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Romance चाहत

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डॉली ने चाहत को देखा फिर मुस्कुरा दी उसने एक हाथ से लड़के के हाथ को पकड़ा और चाहत की तरफ अा गई। चाहत के सामने खड़े होकर डॉली ने बैग उसके हाथो से लेते हुए कहा - अरे.. इसे तो मै भूल गई थी..ये बोल डॉली ने चाहत के हाथो से बैग ले लिया।

चाहत वो तो कुछ बोल ही नहीं रही थी बस कभी डॉली के बगल में खड़े लड़के को देखती तो कभी डॉली को।

डॉली को उसका हैरान सा चेहरा देख हसी अा गई उसने मुस्कुराते हुए कहा - रेहान.. ये चाहत है .. मेरी कॉलेज की फ्रेंड.. मेरी टीचर.. जिसके बारे में मैंने तुम्हे बताया था..

फिर वो चाहत की तरफ मुड़ी और उसने चाहत से कहा - और चाहत ये है.. रेहान..मेरा boyfriend.. ये बोल डॉली ने रेहान का हाथ पकड़ लिया और उसके बगल से लग गई।

चाहत ये सुन हैरान हो गई वो बस रेहान को देख रही थी। इसके साथ ही रेहान ने चाहत की तरफ हाथ बढ़ाया था जिसे चाहत देख ही नहीं रही थीं वो खुद में ही खो गई थी। चाहत को सदमे में देख डॉली को मज़ा आ रहा था पर डॉली चाहत को कुछ कहती उससे पहले ही ट्रेन की सीटी की आवाज़ हुई जिसका मतलब था कि अब ट्रेन चलने को तैयार है।

ट्रेन की आवाज़ सुन डॉली जल्दी से चाहत के गले मिली फिर उसके कान में धीरे से कहा - इसके बारे में.. बाद में बताती हू.. अभी के लिए बाय.. ये बोल वो उससे दूर हुई ।

चाहत भी ट्रेन कि सिटी की आवाज़ से होश में आ गई थीं उसने भी डॉली को कस के गले लगा लिया फिर उसके कान में कहा - बेटा .. तुमने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई हैं ना.. तुम वापस आओ.. फिर तुम्हे बताती हूं.. ये बोल उसने डाली को छोड़ दिया और ट्रेन में चढ गई।

चाहत गेट के पास खड़ी थी । साथ ही ट्रेन ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली । डॉली ने नीचे से अपना हाथ हिलाते हुए चाहत को बाय किया और उसे फ्लाइंग किस दी। चाहत भी उसे देखते हुए अपना हाथ भी उठा कर उसे बाय किया।

थोड़े देर तक चाहत गेट के पास ही खड़ी होकर डॉली को देखती रही जब डॉली का अश्क धुधला हुआ तब वो अंदर आकर अपनी सीट पर बैठ गई। उसे डॉली का उसे फ्लाइंग किस करना याद अा रहा था। जिसे सोच कर उसने मुस्कुराते हुए मन में कहा - पागल..

चाहत खिड़की के पास अा गई और खिड़की से पीछे छूटते हुए पेड़ो को देखने लगी। क्युकी अब आगे का सफर उसे अकेले ही पूरा करना था।

ट्रेन अपनी रफ्तार लिए हुए थी। चाहत का दिल भी इसी रफ्तार से धड़क रहा था। अब ये बेचैनी इतने दिनों बाद घर जाने की थी या फिर अध्यन से मिलने की थी कह पाना मुश्किल था।

ट्रेन हमेशा की तरह टाइम पर थी। राजनांदगांव स्टेशन अा चुका था। चाहत ने एक बार खिड़की से बाहर देखा फिर गहरी सांस ली । उसने अपने बैग को एक हाथ में पकड़ा और पर्स को अपने कंधो पर लटका लिया। लेफ्ट हैंड में बैग पकड़े और राइट हैंड में मोबाइल पकड़े वो ट्रेन से नीचे अा गई।

चाहत ने कुछ नम्बर दबाए और मोबाइल कान से लगा लिया। दूसरी तरफ से हेल्लो सुनने के साथ चाहत ने कहा - हा आर्यन.. मै स्टेशन पर हूं,.. हा.. ठीक है.. मै वेट करती हूं.. ये बोल चाहत चलते हुए स्टेशन से बाहर आ गई।

अध्यन जैसे ही चाहत के बगल से गुज़रा वो कुछ पल के लिए रुक गया । उसने पलट कर देखा तो एक लड़की जिसकी हाइट लगभग 5 फुट 6 इंच है वो मल्टीकलर का स्कार्फ बांधे खड़ी है। जिसकी पीठ अध्यन की तरफ है। अध्यन वहीं रुक गया उसे कुछ पल के लिए ऐसा लगा जैसे वो चाहत ही हों वो बस उसे ही देखे जा रहा था वो स्कार्फ के पीछे छुपे उस चेहरे को देखना चाह रहा था। यहां तक कि उसे इस बात का होश नहीं था कि वो स्टेशन पर खड़ा है।

तभी अंश ने मूड कर देखा तो अध्यन एक लड़की की तरफ देख रहा था तो उसने कहा - हम पहले से ही लेट है.. और ये है कि .. वो अध्यन के पास आया फिर उसने अध्यन का हाथ पकड़ कर कहा - अगर देखना हो गया हो तो.. चले..

