• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

अद्भुत-एक हॉर्रर कहानी complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
अद्भुत-एक हॉर्रर कहानी

सुबहका वक्त. कांचके ग्लासेस लगाई इमारतोंके जंगलमें एक इमारत और उस इमारतके चौथे मालेपर एक एक करके एक आयटी कंपनीके कर्मचारी आने लगे थे. दस बजनेको आए थे और कर्मचारीयोंकी भीड अचानक बढने लगी. सब कर्मचारी ऑफीसमें जानेके लिए भीड और जल्दी करने लगे. कारण एकही था की देरी ना हो जाए. सब कर्मचारीयोंके आनेका वक्त दरवाजेपरही स्मार्ट कार्ड रिडरपर दर्ज कीया जाता था. सिर्फ जानेका वक्तही नही तो उनकी पुरी अंदर बाहर जानेकी गतिविधीयां उस कार्ड रिडरपर दर्ज किई जाती था. कंपनीका जो कांचसे बना मुख्य दरवाजा था उसे मॅग्नेटीक लॉक लगाया था और दरवाजा कर्मचारीयोंने अपना कार्ड दिखानेके सिवा खुलता नही था. उस कार्ड रिडरकी वजहसे कंपनीकी सुरक्षा और नियमितता बरकरार रखी जाती थी. दसका बझर बज गया और तबतक कंपनीके सारे कर्मचारी अंदर पहूंच गए थे. कंपनीकी डायरेक्टर और सिईओ अंजलीभी.

अंजलीने बी.ई कॉम्प्यूटर किया था और उसकी उम्र जादासे जादा होगी. उसके पिता, कंपनीके पुर्व डायरेक्टर और सिईओ, अचानक गुजर जानेसे, उम्रके लिहाजसे कंपनीकी बहुत बडी जिम्मेदारी उसपर आन पडी थी. नही तो यह तो उसके हंसने खेलनेके और मस्ती करनेके दिन थे. उसकी आगेकी पढाई यु.एस. में करनेकी इच्छा थी. लेकिन उसकी वह इच्छा पिताजी गुजर जानेसे केवल इच्छाही रह गई थी. वहभी कंपनीकी जिम्मेदारी अच्छी तरहसे निभाती थी और साथमें अपने मस्तीके, हंसने खेलनेके दिन मुरझा ना जाए इसका खयाल रखती थी.

हॉलमें दोनो तरफ क्यूनिकल्स थे और उसके बिचमेंसे जो संकरा रास्ता था उससे गुजरते हूए अंजली अपने कॅबिनकी तरफ जा रही थी. वैसे वह ऑफीसमें पहननेके लिए कॅजुअल्स पहनावाही जादा पसंद करती थी ढीला सफेद टी शर्ट और कॉटनका ढीला बादामी पॅंन्ट. कोई बडा प्रोग्रॅम होनेपर या कोई स्पेशल क्लायंट के साथ मिटींग होनेपर ही वह फॉर्मल ड्रेस पहनना पसंद करती थी. ऑफीसके बाकी स्टाफ और डेव्हलपर्सकोभी फॉर्मल ड्रेसकी कोई जबरदस्ती नही थी. वे जिन कपडोमें कंफर्टेबल महसूस करे ऐसा पहनावा पहननेकी उन सबको छूट थी. ऑफीसके कामके बारेमें अंजलीका एक सूत्र था. की सब लोग ऑफीस का कामभी ऍन्जॉय करनेमें सक्षम होना चाहिए. अगर लोग कामभी ऍन्जॉय कर पाएंगे तो उन्हे कामकी थकान कभी महसूसही नही होगी. उसने ऑफीसमेंभी काम और विश्राम या हॉबी इसका अच्छा खासा तालमेंल बिठाकर कर उसके कंपनीमें काम कर रहे कर्मचारीयोंकी प्रॉडक्टीव्हीटी बढाई थी. उसने ऑफीसमें स्विमींग पुल, झेन चेंबर, मेडीटेशन रुम, जीम, टी टी रुम ऐसी अलग अलग सुविधाए कर्मचारीययोंको मुहय्या कराकर उनका ऑफीसके बारेमें अपनापन बढानेकी कोशीश की थी. और उसे उसके अच्छे परिणामभी दिखने लगे थे.

उसके कॅबिनकी तरफ जाते जाते उसे उसके कंपनीके कुछ कर्मचारी क्रॉस हो गए. उन्होने उसे अदबके साथ विश किया. उसनेभी एक मीठे स्माईलके साथ उनको विश कर प्रतिउत्तर दिया. वे सिर्फ डरके कारण उसे विश नही करते थे तो उनके मनमें उसके बारेमें उसके काबीलीयतके बारेमें एक आदर दिख रहा था. वह अपने कॅबिनके पास पहूंच गई. उसके कॅबिनकी एक खासियत थी की उसकी कॅबिन बाकि कर्मचायोंसे भारी सामानसे ना भरी होकर, जो सुविधाएँ उसके कर्मचारीयोंको थी वही उसके कॅबिनमेंभी थी. मै भी तुममेंसे एक हूँ. यह भावना सबके मनमें दृढ हो, यह उसका उद्देश्य होगा.

वह अपने कॅबिनके पास पहूँचतेही उसने स्प्रिंग लगाया हूवा अपने कॅबिनका कांचका दरवाजा अंदरकी ओर धकेला और वह अंदर चली गई.

अंजलीने ऑफीसमें आयेबराबर रोजके जो महत्वपुर्ण काम थे वह निपटाए. जैसे महत्वपुर्ण खत, ऑफीशियल मेल्स, प्रोग्रेस रिपोर्ट्स इत्यादी. कुछ महत्वपुर्ण मेल्स थी उन्हे जवाब भेज दिया, कुछ मेल्सके प्रिंट लिए. सब महत्वपुर्ण काम निपटनेके बाद उसने अपने कॉम्प्यूटरका चॅटींग सेशन ओपन किया. कामकी थकान महसूस होनेसे या कुछ खाली वक्त मिलनेपर वह चॅटींग करती थी. यह उसका हर दिन कार्यक्रम रहता था. यूभी इतनी बडी कंपनीकी जिम्मेदारी संभालना कोई मामूली बात नही थी. कामका तणाव, टेन्शन्स इनसे छूटकारा पानेके लिए उसने चॅटींगके रुपमें बहुत अच्छा विकल्प चुना था. तभी फोनकी घंटी बजी. उसने चॅटींग विंडोमें आये मेसेजेस पढते हूए फोन उठाया. हुबहु कॉम्प्यूटरके पॅरेलल प्रोसेसिंग जैसे सारे काम वह एकही वक्त कर सकती थी.

यस मोना

मॅडम . नेट सेक्यूराज मॅनेजींग डायरेक्टर . मि. भाटीया इज ऑन द लाईन. उधरसे मोनाका आवाज आया.

कनेक्ट प्लीज

हाय तबतक चॅटींगपर किसीका मेसेज आया.

अंजलीने किसका मेसेज है यह चेक किया. टॉम बॉय मेसेज भेजनेवालेने धारण किया हुवा नाम था.

क्या चिपकू आदमी है अंजलीने सोचा.

यही टॉम बॉय हमेशा चॅटींगपर उसे मिलता था. और लगभग हरबार अंजलीने चॅटींग सेशन ओपन किए बराबर उसका मेसेज आया नही ऐसा बहुत कम होता था.

इसे कुछ काम धंदे है की नाही . जब देखो तब चॅटींगपर पडा रहता है

अंजलीने आजभी उसे इग्नोर करनेकी ठान ली. दो तिन ऑफलाईन मेसेजेस थे.

अंजली कान और कंधेके बिच फोनका क्रेडल पकडकर की बोर्डपर सफाईसे अपनी नाजुक उंगलीया चलाते हूए वे ऑफलाईन मेसेजेस चेक करने लगी.

गुड मॉर्निंम मि. भाटीया. हाऊ आर यू अंजलीने फोन कनेक्ट होतेही मि. भाटीयाका स्वागत किया और वह उधरसे भाटीयाकी बातचीत सुननेके लिए बिचमें रुक गई.

देखीए भाटीयाजी. वुई आर द बेस्ट ऍट अवर क्वालीटी ऍन्ड डिलीवरी शेड्यूलस. यू डोन्ट वरी. वुई विल डिलीवर युवर प्रॉडक्ट ऑन टाईम. हमारी डिलीवरी वक्तके अंदर नही हूई ऐसा कभी हुवा है क्या . नही ना . देन डोंट वरी. अप एकदम निश्चिंत रहीएगा . यस. ओके. बाय. अंजलीने फोन रख दिया और फिरसे दो डीजीट डायल कर फोन उठाया, जरा शरवरीको अंदर भेज दो

फोनपर चल रहे बातचीतसे अंजलीका कॉम्प्यूटरपर खयाल नही रहा था. क्योंकी उस वक्त काम महत्वपुर्ण था और बाकी बाते बाद में.

तभी कॉम्पूटरपर बिप बजा. चॅटींग विंडोमें अंजलीको किसीका मेसेज आया था. अंजलीने चिढकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

फिरसे उसी टॉम बॉयकाही मेसेज होगा उसने सोचा.

लेकिन वह मेसेज टॉम बॉयका नही था. इसलिए वह पढने लगी.

मेसेज था क्या तुम मेरी दोस्त बनना पसंद करोगी

मॉनिटरपर अबभी क्या तुम मेरा दोस्त बनना पसंद करोगी यह चॅटींगपर आया मेसेज दिख रहा था. अब इसे क्या जवाब भेजा जाए ताकी वह अपना पिछा छोडेगा ऐसा सोचते हूए अंजलीने मेसेज भेजनेवालेका नाम देखा. लेकिन वह टॉम बॉय नही था यह देखकर उसे सुकून महसुस हूवा.

क्यो नही जरुर. दोस्ती करनेसे निभाना जादा मायने रखता है अंजलीने मेसेज टाईप किया.

तभी शरवरी अंजलीकी सेक्रेटरी अंदर आ गई.

यस मॅडम

शरवरी मैने तुम्हे कितनी बार कहा है . की डोन्ट कॉल मी मॅडम. कॉल मी सिम्प्ली अंजली. तुम जब मुझे मॅडम कहती हो मुझे एकदम सालसे सालका हुए जैसा लगता है अंजली चिढकर बोली.

वह उसपर गुस्सा तो हो गई लेकिन फिर उसे बुरा लगने लगा.

अंजली अचानक एकदम गंभीर होकर बोली, सच कहूं तो पापा के अचानक जानेके बाद यह जिम्मेदारी मुझपर आन पडी है . नहीतो अभी तो मेरे हसने खेलनेके दिन थे. सच कहूं तो . मैने तुम्हे यहां जानबुझकर बुला लिया है . ताकी इस कामकाजी मौहोलमें मै अपनी हंसी खुशी ना खो दूं . कम से कम तूम तो मुझे अंजली कह सकती हो . तूम मेरी दोस्त पहले हो और सेक्रेटरी बादमें . समझी अंजलीने कहा.

यस मॅडम . आय मीन अंजली शरवरीने कहा.

अंजली शरवरीकी तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुराने लगी. शरवरी उसके सामने कुर्सीपर बैठ गई तभी फिरसे कॉम्पूटरका अलर्ट बझर बज गया. चाटींगके विंडोमें फिरसे मेसेज आ गया था

तुम्हारा नाम क्या है

मेरा नाम अंजली . तुम्हारा अंजलीने मेसेज टाइप किया.
 
अंजलीने सेन्ड बटनपर माऊस क्लिक किया और बोलनेके लिए शरवरी बैठी थी उधर अपनी चेअर घुमाई.

वह नेट सेक्यूराका प्रोजेक्ट कैसा चल रहा है . अंजलीने पुछा.

वैसे सबतो ठिक है . लेकिन एक मॉड्यूल सिस्टीमको बारबार क्रॅश कर रहा है . बग क्या है कुछ समझमें नही आ रहा है . शरवरीने जानकारी दी.

तभी चॅटींगपर फिरसे मेसेज आया

मेरा नाम विवेक है . बाय द वे. आपकी पसंदीदा चिजें क्या है . आय मीन हॉबीज

अंजलीने कॉम्पूटरकी तरफ देखा. और उस मेसेजकी तरफ ध्यान ना देते हूए चिंतायुक्त चेहरेसे शरवरीकी तरफ देखने लगी.

उस मॉड्यूलपर कौन काम कर रहा है अंजलीने पुछा.

दिनेश माहेश्वरी शरवरीने जानकारी दी.

वही ना जो पिछले महिने जॉईन हुवा था अंजलीने पुछा.

हां वही

उसके साथ कोई सिनीयर असोशिएट करो और सी दॅट द मॅटर इज रिझॉल्वड अंजलीने एक पलमें उस समस्याकी जड ढूंढते हुए उसपर उपायभी सुझाया था.

यस मॅडम. आय मीन अंजली शरवरी बडे गर्वके साथ अंजलीके तरफ देखते हूए बोली.

उसे अपने बॉस और दोस्त अंजलीके मॅनेजमेंट स्किलसे हमेशा अभिमानीत महसूस करती थी.

अंजलीने फिरसे अपना रुख अपने कॉम्प्यूटरकी तरफ किया.

शरवरी वहांसे उठकर बाहर गई और अंजली कॉम्प्यूटरपर आए चॅटींग मेसेजको जवाब टाईप करने लगी.

हॉबीज . हां . पढना, तैरना . कभी कभी लिखना और ऑफ कोर्स चॅटींग

अंजलीने मेसेज टाईप कर सेन्ड की दबाकर वह भेजा और चॅटींग विंडो मिनीमाईझ कर उसने मायक्रोसॉफ्ट एक्सेलकी दुसरी एक विंडो ओपन की. वह उस एक्सेल शिटमें लिखे हूए आंकडे पढते हूए गुमसी गई. शायद वह उसके कंपनीके किसी प्रोजेक्टके फायनांसिएल डिटेल्स थे.

तभी फिरसे एक चॅटींग मेसेज आ गया.

अरे वा . क्या संयोग है . मेरी हॉबीजभी तुम्हारी हॉबीजसे मेल खाती है . एकदम हुबहु . एक कम ना एक जादा . उधरसे विवेकका था.

रिअली उसने उपरोधसे भरे लहजेसे जवाब दिया.

फ्लर्टींगके इस पुराने नुस्केसे अंजली अच्छी तरहसे वाकिफ थी.

तभी पियून अंदर आया. उसने कुछ कागजाद दस्तखत करनेके लिए अंजलीके सामने रखे. अंजलीने उन सब कागजाद पर एक दौडती हुई नजर घुमाई और उनपर दस्तखत करने लगी.

आय स्वीअर मॉनिटरपर विवेकने उधरसे भेजा हुवा मेसेज आ गया.

शायद उसे उसके शब्दोमें छुपा उपरोध समझमें आया था.

