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Romance Wo Lal Bag Wali (Completed)

तन्यल ने उसको घुरा और तेजी से दो दी सीढिया लांघता हुआ ऊपर की और बढ़ा, उसने तीसरे माले पर पहुच कर ही साँस ली और 308 नम्बर कमरे के सामने पहुचा और दरवाजे को जोर से ठोकर मारी, दरवाजा आसानी से खुल गया, उसने अन्दर देखा कमरा पूरी तरह खाली था |

उसने पुरे कमरे का मुआवना किया और मन ही मन कहा - गये 5 लाख़ हाथ से !

उसने वायरलेस निकाला और फिर चिल्लाया - मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |

मून मून होटल का मालिक एक चालक व्यापारी था, उसने शहर के बाहर फालतू पड़ी इस प्रॉपर्टी से पैसे कमाने का घटिया रास्ता निकला था, उसने पुलिस की रेड पड़ने की स्थिति मैं बचने का एक नायब रास्ता ढूढ़ लिया था, जैसे ही पुलिस की जीप होटल के आधा किलोमीटर बाहर मेन गेट पर पहुची, वहा बैठे सिक्यूरिटी गार्ड ने अन्दर होटल के कमरों मैं लगा सायरन बजा दिया, और अन्दर पूरा होटल अलर्ट हो गया, फिर सामने से आता टेम्पो और उसमे रिवर्स गियर नही होना सब केवल पुलिस को रोके रखने का प्लान था, ताकि अन्दर सभी वेश्याओ और जोड़ो को बाहर सुरक्षित निकाला जा सके |

दिन भर की थकान के बाद मयूर की सुरक्षित और आरामदायक बांहों में रागिनी बच्चों की तरह निश्चिन्त सो रही थी, उसकी नींद खुली तब सायरन की आवाज पुरे कमरे मैं गूंज रही थी, उस समय सुबह के 5 बज रहे थे, और सायरन काफी देर से बज रहा था, कोई जोर जोर से दरवाजा भड़क रहा था, वो आवाज बहुत डरावनी थी, उसने मयूर को उठाया, मयूर ने आवाज को फ़ौरन पहचान लिया, वो अपने दोस्तों के साथ इस होटल मैं पहले भी आ चूका था, उसने रागिनी से कहा - पुलिस की रेड | जल्दी सामान समेटो और भागो यहाँ से |

रागिनी ने कहा - हमारे पास जो भी सामान है सब खुल्ला पड़ा है और एक शरारती मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आई |

जब वो बाहर निकले तब तक निश्चित ही देर हो चुकी थी, क्योकि मयूर ने नोटिस किया की उस समय कोरिडोर में कोई भी नहीं था सिवाय उनके, सारे कमरे पहले ही खाली हो चुके थे, वास्तव मैं ये बिलकुल सही था जब उनकी नींद खुली तब तन्यल होटल के रिसेप्शन पर खड़ा था |

जब वो रूम से बाहर निकले तब तक तन्यल सीढिया चढ़ रहा था, उन दोनों को अगर भागना था तो एक मात्र रास्ता वो सीढिया ही थी जिनसे निचे उतर कर वो पीछे के रास्ते से जंगलो में जा सकते थे, और उस एक मात्र रास्ते से तन्यल ऊपर आ रहा था और बहुत सम्भावना थी की उन दोनों की भिडंत तन्यल सो हो जाये |

मयूर जब निचे उतरने की सीढियों के मुहाने पर पहुचा और उसने तन्यल को ऊपर चढ़ते देखा तो उसका दिल धक् से रह गया उसने देखा वो बहुत तेजी से दो दो सीढिया चढ़कर ऊपर आ रहे थे, उसने इधर उधर नजर डाली और उसे सीढियों के पास वाश रूम दिखाई दिया उसने रागिनी का हाथ पकड़ा और वो दोनों वाश रूम में घुस गये, तन्यल ऊपर आया और सीधा रूम नो.. 308 पे गया, मयूर ने वाशरूम का दरवाजा खोल कर देखा, तन्यल और उसके साथ आये पुलिस वाले रूम के अन्दर जा चुके थे, उसने रागिनी का हाथ थाम रखा था फ़ौरन बाहर निकलने के लिए दरवाजा खोला वो बाहर निकलने ही वाले थे कि तभी उनके रूम में घुसे पुलिस वालो में से एक बाहर आया, और वाश रूम की तरफ बढ़ा, उनका दिल फिर तेजी से धडकने लगा, धीरे धीरे उसके जूतों की आवाज उनके करीब आ रही थी, किसी भी सेकंड उनका सामना उस पुलिस वाले से हो सकता था, पुलिस वाला वाश रूम तक आया, और उसने वाशरूम के दरवाजे का नकुचा पकड़ कर निचे की और दबाया, मयूर तैयार था, तभी पुलिस वाले ने देखा, जिस वाशरूम में वो जा रहा था, उसके ऊपर एक लेडीज स्टीकर लगा था, उसने नकुचा छोड़ दिया और उसके बिलकुल पास में एक और दरवाजे का नकुचा खोला जिसपर जेंट्स का स्टीकर लगा था, खोला और अन्दर चला गया