अध्यन ने कहा - मुझे ऐसा लगा.. की..

तभी अंश ने कहा - की वो चाहत है.. अरे मजनू के भतीजे.. वो चाहत कैसे हो सकती है.. उसकी ट्रेन तो अभी आई ही नहीं होगी.. जिसे सुन अध्यन ने हा कहा और दोनों स्टेशन की तरफ चले गए। वहीं दूसरी ओर चाहत आर्यन का वेट कर रही थी। उसने अपने सामने देखा जहा एक पेड़ था। चाहत को वहां काफी धूप लग रही थी जिससे बचने के लिए वो उस

चाहत स्टेशन के बाहर खड़ी थीं दोपहर का वक़्त था शायद इसीलिए धूप ज्यादा ही थी तो चाहत ने स्कार्फ निकाला और अपना चेहरा उससे कवर कर लिया। चाहत वहीं खड़ी आर्यन के आने का वेट कर रही थी।

चाहत के पीछे साइड बाइक रुकी जिसमे से अंश जिसने ब्लैक टी शर्ट के ऊपर ब्राउन लेदर का जैकेट पहन था और अध्यन जिसने ब्लैक एंड व्हाइट मिक्स टी शर्ट पर व्हाइट जैकेट पहन रखा था वो बाइक से उतर कर स्टेशन की तरफ देखने लगा।

अंश बाइक की स्टैंड लगाते हुए - यार.. बस ट्रेन ना आईं हो..

अध्यन हाथ में बुके लिए हुए - सब तेरी वजह से हुआ.. मुझे अकेले अा जाना चाहिए था.. पर नहीं .. मुझे तो तेरा वेट था.. अब देख क्या हो गया..

अंश उसे देख कर - सॉरी यार.. ये बोल उसने अध्यन की तरफ देखा तो अध्यन ने कहा - इट्स ओके.. चल अब लेट ना कर..

पेड़ के नीचे चले गई।

अध्यन और अंश पहले इंक्वायरी के पास गए वहा उन्होंने ट्रेन के बारे में पूछा तो उन्हे पता लगा ट्रेन तो अा चुकी है और चली भी गई।

अध्यन और अंश ने जब ये सुना तो दोनों का मुंह उतर गया। अध्यन के हाथ से फूलों का बुके छूट कर नीचे गिर गया। जिस पर कुछ लोग पैर रख कर आगे भी बढ़ गए। अंश ने एक नजर अध्यन को देखा फिर बुके को उठा कर डस्टबिन में डाल दिया। फिर दोनों हारे हुए जुवारी की तरह दोनों स्टेशन से बाहर अा गए।

चाहत जो पेड़ के नीचे थी उसे थोड़ी ही दूर पर आर्यन आता दिखाई दिया । उसने आर्यन को हाथ का इशारा कर के बताया वो उस ओर है। तो आर्यन अपनी बाइक उसके पास ले आया। आर्यन बाइक से उतरा और दी बोलते हुए चाहत के गले लग गया। चाहत भी बहुत दिनों बाद अपने आर्यन से मिली थी तो उसे भी गले लग कर अच्छा लगा ।

चाहत ने आर्यन कि पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा - कैसा है मेरा सोनपापड़ी..

आर्यन ने चाहत से दूर होते हुए कहा - बहुत अच्छा.. और

आपके आने के बाद तो और भी अच्छा हो गया हूं..

चाहत ने आर्यन के गाल पर हाथ रख कर कहा - कितना पतले लग रहे हो.. मेरे जाने के बाद .. मम्मी तुम्हे खाना नहीं देती क्या.. ??

ये सुन आर्यन चाहत के हाथ पर हाथ रख कर बोलता है - देती है दी.. पर अब आपके हाथ की चॉकलेट नहीं मिलती ना.. इसीलिए ऐसा हो गया हूं..ये बोल वो मुस्कुरा दी। वैसे तो आर्यन ने ये बात मजाक में कहीं थी पर चाहत को उसके आंखो का दर्द दिख गया था जिसे उसने सफाई से छुपाने की कोशिश की थी। चाहत सोचने लगी - मेरा सोनपापड़ी.. कितना बड़ा हो गया है.. और समझदार भी । वो ये सोच ही रही थी तभी ..

आर्यन ने बाइक में बैठ कर चाहत को बैठने का इशारा करता है। चाहत इशारा समझ बाइक में बैठ जाती है।

बाहर आकर अंश अपना हाथ बाइक पर कहता है - सॉरी यार.. मेरे कारण.. तू आज.. वो इससे ज्यादा कुछ कह पाता उससे पहले ही अध्यन ने उसके हाथो पर अपना हाथ रख कहा - नहीं भाई.. इट्स ओके..

अध्यन अपना सिर उठा कर सामने देखते हुए कहता है -

वो... आर्यन है ना..

