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अधूरी हसरतें

आज निर्मला को शीतल की सालगिरह में जाना था वैसे तो उसने पूरे परिवार सहित उसे आमंत्रित की थी लेकिन वह जानती थी कि अशोक उसके साथ जाने वाला नहीं है। जिसके बारे में उसने चुदवाते समय रात को ही इस बात की पुष्टि करली थी। निर्मला को रह-रहकर अशोक के ऊपर तरस आ जाती थी,,,,,, और गुस्सा भी आता था वह उसे अब कोसते हुए मन ही मन में बड़बड़ आती रहती थी की न जाने कैसा मर्द है कि,,,,, इतनी खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी वह अपनी बीवी पर जरा सा भी ध्यान नहीं देता,,,, इसकी जगह कोई और मर्द होता तो उसे पाकर इतना खुश होता कि दिन-रात उसकी पूजा करता रहता और दुनिया का हर सुख चाहे वह आर्थिक हो या शारीरिक सब कुछ देता।

निर्मला इन सब बातें काम करते वक्त सोच रही थी लेकिन फिर अशोक का ख्याल अपने दिमाग से निकाल कर अपने आप को काम में व्यस्त कर ली। घर का सारा काम निपटा कर ऊसे शीतल की सालगिरह में जाने के लिए तैयार होना था।

शाम के 6:00 बज रहे थे उसे नव बजे तक शीतल के घर पहुंचना था। शुभम को तैयार होने के लिए कहकर वह अपने कमरे में खुद तैयार होने के लिए चली गई। थोड़ी ही देर में शुभम तो तैयार हो चुका था लेकिन निर्मला को तैयार होने में मजा नहीं आ रहा था क्योंकि बिना नहाए कहीं वह जाती नहीं थी,,, इसलिए तैयार होने के पहले उसने सोची की जाकर थोड़ा नहा लुं तब वह फ्रेश भी हो जाएगी और तैयार होने में अच्छा भी लगेगा। ऐसा सोच कर वह बाथरुम की तरफ चल दी उसे आज बहुत अच्छा लग रहा था। किसी भी प्रकार की पार्टी में आना जाना वैसे तो उसे पसंद नहीं था लेकिन आज की बात कुछ और थी कुछ दिनों से उसके सोचने-समझने और देखने के रवैये में जो बदलाव आया था उस बदलाव का असर उसके पहरावे पर साफ तौर पर दिखाई देता था। अब वह इस तरह के कपड़े पहनती थी जिसमें से उसके बदन की झलक दिखाई देती हो खासकर के ब्लाउज,,,,, अब वह डीप गले वाला ही ब्लाउज पहनती थी जिसमें से उसकी आधी चूचियां बाहर को झलकती हुई नजर आती थी और बीच की गहरी लकीर साफ साफ नजर आती थी। ब्लाउज भी बेक लेस जिसमे से उसकी नंगी और चिकनी पीठ भी साफ साफ नजर आती थी।

निर्मला बाथरूम में प्रवेश करते ही अपने बदन से धीरे धीरे कर के सारे कपड़े उतार फेंकी,,, और अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई। बाथरूम में एकदम एकांत पाकर और अपने बदन पर एक भी कपड़ा ना पाकर निर्मला को उत्तेजना का अनुभव होने लगा। वैसे भी प्राकृतिक तौर पर एकांत में जब भी स्त्री या कोई भी पुरुष संपूर्ण नग्नावस्था में होता है तो प्राकृतिक रुप से अपने अंगो से अपने आप ही खेलने लगता है। ऐसा ही कुछ निर्मला के साथ भी हो रहा था एकदम नंगी होकर के उसके दिमाग में भी उत्तेजना का प्रसार होने लगा और अपने हाथों से ही वह अपने बदन को स्पर्श करने लगी,,,, वह अपनी हथेली में अपनी दोनो चुचियों को-लेकर जोर-जोर से दबाते हुए सिसकने लगी। ऐसा करने में उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी और साथ ही उसकी कल्पना में उसका बेटा घूम रहा था इसलिए तो जल्द ही उसकी बुर से नमकीन पानी रिसने लगा। एक हाथ से अपनी चूचियों को दबाते हुए दूसरे हाथ से उसने सावर का नोब घुमा दी,,, और सावर में से ठंडे पानी का झरना फूट पड़ा क्योंकि उसके दिमाग को ठंडा करने लगा लेकिन बदन में जो कामोत्तेजना की गर्मी थी उस गर्मी को पाकर ठंडा पानी भी गर्म होने लगा। धीरे-धीरे करके उसने दूसरी हाथ की उंगली को अपनी बुर में प्रवेश करा दी और उंगली को अंदर बाहर करते हुए अपनी बुर को अपने हाथों से ही चोदने लगी। निर्मला को इस प्रकार से अपने बदन से खेलने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी। वह जोर जोर से अपनी उंगली को अपनी बुर में अंदर-बाहर पेलते हुए गरम सिसकारी ले रही थी। निर्मला अपने हाथों से अपनी चूची को पकड़कर उसे थोड़ा सा ऊपर उठा दी और खुद भी अपने चेहरे को नीचे झुका कर चुकी के निप्पल को अपने मुंह में दबाकर चूसने लगी । ऐसा करने में उसे जरा भी दिक्कत पेश नहीं हो रही थी क्योंकि उसकी चूचियों का साइज ही बहुत बड़ा था जो कि आराम से उसके मुंह तक पहुंच रहा था। एक उंगली से अपनी बुर को चोदने के साथ-साथ अपनी चूची को भी अपने ही मुंह से पीने की वजह से उसकी कामोत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी। उत्तेजना की वजह से उसके बदन में एक अजीब सी कंपन हो रही थी,,,,, खास करके उसकी बड़ी-बड़ी नितंबों में जैसे जैसे वह अपनी उंगली को बुर में जल्दी-जल्दी अंदर बाहर करते हुए चरम सुख के करीब पहुंच रही थी वैसे वैसे उसकी नितंबों की थीरकन और ज्यादा बढ़ती जा रही थी।

और कुछ देर बाद ही उसकी बुर से नमकीन पानी का फव्वारा फूट पड़ा। और गहरी गहरी सांसे लेते हुए वह अपने चरमोत्कर्ष का आनंद लेने लगी वह झड़ चुकी थी,,,, संभोग सुख तो नहीं लेकिन संभोग सुख के बिल्कुल करीब का अनुभव उस ने पा ली थी।वह झड़ने के बाद नहाना शुरु कर दी धीरे-धीरे करके उसने अपने बदन पर साबुन लगा कर अपने बदन की चिकनाई को और ज्यादा बढ़ाने लगी।

पूरे बदन पर साबुन अच्छी तरह से लगाकर वह फिर से सावर के नीचे खड़ी हो गई और सावर का ठंडा पानी उसके बदन पर साबुन के झाग को धोते हुए उस के उजले बदन को और भी ज्यादा खूबसूरत करने लगा। नहाते नहाते सफेद पेशाब लगने का एहसास होने लगा,,,,,

दूसरी तरफ शुभम को भी पेशाब का प्रेशर बढ़ने लगा तो वह बाथरुम की तरफ चल दिया,,,,, बाथरूम के दरवाजे तक पहुंचा तो बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और अंदर से सावर की आवाज़ आ रही थी इसलिए वह दरवाजे पर ही रुक गया,,, अंदर जरूर उसके मतलब का सामान पूरी तैयारी में है पैसा उसके मन में ख्याल आते ही उसके दिल की धड़कन तेज होने लगी और उसकी नसीब जोरों पर थी क्योंकि उसने देखा तो दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था। जल्दी-जल्दी में निर्मला बाथरूम में तो आ गई थी लेकिन उसने दरवाजा बंद करना भूल गई थी और यही लाभ शुभम को मिलने वाला था। शुभम का दिल जोरो से धड़क रहा था वह धीरे-धीरे हल्का सा दरवाजे को खोलकर अंदर नजर दौड़ाया तो,,,, बाथरूम के अंदर का नजारा देखकर उसके लंड ने ठुनकी लेना शुरु कर दिया। शुभम के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी नजारा भी कुछ इस तरह का ही था निर्मला बाथरुम में संपूर्ण नग्नावस्था में खड़ी होकर नहा रही थी उसकीे बड़ी बड़ी गांड नहाते समय कुछ ज्यादा ही मटक कर रही थी जिसको देखकर शुभम की हालत खराब होने लगी। शुभम की सांसे तीव्र गति से चलने लगी और तुरंत उसके पैंट में तंबू बन गया। यह नजारा ही शुभम को चुदवासा करने के लिए काफी था कि तभी अगला नजारा देख कर उसकी और भी ज्यादा हालत खराब होने लगी निर्मला नहाते नहाते ही पेशाब का प्रेशर बढ़ने की वजह से नीचे बैठ गई,,,,, और सुरसुरा कर पेशाब करने लगी,,,, यह नजारा देखते ही शुभम की सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,, उसका दिमाग एकदम सुन्न हो गया उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन उसकी नजरें अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखे जा रही थी और अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था देखते ही देखते निर्मला अपने बेटे की आंखों के सामने ही पेशाब कर लीे लेकिन इस बात का एहसास उसे बिल्कुल भी नहीं हुआ कि दरवाजे पर शुभम खड़ा होकर उसे देख रहा है।

निर्मला देखते ही देखते पेशाब कार्य को संपूर्ण करके खड़ी हो गई और अपनी मां को खड़ी होता देखकर शुभम समझ गया कि अब उसका यहां खड़ा रहना ठीक नहीं है इसलिए वह झट से अपने कमरे में चला गया।,,,

शुभम बाथरूम का नजारा देखकर एकदम सन्न हो गया था कमरे में आकर अपने बिस्तर पर वाह एक दम शांत होकर बैठ गया था। उसने जो आज देखा था वह बड़ा ही कामोतेजक था उसका पानी निकलते निकलते बचा था।

उसे बैठे-बैठे काफी समय हो गया था। और समय भी निकला जा रहा था उसे लगा कि उसकी मां तैयार हो गई होगी इसलिए सीधे वह अपनी मां के कमरे की तरफ चल दिया कमरे का दरवाजा बंद था। उसने बाहर से अपनी मां को आवाज लगा या।।

मम्मी तैयार हो गई कि नहीं,,,

हां हो रही हूं तू हो गया कि नहीं,,,,,,

हां मैं तो कब से हो गया,,,,,,

अच्छा,,,,, तू अंदर आ जा मैं 10 मिनट में तैयार हो जाती हुं। ( निर्मला की आवाज ऐसी आ रही थी ऐसा लग रहा था कि उसने मुंह में कुछ भरी हो,,,, अपनी मां की बात सुनकर शुभम दरवाजे पर हल्के से हाथ रखा तो दरवाजा अपने आप ही खुल गया और वह सीधे कमरे में घुस गया कमरे में घुसते ही जैसे ही उसकी नजर निर्मला पर पड़ी तो वह फिर से दंग रह गया। निर्मला केवल टावल में खड़ी थी और टावल के किनारी उसने मुंह से दबाकर पकड़ रखी थी,, इसलिए तो उसके मुंह से इस तरह की आवाजें आ रही थी । निर्मला टॉवल भी इस तरह का पहनी हुई थी कि टॉवल उसके जांघों से ऊपर तक ही पहुंच रही थी जो कि वह थोड़ा सा भी अलमारी के ऊपर वाले ड्रावर की तरफ हाथ बढ़ाती तो उसकी बड़ी बड़ी नितंब दिखने लग रही थी। यह देख कर तो शुभम की सांस ही अटक गई थी,,,,ऊसे कुछ सुझा नहीं वह बस आंख पड़े अपनी मां की नग्नता का रसपान करता रहा। निर्मला अलमारी में कुछ खंगाल रही थी वह अपने लिएे कपड़े ढुंढ रही थी लेकिन उसे इतना अच्छी तरह से मालूम था कि जिस तरह से वह खड़ी है उसका बेटा उसके बदन को प्यासी नजरों से घूर रहा होगा। प्रभात जानबूझकर ऊपर वाले ड्राइवर की तरफ हाथ बढ़ा ने लगी क्योंकि उसे इतना अंदाजा लग गया था कि ऐसा करने पर उसकी टावल नीचे से ऊपर की तरफ उठ जा रही थी और उसकी गांड का बहुत ही अच्छा खासा हीस्सा शुभम की आंखों के सामने तैरने लग रहा था। और ऐसा करने में निर्मला को अब बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी। वह अलमारी में से अपनी साड़ियों को बारी-बारी से देखते हुए शुभम की तरफ बिना देखे हुए ही बोली,,,,

शुभम मुझे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं पार्टी में क्या पहन कर जाऊं,,,,,, इतनी सारी साड़ियां है लेकिन कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

( शुभम की तो हालत खराब थी वह अपनी मां की नंगी बदन को देखकर अब उत्तेजना का अनुभव करते हुए मस्त हुए जा रहा था और उसके पैंट में,,,

शुभम के पेंट में अच्छा कौशल तंबू बन चुका था जो कि कभी भी उसकी मां की आंखों के सामने नजर आ सकता था इस बात से घबराते हुए वह झट से बिस्तर पर बैठ गया। और बोला।)

मम्मी आप कुछ भी पहनो आप पर तो बेहद अच्छी लगेगी,,,,

ऐसा क्यों? ( इस बार वह अपने बेटे की तरफ नजर घुमाकर देखते हुए बोली।)

क्योंकि तुम सुंदर हो इसलिए जो भी पहनोगी अच्छी लगेगी।

( अपने बेटे की मुंह से अपनी तारीफ सुनकर निर्मला को अच्छा लगा वह मुस्कुराते हुए फिर बोली,, लेकिन अभी भी वह टॉवल को अपनी दातों से ही पकड़े हुए थी। )

लेकिन फिर भी तू ही बता कि आज मैं क्या पहनु? ( निर्मला फिर से अपने हाथ को ऊपर की तरफ उठाकर साड़ी को ढूंढने का नाटक करते हुए अपनी गांड शुभम को दिखाने लगी और वह शुभम देखकर एकदम मस्त होने लगा वह तो मन ही मन यही सोच रहा था कि अगर कुछ भी नहीं पहनोगी तो भी चलेगा,,,,,, लेकिन फिर भी वह अपनी पसंद बताते हुए बोला)

मम्मी आप वहां आसमानी रंग की साड़ी पहन लो पार्टी में बहुत अच्छा लगेगा,,,,,

( अपने बेटे की पसंद जानकर निर्मला खुश हुई क्योंकि उसे भी आसमानी रंग की साड़ी भी पहनकर जाने की इच्छा हो रही थी अशोक से तो अब यह सब पूछना मतलब पत्थर पर सिर मारने के बराबर था इसलिए वह अपने बेटे से ही यह पुछ कर संतुष्ट हो रही थी। वहां अलमारी में से आसमानी रंग की साड़ी और उसके मैचिंग का ब्लाउज और पेटीकोट निकाल कर बाहर टेबल पर रख दी। लेकिन शुभम की तो हालत खराब हो रही थी वो जानबूझकर बिस्तर पर बैठ गया था ऐसा ना करता तो,,,,, उसके मन के अंदर क्या चल रहा है यह उसकी मां को देखकर समझते देर नहीं लगती। निर्मला इस हालत में बेहद खूबसूरत और कामुक लग रही थी शुभम अपनी मां को इस अवस्था में सीधे नजर से नहीं देख रहा था बल्कि बार बार नजर तिरछी कर के देख ले रहा था। और यह देखकर निर्मला अंदर ही अंदर खुश हो रही थी अब उसे भी जल्दी तैयार होना था क्योंकि समय काफी हो रहा था।

शुभम तू अपनी नजरें बचा रहा था बार-बार वह मुझे फर्श की तरफ देख नहीं रहा था,,,,, तभी उसकी मां ने जो बोलीे वह सुनकर वह एकदम से सन्न हो गया,,,,,

शुभम मेरी पैंटी तो दे,,,,

( इतना सुनकर शुभम तो सक पका किया वह फटी आंखों से अपनी मां की तरफ देखने लगा कि वह क्या कह रही है। शुभम के चेहरे के हाव भाव को देखकर निर्मला को समझते देर नहीं लगी कि वह शायद उसकी बात को ठीक से समझ नहीं पाया इसलिए वह दुबारा बोली।)

अरे ऐसे क्या देख रहा है मेरी पैंटी पर ही तो तू बैठा है,,,, ला जल्दी दे मै पहनु।

( निर्मला अपने बेटे से इस तरह की बातें करने में बिल्कुल भी हीचकीचा नहीं रही थी। बल्कि उसे तो बहुत मजा आ रहा था। अपनी मां की बात सुनकर शुभम के चेहरे पर घबराहट के भाव नजर आने लगे और वह नजर ए नीचे करके देखा तो वास्तव में वह अपनी मां की पैंटी पर ही बैठा हुआ था। उसने जल्दी से थोड़ा सा बिस्तर पर से उठ कर अपने नीचे से अपनी मां की पैंटी निकालकर अपनी मां की तरफ उछाल दिया,,,,, और निर्मला हवा में उछली हुई पेंटिं को पकड़ने की कोशिश करते हुए उसके मुंह से टावल की किनारी छूट गई और टॉवल अगले ही पल उसके बदन से गिरता हुआ नीचे उसके कदमों में जा गिरा,,,,,आहहहहहह,,,,, एक गरम सिसकारी शुभम के मुंह से निकल गई जब उसने यह नजारा देखा तो,,,,, उसकी मां एक बार फिर उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी हो गई,,,,, उसका गोरा दुधिया बदन ट्यूबलाइट के उजाले में एक बार फिर से चमकने लगा,,,,, शुभम तो आंखें फाड़े अपनी मां को ही देखे जा रहा था। यह देखकर निर्मला मुस्कुराने लगी लेकिन उसने अपने बदन को फिर से टावल उठाकर ढंकने का बिल्कुल भी दरकार नहीं की,,,,, वह शायद यही चाहभी रही थी। इसलिए तो वहां बिना किसी दरकार के अपनी पैंटी को उठाते हुए बोली।

क्या कर रहा है शुभम हाथ में तो दे सकता था। ( निर्मला अपनी पैंटी को उठाकर झटकने लगी,,,,)

 


ससस,,,, सॉरी मम्मी,,,,,( इतना कहकर वह अपनी नजरें नीचे झुका लिया,,, लेकिन निर्मला अपने बेटे के सामने भी एकदम बिंदास होकर अपनी पैंटी को पहनने लगी। अपनी लंबी लंबी चिकनी गोरी टांगो को पैंटी में डालकर वह धीरे-धीरे सरका कर अपनी जांघो तक ला दी,,,, और इतने पर ही अटका कर एक नजर शुभम पर डाली तो वह तिरछी नजर से उसे ही देख रहा था दोनों की नजरें जब आपस में टकराई तो शुभम शरर्मा कर फिर से नजरें झुका लिया,,,, यह देखकर निर्मला के चेहरे पर कामुक मुस्कान तैरने लगी,,,,, निर्मल ने अपनी पैंटी को जांघो तक लाकर जानबूझकर अटका दी थी। ताकि वह उसकी चिकनी और तरोताजा बुर को देख सके लेकिन डर के मारे शुभम नजर उठा कर अपनी मां की जांघों के बीच के उस खूबसूरत द्वार को देख ना सका। यह कसमसाहट उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी क्योंकि उसने अब तक अपनी मां के बदन के सारे अंगो को देख चुका था लेकिन वही एक अंग को अभी तक नहीं देख पाया था। बल्कि अभी तो उसके पास पूरा मौका भी था लेकिन ना जाने कौन से डर की वजह से वह आंख उठाकर जांगो के बीच की उस जगह को देख नहीं पाया। निर्मला भी मुस्कुराते हुए पैंटी को पहन ली और पहनने के बाद उसे इधर उधर से खींचकर ठीक से आरामदायक स्थिति में कर ली। अभी तो मात्र उसके बदन पर पैंटी ही चढी़े थी बाकी का पूरा बदन नंगा ही था। लेकिन आज ना जाने निर्मला को कौन सा जुनून सवार था कि अपने बेटे की उपस्थिति में भी शर्माए बिना ही संपूर्ण रूप से नंगी होकर कि अपने कपड़े बदल रही थी। पेंटी पहनने के बाद वह शुभम से बोली,,,,,,

शुभम तेरे पीछे मेरी ब्रा भी है उसे भी दे दे,,,, लेकिन फ़ेंक कर नहीं मेरे हाथ में दे,,,,,

( इस बार ब्रा मांगने पर फिर से शुभम की हालत खराब होने लगी पेंट में लंड पूरी तरह से तंबू बनाए हुए था उसकी हालत फसल खराब हुई जा रही थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि बिना छुए हि आज उसका पानी निकल जाएगा। वह अपने आप को संभालते हुए पीछे हाथ बढ़ाकर बिस्तर पर से ब्रा उठाया जो की बहुत ही मुलायम थी। और खड़े होकर अपनी मां को थमाया लेकिन इस बार वह अपनी उत्तेजना को छिपा ना सका,,,, उसकी मां की नजर उसके पैंट में बने तंबू पर पड़ ही गई और उस तंबू को देखकर निर्मला के बदन में सुरसुराहट सी दौड़ गई। वह मुस्कुराते हुए शुभम के हाथ से ब्रा को लेकर पहनने लगी। वह शुभम की तरफ देखते हुए अपनी चूची को एक एक हाथ से पकड़ कर ब्रा के अंदर कैद करने लगी और शुभम यह नजारे को छुपते छुपाते देखे बिना अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। यही सब निर्मला को बहुत ही ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करा रहा था और उसे मजा भी बहुत आ रहा था। धीरे धीरे करके ऐसे ही शुभम की उत्तेजना को बढ़ाते और उसे अंदर ही अंदर तड़पाते हुए निर्मला अपने कपड़े पहन ली,,,, आसमानी साड़ी में निर्मला एकदम परी की तरह खूबसूरत लग रही थी जिसको देखकर शुभम की आंखें उसके बदन की खूबसूरती की चमक से चौंधिया सी गई थी। घर से निकलते निकलते वह शुभम पर आखरी बार अपने हुस्न का जलवा बिखेरते हुए बोली,,,,,

शुभम बेटा लगता है मेरे ब्लाउज की डोरी ठीक से बंधी नहीं है तू जरा इसे ठीक से बांध दे तो,,,,

