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रूचि बिस्तर ठीक करने में कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रही थी इसलिए शुभम के द्वारा दरवाजा खटखटाया जाने पर भी उसका ध्यान नहीं गया और वह उसी तरह से बिस्तर को ठीक करती रही,,, रूचि के ज्यादा झुक जाने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गांड और भी ज्यादा हवा में उठ गई,,, और इस तरह से औरतों की उठी हुई बड़ी-बड़ी गांड तो शुभम की थर्मामीटर के पारे को बढ़ाने के लिए काफी होती थी,,, कुछ ही सेकंड में शुभम के पेंट में तंबू सा बन गया। रूचि इतनी ज्यादा टाइट साड़ी पहनती थीै कि उसकी गांड की दोनों फांकें किसी खरबूजे की भांति,,साड़ी के ऊपर से नजर आने लगी।,,,
इस अद्भुत और मादक दृश्य को देखकर शुभम की धड़कन तेज होने लगी वह अब दोबारा दरवाजे को खटखटाने की जहमत नहीं उठाना चाहता था क्योंकि यह नजारा ही इतना गजब का था कि आंखों से उतर कर पूरे बदन में हलचल सा मचा दे रहा था शुभम आंखें गड़ाए अपनी छोटी मामी की खूबसूरत बदन की हलचल को देखता रहा। उसके जी में तो आ रहा था कि पीछे से जाकर पकड़ ले और उसकी साड़ी उठाकर अपना मोटा लंड ऊसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दे,,,। और उसके मन में ऐसा ही कुछ करने को हो रहा था क्योंकि वह इस घर की बड़ी बहू मतलब उसकी बड़ी बानी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर यही सोच रहा था कि जब घर की बड़ी बहू उस से चुदवाने के लिए तैयार हो गई थी और बेझिझक चुदाई का मजा भी ले चुकी है तो छोटी बहू भी उसी की ही तरह होगी,,, और वैसे भी शुभम को अपनी ताकत पर पूरा विश्वास था,,, शुभम को मन ही मन में अपने लंड पर गर्व होने लगा था,,, क्योंकि अब तक 3 औरतें बेझिझक उसके लंड की प्यासी हो चुकी थी।,,, वह।अब तक इतना तो समझ ही गया था कि,,, औरतें मोटे और लंबे लंड की दीवानी होती है इसलिए उसके मन में ख्याल आ रहा था की यह वाली मामी भी उसके मोटे तगड़े लंड को देखेगी तो वह इंकार नहीं कर पाएगी।,,,, यह सोचकर सुभम की दिल की धड़कन तेज हो गई। शुभम पूरी तरह से दृढ़ निश्चय कर लिया था कि आज का अपनी छोटी मामी की रसीली बुर का भी स्वाद चख लेगा इसलिए उसे पीछे से पकड़ने के लिए अपना कदम आगे बढ़ाया ही था कि रुचि को पीछे हलचल सी महसूस हुई,,, और वहां जाते थे पीछे की तरफ देखी तो,,, शुभम को अपनी तरफ आता देख कर एक पल के लिए तो वह डर ही गई लेकिन जैसे ही उसे आभास हुआ कि वह शुभम हे तो उसे थोड़ी राहत हुई वह शुभम की तरफ देखते हुए बोली,,,,।
शुभम,,, बेटा तु यहां,,,, कोई काम,,,,,,,, ( उसके मुंह से इतना ही निकला था कि उसकी नजर शुभम के पेंट में बने लंबे तंबू पर गई,,, तो शब्द ऊसके मुंह में ही अटक गए,, शुभम के चेहरे के भाव और उसकी शारीरिक भाषा को देख कर रूचि को समझते देर नहीं लगी कि शुभम क्या करने वाला था वह अभी भी उसी अवस्था में ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में उठाए पीछे की तरफ देख रही थी,,, शुभम के पेंट में बने लंबे तंबू और अपनी तबीयत बड़ी गांड की तरफ देखते हुए वह सारा मामला समझ गई एक पल के लिए तो एकदम शर्मिंदा हो गई और अपनी स्थिति को बदलते हुए,,, वह शुभम की तरफ घूमी और गुस्से में बोली,,,।)
शुभम यह क्या हरकत है?
