तन्यल ने उसको घुरा और तेजी से दो दी सीढिया लांघता हुआ ऊपर की और बढ़ा, उसने तीसरे माले पर पहुच कर ही साँस ली और 308 नम्बर कमरे के सामने पहुचा और दरवाजे को जोर से ठोकर मारी, दरवाजा आसानी से खुल गया, उसने अन्दर देखा कमरा पूरी तरह खाली था |
उसने पुरे कमरे का मुआवना किया और मन ही मन कहा - गये 5 लाख़ हाथ से !
उसने वायरलेस निकाला और फिर चिल्लाया - मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |
मून मून होटल का मालिक एक चालक व्यापारी था, उसने शहर के बाहर फालतू पड़ी इस प्रॉपर्टी से पैसे कमाने का घटिया रास्ता निकला था, उसने पुलिस की रेड पड़ने की स्थिति मैं बचने का एक नायब रास्ता ढूढ़ लिया था, जैसे ही पुलिस की जीप होटल के आधा किलोमीटर बाहर मेन गेट पर पहुची, वहा बैठे सिक्यूरिटी गार्ड ने अन्दर होटल के कमरों मैं लगा सायरन बजा दिया, और अन्दर पूरा होटल अलर्ट हो गया, फिर सामने से आता टेम्पो और उसमे रिवर्स गियर नही होना सब केवल पुलिस को रोके रखने का प्लान था, ताकि अन्दर सभी वेश्याओ और जोड़ो को बाहर सुरक्षित निकाला जा सके |
दिन भर की थकान के बाद मयूर की सुरक्षित और आरामदायक बांहों में रागिनी बच्चों की तरह निश्चिन्त सो रही थी, उसकी नींद खुली तब सायरन की आवाज पुरे कमरे मैं गूंज रही थी, उस समय सुबह के 5 बज रहे थे, और सायरन काफी देर से बज रहा था, कोई जोर जोर से दरवाजा भड़क रहा था, वो आवाज बहुत डरावनी थी, उसने मयूर को उठाया, मयूर ने आवाज को फ़ौरन पहचान लिया, वो अपने दोस्तों के साथ इस होटल मैं पहले भी आ चूका था, उसने रागिनी से कहा - पुलिस की रेड | जल्दी सामान समेटो और भागो यहाँ से |
रागिनी ने कहा - हमारे पास जो भी सामान है सब खुल्ला पड़ा है और एक शरारती मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आई |
जब वो बाहर निकले तब तक निश्चित ही देर हो चुकी थी, क्योकि मयूर ने नोटिस किया की उस समय कोरिडोर में कोई भी नहीं था सिवाय उनके, सारे कमरे पहले ही खाली हो चुके थे, वास्तव मैं ये बिलकुल सही था जब उनकी नींद खुली तब तन्यल होटल के रिसेप्शन पर खड़ा था |
जब वो रूम से बाहर निकले तब तक तन्यल सीढिया चढ़ रहा था, उन दोनों को अगर भागना था तो एक मात्र रास्ता वो सीढिया ही थी जिनसे निचे उतर कर वो पीछे के रास्ते से जंगलो में जा सकते थे, और उस एक मात्र रास्ते से तन्यल ऊपर आ रहा था और बहुत सम्भावना थी की उन दोनों की भिडंत तन्यल सो हो जाये |
मयूर जब निचे उतरने की सीढियों के मुहाने पर पहुचा और उसने तन्यल को ऊपर चढ़ते देखा तो उसका दिल धक् से रह गया उसने देखा वो बहुत तेजी से दो दो सीढिया चढ़कर ऊपर आ रहे थे, उसने इधर उधर नजर डाली और उसे सीढियों के पास वाश रूम दिखाई दिया उसने रागिनी का हाथ पकड़ा और वो दोनों वाश रूम में घुस गये, तन्यल ऊपर आया और सीधा रूम नो.. 308 पे गया, मयूर ने वाशरूम का दरवाजा खोल कर देखा, तन्यल और उसके साथ आये पुलिस वाले रूम के अन्दर जा चुके थे, उसने रागिनी का हाथ थाम रखा था फ़ौरन बाहर निकलने के लिए दरवाजा खोला वो बाहर निकलने ही वाले थे कि तभी उनके रूम में घुसे पुलिस वालो में से एक बाहर आया, और वाश रूम की तरफ बढ़ा, उनका दिल फिर तेजी से धडकने लगा, धीरे धीरे उसके जूतों की आवाज उनके करीब आ रही थी, किसी भी सेकंड उनका सामना उस पुलिस वाले से हो सकता था, पुलिस वाला वाश रूम तक आया, और उसने वाशरूम के दरवाजे का नकुचा पकड़ कर निचे की और दबाया, मयूर तैयार था, तभी पुलिस वाले ने देखा, जिस वाशरूम में वो जा रहा था, उसके ऊपर एक लेडीज स्टीकर लगा था, उसने नकुचा छोड़ दिया और उसके बिलकुल पास में एक और दरवाजे का नकुचा खोला जिसपर जेंट्स का स्टीकर लगा था, खोला और अन्दर चला गया
