• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
इस बात को 10, 15 दिन निकल चुके थे एक दिन पास के गांव की ही आंगनबाड़ी की एक कार्यकर्ता डॉली की आंगनबाड़ी पर किसी काम से आई, उन दोनों को एक दूसरे की आंगनबाड़ी की रिपोर्ट बनाकर भेजनी थी एक दिन पहले ही जाकर डॉली ने उसकी आंगनबाड़ी की रिपोर्ट कंप्लीट कर दी थी और आज वह डॉली की आंगनबाड़ी पर आकर यहां की रिपोर्ट बना रही थी, डॉली भी उसके काम में सहायता कर रही थी ,पर काम करते-करते काफी देर हो गई ,जो उसके गांव जाने वाली बस शाम को 400 बजे यहां से निकलती थी ,वह

भी निकल चुकी थी, लेकिन आज रिपोर्ट का बनना जरूरी था, इसलिए डॉली ने कहा था कि वह उसे किसी से छुड़वा देगी ,करीब 500 बजे रिपोर्ट बन कर तैयार हो गई ,तब तक काकी ने राज को आंगनबाड़ी भेजा था, कि वह पता करे डॉली अभी तक क्यों नहीं आई

जब राज आंगनवाड़ी पर डॉली से पूछने आया ,,तो डॉली के पास में बैठी हुई उसकी सहेली ,राज को देखकर पूछने लगी

डॉली इस गांव में इतना स्मार्ट बंदा कहां से आया,, डॉली मुस्कुराए और जवाब दिया यह राज है ,,वह राज को नाम से तो जानती थी ,क्योंकि डॉली के ही मुंह से उसने राज का नाम सुना था ,पर उसने पहली बार राज को देखा था ,,तभी डॉली ने राज से कहा प्लीज आपने इनके गांव तक छोड़ दीजिए क्योंकि कुछ रिपोर्ट रह गई थी ,इसलिए इनकी बस मिस हो गई है

डॉली ने कहा और फिर जरूरी भी था तो। राज ने फटाफट उन्हें बैठने के लिए कहा क्योंकि शाम के टाइम ढाबे पर रस भी ज्यादा हो जाता है ,तो उसे टाइम से वापस भी आना था ,जब आंगनबाड़ी बंद करके दोनों बाहर निकली ,तो उसकी सहेली झट से राज के साथ आगे की सीट पर बैठ गई, डॉली जैसे ही घर जाने के लिए मुड़ी राज ने कहा महारानी तू भी गाड़ी में बैठ जा ,बस मैडम को छोड़ने में आधा घंटा लगेगा, उसके बाद साथ ही घर आ जाएंगे ,डॉली जानती थी कि राज इस तरह से अकेले उसको छोड़ने नहीं जाएगा ,तो डॉली जाकर पीछे की सीट पर बैठ गई, राज जब गाड़ी

ड्राइव करने लगा तो डॉली ने देखा कि वह राज की बातों में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट ले रही है ,बहुत गौर से राज को देखते हुए, कभी मुस्कुराती तो कभी राज से कोई सवाल पूछती, पर राज का ध्यान उसकी तरफ बिल्कुल भी नहीं था सिर्फ 20 मिनट में ही डॉली ने महसूस किया कि वह राज की तरफ आकर्षित हो रही थी दो-चार मिनट बाद उसका गांव आ ही चुका था,, सिवा ने उसके घर का पता पूछा और घर के दरवाजे पर जाकर जीप रोक दी

जब वह गाड़ी से उतरी तो बहुत ही इतराते हुए अदा के साथ उसने राज को थैंक्यू कहा और वह कोशिश कर रही थी, कि राज उससे और भी बातें करें ,लेकिन राज ने उसकी बात सुने बिना ही गाड़ी स्टार्ट की और वापस गांव की तरफ ले ली,,,,

डॉली की सहेली को छोड़कर, डॉली और राज घर वापस लौट रहे थे ,आते हुए डॉली राज के साथ ही आगे की सीट पर बैठ गई थी, डॉली ने मुस्कुराते हुए राज से पूछा!

दखिये ना मेरी फ्रेंड कितनी अच्छी तरह से आप को थैंक यू बोल रही थी, और आपने उसकी बात का जवाब भी नहीं दिया

यह गलत बात है, उसको वेलकम ना सही कम से कम उसकी तरफ देख कर एक बार मुस्कुरा तो सकते थे, राज ने आंखें चढ़ाते हुए डॉली को देखा ,और वापस गाड़ी ड्राइव करने लगा, डॉली को राज की ऐसी शक्ल देख कर हंसी आ रही थी, और उन्हें चिड़ाने का भी मन कर रहा था ,डॉली ने फिर कहा आपने उसको थैंक्यू क्यों नहीं बोला ,वह क्या सोचेगी कि आपको लड़कियों की फ़ीलिंग को समझना ही नहीं आता ,,

गाड़ी चलाते हुए ही राज ने डॉली से कहा देख महारानी तू अपन को मत सिखा किससे क्या बोलना है , बड़ी आई मुझे सिखाने वाली यह मत भूल कि मेरे सामने ही बढ़ी हुई है तू और रही बात लड़कियों को

समझने की

तो अपुन को इस सब की जरूरत नहीं है अपुन तेरे को समझता है ,अपने वास्ते इतना ही काफी है ,और सुन आगे से जब भी आंगनवाड़ी का कोई काम हो, तो उसे बोल देना कि टाइम पर खत्म कर के यहां से कल्टी काट ले ,,अब अपन उसको कोई छोड़ने वोढ़ने नहीं जाने वाला,,

डॉली ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा ठीक है नहीं कहूंगी आपसे किसी को छोड़ने के लिए और चुपचाप बैठ गई, राज समझ गया था कि डॉली का मूड खराब हो गया है

उसने डॉली को मनाने की कोशिश की और हंसते हुए डॉली से कहने लगा ,,

महारानी तू भी ना सब के पचड़े में कायको पड़ती है ,अपने काम से काम रख ना अरे उसकी नौकरी है ,उसका काम है ,उसको खुद ही सोचना चाहिए, तूने सब का ठेका ले रखा है ,डॉली ने दोनों कान पकड़ते हुए राज से सॉरी बोला ,

और कहां मैंने कह तो दिया आपसे

कि आज के बाद आपसे कभी किसी को छोड़ने के लिए नहीं कहूंगी

फिर क्यों मुझे इतना लंबा लेक्चर सुना रहे हैं डॉली जब गुस्सा होती ,तो ऐसे ही बात करती है,अब राज के पास एक ही चारा था

उसने भी अपना कान पकड़ते हुए डॉली से कहा सॉरी मैडम जी माफ कर दो

आगे से इतना लंबा लेक्चर नहीं सुनाऊंगा थोड़ी देर बाद दोनों घर आ चुके थे

घर आकर भी डॉली राज की बात पर गुस्सा थी ,और सिवा कुछ ना कुछ कहते हुए उसे मनाने की कोशिश कर रहा था

और उससे बात करने की कोशिश भी कर रहा था ,लेकिन डॉली सीधी जाकर अपने कमरे में चली गई ,और राज अभी भी बाहर से कुछ ना कुछ बोलते ही जा रहा था

थोड़ी देर बाद जब वह चेंज करके कमरे से निकली ,तो राज ने काकी की तरफ देखते हुए कहा ,काकी देखना महारानी कितना भाव खा रही है ,अरे पता नहीं कैसी कैसी लड़कियों को मुझसे छोड़ने के लिए कहती है और फिर अपुन को समझाती है ,कि अपुन

ने ठीक से उससे बात नहीं की ,काकी तू ही बता क्या मुझे लड़कियों से बात करना आता है ,छोरी के नाम पर अपुन की लाइफ में तू और महारानी के अलावा और कोई नहीं है अपुन साला कैसे समझेगा की लड़कियों से कैसे बात की जाती है, राज की बड़बड़ अब भी चालू थी ,डॉली ने जब तक हाथ मुंह धो कर सबके लिए खाना भी लगा लिया था और काकी को बुलाकर खाना शुरू करने के लिए कहा, राज भी हाथ धो कर आ चुका था ,काकी ने आज खाने में छोले, पूरी और खीर बनाई थी ,राज ने थाली देखते हुए कहा काकी क्या आज क्या तेरा बर्थडे है

जो यह सब आइटम बने हैं ,अरे नहीं बेटा बस बहुत

दिनों से मेरा ही मन कर रहा था छोले पूरी खाने का ,इसलिए सोचा रात को बना लूं, तो सब लोग बैठ कर आराम से खा लेंगे, डॉली अभी मुंह बनाकर छोटे-छोटे कौर चुपचाप खा रही थी ,राज पूरी तरह से डॉली को मनाने की कोशिश कर रहा था

खाना खाते हुए डॉली को अचानक हिचकियां शुरू हो गई ,वह जोर-जोर से हिचकी लेती जा रही थी ,शायद हरी मिर्ची कुछ तेज थी ,और डॉली ने मिर्ची का एक बड़ा वाइट खा लिया था ,काकी ने जल्दी से डॉली को खीर की कटोरी पकड़ाते हुए कहा डॉली खीर खा ले ,तो तेरी हिचकियां बंद हो जाएंगी,लगता है तुझे मिर्ची लग गई

राज ने देखा कि डॉली लगातार हिचकियां लिए ही जा रही है ,और उसने खीर को हाथ तक नहीं लगाया ,शायद वह अभी गुस्सा थी और किसी ना किसी तरह अपनी भड़ास निकाल रही थी ,तभी राज ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा, काकी तेरे को पता है कि जिस तरह जहर को जहर मारता है

उसी तरह मिर्ची को मिर्ची मारेंगी तू ऐसा कर महारानी को 4,6 हरी मिर्ची खिला दे

तो इसकी हिचकियां बंद हो जाएंगी,,,,

डॉली इस बात पर बुरी तरह से खिसिया गई और थाली छोड़कर पैर पटकती हुई अपने कमरे में चली गई, काकी ने देखा कि राज के चिढ़ाने पर डॉली गुस्सा हो गई है

तो राज को डांटते हुए कहा !

तू क्यों उसके पीछे पड़ा रहता है ,अब वह मेरे कहने पर नहीं आएगी ,जा और उसे मना कर ला, तुझे पसंद है ना कि उसे मीठा कितना पसंद है ,और फिर भी उसको आधे खाने से गुस्सा कर दिया ,और वह खाली छोड़ कर चली गई ,भूखे पेट तो राज भी डॉली को नहीं देख सकता था ,वह भी अपनी थाली छोड़ कर डॉली को लेने उसके कमरे में चला गया ,जब देखा तो डॉली पलँग पर उल्टी लेटी हुई अभी भी हिचकियां ले रही थी

राज ने पलंग के पास घुटनों के बल बैठते हुए डॉली से कहा सॉरी !

अब अपुन कुछ भी नहीं कहेगा ,तू चल कर खाना खा ले ,तू आंगनबाड़ी की मैडम जी और तुझे इतना भी पता नहीं कि खाने को छोड़ कर नहीं आते, डॉली ने लेटे-लेटे ही कहा आप जाइए मुझे नहीं खाना खीर

राज थोड़ी देर उसे मनाता रहा फिर भी डॉली नहीं उठी तो उसकी छोटी खींचते हुए कहा ,तू चल रही है, या तुझे उठा कर ले जाऊं ,चुपचाप चलकर अपनी थाली खत्म कर ,,चल ठीक है अगर तू नहीं जाती तो मैं भी नहीं खाऊंगा ,जब डॉली ने राज की बात सुनी ,तो चुपचाप उठी और धीरे-धीरे दोबारा अपनी थाली के पास आकर बैठ गई राज भी उसके पीछे जल्दी से आ कर खाना खाने लगा ,,डॉली ने अपनी खीर खत्म कर ली, तो राज ने अपनी कटोरी में से भी आधी खीर दुबारा डॉली की कटोरी में डालते हुए कहा ,महारानी ! तुझे मीठे की ज्यादा जरूरत है ले ले,और जब डॉली ने घूरकर उसे देखा तो जल्दी से दोनों कान पकड़ते हुए

कहा, सॉरी गलती हो गई अब तू गुस्सा मत करना ,चुपचाप खा ले ,,,

बहुत देर की हंसी हुई रुकी नीले के होठों पर आ गई थी ,वह हंसते हुए खीर खाने लगी,,,,,

दूसरे दिन जब डॉली आंगनबाड़ी गई तो आज भी उसकी सहेली पूनम को डॉली की आंगनबाड़ी पर काम था ,और आज पूनम टाइम पर डॉली की आंगनवाड़ी में आ गई थी आज डॉली भी घर से कुछ जल्दी ही निकल गई ,इसलिए वह ना खाने का डिब्बा लेकर जा पाई और ना ही खाना खाकर गई

उसने दोपहर में आने के लिए कह दिया था दोपहर में जब लंच टाइम हुआ तो नहीं डॉली

ने पूनम से भी घर चलने को कहा

भूख तो पूनम को भी लग रही थी

और फिर डॉली उसकी सहेली ही थी इसलिए वह भी डॉली के साथ उसके घर आ गई, काकी ने पालक दाल ,चावल ,रोटी और सूखे आलू की सब्जी बनाई थी

दोनों बैठ कर जल्दी खाना खाने लगी क्योंकि उन्हें वापस आंगनबाड़ी जाना था

तभी राज भी किसी काम से घर पर आया जैसे ही राज ने घर के अंदर पैर रखा

और राज की आवाज पूनम के कानों में पड़ी ,तो उसका ध्यान खाने से हटकर राज पर चला गया ,राज ने बॉडी फिट बॉडी

टी शर्ट और जींस पहन रखा था ,उसके पैरों में स्पोर्ट्स शूज ,और बेल्ट में लगा हुआ चाबी का छल्ला ,इस लुक

में राज किसी साउथ हीरो से कम नहीं लग रहा था ,उसका ऊंचा कद डोले शोले वाली सिक्स पैक बॉडी जिसके लिए वह करीब 2 से 3 घंटे रोज मेहनत करता था ,जो उसकी टीशर्ट मै से साफ नजर आ रही थी

पूनम ने देखा तो बस देखती ही रह गई,,,,, शायद ढाबे पर सिलेंडर खत्म हो गया था और सिलेंडर का स्टॉक ऊपर वाले कमरे में रहता था ,जिससे कि कोई डर ना रहे

जब काकी ने राज से खाने के लिए पूछा तो राज ने जवाब दिया ,काकी ढाबे पर सिलेंडर खत्म हो गया है ,मैं बस यू वहां सिलेंडर रख कर आता हूं ,बाद में खाना खा लूंगा और बड़ी-बड़ी डगें रख ता हुआ ऊपर गया

और किसी फूल की तरह, भरे हुए सिलेंडर को लेकर 2 मिनट में ही नीचे आ गया

पूनम राज की इस अदा पर

उसकी मर्दानगी को देखकर अपने होश खो बैठी थी, पूनम और डॉली खाना खा चुके थे लेकिन पूनम जानबूझकर किसी ना किसी काम में डॉली को जाने से रोक रही थी जिससे कि राज खाना खाने घर आए

और उसे दोबारा राज को देखने का मौका मिले,,,,,,

करीब 1015 मिनट गुजर चुके थे, जैसे ही डॉली और पूनम जाने को हुई राज अंदर आ गया ,अब पूनम के पास यहां रुकने का कोई बहाना नहीं था ,पर फिर भी वह एक बार मुड़कर राज के पास आई और कहने लगी राज शायद मैं आज भी लेट हो जाऊंगी

क्या आप मुझे मेरे घर तक छोड़ देंगे

राज पूनम को जवाब ना देते हुए डॉली की तरफ देखने लगा ,पूनम भी राज और डॉली को देख रही थी ,पूनम ने चुप्पी तोड़ी और कहां राज आप डॉली की तरफ क्यों देख रहे हैं ,वह मना थोड़ी ना करेगी

क्यों डॉली ,राज से बोलो ना मुझे छोड़ने के लिए ,डॉली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे ,कल ही उसकी राज से इस बात पर अच्छी खासी बहस हुई थी तभी काकी ने बात को संभालते हुए कहा

हां हां पूनम बेटा चिंता क्यों कर रही है राज तुझे जरूर छोड़ देगा , पूनम ने देखा कि उसने अपनी बात मनवा ली है

तो वह राज को एडवांस में ही थैंक यू और बाय बोलते हुए मुस्कुरा कर बाहर चली गई पूनम के जाते ही ,राज काकी पर बरस पड़ा था ,काकी तू काय को अपुन को इन छोरियों के पचड़े में लाती है,अपुन इसे छोड़ने वाला नहीं है ,अरे कल छोड़ दिया, आज फिर वह कहने लगी ,जब नौकरी कर रही है ,तो आने जाने के इंतजाम के बारे में भी तो सोचना चाहिए ,अपुन पहले ही बता देता है

अगर टाइम होगा तो ही अपन जा पाएगा और हाथ धोते हुए वापस ढाबे पर चला गया

शाम को 500 बजे जब आंगनवाड़ी का काम खत्म हुआ ,तो पूनम मुस्कुराती हुई खुशी में डॉली के साथ घर पर ही आ गई डॉली अभी तक बीच में कुछ भी नहीं बोली थी, काकी ने पूनम से घर छुड़वाने के लिए कह

दिया था ,इसलिए जब पूनम घर आई तो काकी राज को बुलाने ढाबे पर गई

अब ऐसी स्थिति में कैसे भी राज को छोड़ने तो जाना ही था ,लेकिन उसने कहा काकी को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा !

