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रवीश के माता पिता जी के जाने के बाद रिया की क्लास लग गई।
"क्यों पैर छुए तुमने?किसने कहा था?"
"पापा मैंने तो सोचा आपको अच्छा लगेगा।संस्कारीत लगूंगी।"
"लेकिन जब मैंने नही कहा तो क्या जरूरत थी?"
"पर हुआ क्या पापा?आप ही रिश्ता लाएं हैं न?मैं थोड़े न अपनी पसंद का लड़का लेकर आ गई हूँ क्या हुआ आपको अचानक?"
"अभी तुम्हारे ताऊ जी से बात करनी होगी इस बारे में।तिवारी में शादी की जा सकती है कि नहीं?"
"क्या पापा आप भी।राधिका दीदी की शादी भी तो त्रिवेदी में हुई है।फिर ये तिवारी में क्या दिक्कत होगी?" रिया का तर्क बिल्कुल सही था।राधिका दीदी ताऊ जी की ही बेटी हैं।
"लेकिन एक बार पूछना तो होगा ही।बात करते हैं हम। तुम पढ़ाई करो अभी।"
"पापा अब कोई फ़ोटो नही देखूंगी मैं।शादी करानी है तो रवीश से करवा दीजियेगा। अब कोई नया रिश्ता नहीं।"
"बड़ो से बात होने दो। मुझे भी पसन्द है रवीश।"
"ठीक है।चल निशी आज पेस्ट्री पापा की तरफ से।"
"ये..sss तू चेंज कर ले।ऐसे ही जाएगी क्या?"
"क्यों साड़ी में अच्छी नही लग रही क्या?"
"हम्म लग तो लल्लनटॉप रही हो पर कोई पीछे पड़ गया तो?"
"चल न यार।"
अंकल ताऊ जी को फोन लगा कर बात कर रहे थे और हम दोनों आजाद बेकरी आ गए मेरी फेवरेट कोकोनट चॉकलेट पेस्ट्री खाने।
पेस्ट्री खाने के बाद।मैंने रिया को जनरेशन स्टूडियो दिखाया।
"चल जब तैयार है ही तो एक फोटो भी खिंचवा ले।क्या पता कल को रवीश से शादी नही हुई तो अंकल को फ़ोटो दे देना।इसे दिखाओ मुझे नहीं।"
"आईडिया सही है बे तेरा। चल।"
हम दोनों जनरेशन स्टूडियो में पहुच गए।बहुत पोज़ देने के बाद दो चार फोटोज अच्छी दिखीं।क्योंकि रिया मैडम का मुंह बंद हो जाये और वो शांति से फ़ोटो खिंचवा ले पॉसिबल नहीं।
लेकिन मेरा फोन आया और मैं जब बाहर आ गई तब उसकी पिक्स अच्छी क्लिक हुईं।
"हेलो।"
"निशी।अब भी नाराज हो?"
"पंकज?ये कौन सा नम्बर है?"
"मुझे लगा मेरे नम्बर से फोन नही उठाओगी तो..इसलिए।"
"देखो पंकज।मैं बाद में बात करूँगी तुमसे।अभी बिजी हूँ।"
"निशी, तुमने मेरे गिफ्ट खोल कर देखा?"
ओह गिफ्ट्स तो खोले ही नही अब तक मैंने।सच कहूं तो मुझे गिफ्ट्स से हमेशा से परहेज था तो कभी भी गिफ्ट्स खोलने की उत्सुकता नही होती।इसलिए देखा ही नहीं।
"पंकज बिजी थी। कल भी नही देख पाई थी आज देखकर बताती हूँ।"
"तुम्हें पसन्द आएगा।मुझे पता है।"
"बाय पंकज।"
मैं अंदर आ गई और रिया की जिद पर एक दो सिंगल पोज़ मैने भी दे ही दिए।
एक बार फिर फोन बजा पर इस बार मेरा नही रिया का।
"जी पापा बस आ ही रहे हैं।"
हम दोनों स्टूडियो से निकल आये।
"रिया तू जा घर मैं निकल रही हूं।फिर.."
"हाँ-हाँ फिर अपने अभ्युदय जी के पास भी तो जाना है।"
"हाँ जाना तो है पर पहले वो पंकज का गिफ्ट देखना है।"
"ओहो। पंकज के गिफ्ट में बड़ा इंटरेस्ट आ रहा है तुझे?"
"नही यार।तुझे पता उसने क्या किया?"
"क्या किया?"
