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गतान्क से आगे......................
सुधिया- यह आप क्या कह रहे है बाबा यह मैं कैसे कर सकती हू
राज- सोच लो बेटी इसके अलावा कोई उपाय नही है और यह संकट भी इसलिए तुझ पर आया है क्यो कि तूने अपने बेटे के साथ अपनी काम वासना पूरी की है और फिर मैं ज़ोर से चिल्लाया, बता कि है कि नही अपने बेटे के साथ अपनी वासना की तृप्ति,
सुधिया सीधे मेरे पेरो मे गिर गई और रोने लगी,
सुधिया- बाबा मुझे माफ़ कर दीजिए मुझसे ग़लती हो गई
राज- नही बेटी तुझे पछटाने की ज़रूरत नही है बस मैने जो उपाय बताया है वह कर लेना तेरा बेटा लंबी उम्र प्राप्त कर लेगा,
सुधिया- पर बाबा अगर मुझे सुबह वहाँ कोई नही मिला तो
राज- रामू की मा के सवाल ने वाकई मेरी गंद फाड़ दी मैं सोचने लगा क्या जवाब दू फिर मैने उससे कहा यह तुमने बड़ा ही बुद्धिमानी का सवाल किया है जाओ हमारे लिए जल लेकर आओ हम अभी ध्यान लगा कर कुछ सोचते है और जैसे ही सुधिया उठ कर जाने लगी उसकी घाघरे मे मटकते गुदाज चूतादो की हर्कतो ने मेरे लोदे को तान कर रख दिया,
मैने मन मे सोचा इसकी गुदाज मोटी गंद मारने मे तो मज़ा आ जाएगा बस फिर जैसे ही सुधिया पानी लेकर लोटी मैने जल लेकर उसे वही अपने सामने बैठने को कहा जब वह बैठ गई तो उसके मोटे-मोटे दूध पूरी तरह मुझे नज़र आने लगे मेरा तो दिल उसके मोटे-मोटे दूध को देख कर मस्त हो गया मैने उसके उपर जल च्चिड़क कर अपनी आँखे बंद कर ली और अपने होंठो से बुदबुदाने लगा उसके बाद कुछ देर मे मैने अपनी आँखे खोली और कहा
राज- बेटी सच बताओ तुमने कई बार अपने बेटे से संभोग किया है ना
सुधिया- मेरी बात सुन कर थोड़ा शर्मा गई और हाँ मे अपनी गर्दन हिला दी
राज- बेटी कल तुम्हे एक साथ दो आदमियो के साथ संभोग करना होगा
सुधिया- आश्चर्या से मेरे मूह की ओर देखने लगी
मैं उसके अंदर के हालत समझ गया और मैने कहा क्या तुमने कभी एक साथ दो लोगो के साथ संभोग नही किया है ना
सुधिया- शायद मेरी बातो से गरम हो रही थी और अपने गले का थूक गटकते हुए कहने लगी नही बाबा जी मैने दो लोगो के साथ कभी नही किया,
राज- बेटी कल तुझे जो भी पहला आदमी जल लेकर आता हुआ नज़र आए उससे तुझे संभोग करना है जब वह तुझे नंगी देख कर तुझे अपनी बाँहो मे भर ले तब तू थोड़ा ना नुकुर करके उससे संभोग करेगी जब वह तुझे भोग रहा होगा तब तुझे इधर उधर ध्यान रख कर देखना होगा और जब तुझे कोई दूसरा आदमी नज़र आने तक पहले वाले आदमी को भेज कर उस दूसरे वाले आदमी को भी अपने पास बुलवाना होगा और फिर उस आदमी से भी तुझे संभोग करना होगा
लेकिन ध्यान रहे दोनो आदमी एक साथ तेरे दोनो अंगो मे अपना लिंग प्रवेश कराएगे तभी तू दोष मुक्त होगी, और यह भी ध्यान रखना दूसरे आदमी के हाथ मे भी जल का लोटा होना चाहिए,
