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अजनबी हमसफर

पूनम हैरान परेशान बैठी रही ,कल सार्थक उसपर अनायास गुस्सा कर रहा था और आज लावण्या ने अपना फोन वापस ले लिया अचानक से उसके भैया और भाभी दोनों ही उसके साथ रूखा ब्यवहार करने लगे लेकिन पूनम को इस तरह रूखा ब्यवहार करने की वजह समझ मे नही आ रही थी

पूनम ने अपने पूरे माइंड को रिवाइंड करके अपनी कोई गलती ढूढने की कोशिश की जिससे इस बेरुखी की वजह का पता चल पड़े लेकिन वह नाकाम रही

सोचते सोचते पूनम का दिमाग फटने लगा लेकिन उसकी समझ मे कुछ नही आया आखिर में वह थक गई और बिस्तर से उठ कर बाहर निकल कर बाहर आ गयी ।

वह चुपचाप बाथरूम गयी और फिर फ्रेश होकर फटाफट नहाई और किचन में आकर अपने भाभी की नास्ता बनाने में मदद करने लगी ।

लावण्या ने कुछ नही कहा बस चुपचाप अपना काम कर रही थी उसने पूनम को एक बार नजर उठा कर देखा और फिर अपने काम मे ब्यस्त हो गयी ।

तीन दिन तक ऐसे ही चला इन तीन दिनों में एक बार भी पूनम और लक्ष्य की बात नही हुई ।

पूनम बेचैन हो रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका कुछ खो गया हो

ये क्या हो रहा है मुझे इतनी बेचैनी क्यो हो रही है पहले भी तो मेरे पास फोन नही था तो अब अगर नही है तो क्या हो गया पूनम ने अपने बेचैन दिल को मनाने की कोशिश की

लक्ष्य लगातार पूनम के नम्बर पर काल करने की कोशिश कररहा था लेकिन पूनम का फोन स्विच ऑफ आरहा था । लक्ष्य को पूनम से बात करने की आदत हो गयी थी इसी वजह से वह भी पूनम से बात करने के लिए मरा जा रहा था ।आखिरमें चौथे दिन उसके बर्दास्त से बाहर हो गया ।

उसने लावण्या के फोन पर कॉल किया

हेलो भाभी नमस्ते - लक्ष्य ने कहा

नमस्ते - हां लक्ष्य बोलो लावण्या ने कहा

क्या हुआ भाभी पूनम का फोन नही लग रहा है सब ठीक तो है ना- लक्ष्य ने छूटते ही पूछा

हां लक्ष्य सब ठीक है उसका फोन खराब हो गया है लेकिन

तुम फोन क्यो कर रहे थे कुछ काम था क्या - लावण्या ने पूछा

नही ऐसे कोईखास काम नही था बस ऐसे ही फोन किया था- लक्ष्य बोला .

हम्म और सब ठीक है ना लावण्या ने औपचारिकता बस पूछा

जी भाभी ठीक है सब, कहा है मैडम जी? - लक्ष्य ने पूनम के बारे में पूछा

पूनम काम कर रही है वो बात नही कर सकती लावण्या ने कहा

ओह्ह अच्छा कोई बात नही मैं बाद में काल करता हूँ - लक्ष्य ने कहा

कुछ काम है तुम्हे क्या? - लावण्या ने दुबारा से पूछा

नही बस ऐसे ही -लक्ष्य बोला

वैसे सार्थक कहा है भाभी? लक्ष्य ने पूछा

बस ऑफिस जाने को तैयारहो रहे है - लावण्या ने कहा

अच्छा ठीक है लक्ष्य ने कहा और फोन रख दिया

लक्ष्य को ऐसा महसूस हुआ मानो आज लावण्या का ब्यवहार कुछ बदला हुआ हो जिस तरह से वह बात करती थी आज उस तरह से उसने बात नही किया और यही बात लक्ष्य को बहुत जीव लग रहा था और फिर पूनम से भी उसकी बात नही हुई पूनम से बात करने का उसका बहुत मन कर रहा था लेकिन वो करे तो क्या करे उसे कुछ समझ मे नही आरहा था ।

ऐसे ही तीन दिन और बीत गए लक्ष्य और पूनम से बात हुए करीब एक हफ्ता हो गया और लक्ष्य बहुत ही ज्यादा परेसान हो गया उसे पूनम से बात करने का बहुत ही ज्यादा मन कर रहा था आखिर में उसने एक फैसला किया ।

उसने अपनी बाइक उठाई और सार्थक के घर की तरफ चल पड़ा

सार्थक के घर पहुच कर उसने दरवाजा खटखटाया पूनम बाहर निकली और उसने दरवाजा खोला

लक्ष्य को देखते ही पूनम की आंखे चार सौ चालीस बोल्ट के बल्ब जैसे चमक उठी अनायास ही उसके चेहरे पर एक

मुस्कुराहट आगयी ।

अरे लक्ष्य तुम ? यहां कैसे बड़े दिन बाद आये हो सब ठीक तो है ना तुम कैसे हो- पूनम चहक कर बोली लक्ष्य को देख कर उसे बहुत ही ज्यादा खुशी महसूस हो रही थी

मैं ठीक हूँ तुम कैसी ? हो बहुत दिन हुआ तुमसे बात नही हुआ तो मैंने सोचा कि चलकर तुम्हारा हाल चाल पूछ लू - लक्ष्य भी पूनम को देखकर बहुत खुश था पूनम को देख कर उसके बेचैन मन को जैसे चैन मिला हो

कौन है पूनम लावण्या ने अंदर से चिल्ला कर कहा

लक्ष्य आया है भाभी- पूनम ने खुश होकर कहा

लक्ष्य का नाम सुनते ही लावण्या के शरीर मे जैसे बिजली सी भर गई वह मानो दौड़ती हुई आयी उसके चेहरे की रंगत उड़ी हुई थी ।

अरे लक्ष्य तुम यहाँ कैसे कुछ काम था क्या ? - लावण्या ने कहा

क्यो बिना काम के मैं नही सकता क्या भाभी - इस ततः लावण्या के पूछह जाने पर लक्ष्य सकपका गया और बुरी तरह झेप गया अपनी मुस्कराहट के पीछे लक्ष्य ने अपनी झेप

छुपाते हुए कहा

नही ऐसी बात नही है आ सकते हो लेकिन सार्थक तो है नही इसी लिए मैने सोचा - लावण्या ने कहा .

मुझे सार्थक से कोई काम नही था ,मैने सोचा कि बहुत दिन हो गए इस नकचढ़ी चुहिया के हाथ की चाय नही पी है आज चल कर पी लेता हूँ और बहुत दिन हो गए तुम लोगो से मिले हुए तो चला आया - लक्ष्य बोला

लावण्या को न चाहते हुए लक्ष्य को अंदर आने के लिए कहना पड़ा

पूनम को देख कर लक्ष्य और लक्ष्य को देख कर पूनम दोनों बहुत खुश थे और लावण्या दोनों की खुशी महसूस कर रही थी ।

पूनम बिना कहे ही किचन में चली गयी और चाय बनाने लगी लावण्या वही बाहर बैठ कर लक्ष्य से बाते कर रही थी थोड़ी देर बाद पूनम लक्ष्य के लिए चाय लेकर आई और एक कप लक्ष्य को एक लावण्या को देकर एक खुद लेकर बैठ गयी ।

अरे तुम यहाँ क्यो बैठ गयी छुटकी तुम्हारे भैया के कपड़े प्रेस

करने है जाओ जाकर वो करलो - लावण्या ने कहा

जा रही हूँ भाभी बस चाय पी लू - पूनम ने कहा

अरे अंदर ही पी लेना न प्रेस लगा देना जबतक वो गरम होगा तब तक पी लेना यहां बैठने से काम नही होगा पूनम करने से होगा छोटा सा दिन होता है कब खत्म हो जाता है पता नही तो टाइम बेस्ट मत करो जाओ जाकर कर लो अभी बहुत काम है - लावण्या ने कहा

पूनम ने लावण्या को देखा लेकिन लावण्या के चेहरे पर कोई भी भाव नही था वह उठ कर अंदर चली गयी ।

पूनम के फोन को क्या हुआ भाभी लक्ष्य ने चाय पीते हुए पूछा

खराब हो गया है लावण्या ने टका सा जबाब दिया ।

हम्म भाभी मेरे पास एक एक्सट्रा फोन पड़ा है अगर आप कहो तो मैं दे दू - लक्ष्य ने कहा

नही लक्ष्य उसकी कोई जरूरत नही है वैसे भी पूनम को फोन की क्या जरूरत है वो तो घर मे ही रहती है कही आना

जाना ही नही है और कुछ जरूरी बात करनी हो तो मेरा फोन तो है ही न - लावण्या ने कहा

लक्ष्य का चेहरा उतर गया ।

लक्ष्य थोड़ी देर इधर उधर की बाते करता रहा उसे यह बात महसूस हुआ कि लावण्या का ब्यवहार उसके लिए बदला हुआ है और यही बात सोच सोच कर वह परेसान था ।

भाभी मुझसे कोई गलती हो गयी क्या आखिर में लक्ष्य ने पूछ ही लिया

नही ऐसी तो कोइ बात नही है- लावण्या बोली

मुझे लग् रहा है कि आज मैं किसी गैर के घर आया हूँ आज आपका ब्यवहार कुछ बदला हुआ लग रहा है ऐसा लग रहा है जैसे आपको मेरा यहाँ आना पसनद नही आया हो - लक्ष्य बोला

नही लक्ष्य ऐसा कुछ नही है तुम्हे बहम है और रही बात आने न आने की तो तुम तो चाची जी को जानते ही हो उन्हें किसी बाहरी का अपने घर मे इस तरह बार बार आना बिल्कुल अच्छा नही लगता और इसी बात पर उन्होंने उस दिन सार्थक को बहुत सुनाया - लावान्या बोली

ठीक है अगर ऐसी बात है तो मैं आगे से ध्यान रखूंगा -लक्ष्य ने कहा

लक्ष्य तुम्हे कुछ काम था क्या असल मे मुझे बहुत काम करना है तो जाना है - अचानक से लावण्या ने लक्ष्य से कहा

न भाभी ने बस मैं निकल रहा हूँ लक्ष्य लावण्या के बातो का मतलब समझ गया और उठता हुआ बोला

जाते हुए लक्ष्य की नजर पूनम को एक और बार देखने के लिए तलास रही थी लेकिन पूनम बाहर नही आई और आज लक्ष्य की भी हिम्मत नही हुई कि वह पूनम से मिलने चला जाय इसी वजह से वह बहुत ही बेझिल कदमो से बाहर की तरफ जाने लगा वो जिस मकसद से यह आया था उसका कोई भी मकसद पूरा नही हुआ ।

अगले दिन का सुबह रजनी के जिंदगी का मानो सबसे खूबसूरत सबेरे की तरह आया हो ।

रजनी का चेहरा खुशी से दमक रहा था राजीव की बाते राजीव का व्यवहार और राजीव की सादगी और सरलता रजनी के दिल मे सीधा उतर चुकी थी ।

कल रात की बाते सोच कर रजनी के ओठो पर एक बहुत ही प्यारी और खूबसूरत सी मुस्कुराहट सी आ गयी और उसका दिल खुशी से जोर जोर धड़कने लगा

कल रात में राजीव ने अपने इरादों से रजनी को खुशहाल कर दिया था ।

रजनी ने उठ कर अंगड़ाई ली और भाग कर बाथरूम पहुची वहां पर फ्रेश होकर जल्दी से उसने हाथ मुह धोया और फिर राजीव के कमरे में भागी ।

राजीव उठ चुका था और वह रजनी के आने की राह देख रहा

था ।

गुड मॉर्निंग, - राजीव ने रजनी को देख कर मुस्कुरा कर कहा

गुड मॉर्निंग, आप जाग गए ?- रजनी ने भी मुस्कुरा कर जबाब दिया

हा कब का मेरी आदत है सुबह सुबह उठने की रजनी इसीलिए मैं कब का जाग चुका हूँ और तैयार होकर आपके जागने का ही इन्तेजार कर रहा था - राजीव ने कहा

मैं भी रेडी हूँ - रजनी बोली

गुड तो देर किस बात की चलिए चलते है वापस अपने घर राजीव ने कहा

जी रजनी ने कहा और फिर राजीव के पीछे पीछे चल पड़ी
 
राजीव ने रजनी को बिठाया और गाड़ी निकाली और फिर अपने घर की तरफ रवाना हो गया

पूरे रास्ते दोनों एक दूसरे से बाते करते रहे और रजनी ने अपनी जिंदगी के वो स्याह पन्ना भी राजीव के साथ बाट

लिया जिसे वह कभी भी किसी के सामने नही कहना चाहती थी लेकिन राजीव को अंधेरे में रखकर वो अपनी जिंदगी की ये इम्पोर्टेन्ट डिसीजन नही लेना चाहती थी । इसी लिए उसने राजीव से कुछ भी नही छुपाया ।

मुझे आपके पुराने जिंदगी से कोई मतलब नही है रजनी मैने तुम जैसी हो उसे देख कर तुम्हे पसंद किया है और मैं तुमसे वादा करता हूँ कि कुछ भी हो जाय तुम मेरी वजह से कभी परेसान नही होंगी - राजीव ने कहा

रजनी ने प्यार से राजीव की तरफ देखा

क्या देख रही हो - राजीव ने मुस्कुरा कर कहा

देख रही हूँ कि सच्चे लोग कैसे होते है एक तुम हो जिसे लोगो के इमोसन लोगो के जज्बात और उनका सम्मान कितनी अच्छी तरह से करना आता है और कुछ ऐसे लोग भी होते है जिनहे किसी को हर्ट करने में ही मजा आता है किसी को तकलीफ देकर उन्हें जैसे सूकून मिलता है ।रजनी राजीव को एक तक देख रही थी और बोल रही थी

राजीव मुस्कुरा कर रह गया ।

करीब चार घंटे की ड्राइव के बाद दोनों नगीना पहुचे राजीव ने रजनी के घर के पास ले जाकर उतार दिया

अब आप कहा जा रहे है अपने घर की खुशबू के घर - - रजनी ने राजीव से पूछा

अब सीधा अपने घर जाऊंगा मम्मी पापा को खुशखबरी भी तो देनी है कि मैंने उनकी बहू ढूढ ली है राजीव मुस्कुराते हुए बोला

राजीव की बाते सुनकर रजनी लजा गयी

जल्दी आना राजीव मैं बेसब्री से तुम्हारा इन्तेजार करूँगी रजनी ने अपनी नजर झुका कर कहा यह कहते हुए उसके चेहरे की उदासी सारी कहानी बयां कर रही थी ।

ऐसे उदास होकर बोलोगी तो मैं कैसे जा पाऊंगा और जाऊंगा नही तो आऊंगा कैसे इसीलिए अब मुस्कुरा कर जाने की इजाजत दे दो राजीव ने रजनी का कंधा पकड़ कर देखते हुए कहा

जाइये मैने आपको कहा रोका है- रजनी ने कहा

हां ये भी सही है अच्छा चलो रजनी अपना ख्याल रखना मैं

आता हूँ जल्द ही मम्मी पापा के साथ वापस आऊंगा कहकर राजीव अपनी गाड़ी की तरफ जाने लगा रजनी उसको जाता हुआ देख रही थी गाड़ी के पास पहुच कर राजीव ने घूम कर रजनी को वापस देखा और फिर हाथ हिला कर बाय कहा और गाड़ी में समा गया

देखते ही देखते राजीव की गाड़ी आंखों से ओझल हो गयी और रजनी बुझे मन से और थके कदम से अपने घर की तरफ चल पड़ी ।

सार्थक के घर से निकल कर लक्ष्य और भी बेचैन हो गया उसे इतना तो समझ मे आगया की पूनम के घर मे सब ठीक नही है क्योंकि आज के पहले ऐसा ब्यवहार न तो सार्थक ने उससे किया था और न ही लावण्या ने किया था लेकिन आज ऐसा लग रहा था कि उसका जाना लावण्या को पसंद नही आया लेकिन क्यो मैने अचानक ऐसा क्या कर दिया है जो लावण्या और सार्थक ऐसे रुडली ब्यवहार कर रहे है लक्ष्य बहुत ही ज्यादा परेसान था ।

और पूनम उससे भी ठीक से बात नही हुई और फोन भी खराब हो गया अब बात भी नही कर सकता लक्ष्य बुरी तरह से परेसान था और सोच रहा था ।

वह घर पहुचा और सीधे अपने कमरे में जाकर पड गया

उसका कुछ भी करने का दिल नही कर रहा था शाम को लक्ष्य के पापा घर आये तो उन्होंने लक्ष्य को बुलाया

आया पापा लक्ष्य अपने पापा की आवाज सुनकर बोला

और फिर जल्दी से उठकर पापा के पास भागा ।

उसके पापा ड्राइंग रूम में बैठे हुए थे और उन्ही के पास उसकी मम्मी बैठी हुई थी ।दोनों के हाथों में काफी का मग था और दोनों काफी पी रहे थे ।

जी पापा लक्ष्य ने जाकर पूछा

क्यो बरखुरदार दीन दुनिया का होश है कि अपने कमरे तक ही सिमट कर रह गए हो मुझे आये हुए कितनी देर हो गयी और तुम्हारा अता पता नही है और ये क्या हाल बना रखा है बदहवास सा चेहरा और बेतरतीब बढ़े हुए बाल कम से इसमें कंघी तो कर लो ये कैसा हुलिया बना रखा है ।पापा जी ने लक्ष्य की सकल देख कर कहा ।

सॉरी पापा अभी हाथ मुह धोकर आता हूँ लक्ष्य जाने के लिए घूमा

रुको पहले काफी पी लो फिर कही जाना काफी ठंडी हो जाएगी और आओ बैठो मुझे तुमसे कुछ बात करनी है- लक्ष्य के पापा ने कहा

जी पापा लक्ष्य बैठ गया और उसने काफी का मग उठा लिया और उसमें थोड़ा सा एक्सट्रा फ्लेवर मिक्स करने लगा ।

इतना चॉकलेट पाउडर क्यो डाल रहे हो काफी में नही पीनी हो तो रहने दो - लक्ष्य के पापा ने कहा

वो क्या है ना पापा आई डोंट लाइक काफी मुझे चाय पसंद है - लक्ष्य ने कहा

तो रहने दो मत पियो कोई जबरदस्ती नही है- लक्ष्य की मम्मी जी कहा

वो सब छोड़िये न आप बताइए क्या बात है पापा क्या बात करना है आपको हमसे - लक्ष्य ने अपने पापा से पूछा

मुझे ये जानना है कि तुमने अपनी जिंदगी के लिए क्या सोचा है , कुछ करने का मूड है कि अभी भी सिर्फ तुम्हे मस्ती ही करनी है - लक्ष्य के पापा ने पूछा

क्या मतलब पापा - लक्ष्य को कुछ भी समझ मे नही आया

मतलब ये है कि तुम मेरे एकलौते बेटे हो पढ़े लिखे हो समझदार हो तो आखिर कब तक ऐसे घूमते रहोगे इधर से उधर कोई फॉर्म वार्म भरो जब तक मैं बैठा हूँ डिपार्टमेंट में तब तक कुछ न कुछ करवा ही दूंगा वरना फिर बाद में मुश्किल हो जाएगा और फिर तुम्हारी भी तो शादी करनी है कब तक ऐसे बैठे रहोगे शादी से पहले नौकरी लग जाय तो अच्छा रहेगा - लक्ष्य के पापा ने कहा

ठीक है पापा मैं देखता हूँ कोई जॉब लेकिन अभी शादी नही , अभी शादी का नही सोचा है - लक्ष्य ने कहा

क्यो फिर कब सोचोगे उम्र हो गयी है शादी की तुम्ही देख लो वो तुम्हारा दोस्त है क्या नाम है हां सार्थक तुम्हारी मम्मी कह रही थी कि उसकी भी हो गयी तो तुम्हे क्या प्रॉब्लम है - लक्ष्य के पापा बोले

पापा कोई जरूरी है कि सार्थक की हो गयी तो मैं भी कर लूं , मुझे अभी नही करनी अभी मैं शादी के लिए तैयार नही हूँ - लक्ष्य ने कहा

देख रही हो मुझे पहले से पता था कि इसका यही जबाब होगा ये आजतक न कभी सीरियस रहा है ना आगे किसी चीज के लिए सीरियस होगा - लक्ष्य के पापा ने भड़क कर कहा

