जीशान का दिल बस उससे यही कहता है कि आज क़ुबूलियत का दिन है। अनुम रूम के अंदर आती है और पीछे दरवाजा लाक कर देती है। उसकी आँखों की चमक आज का सामना आज जीशान को अकेले करना था। जीशान को लगने लगता है कि जैसे हर चीज थम सी गई है, बस वो है और उसकी महबूबा अनुम वहाँ मौजूद है।
अनुम जीशान की आँखों में देखती हुई, अपना नाइटी गाउन नीचे गिरा देती है।
जीशान-उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ये मैं क्या देख रहा हूँ ? अगर वो अपनी मोहब्बत का, अपनी अनुम का इतना आशिक ना होता तो शायद दिल के बंद हो जाने से आज इस दुनियाँ से कूच कर जाता।
अनुम सिर्फ़ जीशान के दिए हुई पेंडेंट में उसके सामने खड़ी थी, अपनी पलकों में हजारों ख्वाब समेटे हुये
जीशान आगे बढ़ता है। दोनों बिल्कुल खामोश थे। जीशान अपनी पैंट की पाकेट से एक कागज निकालकर टेबल पर रख देता है, और पेन अनुम की तरफ बढ़ाता है-“इस कागजात पर साइन करिए अनुम…”
अनुम काँपते लबों से-क्या है ईई?
जीशान-“निकाहनामा…”
अनुम हैरतजदा सी जीशान को एकटक देखने लगती है।
जीशान-“हाँ अनुम, इस पर दो गवाहों के और एक वकील के दस्तख़त हैं। इस पर लिखा है कि अनुम ख़ान आपको जीशान ख़ान के निकाह में वाइवज महज 100000 (एक लाख) रूपए मेहर सिक्काए राजुल वक्त दिया जाता है। क्या आप जीशान ख़ान से अपना निकाह क़ुबूल करती हैं?”
अनुम के हाथ काँपने लगते हैं। वो क्या समझकर आई थी, और एक ही पल में जीशान ने उसे क्या बना दिया? उसकी आँखों में उतरते आँसू जीशान को साफ बता रहे थे कि अनुम किस कदर खुश है जीशान के इस पुख़्ता कदम से।
जीशान अनुम का हाथ पकड़कर उसे पेन थमा देता है-“साइन कीजिए और हमारी मोहब्बत को तकमील दीजिए अनुम…”
अनुम एक नजर जीशान के मर्दाना वजूद को देखती है और फिर दिल की गहराईयों से उस कागज पर साइन करती हुई कहती है-“हाँ। मैं अनुम ख़ान आपको अपने निकाह में क़ुबूल करती हूँ …”
उसके बाद जीशान भी उस कागज पर साइन कर देता है। जीशान अनुम के नंगे जिस्म को अपनी बाहों में भर लेता है। वो अपने होंठों से अनुम के होंठों को चूमते हुये बड़े प्यार से कहता है-“आइ लव यू मेरी जान… आज मैं बहुत खुश हूँ …”
अनुम-“मेरे सरताज, मैं भी आपसे बेपनाह मोहब्बत करती हूँ । मुझे वो सारी खुशियाँ दे दो, जिनके लिए मैं तरसी हूँ । मुझे फिर से प्रेगनेंट कर दीजिए जीशान। आपकी अनुम आपके बच्चे के माँ बनना चाहती है…”
जीशान-“अनुम्म…” वो अनुम को बेड पर अपने नीचे गिरा देता है और अपने मर्दाना जिस्म को अनुम के नाजुक से बदन पर टिकाकर उसके होंठों को इस कदर चूमने लगता है कि अनुम लरज जाती है।
जीशान-“आज से तुम्हारा शौहर तुम्हें दुनियाँ के हर गम से निजात दिला देगा…”
अनुम को जीशान की इस बात पर सौ फीसद यकीन था। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुये एक दूसरे से अपने जिस्म रगड़ने लगते हैं।
जीशान को कोई जल्दी नहीं थी, वो अनुम के होंठों को चूमते हुये माथे से लेकर गर्दन के पास आ जाता है। अपनी जीभ से अनुम की गर्दन का बोसा लेने के बाद जीशान नीचे की तरफ उतरने लगता है। खुशी और जोश में अनुम का जिस्म जल बिन मछली की तरह तड़प रहा था, उसका खूबसूरत पेट नीचे ऊपर होने लगता है। जैसे ही जीशान अपनी जीभ अनुम की नाभी के अंदर डालकर चूमता है।
अनुम-“आह्ह… जान्न निकाल लोगे आज आप अपनी बीवी की उन्ह…”
जीशान-“नहीं , आज मेरी जान में जान डालूँगा मैं अनुम…” वो अनुम की जाघों को चूमता हुआ उस जगह पहुँच जाता है, जहाँ वो हमेशा से पहुँचने के ख्वाब देखा करता था।
अनुम अपने दोनों पैर जीशान के लिए, अपने शौहर के लिए, खोल देती है, और जीशान अपनी गुलाबी जीभ से अनुम की बिना बाल वाली चमकती हुई चूत को चूमने चाटने कुरेदने लगता है-गलपप्प-गलपप्प।
अनुम-“उन्ह आराम से ना जी… आह्ह… ऊहुउउउ… ओह्ह…” वो अपनी आँखें बंद कर लेती है।
जीशान की जीभ अनुम की चूत के इतना अंदर तक जा रही थी कि अनुम को ऐसे महसूस होने लगता है, जैसे जीशान उसे अपने जीभ से चोद रहा हो।
जीशान-“आज नहीं जानेमन… आज से कभी नहीं रोकोगी तुम मुझे। ये मेरी है और मैं इसका मालिक हूँ । गलपप्प-गलपप्प…”
अनुम-“हाँ… मेरी रूह के मालिक, मेरे जिस्म के मालिक, मेरे सरताज, अनुम को आप जहाँ चाहिए वहाँ कर सकते हैं आह्ह…”
जीशान-क्या कर सकते है अनुम?
अनुम-“उन्ह आह्ह…”
जीशान-बोल क्या कर सकते हैं?
अनुम-“चोद सकते है आप मुझे, आपका दिल जहाँ कहे। मैं आपको आज के बाद कभी नहीं रोकूंगी , वादा करती हूँ आह्ह…”
जीशान-सोच लो जानेबहार?
अनुम-सोचना कैसा? शौहर को कभी नहीं मना करती अच्छी बीवी आह्ह…”