मुझे तुम्हारा मेलींग ऍड्रेस मीलेगा उधरसे विवेकका फिरसे मेसेज आ गया.

. अंजलीने खास चॅटींगपर मिलनेवाले अजनबी लोगोंको देनेके लिए बनाया मेल ऍड्रेस उसे भेज दिया.

अंजलीने अब अपनी चेअर घुमाकर अपनी डायरी ढुंढी और अपने घडीकी तरफ देखते हूए वह कुर्सीसे उठ खडी हो गई.

अपनी डायरी लेकर वह जानेके लिए घुम गई तभी फिरसे कॉम्प्यूटरपर चॅटींगका बझर बज गया. उसने जाते जाते मुडकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

मॉनिटरपर विवेकका मेसेज था, ओके थॅंक यू. बाय . सी यू सम टाईम.

इंटरनेट कॅफेमें विवेक एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ कर रहा था. एक उसकेही उम्रके लडकेने, शायद उसका दोस्तही हो, जॉनीने पिछेसे आकर उसके दोनो कंधोपर अपने हाथ रख दिए और उसके कंधे हल्केसे दबाकर कहा, हाय विवेक. क्या कर रहे हो

अपने धूनसे बाहर आते हूए विवेकने पिछे मुडकर देखा और फिरसे अपने काममें व्यस्त होते हूए बोला, कुछ नही यार. एक लडकीको मेल भेजनेकी कोशीश कर रहा हूं

लडकीको .ओ हो. तो मामला इश्क का है जॉनी उसे चिढाते हूए बोला.

अरे नही यार. बस सिर्फ दोस्त है . विवेकने कहा.

प्यारे . मानो या ना मानो.

जब कभी लडकीसे बात करना हो और लब्ज ना सुझे.

और जब कभी लडकीको खत लिखना हो और शब्द ना सुझे.

तो समझो मामला इश्क का है .

जॉनी उसे और चिढाते हूए बोला.

विवेक कुछ ना बोलते हूए सिर्फ मुस्कुरा दिया.

देखो देखो गाल कैसे लाल लाल हो रहे है . जॉनीने कहा.

विवेक फिरसे कुछ ना बोलते हूए सिर्फ मुस्कुरा दिया.

जब कोई ना करे इन्कार .

या ना करे इकरार .

तो समझो वह प्यार है

जॉनी उसे छोडनेके लिए तैयार नही था.

लेकिन अब विवेक चिढ गया, तू यहांसे जाने वाले हो या मुझसे पिटने वाले हो .

तुम जैसा समझ रहे हो ऐसा कुछ नही है . मै सिर्फ अपने पिएचडीके टॉपीक्स सर्च कर रहा हूं और बिच बिचमें बोरीयतसे बचनेके लिए मेल्स भेज रहा हूं बस्स. विवेकने अपना चिढना काबूमें रखनेकी कोशीश करते हूए कहा.

बस्स जॉनी.

तुम अब जानेवाले हो . या तुम्हारी इतने सारे लोगोंके सामने अपमानीत होनेकी इच्छा है विवेक फिरसे चिढकर बोला.

ओके . ओके. काम डाऊन. अच्छा तुम्हारे पिएचडीका टॉपीक क्या है जॉनीने पुछा.

इट्स सिक्रीट टॉपीक डीयर. आय कान्ट डिस्क्लोज टू ऐनीवन. विवेकने कहा.

नॉट टू मी आल्सो . जॉनीने पुछा.

यस नॉट टू यू आल्सो विवेकने जोर देकर कहा.

तुम्हारा अच्छा है . सिक्रसीके पिछे . इश्कका चक्करभी चल रहा है . जॉनीने कहा.

तूम वह कुछभी समझो . विवेकने कहा.

नही अब मै समझनेकेभी आगे पहूंच चूका हूँ . जॉनीने कहा.

मतलब

मतलब . मुझे कुछ समझनेकी जरुरत नही बची है

मतलब

मतलब अब मुझे पक्का यकिन हो गया है जॉनीने कहा.

विवेक फिरसे चिढकर पिछे मुडा. तबतक जॉनी मुस्कुराते हूए उसकी तरफ देखते हूए वहांसे दरवाजेकी तरफ निकल चूका था.

सुबहके लगभग दस बजे होंगे. अंजली जल्दी जल्दी अपने कॅबिनमें घुस गई. जब वह कॅबिनमें आगई थी तब शरवरीकी कॅबिनकी चिजे ठिक लगाना चल रहा था. अंजलीके अनुपस्थितीमें उसके कॅबिनकी पुरी जिम्मेदारी शरवरीकीही रहती थी.
 
अंजलीके कॅबिनमें प्रवेश करतेही शरवरीने अदबसे खडे रहते हूए उसे विश किया, गुडमॉर्निंग.

मॅडम उसकें मुंहमें आते आते रह गया. अंजली उसे कितनीभी दोस्तकी तरह लगती हो या उससे दोस्तकी तरह व्यवहार करती हो फिरभी शरवरीको कमसे कम उसके कॅबिनमें उससे दोस्तकी तरह बरताव करना बडा कठिण जाता था, और वह भी कभी कभी बाकी लोगोंके सामने.

अंजलीने अंदर आकर उसके पाससे गुजरते हूए उसके पिठपर थपथपाते हूए कहा, हाय

उसके पिछे पिछे उसका ड्रायव्हर उसकी सुटकेस लेकर अंदर आ गया. जैसेही अंजली अपने कुर्सीपर बैठ गई, ड्रायव्हरने सुटकेस उसके बगलमे रख दी और वर कॅबिनसे निकल गया.

शरवरी अंजलीके आमने सामने कुर्सीपर बैठ गई और उसने उसकी अपॉईंटमेंट्सकी डायरी खोलकर उसके सामने खिसकाई. अंजलीने अपने कॉम्पूटरका स्विच ऑन किया और वह डायरीमें लिखी अपॉईंटमेट्स पढने लगी.

सुबह आए बराबर मिटींग. अंजली बुरासा मुंह बनाकर बोली, अच्छा इस दोपहरके सेमीनारको मै नही जा पाऊंगी . क्यों न शर्माजीं को भेज दे .

ठिक है शरवरी उस अपॉईंटके सामने स्टार मार्क करते हूए बोली.

क्या करें इन लोगोंको मुंहपर कुछ बोलभी नही सकते . और समयके अभावमें सेमीनार को जा भी नही सकते. सचमुछ किसी कंपनीके हेडका काम कोई मामुली नही होता.

अंजली अपनी सूटकेस खोलकर उनमेंसे कुछ पेपर्स बाहर निकालने लगी. पेपर निकालते हूए एक पेपरकी तरफ देखकर, वह पेपर बगलमें निकालकर रखते हूए बोली, अब यह देखो . इस कंपनीके टेंडरका काम अब तक पुरा नही हुवा . यह पेपर जरा उस कुलकर्णीकी तरफ भेज देना .

कुलकर्णी आज छुट्टीपर है शरवरीने कहा.

लेकिन मेरे जानकारीके अनुसार उनकी छुट्टी तो कलतक ही थी. . अंजली चिढकर बोली.

हां .लेकिन अभी थोडी देर पहले उनका फोन आया था. . वे कामपर नही आ सकते यह बोलनेके लिए शरवरीने कहा.

क्यों नही आ सकते शरवरीने गुस्सेसे पुछा.

मैने पुछा तो उन्होने कुछ ना कहते हूएही फोन रख दिया.

यह कुलकर्णी मतलब एक बेहद गैरजिम्मेदाराना आदमी . अंजली चिढकर बोली.

और फिर जो अंजलीकी बडबड शुरु होगई वह रुकनेका नाम नही लेही थी. शरवरीको खुब पता था की जब अंजली ऐसी बडबड करने लगे तो क्या करना चाहिए. कुछ नही, चूपचाप बैठकर सिर्फ उसकी बडबड सुन लेना. बिचमें एकभी लब्ज नही बोलना. अंजलीने ही उसे एक बार बताया था की जब अपना बॉस ऐसा बडबड करने लगे, तो उसकी वह बडबड मतलब एक तरह का स्ट्रेस बाहर निकालने का तरीका होता है. जब उसकी ऐसी बडबड चल रही होती है तब जो सेक्रेटरी उसे और कुछ बोलकर या और कुछ पुछकर उसकी और स्ट्रेस बढाती है उसे मोस्ट अनसक्सेसफुल सेक्रेटरी कहना चाहिए. और जो सेक्रेटरी चूपचाप अपने बॉसकी बकबक सुनती है और अपने बॉसको फिर से नॉर्मल होनेकी राह देखती है उसे मोस्ट सक्सेसफुल सेक्रेटरी कहना चाहिए.

अंजलीकी बकबक अब बंद होकर वह काफी शांत हो गई थी. वह हाथमें कुछ पेपर्स और फाईल्स लेकर मिटींगको जानेके लिए अपने कुर्सीसे उठ खडी हो गई. शरवरीभी उठ खडी होगई.

बगलमें चल रहे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखते हूए वह शरवरीसे बोली, तूम जरा मेरी मेल्स चेक कर लेना . मै मिटींगको हो आती हूं . और अंजली अपने कॅबिनसे बाहर जाने लगी.

पर्सनल मेल्सभी शरवरीने उसे छेडते हूए मुस्कुराकर मजाकमें कहा.

यू नो. देअर इज नथींग पर्सनल. और जोभी है . तुम्हे सब पता है ही . अंजलीभी उसकी तरफ देखकर, मुस्कुराते हूए बोली और पलटकर जल्दी जल्दी मिटींगको जानेके लिए निकल पडी.

सुबह सुबह रास्तेपर बॅग हाथमें लेकर विवेककी कही जानेकी गडबड चल रही थी.

पिछेसे दौडते हूए आकर उसके दोस्त जॉनीने उसे जोरसे आवाज दिया, ए सुन गुरु. इतनी सुबह सुबह कहां जा रहा है

विवेकने मुडकर देखा और उसे अनदेखा करते हूए फिरसे पहले जैसे जल्दी जल्दी सामने चलने लगा.

किसी लडकी के साथ भाग तो नही जा रहे हो . जॉनीने वह रुक नही रहा है और उसकी गडबड देखते हूए पुछा.

जॉनी अबभी उसके पिछेसे दौडते हूए उसके पास पहूंचनेकी कोशीश कर रहा था.

क्या सरदर्द है . जरा दो दिन बाहर जा रहा हूं . उसका भी इतना ढींढोरा. विवेक बडबड करते हूए सामने चल रहा था.

दो दिन बाहर जा रहा हूं . उतनाही तूमसे छूटकारा मिलेगा विवेकने चलते हूए जोरसे जॉनीको ताना मारते हूए कहा.

थोडी देर रुको तो सही . तुमसे एक अर्जंट बात पुछनी थी. . जॉनीने कहा.

विवेक रुक गया और जॉनी दौडते हूए आकर उसके पास पहूंच गया.

बोलो . क्या पुछना है . जल्दी पुछो . नही तो उधर मेरी बस छूट जाएगी विवेक बुरासा मुंह बनाकर बोला.

क्या हूवा फिर कल जॉनीने पुछा.

किस बातका विवेकने प्रतिप्रश्न किया.

वही उस मेलका . कल मेल भेजी की नही जॉनीने उसे छेडते हूए उसके गलेमें हाथ डालकर पुछा.

अजीब बेवकुफ हो तूम . किस वक्त किस बातका महत्व है इसका कोई तुम्हे सरोकार नही होता. उधर मेरी बस लेट हो रही है और तुम्हे उस मेलकी पडी है . विवेक झल्लाते हूए उसका हाथ अपने कंधेसे झटकते हूए बोला.

विवेक अब फिरसे तेजीसे आगे बढने लगा.

क्या बात करते हो यार तूम . बससे कभीभी मेल महत्वपुर्ण होगी . अब मुझे बता. हावडा मेल, राजधानी मेल. ये सारी मेल बडी की वह तुम्हारी टपरी बस जॉनी अबभी उसके पिछे पिछे जाते हूए उसे छेडते हूए बोला.

विवेक समझ चूका था की अब जॉनीसे बात करनेमें कोई मतलब नही था. वह अपने बडे बडे कदम बढाते हूए आगे चलने लगा. और जॉनीभी बकबक करते हूए और उसे छेडते हूए उसके साथ साथ चलने लगा.
 
शरवरी अंजलीके कॅबिनमें कॉम्प्यूटरपर बैठी हूई थी. अंजली उसकी सुबहकी मिटींग निपटाकर उसके कॅबिनमें वापस आ गई. उसने घडी की तरफ देखा. लगभग दोपहरके बारा बज गए थे. कुर्सी पिछे खिंचकर वह अपने कुर्सीपर बैठ गई और कुर्सीपर पिछेकी ओर झुलते हूए अपनी थकावट दूर करनेका प्रयास करने लगी. शरवरीने एक बार अंजलीकी तरफ देखा और वह फिरसे अपने कॉप्म्यूटरके काममें व्यस्त हो गई.

किसीकी कोई खास मेल अंजलीने शरवरीकी तरफ ना देखते हूए ही पुछा.

नही . कोई खास नही. लेकिन एक उस टॉमबॉय की मेल थी. शरवरीने कहा.

टॉमबॉय . कुछ लोग बहुतही चिपकू होते है . नही अंजलीने कहा.

सही है . शरवरीको अंजलीका इशारा समझ गया था.

क्योंकी अंजलीने पहले एकबार उसे उस टॉमबॉयके बारेमें बताया था.

और हां . एक और किसी विवेककी मेल थी शरवरीने आगे कहा.

विवेक . हां वही होगा जो कल चॅटींगपर मिला था. मै बोलती हूं ना उसने क्या लिखा होगा. तुम्हारी उम्र क्या है . तुम्हारा ऍड्रेस क्या है . मेरी उम्र फलां फलां है . मेरा ऍड्रेस फलां फलां . और मै फलां फलां काम करता हू. और धीरे धीरे वह अपने असली जातपर आएगा. इन आदमीयोंकी जातही ऐसी होती है . लंपट .बदमाश आणि चिपकू.

तूम बोल रही हो वैसा उसने कुछभी लिखा नही है . शरवरी बिचमेंही उसे टोकते हूए बोली.

नही . तो फिर किसी कंपनीके प्रॉडक्टकी सिफारीश की होगी उसने. मतलब वह प्राडक्ट खरीद हम लेंगे और वह उसका फौकटमें कमिशन खाएगा अंजलीने कहा.

नही वैसाभी उसने कुछ लिखा नही है . शरवरीने कहा.

फिर . फिर उसने क्या लिखा है अंजलीने उत्सुकतावश गर्दन घुमाकर शरवरीके तरफ देखते हूए पुछा.

उसने मेलमें कुछभी लिखा नही है . उसने ब्लॅंक मेल भेजी है और निचे सिर्फ उसका नाम विवेक ऐसा लिखा हुवा है शरवरीने कहा.

