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अनोखे परिवार

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StoryPublisher

Guest
अनोखे परिवार--1

ये बात उन दिनों की है जब मैं पटना जैसे छोटे शहर से

नौकरी की तलाश में देल्ही पहुँचा था. रुकने का

बंदोबस्त अपने दोस्तों के साथ पहले से ही कर लिया था.

मुझे पता था कि मुझे क्या करना हैऔर कौन सी नौकरी करनी

है. कुछ दिनों की तलाश के बाद आख़िरकार मुझे नौकरी मिल

गयी.

देल्ही के साउत एक्स एरिया में मेरा दफ़्तर था और मैं चाहता

था की ऑफीस के आस पास ही घर मिल जाए घर क्या किसी कमरे या

बरसाती की ही तलाश थी जहाँ ज़्यादा पैसा ना इनवेस्ट करना

पड़े.

कुछ दिनों की मेहनत के बाद ग्रीन पार्क में मुझे एक

बरसाती मिल गया.

टू फ्लोर का मकान था और उपर छत था छत पर ही एक कोने

में एक कमरा बना हुआ था साथ ही एक छोटा सा स्पेस शायद

किचन के लिए और कमरे के सटे हुए बाथरूम बने हुए

थे यानी एक कंप्लीट सेट मुझे मिल गया .

घर का कन्स्ट्रक्षन कुछ इस तरह का था छत के ठीक नीचे

वाले फ्लोर पर मकान मालिक की फॅमिली रहती थी और उसके नीचे

एक दूसरा परिवार जिसमे मेरे मकान मालिक नें अपने किसी

दोस्त के परिवार को किराया पर दिया हुआ था मेरे छत से और

मेरे कमरे की खिड़की से उपर वाला पूरा फ्लोर सॉफ दिखता था

और नीचे वाले फ्लोर के एक दो कमरे दिखाई देते थे .

मैं आपको इन दोनो परिवार से इंट्रोडक्षन करवाता हूँ.

मकान मालिक का परिवार -

1) सूरज शर्मा (हज़्बेंड) - एज 55

2) कोमल शर्मा ( वाइफ) - एज 40 -45

3) संजय शर्मा ( बेटा) - एज 25

4) ललिता शर्मा ( बहू) - एज 22

5) सरोज शर्मा ( बेटी) - एज -22

यानी भरा पूरा परिवार था उनका

नीचे वाले फ्लोर पर रहने वाला परिवार

1) श्याम सिंग (हज़्बेंड) - एज 52

2) राधिका सिंग ( वाइफ) -एज 40

3) रंजन सिंग ( बेटा) - एज 25-26

4) श्वेता सिंग ( बहू) - एज 23

उनके बीच रिश्ते अच्छे थे. उनका आपस में रोज़ का आना

जाना था, खाना पीना भी लगभग साथ ही होता था. एक ही

परिवार की तरह रहते थे. मैं रोज सुबह करीब 9 बजे ऑफीस

के लिए निकलता और शाम के 7 बजे वापिस आता था. सॅटर्डे

सनडे छुट्टी होती थी. मैं धीरे धीरे इन दोनों परिवार से

भी घूल मिल गया था मगर इनके घर जाना मैं एवाउड

करता था खुद में मगन रहता था.

शुक्रवार की शाम को जब मैं घर लौटा तो मुझे शर्मा जी

मुझे सीढ़ियों पर ही मिल गये उन्होने मुझे कहा कि बेटा

कभी घर आ जाया कर और माजी का हाथ बटा दिया कर.

मैने संकोच करते हुए कह दिया कि ठीक है अंकल कोई बात

नही जब भी कोई काम हो मुझे बुला लिया कीजिए और कुछ इधर

उधर की बात के बात मैं अपने कमरे में चला गया फ्रेश

होने के बाद मैं अपने बेड पर लेट कर किताब पढ़ रहा था कि

अचानक दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई मैं हड़बड़ा कर

उठा और दरवाज़ा खोला तो देखा की शर्मा जी बाहर खड़े हैं.

रात के यही कोई 9 बज रहे होंगे मैने उनसे पूछा क्या

बात है अंकल. उन्होने कहा "बेटे आज हम दोनो परिवार

नें एक छोटी पार्टी रखी है सिर्फ़ हम ही लोग रहेंगे तो तुम भी

आ जाते तो ठीक रहता आपस में जान पहचान भी हो जाती "

, मैने कहा ठीक है अंकल मैं आता हूँ. मुझे इन्वाइट

करके वो चले गये मैने भी ना चाहते हुए अपनी जीन्स

और टी-शर्ट डाली और नीचे वाले फ्लोर पर पहुच गया.

दरवाज़े का बील बजाया , थोड़ी देर में ललिता भाभी नें

दरवाज़ा खोला. मैं उन्हें देखता ही रह गया, वैसे तो वो

बहुत खूबसूरत थी मगर उस दिन कहर ढा रही थीं . गोरा

रंग, गहरी लिपस्टिक, हाथों में मेहन्दी, कलाई चूड़ियों से सजी

हुई, नीले सलवार कुर्ते में सजी चूचियाँ ओह! मत पूछो

कितनी भारी भारी चूचियाँ थीं उनकी. उनको देख कर मेरी

जवानी हिचकोले मारने लगी लंड में भी सुगबुगाहट शुरू हो

गयी.

मैं उन्हें देखता ही रह गया अचानक मेरी तंद्रा टूटी जब

उन्होनें कहा कि "अरे अंदर तो आओ बाहर ही खड़े रहोगे

क्या चलो अंदर शरमाओ नही तुम भी परिवार ही जैसे हो"

मैने कहा हां भाभी क्यों नही " मैं अंदर आ गया

था" , वो मेरे आगे आगे चल रही मैं पीछे

पीछे. क्या गांद थी उनकी ऊऊफफफ्फ़ , गजब गोलाई थी जब चलती

थीं तो गजब हिलती और मटकती थी मैने किसी तरह से अपने को

और अपने लंड को संभाला था.

वो मुझे कमरे के भीतर लेकर गयी जहाँ पहले से ही

दोनो परिवार के सभी लोग मौजूद थे, सामने कुछ नाश्ता

और ड्रिंक्स पड़े थे. संजय शर्मा और सूरज शर्मा नें

मेरा स्वागत किया और वही पड़े सोफे पर बिठाया.

