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अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ complete



अमन विला के शहजादे को ये नहीं पता था कि अनुम के दिल में उस वक्त क्या हलचल हो रही है? बिना अनुम की सहमति के जीशान के ख्वाब सिर्फ़ ख्वाब रहने वाले थे, उन्हें अमल जामा पहनाना सिर्फ़ अनुम के हाथों में था।

जीशान का दिल फॅक्टरी में नहीं लगता वो जल्दी -जल्दी अपनी मीटिंग्स निपटाकर घर चला आता है। जहाँ रज़िया उसे वक्त से पहले घर में देखकर बहुत खुश होती है।

वही अनुम का दिल जोरों से धड़कने लगता है।

रज़िया-बहुत जल्दी आ गये?

जीशान-हाँ काम कुछ ख़ास नहीं था तो सोचा क्यों ना आराम किया जाए?

रज़िया-ये तो बहुत अच्छा किया तुमने। फ्रेश हो जाओ मैं अनुम से कहकर चाय रूम में भिजवाती हूँ ।

जीशान अपने रूम में फ्रेश होने चला जाता है, और रज़िया अनुम के पास आ जाती है। वो किचेन में रात का खाना बना रही थी।

रज़िया-अनुम बेटी सुनो वो?

अनुम-“मुझे पता है अम्मी, मैं चाय ही बना रही हूँ …”

रज़िया मुश्कुराती हुई अपने रूम में चली जाती है।

जीशान नहाकर जब अपने रूम में सिर्फ़ तौलिया पहनकर आता है, तो उसे अनुम बेड पर अपनी सोचों में खोई हुई दिखाई देती है। जीशान खंकारता है और अनुम चौंक के उसकी तरफ देखती है। वो ऊपर से नंगा था और एक तौलिया नीचे लपेटे हुये था।

जीशान-क्या हुआ थोड़ी परेशान दिखाई दे रही हैं आप?

अनुम-हाँ… वो मैं… नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं । चाय पी लो, ठंडी हो जाएगी।

जीशान रूम का दरवाजा धकेल देता है और आईने के सामने जाकर खड़ा हो जाता है। उसकी पीठ अनुम की तरफ थी और अनुम उसे ही देख रही थी कि अचानक जीशान के कमर से लिपटी हुई तौलिया नीचे गिर जाती है, और जीशान पूरा नंगा हो जाता है।

अनुम के आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। मगर जीशान अपना तौलिया उठाने के बजाए अनुम की तरफ रुख़ मोड़ देता है।

अनुम की आँखों के सामने 7” इंच लंबा 3” इंच मोटा वो खूबसूरत लाल सुपाड़े वाला सफेद कलर का लौड़ा आ जाता है। जिसे देखने के बाद अनुम अपनी आँखें उससे हटा नहीं पाती और एकटक जीशान के लण्ड को देखती रह जाती है। उसे तब होश आता है जब जीशान अनुम के एकदम करीब आकर खड़ा हो जाता है।

अनुम अपनी नजरें उठाकर जीशान की आँखों में देखती है। अनुम का जिस्म बरफ की तरह ठंडा पड़ चुका था, साँसें थमने का नाम नहीं ले रही थीं कि तभी जीशान अपने लण्ड को हाथ में पकड़ता है, और उससे अनुम के, अपनी अम्मी के गुलाबी होंठों के पास लाकर उसके होंठों पर घिसने लगता है।

अनुम का मुँह बंद था, लण्ड का सुपाड़ा अनुम के होंठों पर घूमने लगता है। ताज्जुब की बात जीशान के लिए थी कि ना तो अनुम मुँह खोल रही थी, और ना जीशान को ऐसा करने से मना कर रही थी।

जीशान-रात में मैं इंतजार करूँगा और ये भी?

अनुम बिना कुछ बोले वहाँ से जाने लगती है।

जीशान पीछे से आवाज़ देता है-सिर्फ़ पेंडेंट पहनकर आना है आपको।

अनुम-“मैं नहीं आउन्गि…” वो धीमी आवाज़ में बोलती है।

जीशान-“मुझे पता है आप आओगी, मेरा दिल कहता है…”

अनुम इस बार जीशान से कुछ नहीं कहती और सीधा अपने रूम में चली जाती है। उसे कुछ देर पहले हुये वाकिये पर यकीन नहीं हो रहा था। वो चाहकर भी अपने जिस्म को काबू नहीं कर पा रही थी। ये जोश-ए-जुनून था या मोहब्बत? ये तो अनुम खुद भी नहीं जानती थी। हाँ मगर एक बात ज़रूर थी कि वो अपनी बात पर कायम रहने का सोच रही थी कि चाहे कुछ भी हो जाए वो रात जीशान के रूम में नहीं जाएगी।

रात खाना खाने के बाद सभी अपने-अपने रूम में सोने चले जाते हैं, और जीशान लुबना से बात करने उसके रूम में चला जाता है। लुबना उस वक्त बेड पर बैठी अपनी उंगली में पहनी हुई रिंग को ही घुमा रही थी, और अपनी आने वाली जिंदगी के हसीन सपने बुन रही थी।

जीशान-क्या सोच रही हो लुबु?