काकी आज अपुन आखिरी बार जा रहा है आज के बाद तू उससे कभी नहीं कहेगी

हां रे नहीं कहूंगी ,पर आज वह लड़की घर पर बैठी हुई है, अब तो उसे छोड़ दे

तू चल मैं आता हूं ,राज ने घर आकर जीप की चाबी उठाई ,और चश्मा लगाते हुए पूनम को चलने के लिए कहा, पूनम को तो मानो खुशियों का खजाना मिल गया था

वह इठलाती हुई राज के साथ चलने लगी

राज गाड़ी में बैठता ,इससे पहले ही पूनम जाकर आगे कि सीट पर बैठ गई

और जब राज ने गाड़ी स्टार्ट की तो पूनम ने बड़ा खुश होते हुए डॉली और काकी से बाय किया ,,,जैसे ही गाड़ी गांव की तरफ चली पूनम राज को रिझाने के लिए कभी अपने बालों को चेहरे से हटाती तो कभी अपनी

चुन्नी ठीक करती, पर राज का ध्यान गाड़ी पर ही था ,जब राज ने हल्की सी गाड़ी की स्पीड बढ़ाई , तो डॉली ने इतराते हुए कहा राज गाड़ी धीरे चलाइए ना ,मुझे तेज गाड़ी में डर लगता है, राज ने एक निगाह पूनम को देखा और कहा ,यह अपुन का सबसे धीमा

स्टाइल है ,अगर गाड़ी को इससे कम स्पीड में चलाएगा तो बंद हो जाएगी,,,, ,

पूनम इस बात पर कुछ झेंप गई थी

क्योंकि गाड़ी सच में ही धीरे चल रही थी इतनी देर में पूनम का घर आ चुका था

पूनम गाड़ी से नीचे उतरती इससे पहले ही उसने बड़ा भोला चेहरा बनाकर राज से कहा ,राज क्या आप मुझे अपना मोबाइल नंबर दे सकते हैं ,अगर मुझे कभी किसी काम की जरूरत पड़े, तो आप से सीधे ही बात हो जाएगी ,वरना विचारी डॉली को बीच में परेशान होना पड़ता है

राज का दिमाग वैसे ही पूनम की बातों से पका हुआ था ,उसने सोचा कि नंबर दे दिया तो फिर रोज रोज का लफड़ा हो जाएगा इसलिए उसने कन्नी काटते हुए कहा

अपुन को अपना ही नंबर याद नहीं रहता तुझे कोई काम हो तो बिंदास डॉली के फोन पर फोन लगाना ,वह अपुन को बता देगी पूनम की बात को अधूरा छोड़कर राज ने गाड़ी स्टार्ट की ,और बैक करने लगा

जब पूनम ने देखा कि राज इतनी आसानी से अपना नंबर देने वाला नहीं है

तो वह बुरा सा मुंह बनाकर गाड़ी से नीचे उतर गई ,और राज वापस घर आ गया,,

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
अब तो पूनम की आदत में शुमार हो चुका था, कि मैं जब भी आंगनबाड़ी आती तो किसी न किसी बहाने राज से जरूर मिलती कभी उसके ढाबे पर पहुंच जाती ,तो कभी डॉली के साथ घर पर आ जाती

अगर राज किसी काम से आंगनबाड़ी में मिल जाता ,तो वहां भी उससे बातें करना शुरू कर देती, वैसे तो पूनम भी अच्छी लड़की थी ,उसकी उम्र डॉली से बस यही कोई दो-तीन साल ज्यादा होगी, वह डॉली से भी राज की बहुत बातें करती थी

हमेशा हर बात उसके बारे मैं जानने के लिए बेचैन रहती, और डॉली भी पूनम को अपनी अच्छी सहेली मानकर उसे सब कुछ बता देती,,

डॉली की तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था ,कि आखिर पूनम चाहती क्या है

डॉली बिल्कुल भोलेपन से , मासूमियत से सारी बातें बताती जाती, असल में पूनम जानना चाहती थी, कि राज कैसा है

उसका नेचर कैसा है, डॉली और राज के बीच का रिश्ता कैसा है

वह बातों ही बातों में धीरे-धीरे हर बात को समझ रही थी ,वैसे तो सबको ही पता था कि डॉली कैसे इस घर में राज और काकी के साथ रहने लगी, पर चूँकि पूनम दूसरे गांव की थी, तो उसे ज्यादा गहराई से हर बात का पता नहीं था ,पर जब उसने पूछा तो डॉली ने भी कुछ ना छुपाते हुए उसे सारी बातें साफ-साफ बता दीं

पूनम को इतना तो विश्वास हो गया था कि डॉली और राज के बीच एक बेनाम और पवित्र रिश्ता है,

अब तो वह राज के और भी करीब आना चाहती थी ,क्योंकि डॉली और काकी से उसने काफी अच्छी दोस्ती कर ली

और इस बीच वह यह भी समझ चुकी थी की काकी यही चाहती है, कि जल्द से जल्द राज का घर बसाय, और क्यों नही आखिर

अब राज की उम्र हो चुकी थी

बूढ़ी काकी और कितना इंतजार करती उसकी तो हमेशा से एक ही इच्छा रहती कि राज का घर बसे ,

और वह अपनी गृहस्थी में रम जाए ,पर जब भी पूनम राज के करीब जाने की कोशिश करती, तो उसे ऐसा लगता कि राज उससे दूर भाग रहा है

वैसे राज एक बहुत ही अच्छा समझदार और सबकी मदद करने वाला था

पर पूनम का ऐसा व्यवहार उसे पसंद नहीं आता था ,अगर पूनम कभी धोखे से भी अपना हाथ राज के हाथ पर रख दे तो वह एक झटके से अपना हाथ हटा देता

पूनम राज से कुछ जानना चाहती, या उसका फोन नंबर मांगती, तो वह सब कुछ डॉली के ऊपर छोड़ देता

1 दिन पूनम अचानक से डॉली के घर आई जब उसने देखा कि डॉली रसोई में रोटियां सेक रही है ,तो वह भी हाथ धोते हुए डॉली के साथ उसकी मदद करवाने रसोई में पहुंच गई ,ठीक उसी समय राज खाना खाने घर आया हुआ था ,जब पूनम ने देखा कि काकी राज के लिए थाली लगा रही है

तो जल्दी से उसने खुद थाली लगाते हुए खाना परोसा, और थाली लेकर राज को देने चली गई ,राज ने बिना उसकी तरफ देखे थाली उसके हाथ से ली ,और अपने कमरे में चला गया ,वैसे तो राज बाहर वाले कमरे से ही खाना खाता था, पर वह समझ गया था कि पूनम बार-बार आकर उसे परेशान करेंगी इसलिए वह अपने कमरे में चला गया था जब पूनम ने देखा कि अब उसे राज के पास जाने का कोई मौका नहीं मिल रहा तो

वह डॉली से चिमटा लेकर जानबूझकर रोटियां सेकने लगी, और थोड़ी ही देर में जोर से चिल्लाई ,कि उसका हाथ जल गया है काकी और डॉली पूनम को देखने दौड़ी और डॉली ने जल्दी से पूनम का हाथ पकड़ा और उसे लेकर बाहर आकर बरनोल ढूंढने लगी, जब उसे बरनोल नहीं दिखी, तो उसने राज को आवाज लगाई

राज जरा बरनोल लेकर यहां आइए

देखिए ना पूनम का हाथ जल गया है

राज जब बरनॉल लेकर बाहर आया तो देखा कि डॉली उसका हाथ पकड़कर खड़ी है और पूनम दर्द से कराह

रही थी

डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहा देख की रहे हैं ,जल्दी से पूनम के हाथ पर बरनोल लगा दीजिए, राज ने एक बार घूर कर डॉली की तरफ देखा ,और बरनोल का ढक्कन खोलते हुए डॉली के हाथ में पकड़ा कर कहा ले तू ही लगा दे, मुझे ढाबे निकलना है, और एक झटके के साथ बाहर चला गया डॉली जल्दी से पूनम के हाथ पर दवा लगाने लगी, लेकिन इस बात से पूनम दुखी हो गई थी, कि उसका हाथ जल गया और राज ने एक बार उससे पूछना या देखना भी ठीक नहीं समझा, पर आखिर इस बात की भड़ास निकालती भी तो किस पर ,,,

राज के आगे तो कोई कुछ बोल भी नहीं सकता था, राज ढाबे पर जा चुका था

डॉली ने पूनम को दवा लगाई और अपने हाथों से उसे खाना भी खिलाया, जब पूनम को आराम मिला ,तो आज वह टाइम से 400 बजे की बस से अपने गांव वापस चली गई,,,,,

इसी तरह करीब दो-तीन महीने गुजर चुके थे अब पूनम और डॉली अच्छी सहेलियां बन चुकी थी, पूनम किसी ना किसी बहाने डॉली के पास आती रहती थी, यहां तक कि कभी-कभी तो वह अपने घर वालों या रिश्तेदारों को लेकर राज के ढाबे पर खाना खाने भी आ जाती थी ,जिससे उसे राज का साथ मिले ,और

राज बस डॉली की सहेली होने के नाते उससे जरूरत की बात ही करता था ,,

पूनम समझ नहीं पा रही थी, कि आखिर राज क्यों उसे भाव नहीं देता ,क्यों जब भी वह एक कदम आगे बढ़ाती है

तो राज दो कदम पीछे हट जाता , आखिर मुझ में ऐसी क्या कमी है,,,

दो-तीन दिन बाद संडे था, उस दिन पूनम के भाई का बर्थडे था ,तो पूनम ने यही प्लान बनाया ,कि वह अपने भाई और परिवार वालों को लेकर शाम को राज के ढाबे पर आएगी ,और उसने डॉली को भी फोन कर दिया था ,जिससे कि डॉली भी टाइम पर काम खत्म करके उसे मिल जाए, तो दोनों कुछ समय साथ बिता लेंगी,

डॉली को भी अच्छा लगा ,क्योंकि काफी दिनों से वह पूनम से मिली भी नहीं थी

पूनम ने आज सोच लिया था कि वह राज से अपने दिल की बात आज कह कर ही रहेगी ,हो सकता कि राज स्वभाव से शर्मिला हो ,और इसलिए वह मुझसे दूर भागता हो ,अगर मैं साफ और सीधे शब्दों में अपनी बात उसके सामने रख दूं ,तो शायद उसे मेरी दोस्ती मंजूर हो जाए, और इसीलिए वह अपने मां बाप को भी साथ ला रही थी कि अगर राज ने उसकी बात मान ली, उसके प्यार को कुबूल कर लिया ,तो वह अपने मां पिता से भी राज को मिलवा देंगी यह सब कुछ सोच कर आज शाम को ही राज के ढाबे पर आने वाली थी

पूनम ने आज सबसे सुंदर अपनी पसंद का सूट पहना हुआ था ,खुले हुए बाल और नए झुमके ,यानी कि वह खुद को अच्छे से सजा संवार कर आने वाली थी

शाम को 600 बजे तक पूनम अपने माता पिता भाई ,और भाई के कुछ दोस्त भी साथ में थे, सबको लेकर आ चुकी थी

डॉली भी पूनम को ढाबे पर ही मिल गई थी डॉली और पूनम ने एक दूसरे से बातें की नीलम ने उसके भाई को बर्थडे विश किया और फिर दोनों अंदर जाकर केक काटने की तैयारियां करने लगी ,क्योंकि केक का प्रोग्राम

उसने अपने भाई से छुपा कर रखा था

जब डॉली और पूनम बातें कर चुकी

तो पूनम निगाहें घुमाते हुए राज को देखने लगी, राज अभी तक उसे ढाबे पर नहीं दिखा था, जब उसने डॉली से पूछा तो डॉली ने कहा ,वह घर पर हैं

बस आते ही होंगे, पूनम बिल्कुल तैयार हो चुकी थी ,कि जैसे ही राज आएंगे मौका देखते हुए वह अपने मन की बात राज के सामने रख देगी ,तभी थोड़ी देर में राज आता हुआ दिखा, वह जैसे ही आया ढाबे पर चल रहे कामों की निगरानी करने लगा शाम के टाइम काफी कस्टमर आते हैं

तो उन सब में बिजी हो गया था

डॉली भी अंदर की व्यवस्था देख रही थी क्योंकि केक काटने का प्रोग्राम अंदर ही था इस बीच पूनम को मौका मिला ,और बह राज के करीब जाने की कोशिश करने

लगी कभी उसके पीछे किचन में जाती, तो कभी बाहर के हॉल में ,बह राज से बात करने की कोशिश कर रही थी ,पर राज बहुत बिजी था ,बह 2 मिनट भी पूनम को नहीं दे पा रहा था ,पूनम ने राज से कहा भी कि मुझे आपसे जरूरी बात करनी है

राज ने बिना उसकी तरफ देखे ही कह दिया अभी अपन बहुत बिजी है

जो भी बात है डॉली को बता देना

पूनम फिर भी राज के पीछे पीछे जा रही थी और कोशिश कर रही थी, कि कैसे भी वो उसकी तरफ देखे, और वह अपने दिल का हाल उससे कहे ,पर राज ने एक बार भी नजर उठाकर पूनम को नही देखा

वह सच में बहुत व्यस्त था ,कभी बिल बनाना ,तो कभी ऑर्डर के लिए बोलना

कभी खाने का इंतजाम देखना, बहुत सारे काम एक साथ ही हो रहे थे ,लेकिन इसी बीच किसी जरूरी काम से जैसे ही राज स्टोर रूम में आया ,कि पूनम उसका रास्ता रोककर उसके सामने खड़े हो गई

और उसकी आंखों में देखते हुए कहा !