शर्मा जी अचानक बीच में हो गये और उन्होने कहा कि

'पंकज (मैं) को यहाँ आए करीब एक महीना हो गया है लेकिन

ये अभी भी हम से दूर दूर रहता है जबकि यहाँ इस घर का

नियम सब एक साथ एक ही परिवार की तरह सुख दुख में

भागीदार होते हैं आज से इस बच्चे को अपने परिवार में

हम शामिल करते हैं" मैं हैरान था मैं फिर चुप चाप

मुस्कुरा दिया , इसमे कोई हर्ज़ तो था नही उल्टे मेरा ही फ़ायदा

था कि चलो कोई ज़रूरत होगी इनसे मदद मिल जाएगी. श्याम

अंकल अपनी जगह से उठ कर आगे आए और उन्होनें मुझसेहाथ

मिलाया. उन्होनें मुझे अपनी पत्नी राधिका से भी

मिलवाया.
 
जब वो मुझे राधिका आंटी से मिलवाने के लिए मुझे ले

जा रहे थे तो मैने गौर किया कि कोमल आंटी संजय भैया

को कुछ अजीब नज़रों से देख रही थी, खैर मैं उनसे ,मिला

इस उम्र में भी वो जवान ही लग रही थी. चुचिया काफ़ी बड़ी

बड़ी लग रही थी थोड़ी सावली थीं मगर कातिल थीं एक दम

पर्फेक्ट बॉडी. इधर उनसे कुछ ही दूरी पर कोमल आंटी और

सरोज भी बैठी थी.

थोड़ी दूरी पर श्वेता अपने पति राजन् के साथ सॅट कर

बैठी बला की परी थी . वहाँ ये तय कर पाना मुश्किल कि इन

महिलाओ में सबसे खूबसूरत कौन है. खैर काफ़ी देर तक

बातों का सिलसिला चलता रहा. बीच में ललिता भाभी मुझसे

मज़ाक भी कर लेती और उनका साथ देती सरोज और श्वेता मैं

शरमा जाता मगर इन्सब में मेरे लंड महाराज बहुत नाराज़

लग रहे थे जब से आए थे चुचि और गंदों को देख कर

खड़े ही थे बैठे का नाम भी नही ले रहे थे.

मेरा हाल भी बुरा था. पार्टी ख़तम खाना ख़ाके मैं

अपने कमरे में आ गया. यही कोई 12 बज रहे होंगे.

मैने लाइट बुझाई और सोने की कोशिश करने लगा मगर

लंड महाराज मानने को तय्यार नही थे. मैने शॉर्ट्स पहन

रखे थे और शॉर्ट्स में टेंट सा बन गया था. मैं अपने

लंड को सहलाए जा रहा था ऐसे ही करीब दो घंटे निकल

गये थे कि अचानक किसी नें धीमे से दरवाज़े पर दस्तक

दी मैं चौक गया थोड़ा डर भी गया था.

खैर मैने दरवाज़ा खोला देखा तो और भी हैरान हो गया

सामने कोमल आंटी खड़ी थी. नाइटी पहन रखी, चुचियों

का उभार भी सॉफ झलक रहा था. मैने उत्सुकतावास पूछा "

आंटी सब ठीक है क्या हुआ आप इस वक़्त यहाँ", वो मेरे

कमरे में आते हुए बोलीं " हां बेटा सब ठीक ही है क्या

बताऊ नींद नही आ रही थी सोचा कि देखती हूँ अगर तुम

जाग रहे होगे तो मैं तुमसे बात करके थोड़ी टाइम पास कर

लूँगी"

मैने कहा अंकल कहाँ हैं तो उन्होनें कहा पीकर सो

गये हैं. आंटी नें पूछा " मेरे आने से बेटा तुम्हें तो

कोई डिस्टर्बेन्स नही हुई ना" मैने कहा " कैसी बाते करती

हो आंटी" मैने उन्हे अंदर बुलाया और बेड पर बैठा दिया.

उनकी आँखों में मुझे कुछ अजीब सी मदहोश लग रही

थी. उन्होनें इधर उधर की बाते शुरू कर दी उन्होनें

अचानक मुझ से पूछा की बेटा तू पटना जैसे छोटे शहर से

आया है देल्ही के माहौल कैसा लगता है.

मैने भी कह दिया कि आंटी यहाँ का माहौल थोड़ा पटना से

अलग है . उन्होने मुझसे पूछा कि कही तेरा मतलब लड़कियों

से तो नही और कह के हांस पड़ी मैं भी शर्मा गया.

मैने कहा हां आप कह सकती हैं कि यहाँ लड़कियाँ अपने

आपको ठीक ढंग से रखती हैं. उन्होने कहा कि बेटा एक

चीज़ बता तू यहाँ अकेला रहता है तेरा दिल कभी घबराता नही

है क्या.

मैने कहा आंटी सच बताऊ तो कल तक मैं बहुत अकेला

महसूस कर रहा था मगर आज आप लोगों से मिलकर ऐसा लग

रहा है अब कोई अकेलापन नही. अचानक वो नीचे झुकी उनके

नीचे झुकते ही उनकी चूचियाँ सॉफ दिखने लगी क्या बड़ी

बड़ी मस्त चुचियाँ थीं. ये देख कर मेरा लंड फिर से

खड़ा हो गया था. वो कुछ उसी अवस्था में बैठी रही .

उनकी नज़र अचानक मेरे शॉर्ट्स बन रहे टेंट पर पड़ी और

वो मुस्कुरा दीं.

मैं उनकी मुस्कराहट को देख कर समझ गया की उन्होने

मेरे खड़े लंड को देख कर भाँप लिया है की मेरी हालत

खराब हो रही है. उन्होनें अचानक कहा कि बेटा ये क्या है

तेरे पॅंट में कोई रोड छुपा रखा है क्या, मैं शर्मा गया

था. मैं हड़बड़ा गया था, मैने कहा "वो आंटी ये तो

मैं आगे कुछ बोले नही पाया और थूक निगलते हुए मैने

हकलाने लगा.

उन्होनें मेरे गालों को सहलाया और कहा कि मैं समझती

हूँ तेरी उम्र ही ऐसी है. मैने भी इसी लिए संजय की शादी

टाइम से करवा दी नही तो इधर उधर चूत के चक्कर में

घूमता फिरता रहता. उनके मूह से चूत शब्द सुन कर मैं

चोंक गया. उन्होने कहा कि बेटा तेरा लॉडा तो काफ़ी दमदार

और बड़ा लगता है.
 