लक्ष्य बेटे क्या प्राब्लम है कोई दिक्कत हो तो बताओ और अगर किसी से प्यार करते हो तो बताओ आखिर क्या कारण है कि तुम शादी नही करना चाहते हो वैसे भी मेरे एक जानने वाली की लड़की है बहुत ही खूबसूरत पढ़ी लिखी और अच्छी लड़की है , ना हो तो एक बार मिल लो उससे, उसके बाद जो तुम कहोगे आखिर में पसंद तुम्हे ही करना है , लेकिन एक बार मिल तो लो उन्हें तुम बहुत पसंद हो और उस लड़की की मम्मी कई बार इशारो ही इशारो में मुझसे कह भी चुकी है- लक्ष्य की मम्मी ने लक्ष्य को समझाया

क्या यार मम्मी आप लोग तो पीछे पड़ गए मैने बोल दिया कि मुझे अभी शादी नही करनी तो फिर बात खत्म न तो मुझे किसी को देखना है ना किसी से मिलना है- लक्ष्य को मानो ये सब बिल्कुल अच्छा नही लग रहा था

क्या बात है कुछ परेशानी है कुछ परेसान लग रहे हो और ये कैसा हाल बना रखा है अगर कोई टेंसन हो तो बेझिझक हमसे कह सकते हो हम तुम्हारे मम्मी पापा है - लक्ष्य की

मम्मी ने कहा

नही मम्मी ऐसी कोई बात नही है मुझे कोई परेशानी नही है लेकिन आप लोगो ने अचानक से मेरी शादी की बात सुरू कर दिया तो अनकम्फर्टेबल फील करने लगा था - लक्ष्य ने कहा

बेटे हम तुम्हारे मम्मी पापा है और तुम्हारी खुशी में ही हमारी खुशी है इसीलिए बोले, अगर तुम्हें अभी शादी नही करनी तो मत करो लेकिन कितने दिन ज्यादा से ज्यादा एक साल हद से हद दो साल फिर तो करनी ही पड़ेगी और ये रिस्ता मुझे और तुम्हारे पापा को अच्छा लगा था इसीलिए बोल हमने सोचा कि तुमसे एक बार

बात कर ले अगर तुम अभी रेडी नही हो तो हम बोल देंगे अगर इन्तेजार कर सकते है तो कर ले लेकिन तुम परेसान मत हो लेकिन इस तरह से घूमना फिरना और मस्ती करना अब बंद कर दो और अब थोड़ा सा अपने कैरियर पर भी ध्यान दो जिससे तुम्हारी भी जिंदगी पटरी पर आ जाय अभी तो मैं हूँ तो कोई फिक्र नही है लेकिन भगवान ने करे अगर मैं ना हुआ तो फिर इसीलिए बेटे तुम भी अब सीरियसली अपनी लाइफ और अपने कैरियर को सेट करने की बात सोचो - लक्ष्य के पापा ने प्यार से कहा

जी पापा मैं कल ही अपने हिसाब का कोई नौकरी ढूढता हूँ

लक्ष्य ने कहा

गुड ये हुई न बात लक्ष्य के पापा खुश हो गए और लक्ष्य की पीठ थपथपाते हुए बोले

अच्छा अब जाओ फटा फट हाथ मुह धो कर आजाओ खाना रेडी है आकर खाना खा लो- लक्ष्य की मम्मी ने कहा

जी मम्मी आता हूँ लक्ष्य ने कहा और फिर वापस से अपने कमरे में चला गया ।

रजनी अपने घर पर पहुची रजनी की मम्मी और पापा रजनी का इंतजार कर रहे थे रजनी को देखते ही उसके मम्मी पापा खुश हो गए

आ गयी बेटा , कैसे है लावण्या ठीक है और दामाद जी वो कैसे है - रजनी की मम्मी ने कहा

सब ठीक है मम्मी लावण्या भी ठीक है और सार्थक भी ठीक है मम्मी सॉरी मम्मी आपको बताया नही वो बात यह है कि सार्थक ने अचानक से बुलाया और सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि आपलोगों को कुछ भी बताने का मौका ही नही मिला रजनी ने बिना कुछ बताये जाने का कारण बताया ।

अरे कोई बात नही रजनी किसी गैर के यहां थोड़े न गयी थी अपनी छोटी बहन के यहा गयी थी, ये बता दामाद जी लावण्या का ध्यान तो रखते है ना- रजनी की मम्मी ने रजनी से पूछा ।

ध्यान रखते है , अरे मां सार्थक लावण्या को पलको पर बिठाकर रखता है मजाल है जो लावण्या को किसी बात की कोई तकलीफ भी हो जाय बिना कहे ही लावण्या की सारी इच्छाएं सार्थक पूरी करते है और एक बात तो हम आपको बताना ही भूल गए आप बहुत जल्द ही नाना नानी बनने वाली है और मैं मौसी रजनी खुशी से खिलखिलाती हुई बोली

क्या ? लावण्या मां बनने वाली है तू सच कह रही है रजनी मम्मी जी ने खुश होते हुए कहा

सौ फीसदी सच कह रहे है माँ ये बात खुद लावण्या ने मुझे बताई है - रजनी ने चहकते हुए कहा

है भगवान तुम्हारा बहुत बहुत धन्यबाद जो मेरी लावण्या को इतना अच्छा घर और वर दिया ऐसे ही दया करना प्रभु तुम्हारा ही सहारा है और कोई नही है अब जैसे मेरी लावण्या का घर बसा दिया और इतनी खुशी दी है मेरी रजनी की भी जिंदगी में कोई ऐसा भेज दे जो मेरी बच्ची का घर बस जाय

इसके भी खुशिया वापस लौटा दी प्रभु ये भी सबकी तरह हसती खिलखिलाती अपने घर परिवार में चली जाय तो फिर आराम से मर पाउंगी रजनी की मम्मी ने दिल से प्रार्थना की ।

चुप रहिये माँ कैसीबाते कर रही है ये मरने वरने की बाते मेरे सामने मत किया करे मुझे बिल्कुल भी अच्छा नही लगता रजनी ने गुस्सा होते हुए कहा

रजनी जिंदगी का क्या भरोसा अपने पापा की हालत तो देख ही रही है बीमार ही रहते है और फिर मैं भी अब कितने साल और जी लूंगी एक न एक दिन तो जाना ही है लेकिन एक इच्छा है कि जाने से पहले अपने दोनों बेटियों के घर बसा दू और उन दोनों के बच्चों को अपना आशिर्बाद दे दु लावण्या का तो कर दिया जैसे तैसे , उसकी तरफ से तो निश्चिन्त हो गयी लेकिन मुझे तुम्हारी बहुत चिंता रहती है जाने क्या बिगाड़ा था तुमने किसीका जो भगवान ने तुम्हारा बिगाड़ दिया - रजनी की मम्मी ने उदास होते हुए कहा

जो होता है अच्छे के लिए होता है शायद इसी में मेरा भला था इसीलिए ऐसा हुआ आप मेरे लिए बिल्कुल भी चिंता मत किजिये , मेरे नसीब में जो होगा वही होगा रजनी ने मम्मी को समझाया

अच्छा लावण्या को बता दे कि तू पहुच गयी है आराम से और ला थोड़ी सी मेरी बात भी करवा देना रजनी की मम्मी ने कहा

जी मम्मी जी रजनी ने कहा औए फोन मिलाने लगी

हेलो लावण्या फोन उठते ही रजनी ने कहा

हां दीदी आप घर पहुच गयी ना , अच्छे से पहुच गयी न रास्ते मे कोई परेशानी नही हुआ न लावण्या ने छूटते ही पूछा ।

नही लावण्या कोई दिक्कत नही हुई अच्छे से पहुच गयी और बता क्या हो रहा है क्या कर रही है ।

कुछ नही दीदी अभी अभी सब लोगो ने लंच किया है तो जा रही थी बर्तन धुलने लेकिन अचानक से मितली सी आने लगी ऐसा लगाकि जैसे उल्टी सी हो जाएगी इसी लिए आकर लेट गयी- लावण्या ने कहा

हां ऐसे समय मे उल्टी होता है लावण्या चिंता मत करना और समय मिले तो एक बार जाकर डॉक्टर को दिखा लेना और अल्ट्रा साउंड करवा लेना जिससे पता चल जाएगा को बेबी ठीक है की नही - रजनी ने लावण्या से कहा

जी दीदी ठीक है, मम्मी पापा कैसे है लावण्या ने पूछा

सब ठीक है मम्मी तुम्हारे लिए बहुत खुश है मेरे पास ही है लो

बात कर लो ।रजनी ने कहा और फोन अपनी माँ को दे दिया

हेलो लावण्या कैसी हो बेटी ठीक हो- मम्मी जी ने कहा

नमस्ते मम्मी मैं ठीक हूँ आप नानी बनने वाली हो लावण्या ने खुश होकर कहा

हां बेटे रजनी ने अभी अभी बताया अब तो भगवान से प्रार्थना है कि भगवान सब कुछ अच्छे से निपटा दे और तुम दोनों हमेसा खुश रहो रजनी ने बताया तो मुझे बहुत खुशी हुई अपना ध्यान रखना बेटा लापरवाही मत करना खाने पीने का ध्यान रखना जिससे सब कुछ अच्छे से हो जाय ठीक है मम्मी जी की गाइडलाइन शुरू हो गयी

जी मम्मी जी सार्थक बहुत अच्छे है वो मेरा बहुत ध्यान रखते है और किसी चीज की कोई कमी नही होने देते और फिर पूनम भी तो है वो भी मेरा बहुत खयाल रखती है आप मेरी चिंता मत कीजिये बस आप पापा का ध्यान रखिये उनकी तबियत ठीक है ना - लावण्या ने कहा

हां ठीक ही है अब तो ऐसे ही चलना है लावण्या - मम्मी जी ने उदास होकर कहा

लावण्या बेटा तुमसे मिलने का बहुत मन कर रहा है तो भैया से बोलो की एक बार लेकर तुम्हे मिलवा जाए फिर तुम्हारा आना मुश्किल हो जाएगा मम्मी जी ने कहा

मम्मी जी उनको टाइम नही मिल पाता मेरा भी आपको और पापा जी से मिलने का बहुत मन कर रहा है लावण्या ने कहा

हां अभी नई नई नौकरी है तो उनको भी कहा टाइम होगा फिर भी एक बार बोलना अगर समय निकाल सके तो आ जाना बहुत दिन हो गए तुम्हे मिले हुए - मम्मी जी ने कहा

ठीक है मम्मी आज शाम को आने दीजिये मैं बात करती हूँ लावण्या ने कहा

और कोई दिक्कत तो नही है ना मम्मी जी ने कहा

नही मम्मी कोई खास दिक्कत तो नही है बस कभी कभी थोड़ी सी मितली आती है और उल्टी होती है - लावण्या ने कहा

ऐसा होता है बेटे इसमें घबराने वाली कोई बात नही है ये सबके साथ होता है फिर भी अगर ज्यादा हो रहा हो तो एक बार जाकर डॉक्टर को दिखा लो वो दवा लिख देंगे - मम्मी जी ने कहा

जी मम्मी जी लावण्या बोली

मां बेटी दोनों ने थोड़ी देर बात किया और फिर फोन रख दिया ।

लावण्या से बात करके मम्मी जी के चेहरे पर एक संतुष्टि सी आ गयी
 
लक्ष्य रात भर सो नहीं पाया उसका दिमाग बार-बार पूनम की तरफ से चला जाता था कैसे भी करके वह पूनम से बात करके लावण्या और सार्थक के इस बदले व्यवहार का वजह जानना चाहता था लेकिन उसे कोई भी तरीका समझ में नहीं आ रहा था।

शाम को सार्थक के घर आने पर लावण्या ने उससे डॉक्टर को दिखाने के लिए बोला

ठीक है तुम कल तैयार रहना कल हम दोनों चलेंगे डॉक्टर के पास - सार्थक ने कहा

आप चलेंगे , और ऑफिस , आपको तो ऑफिस भी जाना होगा - लावण्या ने पूछा

कोई बात नही मैं कल ऑफिस से छुट्टी ले लूंगा तुम उसकी चिंता मत करो- लक्ष्य ने कहा

अच्छा सार्थक एक बात और कहना है मम्मी का फोन आया था , मम्मी बुला रही है और मेरा भी उन्हें देखने का बहुत मन कर रहा है तो किसी दिन समय निकाल कर नगीना ले चलो - लावण्या ने रिक्वेस्ट किया ।

अच्छा घबराओ मत मैं मैनेज करता हूँ सबसे पहले तुम्हारा चेकअप करवा दू फिर वहां भी चल चलेंगे - सार्थक ने कहा

अगले दिन सुबह सुबह ही लावण्या और सार्थक तैयार हो गए ।

पूनम ने देखा तो पूछा ।कहा जा रहे है आप लोग ?

पूनम तुम रहना यही पर मैं शाम तक वापस आ जाऊंगा जा रहा हूँ तुम्हारी भाभी को डॉक्टर को दिखाने - सार्थक ने पूनम से कहा

ठीक है भैया जाइये पूनम ने कहा

लावण्या और सार्थक चले गए पूनम और चाची जी घर मे रह गए ।

ना जाने क्यों पूनम आज आपने आप को आजाद महसूस

कर रही थी और वह बहुत खुश थी वह किचन में आई और अपने चाची के लिए चाय बनाने लगी ।

तभी अचानक उसकी नजर अपने उस फोन पर पड़ा जो लावण्या ने उसे दिया था वह वही किचन में रखा हुआ था न जाने क्यों फोन को देख कर पूनम की बांछे खिल गयी उसने लपक कर फोन उठाया और देखा

वह स्विच ऑफ था

पूनम ने जल्दी से चाय बनाया और चाची को दिया फिर खुद एक कप लेकर बैठ गयी फोन अभी भी उसके हाथ मे था ।

पूनम ने जल्दी से फोन खोला फोन के खुलते ही ढेर सारे मैसेज और नोटिफिकेसन कि बाढ़ सी आगयी

पूनम एक एक करके सारे मैसेजेज पढ़ने लगी

लक्ष्य ने भी कई सारे मैसेज भेजे थे और बार बार काल करने की रिक्वेस्ट की थी

लक्ष्य का मैसेज पढ़कर पूनम का दिल एक अजीब सी कसमकस से भर गया अनायास ही उसकी उंगलियां लक्ष्य का नंबर मिलाने लगी

जैसे ही उसने फोन मिलाया तुरंत ही फोन कनेक्ट हुआ

पूनम ने घबरा कर फोन काट दिया ।

ये क्या कर रही है पूनम क्यो मिला रही है लक्ष्य को फोन ,भैया ने मना किया है ना फिर क्यो आखिर लक्ष्य से बात करने को इतना बेचैनी क्यो पूनम के दिल से आवाज आई ।

तो क्या हुआ इतने सारे मैसेज आये है अगर एक बार बात कर लूंगी तो क्या हो जाएगा बस हाल चाल ले लूंगी- पूनम ने प्रत्यक्ष कहा

क्यो आखिर क्यों लक्ष्य का हाल चाल लेना इतना जरूरी क्यो है क्या रिस्ता है तेरा लक्ष्य से कही ऐसा तो नही की तू लक्ष्य से प्यार करने लगी हो और इसी लिए उससे बात करने के लिए उतना बेचैन है पूनम के दिल से आवाज आई

प्यार और उस लक्ष्य से ऐसी कोई बात नही है क्या कोई किसी से बात करता है तो वो उससे प्यार करने लगता है अरे मैं तो सिर्फ बात कर रही हूँ पूनम ने अपने दिल को समझाने के लिए कहा

प्यार ऐसे ही होता है जितना बेचैनी जितनी तड़फ तुझे लक्ष्य से बात करने के लिए हो रही और जिस तरह तू अपने भैया

और भाभी से छुप कर लक्ष्य को फोन मिला रही है उससे साफ लग रहा है कि तू लक्ष्य से प्यार करती है और उससे बात करने के लिए मरी जा रही है पूनम के दिल ने एक बार फिर से पूनम को आइना दिखाया

ऐसा कुछ नही है मैं तो बस लक्ष्य को एक बार फोन करने के लिए कह रही हूँ उस दिन घर आया था तब भी तो उससे बात नही हुई और उसने मेरी कितनी हेल्प की है अब अगर उसने इतने मैसेज किया है तो एक बार तो बात कर लेनी चाहिए पूनम ने कहा और फिर उसने लक्ष्य को फोन मिला दिया

उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था मानो वह कही चोरी कर रही हो

जैसे ही दो बार बेल बजा लक्ष्य ने फोन उठाया

हेलो पूनम लक्ष्य की आवाज सुनाई पड़ी

कैसे हो लक्ष्य ठीक हो ना पूनम ने धड़कते दिल से कहा

मैं तो ठीक हूँ यार तुम कैसी हो? , कहा थी इतने दिन से? न कोई फोन न मैसेज सब ठीक है ना ? कोई परेशानी तो नही है ? लक्ष्य मानो सब कुछ एक बार मे ही जान लेना चाहता हो वो बहुत ज्यादा एक्साईटेड था

हा सब ठीक है वो भाभी ने अपना फोन मुझसे ले लिया बोली तुम्हे जब जरूरत पड़ेगी तो ले लेना अब मेरे पास कोई फोन नही है इसीलिए मेरी आपसे बात नही हुई तुम ठीक हो न ? पूनम ने पूछा

नही यार मैं ठीक नही हूँ बिल्कुल ठीक नही हूँ पता है तुमसे बात नही हुई तो दिल मे एक बेचैनी सी थी ऐसा लग रहा था कि कुछ गुम हो गया है और इसीलिए तुम्हारे घर भी आया था लेकिन लावण्या का ब्यवहार कुछ अजीब सा था , ऐसा लग रहा था कि उसका मेरा आना बिल्कुल पसंद नही आया हो इसीलिए तुमसे मिलने की हिम्मत नही हुई ।सब ऐसा क्यों कर रहे है पूनम ,? क्या घर मे कुछ हुआ था क्या ? लक्ष्य बहुत ज्यादा परेसान और बेचैन था ।

नही लक्ष्य ऐसा कुछ भी नही हुआ था, लेकिन ना जाने क्यों भैया और भाभी दोनों का ब्यवहार बदल गया है उस दिन भाभी के बर्थडे वाले दिन भी भैया खामखा गुस्सा हो रहे थे और भाभी ने अपना फोन वापस ले लिया , आज के पहले ऐसा न तो भैया ने कभी किया और न भाभी ने मुझे खुद नही समझ मे आरहा है कि ऐसा क्या हो गया, क्या तुमसे भैया ने कुछ बताया है?- पूनम ने पूछा

नही पूनम मुझसे तो सार्थक ने कुछ नही कहा लक्ष्य भी

सोचते हुए बोला

अच्छा छोड़ो ये बाते , होगा कुछ जाने दो क्या पता ये मेरा बहम हो - पूनम ने कहा

तुमसे मिलने का मन कर रहा है बहुत सारी बाते करनी है जो कैसे मिलू अभी आ जाऊँ क्या ?- लक्ष्य बोला

क्यो मिलना क्यो है ? और ऐसी क्या बाते है जो मुझसे करनी है ? तुम्हारी सारी तितलियां कहा गयी उनसे पेट नही भरा , उनसे बात कर लो , उन्हें बता दो । पूनम बोली

उन तितलियों में वो मजा कहा जो इस मधुमख्खी में है वैसे भी अब मैं सुधर गया हूँ पूनम अब किसी तितली के पीछे नही भागता - लक्ष्य ने कहा

आहाहा क्या बढ़िया झूठ बोला एक नम्बर के झूठे और मक्कार हो बड़े आये सुधरने वाले तुम कभी नही सुधर सकते - पूनम ने लक्ष्य की हंसी उड़ाते हुए कहा

अरे सच मे ट्रस्ट मी पूनम अब किसी से कोई बात नही करता मन ही नही करता तुम खामखा मुझ पर शक करती हो मैं सच मे सुधर गया हूँ - लक्ष्य ने सफाई दी ।

वैसे तो तुम सुधर नही सकते लेकिन अगर सुधर गए हो तो अच्छी बात है, कुछ तो अकल आयी इन सब मे कुछ नही रखा है अब सीरियस हो जाओ बहुत हो गयी मटरगस्ती पूनम ने किसी अपने की तरह लक्ष्य को समझाया

