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अधूरी हसरतें

दूसरी तरफ जवानी की ओखली पूरी तरह से मुसल से कुटवाने के लिए तैयार थी। ।।

कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म होता जा रहा था निर्मला कोमल और शुभम तीनों में से किसी ने इस बात की कभी कल्पना भी नहीं की थी कमरे में इस तरह से वह तीनों एक साथ जवानी के रस मे डूबेंगे। निर्मला के चेहरे पर उन्माद साफ तौर पर छलक रहा था कुछ देर पहले निर्मला घबराहट के मारे सोचने समझने की शक्ति खो बैठी थी चित्र सी कोमल उसे धमका रही थी उसे देखते हुए निर्मला पूरी तरह से डर गई थी और उसे लगने लगा था कि अब वह अपने ही परिवार में बदनाम हो जाएगी,,, लेकिन जिस तरह से शुभम ने समझा बुझा कर उसे जवानी के मजे लूटने के लिए कमरे में लाया था उसे देख कर निर्मला काफी खुश और आश्चर्य में थी।

लेकिन इस समय कमरे में मौजूद तीनों शख्स एक दूसरे के बदन पर खेल रहे थे। कोमल अपनी शर्म हया को त्याग कर अपनी बुआ की बड़ी-बड़ी चुचियों को दबा दबा कर पीने में व्यस्त हो गई थी। निर्मला इस तरह से कोमल के द्वारा चूची पीने पर वह मदहोशी के आलम में मस्त हुए जा रही थी,, जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत के हाथों से अपनी सुडोल बदन को इस तरह से दबावा रही थी मसलवा रही थी,,,, निर्मला कभी सोचा भी नहीं थी कि एक स्त्री होने के बावजूद भी किसी गैर स्त्री का उसके बदन को इस तरह से चुमना चाटना दबाना उसे इतना अच्छा लगेगा,,,, औरत के साथ मजे लेने का यह उसका पहला अवसर था इसलिए इसके बारे में उसे इसके प्रति आनंद की अनुभूति की कल्पना भी नहीं थी लेकिन घर के पीछे जिस तरह से वह कोमल के नितंबों से खेल रही थी उसे उस पल बेहद आनंद की अनुभूति हुई थी इसलिए वह इस समय कमरे में अपनी उसी आनंद को और ज्यादा बढ़ाने के उद्देश्य से कोमल को और कस कस के दबा दबा कर चुचीयां पीने के लिए उकसा रही थी,,, और साथ ही अपने दोनों हाथों से कोमल की भरावदार गांड को दबाए भी जा रही थी,,,

दोनों औरतों को इस तरह से आपस में मजे लेकर मस्ती करते हुए देखकर शुभम पूरी तरह से कामा तूर हो चुका था। उस का मुसल ओखली में जाने के लिए छटपटा रहा था शुभम घुटनों के बल बैठकर धीरे-धीरे करके कोमल की चड्डी को नीचे की तरफ सरका दिया और चड्डी को बिना पैरों से निकाले ही घुटनों तक लाकर छोड़ दिया।,,, शुभम सांसे उत्तेजना के मारे तीव्र गति से चल रही थी वह आंखों में नशा लिया कोमल की गोलाकार गांड को देखे जा रहा था। जो कि अभी भी कुर्ती से ढकी हुई थी जिसे शुभम अपने हाथों से पकड़कर थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए, कोमल की गोरी गोरी गांड पर अपनी नाक रगड़ कर उसकी मादक खुशबू को महसूस करने लगा।,,, कोमल के नितंबों से आ रही बेहद नाटक खुशबू शुभम के लिए नशे का काम कर रही थी, उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी थी।,,, शुभम से कोमल के बदन से आ रही उत्तेजक खुशबू बर्दाश्त नहीं हो रही थी।,, और वह अपनी नाक को कोमल की मुलायम गांड की दोनों फांकों को हाथों से पकड़कर फैलाते हुए बीच की दरार में अपनी नाक को ऊपर से नीचे की तरफ रगड़ने लगा,,, शुभम की इस हरकत की वजह से कोमल का बदन कसमसानेे लगा,,,, शुभम जीस तरह की हरकत कर रहा था उसकी वजह से कोमल की कमर दाएं बाएं पानी की लहर की तरह लहरा रही थी जिससे यह नजारा और भी ज्यादा उत्तेजक हुए जा रहा था।,,, कोमल को जरा सा भी संभलने का मौका नहीं मिल रहा था। कोमल अपने ऊखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त नहीं कर पा रही थी। सुभम नीचे से लगा हुआ था तो निर्मला ऊपर से उसकी आग को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपने दोनों हाथों में कुर्ती के ऊपर से ही उसकी दोनों कबूतरों को दबा दबा कर दाना खिला रही थी। कोमल इस तरह की उत्तेजना का सामना करते हुए पूरी तरह से कामातुर हो चुकी थी। वह भी पागलों की तरह छोटे बच्चे की तरह निर्मला का दूध पिए जा रही थी,,, शुभम पर तो जैसे,, काम का भूत सवार हो गया था वह अपनी नाक को नितंबों की दरार के बीचो-बीच रगड़ते हुए। कोमल की भूरे रंग के छेद कर अपनी नाक रख कर उसकी खुशबू को अपने अंदर उतार रहा था,, जिससे उसकी उत्तेजना में निरंतर बढ़ोतरी हो रही थी शुभम की यह हरकत कोमल के बदन में हलचल बढ़ा रही थी,। कोमल समझ नहीं पा रही थी कि सुभम यह क्या कर रहा है लेकिन जो भी कर रहा था उससे उसका आनंद दुगुना होता जा रहा था तभी शुभम ने ऐसी हरकत कर दिया कि पल भर में भी कोमल की बुर से मदन रस की पिचकारी छूट पड़ी,,, इसमें कोमल का दोष बिल्कुल भी नहीं था अपनी उत्तेजना पर काबू कर पाने में वह अभी पूरी तरह से कच्ची थी,,,। वैसे भी बदन की उत्तेजना क्या होती है इस बात से वाकिफ भी शुभम ने हीं कराया था,,,। इसलिए तो शुभम ने जब अपनी जीभ निकालकर कोमल की नितंबों के लकीर के बीचो-बीच के उस भूरे रंग के संवेदनशील क्षेंद पर रखकर उसे चाटना शुरू किया तो कोमल का भेरू जवाब दे गया और वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और नियंत्रण खोने की वजह से,,, उसका इस कमरे में पहला स्खलन हो गया। उसका बदन पूरी तरह से अकड़ गया था और उसकी बुर से मदन रस नीचे फर्श पर चूने लगा,,, जिस तरह से अकड़ते हुए कोमल के मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज आई थी। निर्मला को समझते देर नहीं लगी थी कोमल झड़ रही थी। इसी बात की पुष्टि करने के लिए अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर कोमल की जांघो के बीचो-बीच बुर पर रख दी,, जिसमें से अभी भी मदन रस का स्राव हो रहा था,,,यह देख कर निर्मला मुस्कुराते हुए बोली,,,।

वाह कोमल रानी तुम तो अभी से पानी छोड़ रही हो अभी तो पूरी रात बाकी है।,,, (इतना कहने के साथ ही कोमल की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए निर्मला ने अपनी नाजुक हथेली में कोमल के कोमल अंग को दबोच ली। जिससे कोमल के मुंह से सिसकारी निकल गई,,।

आहहहहहहहह,,, बुआआआआ,,,,,,,,

क्या हुआ मेरी प्यारी कोमल रानी,,,, अभी से सिसकारी छुटनें लगी,,,,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला ने कोमल को संभालने का मौका ना देते हुए अपनी बीच वाली उंगली को सीधे उसकी रसीली पुर के अंदर बिना रुके घुसादी,,, बुर पूरी तरह से गीली होने की वजह से निर्मला की बीच वाली लंबी उंगली पूरी की पूरी बुर के अंदर समा गई,,,,,,।

आहहहहहहहहह,,, मर गई रे बुआआआ,,,,,,,,,,,

( कोमल को निर्मला की हरकत की वजह से दर्द का का एहसास हो रहा था लेकिन निर्मला बिना रुके अपने बीच वाली उंगली को धीरे धीरे उसके घर के अंदर बाहर करने लगी और उंगली से उसकी बुर को चोदते हुए बोली,,,,।)

तुम्हारा अभी से यह हाल है कोमल रानी अभी तो मेरी सिर्फ ऊंगली गई है,,,, तब तुम इतना छटपटा रही हो,,, तब क्या होगा जब मेरा बेटा तुम्हारी बुर में अपना मोटा लंबा लंड डालकर तुम्हे चोदेगा,,,,,।

( निर्मला को कोमल की बुर अभी तक कुंवारी ही लग रही थी उसे यह नहीं मालूम था कि जिस बुर में उंगली डालकर उसे मोटे तगड़े लंड से डराने की कोशिश कर रही है ऊसी बुर के अंदर उसका बेटा अपना मोटा बड़ा लंड डालकर उसे पेल चुका था। लेकिन कोमल भी इस बात को निर्मला के सामने जाहिर नहीं होने देना चाहती थी इसलिए बात को घुमाते हुए बोली,,,,।

बुआ मुझे तुम डरा रहे हो बाकी मैं आपसे चली जाऊं और तुम अकेले ही शुभम के लंड से चुद कर मजा ले सको,,, लेकिन आज मैं भी तय करके आई हूं कि आज की रात में भी तुम्हारे साथ मजा लूंगी और तुम्हारे बेटे के लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवाऊंगी,,,,,,

 
( दोनों की बातों से मस्त होकर शुभम लगातार अपनी जीभ से उस भूरे रंग के छेद को चाटते हुए छेड़ रहा था,,, शुभम को कोमल की खूबसूरत गांड की गुलाबी छेद के ऊपरी भूरे रंग के छेद को चाटने में ज्यादा मजा आ रहा था,,,,। कोमल भी निर्मला को अपना इरादा बता कर दोनों हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए पिए जा रही थी।,,,

तीनों लगे हुए थे निर्मला अपनी बीच वाली उंगली को अब बड़ी तीव्र गति से कोमल की जड़ के अंदर बाहर करते हुए उसे चुदाई का सुख प्रदान कर रही थी।,,,

पागलों की तरह कोमल की गांड चाटे जा रहा था। कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्मा चुका था,,, कमरे के बीचो-बीच कोमल और निर्मला खड़े होकर एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे और शुभम अपने घुटनों के बल नीचे बैठकर कोमल की मदभरी गांड चाट रहा था। शुभम अपनी जीभ को सुई की तरह नुकीली करके धीरे धीरे कोमल की गांड के भूरे रंग के छेद में डालना शुरू कर दिया था। कोमल की चूस्त छेद को देख कर शुभम को इतना तो समझ में आ रहा था कि से ज्यादा अंदर कुछ भी जाने वाला नहीं है फिर भी वह जबरदस्ती अपनी जीभ को अंदर की तरफ ठेले जा रहा था। लेकिन शुभम की यही जबरदस्ती कोमल की मदहोशी का कारण बन रही थी रह रह कर उसके मुख से गर्म सिसकारी पूरे कमरे में सुनाई दे रही थी,,आलम यह हो गया था की मस्त हो चुकी कोमल अपने नितंबों को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी सुडोल गांड को शुभम के चेहरे पर रगड़ने लगी थी,,,, जिसकी गर्मी और मादक खुशबू में खोकर शुभम एकदम से चुदवासा हो गया था। कोमल की गांड को चाटते हुए एक हांथ से लंड को सहला रहा था।

धीरे-धीरे तीनों पूरी तरह से कामोत्तेजित चुके थे।,,,,

शुभम दोनों हाथों से कोमल की गांड को दबा दबा कर एकदम लाल टमाटर की तरह कर दिया था।,,, शुभम से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसे अब अपने लंड को गुलाबी छेद में डालने के लिए तड़प बढ़ती जा रही थी।,,, खड़ा हो गया और कोमल की कुर्ती पकड़कर ऊपर की तरफ सरकाने लगा,,, कोमल भी मौके की नजाकत को समझते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर कर दी ताकि शुभम आराम से उसकी कुर्ती को निकाल सके और देखते ही देखते शुभम ने उसके बदन से कुर्ती को निकालकर नीचे फेंक दिया,,, शुभम ठीक उसके पीछे खड़ा होने की वजह से उसके टनटनाए लंड का स्पर्श कोमल अपने नितंबों पर बराबर महसूस कर रही थी,,,, मोटे तगड़े लंड का स्पर्श नितंबों पर होते ही कोमल की बुर फुदकने लगी और उससे रहा नहीं गया और वह अपना एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर शुभम के मोटे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।,,,

यह सब देखकर निर्मला की प्यास बढ़ती जा रही थी और वह अपने हाथों से अपनी साड़ी को खोलने लगी देखते ही देखते वह पूरी तरह से नंगी हो गई,

निर्मला को पूरी तरह से नंगी अपनी आंखों के सामने खड़ी हुई देखकर कोमल आश्चर्य से फटी आंखों से उसे देखे जा रही थी। कोमल की नजरें ऊपर से नीचे की तरफ घूम रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कोई औरत इतनी उम्र में भी खूबसूरत हो सकती है निर्मला कोमल की नज़रों को भाप गई थी,,, इसलिए उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए वह खुद ही अपने हाथों से दोनों चूची को पकड़ कर उसकी तरफ आगे बढ़ते हुए बोली,,।

क्या देख रही हो कोमल रानी,,,?

कुआं में देख रही हूं कि इस उम्र में भी क्या औरत इतनी खूबसूरत हो सकती है।

तो तुझे क्या लग रहा है यह सच है या सपना?

