहे थे वही ख्याल सरला के भी मन में आ रहा था उसे अब एक रास्ता सोच लिया था अपनी तड़पती हुई प्यास को बुझाने के लिए जिस तरह से वह छत पर सूखने के लिए रस्सी पर टंगी हुई साड़ी की ओट का सहारा लेकर शुभम से खुले तौर पर चुदाई करवाई थी उसे लगने लगा था कि अब वह इसी तरह से रोज सुभम से चुदवाएगी और अपने तन की प्यास बुझा पाएगी और यही सोचकर वह मन ही मन गीत गुनगुनाते हुए तैयार हो रही थी,,,,, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और रुचि उसे चलने के लिए बोली तो वह आने के लिए बोल कर जल्दी जल्दी तैयार होकर कमरे से बाहर आ गई,,,,, रुचि उसे देखी तो देखती ही रह गई क्योंकि पहली बार वह इतना ज्यादा सज धज कर दवा खाने जाने के लिए निकल रही थी,,,,,

क्या बात है मम्मी आजकल आप बहुत ज्यादा सज धज रही,,हो,,,

नहीं रे ऐसी कोई बात नहीं है बस ऐसे ही,,( अपने पल्लू को ठीक करते हुए सरला बोली,,,)

नहीं ऐसी कोई बात हो तो जरूर बता देना वैसे मुझसे नहीं कहोगी तो किस से कहोगी,,( रुचि अपनी दोनों आंखों को नचाते हुए सरला पर व्यंग कसते हुए बोली,,, रुचिका उसे इस तरह से बात करना सरला को कुछ ठीक नहीं लगा,,, वह बोली कुछ नहीं और घर से बाहर आ गई,,,)

यहां से रिक्शा कर लेते हैं जाने में आसानी होगी,,,,

नहीं मम्मी जी रहने दीजिए पैदल ही चलते हैं 15 20 मिनट तो लगेगा और वैसे भी पैदल चलने में सेहत भी सही रहती है आप अपने आप को मेंटेन रखेंगी तभी तो खूबसूरत लगेंगी,,,

ठीक है जैसा तू कहे ,,,,(ओर इतना कहकर पैदल चलने लगी सरला को कुछ ठीक नहीं लग रहा था जिस तरह से वह आज उससे बात कर रही थी उसे लगने लगा था कि दाल में जरूर कुछ काला है,, लेकिन उसे यह समझ में नहीं आया कि काला कहां है,,, रुचि को साफ नजर आ रहा था कि शर्मिला आज अपनी साड़ी को कुछ ज्यादा ही कस कर अपनी कमर से बांधी हुई थी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी गांड फैली हुई नहीं बल्कि सुडौल लग रही थी,,, रुचि को समझते देर नहीं लगी कि अपनी गांड दिखा दिखाकर ही वह सुभम जैसे जवान लड़के को अपने बस में की है,,,, इकरा से वह अपनी सास की बड़ी बड़ी गांड देखकर ईर्ष्या कर रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अधिकतर लड़कों को औरतों की बड़ी बड़ी गांड ही पसंद आती है जिसे वह पीछे से अपने हाथों से पकड़कर धक्के पर धक्के लगाते हैं,, यह सोचते हुए हो गए उसका ध्यान अपने आप ही अपने नितंबों पर चले गया जिस पर वह पीछे नजर करके नजर भर कर देख ले रहे थे उसे अपने नितंबों में जरा भी खोट नजर नहीं आई बल्कि जवानी से भरपूर औरत की गांड जिस तरह से होती है उसी तरह की गांड उसकी भी थी ना ज्यादा बड़ी ना ज्यादा छोटी उभरी हुई एकदम सुडोल मदमस्त कर देने वाली,,,, जोकि मर्दों की कमजोरी बनी रहती है उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सुबह जैसा जवान लड़का एक उम्रदराज औरत के पीछे कैसे पड़ गया या तो यह भी हो सकता है कि शुभम को केवल दूर से काम होता है औरत से और ना तो उसकी उम्र से कोई लेना देना नहीं होता लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह जिस तरह से रुचि से बातें करता था उससे बिल्कुल भी नहीं लगता था कि शुभम उम्रदराज औरतों के पीछे पागल होता होगा,, उसे सारा दोष अपनी सांस में ही नजर आ रहा था वहां अपने मन में सोच रही थी कि यही कुछ करी होगी उसे दीवाना बनाई होगी उसे लालच दी होगी तभी वह चाहकर इस तरह से उसकी चुदाई कर रहा था नहीं तो वह तो मौका देख कर उसे भी छोड़ दे सकता था क्योंकि एक बार तो उसकी चुदाई कर ही चुका था,,,, लेकिन अब वह मन में ठानी थी कि अब ऐसा दोबारा नहीं होने देगी वह शुभम को अपना बना कर रहेगी,,,,,
सास बहू दोनों फुटपाथ पर चल रहे थे सड़क पर गाड़ियां तेज रफ्तार से आ जा रही थी जिनके होरन की आवाज से पूरा वातावरण गूंज रहा था,, रुचि की नजरें उन मर्दों की नजरों से बच नहीं पाई जो उन दोनों को आते जाते देख रहे थे खास करके उन मर्दों की नजर उसकी सांस की बड़ी-बड़ी का और उसकी मदमस्त गांड पर टिक कर रह जाती थी ,,,
पहले यह सब रुचि को अच्छा नहीं लगता था लेकिन आज ना जाने क्यों उसे यह सब अच्छा लगने लगा था जो भी मर्द उसके खूबसूरत बदन या उसके नितंबों की तरफ देखता तो उसके तन बदन में हलचल सी होने लगती थी,, और जिस तरह से फुटपाथ पर आते जाते मर्दों की नजरें उसकी सांस की भी बड़ी बड़ी गांड पर ठहर कर रह जाती थी उससे उसे साफ पता चलता था कि मर्दों को औरतों की बड़ी बड़ी गांड और बड़े बड़े दूध सबसे ज्यादा प्यारे होते हैं,, अपनी सास से शिवम के बारे में बात करने के आगे वह रिपोर्ट वाली बात को भूल चुकी थी उसे अब इस बात की बिल्कुल भी चिंता नहीं थी कि रिपोर्ट में क्या आने वाला है बस वह अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में थे इसलिए वह दो कदम आगे बढ़कर अपने सास के करीब पहुंच गई और उस से बोली,,,

मम्मी जी एक बात कहूं आप बुरा तो नहीं मानोगी,,,

नहीं ,,,,(सरला गौर से रुचि की तरफ देखते हुए बोली क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि रुचि क्या कहने वाली है,,)

मम्मी इस उमर में भी आपकी गांड बहुत जबरदस्त लगती है मैं आज पीछे से देखने पर आपको कह रही हूं,,
( रुचि वह अपना उल्लू सीधा करना था इसलिए जो मुंह में आया वह बोलने लगी हो आज बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रही थी कि अपनी सास के आगे उसे कैसे बात करना है बल्कि वह किसी भी तरह से अपना काम बनाना चाहती थी)

यह क्या कह रही हो बहु तुम्हें ऐसा कहते शर्म नहीं आ रही है,,

शर्म कैसी मम्मी जी मैं तो सच कह रही हूं जो दिखता है वही कह रही हूं,, ( रुचि फिर से एक बार अपनी दोनों आंखों को नचाते हुए बोली,,,)

मम्मी मैं ऐसे ही थोड़ी कह रही हो आते जाते मैं सबकी नजर को देखकर बोल रही हो कि आते जाते जो भी आपको देख रहा है वह आपकी बड़ी बड़ी गांड को ही देख रहा है जो कि आपकी साड़ी कसी होने की वजह से और जबरदस्त लग रही है,,,,( अपनी बहू की बात सुनकर वह अपनी नजर पीछे की तरफ करके अपनी बड़े-बड़े नितंबों को देखने लगी क्योंकि वाकई में बेहद मादकता से भरे हुए लग रहे थे और उन्हें देखते ही उसे शुभम की याद आ गई जो कि वह भी उसकी बड़ी बड़ी गांड कहीं दीवाना था, अपनी बहू की यह वाली बात पर वह मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

तू पागल हो गई है बहु भला इस उमर में कौन लड़का देखता है मेरे में अब वह पहले वाली बात थोड़ी है,, ( अपने चारों तरफ आते जाते मर्दों की नजर को भांपते हुए सरला बोली जो कि वाकई में वह लोग उसी को देख रहे थे,,)

नहीं मम्मी आप हमें अभी भी पहले वाली बात है तभी तो मर्दों की नजर तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पर टिकी रहती है और खासकर के जवान होते लड़कों की जैसे कि शुभम,, ( इतना कहकर रुची अपनी सास के चेहरे की तरफ देखने लगी जिस पर शुभम का नाम सुनते ही हवाईया उड़ने लगी थी,,)
 
शुभम का नाम सुनते ही सरला के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी,,,,, हड़बड़ाहट उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी,,,,

कककक,, क्या कह रही है तू तुझे कुछ समझ में आ रहा है कि क्या कह रही,, है,,,( सरला अपने बहु से नजरें चुराते हुए बोली,,,)

मैं जो कुछ भी कह रही हुं मम्मी ठीक ही कह रही,,हु,,,

तुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि शुभम,,,( इतना कहने के बाद वह आगे कुछ बोल नहीं पाई,,,)

सुभम,,,,, मम्मी जी,,, शुभम भी आपकी बड़ी बड़ी गांड का दीवाना है,,,,,( रुची सरला के एकदम बराबर आकर चलते हुए बोली,,,)

बहुत तुझे यह सब बातें मुझसे करते हो शर्म आनी चाहिए लेकिन तुम एकदम बेशर्म होकर मुझसे यह सब बातें कह रही है,,,( सरला थोड़ा गुस्से में जरूर थी लेकिन फिर भी शर्म के मारे अपनी नजरें चुराते हुए बोल रही थी,,,)

क्या बात है मम्मी जी मुझे यह बातें करते हुए शर्म आनी चाहिए और आपको यह सब करते हुए शर्म नहीं आनी चाहिए,,,,,, क्या कहना आपका,,,,,
( सरला से यह सब सुना नहीं जा रहा था सरला को लगने लगा कि रुचि ने शायद सब कुछ की आंखों से देख ली है,, लेकिन फिर भी आखरी तक अपना बचाव करने के लिए प्रयास करते हुए बोली,,)

कककक,,क्या,,, किया है मैंने,,, क्या करते हुए मुझे शर्म आनी चाहिए क्या करते हुए नहीं आनी चाहिए,, तु ये सब क्या बकवास कर रही है,,,, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,( सरला अपनी बहू से नजरे बचाते हुए जल्दी-जल्दी कदम आगे बढ़ाने लगी,,,)

मैं बकवास नहीं कह रही हूं मम्मी जी मैं जो कुछ भी कह रही हूं सच कह रही हूं मैं ऐसे ही कोई बात नहीं कहती और इतनी बड़ी बात तो बिल्कुल भी नहीं,, छत पर क्या हो रहा था यह सब मैं अपनी आंखों से देख चुकी हुं,,,,(इतना सुनते ही सरला को तो जैसे चक्कर आने लगा उसके पैरों तले की जमीन खिसकने लगी वह लगभग गिरने वाली थी क तब तक रूचि ने उसे अपने हाथ से संभाल लिया और धीरे से फुटपाथ पर लगे कुर्सी पर बिठा दी,,, यह सब देखकर फुटपाथ पर दूसरे चलने वाले लोग खड़े होकर पूछने लगे तो रोज ही ना जरा सा चक्कर आने का बहाना करके उन लोगों को जाने के लिए कह दिया और खुद उसी कुर्सी पर बगल में बैठ गई,,)
सब कुछ अपनी आंखों से देख चुकी हुं,,, मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि मम्मी तुम ऐसा कर सकती हो ,, इतनी इज्जत दार मर्यादा वाली औरत होने के बावजूद और समाज में इतनी इज्जत दार औरत होते हुए तुम इस तरह की गिरी हुई हरकत कर सकती हो अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ खुले छत पर चुदाई का खेल खेल रही थी,,,,,( सरला क्या कहती अब उसके पास अपना बचाव करने के लिए कोई भी शब्द नहीं थे, अपनी बहू की इस तरह की बातें सुनकर उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे,, आंसुओं को देखकर भी रुचि आज उस पर बिल्कुल भी रहम नहीं करना चाहती थी वह अपनी सास पर आज अपनी पकड़ एकदम बराबर बना लेना चाहती थी,,, इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) पहले तो मुझे लगा मम्मी जी कि मैं कोई सपना देख रही हूं जब मेरी आंखें जो देख रही है वह छूट केवल भ्रम है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं,,था,,, मेरी आंखें जो कुछ भी देख रही थी वह हकीकत थी,, फिर मुझे लगा कि शायद भावना में आप बह गई होंगी आप से गलती हो गई होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था आप तो बल्कि शुभम जो कि आपके बेटे की उम्र से भी कम उम्र का लड़का है उसे उकसा रही थी और जोर जोर से धक्के लगाने के,, लिए,,,( रुचि की यह सब बातें सरला से सुनी नहीं जा रही थी उसे एहसास हो रहा था कि उससे बहुत बड़ी गलती हुई है अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ वो भी खुले छत पर चुदाई का खेल खेल के वह बहुत बड़ी गलती कर दी है,,, वह लगातार रोए जा रही थी,,,)
मुझे तो वह सब सोचकर ही शर्म आती है मम्मी जी,, ओर वो शुभम बड़ा संस्कारी बना फिरता है उसे भी शर्म नहीं आई अपनी मां की उम्र से बड़ी औरत के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए वह भी कितने मजे ले ले कर तूम्हे पीछे से चोद रहा था,, कि जैसे कोई लड़की को चोद रहा हो,,,,( रुचि यह सब बोलते हुए सरला की तरफ देख ले रही थी जो कि बहुत ही डरी हुई और सहमी हुई नजर आ रही थी उसकी आंखों से लगातार आंसुओं की धार गिरती जा रही थी,,, क्योंकि अब वह अपना बचाव करने में सक्षम नहीं थी वह पूरी तरह से फस चुकी थी,,,, अपनी सास की हालत को देखकर रुचि अंदर ही अंदर खुश हो रही थी उसे लगने लगा था कि उसका शिकंजा उसकी सांस पर पूरी तरह से कस्ता चला जा रहा है,,, वह किसी भी तरह से अपनी सास को छोड़ना नहीं चाहती थी इसलिए बातों के तीर उसके दिल पर चला रही थी और तभी एक तीर और दागते हुए बोली,,,)

मम्मी जी मुझे बहुत शर्म आ रही है मैं उसी दिन जब तुम शुभम से चुदवा रही थी तभी तुम्हें पकड़ लेना चाहती थी लेकिन मुझे लगा कि ऐसा करने पर आप बहुत शर्मिंदा होंगी आपको बहुत दुख होगा इसीलिए मैं खामोश रही लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं खामोश रह पाऊंगी अगर यह सब बात सब को पता चल गई तब सोचो क्या होगा अगर यही बात तुम्हारे बेटे को पता चल गई कि उसकी मां एक जवान लड़के से चोरी-छिपे छत पर चुदाई करवाती है रोज चुदवाती है तो सोचो वह क्या सोचेगा तुम्हारे बारे में,,

नहीं नहीं बहु ऐसा बिल्कुल मत करना मैं तेरे हाथ जोड़ती हूं (और ऐसा कहते हुए रोते हुए वह रुचि के आगे हाथ जोड़ने लगे लेकिन रुचि तुरंत उसका हाथ पकड़कर नीचे कर दी और बोली,,)

क्या करती हो मम्मी जी आते जाते सब लोग देख रहे हैं क्या सोचेंगे,,,,,

मैं क्या करूं बहु मैं बहक गई थी मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही है मैं सच में बहुत बड़ी गलती कर गई,,,,,
( रुचि को सरला के चेहरे पर साफ दिख रहा था कि उसे पछतावा हो रहा था वह अंदर ही अंदर दुखी थी शर्मिंदगी महसूस कर रही थी अब सरला उसे और बेइज्जत नहीं करना चाहती थी इसलिए बोली,,,)

मम्मी जी आप चाहती हैं कि यह राज राज ही रहे तो यह राज हमेशा के लिए मेरे सीने में दफन रहेगा मैं यह बात किसी से नहीं कहूंगी आपके बेटे से भी नहीं,,,

बाहों में तेरी जिंदगी भर एहसानमंद रहूंगी तू जो कहेगी मैं वह करूंगी लेकिन यह बात किसी को मत बताना वरना मैं मर जाऊंगी,,

मम्मी जी आप यकीन रखिए में यह बात किसी से नहीं कहूंगी,,,( रुचि अपनी सास का हाथ अपने हाथ में लेकर उसे हल्के से दबाते हुए उसे एहसास दिलाते हुए बोली,,)
अब चलिए हमें दवाखाने भी जाना है ,,,,

इतना कहकर रुचि उसका हाथ पकड़ कर खड़ी हुई और धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ा कर अस्पताल की तरफ जाने लगी रुचि मन ही मन में बहुत खुश हो रही थी क्योंकि उसे यकीन था कि उसकी युक्ति एकदम काम कर जाएगी जैसा कि वह चाहती है उसका तीर ठीक निशाने पर लगा था उसकी सास पूरी तरह से उसकी पकड़ में आ गई थी,,,, सरला अपनी बहू से नजर नहीं मिला पा रही थी ,,,वह एकदम शर्म से गड़ी जा रही थी कर भी क्या सकती थी उसकी हरकत ही कुछ ऐसी थी,,,, और देखा जाए तो हरकत कुछ गलत नहीं थी औरत को अपनी प्यास बुझाने का पूरा हक होता है जब तक कि उसका साथी उसके पास होता है तब तक यही क्रिया वह बड़े आराम से और दुनिया की नजर में सभ्यता के साथ करती रहती है लेकिन जब उसी के पास किसी भी प्रकार का जुगाड़ नहीं होता,, तब यही किया उसे बाहर करनी पड़ती है जो कि दुनिया की नजर में सभ्यता और संस्कार के खिलाफ होता है लेकिन औरतों की अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए यही रास्ता सही भी होता है,,,, सरला के लिए यह सब सही होता अगर वह पकड़ी नहीं गई होती तो,, लेकिन उसकी किस्मत खराब थी कि उसकी बहू ने उसे रंगेहाथ चुदवाई करवाते हुए देख ली थी,,,, और यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी कि वह जल्दबाजी कर गई थी अपनी वासना अपनी जरूरत है थोड़ा भी सब्र नहीं कर पाई और आनन-फानन में अपनी बहू की मौजूदगी में ही वह खुले छत पर शुभम के साथ संभोग रत हो गई,,,,,

थोड़ी ही देर में दोनों अस्पताल पहुंच गए थे,, अब रुचि का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अभी तक वह अपनी युक्ति को काम लगाने के चक्कर में यह भूल गई थी कि आज उसकी रिपोर्ट आने वाले थे और यही रिपोर्ट उसे बताने वाली थी कि वह पूरी तरह से मां बनने में सक्षम है या नहीं,,,,, सरला भी परेशान नजर आ रही थी,, उसे लगने लगा था कि आज का दिन उसके लिए बहुत खराब है क्योंकि शुरुआत ही खराब हो चुकी थी और वह भी थोड़ी बहुत नहीं बेहद खराब हो चुकी थी,,, अब उसे यह डर सता रहा था कि कहीं रिपोर्ट में यह ना जाए कि उसका बेटा बाप बनने में सक्षम नहीं है क्योंकि थोड़ी बहुत शंका तो उसे अपने बेटे के हाव-भाव और उसके दुबले पतले शरीर को देखकर हो ही रही थी लेकिन आज रिपोर्ट आज आने पर सब कुछ साफ हो जाएगा वह मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि ऐसा कुछ भी ना रिपोर्ट में आए जिससे उसकी बदनामी और शर्मिंदगी,,हो,,,

थोड़ी ही देर में एक नर्स आई और उन्हें डॉक्टर के केबिन में जाने के लिए बोली,,, सास बहू दोनों धड़कते दिल के साथ डॉ के केबीन में चली गई,,, डॉक्टर ने रिपोर्ट के बारे में बताने लगा उसने यह बताया कि रुचि में कोई कमी नहीं है वह कभी भी मां बन सकती है और पूरी तरह से सछम लेकिन, उसका पति किसी भी सूरत में कभी भी बाप नहीं बन सकता यह सुनते ही सरला के नीचे से जमीन सरक गई उसे फिर से चक्कर जैसा आने लगा,,,, वह डॉक्टर के आगे हाथ जोड़कर विनती करने लगी कि किसी भी तरह से उसे बाप बनने में सक्षम बनाइए,, लेकिन वह डॉक्टर सरला से साफ शब्दों में कह चुका था कि वह या तो मेडिकल किसी भी तरह से उसकी कोई भी मदद नहीं कर सकते वह कभी भी बाप नहीं बन सकता,,,, रही सही उम्मीद सरला की जाती रही आज का उसका दिन ही खराब था,, दोनों सूरते हाल में उसकी इज्जत पर बनाई थी अगर छत वाली बात किसी को भी कानो कान खबर पड़ेगी तो वह समाज में मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाएगी और अगर उसका बेटा कभी बाप नहीं बन सका तो यह भी उसकी इज्जत पर बन आने वाली बात थी,, ,,, वह मां बनने में पूरी तरह से सक्षम है इस बात से रूचि बेहद खुश थी लेकिन इस बात का उसे बेहद दुख था कि वह कभी भी मां नहीं बन पाएगी क्योंकि उसका पति बाप बनने के लायक ही नहीं है,, उसकी धारणा बिल्कुल सही साबित हुई थी वह डॉक्टर के केबिन में कुछ बोल नहीं पाई वहां से दोनों सास बहू डॉक्टर के केबिन से बाहर आ गए,,,,

सड़क पर चलते समय सरला को कुछ सुझ नहीं रहा था कि वह क्या करें सब कुछ परिस्थिति उसके विपरीत चल रही थी,,,, रुचि भी अब कुछ बोल नहीं रही थी दोनों खामोश होकर घर वापस लौट आए,, छत वाली बात को लेकर रुचि अपनी सास से कुछ बोल नहीं पाई क्योंकि बात ही कुछ ऐसी हो गई थी,,,,, रात भर दोनों सास बहु अपने अपने कमरे में अपने बिस्तर पर करवट बदलते हुए इसी बारे में सोचते रहे कि आगे क्या होगा ,,,अब क्या किया जाए,,,,
दुनिया में औरतों के लिए सबसे बड़ा सुख होता है मां बनना,, रुचि भी यही चाहती थी कि वह जल्द से जल्द में आपने लेकिन अब उसके सारे सपने पर पानी फिर गया था क्योंकि उसका पति उसे मां बनाने लायक बिल्कुल भी नहीं,, था,, रुचि को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसके पास दूसरा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था ऐसे में उसे,,,, शुभम का ख्याल आया,, ,, अपने मन में सोचने लगी कि उसका पति तो उसे मां बनाने से रहा क्यों ना वाह शुभम के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए मां बन जाए वैसे भी उससे और उसकी सास के सिवा किसी और को भी पता नहीं है कि उसका पति बाप बनने लायक नहीं है,,,, ऐसे में उसका दो काम हो जाएगा एक तो अपनी शारीरिक संतुष्टि को भी प्राप्त कर देगी जुदाई के असली सुख को प्राप्त करके वह मां भी बन जाएगी,, और यह बात किसी को कानों कान खबर भी नहीं पड़ेगी मैं तो शुभम को भी यह बात के बारे में पता चलेगी कि उसके पेट में जो बच्चा पड़ रहा है उसी का है,, यह ख्याल मन में आते ही सुरुचि के चेहरे पर चमक आ गई उसे अब अपनी मंजिल नजर आने लगी कुछ देर पहले जो रास्ता नहीं सोच रहा था आप सब कुछ साफ हो चुका था बस उसे इस बारे में अपनी सास से बात करके उन्हें पटाना था जो कि इसमें कोई भी दिक्कत उसे नजर नहीं आ रही थी क्योंकि उसके लिए उसकी सास को काबू करने के लिए छत वाली बात ही काफी थी,, अपनी मुश्किल को सुलझा ली थी इसलिए आराम से सो गई लेकिन दूसरे कमरे में उसकी सास की आंखों से नींद कोसों दूर थी ,,, उसे कोई रास्ता नहीं सोच रहा था कि तोबा डबल मुसीबत में फंस गई थी एक तो उससे शुभम से चुदवाते हुए उसकी बहू ने देख ली थी और दूसरा यह कि उसका बेटा कभी बाप नहीं बन सकता था इन दोनों मुसीबत से उसे छुटकारा पाना था,,,, ऐसे में सरला के लिए मात्र एक सहारा शुभम ही नजर आ रहा था वह चाहती थी कि उसकी बहू शुभम के साथ शारीरिक संबंध बनाकर गर्भवती हो जाए और इस बात की कानो कान खबर ना तो शुभम को ही पता रहेगी और ना ही किसी को सबको यही लगेगा कि जब उसके पति का ही बच्चा है ऐसे में सब कुछ सही हो जाएगा,, रुचि की शारीरिक जरूरत भी पूरी हो जाएगी और वह मां भी बन जाएगी लेकिन उसे इस बात का डर था कि कहीं रुचि इसके लिए तैयार होगी या नहीं होगी इस बारे में बात करने से भी से डर लग रहा था लेकिन क्या करें मुसीबत से रास्ता तो निकालना ही था इसलिए वह अपना मन पक्का करके सुबह में उससे बात करने की ठान कर वो भी सो गई ,,,
 