जो आदेश हुजूर और कोई आदेश - लक्ष्य ने मुस्कुरा कर कहा

अच्छा सुनो न ,कल पापा कह रहे थे कि कोई फॉर्म वगैरा भर दो तो क्या करूँ तुम बताओ पूनम- लक्ष्य ने पूनम से पूछा

मैं क्या बताऊँ भरना तुम्हे है तुम जानो वैसे भी मुझे नौकरी करने वाले पसंद नही है और इसके बारे में ज्यादा आइडिया भी नही है तो जो तुम्हारे दिल करे वो करो - पूनम ने हाथ खड़े कर दिए

क्यो नौकरी वाले क्यो पसंद नही है लक्ष्य ने पूछा

क्योकि उनका सारा समय दुसरो के लिए होता है अगर कभी जरूरत पड़ जाए तो उन्हें छुट्टी नही मिलती और तो और कही जाना भी हो तो इतनी सारी फॉर्मेलटी के बाद ही उन्हें छुट्टी मिलती है वैसे लक्ष्य मैं क्या कह रही थी कि तुम कोई

स्टार्टअप क्यो नही शुरू करते हो इस नौकरी वौकरी का चक्कर छोड़ो और खुद का कोई काम करो - पूनम ने कहा

क्या करूँ तुम बताओ - लक्ष्य ने कहा

तुमने केमिकल इंजीनियरिंग किया है ना तो क्यो न एक इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्लांट लगा लो मैने सुना है कि इसमें काफी स्कोप है ये मेरी सजेसन है बाकी तुम्हे जो करना है तुम जानो- पूनम ने कहा

अच्छा चलो सोचता हूँ इस बारे में अब तुम बताओ कैसे मिलोगी मुझे तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है वो भी मिलकर , तुम्हे कुछ बताना है - लक्ष्य ने कहा

मिलना तो बहुत मुश्किल है क्या बात है ऐसे ही बता दो - पूनम ने कहा

नही , ऐसे नही , मिलकर ही बताऊंगा - लक्ष्य ने कहा

तो फिर ठीक है देखते है कभी किसी दिन अगर मौका लगेगा तो फोन करूँगी अब जा रही हूँ बहुत काम है भाभी भी नही है तो सारा काम मुझे ही करना है पूनम ने कहा

रुको न थोड़ी देर बाद चली जाना इतने दिन बाद तो बात कर रही हो और तुम्हे काम की पड़ी है - पूनम के जाने की बात सुनकर लक्ष्य असहज हो गया

अरे मेरा काम तुम थोड़े न कर दोगे मुझे करना है, करूँगी नही तो कैसे होगा पूनम ने कहा

कहो तो आजाऊ करवा दू बस अपने भैया भाभी को सम्हाल लेना - लक्ष्य ने कहा

अच्छा तुम घर का काम करोगे क्या पूनम खिलखिलाती हुई बोली ।

तो क्या हुआ शादी होने के बाद भी तो लोग अपनी पत्नी का हाथ बटाते है - लक्ष्य बोला

तो कोई तुम्हारी शादी थोड़े न हुई है मुझसे जो मेरी हेल्प करोगे पूनम ने कहा

तो कर लो फिर मैं और तुम मिल कर सारा काम कर लेंगे न जाने कैसे लक्ष्य ने बोल दिया

शादी और तुमसे सपने देख रहे हो क्या मैं इतनी भी पागल

नही हूँ कि तुमसे शादी करु पता चला मैं घर मे बैठी रो रही हूँ और तुम अपनी तितलियों के साथ रंगरलिया मना रहे हो न बाबा न मुझे नही करनी- पूनम ने कहा

अब अरे अगर ये मधुमखी मेरी जिंदगी में आजायेगी तो किसी तितली की तरफ मुड़ कर भी नही देखूंगा,अगर देख लिया तो मुर्गा बना देना बस लक्ष्य ने मजाक में कहा

पूनम खिलखिला कर हंस पड़ी क्या लक्ष्य तुम भी कमाल ही हो तुम कोई छोटे बच्चे हो जो मुर्गा बना दूंगी लक्ष्य की बाते सुनकर पूनम हसती हुई बोली

अरे सच मे हँसो मत और वैसे भी मुझे तो तुम से डर लगता है तो अगर तुमसे शादी होगी तो इधर उधर भी नजर नही डालूंगा- लक्ष्य ने कहा

ओये हेलो न तो मेरी तुम से शादी हो रही है और न ही मुझे कुछ कहने की जरूरत है सपने से बाहर आ जाओ मुंगेरी लाल पूनम ने कहा

अच्छा सुनो न यार प्लीज् बस एक बार मिलने आ जाओ मुझे तुम्हे बहुत ही इम्पोर्टेन्ट बात बतानी है प्लीज् मेरे लिए लक्ष्य ने रिक्वेस्ट किया

अच्छा देखती हूँ लक्ष्य कोई बहाना बनाती हूँ अभी तो मुश्किल है मैं बता दूंगी तुम्हे अब मैं रखती हूं फिर अगर मौका मिला तो बात करूँगी पूनम ने कहा

पक्का करोगी न प्रोमिस करो इतने दिन तुमसे बात नही हुई तो दिल बहुत बेचैन था आज जाकर चैन मिला है लक्ष्य ने कहा

अच्छा चलो रखती हूं बाय अपना ध्यान रखना पूणाम ने कहा और फोन काट दिया

लक्ष्य से बात करके पूनम बहुत खुश थी और उसकी वह खुशी उसके चेहरे से साफ महसूस की जा रही थी उसका चेहरा खुशी से दमक रहा था

पागल कही का एक नम्बर का गधा है - पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा

और फिर काल डिटेल डिलीट करके फोन स्विच ऑफ करके वापस उसी जगह पर रख दिया जहां से उसने उठाया था ।और फिर घर के कामो में ब्यस्त हो गयी लक्ष्य से बात करके मानो उसकी सारी बेचैनी सारी प्रोब्लम एक झटके मे खत्म हो

गयी और अब वह बहुत हल्का और टेंसन फ्री महसूस कर रही थी पूनम गुनगुनाते हुए अपना काम करने लगी

राजीव अपने घर पहुचा उसके पापा अपने दुकान पर बैठे थे उसकी एक बहुत बड़ी और अच्छी दुकान थी और राजीव और उसके पापा दोनों वही सम्हालते थे ।

बेटे आ गया कैसी रही शादी सब निपट गया अच्छे से पापा ने आते ही पूछा

जी पापा सब निपट गया मुझे कुछ काम था इसी लिए एक दिन लेट हो गया सॉरी राजीव ने कहा उसने रजनी के साथ जाने वाली बात अपने पापा को नही बताई ।

कोई बात नही , अच्छा जा फ्रेश होकर आजा दुकान सम्हाल मुझे मार्केट जाना है दुकान के सामान की लिस्ट बनाई है तो बाजार जाना पड़ेगा - पापा जी ने कहा

लेकिन पापा सामान लेने के लिए आप क्यो जा रहे है वो तो सामान भेजवाते ही न बोल दीजिये की गाड़ी से भेज दे आप क्यो परेसान होंगे- राजीव ने कहा

अरे बेटे हिसाब किताब भी करना है और पेमेंट भी तो देनी है

तुम नही थे तो सारा काम पेंडिंग पड़ा है अब आगये हो तो सारा काम फटा फट निपटा लू और फिर तुम तो धंधे का वसूल जानते ही हो जुबान ही सबकुछ होती है और मैने आज पेमेंट करने का वादा किया है राजीव के पापा ने कहा

कितना पेमेंट करना है - राजीव ने पूछा

दस लाख राजीव के पापा ने कहा

अच्छा ठीक है आप मत घबराइए मैं बस एक घंटे में आता हूँ जाकर नहा लू फिर आकर दुकान सम्हालता हूँ और आप चले जाना राजीव ने कहा और अंदर चला गया ।
 
रात में राजीव और उसके पापा बैठे हुए थे राजीव रजनी के बारे में बताने के लिए छटपटा रहा था लेकिन उसकी हिम्मत नही हो रही थी और न ही समझ मे आ रहा था कि कहा से शुरू करे वह कसमसा रहा था और बार बार अपनी पोजीसन बदल रहा था

क्या हुआ कुछ दिक्कत है क्या इतना परेसान क्यो हो और बार बार ये उठ बैठ क्यो रहे हो राजीव के पापा ने पूछा

कुछ नही पापा अचानक से इस तरह पूछे जाने पर राजीव

अचकचा गया और नजर झुका कर बोला

मम्मी आपके पैर का घुटना कैसा है दर्द कैसा है कुछ आराम है कि नही - राजीव ने पूछा

कैसा क्या है , वैसे ही है बेटे, कुछ लगा लेती हूँ तो ठीक रहता है फिर वैसे हो जाता है अब तो चलने फिरने में भी दिक्कत होने लगा है कितनी जगह दिखा दिया समझ मे नही आता कि क्या हो गया घुटने में, कहा तो इतना सारा काम कर लेती थी अब तो खाना बनाने और खिलाने में ही दम निकल जाता है ऐसा लगता है पहाड़ चढ़ कर आई हूँ राजीव की मम्मी ने मायूसी से कहा

पापा क्यो न कोई काम वाली रख दे मम्मी को थोड़ा आराम मिल जाएगा राजीव ने अगला पासा फेका

अरे न न काम वाली की कोई जरूरत नही है मैं कर लूंगी और वैसे भी तुम दोनों हो बस ,तो इतना मैं कर ही लूंगी अगर तू चाहता है कि मुझे थोड़ी सी राहत मिल तो शादी के लिए हां क्यो नही बोल देता तेरी दुल्हन आजायेगी तो थोड़ा मुझे भी सुकून मिल जाएगा तेरे पापा की तरफ से तो कोई दिक्कत ही नही है इनका क्या है ये तो गाय है जो बना के दे देती हूँ खा लेते है कभी आज तक कोई शिकायत नही किया नखरे तेरे ही है जब तक श्रोती थी तब तक उसने तेरे नखरे झेले और

अब जब वो अपने घर चली गयी तो मुझे झेलने पड रहे है कभी ये नही कभी वो नही मम्मी जी ने राजीव को सुनाना शुरू कर दिया

श्रोती दीदी का कुछ हाल मिला था राजीव ने पूछा

हा मिला था न वो तुझसे बहुत गुस्सा है कह रही थी कि राजीव को मेरे घर कभी मत भेजना उसको मेरे यहाँ आनेकी कोई जरूरत नही है मम्मी जी ने मुह बना कर कहा

क्यो दीदी क्यो गुस्सा है राजीव ने आश्चर्य से पूछा

क्योकि इतनी बार उसने तुझे बुला लिया और जो तू जाने का नाम नही लेता है इसीलिए कह रही थी राजीव को मेरी याद ही नही आती है हर बार पापा ही आते है राजीव नही, मम्मी जी बोली

राजीव मुस्कुराने लगा और बोला देख ही रही हो मम्मी दुकान से फुरसत नही मिलता है पापा अकेले सम्हाल नही पाते है दुकान थक जाते है तो उन्हें अकेला छोड कर कैसे जाऊ राजीव ने बहाना बनाया

इतनी भी ज्यादा ब्यस्तता नही है की अपनी सगी बहन के यहां जाने का मौका नही निकाल पा रहा है तू अगर तुझे

जाना हो तो एक दिन का टाइम आराम से निकाल लेगा तेरा ही मन नही करता जाने को और श्रोती बेचारी तुझे देखने के लिए तरस रही थी जब घर मे थी तब तो खूब दीदी दीदी करता था अब बहन की याद भी नही आती तुझे मम्मी जी ने तुनक कर कहा

ऐसी कोई बात नही है मम्मी राजीव झेंपते हुआ बोला

तो फिर ऐसी बात नही है तो इस बार जाकर करवा तू ही दे आ श्रोती की शिकायत भी दूर हो जाएगी और तू मिल भी लेगा बोल ठीक है जाएगा मम्मी जी ने हामी भरवाई

राजीव ने थोड़ी देर सोचा और फिर हामी भर दी

मम्मी जी का चेहरा खुशी से खिल गया ।

कुछ दिन तक सब कुछ शांत रहा लक्ष्य की आदतें और ब्यवहार में बहुत ज्यादा परिवर्तन आ गया था मानो वह सचमुच अब अपने आने वाले कल के लिए चिंतित रहने लगा था ।और ये बात महसूस करके उसके मम्मी पापा बहुत खुश थे ।

लक्ष्य के दिमाग मे बार बार एक बात घूमा करती की कैसे भी करके पूनम के दिमाग में यह बैठाना है कि अब लक्ष्य बदल चुका है लेकिन पूनम से मिलना और उससे बात करना बहुत टेढ़ी खीर था वह बड़ी मुश्किल से पूनम से बात कर पाता वो भी जब पूनम कभी उसको फोन करती तभी उसकी बात पूनम से हो पाती और जितनी देर वह बात करती घबराई सी और जल्द बाजी में ही होती थी , जिससे लक्ष्य का मन संतुष्ट होने की जगह पर और भी बेचैन हो जाता था ।

ऐसे ही एक दिन लक्ष्य बहुत ज्यादा बेचैन था और वह पूनम से बात करने के लिए उसका चेहरा देखने के लिए तड़फ रहा था । उसने आव देखा न ताव अपनी गाड़ी उठाई और सीधा

सार्थक के घर पर पहुचा आज वह कुछ ठान कर आया था ।

पूनम ने दरवाजा खोला लक्ष्य को देखते ही मानो वह खुशी से झूम गयी और लक्ष्य को देख कर वह जैसे अपने होश हवास खो बैठी और लक्ष्य से लिपट गयी लक्ष्य ने भी उसे अपनी बाहों में समेट लिया और माथे पर प्यार से किस कर लिया ।

पूनम अपनी इस हरकत पर झेप सी गयी और शरमाकर लक्ष्य से अलग हो गयी उसकी आंखें झुक गयी थी और चेहरे पर सरम की लाली सी आ गयी थी ।

लक्ष्य आया और सोफे पर बैठ गया

लावण्या भाभी कहा है पूनम - लक्ष्य ने पूछा

अपने कमरे में है आराम कर रही है हमारे घर मे नन्हा मेहमान आने वाला है ना तो इसीलिए आज कल भाभी को मैं ज्यादा काम नही करने देती हूँ - पूनम चहकती हुई बोली

बहुत अच्छा इस हालत में उनको आराम करना ही चाहिए लक्ष्य ने कहा

एक मिनट तुम बैठो मैं बुलाती हूँ - पूनम ने कहा और भाग कर अंदर चली गयी

लक्ष्य सोफे पर बैठा रहा और पूनम लावण्या को बुलाने कमरे में चली गयी

थोड़ी देर बाद लावण्या बाहर आई और आकार सोफे पर बैठ गयी

क्या बात है लक्ष्य अचानक कैसे आना हुआ- लावण्या ने उत्सुकता से पूछा

कुछ नही लावण्या भाभी आप लोगो से मिले हुए बहुत दिन हो गया था तो सोचा कि आप लोगो से मिल आऊँ मेनी मेनी कांग्रचुलेसन फ़ॉर निव मेंबर इन फॅमिली -लक्ष्य ने मुस्कुराते हुए लावण्या को बधाई दी

थैंक्स लावण्या मुस्कुराते हुए बोली

सार्थक ऑफिस गया है ना? - लक्ष्य ने पूछा

हा ऑफिस में ही है और कहा जाएंगे - लावण्या हल्के फुल्के अंदाज में बोली

पूनम जाओ जाकर लक्ष्य के लिए चाय बना लाओ - लावण्या ने कहा

जी भाभी लाती हूँ पूनम लक्ष्य के आने से बहुत खुश थी वह

उठी अंदर चली गयी

कैसी तबियत है आपकी कोई कंप्लीकेसन तो नही है ना - लक्ष्य ने औपचारिकता बस पूछा

नही सब नार्मल है - लावण्या ने कहा

डिलेवरी डेट कब की है लक्ष्य ने बात को आगे बढ़ाया

नवंबर में - लावण्या ने हल्के से कहा

और बताइये आप लोग तो हमे बिल्कुल भूल ही गये, और इस सार्थक की शादी क्या हो गयी इसने तो बात करना भी बंद कर दिया क्या आपने बात करने से मना कर दिया क्या- लक्ष्य ने मजाक में कहा

मैं क्यों मना कर दूंगी , मुझे क्या प्रॉब्लम है उनके और तुम्हारे बात करने से- लावण्या ने कहा

नही जैसे आप लोग नही चाहते कि मैं और पूनम बात करे तो क्या पता वैसे ही सार्थक भी बदल गया हो अचानक से लक्ष्य के दिल की बात जुबान पर आगयी

लावण्या ने चौक कर लक्ष्य की तरफ देखा

ऐसी कोई बात नही है लक्ष्य लावण्या ने नजर फेरते हुए कहा

ऐसी ही बात है भाभी मेरे पास भी थोड़ा सा दिमाग है मुझे भी दिख रहा है आपका और सार्थक का ब्यवहार अब आप दोनों बदल गए हो मुझे समझ मे नही आरहा है कि क्या गलती कर दी मैने आपके बर्थडे पार्टी में कि आप लोगो ने मुझसे नजर ही फेर ली आपको और सार्थक को मैं अपना मानता था और इस परिवार को अपना परिवार लेकिन आप लोगो ने मुझसे नजर फेर लिया- लक्ष्य को मानो बहुत दुख हो रहा था और वह रूवासा सा बोला

नही लक्ष्य तुमने तो हमारी इतनी हेल्प की है हर जगह साथ दिया है तुमसे कैसी नाराजगी हम भी तुम्हे अपना ही मानते है इस तरह लक्ष्य के बिचलित होने की वजह से लावण्या ने उसे समझाया

अपना मानते होते तो इस तरह पराये जैसे ब्यवहार न करते पता है आपलोगो के इस तरह ब्यवहार करने से मुझे कितनी तकलीफ हुई है मैं बता नही सकता- लक्ष्य बोला

लावण्या चुप रही लक्ष्य की बाते सुनकर लावण्या को जैसे गिल्ट फील हो रहा था बात भी सच है लक्ष्य ने बिना किसी स्वार्थ, बिना किसी लालच और बिना किसी दबाव के कदम

कदम पर लावण्या और पूनम और साथ में सार्थक का भी साथ दिया था और दोनों का यह रवैया और यह ब्यवहार देख कर पीड़ा होना लाजमी है

आई एम सोरी सार्थक मैं जानती हूँ कि तुमने हमारी बहुत हेल्प की है मैं तुम्हारे किये गए एहसानों को कभी भी नही भूल सकती फिर चाहे तुम्हारा लड़की बन कर मेरे दीदी को छुड़ाना हो या फिर हमें और सार्थक को मिलाना हो या पूनम की मदद करनी हो और तो और जब कि तुमने बिना किसी लालच के हमारी हेल्प की है लेकिन मैं मजबूर हूँ ।

चाची जी को तो जानते ही हो वो कैसी है उन्होंने उस दिन सार्थक को खूब खरी खोटी सुनाई और बोली कि मुझे लक्ष्य का इस घर मे बार बार आना पसंद नही है यही सब करना है तो फिर से उसी घर मे चले जाओ अब तुम्ही बातो हैम लोग क्या करते तुम तो सार्थक को जानते ही हो वो तुम्हारा दोस्त है वो बोले की लक्ष्य तो समझदार है समझ जाएगा लेकिन अब चाची जी को कौन समझाये और उन्होंने हम दोनों भाई बहनों को पाल पास कर बड़ा किया अगर अकेले छोड़ कर जायेगे तो सब क्या कहेंगे और फिर हमारे होते हुए उहें अपने हाथों से खाना बनाना पड़े ये भी तो ठीक नही है इसीलिए हम लोगो ने तुमसे थोड़ी सी दूरी बना ली बस और कोई बात नही है। लावण्या ने अपनी सफाई में कहा

ये आपके फॅमिली का मैटर है इसमें मैं कुछ नही कर सकता हूँ भाभी लेकिन आपलोगो के इस ब्यवहार ने मुझे बहुत ज्यादा हर्ट किया ।- लक्ष्य ने कहा

आई एम सॉरी लक्ष्य लेकिन क्या करते और कोई चारा नही था - लावण्या ने कहा
 
तभी पूनम चाय लेकर आगयी उसने प्यार से लक्ष्य को देखा और फिर मुस्कुराते हुए चाय सर्ब करने लगी