लुबना चौंकती हुई-“नहीं , कुछ भी नहीं । आइए ना बैठिए…”

जीशान लुबना के करीब बैठ जाता है।

लुबना-क्या बात है कुछ कहना था आपको?

जीशान-“नहीं । बस सोने जा रहा था तो मैंने सोचा आज से एक नया रूल फालो किया जाय…”

लुबना-कैसा रूल?

जीशान-“यही की सोने से पहले मेरी जान, मेरी होने वाली शरीक-ए-हयात, मेरी लुबना अपने खूबसूरत होंठों से मुझे गुड नाइट वाली किस्सी दे, और जब सुबह मुझे उठाने के लिए आए तब भी मुझे किस करके उठाए…”

जीशान की बात सुनकर लुबना बुरी तरह शरमा जाती है और अपना रुख़ जीशान की तरफ से दूसरी तरफ फेर लेती है।

जीशान-इधर देख मेरी तरफ।

लुबना-मैंने नहीं देखना।

जीशान-क्यूँ ?

लुबना-आप दिन-ब-दिन बहुत गंदे और बेशर्म होते जा रहे हो।

जीशान-इसका मतलब तू मुझे प्यार नहीं करती?

लुबना जीशान की तरफ देखकर तड़प जाती है-“नहीं नहीं मैं आपसे खुद से भी ज्यादा मोहब्बत करती हूँ । आप ऐसा ना सोचें…”

जीशान-अगर मोहब्बत करती तो अपने शौहर की बात को हुक्म मानकर पूरा करती, यूँ मुँह ना फेर लेती।

लुबना मुश्कुरा देती है और बिना जीशान से कुछ कहे उसके सिर को अपने दोनों हाथों में थामकर अपने होंठ जीशान के होंठों से चिपका देती है।

जीशान इस मौके को इतने आसानी से खोना नहीं चाहता था। वो लुबना को अपनी बाहों में कस लेता है और अपनी जीभ को लुबना के मुँह में डाल देता है। लुबना भी अपनी जीभ को जीशान के मुँह में पहुँचा देती है और दोनों भाई-बहन एक दूसरे में खो जाते हैं। जीशान अपना एक हाथ लुबना की चुची पर रख कर हल्के से उसे मसल देता है।

 
लुबना-“आह्ह… क्या कर रहे हैं आप? उन्ह… नहीं ऐसे नहीं , ठीक नहीं आह्ह…”

इससे पहले कि लुबना और ऐतराज दिखाती जीशान उसे बेड पर गिराकर अपने नीचे लेटा देता है-“मुझे भूक लगी है, दूध पीना है…”

लुबना-क्या? दूध इस वक्त कहाँ से लाऊूँ मैं?

जीशान-“यहाँ से…” वो दोनों हाथों में लुबना की चुचियों को लेकर मसलते हुये कहता है।

लुबना-“बेशर्म कहीं के… मैं क्या कोई गाय भैंस हूँ जो दूध दूँगी ?”

जीशान-“मुझे पीना है, मतलब पीना है वो भी यहाँ से अभी…”

लुबना-पागल हो गये हैं आप?

जीशान-“अच्छा मैं पागल हो गया हूँ ना? और अगर मैंने दूध निकालकर दिखा दिया तो?”

लुबना-असंभव?

जीशान लुबना की नाइटी को ऊपर चढ़ाकर गले से बाहर निकालकर फेंक देता है, और एक झटके में ब्रा भी खोल देता है।

लुबना मना करती रह जाती है। वो जीशान को अपने रूम में से भगाना चाहती थी। मगर आज जीशान कुछ फैसला करके आया था। वो पहली बार अपनी बहन की नंगी चुचियाँ देख रहा था। निपल्स गुलाब की पंखुड़ियों की तरह चमक रही थी। सफेद रंग की लुबना की चुचियाँ इतनी कसी हुई थीं। अब तक किसी भी मर्द ने इन्हें छुआ तक नहीं था, मसलने की बात तो दूर थी।

लुबना-“आप यहाँ से जाते हैं कि अम्मी आह्ह…”

लुबना की आँखें बंद हो जाती हैं, क्योंकी जीशान अपने मुँह में लुबना की एक निप्पल को लेकर चूसने लगता है, और दूसरे हाथ से दूसरे निपल्स को मरोड़ते हुये चुची को दबाने लगता है।

लुबना-“आह्ह… ऐसा मत करिये जीशान उन्ह…” वो पहली बार खुद को हल्का महसूस कर रही थी। ये अनुभव लुबना के लिए बिल्कुल नया और खुशगवार था। वो बहकती जा रही थी।

जीशान उसे अपने साथ आसमान की उँचाइयों पर लेता चला जा रहा था। जीशान अपने दाँतों से लुबना के निपल्स को काटने लगता है, और एक घुटि -घुटि सी मगर मस्ती भर सिसकी लुबना के मुँह से निकलने लगती है। लुबना जो सोच भी नहीं सकती थी, जीशान वो कर रहा था और उसकी हर हरकत लुबना को उसके और करीब ला रही थी।

जीशान-“मुझे मेरी लुबना नंगी चाहिए…”