( अपनी मां की यह बात सुनते ही शुभम की उंगलियां तो पहले से ही कांपने लगी,,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा वह धीरे धीरे चलते हुए अपनी मां के करीब आया और उसके पीछे खड़े होकर के धीरे-धीरे ब्लाउज की रेशमी डोेरी को खोलने लगा,,, डोरी को खोलते हुए उसके हाथ कांप रहे थे,,, उसकी उंगलियों के कंपन को निर्मला अपनी पीठ पर साफ महसूस कर रही थी और मन ही मन प्रसन्न भी हो रही थी। अगले ही पल उसने अपने हाथ की उंगलियों का सहारा लेकर ब्लाउज की डोरी को खोल दिया और खोलने के बाद उसे ठीक से बांधते हुए,,, उसमे गीठान मार दिया,,,, चिकनी गोरी पीठ पर ब्लाउज की डोरी कसते ही पीठ की खूबसूरती और भी ज्यादा निखरने लगी। लेकिन तभी उसकी नजर ब्लाउज के साइड से निकली हुई ब्रा के स्ट्रैप पर पड़ी,,,,, उसे देखते ही वह अपनी मां से डरते हुए बोला,,,,

मम्मी आपकी ब्रा की स्ट्रेप बाहर निकली हुई है।

( अपने बेटे की बात सुनकर उसके भी बदन में हलचल सी मच गई,,,, और मुस्कुराते हुए वह बोली।)

कोई बात नहीं बेटा तू उसे अंदर की तरफ कर दें,,,,

( शुभम फिर से अपने कांपते उंगलियों से अपनी मां की ब्रा की स्ट्रेप को ब्लाउज के अंदर की तरफ सरकाने लगा,,, यही सही मौका देखकर निर्मला अपने बेटे की तड़प को और ज्यादा बढ़ाते हुए बोली,,,,)

बेटा लगता है कि तेरे उसमे अभी तक आराम नहीं हुआ है,,,

( शुभम अपनी मां की हर बात को समझ नहीं पाया और उसकी ब्रा की स्ट्रैप को ब्लाउज के अंदर उंगली से सरकाते हुए बोला,,,)

कीसमे,,,,,,,

अरे तेरे लंड में और किसमे,,,, लगता है फिर से तेरे लंड की अच्छे से मालिश करनी पड़ेगी तब जाकर इस में,,, आराम होगा,,,,,

( अपनी मां की मुझे ऐसी खुली बातें सुनते ही शुभम के दिल की धड़कन तेज हो गई और पेंट के अंदर से ही लंड ने सलामी भरना शुरु कर दिया,,,,,, वह अपना बचाव करते हुए बोला,,,)

ननननन,, नननन,,, नही मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है मुझे आराम है,,,( इतना कहने के साथ ही वह ब्रा के स्ट्रैप को ठीक कर दिया,,,,, निर्मला शुभम की तरफ घूमी और अपनी नजर को उसके पैंट में बने तंबू की तरफ घूमाते हुए बोली,,,,)

आराम है तो फिर इतना तना हुआ क्यों है? ( इतना कहकर वह मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर जाने लगे तो शुभम भी पीछे-पीछे अपनी मां के पिछवाड़े को देखता होगा जाने लगा वह अपने मां की इस बात का जवाब नहीं दे पाया,,,, घर से बाहर आते हैं वहां के राज में से गाड़ी बाहर निकालने के लिए गई मौसम खराब हो रहा था हल्की हल्की बारिश होने लगी थी। )

शुभम और निर्मला दोनों घर के बाहर आ गए थे । बाहर का मौसम कुछ कुछ खराब होने लगा था हल्की हल्की बारिश हो रही थी आसमान में काले बादल पूरी तरह से छा चुके थे,,, ऐसा लग रहा था कि पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में कर लिए हो। निर्मला गैराज मैं जा कर गाड़ी स्टार्ट कर के घर के मेन गेट तक लाइ,,, जहां पर शुभम गाड़ी का दरवाजा खोलकर आगे वाली ही सीट पर अपनी मां के करीब बैठ गया।

और निर्मला एक्सीलेटर पर पैर दबाते हुए गाड़ी को गति प्रदान करने लगी। निर्मला के घर से शीतल घर की दूरी तकरीबन 1 घंटे की थी। चारों तरफ घने बादल की वजह से अंधेरा हो गया था,,,,, निर्मला बहुत अच्छे से तैयार हुई थी और वह आज बेहद खूबसूरत और साथ ही बड़ी सेक्सी लग रही थी। वैसे तो वह दूसरे मर्दों के लिए हमेशा से सेक्सी ही थी लेकिन आज सेक्सी शब्द की परिभाषा को पूरी तरह से उसने अपने अंदर उतार ली थी और सेक्सी पन का एहसास उसे खुद भी हो रहा था। इस तरह के कपड़े उसने कभी पहले नहीं पहनेी थी,,, डीप गले का ब्लाउज और वह भी पूरी तरह से बेतलेंस,,, बस एक पतली सी रेशमी डोरी ब्लाउज को बांधने के लिए,,,, और ऊपर से ट्रांसपेरेंट साड़ी जिसमें से छुपाना चाहो तो भी अपने बदन को छुपा नहीं सकते और वैसे भी निर्मला को कुछ छुपाना नहीं था इसलिए तो उसने इस तरह की साडी पहनी हुई थी।

निर्मला सामान्य गति से ही अपनी गाड़ी को आगे बढ़ा रहे थे वह बहुत ही संभाल कर गाड़ी चलाते थे वह बार-बार शुभम की तरफ देख कर मुस्कुरा दे रही थी और इस तरह से अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर,,,, उसके दिल की घंटियां बजने लगती थी। बार-बार उसे बाथरुम वाला नजारा याद आ जा रहा था,,,, वह अपने नसीब को मन ही मन धंयवाद भी कर रहा था कि अच्छा हुआ था कि उसे इस समय पेशाब लग गई थी और वह बाथरुम की ओर आ गया था वरना इस तरह का अद्भुत और कामुकता से भरा उन्मादक. द्रश्य का लाभ वह कभी भी नहीं ले पाता। का मन ही मन सोच कर उत्तेजित होने लगा कि कितना काम होते देना से भरा हुआ वह नजारा था किस तरह से उसकी मां बाथरूम में अपने पूरे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर नहा रही थी। उस की नंगी चिकनी पीठ और उसकी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड पानी में भीग कर कैसे चमक रही थी। किस तरह से वह खड़ी हो करके नहा रही थी और उसकी गांड मटक रही थी ऊसके गांड की थिरकन देख कर के उसके लंड की हरकत बढ़ने लगी थी। और तो और उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब होने लगी जब उसकी मां नहाते नहाते नीचे बैठ कर पेशाब करने लगी,,,, सच में यह नजारा देख कर तो वह इतना ज्यादा कामोत्तेजित हो गया था कि उसे लगने लगा की कहीं उसका लंड पानी ना छोड़ दे,,,, यह सब उसकी मां के अनजाने में ही हुआ था उसकी मां यह नहीं जानती थी कि शुभम यह सब देख रहा है और अगर वह जान भी लेती तो शायद जो चीज अनजाने में हुई थी वह जानबूझकर उसकी आंखों के सामने निर्मला की जानकारी में ही हो जाती। वह सब पल याद करके उसके लंड के ऐंठन बढ़ने लगी थी।

लेकिन उसे यह नहीं समझ में आ रहा था कि आखिर उसकी मां नग्नावस्था में भी बिना जी जाती उसकी आंखों के सामने क्यों कपड़े बदल रही थी जबकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। उसकी मां इतनी शर्मीली थी कि उसके सामने इस तरह की अर्धनग्न अवस्था में भी नहीं आती थी और आज तो वह उसकी आंखों के सामने ही एकदम बेफिक्र होकर के नग्नावस्था में अपनी पैंटी ब्रा और कपड़े पहन रही थी।

आखिर निर्मला ऐसा क्यों कर रहीे थी यह शुभम के समझ के बाहर हो रहा था। अाखिर उसकी मां उसकी आंखों के सामने ऐसा क्यों कर रही थी,,,, कहीं वो जानबूझकर तो उसे अपना बदन नहीं दिखा रही थी,,,, कभी उसे उसके दोस्तों की कही बात याद आने लगी जब खेल के मैदान में उसका दोस्त बता रहा था कि उसकी सगी भाभी भी उसकी आंखों के सामने इसी तरह की हरकत करती थी नहाने के बाद वह टावल में ही बाहर चली आती थी,,,, तो कभी खुद उसी से ही बाथरुम में ही टावल मांगा करती थी और टावल लेते समय,,

भीे एकदम नग्न अवस्था में ही रहती थी। और अपने देवर को देखकर मुस्कुराती भी थी,,, उसके दोस्त ने यह भी कहा था कि जिस तरह से वह अपना नंगा बदन दिखाती थी,, उसे मोटे ताजे लंड की जरूरत थी,,,, वह अपनी भाभी के इशारे को समझ कर और उसकी जमकर चुदाई कर दिया उसके बाद से वह लगातार अपनी भाभी को रोज यही चोदने लगा,,,,, वह उस दिन साफ-साफ बताया था कि जब औरत इस तरह की हरकत करने लगे तो समझ जाने का कि उसका चुदवाने का मन कर रहा है तभी वह अपना बदन दिखा कर अपनी तरफ आकर्षित कर रही है।

अपने दोस्त की कही बात याद आते हैं शुभम का लंड ठुनकी मारने लगा,,,, वह सोचने लगा कि क्या उसकी मां भी एक दम से चुदवासी हो गई है,,,,,, इसलिए वह उसे अपना नंगा बदन दिखाती है। क्या वह भी यही चाहती है कि उसका ही बेटा उसको ़ चोदे,,,,,, हां बिल्कुल ऐसा ही है तभी तो वह मुझे अपना नंगा बदन दिखा कर मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रही है। और पिछले कुछ दिनों से उसके बर्ताव में भी काफी बदलाव आ गया है कपड़े पहनने का ढंग ही बदल गया है। अगर उसके मन में ऐसा कुछ नहीं होता तो तैयार होते समय जिस तरह से वह केवल टॉवल में ही थी मुझे कमरे में आने को ना कहती,,, और अगर भूल से आ भी गया होता तो,,,, मेरी उपस्थिति में वह एकदम बिंदास होकर कपड़े नहीं बदलती बल्कि मुझसे शर्माती,,, और तो और जिस तरह से उसके बदन से टावल गिर गई थी और वह नंगी हो गई थी,, य,वह झट से टावल उठाकर अपने बदन पर लपेट लेती। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया बल्कि बेझिझक होकर के उसी तरह से ना तो अपने बदन को छुपाने की रत्ती भर कोशिश ही की और ना ही मुझसे जरा सा भी शरमाई बल्कि,,, बेझिझक होकर मुझसे अपनी पैंटी मांगी,,,,, अगर वह सामान्य होती तो इस तरह की हरकत बिल्कुल भी ना करती क्योंकि इससे पहले उन्होंने अपने पहनने के एक भी कपड़े मुझसे कभी नहीं मांगी,,,, और तो और जिस तरह से वह बार-बार पेंट उतार कर लंड दिखाने की बात कर रही थी इससे साफ़ लगता है कि जरूर उसके दोस्तों की कही बात शत प्रतिशत सच है। जरुर वह एकदम चुदवासी हो गई हैं।

दोस्तों की कही बातें उसकी अंतरात्मा को एकदम झकझोर गई। यह सब उसके लिए बड़ा ही आश्चर्यजनक भी था और उसे प्रसन्न करने वाला भी था। क्योंकि वह सोचने लगा कि अगर सच में कुछ ऐसा है तो उसका काम और भी आसान हो जाएगा,,,, इधर तो ऐसा हाल हो जाएगा कि प्यासे को कुएं के पास जाना ही नहीं पड़ेगा बल्कि कुंआ ही प्यासे के पास चलकर आएगा,,,,, उसका मन प्रसन्नता से भर गया उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि उसका सपना बहुत ही जल्द सच हो जाएगा। उसे लेकिन इस बात से हैरानी भी हो रही थी कि अगर उसके दोस्तों की कही बात सच निकली तो क्या सच में उसकी मां उसेसे चुदवाएगी उसके मोटे ताजे लंड को अपनी बुर मे लेगी,,,, वह तो कल्पना करके ही एकदम मस्त हुए जा रहा था कैसा लगेगा जब उसकी मां अपनी टांगे फैला कर उसका मोटा लंड अपनी बुर में डलवा कर चुदवाएगी,,,,,

क्या सच में इतना मोटा ताजा और लंबा लंड औरत की छोटी सी बुर में घुस जाता है और घुसता है तो उन्हें कैसा लगता है,, यह सब बातें उसे एकदम परेशान किए हुए थी। क्योंकि एक बात तो सत प्रतिशत सच ही थी कि उसने औरतों के हर अंग को लगभग देख ही चूका था,,,,, वह भी अपनी मां का ही लेकिन अभी तक उसने मुख्य केंद्र बिंदु बुर के दर्शन नहीं कर पाया था।

उसके मन में तो लड्डू फूट रहे थे । लेकिन यह बात भी उसके लिए जानना जरूरी था कि क्या सच में वह जैसा सोच रहा है ठीक वैसा ही होगा अगर कहीं उसके दोस्तों की बातें गलत निकली तो और उसकी मां यह सब जानकर कि उसका बेटा उसके बारे में गंदे विचार कर रहा है तो वह क्या सोचेगी,,,,, कहीं सब कुछ उल्टा ना हो जाए यह ख्याल मन में आते ही उसके मन में उदासी छा गई और वह मन ही मन सोचने लगा कि कैसे भी है वह हो वह अपनी मां के मन की बात को जरूर जान कर रहेगा।

बाहर का मौसम धीरे धीरे बिगड़े नहीं लगा था हल्की हल्की हो रही बारिश अब थोड़ा तेज हो चुकी थी। अपने बेटे को किसी ख्यालों में खोया हुआ देखकर निर्मला बोली,,,,

क्या हुआ बेटा तू इतना उदास क्यों है क्या सोच रहा है?

कुछ नहीं मम्मी मैं आपके ही बारे में सोच रहा था। ( उसके मुंह से एकाएक निकल गया उसे समझ में नहीं आया कि वह क्या बोले अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला मुस्कुरा दी और वह मुस्कुराते हुए बोली।)

मेरे बारे में,,,,,, मेरे बारे में ऐसी कौन सी बात तो सोच रहा है कि एकदम गहराई में डूब गया,,,,,,

यही मम्मी कि मैंने आपको और पापा को एक साथ कहीं भी आते जाते लगभग नहीं देखा ना तो किसी शादी में आप दोनों साथ में जाते हैं ना किसी की पार्टी में और ना ही कभी मार्केट ही जाते हैं। मुझे यह सब बड़ा अजीब लगता है दूसरों के मम्मी पापा हमेशा साथ में घूमते फिरते रहते हैं हंसते बोलते रहते हैं लेकिन मेरे पापा इस तरह से क्यों करते हैं। ( शुभम बात को संभालते हुए एक ही सा में सब कुछ बोल गया,,,

अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला को भी हैरानी हुई कि आज वह ऐसा क्यों पूछ रहा है। इसलिए वह बोली।)

तू ऐसा क्यों पूछ रहा है?

इसलिए मैं पूछ रहा हूं कि आज देखो ना पापा को हमारे साथ आना चाहिए था ।लेकिन वह नहीं आए क्या आपने उन्हें बताया था।

हां बेटा,,,,, मैंने तो तुम्हारे पापा को साथ में आने के लिए बोली थी। ( निर्मला गहरी सांस लेते हुए बोली) लेकिन उन्हें मुझसे ना जाने कौनसी दुश्मनी है कि मेरे साथ कहीं भी आना जाना पसंद नहीं करते। ( गाड़ी का स्टेयरिंग हल्के हल्के घुमाते हुए बोली।)

लेकिन ऐसा क्यों है मम्मी?

पता नहीं बेटा ऐसा क्यों है!

मम्मी,,, पापा का यह व्यवहार मुझे तो बिल्कुल भी समझ में नहीं आता।

बेटा इतने सालों में तो मैं तेरे पापा के व्यवहार को नहीं समझ पा रही तो तू कहां से समझ पाएगा,,,,( वह शुभम की तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए बोली। कुछ देर तक शांति छाई रही लेडीज परफ्यूम के साथ निर्मला के बदन की मादक खुशबू भी कार में उत्तेजना जगा रही थी। )

 
कार में लेडीज परफ्यूम की खुशबू के साथ-साथ निर्मला के खूबसूरत बदन की मादक खुशबू भी फैली हुई थी। धीरे धीरे बारिश का जोर बढ़ता जा रहा था निर्मला हमेशा से बड़ी ही सावधानी के साथ धीमी गति से ही गाड़ी चलाती थी। कुछ देर तक दोनों खामोश थी बैठे रहे शुभम ही खामोशी को तोड़ते हुए बोला।

मम्मी पापा आपसे प्यार तो करते हैं ना!

क्यों ऐसा क्यों पूछ रहे हो? ( निर्मला मुस्कुराते हुए बोली)

नहीं ऐसे ही,,,,,

ऐसे ही कैसे कुछ तो बात है तभी तुम ईस तरह से पूछ रहे हो।

मम्मी,,,,,,,,,,, पापा हम लोगों के साथ ज्यादा समय नहीं बिताते,,,,,,,, हमेशा जब देखो बिजनेस,,, बिजनेस,,,, बिजनेस,,

इसलिए मैं ऐसा पूछ रहा हूं।

तुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि तेरे पापा मुझसे प्यार नहीं करते ओर तुझे यह सब प्यार वार के बारे में कैसे मालूम,,,,,,,

मम्मी मे अब बड़ा हो गया है थोड़ा बहुत तो मुझे भी समझ में आता ही है,,,,,

( अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला को थोड़ी हैरानी हुई लेकिन ऊसे अच्छा भी लगा यह सुनकर कि उसका बेटा बड़ा हो गया है । तभी तो उसका हथियार भी इतना जानदार हो गया था। निर्मला मुस्कुराते हुए बोली,,,,,।)

अच्छा तू अब बड़ा हो गया है,,,,,, कहीं तुझे तो प्यार व्यार नहीं हो गया,,,

नहीं मम्मी मुझे यह सब मैं बिल्कुल भी इंट्रेस्ट नहीं है,,,,,,( शुभम शरमाते हुए बोला।)

अरे अभी तो तूने ही कहा कि अब तु बड़ा हो गया और अब कह रहा है कि मुझे ईसमें इंटरेस्ट नहीं है। ऐसा क्यों क्या तुझे लड़कीयां अच्छी नहीं लगती। ( निर्मला बड़े ही सहज भाव से शुभम से बोली धीरे-धीरे वह अब खुलने लगी थी,,,, वह बातचीत के जरिए अपने बेटे के मन की बात को जानना चाहती थी ऊसे अब अच्छा लगने लगा था,,,, लेकिन शुभम अपनी मां की बात को सुनकर थोड़ा परेशान सा हो गया था कि वह निर्मला के सवाल का क्या जवाब दें क्योंकि आज तक सच में उसे प्यार व्यार का मतलब ही नहीं मालूम था लेकिन तभी उसे अपने दोस्त की बात याद आ गई जो कि उस दिन बता रहा था कि जिस तरह के सवाल निर्मला पूछ रही थी वैसे ही सवाल उसकी भाभी उससे पूछ रही थी,,,, जो कि ऐसे सवालों का मतलब साफ होता है कि औरत धीरे धीरे खुल रही है या तो इस तरह के सवाल पूछ कर सामने वाले की झिझक को खत्म करना चाहती है। उसका दोस्त तो अपनी भाभी के सवालों का सीधा सीधा और थोड़ा मिर्च मसाला लगाकर जवाब देता था जिसकी वजह से वह अपनी भाभी के साथ संभोग सुख का मजा ले पाया,, अपने दोस्त की बात याद है आते हैं उसके बदन में झुनझुनी सी फैल गई.

