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Rajsharmastories-मेरी तीन मस्त पटाखा बहनें complete

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"भइया प्लीज।।।।।। हाँ आया था मजा लेकिन ये ठीक नहीं है भाई बहन के बीच में तो प्लीज उसे भूल जाओ, अब हम सिर्फ भाई बहन है और दोस्त भी तो अब सिर्फ बाते होगी नो मोर प्लीज" दीदी मुझे समझाते हुए बॉली।

"दीदी प्लीज।।।। अच्छी कल रात जितना किया था ना बस उतना ही करेंगे प्लीज दीदी इतने से के लिए तो मना मत करो इतने में कुछ नहीं होता" मैं गिडगिडाता हुआ बोला और इतना कह कर मैं दीदी के पास बैठ गया और उसकी टाँग पर अपना हाथ रख कर धीरे धीरे सहलाने लगा तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और ग़ुस्से से मेरी तरफ देखा।

"राज एक बार कहा ना की कुछ नहीं करना है चलो जाओ अपने रूम मे" दीदी ग़ुस्से से बोली।

दीदी की बात सुनकर मेरी सूरत रोनी सी हो गई थी और मुँह से आवाज भी निकलने से मना कर रही थी फिर भी मैं बोला "ओके दीदी ठीक है नहीं करना तो मत करो लेकिन मैं आज के बाद कभी भी आपसे बात नहीं करूँगा मुझे यकीन हो गया है की मैं आपको जरा भी प्यारा नहीं हूँ वरना इतना सा करने में क्या हो जाता, कोई बात नहीं मैं जारहा हूँ और एक बार रूम से चला गया तो फिर कभी यहाँ नहीं आउंगा आगे आपकी मर्जि" कहते हुए मैं उठा और रूम के गेट की तरफ बढ़ गया।

में गेट की तरफ बढ़ तो रहा था लेकिन धीरे धीरे क्योंकि मुझे उम्मीद थी की मेरी इमोशनल बातें सुनकर दीदी मुझे रोक लेंगी लेकिन हाय रे मेरी फूटी किस्मत मुझे पीछे से कोई आवाज नहीं आयी और मैं दीदी के रूम से बाहर निकल गया।

मेरे जाने के बाद रीमा दीदी सोच रही थी की अब क्या करे और खुद को ही कोस रही थी की उसकी ही वजह से ये सब हुआ ना वो ऐसी बाते करती और ना ही आज ऐसा होता वो अभी सोच ही रही थी की मैं रूम से बाहर निकल गया था तो दीदी जल्दी से बाहर आई और मुझे आवाज देकर बुलाया लेकिन अब मैं ज़िद्द में आ चुका था और ग़ुस्से से अपने रूम में आकर बेड पर लेट गया और सोचने लगा की आगे क्या होगा।।।।।।।।।।।

रात को सभी ने मुझे खाने के लिए बुलाया लेकिन मैंने तबियत ठीक न होने का बहाना कर दिया और अपने बेड पर ही लेटा रहा लेकिन नींद मेरी आँखों से कोसो दूर थी रात बहुत हो गई थी और शायद सभी लोग सो गए थे की थोड़ी देर बाद मेरा रूम का दरवाजा खुला और दीदी ने अंदर कदम रखा लेकिन मैंने अपनी आँखे बंद कर ली ताकि दीदी यही समझे की मैं सो रहा हूँ।

दीदी मेरे पास आकर बैठ गई और मुझे उठाने लगी "राज उठो भैया मेरी बात तो सुनो"।

लेकिन मैं नहीं उठा तो दीदी ने मुझे हिलाया और जोर से बोल कर मुझे जगाना चाहा लेकिन मैं नहीं उठा दीदी ने मुझे उठाने की हर कोशिश कर ली लेकिन मैं ढीट बन कर पड़ा रहा।

"अच्छा ठीक है भाई मैं जा रही हूँ मैं तो ये कहने आई थी की मुझे तुम्हारी बात मंजूर है हमने कल जितना प्यार किया था उतना अब रोज किया करेंगे लेकिन अब तुम ही नहीं चाहते हो तो ठीक है।।।।।।।।" दीदी हार कर बोली।

