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अद्भुत-एक हॉर्रर कहानी complete

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हॉलमें तालियां गुंजने लगी. एक पतलासा सावला जिसकी उम्र होगी ऐसा एक लडका सामनेके दसमेंसे एक कतारमेंसे खडा होकर स्टेजकी तरफ जाने लगा. उस प्रतियोगीकी तरफ देखकर किसे लगेगा नही की उसे तिसरा प्राईज मिल सकता है . लेकिन उसके चलनेमें एक जबरदस्त आत्मविश्वास झलक रहा था. अमोल राठोड स्टेजपर आया. जिस आत्मविश्वाससे वह चला था उसी आत्मविश्वासके साथ उसने पुरस्कारका स्विकार किया और अंजलीसे हस्तांदोलन किया. हॉलमें मेडीयाकी भी काफी उपस्थिती थी. पुरस्कार स्विकार करते वक्त बिजली चमकें ऐसे फोटोंकें फ्लॅश दोनोंके उपर चमक रहे थे.

फिरसे हॉलमें मानो जोरसे बारिश हो ऐसे लोगोंने तालियां बजाई. अमोल राठोड स्टेजसे उतरकर फिरसे अपने कुर्सीकी तरफ जाने लगा वैसे ऍन्कर दुसरा प्राईज जिसे मिला उसके नामका ऐलान करनेके लिए सामने आया,

दुसरा पारितोषीक है . लाख रुपये कॅश और मोमेंटो. तो थर्ड प्राईज गोज टू. मिस. अनघा देशपांडे फ्रॉम पुणे . प्लीज कम ऑन द स्टेज.

हॉलमें फिरसे तालियां बजने लगी. एक गोरी उंची पतली नाजूकसी लगभग सालकी युवती स्टेजपर आने लगी. अंजली शायद वह खुदभी एक स्त्री होनेसे उस लडकीकी तरफ आंखे भरकर देख रही थी. अनघा स्टेजपर अंजलीके पास आ गई. पुरस्कार देकर अंजलीने उसे गले लगा लिया. फिरसे कॅमेरेके फ्लॅश जैसे बिजली चमके ऐसे चमकने लगे.

अनघा जैसेही स्टेजसे निचे उतरकर अपने जगहपर वापस आगई ऍन्करने फिरसे माईकपर कब्जा कर लिया था ,

अब आखिरमें हम जिस पलकी इतनी बेसब्रीसे राह देख रहे है वह पल एकदम नजदिक आ पहूंचा है . पहला पुरस्कार ऐलान करनेका पल . इन फॅक्ट मै अपने आपको बडा भाग्यशाली समझता हूं की पहला पुरस्कार किसको जानेवाला है यह ऐलान करनेका सौभाग्य मुझे मिल रहा है . क्योंकी वह प्रतिस्पर्धी सारे भारतमें एक अव्वल प्रतिस्पर्धी रहनेवाला है . तो पहले देखते है की वह प्रथम पुरस्कार क्या है . प्रथम पुरस्कार है लाख रुपए कॅश, मोमेंटो ऍन्ड अ जॉब ऑफर इन नेट सेक्यूरा.

सब लोग शांत होकर सुन रहे थे. मानो उस पलके लिए उन्होने अपनी सांसे रोककर रखी थी. बहुत लोग अपनी गर्दन उंची कर सामने देखने की कोशीश कर रहे थे. हॉलमें सब तरफ पिनड्रॉप सायलेन्स था .

फर्स्ट प्राईज गोज टू . द वन ऍन्ड ओन्ली वन. मि. अतूल बिश्वास फ्रॉम चेन्नई .

दुसरी कतार विचलित हूई दिखी, क्योंकी दुसरी कतारसे कोई उठा था. सब लोगों के सर उस दिशामें मुड गए. इसबार हॉलमें सबसे बडा और सबसे दिर्घ तालियोंका आवाज हुवा. सचमुछ उसका यश उसके नामके अनुरुप अतूल यानी की अतूलनिय था. वह उठकर लगभग दौडते हूए ही स्टेजपर चला गया, इससे उसका अपूर्व उत्साह और आत्मविश्वास दिख रहा था. गोरा, उंचा, स्मार्ट, कसा हूवा शरीर ऐसा वह सशक्त यूवक था. अंजलीने अपनी दिशामें आते उस पहले पुरस्कारके हकदारकी तरफ देखा. उसके चेहरेपर एक तेज चमक रहा था. आंखे निली और चमकीली थी. उसकी आखोंमे देखकर पलभरके लिए अंजलीको विवेककी याद आ गई. लेकिन अपने विचारोंको दिमागसे झटककर वह आगे गई. वह अंजलीके सामने आकर खडा होगया और उसने लोगोंकी तरफ मुडकर उनको अभिवादन किया. पहलेका तालियोंका आवाज जो अब भी बरकरार था वह और बढ गया. लोगों को अभिवादन कर उसने अंजलीकी तरफ देखा और उसकी नजर अंजलीपर से हटनेका नाम नही ले रही थी, मानो वह उसके मदहोश करनेवाली आंखोमें अटकसा गया था. तालियोंकी गुंज अब भी चल रही थी. लेकिन अचानक एक अजिब घटना घटी, अंजलीने जितने जोरसे हो सकता है उतनी जोरसे उसके गालपर एक चाटा जड दिया था. तब कहा वो होशमें आगया. हॉलमें चल रहा तालियोंका आवाज एकदमसे बंद होगया, मानो किसीने स्विच ऑफ किया हो. उसने और वहां उपस्थित किसीनेभी सोचा नही होगा वैसी अजिब वह घटना थी. हां अंजलीने उसके गालपर एक जोरका चाटा जमा दिया था. उसका ही क्यों सारे उपस्थित लोगोंका इस बातपर यकिन नही हो रहा था. हॉलमें एकदम श्मशानवत चुप्पी फैल गई. एकदम पिनड्रॉप सायलेन्स.

यस आय स्लॅप्ड हिम. ऍन्ड ही डीजर्व इट. क्योंकी वह एक क्रॅकर है . सिर्फ क्रॅकरही नही तो ही इज आल्सो अ ब्लॅकमेलर. हॉलमें चुप्पीका भंग हुवा वह अंजलीके इन शब्दोनें .

अंजली लगातार बोल रही थी. उसकी आंखोमें आग थी. गुस्सेसे अंजलीका पुरा शरीर कांप रहा था. तभी इन्स्पेक्टर कंवलजीत, जो पहलेसे ही तैयार थे, वे डायसपर दो कॉन्स्टेबलके साथ आ गए. उन्होने प्रथम अतूलकी कॉलर पकडकर दो तिन तमाचे उसके कानके निचे जड दिए.

इन्स्पेक्टर अतूल गुर्राया.

उसके मासूम, स्मार्ट चेहरेने अब उग्र रुप धारण किया था. उसे जडाए हुए तमाचोंकी वजहसे लाल हुवा उसका चेहरा औरही भयानक लग रहा था. इन्स्पेक्टरने जादा वक्त ना दौडाते हूए उसे हथकडीयां पहनाकर अरेस्ट किया और वे गुस्सेसे चिल्लाए, टेक दिस बास्टर्ड अवे.

कॉन्स्टेबल उसे लेकर, लगभग खिंचते हूएही वहांसे चले गए. उसका मद और नशा अबभी उतरा हुवा नही दिखाई दे रहा था. वह वहांसे जाते हूए कभी गुस्सेसे इन्स्पेक्टरकी तरफ तो कभी अंजलीकी तरफ देख रहा था.

याद रखो मुझे अरेस्ट करना तुम्हे बहुत महंगा पडनेवाला है जाते जाते वह चिल्लाया.

कॉन्स्टेबल जब अतूलको वहांसे ले गया और अतूल सब लोगोंके नजरोंसे ओझल हुवा तब कहां इतनी देरसे हक्काबक्का रहे लोगोंमे खुसुरफुसुर शुरु हो गई. कुछ लोग अबभी डरे, सहमे और सदमे मे थे, तो कुछ लोगोंको यह सब क्या हो रहा है कुछ समझ नही आ रहा था. प्रथम पुरस्कार जिसे मिला उस लडकेको अचानक अंजलीने मारा और इन्स्पेक्टरने डायसपर आकर उसे गिरफ्तार किया. सबकुछ कैसे लोगोंके समझके बाहर था. लोगोंमें चलरही खुसुफुसुर देखकर इन्स्पेक्टरने ताड लिया की लोगोंको पुरी केस और उसकी गंभिरता समझाना जरुरी है, नही तो लोग और गडबडी मचा सकते है. क्योंकी अतूल जो कुछ पल पहलेही सबलोगों का हिरो था उसे अंजलीने अगलेही पल उसे व्हिलन करार दिया था. लोगोंको वह सच्चा या अंजली सच्ची यह जाननेकी उत्कंठा होनाभी लाजमी था.

शांत हो जाईए . शांत हो जाईए प्लीज. इन्स्पेक्टर हात उपर कर, जो कुछ लोग उठ खडे हूए थे उन्हे बिठाते हूए बोले, कोई डरनेकी या घबरानेकी कोई जरुरत नही. दिस इज अ केस ऑफ ब्लॅकमेलींग ऍन्ड सायबर क्राईम. मैने खुद इस केसपर काम किया है . और इस केसका गुनाहगारके तौरपर अभी अभी आपके सामने अतूल सरकारको पकडा गया है .

फिरभी लोग शांत होनेके लिए तैयार नही थे, तब ऍन्करने फिरसे माईकका कब्जा लिया, दोस्तो शांत हो जाईए . प्लीज शांत हो जाईए . हमारी प्रतिस्पर्धाभी इथीकल हॅकींग . यानीकी हॅकिंगके बारेमेही थी. और इन्स्पेक्टरने अभी आप लोगोंके सामने हॅन्डल की केसभी हॅकींग और क्रॅकींगके बारेमेंही थी . इसलिए इन्स्पेक्टर साहेबको मेरी बिनती है की वे इस केसके बारेमें. उन्होने यह केस कैसे हॅन्डल की. यह केस हॅन्डल करते वक्त कीन कीन चुनौतीयोंका सामना उन्हे करना पडा. और आखिर वह गुनाहगारतक कैसे पहूंचे . यह सब यहां इकठ्ठा हूए लोगोंको विस्तारसे बतायें .

अब कहा लोग फिरसे शांत हो चुके थे. यह केस क्या है . और इन्स्पेक्टरने उसे कैसे हॅन्डल किया. यह जाननेकी लोगोंमें उत्सुकता दिखने लगी. एन्करने एकबार फिरसे इन्स्पेक्टरकी तरफ देखा और उन्हे आगे आकर पुरी कहानी बयां करनेकी बिनती की. इन्स्पेक्टरने अंजलीकी तरफ देखा. अंजलीने आखोंसेही इजाजत दे दी. इन्स्पेक्टर सामने आये और उन्होने माईक ऍन्करसे अपने पास ले लिया .

इन्स्पेक्टर कहानी कथन करने लगे

सायबर क्राईम यह अब भारतमें नया नही रहा है . आजकल पुरे देशमें लगभर रोज कुछना कुछ सायबर क्राईमकी घटनाएं घटीत होती रहती है . लेकिन तहकिकात करते वक्त मुझे हमेशा इस बातका अहसास होता है की लोगोंकी सायबर क्राइमके बारेंमे बहूत गलतफहमीयां है . जितनी उनकी सायबर क्राईमके बारेमें गलतफहमीयां है उतनाही उनका अपने देशके पुलिस डिपार्टमेंटपर भरोसा उडा हूवा दिखाई देता है . उन्हे हमेशा आशंका लगी रहती है की यह टोपी और डंडे लेकर घुमनेवाले पुलिस यह इतना ऍडव्हान्स. यह इतना टेक्नीकल क्राईम कैसे हॅन्डल कर सकते है . उन्हे सायबर क्राईमके बारेमें अपना पुलिस डिपार्टमेंट कितना सक्षम है इसके बारेमें आशंकाए लगी रहती है. . लेकिन अब अभी अभी मैने हॅन्डल किए केसके जरीए मै लोगोंको यकिन दिलाना चाहता हूं की . सायबर क्राईमके बारेमें अपना पोलीस डीपार्टमेंट सिर्फ सक्षमही नही तो पुरी तरहसे तैयार है . इस तरह का या और किसी तरहका गुनाह होनेके बाद जिस कार्यक्षमतासे हम दुसरे गुनाहगारोंको तुरंत पकड सकते है उसी कार्यक्षमतासे हम सायबर क्रिमीनल्सको भी पकड सकते है. लेकिन फिर भी कुछ चिजोंके बारेंमे हम गुनाह हॅन्डल करते वक्त कम पडते है . खासकर जब उस गुनाहको दुसरे किसी देशके जमिन से अंजाम दिया जाता है तब. उस केसमें वह गुनाहगार किसी दुसरे देशके कानुनके कार्यक्षेत्रमें आता है . और फिर वह देश हमें उस गुनाहके बारेमें उस गुनाहगारको पकडनेके लिए कितना सहकार्य करते है इसपर सब निर्भर करता है. सायबर गुनाहके बारेमें और एक महत्वपुर्ण बात. इसमें इंटरनेट इस्तेमाल करनेवाले लोगोंको कुछ चिजोंमे बहुतही जागरुक होना आवश्यक होता है . जैसे किसीको, उस सामनेके पार्टीकी पुरी जानकारी रहे बिना खुदकी जानकारी . . पासवर्ड . फोन . मोबाईल देना बहुतही खतरनाक होता है . वैसे अनसेफ, अनप्रोटेक्टेड, अनसेक्यूअर कनेक्शनपर फायनांसीयल ट्रान्झेक्शन करना . अपने खुदके प्रायव्हेट फोटो इंटरनेटपर भेजना . इत्यादी. यहभी खतरेसे खाली नही है. अब मै यह जो केस विस्तारपुर्वक बतानेवाला हूं . इससे आपको किस तरह जागरुक रहना पडेगा इसका अंदाजा आ जाएगा .

इतनी प्रस्तावना देकर इन्स्पेक्टर अतूलके केसके बारेंमे बताने लगे .

एक रुममें अतूल और अलेक्स रहते थे. रुमके स्थितीसे यह जान पडता था की उन्होने रुम किराएसे ली होगी. कमरे में एक कोने में बैठकर अतूल अपने कॉम्प्यूटरपर बैठकर चॅटींग कर रहा था और कमरेके बिचोबिच अलेक्स डीप्स मारता हूवा एक्सरसाईज कर रहा था. अतूल अपने कॉम्प्यूटरपर दिख रहे चॅटींग विंडोमें धीरे धीरे उपर खिसक रहे चॅटींग मेसेजेस एक एक करके पढ रहा था. शायद वह चाटींगके लिए कोई अच्छा साथीदार ढूंढ रहा होगा. जबसे उसे चॅटींगका अविश्कार हूवा तब से ही उसे यह बहुत पसंद आया था. पहले खाली वक्तमें वक्त बितानेका गप्पे मारना इससे कारगर कोई तरीका नही होगा ऐसी उसकी सोच थी. लेकिन अब जबसे उसे चॅटींगका अविश्कार हुवा उसकी सोच पुरी तरह बदल गई थी. चॅटींगकी वजहसे आदमीको मिले बिना गप्पे मारना अब संभव होगया था. कुछ जान पहचानवाले तो कुछ अजनबी लोगोंसे चॅट करने में उसे बडा मजा आने लगा था. अजनबी लोगोंसे आमने सामने मिलने के बाद कैसे उन्हे पहले अपने कंफर्टेबल झोन में लाना पडता है और उसके बाद ही बातचित आगे बढ सकती है. और उसके लिए सामनेवाला कैसा है इसपर सब निर्भर करता है और उसको कंफर्टेबल झोन में लाने के लिए कभी एक घंटा तो कभी कई सारे दिनभी लग सकते है. चॅटींगपर वैसा नही होता है. कोई पहचान का हो या अजनबी बिनदास्त मेसेज भेज दो. सामनेवाले ने एंटरटेन किया तो ठीक नही तो दुसरा कोई साथी ढूंढो. अपने पास सारे विकल्प होते है. कुछ न समझनेवाले तो कुछ गाली गलोच वाले कुछ संवाद उसे चॅटींग विंडोमें उपर उपर खिसकते हूए दिखाई दे रहे थे.

