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गतान्क से आगे......................
तभी मैने अपने दोनो हाथो से रति की चूत की फांको को थोड़ा फैला कर जब उसकी गुलाबी
रसीली चूत को अपनी नाक से सूँघा तो क्या मदमाती खुश्बू थी मैं तो मम्मी की चूत की मूत की गंध से एक दम
से पागल हो गया और अपनी लंबी जीभ निकाल कर मम्मी की चूत को अपने मूह मे भर कर उसकी चूत के छेद के
रस को चूस चूस कर पीने लगा और मम्मी अया आहह हाय मर गई राज यह क्या कर रहा है बेटे आह आह सीई सीयी
सीईईईईईईईईईईईई अहह.
क्या चिकनी गंद थी मम्मी की और उसकी चूत जितना चिकना पानी छ्चोड़ रही थी मुझे उतना ही मज़ा अपनी मम्मी की
मस्त चूत का रस पीने मे आ रहा था, मैने अपने दोनो हाथो से मम्मी की गंद और चूत को फैला रखा था
और अपनी जीभ निकाल कर खूब चूस चूस कर मम्मी की चूत का पानी चाट रहा था, मम्मी की चूत पिछे से भी
इतनी फूली औट उठी हुई दिखाई दे रही थी और उसकी चूत की फांके खूब फूली हुई थी और जब दोनो फांको को अलग
किया तो उसकी चूत का गुलाबी रस से भरा हुआ छेद बड़ा ही नशीला रस छ्चोड़ रहा था जिसे पी पी कर मैं मस्त हुआ
जा रहा था,
तभी हरिया ने मम्मी का हाथ पकड़ कर उसे सीधे खड़ा कर दिया और अपनी बंदूक की नली उसकी दोनो जाँघो के
बीच डाल कर कहा "चल अपनी टाँगे थोड़ा फैला ले अब यह लोन्डा तेरी फूली हुई चूत तुझे खड़ी करके तेरी चूत
के सामने बैठ कर चुसेगा, हरिया का इतना कहना था कि मम्मी ने झट से मेरे लंड की ओर देखा और फिर अपनी
जाँघो को थोड़ा खोल कर खड़ी हो गई, मम्मी की फूली चूत और चूत के बीच की मोटी सी गहरी लकीर बड़ी मस्त
नज़र आ रही थी और मैने अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत की गहरी लकीर को जीभ से खोलने की कोशिश करते हुए
उसकी चूत को चाटने लगा और मम्मी ने एक हाथ से अपने मोटे मोटे दूध को दबोचते हुए मेरे सर पर हाथ
फेर कर सहलाना शुरू कर दिया और साथ ही ओह आह सीई सीई आह राज आह बेटे आह की आवाज़ निकालने लगी,
मम्मी
वैसे तो काफ़ी फ्रॅंक और निडर थी लेकिन आज वह सिर्फ़ मज़ा ले रही थी और कह कुच्छ नही पा रही थी, अब उसकी शर्म
लगभग ख़तम हो चुकी थी और यह इस बात से पता चलता था कि अब मम्मी अपने हाथो से अपनी चूत की फांको को
फैला कर अपनी चूत मेरे मूह पर दे रही थी और मैं उनकी गंद मे हाथ भर कर उनकी मोटी मोटी जाँघो को
खूब दबाता हुआ उनकी चूत चाट रहा था,
तभी मैने मम्मी की एक टांग पकड़ कर थोड़ा उपर उठाया तो मम्मी ने साइड के पेड़ को पकड़ कर अपनी टांग
उठा कर मेरे कंधे पर रख दी और मैं मम्मी की टाँगो के बीच घुस कर उसकी चूत को खूब फैला कर पागलो
की तरह चाटने लगा और मम्मी ऐसा लग रहा था कि मेरे मूह पर अपनी चूत रख कर बैठ जाना चाहती है वह
जितना वजन अपनी चूत का मेरे मूह पर देती मैं उतनी ही ज़ोर से उसकी चूत को अपने होंठो से दबोच कर उसका रस
