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अधूरी हसरतें

रूचि बिस्तर ठीक करने में कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रही थी इसलिए शुभम के द्वारा दरवाजा खटखटाया जाने पर भी उसका ध्यान नहीं गया और वह उसी तरह से बिस्तर को ठीक करती रही,,, रूचि के ज्यादा झुक जाने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गांड और भी ज्यादा हवा में उठ गई,,, और इस तरह से औरतों की उठी हुई बड़ी-बड़ी गांड तो शुभम की थर्मामीटर के पारे को बढ़ाने के लिए काफी होती थी,,, कुछ ही सेकंड में शुभम के पेंट में तंबू सा बन गया। रूचि इतनी ज्यादा टाइट साड़ी पहनती थीै कि उसकी गांड की दोनों फांकें किसी खरबूजे की भांति,,साड़ी के ऊपर से नजर आने लगी।,,,

इस अद्भुत और मादक दृश्य को देखकर शुभम की धड़कन तेज होने लगी वह अब दोबारा दरवाजे को खटखटाने की जहमत नहीं उठाना चाहता था क्योंकि यह नजारा ही इतना गजब का था कि आंखों से उतर कर पूरे बदन में हलचल सा मचा दे रहा था शुभम आंखें गड़ाए अपनी छोटी मामी की खूबसूरत बदन की हलचल को देखता रहा। उसके जी में तो आ रहा था कि पीछे से जाकर पकड़ ले और उसकी साड़ी उठाकर अपना मोटा लंड ऊसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दे,,,। और उसके मन में ऐसा ही कुछ करने को हो रहा था क्योंकि वह इस घर की बड़ी बहू मतलब उसकी बड़ी बानी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर यही सोच रहा था कि जब घर की बड़ी बहू उस से चुदवाने के लिए तैयार हो गई थी और बेझिझक चुदाई का मजा भी ले चुकी है तो छोटी बहू भी उसी की ही तरह होगी,,, और वैसे भी शुभम को अपनी ताकत पर पूरा विश्वास था,,, शुभम को मन ही मन में अपने लंड पर गर्व होने लगा था,,, क्योंकि अब तक 3 औरतें बेझिझक उसके लंड की प्यासी हो चुकी थी।,,, वह।अब तक इतना तो समझ ही गया था कि,,, औरतें मोटे और लंबे लंड की दीवानी होती है इसलिए उसके मन में ख्याल आ रहा था की यह वाली मामी भी उसके मोटे तगड़े लंड को देखेगी तो वह इंकार नहीं कर पाएगी।,,,, यह सोचकर सुभम की दिल की धड़कन तेज हो गई। शुभम पूरी तरह से दृढ़ निश्चय कर लिया था कि आज का अपनी छोटी मामी की रसीली बुर का भी स्वाद चख लेगा इसलिए उसे पीछे से पकड़ने के लिए अपना कदम आगे बढ़ाया ही था कि रुचि को पीछे हलचल सी महसूस हुई,,, और वहां जाते थे पीछे की तरफ देखी तो,,, शुभम को अपनी तरफ आता देख कर एक पल के लिए तो वह डर ही गई लेकिन जैसे ही उसे आभास हुआ कि वह शुभम हे तो उसे थोड़ी राहत हुई वह शुभम की तरफ देखते हुए बोली,,,,।

शुभम,,, बेटा तु यहां,,,, कोई काम,,,,,,,, ( उसके मुंह से इतना ही निकला था कि उसकी नजर शुभम के पेंट में बने लंबे तंबू पर गई,,, तो शब्द ऊसके मुंह में ही अटक गए,, शुभम के चेहरे के भाव और उसकी शारीरिक भाषा को देख कर रूचि को समझते देर नहीं लगी कि शुभम क्या करने वाला था वह अभी भी उसी अवस्था में ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में उठाए पीछे की तरफ देख रही थी,,, शुभम के पेंट में बने लंबे तंबू और अपनी तबीयत बड़ी गांड की तरफ देखते हुए वह सारा मामला समझ गई एक पल के लिए तो एकदम शर्मिंदा हो गई और अपनी स्थिति को बदलते हुए,,, वह शुभम की तरफ घूमी और गुस्से में बोली,,,।)

शुभम यह क्या हरकत है?

( अपनी छोटी मामी के मुंह से यह सुनकर शुभम चौक सा गया,,, कुछ ही सेकंड में उसके चेहरे पर घबराहट के भाव ऊपंसने लगे,,, वह अपने चेहरे पर आए डर के भाव को बदलते हुए बोला,,,।)

कककक,, क्या हुआ मामी कैसी हरकत आप क्या बोल रही हैं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।,,,,

लेकिन मुझे सब समझ में आ रहा है,,।( रूचि उस के तने हुए तंबू की तरफ देखते हुए बोली,,,।)

देखने में कितना भोला भाला लगता है लेकिन मन में तेरे कितना चोर है।

मामी आप यह क्या कह रही हैं,,,? ( शुभम अनजान बनता हुआ बोला।)

चल अब बातें मत करना तू चाहे जितना भी छुपाने की कोशिश कर ले लेकिन तेरे मन में क्या चल रहा था तेरा ये( तने हुए तंबू की तरफ इशारा करते हुए) सब कुछ बता दे रहा है।

( अपनी छोटी मामी की उंगली के इशारे की तरफ जब उसका ध्यान दिया तो उसे सब समझ में आ गया वह शर्मिंदा हो गया।)

ना जाने कब से दरवाजे पर खड़े होकर तू मेरे बारे में क्या क्या सोच रहा था।

मामी में कुछ नहीं सोच रहा था (अपने तंबू को हाथों से छुपाने की कोशिश करते हुए)

कुछ नहीं सोच रहा था तो यह तेरा,,,,,, खड़ा कैसे हो गया।( रूचि गुस्से में बोले जा रही थी अपनी छोटी मामी का यह रूप देखकर शुभम घबरा गया,,,। और दूसरा कोई सुन ना ले इसलिए हाथ जोड़ते हुए बोला।।)

मामी मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं मुझसे गलती हो गई,,,,।

गलती इसे गलती कहते हैं या वासना कहते हैं अपनी ही मामी के बारे में तू ना जाने क्या-क्या सोच रहा था। रुक मैं तेरी मम्मी से बता देती हूं जो तुझे बहुत ही अच्छा लड़का समझती है ना,,,।

( यह बात सुनकर शुभम एकदम से रुुंआसा हो गया और झट से अपनी मामी के पैर पकड़ लिया और बोला)

नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं तुम्हारे पैर पकड़ता हूं मैं बदनाम हो जाऊंगा,,,।( इतना कहते हुए शुभम रोने लगा,,, और उसे रोता हुआ देखकर रूचि का दिल थोड़ा सा नाराज हुआ और वह उसे कंधों से पकड़कर उठाते हुए बोली।)

शुभम तेरी उम्र पढ़ने लिखने की है ना की औरतों के पीछे लार टपकाने वाली,,,,

मामी मुझसे गलती हो गई,,,, मैं दुबारा ऐसा कभी भी नहीं करूंगा,,,।

( रुचि को लगने लगा कि शुभम को उसकी गलती का पूरा एहसास हो गया है इसलिए वह बोली,,,।)

अच्छा अब रो मत मैं किसी से नहीं कहूंगी,,,,। अच्छा यह बता तुमने ऐसा क्या देख लिया जो तेरी ऐसी (लंड की तरफ इशारा करते हुए हालत हो गई),,,

नहीं मामी ऐसा कुछ नहीं हुआ( अपने आंसू पोंछते हुए बोला)

देख अब मुझसे कुछ भी मत छुपा मेरा गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है मैं जाकर सब बता दूंगी,,,

नहीं नहीं मामी मैं बताता हूं,,, मैं बड़ी मामी को ढूंढता हुआ यहां आ गया और तुम्हें इस तरह से झुके हुए देखकर तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर ना जाने मुझे क्या हो गया और मेरी ऐसी,,,,,( शर्मिंदगी के मारे सुभम इससे ज्यादा कुछ बोल नहीं पाया और नजरें झुका लिया,।)

छी,,,,, कितना गंदा सोचता है रे तू अब भाग जा यहां से बिल्कुल भी मेरी आंखो के सामने खड़े मत रहना वरना मुझ से रहा नहीं जाएगा और मैं सबको बता दूंगी,,,,( रूचि गुस्से में बोली और शुभम इतना सुनते ही कमरे से तुरंत बाहर निकल गया।,,,,,,

शुभम कमरे से बाहर आकर सीधे अपने कमरे मे आकर बिस्तर पर बैठ गया वह काफी डरा हुआ था क्योंकि उसने ऐसा कुछ हो जाएगा यह सब के बारे में सोचा ही नहीं था क्योंकि अभी तक जितनी भी औरतें उसे मिली थी वह सभी को आसानी से प्राप्तकर्ता जा रहा था। बड़ी मामी के साथ भी संभोग सुख की प्राप्ति आसानी से कर लेने की वजह से उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह छोटी मामी के साथ भी अपनी मनमानी कर लेगा लेकिन उसके सोचने के विरुद्ध उसकी छोटी मामी उसे भला बुरा सुना दी,,, वह मन ही मन में सोचने लगा कि अगर वह सबको बता देती तो ना जाने क्या हो जाता,,,।,, लेकिन इतना तो समझ ही गया था कि छोटी मामी किसी भी तरीके से उसके नीचे आने वाली नहीं है इसलिए उसे उसकी छोटी मामी को पाने का ख्याल छोड़ देना चाहिए।,,, उसे अपने आप पर बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि जिस तरह से वह रोते हुए अपनी मामी के पैर पकड़ कर गिड़गिड़ा रहा था,,,, वह तरह की स्थिति में कभी पहुंच जाएगा उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।,,,

वह बिस्तर पर लेट कर यही सब सोच रहा था लेकिन उसके जेहन से वह नजारा भी नहीं हट रहा था जब वह दरवाजे पर खड़े होकर अपनी छोटी मामी की गदराई गांड को देखकर उत्तेजित हुए जा रहा था।,,,, वह मन मसोसकर रह गया कि काश उसकी छोटी मामी की मद मस्त गांड का स्वाद भी उसे चखने को मिल जाता,,,, लेकिन अफसोस कि वह चरित्र की एकदम पक्की निकली,,, काश वह भी उसकी बड़ी मामी की तरह फिसल जाती तो एक और खूबसूरत औरत उसकी बाहों में आ जाती।,,,, इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी की आंखों के सामने रुचि की बड़ी बड़ी गांड मटक रही थी जिसके बारे में सोचते हुए वह सो गया।,,,

रात अपने पूरे शबाब पर थी भोजन तैयार हो चुका था धीरे-धीरे लोग खाने के लिए इकट्ठे हो रहे थे शुभम भी हाथ मुंह धोकर भोजन करने के लिए जाने ही वाला था कि उसे फिर से वही साया नजर आया और वह सब की नजरें बचाकर घर के पीछे की तरफ आगे बढ़ती चली जा रही थी क्योंकि इतना तो समझ ही गया था कि वह साया किसी औरत का ही था,,,, इसलिए बाकी सब से नजरें बचाकर दुबते हुए ऊस।साए के पीछे जाने लगा,,,

चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, आज उस साएे के हाथ में टॉर्च भी थी जिसे वह रह रह कर सब की नजरें बचाकर जला दे रही थी और उस टॉर्च की रोशनी में रास्ता देखते हुए आगे बढ़ रही थी। शुभम अपने आप को उसके सारे की नजर से बचाते हुए झाड़ियों के पीछे पीछे चला जा रहा था वह मन में फैसला कर चुका था कि आज उस कार्य को देखकर ही रहेगा कि आखिर वह साया है किसका,,,, क्योंकि औरत का इस तरह से छुपते छुपातो रात के समय घर से बाहर निकलने का मतलब बिल्कुल साफ होता है कि वह किसी से मिलने ही जा रही है। गांव का माहौल जिसकी वजह से चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था शुभम को थोड़ा बहुत डर भी लग रहा था लेकिन अपने आगे आगे चल रहे औरत के सारे की वजह से उसे थोड़ी बहुत हिम्मत भी मिल रही थी। कुत्तों के भौंकने की आवाज शुभम थोड़ा बहुत सहम जा रहा था। वह साया धीरे-धीरे खेतों की तरफ आ गया था।,,, वह साया खेतों के करीब घनी झाड़ियों के पास रुक गया और इधर-उधर नजरें घुमा कर देखने लगा,,,, शुभम भी पेड़ के पीछे अपने आप को छिपाकर खड़े हो गया और वहां से ऊस साए की तरफ बराबर नजर गड़ाए हुए देखने लगा,,,। पेड़ से गिरी सूखी पत्तियों की वजह से उसके कदमों की आवाज़ उस साए को ना सुनाई दे इसलिए वह बचा बचा कर बहुत ही धीरे-धीरे कदम रख रहा था। शुभम के दिल की धड़कन उत्सुकतावश बहुत तेज हो चुकी थी क्योंकि वह जानना चाहता था कि वह सहाय के पीछे कौन सा चेहरा छुपा हुआ है और वह किसका इंतजार कर रही है।

खेतों में छाए हुए सन्नाटे में ऊस साए की चूड़ियों की खन खन की आवाज शुभम को मादकता का एहसास दिला रही थी। एक तरह से उस साए की चूड़ियों की आवाज शुभम के तन-बदन में उत्तेजना का अहसास करा रही थी। वह पाया कुछ देर तक इधर उधर देखती रही वह किसी का इंतजार कर रही थी शुभम अपनी धड़कनों को संभाले हुए उस साए की तरफ नजरें गड़ाए हुए था। तभी झाड़ियों के पीछे से एक दूसरा साया बाहर आया और आते ही उसने उसकी आंखों पर हाथ रख कर उसे डरा दिया,,,,

क्या करते हो कितनी देर लगा दी तुमने मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं,,,( वह नाराजगी दर्शाते हुए बोली)

क्या करूं मेरी जान सब काम जल्दी जल्दी निपटा कर भागता हुआ तुम्हारे पास आया हूं क्या करूं तुमसे मिले बिना मुझे भी चैन नहीं मिलता,,,,

मेरा भी तो यही हाल होता है तुम्हारे बिना तभी तो मैं सब कुछ छोड़ छाड़ कर तुमसे मिलने यहां चली आती हूं,,,।

तो मेरी जान खेतों में चलते हैं और वहां जी भर कर प्यार करते हैं,,,,

( इतना कहने के साथ ही वह साया उसे खेतों के अंदर ले जाने लगा,,, दोनों धीरे-धीरे फुसफुसाकर बातें कर रहे थे इसलिए शुभम को बात तो थोड़ी बहुत समझ में आ रही थी लेकिन आवाज नहीं पहचान पा रहा था लेकिन इतना तो तय था कि खेतों के अंदर दोनों के जाने का मतलब था कि चुदाई का खेल शुरू होने वाला था इसलिए शुभम भी बेहद उत्सुक हो गया खेतों के बीच का नजारा देखने के लिए उसने जाने से ज्यादा उसे इस बात की उत्सुकता थी कि आखिरकार दोनों साए हैं किसके,,,, यह देखने के लिए वह भी धीरे-धीरे खेतों के अंदर जाने लगा,,,,,।)

 


दोनों साए खेतों में प्रवेश कर चुके थे,, यह देख कर शुभम से रहा नहीं गया और वह भी नजरें बचाते हुए कुछ ही देर बाद उन दोनों साए के पीछे पीछे खेतों में प्रवेश करने लगा,,,, चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था,,,,, शुभम को कुछ नजर नहीं आ रहा था लेकिन उनके आगे चल रहे हैं दोनों साए,,, जो कि एक के हाथ में टॉर्च होने की वजह से टॉर्च की रोशनी शुभम को नजर आ रही थी और वह उसी रोशनी की तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।,,, कुछ कदम जाने के बाद वह दोनों साए एक जगह पर रुक गए,,,,,, चारों तरफ घनी झाड़ियां फैली हुई थी जिसकी वजह से खेतों के बाहर से कोई भी अंदर की तरफ नहीं देख सकता था। शुभम की मन में उत्सुकता बढ़ने लगी उनसे महज 3 कदम की दूरी पर अपने आप को झाड़ियों के पीछे छुपाए हुए खड़ा था। शुभम वहां से उन दोनों को एकदम साफ तौर पर देख पा रहा था चारों तरफ घनी झाड़ियों के होने के बावजूद जिस जगह पर दोनों खड़े थे उस जगह की झाड़ियों को ऐसा लग रहा था कि साफ कर दिया गया हो,,,, शुभम को अभी तक उन दोनों का चेहरा नजर नहीं आया था।,, जिस तरह से खेतों के बीच की उतनी सी जगह साफ की गई थी ऐसा लग रहा था कि यह दोनों रोज रात को यहीं मिलते थे। और यह दोनों मिलकर ही इतनी सी जगह को साफ़ किए हैं।,, तभी उस साए की आवाज आई,,,

जो करना है जल्दी कर लो मुझे जल्दी घर वापस लौटना है क्योंकि सब लोग खाने पर इंतजार कर रहे होंगे,,,

( इतनी आवाज सुनते ही शुभम के कान खड़े हो गए क्योंकि आवाज जानी पहचानी थी और कुछ ही पल में उसे समझते देर नहीं लगी कि वह आवाज उसकी छोटी मामी रुचि की थी,,,,, शुभम पूरी तरह से सकते में आ गया था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि,,, दोपहर में उसे संस्कार के पाठ पढ़ाने वाली इस हद तक गुजर सकती है किस्मत की आंखों में धूल झोंककर अपने प्रेमी से चोरी चुपके रात को खेतों में मिलती है और अपनी जवानी की प्यास बुझाती है।,,, शुभम को सब कुछ समझ में आ गया था बस उसका चेहरा ठीक से नजर नहीं आ रहा था।,, तभी दूसरे साए ने उसके हाथों से टॉर्च लेकर उसके चेहरे पर टॉर्च की रोशनी फेंकते हुए बोला,,,।

सब कुछ करुंगा मेरी जान यही करने के लिए तो तुम्हें यहां बुलाता हूं लेकिन उससे पहले मैं अपनी रानी का चांद सा मुखड़ा तो देख लुं।,,,,( और इतना कहते ही टॉर्च की रोशनी में उसे साए का चेहरा बिल्कुल साफ नजर आने लगा,,,, टॉर्च की रोशनी में उसका चेहरा नजर आते ही शुभम चौक गया और उसे पक्का यकीन हो गया कि उसकी छोटी मामी ही है लेकिन कुछ ही देर में उसके चेहरे पर मुस्कान फेलने लगी,,,, क्योंकि अब उसे उसकी छोटी मामी उसके हाथों में आती नजर आने लगी,,, चेहरे पर टॉर्च की रोशनी पड़ते ही रुचि शर्मा गई,,, और अपने हाथों से टॉर्च को दूसरी तरफ करते हुए बोली ।

मेरे पास समय नहीं है,,,, और तुम्हें मुखड़ा देखने से फुर्सत नहीं मिल रही है मुखड़ा को छोड़ो मेरी पेटीकोट में आग लगी हुई है उसे बुझाओ,,,,

( इतना कहने के साथ ही रुचि अपनी साड़ी को एक झटके में कमर तक उठा दी,,,, और उसे समझते देर नहीं लगी वह तुरंत नीचे घुटनों के बल बैठ गया,,,, और एक पल भी गवाए बिना तुरंत अपना मुंह रुची की जांघो के बीच डालकर चाटना शुरु कर दिया,,,, जैसे ही,,, उसके होंठ रूचि की रसीली बुर पर स्पर्श हुआ रुची एकदम से काम वीभोर हो गई,,,, उसने भी टोर्च को नीचे जमीन पर रख दिया हालांकि टॉर्च चालू ही था जिससे साफ तौर पर सब कुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ नजर आ रहा था। शुभम यकीन नहीं कर पा रहा था कि यह दोपहर वाली मामी है जो उसे गंदे नजरिए से देखने पर डांट फटकार रही थी।,,,, कुछ देर तक बाहर रूचि को उसकी बुर चाट कर उसे मजे देता रहा,,, रुचि भी अपने प्रेमी से मजे लेते हुए दबी दबी आवाज में सिसकारी ले रही थी। इसके बाद खुद ही वह उसके बाल पकड़कर उसे खड़ा करने लगी और वह पूरी तरह से खड़ा हो पाता इससे पहले ही वह उसकी तरफ अपनी बड़ी-बड़ी गांड करके झुक गई,,, रुचिका यह उतावलापन शुभम को एकदम मदहोश कर गया अब तो उसकी अभिलाषा और भी ज्यादा रुचि को पाने के लिए बढ़ने लगी,,,, झुकी हुई रुची की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर,, वह तुरंत रूचि के पीछे खड़ा होकर अपने लंड को बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,,। रूचि के प्रेमी का चेहरा तो उसे नजर आ रहा था लेकिन शुभम उसे पहचान नहीं पा रहा था क्योंकि गांव में वहां किसी को जानता नहीं था।

शुभम के लिए इतना काफी है वह दोनो अपनी चुदाई खत्म कर दें इससे पहले ही शुभम खेतों से बाहर निकलकर वहीं खड़ा होकर रुचि के बाहर निकलने का इंतजार करने लगा,,,,,। शुभम का भी लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था।,,, अगर रूचि इजाजत देती तो वह दोपहर को ही उसकी बुर का उद्घाटन कर दिया होता,,,, किसी और के लंड से चुदता हुआ देखकर शुभम थोड़ा परेशान जरूर नजर आ रहा था लेकिन इसी की वजह से तो उसे अपने लंड की भी किस्मत जगती नजर आ रही थी,,,। कुछ देर तक वहीं खड़े रहने पर उससे रहा नहीं जा रहा था वह जल्द से जल्द इस बारे में रुचि से बात कर लेना चाहता था।,,,, चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था। समय काफी गुजर गया था उसे इस बात की भी चिंता जताई जा रही थी कि घर पर उसका सब इंतजार कर रहे होंगे क्योंकि उसने अब तक खाना नहीं खाया था तभी झाड़ियों के बीच सुरसुराहट होने लगी शुभम समझ गया कि वह लोग बाहर आ रहे हैं।

शुभम छुपने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था क्योंकि वह जानबूझकर अपनी छोटी मामी से आंख से आंख मिलाकर बात करना चाहता था ।क्योंकि उसकी रंगरेलियों को वह अपनी आंखों से देख चुका था। इसलिए शुभम को आत्म विश्वास हो गया था कि इस बार रूचि उसे ना तो रोक ही पाएगी ना तो डांट ही पाएगी और ना ही किसी को बता देने की धमकी देगी क्योंकि पूरी तरह से रुचि अब उसे अपने कब्जे में लगने लगी थी। तभी रूचि अपने ब्लाउज के बटन बंद करते हुए खेतों से बाहर निकली और सामने सुभम को खड़ा देखकर एक दम से चौंक गई।,,, वैसे तो अंधेरा एकदम घना था लेकिन शुभम उसके बिल्कुल करीब ही खड़ा था इसलिए वह उसे पहचान ली।,,, रुचि एकदम से घबरा गई थी लेकिन फिर भी अपनी घबराहट छुपाते हुए वह बोली।

तू यहां क्या कर रहा है? ( अपने साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए बोली,,।)

पहले यह बताओ कि तुम यहां क्या करने आई थी,,

( शुभम जिस तरह से, उसी से यह सवाल पूछा था रूचि घबरा सी गई थी। फिर भी अपने आप को संभालते हुए बोली।)

अब तुझे यह बताना होगा कि इतनी रात को मैं खेतों में क्या करने आई थी,,,, सौच करने आई थी और क्या करने आई थी,,,( इस बार रुचि थोड़ा शरमाते हुए बोली लेकिन शुभम उसे जरा सा भी मौका नहीं देना चाहता था इसलिए वह तुरंत बोला।)

ज्यादा बातें बनाने की जरूरत नहीं है दिन में तो बहुत सती सावित्री बन रही थी।

तततत,,,, तु,, क्या कह रहा है मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

सब कुछ समझ में आ जाएगा पहले यह बताओ कि वह कौन था जो तुम्हारे साथ खेतों में अंदर गया था।,,,,,

( शुभम की यह बात सुनकर उसके पसीने छूट मिलेगी उसका जल्दी-जल्दी अपने कदम बढ़ाते हुए घर की तरफ जाने लगी तो शुभम भी उसके पीछे-पीछे हो चला

,, रुचि ऊसके सवालों का जवाब नहीं देना चाहती थी,,, लेकिन शुभम उसके पीछे ही पड़ गया था वो फिर से अपने सवाल को दोहराते हुए बोला।)

बताओ वह कौन था?