"मुझे बोल रहा है कि मुझे पसन्द करता है।"
"कुछ नया है इसमें?मैंने तो पहले ही बता दिया था।"
"अरे.. पर, मुझे लगा था तेरा और उसका कोई सीन होगा।इसलिए मैंने पूछ लिया और वो सीधे बोल गया रिया नही तुम पंसद हो।"
"हा हा हा हा निशी तू पागल है।"
"अब मैं पागल हूँ। हाँ मैं पागल ही हूँ। सब मुझे पागल बोलो। कल से अभ्युदय जी भी लगे हुए हैं पागल हो।अब तुम भी शुरू हो जाओ।"
"बस कर। कितना हाइपर रियेक्ट कर रही है। शान्त हो जा।तुझे क्यों लगा कि पंकज मुझे पसंद करता है?"
"देख मुझे लगा तेरी और उसकी बनती है,तो हो सकता है न कि बोल नही पा रहा हो।"
"बोल दिया ना?"
"हाँ बोल दिया। चल मैं जा रही हूँ।कल मिलते हैं कॉलेज में।"
"ओके बाय।"
"कल जल्दी आना बताना है कि शादी का भी प्रपोसल मिला था।"
रिया के कान खड़े हो गए।
"रुक। निशी क्या कहा तूने?"
"कल बताऊंगी।बाय।"
मैं आगे बढ़ गई रिया की गाड़ी के पास से।लेकिन अब रिया को चैन कैसे मिलता।पीछे-पीछे आई गाड़ी से।
"बैठ जा चुप-चाप।"
"लेकिन पापा का फोन?"
रिया ने गाड़ी लगा कर साइड में अंकल को फोन किया।
"पापा निशी को ऑटो नही मिल रहा है।इसे घर छोड़ कर आ रही हूँ 20 मिनट में।"
फोन रखकर गाड़ी स्टार्ट की और बिना कुछ बोले कछपुरा ब्रिज पर आकर गाड़ी रोक ली।
"क्या हुआ?गाड़ी क्यों रोकी?"
"क्योंकि अब आप बताएंगी।कौन सी शादी?किसकी शादी? कैसा प्रपोसल?"
"अच्छा।चल पहले भुट्टा खिला।"
"तू बहुत चीज़े छिपाने लगी है न मुझसे?"
"पागल है क्या रिया? नही बताना होता तो इतना भी क्यों कहती?"
"चल आजा भुट्टा खाना है न?"
"नही खाना रहने दे।मूड ऑफ कर दिया तूने।"
"चल ना वरना तेरे पेट मे जो भुट्टे खाने वाले चूहे हैं वो तुझे अभी कभी काट-काट के परेशान कर देंगे।"
"बकवास न कर।चल।"
भुट्टे वाले को दो मीठे भुट्टे भुनने का बोलकर हम दोनों ब्रिज के किनारे आकर खड़े हो गए।
"अब बताएगी? या उसका कोई मुहूर्त निकलेगा?"
"कल तिलवारा पर।"
"हम्म.."
"अभ्युदय जी ने कहा.. शादी कर लो।"
"तूने क्या कहा?"
"मैंने कुछ भी नहीं।उन्होंने ही फिर मना कर दिया।"
"निशी। सच-सच बताना आज।प्यार करती है न उनसे?"
"रिया कैसे इसे प्यार कहूँ? तू खुद बता क्या मेरे माँ पापा मानेंगे इस रिश्ते के लिए? प्यार का मतलब क्या होता है? मैं बहुत परवाह करती हूं उनकी पर"
"पर क्या निशी? बोल न क्या?"
"पर मैंने कभी ऐसा नही सोचा कि अपने माँ पा के खिलाफ जा पाऊंगी मैं।"
"निशी फिर उनको सपने मत दिखा।उनकी आंखे साफ जाहिर करती हैं प्यार तेरे लिए।"
"प्यार न? मेरी आँखों मे क्या दिखता है तुझे उनके लिए?"
"कभी गौर नही किया मैंने।"
"तो अब करना।प्यार और वासना में एक महीन सी रेखा होगी।तुझे प्यार ही मिलेगा हम दोनों की आंखों में।वासना नहीं।"
"समझ नही पा रही हूँ।"
"प्यार समझ तू। मैं और अभ्युदय जी,हमें एक दूसरे का साथ ही प्यारा है।वो चाहे शादी करने के बाद हो या अभी।एक दूसरे को देख कर जो खुशी मिल जाती है वो प्यार है। उनको मुस्कुराता देखना प्यार है।उन्हें अपने दिल की बातें सुनते देखना प्यार है।अनजाने में ही सही पर उन पर गुस्सा करना भी प्यार है।"
"निशी तू पागल हो गई है।"
"अगर अभ्युदय जी के बारे में बात करना और अपने प्यार का इजहार करना पागलपन है तो रिया मैं पागल हूँ।"
मैं जोर से चिल्लाई
"हाँ मैं पागल हूँ।"
पीछे से भुट्टे वाले भैया ने आवाज दी।
"दीदी पैसे हैं न आपके पास?"