चूसने लगता,
मैं अपने दोनो हाथो से कभी उसकी गुदाज गंद मसलता और कभी उसकी मोटी जाँघो को चूमता
सहलाता और उसकी छूट खूब ज़ोर ज़ोर से पीने लगता, मम्मी लगातार आह ओह हाय राज बेटे आह आह ओह बेटे जैसी आवाज़निकाल कर मेरे सर को सहला रही थी, तभी मम्मी ने मेरे मूह को कस कर अपनी चूत से दबोच लिया और मैने
भी उसकी चूत की फांको को खूब चौड़ा करके अपनी जीभ को नुकीली करके उसकी चूत के छेद मे घुसेड़ना शुरू
कर दिया और मम्मी एक दम से आह आह अहः अहह राज मैं गई और फिर मम्मी की चूत ने खूब
सारा रस छ्चोड़ दिया और उसके चेहरे पर खूब चुदस्पान के भाव उभर आए और उसकी मोटी जंघे खड़ी खड़ी
काँपने लगी,
हरिया ने जैसे ही यह नज़ारा देखा वह पास आया और मुस्कुराते हुए कहने लगा, लगता है इस रानी को पेशाब
लगी है तभी यह अपनी चूत को इतना ज़ोर से तेरे मूह से रगड़ रही है, फिर हरिया ने मम्मी के उपर बंदूक तान
कर कहा चलो रानी अब तुम मुतती जाओ और तुम्हारा यह यार तुम्हारी चूत चाटता जाएगा,
हरिया की बात सुन कर मम्मी ने एक बार हरिया को देखा और फिर अपनी नज़रे नीचे कर ली,
राज- मैं आपके हाथ जोड़ता हू अब हमे जाने दो,
हरिया- ला रामू ज़रा मेरी चिलम तो जला और फिर रामू ने उसकी चिलम जला कर दी और हरिया ने एक कश खींचा
और उसकी आँखो मे खून उतर आया और उसने बंदूक मेरे सीने पर तान कर कहा
हरिया- देख लोंडे चुप चाप इस रंडी को बोल कि अभी के अभी मेरे सामने खड़ी खड़ी मुतेगि नही तो आज तेरी जान
तो जाएगी ही साथ मे इसे भी मार कर फेंक देंगे, और फिर हरिया ने बंदूक के ट्रिग्गर पर उंगली रखते हुए
कहा बोल बच्चे दबाऊ ट्रिग्गर,
रति- एक दम से घब राते हुए, नही नही अपनी बंदूक हटा लो तुम जैसा कह रहे हो मैं वैसा ही करूँगी पर
मेरे राज को कुच्छ ना करो,
हरिया- यह हुई ना बात लगता है तुम दोनो मे बड़ा प्यार है, चलो अब शुरू हो जाओ
मैं हरिया का कमीनपन देख कर मस्त हो रहा था और मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था, मैने मम्मी की
दोनो मोटी जाँघो को पकड़ कर उसकी फूली हुई चट को देखा जो पूरी चिकनी नज़र आ रही थी फिर अपनी नज़रे उठा
कर जब मैने मम्मी को देखा तो वह थोड़ा शरमाते हुए अपनी आँखे बंद करके मूतने की कोशिश करने
लगी और मैं उसकी चूत के बिल्कुल सामने मूह करके उसके दाने को धीरे धीरे अपनी उंगली से रगड़ने लगा तभी
मम्मी की चूत से छुल्ल से थोड़ा सा पेशाब निकला और मैने तुरंत अपनी जीभ से मम्मी की चूत चाटना शुरू
कर दिया,
मैने जैसे ही मम्मी की चूत को चटा वैसे ही मम्मी का मूत रुक गया और जब मैने मूह हटाया तो
मम्मी ने थोड़ा और ज़ोर लगाया और उसकी चूत से फिर से थोड़ी सी धार निकलते देख मैने तुरंत उसकी चूत चाटना
शुरू कर दिया, अब मम्मी की चूत से बूँद बूँद मूत निकल रहा था और मैं उसे चाटता जा रहा था,
