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Thriller एक खून और

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अपनी लम्बी-चौड़ी और खूब भारी एन्टीक चेयर पर बैठे क्लॉड केनड्रिक ने इतनी जोर से सांस छोड़ी कि सामने मेज पर फैले कागज फड़फड़ा गए। बेहद निराश भाव से उसने अपने दफ्तर जिसे वह रिसेप्शन रूम कहता था—में चारों ओर निगाह दौड़ाई। कमरे में एक दीवार पर समंदर की ओर झाँकती एक लम्बी-चौड़ी पिक्चर विंडो थी जिस पर कई कलाकृतियों को सजाया गया था। दफ्तर की बाकी दीवारों पर भी इसी तरह कई मूल्यवान पेंटिंग्स लटकी हुईं थीं।

क्लॉड कैनड्रिक।

पैरेडाईज ऐवन्यु पर मौजूद उस आर्ट गैलरी का मालिक क्लॉड कैन्ड्रिक। उसका खुद का व्यवहार ऐसा था कि वो अपने आप में एक अलग ही शै, एक अलग ही कैरेक्टर माना जाता था।

ऊंचा कद।

लम्बा-चौड़ा थुल-थुल शरीर और उम्र बासठ साल।

और ऊपर से वो होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक और लगा लेता था। साथ में अपने गंजे सिर को ढंकने की गर्ज से एक मिसफिट संतरी रंग की विग और पहनता था। किसी महिला से वार्तालाप के वक्त वो अक्सर अपनी उस बेहूदा विग को ऐसे उठाता था जैसे कोई अपने हैट को उठाता था।

और उसके ये अंदाज ही उसे सबसे अलग—सबसे जुदा दिखाते थे। लेकिन फिर अपने उस हास्यास्पद रखरखाव के बावजूद वो अपने धन्धे में माहिर था और एन्टीक्स, ज्वैलरी और मार्डन आर्ट का लाजवाब पारखी भी।

दुर्लभ बल्कि दुर्लभतम कलाकृतियों से भरी उसकी आर्ट गैलरी—जिसे वो कई नौकरों की मदद से चलाता था—केवल उस शहर की ही नहीं बल्कि आसपास के कई शहरों में खूब ख्यातिप्राप्त थी।

और उसकी उस हासिल ख्याति में इस एक बात का भी दखल था कि वो बेहिचक लेकिन बेहद सावधानी से चोरी की कलाकृतियों की खरीद-फरोख्त भी कर लिया करता था। उसके पास ऐसे कई साहबे दौलत, साहबे जायदाद ग्राहक थे जिन्हें दूसरी जगह मौजूद किसी खास कलाकृति को बकायदा या बेकायदा किसी भी कीमत पर अपने निजी कलैक्शन में लाने का शौक था।

बल्कि सनक थी।

पागलपन था।

ऐसे धनवान ग्राहक कैन्ड्रिक को अपनी इच्छित कलाकृति पर उसकी मांगी मनमानी कीमत अदा करते थे।

उस सुहानी सुबह अपने दफ्तर में बैठा कैन्ड्रिक अपने बिजनेस की छमाही बैलेंस शीट को बार-बार देख रहा था और निराश हो लम्बी सांसें छोड़ रहा था। उसे अपने बिजनेस में अब वो कामयाबी हासिल नहीं थी जैसी वो कभी किसी दौर में सहज ही पा लेता था। उसका बिजनेस घट रहा था और पिछले छः महीने की बैलेंस शीट उसके उस मौजूदा धन्धे में उसके रोते-धोते परफार्मेन्स की दास्तान थी।

लेकिन इसके पीछे वजह भी थी।

उसके कई दौलतमन्द कस्टमर अब मर चुके थे और नई पीढ़ी को उसके पास मौजूद उन एन्टीक्स और क्लासिकल पेंटिंग्स में कोई दिलचस्पी नहीं थी। आज की नई पीढ़ी ड्रग्स, शराब, महंगी कार और सैक्स में ज्यादा दिलचस्पी रखती थी।

उनके लिए कलात्मक वस्तुएं बोर थीं और ड्रग्स ‘इन’ चीज थी। ऐसे माहौल में कैन्ड्रिक के धन्धे को सिकुड़ना था ही और वो सिकुड़ ही रहा था।

आज वो अपने दौलतमन्द ग्राहकों की फेहरिस्त में उन नामों पर निशान लगा रहा था जो मर चुके थे और उसी प्रक्रिया में जैसे ही उसके सामने साईरस ग्रेग का नाम आया—उसने एक लम्बी आह सी भरी। वो इतना बेहतरीन ग्राहक था कि अक्सर नकली पिकासो की पेंटिंग्स के भी मुँहमांगे दाम देता था। वो बढ़िया ग्राहक था लेकिन अब उसकी मौत के बाद उसका खाता बन्द था।

कैन्ड्रिक अपने उन्हीं जिन्दा-मुर्दा ग्राहकों की लिस्ट में उलझा हुआ था कि जब उसका मुंहलगा हेड सैल्समैन लुईस भीतर दाखिल हुआ।

“डार्लिंग”—लुईस ने भीतर आते हुए कहा—“क्रिसपिन ग्रेग आया है और ऑयल पेंटिंग्स में दिलचस्पी दिखा रहा है। मुझे लगा कि तुम उससे मिलना चाहोगे।”

“हाँ जरूर।”—कैन्ड्रिक ने खुद को कुर्सी से बाहर निकाला और हजारों डॉलर की कीमत वाले बेनेटियन मिरर के सामने खड़े होकर अपना बेहूदा विग दुरुस्त किया, अपनी जैकेट को झटककर सीधा किया, दर्पण में खुद को निहारा और बोला—“किस्मत की बात है कि मैं अभी उसी के बारे में सोच रहा था।”

वह अपने दफ्तर से बाहर निकला और अपनी विशाल आर्ट गैलरी में आ गया।

वहाँ उसका एक कारिन्दा एक लम्बे दुबले-पतले ग्राहक—जिसकी पीठ कैन्ड्रिक की ओर थी—को ऑयल पेंटिंग्स काले मखमली कपड़े पर रखकर कुछ यूँ दिखा रहा था कि मानो वो पेंटिंग्स नहीं हीरे-जवाहरात हों।

“मिस्टर ग्रेग।”—कैन्ड्रिक ने संयमित स्वर में कहा।

लम्बा-पतला आदमी पलटा।

कैन्ड्रिक ने देखा कि उसके ऐश ब्लॉड बाल छोटे-छोटे लेकिन करीने से कटे हुए थे। ठीक-ठाक नयन-नक्श वाले उस आदमी का भावहीन पीला चेहरा ऐसा था कि मानो सालों से सूरज के दर्शन न किए हों।

कैन्ड्रिक हड़बड़ा सा गया।

उसने मिस्टर ग्रेग के पिता के साथ कई डीलिंग्स—बड़ी कामयाब डीलिंग्स—की थीं और उसी रूप में उसे अब जूनियर ग्रेग से वैसे ही व्यक्तित्व की उम्मीद थी।

लेकिन ये ‘मिस्टर’ जूनियर ग्रेग एक अलग शख्सियत के मालिक थे जो उसके पिता से कतई मैच नहीं करती थी।

“वैल”—कैन्ड्रिक ने बोलना शुरू किया—“मेरा नाम क्लॉड कैन्ड्रिक है और आपके स्वर्गवासी पिता भी मेरे बढ़िया ग्राहकों में थे। आपको आज यहाँ देखकर दिल खुश हो गया।”

क्रिसपिन ने सिर हिलाया।

केवल सिर हिलाया—कहा कुछ नहीं।

न चेहरे पर कोई मुस्कुराहट उभरी, न उसने हाथ मिलाने का कोई उपक्रम किया।

लेकिन कैन्ड्रिक निराश न हुआ।

उसे अपने दौलतमन्द ग्राहकों के ऐसे सर्द व्यवहार को बर्दाश्त करने का लम्बा तजुर्बा था।

“मैं सिर्फ कुछ ऑयल पेंटिग्स लेने आया था।”—क्रिसपिन ने कहा।

“मुझे यकीन है कि आपकी जरूरत की हर चीज आपको यहाँ हमारे पास मिलेगी मिस्टर ग्रेग।”

“श्योर”—कहकर क्रिसपिन पुनः पलटा और अपनी पसंद की पेंटिंग्स की ओर इशारा करते हुए बोला—“ये, ये और ये—इन सभी को पैक कर दो।”

“अवर प्लेजर सर”—सैल्समैन ने सिर नवांकर कहा और उन पेंटिंग्स को उठाकर काऊण्टर के दूसरे सिरे पर जाकर पैकिंग में लग गया।

“मिस्टर ग्रेग”—कैन्ड्रिक ने चिकने-चुपड़े स्वर में कहा—“मैं जानता हूँ कि आप खुद एक कलाकार हो लेकिन फिर भी भारी अफसोसजनक बात है आप पहले कभी हमारे यहाँ तशरीफ नहीं लाए। इस बात के बावजूद नहीं लाए कि आपके पिता के साथ हमारे बड़े मधुर संबंध थे और उनकी डिमाण्ड की गईं कई कलाकृतियों का हमने ही इंतजाम किया था।”

“मैं एक आर्टिस्ट हूँ लेकिन मुझे केवल अपनी खुद की कला, खुद के बनाए आर्ट में ही दिलचस्पी है।”—क्रिसपिन ने दो टूक स्वर में कहा—“किसी दूसरे फनकार की आर्ट में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं।”

“जी हाँ जरूर-जरूर”—कैन्ड्रिक यूँ मुस्कुराया जैसे कोई बड़ी मछली अपनी खुराक बनने जा रही किसी छोटी मछली को देखकर मुस्कुराती होगी—“आपके रोशन ख्याल वाकई किसी सच्चे कलाकार के हैं और मुझे बेहद खुशी होगी अगर कभी आपकी बनाई पेंटिंग्स को देखने का मौका हासिल हो सके। मेरी अभी हाल ही में मशहूर आर्ट क्रिटिक लोबेनस्टन से बात हुई थी तो उसने भी मुझे बताया था कि आपकी माँ ने उससे आपके आर्ट वर्क के बारे में सलाह-मशवरा किया था। लोबेनस्टन एक कला पारखी है और इस धंधे में उस जैसी आँख किसी और की नहीं।” जबकि असलियत यह थी कि कैन्ड्रिक की नजरों में लोबेनस्टन एक बेकार, नातजुर्बेकार और आर्ट को परखने में अनाड़ी था—“और उसने मुझे बताया था कि कैसे तुम्हारी बनाई कई पेंटिंग्स अपने आप में एक बेजोड़ आर्ट वर्क हैं।”

यह भी एक झूठ था।

सफेद झूठ।

क्योंकि लोबेनस्टन ने तो उल्टा उसे ये कहा था कि क्रिसपिन का आर्ट बेहूदा था जिसकी कोई कमर्शियल वैल्यू नहीं थी। बाजार में उसकी पेंटिंग्स की कुल बख़त, कुल औकात कुछ कौड़ियों से ज्यादा नहीं थी।

“उसने कहा था कि”—कैन्ड्रिक ने आगे कहा—“आपका टैलेन्ट, आपकी कल्पना और क्रियेटिव आईडियाज अनोखे, अद्भुद और हैरान कर देने वाले हैं। आपके आर्ट वर्क में जिस तरह रंगों का सम्मिश्रण उभरकर आता है वह यूनिक है, बेजोड़ है जो न सिर्फ विलक्षण है बल्कि देखने वाले को एक अलग ही दुनिया में ले जाने का माद्दा रखता है। अब ऐसे धुरन्धर आलोचक की बात सुनने के बाद तो मेरी खुद की बड़ी तमन्ना थी कि कभी आपसे मुलाकात हो तो मैं आपको आपकी उस आर्ट-वर्क को प्रमोट करने का ऑफर दे सकूँ।”
 
क्रिसपिन खुश हो गया।

“बल्कि मिस्टर ग्रेग”—कैन्ड्रिक ने गर्म लोहे पर चोट की—“मैं तो चाहता हूँ कि अपनी इस आर्ट गैलरी—जिससे बढ़िया यहाँ पैसेफिक में कोई और आर्ट गैलरी नहीं है—के जरिए मैं आप की पेंटिंग्स की बकायदा एक प्रदर्शनी, एक एक्जिबिशन लगाऊँ। ये मेरे लिए, मेरी इस आर्ट गैलरी के लिए इज्जत अफजाई की बात होगी कि हम आपके जैसे यूनिक और स्टैण्ड अलोन आर्टिस्ट को प्रमोट करने में अपनी भूमिका निभा सकें। प्लीज—अब आप मना मत करना।”

“ओह,”—क्रिसपिन ने कहा—“मेरी कृतियाँ, मेरी सारी पेंटिंग्स एक अलग स्तर की हैं जो अपने आप में खास हैं।”

क्रिसपिन उत्तेजित हो चुका था।

उसे पता था कि उसकी माँ ने लोबेनस्टन से उसकी बनाई पेंटिंग्स की बाबत जिक्र किया था लेकिन उसकी बनाई पेंटिंग्स इतनी जोरदार थीं ये उसने आज पहली बार जाना था। यकायक उसे अहसास हुआ कि उसे भी खुद को एक प्रतिष्ठित पेंटर के तौर पर पब्लिसाईज करना चाहिए। उसके पास अपनी बनाई उन गुप्त खौफनाक पेंटिंग्स के अलावा भी ऐसी ढेरों पेंटिंग्स थीं जिन्हें वो इस प्रमोशन ईवेन्ट में दे सकता था।

लेकिन उसकी पेंटिंग्स अलग थीं—और अगर किसी ने उसकी उन पेंटिंग्स को न समझा तो?

