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अजनबी हमसफर

रजनी ने अपने पापा की ऐसी बुरी अवस्था देखी तो उसे बहुत जोर का झटका लगा और दिल मे एक हुक सी उठी , उसके दिल से एक कराह निकली वो कही कही न कही अपने पापा के इस अवस्था के लिए खुद को जिम्मेदार मान रही थी और ये सही भी था ।

जिसकी जवान बेटी किसी दूसरे के साथ चली जाय उसके दिल पर क्या गुजरती है उसका दुख वही समझ सकता है जिसके उपर बीतती है

लावण्या और रजनी अपने पापा के पास पहुचे

लावण्या ने अपने हाथों से अपने पापा के माथे को सहलाया और हल्के से बोला

पापा कैसे है आप

रजनी के पापा ने हल्के से अपनी आंखें खोली और लावण्या को देख कर उनकी आंखों में चमक आगयी

उन्होंने कपकपाते ओठो से कहा

लावण्या तू आगयी बेटे ,रजनी कहा है ? वो कैसी है? तुझे मिली कि नही ?

आप चिंता मत करे पापा दीदी ठीक है और अच्छी है आप कहते थे न कि मैं आपका बहादुर बेटा हूं तो आपके इस बहादुर बेटे के होते हुए आपको चिंता करने की कोई जरूरत नही है लेकिन ये क्या आप ने फिर लापरवाही करना शुरू कर दिया मेरे पीछे आप ने सायद अपनी सेहत का ध्यान नही रखा कितने कमजोर हो गए है - लावण्या ने तुनक कर शिकायत की मानो कोई छोटे बच्चे को समझ रहा है

जिसके दिल के दोनों टुकड़े दूर हो जाये उसको क्या अच्छा लगेगा मैं ठीक हु तू मेरी चिंता मत कर ये बता रजनी का कुछ पता चला, कहा है वो ?- पापा ने कहा

आपके सिरहाने देखिये लावण्या मुस्कुराती हुई बोली

लावण्या के पापा ने जल्दी से अपना सिर घूम कर पीछे देखा और रजनी को देखते ही खुशी से चहक उठे और झटपट उठने की कोशिश करने लगे

रजनी और लावण्या ने उनको सहारा देकर उठाया

और उठते ही उन्होंने रजनी को कस कर अपने सीने से चिपका लिया और किसी छोटे से बच्चे की तरह रोने लगे

रजनी भी मानो किसी अनाथ की तरह जिसे अभी अभी पता चला हो कि उसका परिवार है अपने पापा को लिपट कर रो रही थी दोनो को इस तरह रोते देख कर लावण्या के आंखों में आंसूओ का सैलाब सा उमड़ आया जो सारे बांध तोड़ कर आंखों को अलविदा कह कर लावण्या के गालो को भिगोने लगा

बाप बेटी का यह मिलन और रोने का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा मानो दोनो एक दूसरे से अलग ही नही होना चाहते हो

आखिर में लावण्या ने पापा को और रजनी को एक दूसरे से अलग किया

दीदी पापा की तबियत खराब हो जाएगी अब चुप हो जाओ और पापा आप भी चुप हो जाये अब तो दीदी आ गयी है ना अब क्यो रो रहे हो - लावण्या ने दोनों को समझाते हुए कहा

काफी समझाने पर दोनों ने एक दूसरे को छोड़ दिया लेकिन अब भी दोनो की आंखे बह रही थी और दोनों ने एक दूसरे के हाथों को थाम रखा था

रजनी तूने बहुत दुख दिया है मुझे , मैं तुझसे बहुत नाराज हु तू एक बार मुझसे कह कर तो देखती ऐसी कौन सी इच्छा है तेरी जो हमने पूरी नही की फिर तूने ऐसा क्यों किया? क्यो अपने पापा की मांन मर्यादा इज्जत सम्मान का ध्यान नही रहा तुझे? तू इतनी समझदार थी फिर कैसे हो गया ये सब - लावण्या के पापा की असली टीस अब निकली

रजनी क्या बोलती वो बस चुपचाप रोये जा रही थी उसे खुद बहुत ग्लानि हो रही थी और वो सर्मिन्दा थी वह बहुत बुरी तरह पछता रही थी

पापा जो हो गया उसे याद करके कोई फायदा नही अब दीदी आगयी है ना तो अब सब भूल जाइए और नए सिरे से जिंदगी शुरू कीजिए - लावण्या ने कहा

लावण्या बेटे ये इतना आसान नही है गाँव समाज और ये दुनिया बहुत जालिम है तुम दोनों मेरी बेटी हो मैं कितना भी चाह लू तुम लोगो से ज्यादा दिन नाराज नही हो सकता क्योंकि मैं तुम लोगो से प्यार करता हूँ मैं माफ कर दूंगा सब भूल जाऊंगा लेकिन कदम कदम पर अब रजनी को जो बातें सुननी पड़ेगी उसका कोई भी इलाज नही है वो रजनी के दिल पर और मेरे आत्मसम्मान पर किसी नस्तर की तरह बार बार चुभेंगे - रजनी के पापा ने दर्द और दुख से भर कर कहा

पापा दुनिया वालो या समाज वालो ने हमे उंगली पकड़ कर चलना नही सिखाया है आपने सिखाया है, अपने हाथों से इस समाज ने खाना नही खिलाया है आपने और मम्मी जी ने खिलाया है , हमारे सारे जिदो और हमारी सारी तकलीफों को दूर इस दुनिया ने नही किया है आपने किया है, खुद को कष्ट देकर हमे सूकून से इस दुनिया या इस समाज ने नही सुलाया है ये सब आपने और मम्मी जी ने किया है आप दोनों क्या सोचते है ये हमारे लिए मायने रखता है रही बात दुनिया की तो आप दोनों का साथ चाहिए बस आपकी बेटीया इतनी भी

कमजोर नही है कि इस दुनिया का सामना न कर पाए आप ने इस लायक तो कर ही दिया है कि किसी भी परिश्थिति का सामना हम करने में सक्ष्म है आप बिलकुल चिंता मत कीजिये - लावण्या ने कहा

जीती रहो मेरी बच्ची आज मुझे तुमपर गर्व है लावण्या मैं हमेशा सोचता था काश मेरे एक बेटा होता लेकिन नही मेरी बेटी लावण्या है तो मुझे किसी बेटे की कोई जरूरत नही है मुझे तुम पर गर्व है तुमने जिस साहस के साथ अकेले जा जकर अपनी बहन को ढूढ़ कर लाई हो इससे मुझे पूरा विश्वास हो गया कि मेरी बेटी कितनी समझदार और साहसी है

पापा आप भी बस अब रहने दीजिए मैने कुछ नही किया सब आप की ही सिखाई शिक्षा है - लावण्या अपनी तारीफ सुन कर झेप गयी और सरमा कर बोली

अच्छा अब ये सब छोड़िये आपने दवाई खाई की नही - लावण्या ने पूछा

मैं ठीक हु रजनी आ गयी न अब मैं ठीक हो जाऊंगा अब किसी दवाई की कोई जरुरत नही है- पापा ने कहा

ऐसे कैसे नही है, जब तक आप बिलकुल अच्छे नही हो जाते तब तक दवा खानी पड़ेगी लापरवाही बिल्कुल नही समझे- लावण्या ने घुड़की दी

रजनी समझा इसको बहुत जिद्दी हो जा रही है अपनी मनमानी करने लगी है हर वक्त मुझे डाटती रहती है - पापा ने

रजनी की तरफ देख कर कहा

पापा लावण्या सही कह रही है आप की तबियत ठीक नही है तो दवा तो खानी पड़ेगी जल्दी से ठीक हो जाइए फिर अभी आपको धूमधाम से लावण्या की शादी भी तो करनी है ऐसे तबियत खराब रहेगी तो कैसे चलेगा - रजनी ने पापा को समझते हुए कहा

क्या दीदी आप भी - लावण्या अपनी शादी की बात सुनकर सरमा गयी और भाग गई

अच्छा पापा आप आराम करो मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूँ रजनी ने कहा

और रजनी ने अपने पापा को आराम से लिटा दिया और लावण्या के पीछे लपकी

लावण्या रजनी ने जाती हुई लावण्या को पुकारा

लावण्या रुकी और घूमी

जी दीदी

रजनी दौड़ कर उसके पास गई और जोर से गले लगा लिया उसकी आंखें फिर से भीग गयी
 
लावण्या को कुछ भी समझ मे नही आया वह आस्चर्य चकित और बदहवास खड़ी रही

फिर उसने रजनी को अपने से अलग किया और बोली

क्या हुआ दीदी अब यु अचानक ये सब क्यो

लावण्या तू न होती तो मैं आज भी जाने उसी हाल में पड़ी होती , तूने मुझे हिम्मत न बधाई होती तो मैं कभी भी पापा के

नजरो का सामना करने की हिम्मत नही जुटा पाती । तूने मुझे इस परिवार मम्मी पापा से मुझे फिर से मिलवा दिया जहां वापस आने का उम्मीद मैं छोड़ चुकी थी ,किस मुह से आती जो मैंने किया था उसके बाद तो कोई भी मुझे क्यो स्वीकार करता ,आज पता चला कि मां बाप अपने बच्चों के लिए जो भी सोचते है अच्छा ही सोचते है कभी बुरा कर ही नही सकते हमें कोई अधिकार नही है कि जवानी के जोश में कुछ ऐसा कदम उठा ले जिससे उनकी मान मर्यादा को चोट पहुचे अगर तू न होती तो मैं मम्मी पापा के इस प्यार के लिए जिंदगी भर तड़फती रहती थैंक्यू सो मच बहन और मुझे मेरी गलतियों के लिए माफ कर दे प्लीज

अरे दीदी आप इस तरह मुझसे माफी माग कर मुझे सर्मिन्दा मत कीजिये प्लीज आप मेरी बड़ी बहन है और हो जाता है कभी कभी लोग चमकते कांच को भी देख कर हीरे होने का भ्रम पाल लेते है मक्खन और चूने का रंग रूप एक जैसा ही होता है लेकिन बस गलती की माफी एक बार होती है बार बार नही ,तो आइंदा से ऐसा कुछ न हो जो पापा के आत्मसम्मान को चोट पहुचे ये हम दोनों बहनों की जिम्मेदारी है क्योंकि पापा ने हमारे लिए बहुत तकलीफे सही है बहुत दुख उठाये है- लावण्या ने कहा

लावण्या की बाते सुनकर रजनी चौक गयी

कितनी सुलझी और कितनी बड़ी बड़ी बातें करने लगी है रे तू , कहा से सीखा ये सब ऐसा लगता है दादी अम्मा की

आत्मा आगयी गयी तुझमे कितनी समझदार और सुलझी है तू और एक मैं जो ना जाने कैसे इतनी बड़ी गलती कर बैठी मैं बहुत छोटी हूँ लावण्या बड़ी तो तू हो गयी है अपने कर्मो से अपने समझदारी से मुझे तुझपर गर्व है लावण्या सच मे मैं बड़ी ख़ुश्किश्मत हूँ जिसे तू मिली है मेरी छोटी बहन के रूप में इतनी समझदार साहसी निडर भगवान करे तेरी हर एक मनोकामना पूर्ण हो और तू जिंदगी में खूब तरक्की करे।

बस बस दीदी बस, अरे एक साथ इतनी सारी तारीफ कही मैं फूल के फट न जाऊँ अब तारीफो से पेट भरेगी या अपने हाथ की स्पेशल भरवा बैगन बना कर खिलाएगी जबसे आप गयी है तरस गयी हूँ दीदी भरवा बैगन खाने को प्लीज- लावण्या ने मनुहार किया

अच्छा ठीक है मैं अभी बनाती है बस आधे घंटे में

तब तक तू कपड़े बदल लें और हाथ मुह धोकर आजा

जी दीदी अभी आयी -लावण्या ने कहा और जल्दी से चली गयी ।

लावण्या और रजनी ने मम्मी पापा को खाना खिलाया और फिर दोनों खाने के लिए बैठी

लाजबाब दीदी ऑसम क्या स्वाद है आपके हाथ मे आपके हाथ का बैगन का भरवा वर्ड का बेस्ट डिस है लावण्या चटखारे लेकर खाती हुई बोली

चल पागल - रजनी मुस्कुराती हुई बोली

सच्ची दीदी बहुत अच्छा बना है खा कर देखो एक बार लावण्या ने अपने हाथों से एक निवाला रजनी की तरफ बढ़ाया

रजनी ने मुस्कुराते हुए लावण्या का हाथ पकड़ लिया और उसी के हाथ से खा लिया

है ना मस्त लावण्या किसी छोटी सी बच्ची की तरह आंख नचा कर बोली

तो तू भी सीख ले सार्थक को बना कर खिलाना अनायास ही रजनी के मुह से निकल गया

सार्थक का नाम सुनते ही लावण्या चौक गयी और एक टक रजनी की तरफ देखने लगी मानो वह रजनी के बातो का मतलब समझने की कोशिश कर रही हो

रजनी के ओठो पर एक मुस्कुराहट थी

ऐसे क्या देख रही है मैं कोई भूत हूँ क्या? - रजनी ने मुस्कुराते हुए कहा

लावण्या के चेहरे पर एक लाली आगयी और बोली

मैं क्यो उसे बना कर खिलाऊंगी वो कहाँ और मैं कहाँ लावण्या यह कहते हुए एक अजीब सी बेचैनी से बोली वह कह तो रजनी से रही थी लेकिन मानो खुद के दिल से बाते कर रही हो

हाँ तो क्या हुआ दूर पास से क्या होता है क्या दूर वाले पास नही आ सकते है फिर इतना भी कौन सा दूर है - रजनी बोली

लेकिन दीदी मैं उसे क्यो खिलाऊंगी मुझे नही खिलाना

उसको- लावण्या खुद को हद तक सम्हाल चुकी थी

मैं तेरी बड़ी बहन हूँ लावण्या और तू अपने दिल की बाते मुझ से कह सकती है और जहां तक मुझे समझ है तू ही नही सार्थक भी तुझे पसंद करता है देखा नही तेरे ट्रैन पर बैठने के बाद वो कितना बेचैन और कितना उदास था मानो उसका कोई अपना उससे बिछड़ कर दूर जा रहा हो- रजनी ने कहा

आपको किसने कहा कि मैं उसे पसंद करती हूँ- लावण्या ने चौक कर कहा

तेरे आंखों ने, तुझे पता है ना तेरी आंखे सब कुछ बोल देती है तो तेरे इन्ही आंखों ने मुझे बता दिया कि मेरी लावण्या का दिल चोरी हो गया है- रजनी मुस्कुराती हुई बोली

क्या दीदी आप भी ऐसी कोई बात नही है - लावण्या सरमा के बोली

चल झूठी देख कैसे सार्थक का नाम सुनते ही तेरे गालो पर लाली छा गयी

अच्छा ये बता तूने फोन किया कि नही ,उसे बता तो दे कि तू अच्छे से पहुच गयी है और उसका भी हाल चाल पूछ लें आखिर में उसने इतनी हेल्प की है तो इतना तो बनता है नही तो वो सोचेगा की तू कितनी सेल्फिश है

एक बार फोन करके हाल चाल भी नही पूछा

सार्थक के फोन करने की बात सुनकर लावण्या के दिल की घंटिया जोर जोर से बजने लगी

वो भी तो कर सकता है दीदी उसने भी तो नही किया

लावण्या मानो सार्थक की शिकायत रजनी से कर रही हो

अरे हो सकता है किसी काम मे बिजी हो गया हो तो खुद कर ले न, क्या हो जाएगा उसने किया या तूने किया, मतलब तो हाल चाल राजी खुशी पूछने से है ना और फिर उसने तेरी और मेरी मदद की है तो हमारा फर्ज बनता है कि हम करे इसी लिए अब ये मैं करू या वो करे छोड़ और सार्थक को फोन कर के बता दे - रजनी ने कहा

जी दीदी अभी फ्री होकर करती हूँ -

लावण्या ने कहा

ठीक है - रजनी बोली और फिर जूठे बर्तनों को समेटने में जुट गई ।

क्रमशः

हाल क्या है मेरे दिल का क्या तुमको बताऊ

अपनी नजरो को किस किस से अब मैं छुपाऊ

दिल मे मेरे अजब सी कसमकस चल रही है

खुद समझ जाओ ना तुमको कैसे दिखाऊ

चैन दे दो तुम वापस अब यही मेरी चाहत

भूल आयी हंसी अब मैं कैसे मुस्कुराऊँ

अब तो दिल कह रहा है जोर से यु धड़क कर

जैसे भी कैसे कर के तेरी दुल्हन बन जाऊं

थोड़ी देर बाद लावण्या फ्री होकर आराम करने अपने कमरे में पहुची ।

तभी उसे सार्थक का ख्याल आया

एक बार भी फोन नही कर सकते थे पता नही सही सलामत पहुचे की नही - लावण्या गुस्से से बड़बड़ाई

फिर उसने अपना मोबाइल निकाला और सार्थक का नम्बर मिलाया ।

2 घंटी जाने के बाद फोन उठा।

हेलो की एक हल्की सी आवाज आई ।

लावण्या चौक गयी उसने कान के पास से मोबाइल हटा कर देखा ।

नम्बर तो सार्थक का ही था ।

उसने फिर से वापस मोबाइल लगाया ।

हेलो की आवाज दुबारा आयी आवाज अब भी लड़की की ही थी ।

हेलो

जी कौन? - उधर से आवाज आई

मैं...मैं.. मुझे सार्थक जी से बात करनी है - लावण्या हकलाते

हुए बोली

आप बोल कौन रही है बताइये मैं बुलाती हूँ - पूनम ने पूछा

आप कौन है , लावण्या ने सवाल के बदले सवाल पूछा

मैं पूनम बोल रही हूँ , सार्थक भैया कमरे में है पूनम ने कहा

नमस्ते मैं लावण्या बोल रही हूँ प्लीज सार्थक से मेरी बात करवा दीजिये -लावण्या ने रिक्वेस्ट किया

अच्छा दो मिनट रुकिए मैं भैया को बुलाती हूँ - पूनम ने कहा और फिर वह मोबाइल लेकर सार्थक के पास पहुची

भैया किसी लावण्या का फोन है -पूनम ने कहा

लावण्या का नाम सुनकर सार्थक जल्दी से फोन की तरफ दौड़ा और जल्दी से फोन उठाया

हेलो लावण्या - सार्थक ने तुरंत कहा, ऐसा लग रहा था अगर एक पल भी देर करता तो फोन कट जाना था ।

हेलो सार्थक जी कैसे है आप ? - सार्थक की आवाज सुनकर जैसे लावण्या के जान में जान आयी हो ।

मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो ?अच्छे से पहुच गयी ?कोई तकलीफ तो नही हुई ,? घर पर सब ठीक है ना? रजनी दीदी ठीक है ना ? उन्हें किसी ने कुछ कहा तो नही?- सार्थक ने एक साथ ही सवालो की झड़ी लगा दी ।

अरे एक साथ इतने सारे सवाल, सब ठीक है आप बताइए आप अच्छे से पहुच गए ? एक बार फोन करना भी गवारा नही समझा - लावण्या ने प्यार से शिकायत की

लावण्या की शिकायत सुनकर सार्थक झेप गया

हा वो घर आकर थोड़ा सा ब्यस्त हो गया ध्यान नही रहा, आई एम सोरी बहुत अच्छा किया तुमने कर लिया - सार्थक ने कहा

अच्छा ये कौन था जिसने फोन उठाया था? - लावण्या ने पूछा

ये मेरी छुटकी है मेरी छोटी बहन पूनम - सार्थक ने कहा

ओह्ह लेकिन तुमने बताया नही था कि तुम्हारी कोई बहन भी है - लावण्या के मुह से निकला

अरे तुमने पूछा भी तो नही था न - सार्थक बोला

हा ये भी सही है इतना समय ही कहा था कि हम दोनों एक दूसरे से कुछ पूछ सकते- लावण्या बोली

लावण्या एक बात बोलू - सार्थक बोला

मुझे भी कुछ कहना है - लावण्या ने कहा

अच्छा पहले तुम बोल लो - सार्थक ने कहा

नही पहले आप बोल दो- लावण्या बोली

अरे बोलो न पहले आप बताओ क्या कहना है फिर मैं बताता हूँ - सार्थक ने कहा

नही नही पहले आप बोलो

पूनम सार्थक के पास खड़ी होकर दोनो की बाते सुन रही थी और उत्सुकता से देख रही थी उसे समझ मे नही आ रहा था कि कौन है जिससे सार्थक बात कर रहा है ।

सार्थक ने पूनम को खड़े देखा तो फोन के माइक पर हाथ रखा और गर्दन हिला कर पूनम के जाने का इशारा किया

पूनम ने ना में गर्दन हिला कर मना कर दिया और लगे हाथ इशारो से पूछ लिया -कौन है ?

एक मिनट लावण्या प्लीज एक मिनट सार्थक फ़ोन में कहा और फिर बोला

छुटकी जा ना यहां क्यो खड़ी है, जा कर अपना काम कर उसके ओठो पर एक हल्की सी मुस्कुराहट थी

नही पहले आप बताओ कि कौन है पूनम ने जिद किया

अरे अभी बताता हूँ बात तो करने दे अच्छे से प्लीज अभी जा अभी सब बताता हूँ प्लीज- सार्थक ने पूनम का मनुहार किया

ओके पहले प्रोमिश करो - पूनम ने कहा

प्रोमिश ,प्रोमिश- सार्थक ने जल्दी से कहा

ओके प्रोमिश मत तोड़ना नही तो फिर जान लेना- पूनम ने धमकी दी और फिर मुस्कुराती हुई घूम कर चली गयी

उसके जाने के बाद सार्थक ने फिर से फोन का रुख किया और बोला - हा लावण्या बोलो

मैं क्या बोलू आप ही कुछ बताने वाले थे - लावण्या ने मुस्कुराते हुए कहा

क्या बताऊँ लावण्या जब से वापस आया हूँ दिल नही लग रहा है ऐसा लग रहा है कुछ मिस कर रहा हूँ सबकी बहुत याद आ रही है ,हम एक हफ्ते पहले ही मिले थे लेकिन ऐसा लग रहा है कि तुम्हे बर्षो से जानता हूँ और सच बताऊ तो तुम्हारी बहुत याद भी आरही है

पता नही फिर से जिंदगी में कभी तुम्हे देख पाऊंगा या नही तुम इतनी दूर हो , जाने फिर हमारा तुम्हारा आमना सामना हो कि नही- सार्थक ने मायुसी से कहा

ऐसी बाते क्यो कर रहे हो सार्थक हम जरूर मिलेंगे और जो हाल तुम्हारा है वही हाल मेरा भी है ऐसा लग रहा है कुछ छूट सा गया है ,जाने कैसी एक अजीब सी बेचैनी है और बार बार मेरी नजरो के सामने तुम्हारा चेहरा आ जाता है- लावण्या ने कहा

अच्छा रजनी दीदी कहा है थोड़ा बात करवाओ - सार्थक ने कहा

एक मिनट रुको करवाती हूँ लावण्या ने कहा और फिर फोन लेकर रजनी के पास पहुची
 
हेलो कैसे हो सार्थक? रजनी की आवाज सार्थक के कानों में पड़ी

मैं ठीक हु, आप तो ठीक है ना ?- सार्थक बोला

हा मैं तो ठीक हु बस इसी लावण्या का कुछ ठीक नही लग रहा है मुझे जब से यह गोवा से आई है कुछ बुझी बुझी सी लग रही है लग रहा है इसका दिल चोरी हो गया है कही तुमने तो नही चुरा लिया - रजनी ने मजाक में कहा

क्या दीदी आप भी कुछ भी बोल रही है- सार्थक झेप गया

क्यो मेरी लावण्या तुम्हे पसंद नही है क्या ?- रजनी ने उल्टा सवाल किया

नही ऐसी बात नही है लावण्या तो बहुत अच्छी है

लेकिन ...सार्थक ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी

लेकिन क्या? अरे इतना सरमाओगे तो किसी से अपने दिल की बात कैसे कर पाओगे हम तो तुम्हारे दोस्त है तो दोस्त से तो दिल की बाते कर सकते हो तो जो भी दिल मे हो कह दो क्या पता मैं तुम्हारी हेल्प कर दु - रजनी ने कहा

ऐसी बात नही है वो तो बस आप लोगो की याद आरही थी तो ऐसे ही बोल दिया सार्थक के चेहरे पर एक लाली सी आगयी हालांकि उसे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था उसका दिल कह रहा था कि सब कुछ सच सच बता दे लेकिन एक झिझक उसे रोक रही थी

अच्छा लो तुम लावण्या से बात करो मैं जा रही हूँ वैसे भी मुझे कबाब में हड्डी बने का कोई शौक नही है

और रजनी ने फोन लावण्या को पकड़ा दिया और चली गयी

लावण्या वही खड़ी होकर सारी बाते सुन रही थी उसके चेहरे पर कई रंग आकर गुजर गए कभी गुस्सा तो कभी अपनी बहन पर प्यार भी आरहा था लेकिन अब जब उसके हाथ मे फोन था तो वह सरम के मारे कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नही थी

हेलो लावण्या क्या हुआ चुप क्यों हो लावण्या को चुप देख कर सार्थक ने कहा

कुछ नही बस ऐसे ही लावण्या ने हल्के से कहा

सॉरी वो दीदी की मजाक करने की आदत है सो प्लीज माइंड मत करना लावण्या को कुछ नही सूझा तो उसने सार्थक को

सफाई दी

अरे कोई बात नही मुझे अच्छा लगा वैसे भी इतना टेंसन वाला माहौल था तो अच्छी बात है रजनी दीदी का माइंड थोड़ा हल्का फुल्का हुआ है- सार्थक बोला

अच्छा सुनो लावण्या अगर रात में तुम फ्री हो तो तो थोड़ी देर बात करे प्लीज अगर फ्री हो तो अगर कोई काम हो तो कोई बात नही- सार्थक ने कहा

हा फ्री हु मैं तुमको फोन करूँगी ठीक है- लावण्या ने टपक से कहा

ठीक है अच्छा अब रखता हूं वरना छुटकी फिर आकर दिमाग खायेगी रात में मिलते है बाय

बाय अपना ध्यान रखना- लावण्या ने कहा

यस, यस, अचानक फोन काट कर सार्थक खुसी से उछल पड़ा मानो उसने कोई वर्ड कप जीत लिया हो लावण्या से बात करके उसे बहुत अच्छा लग रहा था और वह खुसी से नाच रहा था

तभी पूनम कमरे में आई और बोली

हो गयी बात

सार्थक की खुसी पर जैसे किसी ने ग्रहण लगा दिया वह बिल्कुल शांत हो गया हालांकि उसके ओठो पर एक मुस्कुराहट अब भी थी

हा दोस्त थी तो कुछ जरूरी काम था सार्थक ने गंभीरता से कहा

अच्छा.... सच - पूनम ने मानो उसकी बातों को हवा में उड़ा दिया

और नही तो क्या सार्थक नजर चुराता हुआ बोला

लग तो नही रह है कि सिर्फ दोस्त थी इतना खुश तो कभी भी नही हुए किसी से भी बात करके फिर ऐसा क्या है इसमें की इससे बात करके नाच रहे हो खुसी से फुले नही समा रहे हो - पूनम किसी मझे हुए जासूस की तरह सोचती हुई बोली

ऐसा कुछ नही है पूनम तू खामखा ही ज्यादा दिमाग चला रही है वो कालेज की फ्रेंड है उसे कुछ नोट्स चाहिए थे, तो उसी के लिए फोन किया था - सार्थक ने सरासर झूठ बोला

तो मैंने कब कहा कि मेरी होने वाली भाभी थी,अपने आप ही तुम्ही अपने मन से सफाई दिए जा रहे हो वो क्या है चोर की दाढ़ी में तिनका- पूनम मुस्कुराती हुई बोली

क्या ...मैं.. मैं.. मैने कहाँ सफाई दी ,वो तो तू ऐसे शक से मुझे देख रही थी इसी लिए मैने तुझे बता दिया कि कही तू गलत न जज कर ले बाकी तू तो मेरा नेचर जानती ही है- सार्थक ने कहा

हा हा पता है आप एक नम्बर के डरपोक हो लड़कियों से बात करने में ही आप कापने लगते हो तो आप पर शक करना बेवकूफी है समझे मेरे भोले भैया पूनम ने सार्थक से कहा

वैसे एक बात कहू भाई- पूनम ने कहा

देख लो अगर कुछ बात बनती हो तो तो बना लो , अगर आपके दिल मे कुछ हो तो मैं हेल्प कर दूं मुझ बेचारी को एक

भाभी मिल जाएगी, कम से कम अपना नही तो मेरा ख्याल कर लो ,अकेले मैं घर मे बोर हो जाती हूँ पूनम ने मासूमियत और क्यूट से फेस बना कर कहा मानो बहुत ज्यादा तकलीफ में और लाचार हो

ओये तू चुप कर बहुत बक बक करने लगी हैआजकल, बहुत दिमाग चलने लगा है तेरा आजकल, ज्यादा अपना दिमाग मत चला और ज्यादा मत सोच और जा चुपचाप अपना काम कर वरना पिटेगी मेरे हाथ से बड़ी आयी मेरी हेल्प करने वाली- सार्थक ने पूनम को डपटते हुए कहा

अरे ; एक तो मैं आपकी हेल्प करना चाह रही हूँ और आप हो कि मुझपर ही गुस्सा कर रहे हो सच ही कहते है भलाई का जमाना ही नही है आजकल, - पूनम ने मायूसी से कहा

तू मेरी भलाई करने को रहने दे मैं अपना भला खुद कर सकता हूँ मेरे लिए इतना सोचने के लिए बहुत बहुत धन्यबाद आपका लेकिन मुझे तुझ जैसी पागल की हेल्प की कोई जरूरत नही है बड़ी आयी मेरी मदद करने वाली - सार्थक बोला

देख लो अभी भी मौका है ये ऑफर लिमिटेड पीरियड के लिए है बाद में मत कहना की मैने मदद नही किया या बाद में पछताना पड़े अच्छे से सोच लो पूनम पूरी मस्ती के मूड में थी

तू रुक मैं अभी बताता हूँ मुझे लग रहा है आज तेरा पिटने का ही मन है सार्थक मारने के पूनम के पीछे लपका

और पूनम खिलखिला कर हसती हुई बाहर भागी

वह सार्थक से बचकर भाग रही थी तभी न जाने कहा से बाहर चाची जी टपक पड़ी

और पूनम अपनी मस्ती में उनसे जोर से टकराई

वो अभी अभी पानी का नया मटका खरीद कर ला रही थी और पूनम के टकराने से वह मटका उनके हाथ से गिर कर चूर चूर हो गया

पूनम को काटो तो खून नही, डर से उसका चेहरा पूरा सूख गया उसका चेहरा ऐसे हो गया मानो भूखी शेरनी के सामने बकरी आ गयी हो और अब उस का भागने का कोई रास्ता न बचा हो

बड़ी मुश्किल से उसने थूक निगला और सर झुकाये शांत खडी हो गयी

ये क्या नौटंकी हो रही है ये घर है कि घुड़साल जहा तुम कुचाले भर रही हो इतनी भी तमीज नही है कि कैसे रहते है मैं सरम हया तो तुमने पहले ही छोड़ दिया है कम से कम थोड़ी सी तमीज तो सीख लो इतनी दूर से मैं घूप में मर जर कर ये मटका लायी थी कि थोड़ा ठंडा पानी नसीब हो लेकिन तुमसे तो मेरा एक भी सुख देखा कहा जाता है एक मिनट भी नही लगे सारे मेहनत पर पानी फेर दिया और 300 का नुकसान कर दिया सो अलग ऐसी भी क्या जल्द बाजी थी कि तुम्हे आगा पीछा कुछ नही सूझ रहा है ।- चाची जी बिल्कुल आग का गोला बन गयी थी

