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राज के चेहरे पर एक जोरदार पानी का छपाका पड़ा और उसने झुरझुरी लेकर जबरदस्ती आंखें खोल दी । उसका आधा शरीर पानी से तर-बतर था। दोनों हाथ ऊपर बंधे हुए थे । बड़ी मुश्किल से उसने आंखें खोलकर अपने सामने की दिशा में देखा।
राज के सामने खंड हुए उसके हमशक्त नौजवान ने एक क्रूर मुस्कान के साथ हाथ में पकड़े गिलास से न्हिस्की का चूंट लिया और अधनंगी लड़की की कमर में हाथ डाले-डाले उसके होंठों पर एक 'किस' किया । फिर राज से संबोधित होकर बोला
'बोलो, क्या सोचा है तुमने ?'
अधेड़ उम्र इंस्पेक्टर मेहरा ने राज से कहा 'अब भी मान जाओ, राज । क्यों अकारण अपने साथ और भी कई जानें लेने पर तुले हो?'
राज ने इंस्पेक्टर मेहरा के मुंह पर थूक दिया ।
मेहरा ने बड़ी निर्लज्जता से हंसकर रुमाल से अपना चेहरा पोंछा और बोला 'भोला शंकर ऐसी बात का बुरा नहीं मानता
राज ने नफरत से कहा
'कमीने...गद्दार...तूने अपनी ड्यूटी से गद्दारी करके अपने माथे कलंक लगा लिया । अब मुझे भी गद्दार बनाना चाहता है?'
भोला शंकर फिर हंसा और बोला
'भोले भाले, इंस्पेक्टर राज! मैं सी. आई. डी: इंस्पेक्टर मेहरा नहीं हूं । मैं तो तुम्हारे पापा सेठ नरोत्तम सक्सेना का मैनेजर हूं। मैंने सी. आई. डी. इंस्पेक्टर मेहरा को तभी मार डाला था जब वह सक्सेना एंड सक्सेना एंटरप्राइजे के बारे में इन्वेस्टीगेशन कर रहा था । यह मेरे चेहरे पर तो सचमुच मेहरा का मास्क है ।'
भोला शंकर ने अपने चेहरे का मास्क उतार दिया और राज होंठ भींचकर बोला
- 'तो तू है मेरे पापा का दुश्मन! हरामजादे...मैं तुझे किसी कीमत पर जिन्दा नहीं छोडूंगा।'
___ 'हे...हे...हे, मुझे मरना होता तो पैदा होते ही मर जाता क्योंकि मैं अपनी मां की आवारगी का अंजाम हूं...विशुद्ध हरामी! 'और तुम जानते हो हरामी विशुद्ध निर्लज होतेहै । मगर तुम राज...और तुम्हारा यह हमशक्ल निहाल विशुद्ध हलाली हैं क्योंकि तुम दोनों एक-दूसरे के सगे भाई हो ।'
राज ने चौंककर कहा 'क्या? यह मेरा भाई है?'
भोला शंकर हंसकर बोला
'हां, मेरे भोलेराजा! यह निहाल और तुम राज दोनों यशोदा मजूमदार के जुड़वां बेटे हो । यशोदा , जिसे तुम्हारे बापने दौलत के लिए तलाक दे दिया था ।'
अचानक भोला शंकर की आंखें बाहर निकल पड़ी और उसने किसी जानवर के समान हिंसक स्वर में कहा
'और मैं न तो इंस्पेक्टर मेहरा हुं और न ही भोला शंकर । मेरा नाम फ्रेडरिक है । मैं भोला शंकर के नाम से नरोत्तम सक्सेना की फर्म में मैनेजर था।
_ 'मैं उनकी फर्म के द्वारा तस्करी करता था। यह भेद मेरी मां ने मुझे बताया था कि मेरी मां की एक अवैध बहन यशोदा मजूमदार भी है, जो एक अनाथ-आश्रम में है।
'मैंने यशोदा को अनाथ-आश्रम से निकालकर नरोत्तम की सैक्रेटरी बनवाया । उसे मैं अपने हित साधन के लिए इस्तेमाल करना चाहता था । लेकिन वह कम्बख्त सचमुच नरोत्तम से प्यार करने लगी और उससे शादी भी कर बैठी। फिर गर्भवती होकर निकाल दी भी गई ।
'उसने नर्सिंग होम में दो जुड़वां बच्चों को जन्म दिया । मैं उन दिनों फरार था । मुझे नही मालूम था कि यशोदा ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है इसलिए मैं सिर्फ निहाल को ले उड़ा ।
नर्स ने डर के मारे यशोदा को भी नहीं बताया कि उसके दो बच्चे थे । इसलिए एक को यानि तुम्हें यशोदा ने अनाथ-आश्रम में डाल दिया ।
'इसे मैंने चोर बनाया, डाकू बनाया । इसी से मैंने मुरली मनोहर के यहां पच्चीस लाख रुपये का डाका डलवाया ।'
राज ने निहाल की तरफ देखा और भारी आवाज में बोला
'तुमने यह सब क्यों सीखा मेरे भाई? तुम्हारी रगों में तो एक शरीफ बाप का खून है और तुम एक शरीफ औरत की कोख से जन्मे हो?'