सुबह उठकर शुभम और निर्मला तैयार होकर स्कूल चले गए,,, और दूसरी तरफ रूचि और सरल आ रात भर सोच विचार ने के बाद अपने मन की बात एक दूसरे को कहने के लिए लालायित हुए जा रहे थे लेकिन उन्हें कोई राह नहीं सुझ रही थी कि वह किस तरह से अपनी बात की शुरुआत करें,,,,, सरला के अंदर बहुत सारी बातें चल रही थी एक तो वैसे ही परेशान थी, सब कुछ ठीक चल रहा होता अगर रुचि ने उसे शुभम से संभोग करते हुए ना देखी होती,, उसकी हड़बड़ाहट उसके लिए परेशानी का कारण बन चुकीथी,,
सरला कुर्सी पर बैठी हुई थी और रुचि रसोई घर में नाश्ता तैयार कर रही थी उसके मन में भी ढेर सारी बातें चल रही थी और अंदर ही अंदर वह प्रश्न भी हो रही थी क्योंकि एक तरह से उसके पति का इस तरह से बाप ना बनने की स्थिति में उसका ही फायदा हो रहा था ऐसे वह चोरी-छिपे शुभम से शारीरिक संबंध बनाती लेकिन अब इस तरह की स्थिति में वह खुले तौर पर बिना डरे शुभम से चुदवा सकती थी,,, लेकिन उसके मन में घबराहट भी हो रही थी कि वह कैसे अपनी सास से यह बात खुले तौर पर कह दो कि भले ही वह अपनी सास को शुभम वाली बात से अपनी पकड़ में कर ली हो लेकिन फिर भी संस्कार और मर्यादा भी कोई चीज होती है जो कि अभी तक रुचि के पक्ष में मजबूत स्थिति में था वह कभी भी ऐसा कोई काम नहीं की थी जिससे उसकी बदनामी हो वह बेहद शरीफ खानदान से थी और संस्कारी थी हालांकि अपने बदन की प्यास को अब वह दबा पाने में सक्षम नहीं थी,,, क्योंकि उसकी रसीली पुर में भी एक जवान मोटे तगड़े लंड का स्वाद चख ली थी जिसकी वजह से अब उसके अंदर कुछ ज्यादा ही खुजली होने लगी थी,,,,, नाश्ता तैयार करते समय बार-बार उसकी आंखों के सामने शुभम का लटकता हुआ बेहद खतरनाक तगड़ा लंड नजर आ रहा था और साथ ही वह नजारा याद आ रहा था जब उसकी सास उम्र दराज होने के बावजूद भी बड़ी मस्ती के साथ झुककर पीछे से शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने बुर में लेकर चुदाई करवा रही थीं,,,, यह सब याद करके उसे अपनी पेंटिं गीली होती महसूस हो रही थी ,,, तभी चाय में आ रही हो ऊबाल को देखकर उसकी तंद्रा भंग हुई वह जल्दी से दो कप चाय तैयार करके रसोई घर से बाहर आ गई,,,, और कब की ट्रे को टेबल पर रखते हुए एक चाय का कप अपनी सास की तरह बढाते हुए बोली,,,

मम्मी जी चाय पीजिए,,

सरला अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहू के हाथ से चाय का कप लेकर कुछ देर तक यूं ही सुन्यमनष्क होकर कप की तरफ देखती रही,,, अपनी सास को इस तरह से खामोश देखकर रूचि बोली,,

क्या हुआ मम्मी इतनी खामोश क्यों हो,,?

मैं जानती हूं बहू की जो कुछ भी हुआ वह ठीक नहीं हुआ मुझे तो समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं किस तरह से मैं तेरी सूनी गोद को हरी कर दूं,,,,( सरला की बात सुनकर रुचि का मन तो हो रहा था कि वह सब कुछ अपनी सास से साफ शब्दों में कह दे कि वह शुभम से चुराकर गर्भवती होना चाहती है,, लेकिन ऐसा कहने से भले ही सरला कुछ ना बोले लेकिन उसके मन में उसके संस्कार को लेकर शंका जरूर होने लगेगी,, इसलिए वह बोली कुछ नहीं बस चाय की चुस्की लेती रही,,,, लेकिन लेकिन अभी भी सरला उसी तरह से शांत बैठी रही तो रूचि बोली,)

मम्मी जी इसमें हम और आप कुछ नहीं कर सकते हैं कि सब शायद भगवान की ही मर्जी थी तब यह सब कुछ हुआ आप चाय पी लीजिए बेवजह चिंता मत करिए भगवान कोई ना कोई रास्ता जरूर निकाल देगा,,,( रुचि अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रही थी कि वह अपनी सास की नजर में संपूर्ण रूप से चरित्रवान औरत बनी रहे ,,)

यह तो तेरा बड़प्पन है बहू जो इतना कुछ होने के बावजूद भी तू कुछ भी नहीं बोल रही है,,,, मैं तो किसी भी तरह से तुझ से नजर मिलाने के लायक ही नहीं रह गई,,, मैं इतने वर्षों तक अपने चरित्र को संभाल कर रखी थी लेकिन ना जाने क्या हुआ कि सबकुछ तार-तार हो,,गया,,,( इतना कहकर सरला रोने लगी और उसको रोता हुआ देखकर रुचि उसे चुप कराते हुए,, बोली,,)

मम्मी इस तरह से मत रोना मैं जानती हूं जो कुछ भी हुआ वह सब भावना में बहकर हुआ है एक औरत होने के नाते आप के दर्द को मैं समझ सकती हुं,, ईतने वर्षों से आप अपने पति बिगर रहकर अपने आप को संभाले हुए थी,, यही आपके चरित्रवान होने का सबूत है हर इंसान से गलती होती है आपसे भी गलती हो गई है आपकी जरूरत थी,,
( अपनी बहू किस तरह की बातें सुनकर सरला को थोड़ी राहत महसूस हो रही थी उसे लगने लगा था कि ओरत होने के नाते वह उसके दर्द को समझ रही है,,)

बहु मुझसे गलती हो गई मैं ऐसा कुछ भी नहीं चाहती थी मैं कैसे बह गई मैं समझ नहीं पा रही हूं,,

मम्मी जी मैं भी यही नहीं समझ पा रही हो कि इतनी उम्र गुजर जाने के बाद आप अपने आप पर कंट्रोल कैसे नहीं कर पाई बल्कि जवानी के दिनों में आपने ऐसी कोई गलती नहीं की होगी यह मुझे पूरी तरह से उम्मीद है तो अब यह गलती कैसे हो गई,,(चाय की चुस्की लेते हुए रूचि बोली)

बहु मुझे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है लेकिन इसमें सब कुछ शुभम की गलती है हमें ठीक तरह से नहीं कह सकती कि उसकी गलती है या मेरी क्योंकि एक हाथ से ताली कभी नहीं बजती लेकिन मैं बहक जरूर गई थी ,,,,,

बहक गई थी लेकिन कैसे और क्यों,,,?

शुभम के लंड को देखकर,,,,( सरला साफ शब्दों में अपने बहू से अश्लील शब्द बोल गई,,)

क्या कह रही हो मम्मी अभी तो वह पूरी तरह से जवान भी नहीं हुआ है तब आप कैसे उसके लंड पर मोहित हो गई,,,( रुचि को तो अच्छी तरह से मालूम था कि शुभम के पास किस तरह का हथियार है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर इस तरह से अपनी सास से पूछ रही थी,,)

बहु यही तो बात है मुझे भी नहीं लगता था कि अभी जवान होते लड़के के पास इतना जबरदस्त हथियार होगा मैं तो देखकर ही दंग रह गई और अपने आप को रोक नहीं भाई उसका लंड वास्तव में मोटा तगड़ा है,,( सरला अपने मुंह से अपनी गलती तो बता रही थी लेकिन उसका इरादा कुछ और था, एक औरत होने के नाते वह औरत के मन को अच्छी तरह से जानती थी वह यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि किसी भी औरत के सामने किसी भी मर्द के मर्दाना अंग की तारीफ कर देने से सामने वाली औरत के मन में उसे देखने कि उसे पाने की इच्छा जरूर जागरूक होती है और यही इच्छा वह रुचि के मन में जगाना चाहती थी ताकि उसका काम आसानी से बन जाए और वह गर्भवती हो जाए,, लेकिन रुचि तो पहले से ही शुभम से शारीरिक सुख भोग चुकी थी इसलिए उसे मालूम था कि शुभम का लंड कितना तगड़ा और मोटा और जानदार है लेकिन फिर भी वह अपनी सास के आगे अनजान बनते हुए बोली,,)

क्या कह रही हो मम्मी सबका एक जैसा ही होता है शुभम में ऐसी कौन सी ख़ास बात थी कि आप बहक गई,,

तू पागल है बहू तुझे अभी मर्दों के बारे में नहीं पता,,( सरला के मुंह से अनजाने में ही यह बात निकल गई तू अपनी सास की बात को पकड़ते हुए रूचि बोली,,,)

क्या बात है मम्मी जी ऐसा लगता है कि आप बहुत सारे मर्दों के साथ सोई है,,

नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैंने तुझे सिर्फ बता रही हूं क्योंकि अक्सर हम सहेलियों में इस तरह की बातें होती रहती थी तब जाकर मुझे यह सब बात पता है,,,,

लेकिन मम्मी मुझे तो यह सब बातें बिल्कुल भी नहीं पता मैं तो यही समझती हूं कि सब का एक जैसा ही होता है जैसा कि आपके बेटे का है,,,,( रुचि आप अपनी सास के आगे जरा भी शर्म नहीं कर रहे थे बल्कि वह खुलती जा रही थी,)

अब मैं यह तो नहीं जानती कि मेरे बेटे का कैसा है बचपन में देखी थी लेकिन अब कैसा है यह मैं नहीं जानती यह बात तो तू ही जानती होगी लेकिन शुभम का कैसा है ,,,रुक मैं तुझे बताती हूं ,,,,(इतना कहकर वह कुर्सी पर से उठ गई और रसोई घर की तरफ जाने लगी,,, रुचि अपनी सास को रसोई घर की तरफ जाते हुए देखती रही और उसी को लगने लगा था कि अब उसका काम बन जाएगा और सरला को भी यही लग रहा था कि शुभम के लंड की बढ़ाई अपनी बहू के आगे करके को अपने बहू में उसे पाने की लालसा जागरुक कर देगी ऐसे में सब कुछ सही हो,, जाएगा,,, रुचि की चाय खत्म हो चुकी थी वह खाली कब को टेबल पर रखते हुए बड़ी उत्सुकता के साथ रसोई घर की तरफ देख रही थी, वह अपनी सास की बात से एकदम सहमत हैं जिस तरह कि वह बात कह रही थी कि वह उसके लंड को देख कर भाग गई ठीक वैसा ही तो उसके साथ भी हुआ था वास्तव में सुभम के लंड में अजीब तरह की ताकत और आकर्षण था जो एक बार और देख ले तो उसकी दीवानी हो जाए और यही उन दोनों के साथ भी हो रहा था,,, और दूसरी तरफ सरला रसोई घर में आकर फ्रिज खोल कर उसमें से लंबा तगड़ा जैसा कि शुभम का लंड था उस तरह का बैगन ढूंढने लगी और थोड़ी देर में उसकी तलाश खत्म हुई वह एक मोटा तगड़ा लंबा बैगन हाथ में लेकर बड़ी उत्सुकता के साथ रसोई घर से बाहर आए और उसे अपनी बहू को दिखाते हुए बोली,,

लेट एक बहू जैसा यह बदन है ठीक वैसा ही शुभम का लंड है मोटा तगड़ा लंबा जिसे देखते ही मैं तो क्या कोई भी औरत उसके आकर्षण में बंध जाएं,,,

क्या बात कर रही हो मम्मी( सरला के हाथ से बेगम को अपने हाथ में लेकर उसे इधर-उधर घुमाते हुए,,) क्या सच में शुभम का लंड ऐसा तगड़ा है,,

हारे बिल्कुल ऐसा ही है इससे 20 ही होगा इससे कम नहीं होगा,,

लेकिन मम्मी आपके बेटे का तो इससे आधा भी नहीं है और पतला है,,,,

मैं जानती हूं बहू तभी तो तू उसके द्वारा मां नहीं बन सकती मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुझे वह छोड़कर तुझे खुश नहीं कर पाता होगा,,,( अब सास बहू दोनों के बीच खुले शब्दों में वार्तालाप होने लगी थी दोनों ऐसा लग रहा था कि शर्म त्याग दी हो,, लेकिन इस तरह की बातें करने में उन दोनों का अपना स्वार्थ था सरला इस तरह की खुली तौर पर बातें करके रुचि को शुभम से संभोग करने के लिए उत्सुक और लालाईत करने पर लगी हुई थी,,, और रूचि इस तरह की बातें करके अपना उल्लू सीधा करने में लगी हुई थी,,,, सरला अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली )
सच सच बताना रुचि में एक सास होने के नाते नहीं बल्कि एक औरत होने के नाते तुझ से पूछती हूं कि जब मेरा बेटा तेरी चुदाई करता हैं तो क्या तुझे मजा आता है क्या तुझे ऐसा लगता है कि कसके उसे अपनी बाहों में भर ले या कभी उसके जोरदार धक्को को सहन करके तु बिस्तर पर बिछी चादर को अपनी मुट्ठी में बांध लेती है अपने दांतो को कस देती है कभी ऐसा हुआ है कि उसकी चुदाई से तु एकदम मस्त हो गई हो और दोबारा उसे चोदने के लिए बोलती हो,,,,,( अपनी सास के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे आश्चर्य हो रहा था और वह भी खुद अपने ही बेटे के बारे में एक माह कभी भी उसकी बुराई करने वाली बात नहीं कर सकती थी लेकिन सलाह के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे अजीब लग रहा था लेकिन उसे मज़ा भी आ रहा था उसे इस बात का एहसास भी हो रहा था कि अगर वह शुभम से संभोग करेगी तो शायद उसके साथ को कोई एतराज नहीं होगा, इसलिए वह अपनी सास के सवाल का जवाब देते हुए बोली,,)

जैसा आप कह रहे हैं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं होता ना जाने क्यों मुझे इन से चुदवाने में जरा भी मजा नहीं आया था जैसा कि मैंने आपको बताई कि उनका लंड जैसा कि आप बता रही है किसी कंपनी देखना मोटा तगड़ा है तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इससे आधा भी नहीं है और इससे एकदम पतला होगा,, तो आप खुद ही सोच सकती हो कि एक औरत के लिए क्या इतना छोटा और पतला लंड सक्षम है उसे संतुष्टि देने के लिए,,

नहीं बहू यही तो मैं कह रही हूं इसलिए तो कह रही हूं कि मेरा बेटा तुझे शारीरिक सुख नहीं दे सकता तभी तो तु मां नहीं बन पा रही है,,,

तुम्हें क्या करूं मम्मी कहां जाऊं किसी अपना दुख कहूं मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है मैं तो यही समझती थी कि जिस तरह का सुख आपके बेटे मुझे देते हैं औरत के नसीब में ऐसा ही सुख होता है मुझे क्या मालूम था कि एक मर्द औरत को इससे भी कहीं ज्यादा सुख देकर उसे संतुष्ट कर देता है और मां बनाता है,,,( अपने चेहरे पर निराशा के भाव लाते हुए बोली उसे देखकर सरला के मन में आशा की किरण नजर आने लगी उसे लगने लगा कि यही ठीक समय है अपने मन में आई बात उसे कहने का इसलिए वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी बहू कहां तक ने हाथ में लेकर उसे हल कैसे दबाते हुए खुद कुर्सी पर बैठ गई और बोली,,)

इसीलिए तो बहू मेरे मन में ख्याल आया है अगर तू कहे तो मैं तुझे बता दूं इसमे हम सबकी भलाई है,,, ( सरला इतना कर ही रही थी कि तभी मोबाइल की घंटी बजने लगी रुचि मोबाइल उठाकर स्क्रीन पर नाम देखें तो वह अपनी सास को दिखाते हुए बोली,,)

मम्मी आपके बेटे का फोन है आप बताइए मैं उन्हें क्या कहूं वो रिपोर्ट के बारे में सुबह से 3 बार फोन कर चुके हैं,,

बहू तू जैसा मैं कहती हूं वैसा ही कह तू सच मत बताना कि वह कभी बात नहीं बन सकता ,,, नहीं तो वह टूट जाएगा एकदम निराश हो जाएगा,,,,

तो मैं क्या कहुं मम्मी,,,,( अभी भी मोबाइल की घंटी बज रही थी जो कि सरला के जवाब देने से पहले ही बंद हो गई,,)

देख बहु मेरे घर की इज्जत अब तेरे हाथ में ही है मैं तेरे हाथ जोड़ती हूं तो घर की इज्जत बचा ले वरना मैं भी कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएंगी क्योंकि मेरा वंश बढ़ाने का बस अब यही एक तरीका है,,,,

यह क्या कर रही है मम्मी इस तरह से आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं,,

शर्मिंदा तो मैं हूं बहू अपनी हरकत की वजह से और अपनी किस्मत की वजह से अब यह शर्मिंदगी से तू ही मुझे निकाल सकती है देख तुझे सिर्फ इतना कहना है कि रिपोर्ट एकदम नॉर्मल आई है रिपोर्ट में कुछ भी नहीं है डॉक्टर कह रहा था कि सिर्फ समय आने पर सब कुछ सही हो जाएगा,,,,

लेकिन कैसे हो जाएगा मम्मी,,, मै कैसे उनसे झूठ कह दूं,,

मेरे कहने पर तू उससे झूठ कह दे मेरे घर की इज्जत बचा ले बहू,,,,,

मैं जैसा तुझसे कह रही हूं वैसा ही कह दे,,,,

लेकिन झूठ कहने से तो मैं मां नहीं बन सकती ना मम्मी,,,

उसका भी उपाय मेरे पास ही बस तु फोन करके जितना मैं कह रही हूं इतना कह दे बस,,,,
( रुचि अपनी सास की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देख रही थी रुचि के मन में यही चल रहा था कि पता नहीं वह क्या कहने वाली है पता नहीं कैसा उपाय ढूंढ कर रखी है क्योंकि वह इसका इलाज कुछ और मन में सोच कर रखी थी कहीं ऐसा ना हो कि दोनों का उपाय अलग अलग है यही सोचकर वह अपने पति को फोन लगाने लगी,,, और जैसा सरला ने बताई थी ठीक वैसा ही वह अपने पति से कह दी उसका पति इस बात से संतुष्ट था कि रिपोर्ट पूरी तरह से नॉर्मल आई है,,,, फोन कट करके रुचि अपनी सास की तरफ आश्चर्य से देखते हुए बोली आप कौन सा उपाय बताने वाली है,,)

देख बहु मेरी बात ध्यान से सुन,,, किसी भी सूरते हाल में तू मां बन नहीं सकती,, जब तक कि तू कोई गलत कदम ना उठाए,,

मैं कुछ समझी नहीं मम्मी जी आप क्या कह रही हैं ,,,?

