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अजनबी हमसफर

सार्थक एक जगह बैठ कर के उसे कूदते और चहकते हुए देख रहा था लावण्या सच में बहुत खुश थी

वह आती हुई लहरों को अपने पैरों से उछाल रही थी और खिलखिला कर हंस पड़ती

अचानक से जैसे लावण्या को सार्थक का होश आया तो उसने नजर घुमाकर देखा सार्थक वहीं पर बैठकर अकेले लावण्या की सारी हरकतों को देख रहा था और मुस्कुरा रहा था

आओ ना सार्थक आओ देखो कितना मजा आ रहा है लावण्या ने सार्थक को अपने पास बुलाया

सार्थक उठा और मुस्कुराते हुए लावण्या के पास आया

थैंक यू सो मच सार्थक थैंक यू मुझे यहां लाने के लिए यहां इतना खूबसूरत लग रहा है की मेरा दिल खुश हो गया ऐसा लग रहा है मैं किसी दूसरी दुनिया मे पहुच गयी हूँ ,देखो ऐसा लग रहा है चांद कितना बड़ा है और यह पानी इतना ठंडा और खूबसूरत लग रहा है जिधर भी नजर जा रही सिर्फ पानी और पानी दिख रहा है और यह ठंडी ठंडी हवा ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पूरे मन को इसने ठंडा कर दिया है और अंदर तक सकून मिल गया हो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ऐसा मन कर रहा है कि यहीं पर बस जाऊं। लावण्या खुशी से चहकती हुई बोली

सार्थक खिलखिला कर हंस पड़ा

बहुत देर तक दोनों ऐसे ही मस्ती करते रहे

उसके बाद सार्थक ने कहा और चलो लावण्या आइसक्रीम खाते है

लावण्या और सार्थक में आइसक्रीम ली और उसे खाने लगे

तभी दोनों की नजर सामने खड़े एक कपल पर गई वह शायद अभी अभी शादी करके गोवा घूमने आए हैं दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार से आइसक्रीम खिला रहे थे और दोनों एक दूसरे के आंखों में प्यार से झांक रहे थे पूरी दीन दुनिया से बेखबर बिना किसी की परवाह किए दोनों एक दूसरे में

खोए हुए थे।

सार्थक ने लावण्या को देखा और लावण्या ने सार्थक को दोनों के गालों पर एक लाली फैल गई

न जाने कैसे सार्थक की हिम्मत हो गई उसने अपनी आइसक्रीम लावण्या की तरफ आगे बढ़ाई पहले तो लावण्या चौक गई लेकिन फिर सार्थक का इरादा समझकर उसने सार्थक की आइसक्रीम से एक बाइट ले ली और मुस्कुराने लगी ।

सार्थक को मानो मुंह मांगी मुराद मिल गई हो उसके दिल में शायद ही कभी इतनी खुशी महसूस हुई हो

और लावण्या उसने तो सर्म से अपनी पलके ही झुका ली उसका पूरा गाल शर्म से गुलाबी हो गया था।

बीच पर घूमते घूमते कब दोनों के हाथ एक दूसरे के हाथ में आ गए दोनों को भी पता नहीं चला दोनों हाथों में हाथ डाले बहुत देर तक घूमते रहे और फिर वापस होटल आने के लिए उन्होंने कैब बुक किया

दोनो बहुत खुश थे और सारे गम सारी परेशानिया भूल चुके थे थैंक यू सो मच सार्थक मुझे बहुत मजा आया शायद ही आज की यह शाम मैं कभी भूल पाउ । लावण्या ने सार्थक से कहा

मुझे भी बहुत मजा आया वैसे तो मैं पहले भी बीच पर आ चुका हूं लेकिन आज की फीलिंग मैं बता नहीं कर सकता थैंक यू सो मच मेरी बात मानने के लिए लावण्या और मेरे

साथ आने के लिए ।सार्थक ने कहा।

दोनो होटल वापस आने लगे अभी भी सार्थक ने लावन्या का हाथ थाम रखा था मानो कभी भी नही छोड़ेगा ।

रजनी ने चुपके से एक पेन और एक पेपर लाकर के लक्ष्य को दे दिया लक्ष्य ने उस पर सार्थक का नंबर लिखा और और रजनी को अपने पास बुलाया उससे बातें करने का बहाना करते हुए सार्थक में चुपचाप रजनी को सार्थक का नंबर दे दिया और बोला

रजनी इस नंबर पर फोन कर लेना यह मेरे दोस्त का नंबर है जिसके साथ लावण्या हैं इसपर तुम्हारी बात लावण्या से हो जाएगी क्योंकि मेरे पास लावण्या का नंबर नहीं है इसीलिए मैं अपने दोस्त का नंबर दे रहा हूँ ।

अब मैं चलता हूं बहुत देर से आया हूं मैं क्योंकि जिसके साथ आया हूं उसी के साथ बाहर जाना है

लक्ष्य उठ कर के वापस से राहुल के पास आया वह मुंह लटकाए बैठा हुआ था शायद सारे पैसे हार चुका था ।

क्या हुआ राहुल लक्ष्य ने राहुल को उदास देख करके पूछा

कुछ नहीं मेरी जान किस्मत सोई हुई है चलो एक एक ड्रिंक करते हैं फिर चलते हैं राहुल ने कहा

मैं अभी अभी करके आई हूं राहुल और मुझे कुछ अच्छा सा नहीं लग रहा है चलो ऊपर चलते हैं वहां के माहौल में थोड़ा सा चैन आ जाएगा वैसे भी यहां पर अब कोई फायदा नहीं है

।लक्ष्य ने उदास होकर कहा

अरे अभी तो हमने आपसे बातें की ही नहीं राहुल ने लक्ष्य के कमर में हाथ डालते हुए कहा

राहुल मैं कहीं भागी थोड़ी ना जा रही हूं चलो एक काम करते हैं हम दोनों उपर चलते हैं और थोड़ी देर डांस करते हैं

तुम मेरे साथ डांस करोगी राहुल लक्ष्य के साथ डांस करने की सोच कर के ही रोमांचित हो रहा था

हां क्यों नहीं अब चलोगे तभी तो ,कही मेरे हस्बैंड वापस आ गए तो सब चौपट हो जाएगा

राहुल ने लक्ष्य की कमर में हाथ डाल दिया और चलने लगा लक्ष्य को अब इतना तो बर्दाश्त करना ही था उसने भी राहुल को मना नहीं किया

दोनों ऊपर आ गए लक्ष्य ने चारों तरफ नजर डाली लेकिन शशांक का कुछ भी पता नहीं था

साला न जाने कब से भरा बैठा था लड़की मिली नहीं कि साला मुझे छोड़ कर भाग गया । लक्ष्य मन ही मन बड़बड़ाया

क्या हुआ डार्लिंग कुछ कहा क्या तुमने लक्ष्य को बड़बड़ाते हुए सुनकर के राहुल ने पूछा

नहीं नहीं मैंने कुछ नहीं कहा ।लक्ष्य की नजरें शशांक को खोजते हुए बोली

हे कृष्ण कन्हैया मुरली वाले कहीं ऐसा ना हो कि मैं पकड़ा जाऊं मेरी इज्जत तू ही बचाना जैसे द्रोपदी की लाज बचाई थी लक्ष्य मन ही मन प्रार्थना कर रहा था उसे डर था कहीं

बार-बार उसके बदन को छूकर कर के राहुल को एहसास ना हो जाए कि वह लड़की नहीं लड़का है और फिर उसका क्या हाल होता।

दोनों जबरदस्ती डांस कर रहे थे राहुल को कहा डांस करना था उसे तो बस लक्ष्य के साथ चिपकना था और लक्ष्य अपने आप को राहुल से किसी तरीके से बचा रहा था जिससे उसे उसकी असलियत का एहसास ना हो

लक्षिका तुम इतना क्यों झिझक रही हो आओ ना जिंदगी है खुलकर इंजॉय करो एक बार तुम मेरा साथ दे करके देखो देखना तुम्हें बहुत मजा आएगा
 
लक्ष्य के होठों पर एक एक मुस्कुराहट आई जो की लक्ष्य ने बड़ी मुश्किल से जबरदस्ती लाई थी

लक्ष्य मन ही मन से शशांक के आने की दुआएं कर रहा था और शायद भगवान ने उसकी दुआ सुन ली शशांक और वह लड़की सामने से आते हुए दिखे

लक्ष्य ने ना आव देखा न ताव उसने राहुल को धक्का दिया और फ्लोर से बाहर आ गया

राहुल को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जब उसने शशांक और नैंसी को आते हुए देखा तो सारा माजरा समझ गया वह उठा और धीरे-धीरे उन दोनों की तरफ चल पड़ा

लक्ष्य सीधा शशांक के पास जाकर के चिपक गया और बोला कहां ले आए हो डियर मैं बहुत बोर हो रही हूं प्लीज चलो यहां से मुझे अच्छा नहीं लग रहा है

क्यों इतना अच्छा तो माहौल है देखो सब कितना इंजॉय कर रहे हैं तुम भी करो शशांक लक्ष्य की हालत देख करके मुस्कुराते हुए बोला उसे लक्ष्य को सताने में बड़ा मजा आ रहा था

लक्ष्य ने उसे खा जाने वाली नजरों से घूरा और फिर बोला चलो ना शशांक यहां से बाहर चलते हैं थोड़ा सा खुले माहौल में इस में मेरा दम घुट रहा है

लक्ष्य को अपनी तरफ घूरता हुआ पाकर शशांक समझ गया की लक्ष्य को गुस्सा आ रहा है ।

ओके ओके चलता हूं।

क्या हुआ पता चल गया क्या? शशांक ने लक्ष्य को फुसफुसा कर कहा

बाहर निकलो फिर बताती हूं । लक्ष्य ने कहा

अभी दोनों बाहर निकलने ही जा रहे थे तभी न जाने कहां से दो लोगों ने आकर के लक्ष्य और शशांक का रास्ता रोक लिया

क्या यही थी उसमें से एक लड़का बोला

जी यही थी उस दूसरे आदमी ने लक्ष्य की तरफ उंगली करके इशारा किया और शायद इसके साथ यह लड़का आया है ।

दोनो चौक गए और उनके चेहरे की हवाइयां उड़ गई ।दोनों की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था ,दोनो ने एक दूसरे को देखा मानो कह रहे हो कि खेल खत्म ।

जी बताइए आप लोग कौन हैं और इस तरह से हमारा रास्ता रोकने का क्या मतलब है ।शशांक ने थोड़ी सी अकड़ दिखाई

अभी आप नीचे बेसमेंट में गई थी उसमें से एक शख्स ने लक्ष्य से पूछा

जी हां गई थी तो क्या हुआ बेसमेंट में जाना कोई गुनाह है क्या लक्ष्य ने भी हल्का सा गुस्सा दिखाया

नही गुनाह नही है मैम बात यह है कि वहां पर आपने ड्रिंक लिया था लेकिन शायद आप जल्दबाजी में उसका पेमेंट करना भूल गई इसी वजह से हमने आपको रोका है । इसके लिए मैं आपसे बहुत माफी चाहता हूं लेकिन प्लीज आप ड्यूस क्लियर कर दीजिए उसके बाद ही आप बाहर जा सकती हैं नहीं तो उसका पेमेंट हमारी सैलरी से कटेगा उस शख्स ने बहुत ही सभ्यता से कहा

पूरी बात का मतलब समझ कर के लक्ष्य और शशांक ने एक गहरी सांस ली मानो बहुत दूर से रेस लगा कर आए हो।

ओह आई एम सो सो सॉरी मुझे बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहा

आई एम सॉरी लक्ष्य वास्तव में शर्मिंदा था जल्दबाजी में उसने पेमेंट नहीं किया या यूं कहिए उसने सोचा था कि इसका पेमेंट राहुल करेगा लेकिन शायद राहुल ने भी नहीं किया

कोई बात नहीं मैडम कभी-कभी हो जाता है यह रहा आपका बिल आप इसे क्लियर कर दीजिए और फिर आप जा सकती हैं।

शशांक ने बिल हाथ में लिया और उसका पेमेंट किया इसके अलावा उसने ₹100 ऊपर से उन दोनों को टिप दे दिया

थैंक यू सो मच सर थैंक्स मैंम आई होप कि आपने हमारे क्लब को इंजॉय किया होगा और दोबारा से हमारे क्लब में आएंगे उन दोनों के ओठो पर एक प्रोफेशनल मुस्कुराहट आ गई

शशांक और लक्ष्य दोनों बाहर आ गए ,वहां पर उन्होंने कैब बुक किया और सीधा होटल में पहुंचे ,जहां पर लावण्या और सार्थक पहले ही पहुंच चुके थे और इन दोनों का इंतजार कर रहे थे।

कमरे में पहुंचकर के लक्ष्य बिस्तर पर धड़ाम से गिरा और फैल गया मानो बहुत बड़ा जंग जीतकर आ रहा हो शशांक सामने रखे सोफे पर बैठ गया

दोनों को सही सलामत देखकर के सार्थक और लावण्या खुश हो गए

भाई क्या हुआ कुछ बताएगा रजनी का कुछ पता चला कि नहीं चला । शशांक ने पूछा

साले तू तो बोल मत उस राहुल के पास मुझे अकेला छोड़ करके भाग गया तुझे पता है मुझे क्या-क्या सहना पड़ा वह साला ठरकी पता नहीं कहां-कहां हाथ लगा रहा था वह तो सुक्र मना कि मेरे मां ने कुछ अच्छे कर्म किए रहे होंगे जिससे मैं सही सलामत वापस आ गया वरना किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाता । शशांक के बोलते ही लक्ष्य भड़क गया और उठ कर खरी-खोटी सुनाने लगा