फेडरिक ने पुन: कहकहा लगाया
'इंस्पेक्टर राज सक्सेना! यह तुम्हारा जुडवां भाई निहाल सक्सेना गूंगा भी है और बहरा भी और न ही यह होठों के हिलने से कुछ समझ सकता है
'मैंने इसका लालन-पोषण इस ढंग से किया है कि यह एक मशीनी-मानव बनकर रह गया है । यह सिर्फ इशारों पर नाचता है और सुरा और सुन्दरी के बल पर जिन्दा रहता है।'
राज के चेहरे पर उद्विग्नता-सी नजर आई। फिर अचानक वह कहकहे लगाने लगा तो फेडरिक ने गुस्से से कहा
'क्यों हंस रहे हो, तुम ?'
इसलिए कि मेरे भाई का गूंगा-बहरा और मशीनी मानव होना ही तुम्हारे षड्यंत्र की असफलता है। नहीं तो तुम अब तक इसे राज सक्सेना बनाकर अपना षड्यंत्र सफल कर चुके होते । इसीलिए तुम चाहते हो कि मैं तुम्हो षड्यंत्र में शामिल हो जाऊं। इंस्पेक्टर राज बनकर डॉली को इस अपराध में गिरफ्तार करा दूं कि वह सेठ नरोत्तम सक्सेना की नकली बेटी बनकर उन्हें मारने और उनकी दौलत पर अधिकार जमाने आई है।
'फिर तुम मुझे भी मार डालो और निहाल को यशोदा मम्मी का बेटा बनाकर उनकी सारी दौलत पर अधिकार कर लो।'
'और मैं तुम्हारे बाप से अपनी बहन के विनाश का बदला भी ले लूं ।'
'मगर मेरी मम्मी मेरे पापा से बदला लेना चाहती तो वह खुद तुमसे मिल जाती । फिर जब तुमने डॉली को अपना साथी बना लिया है तो फिर उसे क्यों पकड़वाना चाहते हो?'
'इसलिए कि डॉली ने मुझे डबल-क्रास किया है । वह सेठ नरोत्तम के कमरे में सोसायटी-गर्ल बनकर गई। और उसे सब-कुछ बता दिया । अब उसने कोई जाल बिछाया होगा।'
'तुम्हें कैसे पता चला?'
फ्रेडरिक ने राज का मास्क दिखाकर कहा
'इस मास्क के द्वारा । ऐसा एक मास्क पहनकर मेरा आदमी बंगले में डॉली से मिला । वह समझी कि तुम्हीं हो, जबकि तुम उसके पीछे यहां आकर पकड़े गए थे।
'दूसरा मास्क दिखाकर मेरे आदमी ने डॉली को विश्वास दिला दिया कि वह इंस्पेक्टर राज है। फिर उसने सब-कुछ बता दिया कि वह किस तरह मुझे और मेरे गैंग को सेठ सक्सेना से मिलकर गिरफ्तार कराना चाहती है ।'
राज ने कहकहा लगाया और बोला
'चलो, यह तो और भी अच्छा हुआ । जो काम मुझे करना था, वह डॉली कर देगी । अब तुम मुझे मार डालो । तुम पकड़े जाओ और तुम्हें दंड मिले यही मेरा सपना है । जो मेरे हाथों न सही डॉली के हाथों पूरा हो जाएगा।'
'ओं, बास्टर्ड! मैं तुझे सचमुच मार डालूंगा ।'
'आचानक फ्रेडरिक ने राज पर हंटर बरसाने शुरूकर दिए।
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राज के सामने खंड हुए उसके हमशक्त नौजवान ने एक क्रूर मुस्कान के साथ हाथ में पकड़े गिलास से न्हिस्की का चूंट लिया और अधनंगी लड़की की कमर में हाथ डाले-डाले उसके होंठों पर एक 'किस' किया । फिर राज से संबोधित होकर बोला
'बोलो, क्या सोचा है तुमने ?'