लुबना-“नहीं आह्ह… अभी नहीं … जीशान शादी की बाद लुबना पूरी की पूरी आपकी है…”

जीशान एक आख़िरी कोशिश लुबना के जिस्म पर करता है। वो अपने हाथ लुबना की जाँघ पर रख कर उसकी चूत को शलवार और पैंटी के ऊपर से दबा देता है।

अपने चूत पर मर्द का हाथ पड़ते ही लुबना की कमर ऊपर की तरफ उठ जाती है और वो चीख पड़ती है-“आह्ह… जीशान अभी वो वक्त नहीं आया उन्ह…”

जीशान उसी वक्त उसके ऊपर से उठ जाता है और लुबना के लाल तपती हुई आँखों और गरम जिस्म को अधूरा छोड़कर वहाँ से अपने रूम में सोने चला जाता है।

लुबना-“सुनिये तो जी…”

मगर तब तक जीशान अपने रूम में पहुँच चुका था। वो बहुत खुश था। वो जानता था कि लुबना एक पक्के इरादे वाली लड़की है। वो जीशान से मोहब्बत करती है। मगर उसे अपना सब कुछ तभी देगी, जब जीशान अपने दिल की गहराईयों से लुबना को अपनाएगा। वो तो बस लुबना के ठंडे पढ़ चुके जिस्म में एक चिंगारी डालना चाहता था।

उसका पूरा ध्यान अनुम की तरफ था। घड़ी रात के 12:00 बजा रही थी। मगर अनुम के कोई हलचल नहीं थी। वो अपने दिल को समझाता हुआ बेड पर बैठ जाता है, एक-एक सेकेंड जानलेवा था जीशान के लिए। बस वो एक ही दुआ कर सकता था कि बस एक बार अनुम यहाँ उसके रूम में आ जाए।

वक्त अपनी रफ़्तार से गुजर रहा था, मगर जीशान के दिल की धड़कनें धीमी होती जा रही थीं। जीशान की नजरें दरवाजे की तरफ टिकी हुई थी कि ना जाने किस पल किस घड़ी अनुम अंदर दाखिल हो जाए।

मगर अनुम अपने रूम के बाथरूम से बाहर निकलती है, अपने चमकते हुये मखमली जिस्म पर सिर्फ़ तौलिया लपेटेते हुये। वो बाहर आते ही आईने के सामने खड़े होकर अपने आपको नीचे से ऊपर तक देखती है।

जो हाल जीशान का था कि दिल की धड़कनें थमती जा रही थीं, उसके बर्खिलाफ अनुम का दिल बेहद जोरों से धड़क रहा था। सामने पड़ी मेज पर अनुम की निगाह जाती है। मेज पर जीशान का दिया हुआ पेंडेंट रखा था। अनुम उसे बस अपनी उंगलियों से छूती है। एक बिजली की लहर उसके दिल-ओ-दिमाग़ को छुती हुई गुजर जाती है। आँखों में उतरते हुये नशे को वो महसूस करती है।

ये वो नशा था जो अनुम के सिर चढ़कर बोल रहा था। सुबह से खुद को संभालती आइ अनुम अब इस पल बेचैन सी हो गई थी। वो आईने में खुद को देखती हुई अपने जिस्म पर लिपट हुई तौलिया नीचे जमीन पर गिरा देती है।

जीशान बेड पर टेक लगाकर लेट जाता है। वो सोचने लगता है कि कहीं उसने जल्दीबाजी तो नहीं कर दिया? कह अनुम उससे नाराज ना हो जाये? वो उठकर अनुम के रूम में जाने का सोचता ही है कि नाइटी गाउन में अनुम जीशान के रूम के दरवाजे पर आ जाती है।

जीशान का दिल बस उससे यही कहता है कि आज क़ुबूलियत का दिन है। अनुम रूम के अंदर आती है और पीछे दरवाजा लाक कर देती है। उसकी आँखों की चमक आज का सामना आज जीशान को अकेले करना था। जीशान को लगने लगता है कि जैसे हर चीज थम सी गई है, बस वो है और उसकी महबूबा अनुम वहाँ मौजूद है।

अनुम जीशान की आँखों में देखती हुई, अपना नाइटी गाउन नीचे गिरा देती है।

 
जीशान का दिल बस उससे यही कहता है कि आज क़ुबूलियत का दिन है। अनुम रूम के अंदर आती है और पीछे दरवाजा लाक कर देती है। उसकी आँखों की चमक आज का सामना आज जीशान को अकेले करना था। जीशान को लगने लगता है कि जैसे हर चीज थम सी गई है, बस वो है और उसकी महबूबा अनुम वहाँ मौजूद है।

अनुम जीशान की आँखों में देखती हुई, अपना नाइटी गाउन नीचे गिरा देती है।

जीशान-उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ये मैं क्या देख रहा हूँ ? अगर वो अपनी मोहब्बत का, अपनी अनुम का इतना आशिक ना होता तो शायद दिल के बंद हो जाने से आज इस दुनियाँ से कूच कर जाता।

अनुम सिर्फ़ जीशान के दिए हुई पेंडेंट में उसके सामने खड़ी थी, अपनी पलकों में हजारों ख्वाब समेटे हुये

जीशान आगे बढ़ता है। दोनों बिल्कुल खामोश थे। जीशान अपनी पैंट की पाकेट से एक कागज निकालकर टेबल पर रख देता है, और पेन अनुम की तरफ बढ़ाता है-“इस कागजात पर साइन करिए अनुम…”

अनुम काँपते लबों से-क्या है ईई?