उसे हिचकिचाहट में पड़ा देखकर कैन्ड्रिक ने चिकने चुपड़े स्वर में कहा—“आप चिन्ता मत करो मिस्टर ग्रेग। लोबेनस्टन जैसे कड़क कला पारखी से चूक नहीं होने वाली और अगर वो आपकी पेंटिंग्स की तारीफ करता है तो यकीनन उनमें कोई तो बात होगी ही। आप बस एक्जिबिशन के लिए एक बार हाँ बोल दो—बाकी मेरे ऊपर छोड़ दो।”

“लेकिन....”—क्रिसपिन हिचकिचाया।

“लेकिन-वेकिन कुछ नहीं”—कैन्ड्रिक ने कहा—“और सोचो कि अगर ऐसे ही हमारे मार्डन आर्टिस्ट शर्म और संकोच में ही पड़े रहते तो इस दुनिया में उनका आर्ट वर्क कभी लाईट में आया ही न होता।”

“वैल मुझे लगता है कि चूँकि मेरी बनाई पेंटिंग्स एक अलग जोनर की हैं तो दुनिया उन्हें आसानी से स्वीकार नहीं करेगी। मेरी पेंटिंग्स बहुत एडवान्स्ड हैं, अपने वक्त से बहुत आगे हैं सो….शायद उन्हें पसंद न किया जाए, शायद आगे कभी….खैर....मैं इसके बारे में सोचूँगा।”

कैन्ड्रिक को लगा मछली फंसने ही वाली थी।

“मैं आपकी भावनाओं की तहेदिल से कद्र करता हूँ।”— उसने और चारा फेंका—“लेकिन आप मुझे अपनी कला को सराहने का सौभाग्य दो मिस्टर ग्रेग। और कुछ नहीं तो एक— सिर्फ एक—पेंटिंग दे दो। मैं उससे अपनी पिक्चर विन्डो की शान बढ़ाऊँगा और वादा करता हूँ कि इस बाबत गंभीर रहूँगा। एक नए कलाकार, वो भी तुम्हारे जैसा काबिल और अद्भुद कलाकार, को दुनिया के सामने पेश करने का मौका मुझे दो। सिर्फ एक पेंटिंग दे दो।”

क्रिसपिन सोचने लगा।

उसकी पेंटिंग्स खास थीं, अलग थीं और पैराडाईज शहर के बेवकूफ लोगों की जहनी समझ से कहीं ऊपर की चीज थीं।

और ऐसे निखद बेवकूफ लोग उसकी बनाई पेंटिंग्स को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

लेकिन फिर भी ....।

एक—सिर्फ एक—पेंटिंग की ही तो बात थी।

उसने फैसला कर लिया।

“ठीक है—किसी को मेरे घर भेज देना। मैं अपनी बनाई कोई एक पेंटिंग दे दूँगा लेकिन इस शर्त पर कि उस पेंटिंग पर न तो मेरे ऑथराईज्ड साईन होंगे और न ही तुम कभी यह खुलासा करोगे कि उसे मैंने बनाया है। अगर किसी ने उसमें दिलचस्पी न दिखाई तो तुम मुझे वो पेंटिंग लौटा देना लेकिन अगर किसी ने उसे खरीदा लिया तो मैं आपकी एक्जिबिशन के लिए अपनी बनाई और पेंटिंग्स भी दे दूँगा।”

“अफकोर्स मिस्टर ग्रेग—मुझे खुशी है कि आपने मेरी बात रख ली।”

“लेकिन शर्त याद रखना—कि किसी को भी इस बात का पता नहीं लगना चाहिए कि उस पेंटिंग को मैंने बनाया है। वह हमेशा एक अननोन, अज्ञात, आर्टिस्ट की पेंटिंग रहेगी। समझ गए?”

क्रिसपिन ने अपनी धुंधली-सी आँखों में ऐसे भाव उभारे कि मोटे कैन्ड्रिक के शरीर में सिरहन सी दौड़ गई।

“मैं समझ गया मिस्टर ग्रेग”—वो बोला—“यकीन करो— ऐसा ही होगा। और अगर तुम्हें कोई दिक्कत न हो तो मैं आज दोपहर बाद ही अपना आदमी तुम्हारे यहाँ भेज देता हूँ।”

तभी सैल्समैन क्रिसपिन की खरीदी पेंटिंग्स पैक कर लाया।

“हाँ भेज देना।”—क्रिसपिन ने पैकेट पकड़ते हुए कहा—“और इसका बिल भी भेज देना।”

“जी जरूर।”—कैन्ड्रिक ने मुस्कुराकर कहा।

क्रिसपिन ने अपना पैकेट संभाला और बाहर की ओर चल दिया।

उस विशाल गैलरी में मौजूद कई बेजोड़ कलात्मक चीजों पर निगाह दौड़ाते हुए वह आगे बढ़ रहा था कि तभी यकायक वो एक छोटे से बॉक्स के आगे ठिठका और उसमें मौजूद मखमल के कपड़े पर रखी चीज को देखने लगा।

उसने गौर से उस चीज को देखा लेकिन समझ न सका कि आखिरकार वो क्या थी।

वो वस्तु, वो चीज—एक चार इंच लम्बी चाँदी की एक पतली बारीक छुरी जैसी चीज थी जिस पर नक्काशी की गई थी। उसमें माणिक और पन्ने जड़े थे और उसे एक बारीक चाँदी की महीन तारों वाली चेन में पिरोया गया था।

“ये क्या है?”—क्रिसपिन ने पूछा।

“पैन्डेन्ट या लॉकेट जैसी ज्वैलरी है और आजकल इसका खूब फैशन है।”

“ऐसी क्या खूबी है इसमें?”

“यह दरअसल उस पैन्डेन्ट की हू-ब-हू नकल है जिसे महान सुलेमान अपनी आत्मरक्षा के लिए पहनता था। वैसे यह दुनिया का सबसे पहला चाकू है जो स्विच ब्लेड—ऐसा जिसके खटका दबाते ही ब्लेड बाहर निकल आए—टैक्नोलोजी का इस्तेमाल हुआ था।”

“स्विच ब्लेड नाईफ।”—क्रिसपिन की आँखें सकुचाईं और उसने उसे उठाकर देखा।

“अपने वक्त में सुलेमान ने इसे पहना था और कहा जाता है कि इसने उसकी जान भी बचाई थी। बड़ी ही लाजवाब चीज है। मैं अपने सेल्समैन से इसको ठीक से दिखाने को कहता हूँ।”— कहकर कैन्ड्रिक ने अपने सेल्समैन को आवश्यक निर्देश दिए।

सेल्समैन ने चाँदी की चेन में झूलते हुए पैन्डेन्ट को उठाया और बड़ी नजाकत-नफासत के साथ अपने गले में डाल लिया। इससे वो चमचमाता पैन्डेन्ट उसकी छाती पर झूलने लगा।

“देखा आपने कितनी उम्दा आईटम है।”—कैन्ड्रिक ने पैन्डेन्ट को हाथ में लेते हुए कहा और उसके ऊपरले सिरे पर लगा एक मणिक दबा दिया।

तत्काल एक पतले फल वाला चाकू उस पैन्डेन्ट में से बाहर निकला।

“दुनिया का सबसे पहला स्विच ब्लैड नाईफ”—कैन्ड्रिक ने गर्व से कहा—“बेहद खतरनाक और ब्लेड से भी पैना—लाजवाब और अद्भुद।”

क्रिसपिन ने चार इंच लम्बे उस चमचमाते फल को गौर से देखा। उत्तेजना की एक तेज लहर उसके जिस्म से गुजरती चली गई। यह एक बेहतरीन चीज थी और इसे उसके पास होना ही चाहिए था।

“क्या कीमत है इसकी?”—उसने पूछा।

“बेमिसाल क्लासिक एन्टिक आईटम अमूल्य होते हैं मिस्टर ग्रेग”—कैन्ड्रिक ने मुस्कुराकर कहा—“लेकिन चूँकि हर शै की एक मार्केट प्राईस होती है सो इसकी भी है।”

“कितनी?”

“पचास हजार डॉलर….लेकिन आप चूँकि हमारे लिए खास ग्राहक हैं तो आपके लिए इसकी कीमत है सिर्फ चालीस हजार डॉलर।”

“ये मुझे दे दो”—क्रिसपिन ने सेल्समैन से कहा और कैन्ड्रिक की ओर देखकर पूछा—“क्या मैं इसे पहनकर देख सकता हूँ।”

“बिल्कुल मिस्टर ग्रेग। अब तो ये आपकी चीज है।”

क्रिसपिन ने पैन्डेन्ट से बाहर निकले चाकू के सिरे को दबाया तो वो दोबारा पैन्डेन्ट में भीतर चला गया। क्रिसपिन ने उसे सेल्समैन के गले से निकाला और अपने गले में डालकर वहीं रखे एक शीशे के सामने जा खड़ा हुआ।

उसने खुद को उसमें निहारा।

वाकई कमाल की चीज थी।

उधर कैन्ड्रिक मन ही मन चकित था।

वो एक नकली, एक डुप्लिकेट चीज थी लेकिन उसका ये कहना सच था कि उस पैन्डेन्ट का असली आईटम वाकई सुलेमान दी ग्रेट पहना करता था। कैन्ड्रिक ने एक कलर पेन्टिंग में इसे देखा था और कुल मिलाकर केवल तीन हजार डॉलर में एक होनहार सुनार से उसकी हूबहू नकल तैयार करवा ली थी।

केवल तीन हजार डॉलर में तैयार हुई वो नकल अब चालीस हजार डॉलर की कीमत में जा रही थी।

जा चुकी थी।

उधर क्रिसपिन ने पैन्डेन्ट पर लगे रूबी को दबाया तो पतले फल वाला चाकू फिर बाहर उछल आया।

“जरा ध्यान से मिस्टर ग्रेग”—कैन्ड्रिक ने व्याकुलता से कहा—“चाकू का फल तीखा है।”

क्रिसपिन ने अपने सिर को हाँ में हिलाया और चाकू को दोबारा पैन्डेन्ट में डाल लिया। वो संतुष्ट था।

उसने पलटकर कैन्ड्रिक की ओर देखा। उसकी आँखों में उस वक्त कुछ ऐसे भाव थे जिसे कैन्ड्रिक समझ तो नहीं पाया लेकिन वह यकायक बेचैनी-सी महसूस करने लगा था।

“मैं इसकी कीमत—चालीस हजार डॉलर—दूँगा”—क्रिसपिन बोला—“बिल भेज देना।”

“जी जरूर।”

क्रिसपिन ने आगे कुछ भी कहे बगैर बाहर की ओर कदम बढ़ा दिए। पैन्डेन्ट—अपनी किस्म का वो अनोखा, अद्भुद और लाजवाब पैन्डेन्ट—उसकी छाती पर झूलता चला गया।

इस पूरे वक्त लुईस जो मूक दर्शक बना सारा वार्तालाप देख रहा था, अब वो कैन्ड्रिक के पास आया।

“कमाल कर दिया”—लुईस ने मुस्कुराकर कहा—“तुम तो कमाल के सेल्समैन हो।”

“छोड़ो वो किस्सा।”—कैन्ड्रिक ने कहा—“उस आदमी में कुछ अजीब सी बात है जो मुझे परेशान कर रही है और ये परेशानी सैंतीस हजार डॉलर के मुनाफे के मुकाबले कहीं ज्यादा है।”

“ऐसा क्या है उसमें?”—लुईस ने हैरान होते हुए पूछा।

“पता नहीं….”—कैन्ड्रिक बोला—“खैर—तुम आज दोपहर बाद मिस्टर ग्रेग के यहाँ चले जाना और उससे उसकी बनाई कोई पेन्टिंग ले आना। हम उसे यहाँ अपनी पिक्चर विन्डो में लगाएंगे। हालाँकि बजाते खुद उस बेवकूफ क्रिटिक लोबेनस्टन के मुताबिक ग्रेग की आर्ट वाहियात है जिसकी कोई कमर्शियल वैल्यू नहीं है लेकिन फिर भी—चूँकि अब वो हमारा मुअज्जिज ग्राहक हो चुका है—तो मैं भी खुद उसकी आर्ट देखना चाहता हूँ।”

“ठीक है।”—लुईस ने कहा और वहाँ से हट गया।

पीछे कैन्ड्रिक अकेला खड़ा कुछ सोचता रहा।

क्रिसपिन के चेहरे पर उभर रहे अजीब से खौफनाक भाव ने उसे पता नहीं क्यों बेचैन कर दिया था।

उसने एक लम्बी सांस खींची, अपने मन में उभर रहे इन ख्यालों को झटका और अपने रिसेप्शन रूम की ओर लौट गया।

¶¶
 
पुलिस हैडक्वार्टर्स में एक सौ सत्तर टेलिफोन कॉल्स और अठारह आदमियों के खुद आकर कोई जानकारी शेयर करने के बाद पैराडाईज सिटी के बाशिन्दों की अब गोल्फ बॉल जैकेट में यकायक दिलचस्पी खत्म हो गई।

लेकिन टी.वी. शो पर उस जैकेट के दिखने के बाद जो भी सूचनाएँ पुलिस को हासिल हुई थीं उन पर गौर करना जरूरी था।

सुबह के आठ बजे लेपस्कि, जैकोबी और लुकास अपनी मेज पर बैठे इसी काम पर लगे थे। इन सूचनाओं में किसी क्लू—किसी सुराग की तलाश करते-करते उन्हें दस बज गए।

लेकिन उनकी तमाम कोशिशों का नतीजा सिफर था।

खूब माथा-पच्ची करने के बावजूद आगे बढ़ने का कोई रास्ता, कोई कारगर क्लू उन सूचनाओं में नहीं था।