मैं शर्मा रहा था , उन्होने कहा बेटा शर्मा क्यों रहा

है संजय को देख अपनी बीवी के साथ कितना खुश है उसकी बीवी

भी हमीने खोजी थी उन्होने गर्व से कहा. ललिता सुंदर है

ना बेटा उन्होनें मुजसे पूछा मैने हां में सिर हिला

दिया.

उन्होने अपना एक हाथ मेरे जांघों पर रख दिया था. मेरी

हालात और खराब होती जा रही थी. मैने उनकी तरफ देखा

उनकी आँखों में अजीब से मदहोशी छाई थी इधर मैं

भी मदहोश हो रहा था. पर मैं कोई पहल करने में डर

रहा था.

उन्होनें कहा कि बेटा देख ना मेरे पीठ में कमर थोड़ी

अकड़न सी आ गयी है ज़रा लाइट जाऊ तो मैने कहा हां आंटी

कोई बात नही आप लेट जाओ. उन्होनें कहा कि अगर तेरे पास कोई

तेल है तो मालिश कर दे.

मैने अपनी अलमारी खोली और उसमे से ऑलिव आयिल निकाला और वहीं

खड़ा हो हो गया मेरा लंड अब भी खड़ा था वो समझ

गयी और उन्होनें कहा अर्रे पंकज बेटा शरमाता क्यों है

मेरी नाइटी मैं उपर कर लेती हूँ तू आराम उपर आ जा और

कमर में पीठ में तेल लगा दे.

मीयन अब बेड पर चढ़ गया और मैं हातेली पर खूब सारा

तेल लिया और पैर पर लगाना शुरू किया आंटी को मज़ा आ राहा

था धीरे धीरे मैं थोड़ा नाइटी उपर किया और तेल अब उनके

घोटने पर लगते हुए उपर चढ़ने लगा.

अब मैं उनके चूतड़ के पास पहुँच गया था मैने नाइटी

को थोड़ा और उपर किया मैं चौंक गया आंटी तो पूरी तरह से

नंगी थी उनकी मलाईदार चूतड़ मेरे आँखों के सामने थी

और साथ ही साथ पीछे उँगे चूत के छेद भी दिख रहे

थे क्या नाज़ारा था क्या बताऊ मेरा लॅंड किसी लोहे की रोड की

तरह हो गयी थी. आंटी नें कहा कि बेटा तेल क्यों नही लगा

रहे हो रुक क्यों गये हो.

मैने अब धीरे धीरे फिर से तेल लगाना शुरू किया मैं

आंटी के चूतड़ को और कमर मल रहा था कभी उनकी गंद की

दरारों में भी मेरी उंगलिया फिसल रही थी, मैने एक हाथ से

अपना लंड अड्जस्ट किया.

आंटी भाँप गयी मगर उन्होने कुछ कहा नही मैं तेल

लगाता रहा वा क्या नज़ारा था क्या उभार थे उनकी चूतड़ के

मन करता था की उनके चूतड़ को चूम लूँ. आंटी नें

टाँगे थोड़ी फैला दी और अब उनके चूत के फाँक मुझे सॉफ

दिखने लगे थे. उनकी चूत गीली हो रही थी यह मैं

देख सकता था मगर पहल मैं नही करना चाहता था.

मैने उनकी गंद पर तेल लगाते लगाते धीरे से उनकी चूत की

दरार का स्पर्श भी कर लिया फिर अपने हाथ वहाँ से हटा दिए.

मैं थोड़ा और उपर सरका उनकी कमर में और पीठ में तेल

लगाने के लिए और जैसे ही मैने ऐसा किया मेरा लंड उनकी

गंद से टकरा गया मैं सिहर उठा आंटी भी कसमासाई.

अचानक आंटी नें कहा की बेटा सुबह होने वाली है अब जाना

होगा क्योंकि अब नहा कर पूजा की तय्यारी भी मुझे ही करनी

है. और मैं बुझे मन से बिस्तर से उतर गया मेरी हालत

बहुत खराब थी क्योंकि ज़िंदगी में पहली बार मैने चूत के

और गंद के दर्शन किए.

आंटी उठे हुए मेरे मन की बात भाँप गयी और कहा कि

बेटा तू आराम कर और दिन का खाना हमारे साथ ही खाना ये

कहकर आंटी गंद मतकाते हुए वहाँ से चली गयी.

मैने जैसे तैसे मूठ मारकर अपने लंड की गर्मी शांत

करने की कोशिश की मगर ऐसा हुआ नही. सुबह के 5 बज चुके

थे और मैं अपने बिस्तर पर लेट गया उसी जगह पर जहाँ पर

थोड़ी पहले आंटी लेटी हुई थी.

कब आँख लगी पता ही नही चला करीब दिन के 12 बजे मेरी

नींद खुली, मेरा लंड खड़ा था किसी पत्थर की तरह. शनिवार

का दिन था ऑफीस की छुट्टी थी मैं फ्रेश होने के बाद चाय

पी छत पर टहलने लगा. रात के बारे में सोच ही रहा

था.सोच सोच कर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया , तभी मुझे

कुछ मेरे पीछे कुछ आहट हुई मैने पलट के देखा तो आंटी

खड़ी थी. उन्होने गाउन डाल रखी थी.

वो मुझे देख कर मुस्कुराई और मेरी तरफ आ गयी.

उन्होने मुस्कुराते हुए पूछा बेटा यहाँ अकेले क्यों टहल

रहा है अगर मन नही लग रहा है नीचे आजा साथ बैठ

कर टीवी देखेंगे घर में ललिता और सरोज भी हैं ये शाम

तक दुकान से लौट आएँगे और संजय भी शाम तक ही

लौटेगा, दोपहर का खाना भी खा लेना. मैने थोड़ी अन्ना

कानी की मगर वो नही मानी और मुझे नीचे ले गयी.

ललिता भाभी द्रवाईंग रूम में ही थी उन्होने नाइटी डाल रखी

थी क्या सेक्सी लग रही थी . उन्होने अर्रे पंकज आओ बैठो

मैं वहीं बैठ गया मगर मेरा मन अब टीवी देखने में

नही लग रहा था मेरी नज़रे बार बार ललिता भाभी पर जा रही थी.

उनकी अदा काफ़ी मनमोहक थी. तभी कमरे में आंटी आ

गाइईं और मुझे कोल्ड ड्रिंक पीने को दिया और वहीं बगल

में बैठ गयी. इन दोनो सेक्सी औरतों को बीच में बैठ

कर लंड को संभालने की कोशिस कर रहा था.