मुझे तो यह सपना ही लग रहा है क्योंकि मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि कोई औरत इस उमर में इतनी ज्यादा खूबसूरत हो सकती है।,,,

( कोमल इतना कह रही थी कि निर्मला अपना हाथ आगे बढ़ाकर कोमल की बुर पर अपनी हथेली रखते हुए बोली,,,।)

मेरी कोमल रानी तुम्हारी बुर देख कर मुझे अपनी जवानी के दिन याद आ गए ( एैसा कहते हुई निर्मला अपनी हथेली को हल्के हल्के उसकी गुलाबी बुर पर फिरा रही थी,,, कोमल के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी और उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,।)

सससहहहहहह,,,, बुअा क्या कर रही हो बुआ,,,,

जवानी का मजा कैसे लिया जाता है यह तुम्हें सिखा रही हूं,,।

आहहहहहहहह,,,,, बुआ मुझे पता नहीं क्या हो रहा है,,

( कोमल सुभम के लंड को अपनी गांड पर रगड़ते हुए बोली,,,।)

कुछ नहीं हो रहा है यह तुम्हें मजा आ रहा है और ऐसे ही लिया जाता है मजा,,,, लाओ जरा ठीक से तो देख लो तुम्हारी मुनीया कैसी है,, देख लूं जरा कि मेरे बेटे का मोटा लंड तुम्हारी बुर में घुसेगा भी या नहीं,,,,,

( ऐसा कहते हुए निर्मला घुटनों के बल बैठ गई शुभम यह सब देख रहा था और उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हुए जा रहा था क्योंकि उसकी नहीं है ना कि कोमल बदन का हर कटाव उसके तन बदन में आग लगा था,,, कोमल पूरी तरह से मस्त हुए जा रहेी थीे और अब वह शुभम के लंड के सुपाड़े को अपनी गांड के बीच की दरार के बीचो-बीच रगड़ना शुरू कर दी थी। जिससे कोमल की भी हालत पल पल खराब हुए जा रही थी।,,,

घुटनों के बल बेठी निर्मला बड़े ध्यान से कोमल की खूबसूरत बुर की बनावट को देख रही थी और गहरी सांसे लेते हुए कोमल उत्सुकता से निर्मला की तरफ देखे जा रहीे थी,,, निर्मला से रहा नहीं जा रहा था और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी उंगलियों से कोमल की बंद सिपी को खोलने की कोशिश करते हुए बोली,,,,

वाहह कोमल ऐसा लग रहा है कि तुमने अभी एक बार भी अपनी बुर के अंदर लंड नहीं ली हो।,,,, सच कह रही हुं ना मै।,,,,,,

हां,,, बुआ,,, आज तक मैंने इसे किसी को छूने भी नहीं दि हुं।

इसका मतलब है इसका उद्घाटन मेरे बेटे के द्वारा ही होगा।,,,,

( जवाब में कोमल कुछ नहीं बोली बस शर्मा कर दी गई जबकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम ने उसकी बुर का उद्घाटन पहले हीं कर चुका है। लेकिन यह बात निर्मला नहीं जानती थी और ना ही कोमल यह चाहती थी कि यह बात निर्मला को पता चले इसलिए वह कुछ नहीं बोली बस निर्मला की हरकतों का आनंद ले रही थी और खुद भी शुभम के मोटे सुपाड़े से खेल रही थी।,,,

निर्मला की हरकतों की वजह से उसके बदन की गर्मी बढ़ती जा रही थी निर्मला हल्की-हल्की अपनी उंगलियों के द्वारा कोमल की नाजुक बंद सीपी को खोलने की कोशिश कर रही थी,,, जोकि बुर की अंदरूनी दीवारों से हो रहे स्त्राव की वजह से बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी निर्मला को कोमल की बुर से छेड़खानी करने में मजा आ रहा था। निर्मला के मन में कुछ और भी चल रहा था अब तक उसने अपने बेटे से ही अपनी बुर चटाते आई थी,, इसलिए आज उसका मन है कह रहा था कि वह भी कोमल से अपनी बुर चटवाए,, और उसी से अपनी दूर चला कर यह देखना चाहती थी कि औरत की बुर जब औरत चाटती है तो कैसा महसूस होता है,,,, लेकिन वह सीधे-सीधे कोमल को यह नहीं कह सकती थी कि ले मेरी बुर चाट ले,, क्योंकि उसके मन में हो रहा था कि हो सकता है की कोमल यह कार्य करने से इंकार कर दें क्योंकि उसके लिए यह सब बिलकुल नया नया था और बुर पर अपना मुंह रखकर जीभ से चाटने में हो सकता है उसे अच्छा ना लगे और वह इंकार कर दें और सारा मजा किरकिरा हो जाए,,,, और ऐसा बाप होने नहीं देना चाहती थी इसलिए वह अपनी हरकतों से कोमल को इतनी ज्यादा कामविभोर से लिप्त कर देना चाहती थी कि ताकि वह जो भी वह बोले वह करने के लिए तैयार हो जाए,,,,,, ईसलिए निर्मला अपनी नशीली आंखों से कोमल की आंखों में झांकते हुए अपने गुलाबी होठों के पीछे से अपनी रशीली जीभ को बाहर निकाली,,, कोमल को समझ पाती इससे पहले ही निर्मला ने अपनी जीभ को नुकीली आकार में करके कोमल के देखते ही देखते उसकी रसीली बुर की पतली दरार पर हल्के से स्पर्श करके,,, उसकी कामाग्नि को और ज्यादा भड़का दि,,, कोमल तो पूरी तरह से अचंभित हो चुकी थी उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, एक औरत औरत की बुर से इस तरह मुंह लगाकर प्यार करेगी लेकिन यह हकीकत था जिसे वह अपनी फटी आंखों से देख रही थी सुभम भी पूरी तरह से चुदवासा हो गया था,,, कोमल खुद अपने गांड के भूरे रंग के छेद पर शुभम के मोटे लंड को रगड़ रही थी,,,, इस दौरान शुभम ने कोमल के ब्रा के हुक को खोल कर उसकी ब्रा भी उसके बदन से अलग कर दीया था। कोमल संपूर्ण का नग्न अवस्था में खड़ी थी और उसकी गोरे बदन को देखकर शुभम अपने आप पर बिल्कुल भी सब्र नहीं कर पाया और पीछे से उसे अपनी बाहों में भरते हुए उसकी दोनों कबूतरों को अपनी हथेलियों में भर कर दबोच लिया,,,,,, इसी बीच कोमल के बदन में झटका सा महसूस हुआ क्योंकि इस दौरान निर्मला अपनी जीभ सहित अपनी गुलाबी होठों के बीच जितना हो सकता था उतना कोमल की करणपुर को अपने मुंह में भरने की कोशिश करते हुए पूरी तरह से कोमल की बुर को अपने होटो के बीच भींच ली । इतनी ज्यादा अत्यधिक उत्तेजना को अपने बदन में महसूस करके निर्मला की हरकत की वजह से उसके तन बदन में कंपन होना शुरू हो गया निर्मला अपने दोनों हाथों से उसकी नरम गरम नितंबों को दबाते हुए उसकी बुर चाटने का आनंद उठाने लगी और कोमल इतने ज्यादा उत्तेजना बर्दाश्त ना कर पाने की शक्ल में गरम गरम सिसकारी छोड़ने लगी और उसके हाथ से शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड भी छूट गया क्योंकि वह खुद अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर शुभम की कमर पकड़ कर अपने बदन से चिपका ली,,, शुभम का मोटा लंड कोमल के नितंबों के नीचे गदर मचाते हुए सीधे उसकी बुर के सामने उसका सुपाड़ा पहुंच गया जहां पर निर्मला अपने गुलाबी होठों से कोमल की बुर चाट रही थी,,,,, अपनी आंखों के सामने अपनी बेटे के मोटे तगड़े लंड के बदामी रंग के सुपाड़े को देख कर,,, निर्मला की उत्तेजना और खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वह कोमल की बुर चाटते चाटते गप्प से शुभम कै सुपाड़े को मुंह में भर कर चूसने लगी,,,, कोमल के लिए यह नजारा बेहद उत्तेजक था उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था यूं तो उसने शुभम और उसकी मां को चुदाई करते हुए देख चुकी थी। लेकीन इस समय वह जीस उत्तेजक दृश्य का दर्शन कर रही थी उसे देखकर उसकी हालत खराब हो चुकी थी,,, उसे यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा था कि एक मा इस तरह से अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी। कोमल की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी। कोमल और कस के शुभम की कमर को पकड़ कर अपने बदन से सटाए हुए थी ऐसा लग रहा था कि जेसे वह शुभम को उसकी बुर में लंड डालने के लिए प्रोत्साहित कर रही हो,,,,

एक तरफ जहां जवानी से भरपूर मादकता छलक रही थी पूरे कमरे में मदहोशी का आलम छाया हुआ था,,,

वहीं दूसरी तरफ सुगंधा की सुहागरात नीरस होती जा रही थी,,, सुगंधा का पति ठीक है कि सुगंधा से बात भी नहीं कर पा रहा था क्या देखकर सुगंधा की आंखों में आंसू आ गए वह समझ गई थी उसकी जिंदगी खराब हो गई है।

 
कमरे में उत्तेजना की परिभाषा को द्रश्यात्मक तरीके से परिभाषित करते हुए शुभम अपनी कमर को होले होले कोमल की नरम नरम नितंबों पर आगे पीछे करते हुए हिला रहा था,,, जिसकी वजह से उसका मोटा तगड़ा

लंड कोमल की कोमल दरारों के नीचे के भाग में रगड़ खाते हुए आगे पीछे हो रही थी,,, कोमल के लिए शुभम की यह हरकत संभोग से कम नहीं थी,,, एक तो पहले से ही शुभम की मां अपनी जीभ से हरकत करते हुए उसकी बुर में आग लगा रही थी और दूसरे यह शुभम अपनी मौसम की गर्मी से बुर के मदन रस को पिघला रहा था। यह सब कोमल के लिए असहनीय था।,,, और ऊपर से उसकी आंखों में खुमारी का नशा बढ़ता ही जा रहा था,, रह रहकर निर्मला कभी अपने बेटे के मोटे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी तो कभी कोमल की रसीली बुर पर जीभ लगाकर उसके रस को गटक ने लगती,,,,

कोमल पूरी तरह से कसमसा रही थी और इस कशमकश की वजह से कमर के नीचे का भाग गोल गोल घूम रहा था जिसकी वजह से कोमल का मजा दोगुना होता जा रहा था। गर्मी का महीना और उपर से कमरे का गर्म दृश्य तीनों के बदन मे काम भावना की तपिश भर रहा था। तीनों के बदन से पसीनेकी बूंदें टपक रही थी।,,, आज पहली बार निर्मला बुर चाटने का आनंद ले रहीे थी उसे आज यह बात अच्छी तरह से समझ में आ गई थी कि मर्दों को घर जाने में कितना मजा आता है तभी तो वह या भी नहीं देखते कि बुर की सफाई ठीक से हुई भी है या नहीं बस उस पर टूट पड़ते हैं,,, और अपनी जीभ से ही चाट चाट कर उसे साफ कर देते हैं।,,, निर्मला की तरह से समझ गई थी कि जितना मजा बुर चुदाई का औरतों को मिलता है उतना ही मर्दों को भी प्राप्त होता है तभी तो वह इस समय पूरे जी जान से कोमल की बुर चाटने में लगी हुई थी।

शुभम कोमल की दोनों कबूतरों को अपने हथेली में भर कर होले होले से उसे पुच कार रहा था,,, कोमल के दोनों संतरों का रंग लाल टमाटर की तरह हो गया था। क्योंकि शुभम दोनों चुचियों को सहलाते-सहलाते उत्तेजना बस जोर से दबा दे रहा था। और इस वजह से कोमल की आह निकल जा रही थी।,,,,

सससहहहहहहह,,,,,, आहहहहहहहह शुभम यह क्या कर रहे हो तुम दोनों मां-बेटे मिलकर मेरे बदन में यह कैसी आग लगा रहे हो,,,, मुझसे यह बदन की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही है,,,,।आहहहहहहहहह सुभम,,,,

( कोमल मदहोश होते हुए बोली)

ओहहहहहहह कोमल मेरी जान मेरी रानी आग तो तुमने मेरे बदन में लगा दी हो,,,, तुम्हारा खूबसूरत बदन जी मैं आ रहा है कि ईसें अपने सीने में भींच लु। मुझसे तुम्हारी जवानी बर्दाश्त नहीं हुई है। मेरा लंड तड़प रहा है तुम्हारी बुर मे जाने के लिए,,,,,

ससससहहहहहह तो डाल दो ना रोका किसने है मैं भी तो तड़प रही हुं तुम्हारे लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,,,।

( कोमल और कुसुम के बीच हो रही अश्लील वार्तालाप को सुनकर निर्मला की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी,,, उन दोनों के बीच की गंदी बातचीत की वजह से बिल्कुल भी हैरान परेशान नहीं थी क्योंकि जब दोनों के बीच और खुद उसके बीच की मर्यादा की दीवार ही गिर गई हो तो अपने शब्दों में संस्कार के ईंटों को जोड़कर कौन सी दीवार खड़ी कर लेंनी थी। इसलिए वहां उन दोनों की बातचीत से और ज्यादा उत्तेजित होकर इस बार अपने बीच वालेी ऊंगली को फिर से कोमल की गुलाबी बुर के छेद में डाल दी और इस वजह से कोमल के मुख से सिसकारी फूट पड़ी।

ससससहहहहहहहह,,,,, आहहहहहहहहहह बुआ,,,,,,,,, यह क्या कर रही हो,,,।

कोमल रानी तुम्हारी बुर में जगह बना रही हुं ताकि मेरी बेटे का मोटा लंड तुम्हारी बुर के अंदर आराम से जा सके,,,,,

तो ऊंगली क्यों उसी को डलवा दो,,,

बडी़ जल्दी पड़ी है तुम्हें लंड लैंने की,,,,,,,

क्या करूं बुआ तुमने जो मेरे बदन में आग लगाई हो मैं तड़प रही हूं तुम्हारे बेटे के लंड को लेने के लिए,,,

ले लेना अभी तो सारी रात बाकी है मेरा बेटा तुम्हारी अच्छे से चुदाई करेगा (इतना कहते हुए निर्मला अपने बेटे के लंड पकड़ कर उसके सुपाड़े का उसी तरह से उसकी गुलाबी बुर के दरार रगड़ने लगी,,,,)

आहहहहहहहहहहह,,, बुआ तड़पा क्यों रही हो,,,,

मेरी जान यहीं तड़प तो तुम्हें लंड निगलने में मदद करेगा,,,,,,

( निर्मला शुभम कै लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के बीचो-बीच रगड़ रही थी जिसकी गर्मी कोमल बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। वह मजदूर थी वाईएनएन जताना चाहती थी कि शुभम ने उसे पहले भी चोद चुका है इसलिए वह अपने बदन में उठ रही चुदास की लहर को अपने अंदर दबाने के लिए अपने नितंबों को गोल गोल आकार में घुमाते हुए शुभम के मोटे और लंड की रगड़ को अपने अंदर महसूस करते हुए मस्त हुए जा रही थी। शुभम दोनों की मद भरी बातें सुनकर मस्त हो चुका था उसका भी सब्र टूट चुका था वह भी चाहता था कि जल्द से जल्द बा कोमल की फोटो में अपना लंड डाल कर उसे चोदे ले लेकिन अभी ऐसा करने पर उसकी मां नाराज हो सकती थी और वह उसे नाराज नहीं करना चाहता था निर्मला के मन में कुछ और ही चल रहा था वह सबसे पहले चुद़वाना चाहती थी। क्योंकि जितनी आप और को मत दीजिए बनाने के लिए उसे कहीं ज्यादा निर्मला मचल रही थी अपने बेटे के लंड को लेने के लिए,,, और वह कोमल के सामने चुदवा कर अपनी

प्यास को बुझा कर तृप्त होना चाहतीे थी,, कोमल ने जब से उसे और शुभम को चुदाई करते हुए पकड़ी थी तब से एक तरफ उसके मन में डर भी था लेकिन एक तरफ उसकी इच्छा यह भी हो रही थी कि वहां कोमल के सामने ही अपने बेटे से चुदवाए,, और अब उसकी यह ख्वाहिश पूरी होने वाली थी इसलिए,,, निर्मला खड़ी हुई और देखते ही देखते अपने बदन पर से सारे वस्त्र उतार फेंकी,,, कोमल और निर्मला दोनों एकदम नंगी हो चुकी थी शुभम कहां पीछे हटने वाला था वह भी खड़ा खड़ा यह देखता रहा और अपने भी वस्त्र उतार कर फेंक दिया। कमरे में तीनों संपूर्ण का नग्न अवस्था में खड़े थे शुभम की आंखों के सामने दो दो औरतें अपनी जवानी से लबालब बदल लिए उसकी आंखों के सामने खड़ी थी जिसे देख कर शुभम ललचा रहा था। उसका लंड छत की तरफ मुंह ऊठाए खड़ा था शुभम के टनटनाए हुए लंड को देख कर कोमल की बुर फुदकने लगी। वह गरम आहें भरते हुए बोली,,,,

शुभम तुम्हारा लंड तो ऐसा लगता है किसी जानवर का लंड है जिस तरह से मुंह ऊठाए खड़ा है,, मुझे तो डर लग रहा है।

डर क्यों लग रहा है कोमल रानी,,,( कोमल की बातें सुनकर शुभम अपने लंड को मुठीयाते हुए बोला,,)

इतना मोटा मेरी बुर ( नजरें झुका कर बुर की तरफ देखते हुए ) में जाएगा कैसे,,,,

( यह सुनकर निर्मला बोली)

चला जाएगा मेरे को मजा नहीं एक बार और अब जब चुदवासी हो जाती है तो गधे का लंड भी ले लेती है।

( निर्मला मुस्कुरा कर बोली।)

तुमतो ले लो की दुआ तुमको ना जाने कितनी बार ली हो लेकिन मेरे में कैसे जाएगा,,,

चला जाएगा मैं हूं ना सब ठीक कर दूंगी,,,

वैसे कहूं तो बुआ तुम ने अपने बेटे को क्या खाकर पैदा की हो उसका लंड भी एकदम गधे के लंड की तरह है।

तुम्हें कैसे पता कि शुभम का लंड गधे के लंड की तरह है तुमने देखी हो क्या गधे का?