कुछ देर तक अपने बेटे को किसी ख्यालों में डूबा देखकर निर्मला फिर बोली।)

क्या हुआ बेटा क्या सोच रहा है।

कुछ नहीं मम्मी आपके सवाल के बारे में ही सोच रहा हूं।

मैंने ऐसा क्या पूछ ली जो तू इतना सोच रहा है । (निर्मला मुस्कुराते हुए बोली,,, निर्मला को मुस्कुराते हुए देखकर शुभम के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ जा रही थी अपनी मां की गुलाबी होठों को देखकर उसके बदन में झुनझुनी का एहसास हो रहा था। तेज चल रही हवा की वजह से निर्मला की बालों की लटे उसके गालों पर घूम जा रहीे थी,,, शुभम अपनी मां की खूबसूरती को अपनी आंखों से पीता हुआ बोला।)

तो क्या करूं मम्मी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है की क्या बोलूं,,,, मुझे तो यह भी नहीं मालूम कि प्यार कैसे किया जाता है क्या करते हैं प्यार में आपको मालूम है क्या,,,,,, ( शुभम बड़ी चालाकी से जवाब देता हुआ बोला वह भी अपने दोस्त की बताई हुई बात पर चलते हुए बातों ही बातों में बहुत कुछ जान लेना चाहता था और बोल भी देना चाहता था।)

ममममम,,,, मुझे,,,, मुझे क्या मालूम,,,,,( निर्मला अपने बेटे के इस सवाल पर शक पकाते हुए बोली।)

अरे भला आपको कैसे नहीं मालूम हो सकता है,,,,, आप तो इतनी बड़ी है आप भी तो पापा से प्यार की होंगी पापा ने भी आपसे प्यार किए होंगे,,,, तो आपको तो पता ही होगा,,,,,, बताओ ना मम्मी प्लीज,,,, ( शुभम अपनी मम्मी से आग्रह करते हुए बोला वह अपनी मम्मी के मन की बात जानना चाहता था बात करते हुए भी उसकी निगाह बार-बार अपनी मम्मी के बदन पर चारों तरफ घूम रही थी और इस बात का एहसास निर्मला को अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन निर्मला को भी अपने बेटे की इस ताक झांक में बड़ा ही आनंद मिल रहा था। अपने बेटे की इस बात पर निर्मला थोड़ी परेशान जरूर हुई लेकिन वह भी शायद यही चाहती थी। धीरे-धीरे बातों के जरिए आपस में दोनों खुलना चाहते थे। )

बेटा यह सब बताने की चीज थोड़ी है तो अपने आप ही हो जाता है और उम्र के साथ साथ प्यार करना भी इंसान सीख जाता है तुझे भी तो तेरे दोस्तों ने कुछ ना कुछ तो बताया ही होगा,,,, क्योंकि इस मामले में दोस्त ही एक शिक्षक की तरह होता है जो कि अपने दोस्त को इन सब बातों के बारे में बताता है। हां मैंने भी तेरे पापा से प्यार की थी। लेकिन उनके व्यवहार के कारण अब मेरा दिल टूट गया,,,,,, लेकिन तेरे दोस्त भी तो मुझे कुछ बताते ही होंगे ऊनसे तू कुछ तो सीखा होगा,,,,

( शुभम अब अपनी मां के सवाल का जवाब क्या देते क्यों बताता वह अपनी मां को उसके दोस्त सिर्फ चुदाई के बारे में ही बातें करते हैं। एक दूसरे की मां के बारे में गंदी बातें करते हैं कोई अपनी मां को चोद चुका है तो कोई अपनी भाभी को और कोई एक दूसरे की मां को चोदना चाहते हैं। यह सब बातें उसके दोस्त करते थे क्योंकि वह अपनी मां को

नहीं बता सकता था। लेकिन जिस तरह से उसकी मां जिद कर रही थी वह सोचने लगा कि अगर वह सच में बता दे तो वास्तव में उसकी मां की मन में क्या चल रहा है वह साफ तौर पर जाहिर हो जाएगा,,, अगर उसकी मां बात को सुनकर गुस्सा करे तो समझो उसके मन में जरा भी गंदगी नहीं है और अगर गुस्सा ना करें तो जरूर कुछ ना कुछ उसके मन छिपा हुआ है।,,,,, वो अभी सोच ही रहा था कि बारिश का जोर बढ़ने लगा अब तो बादलों की गड़गड़ाहट भी बढ़ने लगी। मौसम का मिजाज देख कर निर्मला को थोड़ी चिंता होने लगी अभी शीतल का घर काफी दूर था। वैसे तो अगर तेजी से कार दौड़ाती तो 1 घंटे मे हीं पहुंच जाती लेकिन आराम से चलाने की आदत की वजह से काफी समय हो गया था अंधेरा छा चुका था हाईवे पर स्ट्रीट लाइट जल चुकी थी लेकिन तेज वर्षा के जोर के कारण कुछ साफ साफ दिखाई नहीं दे रहा था। गाड़ी के हेडलाइट की रोशनी में भी ज्यादा दूर तक देखा नहीं जा रहा था। मौसम पूरी तरह से बिगड़ चुका था। ऐसे हालात में निर्मला के लिए गाड़ी चलाना उचित नहीं था यह बात वह खुद भी जानती थी। बार बार आसमान में हो रही बादलों की गड़गड़ाहट से वह घबरा जा रही थी।

एक तरफ उसके मन में घबराहट भी हो रही थी और एक तरफ वह अपने बेटे के मुंह से यह सुनना चाहती थी कि उसके दोस्त प्यार व्यार कि किस तरह की बातें उससे करते हैं।,,,, शुभम को भी लगने लगा था कि यही मौका ठीक है वह भी सब कुछ खुलकर बता देगा हो सकता है उसके लिए भी मस्ती के दरवाजे खुल जाए। वह भी मौसम का मिजाज देख कर थोड़ा सा घबरा रहा था। आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ने लगी थी। निर्मला बड़े ही धीमी गति से कार को आगे बढ़ा रही थी,,, क्योंकि दो मीटर से ज्यादा की दूरी ठीक से नजर ही नहीं आ रही थी। तेज हवा के साथ साथ तेज बारिश हो रही थी जिसकी वजह से सब कुछ धुंधला धुंधला सा नजर आ रहा था। निर्मला को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह शीतल के घर तक पहुंचेगी कैसे पार्टी भी शुरू हो गई होगी यह सब सोचकर वह बड़ी चिंतित नजर आने लगी। कुछ देर पहले बड़ा ही रोमांटिक माहौल के बीच उसके मन में शुभम के हालात को जानने की बड़ी ही उत्सुकता थी लेकिन अब मौसम का मिजाज देख कर वह चिंतित हो गई थी। ऐसे खराब मौसम में उसने कभी भी गाड़ी नहीं चलाई थी इसलिए उसके चेहरे पर घबराहट साफ नजर आ रही थी। काफी देर से दोनों के बीच में खामोशी छाई रही क्योंकि सुबह मैं इस बात का इंतजार कर रहा था कि उसकी मां फिर से उसे ज़ोर देकर पूछे और वहां धीरे धीरे सब कुछ बता दे,, ताकि उसे भी ठीक तरह से पता चले कि उसकी मम्मी के मन में क्या चल रहा है।वह बार बार उसके सामने अपने अंको का प्रदर्शन लगभग नग्नावस्था में क्यों कर रही है आखिर वह चाहती क्या है? और दूसरी तरफ निर्मला की भी हालत कुछ ठीक नहीं थी जबसे शुभम उसके सपने में आकर उसकी जबरदस्ती चुदाई करके गया है तब से वह यही चाहती थी कि उसका यह सपना हकीकत में बदल जाए,,, और वह जिस सुख का अनुभव सपने में भी करके एक दम मस्त हो गई थी उसे हकीकत में करके किस तरह का आनंद की अनुभूति होती है उस अनुभूति का अनुभव करना चाहती थी । निर्मला का मन और दिमाग दोनों अब वासना के वशीभूत हो चुके थे।, संभोग सुख प्राप्त करने की प्रबल भावना उसके मन में प्रजव्लित हो चुकी थी।

बरसात अपने पूरे जोर पर था हवा की जगह अब आंधीे चलने लगी थी। गाड़ी में तेज बौछार आ रही थी इसलिए निर्मला ने दोनों तरफ के कांच को बंद कर दी। निर्मला आज मौसम के मिजाज को देखते हुए अच्छी तरह से समझ गई थी कि ऊससे ड्राइविंग कर पाना बड़ा मुश्किल होगा।

ऐसे हालात में शीतल के घर पहुंच पाना बहुत मुश्किल सा हो गया था।

निर्मला के मन में यही सब चल रहा था कि तभी उसने अपनी गाड़ी को एका एक बहुत जोर से ब्रेक मारी,,,, जोर से ब्रेक मारते ही,,,,,,चीईईईईईई,,,,, की जबरदस्त आवाज के साथ ही गाड़ी अपनी जगह पर ही रुक गई गाड़ी रुकते ही निर्मला की जान में जान आए क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करती तो सामने वाली कार से टक्कर हो जाती जोकि तेज बारिश और हवा की वजह से ठीक से दिखाई नहीं दे रही थी,,,,,,,,

मम्मी लगता है कि गाड़ी चला पाना आसान नहीं होगा (शुभम तेज बारिश को देखते हुए बोला।)

मैं भी यही सोच रही हूं बेटा समय भी काफी हो गया है अब शीतल के घर भी पहुंच नहीं पाएंगे वहां तो पार्टी शुरू हो गई होगी। और इतनी तेज बारिश और हवा की वजह से ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा है,,,,, देखा नहीं तूने अगर ठीक समय पर ब्रेक नहीं मारी होती तो गाड़ी की टक्कर हो जाती ।

गाड़ी को इस तरह से हाईवे पर खड़ी भी नहीं रह सकते जिस तरह से हमें दिखाई नहीं दिया उस तरह से दूसरे गाड़ी वालों को भी इतना नहीं दिख रहा होगा ऐसे में टक्कर होने का डर बना रहेगा।

तो अब क्या करें मम्मी,,,,,( शुभम चिंतित स्वर में बोला।)

रुक जा कुछ सोचती हूं,,,,,,,,

( इतना कहकर निर्मला इधर-उधर नजर दौड़ाने लगी,,,, उसकी बात भी सही थी हाईवे पर गाड़ी खड़ी करने का मतलब था किसी भी गाड़ी का टक्कर होना मुमकिन था,,,,

निर्मला इधर उधर नजर दौड़ा कर सेफ जगह ढूंढ रही थी कि तभी उसे हाईवे के बगल में ही एक खाली जगह नजर आई,,,

निर्मला धीरे-धीरे गाड़ी को आगे बढ़ाते हुए हाईवे से नीचे गाड़ी को उतारने लगी और अगले ही पल निर्मला हाईवे से नीचे गाड़ी उतार कर एक घने पेड़ के नीचे गाड़ी को खड़ी कर दी,,,, यहां लंबी लंबी घास भी हुई थी चारों तरफ घने पेड़ पौधे भी लगे हुए थे जिसकी वजह से गाड़ी ठीक से नजर भी नहीं आती और यह जगह सुरक्षित भी थी। बरसात अभी भी जोरो से बरस रही थी। गाड़ी को खड़े होते ही शुभम बोला।

यह कहां ले आई मम्मी यहां पर चारों तरफ लंबी लंबी ऊंची घासे है। और यहां से अब तो हाईवे भी ठीक से नहीं नजर आ रहा है।

हां तो यही जगह तो एकदम सुरक्षित है। जहां पर रुक कर हम लोग बारिश थमने का इंतजार करेंगे और बारिश के कम होते ही यहां से चले जाएंगे तब तक के लिए हमें यहीं रुकना पड़ेगा ऐसे हालात में हाईवे पर रुकना भी ठीक नहीं है। ( निर्मला शुभम को समझाते हुए बोली।)

ठीक है मम्मी लेकिन बारिश को देख कर लगता नहीं है कि बारिश इतनी जल्दी बंद हो जाएगी और अब तो हम लोग पार्टी में भी नहीं पहुंच पाएंगे,,,, शीतल मैडम खामखा नाराज होंगी,,,,

नहीं नाराज होंगे आंखें तुंहें भी तो पता ही होगा कि बारिश बहुत तेज पड़ रही है अच्छा रुकने उसे फोन करके बोल देती हूं।

( इतना कहने के बाद निर्मला अपनी पत्नी से मोबाइल निकाल कर शीतल का नंबर डायल करने लगे लेकिन तेज बारिश की वजह से नेटवर्क ही नहीं मिल पा रहा था तीन चार बार ट्राई करने के बाद हैरान होकर वाह मोबाइल को फिर से पर्स में रखते हुए बोली।)

धत तेरे की नेटवर्क ही नहीं मिल रहा,,,,

सारा मजा किरकिरा हो गया मम्मी,,,,, पूरा प्लान चौपट हो गया,,, तुम कितनी अच्छी तरह से तैयार हुई थी पार्टी में जाने के लिए लेकिन तुम्हारा मूड भी ऑफ हो गया होगा,,,।

हां सो तो है लेकिन मौसम के आगे कर भी क्या सकते हैं।

( निर्मला और शुभम दोनों का मूड ऑफ हो गया था क्योंकि दोनों के बीच बड़े ही अच्छी तरीके से वार्तालाप हो रहे थे और यह वार्तालाप धीरे धीरे गर्माहट का अंदेशा लिए आगे बढ़ रही थी लेकिन मौसम की वजह से सारा मजा किरकिरा हो चुका था। गाड़ी का कांच बंद होने की वजह से परफ्यूम और निर्मला के बदन की मादक खुशबू का मिलाजुला बेहद मादक सुगंध पूरी गाड़ी में बड़ी तीव्रता के साथ अपना असर दिखा रही थी। शुभम को परफ्यूम की खुशबू से ज्यादा बेहतर और उत्तेजनात्मक खुशबू उसकी मां के बदन से आ रही सुगंधित खुशबू लग रही थी । दोनों के बीच फिर से खामोशी छाई रहीं निर्मला स्टेयरिंग पर अपना हाथ रख कर शुभम की ही तरफ देखे जा रही थी धीरे-धीरे निर्मला के बदन में वासना की गर्मी फैलती जा रही थी। शुभम का खूबसूरत चेहरा निर्मला को ऊन्मादित कर रहा था,,,, शुभम का गठीला बदन निर्मला के बदन में उत्तेजना की लहर फैला रहा था।

वैसे देखा जाए तो हालातों पर माहौल का भी गहरा असर पड़ता है और मौसम का मिजाज जरूर थोड़ा सा खराब था लेकिन जितना खराब था ऊतना ही एक औरत एक मर्द के लिए बेहद रोमांटिक और उत्तेजनात्मक भी था । और इस समय कार में भले ही एक मां और एक बेटा बैठा हुआ था लेकिन इस तरह के बरसाती मौसम में और वह भी हाइवे के किनारे सुनसान जगह पर और एक बंद कार में,,, यह हालात ओर एकांत किसी भी पवित्र रिश्ते चाहे वह कैसा भी हो चाहे भाई-बहन का हो या फिर मां-बेटे का हो,,,,, उनके बीच का पवित्र रिश्ते की डोरी टूट कर बिखर जाती है केवल उनके बीच रिश्ता रह जाता है तो सिर्फ एक मर्द और एक औरत का । और आज जिस तरह का एकांत और मौसम का साथ शुभम और निर्मला को मिला था और दोनों के अंदर जो काम भावना एक दूसरे के बदन को देखकर प्रज्वलित हो चुकी थी उससे यही लग रहा था कि आज की रात इन दोनों के पवित्र रिश्ते के बीच की मर्यादा की डोऱ संस्कारों की डोर टूट कर तार-तार हो जाएगी। इसलिए तो इस तरह के बरसाती माहौल में एकदम सुनसान जगह पर एकांत पाकर अपने बेटे को एकटक निहारते हुए मुस्कुरा रहीे थी,,, शुभम अपनी मां को इस तरह से मुस्कुराते हुए देखकर बोला।

क्या मम्मी तो सारा मजा किरकिरा हो गया पार्टी में जा नहीं पाए और तुम हो कि इस तरह से हंस रही हो,,,,,

,,,

अब हंसो नहीं तो क्या करूं ,,,,,, वैसे एक बात कहूं जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है।( निर्मला मुस्कुराते हुए बोली।)

क्या खाक जो भी होता है अच्छे के लिए होता है इतनी तूफानी बारिश मे हमें इस तरह से हाइवे के किनारे सुनसान जगह पर रुकना पड़ा यह क्या अच्छा हो रहा है।

हां बेटा जो भी होता है अच्छे के लिए होता है तू इस तरह से उदास मत हो हम दोनों इसी जगह पर पार्टी मनाएंगे बस,, मैं हूं ना तू चिंता मत कर,,,,,

( निर्मला की बात शुभम को अजीब लग रही थी आखिर ईस जगह पर कैसे पार्टी मनाएंगे,,,,,।)

 
बारिश अपने जोरों पर थी हाईवे के किनारे की घनी झाड़ियों के बीच निर्मला अपनी कार को खड़ी कर दी थी घने पेड़ के नीचे,,,, वह लोग बारिश थमने तक आसरा लिए हुए वहीं रूके रहे। निर्मला क्या सोच रहे थे कि बारिश के रुकते ही वह फिर से शीतल के घर उस की सालगिरह मनाने चली जाएगी लेकिन बारिश का मिजाज देखते हुए ऐसा संभव हो पाना मुश्किल ही लग रहा था। निर्मला ने अपनी कार को ऐसी घनी झाड़ियों के बीच पाक की थी की हाईवे से आते जाते लोगों को भी कार नजर नहीं आती। बरसात की वजह से मौसम में ठंडक का अनुभव होने लगा था निर्मला अपने बेटे की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली।

बेटा अब ऐसी बारिश में हमें तो यहां रुकना ही पड़ेगा लेकिन जैसा मैंने तुझे बोली कि जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है तो हो सकता है कि यहां रुकना हम दोनों के लिए कुछ अच्छा साबित हो जाए।

मम्मी ऐसी कोई बात है नहीं लेकिन आप कह रही हैं तो जरूर मुझे आप पर विश्वास है। (इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां को बड़े गौर से देखने लगा जो कि इस समय मुस्कुराते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।)

ऐसे क्या देख रहा है?

कुछ नहीं मम्मी मैं तो यह देख रहा हूं कि ऐसी मुसीबत की घड़ी मे भी आप मुस्कुराते हुए कितनी खूबसूरत लगती है।

अच्छा मैं तुझे खूबसूरत लगती हूं,,,,( निर्मला अपने बेटे की बात पर मुस्कुराते हुए बोली।)

हां मम्मी तुम मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो।

अब बे वजह तू बातें मत बना,,,,,

नहीं मम्मी सच में अपनी कसम तुम मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो खूबसूरत लगती क्या हो,,,, तुम हो ही बहुत खूबसूरत।

( निर्मला को अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर बहुत अच्छा लग रहा था वह मन ही मन मुस्कुरा भीे रही थी। वहां अपने बेटे की नजर को अच्छे से पहचान रही थी खूबसूरती के पीछे आकर्षण भी था जो कि उससे अपने बेटे की आंखों में साफ नजर आ रहा था कि वहां उसके बदन के प्रति आकर्षित है। लेकिन अभी उसके अंदर झिझक भरी हुई थी। निर्मला को तभी कुछ याद आया हो इस तरह से बोली।)

अच्छा मैं तुझसे एक सवाल पूछी थी लेकिन तूने उसका जवाब नहीं दिया,,,,,

कैसा सवाल मम्मी?

यही कि तेरे दोस्त भी तो गर्लफ्रेंड लड़कियों की बातें करते होंगे तुझ से उन लोगों ने तो तुझे कुछ बताया ही होगा कि प्यार व्यार क्या होता है।

नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है वह लोग मुझसे ऐसी बातें नहीं करते।

नहीं तू झूठ बोल रहा है ऐसा हो ही नहीं सकता लड़के अक्सर अपने दोस्तों से यह सब बातें जरूर शेयर करते हैं।

( निर्मला अपनी बात पर जोर देते हुए बोली वह अपने बेटे के मुंह से जानना चाहती थी कि प्यार व्यार के बारे में उसके दोस्त क्या बोलते हैं।)

नहीं मम्मी सच कह रहा हूं ऐसी कोई बात नहीं है।

नहीं तू जरुर झूठ बोल रहा है। देख बारिश को देखते हुए हम लोगों को लगता है कि सारी रात यहीं रुकना होगा और एक दूसरे से बातें किए बिना या रात कटने वाली नहीं है। यह तूफानी रात गुजारने के लिए हम दोनों को टाइम पास के लिए बातचीत तो करनी ही होगी अब मैं तुझ से घर गृहस्ती के बारे में बातचीत तो कर नहीं सकती इसलिए ऐसे टॉपिक पर बात करना चाहती हूं जिसमे तुझे भी इंटरेस्ट हो क्योंकि तेरी उम्र भी अब जवान हो रही है ऐसे में तेरा आकर्षण लड़कियों के प्रति जरूर होता होगा।

( अपनी मां की बात सुनकर सुदंर हैरान होते हुए अपनी मां को ही देखे जा रहा था अपने बेटे के चेहरे के भाव को पढ़ते हुए निर्मला बोली।)

देख सुबह मैं जानती हूं कि ऐसी बातें करना ठीक नहीं है लेकिन मैं तेरी मां हूं और तुझे सही उम्र में सही बातों की जानकारी देना मेरा फर्ज बनता है और साथ ही में तो एक टीचर भी हूं इसके लिए तेरे हर सवालों का सही जवाब देना मेरा फर्ज बनता है और मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरी उम्र के लड़के अक्सर अपने दोस्तों से लड़कियों के बारे में अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में जरूर बात करते हैं इसलिए मुझसे तू झूठ मत बोल,,,,।

( निर्मला शुभम पर अपनी बातों का दबाव बराबर बनाई हुई थी,, और निर्मला के सवालों से शुभम का छटक पाना था। उसके लिए भी जवाब देना जरूरी होता जा रहा था वह थोड़ा सोचने लगा और फिर सोचता हुआ देखकर निर्मला फिर बोली।)

देख शुभम तू घबरा मत आज की रात तू दिल खोल कर जो तेरे मन में है सब कुछ मुझे बोल डाल क्योंकि जिस माहौल में हम दोनों फंसे हुए हैं ऐसे माहौल में अगर एक प्रेमी और प्रेमिका फंस जाते हैं और उन्हें इस तरह का एकांत मिल जाता है तो उनके लिए तो यह जन्नत के बराबर हो जाता है।

और शायद तो यह नहीं जानता की जिन लड़की लड़कियों को आपस में प्यार हो जाता है वह अक्सर ऐसे ही एकांत माहौल को ढूंढते रहते हैं।( शुभम अपनी मां की बात बड़े गौर से सुन रहा था और उसे अपनी मां की यह सब बातें बड़ी अजीब भी लग रही थी।) अच्छा तो मुझे एक बात सच सच बताना क्या तूने कभी किसी लड़की से प्यार किया है या तुझे किसी लड़की से प्यार हुआ है।

नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है।

देख तू सच सच बताओ झूठ मत बोल पूरे स्कूल में तुझे कौन सी लड़की सबसे अच्छी लगती है। ( निर्मला स्टीयरिंग पर अपने दोनों हथेलियों को रखते हुए बोली।)

नहीं मम्मी इन सब बातों पर मेरा कभी ध्यान ही नहीं गया।

हे भगवान तेरे जैसा लड़का तो मैंने आज तक नहीं देखी अच्छा यह तो बता कि तुझे कौन अच्छी लगती है।

( शुभम को अपनी मां की बातें और उसके बात करने का अंदाज कुछ अलग लग रहा था लेकिन तभी उसे अपने दोस्त की बात याद आ गई उसे भी लगने लगा कि आज उसकी मां उसके दोस्त की भाभी की तरह ही बात कर रही है जिस तरह से वह बहुत चुदवासी थी हो सकता है उसकी मां भी चुदवासी हो गई हो,, वरना इस तरह की बातें ना करती शुभम के लिए मौका बड़ा खास था वह मन ही मन सोचने लगा कि जब ऐसी बातें करते हुए उसके दोस्त की भाभी अपने ही देवर को ऊकसा कर उसके साथ चुदाई का सुख प्राप्त की। और आज उसकी मां थी अपनी बातों से उसे उकसा रही है हो सकता है कि आज उसका भी मन लंड लेने को कर रहा है यही सब सोचकर शुभम इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वह अपनी मां की बातों का मतलब धीरे-धीरे समझ रहा था वरना ऐसी मुश्किल घड़ी में भी किसी औरत के चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आती लेकिन जिस तरह से निर्मला मुस्कुरा रही थी शुभम को अब लगने लगा था कि इस मुस्कुराहट के पीछे कोई वजह जरुर है। ओर यह वजह शारीरिक सुख से ही संबंधित है। इस बात की शंका शुभम के मन में होते ही उसके बदन में गुदगुदी सी होने लगी।अब वह भी अपनी मां से दूसरी तरह से ही बातें करना चाहता था क्योंकि उसकी मां ने ही बोली थी कि आज जो भी उसके मन में हो सब बोल डाले,,,,

क्या हुआ क्या सोच रहा है बता ना तुझे कौन अच्छी लगती है । (अपनी मां की बात सुनते ही जैसे उसकी तंद्रा भंग हुई हो इस तरह सेकपकाते हुए बोला)

कककक,,, कुछ तो नही,,,,

तो बताना तुझे कौन अच्छी लगती है ।

क्या मम्मी तुम तो मेरे पीछे ही पड़ गई हो,,,,,,,

अच्छा ठीक है कुछ मत बताओ मैं तुझसे अब कुछ पूछुंगी भी नहीं,,,( निर्मला बनावटी गुस्सा बताते हुए बोली।)

लो अब तुम नाराज हो गई मम्मी मैं कह रहा हूं फिर बताने जैसा नहीं है क्योंकि वह लोग प्यार व्यार की बातें नहीं करते थे वह लोग कुछ और ही बताते थे।

क्या बताते थे वह लोग कैसी बातें करते थे?