पूनम के हलक से एक शब्द नही निकला मानो जुबान ने

हड़ताल कर दिया हो

तभी पीछे से सार्थक आ गया और बोला

माफ करना चाची जी इसमे पूनम की कोई गलती नही है वो मैं उसे दौड़ा रहा था इसीलिए वो भागी और आपसे टकरा गई आप चिंता मत कीजिये मैं अभी जाकर बाजार से दूसरा मटका ले आता हूँ - सार्थक ने मामले को रफ़ा दफा करने की कोशिश की

हा पैसे फ्री में आ रहे है ना बिना हाथ पैर डुलाए बैठे बैठे खाने को मिल रहा है दोनो बहन भाइयो को न ,तो ज्यादा चर्बी चढ़ गई है एक चवन्नी कमाना तो है नही तुम्हे बस फूकने के लिए तैयार बैठे हो, दोनो भाई बहन ना जाने कौन से जन्म का बदला ले रहे हो दोनो हमसे जीना मुहाल कर दिया है सुख से घर मे भी नही रह सकते है कही जा कर मर कट जाऊ तभी सूकून मिलेगा मुझे तुम दोनों बहन भाइयो ने जीना हराम कर रखा है मेरा - चाची जी अभी भी गुस्से से आग बबूला हो रही थी

क्या चाची जी आप भी एक 100, 150 के मटके के लिए कितना कुछ बोले जा रही है हो गयी गलती नही देखा पूनम ने तो क्या हो गया टूट गया मैं दूसरा ले आता हूँ इतनी कौन सी आफत आगयी जो आप इस तरह बस बोले जा रही है मिट्टी का मटका ही टूटा है ना कोई पहाड़ तो नही टूट गया जो आप इस तरह से चिल्ला रही है आप मत दीजियेगा पैसे मैं ले आता हूँ - सार्थक ने गुस्से से कहा

देखो देखो कैसे जुबान जोरी पर उतार आया है एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी अगर मेरी बातें इतनी ही बुरी लगती है तो कर लो अपने लिए दूसरा इंतेजाम मेरे बस की नही है तुम दोनों की सुननी मुझे कमा के नही खिला देता जो मैं तेरी सुनूँगी एक तो मेरा ही खायेगा और फिर मुझी को आंख दिखायेगा अपनी बहन की गलती तो नही दिख रही होगी जो एक पल में मेरी सारी मेहनत पर मिट्टी डाल दिया ऊपर से अकड़ रहा है चाची जी पूरे गुस्से में बिफरी हुई थी

तो क्या करूँ बोलो एक मिट्टी के मटके के लिए जान ले लू उसकी, टूट गयी तो टूट गयी कौन सी आफत आगयी दूसरा आ जायेगा एक तो वो वैसे ही डर से सिमट गई है चेहरा पीला पड़ गया है ऊपर से क्या चाहती है आप जान से मार दू उसको सूली पर चढ़ा दू या फांसी दे दु - सार्थक ने कहा

मैं कुछ नही चाहती हूँ मेरे बस की नही है तुम दोनों की रोज रोज की कारस्तानियों को बर्दाश्त करना बहुत सम्हाल दिया बहुत सह लिया लेकिन बस अब और नही अब अपना इंतेजाम खुद कर लो अब मेरे बस की नही है तुम दोनों को सहने की ,अब मेरे बर्दास्त से बाहर हो गया है - चाची ने कहा

चाची जी मुझे माफ़ कर दो मुझसे गलती हो गयी पर प्लीज घर से मत निकालो हम कहा जायेगे किसके सहारे रहेंगे आप ही तो है जिसके सहारे हम लोग है अगर आप भी नही रखेगे तो हमारा क्या होगा - पूनम ने चाची के पैर पकड़ लिए और रोते हुए बोली

न न पूनम बस बहुत सह चुकी मैं और बहुत कर दिया मैने लेकिन अब मुझने और हिम्मत नही है सहने की अब तुम लोग जैसे मन करे वैसे रहो लेकिन अपना इंतेजाम खुद कर लो चाहे मेहनत मजदूरी करो चाहे भीख मांगो मुझसे अब कोई मतलब नही है चाची ने सख़्ती से कहा

चाची ...सार्थक गुस्से से चीख पड़ा

एक पल को चाची भी सार्थक के चीखने से कांप गयी

आपकी हिम्मत कैसे हुई ऐसी बाते बोलने की अभी मैं जिंदा हूँ अभी उसका भाई जिंदा है और जब तक मैं हूँ किसी की हिम्मत नही है मेरी बहन से भीख मंगवाने की मैं आपको अपनी माँ के जैसे सम्मान देता हूँ क्योंकि आपने हमे बहुत सहारा दिया है इसीलिए मैं आज तक आपकी बातों को इग्नोर कर देता था और हंस कर ताल देता था कि आप बड़ी है आपका अधिकार है हमे डांटने का लेकिन आज आपने सारी सीमा लाँघ दी है आज आपने मेरे गुरुर मेरी बहन को ऐसी बात बोल दी है जो मैं कभी भी बर्दास्त नही कर सकता अगर आपके अलावा किसी और ने ऐसा कहा होता तो मैं क्या करता मुझे खुद नही मालूम रही बात कमाने और खिलाने की तो कोई फ्री में नही है हम यहां हमारा भी हक़ है इस घर मे खेत मे और हर एक चीज में हमारा भी हिस्सा है इसमें- सार्थक गुस्से से फट पड़ा

अरे वाह कैसा हिस्सा क्या किया है तेरे बाप ने एक ईंट रखी है इस घर मे सब तेरे चाचा ने अपने पैसे का बनवाया है पहले

अपना पेट पाल ले फिर घर बनवाएंगे और रही बात खेत की तो दिन रात मेहनत करते है तब जा कर उसमें कुछ पैदा होता है कितने दिन तू या तेरा बाप गया है खेत पर बड़ा आया हिस्सा वाला

हा तो जो भी है जब भी जरूरत पड़ती है फोन तो कर देते हो पापा को की इतने पैसे चाहिए वो कहा से आता है वो फ्री में आता है क्या और जितना खिलाती हो उतना मेरी बहन नौकरानी की तरह काम करती है देख रही हो सूख कर कांटा हो गयी है लेकिन आपको फिर भी उसपर दया नही आती है चाची तो माँ जैसी होती है लेकिन आपने छुटकी को सिर्फ डांटने ताने के अलावा और आज तक दिया क्या है बहुत सह लिया है हमने और बहुत सह लिया मेरी बहन ने लेकिन बस अब और नही आज शाम को चाचा जी आएंगे आप हमें जो भी हमारा हो दे दीजियेगा हम अपना गुजर बसर कर लेंगे कम से कम मैं और मेरी बहन सूकून से रहेंगे तो- सार्थक ने कहा

हां ठीक है आने दे आज अपने चाचा को आज ये सारा क्लेश ही खत्म कर दूंगी इस रोज रोज के किच किच से मैं भी आजिज आगयी हूँ

चाची ने कहा और गुस्से से बड़बड़ाते हुए चली गयी

सार्थक भी गुस्से से चाची को जाते हुए देख रहा था

क्रमशः
 
किसी की मासूमियत भी किसी को चुभती है

किसी की खुद्दारी भी किसी को खटकती है

लोग चुप रहने को भी कमजोरी समझ लेते है

देख कर दर्द में किसी को अक्सर ये दुनिया हसती है

चाची के जाते ही पूनम रोते हुए आयी और सार्थक से लिपट गयी ।

सार्थक ने उसे प्यार से गले लगा लिया और चुप करवाने लगा

भैया हम कहा जाएंगे ,कैसे रहेंगे- पूनम रोती हुई बोली

तू चिंता क्यो करती है अभी मैं हूँ न मैं इस लायक हूँ की अपनी बहन का देख भाल कर पाऊ तू घबरा मत बहुत ताने, बहुत गालिया सुन ली तूने लेकिन बस अब बहुत हो चुका आज चाची ने सारी हद क्रास कर दिया मुझे बोलती एक बार को मैं बर्दास्त कर लेता लेकिन उन्होंने मेरे सामने मेरी लाडली बहन को भला बुरा कहा ये मैं बर्दास्त नही कर सकता- सार्थक बोला

पूनम अभी भी हिचकी भर भर के रो रही थी

सार्थक ने पूनम के आँसू पोछे और उसे चुप करवाया और फिर जाकर एक गिलास पानी लेकर आया और पूनम को पिलाया

पूनम शांत हो गयी लेकिन अब भी गुमसुम और उदास थी और चुपचाप उदास दिवार को निहार रही थी ।

छुटकी तू आराम कर मैं थोड़ा बाहर जा रहा हूँ -सार्थक ने

कहा और बाहर चला गया

शाम को चाचा जी आये और चाची ने उन्हें खूब गुस्सा दिखाया और खूब समझाया

चाचा जी लाख प्रयास किया लेकिन चाची जी जैसे आज सोच कर बैठी थी कि दोनों को अब अलग ही रहना है आखिर में थक हार कर उन्होंने भी चाची की बात मान ली और सार्थक और पूनम को अलग रहने के लिए बोल दिया ।

सार्थक और पूनम की आखिरी उम्मीद भी टूट गई

सार्थक बेटे मुझे माफ़ कर देना लेकिन तुम्हारी चाची ने जिद पकड़ लिया है और मैं नही चाहता कि घर मे क्लेश हो इसीलिए तुम लोग अपने दूसरे घर मे शिफ्ट हो जाओ

मैं उसको साफ सफाई करवा देता हूँ और हां तुम बिल्कुल भी घबराना मत किसी चीज की कोई जरूरत हो तो बेझिझक कह देना हम गैर नही है लेकिन अभी मैं भी मजबूर हूँ बेटे मेरे ख्याल से तुम मेरी मजबूरी समझ रहे होंगे बेटे - चाचा जी ने मायूसी और उदास होकर के कहा

आप चिंता मत कीजिये चाचा जी हमे कोई दिक्कत नही होगी आप बिलकुल फिकर मत कीजिये हमे वहां पर कोई तकलीफ नही होगी - सार्थक ने अपने चाचा को इस तरह दुखी देखा तो उन्हें सात्वना देने लगा

आखिर में वह दिन भी आगया जब पूनम और सार्थक को बिदा लेना था आज इस घर मे आखिरी दिन था ।

पूनम को इस घर की और उससे जुड़ी हुई हर एक चीज की

बहुत याद आ रही थी

और आये भी क्यो न आखिर में इसी घर मे तो वह अपने पैदा होने से लेकर अपने जवान होने तक का सफर तय किया था और इसी घर से उसके माँ की बेसुमार यादे जुड़ी थी

दोनो अपना सामान और घर गृहस्थी का चंद सामान लेकर अपने नए आसियाने पर आगये ।

जाते हुए पूनम बार बार भावुक हो रही थी और घर छूटने के गम में उसे बुखार भी चढ़ गया था लेकिन मजाल है जो चाची जी का दिल भी पसीजा हो उन्होंने तो जैसे ठान लिया था कि अब जो भी हो दोनो को अलग करना है ।

तीन कमरे का एक छोटा सा घर जो ना जाने कब से बंद पड़ा था उसकी दरों दीवार भी बिना रख रखाव के बिल्कुल खराब हो गए थे जिसे सार्थक ने चाचा ने हल्की फुल्की रिपेरिंग और साफ सूफ करवा कर इस लायक बनवा दिया था कि वह भूतिया हबेली न लगे बाकी वह घर घर न होकर कबाड़ खाना लग रहा था

सारा सामान सार्थक ने ला कर रख दिया और फिर पूनम से बोला ।

छुटकी तू एक काम कर तू आराम से बेड पर बिस्तर लगा कर लेट जा और देख अभी मैं कैसे पूरे घर को सेट कर देता हूँ तू चुप से बैठ जा।

लेकिन भैया आप ये सब अकेले कैसे करोगे मैं करवा देती हूँ जल्दी हो जाएगा - पूनम ने कहा

अरे हो जाएगा तो घबरा मत तू आराम से लेट जा और थोड़ी देर सो ले और बस देखती जा अभी मैं क्या करता हूँ, आजा सबसे पहले अपनी छुटकी का बेड लगाते है - सार्थक मुस्कुराते हुए बोला

सार्थक ने फटाफट बेड लगाया और उसपर बिस्तर लगा कर पूनम को जबरदस्ती लिटा दिया हालांकि पूनम भी हेल्प करने की जिद कर रही थी लेकिन सार्थक ने बिल्कुल मना कर दिया और जबरदस्ती उसे सुला दिया

फिर अपने काम मे जुट गया ।

थोड़ी देर बाद सच मे पूनम की आंख लग गयी और वह सो गई सार्थक घर को साफ करने में और सामान सेट करने में लगा रहा और करीब 3 घंटे की लगातार मेहनत के बाद पूरा घर सेट हो गया सारे सामान अपनी अपनी जहगाह पर ब्यवस्थित हो गए थे सार्थक जल्दी से बाथरूम में घुसा और फटाफट नहाया फिर कपड़े बदल कर दो कप चाय बनाई और उसे लेकर पूनम के पास पहुचा वह थक कर चूर हो गया था ।

सार्थक ने सोती हुई पूनम के माथे पर हाथ रखा बुखार उतरा हुआ था और सोने के बाद शायद थोड़ी सी रिलेक्स भी हो गयी थी सार्थक को थोड़ी राहत मिली वरना उसे पूनम की काफी चिंता थी उसने प्यार से पूनम के माथे पर हाथ फेरा और फिर धीरे से उसका माथा चूम लिया ।

छुटकी वो छुटकी , उठ जा देख तेरे लिए चाय बना कर लाया

हूँ - सार्थक ने पूनम को आवाज दी

सार्थक की आवाज सुनकर पूनम ने आंखे खोली

और फिर उठ कर बैठ गयी

उसने चारो तरफ नजर डाली पूरा कमरा ब्यवस्थित और काफी साफ सुथरा लग रहा था सारा सामान जो इधर उधरफैला था सब अपनी अपनी जगह पर थे ।

वाह भैया आपने तो सब कुछ सेट कर दिया पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा

और नही तो क्या तू खामखा घबरा रही थी बोला था न मैने की अभी हो जाएगा अब जा जल्दी से हाथ मुह धो कर आ जा और चाय पी ले वरना चाय ठंडी हो जाएगी

पूनम बिस्तर से उठी और बाथरूम में घुस गई

सार्थक पास में ही स्टडी टेबल के पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गया और पूनम के आने का इंतजार करने लगा

थोड़ी देर बाद पूनम आयी और फिर आराम से दूसरी कुर्सी पर बैठ गयी और दोनों चाय पीने लगे

अभी चाय पीकर हटे ही थे कि सार्थक का मोबाइल बजा

सार्थक ने जैसे ही फोन उठाया सामने से आवाज आई

अबे वो देवदास कहा गुम हो गया ? क्या पारो की याद में दोस्तो को भी भूल गया क्या ?

लक्ष्य तू , सार्थक ने आवाज पहचानते हुए कहा ।

तो क्या किसी और के फोन का इंतजार था क्या? कही वो लावण्या का फोन तो नही आना था - लक्ष्य अपनी आदत से

बाज कैसे आता

अबे ऐसा कुछ नही है बोल कैसे याद किया

कैसे क्या याद किया जबसे गोवा से आया है एक बार भी फोन नही आया मैने सोचा कि मैं ही पूछ लेता हूँ कि भाई अभी जिंदा है या चल बसा ,या फिर किसी की याद में टसुए तो नही बहा रहा - लक्ष्य मस्ती से बोला

क्या बोल रहा है यार ऐसा कुछ नही है -सार्थक ने कहा

तो फिर एक काम कर आजा मेरे पास वो बॉडी बिल्डर को भी बुलाया है तो तीनों इंजॉय करते है- लक्ष्य ने कहा

नही यार लक्ष्य मैं नही आ सकता आज बहुत थक गया हूँ और ऊपर से छुटकी घर मे अकेली है -सार्थक ने मना कर दिया

क्यो अकेली क्यो है वो तेरी हिटलर चाची कहा गयी निपट ली क्या - लक्ष्य ने मजाक में कहा

अबे साले क्या बोल रहा है सोच समझ कर बोल चाची है वो मेरी - सार्थक ने लक्ष्य को डांटते हुए कहा

हुंह कैसी चाची ... चल मन तो था कुछ कहने को लेकिन नही कहूंगा वैसे एक बात बता थक कहा गया कौन सा मजदूरी कर रहा था जो थक गया है - लक्ष्य ने पूछा

क्या बताऊ यार सार्थक सारी बाते बताने में हिचकिचा रहा था

अब बोलेगा भी या कुछ लेगा दान दहेज बोलने के लिए -लक्ष्य ने घुड़का

और फिर सार्थक ने शुरू से लेकर अंत तक सारी कहानी बता

दी

हम्म तो ये बात है साले इतना सब हो गया और तू हमे बताने से घबरा रहा था रुक मैं बॉडी बिल्डर को लेकर आता हूँ अभी तेरे घर पर आज तेरे घर पर ही पार्टी होगी - लक्ष्य ने कहा

अबे नही- सार्थक ने कहा

तू चुप रह और शांत बैठ और हां पूनम को बोल दे मस्त अदरक वाली चाय बना कर रखे उसके हाथ की अदरक वाली चाय मस्त लगती है ,समझा अब बोर मत कर जल्दी से फोन रख । लक्ष्य ने कहा

अबे सुन तो भाई ,लक्ष्य मेरी बात तो सुन - सार्थक चिल्लाया लेकिन फोन तो कब का कट चुका था

सिट ,सिट, मैने बताया ही क्यों अब क्या सोचेंगे मेरे बारे में ओह गॉड ये क्या किया मैने सार्थक बुरी तरह से पछता रहा था

क्या हुआ भैया परेसान क्यो है तभी पूनम आयी

क्या बताऊँ यार मेरे दोस्तों को पता चल गया और वो अभी यहां आ रहे है - सार्थक ने मायूसी से कहा

तो आने दो क्या हुआ वैसे भी लक्ष्य और शशांक ही तो होंगे- पूनम ने कहा

हा यही दोनो है लेकिन छुटकी तेरी तबियत ठीक नही है और वो दोनों तेरे हाथ की अदरक वाली चाय पीने के लिए कह रहे है

तो आने दो क्या फर्क पड़ता है अब इतनी भी तबियत खराब

नही है कि चाय भी न बना पाउ आप चिंता मत करो मैं ठीक हु -पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा

शाम को दोनों एक साथ आ धमके पूनम ने दरवाजा खोला

हाय पूनम कैसी हो -लक्ष्य ने कहा

मैं ठीक हूँ आप कैसे है पूनम ने भी औपचारिकता निभाई

मैं तो फर्स्टक्लास हूँ मस्त हूँ ,लक्ष्य मस्ती में बोला

पूनम मुस्कुरा कर रह गयी

शशांक और लक्ष्य पूरे घर का मुआयना करते हुए अंदर सार्थक के रूम में पहुचे

एक तरफ करीने से सजा हुआ किताबो का छोटा सा लाइब्रेरी और उसी के पास था एक लकड़ी का टेबल और कुर्सी जिस पर एक टेबल लैंप रखा था उसी के बगल हैंगर लटका था जिस पर सार्थक के कपड़े टंगे थे

और इधर एक सिंगल बेड पड़ा हुआ था जिसपर बिस्तर और साफ सुथरा सा चादर पड़ा हुआ था

भाई तेरी चाची ने तो तो खुश होकर ताजमहल दे दिया तुझे - लक्ष्य ने चारों तरफ देख कर तंज से कहा

सार्थक मुस्करा कर रह गया और हंस कर टाल दिया

अबे सार्थक इस कबूतर खाने में कैसे रहोगे यार इससे अच्छा तो यह था कि उसी घर में ऊपर वाला फ्लोर तुम ले लेते इसकी हालत कुछ ठीक नही लग रही यार -शशांक ने भी चिंता से कहा

कोई नही यार जो मिला है वही बहुत है तुझे तो पता है ना कि मैं ज्यादा बहस नही करता -सार्थक ने कहा

लेकिन ये तो गलत है यार ऐसा कोई कैसे कर सकता है तेरे चाचा ने भी अपोज नही किया

छोड़ न क्या लेकर बैठ गया आ बैठ तुझे चाय पिलवाता हूँ वो भी स्पेसल वाली सार्थक बात बदलते हुए बोला

छुटकी चाय बन गया क्या सार्थक ने बैठे बैठे ही आवाज लगाई

हा भैया बस दो मिनट पूनम की अंदर से आवाज आई

थोड़ी देर में ही पूनम चाय और नमकीन लेकर हाजिर हुई सबने एक साथ चाय पिया और फिर पूनम चाय के बर्तन लेकर चली गयी और फिर शशांक बोला

सार्थक मेरी एक बात मानेगा क्या

क्या सार्थक ने पूछा

मैं पापा से बात करता हूँ तू मेरे फ्लेट में शिफ्ट हो जा वैसे भी वो खाली पड़ा है तू रहेगा तो थोड़ी देखभाल हो जाएगी -शशांक ने कहा

नही यार मेरे पापा ने मुझे सिखाया है कि दोस्त का एहसान कभी नही लेना चाहिए वरना दोस्ती टूट जाती है और मैं नही चाहता कि मेरे इतने अच्छे दोस्त मुझसे अलग हो जाय इसलिए आई एम सॉरी शशांक यार मैं तेरे फ्लैट में नही आ पाऊंगा सार्थक ने साफ मना कर दिया

अमा यार कौन सा एहसान तेरे रहने से मेरा फ्लैट सुरक्षित

रहेगा ,तू रहेगा तो देख रेख होगी -शशांक ने कहा

जो भी है यार मैं नही आ सकता मैं यही ठीक हु -सार्थक ने मना कर दिया

अबे शशांक छोड़ न इस साले की नाक बहुत उची है ये कभी नही जाएगा इससे सर मत खपा - लक्ष्य ने कहा

यार लक्ष्य इसकी स्टडी डिस्टर्ब होगी यहा देख रहा है घर की क्या हालत है-शशांक ने कहा

क्या कर सकते है हम इसके लिए बाद में कुछ सोचते है तुझे पता है ये मानेगा नही - लक्ष्य ने कहा

काफी देर तक दोनों बैठ कर बाते करते रहे फिर अपने घर चले गए

अगले दिन शशांक ने एक टेम्पो भर कर फर्नीचर सार्थक के घर पर भेज दिया

ये सब किसने भेजा है भाई सार्थक ने ड्राइवर से पूछा

ड्राइवर ने शशांक का पता बता दिया

सार्थक ने तुरंत फोन किया

भाई ये सब क्या है सार्थक ने परेसान होकर पूछा

कुछ नही यार अभी घर का सारा फर्नीचर चेंज हुआ तो ये उठा कर स्टोर रूम में रखवा दिया था कल इसे फेकने जा रहे थे फिर तेरा ख्याल आगया इसी लिए भेजवा दिया अगर रखना है तो रख ले नही तो फेक देना - शशांक ने कहा

लेकिन ये तो अभी बिल्कुल नए है इसे फेक क्यो रहा है

पापा ने अभी घर को रिएएनॉग्रेट करवाया तो ये सब हटा दिया देख लेना जैसा करना होगा कर लेना मेरे लिए तो ये खराब है यार -शशांक ने कहा

मैं सब समझता हूं साले मुझे देने के लिए ही तूने ये सब निकलवाया है घर से लेकिन इसकी क्या जरूरत थी यार शशांक ने कसमसा कर कहा

शशांक हँसने लगा और बोला साले इतने बड़े बाप के बेटे को अपने कबूतर खाने में बैठायेगा तुझे तो सरम नही है कम से कम मेरे इज्जत का ख्याल तो कर ले अब चुपचाप बिना चुचपड के इसे घर मे सेट कर ले कम से कम तेरे घर मे बैठने लायक कोई जगह तो हो और यार तू मेरा दोस्त है वो भी सबसे प्यारा वाला तो कुछ तो हक मेरा भी है अपनी नही तो कम से कम छुटकी का तो लिहाज कर ले वैसे भी इसे मैने तेरे लिए नही भेजा है अपनी बहन पूनम को दिया है और तू कौन होता है मुझे मेरी बहन को कुछ देने से रोकने वाला - शशांक ने कहा

लेकिन यार शशांक ...सार्थक अभी भी कंवेंसड नही था अब लेकिन वेकीन छोड़ और उतरवा उसे वरना वही आ कर तुझे मरूँगा समझा ,और हा भाड़ा मत देना मैने दे दिया है - शशांक ने कहा और फोन काट दिया

मरता क्या न करता सार्थक ने सारा फर्नीचर उठा कर घर मे सेट किया बेड सोफे टेबल कुर्शी आलमारियां पर्दे कुसंस मैट और एक पुरानी वासिंग मसीन किचन के कई सारे सामान

और ऐसे ही ढेर सारी छोटी छोटी घरेलू चीजे उस गाड़ी में थी ।

सार्थक ने सब कुछ उतरवा कर अपने घर मे लगवा लिया और पुराना सामान हटा दिया

सब कुछ लगने के बाद घर हद तक ठीक ठाक लगने लगा था ।

सार्थक और पूनम वापस से अपने कॉलेज जाने लगे ये आखिरी साल था तो इसी वजह से वह ज्यादा दिन तक अपनी पढाई को डिस्टर्ब नही कर सकते थे गाहे बगाहे चाचा जी हाल खबर लेने आ जाते थे लेकिन सार्थक कभी भी वापस उस घर मे नही गया हा पूनम का दिल अब भी उस घर मे ही लगा रहता क्योकि उसी घर मे उसके माँ की यादे थी लेकिन सार्थक के डर से वह जाने का नाम भी नही लेती

धीरे धीरे लावण्या और सार्थक का प्यार परवान चढ़ता गया दोनो खूब सारी बाते करते और जब तक बात नही कर लेते दोनो को चैन नही मिलता था दोनो को दिल मे एक दूसरे के लिए प्यार के अंकुर फुट चुके थे ।

कुछ दिनों बाद पूनम को सब कुछ मालूम चल गया कि लावण्या कौन है लेकिन उसने सार्थक से कुछ भी नही कहा ।

रजनी अपनी जिंदगी को दुबारा से पटरी पर ले आयी धीरे धीरे उस वाकये को वह भूल रही थी लेकिन कभी न कभी कही न कही उसके कानों में अपनी उस गलती का जो उसने

किया था के ताने पड़ जाते जिसे वह इग्नोर तो कर देती लेकिन एक टीस सी जरूर लग जाती ।

ऐसे ही आज एक पड़ोसन ने रजनी से कहा

रजनी फिर आगे क्या क्या सोचा है भाग कर तुम शादी तो कर ही चुकी हो अब फिर से उसी घर में जाओगी या कोई दूसरा ढूढ़ रही हो वैसे अबकी थोड़ा सोच समझ कर ढूढना जमाना खराब है कही फिर से पहले जैसा न मिल जाये जो तुम्हे दर दर की ठोकरे खाने को छोड़ दे ।

रजनी के दिल मे मुक्का सा पड़ा लेकिन वह नकली मुस्कुराती हुई बोली

नही चाची अब मैं किसी को नही ढूढ़ रही और ना ही उसके पास वापस जाउंगी

हाय राम क्या कह रही हो रजनी फिर कब तक बिसंभर के सर पर ही रहोगी वैसे भी अपनी नही तो कम से कम लावण्या का तो ख्याल करो तुमने तो एक बार कर ली अच्छा या बुरा लेकिन लावण्या उसकी भी अब शादी की उम्र हो गयी है - चाची ने कहा

हा तो लावण्या को मैने थोड़े न मना किया है पापा उसकी शादी करेंगे -रजनी किलस कर बोली

देखो रजनी बुरा मत मानना लेकिन वो तुम्हारी तरह नही है वो बहुत समझदार है और फिर अभी तुम बैठी हो तो वो बेचारी कैसे शादी कर सकती है अब तुम्हारा तो पता नही होगा या नही क्योकि एक बार तुम भाग कर शादी कर चुकी हो लेकिन

लावण्या तो अभी कुवारी है उसकी तो करनी ही पड़ेगी न और शादी ब्याह उम्र के साथ हो जाये तो अच्छा रहेगा और वैसे भी बिसम्भर को उसके लिए लड़का तलासने में काफी वक्त लगेगा क्योकि तुम्हारी वजह से समाज मे उनकी नाक कट गयी है ।

रजनी के मुह से एक शब्द भी नही निकला वह चुपचाप खड़ी रह गयी

मैं कुछ गलत कह रही हु तो तुम्ही बताओ पड़ोसन ने कहा

नही आप सही कह रही है मैने गलती तो की है लेकिन उस गलती की सजा मेरी लावण्या को नही मिलनी चाहिए

अब गेहू के साथ घुन तो पिसता है ना तुम्हे भागने से पहले सोचना चाहिए था लेकिन तुमने भी जवानी के जोश में आंखों पर पट्टी बांध रखी थी अब पछताए हॉट का जब चिड़िया चुग गयी खेत अब तुम दोनों बहनों को कोई अच्छा परिवार तो मिलने से रहा बिसम्भर को चाहिए उत्तम माध्यम देख कर जल्दी से दोनों को बिदा करे वरना कल को क्या भरोसा लावण्या भी उसी राह पर चल पड़े जिसपर तुम गयी थी ।

रजनी की दिल किया कि उस औरत को खूब अच्छे से सुनाये लेकिन फिर उसने जब्त कर लिया और चुपचाप सर झुकाये चली आयी ।

दोस्त कैसा जो वक्त जरूरत काम ना आये

दोस्त कैसा जो रोते हुए दोस्त को न हँसा पाए

दोस्त कैसा जो बिना कहे सब समझ ना जाये

दोस्त कैसा जो मुस्किलो में सम्हाल भी न पाए

दोस्त कैसा जो हर सुख दुख में साथ न निभाये

दोस्त कैसा जो हर मुस्किलो में न नजर आए

दोस्ती तो अनमोल नियामत है ऊपर वाले कि

दोस्त ऐसा जो सब कर जाए वो भी बिना बताये

इस दुनिया की भी एक अजीब दस्तान है

यहां पर इंसानो से भी अच्छा तो मकान है

जो छुपा लेता है धूप बारिश से वक्त जरूरत पर

यहां तो खंजर से भी तेज लोगो की जुबान है

रजनी चुपचाप सर झुकाये घर आ गयी पड़ोसन की कही गयी बाते सोच कर उसे जोर की रुलाई आ रही थी वह किसी से बिना कुछ कहे कमरे में पहुची और औधे मुह बिस्तर पर गिर पड़ी ।

और फिर अपना मुंह छुपा कर पड़ोसन की एक एक बात सोचने लगी सोचते सोचते उसके बड़ी मुश्किल से जब्त किये आंसू फूट पड़े और वह हिचकी बांध कर रोने लगी ।

वह पूरी कोशिश कर रही थी कि उसके रोने की आवाज बाहर ना जा पाए लेकिन भला ऐसा कैसे मुमकिन था ।

उसकी हिचकियो और रोने की आवाज सुनकर लावण्या और उसकी मम्मी दौड़ कर आई

क्या हुआ दीदी आप रो क्यो रही है? -लावण्या ने परेसान होकर पूछा

हा बेटा क्या हुआ? रो क्यो रही हो कोई तकलीफ है क्या? -रजनी की मम्मी ने रजनी को सीधा करते हुए कहा

रजनी कुछ नही बोली बस अपनी माँ को देख कर उसकी हिचकिया और तेज हो गयी और वह और जोर- जोर से रोने लगी ।

क्या हुआ दीदी बताओ तो सही ? आप रो क्यो रही है? लावण्या इस तरह रजनी को रोते देख कर बुरी तरह परेसान हो गयी थी .

