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अनौखी दुनियाँ चूत लंड की complete

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मैं(मैंने उसकी आँखों एक अजीब डर देखा जैसे उसे मेरे मना कर देने का डर हो)-मुझे फर्क नहीं पड़ता मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूँ ।

कर्ण-मैं भी ,ई लव यु गरिमा मुझसे अब कभी दूर मत जाना ।

मैं कुछ कह पाती इससे मेरी नज़र उसके फोन पर पड़ी । "अभय की कॉल आ रही है" मैंने कर्ण को बताया ।

कर्ण-आने दो कोई बात नहीं ,मेरे भाई की है वो वैदेही के पास पहुंच गया होगा ।

मैं-नहीं उठाओ मुझे वैदेही कि चिंता हो रही है ,और स्पीकर पर लगाना प्लीज़ ।

कर्ण ने फोन उठाया । अभय की नाराजगी भरी आवाज़ सुनाई दी " तुमने इस भूतनी को क्यों अकेला छोड़ दिया "

कर्ण-इसलिए क्योंकि वो गरिमा के साथ जाने को तैयार ही नहीं थी और उससे उसे मनाने का समय नहीं था ,सब ठीक तो है ?

अभय-हाँ कुछ ज्यादा ही ठीक है बाबा के इलावा सबकी टाँगे और बाहें तोड़ दी हैं बस बाबा की नहीं तोड़ी क्योंकि उसकी तो गर्दन ही...'

कर्ण-बस बस ...फोन स्पीकर पे है गरिमा सुन रही है ।

अभय-नमस्ते भाभी जी , मैं सब मज़ाक कर रहा था ।

मैं- जानती हूँ , तुम और वैदेही ठीक तो हो ?

अभय-वो भूतनी तो मेरे आते ही भाग गई किसी भी पल आपके पास पहुँचती होगी ।

मैं-तुम कब मिलोगे ?

अभय-बस यह सब काम निपटाने के बाद , ठीक है भाई रखता हूँ फ़ोन ।

कर्ण इससे पहले की मुझसे कुछ कहता रेस्टोरेंट का दरवाजा धड़ाम से खुला और वैदेही चिल्लाते हुए अंदर दाखिल हुई " किधर हैं लैला मजनूं "

कर्ण(थोड़ा गुस्से से)- वैदेही तुमने फिर ...।

पर इससे पहले की वो कुछ और कहता वैदेही बड़बड़ाते हुए हमारे पास आकर बैठ गई " उस कुत्ते अभय ने शिकायत कर दी ...भाई सच कहती हूँ ...मैंने कोई गड़बड़ नहीं कि ....तुम बस मुझे डांट सकते हो ...इतनी देर से भाभी बैठी है और तुमने आर्डर तक नहीं किया ....अरे भाभी मैं तो कम बोलती हूँ इसिलए यह सब मुझे तंग करते हैं .."

वैदेही की बक बक चलती रही कर्ण ने मेरी तरफ देखा और मैंने उसकी तरफ और हम दोनों ज़ोर से हँस पड़े ।

ठीक इसी समय डोर बेल बजी रमा ने गरिमा को दरवाजा खोलने के लिए भेज दिया और राजमाह को तड़का लगाने के लिए कढ़ाई गैस पे चढ़ा दी । " तो उस दिन यह सब हुआ था ..मैं सुबह उठी तो गरिमा अपने कमरे थी ....और इस बुद्धु ने अपनी माँ को ही कुछ नहीं बताया " ।

गरिमा(किचेन में वापिस आती है)- चाचू हैं फ्रेश होने गए हैं ।

रमा- खाना भी बन गया है तुम बैठो डाइनिंग टेबल पे मैं खाना लगाती हूँ ।

रमा ,गरिमा और रवि ने लंच साथ में किया फिर लगभग ढाई बजे रवि गरिमा को लेकर उसके घर छोड़ने के लिए निकला और उनके जाने के बाद रमा फिर अपने नार्मल रूप में ऑटो से घर के लिए चल पड़ी ।