देख तू मुझे परेशान मत कर मुझे नहीं मालूम कि तू क्या बोल रहा है मैं इधर अकेले ही आई थी और अकेले ही जा रही हूं,,,,( रूचि तेज कदम बढ़ाते हुए बोली,,)

मैं सब जानता हूं वह पीछे की तरफ से चला गया होगा और अब मुझसे कुछ भी छुपाने की जरूरत नहीं है मैं तुम्हारी चुदाई लीला को अपनी आंखों से देख चुका हूं।

( इस बार शुभम की बात सुनकर रुची के पैर वहीं के वहीं रुक गए। अब उसके पास छुपाने जैसा कुछ भी नहीं था।,,,, अब समझ गई थी कि सुभम सब कुछ देख चुका है,,, अब उसके पास कोई भी बहाना नहीं बचा था इस बार वह बिना जवाब दिए ही आगे बढ़ती चली गई,,,

रुचि को इस तरह से जाते देख,,,, शुभम वहीं खड़ा हो गया क्योंकि घर आ गया था लेकिन फिर भी वह खड़े होकर बोला,, रूचि,,,,,( शुभम के मुंह से इस बार अपना नाम सुनकर रुचि एक पल के लिए वहीं रुक गई और पलटकर शुभम की तरफ देखने लगी,,, जैसे ही रुचि पलटकर शुभम की तरफ देखि वैसे ही शुभम बोला,,,।)

मिलना जरूर इस बारे में मुझे तुमसे बात करनी है,।

( इतना सुनकर रुचि वहां से चली गई रुचि से जाने के बाद सुभम के होठों पर मुस्कुराहट फैल गई,,,, और रात भर रूचि बिस्तर पर करवट बदलते हुए यह सोचने लगी कि आखिर शुभम उसे क्या बात करना चाहता है,, दोपहर वाली हरकत को देखते हुए इतना तो रुचि समझ गई थी कि उसके भी इरादे कुछ नेक नहीं है। और इस बात का डर उसे बराबर बना हुआ था कि कहीं सुभम घर में किसी को बोल ना दे, शुभम अभी जवान हो रहा है और ऐसे में इस उम्र के लड़कों की नजर हमेशा ही औरतों पर और लड़कियों पर बनी रहती है दोपहर में जिस तरह से वह उसके पिछवाड़े को देख रहा था इससे साफ जाहिर था कि वह उसके प्रति आकर्षित था तभी तो,,,, रात को भी वह उसके पीछे पीछे खेतों की तरफ आ गया था,,,,। यही सब सोचते हुए रूचि सो गई,,,, और दिन भर निर्मला शादी की तैयारी में जुटी होने की वजह से थक कर सो गई थी इसलिए शुभम उसकी चुदाई नहीं कर पाया लेकिन रात भर वह उसकी बड़ी बड़ी चूची को मुंह में भरकर पीता रहा।,,,

सुबह से शुभम मौके की ताक में था कि रूची से रात वाली घटना के बारे में बात कर सके,,, लेकिन रुची जान बूझकर उससे कतरा रही थी।,,, शुभम बार-बार उसके पीछे लगा हुआ था लेकिन उसे बिल्कुल भी मौका नहीं मिल पा रहा था इस ताक झांक लुका छुपी में दोपहर हो गई,,,, घर के सभी लोग शादी की तैयारी की बातें करने के लिए बरामदे में बैठे हुए थे। तभी उसके छोटे मामा जो की रुचि के पति थे वह बोले,,,

देखो शादी की तैयारी अभी पूरी तरह से हुई नहीं है और समय बहुत कम है,,,, मैं और भाई साहब शहर जा रहे हैं खरीदी करने के लिए,,,, और घर पर कोई युं ही बैठा भी नही है।

घर के सभी लोग काम में लगे हुए हैं किसी के पास समय नहीं है ऐसे में आम के बगीचे की देखरेख नहीं हो पा रही है तो रुचि तुम ऐसा करो की खाना खाने के बाद

जाकर आम के बगीचे का थोड़ा देखरेख कर लो कहीं ऐसा ना हो कि हम लोग शादी में व्यस्त रहे और बगीचे के सारे आम गायब हो जाए,,,,

ठीक है मैं खाना खा कर चली जाऊंगी,,,,

मैं भी चलूंगा मामी इसी बहाने में आम का बगीचा भी देख लूंगा,,,( शुभम तपाक से बोला)

ठीक है तू भी चले जाना इसी बहाने तु भी घूम घाम लेगा,,,,

( अपने मामा की बात सुनकर शुभम प्रसन्न हो गया वह अंदर ही अंदर खुश होने लगा,,, लेकिन शुभम की बात सुनकर रुचि के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी वह अंदर ही अंदर घबराने लगी,,,, और थोड़ा गुस्से से शुभम की तरफ देखकर कमरे में चले गई,,,, शुभम बस रुचिका आम के बगीचे में जाने का इंतजार करने लगा।,,,

 
कुछ देर बाद है रूचि शुभम से नजरें बचाकर बगीचे की तरफ जाने लगी लेकिन शुभम इसी ताक में था कि कब रूचि घर से बाहर निकलकर बगीचे की तरफ जाए और वह उसके पीछे पीछे लग जाए और जैसे ही रूचि बगीचे की तरफ जाने लगी शुभम झट से उसके पीछे हो चला,,, उसे अपने पीछे आता देखकर रुचि को थोड़ा घबराहट के साथ-साथ क्रोध भी आने लगा मुंह बनाते हुए वह जल्दी-जल्दी बगीचे की तरफ जाने लगी और पीछे से आ रहा शुभम उसे आवाज देता हुआ बोला,,,

ओमानी रुको तो सही इतनी जल्दी-जल्दी अकेले कहां चली जा रही हो मुझे भी तो तुम्हारे साथ ही जाना है,,।

( इतना कहने के साथ ही वह लगभग दौड़ता हुआ रुचि के करीब पहुंच गया रुचि उससे बिना कुछ बोले ही चलती रही,,,, रुचि के मन में अजीब सा असमंजस घर कर गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह शुभम उसके साथ बगीचे में क्यों जाना चाहता है लेकिन इतना तो उसे आभास ही हो गया था कि उसकी नजरें ठीक नहीं है।,,, वह मन में सोचने लगी कि अगर शुभम बगीचे में उसके साथ कुछ करेगा तो वह क्या करेगी क्योंकि कद काठी से वह काफी मजबूत था। उसका दिल जोरो से घबराने लगा लेकिन वह घबराहट को अपने चेहरे पर नहीं आने दे रही थी।,,,,

क्या मामी तुम ऐसे क्यों बर्ताव कर रही हो कि जैसे मुझे जानती ही नहीं अरे कुछ बोलो तो हम दोनों का समय अच्छे से कट जाएगा,,,, और देख रही हो मौसम कितना सुहावना है,,,। ( गर्मी का समय था चिलचिलाती धूप अपना कहर ढा रही थी लेकिन रह रह कर छांव भी हो जा रही थी इसलिए,,, धूप ज्यादा महसूस नहीं हो रही थी चारों तरफ का नजारा हरियाली से भरा हुआ था पगडंडियों के चारों तरफ छोटी बड़ी झाड़ियों का झुरमुट लगा हुआ था। दूर-दूर तक इंसानों का नामोनिशान नहीं था। क्योंकि इस तरह की चीलचिलाती धूप में सभी लोग घर के अंदर ही रहना पसंद करते थे।

दोनों घर से काफी दूर आ चुके थे और यहां पर दूर-दूर तक कोई घर भी नजर नहीं आ रहा था या यूं समझ लो कि पूरे रास्ते भर रूचि और शुभम के सिवा कोई भी नजर नहीं आ रहा था और यह देख कर शुभम के मन में उमंगों का घोड़ा अपनी तेज रफ्तार से दौड़ना शुरू कर दिया। जहां इस तरह के सुहावने मौसम और सुनसान रास्ते को देखकर सुभम मन ही मन प्रसन्न हुए जा रहा था। वही ऐसी स्थिति में रुचि का मन घबरा रहा था।,,,

रूचि कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं थी सुबह भी बोले जा रहा था और वह केवल सुन रही थी लेकिन कनखियों से वह अपनी नजरें शुभम पर डालती तो उसे अंदाजा हो जाता कि शुभम उसके कामरुपी बदन को घूर रहा है। यह देख कर वह बार-बार अपने साड़ी के पल्लू को ठीक से कर लेती,,,। शुभम को रुचि की इस हरकत पर बेहद आनंद प्राप्त हो रहा था,,,।

थोड़ी ही देर में वह दोनों आम के बगीचे मैं पहुंच गए चारों तरफ आम के पेड़ से पूरा बगीचा भरा हुआ था साथ ही,,, हर पेड़ पर आम लदे हुए थे जिन्हें देखने का अपना अलग ही मजा था। शुभम आम का पेड़ और आम लदे हुए पहली बार देख रहा था,,। इसलिए यह नजारा देखकर उसकी आंखों में चमक आ गई कुछ पल के लिए वह रूचि को एकदम से भूल गया और चारों तरफ घूम घूम कर आम के पेड़ और उस पर लगे हुए आम को देखने लगा। कुछ देर तो इतनी कम ऊंचाई के थे कि वह हाथ ऊपर करके ही आम को तोड़ सकता था ऐसे ही वह हाथ बढ़ाकर यह काम को पकड़ते हुए बोला,,,

मामी क्या यह आम को मैं तोड़ सकता हूं।,,,

सब अपना ही है इसमें पूछने वाली क्या बात है तोड़ लो,,( शुभम की तरफ देखते हुए वह बोली,,,।)

काश ऐसी ही इजाजत तुम दूसरे अामों के लिए भी दे देती तो कितना मज़ा आता,,,

क्या कहा तुमने,,,,,( रूचि सवालिया नजरों से शुभम की तरफ देखते हुए बोली)

वही जो आप सुन रही हैं । (इतना कहने के साथ ही वह आम तोड़ लिया)

मैं कुछ समझी नहीं तू क्या कह रहा है,,,,?