रजनी चुप हो जाओ बिल्कुल शांत हो जाओ और आराम से बताओ क्या हुआ ,कुछ दर्द कर रहा है क्या? -मम्मी जी ने पूछा किक़

रजनी ने ना में गर्दन हिला दिया

तो फिर किसी ने कुछ कहा क्या?- मम्मी जी ने फिर से सवाल किया

रजनी चुप रही और सुबकती रही

मतलब किसी ने कुछ कहा, किसने और क्या बोला मुझे बताओ ? मैं उसको बताती हूँ- रजनी की मम्मी ने गुस्से ने भर कर कहा

रजनी कुछ बोल नही रही थी बस चुपचाप खामोश सुबक रही थी

रजनी कोई कुछ भी कहे तुम उसपर ध्यान मत दिया करो। लोगो को और कोई काम नही है बस दूसरे की जिंदगी में ताक झाक करनी है तुम किसी की बात अपने दिल पर मत लिया करो- मम्मी जी ने समझाया

मम्मी जी मेरा जो होना था हो गया आप लावण्या की पसंद के लड़के के साथ उसकी शादी कर दो ,मेरी गलती की सजा मेरी बहन को क्यो मिले उसे उसकी खुशिया मेरी वजह से बर्बाद करने की कोई जरूरत नही है - रजनी ने कहा

कैसी बाते कर रही हो ,दीदी किसने कहा कि आपकी वजह से मेरी खुशी बर्बाद होगी और ये क्या कह रही है आप,आप बिलकुल चिंता मत कीजिये देखिए पहले आप की ही शादी होगी और धूमधाम से होगी सब देखते जाएंगे कौन बोला ये बात मुझे बताओ मैं उसकी सारी की सारी हेकड़ी निकाल दूंगी - लावण्या ने गुस्से से कहा

किस किस का मुह बंद करेगी लावण्या, आज एक ने कहा है कल और लोग बोलेगे वैसे भी अब मुझे दुबारा शादी करनी ही नही है तो फिर क्या फायदा - रजनी ने कहा

ऐसे कैसे नही करनी है दीदी अभी उम्र ही क्या है नन्ही सी चींटी गिर कर सम्हलती है और आप इस तरह हार मान रही है इतनी कमजोर कैसे हो गयी आप और वैसे भी अभी मेरी पढ़ाई चल रही है तो अभी तो मेरा पूरा फोकस स्टडी पर है अभी शादी वादी के बारे में मैंने सोचा तक नही- लावण्या ने कहा

लावण्या एक काम कर ,तू मम्मी पापा को सार्थक के बारे में बता दे कम से कम वो सारी बात चीत फाइनल तो कर ले फिर तुम दोनों की पढ़ाई जब खत्म हो जाएगी तो तुम दोनों शादी कर लेना - रजनी के मुह से निकल गया

और लावण्या आश्चर्य से कभी अपनी मम्मी की तरफ और कभी रजनी की तरफ देख रही थी मानो सरे बाजार किसी ने उसके सारे राज से पर्दा उठा दिया ।

कौन सार्थक तू किसकी बात कर रही है रजनी- लावण्या की

मम्मी चौकती हुई बोली

कु...कुछ नही मम्मी, कोई नही वो दीदी ऐसे ही बोल रही है - लावण्या हड़बड़ा कर बोली

तू बता रजनी सार्थक का क्या चक्कर है- मम्मी जी ने घबरा कर रजनी से पूछा

रजनी ने लावण्या की तरफ देखा मानो बताने की इजाजत मांग रही हो

लावण्या कतार नजरो से रजनी की तरफ देखकर आंखों ही आंखों से न का इशारा किया ।

बोल रजनी चुप क्यों है उसकी तरफ क्या देख रही है मेरी तरफ देख, तुम दोनों मुझसे क्या छुपा रहे हो तुम्हे मेरी कसम रजनी जो कुछ है सच सच बता दो मैं कुछ नही कहूंगी मैं तेरी माँ हु बच्चो, और तुम दोनों की खुशी से बढ़ कर मेरे लिए और कुछ भी नही है ,क्या पता मैं तुम दोनों की हेल्प कर पाउ तो मुझे बताओ ये सार्थक कौन है और लावण्या का उसके साथ क्या संबंध है - मम्मी जी ने प्यार और अपने पन से भर कर पूछा

रजनी ने फिर से लावण्या की तरफ देखा और लावण्या ने अपनी गर्दन झुका लिया मानो रजनी को बताने की मूक सहमति दे दी हो ।

बात ये है मम्मी की ... और रजनी ने शुरू से लेकर अंत तक सारी कहानी अपनी मम्मी को बताई

लावण्या सर झुकाये चुपचाप सब कुछ सुन रही थी ,

लावण्या जो रजनी कह रही है सारी बाते सच है ना तुम सार्थक से प्यार करती हो ।- रजनी की बात खत्म होने के बाद मम्मी जी ने लावण्या से पूछा

ये सच है कि सार्थक बहुत अच्छा और सुलझा समझदार लड़का है मम्मी लेकिन आप और पापा की कसम मैने ऐसा कुछ नही किया कि जिससे आप दोनों की मान मर्यादा को चोट पहुचे क्योकि मेरे मम्मी पापा के मान सम्मान के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ अगर आप को लगता है कि मुझे सार्थक से बात नही करनी चाहिए तो आप मुझसे एक बार बोल दीजिये मैं दुबारा से उसको कभी भी फोन नही करूंगी मम्मी जी लावण्या को कुछ नही सूझ रहा था उसने अपनी मम्मी से कहा

देख लावण्या कभी न कभी कही न कही मुझे तेरी शादी तो करनी ही है फिर लड़का अच्छा होना चाहिए अगर सार्थक तुझे पसन्द है तो फिर क्यो न सार्थक से ही बात किया जाए अगर उसका जबाब ना में होता है तभी कुछ सोचेंगे न और जिस हिसाब से उसने तुम दोनों की हेल्प की है वो भी इतनी दूर प्रदेश में और बदले में उसने तुम लोगो का फायदा उठाने की कोशिश भी नही की उससे यह तो तय है कि लड़का अच्छा है तू चिंता मत कर मैं आज ही तुम्हारे पापा से बात करती हूँ और कोशिश करूँगी की जल्द से जल्द सारी बाते फाइनल हो जाये लेकिन तब तक कुछ भी ऐसा मत करना जो तुम्हारे पापा की गरिमा को धूमिल करे बेटा - मम्मी जी ने

समझाया

लावण्या ने गर्दन हिला दिया और रजनी तुम भी चिंता मत करो जल्द ही फिर से तुम्हारी शादी करूँगी वो भी धूम धाम से परेसान मत हो । मम्मी जी ने रजनी के सर पर हाथ फेरते हुए कहा

मम्मी जी के जाने के बाद लावण्या ने घूर कर रजनी को देखा मानो कह रही हो कि सारी बाते क्यो बता दिया

क्या ऐसे क्यो देख रही है एक न एक दिन बताना ही था तो आज क्यो नही और फिर जब प्यार करती हो तो बताने में क्या बुराई है वैसे भी सार्थक मुझे बहुत पसंद है और अगर उसके साथ तेरी शादी हो जाती है तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा- रजनी ने कहा

लेकिन दीदी सार्थक, वो राजी होगा क्या ?उसने तो कभी ऐसा कुछ जाहिर ही नही किया कि वो मुझसे प्यार करता है और शादी करेगा पता नही कही हम लोग जल्द बाजी तो नही कर रहे है वो सिर्फ ऐसे ही मुझसे बाते कर रहा हो वैसे भी वह लड़कियों से बहुत दूर रहता है और उनका बहुत सम्मान करता है कही ऐसा तो नही उसके दिल मे मेरे लिए ऐसा कुछ नही जैसा हम सोच रहे है- लावण्या ने आसंका जाहिर की

तू एक नंबर की बुद्धू की बुद्धू है अरे उसकी आँखों मे झाक कर देखना तेरे लिए बेसुमार प्यार था जिस दिन तुझसे अलग हो रहा था उस दिन मैंने महसूस किया था कि मानो उसकी कोई सबसे प्रिय चीज कोई उससे छीन कर ले जा रहा हो , तू

नही जानती मैं जानती हूँ वो तुझसे बहुत प्यार करता है और बहुत जल्द ही ये बात वो खुद अपने मुह से कहेगा- रजनी की आंखे चमक पड़ी

कैसे आप क्या करने वाली है लावण्या की आंखे सिकुड़ी और वह सोचते हुए बोली

बस देखती जाआगे आगे होता है क्या देख कैसे तेरे लिए वो भाग भाग कर यहां तक आता है बस मैं जैसे कह रही हूँ करती जाना

ला पहले मुझे सार्थक का नम्बर दे मुझे बात करनी है सार्थक से - रजनी ने कहा

लावण्या कसमसाई और हिचकिचाई

ला न दे तो सही रजनी ने जबरदस्ती फोन लगभग छीन लिया और उसका नंबर खोजने लगी

लावण्या ने सार्थक का नाम की जगह माई स्वीट हार्ट बीट सेव कर रखा था

अरे वाह क्या बात है अभी से ही ,अभी तो कुछ हुआ ही नही है -रजनी मुस्कुराई और बोली

आप भी दीदी लाइये मुझे फोन दीजिये लावण्या सरम से पानी पानी हो रही थी

रजनी ने फोन मिलाया और फिर इंतेजार करने लगे थे

फोन उठते ही सबसे पहले नमस्ते भाभी की आवाज आई वो भी किसी लड़की की आवाज में

रजनी को ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नही थी वह आश्चर्य से

उछल पड़ी ।

उसने कान के पास से फोन हटा कर देखा तो नंबर सही था ।

उसने फिर से फोन कान पर लगाया हालांकि बोला कुछ नही और फोन उठाने वाली लड़की लगातार बोले जा रही थी ।

आप दोनों मुझे बुद्धू समझते हो क्या? आपको क्या लगा कि मुझे कभी पता चलेगा कि आप कौन हो पूनम बोले जा रही थी और रजनी का दिमाग फेल हो गया उसे कुछ समझ मे नही आरहा था कि क्या बात करें और ये लड़की कौन है

लावण्या ने रजनी को चुप देखा तो चौक गयी और उत्सुकता से देखने लगी और इसारो में पूछा क्या हुआ ?

रजनी को कुछ समझ मे नही आया कि क्या करे उसने फोन स्पीकर पर डाल दिया

उस लड़की की आवाज पूरे कमरे में गूँजने लगा ,

नही आपने एक बार भी मुझे बताना ठीक नही समझा मैं आपकी एकलौती ननद हूँ और मेरे भैया मेरे इजाजत के बगैर कुछ नही करते तो आपने कैसेसोच लिया कि आप मेरे भैया से प्यार भरी बात भी करोगे और मुझे पता भी नही चलने दोगे ,पूनम लगातार बोले जा रही थी ।

दोनो खिलखिला कर हंस पड़े उन्हें समझ मे आ गया की कौन है

ऐसे हँसने से काम नही चलेगा आप पहले मुझसे सब कुछ सच सच बताओ , वो अकड़ू से कुछ पुछो तो धौस दिखा कर मेरी आवाज दबा देते है छोटी हूँ ना तो कुछ बोल नही पाती

लेकिन आप भी आप तो मुझे सब कुछ सच सच बताओ बोलो आप मुझे बताओगी न सच का आप मेरी होने वाली भाभी हो न- पूनम ने मासूमियत से पूछा

लावण्या सरमा रही थी पूनम की बाते सुनकर उसके चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल थी

पूनम कैसे हो आप - लावण्या को कुछ नही सूझा तो उसने पूनम से पूछा

अरे वाह आप को मेरा नाम भी पता है पूनम खुशी से खिल गयी

सिर्फ नाम नही सब कुछ मुझे पता है लावण्या ने कहा आप अपने सार्थक भैया की लाडली राजकुमारी हो आप ग्रेजुएसन कर रहे हो ,आपको नीला रंग बहुत पसंद है आप खाना बहुत अच्छा बनाती है ,आपका पढ़ने में दिल नही लगता आप को चटपटी और तीखा गोलगप्पा खाना सबसे अच्छा लगता है - लावण्या ने एक साँस में सब गिनवा दिया

हे राम इतना सब कुछ, आप जासूस हो क्या? पूनम शॉक्ड होकर बोली

ये सब आपको कैसे पता ? ओह्ह अब समझी भैया ने बताया होगा तब तो आप पक्का मेरी होने वाली भाभी ही हो ,है न - पूनम खुसी से चहचहा रही थी

भाभी का तो नही पता लेकिन आपकी बेस्ट फ्रेंड जरूर बनूगी ,आपके भैया आपकी इतनी बाते करते है कि आपसे मिलने का बहुत मन करता है और वो गलत भी नही करते थे

आप सच मे बहुत मासूम और प्यारी है लावण्या ने कहा

थैंक्यू भाभी जी ,... अचानक से पूनम बोलते बोलते रुक गयी और फिर बोली

मैं आपको भाभी बोलूंगी चलेगा ना वो क्या है होने वाली बोलने में थोड़ा लंबा लगता है और नाम मैं ले नही सकती इसीलिए - पूनम ने कहा

हम्म, लावण्या ने लंबी सांस लिया और बोली चलेगा कोई बात नही लावण्या ने इजाजत देदी

हा तो मैं क्या कह रही थी अरे हा पता है भाभी जब मैंने भैया से आपके बारे में पूछा तो मुझे कुछ बताया नही पता है मुझसे कितनी चालबाजी करते है भैया मुझे बोला कि मेरी दोस्त है नोट्स माँग रही थी और मुझे डाँट दिया - पूनम ने सार्थक की शिकायत लावण्या से किया

अच्छा उन्होंने तुम्हे डांटा,लेकिन क्यो लावण्या को पूनम से बात करके मजा आरहा था

वैसे ज्यादा तेज से नही डाँटा बस हलका से वैसे तो मेरे भैया बहुत अच्छे है मुझे बहुत प्यार करते है मेरा बहुत ख्याल करते है - पूनम बोली

आप से हमे मिलना है आपको देखना है बहुत मन कर रहा है आप बताइए आपसे कैसे मिलू- लावण्या ने कहा

आप अपने भैया के साथ हमारे घर आ जाइये -लावण्या ने कहा

नही अगले महीने मेरा बर्थडे है तो आप हमारे घर आ जाइये

फिर हम खूब मस्ती करेगे और खूब सारी बाते करेंगे बोलिये आप आएंगी न ? - पूनम ने पूछा

आई एम सॉरी पूनम लेकिन हम कैसे आएंगे हम आपसे बहुत दूर है आप गाजियाबाद और मैं नगीना कैसे आ पाऊंगी - लावण्या ने कहा

तो क्या हुआ ज्यादा दूर नही है आप अपने भैया के साथ आ जाना - पूनम ने कहा

मेरे कोई भाई नही है पूनम सिर्फ हम दो बहनें ही है

ओह्ह सॉरी फिर तो आप का आना मुश्किल है आपसे मिलने का बहुत मन था सच मे मुझे आपसे खूब सारी बाते करनी थी - पूनम मायूसी से बोली

अचानक रजनी का दिमाक क्लिक किया उसने लपक कर फोन पकड़ा और बोली

हाय पूनम कैसी हो मैं लावण्या की बड़ी बहन रजनी बोल रही हूँ

जी नमस्ते मैं ठीक हु आप कैसी है - लावण्या ने कहा

हां मैं ठीक हु ,आपको लावण्या से मिलना है ना उससे बाते करनी है ना तो एक काम कर सकती हो आप जिससे आप लावण्या से मिल लोगे

कैसे ? कैसे? बताइये - पूनम ने चहक कर कहा

आप अपने सार्थक भैया को लिवाने भेज दो लावण्या को फिर तो लावण्या को आना ही पड़ेगा न फिर तो इनके पास ना आने का कोई बहाना नही बचेगा क्यो कैसी रही - रजनी

ने मुस्कुरा कर कहा

एक्सीलेंट गुड आइडिया थैंक्स आपने बहुत अच्छा आइडिया दिया है आज आने दो बच्चू को आज बताती हूँ मुझे बेवकूप समझते है ना- पूनम लावण्या से बात करके बहुत खुश थी

लावण्या गुस्से से खा जाने वाली नजरो से रजनी को देख रही थी और रजनी के ओठो पर एक मध्यम सी मुस्कुराहट थी ।

अच्छा आप लो अपनी लावण्या भाभी से बात करो मैं जाती हूँ फिर मिलेंगे बाय पूनम टेक केयर रजनी मुस्कुराती हुई बोली

बाय

भाभी मैं भैया को आपको लिवाने भेजूंगी तब तो आप आओगे ना पूनम ने लावण्या से कहा

अरे इसकी क्या जरूरत है पूनम खामखा भैया को परेसान करोगी वैसे ही उनकी पढ़ाई काफी डिस्टर्ब हो गई है आएंगे जायेगे तो काफी उनका काफी नुकसान होगा - लावण्या ने बोला

आप को मुझसे मिलने में कोई इंटरेस्ट नही है क्या? पूनम बोली

अरे नही ऐसी कोई बात नही है मैं तो बस आप के लिए कह रही थी आप अकेली रह जाएगी घर मे लावण्या सकपका कर बोली

कोई नही एक दिन मैं चाची के पास चली जाउंगी पूनम ने कहा बस आपको मेरे बर्थडे पर आना है तो आना है अब

आप सोच लो चाहे जैसे आप नही आएंगी तो मैं आपसे नाराज हो जाउंगी फिर आपसे बात भी नही करूँगी- पूनम ने धमकी दी

अच्छा अच्छा आप गुस्सा मत हो मैं कुछ न कुछ सोचती हूँ - लावण्या ने कहा

वैसे आपके भैया कहा है - लावण्या ने पूछा

अभी अभी मोबाइल चार्ज पर लगा कर कही बाहर गए है आते ही मैं बता दूंगी की आपने फोन किया था ठीक है ।

ओके बाय पूनम अपना ध्यान रखना

आप भी अपना ध्यान रखना और जल्द से जल्द आना बाय

पूनम अपना दिमाग घुमाने लगी और फिर अचानक कुछ सोच कर उसकी आंखें चमक पड़ी ।

उसने सब कुछ छोड़ दिया और अपने बालों को थोड़ा सा खोल लिया और फिर एक चादर तान कर लेट गयी ।

थोड़ी देर बाद सार्थक घर में घुसा तो उसने पूनम को आवाज लगाया

पूनम वो पूनम कहा हो - सार्थक ने कहा

लेकिन पूनम चुपचाप लेटी रही

सार्थक पूनम को बुलाते हुए उसके कमरे में पहुच गया और उसने देखा कि पूनम चद्दर तान कर लेटी थी

क्या हुआ छुटकी - सार्थक घबरा कर बोला

पूनम कुछ नही बोली बस लेटी रही

सार्थक ने पूनम का चद्दर खींच लिया

पूनम ने वापस से उसे ओढ़ लिया

सार्थक के चेहरे पर मुस्कुराहट आगयी

वो नौटंकी अब क्या है अब इस तरह गुस्सा क्यो है - - सार्थक ने पूछा

मैं झुटे और मक्कारो से बात नही करती और आज के बाद मुझसे आप बात मत करना और मुझे छुटकी भी मत बुलाना- पूनम ने मुह फुला कर कहा

अरे हुआ क्या बता तो सही अब मैने क्या किया है - सार्थक ने पूनम को दुलारते हुए कहा

कुछ नही हुआ आप जाओ यहा से मुझे आपसे कोई भी बात नही करनी- पूनम ने बनावटी गुस्से से कहा

अच्छा लेकिन क्यो,? मैने किया क्या है ये तो बता दे ,सार्थक को कुछ समझ मे नही आया

किया क्या है ,देखो देखो कितने भोले बन रहे है जैसे कुछ पता ही नही है कोई भी ये भोली सी सकल देख कर धोखा खा जाय कोई कहेगा कि ये इंसान एक नम्बर का झूठा है- पूनम बोली

अरे बोल न पहेलियां क्यो बुझा रही है ये सब क्या है सार्थक चिढ़ कर बोला

मैने बोला न मुझे कुछ नही बताना आप जाइये यहा से जब आपको मुझसे कोई मतलब ही नही मुझसे कोई प्यार ही नही तो कुछ कहने से क्या फायदा- पूनम शानदार नाटक कर रही

थी

ओह्ह गॉड सार्थक इरिटेट हो रहा था

ठीक है अच्छी बात है मत बता मैं जा रहा हूँ बाहर सार्थक ने कहा और बाहर आगया

पूनम उठी उसके चेहरे पर एक रहस्य मई मुस्कुराहट थी क्योकि वो जानती थी कि अभी भले ही सार्थक गुस्से से चल गया हो लेकिन घूम कर थोड़ी देर बाद फिर से आएगा

क्रमशः
 
मुहब्बत एहसास है दिल का जो आंखों से झलकता है

मुहब्बत करने वाले को भला कब कौन रोक सकता है

ये वो अनमोल लम्हा है जो दिल को प्यार से भर दे

मुहब्बत हो जब जाता है तो सब कुछ प्यारा लगता है

प्यार में पड़ जो जाते है कहा खुद की खबर उन्हें रहती

महबूब की बाहों के मीठे सपने में उनकी रात है कटती

इश्क में लोग अक्सर भूल जाते नींद और चैन को अपने

दिलो में एक तूफान सा रहता समुन्दर सी लहर उठती

सार्थक गुस्से से तो बाहर आगया लेकिन उसका मन नही लगा वह फिर घूम कर अंदर पहुच गया और फिर से पूनम को बुलाने लगा

और पूनम अजगर की तरह पड़ी रही।

तू ऐसे नही मानेगी रुक तुझे मैं बताता हूं - सार्थक ने कहा और फिर पूनम के पास पहुचा और उसे छेड़ने लगा गुदगुदी करने लगा जिससे पूनम हंस पड़े

लेकिन पूनम भी पूरी पक्की वाली थी वह अपनी हंसी अंदर जब्त करके बैठी थी ।

क्या है छुटकी क्यो गुस्सा है बता दे यार- सार्थक थक हार कर बोला

पूनम ने सार्थक को खा जाने वाली नजरो से देखा

अब ऐसे क्या देख रही है बता तो सही बात क्या है -सार्थक ने परेसान होकर पूछा

आपने मुझसे झूठ क्यो बोला - पूनम ने भड़क कर पूछा

कैसा झूठ? और मैने झूठ कब बोला? -सार्थक को कुछ भी समझ मे नही आया

देखो देखो अभी भी झूठ, भैया सच्ची में आप कित्ते झूठे हो

-पूनम ने मासूमियत से कहा

अच्छा मेरी माँ साफ साफ बताएगी , मुझे कुछ नही समझ मे आ रहा है कैसा झूठ, क्या कहना चाह रही है सो प्लीज लेटस यु एक्सप्लेन इट - सार्थक ने हाथ जोड़ते हुए कहा

आपने उस दिन जब लावण्या का फोन आया था तो मुझसे क्या बोला लवान्या मेरी कालेज की एक दोस्त है और मुझसे नोट्स मांग रही है जबकि लावण्या मेरी होने वाली भाभी है आपको सरम नही आती अपनी छोटी सी प्यारी सी मासूम सी बहन से झूठ बोलते हुए आपको क्या लगा कि मुझे पता नही चलेगा मैं सिर्फ सकल से भोली लगती हूँ, हूँ नही समझे - पूनम ने आंख मटका कर कहा

सार्थक को पूरी बात समझ मे आगयी और उसके ओठो पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट फैल गयी

देखो देखो कैसे कृष्ण कन्हैया की तरह मुस्कुरा रहे है, बोलो अब , बोलते क्यो नही , चोरी पकड़ी गई तो जुबान पर ताला लग गया क्या ? मैं पूछ पूछ कर थक गई लेकिन आपने कुछ भी नही बताया वो तो शुक्र मानो की लावण्या भाभी थोड़ी सी समझदार है आपकी तरह नही है जो अपनी एकलौती लाडली मासूम प्यारी सी बहन से झूठ बोले उन्होंने मुझे सब सच सच बता दिया - पूनम ने कहा

क्या सच सच बता दिया और लावण्या का फोन आया था तूने बात की क्या - सार्थक ने कहा और भाग कर अपना फोन उठाया

उसने देखा पूनम ने लावण्या से 12 मिनट तक बात की है

और नही तो क्या मैने बात भी की और आपकी सारी असलियत भी पता कर ली जो आप मुझसे छुपाने की कोशिश कर रहे थे- पूनम ने कहा

मैं क्या छुपाने की कोशिश कर रहा था ऐसा कुछ नही है जैसा तू सोच रही है हम दोस्त है बस

अभी भी सिर्फ दोस्त बोल रहे हो, हे राम इतना झूठ

आप झूठ क्यो बोल रहे हो जबकि लावण्या भाभी ने मुझे सब सच सच बता दिया है

कैसा सच और क्या बता दिया है लावण्या ने - सार्थक ने उत्सुकता से पूछा

यही की आप दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो - पूनम ने कहा

क्या ? ये लावण्या ने कहा कि वो मुझसे प्यार करती है सार्थक खुशी से उछल पड़ा

हा बिल्कुल और आप नही करते हो क्या आप भी तो लावण्या से प्यार करते हो- पूनम बोली

नही पहले ये बता लावण्या ने खुद कहा कि वो मुझसे प्यार करती है कही तू झूठ तो नही बोल रही है - सार्थक को अब भी विश्वास नही हो रहा था

हे भगवान अब क्या स्टाम्प पेपर पर लिख कर दू तभी मानोगे वैसे आप न सच मे एक नंबर के बुद्धू हो आप कुछ नही समझते हो कोई भी लड़की ऐसे डायरेक्ट थोड़े न कहती है

कि मैं आपसे प्यार करती हूँ ,लड़कियों में हल्की सी सरम हल्की सी झिझक होती है वो तो बस इसारो में ही बता देती है कि वो आपसे प्यार करती है- पूनम ने किसी दादी अम्मा की तरह सार्थक को समझाया

क्या मतलब है तेरा, मतलब लावण्या ने ये नही कहा कि वो मुझसे प्यार करती है - सार्थक बुझ सा गया

पूनम ने अपना माथा पीट लिया

सार्थक उसको कबूतर की तरह आंखे झपका कर देख रहा था

तू साफ साफ बता न क्या बात हुई तेरी और लावण्या की- सार्थक बेचैनी से बोला

मैं क्यो बताऊ तुमने मुझे कुछ बताया था जो मैं बताऊ जब मैं कह रही थी कि मैं हेल्प कर दूंगी और तब तो कुछ कहा नही अब जा कर खुद ही पूछ लो - पूनम ने सार्थक को और तपाया

प्लीज प्लीज बहन प्लीज बता दे ना अच्छा ले कान पकड़ता हूँ सॉरी आगे से तुझसे कोई बात नही छुपाउंगा पक्का प्रोमिश अब तो बता दे, तेरी और लावण्या की क्या बात हुई - सार्थक पूनम और लावण्या से हुई बातचीत जाने के लिए उतावला हो रहा था

ऐसे नही पहले आप मुझसे एक वादा करो - पूनम बोली

कैसा वादा - सार्थक ने पूछा

बात जाननी है ना कि मेरी और भाभी की क्या बात हुई तो

मेरी एक बात आपको माननी पड़ेगी अगर मंजूर हो तो बोलो मैं बताना शुरू करू- पूनम ने कहा

मुझे तेरी सारी बाते मंजूर है अब ज्यादा भाव मत खा जल्दी बता वरना पिट जाएगी - सार्थक बेचैनी से बोला

ओहो क्या बात है भैया बड़ी बेचैनी है पूनम सार्थक के स्थिति का आनद लेते हुए बोली

तू रहने दे अब मुझे सुननी ही नही है सार्थक बुरी तरह किलस गया उससे बर्दास्त नही हो रहा था और पूनम उसकी खिंचाई में लगी थी

अच्छा सॉरी सॉरी लेकिन अपना वादा याद रखना भूलना मत

और फिर पूनम ने एक एक बात बतानी शूरु कर दिया वो भी हल्का सा मिर्ची और मसाले का तड़का लगा के

सार्थक बहुत ही ध्यान से उसकी बातें सुन रहा था और

पूरी बात सुनकर सार्थक खुशी से नाचने लगा क्योंकि उसे पता चल गया कि लावण्या भी उससे प्यार करती है वह बहुत खुश था उसका दिल कर रहा था चीख चीख कर सबको बता दे ।

पूनम सार्थक की खुशी को महसूस कर रही थी और वह भी अपने भैया के लिए बहुत खुश थी उसे भी लावण्या की बातचीत और ब्यवहार पसंद आया था ।

मेरी शर्त याद रखना मैने सब बता दिया आपको अचानक से पूनम ने कहा

कैसी शर्त और क्या शर्त है जरा बता

यही की मेरे बर्थडे में लावण्या भाभी को लेकर आओ पूनम ने छूटते ही बोल दिया

पागल हो गयी है क्या ? ये कैसी शर्त है - सार्थक आश्चर्य से उछल पड़ा

देखो आपने प्रोमिश किया है कि मेरी सारी शर्त मंजूर है

पूनम ने उंगली दिखा कर कहा

हां लेकिन ये थोड़े न कहाबथा कि लेकर आऊंगा तु और कुछ मांग ले वो पूरी कर दूंगा - सार्थक अपने वादे से मुकर गया

मैं कुछ नही जानती मुझे कुछ सुनना भी नही, मुझे तो लावण्या भाभी से मिलना है बस और वो भी अपने बर्थडे तक वो आप जानो कैसे- पूनम बिल्कुल बच्चो की तरह अड़ गयी ।

छुटकी ये क्या बचपना है सोच तू क्या कह रही है ऐसे अच्छा थोड़े न लगता है किसी को लाना - सार्थक कसमसा कर बोला

अच्छी तरह से पता है कि क्या बोल रही हूँ और फिर रजनी ने खुद कहा है कि भैया को भेज दो वो लिवा ले जाएंगे तो आप को लाने में कई प्रॉब्लम है - पूनम ने कहा

पूनम देख मेरी बात ध्यान से सुन अपने घर की हालत ठीक नही है वो आएगी तो क्या सोचेगी अगर वो पुराना घर होता तो उसे लाने में मुझे कोई दिक्कत नही थी ऐसी बच्चो वाली जिद मत कर मैं कही नही जा रहा किसी को लेने ये मेरा

फाइनल डिसीजन है बस मुझे इस पर कोई और बहस नही चाहिए - सार्थक ने कहा

ठीक है तो फिर मैं इस बार अपना बर्थडे भी नही मनाऊंगी और आपसे बात भी नही करूँगी आप चीटर हो आप वादा करते हो फिर तोड़ देते हो पूनम मुह फुला कर बोली और उठ कर जाने लगी

अरे छुटकी मेरी बात तो सुन सार्थक पीछे से चिल्लाया

लेकिन पूनम चुपचाप बिना जबाब दिए कमरे से बाहर निकल गयी

सार्थक परेसान हो गया था वह परेसानी से बैठ गया और सोचने लगा तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी

