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Romance Wo Lal Bag Wali (Completed)

मिलने के लिए, शत का गुस्सा, बीज, और दर्द की जगह एक खुशी और उत्साह उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था, मिसेस प्रेंडरिक मयूर की माँ ने देखा उनका लड़का मयूर अचीरता से कार में बैठा और कार गोली की तरह होटल के कपाउड से बहार निकल गयी।

उसने अपना वादा निभाया और 15 मिनिट में उसकी कार बस स्टैंड के पाल गौप पर पहुची रागिनी ने हाथ उठा कर इशारा किया, और कार की अगली सीट पर मयूर के पास आकर बैठ गई, कार बस स्टैंड पार करके दून ले जाने वाली घुमावदार इलान पर नागिन की तरह चलने लगी

कार की खिड़की में से ठी हवा नै माहौल को नशीला बना दिया था, सड़क के एक और पण्ड तो दूसरी और गहरी घाटी थी, पहाड़ी पर फूली का जाल बिछा था, थोड़ी थोड़ी दुरी पर उतरती हुई पानी की धाराय करने का रूप ले चुकी थी, और दूसरी और ढलान में बड़े बड़े बिड के पेड़, और घास के मैदान तो कही नदिया प्रकृति की सुन्दरता का अद्भुत नजर पेश कर रही थी

मयूर ने रागिनी की आँखों में देखते हुए कहा - तो तुम सरेंडर करती हो की हम एक दूजे के लिए बने है या मुझे और जंग लड़नी पड़ेगी।

माहौल का असर कहो, या सच्चा वाला प्यार रागिनी ने इस बार अपने दिमाग को बिच में नहीं आने दिया और मन से कहा- मैं अपने आपको और नहीं रोका सकती. मैं समप्ण करती हैं- उसके चेहरे पर मंतोष के भाव और हलकी मुस्कान थी। ये हुई न बात-मपूर ने दुशी से अपना हाथ कार के स्टीयरिंग पे मारा।

पुमावदार रोड का हर टर्न बहुत खतरनाक था पर कपूर इन रार्ती का खिलाडी था, लसावर देहरादून के पास एक छोटा सा गाँव था जहाँ हर साल तरावर का मेला लगता था, खूबसूरत नजावें, कल कल करते झरने और नदियों को पार करते करते वो लखबर पहुच गये पारम्परिक परिधान पहने महिला पुरुष गीत संगीत और रंग बिरंगे झंडों से सजा ये त्योहार

रागिनी की जिन्दगी के यादगार लम्हों में से एक साबित हुआ, महा मौजूद एक महिला ने जिद की और उन दोनों को भी गढ़वाली परिधान पहना दिए वो एक रंग बिरंगा पहनाया था, जिसमें वो पूरी तरह गढ़वाली ही लग रहे थे डांस, मली, शाने पिने और म्यूजिक में दिन कम बीत गया पता ही नहीं पाता।

रागिनी ने कहा- चलो मार झुले में हलले है।

मान ने कहा- तुम कोई बच्ची हो क्या जो पाने में झुतोगी " वो एक बड़ा गोल पहिये जैसा झुला था जो बहुत ऊचाई तक जाता था और फिर लौट कर आ जाता था. पर रागिनी की जिद के आगे मपूर की एक न चली और वो झूले के दो टिनिट खरीद लाया

बो टीमीट लेकर लाइन में लग गये. मेले में उस समय बहुत भीड़ थी, और उनके आगे भी कई लोग झाले की लाइन में लगकर अपने नंबर का इंतजार कर रहे थे, ने अपना एक राण्ड पूरा किया और पिर झूले वाला पुरानी सवारी को उतार कर नई सवारी को झूले में बिठा रहा था
 
बिठारहा था।

घोड़ी ही देर में उनका नंबर भी आ गया और फेरी व्हील लाने पर लटकते एक पिंजरेनुमा केबिन में बैठ गये, केबिन पर नम्बर लिखा था 17. उनके बैठते ही अला योजा और ऊपर हुआ और झूले वाले ने उनके निचे वाले केबिन में पहले से बैठी झुला झूल चुकी सवारी को उतार कर दूसरी सवारी बिठाई, फिर उसके अगले केबिन में तीसरी बारी अभी सीमारे नम्बर की सवारी बैठी भी नहीं थी की रागिनी की नजर निये गयी और उसका चेहरा डर से सफेद पड़ गया, उसने फौरन केबिन की बिटकनी खोली और नि्दे छलांग लगा दी।

किसी पैसेंजर ने ऐसा पहली बार किया था झलेवाला फौरन रागिनी के पास पहुया - क्या कर रही हो मेडम रागिनी में कहा - मुझे नहीं झुलना तुम झुला रोको, और आकाश को निचे उतरने का इशारा

किया. आकाश भी फौरन निचे उतरा और उसने रागिनी का हाथ पकड़कर पूछा - क्या

हुआ रागिनी ?

रागिनी ने कहा- मुझे नहीं झुलना तुम चलो यहाँ से

दोनों एक दुसरे का हाथ पकड़कर झुले के प्लेटफार्म से निचे उतरे और रागिनी ने कहा - हमे फौरन यहाँ से चलना चाहिए ये जगह हमारे लिए ठीक नहीं है।

असमंजस में फंसे मयूर ने कहा - ओके मुझे अपना सामान जो मैंने झूले वाले के पास रखवाया था वो तो ले लेने दो

रागिनी ने मपूर का हाथ कना कर पा रखा था, वो लगभग उससे चिपक कर चल रही थी, उसके हाथ में उसका लाल हैण्णा बेग था, एक हाथ में मयूर का हाथ तो दुसरे हाथ में अपना हैण्ड बेग

मयूर ने झूले वाले के काउंटर पे उसका दिया टोकन दिया जो उसने सामान रखते समय उसको दिया था और अपना सामान उठाने लगा, तब तक झाले में सारी सवारिया बैठ चुकी थी ले वाले में झूले को स्टार्ट किया और एक्सीलेटर को फुल स्पीड पर कर दिया. मुला पूरी तेजी से ऊपर की और बड़ा और जैसे ही 17 नो का केबिन असमान में पहुचा वो तेजी से निचे आने लगा और एक तेज आवाज के साथ जमीन पर गिर गया

मयूर और रागिनी ने सले के केबिन को ऊपर को जमीन पर गिरते देखा, और दोनों की जान हलक में आ गयी, मेले में अफरातफरी मच गयी, ऐसा पहली बार हुआ था की पहिये वाले फेरी व्हील झूले का कोई केबिन अपने झूले से अलग होकर निचे गिरा हो ?

रागिनी ने चौमी आवाज में कहा-ये वही केबिन है जिसमे हम बैठे 17 नम्बर

मयूर ने जवाब दिया - सही का खतरा और उसे तेरी काई वाला याद आया, फिर उसे रागिनी का डरा हुआ चेजारा याद आया और फिर उसे याद आया की आज अगर रागिनी उस झूले में से नहीं उतरी होती तो वो दोनों भी जमीन पर पड़े केबिन में मरे पड़े होते।

चारो और अफरा तफरी मची थी. मयूर ने रामिनी से पुछा - तुम्हें कैसे पता चला कि दो केबिन टूटने वाला है ?