“ओके लुकास”—लेपस्कि अपनी कुर्सी से उठते हुए बोला—“तुम एक बार फिर उन दो आदमियों के पास जाओ जो साल्वेशन आर्मी के लिए घरों से चीजें हासिल करने का काम करते हैं। हालाँकि क्रेडाक तो अपने पिछले बयान पर अटल है लेकिन हो सकता है कि दूसरा—या फिर दोनों ही—झूठ बोल रहे हों सो उन दोनों को एक बार फिर टटोलो, और हाँ, इस बार जरा प्रेशर डालकर बात करना।”

लुकास ने सहमति सूचक सिर हिलाया और दफ्तर से बाहर निकल गया।

उसके जाने के बाद लेपस्कि, जैकोबी से गपशप करने लगा। उसी गपशप में ही ये एक मसला उठा कि परसों कैरोल के जन्मदिन पर लेपस्कि उसे क्या तोहफा दे। दोनों ने इस मुद्दे पर बातचीत में कई आईटम सोचे, फाईनल किए, फिर कैंसिल किए और अन्ततः एक हैण्डबैग पर एकराय हुए। जैकोबी के ख्याल से एक बढ़िया सा हैण्डबैग जन्मदिन का माकूल तोहफा था।

“वैसे अगर तुम दोनों अपनी ये फालतू की बकवास बन्द करो तो मैं भी कुछ कहना चाहूँगी।”—एक आवाज, नारी कंठ से निकली मधुर खनकती और कशिश भरी आवाज ने दोनों को उस दिशा में पलटकर देखने को मजबूर कर दिया।

पुलिस हैडक्वार्टर्स में बने उनके उस दफ्तर में, जहाँ मिलने आने वालों को रोकने के लिए तमाम इंतजामात किए गए थे—अब वहाँ उसी दफ्तर में उन दोनों पुलिस अफसरों के सामने एक नीग्रो लड़की खड़ी हुई थी।

दोनों अफसर ठगे से उसे देखते रहे, फिर पहले लेपस्कि उठा और उसने आगे बढ़ती उस लड़की को गौर से देखा।

बेशक वो नीग्रो थी लेकिन उसकी रंगत कॉफी मिली क्रीम जैसी थी। ऊँचा लम्बा इकहरा खिंचा तना कद जिस पर बॉडी फिट टाईट लिबास।

ऐसा कि जिसमें युवती के शरीर की सारी बनावट, सारे खम साफ नुमायाँ थे।

ऊपर से तीखे नैन नक्श, छोटी पतली नाक, गोल नथुने, खूब बड़ी आकर्षक काली आँखें और खूबसूरत होंठ।

हर तरह से खूबसूरत, हर ओर से लाजवाब।

ईमान बिगाड़ देने के हद तक हाहाकारी।

“यस मैडम?”—लड़की की काली आँखों में झाँकते हुए लेपस्कि ने कहा तो उसे अहसास हुआ कि शादीशुदा होते हुए भी वो उसकी ओर आकर्षित हो रहा था।

हो चुका था।

नहीं होना चाहिए था लेकिन हो चुका था।

“मैं दरअसल पिछली रात टी.वी. शो पर दिखाई गई उस जैकेट के सिलसिले में यहाँ आई हूँ।”—लड़की ने अपनी मोहक आवाज में कहा।

“आओ”—लेपस्कि ने लड़की से कहा और गौर किया कि जैकोबी अपने स्थान पर बैठा उसे ही घूर रहा था—“बैठो।”

लड़की आगे बढ़ी और लेपस्कि के बराबर से गुजरती हुई वहाँ बिछी विजिटर्स चेयर पर जा बैठी। उसने अपना हैण्डबैग खोला और सिगरेट का पैकेट निकालकर उसमें से एक सिगरेट खींच ली। लेपस्कि फौरन माचिस के लिए अपनी जेबें टटोलने लगा लेकिन इससे पहले कि वो अपने कपड़ों में से माचिस बरामद कर लड़की की सिगरेट सुलगा पाता, वो लड़की पहले ही ठोस सोने के बने लाईटर से अपनी सिगरेट सुलगा चुकी थी।

अपने मनोभावों को काबू में रखने की जद्दोजहद करता लेपस्कि मेज के पीछे अपनी कुर्सी पर आन बैठा। अपने तजुर्बे की बिना पर वो कह सकता था कि लड़की खूब खेली खाई हुई थी जो अपने आगे किसी पुलिसवाले को चाहे वो फर्स्ट ग्रेड का अफसर ही क्यों न हो—कुछ नहीं समझती थी।

लेकिन लड़की के बारे में ऐसे ख्यालातों के बावजूद वो उसे न केवल ताड़ रहा था बल्कि बद्तमीजी की हद तक ताड़ रहा था।

“क्या मैं तुम्हारा नाम जान सकता हूँ मिस….”—उसने पूछा और नोट बनाने की गरज से एक पैड अपनी ओर खींच लिया।

“डोरोलेस हर्नान्देज़”—वो बोली—“165, सी फ्रन्ट एवेन्यू। अपनी अफ्रीकी मूल की माँ और एक हरामखोर स्पेनिश मूल के फैक्ट्री मालिक के संबंधों का नतीजा थी मैं और इसीलिए मैंने जानबूझकर आज भी उस आदमी का नाम अपने साथ चिपका रखा है।”

“ओके….”—लेपस्कि ने उसके सफेद चमचमाते दाँतों को देखते हुए कहा और पूछा—“तो तुम्हारी बैकग्राउण्ड में ये कहानी है।”

“है तो यही—लेकिन तुम आगे कुछ और पूछना चाहते हो तो पूछ लो, मैं बता दूँगी।”

लेपस्कि ने गहरी साँस ली।

सी फ्रन्ट एवेन्यू।

वो जानता था कि वो जगह शहर की ऊँची, महँगी, बेहद, हाईक्लास एस्कोर्ट्स का ठिकाना था। ऐसी लड़कियाँ जो पैरेडाईज सिटी के दौलतमन्दों को उनकी दौलत के बदले एन्टरटेन किया करती थीं। लेकिन इस जानकारी ने भी उस लड़की के बारे में लेपस्कि के ख्यालों में कोई तब्दीली न की।

वो अपनी उस स्टेटस के बावजूद आकर्षक थी।

“तुम्हारे पास उस जैकेट की बाबत कोई खबर है?”—लेपस्कि ने संयत स्वर में पूछा।

“वैल—हो भी सकती है और नहीं भी।”—वो बोली।

“क्या मतलब?”—लेपस्कि ने हैरान होते हुए पूछा।

“मतलब ये मिस्टर ऑफिसर कि मैं नहीं जानती कि मेरे पास कहने के लिए जो बात है वो आपके और आपके महकमे के लिए किसी जानकारी का दर्जा रखती भी है या नहीं।”

“हूँ”—लेपस्कि ने कहा—“मैं समझ गया, कहिए आपको क्या कहना है?”

“मामला दरअसल पिछली रात का है”—डोरोलेस ने कहा—“कल रात मेरे एक दोस्त ने मेरे पास आना था लेकिन पता नहीं क्यों वो आया नहीं। अब ऐसे में पीछे अपने घर में अकेली बैठी बोर हो रही थी और इसीलिए मैंने टी.वी. ऑन कर लिया था।”

“हूँ”—लेपस्कि बोला—“तो इसका मतलब तुमने टी.वी. पर जैकेट देखी….ठीक है।”

“हाँ”—वो मुस्कुराकर बोली—“टी.वी. ऑन करके मार्टिन की चुस्की लेते हुए, मैं उसमें अपना ध्यान लगाने की कोशिश करती रही थी। वैसे भी टी.वी. देखना एक बोर काम है और इसलिए आमतौर पर मैं टी.वी. नहीं देखती।”

“अपना-अपना ख्याल है।”—लेपस्कि ने उसकी कातिल मुस्कुराहट को नजरअंदाज कर काम पर ध्यान लगाने की कोशिश करते हुए कहा।
 
“वैसे मुझे लगता है आपको शायद स्कॉच पसंद होगी।”

“वैल”—लेपस्कि जो बड़ी मुश्किल से अपना ध्यान सामने बैठी लड़की के शारीरिक सौंदर्य से हटाकर उसकी कही बात में लगा रहा था, अब परेशान होने लगा था।

सामने बैठी लड़की का फिगर, उसकी खूबसूरती उसके होशो-हवास उड़ा रहे थे।

उड़ा चुके थे।

“वैल—मिस डोरोलेस”—लेपस्कि ने अपने मन में उमड़ते भड़कते ख्यालों के भावों को अपने चेहरे पर आने से रोका और कहा—“तो आप अकेली थीं और टी.वी. देख रही थीं।”

“हाँ—और उसे देखते ही मुझे याद आया”—उसने गर्दन घुमाकर जैकोबी की ओर देखा और बोली—“वो आपका दूसरा साथी काफी दमदार लगता है।”

“जी हाँ”—लेपस्कि गुर्राया—“और इसकी खुद की माँ को भी यही खुशफहमी थी। लेकिन वो सब छोड़ो और काम की बात करो।”

“ऑफिसर—आप मुझे मेरे नाम—डोरोलस—से बुला सकते हैं।”

लेपस्कि इस बात को गनीमत समझ रहा था कि उसके सामने मेज के दूसरी ओर बैठी डोरोलस उसे उन दोनों के बीच बिछी मेज की वजह से पूरा नहीं देख पा रही थी। लेपस्कि का निचला भाग मेज की आड़ में था और यूँ वहाँ मचती हलचल—डोरोलस की आँखों से—छुपी हुई थी।

“ठीक है डोरोलस”—लेपस्कि ने नियंत्रित लहजे में कहा—“तो तुम्हें टी.वी. देखते समय क्या याद आया?”

“मुझे याद आया कि वो जैकेट मैंने पहले भी कहीं देखी थी। दरअसल वो जैकेट है ही ऐसी कि एक बार देख लेने के बाद उसे आसानी से भुलाया ही नहीं जा सकता।”

“कब देखी तुमने वो जैकेट?”

“कब देखी....?” बोलते हुए उसने कुछ इस अंदाज में अपना पहलू बदला कि लेपस्कि की हालत बद् से बद्तर हो गई—“….पाँच तारीख को।”

पाँच तारीख।

लेपस्कि को याद था कि इसी तारीख को शाम पाँच बजे जेनी का कत्ल हुआ था।

“तारीख की बाबत क्या तुम्हें पक्का यकीन है कि उस रोज पाँच ही थी?”

“हाँ—मुझे बखूबी ध्यान है। उसी रोज मेरे पालतू कुत्ते जेमी का जन्मदिन था सो मैं उसे अपने साथ घुमाने ले गई थी। वैसे तुम्हें भी कुत्ते पसन्द हैं न ऑफिसर?”

लेपस्कि ने अपनी खीज दबाई।

उसे कुत्तों से सख्त नफरत थी।

“आप अपने कुत्ते को बाहर किस वक्त ले गई थीं?”

“लंच के वक्त”—वो बोली—“मैं जेमी का बड़ा ख्याल रखती हूँ और वही मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। जब मैं थकी हारी अपने घर पहुँचती हूँ तो पीछे वही मेरा इंतजार करता है। मेरे आते ही मुझ पर छलांग लगाने लगता है.... ही इज़ सो स्वीट यू नो?”

“हूँ….तो आप अपने कुत्ते को लंच के वक्त बाहर लेकर गई थीं….फिर आगे क्या हुआ।”

“वैल—” उसने मुँह बनाते हुए जवाब दिया—“आगे ये हुआ कि एक आदमी मेरे पास आया और तुम जानते ही हो कि मेरे पास आदमी आते रहते हैं।”—अपना आखिरी फिकरा उसने इस हरकती अंदाज में कहा कि लेपस्कि गड़बड़ा गया।

वो अंदाजा लगा सकता था कि उसका क्या मतलब था। अगर वो शादीशुदा न होता तो यकीनन खुद भी उसके पास पहुँच गया होता।

“जिस आदमी की तुम बात कर रही हो उसने वही जैकेट पहनी हुई थी?”—लेपस्कि ने बामुश्किल अपनी भावनाओं को काबू किया और पूछा।

“अरे नहीं”—डोरोलेस ने कहा—“उसने नहीं।”

“लेकिन अभी तो तुमने कहा कि उसने वो जैकेट पहनी हुई थी।”

“मैंने कहा?—मैंने ऐसा कब कहा?”

“अभी तो कहा—यहीं मेरे सामने कहा।”

“नहीं कहा।”

“अरे—आपने अभी कहा।”

“ऑफिसर”—डोरोलेस ने अपने हाथ हवा में उछाले— “अगर आप यूँ ही मुझे हलकान करेंगे तो मुझे लगेगा कि मैंने यहाँ आकर शायद गलती कर दी है।”

“लेकिन....।”

“प्लीज ऑफिसर, मेरी बात को समझिए।”

“ओके….”—लेपस्कि ने एक लम्बी साँस खींची और कहा—“बोलिए क्या बोलना चाहती हैं आप?”

“शुक्रिया”—उसने मुस्कुराकर कहा और आगे बोली— “दरअसल उस रोज जब मैं अपने कुत्ते जैनी को लंच के वक्त अपने साथ बाहर ले गई थी तो रास्ते में एक आदमी ने मुझे अप्रोच किया था।”

“ओके”—लेपस्कि बोला।

“वो आदमी बेहूदा था, घटिया था लेकिन अब चूँकि उसने मुझे अप्रोच किया था सो मैं उससे बातचीत करने लगी। इसी वक्त जैमी को भी हाजत, नेचर कॉल, हुई—सो वो वहीं साईड में अपने काम पर लग गया।”

“हूँ”—लेपस्कि ने नियंत्रित लहजे में कहा—“आगे।”

“आगे ये कि ठीक उसी वक्त, ऐन वही जैकेट पहने एक दूसरा आदमी वहाँ हमारे पास से गुजरा था।”

“अच्छा….”—लेपस्कि सावधान हो गया—“आगे, आगे क्या हुआ?”