अंश जो कि दूसरी तरफ देख रहा था उसने अध्यन की तरफ देखा फिर दोनों ने मिल कर वहा देखा जहा आर्यन था। उसके ठीक पीछे चाहत आर्यन के कंधो पर हाथ रख कर बाइक में बैठ रही थी। जिसे देख अंश और आर्यन ने एक दूसरे को देखते हुए एक साथ कहा - ओह.. नो..

वो दोनो बाइक को छोड़ आर्यन की तरफ भागे तब तक आर्यन ने बाइक स्टार्ट कर दी और वो उन दोनों से आगे निकल गया।

एक बार फिर से अध्यन और अंश रुक गए। अंश हांफते हुए - अरे.. यार.. फिर से नहीं.. बस थोड़ा देर और रुक जाता ना तो.. मिल लेते.. पर.. बोलते हुए उसने अध्यन को देखा जो एकटक बाइक की तरफ हीं देख रहा था।

अंश ने उसे ऐसे देखा तो उसके कंधो पर हाथ रखा जिससे अध्यन ने चौक कर अंश की तरफ देखा तो अंश ने कहा - डोंट वरी.. हम उससे मिल लेंगे..

जिसे सुन अध्यन ने कहा - मै जब उसके करीब से गुजरा था.. मुझे लगा था.. मुझे फील हुआ था.. पर मैंने इग्नोर कर दिया.. अंश मुझे फील.. अंश ने इससे आगे उसे बोलने नहीं

दिया उसने बस अध्यन को गले से लगा लिया अंश ने शायद पहली बार अध्यन की आंखो में डर देखा था ये महज डर नहीं था उसकी आंखो में किसी अपने को खों देने का डर था मानो अगर उस अपने को अध्यन से दूर किया गया तो वो जी नहीं पाएगा। अंश उसे ऐसे नहीं छोड़ना चाहता था। वहीं अध्यन ने अंश को मजबूती से पकड़ते हुए कहा - इतने करीब होने के बाद भी.. क्यों..??

अंश ये सुन कुछ नहीं कहा और कहता भी क्या.. वो अध्यन उससे दूर हुआ फिर उसने कहा - मै बाइक लेकर आया.. ये बोल अंश बाइक लेने चले गया। वहीं अंश कुछ देर तक चलते हुए कुछ सोचने लगा । उस ने अपना मोबाइल निकाला और कॉल लगा दी।

चाहत जों की बाइक में बैठे इधर उधर देख रही थी उसका मोबाइल बजने लगा। चाहत ने मोबाइल की तरफ देखा फिर मोबाइल कान से लगा लिया उसने कहा - हा... अंश..

दूसरी तरफ से अंश ने कहा - कहा हो..

चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - अपने शहर.. राजनांदगांव.. अभी तो आई.. अब घर जा रही हूं..

अंश ने कहा - ठीक है.. तो मिलता हूं शाम को..

चाहत ने भी चहकते हुए कहा - ठीक है.. अा जाना.. तुम्हारे लिए मैगी बना कर रखूंगी मै..

ये सुन अंश मुस्कुरा दिया फिर उसने कहा - हा.. बहुत सारा बना कर रखना..

चाहत ने भी हस्ते हुए कहा - हा ठीक है..

अंश ने देखा अध्यन बाइक के लिए उसे ही देख रहा था वो बाइक लेकर अध्यन की तरफ जाने लगा। उसने अध्यन को देख कर तुरंत चाहत से कहा - अच्छा ठीक है.. तो तुम घर जाओ.. शाम को मिलता हू तुमसे..

चाहत ने भी कहा - हा ठीक है.. ये बोल उसने कॉल कट कर दी।

वो बाइक लेकर अध्यन के पास पहुंचा तो अध्यन ने उतरे चेहरे के साथ बाइक लेकर उसे स्टार्ट किया फिर अंश की तरफ देख कर कहा - चलो ... अंश उसके इतना कहते ही बाइक पर बैठ गया ।बाइक ने रफ्तार पकड़ ली अध्यन बाइक चलाते हुए सोचने लगा - आज इतने पास होकर भी तुमसे मिल नहीं पाया.. ये क्या हो रहा है मेरे साथ.. ये बोल उसने रोड पर कॉन्संट्रेट करना जरूरी समझा।
 
वहीं अंश जो अध्यन के पीछे बैठा था वो सोच रहा था - नहीं अब और नहीं.. अब तो तुम दोनों को मिलना ही है.. फिर

चाहे कुछ भी क्यों ना हो जाए.. बहुत रह लिए तुम एक दूसरे के बिना.. अब नहीं.. बिल्कुल नहीं.. अंश ये सोच ही रहा था तभी अध्यन ने उसे पुकारा .. अंश ने अपने सोच से बाहर आते हुए कहा - हा..

अध्यन ने बाइक घुमाते हुए कहा - तुझे कहा ड्रॉप करू..

अंश - तेरे घर.. ही चल यार.. आज तेरे घर रुक जाता हूं.. शाम को तू मुझे ड्रॉप कर देना..