रागिनी मे कहा - मैंने उन दोनों की देख लिया था, मेरी आान खतरे मैं है, प्लीज मयूर मुझे यहाँ से जल्दी बहार निकालो।

भीड़ को चीरते हुए वो दोनों मेले से बहार जाने के रास्ते की और दौड़ रहे थे, उनके साथ कई लोग जल्दी से जल्दी बहार निकलना चाहते थे. दौड़ते हुए मपूर ने रागिनी से पूछा - कौन दोनों रागिनी मेरी बात का जवाबो ।

उसका चेहरा पत्थर की तरह सखा हो चुका था, कोई भाव नहीं न इन न कोई चिंता सपाट बेहरा, जिसे कोई नहीं पढ़ सकता मयूर ने पहले भी उस चेहरे को देखा था तब जब वो अपने पापा के बारे में बात कर रही थी।
 
बहार निकलते हुए वो तेजी से अपनी कार की तरफ बढ़े अभी दो कार के पास ही पहुचे थे कि मयूर को अपने पीछे कुछ कदमो की आहट सुनाई दी उसने मुड़कर देखा दी गुढे जैसे दिखाने वाले आदमी जिन्होंने मनेक पेंट और बाइट शर्ट पहन रखा था, उनकी और बढ़ रहे थे, और तभी उसे उनमें से एक के हाथ में बड़ा सा चाकू दिखाई दिया उसकी आखे आक्षर्य से फैल गयी, दोनों उनकी और बढ़ रहे थे।

गुंडों को अपनी और बढ़ते देखा वो सकपका गया आज का दिन बहुत आचर्य जनक या पिन उसने देखा रागिनी ने उन दोनों को अपनी और बढ़ते हुए देखा और अपने साल हैण्ड बेग की चैन खोली और उसमें से दही किताब निकाली जो वो अपने साथ लेकर आई थी उसने किताब के एक हिस्से को विशेष अंदाज में व्याया वाहा शायद वह कोई खटका था और किताब दो हिस्सों में खुल गई, मपूर की आँश तम आश्चर्य में फट गयी जब उसने देखा की किताब-किताब नही होकर एक बॉक्स थी जिसमे एक रिवाल्चर धी, जो पलक झपकते ही रागिनी की हामो में आ गयी. मपूर ने देखा रागिनी का चेहरा फत्पर की तरह

दोनों गुझे रिवालार की उपस्थिति में अनजान उन दोनों की और लपक रहे थे, जैसे ही बो पास में आये मयूर को समझते देर नहीं लगी की अगर उसने कुछ नहीं किया तो रागिनी गोती चला देगी वो तुरंत एक्शन में आया, तब तक दोनों उनके काफी करीब आ चुके थे उसने एक हाथ से रागिनी का हाथ पकड़ा और उससे ऊपर कर दिया, गोली चलने की हाली सी आवाज वातावरण में गूंज गयो गोली गुंडे को लगने की बजाय असमान में कही बली गई, तब तक चाकू वाले गुडे को रिवाल्वर की उपस्थिति का पता चला और उसने देखा, मपूर ने रागिनी का रिवाल्वर वाला हाय कसा के पका रखा है और रिवाल्वर की नाल आसमान की और है, उसने अच्छा मौका देख कर चाकू से रागिनी की और वार किया |

अपने खाती दुसरे हाथ से मयूर ने उसके चाकू वाले हाथ की कलाई पकड़ी और उसे रागिनी तक पहुंचने को रोक दिया, और रागिनी का हाथ छोड़ कर अपने दुसरे हाथ को आजाद किया और एक मुक्का यात वाले की नाक पर माना, यो दर्द में अपनी नाक पकड़ कर दोहरा हो गया और जमीन पर बैठ गया, दुसरे गुंडे ने अपना हाथ मपूर की और बढ़ाया, पर मयूर ने पीछे झुकते हुए अपने सीधे हाथ की दोनों पहली उगलिया उसकी दोनों आँखों में घुसेड दी। उसने हाय मर गया की चीख के साथ अपनी दोनों आखों को आपनी दोनों हतियों से ढक लिया और वही बैठ गया

तभी पहला गुंडा जिसकी नाक पर गहरी चोट लगी थी, गुन्से से उठा और मयूर की तरफ बामपूर ने अब अपनी पालाइंग किक का इस्तेमाल किया और उसकी दोनों टांगों के विध

में अपने असली बाटा के जूते कि आगे की नोक उसके गुप्तांगों पर दे मार दी. अब वो दर्द से चीख रहा था चोट बहुत करारी थी,

मपूर ने रागिनी को कहा- अब पे न बैग से सांस ले सकता है और न ही मूत्र विसर्जन कर सकता है. ये दोनों तो गये काम से चलो यहाँ से भागो।

पुलिस इंस्पेक्टर तन्यल जो अपने दल बल के साथ मेले में जफनीह कर मेले का लुफ्त उठा रहा था, एकाएक मची अफरा तफरी से हाई अलर्ट पे आ गया उसने अपने वायरलेस सेट पर अंदर पूछा- क्या हुआ, उसे जवाब मिला एक शाने का केबिन ले भी टूटकर असमान से जमीन पर गिर गया है, और दो लोग गंभीर रूप से घायल है, तभी तन्पल की नजर मेले के मुख्य द्वार के बहार पड़ी और उसने वो पूरा वाकिया देखा कि कैसे दो गुडे एक जवान जोड़े को मारने दौड़े और उसकी ऑडे तब फिल गयी जब लडकी ने इम्पोरेर पिस्टल निकाल ली, और लड़के ने खून खराबा रोकते हुए उन दोनों की आँखे, नाक और न जाने क्या-क्या तोड़ दिया।

यो वायरलेस पर चिल्लाया - कुछ जवान फौरन बहार निकलने के रामों पर पहुची और खुद भी उन दोनों की तरफ दौड़ पड़ा।
 
मयूर ने इंस्पेक्टर को अपनी और भाग कर आते हुए देखा और मन ही मन कहा - कुए से निकले और खाई में गिरे, उन्हें किसी भी सूरत मैं पुलिस के हत्थे नही चढ़ना है, उसका दिमाग तेजी से चल रहा था, मेला एक मैदान मैं था, जिसका एक मात्र बाहर निकलने का गेट एक सकरी गली में निकलता था, जो की कुछ दूर जाकर मेन रोड पर मिलती थी, अगर वो मेन रोड तक पहुच जाये तो वहा से भागना आसान था, फिर पुलिस उनको नही पकड़ सकती थी, उसने कार की तरफ देखा परन्तु उस गली में अब मेले में से बाहर निकलने वालो की भीड़ बढ़ चुकी थी, और उस सकरी गली मैं कार का निकलना मुश्किल था, अब उनके सामने एक ही रास्ता था की किसी तरह वो भीड़ में शामिल होकर गुम हो जाये, उसने देखा रागिनी ने अपनी पिस्तौल किताब में और किताब अपने लाल हैण्ड बेग में डाल ली थी, वो अब भागने के लिए रेडी थे,वो कार के पीछे की और खड़े थे इंस्पेक्टर भी उनसे चंद कदमो की दुरी पर था और कार के पीछे वाली साइड बढ़ा, मयूर ने रागिनी का हाथ पकड़ा वो कार के पीछे से कार के आगे बढ़े लगभग चंद्राकर चक्कर लगा कर वो गेट के बाहर आ रही भीड़ में शामिल हो गये |

इंस्पेक्टर ने दोनों को कार के पीछे से आगे जाते हुए देखा और जब तक वो कार के पीछे जहाँ रागिनी और मयूर खड़े थे पहुचा तब तक वो आगे जा कर कार की साइड में चल रही भीड़ में शामिल हो गये, लगभग चंद कदमो की दुरी इंस्पेक्टर तन्यल को भारी पड गयी, उसने उनको भीड़ में शामिल होकर गुम होते देखा, और समझ गया इस भीड़ मैं उनको ढून्ढ्ना आसन नही था | उसने अपने साथ आये दो जवानों को इशारा किया और गली के किनारे पर जहा से वो सकरी गली मेन रोड पर मिलती है, के दोनों तरफ बैरियर लगा कर कर खड़े हो गये |
 