सुधिया- मेरी बातो बड़े ध्यान से सुन रही थी फिर मैने उसके गोरे गालो पर हाथ फेरते हुए कहा जा बेटी मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है अब मुझे इजाज़त दे मेरा काम पूरा हुआ अब अपने घर को बचाने की जवाबदारी तेरी है उसके बाद सुधिया ने मेरे पेर च्छुए और मैं उसके घर से बाहर आ गया,
जब मैं बाहर आया तो आसपास देखने के बाद मैं उस ओर चल दिया जहाँ हरिया से मिलना था उसके बाद हरिया मुझे साथ लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा,
हरिया- उत्सुकतावश मुझसे पुच्छने लगा क्या हुआ बाबूजी बात बन गई क्या
राज- पहले मुझे एक मस्त चिलम बना कर पिलाओ फिर मैं बताता हू क्या हुआ उसके बाद मैं और हरिया पेड़ की छाया मे बैठ गये और हम दोनो दम मारने लगे,
हरिया- अब बताओ भी बाबू जी क्या बात हुई सुधिया भाभी से
राज- मुस्कुराते हुए तुम्हारा काम हो गया है हरिया लेकिन मुझे भी तुम्हारे साथ सुधिया को चोदना होगा,
हरिया- लेकिन वह कैसे
राज- फिर मैने हरिया को सारी बात बता दी और उसे समझा दिया कि सुबह 5 बजे हम दोनो को पास वाले तालाब पर चलना होगा,
हरिया मेरी बात सुन कर खुशी से पागल हो गया और बोला बाबू जी आज से आप हमारे गुरु हुए जो आप कहेगे हम मानेगे,
राज- अरे हमे गुरु ना बनाओ और अब हमे अपने घर ले चलो और ज़रा अपनी बीबी के हाथ की चाइ ही पिलवा दो
हरिया- क्यो नही बाबू जी आपने तो हमे धन्य कर दिया बस एक बार हम सुधिया भौजी को चोद ले फिर देखना जब मन होगा उसकी मोटी गंद मार लिया करेगे,
हम दोनो बाते करते हुए हरिया के घर पहुच गये, रुक्मणी ने दरवाजा खोला और हरिया ने घर मे घुसते हुए मुझसे कहा आओ बाबू जी
उसने मुझसे अपनी बीबी के सामने बाबूजी कहा तो मैने हरिया को घूर कर देखा तो कहने लगा मेरा मतलब है बाबा जी आइए अंदर बैठिए
हरिया- अरे सुनती हो जाओ बाबा जी के लिए पानी की व्यवस्था करो तुम नही जानती यह बहुत पहुचे हुए महात्मा है,
मैने हरिया को इशारे से बुलाया और उससे कहा
राज - हरिया तुम अब यहाँ से सीधे खेतो मे चले जाओ और वहाँ जाकर रामू रमिया और चंदा तीनो को यहाँ भेज दो और अपनी पत्नी को समझा दो कि आज तुम खेतो मे ही सो जाओगे,
हरिया- लेकिन रामू को यहाँ क्यो बुला रहे हो
राज- अरे तुम समझ नही रहे हो मैने तुम्हारा काम तो कर दिया अब मैं भी तो थोड़ा रमिया के साथ मस्ती मार लू, मैं किसी भी तरह रामू और तुम्हारी बीबी और चंदा को बातो मे लगा कर अंदर ले जाकर रमिया को चोद लूँगा और उसके बाद शाम को रामू उसे लेकर अपने घर चला जाएगा और मैं तुम्हारे घर पर रात गुज़ार लूँगा,
हरिया- लेकिन बाबूजी मेरा मतलब है बाबाजी मैं खेतो मे रात भर तो बोर हो जाउन्गा कोई और आइडिया बताओ ना जिससे मैं भी रात को मस्त रहू और आप भी मज़ा ले लो, मैं कुछ सोचते हुए अच्छा एक काम करो रात को खाने के समय तुम घर आ जाना और फिर चंदा को लेकर खेतो मे चले जाना इस तरह तुम रात भर चंदा को चोदना और फिर सुबह-सुबह तो तुम्हे सुधिया चोदने को मिल ही जाएगी,