राज क्या आपके पास मेरे लिए 2 मिनट भी नहीं है ,मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं

एक बार तो सुन लो

सिवा उसके बगल से निकलते हुये

स्टोर रूम का काम निपटाने लगा

शायद ऊपर रखी अलमारी में से कुछ निकाल रहा था ,जब वापस नीचे उतरा तो दोबारा पूनम फिर राज

के सामने खड़ी हो गई ,पूनम ने दोबारा उसकी आंखों में देखते हुए कहा, राज एक बार तो मेरी तरफ देखिए ,मैं आपसे कहना चाहती हूं ,कि आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं ,और मैं आपको पसंद करने लगी हूं ,मैं आपसे शादी करना चाहती हूं,,,,,,,

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
राज अपने काम में लगा हुआ था ,शायद स्टोर रूम से कुछ निकालने आया था

पर पूनम ने राज का रास्ता रोकते हुए उससे अपने दिल की बात कह दी

वह राज की आंखों में देखते हुए कहने लगी ,राज मैं आपको पसंद करने लगी हूं आप मुझे अच्छे लगने लगे हैं ,और मैं आपसे शादी करना चाहती हूं, राज ने जैसे ही कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला ,कि उसे डॉली की चीख सुनाई दी ,राज का पूरा ध्यान डॉली की तरफ चला गया, उसके हाथ में एक बड़ा सा कार्टून था ,उसने उस कार्टून को वही फेंका ,और भागता हुआ डॉली के पास पहुंच गया ,जब वहां जाकर देखा तो डॉली की उंगली मैं कैची से हल्का सा कट लग गया था, जो शायद बैलून लगाते हुए टेप काटने से लगा था, उसकी उंगली से खून निकल रहा था ,राज ने डॉली के हाथ से कैंची लेकर दूर फेंक दी ,और उसे डांटते हुए कि वह ठीक से काम क्यों नहीं करती

और यह सब काम करने की जरूरत ही क्या है ,ढाबे पर बहुत सारे लड़के हैं

वह सब देख लेंगे ,झट से डॉली की उंगली को पकड़ते हुए अपने मुंह में रख लिया डॉली के मुंह से हल्की-हल्की कराहने की आवाज निकल रही थी, शायद उसे दर्द हो रहा था ,राज ने एक हाथ से पकड़ते हुए डॉली कुर्सी पर बैठाया ,और छोटू से बर्फ लाने के लिए कहा, जब वह बर्फ लेकर आया तो अपने हाथों से उसकी उंगली पर बर्फ फिराने लगा,,,,

तभी पूनम भी राज के पीछे पीछे वहां आ चुकी थी, पूनम बुझे हुए मन से चुपचाप खड़े होकर सारा नजारा देखती जा रही थी

वह देख रही थी कैसे राज उसकी बातों को इग्नोर करके, डॉली के एक चीख पर भागता हुआ डॉली के पास आ गया ,उसे डॉली की कितनी चिंता है, मेरी बात का तो उसने जवाब देना ही ठीक नहीं समझा ,पूनम एक जगह जड़ होकर खड़ी रह गई थी

उसकी आंखें डबडबा गई थी ,और उसके चेहरे पर उदासी छा गई थी

राज का पूरा ध्यान सिर्फ डॉली पर था

वह किसी बच्चे की तरह डॉली की देखरेख करने में लगा हुआ था, कभी डॉली को पानी पिलाता ,तो कभी उसकी उंगली पर बर्फ घिसता और बीच-बीच में उसे झिड़कियां भी देता जा रहा था ,लेकिन राज की उन झिड़कियों में डॉली के लिए प्यार ,अपनापन और केयर साफ-साफ दिख रही थी

कि डॉली की जरा सी चोट से भी उसका दिल कितना दुखा है, पिछले आधे घंटे में एक पल के लिए भी

उसका दिमाग डॉली से हटा नहीं था ,डॉली कितनी बार कह चुकी कि अब वो ठीक है, उसे बस जरा सी चोट आई है ,उसकी उंगली में बैंडेज इस लगा दो

कोई दिक्कत नहीं है ,पर राज डॉली की बात सुने बिना ही, अपने तरीके से उसकी देखभाल कर रहा था ,उसने जल्दी से काकी को भी फोन कर दिया , वह हल्दी का दूध लेकर ढाबे पर आ जाए,, तब तक काकी भी दूध लेकर आ चुकी थी ,,,

काकी और राज दोनों का प्यार डॉली के लिए अद्भुत था ,और पूनम बस चुपचाप खड़ी हुई सब कुछ देख रही थी, धीरे-धीरे उसकी समझ में आने लगा, कि राज उसे क्यों इग्नोर कर रहा था ,राज के दिल में कहीं ना कहीं डॉली ही है ,पर उसे खुद भी इस बात का एहसास नहीं है

राज से ज्यादा दुनिया का कोई भी व्यक्ति डॉली को कभी नहीं समझ सकता ,और डॉली की राज के लिए जो भावनाएं हैं

जो प्यार है ,जो इज्जत है, उन सब में भी तो कहीं ना कहीं प्रेम ही है, इससे गहरा प्रेम और क्या होगा, कि दोनों बिना बताए एक दूसरे के दिल की बातें समझ जाते हैं

कुछ कहने से पहले ही एक दूसरे की पसंद ना पसंद,और जरूरतों को पूरा कर देते हैं अगर मैं इनको देख कर ही समझ गई हूं कि इनका प्रेम अद्भुत है ,,

तो क्यों सिवा को समझ नहीं आता ,कि वह दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं, वह तो बस इनके बीच में आने की

कोशिश कर रही थी लेकिन डॉली ने ऐसा मुझसे कभी कुछ नहीं कहा ,और ना ही मुझे इनकी बातों से ऐसा महसूस हुआ ,कि एक दूसरे के लिए उनके मन में कोई प्यार बाली फीलिंग है

पर क्यों आखिर अपनी भावनाओं को छुपा क्यों रही है ,,,क्यों सब कुछ पानी की तरह साफ नहीं हो जाता, ऐसी कौन सी मजबूरी है जो दोनों एक दूसरे से अपने दिल की बात नहीं कह पा रहे हैं, पूनम का चेहरा खड़े-खड़े आंसुओं से भीग चुका था

सच जो भी हो लेकिन कहीं ना कहीं वह भी राज को चाहने लगी थी ,जब किसी की चाहत अधूरी रह जाती है ,तो एक दर्द तो दिल में होता ही है ,प्यार चाहे एक तरफा हो या दो तरफा, दिल एक का दुखे या दोनों का पर कहीं ना कहीं चोट तो लगती ही है

ऐसा ही पूनम के साथ भी हुआ था, उसकी एक आंख से आंसू उसका प्यार अधूरा रहने के लिए बह रहे थे, तो दूसरी आंख से डॉली और राज के प्रेम को देखकर, इन दोनों का दिल कितना सच्चा था ,और इनका प्रेम कितना पाक और साफ , जो इतनी गहरी अनुभूति होते हुए भी इनने कभी उसे व्यक्त करने की कोशिश ही नहीं की,,,

थोड़ी ही देर में पूनम ने अपने आंसू पोछे और खुद से कहा ,कि मैं स्वार्थी नहीं बनूंगी अगर डॉली मेरी बहुत अच्छी फ्रेंड है

तो दूसरी तरफ राज से मैंने कहीं ना कहीं प्रेम ही किया है, और प्रेम हमेशा अपने चाहने वाले का अच्छा ही

सोचता है, और मैं भी राज के लिए अच्छा ही सोचूंगी, अब कहीं ना कहीं यह मेरी जिम्मेदारी भी बनती है ,कि मैं इन्हें इनके प्रेम का एहसास दिलवाऊ, कि यह सिर्फ और सिर्फ एक दूसरे के लिए ही बने हैं ,और मुझे दोनों को समझाना ही होगा ,,

तब तक पूनम ने जाकर डॉली का हाथ पकड़ा, और राज की तरफ देखते हुए कहा राज डॉली बिल्कुल ठीक है, और उसका ध्यान में रखूंगी ,आप जाकर अपना काम देख लीजिए ,राज भी पूनम की तरफ देखते हुए धीरे से मुस्कुराया, और वहां से चला गया

उसके बाद पार्टी कंटिन्यू हुई केक काटा सबने पूनम के भाई को बर्थडे विश किया उसके बाद खाना पीना खाकर जब पूनम जाने लगी ,तब तक डॉली काकी के साथ अंदर जा चुकी थी, पूनम के सभी घरवाले घर से बाहर निकल चुके थे, पूनम ने देखा की राज ढाबे के अंदर अकेला है ,तो एक बार जाते जाते , वह राज से मिलने अंदर आ गई उसने राज से कहा थैंक्स!

कि आपने बहुत अच्छा इंतजाम किया था पार्टी सबको बहुत पसंद आई ,और खाना भी बहुत अच्छा था, फिर पूनम ने धीरे से हंसते हुए कहा और

थैंक्स फॉर स्पेशल डिस्काउंट ,,,,

इस बात पर राज भी हंसने लगा ,जब पूनम जाने लगी तो। राज ने रोकते हुए कहा पूनम अपन को तेरे से कुछ कहने का है

पूनम मोदी और राज की तरफ देखने लगी उसने कहा, बोलो क्या कहना है आपको पूनम वह जो तू अपन से

स्टोर रूम में कह रही थी ना ,,अपन ने ठीक से तो नहीं सुना पर हां समझ में आ गया, कि तू अपन से क्या कहना चाहती थी, तू अपन से प्यार के लफड़े की बात कर रही थी ना ,यह सब चक्कर जो लड़के और लड़कियों के बीच चलता है

उसी के बारे में कह रही थी ना, तो अपन तेरे को बताना चाहता है ,की अपुन इन सब चक्कर में नहीं पड़ने वाला ,साला शादी के बाद बहुत सारे लफड़े होते हैं, और वो कंडीशन खतरनाक वाली होती है ,अपन तो एक आजाद पंछी है, और पूरी लाइफ ऐसे ही रहने का है ,यह सब लफड़े बाजी से दूर रहना ही अच्छा है,,,,,

सुन ! अरे तू एक बहुत अच्छी लड़की है

तू पढ़ी लिखी है ,नौकरी भी करती है

तेरे को बहुत मस्त लड़का मिल जाएंगा जिनका अच्छा घर, खानदान ,मां बाप और जिनके पास एक अच्छी सी नौकरी होगी अपन के साथ रहकर तो तेरी जिंदगी का भी कचरा हो जाएगा ,अपन तो कभी स्कूल भी नहीं गया ,साला ढाबे में ही अपनी लाइफ कट जाएगी, इसलिए तू अपने वास्ते एक मस्त नौकरी वाला छोरा ढूंढ ,,और हां अपन तेरी शादी में आएगा ,एक बहुत अच्छे गिफ्ट के साथ ,तू अपन को कार्ड जरूर देना

इतना कह कर राज ने पूनम को बाय कर लिया ,,,पूनम बहुत ध्यान से राज की बात सुन रही थी, उसकी आंखों में झांकने की कोशिश कर रही थी ,कि डॉली कितनी गहराई से उसके अंदर समाई हुई है

राज की सारी दुनिया ही डॉली के इर्द-गिर्द घूम रही

थी ,फिर भी उसे इस बात का अहसास नहीं है, कि वह सिर्फ डॉली के लिए बना है, पूनम एक फीकी हंसी हंसते हुए वहां से चली गई, पूनम पूरे रास्ते सोच रही थी कि राज क्यों नहीं समझ पा रहा है, की डॉली ही उसकी दुनिया है

राज की लैंग्वेज में कहें तो उसका लफड़ा चक्कर सब कुछ डॉली ही है ,,,,,
 
घर पहुंचते-पहुंचते पूनम के मन का सारा सैलाब आंसुओं में बह चुका था ,अब उसका मन हल्का हो चुका था ,और उसने सोच लिया, कि इस बारे में बहुत जल्द वह डॉली से बात करके रहेगी,, करीब छह-सात दिन निकलने के बाद ,आज डॉली को पूनम के गांव उसकी आंगनबाड़ी पर रिपोर्ट बनाने के लिए जाना था

उसने राज से सुबह ही कह दिया था कि 1011 बजे वह उसे पूनम के यहां छोड़ आए राज भी टाइम पर तैयार हो गया था

डॉली को छोड़ने के लिए दोनों जीप में बैठ और पूनम के घर पहुंच गए, डॉली टाइम से पहले ही पहुंच गई थी, इसलिए वह सीधी पूनम के घर ही चली गई ,पूनम को पता था कि डॉली आने वाली है, इसलिए पूनम तैयार होकर दरवाजे पर ही दोनों का इंतजार कर रही थी ,जैसे ही दोनों पहुंचे डॉली घर के अंदर आ गई ,और पूनम ने राज से भी चाय पीने के लिए कहा ,लेकिन राज वैसे भी बहुत व्यस्त रहता है ,,,,

उसने कहा फिर किसी दिन ,और कार बैक करके वापस ढाबे पर चला गया,,,,

कुछ देर दोनों घर में बैठी, और फिर आंगनबाड़ी सेंटर पर पहुंच गई ,पूनम ने कुछ फाइल निकालकर डॉली को दीं, और दोनों जमीन पर बिछे हुए फर्स पर बैठकर अपना रिकॉर्ड बनाने का काम करने लगी

पूनम सोच रही थी कि वह डॉली से इस बारे में बात करे,,,लेकिन अभी काम कुछ बारीकी का था ,तो उसने सोचा यह खत्म हो जाए उसके बाद ही आराम से बात करना ठीक रहेगा ,तकरीबन डेढ़ 2 घंटे बाद सारा काम खत्म हो चुका था ,अब सिर्फ चार्ट सीट तैयार करना बाकी था, जो आराम से बातें करते हुए बन सकती थी

जब सारी जरूरी फाइलें समेट कर डॉली ने रख दी ,और चार्ट पेपर का सामान निकालकर दोनों एक्टिविटी चार्ट सीट बनाने लगी, तब बातों ही बातों में पूनम ने डॉली से कहा ,,,

डॉली तूने शादी के बारे में कुछ सोचा है क्या डॉली काम में व्यस्त थी, एक फूल बनाते हुए वह फूल में रंग भर रही थी, और उसका सारा ध्यान उसी पर था,उसने रंग भरते हुए ही पूनम से कहा,,

नहीं पूनम अभी मेरा सारा ध्यान मेरी पढ़ाई और नौकरी पर है, ग्रेजुएशन का मेरा सेकंड ईयर है ,कम से कम डेढ़ 2 साल तो इस बारे में ,मैं कुछ नहीं सोचने वाली ,,,

और दोबारा अपने काम में लग गई ,थोड़ी देर में पूनम ने फिर डॉली से सवाल किया

अच्छा ठीक है शादी ना सही, यह बता कि तू किसी से प्यार करती है क्या

मेरा मतलब तुझे कोई अच्छा लगता है

या कभी तुझे ऐसा लगा है की किसी को प्यार करती हो,,,,

डॉली ने व्रश रखा और पूनम की तरफ देखते हुए कहा ! पूनम आज तेरे सर पर यह प्यार और शादी का भूत कहां से सवार हो गया कहीं ऐसा तो नहीं कि तुझे ही किसी से प्यार हो गया हो ,,,आज तो पूनम ने सोच ही लिया था ,कि चाहे कुछ भी हो सारी बात डॉली से कर के ही रहेगी,,,,,

पूनम ने डॉली की आंखों में देखते हुए कहा हां डॉली मुझे किसी से प्यार हुआ है

और इसी बारे में ,मैं तुझे सब कुछ बताना चाहती हूं ,और बहुत सारी ऐसी बातें है

जो मैं तुझसे भी जानना चाहती हूं ,क्या आज तू अपने दिल की सारी बातें मुझे सच और साफ-साफ बताएगी

पूनम की यह बात सुनकर डॉली को कुछ अजीब लगा ,कि पूनम इस तरह से बात क्यों कर रही है ,उसने पूनम से कहा तुझे हो क्या गया है,पर पूनम ने डॉली के दोनों हाथ अपने हाथों में लिए ,और डॉली से कहा !

हां डॉली मैं सच में सीरियस हूं ,और तुझ से इस बारे में बात करना चाहती हूं!

क्या आज तू मेरे सारे सवालों के जवाब देगी

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

पूनम लगातार डॉली की तरफ देखे जा रही थी ,क्योंकि आज उसने डॉली से प्रॉमिस लिया था ,कि डॉली उसे उन सारे सवालों के जवाब देगी ,जो वह उससे जानना चाहती है पूनम सच में बहुत सीरियस थी

डॉली भी पूनम की ऐसी बातें सुनकर थोड़ा सोच में पड़ गई थी, कि आखिर अचानक ऐसी कौन सी बात हो गई ,जो पूनम इस तरह से बातें कर रही है, डॉली ने भी उसे भरोसा दिलाया ,कि हां पूनम तो पूछ मुझसे क्या पूछना चाहती है ,इतने महीनों में तू मेरी बहुत अच्छी सहेली बन गई है ,और यकीन कर तू मुझसे जो भी पूछेगी , मैं तुझे सच सच ही बताऊंगी

पूनम ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा

डॉली इन तीन चार महीनों में मैं किसी से प्यार करने लगी थी, धीरे-धीरे उसके करीब आने लगी थी ,और कहीं ना कहीं मुझे लगता था, कि शायद वह भी इस बात के लिए राजी हो जाएगा ,लेकिन जब हिम्मत करके मैंने उसे यह बात बताई, मैंने उससे कहा कि

मैं उसको बहुत प्यार करती हूं और उसके साथ शादी करना चाहती हूं ,तो उसने मेरी इस बात पर कुछ भी

रियेक्ट नहीं किया डॉली बहुत ध्यान से पूनम की बात सुन रही थी, डॉली ने पूछा पूनम वो कौन है

तू तो इतनी अच्छी लड़की है ,और जब तू उससे प्यार करती तो उसने तुझे मना क्यों किया

डॉली क्योंकि वह किसी और से प्यार करता है ,डॉली ने कहा पूनम क्या इस बात का तुझे पहले से पता नहीं था

नहीं डॉली अगर मुझे पता होता तो क्या मैं ऐसा सोचती ,या उससे ऐसा कुछ कहती डॉली ने कहा पूनम जो हुआ उसे भूल जा अच्छा है कि तुझे टाइम पर ही सब कुछ पता चल गया ,और तूने यह बात एक्सेप्ट भी कर ली, कि वह तेरा नहीं हो सकता

अब इस बात को जाने दे, और मैं चाहूंगी कि तू अपनी जिंदगी में आगे बढ़े

पूनम का चेहरा अब भी उतरा हुआ था उसने डॉली से कहा डॉली क्या तू एक बार उसका नाम जानना नहीं चाहेगी

कि वह कौन है, डॉली ने कहा वैसे तो अब नाम जानने से कोई मतलब नहीं है

क्योंकि अब तेरे और उसके बीच ऐसा कुछ है भी नहीं ,फिर भी अगर तू चाहती है तो बता दे ,कि वह कौन है

राज !!!!!

