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डॉली ने चाहत को देखा फिर मुस्कुरा दी उसने एक हाथ से लड़के के हाथ को पकड़ा और चाहत की तरफ अा गई। चाहत के सामने खड़े होकर डॉली ने बैग उसके हाथो से लेते हुए कहा - अरे.. इसे तो मै भूल गई थी..ये बोल डॉली ने चाहत के हाथो से बैग ले लिया।
चाहत वो तो कुछ बोल ही नहीं रही थी बस कभी डॉली के बगल में खड़े लड़के को देखती तो कभी डॉली को।
डॉली को उसका हैरान सा चेहरा देख हसी अा गई उसने मुस्कुराते हुए कहा - रेहान.. ये चाहत है .. मेरी कॉलेज की फ्रेंड.. मेरी टीचर.. जिसके बारे में मैंने तुम्हे बताया था..
फिर वो चाहत की तरफ मुड़ी और उसने चाहत से कहा - और चाहत ये है.. रेहान..मेरा boyfriend.. ये बोल डॉली ने रेहान का हाथ पकड़ लिया और उसके बगल से लग गई।
चाहत ये सुन हैरान हो गई वो बस रेहान को देख रही थी। इसके साथ ही रेहान ने चाहत की तरफ हाथ बढ़ाया था जिसे चाहत देख ही नहीं रही थीं वो खुद में ही खो गई थी। चाहत को सदमे में देख डॉली को मज़ा आ रहा था पर डॉली चाहत को कुछ कहती उससे पहले ही ट्रेन की सीटी की आवाज़ हुई जिसका मतलब था कि अब ट्रेन चलने को तैयार है।
ट्रेन की आवाज़ सुन डॉली जल्दी से चाहत के गले मिली फिर उसके कान में धीरे से कहा - इसके बारे में.. बाद में बताती हू.. अभी के लिए बाय.. ये बोल वो उससे दूर हुई ।
चाहत भी ट्रेन कि सिटी की आवाज़ से होश में आ गई थीं उसने भी डॉली को कस के गले लगा लिया फिर उसके कान में कहा - बेटा .. तुमने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई हैं ना.. तुम वापस आओ.. फिर तुम्हे बताती हूं.. ये बोल उसने डाली को छोड़ दिया और ट्रेन में चढ गई।
चाहत गेट के पास खड़ी थी । साथ ही ट्रेन ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली । डॉली ने नीचे से अपना हाथ हिलाते हुए चाहत को बाय किया और उसे फ्लाइंग किस दी। चाहत भी उसे देखते हुए अपना हाथ भी उठा कर उसे बाय किया।
थोड़े देर तक चाहत गेट के पास ही खड़ी होकर डॉली को देखती रही जब डॉली का अश्क धुधला हुआ तब वो अंदर आकर अपनी सीट पर बैठ गई। उसे डॉली का उसे फ्लाइंग किस करना याद अा रहा था। जिसे सोच कर उसने मुस्कुराते हुए मन में कहा - पागल..
