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अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ complete

रजिया-“मुझे देखने दो…” और रजिया अमन के लण्ड को अपने हाथ में लेकर देखने लगती है, पूछा-“अभी भी तकलीफ हो रही है क्या?”

अमन-नहीं, अब ठीक है।

रजिया-“डाक्टर ने क्या कहा?” वो अमन के लण्ड को सहला रही थी। आज रजिया का दिल जमकर चुदाई का था। कुछ दिनों से उसकी चूत प्यासी थी। उसे पानी चाहिए था अमन का।

अमन-“अह्म्मह… धीरे कर छिनाल। डाक्टर ने कहा था कि इसे नरम जगह पर सुलाना और रात भर गीला रखना सूखने नहीं देना…”

रजिया-“ऐसी जगह कहाँ है?” वो अमन की आँखों में देख रही थी।

अमन उसे अपने से चिपकाते हुए-“तेरे नरम चूत है ना रजिया… वहीं रखूंगा…” और अमन रजिया की चुचियाँ मसलने लगता है।

रजिया-“उंह्म्मह… मुझे नहीं रखना इसे। अब तो इसे कुँवारी चूत मिलने वाली है। है ना…” और रजिया बनावटी गुस्सा दिखाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है।

अमन उसे पटक के बेड पे लेटा देता है, और खुद उसके ऊपर चढ़ जाता है-“तेरी बहन को चोदूं… नाटक करती है साली। नहीं चाहिए तो यहाँ क्यों आई है?” और अमन अपने हाथ से रजिया की चूत रगड़ देता है।

रजिया-“अह्म्मह… नहीं ना जी… बेटा अमन… उंह्म्मह…”

अमन-तेरे चूत गीली क्यों है। छिनाल नहीं चुदाना चाहती तो जा फिर।

रजिया अमन के चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए-“कैसे चली जाऊँ? ये मेरा है, सबसे पहला हक मेरा है इसपे। कोई भी छिनाल आ जाए इसे मुझसे नहीं छीन सकती…” वो अमन के लण्ड को अपने नरम हाथों में मसल रही थी।

अमन-“हाँ मेरी जान, तेरा ही तो है। आज तो तुझे ऐसे चोदूंगा रजिया की तेरी चूत भी मुझसे पनाह माँगेगी…”

रजिया-“हाँ मैं भी रगड़ना चाहती हूँ तुम्हारे नीचे इसे। सुनिए, मुँह में डालिये ना…”

अमन रजिया के बाल पकड़कर उसे अपने ऊपर कर लेता है, और खुद नीचे लेट जाता है-“चल, ले साली…”

रजिया-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प उंन्ह… गलप्प्प-गलप्प्प…” करके अपने मुँह का सलाइवा गिरा-गिरा के अमन का लण्ड चूसने लगती है। वो एक हाथ से अपनी नाइटी निकालकर फेंक देती है। अब वो पूरी तरह नंगी थी और अमन के लण्ड को जैसे किसी लोलीपोप की तरह चूसे जा रही थी।

अमन-“अह्म्मह… साली मुझे भी तेरी चूत चाटनी है। ऐसे घूम जा…”

और रजिया 69 की पोजीशन में आ जाती है।

अमन-“तेरे माँ की चूत… कितनी चिकनी लग रही है, आज ये?”

रजिया-हाँ मेरे जानू, अपने बेटे के लिये आज ही सारे बाल निकाल दिए मैंने अह्म्मह… तुझे ऐसी ही चिकनी चूत चाहिए ना? गलप्प्प-गलप्प्प…”

अमन रजिया की चूत को चूमते हुए-“हाँ ऐसी ही चिकनी अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…”

दोनों माँ बेटे एक दूसरे की चूत और लण्ड को अंदर तक चाट रहे थे। अमन अपने दोनों हाथों से रजिया की नरम गाण्ड दबाने लगता है-“अह्म्मह… काट मत छिनाल अह्म्मह…”

आज अमन के मुँह से ऐसी गंदी गालियाँ सुनकर रजिया को और मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी चूत से आज रात का पहला पानी अमन के मुँह पे गिरने लगता है। जिसे अमन चाटता चला जाता है-“नमकीन पानी अह्म्मह… तेरी चूत तो बहुत मीठी है रजिया…”

रजिया-“हाँ आपकी तो है। अह्म्मह… मेरा बच्चा अपनी अम्मी की चूत को और चूसो बेटा अह्म्मह…”

अमन रजिया को अपने नीचे कर लेता है। और रजिया के दोनों पैर रजिया की छाती से चिपका देता है। जिससे रजिया की चूत सामने की तरफ आ जाती है। रजिया को थोड़ा दर्द होता है। पर चूत की आग के सामने ये दर्द कुछ भी नहीं था।

अमन-“रजिया आज तेरा बेटा तुझे रंडी की तरह चोदेगा। बोल चुदेगी मेरे रंडी बनकर?”

रजिया-“हाँ चुदूंगी अमन… अपने बेटे की रंडी हूँ मैं। चोदो मुझे अमन्न् अह्म्मह…”

अमन अपने लण्ड को रजिया की चूत पे टिकाकर जोरदार झटका अंदर मार देता है-“अह्म्मह… ले रंडी ले अह्म्मह…”

रजिया की सांस जैसे रुक गई थी। इतने जोर से इससे पहले अमन ने उसे कभी नहीं चोदा था। उसके मुँह से एक जोर की चीख निकल जाती है-“अमन जी अह्म्मह… उंन्ह…”

अमन उसके मुँह पे हाथ रखकर दनादन अपना लण्ड उसकी चूत में पेलने लगता है– “चिल्ला मत रजिया, नहीं तो तेरी बेटी भी आ जायेगी चुदाने… साली अह्म्मह…”

अमन का लण्ड सीधा रजिया की बच्चेदानी के दीवार से टकरा रहा था जिससे रजिया के रोंगटे खड़े होने लगे थे-“उंह्म्मह… नहीं अमन… मेरी चूत फट जायेगी बेटा अह्म्मह… धीरे मार झटके अमन अह्म्मह…”

अमन-“तू ऐसे नहीं मानेगी…” वो साइड में पड़ी रजिया की नाइटी को रजिया के मुँह में ठूंस देता है, और पीछे से गांठ बांध देता है, जिससे रजिया की घुन-घुन की आवाज़ आ रही थी-“तेरी बहन को चोदूं, साली चिल्लाती है… ले अब्ब अह्म्मह…”
 
अमन की गाण्ड हवा में इतने जोरों से हिल रही थी जैसे कोई पिस्टन हो। ऊपर से रजिया की चूत का चिपचिपा पानी उसे और आसानी से लण्ड को अंदर बाहर करने में मदद दे रहा था। रजिया की हालत खराब थे। इतने जबरदस्त धक्कों की उसे आदत नहीं थी उसकी आँखें बाहर को आने लगी थीं। पर न जाने क्यों उसे आज सबसे ज्यादा मज़ा आ रहा था। वो चाहती थी कि अमन उसपे ऐसे ही ज़ुल्म करता रहे। ये ज़ुल्म वो सारी जिंदगी खुशी-खुशी लेने को तैयार थी।