क्या

डॉली हैरान होकर पूनम की तरफ देखने लगी

हां डॉली वो राज ही है ,जिसे मैं अपना दिल दे बैठी

थी ,मुझे राज बहुत अच्छा लगने लगा था ,और मैं धीरे-धीरे उसके करीब आ रही थी, मैंने सोच लिया था कि इस बारे में राज से बात कर के ही रहूंगी, और इसीलिए अपने भाई के बर्थडे वाले दिन ,मैं अपने मां पिता को भी साथ लेकर आई थी

कि वह राज को प्रपोज करूंगी और अगर वह हां कहता है ,तो अपने मां बाप से भी मिलवा दूंगी ,मुझे पूरा यकीन था

कि मेरे मां पिता भी राज को जरूर पसंद करते ,राज में ऐसी कोई कमी है ही नहीं

कि कोई उसे नापसंद कर सके, राज में बहुत सारी खूबियां हैं ,जिनकी वजह से वह बहुत अच्छे इंसान हैं

पर जब मैंने राज से इस बारे में बात की

उस वक्त राज एक स्टोर रूम में था

राज के सामने मैंने अपनी सारी बात रख दी थी ,लेकिन उसी वक्त तुझे कैंची से चोट लग गई ,और तेरी एक हल्की सी चीख सुनकर वह सामान स्टोर रूम में फेंकते हुए तेरी तरफ दौड़ पड़ा ,और मैं खड़ी रह कर उसका इंतजार करती ही रह गई

जब मैं वहां पहुंची तो देखा कि राज तेरी चोट से कितना परेशान हो रहा था

चोट तुझे लगी थी ,लेकिन दर्द उसे हो रहा था आह तेरी निकल रहीं थी

पर महसूस राज को हो रही थी

वह सब कुछ भूल कर तेरी छोटी सी चोट को ठीक करने में लगा था, डॉली तब मुझे समझ आया ,कि राज

के लिए तुझसे ज्यादा अहमियत किसी और की नहीं है

जहां एक तरफ मेरी बात अधूरी छोड़ कर वह तेरे पास आ गया था

वहीं दूसरी तरफ जब राज आया तो तू भी निश्चिंत हो गई थी, तूने खुद को राज के हवाले छोड़ दिया था, क्योंकि तू जानती है कि तेरे दर्द को उससे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता ,,,,

,और उस दिन जब मैं जाने लगी थी तो राज ने मुझे रोकते हुए कहा ,कि मैं एक अच्छी लड़की हूं ,और अपने लिए एक पढ़ा-लिखा और अच्छा लड़का देख सकती हूं

और उसकी लाइफ में ऐसा कुछ भी नहीं है ना ही वह इस बारे में ऐसा कुछ सोच रहा है और राज कि इस बात पर मैं हैरान थी

कि वह तेरी इतनी केअर करता है

तेरे लिए हमेशा हाजिर रहता है

तेरी हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात का ख्याल रखता है

तेरे दर्द पर सब कुछ छोड़कर पागलों की तरह दौड़ा चला जाता है

तुझे लेना, तुझे छोड़ना ,तेरी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना ,तेरे आसपास के माहौल पर नजर रखना ,तुझे बच्चों की तरह ट्रीट करना

तेरे नखरे उठाना

डॉली यह सब प्यार नहीं तो क्या है

यह राज का वो प्यार है जिसे वह खुद ही नहीं समझ

पा रहा,,,

उसने मुझसे कहा था, कि वह अकेला ही रहना चाहता है, उसकी भाषा में कहें तो उसे शादी की लफड़े बाजी पसंद नहीं है

डॉली तू जानती है ,उसे मेरा इस तरह से प्यार का इजहार करना पसंद क्यों नहीं आया क्योंकि उसके दिल में पहले से तूने जगह बना रखी है, तो उसके दिल के एक ऐसे कोने में बैठी है ,जहां से कोई और तुझे नहीं देख पा रहा, सिवाय राज के

डॉली किसी स्टैचू की तरह बिना पलकें झपकाए पूनम की बात सुनती जा रही थी उसे पूनम की कोई भी बात समझ नहीं आ रही थी ,कि वह कहना क्या चाहती है

इन सब के बारे में तो डॉली ने कभी सोचा ही नहीं ,,,,,

वह तो राज के पास आकर रहने लगी थी राज और काकी से उसका एक ऐसा रिश्ता है ,जिसका कोई नाम नहीं है,,,,

पर जो पूनम कहती जा रही है, वह सब क्या है ,वह सारी बातें तो मेरे ऊपर से निकल रही हैं ,,,,

पूनम कुछ और कहती, तभी डॉली ने कहा पूनम तू यह सब क्या बोल रही है

राज मुझसे प्यार करते है

पर ये कैसे हो सकता है ,ना तो मैंने और ना ही राज ने कभी इस बारे में सोचा

हां तेरी यह बात सही है कि राज से ज्यादा मुझे कोई भी नहीं समझता, राज मेरी हर बात का ध्यान रखते हैं ,मेरे कुछ कहने से पहले ही वह मेरी आंखों में पढ़

लेते हैं

कि मैं चाहती क्या हूं,,,

पूनम ने डॉली को समझाते हुए कहा डॉली तू और कितना समझना चाहती है

अगर यह प्यार नहीं ,तो क्या है

राज तेरे अलावा किसी के नजदीक नहीं जाना चाहता, तू हमेशा राज के साथ रहना चाहती है

जब वह तेरे पास होते हैं ,तो तू निश्चफिकर हो जाती है

राज की हर चीज का कितने अच्छे से ध्यान रखती है तू,,,,,,,

डॉली एक बार ज़रा आंखें बंद करके सोच एक लंबी चौड़ी सुनसान रोड है

जिसके मीलो दूर तक तुम्हारे आगे और पीछे कोई नहीं है, तुम्हें उस सड़क पर बहुत दूर तक चलते जाना है ,और अगर कोई आकर तुझ से कहें कि इस लंबी चौड़ी सुनसान सड़क पर तुझे किस का साथ चाहिए, ऐसा कौन है जो इसी वक्त तेरे पास आ जाए ,तो तू किसका नाम लेगी

डॉली ने बहुत ही सहज तरीके से कहा

राज का !!!!!!!!

डॉली अगर तुझे किसी चीज की जरूरत हो तो किससे मांगेगी

राज से !!!!!!

और ऐसा कौन है जिससे तू कभी दूर होना नहीं चाहती, और अगर दूर होती भी है तो तुझे हर वक्त उसी की चिंता लगी रहती है पूनम ! मुझे राज की ही चिंता

रहेगी!!!!

पर इन सब से प्यार का क्या मतलब

डॉली में यही तो तुझे समझाना चाहती हूं कि प्यार इसी को कहते हैं, तू राज से प्यार करती है

तुम दोनों एक दूसरे के लिए बने हो ,और तुम्हारे कान्हा जी नेही तुम्हें राज से मिलाया है ,तुम दोनों का साथ तो ऊपर वाला पहले ही लिख चुका है ,मुझे आश्चर्य हो रहा है

कि तू अब तक क्यों नहीं समझी

डॉली अब वक्त आ गया है, कि तुझे राज का हाथ थाम लेना चाहिए ,आखिर वह कब तक अपनी जिंदगी में यूं ही अकेला रहेगा

क्या तुझे काकी की आंखों में राज की गृहस्ती के लिए तड़प दिखाई नहीं देती

वह भी चाहती हैं कि उनके राज का घर बसे ,उसके छोटे-छोटे बच्चे हो

वो अपनी गृहस्ती में सुखी रहे

डॉली एक बार सोच कर देख, क्या तुझे यह सब सोचते हुए अच्छा नहीं लग रहा

कि तू राज के दो छोटे छोटे से बच्चों की मां है, राज अपने दो छोटे बच्चों और तेरे साथ अपनी गृहस्थी में खुश है

डॉली बहुत गहरी चिंता में पड़ गई थी
 
वह इन सारी बातों को गहराई से सोच रही थी,,,,,

उसने पूनम से कहा, पूनम पर यह कैसे हो सकता है ,,राज ने कभी भी उस नजर से मुझे देखा ही नहीं और ना ही मैंने ,,,,

उनके लिए तो मैं अभी तक एक बच्ची हूं

वह मुझे हमेशा बच्चों की तरह ही ट्रीट करते हैं ,,,,डॉली माना कि तू राज से काफी छोटी है, पर प्रेम उम्र नहीं देखता

वह एक दूसरे के लिए इज्जत और प्यार देखता है, और तुम दोनों में वह सब कूट-कूट कर भरा हुआ है, जरा एक बार सोच कर देख अगर कल को तेरी शादी हो गई,

और तू कहीं और चली गई ,तो क्या तू किसी और के साथ खुश रह पाएगी,,,,

यह बात सुनकर सच में डॉली परेशान हो उठी थी ,राज से दूर जाने का की सोच कर भी वह डर गई थी ,,,,

उसके बाद भी पूनम कितनी देर तक एक एक बात उसे समझाती रही, उसे बताती रही अब आंगनबाड़ी बंद करने का टाइम हो गया था ,और राज का भी फोन आ गया था कि वह 1520 मिनट में ही डॉली को लेने आ रहा है, डॉली धीरे-धीरे आंगनबाड़ी में बिखरा हुआ अपना सामान समेटने लगी

तब तक राज की जीप का हॉर्न बाहर सुनाई दिया, जैसे ही डॉली बाहर जाने लगी पूनम ने उसका हाथ पकड़कर रोकते हुए कहा !

डॉली अब और देर मत करना,,,,

तुझे इस बात को समझना ही होगा, कि तू और राज एक दूसरे के लिए ही बने हैं

यह कहते हुए पूनम ने डॉली का हाथ छोड़ दिया,,,, डॉली चुपचाप आकर जीप में आगे की सीट पर बैठ गई ,,,

हमेशा की तरह राज ने जीप स्टार्ट की और उसका बोलना शुरू हो गया,,,,,

महारानी ! कैसा रहा आज का दिन तेरा जो भी काम था, सब हो गया ना, कि तेरे को अभी और यहां पर छोड़ने को आना पड़ेगा डॉली प्रश्नवाचक निगाहों से राज की तरफ देखे जा रही थी ,,

वह बहुत कुछ पूछना चाहती थी राज से बहुत बातें करना चाहती थी, पर उसे पता था कि राज को यह सब समझाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, पता नहीं वह इस बात पर कैसे रिएक्ट करेंगे ,,,

राज लगातार बोल रहा था, और डॉली चुपचाप उसकी बातें सुनती जा रही थी

कुछ ही देर में घर आ गया, डॉली ने अपना बैग उठाया और अंदर चली गई

राज भी उसके पीछे-पीछे अंदर आ गया था ,काकी दोनों का इंतजार ही कर रही थी जैसे ही दोनों अंदर आए, राज ने काकी की तरफ देखते हुए कहा,,,,

काकी देखना इस महारानी को क्या हो गया है, मैं कबसे से कुछ पूछ रहा हूं ,ये है कि कुछ बोलती ही नहीं ,,

डॉली आई और काकी के गले में बाहें डाल कर उनके कंधे पर अपना सिर टिका दिया राज देख रहा था, कि डॉली चुपचाप है लेकिन वह फिर भी उसे चिढ़ाने की कोशिश कर रहा था, पर काकी ने डॉली के गाल पर हाथ रखते हुए, उसकी आंखों में देखकर पूछा!

क्या होगा मेरी डॉली बिटिया को आज ऐसे चुपचाप और बुझी बुझी क्यों है, तेरा सब काम तो ठीक रहा ना, डॉली ने धीरे से कहा जी काकी सब ठीक था

और बैग उठाकर अपने कमरे में चली गई राज और काकी एक दूसरे की तरफ देखने लगे, कि आज से पहले तो डॉली ने ऐसा कभी नहीं किया, वह जब भी आती चहकते हुए सारी बातें बताती, और आते साथ ही

काकी की मदद भी करवाने लगती

जैसे ही राज उसके पीछे उसके कमरे में जाने लगा, तो काकी ने राज का हाथ पकड़कर रोकते हुए कहा!

बेटा लगता है वह किसी बात पर परेशान है अभी उसे और परेशान मत कर कुछ देर बाद उसका मूड ठीक हो जाएगा, तो वह खुद ही हमसे बात कर लेंगी,,,

और यह कह कर काकी रसोई में चली गई पर राज के दिमाग में अभी भी चल रहा था कि आखिर हुआ क्या है, जो डॉली इस तरह का व्यवहार कर रही है,,तभी दुकान से कोई लड़का बुलाने आया,,,

राज भैया ढाबे पर चलिए, कुछ ग्राहकों को आपसे बात करनी है ,और राज भी ढाबे पर चला गया...............

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

डॉली बहुत देर तक अपने कमरे में चुपचाप लेटी रही, आज वह रसोई में भी काकी की मदद करवाने नहीं आई थी ,काकी ने भी सोचा की आंगनवाड़ी का काम ज्यादा हो गया होगा ,इसलिए थक गई होगी ,काकी रात का खाना भी बना चुकी थी ,जब डॉली खाना खाने के लिए नहीं उठी,तो काकी ने बुलाया तब भी डॉली ने कोई उत्तर नहीं दिया काकी थालियां लगा रही थी, और बीच-बीच में डॉली को आवाज भी देती जा रही थी

तब तक राज भी ढाबे से आ गया ,जब उसने देखा कि काकी रसोई में अकेले ही है तो राज ने डॉली के बारे में पूछा

तो काकी ने राज से ही डॉली को बुलाने के लिए कहा !

बेटा जाकर उसको उठा ले ,लगता है आज थक गई होगी ,इसलिए सो गई ,राज ने डॉली के कमरे में जाकर डॉली को जोर से आवाज लगाते हुये कमरे की लाइट भी जला दी,, और देखा तो सच में डॉली सो रही थी ,राज ने कमरे से ही आवाज लगाई काकी ,यह क्या महारानी अभी से सो गई मैं आवाज लगा रहा हूं, सुन

भी नहीं रही

काकी ने कहा बेटा, अगर सो गई है तो उसे उठा ले ,आंगनबाड़ी से आकर तो उसने कुछ भी नहीं खाया, राज हिलाकर डॉली को उठाने लगा, फिर भी डॉली गहरी नींद में थी राज ने उसके माथे पर अपना हाथ रखा तो देखा कि उसका माथा गर्म था

राज ने चादर हटाते हुए डॉली का हाथ पकड़ा, तो हाथ भी गर्म था

राज वहीं से चिल्लाता हुआ काकी के पास आया, काकी महारानी को तो बुखार है

क्या काकी थाली छोड़ते हुए डॉली के कमरे की तरफ गई ,काकी रास्ते में ही बढ़बढ़ाती जा रही थी ,यह लड़की भी ना सुबह से शाम तक मशीन की तरह काम करती है

अपने खाने-पीने का तो ख्याल ही नहीं रखती कितनी बार कहती हूं, टाइम पर खाना खा लिया कर ,दूध फल लिया कर ,पर उसे तो घर के काम और आंगनबाड़ी के काम इन दोनों के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं सबका ध्यान रख लेती है, एक अपना ही नहीं रख पाती, काकी ने भी आकर डॉली के माथे पर हाथ रखा ,देखा तो माथा गर्म था

काकी जल्दी से रसोई में से पानी का गिलास भरकर लाई ,और राज से कहां तू डॉली को थोड़ा पानी पिला, जब इसकी नींद खुल जाए ,तो कुछ खिलाकर दवाई देना पड़ेगी राज ने डॉली को उठा कर बेड पर बिठा लिया था ,और अपने कंधे से उसका सर टिकाते हुए

उसको सहारा दिया

काकी डॉली को पानी पिलाने लगी

डॉली लगभग आधा गिलास पानी पी गई थी राज ने काकी की तरफ देखते हुए कहा कि मैं अभी डॉक्टर को लेकर आता हूं

डॉली ने राज को रोका और धीरे से कहा मैं ठीक हूं, इतनी रात को वैसे भी कौन सा डॉक्टर मिलेगा, अभी पेरासिटामोल ले लेती हूं ,हम सुबह चलकर डॉक्टर को दिखा देगे

डॉली की टेंशन में राज के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी

उसने कहा तू ऐसे कैसे कोई भी दवाई ले लेगी, और पहले तो तू कुछ खा ले सुबह से काम काम और बस काम लगा रहता है पहले कुछ खा, उसके बाद तुझे कोई दवाई देंगे ,और काकी से खाने की थाली लाने के लिए कहा, डॉली बच्चों की तरह जिद करने लगी कि मुझे कुछ नहीं खाना ,मुझे बिल्कुल भी भूख नहीं है

पर राज छोटे-छोटे कौर तोड़कर एक एक निवाला उसके मुंह में रखता जा रहा था

डॉली जबरदस्ती मुंह बना बना कर वह कौन निगल रही थी ,,,

जैसे ही एक रोटी खत्म हुई डॉली ने दोनों हाथों से अपना मुंह बंद कर लिया ,मैं अब और नहीं खा सकती ,प्लीज !