अधेड़ उम्र इंस्पेक्टर मेहरा ने राज से कहा 'अब भी मान जाओ, राज । क्यों अकारण अपने साथ और भी कई जानें लेने पर तुले हो?'
राज ने इंस्पेक्टर मेहरा के मुंह पर थूक दिया ।
मेहरा ने बड़ी निर्लज्जता से हंसकर रुमाल से अपना चेहरा पोंछा और बोला 'भोला शंकर ऐसी बात का बुरा नहीं मानता
राज ने नफरत से कहा
'कमीने...गद्दार...तूने अपनी ड्यूटी से गद्दारी करके अपने माथे कलंक लगा लिया । अब मुझे भी गद्दार बनाना चाहता है?'
भोला शंकर फिर हंसा और बोला
'भोले भाले, इंस्पेक्टर राज! मैं सी. आई. डी: इंस्पेक्टर मेहरा नहीं हूं । मैं तो तुम्हारे पापा सेठ नरोत्तम सक्सेना का मैनेजर हूं। मैंने सी. आई. डी. इंस्पेक्टर मेहरा को तभी मार डाला था जब वह सक्सेना एंड सक्सेना एंटरप्राइजे के बारे में इन्वेस्टीगेशन कर रहा था । यह मेरे चेहरे पर तो सचमुच मेहरा का मास्क है ।'
भोला शंकर ने अपने चेहरे का मास्क उतार दिया और राज होंठ भींचकर बोला
- 'तो तू है मेरे पापा का दुश्मन! हरामजादे...मैं तुझे किसी कीमत पर जिन्दा नहीं छोडूंगा।'
___ 'हे...हे...हे, मुझे मरना होता तो पैदा होते ही मर जाता क्योंकि मैं अपनी मां की आवारगी का अंजाम हूं...विशुद्ध हरामी! 'और तुम जानते हो हरामी विशुद्ध निर्लज होतेहै । मगर तुम राज...और तुम्हारा यह हमशक्ल निहाल विशुद्ध हलाली हैं क्योंकि तुम दोनों एक-दूसरे के सगे भाई हो ।'
राज ने चौंककर कहा 'क्या? यह मेरा भाई है?'
भोला शंकर हंसकर बोला
'हां, मेरे भोलेराजा! यह निहाल और तुम राज दोनों यशोदा मजूमदार के जुड़वां बेटे हो । यशोदा , जिसे तुम्हारे बापने दौलत के लिए तलाक दे दिया था ।'
अचानक भोला शंकर की आंखें बाहर निकल पड़ी और उसने किसी जानवर के समान हिंसक स्वर में कहा
'और मैं न तो इंस्पेक्टर मेहरा हुं और न ही भोला शंकर । मेरा नाम फ्रेडरिक है । मैं भोला शंकर के नाम से नरोत्तम सक्सेना की फर्म में मैनेजर था।
_ 'मैं उनकी फर्म के द्वारा तस्करी करता था। यह भेद मेरी मां ने मुझे बताया था कि मेरी मां की एक अवैध बहन यशोदा मजूमदार भी है, जो एक अनाथ-आश्रम में है।
'मैंने यशोदा को अनाथ-आश्रम से निकालकर नरोत्तम की सैक्रेटरी बनवाया । उसे मैं अपने हित साधन के लिए इस्तेमाल करना चाहता था । लेकिन वह कम्बख्त सचमुच नरोत्तम से प्यार करने लगी और उससे शादी भी कर बैठी। फिर गर्भवती होकर निकाल दी भी गई ।
'उसने नर्सिंग होम में दो जुड़वां बच्चों को जन्म दिया । मैं उन दिनों फरार था । मुझे नही मालूम था कि यशोदा ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है इसलिए मैं सिर्फ निहाल को ले उड़ा ।
नर्स ने डर के मारे यशोदा को भी नहीं बताया कि उसके दो बच्चे थे । इसलिए एक को यानि तुम्हें यशोदा ने अनाथ-आश्रम में डाल दिया ।
'इसे मैंने चोर बनाया, डाकू बनाया । इसी से मैंने मुरली मनोहर के यहां पच्चीस लाख रुपये का डाका डलवाया ।'
राज ने निहाल की तरफ देखा और भारी आवाज में बोला
'तुमने यह सब क्यों सीखा मेरे भाई? तुम्हारी रगों में तो एक शरीफ बाप का खून है और तुम एक शरीफ औरत की कोख से जन्मे हो?'