रजिया अपने मुँह से नाइटी निकाल देती है, और जोर से सांस लेने लगती है-“अह्म्मह… ऊऊऊ… ओह्म्मह… जामलम कुछ तो रहम कर अपनी अम्मी पे अह्म्मह… ओह्म्मह…

रेहाना को भी ऐसे ही चोदता है क्या? अह्म्मह… उंन्ह…”

अमन-“हाँ मेरी जान रेहाना को भी और फ़िज़ा को भी… अह्म्मह…”

रजिया-“क्या फ़िज़ा को भी चोदा तुमने? उंन्ह…” रजिया चकित थी कि फ़िज़ा अपनी कुँवारी चूत अमन से चुदा चुकी है-“अह्म्मह… कितनों को और चोदोगे बेटा?

अमन-“तेरी बहन को चोदूं… इस घर की सभी औरतें मेरे लण्ड के नीचे होंगी एक दिन… जैसे तू है…”

रजिया इतने उत्तेजित हो चुकी थी कि वो दूसरी बार अपनी चूत का पानी छोड़ने लगती है, और अमन का हाथ पकड़ लेती है-“अह्म्मह… अह्म्मह… चोदो जोर से उंह्म्मह… अह्म्मह…” और रजिया ढीली पड़ जाती है।

अमन-“ले मेरे जान… तेरी कोख में मेरा पानी, तुझे मेरा बेटा जनना है… अह्म्मह… अह्म्मह…” और अमन रजिया की चूत में पानी की धार छोड़ने लगता है।

दोनों माँ-बेटे एक दूसरे से चिपके अपनी साँसें संभालने लगते हैं। करीब 10 मिनट बाद अमन रजिया के ऊपर से उतरकर साइड में आ जाता है।

रजिया अपना चेहरा अमन के सीने पे रख देती है, और अमन की छाती के घुँघराले बालों को सहलाने लगती है-“क्या सच में तुमने फ़िज़ा को चोदा है?”

अमन-“हाँ… कल रात…” और अमन उसे सारी बात सुनाता है।

रजिया अपनी चूत को अमन के लण्ड पे रखते हुए-“और कौन कौन है तुम्हारी लिस्ट में?”

अमन-“तेरी बेटी अनुम और हीना… शीबा को तो मैं शादी के बाद चोदूंगा ही…”

रजिया-“नहीं अमन, अनुम को नहीं। वो बच्ची है। हमें उसकी शादी करनी है प्लीज़्ज़ज्ज्ज…”

अमन रजिया के बाल खींचते हुए-“छिनाल रंडी, लण्ड चाहिए ना तुझे मेरा कि नहीं चाहिए?”

रजिया दर्द से-“हाँ… चाहिए ना… रोज चाहिए…”

अमन-“तो फिर चुप रह… बच्ची को बड़ा करना मुझे आता है। तू तेरी गाण्ड बीच में लाएगी तो तेरी चूत में लण्ड नहीं जाएगा…”

रजिया जानती थी कि अमन अनुम को चोदे बिना नहीं रहेगा और उसे डर भी था कि अमन कहीं उसे चोदना ना छोड़ दे। जैसे अगर अनुम अमन से चुद गई तो इसमें मेरा ही फायदा है। फिर तो दिन हो या रात अमन मुझे कहीं भी चोद सकता है। रजिया की होंठों पे मुश्कान आ जाती है।

अमन-क्या सोच रही है?

रजिया अमन के छाती को चूमते हुए-“कुछ नहीं, क्या अनुम तैयार होगी?”

अमन-“उसे पटाना पड़ेगा, जिसमें तू मेरी मदद करेगी, जैसे मैं कहूँ जैसे…”

रजिया-“ठीक है। अरे हाँ… एक बात तो मैं बताना भूल ही गई। ख़ान तुम्हारे लण्ड का दुश्मन दो हफ्तों के लिये सऊदी जा रहा है, साथ में तेरे चाचा भी…”

अमन-क्यों?

रजिया-“उन्हें अपनी प्रापटी बेचनी है वहाँ की और सारा पैसा यहाँ लाना है, हमेशा के लिये…”

अमन-“अच्छा… फिर तो तेरी चूत दिन रात चोदने को मिलेगी…” और अमन रजिया की गाण्ड सहलाने लगता है। जैसे कह रहा हो अब तेरी गाण्ड की बारी है।

रजिया भी गरम थी। वो भी गाण्ड मराना चाहती थी। वो कसमसाते हुए-“उंन्ह… मुझे पेशाब आई है। मैं मूतकर आती हूँ…”

अमन-“चल मैं भी चलता हूँ…” और दोनों माँ-बेटे बाथरूम में चले जाते हैं।

रजिया नीचे बैठने लगते है। तभी अमन उसे झुका देता है।

अमन-“रुक एक मिनट…”

रजिया-“मूतने तो दे…”

अमन-“रुक बोला ना…” और अमन अपना लण्ड रजिया की गाण्ड में डालने लगता है।

रजिया-“अमन्न् क्या कर रहे हो, मुझे मूतने दो ओह्म्मह… उंन्ह…”

अमन का लण्ड रजिया की गाण्ड में चला जाता है। और अमन वहीं खड़े-खड़े रजिया की गाण्ड मारने लगता है।

रजिया का पेशाब रुक जाता है, और वो दीवार पे अपने हाथ टिका देती है। फिर अपनी कमर आगे पीछे करने लगती है। उसे अपनी गाण्ड में अमन का लण्ड बहुत अच्छा लगता था-“उंन्ह… ओह्म्मह… मेरी गाण्ड धीरे से मारा करो बेटा अह्म्मह… वो छोटा सुराख है उंन्ह…”

अमन-“अम्मी, मैं करूंगा तेरा हर सुराख बड़ा… अह्म्मह… ले साली…” दोनों माँ-बेटे खड़े-खड़े 10 मिनट तक अपनी चुदाई का मज़ा लेते है।

रजिया-“प्लीज़्ज़ज्ज्ज… एक मिनट के लिये बाहर निकालो जी, मुझे मूतने दो अह्म्मह…”

अमन अपना लण्ड बाहर निकालता है, और रजिया जल्दी से खड़े-खड़े मूतने लगती है। रजिया का दबाव इतना ज्यादा था कि उसका पेशाब अमन के पैरों पे भी गिरने लगता है। और अमन की जाँघ भीग जाती है। रजिया को हँसी आ जाती है।