पूनम देख कौन है सार्थक चिल्लाया

लेकिन पूनम देखने भी नही गयी दरवाजे पर दूसरी बार नॉक हुआ फिर सार्थक खुद ही उठ कर गया और उसने दरवाजा खोला

क्या है बे देवदास दिन में भी सपने देखने लगा क्या इतना टाइम लगता है दरवाजा खोलने में सामने दरवाजे पर लक्ष्य खड़ा था

अबे तू यहां कैसे ? - सार्थक आश्चर्य से बोला

क्यो आ नही सकता है क्या तेरी मदद की जरूरत पड़ गयी हल्की सी इसीलिए आ गया - लक्ष्य ने कहा

आजा सार्थक हटता हुआ बोला

लक्ष्य ने चारों तरफ नजर घुमा कर देखा और फिर बोला चल

कम से कम फर्नीचर की वजह से घर अच्छा तो लगने लगा अब लगा की इसमे इंसान भी रहते है

सार्थक मुस्कुरा कर रह गया और लक्ष्य पास में पड़े सोफे पर पसर गया

बता क्या प्रॉब्लम है - सार्थक ने उत्सुकता से पूछा

अबे सांस तो लेने दे तुझे आज बड़ी जल्दी है और ये क्या तेरे चेहरे पर बारह क्यो बजा है - लक्ष्य ने सार्थक को उदास देख कर पूछा

कुछ नही यार बस ऐसे ही -सार्थक ने उदास होकर बोला

क्यो मुझे भी नही बताएगा अबे साले दोस्त हु तेरा, तेरे रग रग से वाकिफ हु बता क्या बात है + लक्ष्य ने सार्थक को धौल जमाई और पूछा

छोड़ ना तू बता चाय पियेगा या पानी

खून पियूँगा वो भी तेरा- लक्ष्य ने किलस कर कहा

अबे मजाक मत कर यार- सार्थक ने कहा

पूनम जरा पानी ले आओ और चाय भी बना दो लक्ष्य आया है - सार्थक ने चिल्ला कर कहा

लेकिन अंदर से कोई आवाज नही आया

थोड़ी देर बाद पूनम दो गिलास पानी लेकर आई

हाय पूनम कैसी हो ? - लक्ष्य मुस्कुराते हुए बोला

लेकिन पूनम ने कोई जबाब नही दिया उसने पानी रखा और चुपचाप चली गयी उसने एक शब्द भी नही कहा

इस नकचढ़ी चुहिया को क्या हुआ इसका भी मूड ठीक नही

लग रहा है अबे तुम दोनों का आपस मे झगड़ा हुआ है क्या -लक्ष्य ने सार्थक से पूछा

यार क्या बताऊँ, तू छोड़ पानी पी इसका तो ऐसा ही है तू तो जानता ही है कितनी जिद्दी है जिस चीज की धुन चढ़ जाती है वो पूरा करके ही दम लेती है - सार्थक ने कहा

वैसे कह क्या रही है - लक्ष्य ने उत्सुकता से पूछा

तू छोड़ न यार कहा इसके पंचायत में पड़ा है इसको तो बकवास करने की आदत है- सार्थक ने इग्नोर किया

अंदर से पूनम चाय लेकर आई और साथ मे एक प्लेट में कुछ खाने का सामान भी था उसने चुपचाप उसे रखा और वापस जाने लगी ।

क्या हुआ पूनम आज मूड कुछ खराब लग रहा है क्या बात हो गयी- लक्ष्य ने पूनम से पूछा

मेरा क्यो मूड खराब होगा और मेरी क्या मजाल जो मैं किसी से कुछ कहू -पूनम ने गुस्से से कहा

हुआ क्या ? बताओ तो सही ये तो एक नम्बर का गधा है तुम तो समझदार हो, बात क्या है आज तुमने ढंग से बात भी नही किया -लक्ष्य ने पूछा

मुझे कुछ नही पता आप इन्ही से पूछो वैसे भी अब मेरी खुशियो और मेरी इच्छाओ की परवाह किसे है मेरी खुशी से किसी को क्या मतलब पूनम ने मुह फुला कर कहा

क्या छुटकी एक छोटी सी बात कहा से कहा ले जा रही है यार समझा कर ना तू जो बोलती है वो करता हूँ लेकिन ये मैं

नही कर सकता प्लीज समझ न और ऐसे गुस्सा मत हो - सार्थक ने पूनम को समझाने की आखिरी कोशिस की

कोई मुझे भी कुछ बतायेगा की चल क्या रहा है ,हद है यार तुम दोनों अपने अपने रामलीला में लगे हो बात क्या है बताओ तो सही- लक्ष्य झल्ला कर बोला

दोनो शांत खड़े रहे कोई कुछ बोल नही रहा था

देवी जी आप अपना मुह खोलने का कष्ट करेंगी और डिटेल में बताएंगी की क्या हुआ - लक्ष्य ने तंज से पूछा

लक्ष्य अगले महीने मेरा बर्थडे है और भैया से मैने एक छोटी सी चीज मांगी जिसके लिए उन्होंने प्रोमिश भी किया लेकिन अब मना कर रहे है और अपने प्रोमिश से मुकर गए - पूनम बोली

सार्थक ने घूर कर पूनम को देखा

क्यो ? जब प्रोमिश किया था क्यो मना कर रहा है बे एकलौती बहन है जो गिफ्ट माग रही है दे दे -लक्ष्य ने सार्थक से कहा

क्या दे दु यार खामखा बिना फालतू की जिद कर रही है - सार्थक ने कहा

ऐसा क्या जिद कर दिया उसने जो तू मना कर रहा है - लक्ष्य बोला

सार्थक कसमसा कर रह गया

अब बोल न ऐसा क्या माग लिया जो तूने उसे नाराज कर दिया है

अब तुझे क्या बताऊँ यार सार्थक झिझकते हुए बोला

वो कह रही है मेरे बर्थ डे पर जा कर लावण्या को ले आओ मुझे उससे मिलना है- सार्थक ने एक झटके से बोल दिया

क्या ? लक्ष्य चौक गया

और अब तू ही बता ये कैसे संभव है मैं उसे कैसे ले आऊँ जबकि तू घर की हालत देख रहा है वो देखेगी तो उसे कैसा लगेगा मेरे बारे में क्या सोचेगी यार

पूरी बात बताओ न अधूरी क्यो बोल रहे है आप - पूनम ने बीच मे बात काट दी ।

लक्ष्य मेरी लावण्या भाभी से बात हो गयी है वो आने के लिए राजी हो गयी है लेकिन उन्होंने कहा कि मैं अकेले नही आ सकती तो मैं बोल रही हूँ जाकर उनको ले लाओ लेकिन नही पहले इन्होंने हां बोला था अब मुकर रहे है - पूनम ने कहा

तो इसमें कौन सी आफत है जा जाकर ले आ जब वो खुद ही आने को तैयार है तो तुझे क्या प्रॉब्लम है इतनी छोटी सी बात के लिए तू इस मासूम लड़की का दिल तोड़ रहा है और कैसा क्या लगेगा यार अगर उसने तुझसे प्यार किया होगा तो उसे घर कैसा है इससे कोई मतलब नही होगा इसी बहाने ये भी पता चल जाएगा कैसा भाई है तू यार अपनी बहन की छोटी सी इच्छा पूरी नही कर सकता - लक्ष्य ने कहा

यार तू तो समझ कम से कम तू तो पूनम की साइड मत ले - सार्थक ने कहा

मैं किसी की साइड नही ले रहा यार बस तुझे समझा रहा हूँ

जब लावण्या खुद आने के लिए तैयार है तो तुन्हें लाने में क्या प्रॉब्लम है -लक्ष्य बोला

तू ले आ इसी बहाने वो थोड़ी घुल मिल जाएगी सबसे - लक्ष्य ने कहा

वही तो एक तो इन्होंने पहले मुझसे झूठ बोला नुझे कुछ बताया नही अब जब मैंने खुद सब पता कर लिया और जान गई हूं कि लावण्या मेरी होने वाली भाभी है तो अब ये मुझे उससे मिलने भी नही दे रहे है - पूनम ने मासूमियत से कहा

तुम चिंता मत करो पूनम देखता हूँ कैसे नही जाता -लक्ष्य ने कहा

एक काम कर सार्थक अकेले तुझे जाने में हिचक हो रही है तो मैं तेरे साथ चल रहा हूँ चल लेकर आते है इसी बहाने मैं भी मिल लूंगा और यार वो तेरे लिए परफेक्ट है तुझे प्यार भी करती है और जहाँ तक तेरा सवाल है तू भी उसे प्यार करता है तो फिर दोनों का मेल मिलाप हो जाएगा इससे अच्छी क्या बात होगी और अगर वो तुझसे प्यार करती होगी तो उसे ये खराब घर दिखेगा भी नही समझा और फिर तुझे इतनी ही सरम आरही है तो इसकी रंगाई पुताई करवा दे ठीक हो जाएगा वैसे भी काफी पुराना हो गया है पेंट

अब ज्यादा मत सोच पूनम को बोल दे कि ले आएगा बाकी पूनम के बर्थडे पार्टी की चिंता मत कर मेरे ऊपर छोड़ दे उसे मैं ऑर्गनाइज कर दूंगा बस - लक्ष्य ने कहा

सार्थक ने थोड़ी देर सोचा और फिर हा बोल दिया

पूनम खुशी से खिल गयी और लपक कर सार्थक के कंधे पर झूल गयी

थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू सो सो मच् माई स्वीट स्वीट भैया ये हुई न बात पूनम खुशी से चहचाहती हुई बोली

पूनम को इस तरह से खुश देख कर सार्थक के ओठो पर भी एक स्माइल आगयी ।

सार्थक ने चाचा जी से बात करके पूनम को कुछ दिनों के लिए अपने चाची के पास भेज दिया घर को अच्छे से रंग रोसन करवा दिया था और उसके क्रैक्स रिपेयर करवा दिया था जिससे घर अच्छा लगने लगा

धीरे धीरे समय बीत रहा था

लावण्या और सार्थक की नजदीकियां काफी बढ़ गयी थी दोनो और भी पास आगये थे और दोनों के दिल मे एक दूसरे को मिलने की लालसा और बढ़ गयी थी

आखिर वो दिन भी आ गया जब उसे लावण्या को लेने जाना था ।

लक्ष्य और सार्थक दोनो लावण्या को लिवाने नगीना पहुचे

लावण्या दोनो को रिसीव करने रेलवे स्टेसन आयी हुई थी

सार्थक को देख कर लावण्या बहुत खुश थी और सार्थक भी बहुत खुश था

लावण्या को देखते ही अनायास ही सार्थक की बाहे खुल गयी और लावण्या भी किसी प्यासे परिन्दे की तरह सार्थक के

सीने से आकर लिपट गयी

सार्थक ने अपनी खुली हुई बाह बंद कर ली और लावण्या को आगोश में छुपा लिया मानो लावण्या को वह अपने दिल मे समा लेना चाह रहा हो

दोनो के आंखे खुशी से भीग गयी थी उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था ऐसा लग रहा था कि कई जन्मो की जुदाई के बाद मिले हो ।

दोनो काफी देर तक एक दूसरे से लिपटे रहे और फिर दोनो को अपनी स्थिति का एहसास हुआ दोनों अलग हुए

दोनो की आंखे सरम से झुकी हुई थी और दोनों एक दूसरे से नजर नही मिला पा रहे थे

कैसी हो आप लावण्या - सार्थक ने पूछा

मैं ठीक हूँ आप कैसे है - लावण्या ने पुछा

मैं भी ठीक हूँ आपसे मिलने का मन था बहुत इसीलिए चला आया -सार्थक ने कहा

मुझे तो लगा था कि हम फिर कभी दुबारा नही मिल पाएंगे लेकिन आपको देख कर जैसे जान में जान आ गई हो - लावण्या बोली

अब यही खड़े होकर बाते करनी है या घर भी चलना है अगर दोनों का मिलना हो गया हो तो घर ले चले मैडम जी ये पब्लिक प्लेस है -लक्ष्य बोला

दोनो झेप गए और बोले हा चले

सार्थक और और लावण्या ने एक दूसरे का हाथ थाम रखा

था दोनो के दिल मे एक मीठी मीठी सी उमंग और दिल मे मोहब्बत का सागर हिलोर मार रहा था

लक्ष्य ने एक टैक्सी बुक किया और फिर दोनों लावण्या के घर पहुचे ।

रजनी और लावण्या की मम्मी सार्थक का बेसब्री के साथ इन्तेजार कर रहे थे

रजनी और उसकी मम्मी ने सार्थक का बहुत ही गरम जोशी के साथ स्वागत किया मानो सार्थक अजनबी न होकर कोई मेहमान हो ।

क्रमशः
 
नजर ढूढती थी हमेसा से तुमको बड़ी आरजू थी मुलाकात की

पर लब खामोश है अब जब मिले है छुवन भा रही है तेरे हाथ की

है आंखों में सपने है दिल मे कसमकस है मन मे बहुत कुछ जो तुमसे है कहना

पर आंखों की भाषा में हो रही बाते दिल की किसे है जरूरत किसी बात की सार्थक को यह स्पेसल ट्रीटमेंट बहुत अच्छा लग रहा था ।

रजनी और उसकी मम्मी दोनो ने सार्थक और उसके परिवार का हाल चाल पूछा और बहुत ही आदर के साथ बैठाया और फिर सारी डिटेल पूछने लगी

सार्थक ने सब कुछ सच सच बिना कुछ छुपाये बता दिया ।

बेटा लावण्या और रजनी की जो तुमने हेल्प की है वो भी अनजाने प्रदेश में उसका जिंदगी भर का मेरे ऊपर एहसान है अगर तुम न होते तो मेरी दोनो बेटियां जाने किस हाल में होती तुम्हारा दिल बहुत नेक है और स्वभाव भी बहुत शांत है - रजनी की मम्मी जी सार्थक के बात ब्यवहार से बहुत इम्प्रेस्ड थी

पता है मम्मी जी इन लोगो ने मेरे लिए क्या क्या नही किया, ये लक्ष्य तो लड़की तक बन गए थे मुझे बचाने के लिए - रजनी ने लक्ष्य की तारीफ की

क्या रजनी जी आप भी , ये तो मेरा फर्ज था अब आप लोग इतनी मुसीबत में थे तो हमे कोई और रास्ता ही नही सुझा -

लक्ष्य झेप गया

भगवान आप लोगो को हमेशा सलामत रखे आप तीनो लोग हमारे दोनो बेटियो के जिंदगी में देवदूत बन कर आये है ।मम्मी जी ने दिल से आशिर्बाद दिया

मम्मी जी मैं क्या कहती हूँ क्यो ना अपनी लावण्या को हमेसा हमेसा के लिए सार्थक को शौप दिया जाय, क्या बोलती हो मेरे ख्याल से लावण्या को भी सार्थक पसंद है और सार्थक भी लावण्या को पसंद करता है- रजनी ने मौका देख कर कहा

अगर दोनों बच्चे राजी है तो मुझे क्या परेसानी है मुझे सार्थक पसंद है वैसे भी कही न कही मुझे लावण्या की शादी तो करनी है तो सार्थक जैसा नेक और संस्कारी लड़का हमे कहा मिलेगा जो लड़कियों की इतनी इज्जत करता हो, बाकी आने दो तुम्हारे पापा को मैं एक बार उनसे बात करके फिर सब कुछ तय कर देती हूँ - मम्मी जी ने कहा

क्यो सार्थक बेटे मेरी लावण्या को अपनाओगे - मम्मी जी ने सार्थक का मन जानना चाहा

हा हा क्यो नही आटी आप बिलकुल चिंता मत करे इसकी

बिल्कुल हां है ,यहां तक कि पूनम को भी लावण्या पसंद है , वो तो लावण्या से मिलने के लिए बहुत एक्साइटेड है, तो इसकी तरफ से हां ही है अब तो आप शादी की तैयारी शुरू कर दो जल्द से जल्द अब तो लावण्या के हाथ का बना खाना खाना है - लक्ष्य ने सार्थक के बोलने से पहले ही मुस्कुराते हुए कहा

तुम्हे क्या कहना है सार्थक करोगे मेरी लावण्या से शादी मेरी लावण्या तुम्हे निरास नही करेगी बेटे बहुत सुलझी समझदार और साहसी लड़की है -मम्मी जी ने सार्थक से उसकी मर्जी जाननी चाही

मम्मी जी मुझे कोई प्रॉब्लम नही है लावण्या बहुत अच्छी लड़की है और मुझे पता है जिस किसी के जिंदगी में वह जाएगी उसकी जिंदगी खुशियो से भर जाएगी लेकिन ये शादी ब्याह की बाते अगर बड़े बुजुर्ग करे तो ज्यादा अच्छा होता है बाकी मुझे लावण्या पसंद है, और फिर अभी मेरा फाइनल ईयर बाकी है तो सबसे पहले अपनी स्टडी कम्प्लीट कर लूं और फिर जैसा आप लोगो को उचित लगे आप लोग कर दीजियेगा मुझे कोई प्रॉब्लम नही है - सार्थक ने गंभीरता से कहा

तो ठीक है कोई बात नही आप मुझे बता दीजियेगा की

किससे बात करे फिर दोनों परिवार मिल कर सारी बात चीत कर लेंगे- लावण्या की मम्मी बोली

सार्थक को देख कर और बातचीत करके बिसम्भर जी भी सार्थक के साथ लावण्या की शादी को राजी हो गए थे उन्हें भी सार्थक बहुत पसंद आया था ।

शाम तक दोनों लावण्या के घर ही रहे लावण्या सार्थक के साथ बहुत खुश थी और उसकी वह खुशी उसके चेहरे पर रिफ्लेक्ट हो रही थी

उसने सार्थक के लिए अपने हाथों से कई तरह के डिस बनाये थे और जबरदस्ती उसने सार्थक को खिलाने लगी ।

बस अब नही लावण्या प्लीज अब मत रखो छूट जाएगा प्लीज मेरा पेट भर गया है अब और नही खा पाऊंगा - सार्थक ने लावण्या से रिक्वेस्ट किया

अच्छा थोड़ा सा और प्लीज ये लीजिये रबड़ी आपके लिए स्पेसल बनाया है- लावण्या ने कहा ।

नही लावण्या अब एक निवाला भी नही खा पाऊंगा बिल्कुल पेट मे जगह नही है

अरे थोड़ा सा तो खाइये प्लीज ये लीजिये लावण्या ने अपने हाथों से चम्मच में रबड़ी निकाल कर सार्थक के ओठो के पास लगाया और प्यार से जिद किया

लावण्या मैं पूरा नही खा पाऊंगा खामखा जूठी हो जाएगी पेट मे बिल्कुल भी जगह नही है ये आप खा लो - सार्थक ने कहा

कोई बात नही हो जाने दीजिए जूठी मैं खा लूंगी बस थोड़ा सा खा लीजिये प्लीज -लावण्या ने इतने अपने पन से कहा की सार्थक मना नही कर पाया

सार्थक ने मुस्कुरा कर प्यार से लावण्या को देखा और फिर उसका हाथ पकड़ कर रबड़ी खा ली और फिर हाथ पकड़े पकड़े ही उसने वापस से चम्मच कटोरी में डाल कर एक चम्मच निकाला और लावण्या को खिला दिया

लावण्या ने बिना किसी न नुक़र के खा लिया और मुस्कुराने लगी उसके आंखों में एक अजब सा खुमार भरा था और सार्थक के लिए उसका प्यार और लगाव साफ साफ महसूस हो रहा था

बस देखो तुम्हारी बात मान ली अब बस- सार्थक ने कहा

लावण्या ने वापस से कटोरी रख दी

आओ चलो हाथ धुलवा दू - लावण्या बोली

सार्थक लावण्या के पीछे पीछे चल पड़ा

लावण्या सार्थक को वाशबेसिन के पास ले गयी सार्थक ने हाथ धोया और फिर लावण्या ने तौलिया दिया हाथ पोछने के लिए

खाना कैसा लगा? आपके लिए सबकुछ मैने अपने हाथों से बनाया है -लावण्या ने धीरे से पूछा

बहुत ही अच्छा था बहुत स्वादिष्ट था और थैंक्स आपने मेरे लिए इतना मेहनत किया लेकिन आपने बहुत ज्यादा खिला दिया है - सार्थक बोला

इसमे थैंक्स की क्या बात है आप मेरे लिए स्पेसल है आपने मेरा ध्यान किसी अपने जैसा रखा है तो मेरा इतना तो हक हो ही गया आपपर की आपसे थोड़ी जिद कर सकू - लावण्या ने शरमाते हुए कहा

आपका हम पर पूरा अधिकर है आप पहली लड़की है जिससे मैने इतनी बात की और जिससे मुझे इतना लगाव हुआ है आप जब आस पास होती है तब हमें बहुत अच्छा लगता है जी करता है आपबोलती रहे और मैं सुनता रहू और जब आप

ऐसे हमपर अधिकार जताती है तो हमे बहुत अच्छा लगता है । सार्थक बोला

और हमे भी आपका साथ बहुत अच्छा लगता है हमे भी आपसे बाते करना बहुत अच्छा लगता है ।लावण्या ने अपनी नजर झुका कर कहा उसके आंखों में एक अजब सी चमक और चेहरे पर एक सरम की लाली थी

पता है लावण्या जब आप हमसे स्टेसन पर मिली और हमारे गले लगी थी तो हमे बहुत अच्छा लगा था जी कर रहा था ऐसे ही आप हमेसा मेरी बाहों में मेरे सीने से चिपकी रहे -सार्थक ने कहा

आप को इतने दिनों बाद देखा था और इतने दिनों बाद मिली थी तो खुद को रोक नही पाई - लावण्या ने कहा

तभी अचानक रजनी अंदर आयी और दोनों हड़बड़ा कर जल्दी से दूर दूर हो गये मानो दोनो की चोरी पकड़ी गई हो जबकि वो सिर्फ बाते कर रहे थे

रजनी उन दोनों की हड़बड़ाहट देख कर खिलखिला कर हंस पड़ी और बोली

कोई बात नही आराम से बाते कर लो और घबराओ मत मैं कुछ नही करूँगी

नही दीदी बस वो सार्थक का हाथ धुलवाना था इसी लिए आई थी हो गया अब बाहर ही जाना है लावण्या ने घबरा कर खुद ही सफाई दी डाली

और फिर सार्थक और लावण्या बाहर आगये

सार्थक को सबको लेकर निकलना भी था

लावण्या चलो हमे निकलना है पूनम वहां घर मे अकेली है - सार्थक ने एकांत देख कर लावण्या से कहा

ठीक है मैं और रजनी दीदी दोनो तैयार ही है बस कपड़े बदल कर निकलना ही है आप थोड़ी देर इन्तेजार कर लीजिये फिर हम चलते है लावण्या ने कहा

ठीक है मैं मम्मी जी के पास बैठा हूँ तुम जल्दी से आओ

ओके लावण्या ने कहा

थोड़ी देर बाद लावण्या तैयार होकर बाहर आई

सार्थक उसे एक टक देखता रह गया हल्का सा मेकअप और खूबसूरत से गाउन में लावण्या बहुत सुंदर लग रही थी और उसी के साथ रजनी भी खड़ी थी वह भी बहुत ही सुंदर लग रही थी

क्या हुआ सार्थक बाबू मेरी लावण्या को नजर लागओगे क्या

- रजनी सार्थक की टांग खींचती हुई बोली

सार्थक रजनी की बाते सुनकर सकपका गया और जल्दी से उसने अपनी नजर हटा लिया

नही..नही ..ऐसी कोई बात नही है मैं तो बस ऐसे ही.. -सार्थक ने जल्दी से कहा

अरे बुद्धू मैं तो मजाक कर रही हूँ बात बात पर इतना घबराने की कोई जरूरत नही है- रजनी सार्थक को इस तरह सकपकाते देख कर खिलखिला कर हसते हुई बोली

और उसका भरपूर साथ दिया लक्ष्य ने

लावण्या और मम्मी जी ओठो पर एक मुस्कुराहट फैल गयी

और सार्थक सरम से लाल हो गया

अब चले सार्थक ने कहा

हा हा चलिए

अच्छा मम्मी जी चलते है आप अपना और पापा का ख्याल रखना उन्हें टाइम पर दवाई दे देना लावण्या ने कहा

तू चिंता मत कर, मैं दे दूंगी और सार्थक तुमपर भरोसा करके अपनी अमानत तुझे सौप रही हूँ इसका ध्यान रखना इसकी जिम्मेदारी तुम्हारी है बेटे मुझे पूरा विश्वास है तुम मेरी लावण्या की और रजनी का पूरा पूरा ध्यान रखोगे - मम्मी जी ने कहा

आप चिंता मत कीजिये मम्मी जी ,लावण्या मेरी जिम्मेदारी है और मैं इसको एक खरोच भी नही आने दूंगा आपके भरोसे

को टूटने नही दूंगा - सार्थक ने कहा अब इजाजत दीजिये लेट हो जाएगा

ठीक है जाओ हमेसा खुश रहो

लावण्या रजनी और सार्थक लक्ष्य के साथ वापस निकल गए ।

सार्थक रजनी और लावण्या को लेकर अपने घर पहुचा उसने दोनो के लिए एक कमरा बुक किया था

लेकिन लावण्या ने होटल में जाने से मना कर दिया

सार्थक मैं होटल में क्यो रहूंगी मुझे आपके घर जाना है - लावण्या ने कहा

लेकिन लावण्या यहां तुम आराम से रह पाओगी मेरा घर तुम्हारे रहने लायक नही है छोटा सा घर है सार्थक ने झेंपते हुए कहा

जैसा भी है मेरे लिए अच्छा है मैं होटल में नही रहूंगी मुझे अपने घर ले चलो - लावण्या बोली

सार्थक ने बहुत प्रयास किया लेकिन लावण्या ने होटल जाने से साफ इंकार कर दिया और आखिर में सार्थक को लावण्या और रजनी को लेकर अपने घर जाना पड़ा

उसने पूनम को फोन किया

फोन चाची ने उठाया

चाची पूनम से बात करवाइये सार्थक ने कहा

वो सुबह सुबह ही चली गयी वो यहा नही है - चाची ने कहा

कहा चली गयी - सार्थक ने चौक कर पूछा

और कहा जाएगी घर गयी कह रही थी कि आज कुछ जरूरी काम है इसीलिए सुबह ही उसने जाने की जिद की ,तुम्हारे चाचा जी ने उसे छोड़ दिया और वापस आगये -चाची ने कहा

अच्छा ठीक है सार्थक बोला

सार्थक और लावण्या घर पहुचे

सार्थक ने दरवाजे की कुंडी खटखटाई

पूनम के कदमो की आवाज पास आने लगी और फिर पूनम ने दरवाजा खोला

एक मिनट रुको अभी अंदर मत आना पूनम ने लावण्या को देखा तो खुसी से झूम उठा और फिर दोनों को दरवाजे पर ही रोक दिया ।

वह पलटी और फिर उसने आरती का सजा सजाया थाल उठाया और फिर लावण्या और सार्थक की आरती उतारने लगी और उन्हें तिलक किया

भाभी अब अपना दाया पैर आगे कर के घर मे कदम रखना

लावण्या को बड़ा अजीब लग रहा था और उसके ओठो पर एक मुस्कुराहट थी वह पूनम को आश्चर्य से देख रही थी

ऐसे क्या देख रही है जैसे मैं कह रही हूँ कीजिये ना - पूनम ने प्यार से कहा

लावण्या ने जैसे पूनम ने कहा वैसे ही किया और फिर सब अंदर आगये

ये सब क्या था छुटकी - सार्थक ने उत्सुकता से पूछा

भाभी आज पहली बार हमारे घर आई है तो उनकी आरती उतारी है और क्या , जब नई नई बहू घर मे आती है तो ऐसे ही करते है - पूनम ने कहा

पूनम की बाते सुनकर लावण्या के गाल सरम से गुलाबी हो गए

इसके बाद पूनम ने झुक कर लावण्या के पैर छू लिए लावण्या चौक गयी और बोली

ये आप क्या कर रही है पूनम

कुछ नही भाभी आपके पाव छू रही हूँ क्योंकि आप मेरी भाभी है बड़ी है -पूनम ने मासूमियत से कहा उसकी आँखों मे लावण्या के लिए बेसुमार सम्मान और प्यार भरा था

लावण्या का दिल भर आया उसने उठा कर पूनम को अपने गले लगा लिया और पूनम भी लावण्या से ऐसे चिपक गयी मानो उसे अपनी बिछड़ी हुई माँ मिल गयी हो वह किसी अबोध बच्चे की तरह लावण्या से लिपटी हुई थी उसके भी आंखे भर आयी थी न जाने क्यों वह लावण्या के बाहों में एक अपनापन और एक सुकून महसूस कर रही थी लावण्या की भी आंखे खुशी और प्यार से छलक पड़ी अपनी पूरी जिंदगी में उसको ऐसा प्यार ऐसा स्वागत और सम्मान उसे पहले कभी नही मिला थाऔर यही सब देख कर उसकी आंखें भर आयी थी ।

अरे छुटकी अब मिलती ही रहेगी कि बैठने भी देगी लावण्या

और रजनी दीदी को वो इतनी दूर से आई है थक गई होगी जा जा कर पानी तो ले आ - सार्थक ने पूनम के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा

पूनम ने लावण्या को छोड़ा और सोफे पर बैठाते हुए कहा

भाभी आप आराम से बैठ जाइए मैं अभी आती हूँ रजनी भाभी आप भी बैठिये और भैया आप भी पूनम को लावण्या को देख कर जैसे पंख लग गए थे वह किसी हिरनी की तरह कुचाले भरते हुए अंदर चली गयी

उसके जाने के बाद पहली बार लावण्या ने नजर उठा कर घर को देखा

माफ करना लावण्या छोटा सा घर है ये वैसे हमारा रहने का एक और घर है जहाँ पर इस समय चाचा और चाची रहते है हम दो भाई बहन है तो इसी लिए इसमें रहते है - सार्थक झेप रहा था

बहुत अच्छा है सार्थक ,घर इम्पोर्टेन्ट नही होता है घर मे रहने वाले लोग इम्पोर्टेन्ट होते है पूनम इतनी स्वीट और इतनी प्यारी है उसके होते हुए तुम मुझे होटल में छोड़ने वाले थे अगर मैं यहां न आती तो इतना अच्छा स्वागत कैसा होता मेरा -लावण्या ने सार्थक का झेप मिटाते हुए कहा

थोड़ी देर बाद लावण्या सबके लिए नास्ता लेकर आई

सबने नास्ता किया और फिर सार्थक पूनम की बर्थडे की तैयारियों में जुट गया।

लावण्या ने खुद को और पूनम को अच्छे से तैयार किया

पूनम ने सार्थक का लाया वही ड्रेस पहन रखा था जो वह गोवा से लेकर आया था और उसपर नीले कलर से का गले का सेट विथ मैचिंग झुमके बहुत खिल रहे थे , पूनम वैसे ही काफी खूबसूरत थी लेकिन लावण्या ने अपने हाथों से पूनम की खूबसूरती को और भी निखार दिया था और लावण्या का तो कहना ही क्या वह बहुत प्यारी लग रही थी सार्थक की नजर तो अनायास ही बार बार लावण्या पर टिक जाती और लावण्या सार्थक को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर झेप जाती और अपनी नजर झुका लेती ।

लावण्या और पूनम के कॉलेज की चार लडकिया और रजनी सब के सब रेडी थे सार्थक ने दो कैब बुक किया और फिर सब होटल की तरफ चल पड़े