मयूर भीड़ में शामिल हो कर धीरे धीरे गली के मुहाने पर पहुच रहा था, तभी उसे इंस्पेक्टर तन्यल दिखाई दिया वो उसके बहुत करीब पहुच चुके थे, इंस्पेक्टर अपने वायरलेस सिस्टम में चिल्ला रहा था, - एक लोकल लड़का और लडकी है जिन्होंने पारम्परिक ड्रेस पहन रखी है, लडके ने काली जैकेट सफ़ेद पेंट और सर पर लाल टोपी लगा रखी है और लडकी ने एम्ब्रायडरी का लाल जैकेट और काली स्कर्ट, दोनों जैसे ही दिखे उनको रोक लो |

मयूर ने अनुमान लगाया की इंस्पेक्टर उनको उनकी ड्रेस से पहचानने का प्रयास कर रहा है, उसने आगे नही बढने का फैसला लिया और रागिनी का हाथ पकड़ कर वापिस मेले के अन्दर जाने वाले गेट की तरफ मुड़ गया |

मेले में से भीड़ तेजी से कम हो रही थी, अगर वो यहाँ से जल्दी नही निकले तो भीड़ के छंटते ही तुरंत पकड़ में आ जायेंगे |

दोनों एक तम्बू के पीछे गये और अपने पारम्परिक परिधान, जो उनको एक महिला दुकानदार ने पहनाये थे उतार दिया, अब उनको उनके कपड़ो से तो इंस्पेक्टर नही पहचान सकता था, पर अब उसके सामने एक नई मुसीबत खड़ी हो गई थी, उनको जल्दी से जल्दी यहाँ से निकल कर देहरादून पहुचना था जो की इस गाँव से लगभग 8 किलोमीटर दूर था, अँधेरा हो चूका था और दून तक पहुचने की एक ही पहाड़ी सड़क थी अगर वो उस मुख्य सड़क पर पैदल भी चलेंगे तो आसानी से पकड़े जायगे, वो कार नही ले जा सकता था, क्योकि उसको इंस्पेक्टर ने देख लिया था और उसमे उनको आसानी से पकड़ा जा सकता था, दूसरा रास्ता था जो पहाड़ी ढलान का था पर वो जंगली इलाका था और जंगलो से जाना खतरनाक हो सकता था |

उसका दिमाग तेजी से चल रहा था, तभी उसे दूर एम्बुलेंस के सायरन बजने की आवाज आई और उसने अपनी कार की दिशा में देखा, वहा दोनों गुंडों में से एक गायब था जबकि दूसरा जिसकी आँख पे मयूर ने वार किया था अभी भी बेहोश पड़ा था, उसके पास एक पुलिस जवान खड़ा था जिसकी ड्यूटी उसको एम्बुलेंस में डालने की थी |

मयूर, रागिनी का हाथ पकड़ कर तेजी से उस गुंडे के पास पहुचा और पुलिस वाले से पूछा - क्या हुआ इन्हें, इनकी ये हालत किसने की ?

पुलिस वाले ने दोनों को देखा दोनों बाहरी लोग लग रहे थे उसने कहा - लगता है इसकी किसी लोकल लोगो से झड़प हो गई और उन्होंने इसका ये हाल कर दिया, क्या तुम जानते हो इसको ?

मयूर ने कहा - हाँ मेरा मसूरी में होटल है और ये मेरे होटल में ठहरा था, हम सब साथ में मेला देखने आये और वो झूले का केबिन टूट गया, अफरा तफरी में सब अलग अलग हो गये मैं इंस्पेक्टर साहेब के पास गया था और उन्होंने मुझे यहाँ पहुचाया है, इसको तो हॉस्पिटल ले जाना पड़ेगा, क्या तुमने एम्बुलेंस को फ़ोन कर दिया ?

पुलिस वाला उनकी बात से आश्वस्त लग रहा था उसकने कहा - एम्बुलेंस आती ही होगी |

इतनी देर में सायरन बजाती एम्बुलेंस आ गयी, एम्बुलेंस से उतरे दो मेल नर्स ने गुंडे को स्ट्रेचर पर डाला और एम्बुलेंस में डाल दिया, पहले दोनों मेल नर्स एम्बुलेंस में चढ़े और फिर पुलिस वाला और फिर मयूर और रागिनी |

क्या आप भी हमारे साथ चलेंगे - पुलिस वाले ने दोनों से पूछा

हाँ हम भी चलेंगे, ये परदेशी है, मेरे भरोसे यहाँ तक आये थे, हमको साथ ही जाना होगा - मयूर ने जवाब दिया |

मुझे साहेब से पूछना पड़ेगा उसने वायरलेस का बटन ओन किया - सर घायल पड़े आदमी को बाहर से एम्बुलेंस में डाल दिया है क्या उसके साथ वालो को भी साथ मैं हॉस्पिटल ले जाऊ ?

इंस्पेक्टर तन्यल की नजरे उस समय लाल टोपी, काली जाकेट वाले लडके को ढूंढने में लगी थी, उसे लगा साथ वालो से मतलब वो दोनों गुंडों को ले जाने की बात पूछ रहा है |

उसने जवाब दिया - हाँ उन दोनों को साथ में ले जाओ |

पुलिस जवान ने - सहमती से सर हिलाया और एम्बुलेंस को आगे बढने का इशारा किया |
 
एम्बुलेंस सकरी गली पार करके उसके मुहाने पर पहुची जहाँ इंस्पेक्टर अपने मतहतो के साथ एक लोकल लडके और लडकी को ढूंढ रहा था, मयूर और रागिनी की धडकने तेज चल रही थी अगर इंस्पेक्टर ने एम्बुलेंस के अन्दर की स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया तो उनका पकड़ा जाना निश्चित था, एम्बुलेंस धीरे धीरे करके इंस्पेक्टर के सामने पहुंच रही थी, और उनकी धडकने तेज हो रही थी |

जैसे ही एम्बुलेंस इंस्पेक्टर के सामने पहुची तभी उसे एक लड़का दिखाई दिया जो पारम्परिक वेशभूषा मैं था, उसने अपने साथ वाले पुलिस जवान को उस लडके को रोकने का इशारा किया, और उसको गौर से देखा, उसको मयूर का चेहरा अच्छी तरह से याद था, उसने लडके को जाने का इशारा किया, इतनी देर में एम्बुलेंस उसके सामने से होती हुए गली का मुहाना पार कर के मेन रोड पर आ चुकी थी, कुछ ही देर में वो देहरादून जाने वाली मुख्य सड़क पर आ गई और घुमावदार रास्ते से होती हुई तेजी से देहरादून की और बढ़ चली |

रागिनी का चेहरा पथराया हुआ था, उसने जिन्दगी मैं पहली बार प्यार को महसूस किया था, जब वो छोटी थी और उसकी माँ जिन्दा थी, फिर उसकी माँ की हत्या हो गई और वो फिर अकेली हो गई, और आज उसकी हत्या का भी प्रयास हो रहा था, उसका अतीत उसका पिछा छोड़ने को तैयार नहीं था, उसने अपने जिन्दगी मैं सिवाय सुकून और प्यार के कुछ नहीं माँगा था, उसने मयूर की तरफ देखा - तुमने क्यों मेरे लिए अपनी जिन्दगी जोखिम मैं डाल दी, तुम नही जानते तुम किन लोगो से दुश्मनी ले रहे हो, उसने एम्बुलेंस में अपने पास बैठे मयूर के कंधे पे अपना सर रख दिया और उसका पथराया चेहरा एक मासूम लडकी में तब्दील हो गया, उसके चेहरे पर सुरक्षा और इत्मिनान का भाव साफ दिखाई पड़ रहा था |

इंस्पेक्टर तन्यल मेले के बाहर सकरी गली के मुहाने पर उन दोनों को ढूंढ रहा था, तभी काली पेंट वाला गुंडा उसके सामने आया, उसे देखते ही तन्यल का चेहरा सख्त हो गया - तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?