अमन रजिया के बाल पकड़कर नीचे बैठा देता है, और अपना लण्ड रजिया के मुँह में डाल देता है। फिर उसका सिर कसकर पकड़ लेता है। रजिया कुछ समझ पाती उससे पहले अमन का पेशाब उसके गले में उतरने लगता है, और सीधा उसके पेट के अंदर जाने लगता है। ये पहले बार था जब रजिया पेशाब पी रही थी… वो भी डाइरेक्ट मुँह में।

रजिया का जिस्म काँपने लगता है। ये नया अनुभव उसे और मस्त कर देता है। अमन जब पूरा पेशाब रजिया को पिला देता है, तो अपना लण्ड बाहर निकालने लगता है। तभी रजिया उसके लण्ड को अपने मुँह में वापस ले लेती है-“अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प मुझे और चाहिए अह्म्मह… गलप्प्प अगलप्प्प उंह्म्मह…” रजिया अमन का लण्ड छोड़ने को तैयार नहीं थी। वो तो आज पागल हो गई थी। उसे एहसास हो गया था कि अमन को खुश रखना उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

अमन शावर ओन कर देता है। दोनों के जिस्म पे पानी गिरने लगता है-“अह्म्मह… बस कर रजिया…”

रजिया खड़ी हो जाती है, और अमन के लण्ड पे साबुन लगाने लगती है। अमन भी रजिया की चूत पे और फिर पूरे जिस्म पे साबुन लगाने लगता है। दोनों एक दूसरे को रगड़-रगड़कर नहलाने लगते हैं। 10 मिनट बाद दोनों बाथरूम से बाहर आते हैं।

रजिया अपने बालों को सुखाते हुए बेड के किनारे बैठ जाती है। और अमन वहीं उसकी गोद में सर रख देता है। रजिया की चुचियाँ लटक रही थीं, जिसे अमन अपने मुँह में ले लेता है। और छोटे बच्चे के तरह दूध पीने लगता है।

रजिया-“अह्म्मह… मेरा बेटा दुद्धू पीना है, अम्मी का…”

अमन-“हाँ रजिया, मुझे तेरा दूध पीना है…”

रजिया-“उंह्म्मह… कैसे होगा जी?”

अमन-“तुझे प्रेगनेंट करके गलप्प्प…”

रजिया-“हाँ मेरे सरताज अह्म्मह… उंह्म्मह… मैं पिलाउन्गी आपको अपना गर्म-गर्म दूध उंह्म्मह…”

अमन रजिया की चुचियों को अपने दाँतों से काटने लगता है।

रजिया से अब बर्दास्तकरना मुश्किल हो रहा था उसकी चूत पनियाने लगी थी-“अह्म्मह… आराम से…”

अमन-चल घोड़ी बन जा।

रजिया-“हाँ…” और वो डोगी स्टाइल में आ जाती है।

अमन उसके पीछे से उसकी कमर पकड़कर अपने लण्ड पे थूक लगाकर अंदर पेल देता है। दोनों सिसकारियाँ भर रहे थे। रजिया बहुत खुश थी। उसके दिल की मुराद जैसे पूरे हो रही थी।

अमन-“अम्मी, तुम्हें चोदने में अलग ही मज़ा है…”

रजिया-कैसे जी?

अमन-“जिस चूत से मैं निकला था उसी को चोद रहा हूँ यही सोचकर मेरा लण्ड और तन जाता है। ओह्म्मह… ले साली…”

रजिया-“अह्म्मह… मैं चाहती हूँ कि मेरा बेटा मुझे चोदते हुये गालियाँ दे, मुझे रगड़ते हुए चोदे अह्म्मह… मेरी चूत और गरम होने लगी है राजा बेटा उंन्ह…”

दोनों की कमर लगातार हिल रही थी और दोनों अपने-अपने जोश में थे।

अमन रजिया की चूत से लण्ड बाहर निकाल लेता है।

रजिया-“अह्म्मह… बाहर मत निकाल बेटा अह्म्मह…”

अमन-मुझे तेरे मुँह में गिराना है।

रजिया-“उंन्ह… नहीं म्मेरी चूत प्यासी है जी उंन्ह… डालो ना…”

अमन फिर से लण्ड चूत में पेल देता है, और ताबड़तोड़ 5 मिनट जोर-जोर से चोदते हुए अपना पानी रजिया की चूत में निकाल देता है। अब वो बुरी तरह थक चुका था। वो लेट जाता है। रजिया भी उसके बगल में लेट जाती है। और दोनों एक दूसरे को चूमते हुए आने वाली जिंदगी के ख्वाब बुनने लगते हैं।

 
सुबह 6:00 बजे-

अमन उठ गया था वो रजिया को उठाकर उसके रूम में भेज देता है, और खुद कसरत करने लगता है।

ख़ान साहब अभी भी सो रहे थे।

एक घन्टे बाद जब अमन अनुम के रूम के सामने से गुजर रहा था तब उसकी नज़र अनुम पे पड़ी, वो बेड पे बैठी हुई थी। अमन उसके रूम में चला जाता है-“अरे वाह… आज तो जल्दी उठ गई अनुम…”

अनुम गुस्से से-“जीभ संभालकर बात कर, मैं तेरी बड़ी बहन हूँ…”

अमन ठिठक जाता है। वो दिल में-“इसे हुआ क्या है कि साली आग उगल रही है?” वो उसके पास जाकर बैठ जाता है, और उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाते हुए उसकी आँखों में देखते हुए-“क्या बात है, नाराज क्यों हो मुझसे?”

अनुम-“मैं कौन होती हूँ तुझसे नाराज होने वाली? जा यहाँ से…”

अमन-“नहीं जाऊँगा, पहले मुझे बता क्या बात है?”

अनुम रोने लगती है, और अपना चेहरा अपने दोनों हाथों से छुपा लेती है-“तू जा अपनी शीबा के पास, मैं कौन हूँ? मैं कोई नहीं हूँ तेरी, जा तू…”

अमन भी गम्भीर हो जाता है। वो अनुम को अपने में समेट लेता है-“देख अनुम, तू रोएगी तो मैं भी रो दूंगा। तू मुझे बोल तो सही बात क्या है?

अनुम उसका हाथ पकड़कर उसकी उंगली में पहनी रिंग उसे दिखाती हुई-ये वजह है। बस अब जा यहाँ से और मुझे अकेला छोड़ दे…”

अमन-“ओह्म्मह… तो ये बात है। इधर देख मेरी तरफ…”

अनुम-मुझे नहीं देखना।

अमन-तुझे मेरी कसम।

अनुम गीली पलकों से अमन को देखने लगती है। अमन उसका हाथ पकड़कर अपने हाथ में की रिंग निकालकर उसे पहना देता है-“ये ले, बस आज से तू मेरी है…”

अनुम उसे आँखें फाड़े देखे जाती है। उसे उसके सारे गिले-शिकवे याद ही नहीं रहे। वो तो एक पागल की तरह महसूस कर रही थी, जिससे उसका हमसफर जैसे कई सालों बाद दुबारा मिल गया हो। वो काँपते होंठों से-ये तूने क्या किया?