क्या बात है आज नकचढ़ी चुहिया बड़ी खुश दिखाई पड़ रही है - लक्ष्य ने पूनम को छेड़ते हुए कहा

हा इतने दिन बाद तुम आये हो तो सोचा कि थोड़ा हंस लू क्योकि इतने दिन से जोकर नही दिखा था न पूनम कहा पीछे रहने वाली थी

अच्छा मैं जोकर हूँ - लक्ष्य ने कहा

तो क्या मैं चुहिया हूँ पूनम ने भी कहा

अरे अरे तुम दोनों पिछले जन्म के सास बहू थे क्या जब देखो तब लड़ते रहते हो अब तुम दोनों समझदार हो गए हो अब तो

थोड़े सीरियस हो लो जब देखो बच्चो की तरह लड़ते हो लावण्या ने मुस्कुराते हुए कहा

देखो न भाभी इसी लक्ष्य ने शुरू किया मैने थोड़े न कुछ कहा

मत डाँटो भाभी बड़े दिन बाद आज इससे लड़ने का मौका मिला है बहुत मिस कर रहा था लक्ष्य ने प्यार से पूनम की तरफ देखा और कहा

लावण्या ने चाय खत्म की और कहा

अच्छा लक्ष्य तुम और पूनम बैठो बाते करो मेरी कमर में दर्द हो रहा है मैं जा रही हूँ थोड़ा आराम करने

ओके भाभी लक्ष्य ने कहा और पूनम ने लपक कर लावण्या को उठाने के लिए पकड़ लिया और हाथ पकड़ कर सहारा देकर उठाया लावण्या हल्के हल्के कदमो से अपने कमरे में जाने लगी ।

जैसे ही लावण्या कमरे में पहुची पूनम सरक कर लक्ष्य बिल्कुल करीब आगयी और बोली

आई एम सोरी मैं अपना वादा नही निभा पाई तुमसे मिलने नही आ पाई क्या करूँ कोई मौका ही नही मिला तुम बताओ

क्या बताने वाले थे ।

क्या बताने वाला था लक्ष्य ने न समझते हुए कहा

अरे तुम उस दिन फोन पर कह रहे थे न कि तुम्हे कुछ बताना है इम्पोर्टेन्ट क्या बात थी बोलो पूनम ने पूछा

जाने दो बाद में बताऊंगा लक्ष्य ने कहा

अरे बताओ न क्या बताना था बाद में क्यो पूनम ने जिद किया

अरे जाने भी दो क्यो परेसान हो कुछ इम्पोर्टेन्ट नही था लक्ष्य ने इग्नोर किया

नही जो भी हो बताओ ज्यादा दिमाग मत खराब करो तुम्हे पता है ना कोई बात जब तक जान नही लेती हो चैन नही मिलता चाहे इम्पोर्टेन्ट हो या न हो मुझे बताओ की क्या बात है - पूनम ने कहा

क्या यार तुम भी मतलब घोड़े पर ही सवार रहती हो लक्ष्य ने कहा

हां रहती हूँ बताओ मुझे क्या बात है पूनम मानो जिद पर अड़ गए थी

लक्ष्य बिल्कुल शांत हो गया और एकटक पूनम को देखे जा रहा था

अब बोलो भी जुबान सिल गया है क्या बोलो पूनम बुरी तरह उतावाली हो रहा थी

मतलब नही मानोगी लक्ष्य मुस्कुराते हुए बोला उसे पूनम का इस तरह उतावला पन अच्छा लग रहा था और वह इंजॉय कर रहा था ।

बताओ न लक्ष्य प्लीज बताओ नही तो अभी मारूंगी पूनम ने हल्का सा गुस्सा दिखाया और अपना हाथ उठाया

अच्छा तो ठीक है पहले तुम मार ही दो तभी बताऊंगा लक्ष्य भी तस्सली से बैठ गया

नही बताओगे पूनम ने गुस्से से कहा

नही - लक्ष्य मुस्कुराते हुए बोला

तो ठीक है भाड में जाओ तुम और भाड़ में जाए तुम्हारी बाते अब मुझे सुननी भी नही है पूनम गुस्से से तप गयी और जाने लगी

लक्ष्य ने फटाक से पूनम का हाथ पकड़ कर रोकने की

कोशिश की और इस तरह लक्ष्य के हाथ पकडने पर जाती हुई पूनम को एक झटका से लगा उसका बैलेंस

गया और वह सीधा लक्ष्य के ऊपर उसकी गोदी में गिर पड़ी लक्ष्य ने उसे सम्हालेने की कोशिश की

लेकिन पूनम की कुहनी लक्ष्य के आंखों में लग गयी

आह , लक्ष्य हल्का ऐसा चीखा

क्या करते हो लक्ष्य पूनम ने भी अपने आप को लक्ष्य के ऊपर से उठाया

पूनम के उठते ही लक्ष्य ने अपने हाथों से अपनी एक आंख दबा ली और दर्द से मुह बनाने लगा

लग गया न ऐसे खीचने की क्या जरूरत थी बिल्कुल भी अकल नही है लाओ देखु कहा लगा है लक्ष्य को चोट खाया देख कर पूनम को उसकी बहुत फिक्र हो रही थी पूनम ने लक्ष्य को डाटते हुए कहा

और फिर लक्ष्य के बिल्कुल पास सोफे पर बैठ गयी उसने लक्ष्य के उस हाथ को जो आंखों पर था को अपने हाथों से हटाया और फिर अपनी अंगुलियों के पोरों से आंखों को देखने लगी

लक्ष्य आह कर रहा था

आंख को देखने के चक्कर पूनम का चेहरा लक्ष्य के चेहरे के बिल्कुल पास आगया था इतना पास की पूनम के साँसों की महक लक्ष्य को अपने गालो और चहेरे पर महसूस सी हो रही थी अनायास ही रोमांच से लक्ष्य की आंखे बाद होने लगी और ओठो पर एक मुस्कुराहट सी आगयी

क्या कर रहे हो आंख तो खोलो पूनम ने झल्ला कर कहा

लक्ष्य ने फिर से अपनी आंखें खोला और पूनम और भी पास आ गयी पूनम का शरीर भी लक्ष्य के शरीर से छूने लगा पूनम के बदन की खुश्बू लक्ष्य को मदहोश सी करने लगी उसका खुद से कंट्रोल खोने से लगा और इसी लिए उसने पूनम को हल्का सा पीछे किया और बोला ठीक हो जाएगा रहने दो इतना बोलते हुए भी उसकी आवाज कॉप सी गयी उसके यह भी मानो सूख गए थे और गले मे कांटे से चुभ रहे थे ।

रुको मैं एक काम करती हूँ

पूनम ने झटपट अपने दुप्पटे के कोने को इकट्ठा करके एक पोटली सी बनाई और फिर उस पोटली में अपने मुह से हवा ब्लो किया और उठाकर सीधा लक्ष्य उस आंख पर रख दिया जिसपर चोट लगी थी

लक्ष्य को कुछ गरम गरम सा एहसास हुआ और हल्का सा राहत भी मिला

कैसा लग रहा है - पूनम ने पूछा

बहुत अच्छा लग रहा है - लक्ष्य ने मुस्कुराते हुए कहा

पूनम ने दो तीन बार यही प्रक्रिया दोहराई और फिर लक्ष्य से दूर होते हुए बोली अब देखना शाम तक ठीक हो जाएगा

लक्ष्य को पूनम की मासूमियत देख कर हसी आगयी उसके ओठो पर अनायास ही मुस्कुराहट आगयी अभी कितना बचपन है पूनम में कितनी मासूम , कितनी क्यूट मानो सिर्फ शरीर ही बड़ा हुआ हो दिमाग अभी भी बच्चों वाला हो लक्ष्य पूनम को नजर भर कर देख रहा था

आये हेलो मिस्टर ऐसे घूर घूर कर क्या देख रहे हो नजर लगाओगे क्या पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा ।

कुछ नही लक्ष्य ने अपनी नजर हटा लिया

पूनम एक गिलास पानी मिलेगा क्या लक्ष्य का गला सूखा हुआ था इसी लिए उसने कहा

लाती हूँ पूनम ने कहा और अंदर चली गयी

यही मौका है लक्ष्य बोल दे अपने दिल की सारी बात बोल दे कि तू उससे प्यार करने लगा है लक्ष्य के दिल से आवाज आई

नही अभी अगर उसने ना बोल दिया तो या फिर अगर जोर से कुछ चिल्लाने लगेगी तो भाभी को भी पता चल जाएगा अभी ठीक नही है - लक्ष्य ने कहा

तो फिर कब ? अब कब मिलेगी ये ? और इतना अच्छा मौका कहा मिलेगा?- लक्ष्य के दिल मे कहा

अभी नही अभी पहले मैं जान लू की पूनम भी मुझे पसंद करती है या नही फिर लक्ष्य ने बुदबुदाते हुए कहा

क्या अकेले बड़बड़ बड़बड़ कर रहे हो अचानक से पूनम ने कहा

लक्ष्य ने देखा वह पानी का गिलास लेकर खड़ी थी

लक्ष्य ने पानी का गिलास लिया और बोला कुछ नही बस ऐसे ही

पूनम लक्ष्य के सामने बैठ गयी और बोली कुछ बुदबुदा तो रहे थे अकेले अकेले क्या भूत से बात कर रहे हो

लक्ष्य ने पानी पिया और गिलास टेबल पर रख दिया और पूनम को देख कर मुस्कुराने लगा

बताओ न क्या कह रहे थे क्या बताने वाले थे मुझे पूनम का

कांटा फिर से वही अटक गया

अभी तुम भूली नही तुम्हारी सुई अभी वही अटकी है लक्ष्य बोला

जब तक नही बताओगे नही भूलूंगी - पूनम मुह बनाकर बोली

अच्छा सुनो लक्ष्य ने अपनी दोनों कोहनी सामने पड़े टेबल पर टिका लिए और बोला

पूनम ने भी अपना चेहरा लक्ष्य के और पास कर लिया और ध्यान से सुनने लगी

आज कल मेरे मम्मी पापा मेरे पीछे हाथ धोकर पड़े है मेरी मम्मी मेरे लिए एक लड़की का रिस्ता लेकर आयी थी कह रही थी चल कर देख लो लक्ष्य ने धमाका सा किया

क्या पूनम उछल पड़ी तुम शादी कर रहे हो एक ही पल में उसके चेहरे का रंग उड़ गया ।

नही अभी सिर्फ रिस्ता आया है मैने हां नही बोला है मम्मी बोल रही थी कि लड़की देख लो लक्ष्य इठला कर बोला

ऐसा तुम कैसे कर सकते हो लक्ष्य तुम शादी कैसे कर सकते हो पूनम को मानो कुछ भी समझ मे नही आरहा था लक्ष्य की

बात सुनकर उसका दिमाग जाम हो गया था

मतलब मैं शादी क्यो नही कर सकता लक्ष्य को बहुत आश्चर्य हुआ

मेरा मतलब है कि अभी तुम शादी क्यो कर रहे हो मना कर दो तुम बोल दो की अभी मैं शादी नही करूँगा पूनम ने बेचैनी से कहा

क्यो , आखिर क्यों अगर लड़की सुंदर है और घर परिवार अच्छा है तो क्यो मना कर दूं लक्ष्य पूनम को तड़पाते हुए बोला

हां तुम्हे तो हर लड़की अच्छी लगती है तुमसे और उम्मीद ही क्या की जा सकती है लेकिन अभी तुम कुछ कर भी नही रहे हो और शादी करने की इतनी भी क्या जल्दी है पहले नौकरी कर लो फिर करना शादी कर लेना इतनी भी क्या जल्दी पड़ी है शादी की और अभी खर्चा कहा से लाओगे - पूनम बदहवास सी बोली मानो वो अपने आप मे न हो ।

क्या बोल रही हो मतलब तुम्हे पता भी है क्या बोल रही हो अरे मेरे पापा मम्मी है अभी मैं नही कमाता तो क्या घर मे किसी चीज की कोई कमी नही है और फिर मैं अपने माँ पापा

का इकलौता बेटा हूँ तो मुझे या मेरी होने वाली पत्नी को किसी भी चीज की कोई कमी नही होगी- लक्ष्य ने अकड़ कर कहा

मैं कुछ नही जानती तुम इस शादी को मना कर दो बोल दो की अभी तुम शादी नही कर सकते - पूनम मानो पागल हो गयी थी और उसको क्या बोलना है कुछ समझ मे नही आरहा था

अच्छा चलो मान लो मना कर दिया तो रीजन क्या दू अब वो भी बता दो बड़ी जीनियस हो न तुम तो कोई अच्छा सा बहाना भी तो बताओ - लक्ष्य ने कहा

वो सब मुझे नही पता बस तुम कोई बहाना बना लो, और प्लीज इस शादी को मना कर दो , प्लीज लक्ष्य मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ रही हूँ प्लीज - पूनम रूवासी हो गयी उसके आंखों में आंसू भर आये ऐसा लगा कि वो अभी रो देगी ।

अरे क्या कर रही हो पूनम, प्लीज ऐसा मत करो मैं मना कर दूंगा लेकिन प्लीज तुम उदास न हो पूनम की हालत देख कर और उसके आंखों में आंसू देख कर लक्ष्य को मानो धक्का सा लगा हो वह पूनम की यह हालत एक्सपेक्ट नही कर रहा था और पूनम को बदहवास देख कर लक्ष्य सहम सा गया

उसने पूनम के जुड़े हुए हाथो को थाम लिया और बोला

पूनम के आंखों ने उसके आसुओ को थामने से इनकार कर दिया और अनायास ही वह बहकर उसके गालो पर लुढ़क आये लक्ष्य की शादी की बात सुनकर पूनम के दिल मे एक अजीब सी बेचैनी एक अजीब सा दर्द उमड़ पड़ा था ।

हे पागल रो क्यो रही हो , मैं प्रोमिस करता हूँ कि मैं मना कर दूंगा पक्का वाला प्रोमिस, अब चुप हो जाओ - लक्ष्य पूनम की हालत देख कर बिचलित हो गया था ।

पूनम के ऊपर तो जैसे इस खबर से बज्रपात सा हुआ था वह बहुत ही ज्यादा बेचैन थी और उसका दिल कर रहा था कि वह खूब जोर जोर से रोये ।
 
पूनम के ऊपर तो जैसे इस खबर से बज्रपात सा हुआ था वह बहुत ही ज्यादा बेचैन थी और उसका दिल कर रहा था कि वह खूब जोर जोर से रोये ।

तभी लावण्या निकल कर बाहर आई और उसने देखा

की पूनम के हाथों को लक्ष्य ने थाम रखा है ।

अरे लक्ष्य अभी तुम गए नही लावण्या ने आश्चर्य से कहा

बस भाभी निकल ही रहा था लावण्या की आवाज सुनकर लक्ष्य हड़बड़ा गया और उसने जल्दी से पूनम का हाथ छोड़ दिया और नजर चुराते हुए बोला ऐसा लगा मानो उसकी चोरी पकड़ी गई हो ।

अच्छा पूनम बाय अपना ध्यान रखना लावण्या भाभी आप

भी अपना ध्यान रखना बाय

लक्ष्य ने कहा और जल्दी से वहां से नौ दो ग्यारह हो गया पूनम एक ही जगह पथराई सी खड़ी रही, न तो उसने लक्ष्य के बाय का जबाब दिया और ना ही अपनी जगह से हिली उसको मानो सन्निपात से हो गया था ।

लक्ष्य के जाने के बाद भी पूनम ज्यो की त्यों खड़ी रही

लावण्या पूनम के पास पहुची

पूनम , पूनम- लावण्या ने पूनम को पुकारा

लेकिन पूनम को तो मानो कुछ सुनाई ही नही पड़ रहा हो वह तो पत्थर की मूर्ति की तरह खड़ी थी ।

लावण्या पूनम के पास पहुची और उसे जोर से झकझोरा और फिर से आवाज लगाया

पूनम को जैसे होश आया हो उसने पलट कर लावण्या की तरफ देखा उसकी आंखें डबडबाई हुई थी ।

ये क्या हो रहा था? अभी लक्ष्य ने तुम्हारा हाथ क्यो पकड़ा था- लावण्या ने हल्का सा गुस्सा दिखाया

पूनम ने डबडबाई आंखों से लावण्या को देखा लावण्या ने

पूनम की यह हालत देखी तो उसे बड़ा अजीब लगा

अरे क्या हुआ पूनम तुम रो क्यो रही हो पूनम की आंखों में आँसू देख कर लावण्या ने घबरा कर पूछा

लेकिन पूनम ने कोई जबाब नही दिया

अरे बताओ क्या हुआ लक्ष्य ने कुछ कहा क्या ? लावण्या ने पूनम को सम्हालते हुए कहा ।

नही पूनम की मरी सी आवाज निकली और साथ ही साथ उसने अपनी गर्दन ना में हिलाई

तो फिर तुम्हारे आंखे आंसू से क्यो भरी है लावण्या को कुछ भी समझ ने नही आ रहा था

कुछ नही भाभी बस ऐसे ही पूनम ने जल्दी से अपने आंसू पोछते हुए कहा

आओ बैठो मेरे पास बेठो लावण्या ने पूनम के कंधे पर हाथ रखकर उसे सोफे पर बैठाया और उसके बगल खुद भी बैठ गयी

क्या हुआ मुझे बताओ तुम क्यो रो रही हो, मैं तुम्हारी भाभी हूँ न, और दोस्त भी हूँ तो मुझसे कुछ मत छुपाओ बताओ क्यो परेसान हो , क्या लक्ष्य ने कुछ कहा ? -लावण्या ने अपने आँचल से पूनम के आंसू पोछतें हुए प्यार से पूछा

लावण्या का प्यार और अपना पन पाकर पूनम की हिचकी बध गयी

लावण्या ने उसे अपने सीने से चिपका लिया मानो वो उसकी माँ हो और प्यार से सहलाने लगी औरसाथ ही साथ वह पूनम के रोने के कारण भी पूछ रही थी ।

अच्छा पहले चुप हो जाओ, एकदम शांत तुम्हे मेरी कसम है और मुझे बताओ कि क्या हुआ क्या परेसानी है मैं हूँ न मैं प्रोमिस करती हूँ कि मैं तुम्हारी हर तरह से मदद करूँगी और किसी से कुछ भी नही कहूंगी मुझपर भरोसा करो और बताओ बात क्या है लावण्या ने पूनम का हाथ पकड़ कर कहा

भाभी वो लक्ष्य न .... कहते कहते पूनम रुक गयी और पूनम हिचकिया भरने लगी

हां हाँ लक्ष्य क्या, क्या कहा लक्ष्य ने उसने तुमसे कुछ कहा

क्या ? - लावण्या ने गुस्से से कहा

ना कुछ कहां नही लेकिन वो शादी कर रहा है इतना कह कर पूनम फिर से बिलख पड़ी

लावण्या ने एक लंबी सी सास ली मानो उसे तसल्ली हुई

अरे तो इसमें इतना परेसान होने वाली कौन सी बात है, लक्ष्य शादी कर रहा है तो करने दो तुम्हे क्या प्रोब्लम है तुम क्यो परेसान हो - लावण्या को कुछ भी समझ मे नही आया

ऐसे कैसे कर सकता है वो मुझसे एक बार भी नही पूछा पूनम मानो अपने होश हवास खो चुकी थी ।

अरे वो तुमसे क्यो पूछेगा उसकी जिंदगी है तो इसमें कौन सी बड़ी बात है एक दिन न एक दिन तो उसकी शादी तो होनी ही थी आखिर किसी न किसी से तो वो शादी करता...... अचानक से जैसे लावण्या को जोरदार झटका सा लगा वह चिहुँक कर पूनम से दूर हो गयी और पूनम को घूर कर देखने लगी मानो पूनम के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही हो

और पूनम का चेहरा आसुओ से तार बतर था और उसपर एक उदासी थी

पूनम मुझे साफ साफ बताओ कही तुम लक्ष्य से..... ओह्ह माई गॉड अब मुझे सब समझ मे आगया तुमने मुझे बताया क्यो नही , इतनी बड़ी बात छुपाई क्यो लावण्या को जैसे एक झटके में सब कुछ समझ मे आगया था