इधर तनु लगभग 1.30 बजे घर पहुंची और घर पे ताला देखकर उसे बेहद हैरानी हुई क्योंकि रमा कभी इस वक़्त बाहर नहीं जाती थी खैर उसने सोचा कि माँ शायद मार्किट गयी होगी इसलिए उसने इस बात पर ज्यादा दिमाग नहीं खपाया फूलदान में से चाबी निकालकर घर खोला और अपने कमरे में आकर अपनी स्कूल यूनिफॉर्म उतारने लगी । उसने अपनी स्कूल शर्ट खोली और स्पोर्ट्स ब्रा में घुट रहे अपने 36dd आकार के स्तनों को सहलाते हुए बोली" ओले ओले...चुनु-मुन्नू को बड़ी गर्मी लग रही होगी न ...देखो तो कितना पसीना आ रहा है तुमको ?...मम्मी अभी इन्हें इस गन्दी और तंग स्पोर्ट्स ब्रा से आज़ाद करेगी अपने बच्चों को " वो अपने स्तनों से ऐसे बात कर रही थी मानों वो मम्में न होकर उसके बच्चे ही हों ।उसने अपनी स्पोर्ट्स ब्रा उतार फेंकी और पँखा चलाकर उन्हें सहलाने लगी "आया आराम मेरे चुन्नू-मुन्नू को ....पर देखो तो तुम कितने बड़े-2 हो गए हो ...कितनी प्रॉब्लम होती है तुम्हारी मम्मी को तुम्हारे कारण पता है ? " उसने अपने स्तंनो को प्यार से सहलाया और पीठ के बल बिस्तर पर लेट गयी ताकि अच्छे से हवा ले सके कोई घर पर तो था नहीं इसलिए वो जो मर्ज़ी कर सकती थी ।इसी वक्त राहुल घर पहुंचा पिंकि के साथ भागदौड़ करके वो काफी थक चुका था इसलिए उसने एकसाथ चार-पाँच बार डोरबेल बजा दी जो हर माँ कि तरह रमा की आदत थी ।पिंकि को लगा कि माँ आई होगी इसलिए उसने ब्रा पहनने की जहमत न उठाते हुए बस पास पड़ी सफेद टॉप पहन ली और दरवाजा खोंलेने चली गयी जल्दी में उसे इस बात का भी ख्याल न रहा कि पसीने के कारण उसकी टॉप भीग गयी होगी और सब दिख रहा होगा वो इतनी थकी हुई थी उसने सोचा भी नहीं कि नीचे तो उसने बस पैंटी पहनी हुई है ।"क्या मम्मी इस समय कँहा चली गयी थीं" कहते हुए तनु ने दरवाजा खोला तो राहुल को देखकर हैरान रह गयी ,उससे ज्यादा हक्का-बक्का राहुल रह गया उसकी नज़रे तो जैसे तनु की टॉप से दिख रहे भीगे हुए गोल-गोल स्तंनो और बाहर को उभर रहे निप्पलों पे चिप्पक गयी ।

तनु ने राहुल की नज़रों को अपनी छाती पे टीके पाया तो झट से अपनी बाजुओं को ऊपर कर उन्हें छुपाते हुए बोली "बता नहीं सकते थे कि तुम हो ? डफर किन्हीं का "

राहुल जैसे सपनो की दुनिया से वापिस धरती पे आ गया " तुम नहाते हुए नंगी ही आ जाओगी ........" राहुल अभी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि तनु को याद आया कि वो तो केवल पैंटी में है वो शर्म से पानी-2 हो गयी और मुड़कर अपने कमरे की और भागी ।

 
तनु के मोटे और मटको जैसे गोल नितम्ब भागते हुए गुबारों से हिल रहे थे ।राहुल अपने कमरे में भी पहुँच गया पर तब भी उसके दिमाग तनु के भीगे मोम्मों और उसके भागते समय हिल रहे नितंबों की तस्वीर किसी फिल्म की तरह बार-2 घूमती रही ।

दूसरी तरफ तनु शर्म से लाल हुई जा रही थी "उफ्फ गधे ने मुझे नंगा देख लिया ....अगर उसने माँ को बता दिया तो? ....और पिंकि को? .....उससे तो कितनी बनती है राहुल की....पिंकि अपनी सब सहेलियों को बता देगी ....और माँ तो सोचेगी की पक्का मैं अकेली कुछ गलत-शलत कर रही थी " तनु अपने बिस्तर पर लेटी हुई मन न जाने क्या क्या सोच रही थी । राहुल का हाल भी कुछ बेहतर नहीं था पहले तो पिंकि ने उसकि हसरतों को जगा कर पानी फेर दिया था अब तनु ने जैसे उसके तन बदन में आग सी लगा दी थी राहुल ने अपने कमरे घुसते ही अपना बस्ता फेंक कपड़े उतार दिए और अपने कच्छे को नीचे करके बिस्तर पर लेट गया और आँखे बंद करके मुठियाने लगा । इधर पिंकि अपने कमरे से यह सोचते हुए बाहर निकली की वो राहुल थोड़ा मखन लगाके उसे किसी और को न बताने के लिए मना लेगी ।

राहुल के कमरे का दरवाजा बंद था ,तनु ने दरवाजे को छुआ तो वो हल्का सा खुल गया पर अन्दर जो नज़ारा था उसकी कल्पना तनु ने सपने भी नहीं कि थी वो सोच भी नहीं सकती थी कि वो कभी राहुल को मुठ मारते हुए देखेगी ।राहुल अपने खम्बे जैसे मोटे और लम्बे लौड़े को आँखे बन्द किये मुठिया रहा था इतना बड़ा लौड़ा देखकर तो तनु की आँखे हैरानी से चौड़ी हो गयी "ओह माँ इतना बड़ा " तनु ने मन में सोचा । तनु अपने कमरे में वापिस आने के लिए मुड़ने ही वाली थी कि उसने सोचा " अच्छा मौका है हिसाब बराबर करने का अगर मैं अभी इसे रँगे हाथों पकड़ लूँ तो यह किसी को मेरी बात बता नहीं पाएगा" ।

तनु ने जानबूझकर ज़ोर से दरवाजा खटखटाया ताकि राहुल को पता चल जाए ।

राहुल(अपना कच्छा ऊपर करते हुए,पर उसका बड़ा लन्ड अभी भी कच्छे से बाहर झांक रहा था )-कौन है ?