दोनों ने वाशरूम के दरवाजे पर लगे कांच में से सबकुछ देखा, मयूर ने रागिनि का हाथ पकड़ा और फुर्ती से बाहर निकला, एक एक सेकंड कीमती था, ज्यादा देर वहा रुकना ठीक नही था, उनको रिस्क लेकर जल्दी से जल्दी बाहर निकलना था- वो तेजी से सीढियों से निचे उतरे तभी तन्यल भी बाहर आया, पर कुछ सेकंड के फासले से वो उन दोनों को नही देख सका, दोनों पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर होटल की दिवार के सहारे खड़े हो गये, उन्होंने देखा पीछे एक मैदान था जिसके बाद जंगल, तभी उन्हें तन्यल की आवाज सुनाई दी मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |
उन दोनों ने एक दुसरे की और देखा और तेजी से मैदान मैं दौड़ लगा दी, तन्यल पीछे के दरवाजे की और बढ़ा और उसने बाहर देखा, पर उसे वह कोई नहीं दिखाई दिया, दोनों मैदान पार कर जंगली झाड़ियो के पीछे छुप चुके थे |

तन्यल गुस्से से आग बबूला हो रहा था, वो जितना पांच लाख के पास जाता था उतना ही वो उससे दूर होते जाते थे, वो होटल के रिसेप्शनिस्ट पर गुराया - जल्दी से तेरे सीसीटीवी फुटेज में उन दोनों के फोटो निकाल और मुझे दे, वर्ना आज तेरी खैर नहीं |

रिसेप्शनिस्ट उन दोनों लड़का लडकी को याद कर के सोच रहा था - जरुर उन्होंने किसी का मर्डर किया होगा या बैंक लूटी होगी तभी इंस्पेक्टर इतना उतावला हो रहा है |

उसने सीसीटीवी फुटेज कंप्यूटर में लिया और एक प्रिंट तन्यल को दी |

तन्यल ने प्रिंट देखा और चौक गया फुटेज में लड़का तो साफ दिख रहा था पर लडकी ने अपना मुंह लाल हैण्ड बेग से ढक रखा था - उसके मुंह से सिटी निकल गई, - लडकी को मालूम था यहाँ सीसीटीवी लगा है और बड़ी सफाई से उसने अपना फोटो नही आने दिया, ये कौन हो सकती है ?

झाड़ियो के पीछे एक पेड़ की ओट में मयूर रागिनी की गोद मैं लेटा था, उसने कहा - जब तक बाहर रोड पर चहल पहल नही हो जाती हम यहाँ से नहीं निकल सकते, पकड़े जायेंगे, अभी पाच - छे घंटे ये झाडिया ही अपनी होटल और ये झाडिया ही अपना घर है |

रागिनी ने मयूर के बालो में हाथ फिराते हुए बोला - मयूर कैसे भी करके हमे दिल्ली पहुचना है वहा ये पुलिस वाला हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता है |

तन्यल ने उन दोनों का प्रिंटआउट अपने पास खड़े सिपाही को दिया और कहा - इसकी 1000 फोटो कॉपी करवाओ और शहर के हर कोने मैं इन दोनों के पोस्टर लगवा दो |

झाड़ियो के पीछे बैठे बैठे रागिनी एक टक मयूर को ही देख रही थी उसने सोचा - मैंने तुमको किस मुसीबत में फसा दिया मयूर, मेरे साथ साथ तुम्हारी भी जान पर बन आई है |

ऐसे ही बैठे बैठे दिन के 11 बज गये. होटल के बाहर वाली रोड पे ट्रैफिक बढ़ रहा था, मयूर ने रागिनी से कहा - ये सही समय है हमे यहाँ से निकल चलना चाहिए, हम स्टेशन जायेंगे और वहा से दिल्ली कि ट्रेन पकड़ लेंगे, पर हमे अलग अलग जाना होगा क्योकि पुलिस हम दोनों को साथ मैं तलाश रही है, अगर हम अलग अलग जायेंगे तो किसी को शक नही होगा, रागिनी ने सहमती से सर हिलाया और बोली - मैं रेलवे स्टेशन पहुच कर तुम्हारा इंतजार टिगिट खिड़की के पास करूंगी तुम वही आ जाना |