लगता है आंटी समझ गयी थी. आंटी नें किसी काम से

ललिता भाभी को किचन में भेज दिया , आंटी मेरे और

करीब आ गयी, उन्होनें कहा " बेटा कल रात नींद तो अच्छी

आई थी मैने हां में सर हिला दिया, उन्होनें कहा " मैं

तुझसे एक बात पूछना चाह रही थी कल रात तुमने जवाब नही

दिया था " मैने पूछा "क्या आंटी" उन्होने कहा कि " वो जो

पंत में रोड की तरह था वो क्या था

वो ये कह कर हँसने लगी मैं झेंप गया था उन्होनें

कहा कि बेटा " तू मालिश बहुत अछा करता है कहाँ से सीखा

सारा दर्द और थकावट दूर हो गयी थी कल रात को", अब

जब भी मौका मिलेगा तुझीसे मालिश कर्वाउन्गि. इतने में

ललिता भाभी आ गयी और कहा कि खाना लग गया है. आंटी

खड़ी हो गयी मगर मैं खड़ा होने में संकोच कर

रहा था क्योंकि मेरा लंड अब भी खड़ा था आंटी भाँप गयी

थी ाओह मुस्कुरा दी. मैं जैसे तैसे खड़ा हुआ

और धीरे धीरे खड़े लंड लिए डाइनिंग हॉल में पहुँच

गया वहाँ सरोज भी आ गयी थी और टेबल पर बैठी थी. मैं

बैठ गया और सरोज से बातें करने लगा. इधर उधर की

बातें उसकी पढ़ाई की बातें होने लगी.

kramashah.................

 
अनोखे परिवार--2

खाना ख़तम करके ललिता भाभी और सरोज सोने अपने

कमरे में चले गये आंटी नें मुझे ड्रॉयिंग रूम में

बुला लिया. मैं सोफे पर बैठ गया आंटी भी वहीं पास में

आकर बैठ गयी उन्होनें बात चीत करनी शुरू की मेरी

नज़रे उनकी चूचियों पर थी.

अचानक ही उन्होने पूछ दिया क्या देख रहे हो पंकज .

मैं सकपका गया उन्होनें कहा अछा है क्या. तेरे अंकल को

भी ये बहुत पसंद है. मैं कुछ समझ नही पाया.

उन्होनें कहा कि बेटा शर्मा मत ये ज़िंदगी बहुत छोटी

इसमे आदमी को हमेशा खुश रहना चाहिए और जितना हो सके

एंजाय करना चाहिए. मैं कुछ बोल नही पाया उन्होनें मेरे

हाथ पर अपना हाथ रख दिया. क्या नरम नरम हाथ थी

उनकी, मैने उनकी तरफ देखा उन्होनें मेरा हाथ उठाकर

अपने चूची पर रख दिया क्या सॉफ्ट चूची थी उनकी.

मैने डरते हुए हल्के से उनकी चूची दबा दी वो

सिहर गयी और उनके मूह से हल्की सी आह निकल गयी. उन्होनें

पूछा " पसंद आया बेटा यही देख रहा था ना" उन्होनें

फिर कहा देखेगा और कह कर उन्होनें अपनी एक चूची

अपने नाइटी से आज़ाद कर दिया. वा क्या मस्त चूची थी मैने

हल्के से उसका स्पर्श किया बड़ा अछा लगा लगा जैसे मैं

जन्नत में आ गया हूँ. ये सब मुझे सपने जैसा लग

रहा था एक सुंदर अधेड़ उमर की औरत मुझसे अपनी चूची

मालवा रही है ये देख कर लंड अपने पूरे औकात में आगेया

था.

मैने आंटी के आँखों में झाँकने की कोशिश की उनकी

आँखे एकदम नशीली हो चली थी. उन्होने धीरे से हाथ

बढाकर मेरे लंड को मेरे शॉर्ट्स के उपर से सहलाना शुरू

कर दिया.

उन्होनें कहा कि बेटा तेरा लंड तो बहुत बड़ा लग रहा है

ज़रा दिखा ना कि कैसा है तेरा लंड और उन्होनें पॅंट नीचे

सरका दी, पॅंट सरकते ही मेरा लंड बाहर आ गया वो फटी

फटी और ललचाई नज़रों से मेरे बड़े और मोटे लंड को देख

रही थी उन्होनें कहा कि बेटा तू इसमे क्या लगाता है इतना तगड़ा

लंड मैने आज तक नही देखा है ये तो किसी को भी तृप्त कर

देगा.

मैने पूछा आंटी अंकल का कैसा है तो उन्होनें कहा कि

बेटा उनका भी बड़ा और खूब मोटा है मगर तेरी तो बात ही

कुछ और है. वो मेरे और नज़दीक आ गयी थी उन्होनें मेरे

लंड को अपनी हथेली में लेकर सहलाना शुरू कर दिया मुझे

बहुत मज़ा रहा था दोस्तों मैं बताऊ मेरी क्या हालत हो रही

थी मैं अब एक दम बेकाबू हो गया था.

मैने कन्प्ति आवाज़ में पूछा आंटी अंकल से आप खुश नही

हैं क्या तो उन्होनें कहा ऐसा नही है बेटा वो तो मुझे रोज़

चोदते हैं और मैं ना झाड़ू वो नही झाड़ते मगर क्या

करू मुझे चुद्वाना बहुत अछा लगता है.

मेरी लंड की भूख बहुत ज़्यादा है, तेरे लंड को देख कर लग

रहा है कि अब मेरे दुख भरे दिन गये बेटा. तू मुझे

चोदेगा बेटा मैं इसी का तो इंतेज़ार कर रहा था मैने कहा

आंटी आपलोग बहुत अच्छे हो जब ज़रूरत होगी बोले देना.

आंटी खुश हो गयी और मेरा लंड अपने होंठो के पास

लाकर चूमने लगी धीरे धीरे उन्होनें मेरे लंड को

अपने मूह में भर लिया.
 
मेरी आँखे बंद हो गयी, अजब अहसास था ये पहली बार किसी

औरत नें मेरा लंड छुआ था मैं अजीब मस्ती में था

मैने आंटी की चुचिओ को अपने हाथ भर कर सहलाने

लगा उनकी रफ़्तार भी तेज हो गयी थी और मेरे लंड को अब और तेज़ी

से चूसे जा रही थी.