क्या बताऊं मम्मी बताने लायक नहीं है।

( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला के मन में उत्सुकता जागने लगी उसे लगने लगा कि शुभम कुछ गंदी बातें छुपा रहा है और यही मौका भी अच्छा है उसके मुंह से गंदी बातें उगलवा कर आज की रात हसीन करने का,, निर्मला के मन में ढेर सारी भावनाएं उमड़ने लगी वह शुभम से बोली।)

देख तू मुझसे शर्मा मत सब कुछ बोल डाल,,,,,

मम्मी मुझे बहुत शर्म आती है मैं कैसे बोलूं,,,,,,,

अच्छा तुम मुझे एक बात बता अगर मेरी जगह ऐसे मौके पर ऐसी सुनसान जगह पर और बरसती बारिश में तेरी कोई गर्लफ्रेंड होत तो क्या तू उसे नहीं बताताा,,,,,, देख शर्मा मत,,,,

( अपनी मां की ऐसी बातें सुनकर शुभम को लगने लगा कि आप जरुर उसके साथ कुछ ना कुछ अच्छा होने वाला है,,, वह भी मन ही मन सोचने लगा की जब उसकी मां खुद ही सब कुछ सुनने के लिए तैयार है तो उसे बोलने में क्या हर्ज है इसलिए वह बोला।)

मम्मी वह लोग गंदी बातें करते है।,,,,

कैसी गंदी बातें किसके बारे में,,,,( इतना कहने के साथ ही वह स्टेयरिंग पर से हाथ हटाकर एक हाथ को पीछे की सीट पर रखकर आराम से बैठ गई,,,,)

सससस,,, सेक्स के बारे में,,,,,,( शुभम एकदम से डरते हुए बोला आज पहली बार उसके मुंह से यह शब्द बाहर निकले थे निर्मला को भी अपने बेटे के मुंह से सेक्स शब्द सुनकर गर्माहट सी फैलने लगी। )

सेक्स के बारे में किस तरह के कैसी बातें जरा खुलकर तो बता मैं पहले ही तुझे बता चुकी हूं कि तू आज मत शर्मा,,, यह समझ ले कि तेरे सामने तेरी गर्लफ्रेंड बैठी है और वैसे भी तो मैं तुझे अच्छी लगती हुं ना,, तो यही समझ ले आज यहां पर इस एकांत में तेरे साथ तेरी मम्मी नहीं बल्कि तेरी गर्लफ्रेंड बैठीे है। और अपनी गर्लफ्रेंड से शर्माने की कोई जरूरत नहीं है।

( निर्मला के मन में पूरी तरह से वासना सवार हो चुकी थी कि शीतल वाली बात उसे अच्छी तरह से याद थी,,,, शीतल बार-बार उसे शुभम की तरफ इशारा करके उससे जवान लंड लेने की बात कर रही थी इसलिए निर्मला का मन अपने बेटे के प्रति आकर्षित होने लगा था और ऐसे माहौल में तो उसके बदन में एक अजीब सी उत्सुकता सीे फेल जा रही थी। शुभम भी अपनी मां की बातें सुनकर बोला।)

चचचच,, चुदाई,,,,, वाली बातें,,,,( शुभम फिर से शर्माते हुए बोला।,, अपनी मां से इस तरह की बातें करने में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था जिसे वह बार-बार पैंट के ऊपर से एडजस्ट कर रहा था और निर्मला की नजर उसकी इस हरकत को ध्यान से देख रही थी। )

चुदाई वाली बातें तेरे दोस्त यह सब बातें करत लेकिन किस की चुदाई के बारे में बातें करते हैं

तेरे दोस्त इस तरह की बातें करते हैं। लेकीन कीसकी चुदाई की बाते करते हैं । ( निर्मला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी अपने बेटे के मुंह से यह सब सुनकर उसका अंग अंग उन्माद से भरने लगा था। बाहर बारिश अपने जोरों पर अपना जलवा बिखेर रहे थे साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट मौसम को और भी ज्यादा भयानक बना रहीे थी,,, लेकिन यह बारिश यह एकांत और बादलों की गड़गड़ाहट कार के अंदर के माहौल को गर्मी प्रदान कर रही थी। शुभम भी अपनी मां की बात का जवाब देते हुए बोला,,,,)

मम्मी वाला बहुत गंदी बातें करते थे मैं तो वह बातें सुनकर ही हैरान था कि आखिर वह इस तरह की बातें कर कैसे लेते हैं।

किस तरह की बातें बेटा मुझे भी तो बता,,,,,( निर्मला इस बार अपने एक पैर को सीट पर रख कर आराम से बैठ गई लेकिन वह अपने पैर को जानबूझ कर इतना उठाई थी की साड़ी ऊपर की तरफ सरक गई और उसकी पिंडलियां जो कि एकदम गोरी थी वह साफ साफ नजर आने लगी उस पिंडलियों पर शुभम की नजर चली गई,,,, जिसे देख कर उसका लंड ठुनकी लेने लगा,,,,। इस बात का एहसास निर्मला को भी है हो गया कि उसकी गोरी पिंडली को देखकर शुभम के बदन में हलचल सी मचनें लगी थी,,, इसलिए वह अपनी हथेली को अपनी पिंडली पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी जिसे देखकर शुभम बावला होने लगा। और अपने बदन में अपनी मम्मी की गोरी गोरी पिंडली की गर्माहट को महसूस करते हुए बोला।)

मम्मी वह लोग एक दूसरे की बहन भाभी की गंदी बातें उनकी चुदाई करने की बातें करके मजा लेते थे,,,, ( निर्मला को अपने बेटे की बात सुनते ही उसके बदन में गुदगुदी होने लगी और वह बोली।)

क्या एक दूसरे की बहन भाभी को चोदने की बात करते थे,,,( निर्मला चोदने शब्द को कुछ ज्यादा ही भार देकर बोली थी ताकि शुभम के बदन में मस्ती की लहर दौडने़ लगे और वैसा हो भी रहा था शुभम कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां ऐसे शब्दों का प्रयोग करेगी और वह भी उसके ही सामने इसलिए आज पहली बार अपनी मां के मुंह से सेक्स चुदाई की बात सुनकर उसके बदन में हलचल सी मच आने लगी थी। शुभम का भी मन खुलने लगा वह मन ही मन सोच रहा था कि जब उसकी मां इतना खुल सकती है तो वह भी अपनी बात को नमक मिर्च लगाकर क्यों नहीं बता सकता इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला इस बार वह अपने अंदर चल रही हलचल को अपने शब्दों में बाहर लाते हुए अपनी मां से बोला।)

और तो और मम्मी जब उन लोगों की मैंने यह बात सुनी कि वह लोग अपनी मम्मी को भी गंदी नजर से देखते हैं तो मेरा दिमाग एकदम सन्न हो गया।

( शुभम दोस्तों की मम्मी वाली बात जानबूझकर बोला था ताकि वह अपने लिए रास्ता साफ कर सके और अपने बेटे के मुंह से दोस्तों की मम्मी वाली बात सुनकर निर्मला भी हैरान थी वह शुभम से बोली।)

क्या वादों को अपनी मम्मी को गंदी नजर से देखते हैं पर तुझे कैसे मालूम पड़ा क्या बोल रहे थे वह लोग। ?

मम्मी कैसे बताऊं मुझे शर्म आ रही है,,,,

शर्मा मत देख मैं तुझे बता चुकी हूं कि तू मुझे अपनी गर्लफ्रेंड समझ और मुझे सब कुछ बता दे । (इतना कहने के साथ ही वह अपनी पिंडली को खुजलाते खुजलाते एक बहाने से साड़ी को हल्के से और ऊपर उठा दी जिससे निर्मला की जांघ का थोड़ा भाग नजर आने लगा। चिकनी गोरी जांघ का थोड़ा सा भाग देख कर शुभम के मन पर बिजलियां दौड़ने लगी,, और वह बोला।)

मम्मी बोलो ढेर सारी बातें करते थे जब हम लोग क्रिकेट खेलते रहते हैं और फील्डिंग करते रहते हैं तो आपस में वालों की यही बातें करते हैं जो कि मुझे साफ साफ सुनाई देती है एक तो अपने दोस्त से बोल रहा था कि,,,,, यार आज तो सुबह-सुबह ही मेरा मूड बन गया और मुझे मुठ मारना पड़ा,,,,

( निर्मला तो अपने बेटे के मुंह से मुठ शब्द सुनते ही दंग रह गई और बोली।)

मूड बन गया मतलब कैसे,,,,,?

मम्मी वह बोल रहा था कि जब वह सुबह उठ कर बाथरूम की तरफ गया तो उसे नहीं मालूम था कि बाथरुम में उसकी मां है और वह बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला ही था कि उसकी मां उसे एकदम नंगी बाथरूम में नहाती मिल गई,,, और वह बताने लगा कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और उसकी बड़ी बड़ी चूचियां को देखकर उसका लंड टनटनाकर खड़ा हो गया। ( लंड टनटनाकर खड़े होने की बात सुनते ही निर्मला की बुर में चीटियां रेंगने लगी। )

और तों और मम्मी जब उसने कहा कि,,, अगर उसकी मां जरा सा इशारा कर देती तो वह बाथरुम में घुसकर अपनी मां की बुर में लंड डालकर चोद दीया होता।

( अपने बेटे के मुंह से इस तरह की खूबी बातें सुनकर उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी,,,, आश्चर्य के साथ उसका मुंह खुला का खुला रह गया था। निर्मला हैरान होते हुए और साथ ही अपनी गोरी जांघ को हथेली से सहलाते हुए बोली।)

फिर क्या किया उसने,,,

फिर उसने बताया मम्मी की वह वंही दरवाजे पर ही अपने आप को छुपा कर खड़ा रहा और धीरे से अपने पजामे को नीचे कर दिया,,, और वही खड़े खड़े अपनी मां को नंगी देखते हुए अपने लंड को हिलाने लगा,,,,, और तब तक हिलाते रहा जब तक कि उसका पानी नहीं निकल गया,,,,,

तुझे कैसे मालूम कि वह पानी निकलते तक हिलाते रहा।

 


उसी ने तो बताया था।( इतना कहते हुए वह फीर से अपने खड़े लंड को एडजस्ट करने लगा। जो कि अपने बेटे की ईस हरकत को वह कनखियों से देख रही थी। )

शुभम तेरे दोस्त तो बहुत ही गंदी बातें करते हैं । क्या वह सब सच में ऐसा करते हैं क्या सच में वह अपनी मां को चोदने की ख्वाहिश रखते हैं। ( निर्मला गहरी सांसे लेते हुए बोली और गहरी सांस लेने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जोकी शुभम को साफ साफ नजर आ रही थी। )

ख्वाहिश ही नहीं मम्मी एक दोस्त ने तो यहां तक बताया कि एक रात जब वह अपनी मां के पास सो रहा था तो धीरे-धीरे करके उसने अपनी मां की ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए,,, बटन खोलने के बाद वह धीरे धीरे अपनी मां की चुचियों को दबाने लगा,,,( अपने बेटे के मुंह से यह बात सुनते ही निर्मला की बुर से नमकीन पानी रिसने लगा,,, उसकी सांसे तेज चलने लगी।)

फीर क्या हुआ? ( निर्मला बड़ी ही उत्सुकता के साथ होली यह सब बातें शुभम जानबूझकर नमक मिर्च लगाकर बोल रहा था जबकि उसके दोस्त ऐसा कुछ किए नहीं थे ,, पर हां बल्कि वह लोग अपनी मां को देखते जरूर थे।)

फिर क्या मम्मी जब उसने देखा कि उसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हो रहा है तो मैं धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को ऊपर उठाने लगा। लेकिन उसकी मां सोई नहीं थी जो कि यह बात उसने खुद बताई बहुत याद आ रही थी अपने बेटे की हरकत की वजह से उसकी सांसे तेज चल रही थी। उसे भी मजा आ रहा था।

( यह सब सुनकर निर्मला की हालत खराब हुए जा रही थी।)

फीर क्या हुआ ?

उसके बाद उसने अपनी मां की साड़ी को पूरी कमर तक उठा दिया और धीरे-धीरे उसकी पैंटी को नीचे सरका कर अपने लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ने लगा। इतना करने से उसकी मां से रहा नहीं दिया और वह अपना हाथ पीछे ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ लि और अपने बुर से सटा दी,,,,

इसके बाद,,,,

इसके बाद क्या मम्मी उसके बाद तुम अपनी मां का इशारा पाकर वह अपनी मम्मी को रात भर चोदता रहा।

( निर्मला की तो सांस उखड़ने लगी उसकी बुर से पानी निकलने लगा वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को आधी जांघ तक सरका दी। और कामोत्तेजित होते हुए बोली।)

हां मम्मी सच में वह लोग एसी ही बातें करते हैं।

अच्छा जब वह लोग एक दूसरे की मां के बारे में खुद अपनी मां के बारे में गंदी बातें करते हैं तो वह लोग जरूर तेरी मां के बारे में भी कुछ ना कुछ तो बोले ही होंगे,,,,,

( शुभम समझ गया कि उसकी मां अपने बारे में भी सुनना चाहती है लेकिन फिर भी वह जान बूझकर ना बताने का नाटक करते हुए बोला।)

नहीं मम्मी जाने दो ना,,,,,

अरे कैसे जाने दो,,,,, बता तो सही वो लोग मेरे बारे में क्या बताते हैं तुझसे,,,,, क्या सोचते हैं वह लोग मेरे बारे में,,,,,

जाने दो ना मम्मी क्या करोगे सुनकर वह लोग तुम्हारे बारे में इतनी गंदी बातें बोल रहे थे कि मेरा तो एक बार झगड़ा भी हो चुका था।,,,,

अरे बता तो सही बोलो क्या बोल रहे थे मैं भी तो सुनूं कि मेरे पीठ पीछे लोग क्या क्या मेरे बारे में बोलते हैं और सोचते हैं।

देखो शर्मा मत इतना कुछ बता दिया है तो यह भी बता दे।

मम्मी मेरे दोस्त मुझे बोल रही थी कि तेरी मम्मी क्या माल लगती है तेरी मम्मी की बड़ी बड़ी गांड देख कर हम लोगों का तो लंड ही खड़ा हो जाता है।

( निर्मला जानबूझकर अपने मुंह पर हाथ रखते हुए हैरान होने का नाटक करते हुए बोली।)

क्या तेरे दोस्त मेरे बारे में इस तरह की बातें करते हैं।( निर्मला हैरान होने का सिर्फ नाटक कर रही थी लेकिन उसे अपने बेटे की यह बात सुनकर बड़ा ही मजा आ रहा था।)

हां मम्मी वह लोग यह भी कह रहे थे कि अगर तेरी मम्मी हम लोगों को मौका दे तो तेरी मम्मी की बूर में सारी रात लंड डालकर सारी रात तेरी मम्मी की चुदाई करें और तेरी मम्मी जब चलती है तो क्या मटक मटक कर अपनी गांड मटका तेरी चलती है और तो और,,,, रोज सुबह तेरी मम्मी को याद करके हम लोगों को मुठ मारकर पानी निकालना पड़ता है।

शुभम तेरे दोस्त तों बड़े ही आवारा कीस्म के हैं,,,, सारे के सारे लगता है ठरकी हैं। सबके मन में कितना गंदा विचार है अपनी भी मम्मी के बारे में और दोस्तों की भी मम्मी के बारे में।

इसलिए तो मम्मी मुझे ऊन लोगों की दोस्ती पसंद नहीं है।

( कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही शुभम के साथ साथ निर्मला भी पूरी तरह से काम होते जीत हो चुकी थी शुभम का लंड उसके पैंट में जोऱ दिए हुए था,, जिसे बार-बार वह अपने हाथ से एडजस्ट कर रहा था निर्मला की भी पैंटी पूरी तरह से गीली होने लगी थी थोड़ी देर बाद वह बोली,,,)

शुभम तेरे सभी दोस्त अपनी मां के बारे में गंदी विचार रखते हैं और वह लोग अपनी मां को चोद भी चुके हैं और चोदना भी चाहते हैं,,

तो अपने दोस्तों की बातें सुन कर तेरे मन में भी तो कुछ कुछ होता होगा,,,, तू भी मुझे गंदी नजर से देखता होगा मेरे बदन पर अपनी नजरें ़ दौड़ाता होगा,,,,, ( जांघों पर हथेली से सहलाते हुए) तू भी मुझे पीछे से देखता होगा जब मैं अपनी गांड मटका के चलती होऊंगी तब,,, तेरी नजर भी मेरी बड़ी बड़ी गांड पर टीकती होगी,,,, सच सच बताना शुभम क्योंकि मुझे नंगी देखा होगा ना।

( अपनी मां की यह बात सुनकर सुबह में एकदम से तक पका गया उसकी मां एकदम खुले शब्दों में उस से बातें कर रहे थे क्योंकि शुभम को अच्छी भी लग रही थी लेकिन ईस सवाल पर वह थोड़ा सा घबरा गया। उसे कुछ समझ में नहीं आया कि अपनी मां के सवाल का वह क्या जवाब दे। निर्मला अपने सवाल से अपने बेटे के चेहरे के बदले भाव को देख कर बोली।)

तू घबरा मत मैं तुझसे पहले ही कह चुकी हूं कि आज की रात तुम मुझसे बिल्कुल भी शर्म मत करना तुम मुझसे ऐसे बात करना कि जैसे तू अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बात कर रहा हूं तुम मुझे अपना दोस्त समझ और सब कुछ बोल डाल अगर तूने मुझे दूसरी नजरिए से देखा भी है तो मुझे कोई एतराज नहीं होगा और तू कहीं मुझे एकदम नंगी भी देख चुका हे तो भी मैं तुझे कुछ नहीं कहूंगी बस तू मुझे सच सच बता दे तू ने मुझे नंगी देखा है कि नही।

( अपनी मां की बात सुनकर उसके मन में थोड़ी राहत हुई उसे तो यह सब अच्छा लग रहा था कि आज उसकी मां बिल्कुल खुले शब्दों में उससे बातें भी कर रही है और लगभग उसका साथ भी दे रही है। शुभम को इससे ज्यादा और क्या चाहिए था वैसे भी शुभम तू अपनी मां के ख्यालों में खोया रहता था और आज तो उसे भरपूर मौका मिला था और वह भी उसकी मां उसे साफ साफ शब्दों में सारा भी कर रही थी अगर आज शुभम इस मौके का फायदा नहीं उठाएगा तो शायद ही ऐसा मौका उसे दोबारा मिले वैसे भी बारिश कम होने का नाम नहीं ले रही थी तो यहां से जाने का सवाल ही नहीं होता था बादलों की गड़गड़ाहट से मौसम में एक रोमांच सा भर गया था। सुबह फिर भी एक गाय कितना खुलना नहीं चाहता था वह जान बूझकर अपनी मम्मी से बोला।)

नहीं मम्मी जैसा तुम समझ रही हो वैसा बिलकुल भी नहीं है।

अरे ऐसे कैसे नहीं है तेरे दोस्त तेरे सामने ही अपनी मम्मी को चोदने का और एक दूसरे की मम्मी को चोदने की बात करते हैं और मैं जानती हूं इस उमर में लड़कों को यह सब अच्छा भीं लगता है तो मैं कैसे मान लूं कि तेरे दोस्तों की बात सुनने के बाद भी तेरे मन में मेरे प्रति कोई आकर्षण नहीं जगा हो। क्या मैं तुझे अच्छी नहीं लगती हूं कि मेरा बदल इस लायक नहीं है कि तू मुझे पसंद ना कर सके,,, जबकि तू खुद अभी-अभी बोला था कि मैं तुझे बहुत अच्छी लगती हूं।

हां मम्मी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो लेकिन,,,,,,,( इतना कहने के साथ ही वह फिर से शांत हो गया,,,, उसे शांत देखकर निर्मला फिर बोली।)

लेकिन क्या,,,,,,,( निर्मला धीरे से साड़ी को ऊपर चढ़ाते हुए बोली अब उसकी जांघों का आधे से भी ज्यादा भाग नजर आने लगा था जिस पर नजर पड़ते ही शुभम की आंखों में चमक नजर आने लगी,,,, और वह बोला।)

मम्मी अब मैं क्या बताऊं मुझसे कुछ बोला नहीं जा रहा है।

क्या सुनाऊं तू भी औरतों की तरह शर्मा रहा है देखने औरत होने के बावजूद भी कितना बिंदास होकर तुझसे बातें कर रही हुं। क्योंकि आज की रात कुछ खास है देख जो होता है अच्छे के लिए ही होता है हो सकता है यहां रुकना हम दोनों के लिए अच्छा ही हो वरना हम दोनों तो निकले थे शीतल की शादी की सालगिरह के लिए लेकिन एकाएक मौसम खराब हो गया बल्कि मौसम कितना साफ था। तु देख धीरे-धीरे कितना समय बीत गया अगर हम लोग इस तरह की बातें नहीं करते तो समय काटना भी बड़ा मुश्किल होता जाता और ऊपर से तूफानी बारिश में डर भी लगता। इसलिए जो बोलना है तो एकदम बिंदास बोल,,,,( अपनी मां की बात को बड़े ध्यान से सुन रहा था और अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखते हुए वह बोला।)

क्या बोलूं मम्मी मुझे तो समझ में नहीं आ रहा कि कहां से शुरू करूं,,,,,,

मतलब तू मुझे नंगी देख चुका है,,,,( निर्मला अपने बेटे की आंखों में झांकते हुए बोली,,,,, शुभम अपनी मां की यह बात सुनकर सिर्फ हां में सिर हिलाकर नजरे नीचे झुका लिया अपने बेटे का जवाब सुनकर निर्मला के बदन में गुदगुदी सी होने लगी,,,, एक अजीब प्रकार का रोमांच उसके बदन में फैल गया। मन ही मन में सोचने लगी कि कब देखा होगा शुभम उसे नंगी,,, वो क्या कर रहीे थीे जब उसने उसे नंगी देखा होगा कैसा लगा होगा जब उसने उस के नंगे बदन को देखा होगा क्या उसमें भी उसके दोस्त की ही तरह अपनी मां को नंगी देखकर अपने लंड को हिलाया होगा क्या उसके मन में भी है भावना जगी होगी कि वह अपनी मां की चुदाई करें यही सब सोचकर निर्मला का बदन उत्तेजना के मारे गनगना गया। उसकी सांसे तेज चलने लगी और सीने में अंदर बाहर हो रही सांसों के साथ साथ उसकी बड़ी बड़ी चूचियां भी पहाड़ी घाटी की तरह ऊपर नीचे होते हुए कार के अंदर अपने बेटे पर कहर ढा रही थी। वह चहकते हुए बोली।)

क्या तूने सच मे मुझे नंगी देखा है कब देखा और कहां देखा मैं क्या कर रहीे थी जब तुने मुझे नंगी देखा था। बता ना देखा बिलकुल भी मत शर्माना इतना कुछ बता दिया है तो यह भी बता दे।

( शुभम को अब इस बात का पूरी तरह से आवास हो चुका था कि आज उसके साथ जरुर कुछ ना कुछ अच्छा ही होने वाला है वह तो अंदर ही अंदर मचल रहा था सब कुछ बताने के लिए बस थोड़ा सा नाटक कर रहा था वह नजरें उठाकर अपनी मां की आंख में झांकते हुए बोला।)

दो तीन बार देख चुका हूं हालांकि मैं नंगी देखने के उद्देश्य से जगह पर नहीं पहुंचा था लेकिन फिर भी देख लिया,,,,

सच कहां कहां देखा था क्या मैं उसमे बिल्कुल नंगी थी क्या कर रही थीे मै,,

बाथरूम में ही देख चुका हूं और एक दिन घर के पीछे वाले भाग मे जब तुम कपड़े धो रहीे थी,,,

( घर के पीछे वाले भाग में देखने के नाम से ही निर्मला की बदन में उत्तेजना की तेज बाहर दौड़ने लगी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि घर के पीछे वाले भाग में जब वह कपड़े धो रहे थे तो एकदम बिंदास होकर अपनी बुर में उंगली डालकर अपने हाथों से अपनी बुर की प्यास बुझा रही थी।)

घर के पीछे वाले भाग में,,,,, तू कहां से देख लिया और क्या करने आया था पीछे?