तभी उसे बाकी मेसेजसे कुछ अलग मेसेज दिखा ,

अच्छा तुम क्या करती हो . मेरा मतलब पढाई या जॉब

किसी विवेक का मेसेज था.

वह उसका असली नामभी हो सकता था या नकली .

मैने बी. ई. कॉम्प्यूटर किया हूवा है . और जी. एच. इन्फॉरमॅटीक्स इस खुदके कंपनीकी मै फिलहाल मॅनेजींग डायरेक्टर हूं विवेकके मेसेजके रिस्पॉन्सके तौरपर यह मेसेज अवतरीत हूवा था.

भेजनेवाले का नाम अंजली था.

अचानक मेसेज पढते हूए अतूलके दिमागमें एक विचार कौंधा.

इस मेसेजसे क्या मै कुछ फायदा ले सकता हूं .

वह मनही मन सोचकर सारी संभावनाए टटोल रहा था. सोचते हूए अचानक उसके दिमागमें एक आयडीया आ गया.
 
वह झटसे अलेक्सकी तरफ मुडते हूए बोला, अलेक्स जल्दीसे इधर आ जाओ

उसका चेहरा एक तरहकी चमकसे दमक रहा था.

अलेक्स एक्सरसाईज करते हूए रुक गया और कुछ इंटरेस्ट ना दिखाते हूए धीमे धीमे उसके पास आकर बोला, क्या है . अब मुझे ठिकसे एक्सरसाईज भी नही करने देगा

अरे इधर मॉनिटरपर तो देखो . एक सोनेका अंडा देनेवाली मुर्गी हमें मिल सकती है . अतूल फिरसे उसका इंटरेस्ट जागृत करनेका प्रयास करते हूए बोला.

अब कहा अलेक्स थोडा इंटरेस्ट लेकर मॉनिटरकी तरफ देखने लगा.

तभी चॅटींग विंडोमें अवतरीत हूवा और उपर खिसक रहा विवेकका और एक मेसेज उन्हे दिखाई दिया,

अरे बापरे . तुम्हे तुम्हारे उम्रके बारेमें पुछा तो गुस्सा तो नही आएगा . नही . मतलब मैने कही पढा है की लडकियोंको उनके उम्रके बारेमें पुछना अच्छा नही लगता है. .

उसके बाद तुरंत अंजलीने भेजा हूवा रिस्पॉन्सभी अवतरीत हूवा

साल

देख तो यह हंस और हंसिनी का जोडा. यह हंसीनी एक सॉफ्टवेअर कंपनीकी मालिक है . मतलब मल्टी मिलीयन डॉलर्स. अतूल अपने चेहरेपर आए लालचभरे भाव छूपानेका प्रयास करते हूए बोला.

तेभी फिरसे चॅटींग विंडोमें विवेकका मेसेज अवतररीत हूवा,

अरे यह तो मुझे पताही था. मैने तुम्हारे मेल आयडीसे मालूम किया था. सच कहूं तूमने जब बताया की तूम मॅनेजींग डायरेक्टर हो . तो मेरे सामने एक सालके वयस्क औरतकी तस्वीर आ गई थी.

अलेक्सने उन दोनोंके उस विंडोमें दिख रहे सारे मेसेजेस पढ लिए और पुछा, लेकिन हमें क्या करना पडेगा

क्या करना है यह सब तुम मुझपर छोड दो . सिर्फ मुझे तुम्हारा साथ चाहिए अतूल अपना हाथ आगे बढाते हूवा बोला.

कितने पैसे मिलेगे अलेक्सने असली बातपर आते हूए सवाल पुछा.

अरे लाखो करोडो में खेल सकते है हम अतूल अलेक्सका लालच जागृत करनेका प्रयास करते हूए बोला.

लाखो करोडो अलेक्स अतूलका हाथ अपने हाथमे लेते हूए बोला, तो फिर मै तो अपनी जानभी देनेके लिए तैयार हूं

तभी फिरसे चॅटींग विंडोमें अंजलीका मेसेज अवतरीत हूवा , तूमने तुम्हारी उम्र नही बताई .

उसके पिछेही विवेकका जवाब चॅटींग विंडोमें अवतरीत हूवा, मैने मेरे मेल ऍड्रेसकी जानकारीमें . मेरी असली उम्र डाली हूई है .

साल. बहूत नाजुक उम्र होती है . मछली प्यारके जालमें फसकर कुछभी कर सकती है अतूल अजिब तरहसे मुस्कुराते हूए बोला.

लगभग आधी रात हो गई थी. अतूलके कमरेका लाईट बंद था. लेकिन फिरभी कमरेमें चारो तरफ धुंधली रोशनी फैल गई थी कमरेमें, कोनेमें चल रहे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी वजहसे. अतूल कॉम्प्यूटरपर कुछ करनेमें बहुत लीन था. उसके आसपास सब तरफ खानेकी, नाश्तेकी प्लेट्स, चायके खाली, आधे भरे हूए कप्स, चिप्स, खाली हो चुके व्हिस्किके ग्लासेस और आधीसे जादा खाली हो चुकी व्हिस्किकी बॉटल दिख रही थी. उसके पिछे कॉटपर हाथपैर फैलाकर अलेक्स सोया हुवा था. उस आधी रातके सन्नाटेमें अतूल तेजीसे कॉम्प्यूटरपर कुछ कर रहा था और उसके किबोर्डके बटन्सका एक अजिब आवाज उस कमरेमें आ रहा था. उधर अतूलके पिछे सो रहे अलेक्सका बेचैनीसे करवटपे करवट बदलना जारी था.

आखिर अपने आपको ना रोक पाकर अलेक्स उठकर बैठते हूए अतूलसे बोला, यार तेरा यह क्या चल रहा है . दिनसे देख रहा हूं . दिनभर किचकिच. रातकोभी किचकिच. कभीतो शांतीसे सोने दे. तेरे इस साले किबोर्डके आवाजसे तो मेरा दिमाग पागल होनेकी नौबत आई है .

अतूल एकदम शांत और चूप था. कुछभी प्रतिक्रिया ना व्यक्त करते हूए उसका अपना कॉम्प्यूटरपर काम करना जारी था.

अच्छा तुम क्या कर रहे हो यह तो बताएगा . आठ दिनसे तेरा ऐसा कौनसा काम चल रहा है . मेरी तो कुछ समझमें नही आ रहा है . अलेक्स उठकर उसके पास आते हूए बोला.

विवेक और अंजलीका पासवर्ड ब्रेक कर रहा हूं . अंजलीका ब्रेक हो चुका है अब विवेकका ब्रेक करनेकी कोशीश कर रहा हूं अतूल उसकी तरफ ना देखते हूए कॉम्प्यूटरपर अपना काम वैसाही शुरु रखते हूए बोला. .

उधर तु पासवर्ड ब्रेक कर रहा है और इधर तेरे इस किबोर्डके किचकीचसे मेरा सर ब्रेक होनेकी नौबत आई है उसका क्या अलेक्स फिरसे बेडपर जाकर सोनेकी कोशीश करते हूए बोला.

किसका पासवर्ड ब्रेक हूवा और किसका ब्रेक होनेका रहा इससे उसे कुछ लेना देना नही था. उसे तो सिर्फ पैसेसे मतलब था. अलेक्सने अपने सरपर चादर ओढ ली, फिरभी आवाज आ ही रहा था, फिर तकिया कानपर रखकर देखा, फिरभी आवाज आ ही रहा था, आखीर उसने तकीया एक कोनेमें फाडा और उसमेंसे थोडी रुई निकालकर अपने दोनो कानोंमे ठूंस दी और फिरसे सोनेकी कोशीश करने लगा.

अब लगभग सुबहके तिन बजे होंगे, फिरभी अतूलका कॉम्प्यूटरपर काम करना जारीही था. उसके पिछे बेडपर पडा हूवा अलेक्स गहरी निंदमें सोया दिख रहा था.

तभी कॉम्प्यूटरपर काम करते करते अतूल खुशीके मारे एकदम उठकर खडा होते हूए चिल्लाया, यस. या हू. आय हॅव डन इट

वह इतनी जोरसे चिल्लाया की बेडवर सोया हूवा अलेक्स डरके मारे जाग गया और चौककर उठते हूए घबराए स्वरमें इधर उधर देखते हूए अतूलसे पुछने लगा, क्या हूवा क्या हूवा

कम ऑन चियर्स अलेक्स. हमें अब खजानेकी चाबी मिल चुकी है . देख इधर तो देख . अतूल अलेक्सका हाथ पकडकर उसे कॉम्प्यूटरकी तरफ खिंचकर ले जाते हूए बोला.

अलेक्स जबरदस्तीही उसके साथ आगया. और मॉनिटरपर देखने लगा.

यह देखो मैने विवेकका पासवर्डभी ब्रेक किया है और यह देख उसने भेजी हूई मेल अतूल अलेक्सका ध्यान मॉनिटरपर विवेकके मेलबॉक्ससे खोले हूए एक मेलकी तरफ आकर्षीत करते हूए बोला.

मॉनिटरपर खोले मेलमें लिखा हूवा था

विवेक . को सुबह बारा बजे एक मिटींगके सिलसिलेमें मै मुंबई आ रही हूं . . बजे हॉटेल ओबेराय पहूचूंगी . और फिर फ्रेश वगैरे होकर . बजे मिटींग अटेंड करुंगी . मिटींग बजेतक खत्म हो जाएगी . तुम मुझे बराबर . बजे वर्सोवा बिचपर मिलो . बाय फॉर नॉऊ. टेक केअर

चलो अब हमें अपना बस्ता यहांसे मुंबईको ले जानेकी तैयारी करनी पडेगी. अतूलने अलेक्ससे कहा.

अलेक्स अविश्वासके साथ अतूलकी तरफ देख रहा था. अब कहां उसे विवेक आठ दिनसे क्या कर रहा था और किस लिए कर रहा था यह पता चल गया था.

यार अतूल . यू आर जिनियस अब अलेक्सके बदनमेंभी जोश दौडने लगा था.

वर्सोवा बिचपर अंजली विवेककी राह देख रही थी और उधर बडे बडे पत्थरोंके पिछे छुपकर अतूल और अलेक्स अपने अपने कॅमेरे उसपर केंद्रीत कर विवकके आनेकी राह देखने लगे. थोडी देरमें विवेकभी आ गया, विवेक और अंजलीमें कुछ संवाद हुवा, जो उन्हे सुनाई नही दे रहा था लेकिन उनके कॅमेरे अब उनके एक के पिछे एक फोटो खिचने लगे. थोडीही देरमें विवेक और अंजली एकदुसरेके हाथमें हाथ डालकर बिचपर चलने लगे. इधर अतूल और अलेक्सभी पत्थरोके पिछेसे आगे आगे खिसकते हूए उनके फोटो ले रहे थे.

अंधेरा छाने लगा था और एक लमहेमें उनमें क्या संवाद हुवा क्या पता , विवेकने अंजलीको कसकर अपने बाहोंमें खिंच लिया. इधर अतूल और अलेक्सकी फोटो निकालनेकी रफ्तार तेज हो गई थी. फिरभी वे संतुष्ट नही थे. क्योंकी उन्हे जो चाहिए था वह अबभी नही मिला था.

अंजलीकी कार जब ओबेराय हॉटेलके सामने आकर रुकी. उसके कारका पिछा कर रही अतूल और अलेक्सकी टॅक्सीभी एक सुरक्षीत अंतर रखकर रुक गई. अंजली गाडीसे उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और उसके पिछे विवेकभी जा रहा था, तब अतूलने अलेक्सकी तरफ एक अर्थपुर्ण नजरसे देखा और वे दोनोभी उनके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा करने लगे.

अब अंजली और विवेक हॉटेलके रुममें पहूंच गए थे और रुमका दरवाजा बंद हो गया था. उनका पिछा कर रहे अतूल और अलेक्स अब जल्दी करते हूए उनके रुमके दरवाजेके पास आगए. अलेक्सने दरवाजा धकेलकर देखा. वह अंदरसे बंद था.

अब क्या हम यहां उनकी पहरेदारी करनेवाले है अलेक्सने चिढकर लेकिन धीमे स्वरमें कहा.

डोन्ट वरी. वुई हॅव अ सोल्यूशन अतूलने उसका हौसला बढाते हूए कहा.

अलेक्स दरवाजेके कीहोलसे अंदर हॉटेलके रुममें देख रहा था .

अंदर फोन उठाते हूए अंजलीके हाथका हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा. बादमें फोनका नंबर डायल करनेके लिए उसने दुसरा हाथ सामने किया. इसबार उस हाथकाभी विवेकको स्पर्ष हुवा. इसबार विवेक अपने आपको रोक नही सका. उसने अंजलीका फोन डायल करनेके लिए सामने किया हाथ हल्केसे अपने हाथमें लिया. अंजली उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसने अब वह हाथ कसकर पकडकर खिंचकर उसे अपने आगोशमें लिया था. सबकुछ कैसे तेजीसे हो रहा था. उसके होंठ अब थरथराने लगे थे. विवेकने अपने गरम और अधीर हूए होंठ उसके थरथराते होंठपर रख दिए और उसे झटसे अपने मजबुत आगोशमें लेकर, उठाकर, बाजुमें रखे बेडपर लिटा दिया .
 
अलेक्स अंदर कीहोलसे इतनी देरसे अंदर क्या देख रहा है . और वहभी कुछ शिकायत ना करते हूए. अतूलको आशंका हूई. उसने अलेक्सका सर कीहोल से बाजू हटाया. और वह अब खुद अंदर देखने लगा .

अंदर अंजलीके शरीर पर विवेक झुक गया था और वह उसके गलेको चुम रहा था मानो उसके कानमें कुछ कह रहा हो. धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक अंगोसे खेलने लगा. और प्रतिक्रियाके रुपमें वहभी किसी लताकी तरह उसे चिपककर सहला रही थी. हकसे अब वह उसके शरीरसे एक एक कर कपडे निकालने लगा और वहभी उसके शरीरसे कपडे निकालने लगी.

अलेक्सने अतूलकी उसका सर कीहोलसे बाजू होगा इसकी थोडी देर राह देखी. लेकिन वह वहांसे हटनेके लिए तैयार नही था. तब अलेक्सने जबरदस्ती उसका सर कीहोलसे बाजु हटाया और वह उसे बोला, मेर भाई यह देखनेसे अपना पेट भरनेवाला नही है . थोडा अपने पेट पानीका भी सोचो

अंदरका दृष्य देखनेमें लिन हूवा अतूल अब कहा होशमें आ गया.

लेकिन अब उनके फोटो तूम कैसे निकालनेवाले हो अलेक्सने कामका सवाल पुछ लिया.

डोन्ट वरी वुई आर इक्वीपड विथ टेक्नॉलॉजी. अलेक्सने उसे दिलासा दिया और उसने अपने जेबसे एक वायरजैसी चिज निकालकर उसका एक सिरा अपने कॅमेरेसे जोडा और दुसरा सिरा दरवाजेके कीहोलसे अंदर डाला.

यह क्या है . पता है अलेक्सने पुछा.

दिस इज स्पेशल कॅमेरा माय डियर अतूलने कहा और वह उस स्पेशल कॅमेरेसे हॉटेलके रुमके अंदरके सारे फोटो निकालने लगा.