( अपनी छोटी मामी के मुंह से यह सुनकर शुभम चौक सा गया,,, कुछ ही सेकंड में उसके चेहरे पर घबराहट के भाव ऊपंसने लगे,,, वह अपने चेहरे पर आए डर के भाव को बदलते हुए बोला,,,।)
कककक,, क्या हुआ मामी कैसी हरकत आप क्या बोल रही हैं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।,,,,
लेकिन मुझे सब समझ में आ रहा है,,।( रूचि उस के तने हुए तंबू की तरफ देखते हुए बोली,,,।)
देखने में कितना भोला भाला लगता है लेकिन मन में तेरे कितना चोर है।
मामी आप यह क्या कह रही हैं,,,? ( शुभम अनजान बनता हुआ बोला।)
चल अब बातें मत करना तू चाहे जितना भी छुपाने की कोशिश कर ले लेकिन तेरे मन में क्या चल रहा था तेरा ये( तने हुए तंबू की तरफ इशारा करते हुए) सब कुछ बता दे रहा है।
( अपनी छोटी मामी की उंगली के इशारे की तरफ जब उसका ध्यान दिया तो उसे सब समझ में आ गया वह शर्मिंदा हो गया।)
ना जाने कब से दरवाजे पर खड़े होकर तू मेरे बारे में क्या क्या सोच रहा था।
मामी में कुछ नहीं सोच रहा था (अपने तंबू को हाथों से छुपाने की कोशिश करते हुए)
कुछ नहीं सोच रहा था तो यह तेरा,,,,,, खड़ा कैसे हो गया।( रूचि गुस्से में बोले जा रही थी अपनी छोटी मामी का यह रूप देखकर शुभम घबरा गया,,,। और दूसरा कोई सुन ना ले इसलिए हाथ जोड़ते हुए बोला।।)
मामी मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं मुझसे गलती हो गई,,,,।
गलती इसे गलती कहते हैं या वासना कहते हैं अपनी ही मामी के बारे में तू ना जाने क्या-क्या सोच रहा था। रुक मैं तेरी मम्मी से बता देती हूं जो तुझे बहुत ही अच्छा लड़का समझती है ना,,,।
( यह बात सुनकर शुभम एकदम से रुुंआसा हो गया और झट से अपनी मामी के पैर पकड़ लिया और बोला)
नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं तुम्हारे पैर पकड़ता हूं मैं बदनाम हो जाऊंगा,,,।( इतना कहते हुए शुभम रोने लगा,,, और उसे रोता हुआ देखकर रूचि का दिल थोड़ा सा नाराज हुआ और वह उसे कंधों से पकड़कर उठाते हुए बोली।)
शुभम तेरी उम्र पढ़ने लिखने की है ना की औरतों के पीछे लार टपकाने वाली,,,,
मामी मुझसे गलती हो गई,,,, मैं दुबारा ऐसा कभी भी नहीं करूंगा,,,।
( रुचि को लगने लगा कि शुभम को उसकी गलती का पूरा एहसास हो गया है इसलिए वह बोली,,,।)
अच्छा अब रो मत मैं किसी से नहीं कहूंगी,,,,। अच्छा यह बता तुमने ऐसा क्या देख लिया जो तेरी ऐसी (लंड की तरफ इशारा करते हुए हालत हो गई),,,
नहीं मामी ऐसा कुछ नहीं हुआ( अपने आंसू पोंछते हुए बोला)
देख अब मुझसे कुछ भी मत छुपा मेरा गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है मैं जाकर सब बता दूंगी,,,
नहीं नहीं मामी मैं बताता हूं,,, मैं बड़ी मामी को ढूंढता हुआ यहां आ गया और तुम्हें इस तरह से झुके हुए देखकर तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर ना जाने मुझे क्या हो गया और मेरी ऐसी,,,,,( शर्मिंदगी के मारे सुभम इससे ज्यादा कुछ बोल नहीं पाया और नजरें झुका लिया,।)
छी,,,,, कितना गंदा सोचता है रे तू अब भाग जा यहां से बिल्कुल भी मेरी आंखो के सामने खड़े मत रहना वरना मुझ से रहा नहीं जाएगा और मैं सबको बता दूंगी,,,,( रूचि गुस्से में बोली और शुभम इतना सुनते ही कमरे से तुरंत बाहर निकल गया।,,,,,,