दोनों ने वाशरूम के दरवाजे पर लगे कांच में से सबकुछ देखा, मयूर ने रागिनि का हाथ पकड़ा और फुर्ती से बाहर निकला, एक एक सेकंड कीमती था, ज्यादा देर वहा रुकना ठीक नही था, उनको रिस्क लेकर जल्दी से जल्दी बाहर निकलना था- वो तेजी से सीढियों से निचे उतरे तभी तन्यल भी बाहर आया, पर कुछ सेकंड के फासले से वो उन दोनों को नही देख सका, दोनों पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर होटल की दिवार के सहारे खड़े हो गये, उन्होंने देखा पीछे एक मैदान था जिसके बाद जंगल, तभी उन्हें तन्यल की आवाज सुनाई दी मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |
उन दोनों ने एक दुसरे की और देखा और तेजी से मैदान मैं दौड़ लगा दी, तन्यल पीछे के दरवाजे की और बढ़ा और उसने बाहर देखा, पर उसे वह कोई नहीं दिखाई दिया, दोनों मैदान पार कर जंगली झाड़ियो के पीछे छुप चुके थे |
तन्यल गुस्से से आग बबूला हो रहा था, वो जितना पांच लाख के पास जाता था उतना ही वो उससे दूर होते जाते थे, वो होटल के रिसेप्शनिस्ट पर गुराया - जल्दी से तेरे सीसीटीवी फुटेज में उन दोनों के फोटो निकाल और मुझे दे, वर्ना आज तेरी खैर नहीं |
रिसेप्शनिस्ट उन दोनों लड़का लडकी को याद कर के सोच रहा था - जरुर उन्होंने किसी का मर्डर किया होगा या बैंक लूटी होगी तभी इंस्पेक्टर इतना उतावला हो रहा है |
उसने सीसीटीवी फुटेज कंप्यूटर में लिया और एक प्रिंट तन्यल को दी |
तन्यल ने प्रिंट देखा और चौक गया फुटेज में लड़का तो साफ दिख रहा था पर लडकी ने अपना मुंह लाल हैण्ड बेग से ढक रखा था - उसके मुंह से सिटी निकल गई, - लडकी को मालूम था यहाँ सीसीटीवी लगा है और बड़ी सफाई से उसने अपना फोटो नही आने दिया, ये कौन हो सकती है ?
झाड़ियो के पीछे एक पेड़ की ओट में मयूर रागिनी की गोद मैं लेटा था, उसने कहा - जब तक बाहर रोड पर चहल पहल नही हो जाती हम यहाँ से नहीं निकल सकते, पकड़े जायेंगे, अभी पाच - छे घंटे ये झाडिया ही अपनी होटल और ये झाडिया ही अपना घर है |
रागिनी ने मयूर के बालो में हाथ फिराते हुए बोला - मयूर कैसे भी करके हमे दिल्ली पहुचना है वहा ये पुलिस वाला हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता है |
तन्यल ने उन दोनों का प्रिंटआउट अपने पास खड़े सिपाही को दिया और कहा - इसकी 1000 फोटो कॉपी करवाओ और शहर के हर कोने मैं इन दोनों के पोस्टर लगवा दो |
झाड़ियो के पीछे बैठे बैठे रागिनी एक टक मयूर को ही देख रही थी उसने सोचा - मैंने तुमको किस मुसीबत में फसा दिया मयूर, मेरे साथ साथ तुम्हारी भी जान पर बन आई है |
ऐसे ही बैठे बैठे दिन के 11 बज गये. होटल के बाहर वाली रोड पे ट्रैफिक बढ़ रहा था, मयूर ने रागिनी से कहा - ये सही समय है हमे यहाँ से निकल चलना चाहिए, हम स्टेशन जायेंगे और वहा से दिल्ली कि ट्रेन पकड़ लेंगे, पर हमे अलग अलग जाना होगा क्योकि पुलिस हम दोनों को साथ मैं तलाश रही है, अगर हम अलग अलग जायेंगे तो किसी को शक नही होगा, रागिनी ने सहमती से सर हिलाया और बोली - मैं रेलवे स्टेशन पहुच कर तुम्हारा इंतजार टिगिट खिड़की के पास करूंगी तुम वही आ जाना |