क्या नही बताया क्या छुपाया मैने पूनम ने आश्चर्य से कहा

यही की तुम लक्ष्य से प्यार करती हो - लावन्या ने साफ साफ बोल दिया

नही ऐसी कोई बात नही है भाभी- पूनम ने कहा

अच्छा ऐसी कोई बात नही है तो ये सब क्या है अगर तुम लक्ष्य से प्यार नही करती लक्ष्य तुम्हे पसंद नही है तो फिर लक्ष्य की शादी होने की खबर सुनकर इतना क्यो परेसान हो और इस तरह रो क्यो रही हो- लावण्या ने पूनम से कहा

वो तो बस ऐसे ही अचानक से लक्ष्य ने बताया तो बहुत बुरा लगा पूनम ने मासूमियत से कहा

पूनम तुम्हारी आंखे और तुम्हारा चेहरा तुम्हारे दिल की सारी कहानी बयां कर रहा है अब छुपाने से कोई फायदा नही और तो और अभी अभी आते हुए मैने देखा कि कैसे तुम दोनों

हाथों में हाथ डाले एक दूसरे में खोए हुए थे मुझे हैरानी तो इस बात की है कि मेरे ही पीठ पीछे ये सब हो रहा था और मैं बेवकूप समझ ही नही पाई की तुम्हारे दिल मे क्या है- लावण्या ने कहा

लेकिन भाभी न तो कही कोई घंटी बजी न ही मेरी रातो की नींद हराम हुई , न ही मैने खाना पीना बंद कर दिया ऐसा कैसे प्यार हो सकता है वो फिल्मो में देखा है कि जब प्यार हो जाता है तो भूख प्यास मर जाती है और नीद भी नही आती है चारो तरफ ऐसा लगता है वायलिन बजता है ये सब तो हुआ नही फिर ऐसे कैसे प्यार हो गया- पूनम ने मासूमियत से कहा

लावण्या के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कुराहट आगयी वह पूनम की मासूमियत और भोला पन देख कर अपनी हंसी नही रोक पाई और जोर जोर से हँसने लगी

आप हंस क्यो रही है पूनम कबूतर की तरह आंख झपकाती हुई बोली उसे लावण्या के हँसने का कारण समझ मे नही आया

सच मे पूनम तुम एक नंबर की बुद्धू हो वैसे ये सब तुमसे किसने कहा कि प्यार होता है तो ये सब होता है लावण्या

हसती हुई बोली

अरे वो शाहरुख खान वाली मूवी में देखा था ऐसा होता है - पूनम ने बेहद मासूमियत से बोला

अरे मेरी गोबर गणेश वो सिब फिल्मी बाते है ऐसा कुछ नही होता है जब किसी को किसी से प्यार होता है तो वो उस इंसान के बिना कहे ही उसके मन की बाते समझ जाता है , उसके आंखों की भाषा भी उसे समझ आने लगती है , और उसका सुख दुख सब उसे अपना लगने लगता है , जब वो पास होता है तो सूकून मिलता है और जब वो दूर चला जाता है तो बेचैनी होने लगती है , जब वो बात करता है तो दिल करता है बस सुनती जाऊँ जब वो उदास होता है तो दिल करता है कैसे करके उसके ओठो पर मुस्कुराहट ले आऊँ और सबसे बड़ी बात उसके खो जाने उसके दूर चले जाने और उसके छीन जाने के एहसास से ही ये आंखे भीग जाती है जब ऐसा होने लगे तो समझो कि तुम्हे उससे प्यार हो गया है समझी मेरी भोली भाली ननद श्री - लावण्या ने पूनम का गाल खींचते हुए कहा

हाँ ऐसा तो होता है थोड़ा थोड़ा - पूनम ने सोचते हुए कहा

इसका मतलब की तुम्हे लक्ष्य अच्छा लगता है और तुम लक्ष्य

को पसंद करती हो और तुम लक्ष्य से प्यार करती हो

अच्छा तो फिर अब मैं क्या करूँ भाभी प्लीज मुझे बताये उसकी शादी की बात सुनकर ही मुझे रोना आ रहा है ।

देखो पूनम तुम्हारी सारी बाते अपनी जगह पर ठीक है लक्ष्य बहुत अच्छा लड़का है और उसने हमारी तुम्हारी और तुम्हारे भैया की बहुत हेल्प की है तुम उसे बचपन से जानती हो और देखती आयी हो और फिर तुम्हारी उम्र में ऐसा होना कोई बड़ी बात नही है लेकिन तुम्हारे भैया तुम दोनों के रिश्ते को नही मानेगे - लावण्या ने कहा

क्यो भाभी भैया क्यो नही मानेगे पूनम ने तड़फ कर पूछा

पूनम लक्ष्य की एक कमी है वह हर एक लड़कियों से फ़्लर्ट करता है और किसी को लेकर सीरियस नही होता है अगर वो भी तुमसे प्यार करता होगा तब तो ठीक है लेकिन अगर वह तुमसे टाइमपास कर रहा होगा तो फिर , और तो और मान लो हमने तुम्हारे और लक्ष्य के रिश्ते को एक्सेप्ट भी कर लिया और बाद में लक्ष्य का दिल तुमसे भर गया या उसने अपनी आदत के अनुसार किसी और लड़की से नजदीकियां बढ़ा ली तो तुम क्या करोगी , क्या ये सब तुम सह पाओगी नही ना, पूनम तुम्हारे भैया तुमसे बहुत प्यार करते है तुम

उनकी जान हो और वो तुमपर जान देते है और उनके आंखों के सामने उनकी बहन परेसान होकर रोये उनकी वो लाडली बहन जिसके आंखों में वो कभी आंसू नही देख सकते अगर उस लक्ष्य की वजह से उसे दुख हुआ तो उनके दिल पर क्या बीतेगी वो लक्ष्य को बचपन से जानते है कि वो कैसे है वो तुमसे बड़े है और तुमसे अच्छी तरह से जानते है कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा - लावण्या ने सब कुछ प्यार से समझाया

लेकिन भाभी लक्ष्य में बदलाव आ गया है वो कह रहा था कि अब उसने ये सब छोड़ दिया है पूनम ने कहा

लेकिन अगर वो झूठ बोल रहा होगा तो ? अगर वो तुमसे सिर्फ फ्लर्ट कर रहा होगा तो ? - लावण्या ने कहा

मैं जान न ले लूंगी उसका - पूनम ने गुस्से से कहा

ऐसा नही होता है पूनम ये सिर्फ कहने की बाते है तुम्हारे भैया जो करेगे तुम्हारे अच्छे के लिए करेंगे - लावण्या ने पूनम का गाल थपथपा कर कहा

लेकिन भाभी ... पूनम का दिल अब भी नही मान रहा था

अच्छा चलो इस बारे में मैं तुम्हारे भैया से बात करूँगी

आखिर में मेरी एकलौती ननद हो तो भाभी का कुछ तो फर्ज बनता है अगर लक्ष्य तुम्हे सच मे प्यार करता होगा तो मैं वादा करती हूँ कि तुम दोनों को मिलवाऊंगी लेकिन अगर जरा भी भी एहसास हुआ कि लक्ष्य सिर्फ तुमसे टाइम पास कर रहा है तो आई एम सॉरी पूनम मुझसे बिल्कुल भी उम्मीद मत रखना लावण्या ने साफ साफ कहा

पूनम को समझ मे नही आरहा था कि वो करे क्या और कहे क्या इसी लिए वह चुपचाप लावण्या की बाते सुन रही थी ।

अच्छा पूनम तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो और बिल्कुल भी मत परेसान हो अभी तुम्हारी भाभी है ना फिर तुम्हे इतना सोचने की जरूरत नही है उठो थोड़ा सा पानी गर्म कर दो मेरे पेट मे हल्का सा दर्द है प्लीज लावण्या ने पूनम का मनुहार किया

पूनम चुपचाप उठी और अंदर चली गयी उसके दिमाग मे अभी भी वही सारी बाते घूम रही थी ।

राजीव ने बहुत कोशिश की लेकिन उसकी हिम्मत नही हुई कि वो अपने पापा के सामने रजनी के बारे में बता सके और न ही मम्मी से ही वह कुछ कह पाया इसी वजह से वह बहुत

परेसान था

रजनी और राजीव की फोन पर थोड़ी बहुत बाते होती थी और इन बातों से राजीव को रजनी की नजदीकियां और भी बढ़ गयी दोनों एक दूसरे को और सिद्दत से महसूस करने लगे और दोनों को एक दूसरे की जरूरत महसूस होने लगती ।

इन्ही सब वजहों से राजीव का दुकान में भी मन काम लग रहा था वह इसी उधेड़बुन में लगा रहता कि कैसे अपने घर वालो को बताए कि वह रजनी से शादी करना चाहता है एक दिन ऐसे ही उदास गुमसुम बैठा था तभी उसकी आंखे चमक गयी ।

वह बहुत ज्यादा खुश हो गया और भाग कर अंदर पहुचा

मम्मी वो मम्मी - राजीव जोर जोर से चिल्लाते हुए बोला

क्या हुआ क्यो चिल्ला रहा है मम्मी ने अंदर से कहा

मम्मी आप कह रही थी न कि दीदी को करवा लेकर जाना है तो कब जाना है- राजीव ने कहा

अरे अचानक से ये सूरज पश्चिम से क्यो उग आया है क्या बात है अब तक तो तू जाने को भी राजी नही था अब यु

अचानक से सब ठीक तो है ना - मम्मी जी को का सी हुई

जी मम्मी जी सब ठीक है पापा को बोल दीजिये की वो दुकान सम्हाले दीदी के यहा मैं चला जाऊंगा- राजीव ने कहा

ठीक है तू ही चला जाना वैसे भी तेरी श्रोती दीदी तुझे मिलने के लिए कितनी बेचैन थी और कब से बुला रही थी तेरे ही नखरे थे - मम्मी जी ने कहा

जाना कब है- मम्मी राजीव ने पूछा

कल चला जा परसो चला जा क्या फर्क पड़ता है मम्मी जी ने कहा

अच्छा ठीक है मैं कल ही चला जाता हूँ आप सारी तैयारी पूरी कर दो बस- राजीव ने बोला और वापस दुकान पर आगया

ये लड़का मुझे तो पागल कर देगा अभी तक तो जाने का नाम नही ले रहा था और अब अचानक से न जाने क्या होगया की इतना उतावला हो रहा है भगवान जाने इसके दिमाग को राजीव के जाने के बाद मम्मी जी बड़बड़ाते हुए बोली

अगले दिन राजीव अच्छे से तैयार होकर ढेर सारे सामान

फल सूखे मेवे मिठाई और कपड़े रख कर अपनी बहन के घर की तरफ चल पड़ा वह काफी एक्साइटेज था

राजीव के बहन का काफी बड़ा और आलीशान कोठी था राजीव के जीजा जी की भी दुकान थी जो काफी बड़ी थी लेकिन उनका रहना और दुकान अलग अलग था और इस वक्त वो अपबे दुकान पर थे ।

राजीव की गाड़ी घर के बाउंड्री के पास पहुची बाउंड्री का गेट बंद था राजीव ने अपने गाड़ी का हॉर्न बजाया और इन्तेजार करने लगा

थोड़ी देर बाद एक लड़की घर का दरवाजा खोल कर बाहर आई और फिर बड़ा सा गार्डन नुमा लान पार करके बीच मे बने हुए सीमेंटेड सड़क पर चलती हुई बाहर बाउंड्री के गेट तक आई

जी आप कौन ? उस लड़की ने आते ही पूछा जो शायद वहा की मेड थी ।

दीदी है क्या ? - राजीव ने उस लड़की से सीधा सा सवाल किया

जी है आप कौन उस मेड ने उनसे सवाल के जबाब में सवाल

किया

जाकर दीदी को बोल दीजिये राजीव आये है आपके घर से वो समझ जाएंगी - राजीव ने कहा

जी एक मिनट मैं पूछकर आती हूँ आप दो मिनट रुकिए मैं अभी आयी और वह लड़की भागते हुए अंदर चली गयी

थोड़ी देर बाद वापस लौटी तो उसके साथ खुद एक लगभग 25 या 28 साल की बहुत ही खूबसूरत और सभ्य सी महिला थी जो घर के जस्ट बाहर निकल कर खड़ी थी

उन्होंने वही खड़े खड़े राजीव को हल्का सा देखा और राजीव के देखते ही मानो उनकी आंखें चार सौ चालीस वाट के बल्ब जैसी चमक पड़ी

उन्होंने मेड को कुछ कहा और वह मेड भाग कर बाउंड्री के गेट तक आयी और उसने जल्दी से दरवाजा खोला राजीव अपनी गाड़ी अंदर ले आया

राजीव अपनी गाड़ी ड्राइव करता हुआ घर के बिल्कुल सामने ले आया जहां उसकी बहन श्रोती खड़ी थी ।

उसने वही गाड़ी खड़ी कर दी और गाड़ी का गेट खोलकर

और बाहर निकला
 
राजीव को देख कर श्रोती बहुत खुश थी मानो दुनिया भर की खुशी उसे मिल गयी हो उसके चेहरे की चमक बता रही थी कि राजीव के आने से उन्हें कितनी प्रसन्नता हो रही थी ।

राजीव चलते हुए उनके पास आया और उनके पैरों में झुक गया

हमेशा खुश रहो श्रोती ने आह्लाद से भर कर कहा और उठा कर मानो अपने सीने से लगा लिया

राजीव इस तरह अचानक कैसे रास्ता भूल गया न फोन न मैसेज अचानक दीदी की कैसे याद आगयी - श्रोती ने कहा

मम्मी कह रही थी कि आप गुस्सा है मुझसे, तो मैंने सोचा कि जाकर आप का गुस्सा दूर कर देते है आप ठीक तो है ना दीदी राजीव ने झेंपते हुए कहा

मैं बिल्कुल ठीक हूं और मम्मी पापा सब कैसे है

श्रोती ने पूछा

सब ठीक है दीदी आपसे मिलने का मन कर रहा था इसीलिए

मैंने मम्मी से कहा कि मैं दीदी के यहा चला जाता हूँ फिर आपको करवा भी पहुचाना था तो इसीलिए आ गया

अच्छा चलो अंदर चलो श्रोती ने राजीव को पकड़ कर कहा

एक मिनट दीदी , सामान तो निकाल लाऊ जो मम्मी जी भिजवाया है - राजीव ने बोला

अरे तुम रहने दो तुम चलो अंदर ये मधु निकाल लाएगी श्रोती ने कहा और फिर उसने मधु को आवज दिया

मधु ,,श्रोती ने आवाज लगाई

जी दीदी वही लड़की जिसने गेट खोला था भाग कर आई और बोली

भैया की गाड़ी से सामान निकाल कर ले आओ और लाकर अंदर रख देना

ठीक है दीदी मधु ने सिर हिलाते हुए कहा

राजीव और श्रोती दोनों अंदर चले गए ।।

राजीव को देख कर श्रोती बहुत ही ज्यादा खुश थी।

मानो इस दुनिया जहान की सारी खुशी उसे मिल गयी हो ।

राजीव इतने दिन से तुझे बुला रही थी, अब तक क्यो नही आया मेरे यहाँ आने का मन नही करता क्या - श्रोती ने शिकायती लहजे से कहा

ऐसी बात नही है दीदी, आप जानते ही हो पापा से अकेले दुकान सम्हलता नही है , कई बार कोशिश की आने की लेकिन आना नही हो पाता था पर अब तो आ गया न अब तो आप की शिकायत दूर हो गयी न - राजीव मुस्कुराते हुए बोला

एहसान कर दिया मेरे ऊपर आकर - श्रोती ने भड़क कर कहा

श्रोती को गुस्से में देख कर राजीव मुस्कुराने लगा

तू बैठ राजीव मैं अभी आयी श्रोती ने कहा और उठकर अंदर

चली गयी

थोड़ी देर बाद वह वापस लौटी तो एक छोटी सी टेबल नुमा ट्राली को धकेलते हुए लाई उसपर आलीशान नास्ता रखा हुआ था - श्रोती ने राजीव के सामने उसे सजा के रख दिया

और फिर वापस बैठ गयी और राजीव से बाते करने लगी ।

काफी देर तक इधर उधर की बाते हो रही थी राजीव रजनी की बात अपने दीदी से कहना चाहता था लेकिन उसे समझ मे नही आरहा था कि शुरू कहा से करे ।

मम्मी कैसी है राजीव- श्रोती ने पूछा

मम्मी ठीक है बस उनके घुटने में दर्द रहता है किसी तरह से घर का काम करती है मैने बोला कि मम्मी एक नौकरानी रख दू तो उन्होंने मना कर दिया कह रही थी कोई जरूरत नही है - राजीव ने कहा

हम्म , उनको किसी का काम भी तो नही पसंद आता सब कुछ अपने हाथों से ही करना चाहती है मैं जाऊंगी तो समझाऊंगी - श्रोती ने कहा

ज्यादा दर्द हो तो किसी अच्छे डॉक्टर को दिखा दो या उन्हें कुछ दिन के लिए मेरे पास भेज दो मैं अनुज (अपने हसबैंड ) से कह कर उन्हें अच्छे से दिखवा दूंगी - श्रोती ने कहा

अरे नही दीदी वो कहा आएगी फिर जीजा जी को कहा टाइम है वे वैसे ही इतना ज्यादा ब्यस्त रहते है मैं दिखवा दूंगा आप चिंता मत करो - राजीव ने कहा

ये तो है लेकिन लापरवाही मत करना जल्द से जल्द उन्हें दिखवा दो बहुत दिन से उन्हें ये परेसानी है सारा काम उन्हें अकेले ही करना पड़ता है - श्रोती ने कहा

दीदी मम्मी के लिए क्या करूँ उनके घुटने का दर्द बढ़ता जा रहा है आप ही समझा दो न कि कोई मेड रख ले उन्हें कुछ तो आराम मिलेगा जब तक आप थी तब तक तो ठीक था लेकिन अब उनको अकेले ही सारा काम करना पड़ता है तो उन्हें बहुत दिक्कत होती है - राजीव ने कहा

उन्हें मेड की नही मेरी भाभी की जरूरत है लेकिन तेरा टेस्ट ही समझ मे नही आता तुझे कितनी बार बोल चुकी हूँ कि कोई अच्छी सी लड़की अपने लिए पसंद कर लो , कम से कम मम्मी को आराम तो मिलेगा लेकिन तुझे अभी शादी ही नही करनी है ये नही देख रहा है कि मेरी माँ को कितनी

तकलीफ है - श्रोती ने हल्के से गुस्से से कहा

ऐसी बात नही है दीदी लेकिन शादी करने के लिए कोई लड़की भी तो होनी चाहिए - राजीव ने कहा

तो मेरे भाई को लड़कियों की कमी थोड़े न है तू एक बार हां तो कर, देख तेरी बहन कैसे तेरे लिए लड़कियों की लाइन लगा देती हूँ वैसे मम्मी जी कह रही थी उन्होंने तुम्हारे लिए कोई लड़की पसंद की है जाकर देख लो एक बार, क्या प्रॉब्लम है क्या पता लड़की तुझे पसंद आजाये - श्रोती ने कहा

नही दीदी मुझे किसी को नही देखना राजीव ने शरमाते हुए कहा ।

क्यो देखोगे नही तो पसंद कैसे करोगे अगर हमलोगों का पसंद किया हुआ नही करना तो तुम ही बता दो अगर कोई पसंद हो तो उससे करवा दूंगी - श्रोती ने राजीव की आंखों में झांकते हुए कहा

राजीव ने अपनी गर्दन झुका रखी थी और पैर के उंगलियों के नाखून से फर्श के मार्बल को कुरेदने की नाकाम कोशिश कर रहा था और उसके आंखों के सामने रजनी का चेहरा बार

बार फ्लेश हो रहा था

अच्छा ये तो बता दे कि उसका नाम क्या है श्रोती ने अचानक से पूछा

रजनी...अनायस ही राजीव के मुह से निकल गया

और तुरंत ही हड़बड़ाते हुए बोला किसका नाम दीदी आप किसका नाम पूछ रही है मुझे कोई नही पसंद है ।

राजीव की हड़बड़ाहट देख कर श्रोती खिलखिला कर हंस पड़ी और बोली

राजीव मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ और तुम मेरे एकलौते भाई हो, बचपन से ही तुम्हारे साथ खेल के बड़ी हुई हूँ तुम्हारी रग रग से वाकिफ हु और जानती हूँ कि कब और क्या तुम्हारे दिमाग मे चल रहा होता है और मैं तुम्हारा चेहरा और तुम्हारी हरकते देख कर ही बता सकती हूँ तुम क्या सोच रहे हो।