अमन-“वही, वो मुझे बहुत पहले करना चाहिए था…” और अमन अनुम के होंठों को चूमने लगता है। उसे अपने से कस लेता है। एक तरह से अनुम उसकी गोद में आ चुकी थी।

अनुम अपना जिस्म ढीला छोड़ देती है। जोश और खुशी में वो सब कुछ भूल गई थी कि वो कहाँ है? और कोई उन दोनों को देख भी रहा है।

रजिया दरवाजे की आड़ से उन दोनों को देख रही थी और दिल में सोच रही थी कितना होशियार है अमन।

अमन 5 मिनट अनुम के होंठों का रस पीने के बाद उसे छोड़ देता है।

अमन-“चल अब हँस दे, ऐसे तू बिल्कुल अच्छी नहीं लगती…” और अनुम के रूम से बाहर निकल जाता है। अमन जानता था कि अभी जल्दबाज़ी करना अच्छी बात नहीं है। मछली चारा निगल गई है।

अनुम अपने उंगली में अमन की पहनाई हुए अंगूठी को देख-देखकर मुस्कुराने लगती है, और नाचते हुए अपने रूम से बाहर निकलती है। तभी वो रजिया से टकरा जाती है।

रजिया-“औउच… आराम से बेटी इतनेी भी क्या जल्दी है?”

अनुम-“वो अम्मी, मैं तो आप ही की तरफ आ रही थी।

रजिया-अच्छा क्यूँ?

अनुम-ऐसे ही अमन के लिये नाश्ता बनाना था ना।

रजिया अनुम के गाल पे चींटी काटते हुए-“क्या बात है, तेरे तबीयत तो ठीक है ना बेटा?”

अनुम शरमाते हुए-क्यों अम्मी, ऐसा क्यूँ पूछ रही हैं आप?”

रजिया-“ऐसे ही… आज पहले बार तुझे अमन के नाश्ते के लिये पूछते देखा इसलिये… अच्छा वो सब छोड़, जा तेरे अब्बू का बैग पैक कर दे। वो दो हफ्ते के लिये सऊदी जा रहे हैं…”

अनुम-“क्यूँ अम्मी, अभी तो वो आए हैं?”

रजिया-“उन्हें कुछ काम निपटाने हैं। फिर वो आ जाएंगे। तू जा जल्दी कर उनकी फ्लाइट है 12:00 बजे की…”

अनुम जाने लगती है। तभी

रजिया-“एक मिनट रुक… ये तेरी उंगली में क्या है?”

अनुम का दिल जोरों से धड़कने लगता है। उसे जिस चीज़ का डर था वही बात सामने आ गई थी-“क…कुछ नहीं अम्मी, ये तो रिंग है, ऐसे ही है…” वो बुरी तरह घबरा जाती है।

रजिया-“ये रिंग तो शीबा ने अमन को इंगेज़मेंट वाले दिन पहनाई थी। तेरे पास कैसे?” हालांकि रजिया सब जानती थी पर वो अनुम के मुँह से कुछ सुनना चाहती थी।

अनुम थूक निगलते हुए-“अम्मी वो… अमन ने मुझे दी है। उसके हाथ में टाइट हो रही थी ना इसलिये…” अनुम को अचानक ही ये जवाब सूझा था।

रजिया-“ह्म्मम्म्म्म… अच्छा तू जा…”

अनुम दिल में ऊपर वाले का शुकिया अदा करते हुए वहाँ से बिजली की तेजी से निकल जाती है, और उसके अब्बू के रूम में पहुँच जाती है। वहाँ पहले से अमन और ख़ान साहब बातें कर रहे थे।

ख़ान साहब-“बेटा अमन, मैं कुछ दिनों के लिये वापस जा रहा हूँ। वहाँ से तुम्हारे अकाउंट में वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रान्स्फर कर दूंगा…”

अमन-“जी अब्बू, आप यहाँ की बिल्कुल फिकर ना करें, मैं हूँ ना…” वो अनुम की तरफ देखते हुए स्माइल देता है।

अनुम भी हल्के से स्माइल देते हुए-“अब्बू, आप वापस कब आएंगे?”

ख़ान साहब-बस कुछ दिनों के बात है। बेटा, वहाँ का बिजनेस किसी को हैंड ओवर करके हमेशा के लिये आना है। तुम्हारे चाचू भी साथ चल रहे है।

अमन दिल में-“वाह… फिर तो रेहाना और फ़िज़ा को यहाँ लाकर चोदना पड़ेगा… पर इस अनुम का क्या करूं? ह्म्मम्म्म्म… आइडिया…”

दोपहर 12:00 बजे-

ख़ान साहब और मलिक दोनों एयरपोट़ के लिये सबसे मिलकर निकल जाते हैं।

आज रेहाना और फ़िज़ा भी अमन के घर आई थीं। दोनों माँ-बेटी की चूत पनिया गई थी, ये सोच-सोचकर कि अब तो दिन रात बस अमन का लण्ड चूत में लेकर हम पड़े रहेंगे। पर अमन का तो कुछ और ही इरादा था। उन दोनों के जाने के बाद।

रजिया-“बैठो फ़िज़ा बेटा, रेहाना तुम भी बैठो, मैं चाय बनाती हूँ…”

रेहाना-“नहीं बाजी मैंने कपड़े भीगने डाले हुए हैं, उन्हें धोना है। मैं बाद में आती हूँ और वो ….और फ़िज़ा वहाँ से चली जाती हैं…”

अनुम अपने रूम में थी और अमन के साथ आने वाले वक्त के सपने बुन रही थी।

 
komal mbd wrote: ↑ 18 Dec 2017 12:19
अमन मौका देखकर सभी दरिािे बंद कर देता है।

रजिया ककचेन में सफाई कर रही थी। िो उसे पीछे से िाकर पकड़ लेता है।

रजिया- “अह्म्मह… छोड़ो ना िी क्या कर रहे हो, अनुम आ िाएगी…”

अमन- “आने दे, उसे भी तो पता चले कक उसके माँ ककतनी बड़ी चुदक्कड़ है…” और िो रजिया की चूचचयां मसलने लगता है।

रजिया- “अह्म्मह… क्या मतलब? उंन्ह… आराम से…”

अमन- “मैं तुझे उसके सामने चोदना चाहता हूँ, ताकी िो सब कुछ िान िाए। कफर मैं उसे अपने ररश्ते के बारे में बता दूँगा और मना भी लूँगा…”

रजिया- “िो नहीं मानेगी तो? उंन्ह…” रजिया की चूत में पानी आ चुका था। िो भी अपने बेटी के सामने अपनी गाण्ड उछाल-उछालकर अमन का लण्ड लेना चाहती थे। ये सोच-सोचकर तो उसका सुबह से बुरा हाल था।