शशांक और लक्ष्य ने एक छोटे से होटल में पूनम के बर्थडे की सारी तैयारी कर रखी थी क्योंकि शशांक की कोई बहन नही थी इसी लिए वह पूनम को ही अपनी बहन मानता था और उसे बहुत प्यार भी करता था इसीलिए उसने पार्टी में कोई कसर नही छोड़ी थी ।

शाम को सार्थक के पापा को भी आना था

हाल का एक कोना शशांक ने बर्थडे के लिए रिजर्ब करवाया था वही पर एक छोटा सा स्टेज और उस के सामने गोल मेज रखे थे जिसके चारों तरफ कुर्सी रखी रखी थी और ठीक उसी के बगल एक डीजे फ्लोर था जिसपर रंग बिरंगी लाइटे

हरकत कर रही थी और हल्के हल्के से बज रही थी

हाल का वह कोना रोशनी से नहाया हुआ था और स्टेज को गुब्बारे और लाइट से सजाया गया था ।

होटल पहुच कर अभी सब बैठे ही थे कि सार्थक के दोनों दोस्त भी पहुच गए

भैया पापा कहां रह गए पूनम ने सार्थक से पूछा

अभी बात हुई निकल गए है बस थोड़ी देर में पहुच जाएंगे - सार्थक बोला

थोड़ी देर बाद सार्थक के पापा अवधेस जी भी पहुच गए

सार्थक और पूनम दोनो अपने पापा को देख कर बहुत खुश थे उन्होंने लावण्या को उनसे मिलवाया

और फिर सब बैठ कर बातचीत करने लगे

सार्थक किस का बेट कर रहे हो अवधेश जी ने -सार्थक से पूछा

पापा ,चाचा और चाची को बोला था आने के लिए उन्ही का इंतजार कर रहा हूँ वो आ जाय फिर केक काटा जाय

रुक तू मैं फोन करता हूँ अवधेश जी कहा

उन्होंने फोन मिलाया

इंद्रेश क्या हुआ तुम लोग अभी पहुचे नही कितना टाइम लगेगा ? बच्चे तुम्हारा और बहू का इंतजार कर रहे है । अवधेश जी ने अपने भाई से पूछा

भैया कुसुम की तबियत ठीक नही है तो इसीलिए हम लोग नही आरहे है सार्थक के चाचा ने असमर्थता जताई

सार्थक ने लपक कर फोन ले लिया और बोला

क्या हुआ चाचा चाची को? सुबह तक तो ठीक थी अचानक से क्या हो गया कुछ सीरियस हो तो बताना - सार्थक ने पूछा

नही सार्थक तू तो जानता ही है अपनी चाची को अब भैया से क्या बोलता वो आने से मना कर रही है तो कैसे ले कर आता पूनम को मेरी तरफ से आशिर्बाद देना और मेरे तरफ से उसको कुछ गिफ्ट दे देना पैसे मैं दे दूंगा - चाचा जी ने मायूसी से कहा

मैं समझ सकता हूँ चाचा जी सार्थक बोला उसे अपने चाची का हिसाब किताब पता था कि वो कैसी है इसीलिए अपने चाचा की मजबूरी समझ सकता था

सार्थक ने फोन रख दिया और फिर पूनम से बोला

चाचा जी नही आरहे है चाची की तबियत ठीक नही है

लक्ष्य ने

लक्ष्य ने पार्टी शुरू करने का एलान किया और फिर

एक खूबसूरत सा बड़ा सा केक होटल वालो ने लाकर स्टेज पर पहुचा दिया पूनम ने केक काटा और सबसे पहले पापा को फिर लावण्या और सार्थक को और उसके बाद रजनी शशांक और लक्ष्य और अपनी सहेलियों को खिलाया पूनम के चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी

सॉरी छुटकी मैं कोई गिफ्ट नही ला पाया सबको गिफ्ट देता देख कर सार्थक को अपनी भूल का एहसास हुआ

कोई बात नही है भैया आप ने लावण्या भाभी को लाकर मुझे सबसे प्यारा और सबसे अच्छा गिफ्ट दिया है इस गिफ्ट को मैं जिंदगी भर नही भूल पाऊंगी ये बर्थडे मेरे लिए सबसे स्पेसल है - पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा

पूनम की बाते सुनकर लावण्या सरमा गयी

केक काटने के बाद सब डांस करने लगे और मस्ती करने लगे लावण्या झिझक रही थी इसीलिए वह पूनम के पास बैठी हुई थी पूनम ने कई बार लावण्या को डांस करने के लिए कहा लेकिन लावन्या ने मना कर दिया

लक्ष्य जरा मेरे पास आना पूनम ने अचानक से लक्ष्य को बुलाया

लक्ष्य पूनम के पास आया और पूनम ने उसके कान में कुछ कहा

दोनो की नजर मिली और आंखों ही आंखों में कोई बात हुई और लक्ष्य स्टेज पर आगया

क्रमश

तुम आ क्या गए महफ़िल में माहौल सुरमई हो गया

तुम्हारी चमक को देख कर चाँद सरमा के खो गया

तुम्हारे चेहरे पर एक अजब सी कसिस और जादू है

देख कर तुमको मोहब्बत को भी मोहब्बत हो गया ।

अटेंसन प्लीज ,अटेंसन प्लीज, सार्थक ने ताली बजा कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा

जैसा आप सब जानते है कि आज एक बहुत ही प्यारी और खूबसूरत सी लड़की जिसका नाम पूनम है उसी के बर्थ डे सलिब्रेसन के लिए हम लोग यहां आए है तो लेटस डू समथिंग स्पेसल फ़ॉर हर

हमे बर्थ डे गर्ल का हुक्म मिला है कि कोई गेम खेला जाय तो हम लोग पासिंग बाल खेलते है ,तो गाइज एट ए टाइम ऑफ स्टाप म्यूजिक जिसके हाथ मे बाल होगी उसको बर्थडे गर्ल का डेयर एक्सेप्ट करना होगा सो आप सब तैयार है ना

सबने यस कहा और फिर सब पूनम के सामने एक गोल घेरे में आ कर खड़े हो गये

म्यूजिक शुरू हुआ बॉल एक दूसरे के हाथ से एक दूसरे के हाथ मे जाने लगा

जैसे ही गाना रुका सबने देखा कि बाल काम्या के हाथ मे था

काम्या फस गयी

क्या हुकुम है मेरे आका आदेश करे - लक्ष्य ने पूनम को देख कर पूछा

काम्या तुम एक गाना गाकर सुनाओ तुम बहुत अच्छा गाती हो - पूनम ने कहा

पागल हो गयी है क्या पूनम, मैं नही गा रही सबके सामने ,कुछ और डेयर दे यार - काम्या ने तुनक कर कहा

ये तो चीटिंग है - पूनम ने कहा

काम्या आज उसे आप मना नही कर सकती आप को गाना पड़ेगा

अरे हमे भी तो सुना दीजिये अपनी सुरीली आवाज , यहां सब अपने है यार मेरा नाम लो और शुरू हो जाओ- लक्ष्य ने मजाकिया लहजे से कहा

तुम्हारा नाम क्यो लू ,हुह बड़े आये काम्या ने मुह बिचका कर कहा

काम्या सिंग न यार इतना क्यो सरमा रही हो सब मेरे घर के ही तो है - पूनम ने काम्या से कहा

काम्या ने घूर कर पूनम को देखा मानो खा जाएगी लेकिन किसी को कोई फर्क नही पड़ा आखिर में मजबूरन काम्या को गाना पड़ा उसकी आवाज सच मे बहुत ही प्यारी थी

ना चैन से जीने देगी ना चैन से मरने देगी 2

चलो ले चलें तुम्हें तारों के शहर में

धरती पे ये दुनिया हमें प्यार ना करने देगी 2

जो तुम ना मेरी बाहों में मैं तो सो नहीं सकता

खुदा ने तुझको दिया मुझे तुझे मैं खो नहीं सकता

मैं मर जाउँगा अगर कभी कहना पड़ गया ये सनम

मैं तेरा ही हूँ मगर तेरा हो नहीं सकता

हमें मार ही ना डाले बुरी नज़र ये लोगों की

ये हाथ छुडायेंगे ना हाथ पकड़ने देगी

हाँ चलो ले चलें तुम्हें तारों के शहर में

धरती पे ये दुनिया हमें प्यार ना करने देगी

जैसे ही उसने अपना गाना खत्म किया सबने खूब ताली बजाई

हाय हाय मेरी नेहा कक्कड़ क्या गाना गाया है मजा आ गया - लक्ष्य ने चिल्लाकर कहा

सब हँसने लगे और काम्या ने गुस्से से लक्ष्य को घूरा

म्यूजिक प्लीज पूनम ने कहा

अगला नंबर शशांक का लगा

उसको पूनम ने डेयर दिया लक्ष्य को बैठा कर पांच पुशअप्स लगाने को

फिर रजनी का नंबर आया

रजनी से एक सीन पर एक्टिंग करवाई गई

ऐसे ही पूनम की सहेलियों का फिर अगला नंबर लक्ष्य का था ।

जी बोलिये रजिया सुल्तान इस कनीज के लिए क्या आदेश है - लक्ष्य ने झुक कर हाथ हिलाते हुए कहा

पूनम ये पोल डांस और बेली डांस बहुत अच्छा करता है - शशांक ने चिल्ला कर कहा

क्या ? शशांक की बात सुनकर लक्ष्य उछल पड़ा

अबे साले क्यो इज्जत का फालूदा कर रहा है यार तू दोस्त है कि दुश्मन ,नही पूनम सच मे मुझे नही आती ये झूठ बोल रहा है- लक्ष्य ने घबरा कर कहा

शशांक भैया झूठ नही बोलते अब तो तुम पोल डांस और बेली डांस ही करो - पूनम ने हसते हुए कहा

पूनम की बात सुनकर सब खिलखिला कर हंस पड़े

साले बॉडी बिल्डर तुझे तो मैं बताता हूँ इसका बदला तो तुझे चुकाना पड़ेगा लक्ष्य ने उंगली दिखा कर शशांक को धमकी दी

अब ज्यादा बाते मत करो शुरू हो जाओ हम कब से वेट कर रहे है- काम्या ने कहा

हा फ्री फंड में मुजरा जो देखने को मिल रहा है -लक्ष्य ने तुनक कर कहा

और फिर स्टेज पर आकर उसने पोल डांस और बेली डांस शुर कर दिया , डांस भी ठीक ठाक ही था लेकिन सब उसकी हरकते और डांस देख कर खूब हंस रहे थे और चीयर कर रहे थे,

लक्ष्य को देख कर सबके ओठो पर मुस्कुराहट थी और हो भी क्यो न लक्ष्य की हरकतें और डांस इतना फनी था कि सब खिलखिला कर हंस रहे थे ।

थोड़ी देर बाद उसका डांस खत्म हुआ

पूनम तुम्हारी वजह से कमर में दर्द होने लग गया अगर इतना

कही कमर लचकाया होता तो सौ दो सौ की कमाई हो जाती - लक्ष्य ने कहा

अब दो लोग बचे है लावण्या और सार्थक

गेम फिर से शुरू हुआ जैसे ही म्यूजिक रुका लावण्या फस गयी

उसने जल्दी से बाल फेक दिया और सार्थक ने लपक लिया

लावण्या भाभी आप फसी है आपने म्यूजिक बंद होने के बाद फेका- पूनम जोर से चिल्लाई

लावण्या ने कातर नजरो से सार्थक और पूनम को देखा

सार्थक ने कंधे उठा दिए मानो कह रहा हो -सॉरी

बोलो पूनम लावण्या से क्या करवाना है आपको - लक्ष्य ने पूछा

पूनम सोच में पड़ गयी और सोचने लगी ।

पूनम प्लीज कुछ ऐसा वैसा नही लावण्या ने बेचारगी से कहा

अब भैया और आप हो तो सबका हो गया तो आप दोनों एक रोमांटिक गाने पर एक रोमांटिक सा डांस करो -पूनम ने दोनों को आदेश दिया

पूनम प्लीज मुझसे सबसे सामने डांस नही होगा वो भी सार्थक के साथ लावण्या को सबके सामने डांस करने में झिझक महसूस हो रही थी

सॉरी भाभी कोई बहाना नही चलेगा आप को मेरी बात माननी पड़ेगी आज मेरा बर्थडे है तो आप मुझे मना नही कर सकती है ।पूनम ने गर्दन अकड़ा कर कहा

लावण्या ने सार्थक की तरफ लाचार नजरो से देखा

सार्थक ने पलके झपका कर उसे अस्वासन दिया और फिर पूनम से बोला

पूनम मैं क्या कह रहा लावण्या से और कुछ करवा लो मैं तो जीत गया हूँ न तो मैं क्यो डांस करु

आप शांत बैठो भैया बर्थडे किसका है मेरा की आपका पूनम ने हाथ नचाकर कहा

तेरा ही है लेकिन मुझे क्यो ... तुझे तो पता है ना मुझे डांस नही आता - सार्थक बोला

अबे इतना भाव क्यो खा रहा है तुझे नही करनी तो मैं कर लेता हूँ आओ लावण्या इसको छोड़ो मेरे साथ करो इसके ज्यादा नखरे है एक तो इतनी खूबसूरत और प्यारी सी पार्टनर मिली है डांस के लिए ऊपर से लोगो के इतने नखरे है - लक्ष्य ने सार्थक को सुना दिया और उठ कर लावण्या के पास पहुचा

सार्थक ने लावण्या की तरफ देखा मानो आंखों ही आंखों में कह रहा हो सॉरी लावण्या मैं कोई हेल्प नही कर सकता

भैया भाभी उठो न प्लीज - पूनम ने रिक्वेस्ट किया

लावण्या उठी और साथ मे सार्थक भी उठा और दोनों फ्लोर पर पहुचे

तो भाइयो और उनकी बहनो अब इस शाम की सबसे खूबसूरत सी जोड़ी आप लोगो के सामने एक रोमांटिक गाने पर एक प्यारा और सेक्सी से डांस करने जा रही है तो दिल

थाम के बैठ जाइए पेस है इस पार्टी की शान हमारी स्पेसल मेहमान मिस लावण्या और उनके पार्टनर है आज की बर्थडे गर्ल के प्यारे भाई मिस्टर शर्मीले,संस्कारी ,सार्थक... तालिया

सभी लोगो ने तालिया बजाई सब बहुत एक्साइटेड थे दोनो का डांस देखने के लिये।

हाल के उस कोने की लाइट अचानक से बुझ गयी और फ्लोर की रंग बिरंगी लाइट जल गई और इसके अलावा लेजर लाइट सीधे फ्लोर पर इधर उधर घूमने लगी जो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी

अचानक डी जे की बहुत ही प्यारी सी आवाज गूंजी जिसमे एक बहुत ही खूबसूरत सा डुएट सांग बजा

सांस लेने से भी ज्यादा

तुम ज़रूरी हो गए

जी रहे थे हम अधूरे

तुम से पूरे हो गए

सांस लेने से भी ज्यादा

तुम ज़रूरी हो गए

जी रहे थे हम अधूरे

तुम से पूरे हो गए

मेरी धड़कन

तेरी धड़कन

दोनों दिलों की

एक है तड़पन

आँखें ये मेरी

जो बोलती हैं

धड़कन ये तेरी

वो तोलती है

जीने के सवालों में

यूँ प्यार का रंग भर ला

के लफ़्ज़ों से फिर कुछ भी

मुश्किल हो बयां करना

मेरी धड़कन

तेरी धड़कन

दोनों दिलों की

एक है तड़पन

जैसे ही गाना शुरू हुआ सार्थक ने अपना हाथ लावण्या के कमर में डाल कर अपने तरफ उसे खींच लिया लावण्या सीधे आकर सार्थक के सीने से चिपक गयी

सार्थक ने अपने दूसरे हाथ से लावण्या के हाथ को पकड़ लिया और लावण्या ने भी अपना दूसरा हाथ सार्थक के कंधे पर रख दिया

दोनो के बदन एक दूसरे से चिपके हुए थे और दोनों एक दूसरे को महसूस कर रहे थे

सार्थक और लावण्या एक दूसरे को इतने करीब महसूस करके ही रोमाच से भर गए थे दोनो की सांसो की रफ्तार बढ़ गयी थी और बदन पत्ते की तरह कॉप रहा था

लावण्या ने नजर उठा कर सार्थक के चेहरे को देखा

उसकी नजरो में एक अजब सा नशा और एक अजब सी खुमारी भरी थी जो सीधा सार्थक के दिल मे उतरती हुई सी लगी इस तरह दोनो की नजर एक दूसरे से मिलते ही मानो बिजली सी गिरी हो और लावण्या सरम के मारे छुई मुई सी सार्थक की आगोश में छुप गयी

लावण्या का चेहरा सार्थक के चेहरे के इतना पास था कि सार्थक को उसकी सांसे महसूस हो रही थी और दोनों को एक दूसरे के दिल की धड़कने साफ सुनाई दे रही थी जो इस समय काफी बढ़ी हुई थी

सार्थक का हाल लावण्या से भी ज्यादा खराब था लावण्या को ऐसे इतने पास पाकर ही उसके दिल की धड़कन राजधानी एक्सप्रेस की तरह दौड़ रही थी लावण्या के के बदन की छुवन और मदमस्त खुसबू सार्थक के भावनाओ को भड़काने के लिए काफी थी वह रोमांच की अधिकता से मदहोश था

बड़ी मुश्किल से उसने खुद के भावनाओ को शांत किया और फिर गाने की धुन के साथ अपने कदम को मिलाना शुरू कर दिया

लावण्या ने भी धीरे धीरे सार्थक का साथ देने लगी और दोनों

डांस करने लगे

गाने के बोल ऐसे थे कि मानो दोनो के दिल की बाते हो रही थी और दोनो इस गाने के साथ प्यार के सागर में डूबने लगे लावण्या की साँस सार्थक के सांस के साथ घुलने लगी और दोनों एक दूसरे में खोने लगे

दोनो बहुत ही खूबसूरत डांस कर रहे थे मानो ये शाम ये गाना और ये माहौल उन्ही के लिए ही बना हो

डांस करते करते कब वो दोनों उस गाने में रच बस गए न तो ये लावण्या को पता चला और न ही ये सार्थक को महसूस हुआ वो तो जैसे सबकुछ भूल कर बस अपने जिंदगी के इस हसीन लम्हे को जी भर कर जीने लगे

एक तो अंधेरा जिसमे सिर्फ लेजर लाइट की रोशनी झिलमिला रही थी और उसपर अपने उस हमसफर का साथ जिसके लिए दिल न जाने कितनी बार धड़का हो और तड़फा हो और फिर इतना प्यारा और रोमांटिक गाना दोनो के जज्बात बेकाबू हो गए थे

लावण्या ने मानो खुद को पूरी तरह से सार्थक को सौप दिया और रोमांच से अपनी आंखें बंद कर ली । उसका बदन रह रह कर कॉप जाता था मानो वह खुद भी चाहती हो कि सार्थक उसे ऐसे ही जिंदगी भर प्यार करे और वह उसके बाहो में ही हमेसा हमेसा के लिए खो जाए

यह उसकी जिंदगी का एक हसीन लम्हा था जिसे वह आंखे बंद करके जीने लगी और सार्थक का भरपूर साथ देने लगी

दोनो एक दूसरे में इस कदर खो गए कि कब गाना खत्म हो गया उन्हें पता भी नही चला और जैसे म्यूजिक बंद हुआ सारी लाइट जल गई

लावण्या ने अपनी आंखें खोल ली

सार्थक ने उसे पूरी तरह से अपने बाहो में भर रखा था और उसके ओठ लावण्या के गले को छू रहे थे

लावण्या का पूरा बदन रोमांच से कांप रहा था दोनो के दिलो में प्यार और रोमांस का अथाह सागर हिलोरे मार रहा था

अचानक से ऐसे म्यूजिक बंद होना उसे बहुत अखरा

उसने खुद की उखड़ती साँसों को सम्हाला और फिर सार्थक के बाहो से आजाद होने की कोशिश की

सार्थक ने भी खुद को बमुश्किल सम्हाला और स्थिति का एहसास होते ही उसने लावण्या को आजाद कर दिया

सबने बहुत ही गर्मजोशी के साथ ताली बजाई उन दोनों का इतना सुंदर और प्यार से भरपूर डांस देख कर सबके ओठो पर एक मुस्कुराहट थी

सार्थक और लावण्या दोनो की नजर सरम से झुकी हुई थी मानो उन्होंने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो लावण्या जल्दी से भाग कर स्टेज से नीचे आगयी और पूनम के पास आकर बैठ गयी अब भी उसके सांसे बहुत ही तेजी से चल रही थी

क्या बात है भाभी आप तो भैया में खो सी गयी थी बहुत ही खूबसूरत डांस किया आपने सच मे दिल खुश हो गया पूनम

ने चहकते हुए कहा

लावण्या ने हल्के से मुस्कुरा कर थैंक्स कहा वह सरमा रही थी

लक्ष्य स्टेज पर पहुचा और फिर उसने दोनो के डांस की खूब तारीफ की इसके बाद सबने खाना खाया और फिर पार्टी खत्म होने के बाद अपने अपने घर आगये

पूनम और लावण्या एक साथ एक ही बिस्तर पर सोये रात भर पूनम लावण्या से बाते करती रही, सार्थक की खुद की और लावण्या से उसके बारे में ढेर सारी बाते

उसने किसी छोटे से बच्चे की तरह लावण्या को कोहली भर रखा था यह आज का दिन और रात मानो उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन और रात हो

देर रात वह लावण्या के आगोश में ही सिमट कर सो गई ।

सुबह हुआ लावण्या सबसे पहले उठी और बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आयी फिर उसने पूनम को जगाने की कोशिश की

पूनम देर रात को सोई थी इसीलिए उसकी आंख नही खुल रही थी उसने थोड़ी देर और सोने की गुजारिश की

लावण्या ने उसे अच्छे से चादर ओढा दिया और फिर रजनी को जगाने चली गयी

रजनी जाग कर उठ कर वाशरूम गयी और फिर वह सार्थक के पास आ गयी

सार्थक आराम से सो रहा था

लावण्या ने सोते हुए सार्थक को दो पल खड़े होकर निहारा और फिर धीरे से उसके पास जाकर हल्के हल्के दो बार उसे पुकारा लेकिन सार्थक टस से मस नही हुआ ।

लावण्या ने अपने हाथो से हल्के से सार्थक को हिलाया

सार्थक न जाने किस ख्वाब में था उसने लावण्या का हाथ पकड़ लिया और नीद में बड़बड़ाया

थोड़ा सा और डांस करने दो प्लीज म्यूजिक चला दो बंद मत करो

लावण्या के ओठो पर मुस्कुराहट आगयी और अचानक से कल रात का डांस याद आगया उसके बदन में एक हल्की सी सिरहन दौड़ गयी

सार्थक उठ जाओ सुबह हो गयी है लावण्या ने फिर से सार्थक को हिला कर जगाया

अचानक से सार्थक ने नीद में ही लावण्या का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया

लावण्या इस हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नही थी और ना ही उसे सार्थक से ऐसी कोई उम्मीद थी वह सीधा सार्थक के ऊपर गिर पड़ी और अनायास ही उसका पूरा बदन सार्थक के ऊपर आ गया और ओठ सार्थक के गालो को अनजाने में छू गए

लावण्या के इस तरह अचानक से गिरने पर सार्थक हड़बड़ा गया और फटाक से उसकी आंखें खुल गयी

अपने ऊपर लावण्या को इस तरह पाकर वह आस्चर्य और खुशी से हल्का सा चीख पड़ा

लावण्या आप? - सार्थक ने कहा

लावण्या ने जल्दी से उठने की कोशिश की

वो मैं आपको जगाने आयी थी अचानक से आपने हमे खींच लिया और हम खुद को सम्हाल नही पाए हम आपके ऊपर गिर पड़े - लावण्या ने सकपका कर कहा

सार्थक के ओठो पर एक मुस्कुराहट फैल गयी उसने अपना दोनो हाथ निकाल लिया और लावण्या को अपनी बाहों में केस लिया उसके ओठो पर एक सरारती मुस्कुराहट थी

अपने पूरी लाइफ में आज से अच्छा सुबह मेरा नही हुआ था शायद भगवान आज मुझपर कुछ ज्यादा मेहरबान है इसी लिए उसने सुबह सुबह आपको मेरे पास भेज दिया

लावण्या कसमसाई सरम के मारे उसे कुछ भी समझ मे नही आरहा था

प्लीज छोड़ दीजिए न कोई आ जायेगा तो क्या सोचेगा लावण्या ने सकुचा कर कहा

ऐसे कैसे छोड़ दु अभी आपका ही सपना देख रहा था और आंख खुली तो आप मेरी बाहो में है अब तो बिल्कुल नही छोडूंगा सार्थक ने कहा उसके ओठो पर एक मुस्कुराहट और दिल मे हलचल थी

कास हर सुबह ऐसी ही होती आप मेरे बाहो में आकर मुझे जगाती सार्थक का दिल बेईमान हो रहा था

सार्थक प्लीज जाने दीजिए न रजनी दीदी बाथरूम गयी है अभी आ जायेगी - लावण्या ने सार्थक से रिक्वेट किया

बिल्कुल नही सार्थक ने लावण्या को और अच्छे से अपने बाहो में लपेट लिया और अपमे सीने से चिपका लिया

लावण्या सार्थक के ऊपर लेट सी गयी और अब कसमसाने की भी गुंजाइस नही बची थी

मान जाइये ना प्लीज सार्थक कोई आगया तो क्या सोचेगा लावण्या ने कहा इस तरह सार्थक के ऊपर लेटने में उसे सरम और डर दोनो लग रहा था

कुछ नही सोचेगा यही सोचेगा की होने वाले पति पत्नी प्यार कर रहे है - सार्थक ने सरारत से कहा

हा तो अभी तो हमारी शादी नही हुई है ना अभी प्यार करना ठीक नही है शादी हो जाएगी तो जितना दिल करे आप प्यार कर लीजियेगा हम आपको बिल्कुल नही मना करेगे लेकिन प्लीज अभी छोड़ दीजिए जाने दीजिए -लावण्या ने मुस्कुराते हुए कहा

ऐसे कैसे जाने दे अब आप खुद ही गिरी है तो आप को उसका भुगतान तो करना पड़ेगा न सार्थक ने रोमांटिक होकर कहा

कैसा भुगतान लावण्या को सब समझ मे आरहा था लेकिन फिर भी उसने पूछा

गुड मॉर्निंग किस दो फिर मैं आपको छोडूंगा सार्थक ने मुस्कुरा कर कहा

क्या ? नही अभी नही- लावण्या ने साफ मना कर दिया

किस की बात सुनकर उसके गोरे गोरे गाल गुलाबी हो गए थे और आंखों में लाल डोरे तैर गए

तो फिर ठीक है मैं नही छोड़ रहा ऐसे ही रहो आप सार्थक ने लावण्या को और अच्छे से जकड़ लिया

प्लीज सार्थक छोड़ दो प्लीज कोई आ जायेगा तो बड़ी बदनामी हो जाएगी लावण्या को बहुत डर लग रहा था

एक बार बोल दिया नही तो मतलब नही , अगर आपको जाना है तो सबसे पहले किस, फिर जाओ नही तो मैं बिल्कुल नही छोड़ रहा सार्थक ने प्यार से जिद किया

लावण्या कसमसा कर रह गयी लेकिन सार्थक की पकड़ इतनी मजबूत थी कि लावण्या कुछ नही कर पाई

तभी बाथरूम का दरवाजा खुलने की हल्की आवाज आई

सार्थक प्लीज दीदी आ रही है छोड़ दो लावण्या ने घबरा कर कहा

न बिल्कुल नही पहले जो कहा सो करो सार्थक जैसे जिद पर अड़ा हो

लावण्या को कुछ भी समझ मे नही आरहा था उसने जल्दी से सार्थक के गालो को पकड़ा और जल्दी से उसके ओठो पर

एक किस कर दिया

सार्थक के ओठो पर एक मुस्कुराहट आगयी और उसने अपना बंधन ढीला कर दिया

लावण्या जल्दी से उठ गई और अपने कपड़ों को सही करने लगी

उसने सार्थक के चेहरे पर देखा उसपर एक बहुत ही प्यारी मुस्कुराहट थी

लावण्या की नजर सरम से झुक गयी थी और ओठो पर एक मुस्कुराहट थी

आप बड़े दुष्ट हो मैं तो आपको बहुत सीधा साधा समझती थी लेकिन आप बहुत बड़े चीटर हो - लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा

मैंने क्या किया ? - सार्थक ने मुस्कुरा कर पूछा

मौके का फायदा उठाया है आपने , वो तो दीदी आ रही थी इसीलिए वरना मैं कभी भी आपकी जिद पूरी नही करती- लावण्या ने कहा ।

अच्छा जी , वैसे थैंक्यू मुझे जगाने के लिए ,कास ऐसी सुबह हर एक दिन होती सच मे लावण्या तुमने मेरे घर आकर जो खुशी मुझे दी है इसके बदले में मैं कुछ भी कर सकता हूँ थैंक्स मेरी छुटकी का जिसने मुझे जबरदस्ती लड़ झगड़ कर तुम्हे लेने भेज दिया वरना मुझे पता ही नही चलता कि मेरी लावण्या इतनी प्यारी और रोमांटिक भी है - सार्थक ने दिल से तारीफ की

तो आपसे ज्यादा समझदार तो है ही पूनम इसमे क्या कहना है वो सच मे बहुत मासूम और बहुत प्यारी है उससे मिलकर ऐसा लगा ही नही की मैं उससे पहली बार मिल रही हूँ जिस प्यार और अपने पन से वो मुझसे मिली है शायद ही किसी ने इतना सम्मान और इतना प्यार किसी ने मुझे दिया हो - लावण्या बोली

बस अब जल्दी से तुम हमेसा हमेसा के लिए मेरे घर मे आजाओ अब शायद ही मैं तुम्हारे बिना ज्यादा दिन तक रह पाऊंगा इसीलिए जैसे भी हो जल्दी से जल्दी मेरे घर की रौनक बन जाओ लावण्या- सार्थक की आंखों में लावण्या के लिए बेसुमार प्यार था

मैं तुमसे बहुत बहुत बहुत प्यार करता हूँ लावण्या सार्थक ने आज पहली बार अपने प्यार का इजहार कर दिया

मेरा बस चलता तो मैं वापस ही ना जाऊँ सार्थक, लेकिन जाना पड़ेगा सब कुछ तुम्हारे ऊपर है जितनी जल्दी तुम चाहोगे उतनी जल्दी मैं तुम्हारे पास आ जाउंगी ज्यादा दिन मत लगाना अब मैं भी बिना तुम्हारे ज्यादा दिन तक नही रह पाउंगी जल्दी से बारात लेकर आ जाना और अपनी इस लावण्या को हमेसा हमेसा के लिए अपनी बना लेना क्योकि मैं भी तुमसे बहुत बहुत बहुत प्यार करती हूँ और मन ही मन अपने आप को तुम्हे सौप चुकी हूँ अब मैं तुम्हारी हूँ सार्थक सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी - लावण्या ने सार्थक की आंखों में झांक कर प्यार से कहा

लावण्या कहाँ हो? अचानक से रजनी की आवाज आयी

जी दीदी आयी लावण्या ने हल्के से कहा और फिर एक मुस्कुराहट सार्थक की तरफ उछाला और कमरे से बाहर निकल गयी ।