हरिया- यह बात एक दम फिट है बाबू जी मैं जाता हू और फिर हरिया ने रुक्मणी को समझा दिया की बाबाजी बहुत पहुचे हुए है इनका शाम तक ख्याल रखना मैं खाने पर आउन्गा और रात को बाबा जी के लिए बढ़िया सा खाना तैयार कर लेना, हरिया के जाने के बाद रुक्मणी मेरे लिए पानी लेकर आई तब मैने उसके बदन पर नज़र डाली, रुक्मणी भी भरे बदन की औरत थी और उसकी भी गंद और चुचिया खूब बड़ी नज़र आ रही थी हालाकी रामू की मा से वह कम उमर की लग रही थी और पहनावा भी उसका साडी और ब्लौज था कुल मिला कर मस्त चोदने लायक माल था,
राज- रुक्मणी बेटी तुम्हारे जल मे मिठास है लेकिन तुम्हारे मन मे एक बहुत ही बड़ा भंवर है जिसमे कई बाते समाई हुई है और तुम्हारा मन बहुत चंचल है, तुम्हारी बड़ी कोशिशो से तुम्हारी बड़ी बेटी का घर वापस बस सका है लेकिन एक चीज़ है जो तुम्हारे घर मे परेशानी बन कर कष्ट देने वाली है
रुक्मणी - वह क्या बाबा जी
राज- तुम ने पराए मर्दो के साथ संभोग किया है इसलिए तुम्हारी बड़ी बेटी के जीवन मे समस्या आई लेकिन अब तुम लगातार पराए मर्द से संभोग करती रहती हो जिसके चलते तुम्हारी बेटी चंदा पर भी संकट आने की संभावना बढ़ गई है,
मेरी बाते सुन कर रुक्मणी के माथे पर पसीना आ गया और वह अपनी नज़रे नीचे करके मेरे सामने बैठ गई और कहने लगी नही -नही बाबा जी मैने कभी किसी के साथ ऐसा कुछ नही किया है
राज- चिल्लाते हुए, चुप रहो लड़की वरना अभी श्राप दे दूँगा, मेरे सामने झूठ कतई नही टिक सकता, अगर तुमने तुरंत सच स्वीकार नही किया तो हम रुष्ठ हो जाएगे और यदि हम नाराज़ हुए तो तुम जानती हो क्या हो सकता है,
रुक्मणी- मेरे पेरो को पकड़ कर, मुझे माफ़ कर दो बाबा जी मैने आपसे झूठ कहा आप बिल्कुल सच कह रहे है मैने यह अपराध किया है, मुझे माफ़ कर दीजिए,
राज- बेटी माफी नही इस समश्या का निवारण लेकर हम तेरे दर पे आए है लेकिन उसके लिए तुझे हमारे बताए अनुसार कर्म करना पड़ेगा तभी तेरी बेटी दोष मुक्त हो पाएगी,
रुक्मणी- मैं सब कुछ करने को तैयार हू बाबा जी आप बताइए मुझे क्या करना होगा
राज- बेटी अभी तुझे अपनी बेटी चंदा को लेकर उसी पुरुष के साथ बैठना होगा लेकिन ध्यान रहे तुम तीनो पूरी तरह नंगे होने चाहिए और फिर वही आदमी जिसके साथ तुम संभोग करती हो उसके साथ मिलकर अपनी बेटी चंदा को उत्तेजित करना होगा और फिर अपने हाथो से उस पराए मर्द के लिंग को अपनी बेटी के अंदर प्रवेश करवाना होगा, और फिर तुम तीनो को सामूहिक संभोग करना होगा,
रुक्मणी- लेकिन बाबा यह कैसे होगा आप जिस मर्द की बात कर रहे है वह तो कही दूर खेतो मे काम कर रहा होगा और मेरी बेटी चंदा भी यहाँ नही है, फिर आप कह रहे हो कि यह सब अभी करना होगा,