जीशान-“निकाहनामा…”

अनुम हैरतजदा सी जीशान को एकटक देखने लगती है।

जीशान-“हाँ अनुम, इस पर दो गवाहों के और एक वकील के दस्तख़त हैं। इस पर लिखा है कि अनुम ख़ान आपको जीशान ख़ान के निकाह में वाइवज महज 100000 (एक लाख) रूपए मेहर सिक्काए राजुल वक्त दिया जाता है। क्या आप जीशान ख़ान से अपना निकाह क़ुबूल करती हैं?”

अनुम के हाथ काँपने लगते हैं। वो क्या समझकर आई थी, और एक ही पल में जीशान ने उसे क्या बना दिया? उसकी आँखों में उतरते आँसू जीशान को साफ बता रहे थे कि अनुम किस कदर खुश है जीशान के इस पुख़्ता कदम से।

जीशान अनुम का हाथ पकड़कर उसे पेन थमा देता है-“साइन कीजिए और हमारी मोहब्बत को तकमील दीजिए अनुम…”

अनुम एक नजर जीशान के मर्दाना वजूद को देखती है और फिर दिल की गहराईयों से उस कागज पर साइन करती हुई कहती है-“हाँ। मैं अनुम ख़ान आपको अपने निकाह में क़ुबूल करती हूँ …”

उसके बाद जीशान भी उस कागज पर साइन कर देता है। जीशान अनुम के नंगे जिस्म को अपनी बाहों में भर लेता है। वो अपने होंठों से अनुम के होंठों को चूमते हुये बड़े प्यार से कहता है-“आइ लव यू मेरी जान… आज मैं बहुत खुश हूँ …”

अनुम-“मेरे सरताज, मैं भी आपसे बेपनाह मोहब्बत करती हूँ । मुझे वो सारी खुशियाँ दे दो, जिनके लिए मैं तरसी हूँ । मुझे फिर से प्रेगनेंट कर दीजिए जीशान। आपकी अनुम आपके बच्चे के माँ बनना चाहती है…”

जीशान-“अनुम्म…” वो अनुम को बेड पर अपने नीचे गिरा देता है और अपने मर्दाना जिस्म को अनुम के नाजुक से बदन पर टिकाकर उसके होंठों को इस कदर चूमने लगता है कि अनुम लरज जाती है।

जीशान-“आज से तुम्हारा शौहर तुम्हें दुनियाँ के हर गम से निजात दिला देगा…”

अनुम को जीशान की इस बात पर सौ फीसद यकीन था। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुये एक दूसरे से अपने जिस्म रगड़ने लगते हैं।

जीशान को कोई जल्दी नहीं थी, वो अनुम के होंठों को चूमते हुये माथे से लेकर गर्दन के पास आ जाता है। अपनी जीभ से अनुम की गर्दन का बोसा लेने के बाद जीशान नीचे की तरफ उतरने लगता है। खुशी और जोश में अनुम का जिस्म जल बिन मछली की तरह तड़प रहा था, उसका खूबसूरत पेट नीचे ऊपर होने लगता है। जैसे ही जीशान अपनी जीभ अनुम की नाभी के अंदर डालकर चूमता है।

अनुम-“आह्ह… जान्न निकाल लोगे आज आप अपनी बीवी की उन्ह…”

जीशान-“नहीं , आज मेरी जान में जान डालूँगा मैं अनुम…” वो अनुम की जाघों को चूमता हुआ उस जगह पहुँच जाता है, जहाँ वो हमेशा से पहुँचने के ख्वाब देखा करता था।

अनुम अपने दोनों पैर जीशान के लिए, अपने शौहर के लिए, खोल देती है, और जीशान अपनी गुलाबी जीभ से अनुम की बिना बाल वाली चमकती हुई चूत को चूमने चाटने कुरेदने लगता है-गलपप्प-गलपप्प।

अनुम-“उन्ह आराम से ना जी… आह्ह… ऊहुउउउ… ओह्ह…” वो अपनी आँखें बंद कर लेती है।

जीशान की जीभ अनुम की चूत के इतना अंदर तक जा रही थी कि अनुम को ऐसे महसूस होने लगता है, जैसे जीशान उसे अपने जीभ से चोद रहा हो।

जीशान-“आज नहीं जानेमन… आज से कभी नहीं रोकोगी तुम मुझे। ये मेरी है और मैं इसका मालिक हूँ । गलपप्प-गलपप्प…”

अनुम-“हाँ… मेरी रूह के मालिक, मेरे जिस्म के मालिक, मेरे सरताज, अनुम को आप जहाँ चाहिए वहाँ कर सकते हैं आह्ह…”

जीशान-क्या कर सकते है अनुम?