शामका वक्त था. अतूल सुबहसे अबतक उसके रुममें कॉम्प्यूटरपर बैठा हूवा था. अलेक्स उसके बगलमें आकर खडा हो गया और उसका क्या चल रहा है यह देखने लगा. अलेक्सकी आहट होतेही अतूल कीबोर्डकी कुछ बटन्स दबाता हूवा बोला,

देख यह है हमने निकाली हूई तस्वीरे . कैसी लग रही है

कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर अंजली और विवेककी हॉट फोटोज किसी स्लाईड शो की तरह एकके पिछे एक ऐसी आगे आगे खिसकने लगी.

वा वा . एकदम परफेक्ट. जस्ट लाईक अ प्रोफेशनल फोटोग्राफर. अलेक्स अतूलकी सराहना करते हूए बोला.

लेकिन सिर्फ यह फोटोग्राफ्स देखकर क्या होनेवाला है . हमें आगे भी कुछ करना पडेगा . सिर्फ सुबहसे शामतक कॉम्प्यूटरपर बैठकर क्या होनेवाला है अलेक्स उसे ताना मारते हूए बोला.

अरे . अब आगेका काम यह कॉम्प्यूटरही करनेवाला है . पहले मै अंजलीके मेलबॉक्ससे विवेकको एक मेल भेजता हूं . फिर उसके बाद तुम्हारा काम शुरु होनेवाला है अतूलने कहा.

तूम मेरे कामके बारेमें एकदम बिनदास रहो . सिर्फ पहले तुम्हारा काम होनेके बाद मुझे बता देना . अलेक्सने कहा.

अतूलने काफी मेहनत करके हासिल किया हूवा पासवर्ड देकर अंजलीका मेलबॉक्स खोला और वह मेल टाईप करने लगा

विवेक. सबसे पहले तुम्हे लिखू या ना लिखू ऐसा सोचा . लेकिन बादमे तय किया की लिखनाही ठिक रहेगा . हम मुंबईको मिलनेके बाद मै वापस गई और इधर एक प्रॉब्लेम होगया . वैसे उसको प्रॉब्लेम नही बोल सकते . लेकिन तुम्हारे लिए उसे प्रॉब्लेमही कहना पडेगा . इधर मेरे रिश्तेदारोंको क्या लगा क्या मालूम लेकिन उन्होने तुरंत मेरी शादी तय की है . पहले मुझे बहुत बुरा लगा . लेकिन बादमै मैने उसके बारेमें बहुत सोचा और मै इस नतिजेपर पहूंची हू की मेरे रिश्तेदार जो भी कर रहे है वह मेरे भलेके लिए ही है . लडका अच्छा है, अमेरीकामें पढा हूवा है .इंडस्ट्रीयल फॅमिली है और हमारे बराबरीकी है . अब मुझे धीरे धीरे समझने लगा है की अबतक जो भी हमारे बिच हूवा वह एक अपरीपक्वताका नतिजा था. इसलिए तुम्हारे और मेरे लिए यही अच्छा रहेगा की कुछ हुवाही नही इस तरह सब भूल जाएं . हम मुंबईको मिले थे यह शायद मेरे रिश्तेदारोंको पता चल चुका है . तुमने मुझसे मिलनेकी या मुझसे संपर्क बनानेकी कोशीशभी की तो वे लोग तुम्हे कुछभी कर सकते है . इसलिए तुम इस मेलका रिप्लायभी मत भेजना . मेरा मेलबॉक्सभी शायद मॉनिटर किया जा रहा है . अपना खयाल रखना .इतनाही मै तुम्हे कह सकती हूं . अंजली

अतूलने मेल मानो अंजलीनेही टाईप कर विवेकको भेजी हो इस तरहसे टाईप की. मेल पुरी तरह लिखनेके बाद उसने एक बार फिरसे उसे पढकर देखा. उसके चेहरेपर एक वहशी मुस्कुराहट छुपाए नही छुपाई जा रही थी. उस मेलमें कुछभी त्रूटी बची नही है इसकी तसल्ली होतेही उसने वह मेल विवेकको भेज दी और अंजलीका मेलबॉक्स बंद किया.

इधर विवेक सायबर कॅफेमें बैठा था. उसे आशंका . नही यकिन था की अंजलीकी कोई तो मेल उसे आई होगी. उसने अपना मेलबॉक्स खोला और उसे मेलबॉक्समें अंजलीकी आई हूई मेल दिखाई दी. उसने तुरंत, मानो उसके बदनमें बिजली दौड गई हो, वह मेल खोली. मेल पढते हूए उसका खिला चेहरा एकदमसे मायूस हो गया. मेल पुरी पढनेके बादभी वह जैसे शुन्यमें देख रहा हो ऐसे मॉनिटरकी तरफ देखता रहा.

यह ऐसे कैसे हूवा .

वह अपना मजाक तो नही कर रही है .

उसे एक पलके लिए लगा.

तभी सायबर कॅफेमें एक आदमी आ गया. वह आए बराबर सिधा विवेकके पास गया. धीरेसे उसके पास झुककर उसने उसके कानमें कुछ कहा,

विवेक. आपही है ना

हां विवेक आश्चर्यसे उस आदमीकी तरफ देखते हूए बोला.

क्योंकी वह उस आदमी को पहचानता नही था.

अंजलीजी घरसे भागकर आई है . बाहर गाडीमें आपकी राह देख रही है . वह आदमी फिरसे उसके कानमें बोला.

विवेकने झटसे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर खुले हूए थे वह सब वेब पेजेस बंद कर दिए. और उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेसे बाहर निकल गया.

उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेके बाहर जाते हूए विवेक सोचने लगा.

उसने तो मुझे जो हूवा वह सब भूल जानेके लिए मेल की थी .

फिर वह अचानक भागकर क्यों आगई होगी .

शायद उसके रिश्तेदारोंने उसपर दबाव बनाया होगा .

और इसलिए उसने वह मेल लिखी होगी .

अब विवेक उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेके बाहर पहूंच गया था. बाहर सब तरफ अंधेरा था और अंधेरेमें एक कोनेमें उसे एक खिडकीयोंको सब काले शिशे लगाई हूई कार दिखाई दी.

इसी गाडीमें आई होगी अंजली.

जैसे वह आदमी उस गाडीकी तरफ बढने लगा, विवेकभी उसके पिछे पिछे उस गाडीकी तरफ बढने लगा. गाडीके पास पहूंचतेही उसके खयालमें आगया की गाडीका पिछला दरवाजा खुला है.

दरवाजा खुला रखकर वह अपनी राह देख रही होगी.

गाडीके और पास पहूंचतेही विवेकने पिछले खुले दरवाजेसे अंजलीके लिए अंदर झांककर देखा.

लेकिन यह क्या .

तभी किसी काले सायेने पिछेसे आकर उसके नाकपर क्लोरोफॉर्मका रुमाल रख दिया और उसे अंदर गाडीमें धकेल दिया. वह अंदर जानेके लिए प्रतिकार करने लगा तो उस काले सायेने लगभग जबरदस्ती उसे अंदर ठूंस दिया. गाडीका दरवाजा बंद होगया और गाडी तेजीसे दौडने लगी. विवेकके खयालमें आगयाकी उसके साथ कुछ धोखा हूवा है. लेकिन तबतक देर हो चुकी थी. उसे अब अहसास होने लगा था की वह अपना होश खोने लगा है.

जिस आदमीने विवेकको गाडीतक लाया था उसने जेबसे पैसे निकाले और वह वे पैसे गिनते हूए वहांसे निकल गया.

विवेक एक बेडपर बेसुध पडा हुवा था. अब धीरे धीरे उसे होश आने लगा था. जैसेही वह पुरी तरह होशमें आगया, उसे वह एक अन्जान जगहपर है ऐसा अहसास होगया. वह तुरंत बैठ गया और अपनी नजर चारो तरफ दौडाने लगा. उसके सामने अलेक्स और उसके दो साथी काले लिबासमें बैठे थे. उनके चेहरेभी काले कपडेसे ढंके हूए थे. विवेकने उठकर खडे होनेकी कोशीश की तब उसके खयालमें आगया की उसके हाथपैर बंधे हूए है.

वैसेही हालमें जोर लगाकर फिरसे उठकर खडे होनेकी कोशीश करते हूए वह बोला, कौन हो आप लोग . मुझे यहां कहां और क्यो लाया आप लोगोनें .

चिंता मत करो . यहां हम तुझे ठाठबाठमें रखनेवाले है . हमने तुम्हे अंजलीजीके रिस्तेदारोंके कहे अनुसार यहा लाया है . वैसे वे लोग बहुत अच्छे है . जादातर ऐसे झमेलेमें पडते नही है . लेकिन क्या करे इसबार बाते उनके बसके बाहर निकल गई . फिरभी उन्होने तुम्हे कोई तकलिफ ना हो इसका खास ध्यान रखनेकी हिदायत दी है .

अलेक्स वहांसे उठकर जानेलगा तो विवेक चिल्लाया.

मुझे छोड दो . मुझे पकडकर तुम्हे क्या मिलनेवाला है

अलेक्स जाते हूए एकदमसे रुक गया, और मुंहपर उंगली रखते हुए विवेकसे बोला,

चूप जादा आवाज नही करना .

फिर अपने दो साथीकी तरफ देखकर वह बोला, ओय. तुम दोनो इसपर ध्यान रखो .

फिर दुबारा विवेककी तरफ देखकर अलेक्स बोला, और मजनू तूम . जादा चालाकी करनेकी कोशीश मत करना. नही तो दोनो पैर तोडकर तुम्हारे हाथमें दे देंगे. और ध्यान रखो अंजलीजीके रिश्तेदार अच्छे लोग होंगे . हम नही .

अलेक्स आगे और उसके दो साथी उसके पिछे पिछे कमरेके बाहर निकल गए. उन्होने कमरेको बाहरसे ताला लगाकर चाबी उन दोनोंमेसे एक के पास दी, उसे वह चाबी संभालकर रखनेकी हिदायत दी और अलेक्स वहांसे निकल गया.

सुबहका वक्त था. एक कमरेमें अतूल कॉम्प्यूरपर बैठा था और अलेक्स उसके बगलमें बैठा हुवा था, अब देखो . हमारा मजदूरीका काम अब खत्म हुवा है अतूलने अलेक्ससे कहा और उसने कॉम्प्यूटरपर विवेकके मेलबॉक्सका ब्रेक किया हुवा पासवर्ड देकर विवेकका मेलबॉक्स खोला.

अब असली काम शुरु हो गया है . अतूल कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए बोला.

अलेक्स चूपचाप गौरसे वह क्या कर रहा है यह देख रहा था.

अतूल अब विवेकके मेलबॉक्समें मेल टाईप करने लगा
 
मिस अंजली. हाय. वुई हॅड अ नाईस टाईम . आय रिअली ऍन्जॉइड इट. खुशीसे लथपथ और आपके प्यारसे भीगे हूए वह क्षण मैने अपने हृदय और कॅमेरेमें कैद कर रखे है .

अतूलने टाईप करते हूए एक बार अलेक्सकी तरफ देखा. दोनों एक दुसरेकी तरफ देखकर अजीब तरहसे मुस्कुराए. फिर अतूल आगे टाईप करने लगा

मै तुम्हारी क्षमा मांगता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें कैद किए . वे पल थे ही ऐसे की मै अपने आपको रोक ना सका . तुम्हे झूठ लगता है . तो देखो . उन पलोंमेसे एक पलका फोटो मै इस मेलके साथ भेज रहा हूं . ऐसे काफी पल मैने मेरे कॅमेरेमें और मेरे दिलमें कैद करके रखे है . सोच रहा हूं की उन पलोंको . उन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश करुं . क्यों कैसी झकास आयडिया है नही . लेकिन वह तुम्हे पसंद नही आएगा . नही तुम्हारी अगर वैसी इच्छा ना हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे हृदयमें दफन कर सकता हूं . लेकिन उसके लिए तुम्हे एक मामुली किमत अदा करनी होगी . क्या करें हर चिजकी एक तय किमत होती है . नही .

फिरसे अतूल टाईप करते हूए रुका, वह अलेक्सकी तरफ मुडकर बोला,

अलेक्स बोलो तुम्हे कितनी किंमत चाहिए

मांगो लाख अलेक्सने कहा.

बस लाखही . ऐसा करते है तुम्हारे और मेरे . कैसा रहेगा अतूलने कहा.

अलेक्स आश्चर्यभरी आंखोसे अतूलकी तरफ देखते हूए बोला.

अतूल फिरसे बची हूई मेल टाईप करने लगा

कुछ नही बस सिर्फ लाख रुपए. तुम्हारे लिए एकदम मामुली रकम है . और हां . पैसोंका बंदोबस्त जल्दसे जल्द करो . पैसे कहां और कैसे पहूंचाने है . यह सब बादकी मेलमें बताऊंगा .

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं . लेकिन क्या करे कुछ पानेके लिए कुछ खोना पडता है . अगले मेलकी प्रतिक्षा करना. और हां . मुझे पुलिससे बहुत डर लगता है . और जब मुझे डर लगता है तब मै कुछभी कर सकता हूं . किसीका खुनभी .

तुम्हारा . सिर्फ तुम्हारा . विवेक

अतूलने पुरी मेल टाईप की. फिर एक दो बार पढकर देखी ताकी कोई गलती ना छुटे. फिर कोई गलती नही है इसकी तसल्ली होते ही सेंड बटनपर क्लीक कर अंजलीको भेजभी दी.

जब स्क्रिनपर मेल सेंट मेसेज आया. दोनोंने एक दुसरेका हाथ टकराकर ताली बजाई.

उधर अंजलीने जब मेलबॉक्स खोलकर वह मेल पढी, उसे अपने पैरोंके निचेसे मानो जमिन खिसक गई हो ऐसा लगा. उसने झटसे अपने सामने रखे इंटरकॉमपर दो डीजीट दबाए ,

मोना. सेन्ड शरवरी इन . इमिडीयटली

शामका वक्त था. अतूल एक कमरेमें कॉम्प्यूटरपर बैठा हुवा था. उस कमरेसे बगलकेही कमरेमें बंद किया हुवा विवेक दिख रहा था. लेकिन विवेकको उसके कमरेसे अतूलके कमरेमेंका कुछ नही दिख रहा था. अतूलको रातदिन कॉम्प्यूटरके सिवा कुछ सुझताही न था. अलेक्स अपना एक्सरसाईज वैगेरे निपटाकर पसिना पोंछते हूएही अतुलके पास जाकर बैठ गया.

क्यों लडकी क्या बोलती है . उसे पैसा प्यारा है या अपनी इज्जत अलेक्सने पुछा.

अलेक्सको अपने पास आकर बैठा हुवा पाकर अतुल विवेकका मेलबॉक्स खोलते हूए बोला,

देखो तुम्हे एक मजेकी चिज दिखाता हूं

अतूलने विवेकके मेलबॉक्समेंसे एक मेल खोली.

देखोतो इस मेलमें अंजलीने क्या लिखा हुवा है.

दोनो पढने लगे. मेल पढनेके बाद दोनो उनके कमरेको और विवेकके कमरेंको अलक करते कांचसे विवेककी तरफ देखने लगे.

देखोतो इस मेलमें यह अंजली .

विवेकको समझानेकी कोशीश कर रही है.

वह सोच रही होगी.

कबूतरकी एकदमसे कैसे मर सारी वफाए.

अब इसको क्या बताएं, कैसे समझाए

कि बेचारा इधर पिंजरेमे बंधा तडप रहा है

फिरसे विवेककी तरफ देखते हूए उन्होने एक दुसरेके हाथसे ताली बजाई और वे जोरसे हंसने लगे. दोनोंका हंसना थमनेके बाद अलेक्सने एक आशंका उपस्थित की,

यह विवेक अपने होस्टेलसे अचानक गायब होनेसे वहा कुछ हंगामा तो नही खडा होगा

अरे हां . अच्छा हुवा तुमने याद दिलाया . उसके होस्टेलमें रह रहे उसके किसी दोस्तको मेल कर उसका बंदोबस्त करता हुं अतूलने कहा.