जब मम्मी
की चूत से मूत बंद हो गया तो मैने उसकी चूत के उस छेद को पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया जहाँ से मम्मी
का मूत निकल रहा था और मम्मी आह आह सीई सीईईईईई आहा राज आह ओह करने लगी , मैं अपनी मम्मी की चूत को खूब कस कस कर चूसने लगा और वह अपनी चूत को मेरे मुँह पर खूब रगड़ रगड़ कर मारने लगी,
मैं मम्मी की गुदा मे अपनी उंगली फसा कर लगभग आधी उंगली उसकी गंद मे फसाए हुए उसकी चूत चूस रहा था,
रति की चूत फूल कर लाल हो चुकी थी और वह पूरी नंगी बहुत ही मस्त नज़र आ रही थी वाकई मे अगर भारी
भरकम बदन और वह भी साँचे मे ढला बिल्कुल कटीला हो तो औरत को सिर्फ़ नंगी देख कर ही मस्ती आ जाती है
बस वही हाल रति को देख कर हम सभी का हो रहा था, मम्मी मेरे मूह से अपनी चूत रगड़ते हुए शायद फिर
से झाड़ चुकी थी इसीलिए अब उससे सीधे खड़ा नही रहा जा रहा था और हरिया भी इस बात को समझ चुका था और
फिर हमे वहाँ काफ़ी वक़्त भी चुका था इसलिए हरिया ने अब मुझे चोदने का इशारा किया और मैं खड़ा हो गया
और मम्मी को अपनी बाँहो मे भर कर उसके रसीले होंठ जिन्हे देख देख कर मेरा रोज पीने का मन होता था,
आज वही रसीले होंठ पीते हुए मैं रति के मोटे मोटे दूध को दुहना शुरू कर दिया और मम्मी मुझसे बुरी
तरह चिपक गई, अब मैं मम्मी के बदन के हर हिस्से को सहलाते हुए उसके मूह मे अपनी जीभ डालने की
कोशिश करने लगा तभी मम्मी ने अपनी जीभ बाहर निकाल ली और मैं उनकी जीभ को अपने मूह मे भर कर
उनका रस चूसने लगा,
मेरी इस हरकत से तो मानो मम्मी पागल हो गई और मेरे लंड को अपने हाथो मे पकड़ कर खुद ही उसे अपनी
चूत की फांको के बीच रगड़ने लगी मेरे लंड का सूपड़ा जब मम्मी के भज्नाशे से रगड़ाती तो हम दोनो को
खूब मज़ा आता और हम दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंठो और जीभ को चूस्ते हुए एक दूसरे के अंगो को
खूब सहला और दबोच रहे थे, मम्मी तो अपनी चूत मेरे लंड से ऐसे रगड़ रही थी जैसे रंडी खड़ी खड़ी ही
मेरे लंड पर चढ़ जाना चाहती हो, मेरे लंड की मोटाई और लंबाई देख देख कर रति की चूत भी खूब फूल रही
थी,
तभी मैने अपने हाथ को मम्मी की कमर के पिछे लेजाकार उसकी चूत को अपने लंड की ओर दबाया तो एक पल
के लिए सचमुच मेरे लंड का सूपड़ा मम्मी की चूत को खोल कर अंदर घुसने लगा और मम्मी ने भी अपनी
गंद का झटका मेरे लंड की ओर मारा और मेरा लंड मम्मी की चूत मे खड़े खड़े ही थोड़ा सा घुस गया,
रति- धीरे से मेरे कान मई, बेटे अब मुझसे नही रहा जाता है प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत मे डाल दे,
राज- मम्मी लेकिन मैं आपका बेटा हू अपना लंड आपकी चूत मे कैसे डाल सकता हू,
रति- आह सीईईईई मैं कुच्छ नही जानती, बस मुझे अब तेरे इस मोटे लंड से अपनी चूत खूब कस कस कर मरानी है और