सुन इंस्पेक्टर - गुंडे ने अपनी नाक पकड़ते हुए तन्यल के हाथ मैं दो हजार के नोटों की एक गड्डी रखते हुए बोला - उन दोनों को पकड़ कर केस रजिस्टर करो, ये पचास हजार है, बाकि के चार लाख तुझे उन दोनों को पकड़ने के बाद मिल जायेंगे |

उसने एक सेकंड नोटों की गड्डी को देखा वाकई में असली नोट थे लाल लाल - क्या बकवास है ये ? तन्यल गुर्याया - और उसने ऊपर देखा पर काली पेंट वाला गुंडा वहा से जा चूका था |

उसने नोटों की गड्डी अपनी जेब में डाल ली |

मेला ग्राउंड लगभग खाली हो चूका था, लोग अपने घरो को जा चुके थे, भीड़ छंट चुकी थी, पर इंस्पेक्टर तन्यल को वो दोनों नहीं मिले, आखिर वो गये कहा - उसने मन ही मन सोचा और दोनों जवानों को वही रुकने का इशारा करके खुद मेले ग्राउंड की और बढ़ा तभी एक लोकल दुकानदार महिला उसके पास पहुची और हक्लाती बोली - मैंने एक परदेशी लडके और लडकी को गढ़वाली ड्रेस किराये पर दी थी, अफरातफरी मची थी और इस बीच वो मेरी ड्रेस ले कर भाग गये, वो बहुत महंगी ड्रेसेस थी, मेरा हजारो का नुकसान हो गया |

इंस्पेक्टर एकटक उस महिला को देख रहा था - तो वो दोनों लोकल लोग नही थे, वो सैलानी थे, तभी मैं कहूँ, लोकल लड़की के हाथ में तमंचा कहा से आ गया, और उसे अपनी भूल का अहसास हुआ, वो दोनों लोकल ड्रेस उतार कर आसानी से बाहर निकल गये होंगे |

उसने दुकानदार महिला से कहा - चिंता मत करो तुम्हारी ड्रेस तुमको यही कही से मिल जाएगी, और वायरलेस सेट निकाल कर चिल्लाने लगा - कॉपी दोनों भागे हुए लडके लडकी लोकल नही है, सैलानी है, अब उनका हुलिया फिर से बोल रहा हु, दून जाने वाले रस्ते की सभी पेट्रोल गाडियों को सतर्क किया जाता है, एक लड़का और एक सैलानी लडकी जिसके हाथ में लाल पर्स है जहा भी दिखे पकड़कर पिस्तौल जब्त करे और उनको हिरासत में ले | आई रिपीट |

जब इंस्पेक्टर ये मेसेज वायरलेस पर दे रहा था उसके कुछ देर पहले ही एम्बुलेंस दून पहुच चुकी थी और मयूर ने पहाड़ी रास्ता खतम होते ही एक चौराहे पर एम्बुलेंस रुकवा कर पुलिस वाले को कहा - हम दस मिनिट में हॉस्पिटल पहुच रहे है, मुझे एटीएम से पैसे निकलवाने है, हम कुछ ही देर में हॉस्पिटल पहुंच जायेंगे - और दोनों एम्बुलेंस से उतर गये |

पुलिस वाले ने अपने साहेब का मेसेज वायरलेस पर सुना और उसे सांप सूंघ गया, उसकी आँखों के सामने लाल बेग घूम गया, एक लड़का एक लडकी, दोनों सैलानी, लडकी के हाथ में लाल हैण्ड बेग और उसने वायरलेस पे बोला - सर आपके आदेश से मैं एम्बुलेंस में एक लड़का और एक लडकी को ले कर आया हूँ जो पिछले चौराहे पर उतर गये, लडकी के हाथ में लाल हेन्द्बेग जिसपर बारीक़ हीरे की डिजाईन बनी हुई थी |

इंस्पेक्टरों तन्यल जो दून के रास्ते और उस इलाके में सर्चिंग चालू कर उन दोनों को पकड़ने के बारे मैं सोच रहा था, पास पड़ी कुर्सी पर हताश हो कर बैठ गया, पिछले 30 साल की उसकी पुलिस की नौकरी में किसी ने उसे इस तरह से बेवकूफ नहीं बनाया था, वो भी उसके सुपीरियर के सामने क्योकि वायरलेस के मेसेज पुरे जिले में सर्कुलेट होते है और हर छोटा बड़ा अधिकारी उन मेसेजेस को सुनता है, उसे लगा मानो वायरलेस से कई सारी हंसने की आवाजे आ रही थी |

एक बार वो दोनों उसके हत्थे चढ़ जाये फिर उनकी सारी होशियारी निकालता हूँ |

उसको एम्बुलेंस के साथ गये पुलिस जवान पर भी गुस्सा आ गया वो वायरलेस में चिल्लाया - क्या कर रहे हो, तुम उन दोनों को अपने साथ ले कर गये ही क्यों, तुमको नही पता हम उनको ढूंढ रहे है ?

जवान ने जवाब दिया - सर उन्होंने मुझसे कहा कि वो घायल के साथ है और आपने उनको एम्बुलेंस में घायल के साथ जाने का कहा है, फिर मैंने वायरलेस पर आपकी परमिशन भी ली थी, आपने कहा उन दोनों को ले जाओ |

फिर बेइज्जती - तन्यल के मन ही मन कहा जाओ उनको फ़ौरन ढूंढो वो कहा है |

सर वो पिछले चौराहे पर उतर गये |
 
तुम वायरलेस ले कर उनके पीछे जाओ और देखो अगर वो उसी चौराहे पर कही मिलते है, मैं अभी वही आ रहा हूँ, वो क्या पुलिस को मजाक समझते है |

उसे अपने सुपीरियर के सामने अपनी इज्जत बचानी थी, पूरा डिपार्टमेंट उसपर हंसेगा कि दो जवान छोरे - छोरी उसका बैंड - बजा बजा कर चले गये |

पुलिस जवान एम्बुलेंस से उतरा और पैदल ही पिछले चौराहे पर पहुचा उसने वहाँ आसपास देखा और उन दोनों का कही पता नही था, उसने एक पान वाले को उनका हुलिया बताया और पान वाले ने कहा वो दोनों एक टैक्सी में बैठ कर गये है, टैक्सी अपने स्टैंड की ही है उनको छोड़ कर वापिस यही आएगी |

उसने वायरलेस पर तन्यल को मेसेज किया, संतुष्ट होकर तन्यल ने कहा तुम वापिस एम्बुलेंस के पास जाओ आगे मैं देख लूँगा |

जवान एम्बुलेंस तक आया उसने दरवाजा खोला, पीछे लेटा घायल गुंडा स्ट्रेचर से गायब था |

मयूर का दिमाग तेजी से चल रहा था, जब वो एम्बुलेंस से उतरे तो रात गहरा रही थी और दून की सड़के सुनसान पड़ी थी,

उसने रागिनी से कहा - हम रात सड़क पर नही गुजार सकते, न रेलवे स्टेशन, न बस स्टैंड हमको सर छुपाने का कोई ठिकाना जल्दी से ढूँढना पड़ेगा |

वो इस इलाके से अच्छी तरह से वाकिफ था, उसने एक टैक्सी की तरफ इशारा किया और दोनों उस टैक्सी में सवार हो गये, मयूर ने कहा - गाँधी सरकेल |

वो दोनों होटल के रिसेप्शन पर पहुचे और उन्होंने एक रूम की डिमांड की | रिसेप्शनिस्ट ने उनको एक रूम की चाभी दी और ऊपर जाने का रास्ता बताया, उसने देखा लडकी के गले में पटटे से बंधा लाल बैग लटक रहा था, और वो अपने काम पर लग गया |

दिन भर की दौड़ भाग से थके दोनों रूम में पहुचे जिसमे एक पलंग और छोटा सोफे लगा था, उन्होंने खाना आर्डर किया, खाया और रागिनी ने पूछा - तुम कहा सोओगे ?