तनु(कमरे में दाखिल होते हुए)- मैं हूँ और ......और तुम यह क्या कर रहे थे ।तनु को राहुल कच्छे की इलास्टिक में फसा हुआ लन्ड देखकर हँसी आ रही थी ,राहुल का लन्ड उसकी नाभि तक आ रहा था "कच्छा ऐसे लन्ड को संभालता भी कैसे" तनु ने अपनी हँसी रोकते हुए कहा ।

राहुल(उसे पता नहीं था कि अभी भी उसका लन्ड दिख रहा है)-ममम...मैं कुछ नहीं कर रहा था ।

तनु-तुम अपने नुन्नु से खेल रहे थे न ?

राहुल-ननन.. नहीं तो...

तनु(उसके लिंग की तरफ इशारा करते हुए)-फिर तुम्हारा नुन्नु इतना सूज क्यों गया है ?

राहुल(वो नीचे देखता है और अपने लिंग को हाथों से छुपाते हुए दूसरी तरफ घूम जाता है)-तत्त्त्त तुझे शर्म नहीं आती मुझे नँगा देखते ?

तनु(तनु को राहुल की हालत देखकर बड़ा मजा आ रहा था)- अच्छा जी एक तो तुम गंदी हरकतें करके अपने ल.(वो लन्ड कहने जा रही थी) नुन्नु को सुजा लो और अब मुझे डांट रहे हो ...आने दो माँ को सब बताऊंगी ...वो डॉक्टर से सुई लगवाने ले जाएगी तुम्हें तब पता चलेगा ।

राहुल(राहुल तनु कि बातों में आ चुका था उसे लग रहा था कि तनु गम्भीरता से बोल रही है .....वो सोच रहा कि वो कैसे तनु को बताए कि उसके लन्ड में कोई सूजन नहीं हुई है)- नहीं सूजन नहीं है कुछ देर में सूजन ठीक हो जाएगी ।

तनु(बॉडी कितनी मस्त है इस बुद्धू की ,साले की गाँड़ कितनी मस्कुलर और भारी है)- कैसे ठीक हो जाएगी ?मैंने देखा है बहुत सूज गया था ।

राहुल(अब उसे थोड़ी खीज होने लगी थी )-मैंने कहा न कि ठीक हो जाएगी कुछ देर में , अब जाएगी भी मुझे कपड़े पहनने हैं ।

तनु-गुस्सा क्यों होता है ठीक है नहीं बताऊंगी मम्मी को पर मैं थोड़ी देर में चेक करूँगी की सूजन गयी या नहीं , चल जल्दी से कपड़े पहनकर किचन में आ जाना मैं खाना गर्म कर रही हूँ ।

राहुल-जा भी न अब ।

तनु-जा तो रही हूँ चिल्ला क्यों रहा है । लेकिन चेक करूँगी मैं । वो कहते-2 राहुल के कमरे से निकली और हँसी का गुबार जो उसने रोक रखा था फूट पड़ा "ओह माई गॉड ही इज़ टू क्यूट.......हाहाहा.... क्यूट विद मॉन्स्टर डिक....हाहाहा....नहीं गधा घोड़े के लौड़े वाला ..." वो मन में सोचते हुए पागलों सी हँसती हुई रसोई में घुस गई ।

अपने कमरे में राहुल गुस्से औऱ शर्म से लाल-पीला हो रहा था ...ढीला होजा.... होजा... वो अपने लन्ड को मुठियाते हुए बड़बड़ा रहा था पर लन्ड था कि किसी डण्डे जैसे सख्त था ढीला होने का नाम ही नहीं ले रहा था। " राहुल क्या कर रहा है इतनी देर से जल्दी नीचे आ और घी का डिब्बा उतार के दे मुझे " उसे तनु की आवाज सुनाई दी ।

"कपड़े तो पहन लूँ " राहुल ने अपना लन्ड किसी तरह अपने कच्छे में खोंसते हुए कहा ।"तू फिर से नुन्नु से खेल रहा है ना ? आती हूँ मैं ऊपर" तनु ने जवाब दिया ।

 
राहुल(जल्दी से लोअर और टॉप पहन के रसोई की तरफ जाते हुए)-क्या है ?

तनु-रसोई में आ और ऊपर की शेल्फ से घी का डिब्बा उतार के दे मुझे ।

राहुल(राहुल की नज़र फिर से तनु के मोम्मों और निक्कर से उभर रही गाँड़ पर पड़ती है ,"यह आज मुझे जीने नहीं देगी " वो मन में सोचता है )-पीछे तो हट । राहुल ऊपर की शेल्फ खोलकर देखता है "यार इसमें तो कई डिब्बे हैं घी वाला कौनसा है ?"

तनु-तू न सच में डफर है चल मुझे ऊपर उठा मैं खुद देख लूँगी ।

राहुल-गिर-विर जाएगी एक दिन बिना घी के खाना खा ले ।

तनु(राहुल को घूरते हुए)-तू मुझे उठाएगा या मम्मी को बता दूँ मैं ?