अंजली एकदम उठकर सिधी बैठ गई.

देखूं तो . अंजली शरवरीकी तरफ मुडकर कॉम्प्यूटरकी तरफ देखते हूए बोली.

शरवरीने अंजलीके मेलबॉक्ससे विवेककी मेल क्लीक कर खोली. सचमुछ वह मेल ब्लॅंक थी.

अंजली तूम कुछभी कहो . लडकेमें स्टाईल है . ऍटलिस्ट इतना पक्का है की वह बाकी लडकोसे जरा हटके है . शरवरी अंजलीके दिलको टटोलनेकी कोशीश करते हूए बोली.

तूम जरा चूप बैठोगी . और क्या लडका . लडका लगा रखा है . तुम्हे वह कौन कहाका . उसकी उम्र क्या है . कुछ पता भी है . वह कोई रंगीन मिजाजवाला, कोई खुसट बुढाभी हो सकता है . तुम्हे पता हैही आजकल लोग इंटरनेटपर कैसे पर्सनलायझेशन करते है .

. हां तुम सही कहती हो . लेकिन चिंता मत करो . ये लो मै अभी उसकी सायबर तहकिकात करती हूं शरवरी फटाफट कॉम्प्यूटरके किबोर्डकी कुछ बटन्स दबाती हुई बोली.

थोडीही देरमें कॉम्प्यूटरके मॉनीटरपर मानो एक रिपोर्ट आ गया.

यहां तो उसका नाम सिर्फ विवेक ऐसा लिखा हुवा है . सरनेम लिखा नही है . मुंबईका रहनेवाला है और पिएच डी कर रहा है . उम्र है . शरवरीने मानो किसी बातका क्लायमॅक्स खोलना हो ऐसा एक पॉज लिया.

अंजलीकीभी अब जिज्ञासा जागृत हुई थी और वह शरवरी उसकी उम्र क्या बताती है इसकी राह देखने लगी.

पिएचडी . मतलब जरुर कोई बुढ्ढा खुसट होना चाहिए . मैने कहा था ना

और उसकी उम्र है साल . शरवरीने मानो क्लायमॅक्स खोला था.

तो नूर ए जन्नत मिस अंजली अब क्या किया जाए शरवरी उसे छेडते हूए बोली.

अंजलीभी प्रयत्नपुर्वक आपना चेहरा भावनाविरहीत रखते हूए बोली, तो फिर . हमें उसका क्या करना है

देने वाले अपना पैगाम देकर चले गए

करने वाले तो अपना इशारा कर चले गए

उधर बडा बुरा हाल है दिलके गलियारोंका

अब उन्हे इंतजार है बस आपके इशारोंका

वा वा क्या बात है . शरवरी अपनेही शेरकी तारीफ करते हूए बोली, अब क्या करना है इस मेलका

करना क्या है . डिलीट कर दो अंजलीने कंधे उचकाते हूए बेफिक्र अंदाजमें कहा . मतलब कमसे कम वैसे जताते हूए कहा.

डिलीट. नही इतना बडा सितम मत करो उसपर. एक काम करते है . कोरे खत का जवाब कोरे खतसेही देते है .

शरवरीने फटाफट कॉम्प्यूटरके किबोर्डके कुछ बटन्स दबाए और उस ब्लॅंक मेलको ब्लॅंक रिप्लाय भेज दिया.

अंजलीने आज सुबह आए बराबर कुर्सीपर बैठकर कॉम्प्यूटर शुरु किया. कॉम्प्यूटर बुट होनेके बाद उसने चॅटींग विंडो ओपन किया और किसीका कोई ऑफलाईन मेसेज है क्या देखने लगी. किसीका भी ऑफलाईन मेसेज नही था. उसके चेहरेपर मायूसी छा गई लेकिन वह छिपाते हूए वह सामने टेबलपर रखे रिपोर्टस उलट पुलटकर देखने लगी. उसके टेबलके सामने शरवरी बैठी थी. वह बडी गौरसे अंजलीकी एक एक हरकत देख रही थी और मुस्कुरा रही थी. रिपोर्ट देखते हूए अंजलीके यह बात ध्यानमें आगई तो झटसे उसने शरवरीकी तरफ एक कटाक्ष डाला.

क्या हूवा . क्यो मुस्कुरा रही हो अंजलीने उसे पुछा.

शरवरीभी बडी चतूराईसे अपने चेहरेके भाव छिपाकर गंभीर मुद्रा धारण करती हूई बोली,

कहां. मै कहा मुस्कुरा रही हूं .

तभी अंजलीके कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने झटसे मुडकर अपने कॉम्प्यूटरके मॉनीटरकी तरफ देखा और फिरसे रिपोर्ट पढनेमें व्यस्त हो गई.

दो दिनसे मै देख रही हूं की जबभी चाटींगका बझर बजता है तुम सारे कामधाम छोडकर मॉनीटरकी तरफ देखती हो . क्या किसीके मेसेजकी या मेलकी राह देख रही हो शरवरीने पुछा.

नहीतो अंजलीने कहा और फिरसे अपने टेबलपर रखे रिपोर्ट पढनेमें व्यस्त होगई, या कमसे कम वैसे जतानेकी कोशीश करने लगी. कॉम्प्यूटरका बझर फिरसे बजा. अंजलीने फिरसे छटसे मॉनीटरकी तरफ देखा और इस बार वह अपनी पहिएवाली कुर्सी झटकेसे घुमाकर कॉम्प्यूटरकी तरफ अपना रुख कर बैठ गई.

यह जरुर विवेकका मेसेज है शरवरी फिरसे उसे छेडते हूए बोली.

किस विवेकका अंजलीभी कुछ समझी नही ऐसा जताते हूए बोली.

किस विवेकका . वही जो उस दिन चॅटींगपर मिला था शरवरीभी उसे छोडनेके मुडमें नही थी.

यह तुम इतने यकिनके साथ कैसे कह सकती हो अंजलीने कॉम्प्यूटरपर काम करते हूए पुछा.

मॅडम आपके चेहरेकी लाली सब कुछ बता रही है शरवरी मुस्कुराते हूए बोली.

पहले तो अंजलीके चेहरेपर चोरी पकडने जैसे झेंपभरे भाव आ गए. लेकिन झटसे अपने आपको संभालते हूए वह शरवरीपर गुस्सा होते हूए बोली.

तूम जरा मेरा पिछा छोडोगी. कबसे मै देख रही हो मेरे पिछेही पडी हो. उधर बाहर देखो ऑफिसके कितने काम पेंडीग पडे हूए है. वह जरा देखके आओ. जाओ . अंजलीने कहा.

अंजलीका इशारा समझकर शरवरी वहांसे उठ गई और मुस्कुराते हूए वहांसे चली गई.

शरवरी जानेके बाद अंजलीने झटसे कॉम्प्यूटर पर अभी अभी आया हूवा विवेकका मेसेज खोला.

अंजलीने कॉम्प्यूटरपर आया हुवा विवेकका चॅटींग मेसेज खोला तो सही, लेकिन खोलते वक्त उसका दिल जोर जोरसे धडक रहा था. उसे अपने इस बेचैन स्थितीपर खुदही आश्चर्य हो रहा था. उसने झटसे उसने भेजा हुवा मेसेज पढा
 
हाय गुड मॉर्निंग . हाऊ आर यू उसके मेसेज विंडोमें लिखा था.

वह कही उसमें फसती तो नही जा रही है इस बातकी उसने तस्सल्ली करते हूए बडी सावधानीसे जवाब टाईप किया

फाईन.

और अपने मनकी अधिरता वह भांप ना पाए इसलिए मनही मन सौ तक गिना और फिर काफी समय हो गया है इसकी तसल्ली करते हूए सेंड बटनपर क्लीक किया.

कल मै बाहर गया था उधरसे तूरंत विवेकका मेसेज आ गया.

तूम कल चॅटींगपर क्यो नही मिले इस अंजलीके दिमागमें घुम रहे सवालका जवाब देकर उसने मानो उसके दिलका हाल जान लिया था ऐसा उसे लगा.

वह अपने मनको पढ तो नह सकता है .

अंजलीके मन मे आया.

अच्छा अच्छा उसने भी खबरदारी के तौरपर अपनी रुखी रुखी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

और कुछ पुछोगी नही उसने पुछा.

वह उसका मेसेज आनेके बाद जवाब देनेमें जानबुझकर देरी लगा रही थी, लेकिन उसके मेसेजेस तुरंत, मानो मेसेज मिलनेके पहलेही टाईप किए हो ऐसे जल्दी जल्दी आ रहे थे.

तूमही पुछो उसने रिप्लाय भेजा.

उसे लडकी देखनेके लिए लडका आनेके बाद, एक अलग कमरेमें जाकर जैसे बाते करते है, ऐसा लग रहा था.

अरे हां उस दिन मैने तुम्हे ब्लॅंक मेल इसलिए भेजी थी की मुझे तुम्हारी कुछभी जानकारी नही. फिर क्या लिखता . लेकिन मेल भेजे बिनाभी रहा नही जा रहा था . इसलिए भेज दी ब्लॅंक मेल.

फिर उसनेही पहल करते हूए पुछा, अच्छा तुम क्या करती हो . मेरा मतलब पढाई या जॉब

मैने बी. ई. कॉम्प्यूटर किया हूवा है . और जी. एच. इन्फॉरमॅटीक्स इस खुदके कंपनीकी मै फिलहाल मॅनेजींग डायरेक्टर हूं उसने मेसेज भेजा.

उसे पता था की चॅटींगमें पहलेही खुदकी सच जानकारी देना खतरनाक हो सकता है. फिरभी वह खुदको रोक नही सकी, मानो जानकारी टाइप कर रही उंगलीयोंपर उसका कोई कन्ट्रोल नही रहा था.

अरे बापरे . उधरसे विवेककी प्रतिक्रिया आ गई.

तुम्हे तुम्हारे उम्रके बारेमें पुछा तो गुस्सा तो नही आएगा . नही . मतलब मैने कही पढा है की लडकियोंको उनके उम्रके बारेमें पुछना अच्छा नही लगता है. . उसने उसे बडी खबरदारीके साथ सवाल पुछा.

उसने भेजा , साल

अरे यह तो मुझे पताही था. मैने तुम्हारे मेल आयडीसे मालूम किया था. सच कहूं तूमने जब बताया की तूम मॅनेजींग डायरेक्टर हो . तो मेरे सामने एक सालके वयस्क औरतकी तस्वीर आ गई थी. वह अब खुलकर बाते कर रहा था.

वह उसके खुले और मजाकिया अंदाजपर मनही मन मुस्कुरा रही थी. उसने उसके बारेमेंभी इंटरनेटपर सर्च कर जानकारी इकट्ठा की यह जानकर उसके खयालमें आगया था की वह भी उसके बारेमें उतनाही सिरीयस है.

तूमने तुम्हारी उम्र नही बताई . उसने सवाल किया.

मैने मेरे मेल ऍड्रेसकी जानकारीमें . मेरी असली उम्र डाली हूई है . उसका उधरसे मेसेज आया.

उसके इस जवाबसे उसे अहसास हूवा की वाकई वह बाकी लोगोसे कुछ हटके है.

विवेक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ पढ रहा था. तभी उसका दोस्त धीरेसे, कोई आवाज ना हो इसका ध्यान रखते हूए, उसके पिछे आकर खडा हो गया. काफी समय तक जॉनी विवेकका क्या चल रहा है यह समझनेकी कोशीश करते रहा.

क्या गुरु. कहां तक पहूंच गई है तुम्हारी प्रेम कहानी जॉनीने एकदमसे उसके कंधे झंझोरते हूए सवाल पुछा.

विवेक तो एकदम चौंक गया और हडबडाहटमें मॉनीटरपर दिख रही विंडोज मिनीमाईझ करने लगा.

जोरसे ठहाका लगाते हूए जॉनीने कहा , छुपाकर कोई फायदा नही . मै सबकुछ पढ चूका हूं .

विवेक अपने चेहरेपर आए हडबडाहटके भाव छिपानेका प्रयास करते हूए फिरसे मॉनिटरपर सारी विंडोज मॅक्सीमाईज करते हूए बोला, देख तो . उसने मेलके साथ क्या अटॅचमेंट भेजी है

मतलब आग बराबर दोनो तरफ लगी हूई है . वैसे उस चिडीयाका कुछ नाम तो होगा. जिसने हमारे विवेक का दिल उडाया है जॉनीने पुछा.

अंजली विवेकका चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था.

देख देख कितना शर्मा रहा है जॉनी उसे छेडते हूए बोला.

देखूतो . क्या भेजा है उसने . जॉनीने उसे आगे पुछा.

जॉनी बगलमें रखे स्टूलपर बैठकर पढने लगा तो विवेक उसे अंजलीने अटॅच कर भेजे उस सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅमके बारेमें जानकारी देने लगा

यह एक जॅपनीज सॉफ्टवेअर इंजीनिअरने लिखा हुवा सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅम है . इस प्रोग्रॅमके लिए रिफ्लेक्शन टेक्नॉलॉजीजका इस्तेमाल किया गया है. जब हम कॉम्प्यूटरके मॉनिटरके सामने बैठे होते है तब जो रोशनी अपने चेहरेपर पडती है वह अलग अलग रंगोमें विभाजीत होकर मॉनिटरपर परावर्तीत होती है. इस सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅमद्वारा परावर्तीत हूए रोशनीकी तिव्रता एकत्रीत कर उसे इस टेक्नॉलॉजीद्वारा फोटोग्राफमें परिवर्तीत किया जा सकता है. मतलब अगर आप इस प्रोग्रॅमको रन करोगे तो मॉनिटरपर पडे परिवर्तनके तिव्रताको एकत्रित कर यह प्रोग्रॅम आपका फोटो बना सकता है. लेकिन फोटो निकालते वक्त इतना ध्यान रखना पडता है की आप मॉनिटरके एकदम सामने, समांतर और समानांतर बैठे हूए है. मॉनीटर और आपके चेहरेमें अगर कोई तिरछा कोण होगा तो फोटो ठिकसे नही आएगा.

मतलब यह सॉफ्टवेअर फोटो निकालता है जॉनीने पुछा.

हां . यह देखो अभी अभी थोडी देर पहले मैने मेरा फोटो निकाला हूवा है विवेकने कॉम्प्यूटरपर उसका अपना फोटो खोलकर दिखाया.

अरे वा. एकदम बढीया . अगर ऐसा है तो हमे कॅमेरा खरीदनेकी जरुरतही नही पडेगी. जॉनीने खुशीके मारे कहा.

वही तो .

रुको . मुझे जरा देखने दो . मै मेरा फोटो निकालता हूं . जॉनी मॉनीटरके सामनेसे विवेकको उठाते हूए खुद उस स्टूलपर बैठते हूए बोला.