मयूर रेलवे स्टेशन पर सबसे पहले पहुचा पर वहा पुलिस वाले मुस्तेदी से गेट पे खड़े थे, उसने मुख्य गेट से अन्दर जाने की बजाय मॉल गोदाम से ही अन्दर जाना उचित समझा, वो धीरे धीरे करते मॉल गोदाम को पार कर स्टेशन के अन्दर प्लेटफार्म पे गया और फिर वहा से टिगिट खिड़की तक पहुचा, उसने अपनी जेब से पैसे निकले और उसका दिल धक् से रह गया - टिगिट खिड़की के बाहर एक थम्बे पर उसका साफ और रागिनी का लाल हैण्ड बेग से ढका फोटो लगा था, उसके मुंह से एक आह निकल गई और पहली बार उसके चेहरे पर झुंझलाहट के भाव उभरे, पुलिस बड़ी तेजी से उसके आगे आगे चल रही थी, उसको फोटो देखते, देख एक और लडके ने फोटो देखा और फिर मयूर की और देखा उसका चेहरा आश्चर्य से सफेद हो गया |

मयूर को अपने पहचाने जाने का अहसास हो गया था वो तेजी से बाहर की और बढ़ा, उसको पहचानने वाले ने इधर उधर देखा और पास खड़े पुलिस वाले के पास जाकर उसकी दिशा में इशारा किया |

मयूर स्टेशन से बाहर निकला और उसे अपने फैसले पर पछतावा होने लगा कि क्यों उसने रागिनी को अपने से अलग किया, अब वो उसे कैसे ढूंढेंगा ?

रागिनी टैक्सी से उतरी और सीधी स्टेशन के अन्दर टीगीट खिड़की पर पहुची और उसकी नजर खम्बे पर लगे मयूर और उसके पोस्टर पर पड़ी, और उसका चेहरा भय से पिला पड़ गया |
 
वो बाहर आई और उसने चारो तरफ नजर दौड़ाई, मयूर उसे दूर - दूर तक नही दिखाई पड़ रहा था |

उधर अपना फोटो स्टेशन में लगा देखने के बाद मयूर स्टेशन के सामने एक घटिया से रेस्तरां में कार्नर की टेबल पर लगभग छुप कर बैठ गया, उसने वेटर से एक प्लेट पोहा और चाय लाने का कहा, तभी उसकी नजर रागिनी पर पड़ी वो एक ऑटो से उतरी और तेज कदमो से चलती हुई, स्टेशन के गेट के अंदर दाखिल हो गई - वो जरुर टिगिट खिड़की के पास मेरा इंतजार करेगी पर अन्दर जाना उसके लिए खतरे से खाली नही होगा - उसने सोचा - अजीब मुसीबत है, अब क्या करू, कंही पुलिस रागिनी को पकड़ न ले |

तभी रेस्तरा में एक गरीब सा दिखने वाला लड़का आया और उसने तुड़ा मुड़ा 10 का नोट निकाल कर रेस्तरा वाले से कहा - एक प्लेट पोहा,

शायद ये लड़का स्टेशन पर ही रहता है - और उसके दिमाग में एक तरकीब सूझी
उसने लडके के पास जा कर पचास रूपये का नोट बढ़ाते हुए कहा - क्या मेरा एक काम करोगो ?

नोट देखते ही लडके के चेहरे पर चमक आ गई - क्या ? उसने पूछा

स्टेशन में टिगिट खिड़की के पास एक मेडम खड़ी होगी जिनके हाथ में लाल पर्स है, उनको बोलना मैं उनका इंतजार यहाँ कर रहा हूँ, जब तुम ये काम करके वापस आओगे तो तुम्हे ऐसा ही पचास का एक और नोट दूंगा |

लडके ने सहमती से सर हिलाया, पचास का नोट जेब में डाला और तेजी से रोड पार करके स्टेशन के गेट मैं दाखिल हुआ |

रागिनी ने अपनी बेग से ढकी फोटो और मयूर की पूरी फोटो देखी, और वो टिगिट खिड़की के पीछे लगी लम्बी लाइन के पीछे भीड़ में छुप कर खड़ी हो गई, उसको पक्का मालूम था, मयूर यंहा जरुर आएगा |

टिगिट खिड़की के पास एक पुलिस वाले की आखे मेटल डिटेक्टर की तरह हर आने जाने वाले का गौर से मुआयना कर रही थी, लड़का पुलिस वाले के सामने से टिगिट खिड़की तक पहुचा जिस पर उसने कोई ध्यान नही दिया |