राज- बेटी हम हवा मे बाते नही करते है हम अभी अपने मन्त्र की शक्ति से उन दोनो आत्माओ को यहाँ जल्दी ही बुला लेते है और फिर मैं ऐसे ही उसे दिखाने के लिए मन्त्र पढ़ने लगा और करीब 10 मिनिट के बाद रामू रमिया और चंदा एक दम से घर के अंदर घुस आए जिन्हे देखते ही रुक्मणी की आँखे फटी की फटी ही रह गई,
रामू ने मुझे देखते ही मुस्कुरकर प्रणाम किया और मैने उसे आशीर्वाद दिया,
राज- क्यो रुक्मणी बेटी अब तो समझ गई होगी तुम कि बाबा क्यो पधारे है तुम्हारे यहाँ और तुम्हारे घर पर दोष है कि नही
रुक्मणी- मेरे पेरो मे गिर कर आप धन्य है बाबा जी वाकई आप बहुत पहुचे हुए महात्मा है,
रामू मुस्कुरकर मेरी ओर देखने लगा और मैने प्यार से मेरे पेरो मे झुकी हुई रुक्मणी की ब्लौज मे से झँकती नंगी पीठ को सहलाते हुए कहा बेटी आज हम तेरे सारे कष्ट दूर कर देंगे और मेरी आक्टिंग देख कर रामू मुस्कुराकर मुझे सलाम करने लगा,
राज- अब जाओ रुक्मणी और भीतर के कमरे मे अपनी बेटी चंदा को ले जाओ और जैसी क्रिया मैने बताई है उसकी तैयारी करो हम इस बालक को शुद्ध करके अंदर भेजते है, रुक्मणी के अंदर जाते ही रामू ने रमिया को कहा तू जाकर वहाँ बैठ मैं बाबा जी से तेरे बारे मे भी कुछ पुच्छ लू कही तुझे कोई समस्या तो नही है,
रामू की बात सुन कर रमिया मुस्कुराते हुए सामने जाकर बैठ गई, मैने जब रमिया को देखा तो मुझे लोंड़िया बड़ी चुदासी नज़र आ रही थी,
रामू- हाँ बाबूजी अब बोलिए क्या करना है
राज- रामू तेरा काम हो गया है तू जाकर दोनो मा बेटी को तबीयत से सारी दोपहर चोदना और थोड़ा रमिया को समझा देना कि बाबा जी जैसा कहे वैसे ही करना, शाम को 6 बजे तक जितना चाहे चोद लेना पर ध्यान रहे शुरुआत चंदा को चोदने से करना और दोनो मिलकर पहले चंदा को खूब चूसना चाटना ताकि रुक्मणी को कोई असर ना हो, और रुक्मणी से यह ना कहना कि तुझे हरिया ने यहाँ भेजा है,
रामू- मैं सब समझ गया साहेब जी लेकिन हरिया काका अब इधर आएगा तो नही
राज- नही वह रात से पहले नही आएगा तू आराम से मस्ती मार अब सुन रुक्मणी को मेरे पास भेज और तू जाकर कमरे मे ज़मीन पर चोदने के लिए बढ़िया सा बिस्तेर लगा दे,
रामू अंदर जाकर रुक्मणी को मेरे पास भेजता है
रुक्मणी- हाथ जोड़ कर जी बाबा जी आपने बुलाया
राज- देखो बेटी यह सब के पहले तुम सभी को शुद्ध होना पड़ेगा और रामू तुम सभी को जल से शुद्ध करके मेरे पास बारी-बारी से भेजेगा और फिर मैं जल के बाद तेल से तुम सभी के बदन को पवित्र करूँगा लेकिन पहले तुम और चंदा दोनो मिल कर रमिया को पूरी नंगी करके उसे पानी से अच्छी तरह से नहला कर पूरी नंगी ही मेरे पास भेज दो, तब रुक्मणी रमिया को लेकर सामने आँगन मे जहाँ रुक्मणी और चंदा रोज खुल्ले मे बैठ कर नहाती थी वहाँ बैठा कर रमिया का घाघरा और चोली उतार कर अलग कर देती है मैं रमिया को नंगी देखते ही उत्तेजित हो गया और उसकी कमसिन उठी हुई जवानी और मोटे-मोटे ठोस दूध को देख कर मेरे मूह मे पानी आ गया,
क्रमशः........