रिया और मैं जोर से हंस पड़े।
"क्यों पैर छुए तुमने?किसने कहा था?"
"पापा मैंने तो सोचा आपको अच्छा लगेगा।संस्कारीत लगूंगी।"
"लेकिन जब मैंने नही कहा तो क्या जरूरत थी?"
"पर हुआ क्या पापा?आप ही रिश्ता लाएं हैं न?मैं थोड़े न अपनी पसंद का लड़का लेकर आ गई हूँ क्या हुआ आपको अचानक?"
"अभी तुम्हारे ताऊ जी से बात करनी होगी इस बारे में।तिवारी में शादी की जा सकती है कि नहीं?"
"क्या पापा आप भी।राधिका दीदी की शादी भी तो त्रिवेदी में हुई है।फिर ये तिवारी में क्या दिक्कत होगी?" रिया का तर्क बिल्कुल सही था।राधिका दीदी ताऊ जी की ही बेटी हैं।
"लेकिन एक बार पूछना तो होगा ही।बात करते हैं हम। तुम पढ़ाई करो अभी।"
"पापा अब कोई फ़ोटो नही देखूंगी मैं।शादी करानी है तो रवीश से करवा दीजियेगा। अब कोई नया रिश्ता नहीं।"
"बड़ो से बात होने दो। मुझे भी पसन्द है रवीश।"
"ठीक है।चल निशी आज पेस्ट्री पापा की तरफ से।"
"ये..sss तू चेंज कर ले।ऐसे ही जाएगी क्या?"
"क्यों साड़ी में अच्छी नही लग रही क्या?"
"हम्म लग तो लल्लनटॉप रही हो पर कोई पीछे पड़ गया तो?"
"चल न यार।"
अंकल ताऊ जी को फोन लगा कर बात कर रहे थे और हम दोनों आजाद बेकरी आ गए मेरी फेवरेट कोकोनट चॉकलेट पेस्ट्री खाने।
पेस्ट्री खाने के बाद।मैंने रिया को जनरेशन स्टूडियो दिखाया।
"चल जब तैयार है ही तो एक फोटो भी खिंचवा ले।क्या पता कल को रवीश से शादी नही हुई तो अंकल को फ़ोटो दे देना।इसे दिखाओ मुझे नहीं।"
"आईडिया सही है बे तेरा। चल।"
हम दोनों जनरेशन स्टूडियो में पहुच गए।बहुत पोज़ देने के बाद दो चार फोटोज अच्छी दिखीं।क्योंकि रिया मैडम का मुंह बंद हो जाये और वो शांति से फ़ोटो खिंचवा ले पॉसिबल नहीं।
लेकिन मेरा फोन आया और मैं जब बाहर आ गई तब उसकी पिक्स अच्छी क्लिक हुईं।
"हेलो।"
"निशी।अब भी नाराज हो?"
"पंकज?ये कौन सा नम्बर है?"
"मुझे लगा मेरे नम्बर से फोन नही उठाओगी तो..इसलिए।"
"देखो पंकज।मैं बाद में बात करूँगी तुमसे।अभी बिजी हूँ।"
"निशी, तुमने मेरे गिफ्ट खोल कर देखा?"
ओह गिफ्ट्स तो खोले ही नही अब तक मैंने।सच कहूं तो मुझे गिफ्ट्स से हमेशा से परहेज था तो कभी भी गिफ्ट्स खोलने की उत्सुकता नही होती।इसलिए देखा ही नहीं।
"पंकज बिजी थी। कल भी नही देख पाई थी आज देखकर बताती हूँ।"
"तुम्हें पसन्द आएगा।मुझे पता है।"
"बाय पंकज।"
मैं अंदर आ गई और रिया की जिद पर एक दो सिंगल पोज़ मैने भी दे ही दिए।
एक बार फिर फोन बजा पर इस बार मेरा नही रिया का।
"जी पापा बस आ ही रहे हैं।"
हम दोनों स्टूडियो से निकल आये।
"रिया तू जा घर मैं निकल रही हूं।फिर.."
"हाँ-हाँ फिर अपने अभ्युदय जी के पास भी तो जाना है।"
"हाँ जाना तो है पर पहले वो पंकज का गिफ्ट देखना है।"
"ओहो। पंकज के गिफ्ट में बड़ा इंटरेस्ट आ रहा है तुझे?"
"नही यार।तुझे पता उसने क्या किया?"
"क्या किया?"