अब ज्यादा भोली मत बनो मामी समझ नहीं रही हो या समझना नहीं चाहती,,,, खेतों में तुम्हें जिस हालत में मैं देख चुका हूं उससे यह बिल्कुल भी नहीं लगता कि तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आई हो,,,,( इतना कहते हो शुभम तोड़े हुए आम को जो कि पक चुका था उसके ऊपर की डुंठी निकाल कर उसे गोल-गोल दबाते हुए मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,। शुभम की बात और वह जिस तरह से आम को चूस रहा था यह देख कर रुची अंदर ही अंदर कांप गई।,,)

देखो सुभम मुझे डराने की कोशिश बिल्कुल भी मत करना,,, मैं तुम्हारी बातों में आने वाली नहीं हूं,,,।

मैं तुम्हें डरा नहीं रहा हूं मामी मैं वही बता रहा हूं कि जो हकीकत है,,, तुम रात को ऊस आदमी के साथ चुदवा रही थी,,, जो कि मैं अपनी आंखों से देख रहा था,,,

( शुभम एकदम खुले शब्दों में अपनी मामी से रात वाली हकीकत बता दिया जिसे सुनकर और शुभम की अश्लील भाषा को सुनकर एकदम दंग रह गई,,,। )

और एक बार की बात नहीं है पहले भी मैं तुम्हें खेतों की तरफ छुपते छुपाते जाते हुए देख रहा था,,,,। ( शुभम इतना कहते ही रुचि के बिल्कुल करीब आ गया वह रुचि के बिल्कुल ठीक पीछे खड़ा था,,, रुची पूरी तरह से स्तब्ध हो चुकी थी क्योंकि यह वर्षों से चला आ रहा था लेकिन आज तक किसी को कुछ भी पता नहीं चल पाया था लेकिन शुभम को आए अभी दो-तीन दिन ही हुए थे कि उसमें उसकी रंगरेलीया अपनी आंखों से देख लिया,,, शुभम रुचि के बिल्कुल करीब खड़ा था और आम को चुसने का मजा ले रहा था,,, शुभम रुचि के खूबसूरत बदन की खुशबू को अपने अंदर महसूस कर पा रहा था जिसकी वजह से उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,। और रूचि भी शुभम को अपने एकदम करीब पीछे खड़ा हुआ महसूस करके एक अजीब सी उत्तेजनात्मक स्थिति को महसूस कर रही थी। शुभम आम का मजा लेते हुए रूचि के खूबसूरत बदन की महक को महसूस करके उत्तेजित हुए जा रहा था। जिसकी वजह से उसके लंड का तनाव बढ़ने लगा था,,,, कुछ ही सेकंड में उसके लंड का थाना ईतना ज्यादा बढ़ गया कि,, उसकी पेंट का तंबू हल्के हल्के रुची के उभार मय नितंबों पर स्पर्श होने लगा,,,, और रूचि शुभम के तंबू का स्पर्श अपने नितंबों पर होते ही उसे समझते देर नहीं लगी कि यह स्पर्श शुभम के कौन से अंग का है,,,, इतना समझते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, रुचि के नितंबों पर अपने लंड से बने तंबू का स्पर्श होते ही शुभम के तन-बदन में कामोत्तेजना जोर मारने लगे और वह जानबूझकर अपनी कमर को हल कैसे आगे की तरफ सरकाया जिसकी वजह से उसके लंड से बना कठोर तंबू,,, साड़ी सहित गांड की गहरी दरार में धंसने लगी, रुचि की सांसे तेज गति से चलने लगी शुभम उसकी हालत को देखकर इतना तो अंदाजा लगा दिया कि यह कबूतर उसके हाथों में पूरी तरह से आ चुका है,,,, फिर भी वह पूरी तरह से रुचि को अपने कब्जे में करने के लिए बोला,,,।

मामी अगर मैं तुम्हारी यही काम लीला घर वालों को बता दूं तो क्या होगा तुम्हें ईसका अंदाजा भी है।

( शुभम की बातें और उसका इरादा भांपकर रूचि समझ गई कि अब उसके लिए कोई रास्ता नहीं बचा है,, इसलिए वह बोली,,,।)

तू चाहता क्या है,,,,?

( रुचि के मुंह से यह सवाल सुनते ही शुभम का मन प्रसन्नता से भर गया क्योंकि वह समझ गया था कि उसका रास्ता खुलने वाला है और वैसे भी औरत जब बेबस हो जाएं और इस तरह का सवाल करने लगे तो समझ जाना चाहिए कि वह पूरी तरह से सहकार करने के लिए तैयार है।,,, यह समझते ही, शुभम के लंड में रक्त का भ्रमण तेज गति से होने लगा,,, रूचि के पूछे जाने पर वह आम को फेंक दिया और रुचि को पीछे से अपनी बांहों में भरते हुए अपने दोनों हाथों को रुची की बड़ी बड़ी चूचियो पर ब्लाउज के ऊपर से ही रखकर दबाते हुए बोला,,,,।

मैं यही चाहता हूं कि जो तुम उस आदमी के साथ कर रही थी मेरे साथ करो और मुझे भी करने दो,,,( इतना कहने के साथ ही वह रुची की बड़ी बड़ी चूचियां को ब्लाउज के ऊपर से ही जोर से मसल दिया जिसकी वजह से रुचि के मुंह से सिसकारी निकल गई,,,,।

सससहहहहहहह,,,,,, नहीं यह नहीं हो सकता,,,,

क्यों नहीं हो सकता( इतना कहने के साथ ही शुभम लगातार उसकी चूचियों को मसलते हुए अपने तंबू को और ज्यादा उसकी गांड की दरार में धंसााने लगा,,, स्तन मर्दन और अपने नितंबों पर हो रहे कठोर लंड का एहसास रुची को कामोतेजना से भरने लगा,,, रुचि को इस बात का डर भी लग रहा था कि कहीं कोई उन दोनों को इस हाल में देख ना ले। उत्तेजना के साथ-साथ उसे घबराहट भी महसूस हो रही थी।,,,,

नहीं सुभम यह बिलकुल भी नहीं हो सकता मुझे छोड़ दे।,, मैं सबको बता दूंगी कि तू मेरे साथ क्या करना चाहता है,,,।( उसकी बांहों में से निकलने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,।)

नहीं तुम ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकती वरना मैं वह सच्चाई घरवालों को बताऊंगा जिससे वह आज तक अनजान है और तुम्हें एकदम पवित्र समझते हैं। शायद तुम अनजान बनने की कोशिश कर रही हो क्योंकि तुम भी अच्छी तरह से जानती हो कि मेरे बस मुंह खोलने भर की देरी है उसके बाद तुम्हारा क्या हाल होगा यह तुम अच्छी तरह से जानती हो,,,।( शुभम ईस बार एक हाथ चूची पर से हटा कर उसकी जांघों के बीच ले जाकर साड़ी के ऊपर से ही ऊसकी बुर को दबाने लगा,,,, जिससे रूचि की उत्तेजना पल-पल बढ़ती जा रही थी,, और तो और उसका लंड साड़ी सहित वह अपनी गांड की दरार के भीतर घुसता हुआ महसूस कर पा रही थी,,, रूचि उसकी इस ताकत की वजह से एकदम से मदहोश होने लगी उसे शुभम के लंड की ताकत का जायजा मिल गया था। इसलिए तो ना-नुकुर करते हुए भी उसके मुंह से गरम सिसकारी छूट पड़ी,,,

ससससहहहहहह,,,, शुभम यह क्या कर रहा है तू कोई देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,,

यहां दूर-दूर तक कोई भी नहीं है मामी,,, मेरी बात मान जाओ ऐसा मजा दूंगा कि जिंदगी भर याद रखोगी,,,

नहीं यह नहीं हो सकता मैं तेरी मामी और तू मेरा भांजा है हम दोनों के बीच इस तरह के संबंध नाजायज के साथ-साथ बहुत ही ज्यादा अनैतिक है अगर इस बारे में किसी को भी भनक लग गई तो हम दोनों की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी इसलिए मैं तुझे कह रही हूं कि अपने आप को संभाल और इस तरह का अनैतिक कार्य करने से बच जा।,,,,

रूचि शुभम को समझाने की कोशिश भी कर रही थी और शुभम की हरकतों का पूरी तरह से आनंद भी ले रही थी रुचि के मुंह से निकलने वाली सिसकारी शुभम के सामने घुटने टेकने का संकेत था आखिरकार रुचि भी एक प्यासी औरत थी। उसे हमेशा एक मोटे लंड की तलाश रहती थी इसलिए तो उसे शुभम की हरकतों से बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। शुभम उसकी चूचियों को जोर-जोर से मसलते हुए बोला।

मामी कुछ देर के लिए भूल जाओ कि तुम मेरी मामी और मैं तुम्हारा भांजा हूं बस इतना याद रखो कि तुम एक औरत और एक मैं मर्द हूं और वैसे भी यहां कोई देखने वाला नहीं है चारों तरफ परिंदा भी नजर नहीं आ रहा है तो फिर ऐसी चिल चिलाती धुप में कोई इंसान केसे नजर आएगा।,,,,( रुचि भी यह बात अच्छी तरह से जानती थी यहां वैसे भी ऐसी कड़कड़ाती धूप में आने वाला नहीं था,,,, लेकिन फिर भी वह शुभम को समझाते हुए बोली।)

फिर भी सुभम मैं तुझे ऐसा पाप नहीं करने दूंगी,,,,,

( ऐसा कहते हुए वह फिर से छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन तभी शुभम एक हाथ से अपने पजामे को नीचे कर दिया और रुचिका हाथ पकड़ कर जबरदस्ती उसकी हथेली में अपना लंड थमा दिया,, अपनी हथेली में गरमा गरम मोटा लंड महसूस होते ही उसके तन बदन में कामाग्नि भड़क उठी,,,, उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई गरमा गरम रॉड उसके हाथ में थमा दिया हो,,, उसका छटपटाना कम होने लगा,,, लंड की मोटाई उसे उसके लंड की तरफ देखने के लिए मजबूर कर दी,,, उसकी हथेली की पकड़ को देखते हुए शुभम अपना हाथ हटा दिया था और रुचि ही उसके लंड को कस के पकड़े हुए थी,,,लंड की तरफ देखे बिना ही रुचि को हथेली में लेकर के उसके लैंड की ताकत का अंदाजा लग गया,,, क्योंकि अब तक जितने भी लंड उसकी हथेली में आए थे इस तरह की मजबूती का एहसास उसे कभी नहीं हुआ था।,,,, उसका मन एकदम से व्याकुल हो उठा अपनी खुली आंखों से शुभम के लंड का दीदार करने के लिए। इसलिए वह अपना विरोध भूलकर शुभम की तरफ घूम गई और धीरे-धीरे घबराते हुए अपनी नजरों को नीचे करके सुभम के लंड को देखने लगी,,,, जैसे ही रुचि की नजर शुभम के तने हुए और खड़े लंड पर कड़ी एक पल के लिए वह सब कुछ भूल गई क्योंकि जिंदगी में पहली बार बार इतनी ताकतवर मजबूत मोटे और लंबे लंड को देख रही थी जो कि उसकी हथेली में मचल रहा था।,,, रुचि के चेहरे के हाव भाव को देखकर शुभम समझ गया कि उसका काम बन गया है रुचि से रहा नहीं गया और वह कसके उसके लंड को हथेली में पकड़कर आगे पीछे करके देखने लगी,,,, उत्तेजना के मारे रुचि की सांसे उखड़ रही थी अब बिल्कुल भी विरोध करने की हालत में वह नहीं थी वह पूरी तरह से शुभम को समर्पित होने के लिए तैयार थी। वह शुभम के लंड को अपने बुर के अंदर महसूस करने के लिए व्याकुल हो उठी,,,, वह शुभम के लंड को मुठीयाते हुए बोली।

शुभम यहां कोई देख लेगा चल उसने चलते हैं । (वह नजरों से ही बगीचे के बीचों बीच बनी घास फूस की झुग्गी की तरफ इशारा करते हुए बोली,,,, शुभम उसका इशारा समझती ही खुशी के मारे एकदम गदगद हो गया,,,,

 
चारों तरफ बड़े-बड़े और छोटे-छोटे आम के पेड़ की वजह से बगीचा पूरी तरह से खूबसूरत नजर आता था और बगीचा इतना घना था कि,,, धूप बिल्कुल भी बगीचे में प्रवेश नहीं कर पाती थी इसलिए बगीचे में बहने वाली हवा अपनी शीतलता का एहसास दोनों के बदन पर करा रही थी। शुभम मन-ही-मन बेहद प्रसन्न हो रहा था क्योंकि उसकी मनोकामना पूर्ण होने जा रही थी।,,, दूसरों के सामने रूचि एकदम सती सावित्री होने का बखूबी ढोंग करती थी लेकिन असलियत में वह कितनी बड़ी छिनार है वह इस बात से ही पता चल जा रहा था कि,, झोपड़ी में जाते समय भी उसने शुभम के लंड को अपने हाथ मे ही लिए हुए थी,,। रुचि की हरकत से ही शुभम समझ गया था कि यह बहुत ज्यादा प्यासी औरत है। रूचि झोपड़ी की तरफ आगे बढ़ते हुए चारों तरफ नजर फेर ले रही थी कि कहीं कोई आ ना जाए,,, लेकिन चारों तरफ,, लहलहाते खेत और बह रही शीतल हवा के सिवा कोई भी नहीं था।,,, शुभम के लंड की किस्मत में एक और युग लिखी हुई थी जिसै वह जल्द ही हासिल करने वाला था।