मम्मी तुम उस दिन मुझे कहीं भी नजर नहीं आई मैं बस तुम्हें ढूंढते ढूंढते वहां पहुंच गया तो देखा कि तुम एकदम नंगी होकर कपड़े धो रही हो,,,,,

मुझे एकदम नंगी देख कर तुझे कैसा लगा,,,,

मम्मी अब मैं क्या बताऊं उस दिन पहली बार मैंने तुम्हें नहीं देखा था मुझे तो समझ में ही नहीं आया कि यह क्या हो रहा है मेरा तो दिमाग ही काम करना बंद कर दिया था अब तक मैंने तुम्हें कपड़ों में देखा था कपड़ो में आप काफी खूबसूरत लगती हो लेकिन उस दिन बिना कपड़ों की एकदम नंगी देख कर मुझे पता चला कि आप बेहद और ज्यादा बेहद खूबसूरत हो,,,,,

( अपने बेटे के मुंह से अपने बदन की तारीफ सुनकर निर्मला को बहुत अच्छा लग रहा था वह खुश होते हुए बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

सच में मैं तुझे बेहद खूबसूरत लगती हूं अच्छा यह बता उस दिन मैं वहां क्या कर रही थी।

तुम कपड़े धो रही थी।

सिर्फ कपड़े धो रही थी या और कुछ भी कर रही थी।

( अपनी मां की बात सुनकर शुभम समझ गया कि उसकी मां उसके मुंह से क्या सुनना चाहती है। वह भी कहां पीछे हटने वाला था वह भी उस दिन जोे देखा वह साफ साफ बताया लेकिन थोड़ा घुमा फिरा कर,,,,)

मम्मी तुम कपड़े धोने के बाद अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जा कर जोर जोर से ना जाने क्या कर रही थी मुझे दूर से तो कुछ साफ नहीं दिखाई दिया बस तुम्हारे हाथ की हरकत यह देख रही थी लेकिन यह समझ में नहीं आया कि तुम कर क्या रही हो,,,,,,

( शुभम की बात सुनकर निर्मला मुस्कुराने लगी वह समझ गई कि शुभम अभी तक कुल नादान है इसलिए आवाज नहीं समझ पाया कि वह क्या कर रही है इसलिए वह बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

अच्छा यह तो बता कि मुझे एकदम नंगी देख कर तुझे कुछ हुआ था।

पता नहीं मम्मी तुम्हें ऊस समय एकदम नंगी देखकर मेरे बदन में ना जाने क्या होने लगा पूरे बदन में गर्मी महसूस होने लगी मेरे माथे से पसीने की बूंदें टपकने लगी और,,,,,,,

( इतना कहकर वह चुप हो गया इस तरह से उसने चुप हो जा देख कर निर्मला बोली।)

और,,,,, और क्या हुआ तो चुप क्यों हो गया बताना,,,,

मम्मी मुझे शर्म आ रही है।

अरे तू शर्मा मत जो भी उस दिन तुझे महसूस हुआ सब कुछ बता दे ( इतना कहते हुए जानबूझकर निर्मला ने अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दी जिससे उसकी भरी भरी छातियां शुभम की आंखों के सामने फड़फड़ाने लगी।

 
निर्मला ने जैसे ही जानबूझकर अपने साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिराई उसकी भारी छातियां ब्लाउज में कैद दोनों कबूतरों के साथ फड़फड़ा कर शुभम की आंखों के सामने आ गए। अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियां को देखकर जो कि अभी भी ब्लाउज में कैद थी,,,, शुभम के मुंह में पानी आ गया और जिस नजरिए से वह अपनी मां की चूची को देख रहा था यह देख कर निर्मला का मन खुशी से झूम उठा वह बड़ी प्यासी नजरों से अपनी मां की चुचियों को देखे जा रहा था। निर्मला भी अपने बेटे की हालत और ज्यादा खराब करते हुए हल्के से अपनी हथेली को अपनी एक चूची पर रखकर उसे सहलाते हुए अपनी जीभ से अपने सुर्ख होठों को गिला करते हुए बोली।

अब बता भी दे कि और क्या हुआ था। ( शीशे से बाहर झांकते हुए) देख मौसम भी कितना रोमांटिक होता जा रहा है शुभम की तो हालत खराब हुए जा रहीे थी, आज वह अपनी मां का एक नया रुप देख रहा था। आज उसकी मां कामसूत्र की कोई मूरत की तरह लग रही थी। उसके हाव भाव उसके बदन की रूपरेखा एकदम काम देवी की तरह लग रही थी।

शुभम के पेंट में उसका टनटनाया हुआ लंड गदर मचाये हुए था। जिसे बार-बार वह हाथ लगा कर बैठ आने की कोशिश कर रहा था निर्मला भी अपने बेटे की इस हरकत को काफी देर से गौर कर रही थी। शुभम के लिए भी अब सब कुछ साफ होता नजर आ रहा था जिस तरह से उसकी मां उसे से जानबुझकर यह सब पूछना चाहती थी उससे बिल्कुल साफ हो गया था कि आज कोई नया अद्भुत अध्याय उसकी जिंदगी की किताब से जुड़ने वाला है। इसलिए वह बोला।

मम्मी ऐसे तो मैं तुम्हें पता तो नहीं लेकिन तुम इतना जोर दे रही हो तो मैं बता रहा हूं लेकिन इसके बाद तुम मुझ पर गुस्सा मत करना।

नहीं करूंगी तू बता तो,,,,,

मम्मी घर के पीछे तुम्हें कपड़े धोते हुए देखकर वह भी एक दम नंगी तो मेरी हालत खराब हो गई मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं तुम्हारी बड़ी बड़ी गाड़ और चिकना बदन मेरे दिल की धड़कन बढ़ाता जा रहा था मेरे माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई थी। जैसे जैसे तुम्हारे हाथों में कपड़े धोने के लिए हरकत हो रही थी वैसे वैसे तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड बड़ी अजीब सी थिरकन लिेए हुए मटक रही थी।

तुम्हारा वह रुप देख कर मेरी आंखें फटी की फटी रह गई थी सच कहूं तो मम्मी इससे पहले मैंने कभी किसी औरत को नंगी देखा ही नहीं था। नंगी औरत कैसी दिखती है मुझे कुछ भी नहीं मालूम था। जिंदगी में पहली बार मैंने किसी औरत को बिना कपड़ो के देखा था तभी तो मेरी सांसे एकदम तेज चलने लगी थी मुझे लेकिन वह समझ में नहीं आया कि जब आप सारे कपड़े धो चुकी थी उसके बाद ना जाने हाथ को इतनी तेजी से कहां रखकर हिला रही थी तुम्हारी पीठ मेरी आंखो के सामने थी इसलिए मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया लेकिन जो भी तुम कर रही थी वह मेरी हालत खराब किए हुए थी। तुम्हें देखकर मेरा लंड एकदम टनटनाकर खड़ा हो गया था।( अपने बेटे की गरम बातें सुनकर निर्मला की हालत खराब होने लगी उसकी भी सांसे धीरे-धीरे तेज चलने लगी थी। धीरे-धीरे अभी भी अपनी जांघों को फैला रही थी जिस पर बार-बार शुभम की नजर पहुंच जाती थी और उसके बदन में ठंडे मौसम में भी गर्माहट फैल जाती थी। निर्मला अपनी एक उंगली को दोनो चुचियों की बीच की गहरी लकीर में हल्के से घुसाते हुए बोली।)

सच! क्या सच में तेरा लंड खड़ा हो गया था जब तेरा लंड खड़ा हो गया तब तूने क्या किया? ( निर्मला की जबान एकदम रंडियों की तरह हो गई थी वह अब अपने बेटे से बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रही थी और जो भी मुंह में आ रहा था अपने बेटे से बोल दे रही थी। और यही सब बातें निर्मला के साथ-साथ शुभम के भी बदन में दबी हुई चिंगारी को भड़काने का काम कर रही थी।)

जब तुम्हें देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया तो मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है मुझे ऐसा लगने लगा कि जैसे मुझे जोरों से पिशाब लगी है और ना चाहते हुए भी मैंने पेंट मेसे अपने लंड को बाहर निकाल लिया।

फिर क्या किया ? (निर्मला उत्सुकतावश बोली)

उसके बाद मुझे कुछ समझ में नहीं आया और मैंने झट से अपने लंड को पकड़ लिया और ना जाने क्यों मैं उसे आगे पीछे करके हिलाने लगा ऐसा मैं क्यों कर रहा था यह मुझे बिल्कुल भी समझ में नहीं आया लेकिन ऐसा करने में ना जाने मुझे क्यों मजा आ रहा था। जैसे जैसे तुम्हारे हाथ की हरकत बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे मेरा हाथ भी जोर जोर से चल रहा था। और कुछ ही देर बाद मेरें लंड मेसे ना जाने कैसा सफेद सफेद पानी बाहर आ गया,,, लेकिन शायद वहां पानी बाहर निकल रहा था तो मुझे ना जाने अजीब प्रकार की सुख की अनुभूति हो रही थी ऐसा अनुभव मैंने इससे पहले कभी नहीं किया था। और मैं वहां से चला गया।

( शुभम भी निर्मला की तरह खोलकर अपनी मां से बातें करने लगा था वो जानबूझकर इतनी गरम गरम शब्दों में उस दिन की बातें बयान कर रहा था यह सब बातें सुनकर निर्मला की बुर ़ एकदम गीली हो चुकी थी। वह गर्म सांसे बाहर छोड़ते हुए बोली।)

शुभम तु तो एकदम से छिछोरा हो गया रे तू भी अपने दोस्तों की संगत में ऊन्ही की तरह करने लगा। अब वाकई में तू बहुत बड़ा हो गया है अच्छा यह बता कि बाद में तूने कब देखा मुझे बिना कपड़ों के।

आज ही तो देखा,,,,( इस बार शुभम एकदम बिंदास होकर बोला।)

आज,,,,,,,, आज कब देख लिया तूने ( निर्मला के चेहरे के भाव बदल रहे थे।)

अरे आज ही तो देखा,,,,,, जब मैं पार्टी में आने के लिए तैयार हो चुका था और मुझे पिशाब लगी तो मैं बाथरुम की तरफ जाने लगा और जैसे ही बाथरूम में पहुंचा तो दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था लेकिन मुझे क्या मालूम था कि अंदर तुम हो। मैं तो एक बार फिर से तुम को देखकर एकदम दंग रह गया उस दिन की एकदम नंगी थी बाथरूम में आज भी तुम एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,,, मम्मी तुम्हारी खूबसूरती नंगे पैर में और भी ज्यादा निकल कर सामने आती है और तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो मेरा मुंह खुला का खुला रह जाता है उस समय भी ऐसा हुआ तुम नहा रही थी और मैं तुम्हें बाथरुम से बाहर खड़ा हो कर देख रहा था और फिर से मेरा लंड टनटनाकर खड़ा हो गया,,,,( शुभम की बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर कामुक मुस्कान तैरने लगी।)

सच मम्मी फिर से तुम्हें नंगी देख कर मेरी हालत खराब होने लगी दिल को मैंने थोड़ा दूर से देखा था लेकिन आज लगभग बिल्कुल करीब से देख रहा था तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पानी मैं भीगी हुई और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी मैं तो बस देखता ही रह गया। मेरी हालत खराब होने लगी मैं अपने आप को संभाल पाता इससे पहले ही आपने वह नजारा मुझे दिखा दीे कि मैं तो पागल होते होते बचा।

ऐसा क्या तू ने देख लिया और मैंने क्या दिखा दिया कि तू पागल होते होते बच गया।

पूछो मत मम्मी कि मैंने क्या देख लिया (अपने लंड को पेंट के ऊपर से सहलाते हुए) मैंने पहली बार तुम्हें पेशाब करते हुए देखा मेरी तो सांसे ही अटक गई मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि मैं या क्या देख रहा हूं मुझे लगने लगा था कि कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा लेकिन सपना नहीं वह हकीकत था।

तुम जैसे ही बैठकर मौत ना शुरू करें ना जाने कहां से सीटी की आवाज मेरे कानों में गूंजने लगी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आवाज कहां से आ रही है बस इतना पता था कि तुम पेशाब कर रही हो मुझसे रहा नहीं गया और मैं अपने कमरे में जा कर एक बार फिर से अपने लंड को हिलाकर पानी निकाल दिया।

( निर्मला तो अपने बेटे की इस बात को सुनकर एकदम हैरान हो गई उत्तेजना और आश्चर्य दोनों के भाव उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहे थे। वह इस बात से बिल्कुल हैरान हो चुकी थी कि उसकी पीठ पीछे इतना कुछ हो गया और उसे भनक तक नहीं लगी। उसका बेटा उसे नंगी देख देख कर अपना लंड हिला कर मुठ मारता रहा लेकिन इस बात का उसे जरा भी अंदाजा ही नहीं हुआ। इसका मतलब था कि वह अपने बेटे को अब तक एकदम नादान समझती थी लेकिन उसका बेटा उसकी सोच से एक कदम आगे ही था।)

वाह बेटा तूने तो कमाल कर दिया मुझे तो इस बात की भनक तक नहीं लगी और तू मेरी पीठ पीछे मुझे एकदम नंगी देख देखकर ना जाने कैसे-कैसे ख्याल करके अपना पानी निकालता रहा।

मम्मी जो कुछ भी हुआ सब अनजाने में हुआ मुझे तो इस बारे में कुछ पता भी नहीं था।

चल कोई बात नहीं मुझे पता है कि यह उम्र ही है ऐसी है अच्छा यह बता कि तूने मेरे बदन का कौन कौन सा हिस्सा देखा है।

लगभग मम्मी मैंने आपके बदन का हर हिस्सा देख लिया हूं,,,

अरे देख लिया है तो बता तो सही कौन कौन सा हिस्सा देखा है नाम लेकर तो बता (निर्मला एक हाथ से धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोली)

मम्मी सबसे पहले तो मैंने आपकी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां को देखा जिसे देख कर मैं एकदम हैरान हो गया और उसके बाद तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड को जिसका मटकना हालत खराब कर देता है।

और क्या देखा तूने,,,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला ब्लाउज के पहले बटन को खोल चुकी थी जिस पर शुभम की नजरें गड़ी हुई थी।)

बस मम्मी इसे ज्यादा मैंने और कुछ नहीं देखा,,,,,

क्या इससे ज्यादा तूने और कुछ नहीं देखा और तू कहता है कि मैंने सब कुछ देख लिया,,,, तूने औरतों के सारे अंग को देख लिया लेकिन औरत के मुख्य द्वार को अभी तक नहीं देख. पाया,,,,

मुख्य द्वार ये मुख्य द्वार क्या होता है मम्मी?( शुभम भोलेपन से बोला।)

तो सच में बुद्धू है अरे मुख्य द्वार मतलब जिसे बूर कहते हैं।

वह तो तूने देखा ही नहीं और तो मुझे कह रहा है कि तूने मुझे पेशाब करते हुए देखा।

हां मम्मी मैंने सच में तुम्हें पेशाब करते हुए देखा हूं लेकिन तुम्हारी बुर को मेने नहीं देख पाया।

पेशाब करते हुए देखा लेकिन पेशाब कहां से निकलती है तुझे नहीं दिखाई दिया।

नहीं मम्मी मैं सच कह रहा हूं पेशाब करते हुए देखा लेकिन पेशाब कहां से निकलती है वह मुझे नहीं दिखाई दिया क्योंकि आप बैठी हुई थी तो मुझे ठीक से नहीं दिखा।

पागल जिसमें से पेशाब निकलती है उसे ही बुर कहते हैं। और इसी बुर को पाने के लिए तो दुनिया का हर मर्द तड़पता रहता है तुझे पता है,,,,, अच्छा तु यह बता तूने कभी किसी औरत को चुदवाते या किसी आदमी को चोदते देखा है?

( भीगती तुफानी बारीश मे कार के अंदर का तापमान एकदम गर्म हो चुका था। दोनों मां बेटे की गर्म बातों से कार के अंदर का माहौल एकदम गर्म हो चुका था दोनों कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आपस में बैठकर इस तरह से गंदी बातें करेंगे और एक दूसरे के अंगों को प्यासी नजरों से देखेंगे लेकिन अब यह एक दम सच हो चुका था तूफानी बारिश में हाईवे के किनारे सुनसान जगह पर जंगली झाड़ियों के बीच दोनों मां बेटे किसी एक नए सफर के लिए निकल चुके थे जिसमें दोनों अपनी वासना का तूफान लिए दरिया को पार करने की पूरी कोशिश कर रहे थे।

गरम पात्रों की वजह से निर्मला की बुर पूरी तरह से की जा चुकी थी उसका एक बटन खुला हुआ था उसके चेहरे पर कामुकता साफ नजर आ रहीे थीे, यही हाल शुभम का भी था पेंट में उसका लंड तूफान मचाए हुए था वह बाहर आने के लिए तड़प रहा था जिसे वह बार बार अपने हाथों से शांत करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह शांत होने की वजह और भी ज्यादा भड़क रहा था। अपनी मां के कामुकता से भरे इस सवाल का जवाब देते हुए शुभम बोला।)

नही मम्मी मैंने आज तक ऐसा कुछ भी नहीं देखा,,,

क्या बेटा तू क्या करता है इतना हैंडसम हो कर के भी इस उम्र में तूने अब तो कुछ भी नहीं देख पाया। तुझे पता है एक आदमी अपने लंड को औरत के किस अंग में डालकर उसे चोदता है।

( निर्मला के इस सवाल पर शुभम के चेहरे पर पसीने की बूंदे साफ झलतने लगी ऐसे ठंडे मौसम में भी दोनों मां बेटे के बदन से पसीना टपक रहा था। शुभम अपनी मां के सवाल का क्या जवाब दे उसके पास कोई जवाब नहीं था क्योंकि उसने आज तक चुदाई नामक कामक्रिडा को देखा ही नहीं था। उसे यह बिल्कुल भी नहीं पता था कि औरत अपनी किस्मत में आदमी की नंगी को बुला कर चुदवाती है जो आदमी अपने लंड को औरत की किस अंग में डाल कर चोदता है । इन सब बातों से शुभम बिल्कुल अंजान था उसने बस दोस्तों से सुन रहा था था चोदना चुदाई करना चुदवाना,,,, इन सब का उल्लेख वह शब्दों से ही जानता था। इतना तो उसे पता था कि यह सब करने से औरत और मर्द दोनों को आनंद ही आनंद आता है। लेकिन कैसे करते हैं यह उसे नहीं मालूम था। इसलिए अपनी मां के सवाल पर वह खामोश ही रहा लेकिन निर्मला शुभम की खामोशी को तोड़ते हुए बोली।)

क्या हुआ बता,,,,, तुझे नहीं मालूम है क्या?
 


( इस बार सुबह अपनी मां की अधनंगी जांघो और ब्लाउज के खुले बटन मैसे आधे से ज्यादा बाहर निकली हुई चूचीयो की तरफ पैंट के ऊपर से अपने लंड को मसलता हुआ ना में सिर हिला दिया। और अपनी बेटे का इशारा समझ कर वह मुस्कुराने लगी,,,, अपने बेटे के इशारे पर उसे वह समझ गई कि उसका बेटा वाकई में इस मामले में एकदम बुद्धू है भले ही उसके पास घोड़े के लंड की तरह हथियार है लेकिन उसकी बातों से साफ पता चलता है कि उसने अभी तक अपने लंड को सिर्फ हाथों से ही लाया है उसने अभी तक किसी भी लड़की या औरत की बुर का स्वाद नहीं चखा है। इस बात से वह एकदम प्रसन्न हो गई की उसका लड़का अभी तक एक दम कुंआरा था और सितल की बात याद आते हीै उसके मन में सतरंगी तरंग बजने लगे कि इस उम्र में जवान लंड से चुदवाने का मजा ही कुछ और होता है।.. निर्मला के होठो पर कुटिल मुस्कान फैल गई वह अपने बेटे की नादानी देख कर खुशी से गदगद होने लगी। उसे बड़ा अजीब लगा कि इस उम्र में उसका बेटा अभी तक यह नहीं जानता कि लड़के लड़की के किस अंग में लंड डालकर उसे छोड़ते हैं बल्कि उसकी उम्र में तो लड़की ना जाने क्या-क्या कर चुके होते हैं। निर्मला अपने बेटे की तरफ देखकर अपनी जवानी का जलवा दिखाते हुए मुस्कुराते हुए बोली।)

क्या सच में तुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम है कि लंड किस अंग में डाल कर चुदाई की जाती है या तो सिर्फ ऐसे ही भोला बन रहा है।

सच मम्मी मुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम मैंने तो अभी तक कुछ देखा ही नहीं तो कैसे बता दूं।( शुभम के बदन मे भी उत्तेजना की लहर पुरी तरह से अपना जाल बिछा चुकी थी इसलिए वह अपनी मां की आंखों के सामने जो अभी तक लंड को पैंट के ऊपर से ही दबा दे रहा था वह अब जान बूझकर मसलने लगा था।यह देखकर निर्मला की भी बुर कुलबुलाने लगी थी। उत्तेजना के मारे निर्मला का चेहरा लाल लाल हो गया था जोकिं इस समय बेहद कामुक लग रहा था।

वो फिर से अपने सूखे होंठ पर जीभ फिराते हुए बोली।)

क्या शुभम मुझे तो लगता था कि मेरा बेटा जरूर दो चार लड़कियों को अपनी गर्लफ्रेंड बना कर रखा होगा।

( अपनी मां की बात सुनकर शुभम हंसने लगा और शुभम को इस तरह हंसता हुआ देखकर निर्मला बोली।)

क्यों क्या हुआ हंस क्यों रहा है।

अब हंसु नहीं तो क्या करूं मम्मी मुझे देखकर तुम्हें ऐसा लगता है कि मैं ऐसा कर सकता हूं।

क्यों तुम मर्द नहीं ह?

