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Guest
रजनी ने अपने पापा की ऐसी बुरी अवस्था देखी तो उसे बहुत जोर का झटका लगा और दिल मे एक हुक सी उठी , उसके दिल से एक कराह निकली वो कही कही न कही अपने पापा के इस अवस्था के लिए खुद को जिम्मेदार मान रही थी और ये सही भी था ।
जिसकी जवान बेटी किसी दूसरे के साथ चली जाय उसके दिल पर क्या गुजरती है उसका दुख वही समझ सकता है जिसके उपर बीतती है
लावण्या और रजनी अपने पापा के पास पहुचे
लावण्या ने अपने हाथों से अपने पापा के माथे को सहलाया और हल्के से बोला
पापा कैसे है आप
रजनी के पापा ने हल्के से अपनी आंखें खोली और लावण्या को देख कर उनकी आंखों में चमक आगयी
उन्होंने कपकपाते ओठो से कहा
लावण्या तू आगयी बेटे ,रजनी कहा है ? वो कैसी है? तुझे मिली कि नही ?
आप चिंता मत करे पापा दीदी ठीक है और अच्छी है आप कहते थे न कि मैं आपका बहादुर बेटा हूं तो आपके इस बहादुर बेटे के होते हुए आपको चिंता करने की कोई जरूरत नही है लेकिन ये क्या आप ने फिर लापरवाही करना शुरू कर दिया मेरे पीछे आप ने सायद अपनी सेहत का ध्यान नही रखा कितने कमजोर हो गए है - लावण्या ने तुनक कर शिकायत की मानो कोई छोटे बच्चे को समझ रहा है
जिसके दिल के दोनों टुकड़े दूर हो जाये उसको क्या अच्छा लगेगा मैं ठीक हु तू मेरी चिंता मत कर ये बता रजनी का कुछ पता चला, कहा है वो ?- पापा ने कहा
आपके सिरहाने देखिये लावण्या मुस्कुराती हुई बोली
लावण्या के पापा ने जल्दी से अपना सिर घूम कर पीछे देखा और रजनी को देखते ही खुशी से चहक उठे और झटपट उठने की कोशिश करने लगे
रजनी और लावण्या ने उनको सहारा देकर उठाया
और उठते ही उन्होंने रजनी को कस कर अपने सीने से चिपका लिया और किसी छोटे से बच्चे की तरह रोने लगे
रजनी भी मानो किसी अनाथ की तरह जिसे अभी अभी पता चला हो कि उसका परिवार है अपने पापा को लिपट कर रो रही थी दोनो को इस तरह रोते देख कर लावण्या के आंखों में आंसूओ का सैलाब सा उमड़ आया जो सारे बांध तोड़ कर आंखों को अलविदा कह कर लावण्या के गालो को भिगोने लगा
बाप बेटी का यह मिलन और रोने का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा मानो दोनो एक दूसरे से अलग ही नही होना चाहते हो
आखिर में लावण्या ने पापा को और रजनी को एक दूसरे से अलग किया
दीदी पापा की तबियत खराब हो जाएगी अब चुप हो जाओ और पापा आप भी चुप हो जाये अब तो दीदी आ गयी है ना अब क्यो रो रहे हो - लावण्या ने दोनों को समझाते हुए कहा
काफी समझाने पर दोनों ने एक दूसरे को छोड़ दिया लेकिन अब भी दोनो की आंखे बह रही थी और दोनों ने एक दूसरे के हाथों को थाम रखा था
रजनी तूने बहुत दुख दिया है मुझे , मैं तुझसे बहुत नाराज हु तू एक बार मुझसे कह कर तो देखती ऐसी कौन सी इच्छा है तेरी जो हमने पूरी नही की फिर तूने ऐसा क्यों किया? क्यो अपने पापा की मांन मर्यादा इज्जत सम्मान का ध्यान नही रहा तुझे? तू इतनी समझदार थी फिर कैसे हो गया ये सब - लावण्या के पापा की असली टीस अब निकली
रजनी क्या बोलती वो बस चुपचाप रोये जा रही थी उसे खुद बहुत ग्लानि हो रही थी और वो सर्मिन्दा थी वह बहुत बुरी तरह पछता रही थी
पापा जो हो गया उसे याद करके कोई फायदा नही अब दीदी आगयी है ना तो अब सब भूल जाइए और नए सिरे से जिंदगी शुरू कीजिए - लावण्या ने कहा