 
अमन मौका देखकर सभी दरवाजे बंद कर देता है।

रजिया किचिन में सफाई कर रही थी। वो उसे पीछे से जाकर पकड़ लेता है।

रजिया-“अह्म्मह… छोड़ो ना जी क्या कर रहे हो, अनुम आ जाएगी…”

अमन-“आने दे, उसे भी तो पता चले कि उसके माँ कितनी बड़ी चुदक्कड़ है…” और वो रजिया की चुचियाँ मसलने लगता है।

रजिया-“अह्म्मह… क्या मतलब? उंन्ह… आराम से…”

अमन-“मैं तुझे उसके सामने चोदना चाहता हूँ, ताकी वो सब कुछ जान जाए। फिर मैं उसे अपने रिश्ते के बारे में बता दूँगा और मना भी लूँगा…”

रजिया-“वो नहीं मानेगी तो? उंन्ह…” रजिया की चूत में पानी आ चुका था। वो भी अपने बेटी के सामने अपनी गाण्ड उछाल-उछालकर अमन का लण्ड लेना चाहती थी । ये सोच-सोचकर तो उसका सुबह से बुरा हाल था।

अमन रजिया की नाइटी उतार देता है, और एक झटके में उसकी ब्रा और पैंटी भी उतार देता है। फिर उसके कान में-“सुन रजिया… जैसे ही मैं तेरी चूत में लण्ड डालूं, तू जोर-जोर से सिसकारियाँ भरना, जैसे तुझे मेरा लण्ड अच्छा लग रहा है अपनी चूत में, और तू अपनी मर्जी से मुझसे चुदा रही है…”

रजिया-“आपका लण्ड जैसे भी मुझे चिल्लाने पे मजबूर कर देता है। और रही बात मज़े की तो वो तो मुझे हमेशा से आता है…”

अमन ने रजिया की चूत में अपनी दो उंगालियाँ डाल दी थी, जिससे रजिया सिसक उठी थी। दोनों रजिया के बेडरूम में चले जाते हैं, और दरवाजा भेड़ कर देते हैं, उसे बंद नहीं करते। अमन जल्दी से नंगा हो जाता है, और अपना लण्ड रजिया के मुँह में डाल देता है-“चूस इसे मेरी जान अह्म्मह…”

रजिया-“हाँ आह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…” करके जल्दी-जल्दी लण्ड को चूसे जा रही थी। उसका जिस्म इस बात से उछल रहा था कि जब उसकी बेटी उसे ऐसे देखेगी तो कैसा महसूस करेंगी।

अमन रजिया को बेड पे लेटा देता है, और अपना लण्ड एक झटके में अंदर डाल देता है-“अह्म्मह… रजिया मेरी जान्…”

रजिया इतनी जोर से चिल्लाती है कि अगर गली से कोई गुजर रहा होता तो वो भी सुन लेता-“अमन अह्म्मह… मेरी चूत… जोर जोर से चोदो मुझे अह्म्मह… मैं तुम्हारी हूँ अह्म्मह… मेरे शौहर हाँ हाँ ऐसे ही… और जोर-जोर से अह्म्मह… उंन्ह…”

रजिया भले ही चिल्लाने की एक्टिंग कर रही थी मगर उसके अल्फ़ाज़ दिल से निकल रहे थे, जैसा वो अमन के लिये महसूस करती थी-“आअह्म्मह… मुझे प्रेग्गनेंट कर दो जी…

मुझे प्रेग्गनेंट कर दो अह्म्मह… अमन ऐसे ही… उंन्ह…”

अमन-“हाँ मेरी जान, तेरा और तेरी बेटी का ही तो है ये अह्म्मह… ले तुम दोनों मेरी दुल्हन बनोगी? अह्म्मह… मैं करूंगा तुम दोनों से शादी… ले मेरी जान अह्म्मह…” अमन किसी जानवर की तरह रजिया की चूत मारे जा रहा था। उसे कुछ अंदाजा भी नहीं था कि वो क्या-क्या बोल रहा है। हाँ, मगर वो वो भी बोल रहा था, वो जैसे ही करना भी चाहता था शायद।

रजिया-“जानू मैं अह्म्मह… मेरे चूत पानी छोड़ने वाली है। अह्म्मह… उंन्ह…” और रजिया पानी छोड़ देती है।

अमन-“अह्म्मह…” वो दोनों इतने उत्तेजित थे इस चीज़ से कि अनुम ये सब सुन रही होंगी कि 15 मिनट में ही दोनों का पानी निकलने लगता है-“अह्म्मह… मेरी रजिया अह्म्मह…”

दोनों एक दूसरे से चिपके लंबी-लंबी सांसें ले रहे थे।

तभी अनुम तालियाँ बजाते हुए अंदर दाखिल होती है-“वाह वाह… क्या गंदा घिनौना नज़ारा है। मेरे आँखों के सामने तुम दोनों माँ-बेटे हो जलील इंसानो…”

अमन और रजिया पीछे मुड़कर देखने लगते हैं। पच्च की आवाज़ से अमन अपने लण्ड को रजिया की चूत से बाहर निकाल लेता है।

अनुम अपनी उंगली में से रिंग निकालकर अमन के मुँह पे दे मारती है-“ये ले कमीने इंसान, मैं तुझे क्या समझ रही थी और तू क्या निकला? थू है तुझपे…” और वो नीचे बैठकर जोर-जोर से रोने लगती है।

अमन अपने पैंट पहन लेता है, और अनुम का हाथ पकड़ने की कोशिश करता है।

पर अनुम उसका हाथ झटक देती है-“मुझे हाथ मत लगा तू जलील इंसान…”

रजिया जल्दी से अपने कपड़े उठाने किचिन में भागती है।

अमन अनुम का हाथ मजबूती से पकड़ लेता है-“आखिर तेरी प्राब्लम क्या है अनुम? बोल मुझे… क्यूँ तू ऐसे रिएक्ट कर रही है?”

अनुम गुस्से से तिलमिला जाती है-“मैं क्यूँ ऐसे रिएक्ट कर रही हूँ? तुम अपनी अम्मी के साथ थे, मुझे तो सोचते हुए भी शरम आती है…”

अमन अनुम का हाथ पकड़कर बेड पे बैठा देता है-“पहले मेरी बात सुन ले। उसके बाद तुझे वो करना है, कर लेना?”