ऐसी बात नहीं है मम्मी,,,,,

फिर कैसी बात है,,,, हथियार तो बड़ा भारी रखा है,,,, लगता ही नहीं कि इंसान का है।

( शुभम अपनी मां की यह बात सुनकर उसे एकटक देखने लगा उसे समझ में नहीं आया कि उसकी मां क्या कह रही है बहुत बड़े ही आश्चर्य के साथ अपनी मां को देखते हुए बोला।)

क्या मतलब मैं कुछ समझा नहीं,,,,,,

तू सच में एकदम बुद्धू का बुद्धू ही है। इतना भी नहीं समझता। अच्छा क्या तुझे गर्मी महसूस हो रही है। ( निर्मला अपने माथे पर से पसीने को पोंछते हुए बोली।)

हां मम्मी मुझे भी गर्मी महसूस हो रही है देखो मेरे माथे पर भी पसीना ऊपस आया है,,,,।

तुझे मालूम है ऐसी बारिश के मौसम में पूरा वातावरण ठंडा हो जाता है और ऐसे में गर्मी महसूस नहीं होनी चाहिए लेकिन इस गर्मी के महसूस होने का कारण तु शायद नहीं जानता।

क्या कारण है मम्मी?

हम दोनों जिस तरह की बातें कर रहे हैं यह उन बातों में थोड़ी मस्ती की गर्मी है। तू भी अच्छी तरह से जानता है कि तेरे दोस्त भी इसी तरह की बातें करते हैं। और उनकी बातों को सुनकर तुझे भी मजा आता है सच सच बताना सुबह तेरे दोस्तों की बातें सुनकर तुझे भी मजा आता था ना। देखो झूठ मत बोलना सब कुछ खुलकर बोले झुकाते हैं अभी बोल दो आज की रात तेरे और मेरे बीच में शर्म की कोई दीवार नहीं होनी चाहिए मैं तुझसे पहले ही कह चुका हूं कि तुम मुझसे अपना दोस्त अपनी गर्ल फ्रेंड समझ कर बात कर,,,,,

हां मम्मी उन लोगों की बातें गंदी जरूर थीै लेकिन मुझे भी मजा आता था।

तो जब वो तेरी मम्मी के बारे में मतलब कि मेरे बारे में गंदी बातें कर रहे थे तो तो तू ऊनसे झगड़ा क्यों करने लगा,,,,।

तो क्या करता वह लोग तुम्हारे बारे में गंदी गंदी बातें कर रहे थे और ऐसी गंदी गंदी बातें जो कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था तो ऐसी बातें सुनकर मुझे गुस्सा आ गया और,,,,, और मैं उन लोगों से झगड़ा कर बैठा।

( अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला मुस्कुराने लगी और मुस्कुराती भी कैसे नहीं क्योंकि उसे भी अपने लिए उसके दोस्तों से उसका झगड़ा करना अच्छा लगा,,, तभी वह मुस्कुराते हुए अपने ब्लाउज की दूसरे बटन को भी खोलते हुए बोली।)

देख लगता है कि हम दोनों की बातें कुछ ज्यादा ही गर्म होती जा रही है इसलिए मुझे गर्मी कुछ ज्यादा ही लग रही है। ( ऐसा कहते हुए लेकिन मेरा नहीं अपने दूसरे बटन को भी खोल दी दूसरे बटन के खुलते ही उसकी आधे से भी ज्यादा चूचियां ऐसा लग रही थी कि अभी ब्लाउज की बाकी बचे बटन को तोड़कर बाहर आ जाएंगी। शुभम तो यह नजारा देख कर उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच गया उसकी सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी और वह अपनी फटी आंखों से अपनी मां के सीने की गोलाइयों को देखने लगा। सांसों के साथ साथ ऊपर नीचे होती हुई निर्मला की चूचीयां किसी समुंदर में तैरते हुए पहाड़ की तरह लग रही थी। निर्मला भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके हुस्न का जादू शुभम पर पूरी तरह से छा चुका था। निर्मला को अपनी बेटी की हालत पर हंसी आ रही थी आज पहली बार निर्मला ऐसे हालात के दौर से गुजर रही थी कि किसी के सामने वह अपने हुस्न का जलवा बिखेरते हुए अपने अंदर दबी हुई चिंगारी को भड़का रही थी। आज वह अपने बेटे के साथ रिश्तो की मर्यादा को तार-तार करने के लिए पूरी तरह से उतारू हो चुकी थी। बरसों की प्यासी निर्मला आज हर रिश्ते को भूल जाना चाहती थी । समाज के पन्ने पर लिखे हुए मां-बेटे के रिश्ते को वह वासना के रबड़ से मिटा देना चाहतेी थी। शुभम की सबसे बड़ी तेजी चल रही थी और उसका हाथ उसके लंड पर पेंट के ऊपर से ही उसे सहना रहा था वह भी अपनी शर्म को भूल चुका था इसमें उसकी भी कोई गलती नहीं थी हालात ही कुछ ऐसे बन चुके थे कि जिससे नजर. फेर पाना ऊसके बस मे नहीं था और वह कर भी क्या सकता था जिस उम्र के दौर सेवह गुजर रहा था ऐसे मैं अक्सर जवान होते लड़को की नजर ना चाहते हुए भी आपसी रिश्तो के पीछे छुपे खूबसूरत आकर्षण के प्रति आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाते।

यही हाल शुभम का भी हो रहा था उसके सामने तो रूप खूबसूरती और सेक्स से भरा हुआ एक पतीला पड़ा था जिसमें से वह पेट भरना चाहता था,,, अपनेी प्यास को बुझाना चाहता था अपनी भुख मिटाना चाहता था। लेकिन स्वादिष्ट व्यंजन से भरे हुए पतीले में वह हाथ बढ़ाने से डरता था जबकि निर्मला तो खुद ही शुभम के सामने परोसी हुई थाली बन कर बैठी थी। भाभी शुभम के आगे हाथ बढ़ाने का इंतजार कर रही थी लेकिन उसकी हालत देखकर वह समझ गई थी कि शुभम से कुछ होने वाला नहीं है जो भी करना है उसे ही करना होगा।

रात गहराती जा रहे थे बादल अभी भी बरस रहे थे और साथ में गरज भी रहे थे दूर-दूर तक खाली बिजली के चमकने की रोशनी नजर आ रही थी सब कुछ वीरान पड़ा था ऐसे में निर्मला और शुभम एक ही कार में बैठ कर एक दूसरे के मन को उधेड़ रहे थे। आपसी बातचीत के दौरान दोनों को एक दूसरे को समझने में काफी मदद मिल रही थी। दोनों इतना तो जान ही चुके थे कि इस तूफानी बारिश का दूसरा अध्याय दोनों के लिए कुछ अजीब और अद्भुत लेकर आने वाला है।

निर्मला सही मौके का इंतजार कर रहे थे अपनी जिंदगी में जिसने कभी गाली को भी अपने होठों पर नहीं आने दी थी आज वह खुद अपने बदन को अपने बेटे के सामने खोलकर धीरे-धीरे उसे उकसा रही थी। उसकी साड़ी जांघो पर चढ़ी हुई थी ब्लाउज के दोनों बटन खुले हुए थे जिसमें से आधे से भी ज्यादा चुचीयां बाहर को लटकी हुई थी। यह सब देख कर शुभम की हालत संभाले नहीं संभल रही थी वह अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही मसल रहा था। अपने बेटे को इस तरह से उसकी आंखों के सामने लंड को मसलता हुआ देखकर निर्मला की बुर में चीटियां रेंगने रखी थी। वह अपने बेटे के हथियार को अच्छी तरह से अपने हाथों में लेकर देख चुकी थी इसके लिए वह जानती थी कि उसमें कितना दम है बस आजमाना बाकी था। निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि उसके एक इशारे पर उसका बेटा उस पर टूट पड़ेगा और बरसों से ना बुझने वाली प्यासा कौ वह अपने लंड से रगड़ कर एकदम तृप्त कर देगा। निर्मला अपने आपको अपने बेटे के साथ सांभोगिक मुठभेड़ के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी लेकिन फिर भी अभी आगे बढऩे मैं थोड़ा सा कतरा रही थी। अभी भी थोड़ी सी झिझक ऊसके अंदर बाकी थीै और वह इस झिझक को बातचीत से खत्म करना चाहती थी।

रात काफी हो चुकी थी रात के तकरीबन 1:00 बज चुके थे। बातों की मस्ती में दोनों इस तरह से खोए की समय का ऊन्हे जरा भी पता ही नहीं चला। दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर थी दोनों को नींद नहीं आ रही थी। हाथ में बड़ी गाड़ी पर नजर गई तो निर्मला के होश उड़ गए कब तीन-चार घंटे बीत गए उसे पता ही नहीं चला। उसे अब इस बात का डर था कि अगर ऐसे ही सिर्फ बातों में ही उलझे रहे तो सुबह हो जाएगी और यह सुनहरा मौका उसके हाथ से निकल जाएगा। बारिश थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। शुभम प्यासी आंखों से अपनी मां को गोरे जा रहा था ।और उसका यह घूरना निर्मला को बेहद आनंद की अनुभूति करा रहा था। निर्मला समय को ऐसे गुजरने नहीं देना चाहती थी इसलिए वह हाथ में घडी घडी की तरफ देखते हुए शुभम से बोली।

अरे सुबह देखो तो बातों ही बातों में कब समय गुजर गया इसका पता ही नहीं चला 1:00 बज रहा है।

क्या बात कर रही हो मम्मी सच में 1:00 बज रहा है।

हां रे ले तू भी देख ले (शुभम की तरफ घड़ी दीखा़ाते हुए)

हां मम्मी सच में समय का तो पता ही नहीं चला।

अब तो शीतल की पार्टी भी ना जाने कब से खत्म हो चुकी होगी हम लोग उसकी पार्टी में जा नहीं पाए,,,,, लेकिन शुभम तू सच बताना पार्टी से ज्यादा मजा तुझे इधर एकांत में मेरे साथ आ रहा है कि नहीं।

हां मम्मी तुम सच कह रही हो पार्टी से ज्यादा मजा इधर आ रहा है । (शुभम अपनी मां की चुचियों की तरफ देखता हुआ बोला)

तु शायद नहीं जानता कि मैं तुझसे ऐसी बातें क्यों कर रही हूं मेरे अंदर यह सब बरसों से दबा हुआ है मैं यह सब बातें तेरे पापा से करना चाहती थी और एक पति भी अपनी पत्नी से इसी तरह की बातें करता है मस्ती करता है लेकिन तेरे पापा को मुझ पर ध्यान ही नहीं देते (इतना कहते हुए निर्मला में थोड़ा सा अपने घुटनों को मोदी जिससे उसकी सारी पूरी तरह से उसकी कमर तक चल गई और उसकी लाल रंग की पैंटी नजर आने लगी शुभम की नजर सीधे अपनी मां की पैंटी पर चली गई और वह अपने मां की लाल पेंटिं को देखे कर एकदम से उत्तेजना का अनुभव करने लगा और उसकी सांसे तेज चलने लगी उसका हाथ अपने आप पेंट के ऊपर से लंड को जोर-जोर से मसलने लगा,,,, यह तो बड़ा ही काम उत्तेजना से भरपूर नजारा था और एक जवान होते लड़के के लिए यह तो बेहद ही कामोत्तेजना और रोमांच से भरा हुआ नजारा था। निर्मला को भी आवास हो गया कि उसका लड़का और की पेंटिं को देखकर एकदम उत्तेजित हो चुका है लेकिन वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

शुभम सहाय तू नहीं जानता कि तेरे पापा मुझसे हमेशा कटे कटे से रहते हैं मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते इसलिए मैं हमेशा अपने दुखों को छुपा कर अपने चेहरे पर बनावटी हंसी लाकर दुनिया के सामने रहती हूं।

क्या बात कर रही हो मम्मी क्या पापा तुमसे प्यार नहीं करते?

अगर करते होते तो क्या मुझे तुझसे इस तरह की बातें करने की जरूरत पड़ती।( इतना कहते हुए उसने इस बार अपनी हथेली को अपनी पैंटी पर रखकर हल्के हल्के से सहलाने लगी यह नजारा देखकर शुभम से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह गर्म आहें भरते हुए इस बात ना चाहते हुए भी पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को मुट्ठी में भर लिया और यह देखकर निर्मला झट से बोली।)

क्या बात है बेटा मैं काफी देर से देख रही हुं कि तू बार बार अपना हाथ अपने लंड पर रख दे रहा है तुझे अभी भी आराम नहीं मिला है क्या?

( अपनी मां के मुंह से लंड शब्द सुनकर उसका लंड और भी ज्यादा टनटना गया। लेकिन वह बहाना बनाते हुए बोला।)

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है मम्मी मुझे जोरों से पेशाब लगी है।

अरे तो फिर इतनी देर से तु रोका क्यों है कर क्यों नहीं लिया।

रुको मम्मी में करके आता हूं।

( अपने बेटे की बात सुनते ही देखें उसके दिमाग की बत्ती जली हो और उसने तुरंत अपने बेटे को रोकते हुए बोली।)

रुक जा बेटा कार से नीचे मत ज ऐसी तूफानी बारिश में इस जंगल झाड़ी में सांप बिच्छू के होने का खतरा बना रहता है।

तो मैं पेशाब केसे करूंगा मम्मी,,,,

रुक जा में शीशा नीचे कर देती हुं तु यहीं से पेशाब कर ले,,,,

ऐसे में मम्मी तुम्हारे सामने में कैसे कर सकता हूं।

अरे पागल अब मुझसे शर्माने की क्या जरूरत है रुक जा में शीशा नीचे कर देती हूं।( इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने बेटे के करीब आ गई और वहां से सीशे को नीचे करने लगी,,,)

ले अब कर ले,,,,

( शुभम की हालत खराब हुए जा रही थी उसे सच में पेशाब लगी थी उसका लंड पूरी तरह से पेंट के अंदर खड़ा था और ऐसे मैं उसे अपनी मां के सामने पेशाब करने में शर्म आ रही थी। निर्मला अपने बेटे की स्थिति को अच्छी तरह से समझ गई और वह बोली।)

अच्छा रुक जा मैं जानती हूं तू मेरे सामने शर्मा रहा है,,, मैं ही तेरे लंड को तेरे पेंट से बाहर निकाल देती हूं उसके बाद तो पेशाब कर लेना,,,,

( शुभम कुछ सोच पाता इससे पहले ही निर्मला झट से उसके पेंट के बटन को खोलने लगी निर्मला के बगल में झुनझुनी सी फेल जा रही थी जब वह अपने बेटे के पेंट में बने तंबू को देख रही थी। निर्मला आज वासना के वशीभूत होकर वह भी करने को तैयार हो गई थी जो कि उसने आज तक अपनी पती के साथ भी नहीं की थी इस तरह से वह अपने पति के पेंट को नहीं खोली थी। अगले ही पल निर्मला ने अपने बेटे की पेंट को खोलकर जांगो तक सरकादी और अंडरवियर को भी नीचे सरका दि,, जेसे ही उसका खड़ा लंड अंडरवियर के बाहर आया तो वह हवा में झूलने लगा जिसे देखकर निर्मला की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी। वह आंख फाड़े अपने बेटे के लंड को ही देखे जा रही थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने बेटे के लंड के मोटे सुपाड़े को देखकर उसका मन एकदम से ललच रहा था। उसके जी में तो आ रहा था कि वह अपने बेटे के लंड को मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूस डाले,,,,,, तभी निर्मला की नजर अपने बेटे की नजर से टकराई तो वह बेशर्मों की तरह अपने बेटे की आंख से आंख मिला कर देखने लगी,,,, शुभम भी अपनी मां की नजर में वासना का उठा हुआ तूफान देख रहा था जिसके अंदर वह खुद को डूबता हुआ नजर आ रहा था शुभम की हालत एकदम खराब हो रही थी अजब सा माहौल बना हुआ था तूफानी बारिश ठंडा मौसम उसके बावजूद भी कार का तापमान एकदम गर्म था। उत्तेजना के मारे निर्मला का गला सूख रहा था उसका चेहरा लाल सुर्ख हो चुका था वह अपने बेटे के लंड को अपने हथेली में पकड़ कर ना चाहते हुए भी ऊपर नीचे कर के हिलाते हुए बोली,,,,

देख मैं ना कहती थी कि तेरा हथियार देख कर लगता ही नहीं कि इंसान का हथियार है।( शुभम अपनी मां की बात सुनकर एकदम खामोश था और कह भी क्या सकता था और निर्मला शुभम के लंड को पकड़ कर गाड़ी की खिड़की से थोड़ा सा बाहर निकाल कर बोली,,,)

अब ले मूत ले,,,,,,,

निर्मला का इतना कहना था कि शुभम के लंड से पेशाब की पिचकारी निकलने लगी जो की बड़ी तेज रफ्तार से निकल रही थी। शुभम के लंड को निर्मला अभी भी अपनी हथेली में कस के पकड़े हुए थी। शुभम की उत्तेजना का ठिकाना ना था उसे इस पल बेहद आनंद के अनुभूति हो रही थी वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी पल आएगा। निर्मला को बस एक टक अपने बेटे के लंड को और उसमें से निकलती तेजधार को देखे जा रही थी। शुभम पेशाब गाड़ी के बाहर कर रहा था लेकिन गिली उसकी बुर हो रही थी। निर्मला भी ईससे पहले किसी मर्द को पेशाब करते हुए नहीं देखी थी। निर्मला से रहा नहीं गया तो वह एक हाथ से पेंटी के ऊपर से अपनी बुर को मसलने लगी जो कि काफी गीली हो चुकी थी। निर्मला की पल-पल हालत खराब होती जा रही थी और कुछ ही देर में शुभम एकदम हल्का हो गया लेकिन उसके लंड का तनाव एकदम बरकरार था।

कार के अंदर का माहौल अब पूरी तरह से घर में आ चुका था शुभम पेशाब कर चुका था लेकिन उसे पैंट पहनने की शुध बिल्कुल भी नहीं थी,,,, ज्यों का त्यों वह अपनी मां की आंखों में देखता हुआ वहीं बैठ गया,,,, उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था जो कि अभी भी निर्मला के ही हाथ में था निर्मला भी नहीं चाहती थी कि शुभम पैंट पहनकर इस अद्भुत नजारे पर पर्दा गिरा दे। निर्मला को भी पेशाब का अनुभव होने लगा उसे भी जोरों की पेशाब आई थी। वह अपने बेटे के लंड को हाथ में लिए हुए ही सोचने लगी कि,,,, यही सही मौका है उसे अपने बेटे को अपनी बुर दिखाने का है जिसे उसने आज तक नहीं देख पाया था। वह मन ही मन पूरी तरह से अपने मन में यह धारणा बना ली थी कि वह अपनी रसीली बुर अपने बेटे को दिखा कर उसे संभोग के लिए उत्तेजित और उत्साहित कर लेगी,,, उसे अपनी इस धारणा पर पक्का विश्वास था कि उसका बेटा उसकी चिकनी रसीली बुर को देखेगा तो जरुर ऊसे चोदने के लिए तड़प ऊठेगा।

 
निर्मला के हाथ में अभी भी उसके बेटे का टनटनाया हुआ लंड था जिसे वह रह रह कर आगे पीछे कर के हिला दे रही थी। शुभम के चेहरे पर उत्तेजना की आवाज साफ नजर आ रही थी उसका मुंह खुला हुआ था और वह जोर जोर से सांसे ले रहा था हल्के होने के बावजूद भी उसके बदन में भारी-भारी सी गुदगुदी सी हो रही थी उसे उम्मीद नहीं थी कि आज की रात उसके साथ कुछ ऐसा होगा,,,,, शुभम अपनी मां की आंखों में देख रहा था और उसकी आंखों में वासना का समंदर साफ नजर आ रहा था उसे अपनी मां की कही गई बात याद आने लगी थी आज हम लोग कार में ही पार्टी मनाएंगे,,,,, निर्मला का दहकता बदन शुभम पर सोने बरसा रहा था उसकी अधनंगी आधी चूचियां किसी जीते-जागते बंम से कम नहीं थी जो कि कभी भी शुभम के सीने पर फट सकती थी। निर्मला की हथेली में शुभम का गरम लंड और भी ज्यादा टाइट हो चुका था निर्मला को शुभम के लंड का सुपाड़ा किसी हथौड़े की तरह ही मजबूत लग रहा था वह मन ही मन उस सुपाड़े को अपने बुर की दीवारों पर रगड़ता हुआ महसूस कर रही थी। निर्मला के बर्तन में उत्तेजना और वासना पूरी तरह से सवार हो चुका था वह धीरे-धीरे अब अपने बेटे के लंड को मुठीयाना शुरु कर दी जिसमें शुभम को भी बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी। अब तो निर्मला के लिए भी पीछे हट पाना बड़ा मुश्किल था बरसों से प्यासी बदन में चुदास से भरी हुई चिंगारी,, धीरे धीरे भड़क रही थी।

निर्मला शुभम के खड़े लंड को मुठीयाते हुए बोली,,,

शुभम लगता है कि तुझे काफी देर से पेशाब लगी थी लेकिन तूने अब तक किया क्यों नहीं,,,,

क्या करता मम्मी पेशाब करने गया था बाथरूम में लेकिन वहां तुम एकदम नंगी होकर नहा रही थी तो मेरी पेशाब ही बंद हो गई।

( शुभम की बात सुनते ही निर्मला को हंसी आ गई और हंसते हुए बोली।)

क्या शुभमं इस तरह से कोई अपनी पेशाब रोकता है अरे चले आना चाहिए था ना बाथरूम में,,,, जैसे अभी मेरे सामने पेशाब कर रहा है वैसे उधर भी कर लिया होता।

तुझे पेशाब करता हुआ देखकर मुझे भी पेशाब लग गई। अब क्या करूं कैसे करूं मैं भी कार के नीचे नहीं जा सकती नीचे पानी पानी होगा और घास झाड़ियों में जंगली जानवरों के होने का खतरा बना ही रहता है और बारिश भी बहुत तेज हो रही है। ( निर्मला जान बुझकर इस तरह से बोल रही थी क्योंकि वह शुभम के मन की बात जानना चाहती थीे ।वह देखना चाहती थी कि शुभम क्या कहता है। लेकिन शुभम क्या कहता वह तो खुद ही अचंबित हो चुका था अपनी मां के मुंह से पेशाब लगने की बात सुनकर। उत्तेजना के मारे निर्मला के हाथ में ही उसका लंड ठुनकी लेने लगा,,, निर्मला अबी भी शुभम की तरफ सवालिया नजरों से देख रही थी। शुभम यही चाहता था कि उसकी मां उसकी आंखों के सामने ही पेशाब करें वह फिर से आज बाथरूम वाले नजारे को एकदम नजदीक से देखना चाहता था। इसलिए वह अपनी मां से बोला।