चाहत खिड़की के पास अा गई और खिड़की से पीछे छूटते हुए पेड़ो को देखने लगी। क्युकी अब आगे का सफर उसे अकेले ही पूरा करना था।
ट्रेन अपनी रफ्तार लिए हुए थी। चाहत का दिल भी इसी रफ्तार से धड़क रहा था। अब ये बेचैनी इतने दिनों बाद घर जाने की थी या फिर अध्यन से मिलने की थी कह पाना मुश्किल था।
ट्रेन हमेशा की तरह टाइम पर थी। राजनांदगांव स्टेशन अा चुका था। चाहत ने एक बार खिड़की से बाहर देखा फिर गहरी सांस ली । उसने अपने बैग को एक हाथ में पकड़ा और पर्स को अपने कंधो पर लटका लिया। लेफ्ट हैंड में बैग पकड़े और राइट हैंड में मोबाइल पकड़े वो ट्रेन से नीचे अा गई।
चाहत ने कुछ नम्बर दबाए और मोबाइल कान से लगा लिया। दूसरी तरफ से हेल्लो सुनने के साथ चाहत ने कहा - हा आर्यन.. मै स्टेशन पर हूं,.. हा.. ठीक है.. मै वेट करती हूं.. ये बोल चाहत चलते हुए स्टेशन से बाहर आ गई।
अध्यन जैसे ही चाहत के बगल से गुज़रा वो कुछ पल के लिए रुक गया । उसने पलट कर देखा तो एक लड़की जिसकी हाइट लगभग 5 फुट 6 इंच है वो मल्टीकलर का स्कार्फ बांधे खड़ी है। जिसकी पीठ अध्यन की तरफ है। अध्यन वहीं रुक गया उसे कुछ पल के लिए ऐसा लगा जैसे वो चाहत ही हों वो बस उसे ही देखे जा रहा था वो स्कार्फ के पीछे छुपे उस चेहरे को देखना चाह रहा था। यहां तक कि उसे इस बात का होश नहीं था कि वो स्टेशन पर खड़ा है।
तभी अंश ने मूड कर देखा तो अध्यन एक लड़की की तरफ देख रहा था तो उसने कहा - हम पहले से ही लेट है.. और ये है कि .. वो अध्यन के पास आया फिर उसने अध्यन का हाथ पकड़ कर कहा - अगर देखना हो गया हो तो.. चले..
अध्यन ने कहा - मुझे ऐसा लगा.. की..
तभी अंश ने कहा - की वो चाहत है.. अरे मजनू के भतीजे.. वो चाहत कैसे हो सकती है.. उसकी ट्रेन तो अभी आई ही नहीं होगी.. जिसे सुन अध्यन ने हा कहा और दोनों स्टेशन की तरफ चले गए। वहीं दूसरी ओर चाहत आर्यन का वेट कर रही थी। उसने अपने सामने देखा जहा एक पेड़ था। चाहत को वहां काफी धूप लग रही थी जिससे बचने के लिए वो उस
चाहत स्टेशन के बाहर खड़ी थीं दोपहर का वक़्त था शायद इसीलिए धूप ज्यादा ही थी तो चाहत ने स्कार्फ निकाला और अपना चेहरा उससे कवर कर लिया। चाहत वहीं खड़ी आर्यन के आने का वेट कर रही थी।
चाहत के पीछे साइड बाइक रुकी जिसमे से अंश जिसने ब्लैक टी शर्ट के ऊपर ब्राउन लेदर का जैकेट पहन था और अध्यन जिसने ब्लैक एंड व्हाइट मिक्स टी शर्ट पर व्हाइट जैकेट पहन रखा था वो बाइक से उतर कर स्टेशन की तरफ देखने लगा।
अंश बाइक की स्टैंड लगाते हुए - यार.. बस ट्रेन ना आईं हो..
अध्यन हाथ में बुके लिए हुए - सब तेरी वजह से हुआ.. मुझे अकेले अा जाना चाहिए था.. पर नहीं .. मुझे तो तेरा वेट था.. अब देख क्या हो गया..
अंश उसे देख कर - सॉरी यार.. ये बोल उसने अध्यन की तरफ देखा तो अध्यन ने कहा - इट्स ओके.. चल अब लेट ना कर..
पेड़ के नीचे चले गई।
अध्यन और अंश पहले इंक्वायरी के पास गए वहा उन्होंने ट्रेन के बारे में पूछा तो उन्हे पता लगा ट्रेन तो अा चुकी है और चली भी गई।
अध्यन और अंश ने जब ये सुना तो दोनों का मुंह उतर गया। अध्यन के हाथ से फूलों का बुके छूट कर नीचे गिर गया। जिस पर कुछ लोग पैर रख कर आगे भी बढ़ गए। अंश ने एक नजर अध्यन को देखा फिर बुके को उठा कर डस्टबिन में डाल दिया। फिर दोनों हारे हुए जुवारी की तरह दोनों स्टेशन से बाहर अा गए।
चाहत जो पेड़ के नीचे थी उसे थोड़ी ही दूर पर आर्यन आता दिखाई दिया । उसने आर्यन को हाथ का इशारा कर के बताया वो उस ओर है। तो आर्यन अपनी बाइक उसके पास ले आया। आर्यन बाइक से उतरा और दी बोलते हुए चाहत के गले लग गया। चाहत भी बहुत दिनों बाद अपने आर्यन से मिली थी तो उसे भी गले लग कर अच्छा लगा ।
चाहत ने आर्यन कि पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा - कैसा है मेरा सोनपापड़ी..