बुआ यहा खेतों में अक्सर दिख ही जाते हैं घास चरते हुए अपना वह लटका कर घूमते रहते हैं।( कोमल एक्जाम छिनार पन दिखाते हुए बोली,,, उसे अब बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं हो रही थी। यह देखकर निर्मला और सुभम दोनों हैरान थे लेकिन दोनों मन ही मन खुश हो रहे थे कि इस तरह का खुलापन हीं चुदाई में और ज्यादा आनंद देता है।,,,, निर्मला कोमल की बात सुनकर हंसते हुए बोली।

एकदम छीनार होते जा रही हो,,,

तुम से बड़ी नहीं बुआ,,,,, ( कोमल भी निर्मला की बात का जवाब देते हुए हंस कर बोली,, जवाब में निर्मला भी बस मुस्कुरादी,,, क्योंकि निर्मला के लिए बोलने लायक कुछ भी नहीं था वैसे भी कोमल सच ही कह रही थी। निर्मला सच में इस समय किसी छीनार से कम नहीं थी।

दोनों को शुभम देखते हुए उत्तेजित हुए जा रहा था। उसका लंड पूरी तरह से तैयार था बुर नुमा गुफा मे जाने के लिए,,, उसके लिए दो दो औरते तैयार थी अपनी टांग फैलाने के लिए,, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि दोनों में से कौन सबसे पहले अपनी टांगे खोलेगी यह फैसला निर्मला को ही करना था निर्मला बखूबी जानती थी की सबसे पहले कमरे में शुभम का लंड कौन अपनेी बुर में लेगा।,,,

कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था आधी रात बीत चुकी थी बदन की गर्मी और वातावरण की गर्मी तीनों के बदन में अपना असर दिखा रही थी। तीनों के बदन पर पसीने की बूंदें चमक रही थी। तीनों एक दूसरे को बारी बारी से देख कर मस्त हुए जा रहे थे।,,, तभी निर्मला बोली,,,,

अब हमें खिड़की खोल देना चाहिए क्योंकि देखो हम तीनों की हालत कैसी पसीने से तरबतर हो चुके हैं।
 
अब हमें खिड़की खोल देना चाहिए क्योंकि देखो हम तीनों की हालत कैसी पसीने से तरबतर हो चुके हैं।

( इतना कहते हुए निर्मला गांड मटकाते हुए खिड़की की तरफ जाने लगी,,, निर्मला की लचकती हुई गोल गोल गाने को देखकर शुभम के साथ साथ कोमल की भी हालत खराब हुई जा रही थी। एक औरत होने के बावजूद एक स्त्री के नितंबों के प्रति उसका आकर्षण खुद ऊसे हैरान कर देने वाला लग रहा था। इेसमे कोमल का भी कोई दोस नहीं था। निर्मला की खूबसूरत बदन की बनावट ही कुछ इस तरह की थी कि देखने वाला बस देखते ही रह जाता था। गोल गोल खरबूजे की तरह कभी इधर को तो कभी उधर को लुढकती हुई मदमस्त गांड दोनों की तन बदन में उत्तेजना की लहर भर दे रही थी।,,, कोमल और शुभम दोनों संपूर्णता ं नंगे होकर के निर्मला की तरफ देख रहे थे। शुभम अपनी मां की मदद कैसे छलकती जवानी देख कर अपने आप पर सब्र नहीं कर पाया और उसकी तरफ बढ़ने लगा कोमल शुभम की लटकते हुए लंड को देखकर उत्तेजना से भरी जा रही थी। जैसे ही निर्मला ने खिड़की खोली वैसे ही तुरंत शुभम उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।

आहहहहहहहह क्या कर रहा है थोड़ा सा सब्र कर,,,

( खिड़की खोलते ही बाहर से ठंडी हवा का झोंका कमरे में प्रवेश किया,, और तीनों के बदन में शीतल हवा की ठंडक ने झुरझुरी फैला दी। अपनी मां को बाहों में भर कर अपने तने हुए लंड को उसके नितंबों पर रगडना़ शुरू कर दिया।

कोमल गया देखकर उत्तेजना से भरी जा रही थी कि उसकी आंखों के सामने एक बेटा अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ रहा था।,,, लेकिन निर्मला बेहद खुश नजर आ रही थी और उसकी खुशी का कारण यह था कि उसका बेटा कोमल जैसी खूबसूरत नंगी लड़की बगल में होने के बावजूद भी उसे अपनी बाहों में भर कर प्यार कर रहा था इसकी वजह से निर्मला को अपने बदन पर गर्व होने लगा क्योंकि यह उसके खूबसूरत बदन का ही कमाल था की,, एक जवान लड़का जवान लड़की को छोड़कर उसे प्यार कर रहा था।,,,, शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था उसका तना हुआ लंड ऊसकी मां की गांड के बीचो-बीच गश्त लगा रहा था। जो कि निर्मला की भी उत्तेजना को बढ़ावा दे रहा था शुभम अपने दोनों हाथों में अपनी मां के दोनों खरबुझों को पकड़कर दबाता हुआ बोला,,,।

ओहहहहहहहह,,,, मम्मी क्या करूं तुम्हारी मटकती हुई गांड देखकर मुझसे रहा नहीं गया।,,,,,( निर्मला अपने बेटे के ईस छेड़खानी से खिलखिला कर हंस रही थी।)

आहहहहहहहह,,,, क्या कर रहा है तेरा वो मुझे धंस रहा है।

धंसा रहा हूं तभी तो धंस रहा है, थोडी टांगे खोल दो तो उसे अंदर भी डाल दुं,,,,,

डाल देना मेरे राजा इतनी जल्दी भी क्या है अभी तो पूरी रात बाकी है क्यों कोमल,,, सच कह रही हुं ना।,,,,

( निर्मला अपनी आंखों में मदहोशी लिए हुए कोमल से बोली)

हां बूआ अभी तो सारी रात बाकी है।,,,,,,

( निर्मला कोमल का जवाब सुन कर मुस्कुरा दी लेकिन सुभम ं एकदम पागल हुए जा रहा था। उससे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था उसका खुंटा बार-बार निर्मला की गुलाबी बुर पर दस्तक दे रहा था। जो की निर्मला को भी काम वीभोर कर दे रहा था।,,, निर्मला की भी हालत पल पल खराब हुए जा रही थी उसकी भी इच्छा हो रही थी कि अपने बेटे के लंड को जल्द से जल्द अपनी बुर में डलवा कर चुदवाले,,, लेकिन इतने दिनों बाद भी दिखाना ठीक नहीं था क्योंकि उसे बहुत ज्यादा मस्ती करना था अभी तो वह कोमल से अपनीं बुर चटवाने के इरादे मेथी इसलिए वहअपने बेटे को अपने से दूर करते हुएैं बोली,,,

चलो बेटा बिस्तर पर वहीं यह सब खेल खेलते हैं।

( इतना कहकर वह बिस्तर की तरफ जाने लगी शुभम ठगा सा रह गया वह खिड़की से बाहर झांका तो बाहर चांदनी रात अपना जलवा बिखेर रही थी। चारों तरफ चांदनी उजाला फैला हुआ था ज्यादा कुछ साफ तो नहीं लेकिन फिर भी सब कुछ नजर आ रहा था।,,,,

शुभम खिड़की पर अपनी नजर आया तो देखा निर्मला बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगे फैलाए हुई थी,,,, और कोमल को खाते हुए अपनी गुलाबी बुर ़की पत्तियों को अपनी उंगलियों के बीच रख कर मसल रही थी ।,,,, निर्मला को बिस्तर पर लेट कर इस तरह की हरकत करते हुए देखना कोमल भी पूरी तरह से कामा तुर हो गई वह एक टक निर्मला को ही देखे जा रही थी,,,,, निर्मला प्यासी नजरों से कोमल की तरफ देखते हैं और अपनी बुर पर हथेलीै को रगड़ते हुए बोली,,,।

इधर आओ कोमल रानी तुम्हे जवानी का मजा चखाती हूं,,,,,,

( इतना सुनकर कॉमन निर्मला के करीब जाने लगी यह सब शुभम खिड़की के करीब खड़ा हो कर देख रहा था यह भी देख रहा था कि उसकी मां कितनी ज्यादा चुदवासी हो गई थी। वह मन में सोचने लगा कि अगर हर घर में ऐसी औरत हो तो सच मे हर एक बेटा मादरचोद बन जाए।,,,, वह अपनी मां की तरफ देख रहा था निर्मला अपनी बुर को सहलाते हुए कोमल को अपने करीब बुला रही थी। कोमल धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाते हुए निर्मला की तरफ बढ़, रही थी, जैसे ही कोमल निर्मला के दोनों टांगों के बीच पहुंची निर्मला बोली,,,,।

बस मेरी रानी अब तुम बिस्तर के किनारे बैठ जाओ,,

( कोमल समझ नहीं पा रही थी कि निर्मला क्या करवाना चाह रही थी लेकिन फिर भी,,, इस समय कहां कामाग्नि की ज्वाला मे तप रही थी और निर्मला की खूबसूरती के आकर्षण में बंधी हुई थी,,, निर्मला कह रही थी वैसा करते हुए वह बिस्तर के किनारे बैठ गई,,,,

अब निर्मला की गुलाबी फांखों और कोमल के गुलाबी होठों के बीच की दूरी तकरीबन 1 फीट जितनी ही रह गई थी,,, इस दूरी को कम करते हुए निर्मला अपने नितंबों को नीचे की तरफ कोमल के मुंह की तरफ बढ़ा दी,,,, कोमल को अब कुछ कुछ समझ में आने लगा था।

निर्मला छिनार पंडित आते हुए अपनी बुर को कोमल की फोटो के बिल्कुल करीब कर दी इतना करीब कि वह बिस्तर पर अपने दोनो टांगों को नीचे फर्श पर टिका कर लेटी हुई थी,,,, कोमल को निर्मला के बुर की गर्मी अपने होठों पर महसूस हो रही थी,,,, बुर से उठ रही मादक खुशबू उसके नथुनों से होती हुई उसके बदन में पहुंच रही थी जिससे वह और भी ज्यादा कामातुर हुए जा रही थी।,,, कोमल बिना कुछ बोले अपने आप ही अपने होठों को बुर पर रख कर उसका स्वाद लेना चाह रही थी। ऐसा वो खुद करती इससे पहले ही निर्मला बोल पड़ी,,,

ससहहहहहहहह,,,,, कोमल रानी मेरी बुर में आग लगी हुई है। ईसे अपने होठो से चूम कर अपनी जीभ से चाट कर शांत कर दो।,,,, जल्दी करो कोमल,,,,

( कोमल की भी उत्सुकता निर्मला की बुर चाटने के लिए बढ़ती जा रही थी, वह प्यासी नजरों से निर्मला की रेसीली बुर की तरफ देख रही थी जिसमे मदनरस छलक लग रहा था।,,,, कोमल भी अपनी लालच को रोक नहीं पाई और अपने प्यासे लाल लाल होठों को निर्मला की दहकती हुई गुलाबी बुर पर रखदी,, जैसे ही कोमल ने अपने होठों को निर्मला की बुर के ऊपर रखी निर्मला पूरी तरह से कसमसा गई,,, उसका बदन झनझना उठा। मदहोशी के आलम मे उसकी आंखें खुद-ब-खुद बंद हो गई।

ससससहहहहहहहहह,,, कोमल आहहहहहहहहह,,,,

कोमल पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी उसकी दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी। वो धीरे धीरे अपने जीभ से निर्मला की गुलाबी पत्तियों को चाटना शुरू कर दी,,, कोमल को थोड़ी ही देर में इस कार्य को करने में आनंद आने लगा धीरे-धीरे दोनों के मुंह से सिसकारी की आवाज आने लगी,,, शुभम यह सब देख कर एकदम मस्त हुए जा रहा था। उससे बिल्कुल भी शब्र नहीं हो रहा था,,,,। कोमल को अपनी मां की बुर चाटते हुए देखकर शुभम का लंड और ज्यादा कड़क हो गया,,, वह सीधे बिस्तर पर चढ़ गया और घुटनों के बल बैठ कर अपने तगड़े मोटे लंबे लंड को अपनी मां के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया। अनुभवी निर्मला समझ गए कि उसका बेटा क्या करवाना चाहता है यह सब कोमल तिरछी आंखों से देख रही थी। कोमल की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि शुभम और उसकी मां क्या करने वाले हैं तभी शुभम नीचे की तरफ अपना हाथ ले जाकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसे चुचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया।

ससससहहहहह,,,,, सुभम,,,, आहहहहहहहहह,,,,,,

( और निर्मला गरम सिसकारी लेते हुए, बिना पकड़े ही शुभम के लंड को अपने मुंह में गटक गई,,,, अपने चेहरे को गोल गोल घुमाकर वह शुभम के मोटे लंड को चाटने का आनंद लेने लगी,,, यदि पता कोमल के बदन में कामोत्तेजना की चिंगारियां फूटने लगी,,, वग निर्मला की बुर चाटते चाटते अपनी बीच वाली उंगली को उसकी गुलाबी बुर फांकों के बीच के छेद में घुसा दी,,

ससससहहहहहहहह,,,,, कोमल,,,, एकदम छिनार हो गई रे तु तो,,, ( अपने बेटे के लंड को मुंह में से निकालते हुए बोली और इतना बोलने के साथ फिर से गप्प से पूरा मुंह में भर ली,,, निर्मला की बात सुनकर मुस्कुराते हुए कोमल बोली,,,)