मम्मी तुम भी यही कर लो,,,,,

यहां पर लेकिन मैं कैसे कर सकती हूं तू तो लड़का है कहीं से भी खड़ा होकर कर लेगा लेकिन मैं,,,,,

तो क्या हुआ मम्मी तुम भी मेरी तरह सीट पर घुटने के बल बैठ कर बाहर की तरफ कर लो,,,,,

तू ठीक कह रहा है,,,, ( इतना कहने के साथ ही निर्मला कार की सीट पर थोड़ा सा पाव को ऊपर की तरफ रख कर,,,, अपनी कमर को कार की खिड़की की तरफ़ थोड़ा सा आगे बढ़ा ली,,,,, शुभम तो एकदम खुश हो गया और अपनी मां के इस फैसले पर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी उसके दिल की धड़कन तेज होने लगी,,,, उसे लगने लगा कि आज वह है जो अभी तक नहीं देख पाया आज उस अंग को देख लेगा और वह भी एक दम करीब से,,, निर्मला भी होशियार थी वह एक हाथ स्टेरिंग पर रखकर और दूसरे हाथ से सीट को पकड़ ली और ऐसा जताने लगी की वह सहारा लेकर खड़ी है और स्टेरिंग और सीट पर से अपने हाथ को हटा नहीं सकती। शुभम ठीक अपनी मां के पीछे ही था और अपनी मां की हरकत को देख रहा था उसकी साड़ी घुटनों तक चढ़ी हुई थी और निर्मला की बड़ी बड़ी गांड साड़ी में होने के बावजूद भी शुभम के ऊपर कहर बरसा रही थी वह फटी आंखों से अपनी मां को देखे जा रहा था। तभी निर्मला पीछे की तरफ नजर घुमाकर शुभम से बोली।

शुभम मैं अपनी साड़ी ऊपर नहीं कर सकती क्योंकि मैं दोनों हाथों से टेका ली हुई हूं। तू खुद ही मेरी साड़ी को ऊपर चढ़ा कर मेरी मदद कर दे।

इतना सुनते ही शुभम की तो सांसे ऊपर नीचे हो गई उसकी मां जो करने को कह रही थी उसे करने के लिए दुनिया का कोई भी मर्द तुरंत तैयार हो जाए यहां तो निर्मला खुद अपने बेटे से कह रहे थे जो कि वह अपनी मां की खूबसूरत बदन से पूरी तरह से आकर्षित हो चुका था। उसका दिल जोरो से धड़कने लगा वह कभी सोच नहीं सकता था कि उसकी मां उससे ऐसा कुछ कराएगी,,,, वह तोें अपनी मां की साड़ी ऊपर उठाने के लिए पहले से ही तैयार बैठा था,, बस अपनी मां के इशारे का इंतजार कर रहा था। इशारा मिलते ही उसने तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर दोनों छोर से साड़ी को पकड़ लिया और धीरे-धीरे उपर की तरफ उठाने लगा,,,, जैसे-जैसे साड़ी ऊपर की तरफ उठ रही थी वैसे वैसे निर्मला की नंगी जांघ चमक उठ रही थी,,,, शुभम की हालत खराब हुए जा रही थी उसके लंड की ऐंठन बढ़ती जा रही थी निर्मला भी बराबर नजर घुमाकर अपनी बेटे की हरकत को देख रही थी।

धीरे-धीरे करके आखिरकार शुभम ने अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा ही दिया,,,, निर्मला की बड़ी-बड़ी और वराह अवतार गांड लाल पैंटी में लिपटी हुई शुभम की आंखों के सामने लपलपा रही थी उसे छल रही थी अपनी मायाजाल में और शुभम अपनी मां के नितंबों के माया जाल में फंसता चला जा रहा था और फंसता भी कैसे नहीं इस मायाजाल से आज तक कोई भी मर्द बच नहीं पाया तो शुभम. क्या चीज है। शुभम अपनी मां के नितंबों को फटी आंखो से देखे जा रहा था और उसकी मां भी नजरें घुमा कर अपने बेटे की हालत को देख कर मन ही मन मुस्करा रही थी। शुभम कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसकी मां बोली,,,

बेटा मैं अपने हाथों से अपनी पेंटिंनहीं निकाल पाऊंगी तू खुद ही मेरी पैंटी को नीचे कर दे,,,,,

( शुभम को तो मुंह मांगी मुराद मिल रही थी उसने तुरंत अपने कांपते हाथों को आगे बढ़ाकर अपनी उंगलियों को पैंटी के दोनों छोर पर फसा लिया और धीरे-धीरे पैंटी को नीचे सरकाने लगा,,,, जैसे जैसे शुभम अपने कांपते हाथों से पेंटिं को नीचे सरका रहा था वैसे वेसे वह नंगी होती चली जा रही थी। और अगले ही पल शुभम ने अपनी मां की पैंटी को खींच कर नीचे जांघो तक कर दिया। अब शुभम की आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड कार की डिम लाइट में चमक रही थी। वह अपनी नजर उठा कर अपनी मां की तरफ देखा तो उसकी मां उसे धन्यवाद देते हुए बोली।

थैंक्यू बेटा मदद करने के लिए ( और इतना कहने के साथ ही वह छल छला कर पेशाब करने लगी,,, बुर से पेशाब की धार निकलते ही उसमें से सीटी की आवाज आने लगी और उसकी आवाज शुभम के कानों में पड़ते ही वह बेचैन हो गया

वह एकदम तड़प उठा और अपने आप ही वह थोड़ा सा आगे आकर अपनी मां की बुर से निकलती पेशाब की धार को देखने लगा,,,,ऊफ्फ्फ्फ,,,,,, यह नजारा देखकर शुभम के मुंह से गर्म आह निकलने लगी वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा अद्भुत नजारा वो कभी इतने करीब से देख पाएगा,,,

मोह माया छल कपट प्यार वासना जादू सब कुछ था इस नजारे में और ऐसे नजारे को देखकर भला कौन सा दर्द होगा जो जानबूझकर इस अद्भुत नजारे को ना देख कर अपना मुंह मोडेगा। शुभम तो फटी आंखों से अपनी मां की बुर से निकलते पेशाब की धार को देखकर एकदम कामोत्तेजित हो गया। निर्मला अपने बेटे की हालत को देख कर मुस्कुरा रहेी थी,, और वह मुस्कुराते हुए बोली।)

ले ठीक से देख लें इसमें से ही पेशाब निकलती है जिसको बुर कहते हैं। ( जिस तरह से उसकी मां मुस्कुराकर बता रही थी उसकी मुस्कुराहट देखकर सुभम के दिल पर बिजलियां गिर रही थी,, आश्चर्य के साथ उसका मुंह खुला का खुला रह गया था वह कभी अपनी मां की बुर से निकल रही पेशाब को देखता तो कभी अपनी मां की तरफ देखता,,, उसकी हालत एकदम कटे मुर्गे की तरह हो गई थी। बदन बुरी तरह फड़फड़ा रहा था लेकिन जान नहीं निकल पा रही थी।

निर्मला की भी उत्तेजना की कोई सीमा नहीं थी उसने अपने जीवन में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव कभी नहीं की थी। गजब का नजारा बना हुआ था वह भी कभी नहीं सोच सकती थी कि ऐसा पल उसकी जिंदगी में आएगा कि वह अपने बेटे के सामने ही उसकी आंखों के सामने ही खुद उसके हाथों से ही अपनी साड़ी को उठवाएगी और पेशाब करेगी यह सब बड़ा ही अद्भुत था दोनों के लिए शुभम के ना चाहते हुए भी खुद-ब-खुद उसका हाथ निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड पर चला गया जिस पर हथेली रखते ही उसके बदन में करंट का अनुभव होने लगा,,,, पहली बार वह किसी गांड पर हाथ रख रहा था जो कि उसके बदन को पूरी तरह से झनझना दिया था। धीरे धीरे हल्के हल्के में अपनी मां की काम को करवाने लगा जो की निर्मला को बहुत ही अच्छा लग रहा था। निर्मला और शुभम दोनों यही चाह रहे थे कि यह पल यही थम जाए यहीं रुक जाए जो मजा इस पल में है ऐसा मजा किसी पल में नहीं मिलेगा,,,,, लेकिन ऐसा संभव नहीं था क्योंकि निर्मला पेशाब कर चुकी थी,,,, उस का मन भी कार की खिड़की से हटने का नहीं कर रहा था वह यही चाह रही थी कि उसका बेटा उसकी रसीली बुर को बस देखता ही रहे,,

लेकिन पेशाब करने के बाद वह ज्यादा देर तक इस तरह से नहीं खड़ी रह सकती थी इसलिए वह खिड़की पर से हटी लेकिन अभी भी उसकी सारी कमर तक ही चढ़ी हुई थी और पेंटी जांघों तक सरकी हुई थी। और वह भी अपने बेटे की तरह ही मैं तो सारी को नीचे की और ना ही पैंटी को कहीं नहीं बस वैसे ही सीट पर बैठ गई और जल्दी-जल्दी कार के सीसे को चढ़ाने लगे क्योंकि बाहर तेज हवा के साथ बारिश हो रही थी जिसकी वजह से पानी की बौछार से उसकी सारी और उसका ब्लाउज भीग चुका था। मैं सीट पर बैठ कर अपनी साड़ी को झाड़कर सुखाने की नाकाम कोशिश करने लगी,,,,,

लेकिन अपनी साड़ी को उतारने का इससे अच्छा मौका ना मिलेगा यह ख्याल उसके मन में आते हैं उसका मन मोर की तरह नाचने लगा,,,, लेकिन शुभम का ध्यान केवल उसकी रसीली बुर पर ही टिका हुआ था यह देख कर निर्मला उससे बोली।

ले ओर नजर भर कर इसे ठीक से देख ले ( इतना कहने के साथ ही वह अपनी जांघ को थोड़ा सा फैला दी,,, शुभम का तो गला सूखने लगा) अब तक औरत कि तूने इसी अंग को नहीं देखा था ना।

हां मम्मी मैंने तुम्हारा सब कुछ देख लिया था लेकिन इस अंग को नहीं देख पाया था (वह कांपतेे स्वर में बोला)

कैसी लगी तुझे मेरी बुर (अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखते हुए बोली)

 


गजब मम्मी एकदम अद्भुत मैंने आज तक इस से खूबसूरत कोई अंग नहीं देखा मुझे यकीन नहीं हो पा रहा है कि औरत के बदन में इस तरह का भी अंग होता है।

अच्छी लगी ना तुझे।

हां मम्मी बहुत अच्छी लगी,,,,,,

इसे छुने का दिल कर रहा है तेरा,,,,,

हां मम्मी मै ईसे छुना चाहता हूं देखना चाहता हूं कि छूने पर कैसा महसूस होता है।

( अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला मुस्कुरादी,,,,)

तो ले छू कर देख ले बहुत गर्म होती है।

सच मम्मी,,,

हां रे सच कह रही हूं लैं छुकर देख ले।

( निर्मला का गला उत्तेजना के मारे सो रहा था उसका मन एकदम आनंदित हो चुका था,,, वासना ने उसके मन मस्तिष्क को पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था। उस की रसीली बुर की गुलाबी फांकें अपने बेटे की उंगलियों के स्पर्श को आभास करके ही फुल पिचक रही थी। अपनी मां का आदेश का पाकर शुभम कैसे अपने आप को रोक पाता वह तो कब से ईस पल का सपना देख रहा था। शुभम अपने कांपते हाथों को अपनी मां की जांघों के बीच बढ़ाने लगा,,,, उसका दिमाग एकदम सुंन्न हो चुका था,, उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था उसकी आंखों के सामने बस उसे अपनी मां की बुर दिखाई दे रही थी जोंकि गुलाबी फांकों के बीच बेहद खूबसूरत लग रही थी अगले ही पल उसकी उंगलिया,, निर्मला की चिकनी बुर को स्पर्श कर रहीे थीे जैसे ही शुभम ने अपनी उंगली को अपनी मां की बुर से सटाया उसके बदन में जैसे करंट दौड़ गया हो इस तरह से उसका पूरा बदन गंनगना गया। अपनी मां की बुर को स्पर्श करने के बावजूद भी उसे यकीन नहीं हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि वो सपना ही देख रहा है। तभी उसकी मां बोली,,,

कैसा लगा तुझे,,,,,

बहुत ही खूबसूरत मम्मी और वाकई में तुम्हारी बुर बहुत गर्म है।( वह अपनी मां की तरफ देखे बिना ही बोला अपने बेटे का जवाब सुनकर निर्मला मुस्कुराने लगी और धीरे-धीरे करके अपने ब्लाउज के बाकी बचे बटन को भी खोल दी,,, सुभम जब नजर उठा कर अपनी मां की तरफ देखा तो निर्मला बोली।

पानी की बौछार की वजह से मेरे कपड़े गीले हो गए हैं इसलिए इसे उतारना पड़ेगा,,,, ( शुभम तो और ज्यादा खुश हो गया क्योंकि उसे देखने लगा कि जैसे कि उसकी मां उसकी आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाएगी आज सच में पार्टी की ही रात है। शुभम तू धीरे धीरे करके अपनी मां की बुर पर पूरी हथेली काही स्पर्श करने लगा,,,, रह-रहकर निर्मला अपनी बेटे की हथेली का स्पर्श अपनी बुर पर करके एकदम से उत्तेजना के मारे सिहरं ऊठ रही थी और उसके मुंह से गरम सिसकारी निकल जा ़ रही थी।अगले ही पल

निर्मला अपने ब्लाऊज के साथ साथ अपनी ब्रा को भी उतार दी जैसे ही उसने अपनी ब्रा को अपने बदन से अलग की वैसे ही ऊसकी बड़ी बड़ी चूचीया सीना ताने शुभम के सीने में चुभने लगी,,,, शुभम यह देखकर एकदम हैरान हो गया,,, उत्तेजना की मारे उसने अपनी हथेली में अपनी मां की बुर को भरकर दबोच लिया जिससे निर्मला की हल्की सी चीख निकल गई,,

आहहहहहह,,,, क्या कर रहा है रे,,,,

लगता है तुझे मेरी बुर कुछ ज्यादा ही पसंद आ गई है तभी तो देखना तेरा लंड कैसा खड़ा हो गया है। तुझे पता है अगर तेरी जगह और मेरी जगह कोई प्रेमी प्रेमिका होती तो ना जाने उसके प्रेमी में कब से इस खड़े लंड को अपनी प्रेमिका की बुर में डाल कर चोद दिया होता,,,,,

( यह बात अपनी मां के मुंह से सुनकर शुभम एकदम दंग रह गया वह समझ गया कि उसकी मां एकदम चुदवासी हो गई है और चुदवाना चाहती है। वह नादान बनते हुए बोला।)

सच मम्मीं क्या ऐसा ही होता है?

हां बिल्कुल ऐसा ही होता है तो शायद नहीं जानता क्योंकि तूने अभी तक ना तो चुदाई देखा है और ना ही किसी को चोदा है इसलिए तुझे समझ में नहीं आ रहा पता है यह लंड क्यों खड़ा होता है,,

क्यों खड़ा होता है मम्मी( वह अपनी हथेली को अपनी मां की बुर से रगड़ते हुए बोला)

बेवकूफ इस में जाने के लिए( वह उंगली के इशारे से शुभम को अपनी बुर दिखाते हुए बोली।)

क्या मम्मी कहीं इस छोटे से छेद में इतना मोटा और लंबा लंड घुस पाएगा,,,,( शुभम जानबूझकर नादान बनते हुए बोला)

अरे पागल एक छोटे से छेद में तो गधे का लंड घुस जाए,,,,

( सुभम अपनी मां के मुंह से ऐसी बात सुनकर एकदम से हैरान हो गया।)

तुझे लगता है मेरी बात पर विश्वास नहीं होता अरे इसी में तो मर्द अपने लंड को डाल कर लंड को अंदर बाहर करते हुए चोदता है और इसी को चुदाई कहते हैं। तेरा दोस्त जो कि अपनी भाभी को चोदने की बात तुझे बताया था और तेरा वह दोस्त जो अपनी मां को भी चोद़ चुका था वह लोग इसी तरह से अपनी मां और भाभी की बुर में लंड डालकर चोदेे होंगे,,,, और तू केवल चुदाई शब्द ही सुनकर इतना प्रसन्न हो जाता है और अभी तो तुझे चुदाई के बारे में कुछ भी पता ही नहीं है अच्छा यह बताओ तेरे दोस्तों की बात सुनकर तेरा मन भी तो औरत को चोदने को करता होगा।

( शुभम मुंह से तो कुछ नहीं बोला बस हां में सिर हिला दिया,, यह देखकर निर्मला मुस्कुरा दी और बोली।)

लेकिन कैसे,,, तुझे तो चोदना ही नहीं आता है अरे तुझे तो यह भी नहीं पता कि लंड कौन से अंग में डालकर चोदते हैं।

और मेरी बात पर विश्वास ही नहीं कर रहा कि इस बुर में ( ऊंगली से बुर की तरफ इशारा करते हुए )तेरा इतना मोटा लंबा तगड़ा लंड भी चला जाएगा,,,,,(

इतना कहते हुए उसने झट से अपने बेटे के लंड को पकड़ लेी

उसका मन एकदम से मचलने लगा उसके तन-बदन के अंदर फड़फड़ा रहा कबूतर बाहर आने के लिए तड़पने लगा,,,, उसके पास एक बहुत ही सुनहरा मौका था इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी। अपने बेटे के लंड को पकड़कर उस की चुदवाने की प्यास और ज्यादा बढ़ गई थी। उसकी नजर घड़ी पर गई तो तकरीबन पौने 4:00 का समय हो रहा था,,, बारिश का जोर भी धीरे-धीरे कम हो रहा था,,,,, बाप ने बेटी के लंड को मुंह में लेकर चूस ना चाहती थी जबकि उसने आज तक अपने मन से अपने पति का लंड अपने मुंह में नही ली थी,,, वह अपने बेटे से अपनी बुर चटवाना चाहती थी,,, अपनी बड़ी बड़ी चूचियां को उसके हाथों में सौंप कर उसे जोर जोर से मसलवाना चाहती थी,,, और अपनी चूची को उसके मुंह में देकर उसे से चुसवाना चाहती थी,,,,, लेकिन समय और बारिश का जोर कम होता देखकर वह अपने मन की बात को मन में ही दबा दूं क्योंकि यह सब के लिए ज्यादा समय नहीं बचा था,,,,, लेकिन इस समय वह अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवा कर एक नए रिश्ते का उद्घाटन करना चाहती थी। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी की अगर आज इसका बेटा अपने लंड को उसकी बुर में डाल कर चोद दिया तो वह पूरी तरह से उस का दीवाना हो जाएगा,,,, वह भी आजकी प्यासी रात को अपने बेटे के लंड से चुद कर तृप्त हो जाएगी,,,, और अगर आज चुदाई का कार्यक्रम संतुष्टी जनक से संपूर्ण हो गया तो यह चुसना चटवाना तो हमेशा होता रहेगा,,,, लेकिन जिस तरह से बातों ही बातों में समय बीतता जा रहा हूं अगर ऐसे ही बातें ही करते रहे तो हाथ में आया यह सुनहरा मौका निकल जाएगा और ना जाने भविष्य में ऐसा पल आएे ना आए,,

इसलिए वह अपने आप को पूरी तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तैयार कर ली,,,, और इसलिए वह अपने बेटे के लंड को आगे पीछे करते हुए मुट्ठीयाने लगी,,,,

समय रेती की तरह उसके हाथ से सरकता जा रहा था,,, बारिश का दौर एकदम कम हो चुका था और ऐसा लग रहा था कि कभी भी बारिश बंद हो सकती है। अब किसी भी बात को पूछने पुछाने का उसके पास समय नही था। शुभम भी बड़ी आतुरता के साथ अपनी मम्मी के अगले कदम का इंतजार कर रहा था। शुभम को बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी जब ऊसकी मां ऊसके लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर आगे पीछे कर रही थी। लंड का मोटा सुपाड़ा निर्मला की बुर में खलबली मचाए हुआ था। धीरे से निर्मला अपने लिए जगह बनाने लगी स्टेरिंग सीट से थोड़ा सा बगल में सरक कर आ गई। वह सीट के बीचो-बीच बैठ गई और अपनी गांड को उचका कर थोड़ा सा सीट के एकदम किनारे पर रख दी,,, शुभम कैसी नजरों से अपनी मां के घर पर को देख रहा था लेकिन उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उत्तेजना के मारे निर्मला की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी। शुभम का लंड अभी उसके हाथ में था। निर्मला कसमसाते हुए अपनी गांड को थोड़ा सा इधर उधर की,, ऊसकी पेंटी,अभी भी उसके घुटनो में अटकी हुई थी,,,, जिसकी वजह से निर्मला ठीक से पोजीशन नहीं बना पा रही थी इसलिए वह शुभम के लंड को छोड़कर अपने पंटि को अपनी टांगो से उतार फेंकी,,, अब वह कमर के नीचे से बिल्कुल नंगी हो चुकी थी चुचिया तो वह पहले से ही दिखा रही थी । यह सब देखकर शुभम से रहा नहीं गया वह एकदम कामोत्तेजित हो चुका था लेकिन फिर भी जब वह अपनी मां को अपनी पैंटी निकालते हुए देखा तो वह बोला।

यह क्या कर रही हो मम्मी,,,,,

अब कुछ भी बताने का समय नहीं है,,,( इतना कहते हुए उसने अपनी टांगो को फैला ली इससे उसकी रसीली बुर एकदम साफ साफ शुभम को नजर आ रही थी इतना खूबसूरत नजारा उसने कभी नहीं देखा था,,,, इसलिए उसने और कुछ पूछने की जरूरत नहीं समझा वह अपनी मां को टांगे फैलाए सीट पर बैठे हुए देखकर उत्तेजित हो ही रहा था कि तभी उसकी मां ने फिर से शुभम का लंड पकड़ ली और ईस बार वह लंड को आगे की तरफ खींच कर उसके सुपाड़े को अपनी बुर के बिल्कुल करीब ले आई,,, यह देखकर शुभम की सांसे तीव्र गति से चलने लगी