अध्यन - अच्छा ठीक है .. ये बोल कर उसने बाइक अपने घर की तरफ मोड़ दी.. दोनों कुछ देर में अध्यन के घर अा गए।

चाहत का घर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

आर्यन ने बाइक घर के बाहर रोकी और चाहत नीचे अा गई। उसने घर की तरफ देखा तो उसे वहां की हर बात याद आने लगी। उसका वहा घूमना, मस्ती करना, रीमा जी की काम में मदद करना सब कुछ याद आने लगा। ऐसे ही वो आस पास देख रही थी उसके लगाए हुए पौधे और गार्डन को वैसे ही रखा गया था जैसा उसने छोड़ा था। सब वैसा ही था।

तभी आर्यन उसके बगल में आकर खड़ा हुए उसने चाहत का

हाथ पकड़ कर कहा - वेलकम होम दी.. चाहत ने भी पलट कर उसकी तरफ देखा फिर मुस्कुरा दी।

चाहत और आर्यन अंदर आए तभी आर्यन ने चाहत से कहा - दी यह आओ.. ये बोल कर उसने चाहत का हाथ पकड़ कर उसे सोफे के पास छिपा दिया। फिर उसने ज़ोर से कहा - मम्मी.. मम्मी..

रीमा जी जों की किचेन में काम कर रही थी वो हाथ में चम्मच पकड़ कर वहा खुश होते हुए आई पर जैसे ही उनकी नजर आर्यन पर गई वो घबरा गई। उसने आर्यन के आगे पीछे देखते हुए कहा - चाहत .. चाहत कहा है..??

जिसे देख आर्यन अपना सिर नीचे करते हुए बोला - मम्मी दी का कॉल आया था.. वो आज नहीं अा पाएगी.. ये सुन रीमा जी का चेहरा उतर गया । उन्होंने वैसे ही कहा - ठीक है.. ये बोल वो जाने को मुड़ी तभी चाहत ने पीछे से उन्हे बाहों में भर लिया और अपना सिर उनके कंधो पर रख कर कहा - मम्मा..

चाहत के इतना कहते ही रीमा जी ने अपनी आंखे बंद कर ली। शायद उन्होंने ऐसा इसीलिए किया ताकि उनके दोनों बच्चे अपनी मा के आंखो में मौजूद नमी को देख ना सके।

उन्होंने अपना हाथ चाहत के गालों पर रख कर कहा - अा गया मेरा बच्चा.. ये बोल रीमा जी पलट गई। उन्होंने चाहत को गले से लगा लिया।

चाहत भी रीमा जी की बाहों में कुछ देर के लिए अपने खोए हुए सुकून को महसूस करने लगी। थोड़े देर बाद दोनों एक दूसरे से दूर हुए तो उन्होने देखा । आर्यन जो कि अपने गाल पर हाथ रख कर उन्हे देख रहा था उसने कहा - फाइनली आप दोनों का ये.. जरूरत से ज्यादा प्यार वाला एपिसोड ख़तम हुआ.. कितने ड्रामेटिक हो आप दोनों.. ये बोल वो जैसे आगे बढ़ने लगा। वैसे ही चाहत ने उसे रोका और उसके गालों को खींच कर कहा - हा और तुम.. क्यूट.. मेरी सोनपापड़ी.. चाहत के ऐसा करने से आर्यन चिढ़ गया उसने खुद को चाहत से दूर करते हुए कहा - क्या दी.. मै अब बड़ा हो गया हूं.. मुझे सोनपापड़ी ना बोला करो..

उसकी बात सुन चाहत मुस्कुरा दी फिर उसने कहा - ए.. तुम मेरी सोनपापड़ी थे .. हो और रहोगे.. चाहे कितने भी बड़े क्यों ना हो जाओ.. समझे.. ये बोल उसने एक बार फिर आर्यन के गालों को खींच लिया। आर्यन ने जोर से नहीं कहा जिसे देख कर रीमा जी और चाहत हसने लगे।

चाहत को इतने दिन बाद हस्ते देख आर्यन और रीमा जी उसे

ध्यान से देखने लगे। आज कितने ही दिनों के बाद चाहत की हसी गूंजी थी पूरे घर में.. रीमा जी इस पल को हमेशा के लिए अपने आंखो में बसा लेना चाहती थी। वो बस एक टक चाहत को देख रही थी। चाहत वो तो बस हस ही रही थी। थोड़े देर बाद जब उसकी नजर आर्यन और रीमा जी पर पड़ी तो वो चुप हो गई। रीमा जी चाहत के पास आई फिर उन्होंने अपने हाथो से चाहत की बलाए लेते हुए कहा - हाय मेरा बच्चा.. किसी की नजर ना लगे तुम्हे.. जिसे सुन कर चाहत मुस्कुरा दी। रीमा जी ने चाहत के गालों पर हाथ रख कर कहा - जाओ फ्रेश होकर अा जाओ.. मैंने तुम्हारे लिए बैगन का भरता और पुरिया बनाई है..