"मेने दिल ही दिल में बहुत खुश हुआ और मेरा दिल करने लगा की दीदी को पकड़ कर अपने पास सुला लूँ लेकिन तभी मुझे ख्याल आया की कहीं दीदी मुझसे बात करने के लिए झूट तो नहीं बोल रही है और ये सोच कर मैं सोने का नाटक जारी रखा और थक हार कर दीदी मेरे बेड से उठ कर चली गई मेरी आँखे बंद थी और रूम में अँधेरा भी था कुछ नजर भी नहीं आरहा था।

खेर दीदी दरवाजे के पास पहुँची और बोली "उठ रहे हो या मैं जाउ"।
 


लेकिन मैं कुछ नहीं बोला तो दीदी ने दरवाजा खोला और बाहर निकल गई और वापस जोर से दरवाजा बंद कर दिया लेकिन ये मैंने गलत समझा था क्योंकि उस वक्त हुआ कुछ और ही था।

दरवाजा बंद होने के बाद मैंने आँखे खोली और अपने आप से बाते करने लगा।।।।।।

'दीदी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ सच्चे दिल से और मैं आपके बगैर नहीं रह सकता हूँ आप मुझे इस तरह छोड़ कर चली गई ये आपने ठीक नहीं किया लेकिन दीदी आई लव यू सो मच।।।'

'दीदी मुझे आपके जिस्म ने पागल कर दिया है और आपके होठो ने मेरा चेन छीन लिया है दीदी जब मैं आपकी गांड पर अपना लंड रगड रहा था तब मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था दीदी मैं आपके बिना नहीं रह सकता सच दीदी कल मैं आपसे माफ़ी मांगूंगा आप बेशक मुझे कुछ ना करने दे ये मेरे लिए मुश्किल तो है लेकिन आपके लिए मैं बर्दाश्त कर लूंगा बिकॉज़ आई लव यू सो मच, आई लव यू दीदी आई लव यू ।।।।।।आई लव यू।।।आई लव यू।।।।।'

'दीदी मैं आपके साथ प्यार करना चाहता हूँ उफ़ मैं क्या करू कहाँ जाउ।।।।। देखो दीदी मेरा लंड आपका नाम लेते ही खड़ा हो गया है पता नहीं अब मेरा क्या होगा आप भी तो मेरा साथ नहीं देती है उफ।।।।। दीदी मेरा लंड हाथ में लो' कह कर मैंने अपना लंड पकड़ा और आँखे बंद करके दीदी को इमेजिन करके उफ्फ्।।।। आह्ह्ह्ह।।। की आवाज़ें निकालते हुए अपने लंड को मसलने लगा और बोलने लगा 'यः दीदी मुझे बहुत मजा आरहा है प्लीज दीदी मेरे लंड पर गृप मजबूत करो एस्।।।येस।।।।'

अचानक मुझे झटका लगा जब मेरे हाथ पर किसी का हाथ आया मैं झट से उठा तो क्या देखता हूँ की दीदी मेरे बेड के पास जमीन पर बैठी हुई है और मैंने अपना हाथ लंड से अलग कर लिया और मेरा हाथ हटते ही दीदी ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपने नरम हाथो से हिलाने लगी ऊऊफफफफ मुझसे तो बर्दाश्त नहीं हो रहा था दीदी मेरे लंड को पकड़ कर हिला रही थी।

"भाई आई ऍम सो सॉरी तुम मुझसे इतना प्यार करते हो और मैं ने, पता नहीं क्यों मना कर दिया तुम्हे भाई सच मुझे बहुत मजा आया था कल रात और मैं और भी मजे लेना चाहती हूँ, मुझे भी सेक्स का कोई एक्सपीरियंस नहीं है लेकिन मैं तुम्हारे साथ मजे लेना चाहती हूँ, भाई तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है भाई आई लव योर डिक ओह्ह उफ़ कितना होट कितना मोटा और लम्बा है, इस छोटी सी उमर में भी क्या लंड पाल रखा है तुमने"

"दीदी आई लव यू सो मच, दीदी प्लीज बेड पर मेरे साथ सो जाओ ना।।।।।।आई लव यू दीदी" मैं बोला।