फिर मम्मी एक दम से नीचे ज़मीन पर बैठ कर लेट जाती है और अपनी जाँघो को खूब फैला कर अपने पेर हवा
मे उपर उठा लेती है, अपनी मम्मी का बड़ा सा फूला हुआ भोसड़ा देख कर मैं और रामू और हरिया अपनी सुध
बुध खो चुके थे, और रति संगमरमर जैसे नंगे और भारी बदन को बेझिझक हमे दिखाती हुई अपनी मोटी
जाँघो को फैला कर अपने हाथो से अपनी चूत और दूध सहलाते हुए मेरे लंड को देखने लगती है,
हरिया- जा लोंडे चढ़ जा उपर और ठोक दे साली को आज कस कर तब तक मैं एक दो कश लगा लेता हू और फिर हरिया
और रामू बैठ कर चिलम पीने लगे और मैं मम्मी की दोनो जाँघो के बीच बैठ कर उसकी चूत को अपने लंड से
रगड़ कर सहलाने लगा और मम्मी आह सीईईई..... बस कर बेटे अब नही रहा जाता, खूब कस कर पेल दे अपना मूसल
अपनी मम्मी की चूत मे और खूब कस कर चोद बेटे अपनी मम्मी को,
मैं मम्मी की बात सुन कर बहुत उत्तेजित हो चुका था और मैने अपने लंड को मम्मी की चूत के छेद मे लगा
कर कस कर धक्का मार दिया और मम्मी के मूह से ओह राज मर गई रे आह कितना मोटा लंड है बेटे तेरा, मेरा
आधे से अधिक लंड मम्मी की चूत मे फसा हुआ था और मम्मी अपनी जाँघो को हवा मे मोड लंड को अपनी
चूत मे अड्जस्ट कर रही थी तभी मैने उनकी चिकनी कमर पकड़ कर एक धक्का और कस कर दे दिया और मेरा
लंड जड़ तक मम्मी की चूत मे उतर गया, और मम्मी मुझसे चिपक कर मेरे गालो को चूमने लगी,
मैने मम्मी के दूध को दबाते हुए धीरे धीरे लेकिन गहराई तक अपने लंड के धक्के अपनी मम्मी की फूली
चूत मे मारना शुरू कर दिया और मम्मी मेरे होंठो को चूमते हुए मेरी पीठ सहलाने लगी, मेरा लंड पूरी
गहराई तक उतर रहा था और मेरे पेडू मे मम्मी के पेडू की रगड़ से उसकी बारीक बारीक बाल मुझे हल्के हल्के
चुभ रहे थे और मेरे अंडकोष रति की गंद के छेद से टकरा रहा था, कुच्छ समय मे ही रति अपनी चूत
उठा उठा कर मेरे लंड से रगड़ने लगी और मेरी स्पीड भी बढ़ गई और मैं अपनी मा को खूब कस कस कर गहराई
तक उसकी चूत मे लंड डाल कर चोद रहा था, रति बिल्कुल पागल हो चुकी थी उसने मुझे अपने सीने से पूरी तरह
चिपकाते हुए मेरे होंठो को चूमने लगी,
मैं जब उसके रसीले होंठो को चूमने जाता तो वह अपनी जीभ बाहर
निकाल देती और मैं उसके मोटे मोटे दूध को कस कर दबाते हुए उसकी रसीली जीभ को अपने होंठो के बीच दबा
कर चूस्ते हुए उसकी चूत मे अपने लंड को दनादन पेलने लगा,
रति ने दोनो घुटनो को मोडते हुए अपनी दोनो टाँगो को हवा मे उठा दिया था और मैं खूब कस कस कर उसकी
चूत मे धक्के मारते हुए उससे बुरी तरह चिपका हुआ था,
हम दोनो की साँसे बहुत तेज हो चुकी थी और हम
मंज़िल के करीब ही जाने वाले थे कि हरिया ने रति के उपर बंदूक तान दी और रति एक दम से रुक गई और मैने भी
अपना ध्यान उस ओर लगाया,
क्रमशः........