अनुम-“उन्ह आह्ह…”

जीशान-बोल क्या कर सकते हैं?

अनुम-“चोद सकते है आप मुझे, आपका दिल जहाँ कहे। मैं आपको आज के बाद कभी नहीं रोकूंगी , वादा करती हूँ आह्ह…”

जीशान-सोच लो जानेबहार?

अनुम-सोचना कैसा? शौहर को कभी नहीं मना करती अच्छी बीवी आह्ह…”

 
जीशान खड़ा हो जाता है। अनुम उसे अचानक खड़ा होते देखकर हैरत में पड़ जाती है। जीशान अनुम का हाथ पकड़कर बेड पर बैठा देता है और उसके चेहरे के सामने अपना मोटा खूबसूरत लटकता हुआ लण्ड ले आता है-“इसे अपने मुँह में लो…”

अनुम बड़ी मोहब्बत भरी निगाहों से जीशान के लण्ड को देखने लगती है-“बहुत खूबसूरत है ये…” वो अपने नाजुक हाथों में जीशान के लण्ड को पकड़कर पहले उसे चूमती है, और फिर अगले ही पल उसे अपने मुँह में लेकर अंदर-बाहर चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प… उन्ह… बहुत तड़पी हूँ मैं गलपप्प…”

जीशान-“अम्मी आह्ह… अम्मी आराम से आह्ह…”

अनुम जीशान के मुँह से अपना नाम ना सुनकर बल्की अम्मी सुनकर और ज्यादा जोश में आ जाती है। एक माँ अपने बेटे का लण्ड चूस रही है, यही बात उसे अंदर तक जोश में ले आती है। वो जीशान के लण्ड को पागलों की तरह चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प।

जीशान-“आह्ह… अनुम बस करो आह्ह…”

अनुम रुकने का नाम नहीं ले रही थी। उसे तो जैसे कोई खोया हुआ खजाना मिल गया था।

जीशान से और बर्दाश्त नहीं होता। वो अनुम को अपनी गोद में उठाकर अपने बेड पर लेटा देता है-“बस अब और नहीं … अब ये सिर्फ़ एक जगह जाएगा, तुम्हारी चूत में…”

अनुम-“हाँ… मैं भी यही चाहती हूँ , मुझे ये यहाँ चाहिए…”

जीशान अपनी दो उंगलियों से अनुम की चूत को सहलाता है।

अनुम-“उसे और मत तड़पाओ, आप बस डाल दो…”

जीशान-डाल दूं?

अनुम जीशान को अपने दोनों पैरों में कस लेती है और अपने हाथ में जीशान का लण्ड पकड़कर चूत पर लगा देती है-“आपको अपनी अनुम की कसम मत सताओ मुझे…”

जीशान अनुम के होंठों को चूमता हुआ एक हाथ से उसकी चुची को मसलता हुआ पहली बार अपनी अम्मी, अपनी अनुम की चूत में अपना मोटा लण्ड घुसा देता है।

अनुम-“मर गई जी मैं तो आह्ह… हिलना मत्त्तत्त उन्ह…”

मगर जीशान अब कहाँ रुकने वालों में से था। अनुम के लाख मना करने के बाद भी वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत की गहराईयों में उतारता चला जाता है।

अनुम-“आह्ह… आप मेरी बच्चेदानी पर ठोकर मार रहे हैं उन्ह्न… प्लीज़्ज़… आराम से करिये ना…”

जीशान-“मैं हर रात हर दिन तुझे ऐसे ही चोदुन्गा अनुम, और त मुझे नहीं रोकेगी समझी आह्ह…”

अनुम अपनी आँखें बंद करके धीरे-धीरे दर्द सहती हुई अपनी कमर को ऊपर उठाने लगती है। उसे दर्द भी हो रहा था। कई सालों के बाद एक लण्ड उसकी चूत की गहराईयों में जा रहा था। जीशान अपने बाप का भी बाप था हर लिहाज से, और ये बात अनुम भी बखूबी समझ गई थी कि जीशान उसे कितनी जल्दी प्रेगनेंट कर देगा।

अनुम का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है, और दोनों माँ बेटे एक दूसरे को रगड़ते हुये, मसलते हुये, चूमते हुये अपनी-अपनी कमर ऊपर और नीचे की तरफ पटकने लगते हैं। मोहब्बत की इस लड़ाई में जीत किसी की भी हो? हाँ मगर आज एक बात तो साबित हो गई थी कि अगर किसी को दिल से चाहा जाए तो कोई ताकत उन दोनों को एक होने से रोक नहीं सकती।

अनुम-“आह्ह…” जीशान के झटके अनुम को कहने पर मजबूर कर देते हैं-“उन्ह… इतनी मोहब्बत करते हैं आप जीशान मुझसे?”

जीशान-“ये तो तुम्हें पता चल ही गया होगा। हाँ तुम्हें कल से एक और बात पता चलेगी कि मैं कितना बेशर्म भी हूँ ?”

अनुम-मतलब?