“वो एक सजा संवरा आदमी था, ऐन मेरी पसंद का।”

“मैं समझ गया”—लेपस्कि बोला और उसे वापिस ट्रेक पर लाने के मकसद से पूछा—“वो आदमी दिखने में कैसा था?”

“मैंने उसका चेहरा नहीं देखा था।”

“कद? उसका कद कैसा था—ऊँचा, ठिगना या बीच का सा?”

“ऊँचा।”

“कितना ऊँचा?”—लेपस्कि खड़ा होता हुआ बोला—“मेरे जितना?”

“तुमसे भी ऊँचा….”—उसने तीखी निगाहों से लेपस्कि को घूरा—“हालाँकि तुमसे कोई बहुत ज्यादा ऊँचा नहीं था, लेकिन था ऊँचा ही।”

“और उसकी शारीरिक बनावट कैसी थी—मोटा, पतला, दरम्याना?”

“उसके कंधे चौड़े और कूल्हे पतले।”

“कोई हैट वगैरह पहने था?”

“नहीं….उसके बाल छोटे-छोटे कटे हुए थे।”

“कद की बाबत कोई अंदाजा?”

“करीब छः फीट।”

“उसका लिबास।”—लेपस्कि ने उत्सुकतापूर्वक पूछा।

“जैकेट से मैच करती हल्की नीली पतलून और पैरों में गुक्की के जूते थे।”

“उसकी चाल वगैरह में कोई खास बात नोट की?”

“वैल….”—डोरोलेस ने सोचते हुए कहा—“कुछ खास नहीं। बस यही कि उसके कदम लम्बे-लम्बे पड़ रहे थे।”

उसने सोचने के अंदाज में अपनी उंगलियों को अपने होठों पर ठकठकाया और उसकी इस हरकत से लेपस्कि की हालत एक बार फिर गड़बड़ा गई।

इस लड़की से पूछताछ करना किसी साधारण डिटेक्टिव के वश की बात नहीं थी।

“अच्छा डोरोलेस”—लेपस्कि ने आगे पूछा—“कोई और खास बात जो तुम्हें याद आती हो?”

“वैल”—वो बोली—“उसके हाथ किसी कलाकार, किसी आर्टिस्ट की तरह थे….और उंगलियाँ ऐसी कि मानो किसी पेन्टर की हों।”

“क्या वो अपने रख-रखाव से अमीर लग रहा था?”

“हम्म….वैसे ऐसा अमीर भी नहीं दिख रहा था कि लेकिन हाँ फिर भी अच्छा-खासा खाता-पीता तो यकीनन था।”
 
“हम्म”—लेपस्कि ने कुछ सोचते हुए कहा।

“वैल—ऑफिसर मुझे अब देर हो रही है, सो क्या ही बेहतर हो कि आप मुझे जरा जल्दी फारिग कर दें।”

“फारिग! जल्दी क्यों।”—लेपस्कि ने हैरानी से पूछा।

“….वो इसलिए मिस्टर ऑफिसर कि मेरे प्यारे जैमी को, जो पीछे घर पर अकेला है, अब पेशाब की हाजत लग रही होगी।”

“तो उसमें आपका क्या रोल है? वो अपना काम—ये काम— तो खुद ही करता होगा?”—लेपस्कि ने शैतानी भरे लहजे में पूछा।

“जी हाँ—वो अपने सारे काम खुद ही कर लेता है लेकिन मैं नहीं चाहती कि इस प्रक्रिया में वो पूरे घर में अपने हाजत के निशान छोड़ता फिरे….सो, यू नो वॉट आई मीन।”

“ओ—हाँ….हाँ”—लेपस्कि ने मुस्कुराकर कहा।

उसने चंद और सवाल किए जिसका नतीजा सिफर रहा। वो समझ गया कि उस लड़की के पास बताने के लिए कुछ और नहीं था।

“बहुत-बहुत शुक्रिया मिस डोरोलेस….पुलिस डिपार्टमेन्ट आपके इस सहयोग की भावना की कद्र करता है।”

“कोई बात नहीं, यह मेरा फर्ज था ऑफिसर।”—उसने मुस्कुराकर जवाब दिया।

“शुक्रिया”—लेपस्कि ने कहा और पूछा—“अब एक आखिरी सवाल के बाद आप फ्री हैं।”

“अब वो भी पूछ लीजिए।”

“मैं दरअसल जानना चाहता था कि अगर आप कभी उस आदमी से दोबारा मिलें तो क्या सिर्फ उसकी पीठ देखकर उसे पहचान सकेंगी।”

“वो कैसे भला?”

“उसकी चाल से, कद-काठी से।”

“जी हाँ”—डोरोलेस ने हिचकते हुए कहा—“ऐसे तो मैं उसे अभी भी पहचान सकती हूँ।”

“पीठ देखकर भी?”

“हाँ….पीठ देखकर भी।”

“उसकी चाल-ढाल से, उसकी कद-काठी से।”

“और उसके हाथ, उसकी पेन्टर जैसी उँगलियों से।”

“मेरा वही मतलब था।”

“जी मैं पहचान सकती हूँ।”

“चाहे फिर उसने….”—लेपस्कि ने सावधान स्वर में कहा— “….इस बार भले ही वो खास, न भुला सकने वाली, जैकेट भी न पहनी हो।”

डोरोलेस ने सहमति में सिर हिलाया।

“बहुत बढ़िया मिस डोरोलेस”—लेपस्कि ने उत्साहित स्वर में कहा—“और अब इस बारे में मेरी एक सलाह है जिसे आप गाँठ बाँध लें।”

“जी बोलिए।”—उसने सशंकित स्वर में कहा।

“मेरी इस मामले में आपको ये जाती राय है कि फिलहाल इस मसले पर आप थोड़ा सावधानी बरतें और किसी से, किसी से भी, इसका जिक्र करने से परहेज करें।”

“ऐसा भला क्यों ऑफिसर?”—उसने पूछा।

“ये सिर्फ एक सलाह है मिस डोरोलेस जिसको देने की वजह मेरी अपने पुलिस महकमें की सालों की सर्विस का तजुर्बा है। मैं जानता हूँ कि कभी-कभी मुँह से निकली बात दूर तलक निकल जाती है....और आगे इससे हालात बिगड़ सकते हैं।”

“हूँ”—उसने कुछ सोचते हुए कहा—“मैं आपकी बात समझती हूँ और इसका ध्यान रखूँगी।”

“शुक्रिया मैडम”—लेपस्कि अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ और उसकी ओर हाथ बढ़ाते हुए बोला—“मुझे खुशी है कि आपने यहाँ आकर शहर के पुलिस महकमे की मदद की।”

“थैंक यू ऑफिसर”—कहकर डोरोलेस भी उठ खड़ी हुई, अपने अंग-प्रत्यंग लचकाते हुए उठ खड़ी हुई—“और मुझे खुशी है कि मैं आपके किसी काम आ सकी।”

दोनों ने एक दूसरे से हाथ थामे दो-तीन बार ऊपर नीचे किए और फिर लड़की पलटकर, अपनी फेमस कैट वॉक स्टाईल में ठुमकती सी वहाँ दफ्तर से बाहर निकल गई।

“उसने अपना पता क्या बताया?”—उसके बाहर निकलते ही जैकोबी लपकता सा लेपस्कि के पास पहुँचा और पूछने लगा।

“दो सौ डॉलर….कम से कम दो सौ डॉलर।”—लेपस्कि ने जवाब दिया।

“ये उस लड़की का पता बताने की फीस है?”—जैकोबी ने हैरानी से पूछा।

“नहीं—ये उस लड़की की फीस है।”—लेपस्कि ने सपाट लहजे में कहा—“और पुलिस महकमे में नौकरी करते एक थर्ड ग्रेड डिटेक्टिव की माली हैसियत, ऐसी नहीं होती कि किसी चालू आईटम पर इतनी मोटी रकम खर्च कर सके। समझे मैक्स?”

“समझ गया।”—जैकोबी मुँह लटकाकर बोला।

“क्या समझे?”

“यही कि”—जैकोबी ने नजरें चुराते हुए कहा—“कि इतनी देर से आपने उससे कोई ढंग के सवाल पूछने की जगह उसके धंधे, उस धन्धे में उसकी खुद की प्राईस टैग के बारे में ज्यादा दिलचस्पी जाहिर की लगती है।”

“मैक्स”—लेपस्कि ने नकली नाराजगी जाहिर करते हुए कहा—“तुम लाजवाब हो।”

“थैंक यू”—जैकोबी ने सिर नवाते हुए कहा।

“लेकिन परफैक्ट नहीं….अभी थोड़ा और प्रैक्टिस करो, तो मुझे यकीन है तुम और बढ़िया कर सकते हो।”

लेपस्कि ने अपनी दाईं आँख दबाई, मेज पर से अपने नोट्स उठाए और अपने पीछे हक्के-बक्के जैकोबी को यूँ ही खड़ा छोड़कर बाहर निकल गया।

¶¶
 
पैट हैमिल्टन के रात दस बजे वाले शो को देखकर रेनाल्ड्स ने उठकर टी.वी. बन्द किया और कुर्सी में ढेर की भाँति बैठी एमीलिया की ओर देखा।

हैमिल्टन ने अपने टी.वी. प्रोग्राम में लू बून के कत्ल की डिटेल भी दी थी।

“इसमें कोई शक नहीं कि वो सनकी कातिल अभी भी यहीं इसी शहर में है”—रेनाल्ड्स ने कहा—“और उसके यूँ खुलेआम, आजाद रहते इस शहर में कोई भी, कहीं भी सेफ नहीं है। समझ नहीं आता कि यहाँ का पुलिस डिपार्टमेन्ट कर क्या रहा है?”

“मुझे नहीं लगता कि क्रिसपिन….”—एमीलिया पागलों की तरह चिल्लाई—“वो ऐसा कर ही नहीं सकता।”

“मेरा ख्याल है कि आपको थोड़ी ब्रान्डी लेनी चाहिए।”

“ठीक है....ले आओ”—एमीलिया ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा।

रेनाल्ड्स लड़खड़ाता हुआ लिकर कैबिनेट के पास पहुँचा तो उसे खिड़की से अपनी रॉल्स रॉयल चलाकर जाता हुआ क्रिसपिन दिखाई दे गया।

क्रिसपिन उस वक्त कैन्ड्रिक आर्ट गैलरी जाने के लिए निकला था।

“वो जा रहा है मैडम।”—रेनाल्ड्स ने एमीलिया को बताया।

“जाओ”—एमीलिया बोली—“ऊपर उसके स्टूडियो में जाकर देखो।”

“जी मैडम।”—रेनाल्ड्स ने कहा लेकिन फिर सीढ़ियों के रास्ते ऊपर स्टूडियो में जाने से पहले उसने अपने कमरे में जाकर स्कॉच का एक तीन गुना पैग खींचा, फिर वहीं कहीं से एक तार का टुकड़ा बरामद किया और ऊपर जाती सीढ़ियों के निचले सिरे पर बने दरवाजे के पास पहुँचा। अगले कुछ पलों की कारीगरी के बाद उसने दरवाजे का ताला खोल लिया और ऊपर जाती सीढ़ियाँ चढ़ गया।

एमीलिया वहीं बैठी इंतजार करती रही। उसे यकीन था कि क्रिसपिन ने ही उस दूसरी हत्या को भी अंजाम दिया है लेकिन फिर भी बुझे मन से वह खुद को बहलाने की कोशिश करती रही कि शायद ऐसा न हो। शायद क्रिसपिन का उस दूसरी हत्या से कोई संबंध न हो। एमीलिया—जिसे हमेशा समाज में अपने रुतबे, अपने सम्मान की फिक्र लगी रहती थी—आज यह सोचकर हलकान हो रही थी कि अगर लोगों को यह पता चल गया कि उसका बेटा वहशी कातिल है तो कौन उससे बोलना पसंद करेगा? आज शाम उसे उस पार्टी में इनवाईट किया गया था जिसे स्पेनिश बे होटल में फ्रांसिसी राजदूत के सम्मान में आयोजित किया जा रहा था लेकिन अगर किसी तरह यह बात फैल जाती कि वो एक दुर्दान्त हत्यारे, एक मैनियाक वहशी कातिल की माँ थी तो कौन उसे डिनर पर बुलाता। आज वो शहर के बेहद प्रतिष्ठित लोगों की फेहरिस्त में अपना नाम दर्ज कराती थी लेकिन क्या आगे भी यही हालात रहने वाले थे?

क्या उसे अपना ऐसा रुतबा खोना नहीं पड़ेगा?

इन्हीं ख्यालों में डूबी एमीलिया को आगे अपनी प्रतिष्ठा, अपना रुतबा, अपना रसूख और यहाँ तक कि अपनी पूरी जिन्दगी खत्म होती दिख रही थी।

तभी रेनाल्ड्स वापस लौटा।

एमीलिया ने उसकी ओर देखा तो पाया कि उसका चेहरा कागज की तरह सफेद पड़ा था और चेहरे पर पसीना चुहचुहा आया था।

“क्या बात है?”—घबराई एमीलिया ने पूछा।

“वह एक आदमी का सिर पेंट कर रहा है”—रेनाल्ड्स ने निगाहें नीचे कर फुसफुसाते हुए कहा—“कटा हुआ खून में डूबा सिर।”

एमीलिया को तेज झटका लगा।

अब शक की कोई गुजाईंश नहीं थी। उसकी इकलौती औलाद ही शहर में हुए दूसरे कत्ल के पीछे थी। उसका बेटा बिलाशक उस दूसरे कत्ल का भी जिम्मेदार था।

रुतबा!