तुम्हारा छिनार पना देख कर ही यह सब सीख रही हूं,,

मेरी कोमल रानी कह तो ऐसे रही हो कि जैसे कभी भी किसी के लंड अपनी बुर मे ले कर चुदवाती ही नहीं,,,,

हां अभी तो बिल्कुल भी नहीं करवाती लेकिन जब से तुमको अपनी बेटे से चुदवाते हुए देखी हुं तब से ना जाने क्यों मुझे भी लंड लेने की इच्छा करने लगी है।,,,,,

तो आज अपनी इच्छा भी पूरी कर लेना,,,,,

( इतना कहने के साथ ही निर्मला ने अपना एक हाथ नीचे की तरफ बढ़ा कर कोमल के सिर पर रख दिया और उस पर दबाव देकर अपनी बुर को और जोर-जोर से चाटने के लिए इशारा व्यक्त करने लगी,,, कोमल भी पागलों की तरह निर्मला की बुर चाटने लगी,,, तीनों अपनी अपनी मस्ती में मदहोश हुए जा रहे थे।,,, थोड़ी ही देर में निर्मला की संस्कारी की आवाज बढ़ने लगी जिस तरह से कोमल अपने बीच वाली उंगली को उसकी बुर के अंदर बाहर कर रही थी उसे देखते हुए,,, निर्मला को इतनी दूर के अंदर मोटे तगड़ी लंड की आवश्यकता पड़ने लगी,,, निर्मला अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर उसे हिलाते हुए सिसकारी लेकर बोली,,,।

सससहहहहहह आगहहहहहहहहह,,,,, अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है बेटा,,, अब जल्दी से तू मेरी बुर में अपना लंड डालकर मुझे चोदना शुरू कर दे,,,।

मेरी बुर तेरे लंड के लिए तड़प रही है।,,,,

क्यों क्या हुआ बुआ ऊंगली से मजा नहीं आ रहा है क्या?,,,,
 
?,,,,( बुर से अपने होठों को हटाते हुए बोली)

मजा तो बहुत आ रहा है रे लेकिन तेरी उंगलियों ने मेरी प्यास को और ज्यादा भड़का दी है,, जो कि अब मेरा बेटा ही अपने मोटे मुसल से बुझा सकता है,,,,।

( इतना देने के साथ ही निर्मला अपनी बेटे को उसकी टांगों के बीच में आने का इशारा करते हुए बोली,,,।)

शुभम मेरे बेटे दिखा दे इतनी ताकत आज मुझे एैसा जमकर चोद़ के मैं पानी पानी हो जाऊं,,,,।

तुम चिंता मत करो मम्मी मेरा मोटा ले ले तुम्हारी बुर में घुसकर गदर मचा देगा,,,( इतना कहते हुए शुभम बिस्तर से नीचे उतर आओ और कोमल को एक तरफ करते हैं निर्मला की टांगों के बीच अपने लिए जगह बना लिया कोमल यह सब बड़े गौर से देख रही थी।,, शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को पकड़कर अपनी मां की बुऱ की गुलाबी पत्तियों के बीच सटा दिया,,, जैसे ही सुभम का मोटे लंड का सुपाड़ा बुर पर स्पर्श हुई वैसे ही निर्मला की सिसकारी छूट गई,,,,।

ससससहहहहहह,,,,, आहहहहहहहहहहह रे सुभम मेरै राजा।,,,,,,,,

निर्मला का इतना कहना था कि सुदामा ने अपने दोनों हाथों से अपनी मां की मोटी मोटी चिकनी जांघो को पकड़ कर थोड़ा सा फैलाया,,, और हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का दिया,, निर्मला की बुर पहले से ही पानी पानी हो चुकी थी,,,

पहले से ही गीली हो चुकी बुर के अंदर शुभम का मोटा तगड़ा लंड आराम से सरक गया,,,, शुभम पहले प्रयास में ही अपने आधे लंड को अपनी मां की बुर में प्रवेश करा चुका था।,,, कॉमर्स धड़कते दिल के साथ यह मंजर देख रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था, वेसे तो ऊसे पहले से ही मालूम था कि सुभम अपनी मां को चोदता है लेकिन इस समय वह दोनों के इतने करीब होकर यह नजारे का लुत्फ उठा रही थी कि,,,, उसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कोमल की सांसे भारी चल रही थी। कमरे में तीनों नंगे थे वह कोमल और निर्मला को संभोगनीय अवस्था में देख रही थी,,,। उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था जिस तरह से निर्मला एकदम खुले तौर पर अपने बेटे से चुदवा रही थी ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि यह दाेनो मां बेटे हैं बल्कि ऐसा लग रहा था कि एक मदमस्त औरत एक जवान लड़के को अपना आशिक अपना प्रेमी बनाकर उसे से चुद़वा रही है।,,,, निर्मला आंखों में मदहोशी का नशा लेकर अपने बेटे की तरफ प्यासी और उत्सुकता भरी नजरों से देख रही थी। उसे इंतजार था जब वह पूरा का पूरा लंड बुर में डालकर उसकी जमकर चुदाई करना शुरू करता। ऐसा नहीं था कि सिर्फ कोमल की ही सांसे तेज चल रही थी,,, निर्मला भी सांसे थामे लेटी हुई थी।,, शुभम का भी दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, तीनों इस पल का भरपूर आनंद उठाना चाहते थे लेकिन तीनों की स्थिति अलग थी शुभम अपनी मां को जमकर चोदना चाहता था निर्मला अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसुस करना चाहती थी,, और कोमल अपनी आंखों के सामने एक बेटे को अपनी मां को जमकर चोदते हुए देखना चाहती थी यह देखना चाहती थी कि मर्द औरत के यहां तो कितना मजबूर हो जाता है कि सारे रिश्ते नातों को भूल कर बस उसमे समा जाने की ही चेष्टा करता रहता है।,,

शुभम अपनी मां की चिकनी कमर को दोनों हाथों से थामे अगले प्रहार के लिए तैयार हो चुका था निर्मला दी अपने आप को अपने बेटे के अगले जबरदस्त धक्के को सहने के लिए तैयार कर चुकीे थी,, और पूरी तरह से चोदा से भरा हुआ शुभम एक जोरदार प्रहार करता है और उसका पूरा समाचार लंड उसकी मां की दिल की गहराई में समा जाता है,,,,।

सहहहहहहहह,,,,, सुभम,,,,,,, आहहहहहहहहहह,,,,, पूरा घुस गया रे,,,,,आहहहहहहहह,,,,

( कोमल यह देखकर पूरी तरह से हैरान हो चुकी थी शुभम का पूरा का पूरा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में ऐसा खो गया था कि मानो कोई पानी में डूब गया हो। कोमल इस बात से हैरान थी कि शुभम का इतना लंबा लंड छोटी सी बुर के अंदर कैसा समा गया था।,,,,,,,,,

आहहहहहहहह,, बेटा बस अब तो धीरे-धीरे चोदता हुआ मुझे जन्नत की सैर करा मेरे तन बदन को निचोड़ डाल,,, आहहहहहहहह,,,

( इतना कहना था कि शुभम अपने मोटे लंबे लंड को वापस बुर की गहराई से बाहर की तरफ खींच कर एक और जबरदस्त धक्का मारा और इस बार भी लंड का सुपाड़ा सब कुछ चीरते हुए बुर की गहराई में समा गया।

एक बार फिर से निर्मला के मूंह आह निकल गई लेकिन इस बार शुभम ने निर्मला को समझने का कोई भी मौका नहीं दिया और अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए उसको चोदना शुरू कर दिया शुभम के हर धक्के के साथ निर्मला की आह के साथ सिसकारी छूट जा रही थी। यह नजारा कोमल को पूरी तरह से उत्तेजना से भर दिया वह अपने हाथों से ही अपनी बुर को मसलना शुरू कर दि।,,, निर्मला यह देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी शुभम के हरदा के के साथ उसका मांसल बदन पानी की लहर की तरह लहरा जा रहा था अपने बेटे से चुदवाती हुई वह कोमल से बोली,,,

सससहहहहहहह,,,, कोमल देख,,,, आहहहहहहहह,,, ऐसे चुदवाया जाता है,,, ससससहहहहहह. ,,, जब तू मेरे बेटे से चुदवाई गी तो ओहहहहहहहहह मां उसका मोटा लंड ऐसे ही तेऱी बुर के अंदर आहहहहहहहह,,, बाहर होगा।,,,,,,ऊहहहहहहहह,,,,

देख ऐसे ही हर धक्के के साथ तेरे मुंह से भी आहहहह ऊहहहहह की आवाज आएगी,,,,,,।

कोई बात नहीं बुआ मैं सब कुछ सहन कर लूंगी तुम्हें अपने बेटे से ही तरह से चुदवाते हुए देख कर मेरी बुर मे भी आग लग रही है,,,,।

( इतना कहने के साथ ही कोमल बिस्तर पर चढ़ गई अोर निर्मला की चुचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दी,,, निर्मला को दुगना मजा मिलने लगा। निर्मला की बुर गप्प गप्प करके अपने बेटे के लंड को अंदर ले रही थी। कोमल की बुर पानी फेंक रही थी उससे कुछ बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह जल्द से जल्द शुभम से चुदना चाहती थी,,,, जब उससे बुर की गर्मी बर्दाश्त नहीं हुई तो वह निर्मला के चेहरे पर घुटनों को गर्दन के अगल-बगल मोड़ कर बैठ गई और अपनी बुर को निर्मला के होठो से सटाते हुए बोली,,,

सहहहहहहह बुआ,,,,,,, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है अपना तो अपने बेटे का लंड लेकर मस्त हो रही हो लेकिन यह सब देख कर मेरी बुर में आग लगी हुई है अब जल्दी से जल्दी ईसे चाटकर ठंडी करो,,,,ओहहहहहहह बुआ जल्दी करो बुआ,,,,,,

अरे तू तो एकदम रंडी हो गई है रे,,,,,

अब कुछ भी हो जाओ हमेशा तुमसे कम ही रहूंगी और इतना कहने के साथ ही खुद ही अपनी रसीली भी बुर को निर्मला की होठों पर रगड़ना शुरू कर दी,,, आखिर कोमल की जवानी और उसकी मादक खुशबू से भरपूर बुर का स्वाद चखने से भला निर्मला कब तक अपने आप को रोक पाती,,,, वह भी अपनी जीभ उसमे घुमाना शुरू कर दी,,, दोनों मस्त हुए जा रहे थे। शुभम तो यह नजारा देखकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी अपनी आंखों के सामने वह कोमल की गहराई गांड को गोल गोल घूमते हुए देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो चुका था और उसके झटके और भी अत्यधिक तेज होने लगे थे उसे जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपनी उंगली को उसकी बुर में डालना शुरू कर दिया कोमल की उत्तेजना और मस्ती दोनों पढ़ रही थी। शुभम एक हाथ से कोमल की नरम नरम गांड दबा रहा था तो एक हाथ की बीच वाली उंगली को वह उसकी बुऱ के अंदर बाहर करते हुए उसके जोश को और ज्यादा बढ़ा रहा था।

बंद कमरे में आपसी रिश्तों के बीच वासना का सेलाब उठ रहा था। कोमल गर्म सिसकारी भरते हुए अपनी गदराई गांड को निर्मला के चेहरे पर रगड़ रही थी शुभम अत्यधिक जोश में अपने लंड के खुंटे को अपनी मां की जमीनी बुर मे गाड़ रहा था। मां बेटे दोनों की जांघों की आपस में टकराने से छप छप की आवाज आ रही थी जो कि दोनों के जोश को बढ़ा रही थी। शुभम की चुदाई तीव्र गति से हो रही थी। वह अपनी मां को बड़े जोश के साथ चोद रहा था, तीनो अपनी अलग ही दुनिया में मस्त हुए जा रहे थे । कुछ देर बाद अपने बेटे की जबरदस्ती चुदाई का सामना नहीं कर पाई और भल भलाकर झड़ने लगी,,,, लेकिन शुभम नहीं झढ़ा था उसकी आंखों के सामने कोमल की गदराई जवान गांड लहरा रही थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे शुभम को इशारा कर रही हो अपनी तरफ बुलाने के लिए और यही देखकर शुभम का जोश और ज्यादा बढ़ गया वह अपनी मां की बुर में से अपना लंड वापस निकाला,, उसका पानी अभी नहीं निकला था। लेकिन उसके लंड से निर्मला का मदन रस अभी भी टपक रहा था,, शुभम अपने दोनों हाथोे से कोमल की पतली कमर को थाम कर अपनी तरफ खींचने लगा शुभम की भुजाओं में अत्यधिक बल था इसलिए कमर को समझ पाती इससे पहले ही वह कोमल को अपनी तरफ खींच लिया और जैसे ही उसकी बड़ी बड़ी गांड शुभम के लंड के करीब आई शुभम उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए उसे नीचे की तरफ दबाने लगा ऐसा लग रहा था कि जैसे कोमल भी उसके ईसारे को समझ गई और वह भी निर्मला पर ही झुक गई सुबह मैं अपने दोनों हाथों से कोमल कि सुडौल नितंबों को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाया, जेसे ही उसे लगने लगा कि ऊसका लंड ठीक उसकी बुर के सामने है तो वह अपने लंड को कोमल की बुर के मुहाने पर रखकर जोश में जोरदार धक्का मारा और एक साथ ही उसका आधा लंड कोमल की बुर में समा गया,,, लेकिन इतनी जबरदस्त प्रहार के लिए कोमल पूरी तरह से तैयार नहीं थी इसलिए उसके मुंह से चीख निकल गई,,, उसकी चीख की आवाज सुनकर निर्मला उसके बालों में उंगली घुमाते हुए बोली।

क्या हुआ कोमल रानी पूरा घुस गया क्या ?