आर्यन ने चाहत से दूर होते हुए कहा - बहुत अच्छा.. और
आपके आने के बाद तो और भी अच्छा हो गया हूं..
चाहत ने आर्यन के गाल पर हाथ रख कर कहा - कितना पतले लग रहे हो.. मेरे जाने के बाद .. मम्मी तुम्हे खाना नहीं देती क्या.. ??
ये सुन आर्यन चाहत के हाथ पर हाथ रख कर बोलता है - देती है दी.. पर अब आपके हाथ की चॉकलेट नहीं मिलती ना.. इसीलिए ऐसा हो गया हूं..ये बोल वो मुस्कुरा दी। वैसे तो आर्यन ने ये बात मजाक में कहीं थी पर चाहत को उसके आंखो का दर्द दिख गया था जिसे उसने सफाई से छुपाने की कोशिश की थी। चाहत सोचने लगी - मेरा सोनपापड़ी.. कितना बड़ा हो गया है.. और समझदार भी । वो ये सोच ही रही थी तभी ..
आर्यन ने बाइक में बैठ कर चाहत को बैठने का इशारा करता है। चाहत इशारा समझ बाइक में बैठ जाती है।
बाहर आकर अंश अपना हाथ बाइक पर कहता है - सॉरी यार.. मेरे कारण.. तू आज.. वो इससे ज्यादा कुछ कह पाता उससे पहले ही अध्यन ने उसके हाथो पर अपना हाथ रख कहा - नहीं भाई.. इट्स ओके..
अध्यन अपना सिर उठा कर सामने देखते हुए कहता है -
वो... आर्यन है ना..
अंश जो कि दूसरी तरफ देख रहा था उसने अध्यन की तरफ देखा फिर दोनों ने मिल कर वहा देखा जहा आर्यन था। उसके ठीक पीछे चाहत आर्यन के कंधो पर हाथ रख कर बाइक में बैठ रही थी। जिसे देख अंश और आर्यन ने एक दूसरे को देखते हुए एक साथ कहा - ओह.. नो..
वो दोनो बाइक को छोड़ आर्यन की तरफ भागे तब तक आर्यन ने बाइक स्टार्ट कर दी और वो उन दोनों से आगे निकल गया।
एक बार फिर से अध्यन और अंश रुक गए। अंश हांफते हुए - अरे.. यार.. फिर से नहीं.. बस थोड़ा देर और रुक जाता ना तो.. मिल लेते.. पर.. बोलते हुए उसने अध्यन को देखा जो एकटक बाइक की तरफ हीं देख रहा था।
अंश ने उसे ऐसे देखा तो उसके कंधो पर हाथ रखा जिससे अध्यन ने चौक कर अंश की तरफ देखा तो अंश ने कहा - डोंट वरी.. हम उससे मिल लेंगे..
जिसे सुन अध्यन ने कहा - मै जब उसके करीब से गुजरा था.. मुझे लगा था.. मुझे फील हुआ था.. पर मैंने इग्नोर कर दिया.. अंश मुझे फील.. अंश ने इससे आगे उसे बोलने नहीं
दिया उसने बस अध्यन को गले से लगा लिया अंश ने शायद पहली बार अध्यन की आंखो में डर देखा था ये महज डर नहीं था उसकी आंखो में किसी अपने को खों देने का डर था मानो अगर उस अपने को अध्यन से दूर किया गया तो वो जी नहीं पाएगा। अंश उसे ऐसे नहीं छोड़ना चाहता था। वहीं अध्यन ने अंश को मजबूती से पकड़ते हुए कहा - इतने करीब होने के बाद भी.. क्यों..??