"एक नम्बर की चंट है कुतिया कहीं की" राहुल मन में सोचता हुआ तनु के पीछे आ जाता है और उसे डरते डरते कमर से पकड़ता है ....तनु की नंगी ,पतली और मखमली कमर को छूते ही दोनों के बदनों में बिजली दौड़ जाती है । "क्या कर रहा है ऊपर से पकड़ गुदगुदी होती है" तनु कसमसाते हुए कहती है । राहुल तनु की बात सुनकर तोड़ा चकरा जाता है क्योंकि उसके हाथ पहले ही कमर के ऊपरी हिस्से पर थे वो ज़रा सा भी हाथ ऊपर करता तो तनु के मम्में दब जाते ।

तनु(वो भूख से बेहाल हो रही थी)-सोच क्या रहा है उठा न ?

राहुल तनु के मम्मों को अपने हाथों से दबोचते हुए उसे ऊपर उठा देता है । तनु तो उसे कंधों से पकड़कर उठाने को कह रही थी इस अचानक हुए हमले से वो बौखलाहट में हाथ पैर मारने लगती है । तनु का बैलेंस खराब हो गया है यह सोचकर राहुल ने उसे और ज़ोर से पकड़ लिया तनु के बड़े - 2 मम्में अब राहुल के हब्शी हाथों में वैसे ही गूंथे हुए थे जैसे आटा .। अब तनु को दर्द होने लगा था जिसकी वजह से और तेजी से हाथ पैर चलाने लगी और उसे संभालने के चक्कर में राहुल ने उसके स्तंनो को और ज़ोर से दबा दिया ...इस तरह तनु के मम्में राहुल के हाथों में पिचक से गए आखिर तनु को इतना दर्द होने लगा कि वो चीख पड़ी "राहुल मेरे बूब्स छोड़ मुझे दर्द हो रहा है" ।

राहुल ने तनु की जल्दी से नीचे उतारा तो किसी पागल बिल्ली की तरह उस पर झपटी और जो भी चीज़ उसके हाथ मे आई वो उसने राहुल पे फेकना शुरू कर दी और "आह ...पागल... जानवर... गधा.." बोलते हुए राहुल को मरती रही । राहुल ने उसके हाथ पकड़कर उसे रोकने की कोशिश की तो वो अनजाने में उसपर चाकू से वार कर बैठी । चाकू का वार तो राहुल ने हाथ से रोक लिया पर एक बड़ा सा जख्म उसके बाएं हाथ पर होगा । खून की एक मोटी धारा राहुल के हाथ से फूट निकली ।इतना खून देखकर कर तनु बेहोश होकर ज़मीन पे गिर पड़ी ।

राहुल ने किसी तरह बर्फ लगाकर खून का बहना कम किया और फिर अपने हाथ पर पट्टी बांध दी और तनु को उठाकर उसके कमरे में लेटाया । उसके बाद की फटाफट फिर से रसोई में आया और ज़मीन पे गिरा हुआ अपना खून साफ किया । इसके बाद वो तनु के पास बैठकर उसके माथे पे ठंडी पट्टियों को रखकर उसे होश मे लाने लग गया ।

राहुल को तनु की चिंता तो थी ही पर उसके साथ-2 वो सोच रहा था कि तनु के आने से पहले अगर कोई घर पर आ गया तो क्या होगा? पर आज उसकी किस्मत उसके साथ थी तनु होश आ गया । उसे देखते ही तनु चिल्लाने लगी "मैंने तेरा हाथ काट दिया ...मैंने तेरा हाथ काट दिया "

राहुल ने अपना हाथ मुँह पर रखकर तनु की आवाज़ों को रोका और अपना दिखाते हुए बोला" हाथ कटा नहीं है बस चोट लगी है..चिल्लाओ मत कोई सुन लेगा "

तनु-दिखा मुझे।

राहुल-यह ले देख अम्मा कर ले तसल्ली ।

तनु-तुमने मुझे वँहा से क्यों पकड़ा था ?

 
राहुल-तुने ही कहा था ऊपर से मैं तो कमर से पकड़ रहा था ।

तनु- उफ्फ तुम भी न मेरा मतलब था कि मुझे कंधों से पकड़ ।

राहुल-ज्यादा दर्द हो रहा है वँहा ।

तनु(टॉप के ऊपरहो जाने से उसके मम्में काफी ज्यादा दिख रहे थे , अपनी हालत देख वो शर्मा जाती है वो झटपट टॉप को नीचे करती है)- होगा नहीं क्या इतने ज़ोर से पकड़ता है क्या कोई ?

राहुल-सॉरी तनु ।

तनु-राहुल मुझे भी माफ कर दे मेरी वजह से तेरा हाथ कट गया । तू मम्मी को बता देना और डॉक्टर के पास चले जाना ।

राहुल-पागल है क्या मम्मी को बताऊंगा तो पता है कितनी डांट पड़ेगी दोनों को ,मैं अकेले ही चला जाऊँगा डॉक्टर के पास ।

तनु- मैं भी चलूँगी तेरे साथ शाम में मुझे मार्किट जाना है एक किताब लेने तब तू भी चलना ।

राहुल-ठीक है, अब तुम रेस्ट करो मेरी ट्यूशन का टाइम हो रहा है 6.30 के आसपास आऊँगा तब चलेंगे ।

राहुल और तनु पहली बार आपस में इतने प्यार से बात कर रहे थे । एक तरफ राहुल इतना सब होने के बाद भी खुश था तो दूसरी तरफ तनु एक उलझन थी । वो समझ नहीं पा रही थी कि वो क्यों राहुल के इतने करीब जा रही है जबकि वो मनोज के साथ रिलेशनशिप में है ।