निर्मला की भी हालत इस समय काफी खराब हो रही थी। वह अपने बेटे के लंड के सितारे को अपनी बुर के बिल्कुल करीब एकदम करीब ला कर रुक गई थी,,,, उसके मन में उत्तेजना के साथ-साथ उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी जवान लंड की रगड़ वह भी मोटे और लंबे तगड़े की बुर की अंदर की दीवारों पर कैसा कहर ढाती है इसे महसूस करने की उत्सुकता निर्मला के अंदर बढ़ती जा रही थी। शुभम समझ गया था कि अब उसका सपना पूरा होने वाला है। शुभम कुछ और सोच पाता इससे पहले ही निर्मला ने लंड के सुपाड़े को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच सटा दी,,,, जैसे ही निर्मला ने अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को,,,अपनी बुर की गुलाबी पत्तियो के बीच सटाई वेसे ही ऊसके पुरे बदन मे हलचल सी मच गई ऊत्तेजना के मारे ऊसकी बुर फुलने पिचकने लगी। उसे इस बात का एहसास हो गया कि आज उसकी बुर में एकदम सही लंड जाने वाला है। शुभम की को सबसे ऊपर नीचे हो रही थी वह एक नजर शुभम की तरफ घूमाई और बोली।

अब देख,,,, तू बोलता था ना कि ईतनी छोटी सी बुर में इतना मोटा लंबा लंड कैसे जाएगा देख मे तुझे बताती हूं कि कैसे जाएगा। ( इतना कहते हुए निर्मला ने एकदम ठीक से लंड के सुपाड़े को अपनी बुर के बीचो-बीच टीका दी,,, और बोली)

देख अब कैसे जाता है तू अपनी कमर को आगे की तरफ ठैल,,, अपने लंड को थोड़ा सा धक्का देकर मेरी बुर में डालने की कोशिश कर,,,,

( अपनी मां की बात सुनकर तो शुभम पसीने से तरबतर हो गया उस की पराकाष्ठा की कोई सीमा नहीं थी,,, उसके मन में एक उमंग सी जग़ गई थी,,, चुदाई क्या होती है कैसे होती है आज यह उसकी मा सिखाने वाली थी वह भी अपनी मां की बात को मानते हुए,, अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलना शुरू किया,,,, निर्मला की बुर उत्तेजना के मारे काफी समय से पानी छोड़ रही थी इसलिए उसकी बुर की दीवारें पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जिससे शुभम के लंड का सुपाड़ा बुर के अंदर सरकने लगा। इतने से ही निर्मला को आभास हो गया कि उसके बेटे का लंड काफी मोटा है। जैसे-जैसे शुभम अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ा रहा था वैसे वैसे लंड का सुपाड़ा निर्मला की बुर की दीवारों को फैलीता हुआ अंदर की तरफ सरक रहा था और निर्मला को हल्के हल्के दर्द का अनुभव होने लगा। जैसे-जैसे निर्मला की बुर का मुख्य खुल रहा था वैसे वैसे दर्द के मारे निर्मला का भी मुंह खुलता चला जा रहा था। शुभम की तो हालत खराब हुए जा रहीे थीे, उसे इस बात का आभास बिल्कुल भी नहीं था कि बुर की अंदरूनी दीवारें बहुत ही ज्यादा गर्म होती है उसे ऐसा महसुस होने लगा कि उसका लंड गर्मी सें कही पिघल न जाए।

शुभम की हालत खराब हो जा रही थी मुझसे अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था तो उसके दिमाग पर उत्तेजना पूरी तरह से हावी हो चुकी थी,,, किसी उत्तेजना के चलते वह जोर से अपनी कमर को झटका दिया और इस बार उसका लंड आधे से ज्यादा निर्मला की बुर में समा गया,,,,,,,

लेकिन इस धक्के ने निर्मला की चीख निकाल दिया निर्मला इस धक्के के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थी,,, वह तो अच्छा हुआ कि वह लोग एकांत जगह पर थे इसलिए उसकी चीख दूसरा कोई नहीं सुन पाया,, शुभम अपनी मां की चीख को सुनकर रुक गया और बोला।

क्या हुआ मम्मी ऐसे क्यों चिल्लाई,,,,

कुछ नही बेटा तेरा दम देख कर मेरी चीख निकल गई तू फिक्र मत कर देख कैसे तेरा आधे से भी ज्यादा लंड मेरी बुर में समा गया है अब धीरे धीरे करके पूरा डाल दे।

( शुभम अभी संभोग के दौरान औरत के मुंह से निकलने वाली चीख से बिल्कुल भी अनजान था उसे इस बात का चेहरा भी ज्ञान नहीं था कि ऐसी चीजें संभोग के दौरान औरत को और भी ज्यादा मस्त कर देती है। शुभम सीख वाली बात पर बिलकुल भी ध्यान ना देते हुए अब फिर से आगे जुट चुका था। पनियाई बुर की वजह से धीरे-धीरे करके शुभम का मंडी आगे बढ़ रहा था और निर्मला को बेहद दर्द की अनुभूति भी होने लगी थी। अपने पति के लंड को जब भी बुर में लेती थी तो कभी भी उसे दर्द की अनुभूति नहीं हुई। वह नजरे नीचे झुका कर अपने बेटे के मोटे लंड को अपनी रसीली बुर के अंदर घुसता हुआ देख रही थी। उसकी सांसे बड़ी तेज चल रही थी और तेज चलती सांसो के साथ साथ उसकी नंगी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जोकी शुभम के जोस को और ज्यादा बढ़ा रही थी। आखिरकार धीरे धीरे करके शुभम ने अपने समुचे लंड को अपनी मां की बुर में डाल ही दिया,,

जैसे ही शुभम का पूरा लंड निर्मला की बुर में कहीं खो सा गया हो ऐसा लगने लगा तब निर्मला एकदम प्रसन्न होती हुई शुभम से बोली,,,

देख बेटा अपनी आंखो से देख ले मैं सच कह रही थी या झूठ,,,,,

हमने तुम बिल्कुल सच कह रही हो मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा,,,,( शुभम कांपते स्वर में बोला। उसका पूरा लंड अपनी मां की बुर में डालकर वह अपनी मां की आंखों में देख रहा था। और अपनी मां की आंखों में देखता हुआ बोला।

अब क्या करूं मम्मी,,,,,( शुभम बड़े ही भोले पन से बोला।)

बस अब तू अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए लंड को अंदर बाहर कर के मुझे चोद,,, ईसको ही चुदाई कहते हैं। ( निर्मला बड़े ही उत्तेजनात्मक स्वर मे बोली,,, बस फिर क्या था शुभम शुरू बन गया वह अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाने लगा,,,, उसके अंदर पूरी तरह से जोश बढ़ चुका था निर्मला को शुभम से इतनी तेज झटकों की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। वह तो सोच रही थी कि शुभम बड़े आराम से धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए ऊसे चोदेगा लेकीन ऊसकी गिनती बिल्कुल ऊलटी पड़ गई थी। शुभम बड़ी तेजी ऊसे चोद रहा था । ऊसकी चुदाई देखकर ऊसका पुरा वजुद हील गया था। ऊसे यकीन नही हो रहा था की शुभम ऊसको चोद रहा है। क्योंकी शुभम अभी बिल्कुल नादान था। लेकीन वह ईस समय पुरी तरह से ऊत्तेजित हो चुका था। ईसलिए ऊसके रुकने का तो सवाल ही नही ऊठता था। वैसे भी निर्मला अब उसे रोकने के लिए और धीरे-धीरे करने के लिए बोल ही नहीं सकती थी क्योंकि जिस रफ्तार से वह अपने लंड को बुर में अंदर बाहर कर रहा था उसे बहुत ही ज्यादा आनंद की अनुभूति हो रही थी।

फच्च फच्च करते हुए शुभम का लंड निर्मला की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। शुभम की रफ्तार बिल्कुल भी कम नहीं हो रही थी वह लगातार अपनी मां की बुर में लंड अंदर बाहर करते हुए उसे चोद रहा था। थोड़ी ही देर में पूरी कार निर्मला की गरम सिसकारियों से गूंजने लगी।

सससससहहहहहह,, आहहहहहह,,,,, शुभम क्या मस्त चोद रहा है तू और चोद,,,,आहहहह,,, आहहहहहह,,,,

निर्मला की गरम सिसकारियां सुनकर सुभम का जोश और ज्यादा बढ़ने लगा और वह जोर जोर से धक्के लगाते हुए अपनी मां को चोदने लगा,,,,,

निर्मला की हालत खराब होने लगी थी काफी देर से शुभम एक ही लय मे अपनी मां को चोदे जा रहा था,,,, निर्मला हैरान थी की अभी तक शुभम का पानी नहीं निकला था,,,, शुभम की बुर में धक्के पर धक्का पड़ रहे थे ऊसको जब धक्का बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह थोड़ा सा पीछे की तरफ झुक गई।

हर धक्के के साथ निर्मला की बड़ी बड़ी चूचियां ऊछल जा रही थी। इसलिए निर्मला खुद ही अपने बेटे के दोनों हांथ को पकड़ कर अपनी अपनी बड़ी बड़ी चुचीयाे पर रखकर ऊसे जोर जोर से दबाने के लिए बोली ।

शुभम तो दोनों खरबूजे को दोनों हाथ से पकड़ कर जोर जोर से दबाते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा,,, निर्मला और शुभम दोनों को बहुत मजा आ रहा था उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसे एकांत में तूफानी बारिश में वो लोग इस तरह की पार्टी मनाएंगे। तकरीबन चालीस 45 मिनट तक शुभम अपनी मां की बुर को रौंदता रहा। और उसके बाद दोनों एक साथ झड़ गए,,,, जब सुभम झड़ने वाला था तो निर्मला को इस का आभास हो गया और उसने कसके अपने बेटे की कमर को पकड़ कर अपनी बुर में दबाए रखी ताकि वह ऊसकी बुर में हि झड़े,,, तूफान एकदम से शांत हो गया था कार के अंदर वासना का अौर कार के बाहर बारीश का,,,

निर्मला ने घड़ी देखी तो 5:00 बज रहा था सुबह हो चुकी थी बारिश भी एक दम से थक चुकी थी अब दूर दूर तक गाड़ियों की हेडलाइट नजर आ रही थी अब यहां पर रुकना ठीक नहीं था इसलिए निर्मला ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहन कर एकदम से तैयार हो गई और गाड़ी को वापस हाईवे पर लाकर घर की तरफ बढ़ा दी।

 
निर्मला बारिश के बंद होते ही तुरंत अपनी गाड़ी हाइवे पर लाकर अपने घर की तरफ बढ़ा दी रास्ते भर दोनों एक दूसरे से नजर नहीं मिला पा रहे थे। निर्मला को इस बात का पछतावा बिल्कुल भी नहीं था कि उसने अपने बेटे के ही साथ संभोग सुख का आनंद ले ली है । बल्कि वह अपने बेटे से शर्म के मारे नजरें नहीं मिला पा रही थी। शुभम मन-ही-मन अति प्रसन्न हो रहा था आज उसके मन की बात सच हो गई थी।

आज जो कुछ भी होगा उसके लिए शायद दोनों ही पूरी तरह से तैयार नहीं थे वह तो पार्टी के लिए निकले थे लेकिन हालात ने उन्हें उस एकांत जगह पर रुकने को मजबूर कर दिया था। तूफानी बारिश एकदम थक चुकी थी मौसम धीरे धीरे साफ होने लगा था दूर सूरज की लालिमा हल्के हल्के धरती से जैसे बाहर आ रही हो,,,, निर्मला आराम से गाड़ी चलाते हुए,,, यह सोच रही थी कि अब शीतल उससे ना आने का कारण पूछेगी तो वह क्या बताएगी तभी वह अपने ही सवाल का जवाब मन में ढूंढते हुए मन में ही बोली थी वह भी तो जान ही रही होगी कि तूफानी बारिश किस तरह से पूरे शहर को अपने कब्जे में ले ली थी हाईवे तक सुनसान सा हो चुका था ऐसे में भला कैसे उसके घर पहुंच पाते,,,,, वह मन ही मन शीतल के सवाल का जवाब ढूंढ ली थी।

थोड़ी ही देर में निर्मला की गाड़ी घर के गैराज में प्रवेश की और उसमें से शुभम उतर कर बिना कुछ बोले अपने कमरे की तरफ चला गया निर्मला भी धीरे धीरे कुछ सोचते हुए अपने घर में प्रवेश की तो सामने से ही अशोक तैयार होकर सीढ़ियों से नीचे उतरता हुआ नजर आया उसे देखते ही निर्मला बोली,,,,,

अरे आप तैयार हो गए रूको भी नाश्ता बना देतीे हुं।

नहीं कोई जरुरत नहीं है मैं ऑफिस में कर लूंगा मुझे देर हो रही है।

लेकिन आप आज बहुत जल्दी जा रहे हैं,,,,

( निर्मला के ईतने कहने के साथ ही अशोक आगे बढ़ गया और जाते-जाते बोला।)

मुझे आज ऑफिस में जरुरी काम है इसलिए जल्दी जाना है। ( और इतना कहने के साथ यह वह घर से बाहर चला गया।,,, निर्मला उसे घर के बाहर जाते हुए देखती रही,,,, निर्मला उसे गुस्से की नज़र से देखने लगी और मन ही मन उसे कोसते हुए बोली,,,,, अगर तू मुझ पर ध्यान दिया होता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता,,,,, इतना कहने के साथ ही वहां पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गई और रात की घटना के बारे में सोचने लगी,,,, उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि उसने कुछ ऐसा कदम उठा ली है जो कि उसकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल कर रख सकती है। एक मन ऊसका कह रहा था कि निर्मला तूने जो कि वह बिल्कुल गलत है,,, तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था तूने मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तार तार कर दी है तूने वह शर्मनाक काम कर दी है जिसके बारे में सोचना भी पाप है। यह ख्याल मन में आते ही निर्मला का मन ग्लानी से भर जा रहा था,,,, उसे सच में लगने लगा कि उसने जो की है वह सच में बेहद गलत है उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था लेकिन तभी उसका दूसरा मन कहता कि तूने जो की है उसमें कोई गलती नहीं है जो कुछ हुआ वह हालात की वजह से हुआ,,,, ईस तरह से एकांत में बरसती बारिश में उन दोनों की जगह कोई भी होता तो उनके साथ भी यही होता आखिरकार निर्मला सबसे पहले एक औरत है जो कि बरसों से अपने पति के प्यार के लिए तरस रही थी जिसने अभी तक अपने पति से संभोग सुख का पूरा आनंद भी नहीं लेता इतने वर्षों से ऊषकी बुर प्यासी थी,,,, जो कि एक मोटा और तगड़ा लंड के लिए तड़प रही थी और ऐसा दमदार लंड उसके बेटे के पास था जिसे वह अपने हाथों में लेकर बारीकी से उस का निरीक्षण कर चुकी थी,,,, शुभम भी जवान हो रहा गठीले बदन का मर्द था। जिसके अंदर जवानी का जोश हिलोरे मार रहा था। जिसकी नजरे मदमस्त बदन वाली औरतों के अंगो ऊपांगो पर घूमने लगी थी ऊन्हें देख कर उसके लंड में भी तनाव आना शुरू हो गया था और तो और वह खुद ही अपनी मां की खूबसूरत बदन से पूरी तरह से आकर्षित हो चुका था। ऐसे में उस की उत्सुकता औरतों को और भी अच्छे से जानने की बढ़ती ही जा रही थी,,, और जिस हालात में वह रात भर तूफानी बारिश में रुका था,,, कार के अंदर अपनी खूबसूरत और सेक्सी बदन वाली निर्मला को वह सिर्फ औरत की ही नजर से देख रहा था। ऐसे में बरसों से प्यासी एक पत्नी अपने पति से जरा भी प्यार ना पाने की वजह से,,,, एक प्यासी औरत बन चुकी थी जो किसी भी तरह से अपनी प्यास बुझाना चाहती थी और दूसरी तरफ जवान हो रहा लड़का,,, जो औरतों के बदन से आ रही मादक खुशबू को अपने सीने में उतारना चाहता था।। ऐसे में दोनों के बीच मां बेटे के रिश्ते की जगह केवल औरत और मर्द का यह रिश्ता रह गया था इसलिए दोनों सब कुछ भूल कर एक दूसरे में समाते हुए सारे रिश्ते नातों को तोड़कर संभोग सुख की असीम आनंद कीें गाथा को लिखने में जुड़ गए । उस पल को याद करके निर्मला कीबुर फिर से पानी पानी हुए जा रही थी,,, सारी रात जागने की वजह से वह थक चुकी थी उसे अपने बदन में थकान सी महसूस हो रही थी,,, और जिस आनंद को पाने के लिए वह बरसों से तरस रही थी उसके लिए तो जगना भी जरूरी था,,, बिना कर्म किए बिना मेहनत किए कभी भी फल नहीं मिलता,,,, और निर्मला तो बरसों से प्यासी थी अपनी प्यास बुझाने के लिए अगर उसने महीनों जागना भी पड़ता तो भी उसके लिए वह तैयार थी।

निर्मला कुर्सी पर बैठकर यही सब याद करते करते कब उसकी आंख लग गई उसे पता नहीं चला।

यही हाल शुभम का भी था उसे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि रात को कार में उसने अपनी मां को चोदा है। और यकीन भी कैसे करता यह तो उसके लिए एक सपना ही था अपनी मां के खूबसूरत बदन को देख देखकर उसके कल्पनाओं का घोड़ा ना जाने कितनी तीव्र गति से कहां-कहां दौड़ आया था। निर्मला की बड़ी बड़ी चूचियां उसके बड़े बड़े नितंब को याद करके ना जाने कितनी बार उसने अपने लंड को अपने ही हाथों से शांत किया था। शुभम को वह पल बराबर उसके जेहन में बस गया था जब उसने अपनी मां की रसीली बुर को पहली बार कार के अंदर देखा,,,, वह अभी तक उस अंग के बारे में केवल कल्पना ही करता आया था।

उसे अपनी नजरों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसने अपनी आंखों से अपनी मां की नंगी बुर को देखा है। उसकी बनावट उसके आकार को देखकर आश्चर्यचकित रह गया। वैसे भी उसकी मां की बुर इस उम्र में भी बेहद तारीख थी जिसकी वजह से उसकी गुलाब की पत्तियां बस हल्की हल्की ही नजर आ रही थी और नजर आ रही थी बस केवल एक हल्की सी पतली लकीर,,,, जिसमें लाखों खुशबूदार फूलों के रस को निचोड़कर सारा रस भरा हुआ था। शुभम अपनी मां की जांघों के बीच जब पतली सी दरार को देखा तो उसके बदन में हलचल सी मच गई,,,, उसने उसे कोई भी सुराग नजर नहीं आ रहा था इसलिए वह और भी ज्यादा दंग इस बात से था कि आखिरकार बुर में लंड जाता कैसे हैं और क्या इतनी सी छोटी सी बुर में मोटा लंबा लंड घुस जाता है। यह सब बातें उस समय उसे बेहद परेशान किए हुए थी। ऊस पल की उत्तेजना उसके बदन में झनझनाहट की तीव्रता को और भी ज्यादा बढ़ा दी थी। जब शुभम ने अपनी अंगुलियों से अपनी मां की दहकती हुई बुर को स्पर्श किया तो उस समय उसका पूरा वजूद किसी सूखे पत्ते की तरह फड़फड़ासा गया। उसे निर्मला की गुलाबी बुर का स्पर्श किसी बिजली के तार में दौड़ते करंट से कम नहीं लगा था। शुभम अपने बिस्तर पर लेटे लेटे यही सब सोच रहा था और यह सब सोचते हुए उसका हाथ खुद-ब-खुद पजामे में चला गया,,,, उसका लंड एक बार फिर से पूरी तरह से तैयार होकर खड़ा हो गया था। जिसे वह हल्के हल्के सहलाते हुए आनंद की अनुभूति कर रहा था। उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि बाहर से एकदम साथ दीखने वाली बुर अपने अंदर ना जाने कितने महासागर को समेटे हुए हैं। आंखों को ठंडक प्रदान करने वाली रसीलपुर अपने अंदर ना जाने कितनी गर्मी भरे हुए हैं,,,। क्योंकि वह जब अपने लंड को अपनी मां की बुर के अंदर उतारा था तो उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि बुर के अंदर की गर्मी किसी तपती हुई भट्टी के समान होगी,,,,, उसे एक पल तो ऐसा लगा कि जैसे उसका लंड निर्मला की बुर के अंदर की गर्मी में पिघल जाएगा,,,, लेकिन ना जाने वह कैसे संभाल गया उसे खुद भी नहीं पता चला। उसे इतना तो उसके दोस्तों के द्वारा पता ही चल गया था कि चुदाई करने में बहुत मजा आता है लेकिन इतना ज्यादा मजा आता है उसे इस बात का पता निर्मला की चुदाई करने के बाद ही हुआ। अपनी मां की चुदाई करने के बाद उसके मन में किसी भी प्रकार की ग्लानी नहीं थी। बल्की वह तोें इस नए रिश्ते से बेहद खुश था। लेकिन उसके मन में अभी भी है सवाल बना हुआ ही था कि क्या आगे भी उसकी मम्मी इसी तरह से उसके साथ संबंध कायम रखेगी या यह संबंध यहीं खत्म हो जाएगा,,,, यही सब सोचते हुए वह भी सो गया।

मोबाइल की घंटी बजी तो निर्मला की नींद खुली और वहां अपने पर्स में से मोबाइल निकाल कर स्क्रीन पर देखी तो शीतल का ही नंबर झलक रहा था। वह समझ गई कि कल रात के बारे में ही शीतल उसे फोन कर रही है। निर्मला को खुद अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि ले देकर शीतल ही उसकी खास सहेली थी। उसके घर ना पहुंच पाने का दुख निर्मला को भी था लेकिन हालात ही उसके सामने कुछ इस तरह से अपना हाथ रोके खड़े थे कि वह उसके घर पहुंच ही नहीं पाए शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था। और जो मंजूर था वह हो चुका था। अब तो निर्मला बस इसी उधेड़बुन में लगी हुई थी कि शीतल को कैसे समझाएं। यह सब सोचते हुए ही शीतल का फोन एक बार कट गया और दोबारा रिंग बजने लगी इसलिए निर्मला ने शीतल के फोन को रिसीव करके हेलो बोल रही थी कि सामने से सवालों की झड़ी बरसने लगी।

क्या हुआ निर्मला दिखा दी तुमने अपनी दोस्ती कितने प्यार से मैंने तुम्हें अपनी शादी की सालगिरह पर बुलवाई थी और तुम हो कि एक बार भी फोन करना भी मुनासिब नहीं समझी,,,

अरे यार मेरी बात तो सुनो कि सब कुछ बोलती ही रहोगी,,,

अब क्या सुनाऊं मैं और सुनने सुनाने के लिए कुछ बाकी रखा ही कहां है तुमने,,,,,

अरे नहीं आना था तो मुझे साफ-साफ बोलदी होती मैं पागलों की तरह तुम्हारा इंतजार तो नहीं करती,,,,,,

 
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