क्या हुआ लक्ष्य तू ऐसे क्यों बोल रहा कोई प्रॉब्लम हो गई थी क्या ? सार्थक बोला

प्रॉब्लम भाई सार्थक पूछ मत यह रजिया गुंडों में फस गई थी बस तुम लोगों की दुआ से सही सलामत वापस आ गया वरना कहीं का भी नहीं रहता और यह साला अंडरटेकर लड़की मिलते ही ऐसे गायब हो गया जैसे गधे के सिर से सींग जाने कितने दिनों का भरा बैठा था लड़की देखते ही इतने दिन की दोस्ती भूल गया और मुझ मासूम को उस ठरकी और कमीने राहुल के पास छोड़ करके गायब हो गया मैं तुम्हें क्या बताऊं सार्थक उसने तुम्हारे भाई के साथ क्या-क्या किया कहां-कहां हाथ लगाया बस यूं समझ लो कि तुम्हारा दोस्त अब नापाक हो गया है उसे इस बेदर्द दुनिया ने कहीं का भी नहीं छोड़ा ।लक्ष्य ने ऐसे कहा मानो उसके साथ बहुत थी बुरी घटना हो गई हो

अबे साले नौटंकी छोड़ और साफ-साफ बता रजनी का कुछ पता चला की नही। शशांक ने कहा

ऐसे कैसे पता नही चलेगा तुझे पता है ना जब मैं कोई काम हाथ में लेता हूं तो पूरा करके दम लेता हूं रजनी का पता भी चला और उस तक लावण्या का मैसेज भी पहुंच गया लक्ष्य ने गर्दन अकडा कर कहा

क्या सच में तुम दीदी से मिले हो लक्ष्य तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो ना, कैसी है मेरी दीदी ? ठीक तो है ना? लावण्या रजनी से मिलने की बात सुनकर के बहुत खुश हो गई

हां मैं सच कह रहा हूं लावण्या मैं तुम्हारी रजनी दीदी से मिला और उनको मैंने सार्थक का नंबर दे दिया साथ ही साथ मैंने उनको यह भी बता दिया कि तुम उसे ढूढते हुए आयी हो और बहुत परेशान हो ,बात करना चाहती हो । और यह सब करते हुए मुझे कितने पापड़ बेलने पड़े क्या-क्या सहना पड़ा यह मैं ही जान सकता हूं। लक्ष्य ने कहा

दीदी ठीक तो है ना ? लावण्या ने पूछा

वैसे तो ठीक हैं लेकिन बहुत उदास है शायद किसी मजबूरी में वहां पर काम कर रही हैं ,अब मुझे नहीं पता है कि उनकी क्या मजबूरी है लेकिन उनको देखकर लग रहा था कि उन्हें कोई ना कोई प्रॉब्लम जरूर है। लक्ष्य ने कहा

क्यों आपको ऐसा क्यों लगा? लावण्या ने पूछा

क्योंकि मुझसे बात करते हुए बहुत डरी हुई और घबराई हुई थी और बार-बार चोर निगाहों से इधर उधर देख रही थी मानो

उन पर कोई नजर रख रहा हो इसके अलावा वह बार-बार अपने कपड़ों को एडजस्ट कर रही थी जैसे इतने छोटे छोटे कपड़े पहनने की उनको आदत ना हो और वो बहुत अनकफर्टेबल हो और वह सब जबरदस्ती उनको करना पड़ रहा था । बाकी कोई दिक्कत नहीं है वे ठीक है सही सलामत है तुम चिंता मत करो। लक्ष्य ने कहा

थैंक यू सो मच लक्ष्य तुम्हें नहीं पता तुमने मेरा कितना बड़ा काम कर दिया अगर तुम ना होते तो मेरा यह काम हो ही नहीं पाता लावण्या ने हाथ जोड़कर कहा

लावण्या मेरे दोस्त ने पहली बार मुझसे कुछ करने के लिए कहा था ऐसे कैसे नहीं करता , मुझे चाहे जो कुछ भी करना पड़ता लेकिन उसका काम मैं जरूर से जरूर करता क्योंकि यह मेरा दोस्त नहीं मेरा भाई है मेरी जान है मेरे जिगर का टुकड़ा है इसके लिए कुछ भी कर सकता हूँ , यह तो सिर्फ लड़की बनना था अगर यह मेरी जान भी मांग ले तो इसके लिए हंसते-हंसते जान भी दे दूंगा ।लक्ष्य ने कहा

लक्ष्य की बातें सुनकर के सार्थक बहुत इमोशनल हो गया वह भाग कर आया और लक्ष्य को गले लगा लिया उसकी आंखों से दो बूंद आंसू के बह निकले ।

लक्ष्य ने उसकी पीठ थपथपाई और उसका मूड़ सही करने के लिए बोला साले जिसके लिए मैं तुम दोनों को अकेला छोड़ कर गया वह काम तुमने किया कि नहीं किया, तुम लोगों का कार्यक्रम कुछ आगे बढ़ा कि थैंकयु सार्थक जी थैंक्यू

लावण्या जी ही चल रहा है तुम लोगों का । लक्ष्य ने सार्थक के कान में फुसफुसा कर कहा

लक्ष्य की बातें सुनकर के सार्थक के चेहरे पर लाली दौड़ गई

वह सरमा गया और मुस्कुराने लगा।

उसको और लक्ष्य को इस तरह आंखों ही आंखों में बातें करते देख करके लावण्या भी समझ गई जरूर से जरूर उसी के बारे में बात हो रही है और यह सोच कर के ही वह भी मुस्कुराने लगी वह समझ गयी कि लक्ष्य सार्थक के मजे ले रहा है ।

चारों बहुत खुश थे क्योंकि रजनी का पता चल गया था और लावण्या भी बहुत खुश थी आज उसके चेहरे को देख कर लग रहा था जैसे उसे कोई गम और कोई परेशानी ना हो असल मायनों में वह आज बिल्कुल किसी आजाद पंछी की तरह चहचहा रही थी।

चारों ने एक साथ खाना खाया और फिर अपने अपने कमरों में सोने के लिए चले गए।

अगले दिन सुबह करीब 11:00 बजे के करीब सार्थक के नंबर पर किसी अननोन नंबर से फोन आया

जैसा कि स्पेक्टेड था सार्थक को पता चल गया की हो ना हो यह रजनी का फोन है।

हेलो रजनी जी बात कर रही है क्या ? सार्थक ने छूटते ही कहा

जी मैं रजनी बोल रही थी लावण्या से बात हो सकती है क्या? रजनी ने कहा

बिल्कुल अभी करवाता हूं बस 2 मिनट होल्ड कीजिए सार्थक ने कहा और जल्दी से कमरे से बाहर निकला और लॉबी में दौड़ता हुआ ।लावण्या के कमरे की तरफ भागा

लावण्या के कमरे के पास जाकर कि उसने लावण्या को पुकारा और साथ ही साथ कमरे की घंटी बजाई

लावण्या अभी तुरंत नहा करके बाथरूम से बाहर निकली हुई थी और अपने बाल सुखा रही थी दरवाजे की घंटी सुनकर के वह चौक गई और उसने आकर के दरवाजा खोला सामने सार्थक को खड़ा हुआ देखकर के पास चौक गई ।

सार्थक बिना किसी औपचारिकता के सीधा लावण्या के कमरे में घुस गया और बोला

लावण्या लो तुम्हारी रजनी दीदी का फोन है तुमसे बात करना चाहती हैं लाइन पर हैं बात करो

लावण्या ने झपट कर फोन पकड़ा और बोली

हेलो दीदी मैं लावण्या बोल रही हूं उसकी आवाज में एक अजीब सी बेचैनी और उतावलापन था

लावण्या सामने से सिर्फ इतनी ही आवाज आई और साथ-साथ जोर से सिसकने की भी आवाज आई

क्या हुआ दीदी आप रो क्यों रही हैं ? आप ठीक तो है ना ? रजनी को रोते हुई सुनकर के लावण्या ने घबराकर पूछा

हां मैं ठीक हूं तू बता तू कैसी है ? और घर पर सब कैसे हैं?

मैं बिल्कुल ठीक हूं और घर पर भी सब ठीक ही है ।आप कहां है? दीदी हमने आपको कितना ढूंढा लेकिन आपका कुछ भी नहीं पता चला । आपके लिए सब बहुत परेशान है और पापा तो दिन रात आपका ही नाम लेते रहते हैं आपको तो पता ही है पापा आपसे कितना प्यार करते हैं आप चली आई और इसी गम में पापा की तबीयत खराब हो गई वह आपको बहुत याद करते हैं दीदी आप जहां कहीं पर भी हैं जल्दी से जल्दी घर चलने की तैयारी कर लीजिए पापा की स्थिति ठीक नहीं है वह बस आपको देखना चाहते हैं और आप से मिलने की जिद किए बैठे हैं।लावण्या की आंखों से आंसू की धारा फूट पड़ी

किस मुंह से जाऊं लावण्या, जो काम मैंने किया है उसके बाद मुझे पापा के सामने जाने की हिम्मत नहीं हो रही है मैंने उनके साथ ठीक नहीं किया मैं प्यार में अंधी हो गई थी और मैंने यह गलत कदम उठा लिया मैंने पापा को बहुत दुख दिया है उनकी इज्जत को मैंने मिट्टी में मिला दिया अब मैं उनके सामने कभी भी नहीं जाऊंगी भले ही मर जाऊं ।रजनी रोती हुई बोली

यह आप कैसी पागलो वाली बात कर रही है दीदी वह हमारे मम्मी पापा है हमें प्यार करते हैं। इतनी समझदार होकर के भी ऐसी बेवकूफ वाली बातें आपको शोभा नहीं देती है जो हो गया सो हो गया वह एक बुरा वक्त था जो गुजर गया

आपने बहुत सह लिया और मम्मी पापा ने बहुत सह लिया। आपको पता है उन्होंने आपको ढूंढने के लिए मुझे एक अनजान शहर और अनजान लोगों में अकेले भेज दिया तो सोचिए कितनी तड़प होगी उनके दिल में जिन्होंने मेरी परवाह नहीं की और आप को खोजने के लिए उन्होंने भेज दिया और आप ऐसी बातें कर रही है ।लावण्या ने रजनी को समझाया

लेकिन गाव वाले और पड़ोसी वह क्या कहेंगे मैं कैसे उन सब को फेस कर पाऊंगी। रजनी ने कहा
 
आप उनके बारे में क्यो सोच रही हैं ? पापा मम्मी के बारे में सोचिए ना, मेरे बारे में सोचिए ना , आपके बिना हमारा क्या हाल है इसके बारे में सोचिए । आप कहां मिलोगे मुझे ,आपसे मिल कर के बात करना है, मैं आपको सब समझाती हूं मैं आपके क्लब में आती हूं अभी के अभी । लावण्या ने कहा

नहीं नहीं तुम यहां पर मत आओ लावण्या यहा बहुत ही बुरे बुरे लोग हैं और यहां का माहौल भी तुम्हारे लायक नहीं है । रजनी ने घबरा कर कहा

तो बताइए आप, कहां मिलूं आपसे, मुझे आपसे मिलना है अभी और इसी वक्त ,मैं तुम्हें बहुत मिस कर रही हूं दीदी प्लीज । लावण्या ने रोते हुए रजनी से कहा

ठीक है 1 घंटे बाद मुझे तुम क्लब के बाहर मिलना मैं वही तुम्हें मिल जाऊंगी। रजनी ने कहा

ठीक है दीदी मैं अभी आती हूं मेरा नंबर नोट कर लीजिए

अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे फोन कर लीजिएगा लावण्या ने कहा और उसने रजनी को अपना नंबर लिखवा दिया

ठीक है मैं अभी आती हूं अपना ध्यान रखना रजनी ने कहा और फोन रख दिया

लावण्या ने फोन रखा न जाने उसे क्या सूझा वह दौड़ कर गई और सार्थक से लिपट गई और फफक कर रोने लगी

पहले तो सार्थक घबरा गया लेकिन जब उसे स्थिति समझ में आई तो उसने लावण्या को अपने बाहो में समेट लिया और उसके बालों को हल्के हल्के सहलाने लगा और पीठ पर हल्की हल्की थपकी देकर के चुप करवाने लगा

जी भर कर रो लेने के बाद लावण्या को जैसे होश आया हो वह सार्थक से अलग हुई । इस तरह सार्थक से लिपट जाने के लिए वह शर्मिंदा थी

आई एम सॉरी सार्थक मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई ।लावण्या झेंपते हुए बोली

कोई बात नहीं लावण्या मैं समझ सकता हूं तुम घबराओ मत भगवान ने चाहा तो सब ठीक हो जाएगा सार्थक ने लावण्या को तसल्ली दे

तुम मेरी जिंदगी में किसी फरिश्ते की तरह आए हो मैं बता नहीं सकती हूं कि तुमने मुझे और मेरे परिवार को कितनी बड़ी खुशी से रूबरू करवाया है अगर दीदी नहीं मिलती तो मेरे पापा नहीं बचते और मेरे पापा नहीं होते तो फिर न जाने मेरी मम्मी और मेरा क्या होता मैं अपनी पूरी जिंदगी में तुम्हें

कभी नहीं भूलूंगी ।मैं यह कभी नहीं भूलूंगी कि गोवा में मुझे तीन फरिश्ते मिले थे जिन्होंने मेरे लिए मेरे घर वालों के लिए क्या-क्या किया है । लावण्या की आंखों में अभी भी आंसू झिलमिला रहे थे