लावण्या बेटे ये इतना आसान नही है गाँव समाज और ये दुनिया बहुत जालिम है तुम दोनों मेरी बेटी हो मैं कितना भी चाह लू तुम लोगो से ज्यादा दिन नाराज नही हो सकता क्योंकि मैं तुम लोगो से प्यार करता हूँ मैं माफ कर दूंगा सब भूल जाऊंगा लेकिन कदम कदम पर अब रजनी को जो बातें सुननी पड़ेगी उसका कोई भी इलाज नही है वो रजनी के दिल पर और मेरे आत्मसम्मान पर किसी नस्तर की तरह बार बार चुभेंगे - रजनी के पापा ने दर्द और दुख से भर कर कहा
पापा दुनिया वालो या समाज वालो ने हमे उंगली पकड़ कर चलना नही सिखाया है आपने सिखाया है, अपने हाथों से इस समाज ने खाना नही खिलाया है आपने और मम्मी जी ने खिलाया है , हमारे सारे जिदो और हमारी सारी तकलीफों को दूर इस दुनिया ने नही किया है आपने किया है, खुद को कष्ट देकर हमे सूकून से इस दुनिया या इस समाज ने नही सुलाया है ये सब आपने और मम्मी जी ने किया है आप दोनों क्या सोचते है ये हमारे लिए मायने रखता है रही बात दुनिया की तो आप दोनों का साथ चाहिए बस आपकी बेटीया इतनी भी
कमजोर नही है कि इस दुनिया का सामना न कर पाए आप ने इस लायक तो कर ही दिया है कि किसी भी परिश्थिति का सामना हम करने में सक्ष्म है आप बिलकुल चिंता मत कीजिये - लावण्या ने कहा
जीती रहो मेरी बच्ची आज मुझे तुमपर गर्व है लावण्या मैं हमेशा सोचता था काश मेरे एक बेटा होता लेकिन नही मेरी बेटी लावण्या है तो मुझे किसी बेटे की कोई जरूरत नही है मुझे तुम पर गर्व है तुमने जिस साहस के साथ अकेले जा जकर अपनी बहन को ढूढ़ कर लाई हो इससे मुझे पूरा विश्वास हो गया कि मेरी बेटी कितनी समझदार और साहसी है
पापा आप भी बस अब रहने दीजिए मैने कुछ नही किया सब आप की ही सिखाई शिक्षा है - लावण्या अपनी तारीफ सुन कर झेप गयी और सरमा कर बोली
अच्छा अब ये सब छोड़िये आपने दवाई खाई की नही - लावण्या ने पूछा
मैं ठीक हु रजनी आ गयी न अब मैं ठीक हो जाऊंगा अब किसी दवाई की कोई जरुरत नही है- पापा ने कहा
ऐसे कैसे नही है, जब तक आप बिलकुल अच्छे नही हो जाते तब तक दवा खानी पड़ेगी लापरवाही बिल्कुल नही समझे- लावण्या ने घुड़की दी
रजनी समझा इसको बहुत जिद्दी हो जा रही है अपनी मनमानी करने लगी है हर वक्त मुझे डाटती रहती है - पापा ने
रजनी की तरफ देख कर कहा
पापा लावण्या सही कह रही है आप की तबियत ठीक नही है तो दवा तो खानी पड़ेगी जल्दी से ठीक हो जाइए फिर अभी आपको धूमधाम से लावण्या की शादी भी तो करनी है ऐसे तबियत खराब रहेगी तो कैसे चलेगा - रजनी ने पापा को समझते हुए कहा
क्या दीदी आप भी - लावण्या अपनी शादी की बात सुनकर सरमा गयी और भाग गई
अच्छा पापा आप आराम करो मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूँ रजनी ने कहा
और रजनी ने अपने पापा को आराम से लिटा दिया और लावण्या के पीछे लपकी
लावण्या रजनी ने जाती हुई लावण्या को पुकारा
लावण्या रुकी और घूमी
जी दीदी
रजनी दौड़ कर उसके पास गई और जोर से गले लगा लिया उसकी आंखें फिर से भीग गयी
जिसकी जवान बेटी किसी दूसरे के साथ चली जाय उसके दिल पर क्या गुजरती है उसका दुख वही समझ सकता है जिसके उपर बीतती है
लावण्या और रजनी अपने पापा के पास पहुचे
लावण्या ने अपने हाथों से अपने पापा के माथे को सहलाया और हल्के से बोला
पापा कैसे है आप
रजनी के पापा ने हल्के से अपनी आंखें खोली और लावण्या को देख कर उनकी आंखों में चमक आगयी
उन्होंने कपकपाते ओठो से कहा
लावण्या तू आगयी बेटे ,रजनी कहा है ? वो कैसी है? तुझे मिली कि नही ?