क्रमशः
 
तेरे मासूम से उलझे हुई सोख बालो की वो लट

जिसे हटाने के बहाने से तेरे गालो को छुवा करते है।

तड़फ कर जब भी मेरे आगोश में आजाती हो तुम

जन्नत को इसी धरती पर ही महसूस किया करते है ।

तुम्हारी आँखो की मासूम गलियो में अक्सर उलझ जाता हूँ भटक जाया करती है अक्सर नजर मेरी ।

तेरे ओठो पर पानी की कुछ बूदे डाल कर

हम इस दुनिया की सबसे महंगी शराब पिया करते है ।

लावण्या के जाने के बाद सार्थक उठा और फिर फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस गया

लावण्या ने फटा फट नास्ता बनाया और फिर वापस से जाकर के पूनम को जगाया

गुड मॉर्निंग भाभी , पूनम ने उठकर अंगड़ाई ली और अलसाई सी बोली

गुड मॉर्निंग छुटकी - लावण्या मुस्कुरा कर बोली

तुम्हारे भैया नहाने गए है ,उनके कपडे और तौलिया दे दो ,कहाँ है मुझे नही पता - लावण्या ने कहा

पूनम उठी और उसने कपड़े निकाल कर दे दिया और फिर किचन में आ गयी उसने देखा कि लावण्या ने नास्ता तैयार कर दिया था

अरे आप ने अकेले नास्ता बना लिया मुझे जगाया क्यो नही, सॉरी भाभी कल रात आप से बाते करते हुए देर तक जाग

गयी इसीलिए सुबह आंख खुली माफ कर दीजियेगा- पूनम ने झेंपते हुए कहा

कोई बात नही पूनम इसी लिए तो मैंने भी नही जगाया वैसे भी आप देर से सोई थी तो आप ने कहा थोड़ी देर और सोने दीजिये और मैं अकेले बोर हो रही थी तो मैंने सोचा नास्ता ही बना देती हूँ- लावण्या ने मुस्कुराते हुए कहा

जाओ आप भी जाकर फ्रेस हो जाओ और अपने भैया को भी बोल दो गरमा गरम ब्रेकफास्ट रेडी है

रियली भाभी यु आर सुपर्ब एंड सो सो स्वीट मेरे भैया ने जिंदगी में सबसे अच्छा काम किया है जो उन्होंने आपको चुना, आप कमाल की है और बहुत ही प्यारी है पूनम खुसी से खिल गयी

अरे बस बस इतना मस्का मारने की जरूरत नही है जाइये जल्दी से रेडी होकर आइये क्योकि अभी हमे निकलना भी है - लावण्या ने पूनम के गाल थपक कर कहा

तभी दरवाजे पर खटका हुआ

पूनम दौड़ कर गयी और दरवाजा खोला ,दरवाजे पर सार्थक और पूनम के पापा अवधेश जी खड़े थे

पापा आप आ गये -पूनम ने कहा

हा बेटे आ गया कहा है सार्थक दिखाई नही पड रहा है अवधेश जी ने इधर उधर देखते हुए पूछा

भैया नहा रहे है पापा आप बैठिये नास्ता कर लीजिए लावण्या भाभी ने अपने हाथों से बनाया है - पूनम ने चहक

कर कहा

सार्थक के पापा वही सोफे पर बैठ गए

थोड़ी देर बाद लावण्या हाथ मे नास्ता लेकर आई और उसने बहुत ही सम्मान के साथ अवधेश जी का अभिवादन किया

अवधेश जी ने दिल से आशिर्बाद दिया

आओ बेटे आपसे तो दो पल हमने ठीक से बात भी नही किया बैठो अवधेश जी लावण्या को सामने सोफे पर बैठने का आदेश दिया

लावण्या ने सकुचाते हुए रजनी की तरफ देखा

रजनी ने आंखों ही आंखों में बैठने का इशारा किया

लावण्या चुपचाप सिमटी सी बैठ गयी

आप के पापा क्या करते है बेटे और घर मे कौन कौन है - अवधेश जी पूछा

लावण्या ने जो कुछ भी था ,सब सच सच बता दिया रजनी के मैटर में हल्का सा झूठ बोला कि इनकी शादी हो गयी थी लेकिन मेरे जीजा जी मारते पीटते थे इसी लिए पापा दीदी को लिवा लाये और अब ये हमारे पास ही रहती है ।क्योकि उसे सच बोलने में सरम आ रही थी ।

बेटे आप सार्थक को कैसे जानती है

दरअसल एक दिन जीजा जी ने मेरी दीदी रजनी को बहुत पीटा तो उन्होंने घर छोड़ दिया और सरम के मारे अपने घर मे नही आई तो मैं उन्ही को ढूढते हुए गोवा गई थी क्योंकि दीदी वही थी और वही पर ये अपने दोस्तों के साथ घूमने गए हुए

थे जिन्होंने मेरी और मेरी बहन की बहुत मदद की और इन्ही की वजह से मेरी दीदी को सही सलामत हम लोग वापस ला पाए वही से इन्हें जानते हम- लावण्या ने बहुत सधे हुए और शान्ति से उत्तर दिया

अवधेश जी ने थोड़ी देर में ही पढ़ाई लिखाई और घर परिवार पता ठिकाना सब कुछ पूछ लिया ।

सच बताऊ बेटे मैं जैसी बहू लाना चाहता था आप बिलकुल वैसी है, सबसे बड़ी बात आप बहुत समझदार सुशील और गुनी है और मेरे लल्लू लाल के लिए बिल्कुल परफेक्ट है इसके अलावा मेरी बेटी पूनम भी आपकी बहुत तारीफ कर रही थी जब सब आपकी इतनी तारीफ कर रहे है तो फिर आप मे जरूर कोई न कोई ख़ूबी होगी मुझे आप का ब्यवहार और आपका मिलनसार स्वभाव बहुत पसंद आया तो आप करेगी न मेरे बेटे से शादी आप को कोई दिक्कत तो नही है । अवधेश जी ने पूछा

लावण्या को कुछ भी नही सूझ रहा था वह मन ही मन बहुत खुश थी लेकिन उसने जबाब नही दिया और उसने सरम से नजर झुका ली

जी अंकल हमारे पूरे घर को सार्थक पसंद है और तो और मेरे मम्मी पापा को भी पसंद है हमारी तरफ से बिल्कुल हाँ है - रजनी ने लावण्या की तरफ से हामी भर दी

तो फिर ठीक है आप जाकर अपने पापा से कह दीजियेगा की लावण्या अब हमारी बेटी है हमारी धरोहर

और जब भी आपके घरवालो का मन करे वो आ करके मुझसे मिल ले और शादी ब्याह की सारी बाते बैठ कर हो जाएगी , जब दोनो बच्चे एक दूसरे को पसंद करते है और उनकी पसंद में कोई कमी भी नही है तो हमे किस बात की दिक्कत है ,जब मेरे दोनो बच्चों को पसंद है लावण्या, तो हमे और क्या चाहिए जितनी जल्दी से जल्दी हो मैं दोनो की शादी करना चाहता हूँ - अवधेश जी ने कहा

थैंक्यू अंकल थैंक्यू सो मच, सच मे पापा सुनेगे तो बहुत खुश होंगे अवधेश जी की हां सुनकर रजनी खुशी से खिलखिलाती हुई बोली

पापा नास्ता कर लीजिए ठंडा हो रहा है - लावण्या ने धीरे से कहा

अवधेश जी नास्ता करने लगे

वाह आप को तो खाना बनाना भी बहुत अच्छा आता है मेरे बेटे की किस्मत बहुत अच्छी है जो आप जैसी लड़की मिली है भगवान तुम्हे हमेसा खुश रखे

अरे हा मैं तो भूल ही गया था ऐसा कहकर अचानक से नास्ता करते करते अवधेश जी रुक गए और अपना पर्स निकालने लगे

लावण्या और रजनी आश्चर्य से अवधेश जी को देखने लगे उनकी समझ मे कुछ नही आया

अवधेश जी ने अपने जेब से 1100 निकाले और लावण्या

की तरफ बढ़ाया

ये लो बेटे रख लो

लावण्या को कुछ भी समझ मे नही आया उसने अपनी गर्दन घुमा कर रजनी की तरफ देखा मानो पूछ रही हो ये क्या है

रजनी को भी पल्ले नही पड़ा कि ये पैसे किस लिए

दोनो को इस तरह आवाक और कन्फ्यूज देख कर अवधेश जी ने खुद ही बताया

अरे ले लो सगुन है बेटे , आज पहली बार तुम्हारे हाथ का कुछ बना हुआ खा रहा हूँ तो ऐसे खाली कैसे सगुन तो बनता है ना तुम्हारा , बहू के हाथ का अगर पहली बार खाओ तो सगुन देना होता है - अवधेश जी मुस्कुराते हुए बोले

अरे पापा इसकी कोई जरूरत नही है लावण्या को पूरी बात समझ मे आयी तो उसने जल्दी से कहा

बिल्कुल जरूरत है ये मेरा आशिर्बाद है इसे रख लो सगुन को मना नही करते है - अवधेश जी ने कहा

लावण्या ने वापस से रजनी की तरफ देखा और रजनी ने इशारो से ले लेने की परमीसन दे दी

लावण्या ने सकुचाते हुए पैसे ले लिए और लपक कर अवधेश जी के पैर छू लिए

अवधेश जी ने दिल खोल कर आशिर्बाद दिया

लावण्या का दिल भर आया था उसे बहुत अच्छा फील हो रहा था सच मे उसे यहा आकर बहुत बहुत प्यार मिला जिसकी उसने कल्पना भी नही की थी ।

अपने पापा से कहना जल्दी से जल्दी आकर मुझसे मिले, तुम्हारे आने के बाद पहली बार मुझे एहसास हुआ कि मेरा घर पहले कितना सूना सूना सा लग रहा था अब तो जल्द से जल्द हर रोज तुम्हारे हाथ का बना ही नास्ता करना है बेटे अवधेस जी मुस्कुराते हुए बोले

जी पापा मैं बोल दूंगी लावण्या ने हल्के से कहा

अरे सार्थक खाली हाथ बहू को मत भेजना पहली बार आयी है तो इसके मनपसन्द का जो भी हो ले देना ठीक है । अवधेश जी ने चिल्ला कर सार्थक को आवाज लगाई जो दूसरे कमरे में शायद तैयार हो रहा था

जी पापा- सार्थक ने भी वही से कहा

अच्छा सुनो मुझे तुमसे कुछ बात करना है बेटे जरा यहां आओ अवधेश जी ने बोला

ले जाओ लावण्या हो गया बेटा मेरा अवधेश जी ने नास्ते के

बर्तन को हटाते हुए कहा

लावण्या सबकुछ समेत कर किचन में आ गयी

सार्थक आकर पापा के पास बैठ गया

जी पापा क्या बात है बोलिये सार्थक अवधेह जी के सामने बैठते हुए बोला

बेटा इंद्रेश से मेरी बात हुई उसके दिल मे कोई मैल नही है वो तो कुसुम बहू के ही जिद की वजह से उसे तुम दोनों को इस घर मे शिफ्ट करना पड़ा वो कह रहा था भैया आप जब चाहो अपना हिस्सा ले ले मुझे कोई आपत्ति नही है , लेकिन अगर मैं उन दोनों को वापस बुलाता हूँ तो फिर से कुसुम अपना रूप दिखाएगी और बिना मतलब के जब वो आपके बच्चों पर गुस्सा होती है तो मैं भले ही उनके तरफ से कुछ बोल नही पाता लेकिन बहुत तकलीफ होती है , अब तुम्ही बताओ क्या करु वो सच मे तुम दोनों को बहुत प्यार करता है बस बहू की आदतों से मजबूर है अब जैसा सोचो वैसे कर लो अवधेश जी के आंखों में अपने भाई के लिए चिंता और दुख दोनो का मिला हुआ भाव था

मुझे कुछ नही करना पापा , वो तो उस दिन चाची अनायास ही पूनम पर गुस्सा होने लगी तभी मैने उन्हें बोला वरना आज तक उनके सामने मेरी जुबान नही खुली आप को जैसे ठीक लगे आप कर लो मुझे न तो चाचा जी से कोई शिकायत है और न ही चाची जी से आप जो भी निर्णय लोगे सोच समझ

कर लोगे - सार्थक ने कहा

बेटे भगवान की दया से मेरी इतनी कमाई है कि तुम दोनों के खाने पीने रहने के लिए कोई तकलीफ़ नही होने दूंगा रही बात घर की तो माना यह घर पुराना है उससे छोटा है लेकिन थोड़ा सा बड़ा क्या थोड़ा सा छोटा क्या, वैसे भी तुम्हारी मम्मी के गुजर जाने की वजह से तुम्हारी शादी बिबाह की सारी रश्म रिवाज भी उन्ही दोनो को करनी है तो अभी बटवारे या अलग होने की बात करना भी बेवकूफी है वैसे भी उनके कोई औलाद नही है सब तुम्हारा ही है और तो और तुम्हे ही उनको देखना भी है ऐसे समझ लेना कि वो तुम्हारे दूसरे मम्मी पापा है अगर पूनम की मम्मी आज जिंदा होती तो वो भी कभी न कभी तुम पर और पूनम पर गुस्सा तो होती ना और माना कि कुसुम बहू थोड़ी ज्यादा बोलती है लेकिन बेटे शायद उसे माँ ने बन पाने का मलाल है इसी वजह से झल्लाने की उसकी आदत पड़ गयी है कुसुम की आदत है चिल्लाने की जाने दो उनको भी तुम्हे ही देखना है जैसी भी है अपना ही परिवार अपना ही खून है - अवधेश जी ने समझाया

जी पापा जैसा आप कहे मुझे कोई दिक्कत नही आप मुझसे बेटर जानते है कि कैसे करना है सब - सार्थक ने कहा

ठीक है सार्थक पूनम का ध्यान रखना और तुम्हारा एग्जाम कब है - अवधेश जी ने पूछा

पापा 3, 4 महीने में है एग्जाम

कैसी चल रही है पढ़ाई ? अवधेश जी ने पूछा

बहुत अच्छी है पापा अगले महीने कॉलेज में कई सारी कंपनिया आ रही है तो देखता हूँ कही कैम्पस सलेक्सन हो जाय मैने 2 तीन कंपनियों को सॉर्ट लिस्ट लिया है आगे बढ़ने का बहुत स्कोप है उनमें और पैकेज भी अच्छा देते है ।सार्थक ने बताया

ठीक है बेटे मुझे तो इस बारे में बहुत जानकारी है नही जैसा तुम्हे ठीक लगे और जैसा तुम चाहो वैसे कर लेना

अब मैं चलता हूँ सिर्फ एक दिन की छुट्टी लेकर आया था कल से फिर से ड्यूटी पर जाना है अवधेश जी ने कहा

आइये मैं आपको छोड़ आता हूँ पापा- सार्थक खड़ा होते हुए बोला

नही तुम रहने दो घर मे मेहमान आये है तुम उनकी देख भाल करो मैं अकेले चला जाऊंगा - अवधेश जी ने कहा और जाने के लिए निकल गए ।

पूनम लावण्या को लेकर मार्केट चलो पापा ने उसे कुछ दिलवाने को कहा है - सार्थक ने पूनम से कहा ।

इसकी कोई जरूरत नही है सार्थक - लावण्या ने मना किया

आप पहली बार हमारे घर आई है ऐसे कैसे खाली हाथ जाने देंगे भाभी- पूनम ने कहा

पूनम मैं सिर्फ तुम्हारे बुलाने पर आई थी अब तुमसे मिल लिया अब किसी चीज की कोई जरूरत नही है भाभी बोलती हो न तो भाभी की बात माननी भी चाहिए समझी मेरी भोली ननद , इसीलिए किसी को कही जाने की कोई जरूरत नही है और ना ही कुछ लाने की कोई जरूरत है ,और न ही मैं कही जा रही हूँ - लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा ।

भैया आप जाओ अपनी पसंद का कुछ ले आओ भाभी के लक्षण ठीक नही लग रहे वो तो जाने से रही पूनम ने हाथ खड़े कर दिए और सार्थक से कहा

तुम सही कह रही हो पूनम मैं यू गया और यू आया ।

सार्थक सुनो तो प्लीज लावण्या ने सार्थक को बुलाया लेकिन सार्थक कहा रुकने वाला था वह निकल चुका था ।

करीब आधा घंटा बाद सार्थक लौटा तो उसके हाथ मे दो बहुत ही खूबसूरत सी ड्रेस थी

ड्रेस वकाई में बहुत सुंदर था और कलर भी सार्थक चुन कर लाया था

लावण्या ले जाने से इनकार कर रही थी लेकिन पूनम ने जबरदस्ती उसके बैग में रख दिया

रजनी लावण्या और सार्थक निकलने के लिए तैयार थे

भाभी अब देर मत करना जितनी जल्दी हो सके हमारे घर मे हमेसा के लिए आजाओ आप नही जानती आप को पाकर

जैसे मुझे मेरी मम्मी वापस मिल गयी हो आप बिलकुल उनकी ही परछाई है ,आप ने मेरे कहने पर मेरे बर्थडे में आकर मुझे अपने लाइफ का सबसे खूबसूरत बर्थडे परसेंट दिया है और सच मे आप बहुत प्यारी है मुझे मेरे भैया के पसंद पर गर्व है क्योंकि उन्होंने मेरे लिए वर्ड की बेस्ट भाभी ढूंढ़ी है- पूनम ने लावण्या का हाथ पकड़ कर कहा लावण्या को जाता हुआ देख कर उसका मन भारी हो रहा था

आप बिलकुल भी चिंता मत करो पूनम मैं भी आप लोगो की इस प्यार और अपने पन को कभी नही भूल सकती अगर मैं ना आती तो मुझे कैसे पता चलता कि सार्थक की प्यारी सी छुटकी इतनी बाते भी बनाना जानती है और फिर जितना मान सम्मान आप लोगो ने मुझे दिया है उसके बदले मेरे पास कोई शब्द ही नही है एक बार भी ऐसा लगा ही नही की मैं किसी अजनबी के घर आई हूँ , जब भी दिल करे या जब भी तुम बोर होना मुझे फोन कर लेना - लावण्या ने कहा

जी जरूर पूनम ने कहा और दोनों ने बिदा लिया और फिर तीनो नगीना जाने के लिए घर से निकल गए ।

सार्थक दोनो को पहुचा कर देर रात वापस आगया था

उसका दिल बहुत बेचैन था मानो खुद की खुशियों को अपने ही हाथों से खुद से दूर कर दिया हो उसने उसका चेहरा बहुत

उदास था और वह मायूस हो गया था ।

पूनम ने खाने के लिए उसे बुलाया तो उसने भूख नही है का बहाना बना कर खाना खाने से मना कर दिया ।

ठीक है फिर मैं भी नही खा रही वैसे भी मुझे अकेले खाने की आदत नही है जब आप नही खाएंगे तो फिर मैं भी नही खाऊँगी - पूनम ने कहा उसे अपने भैया की उदासी का कारण अच्छे से पता था

छुटकी सच मे भूख नही है यार तू जा जाकर खा ले - सार्थक ने उदास होकर कहा

भैया लावण्या भाभी के बिना हमे भी कुछ अच्छा नही लग रहा है ,उनकी बहुत याद आरही है ये दो दिन कितने खूबसूरत और खुश गवार थे लेकिन उनको तो जाना ही था अगर आप चाहते है कि वो हमेसा के लिए आ जाय तो जल्द से जल्द उन्हें ब्याह कर ले आये फिर वो कही नही जाएंगी- पूनम ने सार्थक को समझाया

मेरा बस चले तो मैं आज ही उसे ले आऊँ छुटकी लेकिन क्या करूँ मजबूर हूँ- सार्थक ने अपने दिल की बात अपने बहन को बताई

आप घबराए मत मैं खुद कोशिस करूँगी की जल्द से जल्द लावण्या भाभी आपकी जिंदगी में आ जाये

लेकिन आप तब तक अपने आप को संहालिये और ऐसे उदास मत होइए ,मुझे अच्छा नही लगता जो कुछ है मेरे सब

आप ही है अब आप भी ऐसे खाना नही खाएगे तो मुझे कैसा लगेगा- पूनम ने मासूमियत से कहा उसने अपना सैड से फेस बना रखा था

सच मे छुटकी भूख नही है तू जा जाकर खा ले - सार्थक ने मुह बना कर कहा

नही मैं अकेले नही खा पाउंगी रहने दो आप लेट जाओ मैं भी जा रही हूँ सोने,पूनम ने कहा और फिर चली गयी

सार्थक बैठा रहा और लावण्या को याद करता रहा थोड़ी देर बाद उसको पूनम के भूख का एहसास हुआ उसके वजह से पूनम भी भूखी है वह अपने बिस्तर से उठा और किचन में जाकर अपने हाथ से खाना निकाल लाया और उसे लेकर पूनम के कमरे में पहुचा

छुटकी वो छुटकी सार्थक ने आवाज लगाई
 
पूनम सार्थक की आवाज सुनकर उठी और लाइट जला कर दरवाजा खोला

क्या हुआ भैया - पूनम ने झूठ मूठ का सोई होने का नाटक किया

कुछ नही आजा खाना लाया हूँ बिना खाये मत सो - सार्थक ने कहा

पूनम के चेहरे पर एक मुस्कुराहट आगयी क्योकि वह जानती थी अभी सार्थक उसे बुलाने जरूर आएगा वो उससे बहुत प्यार करता है और उसे भूखा बिल्कुल भी नही देख सकता है ।

दोनो भाई बहनो ने एक ही थाली में खाना खाया

सच मे भैया बहुत तेज भूख लगी थी पूनम जल्दी जल्दी खाते हुए बोली

एक नंबर की पागल है तू, जब तूझे भूख लगी थी तो खा लेना चाहिए था खामखा नखरे क्यो दिखा रही थी बेवकूप कही की सार्थक ने एक हल्की सी चपत लगाई

अगर मैं खा लेती तो फिर आप नही खाते इसी वजह से - पूनम ने मुस्कुरा कर कहा ।

हा होशियार तो एक नंबर की है ही तू , सार्थक पूनम का अपने लिए इस तरह परेसान और केअर करते हुए देख कर बहुत ही फक्र महसूस कर रहा था ।

खाना खा लेने के बाद दोनों वापस से अपने अपने बिस्तर पर आकर सो लेट गए ।

क्रमशः

तू मेरी जिंदगी है ,तो तू मेरी जिंदगी का जूनून है

तू पहला इश्क है मेरी , तो तू मेरी अपनी खून है

तुम दोनों ही मेरी दुनिया हो,मुझे प्यार है तुम दोनो से

तू मेरी लाडली गुड़िया है ,तो तू मेरे दिल का सुकूंन है

सुबह जब लावन्या सोंकर उठी तो उसका चेहरा खिला हुआ था वह बहुत खुश थी वजह साफ थी सार्थक और पूनम की किये गए स्वागत सत्कार से और सबके सब ने जो उसे मान और सम्मान दिया इसी वजह से उसका मन बहुत खुश था ।

वह रजनी के पास पहुची और मुस्कुरा कर उसे जगाया

अरे वाह क्या बात है लावान्या आज तो बहुत खुश हो सुबह सुबह ही सार्थक से बात हो गयी क्या या कल की खुमारी अभी उतरी नही है रजनी ने लावण्या के चेहरे की खुशी देख कर कहा ।

क्या दीदी आप भी - लावण्या ने झेंपते हुए कहा ऐसा लगा जैसे रजनी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो

अरे मजाक कर रही हूँ पागल।

तुझे पता है कल हम इस समय कहा थे और क्या कर रहे थे- रजनी ने मुस्कुराते हुए कहा

लावण्या ने घड़ी देखा और ये ठीक वही समय था जब वह सार्थक को जगाने गयी थी

लावण्या के चेहरे पर वो वाकया याद करके फिर से लाली का गयी

दोनो अपने मम्मी के पास पहुचे और फिर शुरू हुआ बातों का सिलसिला दोनो सार्थक एंड फैमिली की बाते करने लगे ऐसा लग रहा था कि उन दोनों की बाते कभी खतम ही नही होगी ।

रजनी और लावण्या दोनो ने बारी बारी से सार्थक और उसके बहन के बारे में सारी बाते अपनी मम्मी को डिटेल में बताई

और फिर अवधेश जी की भी बाते बताई

सच मे माँ वो लोग बहुत अच्छे लोग है बहुत सीधे साधे बिल्कुल हमारे जैसे ,जैसे हम है वैसे ही वो भी है आपको पता है आते हुए जबरदस्ती पापा जी ने सार्थक को कुछ दिलवाने के लिए बोला ,मैं मना करती रही लेकिन वो पूनम नही मानी और उसने ये हमारे लिए ले कर जबरदस्ती बैग में डाल दिया - लावण्या ने सार्थक का दिया गया गिफ्ट अपनी मम्मी को दिखाया ।

मम्मी जी पूनम बहुत प्यारी है बिल्कुल किसी छोटी सी बच्ची जैसी और बहुत बातूनी है वो रात में मुझसे ऐसे लिपट कर सोई जैसे मैं छोटी थी तो आपसे लिपट कर सोती थी - लावण्या तो जैसे वही की ही होकर रह गयी हो

चलो जैसा हम घर ढूढ रहे थे वैसा ही मिल गया अच्छा है ना तूने खुद जाकर तसल्ली कर ली , एक बेटी के पीछे तो वैसे ही रोना है जिंदगी भर अब तेरा घर अच्छे से बस जाय तो रजनी का भी फिर से कही देख के निपटा दु , उसका गुमसुम उदास चेहरा देखा नही जाता अभी उम्र ही क्या है फूल सी

मेरी बच्ची बिल्कुल मुरझा गयी है तेरे पापा को तुम दोनों की ही चिंता खाये जा रही थी लावण्या की बाते सुनकर मम्मी जी को तसल्ली हो गयी

अगर सब अच्छा है और सबको मंजूर है तो मैं तुम्हारे पापा को सार्थक के घर भेज देती हूँ ,वो लावण्या और सार्थक की शादी की सारी बात चीत कर आएंगे आज शाम को मैं उनसे बात करूँगी जितनी जल्दी से जल्दी होगा मैं लावण्या जी शादी सार्थक के साथ करवा दूंगी

लावन्या और रजनी की बाते सुनकर मम्मी जी को सुकून मिल गया था

करीब 15 दिन बाद लावण्या के पापा बिसंभर प्रसाद ने सार्थक को फोन करके आने की सूचना दी

सार्थक ने अपने पापा को बताया सार्थक के पापा और लावण्या के पापा दोनो ने बातचीत कर ली और शादी के लिए राजी हो गए

और फिर दोनों ने मिलकर एग्जाम के बाद सगाई और उसके एक महीने बाद शादी करने का फैसला किया

सार्थक और पूनम दोनो अपने एग्जाम की तैयारियों में जुट गए और सार्थक और लावण्या की भी बहुत कम बात होती थी सिर्फ रात के वक्त या फिर कभी कभार दिन में क्योकि सार्थक ने उसे बताया था की उसका एग्जाम आने वाला है ।

एग्जाम के ठीक पहले ही कालेज कैम्पस में कई सारी कंपनियां कैम्पस सेलेक्सन के लिए आयी हुई थी

सार्थक ने भी दो तीन कंपनियों को सॉर्ट लिस्ट किया था और उन्ही में से एक कंपनी के इंटरब्यू के लिए आज उसे जाना था वो एक फार्मा सुइटिकल कंपन्नी थी और उसे एच आर मैनेजर के लिए अपॉइंट करना था ।

सार्थक का पहला इंटरब्यू था इसीलिए वह नर्बस था हालांकि उसने अच्छे से प्रिपेरसन कर रखा था लेकिन फिर भी जिंदगी का पहला इंटरब्यू था इसीलिए वह थोड़ा सा घबराया हुआ था ।

सारे स्टूडेंट अपनी अपनी बारी के इंतजार में बैठे थे और एक एक करके अंदर जाते और फिर वापस बाहर आते कुछ के चेहरे उदास तो कुछ के खिले होते थे

सार्थक अपनी बारी से अंदर गया ।

सामने ही टेबल के पीछे तीन लोग बैठे थे सार्थक ने मुस्कुरा कर उनका हेलो कहा और फिर उनके कहने पर बैठ गया

वो जो भी पूछते सार्थक अच्छे से और कांफिडेंस से जबाब देता और उन तीनों लोगो को उसका रीजन भी बताता

तीनो जज उसके बात ब्यवहार से काफी इम्प्रेस्ड थे और उसके नॉलेज से भी इम्प्रेस्ड नजर आ रहे थे

और फिर बाहर इन्तेजार करने को बोला गया

थोड़ी देर बाद दूसरा राउंड और फिर तीसरा राउंड का

इंटरव्यू हुआ और सार्थक को उन लोगो ने सेलेक्ट कर लिया और स्टार्टिंग 5 लाख का पैकेज देने को बोला

सार्थक बहुत खुश था उसका जॉब लग गया था उसने सबसे पहले पूनम को फोन करके खुश खबरी दी और फिर लावण्या को फोन किया ।

हेलो लावण्या सार्थक ने खुशी से लावण्या को पुकारा

सार्थक कैसा रहा इंटरव्यू - लावण्या ने छूटते ही उत्सुकता से पूछा

बहुत अच्छा रहा और मेरा सलेक्सन हो गया लावण्या -सार्थक खुशी से फूला नही समा रहा था ।

वो तो होना ही था मुझे पूरा भरोसा था कि तुम्हारा सलेक्सन हो जाएगा इतने इंटेलिजेंट, हार्ड वर्किंग और डिसेंट हो तुम्हे रिजेक्ट करने का तो सवाल ही नही पैदा होता - लावण्या ने भी खुश होकर कहा

थैंक्स लावण्या लेकिन सच मे आज बहुत खुसी का दिन है आज मेरी जॉब लग गयी है अब मैं तुम्हारे लायक हो गया हूँ लावण्या- सार्थक ने कहा

कैसी बाते कर रहे हो सार्थक तुम पहले भी मेरे लायक

थे ,और मेरे क्या तुम्हारे साथ जिसकी भी शादी होती वो बहुत खुशकिस्मत होती और संयोग से वह ख़ुशकिश्मत मैं हूँ जिसे तुमने चुना मैं भगवान से प्रार्थना करूँगी की तुम खूब तरक्की करो और अपने सारे सपने पूरा करो - लावण्या ने दिल से प्रार्थना किया

अपने नही लावण्या हमारे , अब जल्द ही तुम भी मेरी जिंदगी का हिस्सा बनने जा रही हो मत भूलो की पापा ने हम दोनों की शादी फिक्स कर दी है - सार्थक ने मुस्कुरा कर कहा

अच्छा बाबा अच्छा सॉरी गलती हो गयी हमारे, बस तुम खुश हो ना यही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है - लावण्या ने कहा

सच मे तुम मेरे लिए बहुत लकी हो जब से तुम मेरी जिंदगी में आई हो मेरे साथ सब अच्छा अच्छा हो रहा है शायद मेरे इस जॉब में भी तुम्हारा हिस्सा है तुमने मुझे बहुत मोटिबेट किया है ,तुम्हे पता है मुझे बहुत घबराहट हो रही थी लेकिन तुम जो हर बार मेरा हौसला बढ़ाती थी इसी वजह से मेरे अंदर एक पोजिटीबिटी आ जाती थी, तुम्हारा मेरे लिए कॉन्फिडेंस देख कर ही मैं आज यह अचीब कर पाया थैंक्स लावन्या मेरा साथ देने के लिए ऐसे ही जिंदगी भर मेरा साथ देना मुझे कभी अकेला मत छोड़ना - सार्थक ने भावुकता से कहा