तुम जब भी अपने पैरों के नाखूनों से फर्श कुरेदते हो तो पता चल जाता है कि कुछ कहना चाह रहे हो लेकिन कह नही पा रहे हो सच सच बताओ , बात क्या है मैं तुम्हारी बहन भी हूँ और दोस्त भी तो मुझसे क्यो घबरा रहे हो , कौन है ये रजनी ? और कैसी है? कहा मिली? तुम्हे मुझे सारी बात बताओ तुम मेरे पास जिस काम से आये हो मैं तुम्हारा वो

काम भी बना सकती हूँ, मुझ पर भरोसा रखो - श्रोती ने मुस्कुराते हुए कहा

राजीव ने चौक कर श्रोती की तरफ देखा मानो पूछ रहा हो कि आपको कैसे पता चला कि मैं आपके पास क्यो आया हूँ

अब ऐसे क्या देख रहा है भाई, मुझे सब पता है तेरे आने से पहले ही मम्मी का फोन आगया है मेरे पास , और उन्होंने मुझे सब बता दिया कि कैसे तूने खुद जिद करके और मम्मी से कह कर मेरे पास आया है मैं तभी समझ गयी कि तुझे मुझसे कुछ बात करनी है या कोई सलाह लेनी है या किसी को पटाना है क्योंकि तेरी ये पुरानी आदत है जब कही फसता था तो तू मुझे ही याद करता था और मुझे ही आगे कर देता था- श्रोती ने मुस्कुराते हुए कहा

श्रोती की बाते सुनकर राजीव बहुत खुश हो गया उसे श्रोती पर बहुत प्यार आय्या और उसने जल्दी से श्रोती को दुलार से पकड़ लिया और अच्छे से भेटने लगा

आई लब यु माई स्वीट दीदी सच मे आप मुझे कितने अच्छे से समझती है और कितना जानती है मैं बहुत खुशनसीब हूँ कि आप जैसी बहन मुझे मिली है राजीव ने खुश होते हुए कहा

बस बस अब मस्का मारना बंद कर और शुरू हो जा मुझे सारी बात बता और कुछ भी मत छुपा श्रोती ने आदेश सा दिया

दीदी अपने मामा की लड़की है ना खुशबू मैं वहां गया था तो वहां पर एक लड़की आयी थी रजनी वो खुशबू की सहेली थी राजीव ने कहा

हा तो - श्रोती ने ध्यान लगा कर सुनते हुए कहा

पता है उसके साथ क्या हुआ राजीव बोला

क्या श्रोती बोली

हम दोनों खाना खा रहे थे तभी एक गाड़ी आयी, उसमे से दो लड़के उतरे और उन्होंने उसको बुलाया जैसे ही वह गाड़ी के पास पहुची उन लड़कों ने उसे अपने गाड़ी में जबर्दस्ती उठा लिया और लेकर जाने लगे मैने देखा तो उनका पीछा किया और उस गाड़ी का पीछा करते करते ग़ाज़ियाबाद तक गया

बाद में पता चला कि वे लड़के जिन्होंने उस लड़की को उठाया था उसके जानने वाले थे और उस लड़की के बहन के बर्थडे के लिए उसे लेकर गए थे और उसके जीजा जी ने उसे बुलाया था और मैं खामखा डर गया और उसे बचाने के लिए इतना दूर भागते हुए गया

अच्छा लेकिन ऐसे कौन बुलाता है भला कोई भी देखेगा तो यही सोचेगा की वे लड़के उस लड़की के साथ जबरदस्ती कर रहे है- श्रोती ने कहा

अरे दीदी वो सब रजनी के जीजा जी के एक दोस्त का प्रेंक था पहले तो मैं और रजनी भी डर गए थे और तो और उस लड़के को मारने जा रहे थे लेकिन जब सारी बात पता चली तो सब ठीक हो गया

वही पर हमारी और उसकी नजदीकियां बढ़ी और फिर हमने साथ मे शॉपिंग की और खाना खाया और साथ मे ही घुमें फिरे फिर शाम को रजनी की छोटी बहन की बर्थडे पार्टी थी उसमें खूब डांस किया दीदी सच मे बहुत अच्छा लग रहा था, उसका साथ उसकी हंसी और उसका नरम और नाजुक सा लहजा देख कर हमारे मन मे ये आया की काश यह लड़की हमेसा हमेसा के लिए हमारे घर आ जाय क्योकि मैं अपने घर परिवार और अपने लिए जैसी लड़की चाहता था वो बिल्कुल वैसी ही थी राजीव मानो अपनी ही कहानी में खोता से जा रहा था उसके आंखों में ढेर सारे रंगीन सपने और रजनी के लिए बेहिसाब प्यार साफ साफ दिख रहा था

अच्छा, लग रहा है कि मेरे भाई को वो लड़की पसंद आ गयी

है राजीव की बात सुनकर श्रोती मुस्कुराती हुई बोली

दीदी सच मे वो इतनी सीधी और सिम्पल सी है कि क्या बताऊँ उसकी बातें उसका चेहरा उसका लहजा बेहद मीठा है और आंखे ऐसी उदास सी मानो बरबस ही अपनी तरफ खींच रही थी । राजीव मानो रजनी को साक्षात अपने सामने खड़ा देख रहा हो

अच्छा तो फिर मिलवाओ उससे कब मिलवा रहे हो तुम्हारी बाते सुनकर मेरा रजनी से मिलने का बहुत मन कर रहा है- श्रोती ने अकुलाकर कहा

अरे पहले मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए दीदी, मैं मिलवा तो दूंगा उसको आपसे लेकिन एक प्रॉब्लम है- राजीव ने सकुचाते हुए कहा

क्या? ,क्या प्रॉब्लम है? श्रोती ने माथा सिकोड़ कर कहा

दीदी पहले आप मुझसे प्रोमिश करो कि मेरी बात सुनकर रिएक्ट नही करोगे राजीव मानो डरते डरते बोला

ऐसी कौन सी बात है जिसे बोलने पर तुम्हे लगता है मैं रिएक्ट करूँगी ।श्रोती ने आश्चर्य और उत्सुकता से कहा

दीदी रजनी किसी दूसरे से प्यार करती थी और उसके साथ शादी करना चाहती थी इसी लिए वह उस लड़के के साथ घर छोड़ कर चली गयी थी लेकिन उस लड़के ने उसे धोखा दे दिया और फिर उसकी बहन उसे तीन महीने बाद वापस लेकर आई राजीव ने डरते डरते कहा

क्या मतलब वो घर से भाग कर गयी थी क्या? श्रोती ने चिल्ला कर कहा

जी हां - राजीव ने सिर झुका कर हां बोला

और तुम उससे शादी करना चाहते हो कुछ अक्ल वकल है कि नही पहली बात तो मम्मी पापा कभी भी उस लड़की के लिए हाँ नही बोलेंगे और अगर हाँ बोल भी दिया तो सब थू थू करेंगे हमारी सारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी , नही ऐसा नही हो सकता तुम उस लड़की से शादी नही कर सकते- श्रोती ने भड़क कर कहा

दीदी प्लीज इसी लिए तो आपके पास आया हूँ मैने उससे वादा किया है कि बहुत जल्द ही वापस तुम्हारे पास आऊंगा मुझे अपना वादा पूरा करना है आप कैसे भी करके मम्मी पापा को कन्वेंस कर लो - राजीव ने श्रोती का हाथ पकड़

कर रिक्वेस्ट किया

सॉरी राजीव मैं इसमे हेल्प नही कर सकती तुम्हे वही मिली थी इस पूरी दुनिया मे, एक से एक लडकिया है उस लड़की से कई गुना अच्छी और संस्कारी उसको भूल जाओ बस उससे तुम्हारी शादी होना मुमकिन नही है - श्रोती ने कहा

दीदी आपको पता है रजनी ने मुझसे शादी करने से साफ इंकार कर दिया था क्योंकि वो जानती थी कि इसकी कहानी सुनने के बाद मेरे घरवाले उसे नही अपनाएंगे इसीलिए उसने मुझे मना किया लेकिन जब मैंने उसे अपने दिल का हाल बताया तो उसने साफ साफ इंकार कर दिया मेरे बार बार मिन्नते करने पर और इनकार की वजह पूछने पर उसने यह बात मुझे बताई दीदी वो चाहती तो ये बात मुझसे छुपा कसकती थी लेकिन नही उसने मुझे सब कुछ बता दिया इससे साबित होता है कि वो कितनी सच्ची और समझदार है प्लीज प्लीज दीदी एक बार मिल तो लो अगर उसके बाद वो पसंद नही आई तो आप जैसा बोल रही हो मैं वैसा कर लूंगा प्लीज दीदी प्लीज - राजीव ने हाथ जोड़ कर श्रोती को मनाया
 
राजीव तुम बात को समझ नही रहे हो भाई , ये मोहल्ले वाले ये समाज क्या कहेगा , कल को लोग ही ताना देंगे कि दूसरे

के साथ भाग गई थी तुम्हारी बीबी तब क्या करोगे और जो लड़की 20 साल तक पालने पोसने वाले अपने माँ बाप के इज्जत का ख्याल नही रख पाई वो हमारे घर के इज्जत मान सम्मान का क्या ख्याल रखेगी मेरी बात मानो उस लड़की को भूल जाओ मैं तुम्हारे लिए एक से बढ़कर एक लड़कियों की लाइन लगा दूंगी फिर तुम पसंद कर लेना - श्रोती ने कहा

नही दीदी मैं शादी करूँगा तो रजनी से ही करूँगा मैने उसे वादा किया है और मैं वादा निभाउंगा फिर उसके लिए मुझे चाहे जो भी करना पड़ेगा- राजीव ने मानो फैसला कर लिया हो वह उठ कर खड़ा हो गया उसके चेहरे पर एक अजीब सी सख्ती थी

राजीव मेरी बात सुनो ये बेवकूपी है अभी भी वक्त है श्रोती ने मानो आखिरी कोशिश की हो ।

आई एम सॉरी दीदी ये मेरा आखिरी फैसला है मैं आप के पास आया था कि आपसे थोड़ी सी हेल्प मिलेगी क्योकि आप मुझे अच्छे से समझती है आप मेरे दिल का हाल मेरे मन के पीड़ा को समझ पाएंगी लेकिन अब आप शायद मेरी वो दीदी नही रही जो मुझे समझती थी कोई बात नही मैं खुद ही कुछ न कुछ कर लूंगा - राजीव ने मायूसी से कहा

राजीव की बात सुनकर श्रोती कसमसा के रह गयी राजीव उसकी एक बात सुनने के लिए राजी नही था और अपने जिद पर अड़ा था

अच्छा सुन राजीव बैठ जा ज्यादा भाव मत खा और ये नखरे मत दिखा बड़ा आया फैसला करने वाला , ठीक है मुझे मिलवा अगर तूने जैसा कहा है वो लड़की वैसी ही होगी मुझे लगेगा कि वो हमारे घर परिवार को मम्मी पापा को सम्हाल लेगी उनके मान सम्मान और इज्जत पर कभी आंच न ही आने देगी अगर वो मुझे पसंद आएगी तभी मैं बात आगे बढ़ाऊंगी और अगर मुझे लगा कि उस लड़की को तू पहचानने या समझने में गलती कर रहा है तो फिर उस लड़की का नाम दुबारा तेरे जुबान पर नही आई चाहिए फिर तू उसे हमेशा के लिए भूल जाएगा और हमलोगों की बात मानगा ठीक है - श्रोती ने धमकी देते हुए कहा

लेकिन दीदी ... राजीव कसमसा कर बोला

लेकिन वेकीन कुछ नही अगर इस शर्त पर तु मुझे उस लड़की से मिलवाने पर राजी है तब तो उससे मैं मिलूंगी वरना फिर कभी भी वो मेरी भाभी नही बनेगी और अगर तूने अपने मन की की और हमारी मर्जी के बिना जबरदस्ती उस लड़की से शादी की या कोई रिस्ता रखा तो फिर हमेशा हमेशा के लिए

मुझे भूल जाना फिर तेरा और मेरा रिस्ता हमेसा हमेसा के लिए खत्म- श्रोती ने मानो धमाका किया

दीदी... ये आप क्या कह रही है राजीव मानो तड़फ गया और घूर घूर कर श्रोती को देखने लगा

लेकिन श्रोती का चेहरा पत्थर की तरह कठोर था मानो उसने जो कहा है उसी पर अटल रहेगी ।

बोल हां या ना मेरी शर्त मंजूर हो तो उस लड़की से मिलवाने की ब्यवस्था कर वरना फिर तेरी जो मर्जी - श्रोती ने कहा

ठीक है दीदी मुझे आपकी शर्त मंजूर है आप मिल लो जैसे आप कहोगी वैसे ही होगा अगर रजनी आप को पसंद नही आई तो मैं रजनी को हमेशा हमेशा के लिए भूल जाऊंगा राजीव ने भारी मन से कहा उनके चेहरे पर एक उदासी थी ।

उस दिन के बाद लावण्या काफी परेसान थी वह सार्थक से सारी बाते बताना चाहती थी लेकिन कैसे उसे कुछ भी समझ मे नही आरहा था और यह बात जान कर सार्थक कैसा रिएक्ट करेगा यह सोच सोच कर उसे घबराहट हो रही थी उसकी हिम्मत नही हो रही थी वह सार्थक से कुछ कहे ,इसी उधेड़बुन में वह पिछले दो दिन से परेसान थी लेकिन आज

उसने सार्थक से बात करने का सोच लिया था कैसे भी करके लक्ष्य और पूनम के रिश्ते की बात वह आज सार्थक को बताएगी यही सोच कर वह बैठी थी ।

रात में जब दोनों सोने की तैयारी कर रहे थे तब सही मौका जानकर लावण्या ने बात करना शुरू किया ।

सार्थक तुम्हारे बच्चे ने आज मुझे बहुत तंग किया जैसे जैसे बड़ा हो रहा है बहुत सरारती होता जा रहा है लावण्या ने मुस्करा कर सार्थक से कहा ।

क्यो क्या हुआ एनि प्रोब्लम सार्थक ने चिंता से कहा

नही वैसे तो कोई प्रॉब्लम नही है लेकिन आज दो दिन से थोड़ा दर्द हो रहा है - लावण्या ने कहा

अगर ज्यादा दर्द हो रहा हो तो ले चलकर डॉक्टर को दिखा दू - सार्थक ने चिंता से कहा

नही डॉक्टर के पास जाने की कोई जरूरत नही है अब थोड़ी बहुत तो परेसानी होगी ही , पूनम है ना वो सब कर लेती है वो बहुत ध्यान रखती है मेरा आप चिंता मत कीजिये पूनम बहुत समझदार है और मुझसे बहुत प्यार करती है- लावण्या ने

कहा

करेगी क्यो नही आखिर उसके लिए वर्ल्ड की बेस्ट भाभी जो ढूढ कर लाया हूँ तुमने भी तो मेरे इस परिवार को कब अपना लिया पता ही नही चला कैसे सबको अपने ब्यवहार से अपना बना लिया सब तुम्हारी तारीफ करते है यहां तक कल हमारी चाची भी तुम्हारी तारीफ कर रही पड़ोस में जाकर की सार्थक की बहू ऐसी है जबसे वो आयी है तबसे मुझे कुछ नही करना पड़ता है और पूरा घर कैसे सम्हाल रखा है - सार्थक ने खुश होकर कहा

सच चाची मेरी तरीफ कर रही थी लावण्या ने आश्चर्य से कहा उसे वास्तव में खुशी हुई और अच्छा लगा

हा सच मे वो उस दिन मैं जा रहा था तो पड़ोस की आंटी मुझसे मिली और वो कह रही थी कि चाची उनसे मिलने गयी थी और वहां पर वो तुम्हारी बहुत तारीफ कर रही थी - सार्थक ने कहा

सार्थक मैने ऐसा कुछ नही किया है, मैने तो जो मेरा फर्ज था वही किया है और आप लोग भी तो मेरा कितना ध्यान रखते हो आप, पूनम और तो और वो चाची जी भी , बनती बड़ी कठोर है लेकिन वो भी मुझे चाहती है भले ही ऊपर से न

दिखाये लेकिन चाची भी मेरी फिकर करती है आप को पता है उस दिन मैं सीढ़ी चढ़ कर ऊपर कपड़े उतारने जारही थी उन्होंने देख लिया औए बोली बहू तुम बार बार सीढ़ी चढ़ कर उपर मत जाया करो मुझे बता दिया करो मैं कपड़े ले आउंगी वैसे भी पूरा दिन पड़े पड़े शरीर अकड़ जाता है ऊपर नीचे थोड़ा चल लूंगी तो थोड़ी कसरत हो जाएगी , तुम आराम करो बार बार सीढ़ी चढ़ना तुम्हारे लिए ठीक नही है और खुद जाकर सारे कपड़े लेकर आई उनकी सिर्फ जुबान कड़वी है दिल की वो उतनी भी बुरी नही है - लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा

सार्थक सच मे मैने कुछ अच्छा काम किया होगा जो आप जैसा प्यार करने वाला हसबैंड पूनम जैसी प्यारी ननद और इस परिवार जैसा परिवार मिला है पूनम मेरा इतना ध्यान रखती है मानो मैं उसकी भाभी नही उसकी बहन हूँ मुझे तो यह सोच कर ही डर से लगने लगता है कि कल को उसकी शादी हो जाएगी तो मैं इस घर मे कैसे रहूंगी । लावण्या ने कहा

लावण्या मेरी बहन बचपन से ही माँ के प्यार को तरसी है अब उसे तुम मिली हो तो तुममे उसे अपनी मम्मी को तलास रही है और मुझे खुशी है कि तुमने उसको समझा है और उसे वैसा ही प्यार दिया है रही बात उसके चले जाने का तो तुम

देखना उसकी शादी मैं इतनी धूमधाम से करूँगा की पूरा मोहल्ला दांतो तले उंगली दबा लेगा और आखिर पूनम मेरी एकलौती बहन है सार्थक ने खुश होकर कहा

सार्थक एक बात बोलू , पूनम की शादी ऐसी जगह करना , जिस लड़के को हम अच्छे से जानते हो जो हमारे पूनम को खुश रखे , उसे खूब सारा प्यार करे, और पूनम को कभी हमारी कमी न खलने दे , पूनम का जब भी हमसे मिलने का दिल करे वो आ जा सके ।

सार्थक उसकी शादी ऐसे लड़के से करना जो पूनम को समझे , उसके भावनाओ उसके जज्बातो की कद्र करे और उसको हमेसा खुश रखे - लावण्या ने कहा

तुम चिंता मत करो लावण्या ऐसा ही होगा मैं अपनी पूनम के लिए ऐसा ही लड़का तलास करूँगा मुझे भी उसकी शादी की बहुत फिक्र है - सार्थक ने कहा

'

अच्छा सुनिये आप को एक बात बतानी है कल लक्ष्य आया था घर पर वह बहुत उदास और मायूस था - लावण्या ने बताया

लक्ष्य हमारे घर पर क्यो अब क्यो आया था ? मैंने तुमको

मना किया था न कि लक्ष्य को ज्यादा मुह मत लगाओ , लक्ष्य का नाम सुनकर ही सार्थक की त्योरी चढ़ गई

अरे वो हमसे मिलने आया था हमारा हाल चाल पूछने आया था , अब क्या उसको अपने घर से भगा देती वैसे भी वो तुम्हारा दोस्त है - सार्थक लावण्या ने समझाया

हम्म ,है तो दोस्त ही लेकिन साले की आदत खराब है उसने काम दुश्मनो वाला किया है इसी बात की दिक्कत है और कुछ नही - सार्थक ने नफरत से कहा

सार्थक लक्ष्य अब बदल गया है , उसने अपनी आदते सुधार ली है अब वो अपनी हरकतों पर हद तक कंट्रोल करना सीख गया है- लावण्या ने कहा

ये तुमसे किसने कह दिया ,वो कुत्ते की दुम है कभी सीधी नही हो सकती तुम उसे नही जानती लावण्या मैं उसे अच्छे से जानता हूँ , वैसे क्या कह रहा था वह और क्यो आया था - सार्थक ने लावण्या से पूछा