देख बहु मैं जो बात कह रही हुं थोड़ी अटपटी है लेकिन,, इसमें हम सबकी भलाई है हम सबकी इज्जत बनी की बनी रह जाएगी,,

मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूं मम्मी आप क्या कहना चाह रही हैं ,,,,

मैं तुझे समझा रही हुं मेरी बात पूरी तो होने दे,, देख बाबू हम दोनों यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि मेरा बेटा तुझे किसी भी तरह से चोद कर ना तो संतुष्ट कर पाएगा और ना ही तुझे मां बना पाएगा,, ,,

तो,,,,( रुचि आश्चर्य से बोली,,)

तो यही कि जब तक तू अपने कदम बाहर नहीं ले जाती तब तक ना तो सो संतुष्ट हो पाएगी और ना ही तु कभी गर्भवती हो पाएगी,, और अगर तुझे एक स्त्री होने का असली सुख प्राप्त करना है तो अपने कदम बाहर निकालना ही होगा किसी और से संबंध बनाना ही होगा,,

मम्मी जी यह कैसी बातें कर रही है आप आप जानती हैं कि आप क्या कह रहे हैं कि सब खानदान की हमारी कितनी बदनामी होगी और तो और में कितनी बदनाम हो जाएंगे इस बात की खबर है आपको,,( रुचि अपनी सास की बात को समझते हुए जानबूझकर गुस्सा दिखा रही थी,, अंदर से तो वह बेहद खुश हो रही थी क्योंकि उसका काम बनता नजर आ रहा था,,)

मुझे सब खबर है बेटी में सब कुछ सोच समझकर ही है तुझसे यह कह रही हूं,,,,

नहीं मानी मुझसे यह बिल्कुल भी नहीं होगा मैं संस्कारी और मर्यादा वाली औरत हूं शरीफ खानदान से तालुकात रखती हूं मैं कैसे बाहर जाकर के किसी गैर मर्द से संबंध बनाओ और उसके बच्चे की मां बन जाऊं ऐसा नहीं हो सकता मम्मी आप ऐसा सोच भी कैसे सकती हैं कि मैं इस सब के लिए तैयार हो जाऊंगी,,,( रुचि क्रोधित स्वर में बोली जो कि मात्र दिखावा भर था,,)

मेरी बच्ची तो समझने की कोशिश क्यों नहीं करती अगर तू बाहर नहीं जाएगी तो तो मां कैसे बन पाएगी और मेरा बेटा तुझे कभी भी शरीर सुख नहीं दे पाएगा,,

मैं जिंदगी भर ऐसे ही रह लूंगी मम्मी लेकिन किसी गैर मर्द से संबंध नहीं बनाऊंगी,,
( रुचि की बातें सुनकर सरला को लगने लगा था कि यह नहीं मानेगी अब सरला की नजर में रुचि बेहद संस्कारी और मर्यादा वाली औरत लगने लगी थी वैसे तो वह पहले से ही सही थी लेकिन इस बात से वह और भी ज्यादा संस्कारी साबित हो रही थी सरला परेशान हुई जा रही थी कि वह आप कैसे समझाएं,,)

सोनी को लेकर तो जिंदगी बिता लेगी तो कैसे से पाएगी जब किसी और औरत को उनके बच्चों के साथ जाते हुए देखेगी उन्हें मम्मी मम्मी कहते हुए तेरे कान सुनेंगे तो क्या तेरा मन नहीं कहेगा कि तेरा भी एक बच्चा हो जो तुझे मम्मी कहे,,
( सरला की यह बात सुनकर मुझे ऐसा दिखावा करने लगी कि जैसे वह उसकी बात सुनकर ख्यालों में खो गई,, और उसे इस तरह से खोया हुआ देखकर सरला अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,) सोच जरा बेटी तेरा भी खुद का बच्चा होगा तो यह घर किन कार्यों से गूंजेगा आगे पीछे मम्मी मम्मी कहने वाला था पर मुझे दादी,, और तो और मेरे बेटे के माथे पर से यह कलंक दूर हो जाएगा कि वह कभी बाप नहीं बन सकता,,

लेकिन मम्मी यह होगा कैसे मेरी इतनी हिम्मत नहीं है कि मैं घर से बाहर निकल कर किसी गैर मर्द को इस बात के लिए तैयार करूं कि वह मुझे चोद कर गर्भावती कर दे,,,

बाहर नहीं जाना है बहू तभी तो मैं तुझे इतनी देर से समझा रही हूं घर में ही जुगाड़ है और किसी को कानों कान खबर भी नहीं पड़ेगा,,,,,

घर में ही जुगाड़ में कुछ समझे नहीं मम्मी आप क्या कहना चाहती हैं घर में कैसे जुगाड़ है,,( रुचि आश्चर्य सेअपनी सास की तरफ देखते हूए बोली,,,)

सुभम,,,,,,( सरला एकदम खुश होते हुए बोली और शुभम का नाम सुनते ही रुचि के चेहरे पर जैसे चमक आ गयी लेकिन वह अपने चेहरे पर आए भाव को छिपाते हुए बोली,,)

शुभम,,,, मैं, कुछ समझी नहीं आप क्या कह रही हैं,,,,,

बेटी वह शुभम ही तो है जो तुझे चोदकर तुझे संतुष्ट भी कर देगा और तुझे मां भी बना देगा,,

यह कैसी बातें कर रही है मम्मी वह कल का छोकरा मुझे चोद कर मां बना देगा,,,,

बहु वो कल का छोकरा नहीं है बल्कि जबरदस्त मर्द है,,,, इस बात का प्रमाण मुझसे अच्छा भला कौन दे सकता है और यह तो तू अपनी आंखों से देख चुकी है वह कल का छोकरा होता तो मैं उसके साथ कभी भी सारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार नहीं होती लेकिन तु शायद नहीं जानती कि उसका लंड इतना जबरदस्त मोटा तगड़ा है कि अगर औरत की बुर में एक बार जाए तो वह उसकी दीवानी हो जाती है,,( सरला अपनी बहू को समझाने के लिए सुगंध की तारीफ पर तारीफ किए जा रही थी जो कि इस बात से रूचि पूरी तरह से अवगत थी कि जो उसकी सास कह रही है वह 100 आना सच है,,)

मम्मी मुझे नहीं लगता कि वह इस काबिल हो कि वह मुझे चोद कर संतुष्ट कर पाएगा और मुझे मां बना पाएगा,,( रुचि जानबूझकर ऊपरी मन से शंका जताते हुए बोली)

बेटी तो बस एक बार मेरी बात मान ले अगर यह सच नहीं हुआ तो मैं जिंदगी भर के लिए तेरी गुलाब बन जाऊंगी बस एक बार मेरी बात मान ले और इस घर की इज्जत बचा ले,,
( रुचि अपनी सास की बात सुनकर कुछ देर तक सोचने के बाद बोली,,,)
अच्छा ठीक है मैं आपकी बात मान लेती हूं लेकिन वह तैयार कैसे हो जाएगा मुझे चोदने के लिए,

बहू तु एकदम नादान है एकदम पागल भी तु शायद मर्दों को नहीं जानती कि उन्हें तो बस मौका मिलना चाहिए औरतों को चोदने के लिए,,,,,

लेकिन फिर भी मम्मी उसे इस बात का पता चल गया कि मैं उसके द्वारा गर्भवती हुई हूं तो कहीं पूरे समाज में हम लोगों की बदनामी ना हो जाए,,,

कुछ नहीं पता चलेगा बहु,,, औरत के पेट में किसका बच्चा है यह औरत के सिवा और कोई नहीं बता सकता,,,,, बस तू एक बार उससे चुदवा ले तु एक दम मस्त हो जाएगी और तेरी मनोकामना भी पूरी हो जाएगी,,,

लेकिन मम्मी जी क्या एक बार में औरत गर्भवती हो जाती है,,

मैं तुझे एक बार उससे चुदवाने के लिए नहीं कह रही हूं अब तो वह तुझे जिंदगी भर तुझे चोदेगा जब तेरा मन करे तब उससे चुदवा,,,,,( रुचि तो अपनी मम्मी कुछ और सोच कर रखी थी लेकिन यह तो उसकी सास ने उसके ही मन की बात कह डाली थी उसे तो मुंह मांगी मुराद मिल गई,,थी जिसके साथ चुदवाने के लिए वह सारी युक्ति आजमाई थी वह खुद-ब-खुद उसे उसी के साथ चुदवाने के लिए बोल रही थी और उसके बच्चे की मां बनने के लिए भी कह रही थी उसके लिए तो सोने पर सुहागा हो गया था,,,, वह अंदर ही अंदर बेहद प्रसन्न हो रही थी अब तो उसे बस प्रतीक्षा थी कब शुभम का लंड अपनी बुर में ले,,)

लेकिन मम्मी जी ऐसा होगा कैसे हैं मुझे तो बहुत डर लग रहा है वह कैसे तैयार हो जाएगा मुझे चोदने के लिए,,, मेरा मतलब है कि उसे तो मालूम नहीं कि मैं उसे छुड़वाना चाहती हूं तो यह सब होगा कैसे,,,,

सब कुछ हो जाएगा तो शायद नहीं जानते कि शुभम और को का दीवाना है तभी तो वह मेरी जैसी उम्र दराज औरत को चोद कर मस्त हो गया था तु तो एकदम जवान औरत है तेरे पीछे तो वह पागल हो जाएगा बस एक बार उसे ईसारा कर दे वह दिन रात तेरी चुदाई करेगा,,, देख मैं तुझे सब कुछ बताती हूं मैं कुछ दिनों के लिए एक बहाने से किसी रिश्तेदार के घर चली जाती हूं और तू घर में अकेली रहेगी रोज कोई न कोई काम के बहाने तो उसे बुलाते रहना एक बार तू अपनी जवानी का जलवा उसे दिखा दी तब वह तेरा दीवाना हो जाएगा एक बार तेरी बुर का स्वाद उसका लंड चक ले जाना तब वह दिन-रात तेरा गुलाम बनकर तेरी चुदाई करेगा इतना जान लेना कि यही रास्ता है तुझे मां बनने का सुख प्राप्त करने के लिए और संतुष्ट होने के लिए,,
( रुचि सब कुछ समझ गई थी और वह हां में सर हिला कर अपनी स्वीकृति दे रही थी।,, रुचि का काम बन चुका था मुंह मांगी मुराद उसकी झोली में आ कर गिरी थी,, लेकिन इसमें सरला का भी फायदा था सरला अपना फायदा देखते हुए रुचि को यह सलाह और सुझाव दी थी और, शुभम के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार है करवाई थी क्योंकि अगर वह शुभम के साथ चुदवा कर मां बन जाएगी तो एक साथ उसका दो काम हो जाएगा,,, एक तो वह रुचि के मां बनने की सबसे बड़ी राजदार बन जाएगी और साथ ही वह शुभम के साथ कभी भी शारीरिक संबंध बनाकर अपने बदन की प्यास बुझा सकती है क्योंकि तब उसकी बहू को इसके लिए कोई भी ऐतराज नहीं होगा कि उसकी सास एक जवान लड़के से चुदाई करवाती है,,, क्योंकि रुचि के द्वारा पकड़े जाने पर उसे इस बात का पछतावा जरूर था कि जो कुछ भी हुआ वह गलत था लेकिन एक बार सौगंध फिल्म को अपनी बुर में लेने के बाद उम्र दराज सरला से भी रहा नहीं जा रहा था बार-बार उसे शुभम का लंड याद आ रहा था और वह उससे चुदवाने के लिए तड़प रही थी,,, सलमा को कुछ दिन के लिए घर से बाहर जाना था क्योंकि एक बार और उसी के साथ शारीरिक संबंध बन जाने के बाद शुभम कभी भी उसके साथ शारीरिक संबंध बना सकता है तब उसे किसी भी प्रकार का डर नहीं रहेगा,, अब रुचि को पोषण का बड़ी बेसब्री से इंतजार था जब शुभम एक बार फिर से उसके अंदर समाएगा और रूचि और आने वाले पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगी,,
 
सरला काफी खुश नजर आ रही थी,, एक तीर से दो निशाना वो लगा चुकी थी,,, अपने मन में वह सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ कि सुभम से चुदवाते हुए उसकी बहू ने उसे देख ली थी,, इसी वजह से आगे का रास्ता तो एकदम साफ हो गया,,, अब सास बहू दोनों एक दूसरे की राजदार रहेंगे वह एक दूसरे का राज किसी को नहीं कहेंगे तो दोनों का भी काम बनता, रहेगा,, शुभम की वजह से सरला के घर में ढेर सारी खुशियां आने वाली थी एक तो उसके माथे पर लगा दाग कि उसका बेटा कभी बाप नहीं बन पाएगा वह मिट जाएगा ,,,,भले ही उसकी नजर में उसका बेटा बाप बनने लायक नहीं है लेकिन दुनिया को तो यह नहीं लगेगा कि सरला का बेटा बाप नहीं बन सकता,, और तो और अपनी बहू की नजर में अब से गिरना नहीं पड़ेगा वरना वह अपनी बहू से नजर मिलाने के लायक भी नहीं रह गई थी लेकिन रिपोर्ट की वजह से अब शुभम उसकी बहु को चोद कर उसे गर्भवती करेगा जिससे वह मां बन पाएगी और तो और वह अपनी शारीरिक भूख को भी मिटा पाएंगी और सरला को भी आए दिन शुभम से चुदवाने का मौका मिल जाएगा,,, सरला को एक झटके में ही सब कुछ सही होता नजर आ रहा था सास बहू दोनों इस युक्ति से पूरी तरह से संतुष्ट और खुश थे,,, आखिरकार अपनी बहू से बातचीत करके सरला 10 दिनों के लिए अपने रिश्तेदार के वहां जाने के लिए तैयार हो गई,,,, उसे बस से जाना था,, वह शुभम को जानबूझकर बस स्टैंड तक छोड़ने के लिए बोली थी ताकि उसे इस बात की खबर हो जाएगी 10 दिन तक रुचि घर में बिल्कुल अकेली है और सरला शुभम की हरकत को अच्छी तरह से समझ गई थी औरतों का दीवाना था खासकर के शादीशुदा और उम्र वाली औरत का उसे पूरा यकीन था कि उसकी गैर हाजरी में शुभम उसकी बहू पर जरूर डोरे डालेगा और कामयाब हो जाएगा,,,, रुचि तो बस अपनी सास का घर से बाहर जाने का इंतजार कर रही थी कि वह कब घर से बाहर जाए और कब वह स्वयं के नंबर को अपनी बुर में लेकर तृप्त हो,,जाए,,,
Sarlaa chachi k bade bade doodh

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शुभम अपनी मोटरसाइकिल सरला के घर के बाहर खड़ी करके होर्न बजाने लगा,,, जिससे सरला समझ गई शुभम उसे लेने के लिए बाहर आकर खड़ा हो गया है वह जल्दी से देख ले कर घर के बाहर आ गई और दरवाजे तक उसकी बहू रुचि उसे छोड़ने आई शुभम को देखते ही उसकी टांगों के बीच हलचल होना शुरू हो गया,,,, ओर यही हाल सरला का भी हो रहा था,,, काफी दिन हो गए थे शुभम के मर्दाना अंग को अपनी मुलायम बुर में लिए हुए इसलिए उसे अपनी बुर में खुजली महसूस हो रही,,थी,,, मोटरसाइकिल पर बैठकर कुछ देर पहुंची ही थी कि सरला शुभम से बोली,,

शुभम मुझे तो ऐसा लगता है कि तेरा नशा होने लगा है,, जब से तू मुझे चोदना शुरू किया है तब से मुझे तुझ से चुदवाई बिना चैन नहीं आता ना जाने क्या होने लगता है खास करके मेरी बुर में इतनी खुजली होती है कि पूछो मत,, उंगली डाल डाल पर मैं अपनी बुर की खुजली को मिटाने की कोशिश करती है लेकिन यह उतनी ही बढ़ती जाती है पता है क्यों,,

क्यों,,,,,?

क्योंकि इसकी खुजली मेरी उंगली से नहीं जाने वाली,,

तो किससे जाएगी ,,,,,(शुभम मन ही मन मुस्कुराते हुए बोला,,)

तेरे लंड से,,,,,
Sarlaa apni ek chuchi baahar nikalkar


( शुभम की संगत पाकर उम्र दराज सरला जो की बहू वाली होने के बावजूद भी इस तरह की गंदी बातें अपने बेटे की उम्र के लड़के से कर रही थी,,, लेकिन इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी उसकी जरूरत है इस कदर बढ़ गई थी कि उसे जो चाहिए था वह खुले शब्दों में सुभम से बोल रही थी,,,)

लेकिन अब तो आप जा रही हैं चाची ऐसे में मेरा लंड कैसे ले,, पाएगी,,,,

हारे यही तो रोना है मैं जा रही हूं और सच कहूं तो अभी भी मेरी बुर में खुजली हो रही है काश तेरा लंड में अपनी बुर में ले पाती तो जाते-जाते कुछ तो अच्छा हो जाता,,,

( सरला की बात सुनकर शुभम को अपने आप पर बेहद गर्व महसूस हो रहा था कि वह अपने मोटे तगड़े लगने से उम्रदराज औरत को भी अपना दीवाना बना दिया था,, यह उसके लंड का ही करामत है कि जिससे वह छोड़ कर किसी भी औरत को अपने गुलाम बना सकने में पूरी तरह से सक्षम था,,, सरला की बात सुनकर उसका भी मन हो गया था सरला को चोदने के लिए,,, और वह अपनी मोटरसाइकिल चलाते हुए ऐसी कोई जगह ही ढूंढ रहा था जहां पर वह सरला की चुदाई कर सकें,, रात के 9:00 बज रहे थे,, बस स्टैंड आने वाला था जहां से सरला को बस पकड़ कर अपने रिश्तेदार के घर जाना था,,,, शुभम को कोई जगह नहीं सोच रही थी जहां पर हुआ सरला को चोद सके,, वह सरला को तसल्ली देने के लिए बोला,,,)

कोई बात नहीं चाहती जब आना तब तुम्हारी खुजली मिटा दूंगा,,,,

रहा नहीं जाता,,क्या करूं सुभम,,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी वासना कोई नियंत्रण नहीं कर पाए और अपना एक हाथ आगे की तरफ लाकर पेड़ के ऊपर से ही जुनून के लंड जोर से दबा दी जो कि सरला की गरम बातें सुनकर पूरी तरह से खड़ा हो गया था,, ऐसा भी नहीं कि वह उसे पकड़ कर छोड़ दे उसे लगातार दबाती रही,,,)

क्या कर रही हो चाची छोड़ दो कोई देख लेगा ,,,,

अरे कोई नहीं देखेगा तेरा तो पूरा खड़ा हो गया है,,, गरम हो गया है तु,,,,( वह उसी तरह से जोर-जोर से दबाते हुए बोली सरला को अपने हाथों में पेंट के ऊपर से शुभम का लंड और ज्यादा मोटा लग रहा था जिससे उसकी बुर पानी फेंकने लगी,,) देख शुभम मेरी बहु का ख्याल जब तक मे नहीं आ जाती तुझे ही रखना है,,, अच्छे से उसका ख्याल रखना किसी बात की तकलीफ उसे ना हो उसे जो चाहिए वह देना,,( सरला अभी भी शुभम के लंड को पेंट के ऊपर से पकड़े हुए ही बोली उसके बोलने का अर्थ कुछ और था जो कि शुभम उसकी बात से तो नहीं लेकिन उसके जाने की वजह से अच्छी तरह से समझ रहा था कि अब उसकी बहू रुचि के साथ उसे क्या करना है,,)

हां बिल्कुल भी चिंता मत करो चाची में रुचि भाभी का ख्याल अच्छे से रखूंगा उन्हें किसी बात की तकलीफ नहीं होने दूंगा आप निश्चिंत होकर जाइए,,,,,

इतना कहने के साथ ही बस स्टैंड आ गया और सरला शुभम के पेंट पर से अपना हाथ हटा ली,,,, शुभम एक जगह पर अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दिया,, दूरदराज जाने वाली बसों का यह स्टैंड बस्ती से काफी दूर बना हुआ था जहां पर चहल-पहल ज्यादा बिल्कुल भी नहीं थी बस वही लोग नजर आ रहे थे जिन्हें यहां से बस पकड़ कर दूर जाना था और चारों तरफ अंधेरा था बस एक जगह पर स्ट्रीट लैंप जल रहा था जिसके नीचे बैठकर बस की टिकट काटी जा रही,,,, शुभम जाकर वहां से एक टिकट खरीद लाया और उससे यह पूछ भी लिया कि बस कितनी देर में जाने वाली है अभी उसके पास 25 मिनट जैसा था,, बस बस वाले से 25 मिनट की बात सुनकर उसके दिमाग में बत्ती जलने लगी वह जगह ढूंढने लगा कि कहां पर सरला को लेकर जाए और उसकी चुदाई करें ,,, सरला मन में तड़प लेकर वही खड़ी थी,, उसके हाथ में एक छोटा सा बैग था जिसमें उसके दो 3 जोड़ी कपड़े रखे हुए थे,, उसका मन तो नहीं हो रहा था जाने का लेकिन फिर भी जिस तरह की परिस्थिति थी उसे जाना ही पड रहा था,,,,
शुभम उसे वही खड़ी करके पेशाब करने के बहाने जहां बस खड़ी थी वहां के जगह का मुआयना करके थोड़ी ही देर में आ गया,,,,, उसे बस से थोड़ी ही दूर पर घनी झाड़ियां नजर आ रही थी जहां पर कोई भी आता जाता नहीं था और वहां अंधेरा भी काफी था वही स्थान उसे इस समय सरला की चुदाई करने के लिए सबसे उत्तम नजर आ रहा था और वह सरला के पास आकर उसे बोला,,

चाची पेशाब वेशाब करना हो तो कर लीजिए क्योंकि बस लगातार चलेगी कहीं रुके भी नहीं अगर आप को पेशाब लग गई तो दिक्कत हो जाएगी,, ( यूं तो एक औरत के लिए एक लड़के का इस तरह से पेशाब के लिए पूछना उचित बिल्कुल भी नहीं था लेकिन सरला और उसके बीच में किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं था इसलिए शुभम एकदम सहज होकर सरला से पेशाब करने के लिए पूछ रहा था जिसमें सरला को भी कोई दिक्कत नहीं थी और वह शुभम की बात सुनकर, बोली,,)

अच्छा हुआ सुभम इस बारे में पूछ लिया,,, मुझे सच में पेशाब लगी है लेकिन यहां तो चारों तरफ अंधेरा है जांऊ कहां,,

क्या उजाले में सब को दिखा कर मुतोगी,,,, चलो मैं ले चलता हूं,,,,( वहां से चलते समय शुभम चारों तरफ नजर दौड़ा कर इस बात की पूरी तरह से तसल्ली कर लिया था कि कोई भी उन्हें देख नहीं रहा था सब अपने में ही मस्त थे कुछ लोग बहुत देर से आए थे इसलिए वह लोग सो गए थे अभी बस जाने में तकरीबन आधे घंटे जैसा समय था इसलिए सब लोग निश्चिंत थे और इसी का फायदा उठाकर शुभम उसे घनी झाड़ियों की तरफ ले जाने लगा,,,,, शुभम जहां पर सरला को ले जा रहा था,,, वहां काफी अंधेरा था जिसे देखकर सरला शुभम से बोली,,,)

सुबह यहां तो सच में बहुत अंधेरा है,,,

ऐसा काम है अंधेरे में किया जाता है उजाले में नहीं,,

सरला शुभम की बात समझ नहीं पा रही थी और उसके पीछे पीछे चले जा रही थी,,, और शुभम झाड़ियों से खींची हुई जगह मैं ले जाकर सरला को खड़ा कर दिया और सरला को तुरंत अपनी साड़ी ऊपर उठाने के लिए बोला, ,,, और ठीक शर्मा के पीछे खड़े होकर उसे अपनी बांहों में भरकर ब्लाउज के ऊपर से उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को दबाना शुरू कर,,दीया,,,

यह क्या कर रहा है शुभम कोई आ गया तो,,,,( सरला आश्चर्य से बोली क्योंकि शुभम यहां पर इस तरह की हरकत करेगा उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी,,,,)

मेरी रानी तेरी बुर में बहुत खुजली हो रही है ना ला ईसे जाते जाते तेरी बुर में लंड डालकर तेरी खुजली मिटा दु वरना वहां पर खुजली से तड़प उठेगी,,, ( इतना कहते हुए शुभम अपनी पेंट की कटिंग खोने लगा और देखते ही देखते अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकालकर उसे हिलाने लगा सरला उसकी हरकत और उसके खेलने को देखकर समझ गई कि वह क्या करने के लिए उसे किस घनी झाड़ियों में लेकर आया है फिर भी शंका जताते हुए वह बोली,,)

शुभम या कोई आ गया तो,,,,

कोई नहीं आएगा मेरी जान,,,, मुझ पर भरोसा रख और जल्दी से साड़ी उठाकर अपनी चड्डी खोल,,,, मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है जल्द से जल्द मे इस लंड को तेरी बुर में डाल देना चाहता हूं,,,,,( सारा माजरा सरला को समझ में आ गया वह भी एक पल की देरी किए बिना बोली,,)

ठहर जा मेरे राजा जब इतना मेहरबान है तो थोड़ी सी मेहरबानी और कर दे,,,

क्या,,,,,( शुभम अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,)

रुक जा,,,,,( और इतना कहने के साथ ही सरला शुभम के खड़े लंड को पकड़ कर थोड़ा सा झुक गई और उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,, शुभम नहीं जानता था कि सरला उसे मस्ती से इतना भर देगी और जैसे ही वह अपने मुंह में उसके लंड को लेकर चूसना जरूर करें सुबह एकदम मस्ती से भर गया और उसके मुंह से किरण सिसकारी निकल गई, शुभम नहीं जानता था कि सरला उसे मस्ती से इतना भर देगी और जैसे ही वह अपने मुंह मे उसके लंड को लेकर चुसना शुरू की सुभम एकदम मस्ती से भर गया और उसके मुंह से गर्म सिसकारी निकल गई,,,