ऐसा कुछ नहीं है लावण्या बस हमने आपकी थोड़ी सी हेल्प की है ।यह सब मत सोचो और घबराओ मत तुम्हारे पापा को कुछ नहीं होगा वह जल्दी से जल्दी ठीक हो जाएंगे अब देर मत करो जल्दी से तैयार हो जाओ 1 घंटे में रजनी के पास पहुंचना है सार्थक ने कहा

अचानक से जैसे सार्थक ने लावण्या को पहली बार देखा हो वह लावण्या को गौर से देखने लगा

क्या हुआ सार्थक क्या देख रहे हो सार्थक को अपनी तरफ इस तरह से देखता हुआ पा करके लावण्या ने कहा

कुछ नहीं। लावण्या के टोकने पर सार्थक सरमा गया और नजर घुमा लिया

बताओ ना क्या हुआ अचानक से ऐसे क्यों देखने लगे ? लावण्या ने जिद की

तुम्हें देख रहा हूं खुले बाल तुम्हारे ऊपर बहुत ही अच्छे लगते हैं और बिना मेकअप के भी तुम कितनी खूबसूरत लगती हो सार्थक में शर्माते हुए लावण्या की तारीफ की

लावण्या को अपनी स्थिति का एहसास हुआ ,वह नहा करके ऐसे ही बालों को सुखा रही थी तभी सार्थक आ गया था

उसने अपने आपको देखा और सरमा कर बोली

थैंक यू सो मच सार्थक वह क्या है ना मैं अभी जस्ट नहा कर के बाद सुखा रही थी की तब तक तुम आ गए और बाल बांधने का टाइम नहीं मिला

कोई बात नहीं तुम आराम से कर लो मैं जा रहा हूं सार्थक ने कहा और कमरे से बाहर निकल गया

लावण्या ने दरवाजा बंद किया और वापस अपने बाल सुखाने लगी थोड़ी देर बाद कपड़े पहन कर के तैयार हो गई और कंघी उठाकर के बाल बाध ने लगी तभी अचानक से उसे सार्थक की बात याद आ गई उसके होठों पर एक मुस्कुराहट आ गई और गालों पर लाली छा गई

न जाने क्या सोचकर के उसने अपने बाल सिर्फ सीधे किये और उन्हें खुला छोड़ दिया और ऐसे ही कमरे से बाहर निकल गई

चारों के चारों एक ही गाड़ी पर बैठ कर के क्लब के बाहर पहुंचे।

सार्थक तुम और लावण्या जाकर के रजनी से मिलो मैं और लक्ष्य यही पर बैठकर तुम्हारा इंतजार कर रहे है ज्यादा देर मत लगाना क्योंकि अभी हमें घूमने के लिए भी जाना है कोशिश करना जल्दी वापस आ जाओ। शशांक ने सार्थक से कहा

ठीक है देखता हूं मैं, सार्थक ने कहा और लावण्या के साथ

उतर कर के वह क्लब के सामने पहुंचा जहां पर रजनी उसका इंतजार कर रही थी

रजनी को देखकर लावण्या एक बार फिर से इमोशनल हो गई उसने रजनी को अपने गले लगा लिया और आंखों से आंसू बहाने लगी

अभी वह बात कर ही रही थी कि तभी क्लब से वही दो बाउंसर निकले ,जो सार्थक और लावण्या को पकड़ कर उस आदमी तक ले गए थे

उन्होंने रजनी और लावण्या को एक साथ देखा तो कड़क कर रजनी से कहा

तुम यहां क्या कर रही हो तुम्हें पता नहीं है कि क्लब से बाहर निकलना अलाउड नहीं है सिर्फ तभी निकल सकती हो कि जब कोई सामान खरीदना हो और तुम दोनों तुम दोनों आखिर अपनी हरकतों से बाज नहीं आओगे तुम लोगों को सबक सिखाना ही पड़ेगा बोला था मैंने की पूछताछ या जासूसी की कोशिश मत करना ।

चलो चलो तुम लोगों को आज ऐसा मजा चखाउगा कि तुम

लोग कभी क्लब में आना तो दूर क्लब के आसपास भी नहीं फटकोगे ।

सर, सर ,सर प्लीज़ इन्हें कुछ मत कहिए यह मेरी बहन है और यह मेरा जानने वाला है बस हम 5 मिनट में जा रहे हैं सर प्लीज प्लीज बस 5 मिनट रजनी ने हाथ जोड़कर उन बाउंसरों से रिक्वेस्ट किया

अब जो कुछ कहना है सर से ही बोलना मुझसे बोलने से कोई फायदा नहीं चलो तीनो के तीनो अंदर चलो इन तीनों को पकड़ कर अंदर ले चलो अब सर ही इन लोगों की खबर लेंगे उसने कड़क कर कहा और दूसरा बाउंसर भी आ करके जबरदस्ती तीनों को अंदर ले जाने लगा।

एक मिनट रुकिए हमने ऐसी कौन सी गलती कर दिया है जो आप लोग हमसे इस तरह से बात कर रहे हैं। सार्थक ने गुस्सा हो कर के कहा

हमारी बहन है यह ,और अपनी बहन से बात करना कोई गुनाह है क्या ? जो आप रजनी से इस तरह से व्यवहार कर रहे हैं । सार्थक को बोलते देख कर के लावण्या ने भी कहा

सर प्लीज मैं इन्हें वापस भेज दे रही हूं बट प्लीज उनके साथ कुछ भी ऐसा वैसा मत कीजिए। रजनी ने दोनों से कहा

तुम्हें पता है ना किसी अनजान लोग से बात करना अलाउड नहीं है फिर तुम क्यों यहां पर आई हो।बाउंसर अभी भी रजनी से ऐसे बात कर रहे थे

सर ये बहुत दूर से मुझसे मिलने आई है इसीलिए मैंने उनको यहां पर बुला लिया है इनको कुछ मत कहिए सर प्लीज जो कुछ कहना है मुझे कहिये इनको सर के सामने मत ले जाइए रजनी ने कहा

दीदी आप क्यों इतना गिड़गिड़ा रही है , आखिर ऐसी क्या

मजबूरी है जो आप इस तरह से लाचार महसूस कर रही हैं ऐसा क्या कर दिया इन्होंने मुझे बताइए आप । लावण्या बोली

तू दो मिनट चुप रह लावण्या चुप हो जा बिलकुल चुप मैं बात कर रही हूं न । रजनी ने कहा

कोई बात करने की जरूरत नहीं है सर के सामने चलो वही जो भी कुछ बात करनी है वही करना चलो । उसने फिर से एक बार लावण्या और सार्थक के साथ रजनी को धक्का देते हुए कहा है

सार्थक ने उसका हाथ बहुत तेजी से झटक दिया और गुस्से से बोला अपने हद में रहो ज्यादा बदतमीजी की तो फिर हम से बुरा कोई नहीं होगा और खबरदार जो लावण्या को हाथ भी लगाया तो यह तुम्हारा क्लब नही है और न ही हम तुम्हारे नौकर है समझे आई बात समझ मे । सार्थक ने गुस्से से कहा

इतने में एक बाउंसर ने अपनी जेब से पिस्तौल निकाल लिया और बोला

अगर ज्यादा हीरो गिरी दिखाई तो यही ठोक दूंगा चुपचाप अंदर चल और जितना बोल रहा हूँ सुन

पिस्तौल देख कर के रजनी उस बाउंसर के उसके पैरों में पड़ गई और मिन्नत करने लगी

लावण्या की आंखों में भी डर आ गया था सहम तो सार्थक भी गया था लेकिन उसने अपने आप को कंट्रोल कर रखा था

जितना मैं कह रहा हूं उतना सुनो चुपचाप तीनो के तीनो अंदर चलो एक बाउंसर कड़क कर बोला

तीनों के पास अंदर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था वह आराम से धीरे धीरे अंदर जाने लगे

अभी वह क्लब के गेट के पास पहुंचे थे तब तक न जाने कहां से शशांक पीछे से आ गया और उसने एक छोटा डंडा बाउंसर के सर पे मारा उसके हाथ से पिस्तौल छूट गया और वह अपना सर पकड़ कर बैठ गया
 
अभी दूसरा बाउंसर कुछ समझ पाता की एक डंडा उसके भी सर पर पड़ा है

रजनी लावण्या तुम लोग जल्दी से गाड़ी में बैठो निकलो यहां से शशांक ने चिल्लाकर कहा

किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था रजनी बुरी तरीके से डर गई थी वह अपनी जगह से हिली तक नहीं

सोचने का समय नहीं है रजनी जल्दी से गाड़ी में बैठो इसके पहले की कोई मुसीबत आ जाए चलो जल्दी से निकलो यहां से शशांक करने

सार्थक ने लावण्या का हाथ पकड़ा और जल्दी-जल्दी उसको गाड़ी की तरफ ले चलने लगा

लावण्या ने रजनी को खड़े हुए देखा तो उसने सार्थक से हाथ छुड़ाकर के अपने दीदी का हाथ पकड़ा औरर फिर सार्थक का हाथ पकड़ कर तीनो गाड़ी की तरफ दौड़कर जाने लगी

रजनी को जैसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या

करें

दीदी चलो यहां से नहीं तो हम सब मुसीबत में फंस जाएंगे सोचने का समय नहीं है जल्दी कीजिए लावण्या ने कहा

न जाने रजनी क्यों जाना नहीं चाहती थी उसने एक पल सोचा और फिर उसका चेहरा सख्त हो गया और वह भी लावण्या और सार्थक के साथ भाग करके गाड़ी में बैठ गई

शशांक ने गाड़ी को ले चलने का इशारा किया और फिर गाड़ी सड़कों पर दौड़ने लगी

तीनों होटल पहुंचे और उन्होंने गाड़ी छोड़ दिया

रजनी लावण्या हमें यह होटल तुरंत के तुरंत छोड़ना पड़ेगा पड़ेगा क्योंकि उस टैक्सी ड्राइवर ने हमें इसके सामने उतारा है उसे हमारी लोकेशन पता है अगर वह पकड़ा गया तो फिर हम लोग भी पकड़े जा सकते हैं इसलिए तुम लोग जल्दी से अपना समान लो और निकलो यह से

लगभग 15 मिनट बाद चारों के चारों ने होटल से चेक आऊट कर लिया

और काफ़ी दूर जाकर कि उन्होंने एक दूसरा होटल बुक कर लिया

पांचो एक ही कमरे में बैठे थे रजनी की आंखों में खौफ समाया हुआ था

यह ठीक नहीं हुआ लावण्या वह लोग बहुत खतरनाक लोग हैं हमें ऐसे नहीं करना चाहिए था । रजनी ने कहा

क्या कैसे नहीं करनी चाहिए था ऐसी क्या मजबूरी है दीदी जो आप इस तरीके से डरी हुई है क्यों इतना घबराई हुई है । लावण्या ने पूछा

जी रजनी जी ऐसा क्या हुआ कुछ हुआ आप वहां से आना नहीं चाहती थी आपको पता है ना कि आपके पापा की तबीयत खराब है लावण्या ने आपको ढूढने के लिए कितनी परेसानी सही है और तो और अकेले इतनी दूर से आई है फिर भी आप क्यों नहीं जाना चाह रही हैं ।सार्थक में कहां

रजनी ने कुछ नही कहा वह चुपचाप बैठी रही

दीदी बोलिए ना ऐसा क्या हुआ आपके साथ जो आप इतना डर गई है जैसा मैं आपको जानती हूं मेरी दीदी डरने वालों में से नहीं है वह तो बड़ी बहादुर है लेकिन फिर इन लोगों से खौफ खाने का क्या मतलब है हम लोगों ने आपको जान पर खेलकर के वहां से निकालने की कोशिश की है इतनी मुसीबतों के बाद आप को निकालने में सफल रहें हैं लेकिन फिर भी आप आना नहीं चाहती तो बोलिए जवाब दीजिए आपके साथ क्या हुआ है ? लावण्या ने कहा

रजनी को जैसी लावण्या की बातें भी सुनाई पड़ रही थी वहीं तक जमीन को देखे जा रही थी

दीदी जवाब दीजिए क्या हमारे प्यार से ज्यादा उस क्लब से प्यार हो गया है क्या हमारे प्यार का अब आपकी जिंदगी में कोई मोल नहीं है क्या मैं मम्मी पापा सब आपके लिए गैर हो चुके हैं आप ऐसा क्यों कर रही है क्यों हमारे साथ नहीं आना

चाहती हैं लावण्या के आंख में आंसू भर आए

रजनी ने लावण्या को गले लगा लिया और फफक फफक कर रोने लगी। रजनी ने लावण्या को ऐसे गले लगा लिया मानो कोई बच्चा अपनी मां से गले लग गया हो और उसे बहुत सुकून मिला हो

लावण्या ने रजनी को चुप कराने की कोशिश की बड़ी देर बाद लावण्या ने रजनी को चुप कराया और रजनी शांत हुई तब सार्थक ने उसे पानी दिया

अब बताइए दीदी ऐसा क्या हुआ जो आप इतना डर गई है क्या हुआ आप के साथ आप इस क्लब में कैसे आगयी ।लावण्या ने पूछा