मयूर रेलवे स्टेशन पर सबसे पहले पहुचा पर वहा पुलिस वाले मुस्तेदी से गेट पे खड़े थे, उसने मुख्य गेट से अन्दर जाने की बजाय मॉल गोदाम से ही अन्दर जाना उचित समझा, वो धीरे धीरे करते मॉल गोदाम को पार कर स्टेशन के अन्दर प्लेटफार्म पे गया और फिर वहा से टिगिट खिड़की तक पहुचा, उसने अपनी जेब से पैसे निकले और उसका दिल धक् से रह गया - टिगिट खिड़की के बाहर एक थम्बे पर उसका साफ और रागिनी का लाल हैण्ड बेग से ढका फोटो लगा था, उसके मुंह से एक आह निकल गई और पहली बार उसके चेहरे पर झुंझलाहट के भाव उभरे, पुलिस बड़ी तेजी से उसके आगे आगे चल रही थी, उसको फोटो देखते, देख एक और लडके ने फोटो देखा और फिर मयूर की और देखा उसका चेहरा आश्चर्य से सफेद हो गया |
मयूर को अपने पहचाने जाने का अहसास हो गया था वो तेजी से बाहर की और बढ़ा, उसको पहचानने वाले ने इधर उधर देखा और पास खड़े पुलिस वाले के पास जाकर उसकी दिशा में इशारा किया |
मयूर स्टेशन से बाहर निकला और उसे अपने फैसले पर पछतावा होने लगा कि क्यों उसने रागिनी को अपने से अलग किया, अब वो उसे कैसे ढूंढेंगा ?
रागिनी टैक्सी से उतरी और सीधी स्टेशन के अन्दर टीगीट खिड़की पर पहुची और उसकी नजर खम्बे पर लगे मयूर और उसके पोस्टर पर पड़ी, और उसका चेहरा भय से पिला पड़ गया |
उसने पुरे कमरे का मुआवना किया और मन ही मन कहा - गये 5 लाख़ हाथ से !
उसने वायरलेस निकाला और फिर चिल्लाया - मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |
मून मून होटल का मालिक एक चालक व्यापारी था, उसने शहर के बाहर फालतू पड़ी इस प्रॉपर्टी से पैसे कमाने का घटिया रास्ता निकला था, उसने पुलिस की रेड पड़ने की स्थिति मैं बचने का एक नायब रास्ता ढूढ़ लिया था, जैसे ही पुलिस की जीप होटल के आधा किलोमीटर बाहर मेन गेट पर पहुची, वहा बैठे सिक्यूरिटी गार्ड ने अन्दर होटल के कमरों मैं लगा सायरन बजा दिया, और अन्दर पूरा होटल अलर्ट हो गया, फिर सामने से आता टेम्पो और उसमे रिवर्स गियर नही होना सब केवल पुलिस को रोके रखने का प्लान था, ताकि अन्दर सभी वेश्याओ और जोड़ो को बाहर सुरक्षित निकाला जा सके |
दिन भर की थकान के बाद मयूर की सुरक्षित और आरामदायक बांहों में रागिनी बच्चों की तरह निश्चिन्त सो रही थी, उसकी नींद खुली तब सायरन की आवाज पुरे कमरे मैं गूंज रही थी, उस समय सुबह के 5 बज रहे थे, और सायरन काफी देर से बज रहा था, कोई जोर जोर से दरवाजा भड़क रहा था, वो आवाज बहुत डरावनी थी, उसने मयूर को उठाया, मयूर ने आवाज को फ़ौरन पहचान लिया, वो अपने दोस्तों के साथ इस होटल मैं पहले भी आ चूका था, उसने रागिनी से कहा - पुलिस की रेड | जल्दी सामान समेटो और भागो यहाँ से |
रागिनी ने कहा - हमारे पास जो भी सामान है सब खुल्ला पड़ा है और एक शरारती मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आई |
जब वो बाहर निकले तब तक निश्चित ही देर हो चुकी थी, क्योकि मयूर ने नोटिस किया की उस समय कोरिडोर में कोई भी नहीं था सिवाय उनके, सारे कमरे पहले ही खाली हो चुके थे, वास्तव मैं ये बिलकुल सही था जब उनकी नींद खुली तब तन्यल होटल के रिसेप्शन पर खड़ा था |