रमा और गरिमा लगभग एक साथ 3.30 घर पहुँची ,तब तक राहुल ,तनु को खाना देकर ट्यूशन जा चुका था और तनु अपने कमरे में थी ।रमा को डर था कि कहीं गरिमा या तनु को शक न हो जाए इसलिए उसने जानबूझ तोड़े गुस्से में गरिमा से पूछा " गरिमा इतनी देर कँहा थी तू ? आजकल तेरा घूमना फिरना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है "

गरिमा- सहेली के घर चली गयी थी इसलिए लेट हो गयी ।

रमा(उसे गरिमा के सीधे साफ जवाब से खुशी भी और गुस्सा भी आया )-देख रही हूं जैसे-2 एग्जाम पास आ रहें तू कुछ ज्यादा ही घूमने लगी है ।

गरिमा(रमा के पास आकर उसके चेहरे पर किस करते हुए)-टेंशन मत लो मां इस बार भी क्लास में फर्स्ट ज़रूर आऊँगी ।तुम तो ऐसे ही शक करती रहती हो ।

रमा(उसे अनजान बनने में बड़ा मजा आ रहा था)- जा तनु को बुला ला मैं तुम दोनों के लिए खाना निकाल लाती हूँ ।

गरिमा- मेरे लिए मत निकलना मैंने फ्रेंड के घर खा लिया है । फिर वो तनु को आवाज़ लगाती है " तनु नीचे आ मम्मी खाने के लिए बुला रही हैं ।

तनु-मैंने खा लिया है तुम दोनों खा लो ।

रमा- ठीक है , ट्यूशन होमवर्क कर के फिर मनोज आता होगा चार बजने वाले हैं ।मैं अपने रूम में रेस्ट करने जा रही हूँ मुझे तंग मत करना ।

रमा अपने कमरे में चली गयी और गरिमा तनु के पास आ गयी ।

तनु-कँहा थी तू ? तेरा तो हॉफ डे था आज ?

गरिमा(वो अपनी छोटी बहन का उतरा हुआ चेहरा देखकर पहचान गयी कि आज नकचढ़ी का मूड खराब है)-क्या बात है नकचढ़ी तेरा मूड क्यों खराब है ? मनोज आज पढ़ाने नहीं आ रहा क्या ?

तनु-मेरा मूड बिल्कुल ठीक है ,बस मैं कुछ सोच रही हूँ।

गरिमा-अच्छा तो नकचढ़ी सोचती भी है ।

तनु-देखो मेरा मज़ाक मत उड़ाओ नहीं तो मैं बात नहीं करूँगी ।

गरिमा-अच्छा बाबा माफ कर दे मुझे गलती हो गई चल अब यह बता क्या सोच रही थी ।

तनु-तुझे नहीं लगता कि राहुल अचानक बदल गया है ।

गरिमा-हम्म अब कपड़े तो ढंग से पहनता है ।

तनु-नहीं यार ....

तनु पिछली रात वाली घटना गरिमा को बताने ही जा रही थी कि मनोज आ गया ।

 
गरिमा-अच्छा बाबा माफ कर दे मुझे गलती हो गई चल अब यह बता क्या सोच रही थी ।

तनु-तुझे नहीं लगता कि राहुल अचानक बदल गया है ।

गरिमा-हम्म अब कपड़े तो ढंग से पहनता है ।

तनु-नहीं यार ....

तनु पिछली रात वाली घटना गरिमा को बताने ही जा रही थी कि मनोज आ गया ।

गरिमा-तू आज गेस्ट रूम में ही पढ़ ले मैं बहुत थक गई हूँ यार ।

तनु-ठीक है ,पर आज रात तू घरपर ही है ना ?

गरिमा-हाँ यार तू जा न जल्दी वरना वो ऊपर आ जायेगा । उसे कहना कि गरिमा को बुखार है और वो सो रही है ।

तनु-ठीक है ।

तनु को तो केवल शक था और अपनी भावनाओं को दबाने के लिए वो अपने इस शक को बढ़ावा दे रही थी लेकिन कोई था जो राहुल के बारे में इन सबसे ज्यादा ही नहीं बल्कि उसके अतीत के साथ वो यह भी जानता था कि राहुल अनाथ कैसे हुआ और वो इस समय एक गुप्त जगह पे बैठा एक गहरी साजिश रच रहा था । उसके कई गुलामों में से एक था मित्तल ।

अँधरे से भरी एक गुफा में जो दूर कहीं अनजानी जगह पर थी मित्तल एक अजीब सी आकृति के सामने सिर झुकाए खड़ा था । वो अजीब सी आकृति दिखने में तो इंसान ही लग रही थी पर उसका बदन ऐसा था मानो सफेद धुँए का बना हो उसके आरपार देखा जा सकता था आर पार जाया जा सकता था वो थी एक आत्मा ....खूंखार कंसक की आत्मा ।

कंसक- मेरे बच्चे बता क्या खबर है ।

मित्तल-छे और लड़कियों को लाया जा चुका है ।

कंसक- काम बहुत ही धीरे हो रहा है मैंने तुम्हें इतनी दौलत दी है उसका प्रयोग करो लड़कियों को खरीदो जँहा से खरीद सकते हो क्योंकि तुम जानते हो कि मैं सिर्फ औरतों का दूध पी कर ही ज़िंदा रह सकता हूँ ।