नहीं बुआ अभी तो आधा ही गया है,,,,( कोमल दर्द से कराहते हुए बोली,,,,।)

पुरा घुसेगा तब मजा आएगा। ( ईतना कहने के साथ ही निर्मला कोमल की चुचीयो को थामकर ऊसे दबाने लगी।

कोमल मस्त होने लगी, निर्मला के नंगे बदन पर झुककर घुटनों के बल बैठी हुई थी शुभम कोमल की मस्त गांड को पकड़कर अपना आधा लंड ऊसकी बुर में पेल चुका था। जिंदगी में पहली बार उसने इस तरह का आनंद उठा रहा था वह क्यों निर्मला और कोमल भी,,, पूरी तरह से मजा लूट रही थी,,, कोमल की बुर अभी भी बहुत टाइट थी तभी तो शुभम का आधा लंड बुर की गहराई में फंस चुका था। शुभम के बदन में उत्तेजना अपना असर दिखा रही थी उसका जोश बढ़ता जा रहा था,,, उसकी आंखों के सामने दो दो गुलाबी बुर नजर आ रही थी एक ने पानी फेंक दी थी और दूसरी आधे लंड को अंदर लेकर कुलबुला रही थी। अपने दोनों हाथों से कोमल की चूचियों को दबाकर उसकी हालत और खराब किए जा रही थी कोमल जी निर्मला की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचीयो को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने आप को संभाले हुए थी। शुभम जोशं से भरा हुआ कोमल की गांड को अपनी हथेलियों में भर भर कर दबा रहा था। शुभम एक बार फिर से करारा झटका मारा और इस बार उसका पूरा का पूरा लंड बड़ी तेजी से बुर की गहराई में उतर गया। जबरदस्त प्रहार की वजह से कोमल चीख ऊठी,,,

आहहहह,,,,, मर गई रे। आहहहहहहहहहह,,,,,,,

घबराओ मत मेरी कोमल रानी और तुम्हारी बुर का भी उद्घाटन हो गया है तुम्हारी बुर मे मेरे बेटे ने लगता है पूरा का पूरा लंड घुसा दिया है तभी तुम ईस तरह से चीख रही हो।,,,,,

( जवाब में कोमल बोली कुछ नहीं बस अपना सिर हिलाकर हामी भर दी उसे बहुत जोर का दर्द हो रहा था वह अपने दांत को भींचे हुए थी,,,, निर्मला उसे सांत्वना देते हुए बोली,,,।)

सब ठीक हो जाएगा अभी थोड़ी देर में ही तुम खुद ही उसके लंड पर कूद कूद कर चुदवाओगी बस थोड़ा धैर्य रखो,,
 
इतना कहने के साथ ही निर्मला उस के दर्द को कम करने के उद्देश्य से थोड़ा सा ऊपर उठी और लपक कर कोमल की छोटी-छोटी नारंगी को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी,,,, सुभम पीछे से अपने लंड को बुर में डाले हुए ही,, कोमल की नंगी गांड को अपनी हथेलियों से चला रहा था,,,,, कोमल को अभी भी दर्द का आभास हो रहा था एक बार सुभम के लंड से चुदने के बाद भी,,, आज उसकी बुर शुभम के मोटे तगड़े लंड को लेने में दर्द कर रही थी। कुछ देर बाद ही शुभम के सहलाने और निर्मला के द्वारा चूची पीने की वजह से कोमल के बदन में उत्तेजना की लहर फिर से दौड़ने लगी उसे लगने लगा कि अब उसकी बुर चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है इसलिए बिना बोले ही शुभम को इशारा देने के उद्देश्य से वह अपनी गांड को हल्के से आगे की तरफ खींच कर दुबारा उसे पीछे की तरफ ठेल दी,, कोमल की हरकत की वजह से शुभम का लंड कोमल की बुर में अपने आप अंदर बहार हुआ,,, यह कोमल का इशारा शुभम समझ गया और कोमल की कमर अपने दोनों हाथों से थामते े हुए बोला,,,

ओहहहहहहहह. मेरी जान बस अब देखो मैं तुम्हें कैसे चाेदता हूं,,, आज तुम्हाऱी बुर को अपने मोटे लंड से चोदकर भोसड़ा ना बना दिया तो बोलना,,,,,,,

मेरी तो यही चाह रही हूं मेरे राजा आज मुझे चोदो कि मैं जिंदगी भर याद रखु,,,,,,

एक नंबर की रंडी होती जा रही हो कोमल तुम,,,, अभी से यह हाल है तो पता नहीं बाद में क्या होगा?

( निर्मला कोमल की दोनों चुचीयों को मसलते हुए बोली,,,,)

कुछ मत कहो बुआ,,, तुम्हारे बेटे के पास जो हथियार है उसे पाने के लिए हर औरत इस हद तक जा सकतीे हैं,, जब तुम अपने बेटे से चुदने की लालच को रोक नहीं पाई तो हम लोग क्या हैं,,,,, बस शुभम किसी बात पर ध्यान मत दो और अपना काम करो,,,,,

वही तो कर रहा हूं मेरी जान तेरी बुर पीछे से चोदने में और मजा आता है। चल अब तू तैयार हो जा अपनी ओखली में मेरे मुसल का बार सहने के लिए,,,,,

( शुभम की यह बात सुनकर कोमल को भी लगने लगा कि सुबह जबरदस्त प्रहार करने वाला है इसलिए वह कसमेसाते हुए अपनी गदराई गांड को बाय बाय करते हुए एडजेस्ट करने लगी,,, शुभम पूरी तरह से तैयार था बार करने के लिए और वहां कोमल की पतली कमर को अपने दोनों हाथों से थाम कर अपनी कमर को कच कचा कर आगे की तरफ ठेला,,, और तुरंत पीछे की तरफ निकाल दिया एक बार फिर से उसका मोटा लंड कोमल की बुर की गहराई नाप कर ऊपर की तरफ आ गया था,,, शुभम की ओर से भरा हुआ था अब रुकना उसके बस में नहीं था। वह बड़ी तीव्र गति से अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए किसी मशीन की भांति चलाने लगा हर धक्के के साथ कोमल आगे की तरफ पसर जा रही थी जिसे निर्मला अपनी बाहों में भर कर उसकी चूचियों से खेल रही थी,,,, चुदाई का महासंग्राम शुरू हो चुका था शुभम का लंड धड़ाधड़ बुर के अंदर बाहर हो रहा था। कमरे में गर्म सिसकारीयो की आवाज गूंज रही थी। शुभम जिस तरह से जबरदस्त प्रहार कर रहा था उसकी वजह से पूरा पलंग चरमरा रहा था,, अपने बेटे की ताकत को देख कर एक बार फिर से निर्मला की बुर पानी छोड़ने लगी,,, बहुत जोर जोर से कोमल की चूची को दबाते हुए अपनी गांड को ऊपर की तरफ उचका रही थी,,, वह भी इसी समय से सुभम के लंड से चुदना चाहती थी,,, बार-बार वह अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाकर सुभम के लंड़कों अपनी बुर में लेने का इशारा कर रही थी।,,,, शुभम हुमुच हुमुच कर कोमल की बुर में अपना लंड पेल रहा था। कोमल की हालत खराब हुए जा रही थी लेकिन मजा दोगुना मिला था वह मस्त होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेल कर और जोर जोर से लंड लेने के लिए मचल रही थी। शुभम गरम आहै भरते हुए अपने धक्के लगा रहा था। कोमल के नीचे निर्मला मचल रही थी अपने बेटे के लंड को लेने के लिए,,, शुभम भी अपनी मां की तड़प को समझ गया और कोमल की बुर में से लंड निकाल कर अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया जब वह अपनी मां की बुर चोद रहा था तो दो उंगली कोमल की बुर में डालकर आगे पीछे करतै हुए उसे उंगली से चोदने का मजा दे रहा था। लेकिन सिलेंडर का स्वाद चख चुकी बोर को उंगली से कहां मजा आने वाला था,,, कोमल की तड़प बढ़ती जा रही थी,, और शुभम अपनी मां की बुर चोद रहा था कोमल अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दे रही थी उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था,,, वह सिसकारी लेते हुए बोली,,,

ससससहहहहहह,,,,,, उंगली से नहीं मेरे राजा अपने लंड से चोदो उंगली से मजा नहीं आ रहा है,,,,

चिंता मत करो मेरी जान तुम्हारी चुदाई में अपने लंड से ही करूंगा,,, ( इतना कहने के साथ ही सुभम अपनी मां की बुर में से लंड निकाल कर वापस कोमल की बुर में डाल दिया,,, ऐसा करते हुए वह बारी बार से कोमल के साथ साथ अपनी मां की भी चुदाई कर रहा था। तकरीबन 35 मिनट की घमासान चुदाई के बाद तीनों पसीने से तरबतर हो चुके थे कोमल और निर्मला की सिसकारियां तेज होती जा रही थी शुभम भी अपने धक्कों की रफ्तार को तेजी से बढ़ा रहा था। एकाएक कोमल और निर्मला का बदन अकड़ने लगा,,, शुभम समझ गया कि दोनों का पानी निकलने वाला है,,, इसलिए मैं सबसे पहले कोमल की बुर में लंड डालकर उसे जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया करीब 10, १५ धक्कों के बाद वह अपना पानी छोड़ दी,,, उसका पानी निकलते ही शुभम उसकी बुर मे से अपना लंड निकाल कर अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,, वह भी तीन-चार मिनट बाद ही अपना पानी छोड़ दी और उसके साथ ही सुभम भी अपना पानी निकाल कर उन दोनों पर ही निढाल होकर गिर गया कुछ देर तक तीनों संपूर्ण नग्न अवस्था में ही एक दूसरे को अपनी बाहों में भर कर ऐसे ही लेटे रहे,,,।

जहां एक तरफ असीम आनंद से भरपूर चुदाई का कार्यक्रम अपनी प्रथम चरण में सफलतापूर्वक समाप्त होकर आगे की तरफ बढ़ रहा था। वहीं दूसरे कमरे में सुहागरात के सपने लिए सुगंधा अपने अरमानों के किले को ढहता हुआ अपनी आंखों से देख रही थी,,। उसकी खुशियों पर किसी ने झपट्टा मार लिया था उस के अरमानों पर निठल्ले पन का खंजर उसे जख्म दे गया था चारों तरफ ऊसे अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था। अपने पति को इस तरह से अपनी सुहागरात की हसीन रात को नाकामयाबी की सीढ़ी चढ़ते हुए देखकर उसके

सारे सपने बिखर कर रह गए थे,,, अपने पति के द्वारा किसी भी प्रकार की चेष्टा होते ना देख कर वो खुद ही बेशर्म बनकर अपने हाथों से उनके कपड़ों को उतार रही थी और वह शर्मा रहा उसकी सपनो का महल तभी गिरने लगा था जब उसने अपनी पती के छोटे से लंड को देखी थी,,जो की सुहागरात में उसकी बुर में जाने वाले मोटी तगड़ी लंड की तुलना में उसका लंड आधा भी नहीं था। सुगंधा पूरी तरह से रुवासी हो चुकी थी,, लेकिन फिर भी अपने मन को मजबूर करके अपने पति के लंड को खड़ा करने की कोशिश करने लगी,, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पा रही थी,, आखिरकार सुगंधा अपनी बेशर्मी की हद तौड़ते हुए ना चाहते हुए भी उस छोटे से ढीले लंड को अपने मुंह में लेकर चूस कर खड़ा करने की कोशिश करने लगी लेकिन उसका यह चुसना असर दिखाता इससे पहले उसके लंड ने पानी छोड़ दिया।,,, वह अपनी किस्मत पर रोने लगी। और उसका निठ्ठला पती बेशर्म की तरह वहीं बिस्तर पर नाक बजाते हुए सो गया,,,,। सुगंधा से रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर की गर्मी उसे बेचैन बना रहे थे एक पल को ऐसा उसका मन कहा कि शुभम को फोन करके अपने कमरे में बुला ले और बुर की गर्मी के आगे वह बेबस होकर उसे दो बार फोन भी लगाई लेकिन शुभम का मोबाइल साइलेंट में था इसलिए उसे मालूम ही नहीं पड़ा कि सुगंधा ने फोन कि है थक हारकर वह एक किनारे बिस्तर पर सुबकते हुए लेटी रही,, ।

दूसरी तरफ तीनों संतुष्ट होकर एक दूसरे पर लेटे हुए थे।

शुभम कोमल के ऊपर से उठा ऊसका लंड पानी छोड़ कर झूल गया था।,,, धीरे-धीरे कोमल की निर्मला के ऊपर से उठ कर बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई,,, उसके सर पर से वासना का असर उतर गया था वह शर्माने लगी थी,, इसलिए चादर उठाकर अपने नंगे बदन पर डाल दी यह देखकर निर्मला उसके बदन से चादर खींच कर नीचे फेंकते हुए बोली,,,।

अब इसकी क्या जरूरत है कोमल रानी,,, अब तो हम तीनों एक दूसरे के बारे में सब कुछ अच्छे से जान भी चुके हैं इसलिए अब पर्दा करने की कोई जरूरत नहीं है।

दूसरी तरफ सुभम अपने झुल़ते हुए लंड को झुलाते हुए कोमल से बोला,,,।

कैसा लगा कोमल मेरी जान मेरे लंड का स्वाद,,,

( कोमल शुभम की बात सुनते ही शर्मा गई और अपना मुंह से छुपाने लगी,, लेकिन निर्मला अपने बेटे की बात का जवाब देते हुए बोली,,,।)

अरे यह बोले या ना बोले लेकिन इसकी बुर( जबरदस्ती उसकी टांगों को खोलते हुए) सब कुछ बोल दे रही है कि कितनी मस्त हो गई है ये देख केसे तेरा पानी ईसकी बुर से निकल रहा है।,,,

( इतना सुनते ही कोमल बोली।)

बुआ पानी की सुबह में तुम्हारी बुर में निकाला है तो मेरी बुर से कहा निकलेगा,,,।

अरे तेरा पानी तो निकाल दिया ना,,।

अरे तुम दोनों ने मिलकर मेरा इतना सारा पानी निकाल दिया (सुभम मुस्कुराते हुए अपने लंड को हिलाते हुए बोला)

शुभम तेरा तो झूल गया है अभी तो सारी रात बाकी है (शुभम के झूलते हुए लंड की तरफ देखते हुए निर्मला बोली)

अरे मम्मी से खड़ा होने में कितना टाइम लगेगा अभी कोमश ईसे मुंह में ले कर चुसेगी और तुरंत खड़ा हो जाएगा,,,

( इतना कहकर शुभम कोमल की तरफ आगे बढ़ा,,, कोमल शर्मा रही थी लेकिन जिस तरह से शुभम का झूलता हुआ लंड इधर उधर झूल रहा था उसे देखकर उसकी बुर में चीटियां रेंगने लगी,,, एक बार फिर से कोमल की बुर कुल बुलाते हुए पानी छोड़ने लगी,,, और उत्तेजित होकर कोमल खुद ही शुभम के झुलते हुए लंड को पकड़कर मुंह में लेकर चूसने लगी,,,, यह देखकर निर्मला के बदन में भी सुरूर छाने लगा लेकिन निर्मला कुछ कर पाती ईससे पहले ही शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की टांग पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया,,, और उसे घोड़ी बन जाने के लिए कहा,,,, निर्मला भी फिर से चुदवासी हो गई और जैसा शुभम ने कहा वैसे घूमकर झुक

अब शुभम की आंखों के सामने निर्मला की बड़ी बड़ी मोटी गांड हवा में उठी हुई थी जिसे देख कर शुभम की आंखों में खुमारी छाने लगी,,, और वह अपना मुंह उसकी गांड की तरफ ले जाकर उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,, बुर में से अभी भी उसका पानी निकल रहा था जिसकी वजह से उसे कुछ अटपटा सा लग रहा था,,, लेकिन बुर चाटने में उसे बहुत मजा आ रहा था,, तभी शुभम को जैसे पिछली बातें याद आई हो इस तरह से वह एक उंगली अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद में डालना शुरू कर दिया,,, जैसे ही उसने मेरी गांड में प्रवेश की वैसे ही निर्मला चौंक उठी और अपनी गांड को आगे की तरफ खींचते हुए बोली,,,।

यह क्या कर रहा है बेटा,,,

मम्मी आज तो मुझे नहीं रखोगे तुम ही ने मुझे वादा किया था कि एक दिन तुम मुझे अपनी गांड मारने दोगी,,,

