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Guest
"अब बस भी करो न।"
"कमला ! तुम बीच में मत बोलो।"
"अरे...तो क्या..अब मार ही डालोगे...ऐसा कौन-सा पहाड़ टूट पड़ा जो उसने छोटे मालिक के साथ मिलकर केक काट ली...वह भी मालकिन के कहने पर।"
"कमला ! इससे बड़ा भी कोई गजब हो सकता है। उस दिन छोटे मालिक पर इसके कारण सिर्फ डांट ही पड़ी थी...आज इतने मेहमानों के बीच उसका घोर अपमान हुआ-उसे वहीं मुर्गा बनाया गया-उस अपमान का कारण सिर्फ राजेश है।"
"लेकिन राजेश को तो खुद ही जिद्द करके छोटे मालिक साथ ले गए थे और मालकिन के कहने पर दोनों ने मिलकर केक काटा था।"
"तुम जानती हो, छोटे मालिक बहुत भोले हैं, मगर राजेश तो भोला नहीं है-इसे तो समझना चाहिए था।"
"आप ठीक कहते हैं पिताजी।' राजेश ने कहा-"मेरे कारण छोटे मालिक का अपमान हुआ है इसलिए मुझे खूब मारिए।" और उसने कैलाश के दोनों हाथ पकड़कर खुद अपने ही गालों पर थप्पड़ मारने शुरू कर दिए-कमला रो पड़ी...साथ ही कैलाश के होंठों से भी भर्राई आवाज निकली
"बेटे...! मैं जानता हूं, तुम और छोटे मालिक एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हो...मगर अब तुम बिल्कुल बच्चे नहीं रहे-तुम्हें समझना चाहिए कि धरती और आकाश का मेल न कभी हुआ है और न होगा।"
"पिताजी...!"
"हां बेटे...वे लोग हमारी तरह गरीब नहीं खानदानी रईस हैं और हम लोग खानदानी नौकर हैं.. हम लोग पुरखों से उनके वफादार और नमकख्वार
उसने फिर राजेश को जोर से लिपटा लिया।
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"कमला ! तुम बीच में मत बोलो।"
"अरे...तो क्या..अब मार ही डालोगे...ऐसा कौन-सा पहाड़ टूट पड़ा जो उसने छोटे मालिक के साथ मिलकर केक काट ली...वह भी मालकिन के कहने पर।"
"कमला ! इससे बड़ा भी कोई गजब हो सकता है। उस दिन छोटे मालिक पर इसके कारण सिर्फ डांट ही पड़ी थी...आज इतने मेहमानों के बीच उसका घोर अपमान हुआ-उसे वहीं मुर्गा बनाया गया-उस अपमान का कारण सिर्फ राजेश है।"
"लेकिन राजेश को तो खुद ही जिद्द करके छोटे मालिक साथ ले गए थे और मालकिन के कहने पर दोनों ने मिलकर केक काटा था।"
"तुम जानती हो, छोटे मालिक बहुत भोले हैं, मगर राजेश तो भोला नहीं है-इसे तो समझना चाहिए था।"
"आप ठीक कहते हैं पिताजी।' राजेश ने कहा-"मेरे कारण छोटे मालिक का अपमान हुआ है इसलिए मुझे खूब मारिए।" और उसने कैलाश के दोनों हाथ पकड़कर खुद अपने ही गालों पर थप्पड़ मारने शुरू कर दिए-कमला रो पड़ी...साथ ही कैलाश के होंठों से भी भर्राई आवाज निकली
"बेटे...! मैं जानता हूं, तुम और छोटे मालिक एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हो...मगर अब तुम बिल्कुल बच्चे नहीं रहे-तुम्हें समझना चाहिए कि धरती और आकाश का मेल न कभी हुआ है और न होगा।"
"पिताजी...!"
"हां बेटे...वे लोग हमारी तरह गरीब नहीं खानदानी रईस हैं और हम लोग खानदानी नौकर हैं.. हम लोग पुरखों से उनके वफादार और नमकख्वार
उसने फिर राजेश को जोर से लिपटा लिया।
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