दीदी उठ कर मेरे साइड पर लेट गई लेकिन मेरा लंड नहीं छोड़ा था और मुझे किसिंग करने लगी मैंने भी दीदी को पकड़ रखा था और मजे से किसिंग करने लगा दीदी की साँसे तेज थी और धड़कने बढ़ गई थी उफ्फ्फ्फफ्।। ।।।दीदी का गरम जिस्म मुझे बहुत मजे दे रहा था।

दीदी ने मेरा लंड और जोर से पकड़ लिया और मेरी मुठ मारने लगी मैं तो जैसे हवा में उड़ रहा था मैंने जल्दी से दीदी की कुर्ती ऊपर को और दीदी के बूब्स पकड़ लिए जो दीदी की ब्लैक ब्रा में क़ैद थे और उन्हें मसलने लगा और उनके साथ खेलने लगा।

 
"भैया आह्ह्ह्ह।।।।।।आराम से दबाओ दर्द होता है उफ्फफ्फ्फ़ भाई तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है भाई एस्।।।।।आराम से धीरे धीरे सच्ची बहुत दर्द होता है आज तक किसी ने मेरे इनको हाथ नहीं लगाया है पहली बार है सो प्लीज आराम से करो।।।।।" दीदी सिसकते हुए बोली "अरे यार आराम से उफफहहहहहहह आह्ह्ह्हह्ह राज ऐसे नहीं प्लीज़, रुको मैं ब्रा निकालती हूँ वैट।।।उउउफफफ।।।।।।ब्रा फट जाएगा एक मिनट रुको ना क्या जल्दी है अब मैं तुम्हारी हूँ"।

"दीदी क्या करूँ सबर नहीं हो रहा है मुझसे प्लीज जल्दी से निकाल दो ना अपनी ब्रा और मुझे आपके प्यारे बूब्स को नंगा फील करने दो ना आह्ह्ह्हह" मैं दीदी के बूब्स मसलते हुए बोला।

दीदी ने उठ कर अपनी कुर्ती और ब्रा निकाली और मैं झट से उनसे लिपट गया और उनको गर्दन पर कानो पर हर जगह पागलो की तरह किस्स करने लगा और एक हाथ से दीदी के बूब्स दबाने लगा मैं बहुत मजे में था और दीदी भी अब मेरा लंड पकड़ कर मेरी मुठ मारने लगी।

"भैया आह्ह्ह्हह आराम से दबाओ क्या कर रहे हो प्लीज राज दर्द होता है सच, आह्ह्ह्हह हाँ ऐसे अब मेरे निप्पल्स को भी मुँह में डालो और सक करो आहहहह यस भाई मजा आरहा है उफ्फ्फफ्फ्फ़ अपने दाँत मत गढ़ाओ दर्द होता है आराम से करो अब ये तुम्हारे ही है इन्हे आराम से प्यार करो ओह्ह भैया यू मेक मी सो होट सो वेट यस प्लीज बी स्लोली बी केरफुल्ली यस लीक दिस सक्क देम स्लोली लेटस एन्जॉय ब्रदर माय स्वीट लवली राज आई लव यू" दीदी बोली।

"दीदी जोर से करो मैं झड़ने ही वाला हूँ मेरी कम निकलने वाली है दीदी टाइट योर गृप ऑन माय डिक यस दीदी जोर से" कह कर मैंने दीदी के एक बूब को जोर से मस्ला और दूसरे को मुँह में लेकर चबाने लगा दीदी को दर्द हुआ जिससे उन्होंने अपने हाथ की पकड़ मेरे लंड पर मजबूत की और जोर से दो तीन झटके मारे तो मेरे लंड से पानी निकलने लगा उफ़ क्या मजा आरहा था उस वक्त।

दीदी ने मुझे अपने आप से चिपका लिया और अपनी बॉडी में दबा लिया मुझे बहुत अच्छा लग रहा था दीदी ने अभी तक मेरा लंड नहीं छोड़ा था लेकिन आगे पीछे नहीं कर रही थी सिर्फ टाइट पकड़ा हुआ था वो इस काम में एक्सपर्ट लग रही थी।