छोटा लड़का जिसे स्टेशन पर सब छोटू के नाम से बुलाते थे एक अनाथ लड़का था, जिसका कोई नहीं था, उसने कुछ देर आसपास लाल बेग वाली मेडम को तलाशा पर वो उसे नहीं दिखाई दी, अगर उसने उन अंकल का मेसेज मेडम तक नही पहुचाया तो सौ रूपये कमाने का चांस उसके हाथ से जा सकता था, उसने कुछ देर इंतजार किया लेकिन मेडम नहीं दिखाई दी, वो वापिस जाने के लिए मुड़ा, उसके दिमाग में पचास रूपये लेकर भागने का विचार आया, पर उसका जमीर इसकी इजाजत नही दे रहा था |

उसकी नजर पुलिस वाले पर पड़ी, और उसने सोचा - इन पुलिस वाले अंकल ने जरुर किसी लाल बेग वाली मेडम को देखा होगा- और उसने पुलिस वाले के पास जा कर पूछा - क्या आपने यहाँ लाल बेग वाली किसी लडकी को देखा है ?

कमाल है ? पुलिस वाले ने सोचा जिस लाल बेग वाली लड़की को पूरा डिपार्टमेंट ढूंढ रहा है, उसको ये छोटा सा लड़का भी ढूंढ रहा है - उसने पूछा - क्यों ढूंढ रहे हो उसको ?

और लडके ने मयूर के बारे में उसे बताया, पुलिसवाला लडके को लेकर स्टेशन के गेट के बाहर आया लडके ने उसको रेस्तरां की तरफ इशारा किया जहा मयूर बैठा था, उसने वायरलेस उठाया और कुछ बोलता हुआ तेजी से रेस्तरा की और बढ़ गया |

मयूर ने जेसे ही लडके को स्टेशन के अन्दर जाते देखा उसने सावधानी बरतते हुए अपनी पोजीशन बदली और रेस्तरा के पास पड़ी कुछ अतिक्रमण की गुमटियों में से एक के पीछे चला गया, वहा से वो स्टेशन के गेट पर आसानी से नजर रख सकता था |

मयूर ने पुलिस वाले के साथ उस लडके को स्टेशन के गेट से बाहर आते देखा और उसने देखा लडके ने उस रेस्तरा की तरफ इशारा किया था जिधर थोड़ी देर पहले वो बैठा था |

जैसे ही पुलिस वाले रेस्तरा में घुसे, वो गुमटी को ओट में से निकला और उसने देखा की जिस गुमटी की ओट में वो खड़ा था वो एक हेयर सेलून था, उस समय हेयर कट करने की उस दुकान मैं कोई नहीं था, उसने अपनी दाढ़ी पर हाथ फिराया जो कुछ हद तक बढ़ गई थी, वो तुरंत हेयर सेलून के अन्दर घुसा और खाली पड़ी सेलून की कुर्सी पर बैठा गया, दुकानदार से उसने कहा - शेविंग करना है |

दुकानदार ने उसे एक कला चोंगा पहनाया ताकि उसके कपड़ो पर बाल न लगे, मयूर ने देखा सेलून में जिस कांच के सामने वो बैठ कर दाढ़ी बनवा रह था उसमे से पीछे मैंन रोड सहित स्टेशन का गेट साफ दिखाई पड़ता था, अगर रागिनी उस गेट से जाएगी तो उसे दिखाई देगी

दुकानदार ने ब्रश से उसके चेहरे पर क्रीम लगाया और उसका चेहरा सफेद झाग से ढक गया, तभी एक पुलिस वाला वहां आया उसने अन्दर झांक कर देखा और मयूर को गौर से देखा, मयूर का दिल तेजी से धड़क रहा था पर उसके चेहरे पर लगे साबुन से पुलिसवाला उसे पहचान नही पाया और आगे निकल गया |

टिगिट खिड़की पर टिगिट लेने वालो की लाइन के पीछे खड़ी रागिनी की नजर गेट पे खड़े पुलिस वाले पर थी, उसने पुलिस वाले को एक लडके से बात करते देखा फिर पुलिस जवान को तेजी से बाहर जाते देखा, उसने अनुमान लगाया मयूर ने शायद उनका पोस्टर पहले ही देख लिया हो और वो बाहर कही उसका इंतजार कर रहा हो, वो बाहर निकली और गेट के पास उसे वो छोटा लड़का दिखाई दिया |

लडके ने लाल बेग वाली मेडम को देखा और बोला - क्या आप उन लम्बे गौरे, नीली आखो वाले अंकल जी को ढूंढ रही हो ?