रसूख!

सब खतरे में था।

एमीलिया निढाल-सी हो गई और उसने अपनी आँखें मूंद लीं।

“ब्रान्डी।”—उसने रेनाल्ड्स से कहा।

सहमति में सिर हिलाता रेनाल्ड्स लिकर कैबिनेट तक पहुँचा और ड्रिंक बनाने लगा लेकिन वो खुद इतनी बुरी तरह डरा हुआ था कि ड्रिंक बनाते वक्त उसके कांपते हाथ से गिलास छूटकर नीचे जा गिरा।

“रेनाल्ड्स!”—एमीलिया चीखी।

“यस मैडम।”—रेनाल्ड्स ने एक दूसरे गिलास में ड्रिंक तैयार किया और एमीलिया के पास पहुँचा।

एमीलिया ने हाथ आगे बढ़ाकर गिलास थामा और एक ही झटके में उसे गटक लिया।

“मैडम….”—रेनाल्ड्स ने कुछ कहना चाहा।

“मुझसे बात मत करो….बस इतना याद रखो कि हम कुछ नहीं जानते। जाओ अपना काम करो।”

“मैडम—वह आगे फिर किसी और का कत्ल भी कर सकता है।”

“इन लोगों की परवाह किसे है।”—एमीलिया चीखी—“एक वेश्या थी। दूसरा हिप्पी था।”

“लेकिन मैडम....।”

“हम कुछ नहीं जानते”—एमीलिया फिर चीखी—“क्या तुम अब अपनी उम्र के इस मोड़ पर अपनी नौकरी से हाथ धोना चाहते हो? मुझे घर से बाहर फिंकवा देना चाहते हो? हमें इस बखेड़े से कोई मतलब नहीं….हम कुछ नहीं जानते।”

अपनी बेरोजगारी के खतरे से रेनाल्ड्स घबरा गया। इस उम्र में उसे दूसरी नौकरी कहीं हासिल नहीं होनी थी।

और ऊपर से उसे स्कॉच पीने—बेशुमार स्कॉच पीने—की बुरी आदत भी थी।

“मैडम”—उसने हिचकिचाते हुए कहा—“वो अब कंट्रोल से बाहर, और हद से ज्यादा खतरनाक हो चुका है। हो सकता है कि अपने पागलपन के किसी दौरे में वो आप पर भी हमला कर दे।”

रेनाल्ड्स ने बड़ी चालाकी से अपनी बात कही थी। उसने ये नहीं कहा था कि क्रिसपिन खुद उस पर हमला कर सकता है।

“क्या बकवास है।”—एमीलिया बोली—“मैं उसकी माँ हूँ। खामाखा बको मत और जाकर अपना काम देखो। हम कुछ नहीं जानते।”

¶¶
 
टेरेल अपने डेस्क पर मौजूद था। सामने बैठे थे हेस, बेगलर और लेपस्कि। चारों कॉफी की चुस्कियाँ ले रहे थे। “हम इस पागल आदमी के निकट पहुँचते जा रहे हैं।” टेरेल ने कहा—“हमारे लिए महत्वपूर्ण संकेत है: चौथी जैकेट। बाकी तीनों आदमियों का हुलिया इससे नहीं मिलता है।” और लेपस्कि की ओर देखकर पूछा—“तुम इस लड़की द्वारा बताई गई बातों से संतुष्ट हो?”

“हाँ।”

“तब तो यह वही जैकेट होनी चाहिए जो मिसेज ग्रेग ने साल्वेशन आर्मी को दी थी। हम इसी जैकेट का पता लगाना चाहते हैं। लेकिन जो आदमी गक्की शूज पहनता है वह साल्वेशन आर्मी से पुराने कपड़े क्यों खरीदेगा? वह तो खुद भी जैकेट खरीदने की औकात रखता होगा।”

“हो सकता है उस आदमी ने गक्की शूज कहीं से चुरा लिए हों।” हेस ने सम्भावना व्यक्त की—“या फिर किसी कपड़े बेचने वाले से बहुत ही सस्ते दामों पर खरीद लिये हों।”

“हो सकता है।” टेरेल ने सहमति देकर कहा—“टॉम, तुम पुराने कपड़े बेचने वालों को चैक कराओ कि क्या किसी ने गक्की शूज बेचे थे और अगर बेचे थे तो किसको?”

तभी डस्टी लुकास अंदर दाखिल हुआ और उत्तेजित स्वर में बोला—

“चीफ, मैं उन दोनों आदमियों को चैक कर रहा था जो साल्वेशन आर्मी के लिए उपहार स्वरूप कपड़े वगैरा देने वालों के पास जाकर इन चीजों को इकट्ठा करके साल्वेशन आर्मी पहुँचाते हैं। जोए हेनी नाम के उस ट्रक डाईवर को मैं साथ ले आया हूँ। वह बाहर बैठा है। उसका बाप सिड हेनी सीकाम्ब में पुराने कपड़ों की दुकान करता है और वह कबूल कर चुका है कि साल्वेशन आर्मी के कपड़ों में से वह अपने बाप को बेचने के लिए कपड़े देता रहा है।”

“मैं उससे निपटता हूँ चीफ।” हेस उठकर बोला।

जोए हेनी बेरियर के दूसरी ओर बैठा था। उसकी उम्र करीब अट्ठाइस वर्ष थी। शरीर पतला, दाढ़ी बढ़ी, हुई मगर दिखने में चालाक।

हेस और लेपस्कि उसके सामने एक डैस्क पर बैठ गये।

“तुम मुसीबत में फंस सकते हो, जोए।” हेस ने कहा।

“मुसीबत में, वह किसलिए? ये कपड़े आखिर दान दिए हुए ही तो होते हैं।”

“वे कपड़े साल्वेशन आर्मी को दिये जाते हैं। उन्हें अपने पास रखने का तुम्हें कोई हक नहीं है।”

“साल्वेशन आर्मी भी तो उन्हें लोगों को ही देती है। अगर मैंने कुछ कपड़े अपने बाप को दे दिए तो क्या बुरा कर दिया?”

“तुम कब से ऐसा कर रहे हो?”

“करीब छः महीने से।”

“जानते हो—साल्वेशन आर्मी के कपड़े चुराने के जुर्म में तुम तीन महीने के लिए अन्दर जा सकते हो।”

“हूँ? तुम मुझ पर चार्ज नहीं लगा सकते। मैं अपने अधिकारों को जानता हूँ। वे कपड़े साल्वेशन आर्मी की मिल्कियत तब बनते हैं जब मैं उन्हें साल्वेशन आर्मी को डिलीवर कर देता हूँ।”

“नहीं। जब तुम उन्हें ट्रक में लाद लेते हो, तब ही से वे साल्वेशन आर्मी की मिल्कियत बन जाते हैं।”

“लेकिन ट्रक मेरा है। मैं अपनी मर्जी से साल्वेशन आर्मी की मदद करता हूं। अगर पेट्रोल तथा ट्रक के दूसरे खर्चों के बदले मैं कुछ कपड़े रख भी लेता हूं तो क्या बुरा करता हूं?”

“खैर, छोड़ो इस बात को।” हेस ने गहरी सांस ली—“हमें गोल्फ बाल बटनों वाली एक नीली जैकेट की तलाश है। तुम्हें याद है कि तुमने ऐसी कोई जैकेट अपने पिता को दी थी?”

“नहीं। मैं अपने बाप को कपड़ों का बंडल दे देता हूं। उसमें से अपने मतलब के छांटकर बाकी वह मुझे लौटा देता है, तो आगे मैं उन्हें साल्वेशन आर्मी को दे देता हूं।”

“इसके बाप को चैक करो।” हेस ने लेपस्कि से कहा और उठ खड़ा हुआ।

लेपस्कि अपनी कार में बैठकर सीकाम्ब की ओर रवाना हो गया।

जोए हेनी का बाप भी बेटे के अनुरूप छोटी-छोटी आंखों और चूहे जैसी शक्ल वाला काईयां आदमी था।

लेपस्कि ने उसे जैकेट का हवाला देकर पूछा तो उसने साफ इन्कार दिया कि ऐसी कोई जैकेट न तो उसके पास थी न ही कभी उसके हाथों से गुजरी थी। गक्की शूज के बारे में भी उसने यही जवाब दिया। लाख सर पटकने के बावजूद भी लेपस्कि उससे मतलब की जानकारी हासिल नहीं कर सका।

अन्त में पुलिस की अपनी नौकरी को कोसता हुआ लेपस्कि उसकी दुकान से निकलकर अपनी कार की ओर चल दिया। कार के पास पहुँचकर अचानक उसे याद आया कि करोल के लिए हैंडबैग खरीदना था।

वह सोचने लगा।

शनिवार के दिन दोपहर बाद के इस समय आखिर हैंडबैग खरीदने जाए कहां? लेपस्कि को अगर किसी चीज से नफरत थी तो शॉपिंग से थी।

“हाय मिस्टर लेपस्कि!”

लेपस्कि ने पलटकर देखा। सामने कॉरेन स्टर्नवुड खड़ी थी। सिर से पांव तक उसे घूरकर उसने सोचा छोकरी वाकई गजब की है।

“हाय मिस्टर स्टर्नवुड! तुम यहाँ क्या कर रही हो?”

“सिर्फ एक हम्बरगर लेने आई हूं। मेरा बॉस वीक एन्ड के लिए चला गया है और सारा काम मुझ पर आ पड़ा है। जरा सोचो तो आज शनिवार को भी मुझे शाम तक खपना पड़ेगा।”

“मि. ब्रान्डन बाहर गया है?”

“उसका ससुर बीमार है। उसी को देखने गया है। सोमवार तक लौटेगा। मर्डर इनवेस्टीगेशन चल रही है?”

“हां, चल ही रही है।” अचानक लेपस्कि के दिमाग में विचार कौंधा—“मिस स्टर्नवुड, अगर तुम्हारे पास थोड़ा वक्त हो तो मेरी एक परेशानी हल हो सकती है।”

“तुम्हारे लिए मेरे पास हर वक्त, वक्त है।” उसने पलकें झपकाकर कहा।

“दरअसल मैं अपनी पत्नी को बर्थडे पर देने के लिए एक हैंडबैग खरीदना चाहता हूं, लेकिन समझ में नहीं आता क्या करूं?”

“कोई दिक्कत नहीं है। किस किस्म का हैंडबैग चाहते हो?”

“मैं इन मामलों में एकदम अनाड़ी हूं। मगर मेरी बीवी को आसानी से कोई चीज पसंद नहीं आती है।”

“ज्यादातर औरतें ऐसी ही होती हैं।” कॉरेन हंसी—“सवाल यह है कि तुम खर्च कितना करना चाहते हो? पांस सौ डालर?”

“नहीं....नहीं....इतना ज्यादा नहीं। करीब सौ डालर।”

“पैराडाइज एवेन्यु पर लुसिली की दुकान में ट्राई करो।” कॉरेन बोली—“उसकी दुकान विश्वसनीय है।” वह मुस्कुराई, पलकें झपकाईं और बोली—“मुझे हम्बरगर लेना है, सी यू।” और फिर आगे बढ़ गई।

लेपस्कि कार लेकर पैराडाइज एवेन्यु जा पहुंचा। लग्जरी आइटम्स वाली दुकानें शनिवार में दोपहर बाद भी खुली रहती थीं। फुटपाथ पर लोगों की भीड़ थी। शाप विंडो खुली हुई थी। अपनी कार पार्क करके लेपस्कि लम्बे एवेन्यु में पैदल चलने लगा। मन ही मन कुढ़ते हुए आधा रास्ता पार किया और केनड्रिक की गैलरी के सामने पहुंच गया। वांछित दुकान की तलाश में वह प्रत्येक दुकान को गौर से देखता जा रहा था। इसीलिए केनड्रिक की विन्डो में लगी क्रिसपिन की प्राकृतिक दृश्य की पेंटिंग पर भी उसकी नजरें पड़ गईं।

वह तुरंत ठिठककर रुक गया।

पेंटिंग पर नजरें गड़ाते हुए उसके जिस्म में सिहरन-सी दौड़ गई।

लाल सुर्ख चांद! काला आकाश! संतरी सागर तट।

विन्डो के पास जाकर उसने फिर गौर से पेंटिंग को देखा।

“हे भगवान!” उसने मन ही मन कहा—“उस शराबखोर बुढ़िया की भविष्यवाणी!”

उसे याद आ गया। पिछली साल जब वह हत्यारे की तलाश में था तो उसकी बात सही साबित हुई थी। उसने कहा था संतरों में देखो और वह हत्यारा संतरे बेचता हुआ ही पाया गया था।

क्या उसकी बात इस बार भी सही हो सकती थी?

फिर उसे डोरोलेस की बात याद आ गई कलाकार के हाथ!

क्या इस पेंटिंग को तैयार करने वाला आदमी वही हत्यारा हो सकता था जिसे वे ढूंढ रहे थे?

वह पलभर के लिए हिचका। फिर गैलरी में दाखिल हो गया।

¶¶
 
लूइस डी मारने उदास था। उसकी नजरों में केनड्रिक की यह जिद बेवकूफाना थी कि शनिवार के दिन दोपहर बाद भी गैलरी को खोला जाए। केनड्रिक की इस बात को भी वह बेहूदा समझता था कि सारे स्टाफ की तो उस रोज छुट्टी रक्खी जाए मगर हैड सेल्समैन होने के नाते लुइस का यहां रहना जरूरी था।

इन दोनों कारणों से उदास होने के अलावा वह कुपित भी था। ग्रेग की विला में जाकर शराबी बटलर से पेंटिंग लाने के बाद गैलरी में आकर जब उसने ग्रेग की बनायी प्राकृतिक दृश्य की पेंटिंग के ऊपर लिपटा कागज हटाया तो सचमुच उस पर क्रोध मिश्रित बौखलाहट सवार हो गई थी।

“हम इसे गैलरी में नहीं लगा सकते।” लगभग चीखते हुए उसके केनड्रिक से कहा—“देखो तो क्या बकवास है?”