अतूल मेल टाईप करने लगा और टाईप करते हूए बोला, लेकिन अलेक्स याद रखो . इसके आगेही असली खतरा है . इसके आगे हमे सारी मेल्स अलग अलग सायबर कॅफेमें जाकर भेजनी पडेगी . नही तो ट्रेस होनेका बडा खतरा है .

. कॉम्प्यूटरपर मेल आनेका बझर बजतेही अंजलीने अपना मेलबॉक्स खोला. उसे एक नई मेल आयी हूई दिखाई दी. वह मेल उसने भेजे स्निफर प्रोग्रॅमकीही थी. उसने झटसे वह मेल खोली और

यस्स उसके मुंहसे जितभरे उद्गार निकले.

उसने भेजे स्निफरने अपना काम सही सही निभाया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और .

यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड कहते हूए विवेकका मेल ऍड्रेस टाईप करते हूए उस प्रोग्रॅमको विवेकके मेलका पासवर्ड दिया.

अंजलीने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और की बोर्डकी दो चार बटन्स और दोन चार माऊस क्लीक्स दबाए. और दोनोभी कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

ओ माय गॉड . आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह अंजलीके खुले मुंहसे निकला.

शरवरी कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी अंजलीके आश्चर्यसे खुले मुंहकी तरफ देख रही थी.

शरवरी यह देखो विवेकके मेलबॉक्समें . देखो यह मेल . जो है तो मेरे नामकी पर मैने भेजी नही है . मतलब शरवरीने पुछा.

मतलब मै और विवेकके अलावा दुसरा कोई है जो यह मेल अकाऊंटस खोल रहा है . और हो सकता है वही तिसरा आदमी जो मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है . लेकिन वह तिसरा है कौन

कॉन्फरंस रुममें अंजली, इन्स्पेक्टर कंवलजीत और शरवरी बैठे हूए थे. अंजली इन्स्पेक्टर और शरवरीसे इसी केसके सिलसिलेमें कुछ बाते कर रही थी. सब कुछ बयान होनेके बाद अंजलीने एक लंबी सांस ली और आगे कहा,

तो पुरी कहानी इस प्रकार है .

अंजलीने फिरसे एकबार सामने बैठे इन्स्पेक्टर कंवलजीत और शरवरीकी तरफ देखा.

कंवलजीत अंकल. अब मुझे डर . वह ब्लॅकमेलर फोटो इंटरनेटपर डालेगा क्या इस बात का नही है . मुझे असली चिंता है विवेककी . शायद विवेक उनके कब्जेमें है . उसके जानको खतरातो नही अंजलीने अपना डर जाहिर किया.

उसकी जो मेल आई थी उसे हमारे एक्स्पर्टसने ट्रेस करनेकी कोशीश की थी . एक्सॅक्ट लोकेशन और कॉम्प्यूटरका तो कुछ पता नही चला . लेकिन इतना जरुर पता चला की मेल मुंबईसे कहीसे की गई होगी.

इसका मतलब पैसे कहां देना है और कैसे देना है यह बतानेवाली मेलभी मुंबईसेही आएगी इतनी देरसे चुप्पी साधी हूई शरवरी पहली बार बोली.

शायद हां . या शायद ना भी . यह वह क्रिमीनल कितना पहूंचा है इसपर निर्भर करेगा . लेकिन इसबार हम पहलेसेही तयार होनेसे, मेल कौनसे गांवसे, उस गांवके किस जगहसे और कौनसे कॉम्प्यूटरसे आई यह हमे पता चल सकेगा . इन्सपेक्टरने कहा.

इसका मतलब हमारे पास उसके अगले मेलका इंतजार करनेके अलावा दुसरा कोई चारा नही है . अंजली निराश होकर बोली.

हां . लगता तो ऐसाही है . इन्स्पेक्टरभी सोचते हूए सारी संभावनाए जांचते हूए बोला.

एक पुरानी कार एक सायबर कॅफेके पास आकर रुकी. गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर अलेक्स बैठा हूवा था और उसके बगलके सिटपर अतूल बैठा हूवा था. शायद किसीको शक ना हो इसलिए उन्होने वहां आनेके लिए और अगले सारे कामके लिए उस पुरानी कारको चूना था. गाडी रुकतेही गाडीसे अतूल निचे उतरा.

तूम अब पैसे लानेके लिए निकल जावो . मै मेलपर उसे जगहकी सारी जानकारी देता हूं . और सुनो . जरा संभलकर . तुम्हे काफी अंतर तय करना है अतूलने उतरते हूए अलेक्ससे कहा.

यू डोन्ट वरी. तूम एकदम बिनधास्त रहो अलेक्स गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर बैठे हूए बोला.

अच्छा पैसे मिलनेके बाद उस पंटरका क्या करना है अलेक्सने कुछ सोचते हूए पुछा. उसका इशारा विवेककी तरफ था.

उसका क्या करना है . यह बादमें देखेंगे . लेकिन वह अपनी महबुबाके लिए शहीद होगा इसकी जादा संभावना पकडकर हमे चलना होगा. क्योंकी रास्तेसे चलते हूए सामने आए गढ्ढोंको भरते हूए आगे जाना जरुरी होता है . नही तो वापस आते हूए उसी गढ्ढोंमे फिसलकर गिरनेकी संभावना जादा होती है. अतूल उतरते हूए गुढतासे हसते हूए अलेक्सकी तरफ देखते हूए बोला.

अलेक्सभी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया.

अतूल गाडीसे उतरा और सायबर कॅफेकी तरफ निकल पडा. अलेक्सने गाडी आगे बढाई और अगले चौराहेपर मुडकर वह तेजीसे आगे निकल गया.

अतूल सायबर कॅफेमें एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठा था. उसने चॅटींग सेशन खोला और अंजलीभी चाटींग रुममें है यह देखकर उससे चॅटींग शुरु की

हाय मिस. अंजली

उधर अतूलने भेजा हुवा मेसेस अंजलीके मॉनिटरपर अवतरीत हुवा. और तभी शरवरी अंजलीके कॅबिनमें आ गई. शरवरीको देखतेही अंजलीने उसे उसकाही मेसेज है ऐसा इशारा किया. इशारा मिलतेही शरवरी तुरंत कॅबिनके बाहर गई. बाहर जाकर शरवरी अंजलीके ऑफीसके बगलमें स्थित एक रुममें चली गई. उस रुममें इन्स्पेक्टर कंवलजीत और, और दो लोग एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. शरवरीने कमरेमें प्रवेश करतेही कहा

सर उसका मेसेज आया है

वे तिनों एकदम सतर्क होकर, सिधे बैठकर कॉम्प्यूटरकी तरफ देखने लगे.

कम ऑन सुरज ट्रेस द ब्लडी बास्टर्ड उन दोनोंको उत्साहीत करनेके उद्देशसे इन्सपेक्टरने कहा.

सर ही इज ट्रेस्ड . द कॉल इज अगेन फ्रॉम मुंबई . ऍन्ड सी द आय पी ऍड्रेस.
 
इन्स्पेक्टरने मॉनिटरकी तरफ देखा और तुरंत मोबाईल लगाया,

हॅलो राज. हमने उस ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है . उसे अभीभी अंजलीने चॅटींगपर बिझी रखा है . तूम वहां मुंबईमें उसके सही सही ठिकानेका पता लगाओ . ऍन्ड सी दॅट द फेलो शुड नॉट एस्केप. हां यह लो ब्लॅकमेलरका आय पी ऍड्रेस .

अबभी अंजलीको ब्लॅकमेलरका मेसेज हाय मिस अंजली उसके चॅटींग विंडोमें दिख रहा था. वह अब मनही मन उसे जादासे जादा वक्त तक चॅटींगपर कैसे बिझी रखा जाए ताकी पुलिस उसे ट्रेस कर पकड सकें, इसके बारेमें सोच रही थी. तभी अगला मेसेज आया,

अंजली प्लीज ऍकनॉलेज युवर प्रेसेन्स

अब अंजलीके पास कुछतो मेसेजे भेजनेके अलावा कोई चारा नही था, नही तो वह डिस्कनेक्ट होनेका डर था.

हॅलो. उसने मेसेज टाईप कर भेजा.

इधर इन्स्पेक्टरने फिरसे मुंबईको फोन लगाया.

राज . कुछ पता चला

यस सर . द एरीया वुई हॅड जस्ट फाईन्ड आऊट. इट्स ठाणे. बट द एक्सॅक्ट स्पॉट वुई आर ट्राईंग टू लोकेट. उधरसे राज बोल रहा था.

कमॉन डू समथींग ऍन्ड फाईन्ड आऊट क्वीकली इन्स्पेक्टरने कहा.

उधर अंजलीको ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आया

मै मेलमें सारी डिटेल्स भेज रहा हूं .

अंजलीको लगा की उसे सारी डिटेल्स चॅटींगपरही भेजनेके लिए कहा जाए . लेकिन नही उसे आशंका होगी .

लेकिन वह अब डिस्कनेक्ट कर सकता है . उससे संभाषण जारी रखना आवश्यक था.

अचानक उसे कुछ सुझा और उसने मेसेज टाईप किया,

लेकिन लाख रुपए देनेके बादभी तुम मुझे ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी

उधर इन्सपेक्टरको चैन नही पड रहा था. उन्होने फिरसे मुंबई राजको फोन लगाया,

राज . कुछ पता चला

सर वुई हॅव फाऊंड आऊट द एक्सॅक्ट लोकेशन ऍन्ड दी एक्सॅट स्पॉट. उधरसे राजने कहा.

गुड व्हेरी गुड. नाऊ क्वीकली इन्स्ट्रक्ट द ठाणे पुलिस टू रेड द स्पॉट . इन्स्पेक्टरने जोशके साथ कहा.

यस सर उधरसे प्रतिक्रीया आ गई .

अंजली अब सोच रही थी की वह उसे चटींगपर बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही की नही, क्योंकी अबतक उसका कोई रिप्लाय नही आया था.

तभी उसका रिप्लाय आ गया,

देखो . यह दुनिया भरोसेपर चलती है . तुम्हे मुझपर भरोसा करनाही पडेगा . और तुम्हारे पास उसके अलावा दुसरा कोई चाराभी नही है

उसके मायूस चेहरेपर खुशीकी एक लहर दौड गई, क्योंकी कमसे कम अबतक वह उसे बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही थी.

अब आगे उसे और उलझानेके लिए क्या मेसेज भेजा जाए, वह सोच रही थी और उसने कुछ टाईपभी किया. लेकिन तभी ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आ गया

ओके देन बाय. दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन. टेक केअर. तुम्हारा . और सिर्फ तुम्हारा विवेक.

वह और कुछ टाईप कर उसे भेजती उससे पहलेही वह चॅटींग रुमसे गायब होगया.

वह इतने जल्दी चॅटींग खत्म करेगा ऐसा उसे अंदेशा नही था. अंजली तुरंत अपने कुर्सीसे उठकर जल्दी जल्दी अपने कॅबिनसे बाहर निकल गई. बाहर आकर सिधे वह बगलके रुममे, जहां इन्स्पेक्टर और दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बैठे थे वहा चली गई. अंजली वहा पहूंचतेही वे अंजलीके डरसे सहमें चेहरेकी तरफ देखने लगे थे.

अंकल उसने अभी अभी चॅटींग शेशन क्लोज किया है . लेकिन मुझे यकिन है की वह अबभी इंटरनेटपर कनेक्टेड होगा और मेल लिख रहा होगा . अंजलीने कहा.

डोन्ट वरी. ठाणे पुलिस हॅव ऑलरेडी स्टार्टेड टू रेड द लोकेशन. इन्स्पेक्टरने कहा.

पुलिसकी एक गाडी आकर एक सायबर कॅफेके सामने रुकी. गाडीसे एक इन्स्पेक्टर चार पाच हवालदारोंको साथमें लेकर सायबर कॅफेकी तरफ चलने लगा. वे हवालदार उसके अगले आदेशकी राह देखते हूए उसके पिछे पिछे चलने लगे. इन्स्पेक्टर सायबर कॅफेमें घूस गया और उसके पिछे वे चार हवालदारभी कॅफेमें घुस गए. पहले वे रिसेप्शन काऊंटरपर रुके. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ एकदम इतने पुलिसको देखकर हडबडाकर उठ खडा हूवा.

यस सर. उस स्टाफके मुंहसे मुश्कीलसे निकला.

इन्स्पेक्टरने उससे कुछ ना बोलते हूए उसके सामने रखा लॉग रजिस्टर उठाया और उसमें वह कुछ खोजनेकी कोशीश करने लगा.

क्या हुवा साब वह स्टाफ फिरसे हिम्मत करके बोला.

इन्स्पेक्टरने गुस्सेसे सिर्फ उसकी तरफ देखा, वैसे वह सहम गया और चुप होगया. इन्स्पेक्टर लॉगबुकमें एक एक एन्ट्री ठिकसे देखने लगा. एक जगह इन्स्पेक्टरकी रजीस्टरपर दौडती उंगली रुक गई और आंखोकी पुतलीयांभी स्थिर हो गई. उस एन्ट्रीमें नाम के रकानेमें विवेक सरकार ऐसा लिखा हुवा था. इन्स्पेक्टर मन ही मन मुस्कुराया. उसे शायद ब्लॅकमेलरने सब सावधानी बरतनेके बावजुद वह अब पकडा जाने वाला है इस बातकी हंसी आ रही होगी. इन्स्पेक्टर उस एन्ट्रीके सामने दी सारी जानकारी पढते हूए बोला,

सतरा नंबर किधर है

आवो मेरे साथ. मै तुम्हे उधर ले जाता हूं वह स्टाफ इन्स्पेक्टरको एक तरफ ले जाते हुए बोला. वह सायबर कॅफेका स्टाफ आगे आगे और इन्स्पेक्टर अपने साथीयोंके साथ उसके पिछे पिछे चल रहे थे.

चलते हूए एक जगह रुककर उस स्टाफने एक बंद कॅबिनका दरवाजा धकेलकर खोला. सब पुलिस अब गुनाहगारको पकडनेके तैयारीमें थे. लेकिन कॅबिन खोलतेही जब उन्होने कॅबिनके अंदर देखा, उनके चेहरे खुलेकी खुलेही रह गए. क्योंकी कॅबिन खाली थी. कॅबिनमें कॉम्प्यूटर शुरु था लेकिन कॅबिनमें कोई नही था. इन्स्पेक्टरने चारो हवालदारोंको कॅफेमें चारो तरफ उस गुनाहगारको ढुंढनेके लिए भेजा.

इन्स्पेक्टर और चारो हवालदारोंने काफी समय तक सारा कॅफे और कॅफेके आसपासका इलाका छान मारा . लेकिन कुछभी हाथ नही लगा. गुनाहगार अब उनके कब्जेमें आनेवाला नही है इसकी तसल्ली होतेही इन्स्पेक्टरने मोबाईल लगाया,

सर आय थींक वुई वेअर लेट बाय फ्यू सेकंड्स . हि हॅज एस्केप्ड. आय ऍम सॉरी. हम उसे पकड नही पाए

इन्स्पेक्टर कंवलजीत मोबाईलपर बोल रहे थे और उनके आसपास अंजली, शरवरी और वे दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बडी आशासे क्या हुवा यह सुननेका प्रयास कर रहे थे.

शिट . एस्केप्ड. इन्स्पेक्टर झुंझलाए.

और कुछ पल कुछतो सोचनेजैसा करनेके बाद वह मोबाईलपर बोले,

अब एक काम करो . वहांसे उसके फिंगर प्रिट्स लो . जिस कॉम्प्यूटरपर वह बैठा था उसके फोटोग्राफ्स लो . ऍन्ड सी द हिस्ट्री लॉग ऑफ द कॉम्प्यूटर

यस सर उधरसे जवाब आया.