लावण्या घर से निकलने के बाद 1 महीने तक तो सब कुछ ठीक-ठाक था फिर धीरे-धीरे हमारे पास से पैसे खत्म होने लगे अचानक से मोहित का व्यवहार बदलने लगा वह पूरे दिन मुझे कमरे में छोड़ देता था और खुद गायब रहता था मैं उसका इंतजार करती और जब वापस आता है और मैं पूछती कि कहां थे तो मुझे कुछ भी नहीं बताता था कुछ दिन तक तो मैंने बर्दाश्त किया आखिर में एक दिन मैंने जिद पकड़ ली मोहित क्या बात है अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम हो तो बताओ लेकिन इस तरह से मुझे छोड़ कर के कहां चले जाते हो

पहली बार मोहित भड़का था वह बुरी तरीके से भड़क गया और मुझ पर चीखने चिल्लाने लगा

मोहित यह का बदला हुआ रूप देख कर के मैं सहम गई थी

मुझे पहली बार ऐसा महसूस हुआ शायद मैंने गलती कर दी लेकिन फिर मैंने सोचा क्या पता मोहित किसी बात के लिए परेशान हो

मैंने उसे प्यार से समझाया उसकी परेशानियों को समझने की कोशिश की लेकिन दिनों दिन उसका व्यवहार बदलता गया जैसे उसने मुझे ला करके कोई बहुत बड़ी गलती कर दी हो और आखिर में वही हुआ जिसका डर था उसने मुझे वापस चले जाने के लिए कहा

मैंने उसे बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वह तैयार नहीं हुआ उसने मुझे साथ रखने से इनकार कर दिया , उससे साफ साफ मना कर दिया कि वह उससे शादी नहीं कर सकता और उसके ऊपर घरवालों का प्रेशर पड़ रहा है किसी और से शादी करने के लिए।

फिर मैं चीखने चिल्लाने लगी क्योंकि मोहित का यह ब्यवहार मैं हैंडल नहीं कर पा रही थी
 
आखिर में उसने मेरे घरवालों के संस्कार और मेरी इज्जत और मेरे सेल्फ रिस्पेक्ट को ताना दिया उसने मेरे करेक्टर पर अंगुली उठाई उसने कहा तुम पहले से ही बदचलन लड़की हो । जो लड़की अपने घर से भागना स्वीकार कर ले वह कैसी हो सकती है और मैं जिंदगी भर इस कलंक के साथ नहीं रह सकता कि मैंने एक ऐसी लड़की से शादी करी जिसको अपने घर के इज्जत की कोई वैल्यू नहीं थी जिस लड़की ने अपने मम्मी पापा की इज्जत की वैल्यू नहीं कि वह

मेरी इज्जत की क्या वैल्यू करेगी तुम तो फिर कोई मुझसे भी अच्छा मिल गया तो उसके साथ भाग जाओगी ।

उसकी बातें सुनकर मैं शॉक्ड हो गयी मुझे मेरी गलती का एहसास हो रहा था मैंने गलत किया सबके साथ और अब उसी का बदला मिल रहा था

मैं टूट गई मेरा चेहरा गुस्से से लाल हो गया मैंने उसे खूब खरी-खोटी सुनाई झगड़ा किया गुस्सा किया समझाया प्यार से समझाया लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ और आखिर में मुझे छोड़ कर चला गया

मैं लगातार दो दिन तक रोती रही मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं वापस जाने की मेरी हिम्मत नहीं थी किस मुंह से मैं पापा के पास वापस जाती गांव वाले क्या कहते हैं इसी डर से मैं घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी

मेरे पास पैसे भी नहीं थे सिर्फ और सिर्फ ₹400 ही पड़े थे एक-दो दिन जैसे तैसे मैंने गुजारा किया लेकिन मुझे दिख गया कि रास्ता बहुत मुश्किल होने वाला है मैंने बहुत जगह काम ढूंढने की कोशिश की, जिससे कुछ कर पाऊं लेकिन इस दुनिया में अकेली लड़की से सिर्फ और सिर्फ लोगों को एक ही चीज चाहिए होती है और यह उस लड़की का जिश्म इसके अलावा उस लड़की के इमोशन से किसी को कोई मतलब नहीं होता उसकी परेशानियों से किसी को कोई मतलब नहीं होता ।

मेरी एक लड़की से मुलाकात हुई जो यही क्लब मैं काम करती थी उसने मेरी परेशानी देखी और मुझे यहां काम करने के लिए बोला मेरे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था।

बड़ी मुश्किल से मुझे यहां पर नौकरी मिली लेकिन उनकी शर्त थी मैं बिना बताए कहीं नहीं जा सकती इनके क्लब की कोई भी जानकारी किसी तीसरे के साथ शेयर नहीं कर सकती और अगर मैं बिना बताए वहां से जाने की कोशिश करती तो ये मेरे साथ बहुत बुरा सलूक करते और अगर मैं अपने मन से यहां काम करने से मना करती मुझे तो 3 महीने की सैलरी देनी पड़ती ।

क्लब के लोग हरवक्त हमारी हरकतों पर नजर रखते है ।

अभी पिछले हफ्ते एक लड़की भाग गई थी इनके आदमियों ने उसे ढूंढ लिया और फिर उस बेचारी के साथ ऐसे ऐसे जुर्म किए कि मेरी रूह थरथरा गई उसके सारे कपड़े फाड़ दिए और उसके साथ बहुत बदतमीजी की और फिर उसके ऊपर होटल में कॉल गर्ल सप्लाई करने का और ड्रग्स बेचने का केस लगवा दिया यही सब देख कर के मैं बहुत डर गई थी ।

दीदी इतना सब हो गया और आपने बताया तक नही एक बार कम से कम फोन कर देती हमें, आप सब कुछ अकेले झेल रही थी, क्या आपने हमें एक फोन करना भी जरूरी नहीं समझा आप कितनी परेशानियों से गुजरती रही ,भगवान का शुक्र है कि आप सही सलामत हैं अगर आपके साथ कोई हादसा हो जाता तो क्या होता आपने एक बार भी हमारे बारे

में नहीं सोचा लावण्या ने रजनी को डाटते हुए कहा

इतने घटिया लोग है ये किसी लड़की के मजबूरी का नाजायज फायदा उठा रहे हैं तुम चिंता मत करो रजनी हम लोग तुम्हारे साथ हैं शशांक ने रजनी की स्टोरी सुनकर गुस्से से कहा उसका खून खौल गया

ये सब कौन है लावण्या इसके पहले तो मुझे इनके बारे में नहीं पता रजनी ने सार्थक शशांक और लक्ष्य को देख करके लावण्या से पूछा

दीदी यह मेरे दोस्त हैं इन्होंने मेरी बहुत मदद की है यूं कहिए कि अगर यह लोग नहीं होते तो मैं तुम्हारा पता लगा ही नहीं लगा सकती थी

इनका नाम सार्थक है और यह शशांक और यह लक्ष्य है जो आपको क्लब में मिला था ।लावण्या ने तीनों का परिचय रजनी से करवाया

अब आप सुरक्षित हैं और जल्द ही आप अपने परिवार के पास होंगी आप किसी बात की कोई चिंता मत कीजिए जल्दी आप अपने घर में होंगे और लोग क्या कहेंगे समाज क्या कहेगा जब तक इसके बारे में सोचती रहेगी तब तक परेशान रहेंगे आप भी सोचिए कि आपकी मम्मी और पापा को आपकी जरूरत है आपकी बहन को आपकी जरूरत है अपने घर परिवार के बारे में सोचें बस जो हो गया सो हो गया, आपने और आपके परिवार ने लावण्या ने बहुत मुसीबत सह ली लेकिन अब सब ठीक है । सार्थक ने कहा

लावण्या एक काम करो , रजनी थक गई होगी ,उसे कमरे में ले जाओ और आराम करने दो हम कल सुबह बात करेंगे देखते हैं क्या होता है हमें घर जाने में एक दिन बचा है उसके बाद हम लोग अपने घर चले जाएंगे । सार्थक ने कहा

लावण्या रजनी को लेकर कमरे में चली गयी

लावण्या रजनी से उसकी पूरी स्टोरी सुनने लगी और अपने घर की सारी बातें बताने लगी दोनों एक साथ लेटी रही और बहुत देर तक बातें करते रहे फिर उसके बाद एक दूसरे को पकड़ कर के ही सो गई

सुबह सार्थक की आंख खुली आज उसका दिमाग बिल्कुल तरोताजा महसूस कर रहा था जैसे सारी परेशानियां उसके खत्म हो गई हूं और जैसे ही बाहर निकला बाहर कई सारे अख़बार स्टैंड पर लगे हुए थे

सार्थक ने उसमे से एक अखबार उठा लिया और अपने कमरे में लेकर आ गया

अभी वह पढ़ ही रहा था कि वह बुरी तरीके से चौक गया बीच के एक पेज पर रजनी की फोटो लगी हुई थी रजनी की फोटो देखते ही सार्थक पूरी खबर पढ़ने लगा।

गोवा के किसी होटल में 10 लड़कियां पकड़ी गई थी जो कॉल गर्ल थी और उन सबने एक साथ रजनी को अपनी बॉस बोला था उस खबर में यह बताया था कि रजनी कॉल गर्ल रैकेट चलाती थी और बड़े-बड़े होटलों में लड़कियां सप्लाई

करते थे इसके अलावा ड्रग्स की डीलर भी थी और बड़े बड़े रेव पार्टी वगैरा में सप्लाई करती थी पुलिस उसे ढूंढ रही है

पूरी खबर पढ़कर सार्थक के होश उड़ गए उसने वह पेपर उठाया और भागता हुआ लावण्या के कमरे में पहुंचा उसे आवाज देकर के बुलाया

लावण्या आंख मलती हुई बाहर आई शायद सो रही थी ।

गुड मॉर्निंग सार्थक क्या हुआ इतनी सुबह सुबह कैसे आना हुआ लावण्या ने अलसाई सी सार्थक को देखा उसकी आंखों में अभी नींद भरा हुआ था

लावण्या बहुत जल्दी मेरे पास आओ 5 मिनट में । रजनी जी क्या कर रही है अगर वे सो रही हो तो सोने देना अगर जाग रही है तो उनको कहीं बाहर मत जाने देना बहुत जरूरी काम है तुरंत मेरे पास आओ । सार्थक ने कहा

क्या हुआ इतना घबराए हुए क्यो हो लावण्या सार्थक को ऐसे देखकर चौक गई थी क्योंकि सार्थक के हाव भाव से लग रहा था कि जैसे कोई बहुत बड़ी बात हो गई हो

अभी ज्यादा बात मत करो तुम मेरे पास आओ फिर मैं तुम्हें सब बताता हूं

थोड़ी देर बाद लावण्या सार्थक के कमरे में पहुंची सार्थक ने उसे पेपर दे दिया लावण्या ने जल्दी से पूरी रिपोर्ट पड़ी उसकी आंखों में भी चिंता की लकीरे दिखने लगे

परेशान होकर के तीनों के चेहरे को देखने लगी है

यह तो सरासर झूठा आरोप है मेरी दीदी ने ऐसा कुछ नहीं

किया मुझे अपने दीदी पर पूरा भरोसा है लड़कियां झूठ बोल रही हैं मेरी दीदी ऐसा कुछ कर ही नहीं सकती हैं लावण्या ने कहा

हमें पता है लावण्या रजनी ऐसा नहीं कर सकती हैं लेकिन जो उन्होंने बिना बताए क्लब की नौकरी छोड़ दी है या यूं कहिए कि हम लोग उन्हें क्लब से भगा कर ले लाये इसीलिए उन लोगों ने इनके साथ ऐसी घटिया हरकत की है।

अब क्या करें सार्थक अब हम बाहर कैसे जाएं अपने घर कैसे पहुंचे पुलिस तो हमें चारों तरफ ढूढ रही होगी लावण्या ने कहा

चारों के चारों सोच में पड़ गए

अखबार में छपा हुआ फोटो और खबर पढ़कर चारों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई थी सब इस समस्या से निकलने का उपाय सोच रहे थे । अचानक जैसे सार्थक को कुछ याद आया हो और उसकी आंखें चमक गई

शशांक मेरे पास एक आईडिया है । सार्थक ने कहा

कैसा आइडिया? शशांक बोला

शशांक तुम अपने पापा को फोन मिलाओ और उनको सारी बातें बताओ उनके कांटेक्ट बहुत दूर-दूर तक है और वह हमारी जरूर मदद कर सकते हैं क्या पता गोवा में भी कोई ऐसा बंदा हो जो तुम्हारे पापा का जानने वाला हो और हमारी हेल्प कर दे तुम्हारे पापा इतने बड़े बिजनेसमैन हैं तो जरूर से जरूर उनका यहां गोवा में कुछ ना कुछ कांटेक्ट होगा । सार्थक बोला

शशांक ने फोन निकाला और अपने पापा से बात करने लगा उसने अपने पापा को सारी बातें बताइए और हेल्प मांगी

जैसे ही उसने फोन रखा ,सार्थक ने पूछा क्या हुआ ? क्या बोला अंकल ने?