तभी चाहत ने कुछ कहने के मुंह खोला तो रीमा जी ने कहा - हा हा.. मीठे में खीर भी है.. बस तुम जल्दी फ्रेश होकर अा जाओ.. चाहत ने उनकी बात सुन उनके गालों पर किस किया फिर कहा - थैंक्यू मम्मा.. मै अभी आई.. ये बोल जैसे ही चाहत पलटी उसने देखा आर्यन इसका बेग पकड़े उसके रूम की तरफ जा रहा है।

चाहत आर्यन को जाते देख कर रीमा जी की तरफ सवालिया नजरो से देखने लगी जिसे समझते हुए रीमा जी ने कहा - तुम्हारे जाने के बाद से ही.. मेरा छोटा बाबू.. कब इतना बड़ा हो गया पता ही नहीं चला..जो कभी खुद से पानी भी निकाल

कर नहीं पीता था.. अब देखो बिना बोले सारे काम कर लेता है.. वो भी बिना चॉकलेट की डिमांड किए.. ये बोल रीमा जी मुस्कुरा दी जिसे देख चाहत भी मुस्कुरा दी और अपने रूम की तरफ चले गई।

चाहत जैसे ही रूम के बाहर पहुंची तो देखा रूम बिल्कुल वैसा ही था जैसा की वो छोड़ कर गई थी। यहां तक कि उसके रूम में रखे उसकी बुक्स भी। चाहत ये देख कर मुस्कुरा दी। तभी आर्यन वॉशरूम से बाहर आया और कहा - दी.. मैंने गिजर ऑन कर दिया है.. ठंड है तो आप गर्म पानी से हाथ मुंह धोंकर फ्रेश हो जाओ.. तब तक मै मम्मा के साथ खाना लगा देता हूं.. ये बोल कर वो बाहर जाने को हुआ तो चाहत ने उसका हाथ पकड़ लिया। आर्यन ने मूड कर जब चाहत की तरफ कर देखा तो चाहत ने उसे देख कर कहा - मैंने अपने सोनपापड़ी को बहुत मिस किया.. इस वक़्त चाहत की आंखे भीगी थी जिसे देख कर आर्यन ने भी चाहत के आसुं को अपने हाथो से साफ करते हुए कहा कहा - मैंने भी.. और मुस्कुरा कर वहा से चला गया।

आर्यन के जाते ही चाहत ने कबर्ड से अपने कपड़े निकाले फिर फ्रेश होने वाशरूम चले गई । थोड़े देर में जब वो वापस

आईं अपने चेहरे को साफ करते हुए उसकी नजर खिड़की पर गई। जहा अब भी विंड चाइम लटक रही थी। चाहत की नजर जैसे ही विंड चाइम पर पड़ी। वैसे ही वो लहराने लगी जिससे उसकी मीठी आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी। जिससे ऐसा लग रहा था मानो वो भी चाहत का वेलकम कर रही हो। चाहत उसकी आवाज़ सुन कर बस मुस्कुरा दी।

चाहत ने मेहरून कलर का घुटनों के थोड़े नीचे तक का नॉर्मल वन पीस ड्रेस पहन कर तैयार हुई। उसने बालो को पकड़ कर क्लच किया फिर नीचे अा गई। उसने आर्यन और रीमा जी के साथ मिलकर खाना खाया। खाना खाते हुए उसने हॉस्टल और एग्जाम की सारी बातें रीमा जी को बताई फिर रीमा जी को लेकर अपने कमरे में चले आई।

जहा वो रीमा जी की गोद में सिर रखे हुए थी और रीमा जी उसके सिर को सहला रही थी। ऐसे ही चाहत को नींद अा गई । रीमा जी ने देखा चाहत सो रही है तो उन्होंने चाहत के सिर के नीचे तकिया रखा फिर चाहत के माथे को किस कर वो बाहर अा गई।
 
अध्यन का घर

शाम का समय

अंश बैठे हुए बुक्स पढ़ रहा था। तभी अंश ने घड़ी की तरफ देखा जहा शाम के 5 बज रहे थे और फिर सामने देखा जहा अध्यन बैठा था जिसके चेहरे पर बाहर बज रहें थे। अंश ने अध्यन को एक टक किसी एक ही जगह पर देखते हुए देखा फिर उसे याद आया उसे चाहत के घर जाना है। उसने अपना मोबाइल निकला फिर चाहत को कॉल लगा दी। चाहत ने पहले तो कॉल अटेन नहीं किया दूसरी बार में उसने कॉल अटेंड कर लिया।

चाहत के कॉल अटेंड करते ही अंश ने कहा - कहा हो..

चाहत ने अल्साई हुई आवाज़ में कहा - घर पर.. सो रही हूं..

अंश ने कहा - तो फिर उठ जाओ.. मै आधे घण्टे में पहुंच रहा हूं.. ये बोल उसने बिना चाहत की बात सुने कॉल कट कर दी। अंश अब अध्यन के पास गया। उसने अध्यन से कहा - चलो.. अध्यन उसकी आवाज़ सुन अपनी सोच से अचानक बाहर आया उसने अंश की तरफ देखा क्युकी उसे कुछ सुनाई तो दिया था पर अंश ने क्या कहा था ये उसे सुनाई नहीं दिया था।

अंश ने अपना हाथ आगे कर अध्यन को वॉशरूम में धक्का मारते हुए कहा - जाओ.. फ्रेश होकर आओ.. हमे चाहत के घर जाना है.. जिसे सुन अध्यन झट से पकट कर अध्यन की तरफ देखने लगा । जिसे समझते हुए अंश ने हा में सिर हिलाया। अध्यन उसकी बात सुन खुश हुआ फिर अंश को गले लगा कर वॉशरूम में चला गया। अंश उसकी इस हरकत को देख कर कहा - नौटंकी..