जॉनीने स्टूलपर बैठकर माऊस कर्सर मॉनीटरपर इधर उधर घुमाते हूए पुछा, हां अब क्या करना है.

कुछ नही . सिर्फ वह स्नॅपका बटन दबावो . लेकिन रुको . पहले सिधे ठिकसे बैठो. विवेकने कहा.

जॉनी सिधा बैठकर माऊसका कर्सर स्नॅप बटनके पास ले जाकर बटन दबाने लगा.

स्माईल प्लीज विवेकने उसे टोका.

जॉनीने अपने चेहरेपर जितनी हो सकती है उतनी हंसी लानेकी कोशीश की.

रेडी . नाऊ प्रेस द बटन विवेक

जॉनीने स्नॅप बटनपर माऊस क्लीक किया. मॉनीटरवर एक दो पलके लिए निला प्रोसेसींग बार आगे बढता हूवा दिखाई दिया और फिर मॉनीटरपर फोटो दिखाई देने लगा. जैसेही मॉनीटरवर फोटो आगया विवेक जोर जोरसे हंसने लगा और जॉनीका चेहरा तो देखने लायक हो गया था. मॉनीटरपर एक हंसते हूए बंदरका फोटो आ गया था.

दिनबदीन अंजली और विवेकका चॅटींग, मेल करना बढताही जा रहा था. मेलकी लंबाई चौडाई बढ रही थी. एकदुसरेको फोटो भेजना, जोक्स भेजना, पझल्स भेजना . मेल भेजनेके न जाने कितने बहाने उनके पास थे. धीरे धीरे अंजली को अहसास होने लगा था की वह उससे प्यार करने लगी है. लेकिन प्यार का इजहार उसने विवेक के पास या विवेक ने अंजलीके पास कभी नही किया था. उनके हर मेलके साथ. मेल मे लिखे हर वाक्य के साथ. उनके हर फोटो के साथ. उनके व्यक्तीत्व का एक एक पहेलू उन्हे पता चल रहा था. और उतनी ही वह उसमें डूबती जा रही थी. अंजलीने भी अपने आपको कभी रोका नही. या यू कहीए खुद को रोकने से खुदको उसके प्यारमें पुरी तरह डूबनेमें ही उसे आनंद मिल रहा हो. लेकिन प्यारके इजहार के बारे में वह बहूत फूंक फूंककर अपने कदम आगे बढा रही थी. उसके पास बहाना था की उसने अब तक उसे आमने सामने देखा नही था. वैसे उसके प्रेम का अहसास उसे नही था ऐसे नही. लेकिन विवेक भी प्यारके इजहारके बारेमें शायद उतनाही खबरदारी बरत रहा था. शायद उसने भी उसे अबतक आमने सामने न देखनेके कारण. वह मिलनेके बाद मुकर तो नही जाएगा इसके बारेमें वह एकदम बेफिक्र थी. क्यो की विश्वामित्रको भी ललचाए ऐसा उसका सौंदर्य था.

अंजली अपने कॉम्प्यूटरपर चाटींग कर रही थी और उसके टेबलके सामने कुर्सीपर शरवरी बैठी हूई थी. कॉम्प्यूटरपर आई एक मेल पढते हूए अंजली बोली,

शरवरी देख तो विवेकने मेलपर क्या भेजा है

शरवरी कुर्सीसे उठकर अंजलीके पिछे जाकर खडी होगई और मॉनिटरकी तरफ ध्यान देकर देखने लगी. इन दिनो वैसे विवेक और अंजलीका कुछ ना कुछ आदान प्रदान चलता ही रहता था. और शरवरीको भी उनका प्रेमभरा आदान प्रदान देखने में या पढनेमें बडा मजा आता था. उसने मॉनीटरपर देखा की एक छोटा चायनीज बच्चा बडे मजेदार तरीकेसे डांस कर रहा था. डांस करते हूए वह बच्चा एकदमसे शूशू करने लगा तो दोनोही बडी जोरसे हंसने लगी.

पता नही वह कहां कहांसे यह सब ढूंढता है . अंजलीने कहा.

सही है. मै तो इंटरनेटपर कितना सर्फ करती हूं लेकिन यह ऍनीनेशन अबतक मेरे देखनेमें कैसे नही आया. शरवरीने कहा.

तभी एक बुजुर्ग आदमी दरवाजेपर नॉक कर अंदर आया. वह आदमी आतेही अंजलीने अपनी पहिएवाली कुर्सी घुमाकर अपना ध्यान उस आदमीपर केंद्रीत किया. शरवरी वहांसे बाहर चली गई. वह बुजुर्ग आदमी टेबलके सामने कुर्सीपर बैठतेही अंजलीने कहा,

बोलो आंनंदजी.

मॅडम . इंटेल कंपनीने अपने सारे कोलॅबरेटर्स के साथ एक मिटींग रखी है. अभी थोडीही देर पहले उनका फॅक्स आया है. उन्होने मिटींगका दिन और व्हेन्यू हमें भेजा है . और साथही मिटींगका अजेंडाभी भेजा है. . आनंदजीने जानकारी दी.

कहां रखी है मिटींग अंजलीने पुछा.

मुंबई . तारखको . यानीकी . इस सोमवारको आनंदजीने कॅलेडरकी तरफ देखते हूए कहा.

अंजलीभी कॅलेंडरकी तरफ देखते हूए कुछ सोचते हूए बोली,

ठिक है कन्फर्मेशन फॅक्स भेज दो . और मोनाको मेरे सारे फ्लाईट और होटल बुकींग डिटेल्स दे दो

ठिक है मॅडम आनंदजी उठकर खडे होते हूए बोले.

जैसे आनंदजी वहांसे चले गए वैसे अंजलीने अपनी पहिएवाली कुर्सी घुमाकर अपना ध्यान कॉम्प्यूटरपर केंद्रीत कर दिया. उसके चेहरेपर खुशी समाए नही समा रही थी. झटसे उसने मेल प्रोग्रॅम खोला और जल्दी जल्दी वह मेल टाईप करने लगी

विवेक . ऐसा लगता है की जल्दीही अपने नसिबमें मिलना लिखा है .पुछो कैसे लेकिन मै अभी नही बताऊंगी. क्योंकी कुछ तो क्लायमॅक्स रहना चाहिए ना अगले मेलमे सारे डिटेल्स भेजूंगी . बाय फॉर नाऊ. टेक केअर . अंजली.

अंजलीने फटाफट कॉम्प्यूटरके दो चार बटन्स दबाकर आखिर ऐंन्टर दबाया. कॉम्प्यूटरके मॉनीटरपर मेसेज आ गया मेल सेन्ट

विवेक सायबर कॅफेमें अपने कॉम्प्यूटरपर बैठा था. फटाफट हाथकी सफाई किए जैसे उसने गुगल मेल खोलतेही उसे अंजलीकी मेल आई हूई दिखाई दी. उसका चेहरा खुशीसे दमकने लगा. उसने एक पलभी ना गवांते हूए झटसे डबल क्लीक करते हूए वह मेल खोली और उसे पढने लगा

विवेक . को सुबह बारा बजे मै एक मिटींगके सिलसिलेमें मुंबई आ रही हूं . . बजे तक हॉटेल ओबेराय पहूचूंगी. और फिर फ्रेश वगैरे होकर . बजे मिटींग अटेंड करुंगी. मिटींग से बजेतक खत्म हो जाएगी . तुम मुझे बराबर . बजे वर्सोवा बिचपर मिलना . बाय फॉर नॉऊ. टेक केअर

विवेकने मेल पढी और खुशीके मारे खडा होकर यस्स. करके चिल्लाया.

सायबर कॅफेमें बैठे बाकी लोग क्या होगया करके उसकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. जब उसने होशमें आकर बाकी लोगोंको अपनी तरफ आश्चर्यसे ताकते पाया वह शर्माकर निचे बैठ गया.

वह फिरसे अपने रिसर्चके सिलसिलेमें गुगल सर्च ईंजीनपर जानकारी ढुंढने लगा. लेकिन उसका ध्यान किसी चिजमें नही लग रहा था. कब एक बार वह दिन आता है , कब अंजली मुंबइको आती है और कब उसे वह वर्सोवा बिचपर मिलता है ऐसा उसे हो गया था.

वर्सोवा बिच दिमागमें आगया लेकिन उस बिचकी तस्वीर उसके जहनमें नही आ रही थी. वर्सोवा बिचका नाम उसने सुना था लेकिन वह कभी वहां नही गया था. वैसे वह मुंबईमें रहकर पिएचडी कर तो रहा था लेकिन वह जादातर कभी घुमता नही था. मुंबईमें वह वैसे पहले पहले काफी घुमा था. लेकिन वर्सोवा बिचपर कभी नही गया था. अब यहां सायबर कॅफेमें बैठे बैठे क्या करेंगे यह सोचकर उसने गुगल सर्च ओपन किया और उसपर वर्सोवा बिच सर्च स्ट्रींग दिया. इंटरनेटपर काफी जानकारी फोटोज और जानेके रास्ते मॅप्स अवतरीत हूए . उसने वह जानकारी पढकर जानेका रास्ता तय किया. अब और क्या करना चाहिए उसका दिमाग सुन्न हो गया था. चलो उसने भेजी हूई पुरानी मेल्स पढते है और उसने भेजे हूए फोटोज देखते है ऐसा सोचकर वह एक एक कर उसकी पुरानी मेल्स खोलने लगा. मेल्सकी तारीखसे उसके खयालमें आ गया की उनका यह सिलसिला वैसे जादा पुराना नही था. आज लगभग महिना हो गया था जब वह पहली बार उसे चॅटींगपर मिल गई थी.
 
लेकिन उसे उनकी पहचान कैसे कितनी पुरानी लग रही थी. उन्होने एकदुसरेको भेजे मेल्स और फोटोजसे वैसे उन्हे एक दुसरेको जाननेका मौका मिला था और एक दुसरेके जहनमें उन्होने एकदुसरेकी एक तस्वीर बना रखी थी. वैसे उन्होने एकदुसरेके स्वभावकाभी एक अंदाजा लगाकर अपने अपने मनमें बसाया था.

वह अपने कल्पनानूसारही होगी की नही उसके दिमागमें एक प्रश्न उपस्थित हुवा.

या मिलनेके बाद मैने सोचे इसके विपरीत कोई अनजान. कोई कभी ना सोची होगी ऐसी एक व्यक्ती अपने सामने खडी हो जाएगी.

चलो आमने सामने मिलनेके बाद कमसे कम यह सब शंकाए मिट जाएगी उसने उसका फोटो अल्बम देखते हूए सोचा.

अचानक उसे उसके पिछे कोई खडा है ऐसा अहसास हो गया. उसने पलटकर देखा तो जॉनी एक नटखट मुस्कुराहट धारण करते हूए उसकी तरफ देख रहा था.

साले बस बात यहीतक पहूंची है तो यह हाल है . तुझे आजुबाजुकाभी कुछ दिखता नही. शादी होनेके बाद पता नही क्या होगा जॉनीने उसे छेडते हूए कहा.

अरे. तुम कब आए विवेक अपने चेहरेपर आए हडबडाहटके भाव छुपाते हूए बोला.

कमसे कम पुरा आधा घंटा हो गया होगा. ऐसा लगता है शादी होनेके बाद तु हमें जरुर भुल जाएगा जॉनी फिरसे उसे छेडते हूए बोला.

अरे नही यार. ऐसा कैसे होगा . कमसे कम तुम्हे मै कैसे भूल पाऊंगा विवेक उसके सामने आए हूए तोंदमें मुक्का मारनेका अविर्भाव करते हूए बोला.

अंजली वर्सोवा बीचपर आकर विवेककी राह देखने लगी. उसने फिरसे एकबार अपनी घडीकी तरफ देखा. विवेकके आनेको अभी वक्त था. इसलिए उसने समुंदरके किनारे खडे होकर दुरतक अपनी नजरे दौडाई. नजर दौडाते हूए उसके विचार जा चक्र भूतकालमें चला गया. उसके दिलमें अब उसकी बचपनकी यादे आने लगी.

वर्सोवा बीच यह अंजलीका मुंबईमें स्थित पसंदीदा स्थान था. बचपनमें वह उसके मां बापके साथ यहां अक्सर आया करती थी. उसे उसके मां बाप की आज बहुत याद आ रही थी. भलेही आज वह समुंदर का किनारा इतना साफ सुधरा नही था लेकिन उसके बचपनमें वह बहुत साफ सुधरा रहा करता था. सामने समुंदरके लहरोंका आवाज उसके दिलमें एक अजीबसी कसक पैदा कर रहा था.

उसने अपने कलाईपर बंधे घडीकी तरफ फिरसे देखा. विवेकको उसने शामके पांचका वक्त दिया था.

पांच तो कबके बज चूके थे . फिर वह अबतक कैसे नही पहूंचा .

उसके जहनमें एक सवाल उठा .

कही ट्रॅफिकमें तो नही फंस गया .

मुंबईकी ट्रॅफिक में कब कोई और कहां फंस जाएं कुछ कहा नही जा सकता.

उसने लंबी आह भरते हुए फिरसे चारों ओर अपनी नजरे दौडाई.

सामने किनारेपर एक लडका समुंदरके किनारे रेतके साथ खेल रहा था. वह देखकर उसके विचार फिरसे भूतकालमें चले गए और फिर एक बार उसकी बचपनकी यादोंमे डूब गए.

वह तब लगभग सालकी होगी जब वह अपने मां और पिताके साथ इसी बीचपर आई थी. वह लडका जहां खेल रहा था, लगभग वही कही रेतका किला बना रहे थे. तभी उसके पिताने कहा था,

देखो अंजली उधर तो देखो.

समुंदर के किनारे एक लडका कुछ चिज समुंदरके अंदर दुरतक फेंकनेका जीतोड प्रयास कर रहा था. वह लेकिन समुंदरकी लहरे उस चिजको फिरसे किनारेपर वापस लाती थी. वह लडका बार बार उस चिजको समुंदरमें बहुत दुरतक फेकनेकेका प्रयास करता था और बार बार वह लहरें उस चिजको किनारेपर लाकर छोडती थी.