गतान्क से आगे......................
सुधिया- यह आप क्या कह रहे है बाबा यह मैं कैसे कर सकती हू
राज- सोच लो बेटी इसके अलावा कोई उपाय नही है और यह संकट भी इसलिए तुझ पर आया है क्यो कि तूने अपने बेटे के साथ अपनी काम वासना पूरी की है और फिर मैं ज़ोर से चिल्लाया, बता कि है कि नही अपने बेटे के साथ अपनी वासना की तृप्ति,
सुधिया सीधे मेरे पेरो मे गिर गई और रोने लगी,
सुधिया- बाबा मुझे माफ़ कर दीजिए मुझसे ग़लती हो गई
राज- नही बेटी तुझे पछटाने की ज़रूरत नही है बस मैने जो उपाय बताया है वह कर लेना तेरा बेटा लंबी उम्र प्राप्त कर लेगा,
सुधिया- पर बाबा अगर मुझे सुबह वहाँ कोई नही मिला तो
राज- रामू की मा के सवाल ने वाकई मेरी गंद फाड़ दी मैं सोचने लगा क्या जवाब दू फिर मैने उससे कहा यह तुमने बड़ा ही बुद्धिमानी का सवाल किया है जाओ हमारे लिए जल लेकर आओ हम अभी ध्यान लगा कर कुछ सोचते है और जैसे ही सुधिया उठ कर जाने लगी उसकी घाघरे मे मटकते गुदाज चूतादो की हर्कतो ने मेरे लोदे को तान कर रख दिया,
मैने मन मे सोचा इसकी गुदाज मोटी गंद मारने मे तो मज़ा आ जाएगा बस फिर जैसे ही सुधिया पानी लेकर लोटी मैने जल लेकर उसे वही अपने सामने बैठने को कहा जब वह बैठ गई तो उसके मोटे-मोटे दूध पूरी तरह मुझे नज़र आने लगे मेरा तो दिल उसके मोटे-मोटे दूध को देख कर मस्त हो गया मैने उसके उपर जल च्चिड़क कर अपनी आँखे बंद कर ली और अपने होंठो से बुदबुदाने लगा उसके बाद कुछ देर मे मैने अपनी आँखे खोली और कहा
राज- बेटी सच बताओ तुमने कई बार अपने बेटे से संभोग किया है ना
सुधिया- मेरी बात सुन कर थोड़ा शर्मा गई और हाँ मे अपनी गर्दन हिला दी
राज- बेटी कल तुम्हे एक साथ दो आदमियो के साथ संभोग करना होगा
सुधिया- आश्चर्या से मेरे मूह की ओर देखने लगी
मैं उसके अंदर के हालत समझ गया और मैने कहा क्या तुमने कभी एक साथ दो लोगो के साथ संभोग नही किया है ना
सुधिया- शायद मेरी बातो से गरम हो रही थी और अपने गले का थूक गटकते हुए कहने लगी नही बाबा जी मैने दो लोगो के साथ कभी नही किया,
राज- बेटी कल तुझे जो भी पहला आदमी जल लेकर आता हुआ नज़र आए उससे तुझे संभोग करना है जब वह तुझे नंगी देख कर तुझे अपनी बाँहो मे भर ले तब तू थोड़ा ना नुकुर करके उससे संभोग करेगी जब वह तुझे भोग रहा होगा तब तुझे इधर उधर ध्यान रख कर देखना होगा और जब तुझे कोई दूसरा आदमी नज़र आने तक पहले वाले आदमी को भेज कर उस दूसरे वाले आदमी को भी अपने पास बुलवाना होगा और फिर उस आदमी से भी तुझे संभोग करना होगा
लेकिन ध्यान रहे दोनो आदमी एक साथ तेरे दोनो अंगो मे अपना लिंग प्रवेश कराएगे तभी तू दोष मुक्त होगी, और यह भी ध्यान रखना दूसरे आदमी के हाथ मे भी जल का लोटा होना चाहिए,