थोड़े देर बाद दोनों घर से बाहर आए। और चाहत के घर की तरफ चले गए।

चाहत का घर

वहीं चाहत अंश के कहने पर ना चाहते हुए भी उठी और फ्रेश होकर किचेन कि तरफ चले गई। जहा रीमा जी पहले से ही काम कर रही थी। चाहत को देख कर रीमा जी ने कहा - कुछ चाहिए बेटा..

तो चाहत ने कहा - नहीं मम्मा.. फिर वो इधर उधर देखने

लगी। जिसे समझ कर रीमा जी ने कहा - क्या ढूंढ रही हो..

तो चाहत ने मासूम सी शक्ल बना कर कहा - मैगी.. रीमा जी ने उसका चेहरा देखा फिर मुस्कुराते हुए मैगी का पैकेट चाहत की तरफ बढ़ा दिया।

चाहत ने मैगी हाथ में ली फिर सब्जियां लेकर उन्हे काटने लगी। सब्जियां काटते हुए उसने रीमा जी से कहा - मम्मी.. अंश अा रहा है.. थोड़े देर में..

रीमा जी ने भी दाल में छौंक लगाते हुए कहा - अच्छा तभी ये मैगी बन रही है..

चाहत ने भी मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला दिया। तभी रीमा जी ने कहा - तो अध्यन भी अा रहा होगा.. जिसे सुन चाहत के हाथ रुक गए। रीमा जी अपने ही धुन में कहा - हा.. अच्छा है.. वरना तुम्हारे जाने के बाद तो मैंने दोनों को देखा ही नहीं .. आने दो.. दोनों को खूब खबर लूंगी.. दोनों की.. ये बोल रीमा जी ने गैस बन्द किया और रूम से बाहर निकल गई।

वहीं चाहत सोचने लगी - क्या अध्यन भी आयेगा.. काश वो अा जाए.. बहुत दिन हो गए.. उसे देखे.. ये उसने सोचा ही

था तभी उसने देखा सारी सब्जियां कट गई है। जिसे देख उसने सिर झटका फिर मैगी बनाने लगी। थोड़े देर बाद उसकी मैगी भी बन गई। चाहत ने साइड में चाय बना दी फिर गैस बंद कर दी। वो किचेन से हाथ साफ कर बाहर आई।

तभी घर की डोर बेल बजी जिसके साथ ही चाहत के दिल की धड़कने भी बढ़ गई।बेल की आवाज़ सुन कर रीमा जी बाहर अा गई। उन्होंने देखा चाहत दरवाजे के करीब है जिसे देख कर उन्होंने कहा - चाहत... चाहत ने चौक कर उनकी तरफ देखा तो रीमा जी ने कहा - दरवाज़ा खोल दो बेटा.. अंश ही होगा..

चाहत ने हा में सिर हिलाया फिर दरवाजे की तरफ बढ़ गई। उसका हाथ दरवाजे की तरफ जा ही नहीं रहा था वो बार बात अपने हाथ दरवाजे की तरफ बढ़ाती फिर वापस खींच लेती उसने अपनी आंखे बंद की फिर एक झटके में दरवाज़ा खोल दिया.. तभी पीछे खड़ी रीमा जी ने कहा - अरे.. अध्यन .. चाहत ने रीमा जी की आवाज़ सुन कर अपनी आंखे खोली तो सामने अध्यन खड़ा था जो कि उसे ही देख रहा था। चाहत भी वैसे ही उसकी आंखो में देखने लगीं । अध्यन के पीछे खड़ा अंश दोनों को देख रहा था..

चाहत और अध्यन बस एक दूसरे को ही देखे जा रहे थे। जहा चाहत की आंखो में नमी थी वहीं अध्यन के आंखों में चमक थी। आज जुबान कुछ नहीं कह रहे थे। बस आंखे ही बोल रही थी अंश जों की अध्यन के पीछे खड़ा था वो कभी अध्यन को तो कभी चाहत को देखता । उसने कुछ बोलने के लिए मुंह खोला पर कुछ बोल पाता उससे पहले रीमा जी की आवाज़ आई जो उनके पीछे खड़ी थी उन्होंने कहा - चाहत बेटा.. जिससे अध्यन और चाहत को होश आया। दोनों ने एक दूसरे से नज़रे हटाई।

रीमा जी ने फिर कहा - अरे.. हटो भी.. कब तक अध्यन को दरवाज़े पर ही रखोगी.. उनकी आवाज़ सुन कर चाहत दरवाज़े से हट गई जिसके साथ ही अध्यन और अंश अंदर अा गए। चाहत के बगल से गुजरते ही अध्यन ने फिर से वही जानी पहचानी खुशबू को महसूस किया जो चाहत से अा रही