अंश ये सुन कुछ नहीं कहा और कहता भी क्या.. वो अध्यन उससे दूर हुआ फिर उसने कहा - मै बाइक लेकर आया.. ये बोल अंश बाइक लेने चले गया। वहीं अंश कुछ देर तक चलते हुए कुछ सोचने लगा । उस ने अपना मोबाइल निकाला और कॉल लगा दी।
चाहत जों की बाइक में बैठे इधर उधर देख रही थी उसका मोबाइल बजने लगा। चाहत ने मोबाइल की तरफ देखा फिर मोबाइल कान से लगा लिया उसने कहा - हा... अंश..
दूसरी तरफ से अंश ने कहा - कहा हो..
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - अपने शहर.. राजनांदगांव.. अभी तो आई.. अब घर जा रही हूं..
अंश ने कहा - ठीक है.. तो मिलता हूं शाम को..
चाहत ने भी चहकते हुए कहा - ठीक है.. अा जाना.. तुम्हारे लिए मैगी बना कर रखूंगी मै..
ये सुन अंश मुस्कुरा दिया फिर उसने कहा - हा.. बहुत सारा बना कर रखना..
चाहत ने भी हस्ते हुए कहा - हा ठीक है..
अंश ने देखा अध्यन बाइक के लिए उसे ही देख रहा था वो बाइक लेकर अध्यन की तरफ जाने लगा। उसने अध्यन को देख कर तुरंत चाहत से कहा - अच्छा ठीक है.. तो तुम घर जाओ.. शाम को मिलता हू तुमसे..
चाहत ने भी कहा - हा ठीक है.. ये बोल उसने कॉल कट कर दी।
वो बाइक लेकर अध्यन के पास पहुंचा तो अध्यन ने उतरे चेहरे के साथ बाइक लेकर उसे स्टार्ट किया फिर अंश की तरफ देख कर कहा - चलो ... अंश उसके इतना कहते ही बाइक पर बैठ गया ।बाइक ने रफ्तार पकड़ ली अध्यन बाइक चलाते हुए सोचने लगा - आज इतने पास होकर भी तुमसे मिल नहीं पाया.. ये क्या हो रहा है मेरे साथ.. ये बोल उसने रोड पर कॉन्संट्रेट करना जरूरी समझा।
चाहत वो तो कुछ बोल ही नहीं रही थी बस कभी डॉली के बगल में खड़े लड़के को देखती तो कभी डॉली को।
डॉली को उसका हैरान सा चेहरा देख हसी अा गई उसने मुस्कुराते हुए कहा - रेहान.. ये चाहत है .. मेरी कॉलेज की फ्रेंड.. मेरी टीचर.. जिसके बारे में मैंने तुम्हे बताया था..
फिर वो चाहत की तरफ मुड़ी और उसने चाहत से कहा - और चाहत ये है.. रेहान..मेरा boyfriend.. ये बोल डॉली ने रेहान का हाथ पकड़ लिया और उसके बगल से लग गई।
चाहत ये सुन हैरान हो गई वो बस रेहान को देख रही थी। इसके साथ ही रेहान ने चाहत की तरफ हाथ बढ़ाया था जिसे चाहत देख ही नहीं रही थीं वो खुद में ही खो गई थी। चाहत को सदमे में देख डॉली को मज़ा आ रहा था पर डॉली चाहत को कुछ कहती उससे पहले ही ट्रेन की सीटी की आवाज़ हुई जिसका मतलब था कि अब ट्रेन चलने को तैयार है।
ट्रेन की आवाज़ सुन डॉली जल्दी से चाहत के गले मिली फिर उसके कान में धीरे से कहा - इसके बारे में.. बाद में बताती हू.. अभी के लिए बाय.. ये बोल वो उससे दूर हुई ।
चाहत भी ट्रेन कि सिटी की आवाज़ से होश में आ गई थीं उसने भी डॉली को कस के गले लगा लिया फिर उसके कान में कहा - बेटा .. तुमने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई हैं ना.. तुम वापस आओ.. फिर तुम्हे बताती हूं.. ये बोल उसने डाली को छोड़ दिया और ट्रेन में चढ गई।
चाहत गेट के पास खड़ी थी । साथ ही ट्रेन ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली । डॉली ने नीचे से अपना हाथ हिलाते हुए चाहत को बाय किया और उसे फ्लाइंग किस दी। चाहत भी उसे देखते हुए अपना हाथ भी उठा कर उसे बाय किया।
थोड़े देर तक चाहत गेट के पास ही खड़ी होकर डॉली को देखती रही जब डॉली का अश्क धुधला हुआ तब वो अंदर आकर अपनी सीट पर बैठ गई। उसे डॉली का उसे फ्लाइंग किस करना याद अा रहा था। जिसे सोच कर उसने मुस्कुराते हुए मन में कहा - पागल..