ससससहहहह आहहहहह,,, सरला मेरी रानी तू तो एकदम रंडी हो गई,,,रे ,,,,आहहहहहहह,,,,, मेरी जान पूरा गले तक उतारकर चुस,,,,, बहुत मजा आ रहा है,,(शुभम सोच समझकर उसे उस घनी झाड़ियों में एकदम अंधेरे में ले गया था वह जानता था कि वहां कोई आने वाला,, नहीं है इसलिए निश्चिंत होकर वह सरला के साथ मजे करना चाहता था जितना भी समय उसके पास बचा था,,, सरला उसे बेहतरीन तरीके से मजे दे रही थी वह उसके लंड को पूरा गले तक उतारकर उसे चूसने का आनंद ले रही थी उसे भी मालूम था कि यहां से वह 10 दिन के लिए जा रही है 10 दिन के लिए वह शुभम के लंड को ना तो देख पाएगी ना तो उसे अपने मुंह में लेकर या अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझा पाएगी इसलिए इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी,,, देखते ही देखते वासना उसके ऊपर पूरी तरह से सवार हो गई और वह जोर-जोर से शुभम के लंड को चूसना शुरू कर दी शुभम को इस बात का डर था कि थोड़े से समय में की है उसका पानी ना निकल जाए इसलिए उसे खड़े होने के लिए बोला,, सरला भी मौके की नजाकत को समझते हुए खाते हुए खड़ी हुई और तुरंत बिना कुछ बोले अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी चड्डी को जांघो तक लाकर झुक गई,,, शुभम एक बार फिर से अपने चारों तरफ नजर दौडा कर पूरी तरह से तसल्ली कर लिया और अपने लंड को हाथ में लेकर, उसे सरला की रसीली बुर से सटा दिया,, सरला की बुर पर काफी दिनों बाद शुभम का लंड स्पर्श हो रहा था इसलिए वह शुभम के लंड की गर्मी को सहन नहीं कर पाई और उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज निकल गई,,,, जिसे अपने कानों से सुन कर सुभम समझ गया कि सरला बहुत ज्यादा गरम हो चुकी है,,,, शुभम को भी जल्दबाजी हो रही थी क्योंकि धीरे-धीरे समय गुजरता जा रहा था उसके पास समय बहुत कम था,,, देखते ही देखते सुभम अपने मोटे तगड़े लंड को सरला रसीली बुर के अंदर उतार दिया और उसकी बड़ी बड़ी गांड पकड़कर पीछे से चोदना शुरु कर दिया,,,,, सरला एकदम मस्त होने लगी,,, यकीन नहीं हो रहा था कि जाते-जाते शुभम का नंदू अपनी गोद में ले पाएगी इसलिए उसकी निराशा खुशी में बदल गए उसके मुंह से लगातार गर्म सिसकारी की आवाज छुटने लगी जिसे वह एकदम दबाकर अपने मुंह से निकाल रही थी क्योंकि उसे डर था कि कहीं कोई उसकी गरम सिसकारी की आवाज ना सुन ले,, सुभम लगातार धक्के पर धक्के पेल रहा था,, अंधेरे का फायदा उठाकर घनी झाड़ियों के बीच शुभम सरला की जबरदस्त चुदाई कर रहा था और इस जुदाई से सरला बेहद प्रसन्न और संतुष्ट नज़र आ रही थी,,,।

सरला की सास बड़ी तेजी से चलने लगी थी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी आज पहली बार हुआ खुले में इस तरह से सड़क पर अंधेरे का फायदा उठाकर अपनी जबरदस्त चुदाई करवा रही थी और वह भी अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ,, उसके तन बदन में एक अजीब सा रोमांच उठने लगा था,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह ईस तरह से खुली सड़क पर वह चुदाई करवाएगी,,, उसे आज ऐसा महसूस हो रहा था कि वह सामान्य औरत नहीं बल्की एक रंडी है लेकिन यह ख्याल मन में आकर भी उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,,
सरला की हालत खराब होती जा रही थी और पीछे से अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठएलते हुए बोली

शुभम मेरा होने वाला है मैं झड़ने वाली हूं जोर जोर से धक्के मार,,

( शुभम इतना सुनकर अपनी रफ्तार और बढ़ा दिया तो जोर-जोर से साला को चोदना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ झड़ गए,, दोनों जल्दी से अपने कपड़े को दुरुस्त करके झाड़ियों से बाहर आ गए,, बस में धीरे-धीरे लोग जलने लगे थे वह भी जल्दी से सरला को बस में चढ़ा कर,, और बस के जाने के बाद वापस घर पर आ गया जहां पर गुरुजी उसका बेसब्री से इंतजार कर रही थीं,,, लेकिन आज शुभम रुचि के घर नहीं बल्कि अपने घर चला गया क्योंकि वहां पर उसे अपनी मां के लिए भी ड्यूटी निभाना था,,
 
रुची,, बड़ी बेसब्री से शुभम का इंतजार कर रही थी,,, लेकिन शुभम आज की रात उसके घर नहीं गया यह जानते हुए भी कि रुचि घर में अकेले हैं और वह उसके साथ कुछ भी कर सकता है लेकिन फिर भी वह नहीं किया क्योंकि उसके घर पर उसकी मां अकेली थी आज उसके पापा घर पर आने वाले नहीं थे,, इसलिए उसका घर पर रहना जरूरी था,,,,
ruchi ka madmast jawani

शुभम से मिलने के लिए उसका स्वागत करने के लिए उसने अपने गुप्त द्वार कि अच्छे से सफाई करके रखी थी,, महंगी वाली क्रीम लगाकर उसने अपने झांट के बाल साफ करके अपनी बुर को एकदम चिकनी कर दी थी। इतना तो वह अपने पति के लिए नहीं की थी जितना वह सुभम के लिए कर रही थी,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसके बदन की गर्मी को सिर्फ सुभम ही मिटा सकता है,,।
सुभम का इंतजार करते करते उसकी पैंटी अपने आप गीली हो गई थी,,,, जब घड़ी में 12:00 बजे का अलार्म बजने लगा तो वह समझ गई कि शुभम आने वाला नहीं है इसलिए विमान सेवा अपने कमरे में जाकर अपने बिस्तर पर सारे कपड़े उतार कर दूंगी हो गई और,, किचन से वही बेगन लेकर आई थी जो कि उसकी सास उसे शुभम के लंड से तुलना करते हुए उसे दिखा रही थी,,,,, और देखते ही देखते वहां अपनी दोनों टांगों को फैला कर उस बेगन को शुभम के लंड की कल्पना करते हुए अपनी रसीली चिकनी बुर के अंदर डालना शुरू कर दी,,,, देखते ही देखते वह कल्पना में इतनी हो गई कि उसके मुंह से कर्म से इस कार्य की आवाज आने लगी वह आपको को बंद करके शुभम की कल्पना करते हुए उस मोटे तगड़े बेगन को अपनी बुर के अंदर बाहर करके खुद ही अपनी बुर की चुदाई कर रही थी,,,, आखिरकार वह कल्पना में इतने दिन हो गए कि उसे तृप्ति का एहसास होने लगा और वह पानी छोड़ कर झड़ गई,,,
हालांकि उसे शुभम के जीते जागते मोटे तगड़े लंड जैसा मजा तो नहीं आया लेकिन नींद आ सके इतने के लिए तो बेहतर ही था,,,,,
uuufffff ye madhosh jawani.. bade bade doodh

जल्दी ही वार्षिक परीक्षा शुरू होने वाली थी,, जिसके लिए स्कूल के टीचर बच्चों की तैयारी पूरी करवा रहे थे,,, शीतल भी अपनी क्लास के बच्चों की तैयारी पूरी करवा रही थी और परीक्षा में क्या क्या आ सकता है उसके बारे में बता रही थी,,, निर्मला से उसका व्यवहार अब पहले की तरह हो गया था , वह पहले की ही तरह निर्मला जो हंसी मजाक करने लगी थी जिसका जवाब निर्मला भी हंसकर देती थी,,
दोनों जिस समय बात कर रहे थे उसी समय सुभम भी उधर आ गया लेकिन शुभम को पहले से ही शीतल ने समझा कर रखी थी कि उसकी मां की हाजिरी में कभी भी बहुत से बात या कोई ऐसा व्यवहार ना करें जिससे उसकी मां को फिर से शंका हो, ,,, शुभम मौजूद था फिर भी शीतल उसकी तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही थी वह निर्मला से ही बातें कर रही थी निर्मला भी इस बात पर गौर कर रही थी कि शीतल उसके बेटे पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देती थी जिससे उसके मन में शांति होने लगी ,, शुभम भी शीतल को ना देख कर इधर उधर देख रहा था,,,,, जिससे निर्मला के मन में अब दोनों के प्रति किसी भी प्रकार की शंका जाती रही थी,,,, दोनों की तरफ से निर्मला निश्चिंत हो गई थी,,,। दोनों वार्षिक परीक्षा को लेकर ही बातें कर रहे थे और बातों ही बातों में निर्मला से शीतल बोली थी कि उसे क्लास में जाकर सभी बच्चों को इंर्पोटेंट नोटिस बतानी है कि कौन सा चैप्टर परीक्षा में आ सकता है,,,, और जाते-जाते शीतल निर्मला से बोली कि,,
Sssssshhhhhh.. ummmmmmmm. Garam jawani

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निर्मला शुभम को बता देना की इंग्लिश की बुक से चैप्टर नंबर 8 और 12 इन दोनों के बारे में कुछ ज्यादा ही प्रश्न पूछे जाएंगे इसे तैयार करवा देना,,( यह बात शीतल ने निर्मला से कही थी जबकि शुभम उसके पास में खड़ा था लेकिन फिर भी आखरी में वह उसकी तरफ देख कर बोली,,।)

शुभम बेटा के दोनों चैप्टर अच्छी तरह से तैयार कर लेना,,

जी मैडम मैं अच्छे से तैयार कर लूंगा ,,,(शुभम भी उसी तरह से शीतल पर बिल्कुल भी ध्यान ना देते हुए,, बोला,,, शुभम का जवाब सुनकर शीतल मुस्कुरा कर दी ऐसा व्यवहार कर रही थी कि जैसे वह शुभम को खास तौर पर जानती ही ना हो उसके साथ कभी भी ऐसी वैसी हरकत की ही ना हो,, और शीतल का यही व्यवहार निर्मला को अच्छा लग रहा था,, निर्मला को लगने लगा था कि शीतल वास्तव में बदल गई है और शुभम भी अपने आप को बदल लीया है,,, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था शीतल एक बार फिर से निर्मला पर अपने अच्छे व्यवहार का जाल बिछा रही थी,, अब वह शुभम को पूरी तरह से पाना चाहती थी इसलिए धीरे-धीरे फूंक-फूंक कर कदम रख रही है,,, पहले से ज्यादा अब वह सज संवर कर घर से बाहर निकलती थी केवल शुभम को अपनी मोह पास में जकड़ने के लिए,,,, शुभम भी शीतल में आए इस बदलाव को अच्छी तरह से देख रहा था वह पहले से ज्यादा शीतल में अब मादकता का अनुभव करने लगा था उसके कपड़े के पहनावे में भी बदलाव आ चुका था आपको ज्यादातर ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनती थी जिसमें से ज्यादातर उसके फड़फडाते हुए दोनों कबूतर नजर आते थे ,,, जिसे देखते ही शुभम का लंड खड़ा हो जाता था,,,, परीक्षा में आने वाले इंपोर्टेंट चैप्टर के बारे में बता कर शीतल अपनी क्लास की तरफ जाने लगी और निर्मला भी अपनी क्लास की तरफ ,,, लेकिन सुभम अपनी मां से नजरें बचाकर शीतल की मटकती गांड को देखकर गर्म आंहे भर रहा था,,,, वह शीतल की बड़ी बड़ी गांड को अपनी बाहों में लेकर उसकी दोनों फांकों के बीच की गहराई को छूना चाहता था उसमें जीभ डाल कर चाटना चाहता था ,, उसकी मां ने अगर उन दोनों की कामलीला को अपनी आंखों से ना देख ली होती तो अभी तक उसका मोटा तगड़ा लंड शीतल की बुर की मधुर रस का स्वाद चख लिया होता ,,, फिर भी उसे इस बात की तसल्ली थी कि एक ना एक दिन जरूर शीतल उसे चोदने को मिलेगी ,,, इस बात की तसल्ली करते हुए वह गर्म आहें भर कर अपना मन मसोस कर रह गया,,

दूसरी तरफ रुची का बुरा हाल था एक रात उसकी ऐसे ही करवटें बदलते बदलते गुजर गई थी,,, उसका मन बहुत कर रहा था शुभम से चुदवाने के लिए अब तो घर में वह अकेली ही थी जब चाहे तब शुभम का नंबर को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बचा सकती थी लेकिन उसे सुभम पर गुस्सा आ रहा था कि यह जानते हुए भी कि वह घर में अकेली है फिर भी वह ऊससे मिलने नहीं आया था,, अपने पति के रिपोर्ट को देखते हुए उसे मां बनने की जल्दबाजी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन जब से उसकी सास की तरफ से सुभम से चुदवाने की खुली छूट मिल गई थी तब से उसकी बुर में कुछ ज्यादा ही खुजली हो रही थी वह जल्द से जल्द से सुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास को बुझाना चाहती थी ,,, संध्या का समय हो रहा था, शुभम वार्षिक परीक्षा की तैयारी की वजह से स्कूल से सीधा घर आकर पढ़ाई में लग गया था,, इसलिए यह जानते हुए भी कि रुचि घर में अकेले हैं वह जा नहीं पाया ,,, लेकिन उसे भी जल्दबाजी की रुचि से मिलने की,, लेकिन उसकी मां यह चाहती थी कि सुभम पढ़ाई पर इस समय ज्यादा ध्यान दें इसलिए वह शुभम को अपने आप को भी स्पर्श नहीं करने देती थी,,,, क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि अगर वह केवल जुदाई में ध्यान देगा तो पढ़ाई कभी भी नहीं कर पाएगा और वार्षिक परीक्षा चल रही है लेकिन चुदाई ही करता रहा तो परीक्षा में क्या लिखेगा इसलिए वह इस मामले में अपने बेटे के प्रति एकदम कड़क थी ,, वह नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से शुभम परीक्षा में फेल हो हालांकि वह भी शुभम से दूर नहीं रहना चाहती थी क्योंकि उसकी आदत जो पड़ गई थी शुभम के लंड को अपनी बुर में लेकर चुदाई करके मस्त होने की,, कुछ दिनों के लिए वह भी अपने मन को मार कर रहने के लिए तैयार हो गई थी,,,
निर्मला अपने आप पर कंट्रोल कर सकती थी अपने आप को सब्र की सीमा में बांध रखी थी लेकिन शुभम अपने आप को किसी भी हद में नहीं रख सकता था ,, खास करके औरतों के मामले में,, क्योंकि अब औरत उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन चुकी थी,,
इसलिए वह अपनी मां के द्वारा बांधी गई सीमा को लांघ कर छत पर पहुंच गया उसे मालूम था कि छत पर रुची जरूर सूखे हुए कपड़े लेने आएगी,,, वह छत पर पहुंचकर कसरत करने लगा आज उसने अपने सारे कपड़े उतार कर केवल अंडरवियर में ही कसरत करने की ठानी थी,, वैसे भी शुभम केवल अंडरवियर में बेहद कामुक लगता था इसे हाल में अगर कोई भी औरत उसे देख ले तो उसके मुंह में पानी आ जाए क्योंकि बिना उत्तेजना के भी उसके अंडर वीयर में उसका तंबू तना होता था,,
दूसरी तरफ रुचि का हाल बुरा था बार-बार शुभम को याद करके उसकी पेंटी गीली हो रही थी,, क्योंकि वह रात से अब तक तीन बार उसी मोटे तगड़े बैगन का उपयोग करके अपनी प्यास को बुझाने की नाकाम कोशिश कर चुकी थी लेकिन उसे इस बात का आभास हो चुका था कि मोटे तगड़े बेगम से भी कहीं ज्यादा मजा शुभम के मोटे तगड़े और दमदार लंड से,,आता है,,, उसे इस बात का आभास था कि शुभम शाम के वक्त छत पर जरूर कसरत करता है और इस वक्त वह जरूर छत पर होगा और यही सोचकर वह छत की तरफ जाने लगी,,,, जब वह छत की तरफ जा रही थी तो उसे बार-बार वह पल याद आ रहा था जब वह इसी तरह से छत पर जाकर चोरी छुपे उसकी सास को सुभम से चुदवाते हुए देखी थी,,,, छत पर जाने के ख्याल से ही उसके सामने वही सारे दृश्य एकदम जीवंत हो उठते थे,,, उसे ऐसा महसूस होने लगता था कि वह भी छत पर उसकी सास की ही तरह चोरी छुपे उसे से चुदवाने का आनंद लूट रही है,,
यही सब सोचते हुए वह भी छत पर पहुंच गई,, और उसकी नजर ठीक शुभम पर चली गई जो इस समय केवल अंडरवियर में ही कसरत कर रहा,,था,

शुभम के मर्दाना और कसरती जिस्म को देखकर रुचि का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया क्योंकि आज पहली बार वह अपनी आंखों से शुभम के नंगे बदन को इतने गौर से देख रही थी,,,,, उसके नंगे जिस्म को देखते ही उसके मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आ गया,,
 
शुभम भी कसरत करते हुए रुचि को देख लिया था कि वह छत पर आई हुई है और यह देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,, और तो और रूचि के बारे में ही सोचते हुए उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिसकी वजह से उसके अंडरवियर में धीरे-धीरे तंबू का आकार बढ़ने लगा था,, एक बार और उसी के साथ संभोग कर चुका शुभम उसके सामने बिल्कुल भी शर्म लिहाज की परवाह न करते हुए उसी तरह से कसरत करता रहा,, वह पांच-पांच किलो के डंबल को बारी-बारी से दोनों हाथों से उठा रहा,,था,, जिससे उसके हाथों की मसल्स बेहद लुभावनी लग रही थी,,, रुचि तो उसको देखती ही रह गई उसका कसरत ही बदन रुचि के तन बदन में आग लगा रहा था,, कहां उसके पति का मरियल सा शरीर जिसकी बाहों में जाने के बाद उसे कभी भी एहसास नहीं हुआ कि वह किसी मर्द की बांहों में, शरीर जिसकी बाहों में जाने के बाद उसे कभी भी एहसास नहीं हुआ कि वह किसी मर्द की बांहों में है,,,, और शुभम की बाहों में आने के बाद से उसे लगने लगा था कि वाकई में उसकी बांहों में जाने के बाद ऐसा लगता है कि कोई मर्दाना ताकत से भरा हुआ बेहद ताकतवर मर्द उसे अपनी बाहों में भर कर भींच रहा है ,,, वह एहसास ही रुचि को पूरी तरह से उत्तेजना से भर दे रहा था,,
रुचि जब छत पर पहुंची थी तब शुभम के अंडरवियर में उसका बना हुआ तंबू सामान्य स्थिति में था लेकिन रुचि को अपनी आंखों के सामने पाकर आपस में उत्तेजना का जोश भर रहा था जिससे देखते ही देखते उसके अंडरवियर का तंबू तनने लगा और देखते ही देखते वह अपनी पुरी औकात में आ गया,,, रुचि भी शुभम के बदन में आए इस बदलाव को अच्छी तरह से देख कर समझ रही थी कि उसके आने के बाद ही उसका लंड खड़ा हुआ है और यह एहसास उसके तन बदन को झकझोर कर रख दिया,, पल भर में ही उसके बदन में मादकता की गर्मी बढ़ने लगी,,,, बदन में छा रही उत्तेजना रुचि को पल-पल चुदवासी बनाती जा रही थी,,, आज दिन भर में ना जाने कितनी बार उसकी पेंटी गिरी हुई थी वह भी सिर्फ शुभम के बारे में सोच कर,, यहां तो उसकी आंखों के सामने खुद शुभम नंग धडंग हालत में खड़ा होकर कसरत कर रहा था रुचि को इस बात का डर था कि कहीं इस बार वह उसे मात्र देखकर ही ना झड़ जाए,,,,, रुचि के बदन में पूरी तरह से चुदास की लहर दौड़ रही थी जिसकी वजह से वह लंबी लंबी सांसे ले रही थी,,,, वह रस्सी पर सुखते हुए कपड़ों की ओट में सिर्फ अपना चेहरा निकालकर उसे देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी जिसे शुभम देखकर उत्तेजना का अनुभव कर रहा,,,,
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रह रह कर रुचि को उसकी सास वाला नजारा याद आज आ रहा था क्योंकि वह जिस जगह पर खड़ी थी उसी जगह पर उसकी सास छुपकर शुभम से चुदवा रही थी,,,,, उस पल को याद करके रुचि की इच्छा बलवंत वे जा रही थी कि वह भी इसी जगह पर उसकी सास की तरह झुककर शुभम से चुदवाए,,,, यह ख्याल मन में आते ही उत्तेजना के मारे रुचि की फूली हुई कचोरी जैसी बुर फुलने पीचकने लगी थी ,,,। उसकी गहरी चलती सांसों के साथ-साथ उसके ब्लाउज में के दोनों कबूतर ऊपर नीचे हो कर ऐसा लग रहा था मानो कि वह शुभम के हाथों में आने के लिए खुद ही हामी भर रहे हो ,,,
दूसरी तरफ शुभम उत्तेजना से बढ़ता चला जा रहा था वह उसी तरह से पाच पाच किलो के डंबल को ऊपर नीचे करके अपनी कसरती बदन का प्रदर्शन कर रहा था,,, यह बात से हम अच्छी तरह से जानता था कि एक औरत को मर्द का गठीला बदन चौड़ी छाती बेहद पसंद होती है ,,, इतना तो शुभम अच्छी तरह से जानता था कि रुचि उसके प्रति पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी है और उस दिन तूफानी बारिश में झोपड़ी के अंदर जो कुछ भी हुआ था वह अचानक हुआ था शुभम उसकी बहुत ही अच्छे से चुदाई करना चाहता,,था,,, और यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि उसका पति उसे अच्छी तरह से चोद नहीं पाता,, है,, तभी तो उस दिन के पानी बारिश में वह बिना किसी विरोध के उससे चुदवाई थी और वह भी पूरी नंगी होकर,, एक औरत इस तरह से गैर मर्द से तभी शारीरिक संबंध बनाती है जब घर में उसका पति उसे ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता हो,,,, रुचि के इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए शुभम इस समय उसे उकसाने के लिए जानबूझकर अपना दूसरा डंबल नीचे जमीन पर रख दिया था और उसी हाथ से बार-बार रुचि की आंखों के सामने ही अपने पेंट में बने तंबू को हाथ लगाकर उसे दबा दे रहा,,था जिसको देखकर रुचि के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी,,, रुचि पलक झपकाए बिना उस नजारे का आनंद लेते हुए रस्सी पर से सूखे हुए कपड़े को एक-एक करके उतारने लगी,,,,, अपनी तरफ मादक निगाहों से देखता हुआ पाकर शुभम रुचि से बोला,,
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क्या देख रही हो भाभी,,,

वही जो तू दिखा रहा है,,,( रुचि भी उसके सवाल का जवाब खुले शब्दों में देते हुए बोली,,)

मैं तो कुछ भी नहीं दिखा रहा हूं (शुभम उसी तरह से एक हाथ से डंबल को ऊपर नीचे करते हुए बोला)

यह तो मुझे पता ही है कि तू क्या दिखा रहा है और क्या नहीं दिखा रहा है,,( रुचि रस्सी पर से कपड़े उतारते उतारते रस्सी को हाथ से पकड़ कर खड़ी होते हुए बोली)

अब क्या करूं भाभी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत खड़ी होगी तो वह तो खड़ा होगा ही,,,

जरूरी तो नहीं किसी भी खूबसूरत औरत को देखकर खड़ा कर लो,,,

भाभी जी ऐसी वैसी औरत को देखकर ये नहीं खड़ा होता यह तो सिर्फ आपको देखकर ही खड़ा हुआ है,,

अच्छा मैं कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लगती हूं क्या तुझको जो मुझको देखकर तूने अपना खड़ा कर लिया है,,( रुचि उसी तरह से रस्सी को पकड़े हुए ही बोली,,,)

भाभी जी यह सब को नहीं जानता आपको तो पहचानता है और वह भी अच्छी तरह से,,,
( शुभम के कहने का मतलब रुचि अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए उसकी बात सुन कर मुस्कुरा दी,,)

आखिरी मुझको क्यों पहचानता है,,,?