थी जिसे उसने हमेशा महसूस किया था। जिसने अध्यन के चेहरे पर मुस्कान ला दी।

अध्यन और अंश अब सोफे के पास पहुंचे उन्होंने रीमा जी को देखा तो अपने हाथो को जोड़ कर उनको नमस्ते किया बदले में रीमा जी ने भी सिर झुका दिया और कहा - आओ.. बैठो.. अध्यन और अंश ने ये सुन हा में सिर हिला दिया।

दोनों फिर सोफे पर बैठ गए। चाहत भी धीरे से चलते हुए उनके पास अा गई। रीमा जी ने बातों का सिलसिला जारी कर दिया। वहीं अध्यन भी रीमा जी से ही बातें कर रहा था पर उसकी नज़रे रह रह कर चाहत के चेहरे पर ही जा रही थी। चाहत को अपने चेहरे पर अध्यन की नज़रे साफ महसूस हो रही थी। जिससे वो थोड़ा सा अनकंफर्टेबल तो हो रही थी पर इतने दिनों बाद भी खुद के लिए वहीं अहसास अध्यन की आंखो में देख कर वो खुश भी थी । चाहत ने अध्यन को एक नजर देखा फिर वहा से जाने लगी।

जिसे देख रीमा जी ने कहा - बेटू.. जिसे सुन चाहत रुक गई फिर पलट कर बोली - हा... तब रीमा जी ने कहा - अंश को मैगी नहीं खिलाओगी.. ये बोल वो अंश की तरफ देखते हुए

बोली - अंश बेटा.. चाहत ने तुम्हारे लिए मैगी बना कर रखी है.. रीमा जी के बोलते ही अंश ने चाहत की तरफ देखा तो चाहत ने कहा - हा .. वहीं लेने जा रही थी.. ये बोल चाहत मैगी लेने किचेन अा गई।

किचेन में आते ही उसने गहरी सांस ली फिर प्लेट्स निकालने लगी चाहत ने मैगी प्लेट्स में डाली और साथ में चाय का एक कप भी रख लिया और वो बाहर अा गई।

उसने ट्रे टी टेबल पर रखी और सामने रखे सोफे पर बैठ गई। ट्रे को देख रीमा जी ने कहा - अरे.. बस एक ही चाय ..

चाहत ने रीमा जी की बात सुन अध्यन की तरफ देखते हुए कहा - हा वो अध्यन चाय नहीं पीता .. तो.. चाहत के इतना कहते ही अध्यन ने सीधा उसकी आंखो में देखा जिसे देख चाहत ने कुछ देर उसे देखा फिर उसने अंश से कहा - ये चाय तुम्हारे लिए है.. फिर वो उठ कर सामने आई और मैगी का प्लेट अंश की तरफ बढ़ा दिया।

रीमा जी भी तब तक उठ चुकी थी वो बोली - मै भी किचेन में जाती हु..रात का खाना भी बनाना है.. ये बोल वो किचेन की तरफ चले गई। चाहत ने एक नजर रीमा जी की तरफ देखा फिर मैगी की दूसरी प्लेट उठा कर अध्यन की तरफ बढ़ा

दिया। इसी बीच चाहत की उंगलियों ने अध्यन की उंगलियों को छू लिया । चाहत और अध्यन ने कुछ पल के लिए एक अजीब सा अहसास महसूस किया।

दोनों फिर एक दूसरे कि आंखो में खोने लगे तभी अंश ने भी तब तक अपनी प्लेट उठा ली थी उसने मैगी की बाइट खाते हुए अध्यन और चाहत को देखा जो अभी भी एक दूसरे के आंखो में गुम थे जिसे देख उसने मैगी की बाइट लेते हुए कहा - अगर तुम दोनों का एक दूसरे की आंखो में देखना हो गया हो तो.. मैगी खा लो.. नहीं तो उसे भी ठंडी हो जानी है.. चाहत ये सुन हट गई।

वहीं अध्यन उसे देखता ही रहा उसने मैगी की प्लेट पकड़ ली और फिर अंश की तरफ देखते हुए कहा - कम बोला कर तू.. अध्यन की बात सुन अंश ने मुंह बना लिया फिर वो जैसे ही खाने वाला था तभी उसने देखा चाहत चुप चाप बैठ कर उन दोनों को देख रही है। जिसे देख अध्यन ने कहा - तुम्हारी मैगी..??

चाहत ने उसे देखते हुए कहा - नहीं मन नहीं है..

अध्यन ने चम्मच वापस रख कर कहा - क्यों..??

तो चाहत उसकी तरफ देखने लगी पर कहा कुछ नहीं । जिसे

देख अध्यन ने प्लेट वापस टेबल पर रख दी और चाहत से कहा - जाओ.. एक और प्लेट ले आओ..