पापा बोले कि किसी कमिश्नर से उनकी जान पहचान है वह उनसे फोन पर बात कर रहे हैं और हमारी हेल्प जरूर से जरूर करेंगे।

थोड़ी देर बाद शशांक के नंबर पर एक एड्रेस और नंबर आया और फिर उसका फोन आ गया

जी पापा । शशांक ने कहा

बेटे मेरी उनसे बात हो गई है तुम्हें एक नंबर और एड्रेस भेजा है तो तुम उनसे बात कर लो उन्हें मेरा नाम बता देना और जाकर के मिल लो वह तुम्हारी हेल्प कर देंगे।

ठीक है पापा थैंक यू सो मच। शशांक ने खुश होते हुए कहा

सार्थक और शशांक दोनों बाहर निकले और फिर शशांक के फादर के बताए हुए जगह पर पहुंचे
 
शशांक ने उन्हें नमस्ते किया और अपना परिचय दिया । उन्होंने बड़े ही मन से दोनों का स्वागत किया और अपने घर के लॉन में बैठकर उनसे बातें करने लगे

अंकल आज यह जो पेपर छपा है इसमें जो फोटो लगी हुई है कि हमारी किसी जानने वाले की है और हम लोग इसे अच्छी तरीके से जानते हैं यह कभी भी ऐसा काम नहीं कर सकती है जरूर पुलिस को कुछ ना कुछ गलती हुई है अब समस्या यह है कि उसकी बहन से इनकी शादी होने वाली है ,ये हमारे मित्र हैं सार्थक, उनकी बहन ने इन्हें अपनी बहन को बचाने

की गुहार लगाई है तो इन्होंने मुझसे कहा इसलिए मैं आपके पास आया हूं आप प्लीज कैसे ना कैसे करके इनको बचा लीजिये आपकी बहुत मेहरबानी होगी। शशांक ने कहा

देखो बेटा ऐसे मामलों में मैं बहुत कुछ तो नहीं कर सकता अगर एविडेंस इस लड़की के खिलाफ होगा तो फिर मैं उसमें कुछ भी नहीं कर सकता लेकिन अगर यह लड़की निर्दोष है तो जरूर से जरूर मैं इसकी हेल्प करूंगा तुम चिंता मत करो तुम्हारे पापा से मेरे घरेलू संबंध है और तुम मेरे बेटे जैसे हो , मुझसे जो भी हो सकता है मैं जरूर करूंगा। कमिश्नर साहब ने कहा

कमिश्नर साहब ने दोनों के लिए चाय मंगवाया और फिर उस पेपर के संपादक को फोन करके बुला लिया

10 मिनट में ही वह संपादक उनके बगले पर था ।

तुम्हें कैसे पता चला की यह लड़की इन लोगों की बॉस है जो लड़कियां कल होटल में पकड़ी गई थी तुमने किस बेस पर अपने पेपर में यह छापा है ।कमिश्नर सामने संपादक से सीधा सवाल किया

सर हमारे रिपोर्टरों ने आपके डिपार्टमेंट से ही खबर निकाल कर के से छापा है आपके डिपार्टमेंट से ही हमें पता चला है इस लड़कियों ने किसी रजनी का नाम लिया है और फिर जब हमने थोड़ी सी जानकारी जुटाई तो इसी लड़की का नाम औरर फ़ोटो निकल के सामने आया है वह किसी क्लब में जॉब करती थी और साथ ही साथ ज्यादा पैसे कमाने के

लालच में यह काम भी करती थी । संपादक ने कहा

यह बातें तुम्हें किसने बताया कमिश्नर साहब ने फिर से सवाल किया

सर क्लब के मैनेजर ने बताया था यह सारी बातें। संपादक ने बोला

तुमने काउंटर चेक किया था, तुम्हें पता है अगर यह बात गलत निकली तो तुम्हारे ऊपर मानहानि का केस भी हो सकता है बिना किसी सबूत के बिना किसी गवाह के तुमने उसे विक्टिम बना दिया और अगर यह बात गलत निकली तो फिर क्या होगा? कमिश्नर साहब ने कहा

और फिर अभी पुलिस जांच कर रही है जब तक पुलिस का कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आ जाता है तुम इस तरह से किसी का मीडिया ट्रायल और किसी को अपराधी बनाकर किसी लड़की की फोटो अपने पेपर में कैसे छाप सकते हो अगर यह लड़की गलत है तो भी , कमिश्नर साहब ने कहा

सॉरी सर बट जो इंफॉर्मेशन निकल कर आई है उसी के बेस् पर हमने यह खबर छापी है । संपादक ने कहा

ठीक है तुम जाओ अगर जरूरत पड़ेगी तो मैं तुम्हें फिर से बुला लूंगा कमिश्नर साहब बोले

थैंक यू सो मच सर उसने कहा बाहर चला गया

सर हो ना हो इस संपादक को गलत जानकारी दी गई है या फिर उसे लालच दिया गया है आप मेरा विश्वास कीजिए यह लड़की ऐसी नहीं है ।शशांक ने कहा

बेटे शशांक तुम्हारी सारी बातें जायज है लेकिन होटल में पकड़ी लडकिया और क्लब का मैनेजर एक्सेप्ट कर रहा है लड़कियों ने गवाही दी है तो फिर सारे सबूत उस लड़की के खिलाफ है हम उस में कुछ भी नहीं कर सकते हैं हो सकता है इस लड़की ने पैसे के लालच में ऐसा कुछ किया हो बेटा आजकल पैसे के आगे सब नाते रिश्ते फीके पड़ जाते हैं तुम सोच भी नहीं सकते हो ऐसे ऐसे काम हो सकते हैं । कमिश्नर ने कहा

सर मेरे पास एक आईडिया है अगर आप परमिसन दे तो बताऊं सार्थक बहुत देर से सबकी बातें सुन रहा था अचानक से बोला

हा बताओ कमिश्नर साहब ने कहा

सर अगर इन लड़कियों की बॉस रजनी है तो जरूर से जरूर लड़कियों ने रजनी को देखा होगा आप रजनी की फोटो लेकर के किसी दूसरे तरीके से इन लड़कियों से पूछिए कि ये कौन है अगर सच मे रजनी इन्वॉल्व होगी तो लडकिया उसे पहचान लेंगी । आपको दूध का दूध और पानी का पानी पता चल जाएगा अगर उन लड़कियों ने रजनी को देखा होगा तो जरूर से जरूर पहचान लेंगी और अगर नहीं देखा होगा झूठ बोल रही होगी तो नहीं पहचान पाएंगी अगर आप इतना कर दे तो बड़ी मेहरबानी होगी सार्थक ने कहा

वाह एक्सीलेंट ,यह तरीका अपनाया जा सकता है कमिश्नर साहब सार्थक से इंप्रेस थे

तुम लोग बैठो मैं अभी तैयार होकर आता हूं कमिश्नर साहब ने कहा और अंदर चले गए

सार्थक और शशांक वहीं बैठ कर के इंतजार करने लगे

थोड़ी देर बाद कमिश्नर साहब तैयार हो गया है और फिर बोले

शशांक चलो सच क्या है पता करते हैं

जी जरूर अंकल शशांक ने उठते हुए कहा फिर कमिश्नर साहब के साथ शशांक और सार्थक दोनों वहां गए जहां उन सारे लड़कियो को गिरफ्तार करके रखा गया था।

कमिश्नर साहब को देखते हैं सारे के सारे अलर्ट हो गए शशांक ने वही फोटो जो लावण्या ने उसे भेजा था दिखाया

कमिश्नर साहब ने फ़ाइल मगाई पूरे केस की स्टडी की और फिर लड़कियों को बाहर लाने के लिए बोला

थोड़ी बहुत पूछताछ करने के बाद कमिश्नर साहब ने वही फोटो निकाला और उन्हें दिखाया

तुम लोग यह बताओ क्या यह दोनों लडकिया भी तुम लोगों के साथ थी कमिश्नर साहब ने रजनी और लावण्या की फोटो उनको दिखाते हुए कहा

उसमें से एक लड़की ने दोनों की फोटो देखकर कहा नहीं सर यह हमारे साथ नहीं थी हम इन्हें जानते भी नहीं हैं हम सिर्फ 10 लोग ही थे

अच्छे से गौर से देख लो मुझे पता चला है कि तुम 10 नहीं 12 लोग होऔर तुमने इन दोनों लड़कियों को छुपा लिया ये दो लड़कियां भी तुम्हारे साथ तुम्हारे गैंग में काम करती थी।

कमिश्नर साहब ने कड़क कर कहा

लगभग लगभग सारी लड़कियों ने उस फोटो को देखा लेकिन उसमें से किसी ने भी इन दोनो को नहीं पहचाना सबने एक ही सुर में मना कर दिया कि यह लड़की को वह नहीं जानते और उन्होंने इनको नही छुपाया है ।

ठीक है कोई बात नहीं कमिश्नर साहब ने कहा और थाने के इंचार्ज को जरूरी इंस्ट्रक्शन दे कर के वहां से निकल गए ।

सार्थक मैं रजनी से मिलना चाहता हूं कहां पर है वह।कमिश्नर साहब ने कहा

सार्थक बताने में थोड़ा सा हिचकिचा रहा था लेकिन अब तक के कमिश्नर साहब के व्यवहार से लग रहा था कि वह अच्छे हैं ।उसने शशांक की तरफ देखा और शशांक ने आंखों से बता देने का इशारा किया

सार्थक ने बताया कि इस समय रजनी कहां पर है

ठीक है या तो तुम उसे मेरे पास ले आओ या लाकर मिलाने में कोई प्रॉब्लम हो तो मैं खुद चल चलता हूं जैसा तुम्हें ठीक लगे लेकिन 1 घंटे के अंदर अंदर रजनी से मेरी मुलाकात करवाओ मुझे लग रहा है कि इस केस में बहुत बड़े लोगों का हाथ है रजनी के थ्रू हम उन तक तक पहुंच सकते हैं। कमिश्नर साहब ने कहा

जी सर जरूर हम 1 घंटे में रजनी को लेकर के आपके पास पहुंच रहे हैं । सार्थक ने कहा
 
सार्थक ने बाजार से एक बुर्का खरीदा और फिर उसे लेकर के रजनी के पास पहुंचा उसने सारी बातें रजनी को बताइ रजनी बुरी तरीके से डरी हुई थी लेकिन लावण्या ने उसे समझाया

लावण्या और सार्थक और शशांक के समझाने पर वह चलने के लिए तैयार हुई

लावण्या तुम एक काम करो रजनी को यह बुर्का पहना दो और शशांक तुम रजनी के हस्बैंड बन जाओ जिससे रास्ते में अगर किसी पुलिस वाले ने हमें रोका तो कोई भी पहचान नहीं पाए और कोई नई मुसीबत न खड़ी हो । सार्थक ने कहा

1 घंटे बाद सारे के सारे कमिश्नर साहब के बगले पर पहुंचे

कमिश्नर साहब उन लोगों का ही इंतजार कर रहे थे रजनी बुरी तरीके से घबराई हुई थी कमिश्नर साहब ने उससे प्यार से बात की और समझाया तब जाकर के उसे पुलिस का डर थोड़ा सा कम हुआ और फिर उन्होंने रजनी से सारी स्टोरी पूछी रजनी ने बताना शुरू किया ।

कमिश्नर साहब ने बहुत गौर से रजनी की सारी स्टोरी सुनी और फिर कहा कि तुम चिंता मत करो अगर तुमने कुछ नहीं किया होगा तो फिर कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता

जैसा कि तुम बता रही हो कि उस क्लब में तुम्हारी तरह ही कई सारी लड़कियां फंसी पड़ी है और नीचे बेसमेंट में गैरकानूनी रूप से जुआ खाना चल रहा है इस बात का कोई पुख्ता सबूत है तुम्हारे पास ।कमिश्नर साहब ने पूछा

सर कोई सबूत तो नहीं है मेरे पास लेकिन मैं वहां पर खुद

रही हूं मैंने वहां पर काम किया है इसलिए मुझसे बेहतर वहां की स्थिति कौन जान सकता है वहां पर जाना इतना मुश्किल है कि पूछिए मत सिर्फ चुनिंदा लोगों को वहां पर जाना अलाउड है और उनको भी एक विशेष कार्ड मिला हुआ है।

लक्ष्य तुम वहां तक कैसे पहुंचे थे जो तुमने रजनी से बात कर ली तुम तो जैसा कि मुझे पता चला है कि अभी गोवा में नए आए हो तो तुम्हें इतनी जल्दी परमिशन कैसे मिल गई वहां जाने की । कमिश्नर साहब ने पूछा

लक्ष्य अपनी लड़की बनने की कहानी बताने में हिचकिचा रहा था लेकिन बताने के सिवा कोई चारा नहीं था उसने सारी बातें सच-सच बता दी कैसे राहुल को बेवकूफ बनाकर वह लोग नीचे पहुंचे थे

ठीक है तुम घबराओ मत मैं सबका जल्दी पर्दाफास करूंगा लेकिन सबसे पहले मैं यह पक्का कर लूं कि रजनी इन सब में शामिल नहीं है और इसके लिए मुझे रजनी और लावण्या को लेकर के एक बार फिर से उन लड़कियों के पास जाना पड़ेगा।

रजनी और लावण्या को लेकर के कमिश्नर साहब फिर से एक बार वहां पर पहुंचे

रजनी को देख कर के सारे पुलिस वालों के हाथ पांव फूल गए लेकिन कमिश्नर साहब के सामने कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे सिर्फ कसमसा कर रह गए कमिश्नर साहब सीधा उन लड़कियों के पास पहुंचे और फिर उनसे पूछा

तुम लोग तो मना कर रही थी कि इस को जानती नहीं हो और यह तुम लोगों के साथ काम नहीं करती थी कमिश्नर साहब ने कड़क कर पूछा

लड़कियों ने अगर रजनी को देखा हो तभी तो बोले उन लोगों ने आज के पहले रजनी को देखा ही नहीं था

सर हमारा विश्वास कीजिए आज के पहले हमने इन्हें देखा भी नहीं है हम सच कह रहे हैं सर यह किसी दूसरे के साथ भले काम करती हूं लेकिन यह हमारे साथ काम नहीं करती थे हम आपसे झूठ नहीं बोल रहे हैं हमारी तो बॉस रजनी मैडम है इनको तो हम जानते नहीं हैं आप चाहे तो उनसे पूछ लीजिए ।