जल्द ही दोनों झोपड़ी में दाखिल हो गए अंदर प्रवेश करते ही चारों तरफ सूखी हुई घास का ढेर नजर आ रहा था।,,, रूचि तुरंत घास का ढेर सारा पुवाल इकट्ठा करके नीचे बिछा दी और बोलि,,,

अब आराम से करेंगे,,,

( रुची की यह बात सुनकर शुभम एकदम से उत्तेजना से भर गया,,, और उससे रहा नहीं गया वह एक हाथ आगे बढ़ा कर सीधे रुचि की कमर में वह हाथ डाल दिया और उसे अपनी तरफ खींच कर,अपने बदन से सटाते हुए अपने तरसते होठ को रुचि के गुलाबी होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,, शुभम की इस तरह के कामुक हरकत की वजह से कुछ ही पल में रुची काम विभोर होकर खुद ही शुभम के बदन से लिपट गई और उसका साथ देते हुए अपने होठों को खोलकर उसकी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।,,, इतने में तो शुभम की दोनों कामोत्तेजना बढ़ाने वाली हथेलियां रुचि के मखमली बदन पर ऊपर से नीचे चारों तरफ घूमने लगी,,, जिस उत्तेजना और जोश के साथ शुभम रुची के बदन से लिपट कर उसके होठों का रसपान कर रहा था रुचिका तन-बदन एकदम से झनझना उठ रहा था। उसने इतना जोश अब तक किसी मर्द में नहीं देखी थी,,, इसलिए तो उसे इस बात का अंदाजा लग गया की आज एक आम की बगिया में उसकी बुर का बाजा बजने वाला है।,,, शुभम पागलों की तरह उसके होंठों को चूसते हुए कभी उसकी बड़ी-बड़ी नितंबों पर हाथ फेरते हुए दबा देता तो कभी उसकी गोल-गोल कसी हुई चुचियों को दबा देता,,,। शुभम रुचि को उत्तेजना के अथाग सागर में खींचे लिए चला जा रहा था,,,, रूचि उत्तेजना के वशीभूत होकर तेरे से शुभम के मोटे खड़े लंड को पकड़ कर हिलाना शुरु कर दी,, मोटी मोटी और गर्म लंड का एहसास रुचि की बुर को और ज्यादा हवा दे रहा था उसमें से नमकीन रस टपकना शुरू हो गया था। कुछ देर तक यूं ही रुचि के होठों का रसपान करते हैं शुभम एकदम से मदहोश हो गया और होठो के रस से मन भर जाने के बाद वह तुरंत उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा,,,,। रुचि अब शुभम का विरोध बिल्कुल भी नहीं कर रही थी पर कि वह तो शुभम द्वारा किए गए हरकतों का पूरी तरह से मजा ले रहे थे इस झोपड़ी ने किसी बात का डर नहीं था क्योंकि दिन का समय होने के साथ-साथ बेहद गर्मी का समय भी था जिसकी वजह से कोई भी घर से बाहर नहीं निकलता था।,, इसलिए तो जहां किसी के द्वारा देखे जाने का भी डर बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तो रूचि शुभम से अपने ब्लाउज खोलने पर किसी भी बात का ऐतराज़ नहीं दर्शा रही थी,,,, शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसकी सांसे फुल रही थी। वैसे भी रुचि बेहद खूबसूरत लगती है उसका अंग-अंग तराशा हुआ था भरे बदन की मालकिन होने के साथ-साथ गोरा रंग उसे और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहा था उस के बड़े-बड़े गोल नितंब किसी का भी ध्यान आकर्षित करने मैं सक्षम थे। इसलिए तो गांव आते ही सबसे पहले शुभम की नजर रुचि पर ही थी,,,, क्योंकि जिस तरह का आकर्षण और कमजोरी शुभम की औरतों की बड़ी बड़ी गांड की तरफ थी,,, ठीक वैसे ही गोल गोल बड़ी-बड़ी गांड लिए हुए रूचि शुभम के दिलो-दिमाग पर छाई हुई थी।,, वेसे तो सही मायने में शुभम सबसे पहले रुचि पर ही हूं अपने दांव पर आजमाना चाहता था लेकिन शुरुआत उसकी बड़ी मामी से हो गई थी। बड़ी मामी जितनी आसानी से उसे चोदने के लिए मिल गई थी उससे शुभम की हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई थी,,, लेकिन कमरे में जिस तरह से रुचि में उस पर डांट फटकार लगाई थी उसे देखते हुए सुभम का हौसला जवाब दे गया था। उसे लगने लगा था कि वह अपनी छोटी मामी को कभी भी चोद नहीं पाएगा,,, उसे अपनी यह ख्वाहिश अंधेरे में ओझल होती हुई नजर आ रही थी लेकिन,,, कहते हैं ना कि अंधेरा चाहे कितना भी घना हो लेकिन हल्की सी रोशनी जरूर नजर आती है। ठीक वैसा ही शुभम के साथ भी हुआ था,,,। सबसे बड़ा राज़ जो की रूचि सबसे छुपा के रखी हुई थी वह राज शुभम ने अपनी आंखों से देख लिया,,, और उसका नतीजा यह हुआ कि आम के बगीचे में दोपहर के समय झोपड़ी के अंदर शुभम उसके ब्लाउज के बटन खोल रहा था,,,,। शुभम उसके ब्लाउज के बटन खोलते हुए उसके खूबसूरत चेहरा की तरफ देखे जा रहा था,,, रूचि शुभम को इस तरह से उसके ब्लाउज के बटन खोलते हुए देखकर अंदर ही अंदर शर्म महसूस करने लगी क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि शुभम इस तरह का लड़का होगा और उस पर नजरें गड़ाए बैठा था।,,, शुभम की तरफ देखते हुए वहां अपनी नजरें दूसरी तरफ घुमा ली तो शुभम उसके ब्लाउज के बटन खोलते हुए बोला,,।

क्या हुआ ऐसे क्यों नजरें घुमा ली,,,,

मुझे शर्म आ रही है (शुभम की तरफ देखे बिना ही बोली)

अच्छा तो मेरे साथ शर्म आ रही है और उसको खेतों में अपनी साड़ी उठाकर बुर चटवा रही थी तब शर्म नहीं आ रही थी,,,

( शुभम के मौसम अपने बारे में इतनी गंदी बात सुनकर वह एकदम से शर्म से गड़ी जा रही थी,,, क्योंकि उसे इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि शुभम उसे इतने खुले शब्दों में बोलेगा,,, इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाई बस नजरें झुकाए खड़ी रही,,,।)

क्या हुआ मामी इतना क्यों शर्मा रही हो,,,?

तू बातें ही ऐसी कर रहा है तो क्या शर्म नहीं आएगी,,,

रात को छुप-छुपकर चुद़वाने में शर्म नहीं आती,,,।

वह तो मेरी मजबूरी है।

कैसी मजबूरी (ब्लाउज की आखिरी बटन खोलते हुए बोला)

तेरे मामा इस लायक नहीं है कि वह मुझे खुशी दे सके,

( रुचि की बात सुनकर शुभम थोड़ा सा झेंप गया लेकिन उसका पूरा ध्यान रुचि की बड़ी-बड़ी और कठोर चुचियों पर ही थी जोकी ब्रा के अंदर होने के बावजूद भी ऐसा लग रहा था कि बाहर है।। शुभम प्यासी नजरों से रुचि की चुचियों को घूरे जा रहा था,,, और यह देख कर रुची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी।,,, रुचि की बड़ी-बड़ी और गोल चुचियों को ब्रा में देखकर शुभम कुछ पल के लिए रुची की बात को अनसुना कर दिया,,,, और ब्रा के ऊपर से ही अपनी हथेलियां फेरते हुए चूचियों के कठोरपन को महसूस करते हुए बोला,,,

ब्रा के अंदर होने के बावजूद भी तुम्हारी चुचिया इतनी खूबसूरत लग रही है अगर यह ब्रा के बाहर आ जाएंगी तब तो जान ही ले लेंगी,,,

( रूचि शुभम के इस तरह की बातें सुंदर एकदम से भाव विभोर हो गई,,, उसकी हथेली में अभी भी सुभम का लंड था। वह तुरंत मुस्कुराते हुए शुभम के लंड को छोड़कर,, घूम गई उसकी पीठ शुभम की तरफ हो गई और वह शुभम की तरफ नजरें घुमा कर अपनी साड़ी के पल्लू को पूरी तरह स नीचे गिराकर मुस्कुराते हुए बोली,,,।

तो देर किस बात की है,,,लो आजाद कर दो ईन्हे।

 
रूचि जिस अंदाज में शुभम की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई थी उसका अंदाज देखते हो शुभम की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाना लाजमी था।,, अक्सर मर्द को उस वक्त का बेहद बेसब्री से इंतजार रहता है जब ऐसे ही किसी अतरंग समय पर औरत अपनी तरफ से बेहद लुभावना और उत्तेजनात्मक हरकत करती है जिसकी वजह से मर्द की उत्तेजना मैं बेहद वृद्धि होने लगती है और यही शुभम के साथ भी हो रहा था जिस अंदाज से रुचि ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिराई थी,,, उसे देखते हुए शुभम के मुंह में पानी आ गया था और खास करके एक झोपड़ी में एक खूबसूरत औरत के साथ शुभम को और भी ज्यादा कामोंतेजना का अनुभव हो रहा था। शुभम एक कदम आगे बढ़ाकर रुचि के बदन से सट गया और हल्के से अपने दोनों हाथों को उसके कंधों पर रखकर बड़े ही गर्मजोशी से अपनी हथेलियों में दबोचे हुए अपनी हथेली को नीचे की तरफ लेकर आया और उसकी नंगी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूमना शुरू कर दिया एक औरत के लिए मर्द के द्वारा उसकी गर्दन पर चुंबन लेना उसकी उत्तेजना को परम शिखर पर पहुंचाने में सहायक होता है इसी वजह से शुभम की चुंबन लेते ही रुचि के मुंह से गर्म सिसकारी निकल गई,,

सससससस,,,, आहहहहहहहह,,,, शुभम,,,,,,

( रुचि की यह सिसकारी शुभम की उत्तेजना का पारा बढ़ाने लगी,, वहां और ज्यादा रुचि के खूबसूरत कोमल बदन को अपनी हथेली में दबोच लिया एक मजबूत शरीर के मालिक द्वारा अपने नाजुक बदन को दबाए जाने की वजह से रुचि की बुर से पानी टपकने लगा,,, शुभम पागलों की तरह उसकी नंगी पीठ पर जगह-जगह पर चुंबनों की बौछार करने लगा शुभम का लंड अभी भी पेंट के बाहर था जिसको वह रुचि के नितंबों से सटाया हुआ था,,, और तने हुए मोटे लंबे लंड की रगड़ को अपनी बड़ी बड़ी गांड पर महसुस करके रुची के बदन मे सुरसुराहट सी खेल रही थी वह बार-बार अपने बदन को कसमसाते हुए अपनी बड़ी बड़ी लचीली गांड को दाएं-बाएं हिलाकर लंड की रगड़ का मजा ले रही थी।,, शुभम की सांसे तेज चल रही थी बगिया में चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था केवल हवा चलने की वजह से सूखे पत्तों के फड़फड़ाने की आवाज और पंछियों की चहकने की आवाज से बगीए का वातावरण खुशनुमा लग रहा था और उससे भी ज्यादा तो खुशनुमा वातावरण के साथ साथ उत्तेजनात्मक वातावरण तो झोपड़ी के अंदर का था जिसमे रुचि की गर्म सांसे और उसकी गरम सिसकारी से,,, ऐसा लग रहा था कि कहीं सूखे हुए पुआल में आग न लग जाए,,,, वैसे तो रुची की गर्म जवानी ने शुभम के बदन में आग लगा ही दी थी।,,,