अब बस कीजिये कितनी तारीफ करेंगे मेरी आप ,मैने कोई

बहुत बड़ा तीर नही मारा है ये सब आप की मेहनत का नतीजा है जो आपको आपकी मनपसंद नौकरी मिली है इसमे मेरा कोई रोल नही सब आपका ही है आप की खासियत दिख गयी होगी कंपन्नी के लोगो को इसी लिए तो उन्होंने आप को सेलेक्ट कर लिया - लावण्या ने कहा

क्या सार्थक का सलेक्सन हो गया ,थैंक्स गॉड , अचानक पीछे से रजनी की आवाज सार्थक को सुनाई पडी ।

ये रजनी दीदी है क्या?- सार्थक ने पूछा

हा दीदी है, लो बात कर लो - लावण्या ने हौले से कहा

एक पल की खामोसी के बाद अचानक रजनी की आवाज सुनाई पड़ी

कांग्रचलेस सार्थक तुम्हे जॉब मिल गयी- रजनी ने सार्थक को बधाई दी

थैंक्स दी ,कैसी है आप ? - सार्थक ने मुस्कुरा कर पूछा

मैं ठीक हूँ तुम तो ठीक हो ना, पता है मैं कब से कह रही थी लावण्या से की चिंता मत करो सार्थक को जॉब मिल जाएगी लेकिन ये लावण्या पगलाई हुई थी, कल से न ठीक से खाना खा रही है ना सो रही है बस मेरा दिमाग खराब करके रख दिया है - रजनी ने सार्थक को बताया

क्या लावण्या खाना नही खा रही है लेकिन क्यो ? सार्थक ने आस्चर्य से पूछा

खाना, अरे कल से ही तुम्हारे आज के इंटरब्यू के बारे में सोच सोच कर परेसान है ना जाने कितनी बार भगवान से प्रार्थना

कर चुकी है और न जाने कितनी बार कह चुकी होगी कि जाने कैसा गया इंटरव्यू और तो और आज, इसने तुम्हारे लिए फास्ट भी रखा है और मंदिर भी गयी थी पता है फास्ट भी ऐसा वैसा नही निर्जला मतलब पानी तक नही पीयेगी, एकदम पागल है ये सुबह से न अन्न का एक दाना खाया है ना एक बूद पानी का पिया है, कह रही है जबतक सार्थक का फोन नही आएगा त ब तक मुझे चैन नही मिलेगा अब तुम्ही समझाओ मैं तो समझा समझ के हार गयी हूँ - रजनी ने कहा

कहा है महारानी जरा फोन दीजिये उनको - सार्थक ने गुस्से से कहा

लो बात करो रजनी ने फोन लावण्या को पकड़ाना चाहा

लावण्या ने फोन नही पकड़ा

लो बात करो अब फोन क्यो नही पकड़ रही हो जब मैं कह रही थी तब तो मानी नही अब सार्थक समझायेगा तभी तुम्हे समझ मे आएगा - रजनी ने लावण्या को घुड़का और फोन देने की कोशिश की

बताना जरूरी था दीदी, आप को भी एक बात पेट मे नही पचता है मैं नही कर रही बात अभी गुस्सा करेंगे आप भी न ये नही की कुछ बाते छुपा लो - लावण्या ने रजनी पर हल्का सा गुस्सा किया

हा तो जब गलती करोगी तो बताऊंगी नही ,मैं क्यो छुपाऊ अब क्या फायदा अब खुद निपटो मैं क्या करु - रजनी ने लावण्या से कहा

सार्थक को रजनी और लावण्या की आवाज फोन में साफ साफ सुनाई पड़ रही थी

लावण्या ने घबराते हुए फोन पकड़ा ।और डरते डरते हल्के से हेलो कहा

सार्थक बिल्कुल खामोश था उसकी सांस लेने की आवाज आरही जिससे लावण्या को पता चल रहा था कि फोन चालू है

थोड़ी देर दोनो तरफ खामोसी छाई रही फिर लावण्या ने ही खामोसी तोड़ी

बोलिये न चुप क्यों है

क्या बोलू मुझे आपसे ये उम्मीद नही थी मुझसे तो बड़ी बड़ी बातें कर रही थी और खुद क्या कर रही थी और ये सब क्या है लावण्या रजनी दी क्या बोल रही है तुम्हारे भूखे पेट रहने से मुझे जॉब मिल जाएगी क्या अरे मुझे जॉब मिले न मिले तुम्हारी तबियत जरूर खराब हो जानी है तुम इतनी समझदार होकर इतनी बेवकूपी कैसे कर सकती हो सच मे मुझे बहुत दुख हो रहा है कि मेरी वजह से मेरी लावण्या को भूखा रहना पड़ा ये आपने अच्छा नही किया मुझे आपसे बात ही नही करनी- सार्थक ने गुस्सा दिखाया

सॉरी सार्थक लेकिन सच मे मुझे बहुत घबराहट हो रही थी और तुम्हारी चिंता हो रही थी कि पता नही कैसे होगा ये

तुम्हारा पहला इंटरव्यू था न इसीलिए मैं घबराई हुई थी कुछ भी खाने पीने को दिल नही कर रहा था बस सोच रही थी सब अच्छे से हो जाय - लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा

क्या सॉरी लावण्या मुझे बहुत दुख हो रहा है मेरी वजह से तुमने ठीक से खाना पीना नही खाया मुझपर भरोसा नही था क्या - सार्थक ने पूछा

नही ऐसी बात नही है मुझे आपपर तो पूरा भरोसा था लेकिन लड़की हूँ न तो आप तो जानते हो लड़कियों का दिल थोड़ा कमजोर होता है इसी लिए दिल तेज धड़क धड़क रहा था लेकिन अब तुमने ख़ुशख़बरी सुना कर बिल्कुल शांत और सुकून से भर दिया अब आराम से पेट भर के खाऊँगी , बस आप गुस्सा मत करो प्लीज - लावण्या ने मासूमियत से मुस्कुराते हुए कहा ।

सच मे गुस्सा तो बहुत आ रहा है लेकिन इतनी दूर हो कुछ कर भी नही सकता बाकी अगर पास में होती तो बताता तुम्हे - सार्थक ने मुस्कुराते हुए कहा

अच्छा कितना गुस्सा आ रहा है अगर मारने का मन कर रहा हो तो बताओ लावण्या ने भी सार्थक के सुर में सुर मिलाया

हा सच मे तुम्हे पीटने का मन कर रहा है क्योंकि तुमने मेरी लावण्या को खामखा इतना परेसान किया और उसे इतनी तकलीफ दी है तुम्हे पता है ना वो मेरी जान है तो फिर उसको भूखा क्यो रखा - सार्थक ने प्यार से कहा

तो फिर एक काम करती हूँ आपकी लावण्या को पनिश कर देती हूँ बताओ कितने थप्पड़ मारने का दिल है मैं खुद ही मार लेती हूँ ,फिर वैसे भी अब मैं और तुम अलग कहा है तो तुम पीटो या मैं पीटू मतलब तो गलती की पनिशमेंट मिलने से है और ने जो गलती किया है तो उसके बदले में पनिसमेन्ट तो बनता है - लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा

अरे पागल हो गयी हो क्या ये क्या लॉजिक है खबरदार जो ऐसी हरकत की तो मुझे नही करना कोई पनिश वनिष और बस मैं मजाक कर रहा हूँ यार इतना भी गया गुजरा नही हूँ कि मैं अपनी प्यारी और मासूम सी लावण्या पर हाथ उठाउ इससे पहले मैं मरना...

सार्थक प्लीज- लावण्या जोर से चीख पड़ी

सार्थक बोलते बोलते रुक गया

आज के बाद यह शब्द अपनी जुबान पर मत लाना वरना मैं कभी तुमसे बात नही करूँगी समझ लेना

लावण्या गुस्से से बोली सार्थक की बात सुनकर मानो वह तड़फ गयी हो जैसे किसी मछली को पानी से बाहर कर दिया गया हो

सॉरी बट यार मैं तो ऐसे ही बोल रहा था सार्थक को मानो साँप सूंघ गया हो वह बुरी तरह से सकपका गया

ऐसे हो चाहे वैसे हो चाहे जैसे हो अगर तुम मुझसे प्यार करते हो तो आइंदा से ऐसी कोई बात मत करना तुम नही जानते सार्थक तुमसे दूर जाने के ख्याल से ही मेरी रूह कांप जाती है चाहे जो कुछ कर लेना जो बड़ी से बड़ी पनिशमेंट देना हो दे देना जो तुम्हारे दिल मे आये कर लेना बस ऐसी बात मत करना तुम्हे मेरी कसम है लावण्या तड़प गयी थी और उसकी तड़फ उसकी बातों से साफ नजर आरही थी

सॉरी सॉरी लो कान पकड़ कर सॉरी बोल रहा हूँ प्रोमिश आइंदा से नही करूँगा ऐसी बात पक्का - सार्थक खुद ही बहुत सर्मिन्दा था

अरे सार्थक सोरी मत बोलो प्लीज अच्छा छोड़ो यह बताओ फिर क्या पनिशमेंट है मेरे लिए लावण्या बात को बदलने के लिए बोली

कोई पनिशमेंट नही है लेकिन तुम भी ये सब बेवकूपी मत किया करो खुद को तकलीफ देने से कुछ नही होता है कर्म करने से होता है लावण्या और फिर भगवान थोड़े न कहते है कि भूखे पेट रहो - सार्थक ने समझाया

हा लेकिन भगवान से प्रार्थना करने से साहस और शक्ति बढ़ता है और मन को शांति मिलती है और फिर कभी कभी भूखा भी रहना अच्छा होता है शरीर को भी आराम मिलता है ये डॉक्टर भी कहते है- लावण्या ने कहा ।

हा हा बातों में तो आपसे कोई जीत ही नही सकता इतना तो मुझे पता है तो बताइये फिर क्या दे रही है मुझे आज स्पेसल- सार्थक बोला

क्या चाहिए मैं आपको क्या दे सकती हूँ बोलो क्या चाहिए - लावण्या ने पूछा

बस मुझे गिफ्ट चाहिए सार्थक वापस से मुस्कुराते हुए बोला अचानक से उसके आंखों में सरारत भर आयी

क्या गिफ्ट लोगे बताओ आज मैं बहुत खुश हूँ तो जो तुम माँगोगे तुम्हे जरूर दूंगी - लावण्या खुसी से बोली

पक्का सोच लो फिर बाद में मुकर मत जाना सार्थक ने खुश होकर मस्ती में पूछा

हा बस ऐसे कुछ मत मांग लेना जो मैं देने लायक ही न होऊ, वो क्या है ना मेरे होने वाले पति अभी कमाते नही है तो अभी

अभी उनकी जॉब लगी है तो इसीलिए लावण्या ने मजाक में कहा

न न ऐसा कुछ नही मागूँगा जो आप न दे पाओ ऐसी चीज मांगूंगा जो आपके पास है और आप आराम से दे सकते हो और मेरे लिए बहुत अनमोल है सार्थक ने कहा वह फूल मस्ती के मूड में था

ऐसी कौन सी चीज है मेरे पास लावण्या सोचने लगी

हेलो कहा गयी सार्थक लावण्या को चुप देख कर बोला

हा सार्थक हु बट मुझे समझ नही आरहा है क्या है मेरे पास - लावण्या बोली

वही जो उस दिन तुमने मजबूरी में दिया था आज खुश होकर देदो

क्या मजबूरी में दिया था साफ साफ बताओ सार्थक मुझे सच मे कुछ नही समझ मे आरहा है लावण्या सच मे नही समझ पा रही थी ।

तुम भी न मेरी तरह एक नम्बर की बुद्धू हो इतनी छोटी सी बात समझ मे नही आरही है अरे बाबा उस दिन याद करो सुबह सुबह जब जगाने आयी थी जब मैने पकड़ लिया था तो

आपने क्या किया था

धत , गंदे कही के लावण्या सरमा गयी और बोली एक पल में ही उसके पूरे बदन में रोमांच की लहर दौड़ गयी पूरी बात समझ कर उसके गाल गुलाबी हो गए और आंखे शर्मिन्दगी से झुक गयी ।

गंदे क्या, आपने प्रोमिश किया है कि मैं जो भी मांगूंगा आप दे दोगे - सार्थक ने कहा

हा तो मुझे लगा आप कोई गिफ्ट माँगोगे इसीलिए बोला मुझे क्या मालूम था कि मिस्टर सार्थक के इरादे नेक नही है और उनकी नियत खराब है - लावण्या ने कहा ।

हा तो तुम हो ही इतनी सुंदर की नीयत तो खराब होगी ही अब दिल का क्या करे जिसको तुम्हारे अलावा कोई पसंद ही नही आया और तुम्हे देख कर तुमसे बात करके दिल बेईमान हो ही जाता है मैं क्या करूँ सार्थक ने कहा

अपने दिल से कहिये काबू में रहे क्योकि अभी सिर्फ हम दोस्त है और ये सब अभी हमे सोभा नही देता लावण्या मुस्कुरा कर बोली- अच्छा चलिए रखती हूं क्योंकि आज मिस्टर सार्थक का मन बहक रहा है इसीलिए बाय

अपना ध्यान रखना

अरे लावण्या सुनो तो मेरा गिफ्ट उसका क्या ? वह कब दोगी

- सार्थक ने कसमसा कर कहा मानो किसी हसते हुए बच्चे से उसका फेब्रेट खिलौना कोई छीन ले गया हो

आपका गिफ्ट कैंसिल अब मैं खुद अपने मन का गिफ्ट दे दूंगी आपको- लावण्या ने सार्थक को चिढ़ाया

बाय टेक केयर लावण्या ने खिलखिला कर कहा और फोन रख दिया ।

क्रमशः

हरेक मुहब्बत करने वालो की अपनी अपनी ही कोई कहानी है

किसी के ओठो पर मुस्कुराहट है किसी के आंखों में पानी है

कोई इश्क में तड़फता है किसी का दिल किसी के लिए धड़कता है

किसी का हसते हुए रो देना भी इश्क ही कि एक निसानी है

वो गहरी झील सी आंखों में भरा जो ख्वाब वो इश्क है

जहां छुप छुप कर मिलते थे कभी वो बाग वो इश्क है

वो किताबो में जो मिला सूखा हुआ गुलाब वो इश्क है

वो हँस के तुम्हारा नजर झुकाना लाजबाब वो इश्क है

मेरी तन्हाई में जो साथ मेरा देती वो यादे बड़ी सुहानी है

किसी का हसते हुए रो देना भी इश्क की ही एक निसानी है ।
 
सार्थक अपने एग्जाम में मशगूल हो गया और लावण्या ने भी उसको फोन करना बहुत कम कर दिया जिससे सार्थक की पढ़ाई डिस्टर्ब न हो ।

धीरे धीरे समय बीतता जा रहा था और एक एक करके सारे एग्जाम भी हो गये और पूनम का भी पेपर हो रहा था तो वह भी एग्जाम में ब्यस्त थी ।

आज पूनम का आखिरी पेपर था और वह अपना एग्जाम कम्प्लीट करके निकल रही थी उसके सारे पेपर बहुत अच्छे गए थे इसीलिए वह बहुत खुश थी ,जैसे ही वह बाहर निकल कर पहुची उसके कालेज के ही एक लड़के जिसका नाम प्रमोद था ने पूनम को रोका

पूनम सुनो, मुझे तुमसे कुछ काम है- प्रमोद ने कहा पूनम के सारे पेपर बहुत अच्छे से हुए थे इसी लिए वह खुश थी वह रुकी और चहक कर बोली

हाय प्रमोद कैसे हो ?

मैं ठीक हु , तुम बड़ी खुश लग रही हो क्या बात है लग रहा है पेपर बहुत अच्छा गया -प्रमोद ने कहा

हा सच कहा पेपर सच मे बहुत अच्छे हुए है- पूनम खुश होकर बोली

अच्छा ये बताओ मुझे रोका क्यो ? पूनम ने उत्सुकता से पूछा

बस ऐसे ही तुमसे थोड़ी सी बात करनी है तो मैंने सोचा आज के बाद तो तुम शायद मिलो इसी लिए आज ही मौका है बोलने का- प्रमोद बोला

ऐसी क्या बात है जो आज ही आज बोलना है - पूनम ने असंका से पूछा

बस कुछ बात है स्पेसल , प्रमोद की आंखों में प्यार सा उमड़ आया

पूनम को आज प्रमोद का बिहेवियर बहुत अजीब लगा क्योकि वह प्रमोद को जानती थी हालांकि सिर्फ बातचीत थी लेकिन आज का ब्यवहार उसे सही नही लगा ।पूनम को थोड़ा सा अलग लगा और इसीलिए वह थोड़ा सतर्क हो गयी और प्रमोद से दो कदम दूर हो गयी

बस है कुछ बाते अपने दिल की जो आज तक तुमसे नही बोल पाया सोचा अगर आज नही बोलूंगा तो रह जाएगी इसीलिए तुम्हे रोक लिया अगर इजाजत हो तो कहू - प्रमोद ने कहा

प्रमोद मुझे घर जाने के लिए लेट हो रहा है मैं जा रही हूँ, पूनम को हल्का सा डर लग रहा था इसीलिए उसने कहा और घूम कर जैसे ही जाने को हुई प्रमोद ने जल्दी से पूनम का हाथ पकड़ लिया ।

रुको न प्लीज पूनम मेरी बात तो सुनती जाओ अभी चली जाना घर ही तो जाना है

पूनम शॉक्ड रह गयी प्रमोद उसका हाथ पकड़ लेगा ऐसी उसको बिल्कुल उम्मीद नही थी उसने घूर कर प्रमोद को देखा

प्रमोद ने पूनम का हाथ छोड़ दिया

बोलो प्रमोद जल्दी बोलो जो बोलना है मुझे घर जाने को लेट हो रहा है मेरे भैया मेरा इन्तेजार कर रहे होंगे -पूनम ने रुखाई से कहा उसे प्रमोद का हाथ पकड़ना बिल्कुल अच्छा नही लगा

और हमारा क्या , मैं जो तीन साल से तुम्हारा इन्तेजार कर

रहा हूँ उसका कुछ नही , बहुत पत्थर दिल हो यार सच मे - प्रमोद किसी आशिक की तरह बोला

एक्सयूज मी , मैने क्या किया? और मेरा क्यो इन्तेजार कर रहे हो ? और ये सब क्या बोल रहे हो प्रमोद नशा वसा करके आये हो क्या? तुम्हें अंदाजा है कि तुम बोल क्या रहे हो- पूनम खीझती हुई बोली ।

हा नशा ही तो किया है मैने, तुम्हारा नशा पूनम , याद है जब तुम पहली बार मुझे दिखी थी इस कैम्पस में तुमने हल्का ब्लू कलर का ड्रेश पहना था उसी दिन से बस उसी दिन से मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ आज तीन साल हो गए लेकिन तुमसे कहने की कभी हिम्मत नही हुई , आज बड़ी मुश्किल से हिम्मत जुटा कर तुमसे कह रहा हूँ

आई लब यु पूनम , आई लब यु सो मच और जहां तक मुझे समझ मे आता है कि तुम भी मुझे पसंद करती हो क्योकि कालेज में तुम किसी से ज्यादा बात नही करती हो शिवाय मेरे तो बोलो न तुम भी मुझसे प्यार करती हो ना प्रमोद किसी सिरफिरे आशिक की तरह ब्यवहार कर रहा था

पूनम चौक गयी उसकी समझ मे कुछ नही आरहा था उसके दिमाग मे धमाके हो रहे थे ।

देखो प्रमोद मैं तुम्हारे भावनाओ की कदर करती हूँ तुम बहुत

अच्छे लड़के हो और मेरे दोस्त भी हो लेकिन सच मे मैने तुम्हे अपने दोस्त से ज्यादा कुछ नही माना, ना जाने कैसे तुन्हें ये गलत फहमी हो गयी कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ ऐसी कोई बात नही है तुम मेरे अच्छे दोस्त हो बस इससे ज्यादा कुछ नही -पूनम को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन उसने अपने गुस्से को दबा कर कहा

तो दोस्ती को प्यार में बदल लेते है ना , मैं तुम्हे बहुत खुश रखूंगा पूनम ट्रस्ट मी, क्योकि मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ कभी निरास नही करूँगा, तुम जो कहोगी सब पूरा करूँगा तुम्हारे लिए कुछ भी करूँगा- प्रमोद किसी पागलो की तरह बोला

प्रमोद, प्रमोद ,मेरी बात सुनो प्यार दिल से होता है जबर्दस्ती नही , और मैने तुम्हारे लिए कभी कुछ महसूस ही नही किया ,तुम चिंता मत करो तुम्हे मुझसे भी अच्छी लड़की मिल जाएगी , मैं ढूंढ दूंगी तुम्हारे लिए हम दोस्त है दोस्त ही बने रहे तो ज्यादा अच्छा है और ये तुमसे वादा है कि न तो मैं तुमसे कभी दोस्ती तोड़ूंगी और न ही ये बात किसी से कहूंगी प्रोमिश- पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा

पूनम मैं तुम्हारे हर सपने पूरा कर दूंगा प्लीज मेरी गर्लफ्रैंड बन जाओ प्लीज प्लीज , तुम जो कहोगी सब पूरे करूँगा

तुम्हे तो पता है पैसे की कोई कमी नही है मेरे पास तुम जो भी मांगोगी कपड़े ,गहने या कुछ भी कुछ भी मैं तुम्हारे बोलते ही पूरा कर दूंगा- प्रमोद बोला

दिमाग खराब हो गया है क्या तुम्हारा ? पागल हो गए हो क्या ? समझ मे नही आरही बात और क्या पैसे पैसे क्या समझ क्या रखा है तुमने मुझे ? अपने पैसे अपने पास रखो समझे मैं उन लड़कियों में से नही हूँ जो पैसे के पीछे कुछ भी कर सकती है - पूनम ने गुस्से से कहा

मैं जा रही हूँ हटो मेरा रास्ता छोड़ो पूनम ने कहा

एक मिनट पूनम प्लीज एक बार शांति से सोचो आखिर मुझमे कमी क्या है क्यो नही बन सकती तुम मेरी गर्लफ्रेंड बोलो मैं तुम्हे बहुत खुश रखूंगा ट्रस्ट में एक बार मौका तो दो , तुम बात ही नही समझ रही मैं तुमसे प्यार करता हूँ और तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ प्रमोद जैसे सच मे पागल हो गया हो ।

प्रमोद बात को समझो न ,ये प्यार ब्यार दिल की एक फीलिंग है ये जब हो जाता है तो कुछ भी मायने नही रखता लेकिन सच मे मैने तुम्हारे बारे में कभी सोचा तक नही तुम मेरे अच्छे दोस्त हो बस इससे ज्यादा कुछ नही और फिर जबदस्ती प्यार थोड़े न होता है - पूनम ने प्रमोद को समझाया

पूनम मैं रात दिन बस तुम्हारे बारे में ही सोचता हूँ मेरे सपनों में सिर्फ तुम आती हो मैं तुम्हारे साथ शादी करना चाहता हूँ तुम्हे अपनी बाहों में लेकर प्यार करना चाहता हूँ तुम्हारे ओठो......

एनफ इट एनफ , बस बहुत हो गया मैं कुछ नही बोल रही तो तुम कुछ भी बोले जा रहे हो मैं तो तुम्हे अपना दोस्त मानती थी और तुम्हारे मन मे मेरे लिए ये सब

छी इतनी गंदगी मैने कभी सोचा भी नही था कि तुम ऐसा सोचते हो मेरे बारे में पूनम ने प्रमोद को बुरी तरह से लताड़ा

पूनम बस एक बार प्लीज बस एक बार मेरी बात मान जाओ बस एक बार आकर मेरे गले लग जाओ फिर तुम हमेसा के लिए जा रही हो इसी यादों के सहारे मैं जी लूंगा प्रमोद ने पूनम का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खीचते हुए कहा

पहले मेरा हाथ छोड़ो, छोड़ो मेरा हाथ और हां तुम पागल हो साइको जाकर किसी अच्छे डॉक्टर से अपना इलाज करवाओ समझे पूनम को बहुत तेज गुस्सा आया और वह प्रमोद पर बुरी तरह चिल्लाई

पूनम मैं सब करवा लूंगा जो तुम कहोगी और पागल मुझे

तुमने बनाया है तुम्हारे लिए मैने क्या क्या नही किया तुम्हारे जितने फ़ोटो मेरे पास है उतने शायद ही किसी के पास हो याद है मैं अपने साथ एक कैमरा रखता हूँ उसमे सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी फ़ोटो है सिर्फ तुम्हारी ,वो कैमरा मैंने स्पेसली तुम्हारी फ़ोटो खींचने के लिए ही खरिदा था, मेरे पास तुम्हारी 5 हजार 492 फ़ोटो है वो भी अलग अलग तुम नही जानती पूनम मैं तुम्हारे पीछे किस हद तक पागल हूँ

क्या? मेरी फ़ोटो वो भी बिना मेरी इजाजत के ये तुमने ठीक नही किया प्रमोद किसी के बिना इजाजत के किसी की फ़ोटो लेना तो क्राइम है - पूनम ने चौक कर कहा

उसे प्रमोद से हल्का सा डर लगने लगा क्योकि उसे प्रमोद एक मानसिक रोगी लग रहा था मानो सच मे पागल हो गया हो ।

तुम्हारे लिए मैं सूली पर लटक जाऊँ तो भी गम नही ये तो कुछ भी नही है मेरे पास तुम्हारी ऐसी ऐसी फ़ोटो है की क्या बताऊँ- प्रमोद ने कहा

मतलब कहना क्या चाहते हो कैसी फ़ोटो पूनम का दिल जोर का अनहोनी की आसंका से धड़का

तुम चिंता मत करो पूनम मैने सब सम्हाल कर रखे है वो मेरे लिए स्पेसल है , मेरे लिए बहुत खास है जो सिर्फ मेरे और

सिर्फ मेरे लिए है उन्हें मैं ऐसी जगह रखता हूँ कि किसी को भी नही मिल सकती क्योंकि मेरी पूनम की वो स्पेसल फ़ोटो है और कोई मेरे अलावा मेरे पूनम की तरफ देख भी ले ये मुझे गवारा नही प्रमोद को जैसे दौरा पड़ गया हो

नही पहले बताओ तुमने वो सब खींची कैसे और कहा से मिली - पूनम ने उत्सुकता से पूछा

बस मिल गयी याद है उस दिन जब कालेज में कल्चरल प्रोग्राम था तो मैने रिमी को बोल कर चेंजिंग रूम में अपना कैमरा लगवा दिया था इसके लिए मुझे ज्यादा कुछ नही बस रिमी को एक फोन गिफ्ट देना पड़ा और फिर जब तुम कपड़े बदल कर स्टेज पर पहुची तो उसे मैने निकाल लिया इसके अलावा रिमी ने तुम्हारी बहुत सी फ़ोटो मुझे भेजी है स्पेसल वाली - प्रमोद ने स्पेसल शब्द पर खास जोर दिया और ऐसा बोलते हुए उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी ।

पूनम को बहुत तेज गुस्सा आया खुद पर भी और रिमी पर भी

रिमी पूनम की दोस्त थी वो अक्सर बहुत मस्ती करती थी और पूनम के साथ सरारते करती थी , सरारतो में ऐसी शरारते भी शामिल होती जो थोड़ी सी भद्दी भी होती , लेकिन रिमी लड़की थी तो पूनम गुस्सा करके रह जाती थी लेकिन आज पता चला कि सब रिमी जानबूझकर करती थी

जिससे ऐसा करते हुए वह उसकी फोटो या वीडियो ले सके और प्रमोद को दे सके

इस रिमी को तो मैं छोडूंगी नही कमीनी ने इतना बड़ा धोखा मेरे साथ किया जान ले लूंगी उसका मैं , पूनम ने गुस्से से दांत पीस कर कहा

उस पर क्यो गुस्सा करती हो उसको मैने ही ऐसा करने के लिए बोला था तुम्हारी एक एक क्लिप के और एक एक फोटो के मैने उसे पैसे दिए है जितने अच्छे क्लिप उतने अच्छे पैसे रिमी को मैं लाखो दे चुका हूँ पूनम सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए प्रमोद ने ऐसा कहा मानो बहुत बड़ा काम किया हो

मैं कैसे मान लू की तुम सही कह रहे हो कही तुम झूठ बोल रहे हो तो- पूनम ने हल्की सी आसंका जाहिर की क्योकि वह स्योर होना चाहती थी की प्रमोद कह रहा है सही है कि नही

तुम्हे मुझपर बिश्वास नही एक मिनट रुको मैं तुम्हे दिखाता हूँ ।

वह भाग कर गया और फिर वापस आया तो उसके हाथ मे एक टैब था

उसने उसे ओपन किया और दिखाया

पूरा टैब पूनम के ही फ़ोटूवो से भरा पड़ा था और एक से बढ़ कर एक फोटो ऐसा लग रहा था कि पूनम के इन तीन सालों के पूरा सफर इन फोटुओं के रूप में प्रमोद ने कैद कर लिया हो

ये देखो जब तुम और रिमी मस्ती कर रहे थे प्रमोद ने एक क्लिप खोल दी

पूनम ने देखा कि रिमी ने उसके कपड़ो के अंदर हाथ डाल रखा है और पूनम के सीने को पकड़ रखा है और एक भद्दी सी हरकते कर रही है और पूनम दर्द से चिल्ला रही है उसके आस पास की सब लडकिया हंस रही है फिर पूनम को गुस्सा आ गया और उसने जबरदस्ती रिमी को पकड़ कर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसने भी वैसा किया और बोली अब बोल हुआ दर्द हो रहा है कि नही इतनी तेज से दबाती है अब बोल कैसा लग रहा है और रिमी नीचे से दर्द से बिलबिला कर चिल्ला रही थी और माफी मांग रही थी

पूनम ने देखा उसकी आंखें फटी की फटी रह गयी उसके समझ मे नही आ रहा था कि ये सब रिमी ने कैसे किया

ओह्ह गॉड ये सब भी //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svgगम गुस्से और आस्चर्य से उसका दिल घबराने लगा उसके साथ इतना सब हो गया उसे पता भी नही चला उसे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आ रहा था कि उसने रिमी को इतना सब करने कैसे दिया

प्रमोद प्लीज ये सब डिलीट कर दो प्लीज तुम मुझसे प्यार करते हो न तो ये कैसा प्यार है कि बिना बताए ये सब तुमने किया है ये सब इलीगल है जो प्यार करता है वो ये सब कैसे कर सकता है पूनम ने हाथ जोड़ कर प्रमोद से रिक्वेस्ट किया

अब हुआ न बिश्वास अब तो मानती हो न तुम घबराओ मत पूनम ये सब सिर्फ मेरे लिए है इसको मैं अपनी जान से ज्यादा हिफाजत से रखता हूँ और क्या लीगल इलीगल पूनम इश्क और जंग में सब जायज है और फिर मुझसे ज्यादा प्यार करने वाला तुम्हे नही मिलेगा पूनम मेरी बात मान जाओ प्लीज - प्रमोद ने कहा

यु सेटअप इडियट बास्टर्ड अपने आप को समझता क्या है तू , सकल देखी है एक बार बोल दिया दो बार बोल दिया फिर भी समझ मे नही आ रही है तुझे, तू पागल है साइको है किसी अच्छे डॉक्टर से जाकर इलाज करवा तुझे इलाज की जरूरत है सरम नही आई तुझे ये सब करते हुए ,तेरी हिम्मत कैसे हुई बिना मेरी इजाजत के मेरी फ़ोटो खींचने की उसने