इन्सपेक्टरने मोबाईल डिस्कनेक्ट किया और निराशासे अंजलीकी तरफ देखते हूए उसे किस तरह कहां जाए यह सोचने लगे.

द ब्लडी बास्टर्ड हॅज एस्केप्ड. उन्होने कहा.

लेकिन उनके बातचित और हावभावसे कमरेमें उपस्थित सारे लोग यह बात पहलेही समझ चुके थे.

जंगलमें सब तरफ सुखे पत्ते फैले हूए थे. उन सुखे पत्तोकों रौंदते हूए एक काले शिशे चढाई हूई कार धीरे धीरे उस जंगलसे गुजरने लगी. वह कार जब जंगलसे गुजर रही थी तब उन सुखे पत्तोंके रौंदनेसे एक अजिबसी आवाज उस जंगलके शांतीमे बाधा डाल रही थी. आखिर एक पेढके पास वह कार रुक गई. उस कारके ड्रायव्हर सिटवाला शिशा धीरे धीरे निचे खिसकने लगा और अब वहां ड्रायव्हीग सिटपर बैठी हुई काला चष्मा लगाई हूई अंजली दिखने लगी. उसने एक पेढपर लगाई लाल निशानी देखी और उसने बगलके सिटपर रखी एक ब्रिफकेस उठाकर खिडकीसे उस निशान लगाए पेढकी तरफ फेंक दी. ब्रिफकेसका धप्प ऐसा आवाज आ गया. उसने फिरसे अपनी पैनी नजर चारो तरफ घुमाई और अपनी कार स्टार्ट कर वह वहांसे चली गई.

जंगलसे बाहर निकलकर अंजलीकी कार अब प्रमुख रस्तेपर आ गई थी. तभी अंजलीका मोबाईल बजा.

अंजलीने डिस्प्ले ना देखते हूएही वह अटेंड किया, हॅलो.

हॅलो. मै इन्स्पेक्टर कंवलजीत बोल रहा हूं . उधरसे आवाज आया.

यस अंकल.

पैसे कब और कहां भेजने है इसके बारेमें ब्लॅकमेलरकी मेल तुम्हे आईही होगी इन्स्पेक्टर कंवलजीतने पुछा.

हां आई थी . सच कहूं तो मै अब वहां पैसे पहूंचाकर वापसही आ रही हूं अंजलीने कहा.

व्हॉट. इन्स्पेक्टरके स्वरमें आश्चर्य स्पष्ट झलक रहा था.

आय जस्ट कांन्ट बिलीव्ह धीस. तुमने मुझे बताया नही . हम जरुर कुछ कर सकते थे. इन्स्पेक्टरने आगे कहा.

नही अंकल अब यहां मुझे पुलिसका शामिल होना नही चाहिए था . . एक बार तो पुलिस पुरी तरहसे नाकामयाब रही है . यहां मै चान्स लेना नही चाहती थी . और मुझे चिंता सिर्फ विवेककी है . पैसे जानेका अफसोस मुझे नही . बस ब्लकमेलरको पैसे मिलनेके बाद वह विवेकको छोड देगा . और पुरा मसलाही खत्म हो जाएगा अंजलीने कहा.

मै प्रार्थाना करता हूं की तूम जैसा सोचती हो. सब वैसाही हो . लेकिन मुझे चिंता होती है तो बस इस बातकी की अगर वैसा नही हुवा तो इन्स्पेक्टरने कहा.

मतलब अंजलीने पुछा.

मतलब . तुमने पैसे देकरभी उसने अगर विवेकको नही छोडा तो इन्स्पेक्टरने अपना डर जाहिर किया.

अंजली एकदम सोचमें पड गई.
 
अतूल और अलेक्स उस काले ब्रिफकेसके सामने बैठे थे. उनके चेहरेपर खुशी झलक रही थी. आखिर अतूलने अपने आपको ना रोक पाकर वह बॅग खोली. दोनो आंखे फाडकर उन पैसोंकी तरफ देख रहे थे. अतूलने उस बॅगसे एक पैसोंका बंडल उठाया, अपने नाकके पास लिया और वह उस बंडलसे अपनी उंगली फेरते हूए उस नोटोंकी खुशबु लेने लगा.

देख तो कितनी अच्छी खुशबु आ रही है . अतूलने कहा.

अलेक्सनेभी एक बंडल उठाकर उसकी खुशबु लेते हुए वह बोला,

और देखोतो अपने मेहनतके कमाईके पैसेकी खुशबु कुछ औरही आती है . नही

दोनोंने हंसते हूए एक दुसरेकी जोरसे ताली ली.

इतने सारे पैसे वहभी एकसाथ. मै तो पहली बार देख रहा हूं अलेक्सने कहा.

दोनों उस बैगमें हाथ डालकर सारे बंडल्स उलट पुलटकर देखने लगे.

नोटोंके बंडल्स देखते हूए अलेक्स बिचमेही रुककर बोला, अब उस पंटरका क्या करना है . उसे छोड देना है

छोड देना है . कहीं तुम पागल तो नही हूए . अरे अब तो शुरवात हूई है . मुर्गीने अंडे देनेकी अबतो शुरवात हुई है अतूल बिभत्स हास्य धारण करते हूए बोला.

अंजली अपने कुर्सीपर बैठकर कुछ ऑफीशियल कागजाद उलट पुलटकर देख रही थी और उसके बगलमेंही शरवरी कॉम्प्यूटरपर बैठकर कुछ ऑफीशियल काम कर रही थी. तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

उसकाही मेसेज है शरवरीने बताया.

अंजली उठकर कॉम्प्यूटरके पास गई. उसके आतेही कॉम्प्यूटरके सामनेसे उठकर उसने अंजलीको जगह दे दी.

जा जल्दी जा अंजलीने कॉम्प्यूटरके सामने बैठते हूए शरवरीसे कहा.

शरवरी तुरंत वहांसे निकलकर कॅबिनके बाहर चली गई. अंजलीके कॅबिनसे बाहर आकर शरवरी सीधे बगलके रुममें चली गई. वहां इन्स्पेक्टर कंवलजित और वे दोनो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. शरवरी जल्दी जल्दी उनके पास गई. उसकी आहट होतेही तिनो पलटकर उसकी तरफ मुडकर देखने लगे.

जैसे आपने बोला था वैसाही हो गया . ब्लॅकमेलरका फिरसे मेसेज आ गया है . शरवरी जल्दी जल्दी आनेसे सांस फुले स्थितीमें बोली.

वे दोनों कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस कुछ ना बोलते हूए अपने काममें लग गए.

सुरज. कम ऑन. इस बार किसीभी हालमें साला छुटना नही चाहिए.

सर ऍज बिफोर दिस टाईम ऑल्सो हि इज कॉलींग फ्रॉम मुंबई. और उसका आय पी ऍड्रेस देखिए . एक्सपर्टने सॉफ्टवेअरके कुछ रिपोर्ट्स देखते हूए कहा.

वह बोलनेके पहलेही इन्सपेक्टरने मुंबईको इन्स्पेक्टर राजको फोन लगाया,

हां राज . फिरसे हमने ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है . अबभी वह चटींगही कर रहा है . तुम उसकी एक्सॅक्ट लोकेशनका पता करो . ऍन्ड सी दॅट दिस टाईम द बास्टर्ड शुड नॉट एस्केप. और हां उसका आय पी ऍड्रेस लिख लो .

अतूल सायबर कॅफेमें एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर चॅटींगमें उलझा हुवा था.

मिस अंजली. हाय कैसी हो उसने मेसेज टाईप कर भेजा.

काफी समय हो गया था फिरभी उसका जवाब नही आया था. लेकिन उसका नामतो चॅटींगमें दिख रहा था.

कॉम्प्यूटर खुला छोडकर कही गई तो नही साली.

या फिर अपना अचानक मेसेज आनेसे गडबडा गई होगी .

उसने सोचा. अबभी उसका मेसेज आया नही था. गुस्सेसे उसका चेहरा लाल होने लगा था. तभी उधरसे मेसेज आ गया , ठिक हूं

तब कहा अतूलने चैनकी सांस ली. वह अब अगला मेसेज, जो उसके लिए बहुत महत्वपुर्ण था, टाईप करने लगा,

तुम्हे फिरसे तकलिफ देते हूए मुझे बुरा लग रहा है . लेकिन क्या करे . पैसा यह साली चिजही ऐसी है . कितनेभी संभलकर इस्तमाल करो तो भी खतम हो जाती है . मुझे इस बार लाख रुपएकी सख्त जरुरत है .

अतूलने टाईप कर मेसेज भेजभी दिया.

अभी तो तुम्हे लाख रुपए दिए थे मैने . अब मेरे पास पैसे नही है . उधरसे अंजलीका दोटूक जवाब आया.

बस यह आखरी बार . क्योंकी यह पैसे लेकर मै परदेस जानेकी सोच रहा हूं विवेकने कुछ सोचकर टाईप किया और सेंड बटनपर क्लिक किया.

तुम परदेस जावो . या और कही जावो . मुझे उससे कुछ लेना देना नही है . देखो . मेरे पास कोई पैसोका पेढ तो है नही . अंजलीका मेसेज आया.

अतुलको फिरसे गुस्सा आ रहा था, लेकिन अपने गुस्सेपर काबू करते हूए उसने टाईप किया.

ठिक है . तुम्हे अब मुझे कमसे कम लाख रुपए तो भी देने पडेंगे . पैसे कब कहा और कैसे पहूंचाने है वह मै तुम्हे मेल कर सब बता दुंगा .

उसने सेंड बटनपर क्लिक कर मेसेज भेज दिया, और चॅटींग सेशनसे लॉग आऊटभी कर दिया. वह अंजलीसे जादा बहस नही करना चाहता था.

अब अतुल मेलबॉक्स खोल रहा था, तभी उसका ध्यान यूंही खिडकीके बाहर गया और वह भौंचक्का होकर उधर देखने लगा. बाहर एक पुलिस इन्स्पेक्टर और, और एक दो पुलिस तेजीसे सायबर कॅफेके तरफही आ रहे थे. अब अतूलके हरकतोंमे तेजी आ गई. उसने झटसे अपना कॉम्प्यूटर ऑफ किया और काऊंटरपर पैसे देकर वह सायबर कॅफेसे बाहर निकल गया. वह बाहर निकल गया उसके बाद कुछ पलही गुजर गए होंगे जब जल्दी जल्दी पुलिस इन्स्पेक्टर और उसके साथी सायबर कॅफेमें घुस गए. सायबर कॅफेमें प्रवेश करतेही इन्सपेक्टरने ऐलान किया,

नो बडी वील गो आऊट ऑफ दी कॅफे. ऑल ऑफ यू स्टे व्हेअर यू आर. नो बडी वील मुव्ह

अंजलीके कॅबिनके बगलके रुममें दो कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस, अंजली और शरवरी बडी आस लगाए मोबाईलपर बोल रहे इन्स्पेक्टर कंवलजितकी तरफ देख रहे थे.

इन्स्पेक्टरने मोबाईल अपने कानसे हटाया और मायूसीसे अंजलीकी तरफ देखते हूए कहा,

द बास्टर्ड इस मॅनेज्ड टू एस्केप अगेन.

अंजली और शरवरी ने एकदुसरेकी तरफ देखा, उनके खिले हूए चेहरे मायूस हो गए थे.

अंजली अपने कॅबिनमें अपने काममें व्यस्त थी. तभी फोनकी घंटी बजी.

हॅलो अंजलीने फोन उठाया.

अंजली देअर इज गुड न्यूज फॉर यू. उधरसे इन्स्पेक्टर कंवलजित बोल रहे थे.

यस अंकल

ब्लॅकमेलरने विवेकको छोड दिया है . इन्स्पेक्टरने अंजलीको खुशखबरी सुनाई.

ओ. थॅंक गॉड . आय कान्ट एक्सप्लेन . आय ऍम सो हॅपी.

अंजलीको विवेकके छुटनेकी खबर जबसे मिली थी तबसे उसे कुछभी सुझ नही रहा था. उसे कब मिलती हूं ऐसा उसे हो रहा था. वह ऑफीसका सारा काम वैसाही छोडकर सिधे एअरपोर्टकी तरफ निकल पडी.

. उसे पहले बताना कैसा रहेगा

नही . उसे सरप्राईज देते है .

और उसे डायरेक्ट बतानेका कोई रास्ताभी तो नही .

इमेल थी. लेकिन आजकल अंजलीको इमेल, चॅटींग इन सारी चिजोंसे सक्त नफरत और मनमें डरसा बैठ गया था.

एअरपोर्ट आया वैसे उतरकर उसने ड्रायव्हरको गाडी वापस ले जानेके लिए कहकर वह लगभग दौडते हूए तिकिट काऊंटरके पास गई.

मुंबईके लिए . अब कोई फ्लाईट है उसने पुछा.

वन फ्लाईट इज देअर . जस्ट रेडी टू टेक ऑफ. काऊंटरपर बैठे लडकिने बताया.

वन टीकट प्लीज अंजली अपना क्रेडीट कार्ड आगे करते हूए बोली.

उसने काऊंटरसे टिकट खरीदा और लगभग दौडते हूए ही वह फ्लाईटकी तरफ दौड पडी. तभी उसका मोबाईल बजा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. डिस्प्लेपर उसके ऑफिसका नंबर था. उसने आगे कुछ ना सोचते हूए ही फोन बंद किया और दौडते हूएही फ्लाईटमें जाकर बैठ गई. सिटवर बैठतेही फिरसे उसका मोबाईल बजने लगा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. वही ऑफीसका नंबर

ऑफीसचा नंबर. क्या काम होगा . शरवरी एक कामभी ठिकसे नही संभाल सकती .

उसने फोन बंद किया. लेकिन वह फिरसे बजने लगा.

शरवरी कभी ऐसा बार बार फोन नही करती .

कुछ तो जरुरी काम होगा .

उसने फोन उठाया और उधर फ्लाईटका लास्ट कॉल हो गया.

क्या है शरवरी . वह लगभग चिढकरही बोली.

लेकिन यह क्या उधरसे आनेवाला आवाज आदमीका था हां विवेकका आवाज था.

विवेक तूम. वह एकदमसे सिटसे उठकर खडी होते हूए बोली, ऑफीसमें तुम कैसे . कब. और वहां क्या कर रहे हो . उसे क्या बोला जाए कुछ समझ नही आ रहा था.

वह बोलते हूए जल्दी जल्दी प्लेनके दरवाजेकी तरफ जा रही थी.

तुम्हे मिलनेके लिए आया था उधरसे विवेकका आवाज आया.

वह जब प्लेनके दरवाजेके पास पहूंची तब प्लेनका दरवाजा बंद किया जा रहा था.

रुको मुझे उतरना है .

क्यों क्या हुवा अटेंडंट्ने पुछा.

आय ऍम नॉट फीलींग वेल उसके पास अब पुरी बात समझानेका वक्त नही था.

वह दरवाजा बंद करते हूए रुक गया. और वह तेजीसे चलते हूए प्लेनसे उतर गई.

वह अटेंडंट उसकी तरफ आश्चर्यसे देख रहा था.

इसकी तबीयत ठिक नही . फिर वह इतने जल्दी जल्दी और जोशके साथ कैसे उतर रही है उसके मनमें आया होगा.