गतान्क से आगे......................
तभी मैने अपने दोनो हाथो से रति की चूत की फांको को थोड़ा फैला कर जब उसकी गुलाबी
रसीली चूत को अपनी नाक से सूँघा तो क्या मदमाती खुश्बू थी मैं तो मम्मी की चूत की मूत की गंध से एक दम
से पागल हो गया और अपनी लंबी जीभ निकाल कर मम्मी की चूत को अपने मूह मे भर कर उसकी चूत के छेद के
रस को चूस चूस कर पीने लगा और मम्मी अया आहह हाय मर गई राज यह क्या कर रहा है बेटे आह आह सीई सीयी
सीईईईईईईईईईईईई अहह.
क्या चिकनी गंद थी मम्मी की और उसकी चूत जितना चिकना पानी छ्चोड़ रही थी मुझे उतना ही मज़ा अपनी मम्मी की
मस्त चूत का रस पीने मे आ रहा था, मैने अपने दोनो हाथो से मम्मी की गंद और चूत को फैला रखा था
और अपनी जीभ निकाल कर खूब चूस चूस कर मम्मी की चूत का पानी चाट रहा था, मम्मी की चूत पिछे से भी
इतनी फूली औट उठी हुई दिखाई दे रही थी और उसकी चूत की फांके खूब फूली हुई थी और जब दोनो फांको को अलग
किया तो उसकी चूत का गुलाबी रस से भरा हुआ छेद बड़ा ही नशीला रस छ्चोड़ रहा था जिसे पी पी कर मैं मस्त हुआ
जा रहा था,
तभी हरिया ने मम्मी का हाथ पकड़ कर उसे सीधे खड़ा कर दिया और अपनी बंदूक की नली उसकी दोनो जाँघो के
बीच डाल कर कहा "चल अपनी टाँगे थोड़ा फैला ले अब यह लोन्डा तेरी फूली हुई चूत तुझे खड़ी करके तेरी चूत
के सामने बैठ कर चुसेगा, हरिया का इतना कहना था कि मम्मी ने झट से मेरे लंड की ओर देखा और फिर अपनी
जाँघो को थोड़ा खोल कर खड़ी हो गई, मम्मी की फूली चूत और चूत के बीच की मोटी सी गहरी लकीर बड़ी मस्त
नज़र आ रही थी और मैने अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत की गहरी लकीर को जीभ से खोलने की कोशिश करते हुए
उसकी चूत को चाटने लगा और मम्मी ने एक हाथ से अपने मोटे मोटे दूध को दबोचते हुए मेरे सर पर हाथ
फेर कर सहलाना शुरू कर दिया और साथ ही ओह आह सीई सीई आह राज आह बेटे आह की आवाज़ निकालने लगी,
मम्मी
वैसे तो काफ़ी फ्रॅंक और निडर थी लेकिन आज वह सिर्फ़ मज़ा ले रही थी और कह कुच्छ नही पा रही थी, अब उसकी शर्म
लगभग ख़तम हो चुकी थी और यह इस बात से पता चलता था कि अब मम्मी अपने हाथो से अपनी चूत की फांको को
फैला कर अपनी चूत मेरे मूह पर दे रही थी और मैं उनकी गंद मे हाथ भर कर उनकी मोटी मोटी जाँघो को
खूब दबाता हुआ उनकी चूत चाट रहा था,
तभी मैने मम्मी की एक टांग पकड़ कर थोड़ा उपर उठाया तो मम्मी ने साइड के पेड़ को पकड़ कर अपनी टांग
उठा कर मेरे कंधे पर रख दी और मैं मम्मी की टाँगो के बीच घुस कर उसकी चूत को खूब फैला कर पागलो
की तरह चाटने लगा और मम्मी ऐसा लग रहा था कि मेरे मूह पर अपनी चूत रख कर बैठ जाना चाहती है वह
जितना वजन अपनी चूत का मेरे मूह पर देती मैं उतनी ही ज़ोर से उसकी चूत को अपने होंठो से दबोच कर उसका रस