मैने उनसे पूछा कि आंटी क्या मैं आपकी चूत देख सकता

हूँ तो उन्होनें मेरी तरफ नज़रें करके कहा कि बेटा ये भी

कोई पूछने की बात है जो करना है कर मैने उन्हें वहीं

लेटा दिया और उनकी नाइटी उपर सरका दी अब उनकी काली पॅंटी से

धकि चूत मेरे आँखो के सामने थी मैने उनकी चूत

को पॅंटी के उपर से ही सहलाना शुरू कर दिया पॅंटी एक गीली हो

चुकी थी आंटी आहह आहह और सी सी की आवाज़ निकाल रही थी.

मैने उनकी पॅंटी उतार दी उनकी चूत पूरी मेरे सामने थी

चूत पर कोई बॉल नही थे बिल्कुल सॉफ लग रही थी मैने उनकी

चूत की पुतलियों को अलग किया उसमे से रस टपक रही थी मैने

धीरे उनके चूत के दाने को भी सहलाना शुरू किया वो

अब पूरी मस्त हो गयी थी और बड़बड़ा रही थी उन्होने कहा

अरे वाह बेटा तेरी उंगली में तो जादू है बड़ा मज़ा आ रहा

है मैने उनकी चूत को चूम लिया आंटी सिहर उठी उन्होनें

अपनी टाँगे और चौड़ी कर दी मैने उनकी चूत पर ज़बान फेरना

शुरू कर दिया एकदम नमकीन टेस्ट थी उनके चूत की

उन्होनें मेरी सर को सहलाना शुरू कर दिया और अपने चूत के

उपर दबाने लगी उन्हे बड़ा मज़ा आ रहा था वो कहे

जा रही थी " अया बेटा बड़ा मज़ा आ रहा है ऐसे ही चाट

तेरे अंकल भी ऐसा नही चाटते हैं मेरी चूत को क्या चाटा है

तू ", उनकी चूत पानी छोड़ने लगी थी और मैं रस ले लेकर

चूत चाट रहा था.

अब मेरा लंड पूरे ताव में था मैने उनकी टाँगे उपर उठा

दी और उनके ऊट की पुतलियों को अपने दाँत में लेकर हल्का

हल्का काटने लगा वो पूरे मस्ती में आ गयी थी वो

बोलने लगी " अर्रे बेटा तू बहुत है मेरी चूत की रस को पी जा

कहाँ था तू अब तक कल रात ही मैं तुझसे चुद्वाने गयी थी

मैं तू मुझे चोद जी भर के इस भोस्डे को चोद मैं

तेरी हूँ बेटा जब मन चाहे चोद लिया कर.

मैं 69 पोज़िशन में आ गया था उन्होनें मेरे बड़े और

मोटे लंड को अपने मूह में भर लिया और ओर से चूसने लगी

थी अचानक उनकी चूत नें मेरे मूह में खूब सारा पानी

छोड़ दिया वो झड़ चुकी थी मगर मेरा लंड अभी तक खड़ा

था और उनके मूह में था मैने अपना लंड उनकी मूह में

पेलना शुरू कर दिया वो रस ले ले कर लॉलीपोप की तरह चूस रही

थी उन्होनें थोड़ी बाद लंड को मूह से बाहर निकला और कहा

कि बता अब नही रहा जाता मुझे चोद डाल मैं भी पोज़िशन

बदलते हुए उनकी टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को

चूत पर रख कर घीसने लगा आंटी बेकाबू हो रही थीं

और मैं पूरे जोश में था.
 
उन्होनें मेरे लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर टीकाया और

नीचे से अपनी गंद उचका कर मेरे लंड को अपनी चूत के

भीतेर ले लिया मैने भी अपने लंड का दबाव बनाना शुरू

कर दिया वो छटपटाने लगी और मुझे अपने उपर खींच

लिया अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा चुका था मैं

अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा.

वो बड़बड़ाने लगी अर्रे बेटा अपने लंड को धीरे

धीरे क्यों अंदर बाहर कर रहा है ज़रा ताक़त लगा और ओर

से चोद मुझे " मैने अपनी बढ़ा दी " हां बेटा और तेज़

और तेज़ खूब कस के चोदो मुझे आ क्या लंड है तेरा वह

मज़ा आ गया मेरी चूत फाड़ दे बेटा वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने

लगी मुझे डर था कि कहीं भाभी या सरोज ना आ जाए मगर

वो तो अपनी मस्ती में थी मैने खूब ज़ोर उन्हे पेलना शुरू

कर दिया वो छटपटाने लगी.

मैने अपना लंड चूत से निकाला और उन्हे घोड़ी बना दिया अब

उनकी गंद की छेद मेरे सामने थी मैने पीछे से उनकी

चूत में लंड अंदर डाल दिया और अपनी उंगली से गांद को

कुरेदने लगा, वो पूरी मस्ती में आ गयी थी उनके मूह

से आअहह आअहह की आवाज़े आ रही थी और बके जा रही थी

चोद पंकज चोद और ओर ज़ोर से चोद वाह क्या सख़्त लॅंड है तेरा

ऐसा लंड कहाँ से पाया है तूने बहुत अछा लग रहा है

मेरे राजा बेटा तू सही मानों में जवान है गधे जैसा लंड

है तेरा तेरी बीवी तुझसे कितनी खुश रहेगी तू मुझे रोज ऐसे हो

चोदा कर वाह मज़ा आ गया अचानक उनका बदन अकड़ने

लगा

और उन्होनें अपनी चूत को मेरे लंड पर चांप दिया और

झदने लगी इधर मैं भी झदने के कगार पर था कि

अचानक पीछे से आवाज़ आई पंकज माजी ये आपलोग क्या कर

रहे हैं" मैं हड़बड़ा गया आंटी भी हड़बड़ा गयी

मैने झट से अपना लंड निकाला और पीछे मूड कर देखा तो

ललिता भाभी कमर पे हाथ रखे खड़ी थीं मैं अपने

लंड को छुपाने की कोशिश करने लगा मगर वो इतना बड़ा

था कि छुपने का नाम ही नही ले रहा था. भाभी की नज़रें

अचानक मेरे लंड पर गयी और उनका मूह खुला का खुला

रह गया. भौचक होके वो मेरे लंड को देख रही थी माजी

भी ये सब देख रही थी वो भी उसी तरह नगन अवस्था में

अपनी चूत और बड़ी बड़ी चुचिओ पर अपने हाथ रखे खड़ी

थी.