क्योंकि भाभी जी इसने आप की गहराई को नाप लिया है,,
( शुभम उसी तरह से अपनी चौड़ी छाती और अंडर वियर में बने तंबू की नुमाइश करते हुए डम डम तो ऊपर नीचे करके वह बोला,,)

हाय,,,,, ज्यादा गहरी लगी क्या तुझको,,,( लंबी आहें भरते हुए रूचि बोलीं,,)

ठीक से देख नहीं पाया,,, भाभी जी,,,,

अकेली हूं घर पर ठीक से देखना है तो आजा कमरे में तुझे अच्छे से दिखा दूंगी,,,
( इस तरह की गरमा गरम बातें करके रुचि कि तन बदन में आग लग रही थी और रुचि के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर शुभम की हालत खराब होती जा रही थी उसके अंडरवियर में उसका तंबू बड़ा होता चला जा रहा,,था,,,)

हाय मेरी भाभी,,, भगवान तेरी जैसी भाभी सबको दे,,( इतना कहकर शुभम डंबल को नीचे जमीन पर रख दिया और फिर रुची की तरफ आगे बढ़ने लगा,,, यह देखकर रुचि के तन बदन में गुदगुदी होने लगी,, वजह से जैसे आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे रुचि के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी, शुभम पूरी तरह से जोश में आ गया था।,,, जैसे जैसे वह अपनी टांगों को आगे बढ़ा रहा था वैसे वैसे उसके अंडर वियर में बना तंबू हील रहा था और उसका हीलना देखकर रुचि का पूरा वजूद डगमगा रहा था,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा था,, देखते ही देखते शुभम उसके बेहद करीब पहुंच गया,, बार-बार और रोजी उसके अंडर वियर में बने तंबू को देख ले रही थी क्योंकि रुचि जैसी प्यासी औरत के लिए शुभम के अंडरवियर के अंदर का सामान ही सबसे बड़ा खजाना था,, जिसे वह अपने दोनों हाथों से लूटना चाहती थी,, अपने अरमान और धड़कते दिल पर काबू करते हुए रुचि ठंडे लहजे में बोलीली,,)

मेरी जैसी भाभी क्यों,,?

क्योंकि तुम्हारी जैसी भाभी ही अपने देवर को कुछ भी दिखा सकती हो और कुछ भी दे भी सकती है,,,( शुभम रुचि के बेहद करीब पहुंच कर लंबी-लंबी सांसे लेते हुए बोला,, वह अपनी गहरी सांसो से रुचि को इस बात का अहसास दिलाना चाहता था कि वह पूरी तरह से कामाग्नि के जोर में चल रहा था वह पूरी तरह से चुदवासा हो गया है,,, और उसे जो चाहिए वह सिर्फ रुचि ही दे सकती है,,,
रुचि भी उसकी हालत को देखकर समझ गई थी कि अब कुछ भी हो सकता है जिसके लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी,, शुभम की बात का जवाब देते हुए रूचि बोली,,,)

मेरे पास तो ऐसा कुछ भी नहीं जो मैं तुझे दे सकूं या दिखा सकूं,, ( शुभम को अपने बेहद करीब पाकर रुचि का बदन कसमसा रहा था उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,)

तुम्हारे पास सब कुछ है भाभी मैं जानता हूं साड़ी के अंदर छुपा कर रखी हो,,, ऐसा खजाना जिसे देखने के लिए दुनिया का हर मर्द तड़पता है,, जिसे पाने के लिए हर कोई मचलता है,,,

तू मचल रहा है,,?

हां भाभी मैं तो कब से मचल रहा हूं तड़प रहा हूं तुम्हें छत पर देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा था ,,(यह सब कहते हुए तुरंत अपनी अंडरवियर में तने हुए तंबू पर हाथ रखते हुए.. जिससे रुचि का ध्यान उसी तरफ चला गया और उसकी हरकत को देखकर रुचि का भी मन,, मचलने लगा, रुचि के तन बदन में आग लगने लगी,,, वह गहरी सांसे लेते हुए शुभम के तंबू को देख कर बोली,,,)

देखना चाहेगा मेरे खजाने को,,,,( रुचि एकदम मादक स्वर में बोलीं,,)

कौन बेवकूफ होगा जो नहीं देखना चाहेगा,,(शुभम उसी तरह से अंडर वियर के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुए बोला शुभम की ये हरकत प्यास से भरी हुई रूचि के बदन में आग लगा देने वाली थी,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और यही हाल शुभम का भी था,, )

तू देखना चाहेगा,, अगर देखना हो तो मेरे कमरे में आना होगा,,(रुचि का मन तो बहुत कर रहा था इसी समय अपनी साड़ी उठाकर उसने रसीली बुर दिखाने की,, लेकिन वह शुभम को इसी बहाने अपने कमरे में बुलाना चाहती थी जहां पर वह इत्मीनान से उसे अपना एक-एक अंग खोल कर दिखा सके और उसे प्यार करने,,दे,,, लेकिन शुभम को इस समय साबर बिल्कुल भी नहीं था उसकी आंखों के सामने उसके पास में जवानी से भरपूर एक प्यासी औरत खड़ी थी जो अपनी रसीली बुर को दिखाने के लिए तैयार थी और ऐसे में शुभम इस मौके को जाने नहीं देना चाहता था ऐसे तो वह उसके कमरे में भी जाकर सब कुछ देख सकता था लेकिन उसे अभी देखना था और अपनी वह इस लालच को दबा नहीं पाया और बोला,,)

नहीं भाभी मुझे अभी देखना है मैं कमरे में आकर तो कभी भी देख लुंगा लेकिन मेरी इच्छा इसी समय तुम्हारी रसीली बुर को देखने कि कर रही है,,,( सुभम ने एकदम साफ शब्दों में बोल दिया,,)

नहीं यहां नहीं कोई देख लिया तो,,,(रुचि जानबूझकर शंका जताते हुए बोली और इस बात कि उसे खबर थी की छत पर कोई आने वाला नहीं है फिर भी वह अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रही थी कि शुभम उसके साथ उसके कमरे में चले,,)

कोई नहीं देखेगा भाभी यहां छत पर कोई नहीं आता इस समय इस शहर की सबसे सुरक्षित जगह है जहां पर कोई नहीं,, आता,,, बस एक बार मुझे अपनी बुर के दर्शन करा दो मेरा जीवन धन्य हो जाएगा,,( शुभम एकदम गिडगिडाते हुए स्वर में बोला,,, शुभम इस तरह से व्यवहार कर रहा था कि जैसे वह रूचि की बुर को देखा ही ना हो जबकि वह उसकी बुर में अपना पूरा लंड डालकर उसकी जमकर चुदाई कर चुका था,,, लेकिन मर्द की हमेशा से यही आदत रहती है कि वह औरत के अंग को चाहे जितनी बार भी देख ले लेकिन उसका मन नहीं भरता,, और यही कारण था की वह रुची से उसकी बुर दिखाने के लिए मिन्नतें कर रहा था,,, और यह देखकर रुचि अंदर ही अंदर प्रसन्नता के साथ-साथ उत्तेजित भी हुए जा रही थी,,,,, रुचि नखरा दिखाते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं मैं यहां नहीं दिखा सकती यहां कोई देख लिया तो मेरी इज्जत खराब हो जाएगी,,

क्या भाभी नखरा कर रही है यहां कोई नहीं देखने वाला मेरा विश्वास करो,,(यह कहते हुए शुभम का मन तो हो रहा था कि उसे उसके सास वाली बात सब बता दे कि वह उसकी सास की वहीं पर सुधार किया था और कोई भी नहीं देख पाया था,, लेकिन यह वाली बात बताना उचित नहीं समझा इसलिए कुछ बोला नहीं,,)

कैसे विश्वास करूं शुभम देख रहे हो खुली छत हैं और अपने चारों तरफ भी छत ही छत हैं कोई देख लिया तो,,,

मेरा विश्वास करो भाभी कोई नहीं देखेगा अगर नहीं दिखाओगी तो मैं खुद ही तुम्हारी साड़ी उठाकर देख लूंगा,,,,

अरे वाह इतनी जबरदस्ती,,,,(रुचि अपनी आंखों को नचाते हुए बोली,,,)

नहीं दिखाओगी तो मुझे तो जबरदस्ती करना ही पड़ेगा भाभी,,, इतना नखरा जो कर रही हो,,,

मैं कहां नखरा कर रही हूं,,

नखरा ही तो कर रही हो भाभी उस दिन तूफानी बारिश में कैसे सब कुछ खोल कर मेरे हवाले कर दी थी और वहां तो तुम बिना कुछ बोले एकदम नंगी हो गई,,थी,, और देख रही हो मेरी हालत ( अपने हाथ से अपने अंडरवियर को नीचे खींच कर अपने खड़े लंड को दिखाते हुए,,,) कितनी खराब होती जा रही है,,

हालत खराब हो रही है या हालत रंगीन होती जा रही है,,

मैं कुछ नहीं जानता भाभी दिखाना है तो दिखा वरना मैं जा रहा हूं,,,(इतना कहकर वह जानबूझकर सिर्फ दिखावे के लिए जाने को हुआ तो रुचि तुरंत उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोली,)

नाराज क्यों हो रहा है रे दिखा रही हुं ना,,,, लेकिन कोई आ ना जाए,,

यहां कौन आएगा भाभी तुम्हारी सास तो है नहीं,,,

लेकिन तेरी मम्मी तो है ना अगर वह आ गई तो,,

नहीं आएगी मेरा भरोसा करो,,,
( शुभम उसे विश्वास दिलाते हुए बोला और रुचि अपने मन में सोच रही थी अगर आप ही जावे तो भी उसका दिल शुभम को अपनी बुर दिखाने को कर रहा था इसलिए अपने आप को रोक नहीं पाए और बोली,,,)

देख सुगंध तुझ पर विश्वास करके मैं तुझे यहां पर दिखा रही,,हु,,(इतना कहते हुए वह अपने चारों तरफ देखकर तसल्ली कर लेना चाहती थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,, और इतना कहने के साथ ही वह अपने दोनों हाथ को अपनी साड़ी पर रखकर उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खींचने लगी,,)
 
शुभम को यह लग रहा था कि उसके कहने पर रुचि उसे अपनी रसीली बुर दिखाने के लिए तैयार हो गई है लेकिन हकीकत यही थी कि भले ही शुभम उसे दिखाने के लिए बोल रहा था लेकिन वह पहले से यही चाहती थी कि वह शुभम को अपनी रसीली चिकनी बुर दिखा कर एक बार फिर उसे अपनी जवानी की मदहोशी में मदहोश कर देगी,, और इसी लिए ही संध्या के समय, खुली छत पर रुचि अपनी को दिखाने के लिए तैयार हो गई, थी,,।
धीरे-धीरे शाम ढल रही थी आसमान में पंछियों का झुंड वापस अपने घोसले की तरफ वापस उड़ता चला जा रहा था,,,, मंद मंद शीतल हवा बह रही थी, जिसकी ठंडक का एहसास रुचि की मादकता भरी गर्म जवानी को छूकर पसीने की बूंद बन कर उसके बदन से टपक रही थी,,,, दोनों पूरी तरह से निश्चिंत थे क्योंकि उन दोनों की छत बाकी सबके छत से काफी ऊंची थी,, दोनों के तन बदन में उत्तेजना की लहर अपना असर दिखा रही थी दोनों की सांसे गहरी चल रही थी। शुभम काफी उत्साहित और उत्सुक नजर आ रहा था रुचि की बुर के दर्शन करने के लिए इसलिए तो वह लगातार अपने अंडर वियर में बने तंबू को मसल रहा था,,
तेज चलती सांसो के साथ रुची धीरे-धीरे अपनी साड़ी को अपनी उंगलियों के सहारे से ऊपर की तरफ खींच रही थी और जैसे जैसे साड़ी उसकी टांगों को नंगी करते हुए ऊपर जा रही थी वैसे वैसे शुभम का दिल और तेजी से धड़क रहा था,,,,, सुभम ये बात अच्छी तरह से जानता था कि भले ही वह रुची की जमकर चुदाई कर चुका था लेकिन सही ढंग से ठीक तरह से उसकी बुर को अपनी आंखों से नजर भर कर देखा नहीं था,,,, इसलिए वह रुचि के उस बेहतरीन अंग को देखना चाहता था जिसमें वह पहले से ही अपने लंड को डालकर उसकी चुदाई कर चुका,,था,,,
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शुभम यह जानते हुए कि छत पर कोई आने वाला नहीं है फिर भी इधर उधर देख ले रहा था और वापस उसकी नजर रुचि की टांगों के बीच चिपक सी जा रही थी,,, देखते ही देखते रुची ने अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी,,,
उसके बाद जो नजारा शुभम की आंखों के सामने नजर आया उसे देखते ही उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,, उसके जिस्म में जैसे कि सांस आना बंद हो गई हो,, उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,, आखिरकार वो कर भी क्या सकता था नजारा ही कुछ ऐसा था कि शुभम क्या दुनिया का कोई भी मर्द देखता तो वह दंग रह जाता,,
रुचि पहले से ही तैयारी करके छत पर आई थी, क्योंकि उसने साड़ी के नीचे पेंटी नहीं पहनी हुई थी,,, जिसकी वजह से साड़ी के उठते ही,, जैसे ही शुभम की नजर रुचि की नंगी बुर पर गई वह सारा माजरा समझ,, गया,, और पल भर में ही उसका लंड इतना अत्यधिक कड़क हो गया कि मानो कोई लोहे की छड़ हो,,,
सुभम की आंखों के सामने रूचि की रसीली गुलाबी पत्तियों के अंदर कैद बुर थी,, और वह भी काफी फुली हुई थी,, एकदम कचोरी की तरह,,,, ऊसपर बालों का नामों निशान नहीं था,, ऐसा लग रहा था मानो कि अभी अभी उसने महंगी वीट क्रीम लगाकर साफ करके आई हो,,, शादीशुदा औरत होने के बावजूद भी उसकी बुर अभी भी केवल एक पतली लकीर की शक्ल में ही नजर आ रही थी,, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि रुची की बुर में अब तक शुभम के मोटे लंड की सेवा उसके पति का पतला ही लंड घुसा है इसीलिए तो वह बराबर खुल नहीं पाई है,, वरना अभी तक उसकी गुलाबी पत्ती बुर के बाहर झांक रही होती,,,, लेकिन यह शुभम के लिए बेहद खुशी की बात थी कि उसे एक बार फिर से रसीली कसी हुई बुर चोदने को मिलने वाली थी,, हालांकि सुभम एक बार रुची की बुर का आनंद ले चुका था लेकिन अब सुभम रुचि की इत्मीनान से लेना चाहता था,,

इसलिए तो रुचि की नंगी बुर देखकर शुभम एकदम काम भावना से भर गया,,,, यही हाल रूचि का भी हो रहा था वह भी उत्तेजना से भरने लगी थी इस तरह से अपनी साड़ी उठाकर शुभम को बोल दिखाने की वजह से उसके तन बदन में आग लग रही थी और वह अपनी काम भावना को दबा नहीं पा रही थी जिसकी वजह से उसकी बुर में से उसका मदन रस अमृत की बूंद बन कर बुर की दरार से बाहर निकलकर टपकने को हुआ ही था कि उस पर नजर पड़ते ही शुभम अपना हाथ आगे बढ़ाकर उस पर अपनी उंगलियां रखकर हल्कै से दबा दिया जिससे रुचि के मुंह से सिसकारी निकल गई और शुभम बोला,,
Shubham ruchi ki chuchi se maje leta hua


यह क्या दिखा दी भाभी तुमने तो मुझे जन्नत का द्वार दिखा दी और ऐसा कहते हुए हल्के हल्के अपनी उंगली को उसकी पूरी हुई बुर पर रगड़ना शुरू कर दिया जिससे रुचि पूरी तरह से गरमाने लगी,,

ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,, शुभम देखा तो है तुने और डाला भी है,,,,( इतना कहने के साथ ही आनंद की अनुभूति करके उसकी आंखें अपने आप बंद हो गई और उसके मुंह से सिसकारी की आवाज आने लगी क्योंकि उसके बोलते ही शुभम ने अपनी एक उंगली धीरे से उसकी बुर की दरार के अंदर सरका दिया,,,)


ससससहहहहह,,,आहहहहह,,,, सुभम,,ऊहहहहहहह,,,,
( रुचि की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शुभम समझ गया कि बहुत गर्म हो गई है,,, वह उसी तरह से अपनी एक उंगली को उसके घर के अंदर बाहर करता रहा रुचि पूरी तरह से कामोत्तेजना में डूबती चली जा रही थी उससे अपने बदन की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर शुभम के अंडरवियर को नीचे करके उसके खड़े लंड को हाथ में लेकर जोर-जोर से हीलाना शुरू कर दी,, एक प्यासी औरत के लिए किसी मर्द के लंड को अपने हाथ में लेना है उसकी कामोत्तेजना की परिभाषा को दर्शा देता है,, यह उस औरत की तरफ से मौन स्वीकृति होती है कि वह चुदाई के लिए किसी भी हद तक जा सकती है कुछ भी कर सकती है,,, और शुभम की रुचि की इस मानसिक विकृति को स्वीकार करके अपनी उंगली को जोर-जोर से उसके घर के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया उससे दुगना आनंद ले रहा था एक तरफ तो वह रुची की बुर से खेल रहा था और दूसरी तरफ रुचि खुद उसके लंड से खेल रही थी जो कि इस समय अपनी औकात में आ चुका, था,,,,,

रुचि शुभम कै लंड की गर्माहट को अपनी हथेली में महसूस करके पूरी तरह से पिघलने लगी,,, जिंदगी में पहली बार वह किसी गैर मर्द के लंड को अपने हाथ में ले रही थी और वह भी ऐसा वैसा मत बनाइए खास दम दमदार मर्दाना ताकत और जोश से भरा हुआ था जिसे औरत अपनी बुर में लेने के बाद सारी दुनिया को भूल जाती है और बस उसी के आनंद में खो जाती है ,,, इसीलिए तो रुचि दिल दुनिया से बेखबर होकर संध्या के समय अपने ही छत पर, शुभम के द्वारा उंगली चौदन का मजा लेते हुए उसके लंड को हिला रही थी,,
रुची को आज शुभम के मोटे तगड़े लंबी को अपने हाथ से मुठीयाने में इतना आनंद की अनुभूति हो रही थी कि आज तक उसे अपने पति का छोटा लंड पकड़ने में भी उस आनंद का अहसास तक नहीं हुआ था,, वह जोर-जोर से शुभम के लंड को हिला रही थी,, और शुभम लगातार अपनी एक उंगली से रूचि की बुर को चोद रहा था जिससे रुचि एकदम मस्त हुए जा रही थी,,,

साड़ी की ओट में दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल रहे,,थे,, रुचि को मोटे लंड की आवश्यकता अत्यधिक हो रही थी, क्योंकि उसकी गर्म सिसकारी की आवाज पूरे छत पर गूंज रही थी लेकिन उससे साड़ियों को सुनने वाला केवल शुभम ही था जो कि उसकी इस गरम सिसकारियों की आवाज को सुनकर जोश से भरा जा रहा था,,
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ससससहहहह,,, आहहहहह,,, शुभम मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,, मेरी बुर में खुजली हो रही है,, और तेरी उंगली से खुजली जाने वाली नहीं है,,, उंगली निकालकर अपना मोटा लंड डाल दे रे ,,,,
( रुचि कि ईस तरह की मादक बातों को शुभम सुन तो जरूर रहा था लेकिन जवाब नहीं दे रहा था वह लगातार अपनी उंगली को उसके बुर के अंदर बाहर करके उसे चोद रहा था उसमें से चप्प,,, चप्प,,, की आवाज आ रही थी जिसे सुनकर उसका लंड और ज्यादा टाइट हो रहा,, बहुत ज्यादा रुचि को तड़पाना चाहता था इसलिए वह एक उंगली के साथ-साथ अपनी दूसरी उंगली भी उसकी बुर की गुलाबी छेद में ठेल दिया,,, जैसे ही उसकी दूसरी उंगली रुचि की बुर के अंदर गई रुचि के मुंह से आह निकल गई,, लेकिन दर्द के साथ-साथ उसे आनंद की भी अनुभूति हो रही थी वह आंखें बंद करके गरम सिसकारी लिए जा रही थी और रह रह कर अपनी कमर को गोल-गोल घुमाते हुए शुभम की उंगली पर अपनी गोलाकार गांड को नचा रही थी,,,,
धीरे-धीरे अंधेरा बढ़ता जा रहा था शुभम को भी काफी देर हो गई थी छत पर आए,, और शुभम ने काफी अत्यधिक उत्तेजना के बवंडर में रुचि को झकझोर के रख दिया था,, क्योंकि अब उसकी सांसे और ज्यादा तेज और गहरी चल रही थी मौके की नजाकत को समझते हुए शुभम अब उसकी बुर में लंड डालना ही उचित समझ रहा था,, और जैसे ही सुगम अपनी उंगली को उसकी बुर से बाहर निकालकर अपना मोटे लंड का सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों पर स्पर्श कराया तो उसका पूरा शरीर उत्तेजना के मारे झनझना गया,,,, और जब तक वह अपनी आंखें खोल कर अपनी टांगों के बीच के इस नजारे को देख पाती तब तक शुभम फुर्ती दिखाते हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के अंदर सरका दिया था,,, दोनों बिल्कुल सीधे-सीधे खड़े थे ऐसे नहीं शुभम अपने लिए जगह नहीं बना पा रहा था कि उसके घर के अंदर वह पूरा लंड डाल सके,, इसलिए उचित पोजीशन बनाने हेतु वह रुचि की मोटी मोटी जागो को उसके घुटनों से पकड़ कर उसे हल्के से उठा लिया जिससे शुभम के लिए उसकी पुर के अंदर अपना मोटा लंड डालने की जगह अच्छी तरीके से बन गई,, अब सुभम रुची की बुर के अंदर अपना पूरा समूचा लंड डालकर उसकी चुदाई कर सकता था और देखते ही देखते शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को धीरे-धीरे करके उसकी बुर की गहराई में डाल दिया,,,, जैसे-जैसे शुभम का मोटा लंड रुचि की बुर के अंदर दस्ता जा रहा था वैसे वैसे रुचि के चेहरे का हाव भाव बदलते जा रहा था कभी उसपे पीड़ा के भाव नजर आते तो कभी आनंद की लालिमा छा जाती थी,,,,
सुदामापुरी औकात में आ चुका था उसके ऊपर रुचि को चोदने का जोश पूरी तरह से सवार हो चुका था इसलिए अपना पूरा लंड बुर में डालकर चोदना शुरु कर दिया था और सहारे के लिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर उसके गोल गोल गांड को अपनी हथेली में पकड़ कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,, रुची को तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि सुभम ऊसे इस तरह से खड़े खड़े चोदेगा वह तो सोची थी कि उसकी सास वाला दृश्य फिर से पुनरावर्तन होगा,,,, शुभम उसकी भी झुका कर पीछे से लेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ शुभम खड़े-खड़े उसके ले रहा था और रुचि को इसमें बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,,
दोनों के बीच किसी भी प्रकार का वार्तालाप और संवाद नहीं हो रहा था शुभम रुचि की खूबसूरती में मस्त होकर उसके गुलाबी होठों को चूसते हुए अपनी कमर हिला रहा था,,,
रुचि अपनी टांगों के बीच के नजारे को देखकर अंदर ही अंदर मचल उठ रही थी क्योंकि उसे केवल एक मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर के अंदर बाहर होता नजर आ रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था ईतना मोटा लंड उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में चला गया,,,,
शुभम जोर-जोर से उसकी गोल गोल गांड को अपनी हथेली में भरकर दबाते हुए धक्के पर धक्के पेल रहा था,,, रुचि एकदम मस्त हुए जा रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि शुभम इस तरह से भी उसे संतुष्ट कर सकता है उसकी गर्म सांसे शुभम के चेहरे पर पड रही थी,,, शुभम अपनी धक्कों की रफ़्तार को बढ़ाता जा रहा था,,, रुचि को महसूस होने लगा कि उसका पानी निकलने वाला है उसकी सांसे गहरी चलने लगी,, रुचि शुभम को कसकर अपनी बाहों में दबोचे हुए थे और शुभम उसकी गांड को जोर से दबाते हुए अपने धक्के लगा रहा,,था,,,
दोनों की सांसे तेज चल रही थी,, शुभम को इस बात का अहसास हो गया कि रुचि के साथ-साथ वह भी एक दम चरम सुख के करीब पहुंचता जा रहा है इसलिए वह,, रुचि को उसके गोल गोल नितंबों के सहारे पकड़कर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,, हर धक्के के साथ गुरु जी की आंगन जा रही थी क्योंकि जिस तरह से वह धक्के लगा रहा था और उसी को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में गाड़ देगा,,,
शुभम का लंड उसे दर्द जरूर दे रहा था लेकिन मजा भी बहुत दे रहा था इस बात की संतुष्टि उसे अपने मन में थी और इसीलिए तो वह शुभम से चुदवाने का पूरा आनंद लूट रही थी,, शुभम धकाधक अपना लंड पएल रहा था,,,