तुम्हारे साथ - उसने शरारत से जवाब दिया |
मैं तुम्हारे साथ नही सो सकती, तुमको अकेले ही सोना पड़ेगा |

मैं गद्दा जमीन पर बिछा लूँगा तुम पलंग पर सो जाओ - उसने जवाब दिया

रागिनी ने सहमती से सर हिलाया और पलंग के एक हिस्से में सो गई |

मयूर ने अपनी गादी जमीन पर बिछाई और लाइट बंद करके सो गया |

मुश्किल से 15 मिनिट ही हुए थे की उसे किसी के स्पर्श का अहसास हुआ, वो रागिनी थी, वो मयूर के पास आई और उसकी बांहों में सिमट गई और फिर वो दोनों एक दुसरे में समां गये |

तन्यल की फिछले २० साल की पुलिस की नौकरी में इलाके का सबसे चुस्त, मुस्तैद पुलिस वाला माना जाता था, उन दोनों की वजह से उसकी पूरी प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी, उसने इसे प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था |

वो अब तक मेले के बाहर ही था, जब उसे पता चला की वो दोनों तो एम्बुलेंस से भागने में सफल हो गये है, वो वायरलेस में चिल्लाया - जल्दी से सब गाड़ी में बैठो हमको दून पहुचना है, और उन दोनों को पकड़ना है |

सारे पुलिस वाले स्थिति की गम्भीरता और तन्यल की मानसिक स्थिति को समझ चुके थे, तेजी से जीप की तरफ दौड़े, उधर तन्यल ने जीप के ड्राईवर को निचे उतारा और ड्राइविंग सीट संभाल ली, उसने जीप स्टार्ट की, तब तक उसके साथी पुलिस वाले अपने अपने डंडे, सम्भालते हुए जीप तक आ चुके थे |

30 सेकंड के अन्दर सब जीप मैं बैठ जाओ नहीं तो यही छोड़ दूंगा - वो चिल्लाया और उसने हल्के से एक्सीलेटर को दबाया | जीप धीरे धीरे आगे बढ़ी और पुलिस वाले चलती जीप में ही जीप में चढने लगे, जैसे ही तन्यल की घड़ी में 30 सेकंड पुरे हुए उसने जीप का एक्सिलेटर पूरी ताकत से दबा दिया, आखरी बचे 2 पुलिस वाले जीप के पीछे लटके ही रह गये, जिनको बाकि पुलिस कर्मियों ने कैसे तैसे जीप के अन्दर लिया |

तन्यल ने हिसाब लगाया उसकी जीप इन पहाड़ी रास्तो पे 5 मिनिट मैं 1 किलोमीटर का सफर तय करती है, जहा वो दोनों उतरे है वो जगह यहाँ से 6 किलोमीटर है, इस हिसाब से उसको उस चौराहे तक पहुचने में 30 मिनिट का समय लगेगा, उसने किसी भी मोड़ पर एक्सीलेटर से अपना पांव नहीं हटाया, पीछे बैठे पुलिस कर्मियों कि जान पर बन आई थी |

जीप तेजी से उस चौराहे पर रुकी जहा एम्बुलेंस के साथ आया पुलिस कर्मी उनका इंतजार कर रहा था - वो टैक्सी वाला जो उन दोनों को ले कर गया अब तक आया या नही ?

अभी तक नही आया |

ठीक है तुम पैदल मेला ग्राउंड तक जाओ और अपनी ड्यूटी तब तक वही करना जब तक मैं न बोलू और सुनो किसी और गाड़ी मैं लिफ्ट लेकर वहां मत जाना बल्कि पैदल ही जाना ठीक है ?

जी सर - उस पुलिस वाले ने कहा वो समझ गया था उसको 6 किलोमीटर पैदल चलने की सजा मिली है |

जीप मैं बैठे बैठे ही उसने पान वाले को बुलाया - वो टैक्सी वाला अब तक क्यों नही आया ?

यही आएगा साहेब कही नही जायेगा वो यही से चलता है |

तभी उनको एक ऑटो आता दिखाई दिया और पान वाले ने कहा - आ गया आपका ऑटो |

टैक्सी पास आई और उसके रुकने के पहले ही तन्यल ने जोर से पूछा - उन दोनों लडके लडकी को कहा छोड़ कर आया है ?

टैक्सी वाले ने टैक्सी बंद की और दौड़ता हुआ जीप के पास आया और बोला - कौन वो जिनको अभी ले गया था, उनको अगले चौराहे पर गाँधी सर्कल के पास छोड़ा है |

वो वहां से कहा गये कुछ देखा था - हा अजीब थे दोनों मेरी टैक्सी से उतर कर दूसरी टैक्सी में चढ़ गये, मैं वहा सवारी के लिए रुका था नहीं तो मुझे पता ही नही चलता, जहा जाना था मेरी ही टैक्सी में चले जाते, टैक्सी बदलने के क्या जरूरत थी ?

तुम उस दूसरी टैक्सी वाले को जानते हो ?

वो नई चली एको फ्रेंडली टैक्सी थी ग्रीन कलर की, अभी ऐसी कम ही है यहाँ, बस इतना ही जानता हूँ |
 
तन्यल ने जीप आगे बढाई एक हाथ से स्टीयरिंग पकड़ा और दुसरे हाथ से वायरलेस पर चिल्लाया - आल पुलिस पार्टी अलर्ट एक लड़का एक लडकी एको फ्रेंडली ग्रीन टैक्सी मैं चकमा दे कर भाग रहे है, हर ग्रीन एको फ्रेंडली टैक्सी वाले से पूछताछ की जाये, लडकी के हाथ में लाल बेग है |

तन्यल ने मन ही मन सोचा - लड़का बड़ा चालक है, एक ही टैक्सी लेने की बजाय टैक्सी बदल बदल कर घूम रहा है, कितना भी चालक हो पुलिस से नही बच सकता, एक बार वो दोनों हाथ आ जाये फिर बताता हु पुलिस के साथ लुका छिपी खेलने का क्या अंजाम होता है |

वो गाँधी सर्कल चौराहे पर पहुचे, पूरा चौराहा सुनसान पड़ा था, उसने चारो और नजर घुमाई, कोई क्लू मिलने की उम्मीद नही थी, इक्का दुक्का वाहन निकल रहे थे, तभी उसकी नजर चौराहे के किनारे सोये एक भिखारी पर पड़ी उसने जीप उसके पास ली, निचे उतरा और भिखारी को उठा कर पूछा - अभी यहाँ से एक टैक्सी में एक लड़का लड़की गए है ?

भिखारी नींद में था - हाँ तो ?

वो कहा गये है ? - मुझे क्या मालूम - पुलिस से वो पहले ही खफा था |

तन्यल को अपनी गलती का अहसास हुआ उसने गलत सवाल पूछा था - वो टैक्सी जिसमे वो दोनों गये है, उस टैक्सी वाले को जानते हो ?

हाँ वो अपना रमेश है, मेरे को कभी कभी भीख देता है, यही खड़ा रहता है स्टैंड पर |

तुम्हारे पास उसका मोबाइल नम्बर है ?