केनड्रिक ने निराश भाव से पेंटिंग का अध्ययन किया और बोला—“बहुत एडवान्स्ड है।”

“एडवान्स्ड?” लुइस बिफर कर बोला—“यह कला का अपमान है। इसे गैलरी में लगाना गैलरी की तौहीन करना है।”

“शांति से काम लो, लुइस।” केनड्रिक ने उसे झिड़क दिया—“इसे विंडो में लगा दो। मैं इसे डिस्प्ले करने के लिए कह चुका हूँ इसलिए डिस्प्ले तो करूंगा ही और फिर यह भी मत भूलो कि उससे हमें चालीस हजार डालर लेने हैं।”

लुइस ने साइड विंडो साफ करके ईजल पर ग्रेग की पेंटिंग लगा दी। फिर अपने डेस्क पर बैठकर क्रोध पर काबू पाने का यत्न करने लगा।

जब लेपस्कि गैलरी में दाखिल हुआ तो वह एक मैगजीन द्वारा स्वयं को बहलाने की नाकाम कोशिश कर रहा था।

लुइस उसे देखते ही सहम गया। वह शहर के प्रत्येक पुलिसमैन को पहचानता था। लेपस्कि तो उसकी नजरों में बेहद फसादी आदमी था। उसने तुरंत कारपेट के नीचे छुपा एक बटन दबा दिया। केनड्रिक के डेस्क पर एक लाल बल्ब जलने लगा। वह समझ गया बाहर पुलिस मौजूद थी। उसकी गैलरी में कोई अवांछनीय वस्तु नहीं थी, इसलिए डरा तो नहीं मगर उसे ताज्जुब जरूर हुआ। पिछले छह महीने से पुलिस उसके पास नहीं आई थी।

वह कुर्सी से उठा। शीशे के सामने जाकर विग सर पर ठीक से सैट किया, दबे पांव दरवाजे के पास जाकर दरवाज़ा खोला और सुनने लगा।

लुईस कुर्सी से उठा। उसकी चूहे जैसी शक्ल पर मुस्कराहट पुत गई।

“डिटेक्टिव लेपस्कि”—वह कदमों में बिछता हुआ-सा बोला— “आओ। शायद अपनी खूबसूरत बीवी के लिए किसी उपहार की तलाश है, वाकई सही जगह आ पहुंचे हो। ऐसी चीज दूंगा कि फड़क उठोगे और कीमत भी तुम्हारे लिए खासतौर से रियायती होगी।”

इस स्वागत से चकित लेपस्कि पहले तो हिचका फिर लुइस को पुलिसिया अंदाज में घूरा।

“मैं जानना चाहता हूं कि विंडो में लगी लाल चांद वाली पेंटिंग किसने दी है।”

केनड्रिक ने सोचा, अब उसका वहाँ उस वार्तालाप में पहुंचना ही उचित था। सो, वह भारी कदमों से गैलरी में आ गया।

“ओह, फर्स्ट ग्रेड डिटेक्टिव लेपस्कि”—केनड्रिक ने नकली खुशी का इजहार किया—“आओ, स्वागतम्। तुम विंडो में लगी पेंटिंग के बारे में पूछ रहे हो?”

“मैं उस पेंटिंग के पेंटर का नाम जानना चाहता हूं।” लेपस्कि कटुतापूर्वक बोला।

“पेंटर का नाम?” केनड्रिक ने भौंहें चढ़ाईं और कुछ सोचने का अभिनय करता हुआ बोला—“इसे किसने पेंट किया है? यह तो बड़ी भारी समस्या है, डिटेक्टिव लेपस्कि। क्योंकि मैं पेंटर को नहीं जानता।”

“क्या मतलब?” लेपस्कि का स्वर ऐसा था जैसे भारी हथौड़ा गिरा हो।

“अगर मेरी याद्दाश्त धोखा नहीं दे रही है तो कोई आर्टिस्ट इसे बेचने के लिए हमारे पास छोड़ गया था। हालांकि पेंटिंग में अपनी अलग खूबी तो है, मगर इसकी कीमत खास नहीं है। मैं इसे सिर्फ पचास डॉलर में बेच सकता हूँ।”

“दिस इस पुलिस बिजनेस।” लेपस्कि पैनी आवाज में बोला—“मैं आर्टिस्ट का नाम जानना चाहता हूं।”

“मेरी जानकारी के मुताबिक न तो उसने अपना नाम ही हमें बताया था और न ही पेंटिंग पर कहीं दस्तखत किए हैं। उसने फिर आने के लिए कहा था लेकिन अभी तक तो आया नहीं है।”

“पेंटिंग कब दे गया था तुम्हें?”

“चन्द हफ्ते हुए होंगे।” कहकर केनड्रिक ने लुइस से पूछा—“तुम्हें कुछ याद है?”

“नहीं।”—लुइस ने लापरवाही से इन्कार कर दिया।

“उस आर्टिस्ट का हुलिया कैसा था?” लेपस्कि ने पूछा।

“हुलिया?”—केनड्रिक पर उदासी छा गई—“दरअसल मैंने उसे डील नहीं किया था। तुम्हें याद है लुइस?”

“मैंने भी उसे डील नहीं किया।” लुइस के स्वर में पूर्ववत् लापरवाही थी।

लेपस्कि समझ गया कि दोनों ही झूठ बोल रहे थे।

“फिर वह किससे मिला था?”

“मेरे स्टाफ का ही कोई आदमी रहा होगा।”

“मैं पहले भी कह चुका हूँ कि यह पुलिस बिजनेस है।” लेपस्कि स्वयं पर काबू पाकर बोला—“हमारे सामने कुछ ऐसे कारण हैं जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि इस पेंटिंग के पेंटर का जेनी बैडलर और लू बून की हत्याओं में हाथ है। इन दोनों मृतकों के बारे में तो तुमने सुना ही होगा।”

केनड्रिक को पल भर के लिए दिल की धड़कन रुकती-सी प्रतीत हुई, लेकिन अपने मनोभावों पर काबू पाने में वह पूरा माहिर था। उसने मात्र अपनी भौंहें चढ़ाईं।

“यह तुम किस आधार पर कह सकते हो?”

“इस बात को भूलकर उसका हुलिया बताओ। वह आदमी हत्यारा हो सकता है।”

केनड्रिक ने क्रिसपिन ग्रेग के बारे में सोचा। उस पर बाकी अपने चालीस हजार डालर भी उसे याद आ गए।

“मैं अपने स्टाफ से पूछूंगा, डिटेक्टिव लेपस्कि। शायद उनमें से किसी को याद हो। आज तो शनिवार की वजह से वे सब छुट्टी कर गए हैं।”

लेपस्कि को लगभग पूरा यकीन था कि उसे धता बसाई जा रही थी।

“मैं बताए देता हूँ”—वह बोला—“हमें जिस आदमी की तलाश है उसके बाल छोटे-छोटे हैं, कद करीब छह फीट और हाथ कलाकारों जैसे। वह आखिरी बार, सफेद गोल्फ बॉल बटनों की नीली जैकेट, हल्की नीली पेंट और गक्की शूज पहने देखा गया है। हमारे पास सबूत है कि ये दोनों नृशंसतापूर्ण हत्याएँ उसी ने की हैं। अब मैं आखिरी बार पूछता हूँ कि इस पेंटिंग का पेंटर कौन है?”

केनड्रिक को अपनी पीठ पर ठंडा पसीना बहता महसूस हुआ। क्षण मात्र के लिए वह सहम गया और उसका यह सहमना लेपस्कि ने भी साफ नोट किया।

केनड्रिक का खुराफाती दिमाग फौरन सक्रिय हो गया। क्रिसपिन का वह खौफनाक अन्दाज उसे अभी तक याद था।

क्या वह हत्यारा हो सकता था?

मान लो हत्यारा था? मान लो उसने—केनड्रिक ने—उसे गिरफ्तार करा दिया?

तब चालीस हजार की रकम डूब जाएगी।

सुलेमान पैन्डेंट दुबारा नहीं बेचा जा सकता।

“मुझे इसकी गम्भीरता का कोई आइडिया नहीं है।” वह नकारात्मक सर हिलाकर बोला—“मेरा यकीन करो, डिटेक्टिव लेपस्कि। सोमवार को मेरा स्टाफ आएगा। मैं उनसे मालूम करूंगा। बल्कि बेहतर तो यह होगा कि सोमवार की सुबह तुम खुद ही आकर उनसे पूछ लो।”

“तुम्हारा स्टाफ कहां है?” लेपस्कि गुर्राया।

“ओह, यह भला मैं कैसे जान सकता हूं? वीकएंड है। न मालूम कौन कहां गया होगा। लेकिन सोमवार को वे सब यहीं मिलेंगे।”

“सुनो”—लेपस्कि का स्वर ठेठ पुलिसमैन जैसा था—“याद रखना कि इस आदमी को छुपाने वाला दो-दो हत्याओं में उसका सहयोगी समझा जायेगा। मैं सोमवार सुबह को आऊंगा।”

लेपस्कि के गैलरी से बाहर जाते ही केनड्रिक ने लुइस की ओर देखा।

“मुझे इस मुसीबत में मत फंसाना।” लुइस चिल्लाया— “तुमने बता क्यों नहीं दिया था? दो-दो हत्याओं में सहयोगी।”

“बता दूं”—केनड्रिक ने अपनी विग नोंच फेंकी—“ग्रेग मेरा चालीस हजार का कर्जदार है।”

¶¶
 
कॉरेन स्टर्नवुड ने आखिर अपना काम निपटा ही लिया। डाक दिनों दिन बढ़ती जा रही थी और बिजनेस तेजी से फैलने लगा था। केन की सहायता न होने की वजह से शनिवार दोपहर बाद का समय भी उसे रोजमर्रा की माथा-पच्ची में गुजारना पड़ा था।

उसने अपनी घड़ी पर नजर डाली—साढ़े छह बजे थे।

उसने सोचा कि उसका बाप अपने बूढ़े दोस्तों के साथ अपनी याट पर था। उसके बाप ने उसे भी वहां निमंत्रित किया था मगर उसने बता दिया था कि केन अपने बीमार ससुर को देखने गया था, इसलिए दफ्तर का सारा काम उसके ही जिम्मे था और इस वजह से उसे फुरसत नहीं मिल पाएगी।

इस बात से उसका बाप बहुत प्रभावित हुआ था।

अब काम खत्म करने के बाद उसने सिगरेट सुलगाई और बचे-खुचे वीकएण्ड के बारे में सोचने लगी।

वासना की भूख उसे बुरी तरह सता रही थी।

केन के बाद उसे पुरुष संसर्ग नहीं मिला था और अब वह किसी मर्द की जरूरत महसूस कर रही थी। उसे इस बात पर भी खीज आई कि जब तक उसका ड्राईविंग लायसेंस वापिस नहीं मिल जाता, वह कार नहीं चला सकती थी। उसने तय किया कि बाकी का सारा वीकएन्ड वह अपने केबिन में गुजारेगी, लेकिन पहले किसी साथी को ढूंढना था।

उसने अपने विभिन्न पुरुष मित्रों के बारे में सोचा, मगर दिक्कत थी कि वे सब पहले से ही बुक होंगे, क्योंकि उसका कोई भी पुरुष मित्र अपने वीकएन्ड को खाली नहीं रखता था।

काफी देर सोचने के बाद एक तरीका सूझा और उसे प्रयोग करने में बुराई भी नजर नहीं आई।

क्यों न किसी से लिफ्ट मांगी जाए?

मुमकिन था कि कोई बढ़िया नौजवान टकरा जाए। उसने यही करने का निश्चय किया।

आफिस लॉक करके सीव्यू एवेन्यू से होती हुई वह मयामी हाइवे पर आ गई और आम के पेड़ के साए में खड़ी होकर आती-जाती कारों को देखने लगी।

शनिवार की शाम यातायात की अधिकता के कारण कारें धीरे-धीरे गुजर रही थीं।

बहुत देर खड़ी रहने के बाद, ठीक उन क्षणों में जबकि उसका धैर्य टूटने लगा था, उसे एक रॉल्स आती दिखाई दी। इस समय ट्रेफिक जाम हो जाने के कारण रॉल्स ठीक उसके पास आकर रुकी।

उसने ड्राइवर का जायजा लिया, हल्के सुनहरी बाल, सुन्दर एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व।

वह बगैर हिचकिचाए कार की तरफ बढ़ी और ड्राईवर की ओर आमंत्रणपूर्वक मुस्करा दी।

“मेरे रास्ते की ओर जा रहे हो?” उसने पूछा।

क्रिसपिन ग्रेग ने गौर से उसे देखा और उसके मन में पहला ख्याल आया कि पेंटिंग के लिए वह बढ़िया सबजैक्ट थी। फिर उसने देखा कि लड़की की वासनामय आंखों में स्पष्ट आमंत्रण था। वह आगे झुका और कार की दूसरी ओर का दरवाजा खोल दिया।

“तुम्हारा रास्ता किधर है?” बराबर में आ बैठी कॉरेन से उसने पूछा।

“पैडलर्स क्रीक।” मुस्कराई—“कार लाजवाब है।”

“पैडलर्स क्रीक?” ट्रेफिक के साथ-साथ कार आगे बढ़ाता हुआ क्रिसपिन बोला—“वह तो हिप्पी कॉलोनी है।”

“हां।”

“लेकिन तुम तो हिप्पी नहीं हो?”