चाहत खिड़की के पास अा गई और खिड़की से पीछे छूटते हुए पेड़ो को देखने लगी। क्युकी अब आगे का सफर उसे अकेले ही पूरा करना था।
ट्रेन अपनी रफ्तार लिए हुए थी। चाहत का दिल भी इसी रफ्तार से धड़क रहा था। अब ये बेचैनी इतने दिनों बाद घर जाने की थी या फिर अध्यन से मिलने की थी कह पाना मुश्किल था।
ट्रेन हमेशा की तरह टाइम पर थी। राजनांदगांव स्टेशन अा चुका था। चाहत ने एक बार खिड़की से बाहर देखा फिर गहरी सांस ली । उसने अपने बैग को एक हाथ में पकड़ा और पर्स को अपने कंधो पर लटका लिया। लेफ्ट हैंड में बैग पकड़े और राइट हैंड में मोबाइल पकड़े वो ट्रेन से नीचे अा गई।
चाहत ने कुछ नम्बर दबाए और मोबाइल कान से लगा लिया। दूसरी तरफ से हेल्लो सुनने के साथ चाहत ने कहा - हा आर्यन.. मै स्टेशन पर हूं,.. हा.. ठीक है.. मै वेट करती हूं.. ये बोल चाहत चलते हुए स्टेशन से बाहर आ गई।
अध्यन जैसे ही चाहत के बगल से गुज़रा वो कुछ पल के लिए रुक गया । उसने पलट कर देखा तो एक लड़की जिसकी हाइट लगभग 5 फुट 6 इंच है वो मल्टीकलर का स्कार्फ बांधे खड़ी है। जिसकी पीठ अध्यन की तरफ है। अध्यन वहीं रुक गया उसे कुछ पल के लिए ऐसा लगा जैसे वो चाहत ही हों वो बस उसे ही देखे जा रहा था वो स्कार्फ के पीछे छुपे उस चेहरे को देखना चाह रहा था। यहां तक कि उसे इस बात का होश नहीं था कि वो स्टेशन पर खड़ा है।
तभी अंश ने मूड कर देखा तो अध्यन एक लड़की की तरफ देख रहा था तो उसने कहा - हम पहले से ही लेट है.. और ये है कि .. वो अध्यन के पास आया फिर उसने अध्यन का हाथ पकड़ कर कहा - अगर देखना हो गया हो तो.. चले..
अध्यन ने कहा - मुझे ऐसा लगा.. की..
तभी अंश ने कहा - की वो चाहत है.. अरे मजनू के भतीजे.. वो चाहत कैसे हो सकती है.. उसकी ट्रेन तो अभी आई ही नहीं होगी.. जिसे सुन अध्यन ने हा कहा और दोनों स्टेशन की तरफ चले गए। वहीं दूसरी ओर चाहत आर्यन का वेट कर रही थी। उसने अपने सामने देखा जहा एक पेड़ था। चाहत को वहां काफी धूप लग रही थी जिससे बचने के लिए वो उस
चाहत स्टेशन के बाहर खड़ी थीं दोपहर का वक़्त था शायद इसीलिए धूप ज्यादा ही थी तो चाहत ने स्कार्फ निकाला और अपना चेहरा उससे कवर कर लिया। चाहत वहीं खड़ी आर्यन के आने का वेट कर रही थी।
चाहत के पीछे साइड बाइक रुकी जिसमे से अंश जिसने ब्लैक टी शर्ट के ऊपर ब्राउन लेदर का जैकेट पहन था और अध्यन जिसने ब्लैक एंड व्हाइट मिक्स टी शर्ट पर व्हाइट जैकेट पहन रखा था वो बाइक से उतर कर स्टेशन की तरफ देखने लगा।
अंश बाइक की स्टैंड लगाते हुए - यार.. बस ट्रेन ना आईं हो..