जीशान-“वो तुम्हें कल पता चलेगा…”

अनुम-“आह्ह… अम्मी जी…” वो मुश्कुरा देती है। आज अनुम को वो खुशी मिल रही थी जिसकी वो हकदार थी। मोहब्बत और जज़्बातों की रात तो अभी शुरू हुई थी।

जीशान जितनी ताकत से अपने लण्ड को अनुम की चूत में डालता, उतनी शिद्दत से अनुम उसका जवाब देती, अपनी कमर को ऊपर उठाकर। दोनों हाँफने लगते हैं, जिस्म का खून हर एक नस-नस में इतनी तेजी से कभी नहीं बहा था, जितना आज अनुम और जीशान के जिस्म में बह रहा था, और शायद यही वजह थी कि जहाँ चिकनाहट ज्यादा होती है, वहाँ इंसान का टिकना मुश्किल हो जाता है।

अनुम की चूत से रिसते हुई पानी के ताव जीशान का लण्ड नहीं सह पाता और वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत के अंदर उतारकर रुक जाता है।

अनुम समझ जाती है कि जीशान किस जगह खड़ा है-“जान रोको मत इस सैलाब को, अपनी जान के अंदर बहने दो आह्ह…”

जीशान अनुम के होंठों को चूमते हुये अपनी अम्मी की चूत में अपनी मोहब्बत का पहला मीठा-मीठा गाढ़ा-गाढ़ा पानी उतारने लगता है-“अम्मी जान्न गलपप्प-गलपप्प…”

अनुम-“ख़ान साहब्ब उन्ह… इस बारिश ने आज आपकी बीवी को भी भिगो दिया…” और वो भी जीशान के लण्ड पर पानी छोड़ने लगती है।

बेडशीट पर इतना सारा पानी गिर चुका था, जैसे यहाँ कोई सैलाब आया हो।

 
जीशान का दिल बस उससे यही कहता है कि आज क़ुबूलियत का दिन है। अनुम रूम के अंदर आती है और पीछे दरवाजा लाक कर देती है। उसकी आँखों की चमक आज का सामना आज जीशान को अकेले करना था। जीशान को लगने लगता है कि जैसे हर चीज थम सी गई है, बस वो है और उसकी महबूबा अनुम वहाँ मौजूद है।

अनुम जीशान की आँखों में देखती हुई, अपना नाइटी गाउन नीचे गिरा देती है।

जीशान-उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ये मैं क्या देख रहा हूँ ? अगर वो अपनी मोहब्बत का, अपनी अनुम का इतना आशिक ना होता तो शायद दिल के बंद हो जाने से आज इस दुनियाँ से कूच कर जाता।

अनुम सिर्फ़ जीशान के दिए हुई पेंडेंट में उसके सामने खड़ी थी, अपनी पलकों में हजारों ख्वाब समेटे हुये

जीशान आगे बढ़ता है। दोनों बिल्कुल खामोश थे। जीशान अपनी पैंट की पाकेट से एक कागज निकालकर टेबल पर रख देता है, और पेन अनुम की तरफ बढ़ाता है-“इस कागजात पर साइन करिए अनुम…”

अनुम काँपते लबों से-क्या है ईई?

जीशान-“निकाहनामा…”

अनुम हैरतजदा सी जीशान को एकटक देखने लगती है।

जीशान-“हाँ अनुम, इस पर दो गवाहों के और एक वकील के दस्तख़त हैं। इस पर लिखा है कि अनुम ख़ान आपको जीशान ख़ान के निकाह में वाइवज महज 100000 (एक लाख) रूपए मेहर सिक्काए राजुल वक्त दिया जाता है। क्या आप जीशान ख़ान से अपना निकाह क़ुबूल करती हैं?”

अनुम के हाथ काँपने लगते हैं। वो क्या समझकर आई थी, और एक ही पल में जीशान ने उसे क्या बना दिया? उसकी आँखों में उतरते आँसू जीशान को साफ बता रहे थे कि अनुम किस कदर खुश है जीशान के इस पुख़्ता कदम से।

जीशान अनुम का हाथ पकड़कर उसे पेन थमा देता है-“साइन कीजिए और हमारी मोहब्बत को तकमील दीजिए अनुम…”

अनुम एक नजर जीशान के मर्दाना वजूद को देखती है और फिर दिल की गहराईयों से उस कागज पर साइन करती हुई कहती है-“हाँ। मैं अनुम ख़ान आपको अपने निकाह में क़ुबूल करती हूँ …”

उसके बाद जीशान भी उस कागज पर साइन कर देता है। जीशान अनुम के नंगे जिस्म को अपनी बाहों में भर लेता है। वो अपने होंठों से अनुम के होंठों को चूमते हुये बड़े प्यार से कहता है-“आइ लव यू मेरी जान… आज मैं बहुत खुश हूँ …”

अनुम-“मेरे सरताज, मैं भी आपसे बेपनाह मोहब्बत करती हूँ । मुझे वो सारी खुशियाँ दे दो, जिनके लिए मैं तरसी हूँ । मुझे फिर से प्रेगनेंट कर दीजिए जीशान। आपकी अनुम आपके बच्चे के माँ बनना चाहती है…”