ये क्या होता है मोबाइल ?

बड़ी मुश्किल से अपने गुस्से को काबू करते हुए उसने पूछा - देख ये रमेश जिसकी टैक्सी में बैठ के वो दोनों गये है कहा रहता है सीधे सीधे बता ?

भिखारी ने कुछ देर सोचा और बोला - मुझे नही पता वो कहा रहता है ?

तन्यल निराश होने लगा - फिर उसने भिखारी से पूछा तू उसके बारे में कुछ जानता है वो बता

भिखारी ने कहा - मुझे क्या मिलेगा ?

तेरी तो - तन्यल ने बड़ी मुश्किल से अपने हाथ को रोका और अपनी जेब से एक 50 का नोट निकाल कर भिखारी की और बढ़ाया - जल्दी बता ?

भिखारी ने 50 का नोट झपटा और बोला - ज्यादा तो नही पर वो बेवडा है, रोज शराब पिता है, और उनको छोड़ने के बाद शराब के अड्डे पर ही जायेगा |

तन्यल ने गुस्से से कहा - अब सारे शराब के अड्डो पे कौन जायेगा तेरा बाप, चल 50 का नोट वापिस कर |

9426 ये नम्बर है उसकी ऑटो का |

तन्यल ने ख़ुशी से उसके हाथ में एक 50 का नोट और रख दिया |

भिखारी ने सोचा - काश उसको पूरी दून के ऑटो के नंबर पता होते तो वो करोडपति हो जाता |

तन्यल ने वायरलेस पर मेसेज किया - आल पार्टी रीड 9426 नम्बर की एको फ्रेंडली, ग्रीन कलर की टैक्सी को ढूंढे और मुझे मेसेज करो जल्दी |

रात भर हर पुलिस वाला हर शराब के अड्डे, बस स्टैंड और सभी पब्लिक प्लेस पर 9426 ऑटो को ढूंढ रहा था, टैक्सी यूनियन के ऑफिस से 9426 नो. के ऑटो का पता निकाला गया और उसके घर तन्यल खुद पहुचा, पर वो घर नहीं आया था | अपना नम्बर उसकी पत्नी को देने के बाद तन्यल ने कहा - जैसे ही वो आये मुझे फ़ोन करना |

सुबह लगभग 5 बजे रमेश भाई रेलवे स्टेशन के पीछे अपनी ऑटो की पिछली सीट पर शराब के नशे में धुत पड़े मिले, तुरंत तन्यल को मेसेज किया गया, तन्यल उन दोनों को ढूंढने की बेताबी में लगभग अपना आपा खो बैठा था, तुरन्त रेलवे स्टेशन के पीछे पड़े रमेश के पास पहुचा, उसने टैक्सी वाले को बेसुध पड़ा देखा जो उसके किसी प्रश्न का जवाब देने की स्थिति में नही था, उसने जीप में से ठंडी पानी की बोतल निकली और पूरी बोतल उसके चेहरे पे उड़ेल दी, वो हडबडा कर उठा और एक भद्दी गली देकर फिर सो गया, तन्यल ने एक जोर का झापट उसके गाल पे दिया और वो गाल सम्भालता हुआ उठा, तन्यल ने उसका गिरेबान पकड़ कर पूछा - कल रात को तुमने एक लडके और लडकी को गाँधी सर्कल से कहा छोड़ा था ?

वो बुदबुदाया - मैंने कल दो जोड़ो को छोड़ा था आप किसकी बात कर रहे हो |

तन्यल ने कहा - वो लडकी जिसके हाथ में लाल हैण्ड बेग था |

मून मून होटल - टैक्सी ड्राईवर बडबड़ाया और फिर सो गया |

तन्यल तेजी से जीप के में चढ़ा और चिल्लाया - मून मून होटल चलो

पीछे बैठे आई जी के जासूस पुलिस के एक जवान रणवीर ने सोचा - आखिर ये तन्यल उन लडके लडकी में इतनी ज्यादा रूचि क्यों ले रहा है ?

तन्यल मून मून होटल के बारे में सबकुछ जनता था, उसे पता था की ये होटल वेश्याओ और लडके लडकियों को कुछ घंटो के लिए रूम किराये पर देता है, वहाँ उनके लिए छुपना बहुत आसान है क्योकि उस होटल में किसी से कोई आइडेंटिटी नही मांगी जाती |
 
मून मून होटल शहर के बाहर एक बड़े फार्म हाउस के बीच में बना हुआ पुराने ज़माने का स्ट्रक्चर था जिसे रंग रोगन कर रहने लायक कमरों में तब्दील कर दिया गया था, होटल तक पहुचने के लिए मेन रोड से लगभग आधा किलोमीटर अंदर प्राइवेट रोड पे जाना पड़ता था, और अन्दर जाने वाले हर वाहन को होटल की पर्सनल सिक्यूरिटी चेक पोस्ट से हो कर गुजरना पड़ता था |

होटल के गेट पे पहुचते ही तन्यल सिक्यूरिटी गार्ड पर गुराया - जल्दी से बैरिएर खोल और गाडी को आगे जाने दे |

सिक्यूरिटी गार्ड रजिस्टर लेकर जीप के पास गया और बोला - इंट्री कर दो सर नौकरी का सवाल है |

तेरी तो - पुलिस की इंट्री मांग रहा है, साले नाटक बंद कर और दरवाजा खोल |

सिक्यूरिटी गार्ड तेजी से अपने केबिन में अन्दर गया, और उसी समय होटल की बिजली बंद हो गई |

गार्ड ने कहा - सर बिना लाइट के ये गेट नही खुल सकता, जब तक होटल का जनरेटर चालू नही हो जाता आपको यही रुकना पड़ेगा |

लगता है पुलिस का डर खत्म हो गया है लोगो में - तन्यल ने सोचा और जीप में बैठा बैठा बैचेनी से लाइट के आने का इंतजार करने लगा |

लगभग 10 मिनिट ऐसे ही गुजर गये और तभी उसके दिमाग में ख्याल आया, वो जीप से उतरा और सिक्यूरिटी गार्ड के केबिन में गया, - साले तूने अंदर फ़ोन लगा कर बोल दिया की बाहर पुलिस आई है |

नही साहब यहाँ कोई फ़ोन नहीं है न मेरे पास मोबाइल है आप चाहो तो चेक कर लो |

तो फिर दरवाजा क्यों नही खोल रहा ? जल्दी खोल

तभी लाइट आ गयी और वो जीप में बैठा, अभी जीप थोड़ी दूर ही पहुच पाई थी की सामने से एक बड़ा टेम्पो तेजी से उनकी और आते हुए दिखाई दीया, रास्ता संकरा था और दोनों गाड़िया एक साथ नही क्रॉस हो सकती थी, तन्यल के मुंह से कराह निकल गई, वो जल्दी से जल्दी उन दोनों तक पहुच कर उनको अरेस्ट करना चाहता था, पर एक के बाद एक रूकावटे सामने आती जा रही थी, रात लगभग 8 बजे से शुरू हुआ ये चूहे बिल्ली का खेल थमने का नाम ही नही ले रहा था |

उसने टेम्पो वाले से चिल्ला कर कहा - कहा घुसा चला आ रहा है, गाड़ी पीछे ले बेवकूफ |

टेम्पो वाला भी गुस्से से चिल्लाया - मैं नहीं तुम घुस रहे हो, और तमीज से बात कर, मेरी पहुच बहुत ऊपर तक है |

है भगवान - तन्यल ने मन ही मन कहा, - कल रात से आज सुबह तक उसकी जितनी इज्जत खराब हुई थी इतनी तो उसके पूरी पुलिसिया जीवन में नहीं हुई थी, वो गुस्से से जीप से उतरा और गाड़ी की ड्राइविंग सीट पे पहुचा - बता तेरी गाड़ी मैं क्या है, जल्दी खोल दरवाजा |

और अगर न खोलू तो क्या कर लोगे ?