शुभम कमरे से बाहर आकर सीधे अपने कमरे मे आकर बिस्तर पर बैठ गया वह काफी डरा हुआ था क्योंकि उसने ऐसा कुछ हो जाएगा यह सब के बारे में सोचा ही नहीं था क्योंकि अभी तक जितनी भी औरतें उसे मिली थी वह सभी को आसानी से प्राप्तकर्ता जा रहा था। बड़ी मामी के साथ भी संभोग सुख की प्राप्ति आसानी से कर लेने की वजह से उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह छोटी मामी के साथ भी अपनी मनमानी कर लेगा लेकिन उसके सोचने के विरुद्ध उसकी छोटी मामी उसे भला बुरा सुना दी,,, वह मन ही मन में सोचने लगा कि अगर वह सबको बता देती तो ना जाने क्या हो जाता,,,।,, लेकिन इतना तो समझ ही गया था कि छोटी मामी किसी भी तरीके से उसके नीचे आने वाली नहीं है इसलिए उसे उसकी छोटी मामी को पाने का ख्याल छोड़ देना चाहिए।,,, उसे अपने आप पर बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि जिस तरह से वह रोते हुए अपनी मामी के पैर पकड़ कर गिड़गिड़ा रहा था,,,, वह तरह की स्थिति में कभी पहुंच जाएगा उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।,,,
वह बिस्तर पर लेट कर यही सब सोच रहा था लेकिन उसके जेहन से वह नजारा भी नहीं हट रहा था जब वह दरवाजे पर खड़े होकर अपनी छोटी मामी की गदराई गांड को देखकर उत्तेजित हुए जा रहा था।,,,, वह मन मसोसकर रह गया कि काश उसकी छोटी मामी की मद मस्त गांड का स्वाद भी उसे चखने को मिल जाता,,,, लेकिन अफसोस कि वह चरित्र की एकदम पक्की निकली,,, काश वह भी उसकी बड़ी मामी की तरह फिसल जाती तो एक और खूबसूरत औरत उसकी बाहों में आ जाती।,,,, इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी की आंखों के सामने रुचि की बड़ी बड़ी गांड मटक रही थी जिसके बारे में सोचते हुए वह सो गया।,,,
रात अपने पूरे शबाब पर थी भोजन तैयार हो चुका था धीरे-धीरे लोग खाने के लिए इकट्ठे हो रहे थे शुभम भी हाथ मुंह धोकर भोजन करने के लिए जाने ही वाला था कि उसे फिर से वही साया नजर आया और वह सब की नजरें बचाकर घर के पीछे की तरफ आगे बढ़ती चली जा रही थी क्योंकि इतना तो समझ ही गया था कि वह साया किसी औरत का ही था,,,, इसलिए बाकी सब से नजरें बचाकर दुबते हुए ऊस।साए के पीछे जाने लगा,,,
चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, आज उस साएे के हाथ में टॉर्च भी थी जिसे वह रह रह कर सब की नजरें बचाकर जला दे रही थी और उस टॉर्च की रोशनी में रास्ता देखते हुए आगे बढ़ रही थी। शुभम अपने आप को उसके सारे की नजर से बचाते हुए झाड़ियों के पीछे पीछे चला जा रहा था वह मन में फैसला कर चुका था कि आज उस कार्य को देखकर ही रहेगा कि आखिर वह साया है किसका,,,, क्योंकि औरत का इस तरह से छुपते छुपातो रात के समय घर से बाहर निकलने का मतलब बिल्कुल साफ होता है कि वह किसी से मिलने ही जा रही है। गांव का माहौल जिसकी वजह से चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था शुभम को थोड़ा बहुत डर भी लग रहा था लेकिन अपने आगे आगे चल रहे औरत के सारे की वजह से उसे थोड़ी बहुत हिम्मत भी मिल रही थी। कुत्तों के भौंकने की आवाज शुभम थोड़ा बहुत सहम जा रहा था। वह साया धीरे-धीरे खेतों की तरफ आ गया था।,,, वह साया खेतों के करीब घनी झाड़ियों के पास रुक गया और इधर-उधर नजरें घुमा कर देखने लगा,,,, शुभम भी पेड़ के पीछे अपने आप को छिपाकर खड़े हो गया और वहां से ऊस साए की तरफ बराबर नजर गड़ाए हुए देखने लगा,,,। पेड़ से गिरी सूखी पत्तियों की वजह से उसके कदमों की आवाज़ उस साए को ना सुनाई दे इसलिए वह बचा बचा कर बहुत ही धीरे-धीरे कदम रख रहा था। शुभम के दिल की धड़कन उत्सुकतावश बहुत तेज हो चुकी थी क्योंकि वह जानना चाहता था कि वह सहाय के पीछे कौन सा चेहरा छुपा हुआ है और वह किसका इंतजार कर रही है।