रुचि बेसब्री से,,, अपने खुले हुए ब्लाउज को अपनी बाहों से निकलने का इंतजार कर रहे थे इसलिए दोनों चूचियां किसी कबूतर की तरह शुभम के हाथों में आने के लिए फड़फड़ा रहे थे। लेकिन सुभम था की दोनों फड़फड़ाते हुए कबूतर को छोड़कर रुचि की मक्खन जैसी मखमली चिकनी पीठ को चाटने में लगा हुआ था,,, रुचि बेसब थ्री लेकिन जिस तरह से सुभम अपनी हरकतों से उसके बदन की गर्मी बढ़ा रहा था उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी। इसलिए वहां भी अपने ब्लाउज को उतरवाने में बिल्कुल भी उतावलापन नहीं दिखा रही थी। कुछ देर तक रुचि की चिकनी पीठ से खेलने के बाद आखिरकार शुभम अपने दोनों हथेलियों को रुचि के कंधों पर रखकर उसकी ब्लाउज के छोर को कंधों से पकड़कर नीचे की तरफ सरका कर उसकी बाहों से निकालने लगा रूचि भी तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ सीधा कर दी ताकि आराम से उसका ब्लाउज़ निकल सके और अगले ही पल शुभम रुची के ब्लाउज को निकालकर सूखी हुई घास पर फेंक दिया।

और उसकी बांह पकड़ कर फिर से अपने सीने से चिपका कर अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ ले अाया और ब्रा के ऊपर से ही उसकी चुचियों को दबाना शुरु कर दिया। सुभम अपनी मजबूत हथेलियों में रूचि की नरम नरम लेकिन कठोर चूचियों को दबा रहा था,,, जिसकी वजह से रूची के मुख से लगातार सिसकारियां निकलना शुरू हो गई। शुभम का तना हुआ लंड रुचि की मखमली गांड पर दस्तक दे रही थी। शुभम ब्रा के ऊपर से ही रुचि की गोल गोल चूचियों को हथेली में भरकर दबा रहा था।,,, शुभम की हरकत से रुचि एकदम मदमस्त हुए जा रही थी उसके मुंह से लगातार सिसकारी की आवाज गूंज रही थी।

सससहहहहह,,,, शुभम तेरे हाथों में तो जादू है रे,,,,,

जादू मेरे हाथों में नहीं तुम्हारी इन चुचीयों में है तभी तो मेरी उंगलियां अपने आप ही इस पर कसती चली जा रही है,,,।,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम ने उंगलियों का सहारा लेकर चूचियों के नीचे की पट्टी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा दिया,,,, जिससे रुचि की दोनों नारंगिया ब्रा से बाहर आ गई,,, जैसे ही रुचि की दोनों चूचियां बाहर आई शुभम ने झट से उन्हें लपक लिया और जोर जोर से दबाना शुरु कर दिया,,,, नंगी चूचियों को हथेली में भरकर दबाने का अपना अलग ही मजा है। इस बात को सुभम अच्छी तरह से जानता था इसलिए तो चूचियों को दबाने और मसलने का कोई भी मौका वह अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था।,,, रुचि की हालत पल-पल खराब हुए जा रही थी आज उसे अपनी चूची दबवाने और मसलवाने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। रुचि को इस बात की जरा भी उम्मीद नहीं थी कि शुभम जैसा जवान लड़का बेहद इत्मिनान से आगे बढ़ेगा उसे तो ऐसा ही लग रहा था कि झोपड़ी में जाते ही वह उसकी साड़ी उठाकर बस अपने मोटे लंड को ऊसकी बुर में डालकर चोेदना शुरु कर देगा,,,, लेकिन जिस तरह से शुभम धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा था उसने रूचि को बहुत ही ज्यादा मज़ा आ रहा था।,, जितने प्यार और मजबूती से उसने रुचि के चुचियों से खिलवाड़ कर रहा था उस तरह से आज तक किसी ने भी नहीं खेला था।,,,, इसलिए रुचि भी शुभम का पूरा साथ देते हुए उसकी हर हरकत का मजा ले रही थी,। वह मन में अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी अचानक सुभम एक झटके से रूचि की बांह पकड़ कर उसे अपनी तरफ घुमा दिया और पागलों की तरह उसके गुलाबी होठों को अपने मुंह में भर कर चुसना शुरु कर दिया,,,, रुचिका शुभम के ऐसे दीवाने पन से एकदम मदहोश हुए जा रहे थे,,, शुभम एकदम जोश में आकर उसके गुलाबी होठों का रसपान करते हुए अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गया और ब्रा की हुक को खोल दिया,,, अगले ही पल रूचि की ब्रा घास के सुखे ढेर में पड़ी हुई थी,,, रूचि के दोनों कबूतर ब्रा की कैद से आजाद होते हीैं हवा में फड़फड़ाने लगे,,,, और उन फड़फड़ाते हुए कबूतर को अगले ही पल शुभम ने अपनी हथेलियों में दबोच लिया,,,, ऐसा लग रहा था कि शुभम ने किसी खूबसूरत पंछी के गले को अपनी हथेली से दबोच लिया हो इस तरह से दोनों सूचियों का रंग सुर्ख लाल हो गया,,, गोल गोल नारंगी के समान लेकिन बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियों को अपनी हथेली से दबाता हुआ शुभम मस्त हुए जा रहा था।,,, रुचि का चेहरा शर्म और उत्तेजना के कारण लाल टमाटर की तरह हो गया था। वह शुभम को बड़े गौर से देख रही थी और उसके चेहरे के मासूम को देखते हुए इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल था कि इस मासूम से दिखने वाले चेहरे के पीछे,,, कितना शातिर और वासना मई इंसान छुपा हुआ है। उसे बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि,,, उस का भांजा उसके खूबसूरत स्तनों से खेल रहा है। शुभम जी उसकी चूचियों को दबाता हुआ रुचि की तरफ देखते हुए अपने मुंह से गर्म

सीईईई,,, सीईईई,,,,, की आवाजे निकाल कर मज़ा ले रहा था।,,, कुछ देर तक यूं ही स्तनों से खेलते खेलते शुभम ने कब दोनो चुचियों को बारी-बारी से अपने मुंह में भर कर पीने लगा इस बात का पता रुची को बिल्कुल नहीं चला। उसे इस बात का एहसास तब हुआ जब उत्तेजना वस सुभम नै जोर से उसकी चॉकलेटी निप्पल में अपने दांत गड़ा दिए,,,, एकाएक निप्पल में दांत धंसाने की वजह से रुचि के मुंह से चीख निकल गई,,।

आहहहहहहहह,,,, क्या कर रहा है,,,,?

मजा ले रहा हूं मेरी जान,,,,,

( शुभम एकदम खुले तौर पर रुचि को पुकारने लगा था रूचि को पहले तो थोड़ा अजीब लगा लेकिन जिस तरह का मजा वहां उसे दे रहा था उसे देखते हुए रुचि को भी शुभम के द्वारा उसे जान कहे जाने पर अच्छा लगने लगा,,, वह यह देखकर एकदम हैरान थी कि शुभम कैसे जल्दी जल्दी उसकी दोनों चूचियों के साथ खेल रहा था कभी एक चूची को मुंह में भरकर तीता तो कभी दूसरी चूची को,,, कभी-कभी जितना हो सकता था उतना पूरा का पूरा उसकी चूची को मुंह में भर कर पीना शुरु कर देता था और दांत गड़ाकर आनंद ले रहा था। भले ही बड़ी बेरहमी से वह रुचि के बदन से खेल रहा था लेकिन इस बहरेहमीपन में ही रुचि को बेहद मजा मिल रहा था। पहली बार स्तन चुसाई का आनंद रूचि प्राप्त कर रही थी वरना दो-तीन मिनट दबाकर मजे लेने के बाद लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता इसलिए आज पूरी तरह से वह शुभम को अपने बदन से खेलने की इजाजत दे दी थी। सुभम भी पागलों की तरह उसकी चूची को चूस चूस कर लाल टमाटर बना दिया था। कामोत्तेजना मे तप रहे अपने बदन पर खुद रुचि का काबू बिल्कुल भी नहीं था शुभम जिस तरह से और जिस तरफ से खेलना चाह रहा था उसी तरह से खेल रहा था। कमर के ऊपर का बदन पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुका था। बुर काम रुपी रस छोड़ते हुए और भी प्यासी हुए जा रही थी। बुर का दाना अपने आप ही फुदकने लगा था। शुभम रुचि की चूची को दोनों हाथों से खींच खींच कर पी रहा था मानो कि जैसे वह चुची न हाें पका हुआ आम हो,,,, और रुची गरम सिसकारी लेते हुए शुभम को और ज्यादा उकसा रही थी।

ओहहहहहह,,,,, शुभम,,,,,, यह सब कहां से सीखा। तूने तो मेरी हालत ही खराब कर दिया है मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तू सीधा-साधा सुभम है।,,,

मेरी जान मुझे भी कहां यकीन होता है कि तुम वही मेरी सीधी सादी रूचि मामी हो,,,,,

तो क्या लगता है तुझे,,,

सच कहूं तो मुझे इस समय ऐसा लग रहा है कि मैं अपनी खूबसूरत माल के साथ इस बगीचे में मजे कर रहा है एकदम रंडी लग रही हो तुम,,,( एक चूची को कस के दबा कर दूसरी को मुंह में भरते हुए बोला)

छी,,,, कितना गंदा बोलता है तू मेरे बारे में क्या मैं तुझे सच में रंडी लगती हुं।

रुचि को इस तरह से नाराजगी दर्शाते हुए देखकर शुभम बोला,,,

मेरा यह कहने का मतलब नहीं था मैं तो यह कह रहा हूं कि तुम इतनी ज्यादा खूबसूरत हो कि मन करता है कि तुम्हें अपनी प्रेमिका बना लूं और इस समय जिस तरह का खूबसूरत बदन लिए हुए हो मेरी तो जान ही निकाल दोगी मैंने आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,( शुभम रुची की आंखों में झांकते हुए उसकी चूची को जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,।)

क्या मैं तुझे इतनी अच्छी लगती हुं।

तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो मेरी जान अभी तो मैं सिर्फ तुम्हारी कमर के ऊपर का ही नजारा देखकर मरा जा रहा हूं अगर मैं तुम्हारी कमर के नीचे का खूबसूरत बदन देखूंगा तो ना जाने क्या हो जाएगा,,, सच बताओ मेरी जान क्या तुम्हें यह सब अच्छा लग रहा है?