रागिनी की साँस अन्दर की अन्दर ही रह गयी उसने हां में सर ऊपर निचे किया |

लडके ने रेस्तरा के डायरेक्शन में इशारा किया और कहा - पुलिस भी उन अंकलजी को ढूंढते गई है, उनसे मुझे पचास रूपये लेने है |

रागिनी ने अपने पर्स में से 100 का नोट निकला और कहा - हिसाब बराबर

वो बाहर निकली

कटिंग कि दूकान पर अपनी दाढ़ी बनवाते हुए, अपनी कुर्सी के सामने की और लगे कांच में से मयूर गेट पर नजर रखे हुए था, उसने देखा रागिनी बाहर निकली और रेस्तरा की और बढ़ रही है, वो पुलिस वालो के पास में से निकली पर किसी ने उसकी और ध्यान नही दिया क्योकि वो तो अब किसी नीली आखो वाले आदमी को ढूंढ रहे थे |

उस समय तक मयूर की दाढ़ी आधी बन चुकी थी, उसने अपने सामने लगे कांच में से देखा धीरे धीरे चलते रागिनी कटिंग की दुकान के सामने से गुजरी, उसके चेहरे पर उदासी साफ झलक रही थी, उसने फ़ौरन एक कपड़ा उठाया अपने चेहरे से साबुन पोछा और दुकानदार द्वारा पहनाया लबादा उतारा और एक निश्चित दुरी बनाते हुए रागिनी के पीछे पीछे चलने लगा |

इस अनजान शहर में अब उसका कोई नही है - रागिनी का मन गमगीन हो रहा था - उसकी आँखे मयूर को चारो और तलाश कर रही थी, धीरे धीरे चलते चलते वो स्टेशन से थोड़ी दूर निकल गयी, और एक सुनसान गली में मुड़ गई, उसे मयूर से अलग नही होना था - उसके चेरे पर पछतावा और उदासी के मिले जुले भाव थे, क्या पता वो अभी कहाँ होगा, वो अपनी धुन में सुनसान गली में चली जा रही थी, तभी उसे लगा कोई उसका पिछा कर रहा है, उसने मुड़ कर देखा उसके बिलकुल पीछे मयूर खड़ा था, उसे देखते ही उसकी आँखों में ख़ुशी के आंसू झलक पड़े और वो दौड़ कर मयूर के गले लग गई, दोनों कुछ देर तक इसी तरह एक दुसरे से चिपके रहे फिर रागिनी ने मयूर के गालो पर हाथ फेरा और पूछा - ये कौन सी फैशन है आधी दाढ़ी की - और वो दोनों खिलखिला कर हस पड़े |

वापस मिलने की ख़ुशी में वो भूल गये थे की उनके पीछे पुलिस और गुंडे पड़े है, उनका ध्यान टुटा और रागिनी ने कहा - कैसे भी कर के हमको दिल्ली पहुचना है |

मयूर ने कहा - चिंता मत करो रागिनी, जब वापिस मिल गये है तो दिल्ली दूर नही है |
 
ध्यान टुटा और रागिनी ने कहा- कैसे भी कर के हमको दिल्ली पहुचना है। मयूर ने कहा चिंता मत करो रागिनी, जब वापिस मिल गये है तो दिल्ली टूर नही है

वो वापिस स्टेशन की तरफ आये और टैक्सी स्टैंड की और बड़े जहा एक टैक्सी वाला अपनी टैक्सी को पानी से साफ कर रहा था, उसने उन दोनों को देखा और बोला कहा चलना है?

उन्होंने कहा -दिल्ली,

टैक्सी वाले ने दोनों को गौर से देखा और बोला जल्दी गाड़ी में बैठी - और दरवाजा खोल दिया।

दोनों फौरन टैक्सी में सवार हुए और टैक्सी शहरी ट्रैफिक पीछे छोडती हुई दिल्ली जाने वाले

पहाड़ी रास्ते पर आ गई।

टैक्सी ड्राईवर ने ट्रैफिक निकलते ही टैक्सी एक तरफ रोकी और पीछे बैठे दोनों को देखकर कहा - दिल्ली तक जाने के पुरे 50.000 लगेगे, गहाँ तक तुमको ले आया हु आगे तुम्हारी मर्जी

मयूर का मन संशय से भर गया-इतने ज्यादा क्यों ?