अमन रजिया को आवाज़ देता है-“रजिया इधर आ, यहाँ बैठ मेरे पास…”

रजिया कपड़े पहन चुकी थे। वो सामने बैठ जाती है।

अनुम का सर नीचे झुका हुआ था, और वो रोए जा रही थी।

अमन अपनी बात शुरू करता है-“अनुम, देख अपनी अम्मी को ज़रा। इसका चेहरा देख, क्या तूने इससे पहले इतना खुश देखा है। जानती है कि ये खुश क्यूँ नहीं रहती थी? क्योंकी इसकी जिंदगी में सब कुछ था, मगर एक चीज़ नहीं थी, वो हर औरत का हक है। और वो चीज़ है-शौहर का प्यार उसके जिस्म के लिये। क्या रजिया औरत नहीं है? क्या उसके सीने में दिल नहीं है? वो क्या पत्थर की बनी हुई है? तेरा बाप साल में दो बार यहाँ आता है। और एक महीने से ज्यादा नहीं रहता। पूछ रजिया से कि वो कितनी बार रजिया को चोदता है? एक या दो बार? क्यूँ है ना… रजिया, मैं सहे कह रहा हूँ ना?”

रजिया धीमी आवाज़ में-“हाँ…”

अमन-“जब एक शौहर अपनी बीवी को नहीं चोदेगा तो वो क्या करे? बोल मुझे वो क्या करे? बाहर जाकर दूसरे मर्द से चुदाई? हाँ मैंने रजिया को चोदा है, क्योंकी मुझे उसका जिस्म नहीं चाहिए था। वो तो मुझे कहीं भी मिल सकता है। पैसे फेंको तो एक से एक जवान लड़कियां मिल सकती हैं। मुझे रजिया से सच्ची मोहब्बत है। जितनी तू मुझसे करती है।

और एक बात… मैं भी तुझे रजिया की तरह चाहने लगा हूँ… मैं तेरे साथ जबरदस्ती नहीं करूंगा, ना तुझे तेरे मर्ज़ी के बगैर चोदूंगा। क्योंकी जिससे प्यार किया जाता है, उसके खुशी देखी जाती है। तेरे अम्मी मेरे साथ खुश है। और मैं भी।

और एक बात… तुझे हम दोनों को देखकर सिर्फ़ और सिर्फ़ जलन हो रही है।

 
अनुम अमन का चेहरा देखने लगती है। अब अनुम की आँखों में आँसू नहीं थे-जलन मुझे किस चीज़ की?

अमन-“हाँ जलन… ये जलन है। अनुम प्यार की जलन… अपनी चीज़ किसी दूसरे के पास देखने की जलन। अगर तुझे ये सब गंदा घिनौना लगता है, तो तू क्या कर रही है? तुझे जब मैंने किस किया, तब तूने मुझे थप्पड़ मारना चाहिए था। जब मैंने तुझे रिंग पहनाया, तब तुझे वो फेंक देना चाहिए था। आखिर तू भी तो मेरी होना चाहती है ना… तू भी तो मेरी सगी बहन है? क्या ये गंदा नहीं होगा? मैंने तुझे रिंग पहनाया फिर उसके बाद क्या?

बोल मुझे… है कोई जवाब तेरे पास? उसके बाद क्या करेगी मुझसे-शादी। दुनियाँ वाले मानेंगे इस चीज़ को? तेरा बाप इजाजत देगा हमें? नहीं, कभी नहीं? मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ कि मैं ऐसे ही रहूँगा, और ऐसे ही रजिया की चोदूंगा। अगर तुझे मेरी बात गलत लगे तो तेरे बाप को आने के बाद बोल देना और अगर तू मेरी बनकर रहना चाहती है तो?

हाँ, मैं जादा करता हूँ कि तुझसे शादी करूंगा चाहे कोई माने या ना माने। मगर उससे पहले मैं रजिया से शादी करूंगा। बोल तुझे कुछ कहना है?

रजिया और अनुम दोनों अमन को ही देख रही थीं। रजिया ने तो सोचा भी नहीं था कि अमन वो सोच चुका था। उसे अपनी मोहब्बत पे फख्र महसूस हो रहा था। वो उठकर अमन के पास आ जाती है, और अमन के होंठों पे अपने होंठ रखकर उसके होंठों को चूसने लगती है। अब उसे किसी चीज़ की परवाह नहीं थी, ना अनुम की, ना ख़ान की। अब तो वो पूरी तरह अमन की बीवी हो चुकी थी।

अनुम ये सब देख नहीं पाती और अपने कमरे में चली जाती है, और दरवाजा बंद कर लेती है। वो रोना नहीं चाहती थी, क्योंकी उसका दिल नहीं चाहता था। अनुम अपने रूम में बैठी अमन की कही गई बातें सोच रही थी।

और इधर रजिया के रूम में रजिया अमन के कंधे पे सर रखकर-“सुनिए मुझे डर लग रहा है। अनुम कुछ उल्टा सीधा ना कर दे…”

अमन रजिया का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए-“अब तुझे डरने की ज़रूरत नहीं है। मेरे जान, अब मैंने फैसला कर लिया है…”

रजिया-क्या जी?

अमन-“तू आज से प्रेग्गनेन्सी के गोलियाँ खाना बंद कर दे, क्योंकी मैं तुझसे मेरा बच्चा चाहता हूँ और हाँ कल हम शिमला जा रहे हैं। यहाँ से 300 कि॰मी॰ दूर, हमारे पहले हनीमून पे…”

रजिया अमन की बातें सुनकर बुरी तरह शरमा जाती है, और बेड पे लेट जाती है। अमन अपने पैंट को उतारते हुए रजिया की तरफ देखता है। रजिया अपने हाथों से अपना चेहरा छुपा लेती है। आज उसे किसी नई नवेली दुल्हन की तरह शरम आ रही थी। अमन का उसे प्रेगनेंट करना और हनीमून पे ले जाने की बात उसकी चूत में करेंट दौड़ा रही थी।

अमन पूरे तरह नंगा हो चुका था। वो रजिया की भी नाइटी खींच देता है।

रजिया-“अह्म्मह… सुनिए जी, हम शिमला जा रहे हैं तो अनुम कहाँ रहेगी?”

अमन-वो भी हमारे साथ जाएगी।

रजिया-क्या? वो नहीं आना चाहे तो?