चूसने लगता,
मैं अपने दोनो हाथो से कभी उसकी गुदाज गंद मसलता और कभी उसकी मोटी जाँघो को चूमता
सहलाता और उसकी छूट खूब ज़ोर ज़ोर से पीने लगता, मम्मी लगातार आह ओह हाय राज बेटे आह आह ओह बेटे जैसी आवाज़निकाल कर मेरे सर को सहला रही थी, तभी मम्मी ने मेरे मूह को कस कर अपनी चूत से दबोच लिया और मैने
भी उसकी चूत की फांको को खूब चौड़ा करके अपनी जीभ को नुकीली करके उसकी चूत के छेद मे घुसेड़ना शुरू
कर दिया और मम्मी एक दम से आह आह अहः अहह राज मैं गई और फिर मम्मी की चूत ने खूब
सारा रस छ्चोड़ दिया और उसके चेहरे पर खूब चुदस्पान के भाव उभर आए और उसकी मोटी जंघे खड़ी खड़ी
काँपने लगी,
हरिया ने जैसे ही यह नज़ारा देखा वह पास आया और मुस्कुराते हुए कहने लगा, लगता है इस रानी को पेशाब
लगी है तभी यह अपनी चूत को इतना ज़ोर से तेरे मूह से रगड़ रही है, फिर हरिया ने मम्मी के उपर बंदूक तान
कर कहा चलो रानी अब तुम मुतती जाओ और तुम्हारा यह यार तुम्हारी चूत चाटता जाएगा,
हरिया की बात सुन कर मम्मी ने एक बार हरिया को देखा और फिर अपनी नज़रे नीचे कर ली,
राज- मैं आपके हाथ जोड़ता हू अब हमे जाने दो,
हरिया- ला रामू ज़रा मेरी चिलम तो जला और फिर रामू ने उसकी चिलम जला कर दी और हरिया ने एक कश खींचा
और उसकी आँखो मे खून उतर आया और उसने बंदूक मेरे सीने पर तान कर कहा
हरिया- देख लोंडे चुप चाप इस रंडी को बोल कि अभी के अभी मेरे सामने खड़ी खड़ी मुतेगि नही तो आज तेरी जान
तो जाएगी ही साथ मे इसे भी मार कर फेंक देंगे, और फिर हरिया ने बंदूक के ट्रिग्गर पर उंगली रखते हुए
कहा बोल बच्चे दबाऊ ट्रिग्गर,
रति- एक दम से घब राते हुए, नही नही अपनी बंदूक हटा लो तुम जैसा कह रहे हो मैं वैसा ही करूँगी पर
मेरे राज को कुच्छ ना करो,
हरिया- यह हुई ना बात लगता है तुम दोनो मे बड़ा प्यार है, चलो अब शुरू हो जाओ
मैं हरिया का कमीनपन देख कर मस्त हो रहा था और मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था, मैने मम्मी की
दोनो मोटी जाँघो को पकड़ कर उसकी फूली हुई चट को देखा जो पूरी चिकनी नज़र आ रही थी फिर अपनी नज़रे उठा
कर जब मैने मम्मी को देखा तो वह थोड़ा शरमाते हुए अपनी आँखे बंद करके मूतने की कोशिश करने
लगी और मैं उसकी चूत के बिल्कुल सामने मूह करके उसके दाने को धीरे धीरे अपनी उंगली से रगड़ने लगा तभी
मम्मी की चूत से छुल्ल से थोड़ा सा पेशाब निकला और मैने तुरंत अपनी जीभ से मम्मी की चूत चाटना शुरू
कर दिया,
मैने जैसे ही मम्मी की चूत को चटा वैसे ही मम्मी का मूत रुक गया और जब मैने मूह हटाया तो
मम्मी ने थोड़ा और ज़ोर लगाया और उसकी चूत से फिर से थोड़ी सी धार निकलते देख मैने तुरंत उसकी चूत चाटना
शुरू कर दिया, अब मम्मी की चूत से बूँद बूँद मूत निकल रहा था और मैं उसे चाटता जा रहा था,