आप चिंता मत करे पापा दीदी ठीक है और अच्छी है आप कहते थे न कि मैं आपका बहादुर बेटा हूं तो आपके इस बहादुर बेटे के होते हुए आपको चिंता करने की कोई जरूरत नही है लेकिन ये क्या आप ने फिर लापरवाही करना शुरू कर दिया मेरे पीछे आप ने सायद अपनी सेहत का ध्यान नही रखा कितने कमजोर हो गए है - लावण्या ने तुनक कर शिकायत की मानो कोई छोटे बच्चे को समझ रहा है
जिसके दिल के दोनों टुकड़े दूर हो जाये उसको क्या अच्छा लगेगा मैं ठीक हु तू मेरी चिंता मत कर ये बता रजनी का कुछ पता चला, कहा है वो ?- पापा ने कहा
आपके सिरहाने देखिये लावण्या मुस्कुराती हुई बोली
लावण्या के पापा ने जल्दी से अपना सिर घूम कर पीछे देखा और रजनी को देखते ही खुशी से चहक उठे और झटपट उठने की कोशिश करने लगे
रजनी और लावण्या ने उनको सहारा देकर उठाया
और उठते ही उन्होंने रजनी को कस कर अपने सीने से चिपका लिया और किसी छोटे से बच्चे की तरह रोने लगे
रजनी भी मानो किसी अनाथ की तरह जिसे अभी अभी पता चला हो कि उसका परिवार है अपने पापा को लिपट कर रो रही थी दोनो को इस तरह रोते देख कर लावण्या के आंखों में आंसूओ का सैलाब सा उमड़ आया जो सारे बांध तोड़ कर आंखों को अलविदा कह कर लावण्या के गालो को भिगोने लगा
बाप बेटी का यह मिलन और रोने का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा मानो दोनो एक दूसरे से अलग ही नही होना चाहते हो
आखिर में लावण्या ने पापा को और रजनी को एक दूसरे से अलग किया
दीदी पापा की तबियत खराब हो जाएगी अब चुप हो जाओ और पापा आप भी चुप हो जाये अब तो दीदी आ गयी है ना अब क्यो रो रहे हो - लावण्या ने दोनों को समझाते हुए कहा
काफी समझाने पर दोनों ने एक दूसरे को छोड़ दिया लेकिन अब भी दोनो की आंखे बह रही थी और दोनों ने एक दूसरे के हाथों को थाम रखा था
रजनी तूने बहुत दुख दिया है मुझे , मैं तुझसे बहुत नाराज हु तू एक बार मुझसे कह कर तो देखती ऐसी कौन सी इच्छा है तेरी जो हमने पूरी नही की फिर तूने ऐसा क्यों किया? क्यो अपने पापा की मांन मर्यादा इज्जत सम्मान का ध्यान नही रहा तुझे? तू इतनी समझदार थी फिर कैसे हो गया ये सब - लावण्या के पापा की असली टीस अब निकली
रजनी क्या बोलती वो बस चुपचाप रोये जा रही थी उसे खुद बहुत ग्लानि हो रही थी और वो सर्मिन्दा थी वह बहुत बुरी तरह पछता रही थी
पापा जो हो गया उसे याद करके कोई फायदा नही अब दीदी आगयी है ना तो अब सब भूल जाइए और नए सिरे से जिंदगी शुरू कीजिए - लावण्या ने कहा