साले तेरी सारी नेतागिरी थाने की खूंटी पे टांग के रात भर तेरी खाल उधेड़ दूंगा जल्दी खोल गाड़ी मैं कौन है |

ठीक है साहेब नाराज क्यों होते हो देख लो पूरी गाड़ी - और उसने दरवाजा खोल दिया

तन्यल ने टेम्पो में नजर डाली, सीट के निचे देखा, पूरा लोडिंग टेम्पो खाली पड़ा था, अब उसका गुस्सा और भी बढ़ गया, जल्दी पीछे ले नही तो यही चमड़ी उधेड़ दूंगा |

टेम्पो वाले ने कहा मेरी गाड़ी में रिवर्स गियर नही है |

तेरी तो - तन्यल चिल्लाया और अपनी जीप के ड्राईवर को जीप पीछे लेने का इशारा किया जीप पीछे हुई और टेम्पो आगे बढ़ा इस पूरी प्रक्रिया में 15 मिनिट और गुजर गये |

जब तक रास्ता साफ हुआ और तन्यल रिसेप्शन पर पहुचा उसका सब्र का बांध टूट चूका था, आधे किलोमीटर की दुरी तय करने के उसके पुरे 30 मिनिट लग गये थे और मेले से यहाँ तक की 8 किलोमीटर की दुरी तय करने में पूरी रात लग गई थी उसने रिसेप्शन पर बैठे आदमी को देखा और जोर पूछा - क्या यहाँ पर कल रात को कोई लड़का और लडकी आये थे दोनों सैलानी थे, लोकल रेगुलर नही |

कल दो तीन कपल आये तो थे पर वो तो कुछ ही घंटो में रूम खाली कर के चले गये |

क्या उनमे से कोई लाल हैण्ड बेग वाली लडकी थी ? चल बता तेरा रजिस्टर |

अब रिसेप्शनिस्ट समझ चूका था की झूठ बोलने का कोई फायदा नही आज साहब उन दोनों को पकड़ने की कसम ले कर आये है उसने जवाब दिया - हा सर वो 308 रूम मैं है
 


तन्यल ने उसको घुरा और तेजी से दो दी सीढिया लांघता हुआ ऊपर की और बढ़ा, उसने तीसरे माले पर पहुच कर ही साँस ली और 308 नम्बर कमरे के सामने पहुचा और दरवाजे को जोर से ठोकर मारी, दरवाजा आसानी से खुल गया, उसने अन्दर देखा कमरा पूरी तरह खाली था |

उसने पुरे कमरे का मुआवना किया और मन ही मन कहा - गये 5 लाख़ हाथ से !

उसने वायरलेस निकाला और फिर चिल्लाया - मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |

मून मून होटल का मालिक एक चालक व्यापारी था, उसने शहर के बाहर फालतू पड़ी इस प्रॉपर्टी से पैसे कमाने का घटिया रास्ता निकला था, उसने पुलिस की रेड पड़ने की स्थिति मैं बचने का एक नायब रास्ता ढूढ़ लिया था, जैसे ही पुलिस की जीप होटल के आधा किलोमीटर बाहर मेन गेट पर पहुची, वहा बैठे सिक्यूरिटी गार्ड ने अन्दर होटल के कमरों मैं लगा सायरन बजा दिया, और अन्दर पूरा होटल अलर्ट हो गया, फिर सामने से आता टेम्पो और उसमे रिवर्स गियर नही होना सब केवल पुलिस को रोके रखने का प्लान था, ताकि अन्दर सभी वेश्याओ और जोड़ो को बाहर सुरक्षित निकाला जा सके |

दिन भर की थकान के बाद मयूर की सुरक्षित और आरामदायक बांहों में रागिनी बच्चों की तरह निश्चिन्त सो रही थी, उसकी नींद खुली तब सायरन की आवाज पुरे कमरे मैं गूंज रही थी, उस समय सुबह के 5 बज रहे थे, और सायरन काफी देर से बज रहा था, कोई जोर जोर से दरवाजा भड़क रहा था, वो आवाज बहुत डरावनी थी, उसने मयूर को उठाया, मयूर ने आवाज को फ़ौरन पहचान लिया, वो अपने दोस्तों के साथ इस होटल मैं पहले भी आ चूका था, उसने रागिनी से कहा - पुलिस की रेड | जल्दी सामान समेटो और भागो यहाँ से |

रागिनी ने कहा - हमारे पास जो भी सामान है सब खुल्ला पड़ा है और एक शरारती मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आई |

जब वो बाहर निकले तब तक निश्चित ही देर हो चुकी थी, क्योकि मयूर ने नोटिस किया की उस समय कोरिडोर में कोई भी नहीं था सिवाय उनके, सारे कमरे पहले ही खाली हो चुके थे, वास्तव मैं ये बिलकुल सही था जब उनकी नींद खुली तब तन्यल होटल के रिसेप्शन पर खड़ा था |

जब वो रूम से बाहर निकले तब तक तन्यल सीढिया चढ़ रहा था, उन दोनों को अगर भागना था तो एक मात्र रास्ता वो सीढिया ही थी जिनसे निचे उतर कर वो पीछे के रास्ते से जंगलो में जा सकते थे, और उस एक मात्र रास्ते से तन्यल ऊपर आ रहा था और बहुत सम्भावना थी की उन दोनों की भिडंत तन्यल सो हो जाये |

मयूर जब निचे उतरने की सीढियों के मुहाने पर पहुचा और उसने तन्यल को ऊपर चढ़ते देखा तो उसका दिल धक् से रह गया उसने देखा वो बहुत तेजी से दो दो सीढिया चढ़कर ऊपर आ रहे थे, उसने इधर उधर नजर डाली और उसे सीढियों के पास वाश रूम दिखाई दिया उसने रागिनी का हाथ पकड़ा और वो दोनों वाश रूम में घुस गये, तन्यल ऊपर आया और सीधा रूम नो.. 308 पे गया, मयूर ने वाशरूम का दरवाजा खोल कर देखा, तन्यल और उसके साथ आये पुलिस वाले रूम के अन्दर जा चुके थे, उसने रागिनी का हाथ थाम रखा था फ़ौरन बाहर निकलने के लिए दरवाजा खोला वो बाहर निकलने ही वाले थे कि तभी उनके रूम में घुसे पुलिस वालो में से एक बाहर आया, और वाश रूम की तरफ बढ़ा, उनका दिल फिर तेजी से धडकने लगा, धीरे धीरे उसके जूतों की आवाज उनके करीब आ रही थी, किसी भी सेकंड उनका सामना उस पुलिस वाले से हो सकता था, पुलिस वाला वाश रूम तक आया, और उसने वाशरूम के दरवाजे का नकुचा पकड़ कर निचे की और दबाया, मयूर तैयार था, तभी पुलिस वाले ने देखा, जिस वाशरूम में वो जा रहा था, उसके ऊपर एक लेडीज स्टीकर लगा था, उसने नकुचा छोड़ दिया और उसके बिलकुल पास में एक और दरवाजे का नकुचा खोला जिसपर जेंट्स का स्टीकर लगा था, खोला और अन्दर चला गया