जब मम्मी
की चूत से मूत बंद हो गया तो मैने उसकी चूत के उस छेद को पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया जहाँ से मम्मी
का मूत निकल रहा था और मम्मी आह आह सीई सीईईईईई आहा राज आह ओह करने लगी , मैं अपनी मम्मी की चूत को खूब कस कस कर चूसने लगा और वह अपनी चूत को मेरे मुँह पर खूब रगड़ रगड़ कर मारने लगी,
मैं मम्मी की गुदा मे अपनी उंगली फसा कर लगभग आधी उंगली उसकी गंद मे फसाए हुए उसकी चूत चूस रहा था,
रति की चूत फूल कर लाल हो चुकी थी और वह पूरी नंगी बहुत ही मस्त नज़र आ रही थी वाकई मे अगर भारी
भरकम बदन और वह भी साँचे मे ढला बिल्कुल कटीला हो तो औरत को सिर्फ़ नंगी देख कर ही मस्ती आ जाती है
बस वही हाल रति को देख कर हम सभी का हो रहा था, मम्मी मेरे मूह से अपनी चूत रगड़ते हुए शायद फिर
से झाड़ चुकी थी इसीलिए अब उससे सीधे खड़ा नही रहा जा रहा था और हरिया भी इस बात को समझ चुका था और
फिर हमे वहाँ काफ़ी वक़्त भी चुका था इसलिए हरिया ने अब मुझे चोदने का इशारा किया और मैं खड़ा हो गया
और मम्मी को अपनी बाँहो मे भर कर उसके रसीले होंठ जिन्हे देख देख कर मेरा रोज पीने का मन होता था,
आज वही रसीले होंठ पीते हुए मैं रति के मोटे मोटे दूध को दुहना शुरू कर दिया और मम्मी मुझसे बुरी
तरह चिपक गई, अब मैं मम्मी के बदन के हर हिस्से को सहलाते हुए उसके मूह मे अपनी जीभ डालने की
कोशिश करने लगा तभी मम्मी ने अपनी जीभ बाहर निकाल ली और मैं उनकी जीभ को अपने मूह मे भर कर
उनका रस चूसने लगा,
मेरी इस हरकत से तो मानो मम्मी पागल हो गई और मेरे लंड को अपने हाथो मे पकड़ कर खुद ही उसे अपनी
चूत की फांको के बीच रगड़ने लगी मेरे लंड का सूपड़ा जब मम्मी के भज्नाशे से रगड़ाती तो हम दोनो को
खूब मज़ा आता और हम दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंठो और जीभ को चूस्ते हुए एक दूसरे के अंगो को
खूब सहला और दबोच रहे थे, मम्मी तो अपनी चूत मेरे लंड से ऐसे रगड़ रही थी जैसे रंडी खड़ी खड़ी ही
मेरे लंड पर चढ़ जाना चाहती हो, मेरे लंड की मोटाई और लंबाई देख देख कर रति की चूत भी खूब फूल रही
थी,
तभी मैने अपने हाथ को मम्मी की कमर के पिछे लेजाकार उसकी चूत को अपने लंड की ओर दबाया तो एक पल
के लिए सचमुच मेरे लंड का सूपड़ा मम्मी की चूत को खोल कर अंदर घुसने लगा और मम्मी ने भी अपनी
गंद का झटका मेरे लंड की ओर मारा और मेरा लंड मम्मी की चूत मे खड़े खड़े ही थोड़ा सा घुस गया,
रति- धीरे से मेरे कान मई, बेटे अब मुझसे नही रहा जाता है प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत मे डाल दे,
राज- मम्मी लेकिन मैं आपका बेटा हू अपना लंड आपकी चूत मे कैसे डाल सकता हू,