काकी ने कहा ठीक है ,राज अब जबरदस्ती मत कर ,इतने खाने के बाद हम इसको दवाई दे सकते हैं,

लेकिन राज ऐसे कहां मानने वाला था , इसी गांव के पास एक डिस्पेंसरी थी ,जहां पर राज और काकी अक्सर जाया करते थे, और उनसे राज की अच्छी जान पहचान भी थी ,उनको फोन लगा दिया

डॉक्टर से बात करने के बाद, जब डॉली के बारे में सब कुछ बता दिया ,और उन्होंने टेबलेट का नाम बता कर अच्छे से सब कुछ समझा दिया ,तब राज को तसल्ली हुई जिस टेबलेट का नाम उन्होंने बताया ,वह घर पर ही रखी थी ,राज ने वह टेबलेट डॉली को खिला दी ,और उसे लिटा कर उसके पास ही बैठ गया, तभी काकी ने कहा राज डॉली को तो दवाई खिला दी,, अब तू भी तो कुछ खा ले ,लगी हुई थाली भी ठंडी हो गई होगी राज ने कहा की तू जा कर खाले

मैं शहज़ादी के पास बैठता हूं

जब डॉली ने सुना ककि अभी तक राज और काकी ने खाना नहीं खाया ,तो डॉली ने धीरे से उठते हुए कहा ,काकी आप दोनों खाना खा लीजिए, मैं अब ठीक हूं

मुझे पहले से अच्छा लग रहा है

डॉली के कहने पर राज खाना खाने काकी के साथ आ गया ,लेकिन खाना खाने के बाद उसने एक बार फिर डॉली को जाकर देखा उसका बुखार कम हुआ कि नहीं, इस बार पहले से बुखार कम था, राज ने कहा काकी आप लोगों के साथ, में भी यही एक फोल्डिंग डाल कर सो जाता हूं ,रात को भी इसका फीवर देखना पड़ेगा , यह तो सो जाएगी तो इसको होश ही नहीं रहेगा ,काकी

भी दवाई खा कर सोती थी ,तो उसकी आंख सुबह ही खुलती थी ,इसलिए काकी को भी यही सही लगा ,राज ने भी एक फोल्डिंग डाला और सो गया ,राज हर दो-तीन घंटे में उठकर पूरी रात डॉली का फीवर चेक करता रहा

कि कहीं बढ़ तो नहीं रहा है

लेकिन फीवर नॉर्मल ही था, ऐसे ही पूरी रात निकल गई ,जब सुबह हुई तो डॉली रोज की तरह ही उठ गई ,हां पर उसे कमजोरी लग रही थी ,इस इसलिए वह रोज की तरह काम भी नहीं कर पा रही थी ,राज की नींद तो सुबह बहुत ही पक्की होती थी

उसको आसानी से उठाना तो हो ही नहीं पाता था, लेकिन आज राज की भी नींद खुल गई ,उसने जब देखा कि डॉली अपनी जगह पर नहीं है ,तो जल्दी से बाहर आया जहाँ हाथ में झाड़ू लीये डॉली दिखी

झाड़ू छीनते हुए डॉली को डांटना शुरू कर दिया ,महारानी तुझे चैन नहीं पड़ता क्या

क्या तेरी इच्छा क्या है, तू अच्छी तरह से बीमार पड़ना चाहती है क्या

यह सब काम छोड़ और जाकर चुपचाप अपने कमरे में लेट जा ,और फिर काकी को भी आवाज लगाई ,काकी देखना ये शहज़ादी सुबह सुबह क्या कर रही है

यह झाड़ू लेकर आ गई ,तू भी इसे कुछ नहीं कहती ,,,काकी ने अभी तक डॉली को देखा ही नहीं था, कि वह उठकर झाड़ू लगाने लगी है

काकी तो सुबह से उठकर नाश्ता बनाने में लग

गई ,और जब राज के उठने की आहट हुई ,तो उसने एक चूल्हे पर चाय भी चढ़ा दी डॉली के हाथ से झाड़ू छीन कर

उसका हाथ पकड़ उसके कमरे में ले गया औऱ वापस उसे बेड पर लिटा दिया

डॉली राज को समझाने की कोशिश कर रही थी, कि कल से उसे बेहतर लग रहा है और फिर आज शनिवार है ,सप्ताह का आखरी दिन तो उसे आंगनवाड़ी भी जाना होगा ,कल तो छुट्टी तो है ही

वह कल ही आराम कर लेगी, राज ने डांटते हुए कहा ,तेरी समझ में नहीं आ रहा

कि मैं तुझ से कह क्या रहा हूं

खबरदार जो यहां से हिली भी ,अरे तेरी नौकरी लगे हुए 1 साल हो गया

1 दिन की भी छुट्टी नहीं ली होगी

साला सब फालतू में बर्बाद हो जाएंगी

छुट्टियां ,जब तक तू बिल्कुल ठीक नहीं हो जाती, घर से बाहर कदम भी नहीं रखेगी

मैं जाकर वहां पर बोल दूंगा ,और तुझे मोबाइल दे रहा हूं ,और भी तुझे जिस से बोलना हो तो तू बोल देना, यह राज का आखरी फैसला था ,औऱ राज के सामने बोलने की डॉली की हिम्मत भी नहीं थी

डॉली ने कहा ठीक है ,कम से कम मुझे डांटो तो मत ,देखो ना एक तो मेरी तबीयत ठीक नहीं ,ऊपर से आप कल से मुझे डांटे ही जा रहे हैं,,,

हां क्योंकि तुझे डांट से ही समझ में आता है अगर प्यार

से बोलो , तो तू सर पर चढ़ कर नाचने लगती है ,,,जब डॉली लेट गई तो

राज रसोई में गया ,और मखाने का डिब्बा ढूंढने लगा ,एक के बाद एक डिब्बे खोलता जा रहा था ,काकी ने उसके पीछे आते हुए कहा, राज तुझे क्या चाहिए ढूंढ क्या रहा है काकी मैं मखाने का डिब्बा ढूंढ रहा हूं

जब मुझे बुखार आता ,तो तू मुझे वह थोड़ी सा घी और नमक डालकर फ्राई करके देती थी ना ,तो उससे अपुन का मुँह एकदम रापचिक हो जाता था ,और टेस्ट भी अच्छा लगता था ,तो वैसे ही मैं महारानी के लिए बना रहा हूं ,,,,,,

काकी ने हंसते हुए कहा वह मेरी रसोई है

तू रहने दे मेरी रसोई में ही संभाल लूंगी

तू अपना ढाबा ही संभाल ,तू जाकर डॉली के पास बैठ जा ,मैं मखाने तल के लाती हूं और काकी मखाने का डब्बा निकालकर उसे कढ़ाई में हल्का सा घी डाल कर भूना और नमक मिलाते हुए डॉली के पास ले आई

ऐसे मखाने खाने से सच में मुंह का स्वाद अच्छा हो जाता था, राज एक एक मखाना डॉली को अपने हाथों से खिला रहा था राज

ने मखाने खिलाए ,और दूध पिलाया तब तक काकी ने अंदर आते हुए कहा

राज ,राज ,डॉक्टर साहब आए हैं

क्या तू ने उन्हें फोन किया था

हां काकी मैंने तो रात को ही उन्हें फोन किया था, और

सुबह आने के लिए भी बोल दिया था ,आप उन्हें बिठाओ मैं डॉली को लेकर आता हूं ,राज ने डॉली को उठाया और बाहर वाले कमरे में उसे डॉक्टर को दिखाने ,लगा डॉक्टर ने अच्छे से डॉली की आंखें ,जीभ ,हाथ, नाखून और बुखार सब कुछ चेक किया ,और कहा! राज चिंता की कोई बात नहीं है ,डॉली को वायरल फीवर है पर हां मुझे लग रहा है ,कि इन्होंने किसी बात का स्ट्रेस भी लिया है

राज डॉक्टर का मुंह देखने लगा, डॉक्टर साहब मैं कुछ समझा नहीं, राज मेरे कहने का मतलब है ,कि जब हम किसी बात को बहुत गहराई से ,और बहुत देर तक सोचते रहते हैं ,तो उसकी वजह से भी हमारी बॉडी में वीकनेस महसूस होती है, और ऐसे में हमारा साधारण सा फीवर भी काफी बढ़ जाता है ,तो बस डॉली के साथ ही यही हुआ है ,कुछ काम का प्रेशर होगा ,और प्रेशर से ज्यादा लगता है उन्होंने अपने दिमाग पर जोर डाला है ,पर फिर भी लापरवाही करना सही नहीं है ,मैं 3 दिन का मेडिसन दे रहा हूं और डॉली को आराम के साथ ही अच्छे से खाना पीना भी खाना होगा

उसके बाद बिल्कुल पहले की तरह स्वस्थ हो जाएंगी, डॉक्टर ने दवाइयां लिखकर राज के हाथ में दी ,और जाने के लिए खड़े हो गए ,राज डॉक्टर साहब के पीछे पीछे उन्हें छोड़ने बाहर तक आ गया

जब डॉक्टर जाने लगे, तो राज ने एक बार फिर उनसे पूछा डॉक्टर साहब कोई और परेशानी तो नहीं है ना ,डॉक्टर ने हंसते हुए कहा अरे नहीं राज, कोई भी

परेशानी नहीं है ,वायरल फीवर तो वैसे भी दो-तीन दिन का होता है, 3 दिन का डोज़ लेने के बाद उनको अच्छा लगेगा ,और डॉक्टर चले गए
 
पर्चा राज के हाथ में ही था ,राज ने अपनी मोटरसाइकिल निकाली और जल्दी से डॉली की दवाइयां भी ले आया ,आकर उसने डॉली से ही दवाइयों के बारे में समझा

और एक एक दवाई खोलकर डॉली को पिलाने लगा, राज डॉली का ध्यान रख रहा था

और डॉली के ध्यान में तो राज ही था

डॉली को पूनम की कही हुई एक एक बात याद आ रही थी, पूरी रात यही स्ट्रेस तो डॉली के दिमाग में था ,और शायद इसी की वजह से उसका बुखार इतना बढ़ गया था

डॉली ने बहुत सोचा ,हर पहलू से सोचा

हर तरह से सोचा ,अभी भी वह सोचती ही जा रही थी, पूनम की कही हुई एक एक बात डॉली को सच महसूस हो रही थी

आज राज के लिए वह अपने अंदर के भावों को समझने की कोशिश कर रही थी जब राज ने डॉली को सारी दवाइयां खिला दी,और देखा कि यहाँ पानी नहीं था

तो पानी लेने रसोई में चला गया, तब तक डॉली ने देखा कि सामने ही दीवार पर टंगे हुए मंदिर से, कान्हा जी का मुकुट उनके माथे से निकलकर जमीन पर आ गिरा है डॉली धीरे से उठी ,और जाकर कान्हा जी का मुकुट

हाथ में लेकर उन्हें पहनाने की कोशिश करने लगी,,,,

डॉली ने धीरे से कान्हा जी के सर पर उनका मुकुट वापस रख दिया ,और एक बार उनकी तरफ देख कर मुस्कुराई, कान्हा ,मेरे भाई मेरे सखा ,सब कुछ तुम ही हो ,मेरे दिमाग में इतनी सारी उलझने चल रही है

तुमने मेरा हर कदम पर साथ दिया है

जब भी मैं भटकी हूं तुमने मुझे राह दिखाइ है ,मेरा सहारा तुम बने हो ,मेरी उलझने तुमने ही सुलझाइ है

लेकिन अब मेरे साथ जो हो रहा है

ना तो वह उलझन है ,नहीं कोई परेशानी है और ना ही कोई ऐसी बात है जिसकी शिकायत में तुमसे करूं, बस इस बार अगर मुझे जरूरत है ,तो अपनी समझ की

सब कुछ समझते हुए भी मैं क्यों जान नहीं पा रही हूं ,कान्हा जी तुम मेरी सहायता करो मुझे बताओ कि

सच क्या है

कान्हा जी पूनम ने कहा था कि राज को मेरे लिए ही बनाया है ,लेकिन मैं क्यों नहीं समझ पाई ,

अभी तक राज के साथ अपने रिश्ते को लेकर मैं नासमझ क्यों हूं

कान्हा जी मैं तो 8 साल की थी तभी मेरी मां और कुछ दिनों बाद ही बापू मुझे छोड़ कर चले गए थे ,तब से मैं बिल्कुल अकेली हूं लेकिन आपने मुझे इस घर में भेजा

तो आप मुझे भी बता दो कि मेरी किस्मत में किसका साथ लिखा है ,वह कौन है जो आकर मेरे साथ खड़ा होगा ,जिसका हाथ पकड़ कर मैं पूरी जिंदगी चलूंगी ,कान्हा जी आपको मुझे बताना ही होगा ,,,

जिस मंदिर में डॉली के कान्हा जी बैठे थे उनके ठीक उसी के पीछे कान्हा जी की एक बड़ी सी कांच से जड़ी हुई तस्वीर भी रखी थी जिसे डॉली के जन्मदिन पर राज मेले से लेकर आया था

डॉली लगातार अपने कान्हा जी से यह सवाल करती ही जा रही थी, कि कान्हा जी मुझे इस बात का एहसास करवाइए कि मेरा साथ किसके लिए है

और सामने रखी बड़ी सी कांच की तस्वीर में डॉली को राज का चेहरा नजर आया

जो डॉली के बगल में आकर खड़ा हो गया था ,कान्हा जी की परछाई के पीछे डॉली और राज दोनों का चेहरा साफ नजर आ रहा था ,राज को देख कर डॉली का मुंह खुला का खुला रह गया

जब वह मुड़ी तो देखा कि पानी का गिलास लेकर राज

ठीक उसके पीछे ही खड़ा था डॉली ने राज को देखा और राज डॉली को पानी पिलाने लगा, लेकिन पानी पीते हुए डॉली बहुत ध्यान से राज को देखती जा रही थी ,आज कान्हा जी से पूछे हुए सवालों का जवाब उसे मिल चुका था

अब उसे जानने के लिए कुछ भी बाकी नहीं था ,वह सब कुछ समझ गई थी

उसे तो हमेशा ही खुद से ज्यादा भरोसा अपने कान्हा जी पर रहा है

सब कुछ उन्ही पर तो छोड़ रखा है उसने शुरू से आज तक जब वह इतनी बड़ी उलझन में थी ,तो यह कैसे हो सकता था कि कान्हा जी उनका साथ ना दे

वह हर बात समझ चुकी थी ,सब कुछ जान चुकी थी, अब कुछ भी कहने या सुनने के लिए बाकी नहीं था ,उसे राज में अपने भोलेनाथ दिखाई दे रहे थे

राज का प्रेम भी तो बिल्कुल भोलेनाथ की तरह ही अजर अमर और निश्चल था

जिसमें कोई झूठ ,कोई फरेब ,और कोई धोखा नहीं था ,एक एक बात अच्छी तरह से डॉली कि समझ में आ गई थी

पानी पीते पीते उसके होठों पर एक मुस्कुराहट आ गई ,और आंखें राज के चेहरे से हट ही नहीं रही थी, वह राज को देखे ही जा रही थी,,,,,,,,

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

डॉली लगातार राज की आंखों में देखे ही जा रही थी, वह भी राज की आंखों में अपनी परछाई देखना चाहती थी, कि वह कितनी गहराई से राज की आंखों में समाई हुई है बह राज में खुद को ढूंढ रही थी

आज सारी बातें साफ हो चुकी थी

उसे सब कुछ महसूस होने लगा था , कि राज का अपनापन ,उसकी देखभाल और उसकी डांट यह सब प्यार ही तो है

राज इस प्यार को चाहे कुछ भी नाम दे लेकिन डॉली को आज अपने मन में राज के लिए प्रेम की अनुभूति हो चुकी थी

डॉली का कतरा कतरा राज के प्रेम की गवाही दे रहा था ,डॉली भी तो राज की जो देखरेख करती थी, उसकी इज्जत करती थी उसकी सारी चीजों की परवाह करती थी उसके घर के लिए ,उसके ढाबे के लिए काकी के लिए, मन में जो रिस्पेक्ट ,जो प्यार और जो चिंता थी ,वह प्रेम ही तो है

इन्हीं सब चीजों से तो प्रेम को आंका जाता है अब कुछ और समझने के लिए बाकी नहीं रहा था, राज के हाथ

में अब भी पानी का गिलास था ,और डॉली बड़ी-बड़ी आंखों से एकटक राज को से देखे जा रही थी

राज को कुछ अजीब लगा तो उसने डॉली को आवाज लगाई ,,महारानी अपुन को तू

घूरने क्यों लगती है ,अपन तेरे लिए पानी लेने को गया था ,और तू इधर मंदिर के पास आकर अपने कान्हा जी से क्या खुसर पुसर कर रही थी, अपन को पक्का यकीन है अपनी कंप्लेन कर रही होगी