अध्यन हाथ में बुके लिए हुए - सब तेरी वजह से हुआ.. मुझे अकेले अा जाना चाहिए था.. पर नहीं .. मुझे तो तेरा वेट था.. अब देख क्या हो गया..
अंश उसे देख कर - सॉरी यार.. ये बोल उसने अध्यन की तरफ देखा तो अध्यन ने कहा - इट्स ओके.. चल अब लेट ना कर..
पेड़ के नीचे चले गई।
अध्यन और अंश पहले इंक्वायरी के पास गए वहा उन्होंने ट्रेन के बारे में पूछा तो उन्हे पता लगा ट्रेन तो अा चुकी है और चली भी गई।
अध्यन और अंश ने जब ये सुना तो दोनों का मुंह उतर गया। अध्यन के हाथ से फूलों का बुके छूट कर नीचे गिर गया। जिस पर कुछ लोग पैर रख कर आगे भी बढ़ गए। अंश ने एक नजर अध्यन को देखा फिर बुके को उठा कर डस्टबिन में डाल दिया। फिर दोनों हारे हुए जुवारी की तरह दोनों स्टेशन से बाहर अा गए।
चाहत जो पेड़ के नीचे थी उसे थोड़ी ही दूर पर आर्यन आता दिखाई दिया । उसने आर्यन को हाथ का इशारा कर के बताया वो उस ओर है। तो आर्यन अपनी बाइक उसके पास ले आया। आर्यन बाइक से उतरा और दी बोलते हुए चाहत के गले लग गया। चाहत भी बहुत दिनों बाद अपने आर्यन से मिली थी तो उसे भी गले लग कर अच्छा लगा ।
चाहत ने आर्यन कि पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा - कैसा है मेरा सोनपापड़ी..
आर्यन ने चाहत से दूर होते हुए कहा - बहुत अच्छा.. और
आपके आने के बाद तो और भी अच्छा हो गया हूं..
चाहत ने आर्यन के गाल पर हाथ रख कर कहा - कितना पतले लग रहे हो.. मेरे जाने के बाद .. मम्मी तुम्हे खाना नहीं देती क्या.. ??
ये सुन आर्यन चाहत के हाथ पर हाथ रख कर बोलता है - देती है दी.. पर अब आपके हाथ की चॉकलेट नहीं मिलती ना.. इसीलिए ऐसा हो गया हूं..ये बोल वो मुस्कुरा दी। वैसे तो आर्यन ने ये बात मजाक में कहीं थी पर चाहत को उसके आंखो का दर्द दिख गया था जिसे उसने सफाई से छुपाने की कोशिश की थी। चाहत सोचने लगी - मेरा सोनपापड़ी.. कितना बड़ा हो गया है.. और समझदार भी । वो ये सोच ही रही थी तभी ..
आर्यन ने बाइक में बैठ कर चाहत को बैठने का इशारा करता है। चाहत इशारा समझ बाइक में बैठ जाती है।
बाहर आकर अंश अपना हाथ बाइक पर कहता है - सॉरी यार.. मेरे कारण.. तू आज.. वो इससे ज्यादा कुछ कह पाता उससे पहले ही अध्यन ने उसके हाथो पर अपना हाथ रख कहा - नहीं भाई.. इट्स ओके..
अध्यन अपना सिर उठा कर सामने देखते हुए कहता है -
वो... आर्यन है ना..