कुछ देर में मैं शांत हो गया और मैंने दीदी को बेड पर सीधा किया और उनके ऊपर लेट गया और उनके बूब्स सक्क करने लगा और एक हाथ दीदी की सलवार में डाल दिया उफ़ दीदी की चूत बहुत गीली थी मैंने दीदी की चूत के लिप्स पर ऊँगली घुमाई और वो मचलने लगी दीदी बहुत गरम थी और झड़ने के बिलकुल करीब थी थोड़ी ही देर ऊँगली रगड़ने से वो झड़ने लगी और मुझे कस कर पकड़ लिया और हम वैसे ही बेड पर लेटे रहे।।।।।।।।।।।।।।।।

"दीदी कैसा लगा आपको? मजा आया या नहीं और क्या पहले भी कभी किया है ये सब" थोड़ी देर बाद मैंने पूछा।

"नही भैया पहले कभी किसी के साथ नहीं किया लेकिन सच बहुत मजा आया मुझे, आज तुमने मुझे बहुत मजा दिया है राज अब मैं क्या बताऊँ की मुझे कितना मजा आया है आज मैं दूसरी बार झडी हूँ लाइफ में लेकिन ये पहली बार से अच्छा था सच" दीदी बोली।

"दीदी पहले कब झडी थी आप और किसने आपको झड़ाया था" मैंने पूछा।

"वो क्या है ना जब मैं १८ साल की थी तब मेरी एक सहेली की शादी हुई तो उसने मुझे सेक्स के बारे में बताया था तब मैं रात को उसकी बात सोचते हुए सोयी तो सपने में मैंने फील किया की कोई मेरे साथ सेक्स कर रहा है और मजे में मैं झड़ गई लेकिन तब मुझे पता नहीं था तो मैंने मेरी उसी सहेली से इस बारे में पूछा तो उसने बताया की इसे झड़ना कहते है, और सच भैया आज तुम्हारी वजह से मैंने जागते हुए भी फील कर लिया आई लव यू" दीदी मेरे गाल की किस लेती हुई बोली "आज से तुम मेरे लवर हुए अभी जब चाहे हम मजे कर पाएंग़े, ओके तो अब मैं जाती हूँ बहुत रात हो गई है"।

कह कर दीदी ने अपने कपड़े पहने और मुझे गुड नाईट किस करके अपने रूम में चली गई।

।।।।।।।।।।।।।

 
कल दिन जब मैं स्कूल से वापस आया तो सीधे दीदी के रूम में गया लेकिन वो बाथरूम में थी।

"दीदीइइइइइइ।।।" मैंने उसे पुकारा।

"क्या बात है राज, क्यों बुला रहे हो" दीदी ने पूछा।

"दीदी जल्दी से दरवाजा खोलो मुझे आपसे काम है" मैं बोला।

"थोडी देर रुको मैं बस आती ही हूँ" दीदी बोली।

"नही दीदी जल्दी दरवाजा खोलो प्लीज" मैं बेसब्री से बोला।

मेरी इतनी बेसब्री से दीदी घबरा गई की मुझे कुछ हुआ तो नहीं है और बोली "दरवाजा खुला है अंदर आ जाओ"।

जैसे ही मैं अंदर गया सामने का नजारा देख कर मेरे होश उड़ गए सामने दीदी सुसु कर रही थी लेकिन मेरे आने की वजह से उसने अपनी कुर्ती का सामने वाला हिस्सा नीचे कर लिया था जिससे मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

मैन दीदी के पास गया और उसके सामने बैठ गया।

"क्या बात है इतने घबराये हुए क्यों थे तुम्" दीदी ने पूछा।

"दीदी ओ।।।।व।।।।।" कहते हुए मैंने दीदी की कुर्ती का सामने वाला हिस्सा जो उसकी चूत को छुपाये हुए था की उठा दिया और दीदी की चूत को देख कर बोला "में ये देखने आया था"।

"शर्म कर मेरे भाई, चल अब बाहर निकल कहीं कोई आ न जाए" दीदी हँस कर बोली।

मै उठा और बाहर आने लगा तो देखा की रूम में मेरी छोटी बहन रानी खड़ी थी तो मैं जल्दी से वापस बाथरूम में आया और दीदी को इशारा किया की वो चुप रहै।

दीदी समझ गई और इशारे से कहा देखा जिसका डर था वही हुआ खैर दीदी उठि और सलवार पहन ली की तभी रानी ने आवाज दी।