उसकी टॅक्सी लगभग अब उसके घरके पास पहूंच गई थी. टॅक्सी जैसेही उसके घरतक आकर पहूंची उसके दिलकी धडकने तेज हो रही थी. प्लेनसे बाहर निकलतेही वह सिधे एअरपोर्टके बाहर आ गई थी और टॅक्सी लेकर उसने टॅक्सीवालेको सिथे उसके घर ले जानेके लिए कहा था. और प्लेनमें जब विवेकका फोन आया था तभी उसने उसे अपने घर आनेके लिए कहा था. उसे ऑफीसमें सिन नही चाहिए था. तबतक टॅक्सी उसके घरके आहातेमें आकर रुकी. उसे पोर्चमेही विवेक उसकी बडी अधिरतासे राह देखता हूवा दिखाई दिया. उसकी टॅक्सी आतेही वह पोर्चसे उतरकर उसके टॅक्सीके पास आ गया. उसेभी अब रहा नही जा रहा था. टॅक्सीका दरवाजा खोलकर सिधे वह उसके बाहोंमे घुस गई. न जाने कितने दिनोंसे वे एक दुसरेकों मिल रहे थे. अंजली के आंखोमें आंसू आ गए और वे फिर रुकनेका नाम नही ले रहे थे.

अरे अरे. यह क्या विवेक उसे थपथपाते हूए बोला.

देखो तो मै पुरा की पुरा सहीसलामत तुम्हारे पास पहूंच गया हूं वह मजाकिया अंदाजमे, मौहोल थोडा ढीला करनेके लिए बोला.

लेकिन वह उसे इतनी मजबुतीसे चिपक गई थी की वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी.
 
अंजली और विवेक जबसे आए थे तबसे अंजलीके बेडरुममें, एक दुसरेकों बाहोंमे भरकर, लेटे हूए थे. ना उन्हे खानेकी सुध ती ना पिनेकी.

जब उसकी पहली मेल आई, तब तुम्हे क्या लगा विवेकने पुछा.

सच कहूं . मुझे तो मानो मेरे पैर के निचेसे जमिन और सर के उपरसे आसमान खिसक गया ऐसा लगा था. मैने तो दिलसे तुम्हे स्विकारा था और ऐसी स्थितीमें ऐसाभी कुछ हो सकता है, मैने सपनेभी नही सोचा था. अंजलीने कहा.

इसका मतलब तुम्हे सब सच लगा था विवेकने मजाकिया अंदाजमें पुछा.

अरे. मतलब . भलेही दिल नही मानता था पर परिस्थितीयां उसीके ओर इशारा कर रही थी. अंजलीने अपना बचाव करते हूए कहा.

और तुम्हे क्या लगा था अंजलीने पुछा.

नही तुम ठिक कहती हो . मेराभी हाल कुछ कुछ तुम जैसाही था . भलेही दिल ना माने परिस्थितीयां किसी ओर इशारा कर रही थी. विवेकने उसे सहलाते हूए कहा.

ऐसा वक्त फिरसे अपने जिंदगीमें कभी ना आए अंजलीने कहा.

सचमुछ. पहले तो मुझे अपने प्यारको किसीकी नजर लगी हो ऐसाही लग रहा था. विवेक उसके माथेको चुमते हूए बोला.

उसने उसके माथेको चुम लिया और वह उसके होंठोके पास अपने होंठ ले जाकर बडे बडे सांस लेते हूए वही रुक गया. और फिर आवेशके साथ एकदुसरेके होठोंको अपने मुंहमें लेकर वे एक बडे चुंबनमें मशगुल हो गए.

अचानक अंजलीको उनका पहले हॉटेलमें हुवा वह प्रणय याद आ गया और उसीके साथ कोई उनके फोटो खिंच रहा है ऐसा आभास हो गया.

वह झटसे अपने होंठ उसके होठोंसे हटाते हूए वह पिछे हट गई.

क्या हुवा विवेकने पुछा.

हम वही गलती दुबारा तो दोहरा नही रहे है अंजलीने मानो खुदसेही पुछा.

मतलब विवेकने पुछा.

यह सब और वहभी शादीसे पहले. तूम मेरे बारेंमे क्या सोच रहे होगे अंजलीने अपने जहनमें उठा दुसरा सवालभी पुछा.

डोन्ट बी सिली वह फिरसे पहल करते हूए बोला.

लेकिन उसके हाथपैर मानो ठंडे पड चुके थे. वह कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रही थी.

तुम्हे अगर इसमें गलत लगता है और. तुम्हारा दिल अब नही मान रहा है तो ठिक है . वह उससे अलग होते हूए वहांसे उठते हूए बोला.

वैसा नही हनी . डोन्ट मिसअंडरस्टॅंड मी वह उसे फिरसे अपने पास खिंचते हूए बोली.

उसने फिरसे उठनेका प्रयास किया लेकिन अब वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी. विवेकको कुछ समझ नही रहा था की. वह शिथील होकर सिर्फ उसके पास बैठा रहा. लेकिन अब मानो अंजलीके शरीरमें किसी चिजका संचार हुवा था. वह कॉटपर उसे एक तरफ गिराकर उसके उपर चढ गई और उसके शरीरपर सब तरफ चुंबनोकी मानो बरसात करने लगी. और फिर उनके बिच कुछ पलके लिए क्यों ना हो तैयार हुवा फासला मिट गया और वे एकदुसरेमें कब समा गए उन्हे कुछ पताही नही चला.

अंजली सुबह सुबह निंदसे जब जाग गई तब वह अपने पास पडे विवेकके मासूम चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. उसने खिडकीसे बाहर झांककर देखा. बाहर अभीभी अंधेरा था. वह फिरसे विवेकके चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. अचानक उसके खयालमें आगयाकी उसका मासूम चेहरा धीरे धीरे उग्र होता जा रहा है.

शायद वह कोई बुरा सपना देख रहा हो.

उसने उसके चेहरेपर हाथ फेरनेकी कोशीश की. लेकिन उसके हाथका स्पर्ष होतेही वह चौंककर उठ गया और गुस्सेसे बोला, मै तुम्हे छोडूंगा नही . मै तुम्हे छोडूंगा नही

कुछ पलके लिए तो अंजलीभी घबराकर असमंजसमें पड गई.

क्या हुवा अंजलीने पुछा.

लेकिन कुछ पलमेंही उसका गुस्सा ठंडा पडा दिखाई दिया. और वह इधर उधर देखते हूए फिरसे सोनेके लिए लेटते हूए बोला,

कुछ नही

और फिरसे सो गया.

सुबह सुबह अंजली, विवेक, शरवरी और इन्स्पेक्टर कंवलजीत कॉन्फरंन्स रुममें इकठ्ठा हूए थे.

मै इस बातसे संतुष्ट हूं की आखिर ब्लॅकमेलरने विवेकको कोईभी हानी ना पहूंचाते हूए छोड दिया. अंजली काफी समयसे चल रहे चर्चाके बाद एक गहरी सांस लेते हूए बोली.

एक मिनीट विवेकने हस्तक्षेप किया.

सब लोग एकदम गंभीर होकर उसकी तरफ देखने लगे.

मुझे लगता है . ब्लकमेलरकी वजहसे हमे, मुझे, आपको, अंजलीको सबकोही काफी तकलिफ उठानी पडी. विवेकने कहा.

विवेक. पैसा चला गया इस बातका मुझे दुख नही है . तुझे कुछ हानी नही हुई यह मेरे लिए सबसे महत्वपुर्ण है अंजलीने बिचमेही उसे काटते हूए कहा.

इन्स्पेक्टर कंवलजीतभी उसकी हां मे हां मिलाएंगे इस आशासे अंजलीने उनकी तरफ देखा. लेकिन वे कुछ नही बोले.

अंजली बात सिर्फ पैसोकी नही है . कमसे कम मुझे लगता है की उसे यूही छोड देना कुछ उचित नही होगा. . वैसे अबभी देरी नही हूई है. अब अगर हमने उसे पकडनेकी कोशिश की तो कैसा रहेगा . विवेकने सवाल खडा किया और वह इन्सपेक्टरकी प्रतिक्रिया परखनेके लिए उनकी तरफ देखने लगा. इन्स्पेक्टरने सोचते हूए कमरेकी छतकी तरफ देखा और वे कुछ बोलनेही वाले थे तभी शरवरी बिचमेंही बोली.

लेकिन हमे ना उसका नाम पता है . ना उसका पता. वह क्या करता है यहभी हमे पता नही है . फिर अगर हमने उसे पकडनेकीभी ठान ली तो उसे पकडेंगे कैसे . शरवरीने अपनी आशंका जाहिर की.
 
अंजलीने शरवरीकी तरफ देखकर मानो उसके बातको मुक संमती दर्शाई.

इतके दिन हम उसे पकडनेकी कोशीश कर रहे थे. वे सब कोशिशें एकदम खाली गई ऐसा कहना कुछ उचित नही होगा . क्योंकी अबभी अपनेपास कुछ क्लूज है . एक तो उस ब्लॅकमेलरका हॅंन्ड रायटींग जो हमें सायबर कॅफेके लॉगबुकसे मिला. दुसरा उसके फिंगर प्रिन्टस जो हमें सायबर कॅफेसेही मिले और तिसरा . यह फोटोग्राफस देखो . इन्स्पेक्टर कंवलजीत बोल रहे थे.

अबभी ब्लॅकमेलरको पकडनेकी विवेककी तिव्र इच्छा देखकर मानो इन्स्पेक्टरके शरीरमें फुर्ती दौड रही थी. वे अपने जेबसे दो फोटोग्राफ्स निकालकर वहा इकठ्ठा हूए लोगोंको दिखाकर आगे बोले,

यह फोटोग्राफ्स उस सायबर कॅफेमें मिले कॉम्प्यूटरके है, जहां फोटोग्राफ लेनेके थोडीही देर पहले ब्लकमेलर बैठा हुवा था . इस फोटोग्राफ्सकी तरफ थोडा गौरसे देखो . देखो कुछ खयालमें आता है क्या इन्सपेक्टरने वे फोटो सबको देखनेके लिए आगे खिसकाए.

सब लोगोंने वह फोटोग्राफ्स एक एक करके देखे. लेकिन किसीकोभी उन फोटोग्राफ्समें कुछ अलग महसूस नही हुवा. तभी विवेक वे फोटोग्राफ्स देखते हूए मंद मंद मुस्कराया.

क्या हुवा अंजलीने पुछा.

जरा देखोतो. गौरसे देखो . इस फोटोग्राफ्समें कॉम्प्यूटरका माऊस कॉम्प्यूटरके बाए तरफ की बजाय दाई तरफ रखा हुवा दिख रहा है . विवेकने कहा.

यस यू आर ऍब्सुलेटली राईट इन्स्पेक्टरने उत्साहभरे स्वरमें कहा.

अब अंजलीभी मंद मंद मुस्कुराने लगी.

लेकिन इसका क्या मतलब है शरवरी अबभी संभ्रममें थी.

. इसका एकही मतलब निकलता है की वह ब्लकमेलर लेफ्ट हॅन्डेड है . इन्स्पेक्टरने कहा.

यस दॅट्स राईट अब कहा शरवरीभी मुस्कुराने लगी थी.

तभी कॉन्फरंस रुममें रखे हूए फोनची घंटी बजी. फोन अंजलीके बगलमेंही रखा हूवा था. उसने फोन उठाया,

हॅलो

गुड मॉर्निंग अंजली . उधरसे नेट सेक्यूराके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. भाटीयां बोल रहे थे.

गुड मॉर्निंग भाटीयाजी. अंजलीने उतनीही सरगर्मीसे उनका स्वागत किया, बोलीए क्या कहते हो

हमारे यहा हमने एक नेटवर्किंग सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट रखी थी . कॉन्टेस्टचा टॉपीक है इथीकल हॅकींग. उस कॉन्टेस्टमें प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन आपके हाथसेही हो ऐसी हमारी इच्छा है . उधरसे भाटीयाजी मानो अपना हक जताते हूए बोले.

आपने बुलाया और हम नही आए ऐसा कभी होगा क्या भाटीयाजी . मै जरुर आऊंगी . प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन कब है . अंजलीने पुछा.

पुरा प्रोग्रॅम अभी फायनल होनेका है . वैसे वह प्रोग्रॅम टेंटीटीव्हली समव्हेअर अराऊंड धीस मंथ होगा . पुरा प्रोग्रॅम फायनल होतेही आपको वैसे डीटेलमें बताया जाएगा . उधरसे भाटीयाजी बोले.

नो प्रॉब्लेम

थॅंक्स

मेन्शन नॉट

ओके बाय. सीयू

बाय

अंजलीने फोन क्रॅडल वापस रखा और उसने वहा बैठे सब लोगोंपर अपनी नजर घुमाई. उसके चेहरेपर फिरसे मुस्कुराहट दिखने लगी थी.

मेरे दिमागमें एक आयडीया आया है . अभी नेट सेक्यूराके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. भाटीयाजींका फोन था . इथीकल हॅकींगपर वे एक सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट ले रहे है . मुझे यकिन है की अगर इस कॉन्टेस्ट का प्रचार बडे पैमानेपर अगर किया गया और उस कॉन्टेस्ट जितनेवालोंको अगर बडे बडे प्राईजेस रखे गए . तो वह ब्लॅकमेलर इस प्रतियोगीतामें जरुर हिस्सा लेगा . अंजलीने कहा.

लेकिन तुम यह सब इतने यकिनके साथ कैसे कह सकती हो विवेकने आशंका जताई.

पुरे यकिनके साथतो नही. फिरभी . क्रिमीनल सायकॉलॉजीके अनुसार. वह ब्लॅकमेलर अभी अपना आत्वविश्वास और गर्वमें पुरी तरह चुर है . उसतक अगर यह कॉन्टेस्टकी बात पहूचाई गई तो वह उसमें जरुर हिस्सा लेगा . इन्स्पेक्टरने अपना अंदाजा लगाया.

सुबह सुबह ऑफीसमें आए बराबर अंजली अपने काममें व्यस्त हो गई. तभी शरवरी कॅबिनमें आ गई.

प्रतियोगीता कब कलसे शुरु होनेवाली है ना अंजलीने शरवरीसे पुछा.

हां शरवरीने एक फाईल ढुंढते हूए जवाब दिया.

कितने लोगोंके अप्लीकेशन्स आए है अंजलीने पुछा.

लगभग तिन हजार शरवरीने उत्तर दिया.

ओ माय गॉड . इतने लोगोंमें उस ब्लॅकमेलरको ढुंढना यानी . पहाड खोदकर चुहा निकालने जैसा होगा. और वहभी अगर वह इस प्रतियोगीतामें शामील हुवा तो . नही अंजलीने पुछा.

हां कठिण तो है ही शरवरी एक फाईल लेकर शरवरीके सामने आकर बैठते हूए बोली.

तभी अंजलीका फोन बजा. अंजलीने फोन उठाकर अपने कानको लगाया,

अंजली. मै इन्स्पेक्टर कंवलजित बोल रहा हूं . उधरसे आवाज आया.

मॉर्निंग अंकल.

मॉर्निंग . तुम्हे पता तो होगाही की प्रतियोगिताके लिए अप्लीकेशन्स आए है . उसमें हमने जो लेफ्ट हॅन्डेड और राईट हॅन्डेड जानकारी मंगवाई थी . उसके अनुसार जो लेफ्ट हॅन्डेड लोगोंके है वे अप्लीकेशन्स अलग किए हूए है. उसमेसें एक लडकेका हॅन्डरायटींग हुबहु मॅच हो रहा है . उसका नाम है अतूल विश्वास. उधरसे इन्स्पेक्टरने जानकारी दी.

गुड व्हेरी गुड. अंजली एकदम खुश होते हूए बोली, थॅंक्यू अंकल. मै आपके उपकार किस तरह उतार सकुंगी. मुझे तो कुछ समझमें नही आ रहा है . अंजली खुशीके मारे बोली.

इतने जल्दी इतना खुश होकर नही चलेगा . अभी तो सिर्फ शुरुवात है . उसे कानुकके शिकंजेमें पकडनेके लिए हमे और काफी मेहनत करनी पडेगी . इन्स्पेक्टरने कहा.

क्यों . अभी तुरंत हम उसे नही पकड पाएंगे अंजलीने निराश होकर पुछा.