तो जैसा कि तुम लोग कह रही हो इन को नहीं जानती हो और इनको पहली बार देख रही हो यह सही है

जी सर उसमें से एक लड़की जो उन लोगों की हेड लग रही थी उसने कहा

सबसे पहले तो तुम लोगों को मैं यह बता दूं की यही रजनी है जिसको तुम लोग अपना बॉस बता रही हो अब सच क्या है अगर तुम लोगों ने मुझे नहीं बताया तो मैं अभी तुम लोगों की इतना पिटाई करवाउगा तो तुम लोगों के मुंह से सच निकल जाएगा। श्रुति प्रीति ले जाकर के लॉकअप में बंद करो और अच्छे से इनकी खातिरदारी करो अभी सच क्या है बताएंगे यह । कमिश्नर साहब ने अपने दो लेडी कांस्टेबलों को आदेश दिया वह दोनों अपना-अपना लट्ठ लेकर के आई

और अभी दो-तीन फटके ही पड़े थे कि सारी की सारी लड़कियां रोने लगी और बोली

सर हमे बचा लीजिये हमसे गलती हो गई हमारी बॉस रजनी मैडम नहीं कोई और है लेकिन हमें रजनी का नाम लेने के लिए कहा गया था

किसने कहा था प्रीति ने कड़क कर पूछा

सर जिसके अंडर हम लोग काम करते हैं उन्होंने ही हमें रजनी का नाम देने के लिए बोला था और बदले में हमें छुड़वाने का वादा किया था उन्होंने कहा था कि तुम जैसा मैं कह रही हूं ऐसा करोगे तो फिर तुम लोगों को कुछ नहीं होगा इसी वजह से हम लोगों ने रजनी का नाम लिया है और फिर उन्होंने सारी सच्चाई कमिश्नर साहब के सामने खोल कर रख दी

कमिश्नर साहब ने सारे पुलिस वालों को गलत जानकारी प्रेस वालों को देने के लिए बहुत डांटा और फिर उस क्लब पर तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया

रजनी ने वहां के सारे गैरकानूनी धंधे और सारा कच्चा चिट्ठा कमिश्नर और थाना इंचार्ज की मौजूदगी में दर्ज कराया और एक FIR भी कमिश्नर साहब के करने पर दर्ज कराया

इसके अलावा राहुल का कार्ड भी कमिश्नर साहब को दे दिया

जिससे उसकी भी गवाही से सब कुछ क्लियर हो जाये ।

जब सारा कुछ क्लियर हो गया और रजनी निर्दोष हो गई तो

उसने हाथ जोड़कर रोते हुए कमिश्नर साहब का धन्यवाद कहा

कोई बात नहीं बेटा हमें गर्व है तुम पर और तुम्हारी बहन पर और सबसे ज्यादा इम्प्रेस्ड तो में सार्थक,शशांक औरर लक्ष्य से हूं उसने कितने बुद्धिमानी से और कितनी साहस से तुम्हें उस कैद से छुड़ाया है और इतने बड़े गैरकानूनी जुआ खाना का पता लगाने में पुलिस की मदद की है आई एम प्राउड ऑफ यू माय सन तुम लोग चाहे जहां जा सकते हो तुम लोग फ्री हो कमिश्नर साहब ने मुस्कुरा कर कहा

थैंक यू सो मच अंकल थैंक्स ए लॉट अगर आप ना होते तो हमारे लिए बहुत मुसीबत हो जाती हम कभी साबित नहीं कर सकते थे की रजनी निर्दोष है। शशांक बहुत खुश था

गोवा घूम लिया कि अभी घूमना बाकी है और तुम आए थे तो मुझे पहले क्यों नहीं बताया इतना शानदार घर है तुम्हें वहां पर रोक देता होटल में रहने की क्या जरूरत थी कमिश्नर साहब ने शशांक से कहा

नहीं अंकल 6 दिन हो गए घूम लिया अब कल हमें घर वापस

जाना है

ठीक है कमिश्नर साहब मुस्कुराते हुए बोले ।

सारे लोग वापस से होटल में आ गए

सार्थक शशांक और लक्ष्य तुम लोगों का मुझ पर मेरी बहन लावण्या पर और मेरे मम्मी पापा पर बहुत बड़ा एहसान है सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह से ही हम लोग सही सलामत और सुरक्षित हैं तुम लोगों ने अजनबी होकर भी लावण्या की इतनी मदद की है बिना किसी जान पहचान के अपनी जान खतरे में डाली है ऐसा आज के जमाने में बहुत कम होता है। रजनी ने हाथ जोड़कर कहा

रजनी जी ऐसी कोई बात नहीं है किसी की हेल्प कर देने से अगर उसके प्रॉब्लम सॉल्व हो जाती है तो यह हमारे लिए खुशी की बात है फिर भी अगर आप हमें कुछ देना चाहती हैं तो आप दोनों बहनों से एक रिक्वेस्ट है कि आज शाम को हमारे साथ जॉइन करें क्योंकि अब सारी समस्याएं खत्म हो गए हैं तो हम शाम को आप लोगों के साथ पार्टी करना चाहते हैं जिससे आप लोगों के साथ की यादें हमारे साथ हमेशा हमेशा के लिए बन जाए। सार्थक ने कहा

रजनी ने लावण्या की तरफ देखा लावण्या ने मुस्कुरा कर अपनी सहमति दे दी।

शाम को सार्थक ने सबके लिए छोटी सी पार्टी रखी थी

लावण्या खुद भी सज गई और अपनी बहन को भी उसने

अच्छे से तैयार किया सार्थक ,शशांक और लक्ष्य भी तैयार होकर के आए ।

सबके चेहरे खिले हुए थे और सब के होठों पर मुस्कुराहट थी यह पहला मौका था जब सब एक साथ इतने खुश थे

सार्थक ने मुस्कुराकर दोनों का वेलकम किया और फिर बैठाया

अरे सार्थक आप तो हमें ऐसी ट्रीट कर रहे हैं जैसे हम आपके मेहमान हो। लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा

हां तो मेहमान ही है आज हमने पार्टी दी है तो हम हम होस्ट है आप हमारी मेहमान हैं। सार्थक ने कहा

अबे सालों तुम भी बैठ जाओ क्या तुम्हें अलग से निमंत्रण देना पड़ेगा, शशांक और लक्ष्य को खड़े हुए देखकर के सार्थक ने कहा

नहीं भाई हमने सोचा कि तुम दोनों का चल रहा है तो चलने दो हम क्यो बीच में पड़े हम लोग तो कोई कोना ढूंढ रहे थे कहीं छुप ले अब हमारी जरूरत कहां रह गई तुम्हें ।लक्ष्य कहां रुकने वाला था उसने तुरंत ही ताना मारा

लावण्या के चेहरे पर लाली छा गई उसने कहा अरे लक्ष्य बैठो तुम भी तुम्हारे बिना तो पार्टी का मजा ही किरकिरा हो

जाएगा तुम नहीं होगे तो कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा

अच्छा ऐसा है क्या ? ऐसी बातें मत बोलो नहीं तो मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाऊंगा आपकी यह बात तो सीधा मेरे दिल पर लगी हैं देखना कहीं आप मुझसे प्यार मत करने लगना क्योंकि मैंने तुम्हें किसी के लिए छोड़ दिया है तो मैं तुम्हारे दिल के अरमान पूरे नहीं कर पाऊंगा सॉरी मुझे भूल जाओ ।लक्ष्य ने पूरी नौटंकी की
 
दोनों हंस पड़े और लावण्या और रजनी के होठों पर भी एक मुस्कुराहट आ गई क्योंकि लावण्या लक्ष्य का व्यवहार समझ चुकी थी इसलिए उसको उसकी बातों का कुछ भी बुरा नहीं लगा

दीदी इनकी बातों का कुछ भी बुरा मत मानना इनका दिल बहुत साफ है सिर्फ जुबान गंदी है मैं इन्हें अच्छे से जान गई हूं ,आपको पता है लक्ष्य को मैंने तैयार किया था कैसा लग रहा था लावण्या ने कहा

बहुत ही खूबसूरत मैं तो हैरान रह गई थी कि यह लड़का है वैसे भी लक्ष्य भैया बहुत ही स्मार्ट है बहुत ही खुश नसीब होगी जो उनके साथ शादी करेगी ।रजनी ने कहा

सार्थक और शशांक लक्ष्य को पहली बार देखकर के चौक गए थे मैं खुद भी हैरान रह गई थी ।लावण्या ने कहा

पता है रजनी जी आप के चक्कर में मेरी इज्जत लूटते लूटते बची है आपको मेरा सबसे ज्यादा एहसान मानना पड़ेगा इन

दोनों ने क्या किया है कुछ भी नहीं किया है ,मैने अपनी इज्जत आबरू मान मर्यादा अपना सब कुछ दांव पर लगा कर के मैं आपके पास पहुंचा था और आपके पास पहुंचने के लिए मुझे क्या-क्या सहना पड़ा कैसे-कैसे लोगों से कहां-कहां और किस-किस तरह से हरकते झेलना पड़ा यह तो मैं जानता हूं या मेरा दिल जानता है बस यु समझ लीजिए की अब मैं अपनी बीवी के लायक नहीं बचा मेरा सब कुछ इन दरिंदों ने लूट लिया है मुझे किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा है लक्ष्य ने फिर से पूरी तरह से नौटंकी की

अबे नौटंकी बंद कर साला कहीं भी शुरू हो जाता है पहले से कौन सा तू दूध का धुला था ,अच्छा हुआ तेरे साथ अब जाकर के तुझे एहसास हुआ होगा कि किसी लड़की को जिस नजरिए से तू देखता है उसी नजरिए से अगर कोई तुझे देखे तो कैसे लगता है थोड़ा आदमी बन जा और आदत सुधार ले अपनी । शशांक ने लक्ष्य को डांटा

पार्टी में सब ने खूब मस्ती की और जब डांस करने की बारी आई तो सार्थक और लावण्या लक्ष्य और रजनी डांस करने लगे

लक्ष्य ने जबरदस्ती रजनी को पकड़कर फ्लोर पर बुला लिया और उसके साथ डांस करने लगा शशांक बैठकर के दोनों को डांस करता हुआ देख रहा

सार्थक और लावण्या एक दूसरे में खोए हुए थे दोनों की आंखें शर्म से झुकी हुई थी लेकिन दिलों में एक प्यार पनप

चुका था हालांकि दोनों की ओठ इजहार करने से इंकार कर चुके थे लेकिन आंखों की भाषा दोनों अच्छी तरीके से समझ रहे थे रात के करीब 11:00 बजे पार्टी खत्म हुई और फिर सब लोग अपने अपने कमरे में सोने गए अगले दिन उन्हें सुबह सुबह अपने अपने घर निकालना था।

लावण्या और रजनी की ट्रेन 12 बजे ही थी जबकि तीनों को शाम के 4:00 बजे फ्लाइट पकड़ना था

तीनों तैयार होकर के रजनी और लावण्या के साथ स्टेशन पर पहुंचे

लावण्या और सार्थक दोनों की आंखों में एक उदासी थी जो किसी से भी छुपी नहीं थी लक्ष्य और शशांक दोनों इस बात को अच्छी तरीके से समझ रहे थे कि कहीं ना कहीं सार्थक लावण्या से इमोशनली अटैच हो चुका है बस जुबान से कुछ भी नहीं कह पा रहा है और ठीक यही हाल लावण्या का भी था दोनों का बस चलता तो अभी वह नहीं जाते लेकिन एक न एक दिन तो जाना ही था दोनों को एक दूसरे का साथ बहुत पसंद था।

सार्थक अपनी पूरी जिंदगी में मैं तुम्हे कभी नहीं भूल पाऊंगी तुम बहुत ही अच्छे हो शायद मैं कभी किसी इतने अच्छे और सुलझे लड़के से पहले मिली हूं तुम हमेशा हमेशा के लिए मेरे यादों में और मेरी जिंदगी में बस चुके हो कभी-कभी अपने दोस्त को याद कर लेना और जब कभी भी नगीना आना दो

मुझसे जरूर मिलना ।लावण्या की आंखें डबडबा आई

मैं भी तुमको नहीं भूलूंगा लावण्या मेरा नंबर तो तुम्हारे पास है ही कभी कभी हमें भी याद कर लेना नगीना जा करके हमें मत भूल जाना और प्रॉमिस करता हूं जब कभी भी मैं आऊंगा तो तुम्हारे पास जरूर फोन करूंगा ।सार्थक बोला

दोनों बहुत कुछ कहना चाहते थे और अपने अपने दिल की बात भी कह लेना चाहते थे लेकिन कह नहीं पाए।

रजनी को एहसास हो गया कि लावण्या को सार्थक से प्यार हो गया उसने लावण्या और सार्थक को बात करने के लिए पूरा स्पेस दे दिया और खुद जाकर के शशांक और लक्ष्य से बातें करने लगी

सार्थक मैं क्या तुम से कुछ माग सकती हूं प्लीज मना मत करना एक आखरी बार लावण्या की आंखों से आंसू छल छला आए

हां बोलो क्या चाहिए सार्थक बोला

क्या मैं तुमको एक बार गले लगा सकती हूं प्लीज । लावण्या ने कहा

सार्थक भी यही चाहता था उसने दोनों बाहें खोल दी और लावण्या करके उसमें समा गई

सार्थक ने उसे खूब अच्छे से बाहों में भर लिया लावण्या ने भी सार्थक को बहुत तेजी से पकड़ लिया दोनों के आंखों से आंसू टपक पड़े लावण्या तो अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे सार्थक से दूर जाना उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह कुछ छोड़