खेतों में छाए हुए सन्नाटे में ऊस साए की चूड़ियों की खन खन की आवाज शुभम को मादकता का एहसास दिला रही थी। एक तरह से उस साए की चूड़ियों की आवाज शुभम के तन-बदन में उत्तेजना का अहसास करा रही थी। वह पाया कुछ देर तक इधर उधर देखती रही वह किसी का इंतजार कर रही थी शुभम अपनी धड़कनों को संभाले हुए उस साए की तरफ नजरें गड़ाए हुए था। तभी झाड़ियों के पीछे से एक दूसरा साया बाहर आया और आते ही उसने उसकी आंखों पर हाथ रख कर उसे डरा दिया,,,,
क्या करते हो कितनी देर लगा दी तुमने मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं,,,( वह नाराजगी दर्शाते हुए बोली)
क्या करूं मेरी जान सब काम जल्दी जल्दी निपटा कर भागता हुआ तुम्हारे पास आया हूं क्या करूं तुमसे मिले बिना मुझे भी चैन नहीं मिलता,,,,
मेरा भी तो यही हाल होता है तुम्हारे बिना तभी तो मैं सब कुछ छोड़ छाड़ कर तुमसे मिलने यहां चली आती हूं,,,।
तो मेरी जान खेतों में चलते हैं और वहां जी भर कर प्यार करते हैं,,,,
( इतना कहने के साथ ही वह साया उसे खेतों के अंदर ले जाने लगा,,, दोनों धीरे-धीरे फुसफुसाकर बातें कर रहे थे इसलिए शुभम को बात तो थोड़ी बहुत समझ में आ रही थी लेकिन आवाज नहीं पहचान पा रहा था लेकिन इतना तो तय था कि खेतों के अंदर दोनों के जाने का मतलब था कि चुदाई का खेल शुरू होने वाला था इसलिए शुभम भी बेहद उत्सुक हो गया खेतों के बीच का नजारा देखने के लिए उसने जाने से ज्यादा उसे इस बात की उत्सुकता थी कि आखिरकार दोनों साए हैं किसके,,,, यह देखने के लिए वह भी धीरे-धीरे खेतों के अंदर जाने लगा,,,,,।)
इस अद्भुत और मादक दृश्य को देखकर शुभम की धड़कन तेज होने लगी वह अब दोबारा दरवाजे को खटखटाने की जहमत नहीं उठाना चाहता था क्योंकि यह नजारा ही इतना गजब का था कि आंखों से उतर कर पूरे बदन में हलचल सा मचा दे रहा था शुभम आंखें गड़ाए अपनी छोटी मामी की खूबसूरत बदन की हलचल को देखता रहा। उसके जी में तो आ रहा था कि पीछे से जाकर पकड़ ले और उसकी साड़ी उठाकर अपना मोटा लंड ऊसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दे,,,। और उसके मन में ऐसा ही कुछ करने को हो रहा था क्योंकि वह इस घर की बड़ी बहू मतलब उसकी बड़ी बानी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर यही सोच रहा था कि जब घर की बड़ी बहू उस से चुदवाने के लिए तैयार हो गई थी और बेझिझक चुदाई का मजा भी ले चुकी है तो छोटी बहू भी उसी की ही तरह होगी,,, और वैसे भी शुभम को अपनी ताकत पर पूरा विश्वास था,,, शुभम को मन ही मन में अपने लंड पर गर्व होने लगा था,,, क्योंकि अब तक 3 औरतें बेझिझक उसके लंड की प्यासी हो चुकी थी।,,, वह।अब तक इतना तो समझ ही गया था कि,,, औरतें मोटे और लंबे लंड की दीवानी होती है इसलिए उसके मन में ख्याल आ रहा था की यह वाली मामी भी उसके मोटे तगड़े लंड को देखेगी तो वह इंकार नहीं कर पाएगी।