अमन-“वो ज़रूर आएगी। मेरा दिल कहता है। मैंने उसकी आँखें पढ़ ली हैं…”

रजिया अपने पैर खोल देती है। जैसे कह रही हो कि आओ जानू चोदो अपनी रजिया को।

अमन रजिया के मुँह में अपना लौड़ा डाल देता है-“अह्म्मह… पहले थोड़ा गीला तो कर ले मेरी रानी अह्म्मह…”

रजिया-“हाँ गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…” रजिया अब इसमें एक्सपर्ट हो चुकी थी। वो अमन के आंडों को मरोड़ते हुए अपने मुँह में लण्ड लेने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प उंन्ह… मुझे चोदो जान उंन्ह… मैं लेना चाहती हूँ प्लीज़्ज़ज्ज्ज…”

अमन भी जान चुका था कि अब देर नहीं कर सकता। वो अपना लण्ड रजिया के मुँह से निकालकर उसकी चूत में रगड़ने लगता है।

रजिया-डालिये ना जी।

अमन रजिया की एक चूची मुँह में भरकर अपना लण्ड रजिया की गीली चूत में पेल देता है।

रजिया-“अह्म्मह… आगगाग उंह्म्मह… मेरे राजा… चोदो अपने बीवी को… उंह्म्मह… मैं दूगी आपको बेटा… आपका खून उंन्ह… अह्म्मह…” अब रजिया भी नीचे से अपनी कमर ऊपर तक उठा-उठाकर अमन का पूरा लण्ड अपनी चूत की जड़ तक लेने लगती है।

अमन-“हाँ रजिया उंन्ह… अह्म्मह… मुझे तुम दोनों से चाहिए मेरा बच्चा… अनुम से भी अह्म्मह…”

रजिया-हाँ मेरे सरताज हम आपके हैं… दोनों ही उंह्म्मह… अह्म्मह…”

दोनों एक नई दुनियाँ की सैर कर रहे थे। अपनी ही दुनियाँ बसाने चले थे। अमन अपने पूरी ताकत से रजिया को चोद रहा था। वो एक बार पानी निकाल चुका था। वो इतने जल्दी झड़ने वाला नहीं था।

रजिया से ये बर्दाश्त करना मुश्किल था। वो एक जोरदार चीख के साथ अपनी चूत का पानी छोड़ने लगती है-“उंह्म्मह… अमन… जानू…”

अमन-“क्या हुआ? तेरे माँ की… वो रजिया की चूत पेले जा रहा था अह्म्मह…”

रजिया खामोश हो गई थी और दरवाजे की तरफ देख रही थी, वहाँ अनुम खड़ी थी।

अनुम की आँखें लाल देखाई दे रही थीं। वो तो उसे वक्त से दरवाजे में खड़ी थी, जब अमन ने रजिया को शिमला जाने की बात कहा था।

अमन पीछे मुड़कर देखता है तो अनुम अपने रूम में चली जाती है। रजिया मुस्कुराकर अमन को देखती है। अमन उसे आँख मार देता है, और ताबड़तोड़ अपने झटकों की स्पीड बढ़ा देता है। वो 10 मिनट लगातार चोदने के बाद झड़ जाता है। वो दोनों एक दूसरे की बाँहों में पड़े थे।

अमन-“मैं बाहर जा रहा हूँ थोड़ी देर में आ जाऊँगा। तू खाना बना ले और हाँ वो तेरी ट्रांसपेरेंट नाइटी पहन ले, बिना ब्रा बिना पैंटी…”

रजिया-ह्म्मम्म्म्म।

फिर अमन अपने कपड़े पहनकर घर से निकल जाता है। उसे अपने दोस्त इमरान से कुछ काम था। दरअसल इमरान एक शिमला के होटेल वाले को जानता था। अमन उससे एक होटेल में रूम बुक करवाने की बात करने जा रहा था।

अनुम अपने रूम में आईने के सामने खड़ी थी। उसका ब्रेन-वॉश हो चुका था। उसे अमन से गिला नहीं बस आने वाले वक्त का ख्याल कि अब क्या होगा? क्या मैं अमन और अम्मी के साथ शिमला जाऊँ या इनकार कर दूं? मैं नहीं जाऊँगी। नहीं जाऊँगी मैं। वो ठान लेती है।

रजिया खाना बनाने लग जाती है। जैसा उसे अमन ने कहा था वो जैसे ही कपड़े पहने हुए थी।

 
रात 8:00 बजे-

डाइनिंग टेबल पे अमन और अनुम बैठे हुए थे, पर कोई बात नहीं कर रहे थे। अनुम की नज़रें नीचे थी और अमन उसे देख रहा था। रजिया खाने की एक प्लेट अनुम के सामने रख देती है, और एक प्लेट अमन के सामने। अनुम खाना खाने लगती है।

अमन-सुन रजिया।

रजिया अमन को फिर अनुम को देखते हुए-जी।

अमन-“यहाँ आ मेरी गोद में, आज मुझे तेरे हाथ से खाना है।

अनुम वहीं बैठे उनकी बातें सुन रही थी और चुपचाप खाना खा रही थी।

रजिया अपनी गाण्ड मटकाते हुए अमन की गोद में आकर बैठ जाती है।

अमन-“चल खिला अपने शौहर को…” ये अमन ने जानबूझकर कहा था।

रजिया एक निवाला तोड़ते हुए अमन के मुँह में डालने लगती है। तभी अमन रजिया की चुचियाँ मसल देता है।

रजिया-“औउच… उंह्म्मह… क्या कर रहे हैं जी, खाना तो खा लो पहले…”

पर अमन कहाँ सुनने वाला था। वो एक निवाला खाता और रजिया की चुचियाँ मसलता रहता। रजिया के तन-बदन में चीटियाँ रेंग रही थीं। उसे इस सब में एक अलग ही मज़ा आ रहा था।

खाना खाने के बाद अनुम हाल में टीवी ओन कर देती है। उसके नज़र टीवी पे थी पर दिमाग़ पूरी तरह अमन की तरफ।

कुछ देर बाद अमन और रजिया भी वहीं हाल में आ जाते है। अमन सोफे पे बैठा हुआ था, साइड में रजिया और सामने अनुम। अमन रजिया की नाइटी उसके सर से उतारते हुए-“चल मुँह में ले…”

रजिया बिना कुछ बोले सोफे के नीचे बैठ जाती है, और अमन का लण्ड अपने मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगती है।

अमन-“अह्म्मह… धीरे कर साली, तेरी बेटी को चोदूं…” ये अमन ने अनुम की आँखों में देखते हुए कहा। वो उन दोनों को देख रही थी।

अनुम अपना चेहरा फिर से टीवी की तरफ कर देती है।

अमन रजिया को सोफे पे उल्टा झुकाकर पीछे से अपना लण्ड रजिया की चूत में डालने लगता है।

रजिया-“अह्म्मह… धीरे जानू उंन्ह… अह्म्मह… आराम से ना जी…”

अमन अनुम के तरफ देखते हुए जोर-जोर से रजिया को चोदे जा रहा था-“अह्म्मह… ले रानी, तेरे बेटी को चोदूं ले उंह्म्मह…”

अनुम से अब ये सब देखना मुश्किल था। वो उठकर जाने लगती है। तभी अमन अनुम का हाथ पकड़ लेता है और उसे रजिया की कमर के पास खड़े कर देता है। वो अब भी अपना लण्ड रजिया की चूत में पेले जा रहा था। अनुम अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है। पर अमन की मजबूत पकड़ के सामने वो बेबस थी। अमन रजिया की गाण्ड पे थप्पड़ मारते हुए अपना लण्ड अंदर-बाहर करने लगता है। रजिया तो पागल हो चुकी थी। उसकी चूत से लगातार पानी निकल रहा था… ऊपर से अनुम उसकी चूत में अमन का लण्ड जाते देख रही थी। ये उसे पागल करने के लिये काफी था।

रजिया-“उंन्ह… मेरी चूत चाटो उंह्म्मह…”

अमन भी एक दो झटके मारने के बाद अपना पानी रजिया की चूत में निकालकर अपना लण्ड बाहर निकाल देता है। वो अब भी अनुम का हाथ पकड़े हुए था।

अमन-“सुन अनुम, हम तीनों कल शिमला जा रहे हैं, 7 दिन के लिये। तू अपना बैग पैक कर लेना आज। कल सुबह 10:00 ही निकल जाएंगे…”

अनुम कुछ नहीं बोली वो सोच चुकी थी कि वो मना कर देगी।

अमन कड़क आवाज़ में-सुना तूने?