जब वो रूम से बाहर निकले तब तक तन्यल सीढिया चढ़ रहा था, उन दोनों को अगर भागना था तो एक मात्र रास्ता वो सीढिया ही थी जिनसे निचे उतर कर वो पीछे के रास्ते से जंगलो में जा सकते थे, और उस एक मात्र रास्ते से तन्यल ऊपर आ रहा था और बहुत सम्भावना थी की उन दोनों की भिडंत तन्यल सो हो जाये |
मयूर जब निचे उतरने की सीढियों के मुहाने पर पहुचा और उसने तन्यल को ऊपर चढ़ते देखा तो उसका दिल धक् से रह गया उसने देखा वो बहुत तेजी से दो दो सीढिया चढ़कर ऊपर आ रहे थे, उसने इधर उधर नजर डाली और उसे सीढियों के पास वाश रूम दिखाई दिया उसने रागिनी का हाथ पकड़ा और वो दोनों वाश रूम में घुस गये, तन्यल ऊपर आया और सीधा रूम नो.. 308 पे गया, मयूर ने वाशरूम का दरवाजा खोल कर देखा, तन्यल और उसके साथ आये पुलिस वाले रूम के अन्दर जा चुके थे, उसने रागिनी का हाथ थाम रखा था फ़ौरन बाहर निकलने के लिए दरवाजा खोला वो बाहर निकलने ही वाले थे कि तभी उनके रूम में घुसे पुलिस वालो में से एक बाहर आया, और वाश रूम की तरफ बढ़ा, उनका दिल फिर तेजी से धडकने लगा, धीरे धीरे उसके जूतों की आवाज उनके करीब आ रही थी, किसी भी सेकंड उनका सामना उस पुलिस वाले से हो सकता था, पुलिस वाला वाश रूम तक आया, और उसने वाशरूम के दरवाजे का नकुचा पकड़ कर निचे की और दबाया, मयूर तैयार था, तभी पुलिस वाले ने देखा, जिस वाशरूम में वो जा रहा था, उसके ऊपर एक लेडीज स्टीकर लगा था, उसने नकुचा छोड़ दिया और उसके बिलकुल पास में एक और दरवाजे का नकुचा खोला जिसपर जेंट्स का स्टीकर लगा था, खोला और अन्दर चला गया
दोनों ने वाशरूम के दरवाजे पर लगे कांच में से सबकुछ देखा, मयूर ने रागिनि का हाथ पकड़ा और फुर्ती से बाहर निकला, एक एक सेकंड कीमती था, ज्यादा देर वहा रुकना ठीक नही था, उनको रिस्क लेकर जल्दी से जल्दी बाहर निकलना था- वो तेजी से सीढियों से निचे उतरे तभी तन्यल भी बाहर आया, पर कुछ सेकंड के फासले से वो उन दोनों को नही देख सका, दोनों पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर होटल की दिवार के सहारे खड़े हो गये, उन्होंने देखा पीछे एक मैदान था जिसके बाद जंगल, तभी उन्हें तन्यल की आवाज सुनाई दी मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |
उन दोनों ने एक दुसरे की और देखा और तेजी से मैदान मैं दौड़ लगा दी, तन्यल पीछे के दरवाजे की और बढ़ा और उसने बाहर देखा, पर उसे वह कोई नहीं दिखाई दिया, दोनों मैदान पार कर जंगली झाड़ियो के पीछे छुप चुके थे |
तन्यल गुस्से से आग बबूला हो रहा था, वो जितना पांच लाख के पास जाता था उतना ही वो उससे दूर होते जाते थे, वो होटल के रिसेप्शनिस्ट पर गुराया - जल्दी से तेरे सीसीटीवी फुटेज में उन दोनों के फोटो निकाल और मुझे दे, वर्ना आज तेरी खैर नहीं |
रिसेप्शनिस्ट उन दोनों लड़का लडकी को याद कर के सोच रहा था - जरुर उन्होंने किसी का मर्डर किया होगा या बैंक लूटी होगी तभी इंस्पेक्टर इतना उतावला हो रहा है |
उसने सीसीटीवी फुटेज कंप्यूटर में लिया और एक प्रिंट तन्यल को दी |
तन्यल ने प्रिंट देखा और चौक गया फुटेज में लड़का तो साफ दिख रहा था पर लडकी ने अपना मुंह लाल हैण्ड बेग से ढक रखा था - उसके मुंह से सिटी निकल गई, - लडकी को मालूम था यहाँ सीसीटीवी लगा है और बड़ी सफाई से उसने अपना फोटो नही आने दिया, ये कौन हो सकती है ?