,,,, यह सोचकर सुभम की दिल की धड़कन तेज हो गई। शुभम पूरी तरह से दृढ़ निश्चय कर लिया था कि आज का अपनी छोटी मामी की रसीली बुर का भी स्वाद चख लेगा इसलिए उसे पीछे से पकड़ने के लिए अपना कदम आगे बढ़ाया ही था कि रुचि को पीछे हलचल सी महसूस हुई,,, और वहां जाते थे पीछे की तरफ देखी तो,,, शुभम को अपनी तरफ आता देख कर एक पल के लिए तो वह डर ही गई लेकिन जैसे ही उसे आभास हुआ कि वह शुभम हे तो उसे थोड़ी राहत हुई वह शुभम की तरफ देखते हुए बोली,,,,।
शुभम,,, बेटा तु यहां,,,, कोई काम,,,,,,,, ( उसके मुंह से इतना ही निकला था कि उसकी नजर शुभम के पेंट में बने लंबे तंबू पर गई,,, तो शब्द ऊसके मुंह में ही अटक गए,, शुभम के चेहरे के भाव और उसकी शारीरिक भाषा को देख कर रूचि को समझते देर नहीं लगी कि शुभम क्या करने वाला था वह अभी भी उसी अवस्था में ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में उठाए पीछे की तरफ देख रही थी,,, शुभम के पेंट में बने लंबे तंबू और अपनी तबीयत बड़ी गांड की तरफ देखते हुए वह सारा मामला समझ गई एक पल के लिए तो एकदम शर्मिंदा हो गई और अपनी स्थिति को बदलते हुए,,, वह शुभम की तरफ घूमी और गुस्से में बोली,,,।)
शुभम यह क्या हरकत है?
( अपनी छोटी मामी के मुंह से यह सुनकर शुभम चौक सा गया,,, कुछ ही सेकंड में उसके चेहरे पर घबराहट के भाव ऊपंसने लगे,,, वह अपने चेहरे पर आए डर के भाव को बदलते हुए बोला,,,।)
कककक,, क्या हुआ मामी कैसी हरकत आप क्या बोल रही हैं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।,,,,
लेकिन मुझे सब समझ में आ रहा है,,।( रूचि उस के तने हुए तंबू की तरफ देखते हुए बोली,,,।)
देखने में कितना भोला भाला लगता है लेकिन मन में तेरे कितना चोर है।
मामी आप यह क्या कह रही हैं,,,? ( शुभम अनजान बनता हुआ बोला।)
चल अब बातें मत करना तू चाहे जितना भी छुपाने की कोशिश कर ले लेकिन तेरे मन में क्या चल रहा था तेरा ये( तने हुए तंबू की तरफ इशारा करते हुए) सब कुछ बता दे रहा है।
( अपनी छोटी मामी की उंगली के इशारे की तरफ जब उसका ध्यान दिया तो उसे सब समझ में आ गया वह शर्मिंदा हो गया।)
ना जाने कब से दरवाजे पर खड़े होकर तू मेरे बारे में क्या क्या सोच रहा था।
मामी में कुछ नहीं सोच रहा था (अपने तंबू को हाथों से छुपाने की कोशिश करते हुए)
कुछ नहीं सोच रहा था तो यह तेरा,,,,,, खड़ा कैसे हो गया।( रूचि गुस्से में बोले जा रही थी अपनी छोटी मामी का यह रूप देखकर शुभम घबरा गया,,,। और दूसरा कोई सुन ना ले इसलिए हाथ जोड़ते हुए बोला।।)
मामी मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं मुझसे गलती हो गई,,,,।
गलती इसे गलती कहते हैं या वासना कहते हैं अपनी ही मामी के बारे में तू ना जाने क्या-क्या सोच रहा था। रुक मैं तेरी मम्मी से बता देती हूं जो तुझे बहुत ही अच्छा लड़का समझती है ना,,,।
( यह बात सुनकर शुभम एकदम से रुुंआसा हो गया और झट से अपनी मामी के पैर पकड़ लिया और बोला)
नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं तुम्हारे पैर पकड़ता हूं मैं बदनाम हो जाऊंगा,,,।( इतना कहते हुए शुभम रोने लगा,,, और उसे रोता हुआ देखकर रूचि का दिल थोड़ा सा नाराज हुआ और वह उसे कंधों से पकड़कर उठाते हुए बोली।)