तो देख एक बात मैं तेरे कान्हा जी को पहले ही बता देता हूं ,अगर तूने दवाइयां खाने में या अपना ध्यान रखने में जरा भी लापरवाही की और डाँट के साथ साथ तुझे एक चपत भी लगाना पड़ा ना ,तो लगा दूंगा

और इसलिए अपन तेरे कान्हा जी को पहले ही बता देता हूं ,कि वह तेरे को समझा दे डॉली मुस्कुराई और राज के हाथ से पानी पीने लगी ,,,वह पानी का पूरा ग्लास खत्म कर चुकी थी ,पानी खत्म हुआ तो राज ने उसे वापस बेड पर बैठा दिया

और सख्त हिदायत देकर कि जब तक पूरी तरह से ठीक नही हो जाती, तब तक ना तो डॉली घर के कोई काम करेगी और आंगनबाड़ी तो बिल्कुल भी नहीं जाएगी इतना कहते हुए ढाबे के लिए निकल गया जाते-जाते काकी से भी डॉली का ध्यान रखने के लिए कह गया था,,,,,

डॉली मेंटली तो पूरी तरह से फिट हो चुकी थी ,बस बुखार की वजह से थोड़ी सी कमजोरी महसूस हो रही थी,,,,,

राज के जाने के बाद पिछले 5 सालों की सारी बातें एक-एक करके डॉली के दिमाग में घूमने लगी थी, जिस दिन से इस घर में आई उस दिन से आज तक उसे कभी भी राज की किसी भी बात से दुख नहीं पहुंचा था

हां यह जरूर था ,कि पहले बह राज से डरती थी, उससे ज्यादा बात नहीं करती थी और उसके पास भी नहीं जाती थी

लेकिन तब भी अपने लिए उसने राज की आंखों में फिकर ही देखी थी

चाहे वह भले ही उससे दूरी बनाकर रखती थी, क्योंकि तब वह बच्ची थी

और उसे लगता था ,राज बहुत ही सख्त है पर तब भी अगर राज उसके आस पास होता तो वह निश्चिंत हो जाती थी

हमेशा ही आंख बंद करके भरोसा किया है उसने राज और काकी पर ,और सच में यही तो प्यार है ,डॉली अब तक क्यों नहीं समझ पाई थी ,कि राज के अलावा उसकी जिंदगी में कोई और हो ही नहीं सकता

डॉली दिल ही दिल में पूनम को थैंक यू बोल रही थी ,क्योंकि अगर पूनम ये सब नहीं बताती ,तो वह अपने रिश्ते को नाम ही नहीं दे पाती, उसे समझ ही नहीं आता

कि उसके और राज के बीच जो रिश्ता है वह सिर्फ और सिर्फ प्रेम का रिश्ता है जिसकी अनजान डोर से दोनों कब के बंध चुके हैं ,लेकिन अभी तक जिस तरह

डॉली को इस बात की भनक नहीं थी

और समझ नहीं थी, इसी तरह राज को भी समझ नहीं है ,कि वो डॉली से प्यार करता है पर डॉली ने सोच लिया था ,कि वह राज के दिल में अपने लिए प्रेम जगा कर ही रहेगी सब सोचते हुए डॉली को मीठी मीठी नींद आने लगी थी ,वह सो गई जब दोपहर में काफी ने उसे खाने के लिए उठाया ,तो उसे काफी अच्छा लग रहा था

शरीर की सारी थकावट दूर हो चुकी थी

और मन भी बहुत हल्का था ,डॉली ने खाना खाया और दवाई खाकर काकी ने उसे फिर आराम करने के लिए कहा ,डॉली ने कहा कि मैं बिल्कुल ठीक हूं ,अब मुझे आराम की जरूरत नहीं है ,काकी ने काम करते हुए कहा डॉली तू जाने और राज अगर राज आ गया और उसने तुझे घर में घूमता हुआ देख लिया ,तो डांट सुनने के लिए तैयार रहना पर मेरे पास मत आ जाना ,कि वह तुझे डांटता है ,इसलिए तेरी भलाई इसी में है कि जाकर चुपचाप अपने कमरे में आराम कर ले डॉली मुंह बनाते हुए वापस कमरे में चली गई क्योंकि वह जानती थी

सच में पहले उसे डाँटेगा , उसके बाद उसकी दूसरी बात शुरू होगी ,इन 5 सालों में राज ने डॉली के साथ हर तरह का व्यवहार किया था ,जैसे कि हमारे घर वाले हमारे साथ करते हैं ,पर एक चीज का एहसास डॉली को हुआ ही नही था,वह था,राज का प्यार से बोलना राज या तो डॉली का मजाक उड़ाता था

या उसे डांटता था ,या फिर उसकी चिंता करता

था ,लेकिन प्यार के दो शब्द उसने डॉली से कभी नहीं बोले, शायद उसे प्यार से बोलना आता ही नहीं था, उसकी डांट में ही उसका अपनापन और प्रेम छुपा था

लेकिन अब डॉली राज के मुंह से अपने लिए प्रेम के वो ढाई अक्षर सुनना चाहती थी जिसकी अनुभूति उसे आज हो गई थी

पर यह बात तो डॉली की समझ से बाहर थी कि ,आखिर वह बात की शुरुआत करे कहां से ,अब सांझ होने को आई थी

और डॉली को काकी ने शुरू से ही समझाया कि दीया बत्ती के टाइम उठ कर बैठ जाना चाहिए, बिस्तर में पड़ा रहना शुभ नहीं माना जाता ,डॉली उठी अच्छे से हाथ मुंह धो कर कपड़े बदले ,और बाल काढ़ते हुए खुद को शीशे में देखा ,तो चेहरा कुछ उतरा हुआ लग रहा था, जब उसे राज का ख्याल आया तो उसने बाल बनाते हुए चेहरे पर क्रीम लगाई फिर भी चेहरा कुछ उदास और रंगहीन लग रहा था ,तो पास ही रखे काजल पर उसकी नज़र गई आंखों में अच्छे से काजल लगा लिया लेकिन डॉली को अब भी कुछ कमी लग रही थी, इधर उधर देखते हुए कि कहीं राज तो नहीं आ रहे है

उसने अपने होठों पर हल्की सी लिपस्टिक भी लगा ली, वैसे तो डॉली कभी कुछ भी नहीं लगाती थी , बस कभी शादी में जाना हो तो काकी के कहने पर थोड़ा बहुत मेकअप कर लेती थी, इतने में ही डॉली बहुत सुंदर लगने लगी थी,,,

कहते हैं न मन की खुशी चेहरे पर आती है और आज

डॉली मन से बहुत खुश थी

राज के प्रेम से उसका रूप खिल गया था

डॉली खुद को बार बार आईने में देख रही थीअब उसे राज के आने का इंतजार था कि राज घर आए तो वह अपने हाथों से चाय बनाकर राज को दे, लेकिन साथ ही उसे डर भी लग रहा था, कि इस तरह से देखने पर पता नहीं राज क्या कहेगे

जैसे ही डॉली को राज के आने की आहट हुई ,जल्दी से पिंक कलर का दुपट्टा ओड़ते

हुये रसोई में पहुंच गई ,शायद काकी दरवाजे पर थी ,काकी की आदत थी की शाम को खाने पीने से निपट कर कुछ देर के लिए बाहर जा कर बैठ जाती थी

वैसे ही खाना तो राज के आने के बाद ही होता था , डॉली ने जल्दी से चाय चढ़ाई

एक ट्रे में चाय और पानी रखकर बाहर ले आई

राज की नजर डॉली पर गई ,तो टॉवेल से हाथ पोछते हुए बोला

महारानी तू कहीं बाहर से आ रही है क्या मैंने तुझे मना किया था ना,कि तू घर में ही आराम करेगी, डॉली ने मुँह बनाते हुए कहा मैं कहीं भी नहीं गई थी,,, आप डॉटने से पहले एक बार मुझसे पूछ तो लिया करो !

तू कहीं नहीं गई थी ,फिर ये सब क्यों लगा कर रखा है ,घर में इतनी तैयार होकर क्यों घूम रही है
 
डॉली ने फिर गुस्सा होते हुए कहा अगर मैं तैयार हो जाऊ तो आप सवाल करने लगते हैं ,और अगर मैं ऐसे ही घूमती रहूं ,तो काकी मुझे डांटती रहती हैं

मैं करूं तो करूं क्या

एक बार मुझे देख कर बताइए क्या मैं अच्छी नहीं लग रही //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f622.svg

आप तो हमेशा मुझे डांटते रहते हैं ,चाहे मैं कुछ भी करूं, क्या कभी प्यार से नहीं बोल सकते, एक बार देखकर मेरी तारीफ नहीं कर सकते ,कि मैं सुंदर लग रही हूं

और मुंह बनाकर राज की तरफ देखे जा रही थी, राज समझ गया कि डॉली गुस्सा हो गई है ,सिवा ने टॉवेल एक तरफ रखी और डॉली के हाथ से ट्रे लेते हुए कहा

सॉरी तुझे अपुन की बात का बुरा लग गया अरे मेरे कहने का मतलब वह नहीं थ

तू यह सब कभी करती नहीं है ना

तो ऐसे ही अच्छी लगती है, तुझे अच्छा लगने के लिए यह सब करने की जरूरत नहीं है ,तू जैसी है वैसे ही बहुत अच्छी है

और आज यह क्या तू बहकी बहकी बातें कर रही है ,कि तू सुंदर नहीं है ,अपन तेरी तारीफ नहीं करता ,यह क्या सब फालतू की बकवास किए जा रही है, देख तू एक बहुत अच्छी लड़की है, और बहुत अच्छी तरह से रहती है ,तू जो भी करती है सब कुछ सही करती है, तेरा कोई भी काम गलत नहीं होता डॉली ने बीच में ही बात काटते हुए कहा राज मैं आपसे जो कुछ कहना चाहती हूं मतलब वह आप समझ नहीं रहे हैं

राज चाय पीते पीते मोबाइल भी देखता जा रहा था, उसने कहा देख ये गोल-गोल बातें करेगी तो अपन कुछ भी नहीं समझेगा

तू अपन को डायरेक्ट बता कि तू समझाना क्या चाहती है, डॉली अपनी चुन्नी को उंगली में लपेटते हुए राज के आसपास चक्कर लगा रही थी, वह चाहती थी कि राज उसे देखे ,उसकी तारीफ करे,और उसकी आंखों में आंखें डाल कर उससे बात करे

लेकिन राज चाय पीने में ,और मोबाइल में व्यस्त था

डॉली लगातार बोलती जा रही थी ,डॉली ने कहा राज में कुछ आपको समझाना चाह रही हूं ,,,

हां तो बोल ना ! क्या तेरे बोलने का मुहूर्त निकलवाना

पड़ेगा

पहले बताइए आप मुझे डांटेंगे तो नहीं

अरे नहीं ,तू बोल ना और तू कब से अपन को इतना डरने लगी है ,तुझे जो बोलना होता है वह तो तू बोलती ही रहती है

मैं जो आपसे कहने वाली हूं ,आप मेरी वह बात मानेंगे

देख में पहले ही बता देता हूं अगर मानने वाली बात होगी तो ही अपन मानेगा

और मानूंगा तो तब जब तुम मुझे बताएगी

कल मुझे आपके साथ शहर चलना है

शहर पर काय के वास्ते

मुझे कुछ काम है

जो काम तुझे होगा उसका नाम भी तो होगा अभी तो शहर गए थे ,अभी शहर में कौन सा काम है ,,,,

मुझे आपके साथ मूवी देखना है

क्या राज चाय पीते पीछे अचानक रुक गया था ,उसने कप को टेबल पर रखा और डॉली के सामने खड़ा हो गया

महारानी एक बार फिर से बोलना तू क्या बोली,, डॉली ने आंखें झुकाते हुए कहा मुझे आपके साथ मूवी देखने शहर चलना है

मुझे सिनेमा हॉल में मूवी देखना है

महारानी तुझे कबसे सिनेमा देखने का शौक हो गया

पहले तो अपुन सिनेमा देखने बहुत ज्यादा

जाता था, हर संडे को जाता था

जब से तू आई है ,तब से नही गया

आज से पहले तो तू हमेशा मना करती थी और अब तुझे भी सिनेमा का शौक चढ़ गया ठीक है अगर तू कह रही है

तो एक बहुत ही मस्त मूवी लगी है

डॉन नंबर वन

मस्त साउथ मूवी है ,मारधाड़ से भरपूर

क्या एक्शन है हीरो का , इसका जो हीरो है ना साला ,एक लात से ट्रक को भी पीछे धकेल देता है, ठीक है मैं तुझे कल यही वाली मूवी दिखा कर लाता हूं ,और हां काकी से कह देना ,उसको भी ले चलेंगे

उसने भी सालों सिनेमा नही देखा है

खैर यह मैं तुझे क्यों बता रहा हूं ,तो वैसे भी काकी के बगैर हिलती कहां है

तो तैयार हो जाना कल ,मस्त तीन टिकट आज ही बुक करवा देता हूं

नहीं !!!! राज जो आप कह रहे हैं, मुझे वह वाली मूवी नहीं देखनी ,मुझे तो बाहुबली मूवी देखनी है

कुछ ही दिन पहले बाहुबली पार्ट 2 आया है और मेरी सहेली बता रही थी यह बहुत अच्छी मूवी है ,इस के गाने, इसका हीरो इसकी हीरोइन बहुत अच्छे हैं

और मैं चाहती हूं कि मैं आपके साथ यही मूवी देखने जाऊं और हां यह मूवी काकी को तो बिल्कुल भी पसंद नहीं आएगी

और फिर कल तो एकादशी है ,उनका व्रत रहता है ,तो वैसे भी वह शहर में कहां भूखी प्यासी परेशान होंगी, इसलिए मैं आपके साथ ही मूवी देखने चलूंगी

सिर्फ आप और मैं ,और कोई नहीं

महारानी तू पता नहीं अपन को कौन सी मूवी के लफड़े में डाल रही है, तब डॉली ने आश्चर्य से राज की तरफ देखते हुए कहा राज मूवी बहुत अच्छी है ,और जो आपको पसंद है ना एक्शन ,और मारधाड़ ,इसमें वह भी है ,और जो मुझसे पसंद है गाने ,और लव स्टोरी ,तो वह भी है ,दोनों का बहुत अच्छा कॉम्बिनेशन है

प्लीज मैं आपके साथ ही मूवी देखने चलूंगी और इसके सिर्फ दो टिकट ,आप आज ही मंगवा लीजिए ,मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए और हां अगर आप मुझे मूवी दिखाने नहीं ले गए ,तो मैं वापस कल से ही आंगनबाड़ी जाना शुरु कर दूंगी, और अपनी दवाइयां भी नहीं खाऊंगी ,शहज़ादी तू पागल हो गई है क्या ,यह क्या बच्चों जैसी जिद कर रही है चल ठीक है, तू जो कह रही है वह सब हो जाएगा, मैं आज ही तेरी जो तूने मुझे बताइ है ना उसको बुक करवा देता हूं

इतना कहते साथ ही राज फोन निकालकर किसी को टिकट बुक करवाने के लिए फोन लगाने लगा, राज ने फोन को होल्ड किया और डॉली से पूछा शहज़ादी दोपहर में 1200 से 300 का शो बुक कर दूं

डॉली ने कहा नहीं मुझे रात को 600 से 900 का शो

देखना है, दोपहर में भी भला कोई मूवी देखने जाता है क्या

और इतनी गर्मी में मैं नहीं जाऊंगी

फोन होल्ड पर था तो ,राज ने डॉली से कुछ ना कहते हुए चुपचाप रात को 600 से 900 के दो टिकट बुक कर दिए

और मोबाइल जेब में रखते हुए बोला अब तो तू खुश है ना ,और सुन दवाइयां और आराम तो बराबर करेगी, इसी शर्त पर मैं तुझे मूवी दिखाने ले जा रहा हूं डॉली ने खुश होते हुए राज की आंखों में देख कर कहा थैंक यू

और अपने कमरे में चली गई......