नही अभी नही . आगे तो सुनो . हमने अभी उसका फोन टॅप करना शुरु किया है . ताकी उसके और कोई साथीदार होंगे तो उसे हम पकड पाएंगे . और सारे सबुत इकठ्ठा होतेही उसे अरेस्ट करेंगे . इन्स्पेक्टर कंवलजितने कहा.

अंजलीका तो मानो खुन खौल रहा था. उस ब्लॅकमेलरको कब एक बार पकडकर उसे सजा दी जाए ऐसा उसे हो रहा था. उसे फिलहाल वह कुछभी नही कर सकती इस बातका दुख हो रहा था.

लेकिन नही.

मै कुछ तो करही सकती हूं .

यह खबर अगर विवेकको दी जाए तो.

यह खबर सुनतेही वह कितना खुश हो जाएगा .

उसने फोनका क्रेडल उठाया और वह एक नंबर डायल करने लगी.

पोलिस स्टेशनमें इन्स्पेक्टर कंवलजितके सामने एक पुलिस बैठा हुवा था.

सर हमने अतुल बिश्वासके सारे फोन कॉल्स टॅप किए है . उनमेंसे यह एक महत्वपुर्ण लगा . वह पुलिस सामने रखा टेपरेकॉर्डर शुरु करते हूए बोला.

टेपरेकॉर्डर शुरु हो गया और उसमेंसे वह टेप किया हुवा फोन कॉल सुनाई देने लगा.

अलेक्स. मुझे वहां आनेके लिए दिन लगेंगे . पैसे संभालकर रखना . मै वहां पहूचनेके बाद हम उसे बाट लेंगे . अतुलने कहा.

ठिक है . अलेक्सने कहा.

और हां . अपने कॉम्प्यूटरको पुरी तरहसे फॉरमॅट करना. उसमें कुछभी बाकी रहना नही चाहिए .

ठिक है . तूम इधरकी बिलकुल चिंता मत करो. मै सब संभाल लूंगा .

ओके देन . बाय

बाय .

इन्स्पेक्टर कंवलजितने वह संवाद रिवाईंड कर फिरसे बार बार सुना. और फिर वे एक इरादेके साथ खडे होते हूए उस पुलिससे बोले,

चलो

इन्सपेक्टरने भलेही सिर्फ एकही शब्द कहा था, फिरभी वह इशारा उस पुलिसको काफी था. इन्स्पेक्टर आगे आगे और वह पुलिस उनके पिछे पिछे चलने लगे.

रातका समय था. एक अंधेरे कमरेमें अलेक्स कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ कर रहा था. कमरेमें जोभी कुछ उजाला था वह उस मॉनिटरकाही था. उस मॉनिटरके रोशनीमें अलेक्सका भद्दा चेहरा और ही भयानक दिख रहा था. तभी दरवाजेपर दस्तक हूई. अलेक्स उठ खडा हूवा,

लगता है आगए साले बेवडे.

उसने सोचा. यह उसके रातमें इकठ्ठा होनेवाले दोस्तोंके आनेका वक्त था. वे इकठ्ठा होकर देर रात तक पिते थे और गप्पे मारते बैठते थे. और इतनेमें उसके पास पैसा आनेसे उसके यहां आनेवाले दोस्तोंकी गिनती बढती जा रही थी.

कोण है बे मस्तीमें बोलते हूए उसने दरवाजा खोला.

और उसके चेहरेका रंग फिका पड गया. उसके चेहरेकी मस्ती पुरी तरहसे उड गई थी. उसके सामने दरवाजेमें इन्स्पेक्टर कंवलजीत और और पांच छे पुलिस खडे थे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे. वह कुछ सोचे और कुछ हरकत करे इसके पहलेही पुलिसने उसे दबोचकर अरेस्ट किया.

मैने क्या किया अलेक्स अपने चेहरेपर मासुमियतके भाव लाकर बोला.

कोई कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रहा है यह देखकर वह फिरसे बोला,

मुझे क्यों अरेस्ट किया गया . कुछ तो कहोगे

फिरभी कोई कुछ नही बोला.

ऐसे आप कुछभी गलती ना होते हूए किसीको अरेस्ट नही कर सकते . यह कानुनन अपराध है वह अपनी आवाज बढाकर बोला.

फिरभी कोई कुछ बोलनेके लिए तैयार नही था, यह देखते हूए वह चिढकर चिल्लाया,

मुझे क्यो अरेस्ट किया गया है

पता चलेगा. जल्दीही पता चलेगा इन्सपेक्टरका एक साथी ताना मारते हूए धीमे स्वरमें बोला.

अब कंधा उचकाकर, चेहरेपर जितने हो सकते है उतने मासुमियतके भाव लाकर, वह उनकी हरकते निहारने लगा. एक बलवान पुलिस उसके हाथोमें हथकडीयां पहनाकर उसे घरके अंदर ले गया. बाकी सारे पुलिस घरमें सब तरफ फैलकर घरकी तलाशी लेने लगे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे, वे कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट थे. उन्होने तुरंत कॉम्प्यूटरपर कब्जा किया. कॉम्प्यूटर शुरुही था इसलिए अपराधीसे पासवर्ड हासिल करना या उस कॉम्प्यूटरका पासवर्ड ब्रेक करना, यह सब टल गया था. पुलिसकी टीम पुरे घरकी और आसपासकी तलाशी लेते हूए जब कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द इकठ्ठा हो गई, तब कॉम्प्यूटरपर बैठे एक्सपर्टमेंसे एकने इन्स्पेक्टर कंवलजितसे कहा,

सर इसमें तो कुछभी नही है

घरमेंभी कुछ नही मिल रहा है टीममेंसे एकने जोड दिया.

कुछ होगा तो मिलेगा ना . मुझे लगता है आप लोग गलत घरमें घुस गए हो अलेक्सने बिचमेंही कहा.

ठिकसे देखो . उसने अगर हार्डडिस्क फॉरमॅट की हो तो अपने रिकव्हरी टूल्स रन करो इन्सपेक्टरने कहा.

यस सर कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट बोला.

टिममेंसे कुछ पुलिस अबभी घरमें सामान उलट पुलटकर देख रहे थे. तभी एक पुलिस वहा इन्सपेक्टरके पास एक बॅग लेकर आया. उसने बॅग खोली तो अंदर कपडे थे. उसने कपडेभी बाहर निकालकर देखा, लेकिन अंदर कुछभी नही था.

देखो . घरका कोना कोना छान मारो . इन्स्पपेक्टर उन्हे मायूस हुवा देखकर उनका हौसला बढानेके उद्देशसे बोला.

यस सर उस पुलिसने कहा और फिरसे घरमें ढुंढने लगा.

तभी कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टका उत्साहीत स्वर गुंजा सर मिल गया

सारे लोग अपने अपने काम छोडकर कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द जमा हो गए. और वे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ बडी आस लेकर देखने लगे. उनमेंसे सिनियर कॉम्प्यूटर एक्सपर्टने कॉम्प्यूटरपर एक फाईल खोली. शायद उसने वह रिकव्हरी टूल्सका इस्तेमाल कर रिकव्हर की होगी. वह फाईल यानी ब्लॅकमेलरने पहले मेलमें अंजलीको भेजा हुवा अंजली और विवेकके प्रणयका फोटो था. इन्सपेक्टरने अब गुस्सेसे मासूम बननेकी कोशीश कर रहे अलेक्सकी तरफ देखा. अलेक्सके चेहरेसे मासूमियतभरे भाव कबके उड चुके थे. उसने अपनी गर्दन झुकाई थी. इन्स्पेक्टरने अपने साथीसे इशारा करतेही वह पुलिस अरेस्ट किए हुए अलेक्सको बाहर ले गया. अलेक्स चुपचाप कुछभी प्रतिकार ना करते हूए उस पुलिसके पिछे पिछे चलने लगा.

अलेक्सको उस पुलिसने वहांसे बाहर ले जातेही, इन्स्पेक्टर कंवलजितने अपना मोबाईल लगाया

अंजली गुड न्यूज.

पुरी कहानी सुनाकर इन्स्पेक्टरने एक लंबी सांस ली. स्टेजपर इन्स्पेक्टर कंवलजित, अंजली, नेट सेक्यूराके डायरेक्टर और ऍन्कर खडे थे. पुरी कहानी खत्म होगई थी, फिरभी लोग अभीभी शांत थे. हॉलमें मानो शमशानसी चुप्पी फैली हुई थी. तभी अंजलीको हॉलके पिछले हिस्सेमें विवेक खडा हुवा दिखाई दिया. अंजलीने हात हिलाकर उसे स्टेजपर बुलाया. विवेकभी लगभग दौडते हूएही स्टेजपर गया. अंजलीने उसका हाथ अपने हाथमें लेकर उसे अपने पास खडा किया. अबतक जो सब लोग शांत थे वे अब तालियां बजाने लगे. और तालियाभी इतनी की मानो उन्होने सारा हॉल सरपर लिया हो. तालियां रुकनेका नाम नही ले रही थी.
 
अबभी विवेकका हाथ अंजलीके हाथमें कसकर पकडा हुवा था. अंजलीने दुसरा हाथ दिखाकर लोगोंको शांत रहनेका इशारा किया और वह माईक हाथमें लेकर बोलने लगी

हमारा प्रेम. यां यू कहिए . हमारा इ लव्ह . लगा था कमसे कम इसमें तो बाधाएं नही आयेंगी . लेकिन ऐसा लगता है की प्यार की राहमें हमेशा बाधाए होती है .

अंजलीने हॉलमें सब तरफ अपनी नजरे घुमाई और वह विवेकका हाथ और कसकर पकडते हूए आगे बोली, . लेकिन कुछभी हो . आखिर जित प्यारकीही होती है

लोगोंने तालिया बजाते हूए फिरसे पुरा हॉल मानो अपने सरपर उठा लिया.

अब विवेकने माईक अपने हाथमें लिया और लोगोंको शांत रहनेका इशारा करते हूए वह बोला,

हमारे दोनोके प्रेमकहानीसे आप लोग एक सिख जरुर ले सकते है की . एक क्षण स्तब्ध रहकर वह आगे बोला, की बुरेका अंत आखिर बुरेमेंही होता है .

फिरसे लोगोंने तालियां बजाकर मानो उसके कहनेको अपनी सहमती दर्शाई. तभी एक कंपनीका आदमी स्टेजके पिछले हिस्सेसे स्टेजपर आ गया. उसकी चारो ओर घुमती हूई आंखे स्टेजपर किसीको ढूंढ रही थी. आखिर उसे कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर भाटीयाजी दिखतेही वह उनके पास गया और उनके कानमें कुछ बोलने लगा. वह जोभी बोल रहा था वह सुनकर भाटीयाजींके चेहरेपर अचानक हडबडाहट, आश्चर्य और डरके भाव दिखने लगे. उनके चेहरेपर वे भाव देखकर स्टेजपर उपस्थित बाकी लोगोंके चेहरेपरभी भाव बदल गए थे. स्टेजपर जो हल्का फुल्का खुशीका माहौल था वह एकदमसे तनावमें बदल गया था. उस कंपनीके आदमीने भाटीयाजीको सब बतानेके बाद भाटीयाजीने स्टेजपर इधर उधर देखा और वे इन्स्पेक्टर कंवलजितकी तरफ बढने लगे.

अब भाटीयाजी इन्स्पेक्टरके कानमें कुछ बोल रहे थे. इन्स्पेक्टरकीभी वही दशा हो गई थी. उनके चेहरेपरभी हडबडाहटभरे आश्चर्य और डरके भाव आगए थे. तबतक अंजली, विवेक और वह ऍन्करभी इन्स्पेक्टरके पास पहूंच गए.

क्या हुवा अंजलीने एकबार इन्स्पेक्टरकी तरफ तो दुसरी बार भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

जाते हूए वह अपना आखरी दांव खेल गया है इन्सपेक्टरने बताया.

लेकिन क्या हुवा विवेकने पुछा.

थोडा खुलकर तो बताओ अंजलीने भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

खुलकर बोलनेके लिए अब वक्त नही है . चलो मेरे साथ चलो भाटीयाजी अब जल्दी करते हूए बोले. और तेजीसे स्टेजके पिछले हिस्सेसे उतरकर उस कंपनीके आदमीके साथ अपने ऑफीसकी तरफ जाने लगे.

इन्स्पेक्टर, अंजली, और विवेकभी चुपचाप उनके पिछे चलने लगे. वह ऍन्कर उनके पिछे जाएकी ना जाए इस दुविधामें स्टेजपरही रुका रहा, क्योंकी अबतक हॉलमें उपस्थित लोगोंमे खुसुरफुसुर और गडबडी शुरु हो गई थी. हकिकतमें क्या हुवा यह जाननेकी जैसे उन लोगोंकी उत्सुकता बढ रही थी. लेकिन जितने वे लोग अनभिज्ञ थे उतनाही वह ऍन्करभी अनभिज्ञ था. लेकिन क्या हुवा यह जाननेसे बडी जिम्मेदारी अब उस एन्करके कंधेपर आन पडी थी किसीभी तरह उन लोगोंको शांत करके वहां उस हॉलसे सही सलामत बाहर निकालनेकी.

कंपनीके उस आदमीने कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टरके कानमें कुछ खुसफुसाकर प्रोग्रॅमका सारा मुडही बदल दिया था. डायससे निचे उतरकर कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर भाटीयाची सिधे अपने कॅबिनके तरफ जाने लगे. भाटीयाजींको वह फासला मानो बहोत दूर लग रहा था. डायसकी सिढीयां उतरकर और उनके ऑफीसकी सिढीयां चढते हूए पहलीबार उन्हे थकावट महसूस हो रही थी. उनके पिछे इन्स्पेक्टर कंवलजित और सबसे पिछे असमंजसमें चल रहे अंजली और विवेक थे. सबलोग जब भाटीयाजींके कॅबिनमें घुस गए, तब वहां पहलेसेही कुछ लोगोंने कॉम्प्यूटरके इर्दगिर्द भिड की थी. भाटीयाजीभी उस भिडमें शामिल हो गए और कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. अंजली और विवेकने जब उस भिडमें घुसकर उस मॉनिटरकी तरफ देखा. तब कहां उनको सारे मसलेका अवलोकन हुवा. उनके मनमें चल रही सारी शंकाए एक पलमें नष्ट होकर वह जगह अब चिंता और डरने ली थी. मॉनिटरपर एक ब्लींक हो रहा मेसेज दिख रहा था . और मॉनिटरपर उलटी गिनती दिखा रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी एक घडी दिख रही थी. . .

ओ माय गॉड. भाटीयाजींके आश्चर्यासे खुले रहे मुंहसे निकल गया.

उनका पुरा बदन पसिना पसिना हो गया था और चेहरेपरभी पसिनेकी बुंदे दिख रही थी. सब डाटा अगर डिलीट हूवा तो होनेवाले नुकसानके कल्पनाभरसेही वे घबरा गए थे.

सर यही नही तो कंपनीके सारे कांम्प्यूटरपर यह मेसेज आया है . कंपनीका एक आदमी बोला. और फिर सब लोगोंको डॆव्हलपमेंट सेंटरकी तरफ ले जाते हूए बोला, सर जरा इधरभी देखिए .

उसके पिछे सारे लोग कुछ ना बोलते हूए जा रहे थे, मानो समशानमें जा रहे हो.

डेव्हलपमेंट सेंटर यानी एक बडा हॉल था और वहां छोटे छोटे क्यूबिकल्स बनाकर हर डेव्हलपरकी तरफ ध्यान दिया जा सके और सबको प्रायव्हसीभी मिले इसका खास ध्यान रखा गया था. वहां सब कॉम्प्यूटरके मॉनिटर्स शुरु थे और सब मॉनिटरपर एकही मेसेज था .

और यहांभी सब कॉम्प्यूटर्सपर उलटी गिनती चल रही थी.

. .

सचमुछ गुनाहगार जाते हूए अपनी आखरी चाल चल गया है विवेकने कहा.