लावण्या बेटे ये इतना आसान नही है गाँव समाज और ये दुनिया बहुत जालिम है तुम दोनों मेरी बेटी हो मैं कितना भी चाह लू तुम लोगो से ज्यादा दिन नाराज नही हो सकता क्योंकि मैं तुम लोगो से प्यार करता हूँ मैं माफ कर दूंगा सब भूल जाऊंगा लेकिन कदम कदम पर अब रजनी को जो बातें सुननी पड़ेगी उसका कोई भी इलाज नही है वो रजनी के दिल पर और मेरे आत्मसम्मान पर किसी नस्तर की तरह बार बार चुभेंगे - रजनी के पापा ने दर्द और दुख से भर कर कहा
पापा दुनिया वालो या समाज वालो ने हमे उंगली पकड़ कर चलना नही सिखाया है आपने सिखाया है, अपने हाथों से इस समाज ने खाना नही खिलाया है आपने और मम्मी जी ने खिलाया है , हमारे सारे जिदो और हमारी सारी तकलीफों को दूर इस दुनिया ने नही किया है आपने किया है, खुद को कष्ट देकर हमे सूकून से इस दुनिया या इस समाज ने नही सुलाया है ये सब आपने और मम्मी जी ने किया है आप दोनों क्या सोचते है ये हमारे लिए मायने रखता है रही बात दुनिया की तो आप दोनों का साथ चाहिए बस आपकी बेटीया इतनी भी
कमजोर नही है कि इस दुनिया का सामना न कर पाए आप ने इस लायक तो कर ही दिया है कि किसी भी परिश्थिति का सामना हम करने में सक्ष्म है आप बिलकुल चिंता मत कीजिये - लावण्या ने कहा
जीती रहो मेरी बच्ची आज मुझे तुमपर गर्व है लावण्या मैं हमेशा सोचता था काश मेरे एक बेटा होता लेकिन नही मेरी बेटी लावण्या है तो मुझे किसी बेटे की कोई जरूरत नही है मुझे तुम पर गर्व है तुमने जिस साहस के साथ अकेले जा जकर अपनी बहन को ढूढ़ कर लाई हो इससे मुझे पूरा विश्वास हो गया कि मेरी बेटी कितनी समझदार और साहसी है
पापा आप भी बस अब रहने दीजिए मैने कुछ नही किया सब आप की ही सिखाई शिक्षा है - लावण्या अपनी तारीफ सुन कर झेप गयी और सरमा कर बोली
अच्छा अब ये सब छोड़िये आपने दवाई खाई की नही - लावण्या ने पूछा
मैं ठीक हु रजनी आ गयी न अब मैं ठीक हो जाऊंगा अब किसी दवाई की कोई जरुरत नही है- पापा ने कहा
ऐसे कैसे नही है, जब तक आप बिलकुल अच्छे नही हो जाते तब तक दवा खानी पड़ेगी लापरवाही बिल्कुल नही समझे- लावण्या ने घुड़की दी
रजनी समझा इसको बहुत जिद्दी हो जा रही है अपनी मनमानी करने लगी है हर वक्त मुझे डाटती रहती है - पापा ने
रजनी की तरफ देख कर कहा
पापा लावण्या सही कह रही है आप की तबियत ठीक नही है तो दवा तो खानी पड़ेगी जल्दी से ठीक हो जाइए फिर अभी आपको धूमधाम से लावण्या की शादी भी तो करनी है ऐसे तबियत खराब रहेगी तो कैसे चलेगा - रजनी ने पापा को समझते हुए कहा
क्या दीदी आप भी - लावण्या अपनी शादी की बात सुनकर सरमा गयी और भाग गई
अच्छा पापा आप आराम करो मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूँ रजनी ने कहा
और रजनी ने अपने पापा को आराम से लिटा दिया और लावण्या के पीछे लपकी
लावण्या रजनी ने जाती हुई लावण्या को पुकारा
लावण्या रुकी और घूमी
जी दीदी
रजनी दौड़ कर उसके पास गई और जोर से गले लगा लिया उसकी आंखें फिर से भीग गयी