दोनों ने वाशरूम के दरवाजे पर लगे कांच में से सबकुछ देखा, मयूर ने रागिनि का हाथ पकड़ा और फुर्ती से बाहर निकला, एक एक सेकंड कीमती था, ज्यादा देर वहा रुकना ठीक नही था, उनको रिस्क लेकर जल्दी से जल्दी बाहर निकलना था- वो तेजी से सीढियों से निचे उतरे तभी तन्यल भी बाहर आया, पर कुछ सेकंड के फासले से वो उन दोनों को नही देख सका, दोनों पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर होटल की दिवार के सहारे खड़े हो गये, उन्होंने देखा पीछे एक मैदान था जिसके बाद जंगल, तभी उन्हें तन्यल की आवाज सुनाई दी मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |
उन दोनों ने एक दुसरे की और देखा और तेजी से मैदान मैं दौड़ लगा दी, तन्यल पीछे के दरवाजे की और बढ़ा और उसने बाहर देखा, पर उसे वह कोई नहीं दिखाई दिया, दोनों मैदान पार कर जंगली झाड़ियो के पीछे छुप चुके थे |

तन्यल गुस्से से आग बबूला हो रहा था, वो जितना पांच लाख के पास जाता था उतना ही वो उससे दूर होते जाते थे, वो होटल के रिसेप्शनिस्ट पर गुराया - जल्दी से तेरे सीसीटीवी फुटेज में उन दोनों के फोटो निकाल और मुझे दे, वर्ना आज तेरी खैर नहीं |

रिसेप्शनिस्ट उन दोनों लड़का लडकी को याद कर के सोच रहा था - जरुर उन्होंने किसी का मर्डर किया होगा या बैंक लूटी होगी तभी इंस्पेक्टर इतना उतावला हो रहा है |

उसने सीसीटीवी फुटेज कंप्यूटर में लिया और एक प्रिंट तन्यल को दी |

तन्यल ने प्रिंट देखा और चौक गया फुटेज में लड़का तो साफ दिख रहा था पर लडकी ने अपना मुंह लाल हैण्ड बेग से ढक रखा था - उसके मुंह से सिटी निकल गई, - लडकी को मालूम था यहाँ सीसीटीवी लगा है और बड़ी सफाई से उसने अपना फोटो नही आने दिया, ये कौन हो सकती है ?

झाड़ियो के पीछे एक पेड़ की ओट में मयूर रागिनी की गोद मैं लेटा था, उसने कहा - जब तक बाहर रोड पर चहल पहल नही हो जाती हम यहाँ से नहीं निकल सकते, पकड़े जायेंगे, अभी पाच - छे घंटे ये झाडिया ही अपनी होटल और ये झाडिया ही अपना घर है |

रागिनी ने मयूर के बालो में हाथ फिराते हुए बोला - मयूर कैसे भी करके हमे दिल्ली पहुचना है वहा ये पुलिस वाला हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता है |

तन्यल ने उन दोनों का प्रिंटआउट अपने पास खड़े सिपाही को दिया और कहा - इसकी 1000 फोटो कॉपी करवाओ और शहर के हर कोने मैं इन दोनों के पोस्टर लगवा दो |

झाड़ियो के पीछे बैठे बैठे रागिनी एक टक मयूर को ही देख रही थी उसने सोचा - मैंने तुमको किस मुसीबत में फसा दिया मयूर, मेरे साथ साथ तुम्हारी भी जान पर बन आई है |

ऐसे ही बैठे बैठे दिन के 11 बज गये. होटल के बाहर वाली रोड पे ट्रैफिक बढ़ रहा था, मयूर ने रागिनी से कहा - ये सही समय है हमे यहाँ से निकल चलना चाहिए, हम स्टेशन जायेंगे और वहा से दिल्ली कि ट्रेन पकड़ लेंगे, पर हमे अलग अलग जाना होगा क्योकि पुलिस हम दोनों को साथ मैं तलाश रही है, अगर हम अलग अलग जायेंगे तो किसी को शक नही होगा, रागिनी ने सहमती से सर हिलाया और बोली - मैं रेलवे स्टेशन पहुच कर तुम्हारा इंतजार टिगिट खिड़की के पास करूंगी तुम वही आ जाना |

मयूर रेलवे स्टेशन पर सबसे पहले पहुचा पर वहा पुलिस वाले मुस्तेदी से गेट पे खड़े थे, उसने मुख्य गेट से अन्दर जाने की बजाय मॉल गोदाम से ही अन्दर जाना उचित समझा, वो धीरे धीरे करते मॉल गोदाम को पार कर स्टेशन के अन्दर प्लेटफार्म पे गया और फिर वहा से टिगिट खिड़की तक पहुचा, उसने अपनी जेब से पैसे निकले और उसका दिल धक् से रह गया - टिगिट खिड़की के बाहर एक थम्बे पर उसका साफ और रागिनी का लाल हैण्ड बेग से ढका फोटो लगा था, उसके मुंह से एक आह निकल गई और पहली बार उसके चेहरे पर झुंझलाहट के भाव उभरे, पुलिस बड़ी तेजी से उसके आगे आगे चल रही थी, उसको फोटो देखते, देख एक और लडके ने फोटो देखा और फिर मयूर की और देखा उसका चेहरा आश्चर्य से सफेद हो गया |

मयूर को अपने पहचाने जाने का अहसास हो गया था वो तेजी से बाहर की और बढ़ा, उसको पहचानने वाले ने इधर उधर देखा और पास खड़े पुलिस वाले के पास जाकर उसकी दिशा में इशारा किया |

मयूर स्टेशन से बाहर निकला और उसे अपने फैसले पर पछतावा होने लगा कि क्यों उसने रागिनी को अपने से अलग किया, अब वो उसे कैसे ढूंढेंगा ?

रागिनी टैक्सी से उतरी और सीधी स्टेशन के अन्दर टीगीट खिड़की पर पहुची और उसकी नजर खम्बे पर लगे मयूर और उसके पोस्टर पर पड़ी, और उसका चेहरा भय से पिला पड़ गया |

वो बाहर आई और उसने चारो तरफ नजर दौड़ाई, मयूर उसे दूर - दूर तक नही दिखाई पड़ रहा था |

उधर अपना फोटो स्टेशन में लगा देखने के बाद मयूर स्टेशन के सामने एक घटिया से रेस्तरां में कार्नर की टेबल पर लगभग छुप कर बैठ गया, उसने वेटर से एक प्लेट पोहा और चाय लाने का कहा, तभी उसकी नजर रागिनी पर पड़ी वो एक ऑटो से उतरी और तेज कदमो से चलती हुई, स्टेशन के गेट के अंदर दाखिल हो गई - वो जरुर टिगिट खिड़की के पास मेरा इंतजार करेगी पर अन्दर जाना उसके लिए खतरे से खाली नही होगा - उसने सोचा - अजीब मुसीबत है, अब क्या करू, कंही पुलिस रागिनी को पकड़ न ले |

तभी रेस्तरा में एक गरीब सा दिखने वाला लड़का आया और उसने तुड़ा मुड़ा 10 का नोट निकाल कर रेस्तरा वाले से कहा - एक प्लेट पोहा,

शायद ये लड़का स्टेशन पर ही रहता है - और उसके दिमाग में एक तरकीब सूझी
उसने लडके के पास जा कर पचास रूपये का नोट बढ़ाते हुए कहा - क्या मेरा एक काम करोगो ?

नोट देखते ही लडके के चेहरे पर चमक आ गई - क्या ? उसने पूछा

स्टेशन में टिगिट खिड़की के पास एक मेडम खड़ी होगी जिनके हाथ में लाल पर्स है, उनको बोलना मैं उनका इंतजार यहाँ कर रहा हूँ, जब तुम ये काम करके वापस आओगे तो तुम्हे ऐसा ही पचास का एक और नोट दूंगा |

लडके ने सहमती से सर हिलाया, पचास का नोट जेब में डाला और तेजी से रोड पार करके स्टेशन के गेट मैं दाखिल हुआ |
 

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