सुधिया- मेरी बातो बड़े ध्यान से सुन रही थी फिर मैने उसके गोरे गालो पर हाथ फेरते हुए कहा जा बेटी मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है अब मुझे इजाज़त दे मेरा काम पूरा हुआ अब अपने घर को बचाने की जवाबदारी तेरी है उसके बाद सुधिया ने मेरे पेर च्छुए और मैं उसके घर से बाहर आ गया,
जब मैं बाहर आया तो आसपास देखने के बाद मैं उस ओर चल दिया जहाँ हरिया से मिलना था उसके बाद हरिया मुझे साथ लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा,
हरिया- उत्सुकतावश मुझसे पुच्छने लगा क्या हुआ बाबूजी बात बन गई क्या
राज- पहले मुझे एक मस्त चिलम बना कर पिलाओ फिर मैं बताता हू क्या हुआ उसके बाद मैं और हरिया पेड़ की छाया मे बैठ गये और हम दोनो दम मारने लगे,
हरिया- अब बताओ भी बाबू जी क्या बात हुई सुधिया भाभी से
राज- मुस्कुराते हुए तुम्हारा काम हो गया है हरिया लेकिन मुझे भी तुम्हारे साथ सुधिया को चोदना होगा,
हरिया- लेकिन वह कैसे
राज- फिर मैने हरिया को सारी बात बता दी और उसे समझा दिया कि सुबह 5 बजे हम दोनो को पास वाले तालाब पर चलना होगा,
हरिया मेरी बात सुन कर खुशी से पागल हो गया और बोला बाबू जी आज से आप हमारे गुरु हुए जो आप कहेगे हम मानेगे,
राज- अरे हमे गुरु ना बनाओ और अब हमे अपने घर ले चलो और ज़रा अपनी बीबी के हाथ की चाइ ही पिलवा दो
हरिया- क्यो नही बाबू जी आपने तो हमे धन्य कर दिया बस एक बार हम सुधिया भौजी को चोद ले फिर देखना जब मन होगा उसकी मोटी गंद मार लिया करेगे,
हम दोनो बाते करते हुए हरिया के घर पहुच गये, रुक्मणी ने दरवाजा खोला और हरिया ने घर मे घुसते हुए मुझसे कहा आओ बाबू जी
उसने मुझसे अपनी बीबी के सामने बाबूजी कहा तो मैने हरिया को घूर कर देखा तो कहने लगा मेरा मतलब है बाबा जी आइए अंदर बैठिए
हरिया- अरे सुनती हो जाओ बाबा जी के लिए पानी की व्यवस्था करो तुम नही जानती यह बहुत पहुचे हुए महात्मा है,
मैने हरिया को इशारे से बुलाया और उससे कहा
राज - हरिया तुम अब यहाँ से सीधे खेतो मे चले जाओ और वहाँ जाकर रामू रमिया और चंदा तीनो को यहाँ भेज दो और अपनी पत्नी को समझा दो कि आज तुम खेतो मे ही सो जाओगे,
हरिया- लेकिन रामू को यहाँ क्यो बुला रहे हो
राज- अरे तुम समझ नही रहे हो मैने तुम्हारा काम तो कर दिया अब मैं भी तो थोड़ा रमिया के साथ मस्ती मार लू, मैं किसी भी तरह रामू और तुम्हारी बीबी और चंदा को बातो मे लगा कर अंदर ले जाकर रमिया को चोद लूँगा और उसके बाद शाम को रामू उसे लेकर अपने घर चला जाएगा और मैं तुम्हारे घर पर रात गुज़ार लूँगा,
हरिया- लेकिन बाबूजी मेरा मतलब है बाबाजी मैं खेतो मे रात भर तो बोर हो जाउन्गा कोई और आइडिया बताओ ना जिससे मैं भी रात को मस्त रहू और आप भी मज़ा ले लो, मैं कुछ सोचते हुए अच्छा एक काम करो रात को खाने के समय तुम घर आ जाना और फिर चंदा को लेकर खेतो मे चले जाना इस तरह तुम रात भर चंदा को चोदना और फिर सुबह-सुबह तो तुम्हे सुधिया चोदने को मिल ही जाएगी,