"मुझे बोल रहा है कि मुझे पसन्द करता है।"
"कुछ नया है इसमें?मैंने तो पहले ही बता दिया था।"
"अरे.. पर, मुझे लगा था तेरा और उसका कोई सीन होगा।इसलिए मैंने पूछ लिया और वो सीधे बोल गया रिया नही तुम पंसद हो।"
"हा हा हा हा निशी तू पागल है।"
"अब मैं पागल हूँ। हाँ मैं पागल ही हूँ। सब मुझे पागल बोलो। कल से अभ्युदय जी भी लगे हुए हैं पागल हो।अब तुम भी शुरू हो जाओ।"
"बस कर। कितना हाइपर रियेक्ट कर रही है। शान्त हो जा।तुझे क्यों लगा कि पंकज मुझे पसंद करता है?"
"देख मुझे लगा तेरी और उसकी बनती है,तो हो सकता है न कि बोल नही पा रहा हो।"
"बोल दिया ना?"
"हाँ बोल दिया। चल मैं जा रही हूँ।कल मिलते हैं कॉलेज में।"
"ओके बाय।"
"कल जल्दी आना बताना है कि शादी का भी प्रपोसल मिला था।"
रिया के कान खड़े हो गए।
"रुक। निशी क्या कहा तूने?"
"कल बताऊंगी।बाय।"
मैं आगे बढ़ गई रिया की गाड़ी के पास से।लेकिन अब रिया को चैन कैसे मिलता।पीछे-पीछे आई गाड़ी से।
"बैठ जा चुप-चाप।"
"लेकिन पापा का फोन?"
रिया ने गाड़ी लगा कर साइड में अंकल को फोन किया।
"पापा निशी को ऑटो नही मिल रहा है।इसे घर छोड़ कर आ रही हूँ 20 मिनट में।"
फोन रखकर गाड़ी स्टार्ट की और बिना कुछ बोले कछपुरा ब्रिज पर आकर गाड़ी रोक ली।
"क्या हुआ?गाड़ी क्यों रोकी?"
"क्योंकि अब आप बताएंगी।कौन सी शादी?किसकी शादी? कैसा प्रपोसल?"
"अच्छा।चल पहले भुट्टा खिला।"
"तू बहुत चीज़े छिपाने लगी है न मुझसे?"
"पागल है क्या रिया? नही बताना होता तो इतना भी क्यों कहती?"
"चल आजा भुट्टा खाना है न?"
"नही खाना रहने दे।मूड ऑफ कर दिया तूने।"
"चल ना वरना तेरे पेट मे जो भुट्टे खाने वाले चूहे हैं वो तुझे अभी कभी काट-काट के परेशान कर देंगे।"
"बकवास न कर।चल।"
भुट्टे वाले को दो मीठे भुट्टे भुनने का बोलकर हम दोनों ब्रिज के किनारे आकर खड़े हो गए।
"अब बताएगी? या उसका कोई मुहूर्त निकलेगा?"
"कल तिलवारा पर।"
"हम्म.."
"अभ्युदय जी ने कहा.. शादी कर लो।"
"तूने क्या कहा?"
"मैंने कुछ भी नहीं।उन्होंने ही फिर मना कर दिया।"
"निशी। सच-सच बताना आज।प्यार करती है न उनसे?"
"रिया कैसे इसे प्यार कहूँ? तू खुद बता क्या मेरे माँ पापा मानेंगे इस रिश्ते के लिए? प्यार का मतलब क्या होता है? मैं बहुत परवाह करती हूं उनकी पर"
"पर क्या निशी? बोल न क्या?"
"पर मैंने कभी ऐसा नही सोचा कि अपने माँ पा के खिलाफ जा पाऊंगी मैं।"
"निशी फिर उनको सपने मत दिखा।उनकी आंखे साफ जाहिर करती हैं प्यार तेरे लिए।"
"प्यार न? मेरी आँखों मे क्या दिखता है तुझे उनके लिए?"
"कभी गौर नही किया मैंने।"
"तो अब करना।प्यार और वासना में एक महीन सी रेखा होगी।तुझे प्यार ही मिलेगा हम दोनों की आंखों में।वासना नहीं।"
"समझ नही पा रही हूँ।"
"प्यार समझ तू। मैं और अभ्युदय जी,हमें एक दूसरे का साथ ही प्यारा है।वो चाहे शादी करने के बाद हो या अभी।एक दूसरे को देख कर जो खुशी मिल जाती है वो प्यार है। उनको मुस्कुराता देखना प्यार है।उन्हें अपने दिल की बातें सुनते देखना प्यार है।अनजाने में ही सही पर उन पर गुस्सा करना भी प्यार है।"
"निशी तू पागल हो गई है।"
"अगर अभ्युदय जी के बारे में बात करना और अपने प्यार का इजहार करना पागलपन है तो रिया मैं पागल हूँ।"
मैं जोर से चिल्लाई
"हाँ मैं पागल हूँ।"
पीछे से भुट्टे वाले भैया ने आवाज दी।
"दीदी पैसे हैं न आपके पास?"
रिया और मैं जोर से हंस पड़े।