उनके चेहरे पर कातिल मुस्कान आ गयी थी. वो बोली "

बहू इस लंड को देख कर रह गयी ना हैरान मैं भी इसके

के आकार को देख कर अपना होश खो बैठी थी , ये लंड है ही

इतना जानदार कि कोई भी इसको अपने चूत में लिए बिना नही रह

सकता है. बहू इस जीवन में यही एक सुख है इसकी भूख

सभी को होती है तुझे भी है और मुझे. तू भी संजय से रोज़

इसी लिए तो चुद्ति होगी और मैं रोज़ रात को तेरे ससुर से इस

उम्र में भी चुद्ति हूँ." बहू ये भगवान का बनाया हुआ

ऐसा वरदान है इसके लिए क्या क्या हो जाता है और तू नाराज़ हो

रही है."

भाभी की नज़रें मेरे खड़े लंड पर ही टिकी थी. उन्नको

समझ में नही आ रहा था कि वो क्या बोले. ज़ाहिर है मेरा

सख़्त और लंबा लंड उन्हे असचर्यचकित कर रहा था.

उन्होनें अपने आपको संभालते हुए कहा कि पॅकज ये तुम

क्या कर रहे थे और माजी आप इस उम्र ऐसी हरकत छी, मैं

सोच भी नही सकती थी कि आप ऐसा करेंगी वो भी इस अपने बेटे

के उम्र के लड़के के साथ.

सरोज देखेगी तो क्या कहेगी.
 
आंटी नें कहा बहू तूने देख

लिया है तू ही बता मैं क्या करती इसके लंड को देखकर कोई भी

अपना आपा खो सकता देख तो कितना मस्त लॉडा है इसका और ये

कहते हुए उन्होनें मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया.

बहू मैं तो कहती हूँ एक बार तू इसे छू कर तो देख तेरा

क्या हाल होता है. बहू संजय तेरे को रोज़ चोद्ता है ये मैं

जानती हूँ और तू चुदाई के समय क्या क्या बड़बड़ाती है ना

सिर्फ़ मैं बल्कि तेरे ससुर भी जानते है.

हम लोग तेरी बाते सुन चुके हैं. अभी कल ही रात की तो बात

है तू चुदाई के समय कह रही थी कि तू अपनी चूत में साथ

ही साथ गंद में भी लंड चाहती है क्यों बहू मैं क्या

ग़लत कह रही हो बता तू मुझे. भाभी शॉक में थी उनका

मूह खुला का खुला रह गया था उन्होनें कहा " माजी आपलोग

रात को हमारी बातें सुनती हो. आंटी बोली नही बेटा तू इतने ज़ोर

ज़ोर से चिल्ला रही थी कि हमे डर था कि नीचे सिंग साहब

का परिवार तेरी आवाज़ ना सुन लें और शायद ऐसा हुआ भी हो कौन

जाने.

तू चुदाई के समय कंट्रोल रखा कर इतने ज़ोर से चिल्लाति है तू.

आंटी बोली और तू यहाँ जो ये सब कह रही है तो तुझे बता

दूँ आजकल के दौरमे ऐसा कहाँ नही होता तू बता ज़रा दिल और

दिमाग़ खुला रखा कर और मज़े ले ज़िंदगी के और मुझे भी

लेने दे, देख तो इस लंड को कैसे सलामी दे रहा है इस लंड को

कौन मना कर सकता है भला तू बता उन्होनें मेरे लंड

अपनी मुति में जाकड़ लिया था मेरा लंड उनकी बातों को सुन

कर और फनफना गया था, भाभी वहीं सोफे पर लुढ़क गयी

थीं.

मैने आंटी की तरफ देखा उन्होनें मुझे चुप रहने का

इशारा कर दिया मैं चुप चाप तमाशा देखने लगा. आंटी

उसी अवस्था में ललिता भाभी की तरफ बढ़ी और उनके बालों

पर हाथ फेरने लगीं. बोली बहू देख क्या मैं तुम लोगों की

वजह से अपने मन की नही कर सकती, क्या मेरी इतनी भी इस घर

में औकात नही है भाभी नें अपना सर उठाया और कहा ऐसी

बात नही है माजी मुझे इसकी उम्मीद नही थी बस इतनी सी बात

है आप जो चाहें करें मगर बाबूजी

संजय या सरोज को पता चलेगा तो क्या होगा आप बताइए. आंटी

भाभी के बगल में बैठ गयी और सोचने लगी, उन्होने

कहा कि देख बहू इस लंड मेरा पीछा छुड़ाना तो अब मुश्किल

है लेकिन मैं तुम लोगों को भी नाराज़ नही करना चाहती इस लिए

इसका रास्ता ढूँढना होगा कि साँप भी मर जाए और लाठी भी

ना टूटे समझी बेटी. अब तूने देख लिया है तो मिलकर कोई रास्ता

ढूंदेगे अभी तू जा अपने कमरे में मैं झदने वाली

थी जब आ गयी थी यहाँ मेरे चूत में आग लगी है और इसका

लंड भी उल्टी करने को उतावला है.

जा बहू जा आराम शाम को बात करेंगे अभी ज़रा अपनी चूत

को शांत कर लेती हूँ. भाभी उठी और जाने लगी, आंटी नें

कहा कि बेटा ज़रा दरवाज़ा लगा देना जाते जाते भाभी नें

ठीक वैसे ही किया और भाभी चली गयी. आंटी नें मुझे

फिर से अपने उपर खींच लिया और लंड अपने मूह में लिया

और उसे चूसने लगी. उन्होनें कहा कि बेटा मेरी चूत की

आग को शांत कर्दे बेटा जल्दी कर इन सारी बातों को सुनने के

बाद मेरा जोश और भी बढ़ गया था मैने

आंटी लेटया और उनके चूत में लंड पेल दिया आंटी की आह निकल

गयी और मैं उनको चोद्ने लगा मेरी रफ़्तार बढ़ती जा रही

आंटी नें टाँगों को मेरी कमर में फँसा लिया था और वो

झदने के कगार पर पहुँच गयी थीं थोड़ी ही देर में

उनकी चूत नें पानी छोड़ दिया. मैं भी अपने रफ़्तार में था

लंड किसी पिस्टन की तरह चल रहा था थोड़ी देर में मेरे लंड

नें आंटी की चूत में पिचकारी छोड़ दी आंटी आँखे बंद

किए मेरे लंड का पानी अपनी चूत के अंदर लेती रही मैं निढाल

होकर उनके उपर पसर गया.