टैक्सी वाले ने बोला - तुम दोनों ने किया क्या है, पूरी पुलिस फोर्स तुमको ऐसे ढूंढ रही है जैसे तुम इस देश के सबसे बड़े क्रिमिनल हो

वही हुआ जिसका डर था - मयूर ने कहा - पर तुमने हमको पहचाना कैसे "

हमको स्पष्ट आईर मिले है - एक लाल स्लिंग देग वाली लड़की और नीली आखो वाला लड़का जहाँ कही भी मिले फौरन पुलिस को इत्तिला करो, मैंने तुमको यहाँ तक ला कर कितना बड़ा खतरा मोल लिया है, तुम सोच भी नहीं सकते, तुमने ऐसा किया क्या है, घर से भाग कर आये हो ?

रागिनी बोली - तुमको जितने पैसे चाहिए, ले लेना हमको जल्दी से जल्दी दिल्ली तक पहुचा दो

ड्राईवर नै अक्सिलेटर पर पैर मारा और गाड़ी दिल्ली के रास्ते की और ढलान उतरने लगी। तन्यल को कुछ देर के लिए नींद आ गयी थी, वो रात भर का जगा हुआ था, उसने उठते ही अपने डिप्टी से पूरा घटनाक्रम समझा और सोचा - बहुत चालक है, वो पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का उपयोग यहाँ से भागने में नहीं करेंगे, वो सीधा टैक्सी स्टैंड पहुचा और

पार्किंग की पर्ची काटने वाले के पास जाकर बोला - क्या पहाँ से सुबह कोई टैक्सी हायर हुई है ?

यहाँ से तो रोज बहुत सारी टैक्सी हायर होती है साहब आप किसकी बात कर रहे हो ?

फिर मजाक तन्यल ने सोचा यहाँ हमारी नींद हराम हो रही है और इसे पता ही नही है की हम किसको डूब रहे है. उसने कहा - एक लड़का और एक लड़की जिसके हाथ में लाल लिंग बेग है जो उसके कंधे पर लटका है।

टैक्सी यूनियन की पर्ची काटने वाले को ध्यान आपा-हा साहब एक गाडी, लगभग । घंटा पहले गई है, जिसमें एक कपल गया है, लड़का हीरो जैसा और लड़की तो अब क्या बोलू साब, मेरा ध्यान उसी पर था, और उसके हाथ में लाल बेग भी था! पर अब तक वो गाड़ी टोल भी क्रॉस कर गई होगी।

तन्यल ने गाड़ी का नम्बर लिया और टोल पर फोन किया. सुनो 2000 नो की टैक्सी जैसे ही तुम्हारे टोल पर आये उसे रोकने की कोशिश करना और सावधानी से उनके पास पिस्तौल है।
 
पैसे नही है

खुल्ले की चिंता मत कर तू जल्दी दरवाजा खोल -उसने टोल पर्ची काटने वाले से कहा। टोल वाले लड़के ने अपनी मशीन में टोल नाके के टोल वसूल होने का बटन दबाया और उसके प्रिंटर में से पर्ची निकली, उसने पर्ची फाड़ी और मयूर के हाथ में दी, बटन दबते ही टोल का दरवाजा खुला और गाड़ी आगे बढ़ी, तभी गेट के पास खड़ा लड़का जो टोल के लॅड लाइन नम्बर पे किसी से बात कर रहा था ने ड्राईवर को रुकने का इशारा किया।

मयूर ने उसको अपनी और बढ़ते देखा, और ड्राईवर से बोला, जल्दी गाड़ी निकालो और गाड़ी राकेट की तरह टोल का गेट पार करते हुए हाईवे पर दौड़ने लगी।

मयूर ने रागिनी से कहा - तुमको पता है पुलिस तुमको किस नाम से जानती है? रागिनी ने न में सर हिलाया और पूछा क्या?

लाल स्लिंग बेग वाली लड़की - और दोनों खिलखिला फीकी हसी हसने लगे, अन्दर ही अन्दर दोनों जानते थे की पुलिस उनके पीछे अब हाथ घो के पड़ चुकी है।

उनके टोल नाके से आगे निकलने की सूचना मिलते ही तन्यल ने टोल नाके के पास खड़ी पुलिस की जीप की लोकेशन पता की और उसको आईर किया की वो जल्दी से जल्दी उस सफेद कार टैक्सी को पीछे जाकर उन दोनों को पकड़े

मयूर को खतरे का अहसास हो गया था, तो पुलिस को पता चल चूका है की हम इस टैक्सी में है, उसने ड्राईवर से पूछा अगला टोल नाका कितनी दूर है उसने जवाब दिया - लगभग 60 किलो मीटर दूर उसने कहा - ठीक है