कर जा रही हो ।बहुत देर तक दोनों एक दूसरे को अपने आप मेरे समेटे रहे मानो अलग ही नही होना चाहते हो ।

तभी प्लेटफार्म पर गाड़ी आने का अलाउंस हुए और दोनों अलग हुए लावण्या ने मुस्कुरा कर अपने आंसू साफ किया ।

रुको मैं तुम्हारे लिए पानी की बोतल ले आता हूं सार्थक ने कहा

वह भाग करके उसने कैंटीन से एक जूस की बोतल एक पानी की बोतल डिस्पोजल गिलास स्नैक्स बिस्किट और बहुत सारा सामान ला करके लावण्या को दिया

ट्रैन आ करके स्टेशन पर लग चुकी थी और फिर लावण्या और रजनी दोनों ने तीनों से विदा लेकर के ट्रेन में बैठ गए

जब तक ट्रैन नहीं चली गई तब तक तीनों खड़े रहे और जब ट्रेन चल गई तब वापस जाने के लिए मुड़े

लावण्या के चले जाने के बाद सार्थक बहुत उदास था

भाई अगर अभी दिल नही भरा हो औरर मन करे तो घर तक छोड़ आ । लक्ष्य ने कहा

सार्थक झेप गया

शशांक भाई जल्दी से तैयारी कर लो लक्ष्य ने फिर से कहा

कहां की तैयारी । शशांक ने पूछा

नगीना चलना है भाई भाभी के घर ,अपने भाई के साथ

बारात में क्योंकि क्योंकि अब तो दुल्हन नगीना से ही आएगी चाहे जो भी हो । लक्ष्य ने कहा

सार्थक सरमा गया और बोला क्या बे क्या है तुम लोग यार कोई तो मौका छोड़ दिया करो

साले अपने बाप को मत सिखाया कर हम लोग तुझसे इसीलिए इतनी दूर थे की तू अच्छे से बाय बोल सके ।

तुम लोग अपनी बकवास बंद करो चलो एयरपोर्ट चले अपने को भी घर चलना है सार्थक ने शरमाते हुए कहा

पूनम कहा मर गयी -जोर दार आवाज में कोई दहाड़ा

और उसकी इतनी तेज आवाज सुनकर अंदर रसोई में कुछ गिरने की आवाज हुई मानो आवाज की धमक वहां तक पहुची हो

आयी चाची -अंदर से आवाज आई , आवाज सुनकर लग रहा था कि जो कोई भी बोल रहा था डर के मारे उसकी आवाज थरथरा रही हो

एक काम बोल दो तो दो घंटे लगाती है महारानी जी पता नही कौन से जन्म की दुश्मनी निकाल कर चली गयी इसकी माँ ,जो इस को मेरे पास छोड़ कर चली गयी अब ये मेरे छाती पर मूग दल रही है।

मैने बोला था इसको अपने पास मत रखो भेज दो इसके बाप के पास लेकिन मेरी इस घर मे सुनता कौन है ,आज आने दो मै साफ साफ बोल दूंगी की मेरे बस की नही है

इतना राबा ढाबा उठाना अपना इंतेजाम खुद करे भाई साहब मैने जिंदगी भर का ठेका नही उठा रखा है एक लगभग 45 साल की महिला गुस्से से बड़बड़ा रही थी ।

तभी अंदर से एक लगभग 20 साल की लड़की बाहर निकली

गोरी गोरी नाजुक सी ,काफी दुबली पतली थी लेकिन चेहरा मानो चंद्रमा की तरह दमक रहा हो और उसपर काले बाल ऐसा लग रहा था कि की काले बादलों ने चाँद को अपने आगोश में छुपा रखा हो हालांकि उसने रत्ती मात्र भी मेकअप नही कर रखा था लेकीन चेहरे को देख कर ऐसा लग रहा था कि आंखों में काजल और ओठो पर गुलाबी लिपिस्टिक लगा हो बड़ी बड़ी कजरारी आंखे जो इस वक्त डर से झुके हुए थे । दोनो हाथो में बस एक एक कंगन थे और बदन पर गुलाबी रंग का एक पुराना मगर साफ सुथरा सा सलवार सूट था जो उसपर खिल भी रहा था

उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि वह काफी घबराई हुई थी और डरी हुई थी

जी चाची जी? - उस लड़की ने डरते डरते कहा

कब से बुला रही हु क्या बाहरी हो गयी हो सुनाई नही पड़ता है - उस महिला ने गुस्से से पूनम को डांटते हुए कहा

वो...वो..चाची जी मैं काम कर रही थी -पूनम ने सहम कर जबाब दिया

पता है कितना काम करती हो दिन भर बैठे बैठे सिर्फ रोटियां तोड़नी है एक नंबर की काम चोर हो यहां प्यास के मारे गला सूख रहा है और तुम हो कि काम का बहाना बना कर हरवक्त अंदर ही घुसी रहती हो इतना कौन सा काम करती हो और इतना कौन सा काम रहता है घर मे -उस औरत का चेहरा गुस्से से लाल था और जुबान आग उगल रही थी

अपने चाची की यह जली कटी बाते सुनकर पूनम के आंखों में आंसू भर आये जिससे उसने अपनी पलके झपका कर अंदर जब्त करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रही अनायास ही दो बूद लुढ़क कर उसके गालो को गीला करने लगे

लो अब रोना शुरू हो गयी महारानी जी ऐसा क्या बोल दिया मैने जो टसुए बहाना शुरू कर दिया इतना ही मेरी बातें बुरी लगती है तो अपने बाप के पास चली जाओ एक तुम और एक तुम्हारे उस आवारा भाई दोनो ने मिलकर मेरा जीना हराम कर दिया है

न काम के ना काज के और जरा सा कुछ बोल दो तो मुह बन जाता है

अब खड़ी खड़ी मुह क्या देख रही हो जाओ जा कर पानी ले आओ प्यास के मारे जान निकली जा रही है ।- उस महिला ने रुखाई से कहा

जी...जी ..अभी लायी पूनम ने जल्दी से अपने गालो को अपने हाथों से पोछा और फिर अंदर की तरफ भागी

वह महिला अभी भी बड़बडाये जा रही थी ।

थोड़ी देर बाद पूनम अपने हाथ मे पानी का गिलास लेकर आई और फिर उस महिला की तरफ बढ़ाया

उसने गिलास उठाया और एक घूट पी कर सारा पानी वैसा का वैसा रख दिया और बोली

तुम्हारा वह लफंगा भाई सार्थक का कुछ आता पता है कि

कब तक वापस आना है की अब वही रहना है घर से कोई मतलब नही है उसे

नही चाची आज आना था भैया को पूनम ने कहा

हम्म, चलो जाओ आरती का थाल तैयार करलो फिर लाट साहब कमा कर लौट रहे है आज अपने दो आवारा दोस्तो के साथ - उस औरत ने एक कटाक्ष किया

वो तो खैर मनाओ की तुम दोनों को हमारी थोड़ी दाब है वरना वो सार्थक एक नम्बर का छठा गुंडा मवाली और तुम एक नम्बर की...

चाची जी प्लीज ...पूनम ने हल्का सा चिल्ला कर कहा

उसकी आंखें आस्चर्य से फैल गयी उसे बिश्वास नही हो रहा था कि ये उसकी सगी चाची है और ऐसा भी बोल सकती है

और चाची को भी तुरंत लग गया कि उसने कुछ ज्यादा ही बोल दिया लेकिन अब बोल दिया तो बात को सम्हालने में जुट गई

क्या चाची? मैं सच कह रही हूँ आज कल जग जमाना बहुत खराब है बिना माँ की लड़की कैसे बिगड़ जाती है तुम्हे नही पता अपने कस्बे में ही देखो कितनी लडकिया है जो क्या क्या नही करती है लेकिन मैंने तुम दोनों को अपने सगे बच्चे जैसे पाला है इसी वजह तुम दोनों के ऊपर कोई उँगली नही उठा सकता नही तो तुम दोनों जाने किस हाल में होते

पूनम का दिल किया कि बोल दे कि हम दोनों को अपने घर मे रखने के बदले पापा ने अपना पूरा हिस्सा तुम्हे दे रखा है सारे

खेत इस घर को और ऊपर से पैसे भी भेजते है लेकिन उसने अपने आपको कंट्रोल किया और वापस घूम कर अंदर चली गयी
 
पूनम अंदर चली गयी और किचन का काम निपटाते जा रही थी गम और गुस्से से उसका हाथ बहुत जल्दी जल्दी चल रहा था

उसे अपनी जिंदगी के कई साल पहले की घटना अपने आंखों के सामने फ़िल्म सी चलती हुई नजर आयी जब उसकी माँ जिंदा थी ।

सार्थक के पापा दिल्ली में ही एक बहुत बड़े कंपन्नी में जॉब करते थे वह दोनों से बहुत प्यार करते थे और पूनम की माँ तो पूनम को किसी राजकुमारी की तरह सजा कर रखती थी ,पूनम थी भी तो बहुत खूबसूरत जो भी उसे देखता लाड किये बिना नही रहता था छोटा सा परिवार बहुत खुश था लेकिन शायद इस खुशी को किसी की नजर लग गयी पूनम की मम्मी को किडनी फेल्योर हो गया और वह असमय मर गयी पूनम की उम्र सिर्फ 10 साल थी और सार्थक करीब 12 साल का था

दोनो बच्चे बुरी तरह से रो रहे थे और पूनम के पापा के ऊपर जैसे दुखो का पहाड़ टूट पड़ा हो ,वह अपने दोनों बच्चों को सीने से चिपकाये बिलख रहे थे ।

पूनम के माँ के मर जाने के बाद सबने पूनम के पापा को

बहुत समझया की दूसरी शादी कर ले लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया और अपने बच्चों के लिए जिंदगी भर अकेला रहने का निर्णय लिया ।

वह दोनों को लेकर अपने पास जाना चाहते थे लेकिन रिस्तेदारो ने समझाया और ऊँच नीच का हवाला देकर दोनो को यही कस्बे में अपने छोटे भाई के पास रहने के लिए बोला कुछ दिन तो सब ठीक रहा लेकिन फिर पूनम की चाची के तानो को सुनकर पूनम के पापा ने वापस से दिल्ली जाने का सोच लिया क्योकि आगे उन्हें पूनम की शादी भी करनी थी और वह चलेगये तबसे सार्थक और पूनम अपने चाची चाचा के साथ ही रहते है

यह सब सोचते सोचते अनायास ही पूनम की आंखों से आंसू छलछला आये उसे उसने पोछा और फिर अपने काम मे जुट गई आज एक हफ्ते वाद उसके भैया सार्थक वापस आरहे थे इसीलिए उसने उनके लिए कई सारे स्पेशल डिशेस बनाई थी और बेशब्री से सार्थक का इंतजार कर रही थी दरवाजे के खटका सुनकर अनायास ही उसकी नजर और कान दरवाजे की तरफ बढ़ जाते थे

उसने जल्दी जल्दी सब कुछ बनाया और फिर सार्थक का इंतजार करने लगी

अचानक उसे अपनी चाची की आवाज सुनाई पड़ी

घूम आये ? हो गयी मस्ती और मटरगस्ती , बाप कमा रहा है तो पैसे उड़ाओ मेरी तो बाते तुम दोनों भाई बहन को बुरी

लगती है इसीलिए मैंने तो बोलना छोड़ दिया है और कौन है यहां जो तुम्हे रोकने टोकने वाला इसीलिए जो मर्जी सो करो घर का ख्याल तो तुम्हे है नही न एक जवान बहन है घर मे उसकी टेंसन है बस तुम्हे तो अपने उन दो लफंगे दोस्तो के साथ इधर उधर मटरगस्ती करनी है ।करो मेरे बाप का क्या जा रहा है मेरा जो फर्ज था उसे पूरा कर दिया तुम्हारी माँ के मरने के बाद जो जिम्मेदारी मुझे दी थी सबने उसे पूरा कर दिया अब बांध के थोड़े न रख पाउंगी

चाची ,चाची ,मेरी प्यारी चाची अब आ गया हूं अभी डाँट लेना अभी आते ही' कुछ तो रहम खाओ इस नन्ही सी जान पर आपको पता है ना कि मुझे ये ट्रिप फ्री में मिली थी क्विज सो के जीतने पर

हा हा पता है पता है कालेज वालो को भी पता नही नही क्या क्या सूझता है ये नही की कोई कीमती चीज भेट कर दे सिर्फ और सिर्फ खर्च करवाना आता है है

अच्छा छोड़ो ये देखो चाची तुम्हारे लिए क्या लाया हूं सार्थक ने अपना बैग वही खोलना शुरू किया

चाची की आंखे उत्सुकता से फैल गयी वह उत्सुकता से सार्थक के बैग में झांकने लगी लेकिन ऊपर से बोली

मुझे कुछ नही चाहिए जो लाये हो लेजाकर अपनी बहन को दे दो अभी इतने भी गए गुजरे दिन नही आये है कि मैं लोगो से मांग मांग कर पहनू चाची ने मुह बिचका कर कहा

अच्छा तो अब मैं "लोगो" हो गया आप तो कहती थी मैं

आपका बेटा हूँ तो क्या एक बेटा अपनी चाची के लिए कुछ नही ला सकता है - सार्थक ने मुस्कुरा कर कहा