अनुम-ह्म्मम्म्म्मम।

और अमन उसका हाथ छोड़ देता है।

अनुम अपने रूम में जाकर बंद हो जाती है। अनुम बेड पे लेटी हुई थी। अनुम दिल ही दिल में-मैंने हाँ क्यों की? मैं जाना नहीं चाहती थी फिर क्यूँ? क्यूँ? ये जवाब ना उसे पता था और ना अमन और रजिया को। अनुम अपने रूम में बैठी हुई थी। उसकी आँखों में आँसू थे।

अमन और रजिया फ्रेश होकर अनुम के रूम में दाखिल होते हैं। अनुम दोनों को देखती है। मगर कोई रेस्पॉन्स नहीं देती। उसकी आँखें झुकी हुई थीं।

अमन अनुम के पास आकर बैठ जाता है, और उसका एक हाथ अपने हाथ में लेती हुए-“क्या हुआ अनुम? तू मुझसे नाराज है ना? मैं जानता हूँ कि मैंने गलत किया है…”

कितने दिनों से वो सैलाब कच्ची दीजारों से बँधा हुआ था, अनुम के दिल में वो पूरे रफ़्तार से फूट पड़ता है, और वो रोने लगती है। वो बस रोए जा रही थी अमन भी उसे कुछ देर रोने देता है। रो लेने से दिल का बोझ भी हल्का होता है। बाररश हो जाये तो मौसम अच्छा हो जाता है।

अनुम-“मैं तुमसे नाराज नहीं हूँ अमन। मेरा दिल दुख रहा है अंदर से। तुम मेरे साथ शिमला में वो करना चाहते हो, वो तुम कर भी लोगे। पर उसमें मेरी खुशी शामिल नहीं होगी। मैं भी एक इंसान हूँ, एक लड़की, जिसने तुम्हें दिल से अपना शौहर माना है। एक बहन के लिये ये सोचना भी गुनाह है। पर मैं क्या करूँ? अमन ये मेरे बस में नहीं है। मैं तुमसे सच्ची मोहब्बत करती हूँ। तुम्हें अपना सब कुछ मानती हूँ। तुम अभी कहो तो मैं अभी पूरे कपड़े उतार दूं, कर लो वो करना है मेरे साथ। मैं उफफ्र्फ तक ना कहूंगी। मगर मेरा दिल वो तुम्हें एक शौहर की जगह दे चुका है। वो हमेशा-हमेशा के लिये दफन हो जाएगा, मर जाएगी अनुम हमेशा के लिये…” बोलते-बोलते वो सिसक उठी।

अमन उसका चेहरा अपने हाथों में थामते हुए उसकी आँखों में देखने लगता है-“बोल दिया वो बोलना था, अब मेरी बात गौर से सुन…”

एक आदमी की मोहब्बत और एक औरत की मोहब्बत में सिर्फ़ इतना फरक होता है अनुम कि औरत अपने दिल की बात जोर-शोर से बोलती है। मगर एक मर्द अपने दिल की मोहब्बत अपने लफ़्जों से नहीं, बल्की अपने प्यार करने के अंदाज से दिखाता है। वो प्यार वो रजिया से करता हूँ। मेरी जिंदगी में कई लड़कियां आईं, मगर वो मोहब्बत मुझे तुझसे हुई है, वो किसी और से नहीं हो सकती। अरे पगली जब तूने मेरे इन होंठों पे अपने होंठ रखे थे ना… तभी मैं तेरे दिल की कैफियत समझ गया था। हाँ अनुम, मैं भी तुझसे सच्ची मोहब्बत करता हूँ। तुझे क्या लगता है कि मैं तेरा ये जिस्म पाने के लिये बोल रहा हूँ? नहीं, यहाँ मेरे दिल पे हाथ रखकर देख, तुझे इसमें तेरा नाम सुनाई देगा। तू जानती है कि हम शिमला क्यूँ जा रहे हैं?

अनुम की आँखों में सवाल था-क्यों?

अमन-“मैं तुम दोनों को वहाँ इसलिये ले जा रहा हूँ कि अपनी मोहब्बत को अंजाम तक पहुँचा सकूँ। हाँ अनुम, मैं वहाँ तुझसे और रजिया से शादी करने वाला हूँ… हमारे रस्मों रिवाज के मुताबिक वहाँ हमें कोई नहीं पहचानता। एक काजी को कुछ पैसे देकर हम वहाँ शादी करेंगे। उसके बाद तुम दोनों हमेशा के लिये मेरे बीवियां बन जाओगी। यही चाहती थी ना तू कि मुझसे शादी हो? और जब मैं तुझसे शादी कर लूंगा तब तो मुझे हाथ लगाने देगी ना?

अनुम का चेहरा फूल की तरह खिल जाता है। उसे अपने कानों पे यकीन नहीं हो रहा था कि अमन से उसकी शादी है-“हाँ अमन, मैं यही तो चाहती थी। पर अब्बू?”

अमन-“जब प्यार किया तो डरना क्या मेरे जान? और अमन अनुम को गले लगा लेता है।

सारे गीले शिकवे दूर हो चुके थे। वहाँ एक तरफ अनुम बेहद खुश थी। वहीं रजिया की हालत किसी नई नवेली दुल्हन की तरह थी वो अपना हनीमून अपने प्यार करने वाले के साथ मनाने वाली थी, और उसके साथ उसकी सगी बेटी भी उसी बिस्तर पे अपना कुँवारापन अमन को सौंपने वाली थी। वो रात जिसका अब तीनों को इंतजार था।

अनुम एक कुँवारी लड़की से एक मुकम्मल औरत बनने वाली थी और रजिया अपनी कोख में अपने शौहर का बीज बोने वाली थी।

तीनो यही सोच रहे थे कि ये रात जल्द से जल्द ढल जाए और कल एक नया सवेरा हो वो हम तीनों की जिंदगी में उम्मीद की एक नई किरण लेकर आए। इसी ख्यालों में वो तीनों एक ही बेड पे सो जाते हैं।

 
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