फिर उसके पिताजीने अंजलीसे कहा

देखो अंजली वह लडका देखो . वह चिज वह समुंदरमें फेकनेकी कोशीश कर रहा है और वह वस्तू बार बार किनारेपर वापस आ रही है. अपने जिवनमेंभी दु ख और सुखका ऐसेही होता है. आदमी जैसे जैसे अपने जिवनमें आए दुखको दुर करनेका प्रयास करता है. उस वक्त के लिए लगता है की दुख चला गया है और वह फिरसे वापस कभी नही आएगा. लेकिन दुखका उस चिज जैसाही रहता है . जितना तुम उसे दुर धकेलनेकी कोशीश करो वह फिरसे उतनेही जोरसे वापस आता है. अब देखो वह लडका थोडी देर बाद अपने खेलनेमें व्यस्त हो जाएगा. और वह उस चिजको पुरी तरहसे भूल जाएगा. फिर जब उसे उस चिजकी याद आएगी. वह चिज किनारेपर ढूंढकरभी नही मिलेगी. वैसेही आदमीने अगर दुखको जादा महत्व ना देते हूए . सुख और दूखका एकही अंदाजसे सामना किया तो उसे दुखसे तकलिफ नही होगी. .देअर विल बी पेन बट टू सफर ऑर नॉट टू सफर वील बी अप टू यू

उसे याद आ रहा था की उसके पिता कैसे उसे छोटी छोटी बातोंसे बहुत कुछ सिखकी बाते कह जाते थे.

जब अंजली अपनी पुरानी यादोंसे बाहर आ गई, उसके सामने विवेक खडा था. उंचा, गठीला शरीर, चेहरेपर हमेशा मुस्कान और उसकी हर एक हरकतसे दिखता उसका उत्साह. उसने देखे उसके फोटोसे वह बहुत अलग और मोहक लग रहा था. वे एकदुसरेसे पहली बारही मिल रहे थे इसलिए दोनोंके चेहरे खुशीसे दमक उठे थे. दोनों एकदुसरे की तरफ सिर्फ एकटक देखने लगे.

अंजली और विवेक दोनो न जाने कितनी देर सिर्फ एक दुसरे की तरफ ताक रहे थे. भलेही वे एकदुसरे को एक महिने से जानते थे लेकिन वे एक दुसरे के सामने पहली बार आ रहे थे. वैसे वे एकदुसरे को सिर्फ जानते ही नही थे तो उन्होने एक दुसरेको अच्छी तरह से समझ लिया था. एकदुसरे के स्वभाव की खुबीया या खामीयां वे भली भांती जानते थे. फिरभी एक दुसरे के सामने आते ही उन्हे क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था. वे इतने चूप थे की मानो दो दो तिन तिन पेजेस की मेल करनेवाले वे हमही है क्या ऐसी उन्हे आशंका आए. आखिर विवेकने ही पहल करते हूए शुरवात की,

ट्रॅफिकमें अटक गया था. इसलिए देर हो गई .

मै तो साडेचार बजेसेही तुम्हारी राह देख रही हूं . अंजलीने कहा.

लेकिन तूमने तो पांच का वक्त दिया था. विवेकने कहा.

सिर्फ शुरु करनेकी ही देरी थी, अब वे आपस में अच्छे खासे घुल मिलकर बाते करने लगे, मानो इंटरनेट पर चॅटींग कर रहे हो. बाते करते करते वे धीरे धीरे बीचके रेतपर समुंदरके किनारे किनारे चलने लगे. चलते चलते कब उनके हाथ एकदुसरे में गुथ गए, उन्हे पताही नही चला. न जाने कितनी देर तक वे एक दुसरेके हाथ पकडकर बीचपर घुम रहे थे.

सुर्यास्त हो चुका था और अब अंधेराभी छाने लगा था. बिचमेंही अचानक रुककर, गंभीर होकर विवेकने कहा,

अंजली. एक बात पुछू

उसने आखोंसेही मानो हा कह दिया.

मुझसे शादी करोगी उसने सिधे सिधे पुछा.

उसके इस अनपेक्षित सवालसे वह एक पल के लिए गडबडासी गई. अपने गडबडाए हालातसे संभलकर उसने कुछ ना बोलते हूए अपनी गर्दन निचे झूकाई.

विवेकका दिल अब जोरजोरसे धडकने लगा था.

मैने बडा ढांढस कर यह सवाल तो पुछा.

लेकिन वह हां कहेगी या नही .

वह उसके जवाबकी प्रतिक्षा करने लगा.

मैने यह सवाल पुछनेमें कुछ जल्दी तो नही कर दी .

उसने अगर नही कहा तो .

उसके जहनमें अलग अलग आशंकाएं आने लगी.

थोडी देरसे वह बोली,

चलो हमें निकलना चाहिए .

उसने बोलने के लिए मुंह खोला तब उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा था.

लेकिन यह क्या . वह उसके सवालके जवाबसे बच रही थी.

लेकिन वह एक पीएचडी का छात्र था. किसी भी सवाल के जवाब का पिछा करना उसके खुनमें ही भिना हूवा था.

. तूमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया . उसने उसे टोका.
 
चलो मै तुम्हे छोड आती हूं वह फिर से उसके सवाल के जवाब से बचते हूए बोली.

लेकिन वहभी कुछ कम नही था.

अभी तक तूमने मेरे सवालका जवाब नही दिया

वह शर्मके मारे चूर चूर हो रही थी. उसकी गर्दन झूकी हूई थी और उसका गोरा चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था. वह अपनी भावनाए छुपानेके लिए पैर के अंगुठेसे जमीन कुरेदने लगी.

मैने थोडी ना कहा है वह किसी तरह, अभीभी अपनी गर्दन निची रखते हूए बोली.

अपने मुंहसे वह शब्द बाहर पडे इसका उसे खुदको ही आश्चर्य लग रहा था. विवेक का अब तक मायूस हुवा चेहरा एकदम से खुशीके मारे खिल उठा. उसे इतनी खुशी हुई थी की वह उसे कैसे व्यक्त करे कुछ समझ नही पा रहा था. उसने अपने आपको ना रोक पाकर उसे अपने बाहोंमें कसकर भरकर उपर उठा लिया.

अंजली गाडी ड्राईव्ह कर रही थी और गाडीमें आगे उसके बगलकीही सिटपर विवेक बैठा हुवा था. गाडीमें काफी समयतक दोनो अपने आपमें खोए हूए गुमसुमसे बैठे हूए थे.

सच कहा जाए तो विवेक उसने सोचे उससेभी जादा चुस्त , तेज तर्रार और देखनेमें उमदा है . और उसका स्वभाव कितना सिधा और सरल है .

पहलेही मुलाकातमें शादीके बारेमें सवाल कर उसने अपनी भावनाएं जाहिर की यह एक तरहसे अच्छा ही हुवा. सच कहा जाए तो उसने वह सवाल पुछकर मुझेभी उसके बारेमें अपनी भावनाएं व्यक्त करनेका मौका दिया है.

उसे अब उसके बारेंमे एक अपनापन महसूस हो रहा था. उसने अब उसमें अपना भावी सहचारी . एक दोस्त. जो हमेशा दुख और सुखमें उसका साथ देगा . देखना शुरु किया था.

उसने सोचते हूए उसकी तरफ एक कटाक्ष डाला. उसनेभी उसकी तरफ देखकर एक मधूर मुस्कुराहट बिखेरी.

लेकिन अब वहभी अपनेही बारेमें सोच रहा होगा क्या .

तूम पढाई वैगेरा कब करते हो. नही . मतलब . हमेशा तो चॅटींग और इंटरनेटपरही बिझी रहते हो अंजली कुछ तो बोलना है और विवेकको थोडा छेडनेके उद्देश्यसे बोली.

विवेक उसके छेडनेका मुड पहचानकर सिर्फ मुस्कुरा दिया.

हालहीमें तुम्हारे कंपनीका प्रोग्रेस क्या कहता है विवेकने पुछा.

अच्छा है . क्यों . हमारी कंपनी तो दिनबदीन प्रोग्रेस करती जा रही है अंजलीने कहा.

नही मैने सोचा . हमेशा चॅटींग और इंटरनेटपर बिझी होनेसे उसका असर कंपनीके कामपर हुवा होगा. . नही विवेकभी उसे वैसाही नटखट जवाब देते हूए बोला.

वहभी उसके तरफ देखकर सिर्फ हंस दी. वह उसके इस बातोंमें उलझानेके खुबीसे वाकीफ थी और उसे उसका इस बारेमें हमेशा अभिमान रहा करता था.

अंजलीकी गाडी एक आलीशान हॉटेलके सामने हॉटेल ओबेरायके सामने आकर रुकी. गाडी पार्कींगमें ले जाकर अंजलीने कहा, एक मिनीट मै मेरा मोबाईल हॉटेलमें भूल गई हूं . वह झटसे लेकर आती हूं और फिर हम निकलेंगे. नही तो एक काम कर सकते है . कुछ ठंडा या गरम हो जाए तो मजा आ जाएगा . नही . और फिर निकलेंगे अंजली गाडीके निचे उतरते हूए बोली.

अंजली उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और विवेकभी उतरकर उसके साथ हो लिया.

हॉटेलका सुईट जैसे जैसे नजदिक आने लगा, वैसे एक अन्जानी भावनासे अंजलीके दिलकी धडकन तेज होने लगी थी. एक अनामिक डरने मानो उसे घेर लिया था. विवेक भलेही उसके पिछे पिछे चल रहा था लेकिन उसके सासोंकी गति विचलीत हो चुकी थी. अंजलीने सुईटका दरवाजा खोला और अंदर चली गई.

विवेक दरवाजेमेही इधर उधर करता हुवा खडा हो गया.

अरे आवोना अंदर आवो अंजली उनके बिच बनी, असहजता, एक तणाव दूर करनेका प्रयास करती हुई बोली.

बैठो अंजली उसे बैठनेका इशारा करती हुई बोली और वही कोनेमें रखा फोन उठानेके लिए उसके पासही बैठ गई.

अंजलीने विवेकके पास रखा हुवा फोन उठानेके लिए हाथ बढाया और बोली, क्या लोगे ठंडा या गरम

फोन उठाते हूए अंजलीके हाथका हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा था. उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. अंजलीको भी वह स्पर्श आल्हाददायक और अच्छा लगा था. लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना बताते हूए उसने ऑर्डर देनेके लिए फोनका क्रेडल उठाया.

फोनका नंबर डायल करनेके लिए अब उसने अपना दुसरा हाथ बढाया. इसबार इस हाथकाभी हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा. इस बार वह अपने आपको रोक नही सका. उसने अंजलीने आगे बढाया हुवा हाथ हल्केही अपने हाथमें लिया. अंजली उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसे वह हाथ उसके हाथसे छुडाकर लेना नही हो रहा था. मानो वह हाथ सुन्न हो गया हो. विवेकने अब वह हाथ कसकर पकडकर उसे खिंचकर अपनी बाहोंमे भर लिया. सबकुछ कैसे तेजीसे घट रहा था और वह सब अंजलीकोभी अच्छा लग रहा था. उसका पुरा बदन गर्म हो गया था और होंठ कांपने लगे थे. विवेकनेभी अपने गर्म और बेकाबू हूए होंठ उसके कांपते होंठोपर रख दिए. अंजलीका एक मन प्रतिकार करनेके लिए कह रहा था. लेकिन दुसरा मन तो विद्रोही होकर सारी मर्यादाए तोडने निकला था. वह उसपर हावी होता जा रहा था और अंजलीकी मानो होशोहवास खोए जैसी स्थिती हो गई थी. विवेकने उसे झटसे अपने मजबुत बाहोंमे उठाकर बगलमें रखे बेडपर लिटाया. उसके उस उठानेमें उसे एक आधार देनेवाली मर्दानी और हक जतानेवाली भावना दिखी इसलिए वह इन्कारभी नही कर सकी. या यू कहिए उसके पास प्रतिकार करनेके लिए कुछ शक्तीही नही बची थी.

उसे उसका वह सवाल याद आगया, अंजली मुझसे शादी करोगी

और उसे अपना जवाबभी याद आगया, मैने ना थोडीही कहा है

उसे अब उसके बाहोमें एक सुरक्षा का अहसास हो रहा था. वहभी अब उसके हर भावनाको उतनीही उत्कटतासे प्रतिसाद दे रही थी.

विवेक आय लव्ह यू सो मच उसके मुंहसे शब्द बाहर आ गये.

आय टू विवेक मानो उसके गलेका चुंबन लेते हूए उसके कानमें कह रहा था.

धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक बदनसे खेलने लगा. और वहभी किसी लतीका की तरह उसको चिपककर अपने भविष्यके आयुष्यका सहारा ढुंढ रही थी.

हां मैही तुम्हारे आगेके आयूष्य का सहारा . साथीदार हुं इस हकसे अब वह उसके बदनसे एक एक कपडे हटाने लगा था.

हां मैने भी अब तुम्हे सब कुछ अर्पन कर दिया है . इस विश्वास के साथ समर्पन करके वहभी उसके शरीर से एक एक कपडे हटाने लगी.

अंजली अचानक हडबडाकर निंदसे जाग गई. उसने बेडपर बगलमें देखा तो वहा विवेक निर्वस्त्र अवस्थामें चादर बदनपर ओढे गहरी निंद सो रहा था. लेकिन निंदमेंभी उसका एक हाथ अंजलीके निर्वस्त्र बदनपर था. इतने दिनोंमे रातको अचानक बुरे सपनेसे जगनेके बाद उसे पहली बार उसके हाथका एक बडा सहारा महसूस हुवा था.

अंजली चिंताग्रस्त अवस्थामें अपनी कुर्सीपर बैठी थी. उसके टेबलके सामनेही शरवरी बैठी हूई थी. विवेकके साथ बिताया एक एक पल याद करते हूए पिछले तिन कैसे बित गए अंजलीको कुछ पता ही नही चला था. लेकिन आज उसे चिंता होने लगी थी.

आज तिन दिन हो गए . ना वह चाटींगपर मिल रहा है ना उसकी कोई मेल आई है. अंजलीने शरवरीसे चिंताभरे स्वरमें कहा.

एक दिनमें न जाने कितनी बार चॅटींगपर चॅट करनेवाला और एक दिनमें न जाने कितनी मेल्स भेजनेवाला विवेक अब अचानक तिन दिनसे चूप क्यों होगया सचमुछ वह एक चिंताकी ही बात थी.

उसका कोई कॉन्टॅक्ट नंबर तो होगाना शरवरीने पुछा.

हां है. लेकिन वह कॉलेजका नंबर है. लेकिन वहां फोन कर उसके बारेमें पुछना उचीत होगा क्या अंजलीने कहा.

हा वह भी है शरवरीने कहा.

मुझे चिंता है . कही वह मेरे बारेमें कुछ गलत सलत सोचकर ना बैठे . और अगर वैसा है तो पता नही वह मेरे बारेंमे क्या सोच रहा होगा . अंजलीने मानो खुदसेही सवाल किया.

हॉटेलमें जो हुवा वह नही होना चाहिए था .

उसकी वजहसे शायद वह अपने बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा.

लेकिन जोभी हुवा वह कैसे . अचानक. दोनोंको कोई मौका दिए बिना हो गया.

मैने उसे हॉटेलमें बुलाना ही नही चाहिए था.
 
उसे अगर हॉटेलमें नही बुलाया होता तो यह घटना घटी ही नही होती.