बहुत अच्छा लग रहा है शुभम सच बताऊं तो तूने जिस तरह से मेरी चूचियों को दबा दबा कर उसे मुंह में भर कर पी पी कर मुझे जो मजा दिया है मैंने ऐसा मज़ा आज तक नहीं ले पाई हूं।

ओह,,,, मेरी रानी यही तो मैं चाहता हूं कि मैं जो भी करूं तुम्हें अच्छा लगे तुम्हें ऐसा सुख देना चाहता हूं कि तुम जिंदगी भर मुझे याद रखो,,,( इतना कहते हुए शुभम अपनी हथेली को रुचि के चिकने पेट पर फिराने लगा,,, और पेट पर फिराते फिराते अपनी हथेली को पेट के नीचे की तरफ ले जाकर साड़ी के ऊपर से ही बुर वाली जगह को दबाते हुए बोला,,,,।) मेरी जान सच-सच बताना तुम्हें तुम्हारी खूबसूरत बुर की कसम,,, क्या इस समय तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही है,,,।

( शुभम के मस्त बातों से रुचि एकदम मदहोश होने लगी थी उसकी हालत कामोतेजना की वजह से नाजुक होते जा रहे थे उसकी आंखों में खुमारी जा रही थी,,, शुभम के इस तरह के मस्त सवाल सुनकर रोजी की आंखों में चुदाई का नशा साफ झलकने लगा,,, और वह मस्ती भरे अंदाज में बोली,,,,।

हाथ कंगन को आरसी क्या मैं तुम्हारे सामने हूं मेरा खूबसूरत बदन तुम्हारे हाथों में तुम्हारा सवाल खुद जवाब भी है देखना चाहो तो देख सकते हो तुम्हें ना तो मै रोकुंगी और ना ही मेरा वजुद।,,,,( इतना कहते हुए वह शुभम की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए अपने लाल-लाल होठों को अपने ही दांत से काटकर शुभम को उकसाने लगी,,,, शुभम रुचि का यह रुप और उसकी अदाएं देखकर एकदम कामविभोर हो गया,,, और तुरंत अपने हाथ को पेट के नीचे की तरफ से ही बीचोबीच ठुंसी हुई साड़ी के घाट का पकड़ कर खोलने लगा,, शुभम के अगले कदम से रूचि समझ गई कि कुछ ही देर में बात संपूर्ण रूप से महंगी हो जाएगी और उसकी मदमस्त जवानी को सुभम अपना मुंह लगाकर पीना शुरु कर देगा,,, यह सब सोचते हैं उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारने झनझना गया,,, और उत्तेजना बस उसकी बुर से मदन रस की बूंदे टपकने लगी।

 
रुचि का संपूर्ण बदन अद्भुत सुख को महसूस करके कसमसा रहा था। शुभम जो कि पक्का औरत बाज हो चुका था वह रुचि की साड़ी की गांठ को अपने हाथों से

पेटीकोट के अंदर से बाहर की तरफ निकाल रहा था,,, सूरन की आंखों की चमक देखकर इतना साफ नजर आ रहा था कि उसे भी रुचि की बुर देखने में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी थी। उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी तभी तो उसकी हर हरकत के साथ ही उसके मुंह से सीईईईई,,,,,, सीईईीई की मादक सिसकारी नीकल रही थी। और शुभम के मुख से निकलने वाली ऐसी उत्तेजक आवाज को सुनकर रुची के काम भावना और भी ज्यादा तीव्र होती जा रही थी। और कुछ ही सेकंड में पलक झपकते ही शुभम ने रुचि के बदन से उसकी साड़ी को अलग करके घास के ढेर में फेंक दिया और इस वक्त रुचि के खूबसूरत मखमली बदन पर केवल पेटीकोट ही नजर आ रही थी,,,, रूचि शुभम की तरफ से ऐसी नजरों से देख रही थी और उसकी आंखों में मदहोशी की खुमारी भरी हुई थी वह आंखों से ही उसकी पेटीकोट को उतारने का प्रलोभन दे रही थी। क्योंकि,,, उन दोनों के बीच मात्र पेटिकोट का पतला पर्दा ही रह गया था। रुचि भी जल्द से जल्द शुभम की आंखों के सामने एकदम नंगी होने के लिए मचल रही थी तभी तो शुभम भी उसके उतावलेपन को समझते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा कर पेटीकोट की रेसमी डोरी को थाम लिया, शुभम पूरी तरह से कामोत्तेजना के ज्वऱ में तप रहा था,,, पेटिकोट की डोरी को थामे हुए अपनी तीन ऊंगलियों को पेटीकोट के उस हिस्से में डाल दिया जहां पर पेटीकोट का वह हिस्सा जो हल्का सा फटा हुआ नज़र आता है जबकि वह फटा हुआ नहीं बल्कि उसी तरह के डिजाइन का बना होता है शुभम अपनी तीनों उंगलियों को उस में प्रवेश करा कर,, रुचि के मखमली बदन का एहसास अपने बदन में उतारने लगा,,, रूचि जो कि यही सोच रही थी कि वह शुभम पेटीकोट की डोरी को पकड़कर उसे खींचकर खोल देगा लेकिन उसके इस तरह से पेटिकोट के छेद में से उस के नंगे बदन पर ऊंगलिया फिराने की वजह से उसका तन बदन थरथराने लगा उसके चिकने नंगे पेट पर उत्तेजना की थरथराहट साफ महसूस हो रही थी। उसके थरथराते हुए पेट को देखकर उत्तेजना के मारे सुभम का लंड ठुनकि मारने लगा। शुभम उसी मदहोशी के साथ अपनी उंगलियों को पेटीकोट के उसी छेंद से चारों तरफ घुमाने लगा,,, शुभम की ऊंगलिया पेट के नीचे वाले भाग पर चारों तरफ घूम रही थी। और जल्द ही उसे इस बात का एहसास हो गया कि रुचि ने पेटीकोट के अंदर पेंटी नहीं पहनी है और इस बात को लेकर शुभम और भी ज्यादा कामोत्तेजित हाे गया।,,, अब रुचि को पूरी तरह से नंगी देखने की उसकी भी उत्सुकता कुछ ज्यादा ही जोर मारने लगी,, दूसरी तरफ रुचि शुभम की हरकतों से एकदम पानी पानी हुए जा रही थी रह-रहकर घुटि-घुटि सी सिसकारी उसके मुख से निकल जा रही थी जितनी ज्यादा उत्तेजना का एहसास शुभम करा रहा था।।ईस तरह की ऊत्तेजना का एहसास रुचि को कभी भी ना तो हुआ था और ना ही किसी ने कराया था। इतने मात्र से ही रोजी शुभम की दीवानी हुई जा रही थी अभी तो शुभम का असली खेल बाकी था। शुभम धीरे से पेटिकोट के छेद में से ऊंगलियों को बाहर निकाल लिया,,, और रुची की तरफ देखने लगा,,, इस बार रुची की नजरें जैसे ही सुभम की नज़रों से टकराई शर्म के मारे वह अपनी नजरों को फेर ली, शुभम को रुचिका इस तरह से शर्माना बहुत अच्छा लगा,,,, शुभम और रुचि की नजरों के बीच,,,, एक और चीज नजर आ रही थी जो कि बेहद आकर्षक ढंग से अपना परिचय करा रही थी,,,ओर।वह थी रुची की बड़ी बड़ी गोल चुचीयां जो की उसकी गहरी चल रही सांसो कि लय के साथ ऊपर नीचे हो रही थी,,। और यही चूचियों का उठना बैठना शुभम की उत्तेजना बढ़ा रहा था,,, । रुचि आज पूरी तरह से सुभम के हवाले थी,, इसलिए शुभम भी बेहद सब्र से काम ले रहा था,,,। चूचियों को पकड़कर पीने का लालच उसके मन को फिर से झकझोरने लगा,,, उसके मन में आ रहा था कि एक बार फिर से रुचि की बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम कर जी भर के पिए,,, लेकिन इस समय उसके हाथों में रुचि के बेशकीमती खजाने के परदे की डोरी थी,, जिसे खींचते ही बेशकीमती खजाने पर से पर्दा हट जाता और रुची के वग बेशकीमती खजाना शुभम को नजर आने लगता जिस खजाने को देखने के लिए और उसे अपनी हथेली में पकड़कर दबोचने के लिए शुभम ईस समय व्याकुल हुए जा रहा था। और इसी वजह से उसने स्तन मर्दन और स्तन चूसन की लालच को एक तरफ करके बुर दबोचन के लालच की तरफ बढ़ने लगा,,,, कसमसाहट भऱी रुचि क्या खूबसूरत बदन थरथरा रहा था,,,,, उत्तेजना के मारे से शुभम का गला सूख रहा था उसके हाथों में पेटिकोट की रेशमी डोरी थी जिसे वह धीरे-धीरे खींचने लगा था,,, रूचि की नजरें शुभम की उंगलियों में फसी हुई पेटीकोट की डोरी पर ही थी उसे मालूम था कि अगले ही पल वह पूरी तरह से नंगी हो जाएगी इस वजह से उसकी सांसो की गति तेज हो गई थी,,, उसके मन में इस बात से शर्म और उत्तेजना दोनों का मिला जुला असर हो रहा था कि वह अपने से छोटे लगभग उसके बेटे समान ही भांजे के सामने उसके ही हाथों से नंगी होने जा रही थी और अपने से ही छोटे उम्र के लड़के के साथ,,, संभोगरत होने की कल्पना से ही उसके तन-बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी शुभम धीरे-धीरे पेटिकोट की डोरी को खींच रहा था,,, वह चाहता तो एक झटके से ही पेटिकोट की डोरी खोल कर पेटिकोट को नीचे कदमों में गिरा देता लेकिन आहीस्ता आहीस्ता वह जानबूझकर ऐसा कर रहा था क्योंकि धीरे धीरे उत्तेजना बढ़ाने में उसे मजा भी आ रहा था और रुचि की हालत देखने लायक होती जा रही थी क्योंकि निरंतर उसकी सांसो की गति में वृद्धि होती जा रही थी। अगले ही पल शुभम ने पेटीकोट की डोरी को पूरी तरह से खींच कर खोल दिया पेटीकोट पूरी तरह से ढीली हो चुकी थी,,, वह किसी भी वक्त कमर से सरक कर उसके कदमों में गिर सकती थी बस शुभम को पेटिकोट की डोरी अपनी नाजुक उंगलियों से छोड़ने की डेरी थी।,,, कुछ सेकंड के लिए वह खुली हुई डोरी को अपनी उंगलियों में फसाए हुए रुचि की तरफ देखने लगा,,, जो कि इस समय पूरी तरह से मदहोशी में लिप्त हो चुकी थी। शुभम अगले ही पल पेटिकोट की डोरी को अपने हाथों से छोड़ दिया और,,, रूचि के बेश कीमती खजाने पर से पेटीकोट नुमा पर्दा सरकता हुआ रुची के कदमों में जा गिरा,,, अगले ही पल आम के बगीचे में बनी झोपड़ी के अंदर शुभम की आंखों के सामने उसकी छोटी मामी रूचि संपूर्णता पूरी तरह से नंगी खड़ी थी और अपनी छोटी मामी को संपूर्ण रुप से नंगी देखकर उत्तेजना के मारे शुभम का दिल उछलने लगा था। अपलक वह रुचि को देखता ही रह गया उसका गोरा बदन शुभम के ततनबदन में ऊष्मा प्रदान कर रहा था। रूचि को ईस समय बेहद लज्जा का आभास हो रहा है। इस समय वहं शुभम से ठीक से नजरें भी नहीं मिला पा रही थी,,,,। संगमरमर सा बदन झोपड़ी के अंदर अपनी आभा बिखेर रहा था। शुभम रुचि के चेहरे से धीरे-धीरे नजरों को नीचे की तरफ लाकर अपनी नजरों से ही रुचि के खूबसूरत मधुर रस को पी रहा था।रुची के बदन पर कही भी चर्बी का थर जमा हुआ नहीं था। उसके संपूर्ण बदन में चर्बी का माप समतोल आकार में ही था। चिकनी पेट के नीचे त्रिकोण आकार में बना हुआ बदन का आकार बेहद खूबसूरत लग रहा था जिसके बीचो-बीच बुर की पतली दरार नजर आ रहे थीे और उस के बीचो-बीच निकली हुई गुलाब की गुलाबी पंखुड़ियां,,,, बुर की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे। सबसे ज्यादा उत्तेजना प्रदान करने वाली बात यह थी कि रुचि ने पेटीकोट के अंदर कुछ भी नहीं पहनी थी।,,,, शुभम वासना भरी आंखों से रुचि के रूप यौवन का दर्शन कर रहा था और रुची थी की शर्म के मारे अपनी नजरें दूसरी तरफ फैर ली थी,,, शुभम प्यासा था और रुची की तनरुपी गगरी मधुर रस से भरी हुई थी,, और जिसे पीकर शुभम अपनी प्यास बुझाना चाहता था।,, रुचि के मधरुपी मधुर रस को पीने के लिए उसके तनरुपी गगरी के छेंद में बिना होंठ लगाएं उसके मधुर रस का स्वाद नहीं चखा जा सकता था,,,, अगर मधुर रस का स्वाद चखना है तो ऊसे रुचि के गुलाबी छेद में मुंह लगाना ही था और इस बात से ऊसको बिल्कुल भी इनकार भी नहीं था,,,वह तो ऐसे भीं तड़प रहा ऊसकी बुर पर मुंह लगाकर ऊसके मधुर रस को पीने के लिेए।