सन्यल अपनी जिन्दगी में कभी इतना नही भागता, अगर वो उसके धाने की सीमा से पार हो गये थे तो उसकी ड्यूटी खतम पर नोटों की गद्दया उसको भागने पर मजबूर कर रही थी उसने सोचा- ये पैसा तो मैं पूरी मेहनत से ही कमा रही हूँ. दोनों खूब दुइवा रहे है मुझको, और उसने ड्राईवर को डेल्ही रोड पर गाड़ी लेने को कहा

उसने अगले टोल नाके पर फोन किया और सफेद टैक्सी का नम्बर देते हुए वहां तैनात

सुरक्षा कर्मियों को हिदायत दी की जैसे ही ये गाडी टोल पर आये इसको रोक कर रखना

और हा लड़की के पास पिस्तौल है, जरा सावधानी से काम लेना। कुछ देर बाद उसके पास टोल नाके से फोन आया सर हमने उस गाड़ी को रोक लिया है। उसने कहा में कुछ ही देर में बह पहुच रहा हूँ तुम उनको जाने मत देना

भागता दौड़ता सन्पल दुसरे न. के टोल नाके तक पहुचा, उसने अपने होल्स्टर से पिस्तौल निकली और कार के पास गया, अन्दर केवल टैक्सी ड्राईवर बैठा था जो तन्यल को खौफ की नजरो से देख रहा था, सिट के पीछे पड़ा था लाल स्लिंग बेग, जिसमे से कुछ चिल्लर

निकलकर सीट पर बिखरी पड़ी थी।

तन्पल उसपर चिल्लाया - वो दोनों कहा है।

टैक्सी ड्राईवर ने कहा - सर वो तो 10 किलोमीटर पहले ही गाड़ी से उतर गये
 
टैक्सी ड्राईवर ने कहा- सर वो तो 10 किलोमीटर पहले ही गाड़ी से उतर गये।

दोनों कुछ देर तक एक दुसरे को देखते रहे, फिर तन्यात मुड़ा और पहाड़ी रस्ते पर निचे देखने लगा, यहाँ से उसके पाने सीमा समाप्त होती है, वो आगे कुछ नहीं कर सकता। मयूर ने गाड़ी 10 किलोमीटर पहले ही रुकना ली थी वो जनता या तन्यत अगले टोल पर फोन करेगा, टैक्सी से उतरकर रागिनी से दोला -हमको कुछ दूर पैदल ही चलना पड़ेगा ये

सडक पहाड़ का चक्कर लगा कर वापिस वहा निचे आती है. - उसने निचे जाती धुमावदार

सहक की और इशारा किया आगर हम इस पगडंडी में चलेंगे तो हमको पुरे पहाड़ का

चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और हम जल्दी पहुंच जायेंगे, और पुलिस भी हमको उस कार में ही इंडती रहेगी गो पहाड़ से सीधे पगडण्डी उतरे और पापिस हाई पर आ गये, दो मिनिट यही बड़े रहे

और उनको एक वॉल्वो बस आती हुई दिखाई दी, रागिनी ने अपने हाथ को सामने का इशारा

बस को किया

बस के ड्राईवर को बस बीये में रोकने की इजाजत नहीं थी, पर एक शहरी लडकी को इस जंगल में देवा कर उसमे मदद का भाव जागा और उसने बस रोक दी, दोनों दौड़कर उस बस में पड़ गये, पीछे रह गया तन्यत और उनके सामने टैक्सी द्वाईर, उसकी कहानी सुनने के बाद तन्यल ने उसको कहा - आज के बाद मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना
 
रात 8 बजे बस दिल्ली बस स्टैंड पे पहची, मयूर ने सोचा अच्छे समय पहुच गये, अगर सन्याल ने अपना जाल यहाँ तक नहीं डाला होगा तो अभी भीड़ में गुम होना बहुत आसान होगा

मयूर ने रागिनी को कहा - दिल्ली दिलवालों की है देखो है ये हमारे साथ कैसा सुतुक करती है पहले हमको कुछ चीजे खरीदनी है और वो स्टैंड के सामने एक बड़ी दुकान में गये और वहा से एक ब्लू कलर का नया ट्राली बेग खरीदा

रागिनी ने पूछा- इस बेग की क्या जरूरत है ?