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
राज मूवी जाने के लिए तैयार हो गया था

और उसने फटाफट टिकट भी बुक कर दिए तब कहीं डॉली के कलेजे में ठंडक पड़ी राज ढावे जा चुका था ,और काकी अभी भी बाहर बैठी थी, डॉली अपने कमरे में गई और झट से अपनी अलमारी खोलकर देखने लगी कि कल वह कौन सा सूट पहनकर राज के साथ मूवी देखने जाएगी, वह सारे कपड़ों को उलट पलट करती हुई कोई अच्छा सा सूट देख रही थी

आज तक तो डॉली को कभी भी ज्यादा शौक था ही नहीं ,कहीं जाती तो कभी कभार साड़ी ,या कोई अच्छा सा सूट पहन लेती

वह भी काकी के कहने पर, वैसे डॉली को किसी चीज की कमी नहीं रहती थी

पर उसका मन ही नहीं करता था कि वह नए-नए सुंदर-सुंदर कपड़े खरीदे, और पहने सिंपल लैगी और कुर्ता पहन कर ही आंगनवाड़ी चली जाती थी

लेकिन कुछ दिन पहले ही डॉली की सहेली की शादी थी ,तो उसके लिए डॉली ने एक बहुत सुंदर पटियाला सूट सिलवाया था

जिसकी शॉर्ट टाइट फिटिंग की वाइट कुर्ती ,और पिंक पटियाला सलवार के साथ पिंक दुपट्टा

यह सूट डॉली के ऊपर बहुत अच्छा लगता था ,और जब वह इसे शादी में पहन कर गई थी ,तो सबने उसकी बहुत तारीफ की थी डॉली ने सूट के साथ लंबे खुले हुए बाल किए और मैचिंग के झुमके भी कानों में डाले थे उस दिन राज ने भी एक झलक देखकर डॉली की तारीफ की थी

शहज़ादी तेरा सलवार कुर्ता अच्छा लग रहा तूने कहां से सिलवाया इसे

डॉली को यह बात याद आते ही उसने झट से उसी सूट को कल पहनने के लिए बाहर निकाल लिया , क्योंकि यह पहली बार था जब राज ने किसी ड्रेस की तारीफ की थी सूट निकालकर उस पर अच्छे से प्रेस किया और हैंगर में लटका दिया ,उसकी मैचिंग के झुमके, और चुन्नी भी निकाल कर बाहर रख दी थी, जिससे कि जाते समय किसी चीज को ढूंढने में दिक्कत ना हो

डॉली कल के बारे में सोच कर अभी से बहुत खुश हो रही थी ,लेकिन उसने अभी तक यह नहीं सोचा था ,कि मूवी देखने तो जा रही है पर वहां जाकर भी राज से कुछ कहेगी कैसे डॉली को एक आईडिया आया

उसने झट से अपना मोबाइल उठाया और उसमें बाहुबली 2 डाउनलोड करके उसे देखने लगी, क्योंकि वह सारी मूवी देख कर समझ लेना चाहती थी ,कि मूवी के बीच में राज से किस गाने पर और किस सीन के बारे में कौन सी बात कर सकती है

और उस बात का जवाब राज के पास है कि नहीं ,इसलिए डॉली एक बार पहले ही इस मूवी को अच्छी तरह से देखना चाहती थी

थोड़ी ही देर बाद राज और काकी अंदर आ चुके थे, जब सभी खाना खाने लगे तो राज ने कल सिनेमा जाने का जिक्र काकी के सामने किया ,,,

काकी तुझे पता है

अपनी महारानी का सिनेमा देखने का मूड बन रहा है, और उसी के कहने पर मैंने तो टिकट भी बुक करा दीये है

और अपुन इसको ले जा रहा है सिनेमा दिखाने ,लेकिन अपन ने इसके सामने एक शर्त भी रखी है ,कि सिनेमा देखने के बाद यह अपना ध्यान रखे ,और घर पर रहकर आराम करे, काकी !!! इस बात की गवाह तू ही है

वर्ना ये सिनेमा भी देख लेगी ,और अपनी बात से मुकर भी जाएगी

काकी मेने तो तुझे भी साथ ले जाने की बात कही थी ,पर इस डॉली ने यह कहते हुए मना कर दिया, कि तेरा कल उपवास है तो तू कहां परेशान होती फिरेगी ,,,,

काकी ने कहा! हां बेटा अच्छा ही किया मेरा कल उपवास भी है ,और मुझे ना देखना कोई फिल्म ,वहाँ 3 घंटे अंधेरे में बैठकर मेरा तो दम घुटने लगता है,और वहां इतनी ठंडक होती है , कि मुझे ठंड भी लगने लगती है राज ने हंसते हुए कहा , काकी वहां ऐ सी लगा रहता है ,इसलिए ठंडक होती है

हां जो भी हो, तुम दोनों ही देख आओ

डॉली का भी मन बहल जाएगा, काम में फंसी रहती ,वैसे भी वह कहीं बाहर कब जाती है

डॉली कभी राज को देखती और कभी काकी को,वह चुपचाप खाना खाती जा रही थी,,

वह सोच रही थी, सच में राज के मन में तो मेरे लिए कुछ भी पर्सनल नहीं है

अगर में उनसे कुछ कहूंगी भी ,तो वह बात तुरंत काकी तक पहुंच जाएगी

राज किसी बात को समझते ही नहीं

वह अपने कान्हा जी को याद करके कहने लगी,,, कान्हा जी!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg

राज को आप ही समझा सकते हैं

वरना कहीं ऐसा ना हो ,कि मैं उनसे कुछ कहूं और इस बात को काकी के साथ-साथ ढाबे पर भी सबके साथ शेयर करने लगे

डॉली के होठों पर हंसी आ गई थी

पर जो भी हो ,कैसे ना कैसे बात की शुरुआत तो उसे करनी ही होगी ,और इस तरीके से करनी होगी कि बिना कहे ही राज बहुत कुछ समझ जाए,,,,,

बह जब डॉली सो कर उठी तो आज का यह दिन उसके लिए बहुत इंपोर्टेंट था

आज 3 दिन बाद उसकी कमजोरी और बुखार सब कुछ ठीक हो गया था

और फिर अगर कमजोरी होती भी तो राज के साथ

रहते हुए भला उसे किस बात की चिंता थी ,वह उठी काकी के साथ थोड़ा बहुत काम करवाया, नहा धोकर कान्हा जी को प्रसाद खिलाया ,उनसे अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए आशीर्वाद मांगा,और छोटे-मोटे काम करते हुए शाम का इंतजार करने लगी,,,

शाम को 600 से 900 का शो था

कम से कम 400 बजे उन्हें यहां से निकलना था 400 बजे तक डॉली अच्छी तरह से सज कर तैयार हो गई थी

वाइट कुर्ती के साथ पिंक पटियाला सलवार पिंक दुपट्टा ,होठों पर हल्की सी लिपस्टिक कानों में झुमके, हाथों में उसी की मैचिंग की नेल पॉलिश ,और पैरों में जूतियां

अपने बालों को डॉली ने खुला ही छोड़ा था

जब तैयार होकर कमरे से बाहर निकली

तो काकी डॉली को देखती ही रह गई

बिना कुछ कहे कमरे में गई, और उंगली में थोड़ा सा काजल ले कर आई

डॉली के बालों को हटाते हुए काजल उसके कान के पीछे, और बालों के ऊपर छुपाते हुए लगा दिया ,और खुश होकर कहने लगी

देख कितनी सुंदर लग रही है मेरी बच्ची

अरे हमेशा ऐसी ही तैयार होकर जाया कर कहीं भी जाए,,, कितनी प्यारी लग रही है तुझसे कितना भी कहो कभी अच्छे से तैयार होती ही नहीं ,आजकल की लड़कियां तो देखो बिना लाली लगाए घर से बाहर ही नहीं निकलती, आज पहली बार है जब तू बिना कहे ही

मेरी पसंद का तैयार हुई है

अरे मैं भी ऐसे ही चाहूं ,कि जैसे सब की लड़कियां सज सवरकर रहती हैं

तू भी ऐसी ही रहे, तुझे नजर ना लगे बड़ी प्यारी लग रही है,,,,,

राज भी अपना बेल्ट लगाते हुए काकी की बातें ध्यान से सुन रहा था

कभी काकी को देखता, और कभी डॉली को

जीन्स,वाइट फुल शर्ट, और हमेशा की तरह अपनी फेवरेट जैकेट ,राज के कपड़े हमेशा ही ब्रांडेड और अच्छे होते थे

उसे बचपन से सिर्फ दो ही चीजों का तो शौक था, एक कपड़ों का और दूसरा गाड़ियों का ,चाहे वह उसकी अपनी रॉयल इनफील्ड बुलेट हो ,या फिर उसकी पसंदीदा जीप

जब दोनों घर से बाहर निकलने लगे

तो काकी ने एक टिफिन और पानी की बोतल पकड़ाते हुए कहा!

डॉली तू अभी बुखार से ठीक हुई है

बाहर का कुछ भी मत खाना ,,,,

राज ने टिफन को वापस टेबल पर रखते हुए कहा ,काकी वहां पर सारा खाना पैक मिलता है ,और बहुत साफ सफाई वाला होता है ,तू यह सब रहने दे

पर डॉली ने टिफिन को वापस उठाया और पानी की बॉटल लेते हुए काकी से कहा कि मैं आपके हाथ का खाना ही खा लूंगी

अब तो खुश ,,,,और राज के साथ वाहर आ गई,,,मार्च का महीना था ,शाम को 400 बजे के बाद अभी भी हल्की ठंडक रहती थी राज ने जीप स्टार्ट की और शहर की तरफ लेते हुए आगे बढ़ाई

डॉली बार बार राज का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी

कभी कुछ कहती तो कभी कुछ, पर राज अपनी ही धुन में मस्त ,गोविंदा का कोई गाना गुनगुनाते हुए गाड़ी आगे बढ़ाता जा रहा था डॉली ने मुँह बनाते हुए राज से कहा

राज आप मेरे साथ शहर जा रहे हैं

आपको याद भी है कि आप के बगल में कोई और भी बैठा है ,आप खुद में ही मस्त हो जाते हैं , किसी और पर आपका ध्यान ही नहीं जाता ,काकी ने मेरी इतनी तारीफ की और आपने मुझे ठीक से देखा भी नहीं

मैं क्या देखूं मैंने कहा तो है तू हमेशा ही अच्छी लगती है ,,,और हां यह वही वाला ड्रेस है, ना जो तूने अपनी सहेली की शादी में पहना था ,,,यह रापचिक लगता है तेरे ऊपर अपन और क्या कहे

तू बता ना ,मैं सेम टू सेम बोलेगा,,,,

राज को समझाना सच मे बहुत मुश्किल था

ठंडी हवा के झोंके डॉली के बाल कभी उसके चेहरे को छूते ,तो कभी उसके कंधों को

सुहाना मौसम औऱ राज के परफ्यूम की महक मौसम

को और भी खुशनुमा बना रही थी, रास्ते के इस सुहाने सफर के बाद दोनों शहर पहुंच गए थे ,और कुछ ही देर में शहर की भीड़भाड़ भरी सड़कों को चीरते हुए वहां के मल्टीप्लेक्स के सामने थे

बाहुबली मूवी में अब भी काफी भीड़ थी

सारे शो हाउसफुल चल रहे थे ,और जहां तक डॉली को याद था ,वह राज के साथ पहली बार ही सिनेमा हॉल में आई थी

भीड़ इतनी ज्यादा थी कि चलने में भी परेशानी हो रही थी ,लिफ्ट के बाहर भी काफी लोग लिफ्ट का इंतजार कर रहे थे पहले ही मंजिल पर थिएटर था ,तो राज ने पैदल जाना ही ठीक समझा ,और कस के डॉली का हाथ थामते हुए डॉली को सबसे बचते बचाते सीढ़ियों से ऊपर ले जाने लगा पीछे से दूसरे नंबर की लाइन में डॉली और राज की 2 सीटें बुक थी

लास्ट सीट पर डॉली को बिठाते हुए खुद उसके बगल वाली सीट पर बैठ गया एडवर्टाइजमेंट चल रहे थे ,बस पांच 7 मिनट बाद ही मूवी शुरू होने वाली थी

पिक्चर शुरू हो चुकी थी ,हालांकि डॉली ने कल ही पूरी मूवी मोबाइल में देख ली और अब मूवी से ज्यादा ध्यान उसका राज पर था

मूवी निकले हुई 1 घंटे से ज्यादा बीत चुका था ,काफी रोमांटिक सीन चल रहे थे

फिल्म का हीरो जब हीरोइन को साथ ले जाने लगता है , तो उसे जहाज पर बैठना होता है ,लेकिन जहाज जमीन से काफी दूर था, और हीरोइन उस पर आराम से

नहीं चढ़ पा रही थी, तुरंत हीरो पानी में उतर कर अपना एक हाथ हीरोइन के पैर के नीचे और दूसरा हाथ जहाज के ऊपर रख देता है

और फिर वह बड़े आराम से उसके कंधों पर पैर रखते हुए जहाज पर चढ़ जाती है
 
मूवी के रोमांटिक सीनों में से यह एक था डॉली ने धीरे से राज के कान के पास आते हुए कहा, राज अगर हमें कहीं जाना हो और फिल्म के हीरो की जगह आप हों तो क्या आप भी ऐसा ही करेंगे, मुझे अपने कंधो से जहाज तक पहुंचाएंगे क्या

राज मूवी से ध्यान हटाकर डॉली को देखने लगा ,,,

महारानी तू यह क्या उल्टे सीधे सवाल पूछने का है, आराम से मूवी देखना अच्छी लग रही है ,,

नहीं पहले आप मुझे बताइए कि आप भी मुझे इसी तरह से नाव में बिठाएंगे

हां हां बिठा दूंगा अब खुश

ठीक इसी के बाद हीरो और हीरोइन एक बहुत ही खूबसूरत से जहाज पर सवार होकर समुद्र की रोमांटिक यात्रा पर निकलते हैं चारों तरफ ऊंची ऊंची समंदर की लहरें

घने घने बादल उसके बीच मोरनुमा खूबसूरत जहाज, जिस पर लहराते हुए वाइट पर्दे लगे थे ,,,,और एक गाना शुरू होता है इस गाने में दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आते हैं ,और उनका प्यार भी दिखाया जाता है ,, इस सॉन्ग का डॉली को कब से इंतजार था ,,

पूरी मूवी में सबसे रोमांटिक सॉन्ग यही था मूवी में सांग चल रहा था

और डॉली लगातार राज से सवाल करती जा रही थी

गाने में ही डॉली ने फिर से सवाल किया राज!

हां बोल!!!!

डॉली ने राज के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ,,,,

राज!!! देखिए ना मेरी तरफ

मुझे आपसे कुछ कहना है

राज ने बिना देखे ही कहा महारानी ये क्या तू बीच-बीच में पटर पटर बोलती जा रही है एक तो खुद ही मूवी देखने लाई, कि बहुत मस्त मूवी है ,और जब मैं मन लगाकर इसको देख रहा हूं ,तो देखने नहीं देती

अभी चुपचाप मुझे मूवी देखने दे ,और तू भी देख ,,,घर चल कर आराम से बात करना

डॉली ने मचलते हुए कहा, राज मुझे आपसे अभी

बात करनी है ,और यही बात करनी है प्लीज मेरी तरफ देखिये, ना वरना मैं आपको डिस्टर्ब करती ही रहूंगी ,,,,

हॉल में अंधेरा तो था ही,, फिर भी राज ने डॉली को देखने की कोशिश करते हुए उसकी तरफ अपना सिर घुमाया

और कहां बोल क्या कहना है

मुझे आपसे कहना है ,क्या आप भी मुझे किसी ऐसी जगह ले कर जाएंगे जहां सिर्फ आप ,और मैं हूँ

पर किधर उस जगह का कुछ नाम तो होगा

बिल्कुल ऐसी जगह जैसी आप इस गाने में देख रहे हैं, इतना ही खूबसूरत सा जहाज हो और और ऐसे ही दूर दूर तक कोई ना हो सिर्फ आप और मैं ,इतने ही खूबसूरत मौसम में ,बिल्कुल वैसे ही जैसे कि यह दोनों

कौन दोनों

महारानी तू क्या बोले जा रही है

राज आप ये सॉन्ग देख रहे हैं

ना बस ऐसे ही आपके साथ में हूं ,और कोई नहीं ,और मैं भी आपके साथ ऐसे ही गाना गाना चाहती हूं ,जैसे यह दोनों गा रहे हैं

मैं भी आपके साथ ऐसे ही बैठना चाहती हूं जैसे ये दोनों बैठे हैं

मैं भी आपके इतना ही करीब आना चाहती हूं ,जैसे ये दोनों आ रहे हैं

तू ये क्या बोले जा रही है

यह बात अपुन के भेजे से बाहर है

देख मैंने कहा ना अभी तो चुपचाप मूवी देख और अगर तू इसी तरह से बोलती रही ना

तो कुछ देर में सारे सिनेमा वाले हमें हॉल से बाहर निकाल देंगे

डॉली मुंह बनाते हुए चुपचाप मूवी देखने लगी

पर वो इतनी आसानी से कहां मानने वाली थी, किसी न किसी तरह तो वह आज राज को बता ही देना चाहती थी

थोड़ी देर बाद उसने राज के बाजू को कसके पकड़ते हुए उसके कंधे पर अपना सिर टिका दिया