लेकीन,,,,,

लेकिन लेकिन कुछ नहीं मम्मी,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम गांड के भूरे रंग के छेद पर अपना मुंह रखकक ऊसे चाटना शुरू कर दिया,, निर्मला पहले तो इंकार करना चाहती थी लेकिन शुभम की हरकत की वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और उसके मन में भी उत्सुकता होने लगी,,, वह भीं आज उस छेंद का भी मजा ले लेना चाहती थी इसलिए शुभम को रॉकी नहीं,,, कोमल तो सुभम की बात सुनकर हैरान हो गई थी लेकिन शुभम की इस बात में उसके तन बदन में कामोत्तेजना कि फुहार बरसाना शुरू कर दिया था और वह जो उसके साथ शुभम के लंड को पूरा मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी जो कि अब पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,,, सुभम जैसे जैसे अपनी जीभ से उसकी गांड चाट रहा था वैसे वैसे निर्मला की सिसकारी पूरे कमरे में गुंजने लगी थी,,,,। थोड़ी देर बाद ही निर्मला भी पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और शुभम भी,,,,

लेकिन शुभम के मन में कुछ और चल रहा था क्योंकि कोमल भी पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी और अपने हाथ से ही अपनी बुर को रगड़ रही थी,,, शुभम जानता था कि एक बार उसका पानी निकल चुका है इसलिए वह काफी देर तक चुदाई कर सकता है इसलिए कोमल की टांग को पकड़ कर बिस्तर के किनारे तक लेकर आया और उसकी टांगों को फैला कर अपना लंड उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया यह देखकर निर्मला का जोश ओर ज्यादा बढ़ने लगा,,, वह भी कोमल के होठों पर अपना बुर रगड़ना शुरू कर दी,,
 
तीनों पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके थे कोमल तो सुभम के मोटे लंड को लेकर उत्साहित में जा रही थी और अपनी कमर को ऊपर उछाल उछाल कर शुभम का भी हौसला बढ़ा रही थी। तकरीबन 20 मिनट के बाद कॉमल में पानी छोड़ दी,,, निर्मला इसी पल का इंतजार कर रही थी और वहं तुरंत अपनी गांड उठाकर नीचे की तरफ झुक गई,, शुभम जानता था कि इतनी आसानी से उसका मोटा लंड गांड के छेंद में जाने वाला नहीं है इसलिए वह ढेर सारा थूक गांड के छेद पर लगाया और अपने लंड पर चुपड़ दिया,,, जैसे ही वह लंड का सुपाड़ा गांड के भूरे रंग के छेंद पर सटाया निर्मला एकदम से गनगना गई,,, शुभम आहीस्ता आहीस्ता अपने लंड को गांड के छेद में डालना शुरू कर दिया,,, गीलेपन की वजह से उसके लंड को मोटा सुपाड़ा धीरे-धीरे करके गांड में प्रवेश कर गया,,, निर्मला की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी साथ में उसे दर्द भी महसुस हो रहा था,, लेकिन उसे रोमांचकारी अनुभव हो रहा था,, वह भी उत्सुक थी पुर का पूरा लंड अपनी गांड में लेने के लिए,,, आखिरकार शुभम की मेहनत रंग लाई और उसके लंड का मोटा सुपाड़ा गांड के अंदर अच्छी तरह से घुस गया,, जो देखकर कोमल भी हैरान थी वह बड़े गौर से देखे जा रही थी। शुभम जानता था कि जब सुपाड़ा अंदर कुछ किया है तो पूरा लंड भी उसकी गांड में घुस ही जाएगा,,, दर्द के मारे निर्मला थरथरा रही थी,,,, और वह डरते हुए बोली,,,

धीरे से शुभम बहुत दर्द करेगा,,,

अपने आप को संभालना मैं आराम से ही करूंगा,,,, (और इतना कहने के साथ है शुभम ने जोर से अपनी कमर को आगे की तरफ ठैला,, सर सराता हुआ शुभम का आधे से ज्यादा लंड गांड में प्रवेश कर गया,,,, दर्द के मारे निर्मला कराहने लगी,,,, वह ऊसे वापस निकाल लेने के लिए कह रही थी,, लेकिन मैं जानता था कि एक बार अगर उसने वापस निकाल दिया तो उसकी मां उसे वापस नहीं डालने देगी,,, इसलिए वहां अपनी मां की गोरी गोरी गांड को सहलाते हुए उसके दर्द को दूर करने की कोशिश करता रहा और थोड़ी देर बाद निर्मला की कराहने की आवाज बंद हो गई सही मौका देखकर शुभम ने बचा कुचा लंड भीे गांड में डाल दीया। एक बार फिर से निर्मला दर्द से छटपटा गई। लेकिन इस बार शुभम नहीं रुका और धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए गांड मारना शुरू कर दिया कुछ ही देर में निर्मला की कराहने की आवाज गरम सिसकारी में बदल गई,,, उसे मजा आने लगा और शुभम भी,, अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को दबाते हुए चोदना शुरू कर दिया। अब निर्मला और सुभम दोनों को मैं जा रहा था तो कोमल कहां पीछे रहने वालीे थी,,, वह भी निर्मला के करीब घुटनों के बल जाकर अपनी बुर चटाना शुरू कर दी,, निर्मला भी कोमल की बुर चाटने लगी,,।

आज सुभम की ख्वाहिश पूरी हो रही थी,, करीब आधे घंटे बाद निर्मला को मस्ती करने के बाद शुभम भी झड़ गया,,,,,।

तीनों बिस्तर पर लेटे हुए थे,,, निर्मला कोमल को भी गांड मराने के लिए बोली लेकिन वह इंकार कर दी,, सुबह होते होते शुभम ने एक एक बार फिर से निर्मला और कोमल की चुदाई किया तीनों सोए नहीं थे जब सुबह होने वाली थी तो कोमल अपने कपड़े पहन कर धीरे से कमरे से बाहर चली गई।

शुभम और निर्मला को गांव आए काफी दिन हो चुके थे।

अब वह दोनों शहर जाने की तैयारी कर रहे थे। आज की रात और रुकना था। निर्मला बहुत खुश नजर आ रही थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार उसने किसी लड़की के साथ मिलकर साथ में चुदने का आनंद उठाई थी। यही हाल शुभम का भी था एक नया अनुभव एक नया रोमांच उसके तन बदन को झकझोर के रख दे रहा

था। बड़ी ही कुशलता पूर्वक और मजे हुए खिलाड़ी की तरह उसने निर्मला और कोमल को निपटाया था। इसी से शुभम की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता था निर्मला ताे बहुत खुश थी कोमल का भी यही हाल था। कोमल कभी जिंदगी में भी नहीं सोची थी कि शादी से पहले ही चुदाई की असीम सुख को वह भोग लेगी,,, संभोग सुख का जो उसे अनुभव मिला था यह वह जिंदगी भर नहीं भुलने वाली थी।,, एक तरह से वह सुभम की दीवानी हो चुकी थी।,,,, रात भर जागने की वजह से शुभम को नींद का आभास हो रहा था इसलिए वह नहाने जा रहा था।,, निर्मला नहा चुकी थी और वह अपने बालों को संवार रही थी। शुभम होंगर में टंगी अपनी पैंट की जेब में अपनी मोबाइल देखने लगा तो उसने सुगंधा का तीन मिस कॉल था और वह भी रात के 1:30 बजे,,, शुभम मन ही मन में सोचने लगा कि आखिर ये डेढ़ बजे मेरे को फोन क्यों कर रही थी। वह हाथ में फोन लिए हुए ही कुछ देर तक सोचने लगा उसे लगने लगा कि कहीं वह सब कुछ जान तो नहीं गई है।

वह कुछ सोचने लगा लेकिन वह अपने कपड़े लेकर नहाने के लिए चला गया। घर के पीछे पहुंचा तो देखा की सुगंधा वहां नहा रही थी और उसके वस्त्र भीग जाने की वजह से उसकी खूबसूरत जिस्म से चिपके हुए थे जिसकी वजह से उसका हर वह अंग,, नजर आ रहा था जिसे देखने पर हर मर्द के बदन में कामुतता की लहर दोड़ने लगती है। यह देख कर शुभम का मन एक बार फिर से डोलने लगा,,,, लेकिन ना जाने क्यों वह सुगंधा से नजर नहीं मिलाना चाहता था और इसलिए वह जैसे ही वापस जाने के लिए पलटा,,, सुगंधा की नजर ऊसपर पड़ गई और उसे,,, आवाज देकर रोक ली,,, शुभम को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये रोक क्यों ली है,,। लेकिन फिर भी वह धीरे-धीरे उसके करीब पहुंच गया वहां और कोई भी नहीं था,,,, शायद सब लोग नहा कर चले गए थे।,,, सुगंधा तिरछी नजर से उसकी तरफ देखते हुए बोली थोड़ा गुस्से में नजर आ रही थी। और वह गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,

तुम्हारा ही नाम सुभम हे ना,,,,

हां,,,,, ( धीरे से शुभम बोला)

तुम ही मुझे फोन करते थे? ( कपड़े को धोते हुए उस पर साबुन लगाते हुए बोली, )

हां,,,, (थोड़ी देर सोचने के बाद बोला)

क्यों करते थे क्या समझ रखा था तुमने मुझे,,,, ( सुगंधा गुस्से में थोड़ा तेज बोलने लगी और उसकी तेज अवाज सुनकर शुभम उसे शांत कराते हुए बोला।)

ईतनी जोर से क्यों चिल्ला रही हो मामी,,, कोई सुन लेगा तो क्या समझेगा,,,,,

कोई कुछ भी समझे मुझे अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता,,, और मामी क्यो मेरी रानी मेरी जान कहो,,,

दिन के उजाले में ये रिश्तेदारी क्यों,,,,

क्या बकवास कर रही हो मामी ( सुभम अपनी नजर बचाते हुए इधर उधर देख कर बोला)

अब बनने की कोई भी जरूरत नहीं है मुझे सब पता चल गया है कि फोन पर कभी मुझसे मेरा पति बन कर बात करते थे और,, सुहागरात के दिन तुम ही मेरे कमरे में आकर मेरे साथ बिना शादी के सुहागरात मना कर चले गए,,,,

( शुभम को समझते देर नहीं लगी थी कि सुगंधा को सारी बात का पता चल गया है और अब छुपाने से भी कोई बात नहीं बनने वाली थी लेकिन सुगंधा जिस तरह से जोर जोर से बोल रही थी उससे सारा मामला उलझ सकता था। फिर भी वह सुगंधा की बात को टालने के गरज से बोला।)

मामी तुम यह कैसी बहकी बहकी बातें कर रही हो कोई सुन लेगा तो वह क्या समझेगा,,,,।

एक बात समझ लो सुभम इस घर के लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं क्या समझते हैं अब मुझे इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ता,,, इन लोगों ने मेरे साथ धोखा किया है मेरी जिंदगी बर्बाद करके रख दी है, इसलिए इनकी इज्जत और सम्मान कि मुझे बिल्कुल भी किसी भी प्रकार की परवाह नहीं है और तुम दोपहर में मेरे कमरे में बिना बोले चले आना क्योंकि मैं जानती हूं कि फोन करूंगी तो तुम शायद फोन नहीं उठाओगे,,, इसलिए कहती हूं कि अगर किसी भी प्रकार का हंगामा खड़ा नहीं करवाना है तो चुपचाप मेरे कमरे में चले अाना,,,,।

( सुगंधा शुभम को धमकाते हुए गुस्से में बोली जा रही थी,, शुभम उसकी सारी बातों को सुन रहा था उसके मन में इस समय क्या चल रहा है यह खुद सुभम भी नहीं समझ पा रहा था,,,, वैसे ही खड़े रहकर सुगंधा को ही देखे जा रहा था,,, की तभी सुगंधा कपड़े धोते हुए बोली,,)

अब ऐसे ही खड़े रहोगे कि नल भी चलाओगे,,,

( इतना कहने के साथ सुगंधा जानबूझकर अपनी गीली साड़ी को इस तरह से व्यवस्थित करने लगी की ऊसकी एक तरफ की नंगी चूचियां शुभम को नजर आए,,, और ऐसा हुआ भी सुगंधा की गोल गोल चूची शुभम को नजर आ रही थी जो कि पानी में भीगने की वजह से और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी शुभम एक टक नल चलाते हुए सुगंधा की गोल -गोल चुचीयों को घुरे जा रहा था जिस पर पानी की बूंदे मोती के दाने की तरह चमक रही थी,,,, सुगंधा तिरछी नजरों से यह देखकर बेहद खुश हो रही थी क्योंकि एक तरह से उसे इस बात का डर लग रहा था कि कहीं सुभम उसके कमरे में आने से इंकार ना कर दे,, अगर वह ऐसा कर दिया तो उसकी हसीन रात जो कि कांटो भरी रात हो चुकी थी,,, उसकी अरमान उसकी प्यास सब कुछ आंसूओ में बह जाएगा,,,

सुगंधा जी भर कर चुदवाना चाहती थी एक बार वह शुभम से भले ही अनजाने में ही लेकिन चुद चुकी थी,, और उससे दुबारा चुदने मे उसे कोई भी आपत्ति नहीं थी। एक तरह से वह अब अपने ससुराल वालों से और अपने पति से अपनी बेइज्जती का बदला सुभम से चुद कर लेना चाहती थी। और ऐसे माहौल में शुभम का उसके कमरे में आना तभी संभव हुआ था क्योंकि मैंने भी उसको चोदने की तलब एक बार फिर से जाग जाए क्योंकि जिस तरह से वह बोल रही थी हो सकता है वह घबरा जाए डर जाए और उसके कमरे में ना जाए,, इसलिए जानबूझकर सुगंधा अपने गिले वस्त्रों को हल्के से हटा कर उसे अपने वक्ष स्थल के दर्शन करा रही थी,, जब सुगंधा यह देखी की शुभम जी उसकी मानसर स्तनों को देख कर उसकी गिले वक्ष स्थल के दर्शन करके धन्य हुआ जा रहा है तब जाकर उसके मन में प्रसन्नता और आशाओं के अंकुर फूटने लगे उसे पक्का यकीन हो गया कि सुभम के कमरे में जरूर आएगा,,, क्योंकि इसी दौरान उसने शुभम के पजामे में उठते हुए उसके तंबु को देख ली थी,,, और उसे देख कर उसकी रसीली बुर ने प्रसन्नता और खुशी के आंसू बहाते हुए मदन रस की दो बूंदे टपका दी थी,,,

कपड़े धोने के बाद सुगंधा वहां से चली गई,,, हालांकि वह अब अपने ससुराल वालों से अपनी बेइज्जती का बदला लेना चाहती थी। लेकिन अपने अपमान का बदला लेने से ज्यादा वह अपनी वासना की पूर्ति करना चाहती थी क्योंकि जिस तरह का आनंद शुभम ने अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर को चोद कर दिया था वहीं उसके पति के छोटे दुबले और ढीले लंड को देखकर उसकी प्यासऔर ज्यादा बढ़ने लगी थी,,, जवान सुगंधा अपनी प्यास पर काबू रख पाने में बिल्कुल भी असमर्थ साबित होने की वजह से अपनी मान मर्यादा का ख्याल ना करते हुए शुभम से चुदने का फैसला कर चुकी थी,,, वह कभी जिंदगी में भी नहीं सोची थी कि उसे इस तरह के कदम उठाने पड़ेंगे,,,।