बेग से हम पर किसी भी होटल वाले को शक नहीं होगा।

जीनियस - रागिनी हसते हुए बोली

उन्होंने बैग में रखने के लिए कुछ कपड़े खरीदे, रागिनी ने एक दूकान से एक मंगल सूत्र खरीदा और अपने गले में डाल लिया।

खुद ही दुल्हन बन जाओ-मयूर ने कहा

डॉट दोरी जब तुम्हारा मन हो, बैंड बाजा बारात लेकर आना और एक बार और मुझे पहना देना

दोनों टैक्सी में बैठे और रेलवे स्टेशन के सामने एक सकरी गली में स्थित एक श्री स्टार होटल के रिसेमान पर पहुचे और एक कम किराये पर लिया, दो होटल शहर के विध और विदेशी लोगों की पसंदीदा जगह थी, वो अपने रूम में पहुचे और रूम अन्दर से लॉक कर लिया

मुबह लगभग 8 बजे मयूर की नींद खुली, और उसने देखा की रागिनी बिस्तर पर नही है, उसने सोचा बायकम में होगी, और वो फिर को गणा, पकान की वजह से वो दिन चढने तक सोता रहा, लगभग ।। बजे उसकी नींद फिर खुली और रागिनी फिर उसके पास नहीं थी,

यो उठा और चारो और देखा, रम पूरी तरह खाली था उसकी नजर दरवाजे पर गई और वो अन्दर से खुल्ला था, कहा गई वो उसने सोचा और उठ खड़ा हुआ।

और उसको टी टेबल के ऊपर एक कागज पे लिखा नोट पड़ा दिया-मपूर मुझे माफ करना मैंने तुम्हारी जान संकट में डाल दी. मैं तुमको छोड़ कर जा रही हूँ. मुझे भूल जाना. यही तम दोनों के लिए अच्छा रहेगा बाय)

को रिसेप्शन पे गया और पूछा - मेरे साथ जो मेडम थी, उनको देखा तुमने ? मदूर के चेहरे

पर अधीरता थी।

हो तो सुबह 8 बजे ही ब्लू बेग ले कर चली गयी।
 
चौ वापिस रूम मैं आपा और रागिनी को मोबाइल लगाने के लिए अपना मोबाइल औन किया जो उसने मेले वाले कांड के बाद से ऑफ कर रखा था मोबाइल ओन हुआ और अविश्वास से उसकी आँखे मोबाइल की स्क्रीन पर जम गई, उसने देखा मोबाइल पूरी तरह से खाली था, रागिनी की एक मात्र पिक्चर सहित सारी पिक्चर मोबाइल में नहीं थी. न कोई काटेक्ट नम्बर, न कोई विडियो पूरी तरह से ब्लेक मोबाइल

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और उसका ध्यान टुटा आने दरवाजा खोला-सामने लन्याल

खड़ा था

वो दोनों एक दुसरे को देख रहे थे।

पुलिस स्टेशन में तन्यल पाचवी बार मयूर से पूछ रहा था -

वो लडकी कौन थी, कहा से आई थी?

मुझे नहीं मालूम।

उसके हाथ में पिस्तौल कहा से आई थी?

मुझे नहीं मालूम।

जो दोनों गुढे कौन थे, यो उस लकी को क्यों मारना चाहते थे।

मुझे नहीं मालूम

तुमने पुलिस से भागने में उसकी मदद क्यों की ?

क्योकि में उस लड़की से प्यार करता है।

बन्चार मत कारो - तन्यत गुराया - तुम नहीं जानते हो तुम किशा मुसीबत मैं हो, अगर मेरी खोपड़ी बिगड़ गई तो तुमसे तोते की तरह सब उगलवा लँगा, उस लड़की को बचा कर तुमको कुछ नहीं मिलने वाला है, अगर तुमने पुलिस की मदद की तो में तुमको सरकारी गवाह बना कर बरी करता हूँगा।

मगर ने बैचेनी से पहलू बदला और कहा - जो सवाल आप पूछ रहे है उनका जवाब मुझे भी नहीं मालूम मैं खुद विचित्र स्थिति मैं फसा हु

तपल ने कहा - तुमको मालूम है, मैंने हर उस जगह पर तलाश करवाया जहा तुम दोनों गधे पर किसी भी जगह उस लडकी का एक भी फोटो नहीं है, न कोई उसे जनता है न कोई पता ठिकाना किसी को मालूम है, बाय गॉड मैंने अपनी जिन्दगी मैं ऐसा केस नही देखा, वो दोनों गुंडे भी गायब है, लहकी भी, पिस्तौल भी, कोई फोटो भी नहीं आश्चर्य ।

मपूर ने कहा- उसने मुझे उसके बारे में कुछ नहीं बताया, आप मुझे जाने दीजिये, मैं केवल उस लड़की की मदद कर रहा था

ऐसा नहीं हो सकता तुम जितना भोला दिखने का प्रयास कर रहे हो वास्तव में ही नहीं.
 
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