एक पल को चाची को कोई जबाब नही सूझा वो सकपका कर रह गयी और चुप रही

सार्थक ने जल्दीसे अपने बैग से एक खूबसूरत सी साडी निकली और चाची कि तरफ बढ़ाया

साड़ी देखते ही चाची खुशी से खिल गयी जाहिर है कि उन्हें साडी बहुत पसंद आई

ये देखिये बताइये कैसी लगी आपको सार्थक ने कहा

ठीक है ,जो भी है सब अच्छा है ,क्या देखना है अब ले ही आये हो तो क्या बोलू रख दो वही

अरे क्या चाची इतनी मुसीबत से अपनी चाची के लिए मैं साड़ी ढूढ़ के लाया और आप है कि देख भी नही रही है एक बार देखो तो सही सार्थक ने उदास हो कर कहा

क्या देखु ठीक है जो भी है अब जाओ अंदर आराम कर लो नास्ता पानी कर लो पूनम कब से इंतजार कररही थी तुम्हारा चाची ने अपेक्षाकृत शांत और प्यार से कहा

अरे हा मैं तो भूल ही गया था

सार्थक ने जल्दी से अपना आ बैग वापस पैक करते हुए कहा

और उठ कर अन्दर भाग

छुटकी, वो छुटकी सार्थक चिल्लाते हुए अंदर आया

सार्थक की आवाज सुनकर जैसे पूनम को पंख लग गये वह सब काम छोड़ कर दौड़ती हुई आयी और सार्थक को देखते

ही उससे लिपट गयी उसकी आँखों से आंसू फुट पड़े और हिचकिया बध गयी

सार्थक ने प्यारसे उसे गले लगा लिया और उसके बालो पर अपना हाथ फेरने लगा

पूनम उससे बुरी तरह लिपटी हुई थी मानो, मानो कई सालों बाद देख रही हो वह सुबक सुबक कर रो रही थी

क्या हुआ छुटकी क्यो रो रही है पागल अब मैं आ गया न बोला था तो की आज आऊंगा फिर - सार्थक ने मुस्कुराते हुए कहा

मैं कब से आपका इंतजार कर रही थी इतनी देर लगा दी आने में

अरे वो लक्ष्य न तुझे तो पाता है उसका की कितना शरारती है उसी की वजह से देर हो गयी अच्छा अब चुप हो जा और बच्चों की तरह रोना बंद कर खामखा रोये जा रही है यह हफ्ते पहले ही गया था कोई ज्यादा दिन थोड़े न हुए है

हा भैया लेकिन एक हफ्ते भी मैने कैसे गुजारे है क्या बताऊँ ऐसे लग रहा था कि एक एक दिन एक एक महीने के बराबर हो ऊपर से चाची की बाते

क्या हुआ चाची ने फिर कुछ कहा क्या सार्थक ने पूछा

पूनम ने सिर झुका लिया

बोल चाची ने तुझे कुछ कहा फिर से सार्थक हल्के से गुस्से में बोला

जाने दो भैया उनकी तो आदत ही है लेकिन कभी कभी बहुत

गलत बोल देती है दिल को छू जाता है माना कि उन्होंने हमें पाला पोसा सहारा दिया लेकिन फिर भी ...पूनम ने कहते कहते अपनी बात अधूरी छोड़ दी

क्या फिर भी? क्या कहा चाची ने ? - सार्थक ने पूछा

कुछ नही छोड़ो जाने दो ये बताओ कैसा रहा ट्रिप मजा आया कि नही-पूनम ने बात बदलते हुए पूछा

क्या बताऊँ छुटकी मजा तो आया लेकिन एक चक्कर मे फस गया था इसीलिए थोड़ा सा मजा किरकिरा हो गया लेकिन खुशी हैं कि किसी की हेल्प किया

कैसी हेल्प और कैसा मुसीबत क्या हुआ था भैया? - पूनम ने उत्सुकता से पूछा

तू छोड़ लंबी कहानी है फिर बताऊंगा ; आ तुझे दिखाऊ मैं तेरे लिए क्या लाया हूँ

क्या जरूरत थी भैया कुछ लाने की सब कुछ तो है मेरे पास पूनम ने फार्मेलटी अदा किया

अच्छा तुझे नही चाहिए कोई बात नही फिर रहने देता हूँ किसी और को दे दूंगा सार्थक ने सब कुछ समेटते हुए कहा

नही ..नही..ऐसी बात नही है वो तो मैं ऐसे ही कह रही थी।पूनम ने जल्दी से बोला पूनम को सार्थक से ऐसी उम्मीद बिल्कुल नही थी

सार्थक पूनम को ऐसे देखकर खिलखिला कर हंस पड़ा और पूनम के सिर पर एक हल्का सा चपत लगा दिया और बोला - पागल कही की

और पूनम को सारी बात समझ मे आते ही झेप गयी और झूठ मूठ के गुस्से से बोली

नही चाहिए ले जाओ मुझे कुछ नही चाहिए इसे मेरी होने वाली भाभी को दे देना ,मेरे लिए क्यो लाओगे

भाभी का नाम सुनते ही अनायास ही सार्थक के दिल मे लावण्या का ख्याल आया और उसका दिल जोर से धड़क गया उसकी आँखों के सामने लावण्या का मुस्कुराता सा चेहरा घूम गया

अरे पागल ऐसा भला हो सकता है कि मैं अपनी छुटकी को भूल जाउ तू तो मेरी लाडली राजकुमारी है जान है मेरी तुझे कैसे भूल सकता हूं ये देख क्या लाया हूँ तेरे लिए

सार्थक ने अपने बैग से एक खूबसूरत नीले रंग का ड्रेश निकला जिसमे स्टोन से सुंदर की कढ़ाई हुई थी और ढेर सारे नीले रंग का झिलमिलाता हुआ नग लगा हुआ था ड्रेश को खोल कर पूनम को दिखाता हुआ बोला देख बता कैसी लग् रही है
 
वाओ आवसम भैया फैंटास्टिक कितना खूबसूरत है पूनम की आंखे ड्रेस को देख कर फटी की फटी रह गई जाहिर है उसे बहुत पसंद आया

है ना सुंदर- सार्थक ने कहा

बहुत सुंदर है भैया आई लब यु मेरे स्वीट स्वीट भैया पूनम सार्थक के गले मे झूलते हुए बोली

अच्छा बस बस बस अब मसका मारना बंद कर और छोड़ तो

सही अभी और कुछ दिखाना है

पूनम ने सार्थक को छोड़ा और उत्सुकता से दुबारा बैग में देखने लगी

सार्थक ने बैग से एक खूबसूरत और डिजायन दार गले का सेट निकाला जिसमे मैचिंग एक जोड़ी कान के ईयर रिंग भी थे

लवली, सो इम्प्रेससिव, पूनम खुशी के मारे उछल पड़ी मानो कोई छोटी सी बच्ची हो

सो गुड भैया दोनो बहुत ही खूबसूरत है आपको कैसे पता कि मुझे गले का सेट चाहिए

याद है जब तू शादी में गई थी अभी 2 महीने पहले तो जिस नजर से उस लड़की का गले का हार देख रही थी मुझे समझ मे आगया था कि तुझे पसंद आ गया है इसीलिए मैंने तेरे लिए ये खरीदा है - सार्थक बोला

अच्छा और देख ये चाचा जी के लिए और ये घड़ी पापा के लिए देख बता कैसा है- सार्थक ने और गिफ्ट निकाल के दिखाया

अच्छा है बहुत अच्छा है पापा की घड़ी पुरानी हो गयी थी और अब अच्छी भी नही लग रही थी ,अच्छा किया पापा के लिए ले आये वो अपने लिए लेते भी नही ,

अच्छा वो सब छोड़ो ये बताओ अपने लिए क्या लिया पूनम ने पूछा

अपने लिए, अपने लिए क्या लेना मुझे किसी चीज की कोई

जरूरत नही थी मेरे पास सब है -सार्थक ने कहा

अरे ऐसे कैसे फिर मुझे भी कुछ नही चाहिए सबके लियेलाये अपनेलिए भी कुछ ले आते- पूनम ने कहा

क्या लेता मुझे कुछ समझ मे नही आया और फिर जब जरूरत होगी तो ले लूंगा अब बाते ही करती रहेगी की कुछ खाने पीने को भी देगी बड़ी जोर की भूख लगी है छुटकी

अरे सोरी सोरी भैया मैं भूल गयी आप हाथ मुह धो लो मैं अभी लेकर आती हूँ

पूनम जल्दी से अंदर किचन में भागी

सार्थक सारा सामान समेटने लगा अचानक से उसकी नजर लावण्या के कान के झुमकों पर पड़ा जिसे उसने चुपके से अपने जेब मे सरका लिया था जब वह उसके बगल में बैठी थी और सर उसके कंधे पर रख था उसने उसे उठाकर प्यार से देखा और दूसरे हाथ से उसको हल्के से हिलाया उसके ओठो पर एक हल्की सी मुस्कुराहट आगयी वह लावण्या के साथ बिताए पलो को याद करके रोमांचित हो गया

लावण्या आई मिस यू सो मच आई होप तुम भी मुझे याद कर रही होगी ।उसने अपने ओठो से उस कान के झुमके को चूमा और फिर वापस से उसे अपनी जेब मे सरका लिया और सब कुछ समेट कर हाथ मुह धोने चला गया

क्रमशः

कहा हो तुम बताओ तो तुम्हारा हाल कैसा है

तुम्हारी याद को मैं याद करके मुस्कुराता हूँ

मिलो जल्दी करो वादा न तुम बिन जी मेरा लगता

मैं आंखे बंद करते ही तुम्हे अपने पास पाता हूँ

रजनी को लेकर लावण्या अपने शहर नगीना पहुची

रजनी शर्म के मारे जैसे जमीन में धसी जा रही थी उसे अपने किये पर बहुत पछतावा था लेकिन लावण्या ने उसे हिम्मत बधा रखी थी और उसका हाथ मजबूती से थाम रखा था ।

लावण्या और रजनी ने जैसे ही घर मे कदम रखा लावण्या की माँ दोनो को देखते ही खुशी से खिल गयी

वह भाग के आयी और रजनी को अपने गले से लगा लिया।

रजनी मेरी बच्ची ,कहा चली थी मुझे छोड़ कर ? एक बार भी अपनी माँ की याद नही आई- लावण्या की माँ ने रजनी को अपने गले से लगा कर रोते हुए कहा

और रजनी अपनी माँ को इस तरह से रोता देख कर बुरी तरह फफक पड़ी उसने अपनी माँ को जोर से अपने सीने से चिपका लिया मानो कई जन्मों के बाद मिली हो ।

मम्मी मुझे माफ़ कर दो मैं बहुत बुरी हूँ , मैने बहुत गलत काम किया है मैं प्यार में अंधी हो गयी थी प्लीज् मम्मी मुझे माफ़ कर दो ,प्लीज् प्लीज् रजनी जार जार रोये जा रही थी, उसे अपने किये का बहुत अफसोस था

कोई बात नही तू सही सलामत वापस आ गयी यही मेरे लिए

बहुत है जो हो गया उसे भूल जा और अब एक नए सिरे से जिंदगी शुरू कर मैं तुझसे नाराज नही हूँ बस मुझे तेरी चिंता हो रही थी कि जाने कहा होगी किस हॉल मे होगी ।रजनी की मम्मी ने रजनी के आँसू पोछते हुए कहा

क्योकि उसने देख लिया कि रजनी को खुद अपने किये का बहुत पछतावा है कैसे वह अंदर से टूट चुकी है अगर वह भी उसे डांटती या कुछ कहती तो शायद रजनी सम्हल नही पाती इसीलिए उसने इस समय शांत रहना ही बेहतर समझा

ये बता तू कैसी है ठीक तो है ना गुलाब की तरह खिला रहने वाला तेरा चेहरा देख कैसे मुरझा गया है और कितनी कमजोर भी हो गयी है बेटे ये सब कैसे हुआ तबियत खराब हो गयी थी क्या ? रजनी की मम्मी ने पूछा

न मम्मी अपने मम्मी पापा को बहुत दुख दिया है ना, मैने उन्हें बहुत तकलीफ दी है, तो भगवान ने वही सारी तकलीफों का बदला लिया है उन्होंने सारी तकलीफों को मुझे दे दिया ।

ऐसे नही सोचते बेटे तू तो मेरी समझदार गुड़िया है अब सब कुछ भूल जा और जाकर पापा से मिल ले तेरे जाने के बाद वो एकदम टूट से गये है तेरे साथ साथ उनके ओठो की हसी भी चली गयी थी ।रजनी की मम्मी ने कहा

मम्मी मैं पापा का सामना कैसे करु मेरी हिम्मत नही हो रही है उनके सामने जाने की- रजनी ने शर्मिन्दगी से कहा

अरे रजनी तू बिल्कुल मत घबरा वो कुछ नही कहेगे वो तेरे

लिए तड़फ रहे है जा जाकर उनसे मिल ले बेटे -

लावण्या ले जा दीदी को पापा से मिला दे इसे देख कर वो खुश हो जाएंगे - मम्मी जी ने कहा

ठीक है मम्मी- लावण्या बोली

चलो दीदी लावण्या ने रजनी का हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहा

रजनी सहमी सी शर्म से भरी भरी लावण्या के साथ चल पड़ी

दोनो बगल के कमरे में पहुचे जहां पर रजनी के पापा लेटे हुए थे इन एक महीनों में वो बिल्कुल निसहाय और कमजोर हो गए थे गुलाब की तरह खिला रहने वाला चेहरा बिल्कुल सूख गया था ओठो पर पपडिया जमी थी, और आंखे भी शायद रो रो कर सूख गई थी
 
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