दिन चढ़ रहा था। गर्मी की वजह से सब लोग अपने अपने कमरे में आराम कर रहे थे चिलचिलाती धूप में कोई भी नजर नहीं आ रहा था ऐसे में केवल सुगंधा अपने कमरे में सुभम का इंतजार कर रही थी,, और शुभम भी सुबह सुबह गीले कपड़ों में सुगंधा की कसी हुई जवानी देखकर मचल उठा था,, एक बार फिर से उसे भोगने के लिए उसका मन ललायित हो रहा था।

वह सब की नजर बचाकर सुगंधा के कमरे तक पहुंच गया और दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही वह हाथ आगे बढ़ाया दरवाजे पर हाथ रखते ही दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया,,, जिसे सुगंधा ने पहले से ही खोल रखी थी क्योंकि उसे मालूम था कि सुबह उसके चूची को देखकर उसका मन लालायित हो गया था और वह जरूर आएगा,,, शुभम दबे पैरों से कमरे में प्रवेश किया तो देखा सुगंधा टेबल के लग खड़ी होकर उसी का इंतजार कर रही थी,,, उसे देखते ही सुगंधा बोली,,,।

मुझे यकीन था तुम जरूर आओगे मुझे तुमसे ढेर सारे सवाल पूछने हैं,,,।

मुझसे लेकिन क्यों? ( शुभम थोड़ा शंकु चाते हुए बोला)

पहले दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दो,,,

( सुगंधा के इतना कहते ही शुभम पलट कर दरवाजा बंद करके उसकी कड़ी लगा दिया,,,।)
 
मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम ही मेरे सवालों का जवाब दे सकते हो क्योंकि यह सब सारे सवाल तुम्हारे ही खड़े किए हुए हैं। और हां यह कहने की बिल्कुल भी जरूरत मत करना कि जो तुम कह रही हो सरासर गलत है मैं यह सब नहीं जानता,,, अगर तुमने जरा सा भी झूठ कहा तो में तुम्हारे बारे में सब कुछ इस घर के लोगों को बता दूंगी इसमें पहले ही मेरी इज्जत जाएगी लेकिन तुम भी कहीं के नहीं रहोगे,,,,।

( सुगंधा का गुस्सा और उसकी बातें सुनकर एक पल के लिए शुभम डर गया क्योंकि जिस तरह से वह बोल रही थी इसमें कोई शक नहीं था कि वह एक एक बात सबको बताने के लिए तैयार थी,,, शुभम इतना तो जानता था कि उसके बारे में घर की औरतें सब कुछ जानती है लेकिन यह राज केवल हर एक औरत के अपने से ही जोड़ कर रखी हुई थी उन्हें यह नहीं मालूम था कि घर की सभी औरतों को बारी-बारी से उसने चोद चुका था वह भले ही बड़ी मामी हो छोटी मामी हो या सबसे छोटी मामी और बड़ी मामी की लड़की कोमल हो,, घर की सभी औरतें बारी-बारी से उसके लंडका स्वाद चख चुकी थी,,, लेकिन फिर भी यह बात उसके मामा नो को ना पता चल जाए इस बात की घबराहट उसके मन में बनी हुई थी इसलिए सुगंधा की बातों को सुनकर के जवाब देने में ही भलाई थी,,,। )

तो शुभम यह बताओ कि कैसे तुम्हारे मन में यह गंदा विचार आया और मेरे साथ गंदी गंदी बातें फोन पर करने लगे,,,,( सुगंधा टेबल पर अपने नितंबों को टीका कर अपने दोनों हाथ बांधकर किसी

सुगंधा टेबल से अपने नितंबों को सटाकर किसी शिक्षिका की बातें शुभम से सवाल करने लगी,,, ईस अदा में भी सुगंधा बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,।

( शुभम के पास सुगंधा के सवालों का जवाब ना देने का कोई बहाना नहीं था क्योंकि सब कुछ साफ हो चुका था इसलिए वह बोला,,,।)

सच कहूं तो मामी पहले मेरा ऐसा कोई भी विचार नहीं था लेकिन जब मामा ने मुझे आपकी फोटो मोबाइल में दिखाए और तुम्हारी खूबसूरती तुम्हारी सुंदरता देखकर मेरा मन तुम पर मोहित होने लगा जब मुझे इस बात का पता चला कि मामा फोन पर तुमसे अभी तक ठीक से बात नहीं कर पाए हैं तो मेरे दिमाग में आइडिया सूझा,,, और मैं मामा के मोबाइल में से तुम्हारा नंबर लेकर अपने मोबाइल से तुम्हें फोन करने लगा,,,,( शुभम अपनी बात बताते हुए बिस्तर पर बैठ गया,,, सुगंधा उसके बड़े गौर से देख रही थी उसकी बातों को सुनते हुए वह शुभम के गठीले बदन को ऊपर से नीचे तक निहार रही थी।,,,,)

पहले तो मुझे ऐसा ही लगा कि तुम भी किसी चालू लड़की कि तरह होगी,,, लेकिन तुमसे बातें करते हुए मुझे समझ में आया कि तुम पढ़ी लिखी और अच्छी लड़की हो तब तुम्हें पाने की मेरी इच्छा और ज्यादा प्रबल होने लगी,,,, सच कहूं तो मामी तुम्हारी अच्छी अच्छी बातें और तुम्हारी खूबसूरत आवाज सुनकर मुझे तुमसे प्यार होने लगा,,,,

( शुभम बिना रुके बताए जा रहा था और सुगंधा बड़े गौर से उसकी बात को सुनती जा रही थी,,,) मामा के साथ रहकर मुझे उनके निगम में पन का पता चलने लगा और मैं समझ गया कि वह तुम्हें वह प्यार नहीं दे सकते जो प्यार तुम्हें चाहिए था जिस तरह का पति तूम्हे चाहिए उस तरह का पति वह कभी भी नहीं बन सकते,,,

और बातों ही बातों में तुमसे मैंने यह क्या लिया था कि तुम अभी तक संपूर्ण रूप से कुंवारी हो इस बात से मुझे तुम पर और तुम्हारी जवानी पर तरस आने लगा,,,

और फिर मैं मन ही मन में सोचने लगा कि मेरे छोटे मामा से शादी करके तुम्हारी जिंदगी ओेंर जवानी दोनों बर्बाद हो जाएगी,, तो क्यों ना मैं ही तुम्हें वह सुख दूं जो तुम अपने पति से चाहती हो और तुम्हारी सुहाग रात को तुम्हारी बुर से पानी निकलने की जगह तुम्हारी आंखों से पानी निकले यह मुझे मंजूर नहीं था,,,। और उसके बाद क्या हुआ यह तुम अच्छी तरह से जानती हो,,( शुभम जानबूझकर खोलते हुए सुगंधा के सामने बुर शब्द का उपयोग करके उसकी प्यास को बढ़ा दिया था,,, और यही दूर शब्द शुभम के मुंह से सुनकर इस समय उसकी बुर की कुल बुलाने लगी थी,,,। सुभम की बातों को बड़े गौर से सुनने के बाद सुगंधाबोली,,,।)

शादी वाले दिन भी मैं अपने पति को देखी थी जिनसे फेरे लिए थे लेकिन ऊनका चेहरा मैं ठीक से नहीं देख पाई थी। क्या तुम्हें जरा भी तो नहीं लगा कि अगर मैं पहचान गई तो क्या होगा,,,।

सच कहूं तो मामी मुझे डर तो बहुत लग रहा था लेकिन उससे ज्यादा उत्सुकता थी तुम्हें पाने की,,, तुम्हारी रसीली कुंवारी बुर में अपने मोटे लंड डालकर तुम्हें चोदने की,,, और यही उत्सुकता और ख्वाहिश मुझे बेझिझक चतुम्हारे कमरे तक ले आई और यह मैं भी जानता था कि तुम पूरी तरह लल़ायित हो लंड लेने के लिए,,,,

( शुभम जानबूझकर ऐसी खुली बातें कर रहा था क्योंकि अंदर से वह सुगंधा के इरादे को भी जान गया था,, शुभम बिस्तर से उठा और सुगंधा की तरफ धीरे-धीरे बढ़ते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

तुम्हारी चोदने की उत्सुकता को जानकर ही मैं तुम्हारे कमरे में आया था और जैसा जैसा मैं कहता गया वैसा वैसा तुम करती गई,,, तुम मुझे देख कर कहीं अपने पति को पहचानना लो इसलिए मैं आते ही लालटेन की रोशनी को एकदम कम कर दिया लेकिन सच कहूं तो सुगंधा,,,( शुभम इस बार मामी ना कहकर सीधे उसका नाम लेकर बोल रहा था। और शुभम के मुंह से अपना नाम सुनकर सुगंधा भी मचल उठी) मेरी ख्वाहिश तो पूरी हो गई लेकिन वह ख्वाहिश भी अधूरी ही थी,,,,।

( इतना कहकर वह सु्गंधा के करीब पहुंच गया दोनों के बीच केवल 2 फीट की ही दूरी थी,,,। शुभम की इस तरह की मादक बातों को सुनकर सुगंधा के तनबदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह मादक स्वर में बोली,,,।)

भला ऐसा क्यों सब कुछ तो तुम अपने मन का कर लिए थे।,,,

ठीक से देख नहीं पाया हां सुगंधा उस रात तुम्हारी जमकर चुदाई कीया लेकिन ठीक है तुम्हारे खूबसूरत अंगो का दीदार नहीं कर पाया था ।भले ही तुम्हारे अंगों को छूकर मसलकर उनका आनंद पूरी तरह से लिया था लेकिन आंखों की प्यास अभी भी वैसी की वैसी ही बरकरार है।,,,,

( शुभम कि इस तरह की प्यार भरी और कामुक बातें सुनकर अपने भविष्य की चिंता करते हुए,,, सुगंधा रोने लगी और रोते हुए बोलने लगी,,,)

मेरी जिंदगी तो खराब हो गई सुभम मैंने कितने सपने देखे थे,,, अपने विवाह और अपने पति को लेकर ना जाने कैसे-कैसे सपने बून रखे थे मैंने,,, सब कुछ बर्बाद हो गया मैं कहीं की नहीं मुझे नहीं मालूम था कि मेरा पति नामर्द निकलेगा,,,,,

( नामर्द सुनकर शुभम भी चौक गया ओर वह आश्चर्य के साथ बोला,,,)

क्या कह रही हो सुगंधा,, नामर्द तुम्हें गलतफहमी हो रही होगी मैं समझ सकता हूं कि,, छोटे मामा थोड़े से वेसे है शर्मिले है,,, थोड़ा ढीले हैं लेकिन नामर्द तो नहीं हो सकते,,,।

तुम्हारे जाने के बाद से मैं हर रात तड़पकर बिस्तर पर गुजार रही हुं,,,, मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता होगा तुम से कैसी शर्म करूं अब उनका खड़ा ही नहीं होता बड़ी मुश्किल से बेशर्म बनकर मैंने कल रात उनका खड़ा करने की कोशिश करी लेकिन खड़े होने से पहले ही उनका पानी निकल गया मैं तो अपनी किस्मत पर फूट-फूट कर रोने लगी मुझसे रहा नहीं जा रहा था जो आग तुमने मेरे बदन में लगाई थी वह मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,, और इसीलिए मैंने तुम्हें कल रात को फोन भी की थी लेकिन तुमने फोन नहीं उठाया,,,( फोन वाली बात सुनकर सुभम समझ गया कि कल रात को सुगंधा क्यों फोन कर रही थी,,, कल रात तो वह खुद भी लगा हुआ था तो सुगंधा के पास कैसे जाता इसलिए बहाना करते हुए बोला,,,।)

मैं सो गया था,,,।

तुम सो गए थे लेकिन यहां तो मेरी जिंदगी है बर्बाद हो चुकी है उसका क्या और मेरी जिंदगी को बर्बाद करने में इस परिवार के साथ साथ तुम्हारा भी पूरा हाथ है।

( सुगंधा रोते-रोते बोल रही थी।)

तुम ही ने मुझे फोन पर बातें कर करके ढेर सारे सपने दिखाए और अंत में लाकर ऐसी राह पर छोड़ कर जा रहे हो कि जहां से दूर दूर तक कोई भी मंजिल नजर नहीं आती,,,।

( इतना कहकर सुगंधा जोर जोर से रोए जा रही थी,,, उसके रोने की आवाज कहीं कमरे से बाहर ना चली जाए इसलिए शुभम उसे अपनी बाहों में भर कर उसे चुप कराने की कोशिश करने लगा लेकिन उसका इस तरह से बाहों में भरना ही,,, आग मे पेट्रोल का काम करने लगा,,, और शुभम की चौड़ी छाती ओं के बीच समाई सुगंधा,,, धीरे धीरे उसके बदन से लिपटने लगी,,, धीरे-धीरे हाल ऐसा हो गया कि,, उत्तेजना बस सुगंधा खुद ही अपने होठ आगे बढ़ाकर शुभम के होठो को चूमना शुरू कर दी,,, खूबसूरत सुगंधा को अपनी बाहों में भर कर शुभम भी उत्तेजित हो गया और तुरंत ही टन टनाकर उसका लंड खड़ा हो गया,,, जोकि सीधे साड़ी के ऊपर से ही सुगंधा की बुर पर दस्तक देने लगा,,, सुगंधा से शुभम के लंड़की यह चुभन बर्दाश्त नहीं हुई और वह अपना हाथ नीचे ले जाकर पेंट के ऊपर से ही शुभम के लंड को पकड़कर दबाने लगी,,,, दोनों पूरी तरह से उत्तेजित होने लगे और यह सब मामले में शुभम बहुत तेज था और झट से उसने सुगंधा के ब्लाउज के बटन खोल कर ब्लाउज को निकाल फेंका और उत्तेजना वश सुगंधा को कंधे से पकड़ कर दूसरी तरफ घुमा दिया और जल्दी से ऊसकी ब्रा का हुक खोल कर ब्रा भी निकाल फेंका,,, शुभम की आंखों में कामोत्तेजना साथ नजर आ रही थी और शुभम की हरकत की वजह से सुगंधा की आंखों में भी नशा छाने लगा था वह पागलों की तरह सुगंधा की गोरी गोरी गोल गोल चुचियों पर टूट पड़ा और उसे मुंह में लेकर चूसना शुरु़ कर दिया,,,,

सुगंध भी शुभम की हरकतों का आनंद लेने लगी,,, कमरे में मस्ती का तूफान उठने लगा था सुगंधा पागलों की तरह शुभम के बालों को अपनी मुट्ठी में भींच कर उसे अपनी बड़ी-बड़ी चुचियों पर दबाए हुए थी,,,, सुगंधा की आज पूरी तरह से अपनी जवानी को शुभम पर न्योछावर कर देना चाह रही थी तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,, दरवाजे पर दस्तक की आवाज को सुनकर शुभम के साथ साथ सुगंधा भी चौंक गई,,, लेकिन अपने आप को संभाल कर सुगंधा बोली,,,।

कौन?