रति- आह सीईईईई मैं कुच्छ नही जानती, बस मुझे अब तेरे इस मोटे लंड से अपनी चूत खूब कस कस कर मरानी है और
फिर मम्मी एक दम से नीचे ज़मीन पर बैठ कर लेट जाती है और अपनी जाँघो को खूब फैला कर अपने पेर हवा
मे उपर उठा लेती है, अपनी मम्मी का बड़ा सा फूला हुआ भोसड़ा देख कर मैं और रामू और हरिया अपनी सुध
बुध खो चुके थे, और रति संगमरमर जैसे नंगे और भारी बदन को बेझिझक हमे दिखाती हुई अपनी मोटी
जाँघो को फैला कर अपने हाथो से अपनी चूत और दूध सहलाते हुए मेरे लंड को देखने लगती है,
हरिया- जा लोंडे चढ़ जा उपर और ठोक दे साली को आज कस कर तब तक मैं एक दो कश लगा लेता हू और फिर हरिया
और रामू बैठ कर चिलम पीने लगे और मैं मम्मी की दोनो जाँघो के बीच बैठ कर उसकी चूत को अपने लंड से
रगड़ कर सहलाने लगा और मम्मी आह सीईईई..... बस कर बेटे अब नही रहा जाता, खूब कस कर पेल दे अपना मूसल
अपनी मम्मी की चूत मे और खूब कस कर चोद बेटे अपनी मम्मी को,
मैं मम्मी की बात सुन कर बहुत उत्तेजित हो चुका था और मैने अपने लंड को मम्मी की चूत के छेद मे लगा
कर कस कर धक्का मार दिया और मम्मी के मूह से ओह राज मर गई रे आह कितना मोटा लंड है बेटे तेरा, मेरा
आधे से अधिक लंड मम्मी की चूत मे फसा हुआ था और मम्मी अपनी जाँघो को हवा मे मोड लंड को अपनी
चूत मे अड्जस्ट कर रही थी तभी मैने उनकी चिकनी कमर पकड़ कर एक धक्का और कस कर दे दिया और मेरा
लंड जड़ तक मम्मी की चूत मे उतर गया, और मम्मी मुझसे चिपक कर मेरे गालो को चूमने लगी,
मैने मम्मी के दूध को दबाते हुए धीरे धीरे लेकिन गहराई तक अपने लंड के धक्के अपनी मम्मी की फूली
चूत मे मारना शुरू कर दिया और मम्मी मेरे होंठो को चूमते हुए मेरी पीठ सहलाने लगी, मेरा लंड पूरी
गहराई तक उतर रहा था और मेरे पेडू मे मम्मी के पेडू की रगड़ से उसकी बारीक बारीक बाल मुझे हल्के हल्के
चुभ रहे थे और मेरे अंडकोष रति की गंद के छेद से टकरा रहा था, कुच्छ समय मे ही रति अपनी चूत
उठा उठा कर मेरे लंड से रगड़ने लगी और मेरी स्पीड भी बढ़ गई और मैं अपनी मा को खूब कस कस कर गहराई
तक उसकी चूत मे लंड डाल कर चोद रहा था, रति बिल्कुल पागल हो चुकी थी उसने मुझे अपने सीने से पूरी तरह
चिपकाते हुए मेरे होंठो को चूमने लगी,
मैं जब उसके रसीले होंठो को चूमने जाता तो वह अपनी जीभ बाहर
निकाल देती और मैं उसके मोटे मोटे दूध को कस कर दबाते हुए उसकी रसीली जीभ को अपने होंठो के बीच दबा
कर चूस्ते हुए उसकी चूत मे अपने लंड को दनादन पेलने लगा,
रति ने दोनो घुटनो को मोडते हुए अपनी दोनो टाँगो को हवा मे उठा दिया था और मैं खूब कस कस कर उसकी
चूत मे धक्के मारते हुए उससे बुरी तरह चिपका हुआ था,
मंज़िल के करीब ही जाने वाले थे कि हरिया ने रति के उपर बंदूक तान दी और रति एक दम से रुक गई और मैने भी
अपना ध्यान उस ओर लगाया,
क्रमशः........