“कालोनी के पास ही मेरा केबिन है।”—वह हंसी और बोली—“मेरा नाम कॉरेन स्टर्नवुड है।”

“स्टर्नवुड!”—क्रिसपिन फौरन उसकी ओर पलट गया—“इंश्योरेन्स के धंधे वाला एक स्टर्नवुड तो मेरे पिता का भी दोस्त था।”

“मैं उसी की बेटी हूँ। तुम्हारे पिता? क्या नाम है तुम्हारा?”

“क्रिसपिन ग्रेग। साइरस ग्रेग मेरे पिता का नाम था। चन्द महीने पहले उनकी मृत्यु हो गई थी।”

“तुम उसके बेटे हो? मैं एक बार तुम्हारे पिता से मिली थी। बढ़िया आदमी था। बड़ी अजीब बात है।”

“हाँ”—क्रिसपिन ने स्टियरिंग से एक हाथ हटाकर गले में पड़ा सुलेमान पैन्डेंट टटोला। जब से उसने इसे पहना था, बार-बार इसे टटोलने की तीव्र इच्छा होती थी।

“यह ओरिजिनल है?” कॉरेन ने पैन्डेंट को देखते हुए पूछा—“क्या है यह?”

“ऐसे ही एक चीज हाथ आ गई थी।”—क्रिसपिन ने कहा—“मुझे चन्द मिनट का जरा सा काम है। तुम्हें जल्दी तो नहीं है?”

“नहीं”—कॉरेन हंसी—“इस वीकएन्ड में मैं बिल्कुल खाली हूं। कोई काम नहीं है।”

“हम दोनों एक ही जैसे हैं।”—क्रिसपिन बोला—“शायद दोनों मिलकर एक-दूसरे का खालीपन भर सकें।”

कॉरेन ने उसके इकहरे जिस्म, लम्बी टांगों, कलाकार जैसे हाथों और सुन्दर चेहरे पर नजरें घुमाईं, तो जांघों के बीच गर्म खून का तेज प्रवाह अनुभव किया। दिल-ही-दिल में बोली—“जरूर हम एक-दूसरे का खालीपन भर देंगे।”—और कहा—“वाकई मजा रहेगा।”

क्रिसपिन ने हाईवे से पैराडाइज एवेन्यु की ओर राल्स घुमा दी।

“मैं एक चीज देखना चाहता हूं। फिर जब तक कहोगी, साथ रहूंगा।”

इस समय शाम के सात बजकर दस मिनट हुए थे।

पैराडाइज एवेन्यु सुनसान था।

सभी लग्जरी शॉप बन्द हो चुकी थीं।

क्रिसपिन ने केनड्रिक की गैलरी के आगे राल्स रोक दी।

जब से उसने यह पेंटिंग दी थी, उसे इस विख्यात गैलरी में लगा देखने की उसकी प्रबल इच्छा थी। उसने सोचा क्या पेंटिंग सराही गई होगी?

हालांकि शनिवार दोपहर बाद का समय ठीक नहीं था, मगर वह देखना चाहता था कि केनड्रिक नाम के उस अजीब और बेहूदा आदमी ने उसकी पेंटिंग किस ढंग से डिस्प्ले की थी।

पेंटिंग चांदी की पेंट की हुई ईजल पर लगी थी जहाँ सूरज की सीधी किरणें उस पर पड़ रही थीं।

क्रिसपिन को अत्यधिक गर्व की अनुभूति हुई।

यह ओरिजिनल थी।

जानदार थी।

“इसके बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?” उसने पेंटिंग की ओर संकेत करके कॉरेन से पूछा।

कॉरेन ने विरक्तिपूर्वक पेंटिंग की ओर देखा फिर उस पर नजरें जमाकर क्षुब्ध भाव से पूछा—“उस चीज के बारे में?”

क्रिसपिन की मुस्कराहट स्थिर हो गई—“हां, वह जो पेंटिंग है।”

“मुझे माडर्न आर्ट की ज्यादा जानकारी नहीं है,”—कॉरेन ने अनिच्छापूर्वक कंधे झटकाए—“लेकिन मेरे पास चन्द बेहतरीन कलाकृतियां हैं। मेरे बाप के पास तो माडर्न आर्ट के महान् कलाकारों की ढेरों पेंटिंग्स हैं।”

क्रिसपिन की लम्बी कलात्मक उंगलियां स्टियरिंग व्हील पर कस गईं।

“विंडो में लगी पेंटिंग के बारे में तुम्हारी क्या राय है?” उसने पैने स्वर में पूछा।

“यह तो कोई मजाक लगता है....सप्ताहांत का मजाक”—कॉरेन ने जवाब दिया—“या तो इसे बनाने वाला या फिर केनड्रिक पागल है। मेरी नजरों में तो यह किसी बेहूदा बच्चे की बेहूदगी है। तुम ऐसा नहीं समझते क्या?”

“बेहूदा बच्चा?”

“हां”—कॉरेन हंसी—“या फिर कोई पागल आदमी रहा होगा।”

क्रिसपिन की उंगलियां अपने आप ही सुलेमान पैन्डेन्ट को सहलाने लगीं।

“मैं सोचता था कि यह ओरिजिनल थी।”

“क्या तुम सिर्फ यही देखना चाहते थे?” कॉरेन ने पूछा। वह इस आदमी के साथ केबिन में पहुंचने के लिए बेताब थी—“आओ चलें।”

क्रिसपिन हाइवे की ओर कार ड्राइव करने लगा।

“अगर तुम वाकई अच्छे किस्म की माडर्न आर्ट में रुचि रखते हो”—कॉरेन ने कहा—“इस जैसे कूड़े-कबाड़ में नहीं। तब तुम्हें केनड्रिक से मिलना चाहिए। वह पूरा जानकार है इन चीजों का।”

“कूड़ा-कबाड़?”—क्रिसपिन ने पूछा—“तुम वाकई ऐसा समझती हो?”

“तुम नहीं समझते क्या?”

क्रिसपिन के मन में भयानक प्रबल इच्छा उत्पन्न हुई कि कार रोक दे। माणिक पत्थर दबाकर इस लड़की को चाकू घोंप दे और फिर घोंपता ही चला जाए, लेकिन उसने खुद पर काबू पा लिया।

“तुम वीक-एण्ड के लिए बिल्कुल फ्री हो?”—उसने अप्रत्याशित रूप से नर्म स्वर में पूछा—“तुम्हारी राय में हमें क्या करना चाहिए?”

“मेरे केबिन में चलो।”—कॉरेन आमंत्रणपूर्वक मुस्कराई—“वहां मौज मस्ती करेंगे।”

तत्पश्चात दोनों मौन हो गए।

रॉल्स फिसलती रही।

“कार यहीं छोड़ दो।”—कॉरेन ने कहा—“थोड़ी देर पैदल चलना होगा।”

पास के पेड़ों के साये में क्रिसपिन ने कार रोक दी। कार से उतरकर दोनों कॉरेन के केबिन की ओर चल दिए।

क्रिसपिन ने अच्छी तरह जानने के बावजूद भी कहा— “इसी जगह के आसपास कहीं एक लड़की की हत्या हुई थी ना?”

“हां। बड़ा भयानक कांड था।”

सांझ का धुंधलका फैलने लगा था। नीचे झुके पेड़ों और घनी झाड़ियों के झुरमुट से घिरी पगडंडी पर लगभग अंधेरा-सा गहरा रहा था।

“इस रास्ते पर तुम्हें डर नहीं लगता है?”—क्रिसपिन ने उसके पास आकर पैन्डेंट टटोलते हुए पूछा।

“तुम जैसा जवां मर्द साथ हो तो डर कैसा?”

वे खुले स्थान में आ गए।

“वो देखो!”—कॉरेन ने इशारा किया—“वही मेरा केबिन है।”

क्रिसपिन ने एकांत केबिन की ओर देखा।

“बढ़िया जगह है। तुम यहां बिल्कुल अकेली रहती हो? ये हिप्पी तुम्हें परेशान नहीं करते?”

“वे मुझे नोचते हैं।”—कॉरेन ने केबिन का ताला खोला—“मैं उन्हें निचोड़ती हूं।”

दोनों केबिन में दाखिल हो गए। कॉरेन ने लाइट्स आन कर दीं और बड़ी खिड़की के पास जाकर पर्दे खींच दिए।

क्रिसपिन ने चारों ओर निगाहें घुमाईं और बोला—“वैरी नाइस।”

“आई लव इट।”—कॉरेन ने उसे गौर से देखा। दमदार आदमी है। उसने सोचा, फिर पूछ बैठी—“ड्रिंक लोगे?”

क्रिसपिन उसके पास आ गया। अपने हाथ धीरे से उसकी बांहों पर रखकर उसे इस प्रकार घुमा दिया कि कॉरेन की पीठ उसकी ओर हो गई। फिर उसकी उंगलियां हौले-हौले कॉरेन की रीढ़ की हड्डी पर फिसलने लगीं।

कॉरेन के शरीर में सिहरन सी हुई।

उसने अपने कंधे झुका दिए।

उसके समूचे जिस्म से एक तेज लहर गुजरने लगी।

“फिर करो।”—वह बोली—“तुम्हें कैसे पता चला मेरी पसन्द का?”

क्रिसपिन की उंगलियां पुनः उसकी गरदन के पृष्ठ भाग से रीढ़ की हड्डी के अन्तिम सिरे तक फिसलने लगीं।

“ओह मजा आ गया!”

क्रिसपिन ने धीरे से उसे पलंग की ओर धकेला।

“ठहरो।”—कॉरेन ने फटाफट अपने कपड़े उतार फेंके फिर पलंग पर औंधी लेट गई और हांफती हुई बोली—“करो ना। बार-बार करते रहो।”

क्रिसपिन पलंग पर उसके पास बैठ गया। बांये हाथ की एक उंगली को उसकी नंगी पीठ पर फिराने लगा और दांये हाथ से उसने सुलेमान पैन्डेंट गले से निकाल लिया। माणिक दबाते ही चाकू का फल बाहर उछल आया।

“और करो।”—वह कामुक स्वर में बोली—“करते रहो।”

कॉरेन को लगा कि उसकी रीढ़ की हड्डी पर कोई पंख फिसल रहा था। बेहद तेज चाकू की नोंक ने उसकी खाल हौले से पूरी लम्बाई में काट दी। खून छलक आया, लेकिन दर्द बिल्कुल नहीं हुआ।

उस पर कामोन्माद सवार था।

गरदन से रीढ़ की हड्डी के सिरे तक कटी लम्बाई को चाकू ने दुबारा और थोड़ा गहरा कर दिया।

इस बार और ज्यादा खून छलका।

“ओह!”—कामातिरेक के कारण पलंग पर हाथ पटकती हुई कॉरेन फंसी-सी आवाज में बोली—“….आह….फिर करो और करो....।”

अचानक क्रिसपिन की आंखें चमकने लगीं। होंठ गुर्राहट पूर्ण मुद्रा में खिंच गए। पीठ में कटी हुई लम्बाई की गरदन से नीचे तक चाकू द्वारा और भी गहरा कर दिया।

खून तेजी से निकलकर चादर को रंगने लगा।

कॉरेन तेज पीड़ा अनुभव करके सिहर गई। वह तुरन्त पीठ के बल पलटी।

क्रिसपिन के चेहरे पर नजर पड़ते ही आंखें आतंक से फट गईं।

वह किसी खौफनाक दरिन्दे का चेहरा था।

फिर उसने खून से सना चाकू देखा।

“क्या कर रहे हो?”—वह भयभीत स्वर में चिल्लाई—“मुझे क्या कर दिया है तुमने?”

सहसा चादर पर फैला खून देखकर उसका मुंह आतंकपूर्ण चीख की मुद्रा में खुल गया।

तभी क्रिसपिन ने चाकू का भरपूर वार कर दिया।

¶¶
 
लुसिली की दुकान से हैंडबैग खरीदकर लेपस्कि बाहर निकला। उसने अपनी घड़ी पर नजर डाली।

पौने छह बजे थे। पुराने कपड़े बेचने वाले दूसरे दुकानदारों को चैक करने की कोई तुक नहीं थी।

अब तक, वे सब दुकानें बंद कर गए होंगे।

अपनी कार में बैठकर उसने सिगरेट जलाई और सोचने लगा। शराबखोर बुढ़िया मेहिताबेल बेसिंगर ने हत्यारे सम्बन्धी जो क्लूज दिए थे, वे सच प्रतीत हो रहे थे। उसे शुरू में ही समझ जाना चाहिए था कि वे संकेत किसी पेंटिंग की ओर थे। मात्र संयोग ही था कि केनड्रिक की विंडो में लगी पेंटिंग पर उसकी नजर पड़ गई। वह जानता था कि केनड्रिक चोरी की कलाकृतियां और अन्य कलात्मक वस्तुओं की खरीद-फरोख्त का धन्धा भी करता था। वह यह भी समझ रहा था कि पेंटिंग बनाने वाले कलाकार के बारे में केनड्रिक ने झूठ बोला था।

जाहिर था कि वह किसी को छुपा रहा था। लेपस्कि भी भली-भांति जानता था कि केनड्रिक किसी ऐरे-गैरे को नहीं बल्कि धनवान व्यक्ति को ही छुपायेगा।

लेपस्कि ने सिगरेट कार की खिड़की से बाहर उछाल दी। दिक्कत इस बात की भी थी कि वह उस शराबखोर बुढ़िया या उसके क्लूज के बारे में टेरेल या अपने अन्य किसी सहयोगी को बताकर उनकी नजरों में उपहास का पात्र बनना नहीं चाहता था। सो, इस मामले को उसे खुद ही फालो करना होगा। उसने तय किया कि सोमवार की सुबह केनड्रिक की गैलरी में जाकर वो खुद उसके स्टाफ से अच्छी तरह निपटेगा।

हैडक्वार्टर्स जाकर उसने टेरेल की सिड हेनी से हुई बातचीत का विवरण दे दिया और फिर कोई और काम न होने की वजह से घर चला गया।

कारोल हैंडबैग देखकर खुश हो गई।

फिर दोनों पति-पत्नी खा-पीकर सो गए।

रात के ठीक ढाई बजे टेलीफोन की घण्टी की चीख ने लेपस्कि को जागने पर मजबूर कर दिया। मन-ही-मन कुढ़ता हुआ वह बिस्तर से उतरा और लिविंग रूम में आकर रिसीवर उठा लिया।

“टॉम” बेगलर का भारी स्वर सुनाई दिया—“फौरन यहां आ जाओ। उस हरामजादे ने फिर एक हत्या कर दी है और इस बार शिकार हुई है—स्टर्नवुड की लड़की”—फिर सम्बन्ध विच्छेद हो गया।

¶¶

सारी रात भयानक दुःस्वप्नों में घिरी रहने के बाद एमीलिया सोकर उठी तो सुबह के पौने दस बज चुके थे। बेटे सम्बन्धी दुःस्वप्नों ने उसकी इस आशंका की पुष्टि कर दी थी कि अगर क्रिसपिन के हत्यारे होने की बात खुल गई तो उसके दोस्त, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा, भावी जीवन, आदि सब खत्म हो जायेंगे।

बिस्तर के निकट मेज पर लगा घण्टी का बटन दबाकर उसने रेनाल्ड्स को सचेत कर दिया था कि वह जाग चुकी थी। उसे स्ट्रांग ब्लैक कॉफी की जरूरत थी। जब वह लिविंग रूम में पहुंची तो देखा तो रेनाल्ड्स कांपते हाथ से कॉफी डाल रहा था। उसे गौर से देखते ही समझ गई कि वह पिए हुआ था।

“रेनाल्ड। तुम बहुत ज्यादा शराब पीते हो।”—उसे झिड़ककर कहा और बैठ गई।

“यस, मैडम!” रेनाल्ड बोला—“नाश्ता अभी करेंगी?”