अंजलीके दिमागमें पता नही कितने सवाल और उनके जवाब भिड कर रहे थे.

मुझे नही लगता की वह तुम्हारे बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा. वह दुसरेही किसी कारणवश तुम्हारे संपर्कमें नही होगा. जैसे किसी महत्वपुर्ण कामके सिलसिलेमें वह किसी बाहर गाव गया होगा. शरवरी अंजलीके दिलको समझाने बहलानेकी कोशीश करते हुए बोली.

लेकिन अंदरसे वहभी उतनीही चिंतातूर थी. अंजलीने शरवरीको हॉटेलमें घटीत घटनाके बारेमें विस्तारसे बताया मालूम हो रहा था. वैसे वह उसे अपनी बहुत करीबी दोस्त मानती थी और उससे निजी बातेभी नही छुपाती थी.

उसे हॉटेलके अंदर बुलाया नही होता तो शायद यह नौबत नही आती अंजलीने कहा.

नही नही वैसा कुछ नही होगा. पहले तुम अपने आपको बिना मतलब कोसना बंद करदो. शरवरी उसे समझानेकी कोशीश करती हुई बोली.

मोनाने जल्दी जल्दी उसके सामनेसे गुजर रहे आनंदजींको रोका.

आनंदजी आपने शरवरीको देखा क्या मोनाने पुछा.

हां . वह उपर विकासके पास बैठी हूई है . क्यो क्या हुवा आनंदजीने मोनाका चिंतासे ग्रस्त चेहरा देखकर पुछा.

कुछ नही. अंजली मॅमने उसे तुरंत बुलानेके लिए कहा है . आप उधरही जा रहे हो ना . तो उसे अंजली मॅमके पास तुरंत भेज देंगे प्लीज. कुछ महत्वपुर्ण काम लगता है मोना आनंदजींसे बोली.

ठिक है . मै अभी भेज देता हूं . आनंदजी सिढीयां चढते हूए बोले.

शरवरीको आनंदजींका मेसेज मिलतेही वह तुरंत अंजलीके कॅबिनमें गई. देखती है तो अंजली हताश, निराश दोनो हाथोंके बिच टेबलपर अपना सर रखकर बैठी थी.

अंजली क्या हुवा अंजलीको उस अवस्थामें बैठी हुई पाकर शरवरीने चिंताभरे स्वरमें, उसके पास जाकर, उसके पिठपर हाथ सहलाते हूए पुछा.

उसने उसे इतना हताश और निराश, और वह भी ऑफीसमें कभी नही देखा था.

ऐसा अचानक क्या हुवा होगा .

शरवरी सोचने लगी. अंजलीने धीरेसे अपना सर उठाया. उसके हर हरकतमें एक धीमापन और दर्द दुख का अहसास दिख रहा था. उसका चेहराभी उदास दिख रहा था.

हां उसके पिताजी जब अचानक हार्ट अटॅकसे गुजर गए थे तबभी वह ऐसीही दिख रही थी.

धीरेसे अपना चेहरा कॉम्प्यूटरके मॉनीटरकी तरफ घुमाते हूए अंजली बोली, शरवरी. सब कुछ खतम हो चुका है

कॉम्प्यूटरका मॉनीटर शुरुही था. शरवरीने झटसे नजदिक जाकर कॉम्प्यूटरपर क्या चल रहा है यह देखा. उसे मॉनीटरपर विवेककी अंजलीने खोली हूई मेल दिखाई दी. शरवरी वह मेल पढने लगी

मिस अंजली. हाय. वुई हॅड अ नाईस टाईम . आय रिअली ऍन्जॉइड इट. खुशीसे और तुम्हारे प्यारकी वर्षावसे भिगे हुए वह पल मैने मेरे दिलमें और मेरे कॅमेरेमें कैद करके रखे है. मै तुम्हारी माफी चाहता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें बंद किये है . वह पल थे ही ऐसे की मै अपने मोहको रोक नही सका. तुम्हे झूट तो नही लग रहा है न . देखो . उन पलोंसे एक चुने हूए पलको मैने इस फोटोग्राफके स्वरुपमें तुम्हारे मेलके साथ अटॅच करके भेजा है. ऐसे बहुतसे पल मैने मेरे कॅमेरेमे और मेरे हृदयमें कैद कर रखे है . सोचता हूं की उन पलोंको . इन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश कर दूं . क्यो कैसी दिमागवाली आयडिया है है ना . लेकिन यह तुम्हे पसंद नही आएगी . तुम्हारी अगर इच्छा नही हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे दिलमें दफन करके रख सकता हूं . लेकिन उसके लिए तुम्हे उसकी एक मामुलीसी किमत अदा करनी पडेगी. क्या करे हर बात की एक तय किमत होती है . है की नही .कुछ नही बस लाख रुपए. तुम्हारे लिए बहुतही मामुली रकम . और हां . पैसेका बंदोबस्त तुरंत होना चाहिए . पैसे कब कैसे पहुंचाने है . यह बादमें मेलके द्वारा बताऊंगा .

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं . लेकिन क्या करें कुछ पाने के लिए कुछ खोना पडता है . अगले मेलका इंतजार करना . और हां . तुम्हे बता दूं की मुझे पुलिसका बहुत डर लगता है . और जब मै डरता हूं तब हडबडाहटमें कुछभी अटपटासा करने लगता हूं . किसीका खुनभी .

तुम्हारा . सिर्फ तुम्हारा . विवेक

मेल पढकर शरवरीको मानो उसके पैरके निचेसे जमिन खिसक गई हो ऐसा लग रहा था. वह एकदम सुन्न हो गई थी. ऐसाभी हो सकता है, इसपर उसका विश्वासही नही हो रहा था. उसने विवेकके बारेमें क्या सोचा था, और वह क्या निकला था.

ओ माय गॉड. ही इज अ बिग फ्रॉड. आय कांट बिलीव्ह इट. शरवरीके आश्चर्यसे खुले मुंहसे निकल गया.

शरवरीने मेलके साथ अटॅच कर भेजे फोटोके लिंकपर क्लीक करके देखा. वह अंजलीका और विवेकका हॉटेलके सुईटमें एकदुसरेको बाहों में लिया हुवा नग्न फोटो था.

लेकिन उसने यह फोटो, कैसे लिया होगा शरवरीने अपनी उलझन जाहिर की.

मै मुंबईको कब जानेवाली थी . कहा रुकने वाली थी . इसकी उसे पहलेसेही पुरी जानकारी थी. अंजलीने कहा.

यह तो सिधा सिधा ब्लॅकमेलींग है. शरवरी गुस्सेसे आवेशमें आकर चिढकर बोली.

उसके मासूम चेहरेके पिछे इतना भयानक चेहराभी छिपा हूवा हो सकता है . मुझे तो अबभी विश्वास नही होता. अंजलीने दुखसे कहा.

कमसे कम शादीके पहले हमें उसका यह भयानक रुप पता चला. नही तो न जाने क्या हो जाता . शरवरीने कहा.

मुझे दुख पैसेका नही . दुख है तो सिर्फ उसने दिए इतने बडे धोखे और विश्वासघात का है. अंजलीने कहा.

एक पलके लिए समझ लो की अगर हम उसे लाख रुपए दे देते है. लेकिन पैसे लेनेके बादभी वह फिरसे हमें ब्लॅकमेल नही करेगा इसकी क्या ग्यारंटी . शरवरीने फिरसे अपने मनमें चल रहा सवाल जाहिर किया.

अंजली चेहरे पर डर लिए सिर्फ उसकी तरफ देखती रही. क्योंकी उसके पासभी इस सवालका कोई जवाब नही था.

मुझे लगता है तूम एक बार उसे मेल कर उसका मन परिवर्तीत करनेका प्रयास करो. और अगर फिरभी वह नही मानता है तो . चिंता मत करो. हम जरुर इसमेंसेभी कुछ रास्ता निकालेंगे. शरवरी उसको ढांढस बढाते हूई बोली.

सायबर कॅफेमें लोग अपने अपने क्यूबीकल्समें अपने अपने इंटरनेट सर्फींगमें बिझी थे. कुछ कॉम्प्यूटर्स वही खुले हॉलमें रखे थे, वहांभी कोई कॉम्प्यूटर खाली नही था. की बोर्डके बटन्स दबानेका एक अजिब आवाज एक लय और तालमें सारे कॅफेमें घुम रहा था. सब लोग, कोई चॅटींग, कोई सर्फींग, कोई गेम्स खेलनेमें तो कोई मेल्स भेजनेमें मग्न था. तभी एक आदमी दरवाजेसे अंदर आ गया. वह अंदर आकर जिस तरहसे इधर उधर देख रहा था, कमसे कम उससे वह यहां पर पहली बार आया हो ऐसा लग रहा था. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ मेंबर उसके सामने रखे कॉम्प्यूटरपर ताशका गेम सॉलीटेअर खेल रहा था. उस आदमीकी आहट होतेही उसने झटसे, बडी स्फुर्तीके साथ अपने मॉनिटरपर चल रहा वह गेम मिनीमाईझ किया और आया हुवा आदमी अपना बॉस या उसके घरका कोई आदमी नही है यह ध्यानमें आतेही वह फिरसे वह गेम मॅक्सीमाईज करके खेलने लगा. वह अंदर आया हुवा आदमी कुछ पलके लिए रिसेप्शन काऊंटरके पास मंडराया और रुककर स्टाफको पुछने लगा

विवेक आया क्या

उस स्टाफने भावना विरहित चेहरेसे उसकी तरफ देखकर पुछा

कौन विवेक

विवेक सरकार . वह मेरा दोस्त है . और उसनेही मुझे यहां बुलाया है . उस आदमीने कहा.

अच्छा वह विवेक. नही आज तो वह दिखा नही . वैसे तो वह रोज आता है . लेकिन कलसे मैने उसे देखा नही है . काऊंटरपर बैठे स्टाफने जवाब दिया और वह सामने रखे हूए कॉम्प्यूटरपर फिरसे सॉलीटेअर खेलनेमें व्यस्त हो गया.

अंजली कॉन्फरंन्स रुममें दिवारपर लगे छोटे पडदेपर प्रोजेक्टरकी सहाय्यतासे शरवरीको कुछ समझा रही थी. और शरवरी वह जो बोल रही है वह ध्यान देकर सुन रही थी.

शरवरी जैसा तुमने कहा था वैसेही मैने विवेकको समझाकर देखनेके लिए एक मेल भेजी है . लेकिन उसे सिर्फ मेलही ना भेजते हूए मैने एक बडा दांव भी फेंका है . अंजली बोल रही थी.

दांव . कैसा . शरवरीने कुछ ना समझते हूए आश्चर्यसे पुछा.

उसे भेजे हूए मेलके साथ मैने एक सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅम अटॅच कर भेजा है अंजलीने कहा.

कैसा प्रोग्रॅम शरवरीको अभीभी कुछ समझ नही रहा था.

उस प्रोग्रॅमको स्निफर कहते है . जैसेही विवेक उसे भेजी हूई मेल खोलेगा . वह स्निफर प्रोग्रॅम रन होगा . अंजली बोल रही थी.

लेकिन वह प्रोग्रॅम रन होनेसे क्या होगा शरवरीने पुछा.

उस प्रोग्रॅमका काम है . विवेकके मेलका पासवर्ड मालूम करना . और वह पासवर्ड मालूम होतेही वह प्रोग्रॅम हमे वह पासवर्ड मेलद्वारा भेजेगा . अंजली बोल रही थी.

अरे वा. शरवरी उत्साहभरे स्वरमें बोली लेकिन अगलेही पल कुछ सोचते हूए उसने पुछा, लेकिन उसका पासवर्ड मालूम कर हमें क्या मिलेगा

जिस तरहसे विवेक मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है . उसी तरह हो सकता है की वह और बहुत लोगोंको ब्लॅकमेल कर रहा होगा .या फिर उसके मेलबॉक्समें हमे उसकी कुछ कमजोरी. या जो हमारे कामका साबीत हो ऐसा कुछतो हमें पता चलेगा . वैसे फिलहाल हम अंधेरेमें निशाना साध रहे है. लेकिन मुझे यकिन है . हमें कुछ ना कुछतो जरुर मिलेगा अंजली बता रही थी.

हां . हो सकता है शरवरीने कहा.

और फिर कुछ सोचकर उसने कहा, मुझे क्या लगता है . हमें अपना दुश्मन कौन है यह पता है . वह कहां रहता है यहभी पता है . फिर वह अपनेपर वार करनेके पहलेही अगर हम उसपर वार करते है तो

वह संभावनाभी मैने जांचकर देखी है . लेकिन अब वह उसके होस्टेलसे गायब है . वुई डोन्ट नो हिज व्हेअर अबाऊट्स

तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने और शरवरीने झटसे पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा. मॉनिटरकी तरफ देखतेही दोनोके चेहरे खिल गए. क्योंकी उनकी अपेक्षानुसार अंजलीने विवेकके मेलको अटॅच कर भेजे स्निफर सॉफ्टवेअरकीही वह मेल थी. अब दोनोंको वह मेल खोलनेकी जल्दी हो गई थी. कब एक बार वह मेल खोलती हूं और कब एक बार उस मेल द्वारा आए विवेकके पासवर्डसे उसका मेल अकाऊंट खोलती हूं ऐसा अंजलीको हुवा था. उसने तुरंत डबलक्लीक कर वह मेल खोली.

यस्स उसके मुंहसे विजयी उद्गार निकले.
 
उसने भेजे स्निफरने अपना काम बराबर किया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और .

यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड बोलते हूए विवेकका मेल ऍड्रेस टाईप कर उस प्रोग्रॅमको विवेकके मेलका पासवर्ड दिया.

अंजलीने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और कुछ की बोर्डकी बटन्स और दो चार माऊस क्लीक्स किए. और दोनो अब कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

ओ माय गॉड . आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह अंजलीके खुले मुंहसे निकल गया.

शरवरी कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी अंजलीके खुले मुंहकी तरफ असमंजससे देख रही थी.

अंजली अपने ऑफीसमें कुर्सीपर बैठकर कुछ सोच रही थी. उसका चेहरा मायूस दिख रहा था. शायद उसने उसके जिवनमें इतना बडा भूचाल आएगा ऐसा कभी सोचा नही होगा. उसने अपना कॉम्प्यूतर शुरु कर रखा तो था, लेकिन उसे ना चाटींग करनेकी इच्छा हो रही थी ना किसी दोस्तको मेल भेजनेकी. उसने अपनी सारी ऑफीशियल मेल्स चेक की और फिरसे वह सोचने लगी. तभी कॉम्प्यूटरपर बझर बजा. उसने अपनी चेअर घुमाकर कॉम्प्यूटरकी तरफ अपना रुख कीया

हाय . मिस अंजली

विवेकका चॅटींगपर मेसेज था.