जीशान-“अनुम्म…” वो अनुम को बेड पर अपने नीचे गिरा देता है और अपने मर्दाना जिस्म को अनुम के नाजुक से बदन पर टिकाकर उसके होंठों को इस कदर चूमने लगता है कि अनुम लरज जाती है।

जीशान-“आज से तुम्हारा शौहर तुम्हें दुनियाँ के हर गम से निजात दिला देगा…”

अनुम को जीशान की इस बात पर सौ फीसद यकीन था। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुये एक दूसरे से अपने जिस्म रगड़ने लगते हैं।

जीशान को कोई जल्दी नहीं थी, वो अनुम के होंठों को चूमते हुये माथे से लेकर गर्दन के पास आ जाता है। अपनी जीभ से अनुम की गर्दन का बोसा लेने के बाद जीशान नीचे की तरफ उतरने लगता है। खुशी और जोश में अनुम का जिस्म जल बिन मछली की तरह तड़प रहा था, उसका खूबसूरत पेट नीचे ऊपर होने लगता है। जैसे ही जीशान अपनी जीभ अनुम की नाभी के अंदर डालकर चूमता है।

अनुम-“आह्ह… जान्न निकाल लोगे आज आप अपनी बीवी की उन्ह…”

जीशान-“नहीं , आज मेरी जान में जान डालूँगा मैं अनुम…” वो अनुम की जाघों को चूमता हुआ उस जगह पहुँच जाता है, जहाँ वो हमेशा से पहुँचने के ख्वाब देखा करता था।

अनुम अपने दोनों पैर जीशान के लिए, अपने शौहर के लिए, खोल देती है, और जीशान अपनी गुलाबी जीभ से अनुम की बिना बाल वाली चमकती हुई चूत को चूमने चाटने कुरेदने लगता है-गलपप्प-गलपप्प।

अनुम-“उन्ह आराम से ना जी… आह्ह… ऊहुउउउ… ओह्ह…” वो अपनी आँखें बंद कर लेती है।

जीशान की जीभ अनुम की चूत के इतना अंदर तक जा रही थी कि अनुम को ऐसे महसूस होने लगता है, जैसे जीशान उसे अपने जीभ से चोद रहा हो।

जीशान-“आज नहीं जानेमन… आज से कभी नहीं रोकोगी तुम मुझे। ये मेरी है और मैं इसका मालिक हूँ । गलपप्प-गलपप्प…”

अनुम-“हाँ… मेरी रूह के मालिक, मेरे जिस्म के मालिक, मेरे सरताज, अनुम को आप जहाँ चाहिए वहाँ कर सकते हैं आह्ह…”

जीशान-क्या कर सकते है अनुम?

अनुम-“उन्ह आह्ह…”

जीशान-बोल क्या कर सकते हैं?

अनुम-“चोद सकते है आप मुझे, आपका दिल जहाँ कहे। मैं आपको आज के बाद कभी नहीं रोकूंगी , वादा करती हूँ आह्ह…”

जीशान-सोच लो जानेबहार?

अनुम-सोचना कैसा? शौहर को कभी नहीं मना करती अच्छी बीवी आह्ह…”

 
जीशान खड़ा हो जाता है। अनुम उसे अचानक खड़ा होते देखकर हैरत में पड़ जाती है। जीशान अनुम का हाथ पकड़कर बेड पर बैठा देता है और उसके चेहरे के सामने अपना मोटा खूबसूरत लटकता हुआ लण्ड ले आता है-“इसे अपने मुँह में लो…”

अनुम बड़ी मोहब्बत भरी निगाहों से जीशान के लण्ड को देखने लगती है-“बहुत खूबसूरत है ये…” वो अपने नाजुक हाथों में जीशान के लण्ड को पकड़कर पहले उसे चूमती है, और फिर अगले ही पल उसे अपने मुँह में लेकर अंदर-बाहर चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प… उन्ह… बहुत तड़पी हूँ मैं गलपप्प…”

जीशान-“अम्मी आह्ह… अम्मी आराम से आह्ह…”

अनुम जीशान के मुँह से अपना नाम ना सुनकर बल्की अम्मी सुनकर और ज्यादा जोश में आ जाती है। एक माँ अपने बेटे का लण्ड चूस रही है, यही बात उसे अंदर तक जोश में ले आती है। वो जीशान के लण्ड को पागलों की तरह चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प।

जीशान-“आह्ह… अनुम बस करो आह्ह…”

अनुम रुकने का नाम नहीं ले रही थी। उसे तो जैसे कोई खोया हुआ खजाना मिल गया था।

जीशान से और बर्दाश्त नहीं होता। वो अनुम को अपनी गोद में उठाकर अपने बेड पर लेटा देता है-“बस अब और नहीं … अब ये सिर्फ़ एक जगह जाएगा, तुम्हारी चूत में…”

अनुम-“हाँ… मैं भी यही चाहती हूँ , मुझे ये यहाँ चाहिए…”

जीशान अपनी दो उंगलियों से अनुम की चूत को सहलाता है।

अनुम-“उसे और मत तड़पाओ, आप बस डाल दो…”

जीशान-डाल दूं?