इसलिए सुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी गोद आज चिकनी जांघो को पकड़ लिया,,, रूचि एकदम से गनगना गई,,,, शुभम लंबी लंबी सांसे भरते हुए रुचि की रसीली बुर को देख रहा था जिस पर बाल का रेशा तक नहीं था ऐसा लग रहा था कि अभी हाल में ही वह पूरी तरह से साफ की हो,,,, शुभम बुर की पतली दरार पर हल्के से अपनी उंगली रखकर उसकी गर्माहट को महसूस करने लगा,,, और जैसे ही शुभम ने उसके बेशकीमती खजाने पर उंगली रखा वैसे ही तुरंत उत्तेजना के मारे रुचि ने अपने दोनों जांघों को आपस में सिकोड़ ली ओर ऊसके मुख से गर्म सिसकारी निकल गई।

ससससहहहहह,,,, शुभम,,,,, आहहहहहहहहह,,,,

( गरम सिसकारी छोड़ते हुए वह शुभम के हाथ को पकड़ ली,,, उसके हाथ पकड़े होने के बावजूद भी से बम हल्के-हल्के अपनी उंगलियों को फूली हुई बुर पर फिरा रहा था।,,, शुभम औरतों को काबू में करना सीख गया था और उन्हें उनके कौन से अंग को छेड़ने से उन्हें ज्यादा उत्तेजना का अनुभव होता है या अभी वह अच्छी तरह से जानता था,,, इसीलिए तो वहां अपने बीच वाली उंगली को बुर की पतली दरार के बीचो-बीच हल्के हल्के रगड़ते हुए घुमा रहा था,,, रूचि शुभम की हरकत से एकदम चुदवासी हो चुकी थी उसका बदन बुरी तरह से थरथरा रहा था। शुभम के सामने वह पूरी तरह से नंगी खड़ी थी,,, रूचि आज तक अपने नंगे बदन पर किसी मर्द के द्वारा इस तरह की हरकत का सामना नहीं की थी यह सब उसके साथ पहली बार हो रहा था पहली बार ही कोई था जो उसके अंगों से इतना ज्यादा प्यार कर रहा था उसे दुलार रहा था।,,,,, शुभम की भी सांसे बड़ी तेज चल रही थी वह बुर की दरार पर हल्के हल्के अंगुलियों को घुमाता हुआ रुचि से बोला,,,,।

रुंची मेरी जान सच में तुम बहुत खूबसूरत है तुम्हारा संगमरमरी बदन बेहद खूबसूरत है। मैंने आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा (शुभम के द्वारा अपनी तारीफ सुनकर रूचि मन ही मन प्रसन्न होते हुए शर्मा भी रही थी)

चल झूठी तारीफ मत कर,,,,

मैं सच कह रहा हूं मामी,,, मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि तुम मेरी आंखो के सामने नंगी खड़ी हो,,, ( इस बार शुभम की बात सुनकर फिर से वह शर्माती हुई अपनी जांघों को सिकोड़ ली,,, और नजरे दूसरी तरफ फेर कर बोली,,,।)

तूने ही तो किया है मुझे नंगी,,,,।

तो क्या करता मामी तुम्हारे खूबसूरत बदन को देखने के लिए मे कब से तड़प रहा था।( उत्तेजना के मारे बुर को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला जिसकी वजह से रुचि की सिसकारी निकल गई,,,।)

ओहहहहहहहह,,,, शुभम यह मामी मामी क्या लगा रखा है।,,,

तो क्या बोलूं मामी तुम्हें,,,,

कुछ भी बोल लेकिन इस समय मुझे माम़ी मत बोल,,,,

( रुचि भी पूरी तरह से शुभम की हरकतों की दीवानी हो चुकी थी वह भी मामी भांजे के रिश्ते को पूरी तरह से भूल चुकी थी,,, वह शुभम के मुख से और सुनना चाहती थी जो कि एक मर्द औरत से प्यार करते समय बोलता है एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को ऐसी स्थिति में पुकारता है शुभम भी जल्दी समझ गया कि वह क्या चाहती है इसलिए उसकी बुर से खेलता हुआ बोला,,,।)

रुचि मेरी जान,,, तेरा जवान बदन मेरे होश उड़ा रहा है। मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि मैं इस समय तेरी खूबसूरत बदन से खेल रहा हूं।,,, सच रूचि मैं कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तुम्हारी बुर इतनी साफ-सुथरी होगी,,,।

क्या मतलब,,,,? ( रुचि आश्चर्य के साथ बोली)

मेरा मतलब है कि मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम अपनी बुर को साफ रखती होगी बाल का रेशा तक नहीं है,,, सच बताना मामी मेरा मतलब है रूचि,,, यह साफ करने के लिए उसी ने बोला था ना तुम्हारा दीवाना,,,,

( रुचि शुभम की यह बात सुनकर थोड़ा सकपका गई लेकिन उसे मालूम था कि सुभम से छुपाने जैसा कुछ भी नहीं इसलिए वह बोली,,,।)

तू ठीक है समझ रहा है बालों वाली बुर को चाटने से इंकार कर देता था इसलिए मुझे इसे साफ करना ही पड़ता था,,।( रूचि भी शुभम के सामने बेशर्म बनते हुए बोली।)

सच कहूं तो रानी बिना बाल वाली चिकनी बुर को चाटने का मजा ही कुछ और है,,, मुझे भी चिकनी बुर ही पसंद है,,,( इतना कहते हुए शुभम बुर पर से हाथ हटा कर फिर से उसकी मोटी मोटी जांघों को थाम लिया और थोड़ा सा जांघों को पकड़े हुए ही उसके बदन को अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,,।)

देख कैसे कचोरी जैसी फूली हुई है और इसमें से मधुररस टपक रहा है,,,। यही तो मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है जब तक तुम्हें जी भर के औरत की दूर करना जीभ लगाकर चाट ना जाऊ तब तक उन्हें चोदने में मजा नहीं आता,,,

( रुचि शुभम की ऐसी गंदी और खुली हुई बातें सुनकर एकदम से उत्तेजना से भर गई उसे शुभम की बातों से बेहद आनंद मिल रहा था। और वह बोली,,,।)

पक्का हरामी है रे तू कितना भोला भाला तू लगता है उतना ही शैतान है।

क्या करूं मेरी जान तेरी जैसी औरतो ने हीं मुझे हरामी बना दिया।,,,,,, ( इतना कहते हुए शुभम ने उसकी दूर को फैलाते फैलाते अपने बीच वाली उंगली को उस की रसीली बुर के अंदर उतार दिया,, उसकी बुर उसके ही नमकीन पानी से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए एक झटके से पूरी की पूरी उंगली बुर की गहराई तक समा गई,,,, एकाएक शुभम की ऐसी हरकत की वजह से रुचि की लगभग चीख निकल गई,,,,,।

आहहहहहहहहह,,,,,, हरामी यह क्या कर रहा है रे,,,

वही कर रहा हूं मेरी जान जो एक आदमी को एक औरत के साथ करना चाहिए मैं तेरी बुर की गहराई नाप रहा हुं। मैं अपने लंड के लिए रास्ता बना रहा हूं,,,।

तो ऐसे कोई रास्ता बनाता है कितना दर्द करने लगा,,,,

दर्द में ही तो मजा है मेरी रानी अभी तो सिर्फ उंगली गई है जब मेरा बुरा लग जाएगा तब पता नहीं तु कैसे,, सहेगी,,,,( शुभम अपनी उंगली कौ ऊसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए बोला,,,)

सह लूंगी तू डाल के तो देख तुझे भी पूरा का पूरा अंदर ले लूंगी,,,( रुचि एकदम बदहवास होकर मदहोशी के आलम मे बोले जा रही थी। वह एकदम से चुदवासी हो चुकी थी उसकी बुर लंबे मोटे लंड के लिए तड़पने लगी थी,,,, शुभम को रूची का इस तरह से ललकारना और उसे चोदने के लिए उकसाना बेहद प्रभावित कर गया था रुची चाह रही थी कि शुभम ऊसकी बुर में अपना लंड डाल कर उसे चोदना शुरू कर दें,,,, क्योंकि वह पूरी तरह से चुदवाने के लिए तड़प रही थी लेकिन यही तो शुभम की खासियत थी वह कभी भी जोश में होश नहीं खोता था। औरतों को पूरी तरह से चुदवासी बनाकर उसे चोदता था तभी तो चोदने का आनंद और भी ज्यादा बढ़ जाता था,,। रुचि पूरी तरह से गहरी गहरी सांसे ले रही थी, उत्तेजना के मारे ऊसकी बुर फुल पीचक रही थी।,,,, रुचि की यह हालत शुभम से भी देखी नहीं जा रही थी जिस तरह से उसकी गुरु उत्तेजना के मारे फुल रही थी और पीचक रही थी उसे देखते हुए किसी भी समय, उसकी बुर अपना मलाई बाहर झटक सकती थी,,,। और सुभम उसकी बुर से निकली हुई मलाई को अपनी जीभ से चाट कर इसका स्वाद चखना चाहता था,, इसलिए एक पल की भी देरी किए बिना वह झट से अपना मुंह बुर पर लगा दिया और अपनी जीभ को तुरंत उसकी बुर की पतली दरार में घुसा कर चाटना शुरु कर दिया,,,, शुभम की इस हरकत पर रुचि पूरी तरह से गनगना गई, उसका पूरा वजूद कांप गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब हकीकत है,, उसे यह सब सपना ही लग रहा था क्योंकि,,, शुभम को खुद ही वह उसकी हरकत पर डांट फटकार चुकी थी,, वह अपना तन बदन शुभम को सोंपने के लिए कभी भी तैयार नहीं थी,,, लेकिन इस समय नजारा कुछ और ही था आम की बगिया में वह खुद शुभम से अपनी बुर चटवा रही थी। युवा जोश में आकर शुभम के बाल को दोनों हाथों से अपनी मुट्ठी में भींच ली थी,,, सुभम भी पूरे जोश के साथ अपनी जीभ के कोर को उसकी बुर की दरार में डालकर जीभ से ऊसकी बुक के दाने पर चोट कर रहा था,,, और शुभम की यह हरकत रुचि की उत्तेजना को तीव्र गति से बढ़ा रहीे थी,,,। जिस गर्मजोशी के साथ शुभम उसकी बुर को चाट रहा था रूचि अपने आप पर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं कर पाई और भलभलाकर झड़ना शुरु कर दी,,, शुभम भी प्यासे की तरह रुचि की बूर से निकल रहे मदन रस की बुंदो को जीभ से चाट चाट कर अपने गले के नीचे उतारने लगा,,,, शुभम के हाथों पहली बार रुचि झढ़ चुकी थी,, और जिस तरह से शुभम मे बिना चोदे ही उसे झाड़ा था रुचि पूरी तरह से शुभम की दीवानी हो चुकी थी वह यह सोच कर और भी ज्यादा रोमांचित हो रही थी कि जब यह केवल अपनी जीभ से ही उसका पानी निकाल दिया जब यह अपना मोटा लंड उसकी बुर में डालकर चोदेगा तब क्या होगा,,, यह सोचकर उसके मन में उथल पुथल मची हुई थी शुभम रूचि के झड़ जाने के बाद भी,,, लगातार उसकी बुर को चाटे जा रहा था,,, क्योंकि वह रुची के साथ पूरी तरह से मजा लेना चाहता था और उसे भी मजा देना चाहता था।

 
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