शुभम तेरी उम्र पढ़ने लिखने की है ना की औरतों के पीछे लार टपकाने वाली,,,,
मामी मुझसे गलती हो गई,,,, मैं दुबारा ऐसा कभी भी नहीं करूंगा,,,।
( रुचि को लगने लगा कि शुभम को उसकी गलती का पूरा एहसास हो गया है इसलिए वह बोली,,,।)
अच्छा अब रो मत मैं किसी से नहीं कहूंगी,,,,। अच्छा यह बता तुमने ऐसा क्या देख लिया जो तेरी ऐसी (लंड की तरफ इशारा करते हुए हालत हो गई),,,
नहीं मामी ऐसा कुछ नहीं हुआ( अपने आंसू पोंछते हुए बोला)
देख अब मुझसे कुछ भी मत छुपा मेरा गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है मैं जाकर सब बता दूंगी,,,
नहीं नहीं मामी मैं बताता हूं,,, मैं बड़ी मामी को ढूंढता हुआ यहां आ गया और तुम्हें इस तरह से झुके हुए देखकर तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर ना जाने मुझे क्या हो गया और मेरी ऐसी,,,,,( शर्मिंदगी के मारे सुभम इससे ज्यादा कुछ बोल नहीं पाया और नजरें झुका लिया,।)
छी,,,,, कितना गंदा सोचता है रे तू अब भाग जा यहां से बिल्कुल भी मेरी आंखो के सामने खड़े मत रहना वरना मुझ से रहा नहीं जाएगा और मैं सबको बता दूंगी,,,,( रूचि गुस्से में बोली और शुभम इतना सुनते ही कमरे से तुरंत बाहर निकल गया।,,,,,,
शुभम कमरे से बाहर आकर सीधे अपने कमरे मे आकर बिस्तर पर बैठ गया वह काफी डरा हुआ था क्योंकि उसने ऐसा कुछ हो जाएगा यह सब के बारे में सोचा ही नहीं था क्योंकि अभी तक जितनी भी औरतें उसे मिली थी वह सभी को आसानी से प्राप्तकर्ता जा रहा था। बड़ी मामी के साथ भी संभोग सुख की प्राप्ति आसानी से कर लेने की वजह से उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह छोटी मामी के साथ भी अपनी मनमानी कर लेगा लेकिन उसके सोचने के विरुद्ध उसकी छोटी मामी उसे भला बुरा सुना दी,,, वह मन ही मन में सोचने लगा कि अगर वह सबको बता देती तो ना जाने क्या हो जाता,,,।,, लेकिन इतना तो समझ ही गया था कि छोटी मामी किसी भी तरीके से उसके नीचे आने वाली नहीं है इसलिए उसे उसकी छोटी मामी को पाने का ख्याल छोड़ देना चाहिए।,,, उसे अपने आप पर बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि जिस तरह से वह रोते हुए अपनी मामी के पैर पकड़ कर गिड़गिड़ा रहा था,,,, वह तरह की स्थिति में कभी पहुंच जाएगा उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।,,,
वह बिस्तर पर लेट कर यही सब सोच रहा था लेकिन उसके जेहन से वह नजारा भी नहीं हट रहा था जब वह दरवाजे पर खड़े होकर अपनी छोटी मामी की गदराई गांड को देखकर उत्तेजित हुए जा रहा था।,,,, वह मन मसोसकर रह गया कि काश उसकी छोटी मामी की मद मस्त गांड का स्वाद भी उसे चखने को मिल जाता,,,, लेकिन अफसोस कि वह चरित्र की एकदम पक्की निकली,,, काश वह भी उसकी बड़ी मामी की तरह फिसल जाती तो एक और खूबसूरत औरत उसकी बाहों में आ जाती।,,,, इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी की आंखों के सामने रुचि की बड़ी बड़ी गांड मटक रही थी जिसके बारे में सोचते हुए वह सो गया।,,,
रात अपने पूरे शबाब पर थी भोजन तैयार हो चुका था धीरे-धीरे लोग खाने के लिए इकट्ठे हो रहे थे शुभम भी हाथ मुंह धोकर भोजन करने के लिए जाने ही वाला था कि उसे फिर से वही साया नजर आया और वह सब की नजरें बचाकर घर के पीछे की तरफ आगे बढ़ती चली जा रही थी क्योंकि इतना तो समझ ही गया था कि वह साया किसी औरत का ही था,,,, इसलिए बाकी सब से नजरें बचाकर दुबते हुए ऊस।साए के पीछे जाने लगा,,,
चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, आज उस साएे के हाथ में टॉर्च भी थी जिसे वह रह रह कर सब की नजरें बचाकर जला दे रही थी और उस टॉर्च की रोशनी में रास्ता देखते हुए आगे बढ़ रही थी। शुभम अपने आप को उसके सारे की नजर से बचाते हुए झाड़ियों के पीछे पीछे चला जा रहा था वह मन में फैसला कर चुका था कि आज उस कार्य को देखकर ही रहेगा कि आखिर वह साया है किसका,,,, क्योंकि औरत का इस तरह से छुपते छुपातो रात के समय घर से बाहर निकलने का मतलब बिल्कुल साफ होता है कि वह किसी से मिलने ही जा रही है। गांव का माहौल जिसकी वजह से चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था शुभम को थोड़ा बहुत डर भी लग रहा था लेकिन अपने आगे आगे चल रहे औरत के सारे की वजह से उसे थोड़ी बहुत हिम्मत भी मिल रही थी। कुत्तों के भौंकने की आवाज शुभम थोड़ा बहुत सहम जा रहा था। वह साया धीरे-धीरे खेतों की तरफ आ गया था।,,, वह साया खेतों के करीब घनी झाड़ियों के पास रुक गया और इधर-उधर नजरें घुमा कर देखने लगा,,,, शुभम भी पेड़ के पीछे अपने आप को छिपाकर खड़े हो गया और वहां से ऊस साए की तरफ बराबर नजर गड़ाए हुए देखने लगा,,,। पेड़ से गिरी सूखी पत्तियों की वजह से उसके कदमों की आवाज़ उस साए को ना सुनाई दे इसलिए वह बचा बचा कर बहुत ही धीरे-धीरे कदम रख रहा था। शुभम के दिल की धड़कन उत्सुकतावश बहुत तेज हो चुकी थी क्योंकि वह जानना चाहता था कि वह सहाय के पीछे कौन सा चेहरा छुपा हुआ है और वह किसका इंतजार कर रही है।
खेतों में छाए हुए सन्नाटे में ऊस साए की चूड़ियों की खन खन की आवाज शुभम को मादकता का एहसास दिला रही थी। एक तरह से उस साए की चूड़ियों की आवाज शुभम के तन-बदन में उत्तेजना का अहसास करा रही थी। वह पाया कुछ देर तक इधर उधर देखती रही वह किसी का इंतजार कर रही थी शुभम अपनी धड़कनों को संभाले हुए उस साए की तरफ नजरें गड़ाए हुए था। तभी झाड़ियों के पीछे से एक दूसरा साया बाहर आया और आते ही उसने उसकी आंखों पर हाथ रख कर उसे डरा दिया,,,,
क्या करते हो कितनी देर लगा दी तुमने मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं,,,( वह नाराजगी दर्शाते हुए बोली)
क्या करूं मेरी जान सब काम जल्दी जल्दी निपटा कर भागता हुआ तुम्हारे पास आया हूं क्या करूं तुमसे मिले बिना मुझे भी चैन नहीं मिलता,,,,
मेरा भी तो यही हाल होता है तुम्हारे बिना तभी तो मैं सब कुछ छोड़ छाड़ कर तुमसे मिलने यहां चली आती हूं,,,।
तो मेरी जान खेतों में चलते हैं और वहां जी भर कर प्यार करते हैं,,,,
( इतना कहने के साथ ही वह साया उसे खेतों के अंदर ले जाने लगा,,, दोनों धीरे-धीरे फुसफुसाकर बातें कर रहे थे इसलिए शुभम को बात तो थोड़ी बहुत समझ में आ रही थी लेकिन आवाज नहीं पहचान पा रहा था लेकिन इतना तो तय था कि खेतों के अंदर दोनों के जाने का मतलब था कि चुदाई का खेल शुरू होने वाला था इसलिए शुभम भी बेहद उत्सुक हो गया खेतों के बीच का नजारा देखने के लिए उसने जाने से ज्यादा उसे इस बात की उत्सुकता थी कि आखिरकार दोनों साए हैं किसके,,,, यह देखने के लिए वह भी धीरे-धीरे खेतों के अंदर जाने लगा,,,,,।)