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को देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए,, शुभम अपना पूरा गर्म लगा उसकी बुर के अंदर ऊड़ैल दिया,,, झड़ने के बाद रुचि खुद उसे उसी स्थिति में लगभग 1 मिनट तक यूं ही पकड़े रहे ताकि उसकी लंड का आखिरी बूंद तक उसकी बुर के अंदर निचोड़ लें,,,,
वासना का तूफान थम चुका था रुची अपने वस्त्र को दुरुस्त करके रस्सी पर से सूखे कपड़े उतार कर नीचे चली गई और शुभम भी अपने काम में व्यस्त हो गया,,
 
रुचि एक दम मस्त हो चुकी थी,,, वह सूखे हुए कपड़े को व्यवस्थित करके उसे अलमारी में रख रही थी,, उसकी सांसों की गति अभी भी तेज चल रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह अकेले ही कुछ मिनट पहले ही अपने बदन की प्यास बुझा कर आई है,, अभी तक उसकी बुर की गहराई में शुभम के मोटे लंड का एहसास बना हुआ था,,, उसे पहली बार महसूस हुआ था कि एक मर्द के लंड से निकली हुई पानी की पिचकारी औरत को कितना सुख और संतुष्टि प्रदान करती है वरना तो उसके पति के लंड से कब पानी निकल जाता था उसे पता तक नहीं चलता था,, शुभम के लंड से निकली हुई तेज धार वाली पिचकारी उसे अपने बच्चेदानी पर साफ महसूस हुई थी और उसकी पिचकारी की धार को अपनी बच्चेदानी पर महसूस करते ही रुचि एकदम मस्त हो गई थी उसका पूरा बदन एक अजीब से सुख की अनुभूति में नहाने लगा था इसीलिए तो वह शुभम को और कस के अपनी बाहों में जकड़ ली थी ताकि उसके लंड से आखिरी बूंद तक उसकी बुर की गहराई में उतर,,जाए,,, उसे पूरा यकीन था कि शुभम से चुदवा कर वह जरूर मां बन जाएगी,,, पर इस बात की भी खुशी उसे थी कि उसका बच्चा भी शुभम की तरह खूबसूरत गठीले बदन वाला अच्छे नैन -नक्श वाला होगा,,, यही सब सोचते हुए वह एक-एक करके सारे कपड़ों की अलमारी में रख रही थी,, वह मन में यह बात भी सोच रही थी कि वह दो बार शुभम से जबरदस्त चुदाई का मज़ा ले चुकी थी,,लेकिन एकदम इत्मीनान से अभी तक शुभम से चुदाई नहीं करवा पाई थी जिसका उसे रंज था और वह अपनी इस कमी को पूरा करना चाहती थी,,,,,
शुभम अपनी मां के द्वारा ऊठाई गई हद की दीवार को लांघ कर एक बार और रुचि के साथ संभोग सुख भोग चुका,, था,,, और उसमें उसे अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई थी,,, आखिर उसे मजा क्यों नहीं आता एक खूबसूरत नव जवान औरत जो उसे चोदने को मिल रही थी,,


निर्मला रसोई घर में खाना बना रही थी और ना जाने क्यों शुभम को औरत की जरूरत ज्यादा पड़ रही थी,, और वह भी तब जब परीक्षा सर पर आन पड़ी थी,,, और उसकी मां ने उसे सख्त हिदायत दी थी कि जब तक परीक्षा खत्म नहीं हो जाती तब तक बिल्कुल भी चुदाई नहीं होगी,,, लेकिन शुभम से रहा नहीं जा रहा था बार-बार उसका लंड खड़ा हो जा रहा था और वह भी तब जब वह किचन में पानी पीने या किसी काम से चला जाता तब तक उसकी मां की रसोई बनाते समय हिलती हुई गांड देख कर बार-बार उसका लंड खड़ा होने लगा था जिससे उसे परेशानी महसूस हो रही थी,,
जबकि वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के हर एक अंग से खेल चुका था,, लेकिन आदमी का मन कभी भी देख सकता है कभी भी उसी चीज को पाने की इच्छा बार-बार होने लगती है जिस चीज पर उसका पूरा अधिकार होता है और वह जब चाहे उस चीज से अपने मन को तसल्ली दे सकता है और वही शुभम के साथ भी हो रहा था,, रातो दीन वो जिस औरत के खूबसूरत बदन के साथ जब चाहे तब खेलता था ,, और परीक्षा के दौरान उसी खूबसूरत बदन को स्पर्श तक ना कर सकने की सख्त हिदायत के कारण शुभम का मन बार-बार उसी की तरफ लालायित हुआ जा रहा था और यही कारण था कि वह किचन में फ्रिज के पास खड़ा होकर पानी की बोतल से पानी पीते हुए अपनी मां की हिलती हुई गांड को देखकर उत्तेजना से भरता चला जा रहा था,,,,, निर्मला यह सब से अनजान रोटी को सेंड करने में लगी हुई थी उसे यह कहा पता था कि उसकी पीठ पीछे उसका बेटा उसकी बड़ी-बड़ी हिलती हुई गांड को देखकर अपनी आंख सेंक रहा था,,,। इसमें शुभम की नजरों का दोष बिल्कुल भी नहीं था नजारा ही कुछ बेहद उन्माद से भरा हो तो इंसान आखिर क्या करें,, निर्मला को ईस अवस्था में वास्तव में देख पाना भी मर्दों के लिए किस्मत की बात होती है क्योंकि जिस तरह से वह रोटी को बेलते हुए उसे तवे पर रखकर सेंक रही थी उस वजह से उसके बदन में हल्की सी ऊन्मादक थीरकन होती थी और यह सब थीरकन ज्यादातर उसकी कमर के नीचे वाले घेराव पर अधिक होती,
और उसकी वजह से कसी हुई साड़ि में उसकी बड़ी बड़ी गांड पानी भरे गुब्बारे की तरह लहर मारती थी,,, जिसे देखकर अच्छे अच्छों का पानी निकल जाए,, इसलिए तो किचन में खड़े होकर वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को हीलता हुआ देखकर अपनी आंख सेंकता हुआ वासना के समुंदर में डूबता चला जा रहा था,,,,
Nirmala agar apne saare kapde utaarkar nangi ho jaye to bilkul aisi lage


वह जब इत्मीनान से पानी पीते हुए अपने पेजामे में खड़े लंड को बार-बार अपने हाथों से दबाने की कोशिश कर रहा था तभी निर्मला की नजर पीछे गई और शुभम को अपने पीछे खड़े होकर पानी पीता देखकर वह वापस रोटी बनाते हुए बोली

तू अभी तक यही खड़ा है गया क्यो नहीं,,,,

कैसे जाऊं जब आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत खड़ी हो तो बाहर कहां मन लगता है,,
( अपने बेटे की बातें सुनकर वह शुभम की तरफ देखे बिना ही मंद मंद मुस्कुरा रही थी और कुछ देर बाद पीछे घूम कर अपने बेटे की तरफ आंख तर्राते हुए बोली)
पता है ना तुझे मैंने तुझे क्या बोली हुं,, जब तक परीक्षा खत्म ना हो जाए तब तक यह सब बिल्कुल बंद,,(इतना कहकर वह वापस रोटी तवे पर पकाने लगी,, लेकिन वह तवे पर रोटी नहीं बल्कि शुभम के अरमानों को पका रही थी निर्मला की बड़ी-बड़ी मटकती गांड देखकर शुभम के मन में किस तरह की हलचल हो रही थी वह शायद निर्मला को मालूम नहीं था,, और वह उसका अंदाजा भी नहीं लगा पा रही थी इसीलिए तो वह बेफिक्र होकर उसी तरह से रसोई बनाने में मशगूल हो गई,,, और शुभम का दिल कर रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मां की साड़ी उठाकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर के अंदर डाल दे,,, लेकिन परीक्षा तक यह मुमकिन नहीं था फिर भी शुभम सोचा की कोशिश करने में क्या जाता है वैसे भी उसकी मां प्यासी औरत है हो सकता है उसका मन बदल जाए,,,,
इसलिए वह अपना लंड पजामे के ऊपर से मसलते हुए अपनी मां की तरह आगे बढ़ने लगा जो कि इस समय भी अपनी मस्ती में रोटी पकाने में लगी हुई थी,, वैसे भी शुभम ने अपनी मां के साथ अपने घर के अंदर हर जगह पर उस की चुदाई करके उस वातावरण का मजा ले चुका था और सबसे ज्यादा मजा उसे किचन के अंदर ही आता था जब मैं खाना बना रही होती है,, किचन के अंदर वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस करता था ऐसा उसके साथ हमेशा से होता रहा है जब वह अपनी मां के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाता था फिर भी वह जब कभी भी रसोई घर में आता था और अपनी मां को खाना बनाते देखता था तो ना जाने क्यों उसके मन में उसे चोदने की भावना होने लगती थी लेकिन वह कभी अपने मन में भी इस तरह के ख्याल नहीं आने देता था,, यह सब कुछ समय का केवल आकर्षण भर था लेकिन अब तो वह सारी हदों को पार करके अपनी मां के साथ ना जाने कितनी बार शारीरिक सुख का मजा ले चुका है,,



बस कुछ दिनों की ही बात थी परीक्षा खत्म होने के बाद उसकी मां उसे उसे चोदने के लिए कभी भी इनकार नहीं करती,, लेकिन फिर भी निर्मला की खूबसूरती और उसका आकर्षण ईतना अत्यधिक था कि कितनी बार भी उसे चोदो मन नहीं भरता, एक तरह से कह सकते हैं कि निर्मला हाड मास की बनी हुई वह बोरी थी जिसके अंदर जवानी ठुंस ठुंस के भरी हुई थी,,, ना तो जवानी खत्म हो रही थी और ना ही उससे मिलने वाला मजा,, शुभम अपनी मां की मदमस्त जवानी का पूरी तरह से गुलाम बन चुका था, और दुनिया का कोई भी मर्द गुलाम बनना क्यों नहीं चाहेगा जब उसे गुलामी के एवज में इतनी मदमस्त औरत और उसकी जवानी दोनों भागने को मिल रही हो तो कोई भी इंसान ऐसी औरतों का गुलाम बनना पसंद करेगा,,,, क्योंकि दुनिया में धन सुख से तनसुख जरा भी कम नहीं है,,, दोनों के ही समय-समय पर जरूरत होती रहती है,,, और इस समय शुभम के लिए तन का सुख बेहद जरूरी था उसके बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा था और यह दर्द तब तक होता रहता जब तक कि वह निर्मला की खूबसूरत बदन को अपनी बाहों में भरकर अपने कठोर अंग को उसके नाजुक अंग में उतार नहीं देता,,

अपनी मां के सामने शुभम अब किसी भी प्रकार का परदा करना जरूरी नहीं समझता था इसलिए एक झटके में ही वो अपने पजामे को उतारकर कमर के नीचे एकदम नंगा हो गया,, हवा में उसका लंड ऊपर नीचे होकर लहरा रहा था,, देखते ही देखते पीछे से जाकर वह अपनी मां को बाहों में भर लिया और अपने खड़े लंड को उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी गांड की दरार के बीचो-बीच धंसाना शुरू कर दिया,,

आहहहहह,,, क्या कर रहा है रे ,,,,(जैसे ही शुभम का खड़ा लंड निर्मला को अपनी मां की गांड के बीचो बीच दरार के अंदर महसूस हुआ वह चौक उठी,,,)

शुभम तुझे ना बोली हु ना कि जब तक परीक्षा खत्म नहीं हो जाता है ऐसा कुछ भी नहीं होगा,,( ऐसा कहते हुए वह शुभम को हटाने की कोशिश करने लगी ,,,लेकिन शुभम उसे कस के अपनी बाहों में दबोचे हुए उसकी गोरी गोरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया,, शुभम यह बात अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को उसके गर्दन और कान के नीचे वाले भाग पर चुंबन बहुत ही जल्दी उन्हें कामभावना से भर देता है,,, और वह बहुत ही जल्दी चुदवाती होकर जुड़वाने के लिए तैयार हो जाती है इसलिए सुबह भी अपनी मां को छुड़वाने के लिए तैयार करने के लिए उसकी गर्दन के साथ-साथ उसके कान के नीचे वाले भाग पर चुंबनों की बौछार करने लगा था और साथ ही अपने खड़े लंड को साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की गांड की दरार पर रगड़ रहा था और उसे धंसा रहा था, शुभम की यह हरकत पलभर में ही निर्मला के इरादे को बदल कर रख दी,,, अपनी गर्दन और कान के नीचे के नाजुक अंग पर शुभम के जबरदस्त चुंबनों की बौछार को महसूस करके निर्मला भी एकदम से चुदवासी हो गई,, उसके मुंह से सब दिन ही नहीं कर रहे थे वह उसी तरह से खड़ी रह गई तवे पर रोटी जलने लगी थी लेकिन इस बात की फिक्र उसे बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि जिस तरह की हरकत शुभम ने उसके साथ किया था उस से वह एक दम मस्त हो चुकी थी,, अपनी मां की तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध होता ना देखकर शुभम अपने दोनों हाथ को धीरे से उसकी कसी हुई ब्लाउज पर रखकर उसे हल्के हल्के से दबाने लगा ऐसा लग रहा था कि मानो वह ब्लाउज में कैद दोनों कबूतरों को दाना खिला कर उन्हें बहलाने की कोशिश कर रहा,,हो,,
धीरे-धीरे हाथों की हरकत और शुभम के लंड की बगावत को वह अपने बदन पर महसूस करके वह शुभम के रंग में रंगने लगी,,, निर्मला के लिए यह परीक्षा की घड़ी थी,, अपने बेटे की कामुक हरकतों की वजह से वह अपने आप को कमजोर होता महसूस कर रही थी,, और दूसरी तरफ शुभम जोकि अपनी मां को एकदम शांत देखकर उसे लगने लगा कि उसकी मां से इंकार नहीं करेगी और वह अपनी हरकतों को जारी रखते हुए धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा,, क्योंकि वह यह बात अच्छी तरह से जानता था एक बार साड़ी कमर तक उठ जाने के बाद अगर वह अपना लंड उसकी मां की बुर में डाल दिया तो उसकी मां उसे कभी मना नहीं कर पाएगी क्योंकि जिस तरह से सुकून की कमजोरी उसकी मां की बड़ी बड़ी गांड थी उसी तरह से निर्मला की भी कमजोरी उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड था,,
शुभम के सांसो की गति तेज होने लगी शुभम को यकीन नहीं हो रहा था कितनी जल्दी उसकी मां कमजोर पड़ जाएगी,, शुभम की उत्सुकता और खुशी बढ़ती जा रही थी उसे लगने लगा कि अब उसका लंड उसकी मां की बुर के अंदर समझ लो घुसा,ही घुसा,,, वह लगातार अपनी मां के ब्लाउज में कैद दोनों कबूतरों से खेल रहा था,, खेल क्या रहा था उनसे गुटूर गू कर रहा,, था,,, निर्मला को इस बात का एहसास था कि उसका बेटा धीरे-धीरे करके उसकी साड़ी को ऊपर कमर तक उठा देगा,,, वह उसे रोकना चाहती थी लेकिन रोक नहीं पा रही थी,, शुभम की हरकतों की वजह से कमजोर पड़ती चली जा रही थी उत्तेजना के मारे उसके दोनों पैर थरथरा रहे थे,, सुभम के साथ जब भी वह शारीरिक संसर्ग बनाती तब तब उसे नया एहसास होता था,,, आज तक ऐसा कभी भी नहीं हुआ कि निर्मला को अपने बेटे के साथ संबंध बनाने में कोई परेशानी या दिक्कत आई हो या उसे ऊस संबंध से बोरिंग महसूस हुआ हो,,
शुभम के साथ उसे हमेशा से संबंध बनाने में ताजगी और आनंददायक ही महसूस होता था,,, इसीलिए तो ना चाहते हुए भी किचन में शुभम की हरकतों की वजह से वह पूरी तरह से गरमाने लगी,, सुभम अपनी हरकतों को जारी रखे हुआ था,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूख रहा था क्यों किया वह इस समय धीरे-धीरे अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया था,,,, साड़ी के ऊपर नहीं उठा पाया क्योंकि उसे ना जाने क्यों अपनी मां की चुचियों से खेलने का ज्यादा इच्छा हो रहा था इसलिए वह साड़ी को छोड़कर अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलकर अगले ही पल अपने मां के दोनों फड़ फडाते हुए कबूतर को ब्लाउज की कैद से आजाद कर दिया और उन्हें अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया सुबह का समय था इसलिए निर्मला भी आज ब्रा नहीं पहनी थी,, अपनी मां की नंगी चूचियों को अपनी हथेली में पाकर शुभम इतना उत्साहित हो रहा था कि मानव जैसे उसे दुनिया का सबसे बेहतरीन फल मिल गया हो,, और वैसे भी औरत की चूची दुनिया में किसी भी स्वादिष्ट फल से कहीं ज्यादा कीमती और अनमोल होती है,,,


शुभम का मोटा तगड़ा लंड निर्मला की साड़ी के ऊपर से ही उसकी मद मस्त गांड पर रगड़ खाते-खाते इतना ज्यादा कड़क हो गया था कि मानो ऐसा लग रहा था कि लंड ना होकर एक लोहे की छड़ हो,,
निर्मला भी अपनी नरम नरम गांड पर अपने बेटे के कड़क लंड का स्पर्श पाकर एकदम मस्त होने लगी थी ना चाहते हुए भी उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फुटने लगी थी,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को अपनी हथेली में भर-भर कर उसे दबा रहा था और हल्के हल्के अपनी कमर को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी मां की मदमस्त गांड पर अपने लंड को रगड़ रहा था,,, अब सुभम के बर्दाश्त के बाहर था क्योंकि उत्तेजना के मारे निर्मला भी अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलते हुए गोल गोल अपने बेटे के लंड पर घुमा रही थी,,,,।
निर्मला की हरकत शुभम के लिए अपनी मां की तरफ से हरी झंडी का इशारा था,,, शुभम अपनी मां की चूचियों पर से अपना हाथ हटाकर धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को ऊपर उठाना शुरू कर दिया और देखते-देखते अपनी मां की साड़ी को कमर तक ऊपर उठा दिया,, उसका आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उसने यह देखा कि उसकी मां ने पेंटी पहनी नहीं थी उसे लगने लगा कि शायद उसकी मां नखरा कर रही थी उसे भी चुदवाने की आग लगी हुई थी,,, इसलिए वह आव देखा ना ताव अपने लंड को उसकी गांड की दरार के बीचो-बीच रख करें बिना देखे ही निर्मला की बुर के गुलाबी छेद में डालने की कोशिश करने लगा,, दूसरी तरफ निर्मला की हालत खराब होती जा रही थी,, वह भी अपने बेटे से चुदवाने के लिए अपने बदन की जरूरत के आगे घुटने टेक दी थी,, वह भी जल्द से जल्द अपने बेटे को अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में ले लेना चाहती थी लेकिन तभी उसे इस बात का अहसास हुआ कि वह जो कर रही है वो गलत कर रही हैंं,,, क्योंकि उसके बेटे की परीक्षा शुरू होने वाली है अगर वह आज उसे चोदने देगी उसके बदन की गर्मी के आगे घुटने टेक देगी तब वह भी परीक्षा के दौरान भी उससे चुदाई का मजा तो लूट लेगी,,, लेकिन परीक्षा के दरमियान उसके बेटे का मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगेगा और ऐसे में अगर वह फेल हो गया तो एक टीचर का लड़का होने के नाते कितनी बदनामी होगी,, और ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,, वह सब सोच ही रही थी कि तभी शुभम के लंड का मोटा सुपाड़ा गुलाबी बुर के गुलाबी छेद को ढूंढता हुआ धीरे धीरे अंदर की तरफ सरकना शुरू ही किया था कि तभी निर्मला अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी बेटे के लंड को कस के पकड़ लिया और उसकी आंखों में देखते हुए उसे बाहर की तरफ करके अपनी साड़ी को नीचे गिरा दी,, शुभम को समझ में नहीं आया कि उसकी मां ये क्या कर रही है जबकि वह भी पूरी तरह से तैयार हो गई थी चुदवाने के लिए,, इसलिए वह आश्चर्य से अपनी मां से बोला ,,

यह क्या कर रही हो मम्मी पूरा डालने तो दो,,

पूरा क्या तुझे में 1 इंच भी डालने नहीं दूंगी,,,( इतना कहकर वह शुभम के लंड को अपने हाथ से छोड़ दी,, लंड को छोड़ते हैं निर्मला की नजर उस पर पड़ी तो ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बुरी तरह से हांफ रहा हो ऐसा जान पड रहा था कि जैसे किसी के चेहरे पर से ऑक्सीजन का मास्क हटा दो तो कैसे उसकी सांस फूलने लगती है उसी तरह से शुभम के लंड का भी यही हाल था एक पल के लिए तो उसका मन हुआ कि एक बार अपने हाथ से ही पकड़ कर उसे अपनी बुर का रास्ता दिखाते हुए उसे एक बार फिर से अपनी बुर के अंदर ले ले लेकिन फिर अपना मन कठोर कर के वह बोली,)

सुबह में क्या कर रहा है तू,, तेरी परीक्षा शुरू होने वाली और तेरा ध्यान इन सब पर है अरे हमेशा से चुदाई करता आ रहा है कुछ दिन पढ़ाई कर ले मैं नहीं चाहती कि टीचर का लड़का होने के बावजूद तू फेल हो,,( शुभम के मोटे तगड़े हिलते हुए लंड से अपनी नजर हटाते हुए बोली क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह उसके लंड को निहारती रही तो उसका मन फिर से उसे अपनी बुर के अंदर लेने को करने लगेगा,,)

लेकिन मम्मी,,,,( सुभम ईससे ज्यादा कुछ बोलता उससे पहले ही निर्मला उसे चुप कराते हुए बोली,,)

