छोटे भाई के भयभीत अंदाज को देखकर और माँ के सुनाए हुए डरावने किस्सों को याद करके बड़े बालक का भी कलेजा दहल उठा, तथापि उसने छोटे भाई का हौसला बढ़ाने के ध्येय से अपने अंदरूनी हालातों को चेहरे से जाहिर नहीं होने दिया और दृढ़ स्वर में बोला- “पिशाच केवल उनके पीछे आता है, जो उससे दूर भागते हैं या उससे डरते हैं। तुम डरोगे नहीं तो वह तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। मैं जाकर देखता हूँ कि वह चीख किस औरत की थी। मुझे आभास हो रहा है कि वह औरत हमारे गाँव की ही है, जो हमारी तरह अधर्मियों के चंगुल से बच कर जंगल की ओर चली गयी है और अब किसी गहरी मुसीबत में फंस गयी है।”
छोटा बालक कुछ नहीं बोला।
“मैं अधिक दूर नहीं जाऊंगा।” बड़ा बालक उसकी मनोदशा भांप कर बोला- “जल्द ही लौट आऊँगा। डरो मत, तुम्हें यहाँ अधिक देर तक अकेला नहीं छोडूंगा।”
कहने के बाद उसने मशाल संभाला और जंगल की दिशा में बढ़ चला।
छोटा बालक उसे तब तक देखता रहा, जब तक मशाल की रोशनी नजर आती रही। अंतत: अकेलेपन के भय से बचने के लिए उसने आँखें बंद करके कम्बल में मुंह छुपा लिया। कम्बल और अलाव की गर्मी के कारण उसे जल्द ही नींद आ गयी।
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उस कमरे में एक लड़की समेत तीन लोग थे, जिसकी दीवारों से लेकर खिड़कियों के पर्दों तक का रंग नीला था। यहाँ तक कि सीलिंग को भी फ्लोरोसेण्ट ब्लू रंग के स्टीकर्स से ढका गया था। वहां व्याप्त खामोशी इस दर्जे की थी कि लोग एक-दूसरे की साँसों की ध्वनि को भी सुन सकते थे।
लड़की की अवस्था इक्कीस साल थी। वह एक आरामदायक कुर्सी की पुश्त से सर टिका कर आँखें बन्द किये हुए थी। उसके जिस्म में कोई हलचल नहीं थी, सिवाय बन्द पलकों में हल्के-हल्के कम्पन के, किन्तु जल्द ही वह कम्पन भी खत्म हो गया।
लड़की के अलावा कमरे में मौजूद दो अन्य लोगों में एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति था, जो शारिरिक भाषा और हाव-भाव से कोई मनोचिकित्सक लग रहा था। उसकी चश्माधारी आंखें लगातार लड़की के खूबसूरत चेहरे पर ही ठहरी हुई थीं। जबकि दूसरा सांवले वर्ण का एक आकर्षक युवक था, जिसकी उम्र अट्ठाइस वर्ष के आस-पास रही होगी। उसके बाल बेतरतीबी से बिखरे हुए थे। चेहरे पर व्यग्रता थी। वह एक पल लड़की को देखता था, तो अगले पल मनोचिकित्सक को।
आखिरकार जब दो मिनट तक लड़की के होठों का कम्पन वाक्य में तब्दील नहीं हुआ, तो युवक कह उठा- “ये.....क....कुछ बोल क्यों नहीं रही है डॉक्टर?”
“कोशिश कर रही है। इसे परामनोविज्ञान में ‘जात-स्मरण’ अथवा ‘रिवर्स मेमोरी’ कहते हैं।”
लड़की के होठों का कम्पन तीव्र हुआ।
“क्या नजर आ रहा है?” डॉक्टर ने उसके चेहरे को अपलक घूरते हुए पूछा।