अंश जो कि दूसरी तरफ देख रहा था उसने अध्यन की तरफ देखा फिर दोनों ने मिल कर वहा देखा जहा आर्यन था। उसके ठीक पीछे चाहत आर्यन के कंधो पर हाथ रख कर बाइक में बैठ रही थी। जिसे देख अंश और आर्यन ने एक दूसरे को देखते हुए एक साथ कहा - ओह.. नो..
वो दोनो बाइक को छोड़ आर्यन की तरफ भागे तब तक आर्यन ने बाइक स्टार्ट कर दी और वो उन दोनों से आगे निकल गया।
एक बार फिर से अध्यन और अंश रुक गए। अंश हांफते हुए - अरे.. यार.. फिर से नहीं.. बस थोड़ा देर और रुक जाता ना तो.. मिल लेते.. पर.. बोलते हुए उसने अध्यन को देखा जो एकटक बाइक की तरफ हीं देख रहा था।
अंश ने उसे ऐसे देखा तो उसके कंधो पर हाथ रखा जिससे अध्यन ने चौक कर अंश की तरफ देखा तो अंश ने कहा - डोंट वरी.. हम उससे मिल लेंगे..
जिसे सुन अध्यन ने कहा - मै जब उसके करीब से गुजरा था.. मुझे लगा था.. मुझे फील हुआ था.. पर मैंने इग्नोर कर दिया.. अंश मुझे फील.. अंश ने इससे आगे उसे बोलने नहीं
दिया उसने बस अध्यन को गले से लगा लिया अंश ने शायद पहली बार अध्यन की आंखो में डर देखा था ये महज डर नहीं था उसकी आंखो में किसी अपने को खों देने का डर था मानो अगर उस अपने को अध्यन से दूर किया गया तो वो जी नहीं पाएगा। अंश उसे ऐसे नहीं छोड़ना चाहता था। वहीं अध्यन ने अंश को मजबूती से पकड़ते हुए कहा - इतने करीब होने के बाद भी.. क्यों..??
अंश ये सुन कुछ नहीं कहा और कहता भी क्या.. वो अध्यन उससे दूर हुआ फिर उसने कहा - मै बाइक लेकर आया.. ये बोल अंश बाइक लेने चले गया। वहीं अंश कुछ देर तक चलते हुए कुछ सोचने लगा । उस ने अपना मोबाइल निकाला और कॉल लगा दी।
चाहत जों की बाइक में बैठे इधर उधर देख रही थी उसका मोबाइल बजने लगा। चाहत ने मोबाइल की तरफ देखा फिर मोबाइल कान से लगा लिया उसने कहा - हा... अंश..
दूसरी तरफ से अंश ने कहा - कहा हो..
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - अपने शहर.. राजनांदगांव.. अभी तो आई.. अब घर जा रही हूं..
अंश ने कहा - ठीक है.. तो मिलता हूं शाम को..
चाहत ने भी चहकते हुए कहा - ठीक है.. अा जाना.. तुम्हारे लिए मैगी बना कर रखूंगी मै..
ये सुन अंश मुस्कुरा दिया फिर उसने कहा - हा.. बहुत सारा बना कर रखना..
चाहत ने भी हस्ते हुए कहा - हा ठीक है..
अंश ने देखा अध्यन बाइक के लिए उसे ही देख रहा था वो बाइक लेकर अध्यन की तरफ जाने लगा। उसने अध्यन को देख कर तुरंत चाहत से कहा - अच्छा ठीक है.. तो तुम घर जाओ.. शाम को मिलता हू तुमसे..
चाहत ने भी कहा - हा ठीक है.. ये बोल उसने कॉल कट कर दी।
वो बाइक लेकर अध्यन के पास पहुंचा तो अध्यन ने उतरे चेहरे के साथ बाइक लेकर उसे स्टार्ट किया फिर अंश की तरफ देख कर कहा - चलो ... अंश उसके इतना कहते ही बाइक पर बैठ गया ।बाइक ने रफ्तार पकड़ ली अध्यन बाइक चलाते हुए सोचने लगा - आज इतने पास होकर भी तुमसे मिल नहीं पाया.. ये क्या हो रहा है मेरे साथ.. ये बोल उसने रोड पर कॉन्संट्रेट करना जरूरी समझा।