मैं कुछ नहीं सुनना चाहती जब तक परीक्षा खत्म नहीं हो जाती तब तक यह सब बिल्कुल बंद,,,( इतना कहकर वह रसोई घर से बाहर निकल गई,, और शुभम अपनी मां को अपनी गांड मटका कर जाते हुए देखता रह गया, वह कभी अपने खाली लगने की तरह तो कभी अपनी मां की गांड की तरफ देख रहा था उसके सपनों पर पानी फिर गया था ऐसा लग रहा था कि जैसे नींद से उठाने के लिए उसके ऊपर कोई एक बाल्टी ठंडा पानी डाल दिया हो,, जब उसका मन थोड़ा शांत हुआ तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसकी मां जो कह रही थी सच कह रही थी अगर वास्तव में है फेल हो गया तो बड़ी बदनामी होगी इसलिए अभी अपना सारा ध्यान पढ़ाई में लगा दिया और कुछ दिन बाद उसकी परीक्षा भी शुरू हो,, गई,, शुभम की परीक्षा अच्छी जाने लगी उसके पेपर बहुत अच्छे जा रहे थे वह अच्छी तरह से पेपर लिख कर घर आ रहा था,,, दूसरी तरफ रुचि की हालत खराब होती जा रहीं थी उसे अब सुबह शाम शुभम के लंड की लत लग गई थी,,, क्योंकि शुभम जानता था कि उसके पास इतना समय बिल्कुल भी नहीं था कि वह रुचि के पीछे 3,,,,4 घंटे बिता कर उसकी इत्मीनान से और जमकर चुदाई कर सके,,, लेकिन संध्या के समय छत पर चोरी चोरी रुचि की चुदाई जारी थी शुभम एक भी दिन खाली नहीं जाने दे रहा था वह रोज रुची की छत पर चुदाई करता था क्योंकि वह जानता था कि परीक्षा के दौरान एक यही सही जगह थी जहां पर वह अपने तन की प्यास बुझा सकता था,, रुचि को अब ईसमें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी क्योंकि सुभम ने उसे सब कुछ बता दिया था,, रुचि भी नहीं चाहती थी कि शुभम किसी भी परीक्षा में फेल हो वह उसे उत्तीर्ण होता देखना चाहती थी भले ही वह पढ़ाई के मामले में हो या चुदाई के,,
धीरे-धीरे शुभम की परीक्षा खत्म हो गई लेकिन अभी तक सरला घर वापस नहीं आई थी क्योंकि रुची ने उसे फोन करके सब कुछ बता दी थी इसलिए दस 15 दिन और रुकना चाहती थी ताकि रुचि शुभम सिंह चुदाई करवा कर अपने पांव भारी करवा ले और इसी में रुचि दिन-रात लगी हुई थी,,
 
बहु तुझे शादी की सालगिरह की ढेर सारी बधाई,, भगवान करे तु हमेशा खुश रहे और जल्द ही तेरी गोद हरी हो जाए,,

ओहह,, मम्मी जी बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे तो याद ही नहीं था अच्छा हुआ आपने फोन करके मुझे याद दिला,,दीया,, क्या करूं मम्मी अपने दुखों से इतना दुखी हो गई हो कि इन सब का मुझे ध्यान ही नहीं रहा,,,( आज रूचि की शादी की सालगिरह की और सरला उसे उसकी शादी की सालगिरह की बधाई देते हुए फोन की थी जिसे रुचि अभी अभी नहा कर अपने बदन पर केवल टावल लपेटकर बाहर आई ही थी कि, मोबाइल की घंटी बज उठी और वह मोबाइल स्क्रीन पर अपनी सासू मां का नंबर देख कर उसे रिसीव कर ली,,)

तू इतना दुखी मत हुआ कर बहू यह तो किस्मत का लेखा है भला कौन मिटा सकता है,,, और वैसे भी तो भगवान एक दरवाजा बंद करता है तो दूसरा खोल भी तो देता है,,

हां मम्मी आप सही कह रही हैं,,,( रुचि उसी तरह से टावल लपेटे हुए ही फोन पर बात करते हुए अपने कमरे में चली, गई,,, और कमरे में प्रवेश करते ही अपने बदन पर से उस टावल को भी निकाल कर फर्श पर फेंक दी और पूरी नंगी हो गई,, और उसी तरह से अपने बेड पर बैठ कर इत्मीनान से अपनी सास से बात करने लगी क्योंकि उसे इतना तो मालूम ही था कि उसके घर में उसके सिवा कोई नहीं है इसलिए कपड़े पहने या ना पहने कोई फर्क पड़ने वाला नहीं था,, पर वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)
मम्मी जी आपको वहां अच्छा तो लग रहा है ना,, मेरी वजह से आपको इतनी तकलीफ झेलनी पड़ रही है जिसके लिए मैं शर्मिंदा हूं,,,

नहीं नहीं बहू ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,,, मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं,, तू बता तेरा कैसा चल रहा है शुभम तुझे चोदता तो है ना,,( चुदाई वाली बात मुंह से निकलते ही सरला एकदम से अंदर ही अंदर तड़प उठी अब वह अपनी बहू से कैसे कह दें कि उसे शुभम से चुदवाने की बहुत इच्छा हो रही है उसका लंड अपनी बुर में लेकर मस्त होने की इच्छा हो रही है,,)

हां मम्मी शुभम तो मेरी रोज चुदाई करता है,,

तो क्या तेरा जी मचलता है कि नहीं उल्टी जैसा कुछ महसूस होता है या खट्टा खाने को,,,,

Ruchi


नहीं मम्मी ऐसा तो अभी कुछ भी नहीं होता है सब कुछ सामान्य ही है,,,

बहु जब वो तेरी चुदाई करके अपना पानी निकलता है तो तेरी बुर के अंदर पूरा पानी डालता है या लंड बाहर निकाल लेता है,,,,

नहीं मम्मी मैं जब तक उसके लंड का पूरा पानी अपनी बुर के अंदर नीचोड़ नहीं लेती तब तक उसके लंड को छोड़ती नहीं हूं,,,,( इस तरह की गंदी बातें करके रुची के तन बदन में फिर से आग लगने लगी थी,, वह अपनी टांगे फैलाकर अपनी हथेली से हल्के हल्के अपनी बुर के गुलाबी पत्तियों को मसलते हुए अपनी सास से बात करना जारी रखी)
Phn pe baat kArte huye sarlaa apni chuchi masalte huye


हां बहु ठीक है ऐसा ही करना उसके लंड से निकला पानी ही तेरी गोद का भर सकती है,,, वही तेरी और मेरी दोनों की उम्मीद है इसे जाया मत होने,,देना,,,( रुचि के साथ-साथ इस तरह की बातें करके सरला की भी हालत खराब होती जा रही थी एक तो वैसे ही काफी दिन हो चुके थे अपनी बुर के अंदर शुभम के मोटे तगड़े लंड की चौड़ाई और उसकी रगड़ को महसूस किए हुए जिससे सरला एकदम से चुदवासी हो गई थी और वह बिस्तर पर थोड़ा पीछे की तरफ से होकर अपनी साड़ी को अपनी कमर तक खींचकर ऊपर कर दी और अपनी नंगी बुर पर वह भी रुचि की तरह अपनी हथेली को जोर जोर से मसलने, लगी,,)

आप बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी मैं सब कुछ संभाल लूंगी,,, बस इस बात का ख्याल रखना मम्मी की इस बारे में किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए वरना मेरे साथ साथ पूरे परिवार की बदनामी हो जाएगी,,,,(रुचि अपनी हथेली से अपनी बुर को रगडते हुए बोली,,)

बहु तु पागल हो गई है क्या इस बारे में सिर्फ मुझे मालूम है और एक तुझे तीसरे किसी को भी नहीं मालूम है हां शुभम को इस बारे में कभी भनक भी नहीं लगने देना कि तू ऊससे चुदवा कर मां बनना चाहती है वरना भविष्य में मुसीबत हो जाएगी,,,,( मां बनने वाली बात से सरला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और वह अभी तक बुर को हथेली से मसल रही थी जिसमें वह अपनी दो उंगली को एक साथ अपनी बुर के अंदर डालकर उसे अंदर-बाहर करने लगी,)

नहीं मम्मी जी मेरी तरफ से किसी भी प्रकार की चूक नहीं होगी मैं शुभम को यह भनक तक नहीं लगने दे रही हु कि मैं उससे सिर्फ मां बनने के लिए चुदाई करवा रही हुं,,, बस उसे ही एहसास करा रही हूं कि मुझे मजा लेना है,,

हां बहु ऐसा ही करना,,,,( ऐसा कहते हुए सरला अपनी दोनों मिली को जोर-जोर से अपनी बुर के अंदर बाहर करते हुए बोली जिसकी वजह से उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज उसके मुंह से फूट पड़ी,) ससहहह,,,,आहहहह,,,

क्या हुआ मम्मी दर्द हो रहा है क्या,,,?

हमारे इधर सीढ़ियां कुछ ज्यादा ही उतरना चढ़ना पड़ता है ना इसलिए घुटनों में दर्द हो रहा है,,( अपनी मस्ती भरी आवाज को दर्द का नाम लेकर बात को सरला छुपा ले गई,,)

मैं होती तो आपके घुटनों में मालिश कर देती जिससे आपको आपको राहत मिल जाती,,

तू बहुत अच्छी है बहू जो मेरा इतना ख्याल रखती है,,

अच्छी तो आपने मम्मी जी जिसने मुझे इस तरह के कदम उठाने के लिए अपनी तरफ से खुली छूट दे दी हो,


यह सब किस्मत का खेल है बहु इसमें मेरा हाथ कुछ भी नहीं है मैं एक औरत होने के नाते औरत की तकलीफ को समझ सकती हूं,, जैसे एक औरत होने के नाते तूने मेरी तकलीफ को समझकर शुभम वाली बात को अपने दिल से निकाल दी,,,, और तेरी तो अभी शुरुआत है तेरी तो अभी जवानी के दिन है खेलने खाने के दिन है ऐसे में मेरा बेटा तुझे कोई खुशी नहीं देता था इसमें मेरी ही गलती है मैं तो तेरी खुशी में शामिल होना चाहती हूं तेरी दुख को दूर करने के लिए तुझे इस तरह की खुली छूट दी हूं,,,, तो बिल्कुल भी चिंता मत कर शुभम से जमकर चुदवा।,,,

जैसा आप कह रही है वैसा ही हो रहा है मम्मी,,( रुचि अपनी बुर को मसलते हुए बोली,,,)

( सास बहू दोनों को इस तरह की बातें करने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी दोनों के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी दोनों एकदम पूरी तरह से गर्मा रही थी दोनों को इस समय मोटे तगड़े लंड की आवश्यकता जान पड़ रही थी,,, किस्मत का अजीब खेल था एक साथ अपनी ही बहू को दूसरे मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहती है और उसकी बहू भी दुनियादारी को भूलकर गैर मर्द जो कि एक नौजवान छोकरा ही था उसके साथ चुदाई का भरपूर आनंद लेती है सिर्फ और सिर्फ मजे लेने के लिए और अपनी सूनी गोद को हरी करने के लिए,,, सरला के लिए यह मजबूरी कहें या उसकी जरूरत है वह दोनों के बीच में फंसी हुई थी क्योंकि वह अपनी बहू के द्वारा गैर छोकरे के साथ चुदाई करवाते हुए पकड़ा चुकी थी और अपनी इस गलती को छुपाने के लिए वह उस लड़के से अपने बहु के साथ शारीरिक संबंध बनवा चुकी थी,, और दोनों जिस तरह से बातें कर रहे थे लगता ही नहीं था कि दोनों रिश्ते में सास और बहू है ऐसा लग रहा था कि दोनों सहेलियां है,,, कुछ भी हो इसमें दोनों का फायदा था एक तरफ रूचि थी जो अपने पति से शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं थी और मेडिकल रिपोर्ट के बाद से तो वह आसा ही छोड़ दी थी कि वह कभी मां बन पाएगी,, लेकिन शुभम से मिलने के बाद से उसकी उम्मीद बढ़ चुकी थी और उसकी आशाओं को नए पर लग चुके थे वह शुभम से शारीरिक संबंध बनाकर शारीरिक रूप से पूरी तरह से संतुष्ट भी हो रही थी और उसके द्वारा वह मां भी बन सकती थी और दूसरी तरफ सरला थे जो कि उम्रदराज औरत होने के बावजूद भी शुभम के आकर्षण में कुछ इस तरह से बंध गई कि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिया और उसके साथ रोज चुदाई का आनंद लेने लगी थी और ऐसे में उसकी चोरी पकडे जाने पर अपनी बहू को भी इस खेल में शामिल कर ली जो कि अपनी चोरी पकड़े जाने के बाद रुचि से सरला यह बात कह कर उससे से शारीरिक संबंध बनाने को बोली थी जबकि रुचि खुद ही पहले से ही शुभम से चुदाई का आनंद ले चुकी थी,,, इसमें सास बहू दोनों का फायदा था दोनों किसी न किसी तरीके से अपना उल्लू सीधा करना चाहते थे मेडिकल रिपोर्ट वाली बात तो बस एक बहाना था अपने तरीके से मजा लेने के लिए,, खैर जो भी हो दोनों को मजा आ रहा था तभी तो फोन पर इस तरह की बातें करके दोनों मस्त हुए जा रहे थे सरला अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चटकारा प्राप्त करने के लिए बोली,,)

वह मुझे समझ में नहीं आ रहा है की शुरुआत कैसे हुई मतलब कि तू इस तरह की औरत तो है नहीं कि सामने से चलकर उसे बोलेगी कि तू से चुदवाना चाहती हैं तो यह शुरुआत कैसे हुई,,( सरना अपनी दोनों उंगलियों को अपनी बुर के अंदर बाहर करते हुए बोली,, और रुचि भी अपनी बात को नमक मिर्च लगाते हुए अपने साथ के आगे उसे पेश करते हुए बोली,,)

मम्मी जी मुझे बहुत डर लग रहा था मैं जानती थी कि मैं ऐसा कुछ भी नहीं कर पाऊंगी लेकिन फिर भी आप जैसा कह रही थी वैसा करना बहुत जरूरी था इसलिए मैं थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए छत पर चली गई और सूखे हुए कपड़े रस्सी पर से उतारने लगी वहीं पर सुभम कसरत कर रहा था किसी न किसी बहाने उसे बातें करते हुए में कपड़े गिरा कर उसे उठाने के लिए नीचे झुकी,, झुकने से पहले ही में अपने ब्लाउज के बटन को खोल कर रखी थी जिससे मेरी शादी चूचियां बाहर कुछ अलग गई और उसे देखकर वह पूरा जोश में आ गया और वह मुझे छत पर ही पकड़ लिया,,, और उसके बाद उसने जो किया मैं इनकार नहीं कर पाई,,,

सही सही बताना बहू उसका लंड तुझे कैसा लगा,,,? ( सरला बातों ही बातों में चटकारे लेते हुए बोली.. अपनी बुर को मसलते हुए रुचि भी इस बात से एकदम से गर्मा गई और वह अपने बिस्तर पर से उठ कर किचन की तरफ जाने लगी,,,)

आप सच कह रही थी मम्मी मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि एक मर्द का लंड ऐसा हो सकता है मैं तो आपके बेटे के छोटे से लंड से चूदवाकर कर सच में मजा नहीं ले पा रही थी,,,,( ऐसा कहते हुए रुचि रसोई घर में जाकर फ्रीज खोल कर उसमें से एक मोटा तगड़ा बैगन निकाल ली,, और अपनी एक टांग उठा कर उसे टेबल पर रख कर अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में उस बैगन को डालकर अंदर-बाहर करने लगी,,, लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने मुंह से निकल रही सिसकारी पर कंट्रोल किए हुए थी अपनी बहू की बात सुनकर सरला बोली,,।)

मैं कहती थी ना बहू कि उसके लंड में अजीब सा आकर्षण है एक बार औरत अगर उसके लंड को अपनी बुर में ले ले तो वह उसकी दीवानी हो जाए।

हां मम्मी जी आप बिल्कुल सही कह रही हो जो तुम्हारे साथ हुआ उसमें आपकी कोई गलती नहीं,,,( वह उसी तरह से उस बैगन को अपनी दूर के अंदर बाहर करते हुए बोली अपनी बहू की बात सुनकर सरला को अंदर ही अंदर बहुत राहत महसूस हो रही थी।)

अच्छा एक बात बता दिन में कितनी बार तेरी चुदाई करता है,,,

कहां,, मम्मी उसकी परीक्षा चल रही थी तो कहां पर हर रोज चुदाई करता था,, शाम के वक्त ही जब कसरत करने के लिए छत पर आता था तभी उसे मौका मिलता था और तभी मेरी चुदाई करता था,,

लेकिन अब तो उसकी परीक्षा खत्म हो गई है ना,,,

हां तो अब करेगा,,,



बहु तुझे तो मजा आ जाता होगा जब वह अपना मोटा लंड तेरी बुर में डालकर जोर जोर से धक्के लगाता होगा,,,

मम्मी पूछो मत आप तो अच्छी तरह से जानती है कि एक बार जब अपना लंड बुर में डाल देता है तो इतनी जोर जोर से धक्के लगाता है कि मानो कोई मशीन चल रही हो रुकता ही नहीं,,,( शुभम की मर्दानगी के बारे में बताते हुए रुचि इतनी मस्त हो गई थी कि उस बैगन को अपनी बुर की गहराई में जोर-जोर से डालते हुए अंदर बाहर कर रही थी,,)

लेकिन कुछ भी हो मजा आ जाता है ना,,,,



हां मम्मी बहुत मजा आ जाता है,,,

बस ऐसे ही अपने काम में लगे रहे और जल्दी से जल्दी मुझे दादी बनने का सुख दिला,,,, हमें रखती हूं बहु अपना ख्याल रखना,,,, (इतना कहते हुए सरला फोन कट कर दी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि वह जब झड़े तो उसके मुंह से निकलने वाली गर्म सिसकारी की आवाज उसकी बहू को सुनाई दे क्योंकि वह जल्द से जल्द झड़ने वाली थी और इसलिए वह फोन कट करके जोर जोर से अपनी उंगली को अपनी बुर के अंदर-बाहर करने लगी,,, और यही हाल रुचि का भी था जैसे ही फोन कट हुआ मोबाइल को टेबल पर रख कर वह उस बैगन को जोर-जोर से अपनी बुर के अंदर बाहर करने लगी और देखते ही देखते वह बड़ी मस्ती के साथ झड़ गई। वासना का तूफान शांत होते ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ तो वह शर्मा कर मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि वह नहाने के बाद से अब तक पूरी तरह से नंगी ही अपने घर में इधर से उधर घूम रही थी आज उसकी शादी का सालगिरह था और वह अपनी इस सालगिरह को अच्छी तरह से मनाना चाहती थी क्योंकि शादी के बाद से अपनी सालगिरह मना नहीं पाई थी क्योंकि सालगिरह के दिन उसका पति घर पर कभी नहीं होता था लेकिन आज वह अपनी शादी की सालगिरह को शुभम के साथ मनाना चाहती थी और वह भी उसके साथ जमकर चुदाई का आनंद ले कर यह ख्याल मन में आते ही वह मंद मंद मुस्कुराने लगी और अपने घर का काम करने के लिए किचन से बाहर चली गई।
sarlaa chachi

Shubham or nirmala



Ruchi shubham se chudwane k baad



Sheetal ki madmast tadapati jawani
 
रुचि आज बहुत खुश नजर आ रही थी ,,,,आज उसकी शादी की सालगिरह थी ऐसे में उसके परिवार का एक सदस्य भी घर पर नहीं था लेकिन उसे कोई दुख नहीं था इस बात का क्योंकि आज कि वह शादी की सालगिरह शुभम के साथ मनाना चाहती थी,,,, इसलिए वह तैयार होकर बाजार के लिए निकल गई उसे कुछ सामान खरीदना था ,,ताकि आज अपनी सालगिरह पर कुछ नया कर सकें ।
दोपहर के 1:00 बज रहे थे धूप काफी थी जिससे रुचि को भी गर्मी का एहसास हो रहा था ऐसे में वह बाजार में घर का सामान खरीद रही थी,,, आज वह शुभम को खाने पर बुलाना चाहती थी जिसके लिए उसने पूरी तैयारी करते हुए पनीर हरी मटर कुछ कोल्ड ड्रिंक्स वगैरा-वगैरा खरीद चुकी थी,,, वह खरीदी कर चुकी थी गर्मी की वजह से उसका पूरा बदन पसीने से तरबतर हो चुका था। लेकिन फिर भी उसे इस बात का कोई गम नहीं था क्योंकि आज शादी के बाद पहली बार वह इस तरह से खुले में अकेले बाजार घूमने निकली थी। पर शादी के बाद औरत की जिंदगी कितनी बदल जाती है यह बात वह अच्छी तरह से जानती थी।
इसलिए वह कुछ दिन की आजादी का भरपूर फायदा उठाना चाहती थी इसलिए तो पसीने से तरबतर होने के बावजूद भी वह खुश नजर आ रहे थे उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी जो कि हर मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी पीली साड़ी में उसका गोरा बदन और भी ज्यादा खिल उठ रहा था,,,
उसके दोनों हाथों में सामान से भरे हुए थैले थे जिसकी वजह से वह कुछ तन कर चल रही थी और इस वजह से उसके दोनों कबूतर कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ निकल कर फड़फड़ाते हुए नजर आ रहे थे,,, मर्दों के लिए तो इसी पल का जैसे बेसब्री से इंतजार होता है और जिस तरह से चल रही थी उसके ब्लाउज में से उसके निप्पल कुछ ज्यादा ही भाले की तरह निकली हुई थी ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी उसकी निप्पल ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएगी और यह बात रुचि भी अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि बार-बार उसका ध्यान अपनी दोनों चुचियों पर चला जा रहा था लेकिन फिर भी वह इस बात से बेहद असहज थी पर वह सामान्य तौर पर ही अपने कदम आगे आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थीं,,,
थैले का वजन कुछ ज्यादा था जिससे उससे उठाया नहीं जा रहा था,,, और वचन उठा कर चलने की वजह से बार-बार उसकी कमर लचका जा रही है उसके पीछे चल रहे मर्दों की नजर उसकी गोल गोल गांड पर टिकी हुई थी जो कि उसके कदम बढ़ाने के लय के साथ ही उसकी गांड कुछ ज्यादा ही मटक रही थी,,,, उसके गोल गोल नितंबों को देखकर हर मर्द की आह निकल जा रही थी क्योंकि रुचि के बदन में अभी जवानी की शुरुआत हुई थी उसका बदल का हर एक अंग धीरे-धीरे विकसित हो रहा था,,, वजनदार थैला उठाकर चलने में उसे थोड़ी बहुत परेशानी तो हो ही रही थी लेकिन फिर भी वह आज की पार्टी जो कि सिर्फ वह शुभम को देना चाहती थी उस वजह से काफी उत्साहित भी थी,,,,
वह फुटपाथ पर अकेले पैदल चली जा रही थी कि तभी उसे सामने से मोटरसाइकिल पर आता हुआ शुभम दिखाई दिया उस पर नजर पड़ते ही रुचि के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगी और वह तुरंत चिल्लाकर उसे आवाज दी,,,

शुभम,,,,,,वो,,,,,, शुभम,,,,,
( अपना नाम सुनते ही शुभम इधर-उधर देखने लगा तो तभी उसे सामने रोड के दूसरी छोर पर रुचि दिखाई दी जिसके हाथों में बड़े-बड़े दो थेले थे वह देख कर समझ गया कि वह खरीदी करने आई है और उसे देखकर वह काफी खुश भी नजर आ रहा था वह तुरंत अपनी मोटरसाइकिल उसकी तरफ मोड़ दिया और तुरंत उसके पास जाकर बाइक खड़ा करता हुआ बोला,,,)