कुछ खास नही पहले तो हाल चाल पूछा फिर शिकायत कर रहा था लावण्या ने बताया

कैसी शिकायत सार्थक ने उत्सुकता से पूछा

यही की अब हम उसे फोन नही करते और उसे भूल गए उसको लगता है कि तुम मेरी बर्थडे पार्टी के बाद से ही उससे नाराज हो, पूछ रहा था कि बर्थडे में उससे ऐसी क्या गलती हो गयी जो सार्थक और आप मुझसे कटने लगे , मैने ऐसा क्या कर दिया कि जिससे आप लोगो ने मुझे दूध में पड़ी हुई मख्खी की तरह अपनी जिंदगी से निकाल दिया - लावण्या ने कहा

तुमसे क्या पूछ रहा है , उसे अपने आप से पूछना चाहिए कि उसने ऐसा क्या किया है, मैं उसे अपना दोस्त मानता था लेकिन उसने मेरी ही पीठ में खंजर घोपने की कोशिश की है - सार्थक ने गुस्से से कहा

सार्थक मैं एक बात पूछूं ? - लावण्या ने प्यार से कहा

वैसे तो वह आपका दोस्त है आप उसे मुझसे बेहतर जानते हो क्योंकि आप उसके साथ पढ़े हो लेकिन आज तक आपने मुझे भी यह नहीं बताया कि लक्ष्य ऐसा क्या कर दिया जो आप इस कदर नाराज हो गए हो , अगर मुझसे बताने लायक हो तो मुझे भी बताओ मेरी बर्थडे पार्टी में ऐसा क्या हुआ था जिससे आप लक्ष्य से गुस्सा हो गए - लावण्या ने सार्थक से पूछा

सार्थक की आंखों के सामने वह दृश्य घूमने लगा जब पूनम और लक्ष्य लावण्या के बर्थडे पार्टी में चिपक कर डांस कर रहे थे लक्ष्य का हाथ पूनम के कमर पर था और पूनम ने भी लक्ष्य को मानो बाहो में समेट रखा था दोनों एक दूसरे में इस कदर खोये हुए थे कि उन्हें आसपास के लोगो का भी होश नहीं रहा था

क्या हुआ मुझसे भी बताने लायक नहीं है क्या ? मैं आपकी पत्नी हूं कम से कम मुझे तो बता सकते हैं मैं भी तो जानू कि वह दोस्त जिससे आप अपनी जान से ज्यादा प्यार करते करते थे जिसने कदम कदम पर हमारी इतनी मदद की , उसने ऐसा क्या कर दिया कि आप उससे इस कदर दूर होते चले जा रहे हैं उसने ऐसा क्या कर दिया कि जिसकी वजह से आप उसे अपने घर में भी देखना पसंद नहीं करते हैं - लावण्या ने प्यार से पूछा

अब मैं क्या बताऊं लावण्या डायन भी सात घर छोड़ कर के शिकार करती है लेकिन इस लक्ष्य को इतनी भी शर्म नहीं है कि पूनम मेरी बहन है , उस दिन मैं उसके घर गया था और यह अपने कमरे में पूनम से बात कर रहा था मैंने उसकी सारी बातें सुन ली वह पूनम को अपने बातो में उलझा कर अपनी तरफ खींच रहा था उसे फुसला रहा था और उसके

भोलेपन और मासूमियत का फायदा उठा रहा था और फिर तुम्हारे बर्थडे पार्टी में पूनम के साथ जिस तरह से चिपक कर बात कर रहा था जिस तरह मेरी मासूम और भोली भाली बहन को फ़साने की कोशिश कर रहा था उसी को देख कर मुझे बहुत गुस्सा आया , वह तो मेरा दोस्त था इसी वजह से मैंने उसे कुछ नहीं किया अगर उसकी जगह पर कोई दूसरा होता तो मैं ना जाने क्या कर देता लेकिन मैंने उसे जाने दिया क्योंकि उसने मेरी बहुत हेल्प की है लेकिन हेल्प करने का यह मतलब थोड़ी ना है कि मैं अपने घर इज्जत के साथ उसे खेलने का मौका दूंगा , चाची बिल्कुल सही कह रही थी चाहे दोस्त हो या कोई भी हो किसी को भी अपने घर मे नही आने देना चाहिए कब किसकी नियत खराब हो जाये कुछ कह नही सकते - सार्थक ने गुस्से और दुख से कहा

बस इतनी सी बात के लिए ही आप लक्ष्य से इतना गुस्सा है , मुझे लगा पता नहीं क्या हो गया। आप भी ना सार्थक छोटी-छोटी बातों को लेकर के इतना ज्यादा रिएक्ट करने लगते हैं और परेसान हो जाते है - लावण्या ने सार्थक की बात सुनकर के मानो उसकी बातों को हंसी में उड़ा दिया

छोटी सी बात, यह छोटी सी बात है - सार्थक ने आश्चर्य लावण्या को देखा और कहा

लक्ष्य मेरी बहन से चिपक कर डांस कर रहा है उसे अपने

जाल में फ़साने की कोशिश कर रहा था और तुम को यह छोटी सी बात लग रही है सार्थक के चेहरे पर हल्का सा गुस्सा आया

क्या आप भी सार्थक भूल गए ,अरे लक्ष्य ने तो मेरे साथ भी ऐसे ही डांस किया था , याद है गोवा का वह नाइट क्लब जहां पर आप मैं रजनी दीदी लकक्ष और शशांक थे वहां पर भी तो उसने मेरे साथ डांस किया था तो , तब तो आपने कुछ नहीं कहा था अब पूनम के साथ डांस करने पर इतना क्यों गुस्सा हो रहे हैं डांस ही तो किया था- लावान्या बोली

तुम कैसी बातें कर रही हो लावण्या तुम्हें समझ में भी आ रहा है क्या बोल रही हो अरे उसका डांस नॉर्मल नही था अगर वह नॉर्मल डांस करता तो तुम्हें क्या लग रहा है मैं इतना ज्यादा रिएक्ट करता लेकिन पूनम और लक्ष्य दोनों एक दूसरे से बिल्कुल चिपके हुए थे और तो और दोनों एक दूसरे में इस कदर खोए हुए थे कि मानो दोनों ....... कहते कहते सार्थक की आधी बात उसकी जुबान में ही रह गई और आंखों में ढेर सारा गुस्सा और नफरत नजर आने लगा
 
सार्थक आई एम सॉरी आप भी ना छोटी छोटी बातों से परेशान हो जाते है इतनी बड़ी कोई बात नही है जो आप ओवररिएक्ट कर रहे हैं दोनो नए उम्र के है दोस्त भी है और

अगर दोनों साथ मे कम्फर्टेबल महसूस कर रहे है तो क्या फर्क पड़ता है

और फिर इसमें अकेले की सिर्फ लक्ष्य की गलती थोड़े ना है जैसा कि आप कह रहे हैं दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे तो बिना पूनम की सहमति के लक्ष्य की इतनी तो हिम्मत नहीं है कि अपने आप से यह सब कर ले क्या पता पूनम भी... कहते-कहते लावण्या चुप हो गई

क्या पूनम भी तुम कहना क्या चाहती हो , पूनम भी क्या सार्थक में हल्के से गुस्से से लावण्या को घूरा और कहा

मैं वही कहना चाह रही हूं जो आप समझ रहे हैं, क्या आपने एक बार भी पूनम से पूछा कि उसके दिल में क्या है वह क्या चाहती है बिना पूनम की राय जाने ऐसा करना कहां तक ठीक है लावण्या ने सार्थक को समझाया

तुम्हारे कहने का मतलब यह है की पूनम भी लक्ष्य को पसंद करती है क्यों? ऐसा ही है ना - सार्थक ने लावण्या को घूर कर देखा और अपने शब्दों को चबाते हुए पूरा

क्यों ऐसा नही हो सकता है क्या ? आपने कभी गौर किया है जब दोनों एक साथ होते हैं तो कितने खुश होते हैं एक दूसरे की टांग खींचने में ही लगे होते हैं दोनों एक दूसरे को समझते

हैं और कंफर्टेबल फील करती है क्या आपने कभी सोचा है पूनम कभी भी किसी मुसीबत में होती है तो आप के बाद वह किसे याद करती है , सार्थक हो न हो हमारी पूनम भी कही न कही लक्ष्य को पसंद करती है उससे प्यार करती है मुझे ऐसा लगता है ,और मुझे पूरा भरोसा ही नही पूरा यकीन है की लक्ष्य और पूनम दोनो ही एक दूसरे को पसंद करते है तो अगर आप सिर्फ लक्ष्य को दोषी मानते है तो यह लक्ष्य के साथ नाइंसाफी होगी

अगर ऐसी बात है तो तुम्हें उसको रोकना चाहिए था आखिर में मुझसे ज्यादा तो तुम उसके साथ रहती हो तुम्हें उसे समझाना चाहिए था , वह तो अभी नादान है मासूम है भोली है , उसे सही गलत की समझ नहीं है कम से कम तुम्हें तो है तुम्हें तो उसको सही रास्ते पर लाना चाहिए तुम्हें तो उसको समझाना चाहिए तुम्हें उसको सही रास्ता दिखाना चाहिए - सार्थक ने लावण्या को डांटते हुए कहा

सार्थक आप कैसी बातें कर रहे हो अगर पूनम ने ऐसा किया भी है तो उसमें कौन सा गुनाह कर दिया प्यार करना कोई गुनाह थोड़े ना है अगर वह लक्ष्य को पसंद करती है तो इसमें बुराई क्या है आखिर तुमने भी तुम मुझे पसंद नहीं किया था मैंने भी तुम्हें पसंद किया था हमारी लव मैरिज हुई है तो अगर हम लव मैरिज कर सकते हैं , अगर आप लव मैरिज कर

सकते हैं, किसी से प्यार कर सकते हैं तो पूनम ने अगर ऐसा कर लिया तो कौन सा पहाड़ टूट गया ।

सार्थक बुरा मत मानना लेकिन तुम लड़कों की यही बातें मुझे अच्छी नहीं लगती है तुम्हारी नजरें हर चीज को दो नजरिए से देखती हैं , अगर आप लोग किसी की बहन से किसी की बेटी से प्यार करो तो उसमें आप लोगों को कोई बुराई नजर नहीं आती है लेकिन अगर आप लोगों की बहन या बेटी ने किसी के साथ प्यार कर लिया तो फिर ढेर सारी बंदिशे और ढेर सारे कानून याद आने लगते है । आप पूनम पर इस तरह से बंदिशे लगा कर क्या साबित करना चाह रहे है पूनम ने अगर लक्ष्य से प्यार कर भी लिया तो क्या हो गया आप ऐसी बाते कर रहे है मानो उस बेचारी ने प्यार करके कोई अपराध कर दिया हो ऐसा क्यों सार्थक ? आपको प्यार करने का हक है तो दूसरों को क्यों नहीं है , आपका दिल अगर किसी के लिए धड़क सकता है तो हम लड़कियों का क्यो नही धड़क सकता ? क्या क्या हमें इतना भी अधिकार नही है कि हम अपने लिए मनपसन्द जीवन साथी का चुनाव कर पाए - लावण्या ने गंभीरता से कहा

लावण्या बात वह नहीं है , मुझे पूनम के किसी से प्यार करने पर कोई ऑब्जेक्शन नहीं है , और ना मैं उसके लिए उसको रोक टोक रहा हूँ लेकिन लक्ष्य जिस टाइप का लड़का है ,

उसकी जो आदते हैं वह मेरी बहन के लिए ठीक नहीं है और इसी वजह से मैं अपनी बहन को उससे दूर करने की कोशिश कर रहा हूं क्योंकि एक भाई होने के नाते मुझे यह अधिकार है कि मैं अपनी बहन को , उस बहन को जिससे मैं अपने दिल से ज्यादा चाहता हूँ , जान से ज्यादा प्यार करता हूं उसे सही और गलत का रास्ता दिखा सकूं उसे समझा सकूं कि कौन तुम्हारे लिए अच्छा है और कौन बुरा है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि लक्ष्य कभी भी एक अच्छा पति बनने के लायक नहीं है क्योंकि वह कभी भी स्टेबल नहीं रह सकता है और मैं नहीं चाहता कि पूनम लक्ष्य से नजदीकियां बढ़ाए फिर उसके बाद वह बाद में पछताए रोए और उसे देख देख कर के मैं भी दुखी हूं सार्थक में समझाया

ऐसा नही है सार्थक लक्ष्य अब बदल गया है और उसका यह बदलाव मैने खुद महसूस किया है सार्थक पूनम और लक्ष्य की जोड़ी कितनी अच्छी है लक्ष्य पूनम को लेकर सीरियस है उसका पूनम के लिए प्यार मैने लक्ष्य के आंखों में महसूस किया है एक बार ठंडे दिमाग से सोचिये लक्ष्य ने हमारी कितनी मदद की है मैं मानती हूँ कि वो थोड़े से सरारती और लापरवाह है है और केयर लेस है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि अपनी पूनम उन्हें बिल्कुल ठीक कर देगी पूनम भी लक्ष्य को पसंद करती है सार्थक कम से कम पूनम की खुशी के बारे में सोचो लावण्या ने लक्ष्य को समझाने की कोशिश की

लावण्या मैने जो फैसला किया है सोच सोच समझ के किया है इसी में पूनम की भलाई है मैं लक्ष्य को अच्छी तरह जानता हूँ और यह भी जानता हूँ कि पूनम लक्ष्य के साथ बिल्कुल भी खुश नही रहेगी इसी लिए ये मेरा फाइनल डिसीजन है कि लक्ष्य और पूनम का कोई मेल नही है और लक्ष्य के साथ मैं अपने पूनम की शादी कभी नही होने दे सकता हूँ - सार्थक ने कहा

लेकिन लक्ष्य ....लावण्या ने बोलने की कोशिश की

बस लावण्या ये लक्ष्य की वकालत बंद कर दो मैं इस बारे में और कोई भी बहस नही करना चाहता लक्ष्य और पूनम की शादी कभी नही हो सकती यह तुम और पूनम जितनी जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा होगा और आगे से कभी भी अगर लक्ष्य और पूनम ने मिलने की या बात करने की कोशिश की तो फिर मुझसे बुरा कोई नही होगा - सार्थक ने गुस्से से कहा

लावण्या कसमसा कर रह गयी सार्थक का यह रवैया और यह रूप उसके लिए बिल्कुल नया था वह सार्थक से इतनी कठोरता की उम्मीद नही कर रही थी लेकिन सार्थक मानो जिद पर अड़ गया था ।

कुछ दिन बाद राजीव ने श्रोती को फोन किया

हेलो दीदी मैं राजीव बोल रहा था

हां राजीव बोलो

दीदी मैने रजनी को आपसे मिलवाने के लिए राजी कर लिया है तो आप बताइए आप कब उससे मिलना पसंद करेंगी

अच्छा तो एक काम करो तुम दो दिन बाद उसे कही रेस्टोरेंट में बुला लो तुम रजनी को लेकर आ जाना और मैं अनुज के साथ आजाउंगी ठीक है - श्रोती ने कहा

ठीक है दीदी तो मैं दो दिन बाद रजनी को लेकर ररस्टोरेंट में मिलूंगा ओके

ठीक है

दो दिन बाद राजीव रजनी को लेकर श्रोतीके बताये हुए रेस्टोरेंट में पहुचा

राजीव मेरा दिल बहुत घबरा रहा है न जाने दीदी मुझे देख कर क्या सोचेगी और कैसे रिएक्ट करेंगी- रजनी ने कहा वह सच मे बहुत घबराई हुई थी

अरे रजनी कूल डाउन तुम बिल्कुल मत घबराना बस जो दीदी पूछे उसका सही सही और मुस्करा कर जबाब देना मेरी दीदी बहुत अच्छी और समझदार है और मुझे बहुत प्यार करती है देखना वो तुम उनका दिल जरूर जीत लोगी- राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा

तभी अनुज के साथ श्रोती आती हुई दिखी

बिल्कुल साफ सफ्फाक दूध सा धुला चेहरा काले रेशमी बाल और बहुत ही सिम्पल सा लेकिन महगा सूट , गले मे एक सोने का मंगल सूत्र जिसके लटकन वाले ठप्पे के बीचों बीच एक छोटा सा हीरा अपनी एक अलग ही चमक बिखेर रहा था हाथो मे सिर्फ एक एक सोने का कंगन और पैरों में एक खूबसूरत सी सेंडल , बस श्रोती का यही पहनावा था और वह बहुत ही सभ्य और ग्रेसफुल लग रही थी

और अनुज ने एक सफेद रंग का सर्ट और हल्के नीले कलर का कोट पेंट पहना था और जिसमे नीले ही कलर का चेक बना था हाथो में महँगी घड़ी और पैरों में चमक दार काले जूते गले मे एक सोने का जंजीर था और हाथो की दो अंगुलियों में सोने की अँगूठिया थी ।दोनो की जोड़ी कमाल की लग रही थी और दोनों के रहन सहन में रईसी साफ साफ झलक रही थी ।

दोनो को देख कर रजनी मानो सिमट सी गयी श्रोती और अनुज के पर्सनाल्टी से रजनी थोड़ी होपलेस लग रही थी उसने नर्बस होकर राजीव की तरफ देखा ।

राजीव ने अपने पलको को झपका कर उसे हौसला दिया ।

आइये दीदी आइये जीजा जी बैठिये राजीव ने दोनों को अपने सामने टेबल पर बैठाया

श्रोती थोड़ा सा जल्दी करना यार प्लीज - अनुज ने कहा

अरे बैठिये न अभी तो आये है अभी से जल्दी करने लगे है - श्रोती ने मुस्कुराते हुए कहा

राजीव और श्रोती रजनी और राजीव के सामने बैठ गए

श्रोती ने पहली बार भर नजर कर रजनी को देखा

रजनी को श्रोती की आंखे अपने अंदर तक झांकती हुई नजर आयी इसी वजह से वह न चाहते हुए भी अपने नजर झुका ली वह अंदर ही अंदर बहुत डरी और घबराई हुई सी थी

रजनी यही नाम है आपका न - श्रोती ने कहा

जी - बड़ी मुश्किल से रजनी के मुँह से निकला

अरे आप इतनी घबराई हुई क्यो है आप बिलकुल रिलेक्स हो जाइए - रजनी की हालत देख कर श्रोती ने उसे साहस दिया

रजनी को थोड़ा सा कांफिडेंस आया वह हल्की सी मुस्कराई हालांकि उसकी मुस्कुराहट में अब भी झिझक और डर की परछाई साफ साफ दिखाई दे रही थी ।

थोड़ी देर तक इधर उधर की बाते करके श्रोती ने रजनी को नार्मल किया

राजीव तुम और अनुज बात करो मैं और रजनी थोड़ा टहल कर आते है - अचानक से श्रोती ने कहा और रजनी का हाथ पकड़ कर उठाया

अरे कहा जा रहे है आप दीदी , जो बातें करनी है यही कर लीजिए न - राजीव ने घबरा कर कहा

श्रोती ने घूर कर राजीव को देखा मानो राजीव का टोकना उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं आया राजीव ने सकपका कर नजर फेर ली

श्रोती ने फिर रजनी से बोला आओ रजनी मुझे आपसे कुछ बात करनी है

रजनी ने राजीव की तरफ देखा उसके दिल की धड़कन अनायस ही बढ़ गयी थी लेकिन मरती क्या न करती अब जब श्रोती ने बुलाया तो जाना ही पड़ेगा

रजनी उठी और श्रोती के साथ साथ चलने लगी ।

अनुज और राजीव बाते करने लगे लेकिन राजीव का तन मन सब रजनी के पास अटका हुआ था वह बहुत बेचैन था और सोच रहा था कि ना जाने क्या क्या बाते हो रही होगी रजनी जबाब दे पा रही होगी कि नही इसी वजह से अनुज के बातो में न तो उसे इंटरेस्ट लग रहा था और न ही वह मन से उनकी किसी बात का जबाब दे पा रहा था वह बार बार उस तरफ ही देख रहा था जिधर दोनो गए थे ।

इन्तेजार करते करते राजीव को एक एक पल भारी लगने लगा मानो एक एक मिनट एक एक साल के बराबर हो गया हो ।

करीब एक घंटे बाद श्रोती रजनी को वापस लेकर लौटी रजनी के चेहरे पर हद तक संतुष्टि थी , लेकिन श्रोती का चेहरा बिल्कुल सपाट था और उसपर मुस्कुराहट गायब थी वह बहुत गंभीर लग रही थी ।