"दीदी आप कहाँ हो" रानी बोली।

"मैं बाथरूम में नहा रही हूँ अभी आती हूँ" दीदी बोली।

"ओके मैं वेट कर रही हूँ आप जल्दी आओ" रानी बोली।

"बस अब तो हो गया काम वो वहीँ बैठ गई है अब क्या करे" रीमा दीदी बोली वो बहुत घबरा गई थी।

"दीदी आप जाओ मैं यहीं रुकता हूँ" मैं भी घबराते हुए बोला।

"नही पागल अगर वो कहीं यहाँ आगई तो।।।।।" दीदी बोली।

"हाँ ऐसा तो हो सकता है, अच्छा उसे वेट करने दो हो सकता है वैसे ही चली जाए" मैं बोला।

"तु भी न जरा भी सबर नहीं हुआ तुझसे, रात को देख लेता जो देखना था।।।।आ गया यहीं मुँह उठा कर हे भगवान अब क्या करूँ में" दीदी थरथराते हुए बोली।

"अच्छा चलो अब कुछ नहीं होता आप इधर आजाओ" कहते हुए मैंने दीदी को दीवार से चिपका दिया और खुद उसके साथ चिपक गया।

दीदी से चिपकते ही मैं उसे किस्स करने लगा लेकिन वो डरी हुई थी लेकिन धीरे धीरे उसे भी मजा आने लगा तो उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और किसिंग में मेरा साथ देने लगी।

मैने अपने पैंट की ज़िप खोली और अपना लंड बाहर निकाल लिया और दीदी से बोला "दीदी प्लीज इसे अपने हाथ में पकड़ो ना"।

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरा लंड अपने नरम हाथ में पकड़ लिया जो आधा खड़ा था और दीदी के हाथ लगते ही फुल हार्ड हो गया था।

"दीदी प्लीज आप मेरी तरफ बैक कर लो मैं आपकी गांड पर अपना लंड रगडना चाहता हूँ" मैं बोला।

दीदी भी फुल मजे में थी वो झट से घूम गई और उसकी मस्त गांड मेरे सामने आगई।

मैने जल्दी से दीदी की इलास्टिक वाली सलवार दीदी के घुटनो तक नीचे कर दी। अंदर दीदी ने चड्ढी तो पहनी नहीं थी जिससे उसके गोल गोल चूतड़ मेरी आँखों के सामने नंगे थे।

मेरे ऐसा करते हो दीदी ने झट से पलट कर मुझे देखा और बोली "पागल हो गए हो क्या, अभी नहीं फिर कभी कर लेंगे प्लीज अभी मौका नहीं है तुम भी ना।।।।।।"।

"दीदी लंड अंदर थोड़े ही ना डाल रहा हूँ बस ऊपर ऊपर से रगडना है चोदना थोड़े ही है" मैं बोला।

"अच्छा ठीक है लेकिन धीरे धीरे बगैर आवाज किये समझे" दीदी बोली वो मेरी बात समझ गई और वापस घूम गई।

मैने लंड पकड़ कर दीदी की गांड की दरार में रखा और धीरे धीरे मूव करने लगा दीदी को लंड टच हुआ तो बहुत अच्छा फील हुआ और उसने अपनी गांड सिकोड़ ली।

" दीदी प्लीज अपनी गांड टाइट मत करो लाइन में तो जाने दो वहीँ मजा आएगा" मैं बोला।

"मैं कहाँ कर रही हूँ वो खुद ही हो रही है क्योंकि तुम्हारा लंड गरम है ना, चलो ट्राय करती हूँ की अब ना हो" दीदी मजे से बोली।

दीदी फिर वैसे ही खड़ी हो गई तो मैंने लंड पर थूक लगाया और थोड़ी थूक दीदी की गांड की दरार पर भी लगा दी।

"अब ये क्या कर रहे हो? उफ्फ्फफ्फ्फ्।।।।।।तुम भी ना।।।।रोज नए नए तरीके क्या होगा मेरा" दीदी बोली।

"दीदी बस स्लिप होगा थूक से इसलिए लगाया है अब प्लीज चुप करके खड़ी रहो मजा ख़राब मत करो" कह कर मैंने लंड दीदी की क्रैक में रखा और हिलने लगा मुझे बहुत अच्छा लगने लगा।