क्या बात है भाभी आज बड़ी शॉपिंग करने निकली हो,,,,

क्यों मैं शॉपिंग करने नहीं आ सकती क्या ,,,,

नहीं ऐसी बात नहीं है,,,आ सकती हो लेकिन इतनी दोपहर में कितनी धूप लग रही है और आप को देखो पूरे पसीने से भीग गई हो,,(, ऐसा कहते हुए शुभम की नजर सीधे उसके ब्लाउज पर गई जो कि पसीने से भीगी होने की वजह से उसकी चॉकलेटी रंग की निप्पल हल्की-हल्की नजर आ रही थी और उस पर नजर पड़ते ही वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

Ruchi or Shubham

क्या बात है भाभी आज बाजार से बहुत ही अच्छे किस्म की चॉकलेट खरीदी हो लगता है,,,,

चॉकलेट ,,,,नहीं तो मैंने कोई चॉकलेट नहीं खरीदी हुं,,,( शुभम की बात सुनकर रूचि आश्चर्य से बोली ,,,)

लेकिन मुझे तो दिखाई दे रही है भाभी ,,,,,

लेकिन मैंने तो कोई भी चॉकलेट नहीं खरीदी हुं ,,,तो तुम्हें कैसे दिखाई दे रही है,,,

तुम्हारी ब्लाउज में,,,,,( शुभम एकदम बेशर्म की तरह बोला और शुभम की बात सुनकर उसकी नजर सीधे अपने ब्लाउज के ऊपर गई तो उसे अपनी स्थिति का आभास हुआ और वह शर्मा गई,,,)

धत्,,,, तू बड़ा बेशर्म है,,,,,

अच्छा मैं देख लिया तो बेशर्म हूं और तुम दिखा रही हो तो,,,

तो मैं जानबूझकर थोड़ी दिखा रही हु ये तो पसीने की वजह से ऐसा हो गया है ,,,,

चलो जैसे भी हुआ है लेकिन मैं तो बहुत ही स्वादिष्ट चॉकलेट,,,,

इसका स्वाद लेना है तो आ जाना घर पर आज मेरी शादी की सालगिरह है,,,,( रुचि शरमाते हुए बोली,,)

क्या बात है भाभी आज आपकी शादी की सालगिरह है लेकिन सालगिरह तो अपने पति के साथ मनाते हैं मुझे क्यों बुला रही हो,,,

तेरे काम भी तो सब पति वाले ही है ,,,

कौन से काम भाभी जी चुदाई वाले,,,,

थोड़ा शर्म तो कर कोई आते-जाते सुन लेगा तो क्या सोचेगा मेरे बारे में,,,( रुचि इधर उधर देख कर बोली )

कोई नहीं सुनेगा भाभी,,,

अच्छा ये बता शाम को खाने पर आएगा कि नहीं मैंने तेरे लिए ही शाम को छोटी सी पार्टी रखी हुं वह भी सिर्फ तेरे लिए ही इसलिए लिए खरीदी करने आई हुं,,,,

सच भाभी सिर्फ मेरे लिए ही,,,,,

हा रे सिर्फ तेरे लिए ही ,,,,

तब तो बहुत मजा आएगा भाभी सिर्फ मैं और तुम बहुत मजा आएगा,,,,,

तभी तो तुझे बुला रही हूं आएगा ना ,,,,



जरूर आऊंगा भाभी लेकिन मम्मी ,,,,(थोड़ा सोचने के बाद) कोई बात नहीं मैं जरूर आऊंगा आप बुलाओ और मैं ना आऊं ऐसा हो नहीं सकता लेकिन मुझे तुम्हारी यह चॉकलेट (चूची की तरफ इशारा करते हुए) खिलानी पड़ेगी ,,,,

जरूर खा लेना यह सब तेरा ही तो है (रुचि मुस्कुराते हुए बोली )अब चल मुझे जल्दी से अपनी गाड़ी पर बैठा कर घर पर छोड़ दे बहुत तेज धूप लग रही है,,,

अभी लो भाभी( इतना कहकर शुभम अपनी मोटरसाइकिल को घुमा लिया और रुची दोनों थैले को मोटरसाइकिल में टांग कर अपनी मदमस्त गोलाकार गांड को मोटरसाइकिल की सीट पर रखकर बैठ गई और एक हाथ उसके कंधे पर रख ली ऐसा लग रहा था कि जैसे वह उसका पति हो ,,,,वो बहुत खुश नजर आ रही थी शुभम भी मोटरसाइकिल की एक्सीलेटर देकर मोटरसाइकिल को आगे बढ़ा दिया उसके मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह शाम का इंतजार करने लगा था रुचि का घर आ गया रुची को वही उतार कर अपने घर चला गया,,,।


digital coin flip

शुभम का समय आज काटे नहीं कट रहा था वक्त की सुई बहुत ही धीरे-धीरे गुजर रही थी बार-बार उसकी नजर दीवार से लगी हुई घड़ी पर चली जा रही थी जिसमें अभी भी काफी समय था,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और उसके मन में रुचि के घर जाने की उत्सुकता कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि वह सिर्फ खाने के लिए ही नहीं बुलाई है ,,,,बल्कि एक औरत के साथ मर्द का जो काम होता है वही करवाने के लिए बुलाई है,,, वैसे भी अब उसके पास समय ही समय था लेकिन एक छोटी सी समस्या उसके सामने थी कि वह अपनी मां से कैसे इजाजत मांगेगा घर से बाहर जाने के लिए क्योंकि उसकी मां रात को घर से बाहर जाने की इजाजत कभी नहीं देती थी,,,, इसलिए उसके मन में एक युक्ति सूझी और वहां अपनी मां के पास गया जो कि रसोई घर में खाना बना रही थी धीरे-धीरे करके शाम ढल चुकी थी,,,, वह पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर लिया और उसके कान में धीरे से बोला।

आई लव यू मम्मी तुम बहुत अच्छी हो ,,,,,

आज यह मस्का किस लिए,,,( निर्मला उसी तरह से आटा गुंथते हुए बोली,,)

मस्का कहां लगा रहा हूं मम्मी मैं तो सच कह रहा हूं आप बहुत अच्छे हो,,,,

बेटा मैं तेरी मां हूं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम मुझे मस्का लगा रहा है जरूर कुछ काम निकालना है,,,

क्या बात है मम्मी आप तो सब कुछ जानती हो मम्मी आपसे एक काम था क्या काम था बोल,,,

अरे वाह मम्मी आपके सब कुछ जानती हो तो मम्मी ने एक बात बोलूं,,,

बोल,,,,

क्या ना मम्मी मेरे दोस्त लोग ना अच्छे से परीक्षा खत्म हो गई ना इसके लिए एक छोटी सी पार्टी रखे थे मतलब कि उस का जन्मदिन भी है और वह,,,, मैं तो जाने वाला नहीं,,,,, था लेकिन उसकी मम्मी पापा ,,,,,ही मुझे खासतौर पर बुलाए हैं इसलिए मुझे,,,,,, अगर आप कहो तो मैं चला जाऊं,,,,( शुभम अपनी मां से डरते डरते हक लाते हुए बोला कि को अच्छी तरह से जानता था उसकी मां ज्यादातर उसे घर से बाहर और वह भी रात के समय जाने नहीं देती थी,,,)

शुभम तू तो जानता है कि मैं तुझे रात के वक्त कहीं नहीं जाने देती लेकिन फिर भी तो कह रहा है तो आज मैं तुझे जाने की इजाजत दे देती हूं लेकिन जल्दी आ जाना,,,

( शुभम कोई ऐसी उम्मीद अपनी मां से बिल्कुल भी नहीं थी वह यही सोच रहा था कि उसकी मां घर से बाहर जाने की इजाजत उसे नहीं देगी लेकिन जैसे ही वह उसे जाने की इजाजत थी वह अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी मां के गले से लग गया वह काफी खुश था और वह जल्दी से जा कर तैयार होने लगा,,,, घड़ी में 8:00 का समय हो रहा था वह काफी उत्साहित हो रहा था क्योंकि अब समय आ गया था उसके घर जाने के लिए इसलिए वह घर से बाहर जाने के लिए निकला तो उसकी मां उसे रोकते हुए बोली,,,)

तू अपने दोस्त के घर जाएगा कैसे बाइक लेकर जा रहा है,,,

नहीं मम्मी बाइक लेकर मैं नहीं जा रहा हूं आगे रास्ते से मेरा दोस्त अपनी गाड़ी पर मुझे ले जाएगा,,,

कोई बात नहीं आराम से जाना,,,,

हां मम्मी में आराम से जाऊंगा,,,( ईतना कहकर वो घर से बाहर निकल गया और सब से नजरें बचाते हुए खास करके अपनी मां से वह तुरंत सरला के घर गया और बेल बजा दिया,,, रुचि अच्छी तरह से जानती थी कि उसके घर पर इस समय केवल शुभम ही आने वाला है इसलिए वह पहले से ही सारी तैयारी करके रखी हुई थी जैसे ही बेल बजी वह तुरंत दरवाजा खोल दी और जैसे ही दरवाजा खुला शुभम अंदर का नजारा देखकर एकदम दंग रह गया उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,, लाल रंग की ट्रांसपेरेंट गाउन और वह भी इतनी छोटी जैसे कि किसी छोटी लड़की की ड्रेस हो उसकी जांघों तक आ रही थी और उसमें से उसकी लाल रंग की पैंटी और ब्रा सब कुछ नजर आ रहा था गोरे रंग पर यह कलर जानलेवा साबित हो रहा था,,,, शुभम यह नजारा देखा तो देखता ही रह गया उसका गला सूखने लगा उत्तेजना के मारे उसका पूरा शरीर गनगना गया,,,,, शुभम की नजरें उसके गोरे बदन पर ऊपर से नीचे चारों तरफ घूम रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वह होश में बिल्कुल भी नहीं था ऐसा लग रहा था मानो उसके जिस्म में सांस आना बंद हो गई हो,,,, शुभम की हालत देखकर रुचि मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थी उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी और वह शुभम से बोली,,,,।

इस तरह से दरवाजे पर खड़ा रहेगा या अंदर भी आएगा,,,
(रुची की आवाज सुनकर शुभम की तंद्रा भंग हुई तो वह हड़बड़ा कर कमरे में दाखिल हुआ,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह रुचि से नहीं बल्कि किसी स्वर्ग की अप्सरा से मिलने आया हो रूचि तो पहले से ही खूबसूरत थी लेकिन आज कयामत लग रही थी शुभम को ऐसा लग रहा था कि कहीं वह अपने हुस्न के खंजर से उसके दिल के चित्र लेना कर दे,,,,)
madmast gaand ki maalkin ruchi



भाभी आज तो आप एकदम कयामत लग रही हो कहीं जान लेने का इरादा तो नहीं है,,,

अगर मैं तेरी जान ले लूंगी तो मेरा सपना कौन पूरा करेगा,,,

कैसा सपना भाभी,,,,,

मेरा मतलब है कि मेरी प्यास कौन बुझाएगा,,,,

मैं हूं ना भाभी तुम्हारा दास तुम्हारा गुलाम,,, सब कुछ ,,,
(इतना कहने के साथ ही शुभम आगे बढ़ कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और तुरंत उसके लाल-लाल होठों को अपने होंठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया,,, रुचि भी इसी पल का इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रही थी इसलिए वह भी पागलों की तरह शुभम का साथ देते हुए उसको होठों को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी शुभम के हाथ बड़ी तेजी से रूचि के संपूर्ण बदन पर घूम रहे थे,,, जहां भी हाथ घुमा रहा था बड़ी शक्ति के साथ उस हिस्से को अपनी हथेली में दबा ले रहा था कभी दोनों हाथों से उसके नितंबों को दबा देता तो कभी उसकी पीठ को मसल देता तो कभी दोनों हाथ आगे की तरफ लाकर उसके दोनों कबूतरों को जोर से दबा देता,,, शुभम जिस तरह से पागलों की तरह उसके बदन के साथ सख्ती से पेश आ रहा था उसमें रुचि को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसके मुंह से सिसकारी के साथ-साथ दर्द भरी कराहने की आवाज भी आ रही थी,,, दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे खास करके उन अंगों से जिनकी उन्हें सख्त जरूरत थी शुभम अपना एक हाथ उसकी लाल रंग की पैंटी में डाल कर उसके कोमल अंग को सहला रहा था तो रुचि अपने हाथ को उसके पेंट में डालकर उसके कठोर अंग से खेल रही थी,,, दोनों की उनमादक सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं जिसे उन दोनों के सिवा तीसरा कोई भी सुनने वाला नहीं था,,,, लाल रंग की ट्रांसपेरेंट शार्ट गाउन में रुचि के खूबसूरत बदन को देख कर शुभम का पारा एकदम बढ़ने लगा उसकी उत्तेजना परम शिखर पर विराजमान हो गई देखते ही देखते शुभम उसके बदन से एक-एक करके उसके छोटे-छोटे वस्त्रों को उतारना शुरू कर दिया कोई यही काम रुचि भी शुभम के साथ कर रही थी और देखते ही देखते दोनों अगले ही पल एकदम नंगे होकर उनके वस्त्र नीचे जमीन पर पड़े हुए थे शुभम का लंड पूरी औकात में आकर एकदम खड़ा होकर ऐसा लग रहा था मानो वह रुची की बुर को घमासान युद्ध के लिए ललकार रहा हो। और इसमें रुचि की पूर्व भी कुछ कम नहीं थे उसके मुखारविंद का तेज देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह अपने मुंह से आग उगल रही हो क्योंकि रक्त का संचार उसकी बुर के फुले हुए भाग पर इतनी अधिक तेजी से हो रहा था कि उसमें से गर्माहट भरी आंच निकल रही थी जोकि शुभम अपने मोटे तगड़े लंड पर साफ महसूस कर पा रहा था,,,,


दोनों किसी से कम नहीं थे दोनों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे दोनों के बीच घमासान युद्ध होने वाला है,,,,
शुभम एकदम उतावला हो चुका था सब्र का बांध अब टूटने लगा था वह आगे जल्द ही बढ़ना चाहता था इसलिए तो वह तुरंत रुचि की चूची को अपने मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया था जिससे रुचि के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ी हालांकि रुचि का भी मन बहुत हो रहा था शुभम के मोटे लंड को अपनी बुर में रहने के लिए लेकिन वह अपने आप पर सब्र किए हुए थी वह चुद वाना तो चाहती थी लेकिन इससे पहले जी भर कर एक दूसरे के अंगों से मजा ले लेना चाहती थी क्योंकि आज तक उसने नहीं ली थी,,,, शुभम पागलों की तरह रुचि की कभी दाईं चूची तो कभी बाय चूची दोनों को मुंह में भरकर बराबर उसका सेवन कर रहा था,,,, सच पूछो तो रुचि को इसमें स्वर्ग सा आनंद मिल रहा था इस तरह से उसके पति ने कभी भी उसकी चूची को मुंह में भर कर जी भर के नहीं पिया,,, इसलिए तो रोज ही इतनी मस्त हो गई थी कि वह दोनों हाथ की उंगलियों को शुभम के बालों में डालकर उसे जोर से भींचते हुए उसे अपनी चूची पर दबा के उसे पीने के लिए उकसा रही थी,,,।

ले शुभम और पी,,, पूरा मुंह में भरकर पी,,,,पूरा रस निचोड़ डाल दबा दबा कर के,,,, बहुत मस्त चूसता है रे तू,, ससहहहह,,,,,आहहहहहहह,,, पागल कर दिया रे तूने मुझे इस तरह से तो मेरे पति ने कभी नहीं चुसा मेरी चूची को,,,

सही कह रही हो भाभी भैया ने तुम्हारी चूची के साथ-साथ तुम्हारे जिस्म पर कभी भी ज्यादा ध्यान नहीं दिए हैं तभी तो मेरा ध्यान तुम पर चला गया है अब देखो मैं तुम्हें कैसे एक मस्त औरत बना देता हूं,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम फिर से रुचि की चुचियों पर टूट पड़ा,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से रूचि एकदम मस्त में जा रही थी उसकी गरम सिसकारियां पूरे घर में गूंज रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी इसलिए तो वह एक हाथ नीचे की तरफ लाकर सुभम के खड़े लंड को पकड़ कर उसे मुठियाना शुरू कर दी थी,,,

ससससहहहह,,,,,आहहहहहहह,, बहुत मोटा लंड है तेरा सुबह बहुत मजा आता है जब तू अपने लंड को मेरी बुर में डालकर चोदता है मुझे तो यकीन ही नहीं होता की किसी मर्द का लंड कितना मोटा और लंबा होता है,,,

क्यों भाभी भैया का ऐसा नहीं है क्या ,,,,,

हरामी भैया का ऐसा होता तो मैं तेरे पास आती क्या ,,,,तेरे से आधा भी नहीं है तभी तो मैं पागलों की तरह तेरे पीछे घूमती रहती हूं,,, ( बातों ही बातों में रुचि अपना दुखड़ा सुनाते हुए बोली और यह बात सुनकर शुभम को एक बार फिर से अपनी मर्दानगी पर गर्व होने लगा,,,)

बिल्कुल भी चिंता मत करो भाभी मुझे तो ऐसा लगता है कि मेरा लंड आपकी बुर के लिए ही बना है तभी तो देखो तुम्हारी बुर देख कर केसा खड़ा हो गया है,,,( ऐसा कहते हैं मैं शुभम जोर से रूचि की गोल गोल गांड पर चपत लगा दिया,,, जिससे रुचि की आह निकल गई।)

आहहहह,,, क्या कर रहा है लगती है,,,,

लेकिन मजा भी तो आता है ना मेरी रानी ,,,,,

मजा तो आता है लेकिन दर्द भी तो किया ना ऐसे मत चपत लगाया कर ,,,,

अच्छा यह मोटा लंड जब तुम्हारी बुर में जाता है तो कैसे चिल्लाती हो जोर-जोर से,,,, लेकिन मजा भी तो लेती हो,,
( ऐसा कहते हुए शुभम फिर से दो चार चपत एक साथ उसकी गांड पर लगा दिया और देखते-देखते उसकी गोरी गांड एकदम लाल हो और सूची बस हहहहहह करके रह गई यह हकीकत है कि शुभम के चपत लगाने पर पुरवा भी उसकी गांड पर उसे भी आनंद दे रहा था वह एकदम काम विभोर हो चुकी थी,,,,,। उसका भी सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आ रहा था क्योंकि शुभम की हरकतें उसके खूबसूरत जिस्म के साथ लगातार जारी थी वो कभी चूचियों से खेल रहा था और ऊपर से उसे मुंह में लेकर भीगी रहा था लेकिन उसकी हथेलियां उसके खूबसूरत बदन पर चारों तरफ घूम रही थी खास करके उसकी टांगों के बीच की उस पतली दरार पर जिस में आग लगी हुई थी बार-बार वह उसे अपनी उंगली से छेड़ दे रहा था जिससे रुचि एकदम मदहोश हो जा रही थी और उसे भी अपने घर के अंदर उसके मोटे लंड को लेने की आवश्यकता जान पड़ रही थी,,,,।
जबरदस्त मादकता से भरा हुआ नजारा रुचि के घर में नजर आ रहा था अपनी शादी की सालगिरह को अपने पति के साथ ना मना कर वह अपने पड़ोस के जवान लड़के के साथ मना रही थी और वह भी पूरी तरह से नंगी होकर पड़ोस का लड़का शुभम भी पूरी तरह से नग्न अवस्था में पड़ोस की भाभी के साथ उसके जिस्म के साथ खेल रहा था,,, जिसमें उसकी सास का पूरी तरह से खुली छूट थी। और उसी खुद ही छूट का फायदा उठाते हुए रुचि एक जवान लड़की के साथ नग्न अवस्था में उसके अंग से खेल रही थी और उसे भी अपने अंग से खेलने की पूरी इजाजत दे दी थी।
रुचि बार-बार लगातार शुभम के मोटे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर हिला रही थी तो कभी उसे मुठिया रही थी शुभम भी रुची की नरम नरम ऊंगली और उसकी हथेली का आनंद लेते हुए उसकी चूची को पी रहा था,,,, तकरीबन आधे घंटे से शुभम उसकी दोनों चूचियों को ही पी रहा था देखते ही देखते उसे दबा दबा कर पीकर उसे लाल टमाटर की तरह कर दिया था,,, रुचि भी शुभम के हौसले को देखकर हैरान थी क्योंकि वह आधे घंटे से बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पी रहा था और साथ ही उसके खूबसूरत नंगे जिस्म से खेल भी रहा था और साथ ही वह खुद उसके खड़े लंड को जोर जोर से हिला रही थी लेकिन अब तक मजाल था कि उसका लंड पानी फेंका हो,,, उसकी इसी मर्दाना ताकत की तो वह पूरी तरह से कायल हो चुकी थी इसलिए तो आज अपनी शादी की सालगिरह पर उसे अपने घर पर बुलाकर उसकी जवानी के रस को पूरी तरह से नीचोड़ कर अपने आप को तृप्त करना चाहती थी,,,

दोनों किसी से कम नहीं थे एक मर्दाना जो से भरा हुआ था तो एक मदहोश कर देने वाली जवानी से भरपूर थी,, दोनों का नशा अलग अलग था लेकिन मजा एक ही था,, शुभम का लंड का बगावत के मूड में था वह अपने लिए जगह ढूंढ रहा था,,, उसी से अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह कसके रुचि को अपनी बांहों में भर लिया जिससे उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी टांगों के बीच के उस पतली दरार पर ठोकर मारने लगा,,,, शुभम की ईस हरकत की वजह से रुचि की हालत खराब होने लगी,,, बार-बार शुभम के मोटे लंड काम आता छुपाना उसकी बुर के मुख्य द्वार पर रगड़ खा जा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो लेकिन यह दस्तक इतनी तेज थी कि मानो दरवाजे को तोड़कर अंदर वह शक्स अंदर आ जाएगा,,,
और यही डर रुचि को भी सता रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं,, लंड की जबरदस्त ठोकर रूपी दस्तक से मजबूर होकर वह अपनी बुर का दरवाजा ना खोल दे और शुभम भी अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहा था अपने लंड को उसकी बुर में डालने के लिए क्यों किया वह अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ कर रूचि की बुर पर उसे बराबर रगड़ रहा था जिसका मतलब साफ था कि अब वह उसकी बुर में डालने वाला है,, लेकिन रुची इतनी जल्दी उसे अपने बुर के अंदर नहीं लेना चाहती थी अभी तो पूरी रात बाकी थी और वह पूरा मजा लेना चाहती थी,,, इसलिए अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के लंड को पकड़कर उसे दूर करते हुए बोली,,,,

इतनी भी जल्दी क्या है मेरे राजा अभी तो पूरी रात बाकी है,,,

जैसी आपकी मर्जी रानी साहिबा मैं तो आपका गुलाम हूं जैसा आप कहें वैसा ही होगा,,,( शुभम लगभग हफ्ते हुए रुचि से बोला इतना कहकर वह अपने कपड़े पहनने ही वाला था कि रुचि उसे रोकते हुए बोली,,,)

ऐसे ही रहने दो घर में मेरे और तुम्हारे सिवा तीसरा कोई भी नहीं है इसलिए कपड़ा पहनना जरूरी नहीं है आज मैं और तुम सारी रात नंगे ही रहेंगे तूम यहीं बैठो मैं खाना लेकर आती हूं,,, ( इतना कहकर रुचि रसोई घर की तरफ जाने लगी और सुबह ललचाए आंखों से उसकी मटकती हुई गांड को देखता रह गया और अपने लंड को एक हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,)
Ruchi ki mast gaand se khelta hua shubham


हाय मेरी रानी क्या मस्त गांड है रे तेरी ,,,,(और इतना कहकर वह कुर्सी पर बैठ गया एकदम नंगा रुचि के कहे अनुसार अब दोनों के बीच किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं था )
 
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