मित्तल-भगवन बिना बदन के आप कभी शक्तिशाली नहीं हो सकते ,अब जब वो खास लड़का मिल चुका है तो हमें वो प्रकिया शुरू कर देनी चाहिए ।

कंसक-यह मैं जानता हूँ मुझे मत सिखा , उस प्रक्रिया से पहले उस लड़के का 29 लड़कियों से संभोग करना ज़रूरी है तभी वो प्रक्रिया सफल होगी । लेकिन इस रूप में मैं इतना शक्तिशाली नहीं कि उसके दिमाग पर पूरी तरह से काबू पा सकूँ । लेकिन उसका भी उपाय मैंने सोच लिया है ।

मित्तल- क्या उपाय है ? भगवन

कंसक-पहले मेरे लिए दूध लाओ मुझे कमज़ोरी महसूस हो रही है । एक भूरे बालों वाली अंग्रेजन कमरे में एक बड़ा सा जग लेकर दाखिल होती है ।

मित्तल ऐसी जगह पर एमी जैक्सन जैसी सुपर मॉडल और फिल्मों की अदाकारा को देखकर हैरान रह जाता । एमी जैक्सन सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी वो बिना किसी शर्म लिहाज के चलती हुई कंसक के पास आ गयी और उसे दूध से भरा हुआ जग दिया और कंसक के अगले हुक्म का इंतजार करने लगी ।

मित्तल उसके खूबसूरत चेहरे मादक बदन को भेड़िये जैसी नज़रों से घूर रहा था ।

कंसक-इस समय किसका दूध लाई हो एमी ?

एमी-भगवन इस समय अमीषा पटेल और सलमा हायेक का है ।

मित्तल के मन में तो बस एमी और उसका सेक्सी बदन घूम रहा था उसकी सेक्सी फोटोज़ देख देखकर मित्तल ने खूब मुठ मारी थी ।

कंसक-मित्तल लगता है तुझे हमारी नई बच्ची पसन्द है ।

मित्तल(डरते हुए)- भगवन इस सुंदरी को कौन नहीं पसंद करेगा ?

 


मित्तल के मन में तो बस एमी और उसका सेक्सी बदन घूम रहा था उसकी सेक्सी फोटोज़ देख देखकर मित्तल ने खूब मुठ मारी थी ।

कंसक-मित्तल लगता है तुझे हमारी नई बच्ची पसन्द है ।

मित्तल(डरते हुए)- भगवन इस सुंदरी को कौन नहीं पसंद करेगा ?

कंसक(एमी के तोता पुरी आमों जैसे स्तंनो को सहलाते हुए)-जा बच्ची जितनी देर मैं यह देसी-विदेशी मिक्स दूध पीता हूँ तू मेरे इस गुलाम के लिंग को शांत कर अभी इसे मेरे कई काम करने हैं ।पर ध्यान रहे दूध के खत्म होने से पहले इसकी कामवासना खत्म हो जानी चाहिये । इतना कहकर कंसक पत्थर के बने एक बड़े से सिंहासन पर बैठ गया और चुस्कियां लेकर दूध पीने लगा ।

एमी ने मित्तल का हाथ पकड़कर उसे एक कुर्सी पर बिठा दिया और मित्तल पास नीचे जमीन पर घुटनों के बल बैठते हुए धीरे-2 बड़ी लगन से उसकी पैंट की ज़िप खोलकर मित्तल का 10इंची लन्ड बाहर निकाल लिया और उसके टट्टे सहलाते हुए उसके लिंग पर जँहा-तहां चूमने लगी ।"आह...आह..."मित्तल सिसक उठा ।एमी ने अपने सेक्सी होंठ हल्के से खोलते हुए मित्तल के लन्ड के टोपे को मुँह में भर लिया और होंठों से उसके लन्ड पर दबाव बनाते हुए उसे चूसने लगी मित्तल अपने लौड़े पर एमी के नरम और सेक्सी होंठो की गर्मी और दबाव को बड़ी मुश्किल से सहन कर पा रहा था ..."उफ्फ...एमी क्या चूसती हो...आह ...आह..." मित्तल मदहोश सा बोलता जा रहा था । अभी एमी को चुसाई शुरू किए पाँच मिनट भी नहीं हुए थे कि मित्तल एक लम्बी आह के साथ झड़ गया । एमी ने उसके वीर्य की एक बूँद भी बेकार जाने नहीं दी और सारा वीर्य गटक गई ।

कंसक-वाह एमी वाह तूने मुझे भी पछाड़ दिया है तुझे इस काम के लिए चुनकर मैंने कोई गलती नहीं कि ।

एमी ने मित्तल का मुरझाया हुआ लन्ड वापिस उसकी पैंट में खोंसते हुए उसकि ज़िप बन्द कर दी और कंसक के पास जाकर बोली "कौनसे काम के लिए भगवन"

कंसक-मित्तल अब यह बबिता की जगह लेगी और बाकी सबको बताएगी की बबिता की दूसरे शहर में नोकरी लग गयी है इसलिए वो वँहा चली गयी है ।