राज धीरे से बोला तू सोने के वास्ते इधर अपन को लेके आई है

ठीक है सो जा अपन को तो,मूवी भी मस्त लग रही है ,अपन तो फुल टाइम देखेगा

राज को डॉली की छुअन का कोई एहसास नहीं था ,,उसे डॉली के प्यार में उसकी नींद नजर आ रही थी

डॉली का दूसरा वार भी फेल हो गया था

राज को लग रहा था ,कि डॉली सो चुकी है और डॉली ने इस बात का फायदा उठाते हुए अपने हाथ में राज

का हाथ लेकर कस के पकड़ लिया,,,,

वो धीरे-धीरे आंखें खोलते हुए राज को देख रही थी ,उसके मजबूत कंधे और परफ्यूम की भीनी भीनी महक , आज डॉली को एक अलग ही एहसास हो रहा था

वह राज के गले लग कर कुछ देर के लिए सब कुछ भूलना चाहती थी,,,,

कि कैसे राज को भी अपने प्यार का एहसास हो जाये,डॉली के कानों में सिर्फ पिक्चर की रोमांटिक धुन ही गूंज रही थी लेकिन उसकी आंखों में राज था

उसकी छुअन का एहसास, उसके मजबूत बाजूओं का स्पर्श ,और उसकी महक से डॉली उसके प्यार में डूबती जा रही थी

आज पहली बार उसे अहसास हुआ था ,

,कि प्यार कैसे हमें किसी की ओर खींचता है उसकी हर चीज आकर्षित करने लगती है उसकी सारी बातें हमें अच्छि लगने लगती हैं और उसकी नज़दीकियां मदहोश करने लगती हैं ,आज प्यार के साथ-साथ डॉली को कुछ ऐसी बातों का भी एहसास हुआ था जिनका नाम वह नहीं जानती थी

लेकिन उसकी इच्छा थी, कि कुछ देर के लिए वो दोनों किसी ऐसी जगह पहुंच जाए जहां पर उनके अलावा कोई और ना हो

और राज उसे अपनी अपनी बाहों में छुपा ले , वह राज के गले लग कर उसकी,सांसो की गर्माहट को महसूस कर पाए,उसकी धड़कने सुन पाए ,,

अब वह राज से दूर रहना नहीं चाहती थी इज्जत ,प्यार ,देख रेख ,इन सबके साथ साथ कुछ और बातें भी थी ,जो डॉली की समझ में आ रही थी ,और जिनकी चाहत उसे होने लगी थी ,वह राज का साथ पा लेना चाहती थी , राज की शारीरिक नज़दीकियों को भी खुद में समा,लेना चाहती थी

राज डॉली को उठाने की कोशिश करता तो वह उसके और करीब आके उसके बाजू को और कस के पकड़ लेती

राज को डॉली की हरकत कुछ अजीब तो लग रही थी ,क्योंकि आज से पहले उसने ऐसा नही किया था

पर उसने ज्यादा गहराई से इसके बारे में कुछ नहीं सोचा था, कुछ देर बाद अचानक हॉल की लाइट जल गई ,इंटरवल हो गया था

और लोग उठ कर स्नेक्स कोल्ड ड्रिंक के लिए यहां से वहां आने जाने लगे थे

डॉली अभी भी राज के कंधे पर सर रखकर वैसे ही बैठी हुई थी ,जब आसपास के लोग उन्हें कुछ गौर से देखने लगे

तो राज ने हिलाते हुए डॉली को उठाया और कहा बोल क्या खाएगी

अपुन जल्दी लेकर आता है

वरना फिर मूवी शुरू हो जाएगी, और ये क्या तू जब से आई है ,सोते ही जा रही है

अगर तुझे सोना ही था, तो फिर आई ही क्यों है

डॉली ने कहा आपको जो लाना है ले आइए और

चुपचाप बैठ गई.

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
जब इंटरवल में सिनेमा हॉल की लाइट जली और राज स्नेक्स लेने बाहर चला गया तो डॉली इधर-उधर देखने लगी, उसने देखा कि कुछ लोग ध्यान से डॉली की तरफ देख रहे थे शायद इसीलिए क्योंकि लाइट जलने के बाद भी डॉली का सिर राज के कंधे पर था

और उसने राज का हाथ पकड़ रखा था डॉली सामान्य होने की कोशिश करने लगी बस 5 मिनट बाद ही राज एक बड़ी सी ट्रे लेकर आ गया था

जिसमें दो बर्गर कुछ पॉपकॉर्न और दो कोल्ड ड्रिंक के ग्लास रखे हुए थे

राज ने सीट पर बैठते हुए कहा ,शहज़ादी अपुन तेरे वास्ते यहां की सबसे फेवरेट डिस लेकर आया है ,,,बर्गर!

खा कर देख इसका कितना मस्त स्वाद है अरे पूरी फिल्म में अपन तो यही सोच रहा था, कि कब इंटरवल हो और अपन तेरे वास्ते कुछ लेकर आए ,,,

राज ने वो ट्रे अपने घुटनों पर रखी और बर्गर की प्लेट डॉली को पकड़ा दी

ए तू टुकुर-टुकुर क्या इधर उधर देख रही है ले इसको जल्दी से खत्म कर ले ,वरना ठंडा हो जाएगा ,साला स्वाद का कचरा हो जाएगा और खुद भी बड़े-बड़े कौर तोड़ते हुए बर्गर खाने लगा ,,

बीच-बीच में कोल्ड ड्रिंक भी पीता जा रहा था ,,डॉली का खाने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था ,पर उसे खाना ही ठीक लगा क्योंकि वह जो चाह रही थी ,वो तो पूरा हुआ नहीं ,, बस उसने यही सोचा कि अच्छे से एक बार खा पी लूँ, तब इंटरवल के बाद दूसरा ट्राय तो करना ही है

शायद राज को कुछ समझा सकूँ

बर्गर था तो सच में बहुत ही टेस्टी डॉली ने पूरा बर्गर खाया ,,साथ साथ ड्रिंक भी पीती जा रही थी ,डॉली का बर्गर खत्म भी नहीं हो पाया ,कि राज ने उसकी तरफ पॉपकॉर्न का पैकेट बढ़ाते हुए कहा, महारानी पॉपकॉर्न खा मस्त बटर डलवा कर लाया हूं मसाले के साथ ,,,वाह क्या लगते हैं

खा कर देख ना ,,,

डॉली अभी भी राज की तरफ देखती जा रही थी ,,राज ने एक मुट्ठी भरी और एक साथ सारे पॉपकॉर्न डॉली के मुंह में डाल दिए डॉली का मुंह पॉपकॉर्न से भर चुका था

वह पॉपकॉर्न खाती हुई आसपास देख रही थी, क्योंकि आसपास देखने वाले लोग कुछ अजीब ही तरह से दोनों को देख रहे थे

इन दोनों की स्टोरी लोगों की समझ से बाहर थी ,जहां

एक तरफ लड़की प्रपोज करने के मूड में लग रही थी

वही लड़के को सिर्फ और सिर्फ खाने की पड़ी है ,दोनों के बीच का प्यार और केयर सबको समझ आ रही थी

पर उसके बाद भी डॉली का समझाना और राज का ना समझना ,सबकी समझ से परे था ,लोग सोच नही पा रहे थे, कि जब दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं

तो फिर लड़का जानकर अनजान क्यों बन रहा है ,और अगर लड़का प्यार ही नहीं करता ,तो वह लड़की का इतना ध्यान क्यों रख रहा है ,,,बिल्कुल बच्चों की तरह उसे खिलाने ,और उसे समझाने में लगा हुआ है खैर लोगों को इन सब से क्या

उन्हें तो जितना समझ में आता है

उतनी बात के मजे वह ले लेते हैं

बर्गर और ड्रिंक खत्म हो चुका था

लेकिन पॉपकॉर्न के पैकेट राज के हाथ में ही थे, दोबारा सिनेमा हॉल की लाइटें बंद हो चुकी थी ,और पिक्चर शुरू हो गई थी

राज जब भी डॉली से कुछ कहने की कोशिश करता, तो डॉली उल्टा जवाब ही देती ,,,,वह फिर चुपचाप बैठ जाते

राज को डॉली की बात समझ नहीं आ रही थी ,कि डॉली उससे ठीक से बात क्यों नहीं कर रही है,,,,

इस बार जब राज ने दोबारा डॉली को पॉपकॉर्न खिलाएं ,तो डॉली ने गुस्से से कहा यहां में पॉपकॉर्न खाने नहीं आई हूं

और प्लीज अब आप मुझे कुछ भी मत खिलाइए, मेरा

पेट फुल हो चुका है

राज ने मूवी छोड़कर डॉली की तरफ देखा और कहां ! महारानी मैं देख रहा हूं तू जब से सिनेमा हॉल के अंदर आई है, कुछ अजीब सी हरकतें कर रही है ,आखिर तुझे हुआ क्या है ,तू किस बात पर गुस्सा है

और किस बात का गुस्सा मुझ पर निकाल रही है ,अपन ने तो तेरे कहने के माफिक ही सब कुछ किया है, तेरे को मूवी दिखाने लाया तूने कहा था सिर्फ दो लोग चलेंगे

तो साला अपन के आगे पीछे कोई भी नहीं है दुकान का छोटू ,सोनू ,अपन सब को साथ लेकर आता है, लेकिन तेरे कहने पर अपन ने साला सब को मना कर दिया ,और एक तू है कि अभी भी मुंह फुला कर बैठी है

तू सीधे मुंह बात क्यों नहीं कर रही डॉली ने राज के मुंह पर उंगली रखते हुए कहा

राज ये हमारा घर नहीं है ,जो आप इतनी जोर जोर से कुछ भी बोले जा रहे हैं

ये सिनेमा हॉल है ,यहां हमारे आगे पीछे भी लोग हैं, प्लीज अब कुछ मत कहिए

चुपचाप बैठ जाइए ,ठीक है तू अपन को बोलने भी मत दे ,अब तुझे जो ठीक लगे वह कर,,, अब अपन तेरे से कुछ भी नहीं बोलेगा और हां एक बात और ,,,तूने सच ही कहा था कि मूवी में एक्शन मस्त है ,अब एक्शन ही आने वाला है ,

अब सच में पिक्चर में काफी एक्शन सीन आ रहे थे, जिसमें लड़ाई और सिर्फ लड़ाई ही थी ,और राज इन

सब का भरपूर मजा ले रहा था ,वहीं डॉली सारी कोशिश करके सिर पकड़ कर बैठ चुकी थी ,उसने कितना समझाने की कोशिश की थी ,कि वह भी राज के साथ किसी अकेली सुनसान जगह में जाना चाहती है ,उसके कंधे पर सर भी रखा ,उसका हाथ भी पकड़ा, पर पता नहीं राज को कैसे समझ आएगा

सारे मार धाड़ के सीन पर राज खुश होकर तालियां ,और सीटी बजा रहा था

तब डॉली मुंह बना कर चुपचाप बैठी थी थोड़ी देर बाद उसको भी राज की हरकतों पर हंसी आ गई थी, जब उसने देखा की राज उसकी तरफ देख रहा है तो

मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया

फिर भी राज डॉली को देख चुका था

उसने कहा,तू भी खुश हो गई ना

मस्त मूवी है ,,,,आखिरकार मूवी खत्म हुई और बुझे मन से डॉली राज के साथ सिनेमा हॉल से बाहर आ गई,, उसकी सारी कोशिशों पर पानी फिर चुका था

राज डॉली का हाथ पकड़ते हुए जल्दी-जल्दी सिनेमा हॉल से बाहर आ रहा था, क्योंकि वैसे भी रात के 900 बज चुके थे ,और एक से डेढ़ घंटा घर पहुंचने में भी लग जाता ,यही सोचकर लगभग भागता हुआ डॉली के साथ गाड़ी तक आया ,और डॉली से जल्दी से गाड़ी में बैठने के लिए कहा वैसे तो राज अकेला होता है ,तो कितनी भी रात तक शहर आता जाता रहता है

पर अभी वो डॉली के साथ था

और फिर काकी ने भी कहा था ,कि समय से घर आ

जाना, इसलिए दोनों गाड़ी में बैठ गए थे ,जब गाड़ी शहर से बाहर रोड पर आ गई ,तो राज ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा ,,,सहजादी अपन तेरी पसंद की मूवी देखने तेरे को लाया ,फिर भी तेरे चेहरे पर खुशी नहीं दिखी , बात क्या है

आखिर तू इतनी परेशान क्यों है

क्या मूवी तेरे को अच्छी नहीं लगी, अपन को तो मस्त लगी, डॉली ने बढ़बढ़ाते हुए कहा मूवी तो बहुत अच्छी थी

पर इस मूवी में जो मैं आपको समझाना चाहती थी ,वह नहीं समझा पाई

राज ने स्टेयरिंग से ध्यान हटाते हुए डॉली की तरफ देखा, और कहा क्याअपुन को तू क्या समझाना चाहती थी

और क्या नहीं समझा ,,,

कुछ नहीं ,अभी आप गाड़ी पर ध्यान दीजिए मैं ,मैं ,तो बस ऐसे ही कह रही थी

तेरा कुछ पता रहता भी है ,तू कभी भी कुछ भी ऐसे ही बोलती रहती है ,कुछ देर बाद दोनों घर पहुंच गए ,काकी दोनों का इंतजार कर रही थी ,राज ने काफी को फोन करके खाने के लिए पहले ही मना कर दिया था क्योंकि इंटरवल में दोनों का ही पेट भर चुका था ,काकी को थोड़ी बहुत तो समझ फिल्मों की थी ,क्योंकि टीवी पर वह अक्सर पुरानी फिल्में देखती रहती थी ,इसलिए आते साथ ही उसने डॉली से पूछा ,बेटा कैसी थी फिल्म डॉली ने एक ठंडी सांस ली,

और काकी की तरफ देखते हुए कहा ,काकी फिल्म तो अच्छी थी ,हीरो हीरोइन भी अच्छे थे

लेकिन इस पिक्चर का जो हीरो है ना

वह पता नहीं कैसा है ,कुछ समझता ही नहीं की हीरोइनों उसे क्या समझाना चाह रही है जब हीरोइन उससे कुछ बोलती है , तो बस खाने की ही बातें करता रहता है

काकी ने कहा ,क्या सिनेमा में यह सब था राज आया और डॉली की तरफ देखते हुए बोला, यह सब तू क्या बोले जा रही है

मूवी में ऐसा तो कुछ भी नहीं था ,और इसका हीरो वह तो एकदम मस्त था

एक नंबर ,अरे उसने तो हीरोइन के वास्ते अपनी मां से भी पंगा ले लिया था

और तू कह रही है ,कि हीरो कुछ समझता ही नहीं ,,तब तक काकी अंदर जा चुकी थी डॉली राज के पास आई और उसकी तरफ देख कर कहने लगी ,,,राज आपको मूवी अच्छी तरह से समझ में आई ना

हां अपन को तो बराबर ,,,

आपने यह भी समझा ना की हीरोइन क्या कहना चाहती थी ,और हीरो उसकी बात को कितनी अच्छी तरह से समझ जाता है

हां बराबर ,,,,

तो फिर मैं जो आपसे कहना चाहती हूं

आप उसे क्यों नहीं समझते,,,,

महारानी तू यह हर बात में अपुन को कायको बीच में ले आती है ,अरे वह फिल्म है हीरो है ,हीरोइन है,,,

तू ,,,तू ,,,है

और मैं ,,मैं ,,,हूं ,हम हीरो हीरोइन नहीं है

मैं पिछले 4,5 दिनों से देख रहा हूं

तू अपन से गोलमोल बातें करने लगी है

अरे जो भी है सीधा सीधा बोलने का!!!

डॉली ने राज के हाथ से टॉवल छीन कर वापस राज के ऊपर दे मारी

और पैर पटकती हुई अपने कमरे में चली गई राज भी उसके पीछे पीछे उसके कमरे में चला गया ,उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए कहा ,देख अब तू अपन का भेजा खराब मत कर ,सीधा सीधा बोल तेरे को चाहिए क्या

ऐसी कौन सी बात है, जिस पर तू जल के अंगारा हुई जा रही है ,अपन तेरे को शहर भी लेकर गया ,तेरे कहने पर मूवी दिखाई

अगर तेरे को कुछ और चाहिए, कुछ शॉपिंग करना है ,तो बोल अपन पर वह भी करवा देगा ,पर तेरा मुंह फुला कर घूमना

अपुन की समझ से बाहर है
 

Similar threads

S
Replies
64
Views
188
StoryPublisher
S
S
Replies
379
Views
744
StoryPublisher
S
S
Replies
25
Views
95
StoryPublisher
S
S
Replies
29
Views
84
StoryPublisher
S
S
Replies
64
Views
180
StoryPublisher
S
Back
Top