अरे मैं हूं दरवाजा खोलो,,,,

आ गया मेरा निठ्ठला पति,,,,

अब क्या होगा सुगंधा अब तो हम दोनों पकड़े जाएंगे,,,

कुछ नहीं होगा में सब संभाल लूंगी,,, इसी मौके की तो में तलाश में थी,,, तुम जाकर बिस्तर पर बैठ जाओ मैं सब संभाल लूंगी,,,

लेकिन सुगंधा,,,,,,

बस अब तुम कुछ मत कहो,, जाकर बिस्तर पर बैठ जाओ,,,,,

( सुगंधा की बातें सुनकर सुभम बिस्तर पर जाकर बैठ गया लेकिन उसे डर महसूस हो रहा था,,,, सुगंधा जिस तरह से आगे बढ़ रही थी दरवाजे की तरफ उसे देखकर शुभम पूरी तरह से हैरान हुए जा रहा था,,, साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ था कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी इसलिए दोनों गोल गोल चूचियां सीनी ताने दरवाजे की तरफ ही देख रही थी,,,, वह अपने स्तनों को ढकने का बिल्कुल भी प्रयास नहीं कर रही थी शुभम के समझ के बिल्कुल भी परे होते जा रहा था यह सब,,, शुभम इशारे ने उसे अपनी चुचियों को ढकने का संकेत दिया लेकिन सुगंधा नकारते हुए आगे बढ़ गई,। और जैसे ही सुगंधा ने दरवाजा खोली उसका पति के सामने खड़ी अपनी बीवी की नंगी चुचियों को देखकर एकदम हैरान हो गया,,,,।

यह क्या है सुगंधा कपड़े तो पहन ली होती,,,

( एक मां के गरबा कमरे में प्रवेश किया और आगे कुछ बोल पाता इससे पहले उसकी नजर बिस्तर पर बैठे शुभम पर पड़ी तो वह हैरान होता हुआ बोला)

शुभम तुम यहां और ये( अपनी बीवी की नंगी चुचियों की तरफ देखकर) यह सब हो क्या रहा है,,,। मेरी बीवी इस हाल में और तू यहां,, क्या कर रहा है।और तुम सुगंधा कुछ कहती क्यों नही

अपनी बीवी को अर्धनग्न अवस्था में कमरे में शुभम की मौजूदगी में देख कर एकदम बौखला गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार यहां कमरे में हो क्या रहा है।

अपने पति की इस हालत को देखकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो जा रही थी ऐसा लग रहा था कि वह अपने पति को इसी हाल में देखना चाहती थी और वह अपने होठों पर कुटिल मुस्कान लिए दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी,,,,।
 
सुगंधा का पति पूरी तरह से हैरान था कि आखिरकार यह घर में हो क्या रहा है शुभम भी घबराया हुआ था वह अपनी नजरें चुरा रहा था लेकिन सुगंधा बेफिक्र होकर मुस्कुरा रही थी।,,, उसको मुस्कुराता हुआ देखकर ऊसका पति बोला,,,,,,

तुम हंस रही हो जानती भी हो यह सब का मतलब क्या हो रहा है,,,।( वह परेशान हो जा रहा था और वो कल आकर कभी शुभम की तरफ तो कभी सुगंधा की तरफ देख रहा था लेकिन दोनों में से कोई भी किसी भी प्रकार का जवाब नहीं दे रहा था सुगंधा की मुस्कुराहट उसके तन बदन में आग लगा रही थी वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,।)

तुम्हारा इस तरह से आज नंगी होकर कमरे में किसी के लड़की के साथ मौजूद होना इसका मतलब क्या है,,,।

( इस पर भी कोई जवाब ना मिलने की वजह से वह और ज्यादा बोखलाने लगा,, और सुगंधा से जवाब ना मिल पाने की वजह से शुभम की तरफ आगे बढ़ते हुए बोला।)

तू बता मुझे क्या कर रहा था तो इधर,,, (इतना कहने के साथ ही वह शुभम का गिरेबान पकड़ लिया,,, और उसे खड़ा कर दिया शुभम तो इस हरकत की वजह से एकदम से अचंभित हो गया,,, एक औरत के सामने और वह भी सुगंधा जैसी खूबसूरत औरत जो कि एक नामर्द पति मिल जाने की वजह से उसकी मर्दानगी पर फिदा हो गई थी ऐसी औरत के सामने अपना अपमान होता देख कर,,, शुभम को गुस्सा आ गया शुभम गटीले बदन का मालिक था। एक झटके में उसका हाथ पकड़ कर उसे ऐसा झटका दिया कि वह बिस्तर पर चारों खाने चित होकर गिर गया,,,,,। उसके इस तरह से गिरने से सुगंधा खिल खिलाकर हंसने लगी मानो कि जैसे वह अपने अपमान का बदला ले रही हो,,,, वह बिस्तर के करीब आई और बोली,,,,।

देख लिया अपनी आंखों से ईसे कहते हैं ताकत एक मर्द की ताकत,,,, तू तो कोई काम का ही नहीं है। ना तो तु लड़ाई झगड़े में कुछ उखाड़ सकता है और ना ही बिस्तर पर। एकदम निकम्मा है तु,,, ( सुगंधा अपने अपमान का बदला लेते हुए अपने पति को खरी-खोटी सुनाते हुए उसे अपमान कर रही थी और ऐसा करने में उसे सुकून महसूस हो रहा था,,,, कमर के ऊपर अभी भी वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी दोनों चूचियां उसके हिलने डोलने से पानी की लहर कि तरह लहरा रही थी,, बड़ा ही कामोत्तेजना से भरपूर यह नजारा लग रहा था शुभम का मामा बिस्तर पर अभी भी गिरा पड़ा था और दोनों को चकर पकऱ देखकर दंग हुए जा रहा था। उसे सारा मामला समझ में आ गया था की उसकी बीवी का कमरे में इस तरह से गैर जवान लड़के के सामने नंगी होकर रहना क्या दर्शाता था। शुभम को वह क्रोधित होकर देखे जा रहा था। वह जान गया था कि जो काम वह नहीं कर पाया वह शुभम करने आया था,,,। कुछ ना कर सकने की स्थिति में भी अपनी पत्नी को इस तरह से किसी दूसरे लड़कों के साथ गुलछर्रे उड़ाता हुआ देखकर उसका खून खोलने लगा था। इसलिए को एक झटके से उठा और सुगंधाको क्रोधित स्वर मै बोला,,,।

रुको मैं अभी तुम्हारी रंगरलियो का पर्दाफाश कर देता हूं,,, अभी सब को पता चल जाएगा कि तुम कमरे में शुभम को बुला कर क्या कर रही थी।,,,( इतना कहकर वह दरवाजे की तरफ बड़ा ही था कि इस बार सुगंधा उसे धक्का देकर फिर से बिस्तर पर गिरा दी क्योंकि उसके मन की भड़ास अभी नहीं निकली थी जिस तरह का उसने और उसके परिवार वालों ने दगा दिया था उसे इतनी आसानी से नहीं जाने देना चाहती थी क्योंकि वह उसे अपने अपमान का एक एक घूंट उसे पीलाना चाहती थी,,, । शुभम यह सब कुछ अपनी आंखों से देख रहा था सुगंधा ने जिस तरह से फुर्ती दिखाते हुए उसे धक्का देकर बिस्तर पर गिराया था,,, उसका मन प्रसन्नता से भर गया था सुगंधा के लिए उसके मन में प्यार उमड़ रहा था क्योंकि गुस्से में भी सुगंधा बहुत खूबसूरत लग रही थी और इस अवस्था में जबकि उसकी दोनों आपस में रगड़ खाती हुई लहरा रही थी,,, यह नजारा ही शुभम के लिए उत्तेजना से भर देने वाला था।,,,, सुगंधा गुस्से ने अपने पति से बोल रही थी,,,।

अभी से कहां चल दीए जनाब अभी तो तुम्हें बहुत कुछ दिखाना बाकी है,,

( इतना कहने के साथ ही सुगंधा शुभम को पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी बाहों में भर ले और अपने गुलाबी होठों को उसके होठों पर रख कर चूसना शुरू कर दी,,, यह देखकर उसका पति आग बबूला होने लगा,,, उसका क्रोध और ज्यादा बढ़ने लगा,, वो फिर से बिस्तर से उठने की कोशिश किया लेकिन इस बार सुगंधा अपने आचरण से विरुद्ध उसके पैरों में जोर से लात मारकर फिर से उसे बिस्तर पर गिरा दी,,,, वासना और अपने आप को ठगे जाने की स्थिति में सुगंधा पूरी तरह से पागल हुए जा रहीे थी,,। उसे इस समय बिलकुल भी मर्यादा और शर्म ओ हया का भान नहीं था।,,,, बिस्तर पर गिरा उसका पति पति आंखों से दोनों को देख रहा था शुभम भी समझ गया था कि सुगंधा का इरादा क्या था इसलिए वह उसके पति के सामने ही, उसकी एक चूची को हाथ में पकड़ कर दबाते हुए उसके गुलाबी होठों का रसपान कर रहा था,,,। सुगंधा का पति इस समय बेहद क्रोध से भरा हुआ था। वह कमरे से बाहर जाना चाहता था और घर की औरतों को इकट्ठा करके सुगंधा को बेइज्जत करना चाहता था लेकिन सुगंधा उसे अभी और कुछ भी दिखाना चाहती थी, इसलिए वह शुभम के होठों को चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगी देखते ही देखते अपनी पति की आंखों के सामने ही शुभम के आगे घुटने के बल बैठ गई सुगंधा की हरकतों की वजह से शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और उसके पजामे में तंबू तन कर खड़ा हो गया था,,, अपने पति को अपमानित करने के उद्देश्य से वह सुभम के पजामे के ऊपर से ही शुभम के खड़े लंड को मसलते हुए बोली,,,।

तेरे पास है ऐसा,,,,, ( ऐसा कहकर वो अपने पति की तरफ देखकर मादक मुस्कान बिखेर रही थी,, जो कि यह मुस्कुराहट उसके पति के सीने में सुई की तरह चुभ रही थी।,, देखते ही देखते सुगंधा ने धीरे-धीरे करके पजामे को घुटनों तक सरकादी,,,, शुभम का मोटा तगड़ा खड़ा लंड देखकर एक पल के लिए तो सुगंधा भी हैरान हो गई क्योंकि उजाले में आज पहली बार वह शुभम के खड़े लंड को देख रही थी जबकि वह लंड को अपने पूर्व में भी लेकर महसूस कर चुकी थी और अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह ऊसे चूस भी चुकी थी। लेकिन इस समय के हालात कुछ और थे जब वह शुभम के मौसी तक में लंड को अपनी बुर में ली थी और मुंह मे लेकर चूस रही थी तब कमरे में अंधेरा छाया हुआ था।

इस समय तो उसके तन बदन में बेहद प्यास भरी हुई थी,,, और अपने पति को अपमानित करने के उद्देश्य से उसके बदन की उसकी काम भावना की प्यास और ज्यादा बढ़ चुकी थी। और तो और अंधेरे में शुभम के लंड की लंबाई और चौड़ाई भांप ना सकने की वजह से इस समय उसके खड़े और नंगे लंड के दर्शन करके उसकी बुर कुलबुलाने लगी थी,,,, उससे रहा नहीं किया और वह तुरंत शुभम के नंबर को पकड़कर हीलाते हुए अपने पति की तरफ देख कर बोली,,

इसे कहते हैं मर्दाना ताकत क्या है तेरे पास ऐसा,,,, देख ले इसे कहते हैं मर्द का असली लंड तेरे पास तो नुनी भी नहीं है,,,,

( वासना से लिप्त सुगंधा इस समय अपनी मर्यादा भूल चुकी थी,, उसी समय बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मर्यादा और संस्कारों के विरुद्ध आचरण कर रही थी,,, उसी समय बस इसी बात का ख्याल था कि उसे अपने ससुराल वाले और उसके पति से अपने अपमान का बदला लेना है और अपने प्यास बुझाना है बस यही दो बातें उसके जेहन में दबी थी,,, जिसे वह अंजाम तक लिए जा रही थी,,,। सुगंधा का पति क्रोध और लाचार आंखों से अपनी पत्नी की हरकत को देख रहा था उससे यह सब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था,,,। इसलिए वह बोला,,,।

तुम यह क्या कर रही हो सुगंधा,,,, तुम बदनाम हो जाओगेी तुम मेरे बीवी हो करके मेरी आंखों के सामने इस तरह का गंदा काम कर रही हो,,, तुम्हें शर्म आनी चाहिए,,,।

शर्म तो तुझे आनी चाहिए तेरे परिवार वालों को आनी चाहिए,,, जो सब कुछ जानते हुए भी मेरी जिंदगी खराब कर दिए,,,,( सुगंधा बड़ी उत्तेजना के साथ सुभम के लंड को हिलाते हुए बोली,,,, )

तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं हुआ है तुम मेरी बीबी हो मुझसे शादी की हो हम दोनों की जिंदगी आराम से कटेगी,,,,,।

इसके बिना (शुभम के लंड की तरफ इशारा करते हुए)

तू पागल है और सबसे बड़ा बेवकूफ तू औरतों को कभी समझ नहीं पाया वरना इस तरह की गलती कभी जिंदगी में नहीं करता,,, औरतों को सबसे ज्यादा इसकी भूख( लंड को पकड़कर उसकी तरफ इशारा करते हुए) इससे चुदने की प्यास होती है,,। और तेरे साथ रहकर मुझे दो वक्त की रोटी तो मिलेगी जिससे मेरे पेट की आग शांत हो जाएगी लेकिन तेरे साथ रहकर मुझे यह (लंड की तरफ इशारा करते हुए) नहीं मिल पाएगा जिससे बदन की प्यास बुझाई जाती है। तुझे क्या लगा था कि तू मुझसे शादी करके दुनिया के सामने मर्द साबीत होना चाहता है लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा,,,, तेरी सच्चाई में समाज के सामने लाकर रहूंगी,,,

( इतना कहते हुए सुगंधा लगातार शुभम के लंड को हिला रही थी जो कि अब अपनी पूरी औकात पर आ कर चुका था,, शुभम के मोटे लंड को अपनी हथेली में लेकर उसकी गर्माहट से वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी जांघों के बीच उसकी पतली दरार से नमकीन पानी बह रहा था।,,, उससे भी अब अपने बदन की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी सुगंधा पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी और अपनी बेशर्मी की हद बताते हुए अपने पति के सामने ही शुभम के मोटे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,, यह देखकर शुभम मन ही मन प्रसन्न हो रहा था और अपने मामा की तरफ बड़े ही व्यंग्यात्मक रूप से देख कर मुस्कुरा रहा था। उसका मामा यह सब देखकर पूरी तरह से जल भुन रहा था उसे रहा नहीं गया और वह बिस्तर से उठकर दरवाजे की तरफ जाने लगा लेकिन इस बार सुगंधा उसे रोकने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की,,, जेसेही वह दरवाजा की कुंडी खोला,,, वैसे ही तुरंत सुगंधा शुभम के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर बोली,,।

 
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