फेडरिक ने पुन: कहकहा लगाया
'इंस्पेक्टर राज सक्सेना! यह तुम्हारा जुडवां भाई निहाल सक्सेना गूंगा भी है और बहरा भी और न ही यह होठों के हिलने से कुछ समझ सकता है
'मैंने इसका लालन-पोषण इस ढंग से किया है कि यह एक मशीनी-मानव बनकर रह गया है । यह सिर्फ इशारों पर नाचता है और सुरा और सुन्दरी के बल पर जिन्दा रहता है।'
राज के चेहरे पर उद्विग्नता-सी नजर आई। फिर अचानक वह कहकहे लगाने लगा तो फेडरिक ने गुस्से से कहा
'क्यों हंस रहे हो, तुम ?'
इसलिए कि मेरे भाई का गूंगा-बहरा और मशीनी मानव होना ही तुम्हारे षड्यंत्र की असफलता है। नहीं तो तुम अब तक इसे राज सक्सेना बनाकर अपना षड्यंत्र सफल कर चुके होते । इसीलिए तुम चाहते हो कि मैं तुम्हो षड्यंत्र में शामिल हो जाऊं। इंस्पेक्टर राज बनकर डॉली को इस अपराध में गिरफ्तार करा दूं कि वह सेठ नरोत्तम सक्सेना की नकली बेटी बनकर उन्हें मारने और उनकी दौलत पर अधिकार जमाने आई है।
'फिर तुम मुझे भी मार डालो और निहाल को यशोदा मम्मी का बेटा बनाकर उनकी सारी दौलत पर अधिकार कर लो।'
'और मैं तुम्हारे बाप से अपनी बहन के विनाश का बदला भी ले लूं ।'
'मगर मेरी मम्मी मेरे पापा से बदला लेना चाहती तो वह खुद तुमसे मिल जाती । फिर जब तुमने डॉली को अपना साथी बना लिया है तो फिर उसे क्यों पकड़वाना चाहते हो?'
'इसलिए कि डॉली ने मुझे डबल-क्रास किया है । वह सेठ नरोत्तम के कमरे में सोसायटी-गर्ल बनकर गई। और उसे सब-कुछ बता दिया । अब उसने कोई जाल बिछाया होगा।'
'तुम्हें कैसे पता चला?'
फ्रेडरिक ने राज का मास्क दिखाकर कहा
'इस मास्क के द्वारा । ऐसा एक मास्क पहनकर मेरा आदमी बंगले में डॉली से मिला । वह समझी कि तुम्हीं हो, जबकि तुम उसके पीछे यहां आकर पकड़े गए थे।
'दूसरा मास्क दिखाकर मेरे आदमी ने डॉली को विश्वास दिला दिया कि वह इंस्पेक्टर राज है। फिर उसने सब-कुछ बता दिया कि वह किस तरह मुझे और मेरे गैंग को सेठ सक्सेना से मिलकर गिरफ्तार कराना चाहती है ।'
राज ने कहकहा लगाया और बोला
'चलो, यह तो और भी अच्छा हुआ । जो काम मुझे करना था, वह डॉली कर देगी । अब तुम मुझे मार डालो । तुम पकड़े जाओ और तुम्हें दंड मिले यही मेरा सपना है । जो मेरे हाथों न सही डॉली के हाथों पूरा हो जाएगा।'
'ओं, बास्टर्ड! मैं तुझे सचमुच मार डालूंगा ।'
'आचानक फ्रेडरिक ने राज पर हंटर बरसाने शुरूकर दिए।
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