अनुम जीशान को अपने दोनों पैरों में कस लेती है और अपने हाथ में जीशान का लण्ड पकड़कर चूत पर लगा देती है-“आपको अपनी अनुम की कसम मत सताओ मुझे…”

जीशान अनुम के होंठों को चूमता हुआ एक हाथ से उसकी चुची को मसलता हुआ पहली बार अपनी अम्मी, अपनी अनुम की चूत में अपना मोटा लण्ड घुसा देता है।

अनुम-“मर गई जी मैं तो आह्ह… हिलना मत्त्तत्त उन्ह…”

मगर जीशान अब कहाँ रुकने वालों में से था। अनुम के लाख मना करने के बाद भी वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत की गहराईयों में उतारता चला जाता है।

अनुम-“आह्ह… आप मेरी बच्चेदानी पर ठोकर मार रहे हैं उन्ह्न… प्लीज़्ज़… आराम से करिये ना…”

जीशान-“मैं हर रात हर दिन तुझे ऐसे ही चोदुन्गा अनुम, और त मुझे नहीं रोकेगी समझी आह्ह…”

अनुम अपनी आँखें बंद करके धीरे-धीरे दर्द सहती हुई अपनी कमर को ऊपर उठाने लगती है। उसे दर्द भी हो रहा था। कई सालों के बाद एक लण्ड उसकी चूत की गहराईयों में जा रहा था। जीशान अपने बाप का भी बाप था हर लिहाज से, और ये बात अनुम भी बखूबी समझ गई थी कि जीशान उसे कितनी जल्दी प्रेगनेंट कर देगा।

अनुम का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है, और दोनों माँ बेटे एक दूसरे को रगड़ते हुये, मसलते हुये, चूमते हुये अपनी-अपनी कमर ऊपर और नीचे की तरफ पटकने लगते हैं। मोहब्बत की इस लड़ाई में जीत किसी की भी हो? हाँ मगर आज एक बात तो साबित हो गई थी कि अगर किसी को दिल से चाहा जाए तो कोई ताकत उन दोनों को एक होने से रोक नहीं सकती।

अनुम-“आह्ह…” जीशान के झटके अनुम को कहने पर मजबूर कर देते हैं-“उन्ह… इतनी मोहब्बत करते हैं आप जीशान मुझसे?”

जीशान-“ये तो तुम्हें पता चल ही गया होगा। हाँ तुम्हें कल से एक और बात पता चलेगी कि मैं कितना बेशर्म भी हूँ ?”

अनुम-मतलब?

जीशान-“वो तुम्हें कल पता चलेगा…”

अनुम-“आह्ह… अम्मी जी…” वो मुश्कुरा देती है। आज अनुम को वो खुशी मिल रही थी जिसकी वो हकदार थी। मोहब्बत और जज़्बातों की रात तो अभी शुरू हुई थी।

जीशान जितनी ताकत से अपने लण्ड को अनुम की चूत में डालता, उतनी शिद्दत से अनुम उसका जवाब देती, अपनी कमर को ऊपर उठाकर। दोनों हाँफने लगते हैं, जिस्म का खून हर एक नस-नस में इतनी तेजी से कभी नहीं बहा था, जितना आज अनुम और जीशान के जिस्म में बह रहा था, और शायद यही वजह थी कि जहाँ चिकनाहट ज्यादा होती है, वहाँ इंसान का टिकना मुश्किल हो जाता है।

अनुम की चूत से रिसते हुई पानी के ताव जीशान का लण्ड नहीं सह पाता और वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत के अंदर उतारकर रुक जाता है।

अनुम समझ जाती है कि जीशान किस जगह खड़ा है-“जान रोको मत इस सैलाब को, अपनी जान के अंदर बहने दो आह्ह…”

जीशान अनुम के होंठों को चूमते हुये अपनी अम्मी की चूत में अपनी मोहब्बत का पहला मीठा-मीठा गाढ़ा-गाढ़ा पानी उतारने लगता है-“अम्मी जान्न गलपप्प-गलपप्प…”

अनुम-“ख़ान साहब्ब उन्ह… इस बारिश ने आज आपकी बीवी को भी भिगो दिया…” और वो भी जीशान के लण्ड पर पानी छोड़ने लगती है।

बेडशीट पर इतना सारा पानी गिर चुका था, जैसे यहाँ कोई सैलाब आया हो।

जीशान अपने अनुम के ऊपर से उतरकर उसके साइड में लेट जाता है। उसकी छाती ऊपर-नीचे होने लगती है। जिस पर अनुम अपना सिर रख देती है, और जीशान के छोटे-छोटे निप्पल से खेलने लगती है।

जीशान-आप खुश तो हो ना?

अनुम-“बेहद। एक तब इतनी खुश हुई थी मैं, जब आप यहाँ से बाहर आए थे। और आज तब जब आप वापस इस रास्ते के ज़रिए दुबारा अंदर गये हैं। सच कहूँ तो ये एहसास किस्मत वालों को ही नशीब होता है। मुझे यकीन तो नहीं था, हाँ मगर सोचती थी ज़रूर कि खून अपना असर एक दिन ज़रूर दिखाएगा। और आज वो बात भी हकीकत का रूप ले चुकी है…”

 
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