जल्दी से प्रमोद के हाथ से टैब लिया और फिर उठा कर जमीन पर दे मारा ये ले ले देख ले मेरी फोटुएं - अचानक से पूनम अपने आपे से बाहर हो गयी और गुस्से से चिल्लाने लगी यह सब देख कर उसका दिमाग हिल गया

वही पास में पड़ी हुई एक ईंट से उसने टैब को कुचल दिया

और हा तुम्हारे उस रिमी को तो मैं छोडूंगी नही आइंदा से मेरे सामने मत आ जाना वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा गुस्से के मारे पूनम का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वह आग का गोला बन गयी

पूनम को इतने गुस्से में प्रमोद ने कभी नही देखा था इसी वजह से एक बार उसकी सिटी पित्ती गम हो गयी वह सांत खड़ा पूनम को तांडव मचाता देखता रहा

पूनम ने प्रमोद को खूब उल्टा पुलटा सुना कर गुस्से से वहां से चली गयी

गुस्से से उसका माथा फटने को हो रहा था

घर पहुच कर उसने देखा कि सार्थक अभी नही आया था उसने अपने कपड़े बदले और फिर अपने लिए चाय बनाने लगी उसका दिमाग प्रमोद में ही उलझा हुआ था।

उसकी बातें सुनकर पूनम बहुत डर गई थी और इतने सारे

फ़ोटो और वीडियो देख कर वह बहुत घबरा गई थी ।

पूनम को रिमी के साथ और क्लास रूम में की गयी सारी वो हरकते याद आ रही थी जो रिमी जानबूझकर करती थी और इसके अलावा एक दो बार दोनो साथ वाशरूम भी गयी थी तो क्या वहा भी रिमी ने ... पूनम ने सोचा

पूनम का दिमाग खराब हो गया था उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आर है था अब किससे कहे भी कोई है भी तो नही और अगर प्रमोद ने कुछ मिसयूज कर दिया तो

जितना पूनम सोच रही थी उतना उलझ रही थी

अचानक उसकी तंद्रा दरवाजे पर किसी के खटखटाने से टूटी

वह भाग कर गयी और उसने दरवाजे खोला

सामने सार्थक खड़ा था

हाय छुटकी कैसा हुआ पेपर - सार्थक ने मुस्कुरा कर पूछा

ठीक था भैया - पूनम ने उदास होकर कहा

एक मिनट अचानक से सार्थक को कुछ जलने की बू आयी उसने नाक सिकोड कर सूंघते हुए कहा

क्या जल रहा है छुटकी किचन में कुछ रख कर आई है क्या सार्थक ने पूछा

ओह्ह सॉरी सॉरी , पूनम को अचानक चाय का याद आया

और वह किचन में भागी और उसके पीछे पीछे सार्थक लपका

चाय बची कहा थी वो तो कब की कोयला बन चुकी थी

अरे ये तो जल कर पूरा खत्म हो गया , कहा ध्यान था पूनम मैंने भी तीन बार दरवाजा खटखटाया तो तुमने दरवाजा खोला और फिर पेपर का जबाब भी नही दिया और अब ये , कोई बात है क्या बहन कुछ परेसान सी लग रही हो सार्थक को आसंका हुई उसने घबरा कर पूनम से पूछा

न मैं कहा परेसान हूँ ,न मुझे कोई परेशानी नही है , सब ठीक है, सब अच्छा है भैया , कोई दिक्कत नही है -इस तरह से सार्थक के पूछने पर पूनम बुरी तरह गड़बड़ा गयी और सफाई देने लगी उसने झूठमूठ का मुस्कुराने का भी प्रयास किया लेकिन उसकी आँखों ने और जुबान ने और हावभाव ने उसका साथ छोड़ दिया उसके माथे पर अचानक पसीने की बुंदे झिलमिलाने लगी ,सार्थक को शक ही नही पक्का भरोसा हो गया कि पूनम कुछ परेसान है और कोई बात है ।

अच्छा आ जा तेरे लिए चाय मैं बनाता हूँ देख आज अपने भाई के हाथों से स्पेसल अदरक वाली चाय पीकर कैसे तेरी सारी टेंसन और परेसानी छू मंतर हो जाता है सार्थक ने पूनम का नार्मल करने की कोशिश की ।

नही भैया मैं बना दूंगी आप आराम कीजिये पूनम बोली

आज मेरी प्यारी लाडली राजकुमारी आराम करेगी और उसका यह सेवक उसकी सेवा करेगा सार्थक ने कहा और फिर उठा कर उसने पूनम को बिस्तर पर बैठा दिया

तो बोलिये राजकुमारी जी इस खादिम के लिए क्या आज्ञा है सार्थक ने पूनम का मूड ठीक करने के लिए किसी सेवक की तरह झुक कर कहा

पूनम को सार्थक की यह हरकत देख कर सच मे हंसी आ गयी वह बोली भैया क्या है ये ।

आप आदेश कीजिये राजकुमारी जी चाय के साथ आप क्या खाएंगी मैगी या बिस्किट सार्थक ने उसी अंदाज में फिर से पूछा

और कुछ नही बस दो ही चीज है क्या? - पूनम ने पूछा

मुझे क्षमा करें राजकुमारी जी इस सेवक को और कुछ बनाना ही नही आता है - सार्थक ने मुह बना कर कहा

पूनम खिलखिला कर हंस पड़ी वह प्रमोद की सारी बाते भूल गयी एक पल में उसकी सारी टेंसन गायब हो गयी थी

सेवक जो भी लाएगा सब मंजूर है पूनम ने भी सार्थक के सुर में सुर मिलाया

क्रमशः

ये कैसा इश्क है ये कैसा प्यार करने लगे है

ये कैसे अपने चाहत का इजहार करने लगे है

मैने तो सुना है त्याग देने को भी इश्क कहते है

पर अब तो पाने के लिए हद पार करने लगे हैथोड़ी देर बाद सार्थक चाय के साथ बिस्किट और नमकीन लेकर हाजिर हुआ और लाकर टेबल पर रख दिया ।

दोनो ने अपनी अपनी चाय उठाई और पीने लगे पूनम थोड़ी सी रिलेक्स हुई ।

पूनम को थोड़ा सा रिलेक्स देख कर सार्थक बोला

अब बता छुटकी बात क्या है, तू परेसान क्यो है - सार्थक ने गंभीर स्वर में कहा

पेपर अच्छा नही हुआ क्या ? तू इतने टेंसन में क्यो है? तुझे पता है ना तुझे मैं उदास नही देख सकता फिर तू ऐसे क्यो आज गुमसुम औए उदास है ? कुछ प्रॉब्लम हो तो मुझसे कह सकती है या मुझसे कहने में झिझक रही हो तो लावण्या को बता दे - सार्थक ने पूनम के सर पर हाथ फेरते हुए प्यार से कहा

पूनम अपने आप को हद तक सम्हाल चुकी थी और अब खुद को संयत भी कर चुकी थी

ऐसी कोई बात नही है भैया और पेपर बहुत अच्छा गया है

आज कालेज का आखिरी दिन था तो इसी वजह से थोड़ा उदास थी सब कोई छूट जाएगा - पूनम ने साफ साफ झूठ बोला

अरे पागल इसमे इतना दुखी होने वाली कौन सी बात है इस कॉलेज में न सही दूसरी कालेज में अभी तो तुझे पोस्ट ग्रेजुएसन भी तो करनी है अपनी बहन को टीचर बनाना है मुझे - सार्थक ने राहत की सास ली उसका सारा टेंसन खत्म हो गया था

नही भैया अब कालेज से नही ओपन से करूँगी - पूनम ने मायूसी से कहा

क्यो ? सार्थक बोला

बस ऐसे ही ,वरना भाभी घर मे अकेले रह जाएंगी - पूनम ने झूठ मूठ का बहाना बनाया

ठीक है जैसे तेरी मर्जी तुझे जो करना है जैसे करना है कर जितना पढ़ना है पढ़ अब तू चिंता मत कर मेरी भी जॉब लग गयी है अब कोई चिंता नही है - सार्थक बोला जी भैया- पूनम ने कहा

दोनो घरो में शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थी

सार्थक लावण्या दोनो अपने लिए कपड़े जेवर और शादी में यूज़ होने वाले सामानों की खरीददारी करने में जुटे हुए थे ।

पूनम भी हर एक चीज में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही थी और

ले भी क्यो न उनके एकलौते भाई की शादी जो थी ।

सब कुछ अच्छा ही हो रहा था। पूनम प्रमोद के वाकये को लगभग भूल चुकी थी उसे इस बात की तसल्ली थी कि उसने टैब तोड़ दिया था ।

धीरे धीरे शादी का दिन करीब आता जा रहा था सार्थक और पूनम शादी के लिए अपने पुराने घर मे आये हुए थे चाची के नखरे तो थे लेकिन समाज और दुनिया के लिए ही सही वह सार्थक की शादी करने को राजी हो गयी थी अवधेश जी ने शादी की सारी तैयारियां पूरी कर दी थी ।

लक्ष्य और शशांक सार्थक के घर के ही होकर रह गए थे मानो वो सार्थक के दोस्त न हो सार्थक के भाई हो पूरा घर मेहमानों से भरा हुआ था और घर मे शादी का पूरा पूरा माहौल था ।

सार्थक को हल्दी चढ़ चुकी थी इसीलिए उसका बाहर आना जाना निषेध था ।

लावण्या को भी हल्दी चढ़ चुकी थी उसके भी घर मे मेहमानों का हुजूम उमडा पड़ा था उसकी सारी सखिया और सारी सहेलिया सार्थक का नाम ले ले कर उसे छेड़ रही थी और वह कभी सरमाती कभी गुस्सा करती कभी उसके गाल गुलाबी हो जाते और और कभी खीझ कर उसको जबाब देती लेकिन उसके चेहरे पर अपनी शादी की खुशी साफ साफ महसूस हो रही थी वह बहुत खुश थी और हो भी क्यो न आखिर उसके मनपसन्द और उसे इतना प्यार करने वाला सार्थक जो मिला

था

शादी के एक दिन पहले घर मे पूजा पाठ करके मंडप की स्थापना की गई था और रात में मेहंदी और संगीत का फंक्सन था इसके अलावा एक छोटा सा भोज का भी इंतजाम था ।

लावण्या की सहेलियों ने लावण्या को घेर रखा था उसके पूरे चेहरे और शरीर मे हल्दी का पीलापन साफ दिख रहा था जब सारा कार्यक्रम हो गया तो रात में उसकी दो तीन खास सहेलियों ने उसके हाथों और पैरों में मेहंदी लगाना शुरू किया

जो रात को करीब 1 बजे तक चलता रहा मेहदी लगाते लगाते लावण्या की सहेलिया लावण्या से सार्थक की बाते कर रही थी और सार्थक की बाते बताते हुए लावण्या के ओठो पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट और आंखों में एक प्यार भरा अपना पन साफ साफ महसूस किया जा सकता था लावण्या मन ही मन खुद को कब की सार्थक की बन चुकी थी और कब का उसने अपना दिल दिमाग और मन सार्थक को सौप दिया था

सार्थक के नाम की मेहदी लगवा कर लावण्या खुसी से फूली नही समा रही थी वह बार बार अपने हाथों के मेहदी को देखती और सरमा कर नजर झुका लेती

जब सारी मेहदी लग गयी तो लावण्या की सहेलिया लावण्या के पास ही सो गई ।

सुबह दोनो घरो की चहल पहल ही निराली थी चारो तरफ

एक अजीब सी भागदौड़ मची हुई थी लावण्या के घर इस लिए क्योकि बारात आनी है और बारातियो का स्वागत करना है और सार्थक के घर इसलिए क्योंकि बारात नगीना जानी है टाइम से सब हो जाय ।

और इन सब मे सबसे ज्यादा तो ब्यस्त पूनम थी जिसे देखो मुह उठाकर पूनम को ही आवाज लगा रहा था और पूनम उसको तो मानो पंख लग गए हो कभी यहां, कभी वहां ,कभी उनके पास और कभी इनके पास उसके चेहरे पर न तो थकान थी न ही अफसोस , उल्टा उसका चेहरा खिला हुआ था और वह बहुत खुश थी ।
 
लक्ष्य कल से ही से चस्करघिन्नी बना हुआ था कभी ये तो कभी वो उसे दौड़ते ही बीत रहा था ।

और आज तो हद ही हो गयी सुबह से नास्ता करने का समय नही मिला बस बेचारे ने जल्दी जल्दी एक कप चाय पी है वो भी जल्दी से ,क्योकि सुबह सुबह ही उसे सार्थक के पापा ने एक रिश्तेदार को लेने के लिए स्टेसन भेज दिया और गाड़ी दो घंटे लेट थी तो वह वही इंतेजार करता रह गया

उसको बड़ी जोर की भूख लगी थी और उसके पेट मे चूहे कूद रहे थे अब वह किस को बुलाता कोई दिखा नही आखिर में उसको पूनम का ख्याल आया तो वह पूनम को ढूढता हुआ

घर मे आया

पूनम वो पूनम कहा हो यार- लक्ष्य पूनम का नाम लेकर चिल्लाता हुआ बोला

क्या हुआ लक्ष्य मुझे बुला रहे थे क्या ? पूनम ने लक्ष्य की आवाज सुनकर कहा

क्या यार सिर्फ काम ही करवाओगी कुछ खिला भी दो, पत्नी सार्थक को मिल रही हैं और परेड हमारी निकल रही है बहुत तेज भूख लगी है ,पूनम प्लीज कुछ ला दो वरना गिर जाऊंगा कसम से , फिर तुम रोओगी - लक्ष्य ने मुह बना कर बेचारगी से कहा मानो कई जन्मो का भूखा हो

अरे आपने अभी तक कुछ खाया नही- पूनम ने चौक कर कहा

कहा खाया यार अंकल ने सुबह सुबह फूफा जी को लिवाने भेज दिया और वो भी अच्छे और महान आदमी है उन्होंने एक बार भी नही बताया कि ट्रेन दो घंटे लेट है मैं स्टेसन पर बैठ कर इंतेजार करता रहा

वैसे मेरा टाइम कट गया क्योंकि स्टेसन पर कंपन्नी मिल रही थी दिव्य दर्शन हो रहे थे सुंदर सुंदर कन्याओ के - लक्ष्य ने

अपनी आदत के अनुसार अपने सदा बहार अंदाज में कहा

हद है लक्ष्य सच मे कितने चीप हो तुम, तुम्हे लड़कियों के अलावा और कुछ नही सूझता तुम्हे बस लड़की दिख जाए फ़्लर्ट चालू पूनम लक्ष्य की आदत जानती थी इसीलिए लक्ष्य को चिढ़ाते हुए बोली

अरे तुम सरासर गलत इल्जाम लगा रही हो मैने तुम्हारे साथ कब फ़्लर्ट किया तुम भी तो लड़की हो अब खाली बैठा था बोर हो रहा था तो टाइम पास के लिए कुछ तो करना था वैसे एक बात बताऊ उनमे से एक भी तुम्हारे जैसी नही थी -लक्ष्य ने मुस्कुराते हुए कहा

अच्छा बस बस अब तुम शुरू मत हो जाना मुझे ये सब पसंद नही है इसीलिए तुम मेरी तारीफ करने को रहने दो समझे - पूनम ने हल्के से कहा

अच्छा सुनो न पूनम अब तो सार्थक की भी शादी हो रही है तो मेरा भी तो कुछ सेटिंग करवा दो यार और कुछ नही तो फिर जो वो तुम्हारी सहेली है क्या नाम है उसका, अरे वही जिसने महरून कलर का ड्रेस पहना है बड़ी बड़ी बिल्ली जैसी आंखे है उससे ही इंट्रो करवा दो मेरा दिल उसपर आगया है यार, क्या मेरे लिए इतना भी नही कर सकती - लक्ष्य ने

मजाकिया लहजे में कहा

मैं क्यो करवाऊ, तुम्हे थप्पड़ खाने का शौक है तो जाओ , खुद ही बात करो और वैसे भी वो ऐसी वैसी लड़की नही है और तुम्हे क्या तुम तो जिसको देखो लाइन मारना शुरू हो जाते हो -पूनम ने खीझ कर कहा कहा

कितनी संगदिल हो तुम पूनम सच मे इस मासूम से चेहरे पर रहम नही आता तुम्हे , ऐसा लड़का उसे कहा मिलेगा- लक्ष्य ने कहा

लक्ष्य प्लीज़ तुम्हारा बकवास सुनने के लिए मेरे पास टाइम नही है अगर कुछ इम्पोर्टेन्ट काम हो तो बताओ नही तो मेरे जिम्मे बहुत काम है- पूनम लक्ष्य की बातों से खिझती हुई बोली

अच्छा , और मैं खाली हूँ पता है सुबह से इस सार्थक के लिए एक पैर पर नाच रहा हूँ आज तक मैने इतना काम नही किया जितना इस साले ने एक दिन में करवा लिया मुझसे , वो भी बिना खाये पिये,और उसकी बहन मुझे घुड़कियाँ लगा रही है अरे कम से कम थैंक्स तो बोल ही सकती हो कि उसमें भी पैसे लग रहे है, पता है सुबह से भूखा प्यासा लगा हूँ अब तो पेट की अंतड़िया भी थक गई है और चूहे भी उछल उछल कर थक कर सो गए है कुछ खिला दो वरना तुम्हारे बाहो में

ही बेहोस हो जाऊंगा फिर तुम रोती रहना मुझे याद कर करके - लक्ष्य ने कहा

सच मे बहुत बोलते हो बहुत, इतनी बाते बनाना आती कैसे है तुम्हे , इन्ही बातो में ही नादान लडकिया फस जाती है , तुम्हारा मुह नही दर्द करता इतना बक बक कर कर के - पूनम ने खीझ कर कहा

न बिल्कुल नही लडकिया मेरी बातों को ध्यान लगा कर और कान लगा कर सुनती है - लक्ष्य ने गर्दन अकड़ा कर कहा

बेवकूप है वो एक नंबर की , रुको मैं कुछ लाती हूँ वरना कही सच मे गिर कर बेहोश हो गए तो एक मुसीबत और पड जाएगी जान को- पूनम ने कहा

और अंदर चली गयी

थोड़ी देर बाद लौटी तो उसके हाथ मे खाने पीने का सामान था और एक चाय थी

लो नास्ता कर लो और काम पर लग जाओ क्योकि शादी वाले घर मे काम करने से अच्छी और मनपसंद दुल्हन मिलती है समझे - पूनम ने मुस्कुरा कर कहा

अरे सच्ची लो अभी खत्म करता हूँ, और उसने जल्दी जल्दी

खाना शुरू किया

पूनम खिल खिला कर हंस पड़ी आराम से आराम से कोई जल्दी नही है चिंता मत करो अभी और है ले आउंगी मैने भी नही खाया है अपना हिस्सा रख रखा है - पूनम ने हसते हुए कहा

क्या तुमने भी नही खाया कुछ? क्यो तुमने क्यो नही किया नास्ता ?- लक्ष्य परेसान हो गए

अरे सब कभी इधर कभी उधर बुला रहे है तो समय ही नही मिला थोड़ी देर बाद जा रही हूँ कर लूंगी- पूनम ने गंभीरता से कहा

अभी कोई दूसरा टाइम होगा क्या ? इतनी हल्की फुलकी हो, मैं तो एक बार झटका झेल भी लूंगा तुम तो सीधा ऊपर पहुँचोगी और फिर बेचारे सार्थक की शादी भी रुक जाएगी

आओ बैठो लक्ष्य ने पूनम का हाथ पकड़ कर जबरदस्ती बैठा लिया और नास्ता उसके मुंह मे ठूस दिया

पूनम को भी भूख लगी थी इसीलिए उसने भी ज्यादा हुज्जत नही की और लक्ष्य के साथ ही बैठ कर नास्ता करने लगी जब लक्ष्य का हिस्सा खत्म हो गया तो पूनम ने अंदर जाकर अपना हिस्सा भी ले आयी और फिर उसे भी दोनों ने मिल

कर ही खाया

नास्ता करने के बाद दोनों ने राहत की सास ली

भरा पेट की कुछ और खाना है - नास्ता खत्म होने के बाद लक्ष्य ने पूछा

नही नही बस हो गया बहुत भूख लगी थी सच मे पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा

पागल हो नास्ता कर लेना चाहिए था आखिर तुम्हे ही तो दौड़ना है - लक्ष्य ने कहा

पूनम नास्ता करके फिर से अपने काम मे लग गयी और लक्ष्य भी अपने काम मे लग गया

दोपहर बाद ही बारात निकलने की तैयारी शुरू हो गयी

सार्थक को नहला धुला के तैयार किया गया और फिर सजी सजाई एक कार पर सवार होकर सार्थक अपनी दुल्हनिया लेने नगीना की तरफ चल पड़ा

चार घंटे की यात्रा के बाद बारात नगीना पहुची

लावण्या के घर से कुछ दूरी पर बारात रुकने की ब्यवस्था थी ।

सारे लोग इतनी लंबी यात्रा करके थके हुए थे

और उतर उतर कर अपनी अपनी कमर सीधी कर रहे थे

लावण्या के पापा ने बारातियो के रुकने के लिए एक छोटा सा गेस्ट हाउस बुक किया था जिसमे 2 या तीन बड़े बड़े हाल थे

जिसमे फर्श पर ही गद्दे बिछे हुए थे और उन गद्दों पर चादर भी थी

सब थके थे तो एक तरफ से उन्ही गद्दों पर फैल गए और आराम करने लगे लगे

थोड़ी देर बाद ही नाई एक पीतल की परात लेकर पहुचा और फिर सार्थक के पापा और सार्थक के चाचा सार्थक के फूफा और ऐसे ही खास खास मेहमानों के पैर धोये और उन्हें गुड़ और दही खिला कर उनकी आगवानी किया

लावण्या के रिस्तो दारो और सगे संबंधियों ने जलपान की ब्यवस्था की और सबको चलकर जलपान करने लिए रिक्वेस्ट किया

सब एक एक करके जलपान करने लगे

सार्थक ने वही नगीना से ही बारात के साथ साथ लावण्या के घर तक चलने के लिए डी जे रोडलाइट और रथ की बुकिंग कर रखी थी जो समय से पहुच करके अपने अपने साज बाज को दुरुस्त करने में लगे थे ।

जब सब लोगो ने जलपान कर लिया फिर उसके बाद बारात लावण्या के घर की तरफ रवाना हुई

सबसे पहले दो दरवान नुमा लोग पूरी लाल कलर की वर्दी पहने कर एक एक तख्ती जिसपर सार्थक संग लावण्या लिखा था लेकर चल रहे थे उसके बाद एक खुले हुए गाड़ी पर सेट किया हुआ डीजे जिसपर के तरह की रंग बिरंगी लाइट

और लेजर लाइट्स लगी हुई थी चल रही थी और दोनों किनारों पर लगभग 12 लोग अपने अपने सर पर रोड लाइट का सेट उठाये चल रहे थे ।

बीच मे थोड़ा सा जगह खाली था जिससे कि लोग डी जे के पीछे पीछे नाच सके और सबसे अंत मे सार्थक का सीसमहल जैसा रथ चल रहा था बहुत ही खूबसूरत सा रथ जो जीप में ही सेट किया गया था और उस जीप का बोनट न दिख इसके लिए आगे की तरफ चार आर्टिफिशियल घोडे की आकृति इस प्रकार लगाई गई थी मानो वह रथ जीप की वजह से नही घोड़ो की ही वजह से चल रही हो रंग बिरंगी लाइट और सुंदर मनमोहक डिजाइनदार नक्काशियों से रथ को सजाया गया था मानो वह रथ सचमुच का रथ हो, रंग बिरंगी लाइट की झिलमिलाती रोशनी में रथ सच मे बहुत खूबसूरत लग रहा था और उसी के बीचों बीच मे बैठा था सार्थक बिल्कुल किसी राजकुमार की तरह जो अभी अभी किसी युद्ध मे बिजय प्राप्त करके आ रहा हो

लाइट ब्राउन कलर की सुंदर सी शेरवानी जिसमे चारो तरफ नग और मोतियों से डिजायन तैयार किया था जो लाइट पड़ने पर एक अलग ही चकाचौध दिखा रहे थे

और झक सफेद पटियाला पैजामा हाथो में घड़ी और सिर पर एक ख़ूबसूरत सी कलगी दार पगड़ी जिसके बीचो बीच मे एक खूबसूरत सा ब्रोच लगा हुआ था जो सिल्वर कलर ने बड़े से खूबसूरत नग और नीले कलर के छोटे छोटे नगों से बना

हुआ था पैरो में राजस्थानी जूतियां पहने सार्थक रथ के बीचों बीच मे बैठा हुआ था उसके ओठो पर एक मुस्कुराहट थी और चेहरे पर शादी की खुशी साफ साफ महसूस हो रही थी गाजे बाजे के साथ सार्थक की बारात लावण्या के घर पर जाने के लिए निकल गयी सार्थक के दोस्त रिस्ते दार डीजे की धुन पर नाचते गाते लावण्या के घर पहुचे

जहा पर लावण्या के पापा अपने रिस्तेदारो के साथ पूरी बारात का स्वागत करने के लिए हाथ मे फूलो की माला लेकर तैयार खड़े थे ।

उन्होंने सबसे पहले सार्थक के पापा अवधेश जी और सार्थक के चाचा इंद्रेश जी स्वागत किया और फिर सार्थक के रिस्तेदारो का भी फूल माला पहना कर स्वागत किया ।

लावण्या के घर फूलो की लड़ियों और रंगीन झालरों से अच्छी तरह सजाया गया था जो बहुत खूबसूरत लग रहा था ।

दरवाजे पर बारात पहुचने के साथ साथ ही लावण्या को सार्थक का स्वागत करना था लावण्या को उसके कमरे से उसकी सहेलियों ने छुपा कर मुंडेर पर से चावल और गुलाब की पंखडियाँ दी जिसे उसने सार्थक के ऊपर फेकना था लावण्या दुल्हन बनी हुई अपने मेहदी लगे हाथो से पांच मुट्ठी सार्थक के ऊपर फेका

पहली मुट्ठी फेकते ही अनायास सार्थक की नजर मुंडेर की तरफ उठ गई जहा लावण्या को देख कर उसका दिल जोर से

धड़क उठा एक हल्की सी नजर लावण्या के चेहरे पर पड़ते ही सार्थक के तन मन मे एक अजीब सी सरसराहट हुई लावण्या को उसकी सहेलियों ने छुपा रखा था इसी लिए वह चाह कर भी अच्छे से नही देख पाया लेकिन उसके दिल मे एक मीठी मीठी सी उमंग उठने लगी ।

सार्थक को रथ से उतार कर द्वार पूजन के लिए बने हुए मंडप में बैठाया गया और फिर मंत्रोचार के साथ द्वारपूजन का कार्यक्रम हुआ

और फिर बरमाला के लिए सार्थक को पास में ही बने एक जयमाल स्टेज पर सजे हुए कुर्सी पर बैठा दिया गया

थोड़ी देर बाद लावण्या को उनकी सहेलिया लेकर आने लगी

लावण्या किसी छुई मुई सी सिमटी सकुचाती धीरे धीरे चलती हुई सार्थक के पास आ रही थी

सार्थक की नजर एक टक दुल्हन बनी लावण्या के चेहरे पर जम गई थी और जमे भी क्यो न लावण्या बला की खूबसूरत लग रही थी ।

शानदार लाल मखमली जोड़े में लिपटी हुई लावण्या के लहगे का खूबसूरत नग रोशनी में झिलमिला रहे थे हाथो में भरी हुई लाल चूडियों और कंगनों के बीच से झांकती मेहदी से रचे हुए गोरे गोरे हाथ, गले मे शानदार हार जिसने पूरे गले को मानो अपने आगोश में छुपा रखा हो और पैरों में चांदी की पायल जो लावण्या के हर कदम के साथ छनक रही रही थी बालो को बांध कर जुड़े की शक्ल दी गयी थी और उन्ही जुडो

में फसा था लहगे का दुपट्टा और लावण्या का चेहरा तो मानो पूर्णिमा के चाँद की तरह दमक रहा हो आंखों में काजल ओठो पर सुर्ख लाल लिपिस्टिक और चेहरे पर खूबसूरती से किया गया हल्का सा मेकअप से लावण्या का चेहरा और भी अच्छा और खूबसूरती से निखर गया था, नाक में बड़ी सी नथ जो लावण्या के ओठो और गालो को एक साथ चूम रही थी और उसी नथ के बीच से निकली हुई एक लड़ी लावण्या के कान के पीछे कही फसी हुई थी और कान में बड़े बड़े खूबसूरत झुमके और माथे पर लटकती मटकती मांग टीका मानो सार्थक के दिल मे तूफान मचा रहे थे आंखों में काजल को इस खूबसूरती के साथ डाला गया था कि लावण्या की आंखे मानो अभी बोल पड़ेगी

लावण्या दुल्हन के लिबास में मानो स्वर्ग से उतरी कोई अफसरा लग रही थी लावण्या का यह रूप देख कर सार्थक तो मानो बस लावण्या में खो सा गया वह एक टक लावण्या को निहार रहा था जो अभी कुछ घंटों बाद उसकी जीवन संगनी बन जाने वाली थी

लावण्या की सखियो ने लावण्या को स्टेज पर पहुचा दिया और फिर जयमाल की रस्म के लिए सार्थक और लावण्या खड़े हो गए

लावण्या ने अपना नजर उठा कर सार्थक को देखा

दोनो के दिलो में एक हलचल सी मच गई और उनकी सांसो की रफ्तार बढ़ गयी लावण्या की यह नजर सार्थक के सीधा

दिल मे उतरता हुआ सा लगा

लावण्या की सखियो ने एक बरमाला सार्थक को दिया

और फिर सार्थक के साथ हल्की सी चुहल बाजी करने लगी सार्थक और लावण्या उनकी चुहलबाजिया सुन कर मुस्कुरा रहे थे

दोनो ने आगे आ कर एक दूसरे को भर नजर देखा और फिर एक दूसरे के गले में बरमाला डाल दिया

पूरा प्रांगड़ तालियों से भर गया

उसके बाद लावण्या ने सजी सजाई आरती की थाल से सार्थक की आरती उतारी और सार्थक के कदमो में झुक गयी सार्थक का दिल किया कि लावण्या को उठा कर अपने सीने से लगा ले और बोल दे तुम्हारी जगह कदमो में नही मेरे दिल मे है लेकिन जो रीति रिवाज और रस्म है उसे तो मानना ही है उसने लावण्या के सर पर हाथ रख दिया और फिर दोनों स्टेज पर पड़े हुए शानदार सोफे नुमा कुर्शियों पर बैठ गए ।

सब एक एक करके आते और दूल्हा दुल्हन को अपना आशिर्बाद देते और फ़ोटो खिंचवाते और फिर दोनों को गिफ्ट भी देकर वापस जाते इस तरह के घंटो तक यह सिलसिला चलता रहा उसके बाद सभी खाना खाने के लिए चले गए

लावण्या और उसकी चंद सहेलियों और सार्थक भी अपने दोस्तो के साथ एक ही टेबल पर खाना खाने लगे खाने के दौरान भी हंसी मजाक और चुहल बाजियों का सिलसिला

नही थमा ।

खाना खाने के बाद हिन्दू धर्म के बिधि बिधान से शादी का कार्यक्रम होना था इसी लिए दोनों को थोड़ा देर आराम करने के भेज दिया गया

क्रमशः
 
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