इट्स अ टीपीकल एक्सांपल ऑफ ईटेररीझम अंजलीने कहा.

हमारे तो कंपनीका अस्तित्वही खतरेमें आया है भाटीयाजी अपने चेहरेसे पसिना पोंछते हूए बोले.

आप चिंता मत किजिए . पासवर्ड गुनाहगारसे कैसे उगलना है यह हमारा काम है इन्स्पेक्टरने कहा.

तभी दो पुलिस हथकडी पहने हूए अतूलको वहां लेकर आ गए. इन्स्पेक्टरने पुरा मसला समझमें आतेही उसे वापस यहां लानेके लिए अपने साथीयोंको पहलेही वायरलेसपर बताया था. अतूल धीमे मस्ती भरी चालसे मंद मंद मुस्कुराते हूए इन्स्पेक्टरकी तरफ चलने लगा.

पासवर्ड क्या है . इन्स्पेक्टरने उसे कडे स्वरमें पुछा.

इन्स्पेक्टरने साम दाम दंड भेद से पहले दंड का इस्तेमाल करनेकी ठान ली थी ऐसा दिख रहा था.

जल्दी क्या है . पहले मेरी हथकडीतो खोलो . अभी और घंटे बाकी है अतूल हसते हूए शांत स्वरमें बोला.

इन्स्पेक्टर गुस्सेसे उसे मारनेके लिए उसकी तरफ बढे वैसे अतूल चेहरेपर कुछभी डर ना दिखाते हूए वैसेही खडा रहते हूए, उनकी आखोंमें आखे डालकर बोला, अं हं. इस्न्पेक्टर यह गल्ती कभी ना करना . ऐसी गलती करोगे तो मै पासवर्ड तो दुंगा लेकिन वह पासवर्ड देनेके बाद . तुम्हारेपास जो घंटे बाकि है वहभी नही रहेंगे. पुरा डाटा वह पासवर्ड देनेके बाद तुरंत नष्ट हो जाएगा .

इन्स्पेक्टरने उसपर उठाया हुवा हाथ पिछे लिया. उन्हे अहसास हो गया था की उसके बोलनेमें तथ्य था.

खोलो मेरी हथकडी अतूलने फिरसे कहा.

इन्स्पेक्टरने उसे लेकर आए पुलिसको इशारा किया. उन्हे इशारा मिलतेही उन्होने चूपचाप उसकी हथकडी खोली. अतूलने अपनी खुली हूई कलाइयां एक के बाद एक दुसरे हाथमें लेकर घुमाई और वह अपने दोनो हाथ पिछे ले जाते हूए जम्हाई भरते हूए, उसे मिली हूई रिहाईका आनंद व्यक्त करते हूए बोला,

हां अब देखो. कैसे खुला खुला लग रहा है

पासवर्ड क्या है फिरसे इन्स्पेक्टरका कडा स्वर गुंजा.

इन्स्पेक्टर तुम्हे लगता है, की मै इतने आसानीसे और इतने जल्दी तुम्हे पासवर्ड बताऊंगा अतूल इन्स्पेक्टरकी आंखोसे आंखे मिलाते हूए बोला.

फिर तुम्हे और क्या चाहिए इन्स्पेक्टरने अपना स्वर अबभी कडा रखते हूए पुछा.

बस कुछ नही . सिर्फ मेरे पुरे रिहाईका इंतजाम . अतूलने कहा.

मतलब इतनी देर से चुप था विवेक पहली बार बोला.

अरे हां . अच्छा हुवा तु बोला . तुझे मेरे साथ आना पडेगा . मुझे यहांसे दूर . जहां ये लोग फिरसे पहूंच नही पाए ऐसी जगह मुझे पहुचानेकी जिम्मेदारी अब तुम्हारी . और फिर वहांसे मै इन्हे मोबाईलसे वह पासवर्ड बताऊंगा . अतूलने कहा.

हमें क्या मुरख समझ रखा है इन्स्पेक्टर फिरसे गुर्राया.

इन्स्पेक्टर यह वक्त अब कौन मुरख है या बननेवाला है यह तय करनेका नही है . संक्षिप्तमें कहा जाए तो . यू डोन्ट हॅव चॉईस. तुम्हे मेरे कहे अनुसार करनेके अलावा कोई चारा नही है अतूलने कहा.

इन्स्पेक्टरने एक बार विवेककी तरफ तो दुसरी बार अतूलकी तरफ देखा.

ठिक है विवेकने दृढतासे कहा.

इतनी बडी कंपनीका अस्तित्व और भविष्य खतरेमें आया था, इसलिए इन्स्पेक्टरको अतूलका सबकुछ सुननेके अलावा कोई रास्ता नही था. और उससे कितना नुकसान हो सकता है यह भाटीयाजींके पसिनेसे लथपथ चेहरेपर साफ दिख रहा था. वैसे देखा जाए तो भाटीयाजी बहुत हिम्मतवाले या यू कहा जाए की मोटी चमडीवाले आदमी थे. और उनके चेहरेपर और पुरे बदनमें पसिना आए मतलब कंपनीका अस्तित्व बुरी तरफ दाव पर लगा था यह स्पष्ट था.
 
अतूलने बताए अनुसार विवेकभी उसके साथ उसे उस जगहसे दूर छोडनेके लिए तैयार हुवा था. इसलिए उसके साथ कौन जाएगा यह एक बडी गुथ्थी सुलझ गई थी. क्योंकी उसके साथ अकेला जाना खतरेसे खाली नही था, यहांतककी खुदकी जान जानेकाभी खतरा था और वह किसे अपनेसाथ कोई हथीयार ले जाने देगा इतना मुर्ख नही था. लेकिन विवेकको उसके साथ अकेले भेजनेके लिए अंजलीका दिल नही मान रहा था. वह वैसे कुछ बोली नही लेकिन उसके चेहरेसे सबकुछ झलक रहा था. एक तरफ भाटीयाजींकी कंपनी उसकी वजहसेही खतरेमें आ गई थी और उसनेही विवेकको भेजेनेके लिए इन्कार करना उसे ठिक नही लग रहा था. अतुलको जाल डालकर फांसनेके काममें भाटीयाजींका बहुमोल योगदान था. और उन्होने उस बातके खतरेका अहसास होते हूए भी उसे पुरा सहयोग दिया था. और अब उनकी कंपनी खतरेमें आनेके बाद मुंह मोड लेना उसे जच नही रहा था.

विवेकनें उसकी दुविधा जानते हूए उसे अपनी बाहोमें लेते हूए थपथपाकर कहा.

डोन्ट वरी हनी. आय वुल बी फाईन

अंजली कुछभी बोली नही, लेकिन आखीर अपने दिलपर पत्थर रखकर वह उसे जाने देनेके लिए तैयार हो गई.

एक तरहसे इन्स्पेक्टर कंवलजितनेही उसे धिरज बंधाकर तैयार किया था.

भाटीयाजी, अंजली, विवेक और इन्स्पेक्टर कंवलजित स्टेजसे उतरकर वहांसे निकल जानेके बाद हॉलमें इकठ्ठा हूए लोगोंको शांतीसे बाहर निकालनेका काम ऍन्करने कुछ पुलिसकी मदत लेते हूए खुब निभाया था. अब कंपनीके कंपाऊंडके अंदर पुलिस, कंपनीके लोग, विवेक, अंजली और वह गुनाहगार के अतिरिक्त कोई नही था. कुछ लोगोंको इस पुरे मसलेकी खबर शायद लगी थी, क्योकी वे पुलिसकी डरकी वजहसे कंपाऊंडके बाहर जाकर इधर उधर छिपते हूए उधरही देख रहे थे. और वेभी लोग बहुत कम थे. इसलिए अब गुनाहगारको संभालनेमें या उसकी मांगे सुन लेनेमें इन्स्पेक्टर कंवलजितको जादा तकलिफ नही हो रही थी. अगर लोग अबभी कंपाऊंडके अंदर या हॉलमें होते तो शायद इस गुनाहगारको संभालनेसे उन लोगोंको संभालना जादा तकलिफदेह होता था.

आखिर अतूलको उसके कहे अनुसार कही बहुत दुर ले जाकर छोडनेके लिए पुलिस राजी हो गई. सब लोग कंपनीके बिल्डींगके बाहर खुले मैदानमे इकठ्ठा हुए थे. मैदानमें पुलिसकी और बाकी बहुतसारी गाडीयां खडी थी. अतूलने वहां खडी पाच छे गाडीयोंके पास जाकर गौरसे देखा और उनमेंसे एक गाडीके छतपर थपथपाते हूए पुछा,

यह गाडी किसकी है .

वह कंपनीके एक ऑफिसरकी गाडी थी. वह ऑफिसर डरते हूएही सामने आते हूए बोला, मेरी है

चाबी दो अतूलने फरमान छोडा.

भाटीयाजींने उस ऑफीसरकी तरफ देखते हूए आंखोसेही उसे वैसा करनेके लिए कहा. उस ऑफीसरने चुपचाप अपने पॅन्टकी जेबसे चाबी निकालकर अतूलके हवाले कर दी.

हम इस गाडीसे जाएंगे अतूलने एलान किया.

विवेकने एक कडा कटाक्ष अतूलकी तरफ डालते हूए कहा, पहले तुम्हारा मोबाईल इधर दो

अतूलने कुछ क्षण सोचा और अपना मोबाईल निकालकर विवेकके पास देते हूए बोला, गुड मुव्ह

विवेकने वह मोबाईल लेकर इन्स्पेक्टरके पास दिया.

अब तुम्हारा मोबाईल इधर लाओ अतूलने कहा.

विवेकने अपना मोबाईल निकालकर अतूलके पास दिया. अतूलने गाडीकी डीक्की खोली और वह मोबाईल डिक्कीमें डाल दिया. लेकिन उसे क्या लगा क्या मालूम, उसने वह मोबाईल फिरसे डीक्कीसे बाहर निकाला और उसे ऑफ कर फिरसे डिक्कीमें डालते हूए डिक्की बंद की.

गुड मुव्ह अब विवेककी बारी थी.

अतूल उसकी तरफ देखकर मक्कारकी तरह मुस्कुराते हूए बोला, हां अब सब ठिक है

हू विल ड्राईव्ह द व्हेईकल विवेकने गाडीके पास जाते हूए पुछा.

ऑफ कोर्स मी अतूलने कहा और गाडीके ड्राईव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा.

लेकिन अचानक अतूल बिचमेंही रुकते हूए बोला , वेट

विवेकभी रुक गया. अतूल मुस्कुराते हूए विवेकके पास गया और उसकी उपरसे निचेतक पुरी तलाशी लेने लगा. शायद वह उसके पास कोई हथीयार है क्या यह देख रहा था.

हां अब ठिक है अतूल ड्रायव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा वैसे विवेकने कहा,

वेट. दॅट अप्लाईज टू यू टू

विवेकनेभी अतूलके पास जाकर उसकी पुरी तलाशी ली.

हां अब ठिक है विवेकने कहा और गाडीकी तरफ जाने लगा वैसे अतूल इन्स्पेक्टरकी तरफ देखते हूए बोला,

नही अभीभी सब ठिक नही है .

इन्सपेक्टर कुछ ना बोलते हूए अतूलकी तरफ देखने लगा.

इन्स्पेक्टर अगर मुझे किसीभी क्षण खयालमें आगया की हमारा पिछा हो रहा है . या हमारी जानकारी कही भेजी जा रही है . तो ध्यानमें रखो . मै पासवर्ड तो दुंगा . लेकिन वह गलत पासवर्ड होगा . जो दिए बराबर तुम्हारे कंपनीका सारा डाटा तुरंत नष्ट हो जाएगा . समझे अतूलने कडे स्वरमें ताकिद दी.

डोन्ट वरी यू विल नॉटबी . फालोड. प्रोव्हायडेड यू गिव्ह अस द करेक्ट पासवर्ड. इन्स्पेक्टरने कहा.

दट्स लाईक अ गुड बॉय अतूल गाडीके ड्रायव्हीग सिटपर बैठते हूए बोला.

अतूलने गाडी शुरु करके विवेककी तरफ कडी नजरसे देखा. विवेक उसकी बगलवाले सिटपर चुपचाप आकर बैठ गया और अंजलीकी तरफ देखते हूए उसने गाडीका दरवाजा खिंच लिया.

अतूलने गाडी रेस की और कंपनीके कंपाऊंडके बाहर ले जाकर तेजीसे रास्तेपर दौडाई.

कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टर भाटीयाजी, इन्स्पेक्टर कंवलजित और अंजली अभीभी अस्वस्थाके साथ कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देख रहे थे. मॉनिटरपर अबभी वही मेसेज ब्लींक हो रहा था. . लेकिन मॉनिटरपर उलटी गिनती चल रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी घडी दर्शा रही थी . . .

घडीमें दिख रहे शुन्य घंटेने सब लोगोंमे एक अस्वस्थता, एक डर फैलाया था.

अब तो सिर्फ मिनटही बाकी है . अबभी उसका फोन कैसे नही आया अंजलीने कहा.

वह भलेही उपरसे नही दिखा पा रही थी, उसे कंपनीके भले बुरेसे विवेककी जादा चिंता थी, और वह लाजमीभी था. इन्स्पेक्टर कंवलजितने अंजलीके कंधेपर अपना धीरजभरा हाथ रखते हूए कहा, धीरज रखो . फोन इतनेमेंही आएगा

लेकिन अगर उसका फोन नही आया तो हमारे कंपनीका क्या होगा भाटीयाजीने चिंताभरे स्वरमें कहा. यह उन्होने पुछा हुवा सवाल, सवालसे जादा चिंता दर्शा रहा था, इसलिए इस सवालको जवाब देनेके झमेलेंमे कोई नही पडा. और देंगे तो क्या जवाब देंगे तभी कंपनीके चार पाच कर्मचारी वहां जल्दी जल्दी आगए.

क्या लिया क्या बॅक अप भाटीयाजींने उन्हे अधीरतासे पुछा.

नही सर . उसने प्रोग्रॅमही इस तरहसे लिखा है की नेटवर्ककी सब आवाजाही बंद करके रखी है उनमेंसे एक कर्मचारी बोला.

साला यह कॉम्प्यूटर जितना काम आसान बनाता है कभी कभी उतनाही मुश्कील बना देता है भाटीयाजी चिढकर बोले.

भाटीयांजी चिढनेकी वजहभी वैसी ही थी. उस नेटवर्कमें सॉफ्टवेअरके रुपमें उस कंपनीके क्लायंट्सके करोडो रुपए फंसे हूए थे. और वह सारा डाटा अगर डीलीट हुवा तो करोडो रुपयोंका नुकसान होना था. वह कंपनी वे सॉफ्टवेअर फिरसे डेव्हलप कर नही सकती थी ऐसी बात नही थी. लेकिन वह सॉफ्टवेअर डेव्हलप करनेके लिए लगनेवाला वक्त और कंपनीने लाखो कर्मचारीयोंकी मेहनतपर पाणी फेरनेवाला था. और डिलेव्हरी वक्तपर ना देनेसे कंपनीका नाम खराब होकर उनके कुछ ऑर्डर्स कॅन्सलभी हो सकते थे, वह अलग. इन्स्पेक्टर कंवलजितकी भाटीयाजींको धीरज बंधानेकी इच्छा हुई लेकिन हिंम्मत नही बनी. क्योंकी अब उन्हे खुदकोभी अतूलका फोन आएगा की नही इस बारेमें आशंका हो रही थी.

कॅन समबडी ट्राय ऑन द मोबाईल एक कर्मचारीने सुझाया.

मै कबसे ट्राय कर रही हूं . लेकिन स्विच्ड ऑफ काही मेसेज आ रहा है अंजलीने कहा.

क्योंकी वह विवेकने हालहीमें खरीदा हुवा मोबाईल था और उसका नंबर अंजलीके पास था.
 
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