थोड़ी देर बाद मैने अपना लंड निकाला और आंटी नें उसे

अपने मूह में भर लिया उसे चाट कर सॉफ किया. मैं वहीं

बैठ गया, आंटी उठी और उन्होनें अपने बदन पर नाइटी

डाल ली और मुझे शॉर्ट्स हाथ में देते हुए कहा बेटा अभी

तू जा मुझे बहू को भी समझाना है और आगे के चुदाई का

रास्ता भी ढूँढना है और थोड़ी देर में तेरे अंकल और

संजय भी आ ज्एंगे. मैने पॅंट पहना और आंटी नें

मुझे किस किया और मैं उपर अपने कमरे में आ कर सो

गया.

kramashah.................

 
अनोखे परिवार--3

इधर आंटी सीधे ललिता भाभी के कमरे में पहुँची.

भाभी पेट के बल लेती कुछ सोंच रही थी , उनकी नाइटी उनके

घुटनों तक उठ गयी थी. आंटी कमरे के भाभी पास

जाकर बेड पर बैठ गयी और भाभी के बालों में हाथ

फेरने लगी. आंटी नें पूछा " बहू एक बात बता कि तुझे कोई

तकलीफ़ है, किस का व्यवहार तेरे साथ खराब है संजू तुज़से

ठीक पेश आता है ना इतने सारे सवालों का बौछार आंटी

नें ललिता भाबी से कर दिया था. भाभी नें आंटी की तरफ

नम आँखों से देखा और उनके गले लग गई.

भाबी नें भावुक होते हुए जवाब दिया माजी कैसी बातें

कर रही है आप यहाँ मुझे आप सबसे इतना प्यार मिला जिसकी

मैं कल्पना भी नही कर सकती हूँ. आंटी नें कहा तो फिर

बेटा तू मुझ पर इतना नाराज़ क्यों हो रही थी बता भाभी नें

कहा माजी आपको ऐसी अवस्था में देखकर मुझे समझ

नही आया कि मैं क्या करूँ इसी लिए मैं ऐसा बोले बैठी. आंटी

नें कहा बहू देख मेरी उम्र अब तेरी तरह नही है तेरे

बाबूजी भी बूढ़े हो गये हैं ऐसा नही है

उन में कोई कमी है इस उम्र में भो वो मुझे उतना ही

प्यार करते हैं और चुदाई तो पूछो ही मत उनके लंड मेअब भी

बहुत ताक़त है फिर भी वो जवान तो हैं नही और ना मैं

लेकिन मेरी चुदाई की भूख शांत नही हुई है. मेरी सेक्स की

भूख थोड़ी ज़्यादा है और तेरे ससुर अच्छी तरह से जानते हैं.

और अगर आज मैने अपनी सेक्स की भूख शांत करने की कोशिश

की तो इसमे बुराई क्या है मेरा प्यार उनके लिए कम तो नही हो

गया ना सिर्फ़ चुदाई ही तो की है कोई शादी तो

नही की और ना ही उसके साथ कही भागी हूँ अपने घर के

अंदर ही सब कुछ किया बोल बहू. ललिता अपनी सास के गले लग

गयी और रोने लगी. आंटी नें उसे शांत किया और उसे

पूचकारा. आंटी नें भाभी से कहा कि "बहू मैं तुम से एक

सवाल पूछना चाहती हूँ बुरा तो नही मनोगी ना" भाभी

नें कहा की "नही मैं माजी जो चाहे पूछ सकती है" आंटी

नें पूछा " बहू तू ये बता तेरी संजू के साथ सेक्स लाइफ कैसी

चल रही कोई परेशानी तो नही वो तुझे सही ढंग से चोद्ता

तो है ना" भाभी नें आंटी की तरफ देखा और कहा कि माजी

संजू चुदाई में

बहुत अच्छे हैं और मेरी अच्छी तरह से चुदाई भी करते हैं

मगर ये कह कर वो चुप हो गयी.
 
श्याम अंकल थोड़े रंगीन मिज़ाज़ के थे और राधिका आंटी

भी वैसे ही थी इस उम्र में भी पति पत्नी दोनो में बहुत

प्यार था और चुदाई तो बस जब मौका मिले तब हो जाता था.

रंजन भी श्वेता पर जान छिड़कता था. वो भी हमेशा

अपनी बीवी की चुदाई के चक्कर में ही रहता था. इधर श्याम

अंकल का लंड टाइट होने लगा था. राधिका आंटी ये सब देख

रही थीं उन्होने अपने पति के प्यज़ामे को टेंट बनते देख

लिया और हँसने लगी और बोली क्यों जी मौका मिला

नही कि सलामी देने लगे अपने लंड महाराज को देखो उससे

कहो अभी थोड़ा शांत रहे उसे पानी मिलेगा लेकिन अभी थोड़ा

इंतेज़ार करना पड़ेगा और कहते हुए उसने श्याम अंकल के

लंड को धीरे और बड़े ही प्यार से सहला दिया, दूर खड़ी उनकी

बहू किचन से ये सारा तमाशा देख रही थी और मुस्कुरा

रही थी. राधिका आंटी नें सोफे पर से उठते हुए कहा कि

देखो जी मैं ज़रा कोमल दीदी के पास उपर जा रही हूँ कोई

ज़रूरत पड़े तो बुला लेना और हां इसे

शांत करो उन्होनें अपने पति के लंड की तरफ इशारा करते

हुए कहा. श्याम अंकल नें कहा कि अरे कहाँ जा रही हो

डिस्टर्ब करने अभी अभी सूरज आया होगा कहीं वो चुदाई का

प्रोग्राम बना रहे हो और तुम उन्हे डिस्टर्ब कर दोगि अर्रे

नही अगर ऐसा हो रहा होगा तो मैं भी श्याम भाई साहब से

थोड़ा मज़ा ले लूँगी" राधिका आंटी नें मज़किये ढंग से

अपने पति को जलाने के लिए कहा और चली गयी और श्याम

अंकल फिर टीवी देखने लगे.