हरिया- यह बात एक दम फिट है बाबू जी मैं जाता हू और फिर हरिया ने रुक्मणी को समझा दिया की बाबाजी बहुत पहुचे हुए है इनका शाम तक ख्याल रखना मैं खाने पर आउन्गा और रात को बाबा जी के लिए बढ़िया सा खाना तैयार कर लेना, हरिया के जाने के बाद रुक्मणी मेरे लिए पानी लेकर आई तब मैने उसके बदन पर नज़र डाली, रुक्मणी भी भरे बदन की औरत थी और उसकी भी गंद और चुचिया खूब बड़ी नज़र आ रही थी हालाकी रामू की मा से वह कम उमर की लग रही थी और पहनावा भी उसका साडी और ब्लौज था कुल मिला कर मस्त चोदने लायक माल था,
राज- रुक्मणी बेटी तुम्हारे जल मे मिठास है लेकिन तुम्हारे मन मे एक बहुत ही बड़ा भंवर है जिसमे कई बाते समाई हुई है और तुम्हारा मन बहुत चंचल है, तुम्हारी बड़ी कोशिशो से तुम्हारी बड़ी बेटी का घर वापस बस सका है लेकिन एक चीज़ है जो तुम्हारे घर मे परेशानी बन कर कष्ट देने वाली है
रुक्मणी - वह क्या बाबा जी
राज- तुम ने पराए मर्दो के साथ संभोग किया है इसलिए तुम्हारी बड़ी बेटी के जीवन मे समस्या आई लेकिन अब तुम लगातार पराए मर्द से संभोग करती रहती हो जिसके चलते तुम्हारी बेटी चंदा पर भी संकट आने की संभावना बढ़ गई है,
मेरी बाते सुन कर रुक्मणी के माथे पर पसीना आ गया और वह अपनी नज़रे नीचे करके मेरे सामने बैठ गई और कहने लगी नही -नही बाबा जी मैने कभी किसी के साथ ऐसा कुछ नही किया है
राज- चिल्लाते हुए, चुप रहो लड़की वरना अभी श्राप दे दूँगा, मेरे सामने झूठ कतई नही टिक सकता, अगर तुमने तुरंत सच स्वीकार नही किया तो हम रुष्ठ हो जाएगे और यदि हम नाराज़ हुए तो तुम जानती हो क्या हो सकता है,
रुक्मणी- मेरे पेरो को पकड़ कर, मुझे माफ़ कर दो बाबा जी मैने आपसे झूठ कहा आप बिल्कुल सच कह रहे है मैने यह अपराध किया है, मुझे माफ़ कर दीजिए,
राज- बेटी माफी नही इस समश्या का निवारण लेकर हम तेरे दर पे आए है लेकिन उसके लिए तुझे हमारे बताए अनुसार कर्म करना पड़ेगा तभी तेरी बेटी दोष मुक्त हो पाएगी,
रुक्मणी- मैं सब कुछ करने को तैयार हू बाबा जी आप बताइए मुझे क्या करना होगा
राज- बेटी अभी तुझे अपनी बेटी चंदा को लेकर उसी पुरुष के साथ बैठना होगा लेकिन ध्यान रहे तुम तीनो पूरी तरह नंगे होने चाहिए और फिर वही आदमी जिसके साथ तुम संभोग करती हो उसके साथ मिलकर अपनी बेटी चंदा को उत्तेजित करना होगा और फिर अपने हाथो से उस पराए मर्द के लिंग को अपनी बेटी के अंदर प्रवेश करवाना होगा, और फिर तुम तीनो को सामूहिक संभोग करना होगा,
रुक्मणी- लेकिन बाबा यह कैसे होगा आप जिस मर्द की बात कर रहे है वह तो कही दूर खेतो मे काम कर रहा होगा और मेरी बेटी चंदा भी यहाँ नही है, फिर आप कह रहे हो कि यह सब अभी करना होगा,