"दीदी अब कैसा लग रहा है" मैंने पूछा।

 
दीदी ने आँखे बंद की हुई थी और आहे भर रही थी।

"भैया बहुत अच्छा लग रहा है जोर से घसीट कर धक्के मारो मजा आरहा है" दीदी सीसियाते हुए बोली।

मैने दीदी की बात मान कर दीदी की गांड की लाइन में अपना लंड जोर से ऊपर नीचे करने लगा कुछ देर बाद दीदी ने अपना हाथ मुँह के पास किया और अपने हाथ में थूक लेकर मुझे अलग करके अपनी गांड पर बहुत सी थूक डाली और मेरा लंड पकड़ कर वहां रख दिया।

"अब करो जितना स्लिप होता है मजा भी उतना ही आता है, सूखा हो गया था ना इसलिए मैंने थूक लगा दी है" दीदी बोली।

अब मैं पहले से ज्यादा जोर से लंड हिल रहा था और दीदी भी अपनी गांड पीछे कर रही थी की अचानक दीदी झुक गई।

"भैया जरा जोर से रगड़ो मुझे मजा आरहा है मैं जल्दी ही झड़ जाउन्गी, हाँ जरा जोर से" दीदी झूकते ही बोली।

दीदी की बात सुनकर जब मैंने जोर लगाया तो मेरा लंड दीदी की गांड के छेद पर जाकर अटक गया मैंने पीछे किया और फिर जोर लगाया तो मेरा लंड उसकी गांड में घूसने लगा।

दीदी इतनी मदहोश थी की उसे अभी तक महसूस नहीं हुआ था की मेरा लंड उसकी गांड में झाँकने लगा था मैं दीदी की गोरी गांड को देख रहा था दीदी झुकि हुई थी तो उसकी गांड का छेद साफ़ नजर आरहा था।

मैंने लंड पीछे किया और अपने मुँह से थूक गिराया जो सीधे दीदी की गांड की लाइन पर गिरा और बहते हुए दीदी की गांड के छेद तक आ गया और जैसे ही थूक वहां आया तो मैंने लंड को छेद पर सेट करके जोर लगाया तो मेरे लंड का सुपाडा दीदी की गांड में घुस गया।

"ऊऊफ़्फ़फ़ तूने क्या कर दिया हाईईईए.... माँ जलन हो रही है आआहहहहह..." दीदी के मुह से निकला ।

दीदी की कराह सुनकर मैं डर गया और लंड बाहर निकालने लगा तो दीदी ने गांड और टाइट कर ली और बोली "नहीं... अभी रुको दर्द हो रहा है हिलो मत जलन होती है, क्यों डाला तूने अपना लंड मेरी गांड में गंदे कहीं के ूहःहःहमाआ.... दर्द हो रहा है"।

थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही खड़े रहे फिर मैं बोला "दीदी धीरे से निकाल लू या फिर झटके से निकाल लेता हूँ सच दीदी मुझे नहीं पता की अचानक कैसे अंदर चला गया" मैं बोला।

"नही तुम रुको मैं खुद निकालती हूँ " कह कर दीदी ने अपनी गांड का जोर मेरे लंड पर दिया और फिर थोड़ी आगे हुई लेकिन सुपाडा अटका हुआ था दीदी फिर से पीछे हुई और फिर आगे हुई और मजे से अपना लंड दीदी की गांड में आता जाता देख रहा था दीदी की गांड का छेद अब दर्द और जलन से लाल हो गया था लेकिन मुझे अब परेशानी से ज्यादा मजा आरहा था।

"दीदी आप रुको मैं खुद आराम से निकाल लेता हूँ लेट मी ट्राय" मैं बोला।

"ओके लेकिन एकदम धीरे धीरे आराम से निकालना आगे पीछे होकर निकालोगे तो आसानी से बाहर आ जाएगा" दीदी मज़बूरी में बोली।

मैं थोड़ा सा आगे हुआ तो लंड भी थोड़ा अंदर घुस गया तो दीदी बोली "बस इतना ही अब पीछे करो" और अपने होंठ दाँतो में दबा लिए।

मैने धीरे से बाहर निकालना चाहा लेकिन फिर सुपाडा अटक गया तो मैंने वापस आगे धकेला तो लंड थोड़ा और अंदर हो गया।