“नहीं, वह कहां है?”

“अपने अपार्टमेंट में, मैडम।”

“रात वह कहीं बाहर गया था?”

“यस, मैडम।”

“वापिस कब लौटा था?”

“दस बजे के कुछ देर बाद, मैडम।”

एमीलिया ने कॉफी की चुस्की ली।

“टी.वी. ऑन कर दो, रेनाल्ड्स। पैट हेमिल्टन का समय हो रहा है।”

“यस, मैडम।”

टी.वी. स्क्रीन पर पैट हेमिल्टन प्रगट हुआ।

बैकग्राउन्ड में कॉरेन स्टर्नवुड के केबिन का दृश्य था। केबिन में पुलिस आफिसर्स की भीड़ लगी हुई थी। फिर कॉरेन स्टर्नवुड की फोटो स्क्रीन पर उभरी और फिर पेट हेमिल्टन के शब्द गूंजने लगे, जिन्होंने एमीलिया को पत्थर के बुत की भांति जड़ बना दिया।

पागल हत्यारे ने फिर वारदात की। करोड़पति की बेटी कॉरेन स्टर्नवुड की नृशंसता पूर्ण हत्या।

“एक हफ्ते से भी कम समय में यह पागल तीसरी हत्या कर चुका है”—हेमिल्टन ने कहना जारी रखा—“पुलिस को पूरा यकीन है कि किसी ने हत्यारे को छुपा रखा है। मि. जेफरसन स्टर्नवुड ने अब एक इनाम की घोषणा की है।”—स्क्रीन पर शांत स्टर्नवुड की आकृति उभरी, उसके पत्थर की तरह सख्त व क्रूर चेहरे ने एमीलिया की धड़कनें तीव्र कर दीं—“मि. स्टर्नवुड इस हत्यारे को गिरफ्तार कराने वाले को दो लाख डालर का इनाम देंगे“—हेमिल्टन तनिक रुका फिर दोहराया—“दो लाख डालर। प्राप्त सूचना को गुप्त रखा जाएगा। अगर कोई ठोस प्रमाण सहित बता सकता है कि हत्यारा कौन है, तो उसे सिर्फ पुलिस हैडक्वार्टर्स को फोन कर देना होगा और बगैर किसी पूछताछ के टेलीफोनकर्ता को घोषित इनाम दे दिया जाएगा।”—तत्पश्चात् हेमिल्टन स्थानीय समाचार पढ़ने लगा।

रेनाल्ड्स ने टी.वी. सैट बन्द कर दिया।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

दो लाख डालर।

एमीलिया ने सोचा। अगर दस लाख डालर भी हो तो भी वह अपनी सोशल लाइफ की कुर्बानी नहीं देगी।

दो लाख डालर!

रेनाल्ड सोच रहा था। आजादी! कोई सरदर्दी नहीं।

इस मोटी बुढ़िया की जी हजूरी नहीं।

बस उसे पुलिस को एक टेलीफोन करना होगा और फिर दो लाख डालर उसकी जेब में होंगे।

वह एक विला खरीदकर चैन से बाकी जिन्दगी गुजारेगा और जी भर के स्कॉच पी सकेगा।

सहसा उसे आभास हुआ कि एमीलिया उसी को घूर रही थी।

“रेनाल्ड्स”—वह बोली, इस बात का संदेह करते हुए कि वह विश्वासघात की योजना बना रहा था—“हमें कुछ भी नहीं कहना है। धन ही सब कुछ नहीं होता है! मेरी सोचो! मैं तबाह हो जाऊंगी। मुझे तुम्हारी वफादारी पर यकीन है।”

रेनाल्ड्स ने भावहीन चेहरे सहित सर झुका दिया।

बुढ़िया कितनी बेवकूफ थी!

क्या वह वाकई समझती थी कि इतने भारी इनाम के बावजूद भी वह चुप रहेगा?

“यस, मैडम”—वह बोला—“और कॉफी लेंगी?”

“नहीं, मैं क्रिसपिन से बातें करूंगी। तुम्हारी तनख्वाह हमें बढ़ानी चाहिए।”—एमीलिया निराश भाव में बोली—“मेरे वफादार बने रहो। मैं वादा करती हूं कि तुम्हें कभी पछताना नहीं पड़ेगा।”

“मुझ पर यकीन करो, मैडम। मैं आपका पुराना खिदमतगार हूँ”—रेनाल्डस सपाट स्वर में बोला—“थोड़ी कॉफी और चलेगी?”

“नहीं….नहीं।”

“तब फिर मैं ट्रे हटाए देता हूं।”

क्या वह उस पर विश्वास कर सकती थी?

एमीलिया तय नहीं कर पा रही थी।

“रेनाल्ड्स।”

ट्रे सहित द्वार की ओर बढ़ता रेनाल्ड्स रुक गया—“यस, मैडम।”

“आज तुम्हें क्या करना है?”

“आज इतवार है। आपका लंच तैयार करने के बाद थोड़ा घूमने जाऊंगा।”

“मेरी तबियत ठीक नहीं है। सो, मेहरबानी करके तुम मेरे पास ही रहना। कहीं मत जाना।”

“जैसी आपकी मर्जी मैडम।”—हल्का-सा सर झुकाकर वह बाहर निकल गया।

शहर के दूसरे कोने पर क्लाड केनड्रिक ने टी.वी. सैट आफ किया।

गैलरी के ऊपर बने अपने अपार्टमेंट के सुसज्जित लिविंग रूम में वह नाश्ता खत्म करके बैठा था। वह बहुत अच्छे मूड में था मगर पैट हैमिल्टन के प्रसारण ने सारा मूड आफ कर दिया था।

दो लाख डालर।

उसने इस इनाम को हासिल करने की सम्भावना के बारे में सोचा, मगर अफसोस उसके पास कोई ऐसा सबूत नहीं था कि क्रिसपिन ग्रेग ही हत्यारा था। वह हैरान था लेपस्कि ने यह कैसे कह दिया कि ग्रेग की पेंटिंग का हत्यारे से सम्बन्ध था।

हालांकि लेपस्कि द्वारा बताया गया हुलिया ग्रेग से मिलता था लेकिन इस हुलिए के तो और भी हजारों व्यक्ति होंगे। मान लो ग्रेग साबित कर दे कि उसका इन हत्याओं से जरा भी बराबर ताल्लुक नहीं था?

मान लो यह बात खुल जाए कि पुलिस को उसकी सूचना उसने—केनड्रिक ने—दी थी? चोरी की वस्तुओं की डीलिंग करने वाले उसके सभी ग्राहकों का उस पर विश्वास था। एक बार मुखबिर बनने का मतलब होगा हमेशा के लिए मुखबिर बन जाना। इनाम चाहे जितना बड़ा हो, इस बारे में जुबान न खोलना ही ठीक था।

इस सम्बन्ध में लुइस डी मारने को भी सचेत करने के ख्याल से उसने फोन कर उसे तुरंत अपने पास बुला लिया।

क्रिसपिन ग्रेग ने अपना टी.वी. सैट ऑफ कर दिया।

दो लाख डालर।

उसकी आँखें सिकुड़ गईं।

इस हरामजादी कुतिया की हत्या करके उसने सचमुच भयानक भूल की थी।

लेकिन इस बात को जानता कौन था? सिर्फ उसकी मां और रेनाल्ड्स। उसकी मां? उसके लिए तो अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा ही सब कुछ थी।

लेकिन रेनाल्ड्स गद्दारी कर सकता था। शराब की अपनी कमजोरी की वजह से उसे इनाम का लालच आ सकता था।

क्रिसपिन कुछ देर तक बैठा सुलेमान पैन्डेन्ट को टटोलता रहा, फिर उठा और दबे पांव सीढ़ियों के दहाने पर आ खड़ा हुआ। किचन में सफाई करते रेनाल्ड्स की आहट उसे सुनाई दी। बगैर कोई आहट किए सीढ़ियां तय करके तेजी से चलता हुआ वह रेनाल्ड्स के कमरे में जा घुसा। खिड़की में लगी सलाखों से संतुष्ट होकर उसने अपने तेज चाकू से टेलीफोन की एक्सटेन्शन लाइन का केबल काट दिया। फिर बाहर निकला, दरवाजा बंद करके ताले में लटकती चाबी निकाल ली और कारीडोर में बने झाङू वगैरा रखने के एक क्लोजेट में घुसकर दरवाजा आधा खुला रहने दिया।

गूंगी-बहरी क्रिस्सी ने भी पैट हेमिल्टन का प्रोग्राम देखा था। हेमिल्टन ने जिन हत्याओं के बारे में बताया था उसकी कोई खबर उसे नहीं थी, लेकिन दो लाख डालर के इनाम ने उसे जरूर प्रभावित किया। उसकी समझ में नहीं आ सका, इतनी रकम का वह क्या करेगी? इसी उहापोह में फंसी वह उठी ताकि अपने लंच के लिए फ्रिज में रख छोड़ी गई चिकन ला सके। उसने दरवाजा खोला लेकिन फौरन ही फिर बन्द कर दिया।

दरवाजे की झिरी से उसने देखा, क्रिसपिन ने रेनाल्ड्स के कमरे के दरवाजे में से चाबी निकाली और झाङू वगैरा रखने के क्लोजेट में जा घुसा था।

चन्द मिनट बाद, रेनाल्ड्स किचन से निकला। अपने कमरे में जाकर द्वार बन्द कर लिया।

क्रिस्सी असमंजसतापूर्वक खड़ी देख रही थी। क्रिसपिन क्लोजेट से बाहर निकला। रेनाल्ड्स के दरवाजे के ताले में चाबी फंसाकर घुमा दी। फिर चाबी निकालकर जेब में डाली और अपनी मां के कमरे की ओर बढ़ गया।

रेनाल्ड्स स्कॉच का बड़ा पैग डालकर बैठ गया। दो लाख डालर! यह पुलिस को जरूर सूचित करेगा। सभी जरूरी सबूत उसके पास थे।

वे खौफनाक पेंटिंग्स।

खून से सने जले कपड़ों की राख।

कपड़े जलने के बावजूद भी गोल्फ बॉल बटन अभी भी भट्टी में मौजूद थे।

अब वह बैठा क्यों था?

पुलिस को खबर क्यों नहीं करता?

हेमिल्टन ने कहा था कि प्राप्त सूचना बिल्कुल गुप्त रखी जाएगी, लेकिन एक बार इनाम वसूल करने के बाद वह फिर कभी इधर का रुख भी नहीं करेगा।

नर्क में जाए मोटी बुढ़िया!

विस्की खत्म करके वह लड़खड़ाता हुआ उठा और टेलीफोन उठा लिया। हालांकि वह नशे में था परन्तु यह समझते देर नहीं लगी कि फोन में डायल टोन नहीं थी। मन ही मन बड़बड़ाते हुए रिसीवर क्रेडिल पर पटक दिया।

थोड़ा हिचकिचाने के बाद उसने स्कॉच का एक और पैग डाला। कोई बात नहीं, अभी बहुत वक्त था। स्वभावानुसार उसने सोचा कि बुढ़िया को लंच में क्या देगा? फिर सोचा चन्द दिनों की बात थी। दो लाख डालर हाथ में आने के बाद वह इस बुढ़िया की चिंताओं से मुक्त हो जाएगा।

वह हंसा।

स्कॉच खत्म करके खाली गिलास फर्श पर गिरा दिया।

दुबारा टेलीफोन के पास जाकर रिसीवर उठाया तो कटा हुआ केबल दिख गया। भय की सर्द लहर उसके जिस्म से गुजर गई।

आतंक हावी हो गया।

दरवाजे के पास पहुंचकर उसे खोलना चाहा, तो पता लगा कि बाहर से लाक्ड था।

उसे अंदर बन्द किया जा चुका था।

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