मित्तल- भगवन मैं समझा नहीं ,बबिता क्यों जाएगी दूसरे शहर ।

कंसक-यह काम हो चुका है ,एक बड़ी कंपनी का मालिक तेरी ही तरह मेरा गुलाम । मेरे कहने पर उसने बबिता को ज्यादा तनख्वाह का लालच देकर बुला लिया है और बबिता निकल भी चुकी है दूसरे शहर जाने के लिए । तेरा काम यह है कि तूने मनोज से बबिता को फ़ोन करवाना है ताकि बबिता अपने सभी छात्रों के फोन करे और उनसे कहे कि अब उसकी जगह उसकी बहन तनीषा यानी हमारी एमी उन्हें पढ़ाएगी ।

कंसक-एमी 4 बजने में कुछ ही समय रह गया है तुम जल्दी से बबिता के घर जाओ और उसकी जगह लो ....और काम पूरा करो ।

एमी-भगवन इतने कम समय में मैं बबिता के घर नहीं पहुँच सकती ।

कंसक-तो मैं पहुँचा देता हूँ । कंसक इतना कहकर चुटकी बजता है और एमी गायब हो जाती है ।

मित्तल-भगवन एक शंका है ।

कंसक-पूछो ।

मित्तल-भगवन बबिता का मकान मालिक कोई अड़चन न पेश कर दे ।

कंसक-ऐसा होने से बबिता खुद रोकेगी ।

मित्तल-वो कैसे ।

कंसक-मनोज के कहने पर वो अपने मकान मालिक को भी फोन करके बताएगी की अब उसकी जगह कुछ दिनों के लिए उसकी बहन तनीषा रहेगी ।

मित्तल-भगवन मेरे लिए कोई हुक्म ।

कंसक- मित्तल तुम हमसे एक अप्सरा को छुपा के रखोगे इसकी उम्मीद नहीं कि थी मैंने ।

मित्तल-भगवन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया कोई गलतफहमी है ।

कंसक-हम तुम्हारी बेटी प्रिया की बात कर रहे हैं वो हमें पसंद है उसे त्यार करो हमारे लिए ।

मित्तल-पर वो मेरी बात मानती ही नहीं है ,आप तो जानते ही हैं मनोज जैसे कई केस हो चुके हैं उसके साथ ।

 
कंसक-हम तुम्हारी बेटी प्रिया की बात कर रहे हैं वो हमें पसंद है उसे त्यार करो हमारे लिए ।

मित्तल-पर वो मेरी बात मानती ही नहीं है ,आप तो जानते ही हैं मनोज जैसे कई केस हो चुके हैं उसके साथ ।

कंसक-तो उसे करो त्यार और जल्दी ।

मित्तल-वो बेटी है मेरी ।

कंसक(वो दो बार ताली बजता है ,उसके हाथ में हीरों से भरी हुई एक थैली प्रकट हो जाती है)- मित्तल यह लो हमारी तरफ से और प्रिया जल्दी मान जानी चाहिए ।

मित्तल(हीरों को देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती हैं ,वो सोचता है कई करोड़ के होंगे यह तो)- जी भगवन काम हो जाएगा ,मेरी बेटी आपकी सेवा करेगी इससे अच्छी बात उसके लिए कुछ हो ही नहीं सकती ।

दूसरी तरफ इस साजिश से अनजान राहुल ट्यूशन के लिए बबिता के घर पहुंचा तो बबिता की जगह एक तौलिए में लिपटी एक अनजानी लड़की को देखकर वो हैरान रह गया ।

राहुल -जी दीदी हैं मेरी क्लास थी ।

लड़की-मेरा नाम तनीषा है ,मैं बबिता की छोटी बहन हूँ आओ अंदर आओ । ठीक इसी समय उसका तौलिया कुछ नीचे खिसकने के कारण उसके गोरे स्तन कुछ उघड़ जाते हैं ।वो शर्माते हुए तौलिए को ठीक करती है ।

राहुल-मैं बाद में आऊँ क्या दीदी ?

तनीषा-नहीं नहीं अंदर आओ और मुझे दीदी नहीं मैम कहा करो,आज से मैं ही तुम्हें पढ़ाऊंगी ।

राहुल(तनीषा की मादक अदायों के कारण कुछ झेंपते हुए अन्दर जाता है)- बबिता दीदी कँही गयीं हैं क्या (वो सोच रहा था आज मुझे बबिता से कोई काम दिलवाने की बात करनी थी और बबिता को आज ही जाना था).

तनीषा(अपने होंठों को दांतों से काटते हुए) -हम्म बबिता की दूसरे शहर में जॉब लग गयी है इसलिए वो चली गई और कह के गयीं हैं कि उनके सब बच्चों को आज से मैं ही पढ़ाऊंगी । तुम बैठो मैं कपड़े पहनकर आती हूँ ।

राहुल कि नज़र न चाहते हुए भी तनीषा के कामुक और तराशे हुए बदन से नहीं हट रही थीं उसकी नज़र दूसरे कमरे की तरफ जा रही तनीषा कि उठी हुई गाँड़ और गोरी लम्बी टाँगों पे जा रही थी ।