 


इस तरह करते हुए धीरे धीरे मेरा आधा लंड दीदी की गांड में घुस गया था और मैंने दीदी के बूब्स पकड़ लिए और दबाने लगा अब दीदी भी थोड़ी शांत हो गई थी और वो मेरे लंड के अंदर बाहर होने के साथ अपनी गांड हिला रही थी।

मैने अपना एक हाथ दीदी के बूब पर और दुसरा हाथ उसकी चूत पर रखा और बूब को मसलते हुए चूत को रब करने लगा जिससे दीदी फिर गरम हो गई और कुछ ही देर में झड़ गई और वहीँ जमीन पर डॉगी स्टाइल में हो गई।

वह क्या नजारा था दीदी अभी होश में नहीं थी तो मैंने लंड को पहले से ज्यादा जोर से अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और ५ - ७ धक्को में ही दीदी की गांड में झड गया।

मेरी कम को अपनी गांड में गिरती हुई महसूस करके दीदी ने मेरी तरफ देखा और हँस कर बोली "गंदे कहीं के इतना दर्द दिया और तुरंत ही उतना मजा भी दे दिया सच में बहुत पहूँची हुई चीज हो तुम्, सच आई लव यू सो मच् राज यू आर ग्रेट योर लंड इज आल्सो ग्रेट बहुत अच्छा लग रहा था जबकि मेरे अंदर गरम गरम पानी गिर रहा था उफ़ इतना मजा दिया तुमने और दर्द भी की पूछो मत, बस अब आराम से बाहर निकाल लो ये ना हो की फिर खड़ा हो जाये और मेरी गांड फट जाए"।

इत्ना कह कर दीदी हॅसने लगी और मैंने धीरे धीरे अपना लंड बाहर निकालना शुरू कर दिया तो दीदी ने आँखे बंद कर ली और गांड हिलने लगी जिससे मेरा लंड जल्दी ही बाहर आगया।

तभी अचानक ही रानी ने फिर आवाज दी "दीदी मैं जारही हूँ आप भी नहा कर नीचे आजा जाना"।

रानी नीचे जा चुकी थी और हम दोनों भाई बहन हँसते हुए उठे मैं अपने पैंट की ज़िप लगा कर बाहर निकल गया और दीदी नहा कर जल्दी से बाहर आगई।

लेकिन उनकी गांड में सूजन थी तो वो टांगे फैला कर धीरे धीरे चल रही थी मैंने जब देखा तो मुझे उस पर बहुत तरस आया लेकिन दीदी के चेहरे पर नॉटी साइड स्माइल देख कर मैं भी हँस दिया। ।।।।।।।।।।।।।

रात को मैं दीदी का वेट कर रहा था लेकिन बहुत देर होने के बाद भी वो नहीं आई तो मैं उठ कर उसके रूम में चला गया तो देखा की दीदी के साथ मेरी छोटी बहन राखी सो रही थी।

"दीदी आज का क्या प्रोग्राम है?" मैंने धीरे से पूछा।

"अभी तो राखी मेरे पास सो रही है इसलिए आज मुश्किल है कल देखते है" दीदी बोली।

"दीदी मुझे नींद नहीं आरही है और न ही आएगी, प्लीज दीदी कुछ तो करो.... अच्छा आप मेरे रूम में आ जाना कुछ देर बाद" मैं उसे मनाते हुए बोला।

"राज... कहा ना नहीं, अभी मैं भी जग रही हूँ लेकिन कहीं ये उठ गई और मुझे ना देख कर ढूँढ़ने लगी तो, पागल आज रात भर सबर कर लो कहा न कल देखते है" दीदी बोली।

दीदी की बात सुनकर मैंने बुरा सा मुँह बना लिया जिसे देख कर दीदी हॅसने लगी।

"अच्छा बाबा ठीक है मैं आती हूँ तुम्हारे रूम में लेकिन ज्यादा टाइम नहीं रहूँगी जो करना है जल्दी करना, और हाँ अपनी शकल ठीक कर लो नौटंकी कहीं के...." दीदी हँसते हुए बोली.

दीदी की बात सुनकर मैं खुश होकर अपने रूम में आगया और कोई १५ मिनट बाद दीदी भी मेरे रूम में आगई।

 
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