चाहत ने अध्यन की बात सुनी फिर उसे देखने लगीं अध्यन ने कहा - चाहत जाओ.. ये सुन चाहत किचेन में चले गई जहा रीमा जी खाना बना रही थी। चाहत ने उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया उसने प्लेट लिया फिर बाहर अा गई। उस प्लेट को उसने अध्यन को दे दिया और सामने बैठ गई। अध्यन ने प्लेट ली फिर अपने प्लेट से आधी मैगी निकाल कर उस प्लेट में डाल दी।

उसने मूड कर देखा तो अंश ने मैगी ख़तम भी कर ली थी। अध्यन ने अपनी चम्मच प्लेट में रख कर चाहत की तरफ बढ़ा दी फिर उसने अंश की चम्मच उठाई और चाहत की तरफ देख कर कहा - खाओ..

चाहत का मन नहीं था पर अध्यन के इस तरह से कहने से चाहत ने भी प्लेट पकड़ ली और मैगी खाने लगी।

अध्यन ने मैगी खाते हुए कहा - मुझे अकेले खाना पसंद नहीं.. स्पेशली जब तुम सामने हो तो.. अध्यन की बात सुन चाहत के हाथ रुक गए। वो सिर उठा कर अध्यन की तरफ देखने लगी। वहीं अध्यन सिर नीचे कर खाने लगा।

दोनों ने मैगी ख़तम की अंश सोफे पर बैठ कर दोनों को देख रहा था वो दोनो की हरकतों को देख इरिटेट हो रहा था ।उसे दोनों पर बेहद गुस्सा अा रहा था। ये दोनों कैसी हरकते कर रहे थे । जहां वो एक दूसरे की फिक्र कर ये बता रहे थें की प्यार अभी भी है.. वहीं अजीब तरह की खामोशी भी लिए हुए थे। ये कैसा प्यार था इनका .. वो सोचने लगा ऐसे तो ये बात करने से रहे । मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।

अध्यन और चाहत ने जैसे ही मैगी ख़तम कर के टेबल पर रखा तो अंश ने कुछ सोचा फिर साइड से अपना मोबाइल उठा कर उस में टाइम देखते हुए बोला - अध्यन.. 7 बज गए है.. अब हमे चलना चाहिए.. ये सुन चाहत और अध्यन दोनों ने झटके के साथ अंश की तरफ देखा।

अंश ने उन दोनों को देखा फिर एक्टिंग करते हुए बोला - मम्मी का कॉल अा रहा है.. तो मुझे जाना होगा.. ये बोल वो उठ खड़ा हुआ.. फिर उसने अध्यन को देखते हुए कहा - चल अध्यन.. जिसे सुन अध्यन ना चाहते हुए भी खड़ा हो गया ।

अंश ने चाहत की तरफ देखते हुए कहा - ठीक है चाहत.. हम चलते है..

चाहत उसे कुछ समझ ही नहीं आया उसने बस हा में सिर

हिला दिया और अंश और अध्यन को बाहर छोड़ने जाने लगी। अंश आगे चल रहा था और अध्यन उसके पीछे और साथ ही ठीक उसके पीछे चाहत चल रही थीं।

अंश आगे चलते हुए मन हीं मन बुदबुदा रहा था - हे भगवान.. इन दोनों को थोड़ी अक्ल दो.. जिससे ये मुझे भगा कर खुद बात करे.. कुछ तो करो ताकि उनकी बात हो सके..

वहीं चाहत मन हीं मन कह रही थी - रुक जाओ अध्यन.. रुक जाओ.. थोड़े देर के लिए ही सही.. रुक जाओ.. प्लीज़..

तीनो दरवाजे से होते हुए मेन गेट के पास पहुंचे.. अंश ने चाहत को एक बार देखा जिसके चेहरे से पता चल रहा था कि वो उसके जाने से खुश नहीं है । अंश ने उसे देख कर ज़बरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा - बाय चाहत .. जिसे सुन चाहत फिका मुस्कुरा दी उसने भी बाय कह ही दिया।

अंश ये सुन अध्यन की तरफ देखने लगा जो अपने ही सोच में गुम था। अंश ने चले कहा.. जिससे अध्यन का ध्यान टूटा । उसने एक नजर चाहत को देखते हुए कहा - मै नहीं जाऊंगा.. उसके इतना कहते ही चाहत और अंश उसे देखने लगी। दोनों मन ही मन बहुत खुश हुए पर दोनो ने अपनी खुश चेहरे पर आने नहीं दी।

अंश ने जैसे ही कुछ कहने के लिए मुंह खोला वैसे ही अध्यन ने उसे हाथ दिखाते हुए रोक दिया। अंश रुक गया और उसे देखने लगा तो अध्यन ने कहा - तू यहां से ऑटो ले .. और घर निकल.. मै अभी यही रुकूंगा.. चाहत के पास.. ये बोल अध्यन ने चाहत को देखा .. जिससे चाहत थोड़ी देर के लिए उसे ही देखने लगी।

अंश उन दोनो को एक दूसरे की तरफ देखते देख मुस्कुरा दिया। उसने फिर गला साफ करते हुए कहा - ठीक है.. जिसे सुन अध्यन और चाहत ने अंश की तरफ देखा फिर अंश मुस्कुराते हुए गेट से बाहर निकल गया।
 

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