उसे अहसास हो गया की उसके दिलकी धडकने तेज होने लगी है. लेकिन इसबार धडकने बढनेकी वजह कुछ अलग थी. अंजली सिर्फ उस मेसेजकी तरफ देखती रही. उसे अब क्या किया जाए कुछ सुझ नही रहा था. तभी शरवरी अंदर आ गई. अंजलीने शरवरीको विवेकका मेसेज आया है ऐसा कुछ इशारा किया. शरवरी झटसे बाहर चली गई, मानो पहले उन्होने कुछ तय किया हो. अंजली अबभी उस मेसेजकी तरफ देख रही थी.

अंजली कम ऑन एकनॉलेज यूवर प्रेझेन्स विवेकका फिरसे मेसेज आ गया.

यस अंजलीने टाईप किया और सेंड बटनपर क्लीक किया.

अंजलीने कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए उसके हाथोमें और उंगलियोंमे पहली बार कंपन महसूस किया.

मै अब मेलमें सारी जानकारी भेज रहा हूं विवेकका मेसेज आ गया.

लेकिन लाख रुपए देनेके बादभी फिरसे तुम ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी. अंजलीने मेसेज भेजकर उसे बार बार सता रहा सवाल उठाया.

विवेकने उधरसे एक हंसता हूवा छोटासा चेहरा भेजा.

इस बार अंजलीको उस चेहरेके हसनेमें मासूमियतसे जादा कपट दिख रहा था.

देखो . यह दुनिया भरोसेपर चलती है . तुम्हे मुझपर भरोसा करना पडेगा . और तुम्हारे पास मुझपर भरोसा करनेके अलावा और क्या चारा है उधरसे विवेकका ताना मारता हुवा मेसेज आ गया.

और वहभी सचही तो था . उसके पास उसपर भरोसा करनेके अलावा कोई दुसरा चारा नही था.

अंजली अब उसने भेजे मेसेजको क्या जवाब दिया जाए इसके बारेमें सोचने लगी. तभी अगला मेसेज आ गया

ओके देन बाय. दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन. टेक केअर. तुम्हारा . और सिर्फ तुम्हारा विवेक.

अंजली उस मेसेजकी तरफ काफी देरतक देखती रही. बादमें उसे क्या सुझा क्या मालूम, उसने फटाफट कीबोर्डपर कुछ बटन्स दबाए और कुछ माऊस क्लीक्स किए. उसके सामने उसका खुला हुवा मेलबॉक्स अवतरीत हुवा. उसके अपेक्षानुसार और विवेकने जैसा कहा था, उसकी मेल उसके मेलबॉक्समें पहूंच चूकी थी. उसने पलभरकी भी देरी ना करते हूए वह मेल खोली.

मेलमें लाख रुपए कहां, कैसे, और कब पहुचाने है यह सब विस्तारपुर्वक बताया था. साथमें पुलिसके चक्करमें ना पडनेकी हिदायतरुप धमकीभी दी थी. अंजलीने अपनी कलाईपर बंधी घडीकी तरफ देखा. अबभी मेलमें बताए स्थानपर पैसे पहुंचानेमें घंटेका अवधी बाकी था. उसने एक दिर्घ श्वास लेकर धीरेसे छोड दी. वह वैसे कर शायद अपने मनका बोझ हलका करनेकी कोशीश करती होगी. वैसे चार घंटे उसके लिए काफी समय था. और पैसोंका बंदोबस्त भी उसने पहलेसे ही कर रखा था यहांतक की पैसे सुटकेसमें पॅकभी कर रखे थे. मेलकी तरफ देखते देखते उसके अचानक ध्यानमें आ गया की मेलके साथ कोई अटॅचमेंटभी आई हूई है. उसने वह अटॅचमेंट खोलकर देखी. वह एक फॉरमॅटमें भेजा हुवा एक फोटो था. उसने क्लीक कर वह फोटो खोला.

वह उनके हॉटेलके रुममें दोनो जब एक दिर्घ चुंबन लेते हूए आलिंगनबध्द थे तबका फोटो था.

जॉनी अपनेही धुनमें मस्त मजेमें सिटी बजाते हूए रास्तेपर चल रहा था. तभी उसे पिछेसे किसीने आवाज दिया.

जॉनी.

जॉनीने वही रुककर सिटी बजाना रोक दिया. आवाज पहचानका नही लग रहा था इसलिए उसने पिछे मुडकर देखा. एक आदमी जल्दी जल्दी उसीके ओर आ रहा था. जॉनी असमंजससा उस आदमीकी तरफ देखने लगा क्योंकी वह उस आदमीको पहचानता नही था.

फिर उसे अपना नाम कैसे पता चला .

जॉनी उलझनमें वहा खडा था. तबतक वह आदमी आकर उसके पास पहूंच गया.

मै विवेकका दोस्त हूं . मै उसे कलसे ढूंढ रहा हूं . मुझे कॅफेपर काम करनेवाले लडकेने बताया की शायद तुम्हे उसका पता मालूम हो वह आदमी बोला.

शायद उस आदमीने जॉनीके मनकी उलझन पढ ली थी.

नही वैसे वह मुझेतो बताकर नही गया. . लेकिन कल मै उसके होस्टेलपर गया था. वहां उसका एक दोस्त बता रहा था की वह दिनके लिए किसी रिस्तेदारके यहां गया है . जॉनीने बताया.

कौनसे रिस्तेदारके यहां उस आदमीने पुछा.

नही उतना तो मुझे मालूम नही . उसे मैने वैसा पुछाभी था लेकिन वह उसेभी पता नही था . उसे सिर्फ उसकी मेल मिली थी जॉनीने जानकारी दी.

अंजली अपने कुर्सीपर बैठी हूई थी और उसके सामने रखे टेबलपर एक बंद ब्रिफकेस रखी हूई थी. उसके सामने शरवरी बैठी हूई थी. उनमें एक अजीबसा सन्नाटा छाया हूवा था. अचानक अंजली उठ खडी हो गई और अपना हाथ धीरेसे उस ब्रिफकेसपर फेरते हूए बोली, सब पहेलूसे अगर सोचा जाए तो एकही बात उभरकर सामने आती है .

अंजली बोलते हूए रुक गई. लेकीन शरवरीको सुननेकी बेसब्री थी.

कौनसी शरवरीने पुछा.

. की हमें उस ब्लॅकमेलरको लाख देनेके अलावा फिलहाल अपने पास कोई चारा नही है . और हम रिस्क भी तो नही ले सकते

हां तुम ठिक कहती हो शरवरी शुन्यमें देखते हूए, शायद पुरी घटनापर गौर करते हूए बोली.

अंजलीने वह ब्रिफकेस खोली. ब्रिफकेसमें हजार हजारके बंडल्स ठिकसे एक के उपर एक करके रखे हूए थे. उसने उन नोटोंपर एक नजर दौडाई, फिर ब्रिफकेस बंद कर उठाई और लंबे लंबे कदम भरते हूए वह वहांसे जाने लगी. तभी उसे पिछेसे शरवरीने आवाज दिया

अंजली.

अंजली ब्रेक लगे जैसे रुक गई और शरवरीके तरफ मुडकर देखने लगी.

अपना खयाल रखना शरवरीने अपनी चिंता जताते हूए कहा.

अंजली दो कदम फिरसे अंदर आ गई, शरवरीके पास गई, शरवरीके कंधेपर उसने हाथ रखा औड़ मुडकर फिरसे लंबे लंबे कदम भरते हूए वहांसे चली गई.

घना जंगल. जंगलमें चारो तरफ बढे हूए उंचे उंचे पेढ. और पेढोंके निचे सुखे पत्ते फैले हूए थे. जंगलके पेढोंके बिचसे बने संकरे जगहसे रास्ता ढूंढते हूए एक काली, काले कांच चढाई हूई, कार तेडेमेडे मोड लेते हूए सुखे पत्तोसे गुजरने लगी. उस कारके चलनेके साथही उस सुखे पत्तोका एक अजिब मसलने जैसा आवाज आ रहा था. धीरे धीरे चल रही वह कार उस जंगलसे रास्ता निकालते हूए एक पेढके पास आकर रुकी. उस कारके ड्रायव्हर सिटका काला शिशा धीरे धीरे निचे सरक गया. ड्रायव्हींग सिटपर अंजली काला गॉगल पहनकर बैठी हूई थी. उसने कारका इंजीन बंद किया और बगलके पेढके तनेपर लगे लाल निशानकी तरफ देखा.

उसने यही वह पेढ ऐसा मनही मन पक्का किया होगा.

फिर उसने जंगलमें चारो ओर एक नजर दौडाई. दुर दुरतक कोई परींदाभी नही दिख रहा था. आसपास किसीकीभी उपस्थिती नही है इसका यकिन होतेही उसने अपने बगलके सिटपर रखी ब्रिफकेस उठाकर पहले अपने गोदीमें ली. ब्रिफकेसपर दो बार अपना हाथ थपथपाकर उसने अपना इरादा पक्का किया होगा. और मानो अपना इरादा डगमगा ना जाए इस डरसे उसने झटसे वह ब्रिफकेस कारके खिडकीसे उस पेढके तरफ फेंक दी. धप्प और साथही सुखे पत्तोंका मसलनेजैसा एक अजिब आवाज आया.

होगया अपना काम तो होगया .

चलो अब अपनी इस मसलेसे छूट्टी होगई.

ऐसा सोचते हूए उसने छुटनेके अहसाससे भरी लंबी आह भरी. लेकिन अगलेही क्षण उसके मनमें एक खयाल आया.

क्या सचमुछ वह इस सारे मसलेसे छूट चूकी थी .

या वह अपने आपको एक झूटी तसल्ली दे रही थी.

उसने फिरसे चारो तरफ देखा. आसपास कहीभी कोई मानवी हरकत नही दिख रही थी. उसने फिरसे कार स्टार्ट की. और एक मोड लेते हूए कार वहांसे तेज गतिसे चली गई. मानो वहांसे निकल जाना यह उसके लिए इस मसलेसे हमेशाके लिए छूटनेजैसा था.

जैसेही कार वहांसे चली गई, उस सुनसान जागहके एक पेढके उपर, उंचाईपर कुछ हरकत हो गई. उस पेढके उपर उंचाई पर बैठे, हरे पेढके पत्तोके रंगके कपडे पहने हूए एक आदमीने उसी हरे रंगका वायरलेस बोलनेके लिए अपने मुंहके पास लीया.

सर एव्हरी थींग इज क्लिअर . यू कॅन प्रोसीड वह वायरलेसपर बोला और फिरसे अपनी पैनी नजर इधर उधर घूमाने लगा. शायद वह, वहांसे चली गई कार कही वापस तो नही आ रही है, या उस कारका पिछा करते हूए वहां और कोई तो नही आयाना, इस बातकी तसल्ली करता होगा.

सर एव्हती थींग इज क्लिअर. कन्फर्मींग अगेन वह फिरसे वायरलेसपर बोला.
 
उस पेढपर बैठे आदमीका इशारा मिलतेही जिस पेढके तनेको लाल निशान लगाया हुवा था, उस पेढके बगलमेंही एक बढा सुखे हूए पत्तोका ढेर था, उसमें कुछ हरकत होगई. कार शुरु होनेका आवाज आया और उस सुखे हूए पत्तोके ढेरको चिरते हूए, उसमेंसे एक कार बाहर आ गई. वह कार धीर धीरे आगे सरकती हूई जहां वह ब्रीफकेस पडी हूई थी वहा गई. कारसे एक काले कपडे पहना हूवा और मुंहपरभी काले कपडे बंधा हूवा एक आदमी बाहर आ गया. उसने अपनी पैनी नजरसे इधर उधर देखा. जहां उसका आदमी पेढपर बैठा हूवा था उधरभी देखा और उसे अंगुठा दिखाकर इशारा किया. बदलेमें उस पेढपर बैठे आदमीनेभी अंगूठा दिखाकर जवाब दिया. शायद सबकुछ कंट्रोलमें होनेका संकेत दिया. उस कारमेंसे उतरे, उस काले कपडे पहने आदमीने आसपास कोई उसे देखतो नही रहा है इसकी तसल्ली करते हूए वह निचे पडी हूई ब्रीफकेस धीरेसे उठाई. ब्रीफकेस उठाकर कारके बोनेटपर रखकर खोलकर देखी. हजार रुपयोंके एकके उपर एक ऐसे रखे हूए बंडल्स देखतेही उसके चेहरेपर काले कपडेके पिछे, एक खुशीकी लहर जरुर दौड गई होगी. और उन नोटोंकी खुशबू उसके नाकसे होते हूए उसके मश्तिश्क तक उसे एक नशा चखाती हूए दौड गई होगी. उसने उसमेंसे एक बंडल उठाकर उंगली फेरकर देखकर फिरसे ब्रिफकेसमें रख दिया. उसने फिरसे ब्रिफकेस बंद की. पेढपर बैठे आदमीको फिरसे अंगुठा दिखाकर सबकुछ ठिक होनेका इशारा किया. वह काला साया वह ब्रिफकेस उठाकर फिरसे अपने कारमें जाकर बैठ गया. कारका दरवाजा बंद हो गया, कार शुरु होगई और धीरे धीरे गति पकडती हूई तेज गतिसे वहांसे अदृष्य होगई. मानो वहांसे जल्द से जल्द निकल जाना उस कारमें बैठे आदमीके लिए उन नोटोंपर जल्द से जल्द कब्जा जमाने जैसा था.

उस दिलको दर्द देनेवाले, नही दिल को पुरी तरह तबाह कर देनेवाले घटनाको घटकर अब लगभग दिन हो गए होंगे. उस घटना को जितना हो सके उतना भूलनेकी कोशीश करते हूए अंजली अब पहले जैसे अपने काममें व्यस्त हो गई थी. या यू कहिए उन घटनासे होनेवाले दर्दसे बचनेके लिए उसने खुदको पुरी तरह अपने काममें व्यस्त कर लिया था. उसी बिच अंजलीको आयटी क्षेत्रमें भूषणाह समझे जाने वाला आय टी वुमन ऑफ द ईअर अवार्ड मिला. उस अवार्डकी वजहसे उसके यहां प्रेसवालोंका तांता लगने लगा था. उस भिडकी अब अंजलीकोभी जरुरत महसूस होने लगी थी. क्योंकी उस तरहसे वह अपने अकेलेपनसे और कटू यादोंसे बच सकती थी. पिछले चारपांच दिनसे लगभग रोजही कभी न्यूजपेपरमें तो कभी टिव्हीपर उसके इंटरव्हू आ रहे थे.