राज- बेटी हम हवा मे बाते नही करते है हम अभी अपने मन्त्र की शक्ति से उन दोनो आत्माओ को यहाँ जल्दी ही बुला लेते है और फिर मैं ऐसे ही उसे दिखाने के लिए मन्त्र पढ़ने लगा और करीब 10 मिनिट के बाद रामू रमिया और चंदा एक दम से घर के अंदर घुस आए जिन्हे देखते ही रुक्मणी की आँखे फटी की फटी ही रह गई,
रामू ने मुझे देखते ही मुस्कुरकर प्रणाम किया और मैने उसे आशीर्वाद दिया,
राज- क्यो रुक्मणी बेटी अब तो समझ गई होगी तुम कि बाबा क्यो पधारे है तुम्हारे यहाँ और तुम्हारे घर पर दोष है कि नही
रुक्मणी- मेरे पेरो मे गिर कर आप धन्य है बाबा जी वाकई आप बहुत पहुचे हुए महात्मा है,
रामू मुस्कुरकर मेरी ओर देखने लगा और मैने प्यार से मेरे पेरो मे झुकी हुई रुक्मणी की ब्लौज मे से झँकती नंगी पीठ को सहलाते हुए कहा बेटी आज हम तेरे सारे कष्ट दूर कर देंगे और मेरी आक्टिंग देख कर रामू मुस्कुराकर मुझे सलाम करने लगा,
राज- अब जाओ रुक्मणी और भीतर के कमरे मे अपनी बेटी चंदा को ले जाओ और जैसी क्रिया मैने बताई है उसकी तैयारी करो हम इस बालक को शुद्ध करके अंदर भेजते है, रुक्मणी के अंदर जाते ही रामू ने रमिया को कहा तू जाकर वहाँ बैठ मैं बाबा जी से तेरे बारे मे भी कुछ पुच्छ लू कही तुझे कोई समस्या तो नही है,
रामू की बात सुन कर रमिया मुस्कुराते हुए सामने जाकर बैठ गई, मैने जब रमिया को देखा तो मुझे लोंड़िया बड़ी चुदासी नज़र आ रही थी,
रामू- हाँ बाबूजी अब बोलिए क्या करना है
राज- रामू तेरा काम हो गया है तू जाकर दोनो मा बेटी को तबीयत से सारी दोपहर चोदना और थोड़ा रमिया को समझा देना कि बाबा जी जैसा कहे वैसे ही करना, शाम को 6 बजे तक जितना चाहे चोद लेना पर ध्यान रहे शुरुआत चंदा को चोदने से करना और दोनो मिलकर पहले चंदा को खूब चूसना चाटना ताकि रुक्मणी को कोई असर ना हो, और रुक्मणी से यह ना कहना कि तुझे हरिया ने यहाँ भेजा है,
रामू- मैं सब समझ गया साहेब जी लेकिन हरिया काका अब इधर आएगा तो नही
राज- नही वह रात से पहले नही आएगा तू आराम से मस्ती मार अब सुन रुक्मणी को मेरे पास भेज और तू जाकर कमरे मे ज़मीन पर चोदने के लिए बढ़िया सा बिस्तेर लगा दे,
रामू अंदर जाकर रुक्मणी को मेरे पास भेजता है
रुक्मणी- हाथ जोड़ कर जी बाबा जी आपने बुलाया
राज- देखो बेटी यह सब के पहले तुम सभी को शुद्ध होना पड़ेगा और रामू तुम सभी को जल से शुद्ध करके मेरे पास बारी-बारी से भेजेगा और फिर मैं जल के बाद तेल से तुम सभी के बदन को पवित्र करूँगा लेकिन पहले तुम और चंदा दोनो मिल कर रमिया को पूरी नंगी करके उसे पानी से अच्छी तरह से नहला कर पूरी नंगी ही मेरे पास भेज दो, तब रुक्मणी रमिया को लेकर सामने आँगन मे जहाँ रुक्मणी और चंदा रोज खुल्ले मे बैठ कर नहाती थी वहाँ बैठा कर रमिया का घाघरा और चोली उतार कर अलग कर देती है मैं रमिया को नंगी देखते ही उत्तेजित हो गया और उसकी कमसिन उठी हुई जवानी और मोटे-मोटे ठोस दूध को देख कर मेरे मूह मे पानी आ गया,
क्रमशः........