झाड़ियो के पीछे एक पेड़ की ओट में मयूर रागिनी की गोद मैं लेटा था, उसने कहा - जब तक बाहर रोड पर चहल पहल नही हो जाती हम यहाँ से नहीं निकल सकते, पकड़े जायेंगे, अभी पाच - छे घंटे ये झाडिया ही अपनी होटल और ये झाडिया ही अपना घर है |
रागिनी ने मयूर के बालो में हाथ फिराते हुए बोला - मयूर कैसे भी करके हमे दिल्ली पहुचना है वहा ये पुलिस वाला हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता है |
तन्यल ने उन दोनों का प्रिंटआउट अपने पास खड़े सिपाही को दिया और कहा - इसकी 1000 फोटो कॉपी करवाओ और शहर के हर कोने मैं इन दोनों के पोस्टर लगवा दो |
झाड़ियो के पीछे बैठे बैठे रागिनी एक टक मयूर को ही देख रही थी उसने सोचा - मैंने तुमको किस मुसीबत में फसा दिया मयूर, मेरे साथ साथ तुम्हारी भी जान पर बन आई है |
ऐसे ही बैठे बैठे दिन के 11 बज गये. होटल के बाहर वाली रोड पे ट्रैफिक बढ़ रहा था, मयूर ने रागिनी से कहा - ये सही समय है हमे यहाँ से निकल चलना चाहिए, हम स्टेशन जायेंगे और वहा से दिल्ली कि ट्रेन पकड़ लेंगे, पर हमे अलग अलग जाना होगा क्योकि पुलिस हम दोनों को साथ मैं तलाश रही है, अगर हम अलग अलग जायेंगे तो किसी को शक नही होगा, रागिनी ने सहमती से सर हिलाया और बोली - मैं रेलवे स्टेशन पहुच कर तुम्हारा इंतजार टिगिट खिड़की के पास करूंगी तुम वही आ जाना |
मयूर रेलवे स्टेशन पर सबसे पहले पहुचा पर वहा पुलिस वाले मुस्तेदी से गेट पे खड़े थे, उसने मुख्य गेट से अन्दर जाने की बजाय मॉल गोदाम से ही अन्दर जाना उचित समझा, वो धीरे धीरे करते मॉल गोदाम को पार कर स्टेशन के अन्दर प्लेटफार्म पे गया और फिर वहा से टिगिट खिड़की तक पहुचा, उसने अपनी जेब से पैसे निकले और उसका दिल धक् से रह गया - टिगिट खिड़की के बाहर एक थम्बे पर उसका साफ और रागिनी का लाल हैण्ड बेग से ढका फोटो लगा था, उसके मुंह से एक आह निकल गई और पहली बार उसके चेहरे पर झुंझलाहट के भाव उभरे, पुलिस बड़ी तेजी से उसके आगे आगे चल रही थी, उसको फोटो देखते, देख एक और लडके ने फोटो देखा और फिर मयूर की और देखा उसका चेहरा आश्चर्य से सफेद हो गया |
मयूर को अपने पहचाने जाने का अहसास हो गया था वो तेजी से बाहर की और बढ़ा, उसको पहचानने वाले ने इधर उधर देखा और पास खड़े पुलिस वाले के पास जाकर उसकी दिशा में इशारा किया |
मयूर स्टेशन से बाहर निकला और उसे अपने फैसले पर पछतावा होने लगा कि क्यों उसने रागिनी को अपने से अलग किया, अब वो उसे कैसे ढूंढेंगा ?
रागिनी टैक्सी से उतरी और सीधी स्टेशन के अन्दर टीगीट खिड़की पर पहुची और उसकी नजर खम्बे पर लगे मयूर और उसके पोस्टर पर पड़ी, और उसका चेहरा भय से पिला पड़ गया |