राजीव ने रजनी के चेहरे को पढ़कर उसके दिल का हाल समझने की भरपूर कोशिश की लेकिन नाकामयाब रहा श्रोती के चेहरे से राजीव कुछ भी अंदाजा लगाने में असफल रहा ।

दोनो चलते हुए राजीव के बिल्कुल पास आगये राजीव उतावले पन से खड़ा हो गया और श्रोती के चेहरे को देखने लगा मानो पूछ रहा हो कि रजनी कैसी लगी ।

कितना टाइम लगा दिया यार श्रोती आपको पता है ना मैं

कितनी मुश्किल से टाइम निकाल कर आया हूँ अनुज मानो बोर हो रहा था और श्रोती को देखकर उसके जान में जान आयी हो

हो गया अनुज, आई एम सॉरी थोड़ा ज्यादा टाइम लग गया चलिए हो गया- श्रोती ने कहा

अरे दीदी क्या हुआ बता तो दो ? रजनी आपको पसंद आई की नही - राजीव ने उतावले पन से कहा

इतनी भी क्या जल्दी है बता दूंगी अभी तुम्हारे जीजा जी को जल्दी निकलना है तो अभी बिल्कुल भी समय नही है हम दोनों अभी जा रहे है - श्रोती ने निस्तेज भाव से कहा

राजीव कसमसा कर रह गया उसे बिल्कुल भी सब्र नही हो रहा था वह जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी अपनी बहन का डिसीजन जानना चाहता था लेकिन श्रोती ने मानो उसे तड़पाने का पूरा पूरा मन बना रखा था वह कुछ भी बताने के लिए तैयार नही थी ।

हां चलो श्रोती सच मे मुझे कुछ जरूरी काम है अनुज ने कहा ।

अच्छा राजीव घर पहुच कर तुम्हे मैं फोन करती हूँ श्रोती ने कहा और फिर अनुज के साथ चलती हुई अपनी गाड़ी की तरफ जाने लगी ।

रजनी ने भाग कर श्रोती का झुककर पैर छुवा और अनुज को नमस्ते किया

श्रोती ने आशिर्बाद फ़िया और फिर चली गयी ।

जैसे ही श्रोती राजीव की आंखों से ओझल हुई राजीव रजनी की तरफ पलटा मानो अब रजनी ही उसका आखिरी सहारा हो ।वही उसको कुछ बता सकती है ।उसके आंखों और चेहरे पर बेचैनी साफ साफ दिखाई पड़ रही थी और रजनी उसे महसूस भी कर रही थी ।

क्या हुआ रजनी? क्या बाते हुई ? दीदी ने क्या क्या पूछा ? क्या क्या कह रही थी दीदी ? राजीव का बस चलता तो वह सब कुछ एक बार मे एक ही साँस में ही सब कुछ जान लेता ।

अरे एक साथ इतने सारे सवाल ? रुकिए न आप तो मुझसे ज्यादा उतावले हुए जा रहे है और घबराये हुए है रजनी मुस्कुराते हुए बोली

अरे तुम्हे हंसी आरही है और यहां मेरी जिंदगी दाव पर लगी हुई है ।राजीव बेचैनी से बोला

जल्दी बताओ वहां क्या क्या हुआ ? दीदी ने क्या कहा ? राजीव ने पूछा

कुछ नही कहा राजीव, बस जो जो पूछती गयी वो सब मैं सच सच बताती गयी पहले तो मुझे थोड़ी सी घबराहट हो रही थी और डर भी लग रहा था लेकिन दीदी बहुत ही अच्छी है और उन्होंने मेरे डर को दूर किया और फिर मैं उनसे आराम से बाते करनी लगी ।रजनी ने मुस्कुराते हुए बोली

वो सब ठीक है लेकिन दीदी से बाते क्या हुई वो बताओ - राजीव उत्सुकता से बोला

अरे बताती हूँ बताती हूँ एक मिनट रुकिए तो सही - रजनी ने कहा

सबसे पहले दीदी ने मेरे परिवार के बारे में पूछा और फिर मेरे बारे में पूछा उसके बाद दीदी ने आप और हम कहां मिले थे वो सब पूछा और फिर अपने अपने बारे में बताया घर के अंबार में और आपके बारे में बताया और समझाया - रजनी

ने कहा

अच्छा दीदी ने तुम्हारे साथ मेरी शादी करने के लिए तैयार तो है न उनकी बातों से तुम्हे क्या लगा - राजीव ने रजनी से पूछा

ये तो न उन्होंने मुझे बताया और न ही मैने पूछा और न ही उनको बातो से मैं कुछ अंदाजा लगा पाई राजीव दीदी बहुत समझदार है और जो भी करेंगी अच्छा ही करेगी वो आपसे सच मे बहुत प्यार करती है और आपके लिए जो भी सोचेंगी अच्छा ही सोचेंगी मैन अपना काम कर दिया है अब घर के बड़े लोगो का जोभी डिसीजन होगा हमें सिर झुका कर स्वीकार करना पड़ेगा क्योंकि वो हमारे बड़े है और हमारे लिये अच्छा ही सोचेंगे फिर हम क्यों परेसान हो - रजनी ने कहा

अच्छा ,चलो छोड़ो मैं दीदी से ही पूछ लूँगा ,अब फटाफट चलो तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ दूं और उसके बाद मुझे दीदी के पास जाना है - राजीव ने कहा और जल्दी जल्दी गाड़ी की तरफ जाने लगा
 
रजनी भी राजीव के पीछे पीछे चल पड़ी

राजीव जल्दी से गाड़ी में बैठा और गाड़ी स्टार्ट करके चल पड़ा

रजनी को उसके घर की तरफ छोड़ कर राजीव सीधा अपनी बहन श्रोती के घर पहुचा

राजीव को देख कर श्रोती के चेहरे पर एक सख्ती सी सिमट आयी मानो राजीव का आने की उसे पूरी पूरी उम्मीद थी

राजीव उत्सुकता और बेचैनी के साथ श्रोती का बार बार मुह देख रहा था उसे देख कर ऐसा लग रहा था मानो कोई बच्चा परिक्षा के बाद अपना रिजल्ट जानने के लिए बेचैन हो ।

दीदी बताइये न आपने वहां भी कुछ नही बताया और अब यहां पर भी ऐसे खामोश बैठी है और यहां मेरे दिल की धड़कन बढ़ी हुई है - राजीव ने बेचैनी से कहा

क्या बताऊँ श्रोती ने शांति से कहा मानो कुछ हुआ ही नही हो

अरे आप ने ही तो कहा यह कि घर चल कर बताउंगी रजनी के बारे में क्या खयाल है राजीव ने आश्चर्य से कहा उसे अपनी बहन से इतने ठंडे जबाब की उम्मीद नही थी

राजीव तुम्हे और कोई नही मिला था क्या अभी तो तुम्हे एहसास भी नही है कि तुम क्या कर रहे हो लेकिन जब गाव

वाले मुहल्ले वाले तुम्हे टोकेंगे तो तुम्हे बुरा लगेगा और फिर तुम दुखी होंगे श्रोती ने राजीव को समझाते हुए कहा

नही दीदी हमे बुरा तब लगता जब हमें सारी चीजें पता नही होती लेकिन रजनी ने मुझे सब कुछ पहले ही बता दिया तो फिर किस बात का पछतावा दीदी औरवैसे भी दीदी गाव वाले मुहल्ले वाले क्या सोचेंगे इससे मुझे फ़र्क नही पड़ता मेरी दीदी क्या सोचती है मेरे मम्मी पापा क्या सोचते है इससे मुझे फर्क पड़ता है इसीलिए आप बताइए कि आप रजनी के बारे में क्या सोचती है गाव वाले और मुहल्ले वालो की चिंता मत कीजिये - राजीव ने कहा

श्रोती खामोश बैठी रही मानो कुछ सोच रही हो एक तरफ उसके भाई की खुशी थी और दूसरी तरफ समाज का डर वह फैसला नही कर पा रही थी कि राजीव से क्या कहे

आप इस बात को छोड़ दीजिए दीदी इसके अलावा आप को रजनी की बात ब्यवहार और रजनी कैसी लगी मुझे ये बताइये- राजीव ने कहा

और सब ठीक है रजनी समझदार है शांत है सीधी साधी है और खूबसूरत भी है सब कुछ सही है इन सॉर्ट अगर मैं यह कहू की हमारे घर की के लिए बिल्कुल परेफेक्ट है तो गलत नही होगा रजनी के बात करने का अंदाज ,उसका लहजा

और छोटे बड़ो का लिहाज करना किसी को सम्मान देना और किसी का दिल जीतना रजनी को अच्छी तरह से आता है लेकिन भाई सिर्फ और सिर्फ एक ही कमी है और वो मैं बता चुकी हूँ - श्रोती ने ठंडी सांस ली और कहा

दीदी मैं मानता हूँ कि रजनी से गलती हुई है लेकिन उसकी एक गलती की वजह से अगर उसे जिंदगी भर का दुख मिले, तो क्या यह ठीक है दीदी सिर्फ इस वजह से की उसने किसी से प्यार किया और उसके साथ जिंदगी बिताना चाहती थी हमे उससे उसकी सारी खुशियां छीन लेने का अधिकार है क्या दीदी? प्लीज मैं रजनी के साथ शादी करके बहुत खुश रहूंगा वो बहुत अच्छी लड़की है और सबसे बडी बात यह है कि उसकी आँखों मे सच्चाई है उसका दिल साफ है प्लीज् दीदी मुझ पर भरोसा किजिए आप जानती है मैं बिना आप की इजाजत के यह नही कर सकता अगर आप न कर देंगी तो मैं कभी भी रजनी की तरफ देखूंगा नही लेकिन प्लीज दीदी आज तक आपने हर जगह मेरा साथ दिया है जब भी मैं किसी परेसानी मे होता हूँ आप ही मुझे उस परेसानी से निकालती है तो प्लीज इस बार भी निकाल लीजिए इस बार भी वैसे ही साथ दीजिये जैसे आप हमेशा देते आयी है क्योंकि आप के बिना मैं कुछ नही कर पाऊंगा ।- राजीव बोलते बोलते रूवासा हो गया ऐसा लग रहा था कि अगर श्रोती ने उसे ना कर दिया तो वह रो देगा

अरे पागल है क्या अब ऐसी रोनी सी सूरत मत बना मुझे रजनी पसंद आई और तू उससे शादी कर सकता है - श्रोती ने मुस्कुरा कर कहा

सच मे दीदी राजीव खुशी से उछल पड़ा उसे विश्वास नही हो रहा था कि श्रोती ने उसे परमीसन दे दी है

अब लिख कर दूं तू तभी मानेगा क्या? मुझे रजनी को भाभी बनाने में कोई प्रॉब्लम है तू मेरा भाई है जिसमे तेरी खुशी है उसी में मेरी भी खुशी है - रजनी ने कहा

थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू सो सो मच दीदी थैंक्स राजीव ने आव देखा न ताव श्रोती से लिपट गया और उन्हें गले लगा लिया वह बहुत खुश था मानो दुनिया जहान की सारी खुशियां उसे मिल गयी हो ।

अरे ये क्या कर रहा है मुझे छोड़ तो राजीव श्रोती ने कसमसा कर कहा राजीव को इतना खुश देख कर अनायास ही उसके ओठो पर भी मुस्कुराहट फैल गयी थी ।

राजीव श्रोती से अलग हुआ उसका चेहरा खुशी से दमक रहा था ।

दीदी यू आर बेस्ट सिस्टर इन द वर्ल्ड सच मे आप बहुत अच्छी है आई लब यू दी - राजीव ने खुशी से चहकते हुए कहा

बस बस अब मस्का मारना बंद कर और बता अब आगे क्या करेगा मम्मी पापा को कैसे बताएगा - श्रोती ने कहा

आप हो न अब आप को जैसे मैनेज करना है आप करो अब आप को ही सब कुछ करना है । राजीव ने सब कुछ श्रोती को सौप दिया

ठीक है मैं शाम को मम्मी को फोन करूँगी और उनसे बात करूँगी ठीक है - श्रोती ने कहा

ठीक है दीदी जैसे आपको ठीक लगे अब मैं चलता हूँ - राजीव ने कहा

रुक जा खाना खा ले फिर जाना , सुबह से तुमने खाना भी नही खाया है - श्रोती ने कहा

नही दीदी पापा दुकान पर अकेले है सुबह से उन्हें अकेला छोड़ कर आया हूँ फिर आऊंगा तब खाऊंगा अभी जाना है राजीव ने कहा और श्रोती का पैर छूकर वापस निकल गया।

अगले सुबह लावण्या सोकर उठी रात की उसकी और सार्थक की जो बातें हुईं थी वह लावण्या को परेशान कर रही थी सार्थक लक्ष्य के बारे में कुछ सुनना नही चाह रहा था और पूनम और लक्ष्य दोनो एक दूसरे को प्यार करने लगे थे और यह बात लावन्या को पता थी अगर सब कुछ जानते हुए भी लावन्या पूनम को लक्ष्य से दूर करती तो यह पूनम के साथ अन्याय होता इन दोनों के बीच में मानो लावण्या पिस रही थी उसे समझ मे नही आरहा था कि वो करे तो क्या करे ।

लावण्या पूनम के कमरे में पहुची पूनम सो रही थी लावण्या पूनम के सिरहाने जाकर बैठ गयी सोती हुई पूनम किसी मासूम गुड़िया की तरह लग रही थी लावण्या को पूनम पर बहुत प्यार आया उसने हल्के से पूनम के माथे को सहला दिया पूनम को नींद में ही लावण्या के हाथों को महसूस किया और उसने करवट बदली और लावण्या के कमर को पकड़ कर लपेट लिया मानो कोई छोटा बच्चा अपनी माँ को पकड़ कर सोता हो और फिर से सो गयी

पूनम पूनम लावण्या ने पूनम के सर को सहलाते हुए हल्के से पुकारा उसे पूनम के ऊपर प्यार भी आरहा था और वह पूनम के लिए परेसान भी थी वह सोच रही थी कि पूनम को जब सार्थक का डिसीजन पता चलेगा तो वह टूट सी जाएगी लेकिन लावण्या चाह कर भी पूनम के लिए कुछ कर पाने में

असमर्थ थी ।

पूनम उठ जाओ गुड़िया देखो सुबह हो गयी लावण्या ने पूनम को उठाया

भाभी प्लीज थोड़ी देर और सोने दीजिये न प्लीज पूनम ने नीद में ही कहा और लावन्या को और जोर से जकड़ लिया

अरे पूनम देखो टाइम कितने बजे गए चलो अब उठ जाओ लावण्या ने प्यार से कहा

पूनम ने अपनी आंखे खोल दी उसने देखा कि उसने अपने हाथों से लावण्या के कमर को थाम रखा है और उससे लिपटी हुई थी ।

गुड मॉर्निंग भाभी पूनम ने लावण्या को देख कर अलसाई हुई आवाज में कहा

गुड मॉर्निंग पूनम - लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा

भाभी आप इतनी सुबह कैसे जाग जाती है मेरी तो आंख ही नही खुलती- पूनम ने कहा

पूनम लड़कियों को सुबह सुबह ही जाग जाना चाहिए चलो अब उठ जाओ - लावण्या ने मुस्कुरा कर कहा

पूनम उठ कर बैठ गयी और अंगड़ाई लेती हुई पूनम के सीने से लिपट गयी और उसे दुलार करने लगी

अरे पूनम क्या बच्चो जैसी हरकत कर रही हो लावण्या के लिपटने से पूनम हसते हुए और अपने आप को छुड़ाते हुए बोली

भाभी अभी मैं बच्ची ही तो हूँ - पूनम ने मुस्करा कर कहा

अच्छा बच्ची हो' शैतान की नानी हो बड़ी आई बच्ची, ससुराल जाने की उम्र हो गयी अभी बचपना नही गयी कैसे छोटे बच्चों की तरह हरकत कर रही हो- लावण्या ने कहा

भाभी सुबह सुबह आप जब जगाने आती है तो बहुत अच्छा लगता है जी करता है थोड़ी देर आप से लिपट कर सो जाऊँ- पूनम ने प्यार से कहा।

अच्छा मुझसे लिपट कर सोने के सपने मत देखो तुम तो किसी और से लिपट कर सोने का सपना देखो मुझे तो अपने भैया के लिए छोड़ दो- लावन्या ने पूनम के गालों पर हल्की

सी चपत लगा कर मजाक किया

पूनम ने सरमा कर नजर झुका ली उसके आंखों के सामने अनायास ही लक्ष्य का चेहरा कौंध गया

भाभी आपने भैया को लक्ष्य के बारे में बताया क्या? अचानक से पूनम ने पूछा

ये सब बातें बाद में पहले आप उठ कर फ्रेश हो जाओ बहुत काम है पूरा दिन पड़ा है हम दोनों को ही घर मे रहना है कोई तीसरा नही आएगा लेकिन अगर अभी तुम टाइम पर नही उठी तो तुम्हारे भैया लेट हो जायेन्गे लावण्या ने पूनम को टरकाया उसकी समझ मे नही आरहा था कि वह पूनम को वह सब कैसे बताये जो सार्थक ने कहा था वह सुबह सुबह ही पूनम का मूड खराब नही करना चाहती थी ।

अच्छा रुकिए पहले अपने बेबी से बात कर लूं फिर उठती हूँ पूनम ने कहा और लावण्या के पेट के पास कान लगा दिया और साथ ही साथ उसकी कमर पर हाथ लपेटकर बोली

गुड मॉर्निंग बेबी देख रहे हो मम्मी को आपकी बुवा को सोने नही दे रही है, मम्मी कितनी गंदी है ना आप जल्दी से आओ फिर आप और मैं दोनो मिलकर मम्मी से बदला लेंगे आप

मम्मी और पापा दोनो को मत सोने देना बोलो बेबी लोगे न आप मेरा बदला पूनम ने ऐसे कहा जैसे कोई उसकी बातें सुन रहा हो

हां बोल रहा है भाभी - पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा

धत पागल कही की , अभी वो कहा से कुछ कहेगा अभी तो बहुत ज्यादा छोटा है लावण्या ने सरमा कर कहा

छोटा है तो क्या हुआ मेरा बेबी बहुत समझदार है सब समझता है देख रहे हो न बेबी मम्मी आप को अंडर एस्टिमेट कर रही है और आप को छोटा बोल रही है मम्मी को बताओ कि तुम छोटे नही हो और अपनी बुवा की बाते सुन रहे हो सुन रहे हो न बेबी जल्दी से आओ मुझे आपके साथ खेलना है आप जल्दी से आओ फिर हम और आप दोनों मिलकर मम्मी को तंग करेंगे ओके

अब बुवा जा रही है फ्रेश होने फिर मिलूंगी बाय पूनम ने कहा और मुस्कुराती हुई उठ गई

लावण्या के ओठो पार्क बड़ी सी स्माइल आगयी उसके दिल मे अपने बच्चे के लिए एक अजीब सा मीठा से एहसास हुआ उसने प्यार से अपने पेट पर हाथ फेरा उसके आंखे खुशियो से भरी हुई थी

पूनम के जाने के बाद लावण्या उठी और अपना काम करने लगी पूनम की मासूमियत और उसका भोला पन देख कर लावण्या को उसको कुछ भी बताने की हिम्मत नही हुई वह सार्थक की बाते सोच सोच कर खुद ही परेसान थी उसकी समझ मे नही आरहा था कि वह सार्थक को कैसे समझाये वह कमरे की सफाई तो कर रही थी लेकिन उसका दिमाग लक्ष्य और पूनम में ही उलझा हुआ था सार्थक से वह कल बात करके देख चुकी है सार्थक से बात करने का कोई फायदा नही था फिर वो करे क्या आखिर कैसे लक्ष्य और पूनम को एक करे वह जितना सोचती जाती उसका दिमाग उतना ही उलझता जाता ।

एक तरफ उसे लक्ष्य की बाते सही भी लगती क्योकि सचमुच में लक्ष्य बिल्कुल वैसा ही था जैसे सार्थक कह रहा था

और अगले पल पूनम का चेहरा उसकी आँखों के आगे घूम जाता कल का उसका रोता हुआ चेहरा उसे नजर आता जब वह लक्ष्य की शादी की बात सुनकर इतना बेचैन और परेसान हो गयी थी और अगर लावण्या पूनम को कुछ बताती तो उसका ये हसता खेलता चेहरा बिल्कुल उदास और गुमसुम हो जाता ।
 
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