उनकी ये सारी बाते श्वेता भाभी सुन रही थी. राधिका

आंटी उपर चली गयी और कोमल आंटी अपने पूरे परिवार

के साथ ड्रॉयिंग रूम मे बैठी थीं. कोमल आंटी नें

राधिका आंटी को देखते ही कहा अर्रे राधिका आओ आओ मैं

तुम्हे अभी बुलाने ही वाली थी अछा हुआ तुम खुद ही यहाँ आ

गयी राधिका आंटी क्यों कोमल ऐसी क्या बात हो गयी कुछ

खास तो नही राधिका नें सूरज अंकल को देखते हुए बड़े

अदा से कहा और भाई साहब कैसे है आप

कहीं मेरी सहेली को ज़्यादा सताया तो नही आपने कि यह

मुझसे शिकायत करने के लिए मुझे यहाँ बुलाने वाली

थी", वो ये कह हँसने लगीं और बाद में सब हँसने

लगे. " सोरोज बेटी कैसी है", रधिका आंटी नें सरोज को देखते

हुए प्यार से पुच्कार्ते हुए पूछा. सरोज नें भी उसी अंदाज़

में जवाब दिया " ठीक ही है आंटी". तभी कोमल आंटी नें

राधिका आंटी को कहा कि "चलो मेरे कमरे में चल के

बैठते हैं और वहीं बातचीत करते हैं"

राधिका नें उनके साथ चलते पूछा कि क्या बात है कोमल

बता तो ऐसी क्या बात है जो तू मुझे बताना चाहती है. इधर

ललिता वहाँ बैठे ये सब कुछ देख रही थी. राधिका

कोमला के साथ साथ उसके कमरे में पहुँच गयी कोमल

आंटी नें अपने पीछे दरवाज़ा हल्का सा बंद कर दिया और

राधिका को बेड पर बिठाया

क्या बात है कोमल " राधिका नें पूछा

बहू खुश नही है" अचानक ही कोमल नें कह दिया

मतलब" राधिका नें चौंकते हुए पूछा फिर कोमल नें

उसे ललिता भाभी से हुई बात चीत का पूरा बेओरा दे दिया.

राधिका आंटी नें मुस्कराते हुए कहा बस इतनी सी बात, लेकिन

वो सब तो ठीक है उसने तुझे ये सब बताया कैसे

कोमल थोड़ा सोच में पड़ गयी उन्होने राधिका आंटी को

देखते हुए मेरे साथ सारी कहानी बयान कर दी. राधिका

आंटी थोड़ी देर के लिए चुप चाप वहीं खड़ी रही उन्हे चुप

चाप खड़ा देख कोमल आंटी नें कहा राधिका क्या तू भी

मुझे ग़लत समझती है. राधिका आंटी नें उन्हे गौर से

देखा फिर मुस्कुराई और कहा कामिनी मुझे पता है कि तेरी

चूत में खुजली कुछ ज़्यादा ही मचती है क्या उस लड़के का लंड

वाकई इतना शानदार है
 
राधिका की चूत में कोमल की बात सुन कर हलचल मच

गयी थी. हां राधिका क्या बताऊ मैं तुझे आज तो मैं

तृप्त हो गयी समझ मगर अब भी मन नही भरा मेरा"

कोमल आंटी नें यह कहते हुए अंगड़ाई ली. मेरा चूत उसको

याद करके टपक रहा है कोमल आंटी नें कहा चल दिन में

तेरी गर्मी को शांत करने के लिए एक लंड मिल गया पर मेरा

क्या मैं तो दिन भर छटपटा ती ही रहती हूँ" राधिका आंटी

नें कहा.

अर्रे जी छोटा क्यो करती है तेरा जी चाहे तो तू बहती गंगा

में हाथ धो लेना तू कहेगी तो मैं तेरे लिए भी चक्कर

चला दूँगी . कोमल आंटी नें कहा मगर समस्या है कि

बहू का क्या किया जाए. कोमल नें चिंतित मुद्रा में आकर

पूछा कुछ नही मैं कुछ प्लान बनाती हूँ जल्दी चल अब मैं

जा रही हूँ" राधिका ये कहते हुए जाने के लिए उठी

मगर कोमल नें उसका हाथ पकड़ लिया और एक बार फिर से

कोई रास्ता निकालने की मिन्नते की,

राधिका आंटी नें प्यार से कहा कोमल तू चिंता मत कर और

हां ज़रा उस लड़के से अछी तरह से इंट्रोडक्षन तो करा ये

कह कर वो जाने के लिए मूडी. कोमल नें उसे टोकते हुए

कहा " राधिका एक काम कर जब सब सो जायें तो चुप चाप से

छत पर आ जाना मैं वहाः 1 बजे तक पहुँच जाऊंगी तू एक

काम कर 1.30 बजे तक आना मैं कोई ना कोई चक्कर चलाती

हूँ, राधिका आंटी के जाने के बाद कोमल आंटी फिर से

ड्रॉयिंग रूम में आ गयी जहाँ सब बैठे हुए थे.

कोमल आंटी के बैठते ही सूरज अंकल नें उनसे धीरे से

पूछा कि "क्या बात है डार्लिंग बड़ा देर लगा दिया कोई प्लॅनिंग

हो रही थी क्या. कहीं हमारे बारे में तो डिसकस नही कर

रही थी" कोमल आंटी नें मुस्कुराते हुए कहा चलो जी हटो

हमेशा तुम्हे एक ही चीज़ दिखती है" सूरज अंकल नें जवाब

दिया " चल आज रात तुझे बताता हूँ मैने आज तेरी गांद ना

मारी तो मेरा नाम बदल देना

कोमलने एक अदा के साथ मूह बना दिया. सूरज अंकल नेधीरे से

मुस्कुरा कर आंटी का हाथ दबा दिया. कोमल आंटी नें

संजय की तरफ मूह करते हुए पूछा संजू बेटा कैसा रहा

आज का दिन , संजय नें जवाब दिया " ठीक था मा आज आराम से

ही बीता कोमल नें कहा कि चल अछा ही है ज़्यादा टेन्षन मत

लिया कर और ऐश मौज किया कर अभी ही तो उम्र है हँसने

खेलने के और ज़रा बहू का भी ख्याल रखा कर उसे भी टाइम

दिया कर. संजय नें अपनी मा की ऑर देखते हुए कहा.

ललिता को कोई तकलीफ़ है क्या उसने मुझसे कुछ नही कहा अगर

ऐसी कोई है वो मुझसे बेझिझक बोले सकती है" संजय नें

ललिता की ऑर देखा इशारों में पूछने की कोशिश की. ललिता

खड़ी शर्मा रही थी. अर्रे कुछ नही रे मैं वैसे ही कह

रही थी अब अपने पापा को ही देख इस उम्र में भी वो

मुझ पर जान छिड़कते हैं एक मिनिट के लिए भी मुझे नही

छोड़ते है वो मेरे हर अरमान का उन्होनें अच्छे से ध्यान

रखा है,
 
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