अंजली ऑफीसमें बैठी हूई थी. शरवरी उसके बगलमेंही बैठकर उसके कॉम्प्यूटरपर काम कर रही थी. उस बुरे अनुभवके बाद अंजलीका चॅटींग और दोस्तोंको मेल भेजना एकदमही कम हुवा था. खाली समयमें वह यूंही बैठकर शुन्यमें ताकते हुए सोचते बैठती थी. उसके दिमागमें मानो अलग अलग तरहकी विचारोंका सैलाब उठता था. लेकिन वह तुरंत उन विचारोंको अपने दिमागसे झटकती थी. अबभी उसके मनमें विचारोंका सैलाब उमड पडा था. उसने तुरंत अपने दिमागमें चल रहे विचार झटकर अपने मनको दुसरे किसी चिजमे व्यस्त करनेके लिए टेबलका ड्रावर खोला. ड्रॉवरमें उसे उसने संभालकर रखे हूए न्यूजपेपरके कुछ कटींग्ज दिखाई दिए. आय टी वुमन ऑफ द इअर अंजली अंजुळकर न्यूज पेपरके एक कटींगपर हेडलाईन थी. उसने वह कटींग बाहर निकालकर टेबलपर फैलाया और वह फिरसे वह समाचार पढने लगी.

यह समाचार पढनेके लिए अब इस वक्त मेरे पिताजी होने चाहिए थे.

उसके जहनमें एक विचार आकर गया.

उन्हे कितना गर्व महसूस हुवा होता. अपनी बेटीका .

लेकिन भाग्यके आगे किसका कुछ चला है .

अब देखोना अभी अभी आया हुवा विवेकका ताजा अनुभव .

वह सोच रही थी तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा.

काफी दिनोंसे चॅटींग और मेलींग कम करनेके बाद ज्यादातर उसे किसीका मेसेज नही आता था .

फिर यह आज किसका मेसेज होगा .

कोई हितचिंतक .

या कोई हितशत्रू.

आजकल कैसे हर बातमें उसे दोनो पहेलू दिखते थे एक अच्छा और एक बुरा. ठेस पहूंचनेपर आदमी कैसे संभल जाता है और हर कदम सोच समझकर बढाता है.

अंजलीने पलटकर मॉनीटरकी तरफ देखा.

विवेकका मेसेज है . कॉम्प्यूटरपर बैठी शरवरी अंजलीकी तरफ देखकर सहमकर बोली. शरवरीके चेहरेपर डर और आश्चर्य साफ नजर आ रहा था. वह भावनाए अब अंजलीके चेहरेपरभी दिख रही थी. अंजली तुरंत उठकर शरवरीके पास गई. शरवरी अंजलीको कॉम्प्यूटरके सामने बैठनेके लिए जगह देकर वहांसे उठकर बगलमें खडी हो गई. अंजलीने कॉम्प्यूटरपर बैठनेके पहले शरवरीको कुछ इशारा किया वैसे शरवरी तुरंत दरवाजेके पास जाकर जल्दी जल्दी कॅबिनसे बाहर निकल गई.

मिस. अंजली . हाय . कैसी हो विवेकका उधरसे आया मेसेज अंजलीने पढा.

एक पल उसने कुछ सोचा और वह भी चॅटींगका मेसेज टाईप करने लगी

ठीक है . उसने मेसेज टाईप किया और सेंड बटनपर क्लीक करते हूए उसे भेज दिया.

तुम्हे फिरसे तकलिफ देते हूए मुझे बुरा लग रहा है . लेकिन क्या करे . पैसा यह साली चिजही वैसी है . कितनेभी संभलकर इस्तमाल करो तो भी खतम हो जाती है . उधरसे विवेकका मेसेज आ गया.

अंजलीको शक थाही की कभी ना कभी वह और पैसे मांगेगा .

मुझे इस बार लाख रुपएकी सख्त जरुरत है . उधरसे विवेकका मेसेज आ गया.

अभी तो तुम्हे लाख रुपए दिए थे . अब मेरे पास पैसे नही है . अंजलीने झटसे टाईप करते हूए मेसेज भेज भी दिया.

मेसेज टाईप करते हूए उसके दिमागमें औरभी काफी विचारोंका चक्र चल रहा था.

बस यह आखरी बार . क्योंकी यह पैसे लेकर मै परदेस जानेकी सोच रहा हूं उधरसे विवेकका मेसेज आया.

तुम परदेस जावो . या और कही जावो . मुझे उससे कुछ लेना देना नही है . देखो . मेरे पास कोई पैसोका पेढ तो नही है . अंजलीने मेसेज भेजा.

ठिक है . तुम्हे अब मुझे कमसे कम लाख रुपए तो भी देने पडेंगे . पैसे कब कहा और कैसे पहूंचाने है वह मै तुम्हे मेल कर सब बता दुंगा . उधरसे मेसेज आया.

अंजली कुछ टाईप कर उसे भेजनेसे पहलेही विवेकका चॅटींग सेशन बंद हो गया था. अंजली एकटक उसके सामने रखे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी. वह देखतो मॉनिटरके तरफ थी लेकिन उसके दिमागमें विचारोंका तांता लग गया था. लेकिन फिरसे उसके दिमागमें क्या आया क्या मालूम , वह झटसे उठकर खडी हो गई और लंबे लंबे कदम भरते हूए कॅबिनसे बाहर निकल गई.

इथीकल हॅकींग कॉम्पीटीशन ऑर्गनायझर नेट सेक्यूरा ऐसा एक बॅनर बडे अक्षरोंमें स्टेजपर लगाया गया था. आज कॉम्पीटीशन का आखरी दिन था और जितनेवालोंके नाम घोषीत किए जाने थे. पारीतोषीक वितरणके लिए प्रमुख अतिथीके तौर पर अंजलीको बुलाया गया था. स्टेजपर उस बॅनरके बगलमें अंजली प्रमुख अतिथी के लिए आरक्षित कुर्सीपर बैठी हुई थी. और उसके बगलमें एक अधेड उम्र आदमी, भाटीयाजी बैठे थे. वे नेट सेक्यूरा के हेड थे. तभी स्टेजके पिछेसे ऍन्कर सामने माईकके पास जाकर बोलने लगा,

गुड मॉर्निंग लेडीज ऍंड जन्टलमन. जैसे की आप सब लोग जानते हो की हमारी कंपनी नेट सेक्यूराका यह सिल्वर जूबिली साल है और उसी सिलसिले में हमने इथीकल हॅकींग इस प्रतियोगीता का आयोजन किया था . आज हम उस प्रतियोगीताके आखरी दौरसे यानीकी पारितोषीक वितरणके दौरसे गुजरने वाले है . इस पारितोषीक वितरण के लिए हमने एक खास मेहमान को यहां आमंत्रित किया है . जिन्हे हालहीमें आय टी वूमन ऑफ द ईयर सम्मान देकर गौरवान्वीत किया गया है .

हॉलमें बैठे सब लोगोंकी नजरे स्टेजपर बैठे अंजलीपर टीक गई थी. अंजलीनेभी एक मंद स्मित बिखेरते हूए हॉलमें बैठे लोगोंपर एक नजर दौडाई.

और उन खास मेहमानका नाम है . मिस अंजली अंजुळकर . उनके स्वागतके लिए मै स्टेजपर हमारे एक्सीक्यूटीव मॅनेजर श्रीमती नगमा शेख इन्हे आमंत्रित करता हूं .

श्रीमती नगमा शेखने स्टेजपर आकर फुलोंका गुलदस्ता देकर अंजलीका स्वागत किया. अंजलीनेभी खडे होकर उस गुलदस्तेका बडे विनयके साथ अभिवादन करते हूए स्विकार किया. हॉलमें तालीयां गुंज उठी. मानो एक पलमें वहां उपस्थित लोगोंके शरीमें उत्साह प्रवेश कर गया हो. तालीयोंकी आवाज थमतेही ऍन्कर आगे बोलने लगा

अब मै स्टेजपर उपस्थित हमारे मॅनेजींग डायरेक्टर श्री. भाटीयाजीके स्वागतके लिए हमारे मार्केटींग मॅनेजर श्री. सॅम्यूअल रेक्सजीको यहां आमंत्रित करता हूं .

श्री. सॅम्यूअल रेक्सने स्टेजपर जाकर भाटीयाजीका एक गुलदस्ता देकर स्वागत किया. हॉलमें फिरसे तालियां गुंज उठी.

अब भाटीयाजींको मै बिनती करता हूं की वे यहां आकर दो शब्द बोलें ऍन्करने माईकपर कहां और वह भाटीयाजींकी माईकके पास आनेकी राह देखते हूए खडा रहा.

भाटीयाजी खुर्चीसे उठकर खडे हो गए. उन्होने एक बार अंजलीकी तरफ देखा. दोनों एक दुसरेकी तरफ देखकर मुस्कुराए. और अपना मोटा शरीर संभालते हूए धीरे धीरे चलते हूए भाटीयाजी माईकके पास आकर पहूंच गए.

आज इथीकल हॅकींग इस स्पर्धाके लिए आमंत्रित की गई . जी.एच इन्फॉर्मॆटीक्स इस कंपनीकी मॅनेजींग डायरेक्टर और आय टी वूमन ऑफ दिस इयर मिस अंजली अंजुळकर, यहां उपस्थित मेरे कंपनीके सिनीयर आणि जुनियर स्टाफ मेंबर्स, इस स्पर्धामें शामिल हूए देशके कोने कोनेसे आए उत्साही युवक आणि युवतीयां, और इस स्पर्धाका नतिजा जाननेके लिए उत्सुक लेडीज ऍन्ड जन्टलमन. सच कहूं तो . यह एक स्पर्धा है इसलिए नही तो हर एक के जिंदगी की हर एक बात एक स्पर्धाही होती है . लेकिन स्पर्धा हमेशा खिलाडू वृत्तीसे खेली जानी चाहिए . अब देखो ना . यह इतना बडा अपने कंपनीके स्टाफका समुदाय देखकर मुझे एक पुरानी बात याद आ गई . की में हमने यह कंपनी शुरु की थी. तब इस कंपनीके स्टाफकी गिनती सिर्फ थी . मै और, और दो सॉफ्टवेअर इंजिनिअर्स. और तबसे हमने हर दिन लढते झगडते . हर दिनको एक स्पर्धा एक कॉंपीटीशन समझते हूए हम आज इस स्थितीमें पहूंच गए है. मुझे यह बताते हूए खुशी और अभिमान होता है की आज अपने कंपनीने इस देशमेंही नही तो विदेशमेंभी अपना झंडा फहराया है और आज अपने स्टाफकी गिनती . के उपर पहूंच चूकी है .

हॉलमें फिरसे एकबार लोगोंने तालियां बजाते हूए हॉल सर पर उठा लिया. तालीयां थमनेके बाद भाटीयाजी फिरसे आगे बोलने लगे. लेकिन स्टेजपर बैठी अंजली उनका भाषण सुनते हूए कब अपने खयालोंमे डूब गई उसे पताही नही चला .

अंजली और शरवरी कॉफी हाऊसमें एकदुसरेके सामने बैठे थे और दोनो अपने अपने सोच मे डूबी धीरे धीरे कॉफीकी चुस्कीयां ले रही थी. उनमें एक अजिबसा सन्नाटा फैला हुवा था. आखिर अंजलीने उस सन्नाटेको भंग किया

बराबर दिन हो गए है . उसकी अगली मेल अभीतक कैसे नही आई

शायद उसे शक हुवा होगा शरवरीने कहा.

ऐसाही लगता है . अंजली आह भरती हुई बोली.

मुझे लग रहा था की इस बार हम उसे पकडनेमें जरुर कामयाब होंगे . लेकिन अब मुझे चिंता होने लगी है की हम उसे कभी पकडनेमें कामयाबभी होंगे की नही अंजलीने कहा.

और हा उसे शक होना भी उतनाही खतरनाक है . उसने सारे फोटो अगर इंटरनेटपर डाले तो सारा ही खेल बिगड जाएगा . और बदनामीभी होगी वह अलग शरवरीने कहा.

अंजलीने अपने सोचमें डूबे हूए हालतमें सिर्फ सर हिलाया.

एकही झटकेमें उसे पकडना जरुरी है . नही तो अपना प्लान पुरा फेल हो जाएगा अंजलीने कहा .

. हॉलमें चल रहे तालीयोंकी गुंजसे अंजली अपने सोचके विश्वसे बाहर आ गई. उसने चारो तरफ अपनी नजरे दौडाई. भाटीयाजींका स्पीच खत्म हो चुका था और वे उसके बगलकेही सिटपर वापस आ रहे थे. वह उनके तरफ देखकर मुस्कुराई, मानो उनके स्पिचकी सराहना कर रही हो. उधर ऍन्कर फिरसे माईकके पास गया था और उसने ऐलान किया अब मै पारितोषीक वितरणके लिए जी. एच. इन्फॉरमेटीक्सकी मॅनेजींग डायरेक्टर . दि आय. टी वुमन ऑफ दिस इयर. मिस. अंजली अंजुळकर . उन्हे आमंत्रित करता हूं .

अंजली उठ खडी होगई और माइकके पास चली गई. फिरसे हॉल तालीयोंसे गुंज उठा.

तो अब हम पारितोषीक वितरणके लिए आगे बढते है . एन्करने माइकपर जाहिर किया.

. जैसे आप लोग जानते हो . इस प्रतियोगिता को जब जाहिर किया गया तब हमे इसमें भाग लेनेके लिए इच्छूक लोगोंका बहुत प्रतिसाद मिला. देशभरसे लगभग तिन हजार लोगोंके अप्लीकेशन फॉर्मस हमें मिले . पहले छाननीमें हमनें उसमेंसे सिर्फ अप्लीकेशन्स चूने . और अब फायनलमें जो चुने है वे है सिर्फ तिन . लेकिन उन तिन लोगोंके नाम जाननेके पहले हमें थाडा रुकना पडेगा. क्योंकी पहले हम कुछ लोगोंको कुछ प्रोत्साहनपर प्राईजेस देने वाले है .

प्रोत्साहनपर प्राइजेस देनेमें जादा समय न बिताते हूए ऍन्कर एक एकको स्टेजपर बुला रहा था और अंजली उनको प्राईज देकर उनको शाबासकी देकर उनकी वहांसे रवानगी कर रही थी. प्रोत्साहनपर प्राईजेस खत्म हूए वैसे लोगोंमे फिरसें उत्साह बढता हूवा दिखने लगा.

अब जिन तिनोंके नाम जाननेके लिए हम उत्सुक है वह वक्त आ चुका है . सबसे पहले मै तिसरा प्राईज जिसे मिला उस प्रतियोगीका नाम जाहिर करने वाला हूं . एन्करने सब लोगोंकी जिज्ञासा और बढाते हूए एक बडा पॉज लिया , तिसरा प्राईज है लाख रुपये कॅश और मोमेंटो. तो थर्ड प्राईज. मि. अमोल राठोड फ्रॉम जयपूर. प्लीज कम ऑन द स्टेज.
 
Back
Top