तनीषा ने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर दिया पर कुंडी नहीं लगाई और दरवाजा तोड़ा सा खुला रह गया था जिसमें से उसकी पीठ सोफ़े पर बैठे राहुल को नज़र आ रही थी । राहुल की नज़र उसपर चिपक गयी थी । राहुल ने तनीषा को तौलिया खोलते देख एक बार अपनी नज़र दूसरी तरफ घुमा ली पर फिर वो तनीषा की तरफ चली गयी वो तनीषा को पीछे से देख रहा था गोरी पीठ पर काली ब्रा की डोरियां ऐसे लग रही थीं मानों गिफ्ट पैकेट को बांधने वाले रिबन हों ,उसकी पतली ,कर्वी कमर और छोटी से पैंटी से दिखती उसकी गोरी-गोरी ,गोल उठी हुई गाँड़ देखकर राहुल का लन्ड पाजामे में सख्त होने लगपडा ।

 
राहुल यह तो जानता नहीं था कि तनीषा जो असली में एमी जैक्सन थी जानबूझकर उसे उत्तेजित कर रही थी ।एमी ने कनखियों से देखा कि राहुल ने मुँह दूसरी और घुमा लिया है तो वो अपनी सफलता पे मुस्कुरा उठी और अपने कपडे पहने लगी ।

"अपने आप पर काम और वासना को हावी मत होने देना" राहुल को पिंकि के शब्द याद आ रहे थे । "सही है पहले जो हो गया सो हो गया यह मेरी टीचर है इसको मुझे बुरी नज़र से नहीं देखना चाहिए" उसने मन में सोचा ।

"राहुल तू नादान है जो उस पिंकि की बातों में आ रहा है वासना भागने की नहीं बल्कि मज़े की चीज़ है ...तू सोच तनीषा के नरम होंठ तेरे लन्ड को जब चूमेंगे तो तुझे कितना मज़ा आएगा" फिर वही अदृश्य आवाज़ उसके दिमाग में गूंज उठी । "राहुल वासना ने ही तो तुझे ठीक किया है तुझे इतनी शक्तियों का मालिक बनाया है और तू इसी से भाग रहा है....देख उसको उसके अपार सौंदर्य को ...आज तक तुझे मिला ही क्या है ? बूढ़ी रमा ? या वो छिनाल बबिता " अदृष्य आवाज़ राहुल के दिलो दिमाग पर छा सी गयी ।

राहुल ने अपना सिर उठाकर तनीषा के कमरे की तरफ देखा मिनी सफेद रंग की सीलव लेस टॉप और उसके ऊपर काला कोट जो खुला हुआ था जो मानो राहुल से कह रहा था " राहुल अगर मेरे बटन बंद होते तो क्या तू इस सुंदर नेवल को देख पाता?"

तनीषा(कमरे से बाहर आते हुए ) - सॉरी मुझे देर लग गयी मुझे क्लास का टाइम पता नहीं था न ।

राहुल(राहुल की नज़र न चाहते हुए भी ,तनीषा की क्लीवेज पे अटक गई थी , उसने दूसरी ओर देखने की कोशिश करते हुए कहा)- नहीं मैम इट्स ओके ।

तनीषा-(राहुल के गाल को खींचते हुए )- बड़े प्यारे हो तुम अगर तुम बुरा न मानों तो क्या मैं कॉफी बना लूँ ?

राहुल(उसे तनीषा का स्पर्श किसी बिजली के झटके सा लगा था ,इस समय तनीषा उससे जान भी मांगती तो राहुल जान भी दे देता)- बना लो मैम ।

तनीषा-तुम भी चलो किचेन में इतनी देर कॉफी बनती मैं तुमसे पूछ लूँगी की तुम क्या क्या पढ़ चुके हो और क्या पढ़ना है ।

राहुल उसके पीछे-2 चल पड़ा । "कौनसी क्लास में हो तुम " तनीषा ने गैस पे बर्तन चढ़ाते हुए पूछा ।

राहुल(उफ्फ इसकी गाँड़ कितनी गोल है..मन में सोच रहा था)- बाहरवीं ।

तनीषा(राहुल को घूरते हुए)-काफी बड़े हो । नाम क्या है तुम्हारा ?

राहुल- राहुल ।

तनीषा-ओह तुम हो राहुल , बबिता बड़ी तारीफ करती थी तुम्हारी देखते हैं कैसे स्टूडेंट साबित होते हो तुम ।

राहुल- अच्छा होने की कोशिश करूँगा ,पूरा मन लगाकर पढ़ूँगा ।

तनीषा पूरी क्लास के टाइम किसी न किसी तरह राहुल की सिड्यूस करती रही थी ,कभी झुककर अपनी क्लीवेज दिखाती तो कभी मुँह में उँगली डालकर सेक्सी मुँह बनाती । तनीषा चाहती तो राहुल को आज ही सेक्स के लिए मजबूर कर देती पर वो चाहती थी कि राहुल के सिर पर सेक्स का भूत ऐसा सवार हो कि उसे हर लड़की में सिर्फ चूत-मोम्मे और गाँड़ नज़र आएं । राहुल क्लास से बाहर निकला तो उसका लौड़ा इतना टाइट हो चुका था कि कच्छे में दुखने लगा था । वो घर पहुंचा तो तनु बज़ार जाने के लिए तैयार बैठी थी पर वो तनु को अनदेखा कर सीधे बाथरूम में घुस गया ताकि मुठ मारकर अपनी गर्मी शांत कर सके ।

 
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